Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 5 मधुबनी की चित्रकला

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 1 Chapter 5 मधुबनी की चित्रकला Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 5 मधुबनी की चित्रकला

Bihar Board Class 9 Hindi मधुबनी की चित्रकला Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
मधुबनी चित्रकला क्या है? परिचय दीजिए।
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला जो कभी जमीन, भीत्ति और कपड़े तक सीमित था, धीरे-धीरे, कागज और कैनवास पर भी इसका अंकन होने लगा। पहले इन चित्रों में कलाकारों द्वारा निर्मित प्राकृतिक रंगों का प्रयोग होता था किन्तु बाद में कृत्रिम रंगों का उपयोग होने लग गया। मिथिलांचन की इस लोकचित्रकला को मधुबनी पेंटिंग के नाम से जाना जाता है।

मधुबनी चित्रकला में रंग, विषय, शैली और चित्रकार वर्ग में विविधता भी रही _है। इनमें रेखा और रंगों के अनेक सूक्ष्म प्रयोग मिलते हैं चित्र का किनारों (बार्डर) घिरा होना अनिवार्य होता है और दुहरी रेखाओं वाली किनारी में मछली, फल, – फल, चिड़ियाँ आदि का अंकन होता है। सीमा रेखा यानि किनारी के अंदर चित्रित – दृश्य या प्रसंगों में जरूरी होता है कि रेखा और रंग से कोई स्थान खाली नहीं बचे। खाली स्थानों को भरने में प्रकृति और पशु-पक्षियों के चित्र सहायक होते हैं।

मिथिला को चित्रकारी यानि मधुबनी पेंटिंग का संबंध विभिन्न पजा-पाठ और मांगलिक अवसरों से तो रहा ही है साथ ही उसका एक प्रमुख भाग तोत्रिक उद्देश्यों से भी जुड़ा है। यहाँ के चित्रों में चार महादेवियों-महालक्ष्मी, महासरस्वती, महाकाली और चामुण्डां के चित्रांकन के साथ ही साथ काली, कमला, तारा, छिन्नमस्ता, मातंगी, पोडशी, भैरवी, भुवनेश्वरी, धूमावती और बगुलामुखी इन दसों के चित्रांकन की भी परंपरा रही है।

मिथिलांचल की यह मधुबनी चित्रकला रेखा प्रधान चित्र होने के कारण इसमें रेखा या रंग की अस्पष्टता दृष्टिगोचर नहीं होती। प्रसंग या व्यक्ति के भाव की व्यंजना करा देने की प्रमुखता के बावजूद चित्र में खाली जगहों को भरने या सजावट करने में कलाकार की रुचि तथा श्रम के भरपूर प्रमाण मिलते हैं। अनार की कलम, बाँस की कूँची, सींक या बाँस की तिली में लगी रुई और स्वनिर्मित रंगों के साथ रासायनिक रंगों के सहारे ही मधुबनी चित्रकला के हजारों वर्ष के प्राचीन विरासत सरक्षित रखा गया है। बिहार की समद्ध लोक चित्रकला की परंपरा में मधबनी की रंगीन चित्रकारी को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 5 मधुबनी की चित्रकला

प्रश्न 2.
मधुबनी चित्रकला के कितने रूप प्रचलित हैं।
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला के तीन प्रमुख रूप प्रचलित हैं।
(i) भूमि आकल्पन (ii) भित्ति चित्रण और (iii) पेंट चित्रण।
(i) भूमि आकल्पन-प्रायः हर संस्कृति में भूमि आकल्पना की परंपरा रही है। उत्तर प्रदेश में ब्रज क्षेत्र, साँझी, पहाड़ी क्षेत्र की ‘आँजी’, राजस्थान में ‘मांडना’, गुजरात में ‘साँथिया’, दक्षिण प्रदेशों का ‘ओलम’, असम की ‘अल्पन’ आदि भूमि आकल्पन के रूप हैं। बिहार में ‘चौका पुरना’ कहा गया है जो पूजा-पाठ के समय कलश स्थापन की जगह अनिवार्य होता है। इसे ही मिथिला में आश्विन या अरिपन’ कहा जाता है। मिथिलांचल में यह ‘अरिपन’ किसी भी पूजा, उत्सव, अनुष्ठान या विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर भूमि पर निर्मित्त चित्र हुआ करता है। विवाह के अरिपन में कमल, मछली, पुरइन (कमल का पत्ता), बाँस आदि के चित्र बनाये जाते हैं, अर्थात् भूमि पर किये जाने वाले चित्रांकन को भूमि आकल्पन कहते हैं। .

(ii) भित्ति चित्र : भित्ति चित्र, अर्थात् दीवारों पर बनाये जाने वाला चित्र है। भूमि चित्रों की तुलना में दीवार पर बनाये जाने वाले चित्रों में अधिक कलात्मकता होती है। इसकी भावप्रवणता और कल्पनाशीलता अधिक प्रभाव निर्माण करते हैं। भित्ति चित्र में स्थायित्व अधिक होता है। मिथिलांचल के इन चित्रों में सर्वाधिक कलात्मकता विवाहोत्सव के कोहवर लेखन में दिखाई पड़ता है। यह चतुष्कोणीय .. अर्थात् आयताकार या वर्गाकार होता है, जो अनार की डंडी की कलम तथा रुई से बनी तुलिका (ब्रस) द्वारा बनाया जाता है। मिथिला के भीत्ति चित्रों में राधाकृष्ण की रासलीला, रामसीता विवाह, जट-जटिन आदि पौराणिक और लोककथाओं का भी चित्रण होता है।

(iii) पट-चित्रण : कवि विद्यापति के समकालीन राजा शिव सिंह के काल में पट- चित्रण कला का विशेष विकास हुआ था। विभिन्न प्रसंगों के दृश्य कपड़े पर अंकित करने की उस परंपरा का ही विकास आज कागज या कैनवासों पर दिखाई. पड़ता है। पट-चित्रण की परंपरा ने मिथिलांचल की रंगीन चित्रकला को उत्कर्ष तथा प्रसिद्धि की शिखरों तक पहुँचाया है।

प्रश्न 3.
कोहबर चित्रकारी क्या है? बताइए। .
उत्तर-
कोहबर चित्रकारी भीत्ति चित्र का एक सर्वाधिक कलात्मक चित्रकारी है। नव विवाहिता दंपति सर्वप्रथम ससुराल में जिस स्थान पर एक साथ बैठते हैं उसे कोहबर कहा जाता है। कोहबर की चित्रकारी वैवाहिक अवसर पर किसी जानकार महिला द्वारा अनार की डंडी और रुई से बनी तूलिका द्वारा विभिन्न रंगों का प्रयोग करते हुए चतुष्कोणीय (वर्गाकार या आयताकार) चित्रांकन किया जाता है। कोहबर चित्रों में तीन भाग होते हैं-(क) गोसाईं घर (कुलदेवता का स्थान) (ख) कोहबर : घर और (ग) कोहबर घर का कोनिया (कोहबर का बाहरी भाग)। इन तीनों जगहों पर चित्रांकन के अलग-अलग रूप होते हैं। कोहबर चित्रांकन चतुष्कोणीय होता है जिसमें तोता, कमल का पत्ता, बाँस, कछुआ, मछली के अतिरिक्त नैना जोगिन और सामा-चकेवा के चित्रांकन की भी परंपरा है।

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प्रश्न 4.
मधुबनी चित्रकला में रंग प्रयोग की विशेषता बताइए।
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला में रंगों के प्रयोग की विशेष भूमिका है। इन चित्रकारिता में प्रयोग होने वाले रंग चित्रकार पहले स्वयं अपने परिजनों से घर ही. बनाते थे। ये रंग-विभिन्न फूल, फल, छाल आदि से बनने वाले रंगों में करजनी की फली, दीप की फुलिया, पेवरी, रामरस, सिंदूर, नील आदि के सहारे बनाये जाते थे जिनमें बबूल के गोंद का सामान्य प्रयोग होता था। मधुबनी चित्रकला में गोमूत्र, नील, . गेरु, बकरी का दूध, कौड़ी, मोती, ताँबा, तूतिया, लाजवर्त (रत्न) आदि से बने रंगों का भी प्रयोग होता था। ..

अर्थात् मधुबनी चित्रकला में पहले कलाकारों के परिवार में निर्मित प्राकृतिक रंगों के ही प्रयोग होते थे परंतु अब उसमें कृत्रिम रंग और रासायनिक रंगों का उपयोग आरम्भ हो गया है। मिथिलांचल की इस चित्रकला में विभिन्न रंगों का प्रयोग इसे अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि में मददगार सिद्ध हुआ है।

प्रश्न 5.
मधुबनी चित्रकला को ख्याति दिलाने में किस चित्रकार ने विशेष भूमिका निभाई?
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला को ख्याति दिलाने में प्रसिद्ध चित्रकार उपेन्द्र महारथी ने विशेष भूमिका निभाई है। ये मिथिला के चित्रकारी से इतने प्रभावित हए कि संपूर्ण बिहार की लोक चित्रकारी पर अध्ययन करने में वर्षों समय लगा दिया। मिथिलांचल चित्रकला की विशिष्टताओं को उन्होंने उसके पूरे महत्व के साथ चित्रकला के विशेषज्ञों के समक्ष उजागर करने में विशेष भूमिका निभायी थी।

प्रश्न 6.
भूमि आकल्पन से आप क्या समझते हैं? परिचय दीजिए।
उत्तर-
‘भूमि आकल्पन’ का अर्थ है भूमि पर बनाये जाने वाला चित्र। बिहार .
में पूजा पाठ के समय कलश स्थापन की जगह पर अनिवार्य रूप से बनाया जाता है, इसे यहाँ चौका पूरना भी कहा जाता है। इस भूमि आकल्पन की परंपरा देश के प्रायः प्रत्येक प्रदेश की संस्कृतियों में दिखाई पड़ती है। महाराष्ट्र में इसे रंगोली, गुजरात में साथिया, उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में सांझी और पहाडी क्षेत्र में आँगी नाम से जाना जाता है। दक्षिण प्रदेशों का ओलम, असम की अल्पन आदि भूमि आकल्पना के ही रूप हैं। इसे ही मिथिला में आश्विन या अरिपन कहा जाता है। मिथिला के किसी पुजा, उत्सव, अनुष्ठान या विवाह जैसे मांगलिक अवसर का भूमिचित्र हुआ करता है। वैवाहिक अरिपन में कमल, मछली, पुरइन (कमल का पत्ता) बाँस आदि के चित्र बनाने की परंपरा रही है।

प्रश्न 7.
मधुबनी चित्रकला में खाली स्थान क्यों नहीं छोड़े जाते हैं?
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला के चित्रों में खाली स्थान नहीं छोड़े जाते हैं क्योंकि लोकमान्यता है कि इन खाली स्थानों में दुष्ट आत्मायें प्रवेश न कर जायें। इसलिये चित्रों के खाली जगहों को भरने या सजावट करने में कलाकार की रुचि तथा श्रम के भरपूर प्रमाण मिलते हैं। वैसे स्थानों को फूल, पत्ते, टहनी आदि के चित्रों से भर दिये जाते है।

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प्रश्न 8.
मधुबनी चित्रकला के दलित चित्रकार वाले रूप की कुछ सामान्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
मधुबनी चित्रकला के कुछ दलित चित्रकारों ने संभ्रांत परिवार को चित्रकारिता से हट कर इसके एक स्वतंत्र रूप का विकास कर लिया है। इन दलित परिवारों की भी अपनी परंपरा रही है। ब्राह्मण एवं कायस्थ परिवारों में विकसित शैलियों में रंग और चित्रण से सूक्ष्म भिन्नतायें मिलती हैं। इन दलित परिवारों में गोबर के रस तथा काले रंग के सहारे चित्रकारी होती रही है और उनके द्वारा गृहित विषय लोकजीवन के यथार्थ से अपेक्षाकृत अधिक भरे होते हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 8 हमारे आस-पास के बाजार

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 8 हमारे आस-पास के बाजार Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 8 हमारे आस-पास के बाजार

Bihar Board Class 7 Social Science हमारे आस-पास के बाजार Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
रामजी की दुकान से लोग किन-किन कारणों से सामान खरीदते हैं ?
उत्तर-
रामजी की दुकान नजदीक होने के कारण गाँव के ज्यादातर लोग : यहाँ से सामान खरीदते हैं। इनकी दुकान में नमक, गुड़, चाय, चीनी, माचिस आदि रोजमर्रा की सामान मिलते हैं। रामजी गाँव के अधिकतर लोगों को पहचानते हैं इसलिए कभी-कभी उधार सामान भी दे देते हैं। इनके दुकान में सामान के बदले सामान भी मिलता है।

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प्रश्न 2.
किराने के सामान के लिए जलहरा के कछ लोग ही रामजी की दुकान पर बार-बार आते हैं। ऐसा क्यों?
उत्तर-
जलहरा गाँव में रामजी की दुकान के अलावे किराने की और भी ‘2-3 दुकाने हैं। जिसके घर से जो दुकान ज्यादा नजदीक पड़ती है, तो उस दुकान पर चले आते हैं और रामजी अपने पहचान वालों को उधार भी दे देता है।

प्रश्न 3.
बहुत कम मात्रा में सामान खरीदने पर महँगा मिलता है। उदाहरण देते हुए अपना मत रखिए।
उत्तर-
बहुत कम मात्रा में सामान खरीदने पर सामान महँगा मिलता है। उदाहरण के लिए-जैसे हम कभी कोई सामान एक साथ 5 kg. खरीदते हैं तो उसकी कीमत हमें 45 रु. बताई जाती है यानि 9.रु. 91 kg. पर अगर हम वही समान ! kg. खरीदते हैं, तो हमें उसकी कीमत 10 रु. p/kg. बताई जाती है। इससे प्रति किलो रु. ज्यादा देना पड़ता है।

प्रश्न 4.
जलहरा की दुकान और तिथरा के बाजार में क्या अंतर है?
उत्तर-
जलहरा एक छोटा गाँव है, जिसके कारण यहाँ दुकानों की संख्या भी कम है। यहाँ किराने की 3-4 दुकाने ही हैं। लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन दुकानों पर आश्रित होते हैं। जबकि तियरा एक बड़ा गाँव है। यहाँ लगभग 500 घर है। यहाँ पर 15-20 दुकाने हैं, जिसमें 7-8-दुकानें किराना की है। इसके अलावा कपड़ा, मिठाई, सब्जी-फल, चाय, नाश्ता आदि मिलते हैं।

प्रश्न 5.
आस-पास के गाँवों के लोग किन कारणों से तिथरा के बाजार आते हैं ?
उत्तर-
तियरा एक बड़ा गाँव है। यहाँ 15-20 दुकाने हैं जिसमें 78 दुकानें किराना की होती है। यहाँ कपडे, चाय-नाश्ता, फल-सब्जी आदि भी मिल जाती है। यहाँ ठेले पर छोटे, भंजा आदि भी मिलते हैं। इसलिए आस-पास के छोटे गाँव के लोग यहाँ आकर खरीदारी करते हैं। उन्हें इस बाजार में सभी समान मिल जाते हैं। इन बाजारों में समान की अच्छी बिक्री होती है।

प्रश्न 6.
उधार लेना कभी तो मजबूरी है, तो कभी सुविधा । उदाहरण देकर ‘समझाएँ।
उत्तर-
जब कभी अगर हम बाजार गए और हमारे पास पैसे नहीं है और हमें कोई वस्तु सस्ते दामों पर मिल जाए तो, हम कोशिश करते हैं कि उस वक्त हमें वे समान उधार में मिल जाए और अगर हमें वह वस्तु उधार में मिल जाता है तो उस वक्त उधार हमारे लिए सुविधा बन जाता है। पर अगर हमें किसी वस्तु की सख्त जरूरत हो पर उस वक्त हमारे पास पैसे नहीं हो तो उधार लेना हमारी मजबूरी बन जाती है जबकि हमें पता होता है कि उधार लेने की वजह से हमें उस वस्तु की थोड़ी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

प्रश्न 7.
लोग साप्ताहिक बाजार क्यों आना पसन्द करते हैं?
उत्तर-
साप्ताहिक बाजार सप्ताह में एक बार, एक दिन और एक जगह पर लगने वाला बाजार होता है। यहाँ रोजमर्रा के उपयोग की सभी चीजें मिल जाती हैं। यहाँ एक ही समान कई दुकानों में मिलता है। इसलिए अगर कोई विक्रेता अपनी वस्तु का अधिक दाम बताता है, तो लोगों के पास दूसरे दुकान से समान खरीद लेने का विकल्प होता है।

खरीददारों के पास मोल-भाव कर वस्तु की कीमत करवाने का मौका भी होता है। यहाँ पर ज्यादातर वस्तुएँ सस्ती एवं एक ही स्थान पर मिल जाता है। अलग-अलग सामान खरीदने के लिए अलंग-अलग स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होती है।

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प्रश्न 8.
साप्ताहिक बाजार में वस्तुएँ सस्ती क्यों होती है?
उत्तर-
साप्ताहिक बाजार में एक ही वस्तु कई दुकानों में मिलती हैं, इसके कारण दुकानदारों में आपस में कड़ी प्रतियोगिता होती है।

प्रश्न 9.
मोल-भाव कैसे और क्यों किया जाता है ? अपने अनुभव के आधार घर टोलियाँ बनाकर नाटक करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 10.
साप्ताहिक बाजार में जाने का अनुभव लिखें।
उत्तर-
मैं एक बार अपने माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार गई थी। ये बाजार क्योंकि सप्ताह में एक ही दिन लगता है इसलिए बाजार में बहुत भीड़ थी। वहाँ रोजमर्रा के सभी सामान उपलब्ध थे। एक ही जैसे सामान कई दुकानों में मिल रहे थे। सभी लोग अपनी-अपनी जरूरतों के समान खरीदने में व्यस्त थे। कुछ दुकानदार अपनी वस्तु का दाम अधिक बता रहे. थे तो लोग दूसरे दूकान की ओर जा रहे थे, तो कुछ लोग उसी दूकानदार से वस्तु का मूल्य कम करने को कह रहे थे।

सभी लोग खरीदारी करने में व्यस्त थे। वहाँ आस-पास के गाँव के लोग भी खरीददारी करने आए थे। वे लोग जल्दी-जल्दी अपने जरूरत की समान खरीद रहे थे क्योंकि उन्हें शाम तक’

अपने गाँव वापस भी लौटना था और अगर किसी का कोई परिचित व्यक्ति मिल गया तो वो बातें भी कर रहे थे और खरीददारी भी। मेरे माता-पिता ने भी अपने जरूरतों के सामान की खरीददारी की और फिर हम अपने घर लौट आए।

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प्रश्न 11.
आपके घर के आस-पास या कोई शहर के मोहल्ले की दुकानों का विवरण लिखें।
उत्तर-
मेरे घर के पास एक दुकान है। वहाँ रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले सभी सामान उपलब्ध होते हैं। वहाँ सौंदर्य प्रसाधन से लेकर खाद्य सामग्री सभी कुछ मिलता है। उस दुकान के बाहर में फोन बूथ भी है, जहाँ से लोग फोन भी करते हैं। वहाँ के दुकानदार बहुत ही अच्छे हैं। घर के पास दुकान होने के कारण मोहल्ले के सभी लोगों से उनकी जान-पहचान हो गई है।

सभी लोग अपने उपयोग के समान वहीं से लेते हैं। उनके दुकान का सामान भी बहुत अच्छे किस्म का होता है जरूरत पड़ने पर वे हमलोगों को उधार भी देते हैं और बाद में हम उन्हें पैसे दे देते हैं। उनके दुकान में बिक्री भी अच्छी होती है।

प्रश्न 12.
साप्ताहिक बाजार और गाँव की दकानों में क्या अन्तर है?
उत्तर-
साप्ताहिक बाजार सप्ताह में एक ही दिन लगता है। यहाँ पर कोई. भी व्यक्ति अपनी वस्तुएँ बेच सकता है। यहाँ पर रोजमर्रा के उपयोग के समान के साथ ही अन्य भी बहुत सारी वस्तएँ मिलती हैं। यहाँ पर लोगों को मोल-भाव कर सामान के दाम कम कराने का मौका मिलता है। अगर उन्हें लगता है कि दुकानदार वस्तुओं की कीमत कम नहीं कर रहा है, तो लोग दूसरी दुकान से सामान खरीद लेते हैं। यहाँ पर दूसरे गाँवों से लोग खरीददारी करने आते हैं।

पर मोहल्ले के दुकानों में उस मोहल्ले के लोग या उसके आस-पास के लोग ही खरीददारी करने आते हैं। यहाँ के दुकानों में रोजमर्रा के उपयोग के समान भी मिलते हैं। यहाँ पर वस्तुओं का मोल-तोल कम किया जाता है। वह दुकानें स्थायी होती हैं और प्रतिदिन खुलली है। यहाँ पर जान-पहचान की वजह से आपको उधार सामान भी मिल सकता है पर साप्ताहिक बाजार में ऐसा नहीं होता है।

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प्रश्न 13.
पूरन और जूही उस रामजी की दुकान से ही सामान क्यों खरीदते हैं?
उत्तर-
पूरन और जूही हमेशा उस दुकान से ही सामान खरीदते हैं, क्योंकि वह दुकान उनके मोहल्ले में ही हैं और वहाँ के सामान भी अच्छे किस्म के होते हैं। उस दुकान से उनके घर में एक बार में एक महीने का राशन जाता है। पूरन और जूही सामानों की लिस्ट बनाकर दुकान में दे देते हैं और सामान मिलने पर वह दुकानदार से सामानों के दाम लिखकर एक कागज पर ले लेते हैं और जब उनके पापा को वेतन मिलता है तो वे दुकानदार को पैसे दे देते हैं। दुकानदार के रजिस्टर पर भी उनके द्वारा लिए गए सामानों की लिस्ट होती है।

अपनी वस्तुओं को ज्यादा से ज्यादा बेचने के लिए वे लोग दाम कम करते हैं। जैसे-अगर कोई दुकानदार अपनी किसी वस्तु का मूल्य 10 रु. बताता है और खरीददार उसे नहीं खरीदता है तो दूसरा दुकानदार अपनी उसी वस्तु का दाम 9 रु. बताकर उसे बेच देता है। फिर यहाँ पर अलग-अलग दुकान होने से खरीददारों को मोल-भाव करने का भी पूरा मौका मिलता है और वे वस्तुओं का दाम कम करवा लेते हैं। फिर दुकानदारों को सुबह दुकान लगाकर शाम तक हटाना भी होता है इसलिए वे लोग वस्तुओं का दाम कर ज्यादा से ज्यादा वस्तुएँ बेचने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 14.
शहरों में कॉम्प्लेक्स या मॉल में लोग मोल-भाव नहीं करते हैं, क्यों?
उत्तर-
कॉम्प्लेक्स या मॉल में लोग मोल-भाव नहीं करते, क्योंकि वहाँ पर सभी सामान ब्रांडेड कंपनियों की होती है और उन सब पर एक पर्ची रहती है जिस पर उनका निश्चित दाम लिखा रहता है।

प्रश्न 15.
मॉल के दुकानदार और मोहल्ले के दुकानदार में क्या अंतर है?
उत्तर-
मॉल के दुकानदार और मोहल्ले के दुकानदार में बहुत अंतर होता । है। मॉल के दुकानदार से आप वस्तुओं के कीमत को कम करवाने के लिए मोल-भाव नहीं कर सकते हैं। मॉल के दुकानदार आपको एक बार में महीने… भर का सामान देकर बाद में पैसे नहीं ले सकते, उन्हें तुरंत ही पैसा चाहिए। मॉल के दुकानदार से आप उधार सामान भी नहीं ले सकते हैं।

वहीं मोहल्ले के दुकानदार से आप वस्तुओं के मोल-भाव भी कर सकते हैं और उनसे वस्तुओं के दाम कम भी करवा सकते हैं। मोहल्ले के दुकानदार आपको एक बार में महीने भर का सामान देकर बाद में पैसे नहीं ले सकते,

उन्हें तुरंत ही पैसा चाहिए। मॉल के दुकानदार से आप उधार सामान भी नहीं

ले सकते हैं। वहीं मोहल्ले के दुकानदार से आप वस्तुओं के मोल-भाव भी कर सकते हैं और उनसे वस्तुओं के दाम कम भी करवा सकते हैं। मोहल्ले के दुकानदार से हम महीने भर का सामान एक बार में ले सकते हैं और फिर पैसे मिलने पर उन्हें पैसे दे सकते हैं। मोहल्ले के दुकानदार जान-पहचान वाले होने के कारण कभी-कभी जरूरत पड़ने पर हमें उधार भी देते हैं।

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प्रश्न 16.
ब्रांडेड सामान किन कारणों से महंगा होता है?
उत्तर-
ब्रांडेड सामान के महँगे होने का सबसे बड़ा कारण होता है उनके ब्रांड का नाम । ब्रांडेड कंपनियाँ अपने सामानों का बड़ा-बड़ा विज्ञापन करवाती है, वे अपने सामानों के अच्छे क्वालिटी के होने के दावे करती है।

जिसमें कंपनियों का बहुत पैसा खर्च होता है। फिर अपने ब्रांडेड सामानों को बेचने के लिए कंपनियाँ बड़े-बड़े शोरूम का उपयोग करते हैं। इसमें भी उनका बहुत पैसा खर्च होता है। इन्हीं सब कारणों से ब्रांडेड सामान बिना ब्रांड वाले सामान से महंगे होते हैं।

प्रश्न 17.
दुकान या बाजार एक सार्वजनिक जगह है। शिक्षक के साथ चर्चा करें।
उत्तर-
दुकान या बाजार एक सार्वजनिक जगह है क्योंकि यहाँ पर सभी तरह के लोग आ-जा सकते हैं। अपनी जरूरतों के सामान खरीद सकते हैं। यहाँ आने-जाने को लेकर किसी के ऊपर कोई बंदिश नहीं होती। सभी जाति-धर्म आदि के लोग यहाँ एक साथ आकर खरीददारी करते हैं। यहाँ शिक्षित-अशिक्षित, अमीर-गरीब किसी के ऊपर कोई बंदिश नहीं होती है। – यहाँ कोई भी आकर सामान बेच सकता और खरीद सकता है।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बाजार क्या है? यह कितने प्रकार होता है?
उत्तर-
बाजार वह जगह होती है, जहाँ हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जाते हैं। हमारे चारों तरफ बाजार होते हैं। बाजार में हमारी जरूरतों के सभी सामान उपलब्ध होते हैं। बाजार में कई तरह दुकानों होते हैं, जिसमें हमें तरह-तरह के सामान मिलते हैं जैसे कपड़ा, चावल मसाला, अखबार, टी-बी-, मोबाईल, कॉपी-किताब, दवा आदि।

बाजार कई प्रकार के होते हैं-गाँव की दुकान, गाँव का बाजार, साप्ताहिक बाजार या हाट, मोहल्ले का दुकान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल और थोक बाजार।

इन बाजारों में हम अपनी जरूरतों के हिसाब से खरीददारी करने जाते हैं। जब हमें कम सामान खरीदना होता है तो हम छोटी दुकानों से ही सामान खरीद लेते हैं और ज्यादा समान लेना होता है तो हम थोक बाजार से भी सामान खरीदते हैं।

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प्रश्न 2.
ग्राहक सभी बाजारों में समान रूप से खरीददारी क्यों नहीं पाते?
उत्तर-
ग्राहक सभी बाजार में समान रूप से खरीददारी नहीं पाते क्योंकि कछ बाजारों जैसे-साप्ताहिक बाजार में ग्राहकों को वस्तुओं के दाम के माल-भाव करने का मौका मिलता है और वे वस्तुओं के दाम कम करवा सकते हैं और दुकानदार वस्तुओं के दाम कम नहीं करता है तो वे दूसरी दुकान से सामान ले लेते हैं।

मोहल्ले के दुकानदारों से जान-पहचान की वजह से कभी-कभी उधार समान भी मिल जाता है। पर यही अगर ग्राहक चाहे की वे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स या मॉल में वस्तुओं का मोलभाव करें तो यह संभव नहीं होता क्योंकि मॉल में सामान बहुत महंगे और ब्रांडेड होते हैं। थोक बाजार में ग्राहक आसानी से मोल-भाव करते हैं, क्योंकि एक बार में ज्यादा सामान लेने पर सामानों की कीमत कुछ कम होती है।

प्रश्न 3.
बाजार में कई छोटे दुकानदार से बातचीत करके उनके काम और आर्थिक स्थिति के बारे में लिखें।
उत्तर-
बाजार में कई छोटे दुकानदार भी होते हैं, वो लोग मंडी से सामान लाकर बेचते हैं। पर उनके पास सामानों की मात्रा बहुत कम होती है। वे लोग छोटी मात्रा में खरीद-बिक्री करते हैं। उनके दुकानों में रोजमर्रा के उपयोग की सभी सामान उपलब्ध होती है। वे लोग जान-पहचान वालों को कभी-कभी उबार सामान भी द देते हैं और बाद में उनसे पैसे ले लेते हैं।

इनकी आर्थिक स्थिति कुछ खास अंच्छी नहीं होती है। क्योंकि उन्हें – ज्यादा जाम नहीं होता । वे बड़े दुकानों की तरह सामानों को आधुनिक तरीके से पैकिंग करवाकर नहीं बेचते हैं। उनके दुकानों की साज-सज्जा भी अच्छी नहीं होती है। इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति भी साधारण ही रहती है।

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प्रश्न 4.
बाजार को समझने के लिए अपने माता-पिता के साथ आपके – आस-पास के बाजारों का परिभ्रमण करके संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर-
मैं अपने पिताजी के साथ एक बार अपने घर के पास वाले बाजार में गई थी। वहाँ सभी वस्तुएँ मिल रही थीं। कछ दुकानें छोटी थी और कछ दुकानें बड़ी थी। छोटी दुकानों में सामानों की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं थी और वह दुकान भी बहुत ही साधारण-सी थी। वहाँ पर से आस-पास के लोग सामानों की खरीददारी कर रहे थे।

वहीं कुछ दूकानें बहुत बड़ी और आकर्षित ढंग से सजी हुई थी। वहीं कुछ दुकानों में ब्रांडेड कपडे, कुछ में ब्रांडेड जूते आदि मिल रहे थे। वहीं कुछ ठेले आदि पर भो जूते और कपड़े बेच रहे थे। वहीं पास में सब्जी और फल भी मिल रहे थे। ठेले पर चाट-पकौड़े, भुंजा ‘आदि मिल रहे थे। सभी लोग खरीददारी करने में व्यस्त थे।

प्रश्न 5.
किसी साप्ताहिक बाजार में दुकानें लगाने वालों से बातचीत करके अनुभव लिखें कि उन्होंने यह काम कब और कैसे शुरू किया? पैसों की व्यवस्था कैसे की? कहाँ-कहाँ दकानें लगाता/लगाती हैं? सामान कहाँ से खरीदता/खरीदती है ?
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 7 Social Science हमारे आस-पास के बाजार Notes

पाठ का सार संक्षेप

हमारे आस-पास के बाजार – हमें अपने आस-पास दुकानें देखने को मिलती है। बाजार में भी दुकानें देखने को मिलती है और इन दुकानों में तरह-तरह के सामान मिलते हैं। अपने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमलोग बाजार जाते हैं। बाजार के कई रूप होते हैं जैसे नजदीक की दुकान, साप्ताहिक बाजार, बड़ी दुकान तथा शॉपिंग कॉम्पलेक्स आदि । इस अध्याय में हम बाजार के विभिन्न रूपों को जानेंगे।

गाँव की दूकान – गाँव में ज्यादातर छोटी-छोटी दूकानें होती है। इन दुकानों में किराने का समान जैसे – माचिस, नमक, गड, चीनी, चाय, तेल आदि मिलता है। इन दुकानों में थोड़ा बहुत उधार सामान मिलता है, पैसा न होने पर यहाँ से लोगों का काम चल जाता है बशर्ते की दुकानदार आपको पहचानता हो। इन दुकानों में सामान के बदले सामान भी मिलता है, जिसे हम ‘वस्तु “विनिपय प्रणाली’ कहते हैं। यहाँ के लोग छोटी-छोटी जरूरतों के लिए इन दुकानों पर निर्भर रहते हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 8 हमारे आस-पास के बाजार

शहर में मोहल्ले की दुकान – हमारे मोहल्ले में भी किराने करदकान होती है । मोहल्ले में होने के कारण ज्यादातर लोग यहीं से सामान खरीदते हैं। यहाँ भी अलग-अलग ब्रांड के साबुन, दंत मंजन, पाउडर, केश तेल आदि रखे थे। मोहल्ले की दुकान होने के लोग उससे एक महीने का सामान एक बार में ही ले लेते हैं और फिर वेतन मिलने पर एक बार में ही पूरा पैसा दे देते हैं। दुकानदार हिसाब की एक पर्ची खरीददार को दे देता है और दूसरी अपनी रजिस्टर में लिख .ना है। गेहल्ले में ऐसी भी कई दुकानें होती हैं जहाँ दूध, फल, सब्जी, खाइ पदार्थ, हा स्टेशनरी आदि वस्तुएँ मिलती है। ये स्थायी एवं प्रतिदिन खुलने – जानें होती हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 4 बिहार में चित्रकला

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 1 Chapter 4 बिहार में चित्रकला Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 4 बिहार में चित्रकला

Bihar Board Class 9 Hindi बिहार में चित्रकला Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
पटना कलम क्या है? संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
बौद्ध धर्म के विकास के साथ भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक नवीन और विकसित अध्याय आरंभ होता है। इस युग में बिहार और उसकी राजधानी पाटलीपुत्र का स्थान चित्रकला में सबसे अग्रगण्य था। पटना अर्थात् पाटलीपुत्र क्षेत्र के चित्रकारों की चित्रकारी में दिल्ली वाली चित्रकारी की विशेषताएँ तो थी ही किन्तु : स्थानीय प्रभाव से इसमें कुछ विशेष व नवीन विशेषताओं का उभार आया। इसी नवीन चित्रकारी शैली को पटना शैली अर्थात् पटना कलम का नाम दिया गया। पटना कलम का तात्पर्य हुआ चित्रकारी की पटना शैली। बिहार में चित्रकला का व्यापक विकास पटना कलम के रूप में हुआ है।

पटना कलम के चित्रों में विषय के रूप में पशु-पक्षी, प्राकृतिक दृश्य, किसान, लघु व्यवसाय, नाई, धोबी, बढ़ई, लुहार, मोची, तेली, गरीब ब्राह्मण, मुनीम, जमींदार आदि के जीवन व कार्य हआ करते थे. जिसमें बिहार के वर्ग विभाजित लोक जी का यथार्थ अंकन हुआ करता था।
पटना चित्रशैली के जयराम दास, झमक लाल, फकीरचंद लाल, शिवदयाल, भैरोजी, मिर्जा निसार, मेंहदी, गुरु सहाय, सेवक राम, कन्हैया लाल, सोना कुमारी, महादेव लाल, ईश्वरी प्रसाद वर्मा और राधामोहन प्रसाद जी प्रमुख चित्रकार, शिल्पकार, मूर्तिकार आदि थे। थे। सन् 1760 से 1947 ई. तक के काल को पटना कलम के नाम से जाना जाता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 4 बिहार में चित्रकला

प्रश्न 2.
राधामोहन बाबू के महत्व पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
बिहार में पटना चित्रशैली के अंतिम महत्वपूर्ण चित्रकार के रूप में राधामोहन जी का नाम स्वर्णाक्षरित है। यद्यपि विद्वानों ने ईश्वरी प्रसाद वर्मा को पटना कलम का अंतिम चित्रकार माना है। किन्तु वास्तविकता यह है कि महादेव लाल जी के शिष्य बाबू राधामोहन प्रसाद और ईश्वरी प्रसाद के शिष्य दामोदर प्रसाद अम्बष्ट ने पटना चित्रकारी शैली का अपनी पीढ़ी तक बखूबी निर्वाह किया है। फिर भी राधामोहन बाबू का नाम का पटना कलम में कलात्मक पुनर्जागरण की चेतना को व्यापक उभार प्रदान करने में अति महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इन्होंने कला और शिल्प महाविद्यालय की स्थापना पटना में करके चित्रकारी को नव-अभ्युदय प्रदान किये। राधागोहन जी का कहना है “बौद्ध धर्म के विकास के साथ-साथ भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक नवीन और विकसित अध्याय प्रारंभ होता है और इसका विकास इतिहास मौर्यकाल तक पहुंचता है।” पाटलीपुत्र से बौद्ध प्रचारकों के साथ-साथ चित्रकार और मूर्तिकार भी बाहर भेजे जाते थे। जो बुद्ध के उपदेश और उनकी जीवनी के विविध प्रसंग मंदिरों की भित्तियों तथा स्तूपों पर चित्रमूर्ति के रूप में अंकित करते थे।

बिहार परिवर्तनों का प्रदेश रहा है। प्रवृत्ति को नया उन्मेष और धारा को नया मोड़ देने वाली विभूतियों का यहाँ कभी कमी नहीं हई ऐसे ही एक विभूति के रूप में चित्रकार राधामोहन बाबू का जन्म पटना में हुआ जो पटना चित्रशैली के ऐसी अंतिम कड़ी थे, जिन्होंने भविष्य के कलात्मक विकास के लिये एक पुख्ता स्थायी और उर्वर भूमि तैयार की थी। पटना में कला और शिल्प महाविद्यालय की स्थापना करवा कर तो राधामोहन बाबू ने पटना चित्रकला शैली को स्थायी स्थायित्व रूप दिया।

प्रश्न 3.
चित्रकला के क्षेत्र में उपेन्द्र महारथी के महत्वपूर्ण योगदानों का परिचय दीजिए।
उत्तर-
पटना में कला और शिल्प महाविद्यालय के स्थापना के पश्चात् पूरे बिहार राज्य में कलात्मक पुनर्जागरण की चेतना का व्यापक उभार हुआ उसी दौरान उपेन्द्र महारथी जैसे बड़े कलाकार का बिहार में पर्दापण हुआ। इस प्रदेश में ये ऐसी अंतरंगता के साथ रमे कि आजन्म अपनी कला यात्रा का पल-पल बिहार की मिट्टी को समर्पित करते रहे। इस कला साधक ने अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर बिहार का नाम चित्रकारिता में सुशोभित किया।

उपेन्द्र महारथी ने चित्रकला की शिक्षा कलकत्ते में ग्रहण के दौरान ही महसूस कर लिया था कि कला को विदेशी प्रभावों से मुक्त कर राष्ट्रीय चेतना से जोड़ना आवश्यक है। इनकी चित्रकारी में भारतीय धर्म, दर्शन तथा राष्ट्रीयता का गहरा प्रभाव परिलक्षित होता है। उन्होंने अपने दरभंगा-निवास के दौरान ही मिथिला की चित्रमूर्ति आदि लोककलाओं का गहरा अध्ययन किया और उनके महत्व से लोगों को परिचित कराया। लोक कलाओं पर उन्होंने लंबे काल तक शोधपरक कार्य करते हुए बिहार तथा बंगाल के सुदूर देहाती क्षेत्रों की यात्रायें की थी। उन्होंने प्राप्त कलाकृतियों तथा शिल्पों की विशेषताओं से विशेषज्ञों को परिचित कराया था

स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ बिहार सरकार ने उपेन्द्र महारथी को उद्योग विभाग में डिजाइनर के पद पर नियुक्त कर किया और महारथी जी ने भी इस पद पर रहते हुए सिद्ध कर दिया कि चित्रकारी तथा शिल्प के अलावे वे वास्तु-कला के भी महारथी हैं। उनका डिज़ाइन किया हुआ राजगीर, शांति स्तूप, प्राकृत और जैनॉलॉजी संस्थान नालंदा और धौली (भुवनेश्वर) के शांति स्तूप उनकी राष्ट्रीयता मूलक कला-चेतना , तथा कल्पनाशीलता के कालजयी प्रमाण है।

वेणु शिल्प (बाँस कला) में विशेषज्ञता प्राप्ति के पश्चात् इन्हें राष्ट्रपति भवन के एक कक्ष को वेणुशिल्प से अलंकृत करने के लिये विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया था। चित्रकारी, शिल्पकर्म, अध्ययन और शोध-ये चार विशेषतायें उपेन्द्र महारथी के व्यक्तित्व के अंग थे। ये कला से संबंधित लेखन और कथा साहित्य की रचना किया करते थे। “वैशाली की लिच्छिवी”, बौद्ध धर्म का अधत्म,” और “इन्द्रगुप्त” ‘ जैसी पुस्तकों के साथ जापानी वेणु शिल्प पर भी उन्होंने एक स्वतंत्र पुस्तक लिखी थी। बिहार में कलाकर्म और शिल्पकर्म का वास्तविक उन्नयन उपेन्द्र महारथी जी द्वारा ही किया गया है ऐसा उनके कर्तृत्व द्वारा सिद्ध होता है। अतः चित्रकला के क्षेत्र में महारथी जी का योगदान उनकी महारत को भी प्रमाणित कर देता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 4 बिहार में चित्रकला

प्रश्न 4.
छापा चित्रकारी क्या है? इसके विशेषज्ञ चित्रकार कौन हैं? .
उत्तर-
छापा चित्रकारी का बिहार में शुभारंभ अत्यंत स्नेहिल तथा सरल-सहज व्यक्तित्व वाले श्याम शर्मा जी द्वारा हुआ है। सन् 1760 से सन् 1947 तक का समय पटना शैलि का समय है। समय के पटना शैली के चित्रकार राधामोहन बाबू थे। राधामोहन बाबू के साथ पटना चित्र शैली (पटना कलम) का अंत माना जा सकता है।

किन्तु उनके बाद जिन कलाकारों ने बिहार में कलाकर्म और शिल्प कर्म को बहुआयामी आधुनिकता तथा प्रयोगात्मक नवीनता से युक्त किया उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण नाम श्याम शर्मा जी का माना जा सकता है, जिनका जन्म सन् 1941 में
थरा (उत्तर प्रदेश) में हआ था। कलाशिल्प महाविद्यालय लखनऊ में इन्होंने छापा चित्रकारी में विशेषज्ञता प्राप्त कर कला और शिल्प महाविद्यालय पटना, बिहार में छापा कला के विशेषज्ञ शिक्षक के रूप में कार्य करने लग गये। छापा चित्रकारी के विशेषज्ञ चित्रकार श्याम शर्मा ही हैं।

प्रश्न 5.
पटना कला और शिल्प महाविद्यालय का परिचय दीजिए।
उत्तर-
बिहार में पटना कला और शिल्प महाविद्यालय की स्थापना चित्रकार राधामोहन बाबू ने किया था, जो प्रवृत्ति को नवीन उन्मेष और प्रवाह को नया मोड़ देने वाले विभूतियों में से एक थे। इनका जन्म पटना में हुआ था।

पटना कला और शिल्प महाविद्यालय की स्थापना के साथ बिहार की कला और शिल्प के क्षेत्र को नवअभ्युदय के साथ एक सशक्त ज्ञान-विज्ञानशाला प्राप्त हो गया जहाँ से अनेक विश्व-विख्यात चित्रकार, मूर्तिकार, शिल्पकार, वेणु शिल्पकारों के निर्माण के साथ राष्ट्रीय व राज्य स्तर के चित्रकार शिल्पकार भी तैयार हुए। इन कलाकारों ने विश्व चित्रकारिता के क्षेत्र में गजब का प्रभाव कायम किया और मूर्तिकारों व शिल्पकारों के निए विश्वस्तरीय आकर्षण का निर्माण भी किया।

प्रश्न 6.
वेणु शिल्प क्या है? वेणु शिल्प में उपेन्द्र महारथी के महत्वपूर्ण योगदानों का परिचय. दीजिए।
उत्तर-
वेणु शिल्प अर्थात् बाँस कला, आज भी बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलायें मुंज, कुश तथा गेहूँ के डंठलों से दौरी, दौरा, डाली, मऊनी, मोढ़ा आदि विभिन्न रंगों की बना लेती हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् उद्योग विभाग में सरकारी डीजाइनर, श्री उपेन्द्र महारथी जो चित्र कला, शिल्प कला के साथ वास्तुकला के भी महारथी थे। वेणु शिल्प में जापान तक की कला यात्रा करके विशेषज्ञता प्राप्त करके वे जब वापस आये तो प्रथमतः राष्ट्रपति भवन में एक कक्ष को विशेष वेणुकला से अलंकृत करने के लिये दिल्ली बुलाये गये थे।

वेणु शिल्प कला के क्षेत्र में पेन्द्र महारथी जी का योगदान अविस्मरणीय ऐतिहासिक के साथ सांस्कृतिक भी है। कला से संबंधित लेखन तथा कथा-साहित्य की रचनायें उपेन्द्र महारथी जी के महान योगदान के साक्षी हैं। ‘वैशाली की लिच्छवी’, ‘बौद्ध धर्म का अध्यात्म’ के अलावा वेणु शिल्प जगत में एक नया अध्याय जोड़ते हुए जापानी वेणु शिल्प पर एक स्वतंत्र पुस्तक तैयार की थी। वास्तव में बिहार में कलाकर्म और शिल्पधर्म के साथ वेणु शिल्प (बॉस कला) का यथार्थ उन्नयन उपेन्द्र महारथी जी ने किया था।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 4 बिहार में चित्रकला

प्रश्न 7.
बिहार की चित्रकारी में डब्ल्यू. जी. आर्चर का क्या महत्त्व रहा है?
उत्तर-
बिहार की चित्रकारी में विशिष्ट स्थान रखने वाली मधुबनी चित्रकला से अंतर्राष्ट्रीय जगत को प्रथम बार परिचित कराने वाले तत्कालीन जिलाधिकारी डब्लू० जी० आर्चर थे। इन्होंने चित्रकार ईश्वरी प्रसाद वर्मा के तीन सौ चित्र खरीद कर विश्वस्तर पर उन चित्रों के माध्यम से बिहार के मधुबनी चित्र कला को विश्व स्तर पर स्थापित किया। बिहार की चित्रकारी में डब्लू. जी. आर्चर अतिविशिष्ट महत्व की भूमिका निभायी है।

प्रश्न 8.
‘पटना कलम’ चित्रशैली का काल कब से कब तक माना जाता है?
उत्तर-
‘पटना कलम’ चित्रशैली का काल लगभग सन् 1760 से सन् 1986 तक का माना जाता है।

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प्रश्न 9.
सामाजिक जीवन में चित्रकला के महत्व पर एक निबंध लिखें।
उत्तर-
सामाजिक जीवन में चित्रकला विभिन्न विशेष अवसरों या मांगलिक कार्यों में अथवा ज्ञानार्जन या मनोरंजन में अथवा सांस्कृतिक या ऐतिहासिक वैशिष्टय के विभिन्न प्रसंगों पर विभिन्न प्रकार को प्रभाव निर्माण करने वाली है। यह सामाजिक जीवन का दर्पण कहलाने वाली चित्रकला व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीयता या वैश्विक जीवन में नवीनता व प्रेरणा उत्पन्न करने वाली है।

चित्रकला के माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखता है। किसी भी क्षेत्र विशेष की संपूर्ण जानकारी एक चित्र के माध्यम से भी संभव है।

सोलह कलाओं में चित्रकला भी एक कला है। यह जीवन के रुचि-रुझान व आकर्षण का प्रतिबिंब उपस्थित करता है। जीवन में परंपरावश अथवा महत्तावश मनुष्य इस कला को अपने अंदर विकसित करता है। चित्रकला के क्षेत्र में कशलता एवं तल्लीनता से लगे लोगों की आजीविका भी पुष्ट होती है। अनेक लोगों के जीवन यापन का साधन भी यह चित्रकला है। चित्रकला हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिसके माध्यम से हम वर्तमान, भविष्य और भूत काल के साक्ष्यों को छायांकित कर प्रकट करने में सक्षम हो पाते हैं। अपने परिवार और पूर्वजों के चित्र एवं प्रतिमाएँ, देवी-देवताओं या महापुरुषों के चित्र एवं प्रतिमाएँ उनके जीवन का हमें सदा स्मरण दिलाती रहती है। यह चित्रकला सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 बिहार में नृत्यकला

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 1 Chapter 3 बिहार में नृत्यकला Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

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Bihar Board Class 9 Hindi बिहार का लोकगायन Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
बिहार में प्रचलित किसी एक लोकनृत्य का परिचय दीजिए।
उत्तर-
बिहार में खासकर मिथिला में प्रचलित जट-जटिन स्त्रियों का संवादमूलक नृत्य है। वर्षा के लिए किये जाने वाले इस नृत्य में पुरुप नारी दोनों की भूमिकाएँ नारियाँ ही निभाती हैं और दर्शक भी नारियाँ ही होती हैं। इस नृत्य नाटिका के गायन की मधुर लयात्मकता तल्लीन कर देने वाली होती है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 बिहार में नृत्यकला

प्रश्न 2.
मगह में किस लोक नृत्य का प्रचलन था? एक संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
मगह क्षेत्र के गया जिले में नाचने-गानेवाली एक पेशेवर जाति हुआ करती थी। उस जाति की स्त्रियाँ विवाह आदि मांगलिक मौके पर बुलाई जाती थी और वे ‘खेलाडिन’ का नाच प्रस्तुत कर भरपूर पुरस्कार पाती थीं। दस-पन्द्रह के पंक्तिबद्ध समूह में वे नाचती हुई गालियाँ भी गाती थीं। वह नृत्य नवादा जिले के रजौली ग्राम में विकसित हुआ था। खलाडिने अपने नाच में विभिन्न बाजाओं का भी प्रयोग करती थीं।

प्रश्न 3.
कथक नृत्य में बिहार का क्या योगदान रहा है?
उत्तर-
बीसवीं शताब्दी में हरि उप्पल नलिन गांगली. नगेन्द्र मोहिनी शिवजी मिश्र और मधुकर आनन्द जैसे बड़े साधक नर्तकों ने कथक में बिहार की अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर दी। शांति निकेतन से मणिपुरी तथा केरल कलामंडल (केरल) से कथकली नृत्य की शिक्षा लेकर आये हरिउप्पल ने बिहार में शास्त्रीय नृत्य की प्रायः पहली ज्योति जगाई।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 बिहार में नृत्यकला

प्रश्न 4.
बिहार के नृत्य जगत में हरि उप्पल का क्या महत्व रहा है?
उत्तर-
हरि उप्पल की विशेषता थी कि कथकली की कोमलता तथा मणिपुरी के वीरभाव दोनों में उन्होंने अपूर्व दक्षता प्राप्त की थी। वैसी दक्षता किसी अन्य नर्तकों में नहीं देखी गयी। बिहार में उन्होंने नृत्य का विस्तृत प्रांगण तैयार किया है।
“बिहार में उन्होंने नुत्य का जी विस्तृत प्रागण तैयार किया, उसमें नलिनी गागुला, नागन्द्र मारना आर मधुकर आनंद, जेसे उत्तक, बिहार को प्राप्त हो सके।’

प्रश्न 5.
भारतीय नृत्य कला मंदिर कहाँ है? इसकी स्थापना किसने की थी?
उत्तर-
भारतीय नृत्यकला मंदिर बिहार की राजधानी पटना में है। हरि उप्पल ने भारतीय नृत्यकला मंदिर की स्थापना की, जो नृत्य प्रशिक्षण के लिए आज एक देश का विश्वविख्यात संस्थान है।

प्रश्न 6.
कथक और भरतनाट्यम दोनों के विशेषज्ञ किसी एक बिहारी नर्तक का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
नगेन्द्र मोहिनी कथक तथा भरतनाट्यम में बिहार की एक अनुपम उपलब्धि हैं। लंबा छरहरा शरीर, आत्मीयता में पगी मधुर बोली तथा सहज स्नेहिल स्वभाव वाले मोहिनी जी दर्शक वर्ग को मोह लेने वाले नर्तक के साथ ही नृत्य शिक्षक और नत्य शास्त्र पर अनेक पुस्तकों के प्रणेता भी हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति का आचार्य माना जाता है। नलिन गागुली, गोपीकृष्ण तथा रामजीवन प्रसाद से इन्होंने नृत्य के अनेक रूपों की शिक्षा पाई है।

प्रश्न 7.
गुड़िया नृत्य किसे कहते हैं?
उत्तर-
पटनासिटी में एक अत्यंत बूढ़े तथा पूर्णतः अपंग व्यक्ति मोथा सिंह रहते हैं, जिन्होंने गुड़िया नृत्य (मुखौटा नृत्य) का भरपूर विकास किया था। इस नृत्य में एक तरफ पुरुष और दूसरी तरफ नारी का परिधान धारण कर एक ही नर्तक नृत्य करता है। मुखौटा भी दुमुँहा होता है जिसमें एक तरफ नर का मुँह बना होता है और दूसरी तरफ नारी का। यह अत्यंत कठिन नृत्य माना जाता है फिर भी है लोकनृत्य हो। यह नृत्य जगत को बिहार की अनोखी देन है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 बिहार में नृत्यकला

प्रश्न 8.
बिहार के लोकनृत्य में भिखारी ठाकुर का क्या महत्व है?
उत्तर-
पारसी थिएटर कंपनियों के प्रभाव से पेशेवर नाच मंडलियाँ भोजपुर में विकसित हुईं जिनमें पुरुष नर्तकों के नृत्य की परंपरा बनी। भोजपुर में उसे लौंडा-नाच्च कहा जाता है। भिखारी ठाकर की मंडली वस्तुत: लौंडानाच की ही मंडली थी जिसमें उन्होंने विदेसिया आदि अनेक मौलिक नाटकों की शैलियों को विकसित किया। इसमें नाचने वाले युवक पूरी तरह नारी का वेश धारण कर नाचते हैं जिन्हें सिर्फ आवाज से पहचाना जाता है। लौंडा नाच बिहार के अन्य क्षेत्रों के अलावा उत्तर प्रदेश में भी प्रचलित रहा है।

प्रश्न 9.
नगेन्द्र मोहिनी का एक संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-नगेन्द्र मोहिनी कथक तथा भरत नाट्यम में बिहार की एक अनुपम उपलब्धि हैं। लंबा छरहरा शरीर, आत्मीयता में पगी मधुर बोली तथा सहज स्नेहिल स्वभाव वाले मोहिनी जी दर्शक वर्ग को मोह लेने वाले नर्तक के साथ ही नृत्य शिक्षक और नृत्य शास्त्र पर अनेक पुस्तकों के प्रणेता है। इन्हें अन्तरराष्ट्रीय ख्याति का आचार्य भी माना जाता है।

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प्रश्न 10.
मधुकर आनंद पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
मधुकर आनंद जैसे बड़े साधक नर्तकों ने कथक में बिहार की अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर दी। अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मधुकर आनन्द ने अपने नर्तकं पिता बलराम लाल जी से नृत्य का क ख ग सीखा और पटने में नगेन्द्र मोहिनी से कथक की विधिवत शिक्षा पाई थी। परन्तु उनकी कुछ प्रस्तुतियों को देख बिहार संगीत नाटक अकादमी के तत्कालीन अध्यक्ष प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. शिवनारायण सिंह ने उन्हें विश्व-विख्यात नर्तक बिरजू महाराज के पास भेज दिया। विश्वविख्यात नर्तक गुरु की स्नेहिल देख रेख में अपनी प्रखर प्रतिभा तथा सतत साधना से मधुकरजी ने नृत्य में उस स्तर की प्रशंसाएँ पाई जिन पर बिरजू महाराज को भी गर्व है। पिछले 27 सितंबर, 2008 ई० को मधुकर जी का परलोक वास मात्र इकतालीस वर्ष की उम्र में हो गया।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

Bihar Board Class 7 Science प्रकाश Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

(क) जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त किया जा सके, वह ……………. प्रतिबिम्ब कहलाता है।
(ख) उत्तल दर्पण ……………. प्रतिबिम्ब बनाता है।
(ग) यदि प्रतिबिम्ब सदैव वस्तु के आकार का बने तो दर्पण ……………. होगा।
(घ) जिस प्रतिबिम्ब को पर्दे पर न प्राप्त किया जा सके …………….. कहलता है।
उत्तर:
(क) वास्तविक
(ख) आभासी
(ग) समतल
(घ) आभासी ।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

प्रश्न 2.
अपना नाम अंग्रेजी भाषा में लिखकर उसका प्रतिबिम्ब समतल दर्पण में देखकर पता लगाएँ कि किन अक्षरों का प्रतिबिम्ब समान तथा किन का प्रतिबिम्ब भिन्न है?
उत्तर:
अपना नाम लिखें –
A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z .
A B C F G J L N P Q R S Y Z के प्रतिबिम्ब उल्टे बनते हैं।
ध्यान देकर अपना नाम लिखें।

प्रश्न 3.
उत्तल तथा अवतल दर्पण का उपयोग लिखिए।
उत्तर:
उत्तल दर्पण का उपयोग मोटरगाड़ियों के साइडमिरर के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। अवतल दर्पण टॉर्च, गाड़ियों के हेडलाइट, डॉक्टरी द्वारा आँख, कान, नाक, गला के निरीक्षण में इसका उपयोग करते हैं।

प्रश्न 4.
उत्तल और अवतल लेंस में क्या अन्तर है?
उत्तर:
उत्तल लेंस के किनारा पतला और बीच में मोटा होता है। जब प्रकाश पड़ता है तो अन्दर की ओर मुड़ जाती है। अवतल लेंस का किनारा मोटा और बीच में पतला होता है जब प्रकाश – की किरण पड़ती है तो किरण बाहर की ओर चली जाती है।

प्रश्न 5.
वास्तविक प्रतिबिम्ब किस प्रकार का दर्पण बना सकता है ?
उत्तर:
वास्तविक प्रतिबिम्ब अवतल दर्पण बना सकता है।

प्रश्न 6.
आभासी प्रतिबिम्ब किसे कहते हैं ? उदाहरण द्वारा बताएँ।
उत्तर:
आभासी प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है। समतल दर्पण और उत्तल दर्पण में प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी बनता है। जब हम अपना चेहरा समतल दर्पण में देखते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे चेहरे के बराबर सीधा प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बन रहा है।

प्रश्न 7.
समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की विशेषता लिखिए।
उत्तर:
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर सीधा और दर्पण के पीछे जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी है उतनी ही दूरी पर दर्पण के पीछे बनती है। यह प्रतिबिम्ब आभासी कहलाता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

प्रश्न 8.
कॉलम A में दिए गए शब्दों का मिलान कॉलम B में एक अथवा अधिक सही कथनों से कीजिए।
Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश 4
उत्तर:
(क) समतल दर्पण – (iii) सीधा तथा वस्तु के आकार से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है।
(ख) उत्तल दर्पण – (i) सीधा तथा वस्तु के आकार के आकार का प्रतिबिम्ब बनाता है।
(ग) अवतल दर्पण – (iv) दाँतों का आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाता है जिसके कारण दंत चिकित्सक उपयोग करते हैं।
(घ) अवतल दर्पण – (i) उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सकता है।
(च) उत्तल दर्पण – (vi) अधिक क्षेत्र का प्रतिबिम्ब बना सकता है।

Bihar Board Class 7 Science प्रकाश Notes

किसी वस्तु को देखने के लिए प्रकाश जरूरी है। बिना प्रकाश के हम कोई भी वस्तु देख नहीं पाते हैं। प्रकाश सीधी रेखा में गमन करती है। प्रकाश जिस पथ पर चलती है उस पथ को किरण कहते हैं। किरणों के समूह को प्रकाश पुंज कहते हैं। टॉर्च, गाड़ियों के हेडलाइट से निकलने वाली प्रकाश किरणपुंज के रूप में होती है। जिस वस्तु से प्रकाश आर-पार हो जाए उस पदार्थ को पारदर्शक कहते हैं। जिस वस्तु से प्रकाश आर-पार न हो वैसी वस्तु को अपारदर्शक कहते हैं और जिस वस्तु से प्रकाश का कुछ अंश आर-पार और कुछ न हो तो उस वस्तु को पारभाषी पदार्थ कहते हैं।

जब कोई प्रकाश अपारदर्शक वस्तु पर पड़ती है तो प्रकाश अपना पथ बंदल देती है या लौट जाती है जिसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश 2
समतल दर्पण पारदर्शक पदार्थ के बने होते हैं जिसकी एक सतह पर कलई (पेन्ट) किया हुआ हो और दूसरा प्रकाश का परावर्तक, सतह समतल हो, समतल दर्पण कहलाता है।

समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब सीधा होता है। आभासी होता है और वस्तु के बराबर होता है। कोई भी पॉलिश किया हुआ अथवा चमकदार सतह दर्पण की तरह कार्य करता है। समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे होता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

गोलीय दर्पण – गोलीय दर्पण की सतह समतल नहीं होती है। गोलीय दर्पण पारदर्शक गोले का भाग है जिसकी एक सतह पर कलई (पेन्ट) कर बनाया जाता है। कटे गोला की बाहरी सतह पेन्ट किया हो तो अवतल दर्पण और भीतरी सतह पेन्ट किया हआ हो तो उत्तल दर्पण बनता है।
Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश 3
अतः जिस गोलीय दर्पण की बाहरी सतह कलई किया हुआ हो और भीतरी सतह प्रकाश का परावर्तक उसे अवतल दर्पण कहते हैं। जिस गोलीय दर्पण की भीतरी सतह कलई की हुई हो तथा बाहरी सतह प्रकाश का परावर्तक हो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं। प्रतिबिम्ब दो प्रकार के होते हैं। वास्तविक प्रतिबिम्ब और आभासी प्रतिबम्ब । जब प्रतिबिम्ब पर्दे पर बनता है और देखा जाता है वैसे प्रतिबिम्ब को वास्तविक प्रतिबिम्ब कहते हैं। वास्तविक प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने बनता है।। अवतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब प्रायः वास्तविक होता है। दर्पण के सामने भिन्न-भिन्न दूरियों पर वस्तु को रखने पर बना प्रतिबिम्ब की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है। वस्तु से बड़ा या छोटा बन सकता है। वस्तु के उल्टा और सीधा भी बन सकता है।

उत्तल दर्पण के सामने वस्तु रखने पर प्रतिबिम्ब हमेशा वस्तु से छोटा और सीधा तथा आभासी होता है। उत्तल दर्पण के विस्तृत दृष्टि क्षेत्र होते हैं ! अतः चालक दूरी से आती गाडियों को देख लेता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश

चश्मा, दूरबीन, कैमरा में लेंस का प्रयोग होता है। लेंस पारदर्शी पदार्थों के बने होते हैं। इसके दो सतह होते हैं। वे लेंस जिनके किनारे पतले और -बीच में मोटा हो उत्तल लेंस कहते हैं। वैसे लेंस जिनके किनारा मोटा और बीच में पतला हो अवतल लेंस कहलाते हैं। जब उत्तल लेंस पर प्रकाश पड़ती है तो अन्दर की ओर मुड़ जाता है और अवतल लेंस पर प्रकाश पर किरणें पड़ती हैं तो बाहर की ओर फैल जाती हैं।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 16 प्रकाश 1

उत्तल लेंस को अभिसारी और अवतल लेंस को अपसारी लेंस भी कहते हैं। उत्तल लेंस को आवर्धक लेंस भी कहते हैं। श्वेत प्रकाश जब प्रिज्म पर पड़ता है तो अपवर्तन के बाद सात रंगों में विभक्त होता है। श्वेत प्रकाश का सात रंगों में अलग होना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है। श्वेत रंग सात रंगों का मिश्रण है।

वर्षा के बाद सूर्य के विपरीत दिशा में इन्द्रधनुष दिखाई पड़ता है, जिनमें सात रंग होते हैं। अतः सूर्य की किरणों में सात रंग हैं।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.3 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.3

प्रश्न 1.
∆ABC और ∆DRC एकही आधार BC पर बने दो समद्विबाहु त्रिभुज इस प्रकार हैं कि और D भुजा BC के एक ही और स्थित है (देखिए आकृति)| बदि AD बताने पर BC को P पर प्रतिचोद को तो दाइए कि-
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.3
(i) ∆ABD ≅ ∆ACD
(ii) ∆ABP ≅ ∆ACP
(iii) AP कोणA और कोण D दोनों को समद्विभाजित करता है।
(iv) AP रेखाखण्ड BC का लम्ब समद्विभाजक है।
उत्तर:
दिया है, ∆ABC और ∆DBC समद्विबाहु त्रिभुज हैं।
तो, AB = AC ………. (1)
तथा BD = CD …….. (2)
(i) ∆ABD तथा ∆ACD मैं,
AB = AC [समी (1) से]
BD = CD [समी. (2) से]
AD = AD (उभयनिष्ठ)
∴ SSS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABD ≅ ∆ACD.

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(ii) ∆ABP तथा ∆ACP में.
∠BAP = ∠CAP
(∵ ∆ABD ≅ ∆ACD, भाग (1) से])
AB = AC [समी. (1) से]
तथा AP = AP (उभयनिष्ठ)
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABP ≅ ∆ACP.

(iii) ∆ABD ≅ ∆ACD [भाग (1) से]
अतः ∆BAD ≅ ∆CAD
तथा ∆ABP = ∆ACP
अतः ∠BAP = ∠CAP
तो AP, ∠A को दो बराबर भागों में बाँटता है।
∆BDP और ∆CDP में.
BD = CD
BP = CP (∆ABP ≅ ∆ACP)
DP = DP (उभयनिष्ठ)
∴ SSS, सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆BDP ≅ ∆CDP
⇒ ∠RDP = ∠CDP
अत: AP, ∠D को दो बराबर भागों में बाँटता है।
अत: AP कोण ∠A तथा ∠D दोनों को समद्विभाजित करता है।

(iv) ∆BDP ≅ ∆ACP [भाग (iii) से)]
∠BPD = ∠CPD
तथा BP = PC
यह BPC एक रेखायुाम है
तो ∠BPD + ∠CPD = 180°
2∠BPD = 180°
∠BPD = 90°
अत: AP रेखाखण्ड BC का लम्ब समद्विभाजक है।

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प्रश्न 2.
AD एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC का एक शीर्षलम्ब है, जिसमें AB = AC है। दर्शाइए कि-
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(i) AD, रेखाखण्ड BC को समद्विभाजित करता है।
(ii) AD, कोण A को समद्विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) माना ∆ABC में AD एक शोर्षलब है,
∆ABD और ∆ACD में,
AB = AC
AD = AD (उभवनिष्ठ)
∠ADB = ∠ADC = 90° (∵ AD ⊥ BC)
∴ RHS, सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABD ≅ ∆ACD
⇒ BD = CD
तथा ∠BAD = ∠CAD (∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)
आ: AD रेखाखण्ड RC को समद्विभाजित करता है।

(ii) ∆ABD ≅ ∆ACD
∴ ∠BAD = ∠CAD
अत: AD कोण A को समद्विभाजित करता है।

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प्रश्न 3.
एक त्रिभुज ABC को दो भुजाएँ AB और BC तथा माध्यिका AM क्रमश: एक दूसरे प्रिभुज की भुजाओं PQ और QR तथा माध्यिका PN के बराबर हैं (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि-
(i) ∆ABM ≅ ∆PQN
(ii) ∆ABC ≅ ∆PQR.
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उत्तर:
दिया है, AM तथा PN माध्यिका है, अतः ये रेखाखण्ड BC और QR को दो बराबर भागों में बाँटती है।
⇒ BC = QR
\(\frac{1}{2}\)BC = \(\frac{1}{2}\)QR
⇒ BM = QN …… (1)
(i) ∆ABM और ∆PQN में,
AB = PQ (दिया है।)
AM = PN (दिया है।)
BM = QN समी. (1) से]
∴ SSS सर्वागसमता गुणधर्म से, ∆ABM ≅ ∆PQN.

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(ii) ∠ABM = ∠PQR ……… (2) [भाग (i) से]
∆ABC और ∆PQR में,
AB = PQ (दिया है।)
BC = QR (दिया है।)
∠ABC = ∠PQR समी. (2) से]
∴ SAS, सर्वागसमता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆PQR.

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प्रश्न 4.
BE और CF एक त्रिभुज ABC के दो बराबर शीर्षलम्ब हैं। RHS सर्वांगसमता नियम का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए कि ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
उत्तर:
वहाँ BE ⊥ AC, CF ⊥ AB तथा BE = CF
∆AEB और ∆AFC में,
∠A = ∠A (उभयनिष्ठ)
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∠AEB = ∠AFC = 90°
BE = CF (दिया है।)
∆AEB ≅ ∆AFC
⇒ AB = AC (∵ सर्वांगसम त्रिभुज के संगत भाग बराबर होते हैं)
अत: ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।

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प्रश्न 5.
ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है। AP ⊥ BC खींचकर दर्शाइए कि ∠B = ∠C है।
उत्तर:
∆ABP और ∆ACP में,
AB = AC (दिया है)
∠APB = ∠ABC = 90° (∵ AP ⊥ BC)
AP = AP (जभवनिष्ठ)
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∴ RHS, सबोगसमता गुणधर्म से.
∆ABP ≅ ∆ACP
⇒ ∠B = ∠C. (∵ सर्वागसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)

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Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science ध्वनि InText Questions and Answers

प्रश्न शृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 182)

प्रश्न 1.
किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है ?
उत्तर:
जब कोई वस्तु कम्पन करती है तो यह अपने चारों ओर विद्यमान माध्यम के कणों को कंपमान कर देती है। कंपमान वस्तु के सम्पर्क में रहने वाले माध्यम के कण अपनी सन्तुलित अवस्था से विस्थापित होते हैं। ये अपने समीप के कणों पर एक बल लगाते हैं जिसके फलस्वरूप निकटवर्ती कण अपनी विरामावस्था से विस्थापित हो जाते हैं। निकटवर्ती कणों को विस्थापित करने के पश्चात् प्रारम्भिक कण अपनी मूल अवस्थाओं में वापस लौट आते हैं। माध्यम में यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि ध्वनि हमारे कानों तक नहीं पहुँच जाती है।

प्रश्न श्रृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 18)

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय की घंटी ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है ?
उत्तर:
घंटी आगे और पीछे तेज गति करती है जिस कारण वायु में संपीडन और विरलन की एक श्रेणी बन जाती है। यही संपीडन और विरलन ध्वनि तरंग बनाते हैं जो माध्यम से होकर संचरित होती है।

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों को संचरित होने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। अतः उन्हें यान्त्रिक तरंगें कहा जाता है। ध्वनि तरंगें माध्यम के कणों की गति द्वारा अभिलक्षित की जाती हैं।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 3.
मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं। क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पायेंगे ?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। चन्द्रमा पर वायुमण्डल न होने के कारण ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम नहीं है। अतः हम अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि नहीं सुन पायेंगे।

प्रश्न श्रृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 186)

प्रश्न 1.
तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है ?
(a) प्रबलता
(b) तारत्व।
उत्तर:
(a) आयाम
(b) आवृत्ति।

प्रश्न 2.
अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है
(a) गिटार
(b) कार का हॉर्न।
उत्तर:
गिटार का तारत्व कार के हॉर्न से अधिक है क्योंकि गिटार के तारों से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति कार के हॉर्न से अधिक होती है। जितनी अधिक आवृत्ति होगी उतना अधिक तारत्व होगा।

प्रश्न श्रृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 186)

प्रश्न 1.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
तरंगदैर्घ्य-दो क्रमागत संपीडनों (c) अथवा दो क्रमागत विरलनों (R) के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य कहलाती है। इसका SI मात्रक मीटर (m) है।
आवृत्ति – एकांक समय में होने वाले कुल दोलनों की संख्या को आवृत्ति (υ) कहते हैं। इसका SI मांत्रक ह (Hertz) है।
आवर्तकाल – किसी माध्यम में घनत्व के एक सम्पूर्ण दोलन में लिया गया समय ध्वनि तरंग का आवर्तकाल कहलाता है। इसे T अक्षर से निरूपित करते हैं। इसका SI मात्रक सेकण्ड (s) है।
आयाम – किसी माध्यम में मूल स्थिति के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ को तरंग का आयाम कहते हैं। इसे साधारण अक्षर A से निरूपित किया जाता है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 2.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
उत्तर:
ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति व वेग के बीच सम्बन्ध को निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है –
ध्वनि का वेग (v) = तरंगदैर्घ्य (λ) x आवृत्ति (υ) = v = 10

प्रश्न 3.
किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 Hz तथा वेग 440 m/s है। इस तरंग की तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए।
हल:
ध्वनि तरंग की आवृत्ति (υ) = 220 Hz
ध्वनि तरंग का वेग (v) = 440 m/s
ध्वनि तरंग का वेग v = तरंगदैर्घ्य (λ) x आवृत्ति (υ)
λ = v/υ = \(\frac {440}{220}\) = 2 m
अतः इस तरंग की तरंगदैर्घ्य 2 m है।

प्रश्न 4.
किसी ध्वनि स्रोत से 450 m दूरी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य 500 Hz की ध्वनि सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास तक पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अन्तराल होगा?
हल:
दो क्रमागत संपीडनों के बीच का समय तरंग का समय अन्तराल होता है।
आवृत्ति (υ) = \(\frac {1}{T}\)
या T = \(\frac {1}{υ}\) = \(\frac {1}{500}\) = 0.002 s

प्रश्न श्रृंखला # 05 (पृष्ठ संख्या 187)

प्रश्न 1.
ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
उत्तर:
किसी एकांक क्षेत्रफल से एक सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं। प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है। एक बल लगाते हैं जिसके फलस्वरूप निकटवर्ती कण अपनी विरामावस्था से विस्थापित हो जाते हैं। निकटवर्ती कणों को विस्थापित करने के पश्चात् प्रारम्भिक कण अपनी मूल अवस्थाओं में वापस लौट आते हैं। माध्यम में यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि ध्वनि हमारे कानों तक नहीं पहुँच जाती है।

प्रश्न शृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 182)

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय की घंटी ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है ?
उत्तर:
घंटी आगे और पीछे तेज गति करती है जिस कारण वायु में संपीडन और विरलन की एक श्रेणी बन जाती है। यही संपीडन और विरलन ध्वनि तरंग बनाते हैं जो माध्यम से होकर संचरित होती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों को संचरित होने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। अतः उन्हें यान्त्रिक तरंगें कहा जाता है। ध्वनि तरंगें माध्यम के कणों की गति द्वारा अभिलक्षित की जाती हैं।

प्रश्न 3.
मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं। क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पायेंगे?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। चन्द्रमा पर वायुमण्डल न होने के कारण ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम नहीं है। अतः हम अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि नहीं सुन पायेंगे।

प्रश्न श्रृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 186)

प्रश्न 1.
तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है ?
(a) प्रबलता
(b) तारत्व।
उत्तर:
(a) आयाम
(b) आवृत्ति।

प्रश्न 2.
अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है
(a) गिटार
(b) कार का हॉर्न।
उत्तर:
गिटार का तारत्व कार के हॉर्न से अधिक है क्योंकि गिटार के तारों से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति कार के हॉर्न से अधिक होती है। जितनी अधिक आवृत्ति होगी उतना अधिक तारत्व होगा।

प्रश्न श्रृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 186)

प्रश्न 1.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
तरंगदैर्घ्य-दो क्रमागत संपीडनों (c) अथवा दो क्रमागत विरलनों (R) के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य कहलाती है। इसका SI मात्रक मीटर (m) है।
आवृत्ति – एकांक समय में होने वाले कुल दोलनों की संख्या को आवृत्ति (υ) कहते हैं। इसका SI मात्रक हर्ट्ज (Hertz) है।
आवर्तकाल – किसी माध्यम में घनत्व के एक सम्पूर्ण दोलन में लिया गया समय ध्वनि तरंग का आवर्तकाल कहलाता है। इसे T अक्षर से निरूपित करते हैं। इसका SI मात्रक सेकण्ड (s) है।
आयाम – किसी माध्यम में मूल स्थिति के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ को तरंग का आयाम कहते हैं। इसे साधारण अक्षर A से निरूपित किया जाता है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 2.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
उत्तर:
ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति व वेग के बीच सम्बन्ध को निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता हैध्वनि का वेग (v) = तरंगदैर्घ्य (λ) x आवृत्ति (υ)
v = λ υ

प्रश्न 3.
किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 Hz तथा वेग 440 m/s है। इस तरंग की तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए।
हल:
ध्वनि तरंग की आवृत्ति (υ) = 220 Hz
ध्वनि तरंग का वेग (v) = 440 m/s
ध्वनि तरंग का वेग v = तरंगदैर्घ्य (λ) x आवृत्ति (υ)
λ = v /υ = \(\frac{440}{220 }\) = 2 m
अतः इस तरंग की तरंगदैर्घ्य 2 m है।

प्रश्न 4.
किसी ध्वनि स्रोत से 450 m दूरी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य 500 Hz की ध्वनि सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास तक पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अन्तराल होगा?
हल:
दो क्रमागत संपीडनों के बीच का समय तरंग का समय अन्तराल होता है।
आवृत्ति (υ) = \(\frac {1}{T}\)
T= \(\frac {1}{υ}\) = \(\frac {1}{500}\) = 0.002 s

प्रश्न श्रृंखला # 05 (पृष्ठ संख्या 187)

प्रश्न 1.
ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
उत्तर:
किसी एकांक क्षेत्रफल से एक सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा को ध्वनि की तीव्रता कहते हैं। प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न शृंखला # 06 (पृष्ठ संख्या 188)

प्रश्न 1.
वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है ?
उत्तर:
वायु में 25°C पर ध्वनि की चाल 346 m/s है, समुद्री जल में 25°C पर 1531 m/s व आसुत जल में 1498 m/s है व लोहे में 25°C पर ध्वनि की चाल 5950 m/s है। अतः लोहे में ध्वनि सबसे तेज चलती है।

प्रश्न श्रृंखला # 07 (पृष्ठ संख्या 189)

प्रश्न 1.
कोई प्रतिध्वनि 3 5 पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 ms-1 हो तो स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ के बीच कितनी दूरी होगी ?
हल:
ध्वनि की चाल, v = 346 ms-1
प्रतिध्वनि सुनने में लिया गया समय t = 3 s
ध्वनि द्वारा चली गई दूरी = v x 1 = 346 x 3 = 1038 m
3s में ध्वनि ने स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ के बीच की दो गुनी दूरी तय की। अतएव स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ के बीच की दूरी = 1038 = 519 m

प्रश्न शृंखला # 08 (पृष्ठ संख्या 190)

प्रश्न 1.
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती हैं ?
उत्तर:
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल के सभी भागों में पहुँच जाए।

प्रश्न श्रृंखला # 09 (पृष्ठ संख्या 191)

प्रश्न 1.
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परिसर क्या है ?
उत्तर:
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परिसर लगभग 20 Hz से 20,000 Hz है।

प्रश्न 2.
निम्न से सम्बन्धित आवृत्तियों का परिसर क्या है ?
(a) अवश्रव्य ध्वनि
(b) पराध्वनि।
उत्तर:
(a) अवश्रव्य ध्वनि-अवश्रव्य ध्वनि का परिसर 20 Hz से कम है।
(b) पराध्वनि-पराध्वनि का परिसर 20 kHz से अधिक है।

प्रश्न श्रृंखला 10 (पृष्ठ संख्या 193)

प्रश्न 1.
एक पनडुब्बी सोनार स्पंद उत्सर्जित करती है, जो पानी के अन्दर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 s के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m/s हो तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
उत्सर्जन तथा लौटने में लगा समय t = 102 s
खारे पानी में पराध्वनि की चाल v = 1531 m/s
पराध्वनि द्वारा चली गई दूरी = 2d
जहाँ d = चट्टान की दूरी
2d = ध्वनि की चाल x समय
= 1531 x 1.02
= 1561.62 m
d = 1564.62/2 = 780.81
अतः पनडुब्बी से चट्टान की दूरी 780.81 m है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

क्रियाकलाप 12.1 (पृष्ठ संख्या 179)

प्रश्न 1.
स्वरित्र द्विभुज को रबड़ के पैड पर मारकर कम्पित कराकर अपने कान के समीप लाने पर क्या आप कोई ध्वनि सुन पाते हैं ?
उत्तर:
हाँ, स्वरित्र द्विभुज को रबड़ के पैड पर मारने से उसमें कम्पन्न उत्पन्न होते हैं जिनके कारण ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
कंपमान स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को अपनी अंगुली से स्पर्श कीजिए और अपने अनुभव को अपने मित्रों से बाँटिए। .
उत्तर:
कंपमान स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को अपनी अंगुली से स्पर्श करने पर कम्पनों के कारण झनझनाहट महसूस होती है।

प्रश्न 3.
पहले कम्पन न करते हुए स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा से गेंद को स्पर्श कीजिए। फिर कम्पन करते हुए स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा से गेंद को स्पर्श कीजिए। देखिए क्या होता है? अपने मित्रों के साथ विचार-विमर्श कीजिए और दोनों अवस्थाओं में अन्तर की व्याख्या करने का प्रयत्न कीजिए।
उत्तर:
कम्पन न करते हुए स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा से गेंद को स्पर्श कराने पर कुछ नहीं होता। परन्तु कम्पन करते हुए स्वरित्र द्विभुज को गेंद से स्पर्श कराने पर गेंद दोलन करने लगती है। स्वरित्र द्विभुज से गेंद पर ऊर्जा का संचरण होता है।

क्रियाकलाप 12.2 (पृष्ठ संख्या 179)

प्रश्न 4.
कंपमान स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को पानी के पृष्ठ से स्पर्श कराइए। अब कंपमान स्वरित्र द्विभुज की दोनों भुजाओं को पानी में डुबोइए। देखिए कि दोनों अवस्थाओं में क्या होता है ?
उत्तर:
स्वरित्र द्विभुज की एक भुजा को पानी के पृष्ठ से स्पर्श कराने पर पानी में हलचल होती है व दोनों भुजाओं को पानी में डुबोने पर पानी ऊपर की ओर तीव्रता से छलकता है।

क्रियाकलाप.12.3 (पृष्ठ संख्या 180)

प्रश्न 5.
विभिन्न वाद्य यंत्रों की सूची बनाइए और अपने मित्रों के साथ विचार-विमर्श कीजिए कि ध्वनि उत्पन्न करने के लिए इन वाद्य यंत्रों का कौन-सा भाग कंपन करता है ?
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

क्रियाकलाप 12.4 (पृष्ठ संख्या 182)

प्रश्न 6.
अपने मित्र की ओर स्लिकी को एक तीव्र झटका दीजिए। आप क्या देखते हैं ? यदि आप अपने हाथ से स्लिकी को लगातार आगे-पीछे बारी-बारी से धक्का देते और खींचते रहें तो आप क्या देखेंगे ?
उत्तर:
स्लिकी को एक तीव्र झटका देने पर उसमें कम्पन उत्पन्न होता है। अपने हाथ से स्लिंकी को लगातार आगे-पीछे धक्का देने और खींचने पर उसमें तरंग उत्पन्न होती है। ये तरंगें अनुदैर्घ्य हैं।

क्रियाकलाप 12.5 (पृष्ठ संख्या 188)

प्रश्न 7.
इन पाइपों तथा दर्शाए अभिलम्ब के बीच के कोणों को मापिए तथा इनके बीच के सम्बन्ध को देखिए।
उत्तर:
इन पाइपों तथा दर्शाए अभिलम्ब के बीच के कोण आपस में बराबर हैं और ये तीनों एक ही तल में स्थित हैं।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 8.
दाईं ओर के पाइप को ऊर्ध्वाधर दिशा में थोड़ी-सी ऊँचाई तक उठाइए और देखिए क्या होता है ?
उत्तर:
दाईं ओर के पाइप को उठाने पर ध्वनि सुनाई देना बन्द हो जाती है।

Bihar Board Class 9 Science ध्वनि Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है ?
उत्तर:
ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में श्रवण का संवेदन उत्पन्न करती है। ध्वनि विभिन्न वस्तुओं के कम्पन के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट वायु में संपीडन तथा विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं।
उत्तर:
जब कोई कंपमान वस्तु आगे की ओर कम्पन करती है तो अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीडित करती है और इस प्रकार एक उच्च दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र को संपीडन (C) कहते हैं। (चित्र देखें) यह संपीडन कंपमान वस्तु से दूर आगे की ओर गति करता है। जब कंपमान वस्तु पीछे की ओर कम्पन करती है तो एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे विरलन (R) कहते हैं (देखें चित्र)।
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि
प्रश्न 3.
किस प्रयोग से यह दर्शाया जा सकता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर:
एक विद्युत घंटी और एक काँच का वायुरुद्ध बेलजार लेते हैं। विद्युत घंटी को बेलजार में लटकाते हैं। बेलजार को एक निर्वात पम्प से जोड़ते हैं। घंटी के स्विच को दबाने पर हमें उसकी ध्वनि सुनाई देती है। अब निर्वात पम्प को चलाने पर बेलजार की वाय धीरे-धीरे बाहर निकलती है। घंटी की ध्वनि धीमी हो जाती है यद्यपि उसमें पहले जैसी ही विद्युतधारा प्रवाहित हो रही है। कुछ समय पश्चात् जब बेलजार में बहुत कम वायु रह जाती है तब बहुत धीमी ध्वनि सुनाई देती है व समस्त वायु निकाल देने पर जरा भी ध्वनि सुनाई नहीं देती। अतः यह प्रयोग दर्शाता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

प्रश्न 4.
ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है ?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों में माध्यम के कणों का विस्थापन विक्षोभ के संचरण की दिशा के समान्तर होता है। कण एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति नहीं करते लेकिन अपनी विराम अवस्था से आगे-पीछे दोलन करते हैं। अतएव ध्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य तरंगें हैं।

प्रश्न 5.
ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है ?
उत्तर:
ध्वनि की गुणता (timbre) वह अभिलक्षण है जो किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे हमारे मित्र की आवाज पहचानने में हमारी सहायता करता है।

प्रश्न 6.
तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं। लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है ?
उत्तर:
ध्वनि की गति (344 m/s) प्रकाश की गति (3 x 10% m/s) की तुलना में कम है। अतः तड़ित की गर्जन पृथ्वी तक पहुँचने में उसकी चमक से ज्यादा समय लेती है। यही कारण है कि हमें तड़ित की चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है।

प्रश्न 7.
किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परिसर 20 Hz से 20 Hz है। इन दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग 344 ms-1 लीजिए।
हल:
ध्वनि तरंग के लिए –
वेग = तरंगदैर्घ्य x आवृत्ति
या v = λ x υ
ध्वनि का वायु में वेग (v) = 344 m/s

1. v = 20 Hz के लिए
λ1 = \(\frac {υ}{v}\) = \(\frac {344}{20}\) = 17.2m

2. v = 20,000 Hz के लिए,
λ1 = \(\frac {υ}{v}\) = \(\frac {344}{20,000}\) = 17.2 m
अतः कोई व्यक्ति 0.172 m से 17.2 m तरंगदैर्घ्य तक की तरंग सुन सकता है।

प्रश्न 8.
दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
वायु में ध्वनि का वेग = 346 m/s
ऐलुमिनियम में ध्वनि का वेग = 6420 m/s
माना, पाइप की लम्बाई = 1
ध्वनि तरंग द्वारा वायु में लिया गया समय।
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ध्वनि तरंग द्वारा ऐलुमिनियम में लिया गया समय
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= \(\frac {6420}{346}\) = \(\frac {18.55}{1}\)

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प्रश्न 9.
किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कम्पन करेगा?
हल:
आवृत्ति = 100 Hz (दिया है)
इसका तात्पर्य है कि ध्वनि स्रोत 1 सेकण्ड में 100 बार कम्पन करेगा। अतः एक मिनट में की गई कम्पन = 100 x 60 = 6000 बार

प्रश्न 10.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि प्रकाश की तरंगें करती हैं ? इन नियमों को बताइए।
उत्तर:
ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि प्रकाश तरंगें करती हैं। ध्वनि के आपतन होने की दिशा तथा परावर्तन होने की दिशा, परावर्तक सतह पर खींचे गए अभिलम्ब से समान कोण बनाते हैं और ये तीनों एक ही तल में होते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक पृष्ठ के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ की दूरी स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी –
(i) जिस दिन ताप अधिक हो ?
(ii) जिस दिन ताप कम हो ?
उत्तर:
स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए मूल ध्वनि तथा परावर्तित ध्वनि के बीच कम से कम 0.1 s का समय अन्तराल होना चाहिए।
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रह जाती है तब बहुत धीमी ध्वनि सुनाई देती है व समस्त वायु निकाल देने पर जरा भी ध्वनि सुनाई नहीं देती। अत: यह प्रयोग दर्शाता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है। जिस दिन ताप अधिक होगा, ध्वनि का वेग भी अधिक होगा अतः उस दिन प्रतिध्वनि शीघ्र सुनाई देगी। यदि पराध्वनि द्वारा लिया गया समय 0.1 s से कम है तो यह नहीं सुनाई देगी।

प्रश्न 12.
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग
(1) ध्वनि तरंगों के परावर्तन का उपयोग सोनार में किया जाता है। सोनार एक ऐसी युक्ति है जिसमें जल में स्थित पिण्डों की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए पराध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।
(2) स्टेथोस्कोप में भी ध्वनि तरंगों के परावर्तन का उपयोग होता है। स्टेथोस्कोप में रोगी के हृदय की धड़कन की ध्वनि, बार-बार परावर्तन के कारण डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।

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प्रश्न 13.
500 मीटर ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में इसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी ? (g = 10 ms-1 तथा ध्वनि की चाल = 340 ms-1)
हल:
मीनार की ऊँचाई = 500 m
ध्वनि की चाल = 340 ms-1
g = 10 ms-1
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0
पत्थर द्वारा मीनार के आधार पर गिरने में लगा समय = t1

गति के दूसरे समीकरण द्वारा –
s = ut1 + \(\frac {1}{2}\) gt21
500 = 0 x t1 + \(\frac {1}{2}\) x 10 x t21 = t21 = 100 = t1 = 10 s
ध्वनि द्वारा मीनार के आधार से चोटी तक पहुँचने में लगने वाला समय
t2 = \(\frac {500}{340}\) = 1.478
अत: चोटी पर पत्थर के गिरने की ध्वनि सुनाई देगी,
t = t1 + t2
= 10 + 1.47
= 11.47 s के पश्चात्।

प्रश्न 14.
एक ध्वनि तरंग 339 ms-1 की चाल से चलती है। यदि इसकी तरंगदैर्घ्य 1.5 cm हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी ? क्या यह श्रव्य होगी?
हल:
ध्वनि की चाल = 339 m/s
तरंगदैर्घ्य = 1.5 cm = 0.015 cm
ध्वनि की चाल = तरंगदैर्घ्य x आवृत्ति
v = λ x υ
υ = \(\frac {v}{λ}\)
= \(\frac {339}{10.15}\) = 22600 Hz
मनुष्य के लिए श्रव्यता परिसर 20 Hz से 20,000 Hz है। इस ध्वनि की आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक है, अतः यह श्रव्य नहीं होगी।

प्रश्न 15.
अनुरणन क्या है ? इसे कैसे कम किया जा सकता है ?
उत्तर:
किसी सभागार में ध्वनि-निबंध बारम्बार परावर्तनों के कारण होता है। इसे अनुरणन कहते हैं। अनुरणन को कम करने के लिए सभा भवन की छतों तथा दीवारों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थों, जैसे संपीडित फाइबर बोर्ड, खुरदरे प्लास्टिक अथवा पर्दे लगे होते हैं। सीटों के पदार्थों का चुनाव इनके ध्वनि अवशोषक गुणों के आधार पर भी किया जाता है।

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प्रश्न 16.
ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है ? यह किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर:
प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है। विभिन्न आवृत्तियों वाली ध्वनि द्वारा मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रबलता कहते हैं। प्रबलता ध्वनि के आयाम पर निर्भर करती है।

प्रश्न 17.
चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराध्वनि का उपयोग किस प्रकार करता है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चमगादड़ उड़ते समय पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करता है तथा परावर्तन के पश्चात् इनका संसूचन करता है। चमगादड़ द्वारा उत्पन्न उच्च तारत्व के पराध्वनि स्पन्द अवरोधों या कीटों से परावर्तित होकर चमगादड़ के कानों तक पहुँचते हैं। इन परावर्तित स्पंदों की प्रकृति से चमगादड़ को पता चलता है कि अवरोध या कीट कहाँ पर है और यह किस प्रकार का है।

प्रश्न 18.
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं ?
उत्तर:
जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें साफ करने वाले गर्जन विलयन में रखते हैं और इस विलयन में पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण धूल, चिकनाई तथा गन्दगी के कण अलग होकर नीचे गिर जाते हैं। इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है।

प्रश्न 19.
सोनार की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सोनार (SONAR) शब्द Sound Navigation and Ranging से बना है। सोनार एक ऐसी युक्ति है जिसमें जल में स्थित पिण्डों की दूरी, दिशा तथा चाल मापने के लिए पराध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। सोनार में एक प्रेषित्र तथा एक संसूचक होता है और इसे किसी नाव या जहाज में चित्र की भाँति लगाया जाता है।
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प्रेषित्र पराध्वनि तरंगें उत्पन्न तथा प्रेषित करता है। ये तरंगें जल में चलती हैं तथा समुद्र तल में पिण्ड से टकराने के पश्चात् परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं। संसूचक पराध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदल देता है जिनकी उचित रूप से व्याख्या कर ली जाती है। जल में ध्वनि की चाल तथा पराध्वनि के प्रेषण तथा अभिग्रहण के समय अन्तराल को ज्ञात करके उस पिण्ड की दूरी की गणना की जा सकती है जिससे ध्वनि तरंग परावर्तित हुई है।

मान लीजिए पराध्वनि संकेत के प्रेषण तथा अभिग्रहण का समय अन्तराल ‘t’ है तथा समुद्री जल में ध्वनि की चाल ‘v’ है। तब सतह से पिण्ड की दूरी 2d होगी 2d = v x t सोनार के उपयोग – सोनार की तकनीक का उपयोग समुद्र की गहराई ज्ञात करने तथा जल के अन्दर स्थित चट्टानों, घाटियों, पनडुब्बियों, हिम शैल (प्लावी बर्फ), डूबे हुए जहाज आदि की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 20.
एक पनडुब्बी पर लगी एक सोनार युक्ति संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
हल:
पराध्वनि सुनने में लगा समय, t = 5 s
पनडुब्बी से वस्तु की दूरी, d = 3625 m
सोनार तरंगों द्वारा तय की गई कुल दूरी = 2d
पानी में ध्वनि की चाल, v = 2d/t
= \(\frac {2 × 3625}{5}\)
= 1450 ms-1

प्रश्न 21.
किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पराध्वनि का उपयोग धातु के ब्लॉकों (पिण्डों) में दरारों तथा अन्य दोषों का पता लगाने के लिए किया जाता है। पराध्वनि तरंगें धातु के ब्लॉक से गुजारी (प्रेषित की) जाती हैं और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। यदि थोड़ा-सा भी दोष होता है, तो पराध्वनि तरंगें परावर्तित हो जाती हैं जो दोष की उपस्थिति को दर्शाती हैं।
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प्रश्न 22.
मनुष्य का कान किस प्रकार कार्य करता है ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य का कान श्रवणीय आवृत्तियों द्वारा वायु में होने वाले दाब परिवर्तनों को विद्युत संकेतों में बदलता है जो श्रवण तन्त्रिका से होते हुए मस्तिष्क तक पहुँचते हैं। मनुष्य के कान में सुनने की प्रक्रिया निम्न प्रकार होती है –
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बाहरी कान ‘कर्ण पल्लव’ कहलाता है। यह परिवेश से ध्वनि को एकत्रित करता है। एकत्रित ध्वनि श्रवण नलिका से गुजरती है। श्रवण नलिका के सिरे पर एक पतली झिल्ली होती है जिसे कर्ण पटल या कर्ण पटह झिल्ली कहते हैं। जब माध्यम के संपीडन कर्ण पटह तक पहुँचते हैं तो झिल्ली के बाहर की ओर लगने वाला दाब बढ़ जाता है और यह यह कर्ण पटह को अन्दर की ओर दबाता है। इसी प्रकार विरलन के पहुंचने पर कर्ण पटह बाहर की ओर गति करते हैं। इस प्रकार कर्ण पटह कम्पन करता है।

मध्य कर्ण में विद्यमान तीन हड्डियाँ [(मुन्दरक, निहाई तथा वलयक (स्टिरप)] इन कम्पनों को कई गुना बढ़ा देती हैं। गहरा कर्ण ध्वनि तरंगों से मिलने वाले इन दाब परिवर्तनों को आन्तरिक कर्ण तक संचरित कर देता है। आन्तरिक कर्ण में कर्णावर्त (Cochlea) द्वारा दाब परिवर्तनों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित कर दिया जाता है। इन विद्युत संकेतों को श्रवण तन्त्रिका द्वारा मस्तिष्क में भेज दिया जाता है और मस्तिष्क इनकी ध्वनि के रूप में व्याख्या करता है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science गुरुत्वाकर्षण InText Questions and Answers

प्रश्न शृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 149)

प्रश्न 1.
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम लिखिए।
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, द्रव्यमान M व m के दो पिण्ड जो एक-दूसरे से दूरी d पर स्थित हैं, उनके बीच लगने वाला आकर्षण बल F, उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा दोनों पिण्डों के बीच की दूरी (d) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्, .
F ∝ M x m
F ∝ \(\frac{1}{d^{2}}\)
F ∝ Mm \(\frac{\mathrm{M} m}{d^{2}}\)

प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसके पृष्ठ पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
अगर M पृथ्वी का द्रव्यमान है व m उसके पृष्ठ पर रखी किसी वस्तु का, r पृथ्वी की त्रिज्या है तो गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, पृथ्वी व वस्तु के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त होगा –
F = GMm/r2
यहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक है।
G = 6.67 x 10-11 Nm2kg-2

प्रश्न श्रृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 152)

प्रश्न 1.
मुक्त पतन से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। पृथ्वी के इस आकर्षण बल को गुरुत्वीय बल कहते हैं। अतः जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर केवल इसी बल के कारण गिरती हैं, हम कहते हैं कि वस्तुएँ मुक्त पतन में हैं।

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प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर किसी ऊँचाई से मुक्त पतन करती है तब पृथ्वी के आकर्षण बल के कारण उसके वेग के परिमाण में परिवर्तन होता है। वेग में कोई भी परिवर्तन त्वरण उत्पन्न करता है। जब यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण है इसलिए इस त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इस g से निर्दिष्ट करते हैं (g = 9.8 ms-2)।

प्रश्न शृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 153) 

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
द्रव्यमान तथा भार में अन्तर –
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प्रश्न 2.
किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी के भार का 1 गुना क्यों होता है ?
उत्तर:
चन्द्रमा का भार पृथ्वी के 1/100 गुना व त्रिज्या 1/4 गुणा है। चन्द्रमा पर किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे चन्द्रमा वस्तु को आकर्षित करता है। चूंकि चन्द्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी की अपेक्षा काफी कम है अतः वह वस्तुओं पर कम आकर्षण बल लगाता है। अतः किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी के भार का है गुणा है।

प्रश्न शृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 157)

प्रश्न 1.
एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों ?
उत्तर:
एक पतली डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है क्योंकि पतला पट्टा कन्धों पर अधिक दाब लगाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दाब उस वस्तु के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होता है जिस पर बल लग रहा है। जितना कम क्षेत्रफल होगा उतना ज्यादा दाब लगेगा। पतली पट्टी पर लगने वाला दाब अधिक होगा क्योंकि उसका क्षेत्रफल कम है। अत: कन्धों पर लगने वाला दाब अत्यधिक होगा।

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प्रश्न 2.
उत्प्लावकता से आप क्या समझते है ?
उत्तर:
किसी वस्तु को तरल में डुबोने पर तरल द्वारा उस वस्तु पर ऊपर की तरफ लगने वाला बल उत्प्लावक बल कहलाता है व यह प्रक्रिया उत्प्लावकता कहलाती है।

प्रश्न 3.
पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है ? .
उत्तर:
पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु तैरती है अगर उसका घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है। अगर वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है तो वस्तु पानी में डूब जाती है।

प्रश्न शृंखला # 05 (पृष्ठ संख्या 158)

प्रश्न 1.
एक तुला (Weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं। क्या आपका द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम ?
उत्तर:
तुला पर खड़े होने पर उस पर नीचे की ओर बल लगता है व साथ ही ऊपर की तरफ भी एक बल कार्य करता है जिसे उत्प्लावक बल कहते हैं। अतः वस्तु थोड़ा ऊपर की ओर खिसक जाती है जिसके कारण उसके भार में कमी आती है। अतः भारमापी का पाठ्यांक असल पाठ्यांक से कम होगा।

प्रश्न 2.
आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों ?
उत्तर:
रुई का बोरा लोहे की छड़ से अधिक भारी है। रुई के बोरे पर लगने वाला हवा का उत्प्लावक बल लोहे की छड़ की तुलना में अधिक होगा क्योंकि उसका क्षेत्रफल अधिक है। अतः भारमापी उसके वास्तविक द्रव्यमान से कम द्रव्यमान दर्शाएगा।

क्रियाकलाप 10.3 (पृष्ठ संख्या 150)

प्रश्न 1.
कागज की एक शीट तथा एक पत्थर लीजिए। दोनों को किसी इमारत की पहली मंजिल से एक साथ गिराइए। क्या दोनों धरती पर एक साथ पहुँचते हैं ?
उत्तर:
कागज धरती पर पत्थर की अपेक्षा कुछ देर से पहुँचता है। ऐसा वायु के प्रतिरोध के कारण होता है। गिरती हुई गतिशील वस्तुओं पर घर्षण के कारण वायु प्रतिरोध लगाती है। कागज पर लगने वाला वायु का प्रतिरोध पत्थर पर लगने वाले प्रतिरोध से अधिक होता है।

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क्रियाकलाप 10.4 (पृष्ठ संख्या 155)

प्रश्न 2.
क्या पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पानी में डूबी बोतल पर कार्यरत है ? यदि ऐसा है तो बोतल छोड़ देने पर पानी में डूबी ही क्यों नहीं रहती ? आप बोतल को पानी में कैसे डुबो सकते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल बोतल पर नीचे की दिशा में लगता है। इसके कारण बोतल नीचे की दिशा में खिंचती है। लेकिन पानी बोतल पर ऊपर की ओर बल लगाता है। अत: बोतल ऊपर की दिशा में धकेली जाती है। वस्तु का भार पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर होता है।

जब बोतल डुबोई जाती है तो बोतल पर पानी द्वारा लगने वाला पर राखए। ऊपर की दिशा में बल इसके भार से अधिक है। इसलिए छोड़ने पर यह ऊपर उठती है। बोतल को पूरी तरह डुबोए रखने के लिए नीचे की तरफ बाहर से बल लगाना होगा। यह बल पानी द्वारा ऊपर की ओर लगने वाले बल तथा बोतल के भार के अन्तर के बराबर होना चाहिए।

क्रियाकलाप 10.5 (पृष्ठ संख्या 156)

प्रश्न 3.
पानी से भरा एक बीकर लीजिए। एक लोहे की कील लीजिए और इसे पानी के पृष्ठ पर रखिए। देखिए क्या होता है ?
उत्तर:
कील डूब जाती है क्योंकि कील पर नीचे की ओर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल, कील पर पानी द्वारा लगाए गए उत्प्लावन बल से अधिक है।

क्रियाकलाप 10.6 (पृष्ठ संख्या 156)

प्रश्न 4.
पानी से भरा बीकर लीजिए।
एक कील तथा समान द्रव्यमान का एक कॉर्क का टुकड़ा लीजिए। इन्हें पानी के पृष्ठ पर रखिए। .. देखिए क्या होता है ?
उत्तर:
कॉर्क तैरता है जबकि कील डूब जाती है। ऐसा कॉर्क व कील के घनत्वों में अन्तर के कारण है। कॉर्क का घनत्व पानी के घनत्व से कम है अतः कॉर्क पर पानी का उत्प्लावन बल, कॉर्क के भार से अधिक है। इसलिए यह तैरता है। लोहे की कील का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है। या पानी का उत्प्लावन बल लोहे की कील के भार से कम है। इसलिए यह डूब जाती है।

क्रियाकलाप 10.7 (पृष्ठ संख्या 157)

प्रश्न 5.
पत्थर के भार के कारण रबड़ की डोरी की लम्बाई में वृद्धि या कमानीदार तुला का पाठ्यांक नोट कीजिए।
उत्तर:
पत्थर के भार के कारण रबड़ की डोरी की लम्बाई में वृद्धि होती है।

प्रश्न 6.
अब पत्थर को एक बर्तन में रखे पानी में धीरे से डुबोइए। प्रेक्षण कीजिए कि डोरी की लम्बाई में या तुला की माप में क्या परिवर्तन होता है ?
उत्तर:
जैसे ही पत्थर को धीरे-धीरे पानी में नीचे ले जाते हैं, डोरी की लम्बाई में भी कमी आती है। जब पत्थर पूरी तरह पानी में डूब जाता है तो कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 7.
डोरी के प्रसार या तुला की माप में कमी से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं ?
उत्तर:
रबड़ की डोरी की लम्बाई में वृद्धि, पत्थर के भार के कारण होती है। पत्थर को पानी में डुबोने पर लम्बाई में वृद्धि में कमी आती है क्योंकि पत्थर पर ऊपर की दिशा में पानी का उत्प्लावन बल लगता है जिसके कारण रबड़ की डोरी पर लगने वाला नेट बल कम हो जाता है। इसलिए डोरी की लम्बाई में वृद्धि में कमी आती है।

Bihar Board Class 9 Science गुरुत्वाकर्षण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा ?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, द्रव्यमान M व m के दो पिण्डों पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती व उनके बीच की दूरी d के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
F ∝ \(\frac{\mathrm{M} m}{d^{2}}\)
या F α \(\frac{\mathrm{GMm}}{d^{2}}\)
अब अगर दूरी d को आधा कर दिया जाए तो दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल होगा –
F ∝ \(\frac{4 \times \mathrm{GMm}}{d^{2}}\)
F = 4F
अतः अगर दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना बढ़ जाएगा।

प्रश्न 2.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
सभी वस्तुएँ पृथ्वी पर एक स्थिर त्वरण से, जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं, गिरती हैं। हवा की अनुपस्थिति में गुरुत्वीय त्वरण का मान स्थिर होता है व वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। अतः भारी वस्तुएँ हल्की वस्तुओं के मुकाबले तेजी से नहीं गिरती।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 3.
पृथ्वी तथा उसके पृष्ठ पर रखी किसी 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 kg है तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 x 10 m है)।
हल:
दिया है, वस्तु का द्रव्यमान, m = 1 kg
पृथ्वी का द्रव्यमान, M = 6 x 1024 kg
पृथ्वी की त्रिज्या, r = 6 4 x 106 m
पृथ्वी तथा वस्तु के बीच लगने वाला गुरुत्वीय बल
F = \(\frac{\mathrm{GMm}}{r^{2}}\)
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण
= 9.8 N (approx.)

प्रश्न 4.
पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चन्द्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है ? बताइए। क्यों ?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, दो वस्तुएँ एक-दूसरे को बराबर बल से आकर्षित करती हैं, किन्तु विपरीत दिशाओं में पृथ्वी चन्द्रमा को उतने ही बल से आकर्षित करती है जितने बल से चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है।

प्रश्न 5.
यदि चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती ?
उत्तर:
गति के तीसरे नियम के अनुसार चन्द्रमा भी पृथ्वी को आकर्षित करता है। लेकिन गति के दूसरे नियम के अनुसार, किसी दिए हुए बल के लिए त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
F ∝ ma
a ∝ \(\frac {F}{ M }\)
अत: पृथ्वी का द्रव्यमान चन्द्रमा से बहुत अधिक होने के कारण पृथ्वी का चन्द्रमा की ओर त्वरण बहुत कम या नगण्य होता है। यही कारण है कि पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति नहीं करती।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 6.
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि
1. एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाए ?
2. वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
3. दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दो गुने कर दिए जाएँ ?
उत्तर:
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल (F) को निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है –
F = \(\frac{\mathrm{GMm}}{r^{2}}\)
जहाँ M, m दो वस्तुओं के द्रव्यमान हैं व r उनके बीच की दूरी है, G गुरुत्वीय स्थिरांक है।

1. एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना करने पर
M = 2M
F = \(\frac{\mathrm{2GMm}}{r^{2}}\)
या F = 2F
अतः इस स्थिति में गुरुत्वाकर्षण बल दो गुना हो जाएगा।

2. वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुनी करने पर
या r = 2r
F = \(\frac{\mathrm{2GMm}}{r^{2}}\)
F = \(\frac {1}{ 4 }\)F
अतः वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुनी करने पर गुरुत्वाकर्षण बल F = \(\frac {1}{ 4 }\) हो जाएगा।
वस्तुओं के बीच की दूरी तीन गुनी करने पर
r = 3r
F = \(\frac{\mathrm{GMm}}{3r^{2}}\)
= \(\frac {1}{9}\)\(\frac{\mathrm{GMm}}{r^{2}}\)
F = \(\frac {1}{9}\)F
अतः वस्तुओं के बीच की दूरी तीन गुनी करने पर गुरुत्वाकर्षण बल गुने जाएगा।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

3. दोनों वस्तुओं के द्रव्यवमान दो गुने करने पर या जब M= 2M, m = 2m
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F’ = 4F
अत: दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दो गुने करने पर उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना हो जाएगा।

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व हैं ?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है जो असम्बद्ध मानी जाती थीं

  1. हमें पृथ्वी से बाँधे रखने वाला बल;
  2. पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति;
  3. सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति; तथा
  4. चन्द्रमा तथा सूर्य के कारण ज्वार-भाटा।

प्रश्न 8.
मुक्त पतन का त्वरण क्या है ?
उत्तर:
जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उसके वेग के परिमाण में परिवर्तन होता है। वेग में कोई भी परिवर्तन त्वरण उत्पन्न करता है। जब भी कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, त्वरण कार्य करता है। इस त्वरण को मुक्त पतन का त्वरण कहते हैं जो पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण होता है।

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प्रश्न 9.
पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
उत्तर:
पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर लगाया जाने वाला आकर्षण बल गुरुत्वीय बल कहलाता है। इसको वस्तु का भार कहते हैं।

प्रश्न 10.
एक व्यक्ति A अपने मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत वृत पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से सन्तुष्ट होगा ? यदि नहीं, तो क्यों ? (संकेत : ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)
उत्तर:
पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार = x वस्तु का द्रव्यमान
W = mg
m = वस्तु का द्रव्यमान
g = गुरुत्वीय त्वरण
गुरुत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों पर विषुवत वृत्त की अपेक्षा अधिक होता है। अतः विषुवत वृत्त पर सोने का भार ध्रुवों की अपेक्षा कम होगा। इसी कारण अमित का मित्र खरीदे हुए सोने के भार से सन्तुष्ट नहीं होगा।

प्रश्न 11.
एक कागज की शीट उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है ?
उत्तर:
जब एक कागज की शीट को मरोड़कर गेंद बनाई जाती है तो उसका घनत्व बढ़ जाता है। अतः हवा द्वारा उसकी गति पर लगाया गया प्रतिकर्षण कम हो जाता है जिससे वह कागज की शीट की अपेक्षा तेज गति से नीचे गिरती है।

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प्रश्न 12.
चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 1/6 गुना है। एक 10 kg की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?
हल:
चन्द्रमा की सतह पर वस्तु का भार
= \(\frac { 1 }{ 6 }\) x वस्तु का पृथ्वी पर भार
W = M x g
g = 9.8 m/s2
अत: 10 kg की वस्तु का पृथ्वी पर भार
= 10 x 9.8 = 98N
उसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार = \(\frac {98}{ 6 }\)
= 16.3N

प्रश्न 13.
एक गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है। परिकलन कीजिए
1. अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है।
2. पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।
हल:
1. हम जानते हैं,
v2 = u2 + 2gs
जहाँ u = गेंद का प्रारम्भिक वेग
v = गेंद का अन्तिम वेग
s = गेंद की ऊँचाई
g = गुरुत्वीय त्वरण
अधिकतम ऊँचाई पर अन्तिम वेग v = 0
व दिया है, u = 49 m/s
ऊर्ध्वाधर दिशा में,

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g =- 9.8 m/s2
अगर अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक गेंद पहुँचती है = h
समीकरण, v2 – u2 = 2gs से
02 – (49)2 = 2 x (-9.8) x h
h = \(\frac{49 \times 49}{2 \times 9 \cdot 8}\) = 122.5 m
अतः गेंद 122.5 m की अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचती

2. पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया समय अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने वाला समय यदि यह समय t है तो गेंद को ऊँचाई 122.5 m तक पहुँचने में लगने वाला समय निम्न समीकरण द्वारा ज्ञात किया जा सकता है –
v = u + gt
0 = 49 + (-9.8) x t
9.8t = 49
t = \(\frac {49}{9.8}\) = 55
चूँकि गिरने व ऊँचाई तक पहुँचने वाला समय बराबर होता है अतः गेंद द्वारा पृथ्वी की सतह पर लौटने में लिया गया कुल समय
= 5 +5 = 10s

प्रश्न 14.
19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए।
हल:
गति के समीकरण द्वारा,
v2 – u2 = 2gs
यहाँ पत्थर का प्रारम्भिक वेग, u = 0
ऊँचाई, s = 19.6 m
गुरुत्वीय त्वरण, g = 9.8 m/s2
अन्तिम वेग, v = ?
समीकरण में उपर्युक्त मान रखने पर
v2 = 02 + 2 x 9.8 x 19.6 = (19.6)2
⇒ v = \(\sqrt{(19 \cdot 6)^{2}}\)
= 19.6 m/s
अतः पृथ्वी पर पहुँचने से पहले पत्थर का अन्तिम वेग 19.6 m/s है।

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प्रश्न 15.
कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s के प्रारम्भिक वेग से फेंका गया है। g = 10 m/s2 लेते हुए पत्थर द्वारा पहुँची अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?
हल:
गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में गति के समीकरण से,
v2 – u2 = 2gs
जहाँ, u = पत्थर का प्रारम्भिक वेग = 40 m/s
v = पत्थर का अन्तिम वेग = 0
s = पत्थर की ऊँचाई
g= गुरुत्वीय त्वरण = -10 m/s2
माना कि पत्थर की अधिकतम ऊँचाई h है।
अतः v2 – u2 = 2gh से
0- (40)2 = 2 x (-10) x h
h = 40 x 40 = 80 m
अतः ऊपर जाने व नीचे आने में पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी = 80 + 80 = 160 m
ऊपर जाने व नीचे आने में पत्थर का कुल विस्थापन = 80 + (- 80) = 0

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प्रश्न 16.
पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 x 1024 kg तथा सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 kg। दोनों के बीच औसत दूरी 1.5 x 1011 m है।
हल:
दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान, ME = 6 x 1024 kg
सूर्य का द्रव्यमान, Ms = 2 x 1030 kg
पृथ्वी तथा सूर्य के बीच की औसत दूरी, d=1.5 x 1011m
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम से,
F = \(\frac{\mathrm{GM}_{\mathrm{E}} \mathrm{M}_{\mathrm{s}}}{d^{2}}\)
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= 3.56 x 1022 N

प्रश्न 17.
कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे।
हल:
माना कि दोनों पत्थर बिन्दु t पर मिलते हैं व उनकी जमीन से ऊँचाई h है। मीनार की ऊँचाई, h = 100 m. पहला पत्थर जो मीनार की छत से गिराया गया उसके द्वारा तय की गई दूरी x निम्न समीकरण द्वारा ज्ञात की जा सकती है –
s = ut + \(\frac {1}{2}\) gt2
5 = 100 – x
100 – x = ut + \(\frac {1}{2}\) gt2  ….(1)
ऊपर की तरफ फेंके गए पत्थर द्वारा तय की गई दूरी
x = ut – \(\frac {1}{2}\) gt2
यहाँ प्रारम्भिक वेग,
u = 25 m/s

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अतः x = 25t – \(\frac {1}{2}\) gt2 …(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर
100 = 25t
या t = 4s
t के इस मान को समीकरण (2) में रखने पर
x = 25 x 4 – \(\frac {1}{2}\) 9.8 x (4)2
= 100 – 78.4
= 21.6 m.
अतः दोनों पत्थर 4s के पश्चात् दूरी 21.6 m पर मिलेंगे।

प्रश्न 18.
ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6 s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई।
(b) गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊँचाई; तथा
(c) 4s पश्चात् गेंद की स्थिति।
हल:
(a) ऊपर जाने में लगने वाला समय = नीचे आने में लगने वाला समय गेंद ऊपर जाने व नीचे आने में कुल 6s लेती है। अत: यह अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने में 3 s लेगी।
अधिकतम ऊँचाई पर अन्तिम वेग, v = 0
गुरुत्वीय त्वरण, g = – 9.8 m/s2
समीकरण, v = u + gt से
0 =u + (-9.8 x 3)
u = 9.8 x 3 = 29.4 m/s
अत: गेंद 29.4 m/s वेग से ऊपर फेंकी गई।

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(b) माना गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊँचाई h है। प्रारम्भिक वेग, ऊपर जाने में
u = 29.4 m/s
अन्तिम वेग, v = 0
गुरुत्वीय त्वरण, g = – 9.8 m/s2
गति के समीकरण,
s = ut+ \(\frac {1}{2}\) at2 से
h = 29.4 x 3 + \(\frac {1}{2}\) x (-9.8) x 32
= 44.1 m

(c) गेंद अधिकतम ऊँचाई 3 s में ग्रहण करती है। इस ऊँचाई तक पहुँचने के पश्चात् यह नीचे गिरती है। इस स्थिति में,
u = 0
4s के पश्चात् गेंद की स्थिति गेंद द्वारा 4 s – 3 s = 1 s में तय की गई दूरी होगी।
s = ut + \(\frac {1}{2}\) gt2 से
s = 0 x t + \(\frac {1}{2}\) x 9.8 x 12
= 4.9 m

कुल ऊँचाई = 44.1 m
4s के पश्चात् गेंद की ऊँचाई = 44.1 – 4.9 = 39.2 m
अतः 4 s के पश्चात् गेंद पृथ्वी से 39.2 m की ऊँचाई पर

प्रश्न 19.
किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
उत्तर:
किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल ऊपर की दिशा में कार्य करता है।

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प्रश्न 20.
पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी के पृष्ठ पर क्यों आ जाता है ?
उत्तर:
जब किसी वस्तु को पानी में डुबोया जाता है तो उस पर दो बल कार्य करते हैं
1. गुरुत्वाकर्षण बल जो वस्तु को नीचे की ओर खींचता है।
2. उत्प्लावन बल जो वस्तु को ऊपर की ओर धकेलता है।
यहाँ प्लास्टिक के गुटके पर लगने वाला उत्प्लावन बल गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक है।
अतः पानी के भीतर इसे छोड़ने पर यह पानी के पृष्ठ पर आ जाता है।

प्रश्न 21.
50g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm है। यदि पानी का घनत्व 1gcm-3 हो तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा?
हल:
अगर वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से अधिक होता है तो वह उसमें डूब जाती है अन्यथा उसमें तैरती है।
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण
= \(\frac {50}{20}\) = 2.5 g/cm
वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व (1 g/cms) से अधिक है।
अत: वह पानी में डूब जाएगी।

प्रश्न 22.
500 g के एक मोहरबन्द पैकेट का आयतन 350 cm है। पैकेट 1 g cm-3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा ? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा ?
हल:
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण
\(\frac {500}{350}\) = 1.428 g cm-3
पैकेट का घनत्व पानी के घनत्व (1g cm-3) से अधिक है अतः यह पानी में डूब जायेगा। पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान उसके आयतन (350 cm-3) के बराबर होगा = 350 g.

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science बल तथा गति के नियम InText Questions and Answers

प्रश्न श्रृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 131)

प्रश्न 1.
निम्न में किसका जड़त्व अधिक है :
(a) एक रबर की गेंद एवं उसी आकार का पत्थर
(b) एक साइकिल एवं एक रेलगाड़ी
(c) र पाँच का एक सिक्का एवं र एक का सिक्का।
उत्तर:
(a) पत्थर
(b) एक रेलगाड़ी
(c) ₹ पाँच का सिक्का।
किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान से मापा जाता है। अधिक द्रव्यमान वाली वस्तुओं का जड़त्व अधिक होता है।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए उदाहरण में गेंद का वेग कितनी बार बदलता है, जानने का प्रयास करें “फुटबॉल का एक खिलाड़ी गेंद पर किक लगाकर गेंद को अपनी टीम के दूसरे खिलाड़ी के पास पहुँचाता है। दूसरा खिलाड़ी उस गेंद को किक लगाकर गोल की ओर पहुँचाने का प्रयास करता है। विपक्षी टीम का गोलकीपर गेंद को पकड़ता है और अपनी टीम के खिलाड़ी की ओर किक लगाता है। इसके साथ ही उस कारक की भी पहचान करें जो प्रत्येक अवस्था में बल प्रदान करता है।”
उत्तर:
फुटबॉल का वेग चार बार बदलता है। पहली बार, जब फुटबॉल का एक खिलाड़ी गेंद को दूसरे खिलाड़ी की तरफ पहुँचाता है। दूसरी बार, जब खिलाड़ी गेंद को किक लगाकर गोल की तरफ पहुँचाने का प्रयास करता है। तीसरी बार, जब गोलकीपर बॉल को रोकता है। चौथी बार, जब गोलकीपर गेंद को टीम के खिलाड़ी की। ओर किक करता है। कारक जो बल प्रदान करता हैपहली अवस्था पहला खिलाड़ी, दूसरी अवस्था दूसरा खिलाड़ी, तीसरी अवस्था-गोलकीपर चौथी अवस्था-गोलकीपर।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 3.
किसी पेड़ की शाखा को तीव्रता से हिलाने पर कुछ पत्तियाँ झड़ जाती हैं, क्यों ?
उत्तर:
इसका कारण न्यूटन के गति के प्रथम नियम से समझा जा सकता है। पत्तियाँ व पेड़ दोनों विरामावस्था में हैं। पर जब पेड़ को तीव्रता से हिलाया जाता है तब पेड़ गतिमान होता है व पत्तियाँ विरामावस्था में। अतः विरामावस्था में रहने के कारण पेड़ को हिलाने पर कुछ पत्तियाँ झड़ जाती हैं।

प्रश्न 4.
जब कोई गतिशील बस अचानक रुक जाती है तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं और जब विरामावस्था से गतिशील होती है तो आपं पीछे की ओर हो जाते हैं, क्यों ?
उत्तर:
चलती हुई बस में, हम बस की गति की दिशा में गतिमान होते हैं। ब्रेक लगाने पर बस रुक जाती है। परन्तु हमारा शरीर जड़त्व के कारण गतिज अवस्था में ही बने रहने की प्रवृत्ति रखता है। अतः हम आगे की ओर झुक जाते हैं। जब बस विरामावस्था से गतिशील होती है तो हमारा पैर जो बस के फर्श के सम्पर्क में रहता है, गति में आ जाता है। परन्तु शरीर का ऊपरी भाग जड़त्व के कारण इस गति का विरोध करता है। अतः हम पीछे की ओर हो जाते हैं।

प्रश्न शृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 140)

प्रश्न 1.
यदि क्रिया सदैव प्रतिक्रिया के बराबर हैतो स्पष्ट कीजिए कि घोड़ा गाड़ी को कैसे खींच पाता है ?
उत्तर:
घोड़ा पृथ्वी पर पीछे की ओर बल लगाता है या धकेलता है। इसकी प्रतिक्रिया में वह आगे की ओर बढ़ता है। यहाँ घोड़ा गाड़ी को आगे की दिशा में खींचता है किन्तु गाड़ी घोड़े पर विपरीत दिशा में बल लगाती है। चूँकि घोड़ा गाड़ी पर असमान बल लगाता है अत: वह उसे खींच पाता है।

प्रश्न 2.
एक अग्निशमन कर्मचारी को तीव्र गति से बहुतायात मात्रा में पानी फेंकने वाली रबड़ की नली को पकड़ने में कठिनाई क्यों होती है ? स्पष्ट करें।
उत्तर:
पानी फेंकने वाली रबड़ की नली में से जब बहुतायात मात्रा में तीव्र गति से पानी निकलता है तो गति के तीसरे नियम के अनुसार वह नली पर पीछे की ओर समान बल लगाता है। अतः अग्निशमन कर्मचारी को तीव्र गति से बहुतायत मात्रा में पानी फेंकने वाली रबड़ की नली को पकड़ने में कठिनाई होती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 3.
एक 50g द्रव्यमान की गोली 4 kg द्रव्यमान की रायफल से 35 ms-1 के प्रारंभिक वेग से छोड़ी जाती है। रायफल के प्रारंभिक प्रतिक्षेपित वेग की गणना कीजिए।
हल:
दिया है, रायत्रफल का द्रव्यमान m1 = 4 kg
रायफल का प्रारंभिक वेग (u1) = 0
गोली का द्रव्यमान (m2) = 50 g
= \(\frac { 50 }{ 1000 }\) = 0.05 kg
गोली का प्रारंभिक वेग (u2) = 0
गोली का अंतिम वेग (v2) = 35.m/s
रायफल का प्रारंभिक प्रतिक्षेपित वेग (v1) = ?

हम जानते हैं,
m1 U1 + m2u2 = m1V1 + m2V2
⇒ 4kg x 0 + 0.5 kg
⇒ 0.4kg x v1 + 0.05.kg x 35 ms-1
⇒ -4kg x v1 + 1.75 kg ms-1
v1 = \(\frac{1 \cdot 75 \mathrm{kg} \mathrm{m} / \mathrm{s}}{-4 \mathrm{kg}}\)
= – 0.4375 m/s
≈ 4-044 m/s
यहाँ ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि रायफल गोली की विपरीत दिशा में चलती है। अतः रायफल का प्रतिक्षेपित वेग = 0.44 m/s है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 4.
100 g और 200g द्रव्यमान की दो वस्तुएँ एक ही रेखा के अनुदिश एक ही दिशा में क्रमश: 2 ms-1और 1 ms-1 के वेग से गति कर रही हैं। दोनों वस्तुएँ टकरा जाती हैं। टक्कर के पश्चात प्रथम वस्तु का वेग 1.67 ms-1 हो जाता है, तो दूसरी वस्तु का वेग ज्ञात करें।
हल : दिया गया है, पहली वस्तु का द्रव्यमान (m) = 100g
\(\frac { 100 }{ 1000 }\) Kg = 0.1 kg
पहली वस्तु का प्रारंभिक वेग (u1) = 2 m/s
टक्कर के पश्चात पहली वस्तु का अंतिम वेग (v1) = 1.67 m/s
दूसरी वस्तु का द्रव्यमान (m2) = 200 g
\(\frac { 200 }{ 1000 }\) = 0.2 kg
दूसरी वस्तु का प्रारंभिक वेग (u2) = 1 m/s
टक्कर के बाद दूसरी वस्तु का अंतिम वेग (v2) = ?
हम जानते हैं,
m1u1 + m2u2 = m1V1 + m1V2
⇒ 0.1 kg x 1.67 m/s + 0.2kg x v2
⇒ 0.2 kg m/s + 0.2 kg m/s = 0.167 kg m/s + 0.2 kg x v2
⇒ 0.4 kg m/s – 0.167 m/s = 0.2 kg x v2
⇒ v2 = \(\frac{0 \cdot 233 \mathrm{kg} \mathrm{m} / \mathrm{s}}{0 \cdot 2 \mathrm{kg}}\) 0.4 kg m/s -0.167 kg m/s = 0.2 kg x v2
⇒ v2 = 1.165 m/s
अतः टक्कर के बाद दूसरी वस्तु का वेग = 1.165 m/s

क्रियाकलाप 9.3 (पृष्ठ संख्या 130)

प्रश्न 1.
पानी से भरा गिलास ट्रे पर रखिए।
ट्रे को हाथ से पकड़कर जितनी तेजी से हो सके, घूम जाइए। हम देखते हैं कि गिलास लुढ़क जाता है और पानी छलक जाता है, क्यों ?
उत्तर:
ट्रे को हाथ से पकड़कर घूम जाने से ट्रे में गति आ जाती है व पानी से भरा गिलास जो ट्रे के सम्पर्क में है, उसका तल गति में आ जाता है। परन्तु गिलास का ऊपरी भाग जड़त्व के कारण इस गति का विरोध करता है व आगे की ओर लुढ़क जाता है और पानी छलक जाता है।

क्रियाकलाप 9.4 (पृष्ठ संख्या 136)

प्रश्न 2.
क्या बालू के थैले को फेंकने (क्रिया) के कारण उनमें से प्रत्येक ताक्षणिक प्रतिक्रिया का अनुभव करते हैं ?
उत्तर:
हाँ, बालू के थैले को फेंकने (क्रिया) के कारण प्रत्येक बच्चा पीछे की ओर तात्क्षणिक प्रतिक्रिया का अनुभव करता है।

प्रश्न 3.
आप गाड़ी के पहिए पर कोई सफेद रेखा खींच दें, ताकि जब वे दोनों बच्चे थैले को फेंकें तो गाड़ी की गति का अवलोकन किया जा सके।
उत्तर:
दोनों बच्चे जब थैले को आगे की ओर फेंकते हैं तो गाड़ी पीछे की गति करती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 4.
अब दो बच्चों को किसी एक गाड़ी पर खड़ा करें तथा एक अन्य बच्चे को दूसरी गाड़ी पर। आप यहाँ गति के द्वितीय नियम को देख सकते हैं। क्योंकि इस अवस्था में यह · बल अलग-अलग त्वरण उत्पन्न करेगा।
उत्तर:
जब दो बच्चों को एक गाड़ी पर खड़ा किया जाता है तो उनका द्रव्यमान बढ़ जाता है अतः द्वितीय नियम द्वारा (aaF) गाड़ी में कम त्वरण उत्पन्न होता है। जिस गाड़ी पर एक बच्चा खड़ा है उसमें अपेक्षाकृत ज्यादा त्वरण उत्पन्न होता है।

क्रियाकलाप 9.5 (पृष्ठ संख्या 137)

प्रश्न 5.
स्ट्रा (अथवा गुब्बारे) की गति की दिशा का अवलोकन करें।
उत्तर:
जब गुब्बारे से हवा बाहर निकलती है तो स्ट्रॉ विपरीत दिशा में गति करती है। यह क्रिया संवेग संरक्षण व गति के तीसरे नियम को दर्शाती है।

क्रियाकलाप 9.6 (पृष्ठ संख्या 138)

प्रश्न 6.
परखनली कॉर्क की गत्ति की विपरीत दिशा में प्रक्षेपित होती है। कॉर्क तथा प्रक्षेपित परखनली के वेगों में अन्तर का भी अवलोकन करें।
उत्तर:
परखनली का पानी वाष्पित होकर कॉर्क पर आगे की दिशा में बल लगाता है जिस कारण कॉर्क परखनली से बाहर आ जाती है व परखनली को विपरीत दिशा में पीछे की ओर धकेलती है। ऐसा गति के तीसरे नियम के अनुसार होता है। कॉर्क का वेग परखनली के वेग से अधिक होगा क्योंकि परखनली का द्रव्यमान कॉर्क से अधिक है। ऐसा संवेग संरक्षण नियम के अनुसार हो रहा है। अतः उनका कुल संवेग संरक्षित रहता है।

Bihar Board Class 9 Science बल तथा गति के नियम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कोई वस्तु शून्य बाह्य असंतुलित बल अनुभव करती है। क्या किसी भी वस्तु के लिए अशून्य वेग से गति करना सम्भव है ? यदि हाँ, तो वस्तु के वेग के परिमाण एवं दिशा पर लगने वाली शर्तों का उल्लेख करें। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें।
उत्तर:
जब किसी वस्तु पर शून्य बाह्य असंतुलित बल लगाया जाता है तो वस्तु का अशून्य वेग से गति करना सम्भव है। दरअसल यदि किसी गतिमान वस्तु पर बाह्य बल कार्य नहीं करता तो वस्तु गतिमान रहेगी। इसके लिए यह आवश्यक है कि वस्तु एकसमान वेग से किसी निश्चित दिशा में गतिमान हो।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 2.
जब किसी छड़ी से एक दरी (कार्पेट) को पीटा जाता है, तो धूल के कण बाहर आ जाते हैं। स्पष्ट करें।
उत्तर:
छड़ी से दरी को पीटने पर, दरी अचानक गतिमान हो जाती है जब उसके छिद्रों में फंसे धूल के कण विरामावस्था में रहते हैं। अपनी विरामावस्था को बनाए रखने के लिए वे दरी से बाहर आ जाते हैं। यह न्यूटन के गति के प्रथम नियम के कारण होता है जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिर अवस्था या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल कार्यरत न हो।

प्रश्न 3.
बस की छत पर रखे सामान को रस्सी से क्यों बाँधा जाता है ?
उत्तर:
बस की छत पर रखे सामान की बस की विराम स्थिति में अपनी विरामावस्था में रहने की प्रवृत्ति होती है व अपनी गतिज अवस्था में रहने की प्रवृत्ति होती है जब बस गतिमान होती है। यह न्यूटन के गति के प्रथम नियम के कारण होता है। जब बस अपनी विरामावस्था से गतिमान अवस्था में आती है तब सामान अपनी विरामावस्था की स्थिति में रहने के कारण गिर सकता है। इसी प्रकार, गतिमान बस के विरामावस्था में आने पर या ब्रेक लगने के कारण उसके वेग में परिवर्तन होने के कारण भी सामान, अपनी गतिमान अवस्था में रहने की प्रवृत्ति के कारण, गिर सकता है। अत: बस की छत पर रखे सामान को रस्सी से बाँधा जाता है जिससे कि वह गिरने से बच सके।

प्रश्न 4.
किसी बल्लेबाज द्वारा क्रिकेट की गेंद को मारने पर गेंद जमीन पर लुढ़कती है। कुछ दूरी चलने के पश्चात् गेंद रुक जाती है। गेंद रुकने के लिए धीमी होती है, क्योंकि
(a) बल्लेबाज ने गेंद को पर्याप्त प्रयास से हिट नहीं किया है।
(b) वेग गेंद पर लगाए गए बल के समानुपाती है।
(c) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।
(d) गेंद पर कोई असंतुलित बल कार्यरत नहीं है, अतः गेंद विरामावस्था आने के लिए प्रयासरत है।
(सही विकल्प का चयन करें।)
उत्तर:
(c) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।

कारण – जब गेंद जमीन पर लुढ़कती है तो घर्षण बल उसकी गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है और कुछ समय के पश्चात् गेंद रुक जाती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम

प्रश्न 5.
एक ट्रक विरामावस्था से किसी पहाड़ी से नीचे की ओर नियत त्वरण से लुढ़कना शुरू करता है। यह 20 s में 400 m की दूरी तय करता है। इसका त्वरण ज्ञात करें। अगर इसका द्रव्यमान 7 टन है तो इस पर लगने वाले की गणना करें। (1 टन = 1000 kg)।
हल:
दिया गया है,
ट्रक का प्रारंभिक वेग (u) = 0 (ट्रक विरामावस्था से चलता है।)
दूरी, s = 400 m
समय, 1 = 20 s
त्वरण, a = ?
हम जानते हैं,
s = ut + 1/2 at2
⇒ 400 m = 0 x 20s +\(\frac { 1 }{ 2 }\) x a x (20s)2
400 m = 0 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x a x 400 s2
400 m = a x 200 s2
a = \(\frac{400 m}{200 s^{2}}\) = 2 ms-2
ट्रक पर लगने वाला बल = ?
ट्रक का द्रव्यमान = 7 ton =7 x 1000 kg = 7000 kg

हम जानते हैं, बल F = ma
⇒ F = 7000 kg x 2 ms-2
⇒ F = 14000 newton
अतः ट्रक पर लगने वाला त्वरण = 2 ms-2 व बल = 14000 N.

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प्रश्न 6.
1 kg द्रव्यमान के एक पत्थर को 20 ms-1 के वेग से झील की जमीनी सतह पर फेंका जाता है। पत्थर 50 m की दूरी तय करने के बाद रुकता है। पत्थर और बर्फ के बीच लगने वाले घर्षण बल की गणना करें।
हल:
दिया गया है,
पत्थर का द्रव्यमान = 1 kg
प्रारंभिक वेग, u = 20 m/s
अंतिम वेग, v = 0 (चूँकि पत्थर विरामावस्था में आ जाता है।)
दूरी, s = 50 m
घर्षण बल = ?

हम जानते हैं,
v2 = u2 + 2as
⇒ 02 = (20 m/s)2 + 2a x 50 m
⇒ -400 m2s-2 = 100 m x a
a = \(\frac{-400 m^{2} s^{-2}}{100 m}\) =-4ms-2
हम जानते हैं कि बल, F = m x a
या, F = 1 kg x -4 ms-2
F = -4kg ms-2
अतः पत्थर पर लगने वाला घर्षण बल F = -4 kg ms-2
यहाँ चिह्न दर्शाता है कि बल पत्थर की गति की विपरीत दिशा में कार्य कर रहा है।

प्रश्न 7.
एक 8000 kg द्रव्यमान का रेल इंजन प्रति 2000 kg द्रव्यमान वाले पाँच डिब्बों को सीधी पटरी पर खींचता है। यदि इंजन 40000 N का बल आरोपित करता है तथा यदि पटरी 5000 N का घर्षण बल लगाती है, तो ज्ञात करें –
(a) नेट त्वरण बल
(b) रेल का त्वरण, तथा
(c) डिब्बे 1 द्वारा डिब्बे 2 पर लगाया गया बल।
हल:
दिया गया है, इंजन का बल = 40000 N
घर्षण बल = 5000 N
इंजन का द्रव्यमान = 8000 kg
पाँच डिब्बों का द्रव्यमान = 5 x 2000 kg
= 10000 kg

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(a) नेट त्वरण बल = इंजन द्वारा लगाया गया बल – घर्षण बल
= 40000 N – 5000 N
= 35,000 N

(b) रेल का त्वरण
हम जानते हैं,
F = m x a
या, 35000 N = (इंजन का द्रव्यमान + 5 डिब्बों का द्रव्यमान) x a
या, 35,000 N = (8,000 kg + 10,000kg) x a
या, 35,000 N = 18,000 kg x a
या, = \(\frac{35000 \mathrm{N}}{18000 \mathrm{kg}}\)
या, =1.944 ms-2

(c) डिब्बे 1 द्वारा डिब्बे 2 पर लगाया गया बल
नेट त्वरण बल = 35000 N
5 डिब्बों का द्रव्यमान = 10000 kg
हम जानते हैं, F = m x a

अतः, 35,000 N = 10,000 kg x a
a = \(\frac{35,000 \mathrm{N}}{10,000 \mathrm{kg}}\) = 3.5 ms-2
अतः डिब्बों का त्वरण = 3.5 m/s2
डिब्बे 1 द्वारा डिब्बा 2 पर लगाया गया बल
= 4 डिब्बों का द्रव्यमान – त्वरण
F = 4 x 2000 kg x 3.5 ms-2 = 8000 kg x 3.5 ms-2
F = 28000 N

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प्रश्न 8.
एक गाड़ी का द्रव्यमान 1500 kg है। यदि गाड़ी को 1.7 ms-2 के ऋणात्मक त्वरण (अवमंदन) के साथ विरामावस्था में लाना है, तो गाड़ी तथा सड़क के बीच लगने वाला बल कितना होगा?
हल:
दिया गया है,
गाड़ी का द्रव्यमान = 1,500 kg
त्वरण, a = – 1.7 ms-2
गाड़ी तथा सड़क के बीच लगने वाला बल = ?
हम जानते हैं, F = m x a
अतः, F = 1,500 kg x 1.7 ms-2
F = – 2550 N
अतः गाड़ी तथा सड़क के बीच लगने वाला बल – 2550 N है। यहाँ ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि बल गाड़ी की विपरीत दिशा में लग रहा है।

प्रश्न 9.
किसी m द्रव्यमान की वस्तु जिसका वेग। है, का संवेग क्या होगा?
(a) (mv)2
(b) m2
(c) \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv2
(d) mv.
(उपर्युक्त में से सही विकल्प चुनें।)
उत्तर:
(d) mv.
हम जानते हैं,
संवेग p = mv.

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प्रश्न 10.
हम एक लकड़ी के बक्से को 200 N बल लगाकर नियत वेग से फर्श पर धकेलते हैं। बक्से पर लगने वाला घर्षण बल क्या होगा?
उत्तर:
चूँकि 200 N का बल बक्से को धकेलने में लग रहा है अतः 200 N का घर्षण बल बक्से पर लगेगा। न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार बक्से पर विपरीत दिशा में समान परिमाण का बल आरोपित होगा।

प्रश्न 11.
दो वस्तुएँ, प्रत्येक का द्रव्यमान 1.5 kg है, एक ही सीधी रेखा में एक-दूसरे के विपरीत दिशा में गति कर रही हैं। टकराने के पहले प्रत्येक का वेग 2.5 ms-1 है। टकराने के बाद यदि दोनों एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं तब उनका सम्मिलित वेग का क्या होगा?
हल:
चूँकि दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान बराबर है व वे समान वेग से विपरीत दिशा में चल रही हैं अतः टकराने के बाद जब दोनों एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, उनका सम्मिलित वेग शून्य होगा।
व्याख्या:
दिया गया है, पहली वस्तु का द्रव्यमान m1 = 1.5 kg
दूसरी वस्तु का द्रव्यमान m2 = 1.5 kg
पहली वस्तु का प्रारंभिक वेग (11) = 2.5 m/s
दूसरी वस्तु का प्रारंभिक वेग (up) =- 2.5 m/s
(दूसरी वस्तु पहली के विपरीत दिशा में गतिमान है। टकराने के बाद वस्तुओं का सम्मिलित वेग, जो आपस में जुड़ जाती है, v = ?)
m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2V2
⇒ 1.5 kg x 2.5 ms-1 + 1.5 kg x (-2.5 ms-1) = 1.5 kg x v+ 1.5 kg x v
⇒ 3.75 kg ms-1 – 3.75 kg ms-1 = 3.0 kg x v
0 = v x 3.0 kg
⇒ v = 0
अत: दोनों वस्तुओं का टकराने के बाद अंतिम वेग शून्य होगा।

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प्रश्न 12.
गति के तृतीय नियम के अनुसार जब हम किसी वस्तु को धक्का देते हैं, तो वस्तु उतने ही बल के साथ हमें भी विपरीत दिशा में धक्का देती है। यदि वह वस्तु एक ट्रक है जो सड़क के किनारे खड़ा है; संभवतः हमारे द्वारा बल आरोपित करने पर भी गतिशील नहीं हो पाएगा। एक विद्यार्थी इसे सही साबित करते हुए कहता है कि दोनों बल विपरीत एवं बराबर हैं एवं जो एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। इस तर्क पर अपने विचार दें और बताएँ कि ट्रक गतिशील क्यों नहीं हो पाता ?
उत्तर:
ट्रक के अत्यधिक द्रव्यमान के कारण उसका घर्षण बल भी बहुत अधिक होगा। विद्यार्थी द्वारा ट्रक पर लगाया जाने वाला बल इस घर्षण बल से बहुत कम है अतः वह ट्रक को गतिशील नहीं कर पाता। यहाँ, दोनों दिशाओं में लगने वाला नेट बल शून्य है जिसके कारण ट्रक गतिमान नहीं होता। विद्यार्थी द्वारा आरोपित बल व घर्षण बल एक-दूसरे को निरस्त कर रहे हैं। अतः विद्यार्थी द्वारा दिया गया तर्क सही है।

प्रश्न 13.
200 g द्रव्यमान की एक हॉकी की गेंद 10 ms-1 से गति कर रही है। यह एक हॉकी स्टिक से इस प्रकार टकराती है कि यह 5 ms-1 के वेग से अपने प्रारम्भिक मार्ग पर वापस लौटती है। हॉकी स्टिक द्वारा आरोपित बल द्वारा हॉकी की गेंद में आये संवेग परिवर्तन के परिमाप का परिकलन कीजिए।
हल:
दिया गया है,
हॉकी की गेंद का द्रव्यमान m = 200 g = 0.2 kg
हॉकी की गेंद का प्रारम्भिक वेग v1 = 10 ms-1
प्रारम्भिक संवेग = mv1 = 0.2 x 10 = 2 kg ms-1
हॉकी स्टिक से टकराने के बाद गेंद का विपरीत दिशा में वेग v2 = – 5 ms-1
अन्तिम संवेग = mv1 = 0.2 x (-5) = -1 kg ms-1 अतः अभीष्ट संवेग परिवर्तन = mv1 – mv2
= 2 – (-1) = 3 kg ms-1

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प्रश्न 14.
10 g द्रव्यमान की एक गोली सीधी रेखा में 150 ms-1 के वेग से चलकर एक लकड़ी के गुटके से टकराती है और 0.03 5 के बाद रुक जाती है। गोली लकड़ी को कितनी दूरी तक भेदेगी ? लकड़ी के गुटके द्वारा गोली पर लगाए गए बल के परिमाण की गणना करें।
हल:
दिया है, गोली का द्रव्यमान, m = 10 g = 1000 kg = 0.01 kg
गोली का प्रारंभिक वेग, u = 150 m/s
गोली का अंतिम वेग, v = 0
समय, t = 0.3 s
भेदने वाली दूरी, s = ?
गुटके द्वारा लगाया गया बल = ?
हम जानते हैं, v = u + at
⇒ 0 = 150 ms-1 + a x 0.03 s
⇒  – 150 ms-1 = a x 0.03 s
⇒ a = \(\frac{-150 \mathrm{ms}^{-1}}{0.03 \mathrm{s}}\)
= – 5000 m/s2
जानते हैं, s = ut + 1/2 at2
⇒ s = 150 m/s x 0.03 s + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(-500 ms-2) x (0.03 s)2
⇒ s = 4.5 m – 2500 ms-2 x 0.000952)
⇒ s = 4.5 m – 2.25 m
⇒ s = 2.25 m
हम जानते हैं, F = m x a
⇒ F = 0.01 kg x (-5000 ms-2) =-50N
यहाँ ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि बल गोली की विपरीत दिशा में लग रहा है।

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प्रश्न 15.
एक वस्तु जिसका द्रव्यमान 1 kg है, 10 ms-1 के वेग से एक सीधी रेखा में चलते हुए विरामावस्था में रखे 5kg द्रव्यमान के एक लकड़ी के गुटके से टकराती है। उसके बाद दोनों साथ-साथ उसी सीधी रेखा में गति करते हैं। संघट्ट के पहले तथा बाद के कुल संवेगों की गणना करें। आपस में जुड़े हुए संयोजन के वेग की भी गणना करें।
हल:
वस्तु का द्रव्यमान m1 = 1 kg
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान m2 = 5 kg
वस्तु का प्रारंभिक बेग, u1 = 10 m/s
लकड़ी के गुटके का प्रारंभिक वेग, u2 = 0
वस्तु के गुटके का अंतिम वेग, v = ?
‘संघट्ट के पहले तथा बाद में कुल वेग = ?

हम जानते हैं,
m1u1 + m2u2= m1v1 + m2v2
⇒ 1 kg x 10 m/s + 5 kg x 0 = 1 kg x v + 5 kg x v
⇒ 10 kg m/s = v (1 kg + 5 kg)
⇒ 10 kg m/s = v x 6 kg
⇒ v = \(\frac{10 \mathrm{kg} \mathrm{ms}^{-1}}{6 \mathrm{kg}}\)
⇒ v = 1.66 m/s
टकराने से पहले कुल संवेग
= m1u1 + m2v2
= 1 kg x 10 ms-1 +5 kg x 0
= 10 kg ms-1
टकराने के बाद संवेग = m1v1 + m2v2
= m1v + m2v = v (m1 + m2)
[क्योंकि दोनों वस्तुओं का वेग टकराने के बाद एक समान है।
= (1 kg + 5 kg) x \(\frac { 10 }{ 6 }\) m/s [(i) से]
= 6 kg x \(\frac { 10 }{ 6 }\) m/s
= 10 kg m/s

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प्रश्न 16.
100 kg द्रव्यमान की एक वस्तु का वेग समान त्वरण से चलते हुए 6 5 में 5 ms-1 से 8 ms-1 हो जाता है। वस्तु के पहले और बाद के संवेगों की गणना करें। उस बल के परिमाण की गणना करें जो उस वस्तु पर आरोपित है।
हल:
दिया है, प्रारम्भिक वेग, u = 5 m/s
अन्तिम वेग, v = 8 m/s
वस्तु का द्रव्यमान, m = 100 kg
समय t = 6s
प्रारम्भिक व अन्तिम संवेग = ?
वस्तु पर आरोपित बल = ?
हम जानते हैं,
संवेग = द्रव्यमान x वेग
प्रारम्भिक संवेग = द्रव्यमान x प्रारम्भिक वेग
= 10 kg x 5 m/s
= 500 kg m/s

अन्तिम संवेग = द्रव्यमान x अन्तिम वेग
= 100 kg x 8 m/s
= 800 kg m/s

हम जानते हैं,
v = u + at
⇒ 8 m/s = 5 m/s + a x 6s
8 m/s -5 m/s =a x 6s
3 m/s =a x 6s
a = \(\frac{3 \mathrm{m} / \mathrm{s}}{6 \mathrm{s}}\) = 0.5 ms-2
वस्तु पर आरोपित बल = द्रव्यमान x त्वरण
= 100 kg x 0.5 ms-2
= 50 N

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प्रश्न 17.
अख्तर, किरण और राहुल किसी राजमार्ग पर बहुत तीव्र गति से चलती हुई कार में सवार हैं। अचानक उड़ता हुआ कोई कीड़ा, गाड़ी के सामने के शीशे से आ टकराया और वह शीशे से चिपक गया। अख्तर और किरण इस स्थिति पर विवाद करते हैं। किरण का मानना है कि कीड़े के संवेग परिवर्तन का परिमाण कार के संवेग परिवर्तन के परिमाण की अपेक्षा बहुत अधिक है। (क्योंकि कीड़े के वेग में परिवर्तन का मान कार के वेग में परिवर्तन के मान से बहुत अधिक है।) अख्तर ने कहा कि चूँकि कार का वेग बहुत अधिक था अतः कार ने कीड़े पर बहुत अधिक बल लगाया जिसके कारण कीड़े की मौत हो गई। राहुल ने एक नया तर्क देते हुए कहा कि कार तथा कीड़ा दोनों पर समान बल लगा और दोनों के संवेग में बराबर परिवर्तन हुआ। इन विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया दें।
उत्तर:
राहुल का तर्क सही प्रतीत होता है क्योंकि पूरे तन्त्र पर कोई भी बाहरी बल नहीं लगा है तथा संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार त्वरण के समय तन्त्र का कुल संवेग संरक्षित रहता है, अतएव कीड़ा एवं कार दोनों पर समान बल लगेगा तथा दोनों के संवेग में बराबर परिवर्तन होगा।

प्रश्न 18.
एक 10 kg द्रव्यमान की घंटी 80 cm की ऊँचाई से फर्श पर गिरी। इस अवस्था में घंटी द्वारा फर्श पर स्थानान्तरित संवेग के मान की गणना करें। परिकलन में सरलता हेतु नीचे की ओर दिष्ट त्वरण का मान 10 ms-2 लें।
हल:
दिया है,
घंटी का द्रव्यमान = 10 kg
दूरी, s = 80 cm = \(\frac {80}{ 100 }\) = 0.8 m
त्वरण, a = 10 ms-2
घंटी का प्रारम्भिक वेग, u = 0
– संवेग = ?
हम जानते हैं,
u2 = u2 + 2as
v2 = 0 + 2 x 10 x 0.8
v2 = 16 m2s2
v = 16 m s-2
v = \(\sqrt{16 m^{2} s^{-2}}\) = 4 m/s

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हम जानते हैं,
संवेग p = m x v
p = 10 kg x 4 m/s =40 kg m/s

अतिरिक्त अभ्यास
प्रश्न A1.
एक वस्तु की गति की अवस्था में दूरी-समय सारणी निम्नवत् है –
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम
(a) त्वरण के बारे में आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं ? क्या यह नियत है ? बढ़ रहा है ? या शून्य है ?
(b) आप वस्तु पर लगने वाले बल के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं ?
हल: (a)

उपर्युक्त सारणी दर्शाती है कि वेग परिवर्तन की दर बढ़ रही है.अतः वस्तु का त्वरण लगातार बढ़ रहा है।
(b) चूँकि बल, वस्तु में उत्पन्न त्वरण के समानुपाती होता है, इसलिए वस्तु पर लगने वाला बल भी लगातार बढ़ रहा है।

प्रश्न A2.
1200 kg द्रव्यमान की कार को एक समतल सड़क पर दो व्यक्ति समान वेग से धक्का देते हैं। उसी कार को तीन व्यक्तियों द्वारा धक्का देकर 0-2 ms-2 का त्वरण उत्पन्न किया जाता है। कितने बल के साथ प्रत्येक व्यक्ति कार को धकेल पाते हैं। (मान लें कि सभी व्यक्ति समान पेशीय बल के साथ कार को धक्का देते हैं।)
हल:
दिया है:
कार का द्रव्यमान m = 1200 kg
तीन व्यक्तियों द्वारा धक्का देने पर उत्पन्न त्वरण a = 0.2 ms-1
तीसरे व्यक्ति द्वारा लगाया गया बल
F = ma = 1200 x 0.2 = 240N
चूँकि तीनों व्यक्तियों में से प्रत्येक समान पेशीय बल का उपयोग कर रहा है, इसलिए प्रत्येक समान बल से कार को धकेल पाते हैं।
अतः कार को धकेलने में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा आरोपित अभीष्ट बल %D240 N.

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प्रश्न A3.
500g द्रव्यमान के एक हथौड़े द्वारा 50 ms-1 वेग से एक कील पर प्रहार किया जाता है। कील द्वारा हथौड़े को बहुत कम समय 0.01 s में ही रोक दिया जाता है। कील के द्वारा हथौड़े पर लगाए गए बल का परिकलन करो।
हल:
दिया है:
हथौड़े का द्रव्यमान m = 500 g = 0.5 kg
हथौड़े का प्रारम्भिक वेग u = 50 ms-1
हथौड़े पर अन्तिम वेग v = 0 ms-1
समय अन्तराल t = 0.01 s
हम जानते हैं कि,
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम
= \(\frac{m v-m u}{t}\)
= \(\frac{0 \cdot 5 \times 0-0 \cdot 5 \times 50}{0 \cdot 01}\)
= – \(\frac{25}{0 \cdot 01}\) = – 2500 N
(ऋणात्मक चिह्न बल की दिशा बताता है कि बल कील ने लगाया)
अतः, कील द्वारा हथौड़े पर लगा अभीष्ट बल = 2500 N.

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प्रश्न A4.
एक 1200 kg द्रव्यमान की मोटरकार 90 km/h की वेग से एक सरल रेखा के अनुदिश चल रही है। उसका वेग बाहरी असन्तुलित बल लगने के कारण 4s में घटकर 18 km/h हो जाता है। त्वरण और संवेग में परिवर्तन का परिकलन करें। लगने वाले बल के परिमाण का भी परिकलन करें।
हल:
दिया है:
मोटरकार का द्रव्यमान m = 1200 kg
कार का प्रारम्भिक वेग u = 90 km / h
कार का अन्तिम वेग v = 18 km / h
समय अन्तराल t =4s
वेग में परिवर्तन v – u = (90 – 18) km /h
= 72 x 5/18 = 20 m/s
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 9 बल तथा गति के नियम
= \(\frac {20}{4}\) = 5 ms-2
संवेग परिवर्तन p = m (v – u)
= 1200 x 20
= 24000 kg ms-1
बल (F) = द्रव्यमान (m) x त्वरण (a)
= 1200 x 5 = 6000 N
अत: अभीष्ट त्वरण = 5 ms-2, संवेग में परिवर्तन = 24000 kg ms-1 एवं लगने वाला बल = 6000 N.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2

प्रश्न 1.
एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC में जिसमें AB = AC है. ∠B और ∠C के समद्विभाजक परस्पर बिन्दु O पर प्रतिभेद करते हैं। A और O को जोथिए। दर्शाए कि-
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 1
(i) OB = OC
(ii) AO, ∠A को समद्विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) ∆ARC में,
AB = AC (दिया है।
अतः ∠ACB = ∠ABC
तो, \(\frac{1}{2}\) ∠ACB = \(\frac{1}{2}\) ∠ABC
∠OCA = ∠OBA
∠OCB = ∠OBC …. (1)
(∵ OB तथा 0C क्रमश: ∠B तथा ∠C के समद्विभाजक है)
⇒ OB = OC. …… (2)
(∵ समान कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती है।)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2

(ii) ∆OBA और ∆OCA में,
AB = AC (दिया है)
∠OBA = ∠OCA [समी. (1) से]
⇒ OB = OC. [सनी. (2) से]
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से
∆OBA ≅ ∆OCA
⇒ ∠BAO – ∠CAO ( सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)
अत: AO, ∠BAC को समद्विभाजित करता है।

प्रश्न 2.
∆ABC में AD भुजा BC का लम्ब समद्विभाजक है (देखिए आकृति) दहिए कि ∆ABC एक समद्धि आहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 2
उत्तर:
∆ABD और
∆ACD में,
AD = AD (उभयनिष्ठ)
∠ADB =∠ADC = 90°
(∵ AD भुजा BC पर लम्ब है)
BD = DC (दिया है)
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABD ≅ ∆ACD
⇒ AB = AC (सर्वागसम विभुज के संगत भाग बराबर होते हैं)
आत: ∆ARC समद्विबाहु त्रिभुज है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2

प्रश्न 3.
ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें बराबर भुजाओं AC और AR पर क्रमशः शीर्षलम्ब BE और CF खींचे गए हैं (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि ये शीर्षलम्ब बराबर है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 3
उत्तर:
∆ABE और ∆ACF में,
∠A – ∠A (उभयनिष्ठ)
(∵ BE ⊥ AC तथा CF ⊥ AB)
∠AED – ∠ARC = 90°
AB = AC (दिया है)
∴ AAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABE = ∆ACF
⇒ BE = CF (∵ सर्वागतम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते ई)
अत: शीर्षलम्ब बराबर हैं।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.2

प्रश्न 4.
ABC एक त्रिभुज है जिसमें AC और AB पर खींचे गए शीघलम्ब BE और CF बराबर हैं (देखिए आकृति) वाइए कि-
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 4
(i) ∆ABE ≅ ∆CFB
(ii) AB = AC,
अर्थात् ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
उत्तर:
(i) ∆ABE और ∆ACF में,
∠A = ∠A (उभयनिष्न)
BE = CF (दिया है।
∠AEB = ∠AFC = 90°
(∵ BE ⊥ AC, CF ⊥ AB)
∴ AAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABE ≅ ∆ACE. ……..(1)

(ii) ∵ ∆ABE ≅ ∆ACF (समी. (1) से]
⇒ AB = AC. (∵ सर्वांगसम विभुगों के संगत भाग बराबर होते हैं।)
आतः ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।

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प्रश्न 5.
ABC और DBC समान आधार BC पर स्थित दो समद्धि बाहु त्रिभुज है (देखिए आवृति) दशदिए कि ∠ABD = ∠ACD है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 5
उत्तर:
∆ABC में,
AB = AC (दिया है।)
अतः ∠ABC = ∠ACB ……… (1)
(∵ समान भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।)
∆BCD में, BD = CD (दिया है।)
अतः ∠CBD = ∠BCD ………. (2)
(∵ समान भुजाओं के सम्मुख कोष बराबर होते हैं)
समी- (1) व समो. (2) को जोड़ने पर,
∠ABC + ∠CBD = ∠ACB + ∠BCD
∠ABD = ∠ACD.

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प्रश्न 6.
ABC एक समदिवाह त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है। भुजा BA बिंदूत D क इस प्रकार बढ़ाई गई है कि AD = AB है (देखिए आकृति)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 6
दशहिए कि ∠BCD एक समकोण है।
उत्तर:
∆ABC में,
AB = AC (दिया है।)
∠ABC = ∠ACB ……. (1)
(समान भुजाओं के सम्मुख कोण)
∆ACD में,
AC = AD (दिया है।
∠ADC = ∠ACD ……… (2)
(समान भुनाओं के सम्मुख कोण)
समी- (1) और समी. (2) को जोड़ने पर
∠ABC + ∠ADC = ∠ACB + ∠ACD
∠ABC + ∠ADC = ∠BCD ……… (3)
∆BCD में, ∠DBC + ∠BDC + ∠BCD = 180°
समी (3) से, ∠BCD + ∠BCD = 180°
⇒ 2∠BCD = 180°
⇒ ∠BCD = 90°
अत: ∠BCD एक समकोण है।

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प्रश्न 7.
ABC एक समकोण त्रिभुजई, जिसमें ∠A = 90° और AB = AC है। ∠B और ∠C ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∆ABC में, AB = AC (दिया है।)
⇒ ∠B = ∠C (समान भुजाओं के सम्मुखा कोण)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 7
अब. ∠ABC + ∠BCA + ∠CAD = 180°
∠ABC + ∠ABC + 90° = 180°
(∵ ∠CAB = 90° तथा ∠BCA = ∠ABC)
2∠ABC = 180° – 90°
∠ABC = ∠BCA = \(\frac{90°}{2}\) = 45°.

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प्रश्न 8.
दर्शाइए कि किसी समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है।
उत्तर:
माना ∆ABC एक समबाहु त्रिभुज है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.2 8
अत: AB = BC = CA
यहाँ, AB = AC
अत: ∠B = ∠C …….. (1)
(समान भुजाओं के सम्मुख कोण)
यहाँ, BC = AC
अत: ∠A = ∠B ……. (2)
(समान भुजाओं के सम्मुख कोण)
समी. (1) व (2) से,
∠A = ∠B = ∠C
∆ABC में, ∠A + ∠B + ∠C = 180°
3∠A = 180°
∠A = 60° = ∠B = ∠C
अत: समबाहु त्रिभुज के सभी कोण 60 के होते हैं।

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Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 6 मीडिया और लोकतंत्र

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 6 मीडिया और लोकतंत्र Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 6 मीडिया और लोकतंत्र

Bihar Board Class 7 Social Science मीडिया और लोकतंत्र Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
आप पाँच ऐसी खबरों की सूची बनाएँ जो भारत के किसी अन्य राज्यों (बिहार को छोड़कर) की हैं और इसकी जानकारी आपको टी.वी: से प्राप्त हुई है।
उत्तर-
पाँच ऐसी खबरें जो बिहार को छोड़कर किसी अन्य राज्य की हैं और जिनकी जानकारी हमें टी.वी. से प्राप्त हुई, इस प्रकार है

  1. गुजरात का भूकम्प
  2. मुम्बई में हुआ आतंकवादी हमला
  3. कश्मीर का आतंकवाद
  4. मुम्बई में आया भयंकर बाढ़
  5. केरल का सुनामी ।

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प्रश्न 2.
ऊपर दिए गए चित्र को देखकर यह बताओ कि मीडिया के तकनीक में क्या बदलाव आए और इनका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
ऊपर दिए गए चित्र को देखकर यह कहा जा सकता है कि मिडिया के तकनीक में बहुत बदलाव हुए हैं। पहले छपाई का काम हाथों से किया जाता था, जिसमें बहुत ज्यादा समय में बहुत कम काम हो पाता था। पर आज तकनीक में हुए परिवर्तन की वजह से अब छपाई का काम करने के लिए मशीन उपलब्ध है जिससे बहुत कम समय में बहुत ज्यादा काम आसानी से होता है। ये मशीनें कई आदमियों का काम अकेले कर देती हैं।

इन मशीनों के जाने से कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। ये मशीन जहाँ समय की बचत करती हैं साथ ही कई लोगों का कार्य अकेले कर देती हैं, जिससे हमें फायदा हैं पर दूसरी ओर इन मशीनों के आ जाने से बेरोजगारी ‘बहुत अधिक बढ़ गई है। बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 3.
आपके क्षेत्र में केवल टी.वी. का प्रयोग कब शुरू हुआ? इससे क्या फर्क पड़ा?
उत्तर-
हमारे क्षेत्र में केवल टी.वी. का प्रयोग बहुत पहले से शुरू हो चुका है। इसका प्रसारण काफी पहले से हमारे क्षेत्र में हो रहा है।

केवल टी.वी. में बहुत सारे चैनल होते हैं, जिसमें से कुछ चैनल पर सिर्फ समाचार दिखाए जाते हैं। कुछ चैनल पर देश-विदेश के समाचार तो कुछ पर क्षेत्रिय समाचार दिखाए जाते हैं। इसमें अलग-अलग क्षेत्रिय भाषाओं के चैनल भी होते हैं। समाचार के अलग-अलग चैनल होने से किसी भी न्यूज की विस्तारपूर्वक जानकारी मिलती है। क्षेत्रिय चैनल से अलग अलग भाषी लोग

अपनी भाषाओं में टी.वी. देख सकते हैं। मनोरंजन का साधन बढ़ा । जिसे जो देखना है कि वे देख सकते हैं। खेल के लिए अलग चैनल है, समाचार के लिए अलग और जंगलों की जानकारी के लिए अलग तथा विभिन्न विषयों के लिए अलग चैनल है।

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प्रश्न 4.
पिछले पन्ने पर दिए गए चित्र में आप किन-किन तरह के विरोध करने के तरीके पहचान सकते हैं ? इनका मीडिया के साथ क्या संबंध है?
उत्तर-
पिछले पन्ने पर दिए गए चित्र में विरोध के रूप में धरना, कैंडिल मार्च, भूख हड़ताल, जुलूस आदि को दिखाया गया है।

मीडिया के द्वारा इन खबरों को विशेष रूप से कवर किया जाता है। इन खबरों को फिर जनता और सरकार बीच पहुँचाया जाता है। जिससे सरकार तक ये खबरें पहुँचती हैं कि जनता किन बातों का विरोध कर रही है और सरकार द्वारा इन बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता है कि जनता इन बातों का विरोध क्यों कर रही है और फिर उसकारण को दूर करने की कोशिश की जाती है और जनता से ऐसा न करने की अपील की जाती है।

प्रश्न 5.
पटना के समीप गाँव में मनरेगा कार्यक्रम के तहत चल रहे काम में मीडिया द्वारा क्या किया गया और इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
पटना के समीप के एक गांव में मनरेगा कार्यक्रम के तहत मिट्टी कटाई का काम किया जा रहा था और इस कार्य के लिए मजदूरों की जगह बड़ी मशीनों का प्रयोग किया जा रहा था। जबकि इस कार्यक्रम में लोगों को रोजगार देने पर अधिक बल दिया जाता है और इसमें मशीनों का इस्तेमाल वर्जित है। इसमें मशीनों की जगह गाँव में रहने वाले लोगों को कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। पर यहाँ पर इन नियमों की अवहेलना हो रही थी।

मीडिया कर्मियों द्वारा इस खबर को अखबारों एवं न्यूज चैनलों पर प्रमुखता के साथ प्रसारित किया गया, जिससे इस खबर की. जानकारी आम लोगों के साथ ही उच्च अधिकारियों को हुई और गाँव पहुँच उनलोगों ने तुरंत मशीनों से किए जा रहे काम को बंद करने का आदेश दिया। फिर इस मामले की जाँच कराई गई जिससे यह पता चला कि मजदूरों की जाली उपस्थिति दर्ज करके आवंटित राशि आपस में बाँट ली जाती है। जाँच अधिकारियों द्वारा लोगों के खिलाफ कार्यवाई की गई और मजदूरों को उनका हक दिलवाया गया।

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प्रश्न 6.
क्या कभी मीडिया द्वारा गलत खबरें भी पहुँचायी जाती है? चर्चा करें।
उत्तर-
हाँ, मीडिया कभी-कभी अपनी प्रसिद्धि का गलत फायदा उठाती है। वह अपनी साख को बढ़ाने के लिए कभी-कभी खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है और इस वजह से जनता तक गलत बातें पहुँचती हैं। जिससे कभी-कभी जनता गुमराह हो जाती है !

प्रश्न 7.
“न्यूज ऑफ बिहार” की खबर में किस बात की प्रमुखता दी गयी है ?
उत्तर-
“न्यूज ऑफ बिहार” की खबर में इस बात को प्रमुखता दी गयी। कि बारिश होने की वजह से मौसम बहुत सुहाना हो गया। गर्मी की वजह से परेशान लोगों को बारिश से थोड़ी राहत मिली। भयानक गर्मी के बीच अचानक से मौसम का मिजाज बदला और आकाश में काले-काले बादल आ गए और बिजलियाँ चमकने लगी और तेज हवा ओले के साथ बारिश शुरू। हो गई। बारिश होने की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गयी।

पर एक तरफ बारिश की वजह से मौसम तो सुहावना हुआ पर मौसम के बदलते मिजाज ने बहुत तबाही भी मचाई। सड़कों पर कितने लोगों को भिंगते देखा गया और जगह-जगह पेड़ गिर जाने से आवागमन भी बाधित हुआ था।

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प्रश्न 8.
दोनों रपट में क्या अंतर है? चर्चा करें।
उत्तर-
दोनों रपट में एक ही तरह के खवर को अलग-अलग तरीके से लिखा गया है।

न्यूज ऑफ बिहार की रिपोर्ट में बारिश से मौसम में आए परिवर्तन को ज्यादा फोकस किया गया है। इसमें लिखा गया है कि गर्मी की भयंकर तपिश झेल रहे लोगों को अचानक हुई वारिश से बहुत तंबाही भी मची। कई लोग सड़कों पर भिंगते नजर आए और कई जगह पेड़ गिर जाने से आवागमन भी बाधित हुआ।

दूसरी ओर बिहार रोजाना की रिपोर्ट में नगर-निगम की पोल पट्टी भी खोली गयी है। हर साल नगर निगम की ओर से नालियों व सड़कों की सफाई आदि पर लाखो करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, पर यहाँ आम नागरिकों की हर वही दुर्गति होती है। थोड़ी ही बारिश में सड़कों पर नालियों का गंदा पानी

व मलमूत्र फैल जाता है। मुख्य सड़कों के साथ ही गली, मुहल्ले की सड़क – आदि में भी गंदा पानी भर जाता है।

इस दोनों खबरों में ‘न्यूज ऑफ बिहार’ में बारिश से मिलने वाली राहत – को बताया गया है और ‘बिहार रोजाना की रिपोटों’ में बारिश से आम लोगों – को होने वाली परेशानी और नगर निगम की पोल खोली गई हैं।

प्रश्न 9.
संचार के वैकल्पिक माध्यमों में हस्तलिखित अखबार, सामुदायिक रेडियो, लघु पत्रिका इत्यादि का चलन बढ़ा है। शिक्षक की मदद से चर्चा करें।
उत्तर-
संचार के वैकल्पिक माध्यमों में हस्तलिखित अखबार, सामूहिक रेडियो, लघु पत्रिका इत्यादि का चलन बढ़ने का एक मुख्य कारण है कि छपाई वाले अखबार गाँव में नहीं मिलते हैं। इनका दायरा सीमित होता है और. अखबारों का एकछत्र राज्य कायम होने से वे कभी-कभी अपनी प्रसिद्ध का. फायदा उठाते हुए किसी खबर को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और अपनी साख को और बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसमें खेल, सिनेमा आदि को

विस्तारपूर्वक बताया जाता है पर गरीब लोगों, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों जो मूलभूत सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, जिन्हें ये सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की चुनौती है-इन सब बातों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है पर ऊपर लिखित वैकल्पिक माध्यम आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और इससे काफी छोटी-छोटी बातों को जानकारी मिलती हैं। ”

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प्रश्न 10.
कुछ अखबारों को पढ़कर समझाओ कि आपके इलाके के बारे में छपी खबरों में किन बातों पर ध्यान दिया जा रहा है?
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें।

प्रश्न 11.
आपके विचार से क्या कुछ बातों पर मीडिया का कम ध्यान है?
उत्तर-
हाँ, मेरे विचार से कुछ बातों पर मीडिया का कम ध्यान है। मीडिया रोजगार, शिक्षा, गरीबी आदि से जुड़ी खबरों पर ज्यादा ध्यान नहीं देती। जबकि इन बातों को विस्तारपूर्वक लोगों के सामने लाना चाहिए, जिससे जनता की तकलीफ लोगों के सामने आए और लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित हो सके। जबकि मीडिया उन बातों पर ज्यादा ध्यान देती हैं जिससे उनकी प्रसिद्धी और बढ़े।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अगर आपको कैमरा दे दिया जाए तो आप इसका कैसे प्रयोग करेंगे?
उत्तर-
अगर मुझे कैमरा दिया जाए तो मैं उसमें अपने आस-पास की घटनाओं को कैद करना चाहूँगी। हमारे आस-पास क्या अच्छा क्या बुरा, क्या सही या क्या गलत हो रहा है इसे कैद कर सकते हैं और दूसरों को दिखा सकते हैं। हम अपनी आस-पास की खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य को कैद कर सकते हैं।

इसे दूसरों को दिखाने से उन्हें हमारे आस-पास के क्षेत्रों की जानकारी मिलेगी। लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित होगा। लोगों को इन्हें दिखाने से लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित होगा। लोगों को इन्हें दिखाने से लोगों का ध्यान हमारे क्षेत्र की ओर जाएगा। अगर मेरे पास कैमरा होता और मैं कहीं घूमने जाऊँ तो वहाँ के दृश्यों को कैमरे में कैद करके लाऊँगी ‘और अपने आस-पास को दिखाऊँगी, जिससे उन लोगों को भी उस जगह की

जानकारी मिलेगी, वे लोग भी उस जगह को जान पाएंगे।

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प्रश्न 2.
आपके विद्यालय में होने वाले किसी कार्यक्रम पर एक खबर तैयार करें।
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें।

प्रश्न 3.
आपके विचार से संचार का कौन-सा माध्यम ज्यादा लोकप्रिय है? कारण सहित बताएँ।
उत्तर-
मेरे हिसाब से संचार के सभी माध्यमों में टी.वी. सबसे लोकप्रिय है। क्योंकि टी.वी. पर हम खबरों को सुनने के साथ ही देख सकते हैं। टी. वी. पर कभी-कभी घटना स्थल से सीधे ही खबरों को प्रसारित किया जाता

है। जिससे हम घटना स्थल के दृश्य को देख सकते हैं। वहाँ के लोगों के – बातचीत को सुन सकते हैं। वहाँ पर लोगों को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, उसे देख सकते हैं और सुन भी सकते हैं। टी.वी. पर बहुत सारे चैनल होने के कारण हमें हर तरह के खबरे देखने के साथ सुनने को भी मिलती है। टी.वी. हमें देश-विदेश के खबरें के साथ ही क्षेत्रिय खबरें भी विस्तारपूर्वक देखने को मिलती है। टी.वी. मनोरंजन का भी बहुत अच्छा साधन है।

प्रश्न 4.
किसी बड़ी घटना की जानकारी आपको किन-किन माध्यमों से हुई। चर्चा करें।
उत्तर-
गुजरात में आए भूकंप की जानकारी मुझे अखबार, रेडियो और टी.वी. से प्राप्त हुई थी। हमारे कुछ रिश्तेदारों ने फोन में भी हमें इस घटना की जानकारी दी थी। फिर टी.वी. पर गुजरात से सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था। रेडियो पर भी खबरें सुनने को मिल रही थी। पर टी.वी. पर वहाँ का सीधा दृश्य दिखाया जा रहा था।

किस तरह बड़े-बड़े बिल्डिंग भूकंप की वजह से मलबे में बदल गए थे। चारो ओर लोगों की चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थी। सभी अपनी जान बचाने की कोशिश से लगे हुए थे। सेना के जवान मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही आम नागरिक भी उनकी मदद को तैयार थे। अखबार और रेडियो से हमें खबर पढ़ने को और सुनने को मिली पर टी.वी. पर वहाँ की स्थिति को सीधे-सीधे देखने पर उन लोगों के तकलीफ को महसूस करने पर मेरे रोंगटे खड़े हो गये।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 6 मीडिया और लोकतंत्र

प्रश्न 5.
सूचना के आधुनिक संचार माध्यमों से क्या फर्क पड़ा?
उत्तर-
सूचना के आधुनिक संचार माध्यमों का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा । जैसे – पहले अगर हमें कोई खबर लोगों तक पहुँचानी होती थी, तो लोग कबूतर उड़ाकर, डुगडुगी बजाकर या फिर ढोलक पीटकर खबरें पहुँचाई जाती थी। पर आज संचार माध्यमों की वजह से ये लाखों लोगों तक आसानी से पहुँच जाती है। आज अखबार, टी.वी., रेडियो आदि से किसी भी खबर को लाखों लोगों तक पहुँचाना भी बहुत आसान होता है। मोबाइल की वजह से लोग देश-विदेश में रहने वाले लोगों से भी आसानी से बात कर लेते

हैं। पहले के जमाने में लोग खबरों को सिर्फ सुन पाते थे, पर आज के समय में वे खबरों को पढ़ सकते हैं, सुन सकते हैं और साथ ही देख भी सकते हैं

और कभी-कभी तो घटना स्थल से सीधे प्रसारित होने वाले खबरों में वे उस जगह की स्थिति भी देख सकते हैं, जहाँ कोई घटना घटी हो ।

मोबाइल फोन की वजह से लोग जब चाहें, जहाँ चाहे आसानी से बात कर सकते हैं। उन्हें.. किसी बात की जानकारी दे सकते हैं। इंटरनेट भी संचार माध्यम का बहुत अच्छा रूप है और इसका प्रचलन आपके समय में बहुत तेजी से बढ़ रहा ।

प्रश्न 6.
किसी दो प्रमुख समाचार पत्रों के प्रथम पृष्ठ पर दिये गये शीर्षकों की खबर का विवरण तैयार करें और देखें कि उनकी खबरों में क्या समानता और भिन्नता है?
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 7 Social Science मीडिया और लोकतंत्र Notes

पाठ का सार संक्षेप

मीडिया और लोकतंत्र अंग्रेजी शब्द ‘मिडियम’ से ‘मिडिया’ शब्द लिया गया है। मीडियम का अर्थ होता है ‘माध्यम’। मीडिया के द्वारा ही समाज के विचारों एवं खबरों का आदान-प्रदान आसानी से होता है। समाचार-पत्र, पत्रिकाओं, टी.वी. चैनल, रेडियो. फोन-फैक्स. इंटरनेट आदि संचार के विभिन्न माध्यम है जिससे हम देश-विदेश में रहने वाले अपने सगे-संबंधियों से आसानी से बात कर सकते और देश-विदेश में होने वाली हर छोटी-मोटी घटनाओं को देख, सुन और पढ़ सकते हैं। इसकी पहुँच देश-विदेश के जनसमूहों तक होती है, इसलिए इसे मास-मिडिया या जनसंचार माध्यम कहते हैं।

मीडिया के तकनीक में बदलाव-संचार माध्यम आज के समय में हमारी जिंदगी के महत्त्वपूर्ण अंग बन गये हैं। आज के दौर में मोबाइल, टी.. वी., अखबार. आदि के बिना रोजमर्रा के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इन माध्यमों के प्रयोग में आने वाली तकनीक हमेशा बदलती रहती है। बहुत समय पहले डुगडुगी बजाकर, ढोल पीटकर, तुरही बजाकर लोगों तक संदेश पहुँचाया जाता था। पर आज के समय में तकनीकी बदलाव के प्रभाव

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 6 मीडिया और लोकतंत्र

से हम अखबार, रेडियो, टी.वी. के द्वारा खबरों और सूचनाओं को आसानी से लोगों तक पहुँचा सकते हैं। कई बार तो घटना स्थल से सीधा प्रसारण किया जाता है जिससे हम वहाँ के लोगों से हो रही बातों को सुन सकते हैं और वहाँ के दृश्य को देख सकते हैं।
हम संचार माध्यमों की चर्चा दो रूपों में करते हैं-

  1. छपे हुए माध्यम के रूप में और
  2. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में।

छपे हुए माध्यम के अंतर्गत अखबार, पत्र-पत्रिकाओं आदि आते हैं और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के अंतर्गत टी.बी., रेडियो, इंटरनेट आदि आते हैं। तकनीक के इस बदलाव से हमारी जिंदगी और समाज भी प्रभावित हुआ है। टी.वी. के आने से पूरी दुनिया की खबरों को सुनने के साथ ही देख भी सकते हैं। संचार माध्यमों के विकसित होने से दुनिया बिल्कुल सिमट गयी हैं।