Bihar Board Class 7 Hindi रचना निबंध लेखन

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions रचना निबंध लेखन

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi निबंध लेखन

अनुशासन

नियमानुकूल आचरण अनुशासन है । ये नियम परिवार, समाज और राष्ट्र के अलावा, अपने आप को मर्यादित रखने के लिए होते हैं। अनुशासन की शुरुआत वस्तुतः अपने पर शासन से होती है। संयमपूर्वक जीवन-यापन ही __ अपने पर शासन है । हमारे ऋषि-मुनियों ने इसके लिए कुछ नियम बनाये हैं। इन्हें अपने जीवन में उतारकर हम अपने-आप को निखार सकते हैं. विकसित कर सकते हैं । प्रकृति के सारे कार्य अनुशासनबद्ध है ।

आदमी एक सामाजिक प्राणी है । समाज का सही संचालन तभी हो सकता है, जब हमारे बात-व्यवहार एक-दूसरे के सुख-दुःख को दिमाग में रखकर किए जाते हैं । इसके लिए अपने को बाँधना पड़ता है और अपने स्वार्थ का परित्याग करना होता है।

राष्ट्र का तो विकास ही अनुशासन पर आश्रित है । यदि सुरक्षा के लिए सैनिक सदा सतर्क न रहें, सरकारी सेवक समय पर कार्यों को निपटाये नहीं, शिक्षक ज्ञान को विद्यार्थियों में बाँटे नहीं, छात्र अपने मूल कर्त्तव्य विद्याध्ययन से जी चुराये, किसान अन्न-उत्पादन में निरन्तर वृद्धि के लिए प्रयत्न न करे तो देश कहाँ जाएगा ? यदि सभी अपने-अपने मन की करने लगे तो पूरे देश में अराजकता फैल जाएगी । नतीजा होगा कि कोई-न-कोई धर दबोचेगा और फिर हम गुलाम बनकर रह जाएंगे ।

आज के बच्चों के ऊपर ही कल देश को चलाने का भार होगा । इसलिए जरूरी है कि हम शुरू से ही अनुशासन को जीवन में अपनाकर चलें । इससे हम अनुशासित जीवन जीने के आदी हो जायेंगे और अपने साथ देश-समाज को दुनिया में प्रतिष्ठा दिला सकेंगे । हम याद रखे कि अनुशासित राष्ट्र ही सफलता की ऊँचाई छू सकता है।

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पुस्तकालय

‘पुस्तकालय’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है । ‘पुस्तक’ और ‘आलय’। पुस्तक का अर्थ किताब और आलय का अर्थ घर होता है । अतः ‘पुस्तकालय’ शब्द का अर्थ ‘पुस्तकों या किताबों का घर’ होता है । जहाँ पर सामूहिक और व्यवस्थित ढंग से पढ़ने के लिए पुस्तकें रखी रहती हैं, उस स्थान को ‘पुस्तकालय’ कहा जाता है । प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय का रहना आवश्यक है। हमारे विद्यालय में भी पुस्तकालय है । पुस्तकालय में ज्ञानवर्द्धक और लाभदायक पुस्तकें होनी चाहिए ।

पुस्तकों, को पढ़कर ही कोई विद्वान हो सकता है । लेकिन एक आदमी अपनी जरूरत की सारी किताबें अपने पास नहीं रख सकता है । सभी किताबें सब दिन मिलती नहीं हैं । ऐसे में एक आदमी सारी किताबों को खरीद भी नहीं सकता है । पुस्तकालय से किताबें लेकर हम अपनी जरूरत पूरी करते हैं। यहाँ से कोई भी आदमी एक निश्चित समय के लिए पुस्तकें प्राप्त कर सकता है और बाद में पढ़कर उस पुस्तक को फिर पुस्तकालय में वापस कर देता है। इस तरह के अदल-बदल के द्वारा एक ही पुस्तक से बहुत लोगों को लाभ होता है। हम अपना समय बेकार की बातचीत में बर्बाद कर देते हैं । पुस्तकालय में जाकर पुस्तकों का अध्ययन करने से समय का सदुपयोग होता है । यह स्वस्थ मनोरंजन भी है । जो गरीब छात्र हैं वे पुस्तकालय से पुस्तक प्राप्त करके अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं । अतः आधुनिक जीवन में पुस्तकालय एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक संस्था है।

हमारी विद्यालय में पुस्तकालय का प्रभारी एक शिक्षक हैं । छात्र-संघ का एक प्रधानमंत्री होता है । वह प्रत्येक वर्ग के छात्रों को किताबें देता है । प्रत्येक वर्ग को सप्ताह में एक दिन किताबें दी जाती हैं । उसी दिन पहले की ली. गई किताबें छात्र वापस भी करते हैं । शिक्षक-छात्र बौद्धिक स्तर के अनुसार सुरुचिपूर्ण किताबें चुनकर देते हैं ।

पुस्तकालय विद्यालय का प्राण होता है । हमलोगों को पुस्तकालय का भरपूर उपयोग करना चाहिए । इसमें विभिन्न विषयों की पुस्तकें रहती है, इन पुस्तकों के पढ़ने से हमारे ज्ञान की वृद्धि होती है।

समाचार-पत्र

मनुष्य स्वभाव से जिज्ञासु होता है । वह नित्य नवीन जानकारियाँ प्राप्त करना चाहता है । पहले इस जिज्ञासा के समाधान के लिए ऐसा कोई साधन नहीं था, जो आज समाचार-पत्रों के रूप में हमें सुलभ है । समाचार-पत्रों की उत्पत्ति की कहानी, सोलहवीं सदी में इटली से आरंभ होती है । मुद्रण-यंत्रों के आविष्कार से इनका विकास होता गया । आज विश्व-भर में इनका प्रचलन है।

समाचार-पत्र कई तरह के होते हैं । जैसे-दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक तथा मासिक-पत्र । समाचार-पत्र के मुख्यतः दो भेद होते हैं ‘सामान्य’ और _ ‘विशिष्ट’ । ‘सामान्य’ समाचार-पत्र सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, साहित्यिक . आदि विषयों से संबंधित होते हैं । ‘विशिष्ट’ समाचार-पत्रों में विशेष व्यवसाय या पेशे से संबंधित समाचार होते हैं । सामाचार-पत्र लोकतंत्र के प्रहरी हैं। आज विश्व भर में लोकतंत्र का बोलबाला है । समाचार-पत्र इस क्षेत्र में जनता के मार्गदर्शक होते हैं । समाचार-पत्रों के माध्यम से लोग अपनी इच्छा, विरोध

और आलोचना प्रकट करते हैं । इनसे राजनीतिज्ञ भी डरते हैं । नेपोलियन ने कहा था- “मैं लाखों विरोधियों की अपेक्षा तीन विरोधी समाचार-पत्रों से भयभीत रहता हूँ।” समाचार-पत्र राजनैतिक क्रिया-कलापों का पूर्ण व्योरा प्रस्तुत करते हैं । इसी के आधार पर जनता अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती है।

आज के समाचार-पत्र विविधतापूर्ण होते हैं । प्रचार-माध्यम के रूप में इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है। यदि कोई अपने विचार या रचना को देशव्यापी बनाना चाहता है, तो वह समाचार-पत्रों का सहारा लेता है । इससे उसकी बात देश-भर में फैल जाती है। व्यापार के फैलाव के लिए भी ये अत्यन्त उपयोग हैं। इनमें छपे विभिन्न विषयों के लेखों से हमारा ज्ञान-विस्तार होता है । इनसे हम नए विचारों पर चिन्तन करना, इन्हें अपनाना सीखते हैं।

समाचार-पत्र देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, अन्धविश्वास और रूढ़िवादिता जैसी बुराइयों को दूर करने में भी सहायक हो सकते हैं । ये अपनी आलोचनाओं से सामाजिक तथा राजनैतिक बुराईयों का पर्दाफाश कर सकते हैं । यह तभी सम्भव है, जब समाचार-पत्र स्वतंत्र तथा निष्पक्ष हों और अपने उत्तरदायित्वो को ईमानदारी से निभाते हों।

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विद्यार्थी जीवन

विद्यार्थी जीवन फूलों की सेज नहीं, काँटों का ताज है, किन्तु ये काँटे फूल बनाये जा सकते हैं । यह जीवन सरल नहीं है, किन्तु इसे सरल बनाया जा सकता है । इसके लिए दृढ़ निश्चय की, घोर परिश्रम की और पूर्ण शिक्षण की आवश्यकता है।

यह जीवन विद्यालय से प्रारम्भ होता है । विद्यालय वह स्थान है जहाँ जीवन की तैयारी की पहली शिक्षा मिलती है । यह मात्र पठन-पाठन का स्थान नहीं, प्रत्युत् जीवन-निर्माण, चरित्र-निर्माण की पवित्र भूमि है । जीवन का यह भाग विद्यार्थी जीवन कहलाता है ।

बच्चे का भविष्य उसके विद्यार्थी जीवन से जाना जा सकता है । यह भावी जीवन की तैयारी का काल है। मनुष्य इसी काल में विविध ज्ञान और अनेक गुणों की तैयारी करता है । इसी काल में उस जीवन-कक्ष का बीज-वपन होता है जो आगे चलकर फूलता-फलता है। हम इस काल में जैसा कर्त्तव्य करेंगे, भावी जीवन में वैसा ही फल मिलेगा। … विद्यार्थी जीवन निर्माण का काल है । इस निर्माण-काल में शिक्षा और उपदेश की, नियम और प्रतिबन्ध की एवं अनुशासन और संकल्प की आवश्यकता होती है । हमें इन गुणों को अपनाना पड़ता है । इनकी कमी से अनर्थ हो जाने की संभावना रहती है। हमें अपने शिक्षकों और अभिभावकों को नहीं भूलना है। इनके बताये मार्ग पर चलकर ही हम अपने में आत्मनिर्भरता, कर्तव्यपरायणता और अनुशासन आदि गुणों का विकास कर सकते हैं।

छात्र-जीवन का प्रधान कर्त्तव्य है पठन-पाठन । उसे चाहिए कि वह अध्ययन, अध्यवसाय और अनुशासन का मूल्य समझे । उसके लिए संयम नियम की नितान्त आवश्यकता है। इसी से जीवन प्रतिष्ठित हो सकता है। इसके अभाव में मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान का स्वप्न चूर हो जाता है । अंगेजी में एक कहावत है-“Student life is golden life” अर्थात् विद्यार्थी जीवन स्वर्णिम जीवन होता है । इस जीवन की चमक सदा अक्षुण्ण रहे इसका ध्यान प्रत्येक विद्यार्थी को रहना चाहिए ।

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हमारे प्रिय शिक्षक

लाल बिहारी बाबू हमारे वर्ग शिक्षक हैं । वे पाठ को मानो घोल कर पिलाते हैं । क्या मजाल कि उनके पढ़ाते समय कोई तनिक आवाज भूल से भी करे।

जुल्म और जबरदस्ती लाल बिहारी बाबू को बर्दाश्त नहीं । बाबू राम नारायण सिंह का पुत्र भी हमारे ही विद्यालय में पढ़ता है । वे गाँव के बड़े ही प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं । विद्यालय के संचालकमंडल में भी दखल रखते हैं। एक बार उनके पुत्र ने ताव में आकर अपने साथ पढ़ने वाले हरिजन लड़के को बेवजह पीट दिया । लाल बिहारी बाबू इस अनाचार को भला कब बर्दाश्त कर सकते थे ? उतने क्रोध में पहली बार लाल बिहारी बाबू को मैंने देखा था, बेंत की छड़ी तडातड़ उस लड़के की पीठ पर पड़ रही थी । लाल बिहारी बाबू के मुँह से एक ही बात बार-बार निकल रही थी, “अरे बुद्ध ! तूम अपने सहपाठी को नीचा मानता है । तू नीच है” । वह लड़का जब घर पहुंचा तो उसके पिताजी ने सारी बात जान ली। पन्द्रह-बीस मिनट में ही लड़के को साथ लिये बाबू रामनारायण सिंह ने आते ही अपने लड़के को आज्ञा दी, “गुरुजी के पैर पकड़, शपथ ले कि आगे फिर ऐसी हरकत नहीं करेगा ! अपने साथी से अपने किए के लिए माफी माँग” | लाल बिहारी बाबू की आँखों से आँसू की धारा बह रही थी और वे हकलाते हुए कहते जा रहे थे-“खोट मुझमें है रामनारायण बाबू ! मैं लड़के को सच्ची शिक्षा नहीं दे सका कि आज आशीष देनेवाले हाथ में छड़ी उठानी पड़ गई।”

भला, ऐसे वर्ग-शिक्षक को कौन भुला सकता है ? आज सारा गाँव वस्तुतः उनके चरणों में नतमस्तक है।

बाढ़

जब नदियों का जल बढ़कर आस-पास के इलाके में फैल जाता है, तब कहा जाता है कि नदियों में बाढ़ आ गई है । अत्यधिक वर्षा और बर्फ के अधिक पिघलने से नदियों में पानी बढ़ जाता है । यह बढ़ा हुआ जल नदी के दोनों किनारों के ऊपर आ जाता है । तब पानी में आस-पास की जमीनें डूब जाती है । बाढ़ प्रायः बरसात के समय आती है । कभी-कभी किसी-किसी नदी में जोरों की बाढ़ आती है । इससे नदी के किनारे के गाँव डूब जाते हैं।

जल-शक्ति के सामने कोई भी टिक नहीं सकता है । किसी भी स्थान के लिए बाढ़ एक प्राकृतिक प्रकोप है।

बाढ़ आने से अत्यधिक हानियाँ होती हैं । अचानक बाढ़ से गाँव-के गाँव बह जाते हैं । बहुत से आदमी और पशु डूबकर मर जाते हैं । खेतों में लगी हुई फसलें बर्बाद हो जाती हैं । गाँवों में कच्चे घर गिर जाते हैं । बाढ़-वाले क्षेत्रों के लोग बेघर होकर ऊँचे स्थानों, सडकों और स्टेशनों में शरण लेते हैं। बड़े-बड़े वृक्ष बाढ़ की धारा में उखड़ कर बह जाते हैं। बाढ़ के समय नदियाँ अपनी धारा भी बदलती हैं । उपजाऊ जमीन पर बाढ़ के समय बालू जमा हो जाते हैं और जमीन ऊसर हो जाती है। बाढ़ जब उतर जाती है तो पानी नदी में चला जाता है। चारो ओर गंदगी फैली रहती है। पानी में घास-फूस आदि के सड़ने से बहुत-सी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं । खासकर पशुओं में बीमारी तेजी से फैलती है।

बाढ़ के जल में मिट्टी के चिकने और उपजाऊ कण रहते हैं। बाढ के समय ये कण हमारे खेतों में जमा हो जाते हैं । इससे हमारे खेतों की उर्वश शक्ति बढ़ जाती है । अगले वर्ष बहुत अच्छी फसल होती है । बाढ़ से गाँवों की सफाई भी हो जाती है ।

‘बाढ़ से हानियाँ भी ज्यादा हैं। इससे बचाव के लिए सरकार प्रयत्न कर रही है । बाढ़वाली नदियों के किनारे पर तटबन्ध बनाये जा रहे हैं । बाढ़ के जल के उपयोग की भी योजनाएं बनायी जा रही हैं । बाढ़ से ज्यादा नुकसान सुखाड़ से होती है।

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वर्षा-ऋतु

भारतवर्ष के अन्दर छह ऋतुएँ होती है-1. वसन्त, 2. ग्रीष्म (गर्मी), 3. वर्षा, 4. शरद् (जाड़ा), 5. हेमन्त और 6. शिशिर । हम इन छहों ऋतुओं को तीन भागों में बाँट सकते हैं-गर्मी, वर्षा और जाड़ा । वर्षा ऋतु मुख्यतः आषाढ़ और सावन में आती है, लेकिन इसका प्रभाव आश्विन तक बना रहता है। वर्षा-ऋतु का आगमन ग्रीष्म (गर्मी) के बाद होता है ।

वर्षा ऋतु के आते ही आकाश में काले-काले बादल छा जाते हैं । बादल गरजने लगते हैं । भारी वर्षा प्रारम्भ हो जाती हैं । वर्षा के जल से धरती की जलती हुई छाती शीतल हो उठती है। जीव-जन्तुओं में खुशियाली छा जाती है । ग्रीष्म-ताप से झुलसे हुए पेड़-पौधे फिर से नये पत्तों से लदने लगते हैं। धीरे-धीरे धरती पर हरियाली छाने लगती है। वर्षा-ऋतु में दिन-रात वर्षा होती रहती है । बादलों की गरज और बिजली की कड़क गड़ा भयावनी होती है।

जल ही जीवन है । अत: वर्षा-ऋतु में धरती को नया जीवन मिलता है। चारों ओर हरियाली छा जाने से पृथ्वी का दृश्य देखने योग्य हो जाता है। नदी और ताल-तलैया जल से लबालब भर जाते हैं । किसानों के लिए यह बहुत खुशी का समय होता है । इसी समय धान और मकई की मुख्य फसलें बोई जाती है। रब्बी की फसल के लिए जमीन में तरी आती है। भारत की खेती वर्षा-ऋतु पर निर्भर है। – इस ऋतु से कुछ हानियाँ भी होती हैं । अधिक वर्षा के कारण नदियों में बाढ़ आ जाती है, जिससे गाँव बह जाते हैं । लगी हुई फसलें नष्ट हो जाती हैं । यातायात ठप हो जाता है । पशु-पक्षी अधिक वर्षा के कारण भींग-भीग कर मर जाते हैं । गड्ढे में पानी जम जाता है, जिससे बीमारियाँ पैदा होती हैं।

इतना होने पर भी वर्षा-ऋतु से लाभ ही अधिक है। खेती के लिए यह आवश्यक ऋतु है । वर्षा नहीं हो तो धरती वीरान और रेगिस्तान बन जाएगा।

वसन्त-ऋतु

भारत सौन्दर्यमयी प्रकृति की गोद में बसा हुआ सुषमा सम्पन्न देश है। इसे ‘प्रकृति का पालना’ भी कहा जाता है । यहाँ प्रकृति अपने रंग-बिरंगे मोहक रूपों में देखने को मिलती है । वर्ष की छह ऋतुएँ एक के बाद दूसरी क्रमसे आकर विविध रूपों में भारत-भूमि का श्रृंगार करती है । वसन्त ऋतुओं की इस माला का सबसे सुन्दर और चमकता हुआ मोती है । ऋतुराज वसन्त के आते ही उसकी मादकता हर स्थान पर छा जाती है और प्रकृति राजरानी की तरह सजने लगती है ।

ऋतुराज वसन्त के आगमन से ही शीत का भयंकर प्रकोप भाग जाता है । वसन्त का आगमन फागुन में होता है और वह चैत तक रहता है। वसन्त के आते ही पश्चिम-पवन वृक्ष के जीर्ण-शीर्ण पत्तों को गिराकर उन्हें स्वच्छ और निर्मल बना देता है । वृक्षों और लताओं के लहकते हुए नवकिसलय-दल दिखने लगते हैं । रंग-बिरंगे विविध पुष्यों की सुगन्ध दशों-दिशाओं में अपनी मादकता का संचार करने लगती है । जलवायु सम हो जाती है-न शीत की कठोरता और न ग्रीष्म का ताप । कोयल की कूक चारों ओर सुनाई पड़ने लगती है । शीत के ठिठुरे अंगों की शिथिलता मिट जाती है और उन अंगों में जीवन की नई स्फूर्ति उमड़ने लगती है । वसन्त के आगमन के साथ ही जैसे जीर्णता और पुरातनता का प्रभाव तिरोहित हो जाता है।

वसन्त में प्रकृति के कण-कण में नवजीवन का संचार हो जाता है । ऐसे में ही हँसी-खुशी के.साथ होली आती है और सबको झुमा डालती है। इसलिए होली को वसंतोत्सव भी कहा जाता है । इस समय खेतों में पकी हई फसलें लहराती रहती हैं । हर्ष में डूबे किसान अपनी फसलों को देखकर नाचने लगते हैं। ढोल की थाप ओर मैंजीरों की सकती ध्वनि से वातावरण गूंजने लगता है और ऐसा प्रतीत होता है मानों संसार में सुख-ही-सुख, आनन्द-ही-आनन्द है। वसन्त की इस मस्त कर देनेवाली माधुरी की प्रशंसा कवियों और लेखकों ने मुक्तकंठ से की है।

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15 अगस्त (स्वाधीनता दिवस)

हमारे देश का सबसे महत्त्वपूर्ण और स्वर्णिम दिन है-15 अगस्त, 1947। इसी दिन हम सदियों की गुलामी की जंजीरें तोड़कर आजाद हुए । दुनिया के आजाद देशों के आकाश में एक नया सितारा जगमगा उठा-स्वाधीन भारत ।

15 अगस्त हमारा राष्ट्रीय त्योहार है । इसी दिन, देश के भाग्य ने पलटा खाया, आजादी मिली । इसके लिए हमारे देश के लाखों लोगों ने अपनी जान की बाजी लगाई । अपनी सारी जिंदगी या जवानी जेल के सीखचों के अन्दर गुजार दी। कितनी माताओं के लाल छिने, कितनी सुहागिनों के माँग धुले तब जाकर यह दिन आया । अमानवीय आत्याचारों से ऊबकर स्वतंत्रता-प्रेमी भारतीयों के हृदय में तीव्र आक्रोश पैदा हुआ और अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिली, सत्य और अहिंसा के अस्र के सामने अंग्रेजों की कठोरता प्रकम्पित हो उठी । 15 अगस्त, 1947 को शताब्दियों की खोई स्वतंत्रता भारत को पुनः प्राप्त हो गई । सारे देश में स्वतंत्रता की लहर दौड़ गई । लालकिले पर देश का अपना तिरगा झंडा लहराया । एक नये अध्याय की शुरुआत हुई।

लेकिन 15 अगस्त का दूसरा पहलू भी है । इसके एक दिन पूर्व मातृभूमि के दो टुकड़े हो गए । भारत का एक अंग कटकर पाकिस्तान बना । अखंड भारत का सपना बिखर गया । इस प्रकार एक ओर यह दिन हमारे लिए हर्ष’ का है तो दूसरी ओर विषाद का भी है। प्रतिवर्ष यह राष्ट्रीय पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है । विद्यालय के छात्र अपने इस ऐतिहासिक उत्सव को बड़े उल्लास और उत्साह के साथ मनाते हैं । उसी दिन राज्यों की राजधानियों में भी किसी सार्वजनिक स्थानों पर मुख्यमंत्री के कर-कमलों द्वारा झंडा फहराया जाता है । सभी सरकारी कार्यालयों में भी काफी सरगर्मी के साथ तिरंगा झंडा फहराया जाता है तथा लोग अपने-अपने घरों पर भी तिरंगा झंडा फहराते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में विशेष आयोजन होता है । प्रधानमंत्री लालकिले पर झंडा फहराने के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हैं । राज्यों की आकर्षक झाँकियाँ निकाली जाती हैं।

यद्यपि हमें आजादी मिल गई है तथापि देश की स्थिति दयनीय है, अशिक्षा है, भ्रष्टाचार है, भूख है, गरीबी है । इन्हें मिटना होगा, तभी हम सही अर्थ में स्वतंत्र देश के आदर्श नागरिक बन सकेंगे।

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हमारा देश : भारत

भारत हमारा प्यारा देश है । हम सभी भारत माता की संतान हैं । मनुष्य का जहाँ जन्म होता है, वहाँ वह पलता-बढ़ता है, वह मनुष्य की जन्मभूमि होती है। भारत हमारी जन्मभूमि है । यहीं की मिट्टी, हवा और पानी में हम पले हैं। हमारे लिए यह स्वर्ग से भी बढ़कर है । यह एक महान देश है और संसार का शिरोमणि है।

जब दुनिया के अन्य देशों के लोग असभ्यावस्था में जंगलों में घूमते थे, उस समय भारत में वेद की ऋचाएं गूंजती थीं । भारत भूमि अवतारों, ऋषियों, मुनियों एवं महात्माओं की तपोभूमि है । यहीं पर दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्रनाथ टैगोर और महात्मा गाँधी जैसे महान आत्माओं ने भारत का मान विश्व में ऊँचा किया है। – इसके उत्तर में नेपाल-चीन ओर तिब्बत हैं। इसके दक्षिण में हिन्द महासागर है । इसके पूरब में बंगाल की खाड़ी और म्यांमार (बर्मा) हैं । भारत के पश्चिम में अरब सागर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं । उत्तर में संसार का सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय भारत माता के सिर का जगमगाता मुकुट है।

प्राकृतिक दृष्टि से यह एक सम्पन्न देश है । यहाँ की नदियों में सालों भर मीठे जल का प्रवाह होते रहता है। गंगा और ब्रह्मपत्र के उत्तरी मैदान काफी उपजाऊ हैं । अनेक प्रकार के अन्न यहाँ उपजते हैं । यहाँ नदियों का जाल बिछा है । यहाँ की जलवायु मानसूनी और उत्तम है । भारत के पठारी भाग के गर्भ में खनिज-रत्नों का भंडार छिपा है । चारों ओर फैली वन-सम्पदा इसके ऐश्वर्य में चार चाँद लगाती है । भारत सदा शान्ति और अहिंसा का पुजारी रहा है । आज भी भारत अपने इस पुनीत संदेश को सारी दुनिया में फैला रहा है ।

भारत के लोग महान राष्ट्रप्रेमी हैं । इसकी मान-प्रतिष्ठा के लिए यहाँ के लोग सदा अपना बलिदान देने के लिए तैयार रहते हैं । हमारे अन्दर देश-प्रेम की भावना सदा भरी रहनी चाहिए । तभी देश सुरक्षित रहेगा ।

होली

ऋतुओं में वसन्त का, फूलों में गुलाब का और रसो में शृंगार का जो महत्त्व है, वही स्थान त्योहारों में होली का है । मात्र यही एक त्योहार है जिसमें वसन्त की सुषमा, गुलाब की खुशबू और श्रृंगार की मादकता का अपूर्व संयोग है। यह हँसी-खुशी का पर्व है । दिन-रात अपनी कर्म-संकुलता में उलझे मनुष्य को यह पर्व आनन्द और प्रसन्नता से भर देता है।

इस पर्व के पीछे भी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रहाद भगवान विष्णु का भक्त था । हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मरवाने “की हरचन्द कोशिश की, पर भगवान की कृपा से वह सदा बचता गया । प्रह्लाद की बुआ होलिका के पास वरदानयुक्त एक चादर थी, जिसे ओढ़कर कोई भी आदमी आग में नहीं जलता था । अन्त में हिरण्यकशिपु के कहने पर होलिका ” ने वही चादर ओढ़ ली और प्रह्लाद को लेकर आग में प्रवेश कर गई। भगवत्कृपा से उसी समय जोरों की हवा चली और होलिका की चादर प्रह्लाद के शरीर से लिपट गई । प्रहाद भगवान का नाम लेता हुआ चिता से बाहर आ गया और होलिका जल मरी । इसी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।

यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है । रात्रि में होलिका दहन होता है और सुबह लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं । दोपहर के बाद स्नान के पश्चात् अबीर-गुलाल का कार्यक्रम प्रारंभ होता है। उस दिन हर चेहरा एक रंग में रंग जाता है । न कोई बड़ा होता है न छोटा, न कोई ऊँच होता है न नीच, न कोई धनी होता है न निर्धन । बच्चे, बूढ़े, जवान, स्त्री, पुरुष सभी एक ही रंग में रंगे हुए. एक ही मस्ती में मस्त । इस दिन हर गाँव का गली-कृचा ‘मोहन खेले होली हो’ की ध्वनि से गूंजने लगता है । हर स्थान पर मालपूआ और पकवान की सोधी गंध फैलने लगती है । ढोल और मँजीर की ध्वनि से आकाश गूंजने लगता है । सारा वैर-भाव भूलकर सभी एक-दूसरे को गले मिलते हैं। .. आज की भौतिकवादी दुनिया में होली की खुशियों की झोली बहुत कुछ खाली हो गयी है, फिर भी इसमें अन्य त्योहारों से अधिक खुशियाँ हैं । इस सामाजिक पर्व को भाइचारे और सहृदयता से ही मनाया जाना चाहिए ।

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दुर्गापूजा या विजयादशमी

दुर्गापुजा हिन्दुओं का सर्वप्रमुख पर्व है । इस पर्व को कहीं दशहरा, कहीं शारदीय नवरात्रपूजा और कहीं विजया दशमी भी कहा जाता है । इस पर्व को मुख्य रूप से बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। दुर्गापूजा शक्ति की उपासना है । यह अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है।

दुर्गापूजा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के विषय में कई तरह की धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं। कुछ लोग कहते हैं कि राम नं इसी दिन रावण का वध किया था । उसकी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है । कुछ लोगों के अनुसार महिपासुर नामक असुर महान शक्तिशाली एवं पराक्रमी था । उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था । स्वर्ग-च्युत भयातुर देवताओं ने भगवान विष्णु की स्तुति-आराधना की । ब्रह्मा, विष्णु, महेश-इन त्रिदेवों के शरीर से तथा सभी देवताओं के शरीर से थोड़ा-थोड़ा तेज निकला और सबके सम्मिलित तेज-पुंज से नारी रूप में आदिशक्ति माता दुर्गा प्रकट हुई । देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र माता को प्रदान किए । माता हुंकार करती – हुई युद्ध के मैदान में पहुंची और प्रचंड बली महिषासुर का वध किया । उसी विजय के उपलक्ष्य में दुर्गापुजा का पर्व मनाया जाता है । कथाएँ जो भी सत्य हो, पर यह पूर्णतः सत्य है कि यह पर्व असत्य पर सत्य की, अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है।

दुर्गापूजा का पर्व दस दिन तक मनाया जाता है । आश्विन मास के शुक्लपक्ष के प्रारम्भ में ही कलश-स्थापन होता है और माता दुर्गा की पूजा प्रारम्भ हो जाती है । बड़ी निष्ठा, श्रद्धा-भक्ति, बड़े उल्लास और धूम-धाम से दुर्गापूजा की जाती है । दशमी को यज्ञ की समाप्ति के बाद विर्जन का काम होता है । इस अवसर पर कहीं-कहीं मेला लगता है तथा विभिन्न स्थानों पर संगीत-समारोह का भी आयोजन किया जाता है।

दुर्गापूजा के अवसर पर सभी शिक्षण-संस्थान और सरकारी कार्यालय बन्द कर दिये जाते हैं । सभी लोग मिल-जुलकर इस पर्व को मनाते हैं । इस पुनीत अवसर पर हम सबको अपनी संस्कृति से शील और शक्ति की सीख लेनी चाहिए । यह उत्सव मात्र प्रचण्ड शक्ति का ही प्रचार नहीं, बल्कि इसके सात्त्विक तेज का भी प्रेरक है । अतः सबको सात्विक भाव से ही माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिए । इस पूजा के चलते अगर धार्मिक द्वेष उत्पन्न होता है, तो निश्चित रूप से पूजा का मूल उद्देश्य नष्ट हो जाता है ।

मेरे प्रिय कवि : तुलसीदास

सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई, नन्ददास आदि भक्त कवियों की काव्यकृतियों के रसास्वादन करने का सुअवसर हमें मिला । किन्तु महाकवि तुलसीदास की रचनाओं-रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली में भक्ति-भावना के उद्रेक की जितनी क्षमता विद्यमान है, उतनी किसी कवि की रचनाओं में नहीं । उनकी रचनाओं में काव्य-सौष्ठव के दोनों पक्षों-भावपक्ष और कलापक्ष का अद्भुत , समन्वय हुआ है।

तुलसीदास ने विशृंखलित भारतीय संस्कृति को ठोस रूप प्रदान किया । तुलसीदास का आविर्भाव जिस काल में हुआ था, भारत में वह काल परस्पर विरोधी संस्कृतियों, साधनाओं, जातियों का सन्धिकाल था। देश की सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक स्थिति विशृंखलित हो रही थी । तुलसीदास ने समाज का सम्यक दिशा प्रदान की। उन्होंने अपने आराध्यदेव मर्यादा-पुरुषोत्तम राम के पावन चरित्र में शौर्य, विनयशीलता, पुरुषार्थ, करुणा तथा वात्सल्य भाव आदि मानवीय विभूतियों को संजोकर रख दिया है । राम के विमल चरित्र में ईश्वरीय एवं मानवीय गुण दोनों समवेत रूप से मुखरित हुए हैं।

यद्यपि महाकवि तुलसीदास के जन्म-स्थान, जन्म-तिथि, माता-पिता, शिक्षा-दीक्षा आदि के संबंध में विद्वानों में मतभेद है, फिर भी अधिकांश विद्वानों ने इनका जन्म संवत् 1589 के लगभग माना है तथा आत्माराम दूबे को इनका पिता और हुलसी को माता स्वीकारा है। गुरु नरहरिदास के चरणों में रहकर इनकी शिक्षा-दीक्षा हुई । इनका विवाह रत्नावली के साथ हुआ जिन्होंने इन्हें भगवद्-भक्ति की ओर प्रेरित किया !

तुलसीदास सचमुच आदर्शवादी भविष्यद्रष्टा थे । अपने आदर्श चरित्रों के आधार पर उन्होंने भारतवर्ष के भावी समाज की कल्पना की थी । प्रत्येक चरित्र-चित्रण में तुलसी ने मानव वृत्तियों को गंभीरता से देखा-परखा है। इसीलिए पाठक तुलसीदास द्वारा प्रतिपादित अनुभूतियों को उनके राग, वैराग्य, हास्य और रुदन को अपना ही राग-वैराग्य, हास्य और रुदन समझते हैं । यही कवि की सच्ची कला की महानता है।

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प्रदूषण

प्रकृति के विभिन्न घटका में असंतुलन ‘प्रदूषण’ कहलाता है । पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बना रहे : इसके लिए उसका प्रकृति के साथ समन्वय होना ही चाहिए । प्रदूषण के कारण वयजीव को संख्या में कमी, पारिस्थितिक असंतुलन, प्राकृतिक विपदाएँ, जनसंख्या वृद्धि आदि हैं। पर्यावरण के असंतुलन से ही प्रदूषण बढ़ता है। कारखाने की चिमनियों से निकलनेवाले धुएँ वातावरण को विषाक्त बना रहे हैं, उनके कूड़े-कचड़े तथा गंदी नालियों का बहाव नदियों की ओर किया जा रहा है । जंगलों की धड़ाधड़ कटाई हो रही है और खेतों में मनमाने ढंग से कीटाणुनाशक दवाइयाँ छिड़की जा रही है । इससे प्रदूषण की जटिल समस्याएँ उठ खड़ी हो गई हैं । इस समस्या ने मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है।

प्रदूषण के अन्तर्गत वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण, और मिट्टी-प्रदूषण की चर्चा मुख्य रूप से होती है । भारत में भी प्रदूषण की मुख्य यही समस्याएँ हैं। जल, वायु, मिट्टी हमारे जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी तथा महत्त्वपूर्ण हैं। लेकिन मानव सभ्यता के विकास के साथ इन प्राकृतिक उपादानों की शुद्धता और निर्मलता भी घटती गई है ।

हमें अपने स्वास्थ्य तथा वायु, जल एवं मिट्टी के प्रदूषण की समस्याओं को नियंत्रित रखने के लिए जल्द ही किसी कारगर उपाय का पता लगाना आवश्यक है। वायुमंडल के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम में तीव्रता लानी होगी। नदियों के जल-प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दूषित नालियों के प्रदूषित जल के बहाव के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। मिट्टी के प्रदूषण को रोकने के लिए जहरीली खाद पर रोक लगानी होगी । यह कार्य सरकार तथा जनता दोनों के पारस्परिक सहयोग द्वारा ही संभव है। अतः प्रदूषण की समस्या के निराकरण के लिए जन-जागृति और जन-अभिरुचि पैदा करना आवश्यक है । इसीलिए प्रदूषण को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है ।

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विज्ञान के चमत्कार
अथवा, विज्ञान और हमारा जीवन

विज्ञान का अर्थ है-प्राकृतिक शक्तियों का विशेष ज्ञान । ज्ञान जब शृंखला की कड़ियों में गुँथ जाता है, तो विज्ञान की सृष्टि होती है । ज्ञान चेतना का विज्ञान है और विज्ञान शक्ति का ज्ञान है । ज्ञान परिचय है और विज्ञान शक्ति । ज्ञान चेतना है और विज्ञान उस चेतना के फल का भोग । ज्ञान जिज्ञासा की – तृप्ति है और विज्ञान उस तृप्ति का प्रयोजन । विज्ञान का धरातल प्रयोजन का है, भौतिक क्षेत्र में सुख-सुविधा और समृद्धि की उपलब्धि है । तात्पर्य यह कि “मनुष्य के अनुभव एवं अवलोकन से प्राप्त क्रमबद्ध एवं सुसंगठित ज्ञान को विज्ञान कहते हैं।”

विज्ञान के साथ नानव जीवन का घनिष्ठ सम्बन्ध है । विज्ञान के चामत्कारिक आविष्कारों के प्रभाव से सारा संसार घर-आँगन-सा प्रतीत होने लगा है । विज्ञान ने ‘समय’ और ‘दूरी’ पर अधिकार कर लिया है । आज विज्ञान द्वारा रेल, मोटर, ट्राम, जलयान, वायुयान, रॉकेट और अंतरिक्ष-यान बनाये जा चुके हैं जिनके द्वारा दो स्थानों के बीच की दूरी समाप्त हो गई है। इतना ही नहीं, विज्ञान ने हमें वायरलेस, टेलीफोन, रेडियो एवं टेलीविजन दिये हैं, जिनके द्वारा संसार भर का समाचार घर-बैठे प्राप्त कर सकते हैं। चलचित्र हमारे मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन है । अणुवीक्षण यंत्र के द्वारा हम सूक्ष्मातिसूक्ष्म अदृश्य पदार्थों को भी देखने की सामर्थ्य प्राप्त कर चुके हैं।

तार, टेलीफोन, टैलीपिंटर, बेतार के तार, मुद्रण यंत्र, एक्स-रे आदि विज्ञान के अद्भुत चमत्कार हैं । विज्ञान के चलते ही आज दुनिया का कोई रोग असाध्य नहीं रह गया है । कम्प्यूटर का आविष्कार तो आधुनिक युग का सबसे अद्भुत आविष्कार है । यह मानव के लिए प्रायः सभी क्षेत्रों में सर्वाधिक उपयोगी है । विज्ञान ने बिजली के रूप में मनुष्य को एक महान शक्ति प्रदान की है । शक्ति के अन्य विभिन्न साधन भी विज्ञान की ही देन है । इस प्रकार शिक्षा का क्षेत्र हो या कृषि का या उद्योग का, मानव जीवन के लिए विज्ञान अत्यधिक उपयोगी है।

विज्ञान के उपर्युक्त सभी चमत्कारों को उनके व्यवहार ही निर्देशित करते हैं कि वे मानवता के लिए हितकर हैं या अहितकर । एक ओर विज्ञान ने अगर मनुष्यता के लिए सुख और सुविधाओं का अम्बार लगा दिया है, तो दूसरी ओर उसने मानवता को विनाश के रास्ते पर भी ला खड़ा किया है । विज्ञान ने अनेक भयंकर अस्त्र-शस्त्रों का आविष्कार कर मानवता को खतरे में डाल दिया है। अतः विज्ञान को ‘विज्ञान’ बनाने के लिए उसे जनहितकारी बनाया जाना चाहिए।

कम्प्यूटर और उसका महत्त्व

आधुनिकतम वैज्ञानिक आविष्कारों में कम्प्यूटर एक अद्भुत आविष्कार है । क्या रेडियो, क्या दूरदर्शन क्या चलचित्र–सर्वत्र कम्प्यूटर के सम्बन्ध में प्रचार का कार्य जारी है। कम्प्यूटर एक ऐसा उपयोगी यंत्र है जिससे मनोरंजन या मनबहलाव नहीं हो सकता है । इसलिए जनसाधारण उसकी ओर आकृष्ट नहीं होते और उसका प्रचार विभिन्न माध्यमों से किया जाता है । अतः यह स्पष्ट है कि कम्प्यूटर टंकण यन्त्र आदि की तरह एक कामयाब मशीन मात्र है और इसलिए इसका प्रचार केवल आवश्यकता के अनुरूप ही होता है । इस यंत्र से गणना सम्बन्धी बहुत बड़ा काम अत्यन्त आसानी से क्षणमात्र में हो सकता है ।

चूँकि मानव-मस्तिष्क द्वारा सम्पादित सभी काम कम्प्यूटर से सही-सही और अत्यन्त अल्प काल में हो जाते हैं, इसलिए आधुनिक काल में इसका प्रयोग सभी क्षेत्रों में हो रहा है। बड़े-बड़े व्यवसायों एवं तकनीकी संस्थाओं और प्रशासकीय कार्यालयों में इसके उपयोग से बहुत तरह के कार्य सम्पादित हो रहे हैं । बड़े-बड़े उत्पादनों का हिसाब-किताब लगाने तथा भावी उत्पादन संबंधी अनुमान की गणना करने में कम्प्यूटर से काम लिया जाता है । यही कारण है कि आजकल व्यवसाय, चिकित्सा, अंतरिक्ष कार्यक्रम, प्रतिरक्षा एवं अखबारी दुनिया में कम्प्यूटर सर्वाधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि कम्प्यूटर आधुनिक युग के लिए अत्यन्त आवश्यक है । व्यावसायिक, प्रशासनिक, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर के प्रयोग से अप्रत्याशित लाभ उठाया जा सकता है । कम्प्यूटर की सहायता से सभी क्षेत्रों में विकास की गति में कई गुनी वृद्धि हुई है। मौसम संबंधी भविष्यवाणी में कम्प्यूटर की गणना बेजोड़ है । इस प्रकार सभी क्षेत्रों के विकास का सही आकलन करके मानव-मात्र का उपकार कर रहा है । आशा है, निकट भविष्य में यह मानव-कल्याण का अचूक साधन प्रमाणित होगा।

दहेज-प्रथा : एक अभिशाप

देहज-प्रथा भारतीय समाज की सबसे विषम कुरीति है । दहेज की रूढ़ि के चलते भारतीय समाज निराशा और कुण्ठा के अन्धकार में भटक रहा है। दहेज-प्रथा रूढ़िवादिता, शोपण एवं सामाजिक अन्धविश्वास का जीता-जागता उदाहरण है। यह विशाल सर्प की तरह पूरे समाज को अपनी कुण्डली में समेटे हुए है । इसने अच्छे-बुरे, ज्ञानी-अज्ञानी, शिक्षित-अशिक्षित सबों को एक सतह पर ला खड़ा किया है । पूरा समाज दहेज की दारुण ज्वाला से धधक रहा है।

आज इस कुप्रथा के चलते बहुत-से वर, योग्य वधू नहीं प्राप्त कर पाते । फलतः जीवन दु:खमय और नारकीय होता जा रहा है । यह कुप्रथा संक्रामक बीमारी की तरह घर-घर में फैलती चली जा रही है । हर कन्या का पिता इस कुप्रथा के चलते चिन्ता-ग्रस्त हैं । जैसे-जैसे कन्या की उम्र बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे परिवार निराशा के अन्धकार में डूबता चला जा रहा है । पिता अपना घर-द्वार, जमीन आदि बेचकर वर के अभिभावक की मांग पूरी करने में लगे हैं । वर-पक्ष की माँग सुरसा के मुँह की तरह बढ़ती ही चली जा रही है। इस राक्षसी प्रथा के बहुत-से दुष्परिणाम हुए हैं । विवाह मे दहेज की कमी के कारण अनेक कन्याओं की हत्या एवं आत्म-हत्या के समाचारों से अखबार के पन्ने भरे पड़े हैं। बहुत-सारी कन्याओं को इस प्रथा के राक्षस ने लील लिया है, बहुत-से घर इस कुप्रथा को भेंट चढ़ चुके हैं । क्या विडम्बना है, जो आज कन्या की शादी के लिए गली-गली भटक रहे हैं, वही कल लड़के की शादी के लिए अकड़ते और दहेज माँगते हैं । तलवा सहलाने वाला ही सिर पर चढ़ने लगता है।

हम सबको भारतमाता के सिर पर लगे इस दाग को धोना है। इसके लिए समाज के अविवाहित युवक-युवतियों को आगे बढ़कर आदर्श का परिचय देना है । हमारी सरकार भी इस राक्षसी प्रथा को समाप्त करने के लिए कृतसंकल्प है। दहेज लेना और देना दण्डनीय अपराध है । फिर भी यह कुप्रथा फल-फूल रही है, क्योंकि हम सभी इसका सामूहिक विरोध नहीं कर रहे हैं। जिस दिन हम सभी इसके विरुद्ध खड़े हो जायेंगे. उसी दिन यह कुप्रथा समाप्त हो जायेगी ।

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महात्मा गाँधी

“चल पड़े जिधर दो डंग मग में
चल पड़े कोटि पग उसी ओर,
पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि
गड़ गये कोटि दृग उसी ओर ।” – सोहनलाल द्विवेदी

धन्य है वह देश जिसने एक-से-एक महापुरुषों को जन्म देकर अपनी मिट्टी का मान और गौरव बढ़ाया है ! इन महापुरुषों ने विश्व को नया प्रकाश और नयी प्रेरणा दी है। प्रातः स्मरणीय महात्मा गाँधी भी महापुरुषों की उसी पंक्ति में आते हैं, जिन्होंने अपने देश ही नहीं, वरन् विश्व-कल्याण को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया ।

महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था । इनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई. में गुजरात राज्य के पोरबन्दर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता करमचन्द गाँधी एक रियासत के दीवान थे और माता पुतली बाई एक महान् धार्मिक महिला थीं । इनकी शिक्षा का श्रीगणेश पोरबन्दर की पाठशाला से हुआ । बचपन में ही इनका विवाह कस्तूर वा नाम की बालिका से सम्पन्न करा दिया गया । मैट्रिक पास करने के बाद ये बैरिस्टरी पढ़ने लंदन गए ।

बैरिस्टर बनकर वे बम्बई हाईकोर्ट में वकालत करने लगे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी । वे एक मुकदमे की पैरवी में दक्षिण अफ्रीका गये, जो इनके क्रान्तिकारी जीवन का श्रीगणेश था । वहाँ उन्होंने प्रवासी भारतीयों के पक्ष में अंग्रेजों का डटकर विरोध किया । दक्षिण अफ्रीका में सफलता एवं अनुभव प्राप्त करके भारत आये । भारत में क्रांति का श्रीगणेश बिहार राज्य के चम्पारण जिले में किया । धीरे-धीरे उनकी आवाज भारत-भर में गूंजने लगी । फिर तो आजादी की लड़ाई का बिगुल बज उठा असहयोग आन्दोलन, ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन एवं ‘करो या मरो’ के नारे ने अंग्रेजों के इस विशाल साम्राज्य की नींव हिला दी इस क्रम में गाँधीजी को कई बार जेल की यात्राएँ करनी पड़ी एवं असहनीय पीड़ाएँ भी झेलनी पड़ी, लेकिन सत्य और अहिसां का वह पुजारी सदा अपने पथ पर चट्टान की तरह अडिग रहा । 15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हो गया । एक हजार वर्षों के बाद भारतीय जनता ने आजादी की हवा में सौस ली । अब गाँधीजी भारत में राम-राज्य लाने के लिए प्रयत्न – करने लगे और भावी योजनाओं पर विचार-विमर्श करने लगे । 30 जनवरी, 1948 ई. संध्या की बेला थी । काल चुपके चुपके आ पहुँचा । प्रार्थना की पवित्र बेला में नाथूराम गोडसे की तीन गोलियाँ चली । गाँधीजी गिरे और ‘हे रामा’ कहते हुए स्वर्ग सिधार गये । इस खबर से भारत ही नहीं, समूचा विश्व शोकाकुल हो उठा । राम-राज्य का स्वप्न अधूरा रह गया !

ईद

हिन्दुओं के लिए जैसे होली, वैसे मुसलमानों के लिए ईद है । दोनों आनन्द के पर्व हैं । इस्लामी हिजरी सन् चन्द्रमास पर आधारित होता है । इसके बारह महीनों में एक महीना “रमजान” का होता है । यह बहुत पवित्र महीना माना जाता है । इस महीने में मुसलमान भाई रोजा रखते हैं, दिनभर रोजा रखने के बाद शाम को नमाज अदा करते हैं । फिर पूरा परिवार सामूहिक रूप से खाते-पीते हैं । इसे ही. रोजा रखना’ कहते हैं । रमज़ान के महीने में पांच बार नमाज अदा करना, रोजा रखना, खैरात देना और नेक कार्यों में लगना आवश्यक होता है।

तीस दिन विधिपूर्वक रोजा रखने के बाद, अगले महीने की पहली तारीख को यानी दूज का चाँद देखकर दूसरे दिन ‘ईद’ का त्योहार मनाया जाता है। चाँद के दर्शन करते ही लोग एक-दूसरे को मुबारकवाद देते हैं । ‘ईद’ को ‘ईद-उल-फितर’ भी कहा जाता है ।

ईद के दिन हर घर में सुबह से ही चहल-पहल रहती है । स्नानादि के बाद नए कपड़े पहनकर सभी बच्चे, बूढ़े, बड़े ईदगाह या किसी बड़े मैदान में जुटते हैं । एक के पीछे दूसरे लोग कतार में खड़े हो जाते हैं । पहले आनेवाला आगे की पंक्ति में होगा । यहाँ कोई मालिक या नौकर, कोई छोटा या बड़ा नहीं होता । खुदा के दरबार में सभी बराबर हैं । एक साथ झुकना – घुटने के बल बैठना, सिर नबाना बड़ी ही खूबसूरत अनुशासन का दृश्य उपस्थित करता है । गरीबों को उस दिन अपनी शक्ति के अनुसार दान देते हैं । उनमें सेवइयाँ और कपड़े बांटे जाते हैं।

ईद की नमाज खत्म होते ही बच्चे मिठाइयों और खिलौने की दुकानों पर टूट पट्ने हैं । बड़े-बूढ़े सभी एक-दूसरे के गले मिलते हैं । घर पर आनेवाले लोगों का स्वागत तरह-तरह के पकवानों से, जिसमें सेवई जरूर होती है, किया जाता है । जगह-जगह कव्वालियों और गजलों का जलसा रात देर तक चलता रहता है।

बड़े इंतजार के बाद हर साल ईद आती है और खुशियाँ लुटा जाती है। उसके पहले एक महीने तक का नियमित उपवास शरीर की भी शुद्धि करता है । ईद हमें बराबरी और खुशी का संदेशा देती है । वह हमें अनुशासित नियमित जीवन बिताने का पाठ पढ़ाती है।

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भारतीय नारी की महत्ता

समर्पण की मूर्ति नारी भारत की नारी का नाम सुनते ही हमारे सामने प्रेम, करुणा, दया, त्याग और सेवा-समर्पण की मूर्ति अंकित हो जाती है। जयशंकर प्रसाद ने नारी के महत्त्व को यों प्रकट किया है।

नारी तुम केवल श्रद्धा हो,
विश्वास रजत नग पदतल में।
‘पीयूष स्रोत-सी बहा करो,
जीवन के सुंदर समतल में ॥

नारी के व्यक्तित्व में कोमलता और संदरता का संगम होता है । वह तर्क की जगह भावना से जीती है । इसलिए उसमें प्रेम, करुणा, त्याग आदि गुण अधिक होते हैं। इन्हीं की सहायता से वह अपने तथा अपने परिवार का जीवन सुखी बनाती है।

पश्चिमी नारी-उन्नत देशों की नारियों प्रगति की अंधी दौड़ में पुरुषों से मुकाबला करने लगी हैं। वे पुरुषों के समान व्यवसाय और धन-लिप्सा में संलग्न हैं। उन्हें अपने माधुर्य, ममत्व और वात्सल्य की कोई परवाह नहीं है। अनेक नारियाँ माता बनने का विचार ही मन में नहीं लाती। वे केवल अपने सुख, सौंदर्य और विलास में मग्न रहना चाहती हैं। भोग-विलास की यह जिंदगी भारतीय आदशों के विपरीत है।

भारतीय नारी-भारतवर्ष ने प्रारंभ से नारी के ममत्त्व को समझा है। इसलिए यहाँ नारियों की सदा पूजा होती रही है। प्रसिद्ध कथन है –

यह नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता।

भारत की नारी प्राचीन काल में पुरुषों के समान ही स्वतंत्र थी। मध्यकाल में देश की स्थितियाँ बदलीं । आक्रमणकारियों के भय के कारण उसे घर की चारदीवारी में सीमित रहना पड़ा । सैकड़ों वर्षों तक घर-गृहस्थी रचाते-रचाते उसे अनुभव होने लगा कि उसका काम बर्तन-चौके तक ही है। परंतु वर्तमान युग में यह धारणा बदली। बदलते वातावरण में भारतीय नारी को समाज में खुलने का अवसर मिला। स्वतंत्रता आंदोलन में सरोजिनी नायडू, कमला नेहरू, सत्यवती जैसी महिलाओं ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । परिणामस्वरूप स्त्रियों में पढ़ने-लिखने और कुछ कर गजरने की आकांक्षा जाग्रत हुई।

वर्तमान नारी-भारत की वर्तमान नारी विकास के ऊँचे शिखर छू चुकी है। उसने शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों से बाजी मार ली है। कंप्यूटर के क्षेत्र में उसकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है । नारी-सुलभ क्षेत्रों में उसका कोई मुकाबला नहीं है। चिकित्सा, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उसका योगदान अभूतपूर्व है । आज अनेक नारियाँ इंजीनियरिंग, वाणिज्य और तकनीकी जैसे क्षेत्रों में भी सफलता प्राप्त कर रही हैं। पुलिस, विमान-चालन जैसे पुरुषोचित क्षेत्र भी अब उससे ‘अछूते नहीं रहे हैं।

दोहरी भूमिका वास्तव में आज नारी की भूमिका दोहरी हो गई है। उसे घर और बाहर दो-दो मोर्चों पर काम संभालना पड़ रहा है। घर की सारी जिम्मेदारियाँ और ऑफिस का कार्य-इन दोनों में वह जबरदस्त संतुलन बनाए हुए है। उसे पग-पग पर पुरुष-समाज की ईर्ष्या, घृणा, हिंसा और वासना से भी लड़ना पड़ता है। सचमुच उसकी अदम्य शक्ति ने उसे इतना महान बना दिया है।

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आतंकवाद

भारत में आतंकवाद-भारत मूलतः शांतिप्रिय देश है। इसलिए यहाँ की धरती ने बुद्ध, महावीर, गाँधी जैसे अहिंसक नेता पैदा किए हैं। आतंकवाद की प्रवृत्ति यहाँ का जमीन से मेल नहीं खाती । परंतु दुर्भाग्य से पिछले दो दशकों से भारतवर्ष आतंकवाद की लपेट में आता जा रहा है। सन 1967 में बंगाल में नक्सलवाद का उदय हुआ।

सन 1981 से 1991 तक भारत का पंजाब प्रांत आतंकवाद की काली छाया से घिरा रहा । तत्कालीन भ्रष्ट राजनीति और पाकिस्तान की साजिश के कारण फैला सिख-आतंकवाद हजारों निरपराधों की जान लेकर रहा।

काश्मीर में आतंकवाद-पाकिस्तान जब पंजाब में हिंदू-सिख को लड़ाने में सफल न हो पाया तो उसने काश्मीर में अपनी गतिविधियाँ तेज कर दी। पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादियों की योजनाबद्ध घुसपैठ हुई। नौजवान युवकों को जबरदस्ती आतंक के रास्ते पर डालने के लिए घृणित हथकंडे अपनाए गए । जान-बूझकर काश्मीर में भारत-विरोधी वातावरण का निर्माण किया गया। वहाँ के अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ दिल दहलाने वाले भयंकर अत्याचार किए गए, ताकि वे काश्मीर छोड़कर अन्यत्र जा बसें और काश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा हो सके।

काश्मीर का आतंकवाद आज कैंसर का रूप धारण कर चुका है। पाकिस्तानी आतंकवादी कभी मुंबई में तो कभी कोलकाता में बम विस्फोट करते हैं, कभी गुजरात के अक्षरधाम में तो कभी काश्मीर की मस्जिद में खून-खराबा करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद—आज आतंकवाद राष्ट्र की सीमाओं को पार करके पूरे विश्व में अपना जाल ला चुका है। ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान की भूमि पर रहकर अमेरिका के ट्विन टावरों को पल भर में भूमिसात कर दिया।

आतंकवाद फैलने के कारण आज विश्व में जो आतंकवाद फैल रहा है, उसका प्रमुख कारण है-धार्मिक कट्टरता । ओसामा बिन लादेन, तालिबान, लश्करे-तोएबा, सीरिया, पाकिस्तान, फिलीस्तिीन-सबके पीछे सांप्रदायिक शक्तियाँ काम कर रही हैं। आज आतंकवादी आधनिक तकनीक का भरपुर प्रयोग करते हैं। उनके पास विध्वंस की ढेरों सामग्री है।

भारत में आतंकवाद फैलने का एक अन्य कारण है-क्षेत्रवाद और राजनीतिक स्वार्थ । वोट के भूखे राजनेता जानबूझकर आतंकवाद को प्रश्रय देते हैं।

समाधान – आतंकवाद की समस्या मनुष्यों की बनाई हुई है, इसलिए आसानी से सुलझाई जा सकती है । जिस दिन अमेरिका की तरह पूरा विश्व दृढ़ संकल्प कर लेगा और आतंकवाद को जीने-मरने का प्रश्न बना लेगा, उस दिन यह धरती आतंक से रहित हो जाएगी।

बेरोजगारी : समस्या और समाधान

भूमिका आज भारत के सामने अनेक समस्याएँ चट्टान बनकर प्रगति का रास्ता रोके खड़ी हैं। उनमें से एक प्रमुख समस्या है-बेरोजगारी । महात्मा गाँधी ने इसे ‘समस्याओं की समस्या’ कहा था।

अर्थ बेरोजगारी का अर्थ है-योग्यता के अनुसार काम का न होना । भारत में मुख्यतया तीन प्रकार के बेरोजगार हैं । एक वे, जिनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। वे पूरी तरह खाली हैं। दूसरे, जिनके पार्स कुछ समय काम होता है, परंतु मौसम या काम का समय समाप्त होते ही वे बेकार हो जाते हैं। ये आशिक बेरोजगार कहलाते हैं। तीसरे वे, जिन्हें योग्यता के अनुसार काम नहीं मिला।

कारण बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है-जनसंख्या-विस्फोट । इस देश में रोजगार देने की जितनी योजनाएँ बनती हैं, वे सब अत्यधिक जनसंख्या बढ़ने के कारण बेकार हो जाती हैं। एक अनार सौ बीमार वाली कहावत यहाँ पूरी तरह चरितार्थ होती है। बेरोजगारी का दूसरा कारण है-युवकों में बाबूगिरी की होड़ । नवयुवक हाथ का काम करने में अपना अपमान समझते हैं। विशेषकर पढ़े-लिखे युवक दफ्तरी जिंदगी पसंद करते हैं। इस कारण वे रोजगार-कार्यालय को धूल फांकते रहते हैं।

‘बेकारी का तीसरा बड़ा कारण है-दूषित शिक्षा-प्रणाली । हमारी शिक्षा-प्रणाली नित नए बेरोजगार पैदा करती जा रही है। व्यावसायिक प्रशिक्षण का हमारी शिक्षा में अभाव है । चौथा कारण है-गलत योजनाएँ । सरकार को चाहिए कि वह लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दे। मशीनीकरण को उस सीमा तक बढ़ाया जाना चाहिए जिससे कि रोजगार के अवसर कम न हों। इसीलिए गाँधी जी ने मशीनों का विरोध किया था, क्योंकि एक मशीन कई कारीगरों के हाथों को बेकार बना डालती है।

दुष्परिणाम बेरोजगारी के दुष्परिणाम अतीव भयंकर हैं । खाली दिमाग शैतान का घर । बेरोजगार युवक कुछ भी गलत-शलत करने पर उतारू हो जाते हैं । वही शांति को भंग करने में सबसे आगे होते हैं। शिक्षा का माहौल भी वही बिगाड़ते हैं जिन्हें अपना भविष्य अंधकारमय लगता है।

समाधान–बेकारी का समाधान तभी हो सकता है, जब जनसंख्या पर रोक लगाई जाए। युवक हाथ का काम करें। सरकार लघु उद्योगों को • प्रोत्साहन दे । शिक्षा व्यवसाय से जुड़े तथा रोजगार के अधिकाधिक अवसर जुटाए जाएँ।

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समय अमूल्य धन है

समय जीवन है-फ्रैंकलिन का कथन है-‘तुम्हें अपने जीवन से प्रेम है, तो समय को व्यर्थ मत गँवाओं क्योंकि जीवन इसी से बना है।’ समय को नष्ट करना जीवन को नष्ट करना है । समय ही तो जीवन है । ईश्वर एक बार एक ही क्षण देता है और दूसरा क्षण देने से पहले उसको छीन लेता है।

समय का सदुपयोग आवश्यक समय के सदुपयोग का अर्थ है-उचित अवसर पर उचित कार्य पूरा कर लेना । जो लोग आज का काम पर और कल का काम परसों पर टालते रहते हैं, वे एक प्रकार से अपने लिए जंजाल खड़ा करते चले जाते हैं। मरण को टालते-टालते एक दिन सचमुच मरण आ ही जाता है । जो व्यक्ति उपयुक्त समय पर कार्य नहीं करता, वह समय को नष्ट करता है । एक दिन ऐसा आता है, जबकि समय उसको नष्ट कर देता है। जो छात्र पढ़ने के समय नहीं पढ़ते, वे परिणाम आने पर रोते हैं।

समय की अगवानी आवश्यक समय रुकता नहीं है। जिसे उसका उपयोग उठाना है, उसे तैयार होकर उसके आने की अग्रिम प्रतीक्षा करनी चाहिए । जो समय के निकल जाने पर उसके पीछे दौड़ते हैं, वे जिंदगी में सदा घिसटते-पिटते रहते हैं। समय सम्मान माँगता है। इसलिए कबीर ने कहा है –

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलय होयगा, बहुरि करेगा कब ।।

उचित समय पर उचित कार्य-जो जाति समय का सम्मान करना जानती है, वह अपनी शक्ति को कई गुना बढ़ा लेती है । यदि सभी गाड़ियाँ अपने निश्चित समय से चलने लगें तो देश में कितनी कार्यकुशलता बढ़ जाएगी। यदि कार्यालय के कार्य ठीक समय पर संपन्न हो जाएँ, कर्मचारी समय के पाबंद हों तो सब कार्य सुविधा से हो सकेंगे। यदि रोगी को ठीक समय पर दवाई न मिले तो उसकी मौत भी हो सकती है। अतः हमें समय – की गंभीरता को समझना चाहिए।

अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान

स्वस्थ शरीर-एक वरदान-सृष्टि ने मानव को जो सर्वश्रेष्ठ वरदान दिए हैं उनमें से एक महत्त्वपूर्ण वरदान है-स्वस्थ शरीर । स्वस्थ शरीर से ही जिंदगी की सही शुरूआत होती है। जीवन के सभी सुख, सभी आनंद स्वस्थ होने पर ही याद आते हैं।

अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ-अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ है-शरीर के सभी अंगों का नीरोग और विकारहीन होना । कुछ लोग शरीर के मोटेपन, सुराउन, आकर्षक चेहरे आदि को स्वास्थ्य मान लेते हैं। लेकिन यह भ्रामक धारणा है । मोटापन स्वास्थ्य नहीं, रोग है। शरीर का गठीलापन भी अच्छे स्वास्थ्य का अनिवार्य चिह्न नहीं है । इसी भाँति शरीर के दुबलेपन को कई लोग रोग मान लेते हैं। लेकिन यह अनिवार्य नहीं है । प्रायः दुबले लोग अधिक स्वस्थ रहते हैं । स्वस्थता का असली चिह्न यह है कि शरीर में कोई रोग न हो।

स्वास्थ्य वरदान क्यों-अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान इसलिए है क्योंकि संसार के सभी सुख स्वस्थ होने पर ही भोगे जा सकते हैं । यदि किसी करोड़पति के पास स्वस्थ शरीर न हो तो वह करोड़ों की संपत्ति का क्या करेगा? धनपति के पास मजबूत टाँगें न हों तो वह जगह-जगह घूमने का आनंद कैसे लेगा? उसका पेट ही खराब हो तो स्वादिष्ट व्यंजनों का रस कैसे ग्नेगा? शरीर जर्जर होने पर करोड़ों रुपये मिलकर भी उसकी कामनाएं पूरी नहीं कर सकते । भला पोलियो से ग्रस्त बच्चा खेलों की उस विद्युत-गति का – आनंद कैसे ले सकेगा, जिसे स्वस्थ लेकिन गरीब बच्चा भी अनुभव कर सकता है? सच तो यह है कि स्वास्थ्य के बिना मनुष्य बहुत निर्धन है। इसीलिए किसी ने कहा है-‘स्वास्थ्य धन है।’ यह उक्ति भी उतनी सही नहीं है जितनी कि यह उक्ति-‘जान है तो जहान है।’ यदि स्वास्थ्य नहीं तो न जिंदगी है, न संसार है।

स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा का निवास संभव-स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और स्वस्थ आत्मा का निवास संभव है । स्वामी विवेकानंद का कथन है

‘शारीरिक दुर्बलता ही हमारे दुखों के कम-से-कम एक तृतीयांश का कारण है। सर्वप्रथम हमारे नवयुवकों को बलवान बनाना चाहिए। धर्म पीछे आ जाएगा।

रोगी काया तो न किसी प्रकार का मानसिक आनंद ले पाती है और नप्रभु में ध्यान लगा सकती है। रोगी का ध्यान सदा अपने रोग में अटका रहता है। इसलिए यह बात सच है कि ‘नीरोग शरीर परमात्मा द्वारा मिला हुआ सर्वश्रेष्ठ वरदान है।

Bihar Board Class 7 Hindi रचना निबंध लेखन

चरित्र-बल

चरित्र का अर्थ और महत्त्व-चरित्र’ का अर्थ है-‘चाल-चलन’ या व्यक्तित्व के गुण । यद्यपि चरित्र बुरा भी हो सकता है और श्रेष्ठ भी, परंतु समाज में प्रायः अच्छे चरित्र को ही चरित्रवान कहते हैं। अत: ‘चरित्र’ शब्द स्वतंत्र रूप में अच्छे चरित्र के लिए प्रयुक्त होता है। चरित्रवान का अर्थ है-ईमानदार, सन्ना, दयावान, करुणावान, कर्मठ, सात्विक, शुद्ध और कपटहीन व्यक्ति ।

चरित्र-बल-सच्चरित्रता में अपार बल होता है। जिस व्यक्ति में प्रेम, मानवता, दया, करुणा, विनय आदि गुण समा जाते हैं, वह शक्ति का भंडार बन जाता है। उसमें से ज्योति की किरणें फूटने लगती हैं। जैसे सूर्य का तेज समस्त दिशाओं को आलोकित कर देता है, उसे प्रकार चरित्र-बल जीवन के सभी क्षेत्रों को शक्ति, उत्साह और प्रकाश से भर देता है । कारण स्पष्ट है । ईमानदारी, सच्चाई, निष्कपटता, मानवता आदि गुण स्वयं में बहुत शक्तिवान हैं। यदि ये सभी शक्ति के कण किसी एक व्यक्ति के व्यक्तित्व में पूजीभूत हो जाएँ तो फिर महाशक्ति का विस्फोट हो सकता है।

उदाहरण-महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व का लें । उन्होंने जिस महानता को अर्जित किया, उसके पीछे उनके चारित्रिक गुण ही थे। असत्य का विरोध, अहिंसा, अन्याय का सविनय बहिष्कार, सच्चाई, मानवता आदि गुणों के कारण ही उन्होंने पूरे देश में अपने व्यक्तित्व की छाप अंकित की। इसी चरित्र-बल के कारण ही विश्वविजयी अंग्रेज सरकार उनसे डरती थी । उन्होंने अपने चरित्र-बल से केवल स्वयं को ही नहीं, अपितु पूरे भारत को आंदोलित कर दिया।

चरित्र-बल का प्रभाव अत्यंत तीव्रता से होता है । किसी चरित्रवान व्यक्ति के सामने खड़े होकर हमारी कमजोरियाँ नष्ट होने लगती हैं। जब पत्थर की देव-मूर्ति के सामने ही हम कोई पाप नहीं कर पाते, तो जीवित देवताओं के सामने भला कैसे कोई पाप कर सकते हैं ? यही कारण है कि चरित्र-संपन्न लोगों के सामने व्यसनी लोग इस तरह झुक जाते हैं जैसे सूरज के निकलने पर अंधेरा हार मान लेता है । इतिहास प्रमाण है कि भगवान बुद्ध के सामने डाकू अंगुलिमाल ने घुटने टेक दिए थे, क्रांतिकारी जयप्रकाश नारायण के सामने अंसख्य डाकुओं ने हथियार डाल दिए थे । इन सबसे यही प्रमाणित होता है कि चरित्र-बल में अपार शक्ति है।

Bihar Board Class 7 Hindi रचना निबंध लेखन

परोपकार

परोपकार का अर्थ – परोपकार दो शब्दों के मेल से बना है-पर + उपकार । इसका अर्थ है-दूसरों की भलाई करना । गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई।’ अर्थात परोपकार सबसे बड़ा धर्म है । मैथिलीशरण गुप्त जी भी यही कहते हैं

मनुष्य है वही कि जो मनुष्य के लिए मरे,
यह पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे।

परोपकार का महत्त्व–परोपकार एक सामाजिक भावना है। इसी के सहारे हमारा सामाजिक जीवन सुखी और सुरक्षित रहता है। परोपकार की भावना से ही हम अपने मित्रों, साथियों, परिचितों और अपरिचितों को निष्काम सहायता करते हैं।

प्रकृति हमें परोपकार की शिक्षा देती है। सूर्य हमें प्रकाश देता है, चंद्रमा अपनी चाँदनी छिटकाकर शीतलता प्रदान करता है, वायु निरंतर गति से बहती हुई हमें जीवन देती है तथा वर्षा का जल धरती को हरा-भरा बनाकर हमारी खेती को लहलहा देता है । प्रकृति से परोपकार की शिक्षा ग्रहण कर हमें भी परांपकार की भावना को अपनाना चाहिए।

परोपकार से प्राप्त अलौकिक सुख -परोपकार करने से आत्मा को सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है । दूसरे का कल्याण करने से परोपकारी की आत्मा विस्तृत हो जाती है उसे अलौकिक आनंद मिलता है। उसके आनंद की तुलना भौतिक सुखों से नहीं की जा सकी । ईसा मसीह ने एक बार अपने शिष्यों को कहा था-‘स्वार्थी बाहरी रूप से भले ही सुखी दिखाई पड़ता है, परंतु उसका मन दुखी और चिंतित रहता है । सच्चा आनंद तो परोपकारियों को प्राप्त होता है।

परोपकार के विविध रूप और उदाहरण भारत अपनी परोपकारी परंपरा के लिए जगत-प्रसिद्ध रहा है। भगवान शंकर ने समुद्र-मंथन में मिले विष का पान करके धरती के कष्ट को स्वयं उठा लिया था । महर्षि दधीचि ने राक्षसों के नाश के लिए अपने शरीर की हड्डियाँ तक दान कर दी थीं। आधुनिक काल में दयानंद, तिलक, गाँधी, सुभाष आदि के उदाहरण हमें लोकहित की प्रेरणा देते हैं।

परोपकार में ही जीवन की सार्थकता-परोपकार मनुष्य-जीवन को सार्थक बनाता है । आज तक जितने भी मनुष्य महापुरुष कहलाने योग्य हुए हैं, जिनके चित्र हम अपने घरों पर लगाते हैं, या जिनकी हम पूजा करते हैं, वे सब परोपकारी थे। उनकी इसी परोपकार भावना ने उन्हें ऊँचा बनाया, महान बनाया।

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Political Science Objective Answers Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

प्रश्न 1.
लोकतन्त्र के बारे में इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) लोकतन्त्र में लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता होती है।
(b) लोकतन्त्र में लोगों को संगठन बनाने का अधिकार होता है।
(c) लोकतांत्रिक देशों में लोगों को विरोध करने की आजादी नहीं होती
(d) लोकतन्त्र में चुने हुए नेताओं को ही देश पर शासन का अधिकार होता है।
उत्तर-
(c) लोकतांत्रिक देशों में लोगों को विरोध करने की आजादी नहीं होती

प्रश्न 2.
इनमें से किससे लोकतन्त्र के विस्तार में मदद मिलती है?
(a) विदेशी लोकतांत्रिक शासन का आक्रमण
(b) सैनिक तख्ता-पलट
(c) प्रेस पर प्रतिबन्ध
(d) लोगों का संघर्ष
उत्तर-
(d) लोगों का संघर्ष

प्रश्न 3.
नेपाल के उग्र राजनीतिक दल को कहा जाता है:
(a) माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी
(b) नक्सलवादी
(c) साम्यवादी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

प्रश्न 4.
चिली में पिनोशे का सैनिक शासन कब समाप्त हुआ?
(a) 1968 में
(b) 1989 में
(c) 1988 में
(d) 1998 में
उत्तर-
(c) 1988 में

प्रश्न 5.
लोकतन्त्र के विस्तार का वर्तमान चरण प्रारंभ होता है:
(a) 1976
(b) 1980
(c) 1992
(d) 2000
उत्तर-
(b) 1980

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प्रश्न 6.
वर्तमान समय में किस शासन व्यवस्था को विश्व में सबसे लोकप्रिय एवं सर्वोत्तम माना जाता है?
(a) सैनिकतंत्र
(b) लोकतन्त्र
(c) राजतन्त्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) लोकतन्त्र

प्रश्न 7.
सोलिडेरिटी वर्ग का संगठन है:
(a) व्यावसायिक
(b) पूँजीपति
(c) राजनीतिक
(d) मजदूर वर्ग
उत्तर-
(d) मजदूर वर्ग

प्रश्न 8.
पोलैंड में ‘सोलिडेरिटी’ में सीनेट के सभी 100 सीटों के लिए चुनाव लड़ा। इस चुनाव में ‘सोलिडेरिटी’ को कितने सीटों पर सफलता मिली?
(a) 55
(b) 69
(c) 77
(d) 99
उत्तर-
(d) 99

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प्रश्न 9.
जारूजेल्स्की का शासन निम्नलिखित में से किस देश पर था?
(a) भारत
(b) म्यांमार
(c) पोलैंड
(d) सोवियत संघ
उत्तर-
(c) पोलैंड

प्रश्न 10.
इनमें से कौन-सा कथन सही है?
(a) प्राचीन भारत में लोकतन्त्र के प्रमाण नहीं मिलते हैं।
(b) ब्रिटेन में 1688 ई की गौरवपूर्ण क्रान्ति के बाद लोकतन्त्र कमजोर हुआ।
(c) फ्रांस में 1789 ई. की क्रान्ति ने लोकतांत्रिक शासन की नींव डाली।
(d) पाकिस्तान एवं नेपाल में लोकतांत्रिक शासन को कभी चुनौती नहीं दी गई।
उत्तर-
(c) फ्रांस में 1789 ई. की क्रान्ति ने लोकतांत्रिक शासन की नींव डाली।

प्रश्न 11.
चिली में लोकतन्त्र की वापसी किस प्रकार हुई?
(a) सैनिक तानाशाही का अंत करके
(b) ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का अंत करके
(c) एक दल के शासन का अंत करके
(d) नरेश द्वारा अपने अधिकारों का त्याग करके
उत्तर-
(a) सैनिक तानाशाही का अंत करके

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प्रश्न 12.
पाकिस्तान में जनरल मुशर्रफ ने किस वर्ष सत्ता पलट द्वारा सैनिक शासन स्थापित किया था?
(a) 1995 में
(b) 1996 में
(c) 1999 में
(d) 2001 में
उत्तर-
(c) 1999 में

प्रश्न 13.
नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र ने कब निर्वाचित सरकार को पदच्यूत कर दिया था?
(a) 2005 में
(b) 2003 में
(c) 2007 में
(d) 2008 में
उत्तर-
(a) 2005 में

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प्रश्न 14.
नेपाल में संविधान सभा के चुनाव कब संपन्न हुए?
(a) 2006 में
(b) 2005 में
(c) 2008 में
(d) 2009 में
उत्तर-
(c) 2008 में

प्रश्न 15.
डॉ. रामवरन यादव किस देश राष्ट्रपति हैं?
(a) श्रीलंका
(b) मालदीव
(c) भूटान
(d) नेपाल
उत्तर-
(d) नेपाल

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कहाँ प्राचीन समय में लोकतन्त्र का उदाहरण नहीं मिलता है?
(a) कपिलवस्तु का शाक्य
(b) अलकम्प का बुलि
(c) कुशीनारा का मल्ल
(d) मगध का पाटलिपुत्र
उत्तर-
(d) मगध का पाटलिपुत्र

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प्रश्न 17.
नेपाल में लोकतन्त्र की वापसी कब हुई?
(a) 2002 में
(b) 2003 में
(c) 2006 में
(d) 2008 में
उत्तर-
(c) 2006 में

प्रश्न 18.
‘लेक वालेशा’ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन कथन सही नहीं
(a) यह साम्यवादी सरकार के नेता थे
(b) हड़तालियों का नेतृत्व किया
(c) यह एक इलेक्ट्रीशियन थे ।
(d) 1989 के निर्वाचन में राष्ट्रपति बने
उत्तर
(a) यह साम्यवादी सरकार के नेता थे

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प्रश्न 19.
अमेरिका द्वारा सार्वभौम वयस्क मताधिकार किस वर्ष अपनाया गया?
(a) 1928
(b) 1945
(c) 1965
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) 1965

प्रश्न 20.
चिली में सैनिकों द्वारा किस वर्ष सल्नाडोर आयेंद के शासन का तख्ता पलट कर दिया गया था?
(a) 1973
(b) 1988
(c) 1975
(d) 1990
उत्तर-
(a) 1973

प्रश्न 21.
पोलैंड में जनतन्त्र की स्थापना से पहले कौन-सी स्थिति नहीं थी?
(a) व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार
(b) सरकार का समस्त उद्योगों पर नियन्त्रण
(c) एक दलीय व्यवस्था
(d) जनता को अपनी सरकार को चुनने की स्वतंत्रता
उत्तर-
(d) जनता को अपनी सरकार को चुनने की स्वतंत्रता

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प्रश्न 22.
किसने कहा था कि “जब देशद्रोह करनेवाली ताकतें अपनी सत्ता पूरी तरह कायम कर लेंगी तब भी चीली के लोग उस अंधियारे की दौर से पार पा लेंगे।”
(a) सत्नाडोर आयेंद
(b) अल्बर्टो वैशेले
(c) ऑगस्तो पिनाशे
(d) मिशेल बैशेल
उत्तर-
(a) सत्नाडोर आयेंद

प्रश्न 23.
अगस्तो पिनाशे द्वारा शासन सत्ता पर अधिकार जमाना उदाहरण है:
(a) साम्यवादी शासन का
(b) सैनिक तख्ता पलट का
(c) लोकतन्त्र का
(d) उपरोक्त मे से कोई नहीं
उत्तर-
(b) सैनिक तख्ता पलट का

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प्रश्न 24.
लोकतन्त्र के बारे में इनमें कौन-सा कथन सही है?
(a) लोकतन्त्र का विकास रूक-रूककर हुआ
(b) लोकतन्त्र का क्रमिक विकास हुआ
(c) लोकतन्त्र का विकास कभी रूक-रूककर एवं कभी क्रमिक हुआ
(d) लोकतन्त्र का विकास कभी नहीं हुआ
उत्तर-
(b) लोकतन्त्र का क्रमिक विकास हुआ

प्रश्न 25.
लोकतन्त्र का अंग्रेजी रूपांतर डेमोक्रेसी (Democracy) शब्द निम्नलिखित में से किस भाषा से लिया गया है?
(a) फ्रेंच
(b) लैटिन
(c) ग्रीक
(d) इटालियन
उत्तर-
(c) ग्रीक

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प्रश्न 26.
आंग-सान-सू-की का संबंध निम्नलिखित में से किस देश से है?
(a) चीन
(b) भारत
(c) नेपाल
(d) म्यांमार
उत्तर-
(d) म्यांमार

प्रश्न 27.
स्वतन्त्रता, समानता और भातृत्व नामक लोकतन्त्र के तत्व किस क्रान्ति के द्वारा स्थापित हुए?
(a) गौरवपूर्ण क्रान्ति
(b) फ्रांसीसी क्रान्ति
(c) अमेरिकी क्रान्ति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) फ्रांसीसी क्रान्ति

प्रश्न 28.
लोकतन्त्र में निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार लोगों को प्राप्त नहीं होता है?
(a) हड़ताल करने का
(b) संघ अथवा संगठन बनाने का
(c) विचार अभिव्यक्ति का
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर-
(d) उपरोक्त सभी

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प्रश्न 29.
सुरक्षा परिषद् के सदस्यों की संख्या कितनी है? ..
(a) पाँच
(b) दस
(c) पन्द्रह
(d) बीस
उत्तर-
(c) पन्द्रह

प्रश्न 30.
निम्नलिखित राज्यों में से किस राज्य को सुरक्षा परिषद् में ‘वीटो’ का अधिकार प्राप्त नहीं है?
(a) अमेरिका
(b) ब्रिटेन
(c) चीन
(d) भारत
उत्तर-
(d) भारत

प्रश्न 31.
चीली के पिनाशे सरकार का पतन किस वर्ष हुआ?
(a) 1975
(b) 1980
(c) 1988
(d) 1990
उत्तर-
(c) 1988

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प्रश्न 32.
अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्यालय कहाँ है?
(a) न्यूयॉर्क
(b) द हेग
(c) लंदन
(d) नई दिल्ली
उत्तर-
(b) द हेग

प्रश्न 33.
चिली में लोकतन्त्र की बहाली कब हुई?
(a) 2000 में
(b) 2004 में
(c) 2006 में
(d) 2009 में
उत्तर-
(c) 2006 में

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प्रश्न 34.
इन कथनों में कौन-सी ऐसी मांग है जो पोलैंड के हड़ताली मजदूरों ने सरकार के समक्ष नहीं रखी?
(a) देश में स्वतन्त्र मजदूर संघ को मान्यता मिले
(b) देश में सैनिक शासन की स्थापना की जाए
(c) राजनैतिक बंदियों को रिहा किया जाए।
(d) प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए।
उत्तर-
(d) प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए।

प्रश्न 35.
पहली बार किस साम्यवादी शासन वाले देश में स्वतन्त्र मजदूर संघ बनाने की मान्यता प्रदान की गई?
(a) चीन में
(b) पोलैंड में
(c) सोवियत संघ में
(d) क्यूबा में
उत्तर-
(b) पोलैंड में

प्रश्न 36.
निम्नलिखित में से किससे लोकतन्त्र के विस्तार में मदद मिलती है?
(a) वयस्क मताधिकार की व्यवस्था
(b) सैनिक तख्तापलट
(c) वंशानुगत राजतन्त्र की व्यवस्था
(d) राजनीतिक दलों पर प्रतिबन्ध
उत्तर-
(a) वयस्क मताधिकार की व्यवस्था

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प्रश्न 37.
प्राचीन युग में निम्नलिखित में से किस देश में लोकतन्त्र की व्यवस्था नहीं थी?
(a) भारत
(b) रोम
(c) चीन
(d) रूस
उत्तर-
(d) रूस

प्रश्न 38.
प्रत्यक्ष लोकतन्त्र आज किस देश में प्रचलित है?
(a) भारत
(b) स्विट्जरलैंड
(c) ब्रिटेन
(d) संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर-
(b) स्विट्जरलैंड

प्रश्न 39.
निम्नलिखित में से किससे लोकतन्त्र के विकास में मदद नहीं मिलती
(a) लोगों का समानता के लिए संघर्ष
(b) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण
(c) उपनिवेशवाद का अंत
(d) लोगों की स्वतन्त्रता की चाह
उत्तर-
(b) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण

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प्रश्न 40.
निम्नलिखित में से कौन संयुक्त राष्ट्रसंघ का विशिष्ट अभिकरण नहीं है?
(a) आसियान
(b) FAO
(c) UNICEF
(d) IMF
उत्तर-
(a) आसियान

प्रश्न 41.
निम्नलिखित वाक्यांशों में से किसी एक वाक्य का चुनाव करके इस वाक्य को पूरा कीजिए। अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं में लोकतन्त्र की जरूरत है ताकि.
(a) धनी देशों की बातों का ज्यादा वजन हो।
(b) विभिन्न देशों को बातों का वजन उनकी सैन्य शक्ति के अनुपात में हो
(c) देशों की उनकी आबादी के अनुपात में सम्मान मिले।
(d) दुनिया के सभी देशों के साथ समान व्यवहार हों
उत्तर-
(d) दुनिया के सभी देशों के साथ समान व्यवहार हों

प्रश्न 42.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव निम्नलिखित में से कौन हैं?
(a) कोफी अन्नान
(b) डॉ. बी. बी. घाली
(c) ट्रिगिव लाई
(d) बान-की-मून
उत्तर-
(d) बान-की-मून

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प्रश्न 43.
निम्नलिखित में से किसका सम्बन्ध प्रत्यक्ष जनतन्त्र प्रणाली से नहीं
(a) जनमत संग्रह
(b) आरंभक
(c)प्रत्याहह्वान
(d) जनता द्वारा अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन
उत्तर-
(d) जनता द्वारा अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन

प्रश्न 44.
लोकतन्त्र के कितने रूप हैं?
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर-
(a) दो

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प्रश्न 45.
संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई:
(a) 24 अक्टूबर, 1950 को ।
(b) 26 जनवरी, 1950 को
(c) 24 अक्टूबर, 1945 को
(d) 15 अगस्त, 1947 को
उत्तर-
(c) 24 अक्टूबर, 1945 को

प्रश्न 46.
निम्नलिखित में से कौन-सा देश है जहाँ सबसे पहले जनता को सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्राप्त हुआ?
(a) भारत
(b) अमेरिका
(c) फ्रांस
(d) न्यूजीलैंड
उत्तर-
(d) न्यूजीलैंड

प्रश्न 47.
नेपाल में प्रथम संविधान कब बना?
(a) 1950
(b) 1948
(c) 1975
(d) 2009
उत्तर-
(b) 1948

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प्रश्न 48.
“लोकतन्त्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन प्रणाली है।” लोकतन्त्र की यह परिभाषा निम्नलिखित में से किस विद्वान का है?
(a) जेलिनेक
(b) अरस्तू
(c) अब्राहम लिंकन
(d) सीले
उत्तर-
(c) अब्राहम लिंकन

प्रश्न 49.
आयेंदे कहाँ के निर्वाचित राष्ट्रपति थे?
(a) चिली
(b) पोलैंड
(c) श्रीलंका
(d) भारत
उत्तर-
(a) चिली

प्रश्न 50.
निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त राष्ट्रसंघ का अंग नहीं है?
(a) महासभा
(b) सुरक्षा परिषद्
(c) दक्षेश
(d) अन्तराष्ट्रीय न्यायालय
उत्तर-
(c) दक्षेश

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प्रश्न 51.
सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के संबंध में कौन विकल्प सही हैं?
(a) संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्रिटेन, रूस, चीन
(b) भारत, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, चीन
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जापान
(d) संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन
उत्तर-
(d) संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन

प्रश्न 52.
सुरक्षा परिषद् में वीटो का अधिकार किसे प्राप्त है?
(a) सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों को
(b) सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों को
(c) सुरक्षा परिषद् के स्थायी और अस्थायी दोनों सदस्यों को
(d) सिफ संयुक्त राज्य अमेरिका को
उत्तर-
(a) सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों को

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प्रश्न 53.
निम्नलिखित जोड़ों का परीक्षण करें और दिए गए कूटों में से सही
कूट की पहचान करें:
Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास - 1
उत्तर-
(c)

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BSEB Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 5 सामाजिकं कार्यम्

Bihar Board Class 8 Sanskrit सामाजिकं कार्यम् Text Book Questions and Answers

विज्ञानस्य विकासेन अद्य संसारः यद्यपि नाना सुविधाः लभते किन्तु मनुष्येषु सामाजिकः सम्पर्कः क्रमश: अल्पीकृतः । स्वगृहे एव जनः अनेकानि विज्ञानोपकरणानि प्रयुञ्जानः अन्यान् तुच्छान् मन्यते । कदाचित् एतेषाम् उपकरणानाम् अभावे परिवारे सदस्याः एव उपकारकाः अभवन् । क्रमेण मानवस्य एकाकित्वेन स्वार्थवादः उदितः । इदानीं मनुष्यः स्वकीयं हितमेव सर्वोपरि मन्यते । किन्तु समाजस्य सदस्यरूपेण सर्वेषां कर्त्तव्यं वर्तते यत् एकैकस्य जनस्य हिताहितं चिन्तयेयुः। कश्चित् संकटापन्नः वर्तते, कश्चिन्मार्गे दुर्घटनाग्रस्तः, क्वचित् जलपूरेण सम्पूर्णस्य ग्रामस्य विनाशः, क्वचित् निर्धनः जनः परिवारपालने असमर्थः, क्वचित् वृद्धाः जनाः उपेक्षिताः, कदाचित् गृहेषु अग्निदाहः, क्वचित् यातायातमार्गः अवरुद्धः, क्वचित् मार्गे वृक्षाः पतिताः, क्वचित् अनाथा: शिशवः, दुर्बलाः महिलाश्च सहायताम् अपेक्षन्तेइत्येवं समाजे नाना समस्याः जनस्य ध्यानाकर्षणाय वर्तन्ते ।

अर्थ – विज्ञान के विकास से आज संसार जबकि अनेक सुविधा प्राप्त करता है। लेकिन मनुष्यों में सामाजिक सम्पर्क कम से कम हो गया है । अपने घर में ही मनुष्य अनेक वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर दूसरों को नीच (कमजोर) मानते हैं। कभी इन उपकरणों के अभाव में परिवार में सदस्य भी उपकार करने वाले हो जाते थे । धीरे-धीरे (क्रम से) मानव के अकेलापन के कारण स्वार्थवाद का उदय हुआ। इस समय मनुष्य अपना हित को ही श्रेष्ठ मानते हैं। लेकिन समाज के सदस्य होने के कारण सबों का कर्त्तव्य है कि हरेक व्यक्ति के हित-अहित का चिन्तन करना चाहिए। कोई संकट से घिरा है। कोई मार्ग में दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। कहीं बाढ़ से समूचे गाँव का विनाश हो जाता है। कहीं निर्धन लोग परिवार पालने में असमर्थ हैं। कहीं बूढ़े लोग उपेक्षित हैं। कभी घरों में आग लग गया। कहीं आने-जाने का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। कहीं रास्ते में पेड़ गिर गया है। कहीं अनाथ बच्चे और दुर्बल महिलाएँ हैं। सब सहायता की अपेक्षा रखते हैं। इसी प्रकार के ही समाज में

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 5 सामाजिकं कार्यम्

अनेक समस्या लोगों को ध्यानाकर्षण के लिए हैं। एताः स्वार्थवादेन न समाधेयाः सन्ति, प्रत्युत उपकारपरेण जनेन कल्याणकारिण्या संस्था वा गृह्यन्ते । सर्वदा न सुखं दृश्यते, संकटोपि

जनैः  अपेक्षितं भवति । नेदं यत् सामाजिक कार्य संकटकाले एव भवति प्रत्युत समाजस्य विकासाय स्वग्रामस्य नगरस्य वा गौरवाय अपि इदं क्रियते । यथा काचित् सामाजिकी संस्था सम्पूर्ण ग्राम स्वच्छं कुर्यात्, मार्गेषु वृक्षारोपणम्, कूपतडागदिजलाशयानां व्यवस्थाम्, रिक्तेषु क्षेत्रेषु उद्यानानां विन्यासम्, क्वचित् पुस्तकालयस्य, व्यायामशालायाः सामुदायिकभवनस्य वा प्रबन्धनं कुर्यात् । यदि ग्रामे मार्गव्यवस्था नास्ति तदा ग्रामजनानां स्वैच्छिक-श्रमेण मार्ग निर्मातुं प्रभवन्ति सामाजिकसंस्थाः । तदर्थम् एकोऽपि मनुष्यः कार्यारम्भे समर्थः ।।

अर्थ- इन सबों का समाधान स्वार्थवाद नहीं है। लेकिन परोपकार में लगे लोगों या कल्याण के काम में लगे रहने वाली संस्था से सम्भव है। सदैव सुख नहीं दिखता है। संकट किसी को भी कहीं भी हो सकता है। ऐसे समय में ही सामाजिक कार्यों का लोग अपेक्षा करते हैं। ये सब सामाजिक कार्य संकट काल में ही नहीं होता बल्कि समाज के विकास के लिए अपने गाँव या शहर की उन्नति के लिए भी यह किया जाता है। जैसे कोई सामाजिक संस्था सम्पूर्ण गाँव को स्वच्छ करता है। रास्ते में वृक्षारोपण, कुआँ, तालाब आदि जलाशयों की व्यवस्था, खाली (परती) खेतों में बगीचे का लगाना, कहीं पुस्तकालय, व्यायामशाला या सामुदायिक भवन का प्रबन्ध भी किसी को करना चाहिए । यदि गाँव में मार्ग व्यवस्था नहीं है तो सामाजिक संस्था गाँव के लोगों से श्रम के द्वारा निर्माण कराने में समर्थ होते हैं। इस कार्य को आरम्भ करने में एक ही मनुष्य समर्थ है।

संकटकाले तु सुतरां वर्धते सामाजिक कार्यम् । क्वचित् निर्धने परिवारे विवाहयोग्यानां किशोरीणां किशोराणां च सामूहिको विवाहोऽपि सार्वजनिकस्थलेषु आयोज्यते । तब विवाहस्य सरला रीतिः आडम्बरविहीना दृश्यते। किञ्च काश्चित् संस्थाः निर्धनान् छात्रान् प्रतियोगितापरीक्षार्थ प्रस्तुवन्ति निःशुल्कम्। तदपि महत्त्वपूर्ण कार्यम् । किञ्च क्वचित् यानानां दुर्घटनासु सत्वरं सहायतार्थ समागच्छन्ति, आहतान् चिकित्सालयं प्रापयन्ति, अनाथीभूतान् बालकान् उचितं स्थान प्रापयन्ति काश्चित् संस्थाः ।

अर्थ – संकट के समय में सामाजिक कार्य और भी अधिक बढ़ जाते हैं। कहीं गरीब परिवार के विवाह योग्य लड़कियों का और लड़कों का सामूहिक विवाह भी सार्वजनिक स्थलों पर आयोजन किये जाते हैं । वहाँ के विवाह सरल रीति और आडम्बर विहीन दिखते हैं। कहीं कोई संस्था गरीब छात्रों की प्रतियोगिता परीक्षा निःशुल्क लेता है। यह सब भी महत्त्वपूर्ण कार्य हैं । कहीं कोई संस्था यान दुर्घटना के अवसर पर तेजी में सहायता के लिए आ जाते हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाते हैं । अनाथ बच्चों को उचित स्थान दिलाते हैं।

भारते वर्षे नदीनां जलपूरेण यदा विनाशलीला दृश्यते, विशेषेण विहारराज्ये, तदानीमपि सामाजिकसंस्था: दूरस्थाः अपि समागत्य विविधा सहायतां धनजनसामग्रीरूपां कुर्वन्ति । एकैकेनापि पुरुषेण यदि अपरस्योपकारः क्रियते तदा जीवनं सफलं मन्येता भारतस्य प्राचीन: आदर्शः आसीत्

“कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामातिनाशनम्”। यत्र भारते सर्वे प्राणिनः सहायतां संकटकाले लभन्ते तत्र सम्प्रति मनुष्याः अवश्यमेव उपकर्त्तव्याः । अर्थ-भारतवर्ष में बाढ़ से जब विनाश की लीला दिखाई पड़ती है विशेषकर बिहार राज्य में, उस समय दूर में रहने वाली सामाजिक संस्था आकर : विविध प्रकार की सहायता धन-जन के द्वारा करते हैं । हरेक व्यक्ति के द्वारा यदि दूसरों का उपकार किया जाता है तो मानव का जीवन सफल माना जाएगा। भारत का प्राचीन आदर्श था कि दुःख से दुःखी लोगों का दुःख दूर … करने की कामना करता हूँ।

जिस भारत में संकटकाल में प्राणी एक-दूसरों से सहायता प्राप्त करते रहे हैं वहाँ के मनुष्यों को उपकार अवश्य करना चाहिए।

शब्दार्थ

अद्य = आज । नाना = अनेक । लभते = प्राप्त करता है । अल्पीकृतः = कम हो गया है। प्रयुञ्जानः = प्रयोग करते हुए। तुच्छान् = नीच, महत्त्वहीन । मन्यते = मानता है, समझता है । कदाचित् = कभी । उपकारकाः = उपकार करने वाले । एकाकित्वेन = अकेलापन के कारण । उदितः = उत्पन्न हुआ, प्रकट हुआ । इदानीम् = इस समय । स्वकीयम् = अपना । सर्वोपरि = सबसे ऊपर । जलपूरेण = जल भरने से, बाढ़ से । क्वचित् = कहीं । अवरुद्धः = रुका हुआ, बंद । पतिताः = गिरे हुए । शिशवः = बच्चे । अनाथाः = जिनके माता-पिता नहीं हैं । अपेक्षन्ते = चाहते हैं । एवम् = इस प्रकार । वर्तन्ते = हैं । एताः = ये । प्रत्युत = अपितु, वरन् । उपकारपरेण = दूसरों की भलाई करने वाले (तृतीया विभक्ति) ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 5 सामाजिकं कार्यम्

दृश्यते = दिखलाई देता है। कस्यापि = किसी का भी । कुत्रापि = कहीं भी । भवितुम् = होने के लिए, होने में । शक्नोति = सकता है । क्रियते = किया जाता है । काचित् = कोई (स्त्रीलिङ्ग) । कुर्यात् = करें । कूपः = कुआँ । तडागः = तालाब । रिक्तेषु = खाली (सप्तमी विभक्ति) । क्षेत्रेषु = स्थानों में, विषयों में, खेतों में। उद्यानानाम् = बगीचों की। विन्यासम् = रचना, निर्माण । निर्मातुम् = बनाने के लिए । प्रभवन्ति = समर्थ/उत्पन्न होते हैं। सुतराम् = बहुत । वर्धते = बढ़ता है। आयोज्यन्ते = मनाये जाते हैं, किये जाते है। किञ्च = इसके अतिरिक्त । सत्वरम् = शीघ्र । समागच्छन्ति = आते हैं। प्रापयन्ति = ले जाते हैं, पहुँचाते हैं। तदानीम् = उस समय । दूरस्थाः = दूर में रहने वाले । समागत्य = आकर । विविधाम् = विभिन्न (द्वितीया विभक्ति)। एकैकेनापि = एक-एक के द्वारा भी। अपरस्य = दूसरे का । कामये = कामना करता हूँ। दुःखतप्तानाम् = दु:ख से आतों का, दुःख से पीड़ितों का । यत्र = जहाँ । उपकर्त्तव्याः = उपकृत करना चाहिए।

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेद

यद्यपि = यदि + अपि (यण् सन्धिः) । विज्ञानोपकरणानि = विज्ञान + उपकरणानि (गुण-सन्धिः) । एकैकस्य = एक + एकस्य (वृद्धि-सन्धिः) । कश्चित् = कः + चित् (विसर्ग-सन्धिः) । संकटापन्नः = संकट + आपन्न: (दीर्घ-सन्धिः) । कश्चिन्मार्गे = कः + चित् + मार्गे (विसर्ग-सन्धिः, व्यञ्जन-सन्धिः) । निर्धनः = निः + धनः (विसर्ग-सन्धिः) । दुर्बलाः = दुः + बलाः (विसर्ग-सन्धिः) । महिलाश्च = महिलाः + च (विसर्ग-सन्धि)। इत्येवम् = इति + एवम् (यण-सन्धिः) । ध्यानाकर्षणाय = ध्यान + आकर्षणाय (दीर्घ-सन्धिः) । संकटोऽपि = संकटः + अपि (विसर्ग-सन्धिः) । कस्यापि = कस्य + अपि (दीर्घ-सन्धिः)। कुत्रापि = कुत्र + अपि (दीर्घ-सन्धिः ) । नेदम् = न + इदम् (दीर्घ-सन्धिः ) । पुस्तकालयस्य = पुस्तक + आलयस्य (दीर्घ-सन्धिः)। नास्ति = न + अस्ति (दीर्घ-सन्धिः) । तदर्थम् = तत् + अर्थम् (व्यञ्जन-सन्धिः ) । एकोऽपि = एकः + अपि (विसर्ग-सन्धिः) । कार्यारम्भे = कार्य + आरम्भे (दीर्घ-सन्धिः) । किञ्च = किम् + च (व्यंजन-सन्धिः) । काश्चित् = काः + चित् (विसर्ग-सन्धिः) । तदपि = तत् + अपि (व्यञ्जन-सन्धिः) । चिकित्सालयम् = चिकित्सा + आलयम् (दीर्घ-सन्धिः ) । समागत्य = सम् + आगत्य । एकैकेनापि = एक + एकेन + अपि (वृद्धि-सन्धि, दीर्घ-सन्धिः ) । अपरस्योपकारः = अपरस्य + उपकारः (गुण-सन्धिः ) । अवश्यमेव = अवश्यम्: + एव ।

प्रकृति-प्रत्यय-विभाग:

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 5 सामाजिकं कार्यम् 1

अभ्यास

मौखिक 

प्रश्न 1.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् अर्थं वदत :
प्रश्नोत्तर :

  1. अल्पीकृतः = कम हो गया है।
  2. प्रयुञ्जानः = प्रयोग करते हैं।
  3. एकाकित्वेन = अकेलापन के कारण।
  4. हिताहितम् = हित और अहित ।
  5. क्वचित् = कहीं ।
  6. प्रत्युत = बल्कि, अपितु ।
  7. सर्वदा = सदैव ।
  8. सुतराम् = बहुत, अत्यन्त ।
  9. विन्यासम् = रचना, निर्माण ।
  10. वर्धते = बढ़ता है ।
  11. आसीत् = था।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 5 सामाजिकं कार्यम्

प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानां एकवचन रूपं वदत
प्रश्नोत्तर :

  1. प्रापयन्ति = प्रापयति ।
  2. प्रभवन्ति = प्रभवति ।
  3. अभवनम् = अभवत् ।
  4. सन्ति = अस्ति ।
  5. आसन् = आसीत् ।
  6. समागच्छन्ति = समागच्छति ।
  7. कुर्वन्ति = करोति।

प्रश्न 3.
निम्नलिखितानां पदानां बहुवचन रूपं वदत
प्रश्नोत्तर :

  1. विज्ञानोपकरणम् = विज्ञानोपकरणानि ।
  2. महिला = महिलाः ।
  3. जनस्य = जनानाम् ।
  4. बालकाय = बालकेभ्यः ।
  5. ग्रामे = ग्रामेषु ।
  6. फलम् = फलानि ।
  7. नदी = नद्यः।

लिखित 

प्रश्न 4.
सन्धिं कुरुत:
प्रश्नोत्तर:

  1. न + इदम् = नेदम् ।
  2. कः + चित् = कश्चित् ।
  3. एकः + अपि = एकोऽपि ।
  4. एकेन + अपि = एकेनापि ।
  5. निः + धन: = निर्धनः ।
  6. इति + एवम् = इत्येवम् ।

प्रश्न 5.
सन्धि विच्छेदं कुरुत
प्रश्नोत्तर :

  1. महिलाश्च = महिलाः + च ।
  2. कश्चिन्मार्गे = कः + चित् + मार्गे।
  3. एकैकस्य = एक + एकस्य ।
  4. यद्यपि = यदि + अपि ।
  5. किञ्च = किम् + च ।
  6. काश्चित् = काः + चित् ।
  7. संकटोऽपि = संकटः + अपि ।

प्रश्न 6.
वाक्य निर्माणं कुरुत ।
प्रश्नोत्तर :

  1. असमर्थः = सः कार्यं कर्तुम असमर्थः अस्ति ।
  2. इदानीम् = इदानीम् परोपकारकः न दृश्यते ।
  3. वृद्धः = वृद्धः जनः सेवा योग्यः भवति ।
  4. पतति = वृक्षात् पत्रं पतति ।
  5. गमिष्यामि = अहं गृहं गमिष्यामि।
  6. वर्तते = भारतस्य उत्तरे हिमालयः वर्तते ।
  7. आसीत् = भरतः एकः नृपः आसीत् ।

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प्रश्न 7.
मञ्जूषातः शब्द चित्वा रिक्तस्थानानि पूरथत :
(गच्छन्ति, सन्ति, दृश्यते, रोहितः, जनाः, नद्यः ।

प्रश्नोत्तर :

  1. सर्वदा सुखं न दृश्यते ।
  2. जनाः गृहं गच्छन्ति ।
  3. वृक्षे आम्रफलानि सन्ति।
  4. रोहितः छात्रः अस्ति ।
  5. नद्यः प्रवहन्ति ।
  6. जना. सत्वरं सहायतार्थं समागच्छन्ति ।

प्रश्न 8.
प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत

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प्रश्न 9.
सुमेलनं कुरुत

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उत्तरम्:
(क) – (2)
(ख) – (5)
(ग) – (1)
(घ) – (3)
(ङ) – (4)

प्रश्न 10.
विपरीतार्थक शब्दयोः सुमेलनं कुरुत

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उत्तरम्:
(क) – (7)
(ख) – (1)
(ग) – (6)
(घ) – (5)
(ङ) – (4)
(च) – (3)
(छ) – (2)

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प्रश्न 11.
उदाहरणानुसारम् अव्ययपदानि चिनुत :
यथा – शीला श्वः ग्रामं गमिष्यति-श्वः ।
प्रश्नोत्तर :

  1. वैभवी कुत्र गमिष्यति ? – कुत्र। ।
  2. शाम्भवी कदा पठिष्यति ? – कदा ।
  3. आयुषी चैतन्यः च लिखतः – च ।
  4. जावेदः उच्चैः अहसत् – उच्चैः ।
  5. जॉनः सर्वदा सत्यं वदति – सर्वदा।

प्रश्न 12.
रेखांकितपदेषु प्रयुक्तां विभक्ति लिखत
प्रश्नोत्तर :

  1. मनुष्येषु सामाजिकः सम्पर्कः क्रमशः अल्पीकृतः।
  2. समाजस्य सदस्यरूपेण सर्वेषां कर्त्तव्यं वर्तते ।
  3. सर्वेषां जनानां विकासाय कार्यं कर्त्तव्यम्
  4. मम ग्रामे एका सामाजिकी संस्था अस्ति।
  5. जनैः सामाजिक कार्यं कर्तव्यम् ।

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प्रश्न 13.
अधोलिखित तद्भव-शब्दानां तत्समशब्दान् चिनुत
यथा

  1. गाँव – ग्राम

प्रश्नोत्तर

  1. गाँव – ग्राम
  2. आग – अग्नि
  3. कुआँ – कूप
  4. खेत – क्षेत्र
  5. पाँचवाँ – पंचम
  6. सब – सर्व
  7. बूढ़ा – वृद्ध

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबन्धन

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Geography Objective Answers Chapter 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबन्धन

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 13 समुदाय आधारित आपदा प्रबन्धन

प्रश्न 1.
आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख अंकों में कौन एक निम्नलिखित में शामिल नहीं है?
(a) पूर्वानुमान, चेतावनी एवं प्रशिक्षण
(b) आपदा के समय प्रबंधन गतिविधियाँ
(c) आपदा के बाद निश्चित रहना
(d) आपदा के बाद प्रबंधन कार्य करना
उत्तर-
(c) आपदा के बाद निश्चित रहना

प्रश्न 2.
प्रत्येक ग्रीष्म ऋतु में कौन-सी आपदा लगभग निश्चित है? .
(a) आगजनी
(b) वायु दुर्घटना’
(c) रेल दुर्घटना
(d) सड़क दुर्घटना
उत्तर-
(a) आगजनी

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प्रश्न 3.
सामुदायिक प्रबंधन के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन एक प्राथमिक क्रियाकलाप में शामिल नहीं है?
(a) निकटतम प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र को सूचित करना
(b) प्रभावित लोगों को स्वच्छ जल और भोजन की उपलब्धता की … गारंटी करना
(c) आपदा की जानकारी प्रशासनतंत्र को नहीं देना
(d) आपातकालीन राहत शिविर की व्यवस्था करना
उत्तर-
(c) आपदा की जानकारी प्रशासनतंत्र को नहीं देना

प्रश्न 4.
ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति के प्रमुख कार्य इनमें से कौन नहीं है?
(a) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं करना
(b) सभी को सुरक्षा देना
(c) राहत शिविर का चयन एवं राहत पहुँचाने का कार्य करना
(d) स्वच्छता का ख्याल करना
उत्तर-
(a) प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं करना

प्रश्न 5.
आपदा प्रबंधन के लिए समुदाय में कौन-से अच्छे गुण होने चाहिए?
(a) परिश्रमी और साहसी
(b) समुदाय की भलाई के विषय में सोचना
(c) उत्साह, साहस और सख्ती प्रयोग की क्षमता
(d) इनमें से सभी
उत्तर-
(d) इनमें से सभी

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प्रश्न 6.
आपदा से निपटने में कौन लोग सही सुझाव दे सकते हैं?
(a) बच्चे
(b) महिलाएँ
(c) विकलांग
(d) अनुभवी लोग
उत्तर-
(d) अनुभवी लोग

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन पूर्वानुमान अनुभव आधारित आपदा नहीं है?
(a) गर्मी के दौरान आग लगना
(b) भीड़वाली जगहों या सड़कों पर दुर्घटना होना
(c) वर्षा ऋतु के दौरान बाढ़
(d) शीत ऋतु के दौरान सूखे की स्थिति
उत्तर-
(d) शीत ऋतु के दौरान सूखे की स्थिति

प्रश्न 8.
आपदा के दौरान क्या करना चाहिए?
(a) घर छोड़कर भाग जाना चाहिए।
(b) प्रशासन का सूचना देनी चाहिए।
(c) अफवाह फैलानी चाहिए।
(d) घायलों की सहायता नहीं करनी चाहिए।
उत्तर-
(b) प्रशासन का सूचना देनी चाहिए।

प्रश्न 9.
आपदा से निपटना किसकी जिम्मेवारी है?
(a) एक व्यक्ति की
(b) सिर्फ सरकार की
(c) सिर्फ बच्चों की
(d) समुदाय की
उत्तर-
(d) समुदाय की

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प्रश्न 10.
अग्निशामक दस्तों के आने के पूर्व क्या करना चाहिए?
(a) आगे बुझाने का प्रयास करना चाहिए।
(b) घर में फंसे लोगों को बाहर निकालना चाहिए।
(c) शांत बैठे रहना चाहिए।
(d) मुखिया को खबर करनी चाहिए।
उत्तर-
(b) घर में फंसे लोगों को बाहर निकालना चाहिए।

प्रश्न 11.
समुदाय के लोगों को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
(a) स्वयं का
(b) समाज के हित का
(c) प्रशासन का
(d) मुनाफे का
उत्तर-
(b) समाज के हित का

प्रश्न 12.
आपदा प्रबंधन के लिए किस प्रकार के क्रियाकलाप किए जाने चाहिए?
(a) प्राथमिक
(b) द्वितीयक
(c) तृतीयक
(d) पंचम
उत्तर-
(a) प्राथमिक

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प्रश्न 13.
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक दंगों को किन शक्तियों ने रोका था?
(a) सांस्कृतिक
(b) धार्मिक
(c) सामाजिक
(d) आर्थिक
उत्तर-
(c) सामाजिक

प्रश्न 14.
ग्रीष्मकाल के दौरान किस आपदा की आशंका रहती है?
(a) रेल दुर्घटना का
(b) वायु दुर्घटना की
(c) आगजनी का
(d) राहजनी की
उत्तर-
(c) आगजनी का

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प्रश्न 15.
निम्नलिखित में कौन आपदा प्रबंधन से संबंधित नहीं है?
(a) पूर्वानुमान, चेतावनी और प्रशिक्षण
(b) आपदा के समय प्रबंधन करना
(c) आपदा के बाद निश्चित हो जाना
(d) आपदा के बाद भी प्रबंधन कार्य करना
उत्तर-
(c) आपदा के बाद निश्चित हो जाना

प्रश्न 16.
मानव किस प्रकार का प्राणी है?
(a) दुर्बल
(b) सामुदायिक
(c) एकाकी
(d) असभ्य
उत्तर-
(b) सामुदायिक

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प्रश्न 17.
निम्नलिखित में कौन सामुदायिक आपदा प्रबंधन का प्राथमिक क्रियाकलाप नहीं है?
(a) निकट के स्वास्थ्य केन्द्र को सूचित करना
(b) स्वच्छ जल एं भोजन का प्रबंध
(c) आपातकालीन राहत शिविर चलाना
(d) प्रशासन को सूचना नहीं देना
उत्तर-
(d) प्रशासन को सूचना नहीं देना

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में कौन ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति का प्रमुख कार्य
(a) सब की सुरक्षा
(b) चिकित्सा व्यवस्था करना
(c) राहत शिविर की देखभाल
(d) सभी
उत्तर-
(d) सभी

प्रश्न 19.
ग्रामीण स्तर पर कौन आपदा प्रबंध समिति में विशेष सहयोग नहीं दे सकता है?
(a) बैंक मैनेज़र
(b) ग्रामसेवक
(c) सरपंच
(d) मुखिया
उत्तर-
(a) बैंक मैनेज़र

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प्रश्न 20.
भीड़वाली सड़कों पर किस प्रकार की आपदा की आशंका बनी । रहती है?
(a) बाढ़ की
(b) भूकम्प की
(c) तूफान की
(d) दुर्घटना की
उत्तर-
(d) दुर्घटना की

प्रश्न 21.
आपदा किस प्रकार आती है? .
(a) पूर्व सूचना देकर
(b) पूर्व सूचना दिए बिना
(c) प्रशासकों को सूचना देकर
(d) सभी गलत
उत्तर-
(b) पूर्व सूचना दिए बिना

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 1.
सामान्य आपदाओं को कितने वर्गों में रखा जाता है?
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर-
(b)2

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 2.
तीव्र ज्वर का क्या कारण है? ।
(a) जीवाणु
(b) विषाणु
(c) फंगस
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) जीवाणु

प्रश्न 3.
पैदल चलते समय सड़क पर चलना आदर्श है।
(a) दायीं तरफ
(b) बीच से
(c) बायीं तरफ
(d) स्वेच्छा से
उत्तर-
(c) बायीं तरफ

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 4.
नगरों में सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
(a) जहाँ जेब्रा का चिह्न नहीं बना हो
(b) जहाँ जेब्रा का चिह्न बना हो
(c) अपनी इच्छा के अनुसार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) जहाँ जेब्रा का चिह्न बना हो

प्रश्न 5.
रेल यात्रा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
(a) रेल फाटकों को पार करते समय दायीं-बायीं ओर नहीं देखना चाहिए
(b) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।
(c) बच्चों को रेलवे लाइन पार करने के नियमों की जानकारी नहीं होनी चाहिए।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) रेल यात्रा के दौरान ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जाना चाहिए।

प्रश्न 6.
पैदल चलते समय सड़क पर चलना आदर्श है।
(a) दायीं तरफ
(b) बायीं तरफ
(c) बीच में .
(d) स्वेच्छा से
उत्तर-
(b) बायीं तरफ

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 7.
विश्व में सबसे अधिक दुर्घटना की दर किस देश में है?
(a) भारत
(b) रूस
(c) संयुक्त सज्य अमेरिका
(d) जापान
उत्तर-
(a) भारत

प्रश्न 8.
संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर कब आतंकवादी हमला हुआ था?
(a) 11 सितम्बर, 2001
(b) 13 सितम्बर, 2001
(c) 26 नवम्बर, 2008
(d) 16 नवम्बर, 2008.
उत्तर-
(a) 11 सितम्बर, 2001

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन कालाजार का लक्षण नहीं है?
(a) तीव्र ज्वर
(b) जबर्दस्त कँपकँपी.
(c) कै-दस्त होना
(d) भूख नहीं लगना
उत्तर-
(b) जबर्दस्त कँपकँपी.

प्रश्न 10.
अधिकतर रेल दुर्घटनाएँ कहाँ होती हैं?
(a) प्लेटफॉर्म पर
(b) समपार पर
(c) पुल पर
(d) कहीं भी
उत्तर-
(b) समपार पर

प्रश्न 11.
पेट की गड़बड़ी होने पर क्या करना चाहिए?
(a) तुरंत स्वयंसेवी संस्था को फोन पर सूचित करना चाहिए।
(b) नमक और चीनी का घोल एक-एक घंटे के अंतराल पर व्यक्ति को देना चाहिए।
(c) ग्रामसेवक की सहायता लेनी चाहिए।
(d) अग्निशामक को सूचित करना चाहिए।
उत्तर-
(b) नमक और चीनी का घोल एक-एक घंटे के अंतराल पर व्यक्ति को देना चाहिए।

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 12.
सड़क दुर्घटना का क्या कारण है?
(a) यातायात के नियमों का ठीक से पालन नहीं करना
(b) वाहनों की गति अधिक रहना
(c) ओवरटेकिंग कर आगे निकलने की जल्दबाजी
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 13.
भारत में समपारों की संख्या कितनी है?
(a) 2,100
(b) 4,700
(c) 3,700
(d) 5,700
उत्तर-
(c) 3,700

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 14.
प्रत्येक बस में क्या रखना अत्यावश्यक है?
(a) प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स
(b) टिकट
(c) सीट
(d) खलासी
उत्तर-
(a) प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स

प्रश्न 15.
वायु दुर्घटना का क्या कारण है?
(a) मौसम की खराबी
(b) तकनीकी गड़बड़ी
(c) तूफान का आना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 12 सामान्य आपदाएँ : निवारण एवं नियंत्रण

प्रश्न 16.
ड्राइवर का कैसा होना जरूरी है?
(a) अप्रशिक्षित
(b) मोटा एवं पहलवान
(c) प्रशिक्षित
(d) ताकतवर
उत्तर-
(c) प्रशिक्षित

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प्रश्न 17.
घर में आग से धुआँ भर जाने पर क्या करना चाहिए?
(a) खिड़की से कूद जाना चाहिए
(b) हो-हल्ला करना चाहिए
(c) जमीन पर लेटकर तथा रेंगकर बाहर निकलना चाहिए
(d) सभी गलत है
उत्तर-
(c) जमीन पर लेटकर तथा रेंगकर बाहर निकलना चाहिए

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित : घटनाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Geography Objective Answers Chapter 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित : घटनाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित : घटनाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

प्रश्न 1.
इनमें से कौन परमाणु ऊर्जा केन्द्र है?
(a) कैगा
(b) वाराणसी
(c) दिल्ली
(d) मेरठ
उत्तर-
(a) कैगा

प्रश्न 2.
हिरोशिमा किस देश में है?
(a) भारत
(b) जापान
(c) चीन
(d) ताईवान
उत्तर-
(b) जापान

प्रश्न 3.
परमाणु विस्फोट से बचने के लिए सर्वप्रथम प्रतीक चिह्न का विकास किसने किया था?
(a) टोकियो विश्वविद्यालय
(b) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
(c) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय

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प्रश्न 4.
मानवजनित आपदा के सर्वाधिक विनाशकारी संघटक हैं:
(a) मानवीय भूल के कारण आग लगना
(b) नाभिकीय कारकों से उत्पन्न आपदा
(c) जहरीले उत्पाद का रिसाव
(d) बाँध के टूटने से उत्पन्न आपदा
उत्तर-
(b) नाभिकीय कारकों से उत्पन्न आपदा

प्रश्न 5.
परमाणु के विस्फोट से बचने के लिए सर्वप्रथम प्रतीक चिह्न का विकास किसने किया है?
(a) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय
(b) टोकियो विश्वविद्यालय
(c) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय

प्रश्न 6.
भोपाल में रासायनिक गैस रिसाव कब हुआ था?
(a) 1984
(b) 1990
(c) 1930
(d) 2004
उत्तर-
(a) 1984

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प्रश्न 7.
तूतीकोरिन में 1997 ई. में गैस रिसाव से कौन-सी बीमारी उत्पन्न हुई थी?
(a) उल्टी होना
(b) सर्दी एवं खाँसी
(c) उल्टी होना, छाती में जलन
(d) मस्तिष्क ज्वर
उत्तर-
(c) उल्टी होना, छाती में जलन

प्रश्न 8.
अम्लीय वर्षा का सर्वाधिक प्रभाव कहाँ पड़ा है?
(a) पटना महानगर
(b) दामोदर घाटी क्षेत्र
(c) उत्तरी बिहार
(d) असम घाटी क्षेत्र
उत्तर-
(b) दामोदर घाटी क्षेत्र

प्रश्न 9.
हिरोशिमा पर परमाणु बम किस दिन गिराया गया था?
(a) 6 सितम्बर को
(b) 6 अगस्त को
(c) 9 अगस्त को
(d)9 नवम्बर को
उत्तर-
(b) 6 अगस्त को

प्रश्न 10.
हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने के कितने दिन बाद नागासाकी शहर पर भी परमाणु बम गिराया गया था?
(a) 1 दिन
(b) 2 दिन
(c)3 दिन
(d) 5 दिन
उत्तर-
(b) 2 दिन

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित : घटनाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

प्रश्न 11.
परमाणु तकनीक विकसित देशों की संख्या लगभग कितनी है?
(a) 5
(b) 15
(c) 18
(d) 20
उत्तर-
(d) 20

प्रश्न 12.
2004 में किस ग्रह तक एक प्लूटोनियम से संचालित अंतरिक्ष यान पहुँच गया था?
(a) बुध
(b) शुक्र
(c) शनि
(d) वृहस्पति
उत्तर-
(c) शनि

प्रश्न 13.
रासायनिक आपदाओं को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?
(a) 1
(b) 2
(c) 5
(d) 3
उत्तर-
(d) 3

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प्रश्न 14.
पहली बार किस वर्ष रसायनों के घातक परिणाम को अनुभव किया गया?
(a) 1990 में
(b) 1935 में
(c) 1993 में
(d) 1975 में
उत्तर-
(a) 1990 में

प्रश्न 15.
भोपाल शहर में गैस त्रासदी किस वर्ष हुई थी?
(a) 1973 में
(b) 1984 में
(c) 1994 में
(d) 2004 में
उत्तर-
(b) 1984 में

प्रश्न 16.
भोपाल गैस दुर्घटना का कारण क्या था?
(a) मेथिल ऐल्कोहॉल
(b) मेथिल आइसोसायनेट
(c) मेथिल ईथर
(d) सभी गलत
उत्तर-
(b) मेथिल आइसोसायनेट

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प्रश्न 17.
भारत में प्रयोग किए जानेवाले कितने कीटनाशकों को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अत्यन्त जहरीला घोषित किया है?
(a) 35% को
(b) 55% को
(c) 80% को
(d) 85% को
उत्तर-
(c) 80% को

प्रश्न 18.
जैविक आपदा को कितने वर्गों में बांटा गया है?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर-
(d) चार

प्रश्न 19.
अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर किस वर्ष हमला हुआ था? ।
(a) 2001 में
(b) 2002 में
(c) 2003 में
(d) 1998 में
उनस-
(a) 2001 में

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प्रश्न 20.
भारत में एड्स का पता किस वर्ष चला?
(a) 1986 में
(b) 1987 में
(c) 1988 में
(d) 1999 में
उत्तर-
(a) 1986 में

प्रश्न 21.
डेंगू बीमारी का क्या कारण है?
(a) आग लगने से
(b) एक बर्तन में अधिक समय तक पानी रहने से
(c) बाढ़ आने से
(d) गंदे भोजन से
उत्तर-
(b) एक बर्तन में अधिक समय तक पानी रहने से

प्रश्न 22.
एंथेक्स क्या है?
(a) अति सूक्ष्म जीव
(b) युद्धपोत
(c) जंगली जानवर
(d) युद्ध का एक अस्त्र
उत्तर-
(a) अति सूक्ष्म जीव

प्रश्न 23.
भारत में एड्स से लगभग कितने लोग प्रभावित हैं?
(a)25 लाख
(b) 30 लाख
(c) एक करोड़
(d) 50 लाख
उत्तर-
(a)25 लाख

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प्रश्न 24.
हिरोशिमा किस देश में है?
(a) भारत में
(b) जापान में
(c) मलेशिया में
(d) चीन में
उत्तर-
(b) जापान में

प्रश्न 25.
भारत में पहला परमाणु ऊर्जा उत्पादक केन्द्र कहाँ स्थापित किया गया?
(a) ट्रॉम्बे में
(b) पोखरण में
(c) भोपाल में
(d) चेन्नई में
उत्तर-
(a) ट्रॉम्बे में

प्रश्न 26.
परमाणु विस्फोट से बने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय रेडियोधर्मी प्रतीक का विकास किसने किया है?
(a) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने
(b) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने
(c) टोकियो विश्वविद्यालय ने
(d) संयुक्त राष्ट्र ने
उत्तर-
(b) कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने

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प्रश्न 27.
पहला परमाणु बम कहाँ गिराया गया था?
(a) चेर्नोबिल पर
(b) इराक पर
(c) हिरोशिमा पर
(d) अफगानिस्ता पर
उत्तर-
(c) हिरोशिमा पर

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में कौन रासायनिक अस्त्रों के विशेषज्ञ हैं?
(a) मार्क टुली
(b) अमर्त्य सेन
(c) जी. हैरिजेल
(d) जी. मॉरसेल
उत्तर-
(c) जी. हैरिजेल

प्रश्न 29.
निम्नलिखित में कौन दीर्घकाल तक प्रभावित करनेवाली बीमारियों में शामिल नहीं है?
(a) एड्स
(b) बर्ड फ्लू
(c) डेंगू
(d) मलेरिया
उत्तर-
(d) मलेरिया

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प्रश्न 30.
इनमें से कौन एक घातक बीमारी है?
(a) येलो फीवर
(b) इंफ्लुएंजा
(c) हैजा
(d) डायरिया
उत्तर-
(b) इंफ्लुएंजा

प्रश्न 31.
तूतीकोरिन स्थित ताँबे की फैक्टरी से किस वर्ष गैस रिसाव से दुर्घटना हुई थी?
(a) 1995 में
(b) 2005 में
(c) 2002 में
(d) 1997 में
उत्तर-
(d) 1997 में

प्रश्न 32.
भोपाल शहर किस राज्य में स्थित है?
(a) छत्तीसगढ़
(b) गुजरात
(c) राजस्थान
(d) मध्य प्रदेश
उत्तर-
(d) मध्य प्रदेश

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प्रश्न 33.
थर्मोन्यूक्लीय बम विस्फोट किस वर्ष कराया गया था?
(a) 1998 में
(b) 1999 में
(c) 1997 में
(d) 2001 में
उत्तर-
(a) 1998 में

प्रश्न 34.
भारत में भूमिगत परमाणु विस्फोट परीक्षण कहाँ किया गया?
(a) नरोरा में
(b) कैगा में
(c) तारापुर में
(d) पोखरन में
उत्तर-
(d) पोखरन में

प्रश्न 35.
निम्नलिखित में कौन क्षेत्र अम्ल-वर्षा से अधिक प्रभावित होता है?
(a) उत्तर बिहार
(b) दामोदर घाटी
(c) नर्मदा घाटी
(d) ब्रह्मपुत्र घाटी
उत्तर-
(b) दामोदर घाटी

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 11 मानवीय गलतियों के कारण घटित : घटनाएँ : नाभिकीय, जैविक और रासायनिक

प्रश्न 36.
डेंगू बीमारी का क्या कारण है?
(a) आग लगना
(b) जल जमाव
(c) बाढ़ प्रकोप
(d) ठंडा भोजन
उत्तर-
(b) जल जमाव

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में कौन रेडियोधर्मी खनिज/धातु नहीं है?
(a) यूरेनियम
(b) थोरियम
(c) प्लूटोनियम
(d) कोयला
उत्तर-
(d) कोयला

प्रश्न 38.
रेडियोधर्मी खनिजों से कौन-सी किरणें नहीं निकलती हैं?
(a) अल्फा
(b) गामा
(c) बीटा
(d) सभी
उत्तर-
(d) सभी

प्रश्न 39.
भारत में परमाणु ऊर्जा आयोग कब गठित हुआ था?
(a) 1954 में
(b) 1931 में
(c) 1948 में
(d) 1974 में
उत्तर-
(c) 1948 में

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प्रश्न 40.
भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान पर कार्य किस वर्ष प्रारंभ हुआ था?
(a) 1939 से
(b) 1949 से
(c) 1959 से
(d) 1962 से
उत्तर-
(d) 1962 से

प्रश्न 41.
चन्द्रयान किस वर्ष चाँद पर उतरा?
(a) 2001 में
(b) 2003 में
(c) 2005 में
(d) 2008
में उत्तर-
(d) 2008

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 5 संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Political Science Objective Answers Chapter 5 संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 5 संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ

प्रश्न 1.
अगर आपको भारत का राष्ट्रपति चुना जाए तो आप निम्नलिखित से कौन-सा फैसला खुद कर सकते हैं ?
(a) अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री चुन सकते हैं
(b) लोकसभा में बहुमत वाले प्रधानमंत्री को उसके पद से हटा सकते
(c) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिए कह सकते
(d) मंत्रिपरिषद् में अपनी पसंद के नेताओं का चयन कर सकते हैं।
उत्तर-
(c) दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक पर पुनर्विचार के लिए कह सकते

प्रश्न 2.
निम्नांकित में कौन राजनैतिक कार्यपालिका का एक प्रधान हिस्सा
(a) गृहमंत्री
(c) पुलिस महानिदेशक
(b) जिलाधीश
(d) गृह मंत्रालय का सचिव
उत्तर-
(a) गृहमंत्री

प्रश्न 3.
निम्नांकित राजनैतिक संस्थाओं में से कौन-सी संस्था देश के वर्तमान कानून में संशोधन कर सकती है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) राष्ट्रपति
(c) प्रधानमंत्री
(d) संसद
उत्तर-
(d) संसद

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 5 संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में कौन राजनैतिक कार्यपालिका का हिस्सा होता है ?
(a) जिलाधीश
(b) गृह मंत्रालय का सचिव
(c) गृहमंत्री
(d) पुलिस महानिदेशक
उत्तर-
(c) गृहमंत्री

प्रश्न 5.
न्यायपालिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा बयान गलत है?
(a) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून को सर्वोच्च न्यायालय को मंजूरी की जरूरत होती है
(b) अगर कोई कानून संविधान की भावना के खिलाफ है तो न्यायपालिका उसे अमान्य घोषित कर सकती है
(c) न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतंत्र होती है
(d) अगर किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है तो वह अदालत में जा सकता है
उत्तर-
(a) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून को सर्वोच्च न्यायालय को मंजूरी की जरूरत होती है

प्रश्न 6.
संघीय मंत्रिमंडल की बैठकों का सभापतित्व कौन करता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) उपराष्ट्रपति
(c) राष्ट्रपति
(d) गृहमंत्री
उत्तर-
(a) प्रधानमंत्री

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प्रश्न 7.
संघीय मंत्रिपरिषद के सदस्यों का चयन कौन करता है ?
(a) संसद
(b) उपराष्ट्रपति
(c) राष्ट्रपति
(d) प्रधानमंत्री
उत्तर-
(d) प्रधानमंत्री

प्रश्न 8.
संघीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती भा
(a) लोकसभा
(b) राज्यसभा
(c) राष्ट्रपति
(d) जनता
उत्तर-
(a) लोकसभा

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प्रश्न 9.
निम्नांकित में किसकी नियुक्ति राष्ट्रपति नहीं करता है ?
(a) उपराष्ट्रपति की
(b) चुनाव आयुक्त की
(c) प्रधानमंत्री की
(d) सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश की
उत्तर-
(a) उपराष्ट्रपति की

प्रश्न 10.
पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या है
(a)21
(b) 25
(c) 43
(d) 33
उत्तर-
(c) 43

प्रश्न 11.
लोकसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष का नाम है
(a) शीला दीक्षित
(b) नजमा हेपतुल्ला
(c) मीरा कुमार
(d) सुषमा स्वराज
उत्तर-
(c) मीरा कुमार

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प्रश्न 12.
15वीं लोकसभा के गठन की तिथि है
(a) 20 मई 2009
(b) 22 मई 2009
(c) 24 मई 2009
(d) 26 मई 2009
उत्तर-
(b) 22 मई 2009

प्रश्न 13.
कार्यपालिका कितने प्रकार की होती है ?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार.
उत्तर-
(b) दो

प्रश्न 14.
इनमें कौन-सी राजनीतिक संस्था राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं
लेती है ?
(a) लोकसभा
(b) विधानपरिषद
(c) राज्यसभा
(d) विधानसभा
उत्तर-
(b) विधानपरिषद

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प्रश्न 15.
लोकसभा को कहा जाता है
(a) प्रथम सदन
(b) द्वितीय सदन
(c) तृतीय सदन
(d) उच्च सदन
उत्तर-
(a) प्रथम सदन

प्रश्न 16.
पिछड़ी जाति के लिए आरक्षण पर निम्नलिखित तीन प्रतिक्रियाओं में कौन-सी प्रतिक्रिया सही है ?
(a) चूँकि सर्वोच्च न्यायालय सरकार के साथ सहमत हो गयी। अतः वह स्वतंत्र नहीं है
(b) न्यायापालिका स्वतंत्र है । क्योंकि वह सरकार के विरुद्ध, भी फैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को अपने निर्णय में संशोधन का आदेश दिया
(c) न्यायपालिका न तो स्वतंत्र है और न ही किसी की इच्छा के अनुसार चलनेवाली संस्था है । बल्कि यह परस्पर विरोधी समूहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है । न्यायालय ने इस आरक्षण विवाद में इसके समर्थकों एवं विरोधियों के बीच अच्छा संतुलन बनाया
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) न्यायापालिका स्वतंत्र है । क्योंकि वह सरकार के विरुद्ध, भी फैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को अपने निर्णय में संशोधन का आदेश दिया

प्रश्न 17.
लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों की संख्या कितनी है ?
(a) 545
(b) 520
(c) 543
(d) 500
उत्तर-
(c) 543

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प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से कौन-सा सदन विघटित नहीं होता है ?
(a) लोकसभा
(b) विधानसभा
(c) राज्यसभा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर-
(c) राज्यसभा

प्रश्न 19.
सरकारी नीतियों का कार्यालय आदेश निर्गत करता है
(a) राष्ट्रपति
(b) विभागीय लोकसेवक
(c) सम्बद्ध मंत्री
(d) प्रधानमंत्री
उत्तर-
(b) विभागीय लोकसेवक

प्रश्न 20.
देश के कानून के निर्माण का अधिकार किसे है ?
(a) संसद को
(b) प्रधानमंत्री को
(c) राष्ट्रपति को
(d) सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर-
(a) संसद को

प्रश्न 21.
संसद का अधिवेशन बुलाने का कार्य कौन करता है ?
(a) राष्ट्रपति
(b) लोकसभा का अध्यक्ष
(c) राज्यसभा का सभापति
(d) संघीय मंत्रिपरिषद
उत्तर-
(a) राष्ट्रपति

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प्रश्न 22.
राज्यसभा का सभापति कौन होता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) उपराष्ट्रपति
(d) राज्यसभा का सदस्य
उत्तर-
(c) उपराष्ट्रपति

प्रश्न 23.
बिहार विधानसभा में कुल कितने सदस्य होते हैं ?
(a) 123
(b) 243
(c) 550
(d) 324
उत्तर-
(b) 243

प्रश्न 24.
राष्ट्रपति को सलाह एवं मंत्रणा कौन देता है ?
(a) मुख्यमंत्री
(b) राज्यपाल
(c) संघीय मंत्रिपरिषद
(d) उपराष्ट्रपति
उत्तर-
(c) संघीय मंत्रिपरिषद

प्रश्न 25.
भारत में राष्ट्रीय संकट की उद्घोषणा कौन करता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) विदेशमंत्री
(d) वायुसेनाध्यक्ष
उत्तर-
(b) राष्ट्रपति

प्रश्न 26.
महान लोकतांत्रिक देश भारत में केंद्रीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की सभा को क्या कहा जाता है :
(a) पार्लियामेंट
(b) नेशनल असेंबली
(c) संसद
(d) कांग्रेस
उत्तर-
(c) संसद

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प्रश्न 27.
राज्यपाल विधानपरिषद के कितने सदस्यों को मनोनीत कर सकता
(a) 1/2 सदस्यों को
(b) 1/6 सदस्यों को
(c) 17 सदस्यों को
(d) 1/8 सदस्यों को
उत्तर-
(b) 1/6 सदस्यों को

प्रश्न 28.
बिहार के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति कौन होता है ?
(a) राज्यपाल
(b) राष्ट्रपति
(c) मुख्यमंत्री
(d) प्रधानमंत्री
उत्तर-
(a) राज्यपाल

प्रश्न 29.
बिहार विधानपरिषद के कुल सदस्यों की संख्या है
(a) 45
(b) 5
(c) 75
(d) 65
उत्तर-
(c) 75

प्रश्न 30.
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने पद पर बने रहते हैं
(a) 58 वर्ष की उम्र तक
(b) 60 वर्ष की उम्र तक
(c) 62 वर्ष की उम्र तक
(d) 65 वर्ष की उम्र तक
उत्तर-
(d) 65 वर्ष की उम्र तक

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प्रश्न 31.
राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे व्यक्ति का नाम कितने मतदाताओं द्वारा क्रमशः प्रस्तावित एवं अनुमोदित होना चाहिए ?
(a) 30-30
(b) 40-40
(c) 50-50
(d) 60-60
उत्तर-
(c) 50-50

प्रश्न 32.
किस संशोधन अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया था?
(a) 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा
(b) 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा
(c) 43वें संशोधन अधिनियम द्वारा
(d) 45वें संशोधन अधिनियम द्वारा
उत्तर-
(a) 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा

प्रश्न 33.
निम्नलिखित राजनैतिक संस्थाओं में से कौन-सी संस्था देश के मौजूदा कानून में संशोधन कर सकती है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) राष्ट्रपति
(c) प्रधानमंत्री
(d) संसद
उत्तर-
(d) संसद

प्रश्न 34.
‘राष्ट्रपति’ निम्नलिखित में से किसके अंतर्गत आते हैं ?
(a) विधायिका
(b) न्यायपालिका
(c) कार्यपालिका
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) कार्यपालिका

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प्रश्न 35.
संघात्मक शासन में सरकार के कितने स्तर होते हैं ?
(a) एक स्तर
(b) दो स्तर
(c) तीन स्तर
(d) चार स्तर
उत्तर-
(b) दो स्तर

प्रश्न 36.
निम्नलिखित में से किस देश में संघात्मक शासन नहीं है
(a) ब्रिटेन
(b) भारत
(c) संयुक्त राज्य अमेरिका
(d) कनाडा
उत्तर-
(a) ब्रिटेन

प्रश्न 37.
किसी भी विधेयक को संसद के किसी सदन से पास होने के लिए कितने वाचनों से गुजरना पड़ता है ?
(a) दो वाचन
(b) तीन वाचन
(c) चार वाचन
(d)पाँच वाचन
उत्तर-
(b) तीन वाचन

प्रश्न 38.
निम्नलिखित में से कौन नीतिगत निर्णय में शामिल नहीं होते हैं ?
(a) राष्ट्रपति
(b) प्रधानमंत्री
(c) राजनीतिक दल
(d) मंत्रिमंडल
उत्तर-
(c) राजनीतिक दल

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प्रश्न 39.
भारत का राष्ट्रपति जटिल कानूनी मसलों पर किससे परामर्श ले सकता है?
(a) संसद का
(b) निर्वाचन आयोग का
(c) केन्द्रीय मंत्रिमंडल का
(d) अधीनस्थ न्यायालय का
उत्तर-
(d) अधीनस्थ न्यायालय का

प्रश्न 40.
भारत का सर्वोच्च न्यायालय किहाँ से निरीक्षण कर सकता है ?
(a) प्रधानमंत्री से
(b) सर्वोच्च न्यायालय से
(c) उच्च न्यायालयों से
(d) कानून मंत्री से
उत्तर-
(b) सर्वोच्च न्यायालय से

प्रश्न 41.
निम्नांकित में सर्वोच्च न्यायालय का एक सही कार्य कौन-सा है ?
(a) संविधान की भावना के विरुद्ध बने कानूनों को अमान्य करार देना
(b) संसद द्वारा पारित विधेयक को स्वीकृति प्रदान करना
(c) संसद एवं राष्ट्रपति के परामर्श के अनुसार अधिकारों का प्रयोग करना
(d) कार्यपालिका के कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप करना
उत्तर-
(a) संविधान की भावना के विरुद्ध बने कानूनों को अमान्य करार देना

प्रश्न 42.
बिना विधायिका का सदस्य बने कोई भी व्यक्ति कब तक मंत्री के पद पर बना सकता है ?
(a) छह माह तक
(b) तीन माह तक
(c) नौ माह तक
(d) एक वर्ष तक
उत्तर-
(a) छह माह तक

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प्रश्न 43.
राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) मुख्यमंत्री
(d) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
उत्तर-
(b) राष्ट्रपति

प्रश्न 44.
निम्नलिखित में निर्णय कौन लेता है ?
(a) सैनिक
(b) सरकार
(c) किसान
(d) जनता
उत्तर-
(b) सरकार

प्रश्न 45.
भारत के सरकारी सेवाओं एवं पदों में 27 प्रतिशत आरक्षण किसके लिए किया गया है?
(a) अगड़े वर्गों के लिए
(b) राजनैतिक वर्ग के लोगों के लिए
(c) पिछड़े वर्गों के लिए
(d) अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए
उत्तर-
(c) पिछड़े वर्गों के लिए

प्रश्न 46.
किस तरह की शासन-व्यवस्था में सरकार मुख्य रूप से लोक-कल्याण के लिए कार्य करती है ?
(a) लोकतांत्रिक शासन में
(b) तानाशाही शासन में
(c) सैनिक शासन में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) लोकतांत्रिक शासन में

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प्रश्न 47.
निम्नलिखित में से कौन सरकार का अंग नहीं है ?
(a) विधायिका
(b) कार्यपालिका
(c) न्यायपालिका
(d) राजनीतिक दल
उत्तर-
(d) राजनीतिक दल

प्रश्न 48.
संसद में कितने सदन हैं ?
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर-
(b) दो

प्रश्न 49.
केंद्रीय विधानमंडल किसे कहा जाता है ?
(a) विधानसभा
(b) न्यायपालिका
(c) संसद
(d) मंत्रिमंडल
उत्तर-
(c) संसद

प्रश्न 50.
निम्नलिखित में से कौन औपचारिक राजनैतिक संस्था नहीं है ?
(a) संसद
(b) प्रधानमंत्री
(c) केबिनेट
(d) दबाव समूह
उत्तर-
(d) दबाव समूह

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प्रश्न 51.
निम्नलिखित में से निर्णय लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होती है ?
(a) विधायिका
(b) कार्यपालिका
(c) न्यायपालिका
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) कार्यपालिका

प्रश्न 52.
भारत में कैसी शासन-व्यवस्था है ?
(a) संघात्मक
(b) एकात्मक
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) संघात्मक

प्रश्न 53.
भारत में आरक्षण निम्नलिखित में से किसे प्राप्त है ?
(a) पिछड़ा वर्ग को
(b) अगड़ा वर्ग को
(c) बुजुर्गों को
(d) बच्चों को
उत्तर-
(a) पिछड़ा वर्ग को

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प्रश्न 54.
निम्नलिखित में से कौन कार्यपालिका के अंतर्गत नहीं आता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राज्यपाल
(c) उच्च न्यायालय
(d) उपराष्ट्रपति
उत्तर-
(c) उच्च न्यायालय

प्रश्न 55.
निम्नलिखित में से किसकी अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद कोई विधेयक कानून का रूप लेता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) उपराष्ट्रपति
(d) लोकसभा के अध्यक्ष
उत्तर-
(b) राष्ट्रपति

प्रश्न 56.
लोकतांत्रिक देशों में लोक-कल्याणकारी कार्य के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन कार्य सम्मिलित नहीं है ?
(a) धनवानों की सुरक्षा
(b) सबके लिए शिक्षा की व्यवस्था
(c) सबके लिए स्वास्थ्य की व्यवस्था
(d) विकास संबंधी कार्य करना
उत्तर-
(a) धनवानों की सुरक्षा

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प्रश्न 57.
निम्नलिखित में से कौन कार्य राज्यसभा का नहीं है ?
(a) साधारण विधेयक पास करना
(b) धन विधेयक पर संशोधन संबंधी सुझव देना
(c) मंत्रियों से प्रश्न पूछना
(d) अविश्वास प्रस्ताव लाना
उत्तर-
(d) अविश्वास प्रस्ताव लाना

प्रश्न 58.
लोकसभा का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है ?
(a) 6 वर्ष
(b) 5 वर्ष
(c) यह कभी भंग नहीं होता है
(d) 10 वर्ष
उत्तर-
(b) 5 वर्ष

प्रश्न 59.
लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के कम से कम कितने सदस्यों का होना आवश्यक है ?
(a) 12 सदस्य
(b) 1 सदस्य
(c)2 सदस्य
(d) 10 सदस्य
उत्तर-
(c)2 सदस्य

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प्रश्न 60.
धन विधेयक सर्वप्रथम किस सदन में पेश किया जाता है ?
(a) किसी भी सदन में
(b) किसी भी सदन में नहीं।
(c) राज्यसभा में
(d) लोकसभा में
उत्तर-
(d) लोकसभा में

प्रश्न 61.
विधानसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम कितनी हो सकती है?
(a) 500
(b) 243
(c) 400
(d) अनिश्चित
उत्तर-
(a) 500

प्रश्न 62.
बिहार विधानपरिषद में सदस्यों की संख्या कितनी है ?
(a) 100
(b) 36
(c) 63
(d) 75
उत्तर-
(d) 75

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प्रश्न 63.
विधानपरिषद के संबंध में निम्नलिखित में से कौन कथन सत्य है ?
(a) यह एक स्थायी सदन है
(b) इसकी बैठक वर्ष में कम से कम एक बार अवश्य होनी चाहिए
(c) इसकी सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है
(d) भारत में सभी राज्यों में विधानपरिषद है
उत्तर-
(a) यह एक स्थायी सदन है

प्रश्न 64.
राष्ट्रपति को शपथ कौन दिलाता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) उपराष्ट्रपति
(c) लोकसभा के अध्यक्ष
(d) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर-
(d) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

प्रश्न 65.
विदेशी राजदूत एवं कूटनीतिज्ञ अपना परिचय-पत्र किसे पेश करते
(a) राष्ट्रपति को
(b) प्रधानमंत्री को
(c) उपराष्ट्रपति को
(d) किसी अन्य मंत्री को
उत्तर-
(a) राष्ट्रपति को

प्रश्न 66.
निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रपति की विधायी शक्ति के अंतर्गत नहीं आता है ?
(a) संसद की बैठक बुलाना
(b) राज्यपाल की नियुक्ति करना
(c) दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाना
(d) अध्यादेश जारी करना
उत्तर-
(b) राज्यपाल की नियुक्ति करना

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प्रश्न 67.
उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
(b) राज्यपाल
(c) उपराष्ट्रपति
(d) राष्ट्रपति
उत्तर-
(d) राष्ट्रपति

प्रश्न 68.
राष्ट्रपति के निर्वाचन में निम्नलिखित में कौन मतदाता है ?
(a) विधानसभा के मनोनीत सदस्य
(b) राज्यपाल के मनोनीत सदस्य
(c) उपराष्ट्रपति
(d) लोकसभा के निर्वाचित सदस्य
उत्तर-
(d) लोकसभा के निर्वाचित सदस्य

प्रश्न 69.
भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग निम्न में से किस स्थिति में लगाया जा सकता है ?
(a) बीमार होने की स्थिति में
(b) देश से बाहर रहने की स्थिति में
(c) संविधान के उल्लंघन की स्थिति में
(d) प्रधानमंत्री के परामर्श से किसी मंत्री को बर्खास्त करने की स्थिति
उत्तर-
(c) संविधान के उल्लंघन की स्थिति में

प्रश्न 70.
सर्वोच्च न्यायालय में अन्य न्यायाधीशों की संख्या है
(a) 31
(b) 30
(c) 25
(d) 20
उत्तर-
(b) 30

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प्रश्न 71.
सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि किसके द्वारा होती है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
(b) संसद
(c) राज्यों के उच्च न्यायालयों की समितियों द्वारा
(d) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के कमेटी द्वारा
उत्तर-
(b) संसद

प्रश्न 72.
सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) संसद
(b) न्यायाधीशों का एक समूह
(c) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
(d) संघ लोक सेवा आयोग
उत्तर-
(c) सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश

प्रश्न 73.
सवोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यता के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सही नहीं है ?
(a) वह भारत का नागरिक हो
(b) उच्च न्यायालयों में 10 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में काम करने का अनुभव
(c) राष्ट्रपति के विचार में कानून का ज्ञाता हो
(d) किसी उच्च न्यायालय में 10 वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में कार्य करने का अनुभव
उत्तर-
(b) उच्च न्यायालयों में 10 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में काम करने का अनुभव

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प्रश्न 74.
सर्वोच्च न्यायालय स्थापित है
(a) मुंबई में
(b) चेन्नई में
(c) पटना में
(d) दिल्ली में
उत्तर-
(d) दिल्ली में

प्रश्न 75.
द्विसदनात्मक विधानमंडल में कितने सदन होते हैं ?
(a) पाँच
(b) चार
(c) तीन
(d) दो
उत्तर-
(d) दो

प्रश्न 76.
राष्ट्रपति को संसद का अंग मानने के लिए निम्नलिखित में से कौन तर्क सही है ?
(a) संसद के फैसले राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू होते हैं
(b) संसद जनता के प्रतिनिधियों वाली संस्था है
(c) संसद संवैधानिक संस्था है
(d) राष्ट्रपति के चुनाव में संसद सदस्य भाग लेते हैं
उत्तर-
(a) संसद के फैसले राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू होते हैं

प्रश्न 77.
राज्यसभा में बिहार से कितने सदस्यों का प्रतिनिधित्व है ? .
(a) 22
(b) 16
(c) 6
(d) 18
उत्तर-
(b) 16

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प्रश्न 78.
निम्नलिखित में से कौन राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए आवश्यक योग्यता नहीं है ?
(a) वह भारत का नागरिक हो
(b) उसकी उम्र 25 वर्ष हो
(c) वह लाभ के पद पर न हो
(d) वह अपराधी न हो
उत्तर-
(b) उसकी उम्र 25 वर्ष हो

प्रश्न 79.
निम्नलिखित में से कौन राज्यसभा का सभापति होता है ?
(a) राष्ट्रपति
(b) प्रधानमंत्री
(c) उपराष्ट्रपति
(d) राज्यपाल
उत्तर-
(c) उपराष्ट्रपति

प्रश्न 80.
जनप्रतिनिधियों के राष्ट्रीय सभा को भारत में किस नाम से जाना
जाता है ?
(a) राष्ट्रीय परिषद
(b) नेशनल असेंबली
(c) संसद
(d) राजनीतिक दल
उत्तर-
(c) संसद

प्रश्न 81.
मंत्रिपरिषद किस सदन के प्रति उत्तरदायी होता है ?
(a) तृतीय सदन
(b) निम्न सदन
(c) उच्च सदन
(d) दोनों सदनों के प्रति
उत्तर-
(b) निम्न सदन

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प्रश्न 82.
संसद के कितने सदन हैं ?
(a) एक सदन
(b) दो सदन
(c) तीन सदन
(d) एक भी सदन नहीं है
उत्तर-
(b) दो सदन

प्रश्न 83.
राज्यसभा में सदस्यों की संख्या कितनी है ?
(a) 238
(b) 545
(c) 552
(d) 250
उत्तर-
(d) 250

प्रश्न 84.
राज्यसभा का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है ?
(a) 6 वर्ष
(b) स्थायी सदन है
(c)5 वर्ष
(d) 2 वर्ष
उत्तर-
(b) स्थायी सदन है

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प्रश्न 85.
साधारण विधेयक को राज्यसभा में कितने दिनों तक रोककर रखा जा सकता है ?
(a) 14 दिन
(b) 6 महीना
(c) 5 वर्षों तक
(d) अनिश्चित काल तक
उत्तर-
(b) 6 महीना

प्रश्न 86.
लोकसभा में अधिकतम सदस्य संख्या कितनी हो सकती है ?
(a) 545
(b) 552
(c) 250
(d) 1000
उत्तर-
(b) 552

प्रश्न 87.
ग्राम कचहरी के प्रधान को क्या कहा जाता है ?
(a) मुखिया
(b) वार्ड सदस्य
(c) सरपंच
(d) प्रमुख
उत्तर-
(c) सरपंच

प्रश्न 88.
निम्नलिखित में से कौन राजस्व न्यायालय के अंतर्गत नहीं आता
(a) राजस्व परिषद
(b) ए. डी. एम.
(c) एल. आर. डी. सी.
(d) जिला जज का न्यायालय
उत्तर-
(d) जिला जज का न्यायालय

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प्रश्न 89.
अंतिम अपीलीय न्यायालय निम्नलिखित में से कौन है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) जिला न्यायालय
(c) जिला न्यायालय
(d) ग्राम कचहरी
उत्तर-
(a) सर्वोच्च न्यायालय

प्रश्न 90.
निम्नलिखित में से कौन अभिलेख न्यायालय है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) उच्च न्यायालय
(c) सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय दोनों

प्रश्न 91.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक कारण है जिसके आधार पर . राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर सकते हैं ?
(a) वित्तीय संकट की स्थिति में
(b) राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति में
(c) युद्ध या बाहरी आक्रमण की स्थिति में
(d) इनमें से सभी स्थिति में
उत्तर-
(c) युद्ध या बाहरी आक्रमण की स्थिति में

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प्रश्न 92.
भारत में राष्ट्रपति शासन सर्वप्रथम किस राज्य में लागू हुआ?
(a) बिहार
(b) पंजाब
(c) केरल
(d) उत्तर प्रदेश
उत्तर-
(b) पंजाब

प्रश्न 93.
भारत में वित्तीय आपात की घोषणा कितनी बार की गई है ?
(a) तीन बार
(b) सौ से अधिक बार
(c) दो बार
(d) एक बार भी नहीं
उत्तर-
(d) एक बार भी नहीं

प्रश्न 94.
उपराष्ट्रपति किस सदन का पदेन सभापति होता है ?
(a) राज्यसभा का
(b) लोकसभा का
(c) उपर्युक्त दोनों का
(d) उपर्युक्त में से किसी का नहीं
उत्तर-
(a) राज्यसभा का

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प्रश्न 95.
उपराष्ट्रपति अपना त्याग-पत्र किसे सौंपता है ?
(a) प्रधानमंत्री को
(b) राज्यसभा के उपसभापति को
(c) राष्ट्रपति को
(d) लोकसभा के अध्यक्ष को
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति को

प्रश्न 96.
राष्ट्रपति अपना कार्य किसकी सलाह और मंत्रणा से करता है ?
(a) राज्यपाल
(b) संघीय मंत्रिपरिषद
(c) उपराष्ट्रपति
(d) राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक कमेटी में ।
उत्तर-
(b) संघीय मंत्रिपरिषद

प्रश्न 97.
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होता है ?
(a) लोकसभा के प्रति
(b) राज्यसभा के प्रति
(c) जनता के प्रति
(d) सर्वोच्च न्यायालय के प्रति
उत्तर-
(a) लोकसभा के प्रति

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प्रश्न 98.
संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है ?
(a) लोकसभा के अध्यक्ष
(b) राज्यसभा के सभापति
(c) राष्ट्रपति
(d) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति

प्रश्न 99.
निम्नलिखित संस्थाओं में से कौन-सी देश के वर्तमान कानून में संशोधन कर सकती है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) राष्ट्रपति
(c) प्रधानमंत्री
(d) संसद
उत्तर-
(d) संसद

प्रश्न 100.
लोकसभा एवं विधानसभा द्वारा मंत्रिपरिषद् पर नियंत्रण रखने का निम्नलिखित में से कौन-सा साधन नहीं है ?
(a) अविश्वास प्रस्ताव
(b) कटौती प्रस्ताव
(c) हड़ताल एवं बंद का प्रस्ताव
(d) काम रोको प्रस्ताव
उत्तर-
(c) हड़ताल एवं बंद का प्रस्ताव

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प्रश्न 101.
राज्यों के विधानमंडल का स्वरूप केसा है ?
(a) केवल एक सदनात्मक
(b) केवल.द्विसदनात्मक
(c) एक सदनात्मक एवं द्विसदनात्मक दोनों का रूप
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) एक सदनात्मक एवं द्विसदनात्मक दोनों का रूप

प्रश्न 102.
निम्नलिखित में से किस राज्य में द्विसदनात्मक विधानमंडल नहीं है ?
(a) झारखंड
(b) बिहार
(c) उत्तर प्रदेश
(d) जम्मू-कश्मीर
उत्तर-
(a) झारखंड

प्रश्न 103.
अविभाजित बिहार में विधानसभा के सदस्यों की संख्या कितनी थी?
(a) 550
(b) 324
(c) 243
(d) 81
उत्तर-
(b) 324

प्रश्न 104.
निम्नलिखित में से कौन प्रशासनिक कार्य करता है ?
(a) विधायिका
(b) कार्यपालिका
(c) न्यायपालिका
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) कार्यपालिका

प्रश्न 105.
कार्यपालिका के रूप होते हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर-
(a) दो

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प्रश्न 106.
राष्ट्रपति निम्नलिखित में से किस कार्यपालिका के अंतर्गत आते हैं?
(a) स्थायी कार्यपालिका
(b) राजनैतिक कार्यपालिका
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) राजनैतिक कार्यपालिका

प्रश्न 107.
भारत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सही है ?
(a) यहाँ अर्द्धअध्यक्षात्मक कार्यपालिका है
(b) यहाँ अध्यक्षात्मक कार्यपालिका है
(c) यहाँ उपर्युक्त दोनों तरह की कार्यपालिका है
(d) यहाँ संसदीय कार्यपालिका है
उत्तर-
(d) यहाँ संसदीय कार्यपालिका है

प्रश्न 108.
भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति कौन थे ?
(a) एस. राधाकृष्णन
(b) बी. डी. जत्ती
(c) शंकर दयाल शर्मा
(d) हामिद अंसारी
उत्तर-
(a) एस. राधाकृष्णन

प्रश्न 109.
केंद्रीय सरकार का वास्तविक प्रधान निम्नलिखित में से कौन है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) उपराष्ट्रपति
(d) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर-
(a) प्रधानमंत्री

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प्रश्न 110.
निम्नलिखित में से कौन बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहे हैं ?
(a) कर्पूरी ठाकुर
(b) राम सुंदर दास
(c) लालू प्रसाद
(d) राम विलास पासवान
उत्तर-
(d) राम विलास पासवान

प्रश्न 111.
निम्नलिखित में कौन राजनैतिक कार्यपालिका का हिस्सा होता है ?
(a) गृहमंत्री
(b) सचिव
(c) निर्देशक
(d) जिलाधीश
उत्तर-
(a) गृहमंत्री

प्रश्न 112.
राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है ?
(a) 10 वर्ष
(b) 6 वर्ष
(c) 5 वर्ष
(d) कभी समाप्त नहीं होता है
उत्तर-
(c) 5 वर्ष

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प्रश्न 113.
निम्नलिखित में से कौन-सी शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त नहीं है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करना
(b) उपराष्ट्रपति की नियुक्ति करना
(c) अध्यादेश जारी करना
(d) धन विधेयक पेश करने की अनुमति प्रदान करना
उत्तर-
(b) उपराष्ट्रपति की नियुक्ति करना

प्रश्न 114.
राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन की घोषणा कौन करता है ?
(a) राज्यपाल
(b) मुख्यमंत्री
(c) राष्ट्रपति
(d) गृहमंत्री
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति

प्रश्न 115.
निम्नलिखित में से कौन संसद में धन विधेयक पेश करने की अनुमति प्रदान करता है ?
(a) वित्तमंत्री
(b) प्रधानमंत्री
(c) राष्ट्रपति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 5 संसदीय लोकतंत्र की संस्थाएँ

प्रश्न 116.
निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्ति नहीं
(a) खाद्यान्न का संकट
(b) राष्ट्रीय आपात
(c) राज्यों में संवैधानिक संकट
(d) वित्तीय संकट
उत्तर-
(a) खाद्यान्न का संकट

प्रश्न 117.
लोकतंत्र में विवादों के समाधान के लिए न्यायापालिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सही है ?
(a) न्यायाधीशों का मनमाना निर्णय
(b) कानून के शासन का सिद्धांत
(c) परिस्थिति की सिद्धांत के अनुसार निर्णय
(d) व्यक्ति की हैसियत के अनुसार निर्णय
उत्तर-
(b) कानून के शासन का सिद्धांत

प्रश्न 118.
न्यायपालिका की स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सही नहीं है?
(a) न्यायपालिका पर कार्यपालिका का नियंत्रण होना चाहिए
(b) न्यायाधीश बिना डर एवं भय के निर्णय करें
(c) न्यायापालिका की सरकार के विभागों से मुक्त होना चाहिए
(d) न्यायपालिका के निर्णय में किसी तरह का हस्तक्षेप न हो
उत्तर-
(a) न्यायपालिका पर कार्यपालिका का नियंत्रण होना चाहिए

प्रश्न 119.
राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
(b) मुख्यमंत्री
(c) राष्ट्रपति
(d) विधानसभा के सदस्य
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति

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प्रश्न 120.
राज्य मंत्रिपरिषद का प्रधान कौन होता है ??
(a) प्रधानमंत्री
(b) मुख्यमंत्री
(c) राज्यपाल
(d) केबिनेट मंत्री
उत्तर-
(b) मुख्यमंत्री

प्रश्न 121.
राज्य मंत्रिपरिषद का आकार कितना बड़ा होता है ?
(a) विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या का 15%
(b) विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या का 12%
(c) केंद्रीय मंत्रिपरिषद के बराबर
(d) कोई सीमा नहीं है
उत्तर-
(a) विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या का 15%

प्रश्न 122.
मुख्यमंत्री को शपथ निम्नलिखित में से कौन दिलाता ?
(a) राष्ट्रपति
(b) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
(c) राज्यपाल
(d) प्रधानमंत्री
उत्तर-
(c) राज्यपाल

प्रश्न 123.
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे ?
(a) श्रीमती इंदिरा गांधी
(b) लाल बहादुर शास्त्री
(c) गुलजारी लाल नंदा
(d) पं. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर-
(d) पं. जवाहरलाल नेहरू

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प्रश्न 124.
निम्नलिखित में से कौन मंत्रिपरिषद का कार्य नहीं है ?
(a) मंत्रियों की नियुक्ति करना
(b) राष्ट्रीय नीति निर्धारण करना
(c) राष्ट्रपति को सलाह देना
(d) राष्ट्रपति के लिए अभिभाषण तैयार करना
उत्तर-
(a) मंत्रियों की नियुक्ति करना

प्रश्न 125.
प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) राष्ट्रपति
(b) लोकसभा के अध्यक्ष
(c) राज्यसभा के सभापति
(d) भारतीय नागरिक
उत्तर-
(a) राष्ट्रपति

प्रश्न 126.
निम्नलिखित में से किसके लिए यह योग्यता निर्धारित है कि लोकसभा में बहुमत दल का नेता हो ?
(a) राष्ट्रपति
(b) उपराष्ट्रपति
(c) मंत्री
(d) प्रधानमंत्री
उत्तर-
(d) प्रधानमंत्री

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प्रश्न 127.
मंत्रिमंडल की बैठक कौन बुलाता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) राष्ट्रपति
(c) लोकसभा के अध्यक्ष
(d) उपराष्ट्रपति
उत्तर-
((a) प्रधानमंत्री

Bihar Board 9th Political Science Objective Answers Chapter 4 चुनावी राजनीति

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Political Science Objective Answers Chapter 4 चुनावी राजनीति

प्रश्न 1.
चुनाव क्यों जरूरी है ? इस बारे में कौन-सा वाक्य सही नहीं है ?
(a) लोग चुनाव में अपनी पसंद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं
(b) चुनाव लोगों को सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करता है
(c) चुनाव लोगों की आकांक्षाओं को फलीभूत होने का अवसर प्रदान करता है
(d) चुनाव न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करने का अवसर प्रदान करता है
उत्तर-
(d) चुनाव न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करने का अवसर प्रदान करता है

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प्रश्न 2.
भारत के चुनाव लोकतांत्रिक है, यह बताने के लिए इनमें से कौन-सा वाक्य उपर्युक्त कारण नहीं देता ?
(a) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता है
(b) भारत में चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष हैं
(c) भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र का हर व्यक्ति मतदाता है
(d) भारत में चुनाव हारने वाली पार्टियाँ जनादेश को स्वीकार कर लेती
उत्तर-
(a) भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा मतदाता है

प्रश्न 3.
एक विधानसभा का उम्मीदवार वैधानिक ढंग से अपने चुनाव अभियान में अधिकतम कितनी धनराशि खर्च कर सकता है ?
(a)2 लाख
(b) 5 लाख
(c) 10 लाख
(d) 8 लाख
उत्तर-
(c) 10 लाख

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प्रश्न 4.
लोकसभा एवं विधानसभा के उम्मीदवार होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
(a) 18 वर्ष
(b) 21 वर्ष
(c) 25 वर्ष
(d) 30 वर्ष
उत्तर-
(c) 25 वर्ष

प्रश्न 5.
बिहार विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
(a)20
(b) 25
(c) 40
(d) एक भी नहीं
उत्तर-
(c) 40

प्रश्न 6.
वर्तमान में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं
(a) एम. गोपालास्वामी
(b) के. सुब्बाराव
(c) नवीन चावला
(d) सुनील अरोड़ा
उत्तर-
(d) सुनील अरोड़ा

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प्रश्न 7.
वर्तमान समय में भारत के प्रधानमंत्री हैं
(a) सोनिया गाँधी
(b) पी. वी. नरसिम्हा राव
(c) राहुल गाँधी
(d) नरेन्द्र मोदी
उत्तर-
(d) नरेन्द्र मोदी

प्रश्न 8.
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रत्याशियों को नामांकन करते समय इनमें से कौन-सी बात शपथ पत्र में संलग्न करने का आदेश नहीं दिया है ?
(a) उम्मीदवार के विरुद्ध चल रहे गंभीर आपराधिक मामलों का विवरण
(b) उम्मीदवार और उसके परिवार के सदस्यों की सम्पत्ति एवं देनदारियों का ब्योरा
(c) उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता
(d) अपने परिवार के सदस्यों की योग्यता
उत्तर-
(d) अपने परिवार के सदस्यों की योग्यता

प्रश्न 9. .
लोकसभा में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या कितनी है ?
(a) 41
(b) 70
(c) 79
(d) 179
उत्तर-
(c)79

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प्रश्न 10.
लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था वाले देशों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सही नहीं है ?
(a) सभी लोगों को चुनाव लड़ने और मतदान करने का अधिकार
(b) चुनाव में विकल्प का होना
(c) नियंत्रित अंतराल पर निष्पक्ष चुनाव होना
(d) किसी एक पार्टी को मतदान करने पर मजबूर करना
उत्तर-
(d) किसी एक पार्टी को मतदान करने पर मजबूर करना

प्रश्न 11.
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति होती है- .
(a) राष्ट्रपति द्वारा
(b) प्रधानमंत्री द्वारा
(c) सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा
(d) इनमें किसी के द्वारा नहीं
उत्तर-
(a) राष्ट्रपति द्वारा

प्रश्न 12.
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता लोकतंत्र के लिए
(a) शुभ संकेत है
(b) अशुभ संकेत हैं
(c) खतरे की घंटी है
(d) इनमें कोई सही नहीं
उत्तर-
(a) शुभ संकेत है

प्रश्न 13.
भारत में प्रथम आम चुनाव संपन्न हुआ
(a) 1945 में
(b) 1947 में
(c) 1952 में
(d) 1950 में
उत्तर-
(c) 1952 में

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प्रश्न 14.
पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद कौन ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने दो बार (दूसरी बार ) इस पद पर आसीन हुए ?
(a) अटल बिहारी वाजपेयी
(b) मनमोहन सिंह
(c) मोरारजी देसाई
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) मनमोहन सिंह

प्रश्न 15.
भारत में निर्वाचन करानेवाली संस्था को कहा जाता है
(a) वित्त आयोग
(b) योजना आयोग
(c) सरकारिया आयोग
(d) निर्वाचन आयोग
उत्तर-
(d) निर्वाचन आयोग

प्रश्न 16.
भारत में लोकसभा का चुनाव कितने वर्षों पर होता है ?
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
उत्तर-
(c) 5

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प्रश्न 17.
आंध्र प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में
(a) कम है
(b) ज्यादा है
(c) बराबर है
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(b) ज्यादा है

प्रश्न 18.
नए परिसीमन के बाद लोकसभा में अनुसूचित जातियों के लिए – आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर हो गई है
(a) 70
(b) 80
(c) 84
(d) 90
उत्तर-
(c) 84

प्रश्न 19.
नए परिसीमन के बाद लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर हो गई है
(a) 35
(b) 37
(c) 47
(d) 57
उत्तर-
(c) 47

प्रश्न 20.
15वीं लोकसभा के लिए कितने सीटों पर चुनाव हुए ?
(a) 552
(b) 545
(c) 543
(d) 540
उत्तर-
(c) 543

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प्रश्न 21.
MLA कौन होता है ?
(a) विधानसभा के सदस्य
(b) विधानपरिषद के सदस्य
(c) लोकसभा के सदस्य
(d) राज्यसभा के सदस्य
उत्तर-
(a) विधानसभा के सदस्य

प्रश्न 22.
वर्तमान समय में लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए कितने सीट आरक्षित हैं ?
(a) 47 सीट
(b) 84 सीट
(c) 110 सीट
(d) एक भी सीट नहीं
उत्तर-
(b) 84 सीट

प्रश्न 23.
भारत में निम्नांकित में किस कारणवश चुनाव की आवश्यकता पड़ती है?
(a) सरकार की आय में वृद्धि के लिए
(b) अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए
(c) सरकारी नौकरी में जाने के लिए
(d) न्यायापालिका के कार्यों पर अंकुश लगाने के लिए
उत्तर-
(b) अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए

प्रश्न 24.
लोकतांत्रिक देशों में चुनावों के महत्त्व के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है ?
(a) अच्छे प्रतिनिधियों का चयन
(b) सरकार को वैधानिक मान्यता
(c) तानाशाह में वृद्धि
(d) शासन में भागीदारी
उत्तर-
(c) तानाशाह में वृद्धि

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प्रश्न 25.
निम्नांकित में किस कारक के आधार पर भारतीय निर्वाचन व्यवस्था को लोकतांत्रिक कहा जा सकता है ? ।
(a) दुनिया में सबसे अधिक मतदाता भारतवर्ष में है
(b) 18 वर्ष से अधिक उम्र का प्रत्येक व्यक्ति भारतवर्ष में मतदाता है
(c) प्रायः भारत में चुनाव में पराजित होनेवाली पार्टी देर-सवेर जनादेश को स्वीकार कर लेती है
(d) भारत में निर्वाचन व्यवस्था स्वतंत्र एवं निष्पक्षता की कसौटी पर खरी उतरी है
उत्तर-
(d) भारत में निर्वाचन व्यवस्था स्वतंत्र एवं निष्पक्षता की कसौटी पर खरी उतरी है

प्रश्न 26.
निम्नांकित में चुनाव आयोग की किन भूमिकाओं से आप सहमत नहीं है ?
(a) चुनाव में सरकारी मशीनरी (तंत्र) के दुरुपयोग पर रोकथाम हो
(b) फोटो पहचान पत्र एवं अन्य निर्धारित किए गए पहचानों के आधार पर ही मतदान कराने की व्यवस्था हो
(c) चुनाव आयोग को चाहिए कि वह मतदाताओं के साथ-साथ मतदान कर्मियों की सुरक्षा का भी पुख्ता प्रबंध करें।
(d) चुनाव आयोग को चाहिए कि वह राजनीति दलों के द्वारा उम्मीदवार तय करने में आवश्यकता हस्तक्षेप करें
उत्तर-
(d) चुनाव आयोग को चाहिए कि वह राजनीति दलों के द्वारा उम्मीदवार तय करने में आवश्यकता हस्तक्षेप करें

प्रश्न 27.
चुनाव आयोग (भारत में) स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन के लिए, इनमें से किन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर रहा है?
(a) चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करना
(b) चुनाव खर्च पर नकेल कसना
(c) राजनैतिक विज्ञापनों पर सेंसर लगाना
(d) आयोग ने गुजरात में 15 मतदान केंद्रों पर फिर से मतदान का आदेश दिया
उत्तर-
(c) राजनैतिक विज्ञापनों पर सेंसर लगाना

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प्रश्न 28.
निम्नांकित में कौन-सा कथन गलत है ?
(a) भारत में सत्ताधारी दल के लिए चुनाव जीतना बिल्कुल आसान है
(b) भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए चुनाव आयोग के पास पर्याप्त अधिकार है।
(c) स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव हो, इसके लिए जनता की भी. भागीदारी आवश्यक है
(d) भारत में होनेवाले चुनाव में आम लोगो को (जनता की) जबर्दस्त भागीदारी होती है
उत्तर-
(a) भारत में सत्ताधारी दल के लिए चुनाव जीतना बिल्कुल आसान है

प्रश्न 29.
शैतान सिंह नामक एक उम्मीदवार एक आपराधिक मामले में अदालती आदेश से जेल में कैद है। अदालती फैसले मे विलंब के कारण उसके उम्मीदवारी को वैध करार देना चुनाव आयोग की विवशता है। ऐसी विषम परिस्थिति में लोगों को निम्नांकित विकल्पों में से किसे चुनना चाहिए ?
(a) लोगों को चाहिए कि उस आपराधिक छवि के अपराध को माफ कर उसे वोट दे
(b) चुनाव के समय लोग उससे कोई बात ही न करे
(c) उसकी छवि आपराधिक होने के कारण लोगों को डर के मारे उसके पक्ष में मतदान करना चाहिए
(d) आपराधिक छवि होने के कारण उसका राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर सामूहिक बहिष्कार करना चाहिए, क्योंकि यदि ऐसे लोग सदन में जाएंगे तो लोकतंत्र कलंकित होगा।
उत्तर-
(d) आपराधिक छवि होने के कारण उसका राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर सामूहिक बहिष्कार करना चाहिए, क्योंकि यदि ऐसे लोग सदन में जाएंगे तो लोकतंत्र कलंकित होगा।

प्रश्न 30.
पंद्रहवीं लोकसभा का चुनाव बिहार में कितने चरणों में पूरा हुआ?
(a) दो
(b) चार
(c) तीन
(d) पाँच
उत्तर-
(b) चार

प्रश्न 31.
आगामी लोकसभा का चुनाव स्वतंत्र, स्वच्छ एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो, इसके लिए मतदाता को निम्नांकित विकल्पों में से किसका चयन करना होगा?
(a) स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखना चाहिए
(b) स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए राष्ट्रपति के पास आवेदन देना चाहिए
(c) निष्पक्ष एवं स्वच्छ जनमत का निर्माण करना चाहिए
(d) स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव कराने का दायित्व आँखें मूंदकर सरकार पर छोड़ देना चाहिए
उत्तर-
(c) निष्पक्ष एवं स्वच्छ जनमत का निर्माण करना चाहिए

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प्रश्न 32.
भारत में 15वाँ आम चुनाव कब संपन्न हुआ?
(a) 1979 में
(b) 1989 में
(c) 2004 में
(d) 2009 में
उत्तर-
(d) 2009 में

प्रश्न 33.
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल क्या है ?
(a)2 वर्ष
(b)5 वर्ष
(c) 6 वर्ष
(d) 8 वर्ष
उत्तर-
(c) 6 वर्ष

प्रश्न 34.
भारतीय निर्वाचन आयोग में कुल कितने चुनाव आयुक्त होते हैं ?
(a) 2
(b) 3
(c) 5
(d) 10
उत्तर-
(b) 3

प्रश्न 35.
भारतीय लोकसभा का प्रत्याशी अपने चुनाव अभियान के दौरान अधिक-से-अधिक कितनी धनराशि खर्च कर सकता है ?
(a) 5 लाख
(b) 15 लाख
(c) 20 लाख
(d) 25 लाख
उत्तर-
(d) 25 लाख

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प्रश्न 36.
लोकसभा के चुनाव हेतु संपूर्ण भारत को कितने निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटा गया है?
(a) 243
(b) 324
(c) 543
(d) 420
उत्तर-
(c) 543

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से कौन चुनाव सुधार के लिए आवश्यक सुझाव नहीं माना जा सकता है ?
(a) काले धन के प्रयोग का छूट
(b) अपराधियों को चुनाव लड़ने पर रोक
(c) राइट टू रिकॉल सिस्टम लागू करना
(d) राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण
उत्तर-
(a) काले धन के प्रयोग का छूट

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प्रश्न 38.
मतदाता सूची का निर्माण निम्नलिखित में से कौन करता है ?
(a) लोकसभा
(b) चुनाव आयोग
(c) सर्वोच्च न्यायालय
(d) परिसीमन आयोग
उत्तर-
(b) चुनाव आयोग

प्रश्न 39.
जो उम्मीदवार बिना पार्टी के चुनाव चिह्न और बिना पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ता है उसे क्या कहा जाता है ?
(a) दलीय उम्मीदवार
(b) मनोनीत उम्मीदवार
(c) निर्दलीय उम्मीदवार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(c) निर्दलीय उम्मीदवार

प्रश्न 40.
मतदान के बाद ई. वी. एम. या बैलेट बॉक्स को जिस स्थान पर रखा जाता है उसे क्या कहते हैं ?
(a) मतदान केंद्र
(b) चुनाव आयोग
(c) परिसीमन आयोग
(d) स्ट्रांग रूम
उत्तर-
(d) स्ट्रांग रूम

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प्रश्न 41.
‘चुनाव आयोग’ निम्नलिखित में से कैसी संस्था है ?
(a) राजनैतिक संस्था
(b) संवैधानिक संस्था
(c) सामुदायिक संस्था
(d) न्यायिक संस्था
उत्तर-
(b) संवैधानिक संस्था

प्रश्न 42.
निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य चुनाव आयोग का नहीं है ?
(a) राष्ट्रपति का चुनाव कराना.
(b) चुनाव आचार संहिता लागू करना
(c) चुनाव कार्य में लगे अधिकारियों पर नियंत्रण रखना
(d) चुनाव के समय पार्टी का प्रचार करना
उत्तर-
(d) चुनाव के समय पार्टी का प्रचार करना

प्रश्न 43.
निम्नलिखित में से कौन-सा लोकतांत्रिक चुनाव की शर्त नहीं हैं ?
(a) हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने की सुविधा हो
(b) हर व्यक्ति साक्षर हो
(c) चुनाव में विकल्प हो
(d) चुनाव स्वतंत्र. एवं निष्पक्ष हो
उत्तर-
(b) हर व्यक्ति साक्षर हो

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प्रश्न 44.
बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को लोकसभा के कितने सदस्यों को चुनने का अधिकार दिया गया है ?
(a) 85
(b) 80
(c) 55
(d) 50
उत्तर-
(b) 80

प्रश्न 45.
चुनाव में उम्मीदवारों को इनमें से कौन-सा कार्य करने की छूट प्राप्त है ?
(a) चुनाव प्रचार के लिए धर्म स्थल का उपयोग
(b) सरकारी वाहन का उपयोग करने की छूट
(c) विद्यालय के मैदान में सभा आयोजित करने की छूट
(d) चुनाव घोषणा के बाद बड़ी योजना का शिलान्यास
उत्तर-
(c) विद्यालय के मैदान में सभा आयोजित करने की छूट

प्रश्न 46.
भारत में मतदाता सूची में नाम होने के लिए न्यूनतम उम्र क्या है ?
(a) 21 वर्ष
(b) 18 वर्ष
(c) 25 वर्ष
(d) 30 वर्ष
उत्तर-
(b) 18 वर्ष

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प्रश्न 47.
उम्मीदवारों द्वारा चुनाव-प्रचार चुनाव के कितने घंटे पहले समाप्त हो जाता है ?
(a) 48 घंटे
(b) 24 घंटे
(c) 12 घंटे
(d) 72 घंटे
उत्तर-
(a) 48 घंटे

प्रश्न 48.
चुनाव आयोग के सदस्यों का कार्यकाल क्या है ?
(a) 50 वर्ष
(b) 60 वर्ष
(c) 62 वर्ष
(d) 65 वर्ष
उत्तर-
(c) 62 वर्ष

प्रश्न 49.
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है ?
(a) प्रधानमंत्री
(b) उपराष्ट्रपति
(c) राष्ट्रपति
(d) लोकसभाध्यक्ष
उत्तर-
(c) राष्ट्रपति

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प्रश्न 50.
जब लोग स्वयं शासन में भाग लेते हैं तो ऐसी शासन-व्यवस्था को कहते हैं
(a) प्रत्यक्ष लोकतंत्र
(b) अप्रत्यक्ष लोकतंत्र
(c) गैर लोकतंत्र
(d) इनमें से सभी
उत्तर-
(a) प्रत्यक्ष लोकतंत्र

प्रश्न 51.
लोकसभा एवं विधानसभा का चुनाव कितने वर्षों के अंतराल
पर होता है ?
(a) 6 वर्ष
(b) 10 वर्ष
(c) 5 वर्ष
(d) 8 वर्ष
उत्तर-
(c) 5 वर्ष

प्रश्न 52.
एकल निर्वाचन क्षेत्र में एक क्षेत्र से कितने उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं ?
(a) चार
(b) तीन
(c) दो
(d) एक
उत्तर-
(d) एक

प्रश्न 53.
निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित करने का आधार क्या होता है ?
(a) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या
(b) सरकार की इच्छा
(c) निर्वाचन आयोग की इच्छा
(d) राजनीतिक दलों की इच्छा
उत्तर-
(a) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या

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प्रश्न 54.
चुनाव के समय चुनाव आयोग के किन भूमिकाओं में असहमत हैं ?
(a) फोटो पहचान-पत्र एवं अन्य निर्धारित पहचानों के आधार पर ही चुनाव हो
(b) चुनाव में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग पर रोक लगाना
(c) चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवार तय करने में हस्तक्षेप करना चाहिए
(d) चुनाव आयोग मतदाता के साथ-साथ मतदान अधिकारियों की भी सुरक्षा करें
उत्तर-
(c) चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवार तय करने में हस्तक्षेप करना चाहिए

प्रश्न 55.
लोकतंत्र में फैसला किसके द्वारा लिए जाते हैं ?
(a) जनप्रतिनिधियों द्वारा
(b) न्यायाधीशों द्वारा
(c) पुलिस द्वारा
(d) अफसरों द्वारा
उत्तर-
(a) जनप्रतिनिधियों द्वारा

प्रश्न 56.
ई. वी. एम. क्या है ?
(a) एक कंप्यूटर है
(b) ब्लडप्रेशर मापने का मशीन है
(c) मतदान का मशीन है
(d) अपराध रोकने का मशीन है
उत्तर-
(c) मतदान का मशीन है

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प्रश्न 57.
निम्नलिखित में से कौन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की चुनौतियाँ नहीं हैं?
(a) रुपया-पैसा के बल पर चुनाव जीतना
(b) अपराधी पृष्ठभूमि के लोगों द्वारा चुनाव लड़ना
(c) नियमित अंतराल पर चुनाव होना
(d) राजनीतिक दलों पर पारिवारिक नियंत्रण रखना
उत्तर-
(c) नियमित अंतराल पर चुनाव होना

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 2 राजा, किसान और नगर : आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 2 राजा, किसान और नगर : आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 2 राजा, किसान और नगर : आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ

Bihar Board Class 12 History राजा, किसान और नगर : आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ Textbook Questions and Answers

उत्तर दीजिए (लगभग 100-150 शब्दों में)

प्रश्न 1.
आरम्भिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के प्रमाणों की चर्चा कीजिए। हड़प्पा के नगरों के प्रमाण से ये प्रमाण कितने भिन्न हैं?
उत्तर:
आरम्भिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के प्रमाण तथा हड़प्पा के नगरों से भिन्नता: आरम्भिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के प्रमाण स्वरूप अभिलेख, ग्रंथ, सिक्के तथा चित्र मिलते हैं। ये प्रमाण विभिन्न ऐतिहासिक पक्षों के बारे में पूर्ण जानकारी देने में असमर्थ हैं। 1830 सा०यु० में भारतीय अभिलेखों के अध्ययन की कुछ नई महत्त्वपूर्ण विधियाँ अस्तित्त्व में आईं।

ईस्ट इण्डिया कंपनी के एक अधिकारी जेम्स प्रिंसेप.ने प्राचीन शिलालेखों तथा सिक्कों में प्रयोग की गई ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों को पहली बार पढ़ा। इन अभिलेखों में पियदस्सी अर्थात् अशोक के विषय में वर्णन किया गया था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक भारत के महान् शासकों में से एक था।

यूरोपीय तथा भारतीय इतिहासकार अब विभिन्न भाषाओं में लिखे गए अभिलेखों तथा ग्रंथों की सहायता से उन महत्त्वपूर्ण वंशों के तिथिक्रम में इतिहास का वर्णन करने लगे जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में शासन किया।

इस प्रकार विद्वानों को प्राचीन भारतीय राजनीतिक इतिहास की खोज करने की नई दिशा मिली। इसी के परिणामस्वरूप 20वीं शताब्दी के आरम्भ तक प्राचीन भारत के राजनीतिक इतिहास की रूपरेखा सामने आई। इसके बाद विद्वानों ने राजनीतिक परिवर्तनों और आर्थिक तथा सामाजिक विकासों के बीच संबंध का पता लगाने की दिशा में कार्य किया। ज्ञात हुआ कि ऐसे संबंध परोक्षतः बने थे।

ये हड़प्पा नगरों के प्रमाणों से आरंभिक ऐतिहासिक नगरों के प्रमाण भिन्न थे। ऐसा इसलिए कि इन पर अंकित लिपि को पढ़ लिया गया है, इसलिए कुछ बातें स्पष्ट हो गयी हैं। हड़प्पा नगरों के प्रमाणों की लिपि पढ़ी नहीं जा सकी है। इसलिए स्पष्ट नहीं है। हड़प्पा से साक्ष्य भी कम ही प्राप्त हुए हैं।

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प्रश्न 2.
महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षणे का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षण:
1. बौद्ध धर्म और जैन धर्म के ग्रंथों में महाजनपदों या 16 राज्यों के नाम मिलते हैं। इन ग्रंथों में महाजनपदों के नाम आपस में नहीं मिलते फिर भी अवन्ति, वत्स, कोशल, मगध, कुरु तथा पंचाल जैसे महाजनपदों के नामों का कई बार उल्लेख हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि ये महाजनपद अन्य जनपदों से अधिक शक्तिशाली थे। यह सभी जनपद गंगा-यमुना की घाटियों में स्थित थे।

2.  इन महाजनपदों के इतिहास की पूर्ण जानकारी नहीं मिलती, तथापि इनसे छठी शताब्दी सा०यु०पू० में भारत की राजनीतिक स्थिति के बारे में कुछ अनुमान लगा सकते हैं। उस समय राजनीतिक एकता का अभाव था। इन 16 राज्यों के शासक आपस में लड़ते रहते थे। इन महाजनपदों की राजनीतिक उपलब्धियों के बारे में बहुत कम परंतु उनके शासन प्रबंध के विषय में पर्याप्त जानकारी मिलती है।

3. अधिकांश महाजनपदों के मुखिया राजा कहे गए हैं। इन जनपदों में से कई जनपदों को गण तो कई को संघ कहा जाता था। वस्तुत: इन राज्यों में सत्ता अल्प प्रभावशाली तथा शक्तिशाली लोगों के हाथों में केन्द्रित थी। इसको समूह शासन नाम दिया गया है। महावीर तथा बुद्ध दोनों ऐसे गणराज्यों के राजकुमार या युवराज थे। वज्जि संघ-जैसे कुछ राज्यों में, राजा ही संयुक्त रूप में भूमि आदि संसाधनों पर नियंत्रण रखते थे।

4. प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी और उसके आस-पास दुर्ग बने होते थे। नगरों के विकास, सैन्य प्रबंध तथा उच्च अधिकारियों के वेतन भुगतान हेतु संसाधनों की आवश्यकता होती थी।

5. लगभग छठी शताब्दी सा०यु०पू० के पश्चात् ब्राह्मणों ने संस्कृत भाषा के धर्मशास्त्रों की रचना का कार्य आरम्भ कर दिया था। इन धर्मशास्त्रों में शासकों तथा अन्य सामाजिक वर्गों के लिए नियम लिखे होते थे।

6. ये धर्मशास्त्र कृषकों, व्यापारियों तथा कारीगरों से कर तथा उपहार एकत्रित करने का अधिकार महाजनपद के शासक को देते थे। धन संग्रह करने के लिए पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करने की मनाही नहीं थी। धीरे-धीरे कुछ शक्तिशाली राज्यों ने स्थायी सेनाएँ तथा अधिकारियों की भर्ती कर ली। अन्य शासक अपनी आवश्यकतानुसार किसानों में से ही सैनिकों की भर्ती कर लेते थे।

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प्रश्न 3.
सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार कैसे करते हैं?
उत्तर:
इतिहासकारों द्वारा सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण:
इतिहासकार सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण करने के लिए विभिन्न प्रकार के ऐतिहासिक स्रोतों-साहित्य और पुरावस्तुओं का सहारा लेते हैं। पुरातत्त्व की खोज से पूर्व साहित्यिक ग्रन्थों के आधार पर इतिहास लिखा गया था। उदाहरण के लिए-आर्यों के जीवन का इतिहास वैदिक ग्रंथों के आधार पर पुनर्निर्मित किया गया है।

बौद्धकाल और जैनकाल का अनेक विवरण इस काल के ग्रंथों में वर्णित बातों के आधार पर दिया गया है। मौर्यकालीन जनजीवन की बहुत कुछ जानकारी बौद्ध और जैन ग्रंथों से होती है। भारत में समय-समय पर विदेशी यात्रियों का आगमन होता रहा है। उन्होंने अपने यात्रा विवरण में भारत के कई क्षेत्रों का वर्णन किया है।

उदाहरण के लिए-यूनानी यात्री मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में 302 सा०यु०पू० से 298 सा०यु०पू० तक रहा। उसने अपनी पुस्तक इंडिका में भारत के आम लोगों के जीवन का रोचक वर्णन किया है। कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र मौर्यकालीन जनजीवन का इतिहास प्रस्तुत करता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि इतिहासकार साहित्य के आधार पर सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण करते हैं।

पुरातात्विक साधन यथा-अभिलेख, सिक्के, मूर्तियाँ, स्मारक, भवनावशेष और मनके भी लोगों के जीवन का वर्णन करने में इतिहासकारों की मदद करते हैं। उदाहरण के लिए-कुषाण काल में सोने के सिक्के अधिक मिलने से ऐसा प्रतीत होता है कि सामान्य लोगों की आर्थिक दशा अच्छी थी। हड़प्पा के स्थलों से बैलगाड़ी के खिलौने मिलना इतिहासकारों के इस उल्लेख का आधार बनता है कि लोग परिवहन के साधन के रूप में बैलगाड़ी का प्रयोग करते थे।

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प्रश्न 4.
पाण्ड्य सरदार (स्रोत 3) को दी जानेवाली वस्तुओं की तुलना दंगुन गाँव (स्रोत 8) की वस्तुओं से कीजिए। आपको क्या समानताएँ और असमानताएँ दिखाई देती हैं?
उत्तर:
समानताएँ:
दोनों जगह दी गई सामग्रियों में फूल शामिल हैं। दोनों ही जगह दान में फूल दिए गए हैं।

असमानताएँ:
पाण्ड्य सरदारों को दी जाने वाली वस्तुएँ दंगुन गाँव की वस्तुओं से अधिक हैं। इसमें दैनिक जीवन के उपयोग की अधिक वस्तुएँ शामिल हैं। दंगुन गाँव में वस्तुओं की संख्या कम है। यहाँ प्रभावती गुप्त ने सम्पूर्ण गाँव की सम्पत्ति और करारोपण की व्यवस्था को भी दान में दे दिया है।

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प्रश्न 5.
अभिलेखशास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
अभिलेखशास्त्रियों की कुछ समस्याएँ –

  1. कई अभिलेखों के अक्षरों को हल्के ढंग से उत्कीर्ण किया गया है। इसीलिए समय के साथ वे अक्षर घिस भी गये हैं। उन्हें पढ़ने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  2. अनेक अभिलेखों के अक्षर लुप्त हो गये हैं। ऐसे अनेक प्रसंगों से माध्यम से जोड़कर पढ़ा जाता है।
  3. अभिलेखों में वर्णित बातों का अर्थ निकालना एक दुष्कर कार्य है, क्योंकि कुछ अर्थ किसी विशेष स्थान या समय से संबंधित होते हैं।
  4. अभिलेख हजारों की संख्या में प्राप्त हुए हैं परंतु उनमें से कुछ के अर्थ ही निकाले जा सके हैं और अधिकतर अभिलेख सुरक्षित भी नहीं हैं।
  5. प्रायः अभिलेखों में उन्हें तैयार करने वाले लोगों का ही उल्लेख होता है। इसलिए अन्य विवरण के लिए प्रत्यक्ष उपायों का सहारा लेना पड़ता है।

निम्नलिखित पर एक लघु निबंध लिखिए। (लगभग 500 शब्दों में)

प्रश्न 6.
मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए। अशोक के अभिलेखों में इनमें से कौन-कौन से तत्त्वों के प्रमाण मिलते हैं?
उत्तर:
मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षण एवं अशोक के अभिलेखों के तत्त्व:
1. केन्द्रीय प्रशासन:
केन्द्रीय प्रशासन के मुख्य अंग राजा, मंत्रिपरिषद् तथा उच्च सरकारी अधिकारी आदि थे। राजा सर्वेसर्वा होता था। सारा नागरिक एवं सैनिक प्रशासन उसी की इच्छानुसार चलता था। वह एक शानदार महल में बड़े ठाट-बाट से रहता था परंतु प्रजा की भलाई को भी कभी नहीं भूलता था। राजा को परामर्श देने के लिए एक मंत्री-परिषद् होती थी।

प्रत्येक मंत्री के पास कोई-न-कोई विभाग होता था। राजा तथा मंत्रियों की सहायता के लिए अध्यक्ष, अमात्य, राजुक और प्रादेशिक जैसे अनेक अधिकारी होते थे। नियुक्ति के बाद भी धम्म-महामात्त नाम के अधिकारी उनके कार्यों पर नजर रखते थे। ये सब अधिकारी बड़े चरित्रवान और ईमानदार होते थे।

2. प्रान्तीय प्रशासन:
इतने बड़े राज्य के कार्य को भली प्रकार चलाने के लिए देश को निम्नलिखित चार प्रान्तों में विभक्त किया गया था -(क) मध्य प्रान्त: इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। इस प्रान्त का कार्य राजा स्वयं चलाता था। (ख) उत्तर-पश्चिमी प्रान्त: इसकी राजधानी तक्षशिला थी। (ग) पश्चिमी प्रान्त: इसकी राजधानी उज्जैन थी। (घ) दक्षिणी प्रान्त: इसकी राजधानी स्वर्णगिरि थी।

ये प्रान्त गवर्नरों के अधीन होते थे जो प्रायः राजवंश से सम्बन्ध रखते थे। इन प्रांतीय गवर्नरों तथा अधिकारियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी। इस कार्य के लिए विशेष गुप्तचर छोड़ रखे थे जो राज्य में होने वाली प्रत्येक घटना की सूचना देते रहते थे। प्रान्त आगे जिलों में विभक्त थे जिनके अधिकारी को ‘स्थानिक’ कहते थे। इसके पश्चात् आजकल की तहसीलों की भांति मए गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट टू चार गाँव से लेकर दस गाँवों के ऊपर ‘गोप’ नामक अधिकारी नियुक्त किए थे। प्रत्येक गाँव का अधिकारी ‘ग्रामिक’ कहलाता था।

3. नगर प्रबंध:
मेगस्थनीज के वृत्तान्त से पता चलता है कि पाटलिपुत्र जैस बड़े नगरों के लिए विशेष नागरिक-प्रबंध की व्यवस्था की गई थी। इस नगर के लिए तीस सदस्यों की एक समिति थी, जो छ: बोड़ों में विभक्त की गई थी। प्रत्येक प्रबंध-बोर्ड में पाँच सदस्य होते थे। ये बोर्ड निम्न ढंग से अपना कार्य करते थे – (क) पहले बोर्ड का कार्य कला-कौशल की देखभाल करना, कारीगरों के वेतन नियत करना तथा दु:ख में उनकी सहायता करना आदि था।

(ख) दूसरे बोर्ड का कार्य विदेशियों की देखभाल करना, उनके लिए सुख सामग्री उपलब्ध कराना तथा उनकी निगरानी रखना आदि था। (ग) तीसरे बोर्ड का कार्य जन्म-मरण का हिसाब रखना था ताकि कर आदि लगाने तथा अन्य प्रबंध करने में सुविधा रहे। (घ) चौथे बोर्ड का कार्य व्यापार का प्रबंध करना, तौल में बाटों तथा माल के पैमाने की जांच-पड़ताल करना और कानून के विरुद्ध चलने वालों को दण्ड देना आदि था। (ड़) छठे बोर्ड का कार्य वस्तुओं की बिक्री पर लगे हुए विक्रय-कर को एकत्र करने का था।

4. आय एवं व्यय:
सरकार की आय का सबसे बड़ा साधन भूमि-कर था। जो प्रायः भूमि की उर्वरता के हिसाब से 1/4 से 1/6 भाग तक लिया जाता था। आय के अन्य साधन-खानों से कर, वनों से आय, सीमा से बाहर जाने वाली वस्तुओं पर कर, जलयानों पर कर और जुर्माना इत्यादि थे। इस प्रकार जो धन इकट्ठा होता था उसे राजा और दरबार, सेना के अधिकारियों के वेतन, अस्पतालों व सड़कों के बनाने, दान देने, सिंचाई के साधनों को सुधारने आदि पर व्यय किया जाता था। इस प्रकार आय और व्यय का ढंग बड़ा सुव्यवस्थित था।

5. न्याय प्रबंध:
मौर्य राजा न्याय की ओर विशेष ध्यान देते थे और स्वयं भी बड़ी लगन से न्याय करते थे। गाँव में पंचायतें न्याय का कार्य करती थीं और नगर में नगर-कचहरियाँ थीं। इनमें नागरिकों तथा अधिकारियों दोनों के मामलों की सुनवाई और न्याय होता था। इन स्थानीय न्यायालयों (Local Courts) की अपील प्रान्तीय न्यायालयों में की जाती थी।

इन प्रान्तीय न्यायालयों के ऊपर एक केन्द्रीय न्यायालय था जो पाटलिपुत्र में स्थित था। प्रान्तों की अपील राजा स्वयं सुना करता था। दण्ड बड़े कठोर थे। जुर्माना करना तथा कोड़े लगाने से लेकर हाथ-पांव आदि काट देना और जघन्य अपराध के लिए प्राण दण्ड देना प्रचलित था। अशोक के समय में दण्ड-व्यवस्था कुछ हल्की कर दी गई थी। न्याय प्रबंध इतना अच्छा था कि चोरी और अन्य अपराध बहुत कम हुआ करते। इस विषय में मेगस्थनीज भी लिखता है कि पारलिपुत्रं, जिसकी जनसंख्या कोई 6,00,000 थी, वहाँ 8 पौंड (लगभग 120 रुपये) से अधिक किसी भी दिन चोरी नहीं होती थी।

6. प्रजा हितकारी कार्य:
मौर्य सम्राटों ने प्रजा के हित को ध्यान में रखकर ही सभी कार्य संपन्न किए। देश को छोटे-छोटे भागों में बांटना, एक सुव्यवस्थित न्याय-प्रणाली चलाना, अधिकारियों को कटोर दण्ड देना, घूसखोर अधिकारियों पर जासूस छोड़ना और लोगों के नैतिक स्तर को ऊँचा करने के लिए धम्म-महामात्त नाम के अधिकारियों की नियुक्ति करना आदि इस बात को स्पष्ट करते हैं कि मौर्य शासकों ने जनहित को सर्वोपरि महत्व दिया। केवल यही नहीं, देश में सिंचाई के लिए तालाब और नहरें बनाई गईं, व्यापार की उन्नति के लिए सड़कें बनाई गई तथा उनके दोनों और छायादार वृक्ष लगाए गए ताकि प्रजा सुख से रह सके।

7. सैनिक प्रबंध:
चन्द्रगुप्त मौर्य के पास एक विशाल सेना थी। इसमें कोई 6,00,000 पैदल; 30,000 घुड़सवार; 9,000 हाथी और 8,000 रथ थे। प्रत्येक हाथी पर प्रायः चार व्यक्ति और रथ पर तीन व्यक्ति हुआ करते थे। इस प्रकार उसकी सेना 7,00,000 के लगभग थी। इस समस्त सेना को नगद वेतन दिया जाता था। केवल उन्हीं व्यक्तियों को सिपाही चुना जाता था जो बड़े वीर व धैर्यवान होते थे। सेना का नेतृत्व राजा स्वयं करता था। इतनी बड़ी सेना के प्रबंध के लिए तीस सदस्यों का एक पृथक् सेना-विभाग था। इस विभाग की छ: समितियाँ थीं जिनके अधिकार में –

  1. सामुद्रिक बेड़े
  2. यातायात
  3. पैदल सेना
  4. घुड़सवार सेना
  5. रथ तथा
  6. हाथियों आदि का प्रबंध होता था।
  7. सारी मौर्य सेना अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थी।

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प्रश्न 7.
यह बीसवीं शताब्दी के एक सुविख्यात अभिलेखशास्त्री डी.सी. सरकार का वक्तव्य है: भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिसका प्रतिबिंब अभिलेखों में नहीं है: चर्चा कीजिए।
उत्तर:
अभिलेख इतिहास के लिखित साधन हैं और इतिहास की रचना में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। अशोक ने अभिलेखों का पर्याप्त विस्तार किया। यह अशोक के जीवन, उसके अशोक के महान् कार्यों और धर्म तथा उपाधियों के बारे में बताते हैं। यह सब स्रोत “देवनाप्रिय” तथा “पियदस्सी” के नाम से अंकित हैं।

इन अभिलेखों से ज्ञात होता है कि उसका शासन-प्रबंध सहानुभूतिपूर्ण था। अपने चौथे अभिलेख में उसने कहा है कि “जिस प्रकार एक व्यक्ति अपने बच्चों के लिए एक सुयोग्य परिचारिका का प्रबंध करता है, उसी प्रकार मैं चाहता हूँ कि मेरे अधिकारी भी प्रजा के साथ सद्व्यवहार करें और सुयोग्य हों।” इन्हीं अभिलेखों से अशोक के राज्य विस्तार का पता चलता है। धार और अजमेर में तो चट्टानों पर संस्कृत नाटक तक खुदे मिले हैं। इलाहाबाद का अभिलेख हरिषेण ने लिखा था।

इसमें 33 पंक्तियाँ हैं। यह अभिलेख हमें समुद्रगुप्त की नियुक्ति, उसकी विजयों तथा उसके महान कार्यों के बारे में बताता है। महरौली के लौह स्तंभ में न केवल हमें चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के महान कार्यों का वर्णन मिलता है बल्कि यह भी ज्ञात होता है कि उस समय तक धातु कला काफी विकसित हो चुकी थी।

इस प्रकार इतिहास के निर्माण में अभिलेख अत्यन्त सहायक हैं। अभिलेखों के महत्त्व के बारे में स्मिथ (Smith) महोदय का कहना है, “प्रारम्भिक हिन्दू इतिहास में घटनाओं की तिथि का जो ठीक-ठीक ज्ञान अभी तक प्राप्त हो सका है वह प्रधानतः अभिलेखों के साक्ष्य पर आधारित है।”

प्रश्न 8.
उत्तर-मौर्यकाल के विकसित राजत्व के विचारों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
उत्तर-मौर्यकाल में विकसित राजत्व के विचार:
भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में चोल, चेर, और पाण्ड्य जैसी सरदारियों का उदय हुआ। सरदार एक शक्तिशाली व्यक्ति होता था। ये स्थायी और समृद्ध होते थे। इन राज्यों के विषय में तमिल संगम ग्रंथों से जानकारी मिलती है। व्यापार आदि से सरदारों को पर्याप्त आमदनी होती थी। इनमें मध्य एवं पश्चिम भारत के शासक सातवाहन और उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर और पश्चिम में शासन करने वाले मध्य मूल के शक शासक शामिल थे।

प्राचीन भारतीय राजाओं ने अपनी महत्त बढ़ाने के लिए अपना नाम देवी-देवताओं से जोड़ा। इसके अच्छे उदाहरण कुषाण शासक हैं। उन्होंने अपने सिक्कों एवं मूर्तियों के माध्यम से राजधर्म उत्कीर्ण कराए। मथुरा स्थित माट के एक देवस्थान पर कुषाण शासकों की एक विशाल मूर्ति स्थापित की गई है। ऐसी मूर्तियाँ अन्य कोई स्थानों पर भी दिखाई देती हैं। ऐसा अपनी महत्त बढ़ाने के लिए किया गया। प्रसिद्ध कुषाण शासक कनिष्क ने अपने नाम के आगे ‘देवपुत्र’ जोड़ा था। इस प्रकार राजत्व के विचार का निरंतर विकास हो रहा था।

चौथी शताब्दी के गुप्त सम्राटों के काल में राजत्व की नई विचारधारा पनपी। ये अपने को सम्राट कहते थे और इनके अधीन सामन्त होते थे। ये सम्राट सेना स्थानीय संसाधन के लिए सामंतों पर निर्भर थे। कभी-कभी सामन्त शासक पर भारी पड़ता था और शासक को हटाकर स्वयं सम्राट बन जाता था। गुप्त सम्राटों ने अपने नाम के सिक्के चलवाये, मुद्रायें बनवायी और प्रशस्तियाँ लिखवायीं। उन्होंने महाराजाधिराज जैसी बड़ी-बड़ी उपाधियाँ धारण की। प्रत्यागप्रशस्ति से समुद्रगुप्त के लिए लिखा गया है – “वे देवताओं में कुबेर, वरूण, इन्द्र और यम के तुल्य हैं।”

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प्रश्न 9.
वर्णित काल में कृषि के तौर-तरीकों में किस हद तक परिवर्तन हुए?
उत्तर:
कृषि के तौर-तरीकों में परिवर्तन:
उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज हो चुकी थी और सर्वप्रथम इसका प्रयोग हल के फाल और तीरों के फलक बनाने में किया गया। इससे कृषि के तौर तरीकों में भारी परिवर्तन हुए। छठी शताब्दी सा.यु.पू. से गंगा और कावेरी की घाटियों के उर्वर कछारी क्षेत्र में हल का प्रयोग बढ़ गया था। जिन क्षेत्रों में भारी वर्षा होती थी वहाँ उर्वर भूमि की जुताई लोहे के फाल वाले हलों से की जाने लगी। इसके अलावा गंगा घाटी में धान की रोपाई की वजह से उपज में भारी वृद्धि होने लगी। इससे पहले किसानों को पर्याप्त मेहनत करनी पड़ती थी।

यद्यपि लोहे के फाल वाले हल की वजह से फसलों की उपज बढ़ने लगी लेकिन ऐसे हलों का उपयोग उपमहाद्वीप के कुछ गिने-चुने भागों तक सीमित था। पंजाब और राजस्थान जैसी अर्धशुष्क जमीन वाले क्षेत्रों में लोहे के फाल वाले हल का प्रयोग 20 वीं शताब्दी में शुरू हुआ। पूर्वोत्तर और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले किसानों ने कुदाल का उपयोग किया क्योंकि ऐसे इलाकों के लिए कुदालों से खुदाई करनी अधिक उपयोगी थी।

इस युग में उपज बढ़ाने के लिए सिंचाई के विभिन्न साधनों का उपयोग किया गया। कृषकों ने कुँओं, तालाबों और कहीं-कहीं नहरों के माध्यम से भी खेती की सिंचाई की। व्यष्टि स्तर पर प्रत्येक किसान और कृषक समुदायों ने मिलकर सिंचाई के साधन विकसित किए। व्यक्तिगत रूप से तालाबों, कुँओं और नहरों जैसे सिंचाई साधन प्रायः राजा या प्रभावशाली लोगों ने विकसित किए। उनके इन कामों का उल्लेख आर्यलेखों में है। सुदर्शन झील का उल्लेख कई अभिलेखों में मिलता है।

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प्रश्न 10.
मानचित्र 1 और 2 की तुलना कीजिए और उन महाजनपदों की सूची बनाइए जो मौर्य साम्राज्य में शामिल रहे होंगे। क्या इस क्षेत्र में अशोक के कोई अभिलेख मिले हैं?
उत्तर:
मौर्य साम्राज्य में शामिल महाजनपद

  1. गांधार
  2. मगध
  3. काशी
  4. वत्स
  5. अवन्ति।

अशोक के अभिलेख: गांधार के तक्षशिला, काशी में सारनाथ, वत्स में कौशाम्बी आदि से अशोक के अभिलेख मिले हैं।

परियोजना कार्य (कोई एक)

प्रश्न 11.
एक महीने के अखबार एकत्रित कीजिए। सरकारी अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक कार्यों के बारे में दिये गये वक्तव्यों को काटकर एकत्रित कीजिए। समीक्षा कीजिए कि इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों के बारे में खबरों में क्या लिखा है? संसाधनों को किस प्रकार से एकत्र किया जाता है और परियोजनाओं का उद्देश्य क्या है? इन वक्तव्यों को कौन जारी रखता है और उन्हें क्यों और कैसे प्रसारित किया जाता है? इस अध्याय के चर्चित अभिलेखों के साक्ष्यों से इनकी तुलना कीजिए। आप इनमें क्या समानताएँ और असमानताएँ गते हैं?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 12.
आज प्रचलित पाँच विभिन्न नोटों और सिक्कों को इकट्ठा कीजिए। इनके दोनों ओर आप जो देखते हैं उनका वर्णन कीजिए। इन पर बने चित्रों, लिपियों और भाषाओं, माप, आकार या अन्य समानताओं और असमानताओं के बारे में एक रिपोर्ट तैयार कीजिए। इस अध्याय में दर्शित सिक्कों में प्रयुक्त सामग्रियों, तकनीकों, प्रतीकों, उनके महत्त्व और सिक्कों के संभावित कार्य की चर्चा करते हुए इनकी तुलना कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 12 History राजा, किसान और नगर : आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
1830 ई. में प्रिंसेप द्वारा लिपियों के अर्थ निकालने के क्या लाभ हुए?
उत्तर:

  1. इस खोज से आरम्भिक भारत के राजनीतिक इतिहास के अध्ययन को एक नई दिशा मिली।
  2. भारतीय और यूरोपीय विद्वानों ने उपमहाद्वीप पर शासन करने वाले प्रमुख राजवंशों की वंशावलियों की पुनर्रचना के लिए विभिन्न भाषाओं में लिखे अभिलेखों और ग्रंथों का उपयोग किया।

प्रश्न 2.
गण और संघ राज्यों में शासन कैसे चलता था?
उत्तर:

  1. गण और संघ राज्यों में कई लोगों का समूह शासन करता था।
  2. इस समूह का प्रत्येक व्यक्ति राजा कहलाता था। भगवान महावीर और भगवान बुद्ध इन्हीं गुणों से संबंधित थे।

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प्रश्न 3.
सा.यु.पु. छठी शताब्दी को परिवर्तनकारी काल क्यों माना जाता है?
उत्तर:

  1. इस काल में आरम्भिक राज्यों एवं नगरों का उदय हुआ। यह लोहे के प्रयोग और सिक्कों के विकास से सम्भव हुआ।
  2. इसी काल में बौद्ध तथा जैन सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ।

प्रश्न 4.
मगध नये-नये धार्मिक आन्दोलनों का केन्द्र क्यों बना?
उत्तर:

  1. उन दिनों मगध राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र था। यहाँ के शासकों द्वारा बौद्ध या जैन धर्म स्वीकार किए जाने की दशा में इन धर्मों के प्रचार-प्रसार की सम्भावना काफी अधिक थी।
  2. सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य केन्द्र भी मगध ही था। वहाँ से धर्म प्रचार करके आगे बढ़ना सुगम था। इस कारण मगध धार्मिक आन्दोलनों का केन्द्र बना।

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प्रश्न 5.
धर्मशास्त्र कब लिखे गये? इनका क्या महत्त्व है?
उत्तर:

  1. लगभग छठी शताब्दी सा.यु.पू. में धर्मशास्त्र नामक ग्रंथों की रचना शुरू की गई।
  2. इनमें शासक सहित अन्य के लिए नियमों का निर्धारण किया गया और यह अपेक्षा की जाती थी कि शासक क्षत्रिय वर्ण से ही बनाए जाएँ।

प्रश्न 6.
“पंचमार्कड या आहत मुद्रायें’ नामक पद का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर:
इन मुद्राओं पर कोई-न-कोई चिह्न अंकित होता था। कई बार इन पर शासक की आकृति, उनके वंश चिह्न और कई बार तिथि भी अंकित रहती थी। ऐसी पंचमाड या आहत मुद्रायें इतिहास को जानने में बड़ी उपयोगी सिद्ध होती है।

प्रश्न 7.
विवेचन करें कि छठी सदी सा.यु. से चौथी सदी तक नगर विकास के कौन-कौन से कारण थे?
उत्तर:

  1. बौद्ध काल में बड़े-बड़े राज्य अस्तित्व में आ चुके थे। उनकी राजधानियों का बड़े-बड़े नगरों के रूप में विकसित होना स्वाभाविक था।
  2. सिक्कों के आविष्कार ने व्यापार को प्रोत्साहन दिया और इस कारण भी अनेक व्यापारिक केन्द्र बड़े-बड़े नगरों में परिणित हो गए। ये नगर प्रायः नदियों के किनारे बसे हुए थे और जल-मार्ग द्वारा दूसरे नगरों से जुड़े हुए थे। इस व्यापार ने भी उन्हें वैभवशाली बनाने में बड़ी सहायता की।
  3. कुछ स्थान औद्योगिक इकाइयों के रूप में भी उभरे और शीघ्र ही बड़े नगरों में तब्दील हो गए थे।

प्रश्न 8.
‘उत्तरी काला पालिशदार अवस्था’ नामक पद स्पष्ट करें।
उत्तर:
एन.बी.पी. फेज या ‘उत्तरी काला पालिशदार अवस्था’ मिट्टी के बर्तन बनाने की उस अवस्था को कहते हैं जब चमकीले पालिशदार बर्तन धनी व्यक्तियों की खाने की मेजों को सजाते थे। ऐसी अवस्था भारत में छठी शताब्दी सा.यु.पू. में थी।

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प्रश्न 9.
‘धम्म’ शब्द का आशय 20-30 शब्दों में स्पष्ट करें।
उत्तर:
‘धम्म’ सामाजिक व्यवहार के उन नियमों को कहा जाता है जो नैतिकता पर आधारित होते हैं। इन्हें लोकाचार के नियम भी कहा जा सकता है। बड़ों का आदर करना, छोटों से प्यार करना आदि सभी आचार, विचार और व्यवहार के नियम इस कोटि में आते हैं। कलिंग की विजय के पश्चात् अशोक ने ऐसे ही ‘धम्म का प्रचार किया।

प्रश्न 10.
महावीर स्वामी अथवा जैन धर्म की शिक्षाओं का वर्णन करें।
उत्तर:
महावीर स्वामी ने लोगों को जीवन जीने का सरल मार्ग दिखाया। उनके अनुसार मनुष्य को त्रिरत्न अर्थात् शुद्ध चरित्र, शुद्ध दर्शन और शुद्ध आचरण का पालन करना चाहिए। उन्होंने मोक्ष-प्राप्ति के लिए लोगों को प्रेरित किया। उनका कहना था कि इसके लिए घोर तपस्या का मार्ग ही सर्वोत्तम मार्ग है। उनके अनुसार पशु, वायु, अग्नि तथा वृक्ष सभी वस्तुओं में आत्मा है और इन्हें कष्ट नहीं देना चाहिए।

उन्हें वेद-निहित, अनुष्ठान एवं कर्मकाण्ड, जाति-पाति या यज्ञ तथा बलि में विश्वास नहीं था। उनका विचार था कि अपने अच्छे या बुरे कर्मों के कारण मनुष्य जन्म लेता है और आत्मा को पवित्र रखकर ही वह मोक्ष प्राप्त कर सकता है। उन्होंने अपने अनुयायियों को बताया कि वे क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, चोरी, निन्दा आदि अनैतिक कामों से दूर रहें और सदाचारी बनें।

प्रश्न 11.
लिपि शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर:
वास्तव में ‘लिपि’ और ‘दिपी’ शब्दों का एक ही अर्थ है। अपने शिलालेखों में अशोक ने लिपि का प्रयोग किया जो सम्भवतः ईरानी शब्द ‘दिपि’ से ही लिया गया था। प्राचीन ईरानियों के लिए ‘दिपी’ का जो महत्त्व था वही भारतीयों के लिए ‘लिपि’ का था।

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प्रश्न 12.
कलिंग युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
अशोक ने कलिंग (या आधुनिक उड़ीसा) के साथ 261 सा.यु.पू. में एक युद्ध लड़ा। इस युद्ध के बड़े दूरगामी प्रभाव पड़े –

  1. इस युद्ध के विनाश को देखकर अशोक इतना विचलित हुआ कि उसने युद्ध का मार्ग सदा के लिए त्याग दिया और धर्म-विजय का गर्ग अपना लिया।
  2. अशोक अब बौद्ध धर्म का अनुयायी हो गया और इस धर्म का इतने बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया कि यह एक विश्व धर्म बन गया।

प्रश्न 13.
मौर्य वंश के पतन के दो मुख्य कारण लिखें।
उत्तर:

  1. अशोक ने कलिंग के युद्ध के पश्चात् जब बौद्ध धर्म को अपना लिया तो उसकी सारी गतिविधियाँ बंद-सी हो गईं। इस कारण मौर्य साम्राज्य की सीमाएँ अरक्षित हो गई।
  2. विदेशी आक्रमणकारियों ने विशेषकर हिन्द-यूनानियों और हिन्द-पार्थियनों ने, इस कमजोरी का लाभ उठाकर देश पर आक्रमण करने शुरू कर दिये। उनके भयंकर आक्रमण के सामने, सैनिक शक्ति में शिथिल, मौर्य साम्राज्य न टिक पाया।

प्रश्न 14.
सिकंदर भारत पर आक्रमण क्यों करना चाहता था?
उत्तर:

  1. इसका पहला कारण यह दिया जाता है कि सिकंदर एक महान् विजेता था जो भारत को जीत कर अपने नाम को चार चांद लगाना चाहता था।
  2. दूसरा कारण यह बताया जाता है कि वह भारतीय संस्कृति की महानता के विषय में बहुत कुछ सुन चुका था इसलिए वह स्वयं इस तथ्य की सत्यता को भारत आकर परखना चाहता था ।

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प्रश्न 15.
मनुस्मृति में सीमाओं का क्या महत्त्व बताया गया है?
उत्तर:

  1. मनुस्मृति आरम्भिक भारत का सबसे प्रसिद्ध विधिग्रंथ है।
  2. इसके अनुसार राज्य की सीमाओं की अनभिज्ञता से विश्व में विवाद होते हैं। सीमाओं की पहचान के लिए शासक के लिए शासक ने गुप्त निशान जमीन में गाड़कर रखने चाहिए।

प्रश्न 16.
राजगाह का क्या महत्त्व है?
उत्तर:

  1. राजगाह मगध की राजधानी थी। इस शब्द का शब्दिक अर्थ-‘राजाओं का घर’ है। यह आधुनिक बिहार के राजगीर का प्राकृत नाम है।
  2. पहाड़ियों के बीच बसा राजगाह एक किलेबंद शहर था। बाद में चौथी शताब्दी सा.यु.पू. में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया गया।

प्रश्न 17.
दक्षिण के सरदारों के क्या कार्य थे?
उत्तर:

  1. सरदार एक शक्तिशाली व्यक्ति होता था। उसका कार्य विशेष अनुष्ठान का संचालन करना, युद्ध के समय नेतृत्व करना और विवादों को सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाना आदि था।
  2. वह अपने अधीन एक लोगों से भेंट लेता था और अपने समर्थकों में प्राप्त भेंट का वितरण करता था। सामान्य रूप से एक सरदार के अधीन-कोई स्थायी सेना या अधिकारी नहीं होते थे।

प्रश्न 18.
यूनानी यात्री मेगस्थनीज द्वारा वर्णित सैन्य-प्रबंध के लिए जिम्मेदार छः उपसमितियों के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. नौसेना का संचालन करना।
  2. यातायात और खानपान व्यवस्था संभालना।
  3. पैदल सैनिकों का प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और युद्ध में संचालन करना।
  4. अश्वारोहियों का संचालन।
  5. स्थारोहियों का संचालन।
  6. हाथियों की सेना (गज-सेना) का संचालन।

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प्रश्न 19.
समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
भारत का नेपोलियन समुद्रगुप्त-समुद्रगुप्त ने मगध राज्य को शक्तिशाली बनाया तथा छोटे-छोटे राज्यों को जीतकर देश में राजनैतिक एकता की स्थापना की।

समुद्रगुप्त को महान् सैनिक सफलताओं के कारण डॉ. वी.ए. स्मिथ ने उसे ‘भारत का नेपोलियन’ कहा है। नेपोलियन ने लगभग सारे यूरोप को जीता था और समुद्रगुप्त ने भी सारे भारत को जीता था। भारत में कोई भी शासक उसकी सत्ता को चुनौती देने वाला न था।

प्रश्न 20.
मेगस्थनीज कौन था?
उत्तर:

  1. मेगस्थनीज यूनानी राजदूत था और चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था।
  2. उसने अपनी यात्रा का विवरण अपने ग्रंथ ‘इण्डिका’ में किया। इस ग्रंथ से चन्द्रगुप्त मौर्य और उसकी समकालीन शासन-व्यवस्था के विषय में पर्याप्त जानकारी मिलती है।

प्रश्न 21.
श्रेणी के क्या कार्य थे?
उत्तर:
प्रत्येक श्रेणी (गिल्ड) एक व्यवसायिक संगठन थी। यह जन-साधारण से धन लेती और ऋण देती थी। मंदिर, बाग, विश्राम गृह आदि भी यही श्रेणी लोगों के लिए बनवाती थी। वह सदस्यों की सुरक्षा भी करती थी।

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प्रश्न 22.
गुप्त वंश की जानकारी के मुख्य स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
इलाहाबाद और सांची के अभिलेख, भूमि अनुदान संबंधी दस्तावेज, सिक्के और फाह्यान एवं कालीदास की साहित्यिक कृतियाँ।

प्रश्न 23.
इलाहाबाद या प्रयाग-स्तम्भ अभिलेख का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
इलाहाबाद या प्रयाग का स्तम्भ अभिलेख गुप्तकाल का एक महान् ऐतिहासिक स्रोत है। इस अकेले स्रोत पर बहुत कुछ समुद्रगुप्त की महानता निर्भर करती है। इस अभिलेख की 33 लाइनें हैं जो संस्कृत भाषा में हैं। इस लेख के रचयिता समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण थे जिसने अपने आश्रयदाता की विजयों और सैनिक पराक्रमों का वर्णन किया है।

प्रश्न 24.
दिल्ली के लौह-स्तम्भ अभिलेख का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
दिल्ली में कुतुबमीनार के पास लौह-स्तम्भ पर किसी चन्द्र नामक राजा का अभिलेख खुदा हुआ मिला है। यह अभिलेख अब चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नाम से जोड़ा जाता है। इस अभिलेख से पता चलता है कि चन्द्र ने पश्चिमोत्तर दिशा और बंगाल में निरंतर विजयें प्राप्त की और अपने वंश की कीर्ति को चार-चाँद लगा दिये।

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प्रश्न 25.
समूह शासन या ओलीगार्की का क्या अर्थ है?
उत्तर:

  1. जहाँ सत्ता, पुरुषों के एक समूह के साथ में रहती है समूह शासन कहलाता है। गणराज्यों में इसी प्रकार की शासन व्यवस्था थी।
  2. यह प्राचीन भारत का प्रजातांत्रिक शासन था और शासन के सभी कार्य सर्वसहमति से कराए जाते थे।

प्रश्न 26.
सरदारी प्रथा क्या है?
उत्तर:

  1. सरदारी प्रथा चोल, चेर और पाण्ड्य राज्यों में प्रचलित थी। सरदार एक शक्तिशाली व्यक्ति होता था जिसका पद वंशानुगत भी हो सकता था और नहीं भी।
  2. सरदार के कार्यों में विशेष अनुष्ठान संपन्न करना/करवाना, युद्ध के समय नेतृत्व करना और विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता की भूमिका निभानी आदि शामिल हैं।

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प्रश्न 27.
‘धम्म’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:

  1. अनेक विद्वानों ने ‘धम्म’ का अर्थ अशोक के धर्म से लगाया है। अशोक ने अपने अभिलेखों के माध्यम से ‘धम्म का प्रचार किया।
  2. धम्म’ में बड़ों के प्रति आदर, सन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता, सेवकों और दासों के साथ उदार व्यवहार तथा दूसरे के धर्मों और परम्पराओं का आदर करना शामिल है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
महाजनपदों का महत्त्व बताइए।
उत्तर:
महाजनपदों का महत्त्व-प्राचीन भारतीय इतिहास में उपर्युक्त महाजनपदों का उत्थान अपना विशेष महत्त्व रखता है। सर्वप्रथम, इन महाजनपदों में राजतंत्रों के साथ-साथ गणतंत्रों का भी उत्थान हुआ। यहाँ का प्रमुख प्रबंधक प्रजातंत्रीय सिद्धांतों के अनुसार लोगों द्वारा चुना जाता था। राजतंत्र वाले महाजनपदों की शासन प्रणाली को देखने पर यह ज्ञात होता है कि वहाँ पर तानाशाह नहीं थे।

शासक प्रजा-सेवक होते थे और प्रजा की भलाई के कार्यों में लीन रहते थे। तीसरा महत्त्व यह था कि विभिन्न राजतंत्र और गणतंत्र धीरे-धीरे आपस में मिलते जा रहे थे और भारत एक अखंड राजनीतिक इकाई का रूप धारण करता जा रहा था। मगध शासकों ने विभिन्न राजनीतिक इकाइयों को जीतकर एक शक्तिशाली साम्राज्य की नींव रखी। इस तरह उन्होंने भारत को एक अखंड राजनीतिक इकाई का स्वरूप दिया।

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प्रश्न 2.
मगध साम्राज्य के शक्तिशाली होने के क्या कारण थे?
उत्तर:
मगध साम्राज्य के शक्तिशाली होने के निम्न कारण थे –
1. महत्त्वाकांक्षी शासक:
साम्राज्य विस्तार की अपनी महत्त्वाकांक्षा पूरी करने के लिए तत्कालीन शासकों ने विभिन्न ढंग अपनाये। बिम्बिसार ने पड़ोसी प्रदेशों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करके अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर लिया।

अजातशत्रु ने वैशाली और कोशल को अपनी शक्ति के बल पर हथिया लिया। महापद्मनन्द ने कोशल और कलिंग को हड़प लिया। साम, दाम, दण्ड, भेद सभी तरह की नीतियों का सहारा लेकर मगध का उत्थान किया गया।

2. प्राकृतिक सम्पदा:
मगध राज्य के प्राकृतिक साधन बड़े विशाल थे। मगध में लोहे. की खान प्रचुर मात्रा में रहने के कारण हथियार, उद्योग-धंधे, कृषि सम्बन्धी राज्य का विकास करना आसान हो गया।

3. अनुकूल स्थान पर राजधानी:
मगध की, एक ओर तो पहाड़ियों से घिरी राजधानी राजगृह थी, तो दूसरी ओर गंगा, गंडक और सोन के संगम पर स्थित राजधानी पाटलिपुत्र थी। इन तक आक्रमणकारी आसानी से नहीं पहुंच पाता था। प्राकृतिक सुरक्षा से परिपूर्ण ये राजधानियाँ भी मगध साम्राज्य के उत्थान का एक बड़ा कारण सिद्ध हुईं।

4. सैनिक शक्ति:
मगध की सेना में हाथी, घोड़े एवं रथ थे। हाथियों द्वारा शत्रु सेना के घोड़े रौंद दिए जाते थे जिसके कारण उनमें भगदड़ मच जाती थी। किलों के विशाल दरवाजों को तोड़ने में भी हाथियों की सहायता ली जाती थी। रथों और घोड़ों का उचित प्रयोग काफी लाभकारी सिद्ध होता था।

5. उपजाऊ भूमि:
गंगा के आसपास स्थित होने के कारण मगध राज्य में उपजाऊ भूमि की कमी नहीं थी। अत; देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में कृषि का बड़ा सहयोग था। इससे राज्य में समृद्धि की लहर दौड़ गई।

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प्रश्न 3.
सा.यु.पू. छठी शताब्दी में वत्स राज्य के उत्थान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वत्स राज्य-इस राज्य में आधुनिक इलाहाबाद के आसपास के प्रदेश शामिल थे। यह राज्य बड़ा वैभवशाली और सम्पन्न था। इसकी राजधानी कौशाम्बी में थी। यह नगर यमुना नदी के तट पर एक प्रसिद्ध व्यापारिक केन्द्र था। बुद्ध के समय इस राज्य पर उदयन नामक शासक शासन करता था। उसे मगध के शासक अजातशत्रु और अवन्ति के राजा प्रद्योत से युद्ध करने पड़े।

उदयन ने मगध के राजा से विवाह-सम्बन्ध कायम किए। अवन्ति के शासक प्रद्योत ने इस पर आक्रमण किया किन्तु वह असफल रहा और उसे अपनी लड़की का विवाह उदयन ई करना पड़ा। शुरू में उदयन बौद्ध धर्म का विरोधी था परंतु बाद में उसने इस धर्म को अपना कर राज्य-धर्म घोषित किया। उदयन के उत्तराधिकारी दुर्बल शासक होने के कारण यह राज्य उसकी मृत्यु के पश्चात् अवन्ति राज्य में विलीन हो गया।

प्रश्न 4.
बौद्ध युग में आर्थिक उन्नति के क्या कारण थे?
उत्तर:
बौद्ध युग में आर्थिक उन्नति के कारण –

  1. बौद्ध युग में वाराणसी, कौशाम्बी, पाटलिपुत्र, कपिलवस्तु, अयोध्या, तक्षशिला तथा वैशाली जैसे नगरों का विकास होने के कारण न्यापार की उन्नति हुई।
  2. उस काल में धातु के सिक्के चलाये गये।
  3. उस काल में स्थल तथा जल दोनों मार्गों से व्यापार होता था। लंका, वर्मा, जावा, सुमात्रा और मलाया आदि देशों के साथ जलमार्ग से व्यापार होता था।
  4. विभिन्न व्यवसाय वाले शिल्पकारों ने अपने आपको विभिन्न संधों में संगठित कर लिया था।
  5. कृषि-योग्य भूमि की कुल आय का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था।
  6. धान के अलावा जौ, दालें, ज्वार, गन्ना, बाजरा तथा कपास की फसलें भी उगायी जाती थीं।

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प्रश्न 5.
बुद्ध के समय मुख्य गणराज्यों की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुख्य गणराज्यों की दशा:
बुद्ध कालीन मुख्य गणराज्यों में कपिलवस्तु के शाक्य, पावा और कुशीनगर के मल्ल, वैशाली के लिच्छवि आदि विशेषकर प्रसिद्ध थे। इन राज्यों के राजनीतिक इतिहास के विषय में काफी कम जानकारी मिली है। शाक्य लोगों का राज्य हिमालय की तराई में नेपाल और भारत की सीमा के आस-पास स्थित था।

महात्मा बुद्ध भी इसी वंश के थे। ये लोग काफी समय से प्रजातंत्र के सिद्धांतों के अनुसार राज्य करते रहे। अन्त में कोशल के शासक विरुद्ध के समय इस राज्य को कोशल साम्राज्य में मिला लिया गया। मल्ल लोगों की दो शाखाएँ थीं-एक पावा के स्थान से (जहाँ महावीर स्वामी की मृत्यु हुई थी) और दूसरी कुशीनगर के स्थान से (जहाँ महात्मा बुद्ध का देहांत हुआ था) राज्य करती थी। अन्त में मल्ल लोगों का साम्राज्य अजातशत्रु के समय मगध राज्य में मिला लिया गया।

प्रश्न 6.
जैन धर्म और बौद्ध धर्म में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैन धर्म और बौद्ध धर्म में अंतर:
1. प्रचार संगठन में अन्तर:
बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जो संगठन बनाया गया, वह जैन धर्म के संगठन से कहीं अधिक अच्छा था। मठों में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं का काम सुव्यवस्थित होता था। वे प्रायः एक स्थान से दूसरे स्थान को घूमा करते थे।

प्रचार की व्यवस्था ठीक न होने के कारण जैन धर्म बहुत फैल न सका जबकि बौद्ध धर्म आज भी संसार के बड़े धर्मों में गिना जाता है। जैन धर्म के भिक्षु अपने कार्य में इतने चतुर नहीं थे और न उनका धर्म बौद्ध धर्म की भाँति एक प्रचारक धर्म था।

2. वेष-भूषा में अंतर:
जैनमत वालों के दो बड़े अंग हैं-श्वेताम्बर (Svetambaras) जो श्वेत रंग के कपड़े पहनते हैं और दिगम्बर (Digambaras) जो बिल्कुल नग्न रहते हैं। इनका नग्न रहना अध्यात्मिक उन्नति में एक बड़ी बाधा रही। बौद्ध मत के भिक्षु नग्न नहीं रहते।

3. विभिन्न धार्मिक ग्रन्थ:
बौद्धों के अपने अलग धर्म ग्रन्थ हैं, जिन्हें वे त्रिपिटक अथवा तीन टोकरियाँ (Triptakas or Three Baskets) कहते हैं, जबकि जैनियों का धर्म ग्रंथ अंग (Angas) कहलाता है।

4. भिन्न पूज्य व्यक्ति:
बौद्धों के पूज्य व्यक्ति बोधिसत्व (Bodhisattvas) हैं परंतु जैनियों के उपास्य व्यक्ति 24 तीर्थंकर (Trithankaras) हैं।

5. मोक्ष के विभिन्न साधन:
जीवन में मानसिक शांति पाने के लिए बौद्धमत वाले बुद्ध के बताए हुए अष्टमार्ग पर चलते हैं जबकि जैनमत वाले अपने त्रिरत्नों का अनुपालन करते हैं।

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प्रश्न 7.
अशोक के धर्म (धम्म) के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अशोक ने अपनी जनता के नैतिक उत्थान के लिए लोगों के सामने कुछ नैतिक नियम रखे। इन्हीं नियमों के समूह को धम्म कहा जाता है। अशोक द्वारा प्रतिपादित धम्म के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित थे –

  1. अशोक का मुख्य सिद्धांत था-बड़ों का आदर। उसके अनुसार शिष्यों को अपने गुरुजनों का मान करना चाहिए। सभी को ऋषियों, ब्राह्मणों तथा वृद्ध पुरुषों का आदर करना चाहिए।
  2. इस धम्म के अनुसार बड़जें को परिवार के सदस्यों, सम्बन्धियों, सेवकों, निर्धनों तथा दासों के साथ अच्छा और नम्र व्यवहार करना चाहिए।
  3. प्रत्येक मनुष्य को अपने बुरे कर्मों को फल अपने अगले जन्म में भुगतान पड़ता है। मनुष्य ने हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए।
  4. अहिंसा अशोक धम्म का मूल मंत्र है। इसके अनुसार किसी भी जीव को मन, वचन तथा कर्म से कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए।
  5. सभी मनुष्यों को समय-समय पर अपने कृत कार्यों का विश्लेषण करना चाहिए।
  6. ईर्ष्या, क्रोध, अहंकार और झूठ पाप है। मनुष्य को इन पापों से दूर रहना चाहिए।

प्रश्न 8.
अजातशत्रु की विजयों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अजातशत्रु (Ajatsatru,495 to 462 B.C.E.):
अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् अजातशत्रु मगध के सिंहासन पर 395 सा०यु०पू० के लगभग बैठा। उसने बौद्ध ग्रन्थों के अनुसार लगभग 32 वर्ष अर्थात् 462 सा०यु०पू० तक राज्य किया। अजातशत्रु एक बड़ा सफल तथा महत्त्वाकांक्षी राजा था जिसने राज्य का विस्तार करने में कोई कसर न छोड़ी।

1. अजातशत्रु की विजयें:
सबसे पहले अजातशत्रु को कोशल के राजा प्रसेनजित (Prasenjit) के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करनी पड़ी। प्रसेनजित ने काशी प्रदेश पहले मगध के शासक बिम्बिसार (अजातशत्रु के पिता) को दिया था लेकिन बिम्बिसार की मृत्यु के पश्चात् उसको पुनः अपने राज्य में मिला लिया था। युद्ध का मुख्य कारण यही बना।

इस युद्ध में कोशल के शासक प्रसेनजित की पराजय हुई, परंतु अजातशत्रु ने इस शत्रुता को एक सफल कूटनीतिज्ञ की भाँति मित्रता में बदल लिया। प्रसेनजित ने अपनी पुत्री का विवाह अजातशत्रु से कर दिया और अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त काशी का प्रदेश भी उसे दहेज में दे दिया। इस प्रकार अपने पिता की भाँति अजातशत्रु ने भी विवाह सम्बन्धों से अपनी शक्ति को बहुत बढ़ाया।

2. अजातशत्रु की सबसे बड़ी विजय लिच्छवियों (Lichchhavis) के लगभग 36 राज्यों के संघ को जीतने की थी। इस कार्य को पूरा करने में लगभग 16 वर्ष (484 से 468 सा०यु०पू० तक) लग गए। इस संघ को पराजित करना कोई सरल कार्य नहीं था, क्योंकि एक तो वे लड़ाके और दृढ़ स्वभाव के थे और दूसरा उनमें बड़ी एकता थी।

अजातशत्रु इन सब कठिनाइयों को अच्छी प्रकार जानता था। उसने बड़ी सावधानी से युद्ध की तैयारी की। सबसे पहले उसने विश्वसनीय मंत्री वस्सकरा (Vassakara) को लिच्छिवि लोगों में फूट डालने के लिए भेज दिया जो अपने कार्य में तीन वर्ष पश्चात् सफल हुआ और इस प्रकार उन लोगों की एकता जाती रही। दूसरे, अजातशत्रु ने लिच्छिवि प्रदेश के पास गंगा नदी के तट पर पाटलिपुत्र के नए नगर की नींव रखी ताकि उन लोगों पर सुगमता से आक्रमण किया जा सके।

तीसरे, मगध-शासक ने इस युद्ध में कई नये ढंग के अच्छे अस्त्रों का प्रयोग किया। इस प्रकार अजातशत्रु अपने उद्देश्य में सफल हुआ। लिच्छिवि लोगों के सारे-के-सारे प्रदेश को मगध राज्य में मिला लिया गया। अजातशत्रु का यश इस विजय से चारों और फैल गया। अवन्ति का सुप्रसिद्ध शासक प्रद्योत अजातशत्रु की बढ़ती हुई शक्ति को देखकर ईर्ष्या करने लगा, परंतु वह अजातशत्रु के विरुद्ध कुछ भी करने में असमर्थ था, क्योंकि अजातशत्रु अब बहुत शक्तिशाली हो चुका था। इस प्रकार अपनी विजयों से अजातशत्रु ने ममध राज्य की सीमाओं का बहुत विस्तार किया।

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प्रश्न 9.
शिलाओं पर उत्कीर्ण अशोक के राज्यादेशों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शिलाओं पर उत्कीर्ण राज्यादेश:
शिलाओं पर उत्कीर्ण राज्यादेश चार प्रकार के मिले हैं –

(क) इनमें सबसे प्रसिद्ध शिला-राज्यादेश हैं जो शाहवाजगढ़ी (पेशावर जिला), मनसेरा (जिला हजारा), गिरनार (काठियावाड़), मासकी (मैसूर), दौली तथा जुगादा (कलिंग प्रदेश), कालसी (जिला देहरादून) आदि स्थानों पर मिले हैं। इनमें अशोक की धर्म-यात्राओं, अहिंसा नीति, धर्म के नियमों, धर्म-महामान्यों की नियुक्ति जैसे विषयों पर लिखा गया है।

(ख) दूसरे प्रकार के शिलालेख दो लघु राज्यादेशें (The Two Minor Rock Edicts) के नाम से प्रसिद्ध हैं। ये संसराम (पूर्वी बंगाल), रूपनाथ (मध्य प्रदेश), बैरात (राजस्थान) इत्यादि अनेक स्थानों पर पाए गए हैं। इनमें अशोक ने बौद्ध धर्म पर अपनी निष्ठा (विश्वास) प्रकट की है।

(ग) तीसरे प्रकार के दो शिला लेख कलिंग राज्यादेश (Two Kalinga Edicts) कहलाते हैं। क्योंकि ये दोनों कलिंग प्रदेश (दौली और जोगादा आदि) में पाए गए हैं। इनमें अशोक के प्रान्तीय राज्य-प्रबंध का वर्णन है।

(घ) चौथे प्रकार का लेख भाबरू राज्यादेश (The Bhabru Edicts) के नाम से प्रसिद्ध है। यह राजस्थान में स्थित एक शिला पर अंकित है। इस लेख में अशोक ने भिक्षुओं के नियमों की विवेचना की है।

प्रश्न 10.
मौर्य काल में भाषा और लिपि के क्षेत्र में क्या प्रगति हुई है?
उत्तर:
मौर्य काल में शिक्षित वर्ग की भाषा संस्कृत और आम-बोलचाल की भाषा पाली थी। अशोक ने पाली भाषा को राजभाषा बना दिया और अपने शिलालेखों में भी इसका प्रयोग किया। इन कारणों से इस भाषा का भी इस काल में बड़ा विकास हुआ। इस काल में दो लिपियों का प्रयोग होता था-ब्राह्मी लिपि और खरोष्टी लिपि। खरोष्टी लिपि का प्रयोग अशोक ने उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त के शिलालेखों में किया । यह लिपि दायें से बायें लिखी जाती थी।

इस काल में अनेक उत्तम ग्रन्थों की रचना हुई। चन्द्रगुप्त के प्रधानमंत्री चाणक्य ने संस्कृत भाषा में राजनीति के सुप्रसिद्ध ग्रन्थ ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की। इसमें उसने राजनीति एवं शासन-सम्बन्धी सिद्धांतों का प्रतिपादन किया। इसकी तुलना मैक्यावली (Micheavelli) के ग्रन्थ ‘प्रिन्स’ (Prince) के साथ की जाती है।

वात्सायन ने ‘कामसूत्र’ की रचना की इसी युग में की थी। इसी युग में गृहसूत्र, धर्मसूत्र और वेदांगों की रचना हुई-ऐसा विद्वानों का मत है। इस काल में संस्कृत व्याकरण पर पाणिनी ने ‘अष्टाध्यायी’ नामक ग्रंथ लिखा। अन्य दो और पतञ्जलि उत्तर-मौर्य युग में हुए।

मौर्यकाल में बौद्ध और जैन साहित्य का भी काफी विकास हुआ। अशोक ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र में तीसरा बौद्ध सम्मेलन आयोजित कराया। इसी काल में बौद्ध धर्म के त्रिपिटिक ग्रंथों का संकलन किया गया। प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान् तिस्स ने ‘कथावथु’ नामक ग्रंथ की रचना भी इसी काल में की। जैन साहित्य का भी काफी विकास हुआ। प्रसिद्ध जैन विद्वान-भद्रबाहु तथा प्रभव ने ग्रंथों की रचना की।

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प्रश्न 11.
मौर्य साम्राज्य के महत्त्व का आकलन कीजिए।
उत्तर:
मौर्य साम्राज्य का महत्त्व –

  1. भारतीय इतिहास ही नहीं, विश्व इतिहास में मौर्य साम्राज्य का बहुत अधिक महत्त्व है। ब्रिटिश काल में भारत एक औपनिवेशिक देश था। ऐसे में मौर्य साम्राज्य इतिहासकारों के लिए उत्साहवर्धक था। भारत में महाजनपद रूप से गणतंत्र पद्धति का यह पहला साम्राज्य था।
  2. मौर्यकालीन पुरातत्त्व और मूर्तियों ने सिद्ध कर दिया है कि चौथी-तीसरी सदी सा०यु०पू० में भारत में एक साम्राज्य मौजूद था।
  3. अशोक के अभिलेख अन्य देशों से भिन्न थे। इनमें संदेश लिखे थे।
  4. अशोक एक चक्रवर्ती सम्राट था। इससे राष्ट्रवादी नेताओं को बहुत प्रेरणा मिली।
  5. मौर्य साम्राज्य में कुछ कमियाँ रहने के कारण यह साम्राज्य मात्र 150 वर्ष तक ही चल पाया और इसका विस्तार भी सम्पूर्ण उपमहाद्वीप में नहीं था।

प्रश्न 12.
पाण्ड्य चेर और चोल राज्य के अन्तर्गत वाणिज्य केन्द्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तीनों ओर समुद्र से घिरा होने के कारण पाण्ड्य, चेर और चोल जैसे सुदूर, दक्षिणी राज्यों के शासकों का शुरू से ही सामुद्रिक गतिविधियों के प्रति बड़ा अनुराग रहा। उनकी आय का एक बड़ा साधन व्यापार से होने वाली आय थी।

यह व्यापार उत्तर के मगध साम्राज्य और रोमन साम्राज्य के बीच होता था। चेर, चोल और पाण्ड्य राजाओं के काल में कई स्थान वाणिज्य केन्द्रों के रूप में उभर कर सामने आये। विशेषकर चोल राज्य में स्थित उरैयुर (Uraiyur), पुहार या कावेरीपट्टनम (Puhar or Kaveripattanam), पाण्ड्य राज्य में स्थित मदुरै (Madurai), तथा चेर राज्य में स्थित मुजिरी (Muzairis) (ट्रांगनोर) महत्त्वपूर्ण वाणिज्य-केन्द्र था।

ऐसे वाणिज्य-केन्द्र गर्म मसालों, विशेषकर काली मिर्च तथा सूती कपड़े, मलमल और रेशम के ऊपर तरह-तरह की नक्काशीदार बुनाई के लिए बहुत प्रसिद्ध थे। ये प्रसिद्ध वाणिज्य-केन्द्र दोनों उत्तर और रोमन साम्राज्य से अपने व्यापारिक सम्बन्धों के कारण बड़े समृद्ध बन गये। रोमन साम्राज्य का बहुत सा सोना, अनेक भारतीय वस्तुओं के बदले भारत आने लगा। इसके परिणामस्वरूप दक्षिणी राज्य उत्तरोत्तर धनी बनते चले गये।

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प्रश्न 13.
भारत पर सिकंदर के आक्रमण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1. भारत में थोड़ा समय ठहरना:
सिकंदर भारत में केवल 19 महीने रहा और यह सारा समय उसने लगभग लड़ने में व्यतीत किया। लड़ाई के वातावरण में भारतवासी यूनानियों को और यूनानी भारतवासियों को अच्छी प्रकार न समझ सके। ऐसी अवस्था में भारत पर यूनानी सभ्यता का प्रभाव पड़ना लगभग असंभव था।

2. केवल सीमावर्ती आक्रमण:
सिकंदर भारत के आन्तरिक भागों तक नहीं जा सका। उसका आक्रमण सीमा पर की गई डकैती जैसा था। इस प्रकार सिकंदर के आक्रमण का कोई विशेष प्रभाव पड़ने की सम्भावना बहुत कम थी।

3. मौर्य वंश के उदय में सहायक:
सिकंदर के आक्रमण से पंजाब की रियासतें एवं लड़ाकू जातियाँ अब इतनी दुर्बल हो गई कि चन्द्रगुप्त मौर्य उन्हें आसानी से पराजित कर पाया। यदि ऐसा न होता तो चन्द्रगुप्त को उन्नति करने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता क्योंकि अनेक राजाओं से लड़ना पड़ता।

4. भारतीय एकता के कार्य में सहायता:
रियासतों तथा लड़ाकू जातियों को सिकंदर द्वारा कुचले जाने का एक अन्य प्रभाव यह भी हुआ कि भारतीय एकता की स्थापना करने तथा एक शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित करने में काफी आसानी रही।

5. यूरोपीय देशों से प्रत्यक्ष सम्बन्ध:
सिकंदर के आक्रमण ने पूर्व और पश्चिम राज्यों के मध्य सम्पर्क बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण कार्य किया। अब लोगों को चार मार्गों का पता चल गया जिनसे भारतीय व्यापारी, कारीगर तथा धर्म प्रचारक अन्य देशों को गए और अन्य देशों के लोग भारत आए। इस प्रकार भारत और यूरोप के व्यापारिक सम्बन्ध भी पहले से अब काफी अच्छे हो गए।

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प्रश्न 14.
गुप्तकालीन कला, साहित्य और विज्ञान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गुप्तकालीन कला, साहित्य और विज्ञान:
गुप्त सम्राट कला, साहित्य और विज्ञान के पोषक थे। कला के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी प्रशंसनीय उपलब्धियाँ रही हैं। वास्तुकला के क्षेत्र में उन्होंने अनेक मंदिरों एवं भवनों का निर्माण करवाया। मथुरा का शिव मंदिर और देवगढ़ इसी काल में बनाया गया।

गुप्तकाल में निर्मित अजन्ता की गुफायें विश्व प्रसिद्ध हैं। गुप्तकालीन मठ तथा स्तूप भी भवन निर्माण कला के उत्तम उदाहरण हैं। इसी के साथ मूर्तिकला, चित्रकला, संगीतकला और मुद्राकला आदि की भी खूब उन्नति हुई। प्रस्तर मूर्तियों में बुद्ध, बोधिसत्व, विष्णु, शिव और सूर्य आदि की मूर्तियाँ कलात्मकता की दृष्टि से श्रेष्ठ हैं।

गुप्तकाल में साहित्य की भी खूब उन्नति हुई। गुप्तकालीन कालिदास के ग्रन्थ-अभिज्ञान शाकुन्तलम् मेघदूत और कुमारसम्भव, विशाखादत्त का देवीचन्द्रगुप्तम्। भास का स्वप्नवासवदत्ता आदि प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं। गुप्तकाल में लिखे गये सभी नाटक सुखान्त हैं।

विज्ञान और गणित के क्षेत्र में गुप्तकाल की उपलब्धियाँ महान् हैं। दशमलव पद्धति का जन्म इसी काल में हुआ। आर्यभट्ट उस काल का एक ज्योतिषी एवं गणितज्ञ था। उसने पता लगाया कि पृथ्वी गोल है तथा अपनी धूरी पर सूर्य के चारों ओर घुमती है।

प्रसिद्ध ज्योतिषी वराहमिहिर ने (वृहद्संहिता) और योगमाया जैसे अनेक प्रसिद्ध ग्रन्थ लिखे। आयुर्वेद के क्षेत्र में नागार्जुन ने रसायनशास्त्र की रचना की। गुप्तकाल में धातु कर्म काफी विकसित था। नालन्दा से प्राप्त बुद्ध की तांबे की मूर्तियाँ अत्यन्त आकर्षक हैं। दिल्ली में महरौली स्थित लोहे का स्तम्भ भी धातुकला एवं इंजीनियरिंग का एक आकर्षक नमूना है। इस प्रकार गुप्तकाल में कला, साहित्य एवं विज्ञान की अभूतपूर्व उन्नति हुई।

प्रश्न 15.
गुप्तकालीन सामाजिक एवं आर्थिक जीवन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गुप्तकालीन भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ:
गुप्तकाल में ब्राह्मणों का महत्त्व बढ़ गया था। उन्हें राजाओं से पर्याप्त भूमि अनुदान प्राप्त हुआ। वर्ण-संकर के कारण अनेक जातियों और उपजातियों का जन्म हुआ।

विदेशियों को क्षत्रिय वर्ण में रखा गया। भूमि अनुदान द्वारा पिछड़े लोग उच्च वर्ण और कबायली निम्नवर्ग में शामिल हो गये। शूद्रों में ‘चाण्डाल’ नामक नई अछूत जाति बनी। उन्हें नगर से बाहर रहना पड़ता। गुप्तकाल में स्त्रियों की दशा पतनोन्मुखी थी। वे उच्च शिक्षा नहीं प्राप्त कर सकती थीं। बाल-विवाह का प्रचलन था और स्त्रियों का अधिकार केवल स्त्री-धन (वस्त्र और आभूषण) तक सीमित जाति बनी थी। उच्च वर्ण के लोग सभी प्रकार से सुखी थे।

आर्थिक जीवन:
गुप्तकाल का आर्थिक जीवन सुखी और सम्पन्न था। गुप्त शासकों ने सर्वाधिक स्वर्ण-मुद्रायें जारी की। इस काल में तांबे की बहुत कम मुद्रायें मिलती हैं। भारत का रेशम व्यापार बंद हो गया था। इस काल में कृषि की उन्नति हुई परंतु किसानों से बड़े पैमाने पर पेगार लिया जाता था। अनेक क्षेत्रों में परती भूमि का उपयोग किया गया। आंतरिक व्यापार विकसित था।

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प्रश्न 16.
‘पेरिप्लस ऑफ एरीथ्रियन सी’ का लेखक कौन है? उसने व्यापार के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:
पेरिप्लस ऑफ एरीशियन सी:

  1. पेरिप्लस ऑफ एरीथियन सी का लेखक एक यूनानी समुद्री यात्री था।
  2. उसने समुद्र द्वारा होने वाले विदेशी व्यापार दर्शाने के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की सूची तैयार की थी।
  3. वह यह दिखाना चाहता था कि भारत से काली मिर्च तथा दाल-चीनी जैसे गर्म मसाले निर्यात किये जाते थे।
  4. इनके बदले में पुखराज, मूंगे तथा हीरे जैसी बहुमूल्य वस्तुओं का आयात किया जाता था।

प्रश्न 17.
भारत के राजनैतिक इतिहास के निर्माण में जेम्स प्रिसेंप का क्या योगदान है?
उत्तर:
जेम्स प्रिसेंप का योगदान –

  1. जेम्स प्रिसेंप ईस्ट इण्डिया कंपनी के एक अधिकारी थे। उन्होंने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ निकाला। इन लिपियों का प्रयोग प्रारम्भिक अभिलेखों और सिक्कों में किया गया है।
  2. उन्होंने यह जानकारी प्राप्त की कि अभिलेखों और सिक्कों पर पियदस्सी अर्थात् सुन्दर मुख – आकृति वाले राजा का नाम लिखा है। कुछ अभिलेखों में राजा का नाम अशोक भी लिखा था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक सर्वाधिक लोकप्रिय शासकों में से एक था।
  3. प्रिसेंप की इस खोज से आरम्भिक भारत के राजनीतिक इतिहास के अध्ययन को नई दिशा मिली, क्योंकि भारतीय और यूरोपीय विद्वानों ने उपमहाद्वीप पर शासन करने वाले प्रमुख राजवंशों की पुनर्रचना के लिए विभिन्न भाषाओं में उत्कीर्ण अभिलेखों और ग्रंथों का उपयोग किया।
  4. इस प्रकार 20वीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों तक उपमहाद्वीप के राजनैतिक इतिहास का ढाँचा तैयार हो गया।

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प्रश्न 18.
छठी शताब्दी सा.यु.पू. के गणराज्यों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
छठी शताब्दी सा.यु.पू. के गणराज्य:
1. छठी शताब्दी सायु०पू० में निम्नलिखित गणराज्य थे:

  • (क) कुशीनारा के मल्ल
  • (ख) पावा के मल्ल
  • (ग) कपिलवस्तु के शाक्य
  • (घ) रामग्राम के कोलिय
  • (झ) वैशाली के लिच्छवि।

2. इन राज्यों की शासन पद्धति राजतंत्रीय राज्यों (महाजनपदों) से भिन्न थी। इनमें कोई राजा नहीं होता था। शासन सत्ता लोगों द्वारा चुने गये किसी मुखिया के हाथ में होती रहती। इनका पद पैतृक नहीं था।

3. सरकार का सारा कार्य चुने गए सदस्य आपसी परामर्श से करते थे।

4. छठी शताब्दी का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गणराज्य वज्जियों का था। यह राज्य आठ गणों का एक संघ था जिनमें से लिच्छवी गण बहुत ही महत्त्वपूर्ण था।

प्रश्न 19.
अशोक को ‘महान्’ क्यों कहा जाता है? अथवा, अशोक का इतिहास में क्या स्थान है?
उत्तर:
इतिहास में अशोक का स्थान –

  1. अशोक न केवल भारत का अपितु विश्व का भी एक महान् सम्राट माना जाता है। उसमें मनुष्यता कूट-कूट कर भरी थी और उसने प्रजा तथा मानव सेवा के लिए हर उपाय किये। बह लोगों को धार्मिक तथा नैतिक उपदेश देने में जुट गया। संसार में शायद ही किसी सम्राट ने ऐसा किया हो।
  2. अशोक एक विशाल साम्राज्य का राजा था। उसका साम्राज्य पूर्व में बंगाल से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान तक और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक विस्तृत था।
  3. अशोक ने बौद्ध धर्म को विश्व के लगभग सभी देशों में फैला दिया। एक छोटे से धर्म को विश्व धर्म बना देने वाले व्यक्ति को महान् कहना उचित ही है।
  4. अशोक एक सहनशील सम्राट था और सभी धर्मों का आदर करता था।
  5. अशोक अपनी प्रजा को अपनी संतान के समान समझता था। राज्य की ओर से अनाथों तथा विधवाओं को विशेष सुविधा दी जाती थी। उसने पशुओं की रक्षा के लिए भी अस्पताल खुलवाये।

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प्रश्न 20.
चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन प्रबंध की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन प्रबंध –

  1. केन्द्रीय शासन का मुखिया स्वयं सम्राट होता था। उसकी शक्तियाँ असीम थी। उसकी सहायता के लिए कई मंत्री होते थे।
  2. सम्पूर्ण मौर्य साम्राज्य चार प्रान्तों में विभाजित था प्रांत के मुखिया को कुमार कहते थे। वह प्रायः राज घराने का ही कोई व्यक्ति होता था।
  3. नगरों का शासन नगराध्यक्ष के हाथ में होता था। बड़े-बड़े नगरों के प्रबंध के लिए 30-30 सदस्यों की परिषदें थीं।
  4. प्रत्येक परिषद् पाँच-पाँच सदस्यों के छः बोर्डों में विभाजित थी। गाँवों का शासन पंचायतों के हाथ में था।
  5. न्याय के लिए दीवानी और फौजदारी अदालतें थीं। प्रजा के हित की ओर विशेष ध्यान दिया जाता था।
  6. चन्द्रगुप्त मौर्य का सैनिक संगठन भी उच्च कोटि का था। सेना में 6 लाख पैदल, 36 हजार घुड़सवार 9 हजार हाथी और 8 हजार रथ शामिल थे।

प्रश्न 21.
अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए कौन-कौन से कार्य किये?
उत्तर:
अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए किये ये कार्य:

  1. कलिंग युद्ध के पश्चात् अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया और प्रचार के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया।
  2. उसने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करने के साथ ही उनका भी पालन किया। ये सिद्धांत जनता के कल्याण से सम्बन्धित थे।
  3. उसने बौद्ध धर्म के नियमों को स्तभों, शिलाओं तथा गुफाओं पर खुदवाया । ये नियम आम बोलचाल की भाषा में खुदवाये थे, ताकि साधारण लोग भी इन्हें पढ़ सकें।
  4. बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अनेक स्तूप और बिहार बनवाये जो बौद्ध धर्म के प्रचार केन्द्र बन गये। स्तूप महात्मा बुद्ध की याद दिलाते थे जबकि बिहार में बौद्ध अनुयायी निवास करते थे तथा बौद्ध शिक्षा ग्रहण करते थे।
  5. वह विहारों और बौद्ध भिक्षुओं की सहायता भी करता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
बौद्धयुगीन व्यापार एवं वाणिज्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बौद्धयुगीन व्यापार एवं वाणिज्य:

व्यावसायिक संघ और श्रेणियाँ:
इस काल की एक मुख्य विशेषता यह भी थी कि भिन्न-भिन्न व्यवसाय करने वालों या शिल्पकारों ने अपने-आपको विभिन्न संघ में संगठित कर रखा था। एक ही धंधा करने वालों का प्रायः अपना अलग शिल्प-संघ या श्रेणी होती थी। बौद्ध साहित्य में इस प्रकार की अनेक श्रेणियों के उल्लेख मिलते हैं।

प्रत्येक श्रेणी का अपना अलग अध्यक्ष होता था जो ‘प्रमुख’, ‘ज्येष्ठक’ या ‘श्रेष्ठिन’ के नाम से पुकारा जाता था। इस अध्यक्ष का समाज में बड़ा सम्मान था। विभिन्न व्यावसायिक संघ या श्रेणियाँ अपने सदस्यों के पारस्परिक झगड़ों को निपटाती थी और उनके माल के निर्माण और क्रय-विक्रय में सहायता देती थी।

व्यापार और वाणिज्य:
उस समय व्यापार जल और थल दोनों मार्गों से होता था। अपने सामान की बिक्री के लिए व्यापारियों ने बड़े-बड़े बाजार बना रखे थे। कुछ व्यापारी अपना सामान बैलगाड़ी, ऊँटों अथवा घोड़ों की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी ले जाते थे। ऐसे व्यापारी चोर-डाकुओं से बचने के लिए प्रायः कारवाँ (Caravan) के रूप में चलते थे। कई बार कुछ राज्य कारवाँ के साथ सशस्त्र सैनिक भी भेज देते थे।

बौद्ध साहित्य से पता चलता है कि उन दिनों भारत के व्यापारिक संबंध लंका, वर्मा, जावा, सुमात्र, मलाया, अरब और कई पाश्चात्य देशों से भी थे। भारत से जिन वस्तुओं का निर्यात होता था उनमें-सूती, ऊनी तथा रेशमी वस्त्र, कंबल, कालीन, औषधियाँ, इत्र, तेल, हाथी-दाँत का सामान, मोती, रत्न आदि वस्तुएँ विशेष उल्लेखनीय हैं। उस समय के प्रसिद्ध बन्दगाह-भृगुकच्छ (आधुनिक भडोंच), सुपारक (आधुनिक सुपारा) और ताम्रलिप्ति (पश्चिम बंगाल में स्थित तामलुक) आदि थे।

शिल्पकारों की भांति व्यापारियों ने भी अपने-आपको व्यापारिक संघों में संगठित कर रखा था। प्रायः सबसे धनी व्यापारी अध्यक्ष पद को ग्रहण करता था और उसे ‘श्रेष्ठिन’ या ‘सेठी’ कहा जाता था।

सिक्कों का आरम्भ:
वैदिक युग में लेन-देन में प्रायः चीजों का आदान-प्रदान ही होता था परंतु बौद्धकाल में मौद्रिक विनिमय ने स्थान ले लिया था। उस समय की कुछ प्रमुख मुद्राओं के नाम बौद्ध साहित्य में इस प्रकार दिये गये हैं-काकणिक, माषक, अर्द्धमाषक, पद, अर्द्धपद, कहापण (कर्षापण) तथा अर्द्धकर्षाण आदि।

ये सिक्के ताँबे और चाँदी आदि के होते थे। सोने के सिक्के भी थे जिन्हें निक्ख (या निष्क) और सुवण्ण (या सुवर्ण) कहा जाता था। इस समय ब्याज पर धन देने की प्रथा भी चल पड़ी थी और हुण्डियों तथा ऋण-पत्रों का प्रयोग भी होने लगा था।

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प्रश्न 2.
अशोक के राज्यादेशों और शिलालेखों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
अशोक के राज्यादेशों और शिलालेखों का महत्त्व:
अशोक के शिलालेख और राज्यादेश इतिहासकारों के लिए अमूल्य वस्तु हैं क्योंकि उनसे उसके विषय में बहुत सी बातों का पता चलता है। संभव है कि इन लेखों के बिना हमें अशोक के बारे में बहुत कम मालूम होता।

इनके विषय में ठीक ही कहा गया है, ये अभिलेखों के अनोखे संग्रह ही हैं जो अशोक की आन्तरिक भावनाओं और आदर्शों को हमारे सामने ला देते हैं और सदियों के बारे में भी सम्राट के लगभग वही शब्द हमारे कानों में गूंजने लगते है।” इन राज्यादेशों से हमें निम्नलिखित आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त होती हैं:

1. अशोक का राज्य विस्तार:
अशोक के बहुत-से लेख सीमांत प्रदेशों से मिले हैं। इनसे उसके साम्राज्य में सम्मिलित प्रदेशों और उनकी सीमाओं की जानकारी मिलती है।

2. अशोक का व्यक्तिगत धर्म:
इन्हीं लेखों से हमें यह भी पता चलता है कि अशोक का धर्म क्या था? अशोक का पशुओं का वध रोकना, महात्मा बुद्ध से सम्बन्धित सभी स्थानों की यात्रा करना, अन्य देशों में धर्म प्रचारक भेजना और एक धर्म रक्षक की भाँति भिक्षुओं के लिए नियम बनाना आदि सब बातों का हमें इन्हीं राज्यादेशों से पता चलता है।

3. अशोक का विश्व धर्म:
इसके अतिरिक्त इन्हीं लेखों से उस धर्म का पता चलता है, जिसे अशोक संसार के सामने रखना चाहता था। बड़ों का आदर करना चाहिए, छोटों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, सत्य बोलना चाहिए, दान देना चाहिए आदि गुणों का हमें इन राज्योदेशों से पता चलता है जो अशोक के प्रचारित धम्म के मुख्य सिद्धांत थे।

4. अशोक के राजत्व के आदर्श:
अशोक के शिलालेखों या राज्यादेशों से उसके राजत्व के आदर्श का भी पता चलता है। अशोक का आदर्श लोगों पर शासन करना नहीं वरन् उनकी सेवा करना तथा उनमें नैतिकता का संचार करना था।

अशोक ने किस प्रकार एक पिता की भाति अपनी प्रजा पर राज्य किया, किस प्रकार उनके लिए कुएँ बनवाए, सरायं बनवाईं, छायादार वृक्ष लगवायें, अस्पताल बनवाये, अधिकारियों को लोक सेवा का पाठ पढ़ाया, आदि सब बातों का ज्ञान हमें इन्हीं राज्यादेशों से ही होता है।

5. अशोक का चरित्र:
अशोक के चरित्र पर भी इन शिलालेखों से पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। इन लेखों से हमें पता चलता है कि किस प्रकार वह हर समय लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहता था और उनके लिए केवल इस लोक में ही नहीं वरन् परलोक में भी सुख-समृद्धि की कामना करता था।

6. मौर्य कला:
ये राज्यादेश बड़ी-बड़ी शिलाओं, स्तम्भों तथा गुफाओं पर खुदे हुए थे। इतने बड़े और भारी स्तम्भों को इतनी दूर किस प्रकार ले जाया गया होगा-यह आज भी आश्चर्य में डाल देने वाली बात है। पत्थरों को काटकर बनाए गए भिन्न-भिन्न पशु-पक्षी आज भी अपनी चमक बरकरार रखे हुए हैं।

7. शिक्षा प्रचार:
सारे देश में पाए गए ये राज्यादेश सर्व साधारण के पढ़ने के लिए थे। इन्हें देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अशोक के समय लोग काफी पढ़े-लिखे होंगे और शिक्षा का प्रचार भी काफी हुआ होगा।

8. प्रचलित भाषा:
ये लेख संस्कृत भाषा में न होकर प्राकृत (लोगों की बोल-चाल की भाषा) में हैं। इनसे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उन दिनों प्राकृत भाषा ही जन-साधारण की भाषा रही होगी।

9. अशोक का अन्य देशों से सम्बन्ध:
अशोक का अन्य देशों के साथ बड़ा मैत्रीपूर्ण व्यवहार था, इसका ज्ञान भी हमें राज्यादेशों से ही मिलता है।

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प्रश्न 3.
मेगस्थनीज ने भारत के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:
मेगस्थनीज का विवरण:
मेगस्थनीज एक यूनानी इतिहासकार था जो यूनानी शासक सेल्यूकस की ओर से चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा गया था। वह कोई पाँच वर्ष (302 साव्यु०पू० से 298 सान्यु०पू० तक) भारत में रहा।

उसने भारत का वृत्तान्त अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘इण्डिका’ (Indica) में लिखा है। इस पुस्तक का विशेष ऐतिहासिक महत्त्व है। इससे तीसरी शताब्दी सा०यु०पू० की राजनीतिक एवं सामाजिक अवस्थाओं के सम्बन्ध में बड़ी जानकारी प्राप्त होती है।

1 राजा के विषय में:
मेगस्थनीज ने राजा के विषय में बहुत-कुछ लिखा है। वह लिखता है कि राजा बड़ी शान से रहता था और उसका राजमहल अपने ढंग का एक अद्वितीय सुन्दर महल था। राजा महल के एक कमरे में दो रातें इकट्ठी नहीं बिताता था। वह बहुत कम लोगों से मिलता-जुलता था और केवल निम्नलिखित चार कार्यों के लिए महल छोड़ता था:

  • (क) युद्ध में जाने के लिए
  • (ख) न्याय करने के लिए
  • (ग) यज्ञ या हवन के लिए तथा
  • (घ) शिकार अथवा भ्रमण के लिए।

राजा की देख-रेख के लिए गुप्तचर नियुक्त थे। इन गुप्तचरों में स्त्रियाँ अधिक थी। राजा अपने प्रधानमंत्री चाणक्य (कौटिल्य) का बहुत आदर करता था, जो महल के पास ही एक झोपड़ी में रहता था।

2. सैनिक संगठन के विषय में:
चन्द्रगुप्त की एक बड़ी विशाल सेना थी जिसकी संख्या लगभग सात लाख थी। जिसमें 6,00,000 पैदल; 30,000 घुड़सवार; 9,000 हाथी और लगभग 8,000 रथ थे। हर एक रथ में 3 व्यक्ति होते थे। मेगस्थनीज लिखता है कि समस्त सेना की व्यवस्था तीस सदस्यों की एक प्रथक् समिति करती थी। सेना-विभाग के छ: उप-विभाग थे। इनके अधिकार में –

  • पैदल सेना
  • घुड़सवार सेना
  • जल-सेना
  • रथ
  • हाथी और
  • सामग्री पहुँचाने का प्रबंध था।

3. सिविल प्रशासन के विषय में:
सिविल प्रबंध के विषय में भी मेगस्थनीज ने बहुत-कुछ लिखा है। वह लिखता है कि राजा निरंकुश था और उसके अधिकार असीमित थे। राजा ने सब प्रकार की सूचनायें प्राप्त करने के लिए अपने गुप्तचर छोड़ रखे थे। प्रजा पर कई प्रकार के कर लगाए गए थे। आय का सबसे बड़ा साधन भूमि-कर था जो कुल उपज का पाँचवा भाग होता था।

बिक्री की चीजों के आवोगमन और सरकारी नौकाओं पर बैठकर नदी पार करने पर भी कर लगाए गए थे। प्रजा की भलाई की और भी विशेष ध्यान दिया जाता था । जल-सिंचाई के लिए नहरें और यात्रा के लिए सड़कें बनी हुई थीं। सड़कों पर यात्रियों की सुविधा के लिये मील के पत्थर लगे हुए थे। इन सड़कों पर जाने वाले यात्रियों की रक्षा का पूरा-पूरा प्रबंध था और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर सरायें बनी हुई थीं। सड़कों पर दोनों ओर छायादार वृक्ष भी लगे हुए थे। इन सब कारणों से व्यापार का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।

मेगस्थनीज ने लिखा है कि कानून बड़े कठोर थे और छोटे-छोटे अपराधों के लिए भी हाथ-पाँव काट दिए जाते थे। देश में न्यायालय भी थे। राजा न्याय करने के लिए उत्सुक रहता था। सारा देश प्रान्तों में बंटा हुआ था और उन प्रान्तों पर योग्य अधिकारी नियुक्त थे। ये देश में शान्ति व्यवस्था बनाए रखते थे। मेगस्थनीज लिखता है कि प्रान्त, जिलों में बंटे हुए थे और प्रत्येक जिले में कई गाँव होते थे। गाँव के मुखिया को गोप (Gope) कहते थे।

4. पाटलिपुत्र के नगर-प्रशासन के विषय में:
मेगस्थनीज ने चन्द्रगुप्त मौर्य की राजधानी के विषय में बहुत-कुछ लिखा है। उसके अनुसार यह नगर गंगा और सोन नदियों के संगम पर बसा हुआ था और बड़ा शोभनीय था। इस नगर के चारों ओर लकड़ी की एक चौड़ी दीवार थी, जो कि एक गहरी खाई से घिरी हुई थी। इसमें सदा पानी भरा रहता था।

राजमहल सुन्दरता और सजधज में अद्वितीय था। इसमें सुन्दर बाग और फल-फूलों वाले वृक्ष थे तथा सब प्रकार के मनोरंजन के साधन थे। इस नगर के प्रबंध के लिए तीस सदस्यों की एक समिति थी। समिति छ: उप-समितियों में बँटी हुई थी जिनके अधिकार में कला-कोशल, विदेशियों की देख-भाल, जनसंख्या की गिनती, व्यापार, बिकने वाली वस्तुएँ और कर वसूली का प्रबंध इत्यादि था।

5. भारतीय समाज के विषय में:
मेगस्थनीज लिखता है कि समाज सात वर्गों में विभक्त था –

  • (क) दार्शनिकों का राज्य में बड़ा नाम था।
  • (ख) परिषद्-सदस्य राजा को सलाह देते थे और राज्य के कार्य में उसकी सहायता करते थे।
  • (ग) तीसरी श्रेणी सैनिकों की थी। वे लड़ाई के समय युद्धरत रहते थे, अन्यथा आराम करते थे।
  • (घ) चौथी श्रेणी अन्य छोटे-छोटे अधिकारियों की थी, जो राज्य-प्रबंध में राजा और गवर्नरों की सहायता करते थे।
  • (ड) पाँचवीं श्रेणी कृषकों की थी जिनका कार्य देश के लिए अनाज पैदा करना था।
  • (च) छठी श्रेणी व्यापारियों तथा शिल्पकारों की थी। ये देश के व्यापार की ओर ध्यान देते थे।
  • (छ) सातवीं श्रेणी गड़रियों आदि की थी। ये भेड़-बकरी इत्यादि चराकर तथा शिकार करके अपना जीवन-निर्वाह करते थे।

मेगस्थनीज ने लिखा है कि लोग सत्यावादी थे। चोरी आदि की घटनायें बहुत कम होती थीं। लोग एक-दूसरे पर विश्वास रखते थे और मुकदमेबाजी बहुत कम थी। ब्राह्मणों का समाज में विशेष स्थान था और सब उनका आदर करते थे। प्रजा बड़ी प्रसन्न थी और देश बड़ा उपजाऊ तथा समृद्ध था। लोग सादा जीवन व्यतीत करते थे और घरों में ताला आदि नहीं लगाते थे। दास-प्रथा को लोग नहीं जानते थे। वह यह भी लिखता है कि यहाँ के लोगों के खाने का कोई समय नहीं था और वे हर वक्त खाते रहते थे।

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प्रश्न 4.
मौर्यकालीन कला-कौशल का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
मौर्यकालीन कला:
1. भवन-निर्माण-कला (Architecture): मौर्य शासकों ने जो भवन बनवाए उन्हें देखकर विदेशी यात्री भी चकित रह गए। ये भवन अधिकतर लकड़ी के थे, इसलिए मौर्यकालीन शिल्प-कला की सुन्दरता के कोई विशेष नमूने हम नहीं देख पाए हैं। यूनानी लेखकों से पता चलता है कि मौर्य शासकों द्वारा बनाए गये राजमहल अपनी सुन्दरता के लिए सारे संसार में प्रसिद्ध थे।

केवल यही नहीं, चीनी यात्री फाह्यान (Fahien) का भी यही कहना है कि, “अशोक का राजमहल इतना सुन्दर तथा शानदार था कि उसे मनुष्यों ने नहीं बल्कि देवताओं ने बनवाया होगा।” इन राजमहलों के अतिरिक्त मौर्य शासकों ने अपने साम्राज्य को कई हजार स्तूपों (Stupas) से सजाया। ये स्तूप ईंटों अथवा पत्थरों द्वारा बनाए हुए गुम्बद के आकार के थे। इनकी गोलाई नीचे से ऊपर की ओर कम होती जाती थी। इन सब स्तूपों में साँची स्तूप (Sanchi Stupa) और भरहुत स्तूप (Bharhut Stupa) विशेष उल्लेखनीय हैं।

2. वास्तुकला (Sculpture):
मौर्य काल में पत्थर को तराश कर सुन्दर-सुन्दर स्तम्भ, पशु-पक्षी, मूर्तियाँ, गुफाएँ आदि बनाने की कला से जितनी उन्नति की, भारतीय इतिहास के शायद ही किसी काल में इतनी हुई हो। मौर्यकालीन कला के सर्वोत्कृष्ट नमूने अशोक के स्तम्भ हैं। ये स्तम्भ 50 से 60 फुट ऊँचे हैं और इनका वजन 50 टन है। आश्चर्य की बात है कि इतने लम्बे-चौड़े और भारी स्तम्भ एक ही टुकड़े से काटकर कैसे बनाए गए होंगे। यद्यपि ये स्तम्भ इतने भारी हैं फिर भी इन्हें सुनार के आभूषणें सी सफाई तथा सुन्दरता से बनाया गया है। प्रत्येक स्तम्भ के सिरे पर एक अलग शीर्ष (Capital) बनाया गया है।

इन शीर्षों पर बने हुए पशु-पक्षियों के चिह्न अपनी सुन्दरता में बेजोड़ हैं। सारनाथ (Sarnath) के स्तम्भ का तीन शेरों वाला शीर्ष मौर्य काल की उन्नति का जीता-जागता नमूना है। इसको आधुनिक भारतीय मुद्रा में भी अपनाया गया है। मौर्यकालीन वास्तुकला का एक अन्य नमूना ठोस चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएँ हैं। पत्थरों को काटकर गुफाएँ बनाना कितना कठिन कार्य है परंतु मौर्य काल में इसका बड़ी कुशलता के साथ किया गया।

3. पालिश करने की कला (Art of Polishing):
मौर्य काल में कठोर पत्थर को साफ करके पालिश करने की कला इतनी उन्नत थी कि आज के युग में ऐसा कर पाना संभव नहीं है। गया के पास गुफाओं की दीवारों पर इस प्रकार की पालिश की गई है कि वे शीशे के समान चमकती हैं। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्थित अशोक की लाट पर इतनी चमकदार पालिश है कि अंग्रेज पादरी हेबर (Bishop Haber) जैसे बहुत-से लोगों को अनेक बार यह भ्रम हुआ कि यह स्तम्भ पत्थर का है अथवा धातु से ढालकर बनाया गया है।

4. स्थापत्य कला (Art of Engineering):
अशोक के काल में पहाड़ों के बड़े-बड़े – टुकड़े काटे गये, संभाले गये और तराश कर ऐसे स्तम्भों के रूप में लाये गए, जिनमें प्रत्येक का वजन लगभग 50 टन और ऊँचाई 50 फुट थी। पत्थरों के ये बड़े-बड़े टुकड़े सम्भवतः चुनार (Chunar) की पहाड़ियों से काटे गये थे। आज भी वहाँ ऐसे अच्छे पत्थर मिलते हैं। ये स्तम्भ हमें दूर-दूर के स्थानों में मिलते हैं। इन्हें इतनी दूर तक किस प्रकार ले जाया गया होगा यह एक आश्चर्य में डाल देने वाली बात है।

इस कठिनाई का ज्ञान हमें एक उदाहरण से आसानी से लग म ए गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट टू (उच्च माध्यमिक) सकता है। 1356 में सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने अम्बाला जिले में स्थित तोपरा नामक स्थान से एक स्तम्भ दिल्ली लाना चाहा। कहते हैं कि इसको लाने में 8,400 मनुष्य लगे और 42 पहिए वाले छकड़े का प्रयोग किया गया। इस प्रकार एक पहिये को खींचने के लिए लगभग 200 व्यक्ति लगाए गए थे। इससे ज्ञात होता है कि अशोक के समय में स्थापत्य कला ने कितनी उन्नति की।

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प्रश्न 5.
अशोक के धम्म का क्या अर्थ है? उसकी प्रमुख विशेषतायें बताइए। इसका अशोक की साम्राज्य नीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
‘धम्म’ का अर्ध:
अशोक ने अपने ‘धम्म’ के कारण विश्वभर में ख्याति प्राप्त कर ली थी। वस्तुतः कलिंग युद्ध के पश्चात् अशोक ने अपने जीवन का उद्देश्य मनुष्य सहित जीव मात्र का कल्याण करना बना लिया था। उसका विश्वास था कि उच्च कोटि के नैतिक जीवन के बिना कोई व्यक्ति सुखी नहीं रह सकता। उसने लोगों के जीवन की नैतिकता सुनिश्चित करने के लिए ही ‘धम्म’ का महान् बीड़ा उठाया। कुछ इतिहासकारों का विश्वास है कि अशोक का धर्म बौद्ध धर्म पर आधारित था, क्योंकि वह अहिंसा में विश्वास रखता था।

डा. आर. जी. भण्डारकर के अनुसार, “अशोक का धर्म, धर्म-निरपेक्ष बौद्ध धर्म के अतिरिक्त कुछ नहीं था।” डॉ. एन. के. शास्त्री ने भी ऐसा ही कुछ कहा है, “अशोक ने बौद्ध धर्म को एक शुष्क बौद्ध ज्ञान की खोज के स्थान पर एक आकर्षक, भावात्मक एवं लोकप्रिय धर्म में परिवर्तित कर दिया।

“यह अलग बात है कि ऐसी धारणाएँ सही प्रतीत नहीं होती। बौद्ध धर्म में चार आर्य सत्यों एवं अष्टमार्ग का उल्लेख है परंतु अशोक के धम्म में इसका कोई जिक्र नहीं है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार अशोक का धर्म वैदिक धर्म पर आधारित था, क्योंकि अशोक स्वर्ग में विश्वास रखता था परंतु इस विचार को नहीं माना जा सकता, क्योंकि अशोक का विश्वास रीति-रिवाजों तथा बलि आदि प्रथा में नहीं था।

अशोक के धम्म का उल्लेख उसके अभिलेखों में बार-बार आता है। इनका अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि धम्म वस्तुतः नैतिक जीवन व्यतीत करने के नियमों का संग्रह था । यह प्रत्येक धर्म में मिलता है और प्रत्येक धर्म इस पर आधारित है। यह कोई नया धर्म नहीं था । डा. राधा कुमुद मुकर्जी (R.K. Mookerjee) ने लिखा है

“His origniality lay not in idea of Dhamma but in the practical measures for its adoption by the people.”

अशोक के धम्म की विशेषतायें:
अशोक के धम्म के उपर्युक्त सिद्धांत का अध्ययन करने पर वह निष्कर्ष निकलता है कि इसकी कुछ खास विशेषतायें थीं जिसके कारण यह इतनी शीघ्रता से देश-विदेश में फैल गया और जनता में इस सीमा तक लोकप्रिय हो गया । इस धम्म की मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित थीं

1. नैतिकता:
अशोक के धम्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका नैतिकता पर आधारित होना है। इसीलिए इस धर्म को नैतिकता का नियम अथवा पवित्रता का नियम (Law of Piety) कहा जाता है। वस्तुतः अशोक का धम्म कोई विशेष धर्म न होकर नैतिकता के सिद्धांतों का एक संग्रह था। अर्थात् उसका धर्म मानवता का धर्म था जिसे कोई भी मनुष्य प्रत्येक देश तथा प्रत्येक काल में अपने जीवन को कल्याणमय बनाने के लिए अपना सकता था। इस प्रकार सभी नैतिक गुणों का समावेश होने के कारण ही उसका धर्म इतनी शीघ्रता से सारे संसार में लोकप्रिय हो गया।

2. सहनशीलता:
अशोक के धम्म की दूसरी महान् विशेषता इसकी सहिष्णुता थी। स्वयं बौद्ध धर्म का अटल भक्त होते हुए भी अशोक ने कभी भी अपने धम्म को दूसरों पर लादने को कोशिश नहीं की और न कभी दूसरे धर्मों को हेय दृष्टि से देखा। अपने धर्म के साथ-साथ वह दूसरे धर्मों को भी सम्मान देता था। उसके इस गुण ने लोगों पर अत्यन्त गहरा प्रभाव डाला और लोगों ने बड़ी तत्परता से उसके पवित्रता के नियमों को अपना लिया।

3. सार्वभौमिकता:
अशोक के धम्म की दूसरी बड़ी विशेषता इसके सार्वभौमिक होने की थी। यह धम्म एक संकीर्ण सम्प्रदाय न होकर मानवता का धर्म था जिसे प्रत्येक व्यक्ति नि:संकोच अपना सकता था।

डॉ. आर. के. मुकर्जी के अनुसार, ‘अशोक ने अपने धर्म में उन सिद्धांतों का समावेश किया जो सर्वमान्य हैं और जिन्हें सारी मानव जाति पर लागू किया जा सकता है। उसका धर्म न केवल बौद्ध धर्म था बल्कि सभी धर्मों का सार अथवा निचोड़ था जिसे कोई देश अथवा जाति किसी भी समय अपना सकती थी।

इस प्रकार नैतिकता, सहिष्णुता और सार्वभौमिकता के कारण ही अशोक का धर्म न केवल भारत अपितु नेपाल, सीरिया और लंका आदि देशों में भी लोकप्रिय हो पाया।

अशोक के धम्म का उसकी साम्राज्य नीति पर प्रभाव:

  • (क) अशोक ने किसी नवीन धर्म का प्रतिपादन नहीं किया। उसका धम्म उच्च नैतिक आदर्शों का संग्रह मात्र था। वह धार्मिक मतभेदों का अन्त करके सभी धर्मों में समन्वय तथा एकता लाना चाहता था।
  • (ख) अशोक के उच्च धार्मिक आदर्शों एवं सिद्धांतों ने उसे जन-कल्याण के कार्यों की ओर प्रेरित किया।
  • (ग) अशोक ने दिग्विजय के स्थान पर धर्म-विजय को अपनी साम्राज्य नीति का आधार बनाया।
  • (घ) अशोक की प्रबल धार्मिक भावना तथा धर्म-प्रचार के कारण उसके साम्राज्य में अपराधों की संख्या कम हो गयी।
  • (ड) अशोक ने अपनी साम्राज्य नीति में अहिंसा, सहनशीलता और आपसी मेल-जोल को स्थान दिया।
  • (च) इससे प्रजा में राजभक्ति को बढ़ावा मिला।

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प्रश्न 6.
मौर्य साम्राज्य के पतन के कौन-कौन से कारण थे? इसमें अशोक कहाँ तक उत्तरदायी था?
उत्तर:
मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण:
अशोक मौर्य वंश का सबसे महान् शासक था किन्तु उसकी मृत्यु के पश्चात् कोई पचास वर्ष (322-185 सा०यु०पू०) में ही इतना बड़ा साम्राज्य नष्ट-भ्रष्ट हो गया। इसे जानने के लिए हम सब बड़े उत्सुक हो जाते हैं कि इस साम्राज्य का इतना शीघ्र पतन होने के क्या कारण थे ? इन कारणों का उल्लेख निम्नवत किया जा सकता है –

1. कमजोर उत्तराधिकारी:
चन्द्रगुप्त मौर्य तथा अशोक जैसे शासकों में इतनी सामर्थ्य तथा बुद्धि नहीं थी कि एक विशाल साम्राज्य को सम्भाल सकें। अशोक के उत्तराधिकारी दशरथ, सम्प्रति और बृहद्रथ बहुत कमजोर थे। वे शासन की बागडोर संभाल न सके और ऐसे में मौर्य साम्राज्य का पतन होना स्वाभाविक ही था।

2. उत्तराधिकार व्यवस्था का अभाव:
मौर्य साम्राज्य में उत्तराधिकारी को नियुक्त करने का कोई विशेष नियम न था। कहा जाता है कि अशोक के उत्तराधिकारी कुणाल को उसकी सौतेली माता द्वारा अन्धा करवा दिया गया। इस प्रकार राजकुमारों के आपसी झगड़ों और उनमें बहु-विवाह की प्रथा ने राजमहल को षड्यंत्रों का अड्डा बना दिया। ऐसे वातावरण में मौर्य साम्राज्य का पतन अवश्यम्भावी ही था।

3. आन्तरिक विद्रोह:
आन्तरिक विद्रोहों ने भी मौर्यों के पतन में बड़ा भारी भाग लिया । अशोक की मृत्यु के पश्चात् कमजोर उत्तराधिकारी राज्य करने लगे जिसका दूर-दूर के राज्यों के गवर्नरों ने भी पूरा लाभ उठाया। कंधार प्रान्त में वीरसेन और कश्मीर में जुलक स्वतंत्र हो गए। डॉ. त्रिपाठी (Dr. Tripathi) के अनुसार, “इन विद्रोहों ने शासकों की शक्ति क्षीण कर दी और जब तूफान फट पड़ा तो वे उसके साथ ही बह गए।”

4. विदेशों में राजदूतों का न होना:
प्राचीन शासन-व्यवस्था में विदेशी विभाग प्रायः नहीं होता था और विदेशों में दूत आदि भी नहीं भेजे जाते थे। इसके कारण पड़ोसी देशों की आंतरिक स्थिति और योजना का कोई संकेत नहीं मिल पाता था। किसी बात का पता उस समय चलता था जब शत्रु सिर पर आ जाता था। यह कमी भी मौर्य साम्राज्य के पतन का कारण बनी।

5. विदेशी आक्रमण:
मौर्य साम्राज्य को पतन की ओर जाते देख कर बाहर के आक्रमणकारियों ने भी भारत की ओर अपने कदम बढ़ाए। उन्होंने बार-बार भारत पर आक्रमण करने आरम्भ कर दिए और देश को बहुत हानि पहुँचाई। हिन्द-यूनानियों तथा हिन्द-पार्धियनों के आक्रमणों ने मौर्य साम्राज्य को बड़ा धक्का पहुँचाया।

6. धन की कमी:
अशोक के उत्तराधिकारी कुछ काल तक अपने-आप को आन्तरिक विद्रोहों तथा विदेशी आक्रमणों से बचाते रहे परंतु धीरे-धीरे उनकी आर्थिक दशा खराब होती गई। धन की कमी और उसके अनुचित प्रयोग के कारण मौर्य वंश के अंतिम राजा साम्राज्य के लगातार बढ़ते दायित्वों को न सँभाल पाए।

अशोक का उत्तरदायित्व:
अनेक राजवंशों की भाँति अन्त में मौर्य वंश का भी अनेक कारणों से पतन होना आवश्यक था। इस पतन में अशोक का बड़ा उत्तरदायित्व था जो निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित है:

1. सैनिक शक्ति की कमी:
मौर्य साम्राज्य के पतन का सबसे बड़ा कारण सैनिक शक्ति का क्षीण होना था। कलिंग विजय के पश्चात् अशोक ने अन्य देशों को जीतना छोड़ दिया। इससे सैन्य-शक्ति को बड़ा धक्का लगा। जब सिपाहियों के लिए लड़ने का कोई काम न रहा, तो वे युद्ध कला को भूलने लगे और अशोक के राज्यकाल के चालीस वर्षों में वे बिल्कुल नकारा तथा आलसी हो गए। अशोक के पश्चात् दूरस्थ प्रदेशों में विद्रोह होने लगे तो ऐसे सैनिक उनको दबाने में असमर्थ रहे।

2. ब्राह्मणों की तीव्र प्रतिक्रिया:
श्री पी.एच. शास्त्री का कहना है कि मौर्य वंश के पतन का मुख्य कारण अशोक की ब्राह्मण-विरोधी नीति थी। बौद्ध धर्म को अपना लेने तथा राजकोष से केवल बौद्ध भिक्षुओं की सहायता करने से ब्राह्मणों की दशा खराब हो गई और समाज में उनका सम्मान घटने लगा।

अशोक से पहले प्रतिष्ठा प्राप्त इस वर्ग के लोग मौर्य शासकों तथा उनकी नीति के घोर विरोधी हो गए और अन्त में एक ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र (Pushyamitra) ने ही मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ का वध करके इस वंश को समाप्त कर दिया।

3. मौर्य साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार:
उन दिनों आवागमन के साधन बहुत सीमित थे। हिमालय से लेकर सुदूर दक्षिण तक और बंगाल से हिन्दूकुश पर्वत तक फैले हुए इस विशाल साम्राज्य को परिवहन साधनों के अभाव में बनाए रखना कठिन हो गया था। चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे शक्तिशाली सम्राटों के लिए ऐसा करना किसी सीमा तक संभव था परंतु बृहद्रथ जैसे कमजोर भला इतने बड़े साम्राज्य को कब तक अपने अधीन रख सकते थे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अभिलेखों की निम्नलिखित में कौन सीमा नहीं है?
(अ) अभिलेख देश के कुछ ही भागों में मिलते हैं।
(ब) कुछ अभिलेखों के अक्षर हल्के हैं।
(स) कुछ अभिलेखों के अक्षर लुप्त हो गये हैं।
(द) अभिलेख के तथ्य का अर्थ निकालना कठिन है।
उत्तर:
(अ) अभिलेख देश के कुछ ही भागों में मिलते हैं।

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प्रश्न 2.
भारत में सबसे अधिक अभिलेख किसके मिले हैं?
(अ) अशोक
(ब) समुद्रगुप्त
(स) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
(द) कनिष्क
उत्तर:
(अ) अशोक

प्रश्न 3.
जेम्स प्रिंसेप ने अशोककालीन ब्राह्मी लिपि का अर्थ कब निकाला?
(अ) 1738 ई०
(ब) 1838 ई०
(स) 1938 ई०
(द) 1947 ई०
उत्तर:
(ब) 1838 ई०

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प्रश्न 4.
आह्त सिक्कों को किसने जारी किया?
(अ) राजा ने
(ब) व्यापारियों ने
(स) नागरिकों ने
(द) उपर्युक्त सभी ने
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी ने

प्रश्न 5.
उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र के साथ क्या नहीं मिला है?
(अ) मोबाइल
(ब) सोने की वस्तुएँ
(स) चाँदी की वस्तुएँ
(द) उपकरण
उत्तर:
(अ) मोबाइल

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प्रश्न 6.
प्रभावती गुप्त कौन थी?
(अ) समुद्रगुप्त की पुत्री
(ब) चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री
(स) कुमारगुप्त की पुत्री
(द) स्कन्दगुप्त की पुत्री
उत्तर:
(ब) चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री

प्रश्न 7.
राजा के आतंक से तंग आकार लोग क्या करते थे?
(अ) घर में अपने को बंद करते थे।
(ब) राजा को मार देते थे।
(स) घर को छोड़कर जंगल में भाग जाते थे।
(द) आत्महत्या कर लेते थे।
उत्तर:
(स) घर को छोड़कर जंगल में भाग जाते थे।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में कौन सामन्तों से संबंधित नहीं था?
(अ) राजा से वेतन लेते थे।
(ब) अपना निर्वाह स्थानीय संसाधनों से करते थे।
(स) भूमि पर नियंत्रण रखते थे।
(द) शासकों का आदर करते थे।
उत्तर:
(अ) राजा से वेतन लेते थे।

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प्रश्न 9.
अशोक ने साम्राज्य को अखंड करने के लिए क्या किया?
(अ) शक्तिशाली सेना का निर्माण किया।
(ब) उसने धम्म का प्रचार किया।
(स) सीमा रक्षकों की नियुक्ति की।
(द) सीमा पर तार लगवायें।
उत्तर:
(ब) उसने धम्म का प्रचार किया।

प्रश्न 10.
प्राचीन भारत के एक ऐसे क्षेत्र का नाम बताइए जहाँ राज्य और नगर सघन रूप से बसे थे –
(अ) दक्षिण भारत
(ब) उत्तर-पश्चिमोत्तर प्रान्त
(स) पूर्वी भारत
(द) पश्चिम भारत
उत्तर:
(स) पूर्वी भारत

प्रश्न 11.
प्राचीनतम् अभिलेख किस भाषा में लिखे गये?
(अ) प्राकृत
(ब) संस्कृत
(स) यूनानी
(द) हिन्दी
उत्तर:
(अ) प्राकृत

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प्रश्न 12.
संघ या गणराज्यों में किसका शासन था?
(अ) राजा
(ब) लोगों के समूह का
(स) मंत्रियों का
(द) किसी का नहीं
उत्तर:
(ब) लोगों के समूह का

प्रश्न 13.
सबसे पहले पाटलिपुत्र (पटना) राजधानी कब बनी?
(अ) छठी शताब्दी सा०यु०पू० में
(ब) पाँचवी शताब्दी सा०यु०पू० में
(स) चौथी शताब्दी सा०यु०पू० में
(द) दूसरी शताब्दी साव्यु०पू० में
उत्तर:
(स) चौथी शताब्दी सा०यु०पू० में

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प्रश्न 14.
वह प्रथम सम्राट कौन था जिसने पत्थरों और स्तम्भों पर प्रजा और अधिकारियों के लिए सन्देश खुदवाये?
(अ) अशोक
(ब) कनिष्क
(स) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
(द) हर्षवर्धन
उत्तर:
(अ) अशोक

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 9 क्षेत्रीय अध्ययन

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Geography Objective Answers Chapter 9 क्षेत्रीय अध्ययन

प्रश्न 1.
क्षेत्र में जाकर इकट्ठे किये गये आँकड़ों को क्या कहा जाता है?
(a) द्वितीयक आँकड़ा
(b) प्राथमिक आँकड़ा
(c) तृतीयक आँकड़ा
(d) चतुर्थक आँकड़ा
उत्तर-
(b) प्राथमिक आँकड़ा

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प्रश्न 2.
भूगोल में क्षेत्रीय अध्ययन हैः ।।
(a) एक उपागम
(b) एक विधितंत्र
(c) एक सिद्धान्त
(d) एक मॉडल
उत्तर-
(a) एक उपागम

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किसका महत्व क्षेत्रीय अध्ययन में सबसे अधिक
(a) भूगोल शिक्षक का
(b) विज्ञान शिक्षक का
(c) क्रीडा शिक्षक का.
(d) शारीरिक शिक्षक का
उत्तर-
(a) भूगोल शिक्षक का

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से क्षेत्रीय अध्ययन की दृष्टि से किसका अवलोकन महत्वपूर्ण है?
(a) पशुपालन का
(b) नागरिक सुविधाओं का
(c) स्थलाकृति का
(d) उद्योग-धन्धे का
उत्तर-
(c) स्थलाकृति का

प्रश्न 5.
क्षेत्रीय अध्ययन किस रूप में किया जाना चाहिए?
(a) प्राकृतिक पर्यावरण का अवलोकन करके
(b) मानवीय पर्यावरण का अवलोकन करके
(c) प्राकृतिक एवं मानवीय पर्यावरण का अवलोकन कर स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए
(d) भ्रमण कर आनंद लेकर
उत्तर-
(c) प्राकृतिक एवं मानवीय पर्यावरण का अवलोकन कर स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए

प्रश्न 6.
किसी क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर के गिरने का क्या कारण हो सकता है
(a) वहाँ का जनसंख्या में वृद्धि होना
(b) वहाँ नलकूपों से अधिक जल का निष्कासन होना
(c) वृक्षों की अधिक कटाई होना तथा वर्षा कम होना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी

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प्रश्न 7.
क्षेत्र में जाकर स्वयं इकट्ठा किए गए आँकड़ों को क्या कहा जाता
(a) द्वितीयक आँकड़ा
(b) तृतीयक आँकड़ा
(c) पंचम आँकड़ा
(d) प्राथमिक आँकड़ा
उत्तर-
(d) प्राथमिक आँकड़ा

प्रश्न 8.
क्षेत्रीय अध्ययन क्या है?
(a) विधितंत्र
(b) उपागम
(c) मॉडल
(d) सिद्धान्त
उत्तर-
(b) उपागम

प्रश्न 9.
भूमि प्रदूषण से बचाव का तरीका क्या है?
(a) प्लास्अिक का अत्यधिक उपयोग करना
(b) रासायानिक उर्वरकों का प्रयोग कम-से-कम करना
(c) खेतों की सिंचाई नहीं करना
(d) ढालू भूमि पर वन नहीं लगाना
उत्तर-
(b) रासायानिक उर्वरकों का प्रयोग कम-से-कम करना

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प्रश्न 10.
जल प्रदूषण का प्रमुख कारण क्या है?
(a) नगरों के गंदे जल को नदियों में गिराना
(b) कारखानों का अपशिष्ट पदार्थ नदी में गिराना
(c) शहरों का कूड़ा-कचरा नदियों में डालना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में कौन प्रदूषण का प्रकार नहीं है?
(a) ध्वनि
(b) जल
(c) आकाश
(d) वायु
उत्तर-
(c) आकाश

प्रश्न 12.
नलकूपों द्वारा सिंचाई के कारण किस जिले में भूमिगत जलस्तर में गिरावट आई है?
(a) गया में
(b) नालन्दा में
(c) जहानाबाद में
(d) उपर्युक्त सभी में
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी में

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प्रश्न 13.
मकानों की छतों के वर्षा-जल को पाइप द्वारा भूमि से बनी टंकी में जमा करने की तकनीक को क्या कहा जाता है?
(a) जल-जमाव
(b) वाटर हारवेस्टिंग
(c) भूमि सिंचाई
(d) चार्जिंग विधि
उत्तर-
(b) वाटर हारवेस्टिंग

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन द्वितीयक आँकड़े का स्रोत नहीं है?
(a) जनगणना
(b) कृषि विभाग ।
(c) प्रश्नावली
(d) नगरपालिका
उत्तर-
(b) कृषि विभाग ।

प्रश्न 15.
किसी क्षेत्र में कच्चे मकानों की संख्या घट रही हो और पक्के मकानों की संख्या बढ़ रही हो तो आप क्या अनुमान लगाएँगे?
(a) लोगों का मुख्य पेशा नौकरी है
(b) लोगों को मिट्टी से लगाव नहीं है
(c) लोग कृषि-कार्य छोड़ रहे हैं
(d) लोग सम्पन्न होते जा रहे हैं
उत्तर-
(d) लोग सम्पन्न होते जा रहे हैं

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प्रश्न 16.
क्षेत्रीय अध्ययन करते समय भूमि की ढाल का पता कैसे लगाएँगे?
(a) लोगों से पूछकर
(b) नदी-प्रवाह की दिशा देखकर
(c) सड़कों की दिशा देखकर
(d) बस्ती का फैलाव देखकर
उत्तर-
(b) नदी-प्रवाह की दिशा देखकर

प्रश्न 17.
प्रश्नावली क्या है?
(a) प्रत्यक्ष रूप से तथ्यों के अवलोकन की विधि
(b) वाद-विवाद प्रतियोगिता
(c) तथ्यों के आकलन के संदर्भ में विचार-विमर्श
(d) अप्रत्यक्ष रूप से तथ्यों के अवलोकन की विधि
उत्तर-
(b) वाद-विवाद प्रतियोगिता

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प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से किससे पर्यावरण सर्वाधिक प्रदूषित होता है?
(a) वाहन से
(b) मानव से
(c) शोर से
(d) मशीनों से
उत्तर-
(a) वाहन से

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से किस स्रोत से सर्वाधिक वायु प्रदूषण होता है?
(a) घरेलू ईंधन से
(b) स्वचालित वाहन से
(c) रासायनिक कीटनाशक से
(d) ताप बिजलीघर से
उत्तर-
(a) घरेलू ईंधन से

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 8 मानचित्र अध्ययन

Bihar Board 9th Social Science Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th Social Science Geography Objective Answers Chapter 8 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 1.
कौन-सी मापक विधि सर्वाधिक मान्य है?
(a) प्रकथन
(b) निरूपक भिन्न
(c) आलेख
(d) कोई नहीं
उत्तर-
(b) निरूपक भिन्न

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 8 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 2.
मापनी में हर व्यक्त करता है
(a) धरातल की दूरी
(b) मानचित्र की दूरी
(c) दोनों दूरियाँ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(a) धरातल की दूरी

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा मापक निरूपक भिन्न का है?
(a) मीटर
(b) सेंटीमीटर
(c) ईंच
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) सेंटीमीटर

Bihar Board 9th Geography Objective Answers Chapter 8 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 4.
निम्न में किस मापनी के द्वारा किलोमीटर और मील दोनों की दूरियों को दर्शाया जा सकता है?
(a) रेखीय मापनी
(b) आरेखीय मापनी
(c) प्रतिनिधि भिन्न
(d) तुलनात्मक मापनी
उत्तर-
(c) प्रतिनिधि भिन्न

प्रश्न 5.
मानचित्रों में मापक अंकित करने की विधियाँ हैं।
(a) शब्दों द्वारा
(b) रेखीय मापक द्वारा
(c) प्रतिरिधि भिन्न द्वारा
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(d) इनमें सभी

प्रश्न 6.
रेखीय मापक में सौवें भाग की दूरी किस मापक से मापी जा सकती
(a) प्रतिनिधि भिन्न से
(c) विकर्ण मापनी से
(b) तुलनात्मक मापनी से
(d) सरल मापनी से
उत्तर-
(b) तुलनात्मक मापनी से

प्रश्न 7.
मानचित्र की दूरी को मापनी में कैसे जाना जाता है?
(a) अंश
(b) हर
(c) मापनी का प्रकथन
(d) कोई नहीं
उत्तर-
(a) अंश

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प्रश्न 8.
पृथ्वी की दूरी मापनी में कहाँ लिखी जाती हैं?
(a) अंश
(b) हर
(c) ‘a’ एवं ‘b’ दोनों में
(d) किसी में नहीं
उत्तर-
(b) हर

प्रश्न 9.
किलोमीटर तथा मील दोनों दूरियों को किस प्रकार की मापनी द्वारा प्रदर्शित करना संभव है?
(a) तुलनात्मक
(b) रेखीय
(c) प्रतिनिधि भिन्न
(d) विकर्ण
उत्तर-
(a) तुलनात्मक

प्रश्न 10.
मापनी क्या है?
(a) एक अनुपात
(b) एक कथन
(c) एक दूरी
(d) एक लम्बाई
उत्तर-
(a) एक अनुपात

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प्रश्न 11.
राजस्व मानचित्र किस प्रकार का मानचित्र होता है?
(a) लघु मापनी
(b) दीर्घ मापनी
(c) विकर्ण मापनी
(d) कोई नहीं
उत्तर-
(b) दीर्घ मापनी

प्रश्न 12.
एटलस किस मापनी पर बना होता है?
(a) वृहत्
(b) विकर्ण
(c) लघु
(d) रेखीय
उत्तर-
(c) लघु

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प्रश्न 13.
प्रतिनिधि भिन्न का अंश हमेशा किना रहता है?
(a)2
(b)3
(c)1
(d)0
उत्तर-
(c)1

प्रश्न 14.
इनमें से कौन एक वृहत् माफ्नी मानचित्र है?
(a) एटलस
(b) दीवार मानचित्र
(c) टोपो मानचित्र
(d) राजस्व मानचित्र
उत्तर-
(d) राजस्व मानचित्र

प्रश्न 15.
257 इंच की दूरी किस मापनी पर पढ़ा जाना संभव है?
(a) रेखीय
(b) तुलनात्मक
(c) विकर्ण
(d) किसी पर नहीं
उत्तर-
(c) विकर्ण

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प्रश्न 16.
5.7 सेंटीमीटर की दूरी किस प्रकार की मापनी पर पढ़ा जा सकता
(a) रेखीय
(b) तुलनात्मक
(c) विकण
(d) प्रतिनिधि भिन्न
उत्तर-
(a) रेखीय

प्रश्न 17.
1 सेंटीमीटर = 1 किलोमीटर के लिए सही प्रतिनिधि भिन्न क्या होगा?
(a) 1 : 100
(b) 1 : 1,000
(c) 1 : 10,000
(d) 1 : 100,000
उत्तर-
(d) 1 : 100,000

प्रश्न 18.
1 सेंटीमीटर = 2 किलोमीटर के लिए सही प्रतिनिधि भिन्न क्या होगा?
(a) 1: 200
(b) 1 : 200,000
(c) 1 : 2,000
(d) 1 : 20,000
उत्तर-
(b) 1 : 200,000

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प्रश्न 19.
निम्नलिखित में कौन-सी विधि मापक की सर्वमान्य विधि है?
(a) कथन विधि
(b) प्रतिनिधि भिन्न
(c) रेखीय विधि
(d) विकर्ण विधि
उत्तर-
(b) प्रतिनिधि भिन्न

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प्रश्न 20.
निम्नलिखित में किसका अंकन प्रतिनिधि भिन्न में किया जाता है?
(a) इंच का
(b) सेंटीमीटर का
(c) मीटर का
(d) किसी का नहीं
उत्तर-
(d) किसी का नहीं