Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 3 सरल रेखा में गति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 3 सरल रेखा में गति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 3 सरल रेखा में गति

Bihar Board Class 11 Physics सरल रेखा में गति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 3.1
नीचे दिए गए गति के कौन-से उदाहरणों में वस्तु को लगभग बिंदु वस्तु माना जा सकता है:

  1. दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोई रेलगाड़ी।
  2. किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ति के ऊपर बैठा कोई बंदर।
  3. जमीन से टकरा कर तेजी से मुड़ने वाली क्रिकेट की कोई फिरकती गेंद।
  4. किसी मेज के किनारे से फिसल कर गिरा कोई बीकर।

उत्तर:

  1. रेलगाड़ी दो स्टेशनों के मध्य बिना झटके के चल रही है। इसलिए दोनों स्टेशनों के मध्य की दूरी, रेलगाड़ी की लम्बाई की अपेक्षा अधिक मानी जा सकती है। अतः रेलगाड़ी को बिन्दु वस्तु मान सकते हैं।
  2. बन्दर निश्चित समय में अधिक दूरी तय करता है। इसलिए बन्दर को बिन्दु-वस्तु मान सकते हैं।
  3. चूँकि क्रिकेट की गेंद का मुड़ना सरल नहीं है। इस प्रकार निश्चित समय में क्रिकेट गेंद द्वारा तय की गई दूरी कम है। अतः क्रिकेट गेंद को बिन्दु-वस्तु नहीं मान सकते हैं।
  4. चूँकि बीकर निश्चित समय में कम दूरी चलता है। अतः बीकर को बिन्दु-वस्तु नहीं माना जा सकता है।

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प्रश्न 3.2
दो बच्चे A व Bअपने विद्यालय 0 से लौट कर अपने – अपने घर क्रमश: P तथा Q को जा रहे हैं। उनके स्थिति-समय (x – t) ग्राफ चित्र में दिखाए गए हैं। नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रविष्टियों को चुनिए:

  1. B/A की तुलना में AIB विद्यालय से निकट रहता है।
  2. B/A की तुलना में AIB विद्यालय से पहले चलता है।
  3. B/A की तुलना A/B तेज चलता है।
  4. A और B घर(एक ही/भिन्न) समय पर पहुंचते हैं।
  5. A/B सड़क पर B/A से (एक बार/दो बार) आगे हो जाते हैं।
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उत्तर:

  1. B की तुलना में A विद्यालय से निकट रहता है।
  2. B की तुलना में A विद्यालय से पहले चलता है। चूँकि A के लिए गति प्रारम्भ का समय t = 0 जबकि B के लिए गति प्रारम्भ t समय पर होती है।
  3. A की तुलना में B तेज चलता है।
  4. A तथा B घर अलग-अलग समय पर पहुँचते हैं।
  5. B सड़क पर A से एक बार आगे हो जाता है।

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प्रश्न 3.3
एक महिला अपने घर से प्रात: 9.00 बजे 2.5 km दूर अपने कार्यालय के लिए सीधी सड़क पर 5 km h-1 चाल से चलती है। वहाँ वह सायं 5.00 बजे तक रहती है और 25 km h-1 की चाल से चल रही किसी ऑटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है। उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का x – t ग्राफ खींचिए।
उत्तर:
घर से कार्यालय तक पार की गई दूरी = 2.5 किमी
घर से चलने पर चाल = 5 किमी प्रति घण्टा
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कार्यालय पहुँचने में लगा समय = \(\frac{2.5}{5}\) = 0.5 घण्टा
माना x – t (समय-दूरी) ग्राफ का मूल बिन्दु O है। t = 9 AM पर x = 0 तथा t = 9:30 AM पर x = 2.5 किमी (बिन्दु
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P)। तथा महिला 9:30 AM से समय 5:00 PM तक कार्यालय में रहती है। जिसे PQ द्वारा व्यक्त किया गया है।
कार्यालय से घर तक पहुँचने में लगा समय
= \(\frac{2.5}{25}\) = \(\frac{1}{10}\) घण्टा
= 6 मिनट
∴ t = 5 : 06 PM पर x = 0 जिसे बिन्दु R से व्यक्त किया गया है।

प्रश्न 3.4
कोई शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद फिर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है। उसका हर कदम 1 m लंबा है और 1 समय लगता है। उसकी गति का x – t ग्राफ खींचिए। ग्राफ से तथा किसी अन्य विधि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहाँ से चलना प्रारंभ करता है वहाँ से 13 m दूर किसी गड्ढे में कितने समय पश्चात् गिरता है?
उत्तर:
शराबी का x – t ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। पहले 8 कदमों अर्थात् 8 सेकण्ड में शराबी द्वारा चली दूरी
= 5 मी० – 3 मी० = 2 मीटर अतः 16 कदमों में शराबी द्वारा चली गई दूरी
= 2 × 2 = 4 मीटर
24 कदमों में शराबी द्वारा चली गई दूरी
= 4 + 2 = 6 मीटर
32 कदमों में शराबी द्वारा चली गई दूरी
= 6 + 2 = 8
मीटर अगले 5 कदमों में शराबी द्वारा चली गई दूरी
= 8 + 5 = 13 मीटर
∴ कुल 13 मीटर चलने पर लिया गया समय
8 × 4 + 5 = 37 सेकण्ड।
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प्रश्न 3.5
कोई जेट वायुयान 500 km h-1 की चाल से चल रहा है और यह जेट यान के सापेक्ष 1500 km h-1 की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है। जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी?
उत्तर:
दिया है: जैट का वेग, Vj = -500 किमी प्रति घण्टा
जेट के सापेक्ष उत्पाद बाहर निकालने का आपेक्षिक वेग, ve = 1500 किमी प्रति घण्टा
माना बाहर निकलने वाले दहन उत्पादों का वेग ve है।
∴ Vej = Ve – Vj
या Ve = Vej + Vj = 1500 + (-500)
= 1000 किमी प्रति घण्टा

प्रश्न 3.6
सीधे राजमार्ग पर कोई कार 126 kmh-1 की चाल से चल रही है। इसे 200 m की दूरी पर रोक दिया जाता है। कार के मंदन को एक समान मानिए और इसका मान निकालिए। कार को रुकने में कितना समय लगा?
उत्तर:
दिया है:
u = 126 किमी/घण्टा
= 126 × \(\frac{1000}{60×60}\) = 35 मीटर/सेकण्ड
S = 200 मीटर
v = 0
न्यूटन के गति विषयक तृतीय समी० से,
v2 = u2 + 2as
02 = (35)2 + 2 × a × 200
अथवा a = \(\frac{-35×35}{2×200}\) = -3.06 मीटर/सेकण्ड
पुनः समीकरण v = u + \(\frac{1}{2}\)at2 से
t = \(\frac{v-u}{a}\) = \(\frac{0-35}{-3.06}\)
= 11.44 सेकण्ड।

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प्रश्न 3.7
दो रेलगाड़ियाँ A व B दो समांतर पटरियों पर 72 km h-1 की एकसमान चाल से एक ही दिशा में चल रही हैं। प्रत्येक गाड़ी 400 m लंबी है और गाड़ी A गाड़ी B से आगे है। B का चालक A से आगे निकलना चाहता है। 1ms-2 से इसे त्वरित करता है। यदि 50s के बाद B का गार्ड A के चालक से आगे हो जाता है तो दोनों के बीच आरंभिक दूरी कितनी थी?
उत्तर:
दिया है:
uA = uB = 72 किमी प्रति घण्टा
= 72 × \(\frac{5}{18}\) = 20 मीटर/सेकण्ड
t = 50 सेकण्ड
गाड़ी की लम्बाई = 400 मीटर
SA = uA × t
= 20 × 50
= 1000 मीटर
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 से
SB = 20 × 50 + 1 × (50)2
= 1000 + \(\frac{1}{2}\) × 2500
= 1000 + 1250
= 2250 मीटर
अत: दोनों रेलगाड़ियों के बीच आरम्भिक दूरी
= 2250 – 1000
= 1250 मीटर

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प्रश्न 3.8
दो – लेन वाली किसी सड़क पर कार A 36 km h-1 की चाल से चल रही है। एक दूसरे की विपरीत दिशाओं में चलती दो कारें B व C जिनमें से प्रत्येक की चाल 54kmh-1 है, कार A तक पहुँचना चाहती है। किसी क्षण जब दूरी AB दूरी AC के बराबर है तथा दोनों 1 km है, कार B का चालक यह निर्णय करता है कि कार C के कार A तक पहुँचने के पहले ही वह कार A से आगे निकल जाए। किसी दुर्घटना से बचने के लिए कार B का कितना न्यूनतम त्वरण जरूरी है?
उत्तर:
दिया है:
vA = 36 किमी/घण्टा
= 54 × \(\frac{5}{18}\) = 15 मीटर/सेकण्ड
माना कार A के सापेक्ष C की आपेक्षिक चाल vca तथा कार A के सापेक्ष कार B की आपेक्षिक चाल VBA है।
∴ vca = 15 – (-10) = 25 मीटर/सेकण्ड
तथा VBA = 15 – 10 = 5 मीटर/सेकण्ड
प्रश्नानुसार aca = 0, चूँकि दोनों कारें (A व C) नियत वेग से गतिमान हैं।
AC दूरी तय करने में लगा समय

माना कार B का A के सापेक्ष त्वरण aBA = a है।
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प्रश्न 3.9
दो नगर A व B नियमित बस सेवा द्वारा एक दूसरे से जुड़े हैं और प्रत्येक T मिनट के बाद दोनों तरफ बसें चलती हैं। कोई व्यक्ति साइकिल से 20 km h-1 की चाल से A से B की तरफ जा रहा है और यह नोट करता है कि प्रत्येक 18 मिनट के बाद एक बस उसकी गति की दिशा में तथा प्रत्येक 6मिनट बाद उसके विपरीत दिशा में गुजरती है। बस सेवाकाल T कितना है और बसें सड़क पर किस चाल (स्थिर मानिए) से चलती हैं?
उत्तर:
माना प्रत्येक बल की चाल vb किमी प्रति घण्टा तथा साइकिल सवार की चाल vc किमी प्रति घण्टा है। साइकिल सवार की गति की दिशा में अर्थात् A से B की ओर चल रही बसों की आपेक्षिक चाल = vb – vc
∴ साइकिल सवार की गति की दिशा में प्रत्येक 18 मिनट बाद एक बस गुजरती है।
∴ चली गई दूरी = (vb – vb) × \(\frac{18}{60}\)
परन्तु बसें प्रत्येक T मिनट बाद चलती हैं। अतः यह दूरी vb × \(\frac{T}{60}\) के तुल्य होगी।
अर्थात् (vb – bc) × \(\frac{T}{18}\) ……………. (1)
साइकिल सवार से विपरीत दिशा में बसों का आपेक्षिक वेग
= (vb + vc)
∴ चली दूरी = (vb + vb) × \(\frac{6}{60}\)
प्रश्नानुसार विपरीत दिशा में बस प्रत्येक 6 मीटर के अन्तराल पर मिलती है। अतः यह चली दूरी vb × \(\frac{T}{60}\) के तुल्य होगी।
∴ (vb + vc) × \(\frac{6}{60}\) = vb × \(\frac{T}{60}\)
या vb + vc = \(\frac{vb×T}{6}\) ………………… (2)
समी० (2) को (1) से भाग देने पर,
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या vb + vc = 3vb – 3vc
अथवा vc + 3vc = 3vb – vb
∴ vb = 2vc
= 2 × 20 किमी/घण्टा
= 40 किमी/घण्टा।
समी० (2) में vb व vc का मान रखने पर,
40 + 20 = \(\frac{40×T}{60}\)
T = \(\frac{60×6}{40}\) = 9 मिनट

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प्रश्न 3.10
कोई खिलाड़ी एक गेंद को ऊपर की ओर आरंभिक चाल 29 ms-1 से फेंकता है –
(i) गेंद की ऊपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा क्या होगी?
(ii) इसकी गति के उच्चतम बिंदु पर गेंद के वेग व त्वरण क्या होंगे?
(iii) गेंद के उच्चतम बिंदु पर स्थान व समय को x = 0 व t = 0 चुनिए, ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर की दिशा को x – अक्ष की धनात्मक दिशा मानिए। गेंद की ऊपर की व नीचे की ओर गति के दौरान स्थिति, वेग व त्वरण के चिन्ह बताइए।
(iv) किस ऊँचाई तक गेंद ऊपर जाती है और कितनी देर के बाद गेंद खिलाड़ी के हाथों में आ जाती है?
[g = 9.8 ms-2 तथा वायु का प्रतिरोध नगण्य है।]
उत्तर:
(i) ऊर्ध्वाधर गति में वस्तु सदैव गुरुत्वीय त्वरण के अधीन चलती है जिसकी दिशा नीचे की ओर होती है।

(ii) गति के उच्चतम बिन्दु v = 0
a = 9.8 मीटर/सेकण्ड2 नीचे की ओर

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(iv) दिया है : u = 29 मीटर/सेकण्ड
a = 9.8 मीटर/सेकण्डर2
v = 0
सूत्र v2 = a2 + 2as से,
v2 = 2a2 + 2 × 9.8 × S
∴ S = \(\frac{-2a×2a}{2×9.8}\) = 42.9 मीटर
अतः सूत्र = u + at से,
0 = 29 – 9.8 × t
∴ t = \(\frac{29}{2.8}\) = 2.96
∴ कुल समय = 2 × 2.96
= 5.92 सेकण्ड

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प्रश्न 3.11
नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण बताते हुए व उदाहरण देते हुए बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य, एकविमीय गति में किसी कण की –

  1. किसी क्षण चाल शून्य होने पर भी उसका त्वरण अशून्य हो सकता है।
  2. चाल शून्य होने पर भी उसका वेग अशून्य हो सकता है।
  3. चाल स्थिर हो तो त्वरण अवश्य ही शून्य होना चाहिए।
  4. चाल अवश्य ही बढ़ती रहेगी, यदि उसका त्वरण धनात्मक हो।

उत्तर:

  1. सत्य, सरल आवर्त गति करते कण की महत्तम विस्थापन की स्थिति में कण की चाल शून्य होती है, जबकि त्वरण महत्तम (अशून्य) होता है।
  2. असत्य, चाल शून्य होने का अर्थ है कि कण के वेग का परिमाण शून्य है।
  3. असत्य, एकसमान वृत्तीय गति करते हुए कण की चाल स्थिर रहती है तो भी उसकी गति में अभिकेन्द्र त्वरण कार्य करता है।
  4. असत्य, यह केवल तब सत्य हो सकता है, जब चुनी गई धनात्मक दिशा गति की दिशा के अनुदिश हो।

प्रश्न 3.12
किसी गेंद को 90 m की ऊँचाई से फर्श पर गिराया जाता है। फर्श के साथ प्रत्येक टक्कर में गेंद की चाल 1/10 कम हो जाती है। इसकी गति का t = 0 से 12 s के बीच चाल-समय ग्राफ खींचिए।
उत्तर:
दिया है:
u1 = 0, s1 = 90 मीटर,
a1 = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र v2 = u2 + 2as से,
v12 = 02 + 2 × 9.8 × 90
∴ v1 = \(\sqrt{2×9.8×90}\)
= 42 मीटर प्रति सेकण्ड
पुनः सूत्र v = u + at से,
42 = 0 + 9.8 × t1
∴ t1 = \(\frac{42}{9.8}\) = 4.2 सेकण्ड
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प्रश्नानुसार, u2 = v1 – \(\frac{v_{1}}{10}\)
= 42 – 4.2 = 37.8 मीटर/सेकण्ड
v2 = 0, a2 = -9.8 मीटर/सेकण्ड2
सूत्र v = u + at से,
0 = 37.8 – 9.8 × t2
∴ t2 = \(\frac{37.8}{9.8}\) = 3.9 सेकण्ड
∴ t = t1 + t2
= 4.2 + 3.9 = 8.1 सेकण्ड
u2 = 0
हम जानते हैं कि, ऊपर जाने का समय = नीचे आने का समय = 3.9 सेकण्ड
∴ t3 = t2 = 3.9 सेकण्ड
वह वेग जिससे गेंद फर्श पर टकराती है,
= a3 = a2 = 37.8 मीटर/सेकण्ड
तथा t = (t1 + t2) + t3
= 8.1 + 3.9 = 12 सेकण्ड पर
चाल v = 37.8 मीटर/सेकण्ड

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प्रश्न 3.13
उदाहरण सहित निम्नलिखित के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए:
(a) किसी समय अंतराल में विस्थापन के परिमाण (जिसे कभी-कभी दूरी भी कहा जाता है) और किसी कण द्वारा उसी अंतराल के दौरान तय किए गए पथ की कुल लंबाई।

(b) किसी समय अंतराल में औसत वेग के परिमाण और उसी अंतराल में औसत चाल (किसी समय अंतराल में किसी कण की औसत चाल को समय अंतराल द्वारा विभाजित की गई कुल पथ-लंबाई के रूप में परिभाषित किया जाता है)। प्रदर्शित कीजिए कि (a) व (b) दोनों में ही दूसरी राशि पहली से अधिक या उसके बराबर है। समता का चिन्ह कब सत्य होता है? (सरलता के लिए केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए।)
उत्तर:
(a) विस्थापन के परिमाण से तात्पर्य है कि सीधी रेखा की कुल लम्बाई कण द्वारा किसी समयान्तराल में तय किए गए निश्चित पथ की लम्बाई उसी समयान्तराल में उन्हीं बिन्दुओं के मध्य तय किए गए पथ से अलग हो सकती है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
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(b)
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लेकिन औसत वेग का मान शून्य है चूँकि इस समय में विस्थापन शून्य है।
∴ औसत चाल > औसत वेग

प्रश्न 3.14
कोई व्यक्ति अपने घर से सीधी सड़क पर 5 km h-1 की चाल से 2.5 km दूर बाजार तक पैदल चलता है। परंतु बाजार बंद देखकर वह उसी क्षण वापस मुड़ जाता है तथा 7.5 km h-1 की चाल से घर लौट आता है।
समय अंतराल –

(i) 0 – 30 मिनट
(ii) 0 – 50 मिनट
(iii) 0 – 40 मिनट की अवधि में उस व्यक्ति

(a) के माध्य वेग का परिमाण, तथा
(b) का माध्य चाल क्या है? (नोट : आप इस उदाहरण से समझ सकेंगे कि औसत चाल को औसत वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित करने की अपेक्षा समय द्वारा विभाजित कुल पथ-लंबाई के रूप में परिभाषित करना अधिक अच्छा क्यों है। आप थक कर घर लौटे उस व्यक्ति को यह बताना नहीं चाहेंगे कि उसकी औसत चाल शून्य थी।)
उत्तर:
सूत्र v = \(\frac{S}{t}\) से,
∴ व्यक्ति को बाजार जाने में लगा समय,
t1 = \(\frac{2.5}{5}\) = 0.5 घण्टा = 30 मिनट
∴ व्यक्ति को बाजार से आने में लगा समय,
t2 = \(\frac{2.5}{7.5}\) = 0.33 घण्टा = 20 मिनट

(i) 0 – 30 मिनट में व्यक्ति द्वारा चली दूरी = 2.5 किमी
∴ माध्य चाल = \(\frac{2.5}{30/60}\) = 5 किमी/घण्टा
अर्थात् इस समयान्तराल में व्यक्ति का विस्थापन तथा माध्य वेग के परिमाण भी क्रमश: 2.5 किमी तथा 5 किमी/घण्टा होंगे।

(ii) 0-50 मिनट के समयान्तराल में प्रथम 30 मिनट में व्यक्ति बाजार जाता है जबकि अगले 20 मिनट में वापस आता है।
∴ विस्थापन = 0
∴ माध्य वेग का परिमाण = \(\frac{0}{50/60}\) = 0
इस समयान्तराल में चली दूरी
= 2.5 + 2.5 = 5 किमी
∴ माध्य चाल = \(\frac{5}{50/60}\) = 6 किमी/घण्टा

(iii) चूँकि वापस आने में तय दूरी 2.5 किमी तथा लिया गया समय 20 मिनट है।
अतः प्रथम 10 मिनट में तय की गई दूरी 1.25 किमी होगी।
अतः 0 – 40 मिनट के समयान्तराल में विस्थापन
= 2.5 – 1.25
= 1.25 किमी
∴ माध्य वेग का परिमाण = \(\frac{1.25}{20/60}\) = 1.875 किमी/घण्टा
तथा इस समयान्तराल में चली दूरी
= 2.5 + 1.25 = 3.75 किमी
∴ माध्य चाल = \(\frac{3.75}{20/60}\) = 5.625
∴ माध्य वेग < माध्य चाल

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प्रश्न 3.15
हमने अभ्यास 3.13 तथा 3.14 में औसत चाल व औसत वेग के परिमाण के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है। यदि हम तात्क्षणिक चाल व वेग के परिमाण पर विचार करते हैं, तो इस तरह का अंतर करना आवश्यक नहीं होता। तात्क्षणिक चाल हमेशा तात्क्षणिक वेग के बराबर होती है। क्यों?
उत्तर:
हम जानते हैं कि तात्क्षणिक चाल
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अत्यन्त लघु समयान्तरालों अर्थात् ∆t → 0 में वस्तु की गति की दिशा को अपरिवर्तित माना जाता है। इस प्रकार कुल पद लम्बाई अर्थात् दूरी एवम् विस्थापन के परिमाण में कोई अन्तर नहीं होता है। अर्थात् तात्क्षणिक चाल हमेशा तात्क्षणिक वेग के परिमाण के तुल्य होती है।

प्रश्न 3.16
चित्र में (a) से (d) तक के ग्राफों को ध्यान से देखिए और देखकर बताइए कि इनमें से कौन – सा ग्राफ एकविमीय गति को संभवतः नहीं दर्शा सकता।
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उत्तर:
चारों ही ग्राफ असम्भव हैं, चूँकि –

  1. एक ही समय किसी कण की दो विभिन्न स्थितियाँ सम्भव नहीं है।
  2. एक ही समय किसी कण के विपरीत दिशाओं में वेग नहीं हो सकते हैं।
  3. चाल कभी भी ऋणात्मक नहीं होती है।
  4. किसी कण की कुल पथ लम्बाई समय के साथ कभी भी नहीं घट सकती है।

प्रश्न 3.17
चित्र में किसी कण की एकविमीय गति का x – t ग्राफ दिखाया गया है। ग्राफ से क्या यह कहना ठीक होगा कि यह कण t < 0 के लिए किसी सरल रेखा में और t > 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है। यदि नहीं, तो ग्राफ के संगत किसी उचित भौतिक संदर्भ का सुझाव दीजिए।
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उत्तर:
नहीं, यह गलत है। समय-दूरी आलेख (x – t वक्र) किसी कण के प्रक्षेपण को व्यक्त नहीं करता है। जैसे – जब कोई पिण्ड किसी मीनार से गिराया जाता है तब x = 0 पर t = 0 होता है।

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प्रश्न 3.18
किसी राजमार्ग पर पुलिस की कोई गाड़ी 30 km/h की चाल से चल रही है और यह उसी दिशा में 192 km/h की चाल से जा रही किसी चोर की कार पर गोली चलाती है। यदि गोली की नाल मुखी चाल 150 ms-1 है तो चोर की कार को गोली किस चाल के साथ आघात करेगी? (नोट : उस चाल को ज्ञात कीजिए जो चोर की कार को हानि पहुँचाने में प्रासंगिक हो)।
उत्तर:
दिया है : चोर की चाल, vt = 192 किमी/घण्टा
= 192 × \(\frac{5}{18}\) = \(\frac{160}{3}\) मीटर/सेकण्ड
तथा पुलिस की चाल vp = 30 किमी/घण्टा
= 30 × \(\frac{5}{18}\) = \(\frac{25}{3}\) मीटर/सेकण्ड
अत: चोर की कार का पुलिस की कार के आपेक्ष वेग,
vtp = vt – vp
= \(\frac{160}{3}\) – \(\frac{25}{3}\) = \(\frac{160-25}{3}\)
= \(\frac{135}{3}\) = 45 मीटर / सेकण्ड
गोली की नाल मुखी चाल, vb = 150 मीटर / सेकण्ड
= गोली की पुलिस के सापेक्ष चाल
अत: चोर की कार पर प्रहार करते समय गोली की चाल = पुलिस के सापेक्ष गोली की सापेक्ष चाल – पुलिस के सापेक्ष चोर की कार की सापेक्ष चाल
= 150 – 45
= 105 मीटर / सेकण्ड

प्रश्न 3.19
चित्र में दिखाए गए प्रत्येक ग्राफ के लिए किसी उचित भौतिक स्थिति का सुझाव दीजिए –
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उत्तर:
(a) x – t ग्राफ प्रदर्शित कर रहा है कि प्रारम्भ में x शून्य है, फिर यह एक स्थिर मान प्राप्त करता है। पुन: यह शून्य हो जाता है तथा फिर यह विपरीत दिशा में बढ़कर अन्त में एक स्थिर मान (विरामावस्था) प्राप्त कर लेता है। अत: यह ग्राफ इस प्रकार की भौतिक स्थिति व्यक्त कर सकता है जैसे एक गेंद को विरामावस्था से फेंका जाता है और वह दीवार से टकराकर लौटती है तथा कम चाल से उछलती है तथा यह क्रम इसके विराम में पहुँचने तक चलत रहता है।

(b) यह ग्राफ प्रदर्शित कर रहा है कि वेग समय के प्रत्येक अन्तराल के साथ परिवर्तित हो रहा है तथा प्रत्येक बार इसका वेग कम हो रहा है। इसलिए यह ग्राफ एक ऐसी भौतिक स्थिति को व्यक्त कर सकता है। जिसमें एक स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई गेंद (फेंके जाने पर) धरती से टकराकर कम चाल से पुनः उछलती है तथा प्रत्येक बार धरती से टकराने पर इसकी चाल कम होती जाती है।

(c) यह ग्राफ प्रदर्शित करता है कि वस्तु अल्प समय में ही त्वरित हो जाती है; अतः यह ग्राफ एक ऐसी भौतिक स्थिति को व्यक्त कर सकता है जिसमें एकसमान चाल से चलती हुई गेंद को अत्यल्प समयान्तराल में बल्ले द्वारा टकराया जाता है।

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प्रश्न 3.20
चित्र में किसी कण की एकविमीय सरल आवर्ती गति के लिए x – t ग्राफ दिखाया गया है।(इस गति के बारे में आप अध्याय 14 में पढ़ेंगे) समय t = 0.3 s, 1.2 s, -1.2 s पर कण के स्थिति, वेग व त्वरण के चिन्ह क्या होंगे?
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उत्तर:
हम जानते हैं कि सरल आवर्त गति में,
त्वरण a = -w2x
जहाँ w नियतांक है जिसे कोणीय आवृत्ति कहते हैं।
समय t = 0.3 सेकण्ड दर, दूरी (x) ऋणात्मक है। दूरी-समय ग्राफ का दाब भी ऋणात्मक है। इस कारण स्थिति तथा वेग ऋणात्मक है। अतः त्वरण (a = -w2x) धनात्मक है।
समय t = 1.2 सेकण्ड पर, दूरी (x) धनात्मक है। दूरी समय (x – t) ग्राफ का ढाल भी धनात्मक है। इस प्रकार स्थिति तथा वेग धनात्मक है। अतः त्वरण ऋणात्मक है।
समय t = -1.2 सेकण्ड पर, दूरी (x) ऋणात्मक है। दूरी समय (x – t) ग्राफ का ढाल भी धनात्मक है। इस प्रकार वेग धनात्मक है तथा अन्त में त्वरण (a) भी धनात्मक है।

प्रश्न 3.21
चित्र किसी कण की एकविमीय गति का x – t ग्राफ दर्शाता है। इसमें तीन समान अंतराल दिखाए गए हैं। किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम है और किसमें न्यूनतम है? प्रत्येक अंतराल के लिए औसत वेग का चिह्न बताइए।
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उत्तर:
चूँकि लघु अन्तरालों में समय-दूरी (x – t) ग्राफ की ढाल उस अन्तराल में कण की औसत चाल को प्रदर्शित करती है। ग्राफ से स्पष्ट है कि इस अन्तराल में,
(i) अन्तराल (3) में ग्राफ की ढाल अधिकतम है अतः औसत चाल अधिकतम है। जबकि अन्तराल (2) में ग्राफ की ढाल न्यूनतम है अतः इस अन्तराल में औसत चाल न्यूनतम है।

(ii) अन्तराल (1) एवम् (2) में ढाल धनात्मक है लेकिन अन्तराल (3) में ऋणात्मक है अतः अन्तराल (1 व 2) में औसत वेग धनात्मक जबकि अन्तराल (3) में ऋणात्मक है।

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प्रश्न 3.22
चित्र में किसी नियत (स्थिर) दिशा के अनुदिश चल रहे कण का चाल-समय ग्राफ दिखाया गया है।
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इसमें तीन समान समय अंतराल दिखाए गए हैं। किस अंतराल में औसत त्वरण का परिमाण अधिकतम होगा? किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम होगी? धनात्मक दिशा को गति की स्थिर दिशा चुनते हुए तीनों अंतरालों में v तथा a के चिह्न बताइए। A, B, C व D बिंदुओं पर त्वरण क्या होंगे?
उत्तर:
(i) चूँकि लघु अन्तरालों में चाल-समय (v – t) ग्राफ की ढाल का परिमाण कण के औसत त्वरण के परिमाण को व्यक्त करता है। दिए गए ग्राफ से स्पष्ट है कि ढाल का परिमाण अन्तराल वक्र (2) में अधिकतम जबकि अन्तराल (3) में न्यूनतम है। इस प्रकार औसत त्वरण का परिमाण अन्तराल (2) में अधिकतम व अन्तराल (3) में न्यूनतम होगा।

(ii) औसत चाल अन्तराल (1) में न्यूनतम तथा अन्तराल (3) में अधिकतम है।

(iii) तीनों अन्तरालों में चाल (v) धनात्मक है। अन्तराल (1) में चाल-समय (v – t) ग्राफ का ढाल धनात्मक जबकि अन्तराल (2) में ढाल अर्थात् त्वरण a ऋणात्मक है। अन्तराल (3) में चाल-समय ग्राफ समय-अक्ष के समान्तर है। अतः इस अन्तराल में त्वरण शून्य है।

(iv) चारों बिन्दुओं (i. e.,A, B, C तथा D) पर, चाल-समय ग्राफ समय-अक्ष के समान्तर है। अतः इन चारों बिन्दुओं पर त्वरण शून्य है।

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अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 3.23
कोई तीन पहिये वाला स्कूटर अपनी विरामावस्था से गति प्रारंभ करता है। फिर 10 s तक किसी सीधी सड़क पर 1ms-2 के एकसमान त्वरण से चलता है। इसके बाद वह एक समान वेग से चलता है। स्कूटर द्वारा वें सेकंड (n = 1, 2, 3, …) में तय की गई दूरी को n के सापेक्ष आलेखित कीजिए। आप क्या आशा करते हैं कि त्वरित गति के दौरान यह ग्राफ कोई सरल रेखा या कोई परवलय होगा?
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उत्तर:
प्रारम्भिक वेग, u = 0,
त्वरण a = 1 मीटर/सेकण्ड2, t = 10 सेकण्ड
सूत्र,
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इत्यादि।
चित्र से स्पष्ट है कि एक समान त्वरित गति के लिए समय अक्ष पर झुकी सरल रेखा, एक समान गति के लिए समय अक्ष के समान्तर सरल रेखा ही है।

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प्रश्न 3.24
किसी स्थिर लिफ्ट में (जो ऊपर से खुली है) कोई बालक खड़ा है। वह अपने पूरे जोर से एक गेंद ऊपर की ओर फेंकता है जिसकी प्रारंभिक चाल 49 ms-1 है। उसके हाथों में गेंद के वापिस आने में कितना समय लगेगा? यदि लिफ्ट ऊपर की ओर 5 ms-1 की एकसमान चाल से गति करना प्रारंभ कर दे और वह बालक फिर गेंद को अपने पूरे जोर से फेंकता तो कितनी देर में गेंद उसके हाथों में लौट आएगी?
उत्तर:
जब लिफ्ट स्थिर है, तब u = 49 m s-1, υ = 0 तथा a = – 9.8 ms-2
जब गेंद लड़के के हाथ में वापस लौटेगी तो गेंद का लिफ्ट के सापेक्ष विस्थापन शून्य होगा।
अत: s = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 में, s = 0 तथा माना लौटने में लगा समय = t
∴ 0 = 49t – \(\frac{1}{2}\) × 9.8 × t2
= \(\frac{1}{2}\) × 9.8 × t2 = 49t
= t = \(\frac{49×2}{9.8}\) = 10s
9.8 जब लिफ्ट ऊपर की ओर एक समान वेग से चलती है तो लिफ्ट के सापेक्ष गेंद का प्रारम्भिक वेग 49 ms-1 ही रहेगा; अतः गेंद को बालक के हाथों में आने में 10s का ही समय लगेगा।

प्रश्न 3.25
क्षैतिज में गतिमान कोई लम्बा पट्टा (चित्र) 4km/h की चाल से चल रहा है। एक बालक इस पर (पट्टे के सापेक्ष)9 km/h की चाल से कभी आगे कभी पीछे अपने माता-पिता के बीच दौड़ रहा है। माता व पिता के बीच 50 m की दूरी है। बाहर किसी स्थिर प्लेटफॉर्म पर खड़े एक प्रेक्षक के लिए, निम्नलिखित का मान प्राप्त करिए –
(a) पट्टे की गति की दिशा में दौड़ रहे बालक की चाल,
(b) पट्टे की गति की दिशा के विपरीत दौड़ रहे बालक की चाल,
(c) बच्चे द्वारा (a) व (b) में लिया गया समय यदि बालक की गति का प्रेक्षण उसके माता या पिता करें तो कौन-सा उत्तर बदल जाएगा?
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उत्तर:
माना \(\overrightarrow{v_{B}}\) = पट्टे का वेग = 4 kmh-1 (बाएँ से दाएँ)
\(\overrightarrow{v_{CB}}\) = पट्टे के सापेक्ष बालक का वेग

(a) जब बालक पट्टे की गति की दिशा में दौड़ता है –
पट्टे के सापेक्ष बालक का वेग = 9 km h-1 (बाएँ से दाएँ)
यदि बालक का वेग, प्लेटफार्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष \(\overrightarrow{v_{c}}\) हो तो,
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(b) जब बालक पट्टे की गति की दिशा के विपरीत दौड़ता है –
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ऋणात्मक चिह्न बालक की विपरीत दिशा (दाएँ से बाएँ) को व्यक्त करता है।

(c) स्थिति (a) अथवा (b) में लगने वाला समय
= \(\frac{50×60×60}{1000×9}\) = 20 s
समय 20 s रह जाएगा यदि माता या पिता बालक की गति का प्रेक्षण करते हैं।

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प्रश्न 3.26
किसी 200 m ऊँची खड़ी चट्टान के किनारे से दो पत्थरों को एक साथ ऊपर की ओर 15 ms-1 तथा 30 ms-1 की प्रारंभिक चाल से फेंका जाता है। इसका सत्यापन कीजिए कि नीचे दिखाया गया ग्राफ (चित्र) पहले पत्थर के सापेक्ष दूसरे पत्थर की आपेक्षिक स्थिति का समय के साथ परिवर्तन को प्रदर्शित करता है। वायु के प्रतिरोध को नगण्य मानिए और यह मानिए कि जमीन से टकराने के बाद
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पत्थर ऊपर की ओर उछलते नहीं। मान लीजिए g = 10 ms-2 ग्राफ के रेखीय व वक्रीय भागों के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर:
दिया है:
x(0) = 200 मीटर,
v(0) = 15 मीटर/सेकण्ड
a = -10 मीटर/सेकण्ड2
हम जानते हैं कि
x = x0 + ut + \(\frac{1}{2}\)at2
∴ x1(t) = 200 + 15 × t – 5t2
जब पहला पत्थर जमीन से टकराता है,
x1(t) = 0
∴ -5t2 + 15t + 200 = 0 ……………. (1)
या t2 – 3t – 400 = 0
या (t + 5) (t – 8) = 0
∴ t = -5 या 8
परन्तु t # ऋणात्मक
∴ t = 8 सेकण्ड
जब दूसरा पत्थर जमीन से टकराता है,
x2(t) = 200 मीटर, V0 = 30 मीटर/सेकण्ड
a = -10 मीटर/सेकण्ड2
x2 (t) = 200 + 30t – 5t2
प्रश्नानुसार, x2(t) – x1(t) = 15t …………………… (1)
जहाँ x2 (t) – x1 (t) दोनों पत्थरों के बीच दूरी (x) है।
x = 15t
i.e., x ∝ t
i.e., अब तक दोनों पत्थर गतिमान रहेंगे, उनके बीच दूरी बढ़ती रहेगी। अर्थात् (x – t) ग्राफ सरल रेखा होगा।
चूँकि t = 8 सेकण्ड, अत: पत्थर पृथ्वी पर 8 सेकण्ड बाद लौटेगा। इस समय पर दोनों के बीच अधिकतम दूरी होगी।
∴ अधिकतम दूरी, x = 15 × 8
= 120 मीटर होगी।
अर्थात् 8 सेकण्ड बाद केवल दूसरा पत्थर गतिशील होगा। अतः ग्राफ द्विघाती समीकरण के अनुसार परवलयाकार होगा।

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प्रश्न 3.27
किसी निश्चित दिशा के अनुदिश चल रहे किसी कण का चाल-समय ग्राफ (चित्र) में दिखाया गया है। कण द्वारा (a) t = 0s से t = 10s
(b) t = 25 से 6s के बीच तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
(a) तथा (b) में दिए गए अंतरालों की अवधि में कण की औसत चाल क्या है?
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उत्तर:
(a) t = 0 सेकण्ड से t = 10 सेकण्ड में चली गई
= चाल समय ग्राफ का क्षेत्रफल
= 0B × AC
= 1 × 10 × 12
= 60 मीटर
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(b) t = 2 सेकण्ड से t = 6 सेकण्ड में चली दूरी ज्ञात करने के लिए, इसे दो भागों में अर्थात् t = 2 से t = 5 से० तक तथा t = 5 से t = 6 से० तक ज्ञात कर जोड़ेंगे।
(i) t = 2 से t = 5 से० के लिए
ut = 0, v =12 मीटर/सेकण्ड, t = 5 सेकण्ड
∴ a = \(\frac{v-u}{t}\) से
a = \(\frac{12}{5}\) = 2.5 मीटर/सेकण्ड
अब सूत्र v = u + at से, 1 = 2 सेकण्ड पर चाल,
v = 0 + 2.4 × 2 = 4.8 मीटर/सेकण्ड
∴ t = 2 से 1 =5 से० में चली दूरी
S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2
= 4.8 × 3 + \(\frac{1}{2}\) × 2.4 × 32
= 14.4 + 10.8
= 25.2 मीटर

(ii) t = 5 से t = 6 से० के बीच चली दूरी
x = 12 × 1 + \(\frac{1}{2}\) × (-2.4) – 12
= 12 – 1.2 = 10.8 मीटर
∴ कुल चली दूरी = 25.2 + 10.8
= 36 मीटर
अत:
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\(\frac{36}{4}\) = 9 मीटर/सेकण्ड।

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प्रश्न 3.28
एकविमीय गति में किसी कण का वेग-समय ग्राफ (चित्र) में दिखाया गया है:
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नीचे दिए सूत्रों में से t, तक के समय अंतराल की अवधि में कण की गति का वर्णन करने के लिए कौन-से सूत्र सही हैं:

  1. x (t2) = x(t1) + v(t1) (t2 – t1) + (1/2) a(t2 – t1)
  2. v(t2) = v(t1) + a(t2 – t1)
  3. vaverage = [x(t2) – x(t1)]/t2 – t1)
  4. aaverage = [v(t2) – v (t1)]/(t2 – t1)
  5. x(t2) = x(t1) + vaverage (t2 – t1) + (1/2) aaverage (t2 – t1)
  6. x(t2) – x(t1) = t – अक्ष तथा दिखाई गई बिंदुकित रेखा के बीच दर्शाए गए वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य।

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 13.1
ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। ऑक्सीजन के एक अणु का व्यास 3 A लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
d = 3Å
∴r = \(\frac{1}{2}\) × 3 = 1.5 Å
= 1.5 × 10-10 मीटर
STP पर 1 मोल गैस का आयतन
V1 = 22.4 l = 22.4 × 10-3 मीटर3
तथा 1 मोल गैस में अणुओं की संख्या
= N = 6.02 × 1023
∴ अणुओं का आयतन, V2 = एक अणु का आयतन × N
= \(\frac{4}{3}\) π3 × N
= \(\frac{4}{3}\) × 3.14 × (1.5 × 10-10)3 × 6.02 × 1023
= 8.52 × 10-6 मीटर2
∴\(\frac{V_{2}}{V_{1}}\) = \(\frac{8.52 \times 10^{-6}}{22.4 \times 10^{-3}}\) = 3.8 × 10-4
अतः अणुओं के आयतन तथा STP पर इनके द्वारा घेरे गए आयतन का अनुपात 3.8 × 10-4 है।

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प्रश्न 13.2
मोलर आयतन STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP : 1 atm) दाब, 0°C दर्शाइये कि यह 22.4 लीटर है।
उत्तर:
दिया है:
STP पर,
P = 1 atm = 7.6 m of Hg column
= 0.76 × 13.6 × 103 × 9.9
= 1.013 × 105 Nm-2
T = 0°C = 273 K
R = 8.31 J mol-1K-1
n = 1 मोल V = 22.41 सिद्ध करने के लिए, सूत्र PV = nRT से,
V = \(\frac{nRT}{P}\)
= \(\frac{1 \times 8.31 \times 273}{1.013 \times 10^{5}}\)
= 22.4 × 10-3 m-3
= 22.4 लीटर
इति सिद्धम्।

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प्रश्न 13.3
चित्र में ऑक्सीजन के 1.00 × 10-3 kg द्रव्यमान के लिए PV/T एवं P में, दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ दर्शाये गए हैं।
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(a) बिंदुकित रेखा क्या दर्शाती है?
(b) क्या सत्य है : T1 > T2 अथवा T1 < T2?
(c) y – अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ PVIT का मान क्या है?
(d) यदि हम ऐसे ही ग्राफ 100 × 10-3 kg हाइड्रोजन के लिए बनाएँ तो भी क्या उस बिंदु पर जहाँ वक्र y – अक्ष से मिलते हैं PV/T का मान यही होगा? यदि नहीं तो हाइड्रोजन के कितने द्रव्यमान के लिए PV/T का मान (कम दाब और उच्च ताप के क्षेत्र के लिए वही होगा? H2 का अणु द्रव्यमान = 2.02 u, O2 का अणु द्रव्यमान = 32.0 u, R = 8.31J mol-1K-1)
उत्तर:
(a) बिन्दुकित रेखा यह व्यक्त करती है कि राशि PV/T स्थिर है। यह तथ्य केवल आदर्श गैस के लिए सत्य है। अर्थात् बिन्दुकित रेखा आदर्श गैस का ग्राफ है।

(b) ताप T2 पर ग्राफ की तुलना में ताप T1 पर गैस का ग्राफ आदर्श गैस के ग्राफ के अधिक समीप है। हम जानते हैं कि वास्तविक गैसें निम्न ताप पर आदर्श गैस के व्यवहार से अधिक विचलित होती हैं। अत: T1 > T2

(c) जहाँ ग्राफ -अक्ष पर मिलते हैं ठीक उसी बिन्दु पर आदर्श गैस का ग्राफ भी गुजरता है। अतः इस बिन्दु पर ऑक्सीजन गैस, आदर्श गैस का पालन करती है।
अत: गैस समीकरण से,
\(\frac{PV}{T}\) = nR
हम जानते हैं O2 का 32 × 10-3 kg = 1 मोल
∴ O2 का 1.00 × 10-3 kg
= \(\frac{1}{32 \times 10^{-3}} \times 1 \times 10^{-3}\)
i.e., n = \(\frac{1}{32}\)
R = 8.31 JK-1 mol-1
∴\(\frac{PV}{T}\) = \(\frac{1}{32}\) × 8.31 = 0.26 JK-1

(d) नहीं, हाइड्रोजन गैस के लिए PV/T का मान समान नहीं रहता है। चूँकि यह द्रव्यमान पर निर्भर करता है तथा H2 का द्रव्यमान O2 से कम है।
माना हाइड्रोजन का अभीष्ट द्रव्यमान m किया है जिसमें PV/T का समान मान प्राप्त होता है।
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प्रश्न 13.4
एक ऑक्सीजन सिलिंडर जिसका आयतन 30 लीटर है, में ऑक्सीजन का आरंभिक दाब 15 atm एवं ताप 27°C है। इसमें से कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी (गेज)दाब गिर कर 11 atm एवं ताप गिर कर 17°C हो जाता है। ज्ञात कीजिए कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा निकाली गई है। (R = 8.31J mol-1K-1, ऑक्सीजन का अणु द्रव्यमान O2 = 32 u)।
उत्तर:
दिया है:
ऑक्सीजन सिलिण्डर में प्रारम्भ में
V1 = 30 litres = 30 × 10-3 m3
P1 = 15 atm = 15 × 1.013 × 105 Pa
T1 = 27 + 273 = 300 K
R = 8.31 JK-1mol-1
माना सिलिण्डर में ऑक्सीजन गैस के n1 मोल हैं।
अतः सूत्र PV = nRT से,
n1 = \(\frac{P_{1} V_{1}}{R T_{1}}\)
= \(\frac{15 \times 1.013 \times 10^{5}}{8.31 \times 300}\) = 18.253
ऑक्सीजन का अणु भार
M = 32 = 32 × 10-3 kg
सिलिंडर में ऑक्सीजन का प्रारम्भिक द्रव्यमान
m1 = n1M
= 18.253 × 32 × 10-3 kg
माना अन्त में सिलिंडर में O2 के n2 मोल बचे हैं।
दिया है:
V2 = 30 × 10-3 m-3, P2 = 11 atm
= 11 × 1.013 × 105 pa
∴ n2 = \(\frac{P_{2} V_{2}}{R T_{2}}\)
= \(\frac{\left(11 \times 1.013 \times 10^{5}\right) \times\left(30 \times 10^{-3}\right)}{8.31 \times 290}\)
= 13.847 .
∴ सिलिंडर में O2 गैस का अन्तिम द्रव्यमान
m1 – m2
= (584.1 – 453.1) × 10-3 kg
= 141 × 10-3 kg = 0.141 kg

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प्रश्न 13.5
वायु का एक बुलबुला, जिसका आयतन 1.0 cm3 है, 40 m गहरी झील की तली में जहाँ ताप 12°C है, उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है जहाँ ताप 35°C है। अब इसका आयतन क्या होगा? उत्तर:
जब वायु का बुलबुला 40 मी० गहराई पर है तब
V1 = 1.0 cm3 = 1.0 × 10-6m3
T1 = 12°C
= 12°C – 12 + 273 = 285 K
= 1 atm + 40 m पानी की गहराई
P1 = 1 atm – h1ρg
= 1.013 × 105 + 40 × 103 × 9.8
= 493000 Pa
= 4.93 × 105 Pa
जब वायु का बुलबुला झील की सतह पर पहुँचता है तब
V2 = ?, T2 = 35°C
= 35 + 273
= 308 K
P2 = 1 atm = 1.013 × 105 Pa
सूत्र
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प्रश्न 13.6
एक कमरे में, जिसकी धारिता 25.0 m3 है, 27°C ताप और 1 atm दाब पर, वायु के कुल अणुओं (जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जलवाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं) की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
V = 25.0 m3
T = 27°C = 27 + 273 = 300 K
K = 1.38 × 10-23 JK-1
P = 1 atm = 1.013 × 105 Pa
गौस समीकरण से, P = \(\frac{nRT}{V}\)
= \(\frac{n}{V}\) (Nk) T (∵\(\frac{R}{n}\) = k)
= (nN) \(\frac{kT}{V}\) = N’ \(\frac{KT}{V}\)
जहाँ N’ = nN = दी गई गैस में ऑक्सीजन अणुओं की संख्या
N’ = \(\frac{PV}{kT}\)
= \(\frac{\left(1.013 \times 10^{5}\right) \times 25}{1.38 \times 10^{-23} \times 300}\)
= 6.10 × 1026

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प्रश्न 13.7
हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आंकलन कीजिए –
(i) कमरे के ताप (27°C) पर
(ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000 K) पर
(iii) 100 लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर।
उत्तर:
गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, ताप T पर गैस की औसत गतिज ऊर्जा (i.e., औसत ऊष्मीय ऊर्जा) निम्नवत् है –
E = \(\frac{3}{2}\) KT
दिया है: k = 1.38 × 10-23 JK-1

(i) T = 27°C = 273 + 27 = 300 K पर,
E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 300
= 621 × 10-23 J
= 6.21 × 10-21 J

(ii) T = 6000K पर
∴E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 6000
= 1.24 × 10-19 J

(iii) T = 10 × 106 K पर,
∴ E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 × 107
= 2.07 × 10-16 J
= 2.1 × 10-16 J

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प्रश्न 13.8
समान धारिता के तीन बर्तनों में एक ही ताप और दाब पर गैसें भरी हैं। पहले बर्तन में नियॉन (एकपरमाणुक) गैस है, दूसरे में क्लोरीन (द्विपरमाणुक) गैस है और तीसरे में यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (बहुपरमाणुक) गैस है। क्या तीनों बर्तनों में गैसों के संगत अणुओं की संख्या समान है? क्या तीनों प्रकरणों में अणुओं की vrms (वर्गमाध्य मूल चाल) समान है।
उत्तर:
(a) हाँ, चूँकि आवोगाद्रों परिकल्पना से, समान परिस्थितियों में गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।

(b) नहीं चूँकि Vrms = \(\sqrt{\frac{3 R T}{m}}\)
∴ Vrms ∝ \(\frac{1}{\sqrt{m}}\)
अतः तीनों गैसों के ग्राम-अणु भार अलग-अलग हैं। अतः अणुओं की वर्ग माध्य-मूल चाल अलग-अलग होगी।

प्रश्न 13.9
किस ताप पर आर्गन गैस सिलिंडर में अणुओं की vrms, 20°C पर हीलियम गैस परमाणुओं की vrms के बराबर होगी। (Ar का परमाणु द्रव्यमान = 39.91 एवं हीलियम का परमाणु द्रव्यमान = 4.0 u)।
उत्तर:
माना कि T1 व T2 K ताप पर आर्गन व हीलियम गैस की वर्ग माध्य मूल वेग क्रमश: C1 व C2 हैं।
दिया है:
M1 = 39.9 × 10-3 kg,
M2 = 4.0 × 10-3 kg, T1 = ?
T2 = -20 + 273 = 253 K
हम जानते हैं कि वर्ग माध्य मूल वेग
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या T = 2523.7 K = 2524 K
= 2.524 × 103K

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प्रश्न 13.10
नाइट्रोजन गैस के एक सिलिंडर में, 2.0 atm दाब एवं 17°C ताप पर नाइट्रोजन अणुओं के माध्य मुक्त पथ एवं संघट्ट आवृत्ति का आंकलन कीजिए। नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या लगभग 1.0 A लीजिए। संघट्ट काल की तुलना अणुओं द्वारा दो संघट्टों के बीच स्वतंत्रतापूर्वक चलने में लगे समय से कीजिए। (नाइट्रोजन का आण्विक द्रव्यमान = 28.0 u)।
उत्तर:
मैक्सवेल संशोधन ने गैस अणुओं का मध्य मुक्त पद
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जहाँ d = अणु का व्यास
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2 atm दाब पर, m द्रव्यमान गैस का आयतन
V = \(\frac{RT}{P}\), T = 273 + 17 = 290 K
∴ n = \(\frac{n}{V}\) = \(\frac{NP}{RT}\)
दिया है: N = 6.023 × 1023 mole-1
P = 2 atm = 2 × 1.013 × 105 Nm-2
R = 8.3 JK -1 mol-1
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वर्ग माध्य मूल वग C = \(\sqrt{\frac{2 R T}{M}}\)
R = 8.31 J mol-1 K-1
T = 290 K, M = 28 × 10-3 kg रखने पर
C = \(\sqrt{\frac{3 \times 8.31 \times 290}{28 \times 10^{-3}}}\)
= 5.08 × 102 ms-1
= 5.10 × 102 ms-1
∴ संघट्ट आवृत्ति,
v = \(\frac{C}{λ}\) = \(\frac{5.1 \times 10^{2}}{1.0 \times 10^{-7}}\)
= 5.1 × 109 s-1
माना दो क्रमागत संघट्टों के मध्य र समय है।
∴ τ = \(\frac{λ}{C}\) = \(\frac{1.0 \times 10^{-7} \mathrm{m}}{5.1 \times 10^{2} \mathrm{ms}^{-1}}\)
= 2 × 10-13 s
पुनः माना संघट्ट के लिया गया समय t है।
∴ t = \(\frac{d}{C}\) = \(\frac{2 \times 10^{-10}}{5.10 \times 10^{2}}\)
= 4 × 10-13 s
समी० (i) को (ii) से भाग देने पर,
\(\frac{τ}{τ}\) = \(\frac{2.0 \times 10^{-10} \mathrm{s}}{4 \times 10^{-13} \mathrm{s}}\) = 500
या τ = 500t
अतः दो क्रमागत टक्करों के मध्य समय टक्कर में लिये गए समय का 500 गुना है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि गैस के अणु लगभग हर समय मुक्त रूप से चलायमान रहते हैं।

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अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 13.11
1 मीटर लंबी संकरी ( और एक सिरे पर बंद) नली क्षैतिज रखी गई है। इसमें 76 cm लंबाई भरा पारद सूत्र, वायु के 15 cm स्तंभ को नली में रोककर रखता है। क्या होगा यदि खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए नली को ऊर्ध्वाधर कर दिया जाए।
उत्तर:
प्रारम्भ में नली क्षैतिज है तब बंद सिरे पर रोकी गई वायु का दाब वायुमण्डलीय दाब के समान होगा।
∴ P1 = 76 सेमी पारे स्तम्भ का दाब।
माना कि नली का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A सेमी2 है।
वायु का आयतन = 15 × A = 15A सेमी3

जब नली का खुला सिरा नीचे की ओर रखते हैं तथा ऊर्ध्वाधर करते हैं जब खुले सिरे पर बाहर की ओर से वायुमण्डलीय दाब कार्य करता है जबकि ऊपर की ओर से 76 सेमी पारद सूत्र का दाब व बंद सिरे पर एकत्र वायु का दाब अधिक है।

अतः पारद सूत्र असंचुलित रहेगा व नीचे गिरते हुए वायु को बाहर निकाल देता है। माना कि पारद सूत्र की 2 लम्बाई नीचे नली से बाहर निकलती है।
∴ नली में पारद सूत्र की शेष लम्बाई = (76 – h) सेमी
तथा बंद सिरे पर वायु स्तम्भ की लम्बाई
= (15 + 9 + h)
= (24 + h) सेमी

तथा वायु का आयतन V2 = (24 + h) A सेमी3
माना कि इस वायु का दाब P2 है।
∴ सन्तुलन में,
P2 + (76 – h) सेमी पारद सूत्र का दाब = वायुमण्डलीय दाब
∴P2 = R सेमी पारद सूत्र का दाब
सूत्र P1V1 = P2V2 से
76 × 15A = h × (24 + h) A
या 1140 = 24h + h2
या h2 + 24h – 1140 = 0
∴ h = -24 ± \(\sqrt{24^{2}-4 \times 17-1140}\)
= 28.23 या – 4784 सेमी
परन्तु h ≠ ऋणात्मक
∴ h = 28.23 सेमी।
अतः पारद सूत्र की 28.23 सेमी लम्बाई नली से बाहर निकल जाएगी।

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प्रश्न 13.12
किसी उपकरण से हाइड्रोजन गैस 28.7 cm3 s-1 की दर से विसरित हो रही है। उन्हीं स्थितियों में कोई दूसरी गैस 7.2 cm3 s-1 की दर से विसरित होती है। इस दूसरी गैस को पहचानिए।
[संकेत : ग्राहम के विसरण नियम R1/R2 = (M2/M1)1/2 का उपयोग कीजिए, यहाँ R1, R2 क्रमशः
गैसों की विसरण दर तथा M2 एवं M2 उनके आण्विक द्रव्यमान हैं। यह नियम अणुगति सिद्धांत का एक सरल परिणाम है।]
उत्तर:
विसरण के ग्राहम के नियम से,
\(\frac{R_{1}}{R_{2}}\) = \(\sqrt{\frac{M_{2}}{M_{1}}}\) ………………. (i)
जहाँ R1 = गैस – 1 की विसरण दर = 28.7 cm3 s-1
R2 = गैस – 2 की विसरण दर = 7.2 cm2 s-1 ………………. (ii)
माना इनके संगत अणुभार M1 व M2 हैं।
∴H2 के लिए, M1 = 2
∴ समी० (i) तथा (ii) से
\(\frac{28.7}{7.2}\) = \(\sqrt{\frac{M_{2}}{2}}\)
या \(\frac{M_{2}}{2}\) = (\(\frac{28.7}{7.2}\))2
या M2 = 2 × 15.89 = 31.77 = 32 u
हम जानते हैं कि O2 का अणुभार 32 है। अत: अज्ञात गैस O2 है।

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प्रश्न 13.13
साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब अपने संपूर्ण आयतन में एकसमान है। यह पूर्णतया सत्य केवल तभी है जब कोई भी बाह्य प्रभाव न हो। उदाहरण के लिए, गुरुत्व से प्रभावित किसी गैस स्तंभ का घनत्व (और दाब) एकसमान नहीं होता है। जैसा कि आप आशा करेंगे इसका घनत्व ऊँचाई के साथ घटता है।

परिशुद्ध निर्भरता ‘वातावरण के नियम n2 = n1 exp \(\left[-\frac{m g}{k_{B} T}\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) से दी जाती है, यहाँ n2, n1 क्रमश: h2, h1 ऊँचाइयों पर संख्यात्मक घनत्व को प्रदर्शित करते हैं।

इस संबंध का उपयोग द्रव स्तंभ में निलंबित किसी कण के अवसादन साम्य के लिए समीकरण n2 = n1 exp \(\left[-\frac{m g N_{A}}{\rho R T}\left(\rho-\rho^{\prime}\right)\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) को व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए, यहाँ निलंबित कण का घनत्व तथा ρ’ चारों तरफ के माध्यम का घनत्व है। NA आवोगाद्रो संख्या, तथा R सार्वत्रिक गैस नियतांक है। संकेत : निलंबित कण के आभासी भार को जानने के लिए आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग कीजिए।]
उत्तर:
माना कि कणों तथा अणुओं का आकार गोलाकार है। कणों का भार निम्नवत् है।
w = mg = \(\frac{4}{3}\) πr2 ρg …………… (i)
जहाँ r = कणों की त्रिज्या
तथा ρ = कणों का घनत्व है।
कणों की गति गुरुत्व के अधीन होने पर, ऊपर की ओर उत्क्षेप लगाती है जिसका मान निम्नवत् है –
B = कण का आयतन × प्रतिवेश का घनत्व × g
= \(\frac{4}{3}\) πr3 ρ’g ………………. (ii)
माना कण पर नीचे की ओर लगने वाला बल F है।
अत: F = W – B
= \(\frac{4}{3}\) πr3(ρ – ρ’) g ……………….. (iii)
पुनः n2 = n1 exp \(\left[\frac{-m g}{k_{B} T}\left(h_{2}-h_{1}\right)\right]\) ……………… (iv)
जहाँ kB = बोल्ट्जमैन नियतांक है।
तथा n1 व n2 क्रमश: h1 व h2 ऊँचाई पर संख्या घनत्व है। समीकरण (iii) में mg के स्थान पर बल F रखने पर, समीकरण (ii) व (iv) से,
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जो कि अभीष्ट समीकरण है।
जहाँ \(\frac{4}{3}\) πr3 ρg = कण का द्रव्यमान × g = mg

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प्रश्न 13.14
नीचे कुछ ठोसों व द्रवों के घनत्व दिए गए हैं। उनके परमाणुओं की आमापों का आंकलन (लगभग)कीजिए।
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[संकेत : मान लीजिए कि परमाणु ठोस अथवा द्रव प्रावस्था में दृढ़ता से बंधे हैं तथा आवोगाद्रो संख्या के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए। फिर भी आपको विभिन्न परमाण्वीय आकारों के लिए अपने द्वारा प्राप्त वास्तविक संख्याओं का बिल्कुल अक्षरशः प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि दृढ़ संवेष्टन सन्निकटन की रुक्षता के परमाणवीय आकार कुछ Å के परास में हैं।
उत्तर:
(a) कार्बन का परमाणु भार
M = 12.01 × 10-3 kg
N = 6.023 × 1023
∴ एक कार्बन परमाणु का द्रव्यमान
m = \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{12.01 \times 10^{-3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
या m = 1.99 × 10-26 kg
= 2 × 10-26 kg
कार्बन का घनत्व \(\rho_{\varepsilon}\) = 2.2 × 10+3 kg m-3
∴ प्रत्येक कार्बन परमाणु का आयतन
V = \(\frac{m}{\rho_{\mathrm{C}}}=\frac{2 \times 10^{-26}}{2.2 \times 10^{3}}\)
= 0.9007 × 10-29 m3
माना rC = कार्बन परमाणु की त्रिज्या
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(b) दिया है : स्वर्ण परमाणु का परमाणु भार
M = 1.97 × 10-3 kg
∴ प्रत्येक स्वर्ण परमाणु का द्रव्यमान
= \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{197 \times 10^{3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 3.271 × 10-25 kg
ρg = 19.32 × 103 kg m-3
माना rg = गोल्ड परमाणु की त्रिज्या
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(c) दिया है : नाइट्रोजन परमाणु का परमाणु भार
M = 14.01 × 10-3 kg
∴ प्रत्येक परमाणु का द्रव्यमान
m = \(\frac{M}{N}\) = \(\frac{14.01 \times 10^{-3} \mathrm{kg}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 2.3261 × 10-26 kg
माना rn = इसके प्रत्येक परमाणु की त्रिज्या
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(d) दिया है : MLi = 6.94 × 10-3 kg
ρLi = 0.53 × 103 kg m-3
∴ mLi = mass of Li atom
= \(\frac{M_{\mathrm{Li}}}{\rho_{\mathrm{Li}}}=\frac{6.94 \times 10^{-3}}{6.023 \times 10^{23}}\)
= 1.152 × 10-26 kg
माना rLi = Li परमाणु की त्रिज्या
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(e) दिया है : MF = 1.9 × 10-3 kg
ρF = 1.14 × 103 kg m3
∴ प्रत्येक फलुओरीन परमाणु का द्रव्यमान
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माना प्रत्येक फलुओरीन परमाणु की त्रिज्या rF है। अतः
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.1
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिंड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?

(b) पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है?

(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएँगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अभ्यासों में दिए गए आँकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
उत्तर:
(a) नहीं।
(b) हाँ, यदि अंतरिक्ष यान का आकार उसके लिए इतना अधिक हो कि वह गुरुत्वीय त्वरण (g) के परिवर्तन का संसूचण कर सके।
(c) ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इस अर्थ में यह उन बलों से भिन्न है जो दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।

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प्रश्न 8.2
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व को गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से तथा दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा-अन्तर के लिए सूत्र
-GMm (1/r2 – 1/r1) सूत्र mg(r2 – r1) से अधिक/कम यथार्थ है।
उत्तर:
(a) घटता है।
(b) घटता है।
(c) पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
(d) अधिक।

प्रश्न 8.3
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?
उत्तर:
माना पृथ्वी व ग्रह का परिक्रमण काल क्रमश: TE व Tp हैं।
∴ Tp = \(\frac{T_{E}}{2}\)
माना कक्षीय आमाप क्रमशः re व rp हैं।
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अर्थात् ग्रह का आमाप पृथ्वी से 0.63 गुना छोटा है।

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प्रश्न 8.4
बृहस्पति के एक उपग्रह, आयो (lo), की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या 4.22 × 108 m है। यह दर्शाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 गुना है।
उत्तर:
दिया है:
सूर्य का द्रव्यमान = Ms = 2 × 30 kg
बृहस्पति के उपग्रह का आवर्त काल = T = 1.769 दिन
= 1.769 × 24 × 3600s
= 15.2841 × 104 s
बृहस्पति के चारों ओर उपग्रह की त्रिज्या
= r = 4.22 × 8 m
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
माना बृहस्पति का द्रव्यमान MJ है।
MJ = \(\frac{1}{1000}\)Ms सिद्ध करने के लिए
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अत: बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग (1/1000) गुना है।

प्रश्न 8.5
मान लीजिए कि हमारी आकाशगंगा में एक सौर द्रव्यमान के 2.5 × 1011 तारे हैं। मंदाकिनीय केन्द्र से 50,000 105 ly दूरी पर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लेगा? आकाशगंगा का व्यास 105 ly लीजिए।
उत्तर:
एक सौर द्रव्यमान = 2 × 1030 kg
एक प्रकाश वर्ष = 9.46 × 1015 m
माना M = आकाश गंगा में तारे का द्रव्यमान
= 2.5 × 1011 × 2 × 1030 kg
= 5 × 1041 kg
तारे की कक्षा की त्रिज्या = r = मंदाकिनी के केन्द्र से तारे की दूरी
= 50,000 प्रकाश वर्ष
= 50,000 × 9.46 × 1015 m
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
एक आवृत्ति काल = T
आकाशगंगा का व्यास = 105 प्रकाश वर्ष
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प्रश्न 8.6
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शुन्य अनन्त पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिंड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।
उत्तर:
(a) गतिज ऊर्जा
(b) कम होती है।

प्रश्न 8.7
क्या किसी पिंड की पृथ्वी से पलायन चाल –

  1. पिंड के द्रव्यमान
  2. प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति
  3. प्रक्षेपण की दिशा
  4. पिंड के प्रमोचन की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. नहीं
  4. हाँ।

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प्रश्न 8.8
कोई धूमकेत सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में धूमकेतु की शुरू से अन्त तक –

  1. रैखिक चाल
  2. कोणीय चाल
  3. कोणीय संवेग
  4. गतिज ऊर्जा
  5. स्थितिज ऊर्जा
  6. कुल ऊर्जा नियत रहती है। सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में ह्रास को नगण्य मानिये।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. हाँ
  4. नहीं
  5. नहीं
  6. हाँ।

प्रश्न 8.9
निम्नलिखित में से कौन से लक्षण अन्तरिक्ष में अन्तरिक्ष यात्री के लिए दुःखदायी हो सकते हैं?
(a) पैरों में सूजन
(b) चेहरे पर सूजन
(c) सिरदर्द
(d) दिक्विन्यास समस्या।
उत्तर:
(b), (c) व (d)।

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प्रश्न 8.10
एक समान द्रव्यमान घनत्व की अर्धगोलीय खोलों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केन्द्र पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा देखिए चित्र]

  1. a
  2. b
  3. c
  4. 0 में किस तीर द्वारा दर्शायी जाएगी?

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उत्तर:
गोलों को पूरा करने पर, केन्द्र C पर नेट तीव्रता शून्य होगी। इसका तात्पर्य है कि केन्द्र C पर दोनों अर्धगोलों के कारण तीव्रताएँ परस्पर विपरीत व बराबर होंगी। अर्थात् दिशा (iii) C द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.11
उपरोक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिन्दु P पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर –
(i) d
(ii) e
(iii) f
(iv) g द्वारा व्यक्त की जाएगी?
उत्तर:
(ii) (e) द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.12
पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 × 1024 kg। अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए ( कक्षीय त्रिज्या = 15 × 1011 m)
उत्तर:
माना पृथ्वी के केन्द्र से दूरी पर सूर्य व पृथ्वी के कारण गुरुत्वाकर्षण बल बिन्दु P पर है। अतः रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है।
माना सूर्य से पृथ्वी से बीच की दूरी = x = पृथ्वी की त्रिज्या
सूर्य का द्रव्यमान, Ms = 2 × 1030 किग्रा
पृथ्वी का द्रव्यमान Me = 6 × 1024 किग्रा
x = 1.5 × 1011 मीटर
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
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बिन्दु P पर, सूर्य व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल
= पृथ्वी व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल।
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प्रश्न 8.13
आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आंकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 15 × 108 km है।
उत्तर:
हम जानते हैं कि पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर 1.5 × 1011 मीटर त्रिज्या की कक्षा में घूमती है। पृथ्वी एक चक्कर 365 दिनों में पूरा करती है।
दिया है:
पृथ्वी की त्रिज्या = R = 1.5 × 1011 मीटर
सूर्य के चारों ओर पृथ्वी और पृथ्वी का आवर्तकाल,
T = 365
दिन = 365 × 24 × 60 × 60 से०,
G = 6.67 × 1011 न्यूटन-मीटर2 प्रति किग्रा2
जहाँ Ms = सूर्य का द्रव्यमान है = ?
हम जानते हैं कि –
जहाँ Ms = सूर्य का द्रव्यमान है।
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∴ सूर्य का द्रव्यमान = 2.0 × 1030 किग्रा।

प्रश्न 8.14
एक शनि वर्ष एक पृथ्वी-वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 15 × 108 km दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?
उत्तर:
केप्लर के नियम से,
i.e., T2 ∝ R3
∴ शनि के लिए \(T_{s}^{2} \propto R_{s}^{3}\) …………….. (i)
तथा पृथ्वी के लिए \(T_{e}^{2} \propto R_{c}^{3}\) ……………. (ii)
समी० (i) को (ii) से भाग देने पर,
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दिया है:
Ts = 29.5Te या \(\frac{T_{s}}{T_{e}}\) = 29.5
सूर्य से पृथ्वी की दूरी = Rs = 1.5 × 108 km
सूर्य से शनि की दूरी = Rs ……. (iv)
∴ समी० (iii) व (iv) से,
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= 1.43 × 107 किमी

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प्रश्न 8.15
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?
उत्तर:
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊँचाई = h = \(\frac{R}{2}\)
जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या है।
हम जानते हैं कि gh = g[1 + \(\frac{h}{R}\))2
दिया है:
h = \(\frac{R}{2}\)
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माना m = वस्तु का द्रव्यमान है
माना पृथ्वी के पृष्ठ व hऊँचाई पर भार क्रमश: W व Wh हैं।
अतः w = mg = 63 N दिया है।
तथा Wh = mgh
= m × \(\frac{4}{9}\)g = \(\frac{4}{9}\) mg
= \(\frac{4}{9}\) × 63 = 28 N
∴ Wh = 28 N

प्रश्न 8.16
यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250N है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?
उत्तर:
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर गुरुत्व के कारण त्वरण क्रमशः g व gd हैं।
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर भार क्रमश: W व Wd है।
∴ W = mg = 250 N ……. (i)
तथा Wd = mgd ……………….. (ii)
हम जानते हैं कि gd = g(1 – \(\frac{d}{R}\)) ………………. (iii)
दिया है: d = \(\frac{R}{2}\) जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या। ………………… (iv)
∴ समी० (iii) व (iv) से,
gd = g(1- \(\frac{R/2}{R}\))
= g (1 – \(\frac{1}{2}\)) = g × \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{g}{2}\) ……………. (v)
∴ wd = mgd = m \(\frac{g}{2}\) (समी० (v) से)
= \(\frac{1}{2}\) mg = \(\frac{1}{2}\) W
= \(\frac{1}{2}\) × 250 = 125 N
∴ पृथ्वी के केन्द्र से आधी दूरी पर वस्तु पर वस्तु का भार
= 125 N

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 8.17
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर कोई रॉकेट 5 kms-1 की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा? पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = 6.4 × 106 m तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
उत्तर:
माना रॉकेट की प्रारम्भिक चाल है रॉकेट की पृथ्वी से h ऊँचाई पर वेग शून्य है।
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है तथा पृथ्वी के पृष्ठ पर इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा
K.E. + P.E. = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) ………………… (i)
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान
R = पृथ्वी की त्रिज्या
G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक
उच्चतम बिन्दु पर K.E. = 0 (∵ वेग = 0)
तथा P.E. = –\(\frac{GMm}{R}\) ………….. (ii)
h ऊँचाई पर रॉकेट की सम्पूर्ण ऊर्जा
= K.E. + P.E. = 0 + P.E. = P.E.
= \(\frac{G M_{m}}{R+h}\) ……………….. (iii)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
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दिया है: v = 5 km s-1 = 5000 ms-1
दिया है: R = 6.4 × 6 m
समी० (iv) में दिया मान रखने पर,
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∴ पृथ्वी के केन्द्र से दूरी
= R + h = 6.4 × 106 + 1.6 × 106
= 8.0 × 106 मीटर।

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प्रश्न 8.18
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 kms-1 है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वीसे अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
माना वस्तु की प्रारम्भिक व अन्तिम चाल v व v’ है।
माना वस्तु का द्रव्यमान m है।
वस्तु की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
= \(\frac{1}{2}\) mv2
वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (पृथ्वी की सतह पर)
= \(\frac{-GMm}{R}\)
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जहाँ M व R क्रमशः पृथ्वी के द्रव्यमान व त्रिज्या हैं।
वस्तु की अन्तिम स्थितिज ऊर्जा (अनन्त पर) = 0
वस्तु की अन्तिम गतिज ऊर्जा (अनन्त पर) = \(\frac{1}{2}\) mv2
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
प्रा० गतिज ऊर्जा + प्रा० PE = अन्तिम (KE + PE)
या \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0
या \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) ……………….. (i)
Also Let ve = escape velocity
\(\frac{1}{2} m v_{e}^{2}\) = \(\frac{GMm}{R}\) ………….. (ii)
समी० (i) तथा (ii) से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{1}{2} m v_{e}^{2}\) …………….. (iii)
अब
ve = 11.2 kms-1
v = 3ve ……………… (iv) (दिया है)
समी० (iii) तथा (iv) से,
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= 31.7 kms-1

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प्रश्न 8.19
कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg; पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 × 106 m तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
उत्तर:
माना पृथ्वी का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमशः M व R है।
माना पृथ्वी पृष्ठ से L ऊँचाई पर उपग्रह का द्रव्यमान m है।
h ऊँचाई पर कक्ष में वेग = कक्षीय वेग = v
कक्ष में उपग्रह की KE = \(\frac{1}{2}\) mv2
h ऊँचाई पर उपग्रह की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R+h}\)
अत: चक्रण करते उपग्रह की सम्पूर्ण ऊर्जा (KE + PE)
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R+h}\)
= \(\frac{1}{2}\)m (\(\frac{GM}{R+h}\)) – \(\frac{GMm}{R+h}\)
(∵ h ऊँचाई पर कक्षीय वेग = \(\sqrt{\frac{G M}{R+h}}\))
= – \(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)
उपग्रह को पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए इसकी गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा शून्य होगी तथा इसकी गतिज ऊर्जा भी शून्य होगी।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने पर उपग्रह की अन्तिम ऊर्जा = 0
R ऊँचाई पर चक्रण करती वस्तु की ऊर्जा + दी गई ऊर्जा = 0 (ऊर्जा संरक्षण के नियम से)
उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए दी गई ऊर्जा
= E = – चक्रण करते उपग्रह की ऊर्जा
= -(\(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)) = \(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R+h}\)
दिया है
h = 400 km
= 400 × 103 m, R = 6400 × 103 m,
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
M = 6 × 1024 kg, m = 200 kg
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प्रश्न 8.20
दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (2 × 1030 kg) के बराबर है, एक दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे 109 km की दूरी पर हैं तब इनकी चाल उपेक्षणीय है। ये तारे किस चाल से टकराएंगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या 104 km है। यह मानिए कि टकराने के पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता (G के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए)।
उत्तर:
दिया है:
प्रत्येक तारे का द्रव्यमान
M = 2 × 1030 किग्रा
दोनों तारों के मध्य प्रा० दूरी,
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r = 109 किमी = 1012 मीटर
प्रत्येक तारे का आकार = त्रिज्या
= r = 104 किमी = 107 मीटर
माना दोनों तारे एक दूसरे से v से टकराते हैं।
माना दोनों तारे की प्रा० चाल u है।
r दूरी पर रखे एक तारे की दूसरे के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा
PE = \(-\frac{G m_{1} m_{2}}{r}=-\frac{G M m}{r}\)
r दूरी पर KE = 0 [∵ u = 0]
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा
KE + PE = 0 – \(\frac{G M^{2}}{r}\) = \(\frac{-G M^{2}}{r}\) ……………… (i)
माना दोनों तारों के केन्द्र r’ दूरी पर जब दोनों तारे एकदम टकराने वाले होते हैं = 2R
संघट्ट के बाद दोनों तारों की KE
= \(\frac{1}{2}\) mv2 + \(\frac{1}{2}\) mv2
– Mv2
संघट्ट के समय दोनों तारों की
PE = \(\frac{-GMM}{r’}\) = \(\frac{G M^{2}}{r}\)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = अन्तिम (ICE + IPE)
या \(\frac{-G M^{2}}{r}\) = Mv2 – \(\frac{G M^{2}}{2R}\)
या Mv2 = \(\frac{G M^{2}}{2R}\) – \(\frac{-G M^{2}}{r}\)
v2 = GM(\(\frac{1}{2R}\) – \(\frac{1}{r}\))

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प्रश्न 8.21
दो भारी गोले जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 100 kg, त्रिज्या 0.10 m है किसी क्षैतिज मेज पर एक दूसरे से 1.0 m दूरी पर स्थित हैं। दोनों गोलों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर गुरुत्वीय बल तथा विभव क्या है? क्या इस बिन्दु पर रखा कोई पिंड संतुलन में होगा? यदि हाँ, तो यह सन्तुलन स्थायी होगा अथवा अस्थायी?
उत्तर:
माना दोनों गोले क्रमश: A व B बिन्दु पर रखे गए हैं। दोनों गोलों के बीच की दूरी = r = AB = 1 मीटर
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AB का मध्य बिन्दु 0 = AB × \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5 m
AO = OB
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5 m
प्रत्येक गोले का द्रव्यमान = M = 100 kg
माना कि O बिन्दु पर रखी प्रत्येक वस्तु का द्रव्यमान = m
हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल,
F = \(\frac{G M m}{d^{2}}\)
माना A व b के कारण O पर बल क्रमश: FA व FB हैं। अतः
FA = \(\frac{G \times 100 \times m}{(0.5)^{2}}\) along OA
तथा FB = \(\frac{G \times 100 \times m}{(0.5)^{2}}\) along OB
चूँकि |\(\vec{F}\)A| = |\(\vec{F}\)B|
ये दोनों विपरीत दिशा में लगते हैं।
अतः O पर परिणामी बल = 0
इसका तात्पर्य यह है कि O बिन्दु पर रखी वस्तु पर कोई बल नहीं लगता है। अतः यह वस्तु सन्तुलन में है। लेकिन यह सन्तुलन अस्थिर है चूँकि A व B में सूक्ष्म विस्थापन से भी सन्तुलन बदला जाता है।
पुनः हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण विभव,
= – \(\frac{Gm}{d}\)
माना A व B बिन्दुओं पर रखे गोलों पर O के कारण गुरुत्वाकर्षण विभव क्रमश: VA व VB है।
अतः VA = \(\frac{G×100}{(0.5)}\) (∵d = 0.5)
तथा VB = – \(\frac{G×100}{(0.5)}\)
सम्पूर्ण विभव V = VA + VB
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अतः मध्यबिन्दु पर रखी वस्तु अस्थिर सन्तुलन में होती है।

Bihar Board Class 11 Physics गुरुत्वाकर्षण Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.22
जैसा कि आपने इस अध्याय में सीखा है कि कोई तुल्यकाली उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से लगभग 36,000 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इस उपग्रह के निर्धारित स्थल पर पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण विभव क्या है? (अनन्त पर स्थितिज ऊर्जा शून्य लीजिए।) पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 km.
उत्तर:
दिया है:
ME = 6 × 1024 किग्रा
RE = 6400 किमी = 6.4 × 106 मीटर
h = 36 × 106 मीटर
हम जानते हैं कि गुरुत्वीय विभव
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= -9.4 × 106 जूल प्रति किग्रा

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प्रश्न 8.23
सूर्य के द्रव्यमान से 2.5 गुने द्रव्यमान का कोई तारा 12 km आमाप से निपात होकर 1.2 परिक्रमण प्रति सेकण्ड से घूर्णन कर रहा है। (इसी प्रकार के संहत तारे को न्यूट्रॉन तारा कहते हैं कुछ प्रेक्षित तारकीय पिंड, जिन्हें पल्सार कहते हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।) इसके विषुवत् वृत्त पर रखा कोई पिंड, गुरुत्व बल के कारण, क्या इसके पृष्ठ से चिपका रहेगा? (सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg)
उत्तर:
तारे से चिपके तारकीय पिंड के लिए, तीर का गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्र बल के बराबर या अधिक होगा। इस दशा में अभिकेन्द्र बल, गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक नहीं होगा तथा पिंड नहीं उड़ेगा।
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अतः तारे से तारकीय पिंड से चिपकने के लिये, गुरुत्व के कारण तारे पर त्वरण ≥ अभिकेन्द्रीय त्वरण
दिया है:
r = 12 km = 12 × 103 m
आवृत्ति v = 1.5 rps
w = 2πv = 2π × 1.5 = 3 × rads-1
अभिकेन्द्रीय त्वरण,
ac = \(\frac{v^{2}}{r}\) = rω2
= 12 × 103 × (3π2) …………… (i)
= 12 × 103 × 9 × 9.87
= 1065.96 × 103 ms-2
= 1.1 × 106 ms-1
पुनः हम जानते हैं कि तारे पर गुरुत्व के कारण त्वरण निम्नवत् है –
g = \(\frac{G M}{r^{2}}\) ……………… (ii)
दिया है:
M = सूर्य के द्रव्यमान का 2.5 गुना
= 2.5 × 2 × 1030 kg (∵ सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg)
= 5 × 1030
r = 12 km
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2 …………… (iii)
समी० (ii) व (iii) से,
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समीकरण (i).व (iv) से,
g >> a
अतः पिंड तारे से चिपका रहेगा।

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प्रश्न 8.24
कोई अन्तरिक्षयान मंगल पर ठहरा हुआ है। इस अन्तरिक्षयान पर कितनी ऊर्जा खर्च की जाए कि इसे सौरमण्डल से बाहर धकेला जा सके। अन्तरिक्षयान का द्रव्यमान = 1000 kg; सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg; मंगल का द्रव्यमान = 6.4 × 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km; मंगल की कक्षा की त्रिज्या = 2.28 × 108 km तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
उत्तर:
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
माना कि सूर्य के सापेक्ष मंगल का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R है।
दिया है:
सूर्य का द्रव्यमान M = 2 × 1030 kg
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व्यक्ति की सूर्य के चारों ओर त्रिज्या,
= R = 2.28 × 108 km
मंगल की त्रिज्या = R’ = 3395 km
मंगल का द्रव्यमान = M’ = 6.4 × 1023 kg
सौरमण्डल का द्रव्यमान m = 1000 किग्रा
सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण अन्तरिक्षयान की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\) ………………. (i)
मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण सौरमण्डल की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GM’m}{R’}\) …………….. (ii)
मंगल के पृष्ठ पर अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\) – \(\frac{GM’m}{R’}\) ……………. (iii)
चूँकि अन्तरिक्षयान की KE शून्य है .
∴ अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा
= KE + PE = 0 + PE
= \(\frac{-GMm}{R}\) + \(\frac{GM’m}{R’}\)
= -Gm \(\frac{M}{R}\) + \(\frac{M’}{R’}\) ………………. (iv)
अन्तरिक्षयान को सौरमण्डल से बाहर करने के लिए, इसकी गतिज ऊर्जा इतनी बढ़ानी चाहिए जिससे इस ऊर्जा का मान, मंगल के पृष्ठ पर ऊर्जा के समान हो जाए।
अभीष्ट ऊर्जा = – (अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा)
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प्रश्न 8.25
किसी रॉकेट को मंगल के पृष्ठ से 2 kms-1 की चाल से ऊर्ध्वाधर ऊपर दागा जाता है। यदि मंगल के वातावरणीय प्रतिरोध के कारण इसकी 20% आरंभिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है, तो मंगल के पृष्ठ पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट मंगल से कितनी दूरी तक जाएगा? मंगल का द्रव्यमान = 6.4 × 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km तथा G = 6.67 × 10-11 Nm 2kg-2
उत्तर:
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
दिया है:
मंगल का द्रव्यमान, M = 6.4 × 1023 किग्रा
मंगल की त्रिज्या, R = 3395 किमी
गुरुत्वाकर्षण नियतांक
G = 6.67 × 10-11 न्यूटन-मीटर2 प्रति किग्रा2
माना कि रॉकेट मंगल से h ऊँचाई तक पहुँचता है।
माना कि मंगल के पृष्ठ से रॉकेट को प्रारम्भिक चाल v से छोड़ा जाता है।
रॉकेट की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2
व रॉकेट की प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा = \(\frac{-GMm}{R}\)
रॉकेट की सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = K.E. + P.E.
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
चूँकि h ऊँचाई पर 20% ऊर्जा नष्ट हो जाती है जबकि 80% ऊर्जा संचित रहती है।
संचित ऊर्जा = \(\frac{80}{100}\) × \(\frac{1}{2}\) mv2
सम्पूर्ण उपलब्ध प्रा० ऊर्जा,
= \(\frac{4}{5}\) \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
= 0.4 mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
h ऊँचाई पर रॉकेट की स्थितिज ऊर्जा = \(\frac{-GMm}{R+h}\)
h ऊँचाई पर K.E. = 0
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = सम्पूर्ण अन्तिम ऊर्जा
∴ प्रा० (KE + PE) = अन्तिम (KE + PE)
= 0 + P.E. = P.E.
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दिया है:
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण
= 495 × 103 m
= 495 किमी

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.1
किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक:

  1. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
  2. उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
  3. किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
  4. किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
  5. किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।

उत्तर:

  1. चूँकि रस्सी का विस्थापन तथा मनुष्य द्वारा लगाया गया बल दोनों ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर दिष्ट हैं। अत: कार्य धनात्मक होगा।
  2. चूँकि गुरुत्वीय बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  3. चूँकि घर्षण बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  4. चूँकि वस्तु पर लगाया गया बल, वस्तु की गति की दिशा में है। अतः कृतं कार्य धनात्मक होगा।
  5. चूँकि वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिशा में है अत: कार्य ऋणात्मक होगा।

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प्रश्न 6.2
2 kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरंभ में विरामावस्था में है, 7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज-घर्षण गुणांक 0.1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए।
(a) लगाए गए बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन।
उत्तर:
दिया है:
बल, F = 7 न्यूटन,
m = 2 किग्रा, µ = 0, µk = 0.1
चूँकि गति क्षैतिज मेज पर हो रही है।
अतः घर्षण बल, µkR = µk mg
= 0.1 × 2 × 10 = 2 न्यूटन
अतः पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल,
F1 = F – µkN
= 7 – 2 = 5 न्यूटन
सूत्र F1 = ma से,
त्वरण,
a = \(\frac{F_{1}}{m}\) = \(\frac{5}{2}\)
= 2.5 मीटर/सेकण्ड2
अतः 10 सेकण्ड में चली दूरी,
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
S = 0 × 10 + 1 × 2.5 × 102
= 125 मीटर

(a) आरोपित बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W1 = F.S cos 0°
= 7 × 125
= 875 जूल

(b) घर्षण बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W2 = -(µkR).S
= -2 × 25
= -250 जूल
चूँकि विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है। इसी कारण यह कार्य ऋणात्मक है।

(c) सम्पूर्ण बल द्वारा कृत कार्य,
W = सम्पूर्ण बल × कुल विस्थापन
= 5 × 125
= 625 न्यूटन

(d) कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन,
∆K = सम्पूर्ण बल द्वारा किया गया कार्य
= 625 न्यूटन।
यहाँ गतिज ऊर्जा में कुल परिवर्तन बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण प्रभाव को समाप्त करने में कम होता है।

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प्रश्न 6.3
चित्र में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा-फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि-अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भो के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
उत्तर:
∵ KE + P.E. = E (constant)
∴ K.E. = E – P.E.

(a) इस ग्राफ में x < a के लिए स्थितिज ऊर्जा वक्र, दूरी अक्ष
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के साथ सम्पाती (P.E. = 0) जबकि x > a के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण x > a क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।

(b) इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।

(c) 0 < x < a तथा b < x क्षेत्रों में P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

(d) –\(\frac{b}{2}\) < x < \(\frac{a}{2}\) तथा < x < \(\frac{b}{2}\) क्षेत्रों में P.E. > E;
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

प्रश्न 6.4
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन V(x) = kx2/2 है, जहाँ k दोलक का बल नियतांक है। k = 0.5 Nm-1 के लिए V(x) व x के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल 1J ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही ‘वापिस आना’ चाहिए जब यह x = ± 2 m पर पहुँचता है।
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उत्तर:
हम जानते हैं कि,
E = KE + PE
∴ E = \(\frac{1}{2}\) mv2 + \(\frac{1}{2}\) kx2 [∵ PE = v(x) = \(\frac{k x^{2}}{2}\)]
कण उस स्थिति x = xm से लौटना शुरू करेगा जबकि कण की गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
इस प्रकार, \(\frac{1}{2}\) mv2 = 0 तथा x = xm पर,
E = \(\frac{1}{2}\) kx2m
दिए है: E = 1 जूल व k = 0.5 न्यूटन/मीटर
∴ 1 = \(\frac{1}{2}\) × 0.5 × x2m
या \(x_{m}^{2}\) = \(\frac{2}{0.5}\) = 4
∴ xm = ± 2 मीटर
इस प्रकार कण x = ± 2 मीटर पर पहुँचने पर ही वहाँ से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।

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प्रश्न 6.5
निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई-रॉकेट या वातावरण?
(b) धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लंबवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की संपूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?
(c) पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे-जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?
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(d) चित्र (i) में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है। चित्र (ii) में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?
उत्तर:
(a) बाहरी आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है।

(b) धूमकेतु पर सूर्य द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है। इस प्रकार धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

(c) जैसे – 2 उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे – 2 उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती रहती है। अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाता है।

(d) चित्र (i) में स्थिति में, व्यक्ति द्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (i.e., θ = 90)
अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = Fs cos 90° = 0
चित्र (ii) स्थिति में, घिरनी मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है व द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (i. e., θ = 0°)
अत: मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = mgh cos 0°
= 15 × 20 × 1
= 300 जूल।

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प्रश्न 6.6
सही विकल्प को रेखांकित कीजिए:

  1. जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
  2. किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
  3. किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आंतरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
  4. किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।

उत्तर:

  1. घटती है, चूँकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
  2. गतिज ऊर्जा, चूँकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही है।
  3. बाह्य बल, चूँकि बहुकण निकाय में, आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है एवम् आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं।
  4. कुल रेखीय संवेग तथा कुल ऊर्जा भी जबकि दो पिंडों का निकास वियुक्त है।

प्रश्न 6.7
बतलाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए।

  1. किन्हीं दो पिंडों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिंड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
  2. किसी पिंड पर चाहे कोई भी आंतरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
  3. प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बंद लूप में, किसी पिंड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
  4. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अंतिम गतिज ऊर्जा, आरंभिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

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प्रश्न 6.8
निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए:

  1. किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे संपर्क में होती है) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
  2. दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है?
  3. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व (b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
  4. यदि दो बिलियर्ड-गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, ना कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)

उत्तर:

  1. नहीं, चूँकि संघट्ट काल के दौरान गेंद सम्पीडित हो जाती है। अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
  2. हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
  3. हाँ, दोनों उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
  4. चूँकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों के मध्य दूरी पर निर्भर करती है इसका तात्पर्य यह है कि संघट्ट काल में पिंडों के मध्य लगने वाला संरक्षी बल है। अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। अतः प्रत्यास्थ संघट्ट होगा।

प्रश्न 6.9
कोई पिंड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
a = नियत, µ = 0
∴ बल = ma, अचर होगा तथा = at होगा। ]
∴ शक्ति P = Fv = ma.at = ma2t
∴ P ∝ t
अतः विकल्प (ii) सत्य है।

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प्रश्न 6.10
एक पिंड अचर शक्ति के स्त्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका t समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
शक्ति P = Fv अचर है।
∴ P = (ma)
v = m.\(\frac{dv}{dt}\).v
या \(\frac{vdv}{dt}\) = \(\frac{p}{m}\)
या vdv = \(\frac{p}{m}\).dt
समाकलन करने पर, \(\frac{v^{2}}{2}\) = \(\frac{pt}{m}\) + c1
प्रारम्भ में, t = 0 पर v = 0
∴ a = 0
∴ \(\frac{v^{2}}{2}\) = \(\frac{p}{m}\).t
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समाकलन करने पर,
प्रारम्भ में, t = 0 पर s = 0
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अतः विकल्प (iii) सही है।

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प्रश्न 6.11
किसी पिंड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z – अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है।
F = (-\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \))N
जहाँ \(\hat { i } \), \(\hat { j } \), \(\hat { k } \) क्रमशः x – , y – एवं z – अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश हैं। इस वस्तु को 7 – अक्ष के अनुदिश 4m की दूरी तक गति कराने के लिए आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
\(\vec { F } \) = –\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \) न्यूटन
चूँकि विस्थापन z – अक्ष के अनुदिश है।
अतः \(\vec { s } \) = 4\(\hat { i } \) मीटर
∴ बल द्वारा किया गया कार्य, W = \(\bar{F}\). \(\hat { S } \)
= (-\(\hat { i } \) + 2\(\hat { j } \) + 3\(\hat { k } \).(4\(\hat { k } \))
= 12 जूल [∵\(\hat { j } \).\(\hat { k } \) = 0 व \(\hat { k } \).\(\hat { k } \) = 1 इत्यादि]

प्रश्न 6.12
किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 kev है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 keV है। इनमें कौन-सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 × 10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 × 10-27 kg, 1ev = 1.60 × 10-19 J)
उत्तर:
दिया है:
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.11 × 10-31 किग्रा,
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.67 × 10-27 किग्रा,
1eV = 1.6 × 10-19 जूल
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
Kp = 100 KeV = 105eV
= 105 × 1.6 × 10-19J
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ke = 10 keV = 104 eV
= 104 × 1.6 × 10-19J
माना कि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन की चाल क्रमशः vp, व ve हैं।
सूत्र गतिज ऊर्जा, K = \(\frac{1}{2}\) mv2 से,
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
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इसी प्रकार,
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चूँकि ve > vp
अर्थात् इलेक्ट्रॉन तीव्रगामी है।
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प्रश्न 6.13
2 mm त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 m की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरंभिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 ms-1 हो तो संपूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
वर्षा की बूंद की त्रिज्या, r = 2 मिमी
= 2 × 10-3 मीटर,
प्रारम्भिक ऊँचाईं, h = 500 मीटर
प्रारम्भिक चाल, u = 0
पृथ्वी तल पर बूंद की चाल, v = 10 मीटर/सेकण्ड
त्वरण, g = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
बूंद का द्रव्यमान, m = (\(\frac{4}{3}\) πr3) × (ρ)
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × (2 × 10-3)3 × 103
= 3.35 × 10-5 किग्रा
बूंद पर गुरुत्वीय बल,
F1 = mg = 3.35 × 10-5 × 9.8
= 3.28 × 10-4 न्यूटन
यात्रा के दोनों अर्धभाग समान हैं।
∴ h1 = h2 = \(\frac{h}{2}\) = 250 मीटर
यात्रा के इन भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य,
W1 = W2 = mgh1
= (3.28 × 10-4) × 250 = 0.082 जूल

वर्षा की बूँद की गतिज ऊर्जा में कुल वृद्धि,
∆K = K2 – K1
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{1}{2}\) mu2
= \(\frac{1}{2}\) × 3.35 × 10-5 × (10)2 – 0
= 0.001 जूल

गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य,
Wg = W1 + W2
= 0.082 + 0.082
= 0.164 जूल

माना प्रतिरोधी बल द्वारा कुल कृत कार्य ωr है।
∴ नेट कार्य, W = Wg + Wr = ∆K (कार्य ऊर्जा प्रमेय से)
∴ ωr = ∆K – Wg
= 0.001 – 0.0164
= – 0.163 जूल

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प्रश्न 6.14
किसी गैस-पात्र में कोई अणु 200 ms-1 की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुनः उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
उत्तर:
दिया है:
θ = 30°, u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड दीवार से संघट्ट के बाद चाल,
v = u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड
चूँकि प्रत्येक संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है। अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है।
माना अणु का द्रव्यमान m है।
अतः दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mu2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
एवम् संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
∴ K1 = K2
अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।

प्रश्न 6.15
किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पंप 30 m3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 m ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
उत्तर:
दिया है:
टंकी की ऊँचाई, h = 40 मीटर
टंकी का आयतन, V = 30 मीटर3
लगा समय, t = 15 मिनट = 15 × 60 सेकण्ड, पम्प की दक्षता, η = 30%
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
उठाए गए जल का द्रव्यमान,
m = V × ρ = 30 × 103
= 3 × 104 किग्रा
पम्प द्वारा टंकी भरने में खर्च की गई शक्ति,
P0 = \(\frac{W}{t}\) = \(\frac{mgh}{t}\)
= \(\frac{3 \times 10^{4} \times 9.8 \times 40}{1.5 \times 60}\) = 13066 वॉट
माना पम्प द्वारा उपयोग की गई शक्ति P1 है।
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= 43553 वॉट
= 43.55 किलो वॉट।

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प्रश्न 6.16
दो समरूपी बॉल बियरिंग एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बाल बियरिंग, जो आरंभ में V चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र) में कौन-सा परिणाम संभव है?
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उत्तर:
माना प्रत्येक बॉल बियरिंग का द्रव्यमान m है।
अतः संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0 + 0 = \(\frac{1}{2}\)mv2
प्रथम स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
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अतः K1 > K2
द्वितीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की कुल ऊर्जा,
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अतः K1 = K2
तृतीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
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प्रश्नानुसार संघट्ट प्रत्यास्थ है। अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी। चूँकि केवल द्वितीय स्थिति में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है अर्थात् केवल यही परिणाम सम्भव होगा।

प्रश्न 6.17
किसी लोलक के गोलक A को, जो ऊर्ध्वाधर से 30° का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
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उत्तर:
दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।

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प्रश्न 6.18
किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लंबाई 1.5 m है तो निम्नतम बिंदु पर, आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी आरंभिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु P पर, लोलक में केवल स्थितिज ऊर्जा है। बिन्दु B पर, लोलक में केवल गतिज ऊर्जा है। इका अर्थ है कि जब लोलक P से Q पर पहुँचता है, तब स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
अतः बिन्दु Q पर KE = PE
लेकिन 5% स्थितिज ऊर्जा, वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाती है।
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∴ Q पर गतिज ऊर्जा
= P पर स्थितिज ऊर्जा का 95% …… (1)
माना लोलक का द्रव्यमान = m
बिन्दु Q पर लोलक की चाल = v
तथा बिन्दु P की 0 के सापेक्ष ऊँचाई = h = 1.5 मीटर
∴ समी० (1) से,
\(\frac{1}{2}\)mv2 = \(\frac{95}{100}\) × mgh
अथवा
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= 5.29 मीटर/सेकण्ड
v = 5.3 मीटर।

प्रश्न 6.19
300 kg द्रव्यमान की कोई ट्राली, 25 kg रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 kmh-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात् बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 kg s-1 की दर से निकलकर ट्राली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि वेग एक समान है व ट्रॉली व रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है अत: निकाय का रेखीय संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी तरह का आन्तरिक परिवर्तन क्यों न हो जाए। इस प्रकार ट्रॉली की चाल 27 किमी प्रति घण्टा ही बनी रहेगी।

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प्रश्न 6.20
0.5 kg द्रव्यमान का एक कण y = ax3/2 वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a = 5 m-1/2s-1 है। x = 0 से x = 2m तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 0.5 किग्रा
v = ax3/2
a = 5m-1/2 प्रति सेकण्ड
माना वस्तु पर F बल से a’ त्वरण उत्पन्न होता है।
∴ F = ma’ = \(\frac{mdv}{dt}\)
माना वस्तु को dx दूरी विस्थापित करने पर किया गया कार्य dw है।
∴ dw = F.dx = m\(\frac{dv}{dt}\).dx
= m.dv. \(\frac{dx}{dt}\) = mvdv ……………. (1)
माना वस्तु को x = 0 से x = 2 मीटर तक चलाने में किया गया कुल कार्य W है।
∴ समी० (1) से,
W = ∫dw = ∫mvdv
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= 50 जूल

प्रश्न 6.21
किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल A के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं।
(a) यदि हवा वेग से वृत्त के लंबवत् दिशा में बहती है तो t समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान क्या होगा?
(b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
(c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है यदि A = 30 m2, और v = 36 kmh-1 और वायु का घनत्व 1.2 kgm-3 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
वायु का घनत्व, ρ = 1.2 किग्रा प्रति मीटर3,
वायु का वेग, v = 36 किमी/घण्टा
= 36 × \(\frac{5}{8}\) = 10 मीटर/सेकण्ड
= 30 मीटर2, समय, t = ?

(a) t समय में वृत्त से प्रवाहित वायु का आयतन,
V = A × vt
वृत्त से प्रवाहित वायु का द्रव्यमान,
m = vp = Avtρ

(b) इस वायु की गतिज ऊर्जा,
K = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) (Avtρ) v3
= \(\frac{1}{2}\)ρAv2t

(c) इस समय में पवन चक्की द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा,
E = वायु की गतिज ऊर्जा का 25%
= (\(\frac{1}{2}\) Aρv3t) × \(\frac{25}{100}\) = \(\frac{1}{8}\) Aρv3t
अत: इस ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति,
P = \(\frac{E}{t}\)
= \(\frac{1}{8}\) Aρv3
= \(\frac{1}{8}\) × 30 × 1.2 × 103
= 4.5 विलोवॉट

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प्रश्न 6.22
कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है।
(a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है?
(b) यदि वसा 3.8 × 107 J ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी वसा खर्च कर डालेगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 10 किग्रा,
h = 0.5 मीटर
द्रव्यमान को उठाया गया, n = 1000 बार
(a) 10 किग्रा के द्रव्यमान को 1000 बार उठाने में किया गया कार्य,
W = n × mgh
= 1000 × 10 × 9.8 × 0.5
= 49000
= 49 किलो जूल

(b) 1 किग्रा वसा द्वारा प्रदत्त यान्त्रिक ऊर्जा
= 3.8 × 107 जूल का 20%
= 3.8 × 107 × \(\frac{20}{100}\)
= \(\frac{3.8}{5}\) × 107 जूल
इसलिए (\(\frac{3.8}{5}\) × 107) जूल ऊर्जा मिलती है = 1 किग्रा वसा से,
∴ 1 जूल ऊर्जा मिलती है = \(\frac{5}{3.8 \times 10^{7}}\) किग्रा वसा से
∴ 49000 जूल ऊर्जा मिलती है,
= \(\frac{5}{3.8 \times 10^{7}}\) × 49000 किग्रा वसा से
= 6.45 × 10-3 किग्रा वसा से

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प्रश्न 6.23
कोई परिवार 8 kW विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है।
(a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm-2 है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8 KW की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी?
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
उपभोग की गई विद्युत शक्ति = 8 KW
(a) सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 वॉट/मीटर2
उपयोगी विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण दर = 20%
8 किलो वॉट के लिए आवश्यक क्षे० = ?
प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल से प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति
= 200 वॉट का 20%
= 200 × \(\frac{20}{100}\) = 40 वॉट
इसलिए 40 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है = 1 मी2 क्षेत्रफल से।
∴ 1 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) क्षेत्रफल से
∴ 8 kw उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) × 8 × 1000 क्षेत्रफल से।
= 200 मीटर2 क्षेत्रफल से।

(b) इस क्षेत्रफल की तुलना जटिल घर की छत से करने के लिए माना छत की भुजा a है।
∴ छत का क्षेत्रफल = a × a2
a2 = 200
a = \(\sqrt{200}\) = 14.14 मीटर
= 14 मीटर
अर्थात् आवश्यक क्षेत्रफल 14 मीटर × 14 मीटर आकार के भवन की छत के क्षेत्रफल के समतुल्य है।

Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.24
0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-1 की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरंत ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान, m = 0.012 किग्रा,
गोली की प्रा० चाल, u = 70 मीटर/सेकण्ड
गोली की अन्तिम चाल v = 0
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान, m = 0.4 किग्रा
लकडी के गटके की प्रा० चाल, u1 = 0
माना कि संघट्ट के बाद गोली तथा गुटके की अन्तिम चाल v मीटर/सेकण्ड है।
संवेग संरक्षण के नियमानुसार,
संघट्ट से पूर्व गोली तथा गुटके का संवेग = संघट्ट के पश्चात् दोनों का अन्तिम संवेग।
∴ mu + mu1 = (m + m)v
∴ 0.012 × 70 + 0.4 × 0
= (0.012 + 0.4) y
∴ v = \(\frac{0.012×70}{0.412}\) = 2.04 मीटर/सेकण्ड
माना गुटका संघट्ट के बाद h ऊँचाई तक ऊपर उठता है।
∴ संघट्ट से पूर्व गुटके व गोली की KE में कमी = संघट्ट के बाद गुटके व गोली की P.E. में वृद्धि
∴ \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2 = (m + m) gh
∴ h = \(\frac{v^{2}}{2 g}\) = \(\frac{2.04×2.04}{2×9.8}\)
= 0.212 मीटर
= 21.2 सेमी
गोली धंसने से उत्पन्न हुई ऊष्मा
= \(\frac{1}{2}\) mu2 – \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.012 × 702 – \(\frac{1}{2}\) × 0.412 × 2.042
= 28.54 जूल

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प्रश्न 6.25
दो घर्षण रहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिंदु पर मिलते हैं। बिंदु A से प्रत्येक पथ पर एक-एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि θ1 = 30°, θ2 = 60° और h = 10m दिया है, तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुँचने में लिए गए समय क्या हैं?
उत्तर:
AB तथा AC क्रमश: θ1, व θ2, पर झुके दो समतल तल हैं। दोनों पत्थर एक ही समय नीचे नहीं आएंगे।
व्याख्या: माना इन तलों पर इन पत्थरों के भार क्रमश: m1g
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व m2g हैं। m1g तथा m2g के वियोजित घटक चित्र के अनुसार होंगे।
माना पहले व दूसरे पत्थर में उत्पन्न त्वरण क्रमशः a1 व a2 हैं। तब
या ma1 = m1g sin θ1
a1 = g sin θ1
इसी प्रकार, a2 = g sin θ2
∴ a2 = g sin θ2
∴ a2 > a1 i.e., a1 = sin 30° = \(\frac{g}{2}\)
तथा a2 = g sin 60° = \(\frac{g \sqrt{3}}{2}\)
v = u + at v = ar
या t = \(\frac{v}{a}\) ………. (1)
यहाँ
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अर्थात् दूसरा पत्थर कम समय लेगा व पहले पत्थर पर | जल्दी नीचे पहुँचेगा।

हाँ, दानों पत्थर एक साथ नीचे पहुँचेंगे।
व्याख्या: बिन्दु A पर तल की ऊँचाई, h = 10 मीटर है।
माना दोनों पत्थर, क्रमश: v1 व v2 वेग से नीचे पहुंचते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
चोटी पर स्थितिज ऊर्जा में क्षय = नीचे गतिज ऊर्जा में वृद्धि
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प्रश्न 6.26
किसी रुक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 Nm-1 स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्प्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गुटके और आनत तल के मध्य घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान, m = 1 किग्रा
स्प्रिंग नियतांक, K = 100 न्यूटन/मीटर,
g = 10 मीटर/सेकण्ड2
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माना गुटके को छोड़ने पर विस्थापन,
x = 10 सेमी = 0.1 मीटर
झुकाव, θ = 37°
∴ sin 37° = 0.6018 व cos 37° = 0.7996
माना नीचे की ओर x दूरी चलने में किया गया कार्य है।
∴ W = (mg sin θ – u mg cosθ)x …………. (1)
लेकिन स्प्रिंग में यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहेगा।
∴ PE = \(\frac{1}{2}\) Kx2 ……. (2)
समी० (1) व (2) से,
\(\frac{1}{2}\) Kx2 = mg (sinθ – µcos θ).x
= µmg cosθ = – \(\frac{1}{2}\) kx = mg sinθ
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= 0.125

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प्रश्न 6.27
0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 ms-1 की एकसमान चाल से नीचे आ रही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लंबाई = 3 m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्न होता?
उत्तर:
दिया है: बोल्ट का द्रव्यमान, m = -0.3 किग्रा
लिफ्ट की लम्बाई, h = 3 मीटर
छत पर बोल्ट की स्थितिज ऊर्जा, v = mgh
= 0.3 × 9.8 × 3
= 8.82 जूल
चूँकि बोल्ट लिफ्ट के फर्श से टकराकर बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठता है, इसका तात्पर्य है कि फर्श से टकराने पर बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मा में बदल जाती है। अत: बोल्ट के फर्श से टकराने पर उत्पन्न ऊष्मा 8.82 जूल है। लिफ्ट के स्थिर होने पर, यह एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। चूँकि गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी स्थानों पर एक समान होता है अर्थात् हमारा उत्तर समान होगा।

प्रश्न 6.28
200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 ms-1 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अंतिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरंभ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?
उत्तर:
दिया है:
ट्रॉली का द्रव्यमान, m1 = 200 किग्रा, ट्रॉली की चाल u = 36 किमी प्रति घण्टा
= 36 × \(\frac{5}{18}\) = 10 मी/से
बच्चे का द्रव्यमान m2 = 20 किग्रा
बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल, v2 = 4 मीटर/सेकण्ड
माना ट्रॉली की अन्तिम चाल v1 है
∴ बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग,
Pi = (m1 + m2) u1
= (200 + 20) × 10 = 2200 किग्रा मीटर/सेकण्ड
बच्चे के ट्रॉली से कूदते समय निकाय का संवेग,
P1 = m1 v1 + m2 (v1 – v2)
= 200v1 + 20 (v1 – 4)
= 220v1 – 80
परन्तु संवेग संरक्षण के नियमानुसार, Pi = Pf
2200 = 220v1 – 80
या 220v1 = 2280
∴ v1 = \(\frac{2280}{220}\) = 10.36 मीटर/सेकण्ड
ट्रॉली में 10 मीटर की दूरी चलने में बच्चे द्वारा लिया गया समय,
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= \(\frac{10}{4}\) = 2.5 सेकण्ड
माना इस समय में ट्राली द्वारा चली गई दूरी x है।
∴ x = v × t = 10.36 × 2.5
= 25.9 मीटर।

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प्रश्न 6.29
चित्र में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्रों में से कौन-सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँr गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास R है।
उत्तर:
जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक – दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरी 7, 2R से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी। प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर (r = 2R) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।
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केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।

प्रश्न 6.30
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए –
n → p + e
प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β – क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।
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[नोट: इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e, p तथा n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय-प्रक्रिया इस प्रकार है:
n → p + e + v]
उत्तर:
माना न्यूट्रॉन के प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन में क्षय होने पर अवनमन (disintegration) द्रव्यमान ∆m है।
उत्सर्जित ऊर्जा, E = ∆mc2
परन्तु ∆m = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – (प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
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पाजिट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान परन्तु आवेश इलेक्ट्रॉन का विपरीत होता है। जब इलेक्ट्रॉन तथा पाजिट्रॉन एक दूसरे के समीप आते हैं तो वे एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं। इसके द्रव्यमान आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त ऊर्जा गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित होती है जो कि निम्नवत् है –
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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.1
विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टाइन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था “संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है’?
उत्तर:
ब्रह्माण्ड अत्यन्त जटिल है एवं इसमें होने वाली घटनाएँ भी बहुत जटिल हैं लेकिन विज्ञान के अनेक नियम ऐसे हैं जो इन सभी घटनाओं की व्याख्या पूर्णत: करते हैं। अतः जब प्रथम बार कोई घटना देखते या सुनते हैं तब वह अबोधगम्य होती है लेकिन जब हम उस घटना से जुड़े सिद्धान्त नियम इत्यादि का गहन विश्लेषण करते हैं तो वह घटना हमारे लिए बोधगम्य हो जाती है।

इस प्रकार भौतिक जगत से जुड़े प्रत्येक तथ्य की सुस्पष्ट व्याख्या विज्ञान विषय में उपलब्ध है। जब कभी भी हम किसी तथ्य से जुड़े वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जानना चाहते हैं तो हम उसे जान लेते हैं। इसी कारण जटिलतम परिघटना भी हमारे लिए आश्चर्यजनक नहीं होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि आइंसटाइन का कथन तर्क संगत है।

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प्रश्न 1.2
“प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धांत से आरंभ होकर धर्मसिद्धांत के रूप में समाप्त होता है”। इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैधता के लिए विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
अपसिद्धान्त ऐसे तथ्य हैं जो स्थापित नहीं होते हैं जबकि धर्म सिद्धान्त से अर्थ स्थापित विचार हैं जिन पर सामान्यत: कोई प्रश्न नहीं उठता है। जैसे-प्रकाश-वैद्युत नियम प्रारम्भ में एक अपसिद्धान्त के रूप में आया था लेकिन अन्तत: यह एक धर्म सिद्धान्त के रूप में परिवर्तित हो गया था।

प्रश्न 1.3
“संभव की कला ही राजनीति है”। इसी प्रकार “समाधान की कला ही विज्ञान है”। विज्ञान की प्रकृति तथा व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सभी राजनीतिज्ञ, चाहे वे दुनिया के किसी भी भाग से सम्बन्धित हों, हमेशा कुछ भी कहने को तैयार रहते हैं। राजनीतिज्ञों के अनुसार, प्रत्येक कार्य, घटना इत्यादि सभी कुछ सम्भव है एवम् इसके पीछे जो कारण है वह सिर्फ उनके शब्दों का जाल होता है। इसी कला से वे जनता में अपनी प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। अर्थात् राजनीति सम्भव की कला है। जो कार्य किसी भी तरह होना सम्भव न हो उसे भी राजनीतिज्ञ अपनी बात के माध्यम से सम्भव बना सकते हैं।

हालांकि विज्ञान में ऐसा नहीं होता है। विज्ञान में प्रश्न का तार्किक उत्तर उपलब्ध है जिसकी जाँच बार-बार की जा सकती है। उदाहरण के लिए विज्ञान कहता है कि प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है, तो इसका कारण एवम् इसकी जाँच हम कभी भी और कितनी ही बार कर सकते हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक अध्ययन के बाद असम्भव एवम् जटिल प्रक्रियाओं को भी बोधगम्य कर सकते हैं। अर्थात् हम कह सकते हैं कि विज्ञान समाधान की कला है जबकि राजनीति सम्भव की कला है।

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प्रश्न 1.4
यद्यपि अब भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विस्तृत आधार है तथा यह तीव्रता से फैल भी रहा है, परन्तु फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्व नेता बनने की अपनी क्षमता को कार्यान्वित करने में काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्वपूर्ण कारक लिखिए जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं?
उत्तर:
भारत में विज्ञान के विकास में बाधा उत्पन्न करने वाले कुछ महत्वपूर्ण कारक निम्नलिखित हैं –

  1. हमारे देश में वैज्ञानिकों को लक्ष्यों की प्राप्ति करने के लिए शैक्षणिक स्वतन्त्रता प्राप्त नहीं है।
  2. विदेशों में वैज्ञानिकों, इन्जीनियों, डॉक्टर्स इत्यादि का देशान्तर भ्रमण, क्योंकि विदेशों में उन्हें उत्कृष्ट सुविधाएँ, वेतन इत्यादि प्राप्त हो जाते हैं जबकि हमारे देश में इन सुविधाओं एवम् उच्च वेतन का प्राप्त करना आज भी सम्भव नहीं है।
  3. हमारे देश में अनुसन्धान एवम् तकनीक के प्रबन्धन में प्रशासनिक हस्तक्षेप की अधिकता भी विज्ञान के विकास में बाधा है।
  4. हमारे देश में अनुसन्धानकर्ताओं एवम् उद्यमियों के मध्य सामंजस्य स्थापित नहीं है।

प्रश्न 1.5
किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन के कभी भी दर्शन नहीं किए हैं। परन्तु फिर भी सभी भौतिक विज्ञानियों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। कोई बुद्धिमान परन्तु अंधविश्वासी व्यक्ति इसी तुल्यरूपता को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाता है कि यद्यपि किसी ने ‘देखा’ नहीं है परन्तु ‘भूतों’ का अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
किसी भी भौतिक विज्ञानियों ने इलेक्ट्रॉन के कभी दर्शन नहीं किए हैं, परन्तु फिर भी सभी भौतिक विज्ञानियों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। इसका मुख्य कारण है कि इस कण के अस्तित्व के पक्ष में बहुत-से प्रमाण उपलब्ध हैं; जैसे विद्युत धारा का प्रवाह, अणुओं की विभिन्न आकृतियों एवम् आकारों का होना, विभिन्न रासायनिक यौगिकों में ध्रुवणता होना, क्षम का होना इत्यादि। जबकि भूतों का कोई भी भौतिक प्रभाव नहीं होता है, जिसे प्रायोगिक रूप से सत्यापित कर सके। अतः हम कह सकते हैं कि इन दोनों की पारस्परिक तुलना एक निरर्थक कार्य है।

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प्रश्न 1.6
जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़े के कवचों (खोल) में से अधिकांश समुरई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते जुलते प्रतीत होते हैं। नीचे इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगता है?

1. कई शताब्दियों पूर्व किसी भयानक समुद्री दुर्घटना में एक युवा समुरई डूब गया। उसकी बहादुरी के लिए श्रद्धांजलि के रूप में प्रकृति ने अबोधगम्य ढंगों द्वारा उसके चेहरे को केकड़े के कवचों पर अंकित करके उसे उस क्षेत्र में अमर बना दिया।

2. समुद्री दुर्घटना के पश्चात् उस क्षेत्र के मछुआरे अपने मृत नेता के सम्मान में सद्भावना प्रदर्शन के लिए उस हर केकड़े के कवच को जिसकी आकृति संयोगवश समुरई से मिलती-जुलती प्रतीत होती थी, उसे वापस समुद्र में फेंक देते थे। परिणामस्वरूप केकड़े के कवचों की इस प्रकार की विशेष आकृतियाँ अधिक समय तक विद्यमान रहीं और इसीलिए कालान्तर में इसी आकृति का आनुवंशत: जनन हुआ।

यह कृत्रिम वरण द्वारा विकास का एक उदाहरण है। (नोट : यह रोचक उदाहरण कार्ल सागन की पुस्तक “दि कॉस्मॉस” से लिया गया है। यह इस तथ्य पर प्रकाश डालता है कि प्रायः विलक्षण तथा अबोधगम्य तथ्य जो प्रथम दृष्टि में अलौकिक प्रतीत होते हैं वास्तव में साधारण वैज्ञानिक व्याख्याओं द्वारा स्पष्ट होने योग्य बन जाते हैं। इसी प्रकार के अन्य उदाहरणों पर विचार कीजिए)
उत्तर:

  1. दिए गये प्रश्न में दोनों कथनों में से कथन है।
  2. प्रेक्षित तथ्य का वैज्ञानिक स्पष्टीकरण देने में पर्याप्त रूप में समर्थ है।

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प्रश्न 1.7
दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैण्ड तथा पश्चिमी यूरोप में जो औद्योगिक क्रांति हुई थी उसकी चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ थीं। ये उपलब्धियाँ क्या थीं?
उत्तर:
सन् 1750 से अर्थात् औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व, कुछ सरल यन्त्र एवं मशीनें ही प्रचलन में थीं, जिनके कार्य करने की दर काफी कम एवम् उत्पादित माल का स्तर काफी खराब था लेकिन औद्योगिक क्रान्ति के परिणामस्वरूप कुछ नवीन मशीनों का विकास हुआ जिनके द्वारा उत्पादन लागत में कमी आई एवम् वैमार माल की उत्कृष्टता में उन्नति हुई।
औद्योगिक क्रान्ति की प्रमुख वैज्ञानिक एवम् प्रौद्योगिकीय उपलब्धियाँ निम्नवत् हैं –

  1. स्पिनिंग गेनी (Spinning Genny): सन् 1764 में हारग्रीव्ज ने इस मशीन का आविष्कार किया। इससे कटाई-कार्य में तेजी आई।
  2. भाप इंजन (Steam Engine): सन् 1769 में जेम्सवॉट ने इसका आविष्कार किया। इसकी सहायता से औद्योगिक इकाइयों को देश के भीतरी भागों में समुद्री किनारों से दूर स्थान प्राप्त हो सका था।
  3. पावरलूम (Powerloom): सन् 1785 में कार्ल-राइट ने इसका आविष्कार किया। यह माप शक्ति चालित मशीन है। इसे चलाकर कपड़ों की बुनाई का कार्य किया जाता था।
  4. विस्फोटक पदार्थ की खोज से ना सिर्फ आर्मी में सहायता मिली बल्कि इससे खनिज विस्फोट में भी सहायता मिली है।

प्रश्न 1.8
प्रायः यह कहा जाता है कि संसार अब दूसरी औद्योगिकी क्रांति के दौर से गुजर रहा है, जो समाज में पहली क्रांति की भाँति आमूल परिवर्तन ला देगी। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उन प्रमुख समकालीन क्षेत्रों की सूची बनाइए जो इस क्रांति के लिए उत्तरदायी हैं।
उत्तर:
विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उन प्रमुख समकालीन क्षेत्रों की सूची निम्नवत् है जो इस क्रांति के लिए उत्तरदायी हैं, जो समाज में पहली क्रांति की भाँति आकूल परिवर्तन ला देगी –

  1. जैव प्रौद्योगिकी
  2. सुपर कम्प्यूटर
  3. सूचना प्रौद्योगिकी
  4. विद्युत दुर्बल बल के सिद्धान्त का विकास
  5. प्रकाशिक तन्तु।

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प्रश्न 1.9
बाईसवीं शताब्दी के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पर अपनी निराधार कल्पनाओं को आधार मानकर लगभग 1000 शब्दों में कोई कथा लिखिए।
उत्तर:
माना कि एक हवाई जहाज 500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारे की ओर गतिमान है। माना यह हवाई जहाज विद्युत मोटर जिसमें अतिचालक तार लगा है, में संचित धारा से चलता है। ब्रह्माण्ड में, माना कि एक क्षेत्र ऐसा है जहाँ इतना अधिक ताप है, जिस कारण मोटर के विद्युत तारों का अतिचालक गुण नष्ट हो जाता है। इस स्थिति में, एक अन्य हवाई जहाज जिसमें द्रव्य तथा अद्रव्य भरा है, पहले हवाई जहाज को चलाता है जिस कारण यह तारे की ओर गतिमान रहता है।

प्रश्न 1.10
‘विज्ञान के व्यवहार’ पर अपने ‘नैतिक दृष्टिकोणों’ को रचने का प्रयास कीजिए। कल्पना कीजिए कि आप स्वयं किसी संयोगवश ऐसी खोज में लगे हैं जो शैक्षिक दृष्टि से सेचक है परन्तु उसके परिणाम निश्चित रूप से मानव समाज के लिए भयंकर होने के अतिरिक्त कुछ नहीं होंगे। फिर भी यदि ऐसा है तो आप इस दुविधा के हल के लिए क्या करेंगे?
उत्तर:
प्रत्येक वैज्ञानिक खोज, प्रकृति के रहस्यों को प्रदर्शित करती है एवम् इन रहस्यों के सत्य को समाज के सामने रखता है। सत्य एक सापेक्षिक पद है। सत्य का प्रदर्शन इस प्रकार होना चाहिए कि कोई भी खोज जो मानव समाज के नैतिक मूल्यों को हानि पहुँचा सकती हो, उसे एकदम रोक देना चाहिए। जैव-प्रौद्योगिकी मानव-कल्याण हेतु बहुत उपयोगी है लेकिन जीवित प्राणियों की क्लोनिंग नीति-असंगत है। इस अनुसंधान को आगे बढ़ाने से पूर्व हमें समाज के सामने यह तथ्य रखना चाहिए कि क्या यह अनुसन्धान जारी रखना मानव के लिए भयंकर तो नहीं है। यदि ऐसा है तो अनुसन्धान को एकदम से रोक देना चाहिए।

इसके अलावा कोई खोज आज भयंकर हो लेकिन भविष्य में यह लाभप्रद सिद्ध हो सकती है। इसके लिए, सबसे पहले यह जरूरी है कि वैज्ञानिक खोज के गलत प्रयोग के सम्बन्ध में लोक विचार लेने चाहिए। यह सार्थक कदम किसी वैज्ञानिक खोज के गलत प्रयोग को रोक सकता है। अतः उन वैज्ञानिक खोजों जो समाज के नैतिक मूल्यों के लिए भयंकर साबित हो सकती हैं, को समाज की अच्छाई के लिए रोक देना चाहिए।

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प्रश्न 1.11
किसी भी ज्ञान की भाँति विज्ञान का उपयोग भी, उपयोग करने वाले पर निर्भर करते हुए, अच्छा अथवा बुरा हो सकता है। नीचे विज्ञान के कुछ अनुप्रयोग दिए गए हैं। विशेषकर कौन-सा अनुप्रयोग अच्छा है, बुरा है अथवा ऐसा है कि जिसे स्पष्ट रूप से वर्गबद्ध नहीं किया जा सकता। इसके बारे में अपने दृष्टिकोणों को सूचीबद्ध कीजिए –

  1. आम जनता को चेचक के टीके लगाकर इस रोग को दबाना और अन्ततः इस रोग से जनता को मुक्ति दिलाना। (भारत में इसे पहले ही प्रतिपादित किया जा चुका है।)
  2. निरक्षरता का विनाश करने तथा समाचारों एवं धारणाओं के जनसंचार के लिए टेलीविजन।
  3. जन्म से पूर्व लिंग-निर्धारण।
  4. कार्यदक्षता में वृद्धि के लिए कम्प्यूटर।
  5. पृथ्वी के परितः कक्षाओं में मानव-निर्मित उपग्रहों की स्थापना।
  6. नाभिकीय शस्त्रों का विकास।
  7. रासायनिक तथा जैव-युद्ध की नवीन तथा शक्तिशाली तकनीकों का विकास।
  8. पीने के लिए जल का शोधन।
  9. प्लास्टिक शल्य क्रिया।
  10. क्लोनिंग।

उत्तर:

  1. अच्छा
  2. अच्छा
  3. बुरा
  4. अच्छा
  5. अच्छा
  6. बुरा
  7. बुरा
  8. अच्छा
  9. अच्छा
  10. इसे स्पष्ट रूप से वर्गबद्ध नहीं किया जा सकता।

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प्रश्न 1.12
भारत में गणित, खगोलिकी, भाषा विज्ञान, तर्क तथा नैतिकता में महान विद्वत्ता की एक लंबी एवं अटूट परम्परा रही है। फिर भी इसके साथ एवं समान्तर, हमारे समाज में बहत-से अंधविश्वासी तथा रूढ़िवादी दृष्टिकोण व परम्पराएँ फली-फूली हैं और दुर्भाग्यवश ऐसा अभी भी हो रहा है और बहुत-से शिक्षित लोगों में व्याप्त हैं। इन दृष्टिकोणों का विरोध करने के लिए अपनी रणनीति बनाने में आप अपने विज्ञान के ज्ञान का उपयोग किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
हमारे देश में समाज में व्याप्त अन्धविश्वासी एवम् रूढ़िवादी दृष्टिकोण व परम्पराएँ दूर करने के लिए रणनीति बनाने में विज्ञान के ज्ञान का उपयोग निम्नवत् रूप में किया जा सकता है –
(a) स्थानीय स्तर पर जनता को आपसी बातचीत, सभाओं, क्लबों इत्यादि के माध्यम से गलत एवम् असत्य विश्वासों को दूर करने के लिए जानकारियों का प्रचार करना लाभदायक होगा।

(b) छात्रों को दी जाने वाली विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रम में दैनिक जीवन से जुड़े अनुभवों की स्पष्ट व्याख्या देने वाली पाठ्य सामग्री का समावेश अति आवश्यक है अर्थात् शिक्षा की दैनिक जीवन में व्यक्त विभिन्न घटनाओं की व्याख्या देने में समर्थ होना चाहिए। इस प्रकार शिक्षा का उद्देश्य तर्कसंगत हो जाएगा एवम् वह भविष्य में भी लाभदायक सिद्ध होगी।

(c) इन्जीनियर्स, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, एवम् डॉक्टर्स इत्यादि द्वारा विभिन्न परिघटनाओं के सही-सही कारणों एवम् अन्धविश्वासों व गलत धारणाओं को समाप्त करने के लिए प्रदान की गई जानकारियों के अलग-अलग कार्यक्रमों द्वारा शहरी व ग्रामीण जनता के सामने प्रस्तुत करना लाभदायक होगा।

(d) समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, इण्टरनेट इत्यादि माध्यमों द्वारा लोगों में व्याप्त अपूर्ण ज्ञान, भ्रान्तियों, रूढ़िवादिता, अन्धविश्वास इत्यादि को समाप्त करने में किया जाना एक हितकारी प्रयास है। इस कार्य के लिए विभिन्न कार्यक्रमों जैसेनाटकों, क्विज, विचार-गोष्ठियों, वर्कशॉप, समर स्कूल, विन्टर-स्कूल आदि का आयोजन कर संकेत दें।

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 1 भौतिक जगत

प्रश्न 1.13
यद्यपि भारत में स्त्री तथा पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त हैं, फिर भी बहुत-से लोग महिलाओं की स्वाभाविक प्रकृति, क्षमता, बुद्धिमत्ता के बारे में अवैज्ञानिक विचार रखते हैं तथा व्यवहार में उन्हें गौण महत्व तथा भूमिका देते हैं। वैज्ञानिक तर्कों तथा विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में महान महिलाओं का उदाहरण देकर इन विचारों को धराशायी करिए, तथा अपने को स्वयं, तथा दूसरों को भी समझाइए कि समान अवसर दिए जाने पर महिलाएँ पुरुषों के समकक्ष होती हैं।
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से स्त्री तथा पुरुषों में कुछ अन्तर अवश्य होते हैं। परन्तु जिम्मेदारी निभाने, कार्य करने, बुद्धिमत्ता तथा सोच समझने में स्त्री व पुरुष में कोई अन्तर नहीं होता है। जन्म से पूर्व एवम् जन्म के पश्चात् आहार के पोषक तत्वों का एक बड़ा भाग मानव मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करता है। यह मस्तिष्क स्त्री अथवा पुरुष किसी का भी हो सकता है। जब हम स्त्रियों के प्राचीन इतिहास एवम् वर्तमान स्थिति का अध्ययन करें तो हम देखते हैं कि स्त्रियों की स्थिति हमेशा से ही सम्मानजनक .रही है एवम् उन्होंने अनेक उत्कृष्ट कार्य किए हैं। ये स्त्रियाँ हर कार्य करने में सक्षम हैं एवम् किसी भी रूप में पुरुषों से कम नहीं है।

जब कभी भी स्त्रियों को अवसर मिलता है चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। महर्षि अत्रि की पत्नी सती अनुसूइया, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी कर्मवती, नूरजहाँ, मैडम क्यूरी, सरोजिनी नायडू, कल्पना चावला, प्रिंसेज डायना, मार्गेट थ्रेचर, इन्दिरा गाँधी, श्रीमती भण्डानाइके, श्रीमती चन्द्रिका कुमार तुंगे, बछेन्द्री पाल इत्यादि अनेक नाम स्त्रियों के स्वर्णिम इतिहास का उल्लेख करते हैं।

आजकल सानिया मिर्जा का नाम भी शीर्षस्थ स्थान पर है। इसका तात्पर्य है कि इन स्त्रियों को अवसर मिलने पर, इन्होंने अपनी अपूर्व क्षमता का परिचय दिया। आज हमारे देश में रक्षा सेवाओं के द्वार भी स्त्रियों के लिए खुले हुए हैं। इस क्षेत्र में भी स्त्रियों ने अपनी कार्यदक्षता सिद्ध की है। अतः हम कह सकते हैं कि समान अवसर दिए जाने पर महिलाएँ भी पुरुषों के समकक्ष परिणाम देती हैं।

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प्रश्न 1.14
“भौतिकी के समीकरणों में सुन्दरता होना उनका प्रयोगों के साथ सहमत होने की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण है।” यह मत महान ब्रिटिश वैज्ञानिक पी० ए० एम० डिरैक का था। इस दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए। इस पुस्तक में ऐसे संबंधों तथा समीकरणों को खोजिए जो आपको सुन्दर लगते हैं।
उत्तर:
डिरैक के कथन में कोई विसंगति नहीं है। भौतिकी में एक समीकरण जो प्रयोगों के साथ सहमत है, उसे निश्चित ही सरल एवम् बोधगम्य होना चाहिए। यही उसकी सुन्दरता की कसौटी है। इसका तात्पर्य है कि जो समीकरण सरल एवम् समझने योग्य होगी, वह सुन्दर मानी जाएगी। जैसे आइन्सटीन की द्रव्यमान ऊर्जा समतुल्यता समीकरण E = mc2, द्रव्यमान के ऊर्जा तथा ऊर्जा के द्रव्यमान में स्थानान्तरण को समझाती है। यह समीकरण सरल एवम् समझने योग्य है। अर्थात् यह एक सुन्दर समीकरण है।

प्रश्न 1.15
यद्यपि उपरोक्त प्रकथन विवादास्पद हो सकता है, परन्तु अधिकांश भौतिक विज्ञानियों का यह मत है कि भौतिकी के महान नियम एक ही साथ सरल एवं सुन्दर होते हैं। डिरैक के अतिरिक्त जिन सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानियों ने ऐसा अनुभव किया, उनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं : आइंस्टाइन, बोर, हाइसेनबर्ग, चन्द्रशेखर तथा फाइनमैन। आपसे अनुरोध है कि आप भौतिकी के इन विद्वानों तथा अन्य महानायकों द्वारा रचित सामान्य पुस्तकों एवं लेखों तक पहुँचने के लिए विशेष प्रयास अवश्य करें। (इस पुस्तक के अंत में दी गई ग्रंथ-सूची देखिए)। इनके लेख सचमुच प्रेरक हैं।
उत्तर:
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प्रश्न 1.16
विज्ञान की पाठ्य पुस्तकें आपके मन में यह गलत धारणा उत्पन्न कर सकती हैं कि विज्ञान पढ़ना शुष्क तथा. पूर्णत: अत्यंत गंभीर हैं एवं वैज्ञानिक भुलक्कड़, अंतर्मुखी, कभी न हँसने वाले अथवा खीसे निकालने वाले व्यक्ति होते हैं। विज्ञान तथा वैज्ञानिकों का यह चित्रण पूर्णतः आधारहीन है। अन्य समुदाय के मनुष्यों की भाँति वैज्ञानिक भी विनोदी होते हैं तथा बहुत-से वैज्ञानिकों ने तो अपने वैज्ञानिक कार्यों को गंभीरता से पूरा करते हुए अत्यंत विनोदी प्रकृति तथा साहसिक कार्य करके अपना जीवन व्यतीत किया है। गैमो तथा फाइनमैन इसी शैली के दो भौतिक विज्ञानी हैं। ग्रंथ सूची में इनके द्वारा रचित पुस्तकों को पढ़ने में आपको आनन्द प्राप्त होगा।
उत्तर:
गैमो एवं फाइन द्वारा रचित पुस्तक निम्नलिखित हैं –

  • गैमो द्वारा रचित ‘Mr Tompkins in paperback : Cambridge Universing Press (1987)”
  • फाइनमैन द्वारा रचित “Surely you are joing : Mr. Reynman, Bantan Books (1986)”

उपरोक्त पुस्तकों के पढ़ने पर ज्ञात होता है कि वैज्ञानिक भी अन्य मनुष्यों की भाँति ही विनोदी होते हैं। इनके अलावा सी० वी० रमन, होमी जे० भाभा, भी विनोदी स्वभाव के भौतिकवादी रहे हैं। हमारे देश के कुछ नेता जैसे – मुरली मनोहर जोशी, वी० पी० सिंह इत्यादि भी भौतिकविद् रहे हैं।

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 15 तरंगें

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 15 तरंगें Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics तरंगें Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उतर

प्रश्न 15.1
2.50 kg द्रव्यमान की 20 cm लंबी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा?
उत्तर:
दिया है:
तनाव T = 200 N, डोरी की लम्बाई, l – 20 मी,
डोरी का द्रव्यमान M = 2.50 kg
∴ डोरी का द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई
m = \(\frac{M}{l}\) = \(\frac{2.50}{20.0}\) = 0.125 kg m-1
हम जानते हैं कि अनुप्रस्थ तरंगों का वेग,
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) = \(\sqrt{\frac{200}{0.125}}\) = 40 ms-1
माना अनुप्रस्थ तरंगों द्वारा एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचने में लिया गया समय t है।
∴ सूत्र t = डोरी की ल०/डोरी का वेग,
∴ t = \(\frac{1}{v}\) = \(\frac{20}{40}\) = 0.5 s

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प्रश्न 15.2
300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? (g = 9.8 ms-2)
उत्तर:
दिया है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0
त्वरण a = g = 9.8 मीटर/से०2
मीनार की ऊँचाई h = 300 m,
वायु में ध्वनि की चाल v = 340 ms-1
माना t1 = पत्थर द्वारा गिरने में लिया गया समय
व t2 = ध्वनि द्वारा मीनार के आधार से शीर्ष तक पहुँचने में लिया गया समय
माना t = शीर्ष पर ध्वनि सुनाई देने का समय है।
अतः t = t1 + t2 …………….. (i)
गति के समी० से
s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2
दिया है: s = h, u = 0, a = g, t = t1
∴ h = 0 + \(\frac{1}{2}\) gt12
या t1 = \(\sqrt{\frac{2h}{g}}\)
या t1 = \(\sqrt{\frac{2 \times 300}{9.8}}\) = 7.82 s …………………. (ii)
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∴ समी० (i), (ii) व (iii) से,
t = 7.82 + 0.88 = 8.7s

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प्रश्न 15.3
12.0 m लंबे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल 20°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 ms-1) के बराबर हो।
उत्तर:
दिया है:
l = 12 मीटर, M = 2.10 किग्रा
माना कि तार में तनाव = T
तथा तार की द्रव्यमान प्रति एकांक लम्बाई m है।
∴ m = \(\frac{M_{s}}{l}\) = \(\frac{2.10}{12}\)
= 0.175 किग्रा प्रति मीटर
तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल = 20°C
शुष्क वायु में ध्वनि की चाल = 343 मीटर/सेकण्ड
हम जानते हैं कि तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
या v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = mv2 = 0.175 × (343)2
= 20588.6 किग्रा मीटर/सेकण्डर
= 2.06 × 104 न्यूटन।

प्रश्न 15.4
सूत्र v = \(\sqrt{\frac{\gamma P}{\rho}}\) का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों –
(a) दाब पर निर्भर नहीं करती
(b) ताप के साथ बढ़ जाती है, तथा
(c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है?
उत्तर:
(a) वायु में ध्वनि की चाल पर दाब का प्रभाव-वायु में ध्वनि की चाल सूत्र v = \(\sqrt{\frac{v P}{d}}\) से प्रतीत होता है कि दाब P के बदलने पर ध्वनि की चाल (y) का मान भी बदल जाता है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। माना कि परमताप T पर किसी गैस के 1 ग्राम-अणु द्रव्यमान का आयतन V व दाब P है। माना कि गैस का अणुभार तथा घनत्व क्रमश: M व d है।
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∴ गैस का आयतन, PV = RT से
\(\frac{pm}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{d}\) = \(\frac{RT}{m}\) = (ताप के नियत होने पर)
अतः ताप (T) के नियत रहने पर, यदि दाब P का मान बदलेगा तब उसके साथ घनत्व (d) का मान भी बदलेगा लेकिन P/d का मान नियत रहेगा। इससे ध्वनि की चाल का मान समान रहेगा।
अतः वायु या गैस का ताप नियत रहे तो ध्वनि की चाल पर दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

(b) वायु में ध्वनि की चाल पर ताप का प्रभाव – किसी गैस के लिए P/d का मान गैस के ताप पर निर्भर करता है। किसी गैस को गर्म करने पर,
(i) ताप बढ़ने पर यदि गैस फैलने के लिए स्वतन्त्र है, तो उसका घनत्व कम हो जाता है। जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
(ii) यदि गैस किसी.बर्तन में बंद है तो उसका घनत्व (d) वही रहेगा लेकिन दाब बढ़ जायेगा जिससे P/d का मान बढ़ेगा।
अर्थात गैस का ताप बढ़ने पर उसमें ध्वनि की चाल बढ़ती है। जब किसी गैस के एक ग्राम अणु, घनत्व व आयतन क्रमश: M, d व v है तब V = \(\frac{m}{d}\)
यदि गैस का दाब P व परमताप T हो तो गैस समीकरण PV = RT से,
\(\frac{PM}{d}\) = RT
या \(\frac{P}{m}\) = \(\frac{RT}{m}\)
∴ गैस में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{V P}{d}}\)
= \(\sqrt{\frac{\gamma R T}{M}}\)
अतः किसी गैस में ध्वनि की चाल उसके परमताप के वर्गमूल के समानुपाती होती है।
∴ v ∝ \(\sqrt{T}\)

(c) वायु में ध्वनि की चाल पर आवृत्ति का प्रभाव – आर्द्र वायु का घनत्व शुष्क वायु के घनत्व की तुलना में कम होता है। अतः आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु की तुलना में बढ़ जाती है।

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प्रश्न 15.5
आपने यह सीखा है कि एक विमा में कोई प्रगामी तरंग फलन y = f(x,t) द्वारा निरूपित की जाती है जिसमें x तथा t को x – vt अथवा x + vt अर्थात् y = f(x ± vt) संयोजन में प्रकट होना चाहिए। क्या इसका प्रतिलोम भी सत्य है? नीचे दिए गए y के प्रत्येक फलन का परीक्षण करके यह बताइए कि वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है:
(a) (x – vt)2
(b) log (x + vt) x0
(c) 1/(x + vt)
उत्तर:
इसका विलोम असत्य है। चूंकि किसी प्रगामी तरंग के स्वीकार करने योग्य फलन के लिए एक प्रत्यक्ष आवश्यकता यह है कि यह हर समय व हर स्थान पर परिमित होनी चाहिए। दिए गए फलनों में से सिर्फ फलन (c) ही इस प्रतिबन्ध को सन्तुष्ट करता है। शेष फलन सम्भवतया किसी प्रगामी तरंग को व्यक्त नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 15.6
कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमशः 340 ms-1 तथा 1486 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है:
v = 1000 kHz =106 Hz
वायु में ध्वनि की चाल v1 = 340 ms-1
व जल में ध्वनि की चाल v2 = 1486 ms-1
सूत्र, λ = \(\frac{v}{v}\) से

(a) परावर्तित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य
λ1 = \(\frac{v_{1}}{v}=\frac{340}{10^{6}}\)
= 0.34 मिमी

(b) जल में तरंग की तरंगदैर्ध्य
λ2 = \(\frac{v_{2}}{v}=\frac{1486}{10^{6}}\)
= 0.149 सेमी।

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प्रश्न 15.7
किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूमरों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 kms-1 है? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।
उत्तर:
दिया है:
आवृत्ति v = 4.2 MHz = 4.2 × 106 Hz
चाल v = 1.7 kms-1
= 1700 मीटर/सेकण्ड
सूत्र तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac{v}{v}\) से,
ध्वनि की तरंगदैर्ध्य,
λ = \(\frac{1700}{4.2 \times 10^{6}}\)
= 0.405 मिमी।

प्रश्न 15.8
किसी डोरी पर कोई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन
y(x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + π/4)
द्वारा किया जाता है। यहाँ x तथा y सेंटीमीटर में तथा t सेकण्ड में है।x की धनात्मक दिशा बाएँ से दाएँ है।
(a) क्या यह प्रगामी तरंग है अथवा अप्रगामी? यदि यह प्रगामी तरंग है तो इसकी चाल तथा संचरण की दिशा क्या है?
(b) इसका आयाम तथा आवृत्ति क्या है?
(c) उद्गम के समय इसकी आरंभिक कला क्या है?
(d) इस तरंग में दो क्रमागत शिखरों के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है?
उत्तर:
दी हुई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का समीकरण है –
y(x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + \(\frac{π}{4}\)) ………………….. (iv)
संचरित तरंग का सामान्य समीकरण निम्न है –
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(a) समी० (i) व (ii) की तुलना करने पर स्पष्ट है कि समी० (i) संचरित तरंग को व्यक्त करती है।
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समी० (iii) तथा (iv) की गुणा करने पर,
2πvλ = \(\frac{2 \pi \times 26}{0.018}\)
vλ = – 2000
v = – 2000 cms-1 = -20 ms-1
जहाँ v = vλ तरंग का वेग है। यहाँ ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि तरंग बाएँ से दायीं ओर चलती है।
∴ वेग = 20 s-1

(b) A = 3.0 cm = 3.0 × 10-2 m
\(\frac{2π}{T}\) = 36
v = \(\frac{36}{2π}\) = \(\frac{36}{2×3.14}\) = 5.73 Hz

(c) प्रारम्भिक कला ϕ = \(\frac{π}{4}\) Frad

(d) तरंग में दो गर्मों के बीच न्यूनतम दूरी = तरंगदैर्ध्य
= λ = \(\frac{2π}{0.018}\)
= \(\frac{2×3.14}{0.018}\) = 348.9 cm
= 3.489 m
3.49 m = 3.5 m

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प्रश्न 15.9
प्रश्न 15.8 में वर्णित तरंग के लिए x = 0 cm, 2 cm तथा 4 cm के लिए विस्थापन (y) और समय (1) के बीच ग्राफ आलेखित कीजिए। इन ग्राफों की आकृति क्या है? आयाम, आवृत्ति अथवा कला में से किन पहलुओं में प्रगामी तरंग में दोलनी गति एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर भिन्न है?
उत्तर:
दी हुई तरंग समीकरण है –
y (x, t) = 3.0 sin (36t + 0.018x + \(\frac{π}{4}\)) ………….. (i)
माना x = 0, 2 व 4 सेमी के लिए तरंग के विस्थापन क्रमशः y1, y2 व y3 हैं।
∴ y1 = (0, t) = 3.0 sin (36t + \(\frac{π}{4}\)) …………….. (ii)
y2 (2, t) = 3.0 sin (36t + 0.036 + \(\frac{π}{4}\)) ……………………. (iii)
तथा y3 (4, t) = 3.0 sin (36t + 0.072 + \(\frac{π}{4}\)) ………………….. (iv)
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समी० (ii), (iii) व (iv) से स्पष्ट है कि ये वक्र ज्यावक्रीय हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। तरंग संचरण में दोलनी गति, एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक केवल कला में भिन्न है, जैसा कि क्रमशः (ii), (iii) व (iv) से दिखाया गया है। इन तरंगों के आयाम व आवृत्ति क्रमश: 3 सेमी० व \(\frac{36}{2π}\) s-1 समान हैं।

प्रश्न 15.10
प्रगामी गुणावृत्ति तरंग
y (x, t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35)
जिसमें x तथा y को m में तथा कोs में लिया गया है, के लिए उन दो दोलनी बिन्दुओं के बीच कलांतर कितना है जिनके बीच की दूरी है –
(a) 4m
(b) 0.5 m
(c) λ/2
(d) \(\frac{3λ}{4}\)
उत्तर:
दी हुई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग का समीकरण निम्न है –
y(x, t) = 2.0 cos 2π (10t – 0.0080x + 0.35) ……………… (i)
अतः संचरित गुणावृत्ति तरंग की सामान्य समीकरण निम्न है –
y(x, t) = A cos \(\left[\frac{2 \pi}{T} t-\frac{2 \pi}{\lambda} x+\phi_{0}\right]\) ………………….. (ii)
समी० (i) व (ii) की तुलना से
\(\frac{2π}{λ}\) = 2π × 0.0080 cm-1 …………………. (iii)
\(\frac{2π}{T}\) = 2π × 10
ϕ0 = 0.35
हम जानते हैं कि कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × पथान्तर ……………..(iv)

(a) पथान्तर = 4m = 400m, (iv) से,
समी० (iv) से, कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × 400
= 2π × 0.0080 × 40 [समी० (iii) से]
= 6.41π rad

(b) पथान्तर = 0.5 m = 50 cm पर
कलान्तर = 2π × 0.0080 × 50
= 0.8π rad

(c) पथान्तर = \(\frac{π}{2}\) पर,
कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × \(\frac{λ}{2}\) = π radian पर

(d) पथान्तर = \(\frac{3λ}{4}\) पर,
कलान्तर = \(\frac{2π}{λ}\) × \(\frac{3λ}{4}\)
= \(\frac{3π}{2}\) rad = (π + \(\frac{π}{2}\))
∴ cos (π + θ) = – cos θ
प्रभावी कलान्तर = \(\frac{π}{2}\)

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प्रश्न 15.11
दोनों सिरों पर परिबद्ध किसी तानित डोरी पर अनुप्रस्थ विस्थापन को इस प्रकार व्यक्त किया गया है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2π}{3}\) x) cos (120 πt)
जिसमें x तथा y को m तथाt को s में लिया गया है। इसमें डोरी की लम्बाई 1.5 m है जिसकी संहति 3.0 × 10-2 kg है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) यह फलन प्रगामी तरंग अथवा अप्रगामी तरंग में से किसे निरूपित करता है?
(b) इसकी व्याख्या विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंगों के अध्यारोपण के रूप में करते हुए प्रत्येक तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए।
(c) डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया हुआ फलन है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2πx}{3}\)) cos (120 πt) …………….. (i)
संचरित तरंग को निम्न रूप में व्यक्त कर सकते हैं –
y (x, t) = A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt – x) ………………. (ii)
तथा प्रगामी तरंग निम्न रूप में व्यक्त कर सकते हैं –
y (x, t) = -2A sin (\(\frac{2πx}{λ}\)) cos (\(\frac{2πvt}{λ}\)) …………….. (iii)

(a) चूँकि दिया गया फलन प्रगामी तरंग की भाँति है। अतः दिया गया फलन प्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।
(b) हम जानते हैं कि यदि तरंग
y1 = A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt + x)
x – अक्ष की धनात्मक दिशा में संचरित होती है, तो यह तरंग निम्न परावर्तित तरंग द्वारा अध्यारोपित होती है।
y2 = -A sin \(\frac{2π}{λ}\) (vt + x)
अतः अध्यारोपण सिद्धांत से, y = y1 + y2
= – 2A sin (\(\frac{2π}{λ}\) x) cos (\(\frac{2π}{λ}\) vt) ……………………. (iii)
समीकरण (i) तथा (ii) की तुलना करने पर,
= \(\frac{2π}{λ}\) = \(\frac{2π}{3}\) 0r λ = 3 m
\(\frac{2π}{λ}\) v = 120π
या v = 60λ = 60 × 3 = 180 ms-1
∴ आवृत्ति v = \(\frac{v}{λ}\) = \(\frac{180}{3}\) = 60 Hz
अनुप्रस्थ तरंग का वेग
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) or v2 = \(\frac{T}{m}\)
∴ T = v2 × m ………………… (iv)
दिया है:
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(c) माना डोरी में तनाव T है।
∴ समीकरण (iv) व (v) से,
T = (180)2 × (2 × 10-2)
= 32400 × 2 × 10-2
= 648 N

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प्रश्न 15.12
(i) प्रश्न 15.11 में वर्णित डोरी पर तरंग के लिए बताइए कि क्या डोरी के सभी बिन्दु समान (a) आवृत्ति, (b) कला, (c) आयाम से कंपन करते हैं? अपने उत्तरों को स्पष्ट कीजिए।
(ii) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिन्दु का आयाम कितना हैं।
उत्ता:
(a) डोरी के समस्त बिन्दु समान आवृत्ति से कंपन करते हैं।
(b) चूंकि λ = 3 मीटर व डोरी की लम्बाई, l = 1.5 मीटर = \(\frac{1}{2}\)
अर्थात् डोरी को दोनों सिरों पर निस्पंद व मध्य में एक प्रस्पंद बनेगा।
चूँकि अप्रगामी तरंगों में दो क्रमागत निस्पंदों के मध्य के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करते हैं। अतः डोरी के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करेंगे।

(c) दी गई समीकरण निम्न है –
y (x, t) = 0.06 sin (\(\frac{2π}{3}\) x)
इस समीकरण का आयाम,
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प्रश्न 15.13
नीचे किसी प्रत्यास्थ तरंग (अनुप्रस्थ अथवा अनुदैर्ध्य) के विस्थापन को निरूपित करने वाले x तथा t के फलन दिए गए हैं। यह बताइए कि इनमें से कौन (i) प्रगामी तरंग को, (ii) अप्रगामी तरंग को, (iii) इनमें से किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता है –

  1. y = 2 cos (3x) sin 10t
  2. y = 2\(\sqrt{x-vt}\)
  3. y = 3 sin (5x – 0.5t)+4 cos (5x – 0.5t)
  4. y = cos x sin t + cos 2x sin 2t

उत्तर:

  1. महत्व फलन अप्रगामी तरंग को व्यक्त करता है।
  2. किसी भी तरंग के लिए स्वीकार करने योग्य नहीं है।
  3. प्रगामी गुणावृत्ति तरंग को प्रदर्शित करता है।
  4. दो प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 15.14
दो दृढ़ टेकों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 H2 आवृत्ति से कंपन करता है। इस तार का द्रव्यमान 3.5 × 10-2 kg तथा रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0 × 10-2 kg m-1 है।
(a) तार पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल क्या है, तथा
(b) तार में तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है:
m = 3.5 × 10-2 kg
रैखिक द्रव्यमान घनत्व µ = 4 × 10-2 kg m-1
सूत्र µ = \(\frac{m}{l}\) से,
तार की लम्बाई l = \(\frac{m}{µ}\)
= \(\frac{3.5 \times 10^{-2}}{4 \times 10^{-2}}\) = \(\frac{7}{8}\) मीटर
माना तार में उत्पन्न तरंग की तरंगदैर्ध्य λ है।
चूँकि तार मूल विधा में कम्पन कर रहा है। अतः \(\frac{λ}{2}\) = l
∴ λ = 2l = \(\frac{7}{4}\) मीटर
सूत्र v = vλ से,
तार में तरंग की चाल
v = 45 × \(\frac{7}{4}\) = 79 ms-1
माना कि तार का तनाव t है।
∴ v = \(\sqrt{\frac{T}{\mu}}\)
∴ T = v2µ = (79)2 × 10-2
= 248 न्यूटन

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प्रश्न 15.15
एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1 m लंबी नलिका, किसी नियत आवृत्ति के स्त्रोत (340 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज) के साथ, जब नलिका में वायु कॉलम 25.5 cm अथवा 79.3 cm होता है तब अनुनाद दर्शाती है। प्रयोगशाला के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल का आंकलन कीजिए। कोर-प्रभाव को नगण्य मान सकते हैं।
उत्तर:
नलिका में पिस्टन लगाने से यह बंद आर्गन नलिका की भाँति व्यवहार करेगा। माना बंद नलिका में nवें तथा (n + 1) वें कम्पन के लिए अनुनादित वायु स्तम्भों की लम्बाइयाँ l1 व l2 हैं।
∴ l1 = 25.5 सेमी
l2 = 79.3 सेमी
माना ध्वनि तरंग का वेग v है। अतः इन कम्पनों के लिए आवृत्ति v1 व v2 निम्नवत् होगी –
v1 = (2n – 1) \(\frac{v}{4 l_{1}}\) ……………… (i)
तथा v2 = [2(n + 1) – 1] \(\frac{v}{4 l_{2}}\) ……………………. (ii)
दोनों विधाओं में 340 Hz की आवृत्ति से अनुनाद होगा।
∴ v1 = v2 = 340
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या 3(2n – 1) = 2n +1
या 6n – 3 = 2n + 1
या 6n – 2n = 3 + 1
4n = 4
∴ n = 1
समी० (2n – 1) \(\frac{v}{4 l_{2}}\) = 340 में n = 1 रखने पर
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या v = 340 × 4 × 25.5
या v = 340 × 102
= 34680 cms-1
= 346.8 ms-1
= 347 ms-1

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प्रश्न 15.16
100 cm लंबी स्टील-छड़ अपने मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्ध्य कंपनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
उत्तर:
चूँकि छड़ मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है अतः यहाँ एक निस्पंद (A) तथा मूल विधा के लिए सिरों पर दो प्रस्पंद बनेंगे। अतः छड़ की मूल लम्बाई निम्नवत् होगी –
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l = \(\frac{λ}{2}\) 0r λ = 2l
जहाँ l = छड़ की लम्बाई
तथा λ = तरंग की तरंगदैर्ध्य
दिया है
l = 13100 cm, v = 2.53 kHz = 2.53 × 103 Hz
∴ λ = 2 × 100 = 200 cm
माना स्टील में ध्वनि का वेग v है।
अत: v = vλ
= 2.53 × 103 × 200
= 506 × 103 cms-1
= 5.06 × 103 ms-1
∴ v = 5.06 kms-1

प्रश्न 15.17
20 cm लंबाई के पाइप का एक सिरा बंद है। 430 Hz आवृत्ति के स्त्रोत द्वारा इस पाइप की कौन-सी गुणावृत्ति विधा अनुनाद द्वारा उत्तेजित की जाती है? यदि इस पाइप के दोनों सिरे खुले हों, तो भी क्या यह स्त्रोत इस पाइप के साथ अनुनाद करेगा? वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 है।
उत्तर:
दिया है:
l = 20 cm = 0.2 m, v = 340 ms-1
उत्तेजित स्त्रोत की आवृत्ति vn = 430 Hz
हम जानते हैं कि बंद नली के कम्पनों की आवृत्ति निम्न होती है –
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अत: आर्गन नली प्रथम सन्नादी या दोलन की मूल आवृत्ति में है।
खुली नली में, कम्पन की nवीं विधा की आवृत्ति –
V’n = n \(\frac{v}{2l}\)
जहाँ मूल विधा में लम्बाई l = \(\frac{λ}{2}\) or λ = 2l
या 430 = \(\frac{n×340}{2×0.2}\)
या n = \(\frac{430×0.4}{340}\) = \(\frac{172}{340}\) = 0.5
चूँकि n एक पूर्णांक है। अतः n = 0.5 सम्भव नहीं है। अतः समान स्त्रोत खुली नली में अनुनादित नहीं होगा।

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प्रश्न 15.18
सितार की दो डोरियाँ A तथा B एक साथ ‘गा’ स्वर बजा रही हैं तथा थोड़ी-सी बेसुरी होने के कारण 6 Hz आवृत्ति के विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। डोरी A का तनाव कुछ घटाने पर विस्पंद की आवृत्ति घटकर 3 Hz रह जाती है। यदि A की मूल आवृत्ति 324Hz है तो B की आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
हम जानते हैं कि –
आवृत्ति ∝ Bihar Board Class 11 Physics Chapter 15 तरंगें
अतः डोरी में तनाव कम होने से इसकी आवृत्ति भी घटती है।
माना A की वास्तविक आवृत्ति VA व B की VB है।
∴ VA – VB = 6 Hz
परन्तु VA = 324 Hz
∴ VB = 324 – 6
= 318 Hz
A में तनाव कम करने पर,
∆v = 3 Hz
A की आवृत्ति = 324 – 3 = 321 Hz
∴ B की आवृत्ति = 318 Hz

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प्रश्न 15.19
स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे)?
(a) किसी ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पंद दाब प्रस्पंद होता है और विस्थापन प्रस्पंद दाब निस्पंद होता है।
(b) आँख न होने पर भी चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, ‘दिशा, प्रकृति तथा आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।
(c) वायलिन तथा सितार के स्वरों की आवृत्तियाँ समान होने पर भी हम दोनों से उत्पन्न स्वरों में भेद कर लेते हैं।
(d) ठोस अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का पोषण कर सकते हैं जबकि गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो सकती हैं, तथा
(e) परिक्षेपी माध्यम में संचरण के समय स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।
उत्तर:
(a) ध्वनि तरंगों में जहाँ माध्यम के कणों का विस्थापन न्यूनतम होता है वहाँ कण अत्यधिक पास-पास होते हैं। अतः वहाँ दाब अधिकतम होता है। (i.e., दाब प्रस्पंद बनता है) एवं जहाँ विस्थापन महत्तम होता है वहाँ कण दूर-दूर होते हैं, अतः वहाँ दाब न्यूनतम होता है (i.e., दाब निस्पंद बनता है।)

(b) चमगादड़ उच्च आवृत्ति की पराश्रव्य तरंगें उत्सर्जित करती है। ये तरंगें अवरोधकों से टकराकर वापस लौटती हैं तो चमगादड़ इन्हें अवशोषित कर लेते हैं। परावर्तित तरंगों की आवृत्ति व तीव्रता की प्रेषित तरंगों से तुलना करके चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, प्रकृति, दिशा व आकार सुनिश्चित कर लेते हैं।

(c) प्रत्येक स्वर में एक मूल स्वरक के साथ कुछ अधिस्वरक भी उत्पन्न होते हैं। परन्तु वायलिन व सितार से उत्पन्न स्वरों में मूल स्वरकों की आवृत्तियाँ समान रहती हैं लेकिन उनके साथ उत्पन्न होने वाले अधिस्वरकों की संख्या, आवृत्तियों व अपेक्षिक तीव्रताओं में भिन्नता होती है। इसी भिन्नता के आधार पर इन्हें विभेद किया जाता है।

(d) ठोसों में आयतन प्रत्यास्थता के साथ-साथ अपरूपण प्रत्यास्थता भी पाई जाती है। अतः ठोसों में दोनों प्रकार की तरंगें संचरित होती हैं। जबकि गैसों में केवल आयतन प्रत्यास्थता ही पाई जाती है। अतः गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो पाती हैं।

(e) प्रत्येक ध्वनि स्पंद कई विभिन्न तरंगदैर्ध्य की तरंगों का मिश्रण होता है। जब यह स्पंद परिक्षेपी माध्यम में प्रवेश करता है तब ये तरंगें अलग-अलग वेगों से गतिमान रहती हैं। अतः स्पंद की आकृति विकृत हो जाती है।

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प्रश्न 15.20
रेलवे स्टेशन के बाह्य सिग्नल पर खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजाती है।
(i) प्लेटफॉर्म पर खड़े प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति क्या होगी जबकि रेलगाड़ी –
(a) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म की ओर गतिशील है, तथा
(b) 10 ms-1 चाल से प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है?
(ii) दोनों ही प्रकरणों में ध्वनि की चाल क्या है? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
v = 400 Hz, vt = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल
v = 340 ms-1
(i) (a) जब रेलगाड़ी (ध्वनि स्त्रोत) स्थिर प्रेक्षक की ओर गतिमान है, तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v \(\left(\frac{v}{v-v_{t}}\right)\)
= 400 (\(\frac{340}{340-10}\))
= 412 Hz

(b) जब रेलगाड़ी स्थिर प्रेक्षक से दूर जा रही है तब प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति,
v’ = v \(\left(\frac{v}{v+v_{t}}\right)\)
= 400 (\(\frac{340}{340+10}\)) = 389 Hz

(ii) दोनों स्थितियों में ध्वनि की चाल (340 ms-1) समान है।

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प्रश्न 15.21
स्टेशन यार्ड में खड़ी कोई रेलगाड़ी शांत वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजा रही है। तभी 10 ms-1 की चाल से यार्ड से स्टेशन की ओर वायु बहने लगती है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए ध्वनि की आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा चाल क्या है? क्या यह स्थिति तथ्यतः उस स्थिति के समरूप है जिसमें वायु शांत हो तथा प्रेक्षक 10 ms-1 चाल से यार्ड की ओर दौड़ रहा हो? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 ms-1 ले सकते हैं।
उत्तर:
दिया है:
v = 400 Hz
वायु की प्रेक्षक की ओर चाल vw = 10 ms-1
शांत वायु में ध्वनि की चाल vw = 340 ms-1
चूँकि रेलगाड़ी व प्रेक्षक दोनों स्थिर हैं। अतः V0 = 0 व v’s = 0
अतः प्रेक्षक द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति
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चूँकि वायु प्रेक्षक की ओर चलती है।
अतः प्रेक्षक के लिए वायु की चाल
= vs + vw = 350 ms-1
प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति = 400 Hz
∴ ध्वनि की तरंगदैर्ध्य λ’ = \(\frac{v_{t}+v_{s}}{v^{\prime}}\)
= \(\frac{340+10}{400}\) = \(\frac{7}{8}\) Hz = 0.875 m

Bihar Board Class 11 Physics तरंगें Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 15.22
किसी डोरी पर कोई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग इस प्रकार व्यक्त की गई है –
y (x, t) = 7.5 sin (0.0050x + 12t + π/4)
(a) x =1cm तथा t=1s पर किसी बिन्दु का विस्थापन तथा दोलन की चाल ज्ञात कीजिए। क्या यह चाल तरंग संचरण की चाल के बराबर है?
(b) डोरी के उन बिन्दुओं की अवस्थिति ज्ञात कीजिए जिनका अनुप्रस्थ विस्थापन तथा चाल उतनी ही है जितनी x = 1cm पर स्थित बिन्दु की समय t = 15, 5s तथा 11s पर है।
उत्तर:
दिया है:
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(a) समीकरण (i) की तुलना संचरित तरंग के सामान्य समीकरण से करने पर
y = a sin [\(\frac{2π}{λ}\) (vt + x) + \(\frac{π}{4}\)] we get
v = velocity of wave,
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बिन्दु के दोलन का वेग
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x = 1 सेमी° पर  t = 1 सेकण्ड
v = 90 cos (0.05 × 1 + 1.12 × 1 + 0.789)
= 90 cos 732.83° = 90 cos 12.83°
= 90 × 0.9571 cms-1 = 87.76 cms-1
= 88 cms-1
परन्तु तरंग संचरण का वेग 24 मीटर/सेकण्ड है।
स्पष्ट है कि बिन्दु का दोलन वेग तरंग संचरण के वेग के समान नहीं है।
∴ नहीं, यह वेग तरंग संचरण के वेग (24 मीटर/से०) के समान नहीं है।

(b) दी हुई समीकरण है,
y (x, t) = 7.5 sin (0.005x + 12t + \(\frac{π}{4}\))
इस समीकरण की तुलना समीकरण,
y = A sin (ωt + kx + ϕ) से करने पर,
∴ k = 0.005 रेडियन 1 सेमी०
∴λ = \(\frac{2π}{k}\)
= \(\frac{2×3.14}{0.005}\) = 12.57 मीटर
तरंग में सभी बिन्दुओं का समान अनुप्रस्थ विस्थापन होता है। यह विस्थापन λ, 2λ, 3λ, ……… इत्यादि होता है। अतः 12.57 मीटर, 25.14 मीटर, 37.71 मीटर इत्यादि दूरी पर स्थित बिन्दु x = 1 सेमी से समान विस्थापन पर होंगे। अतः सभी बिन्दुओं जिनका विस्थापन nλ है। जहाँ n = ±1, +2, ±3, ±4, …………… है, x =1 सेमी से 12.57 मोटर, 25.14 मीटर ………….. दूरी हैं।

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प्रश्न 15.23
ध्वनि का कोई सीमित स्पंद (उदाहरणार्थ सीटी की पिप) माध्यम में भेजा जाता है।
(a) क्या इस स्पंद की कोई निश्चित –
(i) आवृत्ति
(ii) तरंगदैर्ध्य
(iii) संचरण की चाल है?
(b) यदि स्पन्द दर 1 स्पंद प्रति 20 सेकण्ड है अर्थात् सीटी प्रत्येक 20 s के पश्चात् सेकंड के कुछ अंश के लिए बजती है, तो सीटी द्वारा उत्पन्न स्वर की आवृत्ति (1/20) Hz अथवा 0.05 Hz है?
उत्तर:
(a) नहीं, इस स्पंद की कोई निश्चित आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य नहीं होती है। स्पन्द के संचरण की चाल निश्चित होती है, जो माध्यम में ध्वनि की चाल के समान है।
(b) नहीं, स्पंद की आवृत्ति (\(\frac{1}{20}\)) Hz
या 0.05 Hz नहीं है।

प्रश्न 15.24
8.0 × 10-3 kg m-1 रैखिक द्रव्यमान घनत्व की किसी लंबी डोरी का एक सिरा 256 Hz आवृत्ति के विद्युत चालित स्वरित्र द्विभुज से जुड़ा है। डोरी का दूसरा सिरा किसी स्थिर घिरनी के ऊपर गुजरता हुआ किसी तुला के पलड़े से बँधा है जिस पर 90 kg के बाट लटके हैं। घिरनी वाला सिरा सारी आवक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है जिसके कारण इस सिरे से परावर्तित तरंगों का आयाम नगण्य होता है। t = 0 पर डोरी के बाएँ सिरे (द्विभुज वाले सिरे) x = 0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन शून्य है (y = 0) तथा वह y की धनात्मक दिशा के अनुदिश गतिशील है। तरंग का आयाम 5.0 cm है। डोरी पर इस तरंग का वर्णन करने वाले अनुप्रस्थ विस्थापन y को x तथा t के फलन के रूप में लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि तरंग वेग –
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) ………………… (i)
पलड़े में द्रव्यमान = M = 90 kg
दिया है: T = Mg = 90 × 9.8 = 882.0 N
रेखीय द्रव्यमान घनत्व m = 8 × 10-3 kg m-1
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धनात्मक x – दिशा में विस्थापन वाली संचारित तरंग का समीकरण
y = A sin (wt – kx) ……………………. (ii)
जहाँ ω = 2πv तथा
A = 5.0 cm = 0.05 m, v = 256 Hz.
∴ω = 2π × 256 s-1
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समी० (ii) में ω1A तथा k के मान रखने पर,
y = 0.05 sin (1.6 × 103t – 4.84)

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प्रश्न 15.25
किसी पनडुब्बी से आबद्ध कोई ‘सोनार’ निकाय 40.0 KHz आवृत्ति पर प्रचालन करता है। कोई शत्रु-पनडुब्बी 360 km h-1 चाल से इस सोनार की ओर गति करती है। पनडुब्बी से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है? जल में ध्वनि की चाल 1450 ms-1 लीजिए।
उत्तर:
दिया है:
जल में ध्वनि की चाल v = 1450 ms-1
शत्रु पनडुब्बी की चाल v1 = 1360 km h-1
= 360 × \(\frac{5}{18}\) = 100 ms-1
सोनार द्वारा प्रेषित तरंग की आवृत्ति
ω = 40 kHz
माना शत्रु पनडुब्बी द्वारा ग्रहण आवृत्ति v1 है।
स्पष्ट है : श्रोता का वेग v0 = v1 = 100 ms-1
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शत्रु पनडुब्बी इस आवृत्ति की तरंगों को परावर्तित करती है। माना सोनार द्वारा ग्रहण आवृत्ति n2 है।
इस स्थिति में, स्त्रोत सोनार की ओर vs = 100 ms-1 के वेग से गति करता है।
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प्रश्न 15.26
भूकम्प पृथ्वी के भीतर तरंगें उत्पन्न करते हैं। गैसों के विपरीत, पृथ्वी अनुप्रस्थ (S) तथा अनुदैर्ध्य (P) दोनों प्रकार की तरंगों की अनुभूति कर सकती है। S तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 4.0 kms-1 तथा P तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 8.0 kms-1 है। कोई भूकंप-लेखी किसी भूकंप की P तथा S तरंगों को रिकॉर्ड करता है। पहली P तरंग पहली S तरंग की तुलना में 4 मिनट पहले पहुँचती है। यह मानते हुए कि तरंगें सरल रेखा में गमन करती हैं यह ज्ञात कीजिए कि भूकंप घटित होने वाले स्थान की दूरी क्या है?
उत्तर:
दिया है:
S तरंगों की चाल
v1 = 4 kms-1
= 4 × 60
= 240 km/min
P तरंगों की चाल v2 = 8 kms-1
= 480 km/min
अत: S तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t1 = \(\frac{x}{u_{1}}\) = \(\frac{n}{240}\) व P तरंगों का भूकंप लेखी तक पहुँचने में लगा समय
t2 = \(\frac{x}{u_{2}}\) = \(\frac{x}{480}\) मिनट
अतः t1 = t2
प्रश्नानुसार P तरंगें, Q तरंगों से भूकंप लेखी तक 4 मिनट पहले पहुँचती हैं।
∴ t2 – t1 = 4 मिनट
2t2 – t2 = 4
∴ t2 = 4 मिनट
∴ दूरी x = 480 × t2
= 480 × 4
= 1920 km

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प्रश्न 15.27
कोई चमगादड़ किसी गुफा में फड़फड़ाते हुए पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करते हुए उड़ रहा है। मान लीजिए चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित पराश्रव्य ध्वनि की आवृत्ति 40 Hz है। किसी दीवार की ओर सीधा तीव्र झपट्टा मारते समय चमगादड़ की चाल ध्वनि की चाल की 0.03 गुनी है। चमगादड़ द्वारा सुनी गई दीवार से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है?
उत्तर:
दिया है:
उत्सर्जित तरंग की आवृत्ति v = 40 kHz
माना ध्वनि की चाल = v
चमगादड़ की चाल v1 = 0.03v
माना दीवार द्वारा ग्रहण की गई तरंग की आगामी आवृत्ति v1 है।
इस स्थिति में श्रोता की ओर गतिमान है तथा श्रोता स्थिर है।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 15 तरंगें
= 41.24 kHz
v1 = 41.24 KHz आवृत्ति की तरंगें दीवारसे टकराकर चमगादड़ की ओर वापस लौटती हैं।
माना चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई तरंगो की आवृत्ति v2 इस स्थिति में, श्रोता, स्थिर स्त्रोत की ओर गतिमान है।
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 15 तरंगें
= 42.47kHz
इस प्रकार चमगादड़ द्वारा ग्रहण की गई परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति 42.47 kHz है।

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

Bihar Board Class 11 Biology रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिए –
(अ) बहिःस्त्रावी ग्रन्थियाँ
(ब) अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियाँ
(स) हॉर्मोन।
उत्तर:
(अ) बहिःस्रावी ग्रन्थियाँ (Exocrine Glands):
ये सँकरी नलिकाओं के द्वारा सम्बन्धित भागों से जुड़ी रहती हैं। इन ग्रन्थियों से स्रावित तरल नलिकाओं द्वारा सम्बन्धित सतह पर मुक्त होता है। इन्हें वाहिनीयुक्त (ducted glands) भी कहते हैं; जैसे-लार ग्रन्थियाँ, आहारनाल की विभिन्न पाचक ग्रन्थियाँ, त्वचा की तैल ग्रन्थियाँ, पसीने की ग्रन्थि (sweat gland), यकृति आदि।

(ब) अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Gland):
ये सम्बन्धित्त एपिथीलियम से पृथक् हो जाने के कारण नलिकाविहीन (ductless) कहलाती हैं। इनसे स्रावित रसायनों को हॉर्मोन्स कहते हैं। इनका वितरण रक्त या ऊतक तरल द्वारा होता है। इन ग्रन्थियों में रक्त-कोशिकाओं का घना जाल फैला रहता. है; जैसे-थाइरॉइड, पैराथाइरॉइड, अधिवृक्क, पीयूष, पीनियल तथा थाइमस ग्रन्थियाँ आदि। .

(स) हॉर्मोन (Hormone):
बैलिस एवं स्टारलिंग (Bayliss and Starling; 1903 – 1905) के अनुसार ये ऐसे सक्रिय सन्देशवाहक रसायन होते हैं जो बाह्य या अन्त:उद्दीपन के कारण शरीर के किसी भाग की अन्तःस्रावी कोशिकाओं द्वारा स्रावित होकर रक्त में पहुँचकर शरीर में संचारित होते हैं और इसकी सूक्ष्म मात्रा शरीर की लक्ष्य कोशिकाओं की कार्यिकी को प्रभावित करती है।

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

प्रश्न 2.
हमारे शरीर में पाई जाने वाली अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों की स्थिति चित्र बनाकर प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
अन्तःस्रावी ग्रन्थियों की स्थिति
Bihar Board Class 11 Biology Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण
चित्र – मानव शरीर में विभिन्न अन्तःस्रावी ग्रन्थियों की स्थिति: (A) पुरुष तथा (B) स्त्री में

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के द्वारा स्रावित हॉर्मोन का नाम लिखिए –
(अ) हाइपोथैलेमस
(ब) पीयूष ग्रन्थि
(स) थाइरॉइड ग्रन्थि
(द) पैराथायरॉइड ग्रन्थि
(य) अधिवृक्क ग्रन्थि
(र) अग्न्याशय
(ल) वृषण
(व) अण्डाशय
(श) थाइमस
(स) एट्रियम
(ष) वृक्क
(ह) जठर-आंत्रीय पथ।
उत्तर:
(अ) हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) से तन्त्रि हॉर्मोन्स (neurohormones) स्रावित करती है। ये दो प्रकार के होते हैं –
(i) मोचक हॉर्मोन (releasing hormones) (ii) निरोधी हॉर्मोन्स (inhibitory hormones)।

(ब) पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Hormones):
इसके अग्रभाग से वृद्धि हॉर्मोन (growth hormones, GH), प्रोलैक्टिन (prolactin) या मैमोट्रोपिन हॉर्मोन, थाइरॉइड प्रेरक हॉर्मोन (thyroid stimulating hormons, TSH), एड्रिनोकॉर्टिकोट्रॉपिक हॉर्मोन (adrenocorticotropic homrone, ACTH), ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन (luteinizing hormone, LH) और पुटिका प्रेरक हॉर्मोन (follicle stimulating hormone, FSH) तथा पश्च भाग से वैसोप्रेसिन (vasopressin) तथा ऑक्सिटोसिन (oxytocin) एवं मध्य भाग से मिलैनोसाइट प्रेरक हॉर्मोन (melanocyte stimulating hormone, MSH)।

(स) थाइरॉइड ग्रन्थि (Thyroid Gland):
इससे टेट्राआयोडोथायरोनीन ((tetraiodo-thyronine) (T4) तथा ट्राइआयोडोथायरोनीन (triodothyronine, T3) स्रावित होता है।

(द) पैराथाइरॉइड ग्रन्थि (Parathyroid Gland):
इससे पैराथॉर्मोन (parathormone) स्रावित होता है।

(य) अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal Gland):
इसके वल्कुट भाग से ऐड्रीनोकॉटकोएड्स (adrenocorticoids) तथा मध्यांश (medulla) से एपिनेफ्रीन (epinephrine) तथा नॉरएपिनेफ्रीन (nor-epinephrine) स्रावित होता है।

(र) अग्न्याशय (pancreas):
की लैंगरहैन्स द्वीपिकाओं (islets of Langerhans) से इन्सुलिन (insulin) तथा ग्लूकैगॉन (glucagon) हॉर्मोन स्रावित होते हैं।

(ल) वृषण (Testes):
इससे एन्ड्रोजेन्स (androgens); जैसे-टेस्टोस्टेरॉन (testosterone) सावित होता है।

(व) अण्डाशय (Ovary):
इससे एस्ट्रोजेन्स (estrogens) तथा प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) हॉर्मोन स्रावित होते हैं।

(श) थाइमस (Thymus):
ग्रन्थि-इससे थाइमोसिन (thymosin) हॉर्मोन स्रावित होता है।

(स) एट्रियम (Atrium):
इससे एट्रियल नेटियुरेटिक कारक (ANF) स्रावित होता है।

(ष) वृक्क (Kidney):
इससे एरिथोपोइटिन (erythropoietin) हॉर्मोन स्रावित होता है।

(ह) जठर-आंत्रीय पथ (Gastrointestinal Tract):
इससे गैस्ट्रिन (gastrin), सीक्रेटिन (secretin) कोलिसिस्टोकाइनिन (cholecystokinin) तथा जठर अवरोधी पेप्टाइड (gastric inhibitory peptide) हॉर्मोन स्रावित होते हैं।

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
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उत्तर:
(अ) हाइपोथैलेमस
(ब) थाइरॉइड ग्रन्थि
(स) अधिवृक्क वल्कुट
(द) वृषण अथवा अण्डाशय
(य) त्वचा की रंग कोशिकाएँ (मिलैनोफोर्स)।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित हॉर्मोन के कार्यों के बारे में टिप्पणी लिखिए –
(अ) पैराथाइरॉइड हॉर्मोन (पी० टी० एच०)
(ब) थाइरॉइड हॉर्मोन
(स) थाइमोसिन
(द) एन्ड्रोजेन
(य) एस्ट्रोजेन
(र) इन्सुलिन एवं ग्लूकैगॉन।
उत्तर:
(अ) पैराथायरॉइड हॉर्मोन (Parathyroid Hormone):
यह कैल्सियम के अवशोषण तथा फॉस्फेट के उत्सर्जन को बढ़ाता है। अस्थि एवं दाँतों के विकास में सहायता करता है और पेशियों को क्रियाशील रखता है।

(ब) थाइरॉइड हॉर्मोन (Thyroid Hormones):

1. ये ऑक्सीकारक उपापचय (oxidative metabolism) को प्रेरित करके कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन और उपापचय दर को बढ़ाते हैं और जीवन की रफ्तार को बनाए रखते हैं। ये हृदय स्पन्दन दर, प्रोटीन संश्लेषण,
O2 एवं ग्लूकोस की खपत आदि को बढ़ाते हैं।

2. थायरॉक्सिन कायान्तरण (metamorphosis) के लिए आवश्यक होता है।

3. ये शीत रुधिर वाले जन्तुओं में त्वक्पतन (moulting) को नियन्त्रित करते हैं।

(स) थाइमोसिन (Thymosin):
यह T – लिम्फोसाइट्स के प्रचुरोद्भवन (proliferation) एवं विभेदीकरण द्वारा शरीर की सुरक्षा करता है। ये जीवाणुओं के प्रतिजन (antigens) को नष्ट करने के लिए प्रतिरक्षी का निर्माण करती है।

(द) एन्ड्रोजेन (Androgens):
इन्हें पौरुष-विकास हॉर्मोन (masculinization hormones) कहते हैं। ये यहायक जनन ग्रन्थियों के विकास को प्रेरित करते हैं। इनके प्रभाव से नर लैंगिक लक्षणों; जैसे-दाढ़ी-मूंछ का उगना, आवाज का भारी होना, अस्थियों का मजबूत होना, पेशियों और शरीर की सुडौलता, कन्धों का फैलाव आदि लक्षणों का विकास होता है।

(य) एस्ट्रोजेन (Estrogens):
इनके कारण स्त्रियों में यौवनारम्भ (puberty) होता है। मासिक धर्म प्रारम्भ हो जाता है। स्तनों, दुग्ध ग्रन्थियों, गर्भाशय, योननि, लैबिया (labia) भगशिश्न (clitoris) आदि का विकास होता है। इस हॉर्मोन को नारी विकास (feminizing) हॉर्मोन कहते हैं।

(र) इन्सुलिन एवं ग्लूकैगॉन (Insulin and Glucagon):
ये कार्बोहाइड्रेट उपापचय का नियमन करते हैं। इन्सुलिन आवश्यकता से अधिक शर्करा को ग्लाइकोजन में बदलता है। इस क्रिया को ग्लाइकोजेनेसिस (glycogenesis) कहते हैं। ग्लाइकोजन शर्करा में संचित हो जाती है। रक्त में ग्लूकोस की मात्रा के कम होने पर ग्लूकैगॉन हॉर्मोन संचित ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में बदल देता है। इसे ग्लाइकोजेनोलिसिस (glycogenolysis) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
निम्न के उदाहरण दीजिए –
(अ) हाइपरग्लाइसीमिक हॉर्मोन एवं हाइपोग्लाइसीमिक हॉर्मोन
(ब) हाइपरकैल्सीमिक हॉर्मोन
(स) गोनेडोट्रॉपिक हॉर्मोन
(द) प्रोजेस्टेरॉनल हॉर्मोन
(य) रक्तदाब निम्नकारी हॉर्मोन
(र) एन्ड्रोजेन एवं एस्ट्रोजेन।
उत्तर:
(अ) हाईपरग्लाइसीमिक हॉर्मोनः जैसेग्लूकैगॉन (glucagon) एवं ग्लूकोकॉर्टिकोएड्स (glucocarticoids)

हाइपोग्लाइसीमिक हॉर्मोन; जैसे:
इन्सुलिन (insulin) एवं ग्लूकोकॉर्टिकॉएड्स।

(ब) हाइपरकैल्सीमिक हॉर्मोन; जैसे – पैराथॉर्मोन (Parathormone)।

(स) गोनेडोट्रॉफिक हॉर्मोन; जैसे – ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन (LH), पुटिका प्रेरक हॉर्मोन (FSH)।

(द) प्रोजेस्टेरॉनल हॉर्मोन; जैसे – प्रोजोस्टेरॉन (progesterone) हॉर्मोन।

(य) रक्तदाब निम्नकारी हॉर्मोन; जैसे – पेप्टाइड हॉर्मोन या (atrial natriuretic factor, ANF)।

(र) एन्ड्रोजेन (androgens); जैसे-टेस्टोस्टेरॉन (testosterone)

एवं एस्ट्रोजेन (Estrogens); pewmes:
एस्ट्रोन (estrone), एस्ट्रिओल (estriole)।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित विकार किस हॉर्मोन की कमी के कारण होते हैं –
(अ) डायबिटीज
(ब) गॉइटर
(स) क्रिटिनिज्म
उत्तर:
(अ) डायबिटीज-यह इन्सुलिन की कमी से होता है।
(ब) ग्वाइटर-यह थायरॉक्सिन की कमी से होता है।
(स) क्रिटिनिज्म-यह थायरॉक्सिन की कमी से होता है।

प्रश्न 8.
एफ० एस० एच० की कार्य-विधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एफ० एस० एच० की कार्य-विधि (Action Mechanism of FSH):
यह पुरुषों में वृषणों की शुक्रजनन नलिकाओं (seminiferous tubules) की वृद्धि तथा शुक्राणुजनन (spermatogenesis) को प्रेरित करता है। स्त्रियों में यह अण्डाशय की ग्रैफियन पुटिकाओं (Graafian follicles) की वृद्धि और विकास तथा अण्डजनन (oogenesis)) को प्रेरित करता है। यह मादा हॉर्मोन एस्ट्रोजेन (estrogen) के स्रावण को प्रेरित करता है।

ऋणात्मक पुनर्निवेशन नियन्त्रण में स्त्रियों में यह प्रमुख हॉर्मोन एस्ट्रोजन (estropgen) तथा पुरुषों में प्रमुख नर हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन (testosterone) FSH के स्रावण का अवरोध करते हैं। स्त्रियों में 40 वर्ष की आयु के बाद अण्डाशयों पर FSH का प्रभाव बहुत कम हो जाता है; अत: मासिक धर्म, अण्डजनन तथा मादा हॉर्मोन स्रावण आदि समाप्त होने लगते हैं। इस स्थिति को रजोनिवृत्ति कहते हैं।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित के जोड़े बनाइए –
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उत्तर:
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Bihar Board Class 11 Physics कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 7.1
एक समान द्रव्यमान घनत्व के निम्नलिखित पिंडों में प्रत्येक के द्रव्यमान केंद्र की अवस्थिति लिखिए:
(a) गोला
(b) सिलिंडर
(c) छल्ला तथा
(d) घन। क्या किसी पिंड का द्रव्यमान केंद्र आवश्यक रूप से उस पिंड के भीतर स्थित होता है?
उत्तर:
(a) गोला
(b) सिलिंडर
(c) छल्ला व
(d) घन, चारों का द्रव्यमान केन्द्र उनका ज्यामितीय केन्द्र होता है। नहीं, जहाँ कोई पदार्थ नहीं है। जैसे वलय, खोखले सिलिंडर व खोखले गोले में द्रव्यमान केन्द्र पिंड के बाहर भी हो सकता है।

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प्रश्न 7.2
HCL अणु में दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच पृथकन लगभग 1.27 Å (1Å = 10-10 m) है। इस अणु के द्रव्यमान केंद्र की लगभग अवस्थिति ज्ञात कीजिए।यह ज्ञात है कि क्लोरीन का परमाणु हाइड्रोजन के परमाणु की तुलना में 35.5 गुना भारी होता है तथा किसी परमाणु का समस्त द्रव्यमान उसके नाभिक पर केंद्रित होता है।
उत्तर:
माना द्रव्यमान केन्द्र H परमाणु से x दूरी पर है। माना हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान, m1 = m
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तथा क्लोरीन परमाणु का द्रव्यमान m2 = 35.5 m
माना द्रव्यमान केन्द्र (मूलबिन्दु) के सापेक्ष H व Cl \(\vec{r}_{1}\) व \(\vec{r}_{2}\) दूरी पर है।
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या m1\(\vec{r}_{1}\) + m2\(\vec{r}_{2}\) = 0 यहाँ
\(\vec{r}_{1}\) = – x\(\hat { i } \) व \(\vec{r}_{2}\) = (1.27 – x)\(\hat { i } \)
∴ m(-x\(\hat { i } \)) + 35.5m (1.27 – x) \(\hat { i } \) = 0
∴ m(-x\(\hat { i } \)) + 35.5m (1.27 – x)\(\hat { i } \) = 0
∴ x = \(\frac{35.5×1.27}{36.5}\)
= 1.235 = 1.2 Å
अर्थात् द्रव्यमान केन्द्र H – परमाणु से 1.24 Å की दूरी पर Cl परमाणु की ओर है।

प्रश्न 7.3
कोई बच्चा किसी चिकने क्षैतिज फर्श पर एकसमान चाल v से गतिमान किसी लंबी ट्राली के एक सिरे पर बैठा है। यदि बच्चा खड़ा होकर ट्राली पर किसी भी प्रकार से दौड़ने लगता है, तब निकाय (ट्राली + बच्चा) के द्रव्यमान केंद्र की चाल क्या है?
उत्तर:
प्रश्नानुसार, ट्राली एक चिकने क्षैतिज फर्श पर गति कर रही है। इसलिए फर्श के चिकना होने के कारण निकाय पर क्षैतिज दिशा में कोई बाह्य बल नहीं लगता है। परन्तु जब बच्चा दौड़ता है तब बच्चे द्वारा ट्राली पर व ट्राली द्वारा बच्चे पर लगाए गए दोनों ही बल आन्तरिक बल होते हैं।
∴ \(\vec{F}\)ext = 0
संवेग संरक्षण के नियमानुसार M\(\vec{V}\)cm = नियतांक
∴ \(\vec{V}\)cm = नियतांक
अतः द्रव्यमान केन्द्र की स्थित चाल होगी।

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प्रश्न 7.4
दर्शाइये कि a एवं b के बीच बने त्रिभुज का क्षेत्रफल a × b के परिमाण का आधा है।
उत्तर:
माना ∆AOB की संलग्न भुजाओं के सदिश \(\vec{a}\) व \(\vec{b}\)
∴ \(\vec{O}\)A – \(\vec{b}\), \(\vec{O}\)B + \(\vec{a}\) या OA = b, OB = a
माना \(\bar{a}\) तथा \(\bar{b}\) के बीच कोण θ है।

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तथा माना त्रिभुज की ऊँचाई h है।
∴ h = AC
समकोण ∆OCA में,
sin θ = \(\frac{AC}{OA}\)
या AC = OA sin θ
या h = b sin θ …………… (i)
हम जानते हैं कि त्रिभुज AOB का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × आधार × ऊँचाई
= \(\frac{1}{2}\) × OB × AC = \(\frac{1}{2}\) × a × h
= \(\frac{1}{2}\) × a × b sin θ
= \(\frac{1}{2}\) ab sin θ ………………. (ii)
पुनः सदिश गुणन के नियम से
\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\) = ab sin θ \(\hat { n } \)
या |\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\)| = |ab sin θ \(\hat { n } \)]
= ab sin θ [∵|\(\hat { n } \)| = 1] …………….. (iii)
∆AOB का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) |\(\vec{a}\) × \(\vec{b}\)|
= \(\frac{1}{2}\) \(\vec{a}\) × \(\vec{b}\) का परिमाण।

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प्रश्न 7.5
दर्शाइये कि a (bx c) का परिमाण तीन सदिशों a, b एवं c से बने समान्तर षट्फलक के आयतन के बराबर है।
उत्तर:
माना OABCDEFG एक समान्तर षट्फलक है जिसकी भुजाएँ क्रमश: OA, OC व OE हैं।
माना कि \(\vec{O}\)A = \(\vec{b}\), \(\vec{O}\)C = व \(\vec{O}\)E = \(\vec{a}\)
यहाँ \(\bar{a}\) व समान्तर चतुर्भुज OABC की संलग्न भुजाएँ हैं।
∴ \(\vec{S}\) = \(\vec{b}\) × \(\vec{c}\) = s\(\hat { n } \)
जहाँ \(\hat { n } \), \(\vec{S}\) के अनुदिश एकांक सदिश है जो कि भुजाओं \(\vec{b}\) व \(\vec{c}\) कोण तल के लम्बवत् है, व S तल OABC का क्षेत्रफल है। माना \(\vec{a}\), \(\vec{s}\) से θ कोण पर है।
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∴ \(\vec{a}\) (\(\vec{b}\) × \(\vec{c}\)) = \(\vec{a}\).\(\vec{s}\) = \(\vec{a}\).\(\hat { n } \)S
= a cos θ.S
= hS ……….. (i)
जहाँ h = a cos θ = \(\vec{a}\) के शीर्ष द्वारा समचतुर्भुज OABC पर डाला गया लम्ब EE’ \(\bar{a}\) की ऊँचाई।
पुनः माना V = समषट्फलक OABC = DEFG का आयतन है।
∴ V = तल OABC का क्षेत्रफल × OABC तल पर E से अभिलम्ब
= S × h
समी० (i) व (ii) से,
v = \(\vec{a}\).(\(\vec{b}\) × \(\vec{c}\)) इति सिद्धम्

प्रश्न 7.6
एक कण, जिसके स्थिति सदिश r के x, y, z अक्षों के अनुदिश अवयव क्रमशःx, y, हैं,और रेखीय संवेग सदिश P के अवयव px, Py, Pz हैं, के कोणीय संवेग 1 के अक्षों के अनुदिश अवयव ज्ञात कीजिए। दर्शाइये, कि यदि कण केवल x – y तल में ही गतिमान हो तो कोणीय संवेग का केवल z – अवयव ही होता है।
उत्तर:
माना OX, OY तथा OZ तीन परस्पर लम्बवत् अक्ष हैं। माना x – y तल में स्थिति सदिश \(\vec{O}\)P = \(\vec{r}\) एक बिन्दु P है।
माना रेखीय संवेग \(\vec{P}\) का \(\hat{r}\) से कोण θ है व कोणीय संवेग \(\vec{L}\)। है।
∴ \(\vec{L}\) = \(\hat{r}\) × \(\hat{p}\) …………….. (i)
यह एक संवेग राशि है जिसकी दिशा दाएँ हाथ के नियम से दी जा सकती है। चूँकि \(\hat{r}\) व \(\hat{p}\) तल OXY में हैं।
अतः
\(\vec{r}\) = x\(\hat{i}\) + y\(\hat{j}\) + z\(\hat{k}\)
तथा \(\vec{p}\) = px\(\hat{i}\) + py\(\hat{j}\) + pz\(\hat{k}\) ………….. (ii)
∴ समी० (i) व (ii) से,
\(\vec{L}\) = (x\(\hat{i}\) + y\(\hat{j}\) + z\(\hat{k}\)) × (px\(\hat{i}\) + py\(\hat{j}\) + pz\(\hat{k}\))
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तुलना करने पर,
Lx = yPz – zpy
Ly = zPx – xPz
Lz = xpy – ypx …….. (iii)
समी० (iii) से, x, y व z – अक्षों के अनुदिश \(\vec{z}\) के अभीष्ट घटक प्राप्त होते हैं।

(b) हम जानते हैं कि xy – तल में गतिमान कण पर लगने वाला बलाघूर्ण
iz = xFy – yFz ………….. (i)
जहाँ \(\hat{i}\)z = xy तल में गतिमान गण z अक्ष के अनुदिश लगने वाले बलाघूर्ण का घटक है।
माना xy – \(\vec{v}\) तल में वेग से गतिमान कण का द्रव्यमान = m
इस वेग के vx, व vy घटक क्रमश: x व y – दिशा में हैं। न्यूटन के गति के दूसरे समी० से,
Fx = \(\frac{d}{dt}\) (Px) = \(\frac{d}{dt}\) (mvx) = m\(\frac{d v_{x}}{d t}\)
तथा Fy = \(\frac{d}{dt}\)(Py) = m.\(\frac{d v_{y}}{d t}\) …………….. (ii)
∴ समी० (i) व (ii) से,
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∴ समी० (iii) व (iv) से,
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∴ समी० (v) व (vi) से,
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अतः समीकरण (vii) से यह निष्कर्ष निकलता है, कि xy – तल में गतिमान कण का कोणीय वेग (\(\vec{L}\)) का केवल एक घटक अर्थात् z – अक्ष के अनुदिश है।

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प्रश्न 7.7
दो कण जिनमें से प्रत्येक का द्रव्यमान m एवं चाल v है d दूरी पर, समान्तर रेखाओं के अनुदिश, विपरीत दिशाओं में चल रहे हैं। दर्शाइये कि इस द्विकण निकाय का सदिश कोणीय संवेग समान रहता है, चाहे हम जिस बिन्दु के परितः कोणीय संवेग लें।
उत्तर:
माना दूरी पर दो समान्तर रेखाओं के अनुदिश गतिमान प्रत्येक कण का द्रव्यमान m है।
माना v प्रत्येक कण विपरीत दिशा में चाल है।
माना कि क्षण t व कण P1 व P2, बिन्दुओं O पर हैं। अब इन दोनों कणों द्वारा बनाए गए निकाय का किसी बिन्दु O के परितः कोणीय संवेग ज्ञात करते हैं। माना प्रत्येक कण का कोणीय संवेग \(\vec{L}\)1 व \(\vec{L}\)2 है।
∴ \(\vec{L}\)1 = \(\vec{r}\)1 × m\(\vec{v}\)
माना कि निकाय का कोणीय संवेग \(\vec{L}\) है।
∴ \(\vec{L}\) = \(\vec{L}\)1 – \(\vec{L}\)2
= \(\vec{r}\)1 × m\(\vec{v}\) – \(\vec{r}\)2 × m\(\vec{v}\)
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अथवा |\(\vec{L}\)| = |\(\vec{L}\)1| – |\(\vec{L}\)2||
= mvr1 sin θ1 – mvr2 sin θ2 ……………. (i)
जहाँ θ1 व θ2, क्रमश: \(\vec{r}\)1, \(\vec{v}\) व \(\vec{r}\)2(-\(\vec{v}\)) के बीच कोण हैं। (चित्र) चूँकि कण की स्थिति समय के सापेक्ष परिवर्तित होती है।
अतः \(\vec{v}\) की दिशा समान रेखा में होगी तथा OM = r1 sin θ1 – r2 sin θ2 = d ……………. (ii)
समी० (i) व (ii) से,
L = mvd
\(\vec{L}\) की दिशा भी \(\vec{r}\) व \(\vec{v}\) के तल के लम्बवत् होती है। जोकि कागज के तल में होगी। यह दिशा समय के साथ अपरिवर्तित रहती है। अर्थात् \(\vec{L}\) परिमाण व दिशा में समान रहता है। अतः यह संरक्षित रहता है।

प्रश्न 7.8
W भार की एक असमांग छड़ को, उपेक्षणीय भार वाली दो डोरियों से चित्र में दर्शाये अनुसार लटका कर विरामावस्था में रखा गया है। डोरियों द्वारा ऊर्ध्वाधर से बने कोण क्रमशः 36.9° एवं 53.1° हैं। छड़ 2 m लम्बाई की है। छड़ के बाएँ सिरे से इसके गुरुत्व केन्द्र की दूरी d ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
माना एक समान छड़ AB का भार W2 है। यह छड़ दो डोरियों OA व O’B से लटकायी गई है। ऊर्ध्वाधर से OA छड़ से 36.9° व O’B छड़ से 53.1° कोण पर है।
<OAA’ = 90° – 36.9°
= 53.1°
इसी प्रकार, <O’ BB’ = 36.9°
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AB – 2M, AC = d मीटर
माना डोरी OA व O’B में तनाव क्रमशः T1 व T2 है। यहाँ वियोजित घटक चित्रानुसार होंगे।
चूँकि छड़ विराम में है, अत: A’B’ अक्ष के अनुदिश व लम्बवत् लगने वाले बलों का सदिश योग शून्य है। अतः
– T1 cos 53.1° + T2 cos 36.9° = 0 ……………. (i)
तथा T1 sin 53.1° + T2 sin 36.9° – W = 0 ………………. (ii)
A के परित: बलाघूर्ण लेने पर व बलाघूर्णों के योग का शून्य रखने पर –
– (T2 sin 36.9°) × 2 + Wd = 0
या T2 = \(\frac{Wd}{2 sin 36.9°}\) …………… (iii)
∴ समी० (ii) व (iii) से,
T1 sin 53.1° = W – T2 36.9°
= W – \(\frac{Wd}{2}\)
∴ T1 = \(\frac{Wd}{sin 53.1°}\) (1 – \(\frac{d}{2}\)) …………….. (iv)
∴ समी० (i), (iii) व (iv) से,
T1 cos 53.1° = T2 cos36.9°
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या 0.5d + 0.8870d = 1
या d = \(\frac{1}{1.3870}\)d = 1
या d = \(\frac{1}{1.3870}\) = 0.721
m = 72.1 सेमी

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प्रश्न 7.9
एक कार का भाग 1800 kg है। इसकी अगली और पिछली धुरियों के बीच की दूरी 1.8 m है। इसका गुरुत्व केन्द्र, अगली धुरी से 1.05 m पीछे है। समतल धरती द्वारा इसके प्रत्येक अगले और पिछले पहियों पर लगने वाले बल की गणना कीजिए।
उत्तर:
माना आगे के पहिए का द्रव्यमान = m ग्राम
∴ (900 – m) kg = प्रत्येक पहिए का द्रव्यमान
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∴ m × 1.05 =(900 – m) × 0.75
या 1.8m = 900 × 0.75
या m = 375 kg
∴ 900 – m = 525 kg
आगे के प्रत्येक पहिये का भार,
W1 = mg = 375 × 9.8
= 3675 न्यूटन
पीछे के प्रत्येक पहिये का भार,
W2 = 525 × 9.8
= 5145 न्यूटन
पृथ्वी द्वारा पहिये पर आरोपित बल = पृथ्वी की प्रतिक्रिया
W2 = 3675 न्यूटन
इसी प्रकार, प्रत्येक पीछे के पहिये पर पृथ्वी द्वारा आरोपित बल = पृथ्वी की प्रतिक्रिया
W2 = 5145 न्यूटन

प्रश्न 7.10
(a) किसी गोले का, इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण 2MR2/5है, जहाँ M गोले का द्रव्यमान एवं R इसकी त्रिज्या है। गोले पर खींची गई स्पर्श रेखा के परितः इसका जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए। (b) M द्रव्यमान एवं R त्रिज्या वाली किसी डिस्क का इसके किसी व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण MR2/4 है। डिस्क के लम्बवत् इसकी कोर से गुजरने वाली अक्ष के परितः इस चकती का जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) माना व्यास AB के परित: R त्रिज्या के गोले का जड़त्व आघूर्ण IAB है। जबकि गोले का द्रव्यमान m है।
∴ IAB = \(\frac{2}{5}\) MR2
माना गोले के व्यास AB के समान्तर स्पर्शी CD है।
∴ समान्तर x – अक्षों की प्रमेय से,
स्पर्श रेखा के परितः गोले का जड़त्व आघूर्ण
ICD = IAB + MR2
= \(\frac{2}{5}\) MR2 + MR2
= \(\frac{7}{5}\) MR2
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(b) माना M द्रव्यमान तथा R त्रिज्या के गोले के दो कास AB व CD हैं। माना चकती के लम्बवत् इसके द्रव्यमान केन्द्र O से गुजरने वाली अक्ष EF है। चकती के लम्बवत् अक्ष DG है जोकि चकती की परिधि पर स्थित बिन्दु D से गुजरती है। अर्थात् DG, EF के समान्तर है। माना चकती का EF अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण IEF है।
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∴ लम्बवत् अक्षों की प्रमेय से,
IEE = IAB + ICD
= \(\frac{1}{2} M R^{2}\) + MR2 = \(\frac{3}{2} M R^{2}\)

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प्रश्न 7.11
समान द्रव्यमान और त्रिज्या के एक खोखले बेलन और एक ठोस गोले पर समान परिमाण के बल आघूर्ण लगाये गये हैं। बेलन अपनी सामान्य सममित अक्ष के परितः घूम सकता है और गोला अपने केन्द्र से गुजरने वाली किसी अक्ष के परितः एक दिये गये समय के बाद दोनों में कौन अधिक कोणीय चाल प्राप्त कर लेगा?
उत्तर:
माना खोखले बेलन व ठोस गोले के द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R हैं।
माना खोखले बेलन का सममित के परित: जड़त्व आघूर्ण L1 है तथा ठोस गोले का केन्द्र के परितः जड़त्व आघूर्ण I2 है।
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माना प्रत्येक पर लगाया गया बलाघूर्ण \(\hat { i } \) है। माना α1 व α2, क्रमश: बेलन व गोले पर कोणीय त्वरण हैं।
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माना ω1, व ω2 किसी क्षण t पर बेलन व गोले की कोणीय चाल है।
∴ ω1 = ω0 + α1t ………….. (iv)
व ω2 = ω0 + α2t
= ω0 + 2.5 α1t
समी० (iv) व (v) से
ω2 > ω1 अर्थात् गोले की कोणीय चाल बेलन से अधिक होगी।

प्रश्न 7.12
20 kg द्रव्यमान का कोई ठोस सिलिंडर अपने अक्ष के परितः 100 rad s-1 की कोणीय चाल से घूर्णन कर रहा है। सिलिंडर की त्रिज्या 0.25 m है। सिलिंडर के घूर्णन से संबद्ध गतिज ऊर्जा क्या है? सिलिंडर का अपने अक्ष के परितः कोणीय संवेग का परिमाण क्या है?
उत्तर:
दिया है:
m = 20 किग्रा
R = 0.25 मीटर
ω = 100 रेडियन प्रति सेकण्ड
माना बेलन की अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण I है
तब I = \(\frac{1}{2} M R^{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) × 20 × (0.25)2
= 0.625 किग्रा-मीटर2
∴ घूर्णन करते बेलन की गतिज ऊर्जा
K.E. = \(\frac{1}{2}\) Iω2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.625 × (100)2
= \(\frac{1}{2}\) × 0.625 × \(\frac{10^{4}}{10^{3}}\) =3125 JKE
हम जानते हैं कि,
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= 62.5 JS

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प्रश्न 7.13
(a) कोई बच्चा किसी घूर्णिका (घूर्णीमंच) पर अपनी दोनों भुजाओं को बाहर की ओर फैलाकर खड़ा है। घूर्णिका को 40 rev/min की कोणीय चाल से घूर्णन कराया जाता है। यदि बच्चा अपने हाथों को वापस सिकोड़ कर अपना जड़त्व आघूर्ण अपने प्रारंभिक जड़त्व आघूर्ण का 2/5 गुना कर लेता है, तो इस स्थिति में उसकी कोणीय चाल क्या होगी? यह मानिए कि घूर्णिका की घूर्णन गति घर्षणरहित है।
(b) यह दर्शाइए कि बच्चे की घूर्णन की नयी गतिज ऊर्जा उसकी आरंभिक घूर्णन की गतिज ऊर्जा से अधिक है। आप गतिज ऊर्जा में हुई इस वृद्धि की व्याख्या किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
(a) माना बच्चे का प्रारम्भिक व अन्तिम जड़त्व आघूर्ण क्रमशः I1 व I2 है।
अतः
∴ I2 = \(\frac{2}{5}\) I1 दिया है।
v1 = 40 rev/min = \(\frac{40}{60}\) rev/min
v2 = ?
∴ ω1 = 2πv1
= \(\frac{2π×40}{60}\) rads-1
= \(\frac{4}{5}\) π रेडियन प्रति सेकण्ड
माना बच्चे को बाहर की ओर हाथ फैलाकर व सिकोड़कर घूर्णीय चाल क्रमश: ω1, व ω2 है।
रेखीय संवेग संरक्षण के नियम से,
I1ω1 = I2ω2
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∴ घूर्णन आवृत्ति v2
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= 100 चक्र प्रति मिनट
∴ v2 = 100 चक्र प्रति मिनट

(b) घूर्णन की प्रा० गतिज ऊर्जा
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स्पष्ट है कि हाथ सिकोड़कर बच्चे की घूर्णन गतिज ऊर्जा, घूर्णन की प्रा० गतिज ऊर्जा से \(\frac{5}{2}\) गुना अधिक है। अन्तिम स्थिति में गतिज ऊर्जा में वृद्धि, बच्चे की आन्तरिक ऊर्जा के कारण होती है।

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प्रश्न 7.14
3 kg द्रव्यमान तथा 40 cm त्रिज्या के किसी खोखले सिलिंडर पर कोई नगण्य द्रव्यमान की रस्सी लपेटी गई है। यदि रस्सी को 30 Nबल से खींचा जाए तो सिलिंडर का कोणीय त्वरण क्या होगा? रस्सी का रैखिक त्वरण क्या है? यह मानिए कि इस प्रकरण में कोई फिसलन नहीं है।
उत्तर:
दिया है:
बेलन का द्रव्यमान,
M = 3 kg
बेलन की त्रिज्या R = 0.4 m
स्पर्शरेखीय बल F = 30 N
a = ?
α = ?
माना खोखले बेलन का अक्ष के परितः जड़त्व घूर्णन है।
अतः I = MR2
= 3(0.4)2
= 0.48 kg m2
माना बेलन पर आरोपित बलाघूर्णन t है।
अतः τ = FR = 30 × 0.4 = 12 Nm
∴ α = \(\frac{τ}{1}\) = \(\frac{12}{0.48}\) = 25 rad-2
α = Rα = 0.4 × 25

प्रश्न 7.15
किसी घूर्णक (रोटर) की 200 rads-1 की एकसमान कोणीय चाल बनाए रखने के लिए एक इंजन द्वारा 180 Nm का बल आघूर्ण प्रेषित करना आवश्यक होता है। इंजन के लिए आवश्यक शक्ति ज्ञात कीजिए। (नोट : घर्षण की अनुपस्थिति में एकसमान कोणीय वेग होने में यह समाविष्ट है कि बल का आघूर्ण शून्य है। व्यवहार में लगाए गए बल आघूर्ण की आवश्यकता घर्षणी बल आघूर्ण को निरस्त करने के लिए होती है।) यह मानिए कि इंजन की दक्षता 100% है।
उत्तर:
दिया है:
ω = 200 रेडियन प्रति सेकण्ड
τ = 180 न्यूटन मीटर
P = ?
सम्बन्ध P = τw से,
P = 180 × 200
= 36000 वॉट
= 36 किलो वॉट

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प्रश्न 7.16
R त्रिज्या वाली समांग डिस्क से R/2 त्रिज्या का एक वृत्ताकार भाग काट कर निकाल दिया गया है। इस प्रकार बने वृत्ताकार सुराख का केन्द्र मूल डिस्क के केन्द्र से R/2 दूरी पर है। अवशिष्ट डिस्क के गुरुत्व केन्द्र की स्थिति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
प्रारम्भिक चकती की त्रिज्या = R
काटकर अलग की गई चकती की त्रिज्या = \(\frac{R}{2}\)
माना A व a चकतियों के क्षे० हैं।
अतः A = πR2
तथा a = π(\(\frac{R}{2}\))2 = \(\frac{\pi R^{2}}{4}\)
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यहाँ O प्रारम्भिक चकती का केन्द्र है।
तथा O1 अलग किए गए गोल भाग का केन्द्र है।
व O2 बचे हुए भाग का केन्द्र है।
p = डिस्क का प्रति एकांक क्षेत्रफल द्रव्यमान है।
माना m1 व m वास्तविक चकती व अलग किए गए चकती के द्रव्यमान है।
अतः m1 = ρA = πR2ρ
तथा m = ρa = \(\frac{\pi R^{2}}{4}\)ρ
माना शेष बचे भाग का द्रव्यमान m है।
अतः m2 = m1 – m
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माना मूल बिन्दु O है।
माना Rcm बचे भाग का द्रव्यमान केन्द्र है।
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ऋणात्मक चिह्न यह व्यक्त करता है कि बचे भाग का द्रव्यमान केन्द्र O से बाईं ओर है जोकि कटे भाग के केन्द्र के विपरीत ओर है।

प्रश्न 7.17
एक मीटर छड़ के केन्द्र के नीचे क्षुर – धार रखने पर वह इस पर संतुलित हो जाती है जब दो सिक्के, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 5g है, 12.0 cm के चिह्न पर एक के ऊपर एक रखे जाते हैं तो छड़ 45.0 cm चिह्न पर संतुलित हो जाती है। मीटर छड़ का द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
माना m ग्राम = द्रव्यमान/छड़ की ल० सेमी
माना m मीटर का कुल द्रव्यमान व m = 100 ग्राम है।
जब मीटर केन्द्र पर सन्तुलित होता है, तब प्रत्येक भाग का द्रव्यमान = 50 मी/ग्राम
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माना 12 सेमी चिह्न पर रखे दो सिक्कों का द्रव्यमान m2 है।
m2 = 5 × 2 = 10 ग्राम
द्रव्यमान केन्द्र = 45 सेमी के चिह्न पर (बिन्दु A)
चूँकि छड़ी सन्तुलन में है। अतः बिन्दु A के परित: अलग-अलग द्रव्यमानों का आघूर्ण समान है।
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या (3025 – 1089 – 936)
m = 330 × 2 = 660
या 1000m = 660
या m = 0.66 ग्राम
M = 100m = 100 × 0.66 = 66 ग्राम

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प्रश्न 7.18
एक ठोस गोला, भिन्न नति के दो आनत तलों पर एक ही ऊँचाई से लुढ़कने दिया जाता है।
(a) क्या वह दोनों बार समान चाल से तली में पहुँचेगा?
(b) क्या उसको एक तल पर लुढ़कने में दूसरे से अधिक समय लगेगा?
(c) यदि हाँ, तो किस पर और क्यों?
उत्तर:
माना तल – 1 पर निम्न बिन्दु से शिखर तक चली दूरी व झुकाव क्रमशः l2 व θ1 है।
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तथा तल – 2 पर निम्न बिन्दु से शिखर तक चली दूरी व झुकाव क्रमश: l2 व θ2 है।
स्पष्ट है कि θ1 > θ2
∴ sin θ1 > sin θ2
या \(\frac{\sin \theta_{1}}{\sin \theta_{2}}>1\) > 1 …………….. (i)
प्रत्येक झुके तल की ऊँचाई,
λ = 14 l1 sinθ 1 = l2 sin θ2 (a) है।
तल के शिखर पर, गोले में केवल स्थितिज ऊर्जा होगी। i.e., PE = mgh
जहाँ m = गोले का द्रव्यमान है।
जब गोला शिखर से निम्न बिन्दु तक लुढ़कता है, तो स्थितिज ऊर्जा, रैखिक गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2}\) Iω2) में परिवर्तित हो जाती है। जहाँ I गोले का जड़त्वाघूर्ण है। माना तल के निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग v व कोणीय चाल के ω है।
माना v1 व v2 क्रमशः दोनों तलों (1 व 2) पर निम्न बिन्दु पर रेखीय वेग है।
अत:
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जहाँ K घूर्णन त्रिज्या है।
समी० (ii) व (iii) से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थिति में गोला निम्न बिन्दु पर समान वेग से लौटता है।

(b) हाँ, यह तल – 1 पर तल – 2 से अधिक समय लेगा। यह समय कम झुकाव वाले तल के लिए अधिक होगा।
व्याख्या: माना तल – 1 व तल – 2 पर फिसलने में लिया गया समय क्रमशः t1 व t2 है।
ठोस गोले के लिए,
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हम जानते हैं कि, झुके तल पर वस्तु का त्वरण निम्न है –
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जहाँ θ = झुकाव
माना झुके तल – 1 व 2 पर गोले के त्वरण क्रमशः a1 व a2 है।
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पुनः माना तल 1 व 2 पर फिसलने का समय क्रमश: t1 व t2 2 है। अतः
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 से,
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समी० (iv) को भाग देने पर
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समी० (vi) व (vii) से,
\(\frac{t_{1}}{t_{2}}\) < 1 t1 < t2
समय t, झुकाव कोण θ पर निर्भर करता है। अतः झुकाव कोण जितना कम होगा, गोला लुढ़कने में उतना ही अधिक समय लेगा।

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प्रश्न 7.19
2 m त्रिज्या के एक वलय (छल्ले) का भार 100 kg है। यह एक क्षैतिज फर्श पर इस प्रकार लोटनिक गति करता है कि इसके द्रव्यमान केन्द्र की चाल 20 cm/s हो। इसको रोकने के लिए कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
दिया है:
r = 2 मीटर
m = 100 किग्रा
द्रव्यमान केन्द्र का वेग,
y = 20 cms-1
= 0.20 मीटर/सेकण्ड
रोकने में व्यय कार्य = ?
माना वलय का कोणीय वेग ω है।
अतः ω = \(\frac{v}{r}\) = \(\frac{0.20}{2}\) = 0.10 सेकण्ड/से०
माना वलय का केन्द्र से गुजरती व तल के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्वाघूर्णन I है।
1 = mr2
= 100 × (2)2
= 400 kgm2
वलय की सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा =वलय की घूर्णन गतिज ऊर्जा + वलय की रेखीय गतिज ऊर्जा
या
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= 2 + 2 + 4J
∴ कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
रोकने में व्यय कार्य = वलय की सम्पूर्ण KE
= 4 जूल

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प्रश्न 7.20
ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान 5.30 × 10-26 kg है तथा इसके केन्द्र से होकर गुजरने वाली और इसके दोनों परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण 1.94 × 10-46 kg m2 है। मान लीजिए कि गैस के ऐसे अणु की औसत चाल 500 m/s है और इसके घूर्णन की गतिज ऊर्जा, स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा की दो तिहाई है। अणु का औसत कोणीय वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
ऑक्सीजन अणु का द्रव्यमान
m = 5.30 × 10-26 किग्रा
ऑक्सीजन अणु का जड़त्वाघूर्णन
I = 1.94 × 10-46 किग्रा – मीटर
अणु का मध्य वेग v = 500 ms-1
औसत कोणीय चाल = ?
प्रश्नानुसार, घूर्णन की गतिज ऊर्जा,
\(\frac{2}{3}\) × रैखिक गतिज ऊर्जा KE
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प्रश्न 7.21
एक बेलन 30° कोण बनाते आनत तल पर लुढ़कता हुआ ऊपर चढ़ता है। आनत तल की तली में बेलन के द्रव्यमान केन्द्र की चाल 5 m/s है।
(a) आनत तल पर बेलन कितना ऊपर जायेगा?
(b) वापस तली तक लौट आने में इसे कितना समय लगेगा?
उत्तर:
दिया है:
θ = 30°
तलों में बेलन के द्रव्यमान केन्द्र की चाल, u = 5 मीटर/सेकण्ड

(a) आनत तल पर लुढ़कते बेलन का त्वरण = -a
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माना बेलन ठोस है, तब K2 = \(\frac{R^{2}}{2}\)
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माना तल पर चली दूरी S है।
∴ v = 0
सूत्र v2 = u2 = 2as से,

(b) माना तली तक आने में बेलन को T समय लगता है।
∴ T = 2t जहाँ t आने या जाने का समय है।
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s = 3.83 मीटर
दिया है:
प्रा० वेग = 0
∴ सूत्र s = ut + \(\frac{1}{2}\) at2 से,
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प्रश्न 7.22
जैसा चित्र में दिखाया गया है, एक खड़ी होने वाली सीढ़ी के दो पक्षों BA और CA की लम्बाई 1.6 m है और इनको A पर कब्जा लगा कर जोड़ा गया है। इन्हें ठीक बीच में 0.5 m लम्बी रस्सी DE द्वारा बाँधा गया है। सीढ़ी BA के अनुदिश B से 1.2 m की दूरी पर स्थित बिन्दु F से 40 kg का एक भार लटकाया गया है। यह मानते हुए कि फर्श घर्षण रहित है और सीढ़ी का भार उपेक्षणीय है, रस्सी में तनाव और सीढ़ी पर फर्श द्वारा लगाया गया बल ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s2 लीजिए) (संकेत : सीढ़ी के दोनों ओर के संतुलन पर अलगअलग विचार कीजिए)
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उत्तर:
दिया है:
AB = AC = 1.6 मीटर
DE = 0.5 मीटर
AD = DB = AE = EC = \(\frac{1.6}{2}\) = 0.8 मीटर
BF = 1.2 मीटर
AF = 0.4 मीटर
माना रस्सी में तनाव = T
फर्श द्वारा सीढ़ी पर बिन्दु B व C पर आरोपित बल
= N’B NC = ?
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W = 40 kg wt = 40 × 9.8 N = 392 N
माना = A’ = DE का मध्य बिन्दु
∴ DA’ = \(\frac{5}{2}\) = 25 m
DF’ = 125 m चित्र में स्पष्ट है कि
NB = Nc = W = 392 N ………… (i)
माना सीढ़ी AB व AC अलग-अलग सन्तुलन में है। A के परितः विभिन्न बलों का आघूर्ण लेने पर
NB × BC’ = W × DF’ + T × AA’ (AB सीढ़ी के लिए)
या NB × AB cos θ
= W × 0.125 + T × 0.8 sin θ ……………. (ii)

इसी सीढ़ी AC के लिए,
या NC × CC’ = T × AA’
या NC × AC cos θ = T × 0.8 sin θ ……………… (iii)

∆DEF’ में,
cos θ = \(\frac{DF’}{DF}\) = \(\frac{0.125}{0.4}\)
= 0.3125 = cos θ 72.8°
∴ θ = 72.8′
∴ sin θ = 0.9553
tan θ = 3.2305
∴ समी० (ii) व (iv) से,
NB × 0.6 × 0.135 = 0.392 × 0.125 + T × 0.8 × 0.9553
या 0.5 NB = 0.764 + 49 …………… (v)
इसी प्रकार,
NC + 1.6 × 0.3125 = T × 0.8 × 0.9553
या 0.5NC = 0.764T
समी० (v) व (vi) से,
NC + 1.6 × 0.3125 = T × 0.8 x 0.9553
या 0.5NC = 0.764T …………… (vi)
समी० (v) व (vi) से,
0.5NB = 0.5NC + 49
या \(\frac{1}{2}\) (NB – NC) = 49
या NB – NC = 98 ………….. (vii)
समी० (i) व (vii) को जोड़ने पर,
2NB = 392 + 98 = 450
∴ NB = 225 N
∴ NC = NB – 98
= 225 – 98 = 147 N ……. (viii)
∴ समी० (vi) व (viii) से,
0.5 × \(\frac{147}{0.764}\) = 96.2 N

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प्रश्न 7.23
कोई व्यक्ति एक घूमते हुए प्लेटफॉर्म पर खड़ा है। उसने अपनी दोनों बाहें फैला रखी हैं और उनमें से प्रत्येक में 5 kg भार पकड़ रखा है। प्लेटफॉर्म का कोणीय चाल 30 rev/min है। फिर वह व्यक्ति बाहों को अपने शरीर के पास ले आता है जिससे घूर्णन अक्ष से प्रत्येक भार की दूरी 90 cm से बदल कर 20 cm हो जाती है। प्लेटफॉर्म सहित व्यक्ति के जड़त्व आघूर्ण का मान 7.6 kg m2 ले सकते हैं।
(a) उसका नया कोणीय वेग क्या है? (घर्षण की उपेक्षा कीजिए)
(b) क्या इस प्रक्रिया में गतिज ऊर्जा संरक्षित होती है? यदि नहीं, तो इसमें परिवर्तन का स्त्रोत क्या है?
उत्तर:
दिया है:
प्रत्येक हाथ में द्रव्यमान = 5 किग्रा
r1 = 90 cm = 0.90 मीटर
r2 = 20 cm = 0.20 मीटर
आदमी तथा प्लेटफॉर्म का जड़त्व आघूर्ण,
1 = 7.6 kgm2
माना r1 व r2 दूरी पर जड़त्वाघूर्ण क्रमशः I’1 व I’2 है।
तब सूत्र I = mr2 से,
I’1 = 2m × \(r_{\mathrm{1}}^{2}\)
= 2 × 5 × (0.2)2
= 8.1 kgm2
I’2 = 2m × \(r_{\mathrm{2}}^{2}\)
= 2 × 5 × (0.2)2
= 0.4 kgm2
माना r1 व r2 दूरी पर निकाय (व्यक्ति + भार + प्लेटफॉर्म) का जड़त्वाघूर्ण क्रमशः
I1 व I है।
तब –
I1 = I’1 + I = 8.1 + 7.6 = 15.7 kgm2 तथा
I2 = I’2I
= 0.4 + 7.6 = 8.0 kgm2
v1 = 30 rpm = \(\frac{30}{60}\) = \(\frac{1}{2}\) ps
ω1 = 2πv1 = 2π × \(\frac{1}{2}\) = π rads-1
माना r2 दूरी पर नवीन कोणीय चाल ω2 है।
∴ कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से,
या I1ω1 = I2ω2
15.7 × π = 8 × ω2
या ω2 = 15.7 \(\frac{π}{8}\)
= 1.9625 π rads-1
∴ कोणीय आवृत्ति v2 निम्न है –
v2 = \(\frac{\omega_{2}}{2 \pi}\) = \(\frac{1.9625}{2π}\) × π rps
= \(\frac{1.9625}{2}\) × 60 rpm
= 58.875 rpm
= 58.9 rpm
= 59 rpm
नहीं, यहाँ गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं होगी? चूँकि घूर्णनी गति में कोणीय संवेग संरक्षित रहता है। अत: यह आवश्यक नहीं है कि घूर्णनी गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहे जिसे निम्न रूप में समझाया जा सकता है –
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अर्थात् I के घटने पर घूर्णनी KE बढ़ती है। KE में यह परिवर्तन (i.e., वृद्धि) वस्तु के जड़त्वाचूर्ण को कम करने में व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य के व्यय होने के कारण होता है।

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प्रश्न 7.24
10g द्रव्यमान और 500 m/s चाल वाली बन्दूक की गोली एक दरवाजे के ठीक केन्द्र में टकराकर उसमें अंत:स्थापित हो जाती है। दरवाजा 1.0 m चौड़ा है और इसका द्रव्यमान 12 kg है। इसके एक सिरे पर कब्जे लगे हैं और यह इनसे गुजरती एक ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः लगभग बिना घर्षण के घूम सकता है। गोली के दरवाजे में अंत:स्थापन के ठीक बाद इसका कोणीय वेग ज्ञात कीजिए। (संकेत : एक सिरे से गुजरती ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः दरवाजे का जड़त्व-आघूर्ण ML2/3 है)
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान
m = 10g = 0.01
किग्रा गोली का वेग v = 500 मीटर/से०
दरवाजे की चौ० b = 1.0 मीटर
दरवाजे का द्र० M = 12 किग्रा
कोणीय चाल = ?
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) Iω2
माना कब्जे वाली भुजा के परितः जड़त्वाघूर्ण है।
∴ I = \(\frac{1}{3}\) (M + m) (\(\frac{b}{2}\))2
(∵ द्रव्यमान केन्द्र से दूरी = \(\frac{b}{2}\) तथा गोली दरवाजे में है।)
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{3}\) (M + m) (\(\frac{b}{2}\))2
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{1}{3}\) (M + m) \(\frac{b^{2}}{4}\) ω2
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति
= 49.98 रेडियन/सेकण्ड

प्रश्न 7.25
दो चक्रिकाएँ जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलंबवत् तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व आघूर्ण I1 तथा I2 हैं और जो तथा ω1 तथा ω2 कोणीय चालों से घूर्णन कर रही है, को उनके घूर्णन अक्ष संपाती करके आमने-सामने लाया जाता है?
(a) इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है?
(b) यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुई इस हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? ω1 ≠ ω2 लीजिए।
उत्तर:
माना I1 व I2 जड़त्व आघूर्ण वाली चकतियों की कोणीय चाल क्रमशः ω1 व ω2 है। सम्पर्क में लाने पर दोनों चकतियों के निकाय का जड़त्व आघूर्ण I1 + I2 होगा।
माना ω = पूरे निकाय की कोणीय चाल है।

(a) ∵ दोनों चकतियों के कुल प्रा० कोणीय संवेग,
L1 = I1 ω1 + I2ω2
संयुक्त निकाय का कुल अन्तिम कोणीय संवेग,
L2 = L1
या (I1 + I2)ω = I1ω1 + I2ω1
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(b) दोनों चकतियों की प्रा० गतिज ऊर्जा
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संयुक्त निकाय की अन्तिम KE.
E2 = \(\frac{1}{2}\) (I1 + I22 ………….. (iii)
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समी० (i) व (ii) से,
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जोकि धनात्मक राशि है।
अतः E1 – E2 > 0 या E1 > E2
या E2 > E1 अर्थात् पूरे निकाय की घूर्णनी गतिज ऊर्जा दोनों चकतियों की प्रारम्भिक ऊर्जाओं के योग से कम है। अतः दो चकतियों को सम्पर्क में लाने पर, गतिज ऊर्जा में कमी आती है। यह कमी दोनों चक्रिकाओं की सम्पर्कित सतहों के बीच घर्षण के बल के कारण होती है।

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प्रश्न 7.26
(a) लम्बवत् अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें। संकेत (x, y) तल के लम्बवत् मूल बिन्दु से गुजरती अक्ष से किसी बिन्दु x – y की दूरी का वर्ग (x2 + y2) है
(b) समांतर अक्षों के प्रमेय की उपपत्ति करें(संकेत : यदि द्रव्यमान केन्द्र को मूल बिन्दु ले लिया जाये तो Σmiri = 0)
उत्तर:
(a) समकोणिक (लम्ब) अक्षों की प्रमेयकिसी समतल पटल को उसके तल में ली गई दो परस्पर लम्बवत् अक्षों OX तथा OY के परित: जड़त्व आघूर्णों का योग इन अक्षों के कटान बिन्दु O में को जाने वाली तथा पटल के तल के लम्बवत् अक्ष OZ के परित: जड़त्व आघूर्ण के बराबर होता है। पटल का अक्ष OZ के परितः जड़त्व आघूर्ण Iz = Iz + Iy
जहाँ Iz तथा Iy पटल का क्रमश: अक्ष OX तथा OY के परितः जड़त्व आघूर्ण है।

सिद्ध करना:
माना एक पटल है जिसके तल में दो परस्पर लम्बवत् अक्षं OX तथा OY ली गई हैं अक्ष OZ पटल के तल के अभिलम्बवत् है तथा OX व OY के कटान बिन्दु०से गुजरती है। माना अक्ष OZ से r दूरी पर m द्रव्यमान का एक कण P है। इस कण का अक्ष OZ के परितः जड़त्व आघूर्ण mr2 होगा। अतः पूरे पटल का अक्ष OZ के परित: जड़त्व आघूर्ण
Iz = Σmr2
लेकिन r2 = x2 + y2
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जहाँ x व y कण भी क्रमश: अक्षों OY व OX से दूरियाँ हैं।
∴ I2 = Σm(x2 + y2)
= Σmx2 + Σmy2
लेकिन Ix = Σmx2 तथा Iy = Σmy2
अतः Ix = Iz + Iy

(b) समान्तर अक्षों की प्रमेय-किसी पिंड का किसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (I) उस पिंड के द्रव्यमान केन्द्र में को जाने वाली समान्तर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (Icm) तथा पिंड के द्रव्यमान व दोनों अक्षों के बीच की लम्बवत् दूरी के वर्ग के गुणनफल के योग के बराबर होता है।
I = Icm + Ma2
जहाँ M पिंड का द्रव्यमान है तथा a दोनों अक्षों के बीच लम्बवत् दूरी है।

सिद्ध करना:
माना एक समतल पटल है जिसका द्रव्यमान केन्द्र C है। माना पटल का पटल के तल में स्थित अक्ष AB के परितः जड़त्व आघूर्ण I है तथा इसके द्रव्यमान केन्द्र C से गुजरने वाली समान्तर अक्ष EF के परितः जड़त्व आघूर्ण Icm है। माना AB तथा EF अक्षों के बीच लम्बवत् दूरी a है। माना EF अक्ष से दूरी पर m द्रव्यमान का एक कण P है। P की AB से दूरी (r + a) होगी। P का AB के परितः जड़त्व आघूर्ण m(r + a)2 होगा। अतः पूरे पटल का AB अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
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I = Σm(r + a)2
= Σm(r2 + a2 + 2ar)
I = Σmr2 + Σma2 + 2aΣmr
अथवा I = Σmr2 + a2Σ + 2aΣmr
लेकिन Icm = Σmr2
तथा a2Σm = a2M
तथा Σmr = 0 क्योंकि किसी पटल के समस्त कणों का पटल के द्रव्यमान केन्द्र में से गुजरने वाली अक्ष के परित: आघूर्णों का योग शून्य होता है। अतः
I = Icm + Ma2

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प्रश्न 7.27
सत्र v2 = \(\frac{2 g h}{\left(1+k^{2} / R^{2}\right)}\) को गतिकीय दृष्टि (अर्थात् बलों तथा बल आघूर्णों के विचार) से व्युत्पन्न कीजिए। जहाँ v लोटनिक गति करते पिंड (वलय, डिस्क, बेलन या गोला) का आनत तल की तली में वेग है। आनत तल पर h वह ऊँचाई है जहाँ से पिंड गति प्रारंभ करता है। सममित अक्ष के परितः पिंड की घूर्णन त्रिज्या है और R पिंड की त्रिज्या है।
उत्तर:
माना M व R क्रमश: गोलीय पिंड के द्रव्यमान व त्रिज्या है, यह एक ऐसे आनत तल पर A बिन्दु पर रखा गया है जिसका क्षैतिज से झुकाव θ है। इस पिंड में A बिन्दु पर पूर्णतः स्थितिज ऊर्जा होगी।
∴ E = mgh …….. (i)
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जब यह पिंड तल पर फिसलना प्रारम्भ करता है, पिंड द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष (i.e., c) से गुजरता है जो कि तल के समान्तर है। इसके भार व भार के घटक के कारण घूर्णनी गति नहीं होती है कि इसकी क्रिया रेखा C से गुजरती है। इस प्रकार पिंड पर लगने वाला सम्पूर्ण बलाघूर्ण शून्य होगा। घर्षण बलाघूर्ण अर्थात् घूर्णन के कारण बल लगता है।
∴ τ = FR ………….. (ii)
घूर्णन करते पिंड की सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा (E) में रैखिक गतिज ऊर्जा (Kt व घूर्णनी गतिज ऊर्जा (Kr) होती है।
i.e., E = Kt + Kr
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तथा v = Rω = घूर्णन करते पिंड का रैखिक वेग
जहाँ जे कोणीय ω वेग है।
पिंड का जड़त्व आघूर्ण, I = \(\frac{1}{2}\) mK2 जहाँ K = घूर्णन त्रिज्या।
माना पृष्ठ सतह खुरदरी है तथा पिंड बिना फिसले ही घूर्णन करता है। बिन्दु B पर, पिंड में दोनों रैखिक व घूर्णनी गतिज ऊर्जाएँ होती हैं। बिन्दु B पर सम्पूर्ण ऊर्जा समी० (iii) के अनुसार होगी।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
बिन्दु A पर स्थितिज ऊर्जा = बिन्दु B पर सम्पूर्ण गतिज ऊर्जा
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प्रश्न 7.28
अपने अक्ष पर ω0 कोणीय चाल से घूर्णन करने वाली किसी चक्रिका को धीरे से (स्थानान्तरीय धक्का दिए बिना) किसी पूर्णतः घर्षणरहित मेज पर रखा जाता है। चक्रिका की त्रिज्या R है। चित्र में दर्शाई चक्रिका के बिन्दुओं A, B तथा C पर रैखिक वेग क्या हैं? क्या यह चक्रिका चित्र में दर्शाई दिशा में लोटनिक गति करेगी?
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उत्तर:
चक्रिका व मेज के मध्य घर्षण बल शून्य है। इस कारण चक्रिका लोटनिक गति नहीं कर पाएगी व मेज के एक ही बिन्दु B के सम्पर्क में रहते हुए अपनी अक्ष के परित: घूर्णनी गति करती रहेगी।
दिया है:
बिन्दु A की अक्ष से दूरी R है।
अतः बिन्दु A पर रैखिक वेग,
VA = Rω0 (तीर की दिशा में)
तथा बिन्दु B पर रैखिक वेग,
VA = Rω0 (तीर की विपरीत दिशा में)
चूँकि बिन्दु C की अक्ष से दूरी \(\frac{R}{2}\) है
अतः बिन्दु C पर रैखिक वेग vc = \(\frac{R}{2}\) (क्षैतिजत: बाईं ओर से दाईं ओर को)
अर्थात् चक्रिका लोटनिक गति नहीं करेगी।

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प्रश्न 7.29
स्पष्ट कीजिए कि चित्र (प्रश्न 7.28) में अंकित दिशा में चक्रिका की लोटनिक गति के लिए घर्षण होना आवश्यक क्यों है?
(a) B पर घर्षण बल की दिशा तथा परिशुद्ध लुढ़कन आरंभ होने से पूर्व घर्षणी बल आघूर्ण की दिशा क्या है?
(b) परिशुद्ध लोटनिक गति आरंभ होने के पश्चात् घर्षण बल क्या है?
उत्तर:
(a) बिन्दु B पर घर्षण बल B के वेग का विरोध करता है। अतः घर्षण बल तीर की दिशा में होगा। घर्षण बल आघूर्ण के कार्य करने की दिशा इस प्रकार है कि वह कोणीय गति का विरोध करता है। ω0 व τ दोनों ही कागज के पृष्ठ के अभिलम्बवत् कार्य करते हैं। इनमें ω0 कागज के पृष्ठ के अंतर्मुखी व र कागज के पृष्ठ के बहिर्मुखी है।
(b) घर्षण बल सम्पर्क – बिन्दु B के वेग को कम कर देता है। जब यह वेग शून्य होता है तो चक्रिका की लोटन गति आदर्श सुनिश्चित हो जाती है। एक बार ऐसा हो जाने पर घर्षण बल का मान शून्य हो जाता है।

प्रश्न 7.30
10 cm त्रिज्या की कोई ठोस चक्रिका तथा इतनी ही त्रिज्या का कोई छल्ला किसी क्षैतिज मेज पर एक ही क्षण 10π rads-1 की कोणीय चाल से रखे जाते हैं। इनमें से कौन पहले लोटनिक गति आरंभ कर देगा। गतिज घर्षण गुणांक µk = 0.2
उत्तर:
दिया है:
छल्ले तथा ठोस चक्रिका की त्रिज्या,
R = 10 सेमी – 0.1 मीटर
µk = 0.2
छल्ले का जड़त्व आघूर्ण = MR2 …………… (i)
ठोस चक्रिका का जड़त्व आघूर्ण = \(\frac{1}{2}\)mR2 …………….. (ii)
प्रा० कोणीय वेग = ω0 = 10π रेडियन/सेकण्ड
घर्षण बल के कारण गति होती है तथा घर्षण के कारण द्रव्यमान केन्द्र त्वरित होता है। छल्ला शून्य प्रारम्भिक वेग से चलता है। प्रारम्भिक कोणीय वेग ω0 में मन्दन घर्षण बलाघूर्ण के कारण होता है।
हम जानते हैं कि F = µkN = ma
या µkmg = ma
या a = µkg ……………. (iii)
तथा बलाघूर्ण τ = -Iα
= FR = µkmgR ……………. (iv)
जहाँ R = चकती या वलय की त्रिज्या
ऋणात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि मन्दन बलाघूर्ण है।
यहाँ u = 0
∴ v = u + at से
v = at or a = \(\frac{v}{t}\)
समी० (iii) से a = µkg
या \(\frac{v}{t}\) = µkg
या v = µkgt (छल्ले के लिए)
तथा = µkgt’ (चकती के लिए) …………….. (v)
समी० (iv) से
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माना छल्ले की t समय व चकती की t’ समय बाद कोणीय वेग
∴ सम्बन्ध ω = ω0 + αt से,
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एकदम फिसलने की शर्त लगाने पर (i.e., V = Rω), छल्ले के लिए
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तथा चकती के लिए,
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अतः समी० (xii) व (xiii) से स्पष्ट है कि t’ < t अर्थात् चकती पहले फिसलना प्रारम्भ करेगी।

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प्रश्न 7.31
10 kg द्रव्यमान तथा 15 cm त्रिज्या का कोई सिलिंडर किसी 30° झुकाव के समतल पर परिशुद्धतः लोटनिक गति कर रहा है। स्थैतिक घर्षण गुणांक µs = 0.25
(a) सिलिंडर पर कितना घर्षण बल कार्यरत है?
(b) लोटन की अवधि में घर्षण के विरुद्ध कितना कार्य किया जाता है?
(c) यदि समतल के झुकाव में वृद्धि कर दी जाए तो के किस मान पर सिलिंडर परिशुद्धतः लोटनिक गति करने की बजाय फिसलना आरंभ कर देगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 10 kg, R = 0.15 m, θ = 30°, µk = 0.25
(a) बेलन पर लगने वाला घर्षण बल –
F = \(\frac{1}{3}\) mg sin θ
= \(\frac{1}{3}\) × 10 × 9.8 × sin 30° = 16.3 न्यूटन

(b) चूँकि परिशुद्ध लोटनिक गति में, सम्पर्क बिन्दु पर कोई सरकन गति नहीं है। इसलिए घर्षण बल के विरुद्ध कृत कार्य, W = 0 है।

(c) लोटनिक गति के लिए,
\(\frac{F}{R}\) = \(\frac{1}{3}\) tan θ ≤ µs
∴ tan θ = 3µs
= 3 × 0.25 = 0.75
∴ θ = tan-1(0.75)
= 37°

प्रश्न 7.32
नीचे दिए गए प्रत्येक प्रकथन को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा कारण सहित उत्तर दीजिए कि इनमें से कौन-सा सत्य है और कौन-सा असत्य है –

  1. लोटनिक गति करते समय घर्षण बल उसी दिशा में कार्यरत होता है जिस दिशा में पिंड का द्रव्यमान केंद्र गति करता है।
  2. लोटनिक गति करते समय संपर्क बिंदु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
  3. लोटनिक गति करते समय संपर्क बिन्दु का तात्क्षणिक त्वरण शून्य होता है।
  4. परिशुद्ध लोटनिक गति के लिए घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य होता है।
  5. किसी पूर्णतः घर्षणरहित आनत समतल पर नीचे की ओर गति करते पहिए की गति फिसलन गति (लोटनिक गति नहीं) होगी।

उत्तर:

  1. सत्य, चूँकि स्थानान्तरीय गति घर्षण बल के कारण ही उत्पन्न होती है। इसी बल के कारण पिंड का द्रव्यमान आगे की ओर बढ़ता है।
  2. सत्य, चूँकि लोटनिक गति, सम्पर्क बिन्दु पर सी गति के समाप्त होने पर प्रारम्भ होती है। इस प्रकार परिशुद्ध लोटनिक गति में सम्पर्क बिन्दु की तात्क्षणिक चाल शून्य होती है।
  3. असत्य चूँकि घूर्णन गति के कारण, सम्पर्क बिन्दु की गति में अभिकेन्द्र त्वरण अवश्य ही विद्यमान होता है।
  4. सत्य चूँकि परिशुद्ध लोटनिक गति में सम्पर्क बिन्दु पर कोई सरकन नहीं होता है। इस कारण घर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य होता है।
  5. सत्य, घर्षण के न होने पर आनत तल पर छोड़े गए पहिए का आनत तल के साथ सम्पर्क बिन्दु विरामावस्था में नहीं रहेगा बल्कि पहिए के भार के अधीन माना तल के अनुदिश फिसलता जाएगा। इस कारण यह गति लोटनिक न होकर विशुद्ध सरकन गति होगी।

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प्रश्न 7.33
कणों के किसी निकाय की गति को इसके द्रव्यमान केन्द्र की गति और द्रव्यमान केन्द्र के परितः गति में अलग-अलग करके विचार करना।
दर्शाइये कि –
(a) P = p’i + miV
जहाँ pi (mi द्रव्यमान वाले) i – वें कण का संवेग है, और P’i = miv’i। ध्यान दें कि द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष i – वें कण का वेग है। द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा का उपयोग करके यह भी सिद्ध कीजिए कि Σp’i = 0
(b) K = K’ + \(\frac{1}{2}\) MV2
K कणों के निकाय की कुल गति ऊर्जा, K’ = निकाय की कुल गतिज ऊर्जा जबकि कणों की गतिज ऊर्जा द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष ली जाये। MV2/2 संपूर्ण निकाय के (अर्थात् निकाय के द्रव्यमान केन्द्र के) स्थानान्तरण की गतिज ऊर्जा है। इस परिणाम का उपयोग भाग 7.14 में किया गया है।

(c) L = Σ + R × MV
जहाँ L’ = r’i × P’i द्रव्यमान के परितः निकाय का कोणीय संवेग है जिसकी गणना में वेग द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष मापे गये हैं। याद कीजिए r’i = ri – R; शेष सभी चिह्न अध्याय में प्रयुक्त विभिन्न राशियों के मानक चिह्न हैं। ध्यान दें कि L’ द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय का कोणीय संवेग एवं MR × V इसके द्रव्यमान केन्द्र का कोणीय संवेग है।

(d) \(\frac{dL’}{dt}\) = Σr’i × \(\frac{dp’}{dt}\)
यह भी दर्शाइये कि
\(\frac{dL’}{dt}\) = τ’ext
(जहाँ τ’ext द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय पर लगने वाले सभी बाह्य बल आघूर्ण हैं।)
[संकेत : द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा एवं न्यूटन के गति के तृतीय नियम का उपयोग कीजिए। यह मान लीजिए कि किन्हीं दो कणों के बीच के आन्तरिक बल उनको मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करते हैं।]
उत्तर:
(a) माना कि m1m2 … mn, दृढ़ पिंड की रचना करने वाले कणों के द्रव्यमान हैं तथा मूल बिन्दु O (0, 0) के सापेक्ष इन कणों के स्थिति सदिश क्रमश:
\(\vec{r}_{1}\), \(\vec{r}_{2}\) …………. \(\vec{r}_{n}\) हैं।
माना कि मूल बिन्दु के सापेक्ष द्रव्यमान केन्द्र (G) की स्थिति सदिश \(\vec{R}\) व द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष अलग-अलग कणों की
स्थिति क्रमश: \(\vec{r}_{1}\), \(\vec{r}_{2}\) ………………. \(\vec{r}_{n}\) हैं।
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t के सापेक्ष दोनों ओर का अवकलन करने पर,
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(d) माना कि कणों के निकाय पर बलाघूर्ण लगाया जाता है।
माना कि कण के लिए \(\vec{L}\) के घटक Lx, Ly व Lz क्रमशः x, y, z व : अक्षों के अनुदिश हैं। माना कि px, py व pz इसके रैखिक संवेग के घटक हैं।
Lz = xpy – yPx
Lx = ypz – zpy
Ly = zpx – xpz
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किसी कण के कोणीय संवेग की परिवर्तन दर,
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माना निकाय का सम्पूर्ण कोणीय संवेग \(\vec{L}\) है।
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हम जानते हैं कि निकाय पर लगने पर सम्पूर्ण बाह्य बलाघूर्ण τ’ext है। अतः
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[∵ बाह्य बल सदैव युग्म में होता है व निरस्त करते हैं।]
∴ समी० (i) व (ii) से,
\(\frac{d \vec{L}_{i}}{d t}\) = τ’ext

Bihar Board Class 12 Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Bihar Board Class 12 Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Bihar Board Class 12 Chemistry रासायनिक बलगतिकी Text Book Questions and Answers

पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 4.1
R → P, अभिक्रिया के लिए अभिकारक की सान्द्रता 0.03 M से 25 मिनट में परिवर्तित होकर 0.02 M हो जाती है। औसत वेग की गणना सेकण्ड तथा मिनट दोनों इकाइयों में कीजिए।
गणना:
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दिया है,
R2 = 0.02 M; R1 = 0.03 M
t2 – t1 = 25 min
अतः औसत वेग = \(\frac{0.02 M – 0.03 M}{25 min}\)
= \(\frac{-0.01 M}{25 min}\)
= 4 × 10-4 M min-1
= 6.66 × 10-6 Ms-1

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प्रश्न 4.2
2A → उत्पाद, अभिक्रिया में A की सान्द्रता 10 मिनट में 0.5 mol L-1 से घटकर 0.4 mol L-1 रह जाती है। इस समयान्तराल के लिए अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए।
गणना:
अभिक्रिया वेग = A के ह्रास होने का वेग
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= 0.005 mol L-1 min-1

प्रश्न 4.3
एक अभिक्रिया A + B → उत्पाद के लिए वेग नियमा = k[A]1/2 [B]2 से दिया गया है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
हल:
r = k [A]1/2B2
∵ अभिक्रिया की कोटि = \(\frac{1}{2}\) + 2 = 2 \(\frac{1}{2}\)

प्रश्न 4.4
अणु X का Y के रूपान्तरण द्वितीय कोटि की बलगतिका के अनुरूप होता है। यदि x की सान्द्रता तीन गुनी कर दी जाये तो Y का निर्माण होने के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
∵ अणु X का Y में रूपान्तरण द्वितीय कोटि की बलगति के अनुरूप होता है।
∴ अभिक्रिया का वेग = k[x]2 ……………….. (i)
∵ X की सान्द्रता तीन गुनी कर दी जाती है,
∴ अभिक्रिया की कोटि = k[3X]2
= 9k[X]2
समी० (i) तथा (ii) से स्पष्ट है X की सान्द्रता तीन गुनी करने पर Y के निर्माण का वेग नौ गुना हो जायेगा।

प्रश्न 4.5
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 1.15 × 10-3s-1 है। इस अभिक्रिया में अभिकारक की 5g मात्रा को घटकर 3g होने में कितना समय लगेगा?
हल:
प्रश्नानुसार, अभिकारक की प्रारम्भिक मात्रा [A]0 = 5g
अभिकारक की अन्तिम मात्रा [A] = 3g
तथा वेग स्थिरांक (k) = 1.15 × 10-3s-1
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए
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= 2.0 × 103 log \(\frac{10}{6}\)
= 2.0 × 103 [log 10 – log 2 – log 3]
= 2.0 × 103 [1 – 3010 – 4.771]
= 2.0 × 103 × 0.2219
= 443.8 ≅ 444s

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प्रश्न 4.6
SO2Cl2 को अपनी प्रारम्भिक मात्रा से आधी मात्रा में वियोजन होने में 60 मिनट का समय लगता है। यदि अभिक्रिया प्रथम कोटि की हो तो वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
गणना:
हम जानते हैं कि प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए,
k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
= \(\frac{0.693}{(60×60 से०)}\)
(∵ t1/2 = 60 मिनट = 60 × 60 से०
= 1.925 × 10-4 प्रति से०

प्रश्न 4.7
ताप का वेग स्थिरांक पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10° ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगनी वृद्धि होती है। वेग स्थिरांक की ताप की निर्भरता की व्याख्या आरेनियस समीकरण
k = Ae-Ea/RT
से भली-भाँति की जा सकती है।
जहाँ A = आरेनियस गुणांक अथवा आवृति गुणांक
R = गैस नियतांक,
Ea = सक्रिय ऊर्जा।

प्रश्न 4.8
परमताप, 298 K में 10 K की वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया का वेग दुगुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए।
गणना:
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= 52898 J mol-1
= 52.9 KJ mol-1

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प्रश्न 4.9
581 K ताप पर अभिक्रिया 2 HI(g) → H2(g) + I2 (g) के लिए सक्रियण ऊर्जा का मान 209.5 kJ mol-1 है। अणुओं के उस अंश की गणना कीजिए जिसका ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है।
हल:
सक्रियण ऊर्जा से अधिक या बराबर ऊर्जा वाले अणुओं का अंश
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= – 18.8323
∴ x = – 2.303 RT
= Antilog \(\bar{19}\).1677
= 1.471 × 10-19

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 4.1
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए –

  1. 3NO(g) → N2O(g) + NO2 (g) वेग = k [NO]2
  2. H2O2 (aq) + 3I (aq) + 2H+ → 2H2O(l) + I3 वेग = k [H2O2] [I]
  3. CH3CHO (g) → CH4 (g) + CO (g) वेग = k[CH3CHO]3/2
  4. C2H5Cl(g) → C2H4 (g) + HCl (g) वेग = k[C2H5Cl]

उत्तर:
1. 3NO(g) → N2O(g) + NO2 (g) वेग = k [NO]2
अभिकारक NO की कोटि = 2
अभिक्रिया कोटि = 2 वेग
स्थिरांक (k) की इकाई
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= L mol-1 s-1

2. H2O2 (aq) + 3I (aq) + 2H+ → 2H2O(l) + I3 वेग = k [[H2O2] [I]
अभिक्रिया की कोटि = अभिकारक (H2O2) की कोटि + अभिकारक (I) की कोटि।
= 1 + 1
= 2
वेग स्थिरांक (k) की इकाई
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= L mol-1s-1

3. CH3CHO (g) → CH4 (g) + CO(g)
वेग = k [CH3CHO]3/2
अभिक्रिया की कोटि = \(\frac{3}{2}\)
वेग स्थिरांक (k) की इकाई
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अभिक्रिया कोटि = 1
वेग स्थिरांक (k) की इकाई
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= s-1

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प्रश्न 4.2
अभिक्रिया 2A + B → A2B के लिए वेग = k [A][B]2 यहाँ k का मान 2.0 × 10-6 mol-2L2s-1 है। प्रारम्भिक वेग की गणना कीजिए; जब [A] = 0.1mol L-1 एवं [B] = 0.2 molL-1 हो तथा अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए; जब [A] घटकर 0.06 mol L-1 रह जाए।
गणना:
प्रश्नानुसार [A] = 0.1 mol L-1
तथा [B] = 0.2 mol
L-1 तथा k = 0.2 mol-1 L2 s-1
प्रारम्भिक वेग = k [A] [B]
= 2.0 × 10-6 mol-2 L2 s-1)
(0.1 mol L-1) (0.2 mol L-1)2
= 8.0 × 10-9 mol L-1s-1
जब [A] 0.10 mol L-1 से घटकर 0.06 mol L-1 रह जाता है अर्थात् 0.04 mol L-1 A
अभिकृत हो जाता है तब अभिकृत [B] = \(\frac{1}{2}\) × 0.04 mol L-1
= 0.02 mol L-1
∴ [B] = 0.2 – 0.02 = 0.18 mol L-1
अतः वेग = (2.0 × 10-6 mol-2 L-2 s-1)
(0.06 mol L-1) (0.18mol L-1)2
= 3.89 × 109 mol L-1L-1s-1

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प्रश्न 4.3
प्लैटिनम सतह पर NH3 का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है। N2 एवं H2 के उत्पादन की दर क्या होगी जबk का मान 2.5 × 10-4 mol L-1 s-1 हो?
हल:
प्लैटिनम की सतह पर अमोनिया का अपघटन निम्न प्रकार से है –
NH3 → \(\frac{1}{2}\)N2 + \(\frac{3}{2}\) H2
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∵ शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए, वेग = k
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= 2.5 × 10-4 mol L-1s-1

प्रश्न 4.4
डाइमेथिल ईथर के अपघटन से CH4, H2 तथा CO बनते हैं। इस अभिक्रिया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है –
वेग = k [CH3OCH3]3/2
अभिक्रिया के वेग का अनुगमन बन्द पात्र में बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अत: वेग समीकरण को डाइमेथिल ईथर के आंशिक दाब के पद में भी दिया जा सकता है।
अतः वेग = k (PCH3OCH3)3/2\
यदि दाब को bar में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभिक्रिया के वेग एवं वेग स्थिरांक की इकाइयाँ क्या होंगी?
उत्तर:
वेग की दाब के पदों की इकाई = bar min-1
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प्रश्न 4.5
रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तरः
अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले कारक:

1. सान्द्रण का प्रभाव:
निश्चित ताप पर अभिकारकों की सान्द्रता बढ़ाने से अभिक्रिया का वेग बढ़ता है क्योंकि अभिकारक अणुओं का सान्द्रण बढ़ जाने से अणुओं के मध्य कारकों की संख्या बढ़ जाती है।

2. ताप का प्रभाव:
ताप की वृद्धि से सक्रिय अणुओं तथा प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

3. दाब का प्रभाव:
दाब बढ़ने से गैसीय अणु निकट आ जाते हैं, जिससे उनके परस्पर टकराने की सम्भावना बढ़ जाती है अर्थात् वेग बढ़ जाता है।

4. उत्प्रेरक का प्रभाव:
उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Ea) का मान कम कर देता है जिससे सक्रिय अणुओं की संख्या बढ़ जाती है, अत: उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

5. अभिकारकों के पृष्ठ क्षेत्रफल का प्रभाव:
अभिकारक अणुओं का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होने पर अभिक्रिया का वेग अधिक होता है।

6. अभिकारकों की प्रकृति का प्रभाव:
यदि अभिकारक आयनिक है, तो अभिक्रिया का वेग अधिक होगा।

7. प्रकाश का प्रभाव:
प्रकाश की उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

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प्रश्न 4.6
किसी अभिकारक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा; यदि अभिकारक की सान्द्रता –

  1. दुगनी कर दी जाए
  2. आधी कर दी जाए?

उत्तर:
वेग = k [A]2 = ka2
1. ∵ [A] = 2a
∴ वेग = k(2a)2 = 4k2 = चार गुना

2. ∵A = \(\frac{1}{2}\) a
∴ वेग = k\(\frac{a}{2}\)2 = \(\frac{1}{4}\)2 = एक चौथाई

प्रश्न 7.
वेग स्थिरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप में कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं?
उत्तर:
किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप – वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगुनी वृद्धि होती है। वेग स्थिरांक की ताप पर निर्भरता की मात्रात्मक रूप में व्याख्या आरेनिअस समीकरण से भली-भाँति की जा सकती है। इसके अनुसार,
k = AeEa/RT

प्रश्न 4.8
जल में एस्टर के छदम प्रथम कोटि के जल-अपघटन के निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए –
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  1. 30 से 60 सेकण्ड समय अन्तराल में औसत वेग की गणना कीजिए।
  2. एस्टर के जल-अपघटन के लिए छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।

उत्तर:
1. t1 से t2 सेकण्ड समय अन्तराल में औसत वेग
= \(\frac{C_{2}-C_{1}}{t_{2}-t_{1}}\)
∴ 30 से 60 s समय-अन्तराल में औसत वेग
= \(\frac{0.31-0.17}{60-30}\) = \(\frac{0.14}{30}\)
= 4.67 × 10-3 molL-1s-1

2. ∵ छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया वेग स्थिरांक
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= 1.98 × 10-2 s-1

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प्रश्न 4.9
एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है।

  1. अवकल वेग समीकरण लिखिए।
  2. B की सान्द्रता तीन गुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
  3. A तथा B दोनों की सान्द्रता दुगनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर:
1. अवकल वेग समीकरण निम्नलिखित है –
\(\frac{dx}{dt}\) = k [A] [B]2

2. माना A की सान्द्रता a तथा B की सान्द्रता b है, तब
वेग = k ab2
B की सान्द्रता तीन गुनी कर देने पर,
वेग = ka(3b)2
= 9k ab2
= 9 गुना

3. [A] तथा [B] दोनों की सान्द्रता दुगनी करने पर
वेग = k(2a) (2b)2
= 8k ab2
= 8 गुना

प्रश्न 4.10
A और B के मध्य अभिक्रिया में A और B की विभिन्न प्रारम्भिक सान्द्रताओं के लिए प्रारम्भिक वेग (r0) नीचे दिए गए हैं। A और B के प्रति अभिक्रिया की कोटि क्या है?
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हल:
माना A की कोटि m तथा B की कोटि n है। तब हम जानते हैं कि –
प्रारम्भिक वेग (r0) = [A]m [B]n
उपर्युक्त तालिका से
(r0)1 = 5.07 × 10-5 = (0.20)m (0.30)n ……………….. (i)
(r0)2 = 5.07 × 10-5 = (0.20)m (010)n …………………. (ii)
(r0)3 = 14.3 × 10-5 = (0.40)m (0.05)n …………………….. (iii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) से भाग देने पर –
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अतः A के प्रति अभिक्रिया की कोटि (m) = 0.5
B के प्रति अभिक्रिया की कोटि (n) = 0

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प्रश्न 4.11
2A + B → C + D अभिक्रिया की बलगतिकी अध्ययन करने पर निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। अभिक्रिया के लिए वेग नियम तथा वेग स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
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हल:
माना A की कोटि m तथा B की कोटि n है। तब
वेग = k [A]m [B]n
उपर्युक्त तालिका से
6.0 × 10-3 = k (0.1)m (0.1)n ………………… (1)
7.2 × 10-2 = k (0.3)m (0. 2)n ………………… (2)
2.88 × 10-1 = k (0.3)m (0.4)n ……………………. (3)
2.40 × 10-2 = k (0.4)m (0.1)n
समीकरण (1) को समीकरण (4) से भाग देने पर,
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अब समीकरण (2) को समीकरण (3) से भाग देने पर,
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∴ वेग नियम = k [A] [B]2
वेग स्थिरांक की गणना
∵ वेग = k [A]m [B]n
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प्रश्न में दी गई तालिका से,
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∴ वेग स्थिरांक = 6.0 mol-2L2 min-1

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प्रश्न 4.12
A तथा B के मध्य अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति शून्य कोटि की है। निम्न तालिका में रिक्त स्थान भरिए।
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हल:
वेग = k [A]1 [B]0 = k [A]
प्रयोग I के लिए: 2.0 × 10-2 mol L-1 min-1 = k(0.1 M)
k = 0.2 min-1

प्रयोग II के लिए:
4.0 × 10-2 mol L-1 min-1
= (0.2 min-1) [A]
या [A] = 0.2 min-1

प्रयोग III के लिए: वेग
= (0. 2 min-1) (0.4 mol L-1)
= 0.08 mol L-1 min-1

प्रयोग IV के लिए:
2.0 × 10-2 mol L-1 min-1
= 0.2 min-1 [A]
या [A] = 0.1mol L-1

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प्रश्न 4.13
नीचे दी गई प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांक से अर्द्ध-आयु की गणना कीजिए –

  1. 200 s-1
  2. 2 min-1
  3. 4 year-1

गणना:
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्द्ध-आयु (t1/2) तथा वेग स्थिरांक (K) में निम्न सम्बन्ध हैं –
t1/2 = \(\frac{0.693}{k}\)

1. t1/2 = \(\frac{0.693}{200 s^{-1}}\)
= 34.6 × 10-3 s

2. t1/2 = \(\frac{0.693}{2 min ^{-1}}\)
= 34.6 × 10-1 s

3. t1/2 = \(\frac{0 \cdot 693}{4 \text { year }^{-1}}\)
= 1.73 × 10-1 year

प्रश्न 4.14
14 C के रेडियोएक्टिव क्षय की अर्द्ध-आयु 5730 वर्ष है। एक पुरातत्व कलाकृति की लकड़ी में, जीवित वृक्ष की लकड़ी की तुलना में 80% 14 C की मात्रा है। नमूने की आयु का परिकलन कीजिए।
हल:
क्षय नियतांक (k) = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
= \(\frac{0.693}{5730}\) प्रतिवर्ष
अब t = \(\frac{2.303}{k}\) log \(\frac{[\mathrm{A}]_{0}}{[\mathrm{A}]}\)
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= 1845 वर्ष

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प्रश्न 4.15
गैस प्रावस्था में 318 K पर N2O5 के अपघटन की [2N2O5 → 4NO2 + O2] अभिक्रिया के आँकड़े नीचे दिए गए हैं –
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  1. [N2O5] एवं t के मध्य आलेख खींचिए।
  2. अभिक्रिया के लिए अर्द्ध-आयु की गणना कीजिए।
  3. log [N2O5] एवं t के मध्य ग्राफ खींचिए।
  4. अभिक्रिया के लिए वेग नियम क्या है?
  5. वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
  6. k की सहायता से अर्द्ध-आयु की गणना कीजिए तथा इसकी तुलना (ii) से कीजिए।

गणना:
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1. [N2O5] तथा समय (t) के मध्य आलेख
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2. [N2O5] का प्रारम्भिक सान्द्रण
= 1.63 × 10-2 M
इस सान्द्रण का आधा = 0.815 × 10-2 M
इस सान्द्र से सम्बन्धित समय = 1440 s
अतः t1/2 = 1440 s

3. log [N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ –
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4. चूँकि log [N2O5] तथा समय (t) के मध्य ग्राफ एक सरल रेखा है; अत: यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है;
अतः वेग नियम है –
वेग = k [N2O5]

5. रेखा की ढाल = – \(\frac{k}{2.303}\)
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6.
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जबकि (ii) में अर्द्ध-आयु 1440 s है।

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प्रश्न 4.16
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक 60s-1 है। अभिक्रिया को अपनी प्रारम्भिक सान्द्रता \(\frac{1}{16}\) वाँ भाग रह जाने में कितना समय लगेगा?
हल:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए,
t = \(\frac{2.303}{k}\) log \(\frac{[\mathrm{A}]_{0}}{[\mathrm{A}]}\)
यदि प्रारम्भिक सान्द्रता R0 हो तो
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प्रश्न 4.17
नाभिकीय विस्फोट का 28.1 वर्ष अर्द्ध-आयु वाला एक उत्पाद 90Sr होता है। यदि कैल्सियम के स्थान पर lµg, 90Sr नवजात शिशु की अस्थियों में अवशोषित हो जाए और उपापचयन से ह्रास न हो तो इसकी 10 वर्ष एवं 60 वर्ष पश्चात् कितनी मात्रा रह जाएगी?
हल:
रेडियोऐक्टिव क्षय प्रथम कोटि बलगतिकी का अनुसरण करता है।
90 sr का क्षय नियतांक (k) = \(\frac{0 \cdot 693}{t_{1 / 2}}\)
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= 2.446 × 10-2 प्रतिवर्ष
प्रश्नानुसार,
a = 1µg, = 10 वर्ष, k = 2.466 × 10-2 प्रतिवर्ष-1
∴k = \(\frac{2.303}{t}\) log \(\frac{a}{a-k}\) ……………. (i)
या 2.466 × 10-2 = \(\frac{2.303}{10}\) log \(\frac{1}{(a-x)}\)
या 2.466 × 10-2 = 2.2303 [log1 – log (a – x)]
या 2.466 × 10-2 = -0.2303 log (a – x)
या log (a – x) = \(\frac{2.466 \times 10^{-2}}{0.2303}\)
= – 01071
या 10 वर्ष पश्चात शेष मात्रा (a – x)
Antilog \(\bar{1}\).8929 = 0.7814 µg
अब 60 वर्ष पश्चात् शेष मात्रा के लिए
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या (a – x) = Antilog \(\bar{1}\).3575 = 0.2278 µg
अतः 60 वर्ष पश्चात् शेष मात्रा = 0.2278 µg.

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प्रश्न 4.18
दर्शाइए कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दुगना होता है।
हल:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए,
t = \(\frac{2.303}{k}\) log \(\frac{a}{a-x}\)
∴ x = a का 99% = 0.99a
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अब x = a का 90% = 0.90a
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समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर,
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अतः 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाला समय का दुगना है।

प्रश्न 4.19
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 30% वियोजन होने में 40 मिनट लगते हैं। t1/2 की गणना कीजिए।
गणना:
∵ वियोजन 30% होता है।
∴ x = a का 30%
= 0.30 a
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए,
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= 77.7 min

प्रश्न 4.20
543 K ताप पर एजोआइसोप्रोपेन के हेक्सेन तथा नाइट्रोजन में विघटन के निम्न आँकड़े प्राप्त हुए। वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
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गणना:
अभिक्रिया का समीकरण निम्नवत् है –
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∵ एजोआइसोप्रोपेन का विघटन एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है –
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प्रश्न 4.21
स्थिर आयतन पर, SO2Cl2 के प्रथम कोटि के ताप अपघटन पर निम्न आँकड़े हुए –
SO2Cl2(g) → S02 (g) + Cl2 (g)
अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए जब कुल दाब 0.65 atm हो।
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गणना:
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∵ SO2Cl2 का विघटन एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।
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∵ Pt = 0.65 atm, तथा P0 + p = 0.65 atm
∴ p = 0.65 – P0
= 0.65 – 0.50
= 0.15 atm
∴ SO2Cl2 का समय है पर दाब, = P0 – p
= 0.50 – 0.15 atm
= 0.35 atm
अतः अभिक्रिया का वेग
= (2.2316 × 10-3 s-1) (0.35 atm)
= 7.8 × 10-5 atm s-1

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प्रश्न 4.22
विभिन्न तापों पर N2O5 के अपघटन के लिए वेग स्थिरांक नीचे दिए गए हैं –
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In k एवं 1/T के मध्य ग्राफ खींचिए तथा A एवं Ea की गणना कीजिए। 30°C तथा 50°C पर वेग स्थिरांक को प्रायुक्त कीजिए।
हल:
log k तथा 1/T के मध्य ग्राफ खींचने के लिए, हम दिए गए आँकड़ों को निम्नलिखित प्रकार लिख सकते हैं –
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उपर्युक्त मानों पर आधारित ग्राफ निम्नलिखित चित्र में प्रदर्शित है –
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हम जानते हैं कि
log k = log A – \(\frac{E_{a}^{*}}{2.303 R T}\)
या logk = (-\(\frac{E}{2.303 R}\)) \(\frac{1}{T}\) + log A
इस समीकरण की तुलना y = mx + c से करते हैं जो अन्त:खण्ड रूप में रेखा की समीकरण है।
log A = y – अक्ष पर अर्थात् k अक्ष पर अन्त:खण्ड का मान
= (-1 + 7.2) = 6.2 [y2 – y1 = – 1 – (-7.2)]
आवृत्ति गुणक A = antilog 6.2
= 1585000
= 1.585 × 106 collisions s-1
वेग स्थिरांक k के मान ग्राफ से निम्नलिखित प्रकार प्राप्त किए जा सकते हैं –
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प्रश्न 4.23
546 K ताप पर हाइड्रोकार्बन के अपघटन में वेग स्थिरांक 2.418 × 10-5 s-1 है। यदि सक्रियण ऊर्जा 179.9 kJ/mol हो तो पूर्व-घातांकी गुणन का मान क्या होगा?
हल:
दिया है:
k = 2.418 × 10-5 s-1, Ea = 179.9 kJ mol-1, T = 546 K
आरेनिअस समीकरण के अनुसार
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प्रश्न 4.24
किसी अभिक्रिया A → उत्पाद के लिए k = 2.0 × 10-2 s-1 है। यदि A की प्रारम्भिक सान्द्रता 1.0 mol L-1 हो तो 100 s के पश्चात् इसकी सान्द्रता क्या रह जाएगी?
हल:
प्रश्न में दी गई k की इकाई से प्रदर्शित होता है कि अभिक्रिया प्रथम कोटि की है। अतः
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log [A] = – 0.8684
∴ [A] = Antilog (-0.8684)
= Antilog (\(\bar{1}\).1316)
= 00.1354 mol L-1

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प्रश्न 4.25
अम्लीय माध्यम में सुक्रोस का ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। इस अभिक्रिया की अर्द्ध-आयु 3.0 घण्टे है। 8 घण्टे बाद नमूने में सुक्रोस का कितना अंश बचेगा?
हल:
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∵ सुक्रोस का ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
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प्रश्न 4.26
हाइड्रोकार्बन का विघटन निम्नांकित समीकरण के अनुसार होता है। Ea की गणना कीजिए।
k = (4.5 × 1011 s-1)e-28000 K/T
गणना:
आरेनिअस समीकरण से,
k = Ae-Ea/RT
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दोनों ओर e की घातों की तुलना करने पर,
– \(\frac{28000 K}{T}\) = –\(\frac{E_{a}}{R T}\)
या Ea = 28000 K × R
= 28000 K × 8.314J K-1 mol-1
= 232.79kJ mol-1

प्रश्न 4.27
H2O2 के प्रथम कोटि के विघटन को निम्नांकित समीकरण द्वारा लिख सकते हैं –
logk = 14.34 – 1.25 × 104 K/T
इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए। कितने ताप पर इस अभिक्रिया की अर्द्ध-आयु 256 मिनट होगी?
गणना:
आरेनिअस समीकरण से,
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इस समीकरण की तुलना प्रश्न में दी गई समीकरण से करने पर,
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प्रश्न 4.28
10°C ताप पर A के उत्पाद में विघटन के लिए k का मान 4.5 × 103 s-1 तथा मिश्रण ऊर्जा 60 kJ mol-1 है। किस ताप पर k का मान 1.5 × 104 s-1 होगा?
हल:
k1 = 4.5 × 10-3 s-1, T1 = 10 + 273 = 283 K
k2 = 1.5 × 104 s-1, T2 = ?
Ea = 60 kJ mol-1
आरेनिअस समीकरण से
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प्रश्न 4.29
298 K ताप पर प्रथम कोटि की अभिक्रिया के 10% पूर्ण होने का समय 308 K ताप पर 25% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगे समय के बराबर है। यदि A का मान 4 × 1010 s-1 हो तो 318 K ताप तथा Ea की गणना कीजिए।
गणना:
298 K ताप पर अभिक्रिया की प्रारम्भिक सान्द्रता a (माना) को 10% वियोजित (अर्थात् ϕa) होने में लगने वाला समय = t1, तब
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इसी प्रकार 308 K पर,
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अब आरेनिअस समीकरण से,
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या k = Antilog (- 2.0022)
= Antilog (\(\bar{3}\).9978) = 9.949 × 10-3 s-1

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प्रश्न 4.30
ताप में 293 K से 313 K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित नहीं होता।
गणना:
माना 293 K पर अभिक्रिया का वेग k1 तथा 313 K पर k2 है, तब प्रश्नानुसार,
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Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी

Bihar Board Class 11 Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Physics ऊष्मागतिकी Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 12.1
कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन-ऊष्मा 4.0 × 104 Jg-1 है?
उत्तर:
दिया है:
ताप में वृद्धि
∆T = (77 – 27)°C
= 50°C
\(S_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}\) = 4.2 × 103 Jkg-1°C-1
ईंधन की दहन ऊष्मा
HC = 4 × 104 Jg-1
प्रति मिनट प्रवाहित जल का द्रव्यमान, m = 3 ली
= 3 किग्रा (∴ 1 ली० = 1kg)
जल द्वारा गर्म होने के लिए ली गई ऊष्मा,
θ = ms ∆T
माना ईंधन के जलने की दर m’ प्रति मिनट है। ……………. (i)
अतः ईंधन द्वारा 1 मिनट में दी गई ऊष्मा
θ = m’HC
ईंधन द्वारा प्रति मिनट दी गई ऊष्मा = प्रति मिनट ली गई ऊष्मा।
∴ m’HC = ms ∆T
∴ m’ = \(\frac{m s \Delta T}{H_{\mathrm{C}}}\)
= \(\frac{3 \times 4.2 \times 10^{3} \times 50}{4 \times 10^{4}}\)
= 15.75 g
= 16 gm
अतः ईंधन 16 gm / मिनट की दर से जलता है।

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प्रश्न 12.2
स्थिर दाब पर 2.0 × 10-2 kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45°C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (N2) का अणुभार 28; R = 8.3 Jmol-1 K-1)।
उत्तर:
दिया है:
N2 का अणु भार = 28
गैस का द्रव्यमान, m = 2 × 10-2 किग्रा
ताप वृद्धि T = 45°C
R = 8.3 जूल प्रति मोल प्रति K
आवश्यक ऊष्मा θ = ?
दी गई गैस द्रव्यमान में, ग्राम मोलों की संख्या,
µ = \(\frac{m}{2gm}\) = \(\frac{20}{8}\) = 0.714
R = 8.3 mol-1K-1
माना नियत दाब पर गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा Cp है।
Cp = \(\frac{7}{2}\) R = \(\frac{20}{8}\) × 8.3 J mol-1 K
दी गई ऊष्मा Q = ?
सूत्र Q = nCp ∆θ से,
Q = nCp ∆θ
= 0.714 × \(\frac{7}{2}\) × 8.3 × 45 J
= 933.75 J
= 934 J

प्रश्न 12.3
व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?
(a) भिन्न – भिन्न तापों T1 व T2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय संपर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अंतिम ताप (T1 + T2)/2 ही हो।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयंत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो संयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(c) कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(d) किसी बंदरगाह के समीप के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
उत्तर:
(a) इसका कारण यह है कि अन्तिम ताप वस्तुओं को अलग-अलग तापों के अतिरिक्त उनकी. ऊष्मा धारिताओं पर भी निर्भर करता है।
(b) चूँकि शीतलक संयन्त्र से अभिक्रिया जनित ऊष्मा को हटाता है अतः शीतलक की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अधिक होनी चाहिए ताकि कम ताप-वृद्धि के लिए अधिक ऊष्मा शोषित कर सके।
(c) कार को चलाते-चलाते, सड़क के साथ घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ता है। इस कारण टायर में भरी हवा का दाब बढ़ जाता है।
(d) बन्दरगाह के समीप के शहरों की आपेक्षिक आर्द्रता समान अक्षांश के रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक रहती है। इस कारण बन्दरगाह के समीप शहर की जलवायु रेगिस्तानी शहर की अपेक्षा शीतोष्ण बनी रहती है।

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प्रश्न 12.4
गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिंडर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है। सिलिंडर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरंभिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
उत्तर:
माना V1 = x
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द्विपरमाणुक गैस का हाइड्रोजन के लिए
γ = \(\frac{7}{5}\) = 1.4
चूँकि ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है, अतः प्रक्रम ऊष्मारोधी है।
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प्रश्न 12.5
रुद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था A से दूसरी साम्यावस्था B तक ले जाने में निकाय पर 22.3J कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्थाA से अवस्था B में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा 9.35 cal है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है?
उत्तर:
दिया है:
dw = 22.3J …………….. (i)
ऊष्मागतिकी के.प्रथम नियम से
∴ dQ = dU + dw’ ……………… (ii)
ऊष्मारोधी प्रक्रम के लिए dU = 0
∴ dQ = 0 + dw’ or dw’ = dQ
= 9.35 × 4.19J
दिया है:
dp = 9.35 cal (1 cal = 4.19J) …………….. (iii)
∴ समी (ii) व (iii) से,
dw’ = 9.35 × 4.19 J
= 38.97 J
माना निकाय पर कृत कार्य W’ है।
W’ = dw’ – dW
= 38.97 – 22.3
= 16.67
= 16.7J

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प्रश्न 12.6
समान धारिता वाले दो सिलिंडर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) सिलिंडर A तथा B में अंतिम दाब क्या होगा?
(b) गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा?
(d) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अंतिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके P – V – T पृष्ठ पर होंगी?
उत्तर:
(a) दिया है:
मानक दाब = P1 = 1 atm, V1 = V
P2 = ? तथा V2 = 2V
चूँकि सिलिंडर B निर्वातित है अतः स्टॉपकॉक खोलने पर गैस का निर्वात में मुक्त प्रसार होगा। अतः गैस न तो कोई कार्य करेगी और न ही ऊष्मा का आदान-प्रदान होगा। अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा व ताप स्थिर रहेंगे। पुनः बॉयल के नियम से,
P1V1 = P2V2
∴ P2 = \(\frac{P_{1} V_{1}}{V_{2}}\) = \(\frac{1×V}{2v}\) = 0.5 atm

(b) चूँकि ω = 0 व θ = 0
∴ ∆V = 0
अर्थात् गैस की आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहेगी।

(c) चूँकि आन्तरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है। अतः गैस का ताप भी अपरिवर्तित रहेगा।

(d) चूँकि गैस का मुक्त प्रसार हुआ है। इस कारण माध्यमिक अवस्थाएँ साम्य अवस्थाएँ नहीं हैं। अतः ये अवस्थाएँ दाब-आयतन-ताप पृष्ठ पर नहीं होगी।

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प्रश्न 12.7
एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 J ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4 × 108 J कार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी?
उत्तर:
दिया है:
प्रति मिनट बॉयलर द्वारा अवशोषित ऊष्मा
= Q1 = 3.6 × 109 J
भाप इंजन द्वारा प्रति मिनट कृत कार्य
= 5.4 × 108 J
प्रति मिनट व्यय/उत्सर्जित ऊष्मा = Q2 = ?
इंजन की प्रतिशत दक्षता n% = ?
हम जानते हैं कि n% = \(\frac{W}{Q_{1}} \times 100\)
∴n% = \(\frac{5.4 \times 10^{8} \mathrm{J}}{3.6 \times 10^{9} \mathrm{J}}\) × 100
= \(\frac{3}{20}\) × 100 = 15%
सूत्र, Q1 = W + Q2 से,
Q2 = Q1 – W
= 36 × 108 – 5.4 × 108
= 30.6 × 108 J/min
= 30.6 × 109 J/min
= 3.1 × 109 J/min

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प्रश्न 12.8
एक हीटर किसी निकाय को 100 W की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 Js-1 की दर से कार्य करता है, तो आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
उत्तर:
दिया है:
θ = 100 W = 100 Js-1
W = 75 Js-1
∴ ∆V = θ – W
= 100 – 75
= 25 Js-1
अत: निकाय की आन्तरिक ऊर्जा वृद्धि दर 25 Js-1 है।

प्रश्न 12.9
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक (चित्र) में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा वहाँ से F तक कुल किए गये कार्य का आंकलन कीजिए।
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उत्तर:
माना गैस D से E व E से F तक कृत कार्य = W
अतः W = W1 + W2
मानां W1 = D से E तक प्रसार में कृत कार्य
= DEHGD का क्षेत्रफल = ADEF का क्षे० + आयत EHGF का क्षे० …………….. (ii)
दिया है:
EF = 5 – 2 = 3 litre = 3 × 10-3 m3
DF = 600 – 300 = 300 Nm-2
FG = 300 – 0 = 300 Nm2
GH = 5 – 2 = 3 × 10-3 m3
∴ समीकरण (ii) से,
∴W1 = [\(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3 × 300] J ……………. (iii)
माना E से F (संपीडन) तक कृत कार्य = W2 = EHGF का
= – FG × GH
= -(300 – 0) × (5 – 2) × 10-3
= – 300 × 3 × 10-3 J ……………….. (iv)
∴ समी० (i) (iii) व (iv) से,
W = \(\frac{1}{2}\) × 3 × 10-3 × 300 + 3 × 10-3
= 3 × 103 × 150 J = 450 × 10-3 J
= 0.450 J

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प्रश्न 12.10
खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अंदर रखने पर उसे 9°C पर बनाए रखता है। यदि कमरे का ताप 36°C है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आंकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
T1 = 273 + 36 = 309 K
T2 = 9°C = 282 K
β = ?
सूत्र β = \(\frac{T_{2}}{T_{1}-T_{2}}\) से
β = \(\frac{283}{309-282}\) = \(\frac{282}{7}\) = 10.4

Bihar Board Class 12 Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन

Bihar Board Class 12 Chemistry Solutions Chapter 3 वैद्युतरसायन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 12 Chemistry वैद्युतरसायन Text Book Questions and Answers

पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 3.1
निकाय Mg2+ | Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे?
उत्तर:
निकाय M2+ | Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात करने के लिए एक सेल स्थापित करते हैं, जिसमें एक इलेक्ट्रोड Mg | MgSO4 (1M), एक मैग्नीशियम के तार को IM MgSO4 विलयन में डुबोकर व्यवस्थित करते हैं तथा मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड Pt. H2 (1 atm) | H+ (1M) को दूसरे इलेक्ट्रोड की भाँति व्यवस्थित करते हैं (चित्र)।
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सेल का वि० वा० बल मापते हैं तथा वोल्टमीटर में विक्षेप की दिशा को भी नोट करते हैं। विक्षेप की दिशा प्रदर्शित करती है कि इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड से हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड की ओर है अर्थात् मैग्नीशियम इलेक्ट्रोड पर आक्सीकरण तथा हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड पर अपचयन होता है। अतः सेल को निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –
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प्रश्न 3.2
क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं?
उत्तर:
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अब हम यह जाँच करेंगे कि निम्नलिखित अभिक्रिया होगी अथवा नहीं –
Zn(s) + CuSO4 (aq) → ZnSO4 (aq) + Cu(s)
सेल को इस प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है –
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चूँकि \(\boldsymbol{E}_{\mathbf{1}}^{\Theta}\) धनात्मक है; अतः अभिक्रिया होगी तथा हम जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट नहीं रख सकते हैं।

प्रश्न 3.3
मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को आक्सीकृत कर सकते हैं।
उत्तर:
फेरस आयनों के आक्सीकरण का अर्थ है –
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केवल वे पदार्थ Fe2+ को Fe3+ में आक्सीकृत कर सकते हैं जो प्रबल आक्सीकरण हों तथा जिनका धनात्मक अपचायक विभव 0.77 V से अधिक हो जिससे सेल अभिक्रिया का वि०वा० बल धनात्मक प्राप्त हो सके। यह स्थिति उन तत्वों पर लागू हो सकती है जो विद्युत-रासायनिक श्रेणी में Fe3+ | Fe2+ से नीचे स्थित हैं; उदाहरणार्थ – Br, Cl तथा I.

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प्रश्न 3.4
pH = 10 के विलयन के सम्पर्क वाले हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए,
H+ + e → \(\frac{1}{2}\) H2
अब नर्नस्ट समीकरण के अनुसार,
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प्रश्न 3.5
एक सेल के emf का परिकलन कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है।
दिया गया है:
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गणना:
सेल अभिक्रिया:
Ni(s) + 2Ag+ (0.02 M) →Ni2+ (0.160 M) + 2Ag(s) के लिए नस्ट समीकरण से –
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प्रश्न 3.6
एक सैल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है,
2Fe+3 (aq) + 2I (aq) → 2Fe2+ (aq) + I2 (s) का 298 K ताप पर E0(cell) = 0.236 V है। सैल अभिक्रिया की मानक गिब्ज ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
हल:
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हम जानते हैं कि
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प्रश्न 3.7
किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?
उत्तर:
विलयन के एकांक आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या को चालकता कहते हैं। विलयन की तनुता के साथ प्रति एकांक आयतन आयनों की संख्या घटती है जिससे चालकता भी घटती है।

प्रश्न 3.8
जल की \(\Lambda^{\circ} m\) ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।
उत्तर:
अनन्त तनुता पर NaOH, HCl तथा NaCl मोलर चालकताएँ ज्ञात होने पर अनन्त तनुता पर जल की A°m ज्ञात की जा सकती है।
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प्रश्न 3.9
0.025 mol L-1 मेथेनोइक अम्ल की चालकता 46.1 S cm2 mol-1 हैं। इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है कि –
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हल:
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= 349.6 + 54.6
= 404.2 S cm mol-1
दिया है:
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प्रश्न 3.10
यदि एक धात्विक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा 2 घंटों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?
हल:
Q (कूलॉम) = i (ऐम्पियर) × t(s)
= (0.5 ऐम्पियर) × (2 × 60 × 60s)
= 3600 C
996500C का प्रवाह 1 मोल इलेक्ट्रॉन अर्थात् 6.02 × 1023 इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के तुल्य होता है।
∴ 3600 C के तुल्य इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह
\(\frac{6.02 \times 10^{23}}{96500}\) × 3600
= 2.246 × 1022 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 3.11
उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका वैद्युत अपघटनी निष्कर्षण होता है।
उत्तर:
Na, Ca, Mg तथा Al.

प्रश्न 3.12
निम्नलिखित अभिक्रिया में \(\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}\) आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
\(\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}\) + 14H+ + 6e → 2Cr3+ + 7H2O
उत्तर:
दी हुई अभिक्रिया से,
\(\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}\) आयनों के एक मोल को 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
∴ F = 6 × 96500 C
= 579000 C
अत: Cr3+ में अपचयन के लिए आवश्यक विद्युत
= 579000C

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प्रश्न 3.13
चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड-संचायक सैल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
उत्तर:
चार्जिंग के दौरान सैल वैद्युत अपघटनी सेल की भाँति कार्य करती है। रिचार्जिंग के दौरान निम्न अभिक्रियायें होती हैं –
कैथोड पर:
PbSO4(s) + 2e → Pb(s) + SO42- (aq)

ऐनोड पर:
PbSO4 (s) + 2H2O (l) → PbO2 (s) + SO42- (aq) + 4H+ (aq) + 2e

परिणामी अभिक्रिया:
2PbSO4(s) + 2H2O(l) → Pb(s) + PbO2 (s) + 4H+ (aq) + 2SO42- (aq)

प्रश्न 3.14
हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किए जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।
उत्तर:
मेथेन (CH4), मेथेनॉल (CH3OH)।

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प्रश्न 3.15
समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक विद्युत रासायनिक सेल बनना माना जाता है।
उत्तर:
लोहे की सतह पर उपस्थित जल की परत वायु के अम्लीय ऑक्साइडों, जैसे : CO2, SO2 आदि को घोलकर अम्ल बना लेती है जो वियोजित होकर H+ आयन देते हैं:
H2O + CO2 → H2CO3 ⇄ 2H+ + CO32- आयनों की उपस्थिति में, लोहा कुछ स्थलों पर से इलेक्ट्रॉन खोना प्रारम्भ कर देता है तथा फेरस आयन बना लेता है। अतः ये स्थल ऐनोड का कार्य करते हैं –
Fe(s) → Fe2+ (aq) 2e
इस प्रकार धातु से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन अन्य स्थलों पर पहुँच जाते हैं। जहाँ H+ आयन तथा घुली हुई ऑक्सीजन इन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर लेती है तथा अपचयन अभिक्रिया हो जाती है। अतः ये स्थल कैथोड की भाँति कार्य करते हैं –
O2(g) + 4H+ (aq) 4e → 2H2O (l)
सम्पूर्ण अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है –
2Fe(s) = O2(g) + 4H+ (aq) → 3Fe2+(aq) + 2H2O (l)
इस प्रकार लोहे की सतह पर विद्युत रासायनिक सेल बन जाता है। फेरस आयन पुनः वायुमण्डलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर फेरिक आयनों में परिवर्तित हो जाते हैं जो जल अणुओं से संयुक्त होकर जलीय फेरिक ऑक्साइड Fe2O3. xH2O बनाते हैं। यह जंग कहलाता है।

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 3.1
निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक-दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं।
Al, Cu, Fe, Mg एवं Zn
उत्तर:
Mg, Al, Zn, Fe, Cu

प्रश्न 3.2
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
K+|K = – 2.93V, Ag+ | Ag = 0.80V,
Hg2+ | Hg = 0.79V
Mg2+ | Mg = – 2.37V, Cr3+ | Cr = – 0.74V
उत्तर:
ऑक्सीकरण विभव उच्च होने से यह तात्पर्य है कि उस धातु का सरलता से ऑक्सीकरण हो जाएगा अर्थात उसकी अपचायक क्षमता अधिक होगी। अत: धातुओं की अपचायक क्षमता का बढ़ता क्रम निम्नलिखित है –
Ag < Hg < Cr < Mg < K

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प्रश्न 3.3
उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
Zn(s) + 2Ag+ (aq) → zn2+ (aq) + 2Ag(s) अब बताइए –

  1. कौन-सा इलेक्ट्रॉड ऋणात्मक अवेशित है।
  2. सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन से हैं।
  3. प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या

उत्तर:
सेल को निम्नांकित चित्र के अनुसार व्यवस्थित करते हैं। सेल को निम्नलिखित प्रकार दर्शाया जाएगा –

  1. ऐनोड (जिंक इलेक्ट्रोड) ऋणावेशित होगा।
  2. सेल में विद्युत धारा के वाहक इलेक्ट्रॉन हैं।
  3. इलेक्ट्रोडों पर होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं –
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प्रश्न 3.4
निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए।

  1. 2Cr(s) + 3Cd2+ (aq) → 2Cr+ (aq) + 3Cd
  2. Fe2+ (aq) + Ag+ (aq) → Fe3+ (aq) + Ag(s)

उपरोक्त अभिक्रियाओं के लिए \(\Delta_{r} G^{\Theta}\) एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
गणना –
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= -0.40 V – (-0.74 V)
= + 0.34 V
ΔrGΘ = – nFEΘ(सेल)
= – 6mol × 96500 C mol-1
= -196860 J mol-1
= -196.86 KJ mol-1
ΔrGΘ = 2.303 RT log Kc
Kc = Antilog 34.5014
= 3.173 × 104

2.
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= -2985 CV mol-1mol-1
= -2895 J mol-1
= -2895 KJ mol-1
ΔrGΘ = – 2.303 RT log Kc
= -2895 = -2.303 × 8.314 × 298 × log Kc
log Kc = 0.50704
Kc = Antilog (0.5074)
= 3.22

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प्रश्न 3.5
निम्नलिखित सेलों की 298K पर नेर्नस्ट समीकरण एवं emf लिखिए।

  1. Mg(s) | Mg2+ (0.001 M) || Cu2+ (0.0001 M) | Cu(s)
  2. Fe(s) | Fe2+ (0.001 M) || H+ (1 M) | H2 (g)(1 bar) | Pt(s)
  3. Sn(s) | Sn2+ (0.050 M) || H+ (0.020 M) | H2(g) (1 bar) | Pt(s)
  4. Pt(s) | Br2(1) | Br (0.010 M) || H2 + (0.030 M) | H2(g) (1 bar) | Pt (s)

हल:
1. सेल अभिक्रिया:
Mg + Cu2+ → Mg2+ + Cu (n = 2)
नेन्स्ट समीकरण:
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2. सेल अभिक्रिया:
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3. सेल अभिक्रिया:
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4. सेल अभिक्रिया:
2Br + 2H+ → Br2 + H2

नेस्ट समीकरण:
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इस प्रकार ऑक्सीकरण हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड पर आक्सीकरण पर तथा अपचयन Br2 इलेक्ट्रोड होगा।
E(सेल) = 1.2887

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प्रश्न 3.6
घड़ियों एवं अन्य युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है –
Zn(s) + Ag2O (s) + H2O (l) → Zn2+ (aq) + 2Ag(s) + 2OH (aq)
अभिक्रिया के लिए ∆rGΘ एवं EΘ ज्ञात कीजिए।
हल:
Zn ऑक्सीकृत तथा Ag2O अपचयित होता है। (Ag+ आयन, Ag में परिवर्तित होते हैं)
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= 0.344 + 0.76
= 1.104
तथा ∆GΘ = -nFEΘ(सेल)
= – 2 × 96500 × 1.104 J
= -2,13 × 105 J

प्रश्न 3.7
किसी विद्युतअपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सान्द्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विद्युतअपघट्य के विलयन की चालकता : यह प्रतिरोध R का व्युत्क्रम होता है तथा उस सरलता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिससे धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है।
c = \(\frac{1}{R}\) = \(\frac{A}{ρl}\) (∵R = ρ \(\frac{A}{l}\))
k = \(\frac{A}{l}\)
यह k विशिष्ट चालकत्व है।
चालकता का SI मात्रक सीमेन्ज है जिसे प्रतीक ‘S’ से निरूपित किया जाता है तथा यह ohm-1 या Ω-1 के तुल्य होता है।

मोलर चालकता (Molar conductivity):
वह चालकता जो 1 मोल विद्युतअपघट्य को विलयन में घोलने पर समस्त आयनों द्वारा दर्शाई जाती है, मोलर चालकता कहलाती है, इसे \(\Lambda_{m}\) (लैम्ब्डा) से व्यक्त किया जाता है। यदि विद्युत अपघट्य विलयन के V cm3 में विद्युतअपघट्य के 1 मोल हों, तब
Am = K × V
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इसकी इकाई ohm-1 cm2 mol-1 या δ cm2 mol-1 है।

सान्द्रता के साथ चालकता तथा मोलर चालकता में परिवर्तन –
विद्युतअपघट्य की सान्द्रता में परिवर्तन के साथ-साथ चालकता एवं मोलर चालकता दोनों में परिवर्तन होता है। दुर्बल एवं प्रबल दोनों प्रकार के विद्युतअपघट्यों की सान्द्रता घटाने पर चालकता सदैव घटती है। इसकी इस तथ्य से व्याख्या की जा सकती है कि तनुकरण करने पर प्रति इकाई आयतन में विद्युतधारा ले जाने वाले आयनों की संख्या घट जाती है।

किसी भी सान्द्रता पर विलयन की चालकता उस विलयन के इकाई आयतन का चालकत्व होता है, जिसे परस्पर इकाई दूरी पर स्थित एवं इकाई अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के मध्य रखा गया हो। यह निम्नलिखित समीकरण से स्पष्ट है –

G = \(\frac{k A}{l}\) = k (A एवं l दोनों ही उपयुक्त इकाइयों m या cm में हैं) किसी दी गई सान्द्रता पर एक विलयन की मोलर चालकता उस विलयन के V आयतन का चालकत्व है, जिसमें विद्युतअपघट्य का एक मोल घुला हो तथा जो एक-दूसरे से इकाई दूरी पर स्थित, A अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो इलेक्ट्रोडों के मध्य रखा गया हो। अतः
\(\Lambda_{m}\) = \(\frac{k A}{l}\)
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चित्र – जलीय विलयन में ऐसीटिक अम्ल (दुर्बल विद्युत अपघट्य) एवं पोटैशियम क्लोराइड (प्रबल विद्युतअपघट्य) के लिए मोलर चालकता के विपरीत c1/2 का आलेख
चूँकि l = 1 तथा A = V (आयतन, जिसमें विद्युतअपघट्य का. एक मोल घुला है।)
\(\Lambda_{m}\) = KV

सान्द्रता घटने के साथ मोलर चालकता बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह कुल आयतन (V) भी बढ़ जाता है जिसमें एक मोल विद्युतअपघट्य उपस्थित होता है। यह पाया गया है कि विलयन के तनुकरण पर आयतन में वृद्धि K में होने वाली कमी की तुलना में कहीं अधिक होती है।

प्रबल विद्युतअपघट्य – प्रबल विद्युतअपघट्यों के लिए, \(\Lambda_{m}\) का मान तनुता के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है एवं इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा निरूपित किया जा सकता है –
\(\Lambda_{m}\) = \(\Lambda_{m}^{0}\) – A c1/2

यह देखा जा सकता है कि यदि \(\Lambda_{m}\) को c1/2 के विपरीत आरेखित किया जाए (चित्र) तो हमें, एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जिसका अंत: खंड \(\Lambda_{m}^{0}\) एवं ढाल – ‘A’ के बराबर है।

दिए गए विलायक एवं ताप पर स्थिरांक ‘A’ का मान विद्युतअपघट्य के प्रकार, अर्थात् विलयन में विद्युतअपघट्य के वियोजन से उत्पन्न धनायन एवं ऋणायन के आवेशों पर निर्भर करता है। अतः, NaCl, CaCl2, MgSO4 क्रमश: 1-1, 2-1 एवं 2-2 विद्युतअपघट्य के रूप में जाने जाते हैं। एक प्रकार के सभी विद्युतअपघट्यों के लिए ‘A’ का मान समान होता है।

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प्रश्न 3.8
298K पर 0.20M KCI विलयन की चालकता 0.0248 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
हल:
प्रश्नानुसार, मोलरता 0.20 M, चालकता (K) = 0.0248 S cm-1
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प्रश्न 3.9
298 K पर एक चालकता सेल जिसमें 0.001 M KCI विलयन है, का प्रतिरोध 1500 Ω है। यदि 0.001 M KCI विलयन की चालकता 298K पर 0.146 × 10-3 s cm-1 हो तो सेल स्थिरांक क्या है?
हल:
हम जानते हैं कि सेल स्थिरांक = चालकता × प्रतिरोध
= (0.146 × 10-3 S cm-1) × (1500 Ω)
= 0.219 cm-1

प्रश्न 3.10
298 K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सान्द्रताओं पर चालकता का मापन किया गया जिसके आँकड़े निम्नलिखित हैंसान्द्रता –
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सभी सान्द्रताओं के लिए \(\Lambda_{m}\) का परिकलन कीजिए एवं \(\Lambda_{m}\) तथा c1/2 के मध्य एक आलेख खींचिए। \(\Lambda_{m}^{0}\) का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
सभी सान्द्रताओं के लिए Am का परिकलन आगे तालिका में दिखाया गया है –
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= 124.0 Scm2mol-1

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प्रश्न 3.11
0.00241 M ऐसीटिक अम्ल की चालकता 7.896 × 10-5 S cm-1 है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए \(\Lambda_{m}^{0}\) का मान 390.5 S cm2 mol-1 हो तो इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
हल:
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वियोजन स्थिरांक
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प्रश्न 3.12
निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी?

  1. 1 मोल Al3+ को Al में
  2. 1 मोल Cu2+ को Cu में
  3. 1 मोल MnO4 को Mn2+ में

हल:
1. इलेक्ट्रोड अभिक्रिया निम्न प्रकार से दी जा – सकती है
Al3+ + 3e → Al
अतः 1mol Al3+ को Al में अपचयन के लिए आवश्यक आवेश की मात्रा = 3 फैराड,
= 3 × 96500C
= 289500C

2. इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार से दी जा सकती है –
Cu2+ + 2e → Cu
अतः 1 mol Cu2+ को Cu में के अपचयन के लिए आवश्यक आवेश की मात्रा = 2 फैराडे
= 2 × 96500 C
= 193000C

3. इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार से दी जा सकती है –
MnO4 → Mn2+
Mn7+ + 5e → Mn2+
अतः 1 mol MnO4 के अपचयन के लिए आवश्यक आवेश की मात्रा = 5 F
= 5 × 96500 C
= 482500C

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प्रश्न 3.13
निम्नलिखित को प्राप्त करने के लिए कितने फैराडे विद्युत की आवश्यकता होगी?

  1. गलित CaCl2 से 20.0 g Ca
  2. गलित Al2O3 से 40.0 g Al

हल:
1. Ca2+ + 2 → Ca
चूँकि 1 mol Ca अर्थात् 40 g Ca को विद्युत की आवश्यकता है = 2F
∴ 20g Ca को विद्युत की आवश्यकता होगी = 1F

2. Al3+ + 3e → Al
चूँकि 1 mol Al अर्थात् 27 g Al की विद्युत की आवश्यकता है% 3F
∴ 40 g Al को विद्युत की आवश्यकता होगी = \(\frac{3}{27}\) × 40
= 4.44 F

प्रश्न 3.14
निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत आवश्यक है?

  1. 1 मोल H2O को O2 में।
  2. 1 मोल Fe0 को Fe2O3 में।

गणना:
1. 1 mol H2O2 के लिए इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है –
H2O → H2 + \(\frac{1}{2}\)O2
अर्थात् O2- → \(\frac{1}{2}\)O2 + 2e
∴ आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2 फैराडे
= 2 × 96500C
= 193000C

2. 1 मोल Feo के लिए इलेक्ट्रोड अभिक्रिया इस प्रकार से दी जाती है –
FeO → \(\frac{1}{2}\)Fe2O3
अब Fe2+ → Fe3+ + e
अतः अभीष्ट विद्युत की मात्रा = 1 फैराडे
= 96500C

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प्रश्न 3.15
Ni(NO3)2 के एक विलयन का प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत-अपघटन किया गया। Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
हल:
प्रवाहित की गई विद्युत की मात्रा
= (5 A) × (20 × 60 s)
= 6000 C
Ni2+ + 2e → Ni
अब चूँकि 2F अर्थात् 2 × 96500C, Ni निक्षेपित करता है = 1 mol
= 58.7g
∴ 6000 C, Ni निक्षेपित करेगा
= \(\frac{58.7}{2 \times 96500}\) × 6000 = 1.825 g

प्रश्न 3.16
ZnSO4, AgNO3, एवं CuSO4 विलयन वाले तीन विद्युत-अपघटनी सेलों A, B, C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युत धारा, सेल B के कैथोड पर 1.45 g सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युत धारा कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक का द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
Ag+ + e → Ag
108g Ag निक्षेपित होता है = 1F = 96500C
∴ 1.45 g Ag निक्षेपित होगा = \(\frac{96500}{108}\) × 1.45
= 1295.6 × C
या t = \(\frac{Q}{I}\) = \(\frac{1295.6}{1.5}\)
= 863.75
= 14 min 24s
Cu2+ + 2e → Cu
अर्थात् 2 × 96500C, Cu निक्षेपित करता है = 63.5 g
अतः 1295.6C. Cu निक्षेपित करेगा = \(\frac{63.5 \times 1295.6}{2 \times 96500}\)
= 0.4263g
इसी प्रकार, Zn2+ + 2e → Zn
निक्षेपित जिंक का द्रव्यमान = \(\frac{65.4 \times 1295.6}{2 \times 96,500}\)
= 0.44g

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प्रश्न 3.17
तालिका 3.1 (पाठ्य पुस्तक) में दिए गए मानक इलैक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया संभव है?

  1. Fe3+ (aq) और I (aq)
  2. Ag+ (aq) और Cu(s)
  3. Fe3+ (aq) और Br (aq)
  4. Ag(s) और Fe3+ (aq)
  5. Br2 (aq) और Fe3+ (aq)

उत्तर:
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सेल अभिक्रिया का वि० वा० बल धनात्मक होगा।
1. Fe3+ (aq) + I (aq) → Fe2+(aq) + \(\frac{1}{2}\)I2
सेल को निम्न प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –
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= 0.54 – 0.77V
= – 0.23V
∴ अभिक्रिया का वि० वा० बल ऋणात्मक है
∴ अभिक्रिया सम्भव नहीं है।

2. Ag+ (aq) + Cu → Ag(s) + Cu2+ (aq)
निम्न प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –
अर्थात् Cu | Cu2+ (aq) || Ag+ (aq) | Ag
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= 0.80V – 0.34V
= 0.46V
∵ अभिक्रिया का वि० वा० बल धनात्मक है।
∵ अभिक्रिया सम्भव है।

3. Fe3+ (aq) + Br (aq) → Fe2+ (aq) + \(\frac{1}{2}\)Br2
निम्न प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –
अर्थात् Br2 (aq) | Br (aq) || Fe2+ (aq) | Fe3+ (aq)
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= 0.77V – 1.09V
= 0.32V
∵ अभिक्रिया का वि० वा०बल ऋणात्मक है
∵ अभिक्रिया सम्भव नहीं है।

4. Ag(s) + Fe3+ + (aq) → Ag+ (aq) + Fe2+ (aq)
सेल को निम्न प्रकार से निरूपित कर कर सकते हैं –
अर्थात् Ag+ (aq) | Ag(s) || Fe2+ (aq) | Fe3+ (aq)
BIhar Board Class 12 Chemistry Chapter 3 वैद्युतरसायन
= 0.77V – 0.80V
= – 0.03V
∵ अभिक्रिया का वि० वा० बल ऋणात्मक है
∵ अभिक्रिया सम्भव नहीं है।

5. \(\frac{1}{2}\)Br2 (aq) + Fe2+ (aq) || Br + Fe3+
निम्न प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –
BIhar Board Class 12 Chemistry Chapter 3 वैद्युतरसायन
= 1.09V – 0.77
= 0.32V
∵ अभिक्रिया का वि० वा० बल धनात्मक है
∵ अभिक्रिया सम्भव है।

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प्रश्न 3.18
निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए विद्युतअपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए:

  1. सिल्वर इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  2. प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
  3. प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ H2SO4 का तनु विलयन
  4. प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ CuCl2 का जलीय विलयन

उत्तर:
1. सिल्वर इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO3 के जलीय विलयन का विद्युतअपघटन
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कैथोड पर:
चूँकि Ag+ आयनों का डिस्चार्ज विभव H+ आयनों से कम होता है, अत: H+ आयनों का निक्षेपणन होकर Ag+ आयन Ag की भांति निक्षेपित होंगे।

ऐनोड पर: Ag → Ag+ + e
ऐनोड का Ag घुलकर विलयन में Ag+ आयन देगा।

2. प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO3 के जलीय विलयन का विद्युतअपघटन
कैथोड पर:
उपर्युक्त खण्ड (i) की भांति Ag+ आयदन Ag की तरह निक्षेपित होंगे।

ऐनोड पर:
OH (aq) → OH + e
4OH → 2H2O(l) + O2 (g)
NO3 आयनों की तुलना में OH आयन डिस्चार्ज होंगे जो विघटित होकर O2 देते हैं।

3. प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ H2SO4 के तनु विलयन का विद्युत अपघटन
H2SO4 (aq) → 2H+ (aq) + SO2-4 (aq)
H2O H+ + OH

कैथोड पर:
H+ + e → H
H + H → H2(g)

ऐनोड पर:
OH → OH + e
4OH → 2H2O(l) + O2(g)
अतः कैथोड पर H2 तथा ऐनोड पर O2 मुक्त होगी।

4. प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ Cucl2 के जलीय विलयन का विद्युतअपघटन
CuCl2 (s) + (aq) → Cu2+ (aq) + 2Cl (aq)
H2O H+ + OH

कैथोड पर:
Cu2+ + 2e → Cu2+ (aq) + 2Cl (aq)
H2O H+ + OH

ऐनोड पर:
अत: कैथोड पर Cu निक्षेपित होगा तथा ऐनोड पर Cl2 मुक्त होगी।