Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 11 कला क्षेत्र में परिवर्तन

Bihar Board Class 8 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 3 Chapter 11 कला क्षेत्र में परिवर्तन Text Book Questions and Answers, Notes.

Bihar Board Class 8 Social Science History Solutions Chapter 11 कला क्षेत्र में परिवर्तन

Bihar Board Class 8 Social Science कला क्षेत्र में परिवर्तन Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उत्कीर्ण चित्र’ व ‘अलबम’ क्या थे?
उत्तर-
उत्कीर्ण चित्र लकड़ी या धातु के छापे से कागज पर बनाये गये चित्र को उत्कीर्ण चित्र कहा गया। अलबम-चित्र रखने की किताब को अलबम कहते हैं।

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प्रश्न 2.
रूपचित्र क्या था ?
उत्तर-
किसी व्यक्ति का ऐसा चित्र जिसमें उसके चेहरे एवं हाव-भाव पर विशेष जोर दिया गया हो । इस शैली के बने चित्र रूपचित्र कहलाते थे।

प्रश्न 3.
किरमिच क्या था ?
उत्तर-
गाढ़ा या मोटा कपड़ा जिस पर चित्र उकेरा जाता था, उसे कलाकार किरमिच कहते थे।

प्रश्न 4.
पाश्चात्य चित्रकारों ने अंग्रेजों की श्रेष्ठता को दर्शाने के लिए चित्रकला की कौन-सी विषय, शैली एवं परम्परा को अपनाया। कक्षा में इसकी चर्चा करें।
उत्तर-
पाश्चात्य चित्रकारों ने अंग्रेजी की श्रेष्ठता को दर्शाने के लिए भारत के भूदृश्यों के चित्रण को अपनी चित्रकारी का विषय बनाया। वे भारत के प्राचीन भू-दृश्यों में वैसे विषय को प्रमुखता दिये जिससे भारत की गरीबी झलके । साथ ही अंग्रेजों द्वारा किये गये आधुनिकीकरण कार्यों को प्रमुखता से चित्रित कर अंग्रेजों के वैभव एवं श्रेष्ठता को सिद्ध किये।

इसके लिए यूरोपीय कलाकारों ने उत्कीर्ण चित्रों की अलबम बनायी जिसे. ब्रिटेनवासी उत्सुकता से भारत को जानने के लिए महंगे दामों में भी खरीदना चाहते थे। अंग्रेजी चित्रकारों ने अंग्रेजी वैभव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए ‘रूपचित्रण’ को प्रचलित यूरोपीय शैली को अपनाया जिसमें चित्र आदमकद होते थे। ये उनकी परम्परागत शैली थी।

प्रश्न 5.
औपनिवेशिक चित्रकला एवं राष्ट्रवादी चित्रकला में अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर-
औपनिवेशिक चित्रकला की परम्परागत शैली जहाँ ‘रूपचित्रण’ थी, यानी आदमकद चित्र वहीं राष्ट्रवादी चित्रकला शैली ‘तेल चित्रकारी’ थी। जहाँ औपनिवेशिक चित्रकला के अंग्रेज कलाकार अपने देशवासियों की श्रेष्ठता व वैभव को सिद्ध करना चाहते थे, वहीं भारतीय, राष्ट्रवादी चित्रकला अपने चित्रों के माध्यम से राष्ट्रवादी संदेश देते थे। साथ ही वे रामायण, महाभारत’

और पौराणिक कहानियों के नाटकीय दृश्यों को ‘किरमिच’ पर चित्रांकित कर भारत के शानदार वे वैभवशाली अतीत को दर्शकर अंग्रेजों के वैभव को करारा जवाब दे रहे थे।

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प्रश्न 6.
कक्षा 7 के इकाई 8 में चित्रित लघुचित्रों को देखकर चित्र 12 की तुलना कीजिए? क्या आपको कोई समानता-असमानता दिखता है ?
उत्तर-
कक्षा-7 के इकाई 8 में चित्रित लघुचित्रों की तुलना में प्रस्तुत पाठ __ में दिये गये चित्र-12 में साफ तौर पर असमानता दिखती है। जहाँ कक्षा-7 के चित्रित लघुचित्र पूरे कैनवास पर चित्रित हैं वहीं कक्षा-8 के चित्र में मूल चित्र मात्र ऊपर एक छोटे से क्षेत्र में है जबकि अधिकतर हिस्से में धुंधली पृष्ठभूमि में हल्के रंगों के उपयोग से कन्ट्रास्ट यानी विरोधाभास उत्पन्न करने की कोशिश की है चित्रकार अवनीन्द्रनाथ टैगोर ने । ‘मेरी माँ’ शीर्षक की उनकी इस चित्र पर स्पष्ट रूप से जापानी कलाकारों के प्रभाव अभिव्यक्त हो रहे हैं।

प्रश्न 7.
आप अपने गाँव, कस्बा एवं शहर में स्थित भवन एवं इमारतों की सूची बनाएँ एवं यह बताएं कि उनका निर्माण किस स्थापत्य शैली में हुआ है ?
उत्तर-
संकेत यह परियोजना कार्य है। अपने शिक्षक के सहयोग, परामर्श व दिशा-निर्देशन में इसे सम्पन्न करें ।

प्रश्न 8.
आर्थिक राष्ट्रवाद क्या है ?
उत्तर-
अंग्रेजी शासन की आर्थिक आलोचना के माध्यम से भारतीय राष्ट्रवाद की आर्थिक बुनियाद तैयार करने के प्रयास को आर्थिक राष्ट्रवाद कहा जाता है।

प्रश्न 9.
साहित्यिक देशभक्ति क्या थी?
उत्तर-
देशभक्तिपूर्ण विचारों की अभिव्यक्ति के लिए साहित्य को माध्यम बनाना साहित्यिक देशभक्ति कहलाया।

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प्रश्न 10.
साहित्य मे किन राष्ट्रवादी तत्वों को उजागर किया गया है, कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर-
भारतीय स्वाधीनता संघर्ष में भारतीय साहित्य ने महत्वपूर्ण , भूमिका निभाई है। उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक में जब राष्ट्रवादी विचार उभार लेने लगा देश में तब, विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों ने साहित्य को देश-भक्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिए प्रयोग में लाने लगे। साहित्य में देश की गुलामी को दूर करने, पराधीनता के बोध को फेंक डालने और स्वतंत्रता की जरूरत को स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलने लगी। साथ ही, साहित्य ने देश की आजादी के लिए जनसाधारण को हर प्रकार से बलिदान करने के लिए उत्प्रेरित किया।

अभ्यास-प्रश्न 

प्रश्न 1.
सही या गलत बताएँ

  1. साहित्य में पराधीनता के बोध एवं स्वतंत्रता की जरूरतों को स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलने लगी थी।
  2. प्रेमचंद ने ‘आनंदमठ’ की रचना की थी।
  3. रमेशचन्द्र दत्त के उपन्यास में हिन्दू समर्थक प्रवृत्ति देखने क मिलती है।
  4. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने भारतीय धन के लूट को नाटक के माध्यम से पर्दाफाश किया है।
  5. वंदे मातरम्’ गीत, की रचना बंकिमचन्द्र चटर्जी ने की थी।

उत्तर-

  1. सही
  2. गलत
  3. सही
  4. सही
  5. सही

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों को भरें

  1. लकड़ी या धातु के छापे से कागज पर बनाई गई तस्वीर को ……….. कहा जाता है।
  2. औपनिवेशिक काल में बनाये गये छविचित्र ………… होते थे ।
  3. अंग्रेजों की विजय को दर्शाने के लिए …………. की चित्रकारी की जाती थी।
  4. एशियाई कला आंदोलन को प्रोत्साहित करने वाले ……….. कलाकार थे।

उत्तर-

  1. उत्कीर्ण चित्र
  2. रूपचित्रण
  3. युद्ध के दृश्यों
  4. जापानी।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के जोड़े बनाएँ

  1. सेन्ट्रल पोस्ट ऑफिस, कलकत्ता – (i) गोथिक शैली
  2. विक्टोरिया टर्मिनस रेलवे स्टेशन, बम्बई – (ii) इंडो सारसेनिक शैली
  3. मद्रास लॉ कोर्ट – (iii) इंडो ग्रीक शैली

उत्तर-

  1. सेन्ट्रल पोस्ट ऑफिस, कलकत्ता – (iii) इंडो ग्रीक शैली
  2. विक्टोयिा टर्मिनस रेलवे स्टेशन, बम्बई – (i) गोथिक शैली
  3. मद्रास लॉ कोर्ट – (ii) इंडो सारासेनिक शैली

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आइए विचार करें 

प्रश्न (i)
मधुबनी पेंटिंग किस प्रकार की कला शैली थी ? इसके अंतर्गत किन विषयों को ध्यान में रखकर चित्र बनाये जाते थे?
उत्तर-
मधुबनी पेंटिंग की कला शैली बिहार की कला शैली है। इसमें प्रकृति, धर्म और सामाजिक संस्कारों, पारिवारिक अनुष्ठानों जैसे विषयों को ध्यान में रखकर चित्र बनाये जाते थे।

प्रश्न (ii)
ब्रिटिश चित्रकारों ने अंग्रेजों की श्रेष्ठता एवं भारतीयों की कमतर हैसियत को दिखाने के लिए किस तरह के चित्रों को दर्शाया है ?
उत्तर-
ब्रिटिश चित्रकारों ने भारत को एक आदिम देश साबित करने के लिए यहां के गुजरे जमाने की टूटी-फूटी भवनों एवं इमारतों के खंडहर के चित्र बनाए । ऐसी सभ्यता के अवशेष दिखाए जो पतन की ओर अग्रसर थी। ये चित्र भारतीयों की कमतर हैसियत को दिखाने के लिए बनाये गये । जबकि ब्रिटिशों या अंग्रेजों की श्रेष्ठता को दिखाने के लिए उनके द्वारा बनायी गयी चौड़ी सड़कें तथा यूरोपीय शैली में बनाई गई विशाल एवं भव्य इमारतों-भवनों को यानी उनके आधुनिकीकरण को अपने चित्र में स्थान दिया।

प्रश्न (iii)
“उन्नीसवीं सदी की इमारतें अंग्रेजों की श्रेष्ठता, अधिकार, सत्ता की प्रतीक एवं उनकी राष्ट्रवादी विचारों का प्रतिनिधित्व करती हैं।” इस कथन के आधार पर स्थापत्य कला शैली की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर-
जब भारत में ब्रिटिश शासन को स्थिरता प्राप्त हुई तब उन्हें बुनियादी तौर पर रक्षा, प्रशासन, आवास और वाणिज्य जैसी इमारतों की पूर्ति के लिए भवनों एवं इमारतों की जरूरत होने लगी । ‘उन्नीसवीं सदी से शहरों में बनने वाली इमारतों में किले, सरकारी दफ्तरों, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक, इमारतें, व्यावसायिक भवन आदि प्रमुख थीं। ये इमारतें अंग्रेजों की श्रेष्ठता, अधिकार, सत्ता की प्रतीक तथा उनकी राष्ट्रवादी विचारों का प्रतिनिधित्व भी करती हैं।

सार्वजनिक भवनों के लिए मोटे तौर पर उन्होंने तीन स्थापत्य शैलियों का ‘प्रयोग किया। इनमें से एक ‘ग्रीको रोमन स्थापत्य शैली’ थी। मूल रूप से रोम की इस भवन निर्माण शैली को अंग्रेजों ने यूरोपीय पुनर्जागरण के दौरान पुनर्जीवित किया था । बड़े-बड़े स्तम्भों के पीछे रेखागणितीय संरचनाओं एवं गुम्बद का निर्माण इस शैली की विशेषता थी। अन्य शैलियां थीं—’गॉथिक शैली’ एवं ‘इंडो-सारासेनिक शैली’।

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प्रश्न (iv)
साहित्यिक देशभक्ति से आप क्या समझते हैं ? विचार करें?
उत्तर-
जब साहित्यकार देशभक्तिपूर्ण उद्देश्यों के लिए साहित्य का उपयोग करते हैं तो इसे साहित्यिक देशभक्ति कहते हैं। ऐसे साहित्य में

साहित्यकारों ने, जनसाधारण को पराधीनता के बोध से परिचित कराया और स्वतंत्रता की जरूरत को महसूस कराया।

प्रश्न (v)
मॉडर्न स्कूल ऑफ आर्टिस्ट्स’ से जुड़े भारतीय कलाकारों ने राष्ट्रीय कला को प्रोत्साहित करने के लिए किन विषयों को चयन किया। चित्र 12,13,14 के आधार पर वर्णन करें।
उत्तर-
‘मॉडर्न स्कूल ऑफ आर्टिस्ट्स’ से जुड़े भारतीय कलाकारों ने राष्ट्रीय कला को प्रोत्साहित करने के लिए यथार्थवादी विषयों (चित्र-12, ‘मेरी माँ’ – अवनीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा चित्रित), ऐतिहासिक एवं पौराणिक ‘ विषयों को अपनी चित्रकारी का विषय बनाया । जैसे चित्र-13 कालिदास की.

कविता का निर्वासित यक्ष, अवनिंद्रनाथ द्वारा बनाया गया यह चित्र जापानी । . जलरंग की तस्वीरों में देखा जा सकता था और चित्र-14 जातुगृह दाह यानी पांडवों के वनवास के दौरान लाक्षागृह के जलने का चित्र । यह चित्र अजन्ता के चित्र शैली से प्रभावित था और नन्दलाल बोस नामक चित्रकार के द्वारा बनाया गया था।

आइए करके देखें

प्रश्न (i)
आप अपने गाँव या शहर के आस-पास मौजूद भवन निर्माण शैली पर ध्यान दें, जो पाठ में दिये गये भवन एवं इमारत से मिलती-जुलती हो। आप उस भवन का एक स्केच तैयार कर उसकी निर्माण शैली की विशेषताओं का वर्णन करें।
संकेत-
यह परियोजना कार्य है । स्वयं करें।

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प्रश्न (ii)
विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित राष्ट्रीय विचारों को प्रोत्साहित करने वाले कविता, कहानी, गीत का संकलन कर उसे कक्षा में प्रदर्शित करें।
संकेत-
यह परियोजना कार्य है, स्वयं करें।

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 1.
प्रकृते नियमः क ?
(a) वर्तमानकाल:
(b) परिवर्तनम्
(c) एकरूपता
(d) भूतम्
उत्तर-
(b) परिवर्तनम्

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 2.
जीवने सदा किं न तिष्ठति ?
(a) एकरूपता
(b) बहुरूपता
(c) परिवर्तनम्
(d) स्थिरम्
उत्तर-
(a) एकरूपता

प्रश्न 3.
कः कालः श्रेष्ठः भवति ?
(a) वर्तमानकालः
(b) भूतकाल:
(c) भविष्यतकालः
(d) सर्व
उत्तर-
(a) वर्तमानकालः

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 4.
मानसे स्वच्छन्दता कदा पदं धरयति ?
(a) बाल्यावस्थाम्
(b) वर्तमानकाल:
(c) युवावस्थाम्
(d) वृद्धावस्थाम्
उत्तर-
(c) युवावस्थाम्

प्रश्न 5.
अनुशासनं कदा अप्रियं भवति ?
(a) बाल्यावस्थाम्
(b) वृद्धावस्थाम्
(c) प्रौढ़ावस्थाम्
(d) युवावस्थायां
उत्तर-
(d) युवावस्थायां

प्रश्न 6.
प्रारब्धं कू न परित्यजन्ति ?
(a) महात्माः
(b) साधुः
(c) महापुरुषा
(d) जनाः
उत्तर-
(c) महापुरुषा

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 7.
बाल लक्षणं…….. परुषतां प्राप्नोति ।
(a) अधुनां
(b) यदा-कदा
(c) शनैः शनैः
(d) एव
(c) शनैः शनैः

प्रश्न 8.
एकरूपता जीवने ………… न तिष्ठति ।
(a) सदा
(b) यदा-कदा
(c) अधुनां
(d) एवं
उत्तर-
(a) सदा

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 9.
किशोर्योऽपि स्वाभिलाषं पूरयितुं ………. क्षमाः सन्ति ।
(a) शनैः-शनैः
(b) सदा
(c) एव
(d) अधुना
उत्तर-
(d) अधुना

प्रश्न 10.
किशोराणां सा ……………. कथा वर्तते।
(a) एव
(b) अधुना
(c) सदा
(d) सम्प्रति
उत्तर-
(a) एव

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 13 किशोराणां मनोविज्ञानम्

प्रश्न 11.
शिक्षकाभिभावकयोर्मध्ये ……….. संवादः अनिवार्यः।
(a) सदा
(b) शनैः शनैः
(c) यदा-कदा
(d) अधुना
उत्तर-
(c) यदा-कदा

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 14 राष्ट्रबोधः

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 14 राष्ट्रबोधः

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 14 राष्ट्रबोधः

प्रश्न 1.
धनञ्जयेन सह विद्यालयं कः गच्छन् आसीत् ?
(a) विवेकः
(b) विनोदः
(c) रामः
(d) विजयः
उत्तर-
(a) विवेकः

प्रश्न 2.
यायावरः बालकः कूपीम् उत्थाप्य कुत्र निगूठवान् ?
(a) यावदेव
(b) स्वस्यूते
(c) शीघ्रमेव
(d) अनुचितम्
उत्तर-
(b) स्वस्यूते

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 14 राष्ट्रबोधः

प्रश्न 3.
मार्गः कून मग्नः जातः आसीत् ?
(a) भिक्षुकः
(b) ग्रामीण
(c) जलप्लावनेन
(d) पथिकः
उत्तर-
(c) जलप्लावनेन

प्रश्न 4.
यः देशस्य रक्षां करोति तस्य किं प्रशस्यते?
(a) ग्रामीण
(b) राष्ट्रबोधः
(c) पथीकः
(d) भिक्षुकः
उत्तर-
(b) राष्ट्रबोधः

प्रश्न 5.
धनञ्जयः आपणात् किं क्रीतवान् ?
(a) रेलजलम्
(b) राष्ट्रबोधम्
(c) अनुचितम्
(d) वृक्षम्
उत्तर-
(a) रेलजलम्

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 14 राष्ट्रबोधः

प्रश्न 6.
विवेकः धनञ्जयस्य किं कार्य निव्दति ?
(a) रेलजलम्
(b) अनुचितम्
(c) राष्ट्रबोधम्
(d) वर्गम्
उत्तर-
(b) अनुचितम्

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 1.
का विश्ववन्दिता अस्ति ?
(a) मगध
(b) वैशाली
(c) भोजपुर
(d) पाटलिपुत्र
उत्तर-
(b) वैशाली

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 2.
काभ्याम् वैशाली विलोकिता?
(a) विष्णुभ्याम्
(b) गंगायाम्
(c) रामलक्ष्मणाभ्यां
(d) अशोकाभ्याम्
उत्तर-
(c) रामलक्ष्मणाभ्यां

प्रश्न 3.
कू सन्देशाः?
(a) सत्याहिंसादिक
(b) अशोकून
(c) गंगायाम्
(d) मगध
उत्तर-
(a) सत्याहिंसादिक

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 4.
कून स्पूतः निर्मितः?
(a) रामेण
(b) अशोकून
(c) चन्द्रगुप्तेन
(d) गोपालेन
उत्तर-
(b) अशोकून

प्रश्न 5.
कस्य जननी प्रशस्ते ?
(a) जिनेन्द्र
(b) महेन्द्र
(c) रामेन्द्र
(d) सुरेन्द्र
उत्तर-
(a) जिनेन्द्र

प्रश्न 6.
का मोक्षदा?
(a) गङ्गा
(b) यमुना
(c) ब्रह्मपुत्रा
(d) नर्मदा
उत्तर-
(a) गङ्गा

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 7.
गङ्गा कस्मित् भागे प्रवहति ?
(a) उत्तरभागे
(b) पूर्वभागे
(c) दक्षिणभागे
(d) उत्तरपूर्वभागे
उत्तर-
(c) दक्षिणभागे

प्रश्न 8.
गणतन्त्रं कूषां कृते शासनं भवति ?
(a) जनानां
(b) बालकानां
(c) रामानां
(d) सर्वेषु
उत्तर-
(a) जनानां

प्रश्न 9.
कस्यां बुद्धकृता उपदेशाः ?
(a) गङ्गायां
(b) रामलक्षमणाभ्याम्
(c) वैशल्यां
(d) अशोकायान्
उत्तर-
(c) वैशल्यां

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 10.
आम्रपालिका कलासाधिक ………. वैशाली।
(a) विश्ववन्दिता
(b) बुद्धकृता
(c) विख्याता
(d) मोक्षता
उत्तर-
(a) विश्ववन्दिता

प्रश्न 11.
यत्र ………… वरं जनेभ्यः ।
(a) प्रकृष्टं
(b) जनानां
(c) समेभ्यः
(d) प्रजापालने
उत्तर-
(b) जनानां

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 12.
………….. ते विख्याताः।
(a) विश्ववन्दिता
(b) समेभ्यः
(c) जनानां
(d) प्रजापालने
उत्तर-
(c) जनानां

प्रश्न 13.
शासनविधौ ……………. तन्त्रम् ।
(a) प्रकृष्टं
(b) प्रजापालने
(c) जनानां
(d) समेभ्यः
उत्तर-
(a) प्रकृष्टं

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Answers Chapter 15 विश्ववन्दिता वैशाली

प्रश्न 14.
जनैः शासनम् प्रियम् …………।
(a) बुद्धकृता
(b) अशोकून
(c) प्रकृष्टं
(d) समेभ्यः
उत्तर-
(d) समेभ्यः

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 9 भारतीय राजनीति : एक बदलाव

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 9 भारतीय राजनीति : एक बदलाव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 9 भारतीय राजनीति : एक बदलाव

Bihar Board Class 12 Political Science भारतीय राजनीति : एक बदलाव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
उन्नी मुन्नी ने अखबार की कुछ कतरनों को बिखेर दिया। आप इन्हें कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें।

  1. मंडल आयोग की सिफारिश और आरक्षण विरोधी हंगामा
  2. जनता दल का गठन
  3. बाबरी मस्जिद का विध्वंस
  4. इंदिरा गांधी की हत्या
  5. राजग सरकार का गठन
  6. गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम
  7. संप्रग का गठन

उत्तर:

  1. इंदिरा की हत्या – 1984
  2. जनता दल का गठन – 1989
  3. मंडल आयोग की सिफारिश और आरक्षण विरोधी हंगामा – 1990
  4. बाबरी मस्जिद का विधवंश – 1992
  5. राजग सरकार का गठन – 1999
  6. गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम – 2002
  7. सप्रंग का गठन – 2004

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 9 भारतीय राजनीति : एक बदलाव

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में मेल करें

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 9 भारतीय राजनीति एक बदलाव Part - 2 img 1
उत्तर:
(क) – (4)
(ख) – (2)
(ग) – (1)
(घ) – (3)

प्रश्न 3.
1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीतिक के मुख्य मुद्दे क्या रहे? इन मुद्दों से राजनीतिक दलों के आपसी जुड़ाव के क्या रूप सामने आए हैं?
उत्तर:
1989 के चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा मुख्य था जिसके आधार पर नव गठित जनता दल की सरकार बनी जिसमें श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमन्त्री बने। जनता दल व इसके सहयोगी दलों ने राष्ट्रीय मोर्चा बनाया परन्तु राष्ट्रीय मोर्चा को भी पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ अतः राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार को दो विरोधी विचारधारा रखने वाली पार्टियों भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी दलों ने बाहर से समर्थन दिया। यह व्यवस्था अधिक समय तक सुचारू रूप से ना चल सकी व जल्द ही इसमें मतभेद उभर कर सामने आने लगे।

विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार द्वारा मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए शिक्षण संस्थाओं व रोजगार में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से भारतीय राजनीति में एक बड़ा तूफान सा आया जिसने आरक्षण की राजनीतिक के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों में राजनीतिक जागरूकता का विकास कर राजनीतक सत्ता में एक नए संघर्ष को जन्म दे दिया। पिछड़े वर्ग की जो राजनीति दक्षिण में चल रही थी वह अब उत्तर भारत में भी प्रारम्भ हो गई जिसके आधार पर कई राज्यों कई क्षेत्रीय दलों का गठन किया गया। इस प्रकार से 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आरक्षण व अन्य पिछड़ा वर्ग का राजनीतिकरण एक प्रमुख मुद्दा उभर कर सामने आया।

आरक्षण के अलावा जो दूसरा मुद्दा भारतीय राजनीति में उभर कर आया वह था बाबरी मस्जिद विवाद जिसको 6 दिसम्बर 1992 में लाखों की संख्या में पहुँचे हिन्दू कट्टर पंथियों ने ध्वस्त कर दिया था व इसके बाद उत्तर प्रदेश की सरकार को केन्द्र ने बर्खास्त कर दिया। परन्तु इस घटना में साम्प्रदायिक हिंसा व तनाव रहा। इस पूरे घटना चक्र से धार्मिक ध्रुवीकरण हुआ जिसका परिणाम 2002 में गोधरा कांड व गुजरात में मुसलमानों की नियोजित तरीके से की गई हत्याएँ। इस पूरे घटना चक्र ने हिन्दू ध्रुवीकरण किया जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को 1996 के चुनाव में मिला। तीसरा महत्त्वपूर्ण परिवर्तन भारतीय राजनीति में हुआ कि राष्ट्रीय दलों का घटता हुआ प्रभाव जिसने गठबन्धन की राजनीति को जन्म दिया।

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 9 भारतीय राजनीति : एक बदलाव

प्रश्न 4.
“गठबन्धन की राजनीति के इस नए दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते” इस कथन के पक्ष में आप कौन-से तर्क देंगे।
उत्तर:
वैसे तो 1977 में जनता पार्टी की सरकार भी एक गठबन्धन की ही सरकार थी क्योंकि इसमें कई राजनीतिक दलों के विलय होकर जाता पार्टी का गठन किया था परन्तु 1989 में गठबन्धन की राजनीति का युग अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया है जो आज तक भी जारी है। जनता पार्टी में घटकदलों ने विलय के बाद अपना अस्तित्व समाप्त कर दिया था परन्तु 1989 के बाद गठबन्धनों की सरकार में प्रायः एक राष्ट्रीय दल व अन्य क्षेत्रीय दल शामिल है जिसमें कोई भी दल अपने अस्तित्व को समाप्त नहीं करता। जनता पार्टी की सरकार केवल 1979 तक ही चली जबकि 1996 के बाद अब गठबन्धन सरकारें लगातार चल रही हैं।

गठबन्धन के इस नए दौर में विशेष बात यह है कि हलाँकि राजनीतिक दल गठबन्धन सरकार बनाने के लिए अपना अस्तित्व तो समाप्त नहीं करते परन्तु अपनी विचारधाराओं को या तो नई परिस्थितियों के अनुसार समायोजित कर लेते है। जिन पर सभी दलों, घटकों की सहमति होती है जिसे न्यूनतम साझा कार्यक्रम कहते हैं। एन.डी.ए. की सरकार चलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (जो सबसे बड़ा घटक था) ने अपनी विचारात्मक मसलों जैसे कश्मीर का अनुच्छेद 370, बाबरी मस्जिद मसला व यूनिफार्म सिविल कोड़ को न्यूनतम साझा कार्यक्रम से अलग रखकर सभी दलों की अन्य विषयों पर सहमति व सहयोग प्राप्त किया। इस कारण एन.डी.ए. की सरकार पूरे पाँच वर्ष चली।

इसी प्रकार से 2004 में यू.पी.ए. का गठन किया गया जिसमें कांग्रेस सबसे बड़ा राष्ट्रीय दल है व अन्य दल सभी क्षेत्रीय राजनीतिक दल हैं। यू.पी.ए. को बाहर से वामपंथियों का समर्थन है। इस गठबन्धन में अलग-अलग विचारों के राजनीतिक दल है जैसे ऐसे अनेक विषय हैं जिस पर कांग्रेस व वामपंथी दल गम्भीर मतभेद रखते हैं व जो सामने भी आए हैं। जैसे उदारीकरण की नीति पर निजीकरण की प्रक्रिया पर व हाल ही में नाभकीय समझौते को लेकर। परन्तु सभी दलों में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति है जिसके आधार पर गठबन्धन सरकार 2014 तक चली।

प्रश्न 5.
आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा एक महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी। इस दौर में इस पार्टी के विकास क्रम का उल्लेख करें।
उत्तर:
भारतीय जनता पार्टी वास्तव में जनवरी 1980 में अस्तित्व में आयी। इससे पहले यह भारतीय जनसंघ के नाम से जानी जाती थी। आपातकाल में जनसंघ के भी प्रमुख नेता व कार्यकर्ता जेल में बंद थे। जनता पार्टी के गठन की प्रक्रिया में जनसंघ ने भी सक्रिय व महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जय प्रकाश नारायण के परामर्श व आशीर्वाद से तत्कालीन प्रमुख विरोधी दलों ने अपने-अपने दलों का एक-दूसरे में विलय कर जनता पार्टी का गठन किया। भारतीय जनसंघ जो कि एक हिन्दुवादी पार्टी मानी जाती थी, अपनी विचारधारा में उदारवादी दृष्टिकोण का समायोजन करते हुए, सोसालिस्ट, कांग्रेस (ओल्ड) व भारतीय लोकदल जैसी पार्टियों के साथ विलय करना स्वीकार कर जनता पार्टी का गठन किया।

1977 में जनता पार्टी ने आपातकाल के बाद चुनाव में हिस्सा लिया व भारी सफलता प्राप्त की। प्रधानमन्त्री के पद पर कांग्रेस (ओल्ड) के नेता श्री मुरारजी भाई देसाई, को नियुक्त किया गया। जनता पार्टी में सरकार बनने के बाद ही मतभेद व विवाद उत्पन्न होंगे। जनसंघ के आर. एस. एस. के साथ सम्बन्धों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गए। उधर चौधरी चरण सिंह व बाबू जगजीवन राम को भी दबाव की राजनीति के चलते उप-प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करना पड़ा।

इस प्रकार जनता पार्टी आए दिन नए-नए विवादों में घिरती रही व अन्त में 1979 में जनता पार्टी टूट गयी। जनवरी 1980 को जनसंघ को दोबारा जीवित ना करते हुए भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया। इस बार की भारतीय जनता पार्टी पुरानी जनसंघ से भिन्न थी। इस बार भारतीय जनता पार्टी का आधार व्यापक किया गया। यह जनसंघ की अपनी हिन्दुवादी, पूँजीपतियों की पार्टी व शहर से सम्बन्ध रखने वाली पार्टी की छवि को दूर कर सभी वर्गों के समर्थन को प्राप्त करना चाहती थी। भारतीय जनता पार्टी ने अपना ग्रामीण क्षेत्र में भी अपना जनाधार बनाया व किसानों के हितों को भी अपने कार्यक्रमों में शामिल किया भारतीय जनता पार्टी ने गाँधीवाद समाजवाद को अपना एजेन्डा बनाया। यहाँ तक कि अल्पसंख्यकों का भी भरोसा जीतने का निर्णय लिया गया। इस प्रकार आपातकाल के बाद भारतीय जनता पार्टी एक व्यापक विचारधारा वाली पार्टी बनी।

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प्रश्न 6.
कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो गया है। इसके बावजूद देश की राजनीति पर कांग्रेस का असर लगातार कायम है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
1952 के चुनाव से कांग्रेस का प्रभुत्व लगातार कायम रहा है। 1967 के चुनाव में पहली बार कांग्रेस को झटका लगा जब 1967 के चुनाव में कांग्रेस 9 राज्यों में सरकार नहीं बना सकी व केन्द्र में भी साधारण बहुमत से ही सरकार बना पायी राजनीतिक क्षेत्र में यह माना जाता है कि 1967 में कांग्रेस का प्रभुत्व समाप्त हो गया। यह सच है कि 1947 से लेकर 1967 तक कांग्रेस का प्रभुत्व कायम था क्योंकि कांग्रेस के पास राष्ट्रीय आन्दोलन के समय का पंडित जवाहर लाल नेहरू व सरदार पटेल जैसा करिश्माई नेतृत्व था व राष्ट्रीय आन्दोलन को लड़ने व स्वतन्त्रता प्राप्त करने की गौरवमई विरासत भी थी।

1967 के चुनाव से 1971 तक कांग्रेस बड़े संघर्ष से गुजरी क्योंकि इस बीच कांग्रेस आन्तरिक मन्थन से चल रही थी। 1969 में कांग्रेस का विभाजन हुआ। कांग्रेस ने श्रीमति इन्दिरा गाँधी के नेतृत्व में कई क्रान्तिकारी कार्यक्रम प्रारम्भ किए। 1971 में चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस ने गरीबी हटाओ जैसे नारे लगाए। 1971 में संयुक्त विरोधी दलों के बावजूद कांग्रेस को भारी सफलता मिली। 1971 से लेकर 1975 तक विभिन्न राज्यों विशेषकर बिहार व गुजरात में कांग्रेस विरोधी आन्दोलन चले जो इतने अधिक हो गए कि 25 जून 1975 को आपातकाल स्थिति की घोषणा करनी पड़ी। 1975 से लेकर 1977 तक आपातकाल की स्थिति रही। 1977 के चुनाव में कांग्रेस को आपातकाल का गुस्सा झेलना पड़ा व कांग्रेस को फिर सफलता मिली। 1984 में श्रीमति इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद 1984 के चुनावों में कांग्रेस को फिर सफलता मिली 1989 के चुनाव में फिर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। 1989 से लेकर 1996 तक फिर कांग्रेस सबसे बड़ी विरोधी दल रही। परन्तु पुनः 2004 से यू.पी.ए. सरकार का नेतृत्व कांग्रेस ही कर रही है।

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प्रश्न 7.
अनेक लोग सोचते हैं कि सफल लोकतन्त्र के लिए दलीय व्यवस्था जरूरी है। पिछले बीस सालों के भारतीय अनुभवों को आधार बनाकर एक लेख लिखिए और इसमें बताइए कि भारत की मौजूदा बहुदलीय व्यवस्था के क्या फायदे हैं।
उत्तर:
भारत एक संघीय समाज है जिसमें अनेक जाति, धर्म, भाषा, बोली, संस्कृति व भौगोलिकताओं के लोग रहते हैं अत: लोगों के विभिन्न प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, व्यवसायिक व क्षेत्रीय हित हैं जिनको विकसित करने के लिए व इनकी रक्षा करने के लिए इनके अर्थात् नागरिकों के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। अपनी बात को कहने, विचारों को व्यक्त करने, संघ व समुदाय बनाने का भी अधिकार नागरिकों को प्राप्त हैं। इसी आधार पर भारत में बहुदलीय प्रणाली है।

बहुदलीय प्रणाली होते हुए भी भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व एक लम्बे समय तक रहा है। एक लम्बे समय तक बहुत सारी विरोधी पार्टियाँ होते हुए भी भारत में मजबूत विरोधी दल का अभाव रहा है। भारत में बहुदलीय प्रणाली के कारण वैचारिक कम है बल्कि सामाजिक धार्मिक वे क्षेत्रीय अधिक है। 1984 के बाद भारत में भारतीय दलीय व्यवस्था एक नए दौर से गुजर रही है। क्षेत्रीय दलों की सरकारें सफलता पूर्वक कार्य कर रही है। 1984 से लेकर 2004 तक विभिन्न राजनीतक दल विरोधी दलों व शासक दलों के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह बहुदलीय प्रणाली की सबसे बड़ी उपयोगिता है कि शासक दल पर कई और से दबाव बना रहता है व सरकार गिरने की स्थिति में विरोधी दल सरकार बनाने के लिए तैयार रहते हैं।

1989 के बाद भारत के गठबंधन सरकारों का दौर चल रहा है जिसमें बहुदलीय प्रणाली का अपना अलग प्रभाव है। क्षेत्रीय दल गठबन्धन सरकारों में प्रान्तीय स्तर व केन्द्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। क्षेत्रीय दल ना केवल अपने राज्यों के हितों की रक्षा कर रहे हैं व अपने क्षेत्र के लोगों का विकास कर रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय हितों व क्षेत्रीय हितों में एक सामंजस्य पैदा करने में सहायक होते हैं। बहुदलीय प्रणाली भारत की विभिन्नता में एकता की युक्ति को चरितार्थ करती है।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।
उत्तर:
“भारत की दलगत राजनीति ने कई चुनौतियों का सामना किया है। कांग्रेस प्रणाली ने अपना खात्मा ही नहीं किया बल्कि कांग्रेस के जमावड़े के बिखर जाने से आत्म-प्रतिनिधित्व की कई नई प्रवृत्ति का जोर बढ़ा। इससे दलगत व्यवस्था और विभिन्न हितों की कमाई करने की इसकी क्षमता पर भी सवाल उठे। राज व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण काम एक ऐसी दलगत व्यवस्था खड़ी करने अथवा राजनीतिक दलों को गढ़ने की है जो कारगर तरीके से विभिन्न हितों को मुखर और एकजुट करें।”

(क) इस तथ्य को पढ़ने के बाद क्या आप दलगत व्यवस्था की चुनौतियों की सुचि बना सकते हैं?
(ख) विभिन्न हितों का समाहार और उनमें एक जुटता का होना जरूरी है।
(ग) इस अध्याय में आपने अयोध्या विवाद के बारे में पढ़ा। इस विवाद ने भारत के राजनीतिक दलों की समाहार की क्षमता के आगे क्या चुनौती पेश की?
उत्तर:
(क) भारतीय दलीय प्रणाली की निम्न चुनौतियाँ हैं –

  • आन्तरिक प्रजातन्त्र का अभाव
  • व्यक्ति पूजा
  • अनुशासनहीनता
  • अवसरवादिता
  • गुटबाजी
  • राष्ट्रीय दलों का घटता प्रभाव
  • क्षेत्रीय दलों का बढ़ता प्रभाव
  • जाति के आधार पर राजनीतिक दलों का गठन
  • धर्म के आधार पर राजनीतिक दलों का गठन
  • गठबन्धन की राजनीति
  • सिद्धान्त हीन समझौते
  • धन की बढ़ती भूमिका
  • हिंसा की बढ़ती भूमिका
  • संस्थाओं की गरिमा में गिरावट
  • दल-बदल की प्रवृति

(ख) बहुल समाज में लोगों के विभिन्न आधारों पर भिन्न-भिन्न हित होते हैं, जिनका पूरा होना लोगों के विकास के लिए व प्रजातन्त्र की सफलता के लिए अति आवश्यक है। प्रजातन्त्रीय विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता है कि शक्तियों का विकेन्द्रीकरण इस प्रकार से हो कि लोगों की क्षेत्रीय आवश्यकताएं पूरी हो उनकी सांस्कृतिक मान्यताएँ व आकांक्षाएँ विकसित हो। बहुल समाज में लोगों के दो प्रकार के हित होते हैं एक क्षेत्रीय हित दूसरे राष्ट्रीय हित अत: राष्ट्रीय एकता अखंडता के लिए यह आवश्यक है कि लोगों के क्षेत्रीय, निजी हितों व राष्ट्रीय हितों में सामंजस्य हो व समायोजन हो।

(ग) अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनाम राम मन्दिर विवाद ने भारतीय राजनीति को अत्यधिक प्रभावित किया है व भारतीय दलीय प्रणाली के सामने अनेक प्रश्न खड़े कर उन्हें अग्नि परीक्षा देने के लिए मजबूर किया। बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर निर्माण का विवाद एक ऐसा विवाद है जिसको ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय भावना के आधार पर सुलझाना चाहिए परन्तु इस विषय का हमेशा रोजनीतिकरण व साम्प्रदायिकरण किया गया। इस विवाद पर कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं रहा जिसने इस विवाद पर व्यापक सोच के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया दी हो। सभी राजनीतिक दलों ने इस विवाद से राजनीतिक लाभ ही निकालने का प्रयास किया है।

सर्वप्रथम श्री राजीव गाँधी ने 1986 में बाबरी मस्जिद के विवादित जगह के आहते का ताला खुलवा कर हिन्दुओं को पूजा पाठ करने की स्वीकृति दी जिसका उद्देश्य हिन्दुओं की वोटों को सुरक्षित करना था। मुस्लिम लीग व अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी इस विषय को केवल धार्मिक/साम्प्रदायिक सोच के आधार पर ही देखा। भारतीय जनता पार्टी जो पहले हिन्दुवादी जनसंघ थी, ने इस विवाद का सबसे अधिक राजनीतिक लाभ उठाया व साम्प्रदायिकरण किया। 1992 में विवादित ढाँचा ध्वंस करने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक आधार पर इस प्रकार से बढ़ाया है कि लोकसभा ने इसके सदस्यों की संख्या में वृद्धि हुई है। 1999 से 2004 में एन.डी.ए. सरकार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में ही चली।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
1989 के बाद के भारतीय राजनीति की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1989 के चुनाव के बाद में घटनाचक्र बहुत तेजी से चला जिससे राजनीतिक माहौल में व्यापक परिवर्तन हुए। इस बीच में जो प्रमुख घटनाएं घटी वे निम्न थी –

  1. इस समय की महत्त्वपूर्ण घटना थी 1989 के चुनाव परिणाम जिसमें कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। 1984 के चुनाव में लोकसभा की 415 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी को 1989 के चुनाव में केवल 197 सीटें ही प्राप्त हुई।
  2. गठबन्धन की राजनीति का आरम्भ वे केन्द्र में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका।
  3. मंडल व कमंडल की राजनीति जिसने भारतीय राजनीति को जातिकरण व साम्प्रदायिकरण को बढ़ाया। आरक्षण की राजनीति का आरम्भ व 1991 में नई आर्थिक नीति व आर्थिक सुधार प्रारम्भ।

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प्रश्न 2.
गठबन्धन की राजनीति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
1989 के चुनाव के बाद एक दल की सरकार का केन्द्र में लगभग अन्त हो गया। 1989 के चुनाव में किसी भी एक दल को बहुमत नहीं मिला। इस स्थिति में एक ऐसी सरकार बनी जिसमें राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी जिसको बाहर से वामपंथी दलों व भाजपा का समर्थन रहा। इस प्रकार से कई राजनीतिक दलों की मिली-जुली सरकारों को गठबन्धन की सरकार कहते। हैं भारत में 1989 के चुनाव के बाद यह स्थिति जारी है। गठबन्धन सरकारों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय मोर्चा का गठन समझाइए।
उत्तर:
1989 के चुनाव में जनता दल चुनाव से पहले हुए लोकदल, जनमोर्चा, कांग्रेस (एस) व जनता पार्टी के विलय का परिणाम था। जनता दल ने फिर कई अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय मोर्चा का गठन किया। इन क्षेत्रीय दलों में थे तमिलनाडू की डी.एम.के. पार्टी, आन्ध प्रदेश की टी.डी.पी. आदि राष्ट्रीय मोर्चा ने 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में वामपंथी दलों व भाजपा के बाहरी समर्थन से सरकार बनायी।

प्रश्न 4.
1989 के चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या थे?
उत्तर:
1984 के चुनाव में राजीव गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी। कांग्रेस को इस चुनाव में 415 सीटें प्राप्त हुई। परन्तु धीरे-धीरे सरकार का ग्राफ गिरता गया। कई प्रकार के स्केन्डल सामने आए। राजीव गाँधी की सरकार में रहे वित्त मंत्री व रक्षा मंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने विभिन्न रक्षा सौदों में हुई किमबैक यानि रिश्वत की चर्चाओं के सन्दर्भ में ना केवल अपने पद से त्याग पत्र दे दिया बल्कि कांग्रेस से त्याग पत्र देकर नया दल जन मोर्चा बना लिया जो बाद में अन्य प्रमुख विरोधी दलों के साथ विलय होकर जनता दल का गठन किया। 1989 के चुनाव के परिणामों ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा प्रदान की। 1989 के चुनाव में प्रमुख मुद्दा भ्रष्टाचार था। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जो पहले ही एक ईमानदार छवि वाले व्यक्ति थे मिस्टर क्लीन बन कर उभरे कांग्रेस को इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा।

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प्रश्न 5.
मंडल आयोग का विषय क्या था?
उत्तर:
1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी तो जनता पार्टी में रहे गृहमंत्री श्री चरण सिंह ने पिछड़े वर्ग के लोगों की पहचान करने व उनके लिए आरक्षण की सीमा तय करने के लिए वी.पी. मंडल की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जिसको मंडल आयोग के नाम जाना जाता है। मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट जनता पार्टी के टूटने के बाद इंदिरा गांधी सरकार के समय में पेश की व जिसको रख दिया गया। 1989 में समय पड़ने पर इस रिपोर्ट को जनता दल की सरकार ने लागू कर दिया। इस रिपोर्ट के लागू करने से पूरे देश में हिंसा का महौल हो गया व अंत में राजनीतिक दलों का विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के खिलाफ इस प्रकार से ध्रुवीकरण हुआ कि जनता दल सरकार को गद्दी छोड़नी पड़ी।

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय मोर्चा व संयुक्त मोर्ग के गठन में अन्तर समझाइए।
उत्तर:
1977 के बाद 1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में पहली गैर कांग्रेस सरकार बनी जिसमें प्रमुख रूप से जनता दल व कुछ क्षेत्रीय दल शामिल थे। इनको बाहर से बी.जे.पी. व वामपंथियों का समर्थन प्राप्त था। जबकि यूनाइटेड फ्रंट की सरकार 1996 में बनी जिसमें प्रमुख रूप से क्षेत्रीय दल थे व बाहर से कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था।

प्रश्न 7.
1989 में कांग्रेस के प्रभाव में कमी के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
1984 के चुनाव में कांग्रेस को 415 सीटें प्राप्त हुई जबकि 1989 के चुनावों में केवल 197 सीटें प्राप्त हुई। इस मिरावट के निम्न प्रमुख कारण थे –

  1. करिश्माई व अनुभवी नेता का अभाव
  2. कांग्रेस में गुटबाजी
  3. विश्वनाथ प्रताप सिंह का करिश्माई नेतृत्व व ईमानदारी की छवि
  4. गैर कांग्रेसी दलों का संगठित होना
  5. कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार का मुद्दा
  6. क्षेत्रीय दलों का बढ़ता हुआ प्रभाव।

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प्रश्न 8.
1991 में मध्यावधी चुनाव के क्या कारण थे?
उत्तर:
1989 के चुनावों के बाद जनता दल अर्थात् राष्ट्रीय मोर्चा भी सरकार एक संगठित राजनीतिक समूह के रूप में कार्य नहीं कर सकी ब 1991 में सरकार गिर गई जिससे 1991 में मध्यावधि चुनाव आवश्यक हो गए। इस घटनाक्रम के निम्न कारण थे –

  1. मंडल आयोग की सिफारिशों का लागू करना
  2. पूरे देश में आरक्षण का विरोध व आरक्षण की राजनीति
  3. बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर निर्माण विवाद
  4. साम्प्रदायिक वातावरण
  5. राष्ट्रीय मोर्चा के घटकों में आपसी खींच-तान
  6. भारतीय जनता पार्टी द्वारा राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार से समर्थन लेना।

प्रश्न 9.
1989 के बाद भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका के कारण समझाइए।
उत्तर:
1989 के बाद भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका केन्द्र स्तर पर व प्रान्त स्तर पर भी बढ़ी है। इसके निम्न कारण प्रमुख हैं –

  1. बढ़ता हुआ क्षेत्रवाद
  2. राष्ट्रीय दलों के प्रभाव में कमी
  3. राष्ट्रीय स्तर पर करिश्माई नेतृत्व का अभाव
  4. राज्यों में नए नेतृत्व का विकास
  5. क्षेत्रीय भेदभाव
  6. संविधान के प्रावधानों का दुरुपयोग

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प्रश्न 10.
एन.डी.ए. के गठन को समझाइए।
उत्तर:
1991 से 1996 तक कांग्रेस ने नरसिम्हा राव के नेतृत्व में अल्पमत सरकार चलायी। 1996 के चुनावों में कांग्रेस का प्रभाव घटा व भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आयी व अल्पमत सरकार बनायी जो मात्र 13 दिन चली। भारतीय जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद यूनाइटेड फ्रंट ने काँग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई जो 1999 तक चली। इस बीच दो प्रधानमंत्री रहे। पहले श्री एच.डी. देवगोडा व बाद में इन्द्र कुमार गुजराल। 1999 में एन.डी.ए. का गठन किया गया। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के साथ अन्य 22 क्षेत्रीय दल व छोटी पार्टियाँ थी। 1999 में एन.डी.ए. की सरकार बनी जो 2004 तक चली। 2004 के चुनाव में यू.पी.ए. ने सरकार बनायी।

प्रश्न 11.
पिछड़े वर्ग की राजनीतिक सत्ता में बढ़ती हुई भागीदारी को समझाइए।
उत्तर:
भारत का पिछड़ा वर्ग परम्परागत रूप से कांग्रेस पार्टी का समर्थन रहा है परन्तु मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 27% आरक्षण लागू होने के बाद पिछड़ा वर्ग राजनीतिक रूप से जागरूक हो गया व आरक्षण की राजनीति ने अन्य पिछड़ा वर्ग को चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण बना दिया। मंडल आयोग ने सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग की पहचान कर विभिन्न जातियों को पिछड़ा वर्ग के रूप में अंकित किया। पिछड़ा वर्ग की राजनीति इतनी अधिक तेज हुई कि जातियों में पिछड़ा वर्ग में शामिल होने की होड़ लग गई। इस प्रकार से राजनीतिक सत्ता में पिछड़ा वर्ग के लोगों की भागीदारी बढ़ गयी। इनके हितों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक दल अस्तित्व में आए। इसी प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग में नेतृत्व का विकास हुआ।

प्रश्न 12.
भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के उदय को समझाइए।
उत्तर:
भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी कई राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश व केन्द्र में भी अहम भूमिका निभा रही है। बहुजन समाज में जागृती का आन्दोलन करने व बहुजन समाज पार्टी बनाने में श्री कांशीराम का अहम योगदान है। बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस की परम्परागत रूप से समर्थन करने वाले वोट बैंक को तोड़ दिया जिनमें प्रमुख रूप से हरिजन, मुस्लिम व पिछड़ा वर्ग शामिल थे। कुमारी मायावती बहुजन समाज पार्टी को नेतृत्व प्रदान कर रही है।

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प्रश्न 13.
2004 के लोक सभा चुनाव के परिणाम समझाइए।
उत्तर:
2004 के चुनाव में एन.डी.ए. बहुमत प्राप्त नहीं कर पायी व कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया क्योंकि कांग्रेस की वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें एन.डी.ए. से अधिक थी। एन.डी.ए. (यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलाइंस) का गठन किया व वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन से डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार बनायी। 2004 के चुनावों ने एक तथ्य को निश्चित कर दिया कि भारत में राष्ट्रीय दलों की स्थिति अभी भी ऐसी नहीं है कि वे स्वतंत्र रूप से अपनी सरकार बना सके। अतः गठबन्धन की सरकारों का दौर भारत में अभी चलेगा।

प्रश्न 14.
गठबन्धन की राजनीति के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1989 से भारत में गठबन्धन सरकारें लगभग निरन्तर चल रही है। जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं –

  1. क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या
  2. राष्ट्रीय दलों के प्रभाव मे गिरावट
  3. त्रिशंकु संसद व विधान सभाएँ
  4. समाज का विभिन्न सामाजिक आर्थिक वर्गों में बँटवारा
  5. सत्ता की राजनीति का बढ़ता प्रभाव
  6. न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति
  7. क्षेत्रीय दलों का दबाव की राजनीति

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प्रश्न 15.
बाबरी मस्जिद के 1992 में ध्वंश होने का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित स्थान को कार सेवकों में व हिन्दू कट्टरवादियों ने ध्वंश कर दिया जिससे सारे देश में दंगे व साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। सभी राजनीतिक दलों व बुद्धिजीवियों ने इसकी निंदा की परन्तु इस घटना ने हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण कर दिया जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को 1996 के चुनाव में मिला जिसमें वह लोकसभा में सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आयी। बाबरी मस्जिद का टूटना भारत के इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
क्या आप समझते हैं कि 1989 के चुनाव में कांग्रेस की सफलता के बाद कांग्रेस का सफाया हो गया?
उत्तर:
इस प्रश्न का सीधा उत्तर यह दिया जा सकता है कि कांग्रेस का 1989 के चुनाव में असफलता का अर्थ यह. नहीं लगाया जा सकता कि कांग्रेस का हमेशा के लिए सफाया हो गया। कांग्रेस भारत का एक बड़ा प्रमुख राजनीतिक दल है जिसकी जड़ें सारे देश में गइराई हुई हैं। बाद के चुनावों के परिणाम ने इसको सिद्ध भी कर दिया। 1989 में बनी राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार 1990 तक ही चली व 1991 में चुनाव कराना आवश्यक हो गया जिसमें फिर कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी जबकि इस चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रभावकारी नेता श्री राजीव गाँधी की हत्या हो गई थी।

1991 से लेकर 1996 तक कांग्रेस ने श्री नरसिम्हा राव के नेतृत्व में सरकार चलाई हालांकि बहुत बड़ा बहुमत कांग्रेस के साथ नहीं रहा। 1996 के चुनाव में कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी परन्तु कांग्रेस के समर्थन से ही 1996 से लेकर 1999 तक यूनाइटिड फ्रंट की सरकार चली। 2004 के चुनाव में फिर गठबन्धन की सरकार बनी तथा फिर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी व इसके ही नेतृत्व में यू.पी. ए. की सरकार डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 2014 तक चली। अतः यह प्रमाणित होता है कि कांग्रेस आज भी प्रभावकारी राजनीतिक दल है।

प्रश्न 2.
मंडल आयोग की सिफारिशों का भारतीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मंडल आयोग का गठन जनता पार्टी की सरकार ने 1979 में पिछड़े वर्ग के लोगों की पहचान करने व उनके शिक्षण संस्थाओं व सरकारी नौकरियों में आरक्षण निश्चित करने के लिए किया था। जिसमें शैक्षणिक व सामाजिक पिछड़ेपन को आधार माना गया था। मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1980 में ही दे दी थी। परन्तु इसको वी.पी. सिंह की सरकार ने 1989 में लागू किया। इस रिपोर्ट के लागू होने से जिसमें 27% के आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, पूरे देश में हिंसात्मक झगड़े प्रारम्भ हो गए। इस रिपोर्ट के लागू होने के बाद भारत में आरक्षण की राजनीति प्रारम्भ हो गई जिसने समाज का व राजनीति का ध्रुवीकरण कर दिया। पिछड़ा वर्ग राजनीतिक सत्ता के लिए संघर्षमय हो गया। इससे प्रान्तों व केन्द्र की राजनीति दोनों प्रभावित हुई।

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प्रश्न 3.
1989 के चुनावों के बाद की प्रमुख घटनाओं का वर्णन करो।
उत्तर:
1989 के बाद भारतीय राजनीति में घटनाचक्र बहुत तेजी के साथ चला। एक प्रकार से 1989 में भारतीय राजनीति का स्वरूप ही बदल गया। निम्न प्रमख घटनाएँ बड़ी तेजी से घटीं।

  1. सबसे महत्त्वपूर्ण घटना 1989 में कांग्रेस की पराजय। जिस पार्टी को 1989 के चुनाव में 415 सीटें मिली थी 1989 के चुनाव में इसे केवल 197 सीटें ही प्राप्त हुई। 1989 के चुनाव कई पार्टियों की मिली-जुली सरकार बनी।
  2. एक अन्य महत्वपूर्ण घटना क्षेत्रीय दलों का विकास/जनता दल व कुछ क्षेत्रीय दलों ने राष्ट्रीय मोर्चा बनाया व विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठबन्धन सरकार बनी।
  3. एक अन्य विशेषता यह रही कि विपरीत विचारधारा रखने वाली भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन से राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार चली।
  4. गैर कांग्रेसवाद के प्रचार का युग प्रारम्भ हुआ।
  5. आरक्षण की राजनीति का प्रारम्भ।
  6. बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर विवाद।
  7. 1991 में आर्थिक सुधार व आर्थिक उदारीकरण की नीतियाँ प्रारम्भ।
  8. क्षेत्रीय दलों की केन्द्र की राजनीति में बढ़ती भूमिका।

प्रश्न 4.
राजीव गाँधी के बाद कांग्रेस की स्थिति समझाइए।
उत्तर:
1991 के चुनाव में तमिलनाडू में चुनाव प्रचार करते समय राजीव गाँधी की लिट्टे के उग्रवादियों ने हत्या कर दी जिससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। कुछ समय के लिए कांग्रेस नेतृत्वहीन हो गयी। राजीव गाँधी के अभाव का 1991 के चुनावों पर भी प्रभाव पड़ा क्योंकि कांग्रेस को अल्पमत की सरकार बनानी पड़ी। कांग्रेस में नेतृत्व संकट उत्पन्न हो गया। अन्ततः ये श्री नरसिम्हा राव जी को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया जो एक कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में जाने जाते हैं हालांकि उन्हीं के कार्यकाल में ही नई आर्थिक नीतियाँ लागू की व स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने के लिए संविधान में 73 वाँ 74 वाँ संविधान संशोधन भी पारित किए गए। 1989 से लेकर 2004 तक के चुनाव तक कांग्रेस एक करिशमाई नेतृत्व की तलाश में रहा।

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प्रश्न 5.
1989 के चुनाव बाद कांग्रेस के प्रभाव में कमी के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर:
1989 के चुनाव में कांग्रेस के प्रभाव में गिरावट आयी जिसके प्रमुख कारण थे –

  1. कांग्रेस सरकार में बढ़ता भ्रष्टाचार
  2. करिश्माई नेतृत्व का अभाव
  3. कांग्रेस में बढ़ती अनुशासनहीनता
  4. विश्वनाथ प्रताप सिंह का एक करिश्माई नेता के रूप में उदय
  5. 1991 में कांग्रेस में नेतृत्व का संकट
  6. क्षेत्रीय दलों का विकास
  7. केन्द्र में अनिश्चितता का दौर
  8. केन्द्र की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती हुई भूमिका
  9. केन्द्र की कांग्रेस सरकारों के द्वारा संविधान के प्रावधानों का दुरुपयोग
  10. कांग्रेस की परम्परागत वोट बैंक का इससे दूर हो जाना
  11. दलित राजनीति का विकास
  12. अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीति का विकास

प्रश्न 6.
गठबन्धन की राजनीति से आप क्या समझते हैं? राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार किस प्रकार बनी समझाइए।
उत्तर:
जब चुनाव के बाद किसी एक राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत ना मिले तो कई सारे राजनीतिक दलों में इस प्रकार से समझौता होता है कि न्यूनतम साँझा कार्यक्रम की सहमति के आधार पर मिली-जुली सरकार बनाते हैं, ऐसी सरकार को गठबन्धन सरकार कहते हैं। 1989 के चुनाव में कांग्रेस को पर्याप्त बहुमत ना मिलने पर राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनी जो एक गठबन्धन सरकार थी क्योंकि इसमें जनता दल प्रमुख पार्टी थी व इसके साथ कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने मिलकर राष्ट्रीय मोर्चे में गठन कर भारतीय जनता पार्टी व वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 1989 से ही भारत में गठबन्धन सरकारों का प्रचलन चला जो आज भी चल रहा है। 1996 से 1999 तक यूनाइटेड फ्रंट की सरकार 1999 से 2004 तक एनडीए की गठबन्धन सरकार व अब 2004 से 2014 तक यू.पी.ए. की 2014 से अब तक एन.डीए. गठबन्धन सरकार चल रही है।

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प्रश्न 7.
भारत की राजनीतिक व्यवस्था पर गठबन्धन की राजनति का प्रभाव समझाइए।
उत्तर:
1989 के बाद देश में गठबन्धन की राजनीति का दौर जारी है। गठबन्धन सरकारें ना केवल केन्द्र में चल रहा है बल्कि अनेक राज्यों में भी गठबंधन की सरकारें चल रही है जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, पंजाब में गठबन्धन की सरकारें चल रही है। गठबन्धन की सरकारों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम रही है। गठबन्धन की राजनीति ने भारतीय राजनीति को दोनों तरह से अर्थात् नकारात्मक तरीके से भी व सकारात्मक तरीके से प्रभावित किया है जिसको निम्न क्षेत्रों में समझ सकते हैं –

  1. राजनीतिक अस्थिरता
  2. क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका
  3. क्षेत्रीय हितों व आकांक्षाओं की पूर्ति
  4. केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्धों पर प्रभाव
  5. राज्यों की राजनीति पर प्रभाव
  6. भारतीय संघीय प्रणाली के स्वरूप पर प्रभाव
  7. राजनीतिक अवसरवाद में वृद्धि
  8. राजनीति संस्थाओं व पदों की स्थिति में परिवर्तन

प्रश्न 8.
बाबरी मस्जिद विवाद ने भारतीय राजनीति को किस प्रकार से प्रभावित किया?
उत्तर:
साम्प्रदायिक भारतीय राजनीति की एक नकारात्मक विरासत रही है जो वास्तव में अंग्रेजी शासन की ही देन है साम्प्रदायिकता आज भी भारतीय समाज व राजनीति को प्रभावित कर रही है। बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर विवाद ने भारतीय समाज व राजनीति को विभाजित किया। कुछ एक राजनीतिक दलों ने इस विवाद का राजनीतिकरण किया है। इसका उन्माद इस प्रकार बढ़ा कि 6 नवम्बर 1992 को कट्टरवादियों ने विवादित ढाँचे को ध्वंस कर दिया। जिससे साम्प्रदायिक झगड़ों की झड़ी लग गई। गोधराकांड व गुजरात में 2002 में हुए साम्प्रदायिक दंगे इसी चिंगारी का परिणाम है। इस विवाद ने समाज को बाँटा है व आपस में नफरत व तनाव को बढ़ाया है जिसका राजनीतिक दलों ने अपने-अपने हित में प्रयोग किया है।

प्रश्न 9.
मंडल विवाद से आप क्या समझते हैं? भारत में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन को इसने किस प्रकार से प्रभावित किया?
उत्तर:
मंडलवाद का सम्बन्ध उस राजनीतिक व सामाजिक माहौल से है जो 1990 में मंडल आयोग की पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थाओं में 27% आरक्षण के सिफारिशों को लागू करने के बाद पूरे देश में उत्पन्न हुआ। शैक्षणिक रूप से व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण के बाद पूरे देश में सामाजिक तनाव हो गया जिसको राजनीतिक दलों ने आने-अपने तरीके से परिभाषित व प्रचारित किया।

इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह रहा कि जिस सरकार ने इस आदेश को लागू किया था अर्थात् विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में चल रही राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। देश ऊंची जाति व पिछड़ी जातियों के वर्गों में बँट गया व इसने पूरे सामाजिक व राजनीतिक व्यवस्था को इस प्रकार से प्रभावित किया कि पिछड़े वर्ग के लोगों में जागरूकता बढ़ी व इनका सामाजिक व राजनीतिक ध्रुवीकरण हो गया। पिछड़े वर्ग के लागों ने संख्या के अनुपात में ना केवल आर्थिक श्रोतों पर हिस्सेदारी की बात करी बल्कि राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी की बात की। अनेक क्षेत्रीय दलों का विकास इस संघर्ष पर ही आधारित है।

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प्रश्न 10.
पिछड़ी जातियों के राजनीतिकरण का भारतीय राजनीति पर प्रभाव समझाइए।
उत्तर:
मंडल की देन आरक्षण की राजनीति है जिसने भारत में पिछड़े वर्ग की राजनीति को जन्म दिया जिसके आधार पर पिछड़ा वर्ग एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर कर आया। इस आधार पर कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों का गठन किया जो विभिन्न राज्यों में सरकार में शामिल है। केन्द्र की राजनीति को भी आरक्षण की राजनीति ने प्रभावित किया। पिछड़े वर्ग का सामाजिक आर्थिक व राजनीति विकास हुआ। इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि मंडल आयोग कि सिफारिशों के आधार पर किए गए 27% आरक्षण के कारण समाज के जीवन में हर पक्ष में परिवर्तन हुआ। पिछड़ा वर्ग विभिन्न दलों के लिए केवल वोट बैंक ही नहीं बल्कि एक राजनीतिक शक्ति है जिसने भारतीय समाज व राजनीति में गतिशीलता को जन्म दिया है।

प्रश्न 11.
भारतीय समाज में राजनीतिक गतिशीलता व सक्रियता लाने में बाबरी मस्जिद विवाद की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
भारत में प्रजातन्त्रीय लोकतन्त्र को अपनाया गया है। चुनावी प्रक्रिया व राजनीतिक प्रक्रिया के प्रभाव में समाज के विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों व समुदायों में जागरूकता का विकास हुआ। इसी प्रक्रिया में दुर्भाग्यवश कुछ नकारात्मक संकीर्ण प्रवृत्तियों व सोच ने भी जन्म लिया है। जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में तनाव व आपसी द्वेष बड़ा है। बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि विवाद भी एक ऐसा ही विवाद है जिसने भारतीय समाज में साम्प्रदायिक तनाव व विभाजन को जन्म दिया।

इस विषय को दलगत व स्वार्थी राजनीति व कट्टरवादी तत्वों ने और अधिक हवा दी। इस विवाद का साम्प्रदायिक आधार वोट बैंक बनाने में प्रयोग किया। 1986 को राजीव गाँधी सरकार ने विवादित जगह के अहाते का ताला खोलकर हिन्दुओं को पूजा करने की अनुमति दे दी जिससे इस विवादित स्थान का विवाद बढ़ने लगा। भारतीय जनता पार्टी ने विवादित स्थान पर राम मन्दिर निर्माण करने का वायदा कर लोगों की भावनाओं को भड़का कर इस विषय को और अधिक गर्म कर दिया जिससे इस विषय का तेजी के साथ समाजीकरण व राजनीतिकरण हो गया। परिणाम स्वरूप 1992 में बाबरी मस्जिद को कट्टरवादियों ने ध्वंस कर दिया जिससे पूरे देश में उत्तेजना का वातावरण हो गया जिसको वोट बैंक में प्रयोग कर भारतीय जनता पार्टी ने सर्वोच्च राजनीतिक सफलता प्राप्त की।

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प्रश्न 12.
गठबन्धन की राजनीति के कुछ प्रमुख गुण बताइए।
उत्तर:
गठबन्धन की राजनीति विश्व के अनेक देशों में प्रचलित है। भारत में इसकी उत्पत्ति 1989 के बाद हुई। आज भारत के अनेक राज्यों व केन्द्र में गठबन्धन सरकारें चल रही हैं। इसके कुछ अवगुणों के बावजूद कुछ गुण भी अवश्य है जो निम्न हैं –

  1. त्रिशंकु संसद व विधान सभाओं की स्थिति में सरकार बनने की संभावनाएँ निश्चित करता है।
  2. संघीय प्रणाली को मजबूत किया है।
  3. केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्धों को एक नया स्वरूप प्रदान किया है।
  4. क्षेत्रीय दलों का विकास व क्षेत्रीय आकांक्षाओं व हितों की पूर्ति में सहायक।
  5. राज्यों की स्थिति मजबूत हुई है।

प्रश्न 13.
गठबन्धन सरकारों के दौर में उन क्षेत्रों पर प्रकाश डालिए जिन पर लगभग सभी दलों की प्रायः सहमति होती है।
उत्तर:
भारत में गठबन्धन सरकारें पहली संसद का परिणाम नहीं है व ना ही भारत में गठबन्धन सरकार बनाने व चलाने की संस्कृति रही। वास्तव में भारत में गठबन्धन सरकारें निश्चित परिस्थितियों का परिणाम है और वह परिस्थितियाँ ही सत्ता को साझा करने की स्थिति जब किसी भी दल को इतना बहुमत ना मिले कि सरकार बन सके।

सत्ता को साझा करने के लिए वह आवश्यक हो जाता है दल अपनी नीतियों व कार्यक्रमों में भी समझौता करें। व मतभेदों को मुद्दों को अलग रख कर कुछ मुद्दों पर आम सहमति बनाए भारत में चल रही गठबन्धन सरकारों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम इसी सहमति का ही परिणाम है। भारतीय गठबन्धन सरकारों में निम्न मुद्दों पर आम सहमति प्रतीत नजर आती है –

  1. आरक्षण
  2. नई आर्थिक नीतियाँ
  3. गठबन्धन सरकारें
  4. विचारधाराओं को व्यवहारिक धरातल के साथ जोड़ना
  5. राजनीतिक स्थिरता के लिए वैचारिक मतभेदों में तालमेल करना

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प्रश्न 14.
भारत में गठबन्धन सरकारों का भविष्य क्या है?
उत्तर:
1989 में विभिन्न राज्यों व केन्द्र में गठबन्धन सरकारें चल रही हैं। दलीय प्रणाली का स्वरूप इस प्रकार से बदला है कि भारत में दो दलीय प्रणाली तो नहीं बल्कि दो प्रमुख दो यानि कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी दलों की प्रमुखता के साथ गठबन्धन रहे जिनमें भारतीय जनता पार्टी अथवा कांग्रेस ने प्रमुख भूमिका अदा की है।

भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस का जनाधार घटता बढ़ता रहा है। विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों की सरकार कार्य कर रही है व ये क्षेत्रीय दल केन्द्र में भी सरकार बनाने व चलाने में भूमिका अदा कर रहे हैं चाहे कांग्रेस के साथ या भारतीय जनता पार्टी के साथ। आज स्थिति यह है कि कोई भी राजनीतिक दल स्वतंत्र स्वरूप से अकेले सरकार बनाने की स्थिति यह है कि कोई भी राजनीतिक दल स्वतंत्र से अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं लगता अत: अभी भारत में गठबन्धन की सरकारें चलेगी इनका अभी भी भविष्य है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
गठबन्धन सरकार से आप क्या समझते हैं? गठबन्धन सरकारों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
जब चुनाव के बाद किसी भी राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत ना मिले व कई राजनीतिक दल मिलाकर अपने विवादित मुद्दों को अलग कर एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति के आधार पर साझा सरकार बनाते हैं तो इसे गठबन्धन सरकार कहते हैं। यह स्थिति बहुदलीय प्रणाली में उस समय आ जाती है जब राष्ट्रीय दलों का प्रभाव कम हो जाता है व कई सारे क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ जाता है जिससे वोट अनेक राजनीतिक दलों में विभाजित होने के कारण किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता।

1980 के बाद भारत में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ने लगी है। इससे पहले बहुदलीय प्रणाली होते हुए भी कांग्रेस का प्रभुत्व रहा। कुछ राष्ट्रीय दल रहे परन्तु उनकी स्थिति काँग्रेस के सामने कमजोर ही रही। 1950 से लेकर 1980 तक के काल में कांग्रेस का प्रभुत्व रहा। 1980 के दशक के बाद विभिन्न कारणों से क्षेत्रवाद का विकास हुआ जिसके आधार पर क्षेत्रीय दलों का गठन किया गया। इन क्षेत्रीय दलों की संख्या विभिन्न कारणों से लगातार बढ़ती ही रही। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी रही कि 1990 के दशक में राष्ट्रीय दल क्षेत्रीय दलों के सामने बौने पड़ गए। क्षेत्रीय दलों ने केवल अपने राज्यों में सरकारें बनायी बल्कि केन्द्र में भी सरकार बनाने व चलाने में अहम भूमिका निभायी। निम्न मुद्दे ऐसे रहे जिन्होंने समाज को विभाजित किया जिसके आधार पर लोगों के राजनीतिक व्यवहार में परिवर्तन हुआ व क्षेत्रीय दलों की संख्या में वृद्धि हुई। ये मुद्दे थे –

  1. आरक्षण
  2. मन्दिर मस्जिद विवाद (बाबरी मस्जिद व राम मन्दिर)
  3. पिछड़ा वर्ग की राजनीति
  4. महिला राजनीति
  5. अल्प संख्यकों की राजनीति
  6. आदिवासी राजनीति
  7. दलित राजनीति
  8. क्षेत्रवाद

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प्रश्न 2.
भारतीय राजनीति में 1990 से 2004 तक की विभिन्न प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1989 के चुनाव के बाद भारत में गठबन्धन की राजनीति प्रारम्भ हुई। 1989 से लेकर 2004 में यू.पी.ए. सरकार बनने तक घटनाचक्र बड़ी तेजी के साथ चला जिससे भारतीय राजनीति में व्यापक परिवर्तन आए। पिछले 20 वर्षों में भारतीय राजनीति में निम्न प्रमुख विषय छाए रहे हैं –

1. कांग्रेस के प्रभाव में उतार चढ़ाव:
कांग्रेस भारत का एक प्रमुख राजनीतिक दल रहा है जिसके साथ गौरवमय इतिहास रहा है। 1970 के दशक में भारतीय राजनीति पर कांग्रेस का प्रभुत्व रहा है केन्द्र व प्रान्तों कांग्रेस की सरकारें लगातार रही हैं परन्तु 1970 के बाद कांग्रेस के प्रभुत्व में कमी आयी है। 1989 से 90 तक कांग्रेस सत्ता से बाहर रही, परन्तु 1991 में पुनः सत्ता में आ गई। 1996 से लेकर 2004 तक कांग्रेस का जनाधार कम हुआ व 2004 तक सत्ता से बाहर रही। 2004 में पुनः कांग्रेस संसद में सबसे बड़े दल के नेता के रूप में उभर कर आयी व गठबन्धन सरकार का नेतृत्व 2014 तक की।

2. आरक्षण की राजनीति:
1989 से देश की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा छाया रहा है वास्तव में आरक्षण की राजनीति हो रही है जिसने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को अत्यधिक प्रभावित किया है। 1989 में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 27% आरक्षण की व्यवस्था की जिसका प्रारम्भ में बहुत विरोध हुआ व देश में हिंसा हुई परन्तु कुछ समय के बाद इसको सभी ने स्वीकार कर लिया है व पिछड़ा वर्ग में शामिल होने की होड़ में सब लगे हैं।

3. राम मन्दिर व बाबरी मस्जिद विवाद-भारतीय राजनीति को 1990 के बाद बाबरी मस्जिद विवाद ने अत्यधिक प्रभावित किया है व साम्प्रदायिक तनाव व द्वेष को जन्म दिया जिसका भारतीय जनता पार्टी ने लाभ उठाया।

4. गठबन्धन सरकारों का उदय

5. क्षेत्रीय पार्टियों की केन्द्र व राज्यों में बढ़ती भूमिका

6. केन्द्र व प्रान्तों में रिस्तों की पुनः व्याख्या का प्रश्न

7. आर्थिक उदारीकरण

8. अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग व महिलाओं का सशक्तिकरण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

I. निम्नलिखित विकल्पों में सही का चुनाव कीजिए

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय मोर्चा में सबसे बड़ा दल कौन-सा था?
(अ) जनता दल
(ब) डी.एम.के.
(स) बी.जे.डी.
(द) तेलगू देशम
उत्तर:
(अ) जनता दल

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प्रश्न 2.
तेलगू देशम पार्टी किस राज्य में है?
(अ) आन्ध्र प्रदेश
(ब) तमिलनाडू
(स) उड़ीसा
(द) मध्यप्रदेश
उत्तर:
(अ) तमिलनाडू

प्रश्न 3.
मंडल आयोग की रिपोर्ट किस वर्ष में लागू की गई?
(अ) 1989
(ब) 1990
(स) 1991
(द) 1992
उत्तर:
(ब) 1990

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प्रश्न 4.
बाबरी मस्जिद को किस दिन व वर्ष में ध्वंश किया गया?
(अ) 4 जनवरी 1991
(ब) 5 जनवरी 1992
(स) 6 दिसम्बर 1992
(द) 10 दिसम्बर 1992
उत्तर:
(स) 6 दिसम्बर 1992

प्रश्न 5.
भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था –
(अ) 25 जून, 1975
(ब) 6 अप्रैल, 1980
(स) 25 जुलाई, 1978
(द) 6 मार्च, 1982
उत्तर:
(ब) 6 अप्रैल, 1980

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प्रश्न 6.
देश में घटित 26.11.2008 की घटना किससे संबंधित है।
(अ) क्षेत्रवाद
(ब) जातिवाद
(स) नक्सलवाद
(द) आतंकवाद
उत्तर:
(द) आतंकवाद

प्रश्न 7.
स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार में गृहमंत्री कौन था?
(अ) सरदार बल्लभ भाई पटेल
(ब) चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
(स) जगजीवन राम
(द) डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
उत्तर:
(अ) सरदार बल्लभ भाई पटेल

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प्रश्न 8.
भारत ने श्रीलंका से अपनी शांति सेना कब बापस बुला ली?
(अ) 1987 में
(ब) 1989 में
(स) 1992 में
(द) 1991प्र
उत्तर:
(ब) 1989 में

प्रश्न 9.
गठबंधन सरकारों के होने से संसदीय व्यवस्था में क्या प्रमुख खामियाँ आयी है?
(अ) राष्ट्रपति की दुर्बल स्थिति
(ब) प्रधानमंत्री की सबल स्थिति
(स) क्षेत्रीय दलों का उदय
(द) सामूहिक उत्तरदायित्व के सूत्र की अवहेलना
उत्तर:
(द) सामूहिक उत्तरदायित्व के सूत्र की अवहेलना

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प्रश्न 10.
राजीव गांधी की हत्या कब हुई?
(अ) अक्टूबर, 1984
(ब) मई, 1991
(स) जुलाई, 1993
(द) अगस्त, 1996
उत्तर:
(ब) मई, 1991

प्रश्न 11.
6 दिसम्बर, 1992 के इनमें से कौन-सी घटना हुई है?
(अ) बाबरी मस्जिद का विध्वंस
(ब) जनता दल का गठन
(स) राजग सरकार का गठन
(द) गोधरा कांड
उत्तर:
(अ) बाबरी मस्जिद का विध्वंस

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प्रश्न 12. डॉ. मनमोहन सिंह सरकार के गठबंधन का क्या नाम है?
(अ) संप्रग
(ब) राजग
(स) पंजाब गठबंधन
(द) सभी
उत्तर:
(अ) संप्रग

प्रश्न 13.
विधायिका में महिलाओं को कितना प्रतिशत आरक्षण देने हेतु विधेयक पर लंबे समय से संसद में निर्णय नहीं हो पाया है?
(अ) 50 प्रतिशत
(ब) 33 प्रतिशत
(स) 40 प्रतिशत
(द) 25 प्रतिशत
उत्तर:
(ब) 33 प्रतिशत

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प्रश्न 14.
कांशीराम राजनीतिक दल के संस्थापक थे?
(अ) बहुजन समाज पार्टी
(ब) शिव सेना
(स) राष्ट्रीय जनता दल
(द) लोक जनशक्ति पार्टी
उत्तर:
(अ) बहुजन समाज पार्टी

प्रश्न 15.
भारतीय संसद पर आक्रमण किया गया था –
(अ) 2005
(ब) 2006
(स) 2001
(द) 2002
उत्तर:
(स) 2001

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प्रश्न 16.
भारतीय शांति सेना को श्रीलंका कब भेजा गया?
(अ) 1987
(ब) 1988
(स) 1989
(द) 1990
उत्तर:
(अ) 1987

प्रश्न 17.
भारत में नई आर्थिक नीतिके संचालक हैं –
(अ) डॉ. मनमोहन सिंह
(ब) यशवंत सिन्हा
(स) वी. पी. सिंह
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) डॉ. मनमोहन सिंह

II. मिलान वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 9 भारतीय राजनीति एक बदलाव Part - 2 img 2
उत्तर:
(1) – (य)
(2) – (स)
(3) – (अ)
(4) – (द)
(5) – (ब)

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 1.
उपकृष्णम् में कौन-सा समास है ?
(a) तत्पुरुषः
(b) बहुव्रीहि
(c) अव्ययीभाव
(d) नब्
उत्तर-
(c) अव्ययीभाव

प्रश्न 2.
पीताम्बरः में कौन-सा समास है ?
(a) तत्पुरुषः
(b) बहुव्रीहि
(c) द्वन्द्वः
(d) द्विगुः
उत्तर-
(b) बहुव्रीहि

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 3.
इतिहरि में कौन-सा समास है ?
(a) द्वन्द्वः
(b) अव्ययीभावः
(c) द्विगुः
(d) तत्पुरुषः
उत्तर-
(b) अव्ययीभावः

प्रश्न 4.
वीणापाणि: में समास का नाम लिखें।
(a) बहुव्रीहिः
(b) तत्पुरुषः
(c) द्विगु
(d) नञ्
उत्तर-
(a) बहुव्रीहिः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 5.
मृगकाको में समास का नाम लिखें।
(a) द्वन्द्वः
(b) द्विगु
(c) पुर्वपदलोपी
(d) नञ्
उत्तर-
(a) द्वन्द्वः

प्रश्न 6.
अनीश्वरः में कौन-सा समास है ?
(a) द्वन्द्वः
(b) द्विगुः
(c) तत्पुरुषः
(d) नञ्
उत्तर-
(d) नञ्

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 7.
‘त्रिभुवनम्’ में कौन-सा समास है ?
(a) द्वन्द्वः
(b) तत्पुरुष
(c) द्विगुः
(d) नब्
उत्तर-
(c) द्विगुः

प्रश्न 8.
यथाशक्ति में कौन-सा समास है ?
(a) अव्ययीभावः
(b) द्वन्द्वः
(c) तत्पुरुषः
(d) बहुव्रीहिः
उत्तर-
(a) अव्ययीभावः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 9.
त्रिफला में कौन-सा समास है ?
(a) द्वन्द्वः
(b) द्विगुः
(c) नन्
(d) तत्पुरुषः
उत्तर-
(b) द्विगुः

प्रश्न 10.
अहिनकुलम् में कौन-सा समास है ?
(a) कर्मधारय
(b) उपपदं तत्पुरुष
(c) द्वन्द्वः
(d) नन्
उत्तर-
(c) द्वन्द्वः

प्रश्न 11.
महापुरुषः में समास का नाम लिखें।
(a) तत्पुरुषः
(b) कर्मधारयः
(c) बहुव्रीहि
(d) द्विगु
उत्तर-
(b) कर्मधारयः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 12.
गंगाजलम् में कौन-सा समास है ?
(a) तत्पुरुषः
(b) नञ्
(c) द्वन्द्वः
(d) द्विगुः
उत्तर-
(a) तत्पुरुषः

प्रश्न 13.
त्रिभुवनम् में कौन-सा समास है ?
(a) द्विगुः
(b) द्वन्द्वः
(c) कर्मधारय
(d) बहुव्रीहि
उत्तर-
(a) द्विगुः

प्रश्न 14.
उपवनम् में कौन-सा समास है ?
(a) नन्
(b) तत्पुरुषः
(c) मध्यमपदलोपी
(d) अव्ययीभावः
उत्तर-
(d) अव्ययीभावः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 15.
अनर्थः में समास का नाम लिखें।
(a) द्वन्द्वः
(b) द्विगु
(c) न
(d) तत्पुरुषः
उत्तर-
(c) न

प्रश्न 16.
उपकृष्णम् में कौन-सा समास है ?
(a) तत्पुरुषः
(b) अव्ययीभावः
(c) नब्
(d) द्वन्द्वः
उत्तर-
(b) अव्ययीभावः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers समास प्रकरण

प्रश्न 17.
उपगङ्गम् में समास का नाम लिखें।
(a) तत्पुरुषः
(b) द्विगुः
(c) अव्ययीभावः
(d) द्वन्द्वः
उत्तर-
(c) अव्ययीभावः

प्रश्न 18.
उपवनम् में कौन-सा समास है ?
(a) अव्ययीभावः
(b) द्विगुः
(c) तत्पुरुषः
(d) नञ्
उत्तर-
(a) अव्ययीभावः

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers सन्धि प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers सन्धि प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers सन्धि प्रकरण

प्रश्न 1.
संधि करें, कुतः + चन ।
(a) कुतचन
(b) कुतश्चन
(c) कुतयनः
(d) कुतचयन्
उत्तर-
(b) कुतश्चन

प्रश्न 2.
वेता + असि का संधि करें।
(a) वेतासि
(b) वेतेसि
(c) वेतुषु
(d) वेतेस
उत्तर-
(a) वेतासि

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers सन्धि प्रकरण

प्रश्न 3.
ततः + असि का संधि करें।
(a) ततासि
(b) ततेसि
(c) ततोऽसि
(d) तेतेऽसि
उत्तर-
(c) ततोऽसि

प्रश्न 4.
कस्मिन् + चित् का संधि करें।
(a) कस्मिंश्चित्
(b) कस्मिनचित्
(c) कस्वित्
(d) कस्मिचितः
उत्तर-
(a) कस्मिंश्चित्

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प्रश्न 5.
धिक् + इयम का संधि विच्छेद करें।
(a) धिकयम्
(b) धिकीयम्
(c) धिकऽयम्
(d) धिगियम्
उत्तर-
(d) धिगियम्

प्रश्न 6.
प्रोः का संधि-विच्छेद निम्न में कौन है ?
(a) प्र + उचुः
(b) प्रो + उचुः ।
(c) प्रो + उचः
(d) प्रो+ चः
उत्तर-
(a) प्र + उचुः

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प्रश्न 7.
तयोरापि का संधि विच्छेद निम्न में कौन है ?
(a) तयः + अपि
(b) तय + अपिः
(c) तयू + अपि
(d) तयु + अपिः
उत्तर-
(c) तयू + अपि

प्रश्न 8.
स्थलोपरि में निम्न में कौन-सा संधि विच्छेद होगा?
(a) स्थल + उपरि
(b) स्थलो + परि
(c) स्थुला + परि
(d) स्थलु + रिः
उत्तर-
(a) स्थल + उपरि

प्रश्न 9.
स्वेच्छया का कौन-सा संधि विच्छेद है ?
(a) स्व + इच्छया
(b) सव + इच्छा
(c) स्व + एच्छीया
(d) स्वेछा + या
उत्तर-
(a) स्व + इच्छया

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प्रश्न 10.
गिरी + ईशः का संधि करें।
(a) गिरीशः
(b) गीरीशः
(c) गरीशः
(d) गरिशः
उत्तर-
(a) गिरीशः

प्रश्न 11.
नदी + इन्द्रः का संधि करें।
(a) नदिन्द्रः
(b) नदीन्द्रः
(c) नद्रीन्द्रः
(d) नदिनः
उत्तर-
(b) नदीन्द्रः

प्रश्न 12.
भानु + उदयः का संधि करें।
(a) भानूदयः
(b) भानादयः
(c) भुनादयः
(d) भानुदयः
उत्तर-
(a) भानूदयः

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प्रश्न 13.
लघु + ऊर्मिः का संधि करें।
(a) लघुर्मि.
(b) लुघुर्मि
(c) लघूमिः
(d) लघर्मि
उत्तर-
(c) लघूमिः

प्रश्न 14.
वधू + उत्सवः का संधि करें।।
(a) वधूत्सवः
(b) वधुत्वः
(c) वधुत्सः
(d) वधु
उत्तर-
(a) वधूत्सवः

प्रश्न 15.
जगदीशः का संधि विच्छेद निम्न में कौन है?
(a) जगत् + इशः
(b) जदीश + शः
(c) जग + ईशः
(d) जगत् + ईशः
उत्तर-
(d) जगत् + ईशः

प्रश्न 16.
सत् + जनः का संधि करें।
(a) सज्जनः
(b) सजनः
(c) सज्जन
(d) सजना
उत्तर-
(a) सज्जनः

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प्रश्न 17.
ने + अनम् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) नेअनम्
(b) नयनम्
(c) नअनम्
(d) नेयनम्
उत्तर-
(b) नयनम्

प्रश्न 18.
गै + अकः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) गायकः
(b) गैयकः
(c) गैअकः
(d) गअक
उत्तर-
(a) गायकः

प्रश्न 19.
पो + अनः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) पोअनः
(b) पअनः
(c) पवनः
(d) पावनः
उत्तर-
(c) पवनः

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प्रश्न 20.
पौ + अकः से कौन शब्द बनेगा?
(a) पौअकः
(b) पअकः
(c) पावकः
(d) पोवकः
उत्तर-
(c) पावकः

प्रश्न 21.
शे + अनम् से कौन शब्द बनेगा? ।
(a) शेअनम्
(b) शेयनम्
(c) श्यनम्
(d) शयनम्
उत्तर-
(d) शयनम्

प्रश्न 22.
नै + अकः से कौन शब्द बनेगा ?.
(a) नैअकः
(b) नअकः
(c) नायकः
(d) नैयकः
उत्तर-
(c) नायकः

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प्रश्न 23.
भो + अनम् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) भोअनम्
(b) भोवनम्
(c) भवनम्
(d) भोवनम्
उत्तर-
(c) भवनम्

प्रश्न 24.
धौ + अकः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) धावकः
(b) धौवकः
(c) धोअकः
(d) धावक्
उत्तर-
(a) धावकः

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प्रश्न 25.
हरिस् + शेते से कौन शब्द बनेगा? :
(a) होसशेते
(b) हरिश्शेते
(c) हरिसशेते
(d) हरिसशते
उत्तर-
(b) हरिश्शेते

प्रश्न 26.
सत + चरित्रः से कौन शब्द बनेगा?
(a) सतचरित्रः
(b) सच्चरत्रिः
(c) सचिरित्रः
(d) सत्चरित्रः
उत्तर-
(b) सच्चरत्रिः

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प्रश्न 27.
सत् + जनः से कौन शब्द बनेगा?
(a) सतजनः
(b) संज्ज्नः
(c) साजनः
(d) सत्जन
उत्तर-
(b) संज्ज्नः

प्रश्न 28.
उत् + चारणम् से कौन शब्द बनेगा?
(a) उतचारणम्
(b) उत्चारणम्
(c) उच्चारणम्
(d) उतचरणम
उत्तर-
(c) उच्चारणम्

प्रश्न 29.
उत् + ज्वलः से कौन शब्द बनेगा?
(a) उतज्वल
(b) उतज्वलः
(c) उज्जवलः
(d) उज्जवल
उत्तर-
(c) उज्जवलः

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प्रश्न 30.
दिक् + अम्बरः से कौन शब्द बनेगा?
(a) दिकअम्बरः
(b) दिगम्बरः
(c) दिगम्बरः
(d) दिग्मनबरः
उत्तर-
(b) दिगम्बरः

प्रश्न 31.
जगत् + ईशः से कौन शब्द बनेगा?
(a) जगईशः
(b) जतईशः
(c) जगतईशः
(d) जगदीशः
उत्तर-
(d) जगदीशः

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प्रश्न 32.
दिक् + गजः से कौन शब्द बनेगा?
(a) दिकगजः
(b) दीकगजः
(c) दिग्गजः
(d) दीग्गजः
उत्तर-
(c) दिग्गजः

प्रश्न 33.
अच् + अन्तः से कौन शब्द बनेगा?
(a) अजन्तः
(b) अजनतः
(c) अजनत्
(d) अचन्तः
उत्तर-
(a) अजन्तः

प्रश्न 34.
जगत् + नाथः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) जगतनाथ:
(b) जगन्नाथः
(c) जगनाथ्
(d) जगत्नाथा
उत्तर-
(b) जगन्नाथः

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प्रश्न 35.
दिक् + नागः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दिङ्नागः
(b) दीङ्नागः
(c) दीछनाग्
(d) दीङ्नाम्
उत्तर-
(a) दिङ्नागः

प्रश्न 36.
उत् + नतिः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) उतनतिः
(b) उतनती:
(c) उन्नतीः
(d) उन्नतिः
उत्तर-
(d) उन्नतिः

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प्रश्न 37.
सम् + धि से कौन शब्द बनेगा?
(a) समधि
(b) समधी
(c) सन्धि
(d) सन्धी
उत्तर-
(c) सन्धि

प्रश्न 38.
तत् + हितः से कौन शब्द बनेगा?
(a) ततहितः
(b) ततहीतः
(c) तद्धितः
(d) तद्धीतः
उत्तर-
(c) तद्धितः

प्रश्न 39.
सम् + योगः से कौन शब्द बनेगा?
(a) सेयोगः
(b) संयोगः
(c) संयोग्
(d) संयोगे
उत्तर-
(b) संयोगः

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प्रश्न 40.
सम् + सारः से कौन शब्द बनेगा ? .
(a) समसारः .
(b) संसार
(c) संसारः
(d) समसारः
उत्तर-
(c) संसारः

प्रश्न 41.
सम् + वादः से कौन शब्द बनेगा?
(a) संवादः
(b) संवाद्
(c) संवाद
(d) संवादेनः
उत्तर-
(a) संवादः

प्रश्न 42.
सम् + हारः से कौन शब्द बनेगा?
(a) समहारः
(b) समहार
(c) संहारः
(d) संहारे
उत्तर-
(c) संहारः

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प्रश्न 43.
दिग + पाल: से कौन शब्द बनेगा?
(a) दिकपाल्
(b) दिकपालः
(c) दीकपालः
(d) दिक्पालः
उत्तर-
(b) दिकपालः

प्रश्न 44.
भेद् + ता से कौन शब्द बनेगा? .
(a) भेदताः
(b) भेदता
(c) भेदा
(d) भेत्ता
उत्तर-
(d) भेत्ता

प्रश्न 45.
लभ् + स्यते से कौन शब्द बनेगा?
(a) लभस्यते:
(b) लभ्स्य ते
(c) लप्स्य तं
(d) लपस्वते
उत्तर-
(c) लप्स्य तं

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प्रश्न 46.
मनः + रथः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) मनस्थः
(b) मनोरथः
(c) मनोरथ्
(d) मनरथ्
उत्तर-
(b) मनोरथः

प्रश्न 47.
पयः + धरः से कौन शब्द बनेगा?
(a) पयोधरः
(b) पयधर्
(c) पयोधर
(d) पयुधरः
उत्तर-
(a) पयोधरः

प्रश्न 48.
पयः + दः से कौन शब्द बनेगा?
(a) पयोदः
(b) पयोद्
(c) पयदः
(d) पयद्
उत्तर-
(a) पयोदः

प्रश्न 49.
यशः + दा से कौन शब्द बनेगा?
(a) यशोदा
(b) यशुदा
(c) यदः
(d) यश्या
उत्तर-
(a) यशोदा

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प्रश्न 50.
पुरः + हितः से कौन शब्द बनेगा?
(a) पोरोहिता
(b) पुरोहीत:
(c) पुरोहितः
(d) पुरोहीत
उत्तर-
(c) पुरोहितः

प्रश्न 51.
सरः + वरः से कौन शब्द बनेगा?
(a) सरवरः
(b) सरोवरः
(c) सरोवर
(d) सरावरः
उत्तर-
(b) सरोवरः

प्रश्न 52.
तेजः + मया से कौन शब्द बनेगा ?
(a) तेजोमयः
(b) तेजेमद्
(c) तेजेमयो
(d) तेजमेय
उत्तर-
(a) तेजोमयः

प्रश्न 53.
मनः + रमा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) मनरमाः
(b) मनरमा
(c) मनोरमा
(d) मनुरमः
उत्तर-
(c) मनोरमा

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प्रश्न 54.
पुनः + रमते से कौन शब्द बनेगा ?
(a) पुनरयेत्
(b) पुनरयत्
(c) पुनारमते
(d) पुनरत
उत्तर-
(c) पुनारमते

प्रश्न 55.
निः + रवः से कौन शब्द बनेगा? .
(a) निरवः
(b) नीरवः
(c) नरवः
(d) निरः
उत्तर-
(b) नीरवः

प्रश्न 56.
निः + रोग: से कौन शब्द बनेगा?
(a) निरोग
(b) नीरोगः
(c) निरोगः
(d) नीरोग्
उत्तर-
(b) नीरोगः

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प्रश्न 57.
प्रातः + रम्यम् से कौन शब्द बनेगा?
(a) प्रातम्यम्
(b) प्रात:रम्यम्
(c) प्रातारम्यमः
(d) प्रातारम्यम्
उत्तर-
(b) प्रात:रम्यम्

प्रश्न 58.
निः + कामः से कौन शब्द बनेगा?
(a) निकामः
(b) निकाम्
(c) निष्कामः
(d) नीष्कामः
उत्तर-
(c) निष्कामः

प्रश्न 59.
जगत् + नाथ से कौन शब्द बनेगा?
(a) जगतनाथ
(b) जगन्नाथ
(c) जनक
(d) जम्म
उत्तर-
(b) जगन्नाथ

प्रश्न 60.
निः + पापः से कौन शब्द बनेगा?
(a) निष्पापः
(b) नीष्पापः
(c) निष्पाप्
(d) नीष्पाप्
उत्तर-
(a) निष्पापः

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प्रश्न 61.
आवि + कृतम् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) आविष्कृतम्
(b) आवीष्कृतम्
(c) आविष्क्रतम्
(d) आविष्क्रमः
उत्तर-
(a) आविष्कृतम्

प्रश्न 62.
निः + कृतम् से कौन शब्द बनेगा?
(a) निष्कृतम्
(b) नीष्कृतम्
(c) निष्कृतम
(d) निकटमाः
उत्तर-
(a) निष्कृतम्

प्रश्न 63.
शरत् + चन्द्रः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) शरच्चन्द्रः
(b) शरचन्द्र
(c) शरजचन्द्रः
(d) शरचन्द्रः
उत्तर-
(a) शरच्चन्द्रः

प्रश्न 64.
षष् + थः से कौन शब्द बनेगा?
(a) षषथः
(b) षष्ठः
(c) षष्ठ्
(d) षष्त्
उत्तर-
(b) षष्ठः

प्रश्न 65.
सत् + वाणी से कौन शब्द बनेगा?
(a) संद्वाणी
(b) सद्वाणि
(c) सद्वाण
(d) सद्वण
उत्तर-
(a) संद्वाणी

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प्रश्न 66.
उत्कृष् + तः से कौन शब्द बनेगा ? ‘
(a) उत्कृष्टः
(b) उत्कृषटः
(c) उत्कृष्ट
(d) उतकृष्ट
उत्तर-
(a) उत्कृष्टः

प्रश्न 67.
तत् + लयः से कौन शब्द बनेगा?
(a) तलयः
(b) तत्लयः
(c) तल्लयः
(d) तल्लय्
उत्तर-
(d) तल्लय्

प्रश्न 68.
तत् + लीनम् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) ततलीनम्
(b) ततलिनम्
(c) तल्लि
(d) तल्लीनम्
उत्तर-
(d) तल्लीनम्

प्रश्न 69.
षट् + मुखः से कौन शब्द बनेगा?
(a) षणमुखः
(b) षणमुख
(c) षणमुख
(d) षणमूखः
उत्तर-
(a) षणमुखः

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प्रश्न 70.
चित् + मयम् से कौन शब्द बनेगा?
(a) चितमयमः
(b) चितमयम्
(c) चीतमयम्
(d) चिन्मयम्
उत्तर-
(d) चिन्मयम्

प्रश्न 71.
गिरि + ईश से कौन शब्द बनेगा? .
(a) गिर
(b) गिरीश
(c) गिरश
(d) गिरी
उत्तर-
(b) गिरीश

प्रश्न 72.
वाक् + हरिः से कौन शब्द बनेगा?
(a) वाग्धरिः
(b) वाग्धरी:
(c) वाग्धारी:
(d) वागधरि
उत्तर-
(a) वाग्धरिः

प्रश्न 73.
उत् + हारः से कौन शब्द बनेगा?
(a) उद्धारः
(b) उदारः
(c) अद्धारः
(d) उदंधारः
उत्तर-
(a) उद्धारः

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प्रश्न 74.
योध् + था से कौन शब्द बनेगा? ।
(a) योधधा
(b) योदा
(c) योद्धा
(d) योग्धा
उत्तर-
(c) योद्धा

प्रश्न 75.
लम् + धवा से कौन शब्द बनेगा?
(a) लब्धवा
(b) लब्ध्वाः
(c) लब्धवः
(d) लब्धाः
उत्तर-
(a) लब्धवा

प्रश्न 76.
स्वयम् + वरः से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्वयंवरः
(b) स्वयंवर
(c) स्वयमवरः
(d) स्वयंवर
उत्तर-
(a) स्वयंवरः

प्रश्न 77.
हरिः + त्राता से कौन शब्द बनेगा?
(a) हरिस्त्राता
(b) हरीस्त्राता
(c) हरिस्त्रात्
(d) हरिस्त्रातः
उत्तर-
(a) हरिस्त्राता

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प्रश्न 78.
इतः + ततः से कौन शब्द बनेगा?
(a) इततः
(b) इतस्तः
(c) इतसतः
(d) इतततः
उत्तर-
(b) इतस्तः

प्रश्न 79.
निः + चल: से कौन शब्द बनेगा?
(a) निचलः
(b) निश्चलः
(c) नीशचल
(d) नीशचल्
उत्तर-
(b) निश्चलः

प्रश्न 80.
निः + उपायः से कौन शब्द बनेगा?
(a) निरूपाय
(b) नीरूपायः
(c) नीरूपाद्
(d) निरूप्या
उत्तर-
(a) निरूपाय

प्रश्न 81.
निः + झरः से कौन शब्द बनेगा?
(a) निर्झरः
(b) नीर्झरः
(c) नीझरः
(d) निझर्
उत्तर-
(a) निर्झरः

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प्रश्न 82.
रविः + एव से कौन शब्द बनेगा?
(a) रविरेव
(b) खीरवे
(c) रविरवः
(d) रवीरव
उत्तर-
(a) रविरेव

प्रश्न 83.
दुः : गन्धः से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दुर्गन्धः
(b) दूर्गन्धः
(c) दूर्गन्ध्
(d) दुगस्थ्
उत्तर-
(a) दुर्गन्धः

प्रश्न 84.
परि + छेदः से कौन शब्द बनेगा?
(a) परिच्छेदः
(b) परीच्छेदः
(c) परीच्छेद
(d) परीच्छेदयः
उत्तर-
(a) परिच्छेदः

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प्रश्न 85.
राज + छात्रम् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) राजच्छत्रम्
(b) राजछात्रम्
(c) राजछात्रमः
(d) राजचछात्रम्
उत्तर-
(a) राजच्छत्रम्

प्रश्न 86.
तरू + छाया से कौन शब्द बनेगा ?
(a) तरूचछायां
(b) तरूच्छाया
(c) तरच्छाया
(d) तरूच्छायः
उत्तर-
(b) तरूच्छाया

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प्रश्न 87.
वि + छेद से कौन शब्द बनेगा?
(a) विच्छेदः
(b) वीच्छेदः
(c) विच्छेद्
(d) विच्छेदः
उत्तर-
(a) विच्छेदः

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प्रश्न 1.
क्त्वा’ प्रत्यय से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) कृत्वा
(b) कृतः
(c) कर्ता
(d) श्रोता
उत्तर-
(a) कृत्वा

प्रश्न 2.
‘कृ + क्तवतु’ से कौन-सा पद बनोग?
(a) कृतः
(b) कार्यः
(c) कृतवान्
(d) कर्ता
उत्तर-
(c) कृतवान्

प्रश्न 3.
‘इतिहास + ठक्’ से कौन-सा पद बनेगा?
(a) इतिहासिकः
(b) ऐतिहासिकः
(c) एतिहासिकः
(d) इतिहास
उत्तर-
(b) ऐतिहासिकः

प्रश्न 4.
‘लेखिका’ में कौन-सा स्त्री प्रत्यय है ? |
(a) ङीष्
(b) चाप्
(c) टाप्
(d) डाप्
उत्तर-
(c) टाप्

प्रश्न 5.
‘अश्व’ का स्त्रीलिंग रूप क्या है ?
(a) अश्वा
(b) अश्वी
(c) अश्वनी
(d) अश्विनी
उत्तर-
(a) अश्वा

प्रश्न 6.
‘लब्धुम्’ में कौन-सा प्रत्यय है ?
(a) टुम्
(b) तुमुन्
(c) तुमन्
(d) लभ्
उत्तर-
(b) तुमुन्

प्रश्न 7.
“स्था + क्त्वा’ से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) स्थात्वा
(b) तिष्ठत्वा
(c) स्थित्वा
(d) स्थिता
उत्तर-
(c) स्थित्वा

प्रश्न 8.
“शिव + अण’ से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) शिवा
(b) शिवी
(c) शिवानी
(d) शैवः
उत्तर-
(d) शैवः

प्रश्न 9.
‘लघिमा’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है ?
(a) इमनिच्
(b) मा
(c) इमा
(d) लधि
उत्तर-
(a) इमनिच्

प्रश्न 10.
‘गतिः’ में कौन-सी स्त्री प्रत्यय है ?
(a) क्त्वा
(b) ल्यप्
(c) घञ्
(d) क्तिन्
उत्तर-
(d) क्तिन्

प्रश्न 11.
‘पठ् + क्त्वा’ से कौन-सा शब्द बनेगा ?
(a) पाठित्वा
(b) पठित्वा
(c) पाठकत्वा
(d) पठनत्वा
उत्तर-
(b) पठित्वा

प्रश्न 12.
‘विष्णु + अण’ में कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) विष्णवः
(b) विष्णुः
(c) वैष्णवः
(d) वैश्यः
उत्तर-
(c) वैष्णवः

प्रश्न 13.
‘सुन्दरतमः’ में कौन-सा स्त्री प्रत्यय है ?
(a) तरम्
(b) थाल्
(c) तमप्
(d) तसिल
उत्तर-
(c) तमप्

प्रश्न 14.
‘कृ +तुमुन्’ के योग से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) ऋतुम्
(b) कर्तुम्
(c) कर्तितुम्
(d) क्रीडितुम
उत्तर-
(b) कर्तुम्

प्रश्न 15.
‘गमनीयम्’ में कौन-सा कृत् प्रत्यय है ?
(a) तव्यत्
(b) अनीयर्
(c) ण्यत्
(d) यत्
उत्तर-
(b) अनीयर्

प्रश्न 16.
‘जन + तल से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) जनकः
(b) जनता
(c) जनार्दनः
(d) जानकी
उत्तर-
(b) जनता

प्रश्न 17.
‘सर्वत्र’ में कौन-सा तद्धित् प्रत्यय है ? .
(a) अण्
(b) त्रल्
(c) घञ्
(d) तस्
उत्तर-
(b) त्रल्

प्रश्न 18.
‘मयूरः’ से कौन-सा स्त्रीलिंग रूप बनेगा?
(a) मयूरा
(b) मौरा
(c) मयूरी
(d) मृत्तिका
उत्तर-
(c) मयूरी

प्रश्न 19.
‘राजन’ शब्द से कौन-सा स्त्रीलिंग रूप बनेगा?
(a) राजनी
(b) रजनी
(c) राज्ञी
(d) राजा
उत्तर-
(c) राज्ञी

प्रश्न 20.
‘नर’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या होगा?
(a) नरी
(b) नरा
(c) नारी
(d) नारि
उत्तर-
(c) नारी

प्रश्न 21.
कृ + क्त से कौन-सा शब्द बना है ?
(a) कृतः
(b) कतः
(c) कतृः
(d) कृतृ
उत्तर-
(a) कृतः

प्रश्न 22.
भू + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) भुतः
(b) भुत
(c) भूतः
(d) भूत्
उत्तर-
(c) भूतः

प्रश्न 23.
त्यज् + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा ?
(a) त्यजतः
(b) त्यक्तः
(c) त्यजती
(d) त्यजित
उत्तर-
(b) त्यक्तः

प्रश्न 24.
वद् + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) वदितः
(b) वदतः
(c) वदत्
(d) वदेतः
उत्तर-
(a) वदितः

प्रश्न 25.
श्रु + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) श्रूत
(b) श्रूतः
(c) श्रुतः
(d) श्रुतीः
उत्तर-
(c) श्रुतः

प्रश्न 26.
लभ् + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) लब्धः
(b) लक्तः
(c) लभयतः
(d) लभेतः
उत्तर-
(a) लब्धः

प्रश्न 27.
स्मृ + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) स्मृतः
(b) स्मृतृ
(c) स्मतः
(d) स्मक्त
उत्तर-
(a) स्मृतः

प्रश्न 28.
दा + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) दतः
(b) दत्तः
(c) दत
(d) दत्त
उत्तर-
(b) दत्तः

प्रश्न 29.
लिख् + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) लिखितः
(b) लिखतः
(c) लिखित्
(d) लिखत्
उत्तर-
(a) लिखितः

प्रश्न 30.
दृश् + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) दृश्क्त
(b) दृशतः
(c) दृष्टः
(d) दृशः
उत्तर-
(c) दृष्टः

प्रश्न 31.
स्था + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) स्थितः
(b) स्थत्
(c) सिथतः
(d) स्तः
उत्तर-
(a) स्थितः

प्रश्न 32.
ज्ञा + क्त से कौन-सा शब्द बनेगा? ।
(a) ज्ञानः
(b) ज्ञाक्तः
(c) ज्ञानः
(d) ज्ञातः
उत्तर-
(d) ज्ञातः

प्रश्न 33.
भू + क्तवतु से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) भूतवान्
(b) भूगतान
(c) भूत्वन्
(d) भूतन्
उत्तर-
(a) भूतवान्

प्रश्न 34.
त्यज् + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा?
(a) त्यजयति
(b) त्यक्तवान्
(c)त्यक्तवानः
(d) ब
उत्तर-
(b) त्यक्तवान्

प्रश्न 35.
वद् + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा?
(a) वदवतुः
(b) वदक्तुः
(c) वपितवान्
(d) वदिता
उत्तर-
(c) वपितवान्

प्रश्न 36.
पा + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा ?
(a) पीतवान्
(b) पात्रवान्
(c) पितवानः
(d) पीत्रवान्
उत्तर-
(a) पीतवान्

प्रश्न 37.
दा + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दातवान्
(b) दत्तवान्
(c) दुतवानः
(d) दतिवानः
उत्तर-
(b) दत्तवान्

प्रश्न 38.
स्म + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्मृतवान्
(b) स्मृतीवान्
(c) स्मतवुः
(d) समक्तवतु
उत्तर-
(a) स्मृतवान्

प्रश्न 39.
लिख् + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा?
(a) लिखितवान्
(b) लिखवान्
(c) लिखन्तवान्
(d) लिखतवानः
उत्तर-
(a) लिखितवान्

प्रश्न 40.
दृश् + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दृशतवतु.
(b) दृतवान्
(c) दृष्टवान्
(d) दृशवान्
उत्तर-
(c) दृष्टवान्

प्रश्न 41.
स्था + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा ?
(a) स्थातवतु
(b) स्थाक्तुः
(c) स्थितवान्
(d) स्थातः
उत्तर-
(c) स्थितवान्

प्रश्न 42.
हन् + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा ?
(a) हनतवतुः
(b) हतवान्
(c) हातवान्
(d) हनीतवानः
उत्तर-
(b) हतवान्

प्रश्न 43.
ज्ञा + क्तवतु से कौन शब्द बनेगा?
(a) ज्ञातवान्
(b) ज्ञातः
(c) ज्ञात्
(d) ज्ञातवाः
उत्तर-
(a) ज्ञातवान्

प्रश्न 44.
कृ + शतृ से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) कृतवान्
(b) कुत्तवानः
(c) कुर्वत्
(d) कृत्वान्
उत्तर-
(c) कुर्वत्

प्रश्न 45.
पठ + शतृ से कौन शब्द बनेगा ? |
(a) पठीतः
(b) पठत्
(c) पठतः
(d) पठतुः
उत्तर-
(b) पठत्

प्रश्न 46.
भू + शतृ से कौन शब्द बनेगा ?
(a) भूतः
(b) भृत्
(c) भृतुः
(d) भवत्
उत्तर-
(d) भवत्

प्रश्न 47.
त्यज् + शतृ से कौन शब्द बनेगा ?
(a) त्यजत्
(b) त्यजन
(c) त्यजतुः
(d) तयजतः
उत्तर-
(a) त्यजत्

प्रश्न 48.
वद + शतृ से कौन शब्द बनेगा?
(a) वदत्
(b) वदतिः
(c) वदतुः
(d) वदन्तः
उत्तर-
(a) वदत्

प्रश्न 49.
गम् + शतृ से कौन शब्द बनेगा ?
(a) गच्छत्
(b) गमशतः
(c) गमशत्
(d) गमश्यत्
उत्तर-
(a) गच्छत्

प्रश्न 50.
स्मृ + शतृ से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्मारत्
(b) स्मरत्
(c) स्मृतः
(d) स्मत्
उत्तर-
(b) स्मरत्

प्रश्न 51.
दृश + शतृ से कौन शब्द बनेगा?
(a) दृशत्
(b) दहत्
(c) दृहतः
(d) दृशतः
उत्तर-
(b) दहत्

प्रश्न 52.
लिख + शतृ से कौन शब्द बनेगा?
(a) लिखत्
(b) लिखतः
(c) लिखम्
(d) लिखतः
उत्तर-
(a) लिखत्

प्रश्न 53.
लभ् + शानच् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) लभमानः
(b) लभमान्
(c) लभामानः
(d) लभामान्
उत्तर-
(a) लभमानः

प्रश्न 54.
जन् + शानच् से कौन शब्द बनेगा?
(a) जयमान्
(b) जयमनः
(c) जायमानः
(d) जयामनः
उत्तर-
(c) जायमानः

प्रश्न 55.
कृ + शानच् से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) कुर्वाणः
(b) कुवणः
(c) कुर्वाणी
(d) कूवाणः
उत्तर-
(a) कुर्वाणः

प्रश्न 56.
बुध + शानच् से कौन शब्द बनेगा?
(a) बुध्यामन्
(b) बुध्यमानः
(c) बुद्धमान
(d) बुद्धमान्
उत्तर-
(b) बुध्यमानः

प्रश्न 57.
पठ् + कत्वा से कौन शब्द बनेगा?
(a) पठीत्वाः
(b) पठित्वा
(c) पठित्व्
(d) पठ्
उत्तर-
(b) पठित्वा

प्रश्न 58.
या + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दत्वा
(b) दात्वा
(c) दत्वः
(d) दत्व्
उत्तर-
(a) दत्वा

प्रश्न 59.
हन् + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) हत्वा
(b) हतवाः
(c) हति
(d) हतव्
उत्तर-
(a) हत्वा

प्रश्न 60.
लभ् + कत्वा से कौन शब्द बनेगा?
(a) ज्ञातवाः
(b) ज्ञात्वा
(c) ज्ञात्वा
(d) ज्ञातवः
उत्तर-
(c) ज्ञात्वा

प्रश्न 61.
भू + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) भूत्वाः
(b) भूतव्
(c) भूत्वा
(d) भुत्वा
उत्तर-
(c) भूत्वा

प्रश्न 62.
स्था + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) स्थवा
(b) स्थित्वा
(c) सथवा
(d) स्थवः
उत्तर-
(b) स्थित्वा

प्रश्न 63.
कृ + कत्वा से कौन शब्द बनेगा?
(a) कत्वा
(b) कत्व्
(c) कत्वः
(d) क्रित्वा
उत्तर-
(d) क्रित्वा

प्रश्न 64.
दृश् + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दृश्ताः
(b) दृश्त्
(c) दृष्टवा
(d) दृष्टव्
उत्तर-
(c) दृष्टवा

प्रश्न 65.
गम् + कत्वा से कौन शब्द बनेगा?
(a) गमित्वा
(b) गत्वा
(c) गत्व्
(d) गत्वः
उत्तर-
(b) गत्वा

प्रश्न 66.
स्मृ + कत्वा से कौन शब्द बनेगा ?
(a) स्मृत्वाः
(b) स्मृत्व
(c) स्मृत्वा
(d) समृत्वा
उत्तर-
(c) स्मृत्वा

प्रश्न 67.
भू + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा?
(a) भुतुमुन्
(b) भवितुम्
(c) भवितम्
(d) भवचतम्
उत्तर-
(b) भवितुम्

प्रश्न 68.
पंठ + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा?
(a) पठितुमुन्
(b) पठितुम्
(c) पठित्वम्
(d) पठ्
उत्तर-
(b) पठितुम्

प्रश्न 69.
गम् + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) गनतुम्
(b) गनतुमः
(c) गन्तुम्
(d) गन्तुम्
उत्तर-
(c) गन्तुम्

प्रश्न 70.
दृश् + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा?
(a) दृश्तुम
(b) दृष्तुम्
(c) द्रष्टुम्
(d) द्रष्तुम्
उत्तर-
(c) द्रष्टुम्

प्रश्न 71.
स्था + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्थातुमः
(b) स्थातूम्
(c) स्थातुम्
(d) स्थातुमुन
उत्तर-
(c) स्थातुम्

प्रश्न 72.
स्मृ + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्मृतुम्
(b) स्मृतुम्
(c) स्मर्तुम् .
(d) स्मातुम्
उत्तर-
(c) स्मर्तुम्

प्रश्न 73.
हस् + तुमुन् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) हसितुम्
(b) हसीतुम्
(c) हसितूम्
(d) हसीतूम्
उत्तर-
(a) हसितुम्

प्रश्न 74.
भू + तव्य से कौन शब्द बनेगा ?
(a) भ्रातुम्
(b) भवितव्यम्
(c) भवीतयम्
(d) भवितूम्
उत्तर-
(b) भवितव्यम्

प्रश्न 75.
पठ् + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) पठितव्यम्
(b) पठीतव्यम्
(c) पठितव्यः
(d) पठीतव्यत्
उत्तर-
(a) पठितव्यम्

प्रश्न 76.
गम् + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) गमतव्यम्
(b) गन्तव्यम्
(c) गमतव्यत्
(d) गमतवयः
उत्तर-
(b) गन्तव्यम्

प्रश्न 77.
दृश + तव्य से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दृशतव्यः
(b) दृश्तव्य्
(c) द्रष्टव्यम्
(d) द्रष्टव्यत्
उत्तर-
(c) द्रष्टव्यम्

प्रश्न 78.
पा + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) पातव्यः
(b) पावत्यः
(c) पाठतव्यः
(d) पातव्यम्
उत्तर-
(d) पातव्यम्

प्रश्न 79.
स्था + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्थातव्यम्
(b) स्थातव्यमः
(c) स्थात्वयः
(d) स्थातयमः
उत्तर-
(a) स्थातव्यम्

प्रश्न 80.
स्मृ + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) समृतव्य
(b) स्मृतव्यम्
(c) समृतव्यम्
(d) स्मृतव्यः
उत्तर-
(b) स्मृतव्यम्

प्रश्न 81.
हस् + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) हसितव्यः
(b) हसीतव्यत्
(c) हसितव्यम्
(d) हसीतव्यतम्
उत्तर-
(c) हसितव्यम्

प्रश्न 82.
लभ् + तव्य से कौन शब्द बनेगा?
(a) लब्ध्वम्
(b) लभतव्यः
(c)लभतव्यत्
(d) लब्धम्
उत्तर-
(a) लब्ध्वम्

प्रश्न 83.
भू + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) भूवनीयर
(b) भवनीयम्
(c) भवनियम्
(d) भवनीयमः
उत्तर-
(b) भवनीयम्

प्रश्न 84.
पठ + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) पठनीयम्
(b) पठिनीयम्
(c) पठीनयमः
(d) पठीनयम्
उत्तर-
(a) पठनीयम्

प्रश्न 85.
गम् + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) गमनीयरः
(b) गमनीयम्
(c) गमनियमः
(d) गमनियम्
उत्तर-
(b) गमनीयम्

प्रश्न 86.
दृश् + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दर्शनीयम्
(b) दृशनीयम्
(c) दर्शनियम्
(d) दर्शनीयमः
उत्तर-
(a) दर्शनीयम्

प्रश्न 87.
पा + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) पनियम्
(b) पानीयम्
(c) पानीयमः
(d) पातनियमः
उत्तर-
(b) पानीयम्

प्रश्न 88.
स्था + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्थानीरः
(b) स्थानीयमः
(c) स्थानीयम्
(d) स्थानिरः
उत्तर-
(c) स्थानीयम्

प्रश्न 89.
स्मृ + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) स्मृनीयरः
(b) स्मरणीयम्
(c) स्मरनीः
(d) स्मृणीयमः
उत्तर-
(b) स्मरणीयम्

प्रश्न 90.
हस् + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) हसनीयरः
(b) हसनीयर्
(c) हसीयरः
(d) हसनीयम्
उत्तर-
(d) हसनीयम्

प्रश्न 91.
लभ् + अनीयर् से कौन शब्द बनेगा?
(a) लभनीयम्
(b) लभयमः
(c) लभयनीरः
(d) लभीनयमः
उत्तर-
(a) लभनीयम्

प्रश्न 92.
गा + यत् से कौन शब्द बनेगा? .
(a) गायम्
(b) गायमः
(c) गेयम्
(d) गायामः
उत्तर-
(c) गेयम्

प्रश्न 93.
नी + यत् से कौन शब्द बनेगा? .
(a) नीयतः
(b) नीयत्
(c) नेयम्
(d) नेयमः
उत्तर-
(c) नेयम्

प्रश्न 94.
स्था + यत् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) स्थायतः
(b) स्थायत्
(c) स्थेयम्
(d) स्थेयमः
उत्तर-
(c) स्थेयम्

प्रश्न 95.
पा + यत् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) पायतः
(b) पायत्
(c) पेयम्
(d) पेयमः
उत्तर-
(c) पेयम्

प्रश्न 96.
लभ् + यत् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) लभयत्
(b) लभयतः
(c) लभ्यम्
(d) लभ्यमः
उत्तर-
(c) लभ्यम्

प्रश्न 97.
दा + यत् से कौन शब्द बनेगा?
(a) दायत्
(b) दायतः
(c) देयम्
(d) देयमः
उत्तर-
(c) देयम्

प्रश्न 98.
हन् + यत् से कौन शब्द बनेगा?
(a) हनयतः
(b) हन्यत्
(c) वहयम्
(d) वहयमः
उत्तर-
(c) वहयम्

प्रश्न 99.
भू + यत् से कौन शब्द बनेगा?
(a) भाव्यम्
(b) भाव्यमः
(c) भावयम्
(d) भावयमः
उत्तर-
(a) भाव्यम्

प्रश्न 100.
भवत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा?
(a) भवती
(b) भवतः
(c) भवतप्
(d) भवतपः
उत्तर-
(a) भवती

प्रश्न 101.
गतवत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) गतवतः
(b) गतवान्
(c) गतवती
(d) गतवः
उत्तर-
(c) गतवती

प्रश्न 102.
कुर्वत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) कुवती
(b) कुर्वती
(c) कुवति
(d) कूवती
उत्तर-
(b) कुर्वती

प्रश्न 103.
बलवत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) बलवती
(b) बलवति
(c) बलवत्
(d) बलवतः
उत्तर-
(a) बलवती

प्रश्न 104.
इयत् + डीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) इयति
(b) इयत्
(c) इयती
(d) इयतः
उत्तर-
(c) इयती

प्रश्न 105.
कर्तृ + डीप से कौन शब्द बनेगा? .
(a) की
(b) कर्तृः
(c) क
(d) कत्री:
उत्तर-
(a) की

प्रश्न 106.
धातृ + डीप से कौन शब्द बनेगा ?
(a) धातुः
(b) धातः
(c) धात्री
(d) धात्री
उत्तर-
(c) धात्री

प्रश्न 107.
दातृ + ङीप से कौन शब्द बनेगा ?
(a) दात्री
(b) दार्जि
(c) दात्रि
(d) दात्री
उत्तर-
(d) दात्री

प्रश्न 108.
हन्त + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) हनत्रिः
(b) हन्त्रि
(c) हन्त्री
(d) ही
उत्तर-
(c) हन्त्री

प्रश्न 109.
गुणिन + डीप से कौन शब्द बनेगा?
(a) गणित्री
(b) गुणिर्की
(c) गुणिनी
(d) गुनीणी
उत्तर-
(c) गुणिनी

प्रश्न 110.
मायाविन् + डीप से कौन शब्द बनेगा?
(a) मायाविनी
(b) मायावीनी
(c) मायावीनि
(d) मायाविनप
उत्तर-
(a) मायाविनी

प्रश्न 111.
यशस्विन् + डीप से कौन शब्द बनेगा ?
(a) यशस्विनी
(b) यशसवनी
(c) यशस्वनी
(d) यशस्वीः
उत्तर-
(a) यशस्विनी

प्रश्न 112.
तेजस्विन् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा?
(a) तेजसविनी
(b) तेजस्विनी
(c) तेजस्विन
(d) तेजस्वीनी
उत्तर-
(b) तेजस्विनी

प्रश्न 113.
श्रीमत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) श्रीमति
(b) श्रीमातः
(c) श्रीमती
(d) श्रीमतपः
उत्तर-
(c) श्रीमती

प्रश्न 114.
प्रेयस् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा?
(a) प्रेयसी
(b) प्रेयसि
(c) प्रयीसी
(d) प्रेयसिसी
उत्तर-
(a) प्रेयसी

प्रश्न 115.
श्रेयस् + ङीप से कौन शब्द बनेगा?
(a) श्रेयसि
(b) श्रेयसः
(c) श्रयेस्
(d) श्रेयसी
उत्तर-
(d) श्रेयसी

प्रश्न 116.
बलवत् + ङीप् से कौन शब्द बनेगा ?
(a) बलवति
(b) बलवत्
(c) बलवत
(d) बलवती
उत्तर-
(d) बलवती

प्रश्न 117.
राजन् + डीप से कौन शब्द बनेगा?
(a) राजनी
(b) राजनि
(c) राज्ञी
(d) राज्ञि
उत्तर-
(c) राज्ञी

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

Bihar Board Class 12 Political Science क्षेत्रीय आकांक्षाएँ Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में मेल करें भाग –

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 8 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ Part - 2 img 1
उत्तर:
(1) – (स)
(2) – (द)
(3) – (ब)
(4) – (अ)

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प्रश्न 2.
पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ आन्दोलन ज्यादा स्वतन्त्रता की माँग के आन्दोलन और अलग देश की माँग करना ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ है। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिए अलग-अलग रंग भरिए व दिखाईए कि राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रबल हैं।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3.
आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने के क्या कारण थे?
उत्तर:
1970 के दशक में पंजाब में अकालियों का आन्दोलन और अधिक तेज हो गया व इसके एक समूह ने पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग उठाई। 1973 में आनंदपुर साहिब में हुए एक सम्मेलन में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया जिसे आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है। इस प्रस्ताव में केन्द्र व प्रांतों के सम्बन्धों को पुनः पारिभाषित करने की माँग की जिसमें राज्यों के सभी क्षेत्राधिकार देकर केन्द्र को कुछ सीमित विषयों (विदेश, सम्बन्ध, रक्षा व बजट) पर क्षेत्राधिकार सीमित किया।

विभिन्न स्तर पर इस प्रस्ताव को अलग राज्य की माँग के रूप में देखा गया। आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव को प्रारम्भ में पंजाब में ऐसी भावना का विकास किया कि पहले सीमा क्षेत्र व पानी के बँटवारे के मद्दे की राजनीति प्रारम्भ हुई व बाद में पंजाब को सिख राज्य के रूप (खालिस्तान) में माँग का आन्दोलन प्रारम्भ किया जिससे पूरा राज्य उग्रवाद की चपेट में आ गया।

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प्रश्न 4.
जम्मू-कश्मीर की अंदरुनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए व बताइए कि इस राज्य में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं में इन विभिन्नताओं के कारण सर उठाया।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर में तीन राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र शामिल हैं-जम्मू, कश्मीर व लद्दाख। कश्मीर को इस राज्य का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। कश्मीरी बोलने वाले ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं। बहरहाल, कश्मीरी भाषा लोगों में अल्पसंख्यक हिन्दु भी शामिल हैं। जम्मू क्षेत्र पहाड़ी तलहटी एवं मैदानी इलाके का मिश्रण है जहाँ हिन्दू, मुस्लिम और सिख यानी कई धर्म व भाषाओं के लोग रहते हैं। लद्दाख पर्वतीय इलाका है जहाँ बौद्ध व मुस्लिमों की आबादी है। इस क्षेत्र में बहुत कम आबादी है। जम्मू-कश्मीर की समस्या के दोनों पहलू है, बाहरी भी व आन्तरिक भी।

जम्मू-कश्मीर अपनी अलग पहचान के संघर्ष में लगा है जहाँ भारत व पाकिस्तान भी इस समस्या से जुड़े हैं । जम्मू कश्मीर को भारत अपना अभिन्न अंग मानता है जबकि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को विवादित मानता है। वहीं जम्मू कश्मीर का एक वर्ग जम्मू-कश्मीर को अलग स्वतंत्र प्रभुसत्ता सम्पन्न राज्य के रूप में देखना चाहते हैं।

1948 के बाद से ही यह विवाद जारी है। दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर की अपनी आन्तरिक समस्या भी है जम्मू क्षेत्र पहाड़ी व मैदानी इलाके का मिश्रण है व अपनी अधिक राजनीतिक स्वायत्तता की माँग करता रहा है। कश्मीर राज्य का दिल है व इसकी पहचान को कश्मीरियत के रूप में जाना जाता है। समय-समय पर लद्दाख के लोगों की ओर से भी मांग उठती रहती है कि इस क्षेत्र को सांस्कृतिक व आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त स्वायत्तता मिलनी चाहिए।

प्रश्न 5.
कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के मसले पर विभिन्न पक्ष क्या हैं? इनमें कौन-सा पक्ष आपको समुचित जान पड़ता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर भारत का वह राज्य है जिसने भारत सरकार अधिनियम 1947 के कानून के आधार पर प्रारम्भ में तो स्वतन्त्र राज्य के रूप में रहने की इच्छा व्यक्त की थी परन्तु 1948 में जब कबालियों ने इस पर आक्रमण कर इसके एक भाग को अपने कब्जे में कर लिया तो उस समय के राजा हरि सिंह ने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर को विलय कर दिया परन्तु कुछ विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हैं इसे विशेष दर्जा दिया जाए अत: भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 व 371 के तहत इसे विशेष दर्जा दिया गया। विशेष दर्जे से यह व्यवस्था है कि जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान होगा व भारत की संसद का कानून जम्मू-कश्मीर में तभी लागू होगा जब जम्मू-कश्मीर की विधान सभा उस बिल को पास कर दे।

जम्मू-कश्मीर को अधिक स्वायत्तता देने के लिए दिए गए अनुच्छेद 370 के सम्बन्ध में अलग-अलग विचार है। कुछ लोगों का यह कहना है कि इसके दिए गए प्रावधान जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के लिए अपर्याप्त है व इनको पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जाता। जबकि अन्य वर्ग का यह मानना है कि 370 को समाप्त कर देना चाहिए व जम्मू-कश्मीर को भी अन्य राज्यों की तरह ही बराबर का दर्जा मिलना चाहिए।

दोनों पक्षों के निष्पक्ष अध्ययन से यह बात कही जा सकती है कि जम्मू-कश्मीर का विषय निश्चित रूप से अलग है व जरूरत है एक ऐसा वातावरण बनाने की कि जम्मू-कश्मीर के लागे कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानने लगे इसके लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्ण सांस्कृतिक व आर्थिक विकास की आवश्यकता है। जम्मू कश्मीर के नौजवानों को अधिक से अधिक रोजगारों व स्वयं रोजगारों में लगाकर उन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता है। जम्मू-कश्मीर के विकास को इस प्रकार से नियोजित करने की आवश्यकता है कि अन्य राज्यों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव ना पड़े। आज की सच्चाई यह है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है जिसके पूर्ण विकास की जिम्मेवारी सभी पर है।

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प्रश्न 6.
असम आन्दोलन सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था। व्याख्या करें।
उत्तर:
असम भारत का एक प्रमुख राज्य है जिसके साथ भारत की महत्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय सीमा लगती है। असम पूर्वोत्तर के सात राज्यों (जिन्हें सात बहनें भी कहा जाता है) में सबसे बड़ा व सबसे प्रमुख राज्य है। असम की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है। असमी भाषा बोलने वालों का इन राज्यों में पहलवाद है जिसके प्रभुत्व का अन्य राज्यों में बोली जाने वाली भाषा के लोगों ने इसका विरोध किया है।

यह सच है कि असम के लोगों को अपनी विशिष्ट भौगोलिकता व सांस्कृतिक धरोहर व पहचान पर अभिमान रहा है यही कारण है कि जब भी इनके इस अभिमान को किसी भी क्षेत्र से ठेस लगती है तो इनका विरोध अत्यधिक तीव्र होता है। इनके द्वारा चलाए गए विभिन्न आन्दोलन इस सच्चाई का परिणाम है।असम आन्दोलन का एक और कारण है असम का आर्थिक पिछड़ापन, जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव वहाँ के युवाओं पर पड़ा जिन्होंने विभिन्न हिंसात्मक आन्दोलनों में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया।

केन्द्र सरकार भी विभिन्न राजनीतिक व आर्थिक कारणों से असम के विकास की ओर ध्यान नहीं दे पायी जिससे असम के लोगों का असन्तोष लगातार बढ़ता रहा जिसमें हिंसात्मक आन्दोलन का जन्म हुआ। अब असम के लोग किसी भी बाहरी लोगों को बर्दास्त नहीं करते। यही कारण है कि बंगला देश, बिहार व पश्चिम बंगाल से आए व बसे लोगों को वे इसलिए सहन नहीं कर पाते क्योंकि उनका यह मानना है कि उनके श्रोतों पर ये बाहर के लोग कब्जा कर रहे हैं। अत: यह सत्य है कि असम आन्दोलन सांस्कृतिक अभियान व आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 7.
हर क्षेत्री आन्दोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता। इस अध्याय से उदाहरण देकर इस तथ्य की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में विभिन्नता में एकता है। भारत एक बहुल समाज है जिसमें विभिन्न जाति, धर्म, भाषा व सांस्कृतिक पहचान के लोग रहते हैं। सभी लोग अपने व्यवसायिक व आर्थिक हितों के प्रति सजग हैं। भारत एक प्रजातन्त्रीय देश है जिसमें सभी को अपनी बात कहने व संघ बनाने व विरोध जताने का अधिकार है। इसी सन्दर्भ में भारत में लोगों के द्वारा अपने हितों की रक्षा करने व विकसित करने का अधिकार है। अपने हितों को प्राप्त करने के लिए लोग एकत्रित होते हैं, संघ बनाते हैं व आन्दोलन भी चलाते हैं।

भारत के कई क्षेत्रों में इस प्रकार के आन्दोलन जारी रहते हैं जो भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं। आन्दोलन को प्रजातन्त्रीय प्रणालियों में स्वीकार किया जाता है परन्तु जब ये आन्दोलन उग्रवादियों व असामाजिक तत्वों के हाथों में चले जाएँ अथवा कट्टरवादियों का नियन्त्रण इन आन्दोलनों पर हो जाए तब सीमा समाप्त हो जाती है व प्रजातन्त्र के लिए खतरा भी पैदा हो जाता है।

भारत के कई राज्यों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर व कई उत्तर पूर्वी राज्यों जैसे नागालैंड व मिजोरम में उग्रवादी आन्दोलन चले हैं जो भारत की एकता अखंडता के लिए खतरा बन गए थे क्योंकि वे भारत से अलग होने की माँग कर रहे थे। पंजाब के आन्दोलनकारी भी हिंसात्मक हो गए थे व खालिस्तान (सिख राज्य’ की माँग कर रहे थे।

लेकिन कई राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय व्यवसायिक व आर्थिक हितों के लिए आन्दोलन चलाए गए हैं जैसे उत्तर प्रदेश में किसान आन्दोलन, असम में बोडो आन्दोलन भी अलगाववाद जैसे कोई माँग नहीं कर रहा था। असमी लोगों का विरोध बाहरी राज्यों से आए विस्थापित लोगों के खिलाफ है। झारखंड व छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड भी ऐसे ही आन्दोलनों का परिणाम है जिसमें वे एक निश्चित क्षेत्र के विकास का मुद्दा उठा रहे थे।

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प्रश्न 8.
भारत के विभिन्न भागों से उठने वाली क्षेत्रीय मांगों से विविधता में एकता के सिद्धान्त की अभिव्यक्ति होती है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं?
उत्तर:
यह कथन सही है कि विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों से उठने वाली माँगों व उन मांगों के सम्बन्ध में चल रहे आन्दोलनों को हम भारत की विविधताओं की अभिव्यक्ति के रूप में समझ सकते हैं क्योंकि भारत एक बहुल समाज है जिसमें विभिन्न जाति, धर्म, भाषा व संस्कृति व भौगोलिकताओं के लोग रहते हैं जिनके प्रति लोगों में प्रजातन्त्र की प्रक्रिया के साथ-साथ लगाव व जागरूकता बढ़ी है। अत: वे अपने क्षेत्रीय भाषीय व भौगोलिक तथा सांस्कृतिक हितों की सुरक्षा के लिए विभिन्न रूपों में अपनी आवाज उठाते रहते हैं।

ये सब कुछ भारतीय संविधान द्वारा तय की गई सीमाओं में ही करते हैं क्योंकि प्रत्येक भारतीय में क्षेत्रीय व राष्ट्रीय भावनाएँ हैं जिसके आधार पर भारत में विभिन्नता में एकता है। यद्यपि कुछ क्षेत्रों से इस प्रकार की माँगें उठती रही है जिससे एकता व अखंडता को आघात लगा है। पंजाब, नागालैंड व मीजोरम व जम्मू व कश्मीर से भी ऐसी माँगें अर्थात् अलग राज्यों की मांग अर्थात् भारत से अलग होने की माँग उठती रही है जिससे भारत की विभिन्नता में एकता की भावना को चोट लगी है। धीरे-धीरे सभी अलगाववादी तत्व भारत की राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। भारत में बहुल समाज होने के बावजूद एकता की भावना छिपी हुई है।

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प्रश्न 9.
नीचे लिखे अवतरण को पढ़े व इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें –
हजारिका का गीत एकता की विजय पर है …… पूर्वोत्तर के सात राज्यों को इस गीत में एक ही माँ की सात बेटियाँ कहा गया है …….. मेघालय अपने रास्ते गई …… अरुणाचल भी अलग हुई व मिजोरम असम के द्वार पर दूल्हे की तरह दूसरी बेटी से ब्याह रचाने को खड़ा है ……. इस गीत का अन्त असमी लोगों की एकता को बनाए रखने के संकल्प के साथ होता है और इसमें समकालीन असम में मौजूद छोटी-छोटी कौमो को भी अपने साथ एक जुट रखने की बात कही गई है …….. कबरी और मिसिंग भाई बहन हमारे ही प्रियजन हैं। संजीव व वरुथा।

(क) लेखक यहाँ किस एकता की बात कर रहा है?
(ख) पुराने राज्य असम से अलग करके पूर्वोत्तर के अन्य राज्य क्यों बनाए गए?
(ग) क्या आपको लगता है कि भारत के सभी क्षेत्रों के ऊपर की यही बात लागू हो सकती है? क्यों?

उत्तर:
(क) इस लेख में लेखक ने असम के उन सब लोगों व क्षेत्रों की बात कर रहा है जो बाद में सात राज्यों में विभाजित हो गए। लेखक ने इन सात राज्यों को एक ही माँ अर्थात् (असम) की सात बेटियाँ कहा है जो भले ही असम से अलग हो गए हों पर उन सबका सामाजिक, सांस्कृतिक व भौगोलिक साथ है व एकता है।

(ख) आजादी के समय मणिपुर और त्रिपुरा रियासतें थी शेष पूर्वोत्तर इलाका असम कहलाता था। गैर असमी लोगों को लगा कि असम की सरकार उन पर असमी भाषा थौंप रही है। अत: गैर असमी लोगों ने अपनी भाषीय पहचान को सुरक्षित करने के लिए अपने निश्चित क्षेत्र के लिए राजनीतिक स्वायत्तता की माँग उठा ली। पूरे राज्य में असमी भाषा को लादने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और दंगे हुए व असम से अलग होकर अपनी भाषीय पहचान के आधार पर अलग राज्य की माँग करने लगे।

पूर्वोत्तर के पूरे इलाके का बड़े व्यापक स्तर पर राजनीतिक पुनर्गठन हुआ। नागालैंड को 1960 में राज्य बनाया गया। 1972 में मेघालय, मणिपुर व त्रिपुरा राज्य बने। असम से अन्य राज्यों के अलग होने का कारण आर्थिक विसमताएँ भी थी। 1959 में मिजो पर्वतीय इलाके में भारी अकाल पड़ा। असम की सरकार इस अकाल में समुचित प्रबन्ध ना कर सकी जिससे मिजोरम के लोगों में असंतोष बढ़ गया जो धीरे-धीरे हिंसात्मक अलगाववादी आन्दोलन का रूप लेने लगा।

1986 में राजीव गाँधी व लाल डेगा के बीच समझौते के आधार पर मिजोरम राज्य का गठन हुआ। इसी प्रकार से राजीव गाँधी व फिजो के समझौते के आधार पर नागालैंड भी एक राज्य के रूप में गठित किया गया। इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि असम से अन्य राज्यों के अलग होने के दो प्रमुख कारण रहे –

  1. भाषीय पहचान के खोने का डर
  2. आर्थिक पिछड़ापन

(ग) भारत जब 1947 में आजाद हुआ था उस समय लगभग 13 राज्य व 9 केन्द्र शासित प्रदेश थे। आज भारत 29 राज्यों का संघ है। नए राज्यों का निर्माण विभिन्न राज्यों में विभिन्न आधारों पर विभिन्न क्षेत्रों से उठी मांगों के आधार पर किया गया। भारत एक बहुल समाज है जिसमें विभिन्न संस्कृतियों, बोलियों, भाषाओं व भौगोलिकताओं के लोग रहते हैं जिनकी अपनी एक विशिष्ट पहचान है। बड़े-बड़े राज्यों में आर्थिक स्तर पर भी क्षेत्रीय असन्तुलन हो जाना भी स्वाभाविक है जिससे एक क्षेत्र में दूसरे क्षेत्र के साथ प्रतियोगिता प्रारम्भ हो जाता है जिससे अलगाववाद की भावना उत्पन हो जाती है।

1955 तक कई राज्यों में भाषा के आधार पर क्षेत्रीय विकास में आर्थिक असन्तुलन को लेकर अलग राज्यों के गठन की मांग बड़ी तेजी से उभरी जिसके परिणाम स्वरूप कई बड़े राज्यों जैसे महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से अलग राज्य बनाने की मांग उठी। 1956 भाषा के आधार पर राज्य पुनर्गठन कानून पास किया गया जिसके आधार पर भाषा के आधार पर अनेक राज्यों का गठन किया गया। 1966 में हरियाणा का पंजाव से विभाजन हुआ। क्षेत्रीय आर्थिक व प्रशासनिक विकास के मुद्दों के आधार पर झारखंड, छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आए।

Bihar Board Class 12 Political Science क्षेत्रीय आकांक्षाएँ Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उन प्रमुख प्रवर्तियों को बताइए जो भारतीय एकता अखंडता के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है।
उत्तर:
निम्न वे प्रमुख प्रवर्तियाँ भारतीय राजनीतिक व्यवस्था से उभर रही है जो भारतीय एकता अखंडता के लिए खतरा पैदा कर रही हैं –

  1. सांस्कृतिक पहचान खोने का डर विशेषकर अल्पसंख्यकों के द्वारा
  2. क्षेत्रवाद
  3. क्षेत्रीय आर्थिक असन्तुलन
  4. एक भाषा का अन्य भाषाओं पर प्रभुत्व का डर
  5. धार्मिक कट्टरवाद
  6. स्थानीय प्राकृतिक श्रोतो पर बाहरी लोगों का प्रभाव।

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प्रश्न 2.
कुछ प्रमुख क्षेत्रीय आन्दोलनों के नाम बताइए जिन्होंने भारतीय राजनीति को प्रभावित किया है।
उत्तर:
कुछ प्रमुख आन्दोलन निम्न हैं जो भारतीय राजनीति को लम्बे समय से प्रभावित करते रहे हैं –

  1. जम्मू-कश्मीर में चल रहे आन्दोलन
  2. आसाम आन्दोलन
  3. मिजोरम आन्दोलन
  4. नागालैंड का आन्दोलन
  5. पंजाब आन्दोलन
  6. भाषा को लेकर दक्षिण में चल रहे अनेक आन्दोलन।

प्रश्न 3.
कुछ राज्यों के नाम बताइए जिनको भाषा के आधार पर गठित किया गया है।
उत्तर:
निम्न प्रमुख राज्य हैं जिनको भाषा के आधार पर 1956 में राज्य पुनर्गठन कानून के आधार पर गठित किया गया –

  1. आन्ध्र प्रदेश
  2. कर्नाटक
  3. महाराष्ट्र
  4. गुजरात
  5. पंजाब
  6. हरियाणा।

प्रश्न 4.
जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक व सांस्कृतिक गठन को समझाइए।
उत्तर:
जम्मू एवं कश्मीर में तीन राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र शामिल हैं जम्मू, कश्मीर व लद्दाख। कश्मीर में ज्यादातर लोग कश्मीरी भाषा बोलते हैं व ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं। कश्मीरी भाषी लोगों में अल्पसंख्यक हिन्दू भी शामिल हैं। जम्मू क्षेत्र पहाड़ी एवं मैदानी इलाके का मिश्रण हैं जहाँ हिन्दू, मुस्लिम और सिख यानी कई धर्म और भाषाओं के लोग रहते हैं।

लद्दाख का इलाका पर्वतीय है जिसमें बौद्ध एवं मुस्लिमों की आबादी है। यह क्षेत्र कम आबादी का क्षेत्र है। जम्मू-कश्मीर बहुलवादी समाज व राजनीति का एक जीवन्त उदाहरण है। यहाँ विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषायी, जातीय समूह के लोग रहते हैं। इसी कारण इन समूहों की अलग-अलग राजनीतिक आकांक्षाएँ हैं।

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प्रश्न 5.
कश्मीर के विभिन्न समूहों के लोगों की अलग-अलग माँगे क्या हैं? कश्मीर के भविष्य के बारे में उनकी क्या सोच है?
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर का जब से भारत में विलय हुआ है तभी से यह विलय विवादों के घेरे में रहा है क्योंकि उस समय के कश्मीर के राजा ने कश्मीर का भारत में विलय उस समय स्वीकार किया जब कबीलियों ने जम्मू कश्मीर के ऊपर आक्रमण करके जम्मू-कश्मीर के एक भाग पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तान ने इस विलय पर आपत्ति की व इस मसले को संयुक्त राष्ट्र में भी ले गया। जम्मू-कश्मीर के भविष्य के सम्बन्ध में विभिन्न पक्षों की अलग-अलग माँगे निम्न हैं –

  1. कश्मीर के कुछ लोग कश्मीर को अलग स्वतंत्र प्रभुसत्ता सम्पन्न राज्य के रूप में प्राप्त करना चाहते हैं।
  2. कुछ लोग कश्मीर का पाकिस्तान में विलय चाहते हैं।
  3. एक बड़ा वर्ग वह है जो जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ ही रखना चाहते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के लिए और अधिक स्वायत्तता चाहते हैं।

प्रश्न 6.
अनुच्छेद 370 के बारे में आप क्या जानते है?
उत्तर:
जब जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ तो कुछ शर्तों के साथ हुआ जिसमें संविधान के अनुच्छेद 370 में जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जे की व्यवस्था की। अनुच्छेद 370 के आधार पर जम्मू-कश्मीर का अपना अलग संविधान है व भारतीय संसद का कोई भी कानून जम्मू-कश्मीर में तभी चलेगा जब जम्मू-कश्मीर की विधान सभा उसे पारित कर देगी।

प्रश्न 7.
द्रविड़ आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
द्रविड़ आन्दोलन भारतीय राजनीति में सबसे ताकतवर व क्षेत्रीय भावनाओं की सर्वप्रथम व सबसे प्रबल अभिव्यक्ति था। यह आन्दोलन एक शान्तिप्रिय आन्दोलन था। इस आन्दोलन के लोगों ने अपनी मांगों को केवल राजनीतिक मन्त्रों के द्वारा ही रखा। द्रविड़ आन्दोलन – की बागडोर तमिल सुधारक ई.वी.राधास्वामी (पेरियार) के द्वारा हुई।

इस आन्दोलन की प्रक्रिया से एक राजनीतिक संगठन ‘द्रविड कषगय’ का सुत्रपात हुआ जिसका उद्देश्य व्यवस्था पर ब्राह्मणों के प्रभुत्व को समाप्त करना था व राजनीति में उत्तर राज्यों के प्रभाव को कम करके क्षेत्रीय गौरव की प्रतिष्ठा पर जोर देता था। यह आन्दोलन प्रमुख रूप से तमिलनाडू तक सीमित रहा।

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प्रश्न 8.
जम्मू-कश्मीर के लोग अनुच्छेद 370 के विशेष दर्जे के प्रावधानों से सन्तुष्ट क्यों नहीं हैं?
उत्तर:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है जिसमें कई प्रमुख प्रावधान है जैसे जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान का होना । परन्तु जम्मू कश्मीर के लोग इस अनुच्छेद के द्वारा विशेष दर्जे देने से भी सन्तुष्ट नहीं जिसके निम्न कारण हैं –

  1. भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के सम्बन्ध में कश्मीर के लोगों से जनमत नहीं करवाया।
  2. अनुच्छेद 370 के द्वारा दिए गए प्रावधानों को ठीक से लागू नहीं किया गया।
  3. जिस प्रकार से भारत में प्रजातन्त्र का विकास हुआ उस प्रकार से जम्मू कश्मीर से प्रजातन्त्रीय संस्थाओं को मजबूत व प्रभावशाली नहीं बनाया गया।

प्रश्न 9.
आपरेशन ब्लूस्टार’ के क्या प्रमुख कारण थे?
उत्तर:
उग्रवादियों ने पवित्र स्वर्ण मन्दिर को अपनी नापाक उग्रवादी गतिविधियों का अड्डा बना दिया जिससे स्वर्ण मन्दिर में हथियार जमा करें जिससे यह एक हथियार बंद किले के रूप में परिवर्तित हो गया। जून 1984 को भारत सरकार ने आपरेशन ब्लूस्टार चलाया जिसके तहत सैनिक कार्यवाही से अमृतसर के. स्वर्ण मन्दिर से सभी उग्रवादियों व उनमें हथियारों को वहाँ से साफ किया जसमें अनेक हत्याएँ भी हुई।

प्रश्न 10.
1973 के आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के सम्बन्ध में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अकालीदल की राजनीति धीरे-धीरे उग्र विचारधारा के नेताओं के हाथों में चली गई। अकाली दल क्षेत्रीय राजनीति करने लगे व केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्धों की पुन: व्याख्या की माँग करने लगे। 1973 के आनंदपुर साहिब प्रस्ताव में केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्ध में निम्न विचार दिए गए कि केन्द्र के पास केवल निम्न विषय केन्द्र चाहिए। शेष विषय प्रान्तों के पास होने चाहिए –

  1. विदेश नीति व प्रतिरक्षा
  2. संचार व्यवस्था
  3. बजट

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प्रश्न 11.
राजीव लोंगवाल समझौते की मुख्य विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
1985 के चुनावों में कांग्रेस को भारी सफलता मिली व राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने देश में चल रहे विभिन्न आन्दोलनों व उनसे जुड़े मुद्दों की ओर ध्यान दिया व बातचीत के द्वारा उन सभी समस्याओं को हल करने का प्रयास किया। इसी कड़ी में पंजाब समस्या का समाधान निकालने के लिए उन्होंने तत्कालीन अकाली दल अध्यक्ष श्रीहरचंद लोंगवाल के साथ समझौता किया जिसकी मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. चंडीगढ़ पंजाब को दे दिया जाएगा।
  2. सीमा विवाद को निपटाने के लिए एक अलग से कमीशन गठित किया जाएगा जो यह भी देखेगा कि चंडीगढ़ के बदले हरियाणा को और कौन-सा व कितना क्षेत्र दिया जाएगा।
  3. पानी के बँटवारे को निश्चित करने के लिए ‘इरादी आयोग’ का गठन किया गया।

प्रश्न 12.
असम आन्दोलन के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर:
असम आन्दोलन के निम्न प्रमुख कारण थे –

  1. असमी भाषा का अन्य भाषाओं के लोगों पर प्रभुत्व
  2. बिहार व बंगला देश के लोगों का असम की अर्थव्यवस्था पर प्रभुत्व
  3. असम का केन्द्र सरकारों के द्वारा पक्षपात पूर्ण रवैया
  4. आसाम का आर्थिक पिछड़ापन

प्रश्न 13.
राजीव गाँधी व आसाम के विद्यार्थी संगठन के बीच समझौते की प्रमुख बातें क्या थी?
उत्तर:
असम में 6 वर्षों की राजनीतिक व आर्थिक अस्थिरता के बाद राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने असम के ‘आसू’ आल इंडिया स्टूडंटस यूनियन’ के नेताओं से सफलतापूर्वक बात कर समझौता किया जिससे आसाम में स्थिरता व चमन लौट आया। इस समझौते से यह तय किया गया कि जो लोग बंगला देश के युद्ध के दौरान अथवा इसके बाद में स्मालों में असम में आए हैं उनकी पहचान की जाएगी व उन्हें बापस भेजा जाएगा। इस समझौते के बाद आसू के नेताओं ने एक क्षेत्रीय दल का गठन किया जिसका नाम आसामगण परिषद रखा। 1985 में इस वायदे के साथ यह सत्ता में आई कि विदेशी लोगों की समस्या को हल कर दिया जाएगा।

प्रश्न 14.
ऐ-जेड फिलो कौन था?
उत्तर:
असमी जादू फिजो का जन्म 1904 में हुआ व इनकी मृत्यु 1990 में हुई। वे नागालैंड के प्रमुख नेता जिन्होंने नागालैंड की स्वतन्त्रता व विकास के लिए विदेशों से संघर्ष किया। वे नागा नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष थे। इन्होंने भारत सरकार के खिलाफ विदेशी जमीन से लम्बा संघर्ष किया। लम्बे समय तक वे भूमिगत रहे। उन्होंने जीवन के अन्तिम 30 वर्ष ब्रिटेन में गुजारे। फीजो को पाकिस्तान व चीन का भी लगातार समर्थन मिलता रहा।

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प्रश्न 15.
भारत में चल रहे आन्दोलन अन्य देशों में चल रहे आन्दोलनों से किस प्रकार से भिन्न थे?
उत्तर:
प्रजातन्त्रीय प्रणालियों में विभिन्न हितों के लोगों के द्वारा अपने-अपने हितों के विकास के लिए आन्दोलनों का रास्ता कई रास्ता कई बार स्वाभाविक प्रतीत होता है परन्तु आन्दोलन का स्वरूप उस देश की संस्कृति व वहाँ के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक वातावरण पर भी निर्भर करता है। भारत में चल रहे आन्दोलनों व अन्य देशों में चल रहे आन्दोलनों में प्रमुख अन्तर यह रहा है कि भारत का आन्दोलन प्रायः संविधान की सीमाओं में रहे व अहिंसात्मक रहे व राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करते रहे परन्तु अन्य देशों में आन्दोलन संविधान की सीमाओं से बाहर रहे व हिंसात्मक रहे।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विभिन्न राज्यों में होने वाले प्रमुख आन्दोलनों के क्या प्रमुख कारण थे?
उत्तर:
आजादी के बाद भारत में प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया प्रारम्भ हुई जिसके पलस्वरूप लोगों में अपनी व्यक्तिगत व क्षेत्रीय हितों के प्रति भी जागरूकता पैदा हुई फलस्वरूप विभिन्न राज्यों में अनेक आन्दालेन अपना प्रभाव दिखाने लगे। इन आन्दोलन के प्रमुख कारण निम्न माने जा सकते हैं –

  1. राजनीतिक व प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया के कारण लोगों में राजनीतिक चेतना का विकास।
  2. भारतीय समाज का बहुल स्वरूप अर्थात् भारत में विभिन्न जाति, धर्म व संस्कृति व भौगोलिकता के लोग रहते हैं।
  3. कई राज्यों में सीमा विवादों का जारी रहना।
  4. क्षेत्रीय असमानताएँ।
  5. नियोजन की राजनीति का प्रभाव।
  6. संविधान के अनुच्छेद 356 का राज्यों में दुरुपयोग।
  7. विभिन्न राज्यों में नए नेतृत्व का विकास।
  8. क्षेत्रीय दलों का विकास।
  9. नदियों के पानी बँटवारे के सम्बन्ध में झगड़े।
  10. राष्ट्रीय व क्षेत्रीय हितों में सामंजस्य का अभाव।

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प्रश्न 2.
भारत की विभिन्नता में एकता के अर्थ को समझाइए।
उत्तर:
भारत में विभिन्न जाति, धर्म, संस्कृति, भाषा, बोली व भौगोलिकता के लोग रहते हैं इस प्रकार. भारत एक बहुल समाज है। भारत में विभिन्न आधारों पर लोगों की अपनी-अपनी पहचान हैं जिसके प्रति इनकी अपनी वफादारी है। परन्तु इसके साथ-साथ राष्ट्रीय एकता व भाईचारे की भावना से भी सभी बँधे होते हैं। भारत के बारे में यह युक्ति सही ही है कि भारत में विभिन्नता में एकता है। भारत के लागों में क्षेत्रीयता व भारतीयता में सामंजस्य पाया जाता है। भारत की जलवायु व भौगोलिकता थोड़ी-थोड़ी दूर पर बदल जाती है, इसमें अनेक मौसम हैं, अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ हैं जो भारत को बहुलवाद का रूप प्रदान करती है।

प्रश्न 3.
भारतीय राजनीति में विभिन्न राज्यों में उभर रहे आन्दोलनों के प्रभावों को समझाइए।
उत्तर:
भारत एक प्रजातन्त्रीय गणराज्य है। सभी नागरिकों को महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार दिए गए। इन सभी अधिकारों में महत्वपूर्ण लोगों को अपने विचारों, भावनाओं व कला को व्यक्तकेरने का अधिकार है। इसी अधिकार के आधार पर प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया के चलते लोगों में अपने सामाजिक आर्थिक, भाषीय व भौगोलिक हितों के प्रति जागरूकता व संवेदना विकसित हुई है जिसको प्राप्त करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर आन्दोलन का रास्ता अपना लेते हैं।

इसी कारण हम देखते है कि पिछले 60 वर्षों में विभिन्न राज्यों में विभिन्न आधारों पर अनेक प्रकार के आन्दोलन चल रहे हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति को नकारात्मक व सकारात्मक दोनों प्रकार से प्रभावित किया है। आमतौर पर सभी आन्दोलन भारतीय संविधान की सीमाओं के अन्दर रहकर अपने मौलिक अधिकारों के आधार पर कर रहे हैं। कुछ एक राज्यों जैसे पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम व नागालैंड में कुछ एक आन्दोलन ऐसे विकसित हुए जिन्होंने अलगाववाद की सोच रखी परन्तु धीरे-धीरे वे भी राष्ट्रीय मुख्य धारा में शामिल हो गए। यह भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की क्षमता का प्रतीक है।

प्रश्न 4.
जम्मू-कश्मीर की समस्या का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर की प्रमुख समस्या इसका भारत में विलय का स्वरूप है। भारत सरकार अधिनियम 1947 के अनुसार सभी देशी रियासतों को यह अधिकार था कि अपना विलय भारत में करे या पाकिस्तान में। उन्हें स्वतन्त्र रूप से रहने का अधिकार भी दिया गया था। जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राजा हरिसिंह ने प्रारम्भ में स्वतन्त्र रहने की स्थिति को स्वीकारा परन्तु बाद में कबिलों के आक्रमण के कारण भारत में विलय को कश्मीर के एक वर्ग ने व पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया। पाकिस्तान ने कश्मीर में उग्रवाद को भड़काया। तभी से कश्मीर में अलगाववाद का उदय हुआ। आज यद्यपि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है परन्तु हिंसा का दौर जारी रहता है।

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प्रश्न 5.
संविधान के अनुच्छेद 370 का क्या महत्त्व है? इसके सम्बन्ध में विभिन्न वर्गों की प्रक्रियाएँ समझाइए।
उत्तर:
जिस समय जम्मू-कश्मीर का विलय किया गया। इसमें दी गई शर्त के अनुसार जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया। जिसकी व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में की गई। इस प्रकार का विशेष दर्जा भारत में किसी अन्य राज्य को नहीं दिया गया। विशेष दर्जे देने के कई पक्ष हैं। प्रथम तो यह है कि जम्मू-कश्मीर केवल एक वह राज्य है जिसका अपना संविधान है।

दूसरा यह कि भारतीय संसद के द्वारा बनाया गया कोई भी कानून तब तक जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि जम्मू-कश्मीर की विधान सभा उसको पारित ना कर दे। संविधान में जम्मू-कश्मीर के बारे में दिए विशेष दर्जे (अनुच्छेद 370) के बारे में कई प्रकार की प्रतिक्रियाएँ हैं। कश्मीर के लोगों का एक बड़ा समूह यह कहता है कि कश्मीर अनुच्छेद 370 को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया। भारत में कई विरोधी दलों विशेषकर भारतीय जनता पार्टी का यह मानना है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देना अन्य राज्यों के साथ भेदभाव व्यवहार है अतः इसे समाप्त कर देना चाहिए।

प्रश्न 6.
अकालियों ने पंजाब की अधिक स्वायत्तता की माँग क्यों उठाई?
उत्तर:
पंजाब में अकाली दल के अधिकांशतः
मिली जूली सरकार अर्थात् गठबन्धन की सरकारें ही चलायी। अकाली दल का नेतृत्व यह महसूस करता है कि पंजाब से हरियाणा अलग होने के बावजूद भी अकाली दल की स्थिति मजबूत नहीं हुई। अकाली दल इसके तीन प्रमुख कारण मानता है जो निम्न है –

  1. अकालियों की पंजाब में सरकारें बार-बार केन्द्र से हटायी हैं।
  2. अकालियों का यह भी मानना है कि इनकी सरकारों को व पार्टी का हिन्दुओं से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता।
  3. तीसरा प्रमुख कारण यह है कि खुद अकालीदल विभिन्न जातियों व वर्गों में बँटा हुआ है। इन कारणों से अकाली बार-बार पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता की माँग करते रहे हैं।

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प्रश्न 7.
आपरेशन ब्लू स्टार 1984 से लेकर राजीव लोंगवाल समझौते तक की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1980 के दशक में अकाली दल का नेतृत्व नरम दल के नेताओं के हाथों से निकलकर गरम दल के नेताओं के हाथों में चला गया जो धीरे-धीरे उग्रवाद का रूप धारण करने लगा। धार्मिक समुदाय के लोगों में आपसी अविश्वास व नफरत का वातावरण बनने लगा। एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय के लोगों को चुन-चुन कर मारते थे। अमृतसर का पवित्र स्थान स्वर्ण मन्दिर उग्रवादियों का अड्डा बन गया जिसमें हथियारों को इकट्ठा किया गया।

इस स्थिति को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार को कड़ा निर्णय लेना पड़ा। जून 1984 में स्वर्ण मन्दिर से उग्रवादियों को निकालने के लिए सैनिक कार्यवाही की गई जिसको आपरेशन ब्लू स्टार कहा गया। इस सैनिक कार्यवाही से सिख समुदाय की भावनाओं को चोट लगी जिससे सिखों में अन्य समुदायों, यहाँ तक दल के खिलाफ भी कड़वाहट आ गई जिससे उग्रवाद को और अधिक बल मिला।

इसका परिणाम यह हुआ कि 31 अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गाँधी के दो सुरक्षाकारों सिखों ने उनकी निर्मम हत्या कर दी जिससे पूरे देश में सिखों को चुन-चुन मारा। इस प्रकार साम्प्रदायिकता का भयंकर रूप सामने आ गया। राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 1985 में राजीव गाँधी व लोंगवाल के बीच विभिन्न विवादित मुद्दों पर समझौता हुआ जिससे पंजाब में हालात को शांत करने में सहायता मिली।

प्रश्न 8.
राजीव लोंगवाल समझौते की मुख्य विशेषताएँ क्या थी?
उत्तर:
1985 में राजीव गाँधी व संत हरचन्द लोंगवाल के बीच हुआ समझौता पंजाब के हालात को सुधारने व विभिन्न विवादित मुद्दों को हल करने में एक ईमानदारी का प्रयास था। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. चंडीगढ़ को पंजाब को हस्तानान्तरित करना
  2. चंडीगढ़ के बदले हरियाणा को दिए जाने वाले क्षेत्र को निश्चित करने के लिए एक आयोग का गठन करना
  3. सतलज व्यास के पानी के बंटवारे के सम्बन्ध में विवाद को हल करने के लिए ईरादी आयोगका गठन किया गया

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प्रश्न 9.
पूर्वोत्तर के सात राज्यों के नाम बताइए। इनको किस प्रकार से संगठित किया गया?
उत्तर:
पूर्वोत्तर के सात राज्यों को उनकी समान सामाजिक सांस्कृतिक व भौगोलिक पहचान के आधार पर सात बहनें कहा जाता है। इन सात राज्यों के नाम हैं असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड। इन राज्यों को मुख्य रूप से इनकी सांस्कृतिक व भाषायी आधार पर गठित किया गया। मणिपुर व त्रिपुरा पहले रियासतें थी जो आजादी के बाद भारत में विलय हो गए थे। आसाम पहले मुख्य बड़ा राज्य था।

इसके विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली अन्य भाषाओं के लोगों को महसूस हुआ कि असमी भाषा उनके ऊपर थोपी जा रही है अत: उन्होंने असम से अलग होकर अपनी भाषाओं के विकास के लिए पृथक राज्यों की मांग उठाना प्रारम्भ कर दिया जिनको विभिन्न समयों में स्वीकार कर लिया गया। नागालैंड का गठन 1960 में पृथक राज्य के रूप में हुआ।

1972 में मेघालय, मणिपुर व त्रिपुरा का गठन किया गया। 1986 में अरुणाचल प्रदेश व मिजोरम का अलग राज्यों के रूप में गठन किया गया। भाषायी व सांस्कृतिक कारणों के अलावा इन राज्यों ने आर्थिक विकास के अभाव के कारण वे राजनीतिक भेदभाव के कारण अलग राज्यों की मांग उठायी थी जिसमें वे अन्ततः सफल भी हो गए।

प्रश्न 10.
पूर्वोत्तर क्षेत्रों की स्वायत्तता की मांग के औचित्य को समझाइए।
उत्तर:
आजादी के बाद सम्पूर्ण पूर्वोत्तर क्षेत्र (केवल मणिपुर व त्रिपुरा को छोड़कर) असम कहलाता था। आसामी भाषा के अन्य भाषाओं के ऊपर प्रभुत्व के डर से गैर असमी भाषा के लोगों ने अपने क्षेत्रों को अलग राज्य के रूप में गठित करने की मांग उठाई। ये अपने क्षेत्र के लिए राजनीतिक स्वायत्तता चाहते थे ताकि अपनी बोली, भाषा, संस्कृति व आर्थिक हितों की रक्षाकर सके। इसके लिए उन्होंने विभिन तरीकों से आन्दोलन प्रारम्भ कर दिए। कभी-कभी ये आन्दोलन हिंसात्मक भी हुए। ये क्षेत्र असम से अलग होकर अपना एक नेतृत्व विकसित करना चाहते थे जो उनके आर्थिक व सांस्कृतिक व भाषीय हितों की रक्षा कर सके।

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प्रश्न 11.
मिजोरम में विघटनकारी व अलगाववादी आन्दोलन के कारणों को समझाइए।
उत्तर:
मिजोरम को आजादी के बाद असम के भीतर ही एक स्वायत्त जिला बना दिया गया था। कुछ मिजो लोगों का मानना था कि वे ब्रिटिश इंडिया के अंग नहीं रहे अत: भारत से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है। 1959 में मिजोरम में अकाल पड़ा जिसकी ओर भारत सरकार ने अधिक ध्यान नहीं दिया जिससे मिजोरम के लोगों की नाराजगी और भी अधिक बढ़ गई व 1966 में मिजो नेशनल फ्रंट ने आजादी की माँग करते हुए सशस्त्र अभियान प्रारम्भ कर दिया व भारतीय सेना व केन्द्र सरकारयों को अपने गुस्से का निशाना बनाया इस प्रकार मिजो नेशनल फ्रंट ने गुरिल्ला युद्ध प्रारम्भ कर दिया।

चीन व पाकिस्तान से मिजो उग्रवादियों को सैनिक ट्रेनिंग व आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। दो दशकों तक मिजोरम इस आतंकी हिंसा का शिकार हुआ जिसमें स्थानीय लोगों को भी नुकसान हुआ व भारतीय सैनिक व केन्द्र सरकार के कर्मचारी व अधिकारी भी इस हिंसा के शिकार हुए। मिजोरम आन्दोलन के प्रमुख नेता लालडेगाँ थे जिन्होंने 1986 में मिजोरम में शान्ति लाने व इसको भारत के साथ राष्ट्रीय मुख्य धारा में लाने के लिए समझौता किया जिसके फलस्वरूप लालडेगा राज्य के मुख्यमन्त्री बने व मिजोरम के उग्रवादियों ने हिंसा त्यागने का वायदा किया।

प्रश्न 12.
नागालैंड में उग्रवादी घटनाओं के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मिजोरम के समान ही नागलैंड की परिस्थितियाँ रही। नागालैंड में 1951 के बाद ही ए-जैंड-फिजो के नेतृत्व में उग्रवादी गतिविधियाँ व आन्दोलन प्रारम्भ हो गए थे। नागालैंड के प्रमुख नेता फिजो को केन्द्र सरकार से वार्ता के बार-बार प्रस्ताव मिलते रहे परन्तु फिजो का रवैयाअडियल ही रहा। नागालैंड के आन्दोलन को बाहरी शक्तियों विशेषकर चीन व पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिलता रहा। हिंसक विद्रोह के एक दौर के बाद नागा लोगों ने भारत की सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। नागालैंड का सन्तोषजनक समाधान अभी भी होना बाकी है। इनकी प्रमुख माँग थी कि नागालैंड को अलग राज्य के रूप में स्थापित करना है।

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प्रश्न 13.
राजीव व आसाम के विद्यार्थियों के बीच हुए आसाम समझौते की प्रमुख विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
1979 से 1985 तक चला आसाम आंदोलन बाहरी लोगों के खिलाफ चले आंदोलनों का सबसे अच्छा उदाहरण है। असमी लोगों को यह डर था कि बिहार व बंगला देश से आए बाहरी लोग स्थानीय व्यापार व प्रशासन पर कब्जा कर एक दिन स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यक बना देंगे जिसके खिलाफ उन्होंने आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया जो 1979 में ऑल आसाम स्टूडेन्ट्स यूनियन ने चलाया। आसूं का आन्दोलन गैर राजनीतिक था व उनका उद्देश्य केवल बाहर से आए अवैध अप्रवासी बंगालियों के दबदबे को समाप्त करना था।

आन्दोलनकारियों की माँग थी कि 1951 के बाद जितने भी लोग असम में आकर बसे हैं उन्हें असम से बाहर भेजा जाए। इस आन्दोलन में इन्हें आसाम के प्रत्येक वर्ग का समर्थन मिला। धीरे-धीरे यह आन्दोलन हिंसक भी हुआ व इस आन्दोलन का राजनीतिकरण भी हुआ आन्दोलन की शुरुआत शान्तिपूर्ण अवश्य हुई लेकिन बाद में हिंसात्मक होने के कारण जान माल का काफी नुकसान हुआ।

छ: वर्ष की अस्थिरता के बाद राजीव गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी तथा राजीव गाँधी के साथ असम समझौता हुआ। इस समझौते में यह तय किया गया कि बंगला देश युद्ध के दौरान व उसके बाद के सालों में जो लोग असम में आए हैं उनको पहचान कर असम से बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद असम में शांति का युग प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 14.
क्षेत्रीय समस्याओं को हल करने में श्री राजीव गाँधी के योगदान को समझाइए।
उत्तर:
जिस समय श्री राजीव गाँधी ने देश के प्रधानमंत्री का पद सम्भाला, देश के अनेक क्षेत्रों में विभिन्न समस्याओं को लेकर आन्दोलन चल रहे थे। इनमें से कई आन्दोलन हिंसात्मक थे व अलगाववादी सोच भी रखते थे। ऐसे प्रमुख आन्दोलन पंजाब, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम व नागालैंड में चल रहे थे। राजीव गाँधी ने अपनी व्यापक सोच समझ-बूझ के आधार पर सभी मुद्दों को समझा जिन पर आन्दालेन चल रहा था। सभी विषयों पर एक व्यवहारिक दृष्टिकोण रखते हैं आन्दोलनकारियों से बात की व समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिससे लगभग सभी क्षेत्रों की समस्याओं को हल करने में नहीं तो कम से कम उस तनाव को कम करने में मदद मिली जो हिंसा को जन्म दे रहे थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पिछले साठ वर्षों की राजनीति में भारत में चली आन्दोलन की राजनीति से क्या सबक लिया जा सकता है?
उत्तर:
भारत एक प्रजातन्त्रीय देश है जिसका निर्माण उदारवादी मूल्यों के आधार पर किया गया है। भारतीय नागरिकों को मौलिक अधिकार प्राप्त हैं जिसके आधार पर उनको अपनी सामाजिक धार्मिक सांस्कृतिक व भौगोलिक पहचान को बनाने, विकसित करने व सुरक्षित रखने का अधिकार है। सभी नागरिकों को अपने आर्थिक हित भी सुरक्षित रखने का अधिकार है। नागरिकों को अपने को व्यक्त करने व अपने हितों को प्राप्त करने के लिए शान्तिपूर्ण आन्दोलन करने व विरोध करने का भी अधिकार है।

इन अधिकारों का प्रयोग भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक करते रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया के विकास के साथआन्दोलनों की राजनीति का भी विकास हुआ जिसने भारतीय राजनीति को नकारात्मक व सकारात्मक रूप में प्रभावित किया है। इन अनुभवों के आधार पर हम निम्न सबक प्राप्त कर सकते हैं –

  1. प्रजातन्त्रीय प्रणाली में लोगों के द्वारा अपनी क्षेत्रीय आकांक्षाओं को व्यक्त करने को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना चाहिए ताकि उनमें किसी प्रकार विद्रोह की भावना उत्पन्न ना हो।
  2. राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था का निर्माण इस प्रकार से होना चाहिए जिससे क्षेत्रीय भावनाओं का समायोजन हो सके।
  3. आन्दोलनकर्ताओं के साथ प्रशासनिक स्तर पर व राजनीतिक स्तर पर जल्द से जल्द बात करने की प्रक्रिया प्रारम्भ होनी चाहिए।
  4. शक्तियों को विभिन्न स्तर पर यथा सम्भव विकेन्द्रित किया जाना चाहिए व स्थानीय संस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि वे स्थायी समस्याओं का निपटारा कर सके।
  5. सभी राजनीतिक दलों को स्थानीय आकांक्षाओं, माँगों व हितों को ठीक से समझकर उनहें सरकार के पास प्रस्तुत करना चाहिए।
  6. क्षेत्रीय पक्षपात को समाप्त करना चाहिए।
  7. संविधान के प्रावधानों का पक्षपात रहित तरीके से प्रयोग करना चाहिए। सही संधीय भावना के अनुसार शासन चलना चाहिए।

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प्रश्न 2.
जम्मू-कश्मीर की समस्या का मुल कारण समझाते हुए इसके निवारक का तरीका सुझाइए।
उत्तर:
आजादी से पहले जम्मू-कश्मीर एक देशी रियासत थी । भारत सरकार अधिनियम 1947 के आधार पर जम्मू-कश्मीर को भी यह छूट दी गई थी कि यह चाहे तो स्वतंत्र राज्य के रूप में रहे अथवा पाकिस्तान या भारत में विलय हो जाए। जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने स्वतंत्र रहना चाहा परन्तु कबिलियों के 1948 में जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण के कारण राजा हरि सिंह ने 1948 में कुछ शर्तों के आधार पर भारत में विलय स्वीकार कर लिया। परन्तु इस विलय को पाकिस्तान ने व जम्मू-कश्मीर के एक वर्ग ने स्वीकार नहीं किया।

इसी आधार पर पाकिस्तान के साथ भारत के सम्बन्ध लगातार खराब ही चल रहे हैं। 1948, व 1965 में पाकिस्तान व भारत के बीच युद्ध चला। भारत ने जम्मू-कश्मीर को भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के आधार पर विशेष दर्जा जिसके आधार पर कश्मीर का अपर अलग स्थानमा के द्वारा बनाया गया कोई कानून तभी लागू हो सकता है जब उस कानून को जम्मू-कश्मीर की विधान सभा पारित कर दे।

इस विलय के बाद नेशनल कांफ्रेंस के नेता श्री शेख अबदुल्ला को जम्मू-कश्मीर का प्रधान मंत्री बनाया गया व यह भी निश्चित किया गया कि जब जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य हो जाएँगे इस विलय पर जम्मू-कश्मीर के लागों की राय अथवा स्वीकृति प्राप्त कर ली जाएगी। केवल इस विलय से समस्या समाप्त नहीं हुई बल्कि इस विलय के बाद समस्या प्रारम्भ हो गई। पाकिस्तान ने ना केवल इसे अस्वीकार कर दिया बल्कि जम्मू-कश्मीर के लागों को भी लगातार इस विषय पर गुमराह करके वहाँ पर उग्रवाद व आतंकवाद को जन्म दिया। जम्मू-कश्मीर समस्या के सम्बन्ध में तीन धारणाएँ हैं –

  1. जम्मू-कश्मीर के लोगों का समूह पाकिस्तान के साथ विलय का पक्षधर है।
  2. जम्मू-कश्मीर में एक समूह ऐसा है जो पाकिस्तान के साथ विलय नहीं चाहता बल्कि स्वतंत्र कश्मीर चाहता है।
  3. जम्मू-कश्मीर के लोगों का एक बड़ा समूह ऐसा है जो भारत में जम्मू-कश्मीर के विलय को स्वीकार करता है परन्तु और अधिक स्वायत्तता की माँग करते हैं।

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प्रश्न 3.
सिक्किम के भारत में विलय की परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारत की आजादी के समय सिक्किम को भारत की शरणागति प्राप्त थी जिसका अर्थ यह है कि सिक्किम भारत का अंग तो नहीं था परन्तु वह पूरी तरह प्रभुसत्ता सम्पन्न राज्य भी नहीं था। सिक्किम की रक्षा व विदेशों के मामलों की जिम्मेवारी भारत की थी जबकि सिक्किम का आन्तरिक प्रशासन व विकास का कार्य वहाँ के राजा चोगयाल के पास था। यह व्यवस्था अधिक सफल नहीं हो पा रही थी क्योंकि राजा लोगों की स्थानीय प्रजातन्त्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रही थी जिसके कारण जनता में राजा चोगयाल के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे।

सिक्किम में एक बड़ा हिस्सा नेपालियों का था जिनका यह मानना था कि राजा चोगयाल अल्पसंख्यक लेपया-भूटिया के एक छोटे से वर्ग का शासन उन पर लाद रहा है। चौगयाल के खिलाफ नेपालियों में विरोध उठा जिसको भारत सरकार का भी समर्थन मिल गया। सिक्किम विधान सभा के लिए पहला लोकतान्त्रिक चुनाव 1974 में हुआ जिसमें सिक्किम कांग्रेस को भारी सफलता प्राप्त हुई। यह पार्टी सिक्किम को भारत में विलय करने की पक्षधर थी।

सिक्किम विधान सभा में 1975 में एक प्रस्ताव पारित कर सिक्किम के भारत में विलय का प्रस्ताव पारित कर दिया जिस पर तुरन्त सिक्किम की जनता का जनमत संग्रह कराने के लिए जनता के पास भेजा गया जिस पर जनता ने इस प्रस्ताव पर जनमत संग्रह कर दिया। भारत सरकार ने सिक्किम विधान सभा के इस अनुरोध को तुरन्त स्वीकार कर लिया जिससे सिक्किम भारत का 22 वाँ राज्य बन गया। चोगयाल ने भारत के इस फैसले की निन्दा की तथा इस फैसले को भारत द्वारा षड्यन्त्र का नाम दिया। क्योंकि सिक्किम के भारत में विलय के फैसले पर जनता की राय प्राप्त कर ली गई थी इसलिए सिक्किम की राजनीति में इस विलय का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। आज सिक्किम भारत का अन्य राज्यों की तरह अभिन्न अंग है व इसका भारत में विलय अन्तिम है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

I. निम्नलिखित विकल्पों में सही का चुनाव कीजिए

प्रश्न 1.
जम्मू-कश्मीर को किस अनुच्छेद के तहत विशेष दर्जा दिया गया है?
(अ) 356
(ब) 370
(स) 368
(द) 352
उत्तर:
(ब) 370

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प्रश्न 2.
भारत में जम्मू-कश्मीर का विलय किस राजा ने किया?
(अ) हरि सिंह
(ब) शेख अब्दुल्ला
(स) राजवेन्द्र सिंह
(द) मीर कासिम
उत्तर:
(अ) हरि सिंह

प्रश्न 3.
आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव किस वर्ष पारित किया गया?
(अ)1971
(ब) 1972
(स) 1973
(द) 1958
उत्तर:
(स) 1973

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प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-से राज्य का नाम नेफा था?
(अ) मेघालय
(ब) मिजोरम
(स) सिक्किम
(द) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर:
(द) अरुणाचल प्रदेश

प्रश्न 5.
संविधान के किस संशोधन द्वारा शक्तियों के केन्द्रीकरण का प्रयास किया गया?
(अ) 24 वाँ संविधान संशोधन
(ब) 42 वाँ संविधान संशोधन
(स) 44 वाँ संविधान संशोधन
(द) 52 वाँ संविधान संशोधन
उत्तर:
(ब) 42 वाँ संविधान संशोधन

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प्रश्न 6.
सुन्दर लाल बहुगुणा का संबंध किस आंदोलन से है?
(अ) पर्यावरण
(ब) महिला सशक्तिकरण
(स) किसान समस्या
(द) आतंकवाद
उत्तर:
(द) आतंकवाद

प्रश्न 7.
जम्मू-कश्मीर के संबंध में भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद पर आपत्ति उठाई जाती है?
(अ) 352
(ब) 356
(स) 360
(द) 370
उत्तर:
(द) 370

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प्रश्न 8.
पंजाब समस्या का समाधान हेतु राजीव गाँधी ने पंजाब के किस नेता के साथ समझौता किया था?
(अ) सुरजीत सिंह बरनाला
(ब) प्रकाश सिंह बादल
(स) हरचरण सिंह लौंगोवाल
(द) अमरिन्दर सिंह
उत्तर:
(स) हरचरण सिंह लौंगोवाल

प्रश्न 9.
1992 में विश्व पर्यावरण के मुद्दे पर पृथ्वी सम्मेलन कहाँ हुआ?
(अ) रियो द जनेरियो
(ब) न्यूयार्क
(स) जेनेवा
(द) टोकियो
उत्तर:
(अ) रियो द जनेरियो

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प्रश्न 10.
नेशनल कॉन्फ्रेंस किस राज्य से संबंधित है?
(अ) राजस्थान
(ब) पंजाब
(स) जम्मू-कश्मीर
(द) हिमाचल प्रदेश
उत्तर:
(स) जम्मू-कश्मीर

प्रश्न 11.
क्षेत्रीय दलों के उदय का सबसे बड़ा कारण क्या है?
(अ) कांग्रेस के नेतृत्व का पतन
(ब) क्षेत्रीय असंतुलन
(स) भारत की संघीय व्यवस्था
(द) बहु-दलीय व्यवस्था
उत्तर:
(अ) कांग्रेस के नेतृत्व का पतन

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प्रश्न 12.
संविधान में 42वाँ संशोधन कब हुआ?
(अ) 1971
(ब) 1976
(स) 1977
(द) 1978
उत्तर:
(ब) 1976

प्रश्न 13.
गठबंधन सरकारों के आने से संसदीय व्यवस्था में क्या प्रमुख खामियाँ आयी हैं?
(अ) राष्ट्रपति की कमजोर स्थिति
(ब) प्रधानमंत्री की सबल स्थिति
(स) सामूहिक उत्तरदायित्व की अवहेलना
(द) क्षेत्रीय दलों का उत्कर्ष
उत्तर:
(द) क्षेत्रीय दलों का उत्कर्ष

II. मिलान वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर

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उत्तर:
(1) – (स)
(2) – (द)
(3) – (ब)
(4) – (अ)
(5) – (य)

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 7 जन-आन्दोलन का उदय

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 7 जन-आन्दोलन का उदय Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 7 जन-आन्दोलन का उदय

Bihar Board Class 12 Political Science जन-आन्दोलन का उदय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन के बारे में निम्नलिखित में कौन-कौन से कथन गलत हैं?
(क) यह पड़ों की कटाई को रोकने के लिए चला एक पर्यावरण आन्दोलन था।
(ख) इस आन्दोलन ने परिस्थितियों और आर्थिक शोषण के मामले उठाए।
(ग) यह महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब-विरोधी आन्दोलन था।
(घ) इस आन्दोलन की माँग थी कि स्थानीय निवासियों का अपने प्राकृतिक संसाधनों का नियन्त्रण होना चाहिए।
उत्तर:
(ग) यह महिलाओं द्वारा शुरू किया गया शराब-विरोधी आन्दोलन था।

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प्रश्न 2.
नीचे लिखे कुछ गलत हैं। इसकी पहचान करें और जरूरी सुधार के साथ उन्हें दुरुस्त करके दोबारा लिखे (Some of the statements below are incorrect, identify the incorrect statements and rewrite those with necessary correction)
(अ) सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि पहुँचा रहे हैं।
(ब) सामाजिक आंदोलन की मुख्य ताकत विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच व्याप्त उनका जनाधार है।
(स) भारत के राजनीतिक दलों ने कई मुद्दों को नहीं उठाया। इसी कारण सामाजिक ‘आंदोलन का उदय हुआ।

ठीक वाक्य नीचे दिए गए हैं –

(क) यह कथन गलत है क्योंकि-सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि पहुँचा रहे हैं।
(ब) यह कथन ठीक है क्योंकि-सामाजिक आंदोलन की मुख्य ताकत विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच व्याप्त उनका जनाधार है।
(स) यह कथन गलत है क्योंकि-भारत के राजनीतिक दलों ने कई सामाजिक, आर्थिक मुद्दों को नहीं उठाया। इसी कारण सामाजिक आंदोलन का उदय हुआ।
उत्तर:
(क) यह कथन गलत है क्योंकि-सामाजिक आंदोलन भारत के लोकतंत्र को हानि पहुँचा रहे हैं।

प्रश्न 3.
उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में (अब उत्तराखंड) 1970 के दशक में किन कारणों से चिपको आन्दोलन का जन्म हुआ? इस आन्दोलन का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन के उदय की कहानी एक ग्राम की एक छोटी-सी उस घटना से है, जिसमें ग्राम वालों ने अपनी खेती बाड़ी के औजार बनाने के लिए वन विभाग से कुछ लकड़ी काटने की अनुमति माँगी जिसको वन विभाग के अधिकारियों ने मना कर दिया परन्तु खेल का सामान बनाने वाली कम्पनी के ठेकेदार को जमीन का टुकड़ा व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आबंटित कर दिया। जिससे ग्राम वालों में रोष पैदा हो गया व इसके खिलाफ रोष व्यक्त करने के लिए आन्दोलन छेड़ दिया जो जल्द ही पूरे उत्तराखंड में फैल गया।

इस आन्दोलन में आन्दोलनकारियों ने पारिस्थितिकी व आर्थिक शोषण के कई सवाल खड़े कर दिए। इसमें आन्दोलनकारियों ने मांग की कि जंगल की कटाई का कोई भी ठेका बाहरी व्यक्ति को ना दिया जाए व स्थानीय लोगों का जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर कारगर नियन्त्रण होना चाहिए। यहाँ के लागों ने मांग की कि इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार लघु उद्योगों के लिए कम कीमत की सामग्री उपलब्ध कराए व इस क्षेत्र को पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुँचाएँ बगैर यहाँ का विकास सुनिश्चित करें।

इस आन्दोलन की प्रमुख विशेषता यह रही कि इसमें महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। सुन्दर लाल बहुगुणा का नाम इस आन्दोलन के साथ प्रमुख रूप से जुड़ा हुआ है। महिलाओं का इस आन्दोलन के साथ जुड़ने का एक प्रमुख कारण यह था कि जंगल के ठेकेदार ग्रामों के पुरुषों को शराब की आपूर्ति करते थे जिससे यहाँ के पुरुषों में नशे की लत लग जाने से परिवार आर्थिक रूप से सामाजिक रूप से व मानसिक रूप से बरबाद हो रहे थे। अतः इस सबसे छुटकारा पाने के लिए महिलाओं ने ही इस आन्दोलन के जरिए इसे दूर करने का बीड़ा उठाया। चिपको आन्दोलन को सुन्दर लाल बहुगुणा के नाम से ज्यादा जाना जाता है।

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प्रश्न 4.
भारतीय किसान यूनियन, किसानों की दुर्दशा की तरफ ध्यान आकर्षित करने वाला अग्रणी संगठन है। नब्बे के दशक में इसने किन मुद्दों को उठाया और इसे कहाँ तक सफलता मिली?
उत्तर:
किसान वर्ग भारत के सभी व्यावसायिक वर्गों की अपेक्षा बद्दतर हालत में है। देश की 80% जनसंख्या व्यवसाय की दृष्टि से कृषि पर निर्भर करती है। कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। भारत सरकार ने व राज्य सरकारों ने कृषि के विकास की ओर तो कुछ ध्यान दिया है परन्तु किसान के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया। किसान की स्वतंत्रता के 60 वर्षों के बाद भी स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं हुआ। अगर कृषि की पैदावार में वृद्धि हुई तो कृषि पर होने वाले खर्च में भी उससे कहीं अधिक अनुपात में वृद्धि हुई इससे किसान के जीवन स्तर में कोई गुणात्मक परिवर्तन नहीं आया।

1960 के दशक में हरित क्रांति आयी। इससे पैदावार भी बढ़ी। मशीन व तकनीकी का भी खेती में प्रयोग हुआ परन्तु कुल लाभ किसानों को अधिक नहीं हुआ अगर इसका कुछ लाभ हुआ भी तो वह केवल पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े किसानों को हुआ। कृषि की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होने के कारण व बैंकों से कर्ज मिलने की सुविधा के कारण भी किसान कों में डूब गए। कई राज्यों में किसानों ने आत्म हत्यायें भी की।

किसान लम्बे समय से असंगठित रहे जिससे इनकी आवाज व इनकी मांगों को सरकार तक ठीक प्रकार से नहीं ले जाया जा सका। 1988 के जनवरी में उत्तर प्रदेश के एक शहर मेरठ में देश भर के लगभग 20 हजार किसान जमा हुए जिसमें किसानों ने बिजली की बढ़ी हुई दरों के अलावा किसानों के हितों से जुड़े अनेक मुद्दों को उठाया। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में चौधरी महेन्द्र सिंह टिकेत के नेतृत्व में किसान आन्दोलन एक आकार ले चुका था। छोटे-छोटे आन्दोलन अन्य कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, हरियाणा व पंजाब में संगठित हो रहे थे।

भारतीय किसान यूनियन एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है जिसका व्यापक जनाधार व प्रभाव है। किसान यूनियन ने महेन्द्र सिंह टिकेत के नेतृत्व देहली के लाल किले पर भी हजारों किसानों की संख्या के साथ धरना देकर संसद का ध्यान किसानों की माँगो की ओर खींचा था। किसान यूनियन की इन गतिविधियों का प्रभाव यह है कि ये विभिन्न स्तर पर किसानों के हितों के लिए लोबीइंग करने में सफल रहे हैं। संसद में किसानों की आवाज उठती है। किसानों के प्रतिनिधि के रूप में अनेक सांसद व विधान सभा सदस्य हैं। प्रत्येक राजनीतिक दल की किसान शाखा है जो किसानों के हितों का ध्यान रखती है। किसान यूनियन की प्रमुख माँगे निम्न हैं –

  1. गन्ने व गेहूँ की सरकारी खरीद मूल्य में बढ़ोत्तरी करने।
  2. कृषि उत्पादों के अन्तर्राज्यीय आवाजाही पर लगी पाबंदियों को हटाने।
  3. समुचित दल पर गारंटीशुदा बिजली आपूर्ति करने।
  4. किसानों के लिए पेंशन का प्रावधान करने।
  5. सस्ती दरों पर किसानों को बैंको से कर्ज दिलाने की व्यवस्था करने।
  6. मूल्यों के निर्धारण में किसानों का प्रतिनिधित्व करने आदि।

इस प्रकार से आज किसान पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक हुआ है। सरकार ने भी ग्रामीण विकास की ओर अधिक ध्यान दिया है जिससे ग्रामों के चेहरे व किसानों के चेहरे में चमक आयी है। ग्रामों में शिक्षा स्वास्थ्य व सिंचाई की सुविधाएँ पहुँचाई गई हैं।

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प्रश्न 5.
आंध्र प्रदेश में चले शराब-विरोधी आन्दोलन ने देश का ध्यान कुछ गम्भीर मुद्दों की तरफ खींचा। ये मुद्दे क्या थे?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कलिनारीमंडल स्थित गुंडलुर गाँव की महिला से अपने गाँव में ताड़ी बिक्री पर पाबंदी लगाने के लिए एकजुट हुई व बड़ी बहादुरी के साथ ताड़ी विक्रेताओं व उनके गुंडों का मुकाबला किया।

अन्ततः ताड़ी विक्रेताओं को हार माननी पड़ी। महिलाओं ने ना केवल ताड़ी बेचने का विरोध किया बल्कि ताड़ी के साथ शराब के धन्धे का भी विरोध किया। महिलाओं के इस अभियान की खबर प्रेस के माध्यम से सभी जगह फैल गई। महिला प्रौढ़ शिक्षा प्रोग्राम जो 1990 के प्रारम्भ में महिलाओं के लिए चलाया गया था, इस कार्यक्रम को अर्थात् महिलाओं के शराब बन्दी के आन्दोलन के प्रचार करने में प्रभावकारी सिद्ध हुआ। इस आन्दोलन ने समाज के निम्न प्रमुख मुद्दों को प्रभावित किया –

  1. महिलाओं का शारीरिक व मानसिक शोषण
  2. शराब के नशे का पुरुषों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव
  3. आर्थिक संकट की स्थिति
  4. महिलाओं की अशिक्षा
  5. बेरोजगारी
  6. राजनीतिक व अपराध के बीच का सम्बन्ध
  7. प्रशासन व अपराध के बीच का सम्बन्ध
  8. घरेलू हिंसा
  9. महिलाओं की शिक्षा की आवश्यकता
  10. दहेज प्रथा
  11. महिलाओं का शारीरिक शोषण
  12. लैंगिक समानता

प्रश्न 6.
क्या आप शराब विरोधी आन्दोलन को महिला-आन्दोलन का दर्जा देंगे?
उत्तर:
वास्तव में शराब विरोधी आन्दोलन को महिला आन्दोलन कहा जा सकता है क्योंकि इन आन्दोलनों को महिलाओं का ही अधिकांशत: समर्थन है व इनका नेतृत्व भी महिला ही कर रही थी। इसको इस नजरिए से भी महिला आन्दोलन कहा जा सकता है क्योंकि शराब के नशे का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं को ही झेलना पड़ता है। इनके ऊपर शारीरिक मानसिक अत्याचार होते हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है। परिवार के बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ जाता है।

परिवार बेरोजगारी का शिकार हो जाता है। परिवार कर्जवान हो जाता है। इसके साथ-साथ शराब के नशे के कारण समाज में महिलाओं को प्रभावित करने वाली अनेक कुरीतियाँ जन्म ले लेती हैं जैसे दहेज, भ्रूण हत्या व सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं का शोषण। इस प्रकार शराब बन्दी के लिए सबसे ज्यादा समर्थन महिलाओं का ही समर्थन मिलता है। हरियाणा आंध्र प्रदेश व गुजरात में चले नशाबन्दी के आन्दोलनों में भी महिलाओं की अग्रिम भूमिकाओं के उदाहरण हमारे सामने हैं। इस प्रकार से हम शराब के खिलाफ आन्दोलनों को हम महिला आन्दोलन कह सकते हैं।

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प्रश्न 7.
नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने नर्मदा घाटी की बाँध परियोजनाओं का विरोध क्यों किया?
उत्तर:
नर्मदा बचाओ आन्दोलन प्रारम्भ से ही सरदार सरोवर परियोजना को विकास परियोजनाओं के साथ जुड़े कई अन्य मुद्दों के साथ जोड़ कर देखता रहा है। इस आन्दोलन के समर्थकों ने विकास के मॉडल और उसके सार्वजनिक औचित्य पर “सवाल उठाया।” आन्दोलनकारियों का यह कहना था कि इन परियोजनाओं पर अत्यधिक खर्च होता है व इन परियोजनाओं का समाज के गरीब वर्गों को विस्थापन, बेरोजगारी व पर्यावरण प्रदुषण के रूप में खमियाजा उठाना पड़ता है।

आन्दोलनकारियों ने अपने आन्दोलन के माध्यम से निम्न प्रमुख प्रश्न उठाएँ –

  1. परियोजनाओं की औचित्यता पर।
  2. परियोजनाओं पर होने वाले खर्चों पर।
  3. परियोजनाओं के सम्बन्ध में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर। इनका कहना है कि जब इस प्रकार की परियोजनाओं के सम्बन्ध में निर्णय लिया जाए तो स्थानीय लोगों को भी इसमें शामिल होना चाहिए व इनकी सहमति भी आवश्यक होनी चाहिए।
  4. विस्थापित लोगों का पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।
  5. पर्यावरण की सुरक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  6. संस्कृति पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
  7. इस औचित्य को भी इस आन्दोलन में उठाया गया कि केवल कुछ लोगों के लाभ के लिए शेष लोगों को बलि का बकरा नहीं बनाना चाहिए।

प्रश्न 8.
क्या आन्दोलन और विरोध की कार्यवाइयों से देश का लोकतन्त्र मजबूत होता है? अपने उत्तर की पुष्टि में उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रजातन्त्र को प्रजा की, प्रजा के लिए व प्रजा के द्वारा सरकार माना जाता है। प्रजातन्त्र में अन्तिम शक्ति जनता के पास निहित होती है प्रजातन्त्रीय सरकार विचार विमर्श, संवाद, सहमति पर आधारित होती है। प्रजातंत्रीय सरकार में मतभेद, विनय की गुंजाइस होती है। प्रजातन्त्रीय सरकार में लोगों के अपने अधिकार व जिम्मेवारियाँ होती हैं व उनको अपनी बात अपने तरीके से कहने का अधिकार होता है। अपनी मांगों को सरकार के सम्मुख रखने का अधिकार होता है।

ये सभी बात प्रजातन्त्रीय वातावरण व संस्कृति में समा सकती है अतः विरोध, मतभेद व आन्दोलन से प्रजातन्त्र कमजोर नहीं होता बल्कि इन प्रक्रियाओं से प्रजातन्त्र मजबूत होता है। इन आन्दोलनों से सरकार पर अंकुश लगता है वह प्रजातन्त्र में गतिशीलता आती है। आन्दोलनों व विरोध से सरकार की क्षमता में विकास होता है। भारत एक प्रजातन्त्रीय देश है जिसमें विभिन्न आधारों पर (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, भाषीय, धार्मिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक व वैचारिक) अनेक हित समूह व दबाव समूह सक्रिय रूप से भारतीय राजनीति को प्रभावित करते हैं।

अनेक बार ये अपने हितों को प्राप्त करने पर आन्दोलन भी करते हैं। किसान आन्दोलन, मजदूर आन्दोलन, महिला आन्दोलन, जातिय आन्दोलन (हाल ही में राजस्थान में आरक्षण के लिए गुर्जर आन्दोलन आदि) कई बार ये आन्दोलन हिंसक भी हो जाते हैं। कई बार ऐसा देखा गया कि राज्य भी अपनी किसी माँग को लेकर केन्द्र सरकार के विरूद्ध आन्दोलन करते हैं। इन सभी गतिविधियों से वास्तव में प्रजातन्त्र मजबूत होता है। सरकार की मनमानी पर अंकुश लगता है व नागरिकों को राजनीतिक शिक्षा भी प्राप्त होते हैं व नागरिकों के हित मजबूत होते हैं। परन्तु यदि इन आन्दोलनों का प्रयोग व आयोजन सही माँग के लिए जिम्मेवारी से नहीं किया जाता है तो इन आन्दोलन से समाज, राष्ट व प्रजातन्त्र को खतरा व नुकसान भी होता है।

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प्रश्न 9.
दलित पैंथर्स ने कौन-से मुद्दे उठाए?
उत्तर:
यह एक ऐतिहासिक सच है कि हमारे समाज में दलित वर्ग सबसे अधिक शोषित रहा है इस वर्ग को सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक स्तर व अन्याय, असमानता व शोषण झेलना पड़ा है। आजादी के बाद प्रजातन्त्रीय वातावरण में दलितों को शिक्षा के अवसर मिले व इनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ जिससे इनमें राजनीतिक जागरूकता का भी विकास हुआ । इन्हें अपने अधिकारों का भी अहसास हुआ। इन सबके फलस्वरूप इन्होंने अपने हितों की रक्षा के लिए संगठन बनाने प्रारम्भ किए जिसमें दलित पैंथर्स भी एक प्रमुख दलित संगठन है दलित पैंथर्स का गठन महाराष्ट्र से दलित युवकों ने 1972 में किया दलित पैंथर्स के सम्मुख निम्न प्रमुख मुद्दे थे –

  1. जातिवाद का विरोध करना।
  2. संवैधानिक प्रावधानों को लागू करना।
  3. दलित महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकना।
  4. सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना।
  5. दलितों पर हो रहे अत्याचारों का विरोध करना।
  6. भूमिहीन गरीब किसानों के हितों की रक्षा करना।
  7. शहरी औद्योगिक मजदूर व अन्य कमजोर वर्गों का एक मजबूत संगठन बनाना।
  8. दलितों में जागरूकता लाना।
  9. राजनीतिक दलों को दलितों के साथ जोड़ना।
  10. आरक्षण की नीतियाँ व सामाजिक न्याय से सम्बन्धित कानूनों को लागू करना।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित अवतरण को पढ़े और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।
उत्तर:
“लगभग सभी नए सामाजिक आन्दोलन नई समस्याओं जैसे-पर्यावरण का विनाश, महिलाओं की बदहाली, आदिवासी संस्कृति का नाश और मानव अधिकारों का उल्लंघन ……. के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे। इनमें से कोई भी अपने आप में समाज व्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नहीं जुड़ा था। इस अर्थ में ये आन्दोलन अतीत की क्रांतिकारी विचारधाराओं से एकदम अलग है।

लेकिन ये आन्दोलन बड़ी बुरी तरह बिखरे हुए हैं और यही इनकी कमजोरी है ……… सामाजिक आन्दोलन का एक बड़ा दायरा ऐसी चीजों की चपेट में है कि वह एक ठोस तथ्य एक जुट जनआन्दोलन का रूप नहीं ले पाता और न ही चितों और गरीबों के लिए प्रासंगिक हो पाता है। ये आन्दोलन बिखरे-बिखरे हैं। प्रतिक्रियाओं के तत्वों से भरे हैं, अनियत है और बुनियादी सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नहीं है। ‘इस’ या ‘उस” के विरोध (पश्चिमी विरोधी, विकास विरोधी, पूंजीवाद विरोधी आदि) में चलने के कारण इनमें कोई संगति आती है अथवा दबे-कुचले लोगों और हाशिए के समुदायों के लिए से प्रासंगिक हो पाते हैं-ऐसी बात नहीं”

रजनी कोठारी –
(क) नए सामाजिक आन्दोलन क्रांतिकारी विचारधाराओं में क्या अन्तर है?
(ख) लेखक के अनुसार सामाजिक आन्दोलनों की सीमाएं क्या-क्या है?
(ग) यदि सामाजिक आन्दोलन विशिष्ट मुद्दों को उठाते हैं तो आप उन्हें बिखरा हुआ कहेंगे या मानेंगे कि वे अपने मुद्दे पर कहीं ज्यादा केन्द्रित है। अपने उत्तर की पुष्टि में तर्क दीजिए।

उत्तर:
(क) आज के जागरूक उदारवादी आन्दोलन व क्रान्तिकारी विचारधाराओं में यह अन्तर है कि प्रजातन्त्रीय वातावरण व उदारवादी सामाजिक आन्दोलन शान्तिपूर्ण होते हैं व धीरे-धीरे व्यवस्था परिवर्तन करने का प्रयास करते हैं जबकि क्रान्तिकारी विचारधारा पर आधारित आन्दोलन हिंसात्मक होते हैं व व्यवस्था को जल्द से जल्द बदलने का प्रयास करते हैं।

(ख) लेखक के अनुसार सामाजिक आन्दोलन की एक बड़ी सीमा यह है कि एक ठोस तथा एक जुट जन आन्दोलन का रूप नहीं ले पाता व ना ही गरीब वर्ग के लोगों के लिए अधिक उपयोगी व प्रासांगिक नहीं हो पाता। ये आन्दोलन बिखरे हुए होते हैं, अनियत होते हैं व समाज की बुनियादी समस्याओं को हल करने के लिए इनके पास कोई ठोस उपाय नहीं होता।

(ग) प्राय:
सभी आन्दोलन निश्चित मुद्दों को लेकर प्रारम्भ होते हैं परन्तु ये अपने आन्दोलन के सफर में समाज में जुड़े अथवा उस विशेष वर्ग से जुड़ी समस्याओं को भी अपने आन्दोलन के ऐजन्डे में शामिल कर लेते हैं। हालाकि अगर कोई आन्दोलन किसी एक ही विशिष्ट मुद्दे को उठाते हैं तो उसको कहेंगे कि वह अपने ही मुद्दे पर कहीं ज्यादा केन्द्रित है। अगर किसान आन्दोलन है तो जाहिर है कि वह किसानों के हितों की ही बात करेंगे। इसी प्रकार से महिला आन्दोलन महिलाओं के हित की बात करेंगे। परन्तु कुछ ऐसे भी आन्दोलन होते हैं जो विशिष्ट व सार्वजनिक अथवा कई मुद्दों को लेकर चलते हैं।

Bihar Board Class 12 Political Science जन-आन्दोलन का उदय Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जन आन्दोलनों का प्रजातन्त्र में क्या महत्व है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र में जन आन्दोलनों का अस्तित्व में आना व विभिन्न आधारों पर इनका उदय होना स्वाभाविक है। प्रजान्त्रीय प्रक्रिया के दौरान व प्रजातन्त्रीय वातावरण में जनता अपने हितों को समझाना प्रारम्भ करती है तथा उनको प्राप्त करने व विकसित करने के संगठन बनाते हैं व आवश्यकता पड़ने पर आन्दोलन भी करते हैं इस प्रकार से कह सकते हैं कि जन आन्दोलन का उदय होना प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया का ही एक भाग है। इस प्रकार के आन्दोलन का प्रजातन्त्रीय प्रणालियों में अपना अलग महत्त्व है। इन आन्दोलनों से प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया में एक नई गतिशीलता को जन्म मिलता है। प्रजातन्त्र इस प्रकार के आन्दोलनों से मजबूत होता है व इन आन्दोलनों के माध्यम से नागरिकों के हितों की रक्षा भी होती है।

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प्रश्न 2.
चिपको आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
उत्तराखंड में प्रारम्भ हुआ चिपको आन्दोलन एक अत्यन्त चर्चित जन आन्दोलन रहा है। सुन्दर लाल बहुगुणा इस आन्दोलन से प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं। इनका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के लिए पारिस्थितिकी सन्तुलन के पेड़ों की रक्षा करना अति आवश्यक रूप से प्राप्त करना है। इस आन्दोलन का प्रारम्भ छोटी-सी घटना से हुआ था जब जंगल के अधिकारियों ने ग्रामीणों को कृषि के यन्त्र बनाने के लिए लकड़ी काटने की अनुमति नहीं दी बल्कि खेल का सामान बनाने वाली कम्पनी के ठेकेदारों को लकड़ी काटने की अनुमति दे दी। इसके खिलाफ आन्दोलन प्रारम्भ किया गया जिसमें अन्य और कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठ गये।

प्रश्न 3.
चिपको आन्दोलनकारियों की मुख्य माँगें क्या थी?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन मुख्य रूप से जंगल के अधिकारियों के पक्षपाती व्यवहार के खिलाफ था। इसके साथ जंगल के ठेकेदारों द्वारा ग्रामवासियों को नशे की लत डालने के खिलाफ भी यह आन्दोलन था। इन आन्दोलनकारियों का उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ों की रक्षा करना भी था। इसके साथ अन्य कई और मुद्दे भी इस आन्दोलन के कार्य क्षेत्र में आ गए जैसे कि स्थानीय लोगों के अधिकार व स्थानीय प्राकृतिक श्रोतों की सुरक्षा।

प्रश्न 4.
चिपको आन्दोलन महिलाओं का आन्दोलन क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन को महिला आन्दोलन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आन्दोलन में महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया व पर्यावरण की सुरक्षा व पेड़ों की सुरक्षा के मुद्दों के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े अनेक मुद्दों को भी उठाया। चिपको आन्दोलन में महिलाओं ने शराब, ताड़ी, दहेज, महिलाओं पर पुरुषों के द्वारा किए गए शारीरिक व मानसिक शोषण जैसे मुद्दे भी उठाए। इस आन्दोलन से महिलाओं ने वन अधिकारियों व ठेके द्वारा किए गए गलत कार्यों को भी उजागर किया तथा उनके परिवार के पुरुषों को नशे की लत डालकर किस प्रकार से उनके परिवारों को आर्थिक संकट में डाल रहे थे। अतः ये सभी प्रश्न महिलाओं को प्रभावित कर रहे थे जिससे महिलाओं ने इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका अदा की। इसलिए ही इसको महिला आन्दोलन भी कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
गैर दलीय आन्दोलन से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
प्रजातन्त्रीय प्रणाली में राजनीतिक दलों की प्रमुख भूमिका होती है कि वे जनता के हितों को सरकार तक ले जाए व जनता के विभिन्न प्रकार के हितों पर जनमत तैयार करें। परन्तु आजकल राजनीतिक दल अपने इन भूमिकाओं में विफल रहे हैं जिससे स्वयं जनता को ही अपने हितों की रक्षा के लिए संगठन बनाकर अपने हितों की रक्षा करनी पड़ती है। इस प्रकार के संगठनों के आन्दोलनों को गैर राजनीतिक आन्दोलन कहते हैं। भारत में 1970 के दशक बाद विभिन्न राज्यों में विभिन्न आधारों पर अनेक गैर राजनीतिक आन्दोलन विकसित हुए। उदाहरण के तौर पर किसान यूनियन, चिपको आन्दोलन, नर्मदा बचाओ आन्दोलन आदि।

प्रश्न 6.
गैर राजनीतिक दलों की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं।
उत्तर:
गैर राजनीतिक दलों की प्रमुख भूमिकाएँ निम्न हैं –

  1. गैर राजनीतिक संगठन ऐच्छिक है।
  2. ये संगठन गैर राजनीतिक होते हैं व चुनाव में हिस्सा नहीं लेते।
  3. ये चुनावी प्रक्रिया व निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
  4. विभिन्न सामूहिक विषय पर संगठित होते हैं।
  5. इनका प्रभाव अक्सर क्षेत्रीय होता है।

प्रश्न 7.
दलित पैंथर्स को एक जन आन्दोलन के रूप में समझाइए।
उत्तर:
दलित समाज को इतिहास में अनेक प्रकार के कष्टों से गुजरना पड़ा है। इनके साथ सामाजिक, आर्थिक मानसिक व शारीरिक अन्याय होता रहा है। प्रजातन्त्र के विकास का दलितों पर भी प्रभाव पड़ा। विशेषकर दलित युवाओं में अपने हितों, गरिमा व मान सम्मान के प्रति जागरूकता जागी व इसको विकसित करने के लिए व अपने ऊपर होने वाले विभिन्न प्रकार के अन्याय व शोषण के खिलाफ लड़ने के लिए एक युवा संगठन बनाया। इसका प्रारम्भ महाराष्ट्र से हुआ इस संगठन का नाम दलित पैंथर्स था। इस संगठन का प्रमुख उद्देश्य था जातिवाद, छुआछुत व इन आधारों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ लड़ना व भारतीय संविधान में इन कुरीतियों को दूर करने के लिए विभिन्न प्रावधानों, सरकारी नीतियों व कानूनों को लागू कराना था।

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प्रश्न 8.
दलित संगठन की प्रमुख गतिविधियाँ क्या थी?
उत्तर:
दलित समाज के हितों की रक्षा करना दलित पैंथर्स का मुख्य उद्देश्य था। इसमें अधिकांशतः युवा वर्ग शामिल था जिनमें उत्साह, जोश व संकल्प था। इस संगठन ने निम्न गतिविधियाँ आरम्भ की –

  1. उच्च जातियों द्वारा दलितों पर किए गए अत्याचार व अन्याय के खिलाफ दलितों को इकट्ठा करना।
  2. दलितों को उनके हित अधिकार व सरकार की नीतियों के बारे में जागरूक करना।
  3. सरकार के ऊपर विभिन्न कार्यक्रमों व गतिविधियों के द्वारा दलितों के पक्ष में नीतियों के बनवाने व लागू करने के लिए दबाव डलवाना।
  4. छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना।
  5. दलित पैंथर्स ने राजनीति को भी अपने उद्देश्य के लिए प्रयोग किया।

प्रश्न 9.
भारतीय किसान यूनियन के बारे में आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसान लम्बे समय से शोषित व असंगठित रहा है। गरीब किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर रही है क्योंकि वह हर चीज अर्थात् अच्छे बीज, खाद, पानी, बिजली व उसके द्वारा पैदा किए गए कृषि पदार्थों की कीमतों के लिए सरकार पर निर्भर रहा है। 1980 के बाद किसानों में भी जागरूकता आयी व इन्होंने भी राजनीतिज्ञों पर भरोसा किए बिना अपना अलग-अलग संगठन बनाया जिसका नाम भारतीय किसान यूनियन है। यह संगठन विभिन्न तरीकों से समय-समय पर सरकार को प्रभावित करता रहा है।

प्रश्न 10.
भारतीय किसान यूनियन की सफलताएँ समझाइए।
उत्तर:
एक लम्बे समय तक भारत का किसान असंगठित रहा है जिससे उसके हितों की ठीक से सुरक्षा नहीं हो पायी किसान अपनी पैदावार की कीमतों के लिए सरकार पर भी निर्भर करती रही व पैदावार के लिए प्रकृति पर निर्भर रही जिससे किसान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रही। 1980 के दशक में भारत के किसानों ने संगठित होना प्रारम्भ किया। चौधरी महेन्द्र सिंह टिकेत के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन का गठन किया गया जिसने कई स्थानों यहाँ तक कि लालकिला व भारतीय संसद पर भी धरना दिया जिससे सरकार भारत के किसानों के हितों के प्रति सजग हुई। आज भारतीय किसानों के प्रभाव के कारण किसानों को कृषि के क्षेत्र में अनेक सुविधाएँ मिल रही हैं बैंकों से अनेक सुविधाएँ मिल रही है वे इनका अपनी कीमतों से अच्छी कीमतें भी मिल रही है। यही भारतीय किसान यूनियन की सफलता है।

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प्रश्न 11.
ताड़ी विरोधी आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
ताड़ी एक प्रकार का नशीला पेय पदार्थ होता है जिसका प्रयोग आन्ध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के ग्रामों के पुरुषों के द्वारा बड़ी मात्रा में हो रहा था जिससे परिवारों का आर्थिक संकट बढ़ रहा था व जिसकी सबसे अधिक मार महिलाओं पर पड़ रही थी इसलिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने ताड़ी की पूर्ति व बेच के खिलाफ एक संगठन बनाया व आन्दोलन चलाया जिसको ताड़ी विरोधी आन्दोलन कहते हैं। महिलाओं के इस आन्दोलन व जागरूकता को दबाने के लिए ताड़ी के विक्रेताओं व ठेकेदारों ने हर प्रकार के प्रयास किए परन्तु वे महिलाओं के साहस को कम ना कर सके। अन्त में ताड़ी के विक्रेताओं को हार माननी पड़ी। इस आन्दोलन ने शराब के नशे के प्रयोग का भी विरोध किया।

प्रश्न 12.
ताड़ी आन्दोलन किस प्रकार से फैला?
उत्तर:
ताड़ी की पूर्ति व बेचने के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ नैलोर में इकट्ठी हुई व सभी महिलाओं से इस आन्दोलन में शामिल होने की अपील की जिसका पूरे क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ा व महिलाओं का यह आन्दोलन एक विशाल आन्दोलन बन गया व लगभग 5000 ग्रामों में फैल गया। जगह-जगह सभाएँ हुई व ताड़ी के नशे व शराब के नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए गए। इस आन्दोलन ने माफिया, अधिकारियों व राजनीतिज्ञों के सम्बन्धों को नंगा कर दिया।

प्रश्न 13.
ताड़ी विरोधी आन्दोलन में अन्य किन-किन मुद्दों को उठाया गया?
उत्तर:
ताड़ी विरोधी आन्दोलन ताड़ी व शराब के नशे के खिलाफ आन्दोलन प्रारम्भ किया परन्तु जिस प्रकार से इसको सफलता मिली, सामूहिक महत्त्व में निम्न मुद्दे भी इसमें शामिल कर लिए गए –

  1. नारी व पुरुषों में भेदभाव।
  2. महिलाओं की शारीरिक व मानसिक यातनाएँ।
  3. दहेज प्रथा।
  4. महिलाओं की सुरक्षा के लिए सम्पत्ति कानूनों में महिलाओं के पक्ष में परिवर्तन।
  5. महिला शिक्षा व रोजगार का विषय।

प्रश्न 14.
ताड़ी बचाओ आन्दोलन का प्रभाव बताइए।
उत्तर:
ताड़ी बचाओ आन्दोलन ग्रामीण क्षेत्र की कुछ महिलाओं ने प्रारम्भ किया था जिनके प्रयास से यह एक जन-आन्दोलन बन गया जिससे ना केवल नशे के खिलाफ जनमत तैयार हुआ बल्कि अन्य सामाजिक बुराइयों को दूर करने का संकल्प इस आन्दोलन के कारण लिया जा सका। इस आन्दोलन की सबसे बड़ी सफलता इस बात में है कि महिलाओं के अधिकारों के बारे में बहुत जागरूकता आयी व महिलाओं की स्थिति में एक बड़ा परिवर्तन आया। सरकार की नीतियों व कानूनों में भी परिवर्तन आ गया। इस आन्दोलन का एक और मायने में प्रभाव व महत्त्व रहा कि यह आन्दोलन माफियाओं, ठेकेदारों, सरकारी अधिकारियों व राजनीति के बीच के सम्बन्धों को तोड़ा गया।

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प्रश्न 15.
नर्मदा बचाओ आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
नर्मदा बचाओ आन्दोलन गुजरात में चलाया गया जिसका प्रभाव देश के अनेक क्षेत्रों में हुआ। इसका उद्देश्य सरदार सरोवर परियोजना के तहत होने वाले बाँध के निर्माण का विरोध करना था। इस आन्दोलन में विकास के नाम पर सरदार सरोवर परियोजना जैसी योजनाओं के औचित्य पर सवाल उठाए। अनेक पर्यावरण से जुड़े लोग व समाज सेवी जैसे प्रमुख रूप से मेधा पाटेकर व अरणघाटी राय इस आन्दोलन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। इनकी यह मांग भी है इस प्रकार की परियोजनाओं की कीमत का सही विश्लेषण किया जाना चाहिए। इस कीमत स्थानीय लोगों द्वारा सही जाने वाली कीमत को भी ध्यान में रखना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र में गैर राजनीतिक आन्दोलनों का महत्त्व व प्रासांगिकता समझाइए।
उत्तर:
प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का अत्यन्त महत्त्व होता है। यह उम्मीद की जाती है कि राजनीतिक दल सरकार व जनता के बीच एक कड़ी का कार्य करती है व जनता की मांगों को व हितो को सरकार तक ले जाती है व सरकार की नीतियों व निर्णयों को जनता तक ले जाकर स्वस्थ जनमत निर्माण का कार्य करती है। प्रजातन्त्र में राजनीतिक दल ही एक प्रकार के राजनीतिक आन्दोलनों के ऐजेन्ट होते हैं परन्तु आज के भौतिकवादी व अवसरवादी युग में राजनीतिक दल के बल, सत्ता की राजनीतिक ही करने में लगे रहते हैं व जनहित से अनभिज्ञ रहते हैं। इस कारण से राजनीतिक दल जनता में अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं।

इस कारण से जनता स्वयं अपने हितों की रक्षा के लिए स्वयं ही संगठित होकर अपने हितों की रक्षा करते हैं। सरकार व समाज का ध्यान अपनी मांगों की ओर दिलाते हैं आवश्यकता पड़ने पर ये आन्दोलन करते हैं धरना देते हैं व प्रस्ताव पारित करते हैं। प्रजातन्त्रीय प्रणाली के कारण जैसे-जैसे जागरूकता का विकास होता है गैर राजनीतिक आन्दोलनों की संख्या बढ़ती जा रही है। अपने-अपने हितों के लिए समूह व दबाव समूह के रूप में सम्बन्धित लोग इकट्ठे होते हैं व अपने विषयों पर विचार विमर्श करते हैं व योजनाएँ बनते हैं व सफलता भी प्राप्त करते हैं। अतः इन गैर राजनीतिक आन्दोलनों की प्रासांगिकता भी है व महत्व भी है।

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प्रश्न 2.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ किस प्रकार से हुआ?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन उत्तराखंड में जंगल के अधिकारियों के पक्षपाती व्यवहार के कारण से प्रारम्भ हुआ। जंगल के अधिकारियों ने ग्राम के लोगों को कृषि के यन्त्र बनाने के लिए लकड़ी काटने की अनुमति नहीं दी जबकि उन्होंने खेल की सामग्री बनाने वाले ठेकेदारों को भूमिखंड ही दे दिया। इसके विरुद्ध ग्राम की महिलाओं ने अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया यह आन्दोलन मात्र कुछ लकड़ी की अनुमति न मिलने से ही नहीं था वास्तव में इसमें कई प्रकार के मुद्दे उठाए गए थे। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय का विषय था। ग्रामीणों को पूर्ति की जाने वाली शराब के विरुद्ध था व जंगल के अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ था। इसमें वह भी माँग थी कि स्थानीय श्रोतों पर स्थानीय लोगों का ही अधिकार हो।

प्रश्न 3.
चिपको आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
चिपको आन्दोलन को सफल बनाने में महिलाओं ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। महिलाओं ने संगठित होकर जंगल के अधिकारियों, राजनीतिज्ञों व ठेकेदारों के बीच के सम्बन्धों को उजागर किया। इस आन्दोलन के माध्यम से ना केवल पेड़ों की अवैध कटाई के खिलाफ अभियान चलाया बल्कि शराब की आपूर्ति, महिलाओं पर शारीरिक व मानसिक अत्याचार परिवार की आर्थिक संकट, दहेज व बेरोजगारी जैसे विषयों को भे उठाया। महिलाओं ने इस आन्दोलन को इतना अधिक प्रभावकारी बनाया कि सरकार को पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए आदेश दिया व इस सम्बन्ध में प्रभावकारी कानून भी बनाया। इस प्रकार चिपको आन्दोलन केवल एक विषय तक ही सीमित ना रहकर ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े अनेक विषयों को भी इस आन्दोलन के साथ जोड़ दिया गया। महिलाओं ने इस आन्दोलन के माध्यम से ना केवल सरकार को इस सम्बन्ध में नीति बनाने के लिए मजबूत किया बल्कि ग्रामीण क्षेत्र का विकास व सुधार भी किया।

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प्रश्न 4.
गैर राजनीतक आन्दोलनों के उदय के कारण व इनके प्रमुख समझाइए।
उत्तर:
भारतीय प्रजातन्त्र एक उदारवादी प्रजातन्त्र है जिसमें सभी वर्गों, धर्मों, संस्कृतियों व व्यवसायों को फलने-फूलने के अवसर हैं तथा अपनी हितों के लिए संगठन बनाने के अधिकार हैं पिछले कुछ वर्षों में अनेक गैर राजनीतिक संगठनों के उदय के कारण निम्न हैं –

  1. राजनीतिक दलों से निराशा
  2. राजनीतिक दलों द्वारा केवल सत्ता की राजनीतिक करना
  3. लोगों की बढ़ती हुई विभिन्न प्रकार की समस्याएँ
  4. राजनीतिक दलों व अन्य राजनीतिक संस्थाओं में विश्वास की कमी। भारतीय प्रजातन्त्र में पिछले वर्षों में अनेक गैर राजनीतक आन्दोलनों का विकास हुआ है जिनके फलस्वरूप लोग अपने हितों की रक्षा करने व इन मुद्दों पर आमराय व स्वस्थ जनमत बनाने में सफल हुए हैं।
  5. इन आन्दोलनों के माध्यम से सरकारों पर भी नियन्त्रण करने में सफलता मिली है।

प्रश्न 5.
दलित पँथर्स का गठन व उद्देश्य समझाइए।
उत्तर:
दलित समाज लम्बे समय से शोषित व उपेक्षित रहा है। यह एक ऐतिहासिक सच है। देश की आजादी के बाद भी स्थिति में परिवर्तन आने में काफी समय लगा यद्यपि संविधान में दलितों के सामाजिक व आर्थिक विकास के अनेक प्रावधान किए गए। प्रजातन्त्रीय वातावरण बनने से युवा दलितों में जागरूकता आयी। गाँधी जी व डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रेरणा से भी दलितों में एक चेतना का विकास हुआ। दलित युवा एक जगह संगठित होकर पूरे देश में दलितों के अन्दर जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाया। युवा दलितों के इस संगठन को दलित पैंथर्स का नाम दिया गया। इसका गठन महाराष्ट्र से प्रारम्भ हुआ। दलित पैंथर्स के निम्न प्रमुख उद्देश्य थे –

  1. दलितों की सामाजिक व आर्थिक दशा को सुधारना।
  2. जाति के आधार पर पक्षपात व अन्याय को समाप्त करना।
  3. दलितों में अपने अधिकारों व सम्मान के प्रति जागरूकता का विकास करना।
  4. संविधान में दलितों के विकास सम्बन्धी प्रावधानों को लागू करना।
  5. दलितों की शिक्षा में प्रसार करना।
  6. सरकारी नौकरियों में व शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था करना।

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प्रश्न 6.
दलितों के विकास में दलित पैंथर्स की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
दलित पैंथर्स 1972 में महाराष्ट्र के युवकों द्वारा गठित युवा संगठन था। इसकी प्रेरणा दलित युवाओं ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर से ली थी। दलित पैंथर्स का मुख्य उद्देश्य दलितों पर उच्च जातियों के द्वारा किया गया शोषण व शारीरिक मानसिक अत्याचार को रोकना था। युवा पैंथर्स अर्थात् दलित पैंथर्स से जुड़े युवाओं का मुख्य निशाना छुआछूत व लम्बे समय से चली आ रही ऊँच-नीच की भावना को समाप्त करना था।

दलित पैंथर्स ने देश के सभी दलितों को संगठित कर उनमें आत्मसम्मान की भावना विकसित करने व शोषण के विरूद्ध आवाज उठाने का साहस पैदा किया। दलित पैंथर्स का इस सम्बन्ध में सहनीय योगदान है कि इन्होंने दलित समाज में जागरूकता पैदा की। – दलित समाज के प्रयासों से सरकारों ने दलित विकास के लिए अनेक नीतियाँ व कार्यक्रम तैयार किए।

प्रश्न 7.
भारतीय किसान यूनियन को भारतीय राजनीति में एक दबाव समूह के रूप में समझाइए।
उत्तर:
भारत के किसानों के हितों पर जनमत तैयार करने व किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार की नीतियों को प्रभावित करने के लिए 1980 के दशक में भारतीय किसान यूनियन का गठन किया गया। भारत के किसानों का कोई प्रभावशाली संगठन ना होने के कारण इनकी आर्थिक दशा अच्छी नहीं रही। किसान अपनी पैदावार के लिए प्रकृति पर निर्भर करते रहे हैं व कृषि की पैदावार की कीमतों के लिए सरकार पर निर्भर करते हैं किसान को अपनी उपज की कीमत को तय करने का भी अधिकार नहीं रहा है।

आज किसान यूनियन एक प्रभावकारी दबाव समूह के रूप में कार्य कर रहा है जो न केवल किसानों को संगठित करने में सफल रहा बल्कि किसानों में अपने हितों के प्रति जागरूक करने में भी सफल रहा है। आज स्थानीय स्तर, क्षेत्रिय स्तर व राष्ट्रीय स्तर पर यहाँ तक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर (डब्लू. टी. ओ.) पर नीति निर्णय व कार्यक्रमों को किसान यूनियन प्रभावित करने में सफल रहा है। विधान सभाओं, संसद व मंत्रीमंडल में किसानों के हितों से सम्बन्धित लोग प्रतिनिधि के रूप में मौजूद हैं। कृषि पदार्थों की कीमत को तय करने वाली संस्था में भी किसानों का प्रतिनिधित्व है।

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प्रश्न 8.
भारतीय किसान यूनियन की मुख्य माँगे क्या हैं?
उत्तर:
भारतीय किसान यूनियन एक प्रभावकारी संस्था है जिसका प्रभाव विभिन्न राज्यों में है। चौधरी महेन्द्र सिंह टिकेत के नेतृत्व में यह संगठन काफी मजबूत हुआ है व विभिन्न स्तर पर किसानों की मांगों को भी उठाया है। भारतीय किसान यूनियन की प्रमुख माँगे निम्न हैं –

  1. कृषि पैदावार जैसे गेहूँ, चावल, गन्ना, दालों की कीमतों को इन पर आने वाले खर्चों के अनुपात में कीमतों में वृद्धि।
  2. उत्तम किस्म के बीज व खाद (रासायनिक) में सरकार की ओर से कीमतों में रियायत।
  3. अन्तर्राजीय स्तर पर कृषि पैदावार पर आने-जाने की रोक को हटाना।
  4. बिजली व पानी की सही कीमतों पर निरन्तर आपूर्ति।
  5. सरकारी कर्ज की माफी।
  6. किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था।

प्रश्न 9.
भारतीय किसान यूनियन के द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों को समझाइए।
उत्तर:
भारतीय किसान यूनियन भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण व प्रभावकारी दबाव समूह है जिसने किसानों को संगठित करने व उनमें अपने हितों को प्रापत करने के लिए महत्त्वपूर्ण निभाई है। किसान यूनियन की प्रमुख गतिविधियाँ निम्न प्रकार की हैं –

  1. रैली का आयोजन करना।
  2. प्रदर्शन करना।
  3. धरनों के रूप में सरकारी नीतियों व निर्णयों का विरोध करना।
  4. जेल भरो आन्दोलनों का आयोजन करना।
  5. संसद में अपने हितों के लिए भावी बनाना।
  6. राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणा पल में अपने मुद्दों को शामिल कराना।
  7. मुकदमों के जरिए अपने हितों को प्राप्त करना।
  8. निर्णय लेने वाले प्रमुख संस्थाओं में किसानों के प्रतिनिधित्व की माँग करना।
  9. किसान समुदाय में अपने हितों के प्रति जागरूकता बढ़ना।
  10. एक शक्तिशाली व प्रभावकारी दबाव समूह के रूप में कार्य करना।

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प्रश्न 10.
ताड़ी विरोधी आन्दोलन के उदय के कारण व प्रभाव समझाइए।
उत्तर:
आन्ध्र प्रदेश में नौवे दशक में महिलाओं ने शराब माफियाओं के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया। शराब माफिया ग्राम के पुरुषों को ताड़ी की आपूर्ति करके उनको नशे की आदत डाल रहे थे जिसका सीधा प्रभाव परिवार पर विशेषकर महिलाओं पर पड़ता था। ताड़ी की आपूर्ति के साथ शराब माफिया शराब की भी आपूर्ति करते थे।

ताड़ी भी एक पेय पदार्थ होता है जिसमें शराब की तरह ही नशा होता है। महिलाओं ने इन माफियाओं व माफियाओं के गुंडों के खिलाफ मजबूती से व हिम्मत से आन्दोलन चलाया। यहाँ तक सरकार भी इस विषय को ले गयी व अन्त में सभी को महिलाओं की मांगों के आगे झुकना पड़ा। महिलाओं के इस आन्दोलन को ताड़ी आन्दोलन के नाम से जाना जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य ताड़ी व शराब की आपूर्ति को रोकने व शराब के माफिया व अधिकारियों की मिली भगत को तोड़ना था।

प्रश्न 11.
ताड़ी आन्दोलन का महिलाओं की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
ताड़ी आन्दोलन का प्रारम्भ आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कलिनारी मंडल स्थित ग्राम गुडलुर की महिलाओं ने ग्राम के पुरुषों में ताड़ी के नशे की बढ़ती लत के खिलाफ किया। इस आन्दोलन ने ताड़ी के नशे व शराब के नशे के पुरुषों व परिवारों पर बुरे प्रभाव के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। ग्राम की महिलाओं ने इकट्ठे होकर पहले अपनी आवाज ताड़ी व शराब की बेचने वालों तक पहुँचाई व बाद में अपनी मांगों को व अपनी दशा को पुलिस प्रशासन व सरकार तक पहुँचाया जिसके परिणामस्वरूप सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने पड़े।

इन आन्दोलनकारियों की मुख्य माँग ताड़ी व शराब की बिक्री पर पूर्ण पाबन्दी लगाना था। प्रेस के माध्यम से भी इस आन्दोलन का काफी प्रचार हुआ। यह आन्दोलन केवल महिलाओं से जुड़े इन मुद्दों तक ही सीमित ना रहा बल्कि इस आन्दोलन में समाज की अन्य सभी समस्याओं को भी शामिल किया गया। परिणाम स्वरूप इस आन्दोलन से लोगों में सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। इससे लिंगसमानता महिलाओं का आर्थिक सामाजिक व मनोवैज्ञानिक शोषण महिलाओं के प्रति हिंसा जैसे मुद्दों को सरकार की ओर से प्राथमिकता का स्थान मिला।

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प्रश्न 12.
सरदार सरोवर प्रोजेक्ट के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अस्सी के दशक के प्रारम्भ में भारत के मध्य भाग में स्थित नर्मदा घाटी में विकास परियोजना के तहत मध्यप्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से गुजरने वाली नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर 30 बड़े, 135 बीच की आकार के व 300 छोटे बाँध बनाने का प्रस्ताव रखा गया। गुजरात के सरदार सरोवर व मध्य प्रदेश के नर्मदा सागर बाँध के रूप में दो सबसे बड़ी बहु-उद्देशीय परियोजना का निर्धारण किया। इस परियोजना के निम्न उद्देश्य थे –

  1. पानी का पीने के लिए व सिंचाई के लिए निश्चित करना
  2. बिजली उत्पादन के उद्देश्य से
  3. कृषि विकास को बढ़ाने व कृषि की पैदावार को बढ़ाने के लिए।

प्रश्न 13.
नर्मदा बचाओ आन्दोलन का प्रभाव समझाइए।
उत्तर:
नर्मदा बचाओ आन्दोलन अपने गठन के बाद से ही इस प्रकार की परियोजनाओं का विरोध करता रहा है जिसके कारण स्थानीय लोगों के पर्यावास, आजीविका, संस्कृति तथा पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता हो। प्रारम्भ में आन्दोलनकारियों ने यह माँग रखी थी कि इन परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को समुचित पुनर्वास किया जाए। नर्मदा बचाओ आन्दोलनकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी परियोजनाओं के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया से स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी होनी चाहिए व जल जंगल जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का प्रभावी नियन्त्रण होना चाहिए।

इस आन्दोलन का प्रभाव महत्त्वपूर्ण उपलब्धि इस बात में देखी जा सकती है कि गुजरात जैसे राज्यों में इस आन्दोलन का विरोध होने के बावजूद न्यायपालिका व सरकार ने यह स्वीकार किया कि लोगों को पुनर्वास मिलना चाहिए। सरकार द्वारा 2003 में स्वीकृत राष्ट्रीय नीति को नर्मदा बचाओ जैसे सामाजिक आन्दोलन की उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है। इस आन्दोलन के आलोचकों का यह कहना है कि यह आन्दोलन विकास की प्रक्रिया, पानी की उपलब्धता व आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है। मेधा पाटेकर, व अन्य कई पर्यावरण से जुड़े लोग इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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प्रश्न 14.
सूचना के अधिकार के सम्बन्ध में आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सूचना का अधिकार का अर्थ है जानने का अधिकार जो प्रजातन्त्र के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सूचना के अधिकार को प्राप्त करने के लिए आन्दोलन का प्रारम्भ 1990 में हुआ व इसका नेतृत्व किया मजदूर किसान शक्ति संगठन ने। राजस्थान में काम कर रहे इस संगठन ने सरकार के सामने यह मांग रखी कि अकाल राहत कार्य और मजदूरों को दी जाने वाली पगार के रिकार्ड का सार्वजनिक खुलासा किया जाए। धीरे-धीरे यह आन्दोलन मजबूत हुआ व सरकार को इस आन्दोलन की मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करनी पड़ी। 2004 में सूचना के अधिकार के विधेयक को सदन में रखा गया। जून 2005 में विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी हासिल हुई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
ताड़ी आन्दोलन में आन्ध्र प्रदेश के कई सामाजिक विषयों को शामिल किया गया। समझाइए।
उत्तर:
ताड़ी आन्दोलन आन्दोलन आन्ध्र प्रदेश का बहुत चर्चित आन्दोलन रहा है जिसमें चितूर जिले के ग्राम गुंडलुर गाँव की महिलाओं ने अपने ग्राम में ताड़ी की बिक्री पर पाबंदी लगाने की माँग करते हुए एक जुट हो गई तथा ग्राम में ताड़ी की बिक्री का विरोध किया जिसकी सूचना मिलने पर ताड़ी के ठेकेदारों ने महिलाओं पर शारीरिक आक्रमण किया परन्तु इस पर भी महिलाओं का साहस कम नहीं हुआ। जिसके आगे ठेकेदारों व उनके गुंडों को हार माननी पड़ी।

इस आन्दोलन में महिला संगठनों के आन्दोलन केवल ताड़ी व शराब की बिक्री के खिलाफ ही नहीं लड़ रहे थे बल्कि उनके सामने अन्य सामाजिक मुद्दे भी थे। महिलाओं ने बड़े ही साहस के साथ शराब के ठेकेदारों व माफिया समूह के बीच के सम्बन्धों को नंगा किया व राजनीतिज्ञों के सम्बन्धों को भी उजागर किया जो एक बड़ा समूह था जिसके माध्यम से ग्राम के पुरुष वर्ग का शोषण हो रहा था जिसका सबसे बुरा प्रभाव महिलाओं पर पड़ रहा था। नेलौर जिले की महिलाओं का यह आन्दोलन जल्द ही बड़े भाग में फैल गया। ताड़ी-विरोधी आन्दोलन का नारा बहुत साधारण था ‘ताड़ी की बिक्री बंद करो’ लेकिन इस साधारण नारे के पीछे क्षेत्र के व्यापक सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक मुद्दों तथा महिलाओं के जीवन को गहरे से प्रभावित किया। ताड़ी विरोधी आन्दोलन महिला आन्दोलन बन गया। इस आन्दोलन में मुख्य मुद्दे निम्न थे –

  1. नशा बन्दी
  2. ठेकेदारों व प्रशासन के बीच के सम्बन्ध
  3. महिलाओं पर हिंसा
  4. महिलाओं का शारीरिक शोषण
  5. आर्थिक संकट
  6. दहेज प्रथा

इस आन्दोलन के कारण महिलाओं के मुद्दों के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता पैदा हो गई व महिलाओं की विभिन्न समस्याओं पर विचार विमर्श करने के लिए एक मंच प्राप्त हुआ। महिला आन्दोलन ने महिलाओं की राजनीति में भागीदारी को भी विकसित किया। 73 वें व 74 वें संविधान संशोधन के द्वारा महिलाओं की स्थानीय समस्याओं में 33% भागीदारी निश्चित करना इस आन्दोलन का ही परिणाम है।

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प्रश्न 2.
राजनीतिक व गैर राजनीतिक आन्दोलनों का महत्त्व व प्रासांगिक समझाइए।
उत्तर:
प्रजातन्त्र सरकार वह रूप है जिसमे व्यक्ति अधिकतम स्वतन्त्रता प्राप्त होती है। व्यक्ति अपने विचार को व्यक्त कर सकता है। अपने विचार अपनी माँग रख सकता है व अपने हितों की रक्षा के लिए संगठित भी हो सकता है। प्रजातंत्र में व्यक्ति अपने हितों का प्रसार करने के लिए संगठन भी बनाते हैं। ये संगठन दो प्रकार के होते हैं राजनीतिक संगठन व गैर राजनीति संगठन। राजनीतिक संगठनों के माध्यमों से विभिन्न हित समूह राजनीति में हिस्सा लेते हैं व चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं, जबकि गैर राजनीतिक संगठन उन व्यक्तियों का समूह होता है जो अपने हितों को प्राप्त करने के लिए सीधे राजनीति में भाग नहीं लेते बल्कि राजनीतिक दलों व राजनीतिक निर्णय को प्रभावित करते हैं।

आजादी के बाद से भारत में संसदीय लोकतन्त्र काम कर रहा है व चुनावी प्रक्रिया का दौर चल रहा है। विभिन्न प्रकार के दबाव समूह इस बीच अस्तित्व में आए हैं जो अपने हितों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे अनेक हित समूहों ने अपने संगठनात्मक आन्दोलन से चुनावी राजनीति में हिस्सा लेकर अपने हितों को प्राप्त करने का प्रयास किया है इन्हें राजनीतिक आन्दोलन कहते हैं। इसके आलावा किसान यूनियन, महिला संगठन, विद्यार्थी संगठन व अन्य अनेक प्रकार के संगठन हैं जो हित समूह व दबाव समूह के रूप में ही कार्य कर रहे हैं।

इनको गैर राजनीतिक संगठन कहते हैं वर्तमान अध्ययन में अनेक गैर राजनीतिक आन्दोलनों का वर्णन किया गया है जिनके अध्याय से ना केवल विभिन्न प्रकार के मुद्दों का ज्ञान होता है। चिपको आन्दोलन व ताड़ी आन्दोलन व नर्मदा बचाओ आन्दोलनो ने समाज के ना केवल निश्चित मुद्दे उठाए हैं बल्कि समाज व प्रशासन से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए गए हैं जिससे समाज को एक नई दिशा मिली है। इस प्रकार ना केवल राजनीतिक संगठनों का आज के प्रजातंत्र में महत्त्व है बल्कि विभिन्न गैर राजनीतिक संगठनों का भी महत्व है व इनका अध्ययन व विश्लेषण प्रासांगिक भी है जिससे भारतीय प्रजातंत्र मजबूत होगा ना केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि स्थानीय स्तर पर भी।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

I. निम्नलिखित विकल्पों में सही का चुनाव कीजिए

प्रश्न 1.
निम्न में से चिपको आन्दोलन से किसका सम्बन्ध है?
(अ) सुन्दर लाल बहुगुणा
(ब) मेघा पाटेकर
(स) मोहिन्दर सिंह टिकेत
(द) विमल जोशी
उत्तर:
(अ) सुन्दर लाल बहुगुणा

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प्रश्न 2.
चिपको आन्दोलन निम्न में से किस राज्य में हुआ?
(अ) महाराष्ट्र
(ब) आन्ध्र प्रदेश
(स) उत्तराखंड
(द) गुजरात
उत्तर:
(स) उत्तराखंड

प्रश्न 3.
निम्न में से किस नदी पर सरदार सरोवर बांध बना?
(अ) यमुना
(ब) ब्रह्मपुत्रा
(स) नर्मदा
(द) झेलम
उत्तर:
(स) नर्मदा

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प्रश्न 4.
मेघा पाटेकर किस आन्दोलन से जुड़ी हैं?
(अ) किसान आन्दोलन
(ब) ताड़ी आन्दोलन
(स) नर्मदा बचाओ आन्दोलन
(द) सूचना के अधिकार का आन्दोलन
उत्तर:
(स) नर्मदा बचाओ आन्दोलन

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों के सामने गलत तथा सही लिखिए –
(अ) अधिकांश विद्वान् मानते हैं कि जन आंदोलन लोकतंत्र में व्यर्थ है और यह समय, धन और जनशक्ति की बर्बादी है।
(ब) जन आंदोलन को भारतीय समाज के सर्वाधिक धनी, पूँजीपतियों, पुराने जमींदारों, जागीरदारों और स्वतंत्रता के समय देशी रजवाड़ों के शासकों ने लामबद्ध किया।
(स) हमारे लोकतांत्रिक ढाँचे और जनमत की अभिव्यक्ति और निर्माण में जन आंदोलन महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं।
(द) चिपको आंदोलन में अनेक पुरुषों और महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर उन्हें कटने से बचाकर स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण निर्माण में प्रशंसनीय योगदान किया।
उत्तर:
(अ) गलत
(ब) गलत
(स) सही
(द) सही

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प्रश्न 6.
‘भारतीय किसान यूनियन’ किस प्रदेश के किसानों का संगठन था?
(अ) उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के किसानों का
(ब) बिहार तथा झारखंड के किसानों का
(स) गुजरात के किसानों का
(द) दक्षिण भारत के किसानों का
उत्तर:
(द) दक्षिण भारत के किसानों का

प्रश्न 7.
ई. वी. रामास्वामी नायकर ‘पेरियार’ ने किस आंदोलन का नेतृत्व किया?
(अ) द्रविड़ आंदोलन का
(ब) ताड़ी-विरोधी आंदोलन का
(स) बिहार आंदोलन का
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(अ) द्रविड़ आंदोलन का

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प्रश्न 8.
चिपको आन्दोलन के संस्थापन थे –
(अ) चंडी प्रसाद भट्ट
(ब) सुंदरलाल बहुगुणा
(स) देवी लाल
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) सुंदरलाल बहुगुणा

प्रश्न 9.
‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा किसने दिया?
(अ) जयप्रकाश नारायण ने
(ब) इंदिरा गाँधी ने
(स) जगजीवन राम ने
(द) राजनारायण
उत्तर:
(अ) जयप्रकाश नारायण ने

प्रश्न 10.
1974 का छात्र-आंदोलन कहाँ हुआ?
(अ) बिहार में
(ब) उत्तर प्रदेश में
(स) बंगाल में
(द) मद्रास में
उत्तर:
(अ) बिहार में

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प्रश्न 11.
बिहार आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(अ) कर्पूरी ठाकुर ने
(ब) जय प्रकाश नारायण ने
(स) सत्येन्द्र नारायण सिंह
(द) विश्वनाथ प्रताप सिंह ने
उत्तर:
(ब) जय प्रकाश नारायण ने

प्रश्न 12.
‘सूचना का अधिकार’ कब अधिनियम बना?
(अ) 2003 में
(ब) 2004 में
(स) 2005 में
(द) 2006 में
उत्तर:
(स) 2005 में

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प्रश्न 13.
मेधा पाटेकर का नाम किस आंदोलन से जुड़ा है?
(अ) नर्मदा बचाओ आंदोलन
(ब) चिपको आंदोलन
(स) टेहरी बाँध रोको आंदोलन
(द) पर्यावरण प्रदूषण रोको आंदोलन
उत्तर:
(अ) नर्मदा बचाओ आंदोलन

प्रश्न 14.
जनता दल का गठन कब हुआ?
(अ) 11 अक्टूबर, 1988
(ब) मई, 1977
(स) 31 अक्टूबर, 1984
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) 11 अक्टूबर, 1988

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 7 जन-आन्दोलन का उदय

प्रश्न 15.
मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना किस राजनीतिक दल के चुनाव घोषणा-पत्र (1991) में था?
(अ) जनता दल
(ब) भाजपा
(स) समाजवादी पार्टी
(द) कांग्रेस
उत्तर:
(अ) जनता दल

प्रश्न 16.
जल, जंगल और जमीन के नारे से संबंधित आंदोलन कौन-सा है?
(अ) नर्मदा बचाओ आंदोलन
(ब) चिपको आंदोलन
(स) नक्सल आंदोलन
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) चिपको आंदोलन

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प्रश्न 17.
मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय किस प्रधानमंत्री के काल में हुआ?
(अ) चौधरी चरण सिंह
(ब) वी. पी. सिंह
(स) एच. डी. देवगौड़ा
(द) चन्द्रशेखर
उत्तर:
(ब) वी. पी. सिंह

प्रश्न 18.
पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण के संदर्भ में न्यायपालिका का निर्देश क्या है?
(अ) आरक्षण नहीं दिया जाए
(ब) प्रआरक्षण को समय सीमा में बाँधा जाए
(स) क्रीमी लेयर से ऊपर वाले को आरक्षण न दिया जाए
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) क्रीमी लेयर से ऊपर वाले को आरक्षण न दिया जाए

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प्रश्न 19.
राष्ट्रीय महिला आयोग के गठन का निर्णय कब लिया गया?
(अ) 1975
(ब) 1990
(स) 1985
(द) 2005
उत्तर:
(ब) 1990

प्रश्न 20.
आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय तथा गरीबी के उन्मूलन के साथ ही आर्थिक विकास रूपी उद्देश्य केवल निम्न के भीतर ही संभव है –
(अ) तानाशाही
(ब) राजतंत्र
(स) अराजकता
(द) लोकतंत्रात्मक ढाँचा
उत्तर:
(द) लोकतंत्रात्मक ढाँचा

प्रश्न 21.
‘सामाजिक न्याय के साथ विकास’ का सूत्र किस पंचवर्षीय योजना में अपनाया गया?
(अ) तीसरी पंचवर्षीय योजना
(ब) चौथी पंचवर्षीय योजना
(स) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना
(द) छठी पंचवर्षीय योजना
उत्तर:
(ब) चौथी पंचवर्षीय योजना

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प्रश्न 22.
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस की स्थापना किसने की?
(अ) जवाहरलाल नेहरू
(ब) राजेन्द्र प्रसाद
(स) सरदार बल्लभ भाई पटेल
(द) चौधरी चरण सिंह
उत्तर:
(ब) राजेन्द्र प्रसाद

प्रश्न 23.
यह किस आंदोलन का नारा है “निजी सार्वजनिक है सार्वजनिक निजी है” –
(अ) किसानों का आंदोलन
(ब) महिलाओं के आंदोलन
(स) मजदूरों के आंदोलन
(द) पर्यावरण की सुरक्षा के आंदोलन
उत्तर:
(द) पर्यावरण की सुरक्षा के आंदोलन

II. मिलान वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 7 जन-आन्दोलन का उदय Part - 2 img 1
उत्तर:
(1) – (य)
(2) – (स)
(3) – (द)
(4) – (ब)
(5) – (अ)

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers उपसर्ग प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers उपसर्ग प्रकरण

Bihar Board 9th Sanskrit Grammar Objective Answers उपसर्ग प्रकरण

प्रश्न 1.
‘प्र’ उपसर्ग से निम्न में से कौन-सा शब्द बना है ?
(a) प्रतिवादः
(b) प्रतिरूपम्
(c) पराभावः
(d) प्रस्थानम्
उत्तर-
(d) प्रस्थानम्

प्रश्न 2.
“वि’ उपसर्ग से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) वैदिकः
(b) व्यासः
(c) वृक्षः
(d) वृकोदरः
उत्तर-
(b) व्यासः

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प्रश्न 3.
संस्कृत में कौन-सा उपसर्ग है ? ।
(a) सम्
(b) संस
(c) संत
(d) अप
उत्तर-
(a) सम्

प्रश्न 4.
‘अनु’ उपसर्ग से शब्द बनता है
(a) अपकारः
(b) अधिरभः
(c) अनुदिनम्
(d) अतिक्रमणम्
उत्तर-
(c) अनुदिनम्

प्रश्न 5.
‘अति’ उपसर्ग के योग से कौन-सा शब्द बनता है?
(a) अधिक
(b) आवश्यक
(c) अत्यन्त
(d) अनाचारा
उत्तर-
(c) अत्यन्त

प्रश्न 6.
‘अभि’ उपसर्ग में कौन-सा शब्द बनता है ?
(a) अभिभावक
(b) आवश्यक
(c) अपकार
(d) अतिक्रमणम्
उत्तर-
(a) अभिभावक

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प्रश्न 7.
“प्रति’ उपसर्ग के योग से शब्द बनता है
(a) पराजयः
(b) प्रतिरूपम्
(c) परिणतिः
(d) पराभवः
उत्तर-
(b) प्रतिरूपम्

प्रश्न 8.
‘नि’ उपसर्ग के योग से बना शब्द है.
(a) निकरः
(b) परिष्कारः
(c) निरसः
(d) निश्चयः
उत्तर-
(a) निकरः

प्रश्न 9.
‘परा’ उपसर्ग के योग से बना शब्द है
(a) प्रचुरः
(b) प्रभावः
(c) पराजयः
(d) प्राकृतः
उत्तर-
(c) पराजयः

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प्रश्न 10.
‘सम्’ उपसर्ग के योग से बना शब्द है
(a) सुमनः
(b) सुयोग्यः
(c) संस्कारः
(d) सुशासितम्
उत्तर-
(c) संस्कारः

प्रश्न 11.
आजीवनम् में कौन-सा उपसर्ग है :
(a) अव
(b) आङ्
(c) अभि
(d) अधि
उत्तर-
(b) आङ्

प्रश्न 12.
उद्गम में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) उप
(b) उत्
(c) अप
(d) अति
उत्तर-
(b) उत्

प्रश्न 13.
सुरूपम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) सु
(b) सम्
(c) रूपम्
(d) सर
उत्तर-
(a) सु

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प्रश्न 14.
उपक्रम में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) क्रम
(b) प्रक्रम
(c) उत
(d) उप
उत्तर-
(d) उप

प्रश्न 15.
‘परि’ के योग से बना शब्द बनता है.
(a) परिणतिः
(b) प्रतिवाद:
(c) प्रस्थानम्
(d) पराजयः
उत्तर-
(a) परिणतिः

प्रश्न 16.
अत्युक्तिः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अनु
(b) अति
(c) अपिगमः
(d) अप्ययः
उत्तर-
(b) अति

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प्रश्न 17.
निर्बलः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) नि
(b) न
(c) निर्
(d) बल
उत्तर-
(c) निर्

प्रश्न 18.
अनुचरः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अनु
(b) अप
(c) आङ्
(d) चरः
उत्तर-
(a) अनु

प्रश्न 19.
दुष्टः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) दुष
(b) दुस्
(c) षट्
(d) दुष्
उत्तर-
(b) दुस्

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प्रश्न 20.
अध्यक्षः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अभि
(b) अति
(c) अनु
(d) अधि
उत्तर-
(d) अधि

प्रश्न 21.
उद्गम में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) उत्
(b) गम
(c) उद्
(d) उप
उत्तर-
(a) उत्

प्रश्न 22.
अनुभवः में कौन-सा उपसर्ग है ? ।
(a) भवः
(b) अन्
(c) अनु
(d) अभि
उत्तर-
(c) अनु

प्रश्न 23.
‘दूर’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) दुःस्वप्न
(b) दुस्तरः
(c) दुष्टः
(d) दुष्करः
उत्तर-
(a) दुःस्वप्न

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प्रश्न 24.
विगतः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) विग
(b) गतः
(c) वि
(d) विग
उत्तर-
(c) वि

प्रश्न 25.
अवनतः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) नतः
(b) अव
(c) अन्
(d) अनु
उत्तर-
(b) अव

प्रश्न 26.
‘अव’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) अवतरणम्
(b) अनुचरः
(c) अधिरालः
(d) अप्ययः
उत्तर-
(a) अवतरणम्

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प्रश्न 27.
अवकाशः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अन्
(b) अ
(c) काशः
(d) अव्
उत्तर-
(d) अव्

प्रश्न 28.
‘अव’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) अवतारः
(b) अभिजनः
(c) अतिरथः
(d) अध्यक्षः
उत्तर-
(a) अवतारः

प्रश्न 29.
अनुवर्षम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अभि.
(b) अन
(c) वर्षम्
(d) अनु
उत्तर-
(d) अनु

प्रश्न 30.
‘अनु’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) अपकारः
(b) अवतारः
(c) अनुभवः
(d) अवनतः
उत्तर-
(c) अनुभवः

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प्रश्न 31.
अनुचरः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अनु.
(b) अव
(c) अप
(d) आङ्
उत्तर-
(a) अनु.

प्रश्न 32.
अनुवर्षम् में कौन-सा उपसर्ग है ? ।
(a) अप
(b) अनु
(c) अव
(d) अधि
उत्तर-
(b) अनु

प्रश्न 33.
अनुदिनम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अप
(b) अधि
(c) आङ
(d) अनु
उत्तर-
(d) अनु

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प्रश्न 34.
‘सम्’ उपसर्ग से निम्न में से कौन-सा शब्द बनेगा?
(a) संयोग
(b) सुयोग्य
(c) सुशासितम्
(d) सुरूपम्
उत्तर-
(a) संयोग

प्रश्न 35.
संतोष में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) सम्
(b) सु
(c) सं
(d) तोषः
उत्तर-
(a) सम्

प्रश्न 36.
संस्कारः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) सं
(b) सु
(c) सम्
(d) संस्
उत्तर-
(c) सम्

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प्रश्न 37.
‘अप’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) अपभ्रंश
(b) आदर
(c) आघातः
(d) अभिभावकः
उत्तर-
(a) अपभ्रंश

प्रश्न 38.
अपभ्रष्टः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अन्
(b) अनु
(c) अप
(d) आङ
उत्तर-
(c) अप

प्रश्न 39.
अपकारः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अपि
(b) अति
(c) अप्
(d) उप
उत्तर-
(c) अप्

प्रश्न 40.
‘परा’ उपसर्ग से निम्न में कौन-सा शब्द बना है ?
(a) पराभवः
(b) प्रयाणम्
(c) प्रयोग
(d) प्रबलम्
उत्तर-
(a) पराभवः

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प्रश्न 41.
पराजय में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) जय
(b) परा
(c) प
(d) प्र
उत्तर-
(b) परा

प्रश्न 42.
‘प्र’ उपसर्ग से बना शब्द है
(a) प्रयाणम्
(b) प्रतिभट्टः
(c) पराजयः
(d) परिणतिः
उत्तर-
(a) प्रयाणम्

प्रश्न 43.
प्रस्थानम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) प्रस्
(b) परा
(c) परि
(d) प्र
उत्तर-
(a) प्रस्

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प्रश्न 44.
निस्सारः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) निर
(b) निस्
(c) सारः
(d) नि
उत्तर-
(b) निस्

प्रश्न 45.
‘निस्’ उपसर्ग से शब्द बना है
(a) निर्बलः
(b) निर्धनः
(c) निसन्देहः
(d) निर्मलम्
उत्तर-
(c) निसन्देहः

प्रश्न 46.
निश्चयः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) निस्
(b) नि
(c) चय
(d) निर
उत्तर-
(a) निस्

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प्रश्न 47.
निरसः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) निस्
(b) नि
(c) न्
(d) निर्
उत्तर-
(d) निर्

प्रश्न 48.
निर्धन: में कौन-सा उपसर्ग है ? ।
(a) नः
(b) नि
(c) निर्
(d) निस्
उत्तर-
(c) निर्

प्रश्न 49.
दुष्टः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) दुष्ठ
(b) दुष
(c) दुस्
(d)दु
उत्तर-
(c) दुस्

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प्रश्न 50.
दुस्तरः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) दुस्
(b) तरः
(c) दु
(d) दुस्
उत्तर-
(d) दुस्

प्रश्न 51.
आघातः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) आङ्
(b) आ
(c) घातः
(d) अधि
उत्तर-
(a) आङ्

प्रश्न 52.
अधिमासः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अपि
(b) अधि
(c) अभि
(d) अति
उत्तर-
(b) अधि

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प्रश्न 53.
उत्साहः में कौन-सा उपसर्ग है ? ,
(a) उत्
(b) उर
(c) उ
(d) उप
उत्तर-
(a) उत्

प्रश्न 54.
अभिभावकः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) अ
(b) वकः
(c) अपि
(d) अभि
उत्तर-
(d) अभि

प्रश्न 55.
उपयोगः में कौन-सा उपसर्ग है ? ।
(a) उत्
(b) उन्
(c) योगः
(d) उप
उत्तर-
(d) उप

प्रश्न 56.
उपकारः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) उत्
(b) उप
(c) काटः
(d) उ
उत्तर-
(b) उप

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प्रश्न 57.
उद्गम में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) उत्
(b) उप
(c) गम्
(d) उद्
उत्तर-
(a) उत्

प्रश्न 58.
सुयोग्यः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) सुयो
(b) योग्यः
(c) सम्
(d) सु
उत्तर-
(d) सु

प्रश्न 59.
प्रतिरूपम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) प्रति
(b) प्र
(c) रूपम्
(d) पर
उत्तर-
(a) प्रति

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प्रश्न 60.
प्रतिएकम् में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) प्र
(b) पर
(c) एकम्
(d) प्रति
उत्तर-
(d) प्रति

प्रश्न 61.
आरम्भः में कौन-सा उपसर्ग है :
(a) आर
(b) अपि
(c) आङ्
(d) अधि
उत्तर-
(c) आङ्

प्रश्न 62.
प्रयोगः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) प्र
(b) परा
(c) योगः
(d) प
उत्तर-
(a) प्र

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प्रश्न 63.
उत्साहः में कौन-सा उपसर्ग है ?
(a) प्रः
(b) उत्
(c) साहः
(d) उ
उत्तर-
(b) उत्