Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
इनमें से भारत के किस राज्य में बाढ़ अधिक आती है?
(क) बिहार
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) असम
(घ) उत्तर प्रदेश
उत्तर:
(ग) असम

प्रश्न 2.
उत्तरांचल के किस जिले में मालपा भूस्खलन आपदा घटित हुई थी?
(क) बागेश्वर
(ख) चंपावत
(ग) अल्मोड़ा
(घ) पिथौरागढ़
उत्तर:
(घ) पिथौरागढ़

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प्रश्न 3.
इनमें से कौन-से राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
(क) असम
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु
उत्तर:
(घ) तमिलनाडु

प्रश्न 4.
इनमें से किस नदी में मजौली नदीय द्वीप स्थित है?
(क) गंगा
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गोदावरी
(घ) सिंधु
उत्तर:
(ख) ब्रह्मपुत्र

प्रश्न 5.
बर्फानी तूफान किस तरह की प्राकृतिक आपदा है?
(क) वायुमंडलीय
(ख) जलीय
(ग) भौमिकी
(घ) जीवमंडलीय
उत्तर:
(क) वायुमंडलीय

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन से भारतीय क्षेत्रों में भूकंप के आने की संभावना सर्वाधिक होती है?
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य
(ख) दक्कन का पठार
(ग) कोरोमण्डल तट
(घ) गंगा का मैदान
उत्तर:
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें

प्रश्न 1.
संकट किस दशा में आपदा बन जाती है?
उत्तर:
प्राकृतिक संकट या मानव निर्मित संकट द्वारा जब धन-जन दोनों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है तब वह संकट आपदा बन जाती है।

प्रश्न 2.
हिमालय और भारत के उत्तर:पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
उत्तर:
इंडियन प्लेट प्रतिवर्ष उत्तर:पूर्व दिशा में एक सेंटीमीटर खिसक रही है। लेकिन उत्तर में स्थित यूरेशियन प्लेट इसके लिए अवरोध पैदा करती है। परिणाम स्वरूप इन प्लेटों के किनारे लॉक हो जाते हैं। ऊर्जा संग्रह से तनाव बढ़ता है प्लेटों के लॉक टूट जाते हैं और भूकंप आ जाता है।

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प्रश्न 3.
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियों अनुकूल हैं ?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कम दबाव वाले उग्र मौसम तंत्र जो 30° उत्तर तथा 30° दक्षिण अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं। तीव्र कोरियोलिस बल, क्षोभ मण्डल में अस्थिरता, तथा मजबूत ऊर्ध्वाधर वायु फान (wedge) की अनुपस्थिति आदि स्थितियाँ अनुकूल हैं।

प्रश्न 4.
पूर्वी भारत की बाढ़, पश्चिमी भारत की बाढ से अलग कैसे होती है?
उत्तर:
पूर्वी भारत की बाढ़ अंधाधुंध वन कटाव तथा प्राकृतिक अपवाह तंत्रों के अवरुद्ध होने तथा बाढ़कृत मैदानों पर मानव बसाव के कारण आती है जबकि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब आदि में मानसूनी वर्षा तथा मानवीय क्रियाकलापों के द्वारा बाढ़ आती है।

प्रश्न 5.
पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं?
उत्तर:
पश्चिमी और मध्य भारत में कम वर्षा होती है जिसके कारण भतल पर जल की कमी हो जाती है। कम वर्षा, अत्यधिक वाष्पीकरण और जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक , प्रयोग से सूखे की स्थिति पैदा होती है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दे

प्रश्न 1.
भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें और इस आपदा के निवारण के कुछ उपाय बताएँ।
उत्तर:
ज्यादा अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी । घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र, जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते हैं। हिमालय क्षेत्र के सारे राज्य और उत्तर:पूर्वी भाग (असम को छोड़कर) इस क्षेत्र में शामिल हैं।

पार हिमालय के कम वृष्टिवाले क्षेत्र लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में स्थिति, अरावली पहाड़ियों में कम वर्षा वाला क्षेत्र, पश्चिमी व पूर्वी घाट के व दक्कन पठार के वृष्टिछाया क्षेत्र ऐसे इलाके हैं. जहाँ कभी-कभी भूस्खलन होता है। इसके अतिरिक्त झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और केरल में खादानों और भूमि धंसने से भूस्खलन होता रहता है।

राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल (दार्जलिंग जिले को छोड़कर), असम (कार्बी अनलोंग को छोड़कर) और दक्षिण प्रान्तों के तटीय क्षेत्र भूस्खलन युक्त हैं। भूस्खलन आपदा के निवारण के कुछ उपाय-भूस्खलन से निपटने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग उपाय होने चाहिए। अधिक भू-स्खलन संभावी क्षेत्रों में सड़क और बड़े बाँध बनाने जैसे निर्माण कार्य तथा विकास कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए।

इन क्षेत्रों में कृषि नदी घाटी तथा कम ढाल वाले क्षेत्रों तक सीमित होनी चाहिए तथा बडी विकास परियोजनाओं पर नियंत्रण होना चाहिए। सकारात्मक कार्य जैसे-वृहत् स्तर पर वनीकरण को बढ़ावा और जल बहाव को कम करने के लिए बाँध का निर्माण भू-स्खलन के उपायों के पूरक हैं। स्थानांतरी कृषि वाले उत्तर:पूर्वी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जानी चाहिए।

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प्रश्न 2.
सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा भेद्यता क्षेत्रों में विभाजित करें और इसके निवारण के उपाय बताएँ।
उत्तर:
अधिक अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते है। सखा एक जटिल परिघटना है जिसमें कई प्रकार के मौसम विज्ञान संबंधी तथा अन्य तत्त्व, जैसे-वृष्टि, वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, भौम जल, मृदा में नमी, जल भंडारण व भरण, कृषि पद्धतियाँ, विशेषतः उगाई जाने वाली फसलें, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियाँ पारिस्थितिकी शामिल हैं।

भारत में सूखाग्रस्त क्षेत्र-भारतीय जलवायु तंत्र में सूखा और बाढ़ महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। कुछ अनुमानों के अनुसार भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 19 प्रतिशत भाग और जनसंख्या का 12 प्रतिशत हिस्सा हर वर्ष सुखे से प्रभावित होता है। देश का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र सखे से प्रभावित हो सकता है 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। सूखे की तीव्रता के आधार पर भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है

अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान का अधिकतर भाग, विशेषकर अरावली के पश्चिम में स्थित मरुस्थल और गुजरात का कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा प्रभावित है। इसमें राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिले भी शामिल हैं, जहाँ 90 मिलीलीटर से कम वार्षिक
औसत वर्षा होती है। अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-इसमें राजस्थान के पूर्वी भाग, मध्य प्रदेश के अधिकतर भाग, महाराष्ट्र के पूर्वी भाग, आंध्र प्रदेश के अंदरुनी भाग, कर्नाटक का पठार, तमिलनाडु का उत्तरी भाग, झारखंड का दक्षिणी भाग और उड़ीसा का आंतरिक भाग शामिल है।

मध्य सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान के उत्तरी भाग, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी जिले, गुजरात के बचे हुए जिले, कोंकणं को छोड़कर महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु में कोयंबटूर पठार और आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। निवारण के उपाय-सूखे की स्थिति में तात्कालिक सहायता से सुरक्षित पेयजल वितरण, दवाइयाँ, पशुओं के लिए चारे और जल की उपलब्धता तथा लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुँचना शामिल है।

दीर्घकालिक योजनाओं में विभिन्न कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे- भूमिगत जल के भण्डारण का पता लगाना, जल अधिक्य क्षेत्रों में अल्पजल क्षेत्रों में पानी पहुँचना, नदियों को जोड़ना और बाँध व जलाशयों का निर्माण इत्यादि। द्रोणियों की पहचान तथा भूमिगत जः भंडारण की संभावना का पता लगाने के लिए सुदूर संवेदन और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों का प्रयोग करना। सूखा प्रतिरोधी फैसलों के बारे में प्रचार-प्रसार। वर्षा जल संलवन (Rain water harvesting) सूखे का प्रभाव कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 3.
किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?
उत्तर:
तकनीकी विकास ने मानव को, पर्यावरण को प्रभावित करने की बहुत क्षमता प्रद कर दी है। परिणमतः मनुष्य ने आपदा के खतरे वाले क्षेत्रों में गहन क्रियाकलाप शुरू कर दि है और इस प्रकार आपदाओं की सुभेद्यता को बढ़ा दिया है। अधिकांश नदियों में, बाढ़-मैद में भू-उपयोग तथा भूमि की कीमतों के कारण क्या तटों पर बड़े नगरों एवं बंदरगाहों, जैसेतथा चेन्नई आदि के विकास ने इन क्षेत्रों को चक्रवातों, प्रभंजनों तथा सुनामी आदि के लिए बना दिया है।

देश की आर्थिक उन्नति के लिए औद्योगिक और परमाणु विकास कभी-कभी आपदा का कारण बन जाता है। किसी जहरीली गैस का रिसाव (उदाहरण भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत, हजारों अपंग एवं बीमार), बाँध जलाशयों का निर्माण कार्य, आग तथा विस्फोट आदि हजारों लोगों की जान ले सकते हैं और लोगों को प्रभावित कर सकते हैं।

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(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए विषयों पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें –

  1. मालपा भूस्खलन
  2. सुनामी
  3. उड़ीसा चक्रवात और गुजरात चक्रवात
  4. नदियों को आपस में जोड़ना
  5. टिहरी बाँध या सरदार सरोवर बाँध
  6. भुज/लातूर भूकंप
  7. डेल्टा या नदीय द्वीप में जीवन
  8. छत वर्षा जल संचयन का मॉडल तैयार करें।

उत्तर:
इस अध्याय को ध्यान से पढ़ें और अपने अध्यापक की मदद से या किसी अन्य पाठ्य-पुस्तक या अपने कक्षा की पाठ्य-पुस्तक से जानकारियाँ इकट्ठी करके इस परियोजना की रिपोर्ट तैयार करें। लगभग सभी जानकारियाँ आपको पाठ्य-पस्तक में ही मिल जायेंगी।

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूकम्पमापक यंत्र को क्या कहते हैं?
उत्तर:
सिस्मोग्राफ।

प्रश्न 2.
भूकंप की तीव्रता किस पैमाने पर मापी जाती है?
उत्तर:
रिक्टर पैमाने पर।

प्रश्न 3.
लाटूर भूकंप (महाराष्ट्र) का क्या कारण था?
उत्तर:
भारतीय प्लेट का उत्तर की और खिसकना।

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प्रश्न 4.
भूकंप किस सिद्धांत से सम्बन्धित है?
उत्तर:
प्लेट टेक्टानिक।

प्रश्न 5.
भारत में प्रभाव डालने वाले प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
बाढ़, सूखा, भूकंप तथा भू-स्खलन।

प्रश्न 6.
प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
आकस्मिक भूगर्भिक हलचलें।

प्रश्न 7.
वर्तमान समय में भारत में आये विनाशकारी भूचाल का नाम लिखें।
उत्तर:
भुज, गुजरात-26 जनवरी, 2001

प्रश्न 8.
विभिन्न भूकंपीय तरंगों के नाम लिखें।
उत्तर:
P-Waves, S-Waves, L-Waves.

प्रश्न 9.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कोई जलभृत भाग किसी ढलान से अचानक नीचे गिरती हैं।

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प्रश्न 10.
तीन प्रदेशों के नाम लिखो जो चक्रवातों से प्रभावित हैं।
उत्तर:
उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

प्रश्न 11.
प्राकृतिक आपदायें किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के धरातल पर आन्तरिक हलचलों द्वारा अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। इनसे मानव पर हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इन्हें प्राकृतिक आपदायें कहते हैं।

प्रश्न 12.
कुछ सामान्य आपदाओं के नाम बताएँ।।
उत्तर:
सामान्य आपादाएँ इस प्रकार हैं-ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप, सागरकम्प, सूखा, बाढ़, चक्रवात, मृदा अपरदन, अपवाहन, पंकप्रवाह, हिमधाव।

प्रश्न 13.
संकट किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रेजी भाषा में प्राकृतिक आपदाओं को प्राकृतिक संकट भी कहा जाता है। फ्रेंच भाषा में डेस (Des) का अर्थ बुरा (Bad) तथा (Aster) का अर्थ सितारे (Stars) से है। मानवीय जीवन और अर्थव्यवस्था को भारी हानि पहुँचाने वाली प्राकृतिक आपदाओं को संकट और महाविपत्ति कहते हैं।

प्रश्न 14.
भूकंप का परिणाम क्या होता है?
उत्तर:
भूकंप की शक्ति को रिक्टर पैमाने पर मापा जात है जिसे परिमाण कहते हैं। यह भूकंप द्वारा विकसित भूकंपीय ऊर्जा की माप होती है।

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प्रश्न 15.
भूकंप की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूकंप द्वारा होने वाली हानि की माप को तीव्रता कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारत के अधिक तथा अत्यधिक भूकंपनीय खतरे वाले क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भूकंप की दृष्टि से भारत के अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्रों के नाम हैं-हिमालय पर्वत, उत्तरपूर्वी भारत, कच्छ रत्नागिरी के आस-पास का पश्चिमी तटीय तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह। अधिक खतरे वाले क्षेत्र हैं-गंगा का मैदान, पश्चिमी राजस्थान ।

प्रश्न 17.
रिक्टर पैमाने पर कितने विभाग होते हैं?
उत्तर:
1-9 तक।

प्रश्न 18.
कोएना भूकंप का क्या कारण था?
उत्तर:
कोएना जलाशय में अत्यधिक जलदाब।

प्रश्न 19.
सूखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्षा की कमी के कारण खाद्यान्नों की कमी होना।

प्रश्न 20.
भारत में सूखे का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
अनिश्चित वर्षा।

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प्रश्न 21.
भारत में कितना क्षेत्रफल भाग बाढ़ों तथा सूखे से प्रभावित है?
उत्तर:
सूखे से 10% भाग तथा बाढ़ों से 12% भाग।

प्रश्न 22.
भारत में बाढ़ों का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
भारी मानसून वर्षा तथा चक्रवात।

प्रश्न 23.
दक्षिणी प्रायद्वीप में बाढ़ कम आती हैं। क्यों?
उत्तर:
मौसमी नदियों के कारण।

प्रश्न 24.
भारत के बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गंगा बेसिन, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल
  2. आसाम में ब्रह्मपुत्र घाटी
  3. उड़ीसा प्रदेश।

प्रश्न 25.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आधार शैलों का भारी मात्रा में तेजी से खिसकना भू-स्खलन कहलाता है। तीव्र पर्वतीय ढलानों पर भूकंप के कारण अचानक शैलें खिसक जाती हैं।

प्रश्न 26.
आपदा प्रबंधन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आपदाओं को सुरक्षा के उपाय, तैयारी तथा प्रभाव को कम करने की क्रिया को आपदा प्रबंधन कहते हैं। इसमें राहत कार्यों की व्यवस्था भी शमिल की जाती है।

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प्रश्न 27.
चक्रवात की उत्पत्ति के लिए आधारभूत आवश्यकताएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव क्षेत्र के चारों और तापमान की क्षतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है।

प्रश्न 28.
चक्रवात की गति और सामान्य अवधि कितनी होती है?
उत्तर:
चक्रवात की गति 150 km प्रति घंटा तथा अवधि एक सप्ताह तक होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि का वर्णन करो।
उत्तर:
विश्व में प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं से एक लाख व्यक्तियों की जानें जाती हैं तथा 20.000 करोड़ रुपये की सम्पत्ति की हानि होती है। यह मानवीय विकास के लिए रुकावट है। U.N.O. के अनुसार 1990-99 के दशक को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का दशक घोषित किया गया। प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त विश्व के प्रमुख 10 देशों में से भारत एक देश है।

प्रति वर्ष 6 करोड़ लोग इनसे प्रभावित होते हैं। विश्व की 50% प्राकृतिक आपदाएँ भारत में अनुभव की जाती हैं। फिर भी भारत में इन आपदाओं से सुरक्षा के लिए एक व्यापक प्रबंध किया गया है जिसमें भूकंपीय स्टेशन, चक्रवात, बाढ़, रडार, जल प्रवाह के बारे में सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं तथ सुरक्षा के प्रबंध किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रमुख प्राकृतिक आपदाएं कौन-सी हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक आपदाएँ वे भूगर्मिक हलचलें हैं जो अचानक ही भू-तल पर परिवर्तन लाकर जन, धन व सम्पत्ति की हानि करती हैं। सूखा, बाढ़, चक्रवात, भू-स्खलन, भूकंप विभिन्न प्रकार की मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

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प्रश्न 3.
भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों पर नोट लिखें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात खाड़ी बंगाल तथा अरब सागर में उत्पन्न होते हैं। चक्रवात पवनों का एक भंवर होता है जो मूसलाधार वर्षा प्रदान करता है। ये प्रायः अक्टूबर-नवम्बर के महीनों में चलते हैं। इनकी दिशा परिवर्तनशील होती है। ये प्रायः पश्चिम की ओर तथा उत्तर:पश्चिम, उत्तर पूर्व की ओर चलते हैं। इनका प्रभाव तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा के तटों पर होता है।

प्रभाव (Effects) –

  • ये चक्रवात मूसलाधार वर्षा, तेज़ पवनें तथा घने मेघ लाते हैं। औसत रूप से 50 सेमी वर्षा एक दिन में होती है।
  • ये चक्रवात जन-धन की हानि व्यापक रूप से करते हैं।
  • खाड़ी बंगाल में निम्न वायु दाब केन्द्र बनने से ये चक्रवात उत्पन्न करते हैं।
  • ये चक्रवात एक दिन में पूर्वी तट से गुजर कर प्रायद्वीप को पार करके पश्चिमी तट पर पहुँच जाते हैं।
  • गोदावरी, कृष्ण, कावेरी डेल्टाओं में भारी हानि होती है।
  • सुन्दरवन डेल्टा तथा बंग्ला देश में भी भारी हानि होती है।

प्रश्न 4.
भू-स्खलन से क्या अभिप्राय है ? इनके प्रभाव बताओ।
उत्तर:
भू-स्खलन (Landslides) – भूमि के किसी भाग के अचानक फिसल कर पहाडी से नीचे गिर जाने की क्रिया को भू-स्खलन कहते हैं। कई बार भूमिगत जल चट्टानों में भर कर उनका भार बढ़ा देता है। यह जल मूल चट्टानी ढलान के साथ नीचे फिसल जाती हैं। इनके कई प्रकार होते हैं।

  • स्लम्प (Slumps) – जब चट्टानें थोडी दुरी से गिरती हैं।
  • रॉक स्लाइड (Rockslide) – जब चट्टानें अधिक दूरी से अधिक भाग में गिरती हैं।
  • रॉक फाल (Rockfall) – जब किसी मूल से चट्टानें ट कर गिरती हैं।

कारण (Causes) –

  • जब वर्षा का जल या पिघलती हिम एक स्नेहक (Lubricant) के रूप में कार्य करता है।
  • तीव्र ढलान के कारण।
  • भूकंप के कारण।
  • किसी सहारे के हट जाने पर।
  • भ्रंशन या खदानों के कारण।
  • ज्वालामुखी विस्फोट के कारण।

प्रभाव (Effects) –

  • भवन, सड़कें, पुल आदि का नष्ट होना।
  • चट्टानों के नीचे दबकर लोगों की मृत्यु हो जाना।
  • सड़क मार्गों का अवरुद्ध हो जाना।
  • नदियों के मार्ग अवरुद्ध होने से बाढ़ आना।
  • 1957 में कश्मीर में भू-स्खलन से राष्ट्रीय मार्ग बंद हो गया था।
  • गत वर्ष में टेहरी-गढ़वाल में बादल फटने से भूस्खलन हुआ।

प्रश्न 5.
शुष्कता और सूखा में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
शुष्कता और सूखा में अंतर –
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प्रश्न 6.
आपदाएँ एवं संकट में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
आपदाएँ एवं संकट में अंतर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के सूखाग्रस्त इलाकों का वर्णन करते हुए सूखे के अर्थव्यवस्था पर होनेवाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में सूखे का सर्वाधिक प्रभाव राजस्थान और इसके निकटवर्ती हरियाणा एवं मध्यप्रदेश के क्षेत्र, गुजरात का अधिकांश भाग, मध्यवर्ती महाराष्ट्र, पूर्वी व मध्यवर्ती कर्नाटक, पश्चिमी व मध्य तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में पड़ता है। इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी कभी-कभी सूखा पड़ जाता है। इन क्षेत्रों में 100 cm.से भी कम वर्षा होती है और पर्याप्त सिंचाई की उपलब्धता भी नहीं है।

यद्यपि देश के किसी भी भाग में वर्षा कम होने पर सखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अनुमानतः भारत का 19% क्षेत्र तथा देश का 12% जनसंख्या प्रतिवर्ष सूखे की चपेट में रहती है। सूखे का अर्थव्यवस्था पर भयानक परिणाम होते हैं। जब फसलें नष्ट होती है तो अन्न की कमी हो जाती है और अकाल पड़ जाता है। पशुओं के लिए चारा कम हो जाता है तो ऋण अकाल पड़ जाता है। जल की कमी की अवस्था को जल अकाल कहा जाता है। जब तीनों परिस्थितियाँ एक साथ उत्पन्न हो जाती है।

तो त्रि-अकाल कहलाती है जो सबसे भयंकर होती है। भीषण अकाल पड़ने पर भारी संख्या में स्त्री, पुरुष तथा बच्चे एवं जीव-जन्तुओं को भोजन के अभाव में मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। सूखाग्रस्त क्षेत्रों से मानव प्रवास तथा पश पलायन एवं सामान्य सी घटना बन जाती है। जलाभाव में लोग दुषित जल पीने को बाध्य होते हैं। जिस कारण पेयजल संबंधी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।

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प्रश्न 2.
भूकंप की परिभाषा दें। भारत में भूकंप क्षेत्रों का वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भूकंप (Earthquake) – पृथ्वी के किसी भाग के अचानक हिलने को भकप कहते हैं। इस हलचल से भूपृष्ठ पर झटके (Tremors) अनुभव किए जाते हैं। भूकंपीय तरंगें सभी दिशाओं में लहरों की भान्ति आगे बढ़ती हैं। ये तरंगें उद्रम (Focus) से आरंभ होती हैं। ये तरंगें तीन प्रकार की होती हैं-P-Waves,S-Waves, L-Waves.

भूकंप के कारण (Causes of Earthquake) – भूकंप के सामान्य कारण ज्वालामुखी विस्फोट, भू-हलचलें, चट्टानों का लचीलापन तथा स्थानीय कारण है। भारत में सामान्य रूप से भारतीय प्लेट तथा यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। ये एक दूसरे के नीचे घुसने का यत्न करती हैं। हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में इनका सम्बन्ध वलन एवं भ्रंशन क्रिया से है। दक्षिणी भारत एक स्थिर भूखण्ड है तथा भूकंप बहुत कम होते हैं। भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने से मापी जाती है जिसका माप 1 से 9 तक होता है। अधिक तीव्र भूकंप भारत के निम्नलिखित क्षेत्रों में अनुभव किए जाते हैं

1. हिमालयाई क्षेत्र (Himalayan Zone) – क्षेत्र में क्रियाशील भूकंप जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल तथा उत्तर:पूर्वी राज्यों में आते हैं जिनसे बहुत हानि होती है। यह भूकंप भारतीय प्लेट तथा यूरेशियम प्लेट के आपसी टकराव के कारण उत्पन्न होते हैं। भारतीय प्लेट प्रति वर्ष 5 सेमी. की गति से उत्तर तथा उत्तर:पूर्व की ओर बढ़ रही है। यहाँ 1905 में कांगड़ा में, 1828 में कश्मीर में, 1936 में क्वेटा में तथा 1950 में असम में भयानक भूकंप अनुभव किए गए।

2. सिन्धु-गंगा प्रदेश (Indo – Gangetion Zone) – इस क्षेत्र में सामान्य तीव्रता के भूकंप, अनुभव किए जाते हैं। इनकी तीव्रता 6 से 6.5 तक होती है। परंतु इन सधन बसे क्षेत्रों में बहुत हानि होती है।

3. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Zone) – यह एक स्थिर क्षेत्र है परंतु फिर भी यहाँ भूकंप अनुभव किए जाते हैं। 1967 में कोयना, 1993 में लातूर, 2001 में भुज के भूकंप बहुत विनाशकारी थे। कोयना भूकंप कोयला डैम के जलाशम में जल के अत्यधिक दबाव के कारण आया परंतु भूकंप भारतीय प्लेट की उत्तर की ओर गति के कारण आए हैं।

4. अन्य भूकंपीय क्षेत्र (Other Sesonic Zones) –

  • बिहार-नेपाल क्षेत्र
  • उत्तर-पश्चिमी हिमालय
  • गुजरात क्षेत्र
  • कोयना क्षेत्र

भारत के प्रमुख विनाशकारी भूकंप –
Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ 3

भूकंप के परिणाम – केवल बसे हुए क्षेत्रों के आने वाला भूकंप ही आपदा या संकट बनता है। भूकंप का प्रभाव सदैव विध्वंसक होता है। भूकंप के कारण प्राकृतिक पर्यावरण में कई तरह से परिवर्तन हो जाते हैं। भूकंपीय तरंगों से धरातल में दरारें पड़ जाती हैं जिनसे कभी-कभी पानी के फब्बारे छूटने लगते हैं। इसके साथ बड़ी भारी मात्रा में रेत बाहर आ जाता है तथा इससे रेत के बांध बन जाते हैं। क्षेत्र के अपवाह तंत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं। नदियों के मार्ग बदल जाने से बाढ आ जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन हो जाते हैं तथा इनके साथ भारी मात्रा में चढ़ानी मलबा नीचे आ जाता है। इससे वहतक्षरण होता है। हिमानियाँ फट जाती हैं तथा इनके हिमधाव सुदूर स्थित स्थानों पर बिखर जाते हैं।

नए जल प्रपातों और सरिताओं की उत्पत्ति भी हो जाती है। भूकम्पीय आपदाओं से मनुष्य निर्मित भवन बच नहीं पाते हैं। सड़कें, रेलमार्ग, पुल और टेलीफोन की लाइनें टूट जाती हैं। गगनचुम्बी भवनों और सघन जनसंख्या वाले कस्बों और नगरों पर भूकंपों का सबसे बुरा असर होता है।

सनामी लहरें (Tsunami Tadial Waves) – समुद्री तल पर भूकंप उत्पन्न होने से 30 मीटर तक ऊँची ज्वारीय लहरें (सुनामी) उत्पन्न होती हैं। 26 दिसम्बर, 2004 को हिन्द महासागर में इण्डोनेशिया के निकट उत्पन्न भूकंप के कारण भयंकर सुनामी लहरें उत्पन्न हुई । इनका प्रभाव इण्डोनेशिया, थाईलैण्ड, म्यानमार, भारत तथा श्रीलंका के तटों पर अनुभव किया गया । इन भयंकर लहरों के कारण इन क्षेत्रों में लगभग 2 लाख लोगों की जाने गई तथा करोडों रुपयों की सम्पत्ति की हानि हुई है। यह पृथ्वी के इतिहास में सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा थी।

भूकंप के प्रभाव को कम करना-भूकंप के प्रभाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसकी निरंतर खोज-खबर रखना तथा लोगों को इसके आने की सम्भावना की सूचना देना । इससे आशंकित क्षेत्रों से लोगों को हटाया जा सकता है। भूकंप से अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्र में भूकम्परोधी भवन बनाने की आवश्यकता है। भूकंप की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को भूकम्परोधी भवन और मकान बनाने की सलाह दी जा सकती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

प्रश्न 3.
आपदा प्रबंधन पर एक लेख लिखें।
उत्तर:
आपदा प्रबंधन (Disaster Management) – आपदा प्रबंधन में निवारक और संरक्षी उपाय, तैयारी तथा मानवों पर आपदा के प्रभाव को कम करने की व्यवस्था तथा आपदा प्रवण क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक पक्ष शामिल किए जाते हैं। आपदा प्रबंध की सम्पूर्ण प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। प्रभाव चरण, पुनर्वास और पुननिर्माण चरण तथा समन्वित दीर्घकालीन विकास और तैयारी चरण ।

प्रभाव चरण के तीन अंग हैं –

  • आपदा की भविष्यवाणी करना
  • आपदा के प्रेरक कारकों की बारीकी से खोजबीन तथा
  • आपदा आने के बाद प्रबंधन के कार्य

जलग्रहण क्षेत्र में हुई वर्षा का अध्ययन करके बाढ़ की भविष्यवाणी की जा सकती है। उपग्रहों के द्वारा चक्रवातों के मार्ग, गति आदि की खोज-खबर ली जा सकती है। इस प्रकार प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पूर्व चेतावनी तथा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के प्रयत्ल शुरू किए जा सकते हैं। आपदा के लिए जिम्मेदार कारकों की बारीकी से की गई खोजबीन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने, भोजन, वस्त्र और पेय जल की आपूर्ति के लिए कार्यदल नियुक्त किए जा सकते हैं।

आपदाएँ मृत्यु और विनाश के चिह्न छोड़ जाती हैं। प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा और अन्य विभिन्न प्रकार की सहायता की जरूरत होती है। दीर्घकालीन विकास के चरण के अन्तर्गत विविध प्रकार के निवारक और सुरक्षात्मक उपायों की योजना बना लेनी चाहिए।

ससार के लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यूनेस्को ने 1990-2000 के दौरान प्राकृतिक आपदा राहत दशक मनाया था। संसार के अन्य देशों के साथ भारत ने भी दशक के दौरान अक्टूबर में विश्व आपदा राहत दिवस मनाया था। इस अवसर पर भूकंप, बाढ़ और चक्रवात प्रवण क्षेत्रों के लोगों के लिए भारत सरकार ने जो करणीय और अकरणीय कर्म प्रचारित किए थे, वे बहुत उपयोगी हैं।

प्रश्न 4.
भूकंप आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
तत्काल कार्यवाही घर के अंदर-बाहर मत भागिए, अपने परिवार को दरवाजों और मेजों के नीचे. पलंगों पर लेटे व्यक्ति को पलगों के नीचे ले आइऐ, खिडकियों और चिमनियों से दूर रहिए। घर के बाहर-भवनों, ऊँची दीवारों, बिजली के झूलते तारे से दूर रहिए। क्षतिग्रस्त भवनों में दुबारा मत जाइए। वाहन चलाते समय-अगर कार या बस में यात्रा करते समय भूकंप के झटके महसस होने लगें तो ड्राइवर को वाहन रोकने के लिए कहिए। वाहन में ही बैठे रहिए।

तत्काल करने योग्य कार्य-घर में सभी आग बुझा दीजिए तथा हीटर बंद कर दीजिए। यदि घर क्षतिग्रस्त हो गया है, तो बिजली, गैस और पानी बंद कर दीजिए। यदि घर में लगभग आग को तत्काल न बुझाया जा सके, तो तुरंत घर छोड़ दीजिए। गैस जलाने के बाद यदि गैस के रिसाव का पता चले तो घर से निकल जाइए संभव हो तो रेगुलेटर बंद कर दें। पालतू और घरेलू जीव-जन्तुओं (कुत्ता-बिल्ली और गोपशु) को बंधन से मुक्त कर दीजिए।

प्रश्न 5.
भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का वर्णन करो। बाढ़ों के कारणों का उल्लेख करते हुए इनसे होने वाली क्षति का वर्णन करो। बाढ़ नियंत्रण के उपाए बताओ।
उत्तर:
बाढ़ समस्या (Flood Problem) – सूखे की भान्ति बाद भी एक प्राकृतिक विपदा है। प्रत्येक वर्ष भारत के किसी-न-किसी भाग में बाढ़ों द्वारा विस्तृत क्षेत्रों से धन-जन की हानि होती है। कई बार देश के एक भाग में भयानक सूखे की स्थिति तो दूसरे भाग में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इससे समस्या अधिक गम्भीर हो जाती है। भारत में बाढ़ एक मौसमी समस्या है जब मानसून की अनियमित वर्षा से नदियों में बाढ़ आ जाती है। जब नदी के किनारों के ऊपर से पानी बह कर समीपवर्ती क्षेत्रों में दूर-दूर तक फैल जाता है तो इसे बाढ़ का नाम दिया जाता है।

भारत ‘नदियों का देश’ है जहाँ अनेक छोटी-बडी नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ वर्षा ऋतु में भरपूर बहती हैं, परंतु शुष्क ऋतु में इनमें बहुत कम जल होता है। निरंतर भारी वर्षा के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। वर्षा की तीव्रता तथा वर्षाकाल की अवधि अधिक होने से बाढ़ों को सहायता मिलती है। मानसून के पूर्व आरम्भ या देर तक समाप्त होने से बाढ़ उत्पन्न होती है।

ब्रह्मपुत्र नदी में मई-जून मास में बाढ़ साधारण बात है। उत्तरी भारत की नदियों में वर्षा ऋतु में बाढ़ आती हैं। नर्मदा नदी में अचानक बाढ़ (Flash floods) आती हैं। तटीय भागों में चक्रवातों के कारण मई तथा अक्टूबर मास में भयानक बाढ़ आती हैं । सन् 1990 में मई मास में आन्ध्र प्रदेश में खाड़ी बंगाल के चक्रवात से भारी क्षति हुई जिसमें लगभग 1000 व्यक्ति मर गए।

बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र (Flood Affected Areas) – भारत में मैदानी भाग में नदी घाटियों में अधिक बाढ़ें आती हैं। देश का लगभग 1/8 भाग बाढ़ों से प्रभावित रहता है। 60 प्रतिशत बाढ़ अधिक वर्षा के कारण उत्पन्न होती हैं। असम, बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्य स्थायी रूप से बाढ़ ग्रस्त रहते हैं। इन प्रदेशों में अधिक वर्षा तथा बड़ी-बड़ी नदियों के कारण बाढ़ समस्या गम्भीर है। एक अनुमान के अनुसार देश में 78 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्रति वर्ष बाढ़ आती हैं। नदी घाटियों के अनुसार बाढ़ क्षेत्रों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है

1. हिमालय क्षेत्र की नदियाँ (The Rivers of the Himalayas) – इस भाग में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र दो प्रमुख नदियाँ हैं जिनमें प्रत्येक वर्ष बाढ़ें आती हैं। गंगा घाटी में यमुना, घाघरा, गंडक तथा कोसी जैसी सहायक नदियाँ शामिल हैं। इन नदियों में जल की मात्रा अधिक होती है। इनकी ढलान तीव्र होती है तथा इन नदियों के मार्ग में परिवर्तन होता रहता है। उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विस्तृत क्षेत्रों में बाढों से भारी क्षति पहुँचती हैं। देश में बाढ़ों से कुल क्षति का 33% भाग उत्तर प्रदेश में तथा 27% भाग बिहार में होता है। कोसी नदी को बाढों के कारण ‘शोक की नदी” (River of Sorrow) कहा जाता है।

ब्रह्मपुत्र नदी असम, मेघालय तथा बंगलादेश में बाढों से हानि पहुँचती है। ब्रह्मपुत्र घाटी भारत में सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहाँ अधिक वर्षा तथा रेत व मिट्टी के जमाव से बाढ़ उत्पन्न होती हैं। भूकंप के आने के कारण नदियाँ अपना मार्ग बदल लेती हैं तथा बाढ़ की समस्या अधिक गम्भीर हो जाती हैं। दामोदर घाटी में दामोदर नदी के कारण भयंकर बाढ़ें आती रही हैं। इस नदी को “बंगाल का शोक” भी कहा जाता था परंतु दामोदर घाटी योजना के पूरा होने के बाद भी बाढ़ समस्या कम हो गई हैं

2. उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India) – इस भाग में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं। यहाँ झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास तथा रावी नदियों के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। बरसाती नदियों में भी बाढ़ें आती हैं।

3. मध्य भारत (Central India) – इस भाग में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश तथा उड़ीसा शामिल हैं। यहाँ ताप्ती, नर्मदा तथा चम्बल नदियों में कभी-कभी बाढ़ें आती हैं। यहाँ अधिक वर्षा के कारण बाढ़ उत्पन्न होती हैं।

4. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Region) – इस क्षेत्र में महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा काबेरी, नदियों में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के कारण बाढ आती हैं। कई बार ज्वार-भाटा के कारण डेल्टाई क्षेत्रों में रेत और मिट्टी के जमाव से भी बाढ़ आती हैं।

बाढ़ों के कारण (Causes of Floods) – भारत एक उष्ण कटिबंधीय मानसूनी देश है। यहाँ मानसूनी वर्षा के अधिक होने से बाढ़ की समस्या गम्भीर हो जाती है। बाढ निम्नलिखित कारणों से आती है –

1. भारी वर्षा (Heavy Rain) – किसी भाग में एक दिन में निरंतर वर्षा की मात्रा 15 सेमी. से अधिक होने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

2. चक्रवात (Cyclones) – भारत के पूर्वी तट पर खाडी बंगाल के तीव्र गति के चक्रवातों से भयानक बाढ़ आती हैं। जैसे-मई, 1990 में आन्ध्र प्रदेश में चक्रवातों द्वारा निरंतर वर्षा से नदी क्षेत्रों में बाढ़ उत्पन्न होने से भारी हानि हुई।

3. वनों की कटाई (Deforestation) – नदियों के ऊपरी भागों में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से अचानक बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं। शिवालिक की पहाड़ियों, असम, मेघालय तथा छोटा नागपुर के पठार में वृक्षों की कटाई के कारण बाढ़ की समस्या गम्भीर है।

4. नदी तल का ऊँचा उठना (Rising of the River Bed) – रेत तथा बजरी जमाव से नदी तल ऊँचा उठ जाता है जिससे समीपवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का जल फैल जाता है।

5. अपर्याप्त जल प्रवाह (Inadequate Drainage) – कई निम्न क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रबंध न होने से बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं।

बाढ़ से क्षति (Damage due to Floods) – बाढ़ से कृषि क्षेत्र में फसलों की हानि होती है। मकानों, संचार साधनों तथा रेलों, सड़कों को क्षति पहुँचती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कई बीमारियाँ फैल जाती हैं। देश में लगभग 2 करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र है जिसमें से 25 लाख हेक्टेयर भूमि में फसलें नष्ट हो जाती हैं। प्रतिवर्ष औसत रूप से 1 करोड़ जनसंख्या पर बाढ़ से क्षति का प्रभाव पड़ता है। लगभग 30 हजार पशुओं की हानि होती है।

एक अनुमान है कि औसत रूप से प्रति वर्ष 505 व्यक्तियों की बाढ़ के कारण मृत्यु हो जाती है। इस प्रकार देश में लगभग 1500 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचती है। सन् 1990 में देश में कुल क्षति 41.25 करोड़ रुपए की थी तथा 50 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त 162 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। 28 करोड़ रुपये की फसलें नष्ट हुई। 862 जानें गई तथा 1,22,498 पशु नष्ट हो गये।

बाढ़ से रोकथाम (Flood Control) – भारत में प्राचीन समय से ही बाढ़ की रोकथाम के लिए उपाय किए जाते हैं। प्रायः नदियों के साथ-साथ तटबंध बनाकर बाढ़ नियंत्रण किया जाता था । सन् 1954 में राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण योजना शुरू की गई। इस योजना के अधीन बाढ़ नियंत्रण के लिए कई उपाय किए गए।

1. नदियों के जल सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे किए गए।

2. नदियों के साथ तटबंध बनाये गए। देश में लगभग 15.467 किमी लम्बे तटबंधों का निर्माण किया गया।

3. निम्न क्षेत्रों में लगभग 30,199 किमी लम्बी जल प्रवाह नलिकायें बनाई गई हैं। 762 नगरों तथा 4,700 गाँवों को बाढ़ों से सुरक्षित किया गया है।

4. कई नदियों पर जलाशय बना कर बाढ़ों पर नियंत्रण किया गया है। जैसे-दामोदर घाटी बहुमुखी योजना तथा भाखडा नांगल योजना। देश में बाढ़ों का पूर्व अनुमान लगाने के लिए (Flood Foredacasting) 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

5. नदियों के ऊपरी भागों में वन रोपण किया गया है। सातवीं पंचवर्षीय योजना के अन्त तक 2710 करोड़ रुपए बाढ़ नियंत्रण पर व्यय किए गए जबकि आठवीं योजना पर 9470 करोड रुपये के व्यय का अनुमान है।

6. केरल तट पर सागरीय प्रभाव से बचाव के लिए 42 किमी लम्बी समद्री दीवारों का निर्माण किया गया तथा कर्नाटक तट पर 73 किमी लम्बी समुद्री दीवारें बनाई गई।

7. देश में बाढ़ के पूर्व निर्माण संगठन (Flood Fore-casting Organisation) की स्थापना की गई है। इसके अधीन 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं जिनकी संख्या इस शताब्दी के अन्त तक 300 हो जायगी।

8. महानदी घाटी में हीराकुड बाँध, दामोदर घाटी में कई बाँध, सतलुज नदी पर भाखड़ा डैम, व्यास नदी पर पौंग डैम तथा ताप्ती नदी पर डकई बाँध बनाकर बाढ़ों की रोकथाम की गई है।

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प्रश्न 6.
सूखा क्या है? भारत में इसके कारणों एवं प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
जब जल तथा नमी की उपलब्धता कुछ देर के लिये सामान्य से काफी कम होती हे तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। High Powered Committce on Disaster Management के अनुसार कृषि, पशुधन, उद्योग अथवा मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं से कम जल उपलब्ध होने की सूखा कहा जाता है।

सूखे का मुख्य कारण-भारत में वर्षा का अपर्याप्त होना तथा असमान वितरण के कारण मुख्य रूप से सूखा होता है। पश्चिमी और मध्य भारत को मौनसूनी वर्षा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। यही नहीं यहाँ वर्षा केवल अनिश्चित ही नहीं अपर्याप्त भी है। वर्षा की कमी जल विज्ञान संबंधी और कृषीय सूखे को प्रेरित करती है।

भारत के कुल क्षेत्रफल के 19% भाग को सूखे की मार झेलनी पड़ती है। इस क्षेत्र में देश की 12% जनसंख्या रहती है। भारत के कुछ राज्यों में सूखा एक स्थायी लक्षण है। देश का लगभग 30% क्षेत्र सूखा प्रदेश है।

सूखे का प्रभाव – सूखे के कारण खाद्यान्नों जल और चारे की कमी हो जाती है, इन्हें क्रमश: अकाल, जलकाल और तिनकोण कहते हैं। कभी-कभी तीनों की कमी एक साथ हो जाती है तब इसे त्रिकाल कहते हैं।

  • सूखे के बाद होनेवाले अकाल के कारण मानवों एवं पशुधन का भारी मात्रा में पलायन आरंभ हो जाता है।
  • सन् 1987 में भारत के आंध्रप्रदेश, गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश आदि 12 राज्यों में भयंकर सूखा पड़ा था।
  • सन् 2002 में मानसूनी वर्षा के न होने से भारत के मध्यवर्ती पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में भयंकर सूख पड़ा।

प्रश्न 7.
चक्रवात आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनते रहिए। बचाव के लिए पर्याप्त समय दीजिए चक्रवात कुछ घंटों में मार्ग की दिशा, गति तथा तीव्रता बदल सकता है। अतः नवीनतम सूचना के लिए रेडियो को निरंतर चलाए रखिए। यदि आपके क्षेत्र के लिए तूफानी पवनों या प्रबल झंडा की भविष्यवाणी की गई हो तो खुले तख्ते, नालीदार, टीन, खाली डिब्बे या ऐसी ही अन्य वस्तुएँ, जो पवन के साथ उड़कर खतरा बन सके, बांध दीजिए या स्टोर में रख दीजिए।

खिड़कियों को टूटने से बचाने के लिए उन्हें बंद रखिए। निकट के सुरक्षित स्थान में चले जाइए या किसी अधिकार प्राप्त सरकारी संस्था के आदेश पर क्षेत्र को छोड़ दीजिए। जब तूफान आ ही जाए, तो घर के अंदर रहिए। अपने घर के सबसे मजबूत भाग में शरण लीजिए।

रेडियो सुनिए और निर्देशों का पालन कीजिए। यदि छत उड़ने लगे, तो मकान के सुरक्षित भाग की खिड़की को खोल दीजिए। यदि आप खले में फंस गए हैं, तो शरण खोजिए। तूफान के दौरान पवनों के शान्त होने पर घर से बाहर या पुलिन (beach) पर मत जाइए। चक्रवातों के साथ प्रायः या झील में ऊँची-ऊंची लहरें उठती हैं।

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प्रश्न 8.
बाढ़ आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनिए। बिजली के सभी उपकरण बंद कर दीजिए। घर के सभी कीमती सामान और कपडे बाढ के पानी की पहुँच से दूर रखिए। ऐसा तभी कीजिए जब बाढ की चेतावनी मिली हो या आपको आशंका हो कि बाढ़ का पानी आपके घर में घुस जायगा। वाहनों, फार्म के पशुओं तथा आसानी से उठाई जा सकने वाली वस्तुओं को निकट की ऊँची – भूमि पर पहुँचा दीजिए। खतरनाक प्रदूषण को रोकिए।

सभी कीटनाशकों को पानी की पहुँच से दूर रखिए। यदि आपको घर छोड़ना पड़े तो बिजली और गैस बंद कर दीजिए। घर छोड़ने की मजबूरी में सभी बाहरी खिड़कियों और दरवाजों पर ताले लगा दीजिए। यदि आप बच सकते हैं, तो बाढ़ के पानी में पैदल या कार में बैठकर प्रवेश मत कीजिए। अपने आप बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के इधर-उधर मत घूमिए ।

प्रश्न 9.
भारत के प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर:
प्राकृतिक आपदा, महाविनाशकारी, अप्रत्याशित और अनियंत्रणीय परिघटना है। ये आपदायें –

  • जैव
  • भू-वैज्ञानिक
  • भूकंपीय
  • जल विज्ञान या मौसमी दशाएँ या प्राकृतिक पर्यावरण की प्रतिक्रियाएँ होती है?

भूकंप, चक्रवाती तूफान, आकस्मिक बाढ़, बादलों का फटना, सूखा आदि प्राकृतिक आपदायें कही जाती हैं। चक्रवात-600 किमी. या इससे अधिक व्यास तफानों में सबसे विनाशक या भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सर्वाधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के विषय में कोई भी सर्वमान्य सिद्धांत नहीं बना है। जब कमजोर रूप से विकसित कम उबाव के क्षेत्र में चारों ओर तापमान की क्षतीज प्रवणता बहुत कम होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है।

अधिकांशतः चक्रवातीय क्षति, तेज पवनों, मुसलाधार वर्षा और समुद्र में उठने वाली ऊँची तूफानों ज्वारीय लहरों के द्वारा होती है। पवनों की तुलना में चक्रवातीय वर्षा के कारण आई बाढ अधिक विनाशकारी होती है। वर्तमान संयम में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने से तथा प्रर्याप्त और सामूहिक कार्यवाही से चक्रवात में मरने वालों की संख्या में कमी आयी है।

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प्रश्न 10.
चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवातों द्वारा क्षति का वर्णन करें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – 600 किमी या इससे अधिक व्यास वाले चक्रवात, पृथ्वी के वायुमंडलीय तूफानों में सबसे अधिक विनाशक और भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सबसे अधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र हैं। संसार में अपने वाले चक्रवातों में से 6 प्रतिशत यहीं आते हैं।

उत्पत्ति – जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव के क्षेत्र के चारों ओर तापमान की क्षैतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है, तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजिन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है। संघनन के बाद मुक्त ऊष्मा, चक्रवात के लिए गतिज ऊर्जा (kinetic energy) में बदल जाती हैं।

चक्रवात की उत्पत्ति की निम्नलिखित अवस्थाएँ हैं –

  • महासागरीय तल का तापमान 26° से अधिक।
  • बंद समदाब रेखाओं का आविर्भाव।
  • निम्न वायु दाब, 1,000 मि.बा. से कम होना।
  • चक्रीय गति के क्षेत्रफल, प्रारम्भ से इसके अर्धव्यास 30 से 50 किमी फिर क्रमश: 100200 किमी और 1,000 किमी तक भी बढ़ जाते हैं।
  • ऊर्ध्वाधर रूप में पवन की गति का प्रारम्भ में 6 किमी की ऊँचाई तक बढ़ना तथा इसके बाद और भी ऊँचा उठाना।

चक्रवातों द्वारा क्षति-प्रभंजन की गति वाली पवनों, प्रभंजन की लहरों तथा मूसलाधार वर्षा से उत्पन्न बाढ़ों के कारण ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों का विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। अधिकतर तूफान अत्यन्त तेज पवनों और तूफानी लहरों के द्वारा भारी क्षति पहुँचाते हैं । पर्वतीय क्षेत्रों में ढाल पर अत्यन्त तीव्रता से बहने वाला वर्षा जल अपने सामने आने वाली हर वस्तु को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान करता है।

तूफानी लहरों की तीव्रता, पवन की गति, दाब प्रवणता, समुद्र की तली की स्थलाकृतियाँ तथा तटरेखा की बनावट पर निर्भर करती है। अनेक क्षेत्रों में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था के बावजूद, ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात धन-जन को अपार क्षति पहुँचाते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

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Set – 1

प्रश्न संख्या 1 से 2 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
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प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ख’ किसे इंगित करता है?
(a) गल्क स्ट्रीय धारा
(b) विषुवतीय धारा
(c) ब्राजील धारा
(d) ओयाशियो धारा
उत्तर:
(b) विषुवतीय धारा

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प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ग’ किसे इंगित करता है?
(a) 200 सेमी. से अधिक वर्षा वाला क्षेत्र
(b) 100 से 200 सेमी. वर्षा वाला क्षेत्र
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र

Set – 2

प्रश्न संख्या 1 से 4 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘B निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) ब्राजील धारा
(b) क्यूरोशिने धारा
(c) विषुवतीय धारा
(d) कैलिफोर्निया धारा
उत्तर:
(d) कैलिफोर्निया धारा

प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकन प्लेट
(b) यूरेशियम प्लेट
(c) दक्षिण अमेरिकन प्लेट
(d) अरेबियन प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकन प्लेट

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प्रश्न 3.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) रॉकी पर्वत
(b) अरावली पर्वत
(c) अल्पस पर्वत
(d) हिमालय पर्वत
उत्तर:
(a) रॉकी पर्वत

Set – 3

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र
(b) तप्त स्थल
(c) छिछले भूकंप केन्द्र
(d) ज्वालामुखी उद्गार
उत्तर:
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र

प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) भूकंपों का देश
(b) बागों का देश
(c) समुद्री धारा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बागों का देश

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प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकी प्लेट
(b) अरेबियन प्लेट
(c) इंडो-आस्ट्रेलियम प्लेट
(d) नजका प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकी प्लेट

Set – 4

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
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प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ किससे संबंधित है?
(a) गर्म जलधारा
(b) ठण्डी जलधारा
(c) व्यापारिक पवनें
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ठण्डी जलधारा

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प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ किससे संबंधित है?
(a) सर्वाधिक वर्षा वाला लेग
(b) कम वर्षा वाला तेज
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज

प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ किस हवा की दिशा को दिखाया गया है?
(a) द.प. मानसून
(b) उत्तरी-पूर्वी मानसून
(c) जेट प्रवाह
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(a) द.प. मानसून

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 9 रूको बच्चों

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 9 रूको बच्चों Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 9 रूको बच्चों

Bihar Board Class 9 Hindi रूको बच्चों Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आपके मन-मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है, उसे व्यक्त कीजिए।
उत्तर-
रुको बच्चो रुको सड़क पार करने से पहले रुको। प्रस्तुत पंक्तियों में कवि बच्चो जो भारत के भविष्य हैं उन्हें सड़क पार करने से रोक रहा है। कहने का भाव यह है कि भारतीय शासन व्यवस्था के प्रति कवि का विचार तीखापन भाव लिए हुए है। अत: बच्चों के माध्यम से सड़क की स्थिति, उस पर गुजरती हुई तेज रफ्तार में गाड़ियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए उनकी विसंगतियों पर भाव केन्द्रित करता है।

कवि कहता है-ऐ बच्चो रुको, देखो, इस व्यवस्था में कितना उहा-पोह है। अव्यवस्था है। अराजकता है। देश का फालतू वक्त बर्बाद किया जा रहा है। कार में बैठे सफेदपोश ये लोकसेवक नहीं हैं ये भ्रष्टाचारी हैं इन्हें देश की चिन्ता नहीं है, अपनी चिंता एवं सुख-सुविधा में ही ये व्यस्त हैं।

कवि की उपरोक्त दो पंक्तियों में देश की वर्तमान स्थिति का यथार्थ चित्र छिपा हुआ है। देश में भ्रष्टाचार, व्यभिचार का बोलबाला है। कर्त्तव्यच्युत ये लोकसेवक आज राष्ट्र के शोषण में लगे हुए हैं। इन्हें तनिक भी लोक-लाज नहीं है। राष्ट्र की प्रगति जनता की चिंता न कर ये अपने व्यक्तिगत हित में लिप्त हैं।

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प्रस्तुत पंक्तियों में हमारी शासन व्यवस्था के नंगेपन को उकेरा गया है। उनकी बेहयाई और मोटी चमड़ी के सुन्नापन पर प्रकाश डाला गया है। ये हमारे लोक सेवक अपने दायित्व निर्वाह में असफल रहे हैं। उन्हें अपने स्वार्थ-पूर्ति में इतनी जल्दीबाजी है कि दूसरी समस्या या बातों की ओर ध्यान ही नहीं जाता।

बच्चों को राह पार करने से रोकने के पीछे यह भाव छिपा है कि ये भारत के भविष्य हैं। कहीं अंधी रफ्तार में ये दब-कुचल न जाएँ इसकी कवि को चिंता है। इसी कारण उन्हें सतर्क करते हुए भविष्य में अपना सुपथ गढ़ने की सलाह देता है।
बच्चे रुककर, सँभलकर सोच-विचारकर आगे बढ़ें और शासन तथा व्यवस्था की अंधी दौड़ का हिस्सा न बनें।
जिस प्रकार आज के सेवक अपनी कर्त्तव्यनिष्ठता को भूल गए हैं ये बच्चे कल अपने भी जीवन में ऐसी ही भूल नहीं करें। ये एक सच्चे नागरिक और लोकसेवक की भूमिका अदा करें यही सीख.कवि भारतीय बच्चों को अपनी कविता के द्वारा देना चाहता है।

प्रश्न 2.
“उस अफसर को कहीं पहुँचने की कोई जल्दी नहीं है। वो बारह या कभी-कभी तो इसके भी बाद पहुंचता है अपने विभाग में।” कवि यह कहकर व्यवस्था की किन खामियों को बताना चाहता है।
उत्तर-
प्रस्तुत क्तियों में कवि, भारतीय लोक व्यवस्था के बिगड़े हुए रूप को चित्रित करते हुए तीखा व्यंग्य करता है। कवि कहता है कि आजादी के बाद हमारी शासन प्रणाली में खामियाँ ही खामियाँ दिखाई पड़ती हैं। जो जिस विभाग में बड़े पद पर पदस्थापित अफसर हैं उन्हें अपने कर्तव्य का ज्ञान ही नहीं है। वे अपने कर्तव्य पथ से च्युत हो चुके हैं। समय पर कार्यालय नहीं पहुँचते हैं। कभी भी बारह बजे के पर्व ये कार्य-स्थल पर नहीं पहुँचते। इनकी लापरवाही और करता से सारा देश अराजक स्थिति में जीने को विवश है। प्रगति के सारे कार्यक्रम ठप्प हैं। विकास की जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इनकी टेबुल पर रखी हुई काम की फाइलें धूल फांक रही है। कार्य-निष्पादन में दिनों, महीनों, बरसों लग जाता है। धीमी गति की इनकी कार्यशैली से राष्ट्र पतन की ओर जा रहा है।

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इन्हें लोक-लाज भी नहीं ये बेशर्मी लोग रात-दिन अपना ही व्यक्तिगत हित में निमग्न हैं। इन्हें देश और जनता की चिंता नहीं। यहाँ भ्रष्टाचार, अराजकता और कर्तव्यहीनता की ओर कवि ने सबका ध्यान आकृष्ट करते हुए तीखा व्यंग्य किया है। आज पूरी नौकरशाही आकंठ. – भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। देश और जनता निराशा के साये में जी रही है देश संक्रमण काल से गुजर रहा है। आजादी के पूर्व लोगों का जो सपना था वह आज चूर-चूर हो गया है। अफसर की शान-बान के आगे जनता बौनी बनी हुई है। जनता के श्रम और उसकी गाढ़ी कमाई पर ये नेता और अफसर गुलछर्रे उड़ा रहे हैं। इन्हें ईमानदारी और नैतिकता की जरा भी परवाह नहीं।

काश! ये जरा भी शांत भाव से चिंतन करते। अपने कर्तव्य और सेवा भाव के प्रति जागरूक होते तो आज कवि को व्यंग्य करने के साथ वर्तमान दशा पर क्षोभ प्रकट करने का अवसर नहीं मिलता।

इस प्रकार अपनी कविताओं के तीखे धार से कवि ने प्रशासक वर्ग को . बार-बार चिन्हित करते हुए यथार्थ का चित्रण सफलतापूर्वक किया है।

प्रश्न 3.
न्याय व्यवस्था पर कवि के द्वारा की गई टिप्पणी पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है? लिखें:
उत्तर-
रुको बच्चो शीर्षक कविता में राजेश जोशी जी ने न्याय व्यवस्था पर करारा चोट किया है। भारतीय न्यायपालिका का जो चरित्र है वह काफी दुखद और चिंतनीय है। कवि कहता है कि रुको बच्चो! रुको! उस न्यायाधीश की कार को निकल जाने दो। किसकी है हिम्मत ‘जो इन न्यायाधीशों से प्रश्न कर सके कि जितनी तेज रफ्तार से आप कार चला रहे हैं उतनी रफ्तार में न्याय कार्य क्यों नहीं संपन्न होता। जनता के बीच नारा उछाला जाता है कि न्याय में देरी होने से असंतोष बढ़ता है जबकि न्याय व्यवस्था ठीक उसके उल्टा है। यहाँ केवल बोलने के लिए नारा *सेमिनारों चाहे भाषण में जोर-जोर से उछाला जाता है, जबकि प्रयोग में उसे अमली जामा नहीं पहनाया जाता।

निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालत तक न्याय के लिए मनुष्य चक्कर काटते-काटते थक जाता है फिर भी उसे राहत नहीं मिलती। भारतीय अदालत में वर्षों से लंबित अनेक मुकदमे पड़े हैं जिन्हें न्याय की प्रतीक्षा है। लेकिन क्या यह संभव है? अर्थात नहीं। भारतीय न्यायपालिका का स्वरूप विकृत हो चुका है। इसी कारण राजेश जोशी जी ने अपनी व्यंग्यात्मक कविताओं में उसके यथार्थ स्वरूप का चित्रण किया है। भारतीय न्यायपालिका न्याय करने में काफी देरी करती है। पैसे पैरवी और शक्ति का अपव्यय सदैव होता रहा है। आम आदमी को न्याय नहीं मिल पाता।

देश में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहराई तक जम चुकी हैं फिर भी कोई उपाय नहीं है कि उससे सभी निजात पा सके। भारतीय लोकतंत्र का यह स्तम्भ अत्यंत ही कमजोर और लाचार है। इस प्रकार न्यायपालिका के पक्ष पर स्पष्ट चिंतन करते हए राजेश जी ने उसके सही और विकत चेहरे को चित्रित किया है जिसमें न्याय की कहीं भी गुंजाइश नहीं।

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न्यायपालिका त्वरित गति से न्याय दिलाने में असमर्थ है। आम आदमी का कोई महत्व नहीं। लोकतंत्र के लिए यह खतरनाक संकेत है-न्यायपालिका द्वारा न्याय निष्पादन में बिलंब का होना।
राजेश जोशी ने अपनी व्यंग्यात्मक कविताओं के द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के कुरूप चेहरे को चित्रित कर सबको सावधान किया है।

प्रश्न 4.
तेज चाल से चलना किसके प्रशिक्षण का हिस्सा है और क्यों?
उत्तर-
‘रुको बच्चो’ कविता राजेश जोशी द्वारा रचित है। इस कविता में, व्यंग्य द्वारा कवि ने लोकतंत्र के शासन व्यवस्था पर करारा प्रहार किया है।
इस कविता में तेज चाल से चलना पुलिस अफसर के प्रशिक्षण से जुड़ा हुआ है। भारतीय पुलिस प्रशासन का चेहरा साफ-सुथरा नहीं है। इस विभाग का निर्माण सुरक्षा और शांति स्थापना के लिए हुआ था किन्तु आज उनके कर्म में विसंगतियाँ पाई जाती हैं।

पुलिस अफसर पैदल रहें चाहे कार में उनके चलने में धीमापन नहीं दिखता। वे ऐसा चलते हैं कि उनके चाल-ढाल से एक प्रकार का रोब-दाब और भय प्रकट होता है। ये भारतीय नागरिकों के पहरूआ के रूप में न दिखकर शोषक और अत्याचारी के रूप में दिखाई पड़ते हैं।

पुलिस अफसर की गाड़ी कहीं भी किसी प्रकार की घटना घटती है वहाँ सबसे बाद में पहुँचती है। कहने का आशय यह है कि वे अपनी जिम्मेवारी से लापरवाह रहते हैं। इतना शिक्षण-प्रशिक्षण के बावजूद भी वे अपनी कर्त्तव्यनिष्ठता का परिचय नहीं देते। वे शोषक और क्रूर मनुष्य के रूप में समाज के सामने प्रकट होते हैं। उन पर नैतिकता और ईमानदारी की जिम्मेवारी डाली गयी है किन्तु ये निरंकुश रूप में अपने को रखते हुए अमानवीय व्यवहार द्वारा जनता को भयभीत किए रहते हैं। र इस प्रकार राजेश जोशी ने अपनी कविता के द्वारा भारतीय पुलिस एवं पुलिस प्रशासन के कुरूप चेहरे को चित्रित किया है।

उदार छवि से युक्त त्वरित न्याय, सुरक्षा, अमन-चैन के लिए उन्हें काम करना . चाहिए वहाँ वे विपरीत चरित्र के रूप में पेश आते हैं।
इस प्रकार भारतीय प्रशासन का एक स्तम्भ व्यवस्थापिका भी है। आज वह भी जर्जर स्थिति में है। भारतीय बच्चों को आगाह करते हुए कवि उन्हें लोकतंत्र के सच्चे सेवक के रूप में स्वयं को गढ़ने की सलाह देता है।

प्रश्न 5.
मंत्री की कार के आगे-आगे साइरन क्यों बजाया जाता है?
उत्तर-
मंत्री की कार के आगे-आगे साइरन बजाने के पीछे भय की आशंका रहती है। राजेश जोशी ने मंत्री के चरित्र का चित्रण करते हुए उनकी कार्यशैली पर तीखा व्यंग्य किया है।
कवि कहता है कि भय से उनकी गाड़ी तेज रफ्तार से भागी जाती है और आगे-आगे साइरन सबको सचेत और सड़क छोड़कर दूर रहने की ओर संकेत करता है।

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इन काव्य पंक्तियों में राजेश जोशी जी ने साइरन को एक संकेत के रूप में। प्रयोग किया है। भारतीय लोकतंत्र आज खतरे में है। ये शासक वर्ग अपने स्वार्थ, में इतना लिप्त है कि इन्हें देश या जनता की चिंता नहीं। केवल अपनी सुरक्षा और सुख की चिंता है। अपनी सुरक्षा के लिए ये इतना चिंतित है कि जब-जब इन्हें किसी काम के बहाने बाहर निकलना पड़ता है तो आगे-आगे साइरन की आवाज सबको सड़क से हटकर दूर रहने की ओर इंगित करती है। इस प्रकार उपरोक्त पंक्तियों में मंत्री के भय की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कवि ने उनके जीवन चरित्र और कार्यशैली पर करार प्रहार किया है। जनता के सुख-दुख से बेपरवाह ये मंत्री निजी सुख-सुविधा में लीन हैं।

व्याख्याएँ

प्रश्न 6.
(क) “सुरक्षा को एक अंधी रफ्तार की दरकार है।”
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में “रूको बच्चो” काव्य-पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने व्यंग्यात्मक लहजे में भारतीय शासकों की क्रूरतम चरित्र को उजागर किया है। यह प्रसंग लोक-प्रशासन से जुड़ा हुआ है।

प्रस्तुत पंक्तियों के द्वारा कवि कहना चाहता है कि आज के मंत्री रूपी शासक अपने स्वार्थ में इतना अंधा हो गए हैं कि तेज रफ्तार से चलती इनकी कार के पीछे कब कौन आ जाएगा और अनर्थ हो जाएगा, इसका इन्हें ख्याल ही नहीं है। कवि के कहने का मूल भाव यह है कि भावी पीढ़ी के लिए इनके हृदय में न संवेदना है, न ममता है। उनकी प्रगति के लिए न कोई योजना है न कोई प्रगतिशील विचार भी। कि राष्ट्रहित की इन्हें चिंता ही नहीं। इसीलिए. कवि भारत के भविष्य आज के जो बच्चे हैं उन्हें सचेत करते हुए कहता है कि तुम अपने कर्तव्य पथ से विचलित मत होना। कल तुम्हारे ही कंधों पर राष्ट्र का भार है।

अपने प्रतीक प्रयोगों द्वारा कवि कहना चाहता है कि ऐ बच्चो, रुककर, सँभलकर, सोच-विचारकर आगे बढ़ो। इस शासन तथा व्यवस्था की अंधी दौड़ का हिस्सा मत बनो।

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प्रश्न 6.
(ख) “कई बार तो पेशी दर पेशी चक्कर पर चक्कर काटते/ऊपर की अदालत तक पहुँच जाता है आदमी।” ।
उत्तर-
रुको बच्चो काव्य पाठ से उपरोक्त पंक्तियाँ ली गई हैं। इसका प्रसंग भारतीय न्यायपालिका से जुड़ा हुआ है।
प्रस्तुत कविता की पंक्तियों में राजेश जोशी ने न्यायपालिका की धीमी गति के न्याय और निरंकुश व्यवहार पर तीखा व्यंग्य किया है।

कवि अपनी भावनाओं को कविता के द्वारा प्रकट करते हुए कहता है कि भारतीय न्यायपालिका की स्थिति भी चिंतनीय है। कई बार आम आदमी न्याय पाने के लिए निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालत तक जीवन भर चक्कर काटता रह जाता है लेकिन उसे समयानुकूल न्याय नहीं मिल पाता। कवि अत्यंत भी क्षुब्ध है-ऐसी अराजक व्यवस्था से। न्याय में त्वरित गति होनी चाहिए वहीं दीर्घसूत्रता दिखाई पड़ती है। न्याय काफी विलंब से मिलता है। कभी-कभी निराशा भी हाथ लगती है। इस प्रकार, हमारी न्याय व्यवस्था लचर स्थिति में है। पैसा और पैरवी का भी बोलबाला है। न्याय का पजारी न्याय कर पाने में असमर्थ है। वह भी भ्रष्टाचार में लिप्त है। उसके चरित्र में भी कई प्रकार की विसंगतियाँ दृष्टिगत होती हैं।

प्रश्न 7.
लेकिन नारा लगाने या सेमिनारों में/बोलने के लिए होते हैं ऐसे वाक्य-कौन से वाक्य? उदाहरण देकर बतलाइए।
उत्तर-
“न्याय में देरी न्याय की अवहेलना है” नारा से देश गुंजायमान हो उठता है किन्तु कहीं भी इसे व्यावहारिक रूप में हम नहीं देख पाते हैं।

केवल नारा देकर जनता को सदा से भरमाया जाता है। उन्हें सही मार्ग से बरगलाया जाता है। उन्हें दिभ्रमित किया जाता है। सही रूप से न्याय शीघ्रताशीघ्र उन्हें समयानुकूल नहीं मिल पाता। जीवन भर निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालत तक वे दौड़ते-दौड़ते थक जाते हैं फिर भी न्याय सुलभ नहीं हो पाता। भारतीय जनता की स्थिति अत्यंत ही दु:खद है।

भारतीय लोक व्यवस्था में ऐसे लुभावने नारे केवल सेमिनारों चाहे भाषणों में प्रयोग किए जाते हैं किन्तु जीवन में उन्हें व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत या प्रयोग नहीं किया जाता है। इस प्रकार इन नारों का. मूल्य नहीं रह जाता क्योंकि वे भरमाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन्हें जमीन पर यथार्थ रूप में नहीं उतारा जाता। यही बिडंबना है-हमारी भारतीय न्याय व्यवस्था की। न्याय में देरी न्याय की अवहेलना जैसे नारे को केवल कहने से उसकी सार्थकता सिद्ध नहीं होगा। जबतक उसे मूर्त रूप देकर जीवन के क्षेत्र में व्यावहारिक रूप से प्रयोग नहीं किया जाय।

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प्रश्न 8.
घटना स्थल पर बाद में कौन पहुँचता है और क्यों?
उत्तर-
‘रुको बच्चो’ काव्य पाठ से ये पंक्तियां ली गई हैं। उन पंक्तियों में राजेश जोशी जी ने पुलिस अफसर के चरित्र को उद्घाटित किया है।

पुलिस अफसर अपने व्यवहार में क्रूरतम एवं शोषक का रूप प्रकट करते हैं, साथ ही उनकी जीवन-शैली भाग-दौड़ की होती है। वे हमेशा तेज रफ्तार से चलते हैं। रोब-दाब का भाव प्रकट करते हुए जनता के साथ उनका व्यवहार रुखा सा होता है। – कहीं भी कोई किसी प्रकार की घटना घट जाती है, उस समय वे वहाँ नहीं पहँचकर काफी बिलंब से पहँचते हैं।

इन पंक्तियों के द्वारा कवि के कहने का भाव यह है कि वे अपने कर्त्तव्य के प्रति लापरवाह रहते हैं। वे सदैव बिलंब और बेपरवाह भाव से घटना स्थल का मुआयना करते हैं। उन्हें अपनी कर्तव्यनिष्ठा का ख्याल नहीं रहता। उनका. चरित्र एक लोक सेवक का न होकर क्रूर शासक का झलकता है। कहीं भी कभी भी वे अपने उच्च आदर्शों को प्रस्तुत नहीं करते। सदैव एक गैर जिम्मेवार अफसर के रूप में समाज में अपनी छवि रखते हैं। यही कारण है कि कवि ने उनके कुरूप चेहरे पर तीखा व्यंग्य किया है। उनका व्यवहार अमानवीय होता है इसमें उन्हें बदलाव लाना होगा।

प्रश्न 9.
तेज रफ्तार से जाने वालों पर कवि की क्या टिप्पणी है?
उत्तर-
“रुको बच्चो” काव्य पाठ में राजेश जोशी जी ने तेज रफ्तार से जानेवाले भ्रष्ट अफसर, अक्षम्य न्यायाधीश, शोषक रूप में गैर जिम्मेवार पुलिस अफसर और मंत्री के विकृत चेहरे और कर्तव्यहीनता की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करते हुए तीखा व्यंग्य किया है।
कवि ने भारतीय लोक व्यवस्था में अफसर का क्या कर्त्तव्य होना चाहिए इस पर ध्यान खींचा है। यहाँ की न्यायपालिका कैसी हो? न्याय प्रक्रिया किस प्रकार की हो इस पर भी तीखा व्यंग्य करते हुए यथार्थ स्थिति का चित्रण किया है।

पुलिस अफसर की राष्ट्र की सुरक्षा शांति व्यवस्था में क्या भूमिका होनी चाहिए? जनता के साथ उनका कैसा व्यवहार होना चाहिए इस पर करारा प्रहार किया है।

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ठीक उपरोक्त लोगों की भाँति ही भारतीय मंत्रियों की जीवन-शैली और उनके क्रिया-कलापों का यथार्थ चित्रण करते हुए राजेश जोशी ने सम्यक् प्रकाश डाला है। राजेश जोशी एक प्रखर व्यंग्य कवि हैं अत: उनकी कविताओं की धार भी तेज है।

राजेश जोशी ने तेज रफ्तार से चलने वाले भ्रष्ट अफसर, न्यायाधीश, पुलिस अफसर और मंत्रियों के काले-कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोला है। ये सच्चे लोकसेवक के रूप में नहीं दिखते बल्कि भ्रष्ट लोक सेवक के रूप में समाज और राष्ट्र के लिए कलंक हैं।
जहाँ भ्रष्ट अफसर अपनी कर्तव्यनिष्ठता के प्रति सजग न होकर लापरवाह अफसर के रूप में चित्रित है। उसके टेबुल पर फाइलें धूल फाँक रही हैं लेकिन दिनों, महीनों, बरसों, कार्य निष्पादन में समय लग जाता है।

ठीक उसी प्रकार निचली अदालत हो चाहे ऊपरी अदालत सब जगह ष्टाचार का बोलबाला है। न्याय में देरी न्याय की अवहेलना है जैसे नारे निरर्थक . सिद्ध होते हैं। जीवन- पर्यंत आम आदमी न्याय पाने में विफल रहता है, धन, बल और समय की क्षति होती रहती है लेकिन न्यायालय अपनी धीमी गति को नहीं छोड़ता। न्याय में त्वरित गति नहीं आ पाती।

पुलिस अफसर की भी कार्य शैली विश्वसनीय नहीं। वे भ्रष्ट रूप में जनता के सामने आते हैं। पैसे और पैरवी के कारण वे न्याय नहीं कर पाते।

किसी घटना के पूर्व नहीं बाद में वे वहाँ पहुँचते हैं जो गैर जिम्मेवारी का परिचायक है।
ठीक उसी प्रकार मंत्रियों की भी स्थिति है। वे अपने स्वार्थ और परिवार की सुविधा के लि! इतने संकीर्ण बन जाते हैं कि प्रशासन व्यवस्था चरमरा जाती है। इन्हें जनता की समस्याएँ दिखाई ही नहीं पड़ती। राष्ट्रहित और समाज हित की बातें इनके लिए बेमानी सी लगती है। इनकी ऐसी स्थिति हो जाती है-जैसे एक अंधे व्यक्ति की होती है। कभी, सुख-सुविधा और स्वार्थ में ये अंधे बन जाते हैं। इनके भ्रष्टाचारी चरित्र के कारण जनता कष्ट झेलती है। राष्ट्र की प्रगति रुक जाती है।

इसी कारण राजेश जोशी जी ने भारत के भविष्य जो आज के बच्चे हैं उन्हें सचेत करत हए आगाह किया है क्योंकि कल राष्ट्र की जिम्मेवारी उन्हीं के कंधों पर आने वाली है।

आज के बच्चे शासन तथा व्यवस्था की अंधी दौड़ का हिस्सा न बनें। काफी सोच-समझकर अपनी दिशा ग्रहण करें और कल के लिए अपने को सक्षम रूप में प्रस्तुत करें।

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प्रश्न 10.
कविता में बच्चों को किस बात की सीख दी गई है क्यों?
उत्तर-
“रुको बच्चो” कविता राजेश जोशी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें भारतीय लोक-प्रशासन के कुरूप चेहरे को उकेरते हुए कवि ने बच्चों को भविष्य के लिए आगाह किया है क्योंकि कल के राष्ट्र के वे ही भविष्य हैं। कल उन्हीं के कंधों पर राष्ट्र का भार पड़ेगा। अतः वर्तमान शासकों, अफसरों, न्यायाधीशों एवं पुलिस अफसरों के जीवन-चरित्र के कुरूप पक्ष का चित्रण करते हुए कवि ने राष्ट्र के भविष्य आज के बच्चों को एक नयी सीख दी है। वह सीख है जीवन में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठता, त्याग, सेवा और जिम्मेवारी को समझना। उसके प्रति सजग रहना। भावी प्रशासन-शासन व्यवस्था की खामियों को कवि ने यथार्थ चित्रण किया है और सबको सचेत भी किया है। कवि ने बच्चों को कहा है कि ऐ बच्चो। शासन तथा व्यवस्था की अंधी दौड का हिस्सा मत बनो। तम रुक-रुककर सँभल-सँभलकर, सोच विचार कर आगे बढ़ो और राष्ट्र की सेवा के लिए योग्य बनो कल के तुम्ही राष्ट्र निर्माता बनोगे।

नीचे लिखे पद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. रुको बच्चो रुको
सड़क पार करने से पहले रुको
तेज रफ्तार से जाती इन गाड़ियों को गुजर जाने दो
वो जो सर से जाती सफेद कार में गया
उस अफसर को कहीं पहुँचने की कोई जल्दी नहीं है
वो बाहर या कभी-कभी तो इसके बाद भी पहुँचता है अपने विभाग
में
दिन महीने और कभी-कभी तो बरसों लग जाते हैं
उसकी टेबिल पर लमी जरूरी फाइल को खिसकने में
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) कवि यहाँ बच्चों से क्या कहता है?
(ग) कवि के अनुसार सफेद कार से यात्रा करते कौन निकल कर कहाँ गया है?
(घ) यहाँ किस कार्यालय की दोषपूर्ण कार्य-प्रणाली की चर्चा की गई है? और किस रूप में?
(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में वर्णित कवि के उद्देश्य की चर्चा करें।
उत्तर-
(क) कवि-राजेश जोशी, कविता-रुको बच्चो

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(ख) कवि यहाँ बच्चों से सड़क पार करने से पहले रुकने के लिए कहता है, क्योंकि सड़क पर अफसरों की गाड़ियाँ तेज रफ्तार से गुजर रही हैं। ‘बच्चे यदि नहीं रुकेंगे तो संभव है कि तेज रफ्तार से चलती उन गाड़ियों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाएँ या उन गाड़ियों से कुचलकर मर जायें।

(ग) कवि के अनुसार सफेद कार से यात्रा करनेवाला व्यक्ति कोई प्रशासनिक पदाधिकारी है जो काफी जल्दीबाजी में है और जिसे जल्द ऑफिस पहुँचना है। हालाँकि उस ऑफिसर को कहीं पहुँचने की कोई जल्दी नहीं है और उसके ऑफिस में ढेर सारे कार्य संपन्न होने की प्रतीक्षा में हैं। उसे उन विर्लोबत कार्यों को पूरा करने के कोई चिंता नहीं है, लेकिन वह तेज रफ्तार में गाड़ी को भगाये चला जा रहा है। तेज रफ्तार से कार्य में चलना उसके लिए आम बात है।

(घ) यहाँ कवि ने सरकारी दफ्तार की दोषपूर्ण कार्य-प्रणाली पर व्यंग्य किया है। सरकारी दफ्तर के लिए यह आम बात है कि उससे जुड़े अफसर कभी कार्यालय में समय पर नहीं पहुँचते। उन अफसरों को काम करने में कोई जल्दी नहीं रहती है। उनके टेबिल पर फाइलों के ढेर लगे रहते हैं। वे सारी-की-सारी फाइलें कई दिनों, कई महीनों और कभी-कभी कई वर्षों से उसी स्थिति में पड़ी हुई हैं।

(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में सरकारी प्रशासकीय पदाधिकारियों की तथा सरकारी दफ्तरों की दुर्दशा की ओर इंगित करना कवि का एकमात्र उद्देश्य है। कवि ने यहाँ यह बताया है कि ये प्रशासकीय पदाधिकारी न तो समय पर दफ्तर जाते हैं और यदि वहाँ किसी तरह पहुँच भी जाते हैं तो वहाँ बैठकर अपने दायित्व का पालन नहीं करते। नतीजा यह होता है कि उनके टेवुल पर फाइलों की ढेर लग जाता है जो महीनों तथा बरसों बाद निष्पादित हो पाता है।

2. रुको बच्चो!
उस न्यायाधीश की लार को निकल जाने दो
कौन पूछ सकता है उससे कि तुम जो चलते हो इतनी तेज कार में
कितने मुकदमें लंबित हैं तुम्हारी अदालत में कितने साल से
कहने को कहा जाता है कि न्याय में देरी न्याय की अवहेलना है
लेकिन नारा लगाने या सेमिनारों में
बोलने के लिए होते हैं ऐसे वाक्य
कई बार तो पेशी-दर-पेशी चक्कर पर चक्कर काटते
ऊपर की अदालत तक पहुँच जाता है आदमी
और नहीं हो पाता है इनकी अदालत का फैसला
(क) कवि एवं कविता के नाम लिखें।
(ख) कवि किनकी कार को जाते हुए देखकर बच्चों को सड़क पार करने से रोकता है, और क्यों?
(ग) कवि इस पद्यांश में न्यायाधीश महोदय की कार्य-प्रणाली पर क्या टिप्पणी करता है?
(घ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि किसकी कार्य-प्रणाली पर क्या व्यंग्य करता है?
(ङ) ‘ऊपर की अदालत से’ कथन से कवि का क्या अर्थ है? नीचे की अदालत के बारे में कवि ने यहाँ क्या कहा है?
उत्तर-
(क) कवि-राजेश जोशी, कविता-रुको बच्चो

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(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवि न्यायाधीश की कार को जाते हुए देखकर बच्चों को सड़क पार करने से रोकता है। इस संदर्भ में कवि यह कहता है कि तेज गति वाली कार से गुजरनेवाले इस न्यायाधीश महोदय से कोई पूछने का यह साहस नहीं कर सकता है कि वे इतनी तेज रफ्तार में कार से क्यों जा रहे हैं। ऐसी बात नहीं है कि उन्हें इस बात की जल्दबाजी है कि वे न्यायालय में सही समय पहुंचे। उनकी अदालत में बरसों से कितने मुकदमे लंबित हैं।

(ग) प्रस्तुत पद्यांश में कवि यह बताना चाहता है कि न्यायालय भी दोषपूर्ण कार्य-शैली का शिकार हो गया है। वहाँ न्यायाधीश महोदय की अदालत में कई मुकदमे वर्षों से लंबित है। स्थिति तो ऐसी बदतर है कि कुछ मुकदमें ऐसे हैं जिनमें व्यक्ति दौड़ते-दौड़ते इस अदालत में न पहुँचकर ऊपर की अदालत (परलोक) में पहुँच जाता है।

(घ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि न्यायपालिका की कार्य-प्रणाली पर तीखा चोट करता है। कवि के अनुसार यह विभाग भी सरकारी अन्य विभागों की तरह भष्टाचार और निष्क्रियता का प्रबल शिकार हो गया है। वहाँ ऐसी दुर्दशा है कि अनगिनत मुकदमे महीनों से नहीं, अपितु कई वर्षों से लंबित हैं। कहने के लिए न्याय विभाग यह चिल्लाकर कहता है कि देर से मिला न्याय न्याय नहीं होता, लेकिन स्थिति यहाँ इतनी बुरी है कि कुछ मुकदमों में दौड़ते-दौड़ते व्यक्ति परलोक की अदालत में पहुँच जाता है और इस अदालत का फैसला सुन नहीं पाता।

(ङ) ऊपर की अदालत से मतलब है ‘यमराज का न्यायालय’, अर्थात ‘मृत्यु की प्राप्ति’। हमारे यहाँ यह बात चलती है कि मनुष्य मरने के बाद यमराज की अदालत में यम के द्वारा पहुँचाया जाता है और वहीं उसके द्वारा किये गये कर्मों का लेखा-जोखा होता है। यहाँ की अदालत के बारे में कवि यह व्यंग्य करता है कि यहाँ किस मुकदमा का निपटारा कब होगा और किसमें कितना समय लगेगा यह कहना असंभव सा है।

3. रुको बच्चो, सड़क पार करने से पहले रुको
उस पुलिस अफसर की बात तो बिलकुल मत करो
वो पैदल चले या कार में ।
तेज चाल से चलना उसके प्रशिक्षण का हिस्सा है
यह और बात है कि जहाँ घटना घटती है
वहाँ पहुँचता है वो सबसे बाद में
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने शासन के किस विभाग पर क्या टिप्पणी की है?
(ग) तेज चाल से चलना किसके प्रशिक्षण का हिस्सा है? इसे स्पष्ट करें।
(घ) यहाँ कवि ने पुलिस की कार्य-प्रणाली पर क्या टिप्पणी की है? क्या आप उससे सहमत हैं?
(ङ) दिए गए पद्यांश की अंतिम दो पंक्तियों का अभिप्राय लिखें।
उत्तर-
(क) कवि-राजेश जोशी, कविता-रुको बच्चो

(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने पुलिस विभाग की दोषपूर्ण कार्य-प्रणाली पर टिप्पणी की है। कहने के लिए तो पुलिस विभाग के अफसर भी तेज रफ्तार कार में चलकर अपने जुड़े कार्यों को समय पर निष्पादित करने की बात करते हैं। लेकिन, यह बात स्पष्ट है कि वे पैदल चले या कार में, इससे उनके कार्य पर कोई प्रभाव पड़ने वाला नहीं है। उनका तो तेज चाल में चलने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। यह बात तो जगजाहिर-सी है कि पुलिस कभी भी वारदात-स्थल पर सबसे बाद में ही पहुँचती है।

(ग) तेज चाल से चलना पुलिस विभाग के अफसरों का प्रशिक्षण है। उन अफसरों को तेज चाल से चलने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे दौड़कर या तेज चाल में चलकर अपराधियों को पकड़ सकें और वारदात-स्थल पर उचित समय पर पहुँच सके। लेकिन, ऐसा होता कहाँ है? स्थिति तो इसके विपरीत है। पुलिस अपराधियों को अब पकड़ती कहाँ है! वह तो महीनों उनके बारे में पता लगाती है और वारदात-स्थल पर बहुत बाद में पहुँचती है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 9 रूको बच्चों

(घ) यहाँ कवि ने पुलिस की कार्य-प्रणाली पर यह टिप्पणी की है कि पुलिस अधिकारी अपने कार्य के प्रति वफादार नहीं है, विभागीय नौकरी से जुड़न के पहले उन्हें दौड़ने, कूदने, फाँदने, जल में तैरने तथा घुड़सवारी करने आदि क प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सक्रिय और आलस्य-मुक्त होकर अपने दायित्व का पालन करें। लेकिन, स्थिति इसके ठीक विपरीत है। यह विभाग तो निष्क्रियता की चादर ओढ़कर आराम से मनोवांछित जगह पर पड़ा रहता है। यदि उन्हें किसी अपराधी और उसके द्वारा किये गये वारदात की सूचना मिलती है तो वे वहाँ काफी इत्मीनान से सबसे बाद में पहुँचने का कष्ट करते हैं।

(ङ) इन दो पंक्तियों में कवि ने पुलिस की निष्क्रियता की चर्चा की है। कवि · यहाँ बताना चाहता है कि पुलिस विभाग अपने दायित्व-पालन की दिशा में काफी निष्क्रिय हो गया है। उनमें दायित्व-पालन की मानसिकता और दायित्व-पालन की इच्छा का घोर अभाव हो गया है। यही कारण है कि अपराधी उनकी पकड़ और पहुँच से बाहर हो गये हैं और अपराध-स्थल पर समय से पहुँचना उनके लिए असंभव-सा हो गया है।

4. रुको बच्चो रुको
साइरन बजाती इस गाड़ी के पीछे-पीछे
बहुत तेज गति से आ रही होगी किसी मंत्री की कार
नहीं नहीं उसे कहीं पहुंचने की कोई जल्दी नहीं है
उसे तो अपनी तोंद के साथ कुर्सी से उठने में लग जाते हैं कई मिनट
उसकी गाड़ी तो एक भय में भागी जाती है इतनी तेज
सुरक्षा को एक अंधी रफ्तार की दरकार है.
रुको बच्चो इन्हें गजर जाने दो।
इन्हें जल्दी जाना है
क्योंकि इन्हें कहीं नहीं पहुँचना है।
(क) कवि एवं कविता के नाम लिखें।
(ख) साइरन का बजना सुनकर कवि बच्चों से क्या कहकर रुकने के लिए कहता है?
(ग) कवि मंत्री महोदय से जुड़ी किस बात की और क्या कहकर हँसी उड़ाता है?
(घ) “सुरक्षा को अंधी रफ्तार की दरकार है।”-इस कथन को स्पष्ट करें।
(ङ) यहाँ कवि ने किसकी कार्य-प्रणाली पर क्या कहकर व्यंग्य किया है।
उत्तर-
(क) कवि-राजेश जोशी, कविता-रुको बच्चो

(ख) साइरन का बजना सुनकर कवि बच्चों से यही कहता है कि साइरन बजाती किसी मंत्री की कार बहुत तेजी से आ रही है तुम्हें रुककर उस कार के निकल जाने देना है। यदि बच्चे ऐसा नहीं करेंगे तो वे मंत्री की कार से धक्का खाकर बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो जाएंगे। इस संदर्भ में कवि कहता है कि मंत्री महोदय को कहीं पहुँचने की जल्दबाजी नहीं है। वे तो केवल रोब और शान के लिए गाड़ी से तेज रफ्तार में गुजरते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 9 रूको बच्चों

(ग) इस संदर्भ में कवि यह चर्चा करता है कि मंत्री महोदय तेजी और फुरती से कैसे काम कर पायेंगे। उनकी तोंद ही बहुत बड़ी है जो उनके लिए काफी बोझिल है। उसके बोझ के कारण मंत्री महोदय को कुर्सी से उठने में कई मिनट लग जाते है और वे बेचारे उठने और बैठने की प्रक्रिया में घोर संकट से पीड़ित हो जाते हैं। उनकी कार तो डर के मारे तेज गति से भागती रहती है।

(घ) इस कथन के माध्यम से कवि इस तथ्य को उद्घाटित करता है कि आज की शासन-व्यवस्था ऐसी है कि अफसरों, न्यायाधीशों, पुलिस पदाधिकारियों तथा नेताओं आदि वरिष्ठ और महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए उनकी वाहिका यानी गाड़ी को तेज रफ्तार से चलाना जरूरी हो गया है। वास्तविक स्थिति यह है कि इन तथाकथित महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों को कहीं आने-जाने में कोई जल्दी नहीं होती। ये तो लोगों के मन में भय, रोब और शान-शौकत जमाने तथा दिखलाने के लिए तेज रफ्तार में गाड़ी को दौड़ाते हुए चलते रहते हैं। उनकी गाड़ियों की यह तेज रफ्तार ‘अंधी रफ्तार’ कही जाती है। इस अंधी रफ्तार के मूल में उनके सुरक्षा की बात की जाती है।

(ङ) यहाँ कवि ने आज के राजनेताओं खासकर मंत्री महोदयों की खोखली, दिखावटी और निष्क्रियतापूर्ण कार्य-प्रणाली पर व्यंग्य किया है। मंत्री महोदय की कार साइरन बजाती हुई काफी तेजी से गुजरती है। उसका यह मतलब नहीं है कि उन्हें किसी अपेक्षित कार्य के निष्पादन के लिए समय पर पहुँचना है। उनकी कार तेज गति में इसलिए भगायी जाती है कि वे अबाधित और सुरक्षित स्थिति में गंतव्य स्थान तक पहुँच जायें और समाज में उनका भय. गेव-दाब तथा शान-शौकत बना रहे।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.3

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BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.3

प्रश्न 1.
वृत्तों के कई जोड़े (युग्म) खींचिए। प्रत्येक जोड़े में कितने बिन्दु भनिष्ठ हैं ? उभयनिष्ठ बिन्दुओं को अधिकतम संख्या क्या है?
उत्तर:
वृत्तों के कई युग्म खींचने से सिद्ध होता है कि प्रत्येक गोड़े के दो उभयनिष्त बिन्दु ग्रेते हैं।
उभयनिष्ठ बिन्दुओं को अधिकतम संख्या भी दो है।

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प्रश्न 2.
मान लीजिए आपको वृत्त दिया है। एक रचना इसके केन्द्र को ज्ञात करने के लिए दीजिए।
उत्तर:
(1) वृत्त पर तीन बिन्दु P, Q तथा R है।
(2) PQ तथा QR को मिलाया।
(3) PQ तथा QR के लम्ब अर्द्धक खाँचे जो O पर प्रतियोद करते हैं। अत: O वृत्त का केन्द्र है।
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प्रश्न 3.
यदि दो वृत्त परस्पर दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करें, तो सिद्ध कीजिए कि उनके केन्द्र उभयनिष्ठ जीवा के लम्ब समद्विभाजक पर स्थित है।
उत्तर:
दिया गया है: O तथा O’ केन्द्र वाले दो वृत्त एक दूसरे को बिन्दु A तथा B पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि उभयनिष्ठ जीवा AB तथा दोनों के केन्द्रों के बीच का रेखाखण्ड OO’ है।
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OO’ तथा AB परस्पर P पर प्रतिच्छेद करते हैं।
सिद्ध करना है : OO’, AB का लम्ब समद्विभानक है।
रचना : O’A, O’B, OA तथा OB को मिलाया।
उपपत्ति : ∆OAO’ स्था ∆OBO’ में,
OA = OB (विचार)
O’A = O’B (प्रिया)
तथा OO’ = OO’ (उभयनिष्ठ)
∆OAO’ ≈ ∆OBO’ (SSS नियम से)
⇒∠AOO’ = ∠BOO’
⇒ ∠AOP = ∠BOP ……. (1)

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[∵ AOO’= ∠AOP तथा ∠BOP = BOO’]
∆AOP तथा ∆BOP में,
OA = OB (त्रिज्या)
तथा ∠AOP = ∠BOP (उभयनिष्ठ)
OP = OP समी. (1) से]
∆AOP ≈ ∆BOP (SAS नियम से)
⇒ AP = PB तथा ∠APO = ∠BPO
∠APO + ∠BPO = 180°
∴ 2∠APO = 180°
⇒ ∠APO = 90°
इसलिए AP = BP
तथा ∠APO = ∠BPO = 90°
अत: AB का लम्ब समद्विभाजक OO’ है।

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

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प्रश्न 1.
याद कीजिए कि दो वृत्त सर्वागतम होते हैं, यदि उनकी त्रिज्याएं बराबर हो। सिद्धकीजिए कि सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीयाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अंतरित करती हैं।
उत्तर:
दिया है। दो सर्वांगसम वृत्त जिनके केन्द्र O तथा O हैं, की दो बराबर जीवाएँ AB तथा PQ है।
सिद्ध करना है: ∠AOB = ∠PO’Q
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2
उपपत्ति :त्रिभुजों AOB तथा PO’Q से,
O = OP (एक वृत्त की प्रियाएँ)
OR = O’O (एक वृत्त की त्रियाएँ)
AB = PQ (दिया है)
अत: ∆AOB ≅ ∆PO’Q (SSS नियम से)
⇒ ∠AOB = ∠PO’Q.
(सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग)

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प्रश्न 2.
सिद्ध कौजिए कि यदि सर्वागसम वृत्तों की जीवाएं उनके केन्द्रों पर बराबरकोण अंतरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं।
उत्तर:
दिवा है: दो सर्वांगसम वृत्त जिनके O तथा O’ है, की जोगाएँ AB Tथा PQ इस प्रकार है,जो O तथा O’ पर समान कोण अंतरित करती हैं।
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अत: ∠AOB = ∠PO’Q
सिद्ध करना है: AB = PQ
उपपत्ति : त्रिभुजों AOB तथा PO’Q में,
AO = PO’ (वृत की त्रिज्या)
BO = QO’ (वृत्त को त्रियाएँ)
∠AOB = ∠PO’Q (दिया है)
अतः ∆AOB ≅ ∆PO’Q (SAS नियम से)
⇒ AB = PQ.

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Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान

Bihar Board Class 6 Science फूलों से जान-पहचान Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) फूल का नर भाग है –
(i) अंखुड़ी
(ii) पंखडी
(iii) पुंकेसर
(iv) स्त्रीकेशर
उत्तर:
(iii) पुंकेसर

(ख) फूल का मादा भाग है
(i) पुंकंसर
(ii) स्त्रीकेसर
(iii) अंखुड़ी
(iv) पंखुड़ी
उत्तर:
(i) पुंकंसर

(ग) ऐसा फूल जिसमें केवल पुंकेसर हाते हैं, स्त्रीकेसर नहीं होते हैं, कहलाते हैं –
(i) नर फूल
(ii) मादा फूल
(iii) अलिंगी फूल
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iv) इनमें से कोई नहीं

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान

(घ) ऐसा फूल जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों उपस्थित होते हैं –
(i) एकलिंगी
(ii) द्विलिंगी फूल
(iii) अलिंगी फूल
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ii) द्विलिंगी फूल

(ङ) पूर्ण फूल के कितने भाग होते हैं ?
(i) दा
(ii) तीन
(iii) चार
(iv) पाँच
उत्तर:
(iii) चार

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथनों पर सही और गलत का निशान लगाएँ।
(क) सभी द्विलिंगी फूल पूर्ण फूल होते हैं।
(ख) सभी. पूर्ण फूल द्विलिंगी होते हैं।
(ग) फूलों की अंखुड़ियाँ आपस में जुड़ी हों तो पंखुड़ियाँ भी आपस में जुड़ी होती हैं।
उत्तर:
(क) गलत
(ख) सही
(ग) सही।

प्रश्न 3.
धतूरा, बैंगन, लौकी के फूलों में से कौन से फूल पूर्ण हैं तथा कौन से अपूर्ण? पता करके कारण सहित लिखें।
उत्तर:
धता एवं बैंगन के फल पूर्ण फूल होते हैं। क्योंकि इसमें पुष्प के चारों चक्र उपस्थित होते हैं। यानि इस फूल में अंखुड़ी, पंखुड़ी, स्त्रीकंसर तथा पुंकेसर उपस्थित हैं। जबकि लौकी के फूल अपूर्ण होते हैं क्योंकि इसमें चारों चक्र उपस्थित नहीं होता।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान

Bihar Board Class 6 Science फूलों से जान-पहचान Notes

अध्ययन सामग्री

पेड़-पौधों के सभी भागों में पुष्प (फूल) का एक अलग ही स्थान प्राप्त है। पौधों की सुन्दरता बढ़ाने से लेकर फल उत्पादन तक इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुष्प अपनी सुन्दरता से सिर्फ मानव को ही नहीं बल्कि कीट-पतंग को भी अपनी ओर आकर्षित करता है जिसके द्वारा निषेचन प्रक्रिया पूरी होती है।

आकारिकीय रूप से फूल एक प्ररोह है, जिस पर गाँठें तथा रूपान्तरित पुप्पी पत्रियाँ लगी रहती हैं। यह तने या शाखाओं के शीर्ष अथवा पत्ती के अक्ष में उत्पन्न होकर प्रजनन का कार्य करता है तथा फल एवं बीज उत्पन्न करता है। प्रायः एक पुष्प चार प्रकार की रूपान्तरित पत्तियों का बना होता है जो कि पुष्पवृन्त के फूले हुए सिरे पुष्पासन पर लगी होती है। इन्हें बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग तथा जायांग कहते हैं। जिन पुष्पों में चारों प्रकार के चक्र होते हैं, उन्हें पूर्ण पुष्प कहते हैं, जिन पुष्पों में एक या एक से अधिक चक्र अनुपस्थित होते हैं। उसे अपूर्ण पुष्प कहते हैं। बाह्यदल पुंज एवं दलपुंज को पुष्प का सहायक अंग एवं पुमंग तथा जायांग को पुष्प का आवश्यक अंग कहते हैं।

अंखुड़ियाँ या बाह्यदल पुंज – यह पुष्प का सबसे बाहरी चक्र होता है। प्रायः यह हरे रंग के बाह्यदलों का चक्र होता है। इसका मुख्य कार्य कलिका अवस्था में पुष्प के अन्य भागों की रक्षा तथा प्रकाश-संश्लेषण करना होता है। कुछ पुण्यों में यह रंगीन होकर परागण के लिए कीटों को आकर्पित करता है।

पंखुड़ी या दल पुंज – यह पुष्प का दूसरा चक्र होता है, जो बाह्य दलपुंज के अन्दर स्थित होता है। यह प्राय: 2-6 दलों का बना होता है। ये प्रायः रंगीन हात हैं और इनका मुख्य कार्य परागण के लिए कीटों को आकर्षित करना है।

पुष्पासन – फूल के डंठल के जिस सिरे पर फूल के सभी अंग जुड़े रहते हैं, उसे पुष्पासन या फूल का आसन कहते हैं।

पुमंग – पुंकेसर के समूह चक्र को पुमंग कहते हैं। दलों से घिरा यह पुष्प का तीसरा चक्र होता है। ये प्रायः रंगीन होते हैं और इनका मुख्य कार्य परागण के लिए कीटों को आकर्पित करना है। पुंकेसर पुष्प का नर जननांग होता है।

जायांग – यह पुष्प का केन्द्रीय भाग व चौथा चक्र होता है। स्त्रीकेसर के समूह को जायांग. कहते हैं। पुष्प के ये मादा जननांग होते हैं। प्रत्येक जायांग एक या अनेक अण्डपों का बना होता है। जायांग मादा बीजाणु उत्पन्न करता है। अण्डप तीन भागों का बना होता है-
(क) अण्डाशय
(ख) वर्तिका
(ग) वर्तिकाग्र

परागण – परागकणों के परागाकोष से मुक्त होकर उसी जाति के पौधे जायांग के वर्तिकान तक पहुँचने की क्रिया को परागण कहा जाता है। जब एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकान पर या उसी पौधे पर स्थित किसी अन्य पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचता है, तो इसे स्वपरागण कहते हैं। परन्तु जब परागकण उसी जाति के दूसरे पौधे पर स्थित पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचता है, तो इसे पर-परागण कहते हैं। पर-परागण कई माध्यमों से होता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 8 फूलों से जान-पहचान

निषेचन – परागण के पश्चात निषेचन की क्रिया होती है। परागनली – बीजाण्ड में प्रवेश करकं बीजाण्डकाय को भेदती हुई भ्रूणकोष तक पहुँचती है और परागकणों को वहाँ छोड़ देती है। इसके बाद एक नर युग्मक एक अण्डकोशिका से संयोजन करता है। इसे निपेचन कहते हैं। अब निषेचित अंण्ड युग्मनज कहलाता है। यह युग्मनज बीजाणुभिद् की पहली इकाई है। निपेचन के बाद बीजाण्ड से बीज, युग्मनज से भ्रूण तथा अण्डाशय से फल बनता है।

पूर्ण फूल – वे सभी फूल जिसमें अंखुड़ी, पंखुड़ी, पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर चारों अंग उपस्थित हों उसे पूर्ण फूल कहते हैं।

अपूर्ण फूल – वे सभी फूल जिसमें अंखुड़ी. पंखुड़ी, पुंकेसर तथा ‘स्त्रीकेसर में से कोई भी अंग अनुपस्थित हो उसे अपूर्ण फूल कहते हैं।

एकलिंगी फूल – एसा फूल जिसमें पुंकेसर या स्त्रीकंसर में से केवल एक ही अंग उपस्थित हो। एकलिंगी फूल दो प्रकार के होते हैं – नर फूल तथा मादा फूल।

नर फूल – वैसे फूल जिसमें केवल पुंकेसर होते हैं, स्त्रीकंसर नहीं होते हैं।

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मादा फूल – वैसा फूल जिसमें केवल स्त्रीकंसर होता है। पुंकेसर नहीं होते हैं। उसे मादा फूल कहते हैं।

द्विलिंगी फूल – वं सभी फूल जिसमें स्त्रीकेसर तथा पुंकेसर दोनों उपस्थित होते हैं उसे द्विलिंगी फूल कहते हैं।

अलिंगी फूल – वे सभी फूल जिसमें स्त्रीकंसर तथा पुंकेसर दोनों ही उपस्थित न हों उसे अलिंगी फूल कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Social Science पृथ्वी और ग्लोब Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
एक देशांतर से दूसरे देशांतर की दूरी तय करने में समय लगता है
(क) चार मिनट
(ख) पाँच मिनट
(ग) चालीस मिनट
(घ) चार संकेण्ड
उत्तर-
(क) चार मिनट

प्रश्न 2.
सबसे अधिक गर्मी पड़ती है
(क) शीत कटिबंध में
(ख) शीतोष्ण कटिबंध में
(ग) उष्ण कटिबंध में
(घ) उत्तरी ध्रुव में
उत्तर-
(ग) उष्ण कटिबंध में

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प्रश्न 3.
कर्क रेखा है
(क) 90° अक्षांश पर
(ख) 23 \(\frac{1}{2}\)° उत्तरी अक्षांश
(ग) 23 \(\frac{1}{2}\)° दक्षिणी अक्षांश
(घ) ध्रुव पर।
उत्तर-
(ख) 23 \(\frac{1}{2}\)° उत्तरी अक्षांश

प्रश्न 4.
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा से परब जाने पर
(क) दिन-रात में परिवर्तन होता है
(ख) एक तिथि घटा दी जाती है
(ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है
(घ) तिथि में कोई परिवर्तन नहीं करते हैं,
उत्तर-
(ग) एक तिथि बढ़ा दी जाती है

प्रश्न 2.
कम शब्दों में उत्तर दें.

प्रश्न (क)
पृथ्वी के दिये गये नमूने का क्या नाम है ?
उत्तर-
पृथ्वी के दिये गये नमूनं का नाम ग्लोब है।

‘प्रश्न (ख)
यह नमूना किस आकृति का होगा ? जैसे त्रिकोण, गोल, त्रिभुजाकार आदि।
उत्तर-
यह नमूना गोल आकृति का होगा ।

प्रश्न (ग)
इस नमूने की आकृति वाले किन्हीं अन्य दो वस्तुओं के . नाम लिखिये।
उत्तर-
इस नमूने की आकृति वाले संतरा, खरबूजा हैं।

प्रश्न (घ)
पृथ्वी के इस नमूने पर कौन-सी रेखाएँ बनी हैं ? उनके नाम लिखिये।
उत्तर-
पृथ्वी के इस नमूने पर अक्षांश रेखा, कर्क रेखा, भूमध्य रेखा, मकर रेखा बनी है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

प्रश्न (ङ)
इस नमूने के अलावा, आप और किन माध्यमों से पृथ्वी पर स्थित किसी स्थान का पता लगा सकते हैं ?
उत्तर-
इस नमूने के अलावा, मैं आसमान में सूरज की स्थिति या रात में ध्रुव तारे को देखकर किसी स्थान की स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं लेकिन इसमें बहुत परेशानी होती है।

पृथ्वी पर स्थित स्थानों को जानने के लिए कम्पास (दिक् सूचक) और नक्शे से ठिकाना खोजना आसान हो गया। इस प्रकार इन माध्यमों के द्वारा भी हम पृथ्वी पर स्थित स्थानों को पता लगा सकते हैं।

प्रश्न 3.
ग्लोब पर कुछ पड़ी एवं खड़ी रेखाएँ बनी हुई हैं। इन्हें गौर से देखकर निम्न प्रश्नों के उत्तर तालिका में लिखिए

प्रश्न (क)
पड़ी/खड़ी रेखाएँ किन दिशाओं के बीच में खींची गयी
उत्तर-
पड़ी/खड़ी रेखाएँ उत्तर और दक्षिण दिशाओं के बीच में खींची गयी हैं।

प्रश्न (ख)
अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है?
उत्तर-
पृथ्वी का आकार गोल है जो एक वृत्त के समान है। एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360° देशांतर रेखाएँ खींची जा सकती हैं। इनमें दो देशांतर रेखाएँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ये हैं 0° तथा 180° देशांतर रेखाएँ।

0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा तथा 1800 देशांतर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।

प्रश्न (ग)
किन्हीं दो पड़ी अथवा खड़ी रेखाओं के बीच किस प्रकार की दूरी है ? (समान/असमान)
उत्तर-
दो अक्षांशों के बीच की दूरी समान होती है।

प्रश्न (घ)
पड़ी/खड़ी रेखाओं को क्या कहते हैं?
उत्तर-
पड़ी/खड़ी रेखाओं को अक्षांश रेखा कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

प्रश्न (ङ)
पड़ी एवं खड़ी रेखाओं में से कौन-सी आपस में मिलती
उत्तर-
पडी एवं खड़ी रेखाओं में से खडी रेखा आपस में मिलती है।

प्रश्न 4.
बताइये –

प्रश्न (i)
अक्षांश वृत्त किसे कहते हैं?
उतर-
भूमध्य रेखीय वृत्त एवं किसी स्थान के बीच जो कोण बनता है उसे उस स्थान का अक्षांश कहा जाता है।

प्रश्न (ii)
दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम बताइये।
उत्तर-
दो प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम-कर्क रेखा, मकर रेखा हैं।

प्रश्न (iii)
पृथ्वी पर कितने कटिबंध हैं? इन कटिबंधों की विशेषताएँ बतलाइये।
उत्तर-
पृथ्वी पर तीन कटिबंध हैं।

1. उष्ण कटिबंध-कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्णकटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती है तथा सूर्य की । किरणें लम्बवत् पड़ती हैं।

2. समशीतोष्ण कटिबंध-कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती है तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे सम शीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परन्तु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

3. शीत कटिबंध-उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिण गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव क्षेत्रों में सालों भर ठंड पड़ती है। इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है।

प्रश्न (iv)
देशान्तर रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर-
ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हुई रेखाएँ खींची गई हैं। ये सभी लम्बवत् रेखाएँ देशांतर रेखाएँ हैं। 0° तथा 180° देशांतर रेखाएँ । एक वृत्त में 360° होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशांतर रेखाएँ खींची गई हैं। इनकी लम्बाई समान होती है। इसकी संख्या 360 होती है। देशांतर रेखाएँ तिथि निर्धारण में सहयोग देती हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

प्रश्न (v)
प्रधान मध्याह्न रेखा क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर-
0° देशांतर को प्रधान देशांतर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा कहते हैं। पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति दर्शाने तथा समय निश्चित करने के लिए देशांतर रेखाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे तिथि निर्धारण में भी सहयोग मिलता है।

प्रश्न (vi)
अक्षांश रेखाओं तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर-
अक्षांश रेखाओं तथा देशांतर रेखाओं की कुल संख्या 20 है।

Bihar Board Class 6 Social Science पृथ्वी और ग्लोब Notes

पाठ का सारांश

किसी भी स्थान पर खड़े होकर अगर दूर तक निगाह डाली जाय तो ऐसा लगेगा कि कुछ दूरी पर जमीन और आसमान आपस में मिल रहे हैं। ऐसा इसलिए नजर आता है क्योंकि हमारी पृथ्वी गोल है। लेकिन हमें आस-पास देखने पर पृथ्वी गोल नजर न आकर चपटी दिखती है। इसका कारण यह है कि हम पृथ्वी पर जगह खड़े होकर पूरी पृथ्वी को – एक साथ नहीं देख सकते हैं।

अगर हम चाँद या उपग्रह पर जाकर पृथ्वी को देखें तो पृथ्वी भी चाँद जैसी दिखाई देती हैं क्योंकि पृथ्वी भी चन्द्रमा की तरह गोल है परन्तु आकार में चन्द्रमा से बड़ी है। चाँद पर पहुँचने वाले पहले व्यक्ति अमेरिका के नील आर्मस्ट्राँग थे। पृथ्वी भी वहाँ से चाँद की तरह ही आकाश में टॅगी गोल गेंद की तरह दिखाई देती है। पृथ्वी वहाँ से नीली दिखाई देती हैं।

पृथ्वी को गोलाकार होने के कारण हम इसके छोटे से पृष्ठ को ही एक बार में देख सकते हैं। यह कहते हुए उन्होंने ग्लोब दिखाकर समझाया । जिस प्रकार विशाल हाथी को छोटे खिलौने के रूप में बनवाकर दिखाते हैं ठीक उसी प्रकार अपनी विशाल पृथ्वी को ग्लोब के रूप में दिखाया गया है।

संसार का मानचित्र दिखाकर बताया कि जमीन के बड़े-बड़े हिस्से जो महासागरों से घिरे हुए हैं वे महाद्वीप हैं इन्हें स्थल भाग कहा जाता है। स्थल पर लोग रहते हैं। इसी पर गाँव, शहर, नदी, नाले इत्यादि हैं। महाद्वीपों की कुल संख्या सात हैं। महाागरों की कुल संख्या चार हैं। ये बहुत गहरे होते हैं। इनकी गहराई कई किलोमीटर तक होती है। सभी महासागर आपस में जुड़े हुए हैं। आर्कटिक महासागर को उत्तरी हिम महासागर भी कहते हैं क्योंकि अत्यधिक ठंड के कारण वहाँ बर्फ जमी रहती है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब 1

आर्कटिक महासागर । “ अगले दिन जब विद्यालय पहुँचा तो गुरुजी ने ग्लोब का अध्ययन करना सिखाया।

उन्होंने बताया कि जब आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में सुबह 10 बजता है तो उस समय पटना में सुबह के 5 बजते होते हैं। यह सब स्थानीय समय में होने वाले अंतर के कारण होता है। इसके बारे में मैं बताता हूँ।

लगभग सात-आठ सौ वर्ष पहले समुद्री यात्राओं के दौरान लोग भटक जाते थे और किसी स्थान को खोजने में बहुत परेशानी होती थी। आसमान में सूरज की स्थिति या रात में ध्रुव तारे को देखकर किसी स्थान की स्थिति का अनुमान लगाया जाता था। इसमें बहुत परेशानी होती थी। बाद में कम्पास (दिक सूचक) और नक्शे से ठिकाना खोजना आसान हो गया लेकिन समय का अन्तर पता करना कठिन था। लेकिन देशान्तर रेखाओं की पहचान से इस मुश्किल का भी समाधान हुआ। राजू ने तुरंत पूछा-ये रेखाएँ क्या होती हैं?

गुरुजी ने बताया कि पृथ्वी गोल है। किसी भी गोले को यदि दो बराबर भागों में बांटा जाय तो गोले का आधा भाग ‘गोलार्द्ध’ कहलाता है। . इसी प्रकार पृथ्वी को उत्तरी एवं दक्षिणी दो बराबर भागों में बाँटने वाली रेखा या वृत्त भूमध्य रेखीय वृत्त होती है। भूमध्य रेखीय वृत को ही भूमध्य रेखा या विषुवत रेखा भी कहा जाता है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

यह सबसे बड़ा वृत्त होता है। इस रेखा से उत्तर का भाग उत्तरी गोलार्द्ध एवं दक्षिणी भाग दक्षिणी गोलार्द्ध कहलाता है। भूमध्य रेखीय वृत्त एवं किसी स्थान के बीच जो कोण बनता है उसे उस स्थान का अक्षांश कहा जाता है तथा वहाँ से पूर्व से पश्चिम की ओर खींची गई रेखाएँ अक्षांश रेखाएँ कहलाती हैं।

भूमध्य रेखीय वृत्त या भूमध्य रेखा पृथ्वी का 0° अक्षांश है क्योंकि यह पृथ्वी के मध्य में है और इसी 0° अक्षांश से ही अन्य अक्षांशों की गणना की जाती है। विपुवत रेखा से उत्तर 90° एवं दक्षिण के 90° अक्षांश होते हैं। 23/2° उत्तरी अक्षांश को कर्क रेखा एवं 23/2° दक्षिणी अक्षांश को मकर रेखा कहा जाता है। भूमध्य रेखीय वृत्त के उत्तर की ओर तथा दक्षिण की ओर जाने पर यह वृत्त क्रमश: छोटा हो जाता है 90° उत्तरी तथा 90° दक्षिणो अक्षांश को क्रमशः उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव भी कहते हैं। यह अक्षांश वृत्त न होकर मात्र एक बिंदु होता है।

रेखाएँ पूर्व से पश्चिम दिशा में विषुवत रेखा के समान्तर खींची जाती हैं। दो अक्षांशों के बीच की दूरी समान होती है। विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर जाने पर वृत्त छोटे होते जाते हैं। ध्रुव एक बिंदु के रूप में रह जाता है। सभी अक्षांश रेखाओं की लम्बाई समान नहीं होती।

ग्लोब पर उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हुई रेखाएँ खींची गई हैं। ये सभी लम्बवत् रेखाएँ देशान्तर रेखाएँ हैं। किसी भी स्थान की सही स्थिति और समय का पता लगाने के लिए इन रेखाओं का सहारा भी लेना पड़ता है। पृथ्वी का आकार गोल है जो एक वृत्त के समान है एवं वृत्त में 3600 होते हैं। इसी आधार पर पृथ्वी पर 360 देशान्तर रेखाएँ खींची जा सकती हैं। इनमें दो देशान्तर रेखाएँ महत्वपूर्ण मानी गई हैं। ये हैं 0° तथा 180° देशान्तर रेखा । 0° देशान्तर को प्रधान देशान्तर रेखा या प्रधान मध्याह्न रेखा तथा 180° देशान्तर रेखा को अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं।

गुरुजी ने बच्चों को देशांतर रेखाओं की कई विशेषताएँ बतायीं जैसे ये रेखाएँ अर्द्धवृत्ताकार होती हैं। विपरीत भाग के अर्द्धवत मिलकर पूर्ण वृत्त बनाती हैं। जैसे 0° और 180 मिलकर एक पूर्ण वृत्त बनाते हैं। इनकी लम्बाई समान होती है। इनकी संख्या 360 होती है। विषुवत वृत्त पर इनके बीच की दूरी सबसे अधिक होती है । लेकिन जैसे-जैसे हम ध्रुवों की ओर जाते हैं इनकी बीच की दूरी कम होती जाती है। ध्रुवों पर ये सभी रेखाएँ मिल जाती हैं तथा एक बिंदु के समान हो जाती है।

पृथ्वी पर किसी स्थान की स्थिति दर्शाने तथा समय निश्चित करने के लिए देशांतर रेखाओं का ज्ञान आवश्यक है। 180° देशांतर रेखा ही रेखा एक होती है। इसलिए यह पूरब या पश्चिम नहीं होती । सूर्य के सामने घूमती पृथ्वी का एक देशान्तर से दूसरे देशांतर तक पहुँचने में 4 मिनट का समय लगता है। अतएव विभिन्न देशांतर पर स्थित स्थानों का समय भी अलग-अलग होता है।

देशांतर रेखाएँ तिथि निया में सहयोग देती हैं। 180° देशांतर रेखा को सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय तिथि रख: भन कहा जाता है। इस रेखा से पश्चिम जाने पर तिथि बढ़ा दी जाती है जबकि पूरब की ओर आने पर तिथि घटा दी जाती है।

गुरुजी ने कहा, राजू के पिताजी अमृतसर से लाहौर के लिए जिस समय उड़ान भरी उस समय उनकी घड़ी में बारह बज रहे थे। आधे घंटे की उड़ान के बाद जब वह लाहौर पहुँचे तो वहाँ एयरपोर्ट की घड़ी में भी बारह बज रहे थे। उन्होंने अपनी घड़ी में भी बारह बजाया और काम पर चल दिये। रेहाना बोली गुरुजी मुझे समय का रहस्य समझ में आ गया।

क्या पृथ्वी पर बनी रेखाएँ लोगों के आने-जाने से मिट नहीं जाती होंगी।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 6 पृथ्वी और ग्लोब

गुरुजी ने स्नेहपूर्वक भाव से रेहाना को देखा और बोले-ये सभी रेखाएँ काल्पनिक होती हैं। जिस प्रकार आप अपने मस्तिष्क में किसी भी वस्तु का चित्र बना सकते हैं उसी प्रकार यह भी कल्पना की गई है । वास्तव में ये रेखाएँ पृथ्वी पर नहीं हैं। अक्षांश रेखाओं से हम किसी स्थान के तापमान का, देशान्तर रेखाओं से समय का एवं जहाँ अक्षांश एवं देशान्तर रेखाएँ मिलती हों उससे उस स्थान की स्थिति का पता करते हैं। पृथ्वी को इन्हीं अक्षांश रेखाओं के आधार पर तीन कटिबंधों में बांटते हैं।

कर्क एवं मकर रेखाओं के बीच अन्य अक्षांशों की तुलना में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है जिसके कारण इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है। यहाँ दिन और रात की स्थितियाँ सालों भर होती हैं तथा सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती हैं। कर्क एवं मकर रेखा के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत्त के बीच वाले क्षेत्र में तापमान मध्यम रहता है। यहाँ जाड़े में सर्दी पड़ती हैं तथा गर्मी में तापमान अधिक रहता है। इसे समशीतोष्ण कटिबंध कहते हैं। दिन और रात की स्थितियाँ होती हैं परंतु सूर्य की किरणें कभी लम्बवत् नहीं पड़ती हैं।

उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव क्षेत्रों में सालों भर ठंड पड़ती है। इसे शीत कटिबंध कहा जाता है। यहाँ छ: महीने का दिन एवं छः महीने की रात होती है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

प्रश्न 1.
खाली स्थान भरिए
(i) वृत्त का केन्द्र वृत्त के …………. मैं स्थित है। (बहिभाग अभ्यंतर)
(ii) एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी जिऱ्या से अधिक हो वृत्त के …………. स्थित होता है (बहिभाग अभ्यंतर)
(iii) वृत्त की सबसे बड़ी जीया वृत्त का ………….. होता हो।
(iv) एक चाप ……………. होता है, जब इसके सिने एक व्यास के सिरे हो।
(v) वृत्तबग्ह एक चाप तथा …………… के बीच का भाग हो।
(vi) एक वृत्त, जिसके तल पर स्थित है, उसे ……………… भागों में विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) अभ्यंतर
(ii) बहिर्भाग
(iii) व्यास
(iv) अई
(v) जीवा,
(vi) तीन।

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प्रश्न 2.
लिखिए, सत्व वा असत्व। अपने उत्तर के कारण दीजिए।
(i) केन्द्र को वृत्त पर किसी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड वृत्त की त्रिज्या होती है।
(ii) एक वृत्त में समान लम्बाई की परिमित जोगाएँ होती है।
(iii) यदि एक वृत्त को तीन बराबर चापों में बाँट दिया जाए, तो प्रत्येक भाग दीर्घ चाप होता है।
(iv) वृत की एक जीया, जिसकी लम्बाई त्रिज्या से दो गुनी हो. वृत्त का व्यास है।
(v) त्रिन्यखंड, जौवा एवं संगत चाप के बीच का क्षेत्र होता
(vi) वृत्त एक समतल आकृति है।
उत्तर:
(i) सत्य, केन्द्र से परिधि तक की दूरी को प्रिज्या कहते हैं।
(ii) असत्य, एक वृत्त से समान लंबाई की अपरिमित जीबाएँ होती है।
(iii) असत्य, प्रत्येक भाग लघुचाप होगा।
(iv) सरथ, व्यास = 2 × प्रिज्या
(v) असाथ, चाप तथा दो त्रियाओं के बीच का क्षेत्र त्रिज्यखंड कहलाता है।
(vi) सत्य, वृत्त एक द्विविमीय आकृति है अतः समतल आकृति है।

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Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 7 पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 7 पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 7 पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा

Bihar Board Class 9 Hindi पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
कवि के आशावादी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
कवि केदारनाथ अग्रवाल ने अपनी कविता में दृढ़ इच्छा शक्ति को . प्रकट करते हुए सबल और श्रीसंपन्न भारत की कल्पना की है। .
कवि की दृष्टि में आजाद भारत का स्वरूप क्लेश रहित, ज्ञान-विज्ञान संयुक्त खुशियों से भरा हुआ तथा मान-सम्मान से जीती हुई जनता का होगा। आशावादी भावों के सहारे कवि ने भारत का जो मानचित्र उकेरा है उसमें भारत कहीं भी किसी क्षेत्र में दीन-हीन के रूप में नहीं दीखता है। कवि की इच्छाशक्ति दृढ़ है। उसके – हृदय में आशाओं की किरणें प्रस्फुटित हो रही हैं। वह कहीं भी निराश नहीं है। वह हर भारतीय के जीवन में मान-सम्मान, खुशियों का राज, क्लेश रहित जीवन, साधन-संपन्न जीवन, उदास आँखों में नयी आशा की किरणों का उद्भव, ज्ञान-विज्ञान एवं विद्या से युक्त नव प्राण के संचार की सुखद कामना करता है। भारतीय जन-जीवन सबकुछ से भरा पुरा हो और श्रीसंपन्नता का इतना आधिक्य हो कि जन-मन खुशियों से झूम उठे मोरों सा नर्तन यानि नाच करने लगे।
कवि आशावादी दृष्टिकोण के साथ जीते हुए पूरे हिन्दुस्तान को धन-धान्य से परिपूर्ण रूप में देखना चाहता है। इस प्रकार भारतीय जीवन में अभाव नहीं रहे, कष्ट नहीं रहे, पीड़ा नहीं रहे यही कवि की मंगलकामना है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 7 पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा

प्रश्न 2.
कवि के मन में आजाद हिन्दुस्तान की कैसी कल्पना है?
उत्तर-
कविवर केदारनाथ अग्रवाल आजाद हिन्दुस्तान को हर दृष्टि से साधन-संपन्न के रूप में देखना चाहते है।

कवि चाहता है कि उसका आजाद भारत मान-सम्मान से युक्त हो यानि यहाँ की जनता का जीवन मान-सम्मान से युक्त हो। गीतों की खेती से भाव यह है कि घर-घर में खुशियों का राज हो, हर घर गीतों के स्वर से गुंजायमान हो। पूरा हिन्दुस्तान मान-सम्मान और उमंग से युक्त हो।

आजाद भारत की कल्पना करते हुए कवि कहता है कि क्लेश रहित भारतीय जन जीवन हो, किसी भी तरह की पीड़ा या कष्ट किसी को न रहे। फूलों की खेती का अर्थ यह है कि समग्र भारत का दृश्य खुशहाल नजर आए। हर घर में प्रसन्नता और सभी का निवास हो। सरस्वती की वीणा का स्वर गूंजे।
जिन आँखों में उदासी हो वहाँ प्रकाश की लौ जले। ज्ञान और विद्या से घर-घर आलोकित हो।

कवि बार-बार जोर देकर कहता है कि भारत ऐसा हो जहाँ नया जीवन का आविर्भाव हो। कहने का. मूलभाव यह है कि सारा भारत साधन से पूर्ण एवं श्रीसंपन्नता से युक्त दीखे। भारतीय जीवन में इतनी खुशियाँ और धन-धान्य की इतनी प्रचुरता हो कि सभी प्रसत्र होकर मोर की तरह नृत्य करने लगे। कहने का आशय यह है कि भारतीय जीवन चिंता और कष्ट से मुक्त हो।

प्रश्न 3.
कवि आजाद हिन्दुस्तान में गीतों और फूलों की खेती क्यों करना चाहता है?
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य-पाठ में यानि ‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने आजाद भारत में गीतों और फूलों की खेती करने का भाव प्रकट किया है।
इस कविता में गीतों और फूलों का प्रतीक प्रयोग हुआ है। प्रकृति के इन रूपों , के द्वारा कवि संकेत करता है कि भारतीय जीवन फूलों सा हँसता हुआ चिर विकसित रूप में सौंदर्य से युक्त हो और गीतों की खेती का तात्पर्य यह है कि घर-घर में हर जीवन में आनंद ही आनंद दीखे। कहीं भी उदासी पीड़ा का दर्शन नहीं हो। किसी के भी जीवन में अभाव नहीं दिखाई पड़े।

इस प्रकार कवि आशावादी दृष्टिकोण रखता है। वह फूलों सा खिलता हुआ हँसता हुआ और श्रीसंपन्न भारत की कल्पना करता है।
ठीक दूसरी तरफ वह गीतों से गुंजायमान घर-द्वार, खेत-खलिहान की परिकल्पना करता है।
कहने का मूलभाव यह है कि भारत का कोना-कोना फूलों-सा हँसता हुआ दिखाई पड़े और गाँव से लेकर पर्वत-घाटी, नदी-कछार सभी जगह जनजीवन गीतों से गुजित रहे।

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प्रश्न 4.
इस कविता में विद्या की खेती का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य-पाठ ‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने अपनी आशाभरी दृष्टि से आजाद भारत के मनोहारी दृश्य का चित्रांकन किया है। कवि के कहने का भाव यह है कि विद्या की खेती घर-घर हो। मूल भाव यह है कि यहाँ का हर नागरिक सुशिक्षित और विद्वान बने। घर-घर में विद्या और ज्ञान-प्रकाश की किरणें पहुँचकर नया जीवन प्रदान करे।
बिना ज्ञान के या विद्या के यह जीवन अंधकारमय हो जाता है। अतः, इस अंधकार और मूढ़ता से मुक्ति के लिए ज्ञान की साधना और विद्या का प्रकाश घर-घर में पहुँचे, यही कवि की कामना है। यहाँ आशावादी दृष्टिकोण का दर्शन होता है।

प्रश्न 5.
इस कविता के केन्द्रीय भाव पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य पाठ ‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण भारत की परिकल्पना की है। इस कविता का केन्द्रीय भाव जनवादी-सपनों को लेकर है। कविता के मानस में आजाद हिंदुस्तान का ऐसा चित्र है जिसकी उर्वर भूमि में मान-सम्मान, स्वतंत्रता, ज्ञान और खुशियों के फूल खिलेंगे। यह कविता संबोधन शैली में लिखी गई है। इस कविता के द्वारा कवि जनता में स्फूर्ति जगाना चाहता है।

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प्रश्न 6.
कवि की राष्ट्रीय-भावना पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ कविता में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने अपनी काव्य प्रतिभा के द्वारा जन-जन में राष्ट्रीय भावना जगाने का कार्य किया है।
भारत आजाद होगा। जन-जन में हर तरह के अभाव का सर्वनाश हो जाएगा यानि खात्मा हो जाएगा।
जन-जीवन प्रसन्नचित्त दिखाई पड़ेगा और क्लेश रहित जीवन में आनंद का राज रहेगा।

गीतों से गुजित घर-आँगन और खेत-खलिहान होंगे। जन-जीवन गीतों से आप्लावित रहेगा। सभी लोग प्रसन्न होकर लोक मंगलकारी भावनाओं के बीच रहेंगे। आपस में प्रेम, सहयोग और त्याग की भावना फूलेगी-फलेगी।
ज्ञान-विज्ञान कि किरणें घर-घर पसरेंगी। उदासी नहीं रहेगी। नवजागरण और आजादी के कारण सबमें नव प्राणों का संचार होगा। सभी एकता के सूत्र में बँधे रहेंगे। सबमें प्रेम, समन्वय, सहयोग और सेवा भावना बढ़ेगी। अभावग्रस्तता से मुक्ति मिलेगी। जन-जन में आशा विश्वास और नव चेतना की लौ जलेगी।
केदारनाथ अग्रवाल की इस कविता में समग्र राष्ट्रीय जीवन की समुन्नति और विद्या-ज्ञान से युक्त, मान-सम्मान की अभिलाषा प्रदर्शित हुई है।

प्रश्न 7.
“मैं कहता हूँ। फिर कहता हूँ’ में कवि के किस भाव का अभिव्यक्ति हुई है?
उत्तर- पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ कविता में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने जोर देकर आशा और विश्वास के साथ अपने मन के उद्गार को दृढ़ता के साथ व्यक्त किया है।

कवि कहता है कि जब आजाद हिन्दुस्तान होगा तब हर जन में नव प्राणों का संचार होगा। खुशियों एवं श्रीसंपन्नता से परिपूर्ण जीवन अभाव मुक्त रहेगा। किसी भी प्रकार र का कोई ताप नहीं रहेगा। इसी कारण कवि विश्वास के साथ कहता है कि अपना भारत सबका भारत सबल और श्रीसंपन्न भारत होगा जहाँ भखमरी बेकारी बेरोजगारी का दर्शन भी नहीं होगा। सबका जीवन उमंग से परिपूर्ण और फलों सा बिहँसता. खिलता नजर आएगा। जन-जीवन अभाव से मक्त होकर मोरों की तरह नृत्यु प्रस्तुत करेगा। कहने का भाव यह है कि सारा भारत खुशहाल नजर आएगा। घर-घर में विद्या-ज्ञान की लौ जलेगी और सबके चेहरे पर प्रसन्नता दिखेगी मान-सम्मान से युक्त जीवन गीतों से भरपूर होगा।

प्रश्न 8.
‘मोरों-सा नर्तन’ के पीछे कवि का तात्पर्य क्या है?
उत्तर-
पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ कविता में कविर केदारनाथ अग्रवाल ने आजाद भारत की परिकल्पना की है उसका सुंदर चित्र खींचा है। कवि को दृढ विश्वास है कि भारत अवश्य आजाद होगा। आजाद भारत में सर्वत्र.खशहाली रहेगी। कहीं भी किसी प्रकार का अभाव, पीड़ा या वैमनस्य नहीं रहेगा।

जब भारत स्वतंत्र हो जाएगा तब यह एक सर्वशक्तिमान सार्वभौम सत्ता के रूप में विश्व पटल पर आगे आएगा। सबको हर तरह की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। लेकिन आजादी मिले तब तो………? कवि आजाद भारत के सुखद-स्वरूप की ‘कल्पना करता है। विविध प्राकृतिक रूपों द्वारा कवि ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम, आजाद भारत का स्वरूप और सामाजिक-एकता पर विशेष बल देते हुए भारत के
लोकतंत्र की मंगलकामना किया है।

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कवि कहता है कि जीवन की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति होने पर जीवन में अभाव से मुक्ति पाने पर, जीवन में सब कुछ संसाधनों की सहज रूप में प्राप्ति होने पर भारत का जन-जन मोर-नाच यानि मयूर नृत्य करने लगेगा। सभी तापों से मुक्ति और जीवन में खुशहाली लाने की ही कवि की मंगल कामना है। इस प्रकार कवि अपनी कविताओं में अत्यधिक हर्ष, खुशियाली, शांति, अमन चैन की मंगल कामना करता है। इसी प्रकार जब भारत धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाएगा तब खुश होकर मयूर की तरह वहाँ के लोग नृत्य करने लगेंगे। यहाँ कवि ने जीवन में सौंदर्य
और खुशियाली की कामना की है। सारा भारत जन के रूप में प्रयुक्त है। जन जागरूक रहेगा तभी परिवार, समाज और राष्ट्र में शांति रहेगी। मोरों-सा नर्तन में भारतीय जन समुदाय की प्रसन्नता, खुशियाली और श्रीसंपन्नता होने की कामना से युक्त भाव छिपा हुआ है।

प्रश्न 9.
इस कविता के उद्देश्य पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
महाकवि केदारनाथ अग्रवाल ने अपनी प्रसिद्ध कविता (सारा) पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा में अत्यंत ही सत्य भाव का वर्णन करते हुए जीवन में शांति, अमन-चैन, खुशियाली और श्रीसंपन्नता से युक्त होने की मंगल कामना किया है।

कवि इसी जन्म और जीवन में सर्वजन के मान-सम्मान की कामना करता है। कवि गीतों की खेती यानि जीवन में शांति और सद्व्यवहार के साथ प्रसन्नचित्त होकर जीने की कामना करता है। वह सारे भारत की चिंता करता है। वह सारे भारत के गोगों की दयनीय दशा और गलामी से मुक्ति दिलाने के लिए अपनी इस काव्य-कति की रचना की है। कवि गीतों की खेती करने के माध्यम से यह शिक्षा देना चाहता है कि भारत का हर घर-आँगन और खेत-खलिहान गीतों से गुंजायमान रहे।

कवि भारत में दुख देखना नहीं चाहता है। यहाँ के जन क्लेश मुक्त और उमंग से भरा हुआ जीवन बितायो फूलों की खेती सारे भारत में होगी, कवि की यह सुखद कामना है। कहने का भाव यह है कि सारा भारत खुशहाल और हँसता, खिलता हुआ दीखे।
कवि को इच्छा है कि आजाद भारत में प्रज्ञाहीन नेत्रवाले नहीं रहे। यानि जिनकी आँखों में दीप बुझे हैं यानि जीवन में घोर उदासी है उन्हें अवश्य प्रकाश मिलेगा। ज्ञान और विद्या से युक्त उनका जीवन होगा।

कवि बार-बार जोर देकर कहता है कि आजाद भारत के जन-जन में नये प्राणों का संचार होगा। नवजागरण का शंखनाद होगा। सर्वत्र आनंद युक्त और स्वस्थता से पूर्ण वातावरण रहेगा। किसी से भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं रहेगा। भारत की जनता प्रसन्नता और खुशहाली में अपने को पाकर मयूर-नृत्य करने लगेगी, यानि जीवन सर्व साधन से परिपूर्ण और सुखमय रहेगा।

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प्रश्न 10.
निम्नांकित पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें:-
(क) क्लेश जहाँ है,
फूल खिलेगा;
हमको तुमको त्रान मिलेगा…..।
उत्तर-
प्रस्तुत कविताएँ केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने भारत की खुशियाली और श्रीसंपन्नता की कामना किया है। कवि कहता है कि जिस भारत में चारों तरफ क्लेश ही क्लेश है, गुलामी में सारे लोग जी रहे हैं वह क्लेश अब शीघ्र दूर हो जाएगा। भारत स्वाधीन होगा। घर-घर में खुशियों की बहार छा जाएगी। यानि जब भारत आजाद होगा तब मर-घर में दीप जलंग, खुशियाँ मनायी जाएगी। सब जनता गलामी से मक्ति पा जो सभी लोग प्रसत्रचिन नजर आएंगे। सबके चेहरे पर अतिशय प्रसन्नता दीखेगी। भारत व जन-समुदाय में नव-जागरण का शंख गूंजे।। नयी चेतना से यहाँ की जनता प्रबुद्ध बनेगी। नवज्ञान की किरणों से घर-घर आलोकित होगा। सभी को विद्या और ज्ञान के प्रकाश में जीने का अवसर मिलेगा! सभी तापों से जनता मुक्ति मिलेगी। इस प्रकार उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि ने भारतीय आजादी की कामना अपने सपनों का भारत बनें इसकी कल्पना एवं चिर-सुखी चिर प्रसन्न भारत रहे, इसकी मंगलकामना करते हुए काव्य रचना किया है। यही उसकी सुखद लोकहितकारी कामनाएँ हैं।

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प्रश्न 10.
(ख) निम्नांकित पंक्तियों की व्याख्या करें:
दीप बुझे हैं ‘जिन आँखों के
इन आँखों को ज्ञान मिलेगा…।
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ कविवर केदारनाथ अग्रवाल द्वारा रचित ‘पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा’ काव्य-पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग भारतीय जनता के सुख-दुख से जुड़ा हुआ है।

कवि केदारनाथ जी ने अपनी उपरोक्त काव्य पंक्तियों के द्वारा इच्छा व्यक्त किया है कि भारत की जनता की आँखों में जो दीप बुझ चुके हैं, यानि उनके आँखों में जो उदासी दिखाई पड़ती है वह शीघ्र ही पूरी होगी।

कहने का मूल भाव है कि गुलाम भारत में जनता की स्थिति अत्यंत ही दुखद और चिंतनीय है। सर्वत्र उदासी, चिंता, पीड़ा और सारी चीजों का अभाव दिखाई पडता है लेकिन यह स्थिति बहत दिनों तक नहीं रहेगी। शीघ्र ही भारत आजाद होगा। सर्वत्र ज्ञान की किरणें अपनी आभा से जन-मन को आलोकित करेंगी। सभी तापों से मुक्ति दिलाएँगी। ज्ञान प्रकाश में सभी प्रसन्न एवं खुशहाल दीखेंगे। किसी भी प्रकार का.कष्ट या अभाव नहीं रहेगा। भारत शीघ्र ही आजाद होगा। घर-घर खुशियाँ मनायी जाएँगी। घर-घर ज्ञान का दीप जल उठेगा। सर्वत्र अमन-चैन और खुशहाली का राज दिखेगा। जनता सभी कष्टों से मुक्ति पाकर चिर प्रसन्नता और चिर नवीनता को प्राप्त करेगी।

इन पंक्तियों में कवि ने भारत की आजादी को शीघ्र पाने और भारतीय जनता की सभी प्रकार की पीड़ाओं से मुक्ति की मंगलकामना किया है।

नीचे लिखे पद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. इसी जनम में
इस जीवन में
हमको तुमको मान मिलेगा
गीतों की खेती करने को
पूरा हिंदुस्तान मिलेगा।
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश में हमारे कैसे हिंदुस्तान की तस्वीर प्रस्तुत की गई है
(ग) गीतों की खेती’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
(घ) ‘हमको तुमको मान मिलेगा’ का अर्थ स्पष्ट करें।
(ङ) प्रस्तुत पद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) कवि-केदारनाथ अग्रवाल। कविता-पूरा हिंदुस्तान मिलेगा।

(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने आजाद भारत के स्वरूप और उसके सुप्रभाव का वर्णन किया है। कवि की आँखों में आजाद भारत का सपना बसा है। कवि का विश्वास है कि आजाद भारत में सभी व्यक्तियों के सुंदर सपने साकार होंगे। भारत के नागरिकों को जन्म-जन्मांतर के लिए मान-सम्मान मिलेगा। सभी विचाराभिव्यक्ति में स्वतंत्र होंगे और सभी खुशियों के गीत गाएँगे। शिक्षा का व्यापक स्तर पर . प्रचार-प्रसार होगा। लोगों के ज्ञान की आँखें खुलेंगी। समाज स्वस्थ और सुंदर होगा। सभी तरह के भेदभाव मिट जाएँगे। लोगों की जीवन-दृष्टि परिष्कृत हो जाएगी।

(ग) ‘गीतों की खेती’ का मतलब है-सुखद और मधुर भावों की अभिव्यक्ति। ‘गीतों की खेती’- प्रतीकात्मक शब्द है। यह मन की प्रसन्नता और आह्लाद का प्रतीक है। कहा भी गया है। मन उमगे, तो गावे गीत, अर्थात् मन में उमंग, उत्साह और उल्लास है तो उसकी अभिव्यक्ति गीतों के रूप में ही होती है। कवि को यह विश्वास है कि आजाद भारत में सभी लोग हँसी और खुशी के गीत गाएँगे।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 7 पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा

(घ) कवि की आँखों में आजाद भारत का स्वप्न है। उसकी यह दृढ मान्यता है कि आजाद भारत में समता और समानता का भाव गतिशील रहेगा। वहाँ ऊँच-नीच, गरीब-अमीर, शिक्षित-अशिक्षित के बीच कोई भेदभाव नहीं रहेगा। कोई गरीबों, दलितों और छोटे लोगों का शोषण नहीं करेगा। समाज में सभी लोग मान-सम्मान की जिंदगी जी सकेंगे। सभी लोग अमीरी-गरीबी, छोटे-बड़े तथा सामाजिक और धार्मिक भिन्नता के लघु बंधन से मुक्त सम्मान से जी सकेंगे।

(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि के कथन का आशय यह है कि जब हमारा _देश अँगरेजों की दासता से मुक्त होकर आजाद देश की गरिमा से भूषित होगा, तब उस समय इस देश के लोग हर्ष और उल्लास की मनः स्थिति में प्रेम के गीत गाएँगे। – सभी लोग मान-सम्मान से जीने का अनुकूल अवसर पाएँगे। सामाजिक और नागरिक स्तर पर धर्म, जाति और धन के नाम पर कोई भिन्नता नहीं होगी।

2. क्लेश जहाँ है
फूल खिलेगा
हमको तुमको त्राण मिलेगा
फूलों की खेती करने को
पूरा हिंदुस्तान मिलेगा।
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) ‘क्लेश जहाँ है फूल खिलेगा’ का अर्थ स्पष्ट करें।
(ग) कवि ने यहाँ किस त्राण की चर्चा की है?
(घ) ‘फूलों की खेती’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि कैसा आश्वासन और विश्वास दे रहा है?
उत्तर-
(क) कवि-केदारनाथ अग्रवाल, कविता-पूरा हिंदुस्तान मिलेगा।

(ख) प्रस्तुत पद्यांश का अर्थ यह है कि गुलाम देश को क्लेश और कष्ट की कंटक भूमि माना जाता है। यही स्थिति हमारे गुलाम भारत देश की भी थी। उन दिनों हमारे देश के लोग बहुविध कष्टों से पीड़ित और आक्रांत थे, लेकिन कवि का यह विश्वास है कि आजादी मिलने के बाद आज जहाँ कष्ट, कठिनाई और पीड़ा का दर्द जमा हुआ है, कल वहीं हँसी-खुशी, उल्लास-उमंग तथा गरिमा-गौरव के बहुरंगे फूल खिलेंगे, अर्थात् वहाँ खुशियाँ-ही-खुशियाँ रहेंगी।

(ग) त्राण का अर्थ है-छुटकारा, मुक्ति, आजादी आदि। कवि ने इस पद्यांश में यह बताया है कि गुलाम भारत के लोग बहुविध कष्टों के बंधन में जकड़े थे। उन्हें इससे मुक्ति दिलाने का एक ही रास्ता था कि इस देश को अँगरेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाएँ। तब ही उस स्वतंत्र भारत के लोगों को ढेर सारे कष्टों-विपत्तियों तथा ताप और संतापों से त्राण, अर्थात मुक्ति मिल सकेगी और सुख्ख के उपभोग का अवसर मिल पाएगा।

(घ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि सभी लोगों को यह आश्वासन और विश्वास दिला रहा है कि जब यह देश आजाद होगा, तब यहाँ के वासियों का जीवन सुख-शांति, प्रेम और उल्लास का सुखद जीवन होगा। क्लेश-काँटे की जगह जीवन के तल पर फूल मुस्कान लुटाएँगे, लोगों को नानाविध कष्टों से मुक्ति मिलेगी और संपूर्ण राष्ट्रीय जीवन के तल पर लोग आँसू की नहीं, बल्कि फूलों की खेती कर अपने-अपने जीवन को सुगंधिमय कर पाएंगे।

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(ङ) कवि ने इस पद्यांश में लोगों को यह आश्वासन और विश्वास दिलाया है कि आजाद भारत में सभी लोगों को सुख-शांति से जीने का समान अवसर मिलेगा। जहाँ दुःख है वहाँ सुख के फूल खिलेंगे। लोगों को दुःख से मुक्ति मिलेगी। सर्वत्र खुशी के फूल सौंदर्य-सौरभ बिखरेते रहेंगे।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 1 भोजन कहाँ से आता है?

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 1 भोजन कहाँ से आता है? Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Science भोजन कहाँ से आता है? Text Book Questions and Answers

अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या सभी जीव-जन्तु एक ही प्रकार का भोजन करते हैं?
उत्तर:
नहीं, सभी जीव-जन्तु अलग-अलग पदार्थ को भोजन के रूप में लेते हैं। जैसे मानव चावल, दाल रोटी दूध आदि लेते हैं परन्तु गाय घास एवं – अनाज खाती है।

प्रश्न 2.
चार पौधों के नाम लिखिए तथा बताइए उनके कौन से भाग भोजन – में उपयोग करते हैं?
उत्तर:
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प्रश्न 3.
चार जंतुओं के नाम लिखिए और उनसे प्राप्त उत्पादों को बताइए।
उत्तर:
जन्तु – उत्पाद
गाय – दूध
मछली – मांस
बकरी – मांस/दूध
मुर्गी – अंडा/मांस

प्रश्न 4.
मिलान कीजिए –
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 1 भोजन कहाँ से आता है 2
उत्तर:
क – घ
ख – क
ग – ख
घ – ग।

प्रश्न 5.
‘दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति उपयुक्त शब्दों से कीजिए।
(गन्ना, सर्वाहारी, ऊर्जा, शाकाहारी)

(क) हमें शक्कर ……………. से प्राप्त होती है।
(ख) बंदर ……………. जन्तु है।
(ग) भोजन से हमें ……………. मिलती है।
(घ) मनुष्य एवं तिलचट्टा …………….जन्तु है।
उत्तर:
(क) गन्ना
(ख) शाकाहारी
(ग) ऊर्जा
(घ) सर्वाहारी।

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प्रश्न 6.
दिए गए शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(शाकाहारी, पादप, दूध, मांसाहारी)

(क) बाघ एक ……………. है। क्योंकि यह केवल मांस खाता है।
(ख) हिरण केवल पादप उत्पाद खाता है और इसलिए इसे ……………. कहते हैं।
(ग) तोता केवल ……………. उत्पाद खाता है।
(घ) जो ……………….. हम पीते हैं वह प्रायः गाय, भैस या बकरी से प्राप्त होता है, इसलिए यह जन्तु उत्पाद है।
उत्तर:
(क) मांसाहारी
(ख) शाकाहारी
(ग) पादप
(घ) दूध ।

प्रश्न 7.
कॉलम 1 में दिए गए खाद्य पदार्थों का मिलान कॉलम 2 से कीजिए-
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 1 भोजन कहाँ से आता है 3
उत्तर:
(1) (घ)
(2) (ग)
(3) (क)
(4) (ख)

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प्रश्न 8.
क्या आपके आस-पास के सभी व्यक्ति को खाने के लिए पर्याप्त भोजन मिलता है ? यदि नहीं तो क्यों ?
उत्तर:
नहीं, सभी व्यक्तियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता क्योंकि हमारे आस-पास बेरोजगारी है और भोजन की बर्बादी उच्चवर्गों द्वारा की जाती है।

प्रश्न 9.
हम भोजन की बर्बादी किन उपायों से रोक सकते हैं?
उत्तर:
हमें भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने होंगें –
(क) जरूरत के अनुसार भोजन पकाना ।
(ख) भोजन पकाते समय सर्चत रहना ताकि वह जले नहीं ।
(ग) थाली में व्यक्ति के अनुसार परांसना चहिए ।

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Bihar Board Class 6 Science भोजन कहाँ से आता है? Notes

अध्ययन सामग्री :

जिस प्रकार वायु एवं जल हमारे जीवन के लिए अतिआवश्यक तत्वों में से एक माने जाते हैं, ठीक उसी प्रकार भोजन भी हमारे जीवन के लिए आवश्यक तत्व है। भोजन वह भोज्य पदार्थ है जो हमारे शारीरिक एवं मानसिक विकास को ऊर्जा प्रदान करता है। इतना ही नहीं, मनुष्य को हरेक काम करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो हमें भोजन से ही प्राप्त होती है।

भोजन से हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा विटामिन खनिज-लवण आदि पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है जो हमारी मांसपेशियाँ, मांस, हड्डी, दाँत, बाल, नाखुन आदि के विकास में सहायक होता है। इसके साथ-साथ सभी शारीरिक क्रिया-कलापों के सम्पादन में भी सहायक होता है।

भोज्य पदार्थ की उपलब्धता ही आहार श्रृंखला को बनाए रखने में मदद करती है। इसके परिणामस्वरूप ही पर्यावरण में हरे-भरे पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों एवं मानव दिखाई पड़ते हैं। भोज्य पदार्थों की प्राप्ति हम दो रूपों में करते हैं।

(क) पादप उत्पाद
(ख) जन्तु उत्पाद।

जहाँ एक ओर अधिक-से-अधिक भोज्य पदार्थ की प्राप्ति हमें पेड़-पौधों से होती है, कुछ पेड़-पौधों की जड़, तो कुछ पौधों के तना, तो कुछ पेड़-पौधों की पत्ती, तो कुछ पेड़-पौधों के फल तो कुछ के फूल को हम अपने भोजन के रूप में लेते हैं। जैसे –

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 1 भोजन कहाँ से आता है 4

दूसरी तरफ हम अंडा, मांस, दूध शहद आदि पशु-पक्षियों से प्राप्त करते हैं। इस प्रकार भोज्य पदार्थ की प्राप्ति पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों आदि से होती है।

पर्यावरण में सभी जीव-जन्तु एक-दूसरे पर अपने आहार के लिए आश्रित हैं।

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खाद्य सामग्री – वे सभी पदार्थ जो पेड़-पौधे या जन्तुओं से प्राप्त होते – हैं तथा जिसके खाने से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। उसे खाद्य सामग्री कहते हैं। जैसे-गेहूँ, चावल, दाल, सरसों, दूध, अंडा तथा मांस आदि।

खाद्य सामग्री के स्रोत – पादप उत्पाद एवं जन्तु उत्पाद!

पादप उत्पाद – दाल, चावल गेहूँ, पालक, गोभी, टमाटर, आलू, प्याज – आदि।

जन्तु उत्पाद – मांस, अंडे, दूध, घी, मछली आदि।

सजीव जगत के जीव-जन्तुओं (मानव सहित) को तीन भागों में बाँटे गए हैं-शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी आदि।

शाकाहारी – वे सभी जन्तु जो केवल पौधे व उसके उत्पाद को भोजन के रूप में लेते हैं। उस शाकाहारी कहते हैं।

जैसे – गाय, भैंस, चूहा, हाथी, बकरी, तोता आदि।

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मांसाहारी – वे सभी जन्तु जो दूसरे जन्तुओं को भोजन के रूप में लेते · हैं उन्हें मांसाहारी कहते हैं। जैसे—छिपकली, शेर, बाघ, आदि।

सर्वाहारी – वे सभी जन्तु जो पादप एवं जन्तु दोनों उत्पादों को अपने भोजन के रूप में लेते हैं उसे सर्वाहारी कहते हैं। जैसे – मनुष्य, कौआ, तिलचट्टा, कुत्ता, बिल्ली, आदि।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

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BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

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प्रश्न 1.
एक चतुर्भुज के कोण 3 : 5 : 9 : 13 के अनुपात में हैं। इस चतुर्भुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना.चतुर्भुज के कोण 3x, 5x, 9x, 13x हैं। चूंकि हम जानी है, कि चतुर्भुज के चारों कोणों का योग = 360°
∴ 3x + 5x + 4x + 13x = 360°
⇒ 30x = 360°
⇒ x = 12°
अतः चतुर्भुज के कोण है, 3x = 3 × 12 = 36°
5x = 5 × 12 = 60°
9x = 9 × 12 = 108°
13x = 13 × 12 = 156°.

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प्रश्न 2.
बदि एक समाजर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, तो दर्शाइए कि वह एक आयत है।
उत्तर:
माना ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जहाँ विकर्ण AC तथा BD बराबर है, अत: AC = BD.
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 1
∆ABC और ∆DCD में,
AB = CD (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजा)
AC = BD (चिकर्ष)
BC = BC (उभयनिष्ठ)
∴ SSS सर्वांगसमता से,
∆ABC ≅ ∆DCB
∠BAC = ∠ACD
(∵ सर्वागसम त्रिभुजों के संगत भाग वराबर होते हैं)
अतः AB || DC
यहाँ AB || DC है तथा BC इन्हें काटती है।
∴ ∠ABC + ∠DCB = 180°
(क्रमागत आंतरिक कोणों का योग)
∴ 2∠ABC = 180°
⇒ 2∠ABC = ∠DCB = 90°
अत: ABCD एक आयत है।

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प्रश्न 3.
दर्शाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करें, तो वह एक समचतुर्भुज होता है।
उत्तर:
माना ABCD एक चतुर्भुज है जहाँ विकणे AC तथा BD परापर समकोण पर समविभाजित करते हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 2
⇒ OA = OC तथा OB = OD
और ∠AOD = ∠COD = ∠AOB = ∠BOC = 90°
∆AOD और ∆COD में,
AO = CO (दिया है)
OB = OD (दिया है)
∠AOB = ∠COD (काभिमुख कोण)
∴ SAS सांसगमता गुणधर्म से,
∆AOB ≅ ∆COD
⇒ ∠OAB = ∠OCD
(∵ सर्वांगसम विभुगों के संगत भाग बराबर होता हैं)
अतः AB || CD
अत: ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

अब ∆AOB और ∆COB में
AO = CO (दिया है।
OB = OB (उभयनिष्ठ)
∠AOR = ∠COR = 90°
∴ SAS सर्वांगममता गुणधर्म से,
∆AOB ≅ ∆COB
⇒ AB = BC
(∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)
अतः AB = BC = CD = DA
अतः चतुर्भुज ABCD एक समचतुर्भुज है।

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प्रश्न 4.
दर्शाइए कि एक वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
उत्तर:
यहाँ ABCD एक वर्ग है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 3
AB || DC और BC || AD
यहाँ AB || DC
∠BAC = ∠DCA
⇒∠BAO = ∠DCO …….. (1)
तथा ∠ABD = ∠CDB
⇒ ∠ABO = ∠CDO …….. (2)
∆AOB तथा ∆COD में,
∠1 = ∠3 [समी- (1) से]
∠2 = ∠4 [समी. (2) से]
AB = CD (दिया है।
∴ ASA. सागसमता गुणधर्म से,
∆AOB ≅ ∆COD
⇒ OA = OC तथा OB = OD
(∵ सांगनम त्रिभुजों के सम्मुख भाग बराबर होते हैं।)
अत: विकर्ष एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।

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अब ∆ABC था ∆BAD मैं,
AB = BA
∠ABC = ∠BAD (दिया है।)
AD = BC (दिया है।)
∴ SAS सागरामता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆BAD
⇒ AC = BD
अत: विकर्ण बराबर है।
अब ∆AOD और ∆COD में,
AO = CO (ऊपर निकाला गया है।)
OD = OD
AD = CD (दिवा है।)
∴ SSS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆AOD ≅ ∆COD
⇒ ∠AOD = ∠COD ………. (3)
हमें ज्ञात है,
∠AOD + ∠COD = 180°
2∠AOD = 180° समी. (3) से]
∠AOD = 90°
OD ⊥ AC
BD ⊥ AC
अतः विकर्ण बरावर हैं तश्चा परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।

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प्रश्न 5.
दाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों और परस्पर लम्बवत् समद्विभाजित करें, तो वह एक वर्ग होता है।
उत्तर:
माना ABCD एक चतुर्भुज है। दिया है. AC = BD, AO = OC, BO = OD AT AC ⊥ BD.
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 4
∆AOB और ∆COD में,
AO = CO (दिया है।)
OB = OD (दिया है।)
∠AOB = ∠COD (उध्वाभिमुख कोण)
∴ SAS सर्वागसमता गुणधर्म से,
∆AOB ≅ ∆COD.
⇒ ∠OAB = ∠OCD तथा AB = CD
(∵ सांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)
अत: AB || DC
इसी तरह AD || BC
अब ∆AOB तथा ∆AOD में,
OB = OD (दिया है।)
OA = OA (उपनिष्ठ)
∠AOB = ∠AOD = 90° (∵ AC ⊥ BD)
∴ SAS सर्वागसमता गुणधर्म से,
∆AOB ≅ ∆AOD
⇒ AB = AD
इसी तरह BC = DC
अतः AB = BC = CD = AD
अत: ABCD एक वर्ग है।

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प्रश्न 6.
समान्तर चतुर्भज ABCD का विकर्ण AC कोण A को समद्विभाजित करता है (देखिए आकृति)। वशाईए कि-
(i) यह को भी समद्विभाजित करता है।
(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है।
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उत्तर:
दिया है. ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
⇒ AB || CD तथा AD || BC
∠1 = ∠3 (आन्तरिक एकान्तर कोण)
तथा ∠2 = ∠4 (आन्तरिक एकातर कोण)
लेकिन ∠1 = ∠2 है
∠3 = ∠4
अत: AC, ∠C को समद्विभाजित करता है।
∆ABC में, ∠1 = ∠4
अतः BC = AB ……… (1)
∆ACD में,
∠2 = ∠3
अतः CD = AD …….. (2)
हमें ज्ञात है, AB = CD ………. (3)
समी. (1), (2) व (3) से,
AB = BC = CD = DA
अत: ABCD एक समचतुर्भुज है।

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प्रश्न 7.
ABCD एक समचतुर्भुज है। दर्शाइए कि विकर्ण AC, ∠A और ∠C दोनों को समद्विभाजित करता है तथा विकर्ण BD, ∠B और ∠D दोनों को समद्विभाजित करता है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 6
उत्तर:
दिया है कि ABCD एक समचतुर्भुज है।
अतः AB = BC = CD = DA
∆ABC में, AB = BC (दिया है)।
⇒ ∠1 = ∠4 ……… (1)
∆ACD में, AD = CD (दिया है)
∠2 = ∠3 …….. (2)
AB || CD
∠2 = ∠3 …….. (3)
सगी. (1), (2) व (3) से,
∠1 = ∠2 तथा ∠3 = ∠4
अत: विकर्ण AC, ∠A और ∠C दोनों को समद्विभाजित करता है। इसी प्रकार, विकर्ण BD, ∠B और ∠D चोनों को समाद्विभाजित करता है।

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प्रश्न 8.
ABCD एक आयत है जिसमें विकर्ण AC दोनों ∠A और ∠C को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि
(i) ABCD एक वर्ग है
(ii) विकर्ण BD, दोनों ∠B और ∠D को समद्विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) यहाँ ABCD एक आवरा है,
अर्थात् AB = DC तथा AD = BC ……… (1)
दिया है, विकर्ण AC, ∠A और ∠C को समद्विभाजित करता है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 7
⇒ ∠1 = ∠2 तथा ∠3 = ∠4
AB || DC
∠BAC = ∠DCA
⇒ ∠1 = ∠4
अत: ∠1 = ∠2 = ∠3 = ∠4
⇒ AD = AB
अतः AB = BC = CD = DA
अत: ABCD एक वर्ग है।

(ii) हमें ज्ञाता है कि वर्ग के विकणं कोणों को समद्विभावित
अत: विकर्ण BD, ∠B और ∠D को समद्विभाजित करता है।

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प्रश्न 9.
समानर चतुर्भुज ABCD के विकणं BD पर दो बिन्दु P और Q इस प्रकार स्थित हैं कि DP = BQ है। (पाठ्य पुस्तक में दी गई आकति) वांडा कि-
(i) ∆APD ≅ ∆COB
(ii) AP = CQ
(iii) ∆AQB ≅ ∆CPD
(iv) AQ = CP
(v) APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
उत्तर:
(i) ∆APD और ∆CQB में,
AD = BC (ABCD समान्तर चतुर्भुव है।)
∠ADP = ∠CBQ (दिया है)
DP = BQ (दिया है।)
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∴ SAS सांगसमता गुणधर्म से,
∆APD ≅ ∆CQB

(ii) ∴ ∆APD ≅ ∆CQB [भाग (i) से]
AP = CQ. (∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)

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(iii) ∆AQB और ∆CPD में,
AB = CD (∵ समान्तर चतुर्भुज की संगत भुजाएँ बराबर होती हैं।)
∠ABQ = ∠CDP (दिया है।)
BO = DP (दिया है।)
∴ SAS सांगसमता गुणधर्म से,
∆AQB ≅ ACPD.

(iv) ∵ ∆AQB ≅ ∆CPD [भाग (iii) से]
∴ AQ = CP.

(v) यहाँ AP = QC तथा AQ = PC है।
दिव है, ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है तथा इसके विकर्ष एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
माना BD विकर्ण O पर विभाजित होता है।
⇒ OB = OD
अत: OB – BQ = OD – DP
OQ – OP तथा OA = OC
(∵ ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है)
अत: APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।

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प्रश्न 10.
ABCD एक समानार चतुर्भुज है तथा AP और CQ शीघों A और C से विकर्ण BD पर क्रमशः लम्ब हैं(देखिए आकृति)। वर्शाइए कि-
(i) ∆APB ≅ ∆CQD
(ii) AP= CQ.
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 9
उत्तर:
(i) ∆APB और ∆CQD में,
∠ABP = ∠CDQ (AB || CD)
∠APB = ∠CQP = 90° (दिया है।)
AB = CD (समान्तर चतुर्भुज की भुजाएं हैं।)
∴ AAS सर्वागसमता गुगधर्म से,
∆APB ≅ ∆COQD

(ii) ∵ ∆APB ≅ ∆COD [भाग (i) से]
∴ AP = CQ (∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)

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प्रश्न 11.
∆ABC और ∆DEF में, AB = DE. AB || DE, BC = EF और BC || EF है। शीर्षों A, B और C को क्रमशः शीपों D, E और F मै जोडा जाता है। (देखिए आकृति)। दहिए कि-
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 10
(i) चतुर्भुज ABED एक समान्तर चतुर्भुज है।
(ii) चतुर्भुज BEFC एक समान्तर चतुर्भज है।
(iii) AD || CF और AD = CE है।
(iv) चतुर्भुज ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है।
(v) AC = DF है।
(vi) ∆ABC = ∆DEF है।
उत्तर:
(i) चतुर्भुज ARED में,
AB = DE और AB || DE
यहाँ सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर और समान्तर है, अत: ABED एक समान्तर चतुर्भुज है।

(ii) चतुर्भुज BEFC में,
EC = EF और BC || EF
वहाँ सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर और सम्मान्तर है। अत: BEFC समान्तर चतुर्भुज है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

(iii) अब, AD = BE और AD || BE ……… (1)
(∵ ABED एक समान्तर चतुर्भुज है)
और CF = BE और CF || BE ……… (2)
(∵ BEFC एक समान्तर चतुर्भुज है)
समी (1) और (2) मैं,
AD = CF और AD || CF

(iv) यहाँ AD = CF और AD || CF है। यहाँ सम्मुख भुजाओं का एक युग्ण बराबर और समान्तर है। अत: ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है।

(v) ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है।
∴ AC = DF है।

(vi) ∆ABC और ∆DEF में,
AB = DE (दिया है।)
⇒ BC = EF (दिया है।)
तथा CA = FD
[भाग (v) से]
∴ SSS सर्वागसमता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆DEF.

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प्रश्न 12.
ABCD एक समलम्ब है जिसमें AB || DC और AD = BC (देखिए आकृति) दर्शाइए कि-
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.1 11
(1) ∠A = ∠B
(ii) ∠C = ∠D
(iii) ∆ABC ≅ ∆BAD
(iv) विकर्ण AC = विकणं BD है।
हल :
एक रेखा CE || AD खोपिए।
(i) यहाँ AD || EC है
तव ∠DAE + ∠AEC = 180°
यहाँ AB || DC तथा AD || EC है, अत: AECD एक समान्तर चतुर्भुज है।
AD = CE
BC = AD (दिया है।)
⇒ BC = CE
∆BCE में, BC= CE
अतः ∠CBE = ∠CEB
⇒ 180°- ∠B = ∠CEB
⇒ 180° – ∠E = ∠B
अत: ∠A = ∠B. ……… (1)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

(ii) ∵ ∠A = ∠B [भाग (1) से]
⇒ 180° – ∠A = 180° – ∠B
अत: ∠D = ∠C.

(iii) ∆ABC और ∆BAD में,
AB = BA (उभयनिष्ठ)
BC = AD (दिया है।
∠A = ∠B (भाग (1) से]
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆BAD.

(iv) ∵ ∆ABC ≅ ∆BAD [भाग (iii) से]
⇒ AC = BD.

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