Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 सहजोबाई के पद

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 सहजोबाई के पद

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सहजोबाई के पद पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर।

कविता के साथ

प्रश्न 1.
सहजोबाई के मन में उनके आराध्य की कैसी छवि बसी हुई है।
उत्तर-
हिन्दी के ज्ञानश्रयी की शाखा की संत कवियित्री सहजोबाई के प्रस्तुत काव्य में श्रीकृष्ण उनके आराध्य प्रतीत होते हैं। सहजोबाई के मन में कृष्ण की शैशवावस्था का अलौकिक सौन्दर्य प्रतिबिम्बित है। लीलाधारी श्रीकृष्ण के माथे पर मुकुट, कान में मोतियों के कुण्डल, बिखड़े हुए बाल, होठ का मटकाना, भौंह चलाते हुए ठुमक ठुमुक कर धरती पर चलते हुए उनका सौन्दर्य अनुपम और अद्वितीय है।

श्रीकृष्ण के घुघरूं की कर्णप्रिय ध्वनि मन के तारों को सहज ही झंकृत करती है। सहजोबाई ने अपने आराध्य नटवर नागर, लीलाधर कृष्ण का सगुण स्वरूप की छवि अपने मन में बसायी हुई है जो दिव्यातिदिव्य और अनुपमेय है। उनकी इस सुन्दरता की बराबर करोड़ो कामदेव की सम्मिलित शोभा भी नहीं कर सकती।

प्रश्न 2.
सहजोबाई ने किससे सदा सहायक बने रहने की प्रार्थना की है?
उत्तर-
ज्ञानाश्रयी संत कवयित्री सहजोबाई ने बाल श्रीकृष्ण से सदा सहायक बने रहने की प्रार्थना की है।

प्रश्न 3.
“झुनक-झुनक नूपूर झनकारत, तता थेई रीझ रिझाई।
चरणदास हिजो हिय अन्तर, भवन कारी जित रहौ सदाई।
इन पंक्तियों को सौन्दर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
निर्गुण ब्रह्म उपासिका कवयित्री सहजोबाई की सगुण भक्ति शिरमौर श्रीकृष्ण के प्रति भाव-विहलता, भाव-प्रवणता इन पंक्तियों में उपस्थित है।

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बालक कृष्ण अपने पैरों को बलात् इस तरह पटक रहे हैं कि उनके पैरों में बंधी पायल के र (घुघरू) एक लय विशेष में झंकृत हो रहे हैं और यह लय है तो ता थैया जिसके इंगित १: कृष्ण न सिर्फ रीझ गये हैं बल्कि अपने चतुर्दिक उपस्थित लोगों को भी मंत्रमुग्ध किये हुए है। कृष्ण की यह विश्वमोहिनी छवि के स्वामी को सहजोबाई अपने हृदय में भवन बनाकर सदा के लिए रखना चाहती हैं। कबीरात्मा भी अपने राम को कुछ इसी तरह अपनी आँखों में बसाना

“नैनन की करि कोठरी पुतरी पलंग बिछाय,
पलकनि कै चिक डारि कै पिय को लिया रिझाय।”

सम्ममा भक्त अपने भगवान से शाश्वत सायुज्यता का आकांक्षी होता है। उसे वह अपने व्यक्तित्व के कोमलतम, पवित्रतम स्थान में रखना चाहता है। भक्त भगवान पर एकाधिकार चाहता है। यही सौन्दर्य यहाँ जित है।

प्रश्न 4.
सहजोबाई ने हरि से उच्च स्थान गुरु को दिया है। इसके लिए वे क्या-क्या तर्क देती हैं?
उत्तर-
कवयित्री सहजोबाई ने अपने गुरु चरणदास के प्रति सहज और पावन भक्तिभावना का परिचय दिया है। कवियित्री ने सच्ची गुरु भक्ति के रूप में अपने गुरु की महिमा की अद्वितीयता का विवेचन एवं विश्लेषण किया है। गुरु के प्रति पूर्णरूप से समर्पित कवयित्री के निश्छल हृदय के पवित्र उद्गार मिलते हैं। सहजोबाई ने गुरु के दिव्यातिव्य मार्गदर्शन के प्रति समर्पिता का भाव सहज ही दृष्टिगोचार होता है। गुरु ने अपने दिव्य ज्ञान से अज्ञानता के तिमिर को हटाकर ज्ञान से प्रकाशित किया, जिससे सांसरिक आवागमन (जन्म-मृत्यु) के बन्धन से मुक्त कराया।

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ईश्वर ने पाँच चोर मद, लोभ, मोह, काम और क्रोध को शरीर रूपी मन्दिर में बिठाया, गुरु ने उससे छुटकारा पाने की युक्ति सिखाई। ईश्वर ने सांसारिक राग-रंग, अपना-पराया का भ्रम में उलझाया, गुरु ने ज्ञान रूपी दीपक के प्रकाश से अलोकित कर तमाम बन्धनों से मुक्ति दिलाने के लिए आत्म ज्ञान से साक्षात्कार कराया है। गुरु ने सांसारिक भवसागर से निकलने का मार्ग प्रशस्त कराया। सहजोबाई की गुरुभक्ति उत्कट और अपूर्व है। गुरु के प्रति परमात्मा से भी बढ़कर प्रेम भक्ति तथा कृतज्ञता का उत्कट और अपूर्व भाव प्रदर्शित कवयित्री ने किया है। गुरु ही ज्ञान का सागर तथा सच्चा पथ-प्रदर्शक है। गुरु का स्थान हरि से भी ऊँचा है।

प्रश्न 5.
“हरि ने पाँच चोर दिये साथा,
गुरु ने लई छुटाय अनाथा।”
यहाँ किन पाँच चोरों की ओर संकेत है? गुरु उससे कैसे बचाते हैं।
उत्तर-
संत साहित्य में अवगुणों को चोर से संज्ञायित किया गया है। पाँच चोर निम्नलिखित हैं-काम, क्रोध, मोह, मद और लोभ। शरीर तक सीमित होना, इन्द्रित सुख की पूर्ति की इच्छा काम है। अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ होते देख गुस्सा होना क्रोध है। अनाधिकृत वस्तु के प्रति आसक्ति मोह अथवा लोभ है।

किसी भी प्रकार की प्रभुता प्राप्त कर लेने का भाव मद से प्रदर्शित होता है। दूसरे को किसी भी रूप में सम्पन्न देखकर ईर्ष्या का भाव डाह का भाव मत्सर है।

सद्गुरु संसार की नश्वरता, असारता, क्षणभंगुरता का निदर्शन करारकर अपने शिष्य को प्रबोध देता है। ध्यान, समाधि जीवमात्र की निष्काम सेवा आदि के द्वारा गुरु इन पाँच चोरों से शिष्य को बचाते हैं।

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प्रश्न 6.
“हरि ने कर्म भर्म भरमायौ। गुरु ने आतम रूप लखायौ ॥
हरि ने मोरूँ आप छिपायौ। गुरु दीपक दै ताहि दिखायो॥”
इन पंक्तियों की व्याख्या करें।
उत्तर-
प्रस्तुत पद्यांश ज्ञानाश्रयी कवयित्री सहजोबाई द्वारा विरचित है। कवियित्री ने गुरु महिमा और गरिमा की श्रेष्ठता का बेबाक चित्रण किया है। वह कहती है कि हरि ने उन्हें सांसारिक . कर्म के भर्म में उलझा कर रख दिया है और गुरु ने आत्मज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित कर उसके ‘स्व’ के अस्तित्व का ज्ञान कराया है : गुरु ने ‘स्वयं’ से साक्षात्कार कराकर सांसारिक अज्ञानता से छुट्टी दिलाई है, गुरु अपने ज्ञान के दीपक से प्रकाशित करते हैं।

प्रश्न 7.
पठित पद में सहजोबाई ने गुरु पर स्वयं को न्योछावर किया है। वह पंक्ति लिखें।
उत्तर-
प्रस्तुत पद में सहजोबाई गुरु की महानता और महिमा के आगे सर्वोत्तम समर्पण किया है जो उसकी उत्कृष्ठ गुरु भक्ति की पराकाष्ट है। वह कहती है

“चरणदास पर तन मन वारूँ। गुरु न तनँ हरि  तजि डारूँ।।”

प्रश्न 8.
पठित पद के आधार पर सहजोबाई की गुरुभक्ति का मूल्यांकन करें।
उत्तर-
संत कवयित्री सहजोबाई का पाठ्यपुस्तक में संकलित पद ‘गुरु भक्ति’ का उत्कृष्ट और दुर्लभ उदारिण है। सहजो द्वारा गुरु भक्ति की उत्कट और अपूर्व अभिव्यक्ति हुई है। गुरु के प्रति परमात्मा से भी बढ़कर प्रेम-भक्ति तथा कृतज्ञता की आत्मिक अनुभूति इस पद में विशेष रूप से दृष्टिगोचर होता है।

सहजोबाई ने अपना सम्पूर्ण जीवन गुरु के चरणों में समर्पित कर दिया। ज्ञान आधारित गुरु भक्ति सहजो में अविचल संकल्प और समर्पण की स्पृहणीय शक्ति बनकर प्रकट होती है।

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वह हरि को त्याज्य समझती है परन्तु गुरु को त्यागने की वह कल्पना भी नहीं करना चाहती है

“राम तर्जे पर गुरु न बिसारूँ।
गुरु के सम हरि न निहारूँ॥

सहजोबाई ने गुरु की महिमा और ज्ञान के अस्तित्व को स्वीकारते हुए उसे उच्छल आनंदानुभूति होती है। वह गुरु को ही सांसरिक आवागमन, मर्म तथा आत्म ज्ञानसे साक्षात्कार कराने के लिए अपनी सारी सत्ता को हृदय, प्राण, बुद्धि कल्पना, संकल्प इत्यादि सारी वृत्तियों को समाहित और घनीभूत करके बड़े वेग के साथ स्वयं को गुरुभक्ति में समाहित कर दिया है। अपनी केवल व्यक्तिगत सत्ता की भावना को पूर्ण विसर्जन कर केवल गुरु को ही ध्येय स्वरूप आत्मसात करती है। गुरु के प्रति परमात्मा से भी बढ़कर प्रेम-भक्ति तथा कृतज्ञता को प्रकट करते हुए कहती है

“चरणदास पर तन मन वारूँ।
गुरु न तनूं हरिः जि डारूँ॥

कवयित्री सहजोबाई एक सच्ची गुरुभक्त के रूप में गुरू की प्रार्थना करती हैं ताकि उसे मोह-माया के बन्धन से मुक्त होकर अपने आराध्य की पूर्ण चरणगति और शरणगति प्राप्ति हो। गुरु के वरदहस्त की छाया में दिव्य ज्ञान प्राप्त कर सकल संताप को दूर करने की क्षमता सम्पन्न होती है।

सहजोबाई के पद भाषा की बात

प्रश्न 1.
पठित पदों में अनुप्रास अलंकार है। ऐस उदाहरण को छांट कर लिखें।
उत्तर-
सहजोबाई रचित पदों की निम्नांकित पंक्तियां में अनुप्रास अलंकार हैं-
“मुकुट लटक अटकी मन माहीं ‘म’ वर्ण की आवृति
नृत तन नटवर मदन मनोहर ‘न’ और ‘म’ वर्ण की आवृति
ठुमक ठुमुक पग धरत धरनि पर ‘प’ और ‘ध’ वर्ण की आवृति
झुनुक झुनक नुपुर झनकारत
तथा थेई थेई रीझा रिझाई में ‘झ’ त, थ और ‘र’ वर्ण आवृति
हरि ने जन्म दियो जग माहीं ‘ज’ वर्ण की आवृति
हरि ने कर्म भर्म भरमायौ में ‘भ’ वर्ण की आवृति।

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प्रश्न 2.
“भौंह चलाना” का क्या अर्थ है?
उत्तर-
आँखों के ऊपर की रोमावली भौंह कहलाती है। व्यक्ति जब कुछ देने से कतराना चाहता है, उसके भीतर चुहल करने की इच्छा होती है, तब भौंहों को ऊपर नीचे करता है। आनन्ददायी आश्र्चचकित करने वाली घटना से साक्षात्कार करने के समय तथ्यों गोपन में भौंह चलाया जाता है। बिहारी ने तो कृष्ण की मुरली चोरी प्रसंग में गोपियों को “भौहनि हँसौ” की स्थिति में प्रस्तुत किया

“बतरस लालच ताल की मुरली धरि लुकाय”
सौं करै भौहनि हंसे दैन कहै नटि जाय।
भौंक चलना का अर्थ सौहार्द्रपूर्ण कुटिलता का अवाक् ज्ञापन करना है।

प्रश्न 3.
चतुराई, रिझाइ जैसे शब्दों में ‘आई’ प्रत्यय लगा है। पठित पदों से अलग ‘आई’ प्रत्यय से पाँच शब्द बनाएँ।।
उत्तर-
लखाई, बिलगाई, मचिलाई, बिलखाई और मुस्काई।

प्रश्न 4.
कर्म-भर्म रोग-भोग मं कौन-सा सम्बन्ध है?
उत्तर-
कर्म-धर्म तथा रोग-भाग दोनों ही द्वन्द्व समास है।

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प्रश्न 5.
इनका शुद्ध रूप लिखें नृत, गुर, हरिपू, बेरी, मर्म, आतम
उत्तर-

  • अशुद्ध – शुद्ध
  • नृत्य – नृत
  • गुरु – गुरु
  • हरिकूं – हरि को
  • बेरी – बेड़ी
  • भ्रम – भर्म
  • आतम – आत्म, आत्मा

प्रश्न 6.
पठित पदों से क्रिया पद चुनएि।
उत्तर-
सहजोबाई रचित पदां में निम्नलिखत क्रियापद आये हैं
अटकी, बिथुराई, हलत, मटक, चलाई, धरत, करत, झनकारत रहौ, बिसारू, तनँ बिसारू, निहारूँ दियो छुटाहीं, दिये, छटाय, गेरी, काटी, उरझायी, भरमायौ, लखायौ, छिपायो, लाये, मिटायै, वारूँ और डारूँ।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

सहजोबाई के पद लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सहजोबाई द्वारा वर्णित सगुण रूप या कृष्ण के रूप पर प्रकाश डालें
उत्तर-
सहजोबाई ने ‘नटवर’ शब्द का प्रयोग किया है जिससे स्पष्ट होता है कि सगुण ईश्वर से उनका तात्पर्य कृष्ण से है। द्वितीय, ठुमक ठुमुक चलने और पैरों में झुमुक झुमुक कर नृपुर बजने से स्पष्ट है कि कृष्ण के बाल रूप का वर्णन है। कवयित्री ने सुन्दर मुकुट, नृत्यशील शरीर, कान के कुंडल तथा बिखर केश का वर्णन किया है। क्रिया सौन्दर्य के अन्तर्गत ठुमुक ठुमुक चलने नूपूर झनकारने, होठ फड़काने, भौहे चलाने, नाचने और भुजाएँ उठाकर भाव-मुद्रा प्रदर्शित करने का वर्णन है।

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प्रश्न 2.
सहजोबाई की गुरु-भक्ति भावना का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर-
सहजोबाई की गुरु-भक्ति अनन्य है। वह गुरु को सदैव हृदय में बसाये रखना चाहती हैं। उसके गुरु संत चरणदास जी आत्मज्ञानी है, उनके पास ज्ञान का दीपक है। ईश्वर ने मानव-तन देकर अपनी प्राप्ति में जितनी बाधाएँ खड़ी की हैं उन सबका निदान गुरु ने किया है, इसलिए सहजोबाई अपने गुरु को गोविन्द से श्रेष्ठ मानती है। उसका दृढ़ विश्वास है कि गुरु की कृपा से ईश्वर मिल सकता है मगर ईश्वर की कृपा से गुरु नहीं। अत: वह अपने गुरु के प्रति समर्पण पूर्ण भक्ति-भावना व्यक्त करती है।

सहजोबाई के पद अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सहजोबाई गुरु को हरि से श्रेष्ठ क्यों मानती हैं?
उत्तर-
उनकी दृष्टि से ईश्वर ने अपने को छिपाने के लिए प्रपंचों का सृजन किया है जबकि गुरु उन प्रपंचों को ज्ञान के प्रकाश से काटकर भक्त को ईश्वर से मिला देता है, अत: गुरु ईश्वर से श्रेष्ठ है।

प्रश्न 2.
ईश्वर ने जीव को अपने से अलग रखने और छिपाने के लिए क्या-क्या किया है?
उत्तर-
ईश्वर ने पंचेन्द्रिय रूपी पाँच चोर साथ लगा दिया है रोग और भोग में उलझाया है, कुटुम्ब्यिों के रूप में ममता का जाल देकर उलझाया है तथा कर्म-फल का भ्रम पैदा किया है।

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प्रश्न 3.
गुरु ने क्या किया है?
उत्तर-
गुरु ने जन्म-मरण के आवागमन से मुक्ति दिलाई है। ममता का बन्धन काटा है। योग और आत्मज्ञान दिया है तथा ज्ञान-रूपी दीपक के प्रकाश में ईश्वर के दर्शन कराये हैं।

प्रश्न 4.
पाँच चोर से कवयित्री का क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
पाँच चोर से तात्पर्य पंच ज्ञानेन्द्रियों-आँख, कान, नाक, मुँह और मन से है जो व्यक्ति को संसार के प्रति आसक्त बनाते हैं। इन इन्द्रियों के कारण मनुष्य संसार के प्रति लगाव रखता है।

प्रश्न 5.
सहजोबाई किस प्रकार की कवयित्री है?
उत्तर-
सहजोबाई निर्गुण और सन्त विचार की दोनों विचारधारा की कवयित्री है।

प्रश्न 6.
सहजोबाई के प्रथम पद में किसकी व्यंजना की गयी है?
उत्तर-
सहजोबाई ने अपने प्रथम पद में कृष्ण की सगुण लीलानुभूति की व्यंजना की है।

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प्रश्न 7.
सहजोबाई ने द्वितीय पद में किस पर प्रकाश डाला है?
उत्तर-
सहजोबाई ने अपने द्वितीय पद में गुरु की महत्ता और उसके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है।

सहजोबाई के पद वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. सही उत्तर का सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग, या घ) लिखें।

प्रश्न 1.
सहजोबाई का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) मध्यप्रदेश
(ख) राजस्थान
(ग) पंजाब
(घ) हरियाणा
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 2.
सहजोबाई के गुरु कौन थे।
(क) चरनदास
(ख) हरिप्रसाद भार्गव
(ग) तुकाराम
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क)

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प्रश्न 3.
सहजोबाई ने अपना सम्पूर्ण जीवन किसको समर्मित किया है?
(क) गुरु चरणदास को
(ख) ईश्वर को
(ग) गुरु और उनके माध्यम से ईश्वर को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 4.
सहजोबाई किसको नहीं छोड़ सकती है।
(क) भगवान को
(ख) गुरु चरनदास को
(ग) अपने पिता को
(घ) अपनी माता को।
उत्तर-
(ख)

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II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न:
1. सहजोबाई निर्गुण …………….. भक्ति के अन्तर्गत आती है।
2. राम तर्जे पै …………. न बिसारूँ।
3. गुरु ने काटा …………….. बेरी।
4. मुकुट लटक ……………. मन माहीं।
उत्तर-
1. ज्ञानाश्रयी
2. गुरु
3. माया
4. अटकी।

सहजोबाई पद कवि परिचय – (1725)

कवि परिचय-साहित्य में कोई भी प्रवृत्ति किसी भी काल में किसी न किसी अंश में जीवित रहती है। जैसे रीति काल के घोर विकास-वैभवपूर्ण वातावरण में भी भूषण वीरस के पुनः प्रस्तोता कवि हुए उसी तरह सहजोबाई भी निर्गुण संतमत की अलग जगाती दीखती हैं।

“हरिप्रसाद की सुता नाम है सहजोबाई।
दूसर कुल में सदा गुरु चरन सहाई।”

की एक मात्र स्वीकारोक्ति के अनसार इनके पिता का नाम हरिप्रसाद भार्गव था। प्रसिद्ध संत कवि चरणदास की ये शिष्या बन आजीवन ब्रह्मचारिणी बन इन्हीं की सेवा में रहीं।

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इनके चिन्तन में कुछ चीजें ऐसी हैं जो अन्य संत कवियों से इन्हें अलग करती हैं। निर्गुण ज्ञानाश्रयी भक्तिधारा की होकर भी कृष्ण के प्रति जो इनका रागानुरक्ति है वह इन्हें मीरा की तरह प्रस्तुत करती है और गुरु के प्रति जो इनका उद्गार है वह इन्हें कबीर की कोटि में पहुंचा देता प्रस्तुत करती है और ना होकर भी कृष्ण के प्रति जात कवियों से इन्हें अलग सहजों के व्यक्तित्व और काव्य में अटूट गुरुभक्ति सहज ध्यानाकृष्ट करती है। वे ईश्वर से कहीं अधिक महत्त्व अपने गुरु को देती हुई कहती हैं-

राम तजूं पै गुरु न बिसारूं। गुरु के सम हर कूँ न निहारूँ।।
चरणदास पर तन मन वारूं। गुरु न तजूं हरिः तजि डारूँ।।

सहजोबाई ने अपना सम्पूर्ण जीवन गुरुचरण दास और उनसे प्राप्त ईश्वरी अनुराग को समर्पित कर दिया। जैसा कि आचार्य शुक्ल का कथन है- ब्रह्म के स्वरूप में भावुक भक्त ध्यान या भाव-मग्नता के समय अपनी सारी सत्ता को हृदय प्राण, बुद्धि, कल्पना, संकल्प इत्यादि सारी वुत्तियों को समाहित और घनीभूत करके बड़े वेग के साथ लीन कर देता है। भावुक भक्त की एकांत अनुभूति प्रत्यक्ष दर्शन के ही तुल्य होती है। सहजोबाई ने कृष्ण के स्वरूप को निर्गुण ज्ञानमार्गी का चोल उतार कर जिस सहज और प्रकृत रूप में प्रस्तुत किया है, उसे विस्मृत करना कठिन है

“मुकुट लटक अटकी मन माहीं।
नृत तन नटवर मदन मनोहर कुडल झलक अलक बिथुराई।”

सहजोबाई की रचनाओं में इनकी प्रगाढ़ गृरुभक्ति, संसार की ओर से पूर्ण विरक्ति तथा साधु, मानव-जीवन, प्रेम, निर्गुण सगुण भेद, नाम स्मरण जैसे परंपरित विषय ही हैं। विषय पुराने हैं उद्भावनाएं ये बहुत मार्मिक नहीं हैं कहीं-कहीं, भाव विह्वलता के निदर्शन अवश्य हो जाते हैं

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“बबा काया नगर बसावौ।
ज्ञान दृष्टि से सैं घट में देखौं, सूरति निरति लौ लौवौ।
पाँच मारि मन बस करि अपने तीनों ताप नसावौ।
सत संतोष गहौ दृढ़ सेती दुर्जन मारि भजावौ।
सील, छिमा धीरज धारौ, अनहद बंब बजावौ।
पाप बनिया रहन न दीजै, धरम बजार लगावौ।।
सुबस बास होवै तब नगरी, बैरी रहै न कोई।
चम्न दास गह अमल बतायो, सहजो संभान्न सोई।।

सहजोबाई ने अपनी रचनाओं में सांसारिकता से विराग, नामजप तथा निर्गुण-सगुण ब्रह्म अभेद भाव की अभिव्यंजना की है। सहजोबाई में जो भक्ति है वह ज्ञान आधारित है लेकिन उसका प्रकटीकरण अविचल संकल्प और समर्पण की स्पृहणीय शक्ति के रूप में हुआ है।

मीरा के बाद सहजोबाई ही हमारे सामने आती हैं जो नारी होकर भी अपने अस्तित्व और सतीत्व दोनों बिन्दुओं पर मुखर हैं। उस जमाने में कुँवारी और ब्रह्मचारिणी बनकर गुरु की सेवा में समर्पित हो जाना एक कठोर कार्य था!

इन्होंने दोहे, चौपाई और कुंडलियाँ छंद में अपनी रचनाएँ की हैं। इनकी एकमात्र उपलब्ध रचना “सहज प्रकाश” है।

पदों का भावार्थ।

सहजोबाई के प्रथम पद

रीतिकाल के घोर शृंगारिक वातावरण में निर्गुण ज्ञानमार्गी भक्ति की अलख जगानेवाली सहजोबाई, कृष्ण के स्वरूप पर इस तरह से मुग्ध हुई कि निर्गुण का पद-पाठ भूल कर कृष्ण सौन्दर्य का वर्णन कर बैठी। इनके अनुसार शिशु कृष्ण के माथे पर जो मुकुट है उसमें झालर हैं, फुदने के उनके हिलने-डुलने से गजब का सौन्दर्य वर्द्धन होता है। सहजो का मन चित्त उसी लटकन में अटक कर रह गया है। छोटे कृष्ण अपने छोटे पैरों के बल नाचने में व्यस्त हैं और इस क्रम में उनके कानों के कुण्डल श्यामल धुंघराले बालों को तितर-बितर करते हुए बार-बार झलक मारते हैं और श्रीकृष्ण के सौन्दर्य को और वर्धित करते हैं।

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उनकी नाक में मुक्ता जड़ित बुलाक है जो होठों के हिलने पर हिलता है। कृष्ण की भौंहे भी कमान सी हैं जिनके गतिशील होने से इनका स्वरूप और प्रभविष्णु हो उठता है। धरती पर तो थाह-थाह कर ठुमक-ठुमक कर चलते हैं किन्तु अपनी बांहें उठाकर पलक झपकते कोई-न-कोई बाल सुलभ चपलता कर बैठते हैं। इनकी चतुराई भी बड़ी मोहक है। जब इन्हें ताता-थैया की लय पर नाचने के लिए कहा जाता है तो इनके पैरों में बंधी पायल के नुपूर झंकृत हो उठते हैं। पहले ये दुलार, मनुहार पर रीझते हैं और फिर आनन्द में डूबकर हम सबको रिझाते हैं।

सहजोबाई अपने गुरु चरणदास की कृपा से यह लीला देखने में सफल हुई है। कृष्ण का यह स्वरूप हृदय को भवन बनाकर सदा सर्वदा के लिए बसाने योग्य है। वह कृष्ण से प्रार्थना करती है कि इसी विश्व मोहन स्वरूप में वे उसके हृदयरूपी भवन में सदा के लिए बस जाएँ।

प्रस्तुत घद में वात्सल्य रस का वर्णन हुआ है। अनुप्रास, वीप्सा, उपमा आदि अलंकारों का सुन्दर विनियोग प्राप्त होता है।

इस पद के वर्णन से सहजोबाई के भीतर सगुण-निर्गुण भक्ति का जो अन्तर्विरोध है उसका एक तरह से निरसन हुआ है। यह उनकी निर्गुण भक्ति की उच्छल आनन्दानुभूति का ही प्रकट रूप है।

सहजोबाई के द्वितीय पद

ज्ञानी, संत, निर्गुणपंथी सहजोबाई अपने गुरु (श्रीचरणदास) और परमब्रह्म राम के बीच प्राथमिकता के प्रश्न पर गुरु के साथ हैं। उनके मत से ब्रह्म राम की उपलब्धि हो जाने के बाद भी गुरु का महत्त्व अक्षुण्ण है। यदि कोई अब उनसे गुरु को छोड़ने, विस्मृत करने को कहेगा तो मै उपलब्ध राम (ब्रह्म) को ही तजना, त्यागना श्रेयष्कर समझूगी। गुरु यदि मेरे सामने हैं तो उनके रहते मैं राम को देखन भी नहीं चाहूँगी।

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यह सही है कि हरि की कृपा से मेरा संसार में जन्म हुआ है। लेकिन ईश्वर तो चौरासी। लाख योनियों में असंख्या जीवों को प्रतिदिन जन्म देते हैं और मृत्यु के द्वारा उसे अपने पास बुला लेते हैं। लेकिन यह कृपा गुरु की ही है जिससे आवागमन से, जेन्म-मरण के चक्र से मुझे (जीव को) मुक्ति मिल गयी है। ईश्वर ने न सिर्फ हमें पैदा किया बल्कि चलते समय पाँचा चोर भी मेरे साथ लगा दिये। ये हैं-काम, क्रोध, मोह, मद और मत्सर।

जो कुछ भी कमायी होती, पुण्यार्जन होता, ये चोर चुरा लेते थे। मै इनके रहते अनाथ थी। गुरु ने इन चोरों (दुर्गुणों) से मुक्त कराया। हरि ने पैदा होने के लिए एक परिवार रूपी कारा में भेज दिया। जहाँ माया-ममता की बहुस्तरीय बेड़ियों ने मुझे जकड़ लिया। गुरु ने इन बेड़ियों को काटकर मुझे मुक्त किया। यही नहीं, ईश्वर ने जन्म देकर रोग और भोग में, सुख और दुःख में उलझा दिया। सांसारिक आकर्षण भोग के लिए प्रवृत्त करते और भोगोपरान्त अनेक रोग झेलने पड़ते थे। योगी गुरु ने योग के द्वारा रोग और भोग दोनों से मुक्त कराया। ईश्वर ने अनेक तरह के कर्म के मकड़जाल में उलझा दिया।

मै वास्तव में क्या हूँ, इसका स्मरण ही भूल गया। गुरु ने मुझे आत्म रूप का दर्शन कराया। ईश्वर ने मेरे साथ धोखा किया। मेरा निजत्व उसने मुझसे ही छिपा लिया, जिसे गुरु ने अपने ज्ञान के दीपक की लौ में मुझे दिख दिया। ईश्वर ने मुझे फिर भरमाने की चेष्टा की कि बंधन में ही, पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में ही जीव की मुक्ति है। किन्तु मेरे गुरु ने ईश्वर के इस तिलस्म को भी मिटा डाला। अत: जिन गुरु चरणदास ने मेरा कायाकल्प किया उन पर मै स्वयं को तन-मन से न्योछावर करती हूँ। गुरु को किसी भी परिस्स्थिति में नहीं तज सकती भले ही हरि को तजना पड़ जाए तो उसे छोड़ने के लिए मै सर्वदा तैयार हूँ। मेरी गति राम में ही, गुरु में लीन होने में ही है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 सहजोबाई के पद

प्रस्तुत पद में सहजोबाई ने परमपिता जगत् नियामक के अवगुणों का वर्णन किया है। ऐसा दुः साहस आज तक शायद ही किसी कवि ने किया हो। ईश्वर ने जन्म देकर भटकने के लिए बाध्य कर दिया, अपने इंगित पर नाचने के लिए बाध्य कर दिया किन्तु गुरु ने ईश्वर के विधान को ही मेरे लिए उलट-पुलट कर रख दिया।

स्वाभाविक रूप से अनुप्रास अलंकार यत्र-तत्र उपलब्ध है। शांत रस का यह पद अपूर्व प्रभाव क्षमता से सम्पन्न है।

सहजोबाई के पद कठिन शब्दों का अर्थ

नृत-नृत्य। भवनकारी-हृदय की भवन बनाकर रहने वाले। नटवर-लीलाधारी कृष्ण। सदाई-सदा ही, सर्वदा, हमेशा। अलक-केश, लट। बिसाऊँ-भूलूँ। बिथुराई-बिखरा हुआ। माही-में। बुलाक-नाक का आभूषण जाल में डोरी-जाल में डालना। हलत-हिलना। बेरी-बेड़ी, जंजीर। मुक्ताहल-मोती। लखादौ-दिखाया। नूपूर-धुंघरू। आप छिपायौ-आत्मरूप। छिया-दिया। रीझ-मोहित। तजि डारूँ-छोड़ दूं। धनरि (धरणी)-धरती। मोरूँ-मुझसे। हिय-हृदय।

सहजोबाई के पद काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. मुकुट लटक अटकी …………..बिथुराई।
व्याख्या-
सहजोबाई ने प्रस्तुत पंक्तियों में सगुण रूप ईश्वर श्री कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन किया है। उनके अनुसार कृष्ण के माथे का शोभाशाली मुकुट और उसमें लगे लटकन मेरे मन में अटक गये हैं। अर्थात् मेरा मन कृष्ण के सौंदर्य पर रीझ गया है। उनका शरीर नृत्य कर रहा है। चंचल स्वभाव के कारण हर समय गतिशील लगता है जो अपनी लयात्मकता के कारण नृत्य करता हुआ प्रतीत होता है। ऐसे नटवर श्री कृष्ण का मर्दन अर्थात् कामदेव के समान मनोहर रूप मन को मुग्ध कर लेता है। उनके कानों में पड़ा कुंडल डोलने पर कौधता है और छितरायी, हुई केश-राशि की शोभा मन को मुग्ध कर देती है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 सहजोबाई के पद

2. नाक बुलाक हलत ………… करत चतुराई।।
व्याख्या-
सहजोबाई ने प्रस्तुत पंक्तियों में नटवर श्री कृष्ण की आंगिक शोभा का वर्णन किया है। इसमें नाक में धारण किये गये बुलाक का वर्णन है जिसमें मुक्ताहल अर्थात् मोती जड़े हुए हैं। उनके मनोरम ओठ विशिष्ट सुन्दर ढंग से मटकते हैं और भौंहो की भौगमा सौन्दर्य की छवि बिखेरती है। वे ठुमुक-ठुमक कर धरती पर पैर रखते है अर्थात् चलते हैं और हाथों को उठा-उठाकर विभिन्न मुद्राओं के द्वारा भाव-चातुर्य व्यक्त करते हैं। अर्थात् उनके हस्त-परिचालन के माध्यम से विविध भावों की भी अभिव्यक्ति होती है वह कोरा हस्तपरिचालन नहीं होता है। यहाँ कवयित्री ने कृष्ण के आभूषण तथा उनके औठ, भौंह, पग, हाथ आदि की गति मुद्रा का सजीव चित्र खींचा है।

3. झुनुक झुनुक नूपूर झनकारत ……………. रहौ सदाई।
व्याख्या-
श्री कृष्ण चलते हैं तो पैरों के नूपुर बजते हैं। इससे उनके बाल-मन को आनन्द आता है, अतः वे जान-बूझकर नूपूर को झनकारते चलते हैं। इससे वातावरण में लयबद्ध झनकार उत्पन्न होती है। यह सुनने वालों का मन मोह लेता है। इतना ही नहीं कृष्ण ताता थेई की मुद्रा में नाचते भी हैं और उनका नृत्य मन को मोह लेता है। इतना ही नहीं कृष्ण ताता थेई की मुद्रा में नाचते भी है और उनका नृत्य मन को मोह लेता है। सहजोबाई कहती हैं कि मै तुम्हारे चरणों की दासी हूँ, तुम मेरे हृदय में निवास करो और सदा मुझ पर कृपा रखो। इन पंक्तियों में ‘चरणदास’ शब्द का दो अर्थो में प्रयोग हुआ है। प्रथम चरणों का दास और द्वितीय सहजोबाई के गुरु चरणदास। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

4. राम तनँ पै गुरु न बिसारूँ ……………… आवागमन छुटाहीं।
व्याख्या-
सहजोबाई ने प्रस्तुत पंक्तियों में अपनी यह प्रतिज्ञा व्यक्त की है कि वह राम को छोड़ सकती हैं मगर गुरु को नहीं। इसका कारण बतलाती हुई कहती है कि हरि ने जन्म देकर संसार में भेज दिया। मै यहाँ जीवन-धारण करने की सारी व्यथा, सारा प्रपंच और सारा विकार झेल रही हूँ। मगर गुरु ने ज्ञान देकर इस आवागमन अर्थात् जन्म लेने और मरने के क्रम से छुटकारा दिला दिया है। इसीलिए मैं गुरु के समान हरि को नहीं मानती हूँ। अर्थात् गुरु हरि से श्रेष्ठ हैं। हाँ ‘राम’ शब्द का प्रयोग ईश्वर के लिए हुआ है दशरथसुत के अर्थ में नहीं।

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5. हरि ने पाँच चोर दिये साथा …………….. काटी ममता बेरी।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में सहजोबाई कहती है कि हरि ने हमारे साथ कोई उपकारा नहीं किया है। उलटे कई समस्याएँ साथ लगा दी हैं। इन पंक्तियों के अनुसार गुरु ने पाँच चोरो से मुक्ति दिलाने का कार्य किया है। अर्थात् उनके उपेदश में इन्द्रियों के प्रति आसक्ति घटाने में सहायता मिली है। इसी तरह हरि ने ‘सूत-वि:-नारी भवन परिवारा’ के कुटुम्ब-जाल में फंसा दिया है, उलझा दिया है ताकि ईश्वर की ओर उन्मुख होने का अवसर ही न मिले। यहाँ गुरु ने ममता की डोर काटकर इस कुटुम्ब जाल से मुक्त होने में मदद की है। अत: ईश्वर सांसारिकता और आसवित में फैलाकर अपने से दूर करता है जबकि गुरु मोहपाश काटकर ईश्वर के समीप पहुँचाता है। अतः गुरु ईश्वर से श्रेष्ठ है।

6. ‘हरि ने रोग भोग उरझायौ ……………. आंतम रूप लखायौ।’
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में सहजोबाई हरि और गुरु का अन्तर स्पष्ट करती हुई कहती है कि हरि ने जीवन तो दिया लेकिन रोग और भोग में उलझा दिया। इससे जीवन कठिन और जटिल हो गया। इसके विपरीत गुरु ने योग की शिक्षा देकर मुक्ति दिलाई। योग के विषय में कहा गया है कि कर्म-कौशल और चित्तवृत्ति के निरोध के उपाय नाम योग है। इन दोनों अर्थात् कौशल और चित्त निरोध से जीवन संयमशील बनता है और तब स्वभावतः रोगमुक्त हो जाता है। इसी तरह हरि ने कर्म मार्ग पर डालकर कर्मफल की अनिवार्यता बतलाई जिससे कर्म का दुनिया में भटक गया। गुरु ने आत्मरूप का ज्ञान देकर बताया है कि अपने भीतर देखने पर आत्मज्ञान पाने से ही कर्म फल और कर्म-बन्धन से मुक्ति मिलती है। इस गुरु योग और आत्मज्ञान देता है जबकि ईश्वर कर्म भोग और रोग। अत: गुरु ही श्रेष्ठ हैं।

7. हरि ने मोसं आप छिपायौ …………….. हरि . तजि डारूँ।
व्याख्या-
चौपाई छन्द में रचित प्रस्तुत पंक्तियों में सहजोबाई कहती हैं कि पंच ज्ञानेन्द्रिया, भोग, रोग, कर्म परिवार, धन आदि सांसारिक आकर्षण के अनेक प्रपंचो के द्वारा ईश्वर ने एक परदा जैसा हमारे और अपने बीच डाल दिया और अपने को छिपया, ताकि हम उसे प्राप्त नहीं कर सकें। सहजो की दृष्टि में उपयुक्त तत्त्व अंधकार के परदे की तरह थे जिसके कारण हम ईश्वर को देखने में असमर्थ रहे। तब गुरु ने ज्ञान का दीपक जलाकर इस अन्धकार को दुर कर दिया और ईश्वर के दर्शन करा दिया फिर हरि से जोड़कर हमारे लिए मुक्ति रूपी गति ले आये।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 सहजोबाई के पद

इस प्रकार गुरु ने ईश्वर द्वारा फैलाए सारे प्रपचों को मिटा दिया जिससे हमारा अज्ञानजनित भ्रम दूर हो गया। मै अपने गुरु. चरणदास पर तन-मन न्योछावर करती हूँ। मै ऐसा ज्ञान देने वाले गुरु को नहीं तनँगी, अकर ईश्वर और गुरु में से किसी एक को छोड़ना होगा तो ईश्वर को ही छोडूंगी। सहजोबाई के इस कथन का अभिप्राय यह है कि गुरु की कृपा से ईश्वर मिल जाता है लेकिन ईश्वर की कृपा से गुरु नहीं। यदि ईश्वर को छोड़ भी दूंगी तो उनकी कृपा से पुनः प्राप्त कर लूँगी, कवयित्री ने चरण की दासी और गुरु चरणदास-इन दो अर्थो में ‘चरणदास’ शब्द का प्रयोग किया है अतः इसमें श्लेष अलंकार है।

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 3 मीराबाई के पद

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 3 मीराबाई के पद

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 3 मीराबाई के पद

मीराबाई के पद पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मीरा अपने सच्चे प्रीतम के साथ किस तरह रहने को तैयार हैं?
उत्तर-
मीरा अपने सच्चे प्रीतम के साथ हर परिस्थिति में रहने के लिए तैयार हैं। उसके प्रीतम कृष्ण उसे जो पहनने के लिए देंगे वही पहनने के लिए तैयार है। जो खाने के लिए उसके प्रीतम के द्वारा दिया जाएगा उसी से मीरा अपनी क्षुधा की तृप्ति करेगी, जो स्थान रहने के लिए कृष्ण देंगे वह वहीं निवास करेगी और यदि वे बेच भी दें तब भी वह कृष्ण प्रदत्त नयी स्थिति में रह लेगी।

प्रश्न 2.
“मेरी उण की प्रीत पुराणी, उण बिन पल न रहाऊँ।”-का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रस्तुत पद सगुण भक्ति धारा की कृष्णोपासक कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित है। कृष्ण के प्रति मीरा का एकनिष्ठ अटूट सर्मपण उत्तरोत्तर अतीव वेग से उमड़ते भावों से परिपूर्ण है। मधुर भाव की उत्कट प्रेमानुभूति से वशीभूत मीरा श्रीकृष्ण मीरा श्रीकृष्ण के प्रति सर्वात्म समर्पण करती है। वह श्रीकृष्ण पर लुट चुकी, मिट चुकी है। श्रीकृष्ण के रंग में रंग में रंगी मीरा उनसे पुरानी प्रीति को स्वीकार करते हुए एक पल भी अकेले नहीं रहना चाहती है। मीरा का अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के प्रति सर्वात्म समर्पित प्रेम व्यजित है। मीरा के प्रेम में उमड़ते हुए ऐसे प्रेम-वेग सहज ही दृष्टिगोचर होता है।

प्रश्न 3.
कृष्ण के प्रति तोड़ने पर भी मीरा प्रीत तोड़ने को तैयार नहीं है। क्यों?
उत्तर-
मीराबाई रूढ़ियों से ग्रसित मध्यकालीन समाज की सामाजिक बंधनों को तोड़कर नटवर नागर (श्रीकृष्ण) की प्रेम दीवानी बनकर उन्हें सच्चा प्रियतम के रूप में अपनाया है। वह तो श्रीकृष्ण के जादुई पाश में इस तरह बँधी है कि उसका अपना अस्तित्व ही उनमें विलीन हो गया है। विधवा मीरा तत्कालीन सामाजिक नियमों के अनुसार सती न होकर श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति की उन्मत घोषणा करती है। उन्होंने श्रीकृष्ण को ही अपना वास्तविक पति और प्रियतम स्वीकार करती है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 3 मीराबाई के पद

पति को वह कैसे छोड़ सकती है जिसके प्रेम में वह अस्तित्वविहीन हो गई है। कृष्ण के द्वारा प्रीत तोड़ देने पर भी वह उनसे प्रीत जोड़ने को मजबूर है। वह श्रीकृष्ण के संग तरुवर और पक्षी, सरवर और मछली, गिरिवर और चारा, चंदा और चकोरा, मोती और धागा तथा सोना और सुहागा के समान रहना चाहती है। वस्तुतः मीरा का किसी भी परिस्थिति में प्रीत नहीं तोड़ने की जादुई पाश में बंध चुकी है।

प्रश्न 4.
मीरा ने कृष्ण के लिए कौन-कौन-सी उपमाएँ दी हैं? वे कृष्ण की तुलना में स्वयं को किस रूप में प्रस्तुत करती हैं?
उत्तर-
मीरा ने कृष्ण के लिए निम्नलिखित उपमानों का प्रयोग किया है-तरुवर (पेड़), सरवर (सरोवर), गिरिवर (हिमालय पर्वत), चन्दा (चन्द्रमा), मोती और सोना।

मीरा ने कृष्ण की तुलना में स्वयं को क्रमशः पंखिया (पारवी, पक्षी), मछिया (मछली), चारा (घास), चकोरा (चकोर, चक्रवाक पक्षी), धागा और सोहागा के रूप में प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 5.
“तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी” में ठाकुर का क्या अर्थ है?
उत्तर-
उपर्युक्त पक्ति में आगत ठाकुर शब्द का अर्थ स्वामी, मालिक, सर्वस्व, सर्वेश, भर्तार आदि है।

प्रश्न 6.
पठित पद के आधार पर मीरा की भक्ति-भावना का परिचय अपने शब्दों में
उत्तर-
कृष्ण भक्त कवियों में मीराबाई का नाम स्वर्णाक्षरों में भक्ति-शिखर पर अकित है। मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की कृष्ण भक्ति है। इस भक्ति में विनय भावना, समर्पण भावना, वैष्णवी प्रीत, अवधा भक्ति के सभी रंग शामिल हैं। कृष्ण प्रेम में अस्तित्व-विहीन मीरा तरुवर पर पक्षी, सरोवर में मछली, गिरिवर पर चारा, चंदा के साथ चकोर, मोती के साथ धागा और सोना के लिए सोहागा के रूप में रहना चाहती है। तमाम तरह की लोक-मर्यादा को छोड़कर श्रीकृष्ण को पति मानकर कहती है-“तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी”

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मीरा ने आँसुओं के जल से जो प्रेम-बेल बोई थी, अब वह फैल गई है और उसमें आनन्द-फल लग गए हैं। वह सौन्दर्य और प्रेम के जादुई पाश में पूर्णतः बंध चुकी है। वह हर . पल अब श्रीकृष्ण को येन-केन प्रकारेण रिझाना चाहती है। वह कहती है

रेणु दिन वा के संग खेलूँ
ज्यूँ-त्यूँ ताही रिझाऊँ।

मीरा के पदों की कड़ियाँ समर्पण भाव से ओत-प्रोत है। इस समर्पण में प्रेमोन्माद के रूप में वह प्रकट होती है। उनका उन्माद और तल्लीनता, आत्मसमर्पण की स्थिति में पहुँच गया है

‘मीरा के प्रभु गिरधर नागर
बार-बार बलि जाऊँ।’.

मीरा की भक्ति में उद्दामता है, पर अंधता नहीं। उनकी भक्ति के पद आंतरिक गूढ़ भावों के स्पष्ट चित्र हैं। मीरा के पदों में श्रृंगार रस के संयोग और वियोग दोनों पक्ष पाए जाते हैं, पर उनमें विप्रलंभ शृंगार की प्रधानता है। उन्होंने ‘शांत रस’ के पद भी रचे हैं।

मीरा की भक्ति के सरस-सागर की कोई थाह नहीं है, जहाँ जब चाहो, गोते लगाओ। इसमें रहस्य साधना भी समाई हुई है। संतों के सहज योग को मीरा ने अपनी भक्ति का सहयोगी बना लिया था।

प्रश्न 7.
“गिरिधर म्हारो साँचो प्रीतम” यहाँ साँचो विशेषण का प्रयोग मीरा ने क्यों किया है?
उत्तर-
कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई उनकी उपासना प्रियतम (पति) के रूप में करती है। यह रूप अत्यन्त मनोहारी है। उन्होंने श्रीकृष्ण को ही अपना वास्तविक पति और सच्चा प्रियतम बताया-‘गिरिधर म्हारो साँचो प्रीतम’। युवावस्था में विधवा मीरा ने वैधव्यता को, जो उनकी नजर में सांसारिक और झूठा था, को धता बताकर स्वयं को अजर-अमर स्वामी श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। अर्थात् ‘साँचो’ विशेषण मीरा की कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ अटूट समर्पण की पराकाष्ठा है।

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प्रश्न 8.
मीरा की भक्ति लौकिक प्रेम का ही विकसित रूप प्रतीत होती है। कैसे? यह दोनों पदों के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रेम के दो स्वरूप हैं-
(i) जगतिक या सांसारिक प्रेम और (2) ईश्वरीय या आध्यात्मिक प्रेम। किसी शायर ने कहा है-“हकीकी इश्क से पहले मिजाजी इश्क होता है।” अर्थात् ईश्वर से प्रेम करने या होने के पूर्व सांसारिक प्रेम होता है। जो अपने रक्त सम्बन्धियों से, अपने परिवेश से प्रेम नहीं कर पाएगा वह ईश्वर से क्या खाक प्रेम करेगा।

मीरा कृष्ण को ‘पिया’ संबोधन देती है। पिया अर्थात् पति। भारतीय समाज में पति-पत्नी ‘के सम्बन्ध को अत्यन्त आदरणीय, सम्मानित स्थान प्राप्त है। विशेषकर हिन्दू समाज में जहाँ हर विषम परिस्थिति में यह दाम्पत्य बंधन अटूट बना रहता है। पति-पत्नी एक-दूसरे के व्यक्तित्व के परिपूरक होते हैं। एक-दूसरे पर आश्रित होते हैं। मीरा का कृष्ण के प्रति प्रेम निवेदन एक पत्नी के प्रणय निवेदन की तरह ही है। अन्तर सिर्फ इतना भर है कि कृष्ण यहाँ अलौकिक, परमपुरुष ब्रह्म स्वरूप हैं। जैसे एक पतिव्रता हर परिस्थिति में, सुख-दुख में पति के प्रति एकनिष्ठ बनी रहती हैं संतुष्ट होती हैं। मीरा भी कृष्ण के प्रति ऐसी ही भावना व्यक्त करती हैं। अत: यह – कहना ठीक ही है कि मीरा की भक्ति लौकिक प्रेम का विकसित रूप है।

मीराबाई के पद भाषा की बात।

प्रश्न 1.
मैं, म्हारो, उण आदि सर्वनाम हैं। दिये गये पदों से सर्वनामों को चुनकर लिखें।
उत्तर-
मीराबाई राजस्थान की थी। उनकी रचनाओं में राजस्थानी बोली के शब्द आये हैं। सर्वनाम भी राजस्थानी बोली के ही प्रयोग में लाये गये हैं।

  • म्हारो – मेरा
  • उण – वह, उसका, उसके
  • तोसों – तुमसे तितही – वहीं
  • वा – उसके
  • ताही – उसको
  • सोई – वहीं।

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प्रश्न 2.
प्रथम पद में मीरा ने कृष्ण और अपने लिए कुछ उपमान या अप्रस्तुत दिये हैं। उन्हें अलग-अलग लिखें।
उत्तर-
कृष्ण के लिए प्रयुक्त उपमान मीरा के लिए प्रयुक्त उपमान

  • तरुवर – पंखिया
  • सरवर – मछिया
  • गिरिवर – चारा
  • चंदा – चकोरा
  • सोना – सोहागा
  • ठाकर – दासी

प्रश्न 3.
मीरा के इन पदों में भक्ति रस है। भक्ति रस का स्थायी भाव ईश्वर विषयक रति है। अन्य रसों की सूची उनके स्थायी भावों के साथ बनाएँ।
उत्तर-
रसो वै सः अर्थात् रस ब्रह्म ही है। रसो की संख्या भिन्न आचार्यों ने आत नौ और ग्यारह निर्धारित की है। स्थायी भावों से साथ इन रसों की सूची निम्नवत है–

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखें रात, दिन, प्रभु, तरु, तालाब, चन्द्रमा, सोना।
उत्तर-

  • रात – निशा, रजनी, रात्रि।
  • दिन – दिवा, दिवस।
  • प्रभु – स्वामी, ठाकुर
  • तरु – वृक्ष, पेड़, तड़ाग
  • तालाब – सर, सरोवर, तडाग।
  • चन्द्रमा – चन्द्र निशापति, रजनीपति, निशाकर, चाँद।
  • सोन – कनक, स्वर्ण, सुवर्ण, हेम, हिरण्य।।

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प्रश्न 5.
मीरा की भाषा ब्रज मिश्रित राजस्थानी है। ये दोनों हिन्दी क्षेत्र की उपभाषाएँ हैं। बिहार प्रदेश में कितनी उपभाषाएँ बोली जाती हैं? उनकी सूची क्षेत्रवार बनाएँ।
उत्तर-
बिहार प्रांत में निम्नलिखित उपभाषाएँ बोली जाती हैं जिनके नाम के आगे उनका क्षेत्र उल्लिखित हैं

  • भोजपुरी-छपरा, सीवान, गोपालगंज, पश्चिमी चम्पारण, आरा, भोजपुर, रोहतास, कैमूर।
  • मैथिली-पूर्वी चम्पारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा सुपौल।
  • मगही-पटना, गया, चतरा, औरंगाबाद।
  • अंगिका-भागलपुर, पूर्णिया का कुछ भाग नौगछिया।
  • वञ्जिका-वैशाली और पूर्वी चम्पारण का कुछ भाग।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

मीराबाई के पद लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मीरा के कृष्ण के प्रति समर्पण भाव का विवेचन करें।
उत्तर-
मारा कृष्ण के प्रति अनन्य भाव से समर्पित है। वह दिन-रात कृष्ण के चरणों में पड़ी रहकर उनकी रूप माधुरी निहारना चाहती है। यह हर तरह से कृष्ण को रिझाना चाहती है। वह ऐसी समर्पिता है कि कृष्ण जो पहचानें, जो खिलावें अर्थात् जैसे रखना चाहें उन्हीं की दासी बनकर रहना चाहती है। यह समर्पण-भाव अपने उत्कर्ष पर वहाँ पहुँच जाता है जहाँ वह कृष्ण द्वारा बेचे जाने पर बिक जाने के लिए तैयार हो जाती है। सारांशत: वह एक पूर्ण समर्पिता और दासी भाव की प्रेमिका है।

प्रश्न 2.
मीरा की दृष्टि में कृष्ण का क्या स्थान है?
उत्तर-
मीरा ने कृष्ण के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग अपने प्रसंग में किये हैं। इन शब्दों से कृष्ण के विषय में मीरा की दृष्टि ज्ञात होती है। प्रथमतः मीरा की दृष्टि से गिरिधर रूप है वह जिसमें उन्होंने पर्वत धारण कर जन-समूह की घोर वृष्टि से रक्षा की। अतः मीरा की दृष्टि में कृष्ण सबके रक्षक हैं। तृतीय, मीरा के कृष्ण नागर हैं। सागर वह व्यक्ति होता है .. जो सभ्य, शिष्ट, संस्कारवान और मृदु वचन एवं आचरण का धनी होता है। अंतः मीरा के कृष्ण श्रेष्ठ पुरुष हैं।

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प्रश्न 3.
कृष्ण के प्रति मीरा किस भाव से समर्पिता है?
उत्तर-
मीरा ने कृष्ण को अपना प्रेमी और पति माना है। स्वभावत: उसने अपने को प्रेमिका के रूप में रखा है। लेकिन उसके प्रेमिका रूप में पत्नी जैसा समर्पण और दासी जैसा सेवा-भाव मिला हुआ है। एक वाक्य में वह पूर्णतः समर्पिता और सेविका प्रेमिका है जो कृष्ण को खुले शब्दों में पति मानती है।

मीराबाई के पद अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मीरा कृष्ण से प्रीति क्यों तोड़ना नहीं चाहती है?
उत्तर-
मीरा की दृष्टि में कृष्ण के समान सर्व रूप-गुण सम्पन्न कोई दूसरा पुरुष है ही नहीं लिससे वह प्रीति कर सके। इसलिए कृष्ण उसके लिए विकल्पहीन पुरुष हैं।

प्रश्न 2.
मीरा ने किन उपमानों के सहारे अपने और कृष्ण के सम्बन्ध को व्यक्त किया है?
उत्तर-
मीरा ने सरोवर और मछली, पेड़ और पक्षी, पर्वत और घास, चन्द्रमा और चकोर, मोती और धागा तथा सोना और सुहागा जैसे उपमानों द्वारा अपने और कृष्ण के सम्बन्ध को व्यक्त किया है?

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प्रश्न 3.
मीरा के कृष्ण कैसे व्यक्ति हैं?
उत्तर-
मीरा के कृष्ण नागर हैं, रक्षक हैं और सच्चे प्रियतम हैं। यही कारण है कि मारा की भक्ति कृष्ण में लीन है।

प्रश्न 4.
मीराबाई किस प्रकार की कवयित्री हैं?
उत्तर-
मीराबाई कृष्णभक्ति वाली कवयित्री है।

प्रश्न 5.
मीराबाई के प्रथम पद में किसकी व्यंजना हुई है?
उत्तर-
मीराबाई के प्रथम पद में एकांतिक प्रेम और समपर्ण भाव दोनों की व्यंजना हुई है।

प्रश्न 6.
श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की समर्पण-भावना उनके किस पद में दिखाई देती है?
उत्तर-
श्रीकृष्ण के प्रति मीराबाई की समर्पण-भावना द्वितीय पद में दिखाई देती है।

मीराबाई के पद वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. सही उत्तर का सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग या घ) लिखें।

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प्रश्न 1.
मीरावाई किस काल के कवयित्री हैं?
(क) रीतिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) वीरगाथाकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 2.
मीरवाई के उपास्य थे
(क) कृष्ण
(ख) राम
(ग) शिव
(घ) ब्रह्मा
उत्तर-
(क)

प्रश्न 3.
मीरा के पद का संकलन किस ग्रंथ में है?
(क) प्रेमाश्रु
(ख) प्रेमवाणी
(ग) प्रेम सुधा
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख)

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प्रश्न 4.
मीरा के प्रथम पद मे किसका वर्णन है?
(क) एकान्तिक प्रेम का
(ख) आत्म समर्पण का
(ग) अनन्य भक्ति का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क)

प्रश्न 5.
दूसरे पद में मीरा के किस रूप की व्यंजन हुई है?
(क) एकान्तिक प्रेम की
(ख) कृष्ण के प्रति समर्पण की
(ग) एकांगिक प्रेम की
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न 1.
मीरा…………..भक्तिधारा की प्रतिनिधि कवयित्री के रूप में जानी जाती है।
उत्तर-
सगुण

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प्रश्न 2.
मीरा की तुलना भारतीय साहित्य में तमिल की वैष्णव भक्त कवयित्री………………से की जाती
उत्तर-
गोदा (अंडाल)

प्रश्न 3.
पहले पद में मीरा का प्रियतम श्रीकृष्ण के प्रति वेपरवाह…………व्यंजित हैं।
उत्तर-
ऐकान्तिक प्रेम

प्रश्न 4.
तुम भये…………मैं तेरी मछिया।
उत्तर-
सरवर

प्रश्न 5.
तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी…………..।
उत्तर-
दासी।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 3 मीराबाई के पद

मीराबाई पद कवि परिचय (1504-1563)

हिन्दी साहित्य की भक्ति रस शाखा में सबसे महत्त्वपूर्ण के रूप में प्रेम दीवानी “दरद दिवाणी” मीराबाई का नाम आदर के साथ लिया जाता है। इनके जीवन-वृत्त में अनेक किम्वदतियाँ समाहित हैं, जिससे इनकी जीवनी अलौकिक घटनाओं से युक्त हो जाती है। कुछ घटनाएँ सत्य भी है जिनका वर्णन मीरा की कई रचनाओं में हुआ है। अनेक रचनाओं का उल्लेख होते हुए भी मीराबाई की पदावली ही सबसे प्रमाणिक मानी गयी है। तत्कालीन वातावरण की दृष्टि से संतों की ये शिष्या दिखती हैं किन्तु धार्मिक दृष्टि से सगुण भक्ति के समीप पड़ती है।

यही कारण है कि मीरा के भाव संतों के भाव जैसे ही अनुभूतिमय है और उनकी शैली में अधिक कोमल, तरल और प्रांजलं है। मीरा का आलंबन अलौकिक है और भक्तिभाव की दृष्टि से मीरा का प्रेम व्यापार रहस्यवाद के अन्तर्गत आता है। मीरा के आराध्य सगुण कृष्ण हैं जबकि रहस्यवाद निर्गुण ब्रह्म और जीव के मधुर रागात्मक सम्बन्ध पर आधारित है। यही कारण है कि मीरा न तो पूर्णतः संतों की श्रेणी में आती है और न भक्तों की श्रेणी में। मीरा की भक्ति माधुर्य भाव की है। सगुण ईश्वर के साथ भक्त कवि अपना भावपूर्ण व्यापार चलाते हैं। मीरा अपने आराध्य देव को प्रेमी ही नहीं पति भी मानती हैं–

“मेरो तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।”
“मैं तो गिरिधर के घर जाऊँ
गिरिधर म्हारों सांचों प्रीतम देखत रूप लुभाऊँ।”

कृष्ण के बिना मीरा का जीवन कठिन हो गया है-

“पिया बिन रहयो न जाई।”
“पिया बिन मेरी सेज अलूनी, जागत रैन बहावे।”

फागुन आया हुआ है और कृष्ण पास नहीं हैं-
“होरी पिया बिन खारी”

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मीरा के समक्ष को लेकर कोई औपचारिक बंधन नहीं है। उनका स्पष्ट कथन है-
“मेरी उनकी प्रीत पुराणी उण बिन पल न रहाऊँ
पूरब जनम की प्रीत पुराणी, सो कस छोड़ी जाय।”

मीरा के काव्य में रूपासक्तिजन्य माधुर्य भाव का वर्णन हुआ है जो कृष्ण के सौन्दर्याकर्षण पर आधारित है-
“मोहन के मैं रूप लुभाणी
सुन्दर वदन कमल दल लोचन
बाँकी चितवन मद मुस्कानी”
आली रे मेरे नैना वान पड़ी

चित चढ़ी मोरे माधुरी मूरत, उरबीच आन पड़ी।”

मीरा तो कृष्ण के हाथों पहले ही दर्शन में बिक गयी और उनके साथ हो गयी-

“मैं ठाढ़ी गृह आपणो री, मोहन निकसे आई
वदन चन्द्र प्रकाशत हिली मंद-मंद मुस्काई
लोग कुटुम्बी गरजे ही बरजे ही, बतिया कहत बनायी
चंचन निपट अकट नहीं मानत, परहित गये बिकाई।”

मीरा की माधुर्य भक्ति में प्रगाढ़ता के साथ अनुभूति की गंभीरता भी है-
“रमईया बिन नींद न आवे
नींद न आवै विरह सतावै प्रेम की आँच डुवाब
होरी पिया बिन लागै खारी
सूनो गाँव देस सब सूना सूनी सेज अटारी।”

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कला पक्ष की दृष्टि से भी मीराबाई का काव्य अत्यन्त समृद्ध है। इनके काव्य में संयोग और वियोग श्रृंगार के साथ शांत रस का सुन्दर परिपाक हुआ है। संयोग शृंगार का वर्णन देखें
“आवत मोरी गलियन में गिरधारी
मैं तो छुनि गई लाज की मारी।”

वियोग शृंगार का एक उदाहरण
‘हे री ! मैं तो दरद दीवाणी म्हारा दरद न जाणै कोई
प्रीतम बिन तम जाइ न सजनी दीपक भवन न भावै हो
फूलन सेल सूल हुई लागी जागत रैनि बिहावै हों।”

शांत रस का वर्णन देखें-
“स्याम बिन दुःख पावा सजनी
कुण महाँ धीर वंधावा
राम नाम बिनु मुकति न पावा फिर चौरासी जावां
साध संगत मा भूलणां जावा मूरख जनम गमावां
मीरा के प्रभु थारी सरणे जोत धरत पद पावां।”

मीरा ने काव्य में प्रकृति चित्रण अपने प्रकृत रूप में उपस्थित है-
“मतवारे बादल आये रे, हरि को सनेसो कबहु न लाये
गाजै पवन मधुरिमा मेहा अति झड़ लाये रे
कारो नाग विरह अति जारी मीरा मन हरि भायो रे।”

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मीरा की भाषा में गुजरती, राजस्थानी और ब्रजभाष में तीनों की त्रिधारा दीखती है। वस्तुतः इन तीनों भाषा-क्षेत्रों से इनका सम्बन्ध रहा है।

मीरा की शैली पद है जिसके साथ ‘सरसी’, विष्णुपद, दोहा, सवैया, शोभन, तांटक और .. कुण्डल छन्दों का भी प्रयोग किया है।

मीरा के काव्य में सादृश्यमूलक अलंकार जैसे उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अत्युक्ति, उदाहरण, . विभावना, समासोक्ति अर्थान्तर न्यास, श्लेष, वीप्सा और अनुप्रास की प्रधानता है। कहा जा सकता है कि मीरा के काव्य का भाव और कला दोनों पक्ष समृद्ध हैं। किन्तु सबके बावजूद मीरा में कवि कर्म प्रधान नहीं है। कृष्ण के लिए उनकी दिवानगी ही प्रधान और प्रसिद्ध है।

मीराबाई के पद कविता का भावार्थ

मीराबाई के प्रथम पद
प्रस्तुत पद में कृष्ण को समर्पित भक्त कवयित्री मीराबाई कृष्ण को ही सम्बोधित करते हुए कहती है हमारे बीच एक रागात्मक सम्बन्ध बना है। यदि इस सम्बन्ध को तुम अपनी तरफ से तोड़ भी देते तो तब भी मेरा एकनिष्ठ प्रेम जारी रहेगा। मैं यह सम्बन्ध कभी नहीं तोडूंगी। इसका एक कारण है कि तुम्हारे जैसा गुण सम्पन्न इस संसार में और कोई नहीं जिससे तुमसे बिछुड़ने के बाद सम्बन्ध बना सकूँ, जोड़ सकूँ।

वैसे हमारा सम्बन्ध अस्तित्व-सा अन्योन्याश्रित हैं। प्रभु मेरे यदि तुम तरुवर हो तो मैं उस पर निवास करने वाली पक्षी हूँ, चिड़िया हूँ। तुम्ही इस “पाखी” के सहायक हो। यदि तुम सरोवर हो तो उसमें जीवन धारण करने वाली मैं मछली हूँ। जल ही जिसका जीवन है। यदि तुम पर्वत राज हो तो मैं उसकी गोद में वाली हरियाली हूँ। यदि तुम चन्द्रमा हो तो मैं तुमको एक टक निहारने वाला चकोर हूँ। यदि तुम मोती हो तो मैं क्षुद्र धागा हूँ जिसमें गूंथ कर माला तैयार होती है। यदि तुम स्वर्ण, कंचन हो तो मैं सोहागा (एक रासायनिक पदार्थ) हूँ। यदि तुम ब्रज के स्वामी ठाकुर हो तो मैं तेरी सेविका हूँ, चरणों की दासी हूँ।

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मीरा रचित इस पद में केवल यही नहीं कथित है कि जीव हर रूप और स्थिति में ईश्वर पर निर्भर है बल्कि यह भी व्यजित तथ्य है कि जीव से ही ईश्वर को सार्थक्य प्राप्त होता है। जिस पेड़ पर पक्षी निवास नहीं करते वह मनहूस माना जाता है। वह सरोवर ही क्या जहाँ जीवन का अस्तित्व ही नहीं हो। मोती कीमती और चमकदार होकर भी किसी की ग्रीवा तक पहुंचने के लिए तुच्छ धागे पर ही निर्भर है। सोने को अपनी स्वाभाविक आभा पाने के लिए सोहागा की संगती चाहिए ही। वह स्वामी क्या जिसके सेवक अनुचर नहीं हो।

मीरा प्रकारान्तर से यह तथ्य कृष्ण को समझा देना चाहती है कि तुम चाहकर भी सम्बन्ध-विच्छेद कर सकते। जीव और ब्रह्म का सम्बन्ध, भक्त और भगवान का सम्बन्ध शाश्वत होता है, काल निरपेक्ष होता है।

प्रस्तुत पद में मीरा ने कृष्ण के लिए पिया, प्रभु, ठाकुर जैसी सम्बोधन संज्ञाओं का और अपने लिए ठाकुर की दासी का प्रयोग कर रागात्मक सम्बन्ध को एक महनीयता प्रदान की है। . रूपक, उदाहरण जैसे अलंकार से सज्जित यह पद, अद्वितीय मारक क्षमता से भी युक्त है।

मीराबाई के द्वतीय पद

कृष्ण की कर्षण शक्ति से प्रभावित मध्यकालीन भक्तिधारा की मधुराभक्ति की साधिका राधिका के समतुल्य दीवानी मीरा रचित इस पद में उनका हृदयोद्गार व्यक्त है। मीरा श्रीकृष्ण के सौन्दर्य और प्रेम के जादुई पाश में इस तरह बंधी हुई है कि उनके निजत्व का निरसन हो चुका है। उनका कहना है कि मेरा गन्तव्य कृष्ण हैं। मैं उसी के घर जाऊंगी। वे ही मेरे सच्चे प्रियतम हैं। जिसके रूप से देखकर लुब्ध हो चुकी हूँ। मैं कृष्ण के साथ अभिसार करने हेतु सन्नद्ध हूँ। जैसे ही रात हागी मैं कृष्ण के पास जाऊँगी और रात पर रास में सहभागी बन सुबह होने के साथ ही इस पर घर को वापस आ जाऊंगी।

कृष्ण भी मुझ पर रीझ जाएँ, मोहित हो जाएँ, इसके लिए सत-दिन उनके रंग संग तरह-तरह के खेलती रहूँगी। अब यह सब इच्छा पर होगा कि मुझे खाने-पीने और पहनने के लिए क्या देते हैं। मेरी ऐसी जातर्तिक कोई इच्छा शेष नहीं है। मेरा और कृष्ण का प्रेम बहुत पुराना और गहरा है। उनके बिना अब एक पल का जीना भी असंभव है। वे अपने आश्रय में जहाँ स्थान देंगे वही मेरा निवास होगा और यदि वे मुझे दूसरे के हाथों बेचना भी चाहें तो मुझे कोई मलाल नहीं होगा। क्योंकि मेरा “मैं’ अब बाकी बचा ही नहीं है। मीरा कहती है कि मेरे स्वामी तो गिरधर नगर है। जिन पर मैं बार-बार बलि जाती हूँ कृष्ण पर अपने को न्योछावर करती हूँ।”

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प्रस्तुत पद में सम्पर्ण के भावना की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति हुई है। जैसे कबीर ने सवयं को राम का कुत्ता घोषित किया। शांत रस की इस रचना में अनुप्रास की छटा देखते बनती है। एकनिष्ठ प्रेम और आत्मोत्सर्ग की यह सर्वोत्तम प्रस्तुति है।

मीराबाई के पद कठिन शब्दों का अर्थ

गिरधर-गोवर्धन गिरि को धारण करने वाले, कृष्ण। तोसों-तुमसे। तरुवर-श्रेष्ठ वृक्ष। पॅखिया-पक्षी। सरवर-तालाब। मछिया-मछली। गिरिवर-पर्वतराज। सोहागा-सोना का शुद्ध करने के लिए प्रयुक्त क्षार। ठाकुर-स्वामी। म्हारो-मेरा। साँचो-सच्चा। रैण-रातः। दिना-दिन। रिझाऊँ-प्रसन्न करूँ। तितही-वहीं। नागर-विदग्ध, चतुर, रसिक। बलि जाऊ-छिवर हो जाऊँ। वा-उसको। ताही-उसको। सोई-वही।

मीराबाई के पद काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. जो तुम तोड़ो, पिया……………कौन संग जोड़ें।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ राजस्थान कोकिला मीरा द्वारा रचित हैं। इन पंक्तियों में मीरा कहती हैं कि हे कृष्ण, तुम मेरे प्रियतम हो, मैं तुमसे प्रेम करती हूँ। तुम पर मेरा अधिकार नहीं है अत: तुम चाहो तो मुझसे अपनी प्रीति तोड़ ले सकते हो। लेकिन मैं तुमसे प्रीत नहीं तोडूंगी। अगर तुमसे प्रीत तोड़ लूँ तो जोडूंगी किससे? अर्थात् तुम्हारे सिवा मेरा कोई नहीं है। अतः तुम करो या न करो मगर मैं तो तुमसे ही प्रीति करूँगी, क्योंकि तुम्हारे सिवा दूसरा कोई ऐसा नहीं है जिससे मैं प्रेम कर सकूँ। मीरा ने अलग भी कहा है-मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई। अतः ये पंक्तियाँ कृष्ण के प्रति मीरा के अनन्य प्रेम को व्यक्त करती हैं।।

2. तुम भये तरुवर………..हम भये सोहागा।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा कृष्ण से अपनी अनन्य प्रीति का निवेदन करती कहती हैं कि कृष्ण तुम तरुवर हो और मैं उस पर आश्रय पाने वाली चिड़िया। तुम सरोवर हो तो मैं उसमें रहने वाली मछली जो तुमसे अलग होते ही तड़प-तड़प कर मर जायेगी। तुम पर्वत हो तो मैं उस पर उगने वाली घास। तुम चन्द्रमा हो तो मैं चकोर। तुम मोती तो मैं धागा। तुम सोना हो तो मैं सोहागा।

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अभिप्राय यह है कि उक्त अनेक उदाहरणों के सहारे मीरा ने कृष्ण के साथ अपनी उस भक्ति का परिचय दिया है जो निर्भरा भक्ति कहलाती है। इसमें भक्त भगवान को अपना आधार मानता है जिसके बिना उसका अस्तित्व ही नहीं होता।

3. मीरा कहे प्रभु……………मेरी दासी:
व्याख्या-
इन पंक्तियों में मीरा कहती है कि हे व्रज में निवास करने वाले मेरै प्रभु ! तुम मेरे . ठाकुर हो और मैं तुम्हारी दासी अर्थात् मुझमें-तुममें स्वामी-सेविका वाला प्रेम है। इन पंक्तियों
मे मीरा का अभिप्राय सामान्य दासी कहने से नहीं है वह बताना चाहती है कि वह कृष्ण की ऐसी प्रिय पत्नी है जो दासी की तरह पूर्ण समर्पण भाव से अपने स्वामी की सेवा करती है और उसी. में सुख मानती है।

4. मैं गिरिधर के घर जाऊँ………….लुभाऊँ।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ मीरा द्वारा रचित पद से ली गयी हैं। यहाँ मीरा द्वारा अपने प्रियतम कृष्ण के पास जाने का उल्लेख किया गया है। मीरा कहती हैं कि कृष्ण मेरे सच्चे प्रियतम हैं। वे अत्यन्त सुन्दर हैं। उनकी रूप माधुरी मोहक है। अत: मैं देखते ही उन पर लुब्ध हो जाती हूँ। जिस तरह भ्रमर फूल पर सतत् मँडराता रहता है। उसी तरह मैं उनकी रूप माधुरी के सम्मोहन में सतत् उन्हीं के समीप रहना और उनकी रूप माधुरी निहारते रहना चाहती हूँ।

5. रैण पडै तब ही उठ जाऊँ…………….ताही रिझाऊँ।
व्याख्या-
मीरा द्वारा रचित “मैं गिरिधर के घर जाऊँ” पद से गृहीत इन पंक्तियों में यह बताने की चेष्टा की गई है कि वह कृष्ण के सौन्दर्य और प्रेम की दीवानी है। अतः एक पल भी अलग रहना उसे स्वीकार नहीं। यही कारण है कि जैसे ही रात होती है उनकी सेवा में चली जाती और भोर होने पर ही उनसे अलग होती है। दिन में भी उनके साथ खेलती रहती हूँ। इस तरह चाहे दिन हो या रात मैं आठों पहर उन्हीं के साथ खेलती या सेवा में रहती हूँ। वे जैसे रीझते है उसी तरह उन्हें रिझाती हूँ। उन्हें जो पसंद है वही आचरण करती हूँ और इस तरह एक आज्ञाकारिणी प्रेमिका या पत्नी के रूप में मैं सेविका धर्म का तन्मयता से पालन करते हुए उनकी प्रसन्नता पाने के लिए प्रयल करती रहती हूँ।

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6. जो पहिरावै सोई पहिरूँ…………….पल न रहाऊँ।
व्याख्या-
मीरा ने अपने पद की प्रस्तुत पंक्तियों में अपने पूर्ण समर्पण भाव को व्यक्त किया है। वह पूरी तरह अनुगता और सेवापरायण दासी है। वह पति रूप श्री कृष्ण से कोई अपेक्षा नहीं करती। उसमें पाने की नहीं देने की लालसा है। अत: आदर्श सेविका की तरह वह कहती है कि वे जो पहनाते हैं वही पहनती हूँ जो देते हैं वही खाती हूँ। मेरी उनसे प्रीत पुरानी है। मैं उनसे अलग एक पल भी नहीं रह सकती हूँ। मीरा के इस कथन से यह बात स्पष्ट है कि मीरा ने भक्त होने के बाद अपने समस्त राजकीय संस्कारों का त्याग कर दिया था। खाने-पहनने की रुचि भूल कर जो मिलता था वही प्रभु प्रसाद समझकर खा लेती थी और जो भी वस्त्र मिल जाता था उससे तन ढंक लेती थी।

7. जहाँ बैठावें तितही बैढूँ………………बार-बार बलि जाऊँ।
व्याख्या-
अपने पद की प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा ने कृष्ण के प्रति अपना समर्पण भाव व्यक्त किया है। वह कृष्ण के प्रेम में दीवानी है। अत: जीवन के सारे क्रियाकलाप, सुख-दुःख को कृष्ण इच्छा का प्रसाद मानकर सादर स्वीकार करती है। वह कृष्ण को अपना नियामक और प्रेरक मानती है और कहती है कि वे जहाँ बैठाते हैं वहीं बैठी रहती हूँ। यदि वे मुझे बेच दें तो उनकी खुशी के लिए मैं सहर्ष बिक जाऊंगी। मेरे प्रभु गिरिधर हैं अर्थात् पर्वत भी उठाकर संकट से रक्षा करने में समर्थ हैं। वे नागर हैं अर्थात् शिष्ट, सभ्य, संस्कारवान और चतुर हैं। अतः मैं बार-बार उन पर अपने को न्योछावर करती हूँ।

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Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Bihar Board 12th Chemistry Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Question 1.
निम्न में से कौन-सा कार्बोनिल यौगिक सर्वाधिक ध्रुवीय है ?
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 1
Answer:
(d)

Question 2.
कीटोन
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 2 को किसके द्वारा एक पद में व्यक्त किया जा सकता है (जहाँ R एवं R’ ऐल्किल समूह हैं )?
(a) एस्टरों का जल-अपघटन
(b) प्राथमिक ऐल्कोहॉलों का ऑक्सीकरण
(c) द्वितीयक ऐल्कोहॉलों का ऑक्सीकरण
(d) ऐल्कोहॉलों के साथ ऐल्किल हैलाइडों की क्रिया
Answer:
(c) द्वितीयक ऐल्कोहॉलों का ऑक्सीकरण

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Question 3.
कार्बनिक यौगिक के ओजोनीकरण से प्राप्त उत्पादों में से एक के रूप में फॉर्मेल्डिहाइड है। यह इसकी उपस्थिति को पुष्ट करता है
(a) दो एथिलेनिक द्विआबन्ध
(b) विनाइल समूह
(c) आइसोप्रोपिल समूह
(d) ऐसीटिलेनिक ट्रिपल आबन्ध
Answer:
(b) विनाइल समूह

Question 4.
निम्न में से कौन-सी अभिक्रियाएँ बेंजोफीनॉन देगी ?
(a) बेंजॉइल क्लोराइड + बेंजीन + AlCl3
(b) बेंजॉइल क्लोराइड + फेनिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड
(c) बेंजॉइल क्लोराइड + डाइफेनिल कैडमियम
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (i), (ii) एवं (iii)
Answer:
(c) (i) एवं (iii)

Question 5.
क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टॉलूईन का बेंजेल्डिहाइड में ऑक्सीकरण कहलाता है
(a) इटार्ड अभिक्रिया
(b) राइमर-टीमन अभिक्रिया
(c) वु अभिक्रिया
(d) कैनिजारो अभिक्रिया
Answer:
(a) इटार्ड अभिक्रिया

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Question 6.
कार्बोनिल यौगिक से HCN का योग उदाहरण है
(a) नाभिकस्नेही योग
(b) विद्युतस्नेही योग
(c) मुक्त मूलक योग
(d) इलेक्ट्रोमेरिक योग
Answer:
(a) नाभिकस्नेही योग

Question 7.
अणुसूत्र C3H6O का एक कार्बनिक यौगिक टॉलेन अभिकर्मक के साथ रजत दर्पण नहीं देता है किन्तु हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ ऑक्सिम देता है । यह हो सकता है
(a) CH2 = CH – CH2 – OH
(b) CH3 COCH3
(c) CH3 – CH2 – CHO
(d) CH2 = CH – OCH3
Answer:
(b) CH3 COCH3

Question 8.
फॉर्मेल्डिहाइड के अलावा अन्य ऐल्डिहाइड ग्रिगनार्ड अभिकर्मक क्रिया करके योग उत्पाद देते हैं जो जल-अपघटन पर देता है
(a) तृतीयक ऐल्कोहॉल
(b) द्वितीयक ऐल्कोहॉल
(c) प्राथमिक ऐल्कोहॉल
(d) कार्बोक्सिलिक अम्ल
Answer:
(b) द्वितीयक ऐल्कोहॉल

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Question 9.
निम्न में से कौन-सा ऐल्डॉल संघनन नहीं देगा?
(a) फिनाइल ऐसीटल्डिहाइड
(b) 2-मेथिलपेन्टेनल
(c) बेंजेल्डिहाइड
(d) 1-फेनिल प्रोपेनॉन
Answer:
(c) बेंजेल्डिहाइड

Question 10.
निम्न में से कौन-सा यौगिक NaHSO3 के साथ क्रिया नहीं करता है ?
(a) HCHO
(b) C6H5 COCH3
(c) CH3 COCH3
(d) CH3 CHO
Answer:
(b) C6H5 COCH3

Question 11.
निम्न में से कौन-सा यौगिक
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के साथ रंगीन क्रिस्टलाइन यौगिक देगा?
(a) CH3COCl
(b) CH3COOC2H5
(c) CH3COCH3
(d) CH3CONH2
Answer:
(c) CH3COCH3

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Question 12.
1-ब्यूटीन के ओजोनाइड के जलअपघटन के उत्पाद हैं
(a) एथेनल केवल
(b) एथेनल एवं मेथेनल
(c) प्रोपेनल एवं मेथेनल
(d) मेथेनल केवल
Answer:
(c) प्रोपेनल एवं मेथेनल

Question 13.
निम्न में से कौन-सा यौगिक कैनिजारो अभिक्रिया में प्राप्त होगा?
(a) CH3 CHO
(b) CH3 COCH3
(c) C6H5 CHO
(d) C6H5 CH2 CHO
Answer:
(c) C6H5 CHO

Question 14.
पेन्टेन-2-वन एवं पेन्टेन-3-वन के बीच अन्तर करने के लिए कौन-सा परीक्षण होता है ?
(a) आयोडोफॉर्म परीक्षण
(b) बेनेडिक्ट परीक्षण
(c) फेहलिंग परीक्षण
(d) ऐल्डॉल संघनन परीक्षण
Answer:
(a) आयोडोफॉर्म परीक्षण

Question 15.
निम्न में से कौन-सा कैनिजारो अभिक्रिया में प्राप्त नहीं होता है ?
(a) बेंजेल्डिहाइड
(b) 2-मेथिलप्रोपेनल
(c) p-मेथॉक्सीबेंजेल्डिहाइड
(d) 2, 2-डाइमेथिलप्रोपेनल
Answer:
(b) 2-मेथिलप्रोपेनल

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Question 16.
CH3 – CH = CH – CHO से CH – CH = CH – CHOOH ऑक्सीकरण के लिए सबसे अच्छा ऑक्सीकारक है
(a) बेयर अभिकर्मक
(b) टॉलेन अभिकर्मक
(c) शिफ अभिकर्मक
(d) अम्लीकृत डाइक्रोमेट
Answer:
(b) टॉलेन अभिकर्मक

Question 17.
जब ऐल्डिहाइड एवं कीटोन अमलगमित जिंक एवं सान्द्र HCl के साथ क्रिया करते है, तो हाइड्रोकार्बन बनते हैं। यह अभिक्रिया कहलाती है-
(a) कैनिजारो अभिक्रिया
(b) क्लेमेन्सन अपचयन
(c) रोजेनमुण्डा अपचयन
(d) वोल्फ-किश्नर अपचयन
Answer:
(b) क्लेमेन्सन अपचयन

Question 18.
अभिक्रिया के निम्न क्रम में, अंतिम उत्पाद (Z) है
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 4
(a) ऐथेनल
(b) प्रोपेन-2-ऑल
(c) प्रोपेनोन
(d) प्रोपेन-1-ऑल
Answer:
(c) प्रोपेनोन

Question 19.
रासायनिक अभिक्रिया के निम्न क्रम में अंतिम उत्पाद (Y) है
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(a) एक ऐल्कीन
(b) एक कार्बोक्सिलिक अम्ल
(c) एक ऐल्डिहाइड
(d) कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण
Answer:
(d) कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण

Question 20.
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक क्रियाशील है जो नाभिकस्नेही योग देता है?
(a) FCH2,CHO
(b) ClCH2 CHO
(c) BrCH2CHO
(d) ICH2CHO
Answer:
(a) FCH2,CHO

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Question 21.
निम्न में से कौन-सा ऐल्डिहाइड कैनिजारो अभिक्रिया को दर्शाएगा?
(a) HCHO
(b) C6H5 CHO
(c) (CH3)3. CCHO
(d) इनमें से सभी
Answer:
(d) इनमें से सभी

Question 22.
निम्न में से कौन-सा सर्वाधिक क्रियाशील समावयवी है ?
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Answer:
(a)

Question 23.
निम्न में से कौन-सा आयोडोफॉर्म परीक्षण का उत्तर नहीं देता है
(a) n-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल
(b) द्वितीयक-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल
(c) ऐसीटोफिनॉन
(d) ऐसिटल्डीहाइड
Answer:
(a) n-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल

Question 24.
जब प्रोपेनल NaOH की उपस्थिति में 2-मेथिलप्रोपेनल के साथ क्रिया करता है, तो चार विभिन्न उत्पाद बनते हैं। अभिक्रिया कहलाती है
(a) ऐल्डॉल संघनन
(b) क्रॉस ऐल्डॉल संघनन
(c) कैनिजारो अभिक्रिया
(d) HVZ संघनन
Answer:
(b) क्रॉस ऐल्डॉल संघनन

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Question 25.
पेन्टेन-2-वन एवं पेन्टेन-3-वन के मध्य अन्तर के लिए परीक्षण सम्पन्न किया जाता है। निम्न में से कौन-सा उत्तर सही है ?
(a) पेन्टेन-2-वन रजत दर्पण परीक्षण देगा
(b) पेन्टेन-2-वन आयोडोफॉर्म परीक्षण देगा
(c) पेन्टेन-3-वन आयोडोफॉर्म परीक्षण देगा
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer:
(b) पेन्टेन-2-वन आयोडोफॉर्म परीक्षण देगा

Question 26.
जब ऐसिटल्डिहाइड को कॉस्टिक सोडा के तनु विलयन के साथ | उपचारित किया जाता है तो कौन-सा यौगिक प्राप्त होता है ?
(a) सोडियम ऐसीटेट
(b) रेजिन्स द्रव्यमान
(c) ऐल्डॉल
(d) एथिल ऐसीटेट
Answer:
(c) ऐल्डॉल

Question 27.
निम्न में से कौन-सा यौगिक ठण्डे तनु क्षार की उपस्थिति में स्वयं | ऐल्डॉल संघनन को सम्पन्न करेगा?
(a) CH ≡ C – CHO
(b) CH2=CHCHO
(c) C6H5 CHO
(d) CH2 CH2 CHO
Answer:
(d) CH2 CH2 CHO

Question 28.
कार्बोक्सिलेट आयन का सही संरचना प्रदर्शन है
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 7
Answer:
(b)

Question 29.
निम्न में से कौन-सी प्रबल ऑक्सीकरण पर ऐसीटिक अम्ल की लब्धि (Yield) होगी?
(a) ब्यूटेनॉन
(b) प्रोपेनॉन
(c) एथिल ऐथेनॉऐट
(d) ऐथेनॉल
Answer:
(c) एथिल ऐथेनॉऐट

Question 30.
कार्बोक्सिलिक अम्ल के कारण डाइमराइज होते हैं
(a) उच्च अणुभार
(b) उपसहसंयोजी आबन्धन
(c) अन्तराणुक हाइड्रोजन आबन्धन
(d) सहसंयोजी आबन्धन
Answer:
(c) अन्तराणुक हाइड्रोजन आबन्धन

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Question 31.
निम्न में कौन-सा HVZ अभिक्रिया में नहीं होगा?
(a) प्रोपेनॉइक अम्ल
(b) एबेनॉइक अम्ल
(c) 2-मेथिलप्रोपेनॉइक अम्ल
(d) 2, 2-डाइमेथिलप्रोपेनॉइक अम्ल
Answer:
(d) 2, 2-डाइमेथिलप्रोपेनॉइक अम्ल

Question 32.
निम्न में से कौन-सा कथन फॉर्मिक अम्ल के बारे में सही है?
(a) यह एक अपचायक है।
(b) यह ऐसीटिक अम्ल की अपेक्षा दुर्बल अम्ल होता है।
(c) यह एक ऑक्सीकारक है।
(d) जब इसके कैल्शियम लवण को गर्म किया जात है, तो यह ऐसीटोन बनाता है।
Answer:
(a) यह एक अपचायक है।

Question 33.
निम्न में से कौन-सा यौगिक नाभिकस्नेही योग. अभिक्रियाओं की ओर सर्वाधिक क्रियाशील होता है ?
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 8
Answer:
(b)

Question 34.
वह अभिकर्मक जो ऐसीटोन एवं बेंजेल्डिहाइड, दोनों से क्रिया नहीं करता है। वह है
(a) सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट
(b) फेनिल हाइड्रेजाइन
(c) फेहलिंग विलयन
(d) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक
Answer:
(c) फेहलिंग विलयन

Question 35.
कैनिजारो अभिक्रिया किसके द्वारा नहीं दी गई है ?
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 9
Answer:
(d)

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Question 36.
निम्न में से कौन-सा यौगिक क्षारीय KMnO4 विलयन के साथ ऑक्सीकरण पर ब्यूटेनॉन देगा?
(a) ब्यूटेन-1-ऑल
(b) ब्यूटेन-2-ऑल
(c) इनमें से दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer:
(b) ब्यूटेन-2-ऑल

Question 37.
क्लेमेंशन अपचयन में कार्बोनिल यौगिक को किसके साथ उपचारित किया जाता है?
(a) जिंक अमलगम + HCl
(b) सोडियम अमलगम + HCl
(c) जिंक अमलगम + नाइट्रिक अम्ल
(d) सोडियम अमलगम + HNO3
Answer:
(a) जिंक अमलगम + HCl

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब (त्रिलोचन)

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब (त्रिलोचन)

गालिब पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
‘गालिब गैर नहीं हैं, अपनों से अपने हैं, के द्वारा कवि ने क्या कहना चाहता है?’
उत्तर-
प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन ने उर्दू के महान शायर ‘मिर्जा गालिब’ की गैर नहीं अपनों से अपने कहा है। कवि के अनुसार गालिब हिन्दी साहित्य के लेखकों से अलग नहीं है। गालिब अन्य हिन्दी कवि और साहित्यकारों के समान ही जीवन-दर्शन, सामाजिक दर्शन तथा प्रकृति के रहस्यों को जनहित में उद्घाटित करने का कार्य अपने शायरों के माध्यम से किया है। शायरी के हल्केपन से दूर गालिब और कथ्य का सारगर्भित चित्रण बड़े ही सहज, स्वाभाविक और ठेठपन में किया है जो कल्याणकारी और शिक्षाप्रद है। वस्तुत: गालिब ने जनहित में लेखक कार्य कर हिन्दी जनता के होताय कवि होने का गौरव प्राप्त कर लिया है।

प्रश्न 2.
‘नवीन आँखों में जो नवीन सपने हैं’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
प्रगतिशील काव्य धारा के कवि त्रिलोचन ने मिर्जा गालिब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का चित्रण ‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट में किया है। कवि के अनुसार आधुनिक भारत के नौनिहालों के सपने जिसमें एक स्वावलम्बी- स्वाभिमानी और शक्ति सम्पन्न भारत के उज्जवल भविष्य का जो सपना है वही सपना गालिब को भी थी। गालिब ने अपनी शायरी के माध्यम से जीवन के जटिल गाँठ को खोलकर भविष्य निर्माण के लिए आवश्यक क्रिया-कलापों के लिए सारगर्भित विवेचन प्रस्तुत किया है। नवीन भारत के नौनिहालों के नवीन सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने अक्षर की महिमा का दिग्दर्शन ही कराया है। अपनी भाषा और लक्ष्य में एकरूपता के कारण ही गालिब की बोली ही आज हमारी बोली बन गई है।

प्रश्न 3.
‘सुख की आँखों ने दुःख देखा और ठिठोली की’ में किन दुखों की ओर संकेत है?
उत्तर-
पतंत्रता की बेड़ी में जकड़ी भारत की सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक जीवन में व्याप्त दुखों का वर्णन गालिब की रचनाओं में उल्लेखित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के सुख को देखनेवाली आँखें, भारत की दारुण-दशा से व्यथित है। मिर्जा गालिब के ‘अंटी में दाम’ नहीं है वे साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। अपने जीवन की कठिनाइयों भरे मार्ग से उतना दुःख नहीं है, वे तो जीवन का साधक कवि है जिसकी आँखों में एक सबल, सजग, सुशिक्षित, स्वावलम्बी तथा सर्वशक्तिसम्पन्न भारत का सपना है। उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन के दुःखों से ठिठोली करने की आदत-सी पड़ गई है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब (त्रिलोचन)

प्रश्न 4.
गालिब ने अक्षर से अक्षर की महिमा किस प्रकार जोड़ी?
उत्तर-
कविवर त्रिलोचन ने उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब के शायरों का भारतीय साहित्य, भारतीय जीवन तथा भारतीय दर्शन पर गहरा और व्यापक छाप को सहज ही परिलक्षित किया है। गालिब का व्यक्तित्व सहज, सादगीपूर्ण तथा शिक्षाप्रद था। उनकी रचनाओं में हिन्दी, उर्दू तथा फारसी का घालमेल है। गालिब ने जो कुछ लिखा है वह जीवन के सत्य के अत्यन्त करीब है। अन्य उर्दू शायरों की भाँति उनकी शायरी में फूहड़पन और हल्केपन का समावेश न होकर तथ्य और कथ्य पर आधारित है। उनकी रचनाओं में नैसर्गिक रूप से भारतीय परम्परा सहज ही दृष्टिगोचर होता है।

उनकी भाषा की सशक्ता सार एवं चित्रण दुनिया के लिए एक दुर्लभ उदाहरण है। शब्द से शब्द जोड़कर उसकी महिमा को व्यापक अर्थ में जनहित में उद्घाटित करनेवाले कवियों के श्रेणी में गालिब प्रतिष्ठित हैं। कवि के रूप में उन्होंने हिन्दी, उर्दू तथा फारसी शब्दों के समायोजन कर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। महान उर्दू शायर गालिब के शब्द .का समुचित आधार बनाकर तथा शब्द से शब्द को जोड़कर तथ्य और कथ्य को सहजता से पाठक के सामने प्रस्तुत करने में महारत हासिल था।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-“अपना कहने को क्या था, धान-धान नहीं था, सत्य बोलता था, जब-जब मुँह खोल रहे थे।”
उत्तर-
प्रस्तुत व्याख्येन पंक्तियाँ प्रगतिवाद काव्यधारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन द्वारा विरचित ‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट से ली गई है। इस कविता में कवि ने उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब के व्यक्त्वि एवं कृतित्व को निखारने-सँवारने तथा गहराई से अनुशीलन किया है। गालिब की जिन्दगी का चित्रण करते हुए कवि कहता है कि भले ही गालिब के पास धन-धान नहीं था, अपना कहने के लिए कुछ भी नहीं था; परन्तु उन्होंने अपनी सत्यनिष्ठा के संबल को कभी नहीं छोड़ा।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब (त्रिलोचन)

गालिब की शायरी सत्य और समयानुरूप थी, जहाँ से मानव-जीवन के तार सहज ही झंकृत होते हैं। उन्होंने जब भी मुँह खोला अर्थात् रचना की वह सत्य पर आधारित भारतीय जनजीवन का सारगर्भित तत्व थे। गालिब सरलता, सादगी तथा सत्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे। उनके इन्हीं गुणों के कारण वे हिन्दी साहित्य के करीब उनकी रचना पहुँच सकी और हिन्दी कवि ने उन्हें ‘अपनों से अपना’ कहा है।

प्रश्न 6.
इस रचना के आधार पर गालिब के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभर कर सामने आती है।
उत्तर-
प्रस्तुत सॉनेट ‘गालिब’ त्रिलोचन की गालिब के प्रति श्रद्धा और निष्ठा का दर्पण है। मिर्जा गालिब उर्दू के महान शायर थे जिन्होंने उर्दू शायरी के माध्यम से अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व का महान छाप भारतीय सभ्यता-संस्कृति पर छोड़ी। मिर्जा गालिब सरल, सहज एवं सादगी के प्रतिमूर्ति थे। धनहीन होने के बाबजूद गालिब ने सत्यनिष्ठा से कभी मुँह नहीं मोड़ा। गालिब ने अपनी रचनाओं को जनहित में उद्घाटित कर एक नवीन चेतना, नवीन आशा एवं नवीन ध्येय से जन-मानस को जोड़ने का प्रयास किया है।

उन्होंने अपनी गरीबी से ठिठोली करते हुए निराले अंदाज में जीवन-पथ पर संघर्षरत होकर भावी भविष्य के लिए नवीन सपने संजोने का कार्य किया था। उनकी रचनाओं में भारतीय अस्मिता, भारतीय संस्कृति तथा भारतीय समाज का स्पष्ट छाप सहज ही प्रतिबिंबित होता है। उन्होंने सत्य पर आधारित भारतीय जीवन-दर्शन को दर्शाया है। वे पुरोधा शायर के रूप में अक्षर से अक्षर की महिमा को जोड़ने का कार्य किया था।

उनकी शायरी में पकृति तथा मानव-जीवन-संघर्षों में जूझते भारतीय समाज के अद्भुत चित्र प्रतिबिम्बत है। जीवन को प्रतिकूल दशाओं में भी परम्परागत नैतिकता का मूल्यबोध के सहारे आगे बढ़ते रहने की कला का गालिब दुर्लभ और अद्वितीय उदाहरण थे। गालिब को भारतीय जनमानस अक्षर में अक्षर की महिमा जोड़ने वाला जीवन का साधक कवि के रूप में चिरस्मृत करता रहेगा।

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प्रश्न 7.
‘गालिब होकर रहे’ से कवि का क्या आशय है?
उत्तर-
प्रगतिशील काव्यधारा के पुरोधा कवि त्रिलोचन में ‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट में उर्दू के महान शायर मिर्जा गालिब के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला है। मिर्जा गालिब युग-पुरुष थे, जिन्होंने समाज की कुरीतियों पर ठोकर मारे, परन्तु उनका सामाजिक जीवन कैसा था; इसका वर्णन त्रिलोचन ने यथार्थ रूप में किया है। सामाजिक अन्धविश्वास तथा जड़ता से दु:खी गालिब को स्वयं की दीनता नजर नहीं आई। गालिब ने आधुनिक जीवन के नवीन सपने देखे। गालिब ने जीवन की जटिल गाँठ को जनहित में उद्घाटित कर मानवता की अकूत सेवा की।

भारतीय संस्कृति जोड़ने वाले साधक कवि थे, जिन्होंने अपनी सत्यनिष्ठा पर आधारित रचनाओं से भारतीय मानस को उद्वेलित एवं झंकृत किया। अपनी सरलता, सादगी तथा भारतीय जीवन दर्शन के उद्घोषक कवि के रूप में गालिब हिन्दी जनता का जातीय कवि के रूप में प्रतिष्ठित हैं। गालिब ने हिन्दी और उर्दू के बीच महासेतु बनकर इनके बीच की दूरी को पाटने का सार्थक प्रयास किया है।

गालिब के करिश्माई व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रभावित कवि गालिब के समान अपने जीवन और चरित्र का निर्माण करने हेतु प्रेरित किया है ताकि महान उर्दू शायर के समान भारत का प्रत्येक नागरिक सत्य, निष्ठा और कर्तव्य-परायणता का मेरुदण्ड बन सके। इस प्रकार गालिब का सम्पूर्ण व्यक्तित्व शिक्षाप्रद और अनुकरणीय है।

प्रश्न 8.
अपना कहने को क्या था, धन-धान नहीं था। सत्य बोलत था, जब-जब मुँह खोल रहे थे। [B.M.2009 (A)]
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे पाठ्य-पुस्तक दिगंत भाग-1 में संकलित प्रयोगधर्मी कवि त्रिलोचन रचित ‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट से उद्धत है। कवि ने उर्दू के महान शायर और शख्सियत मिर्जा गालिब की आर्थिक स्थिति, पारिवारिक स्थिति और आत्मिक स्थिति तीनों का सूत्रवत चित्रण किया है। गालिब जी ने जो लिखा है वह जीवन का कटु सत्य है।

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गालिब के जीवन में निजी कहलाने वाला कुछ नहीं था। जीवन में धन आया भी तो ठहरा नहीं। कोई चल-अचल संपत्ति उनके पास नहीं थी। एक विचित्र बात थी कि जब-जब उनका मुँह खुलता, वे मुंह को खोलते, मुँह से सिर्फ सत्य ही बाहर आता। सत्य तो कटु था। बेधक था, मारक था। सत्य से व्यष्टि से लेकर समाष्टि दूर भागते थे। सत्य का मार्ग अपनाकर हम स्वयं और सृष्टि का कल्याण करने में सक्षम हैं।

सचमुच सत्यवादी वही है जो संबंधों से असंबद्ध हो। कवि ने गालिब के व्यक्तित्व की वह झलक दिखलाई है जो कम शब्दों में अपनी बात बेजोड़ ढंग से रखते हैं।

प्रश्न 9.
हमको उनसे है वफा की उम्मीद। जो नहीं जानते वफा क्या है। गालिब अपने फन के समुच गालिब थे। व्यारघ्या करें। [B.M.2009(A)]]
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ प्रगतिवाद काव्यधारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन द्वारा विरचित गालिब शीर्षक सॉनेट से ली गई हैं।

कवि त्रिलोचन ने जो फारसी के अजीम शायर मिर्जा असद उल्लाह खाँ, ‘गालिब’ का शब्द चित्र अपने सॉनेट में प्रस्तुत किया है। उसके अनुसार मिलन सार हमदर्द, हरदिल अजीज इंसान थे। उन्होंने हमारी बोली को तराशा, हमारी जुदा-जुबानों को एक जगह लाने का गंगा-यमुना के पानी को एक करने जैसा कार्य किया। जिसका परिणाम है कि आज हिन्दी में उर्दू, फारसी, अरबी के शब्द के धुल-मिल गए हैं।

गालिब स्पष्ट करते हैं कि हमने उन लोगों से बफाई और मुहब्बत की उम्मीद की है जो वफा से परिचित ही नहीं है। शायर के मनोभाव को परखने वाले जौहरी का अभाव है। दुनियाँ वालों से उनकी जो उम्मीदें थीं वे साकार नहीं हो पाईं। एक तरह से उनका दर्द ही इन पंक्तियों में उभरकर सामने आया है।

गालिब भाषा की बात

प्रश्न 1.
प्रस्तुत सॉनेट में त्रिलोचन ने कई मुहावरों का प्रयोग किया है। जैसे-अपनों से अपना, अंटी में दाम न होना आदि। पाठ के आधार पर ऐसे मुहावरों की सूची बनाएँ और उनका वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
कवि त्रिलोचन रचित ‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट में निम्नलिखित मुहावरे आये हैं अपनों से अपने-तुमसे क्या छिपाना, तुम तो अपनों से अपने हो। गाँठ जटिल-भागने में नहीं बहादुरी जीवन की जटिल गाँठ खोलने में है। दाम नहीं अंटी में-रिलायंस कम्पनी तुम खरीदगे? अंटी में दाम भी है या नहीं?

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साँस-साँस पर तोलना-किस शब्द का क्या प्रभाव होगा बोलने से पहले साँस-साँस पर तौल लेना चाहिए।

अपना कहने को क्या-अपना कहने को क्या, तुम मेरी छोड़ो अपनी जरूरत कहो। मुँह खोलना- कीमत मुँह खोलने की भी होती है। गालिब होकर रहे-जीवन से हार कर नहीं, जीवन को गालिब होकर आनंद उठाओ।

प्रश्न 2.
महिमा, गरिमा शब्दों की तरह ‘इमा’ प्रत्यय लगाकर आठ अन्य शब्द बनाएं।
उत्तर-
पूर्णिमा, अरुणिमा, कालिमा, लालिमा, रक्तिमा, गरिमा, लघिया, महिमा।

प्रश्न 3.
‘धन-धान’ में कौन-सा समास है?
उत्तर-
धन-धान में द्वन्द्व समास है।

प्रश्न 4.
‘सत्य बोलता था जब-जब मुंह खोल रहे थे’-इस वाक्य में कर्ता कौन है।
उत्तर-
इस वाक्य में कर्ता ‘सत्य’ है जो बोलने का कार्य कर रहा है।

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प्रश्न 5.
‘बेशक’ में ‘बे’ उपसर्ग है। ‘बे’ उपसर्ग लगाकर सात शब्द बनाएँ।
उत्तर-
बेकार, बेलगाम, बेमरौवत, बेमजा, बेसहारा, बेलौस और बेसुरा।

प्रश्न 6.
‘अक्षर’ शब्द के प्रयोग में श्लेष अलंकार है, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
एक ही शब्द के विभिन्न सन्दर्भो में जब अलग-अलग अर्थ (भले ही निरर्थक हो) मिलते हैं तब श्लेष अलंकार होता है। यहाँ अक्षर का पहला अर्थ वर्ण, दूसरा अर्थ भाषा (वाणी) और तीसरा अर्थ सर्वशक्तिमान कालपुरुष, जन्म-जरामरण से रहित ईश्वर, ब्रह्म परमेश्वर और अल्लाह है।

प्रश्न 7.
त्रिलोचन की काव्य भाषा में एक सादगी और सरलता दिखलाई पड़ती है चौड़ी गहरी नदी जैसी बताई जाती है। इस सॉनेट की सादगी और सरलता को आधार बनाकर उनकी काव्य भाषा पर एक टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
त्रिलोचन प्रगतिवादी आन्दोलन के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। प्रगतिवाद की विशेषताओं में एक यह भी है कि सरल बोधगम्य शब्दों, बिम्बों के माध्यम से कवि अपनी बात रखता है किन्तु उसकी मारक क्षमता कहीं अधिक बढ़ी होती है। त्रिलोचन को प्रेमचंद, निराला और नागार्जुन जैसे वास्तविक संघर्षपूर्ण संसार मिला, जिसे देखने, जीने भोगने और उसमें कलात्मक सुधार करने का अवसर मिला।

संघर्षों से दो-दो हाथ करते रहने वालों की काव्य भाषा में सादगी और सरलता ही आयेगी। ‘गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-“छुद्र नदि भरि चलि तोराई” अर्थात् जिन नदियें का पेटी उथला होता है, वे ही अधिक उफनती है। सौभाग्य से त्रिलोचन का वस्तु संसार जितना विस्तृत है उतना ही अनुभव सम्पृक्त भी है।

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वे सॉनेट भले लिखते हों किन्तु सॉनेट रूपी गागर में वे सागर भर देते हैं। वह भी अपने आस-पास के प्रचलित शब्दों से लोकोक्तियों और मुहावरों के भरोसे। क्योंकि उन्हें यह सत्य पता है कि मुहावरे और लोकोक्तियों के पीछे कितने कड़े कटु अनुभव, मानस वृत्तियों का कितना लम्बा इतिवृत्त संबली के रूप में खड़ा है।

गालिब शीर्षक सॉनेट में भी यही सादगी और सरलता दृष्टिगोचर होती है। बोली गाँठ, ठिठोली-बहलाया, दाम, अंटी, साँस-तोल धान जैसे शब्दों के बदले त्रिलोचन शब्द कोश में अर्थ ढूँढने पर बाध्य कर देने वाले शब्दों का भी प्रयोग कर सकते थे किन्तु तब, गालिब का व्यक्तित्व इतना सहज नहीं होता। वे भी केशव की तरह कठिन काव्य के “प्रेत” की तरह दीखते। कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने भी लिखा है-

“जैसा मैं कहता हूँ, वैसा तू लिख फिर भी मुझसे बड़ा तू दीख”

कवि का बड़प्पन इसी में है कि यह बारीक-से-बारीक बात जेहन में उतार दे बिना किसी ताम-झाम के। अलंकार यदि स्वाभाविक रूप से आ जाएँ तो ठोक वरना अतिरिक्त श्रम न करे। तुम मिल जाए तो ठीक। किन्तु तुक के लिए बेतुक अर्थहीन वर्ष.-विन्यास से बचे। हम समझते है कि आधुनिक होकर भी, उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी त्रिलोचन आपादमस्तक सादगी की पूतिमूर्ति हैं और इसी के प्रक्षेप इनके सॉनेट हैं।

प्रश्न 8.
‘महिमा’ संज्ञा है या विशेषण? वाक्य में प्रयोग कर स्पष्ट करें।
उत्तर-
महिमा भाववाचक संज्ञा पद है, जिसका अर्थ है-बड़ाई, महातम, महात्म्य, गौरव आदि। उदाहरण-भगवान श्रीकृष्ण की महिमा अपरम्पार है। भगवान श्रीराम की महिमा जगजाहिर है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

गालिब दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सॉनेट के विषय में जानकारी दें।
उत्तर-
सॉनेट अंग्रेजी साहित्य का काव्यरूप है। हिन्दी में इसके लिए चतुर्दश पदी शब्द का प्रयोग होता है। इस काव्य रूप के विषय में निम्न बातें ध्यातव्य हैं।

  1. इसमें चौदह पंक्तियाँ होती है, कम या अधिक नहीं।
  2. दो-दो पंक्तियों का युग्म या जोड़ा होता हैं जिसे कप्लेट (Couplet) कहते हैं। ऐसे सात कप्लेट से एक सॉनेट बनता है।
  3. अंतिम कप्लेट में सॉनेट की विषयवस्तु से सम्बन्धित कोई महत्त्वपूर्ण तथ्य संदेश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

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प्रश्न 2.
शेर और गजल किसे कहते हैं?
उत्तर-
शेर और गजल दोनों उर्दू शायरी से सम्बन्धित काव्य रूप हैं। शेर में दो पंक्तियाँ होती हैं। इसका शाब्दिक अर्थ होता है एक लड़ी में पिरोना। गद्य को जब पद्य का रूप दिया जाता है तो वह बोध हो जाता है। इसमें दो चरण या पंक्तियाँ या मिसरे होते हैं।

गजल-इसका अर्थ होता है प्रेमिका से बातचीत। यह ऐसा काव्य रूप है जिसमें पाँच से ग्यारह शेर अर्थात् दस से बाईस पंक्तियाँ होती हैं। कुछ लोग इसमें सात से चौदह मिसरे या पंक्तियाँ मानते हैं। इसमें हर शेर दूसरे से स्वतंत्र होता है। उसका मजमून या विषय अलग-अलग होता है। दोनों पंक्तियों का एक प्रकार का तुक होता है। इसमें प्रेमिका के रूप, रंग, अदा तथा खूबियों का अधिकतर बढ़ा चढ़ा और प्रभावशाली वर्णन होता है। वास्तव में गजल में हुश्न और इश्क का वर्णन गजल गोई के दिलों की आवाज को प्रकट करता है।

गालिब उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गालिब का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर-
त्रिलोचन के अनुसार गालिब का व्यक्तित्व दबंग था। वें वक्ता थे। वे दु:खों और कठिनाइयों से संघर्ष करते रहे। उन्हें दुनिया से कोई काम नहीं था, लेकिन वे दुनिया को अपनी अनुभवी आँखों से सदा तौलते रहे। वे मनमौजी स्वभाव के मस्त व्यक्ति थे। उनकी आँखों में सदैव नये सपने पलते थे जिन्हें वे अपनी रचनाओं में व्यक्त करते थे।

प्रश्न 2.
गालिब का कवि-कर्म का संक्षेप में विवेचन करें।
उत्तर-
शायरी के क्षेत्र में गालिब सदा कुछ नया और दूसरे शायरों से कुछ अलग कहने के अग्रणी थे। उनकी रचनाओं में जीवन की जटिल गाँठे खोलने का प्रयत्न है। इसी कारण उनकी अभिव्यक्ति में हल्कापन नहीं है उनकी भाषा भी सहज और सम्प्रेषणीय है, इसलिए वह प्रभाव उत्पन्न करती है। वे जीवन के अनुभवों के कवि हैं। अत: उनकी रचनाओं में सत्य मुखर और बेलौस होकर बोलता है। दूसरे शब्दों में, वे सत्यम् के कवि हैं।

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गालिब अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गालिब का जीवन कैसा था?
उत्तर-
कवि त्रिलोचन के अनुसार गालिब गरीब थे। उनके पास घर नहीं था। उनकी जेब में पैसे नहीं थे। परिवार के नाम पर अपना कहने के लिए भी कोई नहीं था। उन्होंने सुख की आँखों से दुख को देखा था।

प्रश्न 2.
गालिब गैर क्यों नहीं लगते हैं?।
उत्तर-
गालिब दो कारणों से गैर नहीं लगते हैं। प्रथम उनकी भाषा हमारी आज की भाषा की तरह आधुनिक है। द्वितीय, उनके सपने वे ही हैं जो आज की नयी पीढ़ी के नये सपने हैं।

प्रश्न 3.
गालिब द्वारा ‘दुनिया जोतने’ से कवि का क्या तात्पर्य है?।
उत्तर-
दुनिया जोतने से कवि का तात्पर्य यह है कि गालिब की रचनाओं में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के यथार्थ अनुभवों का भंडार है।

प्रश्न 4.
‘गालिब ने जब भी मुँह खोला सत्य कहा’ का तात्पर्य क्या है?
उत्तर-
गालिब ने अपनी रचनाओं में जो भी लिखा है वे सभी बिना किसी लाग लपेट के सत्य की तल्ख अभिव्यक्ति हैं।

प्रश्न 5.
नवीन आँखों के नवीन सपने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
कवि का तात्पर्य है कि गालिब ने जो कुछ लिखा है वह आज की नयी पीढ़ी की भावनाओं से पूर्णत: मेल खाता है।

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प्रश्न 6.
सुख की आँखों से दुःख देखा और ठिठोली की-इसका क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
गालिब गरीबी के बीच रहकर भी मस्त जीवन जीते रहे। दु:खों की कभी परवाह नहीं की। यही कारण है कि गजल के दृष्टिकोण से गालिब का अद्वितीय स्थान है।

प्रश्न 7.
गालिब शीर्षक कविता में कवि के द्वारा किस शायर का परिचय दिया गया है?
उत्तर-
गालिब शीर्षक कविता में कवि त्रिलोचन ने मिर्जा गालिब का परिचय दिया है।

प्रश्न 8.
गालिब कैसी प्रकृति के व्यक्ति थे?
उत्तर-
शायर गालिब आजाद प्रकृति के व्यक्ति थे।

प्रश्न 9.
असदुल्लाह खाँ किनका नाम था?
उत्तर-
असदुल्लाह खाँ प्रसिद्ध शायर और गजलगो मिर्चा गालिब नाम था।

गालिब वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएं

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 गालिब (त्रिलोचन)

प्रश्न 1.
गालिब कविता के कवि हैं?
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) दिनकर
(ग) त्रिलोचन
(घ) मीरा
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 2.
गालिब का जन्म कब हुआ था?
(क) 1971 ई०
(ख) 1885 ई०
(घ) 1910 ई०
उत्तर-
(क)

प्रश्न 3.
गालिब का जन्म स्थान था
(क) मध्य प्रदेश
(ख) दिल्ली
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) हिमाचल प्रदेश
उत्तर-
(ग)

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प्रश्न 4.
कवि का मूल नाम था
(क) जगदेव सिंह
(ख) वासुदेव सिंह
(घ) नटवर सिंह
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 5.
गालिब की कृतियाँ हैं
(क) दिगंत
(ख) शब्द
(ग) फूल नाम एक है
(घ) अमोला
उत्तर-
(क)

प्रश्न 6.
गालिब की गद्य रचनाएँ हैं
(क) देशकाल
(ख) रोजनामचा
(ग) काव्य और अर्थबोध
(घ) मुक्ति बोध की कविताएँ
उत्तर-
(ग)

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प्रश्न 7.
त्रिलोचन की रचना है
(क) काव्य
(ख) सौनेट
(ग) गद्य लेखन
(घ) कहानी-संग्रह
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 8.
त्रिलोचन हैं
(क) लेखक
(ख) काहनीकार
(ग) कवि
(घ) फकीर
उत्तर-
(ग)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
त्रिलोचन …………….. काव्यधारा के प्रमुख कवि हैं।
उत्तर-
प्रगतिवाद या प्रगतिशील।

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प्रश्न 2.
त्रिलोचन हिन्दी कविता में …………… के तो पर्याय ही माने जाते हैं।
उत्तर-
सॉनेट।

प्रश्न 3.
त्रिलोचन ने मुख्य रूप से ……………. अपनी कविता का विषय बनाया है।
उत्तर-
ग्रामीण जीवन और किसानों-श्रमिकों की संस्कृति को।

प्रश्न 4.
त्रिलोचन ने संस्कृत, हिन्दी, उर्दू आदि भषाओं का …………….. किया है।
उत्तर-
अनुशीलन तथा आत्मसात।

प्रश्न 5.
अपने बाद की कविता पर त्रिलोचन का ……………. उनके विशेष महत्व का प्रमाण है।
उत्तर-
रचनात्मक प्रभाव।

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प्रश्न 6.
प्रस्तुत सॉनेट उनके प्रसिद्ध संकलन ……………… में संकलित है।
उत्तर-
दिगंत।

गालिब कवि परिचय – त्रिलोचन (1917)

प्रश्न-
कवि त्रिलोचन का जीवन-परिचय देते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर-
कवि त्रिलोचन का प्रगतिशील कविताओं के कवियों में प्रभावपूर्ण स्थान है। इनका मूल नाम वासुदेव सिंह था। इनका जन्म सन् 1917 में चिरानी पट्टी जिला सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इन्होंने अनेक काव्य-रचनाएँ लिखीं। काव्य के साथ-साथ गद्य के क्षेत्र में भी इनकी लेखनी की प्रवीणता कुछ कम नहीं रही। साहित्य के अनुपम रचनाओं के लिए इन्हें साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इन्हें गाँधी पुरस्कार से नवाजा गया। श्लाका सम्मान भी इनकी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

काव्य-रचनाएँ-धरती, शब्द, अरधान, चैती, मेरा घर, तुम्हें सौंपता हूँ, गुलाब और बुलबुल, ताप के मथ हुए दिन, उस जनपद का कवि हूँ, दिगंत अमाला आदि।

गद्य रचनाएँ-रोजनामचा, देशकाल, काव्य और अर्थ बोध, मुक्ति बोध की कविताएँ। हिन्दी के अनेक कोशों के निर्माण में त्रिलोचन जी ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

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काव्यगत विशेषताएँ-त्रिलोचन जी बहुभाषी विज्ञ शास्त्री भी माने जाते हैं। इनके द्वारा रचित साहित्य में इनका अनेक भाषाओं का ज्ञान स्पष्ट झलकता है। इस ज्ञान से इनकी रचनाओं में

पर हावी नहीं होता। इनकी रचनाओं की भाषा छायावादी कल्पनाशीलता से दूर ग्राम्य जीवन की माटी से जुड़ी यथार्थ की भाषा है। हिन्दी में सॉनेट (अंग्रेजी छंद) को स्थापित करने का श्रेय भी त्रिलोचन जी को जाता है। सामान्य बोलचाल की भाषा को यह कवि पाठक के सम्मुख इस प्रकार से नए स्वरूप में प्रस्तुत करता है कि वह उसे अपने ही आस-पास के वातावरण की जान पड़ती है। इनकी भाषा हृदय को छू लेने वाली है। भाषा सरल और बोधगम्य है। वस्तुतः आधुनिक प्रगतिशील हिन्दी कवियों में त्रिलोचनजी का प्रभावपूर्ण स्थान है।

गालिब कविता का सारांश

प्रश्न-
कवि त्रिलोचन द्वारा लिखित सॉनेट ‘गालिब’ का सारांश लिखें।
उत्तर-
प्रस्तुत सॉनेट प्रसिद्ध कवि त्रिलोचन द्वारा रचित ‘गालिब’ एक प्रसिद्ध सॉनेट है। यहाँ का अंकन ऐसी सरलता और सादगी से किया गया है कि उनकी शबीह में नैसर्गिक अपनाने के साथ पूरी परम्परा का अक्सर दृश्य दिखाई पड़ता है।

एक कवि दूसरे कवि पर लिखे और वह भी सहृदयता के साथ पूरी तरह नतमस्तक होकर तो जरूर कोई बात होगी। और जब बात गालिब की हो तो वकौल गालिब-

“कुछ तो पठिए कि लोग कहते हैं।”
आज गालिब “गजल सरा” न हुआ।”

उसी गालिब पर चुष्पदी छंद विद्या के धुरंधर कवि त्रिलोचन ने सॉनेट रचा। इस सॉनेट के अनुसार गालिब, गैर नहीं है, विजातीय नहीं, बेगाने नहीं। वे किसी रक्त संबंधी की तरह ही स्वजन प्रिय है, प्रेमास्पद हैं क्योंकि उनकी सोच संकीर्ण नहीं है। गालिब ने फारसी के बाद उर्दू और उर्दू के साथ हिन्दी को मजबूती प्रदान की, अर्थवत्ता प्रदान की। आज जो हर किसी की आँखों मे चमकीले सपने तैरते हैं, वे गालिब के देखे गये तरक्की पसंद सपनों के ही हिस्से हैं। गालिब ने जीव-जगत के संबंध के रहस्य को, गांठ को खोलने का काम किया। वह भी नपी-तुली भाषा-शैली में कही भी उनकी भाषा में भटकाव, हल्कापन नहीं है। बचपन सुख से बीता पर व्यक्तिगत कारणों से (शराब और जुए की लत) वे बाकी जिन्दगी दुःख में काटी। खोखली ढिढोलियों के द्वारा ही मन बहलाया।

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“मुफ्त की ‘मय’ पीते है कि जाहिद
रंग लाएगी फाका मस्ती भी मेरी एक दिन”

पैसे का अभाव रहा फिर भी दुनिया से कोई ऐसा वास्ता नहीं रखा कि शर्मसार होना पड़े। हाँ गालिब मन मसोस कर दुनिया की दोरंगी नीति, चाल-ढाल को बड़े गौर से देखते रहे। उनके पास उनका अपना कहलाने वाला भी कोई नहीं था, कुछ भी नहीं था। फिर भी उनके पास अजीब-सी थाती थी। जब कभी कुछ बोलते, कहने के लिए मुँह खुलता तो लगता जैसे सत्य बोल रहे हैं। गालिब अपनी शर्तों पर जीते रहे और अपनी तरीके से कूच किया। किन्तु जो कर गये, जो छोड़कर गये, जो हमें दे गये, वह अमूल्य है, अतुल्य है। गालिब ने अलग-अलग भाषाओं के बीच भावात्मक रिश्ता कायम किया। अलग-अलग धर्म सम्प्रदायों के बीच “परमब्रह्म अनल हक” की एकरूपता का प्रतिपादन किया।

कवि त्रिलोचन ने भी अत्यन्त नपे-तुले ढंग से गालिब की जीवन रेखाओं को उभारा है। उनके व्यक्तित्व और अवदान दोनों को रेखांकित किया है। कविता में यमक, वीप्सा, अनुप्रास जैसे अलंकारों के साथ मुहावरों और लोकोक्तियों में भी अपनी जगह बनायी है।

गालिब कठिन शब्दों का अर्थ

गालिब-शक्तिशाली, जबर्दस्त, विजेता। गैर-पराया। ठिठोली-मजाक, दिल्लगी। अंटी-बटुवा, जेब। अक्षर-जिसका क्षरण न हो, जो नष्ट न हो। बेशक-निस्संदेह।

गालिब काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. गालिब गैर नहीं ……………….. गालिब के सपने हैं।
व्याख्या-
‘गालिब’ शीर्षक सॉनेट की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि त्रिलोचन कहना चाहते हैं कि मात्र भाषा और धर्म की भिन्नता के कारण गालिब को भिन्न नहीं माना जा सकता। वे हमारे समानधर्मा हैं। वे जिस प्रकार की भाषा में अपने भावों का व्यक्त करते हैं वही हमारी भी भाषा है। उनकी रचनाओं में जो व्यक्त हुआ है वही हमारी आज की नयी पीढ़ी के सपने हैं। यहाँ बोली. का साधारण अर्थ नहीं है। यहाँ बोली से तात्पर्य कहने के ढंग और भाषा से है। सारांशत: कवि कहना चाहता है कि आधुनिक भाव-विचार का जो स्वरूप है वही गालिब में भी प्राप्त है। अत: वे हमारे समान धर्मा हैं, हमारे अपने हैं, अपने धर्म के लोगों और अपनी भाषा अर्थात् हिन्दी में लिखने वाले लोगों की तुलना में वे हमें ज्यादा अपने अनुभव होते हैं।

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2. गालिब ने खोली गाँठ ………………. नाम नहीं था।
व्याख्या-
‘गालिब’ शीर्षक कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में त्रिलोचन जी ने गालिब की कविताओं की विशेषता बतलाई है। उनके अनुसार गालिब की कविताओं में जीवन की जटिलता को अंकित करने और उसका रहस्य समझाने की चेष्टा है। उसमें कही गयी बात अर्थात् तथ्य और बोली अर्थात् कहने का ढंग और कहने के लिए अपनायी गई शैली दोनों तुली हुई है अर्थात् सटीक है। अर्थात् कथ्य को इस तरह तोलकर कहा गया है कि सीधे प्रभाव उत्पन्न करती है। उसमें ऊपरी तौर पर सरलता लगती है, लेकिन कथ्य और भाषा दोनों प्रभावशाली होने के कारण हलकापन नहीं है। अभिप्राय यह है कि गालिब की कविता में बात वजनदार ढंग से कही गयी है।

3. सुख की आँखों ने दुःख देखा …………….. धन-धान नहीं था।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियों में गालिब के विषय में त्रिलोचन बताना चाहते हैं कि उन्होंने पहले सुख के दिन देखे। फिर दुर्दिन ने घेरा तो उन्हीं सुख देखने वाली आँखों से दुःख देखना पड़ा। तब लापरवाही और मस्ती के सहारे उन्होंने दुख के साथ ठिठोली की। इस तरह दु:ख के साथ ठिठोली कर यानी उसे हल्केपन से लेकर हँसी-मजाक में उसके प्रभाव को नकार कर गालिब ने अपना जी बहलाया।

उनके पास पैसे नहीं थे। दुनिया से कोई मतलब नहीं था लेकिन सतत् हर साँस वे संसार के लोगों, व्यवहारों को तौल रहे थे। उनके पास धन-धान तो नहीं ही था अपना कहने के लिए भी कोई नहीं था। इसलिए वे बेखौफ होकर सत्य को अपनी शायरी में अभिव्यक्त करते रहे। जब मुँह खोला अर्थात् जब कविता लिखी तो जीवन के सत्य को ही वाणी दी, न समझौता किया, न चापलूसी की। कवि के कहने का आशय यह है कि समय के प्रभाव और दुःखों की मार से गालिब विचलित नहीं हुए तथा सदा सच को वाणी दी।

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4. गालिब हो कर रहे ………………. महिमा जोड़ी।
व्याख्या-
त्रिलोचन रचित ‘गालिब’ कविता से प्रस्तुत पंक्तियाँ ली गयी है। यह उस सॉनेट की अंतिम पंक्तियाँ हैं जिनसे गालिब की कविता के प्रभाव को सूझ–रूप में उपस्थित किया गया है। प्रथम पंक्ति में कवि ने यह बताया है कि गालिब ने परिस्थितियों से जूझकर अपनी साहित्यिक पहचान बनायी और सारी दुनिया को जीतकर रख दिया। अर्थात् जीवन के विविध क्षेत्रों के जटिल और गंभीर समस्या की व्याख्या अपने काव्य माध्यम से की। अत: उनकी कविता जीवन के सच की व्याख्या है।

दूसरी पंक्ति में यह कहा गया है कि वे कवि थे। कवि जो मनीषी होता है, द्रष्टा और स्रष्टा होता है। अक्षर जोड़ना अर्थात् कविता लिखना उनका कार्य था। उन्होंने इस अक्षर-कर्म के स्रष्टा होता है। अक्षर जोड़ना अर्थात् कविता लिखना उनका कार्य था। उन्होंने इस अक्षर-कर्म के सहारे अक्षरत्व अर्थात् अमरत्व प्राप्त किया। कवि की दृष्टि में वे एक अनश्वर कवि हैं, उनकी कृतियाँ समय के साथ और चमकदार और प्रासंगिक होती गयी। अत: अक्षर-साधन से उनको वह महिमा मिली है जो उन्हें अक्षर अर्थात् अनश्वर, अक्षर बनाती है।

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

झंकार पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने शरीर की सकल शिराओं को किस तंत्री के तार के रूप में देखना चाहा है?
उत्तर-
मैथिली शरणगुप्त जैसे राष्ट्रभक्त कवि ने अपने शरीर की सकल शिराओं को मातृभूमि की सर्वतोमुखी विकास रूपी तंत्री के तार रूप में देखना चाहा है। कवि सम्पूर्ण संचित ऊर्जा क्षमता को मातृभूमि के कायाकल्प प्रक्रिया में लगा देना चाहा है।

प्रश्न 2.
कवि को आघातों की चिन्ता क्यों नहीं है?
उत्तर-
कवि राष्ट्र-प्रेम की भावना लोकचित में जागृत करना चाहता है। स्वाधीनता की व्याकुलता में वह स्वाधीनता आन्दोलन को सम्पूर्ण राष्ट्र में अंतर्व्याप्त करना चाहता है। गुलामी से बढ़कर कोई दूसरी पीड़ा नहीं है। स्वाधीनता की उत्कट आकांक्षा कुछ विलक्षण ही होती है। स्वाधीनता की आकांक्षा ने कवि को आघातों की चिन्ता से विमुक्त कर दिया है।

प्रश्न 3.
कवि ने समूचे देश में किस गुंजार के गमक उठने की बात कही है?
उत्तर-
आधुनिक भारत के प्रथम राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त में गुलामी की जंजीर में जकड़ी भारत माता को स्वाधीन करने की गहरी व्याकुलता है। कवि गुलाम भारत में आजादी प्राप्ति हेतु शौर्य, पौरुष तथा पराक्रम का संचार करना चाहता है, जिसके बल पर सम्पूर्ण भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्ष का स्वर गुंजारित हो सके। कवि स्वाधीनता आंदोलन में देशवासियों की सक्रिया सहभागिता चाहता है। वह स्वतंत्रता प्राप्ति के गुंजार का गमक सम्पूर्ण देश में गुंजारित करना चाहता है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

प्रश्न 4.
“कर प्रहार, हाँ कर प्रहार तू,
भार नहीं, यह तो है प्यार।
यहाँ किससे प्रहार करने के लिए कहा गया है। यहाँ भार को प्यार कहा गया है। इसका क्या अर्थ है?
उत्तर-
प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारे पाठ्य पुस्तक दिगंत भाग-1 में संकलित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त रचित झंकार शीर्षक कविता से ली गयी हैं।

सांगीतिक वातावरण में जब संगत करते कलाकार विभिन्न प्रकार के रागों स्वरो, लयों का, अपनी कलाकारिता का इस भाव से प्रदर्शन करे कि सामने वाला कलाकार निरुतर हो जाए। किन्तु समर्थ कलाकार उसकी तोड़ प्रस्तुत करता चलता है जिससे स्वस्थ प्रतियोगी वातावरण बनता है तब परमआनंद की अनुभूति होती है। यहाँ प्रहार का यही अर्थ है, यहाँ एक कलाकार कलावत अपने समकक्ष कलाकर को, ताल, राग के माध्यम से प्रहार करने और स्वयं को उसका प्रतिकार करने के लिए प्रस्तुत होने की बात करता है।

“विपरीत और विरोधी के बीच ही विकास है” के सूत्र को पकड़े हुए कवि इस प्रहार को प्यार की संज्ञा देता है। जब तक चुनौती नहीं हो निखार नहीं आता। जब तक धधकती आग नहीं गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट हो सोने में कांति नहीं आती है। कवि चुनौतियों, जबावदेहियों, दायित्वों को भार स्वरूप नहीं प्यार स्वरूप स्वीकार करता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियां की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(क) “मेरे तार तार से तेरी
तान-तान का हो विस्तार
अपनी अंगुली के धक्के से
खोल अखिल श्रुतियों के द्वार।”
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित पंक्तियाँ हमारे पाठ्य पुस्तक दिगंत भाग-1 में संकलित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त रचित ‘झंकार’ शीर्षक कविता से उद्धत हैं। वीणा से राग स्वर तभी निःसृत होता है तब उसके ऊपर तार अपनी जीवनाहूति देते हैं, अपने को तनवाने (तन्य) के लिए प्रस्तुत होते। स्वर संधान के पूर्व तारों को साधित किया जाता है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

कवि स्वर संधान की पूर्व पीठिका बनने को प्रस्तुत है। अपनी शरीर की शिराओं को तार बनाने का सन्नद्ध है और वाँछा करता है, स्वर लहरी दूर-दूर तक गूंजे। प्रवीण अंगुलियों का तारों पर आघात इतना पुरजोर हो कि अखिल सृष्टि में यह कल निनाद सुना जा सके। कवि ठोस आधार पर मसृण कलाकृति का आकाक्षी है।

कवि शारीरिक भूख के ऊपर उठकर मानसिक हार्दिक क्षुधा की तृप्ति हेतु आहन करता है।

स्पष्ट है गुप्त जी का झुकाव छायावादी विचारधारा की ओर हो चुका है। तार-तार और तान-तान में वीप्सा अलंकार तथा अपनी अंगुली ……………….. अखिल में ‘अ’ वर्ण की आवृति से अनुप्रास अलंकार उपस्थित है।

(ख) ताल-ताल पर भाल झुकाकर
माकहत हों सब बारम्बार
लघ बँध जाए और क्रम-क्रम से
सभ में समा जाए संसार।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित पंक्तियाँ हमारे पाठ्य पुस्तक दिगंत भाग-1 में संकलित मैथिलीशरण गुप्त रचित ‘झंकार शीर्षक कविता से उद्धृत हैं। इन पंक्तियों में कवि ने संगीत की चरम स्थिति की प्राप्ति और उसके प्रभाव की चर्चा की है। संगीत वह भाषा है जिसे अनपढ़ भी समझ लेते हैं। संगीत का जब समां बन्ध जाता है तो हर ताल पर, हर थाप पर प्रत्येक आरोह-अवरोह के साथ श्रोता अपने निजत्व को त्याग कर संगीत के सम्मोहन में बन्धे सिर झुकाते रहते हैं। आनन्द के सागर में डूबे रहते हैं। उन्हें मधुमती भूमिका प्राप्त होती है।

परिपक्व संगीत ‘ब्रह्मानन्द सहोदर’ आनंद की प्राप्ति करता है। संगीत गायन वादन के क्रम में वह चरम क्षण भी आता है जिस सम कहा जाता है जहाँ एक अलौकिक शांतिमय संसार का सृजन हो जाता है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

कविक अभीष्ट है कि हम कला को इस ऊँचाई तक ले जाएँ कि आलोचना का अवकाश न रहे बल्कि हमारी कला विश्व समुदाय को मोहित, आकर्षित करने, उन्हें मधुमती भूमिका में पहुँचाने, ब्रह्मानंद का क्षणिक ही सही साक्षात्कार कराने में सफल हो।

कवि भारत के सांस्कृतिक उत्थान का आकांक्षी है। लालित्य वर्द्धन का आकांक्षी है।

प्रस्तुत पंक्तियां में वीप्स और अनुप्रास अलंकार का वर्णन हुआ है।

प्रश्न 6.
कविता का केन्द्रीय भाव क्या है? अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
आधुनिक काल के द्वितीय उत्थान-द्विवेदी युग के प्रमुख कवि हैं मैथिलीशरण गुप्त। वे आधुनिक भारत के प्रथम राष्ट्रकवि तथा नए भारत में हिन्दी जनता के प्रतिनिधि कवि के रूप में सम्मानित हैं।

प्रस्तुत कविता में कवि कहता है कि स्वतंत्रता का स्वर इतना ऊचाँ हो कि सम्पूर्ण राष्ट्र एकीभूत होकर देश की आजादी का स्वर गुंजारित करे। प्रकृति आनन्दमय हो जाए, मनुष्य का भाग्य इठलाये। मुक्तिकामना की गमक देश और काल की सीमा का उल्लंघन कर जन-जन के मानस पटल पर गुजारित हो जाए। मुक्तिकामना की तान से स्वतंत्रता की ऐसी उत्कट कामना भारतवासियों में पैदा हो कि वे सदियों से गुलामी की दासता में छटपटा रही भारतमाता गुलामी के बन्धन से मुक्त हो जाए। सम्पूर्ण हिन्दीवासी अपनी अस्मिता की खोज की व्याकुलता राष्ट्रप्रेम का या राष्ट्र-मुक्ति के संग्राम में समाहित होकर गुलामी की बेड़ियां से आजाद हो जाए।

‘झंकार’ कविता में स्वाधीनता आन्दोलन की अंतर्व्याप्त राष्ट्र के कोने-कोने में हो चुकी है और स्वाधीनता तथा मुक्ति की प्यास एवं सम्पूर्ण राष्ट्र को हिन्दोलित होने की सच्चाई सहज ही दृष्टिगोचर होती है। कविता में सम्पूर्ण राष्ट्र की एकीभूत मुक्तिकामना की उत्कट और अपूर्व अभित्यक्ति हुई है। राष्ट्र के प्रति प्रणों से बढ़कर राष्ट्र प्रेम तथा कृतज्ञता की आत्मिक अनुभूति इस गीति-गमक रचना में स्वरित होती है। कवि की राष्ट्रीयता, देशप्रेम, यथार्थबोध, आजादी की कामना का उद्देश्य एवं चेतना कविता का मूल स्वर है।

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प्रश्न 7.
कविता में सुरों की चर्चा करें। इनके सजीव-साकार होने का क्या अर्थ है?
उत्तर-
भारत राष्ट्र के गौरव गायक मैथिलीशरण गुप्त की झंकार शीर्षक कविता संगीत की पृष्ठभूमि में रचित है। संगीत के घटक सुर स्वर हैं। स्वरों का आरोह-अवरोह जब पक्के गायक के गले से नि:सृत होता है तो एक जीवन्त अवलोक का सृजन होता है। ऐसा लगता है कि स्वर केवल कान के माध्यम से ही नहीं सुन रहे बल्कि आँखों के सामने साकार रूप में उपस्थित हैं। स्वरों की सर्वोत्तम प्रेषणीयता ही सजीव-साकार का अर्थ ग्रहण करती है।

प्रश्न 8.
इस कविता का स्वाधीनता आन्दोलन से कोई सांकेतिक सम्बन्ध दिखायी पड़ता है। यदि हाँ! तो कैसा?
उत्तर-
राष्ट्रकवि मैथिलीशरधा गुप्त की प्रस्तुत कविता ‘झंकार’ में भारतीय स्वतंत्रता-संघर्ष का स्वर नि-संदेह गुंजारित है। इस कविता में कवि की देशभक्ति स्वतंत्रता प्राप्ति की उत्कृष्ट आकांक्षा तथा भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की उत्प्रेरणा का स्वर अनुगुजित है। दिव्यभूमि की आजादी के लिए व्याकुल कवि का हृदय मुक्ति की युक्ति निकालने को तैयार है तथा सम्पूर्ण हिन्द को इस स्वाधीनता आन्दोलन में कूद पड़ने का आह्वान करता है जो उसके उत्कृष्ट देशभक्ति रेखांकित एवं विश्लेषित करता है।

कविता में गुलामी की बेड़ियों को काटकर भारतमाता को स्वाधीन बनाने की संवेदना-कल्पना का संस्पर्श का एकांत साक्ष्य पेश होता है। कविता में स्वाधीनता आन्दोलन की अंतर्व्याप्ति तथा मुक्ति की प्यास निःसंदेह निर्णायक स्थान प्राप्त कर चुका है। सम्पूर्ण राष्ट्र स्वाधीनता के लिए आन्दोलित होकर सदियों की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए कृतसंकल्पित है। इस कविता में सम्पूर्ण राष्ट्र की एकीभूत मुक्तिकामना की गीति-गमक गुंजारित और झंकृत है।

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प्रश्न 9.
वर्णनात्मक कविता लिखने के लिए “द्विवेदी युग” के कवि प्रसिद्ध थे। किन्तु इस कविता में छायावादी कवियों जैसी शब्द-योजना, भावाभिव्यक्ति एवं चेतना दिखलायी पड़ती है। कैसे? इस पर विचार करें।
उत्तर-
आदर्शवाद की प्रधानता के कारण “द्विवेदी युग’ के कवियों ने वर्णन प्रधान इतिवृत्तात्मक शैली को ग्रहण किया। यह शैली नैतिकता के प्रचार और आदर्शों की प्रतिष्ठा के लिए अत्यन्त उपयुक्त थी। विभिन्न पौराणिक एवं ऐतिहासिक आख्यानों को काव्यबद्ध करने के लिए इस युग में वर्णनात्मक काव्य को प्रधानता मिली। वर्णन-प्रधान शैली होने के कारण इस काव्य में नीरसता और शुष्कता आ गई तथा अनुभूति की गहराई का समावेश हो सका ! वर्णनात्मक काव्य में कोमलकांत पदावली और रसात्मकता का अभाव है।

‘द्विवेदी युग’ के कवि का ध्यान प्रकृति के यथातथ्य वर्णन तथा मानव प्रकृति का चित्रण इस समय की कविता का प्रधान विषय बन गई। इस काल के कवियों ने जहाँ प्रकृति के बड़े संवेदनात्मक एवं चित्रात्मक चित्र प्रस्तुत किये हैं, वहाँ प्रकृति वर्णन के द्वारा नैतिक उपदेश देने की चेष्टा भी की है।

द्विवेदी युग में खड़ी बोली परिमार्जित और परिष्कृत होकर भाषा में स्वच्छता और सजीवता का समावेश करने में समर्थ हुई। भाषा का अधिक सरस, माधुर्यपूर्ण तथा प्रौढ़ स्वरूप इस युग में परिलक्षित होता है। ‘द्विवेदी युग’ के काव्य विविधमुखी है। काव्य में विविध छन्दों को अपनाने की प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होती है।

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रस्तुत कविता ‘झंकार’ में छायावादी कवियों जैसी शब्द योजना, भावभिव्यक्ति एवं चेतना दिखलाई पड़ती है। गुप्त जी की कविता में न संस्कृत के तत्सम शब्दों की भरमार तथा अरबी-फारसी के शब्दों का बाहुल्य और देशज शब्दों की प्रचुरता है। उन्होंने खड़ी बोली की प्रकृति और संरचना की रक्षा करते हुए, उसे काव्य भाषा के रूप में विकसित करने का सफल प्रयास किया है।

राष्ट्रकवि गुप्तजी ने खड़ी बोली हिन्दी के स्वरूप निर्धारण और विकास के साथ-साथ उसे काव्योपयुक्त रूप प्रदान करने वाले अन्यतम कवियों में अग्रणी भूमिका निभाई। निश्चय ही आज की काव्य भाषा के निर्माण में उनकी आधारभूत भूमिका परिलक्षित होती है। प्राचीन के प्रति पूज्यभावना और नवीन के प्रति उत्साहपूर्ण भाव की विशेषता, कालानुसरण की अद्भुत क्षमता एवं उत्तरोत्तर बदलती भावनाओं और काव्य प्रणालियों को ग्रहण कर चलने की शक्ति, काव्य में परम्परा और आधुनिकता का द्वंद्व तनाव और समन्वय का यथार्थ समायोजन करने की अद्भुत क्षमता की गीति-गमक ने उन्हें छायावादी कवियों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

झंकार भाषा की बात

प्रश्न 1.
गुप्तजी की कविता में तुकों का सफल विधान है। इस कविता में प्रयुक्त तुकों को छाँट कर लिखें।
उत्तर-
मैथिलीशरण गुप्तजी तुकान्त कविता रचने के लिए जितने विख्यात हैं उतने ही आलोचना के पात्र भी हैं। किन्तु यह भी सत्य है कि तुक के कारण ही कविता दीर्घजीवी हो पाती है। झंकार में निम्नलिखित तुकान्त शब्द आये हैं- तार-झंकार; साकार-गुजार; प्यार-तैयार; विस्तार-द्वार और बारंबर-संसार।

प्रश्न 2.
पूरी कविता में अनुप्रास अलंकार है। अनुप्रास अलंकार क्या है? कविता से इसके उदहरणों को चुनकर लिखें।
उत्तर-
अनु (बार-बार) + प्रास (रख्ना) = अनुप्रास अर्थात् जहाँ अक्षरों में समानता होती है, भी ही उनके स्वर मिले या न मिले वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। इसके चार भेद हैं-छेकनुप्रास (एक या अधिक वर्षों का केवल दो बार प्रयोग); वृत्यनुप्रास (एक या अधिक वर्णों का दो से अधिक बार प्रयोग); श्रुत्यानुप्रास (मुख के किसी एक ही उच्चारण स्थल से उच्चारित होने वाले वर्गों की आवृत्ति) और अन्त्यानुप्रास (चरण या पद के अन्त में एक से स्वर-व्यंजन के आगम से)।

प्रस्तुत झंकार कविता में निम्न पंक्तियों में अनुप्रास है-

  • प्रथम पंक्ति-स, श, र, क, की आवृत्ति
  • द्वितीय पंक्ति-‘त’ की तीन आवृत्ति
  • तृतीय पंक्ति-‘क’ की एक आवृत्ति
  • चतुर्थ पंक्ति-उ, ऊ की आवृत्ति
  • पंचम पंक्ति-न, स की आवृत्ति
  • षष्ठ पंक्ति-स, र की आवृत्ति
  • सप्तम पंक्ति-द, स, क, ल, म की आवृत्ति
  • अष्टम पंक्ति -क, र, प, ह की आवृत्ति
  • नवम पंक्ति -र, ट की आवृत्ति
  • दशम पंक्ति-त, ह की आवृत्ति
  • एकादश पंक्ति-त, ह की आवृत्ति
  • द्वादश पंक्ति-त, र आवृत्ति।
  • त्रयोदश पंक्ति-त, न की आवृत्ति
  • चतुर्दश पंक्ति-अ की आवृत्ति
  • पंचदश पंक्ति-ल की आवृत्ति
  • षोडस पंक्ति-त, ल, क, र की आवृत्ति
  • सप्तदश पंक्ति- ह, ब, र की आवृत्ति
  • अष्टादश पंक्ति-क, र, म की आवृत्ति
  • उनविंश पंक्ति-स, म की आवृत्ति

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्य प्रयोग द्वारा लिंग निर्णय करें। शरीर, शिरा, झंकार, प्रकृति, नियति, गमक, तान, अंगुली, भाल, संसार।
उत्तर-
शरीर (पुं.) – राम का शरीर गंदा है।
शिरा (स्त्री.) – आपकी शिरा में झंकार है।
झंकार (स्त्री.) – पायल की झंकार मन मोहक होता है।
प्रकृति (स्त्री.) – प्रकृति बहुरंगी है।
नियति (स्त्री.) – आपकी नियति पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
गमक (पुं.) – जर्दा का गमक अच्छा है।
तान (स्त्री.) – मुरली की तान मधुर होती है।
अंगुली (स्त्री.) – मेरी अंगुली कट गई।
भाल ([.) – तुम्हारा भाल चमक रहा है।
संसार (पुं.) – यह संसार सनातन है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाएँ शरीर, प्रकृति, संसार, नियति, काल,
उत्तर-

  • शरीर – शारीरिक
  • प्रकृति – प्राकृतिक
  • संसार – सांसारिक
  • नियति – नैतिक
  • काल – कालिक

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

झंकार लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘झंकार’ कविता का अभिप्राय क्या है?
उत्तर-
‘झंकार’ कविता ईश्वर और मानव के बीच संबंध को सूचित करती है। इसमें कवि बताना चाहता है कि ईश्वर कर्ता है और मनुष्य निमित्त। मनुष्य ईश्वर का वाद्य यन्त्र है। इसके द्वारा वह अपने सत्ता को झंकृत करना चाहता है। यह झंकार विश्वव्यापी लय के रूप में संसार के कण-कण में समायी हुई है। मानव अपने कर्म के द्वारा ईश्वर की सत्ता को व्यक्तर करे यही इस गीत का भाव है।

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प्रश्न 2.
‘झंकार’ कविता का केन्द्रीय भाव बतायें।
उत्तर-
‘झंकार’ कविता आत्म-परमात्मा के बीच निहित सम्बन्ध की व्याख्या करती है। इसमें कवि यह कहना चाहता है कि उसे ईश्वर अपना वाद्य यन्त्र बनने का गौरव दें। वह सभी प्रकार के आघात सहकर भी ईश्वर के संगीत को विश्व संगीत के रूप में व्यक्त करने का माध्यम बनना चाहता है। उसकी इच्छा है कि उसके माध्यम से व्यक्त होने वाली ईश्वरीय सत्ता की झंकार गहरी और व्यापक हो तथा सारा संसार ईश्वरीय संगीत की लय पर सम्मोहित होकर उससे तदाकर या एकरूप हो जाय।

झंकार अति लघु उत्तरीय प्रश्न।

प्रश्न 1.
‘झंकार’ कविता में कवि ने अपने को किस रूप में प्रस्तुत किया है?
उत्तर-
‘झंकार’ कविता में कवि ने अपने को वाद्य यन्त्र के रूप में प्रस्तुत किया है और कहा है कि मेरे शरीर के स्नायु तंत्र की सभी नसें ही इस शरीर रूपी वाद्य यन्त्र या तंत्री के तार

प्रश्न 2.
कवि कैसी गुंजार की इच्छा व्यक्त करता है?
उत्तर-
कवि चाहता है कि वह गुंजर ऐसी हो कि सभी स्थानों तथा सभी समयों में उसकी सत्ता बनी रहे।

प्रश्न 3.
श्रुतियों के द्वार खोलने का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
‘श्रुति’ शब्द के दो अर्थ हैं। पहला कान और दूसरा सुनकर प्राप्त होने वाला ज्ञान। जब ‘श्रुति’ शब्द का दूसरे अर्थ में लाक्षणिक प्रयोग होता है तो वह वेद-ज्ञान का अर्थ देता है। अतः श्रुतियों के द्वार खोलने का अर्थ है परमात्मा की कृपा से समस्त ज्ञान-विज्ञान का बोध प्राप्त हो जाने की क्षमता प्राप्त होना।

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प्रश्न 4.
परमात्मा के संगीत की झंकार से उत्पन्न प्रभाव का कवि ने किस रूप में वर्णन किया है?
उत्तर-
कवि के अनुसार परमात्मा के संगीत की झंकृत का प्रभाव गहरा हो। वह सकल श्रुतियों के द्वार खोल दें। उसके ताल-ताल पर संसार मोहित होकर तथा सिर नवाकर उसके प्रभाव का व्यक्त करें तथा सारा संसार उस संगीत के लय से तदाकार हो जाय।

प्रश्न 5.
झंकार शीर्षक कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर-
झंकार शीर्षक कविता का केन्द्रीय भाव देशवासियों को उनकी अस्मिता का बोध कराना है।

प्रश्न 6.
कवि मैथिलीशरण गुप्त के दृष्टिकोण में स्वाधीनता आन्दोलन में देश का उद्धार कैसे हुआ था?
उत्तर-
कवि मैथिलीशरण गुप्त के दृष्टिकाण से स्वाधीनता आन्दोलन में देश का उद्धार सुरों के तालमेल से हुआ था।

प्रश्न 7.
वीण की तान से कवि मैथिलीशरण गुप्त क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर-
वीणा की तान से कवि मैथिलीशरणगुप्त तान का विस्तार करना चाहते हैं तथा जागरण का संदेश देना चाहते है।

झंकार वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

प्रश्न 1.
‘झंकार’ कविता के कवि हैं
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) दिनकर
(घ) त्रिलोचन
उत्तर-
(ख)

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प्रश्न 2.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म हुआ था?
(क) 1886
(ख) 1876
(ग) 1883
(घ) 1884
उत्तर-
(क)

प्रश्न 3.
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सथान था
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) हिमाचल प्रदेश
(घ) उत्तराखंड

प्रश्न 4.
मैथिलीशरण गुप्त प्रमुख हुई थी
(क) पंडित द्वारा
(ख) माता द्वारा
(ग) पिता द्वारा
(घ) स्वाध्याय द्वारा
उत्तर-
(घ)

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प्रश्न 5.
मैथिलीशरण गुप्त प्रमुख कवि हैं?
(क) द्विवेदी युग
(ख) छायावादी युग
(ग) आदि युग
(घ) इनमें से सभी
उत्तर-
(क)

प्रश्न 6.
मैथिलीशरण गुप्त रचनाएँ है?
(क) साकेत
(ख) यशोधरा
(ग) पंचवटी
(घ) झंकार
उत्तर-
(सभी)

प्रश्न 7.
मैथिलीशरण गुप्त ने अनुवाद किया था?
(क) पलासी युद्ध का
(ख) मेघनाद वध
(ग) वृत्रसंसार
(घ) सभी
उत्तर-
(घ)

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II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न 1.
आधुनिक काल के द्विवेदी युग में प्रमुख …………… है।
उत्तर-
मैथिलीशरण गुप्त।

प्रश्न 2.
झंकार शीर्षक कविता …………. द्वारा लिखित है।
उत्तर-
मैथिलीशरण गुप्त।

प्रश्न 3.
गुलामी की जंजीर में जकड़ी भारतमाता को गुलामी की दासता से मुक्त कराने का भार . …………….. पर है।
उत्तर-
देशवासियों।

प्रश्न 4.
आदर्शवाद की प्रधानता के कारण द्विवेदी युग के कवियों ने वर्णन प्रधान ….. शैली को ग्रहण किया।
उत्तर-
इति वृत्तात्मक।

प्रश्न 5.
भारत-भारती कृति द्वारा जो भावना भर दी थी तभी से वे ………………. के रूप में प्रसिद्ध
उत्तर-
राष्ट्रकवि।

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प्रश्न 6.
राष्ट्रीय आंदोलन में मैथिलीशरण गुप्त के काव्य का …………….. रहा है।
उत्तर-
गहरा संबंध।

प्रश्न 7.
गुप्त जी ने प्रबंध काव्य की लुप्त होती परंपरा को ……………… दिया
उत्तर-
समर्थ संरक्षण।

प्रश्न 8.
वेश वैष्णव ………………. थे।
उत्तर-
रामभक्त।

प्रश्न 9.
साकेत जिसका अर्थ आयोध्या है उनका है।
उत्तर-
उत्कृष्ट महाकाव्य।

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झंकार कवि परिचय – मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964)

मैथिलीशरण गुन्त द्विवेदी युग के एक प्रमुख कवि थे। इनका जन्म 3 अगस्त, 1886 को मध्यप्रदेश के (झाँसी उत्तर प्रदेश) चिरगाँव में हुआ था। ‘सरस्वती’ पत्रिका के माध्यम से इनकी कविता परवान चढ़ी। फिर ‘भारत-भारती ‘ का स्वर तो ऐसा गूंजा कि स्वाधीनता-सेनानियों के ओठों पर इस काव्य की पंक्तियाँ सदा ‘सर्वदा विराजमान रहने लगीं। बासी पूरियों का नाश्ता पसन्द करने वाले गुप्तजी की जीवन-लीला 1964 ई. में समाप्त हुई। कविवर ‘सदा जीवन उच्च विचार’ के मूर्तिमन्त प्रतीक थे।

इनकी श्रेष्ठ काव्य-साधना में अनेक पुरस्कृत-अभिनंदित हुई तथा राष्ट्रभाषा-सालाहकार परिषद के अध्यक्ष भी बने। जब ये दिल्ली में राज्यसभा के मनोनीत सदस्य थे, तब इनके निवास पर गुणियों तथा ज्ञानियों की शानदार महफिलें सजा करती थीं। लेकिन इस अमर यशस्वी महाकवि को एक पर एक तीन-तीन शादियों के बावजूद बारम्बार संतानमृत्यु का दंश झेलना पड़ा कोई दर्जन पर सन्तानों में अन्ततः एक ही का सुख इन्हें नसीब हो सका। गुप्तजी संस्कारी रामभक्त परिवार के परम रामभक्त कवि थे। वे अपनी काव्य कुशलता को भी श्रीराम का ही प्रसाद मानते रहे

“राम ! तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है,
कोई कवि बन जाय-सहज संभाव्य है।”

‘साकेत’ राष्ट्रकवि का श्रेष्ठतम महाकाव्य है। जीवन का अनन्त विविधता एवं बहुगिता उनकी कृतियों में मिलती है। इनके कुछ प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित प्रमुख हैं-साकेत, भारत-भारती, यशोधरा, रंग में भंग, किसान, जयद्रथ-वथ, पत्रावली, प्रदक्षिणा, कुणाल-गीत, सिद्धराज, पंचवटी, द्वापर, विष्णुप्रिय, त्रिपथगा, सैरिन्ध्री, जय भारत, चन्द्रहास, गुरुकुल, हिन्द आदि।

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गुप्तजी आदर्शवादी और राष्ट्रवादी थे। उनकी उदार धार्मिकता, स्वदेशभक्ति तथा सांस्कृतिक गौरव-गान के साथ शक्ति-पूजा, जयघोष तथा ग्रामीण सरलता की संगति खूब बैठी है। मानना होगा कि गुप्तजी खड़ी बोली काव्य-चटसार के सीधे-सादे प्राइमरी गुरु हैं। हिन्दी के अनगिनत आधुनिक कवियों ने निस्संदेह कविताई का ककहरा उन्हीं से सीखा। हिन्दी के संभवतः सरल कवि के रूप में भी शान से पढ़ा जा सकता है।

भारत की साधारण जनता की लालसाएँ, आदर्श, साधना, रुचियाँ तथा आवश्यकताएँ, कर्म एवं भावना गद्य में प्रेमचन्द ढाल रहे थे और पद्य में गुप्तजी। राष्ट्रीय जीवन में व्याप्त रुदन के स्वरों को हास्य की फुलझड़ियों में बदलने का पूरा-पूरा श्रेय गुप्त जी को ही है। कोई भी साहित्यिक धारा इनकी छुअन से नहीं बच पायी। एक ओर वे सांस्कृतिक उत्थान के पुरोधा हैं तो दूसरे ओर समन्वय के प्रहरी।

वास्तव में प्राचीन के प्रति पूज्यभावना औ: नवीन के प्रति उत्साहपूर्ण स्वागत भाव गुप्त जी की विशेषता है। उनमें कालानुसरण की अदुभुत क्षमता थी। उत्तरोत्तर बदलती भावनाओं और काव्य प्रणालियों को ग्रहण करते चलने की शक्ति ने उनके सुदीध रचना समय में बराबर उनका महत्त्व बनाए रखा।

झंकार पाठ का सारांश

स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानंद, महात्मा गाँधी और महर्षि अरविन्द के चिन्तन से प्रभावित स्वतंत्र भारम के प्रथम अघोषित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त रचित झंकार शीर्षक गीत राष्ट्रीय भावना का प्रक्षेपक है। . एक राष्ट्र का समस्त विकास तभी संभव है जब जन-जन में उसके लिए उत्सर्ग का भाव हो। प्रत्येक नागरकि चाहे वह जिस व्यवास से जुड़ा हो यदि वह राष्ट्र उन्नयन के भाव को अपने हृदय में धारण करते हुए कार्यरत है तो देश का कल्याण अवश्मम्भावी है।

कवि एक सत्यनिष्ठ, देशभक्त के रूप में घोषणा करता है मातृभूमि रूपी वीणा के तार बनने की अगर आवश्यकता है। तनाव सहन करने जरूरत है तो मै अपने शरीर की सम्पूर्ण शिराओं को तंत्री का तार बनाने के लिए दधीचि की तरह प्रस्तुत हूँ। मुझे आघातों, वारों, चोटों की चिन्ता किंचित भी नहीं है। मेरा एकमात्र लक्ष्य है कि विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़े ! उसकी झंकार विश्व के कोने-कोने तक सुनाई पड़े। मेरी महती कामना है कि मातृभूमि के उत्कर्ष में नियति नियामक न बनकर घटक बने, प्रकृति सहयोगिनी बने ताकि उन्नति, विकास के जितने भी सुर स्वर है वे साकार हो उठे। यह सुर-संधान देशकाल की सीमा के परे जा पहुंचे। ऐसी गुंजार, का मै आकांक्षी हूँ।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

मै सहर्ष हर प्रकार के प्रहार हेतु प्रस्तुत हूँ। मेरे शत्रुओं, तुम्हें जिस तरह से प्रहार करना हो, मुझे मार्ग से हटाने की इच्छा हो वह करों, मै इसे प्यार समझकर स्वीकार करूँगा। और क्या कहूँ। मै प्राणपण हूँ। तन-मन-धन से तुम्हारे प्रहार सहने के लिए प्रस्तुत हूँ।

कवि पुनः मातृभूमि को सम्बोधित करते हुए कहता है-मेरी शिराओं से बने हर तार से राष्ट्र का विकास रूपी तान विस्तारित हो। जो अब तक बेखबर हैं, जिनके कान उन्नति, कला संस्कृति की गमक धमक गुंजार से वचित हैं, या बन्द हैं। उन कानों के द्वारा खुल जाएँ। वे भी राष्ट्र यज्ञ में आहुति देने हेतु स्वयं को प्रस्तुत कर सकें। देश का स्वरूप इस तरह से बने कि सम्पूर्ण विश्व उस पर मोहित हो जाए। जैसे मधुर मोहक ताल सुनने का बार-बार मन करता है। मन, हृदय सभी मुक्त होते हैं। अवगुंठन के लिए अवकाश नहीं हो, स्थान नहीं हो। ऐसी समत्व भावभूमि तैयार हो कि वसुधैव कुटुम्बकम् की आर्ष कल्पना साकार हो उठे।

वस्तुत: प्रस्तुत गीत में गुप्तजी ने राष्ट्र प्रेमी का चोला बिना उतारे छायावादी रचना संसार में प्रवेश किया है। एक राष्ट्रभक्त विश्व मानव के रूप में कायान्तरित कैसे हो सकता है। एक उत्सर्ग प्रेमी, कला, संस्कृति के विकास के लिए स्वयं को बदली परिस्थिति में कैसे ढाल सकता. है। इन सब तथ्यों पर भी ध्यान जाता है। शत्रु के लिए प्यारे सम्बोधन हृदय की विस्तृत स्थिति का द्योतक कराता है। श्रुतियों के द्वार, साधारण जन के अचेतावस्था के साथ वैदिक ज्ञान के प्रति पुनः लगाव झुकाव को भी दर्शाता है। विकास, विस्तार केवल मेरा ही हो, कवि का यह अभीष्ट नहीं है, बल्कि वह औरों का भी विस्तार देखना चाहता है।

प्रस्तुत कविता ” तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूँ देश की ध – रती तुझे कुछ और भी हूँ।” के सम्मिलन की भूमि में रची गयी गुप्तजी की एक उत्कृष्ट रचना है। अनुप्रास वीप्सा आदि अलंकारों की छटा विकीर्ण है।

झंकार कठिन शब्दों का अर्थ

शिरा-नस नाड़ी, धमनी। झंकार-संगीतमय ध्वनि। तंगी-वीणा, तार से बने हुए वाद्य ! आघात-चोट। नियति-भाग्य ! गमक-संगीत का पारिभाषिक शब्द जो कंपनपूर्ण रमणीक ध्वनि गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट के अर्थ के हैं। गुंजार-गूंज। तार-तार-रेशा-रेशा। अखिल-संपूर्ण। श्रुतियों-ध्वनियों। भाल-माथा। सम-संगीत का शान्तिमय परम क्षण। सकल-सम्पूर्ण।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

झंकार काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. इस शरीर की सकल …………… ऊँची झंकार।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ राष्ट्रकवि मैथिलशरण गुप्त रचित ‘झंकार’ कविता से ली गयी हैं। झंकार में कवि का स्वर आध्यात्मिक है, यहाँ छायावादी रहस्य-चेतना मुखर है। इन पंक्तियों में कवि कहता है कि जिस तरह वीणा के तारों पर आघात करने से संगीत की सृष्टि होती है उसी तरह का मानव शरीर भी वीणा की तरह तारों वाल वाद्य यन्त्र है। इस शरीर में निहित शिराएँ अर्थात् नर्से ही तार है।

हे परमात्मा ! इस शरीर की सभी शिराएँ तुम्हारी तंत्री अर्थात् वाद्य यन्त्र के तार बनें। हमें आधात की चिन्ता नहीं है कि कितनी चोट लगती है या कितनी झंकार उठती है। बस केवल इसमें से झंकार निकलनी चाहिए। अर्थात् इस शरीर से कोई ऐसा महत्वपूर्ण काम संभव हो जो जगत के लिए सुखद और मेरे लिए यशवर्द्धक हो। यहाँ कवि ने अपने को परमात्मा का तंत्र भी कहा है। वही इसे बजाता है अर्थात् जैसा लक्ष्य निर्धारित करता है वैसा हम कार्य करते है।

2. नाचे नियति, प्रकृति सुर साधे ……………. गहरी गुंजार।
व्याख्या-
‘झंकार’ की गीत की इन पंक्तियों में इनके रचयिता कवि प्रस्तुत श्रेष्ठ मैथिलीशरण गुप्त परमात्मा से यह कहना चाहते हैं कि तुम इस तन रूपी तंत्री के सभी सुरों को सजीव-साकार करों। वे सुर इतने प्रभावशाली हों, प्रेरक हो कि नियति अर्थात् भाग्य जो सब को नचाता है वह स्वयं नाचने लगे और प्रकृति जो लय के माध्यम से साकार होती है वह स्यवयं सुर साधने लगे।

उस झंकार का प्रभाव देश देश में अर्थात् सभी स्थानों में व्याप्त हो जाय और वह इतनी स्थायी हो कि भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों में व्याप्त रहकर कालातीत झंकार बन जाय। उस झंकार की गमक ऐसी हो कि उसका गहरा प्रभाव पड़े। यहाँ कवि ने तन के भीतर उठने वाली आत्मा की झंकार के विश्वव्यापी स्वरूप और गहरे प्रभाव की ओर संकेत किया है।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

3. कर प्रहार, हों, कर प्रहार …………….. मैं, हूँ तैयार
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ मैथिलीशरण गुप्त जी की छायावादी-रहस्यवादी काव्यकृति ‘झंकार’ . से गृहीत हैं। इन पंक्तियों में कवि अपने नियन्ता परमात्मा से अनुरोध करना चाहता है तुम मुझको बजाने की कृपा अवश्य करो, यह मेरा सौभाग्य होगा कि तुमने मुझे उपयोग के लायक समझा। बजाने में चाहे जितने जोर से तुम आघात करो मुझे आपत्ति नहीं क्योंकि मै जानता हूँ कि वह प्रहार नहीं तुम्हारा प्यार होगा। हे प्यारों, मै तुमसे अधिक क्या कहूँ, मै हर तरफ से तुम्हारे द्वारा बजाये जाने के लिए तैयार हूँ। ये पंक्तियाँ प्रसन्नतापूर्वक दु:ख उठाने वाली मध्ययुगीन भक्ति-भावना तथा सम्पूर्ण समर्पण की प्रवृत्ति को सूचित करती हैं।

4. मेरे तार तार से ………………. श्रुतियों के द्वार।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त रचित ‘झंकार’ कविता से ली गयी हैं। इसमें कवि यह भाव व्यक्त करता है कि परमात्मा के द्वारा यदि वह उसके संगीत का माध्यम बनाया जाता है तो यह उसका सौभाग्य होगा। अतः वह चाहता है कि उसके शरीर की सभी शिराओं से परमात्मा के संगीत का प्रकाशन हो, वह उनके विश्वव्यापी संगीत के प्रसार का निमित्त ‘बने। उसकी हार्दिक इच्छा है कि परमात्मा के अस्तित्व-बोध का भौतिक माध्यम बनकर जगत को उसकी सत्ता की सांगीतिक अनुभूति करा सकेगा।

5. ताल-ताल पर भाल ………………… समा जाय संसार :
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ मैथिलीशरण गुप्त रचित ‘झंकार’ कविता से ली गयी हैं। हम जानते है कि संगीत में ताल का महत्त्व होता है। हर गीत अलग-अलग ताल में निबद्ध होता है। कवि चाहता है कि उसके माध्यम से परमात्मा का जो संगीत व्यक्त हो उसके प्रत्येक ताल पर संसार बार-बार मोहित होकर अपना सिर झुकाकर परमात्मा की महत्ता को नमन करे। भीतर से निकली झंकार में ऐसी अन्विति हो, ऐसी क्रम-व्यवस्था हो कि लय बँध जाय और उस लय के व्यापक प्रभाव में क्रम-क्रम से सम अर्थात् उद्वेग और तनाव से रहित ऐसी स्निग्ध और आन्नदपूर्ण शान्ति का विधान हो कि सारा संसार उसी में समाहित हो जाय। अर्थात् परमात्मा की सत्ता से तन्मय-तदाकार होकर अखंड आनन्द की प्राप्ति करे। इन पंक्तियों में ताल, लय तथा सम ये तीनों शब्द संगीतशास्त्र के पारिभाषिक शब्द हैं।

 Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 6 झंकार (मैथिलीशरण गुप्त)

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Bihar Board 12th Chemistry Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 1.
ब्यूना-S में S बताता है
(a) सल्फर
(b) स्टिरीन
(c) सोडियम
(d) सेलिसिलेट
Answer:
(b) स्टिरीन

Question 2.
निम्न में से कौन-से थर्मोप्लास्टिक, बहुलक हैं ?
(a) पॉलीथीन, यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड, पॉलीविनाइल
(b) बैकलाइट, पॉलीथीन, पॉलिस्टिरीन
(c) पॉलीथीन, पॉलिस्टिरीन, पॉलीविनाइल
(d) यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड, पॉलिस्टिरीन, बैकेलाइट
Answer:
(c) पॉलीथीन, पॉलिस्टिरीन, पॉलीविनाइल

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 3.
ग्लाइकोजन, प्राकृतिक रूप से प्राप्त एकबहुलक जो पशुओं में संचित होता है, है
(a) मोनोसैकेराइड
(b) डाइसैकेराइड
(c) ट्राइसैकेराइड
(d) पॉलीसैकेराइड
Answer:
(d) पॉलीसैकेराइड

Question 4.
टेरीलीन, एथिलीन ग्लाइकॉल एवं…………..का संघनन बहुलक होता है।
(a) बेंजॉइक अम्ल
(b) फ्थेलिक अम्ल
(c) टेरेफ्थेलिक अम्ल
(d) सेलिसिलिक अम्ल
Answer:
(c) टेरेफ्थेलिक अम्ल

Question 5.
प्राकृतिक रबड़ किसका बहुलक है ?
(a) 1, 1-डाइमेथिलब्यूटाडाइइन
(b) 2-मेथिल-1, 3-ब्यूटाडाइइन
(c) 2-क्लोरोब्यूटा-1, 3-डाइइन
(d) 2-क्लोरोब्यूट-2-इन
Answer:
(b) 2-मेथिल-1, 3-ब्यूटाडाइइन

Question 6.
सल्फर के साथ रबड़ को गर्म करना कहलाता है
(a) गैल्वेनीकरण
(b) बेसेमरीकरण
(c) वल्कनीकरण
(d) सल्फोनीकरण
Answer:
(c) वल्कनीकरण

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 7.
डेक्रॉन किसका उदाहरण है ?
(a) पॉलीएमाइड
(b) पॉलीप्रोपीन
(c) पॉलीएक्रिलोनाइट्राइल
(d) पॉलीएस्टर
Answer:
(d) पॉलीएस्टर

Question 8.
निम्न में से कौन-सा संघनन बहुलक है ?
(a) टेफ्लॉन.
(b) PVC
(c) पॉलिस्टर
(d) नियोप्रीन
Answer:
(c) पॉलिस्टर

Question 9.
निम्न में से कौन-सा बहुलक क्रॉस-जोड़ में शामिल नहीं होता है ?
(a) वल्कनीकृत रबड़
(b) बैकलाइट
(c) मेलामाइन
(d) टेफ्लॉन
Answer:
(d) टेफ्लॉन

Question 10.
जीगलर-नाटा उत्प्रेरक का संयोजन है
(a) (Et3)3Al. TiCl2
(b) (Me)3.Al.TiCl2
(c) (Et)3Al.TiCl4
(d) (Et)3 Al.PtCl4
Answer:
(c) (Et)3Al.TiCl4

Question 11.
निम्न में से कौन-सा योगात्मक बहुलक का उदाहरण नहीं है?
(a) पॉलीथीन
(b) पॉलीस्टिरीन
(c) नियोप्रीन
(d) नायलॉन 6,6
Answer:
(d) नायलॉन 6,6

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 12.
टेफ्लॉन एवं नियोप्रीन किसके उदाहरण हैं ?
(a) सहबहुलक
(b) एकलक
(c) समबहुलक
(d) संघनन बहुलक
Answer:
(c) समबहुलक

Question 13.
निम्न में से कौन-सा समबहुलक (Homopolymer) है ?
(a) बैकेलाइट
(b) नायलॉन 6,6
(c) नियोप्रीन
(d) ब्यूना-S
Answer:
(c) नियोप्रीन

Question 14.
निम्न में से किसमें क्रॉस-जोड़ बहुलक है ?
(a) पॉलीस्टर
(b) ग्लाइकोजन
(c) मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड
(d) पॉलीविनाइल क्लोराइड
Answer:
(c) मेलामाइन फॉर्मेल्डिहाइड

Question 15.
केप्रोलेक्टम का प्रयोग करके बनाया गया संश्लेषित बहुलक कहलाता
(a) टेरीलीन
(b) टेफ्लॉन
(c) नायलॉन-6
(d) नियोप्रीन
Answer:
(c) नायलॉन-6

Question 16.
दी गई बहुलीकरण अभिक्रियाओं में X एवं Y को पहचानिए।
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक 1
(a) X = बैकेलाइट, Y = नोवेलेक
(b) X = नोवोलेक, Y = मेलामाइन
(c) X = बैकेलाइट, Y = मेलामाइन
(d) X = नोवोलेक, Y = बैकेलाइट
Answer:
(d) X = नोवोलेक, Y = बैकेलाइट

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 17.
वह बहुलक जिसमें एमाइड बंधन होता है, है
(a) नायलॉन-6,6
(b) टेरीलीन
(c) टेफ्लॉन
(d) बैकलाइट
Answer:
(a) नायलॉन-6,6

Question 18.
निम्न में से कौन-सा रबड़ का उदाहरण नहीं है ?
(a) पॉलीक्लोरोप्रोपीन
(b) ब्यूना-N
(c) ब्यूटाडाइइन-स्टिंरीन सहबहुलक
(d) पॉलीएक्रिलोनाइट्राइल
Answer:
(d) पॉलीएक्रिलोनाइट्राइल

Question 19.
निम्न में से कौन-सा बहुलक में विनायलिक एकलक इकाइयाँ नहीं होती हैं?
(a) एक्रिलन
(b) नायलॉन
(c) पॉलीस्टिरीन
(d) नियोप्रीन
Answer:
(b) नायलॉन

Question 20.
निम्न में से कौन-सा कथन गलत है ?
(a) PVC का अर्थ है पॉली विनाइल क्लोराइड
(b) PTFE का अर्थ है टेफ्लॉन
(c) PMMA का अर्थ है पॉलीमेथिल मेथिल एक्रिलेट
(d) ब्यूना-S का अर्थ है प्राकृतिक रबड़
Answer:
(d) ब्यूना-S का अर्थ है प्राकृतिक रबड़

Question 21.
निम्न में से कौन-सा उच्च घनत्व पॉलीथीन के बारे में सही नहीं है ?
(a) दृढ़
(b) कठोर
(c) अक्रिय
(d) उच्च शाखित
Answer:
(d) उच्च शाखित

Question 22.
निम्न में कौन-सा जैव-निम्नीकरणीय संश्लेषित बहुलक है ?
(a) एलिफेटिक पॉलिस्टर
(b) PHBV
(c) नायलॉन-2-नायलॉन-6
(d) इनमें से सभी
Answer:
(d) इनमें से सभी

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 23.
जैव-निम्नीकरणीय बहुलक, नायलॉन-2-नायलॉन-6 के एकलक हैं
(a) ग्लाइसीन + एडिपिक अम्ल
(b) ग्लाइकॉल + पथेलिक अम्ल
(c) फीनॉल + यूरिया
(d) ग्लाइसीन + एमिनो केप्रोइक अम्ल
Answer:
(d) ग्लाइसीन + एमिनो केप्रोइक अम्ल

Question 24.
निम्न में से ग्लूकोज का कौन-सा बहुलक जानवरों द्वारा संचित किया जाता है ?
(a) सेल्यूलोज
(b) एमाइलोज
(c) एमाइलोपेक्टिन
(d) ग्लाइकोजन
Answer:
(d) ग्लाइकोजन

Question 25.
निम्न में से कौन-सा अर्द्धसंश्लेषित बहुलक नहीं है ?
(a) cis-पॉलीआइसोप्रीन
(b) सेल्यूलोज नाइट्रेट
(c) सेल्यूलोज ऐसीटेट
(d) वल्कनीकृत रबड़
Answer:
(a) cis-पॉलीआइसोप्रीन

Question 26.
पॉलीएक्रिलोनाइट्राइल का व्यापारिक नाम है
(a) डेक्रॉन
(b) ओरलॉन (एक्रिलेन)
(c) PVC
(d) बैकलाइट
Answer:
(c) PVC

Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक

Question 27.
निम्न में से कौन-सा कथन निम्न घनत्व पॉलीथीन के बारे में सही नहीं है?
(a) दृढ़
(b) कठोर
(c) विद्युत का बुरा चालक
(d) उच्च शाखित संरचना
Answer:
(b) कठोर

Question 28.
Bihar Board 12th Chemistry Objective Answers Chapter 15 बहुलक 2
Answer:
(a)

Question 29.
निम्न में से कौन-सा बहुलक, जिसे बनाने के लिए कम से कम एक डाइइन एकलक आवश्यक है ?
(a) डेक्रॉन
(b) नोवोलेक
(c) नियोप्रीन
(d) टेफ्लॉन
Answer:
(c) नियोप्रीन

Question 30.
निम्न में से किस बहुलक को फाइबर के रूप में प्रयुक्त किया जाता
(a) नायलॉन
(b) पॉलीटेट्राफ्लोरोइथेन
(c) टेफ्लॉन
(d) ब्यूना-S
Answer:
(a) नायलॉन

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

Bihar Board 12th Physics Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 1.
प्रोटॉन का विशिष्ट आवेश 9.6x 107 Ckg-1 है । एक एल्फा कण
का विशिष्ट आवेश होगा –
(a) 9.6×107 Ckg-1
(b) 19.2×107 Ckg-1
(c) 4.8×10 7 Ckg-1
(d) 2.4×107 Ckg-1
उत्तर-
(c) 4.8×10 7 Ckg-1
(c) प्रोटॉन के लिए, विशिष्ट आवेश = \(\frac{e}{m}\) = 9.6 x 107ckg-1
एल्फा कण के लिए,
विशिष्ट आवेश = \(\frac{2 e}{4 m}=\frac{1}{2} \frac{e}{m}=\frac{1}{2} \times 9.6 \times 10^{7}\)
= 4.8 x 107 Ckg-1

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 2.
किसने प्रमाणित किया कि विद्युत आवेश क्वाण्टीकृत होता है ?
(a) जे.जे. थॉमसन
(b) विलियम क्रुक्स
(c) आर.ए. मिलिकन
(d) विल्हेम रॉन्टजन
उत्तर-
(c) आर.ए. मिलिकन

प्रश्न 3.
कैथोड किरणों का अविष्कार किसने किया?
(a) मैक्सवेल क्लर्क जेम्स
(b) हेनरिच ह
(c) विलियम क्रुक्स
(d) जे.जे. थॉमसन
उत्तर-
(c) विलियम क्रुक्स

प्रश्न 4.
धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा निम्न में से किस भौतिक प्रक्रम के द्वारा मुक्त इलेक्ट्रॉनों को प्रदान की जाती है ?
(a) तापायनिक उत्सर्जन
(b) क्षेत्र उत्सर्जन
(c) प्रकाशविद्युत उत्सर्जन
(d) इनमें से सभी
उत्तर-
(d) इनमें से सभी

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 5.
किसी निश्चित प्रयोग से प्रकाशविद्युत संस्तब्ध वोल्टेज 1.5 v है। उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा होगी –
(a) 2.4ev
(b) 1.5ev
(c) 3.1 ev
(d) 4.5 ev
उत्तर-
(b) 1.5ev

प्रश्न 6.
प्रकाशविद्युत उत्सर्जन की घटना को 1887 में किसके द्वारा खोजा गया ?
(a) एलबर्ट आइन्स्टीन
(b) हेनरिच हल
(c) विल्हेम हालवेक्स
(d) फिलिप लेनार्ड |
उत्तर-
(b) हेनरिच हल

प्रश्न 7.
दिया गया चित्र दो विभिन्न धात्विक सतहों A एवं B के लिए निरोधी विभव V एवं आवृत्ति υ को दर्शाता है । A का कार्य-फलन B की तुलना में होता है-,
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 1
(a) कम
(b) अधिक
(c) बराबर
(d) कहा नहीं जा सकता
उत्तर-
(a) कम

प्रश्न 8.
प्रकाशविद्युत धारा का अधिकतम मान कहलाता है –
(a) आधार धारा
(b) सन्तुष्ट धारा
(c) संग्राहक धारा
(d) उत्सर्ज धारा
उत्तर-
(b) सन्तुष्ट धारा

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 9.
प्रकाशविद्युत प्रभाव में, प्रकाशविद्युत धारा किस पर निर्भर नहीं करती है ?
(a) आपतित प्रकाश की तीव्रता
(b) दो इलेक्ट्रोडों के बीच आरोपित विभवान्तर
(c) उत्सर्ज पदार्थ की प्रकृति
(d) आपतित प्रकाश की आवृत्ति
उत्तर-
(d) आपतित प्रकाश की आवृत्ति

प्रश्न 10.
फोटॉन के टकराने के पश्चात्, फोटोइलेक्ट्रॉन को बाहर आने में लिया गया समय लगभग है –
(a) 10-1s
(b) 10-4s
(c) 10-10s
(d) 10-16s
उत्तर-
(c) 10-10s

प्रश्न 11.
प्रकाशविद्युत प्रभाव में, निरोधी विभव किस पर निर्भर करता है ?
(a) आपतित प्रकाश की आवृत्ति
(b) उत्सर्जक पदार्थ की प्रकृति ।
(c) आपतित प्रकाश की तीव्रता
(d) (a) एवं (b) दोनों
उत्तर-
(d) (a) एवं (b) दोनों

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 12.
प्रकाशविद्युत प्रयोग में, यदि आपतित प्रकाश की तीव्रता एवं आवृत्ति दोनों दोगुनी हों, तो संतृप्त प्रकाशविद्युत धारा
(a) नियत रहती है।
(b) आधी हो जाती है।
(c) दोगुनी हो जाती है।
(d) चार गुनी हो जाती है।
उत्तर-
(c) दोगुनी हो जाती है।

प्रश्न 13.
λ तरंगदैर्घ्य का प्रकाश, \(\frac{h v}{\lambda_{0}}\) -कार्य-फलन वाली धातु पर गिरता है।
प्रकाशविद्युत प्रभाव केवल होगा,
(a) λ ≥ λ0
(b) λ ≤ λ0
(c) λ ≥ 2λ0
(d) λ = 4λ0
उत्तर-
(b) λ ≤ λ0

प्रश्न 14.
प्रकाशविद्युत उत्सर्जन केवल तब होता है जब आपतित प्रकाश में एक निश्चित न्यूनतम से अधिक हो।
(a) शक्ति
(b) तरंगदैर्घ्य
(c) तीव्रता :
(d) आवृत्ति
उत्तर-
(d) आवृत्ति

प्रश्न 15.
सीजियम का कार्य-फलन 2.14 ev है। सीजियम की देहली आवृत्ति होगी –
(a) 5.16 x 1019 Hz
(b) 5.16 x 1016Hz
(c) 5.16 x 1018Hz
(d) 5.16 x 1014Hz
उत्तर-
(d) 5.16 x 1014Hz

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 16.
चाँदी के लिए प्रकाशविद्युत देहली तरंगदैर्घ्य λ0 है । एक आपतित तरंगदैर्घ्य λ(λ < λ0) के द्वारा चाँदी की सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होगी –
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 2
उत्तर-
(d)
(d) आइन्स्टीन के प्रकाशविद्युत समीकरण के अनुसार,
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 4

प्रश्न 17.
फोटॉन के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन गलत है ?
(a) फोटॉन दाब उत्पन्न नहीं करते हैं।
(b) फोटॉन का संवेग \(\frac{h v}{c}\) होता है।
(c) फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य होता है।
(d) फोटॉन की ऊजा hυ होती है।
उत्तर-
(a) फोटॉन दाब उत्पन्न नहीं करते हैं।

प्रश्न 18.
यदि m एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है तथा c प्रकाश की चाल है, तो Eऊर्जा वाले फोटॉन की तरंगदैर्घ्य का समान ऊर्जा के इलेक्ट्रॉन से अनुपात होगा –
\((a) c \sqrt{\frac{2 m}{E}}
(b) \sqrt{\frac{2 m}{E}}
(c) \sqrt{\frac{2 m}{c E}}
(d) \sqrt{\frac{m}{E}}\)
उत्तर-
\((a) c \sqrt{\frac{2 m}{E}}\)
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 5

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 19.
फोटॉन-कण संघट्ट में (जैसे-फोटॉन-इलेक्ट्रॉन संघट्ट), निम्न में से कौन-सा संरक्षित नहीं हो सकता है ?
(a) कुल ऊर्जा
(b) फोटॉनों की संख्या
(c) कुल संवेग
(d) (a) एवं (b) दोनों
उत्तर-
(b) फोटॉनों की संख्या

प्रश्न 20.
इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति के आविष्कार लिए वर्ष 1929 में भौतिकी में नोबल पुरस्कार किसे प्राप्त हुआ?
(a) एविन श्रोडिंजर
(b) आर. ए. मिलिकन
(c) लुइस विक्टर दे ब्रॉग्ली
(d) एल्बर्ट आइन्स्टीन
उत्तर-
(c) लुइस विक्टर दे ब्रॉग्ली

प्रश्न 21.
फोटॉन का विराम द्रव्यमान होता है –
\((a) \frac{l v}{c}
(b) \frac{h v}{c^{2}}
(c) \frac{h v}{\lambda}
(d) शून्य\)
उत्तर-
(d) शून्य

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 22.
एक प्रोटॉन एवं α-कण समान विभवान्तर से त्वरित होते हैं । दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λp, का λα से अनुपात होगा,
(a) √2:1
(b) √4 :1
(c) √6:1
(d) √8 :1
उत्तर-
(d) √8 :1

प्रश्न 23.
गतिज ऊर्जा K के कण की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य λ है । यदि उसकी गतिज ऊर्जा k/4 है, तो कण की तरंगदैर्घ्य क्या होगी?
(a) λ
(b) 2λ
(c) λ/2
(d) 4λ
उत्तर-
(b) 2λ
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 7

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 24.
जब किसी इलेक्ट्रॉन का वेग बढ़ जाता है, तो उसकी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य
(a) बढ़ती है।
(b) घटती है।
(c) समान रहती है।
(d) बढ़ या घट सकती है।
उत्तर-
(b) घटती है।

प्रश्न 25.
पदार्थ तरंग की तरंगदैर्घ्य किस पर निर्भर नहीं करती है ?
(a) द्रव्यमान
(b) वेग
(c) संवेग
(d) आवेश
उत्तर-
(d) आवेश

प्रश्न 26.
निम्न में से कौन-सा चित्र कण के संवेग (p) एवं सम्बन्धित दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (λ) के परिवर्तन का प्रदर्शित करता है ?
Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - 3
उत्तर-
(d)

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 27.
कौन-सी घटना पदार्थ की तरंग प्रकृति के सिद्धांत को सर्वाधिक रूप से प्रमाणित करती है ?
(a) इलेक्ट्रॉन संवेग
(b) इलेक्ट्रॉन विवर्तन
(c) फोटॉन संवेग
(d) फोटॉन विवर्तन
उत्तर-
(b) इलेक्ट्रॉन विवर्तन

प्रश्न 28.
विद्युतचुंबकीय तरंग/विकिरण का पदार्थ-तरंग चित्र (Matter wave picture) निकटतापूर्वक किससे संबंधित हैं ?
(a) हाइजनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत
(b) संगतत सिद्धांत (Correspondence principle)
(c) ब्रह्माण्ड सिद्धांत (Cosmic theory)
(d) हर्ट्स के प्रेक्षण
उत्तर-
(a) हाइजनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत

प्रश्न 29.
निम्न में से कौन-सी युक्ति कभी-कभार विद्युत नेत्र (Electric eye) कहलाती है?
(a) LED
(b) प्रकाश सेल
(c) एन्टीग्रेटेड चिप (IC)
(d) सौर सेल ।
उत्तर-
(b) प्रकाश सेल

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 30.
वोल्ट में विभव V से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य λ होगी –
\((a) \frac{1.227}{\sqrt{V}} \mathrm{nm}
(b) \frac{0.1227}{\sqrt{V}} \mathrm{nm}
(c) \frac{0.01227}{\sqrt{V}} \mathrm{nm}
(d) \frac{0.1227}{V} \mathrm{nm}\)
उत्तर-
\((a) \frac{1.227}{\sqrt{V}} \mathrm{nm}\)

प्रश्न 31.
दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य को इस प्रकार से व्यक्त किया जाता है –
\((a) p=\frac{2 \pi h}{\lambda}
(b) p=\frac{h}{2 \lambda}
(c) p=\frac{2 \pi}{h \lambda}
(d) p=\frac{2 \pi}{\lambda}\)
उत्तर-
\((a) p=\frac{2 \pi h}{\lambda}\)

प्रश्न 32.
यदि किसी कण की गतिज ऊर्जा को 16 गुना बढ़ाया जाता है, तो . कण की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य में प्रतिशत परिवर्तन होगा
(a) 25%
(b) 75%
(c) 60%
(d) 50%
उत्तर-
(b) 75%

प्रश्न 33.
समान गतिज ऊर्जा वाले इन कणों में से किसकी दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य अधिकतम होती है ?
(a) इलेक्ट्रॉन
(b) एल्फा कण
(c) प्रोटॉन
(d) न्यूट्रॉन
उत्तर-
(a) इलेक्ट्रॉन

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 34.
माना चार गैसें-हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन एवं हीलियम समान ताप पर हैं। उनके अणुओं की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य के बढ़ते क्रम में उन्हें व्यवस्थित कीजिए।
(a) हाइड्रोजन, हीलियम, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन
(b) ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, हीलियम
(c) ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हीलियम्, हाइड्रोजन
(d) नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम, हाइड्रोजन
उत्तर-
(c) ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हीलियम्, हाइड्रोजन

प्रश्न 35.
प्रायोगिक रूप से जी.पी. थॉमसन ने किस घटना के द्वारा पदार्थ तरंगों की उपस्थिति को प्रमाणित किया था ?
(a) विवर्तन
(b) अपवर्तन
(c) ध्रुवण
(d) प्रकीर्णन
उत्तर-
(a) विवर्तन

Bihar Board 12th Physics Objective Answers Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 36.
एक कण को H ऊँचाई से गिराया जाता है। ऊँचाई के फलन के रूप में कण की दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य किसके समानुपाती होती है ?
(a) H
(b) H1/2
(c) H0
(d) H-1/2
उत्तर-
(d) H-1/2

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

Bihar Board 12th History Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th History Objective answers chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 1.
कालीबंगा स्थित है
(a) सिन्ध में
(b) पंजाब में
(c) राजस्थान में
(d) बंगाल में
उत्तर-
(c) राजस्थान में

प्रश्न 2.
हड़प्पा किस नदी के किनारे स्थित है ?
(a) सिन्धु
(b) व्यास
(c) सतलज
(d) रावी
उत्तर-
(d) रावी

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 3.
लोयल स्थित है
(a) गुजरात में
(b) पश्चिम बंगाल में
(c) राजस्थान में
(d) पंजाब में
उत्तर-
(a) गुजरात में

प्रश्न 4.
सिन्धु घाटी सभ्यता में हल का प्रमाण मिला है ?
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ों
(c) रोपड़
(d) कालीबंगा
उत्तर-
(d) कालीबंगा

प्रश्न 5.
मोहनजोदड़ों की जानकारी किस पुरातत्त्वविद् से मिली
(a) दयाराम सहनी
(b) राखालदास बनर्जी
(c) जॉन मार्शल
(d) गोडेन चाइल्ड
उत्तर-
(b) राखालदास बनर्जी

प्रश्न 6.
भारतीय उपमहाद्वीप की पहली सभ्यता का विकास हुआ
(a) गोदावरी के मैदान में
(b) गंगा के मैदान में
(c) सिंधु के मैदान में
(d) महानदी के मैदान में
उत्तर-
(c) सिंधु के मैदान में

प्रश्न 7.
‘हड़प्पा सभ्यता’ का प्रमुख स्थल कालीबंगा स्थित है
(a) पंजाब में
(b) राजस्थान में
(c) सिंध में
(d) गुजरात में
उत्तर-
(b) राजस्थान में

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 8.
हड़प्पा की बस्तियों की खुदाई की-
(a) सर जॉन मार्शल
(b) सर विलियम जोन्स
(c) मार्टिमर ह्वीलर
(d) (a) और (c) दोनों
उत्तर-
(d) (a) और (c) दोनों

प्रश्न 9.
विद्वानों के मतानुसार हड़प्पा सभ्यता के सबसे बड़े नगर थे
(a) हड़प्पा
(b) कालीबंगा
(c) मोहनजोदड़ों
(d) लोथल
उत्तर-
(c) मोहनजोदड़ों

प्रश्न 10.
निम्न में से किस पुरातत्त्वविद्/पुरातत्त्वविदों ने हड़प्पा. में खुदाई कार्य किया ?
(a) दयाराम साहनी
(b) एम. एस. वैट्स ।
(c) मार्टिमर ह्वीलर
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(d) इनमें सभी

प्रश्न 11.
हड़प्पा सभ्यता की संभवतः सबसे प्रसिद्ध कलाकृति नृत्य की मुद्रा में नग्न स्त्री की एक कांस्यमूर्ति प्राप्त हुई.
(a) मोहनजोदड़ों से
(b) हड़प्पा से
(c) धौलावीरा से
(d) सूरकोटड़ा से
उत्तर-
(a) मोहनजोदड़ों से

प्रश्न 12.
निम्न किस स्थल में कारखाने के पाए जाने से मनकों को बनाए जाने की प्रक्रिया स्पष्ट हो जाती है?
(a) राखीगढ़ी
(b) रोपड़
(c) चन्हूदड़ों
(d) धौलावीरा
उत्तर-
(c) चन्हूदड़ों

प्रश्न 13.
हड़प्पा की बस्तियों से 2000 से अधिक मुहरें पाई गई हैं, ये बनी होती हैं
(a) लोहे की
(b) चाँदी की
(c) फिरोजा पत्थर की
(d) शेलखड़ी की
उत्तर-
(d) शेलखड़ी की

प्रश्न 14.
निम्न किस स्थल में खाँचेदार खेत के प्रमाण मिले हैं ?
(a) बनावली
(b) लोथल
(c) कालीबंगा
(d) राखीगढ़ी
उत्तर-
(c) कालीबंगा

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 15.
हड़प्पावासियों द्वारा कृष्ट फसलें थीं
(a) गेहूँ, यव और सरसों
(b) यव, मूंगफली एवं चावल
(c) गेहूँ, चावल और गन्ना
(d) गेहूँ, कपास एवं गन्ना
उत्तर-
(a) गेहूँ, यव और सरसों

प्रश्न 16.
हड़प्पा सभ्यता में पाई गई मुहरें आमतौर पर किस प्रकार की होती थीं?
(a) त्रिभुजाकार
(b) गोलाकार
(c) चौकार
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(c) चौकार

प्रश्न 17.
हड़प्पा निवासी पूजा करते थे
(a) मातृ देवी का
(b) वृक्ष आत्माओं का
(c) पौराणिक नामक का
(d) इनमें सभी का
उत्तर-
(d) इनमें सभी का

प्रश्न 18.
हड़प्पा सभ्यता में शव साधारणतया किस दिशा में रखकर दफनाए जाते थे?
(a) पूर्व-पश्चिम
(b) उत्तर-पूर्व
(c) उत्तर-दक्षिण
(d) दक्षिण-पश्चिम
उत्तर-
(c) उत्तर-दक्षिण

प्रश्न 19.
ऐलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण किस राजवंश ने किया ?
(a) चालुक्य
(b) चोल
(c) पल्लव
(d) राष्ट्रकूट
उत्तर-
(d) राष्ट्रकूट

प्रश्न 20.
राखालदास बनर्जी को मोहनजोदड़ों के अवशेष किस वर्ष मिले
(a) 1920 ई. में
(b) 1921 ई. में
(c) 1922 ई. में
(d) 1923 ई. में
उत्तर-
(c) 1922 ई. में

प्रश्न 21.
सिन्धुघाटी सभ्यता में विशाल स्नानागर के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) कालीबंगन
(d) लोथल
उत्तर-
(b) मोहनजोदड़ो

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 22.
हड़प्पा सभ्यता किस युग की सभ्यता है ?
(a) पूर्व पाषाण युग
(b) नव-पाषण युग
(c) लौह.युग
(d) कांस्य युग
उत्तर-
(d) कांस्य युग

प्रश्न 23.
हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा नगर कौन था?
(a) मोहनजोदड़ों
(b) कालीबंगा
(c) लोथल
(d) रंगपुर
उत्तर-
(b) कालीबंगा

प्रश्न 24.
सिंधुघाटी निवासियों को किस धातु का ज्ञान नहीं था ?
(a) सोना
(b) चाँदी
(c) लोहा
(d) ताँबा
उत्तर-
(c) लोहा

प्रश्न 25.
सिन्धु सभ्यता को किस श्रेणी के अन्तर्गत रखा गया है?
(a) ऐतिहासिक काल
(b) आद्य ऐतिहासिक काल
(c) पूर्व ऐतिहासिक काल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(b) आद्य ऐतिहासिक काल

प्रश्न 26.
राखालदास बनर्जी को मोहनजोदड़ो के अवशेष किस वर्ष मिले? (2009A,2013A)
(a) 1920 ई. में
(b) 1921 ई. में
(c) 1922 ई. में
(d) 1923 ई. में
उत्तर-
(c) 1922 ई. में

प्रश्न 27.
सिन्धुघाटी सभ्यता में विशाल स्नानागार के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए हैं? (2009, 2013A, 2015A, 2016A. 2017A, 2019A)
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) कालीबंगन
(d) लोथल
उत्तर-
(b) मोहनजोदड़ो

प्रश्न 28.
हड़प्पा सभ्यता किस युग की सभ्यता है? (2010A,2014A, 2018A,2019A)
(a) पूर्व-पाषाण युग
(b) नव-पाषाण युग
(c) लौह युग
(d) कांस्य युग
उत्तर-
(d) कांस्य युग

प्रश्न 29.
हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा नगर कौन था? (2010A,2012A, 2014)
(a) मोहनजोदड़ो
(b) कालीबंगा
(c) लोथल
(d) रंगपुर
उत्तर-
(a) मोहनजोदड़ो

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 30.
सिंधुघाटी निवासियों को किस धातु का ज्ञान नहीं था? (2014A.2019A)
(a) सोना
(b) चाँदी
(c) लोहा
(d) तौबा
उत्तर-
(c) लोहा

प्रश्न 31.
कालीबंगन स्थित है (2015 A)
(a) सिन्ध में
(b) पंजाब में
(c) राजस्थान में
(d) बंगाल में
उत्तर-
(c) राजस्थान में

प्रश्न 32.
हडप्या किस नदी के किनारे स्थित है? (2016A,2018A)
(a) सिन्धु
(b) व्यास
(c) सतलज
(d) रावी
उत्तर-
(d) रावी

प्रश्न 33.
लोथल स्थित है (2016A, 2018A)
(a) गुजरात में
(b) पश्चिम बंगाल में
(c) राजस्थान में
(d) पंजाब में
उत्तर-
(a) गुजरात में

प्रश्न 34.
सिन्धु घाटी सभ्यता में हल का प्रमाण कहाँ से मिला है?
(a) हड़प्पा
(b) मोहनजोदड़ो
(c) रोपड़
(d) कालीबंगा
उत्तर-
(d) कालीबंगा

प्रश्न 35.
हड़प्पा सभ्यता का नगर था
(a) दो स्तरीय
(b) तीन स्तरीय
(c) एक स्तरीय
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(a) दो स्तरीय

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 36.
भारतीय उपमहाद्वीप की पहली सभ्यता का विकास हुआ
(a) गोदावरी के मैदान में
(b) गंगा के मैदान में
(c) सिंधु के मैदान में
(d) महानदी के मैदान में
उत्तर-
(c) सिंधु के मैदान में

प्रश्न 37.
हड़प्पा की बस्तियों की खुदाई की
(a) सर जॉन मार्शल
(b) सर विलियम जोन्स
(c) मार्टिमर हीलर
(d) (a) और (c) दोनों
उत्तर-
(d) (a) और (c) दोनों

प्रश्न 38.
सिन्धुघाटी सभ्यता की जुड़वाँ राजधानी थी
(a) मोहनजोदड़ो-चन्दूदड़ों
(b) हड़प्पा-लोथल
(c) हड़प्पा-मोहनजोदड़ो
(d) लोयल-कालीबंगा
उत्तर-
(c) हड़प्पा-मोहनजोदड़ो

प्रश्न 39.
निम्न में से किस पुरातत्वविद्/पुरातत्वविदों द्वारा हड़प्या में खुदाई सम्पन्न कराया गया?
(a) दयाराम साहनी
(b) एम.एस. वैट्स
(c) मार्टिमर ह्वीलर
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(d) इनमें सभी

प्रश्न 40.
हड़प्पा सभ्यता की संभवतः सबसे प्रसिद्ध कलाकृति नृत्य की मुद्रा में नग्न स्त्री की एक कांस्यमूर्ति प्राप्त हुई
(a) मोहनजोदड़ो से
(b) हड़प्पा से
(c) धौलावीरा से
(d) सूरकोटड़ा से
उत्तर-
(a) मोहनजोदड़ो से

प्रश्न 41.
निम्न किस स्थल में कारखाने के पाए जाने से मानकों को बनाए जाने की प्रक्रिया स्पष्ट हो जाती है?
(a) राखीगढ़ी
(b) रोपड़
(c) चन्हूदड़ो
(d) धौलावीरा
उत्तर-
(c) चन्हूदड़ो

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 42.
हड़प्या की बस्तियों से 2000 से अधिक मुहरें पाई गई हैं, ये बनी होती हैं
(a) लोहे की
(b) चाँदी की
(c) फिरोजा पत्थर की
(d) शेलखड़ी की
उत्तर-
(d) शेलखड़ी की

प्रश्न 43.
निम्न किस स्थल में खाँचेदार खेत के प्रमाण मिले हैं?
(a) बनावली
(b) लोथल
(c) कालीबंगा
(d) राखीगढ़ी
उत्तर-
(c) कालीबंगा

प्रश्न 44.
हड़प्यावासियों द्वारा कृष्ट फसलें थीं
(a) गेहूँ और जौ, तिल
(b) यव, मूंगफली एवं चावल
(c) गेहूँ, चावल और गन्ना
(d) गेहूँ, कपास एवं गन्ना
उत्तर-
(a) गेहूँ और जौ, तिल

प्रश्न 45.
हड़प्पा सभ्यता में पाई गई मुहरें आमतौर पर किस प्रकार की होती थीं?
(a) त्रिभुजाकार
(b) गोलाकार
(c) चौकोर
(d) इनमें सभी
उत्तर-
(c) चौकोर

प्रश्न 46.
हड़प्पा निवासी पूजा करते थे
(a) मातृ देवी का
(b) वृक्ष आत्माओं का
(c) पौराणिक का
(d) इनमें सभी का
उत्तर-
(d) इनमें सभी का

प्रश्न 47.
हड़प्पा सभ्यता में शव साधारणतया किस दिशा में रखकर दफनाए जाते थे?
(a) पूर्व-पश्चिम
(b) उत्तर-पूर्व
(c) उत्तर-दक्षिण
(d) दक्षिण-पश्चिम
उत्तर-
(c) उत्तर-दक्षिण

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 48.
हड़प्पा कहाँ पर स्थित है?
(a) पाकिस्तान में
(b) भारत में
(c) नेपाल में
(d) भूटान में
उत्तर-
(a) पाकिस्तान में

प्रश्न 49.
हड़प्पा टीले का उल्लेख सर्वप्रथम 1826 ई. में किसने किया?
(a) चार्ल्स मैसन
(b) जान ब्रटन
(c) विलियम ब्रटन
(d) सर जॉन मार्शल
उत्तर-
(a) चार्ल्स मैसन

प्रश्न 50.
हड़प्पा सभ्यता में प्राप्त अवतल चक्की पर किस पुराविद् ने प्रकाश डाला है?
(a) कनिंघम
(b) अर्नेस्ट मैके
(c) जॉन मार्शल
(d) सूरजभान
उत्तर-
(b) अर्नेस्ट मैके

प्रश्न 51.
मोहनजोदड़ो किस भाषा का शब्द है?
(a) हिन्दी
(b) सिन्धी
(c) उर्दू
(d) फारसी
उत्तर-
(b) सिन्धी

प्रश्न 52.
राय बहादुर दयाराम साहनी ने कहाँ उत्खनन करवाया था?
(a) मोहनजोदड़ो
(b) हड़प्पा
(c) लोथल
(d) कालीबंगा
उत्तर-
(b) हड़प्पा

प्रश्न 53.
निम्नलिखित हिन्दू देवताओं में से कौन सैन्धव सभ्यता का प्रमुख देवता थे?
(a) गणेश
(b) शिव
(c) विष्णु
(d) वरुण
उत्तर-
(b) शिव

प्रश्न 54.
सिन्धु घाटी सभ्यता किसके समकालीन नहीं मानी जाती?
(a) चीन की सभ्यता
(b) मिस्र की सभ्यता
(c) मेसोपोटामिया की सभ्यता
(d) क्रीट की सभ्यता
उत्तर-
(d) क्रीट की सभ्यता

प्रश्न 55.
बनावली किस राज्य में स्थित है?
(a) गुजरात
(b) हरियाणा
(c) राजस्थान
(d) पंजाब
उत्तर-
(b) हरियाणा

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 56.
पुरातत्व के अन्तर्गत निम्न में से कौन एक नहीं है?
(a) साहित्य
(b) सिक्के
(c) अभिलेख
(d) भग्नावेश
उत्तर-
(a) साहित्य

प्रश्न 57.
कलकत्ता में एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की
(a) कनिघम
(b) फ्लीट
(c) डी.सी. सरकार
(d) विलियम जोन्स
उत्तर-
(d) विलियम जोन्स

प्रश्न 58.
हड़प्पा सभ्यता का प्रशासन था
(a) राजतंत्रात्मक
(b) लोकतंत्रात्मक
(c) नगरपालिका जैसा
(d) गणतंत्रात्मक
उत्तर-
(c) नगरपालिका जैसा

प्रश्न 59.
पहली बार हड़प्पा को किस वर्ष उत्खनित किया गया?
(a) 1921
(b) 1924
(c) 1927
(d) 1930
उत्तर-
(a) 1921

प्रश्न 60.
सिन्धु सभ्यता में गोदीबाड़ा कहाँ से मिला है?
(a) कालीबंगान
(b) रोपड़
(c) बनवाली
(d) लोथल
उत्तर-
(d) लोथल

Bihar Board 12th History Objective Answers Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

प्रश्न 61.
मोहनजोदड़ो किस नदी के किनारे स्थित है?
(a) सतलज
(b) सरस्वती
(c) रावी
(d) सिन्धु
उत्तर-
(d) सिन्धु

प्रश्न 62.
हडप्पा सभ्यता भारत के किस भाग में विकसित हई थी?
(a) दक्षिण
(b) पूर्वोत्तर
(c) पश्चिमोत्तर
(d) मध्य भारत
उत्तर-
(c) पश्चिमोत्तर

प्रश्न 63.
लोथल किस नदी के किनारे स्थित है? [2016, 2019A)
(a) सिंघ
(b) व्यास
(c) भोगवा
(d) रावी
उत्तर-
(c) भोगवा

प्रश्न 64.
सिन्धु सभ्यता में मुहर बनता था
(a) सेलखड़ी का
(b) लोहा का
(c) ताँबा का
(d) इनमें सभी का
उत्तर-
(a) सेलखड़ी का

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

Bihar Board 12th Business Studies Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

प्रश्न 1.
नियुक्तिकरण पर व्यय किया गया धन है :
(A) धन की बर्बादी
(B) आवश्यक
(C) विनियोजन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) विनियोजन

प्रश्न 2.
नियुक्तिकरण है
(A) संगठन का भाग
(B) कर्मचारी प्रबंध कार्य
(C) प्रबंध का कार्य
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

प्रश्न 3.
कर्मचारियों का प्रशिक्षण
(A) आवश्यक
(B) अनावश्यक
(C) अनिवार्य
(D) धन की बर्बादी
उत्तर:
(A) आवश्यक

प्रश्न 4.
कर्मचारियों के विकास में सम्मिलित है:
(A) पदोन्नति
(B) स्थानान्तरण
(C) प्रशिक्षण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 5.
विकास का उद्देश्य है
(A) योग्यता में वृद्धि
(B) श्रेष्ठ निष्पादन
(C) पदोन्नति के अवसर
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 6.
मानव संसाधन प्रबंध में सम्मिलित है: |
(A) भर्ती
(B) चयन
(C) प्रशिक्षण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

प्रश्न 7.
प्रशिक्षण की विधियाँ हैं:
(A) कार्य बदली प्रशिक्षण
(B) कार्य पर प्रशिक्षण
(C) प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 8.
नियुक्तिकरण उत्तरदायित्व…………है:
(A) निम्न प्रबंध
(B) मध्यम प्रबंध
(C) उच्च प्रबंध
(D) इन सभी का
उत्तर:
(D) इन सभी का

प्रश्न 9.
मानव संसाधन प्रबंध में सम्मिलित है..
(A) भर्ती
(B) चयन
(C) प्रशिक्षण
(D) ये सभी |
उत्तर:
(D) ये सभी |

प्रश्न 10.
नियुक्तिकरण है…………….
(A) संगठन का भाग
(B) कर्मचारी प्रबंध का कार्य
(C) प्रबंध का कार्य
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

प्रश्न 11.
पदोन्नति और स्थानान्तरण कर्मचारियों की भर्ती के मुख्य………
(A) कार्य
(B) उद्देश्य
(C) स्रोत
(D) महत्व |
उत्तर:
(C) स्रोत

प्रश्न 12.
किसी व्यक्ति के कम जिम्मेदारी के पद पर स्थानान्तरण को……. कहते हैं:
(A) पदोन्नति
(B) अवनति
(C) कोई भी नहीं
(D) सभी |
उत्तर:
(C) कोई भी नहीं

प्रश्न 13.
किसी कर्मचारी को एक कार्य से हटाकर दूसरे कार्य पर लगाना…..
(A) हस्तान्तरण
(B) त्याग
(C) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं |
उत्तर:
(A) हस्तान्तरण

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

प्रश्न 14.
संगठन के जीवन में भर्ती होती है:
(A) एक बार
(B) दो बार
(C) कभी-कभी
(D) निरंतर
उत्तर:
(D) निरंतर

प्रश्न 15.
कर्मचारियों का चयन होता है:
(A) निम्न श्रेणी के अधिकारियों का
(B) मध्यम श्रेणी के अधिकारियों का
(C) उच्चतम श्रेणी के अधिकारियों का
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 16.
विकास की विधियाँ हैं :
(A) पद हेरफेर
(B) अल्पकालीन पाठ्यक्रम
(C) कार्य पर विकास
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 6 नियुक्तिकरण

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 1.
संगठन प्रक्रिया में निहित है:
(A) समान कार्य का समूहीकरण
(B) कार्य का विभाजन
(C) उपर्युक्त व्यक्तियों की कार्य सौंपा जाना
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(D) कोई नहीं

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 2.
संगठन में पक्षपात नहीं होता है :
(A) औपचारिक संगठन
(B) अनोपचारिक संगठन
(C) विभागीय संगठन
(D) क्रियात्मक संगठन
उत्तर:
(A) औपचारिक संगठन

प्रश्न 3.
संगठन स्वतः निर्मित होता है:
(A) क्रियात्मक
(B) अनौपचारिक
(C) औपचारिक
(D) विभागीय
उत्तर:
(B) अनौपचारिक

प्रश्न 4.
भारार्पण किया जाता है :
(A) अधिकार का
(B) उत्तरदायित्व का
(C) जवाबदेही का
(D) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर:
(A) अधिकार का

प्रश्न 5.
उत्तरदायित्व होता है:
(A) अधीनस्थ का
(B) अधिकारी
(C) दोनों का
(D) इनमें से किसी का नहीं
उत्तर:
(B) अधिकारी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 6.
बड़े आकार वाले उपक्रम में भारार्पण होता है:
(A) ऐच्छिक
(B) आवश्यक
(C) अनिवार्य
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अनिवार्य

प्रश्न 7.
प्रभावी भरार्पण के लिए आवश्यक है:
(A) सम्पर्क की सुविधा
(B) सहयोग तथा समन्वय का पर्यावरण
(C) अधिकारों का स्पष्ट स्पष्टीकरण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 8.
प्रभावशाली अधिकार हस्तान्तरण के लिए उत्तरदायित्व के साथ होना अति आवश्यक है :
(A) अधिकार
(B) मानव शक्ति
(C) प्रोत्साहन
(D) प्रोन्नति
उत्तर:
(A) अधिकार

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 9.
कुण्ट्ज एवं ओ डौनेल के अनुसार संगठन प्रक्रिया के…………
(A) 4
(B) 6
(C) 7
(D) 8
उत्तर:
(c) 7

प्रश्न 10.
“गलत संगठन-संरचना व्यावसायिक निष्पादन को रोकती है तथा यहाँ तक कि उसे नष्ट कर देती है।” यह कथन……. का है:
(A) डकर
(B) ऐलन
(C) टैरो
(D) टेलर
उत्तर:
(A) डकर

प्रश्न 11.
“………….संगठन स्वत: निर्मित होता है।”
(A) औपचारिक
(B) अनौपचारिक
(C)क्रियात्मक
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(B) अनौपचारिक

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 12.
अधिकार सौंपने के मार्ग में. …कठिनाई आती है:
(A) तीन
(B) चार
(C) दो
(D) पाँच
उत्तर:
(A) तीन

प्रश्न 13.
संगठन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए वहद योजना जानी जाती
(A) नीति के रूप में
(B) कार्यक्रम के रूप में
(C) उद्देश्य के रूप में
(D) रणनीति के रूप में
उत्तर:
(A) नीति के रूप में

प्रश्न 14.
केन्द्रीयकरण का अर्थ है : ।
(A) अधिकार का धारण
(B) अधिकार का वितरण
(C) लाभ केन्द्र का निर्माण
(D) नया केन्द्र खोलना
उत्तर:
(A) अधिकार का धारण

प्रश्न 15.
संगठन प्रक्रिया के कदम हैं :
(A) 2
(B) 4
(C) 6
(D) 8
उत्तर:
(C) 6

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 16.
कर्मचारियों की स्वेच्छा पर निर्भर करता है:
(A) औपचारिक संगठन
(B) अनौपचारिक संगठन
(C) क्रियात्मक संगठन
(D) विभागीय संगठन |
उत्तर:
(B) अनौपचारिक संगठन

प्रश्न 17.
अनौपचारिक संगठन की दशा में सत्ताएं होती हैं :
(A) विकेन्द्रित
(B) केन्द्रित
(C) समान रूप से वितरित
(D) कोई नहीं |
उत्तर:
(D) कोई नहीं |

प्रश्न 18.
अधिकार का हस्तान्तरण नहीं किया जा सकता है:
(A) दैनिक कार्य
(B) गोपनीय कार्य
(C) साधारण कार्य
(D) सरल कार्य |
उत्तर:
(B) गोपनीय कार्य

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से कौन अंतरण का तत्व नहीं है?
(A) उत्तरदेयता
(B) अधिकार
(C) उत्तरदायित्व
(D) अनौपचारिक संगठन
उत्तर:
(D) अनौपचारिक संगठन

प्रश्न 20.
कार्य करते हुए अन्तः क्रिया से अचानक बना सामाजिक सम्बन्ध तंत्र कहलाता है
(A) औपचारिक संगठन
(B) अनौचारिक संगठन
(C) विकेन्द्रीकरण
(D) अंतरण
उत्तर:
(B) अनौचारिक संगठन

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में से कौन-सा श्रृंखला सोपान का अनुकरण नहीं करता?
(A) कार्यात्मक संगठन
(B) प्रभागीय संगठन
(C) औपचारिक संगठन
(D) अनौपचारिक संगठन
उत्तर:
(D) अनौपचारिक संगठन

प्रश्न 22.
एक लाबा डाँचा होता है
(A) प्रबंध को सिकुड़ी हुई शृंखला
(B) प्रबंध की फैली हुई श्रृंखला
(C) प्रबंध की कोई शृंखला
(D) प्रबंध के कम स्तर
उत्तर:
(B) प्रबंध की फैली हुई श्रृंखला

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 23.
केन्द्रीकरण से तात्पर्य होता है
(A) निर्णय लेने में अधिकारों को सुरक्षित रखना
(B) निर्णय लेने में अधिकारों का बिखराव करना
(C) प्रभागों का लाभ केंद्र बनाना
(D) नये केंद्रों अथवा शाखाओं का खोलना
उत्तर:
(A) निर्णय लेने में अधिकारों को सुरक्षित रखना

प्रश्न 24.
अंतरण को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक है कि उत्तरदायित्व भी साथ हो
(A) अधिकार
(B) जन शक्ति
(C) प्रोत्साहन
(D) प्रवर्तन
उत्तर:
(A) अधिकार

प्रश्न 25.
प्रबंध के विस्तार से तात्पर्य है
(A) प्रबंधकों की संख्या
(B) एक प्रबंधक की नियुक्ति के समय की सीमा जिसके लिए उसे नियुक्ति दी गई है
(C) एक उच्चाधिकारी के अन्तर्गत कार्य करने वाले अधीनस्थों की गणना
(D) शीर्ष प्रबंध के सदस्यों की गणना
उत्तर:
(C) एक उच्चाधिकारी के अन्तर्गत कार्य करने वाले अधीनस्थों की गणना

प्रश्न 26.
अफवाहों को बढ़ावा देने वाले संगठन स्वरूप को समझा जाता है:
(A) केंद्रीकृत संगठन
(B) विकेंद्रीकृत संगठन
(C) अनौपचारिक संगठन
(D) औपचारिक संगठन
उत्तर:
(C) अनौपचारिक संगठन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

प्रश्न 27.
उत्पादन रेखा पर आधारित सामूहिक क्रिया अंग है:
(A) अंतरित संगठन का
(B) प्रभागीय संगठन का
(C) कार्यात्मक संगठन का
(D) स्वायत्तशासित संगठन का
उत्तर:
(B) प्रभागीय संगठन का

प्रश्न 28.
कार्य के आधार पर सामूहिक क्रिया अंग है:
(A) विकेंद्रीकृत संगठन का
(B) प्रभागीय संगठन का
(C) कार्यात्मक संगठन का
(D) केंद्रीकृत संगठन का
उत्तर:
(C) कार्यात्मक संगठन का

प्रश्न 29.
संगठन में अनुशासन नहीं है:
(A) विभागीय संगठन
(B) क्रियात्मक संगठन
(C) औपचारिक संगठन
(D) अनौपचारिक संगठन
उत्तर:
(D) अनौपचारिक संगठन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 5 संगठन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

प्रश्न 1.
नियोजन होता है:
(A) भूतकाल के लिए
(B) भविष्यकाल के लिए
(C) वर्तमान के लिए
(D) सभी समय के लिए
उत्तर:
(D) सभी समय के लिए

प्रश्न 2.
“नियोजन भविष्य को पकड़ने के लिए बनाया गया पिंजरा है।” यह कथन है
(A) न्यूमैन
(B) हर्ले
(C) एलन
(D) टेरी
उत्तर:
(C) एलन

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

प्रश्न 3.
बजट का अर्थ है:
(A) निष्पादन का नियोजित लक्ष्य
(B) भविष्य के कार्यकलाप का प्रयोग
(C) संसाधनों का सही विवरण
(D) आशान्वित परिणाम का अंकों में वितरण |
उत्तर:
(D) आशान्वित परिणाम का अंकों में वितरण |

प्रश्न 4.
नियोजन सभी प्रबंधकीय क्रियाओं का है:
(A) प्रारम्भ
(B) अन्त
(C) प्रारम्भ तथा अन्त दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रारम्भ तथा अन्त दोनों

प्रश्न 5.
नियोजन है:
(A) लक्ष्य-अभिमुखी
(B) उद्देश्य-अभिमुखी
(C) मानसिक प्रक्रिया
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

प्रश्न 6.
एक अच्छी योजना होती है:
(A) खर्चीली
(B) समय लेने वाली
(C) लोचपूर्ण
(D) संकीर्ण
उत्तर:
(C) लोचपूर्ण

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-सी नियोजन की सीमा नहीं है :
(A) समय की बर्बादी
(B) नियंत्रण का आधार
(C) कटोरता
(D) अत्यधिक लागत
उत्तर:
(B) नियंत्रण का आधार

प्रश्न 8.
नियोजन प्रबंधक का कार्य है :
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) इनमें से सभी
उत्तर:
(B) द्वितीयक

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

प्रश्न 9.
नियोजन आधारित है…………..
(A) भूतकाल पर
(B) आगे आने पर
(C) भविष्य पर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) भूतकाल पर

प्रश्न 10.
…………..एक ऐसी विधि है जो कार्य को पूरा करती है :
(A) प्रक्रिया
(B) उद्योग
(C) उद्देश्य
(D) व्यापार
उत्तर:
(A) प्रक्रिया

प्रश्न 11.
कार्यक्रम का निर्धारण आवश्यक है वैज्ञानिक….के लिए :
(A) नियोजन
(B) प्रबंध
(C) संगठन
(D) नियंत्रण
उत्तर:
(B) प्रबंध

प्रश्न 12.
नियोजन में शामिल है……..
(A) क्या करना है।
(B) कब करना है
(C) कैसे करना है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

Bihar Board 12th Business Studies Objective Answers Chapter 4 नियोजन

प्रश्न 13.
जॉर्ज आर, टैरी के अनुसार नियोजन के प्रकार हैं
(A) 8
(B) 6
(C) 4
(D) 2
उत्तर:
(C) 4

प्रश्न 14.
एक अच्छी योजना होती है :
(A) सर्चीली
(B) समय लेने वाली
(C)लोचपूर्ण
(D) संकीर्ण
उत्तर:
(C)लोचपूर्ण

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