Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.1 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.1

प्रश्न 1.
चतुर्भुज ACBD में, AC = AD है और AB कोण A को समद्विभाजित करता है (देखिए आकृति)। दाइए कि ∆ABC ≅ ∆ABD है। BC और BD के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex Q 7.1 1
उत्तर:
∆ABC और ∆ABD में,
AC = AD (दिया है।)
∠CAB = ∠BAD (दिया है।)
और AB = AB (उभयनिष्ठ)
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से.
∆ABC ≅ ∆ABD
⇒ BC = BD. (∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)

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प्रश्न 2.
ABCD एक चतुर्भुज है, जिसमें AD = BC और ∠DAB = ∠CBA है (देखिए आकृति)। सिद्ध कीजिए कि-
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(i) ∆ABD = ∆BAC
(ii) BD = AC
(iii) ∠ABD = ∠BAC
उत्तर:
(i) ∆ABD और ∆BAC में,
∠DAB = ∠CBA (दिया है)
AD = BC (दिया है)
और AB = AB (उभयनिष्ठ)
∴ SAS सर्वासमता गुणधर्म से,
∆ABD ≅ ∆ABAC.

(ii) ∵ ∆ABD ≅ ∆BAC
अतः BD = AC.(∵ सशंगसम त्रिभुजों के संत भाग बाबर होते हैं)

(iii) ∵ ∆ABD ≅ ∵ ∆BAC
अत: ∠ARD = ∠BAC.
(∵ सांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)

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प्रश्न 3.
एक रेखाखंड AB पर AD और BC दो बराबर लम्ब रेखाखण्ड है (देखिए आकृति)। दशाइए कि CD रेखाखंड AB को समद्विभाजित करता है।
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उत्तर:
∆OBC और ∆OAD में.
∠OAD = ∠OBC = 900
BC = DA (दिया है)
∠BOC = ∠AOD (शीर्षाभिमुख कोण)
∴ AAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆OBC ≅ ∆OAD
⇒ AO = BO (∵ सांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।)
⇒ AB का मध्य बिन्दु O है।
अत: रेखाखण्ड CD, AB को समद्विभाजित करता है।

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प्रश्न 4.
l और m दो समांतर रेखाएँ हैं जिन समानर रेखाओं p और q का एक अन्य युग्म प्रतिच्छेच करता है (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि ∆ABC ≅ ∆CDA है।
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उत्तर:
यहाँ AD || BC (दिया है, l और m समान्तर है)
AB || DC (दिया है. P और q समान्तर है)
अत: ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
अब ∆ABC और ∆CDA में,
AB = DC
तथा BC = AD
और AC = AC (उभयनिष्ठ)
∴ SSS सांगसमता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆CDA.

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प्रश्न 5.
रेखा l ∠A को समद्विभाजित करती है B और रेखा l पर स्थित कोई बिन्दु है। BP और BQ. ∠A की भुजाओं पर B से डाले गए लम्ब हैं (देखिए आकृति) दांडा कि
(i) ∆APB ≅ ∆AQB
(ii) BP = BQ, अर्थात् बिन्दु B कोण की भुजाओं से समदूरस्थ है।
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उत्तर:
(i) ∆APB तथा ∆AQR में,
∠PAB = ∠QAB
(रेका l ∠A को समद्विभाजित करती है)
और ∠APB = ∠AQB = 90 (दिया है।)
तथा AB = AB (उभयनिष्ठ)
∴ AAS सांगसमता गुणधर्म से,
∆APB ≅ ∆AQB.

(ii) ∵ ∆APB = ∆AQB में,
BP = BQ. (∆ सांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बरावर होते हैं)
अत: विन्दु B कोण की भुजाओं से समदूरस्थ है।

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प्रश्न 6.
आकृति में, AC = AE, AB = AD और ∠BAD = ∠EAC है। दाइए कि BC = DE है।
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उत्तर:
∆ABC और ∆ADE में,
AB = AD (दिया है।)
AC = AE (दिया है)
∠BAD = ∠EAC (दिया है)
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆ABC ≅ ∆ADE
⇒ BC = DE (∵ सर्वागमस विभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)

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प्रश्न 7.
AB एक रेखाखण्ड है और इसका मध्य-बिन्दु है। D और E रेखाखण्ड AB के एकही और स्थित दो बिन्दु इस प्रकार हैं कि ∠BAD = ∠ABE और ∠EPA = ∠DPB है (देखिए आकृति) दर्शाइए कि-
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(i) ∆DAP = ∆EBP
(ii) AD = BE.
उत्तर:
(i) दिया है. p रेखाखण्ड AB का मध्य विन्दु है।
अत: AP = PB …….. (1)
दिया है, ∠EPA = ∠DPB
दोनों तरफ ∠EPD जोड़ने पर,
∠EPA + ∠EPD = ∠EPD + ∠DPB
∠DPA = ∠EPB …….. (2)
∆DAP और ∆EBP मैं.
∠DAP – ∠EBP (दिया है।)
AP = PB (समी. (1) से)
∠DPA = ∠EPB (समी. (2) से)
∴ AAS सांगसमता गुणधर्म से,
∆DAP ≅ ∆EBP.

(ii) ∵ ∆DAP ≅ ∆EBP,
AD = BE. (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं)

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प्रश्न 8.
एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसमें कोण C समकोण है, M कर्ण AB का मध्य-विन्दु है। C को M से मिलाकर D इस प्रकार बहाया गया है कि DM = CM है। बिन्दुको बिन्दु से मिला दिया जाता है। (देखिए आकृति)। दर्शाइए कि-
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(i) ∆AMC ≅ ∆BMD
(ii) ∠DBC एक समकोण है
(iii) ∆DBC ≅ ∆ACB
(iv) CM = \(\frac{1}{2}\) AB.
उत्तर:
(i) ∆AMC और ∆BMD में,
AM = BM (M रेखा AB का मध्य बिन्दु है)
CM = DM
∠AMC = ∠DMB (शीर्षाभिमुख कोण)
∴ SAS सांगसमता गुणधर्म से,
∆AMC ≅ ∆BMD.

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(ii) यदि ∆AMC ≅ ∆BMD
⇒ BD = AC ……… (1)
और ∠BDM = ∠ACM (∵ सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते है)
अतः BD || CA
ते ∠CBD + ∠BCA = 180 (∵ तिर्यक रेखा के एक ही ओर के आंतरिक कोणों का योग 180% होता है।)
⇒ ∠CBD + 90 = 180 ⇒ ∠DBC = 90′.

(iii) ∆DBC और ∆ACB में,
∠DBC = ∠ACB = 90 (प्रत्येक 90)
BC = BC (उभयनिष्ठ)
और BD = AC समी. (1) से]
∴ SAS सर्वागसमता गुणधर्म से,
∆DBC ≅ ∆ACB.
∆DBC ≅ ∆ACB ⇒ AB = CD
⇒ \(\frac{1}{2}\) AB = \(\frac{1}{2}\)CD
∴ \(\frac{1}{2}\)AB = CM. इति सिद्धम्

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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

Bihar Board Class 11 Geography महासागरीय जल संचलन Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे गति किससे संबंधित है ……………..
(क) ज्वार
(ख) तरंग
(ग) धाराएँ
(घ) ऊपर में से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) धाराएँ

प्रश्न 2.
वृहत् ज्वार आने का क्या कारण है?
(क) सूर्य और चन्द्रमा का पृथ्वी एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल
(ख) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा एक-दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल
(ग) तटरेखा का दंतुरित होना
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) सूर्य और चन्द्रमा द्वारा एक-दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल

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प्रश्न 3.
पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?
(क) अपसौर
(ख) उपसौर
(ग) उपभू
(घ) अपभू
उत्तर:
(ग) उपभू

प्रश्न 4.
पृथ्वी और चन्द्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?
(क) अक्टूबर
(ख) जुलाई
(ग) सितम्बर
(घ) जनवरी
उत्तर:
(घ) जनवरी

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
तरंगें क्या हैं?
उत्तर:
तरंगें वास्तव में ऊर्जा हैं । तरंगों में जल का कण छोटे वृत्ताकार रूप में गति करते हैं। वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती है जिससे तरंगें उत्पन्न होती हैं। वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती हैं।

प्रश्न 2.
महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?
उत्तर:
वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती हैं। बड़ी तरंगें खुले महासागरों में पायी जाती हैं। तरंगें जैसे ही आगे की ओर बढ़ती हैं बड़ी होती जाती हैं तथा वायु से ऊर्जा को अवशोषित करती हैं।

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प्रश्न 3.
ज्वारभाटा क्या है?
उत्तर:
चन्द्रमा एवं सूर्य के आकर्षण के कारण दिन में एक बार या दो बार समुद्र तल का नियतकालिक उठने या गिरने को ज्वारभाटा कहा जाता है।

प्रश्न 4.
ज्वारभाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
चन्द्रमा के गुरुवाकर्षण के कारण तथा कुछ हद तक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण द्वारा ज्वार भाटाओं की उत्पति होती है। दूसरा कारक, अपकेंद्रीय बल है जो कि गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करता है तथा अपकेंद्रीय बल दोनों मिलकर पृथ्वी पर दो महत्वपूर्ण ज्वारभाटाओं को उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी हैं। चन्द्रमा की तरफ वाले पृथ्वी के भाग पर, एक ज्वारभाटा उत्पन्न होता है जब विपरीत भाग पर चन्द्रमा का गुरुत्वीय आकर्षण उसकी दूरी के कारण कम होता है तब अपकेंद्रीय बल दूसरी तरफ ज्वार उत्पन्न करता है।

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प्रश्न 5.
ज्वारभाटा नौकासंचालन से कैसे संबंधित हैं?
उत्तर:
ज्वारभाटा नौकासंचालकों व मछुआरों को उनके कार्य संबंधी योजनाओं में मदद करती . है। नौकासंचालन में ज्वारीय प्रवाह का अत्यधिक महत्त्व है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जलधाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं ? उत्तर पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को ये कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
जलधाराएँ अधिक तापमान वाले क्षेत्रों से कम तापमान वाले क्षेत्रों की ओर तथा इसके विपरीत कम तापमान वाले क्षेत्रों की ओर बहती हैं। जब ये धाराएँ एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर बहती हैं तो ये उन क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं। किसी भी जलराशि के तापमान का प्रभाव उसके ऊपर की वायु पर पड़ता है। इसी कारण विषुवतीय क्षेत्रों से उन्च अक्षांशों वाले ठंडे क्षेत्रों की ओर बहने वाली जलधाराएँ उन क्षेत्रों की वायु के तापमान को बढ़ा देती हैं।

उदाहरणार्थ, गर्म उत्तरी अटलांटिक अपवाह जो उत्तर की ओर यूरोप के पश्चिमी तट की ओर बहती है। यह ब्रिटेन और नार्वे के तट पर शीत ऋतु में भी वैर्फ नहीं जमने देती। जलधाराओं का जलवायु पर प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। जब आप समान अक्षांशों पर स्थित ब्रिटिश द्वीप समूह की शीत ऋतु की तुलना कनाडा के उत्तरी पूर्वी तट की शीत ऋतु से करते हैं। कनाडा का उत्तरी-पूर्वी तट लेब्राडोर की ठंडी धारा के प्रभाव में आ जाता है। इसलिए यह शीत ऋतु में बर्फ से ढका रहता है।

प्रश्न 2.
जलधाराएं कैसे उत्पन्न होती हैं?
उत्तर:
महासागरों में धाराओं की उत्पत्ति कई कारकों के सम्मिलित प्रयास के फलस्वरूप संभव होती है। इनमें से कुछ कारक महासागरीय जल की विभिन्न विशेषताओं से संबंधित हैं कुछ कारक पृथ्वी की परिभ्रमण क्रिया तथा उसके गुरुत्वाकर्षण बल से संबंधित हैं तथा कुछ बाह्य। कारक हैं। इनके अतिरिक्त कुछ ऐसे कारक भी हैं जो धाराओं में परिवर्तन लाते हैं। इन्हें रूप परिवर्तन कारक (modifying factors) कहते हैं।

1. पृथ्वी के परिभ्रमण से संबंधित कारक – पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा में अपनी अक्षरेखा के सहारे परिक्रमा करती है। इस गति के कारण जल स्थल का साथ नहीं दे पाता है, जिस कारण वह पीछे छूट जाता है, परिणामस्वरूप जल में पूर्व से पश्चिम दिशा में गति उत्पन्न हो जाती है। इस प्रकार विषुवत् रेखीय धाराओं की उत्पत्ति होती है कभी-कभी कुछ जल पृथ्वी की परिभ्रमण दिशा की ओर भी अग्रसर हो जाता है। जिस कारण प्रति विषुवत् रेखीय धारा की उत्पत्ति होती है।

2. सागर से संबंधित कारक – सागरीय जल के तापमान, लवणता, घनत्व आदि में स्थानीय परिवर्तन होते हैं जिस कारण धाराओं की उत्पत्ति होती है।

3. बाह्य सागरीय कारक – महासागरीय जल पर वायुमण्डलीय दशाओं का पर्याप्त प्रभाव होता है। इनमें वायुमण्डलीय दबाव तथा उनमें भिन्नता, वायु दिशा, वर्षा वाष्पीकरण आदि धाराओं की उत्पत्ति में सहायक होते हैं।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
एक ग्लोब या मानचित्र लें, जिसमें महासागरीय धाराएँ दर्शाई गई हैं, यह भी बताएँ कि क्यों कुछ जलधाराएँ गर्म हैं व अन्य ठंडी। इसके साथ ही यह भी बताएं कि निश्चित स्थानों पर यह क्यों विक्षेपित होती है। कारणों का विवेचन करें।
उत्तर:
महासागरीय धाराओं को तापमान के आधार पर गर्म व ठंडी जलधाराओं में वर्गीकृत किया जाता है।
1. ठण्डी जलधाराएँ ठण्डे जल को गर्म जल क्षेत्रों में लाती हैं। ये महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर बहती हैं (ऐसी दोनों गोलाद्धों में निम्न व मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में होता है) और उत्तरी गोलार्द्ध के उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में यह जलधाराएँ महाद्वीपों के पूर्वी तट पर बहती हैं।

2. गर्म जलधाराएँ गर्म जल को ठण्डे जल क्षेत्रों में पहुँचाती हैं और प्रायः महाद्वीपों के पूर्वी तटों पर बहती हैं (दोनों गोलाद्धों के निम्न व मध्य अक्षांशीय क्षेत्रों में)। उत्तरी गोलार्द्ध में ये जलधाराएँ महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर (उच्च अक्षांशीय) क्षेत्रों में बहती हैं।

पानी के घनत्व में अंतर महासागरीय जलधाराओं की ऊर्ध्वाधर गति को प्रभावित करता है। ठंडा जल गर्म जल की अपेक्षा अधिक सघन होता है। सघन जल नीचे बैठता है जबकि हल्के जल की प्रवृत्ति ऊपर उठने की होती है। ठंडे जल वाली महासागरीय धाराएँ तब उत्पन्न होती हैं जब ध्रुवों के पास वाले जल नीचे एवं धीरे-धीरे विषुवत् रेखा की ओर गति करते हैं। गर्म जलधाराएँ विषुवत् रेखा से सतह के साथ होते हुए ध्रुवों की ओर जाती है और ठंडे जल का स्थान लेती हैं।

प्रमुख महासागरीय धाराएँ प्रचलित पवनों और कोरियोलिस प्रभाव से अत्यधिक प्रभावित होती हैं। निम्न अक्षांशों से बहने वाली गर्म जलधाराएँ कोरिलोसिस प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में अपने बाईं तरफ और दक्षिणी गोलार्द्ध में अपने दाईं तरफ मुड़ जाती है (देखें चित्र)।
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प्रश्न 2.
किसी तालाब के पास जाएँ तथा तरंगों की गति का अवलोकन करें एक पत्थर फेंकें एवं देखें की तरंगें कैसे उत्पन्न होती हैं। एक तरंग का चित्र बनाएँ एवं इसकी लम्बाई, दूरी तथा आयाम को मापें तथा अपनी कापी में इसे लिखें।
उत्तर:
इस परियोजना कार्य को स्वयं करें।

Bihar Board Class 11 महासागरीय जल संचलन Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
‘उद्घावन’ क्या है?
उत्तर:
अत्यधिक विक्षुब्ध जल की परत के रूप में जब तरंग स्थल की ओर संचलित होती है, तब इसे उद्धावन कहते हैं।

प्रश्न 2.
जल में सूर्य का प्रकाश कितनी गहराई तक प्रवेश कर सकता है?
उत्तर:
जल में सूर्य का प्रकाश 900 मीटर की गहराई तक प्रवेश कर सकता है, पर केवल 100 मीटर की गहराई तक इतना प्रकाश रहता है, जिसका उपयोग पेड़-पौधे कर सकें।

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प्रश्न 3.
सागरीय जल के तापमान का वार्षिक अंतर किन घटकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:

  1. विभिन्न गहराइयों में तापमान विभिन्नता
  2. ताप चालन का प्रभाष
  3. संवहनी धाराओं का प्रभाव
  4. जलराशियों का पार्श्व विस्थापन

प्रश्न 4.
महासागरीय जल के कौन-से गुण समुद्री जन्तुओं और वनस्पतियों को प्रभाटि करते हैं?
उत्तर:

  1. जल का तापमान
  2. जल का घनत्व
  3. जल की लवणत
  4. जल र संचरण

प्रश्न 5.
उन कारकों के नाम बताइए, जो महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति को निर्याः करते हैं।
उत्तर:
समुद्री धाराओं की उत्पत्ति को नियंत्रित करने वाली महत्त्वपूर्ण क्रियाविधि हैं –

  1. समुद्री धरातल पर पवनों का कर्षण तथा
  2. जल घनत्व में अंतर से उत्पन्न असा

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प्रश्न 6.
महासागरीय धाराएं किसे कहते हैं?
उत्तर:
जल की एक राशि का एक निश्चित दिशा में लम्बी दूरी तक सामान्य संच • महासागरीय धारा कहलाता है। ये चौड़ी प्रवाह प्रणाली से लेकर छोटी प्रवाह प्रणाली तक हं

प्रश्न 7.
थर्मोक्लाइन धाराएं किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जल के घनत्व में अंतर के कारण जो धाराएँ उत्पन्न होती हैं उन्हें थर्माक्लाइन धार कहते हैं।

प्रश्न 8.
गल्फ स्ट्रीम का क्या अर्थ है?
उत्तर:
पलोरिडा अंतरीप से हटेरास अंतरीए की ओर बहने वाली धारा फ्लोरिडा ध कहलाती है। हटेरास अंतरीप के पश्चात् इसे गल्फ स्ट्रीम कहते हैं।

प्रश्न 9.
तरंग-आवर्त काल किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी निश्चित बिन्दु से गुजरने वाले दो क्रमिक तरंगों के बीच के समय को तरंग-आवर्त काल कहते हैं।

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प्रश्न 10.
‘भग्नोमि’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
एक क्रांतिक बिन्दु पर आकर तरंग रूप खंडित होकर विक्षुब्य जल समूह में बदल जता है, जिसे भग्नोर्मि कहते हैं।

प्रश्न 11.
तरंग का वेग कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
तरंग वेग निम्न विधि से निश्चित किया जा सकता है –
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लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भग्ना॑मि तथा उद्घावन किस प्रकार बनती है?
उत्तर:
जब कोई तीव्र ढाल वाली तरंग तट की ओर बढ़ती है और इसे तट के उथले जल से गुजरना पड़ता है, तो इसके शृंग की ऊँचाई शीघ्रता से बढ़ती है और तरंग का अग्रढाल अत्यधिक तीव्र हो जाता है। एक क्रांतिक बिन्दु पर आकार तरंग रूप में खंडित होकर विक्षुब्ध जल समूह में बदल जाता है, जिसे भग्नोर्मि कहते हैं। भानोमि के पश्चात् तरंग अत्यधिक विक्षुब्ध जल की परत के रूप में वह स्थल की ओर संचलित होती है, जिसे उद्धावन कहते हैं।

प्रश्न 2.
स्वेल और सर्फ में क्या अंतर है?
उत्तर:
स्वेल –

  • खुले सागर में नियमित तरंगों को स्वेल कहा जाता है।
  • तट के समीप इन तरंगों की ऊँचाई बढ़ जाती है।

सर्फ –

  • तटीय क्षेत्रों में टूटती हुई तरंगों को सर्फ कहते हैं।
  • तट के समीप ये तरंगें शोर मचाती हुई तट पर प्रहार करती हैं।

प्रश्न 3.
ज्वारीय भित्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब ज्वारीय तरंगें किसी खाड़ी अथवा नदी के मुहाने में प्रवेश करती हैं तो ज्वारीय भंग नदी के ऊपरी भाग की ओर तेजी से बढ़ती हुई एक खड़ी दीवार की भाँति दिखाई देती हैं, जिसे ज्वारीय भित्ति कहते हैं। जब ज्वार उठता है तो पानी की एक धारा नदी घाटी में प्रवेश करती है। यह लहर नदी के जल को विपरीत दिशा में बहाने का प्रयास करती है। ज्वारीय लहर की ऊँचाई बढ़ जाती है तथा पानी का बहाव उलट जाता है। हुगली नदी में ज्वारीय भित्ति के कारण छोटी नावों को बहुत हानि पहुँचती है। ज्वारीय भित्ति मानव की अनेक प्रकार से सहायता करती है।

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प्रश्न 4.
पवन निर्मित तरंगों के विभिन्न प्रकार बताएं।
उत्तर:
तरंगें पवन के संपर्क से सागरीय जल के आगे-पीछे, ऊपर-नीचे की गति से उत्पन्न होती हैं। पवन द्वारा तरंगें तीन प्रकार की होती हैं –

  • सी (sea)
  • स्वेल (swell)
  • सर्फ (surf)

विभिन्न दिशाओं तथा गतियों से उत्पन्न तरंगों को ‘सी’ कहते हैं। जब ये तरंगें नियमित रूप से एक निश्चित गति तथा दिशा से आगे बढ़ती हैं तो इसे स्वेल कहते हैं। समुद्र तट पर शोर करती है, टूटती हुई तरंगों को सर्फ कहते हैं। जब ये तरंगें समुद्र तट पर वेग से दौड़ती हैं, तो इन्हें स्वाश (swash) कहते हैं । समुद्र की ओर वापस लौटती हुई. तरंगों को बैक वाश कहते हैं।

प्रश्न 5.
ज्वारभाटा किसे कहते हैं? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
ज्वारभाटा समुद्र की एक गति है। समुद्र जल नियमित रूप से प्रतिदिन दो बार उठता है तथा दो बार नीचे उतरता है। समुद्र जल के इस नियमित उतार तथा चढ़ाव को ज्वारभाटा कहते हैं। पानी के ऊपर उठने की क्रिया को ज्वार तथा पानी के नीचे उतरने की क्रिया को भाटा कहते हैं।

  • प्रत्येक स्थान पर ज्वार तथा भाटा की ऊँचाई भिन्न-भिन्न होती है।
  • प्रत्येक स्थान पर ज्वार या भाटा की अवधि भिन्न-भिन्न होती है।
  • समुद्र जल लगभग 6 घंटे और 13 मिनट तक ऊपर चढ़ता है और इतनी देर तक नीचे उतरता है।
  • ज्वारभाटा एक स्थान पर नित्य ही एक समय पर नहीं आता।

प्रश्न 6.
समुद्री जल की विसंगति तथा समविसंगतीय रेखा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
महासागर महान ऊष्मा भंडार का काम करते हैं। किसी स्थान के औसत तापमान तथा उस स्थान के अक्षांश के औसत तापमान के बीच के अंतर को ऊष्मीय-विसंगति कहते हैं। गर्मजल धाराओं के कारण धनात्मक तथा शीतल जलधाराओं के कारण ऋणात्मक विसंगति उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 7.
महासागरीय जलधाराओं की मुख्य विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:
महासागरीय जलधाराओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. जलधाराएँ निरंतर एक निश्चित दिशा में प्रवाह करती हैं।
  2. निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर बहने वाली धाराओं को गर्म जलधाराएँ कहते हैं।
  3. उच्च अक्षांशों से निम्न अक्षांशों की ओर बहने वाली धाराओं को ठंडी जलधाराएँ कहते हैं।
  4. उत्तरी गोलार्द्ध की जलधाराएं अपनी दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध की जल-धाराएँ अपने बाई ओर मुड़ जाती हैं।
  5. निम्न अक्षांशों में पूर्वी तटों पर गर्म जलधाराएँ तथा पश्चिमी तटों पर ठंडी जल धाराएँ बहती हैं।
  6. उच्च अक्षांशों में पश्चिमी तटों पर गर्म जलधाराएँ और पूर्वी तटों पर ठंडी जल धाराएँ बहती हैं।

प्रश्न 8.
साउथैम्पटन (इंग्लैंड) के तट पर प्रतिदिन चार बार ज्वार क्यों आते हैं?
उत्तर:
सामान्यतः दिन में दो बार ज्वार आता है। परंतु साउथैम्पटन (इंग्लैंड के दक्षिणी तट) पर ज्वार प्रतिदिन चार बार आते हैं। यह प्रदेश इंगलिश चैनल द्वारा उत्तरी सागर तथा अन्ध महासागर को जोड़ता है। दो बार ज्वार अन्ध महासागर की ओर से आते हैं तथा दो बार उत्तरी सागर की ओर से आते हैं।

प्रश्न 9.
हुगली नदी में नौका संचालन के लिए ज्वार-भाटा का महत्त्व बताएँ।
उत्तर:
ऊँचे ज्वार आने पर नदियों के मुहाने पर जल अधिक गहरा हो जाता है। इस प्रकार बड़े-बड़े जलयान नदी में कई मील भीतर तक प्रवेश कर जाते हैं। कोलकाता हुगली नदी के किनारे समुद्र तट से 120 किमी दूर स्थित है, परंतु हुगली नदी में आने-जाने वाले ज्वार के कारण ही जलयान कोलकाता तक पहुँच पाते हैं। ज्वारीय तरंगें नदियों के जल स्तर को ऊपर उठा देती हैं, जिससे जलयान आंतरिक पतनों तक पहुंच जाते हैं।

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प्रश्न 10.
समुद्री तरंगों की उत्पत्ति किस प्रकार होती है?
उत्तर:
तरंगें जल में दोलनी-गतियाँ हैं। समुद्री तरंगों की उत्पत्ति की क्रियाविधि पर यह विश्वास किया जाता है कि ये तरंगें जलीय घरातल पर पवनों के घर्षण के कारण बनती हैं। तरंगों की ऊँचाई तीन कारकों पर निर्भर करती हैं –

पवन वेग
किसी दिशा विशेष से पवन के बहने की अवधि तथा
जलीय घरातल का विस्तार क्षेत्र, जिस पर पवन चलती है।

जहाँ जल गहरा होता है, वहाँ पवन का वेग अधिक होता है तथा उसके बहने की अवधि भी लम्बी होती है। ऐसी परिस्थिति में उच्च तरंग का निर्माण होता है। पवन वेग 160 किमी प्रति घंटा हो और यह पवन 1,600 किमी विशाल समुद्री क्षेत्र में लगातार 50 घंटे तक चले तो 15 मीटर ऊंची तरंगों की उत्पत्ति हो सकती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
ज्वार विलम्ब से क्यों आते हैं? किसी स्थान पर नित्य चारभाटा एक ही समय पर नहीं आता, क्यों?
उत्तर:
चन्द्रमा पृथ्वी के इर्द-गिर्द 29 दिन में पूरा चक्कर लगाता है। चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर का 29वाँ भाग हर रोज आगे बढ़ जाता है। इसलिए किसी स्थान को चन्द्रमा के सामने दोबारा आने में 24 घंटे से कुछ अधिक ही समय लगता है।
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दूसरे शब्दों में प्रत्येक 24 घंटों के पश्चात् चन्द्रमा अपनी पहली स्थिति से लगभग 13° आगे चला जाता है, इसलिए किसी स्थान को चन्द्रमा के ठीक सामने आने में 12.5×4-50 मिनट अधिक लग जाते हैं।
क्योंकि दिन में दो बार ज्वार आता है इसलिए प्रतिदिन ज्वार 25 मिनट देरी के अंतर से अनुभव किया जाता है। पूरे 12 घंटे के बाद पानी का चढ़ाव देखने में नहीं आता; परंतु ज्वार 12 घंटे 25 मिनट बाद आता है। 6 घंटे 13 मिनट तक जल चढ़ाव पर रहता है और पश्चात् 6 घंटे 13 मिनट तक जल उतरता रहता है। ज्वार के उतार-चढ़ाव का यह क्रम बराबर चलता रहता है।

प्रश्न 2.
प्रशांत महासागर की धाराओं का वर्णन करें। इस महासागर के आस-पास के प्रदेशों पर इन धाराओं के प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
प्रशांत महासागर की धाराएँ-प्रशांत महासागर में धाराओं का क्रम अंघमहासागर के. समान ही है। अधिक विस्तार तथा तट रेखा के कारण कुछ भिन्नता है। मुख्य धाराएँ निम्नलिखित हैं –
1. उत्तरी भूमध्य रेखीय धारा – यह गर्म पानी की धारा है जो मध्य अमेरिका के तट से चीन सागर तक बहती है। यह धारा व्यापारिक पवनों के प्रभाव से पूर्वी-पश्चिमी दिशा में भूमध्य रेखा के समानान्तर बहती है।

2. क्यूरोसिवो धारा – चीन सागर में फिलीपाइन द्वीप समूह के निकट पानी एकत्र होने से इस गर्म धारा का जन्म होता है। क्यूरोसिवो धारा चीन के तट के सहारे जापान तक पहुँच जाती है। दक्षिणी द्वीप से टकराकर इसकी दो शाखाएँ हो जाती हैं। बाहरी शाखा पूर्वी तट पर खुले सागर में बहती है जिसे क्यूरोसिवो धारा कहते है। भीतरी शाखा पूर्वी तट पर खुले सागर में पश्चिमी तट पर बहती है जिसे सुशीमा धारा कहते हैं। इस धारा का रंग गहरा नीला होता है। जापानी लोग इसे काली धारा भी कहते हैं।

3. उत्तरी प्रशांत डिफ्ट – क्यूरोसिवो धारा जल 40° उत्तर अक्षांश को पार करके पूर्व की ओर मुड़ जाता है। इसे उत्तरी प्रशांत ड्रिफ्ट कहते हैं।

4. कैलोफोर्निया की धारा – यह एक ठंडी धारा है जो कैलीफोर्निया के तट के साथ-साथ भूमध्य रेखा की ओर बहती है। इसके प्रभाव से इस तट की जलवायु कठोर व शुष्क हो जाती है।

5. क्यूराइल की धारा – यह एक ठंडी जल धारा है जो बैरिंग जलडमरूमध्य से साइबेरिया के पूर्वी तट के सहारे जापान के पूर्वी तट तक पहुंच जाती है, इसे ओयाशियो धारा भी कहते हैं।

6. दक्षिणी भूमध्य रेखीय धारा – यह एक शक्तिशाली गर्म धारा है, जो भूमध्य रेखा, के दक्षिण में बहती है। यह धारा व्यापारिक पवनों के प्रभाव से दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट से पश्चिम की ओर आस्ट्रेलिया के न्यूगिनी तक जाती है।

7. विपरीत भूमध्य रेखीय धारा – यह एक गर्म जलधारा है, जो भूमध्य रेखा के साथ-साथ शांत हवा की पेटी में पश्चिम से पूर्व दिशा में बहती है। यह उत्तरी तथा दक्षिणी भूमध्य रेखीय धाराओं की विपरीत दिशा में बहती है।

8. पूर्वी आस्ट्रेलिया धारा – फिजी द्वीप के निकट से आस्ट्रेलिया के पूर्वी तट तक बहने वाली इस गर्म धारा को न्यू साउथ वेल्थ धारा भी कहते हैं। यह धारा न्यूजीलैंड द्वीप को घेर लेती है।

9. अंटार्कटिक ड्रिफ्ट-यह अत्यंत ठंडे जल की धारा है जो अंटार्कटिक महाद्वीप के इर्द-गिर्द बहती है। दक्षिणी प्रशांत महासागर में पश्चिमी पवनों के प्रभाव से यह धारा पूर्वी । आस्ट्रेलिया से चिल्ली देश के तट तक बहती है।
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10. पेरू की धारा-यह ठंडी जलधारा को लेकर पेरू तक बहती है। यह धारा ऐटाकामा मरुस्थल की जलवायु को कठोर तथा शुष्क बना देती है।

प्रश्न 3.
दीर्घ ज्वार तथा लघु ज्वार में अंतर बताओ। ज्वार प्रतिदिन 50 मिनट विलम्ब से क्यों आते हैं?
उत्तर:
दीर्घ ज्वार – सबसे ऊँचे ज्वार को दीर्घ ज्वार कहते हैं। यह स्थिति अमावस तथा पूर्णमासी के दिन होती है।

कारण – इस स्थिति में सूर्य, चन्द्रमा तथा पृथ्वी एक सीध में होते हैं। सूर्य तथा चन्द्रमा की संयुक्त आकर्षण शक्ति बढ़ जाने से ज्वार शक्ति बढ़ जाती है। सूर्य तथा चन्द्रमा के कारण ज्वार उत्पन्न हो जाते हैं। इन दिनों ज्वार अधिकतम ऊँचा तथा भाटा कम से कम नीचा होता है। दीर्घ ज्वार प्रायः साधारण ज्वार की अपेक्षा 20% अधिक ऊँचा होता है।
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लघु ज्वार – अमावस के सात दिन पश्चात् या पूर्णमासी के सात दिन पश्चात् ज्वार की ऊँचाई अन्य दिनों की अपेक्षा नीची रह जाती है। इसे लघु ज्वार कहते हैं। इस स्थिति को शुक्ल और कृष्ण पक्ष की अष्टमी कहते हैं जब आधा चाँद होता है।
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कारण – इस स्थिति में सूर्य तथा चन्द्रमा पृथी से समकोण स्थिति पर होते हैं। सूर्य तथा चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति विपरीत दिशाओं में कार्य करती है। सूर्य व चन्द्रमा के ज्वार तथा भाटा एक-दूसरे को घटाते हैं। इन दिनों उच्च ज्वार कम ऊँचा तथा भाटा कम नीचा होता है। लघु ज्वार प्रायः साधारण ज्वार की अपेक्षा 20% कम ऊँचा होता है।

प्रश्न 4.
संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए –

  • हिन्द महासागर की धाराएँ
  • ज्वारभाटा की उत्पत्ति

उत्तर:
1. हिन्द महासागर की धाराएँ – इन धाराओं का परिसंचरण प्रशांत तथा अटलांटिक महासागर की धाराओं के परिसंचरण से भिन्न है। हिन्द महासागर के उत्तरी भाग में धाराओं का परिसंचरण प्रतिरूप मानसून के ऋतुनिष्ठ परिवर्तन का अनुसरण करता हुआ अपनी दिशा बदल लेता है। यहाँ शीत ऋतु से ग्रीष्म ऋतु में धाराओं का उत्क्रमण दिखाई देता है। हिन्द महासागर के दक्षिणी भाग में धाराओं का परिसंचरण प्रतिरूप अन्य दक्षिणी महासागरों के समान ही है, जो दिशा के दृष्टिकोण से घड़ी की सुइयों के प्रतिकूल है।

महासागर के उत्तरी भाग में जल का परिसंचरण गर्मियों में घड़ी की सुइयों के अनुकूल होता है। दक्षिणी विषुवतीय धारा पश्चिम की ओर संचलन करती है। अफ्रीका के तट के पास यह दो भागों में बँट जाती है। इसका बड़ा भाग दक्षिण की ओर मोजांबिक तथा आगुलहास धाराओं के रूप में पूर्व की ओर मुड़कर पश्चिमी पवन अपवाह के रूप में बहता है। आस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट के साथ यह आस्ट्रेलियन धारा के रूप में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है और फिर दक्षिणी विषुवत् धारा से मिल जाती है। सर्दियों में उत्तरी-पूर्वी मानसून धारा विषुवत् रेखा के दक्षिण विरुद्ध धारा के रूप में पूर्व की ओर बहती है।
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2. ज्वारभाटा की उत्पत्ति – ज्वारभाटा सागरों तथा महासागरों के जल स्तर में आवर्ती उतार-चढ़ाव है, जो सूर्य और चन्द्रमा के विभेदी आकर्षण के फलस्वरूप उत्पन्न होता है। दिन में दो बार, लगभग प्रति 12 घंटे 26 मिनट के बाद समुद्र तल ऊपर उठता है तथा दो बार नीचे गिरता है। समुद्र तल के ऊपर उठने को ज्वार तथा नीचे गिरने को भाटा कहते हैं।

ज्वारभाटा की उत्पत्ति का मूल कारण चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति है। सर्वप्रथम न्यूटन ने यह बताया कि सूर्य, चन्द्रमा तथा ज्वारभाटा का आपस में कुछ संबंध है। चन्द्रमा अपने आकर्षण बल के कारण पृथ्वी के जल को आकर्षित करता है। स्थल भाग कठोर होता है, इस कारण खिंच नहीं पाता परंतु जल भाग तरल होने के कारण ऊपर उठ जाता है। यह जल चन्द्रमा की ओर उठता है। वहाँ पर आसपास का जल सिमटकर उठ जाता है जिसे उच्च ज्वार कहते हैं। जिस स्थान पर जलराशि कम रह जाती है वहाँ जल अपने तल से नीचे गिर जाता है, उसे लघु ज्वार कहते हैं।

पृथ्वी की दैनिक गति के कारण प्रत्येक स्थान पर दिन-रात में दो बार ज्वार आता है। एक ही समय में पृथ्वी तल पर दो बार ज्वार उत्पन्न होते हैं। जब ठीक चन्द्रमा के सामने तथा दूसरा उससे विपरीत वाले स्थान पर जल ऊपर उठता है, इसे सीधा ज्वार कहते हैं। विपरीत भाग में अपकेंद्रीय बल के कारण जल ऊपर उठता है तथा
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उच्च ज्वार उत्पन्न होता है इसे अप्रत्यक्ष ज्वार कहते हैं। इस प्रकार पृथ्वी के एक ओर ज्वार आकर्षण शक्ति की अधिकता के कारण और दूसरी ओर अपकेन्द्रीय शक्ति की अधिकता के कारण उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 5.
अंतर स्पष्ट कीजिए –

  1. ठण्डी एवं गर्म महासागरीय धाराएँ
  2. उच्च ज्वार एवं लघु ज्वार
  3. उद्घावन एवं पश्चधावन

उत्तर:
1. ठण्डी एवं गर्म महासागरीय धाराएँ में अंतर –
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2. उच्च ज्वार एवं लघु ज्वार
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3. उद्घावन एवं पश्चधावन
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प्रश्न 6.
महासागरीय धाराओं का वेग कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
तरंग का ऊपरी भाग शीर्ष तथा निम्न भाग गर्त कहलाता है। दो क्रमिक शृंगों अथवा गर्तों के मध्य की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। किसी निश्चित बिन्दु से गुजरने वाले दो क्रमिक तरंगों के बीच के समय को तरंग आवर्त काल कहते हैं। संचलन करती हुई तरंग का वेग निम्न विधि से निश्चित किया जा सकता है
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तरंग आवर्त काल 160 किमी प्रति घंटा हो तो यह पवन 1,600 किमी विशाल समुद्री क्षेत्र में लगातार 50 घंटे तक चले तो 15 मीटर ऊँची तरंगों की उत्पत्ति हो सकती है। शक्तिशाली तूफानों के समय तरंगों की ऊँचाई बढ़ जाती है। 12 से 15 मीटर तक ऊँची तरंगों का वेग 30 से 100 मीटर प्रति घंटा होता है तथा इनकी तरंगदैर्ध्य 60 से 120 मीटर के मध्य होती है।

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प्रश्न 7.
यदि महासागरीय धाराएं न होती, तो विश्व का क्या हुआ होता? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
महासागरीय धाराएँ मानव जीवन पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं। धाराओं का यह प्रभाव कई प्रकार से होता है –

  1. जिन तटों पर गर्म या ठंडी धाराएं चलती हैं वहाँ की जलवायु क्रमशः गर्म या ठंडी हो जाती है।
  2. गर्म धारा के प्रभाव से तटीय प्रदेशों का तापक्रम ऊँचा हो जाता है तथा जलवायु सम हो जाती है। ठंडी धारा के कारण शीतकाल में
  3. तापक्रम बहुत नीचा हो जाता है और वायु विषम व कठोर हो जाती है।
  4. गर्म धाराओं के समीप के प्रदेशों में अधिक वर्षा होती है, परंतु ठंडी धाराओं के समीप के प्रदेशों में कम वर्षा होती है।
  5. गर्म व ठंडी धाराओं के मिलने पर धुंध व कोहरा उत्पन्न होता है।
  6. गर्म व ठंडी धाराओं के मिलने से गर्म वायु बड़े वेग से ऊपर उठती है तथा तीव्र तूफानी चक्रवात को जन्म देती है।
  7. गर्म धाराओं के प्रभाव से सर्दियों में बर्फ नहीं जमती तो बन्दरगाह व्यापार के लिए वर्ष भर खुले रहते हैं, परंतु ठंडी धारा के समीप का
  8. तट महीनों बर्फ से जमा रहता है। ठंडी धाराएँ व्यापार में बाधक हो जाती हैं।
  9. धाराएँ जल मार्गों का निर्धारण करती हैं। ठंडे सागरों के साथ बहकर आने वाली हिमशिलाएँ जहाजों को बहुत हानि पहुंचाती हैं। इनसे
  10. मार्ग बचाकर समुद्री मार्ग निर्धारित किए जाते हैं।
  11. प्राचीन काल में धाराओं का जहाजों की गति पर प्रभाव पड़ता था। धाराओं की अनुकूल दिशा में चलने से जहाज की गति बढ़ जाती थी
  12. परंतु विपरीत दिशा में चलने से उनकी गति मंद पड़ जाती थी।
  13. धाराओं के कारण समुद्र जल स्वच्छ, शुद्ध तथा गतिशील रहता है।
  14. धाराएँ समुद्री जीवन का प्राण है। ये अपने साथ बहुत-सी गली-सड़ी वस्तुएँ बहाकर, लाती हैं। ये पदार्थ मछलियों के भोजन का आधार हैं।

ऊपर लिखित बातों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि धाराएँ न होती तो प्रकृति ही अस्त-व्यस्त हो जाती । समुद्री प्राणियों का जीवन असंभव हो जाता है। जलवायु व्यापार, तापक्रम तथा मानव जीवन पर विपरीत प्रभाव होता और सारे विश्व का अस्तित्व ही बदल जाता। इसलिए धाराएँ महत्त्वपूर्ण हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 5 समानता के लिए महिला संघर्ष

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 5 समानता के लिए महिला संघर्ष Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 5 समानता के लिए महिला संघर्ष

Bihar Board Class 7 Social Science समानता के लिए महिला संघर्ष Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
आपके ख्याल से वे काम जिन्हें आमतौर पर परुष करते हैं, क्या महिलाएँ नहीं कर सकती है? और जो काम आमतौर पर महिलाएँ करती हैं, क्या पुरुष नहीं कर सकते ? चर्चा करें । ऐसा बंटवारा क्यों .. है। इसका उनके जीवन पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
नहीं, ऐसा नहीं है की जो काम आमतौर पर पुरुष करते हैं, वे काम महिलाएं नहीं कर सकती है। आज के समय में पुरुष जो काम करते हैं वे काम महिलाएँ भी करती है। पहले हमारे समाज के लोगों की मानसिकता थी कि महिलाएं घर से बाहर जाकर काम नहीं कर सकती, पर आज ऐसा नहीं है आज महिलाएँ भी घर से बाहर जाकर काम करती हैं और पैसे कमाती हैं।

आज वे हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं। पहले लोगों का ऐसा मानना था कि महिलाएँ तकनीकी कार्य नहीं कर सकती हैं चो सेना में भर्ती नहीं हो सकती हैं पर आज ऐसा नहीं हैं महिलाएं भी आज तकनीकी कार्य करती हैं, वे भी कम्प्यूटर इंजीनियर वैज्ञानिक,

मैकेनिकल इंजिनियर बनती है और सेना में भी भर्ती होकर ऊँचे पदों पर कार्य करती हैं। महिला, आज राजनीति में जाकर देश की बागडोर भी संभाल रही है। इन सबके साथ ही महिलाएं अपने घर और परिवार को भी संभालती है और लोगों की यह भी सोच गलत है कि जो काम महिलाओं द्वारा किए जाते हैं वो पुरुष नहीं कर सकते । आज पुरुष घरों को संभालते हैं।

महिलाओं की तरह पुरुष भी आज खान बना लेते हैं। हमारे देश के बड़े-बड़े होटल और रेस्टॉरेंट पुरुषों के द्वारा ही चलाए जाते हैं।.एक सेफ के रूप में पुरुषों को समाज में बहुत खास जगह मिली। बहुत से लडके या पुरुष पढ़ाई या काम के दौरान अपने घर से बाहर रहते हैं और अपने केयरल करते हैं और अपने खाना भी बनाते

हैं अपने सारे समान को संभालकर रखते हैं और साथ ही अपने काम पर भी . पूरा ध्यान देता है। ये बँटवारा हमारे समाज द्वारा किया गया है, भगवान ने कामों का बँटवारा नहीं किया है। हमने खुद यह तय किया है कि कौन से काम लड़के करेंगे,

और कौन से काम लड़की करेंगी। इसका प्रभाव उनके जीवन पर यह पड़ता है कि अगर लड़कियों को पढ़ाई नहीं करने दिया जाए तो उनमें योग्यता होने के बावजूद भी वे कुछ नहीं कर पाएंगी और अगर लड़कों को यह कहा जाए कि वे खाना नहीं बना सकते तो वे इच्छा होते हुए भी एक सेफ का जॉव कर सकते।

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प्रश्न 2.
गुड़िया और पूजा क्या चाहती थीं और इसे पूरा करने के लिए क्या. किया?
उत्तर-
गुड़िया और पूजा पढ़ाई करना चाहती थी, पर उनके माता-पिता उन्हें पढ़ाना नहीं चाहते थे। इसके लिए एक दिन गुड़िया ने अपने माता-पिता का घर में बंद कर 13 किमी० पेदल चलकर उत्प्रेरण केन्द्र नोखा रोहतास चली गयी और अपना नामांकन करा लिया। इस बारे उसके माता-पिता को दो दिन बाद पता चला और वे उसे लाने उत्प्रेरण केन्द्र भी गए पर गुड़िया वापस नहीं आना चाहती थी और आखिरकार गुड़िया के पिता उसके जिद के आगे झुक गए और पढ़ने की अनुमति दे दी।

इसी तरह पूजा भी पढ़ाई करना चाहती थी। अपने उम्र के बच्चों को विद्यालय जाते देख उसे भी विद्यालय जाने की इच्छा होती थी और इसके लिए वह अपने घर का सारा काम निपटाकर चोरी-छीपे एक वर्ष तक लगातार मध्य विद्यालय जाती रही और अंत में उसने पुलिस में कार्यरत अपने पिताजी को मना लिया।

प्रश्न 3.
अपने आस-पास से कुछ महिलाओं से बात कर के अनभव लिखो। उन्होंने स्कूल की पढ़ाई कहाँ तक की, किन समस्याओं का सामना करना पड़ा और किस तरह का प्रोत्साहन मिला आदि।
उत्तर-
मेरे आस-पास में कुछ ऐसी महिलाएँ हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई बहुत ही मुश्किल से पूरी की। उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए घर से काफी दूर जाना पड़ता था। स्कूल जाने से पहले वे घर का सारा काम करती थी उसके बाद स्कूल जाती थी और स्कूल से आने के बाद भी घर का काम करने के बाद ही अपनी पढ़ाई कर पाती थी। कुछ तो अपनी स्कूल की फीस

देने के लिए सिलाई का काम भी करती थीं। स्कूल घर से दूर होने के कारण , उन्हें पैदल ही स्कूल जाना पड़ता था। परीक्षाओं के समय भी उन्हें घर के कामों से छुट्टी नहीं दी जाती थी, इसलिए वे दिनभर काम करने के बाद रात में जागकर अपनी पढ़ाई करती थी।

अपने स्कूल के शिक्षक से, अपने सहपाठियों से उन्हें बहुत प्रोत्साहन मिलता था। उनके शिक्षक और सहपाठी पढ़ाई में उनकी बहुत मदद करते थे।

कभी-कभी तो उनके स्कूल की फीस उनकी मित्रों के द्वारा भर दिया जाता था। उनके मित्र कॉपी-किताबों से भी उनकी मदद करते थे और उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे।

प्रश्न 4.
शाहुबनाथ को बस चालक बनने के लिए कठिनाइयाँ क्यों आयीं ? शिक्षक के साथ चर्चा करें।
उत्तर-
शाहुबनाथ एक महिला थी पर उनका शौख था औरों से कुछ अलग काम करने की। इसलिए उन्हें बस चालक बनना पसंद आया। पर महिला होने का कारण बस चालक बनने में उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके लिए बस चलाना जितना मुश्किल नहीं था उससे भी ज्यादा मुश्किल था अधिकारियों को यह विश्वास दिलाना की वे भी एक बस चालक बन सकती हैं। पर जब शाहुबनाथ बस की ड्राईवर की सीट पर बैठती तो उन्हें देखते ही यात्री बस से नीचे उतर जाते। कुछ यात्री तो टिकट लेने के बावजूद भी उस बस में यात्रा नहीं करते थे, जिसे शाहुबनाथ द्वारा चलाना होता था।

एक बार तो उनके चलाए बस में सिर्फ एक ही यात्री ने सफर किया था। एक दिन शाहुबनाथ को बहुत रोना भी आया था। पर उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और अपने काम में पूरे लगन के साथ लगी रही। फिर धीरे-धीरे यात्रियों ने उनकी ड्राइविंग की प्रशंसा की और फिर वे पूरे आत्मविश्वास के साथ यात्रियों से भरी बसें भी चलाने लगीं।

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प्रश्न 5.
पृष्ठ 48 के नीचे बायीं ओर के चित्र में आपको क्या दिख रहा है? क्या आपके इलाके में ऐसी समस्या है?
उत्तर-
इस चित्र में औरतें एक लाईन बनाकर बैठी हई है और ये शराब विरोधी आंदोलन कर रही है। इस आंदोलन में औरतें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं और शराब की भट्ठियों पर धरना देकर उसे बंद करवाते हैं। ये लोग शराब की दुकानों को भी बंद करवा देती है। … हमारे इलाके में ऐसी कोई समस्या नहीं है।

प्रश्न 6.
पृष्ठ 48 के नीचे दाहिनी ओर की औरतें ऐसा क्यों कर रही हैं? शिक्षक के साथ चर्चा करें।
उत्तर-
यह औरतें पेड़ से चिपककर खडी है. इसे चिपको आंदोलन कहते हैं। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए ये ऐसा कर रही हैं। क्योंकि पेड़ कटने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है और लोगों की जीविका भी बंद हो जाती है। लोगों को जलावन कहाँ से मिलेगा।

प्रश्न 7.
पृष्ठ 49 पर दिखलाए गए पोस्टर द्वारा क्या कहने की कोशिश की जा रही है?
उत्तर-
इस पोस्टर द्वारा लोगों से यह अपील की जा रही है, वे बेटियों को बचाएँ। लोग अल्ट्रासाउण्ड द्वारा ये पता लगा लेते हैं कि उनके होने वाला बच्चा बेटा है बेटी और वह बच्चा बेटी है तो लोग उसे इस दुनिया में आने से पहले पेट में मार डालते हैं, जिसे हम भ्रूण हत्या कहते हैं। भ्रूण हत्या की वजह से हमारे समाज में लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या बहुत कम है।

इसलिए लोगों से अपील है कि बेटियों से इस दुनिया को देखने का हक न छीने, उन्हें इसको देखने से पहले मौत के मुंह में न धकेलें । लोगों का ऐसा मानना होता है कि बेटियाँ माता-पिता के ऊपर बोझ होती है। उन्हें पालना-पोसना, फिर उनकी पढ़ाई-लिखाई और फिर उनके विवाह के लिए. दहेज इकट्ठा करना पड़ता है, इस वजह से ज्यादातर लोग उसे दुनिया में आने से पहले ही मार देते हैं। पर आज के समय बेटियाँ अपने माता-पिता पर बोझ न होकर उनका सहारा बनती है। इस बेटियों की भ्रूण हत्या न की जाए।

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अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आपके विचार से महिलाओं के बारे में यह प्रचलित धारणा है कि पुरुषों के समान कार्य नहीं कर सकती है, आपके विचार से यह । महिलाओं के अधिकार को कैसे प्रभावित करता है।
उत्तर-
महिलाओं के बारे में यह प्रचलित धारणा कि वे पुरुषों के समान कार्य नहीं कर सकती है, की वजह से महिलाओं के अधिकतर प्रभावित होते. हैं। लोगों की इस सोच की वजह से तो पहले लड़कियों की पढ़ाई में ही दो भेद होता है। लड़कियों को अधिक पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता क्योंकि लड़कियों को तो बड़ा होकर दूसरों के घर को संभालना है और चूल्हा ही फूंकना है तो फिर ज्यादा पढ़ने की क्या जरूरत है। अगर लड़की पढ़ने में अच्छी है और उसमें योग्यता है कि वे कुछ कर दिखाए।

फिर उसे पढ़ाई नहीं करने दिया जाता है और उन्हें शादी के लिए प्रेरित किया जाता है। अगर कोई लड़की तकनीकी क्षेत्र में जाना चाहे, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े किसी विषय की पढ़ाई करना चाहें या फिर सेना में भर्ती होना चाहे तो ऐसा नहीं करने दिया जाता क्योंकि लोगों के हिसाब से तो ये सारे कार्य पुरुष ही कर सकते हैं महिलाएँ नहीं।

लोगों की इसी सोच की वजह से अगर कोई महिला नौकरी करती है, तो उसे अपने पदोन्नति के लिए मुरुषों से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और खुद को साबित करना पड़ता है क्योंकि आज भी महिलाओं को पुरुषों से कमतर माना जाता है। किसी भी जगह पर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों पर पहले ध्यान दिया जाता है।

अगर कोई महिला कुछ अलग करना चाहती है तो उसके लिए उस काम को करने से कहीं ज्यादा मुश्किल होता है लोगों को ये यकीन दिलाना की वह भी ये काम कर सकती हैं और उसे भी मौका दिया

जाना चाहिए। आज भी बहुत सारे क्षेत्र हैं जहाँ महिलाओं को लोगों की इस -सोच का शिकार होना पड़ता है, जैस गाँव में पुरुष और महिलाएं दोनों खेतों

पर काम करते हैं, पर महिलाओं को दी जाने वाली मजदुरी पुरुषों को दी जाने वाली मजदूरी से कम होती है। इसलिए लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए और महिलाओं और पुरुषों को समानता की नजर से देखना चाहिए।

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प्रश्न 2.
महिला आंदोलन द्वारा अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए किन्हीं दो प्रयासों का उल्लेख करें।
उत्तर-
महिला आंदोलन द्वारा अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘किए गए दो प्रयासों में ‘दहेज के खिलाफ किया गया आर्दालन’ और ‘घरेलू हिंसा’ के खिलाफ आंदोलन शामिल है।
दहेज की वजह से औरतों से मार-पीट करना, उन्हें जलाना एक आम बात रही है। दहेज की वजह से कितने औरतों ने अपनी जान गंवाई। इसके

खिलाफ 1980 में औरतों के द्वारा एक जोरदार आंदोलन शुरू किया गया। इसमें महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया । खासकर उन महिलाओं ने जिन्होंने दहेज की वजह से अपने बेटियों और बहनों को खोया था। इस आंदोलन के जरिए जगह-जगह नुक्कड़ नाटक किए और पीड़ित महिला व उनके परिवार वालों को कानूनी सलाह के साथ-साथ मानसिक बल भी दिया गया।

महिलाओं ने कचहरी में अपनी मांगों को रखा । आंदोलन की वजह से दहेज समाज का एक बड़ा मुद्दा बन गया और समाचार पत्रों में इसके खिलाफ बहस हुई। जिसके परिणामस्वरूप दहेज कानून बना जिसके तहत वैसे लोगों

को दंड दिया जा सके, जो इस प्रकार के अपराध में शामिल होते हैं। घरेलू हिंसा जैसे-महिलाओं के साथ मार-पीट, गाली-गलौज और छोटी-छोटी बातों पर उन्हें प्रताड़ित करना एक आम बात हो गयी है। यह एक आम बात होने के साथ ही एक गंभीर समस्या भी है।

घरेलू हिंसा के तहत महिलाओं को शारीरिक जाति के साथ ही मानसिक क्षति पहुँचाने की कोशिश भी की जाती है। इसके खिलाफ महिला समूह बहुत ही लंबे समय से संघर्ष करती आ रही है। उनके इस संघर्ष के फलस्वरूप 2006 में घरेलू हिंसा उत्पीड़न कानून पारित हुआ। जिसके तहत महिलाओं के ऊपर घर में.हाने वाले शारीरिक और मानसिक हिंसा को रोका जाएगा।

प्रश्न 3.
समाज में महिलाओं की स्थिति में सधार करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाये जा सकते हैं? उल्लेख करें।
उत्तर-
समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार करने के लिए उनमें और पुरुषों में भेदभाव नहीं होना चाहिए। महिलाओं को भी अपने इच्छा अनुसार पढ़ाई करने की अपने पसंद के क्षेत्र में काम करने की छूट मिलनी चाहिए। काम करने से वे अपने पैरों पर खड़ी हो पाएँगी और आत्मनिर्भर बनेंगी। उन्हें किसी को ऊपर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें नौकरी में पुरुषों के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्हें पोषण का बराबर अधिकार देना चाहिए।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 5 समानता के लिए महिला संघर्ष

प्रश्न 4.
किसी ऐसी महिला की कहानी लिखें, जिसने अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए विशेष प्रयास किया हो।
उत्तर-
मेरे घर के पास में एक परिवार रहता था, जिसमें तीन बेटियाँ और दो बेटे थे। उनकी मम्मी गृहणी और पिताजी एक छोटा-सा ढाबा चलाते थे। पूरा परिवार मिल-जुलकर काम करता था आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवार वाले सिर्फ बेटों को पढ़ाते थे और बेटियों को नहीं पढ़ाते पर उनकी बेटियाँ पढ़ने में बहुत अच्छी थी, बेटों से भी ज्यादा ।

वे पूरी दिन घर का काम करती थीं और पापा की मदद भी करती थी तथा रात में अपनी पढ़ाई करती. थी। इतनी तकलीफों के बावजूद भी उनलोगों ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और सभी परीक्षाओं में अच्छे नम्बरों के साथ उत्तीर्ण हुई और आज वह एक दफ्तर में उच्च पद पर कार्यरत है।

Bihar Board Class 7 Social Science समानता के लिए महिला संघर्ष Notes

पाठ का सार संक्षेप-

हमारे समाज में कामों को भी दो भागों में बाँट दिया गया है। आज भी समाज में लड़के और लड़कियों को समान नजरों से देखने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं महिला और पुरुषों का समानता का दर्जा नहीं देते । लोगों के हिसाब से कुछ काम जैसे-शिक्षक का कार्य, किसान का कार्य और सैनिक का कार्य सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं, महिलाएँ नहीं ।

बहुत से लोगों का यह मानना होता है कि महिलाएँ नर्स का कार्य अच्छे से कर सकती है, क्योंकि उनमें सहनशीलता और विनम्रता का गुण ‘ होता है। इस तरह लोगों की यह भी धारणा होती है कि तकनीकी कार्यों को करने में लड़कियाँ और महिलाएँ सक्षम नहीं होती है।

इन्हीं धारणाओं के कारण बहुत-सी लड़कियों को उनकी योग्यता के अनुसार पढ़ाई करने और प्रशिक्षण लेने की अनुमति नहीं दी जाती है। बहुत से लड़कियों में कुछ दिखाने की योग्यता होने के बावजूद उन्हें स्कूली शिक्षा से आगे की शिक्षा नहीं दिलवाई जाती है और उन्हें विवाह के लिए प्रेरित किया जाता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 5 समानता के लिए महिला संघर्ष

महिलाओं और पुरुषों में अगर काम करने की योग्यताएँ अलग-अलग है तो इनमें यह फर्क उनके लड़की या लड़का होने से नहीं आता है। बल्कि उनमें यह फर्क हमारी सोच से आता है कि हम उनके बारे में कैसे सोचते हैं, उन्हें कैसे मौके देते हैं । इन बातों से ही यह तय होता है कि कौन किस काम के योग्य हो सकता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 4 समाज में लिंग भेद

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 4 समाज में लिंग भेद Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 4 समाज में लिंग भेद

Bihar Board Class 7 Social Science समाज में लिंग भेद Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
अगर आप श्यामा की जगह पर होते तो क्या करते?
उत्तर-
अगर मैं श्यामा की जगह पर होती तो अपने परिवार को मनाने की कोशिश करती की वह मुझे भी पढ़ाई के लिए स्कूल जाने दें। मुझे भी पढ़ने-लिखने में सहयोग करें और मुझे भी दौड प्रतियोगिता आदि में भाग लेने दें और इनकी इस सोच को बदलने की कोशिश करती की लड़कियाँ सिर्फ घर के ही कार्य कर सकती है और पढ़-लिखकर वे क्या करेंगी, उन्हें तो बड़ी होकर चूल्हा ही फूंकना है।

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प्रश्न 2.
श्यामा के परिवार की सोच का श्यामा के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता हैं?
उत्तर-
श्यामा के परिवार की सोच की लडकियाँ तो बडी होकर चल्हा ही फूंकेंगी। इससे श्यामा की जिंदगी बिल्कुल घर में कैद हो गयी है। उसे पढ़ाई नहीं करने दिया जाने से वह कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी और जिंदगी को अपने ढंग से नहीं जी पाएगी। उसे हमेशा दूसरों पर आश्रित रहना पड़ेगा। वह कभी बाहर की दुनिया को नहीं देख पाएगी, कभी आत्मनिर्भर नहीं हो पाएगी। उसकी जिंदगी घर के अंदर चहारदीवारी में ही बंद होकर रह जाएगी।

प्रश्न 3.
शबाना, जावेद, श्यामा और गोविन्द के जीवन में किस तरह का फर्क है?
उत्तर-शबाना, जावेद, श्यामा और गोविन्द जिस तरह के माहौल में बडे हए हैं, उसमें बहुत अंतर है। शबाना और जावेद बहुत ही खले माहौल के बीच

बडे हए हैं। उनके घर में उनके माता-पिता दोनों काम करते हैं, इसलिए उन्हें  ज्यादा समय नहीं मिल पाता । इस कारण घर के कार्यों को सभी मिल-जुलकर

कार्य करते हैं। शबाना, जावेद अपनी पढ़ाई के साथ ही घर का कार्यों को करने में भी अपने माता-पिता का सहयोग करते हैं। वे दोनों बड़े होकर देश की ओर से क्रिकेट खेलना चाहते हैं और उनके माता-पिता इस सपने को पूरा करने में उनका पूरा सहयोग करते हैं।

श्यामा के साथ ऐसा नहीं हैं। उसके घर का माहौल ऐसा नहीं है। उसके यहाँ लड़के और लड़कियों में भेद किया जाता है। उसे पढ़ने नहीं दिया जाता, किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया जाता है। उसे आत्मनिर्भर बनने का। मौका नहीं दिया जा रहा है।

गोविन्द के घर में उसके माता-पिता दोनों मजदूरी करते हैं। उसकी माँ थक जाने के कारण कभी-कभी घर का काम नहीं कर पाती है। जिस कारण उसके माता-पिता के बीच झगड़ा भी होता है। गोविन्द को ये सब पसंद नहीं है, इसलिए वह घर का कुछ काम जैसे – बरतन साफ करना, जलावन की लकड़ी लाना, झाडू लगाना आदि वह खुद ही कर लेता है । जिस कारण उसके दोस्त उसका मजाक भी उड़ाते हैं।

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प्रश्न 4.
गोविन्द के दोस्त उसे क्यों चिढ़ाते हैं? क्या उनका चिढाना उचित है?
उत्तर-
गोविन्द के दोस्त उसे इसलिए चिढ़ाते हैं, क्योंकि वो अपने घर का कार्य जैसे झाड़ लगाना, बरतन साफ करना, जलावन की लकड़ी लाना आदि करता है। गोविन्द के दोस्तों को गोविन्द का चिढाना सही नहीं है। क्योंकि अपने घरों के कार्य दरने में कोई बुराई नहीं है। अगर लड़कियाँ घर के कामों में अपनी माँ का हाथ बँटा सकती है, तो फिर लड़के क्यों नहीं।

प्रश्न 5.
आप गोविन्द के दोस्त होते तो क्या करते?
उत्तर-
अगर हम गोविन्द के दोस्त होते तो उसे चिढ़ाते नहीं बल्कि उसकी तरह ही हम भी अपने घरों में अपने माँ की कामों में हाँथ बँटाते । घर के छोटे-मोटे कामों को कर देते जिससे हमारी माँ को थोड़ा आराम मिलता। घर के छोटे-मोटे कामों को करने में कोई बुराई नहीं है। जिस तरह बेटियाँ अपने घरों के काम में माँ का हाथ बँटाती है, उसी तरह बेटों को उनके काम में हाथ बँटाना चाहिए।

प्रश्न 6.
पीछे दिए गए उदाहरणों के आधार पर आप किस रूप में बड़ा होना पसंद करेंगे और क्यों?
उत्तर-
पीछे दिए गए उदाहरणों के आधार पर मैं “जावेद और शबाना’ की तरह बड़ा होना चाहूँगी।
‘जावेद और शबाना’ के घर का माहौल बहुत ही खला है। वहाँ बच्चों – को घर के कार्य करने के साथ-साथ पढ़ने-लिखने का छूट भी दिया गया है।

वे लोग पढ़ाई के साथ-साथ अपनी माँ का घर के कामों में हाथ बँटाते हैं। उन लोगों का सपना है कि बड़े होकर वे लोग देश की तरफ से क्रिकेट खेलें।

उनके माता-पिता भी उनके इस सपने को पूरा करने में उनका सहयोग करते हैं। ऐसा नहीं है कि उनके घर में बेटा होने के कारण जावेद को पढ़ने का

हक है और शबाना बेटी है इसलिए उसकी पढ़ाई बंद करवाकर उसे घर का काम करने को कहा जाए। उनके घर में बेटे और बेटियों के समान रूप से व्यवहार किया जाता है और दोनों के सपनों की कद्र की जाती है।

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प्रश्न 7.
लड़के एवं लड़कियों के पहनावे और खिलौने में फर्क क्यों हैं? चर्चा करें।
उत्तर-
लड़के एवं लड़कियों के पहनावे और खिलौने में फर्क समाज के लोगों की सोच के कारण है। समाज ही लड़के और लड़कियों में अंतर करता है। समाज के द्वारा ही यह तय किया जाता है लड़कियों और लड़कों के कपड़े और खिलौने कैसे होंगे। बचपन से लडके और लड़कियों के खिलौनों में भी फर्क किया जाता है जैसे-लड़के को खेलने के लिए कारें दी जाती है और लड़कियों की गुड़िया ।

इन खिलौनों के माध्यम से यह दर्शाने के कोशिश की जाती है कि जब वे बड़े होकर स्त्री या पुरुष होंगे तो उनके जीने का तरीका अलग-अलग होगा। बचपन से इस तरह की बातों को देखते हए उन्हें ऐसा लगने लगता है कि स्वी व पुरुष की भूमिकाओं को निभाना उनका प्राकृतिक गुण है और उन्हें जीवन भी उसी आधार पर जीना चाहिए।

प्रश्न 8.
आपके घर के ज्यादातर काम कौन करता है, और क्यों ?
उत्तर-
मेरे घर के ज्यादातर काम मेरी माँ करती है। क्योंकि मेरे पिताजी सुबह में ही ऑफिस चले जाते । मेरी माँ एक गृहणी हैं। वह घर के सारे काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करती हैं। वह घर की देखभाल करती है, हमारी सेहत का भी ध्यान रखती है। वह सबसे पहले रसोई घर के कामों को निपटाती हैं, फिर घर के झाडू-पोंछा करती हैं बिस्तर ठीक करती है। इन सारे कार्यों

के अलावा वह हमारे पढ़ाई का भी ध्यान रखती है। हमारे होमवर्क पूरा करने में भी हमारी मदद करती है। इसके अलावे वे घर के बाहर का सारा कार्य भी करती है, जैसे-घर के लिए कुछ सामान लाना, बैंक का कार्य, बिजली का बिल आदि। मेरे पिताजी सुबह ऑफिस जाते हैं और रात आते हैं। उनके

ऑफिस जाते वक्त दुकानें बंद रहती है और उनके आते वक्त आधे से अधिक दुकानें बंद हो जाती हैं। इसलिए मेरी माँ को ये सारे कार्य करने पड़ते हैं।

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अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सामान्यतः एक घर में ‘लड़का’ और ‘लड़की’ के रूप में कौन ये काम करेगा ?

  1. मेहमान के लिए एक गिलास पानी लाना ।
  2. माँ के बीमर होने पर डॉक्टर को बुलाना।
  3. घर के खिड़की दरवाजे की सफाई करना।
  4. पिताजी की मोटर साइकिल साफ करने में मदद करना।
  5. बाजार से चीनी खरीदना।
  6. किसी आगंतुक के आने पर दरवाजा खोलना।

उत्तर-

  1. लड़का
  2. लड़का
  3. लड़की
  4. लड़का
  5. लड़का
  6. लड़की।

प्रश्न 2.
आपके परिवार या पास-पड़ोस में क्या लड़कियों और लड़कों में भेद होता है ? आपकी समझ में से यह भेद किस प्रकार का होता है ?
उत्तर-
हाँ, मैंने अपने घर के आस-पड़ोस में लड़के और लड़कियों में भेद होते देखा है। लोग अपने लडकियों और लडकों में भेद करते हैं। वे उनके पहनावे, खान-पान, खेल-कूद आदि में भेद भाव करते हैं। वे अपने बेटों के ऊपर ज्यादा ध्यान देते हैं। वे अपने लड़के को अपने हैसियत के हिसाब से हर खुशी देने की कोशिश करते हैं। वे अपने लडकों को पढ़ाई भी कराते हैं। उन्हें घर का कोई भी काम नहीं करने देते, क्योंकि उनका मानना होता है कि ।

स्कूल से पढ़ाई कर के आया है, थक गया होगा। उसे बिल्कल ताजा खाना दिया जाता है, उसके खाने में मौसमी फल होने चाहिए। खाने में दूध का भी होना जरूश्री होता है। खाली समय में उन्हें पढ़ाई के अलावा खेल-कूद में भी आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उनके सारे फरमाइशों को तुरंत पूरा किया जाता है। अगर कुछ गलत भी करता है तो टाल दिया जाता है।

लड़कियों के ऊपर इतना ध्यान नहीं दिया जाता है। उनकी पसंद-नापसंद का कुछ खास ध्यान नहीं दिया जाता हैं। उन्हें बहुत ज्यादा पढ़ाई भी नहीं करवाई जाती। उनसे घर के कार्यों को कहा जाता है। उनके खान-पान पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। उनके खाने में फल-फूल, दूध आदि का होना न होना कुछ खास मायने नहीं रखता ।

खाली समय में भी कुछ समय ही पढाई कर पाती हैं, बाकी के समय में कछ न काम करने को बोल दिया जाता है। लड़कों की तरह उनको किसी बात को तुरंत पूरा नहीं किया जाता है। लड़कियों को हमेशा यह सिखाया जाता है कि उन्हें बड़े होकर दूसरे के घर जाना है, इसलिए उन्हें घर के सारे काम-काज आने चाहिएं।

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प्रश्न 3.
महिलाओं की तुलना में पुरुषों का काम, क्या ज्यादा मूल्यवान होता है ? अगर नहीं तो क्यों?
उत्तर-
मेरे हिसाब से महिलाओं की तुलना में पुरुषों का काम ज्यादा मूल्यवान नहीं होता है। हमारे समाज में पुरुषों के काम को ज्यादा मूल्यवान इसलिए माना जाता है, क्योंकि वे घर से बाहर जाकर काम करते हैं इसके लिए उन्हें पढ़ाई करनी पड़ती है, काम को सीखना पडता है जिसमें पैसा भी खर्च होता है।

पर महिलाएँ घर का काम करती है. इसके लिए उनका ज्यादा पढ़ा-लिखा होना भी जरूरी नहीं होता है। घरेलू कार्यों को सीखने के लिए उन्हें पैसे खर्च नहीं करने पड़ते । इन कामों को करना तो महिलाओं का स्वाभाविक गुण होता है। इसलिए महिलाओं का कार्य मूल्यवान नहीं माना।।

पर आज के समय में महिलाएं पुरुषों की तरह पढ़ाई भी करती है, कामों को सीखती भी है और उन्हीं तरह घर से बाहर जाकर काम भी करती है और पैसे भी कमाती है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर कार्य करती है। आज के समय ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ सिर्फ पुरुष ही काम करते हैं, महिलाएँ नहीं।

इन सारे कार्यों के साथ-साथ वे घर के कार्यों को भी संभालती है और अपने परिवार को भी। इसलिए मेरे हिसाब से पुरुषों से ज्यादा महिलाओं का कार्य मूल्यवान होता है।

प्रश्न 4.
घरेलू मजदूरी करने वाली महिलाओं से बातचीत कर उनके कार्यों का विवरण काम के घंटे,समस्याएँ एवं मजदूरी आदि की सूची तैयार करें।
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें

प्रश्न 5.
अगर आपकी माँ घर का काम दो दिनों के लिए आपको सौंप दे तो उन कार्यों को करने में क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर-
अगर मेरी माँ घर का काम दो दिनों के लिए मुझे सौंप दे, तो उन कार्यों करने में सबसे बड़ी समस्या है कि माँ की तरह जल्दी-जल्दी सारा काम नहीं कर पाती हूँ। मैं माँ की तरह स्वादिष्ट खाना नहीं बना पाती हूँ और घर की सफाई भी अच्छे से नहीं कर पाते हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science समाज में लिंग भेद Notes

पाठ का सार संक्षेप

हमारी पहचान आमतौर पर एक स्त्री या एक पुरुप के रूप में होती है। इस अध्याय में यह पढ़ना की हमारे समाज में स्त्री और पुरुष की भूमिका कैसे तय होती है।

लिंग मनुष्य की जैविक संरचना है। किसी मनुष्य में प्रजनन अंग यह निर्धारित करता है कि मनुष्य स्त्री है या पुरुष । महिलाओं के कुछ गुण जैसे बच्चे को जन्म देना और उसे स्तनपान कराना उनके विशिष्ट एवं प्रकृतिक गुण है। मनुष्यों में यह फर्क जैविक संरचना के कारण होती है। हमारे समाज में ज्यादातर लोग ‘जेंडर’ शब्द का अर्थ लिंग यानी स्त्रीलिंग व पुलिंग के लिए करते हैं, जो कि एक गलत धारणा है। ‘जेंडर’ से हमारी सामाजिक व्यवहार को दर्शाया जाता है।

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किसी महिला या किसी पुरुष को क्या पहनना चाहिए.. क्या काम करना चाहिए, कैसा व्यवहार करना चाहिए यह सभी सामाजिक रूप से तय होते हैं। ये बातें लिंग भेद, जेण्डर या सामाजिक लिंग कहलाते हैं। लेकिन समय के साथ-साथ समाज बदल रहा है और साथ ही सामाजिक लिंग की परिभाषा बदल रही है। जैसे- कुछ वर्ष पहले तक लड़कियों को स्कूल नहीं जाने दिया जाता था। लेकिन समय के साथ लोगों को इस सोच में भी बदलाव आया है और अब लोग लड़कियों को भी स्कूल जाने की आजादी देने लगे हैं।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 14 पौधों में संवहन

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 14 पौधों में संवहन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 14 पौधों में संवहन

Bihar Board Class 7 Science पौधों में संवहन Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों को भरें –
(i) पौधों में जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण …………… द्वारा होता है।
(ii) जल एवं खनिज पदार्थों का संवहन …………. ऊतक द्वारा होता है।
(iii) पौधों में भोजन के संवहन के लिए……… नामक ऊतक होते हैं।
(iv) वाष्य के रूप में पत्तियों से जल का उत्सर्जित होना ………. कहलाता है।
उत्तर:
(i) मूलरोमां
(ii) जाइलम
(iii) प्लाएम
(iv) वाष्पोत्सर्जन ।

प्रश्न 2.
पौधों में पदार्थों का संवहन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
पौधे जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण करते हैं। अवशोषण मूल रोमों द्वारा होता है। जल एवं खनिज पदार्थ जाइलम ऊतक द्वारा संवहन क्रिया के फलस्वरूप ही पत्तियों तक पहुँचता है। पत्तियाँ या भोजन बनाती हैं, अगर ये पदार्थ न पहुँचंग तो पत्नियाँ भोजन न बनाएगी और पौधों का विकास रूक जाएगा।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 14 पौधों में संवहन

प्रश्न 3.
जाइलम तथा प्लोएम ऊतकों के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
जाइलम संवहन ऊतक है। पौधों के मूलरामा के द्वारा जल और खनिज तत्वों के अवशोषण करते हैं। ये पदार्थ पत्तियों तक पहुँचाने के लिए जाइलम ऊतक जो संवहन ऊतक कहलाता है कार्य करते हैं। जब पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश में अपना भोजन बनाती है तो उस भोजन को पौधे के विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का कार्य प्लोएम ऊतक करते हैं।

प्रश्न 4.
वाष्पोत्सर्जन से क्या समझते हैं ? क्या पौधों में यह क्रिया जरूरी है ?
उत्तर:
जैव क्रियाओं में जल का कुछ भाग उपयोग नहीं होता है। ये अतिरिक्त जल पनियों के छिद्रो, रंध्र द्वारा वाष्प के रूप में उत्सर्जित हो जाता है। वाष्प के रूप में पत्तियों से जल का उत्सर्जन वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। तापमान बढ़ने पर वाष्पोत्सर्जन की क्रिया तीव्र हो जाती है। यह क्रिया जरूरी है।

प्रश्न 5.
एक प्रयोग द्वारा बताइये कि पौधे जल का संवहन करते हैं।
उत्तर:
दो गिलास लेते हैं। दोनों में आधा भाग पानी भर देते हैं। एक गिलास वाले पानी में थोड़ा लाल रंग डाल देते हैं। अब दो पौधे जिनके मूलराम सुरक्षित हो एक एक पौधं दोनों गिलास में रखते हैं करीब चार पाँच घंटे बाद दोनों पौधों को निकालकर जनों को अनुप्रस्थ एवं अनुदेध्यं काटकर देखने हैं. कि रंगीन गिलास वाले तने में लाल धब्बे आते हैं दूसरे में नहीं, अत: यह स्पष्ट है कि मूलरामां के द्वारा जल का अवशोषण होता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 14 पौधों में संवहन

Bihar Board Class 7 Science पौधों में संवहन Notes

पौधे मिट्टी में उगते हैं। मिट्टी से पानी और खनिज तत्व पौधे अवशोषित करत हैं। पौधों की जड़ों में धागे जैसी संरचना “मूल रोम” होती है। मूल रोम ही मिट्टी में उपस्थित जल का अवशोषण करते हैं और पत्तियों तक पहुँचाते हैं। पत्तियों तक जल और पोषक तत्वों को पहुँचाने के लिए वाहिकाएँ होती हैं। संवहन क्रिया द्वारा पत्तियों तक पहुँचता है। वाहिकाएँ विशेष प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर संवहन ऊतक का निर्माण करती है। जल एवं खनिज पदार्थों को पत्तियों तक ले जाने के लिए पौधों के अंगों में जाइलम नामक उतक होते हैं। जल एवं खनिज पदार्थों को पौधों के विभिन्न अंगों तक ले जाने वाला संवहन उतक जाइलम है।

पौधों के संवहन उत्तक दो प्रकार के होते हैं – जाइलम, प्लोएम; पौधों की वृद्धि के लिए जल खनिज के अलावा भोजन की आवश्यकता होती है। पत्तियों से भोजन का संवहन पौधों के विभिन्न अंगों तक फ्लोएम नामक ऊतक द्वारा होता है। पौधे जल को अवशोषित करते हैं। वाष्प के रूप में जल पत्तियों में पाये जाने वाले स्टोमाटा के द्वारा उत्सर्जित होता है। वाष्प के रूप में अवशोषित जल का उत्सर्जन वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। दिन में वाप्पोत्सर्जन को दर बढ़ जाती है क्योंकि रुध्र खुले रहते हैं। जबकि सूर्य की अनुपस्थिति में रन्ध्र बंद हो जाता है। रात में वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है।

गर्मियों में तापमान में वृद्धि से वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ जाती है जबकि जाड़े में कम रहती है। हवा बहने को दर बढ़ने से वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ जाती है। साथ ही साथ हवा में आर्द्रता बढ़ने से वाष्पोत्सर्जन की दर घट जाती है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3

प्रश्न 1.
आकृति में, ∆PQR की भुजाओं OP और RQ को क्रमश: बिन्दुओं S और T तक बढ़ाया गया है। यदि ∠SPR = 135° है, और तो ∠PQT = 110° है, तो ∠PRQ ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3
उत्तर:
∵ ∠SPR + ∠RPQ = 180° (रेखा युग्म)
∴ 135° + ∠RPQ = 180°
[∵ ∠SPR = 135° (दिया है)]
⇒ ∠RPQ = 180° – 135° = 45°
∠TQP + ∠PQR = 180° (रेखा युग्म)
∴ 110° + ∠PQR = 180°
[∵ ∠PQT = 110° (दिया है)]
⇒ ∠PQR = 180° – 110° = 70°
अब, APQR में,
∵ ∠PQR + ∠QRP+ ∠RPQ = 180°
∴ 70° + ∠QRP + 45° = 180°
∠QRP = 180° – 115° = 65°.

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प्रश्न 2
आकृति में, ∠x = 62° और ∠XYZ = 54 है। यदि YO और ZO क्रमशः ∠XYZ. और ∠XYZ के सपद्विभाजक हैं, तो ∠OZY, ∠YOZ ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
∆XYZ में,
∠XYZ + ∠YZX – ∠ZXY = 180°
⇒ 54 + ∠YZX + 62° = 180°
⇒ ∠YZX = 180° – 116° = 64°
दिया है, YO नया ZO क्रमश: ∠XYZ तथा ∠XZY के समद्विभाजक है।
इसलिए ∠OYZ = \(\frac{1}{2}\) × ∠XYZ = \(\frac{1}{2}\) × 54° = 27°
तथा ∠OZY = \(\frac{1}{2}\) × ∠XZY = \(\frac{1}{2}\) × 64° = 32°
अब, ∆YOZ में,
∠OYZ + ∠OZY + ∠YOZ = 180°
27° + 32° + ∠YOZ = 180°
∠YOZ = 180° – 59° = 121°.

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प्रश्न 3.
आकृति में, यदि AB || DE ∠BAC = 35° और ∠CDE = 53° है, तो ∠DCE ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
यहाँ AB || DE (दिया है।)
⇒ ∠BAE = ∠DEC (एकान्तर कोण)
∴ ∠DEC = 35°
अब, ∆CDE मैं.
∠CDE + ∠DEC + ∠ECD = 180°
53° + 35° + ∠ECD = 180°
∠ECD = ∠DCE = 180° – 88°
अत: ∠DCE = 92°.

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प्रश्न 4.
आकृति में यदि रेखाएँ PQ और RS बिन्दु T पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करती हैं कि ∠PRT = 40°, ∠RPT = 95° और ∠TSQ = 75° हैं, तो ∠SQT ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3
उत्तर:
∆PRT में,
∠RPT + ∠PTR + ∠TRP = 180°
⇒ 95° + ∠PTR + 40° = 180°
⇒ ∠PTR = 180° – 135°
∠PTR = 45°
तथा ∠PTR = ∠STQ (शीर्षाभिमुख कोग)
∠STQ = 45°
∆TQS में,
∠SQT + ∠STQ – ∠TSQ = 180°
⇒ ∠SQT + 45° + 75° = 180°
अतः ∠SQT = 180° – 120° = 60°.

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प्रश्न 5.
आकृति में, यदि PQ ⊥ PS. PQ || SR, ∠SQR = 28° और ∠QRT = 65° है, तो x और y का मान ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
PQ|| SR (दिया है।)
अतः ∠PQR = ∠QRT (एकानर कोप)
⇒ ∠PQS + ∠SQR = 65°
⇒ x + 28° = 65° [∵ ∠SQR = 28°]
⇒ x = 65° – 28° = 37°
∴ x = 37°
अब ∆POS में,
∠PSQ + ∠SQP + ∠QPS = 180°
⇒ y + x + 90° = 180°
⇒ y = 180° – 90° – 37°
∴ y = 53°
अत: x = 37° तथा y = 53°.

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प्रान 6.
आकृति में, ∆PQR की भुजा QR को बिंदु S तक बढ़ाया गया है। यदि ∠PQR तथा ∠PRS के समद्विभाजक बिन्दु पर मिलते हैं, तो सिद्ध कीजिए कि ∠QTR = \(\frac{1}{2}\) ∠QPR है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.3
उत्तर:
∆PQR मैं, ∠PRS = ∠P+ ∠Q
(∵ बहिष्कोग सम्मुख अन्त:कोणों के योग के बराबर होता है।)
⇒ \(\frac{1}{2}\) ∠PRS = \(\frac{1}{2}\) ∠P + \(\frac{1}{2}\) ∠Q
⇒ ∠TRS = \(\frac{1}{2}\) ∠P + ∠TOR ……(1)
(∵ QT तथा RT क्रमशः ∠PQR तथा ∠PRS के समद्विभाजक है)
अब, ∆QRT में, ∠TRS = ∠TQR + ∠T
समी. (1) से \(\frac{1}{2}\) ∠P + ∠TQR = ∠TQR + ∠T
⇒ \(\frac{1}{2}\) ∠P = ∠T
अत: ∠QTR = \(\frac{1}{2}\) ∠QPR. इति सिद्धम्

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Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 13 मिट्टी

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 13 मिट्टी Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 13 मिट्टी

Bihar Board Class 7 Science मिट्टी Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
सबसे उपयुक्त उत्तर को चिह्नित करें।
(i) जल धारण क्षमता सबसे अधिक होती है –
(क) दोमट मिट्टी में
(ख) चिकनी मिट्टी में
(ग) बलुई मिट्टी में
उत्तर:
(ख) चिकनी मिट्टी में

(ii) धान की फसल की उपर्युक्त मिट्टी है-
(क) बलुई मिट्टी
(ख) केवल दोमट मिट्टी
(ग) चिकनी एवं दोमट मिट्टी
(घ) केवल चिकनी मिट्टी
उत्तर:
(ग) चिकनी एवं दोमट मिट्टी

(iii) किस प्रकार की मिट्टी में अन्तःस्रवण दर सबसे अधिक होती है ?
(क) चिकनी मिट्टी
(ख) दोमट मिट्टी
(ग) बलुई मिट्टी
उत्तर:
(ग) बलुई मिट्टी

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 13 मिट्टी

प्रश्न 2.
मिट्टी का निर्माण किस प्रकार होता है ? समझाइए।
उत्तर:
जब तेज धूप चट्टानों पर पड़ती है तो गर्म हो जाती है और दरारें -पड़ जाती हैं । ठंड या वर्षा होने पर चट्टानें टूटने लगती हैं। पवन, जल और जलवायु की क्रिया से चट्टानों के टूटने पर मिट्टी का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया अपक्षय कहलाती है। मिट्टी बनने में समय अधिक लगता है।

प्रश्न 3.
बलुई मिट्टी, दोमट मिट्टी तथा चिकनी मिट्टी में अन्तर स्पष्ट करें
उत्तर:
बलुई मिट्टी, दोमट मिट्टी तथा चिकनी मिट्टी में अन्तर –
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प्रश्न 4.
अंतःस्रवण दर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
अंत:स्रवण का अर्थ – पानी का ग्रहण (अवशोषण) मिट्टी द्वारा जल का अंत:स्रावित होने में लगने वाले समय के आधार पर अंत:स्रवण दर की गणना करना ही अंत:स्रवण दर है। मिट्टी के नमूनों की अंत:स्रवण दर इस सूत्र से निकालते हैं।
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प्रश्न 5.
जल धारण क्षमता से आपका क्या अभिप्राय है ? अंतःसवण दर और जल धारण की क्षमता में क्या अन्तर होता है ?
उत्तर:
मिट्टी द्वारा जल का अवशोषण होता है। इसकी क्षमता मिट्टी के कणों पर निर्भर करता है। यदि मिट्टी के कण बड़े होते हैं तो वे जल को अवशोषण करते हैं। ये मिट्टी शुष्क होते हैं नमी नहीं रहती है। अतः जल धारण क्षमता कम है। जिस मिट्टी में जल की मात्रा अधिक होती है इसमें ह्युमस अधिक होता है। इसका मतलब जल धारण क्षमता अधिक है।

मिट्टी में पानी कितनी तेजी से अन्दर जाता है, अन्त:स्रवण दर कहलाता है। बलुई मिट्टी में अन्त:स्रवण सबसे अधिक और चिकनी मिट्टी में कम होता है। बलुई मिट्टी में ह्यूमस नहीं होता, ये शुष्क होते हैं। इनके कणों के बीच हवा होती है। इनके कण आपस में नहीं मिलते हैं।

प्रश्न 6.
समझाइए कि मिट्टी के अपरदन तथा मिट्टी प्रदूषण को किस प्रकार रोका जा सकता है ?
उत्तर:
मिट्टी का अपरदन पवन पानी अथवा बर्फ, वर्षा, नदियों का तेज बहाव के कारण होता है। इसको अधिक संख्या में पेड़, पौधों को लगाना चाहिए । पेड़ की जड़ मिट्टी को जकड़े रहती है और मिट्टी के अपरदन होने से बचाती है। मिट्टी प्रदूषण को बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। खेत बंजर होने लगे हैं। इसका कारण अधिक उर्वरक का उपयोग, कल-कारखानों की गंदगी। मिट्टी में साबुन, अपमार्जक का पानी मिट्टी में जाना, न्यूक्लीयर कपड़ों को जमीन में छुपाना, मिट्टी के प्रदूषण होने का कारण है।

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Bihar Board Class 7 Science मिट्टी Notes

जीवन के लिए मिट्टी पृथ्वी पर होना अनिवार्य है । मिट्टी के बिना जीवन संभव नहीं है। बिना मिट्टी के न पेड़ न घास उग सकते हैं। पृथ्वी पर सभी प्राणियों के पोषण के लिए.सभी सामग्री मिट्टी से ही प्राप्त होती हैं। मिट्टी पर सभी जीव-जन्तुओं का निवास है। चट्टानों के टूटने से मिट्टी का निर्माण होता है। तेज धूप के कारण चट्टानें गर्म होती हैं और उसमें दरारें पड़ जाती हैं। ठंड और वर्षा के कारण घट्टानें टूटने लगती है। पवन जल और जलवायु की क्रिया से चट्टानों के टूटने पर मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी के रावसे ऊपर वाली परत में ह्यूमस और खनिज रहता है। यह उर्वरक होता है। यह जल का धारण अधिक करता है। इस शीर्ष मिट्टी कहते हैं। पौधे के जर्ड शीर्ष मिट्टी में ही रहती हैं। मध्य परत शीर्ष के नीचे जिसमें ह्यूमस कम और खनिज ज्यादा होते हैं। यह परत अधिक कठोर और धनी होती है। मध्य परत के नीचे तीसरी परत जो काफी कठोर होता है। इस परत के नीचे आधार शैल होता है। मिट्टी कई प्रकार की होती है-मिट्टी में पाये जाने वाले चट्टान के कणों के आकार पर मिट्टी को वर्गीकृत किया जाता है। यदि मिट्टी में बड़े कणों का अनुपात अधिक होता है तो वह बलुई मिट्टी कहलाती है और सूक्ष्म कणों का अनुपात अधिक हो तो चिकनी मिट्टी कहते हैं। यदि बड़े और छोटे कणों की मात्रा समान हो तो दोमट मिट्टी कहलाती है। मिट्टी का गुण उसके कणों पर निर्भर करता है।

बलुई मिट्टी हल्की और शुष्क होती है। इनके कण बड़े होते हैं। ये आपस में आसानी से जुड़ नहीं पाते बालू के कणों के बीच के स्थान से जल की निकासी तेजी से होती है। चिकनी मिट्टी में कण सूक्ष्म होते हैं ये आसानी से आपस में जुड़े रहते हैं। इनके बीच रिक्त स्थान कम होता है। ये जल अधिक ग्रहण करते हैं । चिकनी मिट्टी भारी होती है। पादपों को उगाने के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। दोमट मिट्टी में ह्यूमस अधिक होती है। जल धारण की क्षमता है। चिकनी मिट्टी का उपयोग बर्तनों, खिलौनों और मूर्तियों को बनाने के लिए किया जाता है। हम प्रायः खेतों में गर्मी के दिनों में वायु चमकते नजर आते हैं। लगता है वह कम्पन कर रहा है। ऐसा मिट्टी में उपस्थित जल के कारण लगता है। गर्मी के दिनों में मिट्टी के जल का वाष्पन होता है और ऊपर उठता है। जलवायु को सघन बना देती है सूर्य के प्रकाश के अपवर्तन के कारण मिट्टी के ऊपर की वायु कम्पन करते हुए चमकीला दिखाई पड़ती है। मिट्टी जल का अवशोषण करती है। जल के मिट्टी में अंतस्रावित होने में लगने वाले समय के आधार पर अंत:सवण दर की गणना इस सूत्र से करते हैं।

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जगहों पर मिट्टी भिन्न-भिन किस्म की होती है। अपने बिहार राज्य में, विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में बलुई तो कुछ क्षेत्रों में दोमट और चिकनी मिट्टी पाई जाती है । जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक, जैसे पवन, वर्षा, आर्द्रता और मिट्टी के प्रकार के कारण फसलों की किस्में भिन्न भिन्न होती हैं। चिकनी और दोमट मिट्टी में गेहूँ, मक्का, चना, धान की खेती की जाती है। जैसे पदार्थ और जल धारण करने वाली मिट्टी अच्छी किस्म की होती है। आलू, दालों की फसल दोमट और बलुई मिट्टी में की जाती है। क्योंकि जल को निकासी आसानी से की जा सके । मिट्टी के ऊपरी सतह का हटना मिट्टी की अपरदन कहलाता है। पवन, पानी, वर्षा, बर्फ मिट्टी का अपरदन करते हैं। मिट्टी का अपरदन को रोकने के लिए अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए । बंजर और मरुभूमि स्थानों पर मिट्टी का अपरदन अधिक होता है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science कार्य तथा ऊर्जा InText Questions and Answers

प्रश्न श्रृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 164)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु पर 7 N का बल लगता है। मान लीजिए बल की दिशा में विस्थापन 8 m है (चित्र)। मान लीजिए वस्तु के विस्थापन के समय लगातार वस्तु पर बल लगता रहता है। इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
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हल:
किसी वस्तु पर लगने वाले बल द्वारा किया गया कार्य बल के परिमाण तथा बल की दिशा में चली गई दूरी के गुणनफल के बराबर होता है।
कार्य = बल x विस्थापन
W = F x S
यहाँ,
F = 7N
S = 8 m
अतः, किया गया कार्य W = 7 x 8 = 56 Nm = 56J

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प्रश्न श्रृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 165)

प्रश्न 1.
हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है ?
उत्तर:
कार्य करने के लिए निम्न दो दशाओं का होना आवश्यक है
1. वस्तु पर कोई बल लगना चाहिए।
2. वस्तु विस्थापित होनी चाहिए।
यदि इनमें से कोई भी दशा पूरी नहीं होती तो कार्य नहीं किया गया। विज्ञान में हम कार्य को इसी दृष्टि से देखते हैं।

प्रश्न 2.
जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किये गये कार्य का व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल F उसे दूरी S तक विस्थापित करता है तो किया गया कार्य W, बल तथा विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है।
किया गया कार्य = बल – विस्थापन
W = F x S

प्रश्न 3.
1 J कार्य को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
1 J किसी वस्तु पर किए गए कार्य की वह मात्रा है जब 1 N का बल वस्तु को बल की क्रियारेखा की दिशा में 1 m विस्थापित कर दे।

प्रश्न 4.
बैलों की एक जोड़ी खेत जोतते समय किसी हल पर 140 N बल लगाती है। जोता गया खेत 15 m लम्बा है। खेत की लम्बाई को जोतने में कितना कार्य किया गया ?
हल:
बैलों द्वारा किया गया कार्य
w = F xd
जहाँ लगाया गया बल F = 140 N
विस्थापन, d = 15 m
⇒W = 140 x 15 = 2100J
अतः खेत की लम्बाई को जोतने में किया गया कार्य 2100J

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प्रश्न श्रृंखला # 03 (पृष्ठ 169 पर)

प्रश्न 1.
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा क्या होती है ?
उत्तर:
किसी वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं। प्रत्येक गतिशील वस्तु में गतिज ऊर्जा होती है। गतिशील कार, लुढ़कता हुआ पत्थर, उड़ता हुआ हवाई जहाज, बहता हुआ पानी आदि सभी में गतिज ऊर्जा विद्यमान

प्रश्न 2.
किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखो।
उत्तर:
यदि कोई वस्तु जिसका द्रव्यमान m है व वेग। से गतिशील है तो उसकी गतिज ऊर्जा E, निम्न व्यंजक द्वारा प्रदर्शित होगी
Ek = Ima इसका SI मात्रक जूल (J) है।

प्रश्न 3.
5 ms-1 के वेग से गतिशील किसी m द्रव्यमान की वस्तु की गतिज ऊर्जा 25 J है। यदि इसके वेग को दो गुना कर दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी ? यदि इसके वेग को तीन गुना बढ़ा दिया जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी ?
हल:
वस्तु की गतिज ऊर्जा, E = 25 J
वस्तु का वेग, v = 5 m/s
∴ Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
m = \(\frac{2 \mathrm{E}_{\mathrm{K}}}{v^{2}}\) = \(\frac{2 \times 25}{5^{2}}\) = 2 kg

अगर वेग दुगना है तो,
v = 2 x 5 = 10 m/s
∴ Ek (v = 10 m/s के लिए) = \(\frac {1}{2}\)mv2
\(\frac {1}{2}\) x 2 x 10 x 10 = 100 J

यदि वेग तीन गुना है,
v = 3 x 5 = 15 m/s
∴ Ek (v = 15 m/s) के लिए
= \(\frac {1}{2}\)mv2
= \(\frac {1}{2}\) x 2 x 15 x 15 = 225 J

प्रश्न श्रृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 174)

प्रश्न 1.
शक्ति क्या है ?
उत्तर:
कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपान्तरण की दर को शक्ति कहते हैं। यदि कोई अभिकर्ता (एजेन्ट) t समय में w कार्य करता है तो शक्ति का मान होगा –
शक्ति = कार्य / समय
या P = W/t
शक्ति का मात्रक वाट है तथा इसका प्रतीक W है।

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प्रश्न 2.
1 वाट शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
1 वाट उस अभिकर्ता (एजेन्ट) की शक्ति है जो 1 सेकण्ड में 1 जूल कार्य करता है। हम यह भी कह सकते हैं कि यदि ऊर्जा के उपयोग की दर 1 Js-1 हो तो शक्ति 1 W होगी।
1 वाट = 1 जूल / सेकण्ड
1W = 1 Js-1

प्रश्न 3.
एक लैम्प 1000 J विद्युत ऊर्जा 10 s में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है ?
हल:
शक्ति = कार्य / समय।
लैम्प द्वारा ली गई ऊर्जा = 1000 J
समय = 10s
शक्ति = 1000 / 10 = 100w

प्रश्न 4.
औसत शक्ति को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी एजेण्ट की औसत शक्ति, कुल लिए गए समय में, कुल किया गया कार्य है। औसत शक्ति को हम कुल उपयोग की गई ऊर्जा को कुल लिए गए समय से विभाजित कर प्राप्त कर सकते हैं।
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क्रियाकलाप 11.1 (पृष्ठ संख्या 163)

प्रश्न 1.

  1. किस वस्तु पर कार्य किया गया ?
  2. वस्तु पर क्या घटित हो रहा है?
  3. कार्य कौन (क्या) कर रहा है ?

उत्तर:
सीढ़ियों पर चढ़कर इमारत की ऊपरी मंजिल पर पहुँचना, एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ना क्रियाकलाप दैनिक जीवन में किये गये कार्यों के उदाहरण हैं। इमारत की ऊपरी मंजिल पर पहुँचने में

  1. सीढ़ियों पर चढ़ने में कार्य किया गया
  2. हम ऊँचाई पर पहुंच रहे हैं।
  3. हम स्वयं कार्य कर रहे हैं।

ऊँचे पेड़ पर चढ़ने में –

  1. पेड़ पर कार्य हो रहा है।
  2. हम ऊपर चढ़ रहे हैं; हमारा शरीर विस्थापित हो रहा है।
  3. हम स्वयं कार्य कर रहे हैं।

क्रियाकलाप 11.3 (पृष्ठ संख्या 164)

प्रश्न 1.
कुछ स्थितियों पर विचार कीजिए जब वस्तु पर बल लगने के बावजूद वह विस्थापित नहीं होती। ऐसी स्थिति पर भी विचार कीजिए जब कोई वस्तु बल लगे बिना ही विस्थापित हो जाए। प्रत्येक के लिए जितनी स्थितियाँ आप सोच सकें, उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:
एक चट्टान पर बल लगाना, एक दीवार को धकेलना, एक मजबूत पेड़ को धकेलने की कोशिश करना, एक ट्रक को बल लगाकर धकेलने की कोशिश करना आदि वे स्थितियाँ हैं जब वस्तु पर बल लगने के बावजूद वह विस्थापित नहीं होती। जब कोई वस्तु स्थिर वेग से चलती है तो उस पर कोई बल नहीं लग रहा होता, जैसे कि स्थिर वेग से चलती हुई गेंद।

प्रश्न 2.
अपने मित्रों से विचार-विमर्श कीजिए कि क्या इन स्थितियों में कोई कार्य हुआ है।
उत्तर:
नहीं, वैज्ञानिक भाषा में इन स्थितियों में कोई कार्य नहीं हुआ। कार्य करने के लिए दो दशाओं का होना आवश्यक है –
1. वस्तु पर कोई बल लगना तथा
2. वस्तु विस्थापित होना।

क्रियाकलाप 11.4 (पृष्ठ संख्या 164)

किसी वस्तु को ऊपर उठाइए। आपके द्वारा वस्तु पर लगाए गए बल के द्वारा कार्य किया गया। वस्तु ऊपर की ओर चलती है। आपके द्वारा लगाया गया बल विस्थापन की दिशा में है। तथापि वस्तु पर गुरुत्वीय बल भी कार्यरत है।

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा बल धनात्मक कार्य कर रहा है?
उत्तर:
हमारे द्वारा लगाया गया बल धनात्मक कार्य कर रहा है क्योंकि वह विस्थापन की दिशा में है।

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प्रश्न 4.
कौन-सा बल ऋणात्मक कार्य कर रहा है ?
उत्तर:
गुरुत्वीय बल ऋणात्मक कार्य कर रहा है।

प्रश्न 5.
कारण बताइए।
उत्तर:
गुरुत्वीय बल वस्तु पर नीचे की ओर लग रहा है, अर्थात् उसके विस्थापन की दिशा के विपरीत। अत: वह ऋणात्मक कार्य कर रहा है।

क्रियाकलाप 11.5 (पृष्ठ संख्या 166)

प्रश्न 6.
ऊर्जा के कुछ स्रोतों को अध्याय में दिया गया है। ऊर्जा के अनेक अन्य स्रोत भी हैं। उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:
ऊर्जा के कुछ अन्य स्रोत हैं-तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस, वायु, विद्युत ऊर्जा, हाइड्रो ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा।

प्रश्न 7.
क्या ऊर्जा के कुछ स्रोत ऐसे भी हैं जो सूर्य के कारण नहीं हैं ?
उत्तर:
हाँ, नाभिकीय ऊर्जा, तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस, वायु, विद्युत ऊर्जा, हाइड्रो पावर ऊर्जा के ऐसे स्रोत हैं जो सूर्य के कारण नहीं हैं।

क्रियाकलाप 11.6 (पृष्ठ संख्या 167)

प्रश्न 8.
इनमें से कौन-सी गर्त सबसे अधिक गहरी है ?
उत्तर:
वह गर्त जिस पर 1.5 m की ऊँचाई से गेंद गिराई जाती है, अधिक गहरी है।

प्रश्न 9.
कौन-सा गड्डा सबसे अधिक उथला है ? ऐसा क्या है?
उत्तर:
जिस गड्डे पर 25 cm की ऊँचाई से गेंद गिराई जाती है वह सबसे अधिक उथला है क्योंकि इस ऊँचाई से गिराने पर गेंद का वेग कम होगा। अत: उसकी गतिज ऊर्जा भी कम होगी।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 10.
गेंद ने किस कारण से गड्ढा गहरा बनाया ?
उत्तर:
गेंद ने अपनी गतिज ऊर्जा के कारण गड्ढा गहरा बनाया (EK = Tmv2)। जितनी ज्यादा ऊँचाई से गेंद को गिराया जायेगा उसकी स्थितिज ऊर्जा उतनी अधिक होगी (P.E. = mgh)। गेंद के गिरने पर यही स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती है।

क्रियाकलाप 11.7 (पृष्ठ संख्या 167)

प्रश्न 11.
यह ऊर्जा कहाँ से आई ?
उत्तर:
गतिशील ट्रॉली गुटके से टकराने पर अपनी गतिज ऊर्जा उसमें स्थानान्तरित कर देती है। अतः गुटके में ऊर्जा ट्रॉली से आई।

प्रश्न 12.
पलड़े पर रखे द्रव्यमान को बढ़ाकर इस प्रयोग को दोहराइए। किस अवस्था में विस्थापन अधिक है ? किस अवस्था में किया गया कार्य अधिक होगा? .
उत्तर:
जब पलड़े पर द्रव्यमान बढ़ाया जाता है तब गुटके का विस्थापन अधिक होता है व किया गया कार्य भी अधिक होगा। द्रव्यमान बढ़ाने से ट्रॉली पर अधिक बल लगेगा व वह और तेज गति से गुटके पर टकराएगी जिससे गुटके का विस्थापन अधिक होगा व कार्य भी अधिक होगा (W = F x S)

क्रियाकलाप 11.8 (पृष्ठ संख्या 169)

प्रश्न 13.
एक रबड़ बैंड (रबड़ का छल्ला) लीजिए। इसके एक सिरे को पकड़कर दूसरे सिरे से खींचिए। छल्ला खिंच जाता है। छल्ले के एक सिरे को छोड़िए। क्या होता है ?
उत्तर:
छल्ला अपनी प्रारम्भिक लम्बाई प्राप्त करने का प्रयत्न करेगा। छल्ला अपनी खिंची हुई स्थिति में कुछ ऊर्जा उपार्जित कर लेता है।

प्रश्न 14.
खींचने पर यह ऊर्जा किस प्रकार उपार्जित कर लेता है ?
उत्तर:
रबड़ बैंड को खींचने पर हम इसमें कुछ ऊर्जा स्थानान्तरित करते हैं। बैंड में स्थानान्तरित की गई ऊर्जा इसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती है।

क्रियाकलाप 11.9 (पृष्ठ संख्या 169)

प्रश्न 15.
स्लिंकी को छोड़ने पर क्या होता है ?
उत्तर:
स्लिंकी अपनी प्रारम्भिक लम्बाई प्राप्त करने का प्रयत्न करती है।

प्रश्न 16.
खींचने पर स्लिकी ने किस प्रकार ऊर्जा उपार्जित की?
उत्तर:
स्लिकी को खींचने पर हम इसमें ऊर्जा स्थानान्तरित करते हैं। स्लिकी में स्थानान्तरित की गई ऊर्जा इसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती है।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 17.
क्या सम्पीडित करने पर भी स्लिकी ऊर्जा उपार्जित करेगी?
उत्तर:
हाँ, संपीडित करने पर भी स्लिकी में हम ऊर्जा स्थानान्तरित करेंगे जो इसमें स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगी।

क्रियाकलाप 11.10 (पृष्ठ संख्या 169)

प्रश्न 18.
एक खिलौना कार लीजिए। इसमें चाबी भरिए। कार को जमीन पर रखिए। क्या यह चलती है ?
उत्तर:
हाँ यह चलती है।

प्रश्न 19.
इसने ऊर्जा कहाँ से उपार्जित की ?
उत्तर:
खिलौना कार में चाबी भरते समय हम कार्य करते हैं। इसके अन्दर चाबी से स्थानान्तरित की गई ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाती है। यही स्थितिज ऊर्जा कार के चलने पर गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है।

प्रश्न 20.
क्या उपार्जित ऊर्जा चाबी द्वारा भरे गए लपेटनों की संख्या पर निर्भर है ?
उत्तर:
हाँ, उपार्जित ऊर्जा चाबी द्वारा भरे गए लपेटनों की संख्या पर निर्भर करती है। जितने ज्यादा लपेटन होंगे, ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी क्योंकि चाबी भरने में किया गया कार्य उतना ही अधिक होगा।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

प्रश्न 21.
आप इसकी जाँच कैसे कर सकते हैं ?
उत्तर:
कम चाबी भरने पर खिलौना कार कम दूरी तक चलेगी व ज्यादा चाबी भरने पर कार ज्यादा दूरी तक जायेगी। अत: ज्यादा लपेटनों की संख्या ज्यादा ऊर्जा संचित करेगी।

क्रियाकलाप 11.11 (पृष्ठ संख्या 169)

प्रश्न 22.
किसी वस्तु को एक निश्चित ऊँचाई तक उठाइए। इसे ऊर्जा कहाँ से प्राप्त होती है ? सोचिए तथा विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर:
वस्तु को किसी ऊँचाई तक उठाने में उसकी ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसका कारण है कि इसको ऊपर उठाने में इस पर गुरुत्व बल के विरुद्ध कार्य किया जाता है। इस प्रकार की वस्तु में विद्यमान ऊर्जा उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा है।

क्रियाकलाप 11.13 (पृष्ठ संख्या 172)

प्रश्न 23.
हरे पौधे खाना कैसे बनाते हैं ?
उत्तर:
हरे पौधों में हरित लवक (क्लोरोफिल) होता है जो कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल का उपयोग कर व सूर्य की रोशनी से ऊर्जा लेकर भोजन का निर्माण करता है। इस क्रिया को फोटोसिन्थेसिस कहते हैं।

प्रश्न 24.
उन्हें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त होती है ?
उत्तर:
उन्हें ऊर्जा सूर्य की रोशनी से प्राप्त होती है।

प्रश्न 25.
वायु एक स्थान से दूसरे स्थान को क्यों बहती है ?
उत्तर:
वायु उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर बहती है। गर्म हवा हल्की होती है और वह ऊपर उठ जाती है और उसका स्थान ठंडी हवा ले लेती है। इसी प्रकार हवा का बहाव होता रहता है।

प्रश्न 26.
कोयला तथा पेट्रोलियम जैसे ईंधन कैसे | बने ?
उत्तर:
कोयला तथा पेट्रोलियम जैसे ईंधन फॉसिल (fossil) ईंधन है। ये कई सौ वर्ष पूर्व मृत पादपों पर दाब के कारण उत्पन्न हुए हैं।

प्रश्न 27.
किस प्रकार के ऊर्जा रूपान्तरण जल चक्र को बनाए रखते हैं ?
उत्तर:
जल चक्र में सौर ऊर्जा द्वारा पृथ्वी की सतह पर उपस्थित जल का वाष्पीकरण होता है। जब जलवाष्प बादलों में संघनित (condense).होती है तो अत्यधिक ऊर्जा, जो कि वाष्पित होने में ग्रहण की है, वातावरण को प्रदान करती है। वाष्पीकरण के दौरान जल वातावरण से ऊर्जा लेता है तथा वातावरण को ठण्डा कर देता है जबकि वाष्पित जल संघनित (condense) होकर वातावरण को ऊर्जा प्रदान करता है व उसे गर्म कर देता है। यही ऊर्जा का रूपान्तरण मौसम में बदलाव लाता है।

क्रियाकलाप 11.14 (पृष्ठ संख्या 172)

प्रश्न 28.
अनेक मानव क्रियाकलापों तथा हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले जुगतों में ऊर्जा रूपान्तरण सम्मिलित है। इस प्रकार के क्रियाकलापों तथा जुगतों की एक सूची बनाइए।
प्रत्येक क्रियाकलाप या जुगत पहचानिए कि किस प्रकार ऊर्जा का रूपान्तरण हो रहा है।
उत्तर:

  1. टोस्टर विद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
  2. ब्लैडर विद्युत ऊर्जा को मशीनी ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
  3. सूर्य नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
  4. हमारा शरीर खाने से प्राप्त रासायनिक ऊर्जा को मशीनी व विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित करता है जिसके कारण हम चल पाते हैं।
  5. प्राकृतिक गैस चूल्हा जलने से प्राप्त रासायनिक ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरित करता है जिससे खाना बनता

क्रियाकलाप 11.15 (पृष्ठ संख्या 172)

प्रश्न 29.
20 kg द्रव्यमान का कोई पिण्ड 4m की ऊँचाई से मुक्त गिराया जाता है। निम्न सारणी के अनुसार प्रत्येक स्थिति में स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा की गणना करके सारणी में रिक्त स्थानों को भरिए। (परिकलन की सुविधा के लिए g का मान 10 ms-2 लीजिए).
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हल:
(i) दिया है, h = 4 m, m = 20 kg, g= 10 ms-2 स्थितिज ऊर्जा,
Ep = 20 x 10 x 4 = 800 kg ms-2 = 800J
h = 4 m पर प्रारम्भिक वेग, υ = अन्तिम वेग, v = ?
∴ Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
= \(\frac {1}{2}\) x 20 x 0 = 0
Ep + Ek = 800 + 0 = 800 J

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

(ii) Ep = mgh,
यहाँ h = 3 m
Ep = 20 x 10 x 3 = 600 J

हम जानते हैं,
v2 – u2 = 2gh
यहाँ, u = 0
∴ v2= 0 + 2 x 10 x 3
v2 = 60
∴ Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
= \(\frac {1}{2}\) x 20 x 60 = 600J
Ep + Ek = 600 + 600 = 1200J

(iii) Ep = mgh
यहाँ h = 2m
Ep = 20 x 10 x 2 = 400J

हम जानते हैं,
v2 + u2 = 2gh
यहाँ प्रारम्भिक वेग, u = 0
अतः v2 = 2 x 10 x 2 = 40
Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
=\(\frac {1}{2}\) x 20 x 40 = 400J
Ep + Ek = 400 + 400 = 800 J

(iv) यहाँ h = 1 m, m = 20 kg, g = 10 ms-2
∴ Ep = mgh
= 20 x 10 x 1 = 200 J

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हम जानते हैं,
v2 + u2 = 2gh
यहाँ u = 0
v2 = 2 x 10 x 1
v2 = 20
Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
= \(\frac {1}{2}\) x 20 x 20 = 200J
Ep + Ek = 200 + 200 = 400J

(v) भूमि से ठीक ऊपर h = 0 अतः
Ep = mgh = 0
यहाँ समस्त स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होगी।
अतः Ep + Ek = 800 J
Ep = 0
अतः Ek = 800 J
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 11 कार्य तथा ऊर्जा

क्रियाकलाप 11.16 (पृष्ठ संख्या 173)

प्रश्न 30.
प्रत्येक बच्चे द्वारा किया गया कार्य कितना है ?
उत्तर:
प्रत्येक बच्चे द्वारा किया गया कार्य समान है क्योंकि वे समान ऊँचाई तक पहुँचते हैं अतः उनका विस्थापन (d) समान है (W = Fx d)। द्रव्यमान समान है अतः बल (F = mg) भी समान लगा।

प्रश्न 31.
किस बच्चे ने दिए हुए समय, मान लीजिए 1s में अधिक कार्य किया ?
उत्तर:
A ने दिये हुए समय में अधिक कार्य किया। शक्ति, P = W/t यहाँ कार्य के समान है।
A के द्वारा लिया गया समय = 15 s
अतः A की क्षमता, P = \(\frac {W}{15}\)
W = 1J तो
P = \(\frac {1}{15}\) = 0.067 Js-1

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B द्वारा लिया गया समय = 20 s
अतः B की क्षमता = 1 = 0.05 Js-1
अतः A की क्षमता B की तुलना में ज्यादा है। स्पष्ट है कि A ने B से दिये गए समय में अधिक कार्य किया।

Bihar Board Class 9 Science कार्य तथा ऊर्जा Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न सूचीबद्ध क्रियाकलापों को ध्यान से देखिए। अपनी कार्य शब्द की व्याख्या के आधार पर तर्क दीजिए कि इनमें कार्य हो रहा है अथवा नहीं।

  1. सूमा एक तालाब में तैर रही है।
  2. एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझा उठा रखा है।
  3. एक पवन चक्की (विंड मिल) कुएँ से पानी उठा रही है।
  4. एक हरे पौधे में प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया हो रही है।
  5. एक इंजन ट्रेन को खींच रहा है।
  6. अनाज के दाने सूर्य की धूप में सूख रहे हैं।
  7. एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है।

उत्तर:
निम्न दो शर्तों के पूर्ण होने पर कार्य किया जाता है –

  1. वस्तु पर बल लग रहा हो।
  2. बल की दिशा या उसकी विपरीत दिशा में बल लगाने पर वस्तु का विस्थापन हो।

(a) तैरते समय, पानी को पीछे धकेलने के लिए बल लगाती है। अतः पानी भी सूमा पर उतना ही प्रतिक्रिया बल विपरीत दिशा में लगाता है जिसके प्रभाव से वह आगे बढ़ती है। यहाँ बल द्वारा विस्थापन होता है। अतः सूमा द्वारा तैरते समय कार्य किया जाता है।
(b) बोझा उठाते समय गधे को ऊपर की दिशा में बल लगाना पड़ता है। किन्तु बल द्वारा कोई विस्थापन नहीं हो रहा अतः गधे द्वारा शून्य कार्य हो रहा है।
(c) एक पवन चक्की कुएँ से पानी निकालने में गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य कर रही है। अतः पवन चक्की द्वारा कार्य किया जा रहा है।
(d) यहाँ पौधे की पत्तियों का विस्थापन नहीं हो रहा अतः कार्य नहीं हो रहा।
(e) इंजन द्वारा ट्रेन पर बल लगाया जा रहा है जिसके फलस्वरूप ट्रेन का बल की दिशा में विस्थापन हो रहा है। अतः इंजन द्वारा कार्य हो रहा है।
(f) अनाज के दाने सूर्य के प्रकाश में विस्थापित नहीं हो रहे। अतः उनके सूर्य की धूप में सूखने में शून्य कार्य हो रहा है।
(g) पवन ऊर्जा के द्वारा लगाए जाने वाले बल के कारण पाल – नाव गति करती है। अत: पाल-नाव का विस्थापन बल की दिशा में हो रहा है। अत: पवन द्वारा नाव पर कार्य हो रहा है।

प्रश्न 2.
एक पिण्ड को धरती से किसी कोण पर फेंका जाता है। यह एक वक्र पथ पर चलता है और वापस धरती पर आ गिरता है। पिण्ड के पथ के प्रारम्भिक तथा अन्तिम बिन्दु एकही क्षैतिज रेखा पर स्थित है। पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया गया ?
उत्तर:
किसी वस्तु पर गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऊर्ध्वाधर विस्थापन पर निर्भर करता है। ऊर्ध्वाधर विस्थापन वस्तु की प्रारम्भिक व अन्तिम ऊँचाई के बीच के अन्तर द्वारा ज्ञात किया जाता है। यहाँ वह शून्य है। गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य W = mgh
जहाँ, h = ऊर्ध्वाधर विस्थापन = 0
w = mg = 0J
अतः पिण्ड पर गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य है।

प्रश्न 3.
एक बैटरी बल्ब जलाती है। इस प्रक्रम में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जब बल्ब को बैटरी से जोड़ा जाता है तो बैटरी की रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है। बल्ब इस विद्युत ऊर्जा को प्रकाश व ऊष्मीय ऊर्जा में परिवर्तित करता है। अतः प्रक्रम में ऊर्जा परिवर्तन हुए।
रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → प्रकाश → ऊष्मा

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प्रश्न 4.
20 kg द्रव्यमान पर लगने वाला बल इसके वेग को 5 ms-1 से 2 ms-1 में परिवर्तित कर देता है। बल द्वारा किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल:
बल द्वारा किया गया कार्य वस्तु की गतिज ऊर्जा के अन्तर के बराबर होता है।
यहाँ m = 20 kg, u = 5 ms-1,v= 2 ms-1
गतिज ऊर्जा का अन्तर, W = \(\frac {1}{2}\)mv2 – \(\frac {1}{2}\)mu-1
w = \(\frac {1}{2}\) m (v2 – u2)
\(\frac {1}{2}\) x 20 (22 – 52)
W =-210 J
यहाँ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि कार्य वस्तु की गति को धीमा करने में किया गया है।

प्रश्न 5.
10 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड मेज पर A बिन्दु पर रखा है। इसे B बिन्दु तक लाया जाता है। यदि A तथा B को मिलाने वाली रेखा क्षैतिज है तो पिण्ड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
यहाँ शून्य कार्य हुआ क्योंकि गुरुत्वीय बल व विस्थापन एक-दूसरे के क्षैतिज (perpendicular) हैं।

प्रश्न 6.
मुक्त रूप से गिरते हुए पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन करती है ? कारण बताइए।
उत्तर:
नहीं, इस प्रक्रम में ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन नहीं होता। क्योंकि जब कोई वस्तु गिरती है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है। स्थितिज ऊर्जा में कमी गतिज ऊर्जा में बढ़त के बराबर होती है। इस प्रक्रम में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है। अत: ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन नहीं होता।

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प्रश्न 7.
जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन से ऊर्जा रूपान्तरण होते हैं ?
उत्तर:
साइकिल चलाते समय चलाने वाले की पेशीय ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा व साइकिल की गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती है। ऊष्मीय ऊर्जा चालक के शरीर को गर्म करती है व गतिज ऊर्जा साइकिल को गति प्रदान करती है। ऊर्जा रूपान्तरण को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है
पेशीय ऊर्जा → ऊष्मीय ऊर्जा + गतिज ऊर्जा
इस पूरे प्रक्रम में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

प्रश्न 8.
जब आप अपनी सारी शक्ति लगाकर एक बड़ी चट्टान को धकेलना चाहते हैं और इसे हिलाने में असफल हो जाते हैं तो क्या इस अवस्था में ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है ? आपके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ चली जाती
उत्तर:
जब हम एक चट्टान को धकेलने की कोशिश करते हैं तो हमारी पेशीय ऊर्जा का चट्टान पर स्थानान्तरण नहीं होता। ऊर्जा का व्यय भी नहीं होता क्योंकि पेशीय ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है जिसके कारण हमारा शरीर गर्म हो जाता है।

प्रश्न 9.
किसी घर में एक महीने में ऊर्जा की 250 यूनिटें व्यय हुईं। यह ऊर्जा जूल में कितनी होगी ?
हल:
1 यूनिट ऊर्जा = 1 किलोवाट घण्टा (kWh)
1 kWh = 3.6 x 106 J
अतः, 250 यूनिट ऊर्जा = 250 x 3.6 x 106
= 9.0 x 108J

प्रश्न 10.
40 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड धरती से 5 m की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी है ? यदि पिण्ड को मुक्त रूप से गिरने दिया जाए तो जब पिण्ड ठीक आधे रास्ते पर है उस समय इसकी गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (g= 10 ms-2)
हल:
स्थितिज ऊर्जा को निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है –
W = mgh
h = ऊर्ध्वाधर विस्थापन = 5 m
m = वस्तु का द्रव्यमान = 40 kg
g = गुरुत्वीय त्वरण = 10 m/s-2
W = 40 x 5 x 10 = 2000 J
जब पिण्ड ठीक आधे रास्ते पर होगा तब उसकी स्थितिज ऊर्जा = 2000 / 2 = 1000 J, इस बिन्दु पर उसकी स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा के बराबर होगी। यह ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार है। अत: ठीक आधे रास्ते पर उसकी गतिज ऊर्जा 1000J होगी।

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प्रश्न 11.
पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी उपग्रह पर गुरुत्व बल द्वारा कितना कार्य किया जाएगा ? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी उपग्रह पर लगने वाले गुरुत्वीय बल की दिशा उसके विस्थापन के क्षैतिज (perpendicular) होती है। अत: उपग्रह पर पृथ्वी के गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

प्रश्न 12.
क्या किसी पिण्ड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में इसका विस्थापन हो सकता है ? सोचिए। इस प्रश्न के बारे में अपने मित्रों तथा अध्यापकों से विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर
हाँ, एक समान गति से गतिशील पिण्ड में बल की अनुपस्थिति में विस्थापन हो सकता है। यदि कोई पिण्ड स्थिर वेग से गतिशील है तो उस पर लगने वाला नेट बल शून्य होगा। परन्तु पिण्ड की गति की दिशा में विस्थापन होगा। अतः बल के बिना भी विस्थापन सम्भव है।

प्रश्न 13.
कोई मनुष्य भूसे के एक गट्ठर को अपने सिर पर 30 मिनट तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कुछ कार्य किया या नहीं ? अपने उत्तर को तर्कसंगत बनाइए।
उत्तर:
कार्य करने के लिए दो दशाओं का होना आवश्यक है –
(i) वस्तु पर कोई बल लगना चाहिए
(ii) वस्तु विस्थापित होनी चाहिए, बल की या उसके विपरीत दिशा में। – जब कोई मनुष्य भूसे के एक गट्ठर को अपने सिर पर रखे रहता है तो भूसे के ढेर में कोई विस्थापन नहीं होता। गट्ठर पर गुरुत्वीय बल कार्य कर रहा है, पर मनुष्य उस पर कोई बल नहीं लगा रहा। अतः बल की अनुपस्थिति में मनुष्य द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

प्रश्न 14.
एक विद्युत हीटर (ऊष्मक) की घोषित शक्ति 1500 W है। 10 घंटे में यह कितनी ऊर्जा उपयोग करेगा ?
हल:
विद्युत हीटर द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा को निम्न व्यंजक द्वारा ज्ञात किया जा सकता है
P = \(\frac {W}{T}\)
हीटर की घोषित शक्ति, P = 1500 W = 1.5kw
हीटर के उपयोग का समय, T = 10 h
किया गया कार्य = उपयोग की गई ऊर्जा
उपयोग की गई ऊर्जा = शक्ति x समय
= 1.5 x 10 = 15 kWh
अतः हीटर 15 kWh ऊर्जा 10 घण्टे में उपयोग करेगा।

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प्रश्न 15.
जब हम किसी सरल लोलक के गोलक को एक ओर ले जाकर छोड़ते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसमें होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों की चर्चा करते हुए ऊर्जा संरक्षण के नियम को स्पष्ट कीजिए। गोलक कुछ समयपश्चात् विराम अवस्था में क्यों आ जाता है ? अंततः इसकी ऊर्जा का क्या होता है ? क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है ?
उत्तर:
ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार, ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपान्तरित हो सकती है। न तो इसकी उत्पत्ति की जा सकती है और न ही विनाश। रूपान्तरण के पहले व रूपान्तरण के पश्चात् कुल ऊर्जा सदैव अचर रहती है। सरल लोलक के गोलक का उदाहरण लेते हैं –
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जब गोलक अपनी प्रारम्भिक स्थिति P से स्थिति A या B पर पहुँचता है तो यह अपनी स्थिति P से h ऊँचाई तक जाता है। इस बिन्दु पर उसकी समस्त गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है व स्थितिज ऊर्जा शेष रहती है। अब जब गोलक बिन्दु P पर वापस आता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाती है व गतिज ऊर्जा शेष रहती है। ऊर्जा का यह रूपान्तरण गोलक के दोलन के दौरान चलता रहता है।

गोलक का दोलन हमेशा नहीं चलता, वरन् कुछ समय पश्चात् वह विराम अवस्था में आ जाता है। हवा उसकी गति का प्रतिरोध करती है। गोलक की गतिज ऊर्जा घर्षण के प्रभाव के कारण कम होती है व वह कुछ समय पश्चात् रुक जाता है। यहाँ ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन नहीं होता क्योंकि गोलक द्वारा घर्षण को पार करने में व्यय ऊर्जा वातावरण द्वारा प्राप्त की जाती है। अतः गोलक व वातावरण की कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

प्रश्न 16.
m द्रव्यमान का एक पिण्ड नियत वेग । से गतिशील है। पिण्ड पर कितना कार्य करना चाहिए कि वह विराम अवस्था में आ जाए ?
उत्तर:
m द्रव्यमान का एक पिण्ड जो एक नियत वेग v से गतिशील है, उसकी गतिज ऊर्जा होगी
Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
पिण्ड को विराम अवस्था में लाने के लिए उस पर 1 / 2 mv2 जितना कार्य करना होगा।

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प्रश्न 17.
1500 kg द्रव्यमान की कार को, जो 60 km/h के वेग से चल रही है, रोकने के लिए किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
हल:
गतिज ऊर्जा, Ek = \(\frac {1}{2}\)mv2
यहाँ, m = 1500 kg, v = 60 km/hr = 60 x\(\frac {5}{8}\) m/s
Ek = \(\frac {1}{2}\) x 1500 x (60 x \(\left(60 \times \frac{5}{18}\right)^{2}\)
= 20.8 x 104J
अतः, कार को रोकने के लिए 20.8 x 104 J कार्य करना होगा।

प्रश्न 18.
निम्न में से प्रत्येक स्थिति में m द्रव्यमान के एक पिण्ड पर एक बल F लग रहा है। विस्थापन की दिशा पश्चिम से पूर्व की ओर है जो एक लम्बे तीर से प्रदर्शित की गई है। चित्रों को ध्यानपूर्वक देखिए और बताइए कि किया गया कार्य ऋणात्मक है, धनात्मक है या शून्य है।
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उत्तर:
I दशा – इस दशा में बल की दिशा पिण्ड के विस्थापन के लम्बवत् (perpendicular) है। अत: पिंड पर बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।
II दशा – इस दशा में, बल विस्थापन की दिशा में लग रहा है। अत: बल द्वारा पिण्ड पर किया गया कार्य धनात्मक होगा।
III दशा – इस दशा में बल विस्थापन की विपरीत दिशा में लग रहा है। अतः पिण्ड पर किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 19.
सोनी कहती है कि किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। क्या आप उससे सहमत हैं ? बताइए, क्यों ?
उत्तर:
किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है चाहे उस पर कई बल कार्य कर रहे हों। ऐसा तब होता है जब उस पर लगने वाले सभी बल एक-दूसरे के विपरीत हों या नेट बल शून्य हो। एकसमान गति से गतिमान वस्तु पर लगने वाला नेट बल शून्य होता है। अतः वस्तु पर शून्य त्वरण लगता है। सोनी का कथन सही है।

प्रश्न 20.
चार युक्तियाँ जिनमें प्रत्येक की शक्ति 500W है, 10 घण्टे तक उपयोग में लाई जाती हैं। इनके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा kWh में परिकलित कीजिए।
हल:
किसी युक्ति द्वारा व्यय की ऊर्जा शक्ति के सूत्र से ज्ञात की जा सकती है।
P = \(\frac {W}{T}\)
जहाँ शक्ति, P = 500 W = 0.50 kW
समय, T = 10 h
किया गया कार्य = व्यय की गई ऊर्जा
अत: व्यय की गई ऊर्जा = शक्ति x समय
= 0.50 x 10 = 5 kWh
अतः चार समान शक्ति वाली युक्तियों द्वारा व्यय की गई ऊर्जा
= 5 x 4 = 20 kWh = 20 यूनिट

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प्रश्न 21.
मुक्त रूप से गिरता एक पिण्ड अंततः धरती तक पहुँचने पर रुक जाता है। इसकी गतिज ऊर्जा का क्या होता है ?
उत्तर:
जब कोई पिण्ड मुक्त रूप से धरती पर गिरता है तब उसकी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है। उसकी स्थितिज ऊर्जा कम होती है व गतिज ऊर्जा बढ़ती है। जब पिण्ड धरती पर पहुँचने वाला होता है तो ऊँचाई h = 0 तथा इस अवस्था में वस्तु का वेग अधिकतम होगा। अत: गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होगी। किन्तु जैसे ही पिण्ड धरती को स्पर्श करेगा, उसकी गतिज ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा व ध्वनि में रूपान्तरित हो जाती है। यह पृथ्वी के तल को नुकसान भी पहुंचा सकता है यदि इसकी गतिज ऊर्जा काफी अधिक है या पृथ्वी का तल नर्म है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 3 शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 3 शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 3 शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका

Bihar Board Class 7 Social Science शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
अनुप्रिया एवं उसकी सहेलियाँ क्यों परेशान थीं, उन सबकी परेशानी कैसे दूर हुई ?
उत्तर-
अनुप्रिया एवं उसकी सहेलियाँ परेशान थीं क्योंकि उन्हें लग रहा था कि वे मध्य विद्यालय से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाएँगी क्योंकि मध्य विद्यालय तो उनके घर से नजदीक था इसलिए उन्हें विद्यालय जाने में कोई कठिनाई नहीं होती थी पर उच्च विद्यालय उनके गाँव से लगभग 5 किमी. था, जिस कारण उन्हें विद्यालय जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता।

सरकार द्वारा साइकिल योजना शुरू करने से उन सबकी परेशानी दूर हो गयी, क्योंकि साइकिल योजना के तहत उनलोगों को साइकिल दी गयीं और वे आसानी से आगे की जारी रख सकती थी और उच्च विद्यालय आसानी से आ-जा सकती थी।

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प्रश्न 2.
लड़कियों को शिक्षा ग्रहण करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है ऐसा क्यों? कारण सहित लिखें।
उत्तर-
लड़कियों को शिक्षा ग्रहण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कितने परिवारों में आज भी लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता है और अगर पढ़ाया गया तो उन्हें उच्च शिक्षा नहीं दिलवाई जाती है। कई जगहों पर लड़कियों को न पढ़ाने का कारण होता है स्कूल का उनके घर से दूर होना। अगर विद्यालय घर से नजदीक होता है  तो उन्हें विद्यालय जाने पर कोई परेशानी नहीं होती पर विद्यालय का घर से दूर होना उनके शिक्षा पाने के रास्ते में रूकावट बन जाता है।

उनके माता-पिता उन्हें दूर जाकर पढ़ाई की अनुमति नहीं देते, क्योंकि वो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित होते हैं । बहुत से जगहों पर लड़कियों को उच्च विद्यालय की शिक्षा दिलवाने के बाद कॉलेज की पढ़ाई करने घर से दूर दूसरे शहरों में जाने की अनुमति दी जाती है और कारण बताया जाता है अकेली लड़कियों घर से दूर शहर में कैसे रहेंगी। इन सारी वजहों से लड़कियों की शिक्षा में बहुत रूकावट आती है।

प्रश्न 3.
आपकी समझ में ऐसी क्या व्यवस्था हो सकती है जिससे लड़कियों की परेशानी न हो?
उत्तर-
मेरी समझ से हर गाँव में मध्य विद्यालय के साथ-साथ उच्च विद्यालय भी होना चाहिए, जिससे लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से बहुत दूर नहीं जाना पड़े। हर जगह पर कॉलेज की भी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे लड़कियों को उच्च विद्यालय तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद

आगे की शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरी जगह जाना पड़े। अपने शहरों में उच्च शिक्षा दिलवाने वाले किसी अच्छे कॉलेजों के होने की वजह से विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है और लड़कियों की इसकी अनुमति बहुत कम ही मिल पाती है।

प्रश्न 4.
सुमित की चिन्ता का क्या कारण थी? यदि सुमित की जगह आप होते तो आपके मन में क्या-क्या विचार आते ? आपस में चर्चा करें।
उत्तर-
सुमित की चिन्ता का कारण था किताबों का समय पर न मिलना । उसकी किताबें बाजार में नहीं मिलती थी, इसलिए वह चाहकर भी अपनो किताबें बाजार से नहीं खरीद सकता था। किताब नहीं मिलने की वजह से वह कुछ पढ़ाई भी नहीं कर पाया था और उसे इस बात का डर था कि आने वाले अर्द्धवार्षिक परीक्षा में वह क्या लिखेगा। यदि सुमित की जगह मैं भी होती तो मेरे मन में भी वही विचार आता जो सुमित के मन में आया था।

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प्रश्न 5.
आपको समय पर किताब नहीं मिलने की स्थिति में प्रधानाध्यापक ने क्या प्रयास किया?
उत्तर-
समय पर किताब नहीं मिलने की स्थिति में हमारे प्रधानाध्यापक किताब नहीं मिलने की वजहों की जानकारी लेते हैं और जल्द से जल्द उन रूकावटों को दूर कर हमें कम से कम समय में किताब दिलवाते हैं।

प्रश्न 6.
मध्याह्न भोजन योजना, पोशाक योजना, भवन निर्माण योजना, आँगनबाड़ी केन्द्र इत्यादि योजनाओं के विषय में शिक्षकों से चर्चा करें कि आखिर इनकी जरूरत क्यों हैं?
उत्तर-
इन योजनाओं की जरूरत निम्नलिखित कारणों से है

1. मध्याह्न भोजन योजना – मध्याह्न भोजन योजना से बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ भोजन भी मिल जाता है और इस योजना से स्कूलों में बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। कितने बच्चे भी भूखे ही स्कूल चले आते थे जिससे पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था, पर इस योजना में भोजन मिलने से बच्चों का पेट भरा रहता है और पढ़ाई में उनका मन भी लगता है।

2. पोशाक योजना – पोशाक योजना में बच्चों को स्कूल के पोशाक बनवाने के लिए पैसे दिए जाते हैं। इस योजना से उन बच्चों को बहुत लाभ हुआ है जो स्कूल की पोशाक न होने की वजह से स्कूल नहीं जा पाते थे।

3. भवन निर्माण योजना – इस योजना से भी बहत लाभ हआ है, वैसे स्कूल जो जर्जर-जर्जर भवनों में चलाए जाते थे उनकी मरम्मत भी होने लगती है जो स्कूल खुले मैदान में चलाए जाते थे उन्हें अब स्कूल के लिए भवन भी मिल गए।

4. आँगनवाड़ी केन्द्र – आँगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों को शुरूआत की शिक्षा मिलती है। इससे उनकी नींव मजबूत होती है।

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प्रश्न 7.
क्या आप अपने विद्यालयों की पढ़ाई व्यवस्था से संतुष्ट हैं ? अपने विचार लिखें।
उत्तर-
हाँ, मैं अपने विद्यालय की पढ़ाई व्यवस्था से संतुष्ट हूँ। मेरे विद्यालय में सभी शिक्षक अपने-अपने विषयों को बहुत ही अच्छे से पढ़ाते हैं, जो हम बच्चों को बहुत ही आसानी से समझ में आ जाता है।

अगर हमें कुछ पढ़ाई समझ में नहीं आती तो हमारे शिक्षक उसे फिर से पढ़ाकर हमें अच्छे से समझाते हैं। हमें किसी प्रकार की परेशानी होने पर हमारे शिक्षक हमारी मदद करते हैं। शिक्षकों द्वारा पाठ्य-पुस्तक जल्दी से जल्दी दिलवाने की कोशिश की जाती है, पोशाक राशि भी दी जाती है। मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी है। पढ़ाई के अलावे मेरे स्कूल में खेलने की भी उचित व्यवस्था है।

प्रश्न 8.
यह दोनों स्थितियाँ क्यों उत्पन्न होती हैं ? इसके पीछे क्या-क्या कारण है?
उत्तर-
पहली स्थिति जिसमें कहा गया है कि 1000 पैदा होने वाले बच्चों में से 300 बच्चों का वजन बहुत कम होता है और 143 बच्चों की पाँच वर्ष के अंदर मृत्यु हो जाती है। ये स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान संतुलित भोजन नहीं मिल पाता। संतुलित भोजन की कमी से उनके अंदर खून की कमी यानी एनीमिया की बीमारी हो जाती है।

जिस वजह गर्भवति महिला का वजन ही बहुत कम हो जाता है, जिस वजह से होने वाले बच्चे का वजन भी कम होता है और कमजोर शरीर होने की वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियाँ होती हैं, जिससे कभी-कभी उनकी मृत्यु हो जाती है। इसका कारण है पैसे जानकारी के अभाव में गर्भवती महिला को संतुलित आहार और आयरन की गोली का नहीं मिल पाना।

दूसरी स्थिति जिसमें कहा गया है कि 100000 औरतों में से 400 औरतों की बच्चे के जन्म देते समय मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति तब होती है जब गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल न ले जाकर घर में ही प्रसव कराने की कोशिश की जाती है। घर में प्रसव कराने के लिए शिक्षित नर्स की जगह किसी महिला से प्रसव कराने से कई तरह की इनफेक्शन होने की संभावना होती है, जिससे गर्भवती महिला की मौत हो सकती है।

इसका कारण है कम उम्र की लड़कियों का गर्भवती हो जाना और पैसे के अभाव में उन्हें अस्पताल न ले जाना और कभी-कभी गाँव की महिलाओं को तो प्रसव के लिए शहर लाते-लाते रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।

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प्रश्न 9.
इन दोनों स्थितियों में बच्चों और औरतों को कैसे बचाया जा सकता है?
उत्तर-
इन दोनों स्थितियों में बच्चों और औरतों को बचाने के लिए सबसे आवश्यक है कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को संतुलित भोजन दिया जाए। उनके भोजन में हरी सब्जियाँ, दाल, दूध, फल, चावल, रोटी आदि सभी कुछ शामिल हो। उन्हें जो भी आवश्यक टीके हो वो लगवाए जाएँ। उन्हें आयरन की गोलियाँ दी जाए, जिससे उन्हें एनीमिया की बीमारी से बचाया जा सके। अगर माँ स्वस्थ रहेगी तो होने वाले बच्चे का वजन भी सही होगा।

इस तरह से प्रसव के लिए गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर जाना चाहिए। उन्हें घर में प्रसव के दौरान थोड़ी-सी भी चूक से माँ और बच्चे दोनों की जान जा सकती हैं। इसलिए प्रसव डॉक्टरों की देख-रेख में ही करवाना चाहिए । घर में प्रसव करवाने से उतनी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे कई प्रकार के इंफेक्शन्स लगने का खतरा रहता है। जो माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सबके लिए स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध करने के लिए सरकार कौन-कौन से कदम उठा सकती है? चर्चा करें।
उत्तर-
सबके लिए स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध करने के लिए सरकार को सबसे पहले पीने की उचित पानी की व्यवस्था करनी चाहिए । स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने वाली संस्थाओं स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल आदि को सुचारू ढंग से कार्य करने के निर्देश देने चाहिए। सभी अस्पतालों में बच्चों को लगाए जाने वाले जीवनरक्षक टीके और दवाएँ मुफ्त में मिलने चाहिए ।

गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के आयरन की गोली देनी चाहिए । अस्पतालों में बेड की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। डॉक्टरों की कमी को भी दूर करने की कोशिश करनी चाहिए । गाँव में भी अस्पताल खलवाने चाहिए और डॉक्टरों की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे गाँव के लोगों के बीमार होने पर वहीं उनका इलाज हो सके, क्योंकि ज्यादातर लोगों को बीमारी के दौरान शहर लाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो जाती है।

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प्रश्न 2.
शिक्षा की स्थिति बेहतर करने के लिए सरकार की क्या भूमिका होनी चाहिए? –
उत्तर-
शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार को शिक्षा को कानून का रूप देना चाहिए । शिक्षा पाना सबका हक है, पर जिसे शिक्षा नहीं मिल पा रही है, वो न्यायालय का सहारा ले सकं ! शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। सबसे पहले स्कूल की व्यवस्था को ठीक करना चाहिए, क्योंकि शिक्षा पाने के लिए यह पहला पड़ाव है। स्कूलों की व्यवस्था ठीक होने से बच्चों की पढ़ाई की नींव सही होगी। इसके लिए जरूरी है कि हर जगह गाँव में भी मध्य विद्यालय के साथ ही उच्च विद्यालय भी है।

कॉलेजों की भी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से बहुत दूर नहीं जाना पड़े। क्योंकि कुछ विद्यार्थियों खासकर लड़कियों को घर से दूर जाकर पढ़ाई करने की अनुमति नहीं दी जाती है और उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। रोजगार के क्षेत्र में बढ़ोतरी करने से भी लोग शिक्षा की ओर आकर्षित होंगे। इन सबके साथ ही सरकार को जनता के लिए शिक्षा के महत्व को भी बताते रहे।

प्रश्न 3.
सर्वे क्यों किया जाता है ? आपने इस पाठ में किए गए सर्वे से क्या समझे?
उत्तर-
किसी विषय के बारे में जनता की क्या राय है, उस विषय के बारे में उनके बीच कितनी जानकारी है और इन बातों का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। इन सारी बातों की जानकारी के लिए सर्वे किया जाता है। इस पाठ में किए गए सर्वे का मुख्य विषय है बच्चों के स्कूल नहीं जाने ‘के कारण का पता लगाना ।

इस सर्वे में यह पता लगाने की कोशिश की गयी थी कि जो बच्चे कभी स्कूल नहीं गये उनके स्कूल नहीं जाने का कारण, ओ। बच्चे विद्यालय जाते थे पर बीच में ही उन्होंने विद्यालय जाना छोड़ दिया इसका क्या कारण है जो बच्चे बाल मजदूर हैं पढ़ने-लिखने के समय में काम करते हैं, इसका क्या कारण है?

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 3 शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका

प्रश्न 4.
एक ही बच्चे में जो सरकारी स्कूल, निजी स्कूल, निजी स्कूल या अन्य किसी स्कूल में पढ़ते हैं उनसे बातचीत करके पता करें कि इन स्कूलों में क्या समान और क्या अन्तर है।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 7 Social Science शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका Notes

पाठ का सार संक्षेप

दुगी हुई सरकार से लोगों की यह अपेक्षा होती है कि वह जनता की लोकतांत्रिक अधिकार जैसे सड़क, बिजली; कानून व्यवस्था, आपदा के समय लोगों को राहत दिलवाने का कार्य करें। इस अध्याय में हमलोग यही जानेंगे की सरकार के कामों से शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कार्य कैसे जुड़ी हुई है।

हमारे जीवन के विकास के लिए शिक्षा. बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। शिक्षा के द्वारा हमें दुनिया को समझने का मौका मिलता है, शिक्षा से हमें आत्मविश्वास मिलता है और हम खुद को और दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति अपनी रूचि से काम कर पाने में सक्षम होता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 3 शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका

समाज की किसी समस्या पर लोग मिल-जुलकर बातचीत करते और उस समस्या पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, फिर उस समस्या का समाधान निकालते हैं। शिक्षित व्यक्ति अदालत में अपना बचाव करने का कार्य, बैंक से ऋण लेना, वैज्ञानिक ढंग से संग करना और सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी लेने का कार्य आसानी से कर सकता है। एक शिक्षित व्यक्ति आधुनिक सामाजिक कार्यों में भागीदारी करने में तथा राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने में खुद को सक्षम महसूस करते हैं।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2

प्रश्न 1.
पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में x और । के मान ज्ञात कीजिए और फिर दाइए कि AB || CD है।
उत्तर:
गाना जो रेखा AB और CD को काटही नह नियंक रेखा PQ है तषा वह AB और CD को क्रमशः R तथा S पर काली है जैसा आकृति में दर्शाया गया है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
∴ x = y (एकान्तर कोण)
तथा y = ∠CSQ (शीर्षाभिमुख कोण)
अत: y = 130°
⇒ x = y = 130°
अत: AB || CD
ABCD.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2

प्रश्न 2.
पाठ्य-पुस्तक में दी गई आकृति में, यदि AB || CD, CD || EF और y : z = 3 : 7 है तो x का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना तिर्षक रेखा PQ, AB, CD तथा EF को क्रमशः L, M तथा N पर काटती है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
∠CMN = 180° – ∠CML
∠CMN – 180° – y
तथा ∠CMN – ∠FNM (एकान्तर कोप)
180° – y = z
y + z = 180° ……..(1)
दिया गया है, y : z = 3 : 7
अत: y = 3λ, z = 7λ
ये मान समी. (1) में रखने पर,
y + z = 180°
3λ + 7λ = 180° ⇒ 10λ = 180°
λ – \(\frac{180°}{10°}\) = 18°
⇒ y = 3 × 18° = 54°
z = 7 × 18 = 126°
x + y = 180°
(लगातार अभ्यंतर कोण सम्पूरक होते हैं)
⇒ x = 180° – 54°
x = 126°.

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प्रश्न 3.
आकृति में, यदि ” AB || CD, EF ⊥ CD और ∠GED ∠AGE, ∠GEF और ∠FGE ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
उत्तर:
∠AGE = ∠GED (एकान्तर कोग)
∠AGE = 126° (∵ ∠GED = 126°)
∠GEF + ∠FED = 126°
∠GEF = 126° – 90° = 36°
अब, ∆GEF में.
∠GEF + ∠EFG + ∠FGE = 180°
360° + 90° + ∠FGE = 180°
∠FGE = 180 – 126° = 54°
अत: ∠AGE = 126°, ∠GEF = 36° ∠FGE = 54°.

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प्रश्न 4.
पाठ्य पुस्तक में दी गाई आकृति में, यदि PQ || ST, ∠PQR = 110° और ∠RST = 130° है, तो ∠QRS ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
रेखा PQ को बनाया तथा जहाँ यह रेखा RS को काटे इस बिंदु को L मान लिया। (देखें आकृति)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
PL || ST
तथा ∠SLQ = ∠LST (एकान्तर कोग)
⇒ ∠SLQ = 130°
∴ ∠QLR + ∠QLS = 180° (रेखायुग्म)
⇒ ∠QLR = 180° – ∠QLS
= 180° – 130° = 50
तथा ∠PQR + ∠LQR = 180° (रेखा बुग्म)
⇒ ∠LQR = 180° – 110° = 70°
अब, ∆QRL में,
∠QRL + ∠RLQ + ∠LQR = 180°
⇒ ∠QRL + 50° + 70 = 180°
⇒ ∠QRL = 180° – 120° = 60°
अत: ∠QRS = ∠QRL = 60°. (∵ PL || ST)

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प्रश्न 5.
आकृति में, यदि AB || CD, ∠APQ = 50° और ∠PRD = 127° है. तो x और y ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
उत्तर:
दो गई आकृति में
∠APQ = ∠PQR (एकान्तर कोण)
∠PQR = 50°
अत: x = 50°
अब, ∠APR – ∠PRD (एकान्तर कोण)
⇒ ∠APQ + ∠QPR = 127°
⇒ 50° + y = 127°
y = 77°
अतः x = 50° तथा y = 77°.

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प्रश्न 6.
पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में, PQ और RS दो दर्पण है जो एक दूसरे के समानर रखे गए हैं। एक आपतन किरण (incident ray) AB, दर्पण PQ से B पर टकराती है और परावर्तित किरण (reflected ray) पथ BC पर चलकर दर्पण RS से C पर टकराती है तथा पुनः CD के अनूदिश परावर्तित हो जाती है। सिद्ध कीजिए कि AB || CD है।
उत्तर:
दिया गया है. PQ और RS दो दर्पण है, जो एक दूसरे के समान्तर है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 6 रेखाएँ और कोण Ex 6.2
अत: PQ || RS
माना, BN ⊥ PQ तथा CM ⊥ RS. (आकृति)
आकृति में, माना ∠DCM = ∠1, ∠MCB = ∠2, ∠CBN = ∠3 तथा ∠NBA = ∠4.
तथा ∠2 = ∠3(एकान्तर कोण) …….. (1)
तथा ∠1 = ∠2 व ∠3 = ∠4
(परावर्तन के नियम के अनुसार) …….. (2)
अतः समी. (1) व (2) से,
∠1 = ∠4
समी. (1) व (3) को जोड़ने पर,
∠1 + ∠2 = ∠3 + ∠4
∠DCB = ∠CBA
अर्थात् एकान्तार कोण बराबर है।
अतः AB ||CD. इति सिद्धम्

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Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार Questions and Answers

प्रश्न 1.
अलंकार किसे कहते हैं ? साहित्य में इनकी क्या उपयोगिता है ?
उत्तर-
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है-सजावट, शृंगार, आभूषण, गहना आदि। साहित्य में । अलंकार शब्द का प्रयोग काव्य-सौंदर्य के लिए होता है। संस्कृत के विद्वानों के अनुसार ‘अलंकरोति इति अलंकारः’ अर्थात् जो अलंकृत करे या शोभा बढ़ाए, उसे अलंकार कहते हैं। दूसरे शब्दों में, काव्य की सुंदरता बढ़ाने वाले गुण-धर्म अलंकार कहलाते हैं।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

प्रश्न 2.
अलंकारों के कितने भेद हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
मुख्यतः अलंकारों के दो भेद हैं शब्दालंकार और अर्थालंकारा

शब्दालकार

शब्दालंकार शब्द द्वारा काव्य में चमत्कार उत्पन्न करते हैं। यदि जिस शब्द द्वारा चमत्कार उत्पन्न हो रहा है, उसे हटाकर अन्य समान शब्द वहाँ रख दिया जाए, तो वहाँ अलंकार नहीं रहता। अनुप्रास, यमक,ग्लेष आदि शब्दालंकार हैं। इनमें सौंदर्य ‘शब्द’ पर आश्रित रहता है।

1. अनुप्रास

प्रश्न
अनुप्रास अलंकार की परिभाषा देते हुए कुछ उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
जहाँ व्यंजनों की आवृत्ति ध्वनि-सौंदर्य को बढ़ाए, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। व्यंजनों की आवृत्ति एक विशेष क्रम से होनी चाहिए। सौंदर्य-वर्धक व्यंजन शब्दों के प्रारंभ, मध्य या अंत में आने चाहिए।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

उदाहरणतया-

  1. कल कानन कुंडल मोरपखा उर पै बनमाल बिराजति है।
  2. जो खग हौं तो बसैरो करौ मिलि-
    कालिंदी कुल कदंब की डारनि।

स्पष्टीकरण-इन उदाहरणों में ‘क’, ‘ब’, ‘र’ तथा ‘क’ वर्गों की आवृत्ति से सौंदर्य में वृद्धि

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार
अन्य उदाहरण-

  1. कायर क्रूर कपूत कुचाली यों ही मर जाते हैं। (‘क’ की आवृत्ति)
  2. मुदित महीपति मंदिर आए।
    सेवक सचिव सुमंत बुलाए। (‘स’ की आवृत्ति)
  3. कंकन किकिन नुपूर धुनि सुनि।
    कहत लखन सन राम हृदय गुनि।। (‘क’ तथा ‘न’ की आवृत्ति)
  4. तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए। (‘त’ की आवृत्ति)
  5. मधुर-मधुर मुस्कान मनोहर, मनुज वेश का उजियाला। (‘म’ की आवृत्ति)
  6. कानन कठिन भयंकर भारी, घोर घाम वारि बयारी। (‘क’, ‘र’ तथा ‘म’ की आवृत्ति)
  7. चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल थल में। (‘च’ तथा ‘ल’ की आवृत्ति)
  8. भुज भुजगेस की बै संगिनी भुगिनी-सी
    खेदि खेदि खाती दीह दारुन दलन को
  9. मुदित महीपति मंदिर आए।
  10.  बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

2. यमक

प्रश्न
यमक अलंकार की परिभाषा देते हुए कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
‘यमक’ का शाब्दिक अर्थ है ‘जोड़ा’। ‘वहै शब्द पुनि-पुनि परै अर्थ भिन्न-ही-भिन्न। अर्थात् जब कविता में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आता है किंतु हर बार अर्थ भिन्न होता है, वहाँ यमक अलंकार होता है। उदाहरणार्थ-

1. काली घटा का घमंड घटा।
स्पष्टीकरण-यहाँ ‘घटा’ शब्द दो बार आया है। दोनों जगह अर्थ में भिन्नता है।
घटा-वर्षाकालीन घुमड़ती हुई बादलों की माला।
घटा-कम हुआ।
2. कहै कवि बेनी-बेनी ब्याल की चुराई लीनी।
-यहाँ पहले बेनी का तात्पर्य है ‘कवि बेनी प्रसाद’ तथा दूसरे का तात्पर्य है ‘चोटी’।

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अन्य उदाहरण

  1. कनक-कनक तै सौगुनी मादकता अधिकाय।
    वा खाए बौराए जग या पाए बौराया।
  2. माला फेरत युग भया, मिटा न मन का फेर।
    करका मनका डारि दे, मन का मनका फेर।।
  3. जेते तुम तारे, तेरे नभ में न तारे हैं।
  4. खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा।
  5. पच्छी परछीने ऐसे परे पर छीने बीर।
    तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के।

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3. श्लेष

प्रश्न
श्लेष अलंकार की परिभाषा देते हुए कुछ उदाहरण प्रस्तुत कीजिए। अथवा, श्लेष अलंकार का एक उदाहरण दीजिए। .
उत्तर-
श्लेष’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘चिपकना’। अतः जहाँ एक शब्द से दो या दो से अधिक अर्थ प्रकट होते हैं, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

उदाहरणतया –

1. मधुवन की छाती को देखो.
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
यहाँ ‘कलियाँ’ शब्द का प्रयोग एक बार हुआ है, किंतु इसमें अर्थ की भिन्नता है।
(क) खिलने से पूर्व फूल की दशा।
(ख) यौवन-पूर्व की अवस्था।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

2. जो रहीम गति दीप की कुल कपूत गति सोय।।
बारे उरियारो करै बढ़े अंधेरा होय।।
यहाँ ‘बारे’ और ‘बढ़े’ शब्दों में श्लेष है।
‘बारे’ का एक अर्थ है-‘जलाने पर’ तथा दूसरा अर्थ है ‘बचपन में।
‘बढ़े’ के दो अर्थ हैं-‘बुझने पर’ तथा ‘बड़े होने पर।

अन्य उदाहरण

  1. ‘रहिमन’ पानी रखिए बिन पानी सब सून।
    पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।।
    इस दोहे में ‘पानी’ के तीन अर्थ हैं-चमक, प्रतिष्ठा और जल।
  2. मेरी भव-बाधा हरों राधा नागरि सोइ।
    जा तन की झाई परै स्यामु हरित दुति होय।।
  3. सुबरन को ढूँढे फिरत, कवि, व्यभिचारी चोर।

अर्थालंकार

अर्थालंकार में सौंदर्य ‘भाव’ से संबंधित होता है, ‘शब्द’ से नहीं। अर्थालंकार चमत्कार की. बजाय भाव की अनुभूति में तीव्रता लाते हैं अथवा भाव संबंधी चमत्कार उत्पन्न करते हैं। उपमा. रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अन्योक्ति आदि अर्थालंकार है।

4. उपमा

प्रश्न
‘उपमा’ की परिभाषा देते हुए उसके तत्त्वों का परिचय दीजिए तथा उदाहरणों द्वारा अलंकार स्पष्ट कीजिए। .
उत्तर-
उपमा का अर्थ है ‘समानता’। जहाँ किसी वस्तु अथवा प्राणी के गुण, धर्म, स्वभाव । और शोभा को व्यक्त करने के लिए उसी के समान गुण, धर्म वाली किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु अथवा प्राणी से उसकी समानता की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। जैसे- ‘चाँद-सा सुंदर मुख’।

उपमा अलंकार को समझने के लिए निम्नलिखित चार अंगों को समझना आवश्यक है
(क) उपमेय_जिसकी उपमा दी जाए अर्थात् जिसका वर्णन हो रहा है, उसे उपमेय या प्रस्तुत कहते हैं। ‘चाँद-सा सुंदर मुख’ में ‘मुख’ उपमेय है।
(ख) उपमान- वह प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी जिससे उपमेय की समानता प्रकट की जाए, उपमान कहलाता है। उसे अप्रस्तुत भी कहते हैं। ऊपर के उदाहरण में ‘चांद’ उपमेय है।
(ग) साधारण धर्म- उपमेय और उपमान के समान गुण या विशेषता व्यक्त करने वाले शब्द साधारण धर्म कहलाते हैं। ऊपर के उदाहरण में ‘सुंदर’ साधारण धर्म को बता रहा है।
(घ) वाचक शब्द- जिन शब्दों की सहायता से उपमेय और उपमान में समानता प्रकट की जाती है और उपमा अलंकार की पहचान होती है उन्हें वाचक शब्द कहते हैं। सा, सी, सम, जैसी, ज्यों, के समान-आदि शब्द वाचक शब्द कहलाते हैं।
यदि ये चारों तत्त्व उपस्थित हों तो ‘पूर्णोपमा’ होती है; परंतु कई बार इसमें से एक या दो लुप्त भी हो जाते हैं, तब उसे ‘लुप्तोपमा’ कहते हैं।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

पूर्णोपमा का उदाहरण-

  1. हाय फूल-सी कोमल बच्ची। हुई राख की थी ढेरी।
    -यहाँ ‘फूल’ उपमान, ‘बच्ची’ उपमेय, ‘कोमल’ साधारण धर्म तथा ‘सी’ वाचक शब्द है। अतः पूर्णोपमा अलंकार है।
  2. रति सम रमणीय मूर्ति राधा की।
    -यहाँ ‘राधा की मूर्ति’ उपमेय, ‘रति’ उपमान, ‘रमणीय’ साधारण धर्म तथा ‘सम’ वाचक शब्द है। अतः पूर्णोपमा अलंकार है।

अन्य उदाहरण-

  1. पीपर पात सरिस मन डोला।
  2. मुख बाल रवि सम लाल होकर ज्वाला-सा बोधित हुआ।

लुप्तोपमा के उदाहरण-
1. यह देखिए, अरविंद से शिशुवृंद कैसे सो रहे।
-यहाँ ‘शिशुवृंद’ उपमेय, अरविंद’ उपमान तथा ‘से’ वाचक शब्द है। साधारण धर्म लुप्त है। अतः ‘लुप्तोपमा अलंकार है।

2. पड़ी थी बिजली-सी विकराला .
-यहाँ बिजली’ उपमान, ‘विकराल’ साधारण धर्म तथा ‘सी’ वाचक शब्द है, परंतु ‘उपमेय’ लुप्त है। अतः लुप्तोपमा अलंकार है।

अन्य उदाहरण-

  1. वह नव नलिनी से नयन वाला कहाँ है ?
  2. नदियाँ जिनकी यशधारा-सी,
    बहती हैं अब भी निशि-बासर।
  3. मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला।
  4. असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी।
  5. जो नत हुआ, वह मृत हुआ, ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।
  6. सूरदास अबला हम भोरी, गुर चाँदी ज्यौं पागी।

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5. रूपक

प्रश्न
रूपक अलंकार की परिभाषा देते हुए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- जहाँ गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। यह आरोप कल्पित होता है। इसमें उपमेय और उपमान में अभिन्नता होने पर भी दोनों साथ-साथ विद्यमान रहते हैं। यथा

1. चरण कमल बंदौं हरिराई।
यहाँ सादृश्य के कारण उपमेय ‘चरण’ पर उपमान ‘कमल’ का आरोप कर दिया गया है। चरण पर कमल का आरोप कल्पित है। चरण वास्तव में कमल नहीं बन सकता, परंतु सदृश्य के कारण यहाँ चरण को कमल मान लिया गया है। दोनों की अभिन्नता स्थापित होने पर भी दोनों साथ-साथ विद्यमान हैं, अत: रूपक अलंकार है।

2. मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहौं।
-यहाँ चंद्रमा (उपमेय) पर खिलौना (उपमान) का आरोप है। .. अन्य उदाहरण
(क) सक-प्राणियों वत्तमनोमयूर अहा नचा रहा।
(ख) संत-हस गन गहहिं पय, परिहतारि विकार।
(ग) पायो जी मनम-रतन धन पायो।
(घ) सुख चपला-सुःख घन में,
उलझा है चंचलन कुरंग।
(ङ) बीती विभावरी जागरी
अंबर पनघट में डुबो रही
तारा-घट ऊषा-नागरी।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

6. उत्प्रेक्षा

प्रश्न
उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा देते हुए दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
दोनों वस्तुओं में कोई समान धर्म होने के कारण ऐसी संभावना करने के लिए कुछ शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जो उत्प्रेक्षा के वाचक शब्द कहलाते हैं, यथा-
मानो, मनो, मनु, मनहुँ, जानो, जनु आदि।
उदाहरण- कहती हुई यों उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गए पंकज नए।।

प्रस्तुत पाश में उत्तरा के अरु-पूरित नेत्र उपमेय हैं, जिनमें कमल की पंखुड़ियों पर पड़े हुए ओस-कणों की (उपमान की) कल्पना की गई है। इसी प्रकार निम्नलिखित पंक्तियों में भी उत्प्रेक्षा अलंकार देखा जा सकता है-

उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उनका लगा।
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।।

अन्य उदाहरण-

सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात!
मनो नीलमणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।।

प्रस्तुत दोहे में ‘पीत पट’ में ‘नीलमणि सैल’ पर ‘प्रभात’ के ‘आतप’ के आरोप की ‘मानो’ । शब्द द्वारा संभावना की गई है, अतः उत्प्रेक्षा अलंकार है।

पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।।

7. मानवीकरण

जहाँ जड़ प्रकृति या वस्तु पर मानवीय भावनाओं या क्रियाओं का आरोप हो, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है। सरल शब्दों में, जहाँ किसी अचेतन वस्तु को मानत की तरह गतिविधि करता दिखाया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।

उदाहरण. 1.
मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के
माधीकरण यहाँ मेघों को सजा-संवरा और बना-ठना दिखाया गया है।

उदाहरण 2.
दिवसावसन का समय
मेघमय आसमान से उतर रही
संध्या-सुंदरी परी-सी धीरे-धीरे

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण अलंकार

सायीकरण यहाँ संध्या को एक सुंदरी के रूप से धीरे-धीरे आसमान से उतरता हुआ दिखाया गया है। अतः मानवीकरण है।
अन्य उदाहरण-
(क) खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा
किसलय का अंचल डोल रहा।
लो यह लतिका भी भर लाई
मधु मुकुल नवल रस गागरी।।

(ख)तनकर भाला यह बोल उठा-
राणा मुझको विश्राम न दे
मुझको शोणित की प्यास लगी
बढ़ने दे, शोणित पीने दे।
(ग) मैं तो मात्र मृत्तिका हूँ।
(घ) कार्तिक की एक हँसमुख सुबह
नदी-तट से लौटती गंगा नहाकर।