Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 गद्य खण्ड Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

Bihar Board Class 9 Hindi शिक्षा में हेर-फेर Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
बच्चों के मन की वृद्धि के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर-
साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर का कथन है कि जो कम-से-कम जरूरी है वहीं तक शिक्षा को सीमित किया गया तो बच्चों के मन की वृद्धि नहीं हो सकेगी। आवश्यक शिक्षा के साथ स्वाधीनता के पाठ को पिलाना होगा, अन्यथा बच्चे की चेतना का विकास नहीं होगा।

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प्रश्न 2.
आयु बढ़ने पर भी बुद्धि की दृष्टि में वह सदा बालक ही रहेगा। कैसे?
उत्तर-
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने यहाँ बड़े ही सूक्ष्म दृष्टि से समझाने का प्रयास किया है कि आवश्यक शिक्षा के साथ-साथ स्वाधीनता का पाठ भी सिखाया जाना चाहिए वरना आयु बढ़ने पर भी बुद्धि की दृष्टि से वह सदा बालक ही रहेंगा!

प्रश्न 3.
बच्चों के हाथ में यदि कोई मनोरंजन की पुस्तक दिखाई पड़ी तो वह फौरन क्यों छीन ली जाती है? इसका क्या परिणाम होता है?
उत्तर-
उपयुक्त प्रश्न के आलोक में विद्वान साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बताया है कि हमारे बच्चों को व्याकरण, शब्दकोष, भूगोल के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिलता-उनके भाग्य में अन्य पुस्तकें नहीं हैं। दूसरे देश के बालक जिस आयु में अपने नये दाँतों से बड़े आनन्द के साथ गन्ने चबाते हैं, उसी आयु में हमारे बच्चे स्कूल की बेंच पर अपनी पतली टाँगों को हिलाते हुए मास्टर के बेंत हजम करते हैं
और उसके साथ उन्हें कड़वी गालियों के अलावा दूसरा कोई मसाला भी नहीं मिलता।

साहित्यकार ने मनोवैज्ञानिक कारण’ बताते हुए कहा है कि इससे उनकी मानसिक पाचन शक्ति का ह्यस होता है। जिस तरह भारत की संतानों का शरीर उपर्युक्त आहार और खेल-कुद के अभाव से कमजोर रह जाता है उसी तरह उनके मन का पाकाशय भी अपरिणत रह जाता है।

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प्रश्न 4.
“हमारी शिक्षा में बाल्यकाल से ही आनन्द का स्थान नहीं होता।” आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?
उत्तर-
मेरी समझ से साहित्यकार ने बड़ा ही विलक्षण उदाहरण देते हुए बताया है कि-हवा से पेट नहीं भरता-पेट तो भोजन से ही भरता है। लेकिन भोजन का ठीक से हजम करने के लिए हवा आवश्यक है। वैसे ही एक ‘शिक्षा पुस्तक’ को अच्दी तरह पचाने के लिए बहुत-सी पाठ्य सामग्री की सहायता जरूरी है। आनन्द के साथ पढ़ते रहने से पठन-शक्ति भी अलक्षित रूप से बढ़ती है, सहज स्वाभाविक नियम से ग्रहण-शक्ति, धारणा-शक्ति और चिन्ता-शक्ति भी सबल होती है।

प्रश्न 5.
हमारे बच्चे जब विदेशी भाषा पढ़ते हैं तब उनके मन में कोई स्मृति जागृत क्यों नहीं होती?
उत्तर-
कवि मनीषी रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उपर्युक्त प्रश्न के आलोक में कहा है क – अंग्रेजी विदेशी भाषा है। शब्द विन्यास और पद-विन्यास की दृष्टि से हमारी भाषा के साथ उसका कोई सामंजस्य नहीं। भावपक्ष और विषय-प्रसंग भी विदेशी बात हैं। शरू से आखिर तक सभी चीजें अपरिचित होती है, इसलिए धारणा उत्पन्न होने से पहले ही हम रटना आरंभ कर देते हैं। फल वही होता है जो बिना चबाया हुआ अन्न निगलने से होता है। शायद बच्चों को किसी ‘रीडर’ में Hay-making का वर्णन है। अंग्रेज बालकों के लिए यह एक सुपरिचित चीज है और उन्हें इस वर्णन में आनन्द मिलता है। Snowball से खेलते हुए Charlie का Katie से कैसे झगड़ा आ यह भी अंग्रेज बच्चे के लिए कतहलजनक घटना है। लेकिन हमारे बच्चे जब विदेशी भाषा में यह सब पढ़ते हैं तब उनके मन में कोई स्मृति जागृत नहीं होती, उनके सामने कोई चित्र प्रस्तुत नहीं होता अंधभाव से उनका मन अर्थ को टटोलता रह जाता है।

प्रश्न 6.
अंग्रेजी भाषा और हमारी हिन्दी में सामंजस्य नहीं होने के कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर-
साहित्यकार ने उपर्युक्त प्रश्न के आलोक में गहरी अनुभूति का अध्ययन कर हमें बताया है कि अंग्रेजी और हिन्दी में सामंजस्य क्यों नहीं है। उन्होंने कहा है कि ऐसे शिक्षक हमें शिक्षा देते हैं जो अंग्रेजी भाषा, भाव, आचार, व्यवहार, साहित्य-किसी से भी परिचित होते हैं और उन्हें के हाथों हमारा अंग्रेजी के साथ प्रथम परिचय होता है वे न तो स्वदेशी भाषा अच्दी तरह जानते हैं, न अंग्रेजी। वे बच्चों को पढ़ाने की तुलना में मन बहलाते हैं, वे इस कार्य में पूरी तरह सफल होते हैं।

साहित्यकार का कथन है कि यदि बालक केवल एक ही संस्कृत में रहते तो उनकी वाल्य प्रकृति को तृप्ति मिलती। लेकिन वे अंग्रेजी पढ़ने के प्रयास में न सीखते हैं, न खेलते हैं, प्रकृति के सत्यराज में प्रवेश के लिए उन्हें अवकाश ही नहीं मिलता,
साहित्य के कल्पना-राज्य का द्वार उनके लिए अवरूद्ध रह जाता है।

लेखक के विदेशी भाषा के व्याकरण और शब्दकोश में; जिसमें जीवन नहीं, आनन्द नहीं, अवकाश या नवीनता नहीं, जहाँ हिलने-डुलने का स्थान नहीं, ऐसी शिक्षा की शुष्क, कठोर, संकीर्णता में बालक कमी मानसिक शक्ति; चित्र का प्रसार या चरित्र की बलिष्ठता प्राप्त कर सकता है ? लेखक ने अंग्रेजी भाषा और हिन्दी में सामंजस्य नहीं होने के अनेक कारणों को गिनाया है जो सटीक है।

प्रश्न 7.
लेखक के अनुसार प्रकृति के स्वराज्य में पहुँचने के लिए क्या आवश्यक हैं?
उत्तर-
लेखक ने प्रकृति के स्वराज्य में पहुँचने के लिए जो उपाय सुझाया है वह सारगर्भित है। उन्होंने कहा है कि यदि बच्चों को मनुष्य बनाना है तो यह क्रिया बाल्यकाल से ही आरंभ हो जानी चाहिए। शैशव से ही केवल स्मरण-शक्ति पर बल न देकर उसके साथ-ही-साथ चिंतन-शक्ति और कल्पना-शक्ति को स्वाधीन रूप से परिचालित करने का उन्हें अवसर भी दिया जाना चाहिए।

हगारी नीरस शिक्षा में जीवन का बहुमूल्य समय व्यर्थ हो जाता है। हम बाल्यावस्था से कैशोर्य में और कैशोर्य से यौवन में प्रवेश करते हैं शुष्क ज्ञापन का बोझ लेकर। सरस्वती के साम्राज्य में हम मजदूरी ही करते रहते हैं, मनुष्यत्व का विकास नहीं होता। प्रकृति के स्वराज्य में पहुँचने के लिए लेखकाने रहन-सहन, संस्कृति, आवार-विचार, घर-गृहस्थी इत्यादि बातों का समुचित ज्ञान होना आवश्यक बताया है तभी हम प्रकृति के स्वराज्य में पहुँच कर आनन्द ले सकते हैं अन्यथा ऐसे ही भटकते रहेंगे और सरस्वती के साम्राज्य में भी मजदूरी ही करते रहेंगे।

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प्रश्न 8.
जीवन-यात्रा संपन्न करने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर-
साहित्यकार ने बड़ा ही सुन्दर और सटीक उदाहरण देते हुए बताया है कि-बाल्यकाल से ही यदि भाषा-शिक्षा के साथ भाव-शिक्षा की भी व्यवस्था हो और भाव के साथ समस्त जीवन-यात्रा नियमित हो, तभी हमारे जीवन में यथार्थ सामंजस्य स्थापित हो सकता है। हमारा व्यवहार तभी सहज मानवीय व्यवहार हो सकता है और प्रत्येक विषय में उचित परिमाण की रक्षा हो सकती है। जिस भाव से हम शिक्षा ग्रहण करते हैं उसके अनुकूल हमारी शिक्षा नहीं है। हमारे समाज की सारी सभ्यता, संस्कृति उस शिक्षा में नहीं है। चिंता-शक्ति और कल्पना-शक्ति दोनों जीवन-यात्रा संपन्न करने के लिए अत्यावश्यक हैं।

इसलिए जब तक हमारी शिक्षा में उच्च आदर्श, जीवन के कार्यकलाप, आकाश और पृथ्वी, निर्मल प्रभात और सुंदर संध्या, परिपूर्ण खेत और देशलक्ष्मी स्त्रोतस्विनी का संगीत उस साहित्य में ध्वनित नहीं होगा तब तक जीवन-यात्रा सफल संपन्न नहीं होगी।

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प्रश्न 9.
रीतिमय शिक्षा का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
साहित्यकार ने बड़े ही रोचक ढंग से रीतिमय शिक्षा के संबंध में बताया है कि-संग्रहणीय वस्तु हाथ आते ही उसका उपयोग जानना, उसका प्रकृत परिचय प्राप्त करना और जीवन के साथ-ही-साथ आश्रय स्थल बनाते जाना-यही है रीतिमय शिक्षा।

इसलिए यदि बच्चों को मनुष्य बनाना है तो केवल स्मरण-शक्ति पर बल न देकर उसके साथ-ही-साथ चिंतन-शक्ति और कलपना-शक्ति को स्वाधीन रूप से परिचालित करने का भी अवसर उन्हें दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 10.
शिक्षा और जीवन एक-दूसरे का परिहास किन परिस्थितियों में करते हैं?
उत्तर-
लेखक ने उपर्युक्त प्रश्न के संदर्भ में हमें बहुत ही बहुमूल्य तथ्यों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट कराया है। जैसे-हमारी नीरस शिक्षा में बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। बीस-बाईस वर्ष की आयु तक हमें जो शिक्षा मिलती है उसका हमारे जीवन से रासायानिक मिश्रण नहीं होता। इससे हमारे मन को एक अजीब आकार मिलता है। शिक्षा से हमें जो विचार और भाव मिलते हैं उनमें से कुछ को तो लेई से जोड़कर हम सुरक्षित रखते हैं, और बचे हुए कालक्रम से झड़ जाते हैं।

बर्बर जातियों के लोग शरीर पर रंग लगाकर या शरीर के विभिन्न अंगों को गोंदकर, गर्व का अनुभव करते हैं; जिससे उनके स्वाभाविक स्वास्थ्य की उज्जवलता और लावण्य छिप जाते हैं। उसी तरह हम भी अपनी विलायती विद्या का लेप लगाकर दंभ करते हैं किंत यथार्थ आंतरिक जीवन के साथ उसका योग बहत कम ही होता है। हम सस्ते, चमकते हुए, विलायती ज्ञान को लेकर शान दिखाते हैं विलायती विचारों का असंगत रूप से प्रयोग करते हैं। हम स्वयं यह नहीं समझते कि अनजाने ही हम कैसे अपूर्व प्रहसन का अभिनय कर रहे हैं। यदि कोई हमारे ऊपर हँसता है तो हम फौरन योरोपीय इतिहास से बड़े-बड़े उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

लेखक ने यहाँ शिक्षा और जीवन के बीच परिहास का विलक्षण उदाहरण प्रस्तुत किया है जो विचारणीय तथ्य है। लेखक ने निचोड़ के रूप में जो विचार व्यक्त किया है वह है-जब हम शिक्षा के प्रति अशद्धा व्यक्त करते हैं तब शिक्षा भी हमारे जीवन से विमुख हो जाती हैं। हमारे चरित्र के ऊपर शिक्षा का प्रभाव विस्तृत परिमाण में नहीं पड़ता। शिक्षा और जीवन का आपसी संघर्ष बढ़ता जाता है। वे एक-दूसरे का परिहास करते हैं।

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प्रश्न 11.
मातृभाषा के प्रति अवज्ञा की भावना लोगों के मन में किस तरह उत्पन्न होती है?
उत्तर-
लेखक ने मनोवैज्ञानिक तथ्य को उजागर करते हुए उपर्युक्त प्रश्न को समझाने का प्रयास किया है।
लेखक का कथन है कि-हमारे बाल्यकाल की शिक्षा में भाषा के साथ भाव नहीं होता, और जब हम बड़े होते हैं तो परिस्थिति इसके ठीक विपरीत हो जाती है। अब भाव होते हैं, लेकिन उपर्युक्त भाषा नहीं होती। भाषा शिक्षा के साथ-साथ, भाव-शिक्षा की वृद्धि न होने से योरोपीय विचारों से हमारा यथार्थ संसर्ग नहीं होता, और इसीलिए आजकल बहुत से शिक्षित लोग योरोपीय विचारों के प्रति अनादर व्यक्त करने लगे हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों के विचारों से मातृभाषा का दृढ़ संबंध नहीं होता वे अपनी भाषा से दूर हो जाते हैं और उसके प्रति उनके मन में अवज्ञा की भावना उत्पन्न होती है।

हम चाहे जिस दिशा से देखें, हमारी भाषा, जीवन और विचारों का सामंजस्य दूर हो गया है। हमारा व्यक्तित्व विच्छिन्न होकर निष्फल हो रहा है, इसलिए मातृभाषा के प्रति अवज्ञा उत्पन्न हो रही है।

व्याख्याएँ

प्रश्न 12.
(क) “हम विधाता से यही वर मांगते हैं-हमें क्षुधा के साथ अन्य, शीत के साथ वस्त्र, भाव के साथ भाषा और शिक्षा के साथ शिक्षा प्राप्त करने दो।”
(ख) “चिंता-शक्ति और कल्पना-शक्ति दोनों जीवन यात्रा संपन्न करने के लिए अत्यावश्यक है।”
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पंक्तियाँ रवीन्द्रनाथ टैगोर लिखित ‘शिक्षा में हेर-फर’ शीर्षक निबंध से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग से भाव को प्रस्तुत किया है।

लेखक का कहना है कि हेर-फेर दर होने से ही हमारा जीवन सार्थक होगा हम सर्दी में गरम कपड़े और गर्मी में ठंड कपड़े जमा नहीं कर पाते तभी हमारे जीवन में इतना दैन्य है-वरना हमारे पास है सब कुछ।
इसलिए लेखक ईश्वर से उपर्युक्त वर मांगता है। वह कहता है कि हमारी दशा तो वैसी ही है कि

पानी बिच मीन पियासी ।
मोहि सुनि-सुनि आवे हॉसी।

हमारे पास पानी भी है और प्यास भी है। पानी के बीच छटपटाती, तड़पतीमछली की तरह हमारी स्थिति है। इस स्थिति पर हँसी भी आती है। आँखों से आँसू टपकते हैं, लेकिन हम प्यास नहीं बझा पाते।

(ख) प्रस्तुत पंक्तियाँ रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित ‘शिक्षा में हेर-फेर’ निबंध से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने सफल दार्शनिक के रूप में उपर्युक्त पंक्तियों का विवेचन किया है।

लेखक का कथन है कि चिंतन-शक्ति और कल्पना-शक्ति दोनों जीवन-यात्रा संपन्न करने के लिए अत्यावश्यक हैं, इसमें संदेह नहीं। यदि हमें वास्तव में मनुष्य होना है तो इन दोनों को जीवन में स्थान देना होगा। इसलिए यदि बाल्यकाल से ही चिंतन और कल्पना पर ध्यान न दिया गया तो काम पड़ने पर उनका अभाव दुखदायी सिद्ध होगा। हमारी शिक्षा में पढ़ने की क्रिया के साथ-साथ सोचने की क्रिया नहीं होती। हम ढेर-का-ढेर जमा करते हैं पर कुछ निर्माण नहीं करते।

लेखक का कथन सत्य है कि जबतक चिंतन-शक्ति और कल्पना-शक्ति साथ-साथ संचालित नहीं होंगी मनुष्य हमेशा असफल ही रहेगा। इसलिए मनुष्यत्व के विकास के लिए उपयुक्त दोनों शक्तियों को साथ-साथ ग्रहण करना होगा।

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प्रश्न 13.
वर्तमान शिक्षा प्रणाली का स्वाभाविक परिणाम क्या है?
उत्तर-
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में लेखक ने वर्तमान शिक्षा-प्रणाली के स्वाभाविक परिणाम का बड़ा ही चिंतनीय पक्ष उपस्थित किया है।
लेखक का कथन है कि जब हमारे बच्चे इस भाषा को पढ़ते हैं तो उनके मन में कोई स्मृति जागृत नहीं होती, उनके सामने कोई चित्र प्रस्तुत नहीं होती। अंधभाव से उनका मन अर्थ को टटोलता रहता है। नीचे के दर्जे जो मास्टर पढ़ाते हैं में अंग्रेजी भाषा, भाव, आचार, व्यवहार, साहित्य-किसी से वे परिचित नहीं होते हैं और उन्हीं के हाथों हमारा अंग्रेजी के साथ प्रथम परिचय होता है। वे न तो स्वदेशी भाषा अच्छी तरह जानते हैं, न अंग्रेजी। उन्हें बस यही सुविधा है कि बच्चों को पढ़ाने की तुलना में उनका मन बहलाना बहुत आसान है। लेखक ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली के स्वाभाविक दोषों को बड़े ही सहज ढंग से प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 14.
अंग्रेजी हमारे लिए काम-काज की भाषा है, भाव की भाषा नहीं। कैसे?
उत्तर-
लेखक का कथन है कि अंग्रेजी विदेशी भाषा है, इसे काम-काज की भाषा की संज्ञा दी जा सकती है। शब्द-विन्यास और पद-विन्यास की दृष्टि से हमारी भाषा के साथ उसका कोई सामंजस्य नहीं। भाव-पक्ष और विषय-प्रसंग भी विदेशी होते हैं। शुरू से आखिर तक सभी अपरिचित चीजें होती हैं, इसलिए धारणा उत्पन्न होने से पहले ही हम रटना आरंभ कर देते हैं। फल वही होता है जो बिना चबाया अन्न निगलने से होता है।
लेखक ने बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग से समझाया है कि अंग्रेजी भाषा से हम बेरोजगारी की समस्या को थोड़ा सुलझा सकते हैं मगर हमारी संस्कृति, सभ्यता, आचार-विचार आदि सभी नियमों का पालन आदि के साथ अपनी भावना को विकसित करने में अपनी मातृभाषा सहायक होती है। यही सत्य है।

प्रश्न 15.
आज की शिक्षा मानसिक शक्ति का हस कर रही है। कैसे? इससे छुटकारे के लिए आप किस तरह की शिक्षा को बढ़ावा देना चाहेंगे?
उत्तर-
लेखक का कथन उपर्युक्त प्रश्न के संदर्भ में यह कहना है कि हमारी शिक्षा में बाल्यकाल से ही आनन्द का स्थान नहीं होता। जो नितांत आवश्यक है उसी को हम कंठस्थ करते हैं। इससे काम तो किसी-न-किसी तरह चल जाता है लेकिन हमारा विकास नहीं होता। हवा से पेट नहीं भरता-पेट तो भोजन से ही भरता है। लेकिन भोजन को ठीक से हजम करने के लिए हवा आवश्यक है।
लेखक का कहना है कि आनंद के साथ पढ़ते-रहने से पठन-शक्ति भी अलक्षित रूप से बढ़ती है; सहज-स्वाभाविक नियम से ग्रहण-शक्ति,. धारणा-शक्ति और चिंता-शक्ति भी सबल होती है।

लेखक का कथन है कि मानसिक शक्ति का ह्यस करने वाली इस निरापद शिक्षा से मुक्ति के लिए हमें मातृभाषा के माध्यम से मानसिक शक्ति का विकास करना होगा तभी हमें इससे छुटकारा मिल सकेगा।

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नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. अंग्रेजी विदेशी भाषा है। शब्द-विन्यास और पद-विन्यास की दृष्टि से हमारी भाषा के साथ उसका कोई सामंजस्य नहीं है। भावपक्ष और विषय-प्रसंग भी विदेशी होते हैं। शुरू से आखिर तक सभी अपरिचित चीजें हैं, इसलिए धारणा उत्पन्न होने से पहले ही हम रटना आरंभ कर देते हैं। फल वही होता है जो बिना चबाया अन्य निगलने से होता है। शायद बच्चों की किसी ‘रीडर’ में Hay-Making का वर्णन है। अंग्रेज बालकों के लिए यह एक सुपरिचित चीज है और उन्हें इस वर्णन से आनंद मिलता है। Snowball से खेलते हुए Charlie का Katie से कैसे झगड़ा हुआ, यह भी अंग्रेज बच्चे के लिए कुतूहलजनक घटना हैं लेकिन हमारे बच्चे जब विदेशी भाषा में यह सब पढ़ते हैं तब उनके मन में कोई स्मृति जागृत नहीं होती, उनके सामने कोई चित्र प्रस्तुत नहीं होता। अंधभाव से उनका मन अर्थ को टटोलता रह जाता है। (क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) किस दृष्टि से अंग्रेजी का हमारी भाषा के साथ सामंजस्य नहीं है, और क्यों?
(ग) अंग्रेज बालकों के लिए क्या एक चीज सुपरिचित है और इससे बच्चों को क्या मिलता है?
(घ) बच्चों का मन अंधभाव से क्या टटोलता रह जाता है?
(ङ) बच्चे किसी चीज को कब रटने लगते हैं और इसका उनपर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हेर-फेर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) अंग्रेजी एक विदेशी भाषा है। इस भाषा से जुड़े विषय और भाव-पक्ष भी विदेशी हैं। इस भाषा से जुड़ी तमाम बातें-शब्द-विन्यास, पद-विन्यास आदि सभी कुछ हमारे लिए अपरिचित हैं। इस कारण किसी भी दृष्टि से हमारी भाषा के साथ अंग्रेजी का कोई सामंजस्य नहीं बैठता है।

(ग) अंग्रेज बालकों की रीडर में ‘Hay-Making’ का वर्णन आया है। यह शब्द और उससे जुड़ा अर्थ उन बच्चों के लिए जाना-पहचाना शब्द है। उन्हें HayMaking के वर्णन को पढ़कर काफी आनंद मिलता है। यह आनंद उन्हें इसलिए मिलता है कि वे इससे काफी परिचित हैं और इससे जुड़ी बातों को अच्छी तरह जानते हैं। यह शब्द उनके देश और परिवेश से जुड़ा हुआ है।

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(घ) हिंदी भाषा-भाषी या किसी भी भारतीय भाषा-भाषी बच्चे जब अंग्रेजी भाषा सीखना या पढ़ना शुरू करते हैं तो वे उस विदेशी भाषा से मिलने और जुड़नेवाली बातों को चाहकर भी अच्छी तरह समझ नहीं पाते और वे बातें उनकी स्मृति में नहीं आ पातीं। ऐसी स्थिति में बच्चों के सामने कोई चित्र भी नहीं उभर पाता है। परिणामतः, बच्चों का मन उससे जुड़े अर्थ को अंधभाव से ही टटोलता रह जाता है।

(ङ) अंग्रेजी भाषा का हमारी भाषा से किसी भी रूप में कोई सामंजस्य नहीं बैठता है। वह हमारे लिए हर दृष्टि से एक अपरिचित भाषा है। हमारे बच्चे जब उस भाषा को पढ़ना और सीखना शुरू करते हैं, तब उस भाषा के संबंध में उनकी कोई निश्चित धारणा नहीं बनती। परिणामतः, बच्चे धारणा बनने के पहले उस भाषा से जुड़ी बातों को रटना आरंभ कर देते हैं। इसका परिणाम वही होता है जो बिना चबाया अन्न निगलने से होता है।

2. हमारी शिक्षा में बाल्यकाल से ही आनंद के लिए स्थान नहीं होता। जो नितांत आवश्यक है उसी को हम कंठस्थ करते हैं। इससे काम तो किसी-न-किसी तरह चल जाता है, लेकिन हमारा विकास नहीं होता। हवा से पेट नहीं भरता-पेट तो भोजन से ही भरता है। लेकिन भोजन को ठीक से हजम करने के लिए हवा आवश्यक है। वैसे ही, एक “शिक्षा पुस्तक’ को अच्छी तरह पचाने के लिए बहुत-सी पाठ्यसामग्री की सहायता जरूरी है। आनंद के साथ पढ़ते रहने से पठन-शक्ति भी अलक्षित रूप से बढ़ती है; सहज-स्वाभाविक नियम से ग्रहण-शक्ति, धारणा-शक्ति और चिंता-शक्ति भी सबल होती है। लेकिन, मानसिक शक्ति का ह्रास करनेवाली इस निरानंद शिक्षा से हमें कैसे छुटकारा मिलेगा कुछ समझ में नहीं आता।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों का विकास किस कारण से नहीं हो पाता
(ग) शिक्षा-पुस्तक को पूचाने के लिए किस रूप में किसी सहायता जरूरी है?
(घ) आनंद के साथ पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हेर-फेर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) हमारी शिक्षा-पद्धति में यह बड़ा दोष है कि उनमें बचपन के समय से आनंद के लिए कोई प्रावधान या जगह नहीं होती है। यह आनंद बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। परिणामतः, बच्चे इस आनंद से विरत रहने की स्थिति में बाल्यशिक्षा की प्राप्ति के क्रम में किसी तथ्य को कंठस्थ करने की प्रक्रिया से जड जात हैं। इस स्थिति में धरातल पर तो उनका काम चल जाता है, लेकिन उनका सही विकास बाधित हो जाता है और बच्चे विकास से वंचित रह जाते हैं।

(ग) लेखक यह मानता है कि शिक्षा की पुस्तक को अच्छी तरह पचाने के लिए कुछ पाठ्य-सामग्रियों की सहायता जरूरी है, जैसे–भोजन को हजम करने के लिए हवा की जरूरत होती है। उन पाठ्य-सामग्रियों में शिक्षा के साथ जुड़ी आनंद की सामग्री भी शामिल है। लेकिन, यह दु:ख की बात है कि हमारी शिक्षा में बचपन से ही आनंद का कोई स्थान नहीं दिया जाता है, अर्थात हम शिक्षा की सामग्री को आनंद की स्थिति में ग्रहण न कर उसे रटने की पद्धति से ग्रहण करते हैं।

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(घ) आनंद के साथ जब हम पढ़ाई करते हैं तब हमारी पठन-शक्ति बड़े सूक्ष्म ढंग से बढ़ती है। उसके सहज स्वाभाविक नियम से शिक्षार्थी की ग्रहण-शक्ति, धारणा-शक्ति और चिंता-शक्ति भी सक्षम और मजबूत बनती है। तब उस स्थिति में शिक्षा को पचाने में हमारी क्षमता अपनी सबलता का परिचय देती है। यह दु:ख की बात है कि हमारी शिक्षा में पाठ्य-सामग्री के तत्त्व के रूप में इसका अभाव

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने हमारी शिक्षा के दोषों को जगजाहिर किया है। लेखक के अनुसार हमारी शिक्षा का यह एक बहुत बड़ा दोष है कि उसमें बचपन से ही आनंद के साथ शिक्षा प्राप्त करने का कोई तरीका या प्रावधान नहीं है। बच्चे जो भी शिक्षा प्राप्त करते हैं, वे दबाव, भय और तनाव की मन:स्थिति में ही उसे प्राप्त करते हैं। इस कारण उनकी पठन-शक्ति, ग्रहण-शक्ति, धारणा-शक्ति और चिंता-शक्ति दुर्बल बनी रहती है और वे शिक्षा को पचा नहीं पाते।

3. लेकिन अंग्रेजी पढ़ने के प्रयास में ना वे सीखते हैं, ना खेलते हैं। प्रकृति के सत्यराज में प्रवेश करने के लिए उन्हें अवकाश ही नहीं मिलता। साहित्य के कल्पना-राज्य का द्वार उनके लिए अवरूद्ध रह जाता है।

मनुष्य के अंदर और बाहर दो उन्मुक्त विहार-क्षेत्र हैं, जहाँ से वह जीवन, बल और स्वास्थ्य का संचय करता है। जहाँ नाना वर्ण-रूप-गंध, विचित्र गति और संगीत, प्रीति और उल्लास उसे सर्वांग चेतन और विकसित करते हैं। इन दोनों मातृभूमियों से निर्वासित करके अभागे बालकों को एक विदेशी कारागृह में बंद कर दिया जाता है। जिनके लिए ईश्वर ने माता-पिता के हृदय में स्नेह का संचार किया है जिनके लिए माता की गोद को कोमलता प्रदान की गई है,जो आकार में छोटे होते हुए भी घर-घर की सारी जगह को अपने खेला के लिए यथेष्ट नहीं समझते, ऐसे बालकों को अपना बचपन कहाँ काटना पड़ता है? विदेशी भाषा में व्याकरण और शब्दकोश में; जिसमें जीवन नहीं, आनंद नहीं, अवकाश या नवीनता नहीं, जहाँ-हिलने-डुलने का स्थान नहीं, ऐसी शिक्षा की शुष्क, कठोर, संकीर्णता में।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।

(ख) अंग्रेजी पढ़ने के प्रयास में बच्चे किन-किन चीजों से वंचित हो । जाते हैं?

(ग) मनुष्य के अंदर और बाहर जो उन्मुक्त विहार क्षेत्र हैं उनसे उन्हें क्या लाभ मिलते हैं और इनसे विरत रहने पर उन्हें क्या कष्ट झेलना पड़ता है?

(घ) बच्चों को विदेशी भाषा के व्याकरण और शब्दकोश में क्या मिलता है?

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने बच्चों की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हेर-फेर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) लेखक का कथन है कि अंग्रेजी एक विदेशी भाषा है जिसके पढ़ने के प्रयास में बच्चों को लाभ के रूप में कुछ मिलता नहीं। इसके विपरीत सुख के ढेर सारे साधनों से उन्हें वंचित रह जाना पड़ता है। अंग्रेजी भाषा जब वे पढ़ने और सीखने लगते हैं तब वे उस क्रम में उस भाषा से कुछ सीख नहीं पाते, उस भाषा को सीखने की प्रक्रिया में उनके समय की बर्बादी होती है, क्योंकि खेलने का और प्रकृति के सुखद राज्य में विचरण करने का उन्हें समय ही नहीं मिलता। उनके लिए कल्पना का द्वार भी बंद ही रह जाता है।

(ग) लेखक का यह कथन है कि मनुष्य के लिए दो विहार क्षेत्र हमेशा तैयार मिलते हैं। ये दोनों विहार क्षेत्र उन्मुक्त हैं। इनमें एक बाहर का है और दूसरा उसके अंदर का। इन दोनों उन्मुक्त विहार क्षेत्रों में मनुष्य भ्रमण कर विविधवर्णी रूप, गंध, समय की विचित्र गति और संगीत, प्रेम और उल्लास की प्राप्ति करता है। इससे उसकी सर्वांग चेतन-शक्ति विकसित होती है। उनसे विरत रहकर वह एक विदेशी कारागृह में बंद रहने का दुःख भोगता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

(घ) बच्चों को विदेशी भाषा के व्याकरण और शब्दकोश में न तो जीवन की विशेषता, आनंद, अवकाश और नवीनता के दर्शन होते हैं और न जीवन के अन्य कोई सुखद पक्ष के। वहाँ शिक्षा की शुष्क, कठोर, संकीर्णता में बँधे रहने के सिवा वे और कुछ पाते नहीं। इस स्थिति में उनकी मानसिक स्थिति अविकसित रह जाती है और उनका व्यक्तित्व कुंठित हो जाता है।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने बच्चों की कुछ इन विशेपताओं का वर्णन किया है-बच्चे अपने माता-पिता के स्नेह और प्रेम के सत्पात्र होते हैं। ईश्वर ने माता-पिता के हृदय में उनके लिए ही स्नेह का संचार किया है और उनके लिए ही माता की गोद को ईश्वर ने कोमलता प्रदान की है। ये बच्चे ही हैं जो आकार में छोटे होते हुए भी अपने घर के आँगन को खेलने-कूदने के लिए पर्याप्त साधन नहीं मानते और स्वतंत्र रूप से वहाँ विचरण करते रहते हैं।

4. इस तरह बीस-बाईस वर्ष की आयु तक हमें जो शिक्षा मिलती है उसका हमारे जीवन से रासायनिक मिश्रण नहीं होता। इससे हमारे मन को एक अजीब आकार मिलता है। शिक्षा से हमें जो विचार और भाव मिलते हैं उनमें से कुछ को तो लेई से जोड़कर सुरक्षित रखते हैं और बचे हुए कालक्रम से झड़ जाते हैं। बर्बर जातियों के लोग शरीर पर रंग लगाकर या शरीर के विभिन्न अंगों को गोदकर, गर्व का अनुभव करते हैं; जिससे उनके स्वाभाविक स्वास्थ्य की उज्ज्वलता और लावण्य छिप जाते हैं। उसी तरह हम भी अपनी विलायती विद्या का लेप लगाकर दंभ करते हैं, किंतु यथार्थ आंतरिक जीवन के साथ उसका भोग बहुत कम ही होता है। हम सस्ते, चमकते हुए, विलायती ज्ञान को लेकर शान दिखाते हैं, विलायती विचारों का असंगत रूप से प्रयोग करते हैं। हम स्वयं यह नहीं समझते कि अनजाने ही हम कैसे अपूर्व प्रहसन का अभिनय कर रहे हैं। यदि कोई हमारे ऊपर हँसता है तो हम फौरन यूरोपीय इतिहास से बड़े-बड़े उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) बीस-बाईस वर्ष की आयु तक प्राप्त शिक्षा से हमें क्या मिलता
(ग) विलायती विद्या का लेप लगाकर हम क्या करते रहने को मजबूर होते रहते हैं?
(घ) हम हँसी के पात्र कब बनते हैं और उससे बचने के लिए हम क्या करते हैं?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हेर-फेर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) बीस-बाईस वर्ष की आयु तक प्राप्त शिक्षा से हमें ठोस रूप में कुछ लाभप्रद वस्तु या गुण-लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे प्राप्त साधन हमारे जीवन में घुल-मिल नहीं पाते हैं। इसकी प्राप्ति से हमारे मन को स्वाभाविक रूप से सुख-शांति नहीं मिल पाती, बल्कि इसके विपरीत हमारे मन को एक विचित्र स्वरूप मिलता है जो हमारे लिए सुखद नहीं होता। इससे हमें जो विचार और भाव की प्राप्ति होती है उनका कोई शाश्वत मूल्य नहीं होता।

(ग) विलायती शिक्षा का लेप लगाकर हम झूठ का दंभ करते हैं जिनका यथार्थ आंतरिक जीवन के साथ कुछ भी या कोई भी योग नहीं के बराबर होता है। हम झूठा प्रदर्शन करते हैं, गलत रूप से चमकते रहते हैं। विदेशी भाषा से प्राप्त ज्ञान को लेकर शान का प्रदर्शन करते हैं और विलायती विचारों को असंगत रूप से प्रयोग में लाकर उनका प्रचार करते रहते हैं।

(घ) हम विदेशी भाषा से प्राप्त ज्ञान, शान और गुमान में इस प्रकार इतराये फिरते हैं कि हम अपने लोगों के बीच हँसी का पात्र बन जाते हैं। लोगों का हमारे इस नकली रूप पर हँसना स्वाभाविक हो जाता है। लोगों की इस हँसी से बचन के लिए हम शीघ्रातिशीघ्र विदेशों खासकर यूरोपीय इतिहास के पन्नों से उदाहरण ढूँढ-ढूँढकर लोगों के सामने अपनी विशेषता का परिचय देने का प्रयास करते हैं।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय यह है कि अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषा का अध्ययन, मनन और चिंतन हमारे लिए किसी भी रूप में उपयोगी और महत्त्वपूर्ण नहीं है। जिस प्रकार बर्बर जाति के लोग शरीर पर रंग का लेप चढ़ाकर या शरीर के अंगों को गोद-गोदकर लोगों के सामने गर्व का अनुभव करते हैं, उसी तरह विदेशी भाषा का लेप लगाकर लोग व्यर्थ के ज्ञान, गुमान और शान का अनुभव कर उसका प्रचार-प्रसार करते हैं। लेखक की दृष्टि में यह हास्यास्पद है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

5. बाल्यकाल से ही यदि भाषा-शिक्षा के साथ भाव-शिक्षा की भी व्यवस्था हो और भाव के साथ समस्त जीवन-यात्रा नियमित हो, तभी हमारे जीवन में यथार्थ सामंजस्य स्थापित हो सकता है। हमारा व्यवहार तभी सहज मानवीय व्यवहार हो सकता है और प्रत्येक विषय में उचित परिणाम की रक्षा हो सकती है। हमें यह अच्छी तरह समझना चाहिए कि जिस भाव से हम जीवन-निर्वाह करते हैं उसके अनुकूल हमारी शिक्षा नहीं है। जिस घर में हमें सदा अपना जीवन बिताना है उसका उन्नत चित्र हमारी पाठयपुस्तकों में नहीं है। जिस समाज के बीच हमें अपना जीवन बिताना है उस समाज का कोई उच्च आदर्श हमें शिक्षा-प्रणाली में नहीं मिलता। उसमें अब हम अपने माता-पिता, सुहद-मित्र, भाई-बहन किसी का प्रत्यक्ष चित्रण नहीं देखते। हमारे दैनिक जीवन के कार्यकलाप को उस साहित्य में स्थान नहीं मिलता।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) हमारा व्यवहार किस परिस्थिति में सहज मानवीय व्यवहार हो सकता है?
(ग) हमें कौन-सी बात अच्छी तरह समझना चाहिए?
(घ) अनुकूल शिक्षा कौन-सी शिक्षा होती है और उससे हमें क्या मिलता है?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हरे-फर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) यदि बचपन से ही हमारी भाषा-शिक्षा के साथ भाव- शिक्षा की भी व्यवस्था रहती है तो उस परिस्थिति में हमारी सम्पूर्ण जीवन-यात्रा भाव के साथ नियमित रूप से चलती है। तभी हम यथार्थ जीवन की स्थिति से जुड़ते हैं। उसी स्थिति में तभी हमारा व्यवहार सहज मानवीय व्यवहार हो सकता है।

(ग) हमें यह बात अच्छी तरह समझना चाहिए कि हमारी शिक्षा हमारे जीवन-निर्वाह के भाव के अनुकूल नहीं है। हम जिस घर में सदा-सर्वदा के लिए रहने के लिए बाध्य हैं उसका सही साफ-सुथरा चित्र हमारी पाठय-पुस्तकों में है ही नहीं। हमारे दैनिक-जीवन के कार्यकलाप को उस शिक्षा में कहीं कोई स्थान नहीं मिलता है और वहाँ हमें गतिशील जीवन के संगीत के स्वर को सुनने के लिए कोई अवसर नहीं मिलता।

(घ) अनुकूल शिक्षा वही शिक्षा होती है जो हमारे जीवन-निर्वाह के भाव से जुड़ी होती है। उस शिक्षा की पाठय-पुस्तकों में हमारे-स्थायी निवास के उन्नत चित्र विद्यमान रहते हैं और उस शिक्षा की प्रणाली में हमारे सामाजिक जीवन का कोई उच्च आदर्श विद्यमान रहता है। वहाँ हमारे वैयक्तिक और दैनिक जीवन के कार्यकलाप की चर्चा, कथन और अंकन के लिए उचित स्थान उपलब्ध होता है और उस शिक्षा से हमारे जीवन के क्षण जुड़े रहते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने हमारी भाषा-शिक्षा के साथ जुड़ी भाव-शिक्षा की व्यवस्था के महत्त्व पर प्रकाश डाला है। भाषा-शिक्षा भाव-शिक्षा की व्यवस्था से जुड़कर सही रूप में लाभदायी होती है। तभी हम सहज मानवीय व्यवहार के रूप में अपने दैनिक व्यवहार को परिणत कर सकते हैं। आज हमारा दुर्भाग्य है कि हमारी भाषा-शिक्षा हमारी भाव-शिक्षा के साथ जुड़ी नहीं है। इस स्थिति में हमारी शिक्षा की पाठय-पुस्तकों में हमारे इष्ट, घर तथा समाज का कोई स्थान नहीं है और हमारे जीवन का मिलान और सामंजस्य वहाँ नहीं हो पाता है।

6. कहानी है कि एक निर्धन आदमी जाड़े के दिनों में रोज भीख माँगकर गरम कपड़ा बनाने के लिए धन-संचय करता, लेकिन यथेष्ट धन जमा होने तक जाड़ा बीत जाता। उसी तरह जब तक वह गर्मी के लिए उचित कपड़े की व्यवस्था कर पाता तब तक गर्मी भी बीत जाती। एक दिन देवता ने उसपर तरस खाकर उसे वर माँगने को कहा तो वह बोला, ‘मेरे जीवन का यह हेर-फेर दूर करो, मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मैं जीवन भर गर्मी में गरम कपड़े और सर्दी में ठंडे कपड़े प्राप्त करता रहा हूँ। इस परिस्थिति में संशोधन कर दो-बस, मेरा जीवन सार्थक हो जाएगा। हमारी प्रार्थना भी यही है। हेर-फेर दूर होने से ही हमारा जीवन सार्थक होगा। हम सर्दी में गरम कपड़े और गर्मी में ठंडे कपड़े जमा नहीं कर पाते, तभी तो हमारे जीवन में इतना दैन्य है-वरना हमारे पास है सबकुछ।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) इस कहानी में कैसे व्यक्ति की कहानी है? उस व्यक्ति के कार्य का परिचय दीजिए।
(ग) एक दिन किस परिस्थिति में उस व्यक्ति ने देवता से क्या वरदान माँगा?
(घ) उसके अनुसार उसके जीवन में दैन्य का क्या रूप है?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा में हेर-फेर, लेखक-रवीन्द्रनाथ टैगोर

(ख) इस कहानी में एक गरीब व्यक्ति की कहानी है। वह व्यक्ति जाड़े के दिनों में रोज भीख माँग-माँगकर गरम कपड़ा बनाने के लिए धन जमा करता था, लेकिन दुर्भाग्य उस बेचारे का कि जब तक वह यथेष्ट धन जमा करता, तब तक जाड़ा ही बीत जाता।

(ग) वह व्यक्ति जब जाड़ा और गरमी के लिए कपड़े की व्यवस्था न कर पाया, तो उसने अपने ऊपर तरस खाए एक देतवा से यह वरदान माँगा कि मेरे जीवन में यह हेर-फेर है कि मैं जाड़े तथा गरमी दोनों ऋतुओं में जब तक कपड़े खरीदने के लिए भीख मांगकर धन जमा करता हूँ तब तक ऋतुओं के अनुकूल वस्त्र की व्यवस्था नहीं कर पाता।

(घ) उसके अनुसार उसके जीवन में दैन्य का रूप यह है कि वह जीवनभर गरमी में गर्म कपड़े और सर्दी में ठंड कपड़े ही प्राप्त करता रहा है। वह इसमें हेर-फेर चाहता है, अर्थात वह गर्मी में ठंडे कपड़े और ठंड में गर्म कपड़ें प्राप्त करना चाहता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा में हेर-फेर

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के कथन का आशय यह है कि हम अपनी वर्तमान शिक्षा-व्यवस्था से जीवन के अनुकूल जीने का साधन नहीं प्राप्त कर रहे हैं। हमारे जीवन में एक विचित्र प्रकार की दीनता आ गई है। वह दीनता हमारे जीवन के घोर प्रतिकूल है। हमारी स्थिति उस भिखारी की तरह है जो जाड़े के अनुकूल वस्त्र पाने के लिए पूरा शीतकाल भीख माँगने में ही बिता देता है। जब तक वह उसके लिए साधन जुटाता है तब तक जाड़े की ऋतु गुजर जाती है। ग्रीष्म ऋतु में भी यही स्थिति उसके साथ जुड़ी रहती है। इस विचित्र स्थिति में हमारा जीवन सार्थक नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि हम जीवन की अनुकूलता के अनुरूप भाषा-शिक्षा प्राप्त करें।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1

प्रश्न 1.
पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृतियों में कौन-सी आकृतियाँ एक ही आधार और एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हैं? ऐसी स्थिति में,जभवनिष्ठ आधार और दोनों समान्तर रेखाएं लिखिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1
उत्तर:
आकृति (i), (iii) तथा (v)
(i) में आकृति आधार DC. समाजर रेखाएँ DC और AB.
(iii) में आकृति आधार QR. समान्तर रेखाएँ QR और PS.
(v) में आकृति आधार AD, समान्तर रेखाएँ AD और BQ.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.1

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक

Bihar Board Class 6 Science तन्तु से वस्त्र तक Text Book Questions and Answers

अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित तन्तुओं का प्राकृतिक तथा संश्लिष्ट में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक तन्तु – ऊन, रूई, रेशम तथा पटसन।
संगलिष्ट तन्तु – नायलॉन और पॉलिएस्टर।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए कथन ‘सत्य’ हैं अथवा ‘असत्य’ उल्लेख कीजिए –
उत्तर:
(क) तन्तुओं से तागा बनता है। सत्य
(ख) कताई वस्त्र निर्माण की एक प्रक्रिया है। सत्य
(ग) जूट नारियल का बाहरी आवरण होता है। सत्य
(घ) रूई से बिनौले (बीज) हटाने की प्रक्रिया को ओटना कहते हैं। सत्य
(ड) तागों की बुनाई से वस्त्र का एक टुकड़ा बनता है। सत्य
(च) रेशम-तंतु किसी पादप के तने से प्राप्त होता है। असत्य
(छ) पॉलिएस्टर एक प्राकृतिक तन्तु है। असत्य

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(क) …………… और ……….. से पादप तन्तु प्राप्त किए जाते हैं।
(ख) …………….. और ……………… जातंव तन्तु हैं।
उत्तर:
(क) रूई, जूट
(ख) रेशम, ऊन।

प्रश्न 4.
सही विकल्प को चुनिए –

(क) वैसे वस्त्र के तन्तु जो पौधों एवं जन्तुओं से प्राप्त होते हैं, कहलाते हैं –
(i) प्राकृतिक तंतु
(ii) मानव निर्मित तंतु
(iii) प्राकृतिक एवं मानव निर्मित तंतु
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) प्राकृतिक तंतु

(ख) मानव निर्मित तंतु हैं –
(i) पॉलिएस्टर
(ii) नायलॉन
(iii) एलक्रिलिक
(iv) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी

(ग) बिहार के निम्न जिले में जूट अधिक उगाया जाता है –
(i) कटिहार
(ii) मधेपुरा
(iii) सहरसा
(iv) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी

(घ) रेशों से धागा बनाने की प्रक्रिया कहलाती है –
(i) कताई
(ii) बुनाई
(iii) धुलाई
उत्तर:
(i) कताई

(ङ) धागे से वस्त्र बनाने की विधियाँ है –
(i) बुनाई
(ii) बंधाई
(iii) बुनाई एवं बंधाई
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iii) बुनाई एवं बंधाई

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक

प्रश्न 5.
रूई तथा जूट (पटसन) पादप के किन भागों से प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
रूई तथा जूट (पटसन) पादप के तने भाग से प्राप्त होता है।

प्रश्न 6.
नारियल तन्तु से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
नारियल तन्तु से बनने वाली दो वस्तुओं के नाम – चटाई और रस्सी ।

प्रश्न 7.
तन्तुओं से धागा निर्मित करने की प्रक्रिया स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तन्तुओं से तागा निर्मित करने की प्रक्रिया इस प्रकार है। कपास के फूल पूरी तरह से तैयार हो जाने पर उजला रेशे गोलक के रूप में दिखने लगता है। कपास को हाथ से चुना जाता है। फिर बड़े-बड़े मशीनों की सहायता से कपास को बिनोले से अलग कर कपास को हाथों से ओटी जाती है। कपास को पटक-पटक कर धुलाई कर देते हैं। फिर वस्त्र बनाने से पहले सभी तन्तुओं को तागों में परिवर्तित कर लिया जाता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 3 तन्तु से वस्त्र तक

Bihar Board Class 6 Science तन्तु से वस्त्र तक Notes

अध्ययन समाग्री :

रोटी, कपड़ा और मकान ये तीन मानव के न्यूनतम आवश्यकताओं में से एक है। जिस तरह रोटी हमारे जीवन का आधार है ठीक उसी तरह जाड़ा, गर्मी, वर्षा आदि से कपड़ा मेरी रक्षा कर जीवन को आगे बढ़ाने का काम करता है। अलग-अलग मौसम में अलग-अलग तरह के वस्त्र धारण कर हम अपने शरीर की रक्षा करते हैं।

वस्त्र को बनाने के लिए जिन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है उसे हम तन्तु कहते हैं। वैसे तन्तु जो पौधों एवं जन्तुओं से प्राप्त होते हैं उसे प्राकृतिक तन्तु कहते हैं। जैसे कपास, रेशम, ऊन आदि इसके अलावे केले के पत्ते एवं तने बांस से भी तन्तु प्राप्त किया जाता है। वे सभी तन्तु जो पौधे व जन्तु से न प्राप्त कर रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं उसे मानव निर्मित तन्तु कहते हैं। जैसे-पॉलिस्टर, नायलॉन, एक्रिलिक आदि।

वस्त्र के निर्माण में तन्तु से लेकर वस्त्र तक अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जैसे- कताई, बुनाई, बंधाई आदि। रेशों से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं। इस प्रक्रिया में, रूई के एक पुंज से रेशों को खींचकर ऐंठते हैं। ऐसा करने से रेशे आस-पास आ जाते हैं और तागा बन जाता है। कताई के लिए तकली तथा चरखा आदि जैसी युक्तियों का प्रयोग किया जाता है। कताई के बाद बुनाई तथा उसके बाद बंधाई प्रक्रिया के बाद वस्त्र का निर्माण होता है। वर्तमान में ये सभी प्रक्रिया अब मशीन से होती है।

तन्तुओं के प्रकार – तन्त दो प्रकार के होते हैं –
(1) प्राकृतिक तन्तु और
(2) संलिष्ट या मानव निर्मित तन्तु।

(1) प्राकृतिक तन्तु-वैसे तन्तु जो पौधे एवं जन्तु से प्राप्त होते हैं. उसे – प्राकृतिक तन्तु कहते हैं। जैसे- रेशम, ऊन, जट, सत आदि।

(2) संलिष्ट तन्तु या मानव निर्मित तन्तु-वैसे तन्तु जो पौधों एवं जन्तुओं से न प्राप्त कर रासायनिक पदार्थों से बनाए जाते हैं, उसे – मानव निर्मित तन्तु या संशलष्ट तन्तु कहते हैं। जैसे – पॉलिस्टर, नायलॉन, एक्रिलिक आदि।

कताई – तन्तुओं से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं। कताई में तकली, चरखा, कताई मशीन आदि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। तागे से वस्त्र बनाने की कई विधियाँ प्रचलित हैं। इनमें से दो प्रमुख विधियाँ बुनाई तथा बंधाई हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है? Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

Bihar Board Class 6 Science भोजन में क्या-क्या है? Text Book Questions and Answers

अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
आलू में उपस्थित होता है –
(क) मंड
(ख) प्रोटीन
(ग) वसा
(घ) खनिज-लवण
उत्तर:
(क) मंड

प्रश्न 2.
घेघा रोग किसकी कमी से होता है ?
(क) विटामिन-सी
(ख) कैल्सियम
(ग) आयोडीन
(घ) फॉस्फोरस
उत्तर:
(ग) आयोडीन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

प्रश्न 3.
रूक्षांस के मुख्य स्रोते हैं –
(क) चावल
(ख) बेसन
(ग) जल
(घ) ताजे फल और सब्जियाँ
उत्तर:
(ग) जल

प्रश्न 4.
भोजन में मंड परीक्षण के दौरान टिक्चर आयोडीन के हल्के घोल की कुछ बूंदें मिलाने पर खाद्य पदार्थ का रंग बदल जाता है।
(क) नीला
(ख) काला
(ग) नीला या काला
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) नीला या काला

प्रश्न 5.
मिलान कीजिए –

  1. विटामिन-ए – (क) स्कर्वी
  2. विटामिन-बी – (ख) रिकंट्स
  3. विटामिन-सी – (ग) घेघा रोग
  4. विटामिन-डी – (घ) बेरी-बरी
  5. आयोडीन – (ङ) दृष्टिहीनता

उत्तर:

  1. – ङ
  2. – घ
  3. – क
  4. – ख
  5. – ग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

प्रश्न 6.
इनमें सही कथन को (सही) अंकित कीजिए –
(क) केवल चावल खाने से हम अपने शरीर की पोपण आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। (×)
(ख) संतुलित आहार खाकर अभावजन्य रोगों को रोकथाम की जा सकती हैं। (✓)
(ग) शरीर के लिए संतुलित आहार में नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ होने चाहिए। (✓)
(घ) शरीर को सभी पापक तत्व उपलब्ध कराने के लिए मांस पर्याप्त (×)

प्रश्न 7.
दो ऐसे खाद्य पदार्थों के नाम लिखिए जिनमें निम्नलिखित पोषक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
उत्तर:
(क) वसा – मूंगफली और मांस
(ख) मंड – आलू और चावल
(ग) आहारी रेशे – अन्न का चोकर, हरे ताजे फल और सब्जियाँ।
(घ) प्रोटीन – अंडा और दाल

प्रश्न 8.
निम्नलिखित के नाम लिखिए –
(क) पोषक जो मुख्य रूप से हमारे शरीर को ऊर्जा देते हैं।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट तथा वसा मुख्य रूप से हमारे शरीर को ऊर्जा देते हैं।

(ख) पोषक जो हमारे शरीर की वृद्धि और अनुरक्षण के लिए आवश्यक हैं।
उत्तर:
प्रोटीन तथा खनिज लवण हमारे शरीर की वृद्धि और अनुरक्षण के लिए आवश्यक है।

(ग) वह विटामिन जो हमारी अच्छी दृष्टि के लिए आवश्यक है।
उत्तर:
विटामिन-ए जो हमारी अच्छी दृष्टि के लिए आवश्यक हैं।

(घ) वह खनिज जो अस्थियों के लिए आवश्यक है।
उत्तर:
दूध, मक्खन, मछली, अंडा, कैल्शियम तथा फासफोरस इत्यादि ये सब विटामिन डी के अन्तर्गत आते हैं जो अस्थियों के लिए आवश्यक है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

प्रश्न 9.
हमारे भोजन के मुख्य पोषक तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हमारे भाजन के मुख्य पोषक तत्वों के नाम इस प्रकार हैं – प्रोटीन, वसा, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट तथा खनिज लवण हैं। इसके अलावा भोजन में रेशेदार आहार तथा जल भी होते हैं।

प्रश्न 10.
कुपोषण से आप क्या समझते हैं ? इससे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर:
जब शरीर को आवश्यक मात्रा में पोपक तत्त्व पदार्थ नहीं मिलते तब इस स्थिति को कुपोषण कहते हैं ।

हमें पता है कि पोषक तत्त्व अर्थात् भोजन में वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण और विटामिन की कमी से कुपोषण होता है तो भोजन में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की पूर्ति से कुपोषण को रोका जा सकता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

Bihar Board Class 6 Science भोजन में क्या-क्या है? Notes

अध्ययन समाग्री :

विटामिन हमारे शरीर को रोगों से रक्षा करने में सहायता करता है। हमारे भोजन के मुख्य पोषक तत्वों के नाम कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन तथा खनिज-लवण हैं तथा इनके अलावा भोजन में आहारी रेशे तथा जल भी होता है।

संतुलित आहार हमारे शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों तथा पर्याप्त रूक्षांश और जल उचित मात्रा में उपस्थित रहते हैं।

भोजन को हम सब दो प्रकार से खाते हैं।
(1) जन में हम सब पके हुए खाद्य पदार्थ जैसे- भात, दाल, सत्तू, आचार. कभी खिचड़ी, बैगन का भरता इत्यादि लेते हैं।
(2) कच्चे पदार्थ जैसे- मूली, गाजर, टमाटर तथा हरी सब्जियों को सलाद के रूप में लेते हैं। इन सब प्रकार के भोजन को खाने से हमें संतुष्टि मिलती है।

कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा की जाँच की अपेक्षा सरल है।

हमारे आहार में लंबी अवधि तक एक अथवा अधिक पोषक तत्वों की न्यूनता (कमी) से विशिष्ट रोग अथवा विकार उत्पन्न हो सकते

कार्बोहाइड्रेट तथा वसा हमारे शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करते हैं।

प्रोटीन तथा खनिज लवण की आवश्यकता हमारे शरीर की वृद्धि तथा अनुरक्षण के लिए होती है।

कार्बोहाइड्रेट मुख्य रूप से हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। वसा से भी ऊर्जा मिलती है। वास्तविकता यह है कि कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा से हमें अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। वसा और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ऊर्जा देने वाले पोषक कहलाते हैं।

प्रोटीन शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने में हमारी मदद करती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

विटामिन रांगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। विटामिन हमारी आँख, हड्डियों, दांत और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में भी सहायता करते हैं।

विटामिन कई प्रकार के होते हैं –

विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन ई तथा विटामिन के नाम से जाना जाता है। विटामिन के एक समूह को विटामिन बी-काम्पलैक्स कहते हैं। विटामिन ए हमारी त्वचा तथा आँखों को स्वस्थ रखता है। विटामिन सी बहुत से रोगों से लड़ने में हमारी मदद करता है। विटामिन डी हमारी अस्थियां और दाँतों के लिए कैल्सियम का उपयोग करने में हमारे शरीर की सहायता करता हैं।

खनिज लवणों की आवश्यकता अल्प मात्रा में होती है। शरीर के उचित विकास तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक खनिज लवण आवश्यक है। लाहा, हरी सब्जियों, विशेषकर पालक, मेथी, फल में कला. में पाया जाता है। कैल्शियम, दूध से प्राप्त होता है। फास्फोरस एवं कैल्शियम मछली, अंडा इत्यादि में मिलते हैं।

पोपकों के अलावा हमारे शरीर को आहारी रेशों तथा जल की भी आवश्यकता होती है। रेशे की पूर्ति मुख्यतः पादप उत्पादों से होती है। रूक्षांश मुख्य रूप से साबुत खाद्यान्न, दाल, आलू, ताजे फल और सब्जियाँ हैं। रूक्षांश हमारे शरीर को कोई पोपक प्रदान नहीं करते हैं, यह हमारे भोजन के आवश्यक अवयव हैं। रूक्षांश हमारे शरीर से बिना पचे भोजन को बाहर निकालने में सहायता करता है।

जल भोजन में उपस्थित पोपकों को अवशोषित कराने में हमारे शरीर की सहायता करता है। कुछ अपशिष्ट-पदार्थों, जैसे मूत्र तथा पसीने को शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है।

पूरे दिन में जो कुछ भी हम खाते हैं उसे आहार कहते हैं। वे सभी पोषक, उचित मात्रा में होना चाहिए जिनका हमारे शरीर को आवश्यकता है। कोई भी पापक से ज्यादा हो और न बहुत कम। हमारे आहार में पर्याप्त मात्रा में रूक्षांश तथा जल भी होना चाहिए। इस प्रकार के आहार को संतुलित आहार कहते हैं।

एक कटोरी कार्बोहाइड्रेटयुक्त भोजन की अपेक्षा एक कटोरी वसायुक्त भोजन अधिक ऊर्जा देगा। वसा की मात्रा अत्यधिक मोटापे का कारण बनती है।

एक या अधिक पोषक तत्वों का अभाव हमारे शरीर में रोग अथवा विकृतियाँ उत्पन्न कर सकता है। वे रोग जो लंबी अवधि तक पोपकों के अभाव के कारण होते हैं, उन्हें अभावजन्य रोग कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले कुछ रोग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है 1

पोषक तत्व एवं उसके स्रोत :

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है 2

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 2 भोजन में क्या-क्या है?

खनिज-लवण :

  1. कल्सियम – दूध, दूध से बनी वस्तुएँ, पनीर, दही
  2. फॉस्फोरस – दूध, पनीरं, मांस
  3. लौह – अण्डा, यकृत, पालक, मेवा, अनाज
  4. आयोडीन – लवण, मछली, समुद्री वनस्पति
  5. सोडियम – साधारण नमक, दूध, मांस, मछली, अंडा
  6. पोटैशियम – मांस, मछली, अनाज, फल, सब्जियाँ

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 निबंध

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 गद्य खण्ड Chapter 10 निबंध Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 निबंध

Bihar Board Class 9 Hindi निबंध Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 निबंध

प्रश्न 1.
निबंध लेखन का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
निबंध मानसिक प्रतिक्रियाओं, भावनाओं एवं विचारों का एक सँवरा रूप है। निबंधकार जीवन के चित्र खींचता है। जीवन के किसी कोने में झाँककर वह जो कुछ पाता है और उसके मन में उसकी जो प्रतिक्रिया होती है, उसे ही वह निबंध के माध्यम से व्यक्त करता है और वह अपना सम्पूर्ण व्यक्तित्व ढाल देता है।

प्रश्न 2.
निबंध लेखन के समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता
उत्तर-
निबंध लिखने में दो बातों की आवश्यकता है-भाव और भाषा। बिना संयत भाषा के अभिप्रेत भाव व्यक्त नहीं होता। लिखने के लिए जिस तरह परिमार्जित भाव की आवश्यकता है, उसी तरह परिमार्जित भाषा भी। एक के अभाव में दूसरे का महत्व नहीं।

प्रश्न 3.
लेखक ने निबंध की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर-
लेखक ने निबंध की कोई सर्वसम्मत परिभाषा नहीं दी है लेकिन उन्होंने कहा है कि निबंध में निबंधकार अपने सहज, स्वाभाविक रूप को पाठक के सामने प्रकट करता है। आत्मप्रकाशन ही निबंध का प्रथम और अन्तिम लक्ष्य है। आधुनिक नेबंध के जन्मदाता फ्रांस के ‘मौन्तेय’ माने गये हैं। निबंध की परिभाषा में उन्होंने कहा है कि “निबंध विचारों, उद्धरणों एवं कथाओं का सम्मिश्रण है।”

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प्रश्न 4.
निबंध-लेखन में लेखक किस अत्याचार की बात करता है, जिससे निबंध बोझिल, नीरस और उबाऊ हो जाता है?
उत्तर-
विषय-प्रतिपादन के साथ, विचारों के पल्लवन के साथ, भाषा और शैली के साथ, जिसका नतीजा यह होता है कि हिन्दी निबंध नीरस, बोझिल और उबाऊ हो जाता है।

प्रश्न 5.
निबंध-लेखन में हिन्दीतर भाषाओं के उद्धरण में किस बात का ध्यान रखना आवश्यक होता है?
उत्तर-
लेखक का कथन है कि निबंध में हिन्दीतर भाषाओं का उद्धरण जब भी दें, इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि उसका हिन्दी अनुवाद पहले दें, और बाद में टिप्पणी। मूल पंक्तियों का कम-से-कम लेखकों के नाम का हवाला अवश्य दें।

प्रश्न 6.
अच्छे निबंध के लिए क्या आवश्यक है? विस्तार से तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
उत्तर-
अच्छे निबंध के लिए कल्पना शक्ति की आवश्यकता है। कल्पना केवल कलाकारों की चीज नहीं, विज्ञान के मूल में भी कल्पना ही है। किसी भी चीज को सुन्दर और सुरुचिपूर्ण बनाने के लिए कल्पना से काम लेना अत्यावश्य हो जाता है। ‘कल्पना अज्ञात लोक का प्रवेशद्वार है। अच्छे निबंध के लिए लेखक ने चार तरह की बातें कही हैं। व्यक्तित्व का प्रकाशन, संक्षिप्तता, एकसूत्रता और अन्विति का प्रभाव।।
व्यक्तित्व के प्रकाशन में निबंधकार ने बताया है कि अपने सहज स्वाभाविक रूप से पाठक के सामने प्रकट होता है। संक्षिप्तता के संबंध में निबंधकार का कहना है कि निबंध जितना छोटा होता है, जितना अधिक गढा होता है, उसमें उतनी ही सघन अनुभूतियाँ होती हैं और अनुभूतियों में गढाव कसाव के कारण तीव्रता रहती है।

एकसूत्रता के संबंध में निबंधकर आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का उदाहरण देकर बताया है कि व्यक्तिगत विशेषता का मतलब यह नहीं कि उसके प्रदर्शन के लिए विचारों की श्रृंखला रखी ही न जाय या जानबझकर उसे जगह-जगह से तोड दिया जाय; भावों की विचित्रता दिखाने के लिए अर्थयोजना की जाय, जो अनुभूति के प्रकृत या लोक सामान्य स्वरूप से कोई सम्बन्ध ही न रखे, अथवा भाषा से सरकस वालों की सी कसरतें या हठयोगियों के से आसन कराये जायँ, जिनका लक्ष्य तमाशा दिखाने के सिवा और कुछ न हो।

निबंध की चौथी और अन्तिम विशेषता ‘अन्विति का प्रभाव’ के संबंध में निबन्धकार का कहना है कि जिस प्रकार एक चित्र की अनेक असम्बद्ध रेख आपस में मिलकर एक सम्पूर्ण चित्र बना पाती हैं अथवा एक माला के अनेक पुष्प एकसूत्रता में ग्रंथित होकर ही माला का सौन्दर्य ग्रहण करते हैं, उसी प्रकार निबंध के प्रत्येक विचार चिन्तन, प्रत्येक भाव तथा प्रत्येक आवेग आपस में अन्वित होकर सम्पूर्णता के प्रभाव की सृष्टि करते हैं।

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प्रश्न 7.
निबंध लेखन की क्या प्रक्रिया बताई गई है? पाठ के आधार पर बताएँ।
उत्तर-
निबंध लेखन के लिए कोई एक शिल्प विधान निर्धारित नहीं किया जा सकता। निबंध साहित्य का एक स्वतंत्र अंग है। अतः इसे नियमों में नहीं बाँधा ज़ा सकता। लेकिन सुगठित निबंध लिखने के लिए तीन बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए-विषय-निरूपण या भूमिका, व्याख्या तथा निष्कर्ष।

विद्यार्थियों को भूमिका के रूप में विषय का संक्षिप्त परिचय देना चाहिए। जिस दृष्टिकोण से निबंध लिखा जाय, उसी दृष्टिकोण से भूमिका भी लिखी जानी चाहिए। विश्लेषण निबंध का सार अंश है। यहाँ विद्यार्थी को विषय का विश्लेषण कर समुचित रूप से उसपर प्रकाश डालना चाहिए। निष्कर्ष में ऊपर कही गयी बातों का सारांश दो-चार पंक्तियों में बहुत ही सुन्दर ढंग से देना चाहिए। निष्कर्ष वाक्य ऐसे हों कि निबंध के सौंदर्य और सरलता को बढ़ा दें, साथ ही स्थापित विचारों के पोषक हों।

प्रश्न 8.
निबंध के कितने प्रकार होते हैं? भेदों के साथ उनकी परिभाषा भी दें।
उत्तर-
निबंध के तीन मुख्य प्रकार हैं-भावात्मक, विचारात्मक तथा वर्णनात्मक/भावात्मक निबंध में भाव की प्रधानता रहती है और विचारात्मक निबंध में विचार की। विचारात्मक निबंध का आधार चिन्तन है। हृदय से हृदय की आत्मीयता स्थापित करना इस प्रकार के निबंधों का लक्ष्य है। वर्णनात्मक निबंध में विषय-वस्तु के वर्णन की शैली की प्रधानता रहती है।

प्रश्न 9.
निबंध लेखन के अभ्यास से छात्र किन समस्याओं से निजात पा सकता है?
उत्तर-
निबंध लेखन के अभ्यास से छात्र को अज्ञानतावश और स्पर्धावश समस्याओं से निजात मिल सकता है। अज्ञानतावश इसलिए कि वे यह मानते ही नहीं किं निबंध दस पृष्ठों से भी कम का हो सकता है और स्पर्द्धावश इसलिए कि अमुक ने कागज लिया तो में क्यों न लूँ। अगर बातों को सुरुचिपूर्ण ढंग से कहने की कला आती हो तो निबंध अनेक पृष्ठों का भी हो सकता है और उसे पढ़ने में छात्रों को आनंद भी आएगा तथा छात्रों को बढ़ियाँ अंक भी मिलेंगे।

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प्रश्न 10.
निबंध लेखन में कल्पना का क्या महत्व है? ।
उत्तर-
अच्छे निबंध के लिए कल्पनाशक्ति की आवश्यकता है। जीवन में अच्छा करने के लिए कल्पना की जरूरत पड़ती है। कल्पना केवल कलाकारों की चीज नहीं, विज्ञान के मूल में भी कल्पना ही है। कल्पना अज्ञात लोक का प्रवेश द्वार है।

प्रश्न 11.
आचार्य शुक्ल के निबंध किस कोटि में आते हैं और क्यों?
उत्तर-
आचार्य शुक्ल के निबंध प्रबंध, महानिबंध, शोध-प्रबंध, शोध-निबंध की कोटि में आते है। निबंध विचारों की सुनियोजित अभिव्यक्ति है, इसलिए उसमें कसाव होगा, ढीलापन नहीं। आकस्मिक, लेकिन निरन्तर प्रवाह निबंध के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 12.
ललित निबंध की क्या विशेषता होती है?
उत्तर-
वैयक्तिक निबंध को ही आज ललित निबंध कहा जाता है। शास्त्रीय संगीत के गाढ़ेपन को जिस प्रकार थोड़ा घोलकर सुगम संगीत बना दिया गया है, उसी तरह निबंध को भी लोकप्रिय बनाने के लिए उसकी प्राचीन शास्त्रीयता को एक हद तक ढीला करके लालित्य तत्व से मढ़ दिया गया है।

प्रश्न 13.
निबंध को सुरुचिपूर्ण बनाने की दिशा में भाषा के महत्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
निबंध को आकर्षक, विश्वासोत्पदक, तथा रोचक बनाने के लिए विषय से जुड़ना और जुड़कर अपने अनुभवों का तर्कसंगत ढंग से उल्लेख करना नितांत आवश्यक है। आज निबंध आत्मनिष्ठ होते हैं। भाषा के दृष्टिकोण से निबंध की प्रायः दो शैलियाँ हैं-
प्रसाद शैली और समास शैली।
अति साधारण ढंग से सहज-सुगम भाषा में बात कहना प्रसाद शैली है। प्रसाद शैली में गम्भीर से गंभीर भावों को साधारण शब्दों में अभिव्यक्त किया जाता है। किसी बात को कठिन शब्दों में कहना, साधारण भाषा का प्रयोग न कर असामान्य भाषा का प्रयोग समास शैली का लक्ष्य है।

नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. हिंदी निबंध की दुर्दशा का एक कारण यह भी है कि छात्र उसे रबर समझकर मनमानी खींचतान करते हैं, जिससे एक पृष्ठवाला निबंध कम-से-कम दो-तीन पृष्ठों तक खिंच ही जाता है। भारत एक कृषि-प्रधान देश है, भारत एक धर्म-प्रधान देश है’ आदि अनेक ऐसे आर्ष वाक्य हैं, जिनका सदियों से हिंदी-निबंधों में प्रयोग हो रहा है और तब ‘अतएव, अर्थात शैली’ के द्वारा इन वाक्यों को लमारकर पूरे पृष्ठ को भद्दे तरीके से भर दिया जाता है, जैसे “भारत एक कृषि-प्रधान देश है।” अर्थात भारत में कृषि की प्रधानता है। तात्पर्य यह कि भारत में कृषक रहते हैं। कहने का मतलब यह है कि भारत के अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर करते हैं।
(क) लेखक तथा पाठ के नाम लिखें।
(ख) हिंदी निबंध में बहुत दिनों से प्रयुक्त होनेवाले कुछ आर्ष वाक्य लिखें। उन्हें लोग किस रूप में प्रयुक्त कर विकृत कर देते हैं?
(घ) पाठ लेखक के लिए कैसी आवृत्तियों से बचने की लेखक ने
सलाह दी है? उदाहरण देकर बताएँ।
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-निबंध, लेखक-जगदीश नारायण चौबे

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(ख) लेखक के अनुसार निबंध की दुर्दशा का एक विशिष्ट कारण यह है कि छात्र निबंध-लेखन में खींच-तान के प्रयास से उसके आकार को नावश्यक रूप से लंबा कर देते हैं। इस तरह एक पृष्ठ में समाप्त होनेवाले निबंध को वे दो-तीन पृष्ठों तक खींचकर ले जाते हैं और निबंध के स्वरूप को विकृत कर उबाऊ कर देते हैं।

(ग) हिंदी निबंध में बहुत दिनों से प्रयुक्त होनेवाले कुछ आर्ष वाक्य इस तरह के हैं-

  1. भारत एक कृषि-प्रधान देश है,
  2. भारत एक धर्म-प्रधान देश है आदि। इन वाक्यों को लंबाकर इसे विकृत रूप में लिखकर प्रस्तुत किया जाता है-भारत एक कृषि-प्रधान देश है अर्थात भारत में कृषि की प्रधानता है। तात्पर्य यह कि भारत में प्रधान रूप से कृषक रहते हैं।

(घ) लेखक का कहना है कि पाठ लेखक के लिए यह आवश्यक है कि वे उपर्युक्त आवृत्तियों ‘अतएव’, ‘अर्थात् ‘, ‘तात्पर्य यह है’ आदि के अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से मुक्त भाषा-शैली को अपनाकर निबंध के आकार को संतुलित और आकर्षक स्वरूप दें। अन्यथा उनका निबंध ‘दुर्दशा’ का पात्र और परिचायक बनकर रह जाएगा।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने अच्छे निबंधों के स्वरूपगत वैशिष्टय पर प्रकाश डाला है। उसने छात्रों को निर्देश दिया है कि वे रबर समझकर खींच-तान के प्रयास से निबंध’को अनावश्यक रूप से लंबा न करें। इसी तरह ‘अतएव’, अर्थात् तथा ‘तात्पर्य यह है’ आदि फालतू शब्दों का व्यर्थ प्रयोग न कर निबंध के स्वरूप को विकृत होने से बचाएँ।

2. अच्छे निबंध के लिए कल्पनाशक्ति की आवश्यकता है। यूँ भी कुछ अच्छा करने के लिए जीवन में कल्पना की जरूरत पड़ी है। कल्पना केवल कलाकारों की चीज नहीं है, विज्ञान के मूल में भी कल्पना ही है। किसी भी चीज को सुंदर और सुरुचिपूर्ण बनाने के लिए कल्पना
से काम लेना अत्यावश्यक हो जाता है। कल्पना अज्ञातलोकं का प्रवेशद्वार है। इसका सहारा लेकर एक ही विषय पर हजारों छात्र हजारों प्रकार के निबंध लिख सकते हैं, जबकि “परिचय, लाभ-हानि, उपसंहार” वाली पुरातन नीति पर लिखे गए हजार निबंध लगभग एक ही तरह के होते हैं। बिलकुल पिटी-पिटाई लीक। एकदम एक-सी पहुँच और पकड़। कहीं भी नवीनता या नियंत्रण नहीं।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) निबंध के साथ-साथ कल्पना-शक्ति का, किन विषयों से और किस रूप में लगाव और महत्त्व है?
(ग) कल्पना-शक्ति को लेखक ने क्या माना है? निबंध-लेखन के क्षेत्र में इसकी क्या उपयोगिता है?
(घ) पुरातन रीति से लिखे गए निबंधों की क्या पहचान है? उसके – क्या दोष हैं?
(ङ) इस गद्यांश का सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-निबंध, लेखक-जगदीश नारायण चौबे

(ख) लेखक की दृष्टि में सफल निबंध के लिए लेखक को कल्पना-शक्ति से संपन्न होना चाहिए। इससे निबंध बड़े रोचक होते हैं। निबंध-लेखन क्षेत्र के अतिरिक्त कल्पनाशक्ति जीवन में कुछ अच्छा करके दिखाने के लिए भी एक आवश्यक तत्त्व है। कल्पना-शक्ति कलाकारों से जुड़ी चीज तो है ही, यह विज्ञान के मूल में भी एक आवश्यक तत्त्व के रूप में क्रियाशील रहती है। इसी तरह किसी चीज को संदर और आकर्षक बनाने के संदर्भ में भी कल्पना-शक्ति की अनिवार्यता

(ग) “निबंध’ पाठ के लेखक की नजर में ‘कल्पना अज्ञात लोक का प्रवेशद्वार है। इस कल्पना-शक्ति का प्रयोग कर एक ही विषय पर हजारों छात्र हजारों ढंग से, हजारों प्रकार के सुरूचिपूर्ण निबंधों को आकर्षक रूप में लिखकर प्रस्तुत कर सकते हैं। इस रूप में कल्पनाशक्ति के उपयोग से सुरुचिपूर्ण ढंग से लिखे हुए निबंध ग्राह्य हो जाते हैं।

(घ) पुरातन रीति पर, अर्थात ‘परिचय, लाभ-हानि’ उपसंहार आदि शब्दों से प्रयुक्त लिखे निबंधों की पहचान और दोष यह है कि वे निबंध अनेक की संख्या में लिखे जाने पर भी सभी एक ही प्रकार और स्वरूप के होते हैं। उनमें कहीं भी नवीनता नहीं होती है और उनकी पहुँच और पकड़ एकदम समान होती है।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने पुरातन-पद्धति से लिखे गए निबंधों की विकृति और अग्राह्यता पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को कल्पना तत्त्व ऐसे नवीन निबंध तत्त्व का उपयोग करने की सलाह दी है। निबंधकार की यह मान्यता है कि कल्पना-शक्ति के उपयोग से निबंध का स्वरूप आकर्षक, नवीन तथा ग्राह्य हो जाता है।

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3. यूँ तो कल्पना और व्यक्तिगत अनुभवों के मेल से बढ़िया निबंध लिखे जा सकते हैं, परंतु निबंध को अगर वजनदार बनाना हो तो तीसरा तत्त्व भी है। विषय से संबंधित आँकड़े, पुस्तकीय ज्ञान, पत्र-पत्रिकाओं की सूचनाएँ तथा विभिन्न लेखों-निबंधों से प्राप्त जानकारियाँ, इन सबों का. यथास्थान उल्लेख करने से निबंध को विचारपूर्ण बनाया जा सकता है। ध्यान इतना जरूर रखना होगा कि परीक्षा में इस तरह के निबंध बहुत ऊबाऊ अथवा बहुत शोधमुखी न हो जाएँ। डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी और डॉ. विद्यानिवास मिश्र के वैयक्तिक निबंध इस कोटि में आते हैं, लेकिन वे कहीं से भी उबाऊ प्रतीत नहीं होते।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) लेखक के अनुसार निबंध को वजनदार बनाने के लिए तीसरा तत्त्व क्या है और उसकी क्या उपयोगिता है?
(ग) हिंदी के किन्हीं दो वैयक्तिक निबंधकार के नाम और उनके निबंधों की किसी एक विशेषता का उल्लेख करें।
(घ) परीक्षा में निबंध लिखने में किन-किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय/सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-निबंध, लेखक-जगदीश नारायण चौबे

(ख) निबंधकार के अनुसार निबंध को वजनदार बनाने का तीसरा तन्न है-विषय से संबंधित आँकड़े, किताबी ज्ञान, पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित बहुविध सूचनाएँ और विभिन्न लेखों से मिलनेवाली जानकारियाँ। इन्हें संतुलित रूप से उपयोग में लाने से निबंध को हम विचारपूर्ण निबंध की संज्ञा दे सकते हैं। ऐसे विचारपूर्ण निबंध बड़े आकर्षक और ऊबाऊपन के दोषः से सर्वथा मुक्त रहते हैं।

(ग) हिंदी के ढेर सारे वैयक्तिक निबंधकारों में डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी और डॉ. विद्यानिवास मिश्र विशेष चर्चित हैं। इनके द्वारा लिखे गए वैयक्तिक निबंधों की ऐसे तो कई विशेषताएँ परिलक्षित होती हैं, लेकिन उनमें एक खास विशेषता यह होती है कि ऐसे निबंध विचार-प्रधान होते हैं और किसी रूप में ऊबाऊ न होकर हर रूप में आकर्षक और ग्राह्य होते हैं।

(घ) परीक्षा में वैयक्तिक निबंध लिखने में यह ध्यान देना लाजिमी है कि ये निबंध बोझिल, ऊबाऊ और शोधमुखी न होकर सहज, सरल, सरस तथा आकर्षक हों। परीक्षा में सामान्य रूप से ऐसे निबंधों को इस विकृत रूप में प्रस्तुत किया जाता है कि वे शोधमुखी, बोझिल और ऊबाऊ हो जाते हैं।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने लेख निबंध के तीन तत्त्वों-कल्पना, व्यक्तिगत अनुभव और विषय से संबद्ध आँकडों, सूचनाओं और जानकारियों की चर्चा कर तीसरे तत्त्व की सार्थकता और उपयोगिता-विशेष पर बल दिया है। लेखक की दृष्टि में तीसरे तत्त्व के उपयोग से निबंध विचारपूर्ण, शोधमुखी तथा आकर्षक हो जाते हैं और उसमें ग्रहणशीलता का गुण बढ़ जाता है।

4. निबंध कहाँ से शुरू करें और कहाँ खत्म करें, यह भी छात्र पूछते नजर आते हैं। यूँ शुरू तो कहीं से भी किया जा सकता है, उस पंक्ति से भी जिसे खत्म करना तय कर लिया है। फिर भी ‘प्रारंभ’ ऐसा रोचक हो कि पाठक पढ़ने के लिए लालायित हो उठे। प्रारंभिक पंक्तियों में उत्सुकता जगानेवाली क्षमता जरूर होनी चाहिए। ‘भारत अब कृषि-प्रधान देश नहीं है’, ‘मैं अपनी गाय बेचना चाहता हूँ’, “एक प्याली चाय की कीमत अब चार रुपये हो जाएगी’, ‘कल से चाय पीना-पिलाना बंद’ जा सकता है। अंत करना तो बहुत आसान है। जहाँ लगे कि अब मेरे पास कहने को कुछ नहीं, बस वहीं और उसी क्षण लिखना बंद कर
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) निबंध-लेखन के कार्य में छात्र क्या पूछा करते हैं?
(ग) लेखक के अनुसार निबंध के प्रारंभ की क्या विशेषता होनी चाहिए?
(घ) निबंध के विषय-प्रवेश के लिए नमूने के रूप में कुछ वाक्य प्रस्तुत करें।
उत्तर-
(क) पाठ-निबंध, लेखक-जगदीश नारायण चौबे

(ख) निबंध-लेखन के कार्य में छात्र अक्सर यह पूछा करते हैं कि निबंध लिखना हम कहाँ से शुरू करें और उसे कहाँ समाप्त करें। यह सवाल छात्र इसलिए , पूछते हैं कि वे जानते हैं कि निबंध के प्रारंभ और अंत के अंश बड़े महत्त्वपूर्ण होते हैं। इन दो अंशों के आकर्षक रहने पर निबंध की सफलता समझी जाती है।

(ग) लेखक के अनुसार निबंध का प्रारंभ रोचक और पाठकों के लिए आकर्षक होना चाहिए। इसके साथ-ही-साथ निबंध की प्रारंभिक पंक्तियों में पाठकों के मन में उत्सुकता जगानेवाली क्षमता होनी चाहिए। यदि निबंध के प्रारंभ में ये गुण व्याप्त हैं, तभी वे पाठकों के मन को आकर्षित करेंगे और पाठक उसे पढ़ने के लिए लालायित हो उठेंगे। यह निबंध के प्रारंभ की विशेषता होनी चाहिए कि वह निबंध के मकान के लिए सुंदर और भव्य प्रवेश-द्वार बन सके।

(घ) निबंध में प्रवेश के लिए नमूने के रूप में हम इन कुछ वाक्यों को उपस्थित कर सकते हैं-

(क) भारत अब कृषि-प्रधान देश नहीं है।
(ख) मैं अपनी गाय बेचना चाहता हूँ।
(ग) एक प्याली चाय की कीमत अब चार रुपये हो जाएगी।
(घ) कल से चाय पीना-पिलाना बंद। ये वाक्य ऐसे कुछ नमूने हैं जिनको प्रयोग में लाकर हम निबंध के विषय में प्रवेश करने के लिए साधन-संपन्न हो सकते हैं।]

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(ङ) लेखक के अनुसार निबंध का अंत करना बिलकुल सामान्य और आसान बात है। इसके लिए किसी खास सावधानी तथा विषय के चयन की आवश्यकता नहीं है। निबंध-लेखक को जहाँ यह लगे कि अब उस निबंध के लिए उसके पास कुछ कहने को नहीं बचा है, बस उसे वहीं तत्काल लिखना बंद कर निबंध लेखन में पूर्णविराम लगा देना चाहिए। इस कार्य में मोह-ममतावश कुछ इससे अधिक लिखने की कोई जरूरत नहीं है। निबंध का ऐसा ही स्वाभाविक अंत विशिष्ट और उत्तम माना जाता है।

5. पाठ लेखक का कर्तव्य है कि छात्र को सही भाषा प्रयोग-संबंधी उदाहरण अपने लेखन के जरिए ही दें, क्योंकि एक अवस्था तक छात्रों की धारणा रहती है कि हिंदी जितनी अलंकृत और अस्वाभाविक होगी, अंक उतने ही अधिक मिलेंगे। भाषा सहज हो। लिखने के समय भी वह उतनी ही सहज रहे, जितनी सोचने के समय रहती है। बीच-बीच में मोहवश ऐसे शब्द न खोंसें, जिन्हें निर्ममतापूर्वक दूसरा आदमी उखाड़ या नोच दे। वाक्य छोटे हों। बड़े-बड़े वाक्य तभी लिखें, जब भाषा की गति को सँभालने और नियंत्रित करने के गुण आ जाएँ। भाषा पर अधिकार हो जाने के उपरांत तो हम जैसा चाहें, वैसा लिख सकते हैं, लेकिन अपने पाठक का ध्यान तब भी उसे रखना होगा। निबंध को सुरुचिपूर्ण बनाने की दिशा में भाषा के महत्त्व को बराबर ध्यान में रखना होगा, तभी मेहनत सार्थक होगी।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) एक अवस्था तक निबंध-लेखन में छात्रों की भाषा-संबंधी क्या गलत धारणा रहती है?
(ग) छात्रों की भाषा-संबंधी गलत अवधारणा को कैसे दूर किया जा सकता है?
(घ) निबंध में कब छोटे वाक्यों की जगह बड़े वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए? निबंध को कैसे सुरूचिपूर्ण बनाया जा सकता
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय/सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-निबंध, लेखक-जगदीश नारायण चौबे

(ख) निबंध लिखने के क्रम में एक अवस्था तक छात्रों की यह गलत धारणा रहती है कि निबंध की भाषा जितनी अलंकृत, अस्वाभाविक तथा सजी-धजी होगी उस निबंध में उतने ही अधिक अंक मिलेंगे। इसलिए छात्र सहज भाषा का प्रयोग नहीं करते। निबंधकार की दृष्टि में छात्रों की यह धारणा बिलकुल गलत है। अलंकृत भाषा से सजे निबंध कभी भी सफल नहीं कहे जा सकते।

(ग) छात्रों की भाषा-संबंधी इस गलत धारणा को काफी सुगम और सामान्य रूप से दूर किया जा सकता है। इसके लिए उनहें निबंध को सहज भाषा में लिखना चाहिए। भाषा की यह सहजता जिस रूप में निबंध-लेखन के समय रहे, उसी रूप में उसे सोचने के समय भी रहना चाहिए। निबंध-लेखक को बीच-बीच में मोहवश निर्ममतापूर्वक अग्राह्य शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(घ) निबंध में बड़े-बड़े वाक्यों को छोड़कर छोटे-छोटे वाक्य लिखना चाहिए। इससे निबंध को समझने में सरलता बनी रहती है। निबंध के नए लेखकों को उसी समय बड़े-बड़े वाक्य लिखना चाहिए जब उनमें भाषा की गति को नियंत्रित करने और सँभालकर रखने की क्षमता आ जाए। अर्थात्, भाषा पर पहले अधिकार हो जाए तभी वे छोटे-छोटे वाक्यों की जगह बड़े-बड़े वाक्य लिख सकते हैं। निबंध को सुरुचिपूर्ण बनाने के लिए हमें भाषा के महत्त्व को बराबर ध्यान में रखकर उसी के अनुसार निबंध को लिखना होगा।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 निबंध

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने सफल निबंध के लिए अपेक्षित भाषा-शैली-संबंधी कुछ बातें लिखी हैं। निबंधकार का कहना है कि विद्यार्थी निबंध लेखक को निबंध में अलंकृत और अस्वाभाविक भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्हें हर स्थिति में यह सावधानी बरतनी चाहिए प्रयुक्त वाक्य छोटे-छोटे हों। बड़े-बड़े वाक्य वे तब लिखें जब उनमें भापा की गति को सँभालने और नियंत्रित करने की क्षमता आ जाए। भाषा के महत्त्व को ध्यान में रखकर ही सुरुचिपूर्ण निबंधों का लेखन किया जा सकता है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण InText Questions and Answers

अनुच्छेद 1.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
उत्तर:
मैग्नीशियम रिबन की सतह पर उपस्थित मैग्नीशियम ऑक्साइड की सतह को साफ करने के लिए दहन से पूर्व इसे रेगमाल से साफ किया जाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए संतुलित समीकरण लिखिए –
1. हाइड्रोजन + क्लोरीन→ हाइड्रोजन क्लोराइड
2. बेरियम क्लोराइड + ऐलुमिनियम सल्फेट→ बेरियम सल्फेट + ऐलुमिनियम क्लोराइड
3. सोडियम + जल → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
उत्तर:
1. H2 + Cl2 → 2HCl
2. 3BaCl2 + Al2(SO4)2 → 3BaSO4 + 2AICl3
3. 2Na+ 2H2O → 2NaOH + H2     

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए उनकी अवस्था के संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए –
1. जल में बेरियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा अघुलनशील बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं।
2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन
(जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा जल बनाते हैं।
उत्तर:
1. BaCl2 (aq) + Na2SO2(aq) → BaSO2(s) + 2NaCl(aq)
2. NaOH (aq) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H2O

अनुच्छेद 1.2, 1.2.1 और 1.2.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
किसी पदार्थ ‘x’ के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है।
(i) पदार्थ ‘X’ का नाम तथा इसका सूत्र लिखिए।
(ii) ऊपर (i) में लिखे पदार्थ ‘X’ की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
(i) पदार्थ ‘x’ का नाम कैल्सियम ऑक्साइड है। इसका सूत्र Cao है।
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प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 1.7 में एक परखनली में एकत्रित गैस की मात्रा दूसरी से दोगुनी क्यों है? उस गैस का नाम बताइए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि जल का एक अणु हाइड्रोजन के दो तथा ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर बनता है इसलिए यह वैद्युत अपघटन की प्रक्रिया में हाइड्रोजन के दो तथा ऑक्सीजन का एक परमाणु देता है। अतः हाइड्रोजन गैस की मात्रा ऑक्सीजन से दोगुनी होती है।

अनुच्छेद 1.2.3 से 1.3.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है? (2018)
उत्तर:
लोहा, कॉपर की अपेक्षा अधिक क्रियाशील तत्त्व है इसलिए यह कॉपर सल्फेट विलयन में से कॉपर को विस्थापित कर देता है। अभिक्रिया का समीकरण निम्नवत् है –
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अभिक्रिया के फलस्वरूप विस्थापित कॉपर लोहे की कील पर जम जाता है तथा आयरन सल्फेट का विलयन प्राप्त होता है जिसका रंग कॉपर सल्फेट के विलयन से हल्का होता है।

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प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 1.10 से भिन्न द्विविस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जब सिल्वर नाइट्रेट विलयन में सोडियम क्लोराइड विलयन मिलाया जाता है तो सिल्वर क्लोराइड का एक सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है। यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है। अभिक्रिया का समीकरण निम्नवत् है –
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प्रश्न 3.
निम्न अभिक्रियाओं में उपचयित तथा अपचयित पदार्थों की पहचान कीजिए –
(i) 4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
(ii) CuO(s) + H2(g)→ Cu(s) + H2O(l)
उत्तर:
उपचयित होने वाला पदार्थ सोडियम (Na) तथा अपचयित होने वाला पदार्थ ऑक्सीजन (O2) है।
(ii) उपचयित होने वाला पदार्थ हाइड्रोजन (H2) तथा अपचयित होने वाला पदार्थ कॉपर ऑक्साइड (CuO) है।

Bihar Board Class 10 Science रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
नीचे दी गयी अभिक्रिया के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
2Pbo(s) + C(s) → 2Pb(s) + CO2(g)
(i) सीसा अपचयित हो रहा है।
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड उपचयित हो रहा है।
(iii) कार्बन उपचयित हो रहा है।
(iv) लेड ऑक्साइड अपचयित हो रहा है।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (i) एवं (iii)
(c) (i) ,(ii) एवं (iii)
(d) ये सभी
उत्तर:
(a) (i) एवं (ii)

प्रश्न 2.
Fe2O3 + 2Al → Al2O3 +2Fe
ऊपर दी गयी अभिक्रिया किस प्रकार की है?
(a) संयोजन अभिक्रिया ।
(b) द्विविस्थापन अभिक्रिया
(c) वियोजन अभिक्रिया
(d) विस्थापन अभिक्रिया
उत्तर:
(d) विस्थापन अभिक्रिया

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प्रश्न 3.
लौह-चूर्ण पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने से क्या होता है? सही उत्तर पर निशान लगाइए।
(a) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।
(b) क्लोरीन गैस एवं आयरन हाइड्रॉक्साइड बनता है।
(c) कोई अभिक्रिया नहीं होती है।
(d) आयरन लवण एवं जल बनता है।
उत्तर:
(a) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।

प्रश्न 4.
संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
संतुलित रासायनिक समीकरण वह समीकरण है जिसमें अभिकारक तथा उत्पाद, दोनों ही ओर, रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्येक परमाणु की संख्या समान हो।
उदाहरणार्थ: 2H2 + O2 → 2H2O
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ‘द्रव्यमान संरक्षण नियम’ को दर्शाने के लिए रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक होता है।

प्रश्न 5.
निम्न कथनों को रासायनिक समीकरण के रूप में परिवर्तित कर उन्हें संतुलित कीजिए
(a) नाइट्रोजन हाइड्रोजन गैस से संयोग करके अमोनिया बनाता है।
(b) हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का वायु में दहन होने पर जल एवं सल्फर डाइऑक्साइड बनता है।
(c) ऐलुमिनियम सल्फेट के साथ अभिक्रिया कर बेरियम क्लोराइड, ऐलुमिनियम क्लोराइड एवं बेरियम सल्फेट का अवक्षेप देता है।
(d) पोटैशियम धातु जल के साथ अभिक्रिया करके पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देती है।
उत्तर:
(a) 3H2(g) + N2(g) → 2NH2 (g)
(b) 2H2S(g) + 3O2(g) → 25O2(8) + 2H2O(l)
(c) 3BaCl2 (aq) + Al2(SO4)3(aq) → 2AlCl3(aq) + 3BaSO4
(d) 2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH (aq) + H2T

प्रश्न 6.
निम्न रासायनिक समीकरणों को संतुलित कीजिए (2009)
(a) HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2+ H2O
(b) NaOH + H2SO4→ Na2SO4 + H2O
(c) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3
(d) BaCl2 + H2SO4→ BaSO4 + HCl
उत्तर:
(a) 2HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2+ 2H2O
(b) 2NaOH + H2SOA → Na2SO4+ 2H2O
(c) NaCl + AgNO3→ AgCl+ NaNO3 (यह पहले से ही संतुलित है)
(d) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + 2HCl

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प्रश्न 7.
निम्न अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए
(a) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल
(b) जिंक + सिल्वर नाइट्रेट → जिंक नाइट्रेट + सिल्वर
(c) ऐलुमिनियम + कॉपर क्लोराइड→ ऐलुमिनियम क्लोराइड + कॉपर
(d) बेरियम क्लोराइड +पोटैशियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + पोटैशियम क्लोराइड
उत्तर:
(a) Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
(b) Zn + 2AgNO3 → Zn (NO3)2 + 2Ag
(c) 2Al + 3Cucl2 → 2AlCl3 + 3Cu
(d) BaCl2 +K2SO4 → BaSO4 + 2KCl

प्रश्न 8.
निम्न अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए एवं प्रत्येक अभिक्रिया का प्रकार बताइए
(a) पोटैशियम ब्रोमाइड (aq) + बेरियम आयोडाइड (aq) → पोटैशियम आयोडाइड (aq) + बेरियम ब्रोमाइड (υ)
(b)जिंक कार्बोनेट (s) → जिंक ऑक्साइड (s) + कार्बन डाइऑक्साइड (g)
(c) हाइड्रोजन (g) + क्लोरीन (g) → हाइड्रोजन क्लोराइड (g)
(d) मैग्नीशियम (s) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (aq) → मैग्नीशियम क्लोराइड (aq) + हाइड्रोजन (g)
उत्तर:
(a) 2KBr (aq) + BaI2(aq) → 2KI (aq) + BaBr2(s); यह सन्तुलित तथा द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
(b) ZnCO3(s) → ZnO(s) + CO2(g); यह सन्तुलित तथा वियोजन अभिक्रिया है।
(c) H2(g) + Cl2(g)→ 2HCl(g); यह सन्तुलित तथा संयोजन अभिक्रिया है।
(d) Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g); यह सन्तुलित तथा विस्थापन अभिक्रिया है।

प्रश्न 9.
ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है? उदाहरण दीजिए। (2010)
उत्तर:
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा भी उत्पन्न होती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरणार्थः प्राकृतिक गैस का दहन
CH4 (g) + 2O2(g)→ CO2(g) + 2H2O(g) + ऊष्मा

ऊष्माशोषी अभिक्रिया:
जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में ऊर्जा अवशोषित होती है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरणार्थः
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प्रश्न 10.
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं; क्योंकि इसके अन्तर्गत भोजन छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है जो हमारे शरीर को कार्य करने की शक्ति प्रदान करती है। श्वसन क्रिया कों समीकरण रूप में निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –
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प्रश्न 11.
वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर:
वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है; क्योंकि वियोजन अभिक्रिया में एकल यौगिक वियोजित होकर दो अथवा अधिक पदार्थ देता है जबकि संयोजन अभिक्रिया में दो अथवा अधिक पदार्थ संयोग करके एकल उत्पाद प्रदान करते हैं।
उदाहरणार्थः
CaCO3(s)→ Cao(s) + CO2(g) (वियोजन अभिक्रिया)
CaO(g) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq) (संयोजन अभिक्रिया)

प्रश्न 12.
उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें ऊष्मा, प्रकाश एवं विद्युत के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
उत्तर:
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प्रश्न 13.
विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
विस्थापन अभिक्रिया जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में एक तत्त्व दूसरे तत्त्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है, उन्हें विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरणार्थः
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द्विविस्थापन अभिक्रिया:
जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में दो अलग-अलग परमाणु या परमाणुओं के समूह (आयन) का आपस में आदान-प्रदान होता है, उन्हें द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरणार्थः
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प्रश्न 14.
सिल्वर के शोधन में, सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 15.
अवक्षेपण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जिस अभिक्रिया में अवक्षेप (विलयन में अघुलनशील यौगिक) का निर्माण होता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
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प्रश्न 16.
ऑक्सीजन के योग या ह्रास के आधार पर निम्न पदों की व्याख्या कीजिए। प्रत्येक के लिए दो उदाहरण दीजिए –
(a) उपचयन
(b) अपचयन
उत्तर:
(a) उपचयन किसी अभिक्रिया में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का ह्रास उपचयन कहलाता है।
उदाहरणार्थ:
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(b) अपचयन किसी अभिक्रिया में ऑक्सीजन का ह्रास या हाइड्रोजन का योग अपचयन कहलाता है।
उदाहरणार्थ:
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प्रश्न 17.
एक भूरे रंग का चमकदार तत्त्व ‘x’ को वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर वह काले रंग का हो जाता है। इस तत्त्व ‘x’ एवं उस काले रंग के यौगिक का नाम बताइए।
उत्तर:
तत्त्व ‘X’ कॉपर (Cu) है तथा काले रंग के यौगिक का नाम कॉपर ऑक्साइड (CuO) है।

प्रश्न 18.
लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?
उत्तर:
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने से उसकी अभिक्रिया वायु में उपस्थित नमी व ऑक्सीजन से नहीं हो पाती है तथा वह जंग लगने से बच जाती है।

प्रश्न 19.
तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है? (2009)
उत्तर:
तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से ये खाद्य पदार्थ वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ऑक्सीकृत नहीं होते। इस प्रकार खाद्य पदार्थ को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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प्रश्न 20.
निम्न पदों का वर्णन कीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए (2009)
(a) संक्षारण
(b) विकृतगंधिता
उत्तर:
(a) संक्षारण जब कोई धातु अपने आस-पास अम्ल, आर्द्रता आदि के सम्पर्क में आती है तब यह संक्षारित होती है और इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। चाँदी के ऊपर काली परत व ताँबे के ऊपर हरी परत चढ़ना संक्षारण के प्रमुख उदाहरण हैं।
(b) विकृतगंधिता जब वसा और तेल तथा उनमें बनाये गये खाद्य पदार्थ वाय की ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सीकृत हो जाते हैं तो उनमें एक विशेष गंध आने लगती है तथा उनका स्वाद भी खराब हो जाता है। इस प्रक्रिया को ही विकृतगंधिता कहते हैं। अचार व मुरब्बों का खुली वायु में रखने पर खराब हो जाना विकृतगंधिता का प्रमुख उदाहरण है।

Bihar Board Class 10 Science रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + 2HCl किस प्रकार की अभिक्रिया है?
(a) संयोजन अभिक्रिया
(b) वियोजन अभिक्रिया
(c) विस्थापन अभिक्रिया
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया
उत्तर:
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया

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प्रश्न 2.
घरों में सफेदी करने के लिए निम्न में से किस यौगिक का प्रयोग होता है?
(a) Ca(OH)2
(b) CaCO3
(c) Cuo
(d) NaNO3
उत्तर:
(a) Ca(OH)2

प्रश्न 3.
अपचयन की प्रक्रिया में
(a) ऑक्सीजन का ह्रास होता है
(b) हाइड्रोजन का ह्रास होता है
(c) ऑक्सीजन का योग होता है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ऑक्सीजन का ह्रास होता है

प्रश्न 4.
2FeCl3+ 2 H2O + y → 2FeCl2 + H2 SO4 + 2 HCI
रासायनिक अभिक्रिया में है (2018)
(a) S
(b) H2S
(c) SO2
(d) Cl2
उत्तर:
(c) SO2

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रासायनिक संघटन किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो या दो से अधिक परमाणुओं अथवा अणुओं का संयोग जिससे रासायनिक यौगिक बनता है, उस यौगिक का रासायनिक संघटन कहलाता है।

प्रश्न 2.
अभिकारक तथा उत्पाद को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
जो पदार्थ रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं, अभिकारक कहलाते हैं तथा इन अभिक्रियाओं में उत्पन्न होने वाले नए पदार्थ उत्पाद कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
रासायनिक समीकरण में अभिकारक तथा उत्पाद किस प्रकार लिखे जाते हैं?
उत्तर:
रासायनिक समीकरण में अभिकारक बाईं ओर लिखे जाते हैं। एक से अधिक अभिकारक होने पर इनके मध्य ‘+’ का चिह्न लगाया जाता है। उत्पादों को समीकरण के दाईं ओर लिखा जाता है तथा इनके मध्य भी ‘+’ का चिह्न लगा दिया जाता है। अभिकारकों तथा उत्पादों के मध्य एक तीर लगाया जाता है जिसकी दशा उत्पादों की ओर होती है। यह तीर अभिक्रिया की दिशा का बोध कराता है।
उदाहरणार्थ:
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प्रश्न 4.
असन्तुलित समीकरण क्या है?
उत्तर:
एक असन्तुलित समीकरण में अभिकारकों तथा उत्पादों के तत्वों में से एक या एक से अधिक तत्वों के परमाणुओं की संख्या असमान होती है।

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प्रश्न 5.
सन्तुलित रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक तथा प्राप्त उत्पादों में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान होने पर समीकरण सन्तुलित रासायनिक समीकरण कहलाती है।

प्रश्न 6.
विद्युत वियोजन क्या होता है?
उत्तर:
जब किसी पदार्थ का विद्युत धारा प्रवाहित करने पर अपघटन हो जाता है तो यह प्रक्रम विद्युत वियोजन कहलाता है।

प्रश्न 7.
उपचयन किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह अभिक्रिया जिसमें एक रासायनिक स्पीशीज इलेक्ट्रॉनों का ह्रास करती है, उपचयन कहलाती है।

प्रश्न 8.
अपचयन क्या है?
उत्तर:
वह अभिक्रिया जिसमें एक रासायनिक स्पीशीज इलेक्ट्रॉन प्राप्त करती है, अपचयन कहलाती है।

प्रश्न 9.
उपचायक किसे कहते हैं?
उत्तर:
अभिक्रिया में वह पदार्थ जो अन्य पदार्थ को उपचयित कर देता है, उपचायक कहलाता है।

प्रश्न 10.
अपचायक किसे कहते हैं?
उत्तर:
अभिक्रिया में वह पदार्थ जो अन्य पदार्थ को अपचयित करता है, अपचायक कहलाता है।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए –
(i) जिंक धातु जलीय हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कर जिंक क्लोराइड का विलयन तथा हाइड्रोजन गैस बनाती है।।
(ii) जब ठोस मरकरी (II) ऑक्साइड को गर्म करते हैं, तब द्रव मरकरी तथा ऑक्सीजन गैस उत्पन्न होती हैं।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए
1. सल्फ्यूरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन परस्पर अभिक्रिया करके जलीय सोडियम सल्फेट और जल बनाते हैं।
2. फॉस्फोरस क्लोरीन गैस में जलकर फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड निर्मित करता है।
उत्तर:
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरणों को सन्तुलित कीजिए –

  1. Ba(OH)2 (aq) + HBr(aq) → BaBr2(aq) + H2O(l)
  2. KCN(aq)+ H2SO4(aq) + K2SO4(aq)+ HCN(g)
  3. Al(s) + HCl(aq) → AICl3(aq) + H2(g)
  4. 4CH4(g)+ O2(g) → CO2(g)+ H2O(l)

उत्तर:
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प्रश्न 4.
(a) क्या होता है जब सोडियम सल्फेट विलयन को बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाया जाता है?
(b) उपर्युक्त अभिक्रिया की सन्तुलित समीकरण लिखिए। (2010)
उत्तर:
(a) जब सोडियम सल्फेट विलयन को बेरियम क्लोराइड विलयन में मिलाया जाता है तो Baso, का सफेद अवक्षेप बनता है। सोडियम क्लोराइड अन्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है जो विलयन में शेष रह जाता है।
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प्रश्न 5.
संयोजन और वियोजन अभिक्रियाओं में क्या अन्तर है? प्रत्येक अभिक्रिया का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
संयोजन तथा वियोजन अभिक्रियाओं में अन्तर –
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प्रश्न 6.
ऊष्मीय वियोजन तथा आयनिक वियोजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऊष्मीय वियोजन तथा आयनिक वियोजन में अन्तर –

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 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रासायनिक समीकरण क्या है? इससे क्या-क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर:
रासायनिक समीकरण जिस प्रकार प्रतीक किसी तत्व के एक परमाणु और सूत्र पदार्थ के एक अणु को व्यक्त करता है, उसी प्रकार रासायनिक समीकरण से वास्तविक रासायनिक अभिक्रिया व्यक्त होती है। किसी रासायनिक अभिक्रिया में भिन्न-भिन्न अणु भाग लेते हैं और उनमें उपस्थित परमाणुओं अथवा मूलकों की अदला-बदली के पश्चात् नए प्रकार के अणु बनते हैं। इन सब अणुओं को सूत्रों द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
उदाहरणार्थ:
सोडियम क्लोराइड और सिल्वर नाइट्रेट की अभिक्रिया को सूत्रों की सहायता से निम्नलिखित प्रकार से निरूपित किया जा सकता है –Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
यहाँ पर AgNO3 और NaCl अभिकारक तथा AgCl और NaNO3 परिणामी अथवा उत्पाद हैं। रासायनिक अभिक्रिया को इस प्रकार निरूपित करने को रासायनिक समीकरण (chemical equation) कहते हैं। इस प्रकार “किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारकों तथा अभिक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले उत्पादों या परिणामी पदार्थों को प्रतीकों तथा सूत्रों द्वारा निरूपित करने को रासायनिक समीकरण कहते हैं।” कैल्सियम कार्बोनेट पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से कैल्सियम क्लोराइड और जल बनते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। इस अभिक्रिया के लिखने का स्वरूप अर्थात् रासायनिक समीकरण निम्नवत् है।
CaCO3 + 2HCl → CaCl2 + H2O + CO2
रासायनिक समीकरण से निम्नलिखित तथ्यों की जानकारी प्राप्त होती है

  1. रासायनिक समीकरण से, रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों का ज्ञान हो जाता है।
  2. रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न उत्पादों का ज्ञान हो जाता है।
  3. रासायनिक समीकरण में अभिकारकों तथा उत्पादों के परमाणुओं तथा अणुओं की संख्या का बोध होता है। दूसरे शब्दों में, उनकी मोल संख्या का बोध होता है; क्योंकि किसी पदार्थ के प्रतीक या सूत्र से उस पदार्थ के एक मोल का बोध होता है।
  4.  रासायनिक अभिक्रिया के अभिकारकों तथा उत्पादों की मोल संख्या ज्ञात होने पर उनके द्रव्यमान की जानकारी प्राप्त होती है।
  5. रासायनिक अभिक्रिया में यदि कोई अभिकारक या उत्पाद गैसीय अवस्था में है तो उसके आयतन की जानकारी प्राप्त होती है। क्योंकि किसी गैस के एक ग्राम अणुभार का आयतन मानक ताप तथा दाब पर 22.4 लीटर होता है; अत: गैसीय पदार्थों के अणुओं की संख्या को 22.4 लीटर से गुणा करके उसका आयतन ज्ञात कर लेते हैं।
  6. रासायनिक अभिक्रिया के अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। इससे द्रव्यमान संरक्षण के नियम (पदार्थों के अविनाशिता के नियम) की पुष्टि होती है।

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प्रश्न 2.
रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया जब एक या एक-से-अधिक पदार्थ परस्पर अभिक्रिया करके नए पदार्थ बनाते हैं तो ऐसी अभिक्रिया को ‘रासायनिक अभिक्रिया’ कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
मैग्नीशियम जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करता है तो मैग्नीशियम क्लोराइड व हाइड्रोजन गैस बनती है। इस अभिक्रिया को निम्नलिखित समीकरण से प्रदर्शित करते हैं –
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इस अभिक्रिया में, मैग्नीशियम तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को अभिकारक (reactants) तथा मैग्नीशियम क्लोराइड व हाइड्रोजन को परिणामी या उत्पाद (resultants or product) कहते हैं। इस सम्पूर्ण क्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारकों) तथा बनने वाले पदार्थों (उत्पादों) को रासायनिक सूत्रों द्वारा समीकरण के रूप में दर्शाने को अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण कहते हैं।

रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार:
मुख्य रूप से रासायनिक अभिक्रिया निम्नलिखित प्रकार की होती है –
1. संयोजन अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें दो या दो-से-अधिक प्रकार के पदार्थों के अणु परस्पर जुड़कर केवल एक ही प्रकार के पदार्थ के अणु बनाते हैं। उदाहरणार्थ:
(i) सोडियम (Na) धातु, क्लोरीन (Cl) में जलकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) बनाती है –
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(ii) कार्बन मोनोक्साइड (CO) तथा क्लोरीन (Cl2) की क्रिया से कार्बोनिल क्लोराइड (COCl2) बनता है –
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(iii) मैग्नीशियम (Mg), वायु अथवा ऑक्सीजन में जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड (Mgo) बनाता है –
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मैग्नीशियम ऑक्सीजन मैग्नीशियम ऑक्साइड संयोजन अभिक्रियाओं में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन; जैसे-ऐल्कीन अथवा ऐल्काइन अणु का किसी परमाणु अथवा परमाणु समूह से योग होता है तथा असंतृप्त अणु का कोई भाग अणु से पृथक् नहीं होता है। एथिलीन (C2H4) तथा ऐसीटिलीन (C2 H2) हैलोजेन, हाइड्रोजन, सल्फ्यूरिक अम्ल, हाइड्रोजन सायनाइड, ऐल्कोहॉल आदि से संयोजन अभिक्रियाएँ करते हैं।
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इनमें असंतृप्त यौगिक असंतृप्तता कम करके संतृप्त यौगिकों में परिवर्तित हो जाता है।

2. वियोजन अभिक्रिया वियोजन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें कोई यौगिक
अपने अवयवी तत्वों अथवा छोटे-छोटे सरल यौगिकों में वियोजित हो जाता है। यह अभिक्रिया ऊष्मा, प्रकाश अथवा विद्युत द्वारा सम्पन्न होती है। वियोजन अभिक्रिया निम्नलिखित दो प्रकार की होती है
(a) ऊष्मीय-वियोजन (Thermal decomposition) “जब किसी पदार्थ के वियोजन की अभिक्रिया ऊष्मा देने पर होती है तो उसे ऊष्मीय वियोजन कहते हैं।”
उदाहरणार्थ:
(i) पोटैशियम क्लोरेट का वियोजन पोटैशियम क्लोरेट (KClO) को गर्म करने पर यह पोटैशियम क्लोराइड (KCI) तथा ऑक्सीजन में वियोजित होता है –
Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण - 26
(ii) कैल्सियम कार्बोनेट का वियोजन कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर यह कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड में वियोजित होता है –
Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
(iii) फेरस सल्फेट का वियोजन फेरस सल्फेट को गर्म करने पर यह फेरिक ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा सल्फर ट्राइऑक्साइड में वियोजित होता है –
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(iv) मरकरी ऑक्साइड का वियोजन मरकरी ऑक्साइड को गर्म करने पर यह मरकरी तथा ऑक्सीजन में वियोजित होता है –

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

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(b) विद्युत वियोजन (Electrolysis or electrolytic decomposition) “जिस रासायनिक अभिक्रिया में यौगिक (गलित अवस्था में या जलीय विलयन में) का विद्युत प्रवाहित करने पर वियोजन होता है, उसे विद्युत वियोजन कहते हैं।’
उदाहरणार्थ:
(i) सोडियम क्लोराइड का विद्युत-वियोजन गलित सोडियम क्लोराइड में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह सोडियम तथा क्लोरीन में वियोजित हो जाता है
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(ii) जल का विद्युत-वियोजन जब अम्लीय जल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो जल हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में वियोजित हो जाता है।
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(iii) ऐलुमिनियम ऑक्साइड का विद्युत-वियोजन गलित ऐलुमिनियम ऑक्साइड में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह ऐलुमिनियम तथा ऑक्सीजन में वियोजित हो जाता है –
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3. विस्थापन या प्रतिस्थापन अभिक्रिया विस्थापन वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें किसी यौगिक के अणु के किसी एक परमाणु अथवा समूह (मूलक) के स्थान पर कोई दूसरा परमाणु अथवा समूह (मूलक) आ जाता है।
उदाहरणार्थ:
(i) लोहा (Fe), कॉपर सल्फेट (CuSO4) विलयन में से कॉपर को विस्थापित करके स्वयं आ जाता है। फलस्वरूप, फेरस सल्फेट तथा कॉपर (Cu) बनते हैं।
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(ii) मैग्नीशियम (Mg), क्यूप्रिक क्लोराइड के विलयन से कॉपर को विस्थापित करके स्वयं उसका स्थान ले लेता है तथा कॉपर और मैग्नीशियम क्लोराइड बनते हैं।
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(iii) जब जिंक (Zn), सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ क्रिया करता है तो सल्फ्यूरिक अम्ल की हाइड्रोजन को विस्थापित करके उसका स्थान स्वयं ले लेता है। इसके फलस्वरूप, जिंक सल्फेट बनता है तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है –
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(iv) साधारण अवस्था में ओलीफिन (olefins) विस्थापन अभिक्रिया नहीं देते हैं किन्तु उच्च ताप पर इनमें भी प्रतिस्थापन हो जाता है; जैसे-एथिलीन को क्लोरीन के साथ 450-650°C ताप पर गर्म करने से एथिलीन का एक हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन के परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है –
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4. उभय-प्रतिस्थापन या द्वि-विस्थापन अभिक्रिया:
जिस रासायनिक अभिक्रिया में यौगिकों के आयनों अथवा घटकों की अदला-बदली (विनिमय) हो जाती है तथा नए यौगिक बनते हैं, वह उभय-प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। यह अभिक्रिया यौगिकों के विलयनों के मध्य होती है।
उदाहरणार्थ:
(i) जब बेरियम क्लोराइड के विलयन में सोडियम सल्फेट का विलयन मिलाते हैं तो बेरियम सल्फेट व सोडियम क्लोराइड बन जाते हैं –

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(ii) जब कॉपर सल्फेट के विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन मिलाते हैं तो कॉपर हाइड्रॉक्साइड व सोडियम सल्फेट बन जाते हैं Cuso. + 2NaOH
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(iii) जब फेरिक क्लोराइड के विलयन में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन मिलाते हैं –
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(iv) जब सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में सोडियम क्लोराइड का विलयन मिलाते हैं तो सिल्वर क्लोराइड व सोडियम नाइट्रेट बन जाते हैं –
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में पहचान कीजिए कि किस पदार्थ का उपचयन (ऑक्सीकरण) और किस पदार्थ का अपचयन होता है? पदार्थ के उपचयन और अपचयन की आयनिक अभिक्रियाएँ लिखिए –

  1. H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
  2. H2(g) + Cuo(s) → Cu(s) + H2O(l)
  3. 2H2S(g) + SO2(g) → 3S(s)+2H2O(l)
  4. Zn(s) + 2AgNO3(aq) → Zn(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
  5. 2Al(s)+6HCl(aq) → 2AICI3(aq) + 3H2(g)

उत्तर:
1. H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन का उपचयन (ऑक्सीकरण) होता है और क्लोरीन का अपचयन होता है।
आयनिक अभिक्रिया –
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2. H2(g) + Cu0(s) → Cu(s) + H2O(l)
इस अभिक्रिया में H2 उपचयित होती है और Cu0 अपचयित होता है।
आयनिक अभिक्रिया –
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3. 2H2S(g)+ SO2(g) → 3S(s) + 2H2O(l)
इस अभिक्रिया में H2S उपचयित होता है और SO2 अपचयित होती है।
आयनिक अभिक्रिया –
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4. Zn(s) + 2AgNO3(aq) → Zn(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
इस अभिक्रिया में AgNO का अपचयन होता है तथा जिंक उपचयित होता है।
आयनिक अभिक्रिया –
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5. 2Al(s) + 6HCl(aq) → 2ACl3(aq) + 3H2(g)
इस अभिक्रिया में ऐलुमिनियम उपचयित होता है तथा हाइड्रोजन अपचयित होती है।
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आयनिक अभिक्रिया –
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Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 19 मानव शरीर के आंतरिक अंग

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 19 मानव शरीर के आंतरिक अंग Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 19 मानव शरीर के आंतरिक अंग

Bihar Board Class 7 Science मानव शरीर के आंतरिक अंग Notes

मनुष्य के शरीर के अंदर बहुत सारे अंग हैं। ये अंग बाहर से दिखाई नहीं पड़ते हैं। आन्तरिक अंग एक भी खराब हो जाए तो हमारा शरीर अस्वस्थ हो जाता है। स्वास्थ्य ठीक रहने के लिए आन्तरिक अंग बिल्कुल ठीक-ठाक होना अनिवार्य है। ये अंग प्रतिदिन काम करते हैं। इन अंगों को सही तरह से काम करने के लिए हमें पोषक तत्व आहार के रूप में लेना पड़ता है। ये अंग भिन्न-भिन्न तरह के कार्य करते हैं। शरीर के विभिन्न अंगों के बारे में – परिचय करते हैं जो इस प्रकार हैं

1. गुर्दे (किडनी) यह खून में घुले अपशिष्ट पदार्थ को छानकर मूत्र द्वारा बाहर निकाल देता है और रक्त चाप को निर्यात्रत करता है।

2. मस्तिष्क – यह शरीर के सभी अंगों के बीच तालमेल रखता है। यह विचारों और भावनाओं को जन्म देता है। यादाश्त रखता है, विभिन्न तंत्रिकाओं और ज्ञानेन्द्रियों से सूचनाएं प्राप्त करता है। दिल और दूसरे अंगों को प्रभावित करता है। यह पीयूष ग्रंथि के संपर्क में रहता है। मस्तिष्क का स्वस्थ रहना अनिवार्य है।

3. मुँह और ग्रासनली का ऊपरी हिस्सा – भोजन का पाचन, मुँह में दाँतों द्वारा भोजन को चबाने और लार के मिलने से शुरू होता है। चबाया हुआ भोजन गले से निगलने के बाद ग्रास नली में पहुँचता है। निगलने के समय एक बाल्ब हवा जाने के रास्ते को बंद करता है। यह क्रिया अपने-आप होती है। खाने के समय बोलना या जल्दी खाना नहीं खाना चाहिए।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 19 मानव शरीर के आंतरिक अंग

4. आमाशय-इसे पेट भी कहते हैं। निगला हुआ भोजन यहाँ जमा होता है। यह अमाशय के रस से मिलकर छोटी आंत में जाता है।

5. फेफड़ा-मनुष्य को दो फेफड़े होते हैं। एक दायाँ दूसरा बायाँ । ऑक्सीजन युक्त हवा फेफड़ा में जाता है। हृदय को रक्त द्वारा ऑक्सीजन पहुँचता है। पुनः कार्बन डाइऑक्साइड अंगों से लौटकर बाहर निकलता है।

6. हृदय-हृदय हमेशा धड़कता रहता है। ये कभी रूकता नहीं है। स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन लगभक एक लाख बार हृदय धड़कता है। धमनी से शरीर को ऑक्सीजन प्रदान करता है और फेफड़ों से CO2 बाहर निकालता

7. मूत्रनली – मूत्रनली द्वारा मूत्र गुर्दो से मूत्राशय तक पहुँचती है।

8. छोटी आँत – भोजन छोटी आंत के अगले भाग से शुरू होकर कई मोड़ों से गुजरते हुए पचता है और पचने के बाद छोटी आंत इसके पोषक तत्वों को खून में भेजती है और ठोस पदार्थ को अंधनली और बड़ी आंत में भेजती

9. बड़ी आँत-इसमें चढ़ने वाली और उतरने वाली नली है जिसका मुंह मलद्वार में खुलता है। यह अधिकांशतः मल निकालने का काम करता है। लेकिन आवश्यक पदार्थों का शोषण करता है।

10. गर्भाशय, अंडेनलियाँ, योनि–महावरी चक्र में निषेचित अण्ड के लिए गर्माशय में एक स्तर बनता है। अगर गर्भ न ठहरे तो खून के साथ बाहर निकल आता है और नए चक्र का आरम्भ होता है।

11. मूत्राशय मूत्र मार्ग-मूत्र गुर्दो से निकलकर नीचे आता है और मांसपेशियों से बनी थैली में जमा होता है। इस थैली के भर जाने पर मूत्र या पेशाब बाहर के मार्ग से बाहर निकलता है।

12. लिंग, वृषण, शुक्राणु नली-शुक्राणु वृष्ण में उत्पन्न होकर शुक्राणु नली, वीर्य थैली, प्रोस्टेट ग्रंथि और वीर्य नीली के रास्ते लिंग तक ‘पहुँचता है। यहाँ से इनका वीर्य के साथ स्खलन हो जाता है। पेशाब एक नली में प्रोस्टेट ग्रंथि और लिंग में से होकर बाहर आता है।

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13. जिगर पित्ताशय-यह जैव रासायनिक कारखाना है जो अपशिष्ट पदार्थ को दूर करता है। ऊर्जा प्रोटीन संतुलन पर नियंत्रण रखता है। पितशय में यॊचत पित्त छोटी आंत के आगे के भाग में चर्बी (वसा) को पचाने में मदद करता है।

14. प्लीहा – पुरानी इस्तेमाल हो चुकी लाल रक्त कोशिकाओं को छानकर नष्ट करता है।

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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के कम-से-कम चार उपर्युक्त बहुविकल्पीय वाक्यों की रचना करें –

  1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?
  2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?
  3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?
  4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?
  5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

उत्तर:

1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?

  • कीमत
  • कपड़ा
  • डिजाइन
  • फिटिंग

2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?

  • चार
  • दो
  • तीन
  • एक बार

3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?

  • हिन्दुस्तान
  • नवभारत टाइम्स
  • दैनिक जागरण
  • पंजाब केसरी

4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?

  • न्यायोचित है
  • न्यायोचित नहीं है
  • (a) व (b) दोनों विकल्प गलत हैं
  • सभी विकल्प सही हैं

5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

  • 2,000 रुपये से 5,000 रुपये तक
  • 5,000 से 10,000 रुपये तक
  • 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक
  • 15,000 रुपये तक

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प्रश्न 2.
पाँच द्विमार्गी प्रश्नों की रचना करें (हाँ/नहीं) के साथ।
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प्रश्न 3.
सही विकल्प को चिह्नित करें –

(क) आँकड़ों के अनेक स्रोत होते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ख) आँकड़ा-संग्रह के लिए टेलीफोन सर्वेक्षण सर्वाधिक उपयुक्त विधि है, विशेष रूप से जहाँ पर जनता निरक्षर हो और दूर-दराज के काफी बड़े क्षेत्रों में फैली हो (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ग) सर्वेक्षक/शोधकर्ता द्वारा संग्रह किए गए आँकड़े द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

(घ) प्रतिदर्श के अयादृच्छिक चयन में पूर्वाग्रह (अभिनति) की संभावना रहती है (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ङ) अप्रतिचयन त्रुटियों को बड़ा प्रतिदर्श अपनाकर कम किया जा सकता है (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या आपको इन प्रश्नों में कोई समस्या दिख रही है? यदि हाँ, तो कैसे?
(क) आप अपने सबसे नजदीक के बाजार से कितनी दूर रहते हैं?
(ख) यदि हमारे कूड़े में प्लास्टिक थैलियों की मात्रा 5 प्रतिशत है तो क्या इन्हें निषेधित किया जाना चाहिए?
(ग) क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध नहीं करेंगे?
(घ) क्या आप रासायनिक उर्वरक के उपयोग के पक्ष में हैं?
(ङ) (अ) क्या आप अपने खेतों में उर्वरक इस्तेमाल करते हैं?
(ब) आपके खेत में प्रति हेक्टेयर कितनी उपज होती है?
उत्तर:
(क) मैं अपने सबसे नजदीक के बाजार से 6 किमी. दूर रहता हूँ।

(ख) पर्यावरण के हिसाब से प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग हानिकारक है। प्लास्टिक अविघटनीय पदार्थ है, इसलिए यह भू-प्रदूषण पैदा करता है। प्लास्टिक थैलियाँ नालियों एवं पाइपों में पानी के बहाव को अवरुद्ध करती हैं।

(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध अवश्य होना चाहिए, क्योंकि इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमत भी बढ़ जायेगी।

(घ) फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही होना चाहिए। उर्वरकों के अधिक प्रयोग से भू एवं जल प्रदूषण होता है।

(ङ)
(अ) हाँ, मैं विवेकपूर्ण तरीके से अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करता हूँ।
(ब) 50 क्विंटल प्रति हेक्टेअर।

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प्रश्न 5.
आप बच्चों के बीच शाकाहारी आटा नूडल की लोकप्रियता का अनुसंधान करना चाहते हैं। इस उद्देश्य से सूचना-संग्रह करने के लिए एक उपयुक्त प्रश्नावली बनाएँ।
उत्तर:
प्रश्नावली –

  1. क्या आप शाकाहारी आटा नूडल का इस्तेमाल करते हैं?
  2. क्या आपको इसका स्वाद दूसरों से अच्छा लगता है?
  3. आप एक दिन में कितनी बार इसका प्रयोग करते हैं?
  4. प्रतिदिन इस पर आप कितना खर्च करते हैं?
  5. आप इसे किसलिए पसंद करते हैं?
  6. क्या आपको अपने स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर दिखाई पड़ता है?
  7. क्या आप इसके स्थान पर कुछ और प्रयोग करना चाहेंगे?

प्रश्न 6.
200 फार्म वाले एक गाँव में फसलें उत्पादन के स्वरूप पर एक अध्ययन आयोजित किया गया। इनमें से 50 फार्मों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 50 प्रतिशत पर केवल गेहूँ उगाए जाते हैं। यहाँ पर समष्टि और प्रतिदर्श को पहचान कर बताएँ।
उत्तर:
समष्टि 200 खेत हैं और प्रतिदर्श 50 खेत हैं।

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प्रश्न 7.
प्रतिदर्श, समष्टि तथा चर के दो-दो उदाहरण।
उत्तर:
(क) प्रतिदर्श (Sample):

  • एक विद्यालय में 2,000 विद्यार्थी हैं। इनमें से 100 विद्यार्थियों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 100 विद्यार्थी ही प्रतिदर्श हैं।
  • एक गाँव में 30 खेत हैं। उनमें से 3 खेतों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 5 खेत प्रतिदर्श के उदाहरण हैं।

(ख) समष्टि (Population):

  • एक पाठशाला में 100 विद्यार्थी पढ़ते हैं। 100 समग्र का उदाहरण है।
  • एक गाँव में 100 परिवार हैं। उसका सर्वेक्षण किया गया। 100 परिवार समग्र हैं।

(ग) चर (Variable):

  • कक्षा XI के विद्यार्थियों की ऊँचाई
  • जुलाई के महीने में दिल्ली में हुई प्रतिदिन वर्षा।

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प्रश्न 8.
इनमें से कौन सी विधि द्वारा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और क्यों?
(क) गणना (जनगणना)
(ख) प्रतिदर्श
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च बहुत कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अत: उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छा तालमेल हो सकता है।

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन-सी त्रुटियाँ अधिक गंभीर हैं?
(क) प्रतिचयन त्रुटियाँ
(ख) अप्रतिचयन त्रुटियाँ।
उत्तर:
अप्रतिचयन त्रुटियाँ प्रतिचयन त्रुटियों से अधिक गंभीर हैं, क्योंकि प्रतिचयन त्रुटियों के बड़े प्रतिदर्श लेकर कम किया जा सकता है। परंतु अप्रतिचयन त्रुटियों को कम नहीं किया जा सकता। चाहे हम कितना भी बड़ा छोटा प्रतिदर्श क्यों न लें।

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प्रश्न 10.
मान लीजिए आपकी कक्षा में 10 छात्र हैं। इनमें से आपको तीन को चुनना है तो इसमें कितने प्रतिदर्श संभव हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का आकार (N) = 10
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह part - 2 img 2

प्रश्न 11.
अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 को चुनने के लिए लाटरी विधि का उपयोग कैसे करेंगे? चर्चा करें?
उत्तर:
लाटरी द्वारा 10 में 3 छात्रों का चुनाव करना (Selecting 3 students out of 10 students by lottery):

  1. एक जैसी आकार तथा आकृति वाली 10 पर्चियाँ बनाएँगे।
  2. इन पर्चियों पर छात्रों के नाम लिखेंगे। एक पर्ची पर एक नाम लिखा जाएगा।

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प्रश्न 12.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
लाटरी विधि द्वारा हमेशा यादृच्छिक प्रतिचयन ही प्राप्त होता है। इस विधि में प्रत्येक इकाई को शामिल किया जाता है। अतः प्रत्येक इकाई के चुनाव की समान संभावना रहती है। इस विधि में सभी प्रतिभागियों के पर्चियों पर नाम लिखें जाते हैं और उन पर्चियों को एक डिब्बे में डालकर, अच्छी तरह हिलाकर, किसी निष्पक्ष व्यक्ति से उतनी पर्चियाँ एक-एक करके निकलवायी जाती हैं जितने प्रत्याशियों का चुनाव करना होता है, अथवा लोगों को नम्बर वाले टिकट प्रदान किए जाते हैं। टिकटों को बक्से में डालकर, मशीन में हिलाकर, निश्चित संख्या में टिकट निकालकर चयन किया जाता है।

प्रश्न 13.
यादृच्छिक संख्या सारणी का उपयोग करते हुए, अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 छात्रों के चयन के लिए यादृच्छिक प्रतिदर्श की चयन प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
10 विद्यार्थियों को 01, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 09, 10 अंक प्रदान करते हैं। इन संख्याओं में से किसी एक संख्या का दैव आधार पर चयन कर लिया जाता है। अगली दो क्रमागत संख्याओं का और चुनाव करके 3 छात्रों का चयन कर लिया जाता है। माना दैव आधार पर चुनाव की गई संख्या 3 है, तो चयनित छात्रों की संख्याएँ होगी 3, 4 व 5।

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प्रश्न 14.
क्या सर्वेक्षणों की अपेक्षा प्रतिदर्श बेहतर परिणाम देते हैं? अपने उत्तर की कारण सहित व्याख्या करें।
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना. एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अतः उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छी तालमेल हो सकती है।

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संग्रह Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संपूर्ण सर्वेक्षण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
संपूर्ण सर्वेक्षण में समष्टि की प्रत्येक इकाई से संबंधित सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं।

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प्रश्न 2.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में संगणना सर्वेक्षण की अपेक्षा कौन-कौन सा गुण पाया जाता है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समय, धन तथा श्रम की बचत होती है।

प्रश्न 3.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
इसमें संदेह नहीं कि लाटरी सबसे अधिक प्रचलित और सरल विधि है और यादृच्छिक प्रतिदर्श का एक रूप है। परंतु लाटरी विधि हमें हमेशा यादृच्छिक प्रतिदर्श नहीं देती, क्योंकि यह विधि संयोग (Chance) पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 4.
सामान्य विकल्प प्रश्न किसे कहते हैं?
उत्तर:
सामान्य विकल्प प्रश्न उन प्रश्नों को कहते हैं, जिनके उत्तर ‘प्राय’ हाँ या नहीं सही या गलत के रूप में दिए जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
बहु-विकल्प प्रश्नों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
बहु-विकल्प प्रश्नों से अभिप्राय उन प्रश्नों से है जिनके कई संभव उत्तर हो सकते हैं। ये उत्तर प्रश्नावली में ही छिपे होते हैं।

प्रश्न 6.
आँकड़ों की शुद्धता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों की शुद्धता से अभिप्रायः तथ्य या घटना का यथार्थ वर्णन करने वाले आँकड़ों से है।

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प्रश्न 7.
सांख्यिकी आँकड़ों के पूर्ण शुद्ध न होने के दो कारण बताएँ।
उत्तर:
अनुसंधानकर्ता की अपूर्णता, माप, यंत्रों एवं उपकरणों की अपूर्णता।

प्रश्न 8.
अभिनत त्रुटियों के उत्पन्न होने के दो कारण लिखें।
उत्तर:
सूचनाओं की संकलन विधि का दोषपपूर्ण होना तथा आंकड़ों के व्यवस्थितीकरण का दोषपूर्ण होना।

प्रश्न 9.
आवृत्तियों का विन्यास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आवृत्तियों के विन्यास से अभिप्राय प्रत्येक वर्ग में आने वाली पदों की गणना करके उसकी आवृत्तियों को लिखना है।

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प्रश्न 10.
प्रवेश-पत्रिका के कोई दो लाभ लिखें?
उत्तर:
प्रवेश पत्रिका से –

  1. किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
अनुरोध-पत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुरोध-पत्र से अभिप्राय उस पत्र से है जिसके द्वारा अनुसंधानकर्ता अपना परिचय और अनुसंधान के उद्देश्य का विवरण सूचक को देता है।

प्रश्न 12.
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि क्या है?
उत्तर:
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि वह विधि है जिसके अंतर्गत समग्र की सभी इकाइयों को किसी एक आधार (संख्यात्मक, भौगोलिक या अक्षरात्मक द्वारा क्रमबद्ध किया जाता है।

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प्रश्न 13.
प्रतिचयन अतंराल की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रतिचयन अंतराल = समष्टि का आकार

प्रश्न 14.
प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
ये वे आँकड़े होते हैं, जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने उद्देश्यों के अनुकूल सबसे पहले संकलित करता है या गणकों द्वारा संकलित करवाता है।

प्रश्न 15.
द्वितीयक आँकड़े क्या होते हैं?
उत्तर:
यदि किसी दूसरी संस्था द्वारा प्राथमिक तौर पर प्राप्त आँकड़ों को संगृहीत एवं संशोधित (संवीक्षित एवं सारणीकृत) किया जाता है तो इन आँकड़ों को दूसरी संस्था के लिए द्वितीयक आँकड़े कहते हैं।

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प्रश्न 16.
प्रश्नावली किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रश्नावली प्रश्नों की वह सूची है, जिसकी आवश्यकता जानकारी स्वयं-सूचकों द्वारा प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 17.
द्वितीयक आँकड़े संकलित करते समय कौन सी तीन सावधानियां बरतनी चाहिए?
उत्तर:

  1. विश्वसनीयता
  2. अनुकूलता
  3. पर्याप्तता

प्रश्न 18.
एक प्रश्नावली में प्रश्नों की कितनी संख्या होनी चाहिए?
उत्तर:
एक उचित संख्या जो उत्तरदाइओं को हतोत्साहित नहीं करे।

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प्रश्न 19.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Sample Survey) क्या है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समष्टि में से कुछ चुनी हुई प्रतिनिधि इकाइयों के विषय में आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं।

प्रश्न 20.
प्रतिचयन की प्रचलित विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. यादृच्छिक प्रतिचयन
  2. स्तरित प्रतिचयन
  3. बहु-स्तरीय प्रतिचयन
  4. गुच्छा प्रतिचयन

प्रश्न 21.
यादृच्छिक प्रतिचयन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन में समष्टि में से इकाइयाँ इस प्रकार छाँटी जाती हैं, ताकि प्रत्येक इकाई के प्रतिदर्श में सम्मिलित होने की बराबर संभावना हो।

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प्रश्न 22.
समष्टि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुसंधान क्षेत्र की संपूर्ण इकाइयों को समष्टि कहते हैं।

प्रश्न 23.
प्रतिदर्श से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रतिदर्श समष्टि की इकाइयों का वह भाग है जो पूर्ण समष्टि के अध्ययन हेतु चुना जाता है।

प्रश्न 24.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण किस प्रकार के अनुसंधान के लिए अधिक उपयुक्त है?
उत्तर:

  1. अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत हो
  2. समष्टि अनन्त हो
  3. समष्टि की किसी इकाई को परखने से उसका विनाश हो जाए

प्रश्न 25.
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्त्रत कौन-से हैं?
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –

  1. माप की त्रुटियाँ
  2. गणितीय त्रुटियाँ
  3. प्रश्नों का गणक या सूचक द्वारा सही समझ न पाना
  4. रिकॉर्ड करने में त्रुटियाँ

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प्रश्न 26.
जनगणना 2001 के प्रकाशन से हमें तालिका के रूप में जो जिलेवार जन्म तथा मृत्युदर के आँकड़े प्राप्त हुए हैं क्या आप उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहेंगे या द्वितीयक आँकड़ें?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़े।

प्रश्न 27.
अप्रतिचयन त्रुटियाँ क्यों उत्पन्न होती हैं? एक कारण लिखें?
उत्तर:
सूचकों की लापरवाही या भूल से।

प्रश्न 28.
प्रतिदर्श अभिनीति क्या हैं?
उत्तर:
ये वे त्रुटियाँ जो गणकों के पक्षपाती (पूर्वाग्रहित) व्यवहार के कारण पैदा होती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मापन अशुद्धि तथा दर्ज (लेखन) गलतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
मापन अशुद्धियाँ (Measurement Errors):
मापन अशुद्धियों से अभिप्राय उन अशुद्धियों से है जो माप के कारण पैदा होती हैं। ये अशुद्धियाँ मापन यंत्र के दोषपूर्ण होने से उत्पन्न होती है या माप को निकटतम इकाई तक लाने में हो सकती हैं।

लेखन (दर्ज) गलतियाँ (Recording Mistakes):
सूचनाओ को गलत कॉलम में लिखने से अधूरी सूचना दर्ज करने से या गंदा लेख (अस्पष्ट लेख) के कारण उत्पन्न गलतियों को दर्ज गलतियाँ कहते हैं। मान लें गणक 13 के स्थान पर प्रश्नावली में 31 लिख देता है। इस प्रकार की गलती दर्ज गलती कहलाएगी।

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प्रश्न 2.
आँकड़ों के संकलन की प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान विधियों में तीन अंतर बताएँ।
उत्तर:
प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान में अंतर।
(Differences Between Direct Personal Investigation and Indirect Oral Investigation)
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प्रश्न 3.
अनुसंधानकर्ता, गणक तथा सूचक को परिभाषित कीजिए?
उत्तर:

  1. अनुसंधानकर्ता (Investigator): अनुसंधानकर्ता उस विशेष व्यक्ति को कहते हैं, जो अनुसंधान कार्यों को अपनाता है।
  2. गणक (Enumerator): गणक उस व्यक्ति विशेष को कहते हैं जो अनुसंधान” को तथ्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।
  3. सूचक (Respondent): सूचना देने वाले व्यक्ति को सूचक कहते हैं।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. मितव्ययी (Economical): इस विधि के द्वारा एक बड़े समूह के छोटे से भाग का अध्ययन किया जाता है। अत: समय व धन की बचत होती है।
  2. वैज्ञानिक (Scientific): यह विधि वैज्ञानिक भी है, क्योंकि बड़े समूह में से एक अन्य प्रतिदर्श लेकर परिणामों की शुद्धता की जाँच की जा सकती है।
  3. विश्वसनीय (Reliable): यदि प्रतिदर्श प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा ध्यानपूर्वक लिया गया हो तो प्राप्त निष्कर्ष भी शुद्ध रहते हैं।
  4. सरल (Simple): यह विधि बहुत सरल है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।

प्रश्न 5.
यादृच्छिक प्रतिचयन को परिभाषित करें। यह मनमाने निदर्शन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन (Random Sampling):
यादृच्छिक प्रतिचयन को प्रतिनिधि प्रतिचयन भी कहते हैं। यह प्रतिचयन की वह विधि है, जिसके अंतर्गत समष्टि की प्रत्येक इकाई की प्रतिचयन की तरह किसी प्रकार का पक्षपात नहीं होता। उदाहरण के लिए, यदि हमने 1,200 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल में 60 का प्रतिदर्श चुनने हैं तो इस विधि के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिदर्श में चुनने जाने की संभावना समान है। इस प्रकार इकाइयों का चुनाव पक्षपात या व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से प्रभावित नहीं होता। इसमें अनुसंधानकर्ता की अपनी मर्जी नहीं चलती। इस विधि के अंतर्गत लाटरी विधि अथवा होल घुमाकर प्रतिदर्श चुना जाता है।

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प्रश्न 6.
प्राथमिक आँकड़ों को एकत्रित करने की प्रश्नावली विधि समझाइए।
उत्तर:
प्रश्नावली विधि में आँकड़ों का एकत्रीकरण प्रश्नावलियों की सहायता से किया जाता है। अनुसंधान के लिए जिन-जिन बातों के संबंध में आँकड़े एकत्रित करने होते हैं, उनके लिए कुछ प्रश्नों की एक सूची (प्रश्नावली) बना ली जाती है। प्रश्नावली में दिए प्रश्नों के उत्तर के आधार पर संबंधित आँकड़ों का एकत्रीकरण किया जाता है। प्रश्नावली विधि के मुख्य रूप है –

  1. डाक द्वारा प्रश्नावली भेजना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता प्रश्नावली को डाक द्वारा सूचना देने वालों के पास भेज देता है। वे उसे भरकर निश्चित तिथि तक लौटा देते हैं।
  2. प्रगणकों द्वारा प्रश्नावली भरना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता कुछ प्रणगकों को नियुक्त करता है, जो घर-घर जाकर सूचकों से पूछाताछ करके स्वयं प्रश्नावलियाँ भरते हैं।

प्रश्न 7.
एक अच्छी प्रश्नावली में कौन-कौन से गुणों का होना आवश्यक है?
उत्तर:
एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

  1. प्रश्न संक्षिप्त तथा स्पष्ट होने चाहिए।
  2. प्रश्नों की संख्या उचित होनी चाहिए।
  3. प्रश्न सरल तथा समझने में आसान हों।
  4. प्रश्न ऐसे हो जिनका उत्तर हाँ या नहीं में दिया जा सके।
  5. उत्तर एक-दूसरे से मेल खाते हों।
  6. कुछ विशेष प्रकार के प्रश्न, जैसे चरित्र से संबंधित नहीं पूछे जाने चाहिए।
  7. प्रश्नावली का पूर्व परीक्षण एवं संशोधन आवश्यक है।

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प्रश्न 8.
द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत निम्न हैं –

  1. सरकार प्रशासन जैसे: (Statistical Abstract of India (Annual); Reserve bank of India Bulletin, Census of India आदि।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन जैसे: The U.N. Statistical Year Book, Annual Report of I.M.F.आदि।
  3. अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन जैसे: नगरपालिकाओं, जिला समितियों, पंचायतों आदि द्वारा प्रकाशित जन्म-मरण स्वास्थ्य, शिक्षा इत्यादि।
  4. समितियों व आयागों की रिपोर्ट, जैसे-वित्त आयोग, एकाधिकार कमीशन इत्यादि।
  5. व्यापारिक संस्थाओं व परिषदों के प्रकाशित रिपोर्ट जैसे: Hindustan Lever LTD., General Insurance Co. इत्यादि।
  6. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री, जैसे: Economic Times (Daily), Business Today (Weekly) आदि।
  7. अनुसंधान संस्थाओं के प्रकाशन।
  8. वेबसाइट (इंटरनेट)।

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प्रश्न 9.
द्वितीयक आँकड़ों के प्रयोग में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं? किन्हीं तीन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. उद्देश्य व क्षेत्र (Purpose & Scope):
सर्वप्रथम यह देख लेना चाहिए कि प्राथमिक रूप से जब प्रस्तुत आँकड़े एकत्रित किए गए थे, जो अनुसंधान के उद्देश्य के क्षेत्र वही थे, जिनके लिए उनका अब द्वितीयक आँकड़ों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

2. शुद्धता की मात्रा (Degree of Accuracy):
इस बात पर भी विचार करना आवश्यक है कि प्रस्तुत आँकड़ों में शुद्धता का स्तर क्या रखा गया था और उसे प्राप्त करने में कितनी सफलता हुई।

3. font partahaf at great (Ability of Last investigation):
यह भी देखना चाहिए कि द्वितीयक आँकड़े पहले किस अनुसंधानकर्ता द्वारा प्राथमिक रूप से कि विधि द्वारा एकत्र किए गए थे। यदि इन प्रश्नों का उत्तर संतोषजनक प्राप्त होता है तो इन आँकड़ों का प्रयोग किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा सूचकों को प्रश्नावली भेजने के क्या गुण तथा दोष हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण (Advantages of Direct Interview):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण निम्नलिखित हैं –

  1. सूचना अधिक स्पष्ट होती है।
  2. इस विधि के द्वारा संकलित आँकड़े अधिक शुद्ध तथा विश्वसनीय होते हैं।
  3. सूचना देने वाले को प्रश्न पूछने का उद्देश्य बताकर उसे विश्वास में लिया जा सकता है।
  4. व्यक्तिगत साक्षात्कार लचीला है। अनुसंधानकर्ता अपने प्रश्नों में आवश्यकतानुसार फेर-बदल कर सकता है।
  5. सीमित क्षेत्र में व्यक्तिगत साक्षात्कार बहुत ही उपयोगी है।

दोष (Demerits):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं –

  1. इस विधि में व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना रहती है।
  2. इस विधि में अधिक समय और धन खर्च होता है।
  3. यह एक जटिल विधि है।
  4. इस विधि में प्रशिक्षित, कुशल और निष्पक्ष अनुसंधानकर्ता की आवश्यकता होती है। यदि अनुसंधानकर्ता कुशल, प्रशिक्षित तथा निष्पक्ष नहीं हैं तो परिणाम भ्रामक हो सकते हैं।

सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने के गुण (Advantages of Malting Questionnaries to Respondents):
सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने में निम्नलिखित गुण हैं –

  1. यह विधि वहाँ उपयुक्त है जहाँ सूचना एकत्रित करने का क्षेत्र विस्तृत है।
  2. इस विधि के अंतर्गत सूचनाएँ नियमित रूप से प्राप्त होती हैं।
  3. यह मितव्ययी प्रणाली है।
  4. इसमें पक्षपात की संभावना नहीं होती।

दोष-इस प्रणाली के निम्नलिखित दोष हैं –

  1. सूचक उत्तर गलत खानों में भर सकता है।
  2. सूचक को प्रश्न ठीक तरह से समझ न आए और उसे गलतफहमी हो जाए।
  3. उत्तरों की सत्यता का पता लगाना कठिन हो जाता है।
  4. हो सकता है कि प्रश्नावली वापस न आए।

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प्रश्न 2.
प्राथमिक तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर बताएँ। द्वितीयक आँकड़ों के कम-से-कम तीन स्रोत लिखें।
उत्तर:
प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में अंतर –
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आँकड़ों के तीन स्रोत (Three Sources of Secondary Data):

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. अंतराष्ट्रीय प्रकाशन
  3. वेबसाइट

प्रश्न 3.
क्षेत्र सर्वे की योजना में कौन-से मुख्य चरण हैं।
उत्तर:
इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं –

1. प्रश्नावली तैयार करना (Preparation of the Questionnaire):
प्रश्नावली अनुसंधानकर्ता से संबंधित प्रश्नों की एक सूची होती है। इसे अनुसंधान तैयार करता है। प्रायः इसे टाइप करवाया जाता है। या छपवाया जाता है। प्रश्नों के साथ-साथ ही उत्तर देने के लिए खाली स्थान छोड़ दिया जाता है।

इसके साथ एक अनुरोध-पत्र भी भेजा जाता है, जिसमें सूचकों को विश्वास दिलाया जाता है। कि उनके द्वारा भेजी सूचना नितांत गुप्त रखी जाएँगी। डाक व्यय आदि पहले ही चुकाया (प्रीपेड) होता है। प्रश्नावली को लौटाने की तारीख व उसके उद्देश्य साफ-साफ लिख दिए जाने चाहिए।

प्रश्नावलियाँ बनाने की शते-ये शर्ते निम्नलिखित हैं –

  • प्रश्न संख्या सीमित हो।
  • प्रश्न उद्देश्य के अनुकूल हो।
  • प्रश्नों की पुरावृत्ति न हों।
  • प्रश्न एक-दूसरे के पूरक हों।
  • प्रश्नों की भाषा सरल तथा स्पष्ट हो।
  • सूचनाएँ गोपनीय रखी जानी चाहिए।
  • सूचकों को शिष्टाचार के शब्दों से संबोधित किया जाएँ।

2. पूछताछ का तरीका (Mode of Enquiry):
आँकड़ों का संकलन डाक द्वारा हो सकता है या साक्षात्कार (mode of Enquiry Interview) के माध्यम से। पहली विधि काफी प्रमाणित है। इस विधि के अंतर्गत सूचकों को एक प्रश्नावली भेजी जाती है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे निश्चित तिथि तक प्रश्नावली भरकर भेजें। यह विधि वहाँ अधिक उपर्युक्त है जहाँ अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत है। इसके अतिरिक्त यह विधि मितव्ययी है और इससे हमें विश्वसनीय आँकड़े प्राप्त होते हैं, परंतु यह विधि शिक्षित वर्ग तक सीमित है। सूचक प्राय: प्रश्नावली भरकर भेजने में रुचि नहीं लेते।

सूचना संकलन करने की दूसरी विधि साक्षात्कार (Interview) है। इस विधि के अंतर्गत गणक अनुसूची (प्रश्नावली) लेकर स्वयं सूचक के पास जाता है। गणक सूचक को पहले सारी बातें समझा देता है और फिर उनसे सूचना एकत्रित करता है। यह विधि उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है जहाँ सूचक अशिक्षित हो। जटिल व कठिन प्रश्नों के उत्तर सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं: परंतु यह विधि बहुत महँगी है। गणक पक्षपाती भी हो सकते है और यदि गुणक कुशल नहीं है तो प्राप्त सूचना गलत भी हो सकती है।

3. गणकों को प्रशिक्षण देना (Training for Enumerators):
गणकों को प्रशिक्षण देना बहुत ही आवश्यक है, ताकि वे प्रश्नों को अच्छी तरह स्वयं समझ सकें और सूचकों को समझ सकें।

4. छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण (Pilot Surveys):
यदि अनुसंधान विस्तृत क्षेत्र का करना है तो यह अच्छा होगा कि विस्तृत क्षेत्र का अनुसंधान करने से पूर्व छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण कर लिया जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी और बड़े पैमाने पर होने वाली सर्वेक्षण की लागत का पता चल जाएगा।

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प्रश्न 4.
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र में सर्वेक्षण से आप किस प्रकार की त्रुटियों (विभ्रमों) की आशा करते हैं?
उत्तर:
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण से हम निम्नलिखित प्रकार की त्रुटियों की आशा करते हैं –

1. माप की गलतियाँ या त्रुटियाँ (Errors of measurement):
सर्वेक्षण में माप की गलती हो सकती है। दूसरे शब्दों में जब हम किसी व्यक्ति की आयु या आय के विषय में पूछते हैं तो वह अपनी आयु (विशेषतः अशिक्षित व्यक्ति) अनुमान से बताएँगे और कहेंगे लिख लो 30-35 वर्ष। आय के विषय में बताएँगे कि उनकी मासिक आय 2000-3000 रुपए है। इस प्रकार अनुमानित आयु या माप की गलतियाँ कहलाती हैं।

2. प्रश्नावली के कुछ प्रश्नों का गलत समझना या गलत अर्थ (Misunderstanding and misinterpreting some questions of the questionnaire):
जनगणना विधि में बहुत ही गुणकों की नियुक्ति की जाती है और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है, परंतु सारे गणक एक जैसी कुशलता वाले नहीं होते, और कुछ लापरवाह भी होते हैं। अतः वे प्रश्नावली के कई प्रश्नों को गलत समझते हैं या उनका गलत अर्थ लगाते हैं। ऐसी अवस्था में विभ्रम उत्पन्न हो सकती है। कई बार सूचक को भी प्रश्न ठीक ढंग से समझ नहीं आता है और वह गलत उत्तर देकर जान बचाता है।

3. लेखन त्रुटि (Recording mistakes):
कई बार गणक सूचक की सूचनाओं के लेखन में गलती कर बैठता है। उदाहरण के लिए, वह 31 के स्थान पर 13 लिख सकता है। कई बार लेख इतना गंदा होता है कि वह पढ़ा नहीं जाता और तालिका बनाने वाला लिखित उत्तरों को कंप्यूटर की फाइल में गलत बढ़ा देता है।

4. उत्तर न मिलने से त्रुटि (Errors of non-responses):
ये गलतियाँ या त्रुटियाँ उस समय उत्पन्न होती हैं, जब सूचक प्रश्नावली को भरने से इंकार करता है या गणक के बार-बार उससे मिलने जाने पर भी वह उपलब्ध नहीं होता।

5. गणितीय विभ्रम या त्रुटियाँ (Arithmetic errors):
कई प्रश्नों में थोड़ी-सी गणित या गणितीय गणना की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी अवस्था में गणना करने में गलती हो सकती है। उदाहरण के लिए, प्रश्नावली में एक प्रश्न है, ‘गत माह भोजन पर कुल कितना खर्च हुआ? ऐसी अवस्था में परिवार के मुखिया को गेहूँ, चावल, नमक, चीनी, दूध आदि पर होने वाले खर्चों को जोड़ना पड़ेगा। उससे जोड़ लगाने में गलती हो सकती है। मदों और उनकी कीमतों को याद करने में उसे गलती हो सकती है। ऐसी गलतियों को गणितीय गलतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 5.
प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियों में अंतर बताइए।
उत्तर:
प्रतिचयन और प्रतिचयन में अंतर
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प्रश्न 6.
एक व्यक्ति ने एक प्रश्नावली तैयार करने के लिए निम्न प्रश्न बनाए हैं। ये प्रश्न दोषपूर्ण हैं। उनके स्थान पर अच्छे प्रश्न बनाएँ।

  1. आप एक महीने में पुस्तकों पर कितने रुपए खर्च करते हैं?
  2. आप अच्छा लगने के लिए अपनी आय का कितना प्रतिशत कपड़ों पर खर्च करते हैं?
  3. क्या आप नहीं सोचते कि धूम्रपान निषेध होना चाहिए।
  4. क्या आप कॉलेज के पश्चात् नौकरी करेंगी या गृहिणी बनेंगी?
  5. आपको इस उच्च कोटि की चाय की सुगंध कैसी लगी?

उत्तर:
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प्रश्न 7.
एक आदर्श प्रश्नावली में क्या-क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर:
एक आदर्श प्रश्नावली में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –

  1. सीमितता (Limitations): अच्छी प्रश्नावली वही मानी जाती है जो गागर में सागर भरे अर्थात् प्रश्न केवल विषयानुकूल ही हों।
  2. सरल व स्पष्ट (Simple and clear): प्रश्नावली में प्रश्न सीमित के साथ सरल व स्पष्ट भाषा में हों।
  3. उचित क्रम (Systematic order): प्रश्न आपस में जुड़े होने चाहिए और क्रम से होने चाहिए। ऐसा न हो कि बच्चों की संख्या पूछने के बाद, फिर यह पूछे कि आप शादीशुदा हैं? यह निरर्थक एवं हास्यास्पद प्रश्न होगा।
  4. उचित व सम्मानजनक प्रश्न (Proper and respectable questions): प्रश्न सम्मनजनक होने चाहिए जिससे कि सूचक के स्वाभिमान को ठेस न लगे। यह पूछना कि आप जुआ खेलते हैं, उचित नहीं है।
  5. प्रश्नों के प्रकार (Kinds of questions):
    • (क) वैकल्पिक प्रश्न (Alternative question): ये वे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हाँ या ना, गलत या सही दिशा में दिया जा सकता है।
    • (ख) बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple-alternative questions): ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर कई हो सकते हैं, जैसे-आपने स्कूल क्यों खोला है? धन कमाने को, यश कमाने को या गरीब बच्चों की सहायता के लिएं? आदि।
    • (ग) विशिष्ट प्रश्न (Specific question): ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि कोई विशिष्ट जानकारी प्राप्त करनी हो, जैसे-किसी की मासिक आय।
    • (घ) खुले प्रश्न (Open questions): ये ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि सूचक इनका उत्तर मनमर्जी से दे। जैसे-नशाबंदी, दहेज प्रथा पर रोक।
  6. निर्देश (Direction): प्रश्नावली में यह भी ठीक-ठीक लिखा होना चाहिए कि प्रश्नावली को भेजने की अंतिम तारीख क्या है तथा उत्तर कैसे हों।
  7. प्रश्न के नीचे की टिप्पणी (Footnot after the questions): प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों में से किसी प्रश्न का अधिक विश्लेषण चाहिए तो ऐसे प्रश्नों के नीचे टिप्पणी अवश्य लिख देनी चाहिए।
  8. प्रश्नावली की पूर्व जाँच (Pre-checking of questionnaire): प्रश्नावली को सूचकों तक भेजने से पहले पूर्ण रूप से जाँच कर लेनी चाहिए। कोई किसी तरह की कमी न हो।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि हम किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या का अध्ययन करना चाहते हैं तो हमें –
(a) रुपयों की आवश्यकता होती है
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है

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प्रश्न 2.
क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा संग्रहीत आँकड़े कहलाते हैं –
(a) प्राथमिक आंकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्राथमिक आंकड़े

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़े अन्वेशणकर्ता द्वारा
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं
(b) स्वयं एकत्र नहीं करवाये जाते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं

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प्रश्न 4.
जो आँकड़े अन्वेषणकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र एवं संशोधित नहीं किए जाते, कहलाते हैं –
(a) मौलिक आँकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) द्वितीयक आँकड़े

प्रश्न 5.
सभी प्रकाशित आँकड़े कहलाते हैं –
(a) द्वितीयक आँकड़े
(b) प्राथमिक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्राथमिक आँकड़े

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प्रश्न 6.
जो वास्तविक आँकड़े एकत्र करने क्षेत्र में जाता है, उसे कहते हैं –
(a) गणनाकार
(b) पर्यवेक्षक
(c) अन्वेषक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) गणनाकार

प्रश्न 7.
उत्तरदाता प्रश्नावली के प्रश्नों का उत्तर देकर –
(a) वास्तविक आँकड़े प्रदान नहीं करता है
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है

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प्रश्न 8.
जनगणना विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

प्रश्न 9.
प्रतिदर्शी विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

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प्रश्न 10.
क्षेत्रीय कार्य की योजना में आँकड़ों के संग्रह के लिए अपनाई जाती है –
(a) गणना विधि
(b) प्रतिदर्श विधि
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन सही हैं अथवा गलत? इन्हें तदनुसार चिह्नित करें –
(क) सांख्यिकी केवल मात्रात्मक आँकड़ों का अध्ययन करती है।
(ख) साख्यिकी आर्थिक समस्याओं का समाधान करती है।
(ग) आँकड़ों के बिना अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का कोई उपयोग नहीं है।
उत्तर:
(ख) सही है शेष
(क) एवं
(ग) गलत हैं

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प्रश्न 2.
उन क्रिया-कलापों की सूची बनाएँ, जो जीवन के सामान्य कारोबार के अंग होते हैं? क्या ये आर्थिक क्रिया-कलाप हैं –
उत्तर:

  1. बैंक में नौकरी करना
  2. अध्यापक के द्वारा पाठशाला में पढ़ाना
  3. डॉक्टर के द्वारा रोगी का इलाज करना
  4. टैक्सी ड्राइवर
  5. भुगतान के बदले वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना
  6. विद्युत बोर्ड के द्वारा बिजली की आपूर्ति करना
  7. जल बोर्ड द्वारा पानी की आपूर्ति करना
  8. किसान के द्वारा खेत में हल चलाना
  9. लाभ कमाने के लिए दुकानदार के द्वारा वस्तुओं को बेचना

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प्रश्न 3.
सरकार और नीति-निर्माता आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त नीतियों के निर्माण के लिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं। दो उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
आर्थिक विकास के लिए सरकार तथा नीति-निर्देश बनाने वाले उचित नीतियाँ बनाते हैं। इन नीतियों के निर्माण के लिए वे सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं।
यह तथ्य निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट है –

1. वर्तमान समय में विश्वभर में तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। अतः सरकार को अब यह निर्णय लेना है कि सरकार विदेशों से कितनी मात्रा में तेल का आयात करे। इस बात का निर्णय लेने के पहले यह देखना पड़ेगा कि वर्ष 2010 में तेल का घरेलू उत्पादन कितना होगा और उस समय तेल की कितनी माँग होगी। बिना सांख्यिकी के सरकार इस मद में तथ्य नहीं जान पाएगी। अतः विदेशों से कितना तेल आयात करना है, इसका निर्णय नहीं लिया जा सकेगा, जब तक हमें तेल की वास्तविक मांग का पता नहीं चलेगा।

2. विकास का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सांख्यिकी का योगदान महत्त्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए; आँकड़ों के अभाव में हम इस बात का निर्णय नहीं ले सकते हैं कि हमारा खाद्यान्नों का उत्पादन कितना होना चाहिए। हम साधनों को देखते हुए कितनी अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।

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प्रश्न 4.
आपकी आवश्यकताएँ असीमित हैं तथा उनकी पूर्ति करने के लिए आपके पास संसाधन सीमित हैं। दो उदाहरणों द्वारा इसकी व्याख्या करें।
उत्तर:
अन्य व्यक्तियों की तरह मेरी भी आवश्यकताएँ असीमित हैं और उनकी संतुष्टि के लिए साधन सीमित हैं। इस बात की पुष्टि मैं निम्नलिखित दो उदाहरणों द्वारा करता हूँ –
1. मुझे 2,000 रुपए महीना जेब खर्च मिलता है और मेरी आवश्यकताएँ बहुत हैं-जैसे क्रिकेट का सामना खरीदना, सिनेमा देखना। 2,000 रुपए में मैं अपनी सारी आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। इन आवश्यकताओं के अतिरिक्त मुझे अपने मित्रों को उनके जन्मदिन पर उपहार भी देने पड़ते हैं। हर महीने मेरी कुछ आवश्यकताएं पूरी नहीं होती।

2. मैं संयुक्त परिवार में रहता हूँ। हम जिस भवन में रहते हैं वह कोई विशेष बड़ा नहीं है। घर में कोई ऐसा कमरा नहीं है, जिसमें अध्ययन कक्ष (study room) बना लूँ। उसी कक्ष में मेरा अलग बिस्तर है। पढ़ने-लिखने में मेरा अलग बिस्तर है। अपने क्रिकेट का सामान वहीं रखू। परंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता, क्योंकि हमारे परिवार की आय सीमित है।

प्रश्न 5.
उन आवश्यकताओं का चुनाव आप कैसे करेंगे, जिनकी आप पूर्ति करना चाहेंगे?
उत्तर:
हम उस संतुष्ट की जानेवाली आवश्यकता का चयन करेंगे जो परमावश्यक होगी। आवश्यकताएं कई प्रकार की होती हैं –

  1. अनिवार्य आवश्यकता अर्थात् अस्तित्व बनाए रखने की आवश्यकता
  2. आरामदायक आवश्यकता तथा
  3. सुविधाजनक आवश्यकता। आवश्यकताओं की तीव्रता में भी अंतर होता है। हम सबसे पहले उस आवश्यकता की पूर्ति करेंगे, जिसमें सबसे अधिक तीव्रता होगी।

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प्रश्न 6.
आप अर्थशास्त्र का अध्ययन क्यों करना चाहते हैं? कारण बताइए?
उत्तर:
वर्तमान में हमारा देश गंभीर आर्थिक समस्याओं जैसे-महँगाई, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, बेरोजगारी, गरीबी आदि से जूझ रहा है। अर्थशास्त्र में इन समस्याओं के हल को खोजने का प्रयास किया जाता है। इसके अतिरिक्त अर्थशास्त्र शासन की आर्थिक नीतियों का भी निरंतर अध्ययन करता रहता है, जिससे देश की दशा और दिशा का ज्ञान होता है। इन सभी कारणों से हम अर्थशास्त्र का अध्ययन करना चाहते हैं।

प्रश्न 7.
“सांख्यिकीय विधियाँ सामान्य बुद्धि का स्थानापन्न नहीं होती।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
सांख्यिकी का क्षेत्र बहुत व्यापक है। आज ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में इसका प्रयोग किया जाता है। परंतु यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सांख्यिकी विधियों का प्रयोग बड़े ध्यान और सावधानी से किया जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे सांख्यिकी विधियाँ गलत परिणाम भी दे सकती हैं। इन्हें अज्ञानतावश प्रयोग करने से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इनका प्रयोग एक अंधे मनुष्य के समान नहीं करना चाहिए जो किसी बिजली के खंभे से प्रकाश प्राप्त करने के स्थान पर सहारे का कार्य लेता है। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग केवल वही व्यक्ति कर सकते हैं जो समझदार तथा विशेषज्ञ हैं। यूल और केंडाल के शब्दों में-“अयोग्य व्यक्ति के हाथों में सांख्यिकीय रीतियाँ (विधियाँ) सबसे भयानक हथियार हैं।” इस बात का स्पष्टीकरण नीचे उदाहरणों से किया जा सकता है –

उदाहरण 1:
एक बार एक राज्य के किसी गाँव में एक भयानक बीमारी फैल गई। उस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए तात्कालिक कई कदम उठाए गए। उस गाँव में सहायता के तौर पर डॉक्टर तथा दवाइयाँ भेजी गईं। एक राजनेता जो दावा करता था कि वह अच्छा सांख्यिकीय निपुण है (उसका दावा झूठा था) उस गाँव में गया। वहाँ जाकर उसने आँकड़ों का संकलन किया और इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि जहाँ पर अधिक डॉक्टर हैं वहाँ पर अधिक मृत्यु हुई है। उसने कहा कि डॉक्टर मृत्यु के लिए दोषी हैं तथा उन्हें दंड मिलना चाहिए।

उदाहरण 2:
कहते हैं कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी तथा दो बच्चों के साथ दूसरे गाँव के लिए गया। रास्ते में एक नदी पड़ती थी। पिता को उस नदी की औसत गहराई मालूम थी। उसने अपनी तथा अपने परिवार के सदस्यों की औसत ऊँचाई की गणना की। उसके परिवार के सदस्यों। की औसत ऊँचाई नदी की औसत ऊँचाई से अधिक थी। अतः उसने सोचा कि वे नदी को सरलता से पार कर सकते हैं, परंतु नदी पार करते समय उसका छोटा बच्चा (जिसकी ऊँचाई नदी की, गहराई से कम थी) नदी में डूब गया। इसका कारण यह था कि उसने समांतर माध्य का प्रयोग सोच-समझकर नहीं किया था।

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मार्शल ने अर्थशास्त्र को कैसे परिभाषित किया है?
उत्तर:
मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय में मानव क्रियाओं का अध्ययन है।

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प्रश्न 2.
जीवन के साधारण व्यवसाय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जीवन के साधारण व्यवसाय से अभिप्राय मौद्रिक लाभ के लिए की गई क्रियाएँ जैसे-किसी कार्यालय में काम करना, टैक्सी चलाना, पाठशाला में पढ़ना इत्यादि।

प्रश्न 3.
ए. मार्शल कौन थे?
उत्तर:
ए. मार्शल आधुनिक अर्थशास्त्र के जन्मदाता में से एक थे।

प्रश्न 4.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
एक उपभोग को अपनी निश्चित आय से क्या खरीदना चाहिए, जबकि उसके पास क्रय की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं की सूची है तथा उन वस्तुओं की उसे कीमत भी ज्ञात है। यही उपभोग की विषय-सामग्री है।

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प्रश्न 5.
उत्पादन से क्या अभिप्राय?
उत्तर:
वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन करना या वस्तुओं की उपयोगिता में वृद्धि करना उत्पादन कहलाता है। साधारण शब्दों में वस्तुओं का निर्माण करना ‘उत्पादन’ है।

प्रश्न 6.
उत्पादन में हम क्या अध्ययन करते हैं?
उत्तर:
उत्पादन में हम इस बात का अध्ययन करते हैं कि उत्पादक बाजार के लिए किन वस्तुओं का उत्पादन करे, जब उसे लागत तथा की मतों का ज्ञान है।

प्रश्न 7.
वितरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन से प्राप्त होने वाली राष्ट्रीय आय को मजदूरी, लाभ तथा ब्याज के रूप. में बाँटने को वितरण कहते हैं।

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प्रश्न 8.
हमें दुर्लभता का सामना क्यों करना पड़ता है?
उत्तर:
हमें दुर्लभता का सामना इसलिए करना पड़ता हैं, क्योंकि इच्छाओं का पूर्ति करने के लिए जो वस्तुएँ हमें चाहिए, वे सीमित मात्रा में उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 9.
संसाधनों की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. आवश्यकताओं की संतुष्टि के संसाधन सीमित हैं।
  2. सीमित से साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं।

प्रश्न 10.
एक उदाहरण देकर स्पष्ट करें कि साधन के वैकल्पिक प्रयोग क्या होते हैं?
उत्तर:
भूमि एक साधन है। इसके वैकल्पिक प्रयोग हैं। भूमि पर भवन बनाया जा सकता है। इस पर रबर की खेती की जा सकती है अथवा इस पर गेहूँ की खेती भी की जा सकती है।

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प्रश्न 11.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं का तथा सेवाओं का उपयोग ‘उपभोग’ कहलाता है। वस्तुओं के उपभोग करने से उनकी उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है।

प्रश्न 12.
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने से हमारा क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने का उद्देश्य इन समस्याओं का सामना तथा उनके उत्पन्न होने के कारणों का वर्णन करना है।

प्रश्न 13.
अर्थशास्त्र में नीतियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में सहायता करने वाले उपायों को नीतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 14.
अंग्रेजी भाषा का (Statistics) शब्द लैटिन भाषा के किस शब्द से लिया गया है?
उत्तर:
Stat Status से।

प्रश्न 15.
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ है?
उत्तर:
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ अंकों में व्यक्त तथ्यों से है जो व्यवस्थित रूप से एकत्रित किए गए हैं। दूसरे शब्दों में बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ समंक (आँकड़े) हैं।

प्रश्न 16.
समंकों से क्या अभिप्राय है।
उत्तर:
समंकों से अभिप्राय मात्रात्मक तथा गुणात्मक तथ्यों से है, जिनका अर्थशास्त्र में प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 17.
मात्रात्मक तथ्यों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मात्रात्मक तथ्यों से अभिप्राय उन तथ्यों से है जो अंकों से प्रकट किए जाते हैं। उदाहरण के लिए भारत में चावल का उत्पादन 1995-96 में 769.8 लाख टन था, जो बढ़कर 2004-05 में 853.1 लाख टन हो गया।

प्रश्न 18.
समंक या आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़े (समंक) उन आर्थिक घटनाओं को कहते हैं, जिन्हें अंकों में प्रकट किया जा सकता है, जैसे-जनसंख्या, कीमत-वृद्धि, उत्पादन आदि के आँकड़े।

प्रश्न 19.
आर्थिक समस्या क्या है?
उत्तर:
आर्थिक समस्या मूल रूप से चयन की समस्या है, जो साधनों की दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 20.
साधनों की मितव्ययिता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की मितव्ययिता से अभिप्राय साधनों का बुद्धिमत्ता से प्रयोग करना है।

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प्रश्न 21.
आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकता में
  2. सीमित साधनों
  3. साधनों का वैकल्पिक प्रयोग

प्रश्न 22.
सीमित साधन से क्या अभिप्राय है? अथवा, साधनों की दुर्लभता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की दुर्लभता से अभिप्राय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधों का उनकी माँग से कम होना है।

प्रश्न 23.
हम दुर्लभता का सामना क्यों करते हैं?
उत्तर:
क्योंकि हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधन सीमित हैं।

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प्रश्न 24.
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से अभिप्राय है-साधनों के विभिन्न प्रयोग। उदाहरण के लिए भूमि का प्रयोग खाद्य फसलों के लिए किया जा सकता है अथवा वाणिज्यिक फसलों के लिए या किसी अन्य उपयोग के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 25.
कोई दो उदाहरण दें जिससे पता चले कि सांख्यिकी का प्रयोग विभिन्न कारकों में संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है।
उत्तर:

  1. कीमत तथा मात्रा में संबंध।
  2. कीमत तथा पूर्ति में संबंध।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिक विश्वसनीय है?

  1. सन् 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ जितनहा 2001 ई. में।
  2. सन् 2000 ई. में गेहूँ का उत्पादन 100 मिलियन टन था, जबकि 2001 ई. में यह 121 मिलियन टन था।

उत्तर:
2. दूसरा कथन अधिक विश्वसनीय है।

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प्रश्न 27.
निम्नलिखित तथ्यों में से कौन-सा तथ्य अधिक विश्वसनीय है?

  1. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में 310 व्यक्ति मरे।
  2. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में सैकड़ों व्यक्ति मरे।

उत्तर:
पहला तथ्य अधिक विश्वसनीय है।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से आपको कौन से गुणात्मक समंक मिलेंगे –

  1. सुन्दरता
  2. समझदारी
  3. अर्जित आय
  4. एक विषय में प्राप्त अंक
  5. गाने की योग्यता
  6. सीखने की कला

उत्तर:

  1. सुंदरता
  2. समझदारी तथा गाने की योग्यता
  3. सीखने की कला

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प्रश्न 29.
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में क्या संबंध है? अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में विपरीत संबंध है। कीमत तथा माँग विपरीत दिशाओं में चलती है। अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर कीमत में वृद्धि होने से उसकी माँग में कमी आएगी।

प्रश्न 30.
हम सांख्यिकी का प्रयोग किन गंभीर आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण तथा उसके समाधान के लिए करते हैं?
उत्तर:

  1. कीमतों में वृद्धि
  2. जनसंख्या में वृद्धि
  3. बेरोजगारी
  4. निर्धनता आदि

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण लिखें।
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकताएँ (Unlimited Needs): मनुष्य की आवश्यकताएँ अनंत हैं। उनकी कोई गिनती नहीं। ये आवश्यकताएं बार-बार उत्पन्न होती है।
  2. सीमित साधन (Limited Sources): आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित (दुर्लभ) हैं। दूसरे शब्दों में आवश्यकताओं की पूर्ति के उपलब्ध साधन दुर्लभ हैं।
  3. सीमित साधनों का वैकल्पिक प्रयोग (Alternative Uses of Resources): आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए साधन न केवल सीमित हैं, अपितु उनका वैकल्पिक प्रयोग भी है। एक साधन को विभिन्न रूपों में उपयोग किए जा सकते हैं।

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प्रश्न 2.
एक कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 2,500 है। क्या इसे सांख्यिकीय कहा जाएगा? तर्कयुक्त उत्तर दें।
उत्तर:
इसे सांख्यिकी नहीं कहा जाएगा। इसका कारण यह है कि सांख्यिकी तथ्यों का एक समूह है। यह एक तथ्य नहीं है। सांख्यिकी केवल तथ्यों के समूह का अध्ययन करती है। और इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। विद्यार्थियों की संख्या एक तथ्य है। इससे हम कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। यदि हमें यह दिया हुआ हो कि पिछले वर्ष एक कॉलेज में 2,300 विद्यार्थी थे और इस वर्ष 2,500 विद्यार्थी हैं, तब इसे सांख्यिकी कहा जाएगा, क्योंकि यहाँ समक तथ्यों का समूह है तथा इनमें तुलना की जा सकती है।

प्रश्न 3.
सांख्यिकी के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर:
सांख्यिकी के दो कार्य (Two functions of statistics):
सांख्यिकी के कई कार्य हैं। उनमें से दो कार्य निम्नलिखित हैं –

1. जटिल तथ्यों को सरल तथा स्पष्ट बनाना (Presenting comple facts into simple and clear form):
सांख्यिकी साधारण तथा असाधारण सभी जटिल आर्थिक तथ्यों को संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रकट किए गए तथ्य सरलता से समझे जा सकते हैं।

2. नीति निर्धारण में सहायता करना (Helpful in the furmulation of policies):
उचित नीतियाँ निर्धारित करने में सांख्यिकी आधारभूत सामग्री प्रदान करती है। बिना पूर्ण संकलित तथ्यों के कुशल नीति निर्धारण अत्यंत कठिन है। उदाहरण के लिए यह निर्णय करना है कि भारत 2007 में कितना पेट्रोल दूसरे देशों से आयात करेगा। इसके लिए हमें यह पता लगाना पड़ेगा कि उस वर्ष देश में कितना उत्पादन होगा। इस जानकारी के बिना हम पेट्रोल के आयात के विषय में नीति नहीं बना सकते।

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प्रश्न 4.
सांख्यिकी का बहुवचन तथा एकवचन रूप में अर्थ समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है – कवचन, बहुवचन –

  1. बहुवचन के रूप में अर्थ अंकों में व्यक्त की गई सूचना तथा अन्य आँकड़ों से होता है।
  2. जैसे-जनसंख्या के आँकड़े, रोजगार सम्बन्धी आँकड़े की की परिभाषा लिखिए।

प्रश्न 5.
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
उत्तर:
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं –

  1. सांख्यिकी जटिल तथ्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है।
  2. सांख्यिकीय आंकड़ों को तुलनात्मक बनाती है, जिनसे लाभदायक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
  3. सांख्यिकी पूर्वानुमान तथा उचित नीतियों के निर्णय में सहायता करती है।
  4. सांख्यिकी से व्यक्ति के ज्ञान तथा अनुभव में वृद्धि होती है।
  5. सांख्यिकी में दो या दो से अधिक तथ्यों के संबंध में भी ज्ञात किया जा सकता है।

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी की प्रमुख विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
सभी समंक सांख्यिकी नहीं कहला सकते हैं। जिनमें निम्नलिखित विशेषताएँ विद्यमान होती हैं –

  1. समंक तथ्यों के समूह होते हैं।
  2. समंक संख्याओं में व्यक्त किए जा सकते हैं।
  3. समंक अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. समंक का संकलन गणना या अनुमान विधि द्वारा किया जा सकता है।
  5. समंकों का संग्रहण किसी पूर्व निश्चित उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
  6. समंकों को सुव्यवस्थित ढंग से एकत्र किया जाना चाहिए।
  7. समंक एक-दूसरे से संबंधित रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
सांख्यिकी अर्थशास्त्री तथा प्रशासक के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
1. अर्थशास्त्रियों के लिए उपयोगी (Useful for Economicst):
एक अर्थशास्त्री आर्थिक समूहों, जैसे-कुल राष्ट्रीय उत्पाद, उपभोग, बचत, निवेश और मुद्रा के मूल्य होने वाले परिवर्तनों के मापन के लिए समंकों पर निर्भर रहता है। आर्थिक सिद्धांतों का सत्यापन करने तथा परिकल्पनाओं की जाँच करने के लिए भी सांख्यिकीय विधियों का ही प्रयोग किया जाता है।

2. प्रशासक के लिए उपयोगी (Useful for Administrator):
एक सफल प्रशासक को उचित नीति निर्माण के लिए देश में बसने वाले लोगों की संख्या, देश की संपत्ति, आयात और निर्यात की मात्रा, औद्योगिक और कृषि उत्पादकता, श्रम स्थिति, मूल्य स्थिति आदि सभी संबंधित आँकड़ों का ज्ञान होना जरूरी है। ये सभी आँकड़े उसे सांख्यिकी से प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 8.
सांख्यिकी एक व्यापार के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
एक कुशल व्यापारी उपयुक्त आँकड़ों के आधर पर ही वस्तु की माँग का अनुमान लगाता है और क्रय-विक्रय व विज्ञापन नीतियाँ निर्धारित करता है। माँग का पूर्वानुमान लगाते समय ऋतुकालीन परिवर्तनों, व्यापार चक्रों, ग्राहकों की अभिरुचि, रीति-रिवाज, जीवन-स्तर आदि के यथेष्ट आँकड़ों को ध्यान में रखता है।

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प्रश्न 9.
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती।
  2. इनमें केवल संख्यात्मक इकाइयों का अध्ययन किया जाता है।
  3. इसमें गुणात्मक तथ्यों जैसे-वृद्धि, व्यवस्था इत्यादि का अध्ययन नहीं किया जाता है।
  4. सांख्यिकी नियम केवल औसत रूप में ही सत्य है।
  5. सांख्यिकीय का दुरुपयोग किया जाता है।

प्रश्न 10.
“झूठ तीन प्रकार के होते हैं-झूठ, सफेद झूठ और सांख्यिकी।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी को सबसे बड़ा झूठ का रूप का मानने का अभिप्राय है कि हम इसके द्वारा किसी भी सही चीज को झूठा सिद्ध कर सकते हैं। राजनीति तथा प्रशासन में सांख्यिकी का इस संदर्भ में बहुत उपयोग किया जाता है। आँकड़ों (सांख्यिकी) के आधार पर सत्ताधारी दल यह सिद्ध कर सकता है कि पंचवर्षीय योजनाओं से भारत में प्रत्येक क्षेत्र में आशातीत प्रगति हुई है जबकि विरोधी दलों के सदस्यों आँकड़ों से यह सिद्ध कर सकते हैं कि योजना काल में सामान्य व्यक्ति की स्थिति पहले से खराब हो गई है।

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प्रश्न 11.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकी विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में प्रमुख निम्नलिखित सांख्यिकीय विधियों का उपयोग होता है –

  1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data): सांख्यिकी की पहली विधि में किसी समस्या से संबंधित आँकड़ों को एकत्रित करते हैं।
  2. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Data): सांख्यिकी की दूसरी विधि का संबंध के प्रस्तुतीकरण से है।
  3. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data): सांख्यिकी की तीसरी विधि का संबंध आँकड़ों के विश्लेषण से है।
  4. आँकड़ों का निर्वाचन (Interpretation of Data): इस विधि में आँकड़ों के निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

प्रश्न 12.
सांख्यिकी को अंकों में प्रकट तथ्यों के समूह में परिभाषित किया जाता है। कुछ उदाहरण दें।
उत्तर:
सांख्यिकी तथ्यों का समूह है। किसी एक तथ्य से संबंधित आँकड़ों को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति विशेष की आय को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता है। इसका कारण यह है कि इसकी तुलना नहीं की जा सकती। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी तथ्य संख्या में व्यक्त होना चाहिए। यदि तथ्यों को गुणात्मक रूप में प्रकट किया जाता है तो वह सांख्यिकी नहीं कहलाएगी। जैसे-सुन्दरता, ईमानदारी, स्वास्थ्य आदि। राजा ने 80% अंक प्राप्त किए और मोहन ने 90% तो यह संख्या में प्रकट किए तथ्यों का समूह सांख्यिकी कहलाएगा।

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प्रश्न 13.
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार सांख्यिकी की परिभाषा को लिखें।
उत्तर:
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार समंक तथ्यों के उस समूह को कहते हैं, जो अनेक कारणों – से पर्याप्त सीमा तक प्रभावित होते हैं, जो अंकों में प्रकट किए जाते हैं, यथोचित शुद्धता के अनुसार जिनकी गणना अथवा अनुमान लगाया जाता है, जिन्हें किसी-न-किसी पूर्व-निश्चित उद्देश्य के लिए एक सुव्यस्थित विधि द्वारा एकत्र किया जाता है तथा जिन्हें तुलना के लिए एक-दूसरे के संबंध में रखा जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकीय विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकीय उपकरणों (विधियों) का प्रयोग (Statistical methods used in economic analysis):
सांख्यिकीय सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग होने वाले सांख्यिकीय उपकरण या विधियाँ निम्नलिखित हैं –

1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data):
आँकड़ों का संकलन एक सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत हम आँकड़ों के प्रकार-प्राथमिक व द्वितीयक तथा संकलन की विधियों, संगणना विधियों और न्यायादर्श विधि का अध्ययन करते हैं। आर्थिक विश्लेषण में सर्वप्रथम तथ्यों से संबंधित आँकड़ों का संकलन किया जाता है। सांख्यिकी आँकड़े आर्थिक अनुसंधान के आधार होते हैं।

2. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकी उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

3. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

4. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data):
इस सांख्यिकी उपकरण का प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक है। आँकड़ों के विश्लेषण की विभिन्न विधियाँ, केन्द्रीय प्रवृत्तियों की माप, सहसंबंध, सूचकांक आदि आर्थिक विश्लेषण में बहुत उपयोगी हैं।

5. आँकड़ों का निर्वचन (Interpretation of Data):
आँकड़ों के निर्वचन से अभिप्राय उन्हें अर्थ प्रदान करना है। आँकड़े अपने आप कुछ नहीं बोलते, इन्हें सही अर्थ प्रदान करना तथा इनसे सही अर्थ निकालना होता है। यह भी एक सांख्यिकीय उपकरण है, जिसका आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग किया जाता है। यह एक कठिन कार्य है।

6. पूर्वानुमान (Forecasting):
पूर्वानुमान एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है जिसका आर्थिक विश्लेषण से संबंधित पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन पूर्वानुमानित आँकड़ों पर अनेक आर्थिक नीतियाँ आधारित होती हैं। उदाहरणार्थ, यह अनुमान लगाना कि दसवीं पचवर्षीय योजना के अंत तक जनसंख्या कितनी होगी और तदनुसार रोजगार आय, उत्पादकता आदि का पूर्वानुमान लगाय जा सकता है।

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प्रश्न 2.
सांख्यिकी के प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर:
1, तथ्यों को स्पष्टता प्रदान करना (Facts are clearly presented):
सांख्यिकी का पहला कार्य है कि यह तथ्यों को आंकड़ों में प्रस्तुत करके उन्हें अधिक विश्वसनीय बना देता है। यह कहना कि वर्ष 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ था जितना कि 2001 में यदि इस बात को आँकड़ों में कहें कि वर्ष 2000 में गेहूँ का उत्पादन 1000 मिलियन टन था जबकि 2001 में यह 121 मिलियन टन था। दूसरा वाक्य बहुत अधिक विश्वसनीय है।

2. जटिल तथ्यों को सरल बनाना (Simplification of complex facts):
सांख्यिकी विधियाँ अनेक हैं, जैसे-माध्य, माध्यिका, अपरिकरण, जो कि जटिल तथ्यों को सरल बना देती हैं।

3. तथ्यों की तुलना को आसान करना (To make comparisn of facts easy):
विभिन्न प्रकार की सांख्यिकीय विधियाँ आँकड़ों को तुलनात्मक बनाती हैं। प्रतिशत दर और अनुपात इसमें सहायक हैं।

4. व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाना (To increase personal experience):
बाउले ने ठीक ही कहा है कि सांख्यिकी निस्संदेह व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाती है।

5. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in making reasonable policy):
उचित नीति निर्धारण में ये आँकड़े बुनियाद का काम करते हैं।

6. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in forecasting):
भूतकाल में एकत्रित आँकड़े आने वाले भविष्य का अनुमान लगाने में बड़े सहायक होते हैं।

7. तथ्यों के संबंधों का अध्ययन करना (To study relationship between the facts):
सांख्यिकी दो या अधिक तथ्यों के आपस के संबंधों का अध्ययन करती है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

प्रश्न 3.
सांख्यिकी की सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी केवल समूह का अध्ययन करती है। व्यक्तिगत इकाइयों का इसमें अध्ययन नहीं किया जाता है।
  2. सांख्यिकी केवल संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है। इसमें किसी के गुण, बुराई, भलाई का अध्ययन नहीं किया जाता।
  3. सांख्यिकी के नियम इतने यथार्थ नहीं होते जितने भौतिक शास्त्र या रसायन शास्त्र के नियम होते हैं। सांख्यिकी के नियम अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. सांख्यिकी समस्या का सर्वश्रेष्ठ हल नहीं बता सकती है। किसी समस्या को हल करने की अनेक विधियाँ व विधान हैं। सांख्यिकी उनमें से एक है।
  5. सांख्यिकी का दुरुपयोग किया जा सकता है। सांख्यिकी का सबसे बड़ा दोष यह है कि कोई भी दक्ष प्राणी इसकी विधि का गलत प्रयोग करके अपने उपयोग के अनुरूप परिणाम निकाल सकता है। इसका दुरुपयोग भी कर सकता है।

प्रश्न 4.
सांख्यिकी का क्या महत्व (लाभ) है? अथवा, आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में सांख्यिकी की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
सांख्यिकी के अनेक कार्यों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सांख्यिकी का ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में बहुत ही महत्त्व है।

1. सांख्यिकी व व्यापार (Statistics and business):
व्यापारी वर्ग अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करना चाहता है। अत: उसे उत्पाद, क्रय, विक्रय, कीमत निर्धारण में सांख्यिकी का सहारा लेना पड़ता है। अनुमान सांख्यिकी पर निर्भर करते हैं।

2. सांख्यिकी व अर्थशास्त्र (Statistics and economics):
अर्थशास्त्र का अंग सांख्यिकी है। अर्थशास्त्र की लगभग प्रत्येक समस्या सांख्यिकीय सहायता से हल होती है। देश में फैली गरीबी, बेकारी, आय, असमानता का समाधन सांख्यिकी से ही सुलभ है।

3. सांख्यिकी तथा बैंकर (Statistics and bankers):
सांख्यिकी के बिना पूर्व अनुमान गलत हो सकते हैं। वह जनता का विश्वास खो सकता है। ऐसी हालत में सांख्यिकी से ही सुलभ ज्ञान उनके लिए आवश्यक है।

4. सांख्यिकी तथा बीमा कंपनियाँ (Statistics and insurance companies):
बीमा कंपनियाँ व्यक्तियों के जीवन आदि का बीमा करती हैं। ये जीवन की प्रत्याशा के आधार पर बीमा-दर निश्चित करती हैं। किसी कंपनी के सारे काम संभवना सिद्धांत पर आधारित होते हैं और यह सिद्धांत सांख्यिकी का है।

5. सांख्यिकी व अनुसंधान (Statistics and research):
सांख्यिकी उपकरण विधियाँ अनुसंधानकर्ता के लिए विशेष लाभदायक है। सांख्यिकी उपकरणों की सहायता से अनुसंधानकर्ता अपनी खोज में तभी सफल होगा जब उसने आँकड़े एकत्रित किए हुए हों।

6. सांख्यिकी व सरकार (Statistics and Government):
वर्तमान समय में सरकार कल्याणकारी सरकार कहलाती है। वह अधिक-से-अधिक जनसुख की भावना से शासन करती है। यातायात, कृषि, व्यापार, आयत-निर्यात, डाक-तार आदि सभी क्षेत्र आँकड़ों पर निर्भर करते हैं। देश का वार्षिक बजट तो सांख्यिकी ही है।

7. सांख्यिकी व मानव कल्याण (Statistics and human welfare):
मानव कल्याण तभी हो सकता है जब है जब उसकी समस्याएँ (गरीबी, बेकारी) हल हुई हों। उनका हल सांख्यिकी के द्वारा हो सकता है।

8. सांख्यकी व पूर्व अनुमान (Statistics and forecasting):
सांख्यिकी का प्रयोग व्यापार, ऋतु-विज्ञान, सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण आदि के पूर्वानुमान लगाने के काम आता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार सांख्यिकी शब्द का प्रयोग यदि बहुवचन में हो तो इसका अर्थ है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

प्रश्न 2.
रैन्डम हाउस डिक्शनरी सांख्यिकी का अर्थ बनाती है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक विज्ञान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अप्रायोगिक विज्ञान

प्रश्न 3.
सांख्यिकी आँकड़ों के विश्लेषण की विधियाँ हो सकती हैं –
(a) अविवरणात्मक या अप्रायिकतात्मक
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक

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प्रश्न 4.
इस पाठ्य पुस्तक की विषय-वस्तु है –
(a) विवरणात्मक विधियाँ
(b) प्रायिकतात्मक विधियाँ
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) विवरणात्मक विधियाँ

प्रश्न 5.
जिन चरों को संख्याओं द्वारा मापा जाता है, वे कहलाते हैं –
(a) मात्रात्मक आँकड़े
(b) गुणात्मक आँकड़े
(c) मात्रात्मक व गुणात्मक दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मात्रात्मक आँकड़े

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प्रश्न 6.
गुणात्मक आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) संख्याओं में
(b) कोटियों में
(c) संख्याओं व कोटियों दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) संख्याओं में

प्रश्न 7.
अर्थशास्त्री. सांख्यिकी का प्रयोग करते हैं –
(a) मौद्रिक नीति बनाने में
(b) राजकोषीय नीति बनाने में
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में

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प्रश्न 8.
सांख्यिकी की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है –
(a) प्रायोगिक विज्ञानों में
(b) अप्रायोगिक विज्ञानों में
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में

प्रश्न 9.
प्रयोगात्मक आँकड़े आविष्कारक –
(a) स्वयं तैयार करता है
(b) स्वयं या गणकों से एकत्र करवाता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं तैयार करता है

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प्रश्न 10.
सांख्यिकीय संबंधों में –
(a) शत प्रतिशत शुद्धता होती है
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था?
(क) गंडक
(ख) कोसी
(ग) सोन
(घ) दामोदर
उत्तर:
(घ) दामोदर

प्रश्न 2.
किस नदी का बेसिन भारत में सबसे बड़ा है?
(क) सिंधु
(ख) गंगा
(ग) ब्रह्मापुत्र
(घ) कृष्णा
उत्तर:
(ग) ब्रह्मापुत्र

प्रश्न 3.
कौन-सी नदी पंचनद में सम्मिलित नहीं है?
(क) रावी
(ख) सिंधु
(ग) चनाब
(घ) झेलम
उत्तर:
(ख) सिंधु

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प्रश्न 4.
कौन सी नदी दरार घाटी में बहती है ……………………..
(क) सोन
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) लूनी
उत्तर:
(ग) नर्मदा

प्रश्न 5.
अलकनन्दा तथा भागरथी नदी के संगम को क्या कहते हैं?
(क) विष्णु प्रयाग
(ख) कर्ण प्रयाग
(ग) रूद्र प्रयाग
(घ) देव प्रयाग
उत्तर:
(घ) देव प्रयाग

प्रश्न 6.
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को किस नाम से जाना जाता है?
(क) सांगपो
(ख) अरुण
(ग) मूला
(घ) त्रिशूली
उत्तर:
(क) सांगपो

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी है?
(क) महानदी
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) कावेरी
उत्तर:
(ख) गोदावरी

प्रश्न 8.
किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
(क) कोशी
(ख) वागमती
(ग) गंडक
(घ) दामोदर
उत्तर:
(क) कोशी

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 10 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
निम्न में अंतर स्पष्ट करें –

  • नदी द्रोणी और जल-संभर
  • वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप
  • अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप
  • डेल्टा और ज्वारनदमुख ।

उत्तर:
1. नदी द्रोणी और जल – संभर-बड़ी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र को नदी-द्रोणी जबकि छोटी नदियों व नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को ‘जल-संभर’ कहा जाता है। नदी द्रोणी का आकार बड़ा होता है, जबकि जल-संभ का आकार छोटा होता है।

2. वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप – जो अपवाह प्रतिरूप पेड़ की शाखाओं के अनुरूप हो, से वृक्षाकार (Dendritic) प्रतिरूप कहा जाता है, जैसे उत्तरी मैदान की नदियाँ । जब मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समांतर बहती हों तथा सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर मिलती हों तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा (Trellis) अपवाह प्रतिरूप कहते हैं।

3. अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप – जब नदियाँ किसी पर्वत से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं, तो इसे अपकेंद्रीय प्रतिरूप कहा जाता है। जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील या गर्त में विसर्जित होती हैं, तो ऐसे अपवाह प्रतिरूप को अभिकेंद्रीय (Centripetal) प्रतिरूप कहा जाता है।

4. डेल्टा और ज्वारनदमुख – नदियों के मुहाने तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनाता है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश है, इसे डेल्टा कहा जाता है । जवारनदमुख की रचना नदी के तीव्र लम्बवत् कटाव से होती है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए 

प्रश्न 1.
भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
उत्तर:
भारत की नदियाँ प्रतिवर्ष जल की विशाल मात्रा का वहन करती हैं, लेकिन समय व स्थान की दृष्टि से इसका वितरण समान नहीं है। वर्षा ऋतु में, अधिकांश जल बाढ़ में व्यर्थ हो जाता है और समुद्र में बह जाता है। इसी प्रकार, जब देश के एक भाग में बाढ़ होती है तो दूसरा भाग सूखाग्रस्त हाता है। यदि हम नदियों की द्रोणियों को आपस में जोड़ दें तो बाढ़ और सूखे की समस्या हल हो जायेगी। पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होने के कारण पीने के पानी की समस्या भी हल हो जायेगी तथा हजारों, करोड़ों रुपये की बचत होगी और पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। किसानों की आर्थिक हालत सुधरेगी।

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प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीपीय नदियाँ सुनिश्चित मार्ग पर चलती है
  2. ये नदियाँ विसर्प नहीं बनाती; और
  3. ये नदियाँ बारहमासी नहीं हैं।

(घ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों से अधिक में न दें 

प्रश्न 1.
उत्तर भारतीय नदियों की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
उत्तर भारतीय नदियों में हिमालय से निकलने वाली नदियाँ आती हैं। हिमालयी नदी तंत्र के अंतर्गत ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र, सिंधु नदी तंत्र तथा गंगा नदी तंत्र मुख्य हैं। प्रारम्भ में ये नदियाँ हिमालय के अक्ष के समानान्तर बहती हैं, फिर अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती हैं। इन नदियों के निरन्तर बहने के कारण इनके किनारे ऊँचे और ऊँचे होते गए। ये नदियाँ विशाल द्रोणियों का निर्माण करती हैं। ये सदानीरा नदियाँ हैं। अधिकतर प्रायद्वीपीय नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं तथा ये नदियाँ वर्षाधीन हैं। इसके अतिरिक्त ये तटीय नदियाँ होती हैं जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर में जाकर मिलती हैं। हिमालयी नदियाँ हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं जबकि प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी होती हैं। हिमालयी (उत्तर भारतीय नदियाँ) और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में मुख्य अंतर उनको जलवायु के कारण होता है।

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प्रश्न 2.
मान लीजिए आप हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वारा से सिलीगुड़ी तक यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियों के नाम बताएँ। इनमें से किसी एक नदी की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा करने पर गंगा, यमुना, शारदा, सोन, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानदी आदि नदियाँ मार्ग में आती हैं। गंगा अपनी द्रोणी और सांस्कृति महत्त्व दोनों के दृष्टिकोणों से भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह भारत का सबसे बड़ा अपवाह तंत्र है, जिसमें उत्तर हिमालय से निकलने वाली बारहमासी व अनित्यवाही नदियाँ और दक्षिण में प्रायद्वीप से निकलने वाली अनित्यवाही नदियाँ शामिल हैं। यह भारत की सबसे पवित्र नदी है। इलाहाबाद के आगे यमुना इसमें आकार मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है।

इससे आगे उत्तर की ओर से गोमती, घाघरा, गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं। दक्षिण की ओर से सोन नदी आकार मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदरवन में विश्व के सबसे बड़े डेल्ट का निर्माण करती है। इसके किनारे पर हरिद्वारा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, कोलकाता आदि महात्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। इसका अधिकांश जल सिंचाई के उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका जल अमृत के समान माना गया है।

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य विभाजक का नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट।

प्रश्न 2.
एक ट्रांस हिमालयी नदी का नाम बताएँ जो सिन्धु नदी की सहायक नदी है।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 3.
गंगा की सहायक नदी का नाम बताओं जो दक्षिण से मिलती है?
उत्तर:
सोन नदी।

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प्रश्न 4.
सिन्धु नदी की कुल लम्बाई कितनी है?
उत्तर:
2880 किलोमीटर।

प्रश्न 5.
सिन्धुनदी का उदग्म बताएँ।
उत्तर:
मानसरोवर झील (तिब्बत)।

प्रश्न 6.
उत्तरी भारत तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मध्य जल विभाजन का नाम बताएँ।
उत्तर:
विंध्या-सतपुड़ा श्रेणी।

प्रश्न 7.
दरार घाटियों में बहने वाली दो नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा, ताप्ती।

प्रश्न 8.
सिन्धु नदी का कुल बेसिन क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
1,165,000 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 9.
भारत के दो जल-प्रवाह तन्त्र बताएँ।
उत्तर:
हिमालय नदियाँ तथ प्रायद्वीपीय नदियाँ।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती जल प्रवाह की एक नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सिन्धु।

प्रश्न 11.
प्राचीन समय में कौन-सी नदी पंजाब से असम की ओर बहती थी?
उत्तर:
सिन्ध-ब्रह्मा नदी।

प्रश्न 12.
झेलम नदी का स्रोत बताएँ।
उत्तर:
बुल्लर झील।

प्रश्न 13.
गंगा नदी द्वारा निर्मित डेल्टे का नाम लिखें।
उत्तर:
सुंदरवन।

प्रश्न 14.
किस नदी को तिब्बत में सांग-पो कहा जाता है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र।

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प्रश्न 15.
किस नदी को दक्षिण की गंगा कहते हैं?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्री नदी।

प्रश्न 16.
जलबपुर के निकट नर्मदा नदी कौन-सा जल प्रवाह बनाती है?
उत्तर:
मार्बली रॉक।

प्रश्न 17.
प्राचीन समय में हरियाणा के शुष्क क्षेत्र में बहने वाली नदी का नाम लिखों।
उत्तर:
सरस्वती।

प्रश्न 18.
जोग जल प्रपात कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
शरबती नदी पर (कर्नाटक)।

प्रश्न 19.
भारतीय पठार की नदी का नाम लिखों जो अरब सागर की ओर बहती है।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती।

प्रश्न 20.
प्रायद्वीपीय भारत की एक नदी बताओं जो ज्वारनदमुख बनाती है।
उत्तर:
नर्मदा।

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प्रश्न 21.
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
गोदावरी।

प्रश्न 22.
कृष्णा नदी का स्रोत कौन-सा है?
उत्तर:
महाबलेश्वर।

प्रश्न 23.
भारत में गंगा नदी का कुल कितना कितना बेसिन क्षेत्रफल है?
उत्तर:
8,61,404 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 24.
बंग्लादेश में गंगा नदी को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर:
पद्मा।

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प्रश्न 25.
उन नदियों के नाम लिखो जो हिमालय नदी तंत्र बनाती हैं।
उत्तर:
सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 26.
प्रायद्वीपीय भारत की बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी।

प्रश्न 27.
एक ट्रांस हिमालय नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 28.
खम्बात की खाड़ी में गिरने वाली नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
माही।

प्रश्न 29.
अरावली से निकलने वाली नदी का नाम लिखो।
उत्तर:
साबरमती।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं । डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निरक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार है –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

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प्रश्न 2.
गंगा की दो शीर्ष नदियों (Head Streams) के नाम बताइए जो देव प्रयोग में मिलती हैं।
उत्तर:
गंगा नदी उत्तर प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है तथा दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है। देव प्रयाग में इससे दो शीर्ष नदियाँ–अलकनन्दा और भागीरथी आ कर मिलती हैं। इसके बाद इनका नाम गंगा पड़ता है।

प्रश्न 3.
प्रायद्वीप भारत की प्रमुख नदियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीप की कुछ नदियां पूर्व की ओर बहती हुई खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। इनमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेनार महत्त्वपूर्ण नदियाँ हैं। कुछ नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं। इसमें नर्मदा, ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं।

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प्रश्न 4.
गार्ज (महाखंड) क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पर्वतीय भागों में बहुत गहरे तथा तंग नदी मार्गों को गार्ज कहते हैं। इसे महाखंड भी कहा जाता है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं तथा लगातार ऊपर उठते रहते हैं। इसका तल लगातार गहरा होता है। हिमालय पर्वत में ऐसे कई गार्ज मिलते हैं। जैसे – सिन्धु, सतलुज, गार्ज, ब्रह्मपुत्र (दिहांग) गार्ज।

प्रश्न 5.
हिमालय की नदियों के तीन प्रमुख नदी तन्त्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
हिमालय की नदियों का विकास एक लम्बे समय में हुआ है। हिमालय की नदियों को तीन मुख्य तन्त्रों (System) में बाँटा जाता है

  • सिन्धु तन्त्र (Indus System)
  • गंगा तन्त्र (Ganges System)
  • ब्रह्मपुत्र तन्त्र (Brahmaputra System)

प्रश्न 6.
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियाँ लूनी साबरमती तथा माही हैं। अधिकतर नदियाँ रेत में लुप्त हो जाती हैं।

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प्रश्न 7.
उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों को कितने वर्गों में बांटा जाता है?
उत्तर:
भारत का जल प्रवाह देश की भू-संरचना पर निर्भर करता है। इस आधार पर देश की नदियों को दो वर्गों में बांटा जाता है –

  • हिमालय की नदियाँ
  • प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रश्न 8.
पश्चिमी तट पर नदियाँ डल्टा क्यों नहीं बनाती हैं जबकि वे बड़ी मात्रा में तलछट बहा कर लाती हैं?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर नर्मदा औरर ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं। ये नदियाँ काफी मात्रा में तलछट बहा कर ले जाती हैं परन्तु ये डेल्टा नहीं बनाती। इस तट पर मैदान की चौड़ाई बहुत कम है। प्रदेश की तीव्र ढाल है। नदियाँ तेज गति से समुद्र में गिरती हैं। इसलिए तलछट का निक्षेप नहीं होता। संकरे मैदान के कारण नदियों के अन्तिम भाग की लम्बाई कम है जिससे डेल्टे का निर्माण नहीं होता।

प्रश्न 9.
गोदावरी को वृद्ध गंगा या दक्षिणी गंगा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गोदावरी नदी प्रायद्वीप की सबसे बड़ी नदी है। इसका एक विशाल अपवहन क्षेत्र है जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा तथा आन्ध प्रदेश में फैला हुआ है। विशाल आकार और विस्तार के कारण इसकी तुलना गंगा नदी से की जाती है। जिस प्रकार उत्तरी भारत में गंगा नदी का महत्त्व है। गंगा नदी की तरह इसकी भी अनेक सहायक नदियाँ हैं।

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प्रश्न 10.
उस प्रायद्वीपीय नदी का नाम बताइए जिसकी सहायक नदियों का विकास नहीं हुआ है।
उत्तर:
नर्मदा नदी एक द्रोण-घाटी में बहती है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है। इसकी कोई सहायक नदी लम्बी नहीं है। कोई भी नदी 200 किमी से अधिक लम्बी नहीं है।’

प्रश्न 11.
पश्चिमी घाट से निकलने वाली प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय नदियों का जल विभाजक है जहाँ से कई नदियाँ निकल कर पूर्व की ओर बहती हैं। कावेरी नदी ब्रह्मगिरि माला से निकल कर खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। कृष्णा नदी महाबलेश्वर से तथा गोदावरी नदी नासिक क्षेत्र से निकल कर पूर्व की ओर बहती है। कई छोटी-छोटी नदियाँ पश्चिमी घाट से निकल कर पश्चिमी तटीय मैदान में पश्चिम की ओर बहती हैं।

प्रश्न 12.
गंगा तन्त्र में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
गंगा का उदग्म प्रदेश उत्तर प्रदेश के हिमालय में है। गंगा के दाहिने किनारे की मुख्य सहायक नदियाँ यमुना तथा सोन जैसी बड़ी नदियाँ हैं। इसके अतिरिक्त टोन्स तथा पुनपुन जैसी छोटी नदियाँ भी गंगा में मिलती हैं। गंगा के बाएँ पर कई बड़ी नदियाँ इसकी सहायक नदियों के रूप में मिलती हैं । जैसे-राम गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी तथा महानन्दा । ये सब नदियाँ मिल कर गंगा तन्त्र की रचना करती हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

प्रश्न 13.
सिन्धु तन्त्र में बहने वाली नदियों के नाम लिखें।।
उत्तर:
हिमालय पर्वत के पश्चिम में बहने वाली नदियाँ सिन्धु तन्त्र की रचना करती हैं। सिन्धु तिब्बत में 5,180 मीटर की ऊंचाई पर मान सरोवर झील से निकल कर कश्मीर, पंजाब (पाकिस्तान) में बहती हुई अरब सागर में गिरती हैं। इनकी प्रमुख सहायक नदियाँ सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम हैं।

प्रश्न 14.
गंगा तथा महानदी के डेल्टा के मध्य कौन-सी नदियाँ बहती हैं ?
उत्तर:
गंगा नदी का डेल्टा पश्चिमी बंगाल में तथा महानदी का डेल्टा उड़ीसा राज्य में फैला हुआ है। इनके मध्य में बिहार, उड़ीसा मध्य प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्यों के क्षेत्रों में स्वर्ण रेखा तथा ब्राह्मणी नदी का विस्तार है।

प्रश्न 15.
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर:
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में थोड़ा सा अंतर है। एक अपवाह द्रोणी को दूसरे से अलग करनेवाली सीमा को ‘जल संभर’ कहते है। जबकि नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं। जल संभरों का क्षेत्रफल 1000 हेक्टेयर से कम होता है जबकि नदी द्रोणियों का क्षेत्रफल बड़ा होता।

प्रश्न 16. प्रायद्वीपीय
भारत की पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय भारत को पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर –
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प्रश्न 17.
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर बताएँ।
उत्तर:
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में बाढ़ प्रवण क्षेत्र बताओं।
उत्तर:
बाढ़ प्रवण क्षेत्र- भारत में प्रतिवर्ष बाढ़ आती हैं। प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है। ऊँची बाढ़ों से फसलों, मकानों और सार्वजनिक सुविधाओं को – बहुत हानि होती है। अनेक लोग और पशु मर जाते हैं, परिवहन और संचार के साधन अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। इनमें सामान्य जन-जीवन भी गड़-बड़ हो जाता है। देश की उत्तरी विशाल मैदान तथा बड़ी नदियों के तटीय क्षेत्रों में गम्भीर बाढ़ के आने की आशंका बनी रहती है।

बिहार के मैदान, पश्चिम बंगाल के उत्तरी तथा दक्षिणी भाग, असम घाटी और कछार प्रायः आने वाली बाढ़ों के लिए कुख्यात हैं। कश्मीर घाटी, पंजाब के मैदान, उत्तर प्रदेश के मैदान, महानदी गोदावरी और कृष्णा के डेल्टा, कावेरी डेल्टा तथा नर्मदा और ताप्ती के निचले भागों में बाढ़ कभी-कभी ही आती है। बाढ़ आने के प्रमुख कारण ये हैं-भारी वर्षा, नदी घाटियों का मंद ढाल, नदी तल में गाद का भारी मात्रा में जमाव तथा जल ग्रहण क्षेत्रों में वनविहीन पहाड़ियाँ। कुछ क्षेत्रों में सड़कों रेलमार्गों और नहरों के निर्माण से जल के प्रवाह में बाधा पड़ती है। जिससे बाढ़ आ जाती है। तटीय क्षेत्रों में कुछ बाढ़े चक्रवातीय तूफानों के कारण भी आती हैं।

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प्रश्न 2.
भारत की नदियाँ किस तरह देश के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
भारत की नदियाँ अनेक तरह से हमारे लिये तथा हमारे देश के लिये उपयोगी है। नदियों के किनारे ही मानव बसाव हुआ है और प्रमुख सभ्यता और उत्कृष्ट संस्कृतियाँ विकसित हुई हैं। नदियों से बड़ी मात्रा मे जल नगरों तथा गाँवों तक पहुँचाया जाता है। बहुत से उद्योग भी काफी हद तक जल की आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। हमारे जीवन में मीठे जल की अधिकांश आवश्यकताएँ नदियों से ही पूरी होती है।

भारतीय नदियों के जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई में होती है। भारतीय नदियाँ प्रतिवर्ष 167753 करोड़ घन मीटर जल बहता है जिसका मात्र 33% अर्थात् 55,517 करोड़ घन मीटर जल ही सिंचाई के उपयोग में आ पाती है। भारतीय नदियों में जलशक्ति की बड़ी संभावनाएँ हैं । कुल नदी जल प्रवाह का 60% हिमालय में, 16% मध्यवर्ती भारत की नदियों में तथा शेष दक्कन के पठार की नदियों में नीहित है। इन नदियों से 60% कार्यक्षमता के आधार पर 4.1 करोड़ किलोवाट जलशक्ति उत्पादन किया जा सकता है।

देश के उत्तर तथा उत्तर पूर्व में क्रमशः गंगा और ब्रह्मपुत्र में, उड़ीसा में महानदी में, आंध्रप्रदेश के गोदावरी एवं कृष्णा गुजरात में नर्मदा एवं ताप्पी नदियों में देश के प्रमुख जलमार्ग हैं। देश के लगभग 10,600 कि०मी० लम्बे नाव्य जलमार्ग है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी प्रमुख नदियाँ हैं। गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और ताप्पी नदी केवल मुहानों के निकट ही नाव्य है। इस प्रकार भारत की नदियाँ देश के लिए पूर्णरूपेण उपयोगी हैं।

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प्रश्न 3.
नदी प्रवृत्तियों से क्या अभिप्राय है? हिमालयी प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना करें।
उत्तर:
नदी प्रवृत्तियाँ-किसी नदी में जल के ऋतुनिष्ठ प्रवाह के प्रतिरूप को इसकी प्रवृत्ति कहते हैं। हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में अन्तर का मुख्य कारण जलवायु में अन्तर है। हिमालय नदियाँ सदानीरा हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ, हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ मानसूनी और हिमनदीय दोनों ही हैं। इसके विपरीत प्रायद्वीप नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी हैं, क्योंकि इन पर केवल वर्षा का ही नियंत्रण है। प्रायद्वीप की विभिन्न नदियों की प्रवृत्तियाँ भी एक समान नहीं हैं, क्योंकि पठार के विभिन्न भागों की वर्षा के ऋतुनिष्ठ वितरण में अन्तर होता है।

गंगा नदी की प्रवृत्ति-जनवरी से लेकर जून तक गंगा में जल का न्यूनतम प्रवाह रहता है। अगस्त या सितम्बर में अधिकतम प्रवाह होता है। सितम्बर के बाद प्रवाह निरन्तर घटता जाता है। इस प्रकार गंगा नदी में एक विशिष्ट मानसूनी प्रवृत्ति है। गंगा की द्रोणी के पूर्वी और पश्चिमी भाग की नदी प्रवृत्तियों में असाधारण अन्तर पाए जाते हैं। मानसूनी वर्षा से पहले या ग्रीष्म ऋतु के पहले भाग में गंगा में पर्याप्त जल बहता है। इसका मुख्य कारण हिमालय पर बरफ का पिघलना है। गंगा की प्रवृत्ति की तुलना, हिमालय की ही अन्य नदी झेलम से की जा सकती है। झेलम में अधिकतम प्रवाह जून या मई में ही हो जाता है, क्योंकि इसका प्रवाह मुख्य रूप से हिमालय की बरफ से पिघलने पर निर्भर करता है। इन दोनों नदियों की प्रवृत्तियों में एक रोचक अन्तर है। इस अन्तर को इन नदियों के अधिकतम और न्यूनतम प्रवाह की भिन्नता के परास (range) में देखा जा सकता है। झेलम की तुलना में, गंगा में अन्तर अधिक सुस्पष्ट है।

प्रायद्वीपीय नदियाँ-प्रायद्वीप की दो नदियों की प्रवृत्तियों में हिमालयी नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना में काफी अन्तर है। नर्मदा में जल विसर्जन की मात्रा जनवरी से जलाई तक काफी कम रहती है लेकिन अगस्त में यह अचानक बढ़कर अधिकतम स्तर पर पहुँच जाती है। अगस्त में नर्मदा में जिस तेजी से जल की मात्रा बढ़ती है उसी तेजी से अक्तूबर में यह घट जाती है। गोदावरी में उस प्रवाह का स्तर मई तक नीचा रहता है। इसमें दो बार जल की अधिकतम मात्रा रहती है। एक बार मई मैं और दूसरी बार जुलाई-अगस्त में। अगस्त के बाद जल प्रवाह तेजी घटता है। जनवरी से लेकर मई तक के किसी भी महीने की तुलना में अक्टूबर और नवम्बर में जल प्रवाह की मात्रा अधिक होती है।

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प्रश्न 4.
भारत की तटीय नदियों का वर्णन करें।
उत्तर:
तटीय नदियाँ पश्चिम में अरब सागर की ओर तथा पूर्व में बंगाल के खाड़ी की ओर बहती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ ये हैं-शतरंजी, भद्रा वैतरणा, काली नदी, बेड़ती शरावती, भारतपुझा, पेरियार तथा पंबा । शतरंजी अमरेली जिले के दलकहवा के निकट से, भद्रा राजकोट जिले में अनियाली गाँव के पास से तथा धांधर गुजरात के ही पंचमहल जिले के घंटार गाँव के निकट से निकलती हैं। धांधर 135 किमी लम्बी है तथा इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,770 वर्ग किमी है। वैतरणा का उदगम स्रोत महाराष्ट्र के नासिक जिले में 670 मी की ऊँचाई पर त्रियंबक की पहाड़ियों के दक्षिणी ढालों पर है।

172 किमी की यात्रा के बाद यह बलसाड़ के निकट अरब सागर में गिरती है। काली नदी कर्नाटक के बेलगाँव जिले में बीड़ी नामक गाँव के निकट से निकलती है औ कारवाड़ की खाड़ी में गिरती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 5,179 वर्ग किमी है। 161 वर्गकिमी है। 161 किमी लम्बी बेड़ती नदी का उदगम स्रोत हुबली-धारवाड़ के आस-पास की पहाड़ियों में 701 मी की ऊँचाई पर है। शरावती का उदग्म स्थान कर्नाटक के शिमोगा जिले में है। इसी नदी पर प्रसिद्ध गरसोपा (जोग) जल-प्रपात है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,209 वर्ग किमी है। भारतपझा को पोन्नानी भी कहते हैं । यह केरल की सबसे लम्बी नदी है। यह अन्नामलाई की पहाड़ियों के पास से निकलती है। इसका अपवाह क्षेत्र 5.397 वर्ग किमी है। 177 किमी लम्बी पंबा नदी वेबनाद झील में गिरती है।

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ-सुवर्ण रेखा, वैतरणी और ब्राह्मणी के अलावा पूर्व की ओर बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं-दंशधारा, पेन्नर, पलार और वैगाई। वंशधारा का उद्गम तो उड़ीसा के दक्षिणी भाग में है, लेकिन यह आन्ध्र प्रदेश में बहती है। पलार का जलग्रहण क्षेत्र 17,870 वर्ग किमी नदियाँ हैं । पोइनी और चेय्यार इसकी दो प्रमुख नदियाँ हैं। वैगाई केरल से निकलती हैं। यह पेरियार के अपवर्तित जल को लेकर अंत में पाक की खाड़ी में गिर जाती है। छोटी-छोटी तटीय नदियों की विशेषताएँ हैं-तीव्र ढाल, भारी मात्रा में गाद तथा प्रवाह में शीघ्र घट-बढ़। तटीय क्षेत्रों की कृषि की सिंचाई में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कुछ क्षेत्रीय और आर्थिक समूहों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सार्क, यूरोपियन संघ, एशियन, जी – 8, जी – 20 आदि क्षेत्रीय और आर्थिक समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
विभिन्न साधन कौन से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं?
उत्तर:
निम्नलिखित साधनों की सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं –
1980 ई. के दशक में पाकिस्तान भारत में आगे था, परंतु 1990 के दशक में पाकिस्तान की संवृद्धि दर से 3.6 की गिरावट आई। कुछ विद्वानों का मत है कि संवृद्धि दर में गिरावट के अग्रलिखित दो कारण थे –

  1. 1988 में आरम्भ की गई सुधार प्रक्रिया।
  2. पाकिस्तान में राजनैतिक अस्थिरता।

विकास की सामान्य प्रक्रिया के दौरान पाकिस्तान ने सबसे पहले रोजगार और कृषि उत्पाद से सम्बन्धित अपनी नीतियों को बदल कर उन्हें विनिर्माण और उसके बाद सेवाओं की ओर परिवर्तित कर दिया। पाकिस्तान में विनिर्माण में लगे श्रम बल का अनुपात 18% था। जब पाकिस्तान में सीधे सेवा क्षेत्रक पर जोर दिया जा रहा है। 1980 के दशक में पाकिस्तान में सेवा क्षेत्रक में 27% श्रम बल कार्यरत था। वर्ष 2000 में यह बढ़कर 37% हो गया।

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प्रश्न 7.
चीन में ‘एक संतान’ नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ क्या है?
उत्तर:
चीन में “एक संतान” नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ जनसंख्या में वृद्धि रोकना है।

प्रश्न 8.
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतक – 2000-2001:
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प्रश्न 9.
मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए। अथवा, पाकिस्तान तथा भारत के मुख्य मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चीन, पाकिस्तान और भारत के मुख्य जनांकिकीय संकेत – 2003
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प्रश्न 10.
स्वतंत्रता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतंत्रता संकेतकों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता संकेतक से अभिप्राय उन संकेतकों से है जो मनुष्य की सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता को इंगित करते हैं। मानव विकास के संकेतकों में इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता संकेतक के कुछ उदाहरण-नागरिक अधिकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा, न्यायपालिका का स्वतंत्रता को संरक्षण देने की संवैधानिक सीमा तथा विधि सम्मत शासन आदि।

प्रश्न 11.
उन विभिन्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि (तीव्र आर्थिक विकास हुआ) हुई।
उत्तर:
चीन में तीव्र आर्थिक विकास के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं –

  1. विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दिशा निर्देशों के बिना 1978 में आधारित संरचना सुधार लागू करना।
  2. चीन ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में आधारित संरचना का विकास किया, जिससे वहाँ सामाजिक एवं आय के सूचकों में सुधार हुआ।
  3. चीन ने कृषि क्षेत्र सुधार कार्यक्रम लागू किया, जिससे उसकी उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई।
  4. विकेन्द्रीयकृत नियोजन काफी लम्बे समय तक लागू रहा।
  5. व्यक्तिगत उत्पादक इकाइयों का आकार छोटा रखा गया। उपरोक्त सभी कारकों ने आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान प्रदान किया। चीन ने सभी सुधारात्मक उपाय पहले छोटे स्तर पर परखे, उसके बाद ही समष्टि स्तर पर उन्हें लागू किया।

प्रश्न 12.
भारत चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित विशेषताओं को तीन शीर्षकों के अन्तर्गत समूहित कीजिए –

  1. एक संतान का नियम
  2. निम्न प्रजनन दर
  3. नगरीयकरण का उच्च स्तर
  4. मिश्रित अर्थव्यवस्था
  5. अति उच्च प्रजनन दर
  6. भारी जनसंख्या
  7. जनसंख्या का अत्यधिक घनत्व
  8. विनिर्माण क्षेत्रक के कारण संवृद्धि, सेवा क्षेत्रक के कारण संवृद्धि

उत्तर:
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प्रश्न 13.
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण बताइए।
उत्तर:
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण हैं –

  1. कृषि संवृद्धि और खाद्यपूर्ति, तकनीकी परिवर्तन का संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित न होकर अच्छी फसल पर आधारित होना, तथा
  2. पाकिस्तान की विदेशी ऋणों पर निर्भरता की प्रवृत्ति।

प्रश्न 14.
कुछ विशेष मानव विकास संकेतकों के संदर्भ में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कुछ मानव विकास सूचकों की तुलना निम्नलिखित ढंग से है –

  1. कुछ मानव विकास सूचकों जैसे GDP, प्रति व्यक्ति आय आदि में चीन, भारत व पाकिस्तान से आगे है।
  2. निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. चीन में सबसे कम है। इसके बाद क्रमशः पाकिस्तान एवं भारत का स्थान है।
  3. शिशु मृत्यु दर, मातृ दर, पोषक तत्त्व न पाने वालों का प्रतिशत आदि चीन में सबसे कम है।
  4. स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता एवं पीने योग्य पानी प्राप्त करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत चीन में, भारत व पाकिस्तान से अच्छा है।
  5. पाकिस्तान में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. भारत से कम है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने योग्य पानी की उपलब्धता के बारे में पाकिस्तान की स्थिति भारत से बेहतर है।

उपरोक्त तथ्यों से यह कहा जा सकता है कि चीन, भारत व पाकिस्तान से मानव विकास सूचकों के मामलों में आगे चल रहा है। यह भी सत्य है कि कई सूचकों के मामले में पाकिस्तान, भारत से अच्छी स्थिति में है। तीनों देशों के मानव विकास सूचक निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं –
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प्रश्न 15.
पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गई संवृद्धि दर की प्रवृत्तियों पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर:
पिछले दो दशकों में भारत व चीन में संवृद्धि की प्रवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं। जैसे –

  1. दोनों देशों में कृषि क्षेत्र का GDP में योगदान घटा है।
  2. चीन ने. विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि दर हासिल करके उसे बरकरार बनाए रखा, जबकि भारत में इस क्षेत्र की संवृद्धि में गिरावट आयी है।
  3. भारत ने 1990 के पाद सेवा क्षेत्र में संवृद्धि को आगे बढ़ाया है, जबकि चीन में सेवा क्षेत्र का योगदान घटा है।
  4. चीन में आर्थिक संवृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र का अहम योगदान रहा है। भारत में आर्थिक संवृद्धि के लिए सेवा क्षेत्र का योगदान ज्यादा है।
    विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि की प्रवृत्तियाँ 1990 – 2003
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Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि क्या है?
उत्तर:
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2001-2006 ई. है।

प्रश्न 2.
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल लिखें।
उत्तर:
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल 2002-2007 ई है।

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प्रश्न 3.
किस दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान तीन देशों की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति आय समान थी?
उत्तर:
1980 ई. के दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति दर समान थी।

प्रश्न 4.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. कितना प्रतिशत बढ़ी है?
उत्तर:
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. लगभग 8 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है।

प्रश्न 5.
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से कितने लोगों की जानें गई थीं?
उत्तर:
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से 75,000 लोगों की जानें गई थीं।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित किन देशों में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है?

  1. भारत
  2. चीन, और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
भारत और पाकिस्तान में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है।

प्रश्न 7.
अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाई गई विकासात्मक प्रक्रियाओं को समझने की हमें क्यों कोशिश करनी चाहिए?
उत्तर:
क्योंकि ऐसा करने से हमें अपने पड़ोसी देशों की शक्तियों और कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।

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प्रश्न 8.
भारत और पाकिस्तान को कब स्वतंत्रता मिली?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान को 1947 ई. में स्वतंत्रता मिली।

प्रश्न 9.
चीनी गणराज्य की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
चीनी गणराज्य की स्थापना 1949 ई. में हुई?

प्रश्न 10.
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा कब की गई थी?
उत्तर:
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा 1951-56 में की गई थी।

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प्रश्न 11.
चीन ने कब अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की?
उत्तर:
चीन ने 1953 ई. में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की।

प्रश्न 12.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद से विकासशील देश अपने आस-पास के देशों की विकास प्रक्रियाओं और नीतियों को समझने के लिए उत्सुक हैं। क्यों?
उत्तर:
क्योंकि उन्हें केवल विकसित देशों से ही नहीं अपितु अपने जैसे विकासशील देशों में भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा रहा है।

प्रश्न 13.
भारत में नगरीय क्षेत्रों में कितने प्रतिशत लोग रहते हैं?
उत्तर:
भारत में नगरीय क्षेत्रों में 28 प्रतिशत लोग रहते हैं।

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प्रश्न 14.
विद्वानों का मानना है कि भारत, चीन एवं पाकिस्तान सहित अनेक विकासशील देशों में पुत्र को वरीयता देना, एक सामान्य बात है। क्या आप इस बात को अपने परिवार या पड़ोस में देखते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम परिवार और अपने पड़ोस में यह बात देखते हैं।

प्रश्न 15.
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर कितना प्रतिशत थी?
उत्तर:
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर क्रमशः 58%, 97% और 3.6% थी।

प्रश्न 16.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण लिखों।
उत्तर:
राजनैतिक अस्थिरता, प्रेषणों और विदेशी सहायता पर बहुत ही अधिक निर्भरता और कृषि क्षेत्रक का अस्थिर निष्पादन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण हैं।

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प्रश्न 17.
माओ ने कब महान् सांस्कृतिक क्रांति शुरू की?
उत्तर:
माओ ने 1965 में महान् सहारा सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।

प्रश्न 18.
जी. एल. एफ. अभियान में कौन-कौन सी समस्याएँ आईं?
उत्तर:
जी. एल. एफ. अभियान में कई समस्याएँ आई जैसे-भयंकर सूखे का आना जिसने चीन में तबाही मचा दी और उसमें 30 मिलियन लोग मारे गए। चीन और रूस के बीच संघर्ष हुआ और इस संघर्ष में रूस ने अपने विशेषज्ञों को वापस बुला लिया जिन्हें उद्योगीकरण प्रक्रिया के दौरान सहायता करने भेजा गया था।

प्रश्न 19.
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में किन-किन क्षेत्रकों में सुधार किए गए?
उत्तर:
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में कृषि, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए।

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प्रश्न 20.
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का अर्थ यह है कि कीमतों की निर्धारण दो प्रकार से किया जाता था। किसानों और औद्योगिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों के आधार पर आगातों और निर्गतों को निर्धारित मात्रा में खरीदेंगे और बचेंगे और शेष वस्तुएँ बाजार कीमतों पर खरीदी और बेची जाती थीं।

प्रश्न 21.
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए क्या किया गया?
उत्तर:
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किए गए।

प्रश्न 22.
पाकिस्तान में किस प्रकार की अर्थव्यवस्था अपनाई गई है?
उत्तर:
पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है।

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प्रश्न 23.
निम्नलिखित देश में से किस देश की जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है?

  1. भारत
  2. चीन और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
2. चीन और

प्रश्न 24.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6, 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।

प्रश्न 25.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्या थी?
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्रमशः 3.0, 1.8 तथा 5.1 थी।

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प्रश्न 26.
निम्नलिखित देशों में से किस देश में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि सबसे अधिक है और वह कितनी है?
उत्तर:
पाकिस्तान में जनसंख्या की वार्षिक संवृद्धि दर सबसे अधिक है। यह संवृद्धि दर 2.5 है।

प्रश्न 27.
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात किस लिंग (पुरुष महिला) के पक्ष में कम था?
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में कम था।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें –

  1. आयात प्रतिस्थापन
  2. आसियान
  3. जन्म के समय जीवन प्रत्यशा
  4. जी-8
  5. जी-20
  6. मातृत्व (प्रसव) मृत्यु दर
  7. मृत्यु दर
  8. यूरोपियन संघ
  9. सार्क

उत्तर:
1. आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution):
सरकार की आर्थिक विकास की ऐसी नीति जिसमें आयात की जा रही वस्तुओं का स्थान देश की स्वनिर्मित वस्तुएँ ले लेती हैं। इस नीति में आयात नियंत्रण, आयात शुल्क तथा अन्य नियंत्रणों को अपनाया जाता है। इस नीति के ध्येय की प्राप्ति के लिए आन्तरिक उद्योगों को आत्मनिर्भरता की प्राप्ति तथा रोजगार संवर्धन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

2. आसियान (Association of South East Asian Nations):
इसका पूरा नाम दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन है। थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपीन्स, बूनी, जेरुस्लम, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, वियतनाम आदिश इस संगठन के सदस्य हैं।

3. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth):
जन्म के समय विद्यमान आयु-विशेष मृत्युदर के पैटर्न के जीवन पर स्थिर रहने पर उस नवजात शिशु की जीवित रहने की प्रत्याशा (वर्षों में) होती है।

4. जी-8 (G – 8):
यह आठ देशों का गुट है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, उत्तर आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी महासंघ इसके सदस्य हैं। यहाँ राज्याध्यक्षों और अन्तर्राष्ट्रीय अधिकारियों का वार्षिक आर्थिक, राजनैतिक शिखर सम्मेलन होता है। वहाँ अनेक बैठकें और नीतिगत अनुसंधान होते रहते हैं। गुट की अध्यक्षता की अवधि एक वर्ष है जो बारी-बारी से सदस्यों को प्रदान की जाती है। वर्ष 2006 का अध्यक्ष रूस है।

5. जी-20 (G – 20):
इस संगठन के सदस्य अर्जेंटीना, बोलिविया, ब्राजील, चिल्ली, चीन, क्यूबा, मिश्र, ग्वेटेमाला, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाईजीरिया, पाकिस्तान, पराग्वे, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, तंजानिया, वेनेजुएला तथा जिम्बाबे हैं। इसका उद्देश्य विश्व व्यापार संगठन में व्यापार और कृषि से जुड़े प्रश्नों पर ध्यान दिलवाना है।

6. मातृत्व मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate):
यह प्रसव काल में माताओं की मृत्यु और सजीव जन्मों का अनुपात है। अनुपात की गणना एक वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

7. मृत्यु दर (Mortality Rate):
यह शब्द मृत्यु दर पर आधारित है। इसे वर्ष भर में प्रति हजार जनसंख्या में हुई मृत्यु की संख्याओं द्वारा अभिव्यक्ति किया जाता है। यह रुग्णता दर से भिन्न है।

8. यूरोपियन संघ (European Union):
यह 25 स्वतंत्र देशों द्वारा गठित महासंघ है। इसके सदस्य देश हैं-आस्ट्रिया, बेल्जियम, साईप्रस, चेक गणराज्य, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लीबिया, लिथुआनिया, लक्सेवर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडेन, युनाइटेड किंगडम, माल्टा, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया और स्लोवोनिया। इस संगठन का उद्देश्य यूरोप महाद्वीप से राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।

9. सार्क (South Asia Asociation of Regional Corporation):
इसका पूरा नाम दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ है। यह आठ देशों का संघ है। ये देश हैं भारत, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान। सार्क दक्षिण एशियाई जनसमुदायों को मैत्री, विश्वास और सूझ-बूझ के आधार पर मिल-जुल कर कार्य करने का मंच प्रदान करता है। इसका ध्येय सदस्य देशों में आर्थिक तथा सामाजिक विकास का संवर्धन करना है।

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प्रश्न 2.
आजकल विभिन्न देशों में अपने पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने की जिज्ञासा क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
आजकल विभिन्न देशों में पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने एवं समझने की उत्सुकता बढ़ रही है क्योंकि इसके जरिए वे अपनी शक्तियों एवं कमजोरियों को जानने एवं समझने के साथ-साथ पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं की शक्तियों एवं कमजोरियों को भली-भाँति समझ सकते हैं। वे एक-दूसरे की आर्थिक नीतियों की तुलना कर सकते हैं एवं उन नीतियों के परिणामों को भी भली-भाँति जान सकते हैं। तुलना के माध्यम से राष्ट्र अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए सुरक्षात्मक एवं ठीक उपाय अपना सकते हैं।

प्रश्न 3.
चीन द्वारा ग्रेट लीप फोरवर्ड आंदोलन को वापिस लेना आवश्यक क्यों हो गया था? इसको किस कार्यक्रम द्वारा प्रतिस्थापित किया था?
उत्तर:
ग्रेट लीप फोरवर्ड कार्यक्रम वर्ष 1958 में चीन में आरम्भ किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद देश में बड़े पर औद्योगीकरण करना था। लेकिन इस कार्यक्रम को निम्नलिखित कई समस्याओं से गुजरना पड़ा –
1. एक भयंकर ‘सूखा काल’ का सामना करना पड़ा, जिसने 30 मिलियन लोगों की जान लेकर चीन में कोहराम मचा दिया था।

2. रूस के साथ मतभेद होने पर उसने चीन से अपने उन विशिष्ट लोगों को वापिस बुला लिया जो औद्योगीकरण करने के लिए मदद हेतु भेजे गए थे। उपरोक्त समस्याओं के मद्देनजर Great Leap Forward Campaign को हटाकर Great Proletarian Cultural Revolution. कार्यक्रम को लागू किया गया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत व्यवसायों के जानकार व्यक्तियों एवं छात्रों को देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया।

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प्रश्न 4.
पाकिस्तान में नए निवेश के लिए तैयार माहौल के लिए उत्तरदायी कारक बताइए।
उत्तर:
नए निवेश हेतु कई कारक उत्तरदायी थे। उनमें से कुछ निम्नांकित हैं –

  1. 1970 व 1980 के दशकों में ज्यादा जरूरी क्षेत्रों का विकेन्द्रीकरण कर दिया गया था।
  2. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया।
  3. पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।
  4. पाकिस्तान से ढेर सारे लोग मध्य एशिया की ओर प्रवास कर गए।
  5. पाकिस्तान सरकार ने निजी निवेशकों को प्रोत्साहन प्रदान किया।

प्रश्न 5.
चीन, भारत एवं पाकिस्तान की जनसंख्याओं के बारे में बताएँ।
उत्तर:
चीन, भारत एवं पाकिस्तान तीनों एशिया महाद्वीप के देश हैं। येद तीनों ही अर्थव्यवस्थाएँ विकासशील हैं। विश्वभर में चीन सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। पाकिस्तान की जनसंख्या का आकार छोटा है। इस दुनिया में रहने वाले छः व्यक्तियों में एक चीनी है तो दूसरा भारतीय है। पाकिस्तान की जनसंख्या, चीन अथवा भारत की जनसंख्या का आठवाँ भाग है। जनसंख्या आकार के आँकड़े नीचे लिखे गए हैं –
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प्रश्न 6.
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्य-बल की तुलना, उनके सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के साथ करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों की अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल का अनुपात उद्योग तथा सेवा क्षेत्रों की तुलना में ऊँचा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे कम एवं भारत में इस क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। भारत व पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र का उनके संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में अनुपात एक समान है। लेकिन चीन में कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान सबसे कम है। तीनों अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं उनके सकल घरेलू उत्पादन में योगदान से संबंधित आँकड़े निम्न प्रकार से हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव img 7

प्रश्न 7.
भारत, चीन तथा पाकिस्तान के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबलों के प्रतिशत एवं उनका संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में योगदान की तुलना करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत इनके कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल के प्रतिशत से कम है। चीन के मामले में सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र का योगदान, सकल घरेलू उत्पाद में भारत एवं पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा है। पाकिस्तान में उद्योग क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की स.घ.उ. में योगदान की दर एक समान है। भारत में उद्योग क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान कृषि क्षेत्र में थोड़ा अधिक है। उक्त तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के आँकड़े निम्नलिखित तालिका में दर्शाए गए हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव img 8

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प्रश्न 8.
स्वातंत्र्य सूचक को क्या कहा जा सकता है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकों को पर्याप्त बनाने हेतु स्वातंत्र्य सूचकों का समावेशन अति आवश्यक है। इसे सामाजिक एवं राजनैतिक निर्णयों में भागीदारी का सूचक भी कहते हैं। स्वातंत्र्य सूचक इस बात का भी सूचक है कि संविधान वहाँ के लोगों को किस हद तक संरक्षण/सुरक्षा का अधिकार देता है। दूसरे शब्दों में, स्वातंत्र्य सूचक न्याय एवं कानून स्वतंत्रता की भी माप है। अतः स्वातंत्र्य सूचकों के.समावेशन के अभाव में मानव विकास सूचक अपूर्ण कहे जा सकते हैं अथवा इनकी उपयोगिता कम हो जाती है।

प्रश्न 9.
चीन में माओवादी विकास की अवधारणा के बारे में नए नेतृत्व के क्या विचार थे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
1978 तक चीन में आर्थिक विकास की स्थिति भारत की तुलना में बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नए नेतृत्व ने विचार किया कि आत्मनिर्भरता, विकेन्द्रीयकरण, विदेशी तकनीक की चमक आदि असफल रहे हैं। हालांकि चीन ने 1950 के दशक के मध्य में कृषि क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू कर दिए थे, इसके बावजूद भी 1978 तक प्रति व्यक्ति आय का स्तर 1950 जितना ही रहा।

अत: नए नेतृत्व ने 1978 में संरचनात्मक आर्थिक सुधारों को लागू कर दिया। चीन में सुधार कार्यक्रमों का आरम्भ बिना किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के किया गया था। विश्व बैंक अथवा मुद्रा कोष के दिशा-निर्देशों के बिना ही स्वेच्छापूर्वक सुधार कार्यक्रम शुरू कर दिया गया। इस सुधार कार्यक्रम में विकेन्द्रीयकरण, आधुनीकरण, उदारीकरण एवं विदेशी निवेशकों के लिए प्रोत्साहन आदि शामिल थे।

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प्रश्न 10.
अगस्त 2004-2005 के लिए पाकिस्तान सरकार की कार्य निष्यादन क्षमता के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अगस्त 2004-2005 वर्ष के लिए पाकिस्तान सरकार के कार्य निष्पादन का ब्यौरा निम्न प्रकार से है –

  1. तीन सतत वर्षों के लिए पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद की बढ़ोतरी दर 8 प्र.श. हो गई थी।
  2. इस संकरात्मक परिवर्तन के लिए तीनों उत्पादक क्षेत्रों कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र का योगदान था।
  3. अर्थव्यवस्था को उच्च मुद्रा स्फीति एवं निजीकरण का सामना करना पड़ा।
  4. सरकार ने ऐसे कई सामाजिक कार्यों पर खर्च किया, जिनसे गरीबी दूर हो सकती थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन व पाकिस्तान के विकास अनुभवों से हमें क्या-क्या सीख मिलती है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
चीन व पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं के विकास चुनाव से प्राप्त सीख का ब्यौरा निम्नवत है –
1. वर्ष 1978 तक चीन एवं पाकिस्तान में विकास का स्तर भारत जैसा ही था।

2. चीन में राजनैतिक स्वतंत्रता का अभाव पाया जाता है। आज भी मानवता से जुड़े मुद्दे वहाँ के लिए विचारणीय हैं। पिछले तीन दशकों में राजनैतिक दृष्टिकोण में बदलाव किए बिना चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था में ‘बाजार व्यवस्था’ का विकास किया है। उच्च आर्थिक संवृद्धि के साथ चीन ने निर्धनता उन्मूलन में सफलता हासिल कर ली है।

सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादक इकाइयों का निजीकरण किए बिना भी चीन ने ऐसी बाजार व्यवस्था विकसित की है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक एवं आर्थिक विकास के अवसरों में बढ़ोतरी हुई है। वहाँ भू-स्वामित्व सामूहिक आधार पर है, लेकिन किसानों को खेती करने एवं चुकाने के उपरांत कृषि की पूरी आय को अपने पास रखने का अधिकार दे रखा है। चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग सामाजिक सुरक्षा के लिए आश्वस्त हैं। चीन में मानव विकास सूचक सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

3. भारत की भाँति पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली है। वहाँ सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों का सहअस्तित्व कायम है। वहाँ की राजनीति में सेना का प्रभुत्व है। पाकिस्तान के निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम में अस्थायित्व देखने को मिलता है।

विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दबाव में 1988 में संरचनात्मक सुधार कार्यक्रम पेश किए गए। इन सुधार कार्यक्रमों का मानव विकास सूचकों पर बुरा प्रभाव पड़ा। राजनैतिक अस्थिरता, विदेशों पर अधिक निर्भरता, कृषि क्षेत्र की लचर कार्य निष्पादन क्षमता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ज्यादा अच्छा नहीं कर पायी। हाल के कुछ वर्षों में वहाँ सकल घरेलू उत्पाद की उच्च वृद्धि दर से हालात अच्छे होने लगे हैं।

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प्रश्न 2.
आर्थिक एवं मानव विकास में किस प्रकार चीन, भारत एवं पाकिस्तान से आगे निकल गया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:

  1. शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्रों में आधारित संरचना का विकास, भू-सुधार, दीर्घकाल तक विकेन्द्रीयकृत नियोजन छोटे आकार की उत्पादन इकाइयों आदि कारकों ने चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अधिक अवसर प्रदान किए, जिससे वह भारत व पाकिस्तान से आगे निकल गया।
  2. आजादी प्राप्ति के आरम्भ से ही ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बड़े पैमाने पर किया गया। जबकि भारत व पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत अच्छा विकास नहीं किया गया।
  3. चीन में कृषि क्षेत्र में Commune व्यवस्था को लागू किया। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में आर्थिक समानता को बढ़ावा मिल गया।
  4. प्रत्येक सुधार कार्य पहले छोटे भाग पर करके परखा गया। इसके बाद इसको आगे बढ़ाया गया। भारत व पाकिस्तान में समष्टि आधार पर ही सुधार कार्यक्रम लागू किए गए।
  5. चीन की अर्थव्यवस्था में परंपरागत ढंग से उत्पादक क्षेत्रों में रूपान्तरण किया गया। कृषि क्षेत्र से उद्योग क्षेत्र, इसके बाद सेवा क्षेत्र का विकास किया गया लेकिन भारत ने प्रत्यक्ष रूप में कृषि क्षेत्र से सेवा क्षेत्र में छलांग लगा दी।
  6. राजनैतिक विचारधारा बदले बिना भी चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग किया।
  7. चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग अतिरिक्त आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अवसर विकसित करने के लिए किया।
  8. चीन ने भारत व पाकिस्तान से काफी पहले संरचनात्मक सुधार कार्यक्रमों को लागू कर दिया था, वो भी किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के बिना व जबकि भारत व पाकिस्तान ने विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के आह्वान पर आर्थिक सुधार लागू किए हैं।
  9. उपरोक्त बातों के कारण चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास सूचकों का स्तर भारत व पाकिस्तान से ज्यादा है।

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प्रश्न 3.
चीन में लाग किए गए आर्थिक सुधारों के चरणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
चीन की अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को विभिन्न चरणों में लागू किया गया है। सर्वप्रथम चीन के सुधार कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में लागू किए गए। इस क्षेत्र में Commune व्यवस्था लागू की गई। भू-आवंटन केवल प्रयोग के लिए किया गया। स्वामित्व के मामले में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। किसी को कर चुकाने के बाद कृषि क्षेत्र की पूरी आय को रखने की आजादी प्रदान की गई। इसके उपरांत सुधार कार्यक्रमों को उद्योग क्षेत्र में लागू किया गया।

स्थानीय सामूहिक स्वामित्व के आधार पर गाँवों एवं शहरों में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करके उन्हें उत्पादन करने छूट प्रदान की गई और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को इन इकाइयों के साथ प्रतियोगिता करनी पड़ती। चीन में दोहरी कीमत प्रणाली अपनायी गई है। किसानों एवं औद्योगिक इकाइयों को आगतों की निश्चित मात्रा का क्रय एवं उत्पाद की निश्चित मात्रा का विक्रय सरकार द्वारा तय कीमत पर करना पड़ता है। शेष उत्पादन को बाजार की कीमतों पर बेचा जा सकता है। अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए गए हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पाकिस्तान स्वतंत्र देश बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1947 में

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प्रश्न 2.
चीन स्वतंत्र राष्ट्र बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1949 में

प्रश्न 3.
पाकिस्तान ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1956 में

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प्रश्न 4.
चीन ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 1953 में

प्रश्न 5.
पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार शुरू किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 6.
चीन ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1978 में

प्रश्न 7.
भारत ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 8.
किस देश की जनसंख्या सबसे ज्यादा है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

प्रश्न 9.
किस देश का भौगोलिक क्षेत्र सबसे अधिक है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

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प्रश्न 10.
वह सूचक कौन-सा है जिसको ध्यान में रखना आवश्यक है –
(a) स्वतंत्रता सूचक
(b) स्वास्थ्य सूचक
(c) शिक्षा सूचक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वतंत्रता सूचक