Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 2 स्वतंत्रता

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 2 स्वतंत्रता Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 2 स्वतंत्रता

Bihar Board Class 11 Political Science स्वतंत्रता Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
स्वतंत्रता से क्या आशय है? क्या व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता और राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता में कोई संबंध है?
उत्तर:
स्वतंत्रता का अर्थ (The meaning of Freedom):
सामान्य अर्थों में स्वतंत्रता का अर्थ ‘प्रतिरोध रहित’ अवस्था से लिया जाता है। प्रतिरोधों के लगने पर स्वतंत्रता छिन जाती है। स्वतंत्रता अंग्रेजी भाषा के लिबर्टी (Liberty) शब्द के लिए प्रयुक्त होता है जो लैटिन भाषा के (Liber) शब्द से निकला है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘बंधनों का अभाव’। इस प्रकार स्वतंत्रता का अर्थ हुआ ‘बंधन रहित अवस्था’ अर्थात् मनुष्य के व्यवहार पर किसी प्रकार का अंकुश न होना।

वह जैसा चाहे व्यवहार करे। किन्तु यहाँ यह विचारणीय है कि यदि इच्छानुसार आचरण करने की स्वतंत्रता दे दी जाएगी तब केवल शक्तिशाली मनुष्य ही इस स्वतंत्रता का उपभोग कर सकेंगे और स्वतंत्रता केवल कुछ व्यक्तियों को ही मिल सकेगी। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि अंकुशरहित अथवा ‘अनियंत्रित स्वतंत्रता’ वास्तव में स्वतंत्रता है।

प्रतिरोध रहित अवस्था’ और उच्छृखलता में कोई अंतर नहीं है। हमें स्वतंत्रता पर कुछ न कुछ बंधन अवश्य लगाने पड़ेंगे जिससे कि वह सम्पूर्ण समाज के लिए हितकर बन सके। वास्तव में स्वतंत्रता का अर्थ ऐसी अवस्थाओं से है जिससे मनुष्य अपना पूर्ण विकास कर सकता है। अतः कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता से तात्पर्य यह है कि व्यक्ति की ऐसी स्वतंत्रता पर बंधन लगना चाहिए जिनसे किसी दूसरे व्यक्ति अर्थात् समाज को हानि पहुँचती हो। मैकेंजी ने कहा है कि ‘स्वतंत्रता सभी प्रकार के प्रतिबंधों का अभाव नहीं है बल्कि अनुचित प्रतिबंधों के स्थान पर उचित प्रतिबंधों की स्थापना है।”

(“Freedom is not the absence of all restraints, but rather the substitution of rational ones for the irrational”)

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता में संबंध:
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता में घनिष्ठ सम्बन्ध है। राष्ट्र व्यक्ति का समूह होता है जो एक व्यक्ति के समान होता है। इसलिए व्यक्ति की स्वतंत्रता और देश का समूह होता है जो एक व्यक्ति के समान होता है। इसलिए व्यक्तिगत की स्वतंत्रता और देश की स्वतंत्रता के योगदान में विशेष अंतर नहीं होता। राष्ट्र एक जीवित जीव की तरह कार्य करता है और व्यक्ति पर नियंत्रण रखता है। देश की हानि, उसके देशवासियों की हानि होती है। व्यक्ति राष्ट्र स्तर पर दूसरे राष्ट्र के विरुद्ध संघर्ष करता है। सामुदायिक हानि व्यक्ति स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के मध्य की हानि है।

विश्व के अन्य देशों के समान भारत ने शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उसने विदेशी शक्तियों के साथ उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष किया और बड़े शानदार तरीके से 15 अगस्त, 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की। नेल्सन मंडेला और उसके साथियों ने जातीयता की ब्रिटिश नीति के खिलाफ कालों के हित के लिए लम्बे समय तक संघर्ष किया। इन संघर्षों द्वारा दक्षिण अफ्रीका के लोगों के स्वतंत्रता में आने वाले बाधाओं को भी दूर किया। मंडेला ने अपनी पुस्तक ‘स्वतंत्रता के लम्बे कदम’ (Long Walk to Freedom) में स्वतंत्रता की विस्तृत व्याख्या की है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की माँग राष्ट्रीय स्वतंत्रता या राष्ट्र के लिए स्वतंत्रता की माँग का पथ प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 2.
स्वतंत्रता की नकारात्मक और सकारात्मक अवधारणा में क्या अंतर है?
उत्तर:
स्वतंत्रता की अवधारणा के नकारात्मक पक्ष और सकारात्मक पक्ष में अंतर –

1. स्वतंत्रता की अवधारणा का नकारात्मक पक्ष:
प्राचीन विचारक नकारात्मक स्वतंत्रता को महत्व देते हैं। उनके अनुसार “स्वतंत्रता से अभिप्राय, ‘बंधनों के अभाव’ से है अर्थात् मनुष्य पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। उसकी इच्छा तथा उसके कार्यों पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। मनुष्य को अपने अंत:करण के अनुसार कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।

उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र-राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक तथा धार्मिक क्षेत्र में स्वतंत्र होना चाहिए। व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार जो कुछ करना चाहता है, उसे करने देना चाहिए। राज्य उस पर किसी प्रकार की रुकावट नहीं लगाएगा। जॉन लॉक, एडम स्मिथ और मिल आदि विचारक स्वतंत्रता के इसी रूप के समर्थक थे। लॉक को नकारात्मक स्वतंत्रता का प्रतिपादक माना जाता है।

स्वतंत्रता का नकारात्मक दृष्टिकोण निम्नलिखित विचारों पर आधारित है –

  • स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव है।
  • व्यक्ति पर राज्य द्वारा कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
  • वह सरकार सर्वोत्तम है जो कम से कम शासन करे।
  • सम्पत्ति और जीवन की स्वतंत्रता असीमित होती है।

2. स्वतंत्रता का सकारात्मक पक्ष (Positive Aspects of Liberty):
मैक्नी (Mekechine) के अनुसार, “स्वतंत्रता का अर्थ नियंत्रण का अभाव नहीं अपितु उचित नियंत्रण होता है।” ये विचार स्वतंत्रता के सकारात्मक रूप को दर्शाते हैं। स्वतंत्रता के सकारात्मक रूप को 20 वीं शताब्दी के उदारवादी विचारकों में महत्व दिया। उनके अनुसार वास्तविक स्वतंत्रता विवेक के अनुसार कार्य करने में है।

लास्की और मेकाइवर स्वतंत्रता के सकारात्मक सिद्धांत के प्रमुख समर्थक हैं। उनका कहना है कि स्वतंत्रता केवल बंधनों का अभाव है। मनुष्य समाज में रहता है और समाज का हित ही उसका हित है। समाज हित के लिए सामाजिक नियमों तथा आचरणों द्वारा नियंत्रित रहकर व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए अवसर की प्राप्ति ही स्वतंत्रता है। लास्की के शब्दों में, स्वतंत्रता एक सकारात्मक चीज है। इसका तात्पर्य केवल बंधनों का अभाव नहीं है।

स्वतंत्रता के सकारात्मक पक्ष की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  • स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव नहीं है। सकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थक उचित ” प्रतिबंधों को स्वीकार करते हैं परंतु वे अनुचित प्रतिबंधों के विरुद्ध हैं। सामाजिक हित के लिए व्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं।
  • स्वतंत्रता और राज्य के कानून परस्पर विरोधी नहीं हैं। कानून स्वतंत्रता को नष्ट नहीं करते बल्कि स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।
  • स्वतंत्रता का अर्थ उन सामाजिक परिस्थितियों का विद्यमान होना है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में सहायक हों।

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प्रश्न 3.
सामाजिक प्रतिबंधों से क्या आशय है? क्या किसी भी प्रकार के प्रतिबंध स्वतंत्रता के लिए आवश्यक है?
उत्तर:
सामाजिक प्रतिरोध (Social constraints) शब्द का तात्पर्य सामाजिक बंधन और अभिव्यक्ति पर जातीय एवं व्यक्ति के व्यवहार पर नियंत्रण से है। ये बंधन (Restructions) प्रभुत्व और बाह्य नियंत्रण से आता है। ये बंधन विभिन्न विधियों से थोपे जा सकते हैं। ये बंधन कानून, रीतिरिवाज, जाति, असमानता, समाज की रचना आदि हो सकते हैं। स्वतंत्रता या मुक्ति (Liberty) के वास्तविक अनुभव के लिए सामाजिक और कानूनी बंधन (Constraints) आवश्यक है। प्रतिरोध और प्रतिबंध न्यायसंगत और उचित होना चाहिए। लोगों की स्वतंत्रता के लिए प्रतिरोध जरूरी है क्योंकि बिना उचित प्रतिरोध या बंधन के समाज में आवश्यक व्यवस्था नहीं होगी जिससे लोगों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

प्रश्न 4.
नागरिकों की स्वतंत्रता को बनाए रखने में राज्य की क्या भूमिका है?
उत्तर:
नागरिकों के स्वतंत्रता की सुरक्षा में राज्य की भूमिका-राज्य के सम्बन्ध में कई लोगों का कहना है कि राज्य लोगों की स्वतंत्रता का बाधक है। इसलिए उनकी राय में राज्य के समान कोई संस्था नहीं होनी चाहिए। व्यक्तिवादियों का मानना है कि राज्य एक आवश्यक बुराई है। इसलिए वे एक पुलिस राज्य चाहते हैं जो मानव की स्वतंत्रता की रक्षा बाहरी आक्रमणों और भीतरी खतरों से कर सके। इसलिए आधुनिक स्थिति में स्वतंत्रता की अवधारणा और स्वतंत्रता के आवश्यक अवयव बदल गए हैं।

इसलिए राज्य की भूमिका बदल गयी है। आज इस तथ्य को स्वीकार किया जाता है कि प्रतिरोध और उचित बंधन आवश्यक हैं। यह स्वतंत्रता की सुरक्षा और रक्षा के लिए जरूरी है। उचित प्रतिरोध (Reasonable Constraints) राज्य द्वारा उपलब्ध कराया जाता है क्योंकि राज्य इसके लिए अधिकृत है। राज्य लोगों द्वारा समर्पित एक संस्था है। इसलिए वे राज्य के निर्देशों को स्वीकार करते हैं और उसके अनुसार अपने व्यवहार में परिवर्तन करते हैं। लोगों के जीवन को आरामदायक और व्यवस्थित रखने के लिए राज्य उपयोगी नीतियों और कल्याणकारी कानूनों का निर्माण करता है। ये सब स्वतंत्रता के लिए आवश्यक है। इस प्रकार राज्य स्वतंत्रता के उत्थान में सकारात्मक भूमिका निभाता है।

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प्रश्न 5.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है? आपकी राय में इस स्वतंत्रता पर समुचित प्रतिबंध क्या होगा? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ (The meaning of freedom expression):
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व्यक्ति की मौलिक आवश्यकता है जो प्रजातंत्र को सफल और उपयोगी बनाता है। इसका अर्थ है कि एक पुरुष या स्त्री को अभिव्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए। उसे लिखने, कार्य करने, चित्रकारी करने, बोलने या कलात्मक काम करने की पूर्ण आजादी होनी चाहिए। अभिव्यक्ति के भाव या अभिव्यक्ति की स्वतंत्र प्रजातंत्र की जरूरत है। हमें यह भी मानना पड़ेगा कि अभिव्यक्ति की असीमित स्वतंत्रता प्रजातंत्र के लिए हानिकारक है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्वीकृति उचित बंधन के द्वारा उत्तरदायित्वपूर्ण एवं नियंत्रित होना चाहिए। जब हम यह कहते हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बंधन होना चाहिए तब यह निश्चित करना होगा। अधिक बंधन तर्कसंगत होना चाहिए। वह मानवता पर आधारित न्यायपूर्ण हो जिससे बंधन लादते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कोई हानि न पहुँचे। न्यायसंगत बंधन के उदाहरण-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बंधनों (Restrictions) को उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है।

भारतीय संविधान में नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है, परंतु साथ ही कानून-व्यवस्था, नैतिकता, शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा.को यदि नागरिक द्वारा हानि होने की आशंका की अवस्था में न्यायसंगत बंधन लगाने का प्रावधान है। इस प्रकार विद्यमान परिस्थितियों में न्यायसंगत प्रतिबंध लगाया जा सकता है। परंतु इस प्रतिबंध का विशेष उद्देश्य होता है और यह न्यायिक समीक्षा के योग्य हो सकता है।

Bihar Board Class 11 Political Science स्वतंत्रता Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीतिक स्वतंत्रता से क्या अभिप्राय है? (What is meant by Political Liberty?)
उत्तर:
राजनीतिक स्वतंत्रता से अभिप्राय ऐसी स्वतंत्रता से है जिसके अनुसार किसी राज्य के नागरिक अपने यहाँ की सरकार में भाग ले सकें। नागरिकों को मताधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, आवेदन देने का अधिकार तथा सरकारी नौकरी प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किए जाते हैं। रंग, जाति, नस्ल धर्म व लिंग आदि के आधार पर किसी नागरिक को उसके राजनीतिक अधिकारों से वाचत नहीं किया जाता है।

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प्रश्न 2.
भाषण तथा विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से क्या अभिप्राय है? (What do you understand by freedom of speech and expression?)
उत्तर:
लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था में जन सहभागिता तथा लोकमत का विशेष प्रभाव होता हैं। लोकमत के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि नागरिकों को अपने विचारों को भाषण या विचार अभिव्यक्ति द्वारा प्रकट करने का अधिकार होना चाहिए। भाषण तथा विचार अभिव्यक्ति लोकतंत्र की आधारशिला है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में समाचार-पत्र, रेडियो, दूरदर्शन तथा चलचित्र का प्रयोग शामिल है। शब्दों, लेखों, चित्रों, मुद्रण अथवा किसी अन्य प्रकार से अपने विचारों को व्यक्त करना इस प्रकार की स्वतंत्रता में आता है।

आज के वैज्ञानिक युग में नये आविष्कारों के कारण जो भी अभिव्यक्ति के साधन विकसित हो रहे हैं, वे भी अभिव्यक्ति की परिभाषा में शामिल हो रहे हैं। समाचार-पत्रों पर सेन्सरशिप लगाना प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात है, जो विचार अभिव्यक्ति को रोकता है। हाँ, यदि कोई भाषण, लेख या विचार अभिव्यक्ति समाज के अंदर हिंसा, घृणा, साम्प्रदायिकता आदि को बढ़ावा दे तो उस पर रोक लगायी जा सकती है। भारत के संविधान में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों में सम्मिलित की गई है।

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता के किन्हीं दो प्रकारों का वर्णन कीजिए। (Describe any two kinds of Liberty)
उत्तर:
स्वतंत्रता के बहुत प्रकार होते हैं जैसे –

  1. राजनीतिक स्वतंत्रता
  2. आर्थिक स्वतंत्रता
  3. धार्मिक स्वतंत्रता
  4. नागरिक स्वतंत्रताएँ
  5. प्राकृतिक स्वतंत्रता
  6. राष्ट्रीय स्वतंत्रताएँ
  7. निजी स्वतंत्रता

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प्रश्न 4.
क्या प्रतेक कानून स्वतंत्रता का समर्थक है? (Does each and every law support Liberty?)
उत्तर:
यद्यपि कानून और स्वतंत्रता का घनिष्ठ सम्बन्ध होता है, परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि प्रत्येक कानून स्वतंत्रता का समर्थक है। ब्रिटिश काल में अनेक कानून भारतीयों की स्वतंत्रता को कुचलने के लिए ही बनाए गए थे।

प्रश्न 5.
राजनीतिक स्वतंत्रता के दो लक्षण बताइए। (Mention two features of Political Liberty)
उत्तर:
राजनीतिक स्वतंत्रता के दो लक्षण (Two feature of Political Liberty):

  1. प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार होता है।
  2. प्रत्येक नागरिक को सरकारी नौकरी पाने का अधिकार होता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो:
(क) नैतिक स्वतंत्रता
(ख) नकारात्मक स्वतंत्रता (Write short notes on (a) Moral Liberty, (b) Negative concept of Liberty)
उत्तर:
(क) नैतिक स्वतंत्रता (Moral Liberty):
काण्ट (Kant) के अनुसार नैतिक स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्तिगत स्वायत्तता ताकि हम अपने आप में मालिक बन सकें। नैतिक स्वतंत्रता केवल राज्य में ही प्राप्त हो सकती है क्योंकि राज्य ही उन परिस्थितियों की स्थापना करता है जिनमें मनुष्य नैतिक रूप से उन्नति कर सकता है।

(ख) नकारात्मक स्वतंत्रता (Negative Aspect of Liberty):
स्वतंत्रता के नकारात्मक पहलू का अर्थ है कि व्यक्ति पर किसी प्रकार का बंधन न हो। हॉब्स के अनुसार-स्वतंत्रता का अर्थ बंधनों का अभाव है। मिल के अनुसार-व्यक्ति के जो कार्य स्वयं से सम्बन्धित हैं, उन पर किसी प्रकार का बंधन नहीं होना चाहिए परंतु स्वतंत्रता की यह नकारात्मक अवधारणा अव्यावहारिक है। समाज में इस प्रकार की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती।

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प्रश्न 7.
स्वतंत्रता की परिभाषा दीजिए। (Define Liberty)
उत्तर:
स्वतंत्रता जिसे अंग्रेजी में Liberty कहते हैं, लैटिन भाषा के लाइबर (Liber) शब्द ‘से बनी है, जिसका अर्थ होता है ‘बंधनों का अभाव’। इस प्रकार शब्द-उत्पत्ति के आधार पर स्वतंत्रता का अभिप्राय है ‘किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित हुए बिना सोचने-विचारे और सोचे हुए काम की करने की शक्ति’। परंतु इस प्रकार की चरम स्वतंत्रता सदा संभव नहीं है।

प्रश्न 8.
लास्की के द्वारा दी गयी स्वतंत्रता की परिभाषा बताइए। (How has Laski defined Liberty?)
उत्तर:
लास्की (Laski) के अनुसार “आधुनिक सभ्यता में मनुष्यों की व्यक्तिगत प्रसन्नता की गारंटी के लिए जो सामाजिक परिस्थितियाँ आवश्यक हैं उनके अस्तित्व में किसी प्रकार के प्रतिबंध का अभाव ही स्वतंत्रता है।” इसी बात को लास्की ने इस प्रकार भी प्रकट किया है – “स्वतंत्रता का अभिप्राय यह है कि उस वातावरण की उत्साहपूर्वक रक्षा की जाए जिसमें कि मनुष्यों को अपना सर्वोत्तम रूप प्रकट करने का अवसर मिलता है।”

प्रश्न 9.
स्वतंत्रता से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by Liberty?) अथवा, स्वतंत्रता की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। (Explain the concept of Liberty)
उत्तर:
मनुष्य जो चाहे कर सके, इसे स्वतंत्रता नहीं कहते। स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्ति को अपने विकास के लिए पूर्ण अवसर सुलभ हों। लास्की के अनुसार-“स्वतंत्रता का अर्थ उस वातावरण की स्थापना से है जिसमें व्यक्ति को अपने पूर्ण विकास के लिये अवसर प्राप्त हों।” गैटेल के अनुसार-“स्वतंत्रता से अभिप्राय उस सकारात्मक शक्ति से है जिससे उन बातों को करके आनंद प्राप्त होता है जो करने योग्य हैं। कोल के अनुसार-“बिना किसी बाधा के अपने व्यक्तित्व को प्रकट: रने का नाम स्वतंत्रता है।”

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
“स्वतंत्रता का निहितार्थ है जंजीर से मुक्ति, बन्दीकरण से मुक्ति, दासता से मुक्ति।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। (“Liberty implies freedom from chains, from imprisonment and from ensalyement” Discuss)
उत्तर:
स्वतंत्रता क अर्थ है व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सामाजिक दबाव नहीं होना। जे. एस. मिल इसी प्रकार की स्वतंत्रता के समर्थक थे परंतु ऐसी पूर्ण स्वतंत्रता समाज में संभव नहीं। शासको एवं अधिकारियों को भी कानून के अनुसार चलना पड़ता है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता तभी मिल सकती है जबकि उसके कार्यों पर सामाजिक हित में उचित प्रतिबंध भी हो। वास्तविक स्वतंत्रता में अनुचित प्रतिबंधों का अभाव है, सभी प्रकार के कानूनों तथा सभी प्रकार के प्रतिबंधों का अभाव नहीं।

लॉक का कहना है, “जहाँ कानून नहीं वहाँ स्वतंत्रता नहीं। (Where there is no law there is no freedom)। इस प्रकार स्वतंत्रता अनुचित प्रतिबंधों का अभाव है, उनसे मुक्ति है दासता, बन्दीकरण तथा बैड़ियाँ ऐसे अनुचित प्रतिबंध हैं जिनके कारण व्यक्ति स्वतंत्रता का प्रयोग नहीं कर सकता। इसीलिए कहा गया है कि स्वतंत्रता के अर्थों में यह बात निहित है कि व्यक्ति को बेड़ियों से मुक्ति प्राप्त हो, बंदी बनाए जाने के डर से मुक्ति हो, दासता की बेड़ियों से छुटकारा प्राप्त हो।

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प्रश्न 2.
क्या स्वतंत्रता असीम है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बिना किसी बाधा के अपने व्यक्तित्व को प्रकट करने का नाम स्वतंत्रता है परंतु यदि प्रत्येक को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता दे दी जाए तो समाज में अव्यवस्था फैल जाएगी। एक-दूसरे की स्वतंत्रता में बाधा पहुँचेगी। असीमित स्वतंत्रता अपने आप में विरोधाभास है। सभ्य समाज में स्वतंत्रता बंधन व कानूनों की सीमा में ही होनी चाहिए। जब भी स्वतंत्रता असीम हो जाती है, तो वह वह नकारात्मक स्वतंत्रता बन जाती है और व्यक्ति के ऊपर किसी प्रकार का बंधन नहीं होता।

इस प्रकार की स्वतंत्रता के अन्तर्गत व्यक्ति कुछ भी कर सकता हैं जिससे दूसरे व्यक्तियों की स्वतंत्रता नष्ट हो सकती है। अत: व्यक्ति को केवल ऐसे कार्य करने चाहिए, जिससे दूसरों की स्वतंत्रता पर चोट न पहुँचती हो। बार्कर ने लिखा है, “जिस प्रकार कुरूपता का न होना सुन्दरता नहीं है, उसी प्रकार बंधनों का न होना स्वतंत्रता नहीं है।” (“As beauty is not the absence of ugliness so liberty is not the absence of restraints”) अतः स्वतंत्रता असीम नहीं हो सकती।

प्रश्न 3.
क्या प्रत्येक कानून स्वतंत्रता का रक्षक है? (Does every law defend liberty?)
उत्तर:
प्रत्येक कानून से स्वतंत्रता की रक्षा होती है ऐसा आवश्यक नहीं है। ब्रिटिश काल के अनेक कानून भारतीय जनता की स्वतंत्रता को कुचलने वाले थे। रौलेट एक्ट, सेफ्टी एक्ट, वर्नाकुलर प्रेस एक्ट आदि इस प्रकार के कानून बनाए गए थे जिनके विरुद्ध भारतीयों ने घोर संघर्ष किया। गाँधी जी ने नमक कानून तोड़ने के लिए सत्याग्रह किया।

यदि कानून अच्छे हों तो जनता उनका खुशी से पालन करती है, परंतु यदि कानून जनता के हित में नहीं है तो ऐसे कानूनों का जनता सख्ती से विरोध करती है। स्वतंत्रता और प्रभुता के सामंजस्य से जो कानून बनते हैं वे अधिक अच्छे हैं। गेटेल ने लिखा है-“प्रभुत्ता की अधिकता से स्वतंत्रता का नाश होता है। वह अत्याचार में बदल जाती है। इसी प्रकार स्वतंत्रता की अति से अराजकता फैल जाता है और प्रभुता का नाश होता है।” कई बार मजदूरों की स्थिति में सुधार के लिए कानून बनाए जाते हैं। वे कानून स्वतंत्रता में बाधा नहीं पहुँचाते वरन् स्वतंत्रता के समर्थक होते हैं।

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प्रश्न 4.
राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक स्वतंत्रता तथा नैतिक स्वतंत्रता क्या हैं? (What are political, economic and moral liberties?)
उत्तर:
राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Liberty):
राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ है ऐसी स्वतंत्रता जिसके द्वारा नागरिकों को राज्य के कार्यों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। लास्की के अनुसार, “राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ राज्य के कार्यों में क्रियाशील होना है।” लीकॉक के अनुसार, “राजनीतिक स्वतंत्रता संवैधानिक स्वतंत्रता है और इसका अर्थ यह है कि लोगों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए।

“राजनीतिक स्वतंत्रता में नागरिकों को मतदान करने का अधिकार प्राप्त रहता है। इसके अतिरिक्त चुने जाने का अधिकार तथा सार्वजनिक पद पाने का अधिकार एवं सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार भी राजनीतिक स्वतंत्रता से संबंधित हैं। प्रो. लास्की का मत है कि राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए सबको शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हो। साथ ही स्वतंत्र व निष्पक्ष प्रेस भी आवश्यक है।

आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Liberty):
आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ है-बिना दूसरों पर निर्भर हुए जीवन-यापन की सभी मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति। व्यक्ति की भूख तथा बेरोजगारी से मुक्ति, आर्थिक स्वतंत्रता कहलाती है। मनुष्य को अपनी आर्थिक उन्नति के लिए समान अवसर प्राप्त हों। काम करने का अधिकार, न्यूनतम वेतन, काम के निश्चित घंटे, अवकाश पाने का अधिकार, बेकारी, बीमारी तथा बुढ़ापे में सहायता प्राप्त होना आदि आर्थिक स्वतंत्रता की अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं।

एक निर्धन व्यक्ति को मतदान का अधिकार मिलने से ही उसकी स्वतंत्रता पूरी नहीं हो जाती, क्योंकि जब तक वह आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं होगा तब तक वह अपनी इस राजनीतिक स्वतंत्रता का उपभोग भी नहीं कर पायेगा, क्योंकि वह मतदान में या तो भाग ही नहीं ले पाता या अपने मत का प्रयोग स्वतंत्रतापूर्वक अपनी इच्छानुसार नहीं कर पाता; धनी व्यक्ति उसके मत को खरीद लेते हैं अथवा धनी एवं बाहुबली उसको डराकर उसे अपने पक्ष में कर लेते हैं। अत: आर्थिक समानता आर्थिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता का होना भी निरर्थक होता है।

नैतिक स्वतंत्रता (Moral Liberty):
काण्ट (Kant) के अनुसार नैतिक स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्तिगत स्वायत्तता अर्थात् हम स्वयं अपने मालिक हैं। व्यक्ति में समाज के प्रति प्रेम, त्याग, सहानुभूति, सहयोग आदि भावनाओं का विकास होना चाहिए। नैतिक स्वतंत्रता केवल राज्य में ही प्राप्त हो सकती है, क्योंकि राज्य ही उन परिस्थितियों की स्थापना करता है जिसमें व्यक्ति नैतिक रूप से उन्नति कर सकता है। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था के लिए तो नैतिक स्वतंत्रता और भी अधिक आवश्यक है, क्योंकि नैतिक स्वतंत्रता व्यक्ति की मानसिक स्थिति से संबद्ध है जिससे वह बिना लोभ-लालच के अपना सामाजिक जीवन-यापन करता है और अपनी विवेकपूर्ण शक्ति का प्रयोग समाज के हित में करता है।

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प्रश्न 5.
स्वतंत्रता और समानता के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करें। (What is the relationship between liberty and equality?)
उत्तर:
स्वतंत्रता और समानता के बीच वैचारिक स्तर पर कोई समानता न होकर स्वतंत्रता और समानता एक दूसरे के सिद्धांतों को लागू करने का माध्यम बनते हैं। हालांकि स्वतंत्रता और समानता को कुछ विचारक एक समान मानते हैं लेकिन उनकी यह धारणा पूर्णतया इस आधार पर गलत है कि समानता अपने मूल अभिप्राय से किसी को स्वतंत्रता प्रदान नहीं करती है, वैसे ही स्वतंत्रता अपने उद्देश्यों के लिए किया जाता है जिससे कि स्वतंत्रता को समानता के सिद्धांत के अनुरूप सबको समान रूप से वितरित किया जाए।

अब इस समानता के आधार पर प्राप्त होने वाली स्वतंत्रता को लोग कैसे इस्तेमाल करते हैं, यह उनकी क्षमता पर निर्भर करता है। इसीलिए स्वतंत्रता और समानता एक दूसरे की विचारधारा की विरोधी नहीं अपितु स्वतंत्रता और समानता की विचारधारा एक दूसरे से भिन्न होते हुए भी यह दोनों विचारधारा एक दूसरे के साथ सहयोग करके ही स्वतंत्रता को समानातापूर्वक लोगों के बीच क्रियान्वित किया जा सकता है। इस कारण स्वतंत्रता और समानता के बीच का सम्बन्ध स्वतंत्रता को समानतापूर्वक लोगों के बीच लागू करने का एकमात्र माध्यम बनता है अर्थात् बिना समानता के स्वतंत्रता लोगों पर समान रूप से लागू नहीं हो सकती है।

प्रश्न 6.
स्वतंत्रता का अर्थ और कार्य क्षेत्र को वर्णित करें। (Describe the meaning and scope of liberty)
उत्तर:
स्वतंत्रता के अर्थ को सामान्यत: इस रूप से जाना जाता है कि स्वतंत्रता वह सब कुछ करने की शक्ति है जिससे किसी दूसरे को आघात न पहुँचे। स्वतंत्र व्यक्ति को अपनी इच्छा स्वरूप कार्य करने की स्वतंत्रता होती है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में मूल सहायक तत्व स्वतंत्रता, जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छा को पहचानता है और अपनी अच्छी अनुरूप अपने कार्य को पूर्ण करता है। अगर स्वतंत्रता सम्बन्धी अधिकार व्यक्ति को प्राप्त न हो तो निश्चित है कि व्यक्ति का विकास होना सम्भव नहीं है।

इस मूल तथ्य को स्वीकारते हुए कि स्वतंत्रता व्यक्ति का प्राकृतिक अधिकार है, स्वतंत्रता को मूल रूप से व्यक्ति द्वारा निर्मित किया गया है। इसीलिए स्वतंत्रता व्यक्ति का मूल अधिकार है। भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार को अनुच्छेद 19 से लेकर अनुच्छेद 22 तेक में वर्णित किया गया है। स्वतंत्रता के क्षेत्र में दो प्रकार की स्वतंत्रता व्यक्ति के संदर्भ में आती है। पहली व्यक्तिगत स्वतंत्रता और दूसरी सामाजिक स्वतंत्रता। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक स्वतंत्रता दोनों ही मनुष्य के विकास के लिए अनिवार्य होती हैं। बिना इन दो तत्वों के संतुलन के व्यक्ति न तो स्वयं अपना स्वतंत्रतापूर्वक विकास कर सकता है और न ही व्यक्ति अपने को स्वतंत्र समझ सकता है। इस कारण स्वतंत्रता व्यक्ति की आवश्यकता का मूल आधार बन जाती है।

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प्रश्न 7.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता को स्पष्ट करें। (Define the Personal Liberty)
उत्तर:
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मूल अभिप्राय है कि व्यक्ति के वह कार्य जो उसकी निजी आवश्यकताओं से संबंधित हों, तथा इन आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए वह अपनी निजी इच्छा अनुरूप स्वतंत्र हो। व्यक्तिगत स्वतंत्रता में भोजन, वस्त्र, धर्म, पारिवारिक जीवन, निजी सम्पत्ति आदि सम्मिलित हैं। मिल ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बारे में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “मानव समाज को केवल आत्मरक्षा के उद्देश्य से ही किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से हस्तक्षेप करने का अधिकार हो सकता है। अपने ऊपर, अपने शरीर, मस्तिष्क और आत्मा पर व्यक्ति सम्प्रभु है।”

उपरोक्त कथन यह स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता व्यक्ति की स्वयं की इच्छा से संबंधित होती है तथा ऐसी इच्छा को हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता कह सकते हैं जो अपने निर्णय के अनुरूप कार्य कर सकने में अपने को स्वतंत्र महसूस कर सके। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का निर्धारण स्वयं व्यक्ति की अपनी निजी परिस्थितियों और निजी आवश्यकताओं के अनुरूप होता है। व्यक्तिवादी स्वतंत्रता सम्बन्धी अवधारणा को बहुलवादी और उदारवादी विचारकों द्वारा किया गया, तथा यह भी सत्य है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सैद्धान्तिक और उसका व्यावहारिक पक्ष केवल लोकतंत्रीय राजनीतिक विचारधारा से सम्बद्ध है।

प्रश्न 8.
नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक स्वतंत्रता के बीच अंतर को स्पष्ट करें। (Distinguish between Civil Liberty and Political liberty)
उत्तर:
नागरिक स्वतंत्रता का मूल तात्पर्य यह है कि ऐसी स्वतंत्रता को राज्य के माध्यम से दिया जाता है। यह स्वतंत्रता व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता होती है, जिसका संरक्षण और प्रभाव राज्य द्वारा संरक्षित अवश्य होना चाहिए, तभी इस मूलभूत स्वतंत्रता को व्यक्ति अपने विकास में प्रयोग करेगा, बिना किसी की स्वतंत्रता को बाधित किए हुए। नागरिक स्वतंत्रता को दो भागों में विभक्त किया गया है –

  1. शासन के विरुद्ध व्यक्ति की स्वतंत्रता और
  2. व्यक्ति की व्यक्ति से और व्यक्तियों के समुदाय से स्वतंत्रता।

लास्की ने राजनीतिक स्वतंत्रता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा है कि “राज्य के कार्यों में सक्रिय भाग लेने की शक्ति को राजनीतिक स्वतंत्रता कहा जाता है।” लेकिन यह राजनीतिक स्वतंत्रता लोकतांत्रिक पद्धति में ही सम्भव है, न कि अन्य किसी निरंकुश रूप में। लीकॉक द्वारा राजनीतिक स्वतंत्रता को संवैधानिक स्वतंत्रता के रूप में देखा गया जिसका विस्तृत अर्थ यह था कि जनता अपने शासक को अपनी इच्छा के अनुसार चुन सके और चुने जाने के उपरांत यह शासक वर्ग जनता के प्रति उत्तरदायी हो। इस कारण राजनीतिक स्वतंत्रता ने व्यक्ति को दो अधिकार दिए –

  1. मतदान का अधिकार और
  2. निर्वाचित होने का अधिकार। इस प्रकार राजनीतिक स्वतंत्रता लोगों को राज्य के संदर्भ में सक्रिय रूप से भाग लेने का अधिकार देती है।

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प्रश्न 9.
आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ और क्षेत्र वर्णित कीजिए। (Describe the meaning and scope of Economic Liberty)
उत्तर:
आर्थिक स्वतंत्रता के अर्थ और सिद्धांत को उदारवाद के संदर्भ में जाना जाता है। आर्थिक स्वतंत्रता का तात्पर्य उदारवाद के संदर्भ में यह है कि व्यक्तियों के आर्थिक जीवन में राज्य के माध्यम से किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यह धारणा उदारवादियों में इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि मध्य युग में सामंती राज्यों ने भूमि, वस्तुओं तथा सम्पत्ति के क्रय-विक्रय, ‘श्रमिक, धन के लेन-देन आदि पर काफी प्रकार के कड़े प्रतिबंध लगा रखे थे, जिसके कारण आर्थिक सम्पन्नता का सारा केन्द्र राज्य और शासक वर्ग बना तथा राज्य का शासक वर्ग राज्य शक्ति और धन शक्ति को अपने नियंत्रण में रखकर इससे लोगों पर वह अपनी निरंकुशता स्थापित करता था।

इसलिए इस पद्धति को बदलने के लिए आर्थिक स्वतंत्रता में आर्थिक न्याय और आर्थिक समानता की धारणा आर्थिक तत्व का मूल आधार बन गयी। इसलिए राज्य की उदारवादी आर्थिक स्वतंत्रता की धारणा व्यक्ति को स्वतंत्रतापूर्वक आर्थिक विकास करने पर विशेष बल देने लगी और इस आर्थिक स्वतंत्रता में संतुलन की वास्तविक सीमा स्वयं उभरना स्वाभाविक हुई और इसी धारणा ने राज्य के आर्थिक स्वतंत्रता को संतुलित रूप में पेश करने में महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त किया। इस कारण आर्थिक स्वतंत्रता का उपरोक्त तथ्य आर्थिक स्वतंत्रता विकास का मूल मंत्र बन गया लेकिन आर्थिक स्वतंत्रता की अवधारणा केवल लोकतांत्रिक राज्यों से ही सम्बद्ध हुई न कि निरंकुश राज्य से सम्बद्ध हुई।

प्रश्न 10.
आर्थिक स्वतंत्रता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता के परस्पर सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए। (Explain the mutual relationship between economics and political liberties)
उत्तर:
आर्थिक स्वतंत्रता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता में घनिष्ठ सम्बन्ध है। आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ है जीवन-यापन की सभी सुविधाओं या अवसरों की प्राप्ति होना। आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने पर ही व्यक्ति अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता का उचित रूप से प्रयोग कर सकता है। राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ है, अपने प्रतिनिधि चुनने की स्वतंत्रता का अर्थात् मतदान का अधिकार प्राप्त हो।

सार्वजनिक पद पाने का अधिकार हो तथा सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुए बिना राज्य के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले सकता। एक धनी व्यक्ति निर्धनों के मत खरीद कर सत्ता पर अपना अधिकार प्राप्त कर लेता है और तब वह गरीबों का शोषण करता है। वास्तव में राजनीतिक स्वतंत्रता तब तक अर्थहीन है जब तक उसे आर्थिक स्वतंत्रता का ठोस आधार नहीं मिलता।

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प्रश्न 11.
राष्ट्रीय स्वतंत्रता से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by national liberty?)
उत्तर:
राष्ट्रीय स्वतंत्रता (National Liberty):
राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अर्थ है स्वराज्य। व्यक्ति की भाँति राष्ट्र को भी स्वतंत्र रहने का अधिकार है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता के अन्तर्गत प्रत्येक राष्ट्र का यह अधिकार है कि वह स्वतंत्रतापूर्वक अपनी नीतियों का निर्धारण कर सके तथा उन्हें लागू कर सके। दास देशों द्वारा अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता की माँग करना राष्ट्रीय स्वतंत्रता है। 20 वीं शताब्दी में अफ्रीकी व एशिया के बहुत देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया तथा अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त की।

प्रश्न 12.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से आप क्या समझते हैं? (What do you understand by Personal Liberty?)
उत्तर:
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ है कि मनुष्यों को व्यक्तिगत मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए। भोजन, वस्त्र, शादी तथा रहन-सहन आदि व्यक्ति के व्यक्तिगत मामले हैं। राज्य को चाहिए कि वह उन मामलों में हस्तक्षेप न करे। जॉन स्टुअर्ट मिल के अनुसार, “उस सीमा तक व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वंतत्रता प्राप्त होनी चाहिए जहाँ तक कि उसके कार्यों से अन्य व्यक्तियों को हानि न पहुँचती हो।” मिल के अतिरिक्त बर्नार्ड रसेल तथा रूसो आदि राजनीतिक दार्शनिकों ने भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन किया है।

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प्रश्न 13.
किसी व्यक्ति द्वारा स्वतंत्रता के उपभोग के लिए आवश्यक दो दशाएँ बताइए। (Describe any two conditions which are essential for the individual to enjoy liberty)
उत्तर:
स्वतंत्रता का अर्थ है ‘प्रतिबंधों का अभाव’, परंतु सकारात्मक रूप में स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्ति पर उन प्रतिबंधों को हटाना जो अनैतिक और अन्यायपूर्ण हों। किसी व्यक्ति द्वारा स्वतंत्रता के उपभोग की दो आवश्यक दशाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. स्वतंत्रता समाज के सभी व्यक्तियों को समान रूप से होनी चाहिए। समाज के एक वर्ग को स्वतंत्रता प्राप्त होने और दूसरे को प्राप्त न होने से स्वतंत्रता का उपभोग कठिन होता है।
  2. जिनके पास राजसत्ता है उनके द्वारा सत्ता का दुरुपयोग न हो। यदि किसी देश या समाज में ऐसा हो तो वहाँ के लोग स्वतंत्रता का उपभोग ठीक प्रकार से नहीं कर सकते।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थन में तर्क दीजिए। अथवा, “स्वतंत्रता का अर्थ नियंत्रण का अभाव नहीं अपितु उचित नियंत्रण का होना है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। (Give arguments in favour of Positive Liberty) Or, (“Liberty does not mean absence of restraints but imposition of rational restraints. “Explain)
उत्तर:
गैटेल (Gatel) का कथन है कि स्वतंत्रता का केवल नकारात्मक रूप ही नहीं है वरन् सकारात्मक रूप भी है। उसके शब्दों में, “स्वतंत्रता वह सकारात्मक शक्ति है जिसके द्वारा उन कार्यों को करके आनंद प्राप्त किया जाता है जो करने योग्य हैं।”

(Liberty is the positive power of doing and enjoying those thing which are worthy of enjoyment and work-Gettel)
इस कथन से स्पष्ट है कि केवल बंधनों को दूर करने मात्र से ही सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हो सकती। जिस प्रकार कुरूपता के अभाव को सौन्दर्य नहीं कह सकते, सौन्दर्य के लिए कुछ और अधिक भी चाहिए। उसी प्रकार स्वतंत्रता के लिए बंधनों के अभाव के अतिरिक्त भी किसी और वस्तु की आवश्यता है; जो वह है अवसर की उपस्थिति। इसीलिए मैकेन्जी (Machenjie) ने कहा है, “स्वतंत्रता का अर्थ नियंत्रण का अभाव नहीं अपितु उचित नियंत्रण का होना है।”

(Liberty does not mean absence of restraints but imposition of rational restraints)

सकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थन में तर्क (Arguments in favour of positive liberty):

सकारात्मक स्वतंत्रता की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव नहीं, स्वतंत्रता को वास्तविक बनाने के लिए उस पर उचित प्रतिबंध आवश्यक है।
  2. समाज और व्यक्ति के हितों में कोई विरोध नहीं है।
  3. स्वतंत्रता और राज्य के कानून परस्पर विरोधी नहीं हैं। कानून स्वतंत्रता को नष्ट नहीं करते वरन् स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं।
  4. स्वतंत्रता का अर्थ उन सामाजिक परिस्थितियों का विद्यमान होना है जो व्यक्ति के विकास में सहायक हों।
  5. स्वतंत्रता अधिकारों के साथ जुड़ी हुई है। जितनी अधिक स्वतंत्रता होगी उतने अधिक अधिकार होंगे। अधिकारों के बिना व्यक्ति को स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हो सकती।
  6. राजनीतिक व नागरिक स्वतंत्रता का मूल्य आर्थिक स्वतत्रंता के अभाव में निरर्थक है।
  7. राज्य का कार्य ऐसी परिस्थितियाँ पैदा करना है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में सहायक हों।
  8. वांछनीय व उचित कार्यों को करने की सुविधा होती है। यदि अवांछनीय एवं अनुचित कार्य करने की स्वतंत्रता हो तो स्वतंत्रता स्वेच्छाचारिता बन जाएगी।

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प्रश्न 2.
“स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? (“Liberty means absence of restraints.” Do you agree with this view?)
उत्तर:
स्वतंत्रता का अर्थ दो प्रकार से लिया जाता है। एक अर्थ ‘प्रतिबंधों का अभाव’ और दूसरे अर्थ में व्यक्ति के कार्यों पर उचित प्रतिबंध लगाना।

1. स्वतंत्रता प्रतिबंधों का अभाव है (Liberty is the absence of restraints):
कुछ विचारकों का मत है कि व्यक्ति तभी स्वतंत्र रह सकता है जब उसके कार्यों से सभी प्रतिबंध हटा लिए जाएँ और उसे इच्छानुसार कार्य करने दिया जाए। जे. एस. मिल इस प्रकार की स्वतंत्रता के समर्थक थे। उनका कहना है कि “व्यक्ति अपना भला-बुरा स्वयं सोच सकता है और पूर्ण स्वतंत्रता मिलने पर वह अपना सर्वोत्तम विकास कर सकता है।

“यदि व्यक्ति के आचरण या कार्यों पर किसी प्रकार का भी प्रतिबंध है तो उसकी स्वतंत्रता वास्तविक नहीं हो सकती और ऐसी दशा में वह अपना सर्वोत्तम विकास नहीं कर सकता। इस प्रकार की विचारधारा को मानने वाले विद्वान नैतिक, आर्थिक तथा वैज्ञानिक सभी प्रकार के तर्कों के आधार पर इस बात पर जोर देते हैं कि व्यक्ति के कार्यों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। यही वास्तविक स्वतंत्रता है।

2. व्यक्ति के कार्यों पर उचित प्रतिबंध लगाना ही स्वतंत्रता है (Liberty is the imposition of rational restraints):
प्रतिबंधों के अभाव में समाज में जंगल जैसा वातावरण हो सकता है। शक्तिशाली निर्बलों को सताने लगते हैं, अव्यवस्था फैलने लगती है। अतः स्वतंत्रता सबको तभी मिल सकती हैं जबकि सभी व्यक्तियों के कार्यों और आचरण पर उचित प्रतिबंध हो। कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को हानि न पहुँचा सके। कानून द्वारा समाज में व्यवस्था स्थापित की जा सकती है। लॉक के अनुसार, “जहाँ कानून नहीं वहाँ स्वतंत्रता नहीं।” कानून द्वारा ही ऐसा वातावरण स्थापित किया जा सकता है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी इच्छानुसार स्वतंत्रतापूर्वक कार्य कर सके; परंतु मनमानी नहीं करे।

स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्ति को करने योग्य कार्य करने की छूट और भोगने योग्य वस्तु को भोगने की स्वतंत्रता या शक्ति प्राप्त करना। परंतु मनमानी (निरंकुशता) करना नहीं। यह तभी हो सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति पर उचित प्रतिबंध लगाए जाएँ, जिससे कि व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के कार्यों में हस्तक्षेप न करे। प्रतिबंधों के अभाव में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ होने लगती है। अतः यह सत्य है कि वास्तविक स्वतंत्रता प्रतिबंधों का अभाव नहीं वरन् अनुचित प्रतिबंधों के स्थान पर उचित प्रतिबंधों को लगाना है। तभी प्रत्येक व्यक्ति अपना सर्वोत्तम विकास कर सकता है।

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प्रश्न 3.
“राजनीतिक स्वतंत्रता आर्थिक समानता के अभाव में निरर्थक है।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए। (“Political liberty is meaningless without economic equality.” Comment)
उत्तर:
स्वतंत्रता और समानता प्रजातंत्र के दो स्तंभ माने जाते हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता के सम्बन्ध की व्याख्या करते हुए लास्की और सामानला धजातंत्र कोके दो स्तंभम्बन्धबातो हैं या डोयों एक-दसुरे के प्रका (Laski) ने कहा है, “आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक धोखा मात्र है, मिथ्या है, पाखण्ड है और कहने की ही बात है।” लोस्की के इस कथन की सत्यता जानने के लिए यह आवश्यक है कि हम पहले राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता का अर्थ समझें।

राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Liberty):
राजनीतिक स्वतंत्रता का अभिप्राय है कि व्यक्ति देश के शासन में भाग ले सकता है। नागरिकों को मतदान का अधिकार होता है। प्रतिनिधि चुने जाने का अधिकार है। सार्वजनिक पद पाने का अधिकार है। सरकार की नीतियों की आलोचना का अधिकार है।

आर्थिक समानता (Economics Equality):
आर्थिक समानता का अर्थ है कि सभी नागरिकों को अपनी आजीविका कमाने हेतु समान अवसर उपलब्ध हों। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त साधन प्राप्त होने चाहिए। आर्थिक असमानता कम से कम होनी चाहिए। आर्थिक शोषण नहीं होना चाहिए तथा उत्पादन और वितरण के साधनों की ऐसी व्यवस्था हो जो सबके हित में हों।

राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता में संबंध (Relationship between Liberty and. Economic Equality)

1. निर्धन व्यक्ति के लिए मताधिकार अर्थहीन है (Right to vote is meaningless for a poor person):
राजनीतिक अधिकारों में वोट का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है परंतु एक निर्धन व्यक्ति के लिए, जिसे रोटी खाने को नहीं मिलती, रोटी का वोट के अधिकार से अधिक मूल्य है। राजनीतिक स्वतंत्रता के समर्थक यह भूल जाते हैं कि व्यक्ति के लिए वोट डालने और चुनाव लड़ने के अधिकार से अधिक आवश्यक रोटी, कपड़ा और मकान है।

2. निर्धन व्यक्ति द्वारा मत का सदुपयोग असंभव (Proper use of vote is impossible for a poor person):
मताधिकार न केवल अधिकार है वरन् परम कर्तव्य भी है। निर्धन व्यक्ति न तो शिक्षा प्राप्त कर सकता है, न ही देश की समस्याओं को समझ सकता है। अतः वह अपने मत का सदुपयोग भी नहीं कर सकता।

3. निर्धन व्यक्ति के लिए चुनाव लड़ना असंभव है (Contesting an Election is impossible for a poor man):
आजकल चुनाव लड़ने में लाखों रुपया खर्च होता है। निर्धन व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति ही नहीं कर सकता। चुनाव लड़ना तो दूर रहा, वह चुनाव लड़ने का स्वप्न भी नहीं देख सकता।

4. राजनीतिक दलों पर भी धनियों का ही नियंत्रण रहता है (Political parties are controlled by the rich):
राजनीतिक दल धनी व्यक्तियों के निर्देशन पर ही चलते हैं। निर्धन व्यक्ति का राजनीतिक दल पर भी कोई प्रभाव नहीं होता। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक समानता के अभाव में निरर्थक है।

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प्रश्न 4.
“कानून तथा स्वतंत्रता परस्पर विरोधी नहीं हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। (“Law and liberty are not antagonistic.” Comment, अथवा, कानून तथा स्वतंत्रता के परस्पर संबंधों का वर्णन कीजिए। (Discuss the mutual relationship between law and liberty)
उत्तर:
राजनीतिक विज्ञान के कुछ विचारकों का मत है कि कानून और स्वतंत्रता परस्पर विरोधी हैं। वे कहते हैं कि कानूनों द्वारा स्वतंत्रता पर अंकुश लगता है और स्वतंत्रता कम हो जाती है। राजनीतिक विज्ञान के कुछ अन्य विद्वानों का मत है कि कानून स्वतंत्रता विरोधी नहीं है बल्कि कानून के द्वारा ही व्यक्ति को सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त होती है।

कानून स्वतंत्रता का विरोधी है (Law is opposed to Liberty):
इस विचार को मानने वालों का मत है कि राज्य जितने अधिक कानून बनाता है व्यक्ति की स्वतंत्रता उतनी ही कम हो जाती है। व्यक्तिवादियों व अराजकतावादियों का यही मत है।

1. व्यक्तिवादियों का मत (Views of Individualists):
18 वीं शताब्दी में व्यक्तिवादियों ने व्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर दिया और यह कहा था कि राज्य के कानून व्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक प्रतिबंध हैं, इसलिए व्यक्ति की स्वतंत्रता तभी सुरक्षित रह सकती है जब राज्य अपनी सत्ता का प्रयोग कम से कम करे अर्थात् उनके अनुसार वह सरकार सबसे अच्छी है जो कम से कम शासन करती है।

2. अराजकतावादियों का मत (Views of Anarchists):
अराजकतावादियों के अनुसार राज्य प्रभुसत्ता का प्रयोग करके नागरिकों की स्वतंत्रता को नष्ट करता है, अतः अराजकतावादियों ने राज्य को समाप्त करने पर जोर दिया ताकि राज्यविहीन समाज की स्थापना की जा सके।

कानून स्वतंत्रता का रक्षक है (Law protects the Liberty):
राजनीति विज्ञान के जो विचारक स्वतंत्रता का सकारात्मक अर्थ स्वीकार करते हैं और स्वतंत्रता पर उचित बंधनों को आवश्यक मानते हैं, वे कानून को स्वतंत्रता की पहली शर्त समझते हैं और सत्ता को आवश्यक मानते हैं। हॉब्स जो निरंकुशवादी माना जाता है, स्वीकार करता है कि कानून के अभाव में व्यक्ति हिंसक पशु बन जाता है।

अतः सत्ता व कानून का होना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक जीवन बिता सके । लॉक (Locke) ने कहा कि “जहाँ कानून नहीं है वहाँ स्वतंत्रता नहीं है” रिची (Rithce) के शब्दों में, “कानून आत्म विकास के सुअवसर के रूप में स्वतंत्रता को संभव बनाते हैं और सत्ता के अभाव में इस प्रकार की स्वतंत्रता संभव नहीं हो सकती।”

आदर्शवादी विचारकों ने कानून व स्वतंत्रता में गहरा संबंध स्वीकार किया है और उनके अनुसार स्वतंत्रता न केवल कानून द्वारा सुरक्षित है अपितु कानून की देन है। हीगल के अनुसार, “राज्य में रहते हुए कानून के पालन में ही स्वतंत्रता निहित है।” हीगल ने राज्य को सामाजिक नैतिकता की साक्षात् मूर्ति कहा है और कानून चूँकि राज्य की इच्छा की अभिव्यक्ति है, अत: नैतिक रूप से भी स्वतंत्रता कानून के पालन में ही निहित है। अन्त में निष्कर्ष कहा जा सकता है कि कानून स्वतंत्रता का विरोधी नहीं वरन् कानून के पालन से ही स्वतंत्रता संभव है। यदि कानून समाज के प्रबल व्यक्तियों पर अंकुश लगाए तो समाज के बहुत से व्यक्तियों को किसी प्रकार की कोई स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हो सकती।’

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प्रश्न 5.
स्वतंत्रता के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं? व्याख्या कीजिए। (What are the different kinds of liberty? Explain)
उत्तर:
स्वतंत्रता के प्रकार (Kinds of Liberty):

1. प्राकृतिक स्वतंत्रता (Natural Liberty):
प्राकृतिक स्वतंत्रता वह स्वतंत्रता है जिसका मनुष्य राज्य की स्थापना से पहले प्रयोग करता था। रूसो (Rousseau) के अनुसार मनुष्य प्राकृतिक रूप से स्वतंत्र पैदा होता है, परंतु समाज में आकर वह बंधन में बंध जाता है। प्रकृति की ओर से व्यक्ति पर किसी प्रकार के बंधन नहीं होते परंतु अधिकतर राजनीति शास्त्री इस मत से सहमत नहीं हैं। हरबर्ट स्पेन्सर कहता है, “स्वतंत्रता का अर्थ उस व्यवस्था से है जिसमें प्रत्येक मनुष्य को अपनी इच्छानुसार कार्य करने की स्वतंत्रता रहे, यदि वह दूसरों की उतनी ही स्वतंत्रता का उल्लंघन न कर रहा हो।”

2. व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Individual Liberty):
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ है कि मनुष्यों को व्यक्तिगत मामलों में पूरी तरह से स्वतंत्रता होना चाहिए। भोजन, वस्त्र, शादी-विवाह, रहन-सहन आदि मामलों में राज्य को दखल नहीं देना चाहिए।

3. राजनीतिक स्वतंत्रता (Political Liberty):
राजनीतिक स्वतंत्रता ऐसी स्वतंत्रता को कहते हैं जिसके अनुसार किसी देश के नागरिक अपने देश की सरकार में भाग लेने का अधिकार रखते हैं। नागरिकों को मताधिकार, चुनाव में खड़े होने का अधिकार, आवेदन देने का अधिकार तथा सरकारी नौकरी पाने का अधिकार रंग, जाति व धर्म आदि के भेदभाव के बिना सबको प्रदान किए जाते हैं।

4. आर्थिक स्वतंत्रता (Economics Liberty):
आर्थिक स्वतंत्रता से अभिप्राय ऐसी स्वतंत्रता से है जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचि व योग्यतानुसार व्यवसाय करने की स्वतंत्रता हो, देश में उद्योग-धंधों को सुचारू रूप से चलाने की स्वतंत्रता हो और उनको सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था बनायी जाए। धन का उत्पादन व वितरण ठीक ढंग से हो व बेरोजगारी न हो।

5. धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Liberty):
धार्मिक स्वतंत्रता का अर्थ है-प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म मानने की स्वतंत्रता हो। राज्य का कोई विशेष धर्म नहीं होता। विभिन्न धर्म के मानने वालों में कोई भेद नहीं किया जाता। इसी भावना के अनुसार भारत को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है।

6. राष्ट्रीय स्वतंत्रता (National Liberty):
राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अर्थ है कि राष्ट्र को विदेशी नियंत्रण से स्वतंत्रता प्राप्त होती है। एक स्वतंत्र राष्ट्र ही अपने नागरिकों को अधिकार तथा स्वतंत्रता प्रदान कर सकता है जिससे नागरिक अपना सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक तथा राजनैतिक विकास कर सकें।

7. नैतिक स्वतंत्रता (Moral Liberty):
व्यक्ति पूर्ण रूप से तभी स्वतंत्र हो सकता है जबकि वह नैतिक रूप से भी स्वतंत्र हो। नैतिक स्वतंत्रता का अर्थ है कि व्यक्ति अपनी बुद्धि तथा विवेक के अनुसार निर्णय ले सके। हीगल तथा ग्रीन ने नैतिक स्वतंत्रता पर बल दिया है। उनके अनुसार राज्य ऐसी परिस्थितियों की स्थापना करता है, जिससे मनुष्य नैतिक रूप से उन्नति कर सकता है।

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प्रश्न 6.
स्वतंत्रता की परिभाषा दें। इसके नकारात्मक एवं सकारात्मक पहलुओं के अंतर की व्याख्या कीजिए। (Define liberty Discuss the difference between negative and positive aspects of liberty)
उत्तर:
स्वतंत्रता शब्द जिसे अंग्रेजी में Liberty कहते हैं, लैटिन भाषा के शब्द लिबर (Liber) से लिया गया है। जिसका अर्थ है किसी प्रकार के बंधनों का न होना। इस प्रकार स्वतंत्रता का अर्थ है – व्यक्ति के ऊपर किसी प्रकार का बंधन न होना जिससे कि वह अपनी इच्छानुसार कार्य कर सके, परंतु यह उचित नहीं है कि यदि एक जेबकतरे को जेब काटने की पूर्ण स्वतंत्रता दे दी जाए या एक डाकू को नागरिकों को लूटने के लिए स्वतंत्रता दे दी जाए तो समाज में कुव्यवस्था फैल जाएगी। वास्तव में स्वतंत्रता का वास्तविक एंव औचित्यपूर्ण अर्थ यह है कि व्यक्ति को उस सीमा तक कार्य करने की स्वतंत्रता हो जिससे अन्य व्यक्तियों की स्वतंत्रता का अतिक्रमण न हो, इसके साथ ही सभी व्यक्तियों को विकास के समान अवसर प्राप्त हों।

गैटेल (Géttel) का कथन है कि “स्वतंत्रता वह सकारात्मक शक्ति है जिसके द्वारा उन कार्यों को करके आनंद प्राप्त किया जाता है, जो करने योग्य है।” (“’Liberty is the positive power of doing and enjoining those things which are worthy of enjoyment and work.”)। स्वतंत्रता के नकारात्मक तथा सकारात्मक पहलुओं में अंतर (Difference between Negative and positive aspects of Liberty)
Bihar Board Class 11 Political Science Chapter 2 स्वतंत्रता Part - 1 Image 1Bihar Board Class 11 Political Science Chapter 2 स्वतंत्रता Part - 1 Image 1

प्रश्न 7.
आर्थिक स्वतंत्रता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता के सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। (Discuss the relations between Economic Liberty and Political Liberty)
उत्तर:
राजनीतिक स्वतंत्रता तथा आर्थिक स्वतंत्रता में घनिष्ठ सम्बन्ध है। राजनीतिक स्वतंत्रता तब तक अर्थहीन है जब तक कि उसे आर्थिक स्वतंत्रता का ठोस आधार नहीं मिलता। राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ है नागरिकों को राज्य के कार्यों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होना। राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग है कि नागरिक शासन कार्यों में सहयोग करें तथा सहभागी बनें तथा राजनीतिक गतिविधियों में अपना योगदान दें। परंतु राजनीतिक स्वतंत्रता उस समय तक अर्थहीन है जब तक कि नागरिक को आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मिलती।

कोई भी नागरिक आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुए बिना राज्य की राजनीति में सक्रिय भाग नहीं ले सकता। वह अपने मत का प्रयोग भी उचित प्रकार से नहीं कर सकता। लालच में पड़कर भूखा व्यक्ति अपना मत बेच सकता है और इस प्रकार स्वतंत्रता खतरे में पड़ सकती है। धनी व्यक्ति लालच देकर निर्धन व्यक्तियों के मत अपने पक्ष में प्राप्त करके सत्ता पर अधिकार कर लेते हैं और फिर प्रजा का शोषण करते रहते हैं। धीरे-धीरे क्रांति की सम्भावना बढ़ने लगती है।

1917 ई. में रूस की क्रांति इन्हीं कारणों से हुई थी। आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ है-व्यक्ति की बेरोजगारी तथा भूख से मुक्ति। प्रो. लास्की ने आर्थिक स्वतंत्रता की परिभाषा देते हुए कहा है “आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि व्यक्ति को अपनी जीविका कमाने के लिए समुचित सुरक्षा तथा सुविधा प्राप्त हो।” आर्थिक स्वतंत्रता कसी भी स्वतंत्र समाज का मूल आधार है। आर्थिक स्वतंत्रता में यह बात भी निहित है कि जहाँ व्यक्ति अपनी रोजी-रोटी कमा सके, वहाँ वह अपने बच्चों को भी साक्षर बना सके जिससे कि वे राष्ट्र के प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों की पूर्ति कर सकें।

आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने पर ही व्यक्ति राजनीतिक स्वतंत्रता का उपयोग कर सकता है। जो व्यक्ति अपनी मूल आवश्यकताओं के लिए दूसरों की दया पर निर्भर है वह कभी भी नागरिकता के कर्तव्यों को पूरा नहीं कर सकता। आर्थिक स्वतंत्रता के अभाव में व्यक्ति समाज में अपना श्रेष्ठ योगदान नहीं कर सकता।

राज्य में भले ही किसी भी प्रकार की व्यवस्था हो किसान व मजदूर को आर्थिक स्वतंत्रता मिलनी ही चाहिए। देश में बेरोजगारी नहीं होनी चाहिए। संसार में आर्थिक दृष्टि से विकसित राज्यों में जहाँ पूँजीवादी व्यवस्था अपनायी गयी है, नागरिकों को आर्थिक स्वतंत्रता देने का प्रयत्न किया गया है। ऐसी राज्यों में मजदूर संगठित हैं और वे राष्ट्र की राजनीति में सक्रिय भाग लेते हैं। स्पष्ट है कि राजनीतिक स्वतंत्रता तब तक अर्थहीन है जब तक उसे आर्थिक स्वतंत्रता का ठोस आधार नहीं मिलता।

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प्रश्न 8.
स्वतंत्रता का अर्थ समझाइए। क्या आप स्वतंत्रता और समानता को पूरक मानते हैं? (Explain the meaning of the term Liberty Do you think that Liberty and Equality are complementary?)
उत्तर:
स्वतंत्रता को अंग्रेजी में ‘बिलर्टी’ कहा जाता है। यह लैटिन भाषा के ‘लिबर’ शब्द से बना है। इसका अर्थ है बंधनों का न होना। परंतु स्वतंत्रता का यह अर्थ पूर्णतः उचित नहीं है। गाँधीजी के अनुसार, “स्वतंत्रता का अर्थ नियंत्रण का अभाव नहीं अपितु व्यक्तित्व के विकास की अवस्थाओं की प्राप्ति है।” लास्की का कथन है कि “अधिकारों के अभाव में स्वतंत्रता का होना असंभव है, क्योंकि अधिकारों से रहित जनता कानून का पालन करती हुई भी अपने व्यक्तित्व की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकती।”

स्वतंत्रता और समानता (Liberty and Equality):
स्वतंत्रता और समानता में गहरा संबंध है। जब तक राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं होती तब तक समानता भी स्थापित नहीं हो सकती। भारत जब पराधीन था तो शासक वर्ग के लोग अपने आपको भारतीयों से श्रेष्ठ समझते थे परंतु 15 अगस्त, 1947 ई. में भारत राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो गया। भारत का अपना संविधान बना और राजनीतिक तथा सामाजिक समानता की स्थापना की गई।

प्रत्येक वयस्क को जाति, नस्ल, रंग, धर्म, लिंग आदि के भेदभाव के बिना वोट का अधिकार दिया गया। छुआछूत समाप्त कर दी गई। आर. एच. टोनी ने सत्य ही कहा है कि “समानता स्वतंत्रता की विरोधी न होकर इसके लिए आवश्यक है।” वास्तव में स्वतंत्रता और समानता इकट्ठी चलती हैं। एक के बिना दूसरी निरर्थक है। प्रो. पोलार्ड के अनुसार-“स्वतंत्रता की समस्या का केवल एक समाधान है और वह है समानता।”

स्वतंत्रता और समानता का सम्बन्ध जन्म से है। जब निरंकुशता और समानता के विरुद्ध मानव ने आवाज उठायी और क्रांतियाँ हुई तो स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों का जन्म हुआ। स्वतंत्रता और समानता दोनों का एक ही उद्देश्य है और वह है व्यक्ति के विकास के लिए सुविधाएँ प्रदान करना। अतः एक के बिना दूसरे का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। स्वतंत्रता के बिना समानता असंभव है और समानता के बिना स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं है। निष्कर्ष तौर पर कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के पूरक हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक भूख से मरते हुए व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का क्या लाभ है ? वह स्वतंत्रता को न खा सकता है और न पी सकता है। यह कथन किसका है –
(क) हाब्स
(ख) लास्की
(ग) मिल
(घ) आर्शिवादम
उत्तर:
(क) हाब्स

Bihar Board Class 11th Political Science Solutions Chapter 2 स्वतंत्रता

प्रश्न 2.
जहाँ कानून नहीं है वहाँ स्वतंत्रता नहीं है। यह किसने कहा था?
(क) ग्रीन
(ख) लॉक
(ग) हाब्स
(घ) मेकाइवर
उत्तर:
(ख) लॉक

प्रश्न 3.
लांग वाक टू फ्रीडम (स्वतंत्रता के लिए लंबी यात्रा)’ किसकी आत्म कथा है?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) दलाई लामा
(ग) नेल्सन मंडेला
(घ) मार्टिन लूथर किंग
उत्तर:
(ग) नेल्सन मंडेला

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन सकारात्मक स्वतंत्रता का पक्षधर था?
(क) मार्क्स
(ख) ग्रीन
(ग) बेंथम
(घ) जे. एस. मिल
उत्तर:
(ख) ग्रीन

प्रश्न 5.
‘स्वतंत्रता एवं समानता’ को किसने पूरक माना है?
(क) रूसो ने
(ख) लास्की ने
(ग) मेकाइवर ने
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) लास्की ने

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प्रश्न 6.
‘आर्थिक न्याय’ से क्या आशय है?
(क) वर्गीय आय का अंतराल कम करना
(ख) सभी की न्यूनतम आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति
(ग) उपरोक्त दोनों ही
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) उपरोक्त दोनों ही

प्रश्न 7.
टी. एच. ग्रीन किस प्रकार की स्वतंत्रता के पोषक हैं?
(क) नकारात्मक
(ख) सकारात्मक
(ग) आर्थिक
(घ) राजनीतिक
उत्तर:
(ख) सकारात्मक

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प्रश्न 8.
नकारात्मक स्वतंत्रता का अर्थ है?
(क) अराजकता
(ख) बंधनों का अभाव
(ग) लोगों के बीच भेदभाव
(घ) स्वच्छन्दता
उत्तर:
(ख) बंधनों का अभाव

प्रश्न 9.
सकारात्मक स्वतंत्रता के समर्थक विचारक हैं:
(क) रूसो
(ख) ग्रीन
(ग) हीगल
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 1 राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 1 राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 1 राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय

Bihar Board Class 11 Political Science राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
राजनीतिक सिद्धांत के बारे में नीचे लिखे कौन-से कथन सही हैं और कौन-से गलत?
(क) राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों पर चर्चा करता है जिनके आधार पर राजनीतिक संस्थाएं बनती हैं।
(ख) राजनीतिक सिद्धांत विभिन्न धर्मों के अन्तर्सम्बन्धों की व्याख्या करता है।
(ग) यह समानता और स्वतंत्रता जैसी अवधारणाओं के अर्थ की व्याख्या करता है।
(घ) यह राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की भविष्यवाणी करता है।
उत्तर:
(अ) सत्य
(ब) असत्य
(स) सत्य
(द) असत्य

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प्रश्न 2.
‘राजनीति उन सबसे बढ़कर है, जो राजनेता करते हैं।’ क्या आप इस कथन से सहमत हैं? उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
राजनीति में मानव स्वभाव की गहरी पैठ है। व्यक्ति मौलिक रूप से एक स्वार्थी जीव है जो हमेशा प्रतियोगिता में या छिपे रूप में होता है। राजनीति दूसरों के व्यवहार के प्रबंधन की कला है जो उस पर लादा जाता है या निर्देशित किया जाता है। राजनीति प्रभाव की एक कला है और यह अधिकृत स्थिति प्राप्त करने की विधि है। यह निश्चित रूप से राजनीतिज्ञ के उस कार्य से सम्बन्धित नहीं है जो वह करता है या वह विभिन्न कार्यों में निर्णय लेता है।

वस्तुतः राजनीति उससे कहीं अधिक है। राजनीति किसी भी समाज का अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग है। राजनीति सरकार के अच्छे मार्गों का एक प्रयास है। महात्मा गाँधी ने एक बार अवलोकन किया कि राजनीति हमें सर्प की कुण्डली के समान ढंकता, है और बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं देता परंतु यह एक संघर्ष है। राजनीति का प्रयोग समूह, समाज और राजनीतिक संगठन के कुछ रूपों में सामूहिक निर्णय निर्माण के लिए होता है। राजनीतिक बातचीत में सामूहिक निर्णय पर इसका प्रयोग होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि राजनीति एक विस्तृत संकल्पना है जिसका क्षेत्र विस्तृत है।

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प्रश्न 3.
लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
लोकतंत्र को लोगों की सरकार कहा जाता है। यह कहा जाता है कि सरकार की लोकतंत्रीय प्रणाली में वास्तविक शक्ति जनता के पास होती है। यह एक अत्यधिक उत्तरदायी और उत्तरदायित्व पूर्ण सरकार होती है। यह विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत और वाद-विवाद पर आधारित होती है। लोकतंत्र का उद्देश्य जनता हेतु महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे-समानता, न्याय, स्वतंत्रता इत्यादि को प्राप्त करना होता है। लोकतंत्र में लोगों का महत्व दिया जाता है और समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य भाईचारा भी स्थापित करना होता है।

लोकतंत्र की सफलता के लिए कुछ पूर्व आवश्यकताएँ जरूरी हैं जिनमें सतर्क नागरिक होना अति आवश्यक है। यदि नागरिक अपने अधिकारों के प्रति और कर्तव्यों के प्रति चैतन्य नहीं हैं। यदि वे यह नहीं जानता है कि सरकार क्या करने जा रही है और सरकार की नीति क्या है? यदि वे प्रशासन और विधान पर प्रतिरोध या रुकावट नहीं डालते, वे घमंडी हो जाएंगे और अपनी स्थिति और अधिकारों का दुरुपयोग करेंगे। ऐसी स्थिति में स्वतंत्रता और अधिकार प्रभावित होंगे और प्रजातंत्र के सम्मान में भी गिरावट आयगी।

इसीलिए लोगों को विभिन्न स्तरों पर जातीय वाद-विवाद और भाषण के आधार पर स्वस्थ जनमत बनाना चाहिए। इसके लिए लोगों में निम्नलिखित गुण होना चाहिए –

  1. उनमें उच्च स्तर की साक्षरता होनी चाहिए।
  2. लोगों में आर्थिक और सामाजिक समानता होनी चाहिए।
  3. लोगों में पर्याप्त रोजगार होना चाहिए।
  4. लोगों को जाति, भाषा और धर्म के ऊपर उठना चाहिए जिससे लोगों में भाई-चारे का दृष्टिकोण विकसित हो। यदि समाज में योग्यता का अभाव होगा तो प्रजातंत्र केवल एक भीड़ के रूप में होगा और सरकार पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं कायम हो पायगा।
  5. चैतन्य नागरिक का तात्पर्य उत्तरदायी और जागरूक नागरिक से है जो सरकार के कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग ले सकता है।

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प्रश्न 4.
राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हमारे लिए किन रूपों में उपयोगी है? ऐसे चार तरीकों की पहचान करें जिनमें राजनीतिक सिद्धांत हमारे लिए उपयोगी हों।
उत्तर:
प्रत्येक विषय का अपना सिद्धांत होता है। वस्तुतः कोई विषय भी विषय सिद्धांतों के बगैर हो ही नहीं सकता। जब एक परिकल्पना तथ्यों से समर्थित होती है, तो यह सिद्धांत बन जाता है। सिद्धांत एक सामान्यीकरण है जो सम्पूर्ण स्थिति की व्याख्या करता है। यह एक तथ्यात्मक कथन है। यदि विज्ञान (शारीरिक विज्ञान) है या सामाजिक विज्ञान, सभी विषयों के सिद्धांत होते हैं। हमने डार्विन सिद्धांत, न्यूटन नियम और आर्किमिडीज के सिद्धांत के विषय में सुना है। ये सभी सिद्धांत नये नियमों, सिद्धांतों और कानूनों के प्रेरणा-स्रोत हैं।

उसी प्रकार सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, नागरिक प्रशासन आदि के सभी शाखाओं में सिद्धांतों की उपयोग की बात है उसे निम्नलिखित उपयोगी बिन्दुओं में स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. राजनीतिक सिद्धांत समाज को राजनीतिक दिशा प्रदान करता है।
  2. राजनीतिक सिद्धांत सामान्यीकरण, साधन और अवधारणा प्रदान करता है जो समाज में प्रभावी प्रवृत्तियों को समझने में सहायता करता है।
  3. राजनीतिक सिद्धांत आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा का कार्य करता है।
  4. राजनीतिक सिद्धांत समाज को बदलता है।
  5. राजनीतिक सिद्धांत समाज को गतिशील और आंदोलनकारी बनाता है।
  6. ये सिद्धांत समाज में सुधार लाते हैं।
  7. राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक विचार और संस्थाओं के मौलिक ज्ञान को प्राप्त करने में सहायता करते हैं जो समाज को एक विशेष आकार देते हैं जिसमें हम रहते हैं।
  8. राजनीतिक सिद्धांत समाज को निरंतर बनाये रखते हैं।

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प्रश्न 5.
क्या एक अच्छा या प्रभावपूर्ण तर्क औरों को आपकी बात सुनने के लिए बाध्य कर सकता है?
उत्तर:
सिद्धांत तथ्यों और हेतुवाद (Rationalism) को बताता है। सिद्धांत तार्किक वाद-विवाद और भाषण पर आधारित होता है। सिद्धांत व्यक्ति के उचित सामर्थ्य और मानव व्यवहार में निहित होता है। यह बहुत हद तक सही है कि अतार्किक कथन दूसरों के लिए अनुसरण योग्य नहीं होते। यह केवल तार्किक और विवेकी तर्क ही हैं जो दूसरों के लिए अनुसरण योग्य होते हैं। राजनीतिक सिद्धांत उन प्रश्नों का परीक्षण करता है जो समाज से सम्बन्धित और व्यवस्थित होते हैं।

ये विचार मूल्यों के विषय में होते हैं जो राजनैतिक जीवन और मूल्यों को वैसे और महत्व और सम्बन्धित संकल्पना की व्याख्या करते हैं। ऊँचे स्तर पर यह उन वर्तमान संस्थाओं को देखता है जो पर्याप्त है और वे किस प्रकार अस्तित्व में हैं। वह नीति कार्यान्वयन को भी देखता है ताकि वे लोकतांत्रिक और सही रूप में परिवर्तित हो। राजनीतिक सिद्धांत का उद्देश्य नागरिकों को राजनीतिक प्रश्नों और राजनीतिक घटनाओं का मूल्यांकन करने में विवेकयुक्त विचार करने में पशिक्षित करता है।

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प्रश्न 6.
क्या राजनीतिक सिद्धांत पढ़ना, गणित पढ़ने के समान है? अपने उत्तर के पक्ष में कारण दीजिए।
उत्तर:
राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन निश्चित रूप से केवल कुछ पहलुओं में गणित अध्ययन के समान है। यह पूर्ण रूप से समान नहीं है। राजनीतिक सिद्धांत एक तथ्यात्मक कथन है जो कुछ तथ्यों पर आधारित होते हैं। उनमें सूत्रीय औचित्य होता है। तथ्य अंकों के समान गणितीय नहीं होते। राजनीतिक सिद्धांत परिकल्पना करता है। यह एक तार्किक और विवेकी है। यह गुण समस्याओं और गणितीय समीकरणों में दिखाई देता है। हम कह सकते हैं कि राजनीतिक सिद्धांत गुणात्मक तथ्यों के गणित के निकट है और मात्रात्मक की अपेक्षा विवेकयुक्त है। विधि की दृष्टि से भी राजनीतिक सिद्धांत और गणित में निकटता दिखाई देती है।

Bihar Board Class 11 Political Science राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीति शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (What is the meaning of the term Politics)
उत्तर:
प्राचीन काल में राज्य के क्रियात्मक रूप के लिए ‘राजनीति’ शब्द का प्रयोग किया जाता था। अरस्तू के ग्रन्थ का नाम भी ‘राजनीति’ (Politics) था। पालिटिक्स शब्द की उत्पति यूनानी शब्द के पोलिस (Polis) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ नगर-राज्य (City-State) होता है। राजनीति के अन्तर्गत राज्य सरकार, अन्य राजनीतिक संगठनों और उनकी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।

आधुनिक विद्वान-जेलिनिक, होल्जन बर्क, सिजविक, ट्रीटरके आदि भी राजनीति के अन्तर्गत राज्य और सरकार से सम्बद्ध बातों का अध्ययन मानते हैं। फ्रेडरिक पोलक इसे सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक राजनीति में बाँटते हैं। सैद्धान्तिक राजनीति राज्य, सरकार तथा विधान से सम्बन्धित मूल सिद्धांत तथा व्यावहारिक राजनीति राज्य के कार्य, कानून का स्वरूप, व्यक्ति तथा राज्य के सम्बन्धों आदि का अध्ययन करता है।

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प्रश्न 2.
राजनीतिक सिद्धांत का आशय स्पष्ट कीजिए। (Clarify the meanings of Political theory)
उत्तर:
कुछ विद्वानों ने ‘राजनीतिशास्त्र’ अथवा ‘राजनीतिक दर्शन’ के लिये राजनीतिक सिद्धांत का प्रयोग किया किन्तु आशीर्वाद जैसे विद्वानों ने दोनों की विषय वस्तु को एक नहीं माना है। आशीर्वाद के विचार में ‘राजनीतिक सिद्धांत’ शब्द का प्रयोग ‘राजनीतिक दर्शन’ की अपेक्षा अधिक उचित है। ‘राजनीतिक दर्शन’ अनिश्चितता, अस्पष्टता तथा काल्पनिक पक्ष का द्योतक है, जबकि राजनीतिक सिद्धांत शब्द अधिक स्पष्ट, अधिक निश्चित और अधिक नियोजित है।

किन्तु वर्तमान काल में राज्य-विषयक ज्ञान के लिये राजनीतिक सिद्धांत का प्रयोग उचित और तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता, क्योंकि, “राजनीतिक सिद्धांत’ सरकार और शासन कला से कोई सम्बन्ध नहीं रखता। ‘राजनीतिक सिद्धांत’ का सम्बन्ध राज्य के मौलिक सिद्धांतों तथा उसके भूत और वर्तमान तक सीमित है। इसका राज्य के भावी स्वरूप तथा कार्यक्रम से कोई सम्बन्ध नहीं है।

प्रश्न 3.
राजनीति विज्ञान एक विज्ञान है। इस सम्बन्ध में तथ्य प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
राजनीति विज्ञान को अनेक विद्वानों ने निम्न तथ्यों के आधार पर एक विज्ञान माना है –

  1. प्रयोगात्मक विधि द्वारा राजनीतिशास्त्र का अध्ययन सम्भव है।
  2. विज्ञान की तरह राजनीति विज्ञान में भविष्यवाणी की जा सकती है।
  3. राज्य रूपी प्रयोगशाला में राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत परीक्षण एवं पर्यवेक्षण कर एक निश्चित निष्कर्ष तक पहुँचा जा सकता है।
  4. राजनीति विज्ञान में भी कार्य कारण-प्रभाव सम्बन्ध देखा जा सकता है।

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प्रश्न 4.
राजनीति विज्ञान एक विज्ञान नहीं है। तर्क दीजिए। (Political Science is not a science. Give reason)
उत्तर:
निम्न तथ्यों के आधार पर राजनीति विज्ञान को विज्ञान नहीं माना जाता है।

  1. इसमें वैज्ञानिक विधियों का अभाव है।
  2. कार्य-कारण सम्बन्ध का अभाव है।
  3. इसके अन्तर्गत सही भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।
  4. इसमें शुद्ध एवं शाश्वत निष्कर्ष का अभाव है।
  5. इसमें सार्वभौम रूप से मान्य नियमों का अभाव है।
  6. प्रयोगशालाओं का अभाव।
  7. राजनीति विज्ञान का आधार अनिश्चित तथा विचारों में एकता का अभाव है।
  8. इसमें अचूक माप का अभाव है।
  9. इसमें वस्तुपरक अध्ययन की कमी है।

प्रश्न 5.
राजनीति विज्ञान किसे कहते हैं? (What is Political Science?) अथवा, राजनीति विज्ञान से आप क्या समझते हैं? (What do you know about Political Science?)
उत्तर:
विश्व के बहुत से. दार्शनिकों ने राजनीति विज्ञान को अपने-अपने ढंग से परिभाषित किया है। प्रो. गार्नर के अनुसार, “राजनीति विज्ञान का अध्ययन राज्य के साथ आरम्भ होता है और राज्य के साथ समाप्त होता है।” प्रो. सीले के अनुसार, “जिस तरह अर्थशास्त्र धन का, जीव-शास्त्र जीवन का, बीजगणित अंकों का तथा रेखागणित स्थान और दूरी का अध्ययन करता है, उसी प्रकार राजनीति विज्ञान ‘शासन’ के बारे में छानबीन करता है।”

प्रो. गेटेल के अनुसार, “जिन विषयों में राजनीति विज्ञान की सर्वाधिक दिलचस्पी है वे हैं-राज्य, सरकार और कानून।” इन परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि राजनीति विज्ञान, राज्य, सरकार, व्यक्ति के राजनीतिक व्यवहार तथा राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन है। इसमें राज्य के भूत, वर्तमान और भविष्य के हर पहलू का अध्ययन किया जाता है।

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प्रश्न 6.
राजनीति विज्ञान ‘पोलिस’ शब्द से किस प्रकार सम्बन्धित है? (How is Political Science related with the word ‘Polis’?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान को अंग्रेजी भाषा में Political Science कहा जाता है। अरस्तू ने इसे Politics का नाम दिया है। पोलिटिक्स (Politics) शब्द यूनानी भाषा के ‘पोलिस’ (Polis) से बना है जिसका अर्थ है ‘नगर राज्य’ (City State)। प्राचीन काल में छोटे-छोटे नगर राज्य हुआ करते थे परंतु अब विशाल राज्यों का युग है। अत: राजनीति विज्ञान वह विषय है जो राज्यों के बारे में अध्ययन करता है।

प्रश्न 7.
राजनीति विज्ञान के अध्ययन के दो महत्व बताइए। (Write two significance of study of Political Science)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान के अध्ययन के दो महत्व निम्नलिखित हैं –

  1. राजनीति विज्ञान देश के नागरिकों को उनके अधिकारों व कर्तव्यों का ज्ञान कराता है।
  2. राजनीति विज्ञान का अध्ययन लोकतंत्र की सफलता के लिए भी. आवश्यक माना जाता है। नागरिकों को राजनीति विज्ञान से राजनीतिक शिक्षा मिलती है। नागरिकों को यह पता चलता है कि इन्हें अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कैसे करना चाहिए तथा उनके प्रतिनिधि कैसे होने चाहिए।

प्रश्न 8.
राजनीति विज्ञान में मुख्यतः किन बातों का अध्ययन किया जाता है? (What is the main subject matter of Political Science?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान में मुख्यतः जिन बातों का अध्ययन किया जाता है उनमें से अधिकांश निम्नलिखित हैं –

  1. राज्य का अतीत, वर्तमान तथा भविष्य का अध्ययन।
  2. सरकार और उसके विभिन्न रूपों का अध्ययन।
  3. मानव के राजनीतिक आचरण का अध्ययन।
  4. विभिन्न राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन।

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प्रश्न 9.
राजनीति विज्ञान को सर्वव्यापी विज्ञान किसने तथा क्यों कहा? (Why has called Political Science. “A Master Science” and why?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान को कुछ विद्वान विज्ञान मानते हैं और कुछ अन्य विद्वान इस विषय को कला मानते हैं। अरस्तु यूनान का एक बड़ा दार्शनिक था। उसके अनुसार राजनीति विज्ञान न केवल विज्ञान है बल्कि यह अन्य विज्ञानों से ऊपर भी है। अरस्तू के विचार में इसे इसलिए सर्वव्यापी विज्ञान (Master Science) कहना आवश्यक है क्योंकि यह मानव की सभी क्रियाओं और पहलुओं का अध्ययन करता है। उसके अनुसार राजनीति विज्ञान के क्षेत्रों में केवल राजनीतिक संस्थाएँ ही नहीं आतीं बल्कि सामाजिक संस्थाएं भी आती हैं।

प्रश्न 10.
राजनीति क्या है? (What is Politics?)
उत्तर:
राजनीति (Politics) शब्द यूनानी भाषा के शब्द (Polis) से बना है जिसका अर्थ नगर राज्य (City State) है। प्राचीन काल में नगर राज्य हुआ करते थे। अतः राजनीति का अर्थ राज्य संबंधी समस्याओं से ही माना जाता था, परंतु आधुनिक धारणा यह है कि राजनीति एक व्यापक सामाजिक प्रक्रिया है। इसके अन्तर्गत राजनीतिक दल, दबाव, गुट, राजनीतिक संस्कृति, जनमत, मतदान आचरण सभी आ जाते हैं। कुछ आधुनिक लेखकों ने राजनीतिक को ‘शक्ति के लिए सघर्ष’ कहा है। कुछ अन्य लेखक राजनीति को मूल्यों के अधिकारिक आबंटन से संबंधित करते हैं।

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प्रश्न 11.
राजनीति विज्ञान के अध्ययन के क्या लाभ हैं? (What are the advantage of studying Political science?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान के अध्ययन के प्रमुख लाभ –

  1. राजनीति विज्ञान के अध्ययन से हमें राज्य और सरकार के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।
  2. नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान होता है।
  3. विभिन्न समुदायों के संगठनं कार्य तथा उद्देश्यों का ज्ञान प्राप्त होता है।
  4. लोकतंत्र की सफलता विज्ञान के अध्ययन पर निर्भर है।
  5. राजनीतिक चेतना जागृत होती है।
  6. मानव के दृष्टिकोण को उदार बनाता है।
  7. जन कल्याण सम्बन्धी नीति बनाने में सहायक होता है।
  8. व्यक्ति में नैतिक गुणों का विकास करता है। उसे एक आदर्श नागरिक बनाता है।

प्रश्न 12.
राजनीति और राजनीति विज्ञान में क्या अंतर है? (What is the distinction between Politics and Political Science?)
उत्तर:
राजनीति और राजनीति विज्ञान में अंतर (Distinction between Politics and Political Science):
प्राचीन काल में राजनीति शास्त्र को राजनीति ही कहा जाता था। अरस्तू ने अपनी पुस्तक का नाम ‘Politics’ ही रखा था, परंतु आजकल इन दोनों में भेद किया जाता है। ‘Politics’ (राजनीति) शब्द ग्रीक भाषा के Polis से बना है जिसका अर्थ नगर राज्य है। प्राचीन यूनान में छोटे-छोटे नगर राज्य थे, परंतु अब बड़े-बड़े राज्य बन गए हैं। आजकल राजनीति शब्द का अर्थ उन राजनीतिक समस्याओं से लगाया जाता है जो कि किसी ग्राम, नगर, प्रान्त, देश अथवा विश्व की समस्याएँ हैं।

राजनीति दो प्रकार की होती हैं-सैद्धान्तिक तथा प्रयोगात्मक। राजनीतिक विज्ञान, राजनीति से प्राचीन है। राजनीति विज्ञान का उद्देश्य आदर्श राज्य, आदर्श नागरिक तथा आदर्श राष्ट्र का निर्माण करना है जबकि राजनीति का उद्देश्य किसी भी प्रकार सत्ता प्राप्त करने से है। राजनीति का अर्थ ही सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष है जबकि राजनीति शास्त्र सहयोग, सौहार्द्र, सहिष्णुता, प्रेम तथा त्याग की भावना सिखाता है। राजनीति विज्ञान निश्चित आदर्शों पर आधारित है जबकि राजनीति स्वार्थ व अवसरवादिता पर आधारित है।

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प्रश्न 13.
“राजनीति शक्ति के लिए संघर्ष है।” व्याख्या कीजिए। (“Politics is the struggle for power.” Explain)
उत्तर:
कई आधुनिक लेखकों ने राजनीति को ‘शक्ति के लिए संघर्ष’ के रूप में देखा है। वेल और केपलेन (Lasswel and Kaplan) के शब्दों में, “राजनीतिक विज्ञान शक्ति को सँवारने और उसका मिल-बाँटकर प्रयोग करने का अध्ययन है।” राबर्ट डैल (Robert Dahl) का कहना है “राजनीति में शक्ति और प्रभाव का अध्ययन शामिल है।” (Politics involves power and influence) लोग दूसरों पर शासन करना चाहते हैं। ये सत्ता के भूखे होते हैं और शक्ति के लिए संघर्ष करते हैं। राजनीतिक दलों, दबाव गुटों और अन्य संगठित समुदायों के बीच सत्ता या सुविधाओं के लिए संघर्ष चलता रहता है। अत: यह ठीक ही कहा गया है कि राजनीति शक्ति के लिए संघर्ष है।

प्रश्न 14.
राजनीति विज्ञान की इतिहास को क्या देन है? (What is the contribution of Political Science to History?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान की इतिहास को देन (Contribution of Political Science to History):

  1. राजनीति विज्ञान इतिहास को सरस बनाता है।
  2. राजनीति विज्ञान इतिहास को नयी दिशा प्रदान करता है, 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना न होती तो भारत का इतिहास कुछ और ही होता।
  3. राजनीतिक विचारधाराएँ ऐतिहासिक घटनाओं को जन्म देती है। रूसो और मांटेस्क्यू के विचारों ने फ्रांस को जन्म दिया।
  4. “राजनीति विज्ञान ही वह शास्त्र है जो स्वर्ण कणों के रूप में इतिहास रूपी नदी की रेत में संगृहीत किया जाता है।”

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प्रश्न 15.
राजनीति विज्ञान की अर्थशास्त्र को क्या देन है? (What is the contribution of Political Science to Economics?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान की अर्थशास्त्र को देन (Contribution of Political Science to Economics):
राजनीति विज्ञान का उद्देश्य नागरिकों को उन्नति व विकास द्वारा जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना है। राजनीतिक विचारधाराओं का भी आर्थिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। “जैसे प्रजातंत्र की विचारधारा आर्थिक न्याय पर बल देती है। राजनीतिक संगठनों का भी देश की अर्थशास्त्र पर प्रभाव पड़ता है। यदि सत्ता दल में एकता और अनुशासन है तो वहाँ की आर्थिक नीतियाँ उचित और स्थायी होंगी। सरकारी नीतियाँ, आयात-निर्यात, बैंक नीति, विनिमय दर, सीमा शुल्क आदि नीतियों का भी अर्थव्यवस्था पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 16.
“राजनीति विज्ञान और इतिहास परस्पर सहायक और पूरक हैं।” स्पष्ट करो। (“Political Science and History are matually contributory and complementary.” Explain)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान और इतिहास का परस्पर घनिष्ठ संबंध है। दोनों को एक दूसरे से अलग करना बहुत कठिन है। सीले का कथन है कि, “राजनीति विज्ञान के बिना इतिहास का कोई फल नहीं; इतिहास के बिना राजनीति विज्ञान का कोई मूल्य नहीं।” राजनीति विज्ञान इतिहास पर निर्भर है। सभी राजनीति संस्थाएँ विकास का परिणाम होती हैं।

उन्हें समझने के लिए इतिहास का ज्ञान आवश्यक है। इतिहास राजनीति विज्ञान की प्रयोगशाला है। ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर वर्तमान राजनीतिक जीवन में सुधार करने हेतु भविष्य के लिए मार्ग निश्चित किया जा सकता है। दूसरी ओर राजनीति विज्ञान भी इतिहास को अध्ययन सामग्री प्रदान करता है। ऐतिहासिक घटनाएँ राजनीतिक विचारधाराओं का परिणाम होती हैं। निष्कर्ष रूप से कहा जा सकता है कि राजनीति विज्ञान और इतिहास परस्पर सहायक और पूरक हैं।

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प्रश्न 17.
आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति के किन्हीं दो विषयों का नाम बताओ। (Mention the name of any two subjects of Political Science according to Modern Approach)
उत्तर:
आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान के मुख्य विषय निम्नलिखित हैं –

  1. सत्ता तथा शक्ति का अध्ययन
  2. मूल्यों की सत्तावादी व्यवस्था का अध्ययन

प्रश्न 18.
परम्परागत दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान के अध्ययन के कोई दो विषय बताओ। ( Mention any two subject of Political Science according to traditional view)
उत्तर:
परम्परागत दृष्टिकोण के अध्ययन के अनुसार राजनीति विज्ञान के अध्ययन में निम्नलिखित विषयों को मुख्यरूप से शामिल किया जाता है:

  1. राजनीति शास्त्र का अध्ययन (Study of Political Science) है। इसमें राज्य के भूत, वर्तमान तथा भविष्य का अध्ययन किया जाता है।
  2. सरकार का अध्ययन (Study of Government): राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत सरकार का अध्ययन किया जाता है। सरकार राज्य का आवश्यक अंग है। सरकार का संगठन सरकार के अंग तथा विभिन्न प्रकार की शासन प्रणालियों का अध्ययन किया जाता है।

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प्रश्न 19.
राजनीति की परिभाषा दीजिए। (Define politics)
उत्तर:
सामान्य राजनीति से आशय ‘निर्णय लेने की प्रक्रिया’ है। यह प्रक्रिया सार्वभौमिक है। जीन ब्लान्डल के अनुसार “राजनीति एक सार्वभौमिक क्रिया है।” हरबर्ट जे. स्पेंसर के अनुसार “राजनीति वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से मानव समाज अपनी समस्याओं का समाधान करता है।”

प्रश्न 20.
घरेलू मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (Clarify with example the political interference in internal affairs)
उत्तर:
राजनीति का घरेलू मामलों में हस्तक्षेप 10वीं सदी के उत्तरार्द्ध में प्रारंभ हुआ। महिलाओं का शोषण रोकने के लिए भारत में भी अन्य देशों के समान घरेलू हिंसारोधक अधिनियम बनाकर उन्हें घरेलू हिंसा से निदान के क्षेत्र में पहल हुई।

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प्रश्न 21.
क्या राजनीतिक विवादों को तर्कों द्वारा सुलझाया जा सकता है? (Does the solution of Political conflicts is settled by arguments?)
उत्तर:
राजनीतिक तर्कों का एकमात्र उद्देश्य अपनी बात को मनवाना होता है और इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए मनुष्य अनेक तरीकों को अपना सकता है, जैसे-विज्ञापन अथवा प्रचार-प्रसार द्वारा। इराक पर आक्रमण के अपने तर्क को सही ठहराने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने विज्ञापन तथा प्रचार, दोनों तरीकों का सहारा लिया था।

ऐसे समय राजनीतिक विवाद उन तक ही सीमित रह जाते हैं जिनका प्रदर्शन अच्छे तरीके से किया जाता है चाहे वह तर्क गलत ही क्यों न हों। प्रचार के माध्यमों से राजनीतिक उद्देश्यों को जनता के सामने तोड़-मरोड़ कर तथ्यों के द्वारा रखा जाता है और अपने मनमाने निष्कर्षों को लोगों के ऊपर थोप दिया जाता है। यही कारण है कि कुछ राजनीतिक विचारक यह म ते हैं कि राजनीतिक विवादों को तर्कों के माध्यम से ठीक ढंग से नहीं सुलझाया जा सकता है।

प्रश्न 22.
सिद्धांत किसे कहते हैं? (What is theroy?)
उत्तर:
सिद्धांत अंग्रेजी शब्द (Theory) का हिन्दी रूपांतर है और Theory यूनानी शब्द ‘थ्योरिया’ (Thoria), थ्योरमा’ (Theorema) थ्योराइन’ (Theorein) नामक शब्द से लिया गया है। इसका अर्थ है “भावात्मक सोच-विचार” (Sentimental Thinking)। एक ऐसी मानसिक दृष्टि जो कि एक वस्तु के अस्तित्व और उसके कारणों को प्रकट करती है। ओनोल्ड बेश्ट के अनुसार सिद्धांत के अन्तर्गत “किसी भी विषय के संबंध में एक लेखक की पूरी की पूरी सोच या समझ शामिल रहती है। इसमें तथ्यों का वर्णन विश्लेषण व व्याख्या सहित उसका इतिहास के प्रति दृष्टिकोण, उसकी मान्यताएँ और वे लक्ष्य शामिल हैं जिनके लिए किसी भी सिद्धांत का प्रतिपादन किया जाता है। पॉपर के अनुसार: “सिद्धांत मानसिक आँखों में रेखांकित, अनुभाविक व्यवस्था का विकल्प है।”

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प्रश्न 23.
राजनीतिक सिद्धांत की परिभाषा दीजिए। (Give the difinition of political theory)
उत्तर:
जार्ज कैटलिन के अनुसार, राजनीतिक सिद्धांत में राजनीतिक दर्शन तथा राजनीति विज्ञान दोनों सम्मिलित हैं। डेविड हैल्ड के अनुसार “राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक जीवन से संबंधित अवधारणाओं और व्यापक अनुमानों का एक ऐसा ताना-बाना है जिसमें शासन, राज्य और समाज की प्रकृति व लक्ष्यों और मनुष्यों की राजनीतिक क्षमताओं का विवरण शामिल है।”

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करें। (Explain relations between Political Science and Economics)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान और तर्कशास्त्र में घनिष्ठ सम्बन्ध है। प्राचीन समय से ही इन दोनों शास्त्रों को एक ही शास्त्र के दो अंगों के रूप में माना जाता रहा है। राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के घनिष्ठ संबंधों के बारे में विभिन्न विद्वानों के विचार निम्नलिखित हैं –
प्रो. गार्नर के अनुसार, “वर्तमान काल में राजनीति के ज्वलन्त प्रश्न मूल रूप में अर्थशास्त्र के भी प्रश्न हैं। वास्तव में प्रशासन के सम्पूर्ण सैद्धान्तिक पक्ष का स्वरूप अधिकांशतः आर्थिक है। मार्क्स ने तो यहाँ तक कहा है कि, “किसी युग के सम्पूर्ण सामाजिक जीवन के स्वरूप का निश्चिय आर्थिक परिस्थितियाँ ही करती है।” बिस्मार्क का कथन था कि, “मुझे यूरोप के बाहर नए राज्यों की नहीं वरन् व्यापारिक केन्द्रों की आवश्यकता है।”

राजनीति विज्ञान की अर्थशास्त्र को देन (Contribution of Political Science to Economics):
राजनैतिक विचारधाराओं का आर्थिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है। राजनीतिक संगठन का भी देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शासन व्यवस्था यदि दृढ़ और शक्तिशाली है तो उस देश के लोगों की आर्थिक दशा अच्छी होगी। अर्थशास्त्र की राजनीति विज्ञान को देन (Contribution of Economics to Political Science) अर्थशास्त्र को धन का विज्ञान कहते हैं। अर्थशास्त्र में धन के उत्पादन, विनिमय, वितरण तथा उपभोग में लगे व्यक्ति के सामाजिक गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। दूसरे शब्दों में यह मानव आवश्यकताओं और उनकी संतुष्टि का विज्ञान है। जब तक व्यक्ति की आर्थिक दशा अच्छी नहीं होगी, वह अच्छा नागरिक नहीं बन सकता। अतः अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में गहरा सम्बन्ध है।

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प्रश्न 2.
राजनीति विज्ञान का विषय क्षेत्र क्या है? (What is the scope of Political Science?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान का क्षेत्र (Scope of Political Science):
राजनीति विज्ञान का विषय क्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। राजनीति विज्ञान में मुख्यतः निम्नलिखित तथ्यों का अध्ययन होता है:

1. राज्य का अध्ययन (Study of State):
राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत राज्य के भूत वर्तमान तथा भविष्य का अध्ययन किया जाता है। गार्नर के अनुसार, “राजनीति विज्ञान का आरंभ और अन्त राज्य के साथ होता है।” गिलक्राइस्ट ने भी कहा है; “राज्य क्या है, क्या रहा है और क्या होना चाहिए का अध्ययन राजनीति विज्ञान का विषय है।”

2. सरकार का अध्ययन (Study of Govemment):
सरकार राज्य का एक अनिवार्य तत्व है। सरकार के विभिन्न रूप सरकार के अंग तथा सरकार का संगठन आदि का अध्ययन राजनीतिक विज्ञान में किया जाता है।

3. मानव व्यवहार का अध्ययन (Study of Human Behaviour):
राज्य का व्यक्ति के साथ अटूट संबंध है। व्यक्ति और राज्य का क्या सम्बन्ध है? व्यक्ति को कौन-कौन से अधिकार मिलने चाहिए और कौन-कौन से कर्त्तव्य करने चाहिए? व्यक्ति का राजनैतिक आचरण। क्या है ? इन सब बातों का अध्ययन राजनीतिक विज्ञान में किया जाता है।

4. अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों का अध्ययन (Study of International relations):
राजनीति विज्ञान में अन्तर्राष्ट्रीय कानून, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, संयुक्त राष्ट्र संघ आदि का भी अध्ययन किया जाता है। उपरोक्त के अतिरिक्त राजनीति विज्ञान शक्ति का भी अध्ययन है। इसमें नीति निर्माण प्रक्रिया भी अध्ययन की जाती है। इसमें शास्त्र संबंधी कार्य, मतदान, राजनैतिक दल एवं आम राजनीतिक संस्थाओं का भी अध्ययन किया जाता है।

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प्रश्न 3.
राजनीति विज्ञान के परम्परागत तथा आधुनिक अर्थ बताएँ। (Give traditional and modern meaning of Political Science)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान के अंग्रेजी पर्याय (Political Science) की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द पोलिस (Polis) से हुई है, जिसका अर्थ है (City State) अर्थात् नगर राज्य। प्राचीन काल में यूनान में छोटे-छोटे नगर राज्य होते थे। आज के युग में छोटे-छोटे नगर राज्यों का स्थान विशाल राज्यों ने ले लिया है। राज्य के इस विकसित और विस्तृत रूप से संबंधित विषय को राजनीति विज्ञान कहा जाने लगा। राजनीतिक विज्ञान की परिभाषाएँ विभिन्न विद्वानों द्वारा भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रस्तुत की गई हैं –

1. राजनीतिक विज्ञान का अध्ययन है –
ब्लंटशली के अनुसार, “राजनीतिक विज्ञान वह विज्ञान है, जिसका संबंध राज्य से है और जो यह समझने का प्रयत्न करता है कि राज्य के आधारभूत तत्व क्या हैं, उसका आवश्यक स्वरूप क्या है, उसकी किन विविध रूपों में अभिव्यक्ति होती है तथा उसका विकास कैसे हुआ?” प्रसिद्ध विद्वान डॉ. गार्नर के अनुसार, “राजनीति विज्ञान विषय के अध्ययन का आरंभ और अन्त राज्य के साथ होता है।”

2. राजनीति विज्ञान ‘राज्य और सरकार’ दोनों का अध्ययन है:
पॉल जैनट के अनुसार, “राजनीति विज्ञान समाज का वह अंग है जिसमें राज्य के आधार और सरकार के सिद्धांतों पर विचार किया जाता है।” डिमॉक (Dimock) के अनुसार, “राजनीति विज्ञान का संबंध राज्य तथा उसके साधक सरकार से है।”

3. मानवीय तत्त्व-राजनीति विज्ञान समाज विज्ञान का वह अंग है, जिसके अंतर्गत मानवीय जीवन के राजनीतिक पक्ष और जीवन के पक्ष से संबंधित राज्य, सरकार तथा अन्य संबंधित संगठनों का अध्ययन किया जाता है।

राजनीति विज्ञान की परिभाषा-आधुनिक दृष्टिकोण (Definition of Political Science A moderm approach):
परम्परागत रूप से राजनीति विज्ञान को व्यक्तियों के राजनीतिक क्रिया-कलापों तक ही सीमित समझा जाता था और जिसमें राज्य सरकार और अन्य राजनीतिक संस्थाओं को ही महत्वपूर्ण समझा जाता था। परंतु आधुनिक दृष्टिकोण अधिक व्यापक और यथार्थवादी हैं। इसमें अन्तः अनुशासनात्मक दृष्टिकोण (Inter-disciplinary approach) अपनाया गया है। इसमें राज्य को ही नहीं वरन् समाज को भी सम्मिलित किया गया है। आधुनिक लेखकों के द्वारा राजनीति विज्ञान को शक्ति, प्रभाव, सत्ता, नियंत्रण, निर्णय और मूल्यों का अध्ययन बताया गया है।

डेविट इस्टन के अनुसार, “राजनीति विज्ञान मूल्यों का सत्तात्मक आबंटन है।” (Political Science deals with the authoriative allocation of values) केटलिन ने राजनीति विज्ञान को शक्ति का विज्ञान (Science of Power) कहा है। पिनॉक और स्मिथ के अनुसार, “राजनीति विज्ञान किसी भी समाज में उन सभी शक्तियों, संस्थाओं तथा संगठनात्मक ढाँचों से संबंधित होता है जिन्हें उस समाज में सुव्यवस्था की स्थापना, सदस्यों के सामूहिक कर्मों का सम्पादन तथा उनके मतभेदों का समाधान करने के लिए सर्वाधिक अन्तर्भावी (Inclusive) और अंतिम माना जाता है।” इस प्रकार राजनीति विज्ञान व्यक्ति के राजनीतिक व्यवहार को उसके समस्त सामाजिक जीवन के संदर्भ में ही ठीक प्रकार से समझने की कोशिश करता है।

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प्रश्न 4.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखो (Write short notes on:)
(क) शक्ति की अवधारणा (Concept of Power)
(ख) सामाजिक विज्ञान का परिप्रेक्ष्य (Social Science Perspective)
उत्तर:
(क) शक्ति की अवधारणा (Concept of Power):
शक्ति एक ऐसी अवधारणा है जो राज्य के लिए आवश्यक है। राज्य में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिये नागरिकों द्वारा कानूनों का पालन किए जाने की अपेक्षा रखी जाती है परंतु जो व्यक्ति ऐसा नहीं करते उन्हें शक्ति द्वारा बाध्य किया जाता है कि कानूनों का पालन करें।

(ख) सामाजिक विज्ञान का परिप्रेक्ष्य (Social Science Perspective):
इतिहास अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, नीतिशास्त्र, राजनीति विज्ञान आदि अनेक विषय मानव सम्बन्धों का वर्णन करते हैं तथा वे परस्पर एक दूसरे से सम्बन्धित हैं। अतः विषयी दृष्टिकोण में ही मानव समस्याओं को उचित रूप से समझा जा सकता है। आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों में इस प्रकार के दृष्टिकोण की आवश्यकता है। मानव समाज में पायी जाने वाली गरीबी की समस्या की कई दिशाएँ होती हैं। आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक और यहाँ तक की राजनीतिक सभी दृष्टिकोणों से समस्या का अध्ययन किया जा सकता है और तभी उसका निराकरण संभव है।

प्रश्न 5.
राजनीति विज्ञान के क्षेत्र की व्याख्या कीजिए। (Explain the scope of Political Science)
उत्तर:
प्रत्येक विषय का अपना क्षेत्र होता है जिसकी व्यापकता उस शासन की विषय वस्तु पर निर्भर करती है। गार्नर ने राजनीति विज्ञान के क्षेत्र को तीन भागों में विभाजित किया है:

  1. राज्य की प्रकृति तथा उत्पत्ति का अनुसंधान।
  2. राजनीतिक संस्थाओं के स्वरूप, उनके इतिहास तथा विभिन्न रूपों की गवेषणा।
  3. इन दोनों आधार पर राजनीतिक विकास के नियोजन का यथासम्भव आकलन।

राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र की व्याख्या करते हुए गेटल (Gettell) ने कहा है “राजनीति विज्ञान को राज्य का विज्ञान कहा जाता है। यह संगठित राजनीतिक इकाइयों के रूप में मानवजाति का अध्ययन करता है। राज्य के जन्म की ऐतिहासिक व्याख्या भी इसके अन्तर्गत की जाती है। यह राज्य के विकास की व्याख्या भी करता है और वर्तमान समय के विशिष्ट शासन वाले राज्यों के विषय में भी चर्चा करता है।

“राजनीति विज्ञान एक सीमा तक राज्य के आदर्श स्वरूप तथा उसके सर्वोच्च लक्ष्य और शासन के उचित प्रकारों का भी अध्ययन करता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अभिकरण UNESCO के संयोजन में हुए सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत राजनीति के सिद्धांत, राजनीतिक संस्थाएं, राजनीतिक दल, दबाव समूह एवं लोकमत, अन्तर्राष्ट्रीय संबंध आदि विषय सम्मिलित समझा जाना चाहिए।

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प्रश्न 6.
राजनीतिशास्त्र का कला के रूप में विवेचना कीजिए। (Explain the Political Science as an Art)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान न केवल विज्ञान है, अपितु इसे कला भी कहा जा सकता है। यह कला की समस्त विशेषताओं को अपने में समाहित करता है और किसी भी सिद्धांत या सूत्र को व्यवहार में क्रियान्वित करने का प्रयास करता है। अब प्रश्न यह है कि कला क्या है? कला वह विद्या है जो किसी भी कार्य को अच्छी तरह करना सिखाती है और व्यावहारिक जीवन में विभिन्न सिद्धांतों का प्रयोग बताकर जीवन का आदर्श प्रस्तुत करती है अर्थात् कला मानव जीवन का सर्वांगीण चित्र तथा किसी ज्ञान का व्यावहारिक पहलू है। इस दृष्टिकोण से राजनीति विज्ञान भी एक कला है।

प्रोफेसर गैटल के अनुसार, “राजनीतिशास्त्र की कला का उद्देश्य मनुष्य के क्रिया-कलापों से संबंधित उन सिद्धांतों तथा नियमों का निर्धारण करना है जिन पर चलना राजनीतिक संस्थाओं के कुशल संचालन के लिए आवश्यक है।” बकल (Buckle) राजनीति विज्ञान को कलाओं में पिछड़ी हुई कला मानते हुए यह स्वीकार करते हैं कि राजनीति विज्ञान एक कला है, “राजनीति विज्ञान से अधिक कला है। इसका राज्य के व्यावहारिक पक्ष से ज्यादा सम्बन्ध है।”

प्रश्न 7.
राजनीति विज्ञान, विज्ञान और कला दोनों है, स्पष्ट कीजिए। (The Political Science is both the Science and Arts Discuss)
उत्तर:
यह एक सामान्य अभिमत है कि कोई भी अध्ययन या तो विज्ञान की श्रेणी में आता है या कला की, लेकिन वस्तुतः ऐसा सोचना त्रुटिपूर्ण है। विलियम एस. लिंगर के अनुसार “विज्ञान और कला का परस्पर विरोधी आवश्यक नहीं है। कला विज्ञान पर आधारित हो सकती है।” राजनीतिशास्त्र के बारे में यह कहा जा सकता है कि यह विज्ञान और कला दोनों है।

विज्ञान और कला दोनों ही रूपों में यह हमारे लिये उपयोगी है। गार्नर के अनुसार, “राजनीतिक विज्ञान व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है, भ्रममूलक राजनीति दर्शन के सिद्धांत का खण्डन करता है तथा विवेकपूर्ण राजनीतिक क्रियाकलाप के आधार के रूप में सुदृढ़ सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है।” (It renders practical service by deducting sound principles as a basis for wise political action and by exposing the teaching of false political philosophy)

इस प्रकार राजनीतिशास्त्र एक विज्ञान भी है और एक उच्चस्तरीय कला भी। जब हम राजनीति विज्ञान के सिद्धांतों का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित विवेचन करते हैं तथा कुछ सामान्य व सार्वभौम निष्कर्षों की खोज करते हैं तो यह एक विज्ञान है लेकिन जब हम इन सिद्धांतों व व्यवहार के मध्य भिन्नता व सापेक्षता पाते हैं तो राजनीति विज्ञान कला के निकट होती है। सिद्धांतों व व्यवहार का यह अंतर कुशलता व कल्पना (कला) के विकास का अवसर प्रदान करता है।

वर्तमान समय में चुनाव एवं राज्यों के पारस्परिक जीवन में बहुत अधिक अंतर आ गया है और ऐसी परिस्थितियों में राजनीति विज्ञान का कला रूप ही विश्वशान्ति एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत को प्रोत्साहन देकर विश्व को विनाश के गर्त से बचा सकता है। इसलिए, यह स्पष्ट विस्तार करते हुए उसे कला, दर्शन और विज्ञान तीनों मानता है। लासवेल ने भी राजनीति विज्ञान को कला, विज्ञान और दर्शन का संगम माना है।

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प्रश्न 8.
राजनीति विज्ञान के अर्थ और कार्यक्षेत्र को स्पष्ट करें। (Clarify the meaning and scope of Political Science)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान का अर्थ “राज्य की नीति” से होता है। राज्य की नीति में यह अत्यन्त आवश्यक तत्त्व होता है कि राज्य की उत्पत्ति की जाए। राज्य की शक्ति का व्यवहार और सैद्धान्तिक स्वरूप का संचालन सम्प्रभुता के हाथों में निहित किया जाए और साथ ही साथ राज्य में राजनीतिक विचारधारा और राज्य में विधि के स्तर पर राजनीतिक विचारधारा का प्रभाव हो।

राजनीति के अर्थ की उपरोक्त प्रासंगिकता को उजागर करते हुए अरस्तू ने राजनीति के अर्थ और उसके कार्यक्षेत्र को उजागर करते हुए इससे इस महत्वपूर्ण कथन के माध्यम से किया कि “समाज द्वारा सुसंस्कृत मनुष्य सब प्राणियों में श्रेष्ठतम होता है, परंतु जब वह कानून तथा न्याय के बिना जीवन व्यतीत करता है तो वह निकृष्टतम हो जाता है। यदि कोई मनुष्य एसा है जो समाज में न रह सकता हो अथवा जिसे समाज की आवश्यकता ही न हो क्योंकि वह अपने आप में पूर्ण है, तो उसे मानव समाज का सदस्य मत समझो, वह जंगली जानवर या देवता ही हो सकता है।”

प्रश्न 9.
राजनीति विज्ञान राज्य का ही अध्ययन है, स्पष्ट करें। (The Political Science is study of the state, Explain)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान को राज्य का अध्ययन इसलिए कहा जाता है कि राजनीति का अर्थ ही है “राज्य की नीति”। अगर राजनीति अपने इस महत्वपूर्ण अंग का अवलोकन नहीं, करेगी तो निश्चित है कि राजनीति विज्ञान का अस्तित्व कभी भी सम्भव नहीं हो पायेगा। इसलिये राजनीति विज्ञान में राज्य और राज्य की नीति चाहे वह राजनीतिक विचारधारा के रूप हो या किसी विधि के रूप में हो, इन सबको राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता है।

राजनीति की कोई भी विचारधारा चाहे वह लोकतंत्रीय हो और या फिर समाजवादी, साम्यवादी और निरंकुशवादी विचारधारा हो। इन सबको उत्पन्न करने का मूल स्रोत राजनीति है और राजनीति ने निरंकुशवादी विचारधाराओं को राज्य की व्यवस्था चलाने के लिये इसकी उपयोगिता की प्रासंगिकता को स्थापित किया। इस कारण राजनीति विज्ञान का आधार स्तम्भ राज्य है और राज्य से जुड़े होने वाले आवश्यक तत्व जैसे सरकार, विधि, जनता की राज्य के प्रति उसकी राजनीतिक विचारधारा आदि की अवहेलना राजनीति विज्ञान के सन्दर्भ में कोई भी नहीं कर सकता।

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प्रश्न 10.
परम्परागत राजनीति विज्ञान से आप क्या समझते हैं, स्पष्ट कीजिए। (What do youknow about Iraditional Political Science?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान का परम्परागत दृष्टिकोण राजनीति विज्ञान का जहाँ मूल आधार स्तम्भ है, वहीं राज्य और सरकार की संरचना का मूल आधार स्तम्भ भी है। इसके साथ ही परम्परागत राजनीति ने राज्य और सरकार को संचालित करने के लिये राजनीतिक मूल्यों यानि नैतिक दृष्टिकोण पर ही क्रियान्वित होती है। परम्परागत राजनीति बिना नैतिक मूल्यों के किसी भी राजनीतिक सिद्धांत की संरचना को निर्मित नहीं करती, नैतिक मूल्य राजनीति का मूलभूत आधार स्तम्भ है।

परम्परागत राजनीति का यह दृष्टिकोण था कि बिना नैतिक मूल्यों के राज्य की शक्ति निरंकुश होगी, वहीं राजनीति विचारधारा का मार्ग अस्पष्ट और अमर्यादित होगा। इसलिये परम्परावादी राजनीतिक विचारकों ने नैतिकता से ही राजनीति के आदर्श खोजे तथा नैतिकता से राजनीति को मर्यादित किया। अतः यह आदर्श और मर्यादा का स्वरूप होने से राज्य और सरकार की उपयोगिता स्वयं शासक के लिये भी उपयोगी बनी और जनता के लिये भी उपयोगी बनी।

प्रश्न 11.
राजनीतिक विचारधारा की उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए। (Clarify the importance of Political Ideology)
उत्तर:
राजनीतिक विचारधाराओं ने ही संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की राज्य तथा इसके अंग, सरकार और विधि पर राजनीतिक विचारधाराओं का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। जैसे लोकतंत्रीय पद्धति में राज्य के यह दो महत्वपूर्ण तत्व सरकार और विधि कभी भी निरंकुश नहीं हो सकते, क्योंकि उन्हें अपने मूल्यों में प्राकृतिक नियमों को अपनाना पड़ेगा, न्याय की व्यवस्था बनाये रखने के लिये और दूसरा राजनीति जनता के प्रति जवाबदेह हो।

यही लोकतंत्रीय राजनीतिक विचारधारा का मूल स्वरूप रहा है। इसके साथ ही ठीक इसके विपरीत जो राजनीति को बल और शक्ति की निरंकुशता से संचालित करने पर विशेष बल देते हैं और साथ ही साथ यह निरंकुश विचारधारा प्राकृतिक नियमों का अवहेलना अपने विधि निर्माण के सन्दर्भ में व्यापक स्तर पर करती है। इसलिये निरंकुशवादी राज्य व्यवस्था के लिये न्याय की अवधारणा, उसके अस्तित्व के लिये खतरे का मूल आधार बन जाती है।

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प्रश्न 12.
राजनीति विज्ञान में दर्शन की उपयोगिता से आप क्या समझते हैं? (What do you know about the importance of philosophy in political science)
उत्तर:
राजनीतिक दर्शन की मूल जड़ नैतिक नियमों से संबंधित होती है। नैतिक नियमों और उद्देश्यों से ही राजनीति के आदर्शात्मक स्वरूप और सीमा पर सही नियंत्रण स्थापित होता है, तथा राज्य इसी के बल पर निरंकुश नहीं हो सकता है अर्थात् राज्य को यदि निरंकुश नहीं होना है, तो उसे निश्चित रूप से आदर्शवादी सिद्धांतों के अनुरूप ढलना होगा।

इस संदर्भ में चाहे प्राचीन राजनीतिक विचारक हों या फिर आधुनिक राजनीतिक विचारक हों, सबने आदर्शवाद की उपयोगिता को राज्य के सन्दर्भ में उपयोगी इसलिए माना, क्योंकि आदर्शवादी ही निरंकुशता को खत्म करने का एकमात्र मौलिक साधन है। बिना आदर्शवाद के निरंकुशवाद को खत्म नहीं किया जा सकता है। हालांकि राजनीतिक दर्शन की आलोचना इस तथ्य पर की गई कि ऐसा दर्शन काल्पनिक और अव्यावहारिक स्तर पर होता है। इसलिये राजनीति दर्शन को उन्हीं लोगों द्वारा काल्पनिक माना गया जो राजनीति को निरंकुशवादी ज्यादा समझते थे।

प्रश्न 13.
आधुनिक राजनीति विज्ञान और परम्परावादी राजनीति विज्ञान में अंतर में स्पष्ट करें। (Distinguish between Modern Political Science and Traditional Political Science)
उत्तर:
आधुनिक राजनीति विज्ञान के विचारक विज्ञान को केवल राज्य का विषय न मानकर वरन् वह मनुष्य के राजनीतिक व्यवहार को भी राजनीति विज्ञान का विषय मानते हैं। उन्होंने आधुनिक सहभागिता के रूप में प्रदर्शित करके यह स्पष्ट किया, जैसे लासवेल और केपलन ने अपने कथन के द्वारा यह भाव प्रकट किया कि “राजनीति विज्ञान एक व्यवहारवादी विषय के रूप में शक्ति को संवारने और मिल-बांटकर प्रयोग करने का अध्ययन है।” इसलिये राजनीतिक सहभागिता में जनता की भावना और जनता द्वारा शासन में दिए जाने वाले योगदान का विशेष ध्यान रखा जाने लगा, जिससे कि वे राज्य कानून के प्रति जवाबदेह हो।

परम्परावादी राजनीति विज्ञान के विचारक राज्य और सरकार की संरचना को राजनीति विज्ञान का एक अहम् हिस्सा मानते थे। उनका मत था कि यदि सरकार और राज्य के संदर्भ में उनके निर्माण और क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो निश्चित है कि राज्य व्यवस्था वास्तव में एक अनुशासित व्यवस्था को जन्म दे सकेगी तथा स्थायी रूप से शासन व्यवस्था का संचालन कर सकेगी इसलिये परम्परावादी राजनीति विज्ञान के विचारकों ने राज्य और सरकार के स्थायित्व के लिये ही कई राजनीतिक विचारों का प्रतिवादन किया और इन राजनीतिक विचारों का दार्शनिक, ऐतिहासिक और तुलनात्मक पद्धति से सम्बन्ध था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीति विज्ञान के अध्ययन के महत्व की संक्षेप में व्याख्या कीजिए। (Briefly describe the importance of studying Political Science)
उत्तर:
आधुनिक युग प्रजातंत्र का युग है और इस युग में राजनीति विज्ञान के अध्ययन का बहुत महत्व है। इस विषय की गणना संसार के महत्वपूर्ण विषयों में की जाती है। इसका कारण यह है कि आधुनिक जीवन राजनीतिक जीवन ही है। मनुष्य का कार्य राजनीतिक व्यवस्था से प्रभावित होता है। प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी राज्य का नागरिक है और उसका राज्य के साथ अटूट संबंध है। अत: राजनीति शास्त्र के अध्ययन के महत्व का विस्तृत विवेचन निम्नलिखित है –

1. राज्य तथा सरकार का ज्ञान (Knowledge of State and Government):
राजनीति विज्ञान राज्य का विज्ञान है और इसके द्वारा ही हमें राज्य तथा सरकार के बारे में ज्ञान होता है। राज्य का होना सामाजिक जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि समाज में शान्ति व व्यवस्था राजनीतिक संगठन के बिना स्थापित नहीं की जा सकती। राज्य के सभी काम सरकार द्वारा किए जाते हैं। इस कारण सरकार के बारे में भी जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि सरकार का गठन कैसे होता है और किस प्रकार की सरकार अच्छी होती है। इस सब बातों का ज्ञान हुए बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन का पूरी तरह विकास नहीं कर सकता। अतः इस विज्ञान के अध्ययन के बहुत लाभ हैं।

2. अधिकारों व कर्तव्यों का ज्ञान (Knowledge of Rights and Duties):
राजनीति विज्ञान व्यक्ति को उनके अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान कराता है। समाज और राज्य दोनों में ही रहते हुए व्यक्ति को कुछ अधिकार मिलते हैं और ये अधिकार व्यक्ति को जीवित रहने तथा अपने जीवन का विकास करने में सहायक होते हैं। अधिकारों के बदले व्यक्ति को कुछ कर्त्तव्यों का पालन भी करना पड़ता है ताकि शान्ति और व्यवस्था बनी रहे और दूसरों को भी अधिकार मिल सके।

3. विविध समुदायों का ज्ञान होता है (It gives knowledge about many kinds of associations):
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए उसे कई प्रकार के समुदायों में पारा लेना पटता है, जैसे कि धार्मिक, सामाजिक तथा मनोरंजन संबंधी समुदाय। किस समुदाय का संगठन कैसे होता है, उसके क्या उद्देश्य तथा कार्य हैं? व्यक्ति को उनसे क्या लाभ तथा हानियाँ हैं? इन सब बातों का ज्ञान हमे राजनीति विज्ञान द्वारा मिलता है।

4. दूसरे देशों की शासन प्रणाली का ज्ञान होता है (Knowledge of the Government system of other countries):
आज कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता। देश-विदेश की घटनाओं में प्रत्येक व्यक्ति की दिलचस्पी रहती है और उनका प्रभाव पड़ता है। राजनीतिक विज्ञान के पता चलता है कि किस-किस देश में कौन-कौन सी शासन प्रणाली प्रचलित है? वहाँ पर किस राजनीतिक विचारधारा को अपनाया गया है और उनके अनुसार ही हमें अपने सम्बन्ध उन देशों से स्थापित करने पड़ते हैं। कहीं राजतंत्र, कहीं लोकतंत्र, कहीं तानाशाही, कहीं संघात्मक सरकार, कहीं अध्यक्षात्मक सरकार और कहीं संसदीय प्रणाली।

5. लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक (Essential for the Success of democracy):
आज का युग लोकतंत्र का युग है। इस शासन प्रणाली में सम्पूर्ण शासन प्रणाली नागरिकों के हाथों में होती है। वे अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो कानून बनाते और शासन चलाते हैं। अतः लोकतंत्र उसी देश में सफल हो सकता है, जिस देश के लोगों को राजनीतिक शिक्षा मिली हो और राजनीतिक शिक्षा के लिए राजनीतिक विज्ञान का अध्ययन आवश्यक है।

6. राजनीतिक चेतना जागृत होती है (Its study awakens the political consciousness):
आज लोकतंत्र का युग है और शासन की बागडोर जनता के हाथों में होती है। राजनीति शास्त्र का अध्ययन व्यक्ति को सरकार के विभिन्न अंगों, उनके संगठन तथा कार्यों से परिचित करा देता है। यदि किसी व्यक्ति को सरकारी कर्मचारी के रूप में काम करने का अवसर मिले तो राजनीति विज्ञान के अध्ययन की सहायता से वह व्यक्ति अपने कार्यों को आसानी से कर सकता है। इस प्रकार से राजनीतिक चेतना का भी विकास होता है और शासन में भी कुशलता आती है।

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प्रश्न 2.
राजनीति शास्त्र की प्रकृति व विषय क्षेत्र की समीक्षा कीजिए। (Explain the nature and scope of Political Science)
उत्तर:
राजनीति शास्त्र की प्रकृति (Nature of Political Science) क्या राजनीति शास्त्र विज्ञान है? यह प्रश्न राजनीति विज्ञान में अत्यधिक चर्चित रहता है। कुछ विचारक जो इसे विज्ञान मानते हैं उनमें प्रमुख हॉब्स, माण्टेस्क्यू, ब्राइस, जैविक गार्नर आदि। महान दार्शनिक एवं राजनीति विज्ञान के जनक (Father of Political Science) अरस्तू ने तो इसे सर्वोच्च विज्ञान (Master Science) कहा है। राजनीति विज्ञान में वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग होता है। यह क्रमबद्ध अध्ययन है। तार्किक विश्लेषण एवं पर्यवेक्षण आधारित है। कार्य और कारण में संबंध है।

विज्ञान के लक्ष्य अर्थात् सत्य की खोज का राजनीति विज्ञान में भी पुट मिलता है। किस प्रकार के राजनैतिक नियम एक आदर्श राज्य के अन्तर्गत नागरिकों का अधिकतम हित कर सकते हैं, उनका प्रयोग राजनीति विज्ञान में होता रहता है। इसके अतिरिक्त राजनीति विज्ञान में भविष्यवाणी भी की जा सकती है। परंतु दूसरे विचारक इसे विज्ञान नहीं मानते। इसमें मटलेण्ड एवं बकल प्रमुख हैं। इनके अनुसार राजनीति विज्ञान में न तो कोई प्रयोगशाला है और न ही उसमें प्रयोग किए जा सकते हैं।

व्यक्ति को मेढ़क आदि की तरह स्थिर करके प्रयोग नहीं किए जा सकते। राजनीति विज्ञान में निष्पक्षता का अभाव रहता है। कारण और कार्य में वास्तविकता का सम्बन्ध नहीं हो सकता। भविष्यवाणी सही रूप में नहीं की जा सकती। कुछ विचारक राजनीति विज्ञान को कला भी कहते हैं। कला का अर्थ है कि सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम्। कला का अर्थ है किसी कार्य को सफलतापूर्वक किया जाना। इन सभी बातों को राजनीति शास्त्र में पाया जाना उसे कला सिद्ध करता है।

विषय क्षेत्र (Scope of Political Science):
राजनीति विज्ञान के अन्तर्गत राज्य का अध्ययन किया जाता है। राजनीति विज्ञान में राज्य और सरकार का भी अध्ययन किया जाता है। राजनीति विज्ञान का मानवीय तत्वों पर विशेष बल दिया जाता है। अत: यह मानव संबंधों का भी अध्ययन है। इसमें नागरिकों के कर्त्तव्य और नागरिकों के अधिकारों का अध्ययन किया जाता है। विभिन्न प्रकार की राजनीतिक संस्थाओं, अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों, अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों, विश्व शांति के उपायों आदि सभी का अध्ययन इसमें सम्मिलित है। व्यवहारवादी दृष्टिकोण के अनुसार राजनीति विज्ञान व्यक्ति के समाज में विभिन्न प्रकार के संबंधों में भी अध्ययन करता है। आधुनिक विचारकों के अनुसार राजनीति विज्ञान शक्ति का अध्ययन है तथा मानव मूल्यों का भी अध्ययन है।

Bihar Board Class 11th Political Science Solutions Chapter 1 राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय

प्रश्न 3.
राजनीति शास्त्र और इतिहास में संबंध स्थापित कीजिए। (What is the relationship between Political Science and History?)
उत्तर:
राजनीति विज्ञान और इतिहास में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। सीले (Seelay) का कथन है, “राजनीति विज्ञान के बिना इतिहास एक ऐसे वृक्ष के समान है जिसमें कोई फल नहीं लगता और इतिहास के बिना राजनीति शास्त्र बिना जड़ के वृक्ष के समान है।” (Without History Political Science has no root and without Political Science History has no fruit.”) राज्य ऐतिहासिक विकास का परिणाम है। इतिहास राजनीति शास्त्र की प्रयोगशाला भी है। अकबर ने राजपूतों के साथ सुलह की नीति अपनाकर अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाया जबकि औरंगजेब ने जजिया कर लगाकर सिक्ख, मराठे तथा अन्य हिन्दुओं को अपने विमुख कर लिया।

धीरे-धीरे उसका राज्य खण्डित होता गया। इसी प्रकार राजनीति शास्त्र भी इतिहास को सामग्री प्रदान करता है। यदि इतिहास में विभिन्न राजनीतिक संस्थाओं का वर्णन न किया जाए तो इतिहास नीरस बन जाता है। बहुत सी राजनीतिक घटनाएँ इतिहास को एक नई दिशा में मोड़ देती हैं। यदि 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना न हुई होती तो भारत का इतिहास आज कुछ और ही होता। जून 1975 में इन्दिरा गाँधी ने आपात स्थिति न लगायी होती हो शायद भारत के राजनीतिक दलों का यह इतिहास न होता जो आज है। इस प्रकार इतिहास राजनीतिक विज्ञान का बहुत ऋणी है।

अंतर-इतिहास और राजनीति विज्ञान में घनिष्ठ सम्बन्ध होते हुए भी दोनों में विशेष अंतर है। इतिहास में घटनाओं का यथार्थ वर्णन किया जाता है जबकि राजनीति विज्ञान में घटनाओं का विश्लेषण करके आदर्श रूप को लाने का प्रयास होता है। आदर्श राज्य भविष्य में कैसा होना चाहिए इस पर राजनीति विज्ञान में विचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त दोनों विषयों के विषय क्षेत्र भी अलग-अलग होते हैं। उनमें उद्देश्य की दृष्टि से भी अंतर होता है।

प्रश्न 4.
राजनीति शास्त्र का अर्थशास्त्र के साथ संबंध विस्तार से बताइए। (Describe in detail the relationship of Political Science with Economics)
उत्तर:
राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र का घनिष्ठ सम्बन्ध है। आर्थिक परिस्थितियाँ राजनीतिक दशा पर प्रभाव डालती हैं तथा राजनीतिक परिस्थितियाँ आर्थिक दशा को प्रभावित करती हैं। राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र दोनों मानव कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। आर्थिक समस्याओं को राजनीति विज्ञान की सहायता से ही सुलझाया जाता है। राज्य द्वारा निर्धारित नीतियों के आधार पर आर्थिक कार्यक्रम चलाए जाते हैं। हिटलर और मुसोलिनी के नेतृत्व में जर्मनी तथा इटली में जो एक नए प्रकार का शासन (राष्ट्रीय समाजवाद पर आश्रित) स्थापित हुआ था, उसके कारण इन राज्यों का आर्थिक संगठन बहुत कुछ परिवर्तित हो गया था। समाजवाद के विकास का प्रधान कारण आर्थिक विषमता ही है।

ब्रिटेन और भारत में राजकीय समष्टिवाद के कारण इन देशों के आर्थिक जीवन पर राज्य का नियंत्रण बहुत बढ़ गया है। राज्य के कानून मजदूरी की निम्नतम दर, काम के घंटे व इसी प्रकार की अन्य बातों की व्यवस्था करते हैं। इसी प्रकार चुंगी, आयातकर, निर्यातकर, मूल्य का नियंत्रण, मुद्रा पद्धति आदि द्वारा सरकारें वस्तुओं के आदान-प्रदान व विनियम को नियंत्रित करती हैं। इन विविध प्रकार के राजकीय कानूनों द्वारा आर्थिक जीवन बहुत अशों तक मर्यादित हो जाता है। मानव सभ्यता के विकास में आर्थिक परिस्थितियाँ विशेष महत्व रखती हैं। अनेक विचारक इतिहास की घटनाओं का मूल कारण आर्थिक ही मानते हैं। कार्ल मार्क्स ऐसे ही विचारक थे।

अंतर:
राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में घनिष्ठ सम्बन्ध होते हुए भी दोनों में विशेष अंतर भी है जिसका वर्णन निम्न प्रकार है –

1. राजनीति विज्ञान का सम्बन्ध व्यक्तियों से व अर्थशास्त्र का सम्बन्ध वस्तुओं से है (Political Science deals with men and the Economics deals with materials):
राजनीति विज्ञान का मुख्य विषय समाज में रहने वाले व्यक्ति हैं। राजनीति विज्ञान मनुष्य के राजनीतिक सम्बन्धों का अध्ययन करता है परंतु अर्थशास्त्र का सम्बन्ध वस्तुओं से है। यह शास्त्र वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और विनियम का अध्ययन करता है जबकि राजनीति विज्ञान का सम्बन्ध राजनीतिक विचारधाराओं से है। संक्षेप में, अर्थशास्त्र कीमतों (Prices) का अध्ययन करता है और राजनीति विज्ञान मूल्यों (Values) का।

2. राजनीति विज्ञान का क्षेत्र अर्थशास्त्र से विस्तृत है (The Scope of Political Science is wider than Economics):
अर्थशास्त्र मानव की केवल आर्थिक समस्याओं का अध्ययन करता है जिसमें कि धन का उत्पादन, वितरण और उपयोग सम्मिलित हैं जबकि राजनीति विज्ञान मानव के राजनीतिक जीवन का अध्ययन करता है। राजनीति विज्ञान में व्यक्ति के राजनीतिक पक्ष के अतिरिक्त उसके सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक व नैतिक पक्ष का ही अध्ययन किया जाता है। अत: राजनीति विज्ञान का क्षेत्र अर्थशास्त्र से व्यापक है।

निष्कर्ष (Conclusion):
राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के आपसी सम्बन्धों का अध्ययन करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि आज के युग में ये दोनों विषय एक-दूसरे के पूरक, हैं।

Bihar Board Class 11th Political Science Solutions Chapter 1 राजनीतिक सिद्धान्त : एक परिचय

प्रश्न 5.
वैधता से क्या अभिप्राय है? इसका महत्व भी बताइए। (What do you mean by Legitimacy? What is its importance?)
उत्तर:
राज्य को शक्ति प्रयोग करने का अधिकार है। वह नागरिकों के ऊपर बाध्यकारी शक्ति का भी प्रयोग कर सकता है ताकि नागरिक राज्य के कानूनों का पालन करते रहें। नागरिकों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सदैव शक्ति का प्रयोग न तो सम्भव है और न ही इसका कोई औचित्य है। अतः राज्य शक्ति का प्रयोग अंतिम विकल्प के आधार पर ही करता है। शक्ति का प्रयोग केवल उन व्यक्तियों के लिये ही किया जाता है जो कानून का पालन नहीं करते।

व्यक्तियों के द्वारा राज्य की आज्ञा का पालन इस विश्वास पर ही किया जाता है कि राज्य व्यक्तियों के हित में शासन करता है। जब संसद में किसी एक दल का बहुमत नहीं होता है और कुछ दल मिलकर एक संगठन बना लेते हैं तो गठबंधन में सम्मिलित दलों का बहुमत हो जाता है और वे ही सरकार भी बनाते हैं परंतु उनमें से कोई भी एक दल बहुमत नहीं रखता। इस प्रकार अल्पमत की सरकारें बनती रहती हैं परंतु इस प्रकार की सरकारों को भी न्यायोचित माना जाता है क्योंकि कुछ निश्चित नियम व विधियों का इसमें प्रयोग होता है। राज्य में इस प्रकार बनी सरकार का भी औचित्य रहता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
राजनीति विज्ञान का जनक माना जाता है –
(क) सुकरात
(ख) प्लेटो
(ग) अरस्तु
(घ) गार्नर
उत्तर:
(ग) अरस्तु

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प्रश्न 2.
“सदा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना प्रजातंत्र का मूल्य है।” यह किसका कथन है?
(क) जॉन स्टुअर्ट मिल
(ख) रूसो
(ग) लास्की
(घ) हीगल
उत्तर:
(ग) लास्की

प्रश्न 3.
किस लैटिन शब्द से Justice अर्थात् ‘न्याय’ शब्द की उत्पत्ति हुई?
(क) जस्टिसिया
(ख) जज
(ग) जस
(घ) ज्यूडिशिया
उत्तर:
(घ) ज्यूडिशिया

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प्रश्न 4.
लोकतंत्र की आधारशिला है:
(क) स्थानीय शासन
(ख) राष्ट्रपति शासन
(ग) बहुदलीय शासन
(घ) मिली-जुली सरकार
उत्तर:
(ग) बहुदलीय शासन

प्रश्न 5.
‘पॉलिटिक्स’ नामक पुस्तक के लेखक हैं –
(क) प्लेटो
(ख) अरस्तू
(ग) सुकरात
(घ) कौटिल्य
उत्तर:
(ख) अरस्तू

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प्रश्न 6.
प्रजातंत्र (Democracy) किस भाषा के शब्द से बना है।
(क) ग्रीक
(ख) लैटिन
(ग) फ्रेंच
(घ) जर्मन
उत्तर:
(क) ग्रीक

प्रश्न 7.
अमेरिका में ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ पर आतंकी हमला कब हुआ था।
(क) 9 सितम्बर, 2001
(ख) 11 सितंबर, 2001
(ग) 6 अगस्त, 2001
(घ) 9 मार्च, 2001
उत्तर:
(ख) 11 सितंबर, 2001

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 History आधुनिकीकरण के रास्ते Textbook Questions and Answers

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मेजी पुर्नस्थापना से पहले की वे अहम घटनाएँ क्या थीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को सम्भव किया?
उत्तर:
मेजी पुर्नस्थापना 1867-68 में हुई। इससे पहले की निम्नलिखित मुख्य घटनाओं ने जापान के तीव्र .आधुनिकीकरण को सम्भव बनाया-

(i) किसानों से शस्त्र ले लिए गए। अब केवल समुराई ही तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही जबकि पिछली शताब्दी में प्रायः लड़ाइयाँ होती रहती थीं। शान्ति एवं व्यवस्था को आधुनिकीकरण का मूल आधार माना जाता है।

(ii) दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानी में रहने के आदेश दिए गए। उन्हें काफी हद तक स्वायत्तता भी प्रदान की गई।

(iii) मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए भूमि का सर्वेक्षण किया गया और भूमि का वर्गीकरण उत्पादकता के आधार पर किया गया। इसका उद्देश्य राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।

(iv) दैम्यों की राजधानियों का आकार लगातार बढ़ने लगा। अतः 17 वीं शताब्दी के मध्य तक जापान में एदो (आधुनिक तोक्यों) संसार का सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर बन गया। इसके अतिरिक्त ओसाका और क्योतो भी बड़े शहरों के रूप में उभरे दुर्गों वाले कम-से-कम छः शहर ऐसे थे जहाँ की जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। इसकी तुलना में उस समय के अधिकतर यूरोपीय देशों में केवल एक ही बड़ा शहर था। बड़े शहरों के परिणमस्वरूप जापान की वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित्त एवं ऋण की प्रणालियाँ स्थपित हुई।

(v) व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे।

(vi) शहरों में जीवंत संस्कृति कर प्रसार होने लगा। बढ़ते हुए व्यापारी वर्ग ने नाटकों और कलाओं को संरक्षण प्रदान किया।

(vii) लोगों की पढ़ने में रुचि ने होनहार लेखकों को अपने लेखन द्वारा अपनी जीविका चलाने में सहायता पहुँचाई। कहते हैं कि एदो में लोग नूडल की कटोरी के मूल्य पर पुस्तक किराये पर ले सकते थे। इससे पता चलता है कि पुस्तकें पढ़ना अत्यधिक लोकप्रिय था और पुस्तकों की छपाई भी व्यापक स्तर पर होती थी।

(viii) मूल्यवान धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी गई।

(ix) रेशम के आयात पर रोक लगाने के लिए क्योतो में निशिजिन में रेशम उद्योग के विकास के लिए पग उठाये गए। कुछ ही वर्षों में निशिजिन का रेशम विश्वभर में सबसे अच्छा रेशम माना जाने लगा।

(x) मुद्रा के बढ़ते हुए प्रयोग और चावल के शेयर बाजार के निर्माण से भी जापानी अर्थतंत्र का विकास नयी दिशाओं में हुआ।

प्रश्न 2.
जापान के एक आधुनिक समाज में रूपान्तरण की झलक दैनिक जीवन में कैसे दिखाई दी?
अथवा
जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह बदलाव आए? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जापान में पहले पैतृक परिवार व्यवस्था प्रचलित थी, जिसमें कई पीढ़ियाँ परिवार के मुखिया के नियन्त्रण में रहती थी। परन्तु जैसे-जैसे लोग समृद्ध हुए पृथक परिवार प्रणाली अथवा नयी घर व्यवस्था अस्तित्व में आई । इसमें पति-पत्नी साथ रहकर कमाते थे और घर बसाते थे। बिजली से चलने वाले नए घरेलू उत्पादों तथा नए परिवारिक मनोरंजनों की मांग भी बढ़ने लगी।

प्रश्न 3.
पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना छींग (क्विंग) राजवंश ने किया?
उत्तर:
चीन का छींग राजवंश पश्चिमी शक्तियों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना करने। में असफल रहा। (1839-42) में ब्रिटेन के साथ हुए पहले अफीम युद्ध ने इसे कमजोर बना दिया। देश में सुधारों एवं परिवर्तन की मांग उठने लगी । राजवंश इसमें भी असफल रहा और देश गृहयुद्ध की लपेट में आ गया।

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प्रश्न 4.
सन-यात-सेन के तीन सिद्धान्त थे ?
उत्तर:
सनयात सेन के तीन सिद्धान्त (सन मिन चुई) निम्नलिखित थे-

  • राष्ट्रवाद-इसका अर्थ था मांचू राजवंश को सत्ता से हटाना, क्योंकि उसे विदेशी राजवंश माना जाता था।
  • गणतन्त्र-देश में गणतान्त्रिक सरकार की स्थापना करना।
  • समाजवाद-पुंजी का नियमन करना तथा भूमि के स्वामित्व में बराबरी लाना।।

प्रश्न 5.
क्या पड़ोसियों के साथ जापान कि युद्ध और पर्यावरण का विनाश तीव्र औधोगीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ?
उत्तर:
यह बात सत्य है कि जापान के तीव्र औद्योगीकरण के कारण ही जापान ने पर्यावरण के विनाश तथा युद्ध को जन्म दिया।

  • उद्योगों के अनियन्त्रित विकास से लकड़ी तथा अन्य संसाधनों की मांग बढ़ी। इसका पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ा।
  • कच्चा माल प्राप्त करने तथा तैयार माल की खपत के लिए जापान को उपनिवेशों की आवश्यकता पड़ी। इसके कारण जापान को पड़ोसियों के साथ युद्ध करने पड़े।

प्रश्न 6.
क्या आप मानते हैं कि माओ-त्से-तुंग और चीन के साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की नींब डालने में सफलता प्राप्त की?
उत्तर:
इसमें कोई सन्देह नहीं कि माओ-त्से-तुंग अथवा माओजेदांग और उसके साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और इसकी मौजूदा कामयाबी की नींव डालने में सफलता प्राप्त की। यह बात नीचे दिए गए घटनाक्रम से स्पष्ट हो जाएगी.

सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् कोमिनतांग की गतिविधियाँ – 1925 में सनयाप्त सेन की मृत्यु के पश्चात् कोमिंतांग का नेतृत्व च्यांग-काई-शेक के हाथों में आ गया। इससे पूर्व 1927 में चीन में साम्यवादी दल की स्थापना हुई थी। यद्यपि उसने कोमिंतांग के शासन को सुदृढ़ बनाया, ”तो भी उसने, सनयात सेन के तीन क्रान्तिकारी उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में कोई कदम न. उठाया। इसके विपरीत उसने कोमिंतांग में अपने विरोधियों तथा साम्यवादियों को कुचलने की नीति अपनाई। उसे सोवियत संघ का समर्थन भी प्राप्त था। इसके अतिरिक्त उसने जमींदारों के एक नये वर्ग को उभारने का प्रयास किया जो किसानों का शोषण करते थे। इसी बीच माओ-जेदांग नामक साम्यवादी नेता ने किसान आन्दोलन को मजबूत बनाने के लिए लाल सेना का निर्माण किया।

माओ जेदांग का उत्कर्ष – 1930 में माओ जेदांग किसानों तथा मजदूरों की सभा का सभापति बन गया और भूमिगत होकर काम करने लगा। उसके सिर पर 25 लाख डालर का इनाम था। उसने नए सिरे से लाल सेना का संगठन किया और च्यांग-काई-शेक की विशाल सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध आरम्भ कर दिया। उसने च्यांग की सेना को चार बार भारी पराजय दी। परन्तु पाँचवें आक्रमण में उस पर इतना दबाव पड़ा कि उसने ‘महाप्रस्थान’ (Long March) की योजना बनाई और उसे कार्यान्वित किया। लाल सेना के इस प्रस्थान की गणना विश्व की अद्भुत घटनाओं में की जाती है। इस यात्रा में लगभग एक लाख साम्यवादियों ने भाग लिया। उन्होंने 268 दिनों में 6000 मील की दूरी तय की और देश के उत्तरी प्रान्तों शेंसी तथा कांसू (Shensi and Kansu) पहुँचे। यहाँ तक पहुँचने वालों की संख्या केवल 20,000 ही थी।

1935 में मांओ ने जापानियों के विरुद्ध साम्यवादी मोर्चा खड़ा किया। उसने अनुभव किया कि जापान के विरुद्ध संघर्ष उसे लोकप्रिय बना देगा और उसके जन-आन्दोलन को भी अधिक प्रभावशील बनाएगा। उसने यह भी. सुझाव दिया कि कोमिंतांग लाल सेना के साथ मिल कर कार्य करे और संयुक्त मोर्चे की स्थापना की जाए, परन्तु च्यांग ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस बात से च्यांग की प्रतिष्ठा को इतना अधिक आघात पहुँचा कि उसके अपने ही सैनिकों ने उसे बन्दी बना लिया। माओ ने तब तक जापान के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा, जब तक उसे सफलता नहीं मिली।

च्यांग के विरुद्ध संघर्ष-च्यांग माओ की बढ़ती हुई शक्ति से बहुत चिन्तित था। वह उसके साथ मिलकर काम नहीं करना चाहता था। बहुत कठिनाई के बाद वह जापान के विरुद्ध माओ का साथ देने के लिए तैयार हुआ। जब युद्ध समाप्त हुआ तो माओ ने च्यांग के सामने मिली-जुली सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। परन्तु च्यांग ने इसे स्वीकार नहीं किया। माओ ने अपना संघर्ष जारी रखा। 1949 में च्यांग को चीन से भाग कर फारमोसा (वर्तमान ताइवान) में शरण लेनी पड़ी। माओ जेदांग को चीन की सरकार का अध्यक्ष (Chairman) चुना गया। अपनी मृत्यु तक वह इसी पद पर बना रहा।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अफीम युद्धों के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
अफीम युद्ध चीन में अफीम के ‘अवैध व्यापार के कारण हुए। अंग्रेज व्यापारी भारी . मात्रा में चीन अफीम ले जाते थे। इस प्रकार चीनी लोग पूरी तरह अफीम खाने के आदी हो गए, जिससे उनका शारीरिक और नैतिक पतन हुआ। इस व्यापार के कारण ही चीन को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ना पड़ा।’

प्रश्न 2.
चीन में बॉक्सर विद्रोह कब हुआ? इसका क्या महत्त्व था?
उत्तर:
चीन में बॉक्सर विद्रोह 1889-90 ई. में हुआ। इस विद्रोह को अंग्रेजी, फ्रांसीसी, जापानी, जर्मन तथा अमेरिकी सेनाओं ने मिलकर दबाया। इस विद्रोह के कारण चीन विभाजित होने से बच गया।

प्रश्न 3.
चीन में गणराज्य की स्थापना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीन में 1911 में मंचू शासन के पतन के बाद गणराज्य की स्थापना हुई। इसकी घोषणा 1 जनवरी, 1912 ई. को की गई।
नानकिंग को इसकी राजधानी बनाया गया। डॉ. सनयात सेन इस गणराज्य के राष्ट्रपति बने।

प्रश्न 4.
चीन में आगे की ओर बड़ी छलांग (Great Leap Forward 1958-59) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आगे की ओर बड़ी छलांग से अभिप्राय चीन द्वारा आश्चर्यजनक उन्नति करने का प्रस्ताव था। परन्तु चीनी नेता इसमें विफल रहे। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे-

  • चीन में कम्यूनों की स्थापना की गई और लोगों को इसमें शामिल होने के लिए बाध्य किया गया।
  • कृषि उत्पादन में गिरावट आई।
  • मूल्यवान् साधन बर्बाद किए गए। इन सबके परिणामस्वरूप 1960-62 के दौरान देश में गम्भीर संकट उत्पन्न हो गया। आगे की ओर छलांग चीन को आगे ले जाने की बजाय पीछे ले गई।

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प्रश्न 5.
चीन की सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति क्या थी?
उत्तर:
सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति (Cultural Revolution) चीन में आरम्भ की गई। चीन आर्थिक क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने में विफल रहा था। चीन के नेता यह दिखाना चाहते थे कि विफलता के लिए माओ-जेडांग तथा अन्य नेता जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि अन्य लोग जिम्मेदार थे। अतः क्रान्ति के नाम पर मनमाने ढंग से निर्दोष व्यक्तियों पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें बन्दी बनाया गया। परणिामस्वरूप पूरे देश में अव्यवस्था फैल गई और सारी अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई।

प्रश्न 6.
चीन में प्रचलित कंफ्यूशियसवाद की विचारधारा क्या थी?
उत्तर:
कंफ्यूशियसवाद की विचारधारा कंफ्यूशियस (551-479 ई.पू.) और इनके अनुयायियों की शिक्षा से विकसित की गई थी। इसका सम्बन्ध अच्छे व्यवहार, व्यावहारिक समझदारी तथा उचित सामाजिक सम्बन्धों से था। इस विचारधारा ने सामाजिक मानक स्थापित किए और चीनी राजनीतिक सोंच तथा संगठनों को ठोस आधार प्रदान किया।

प्रश्न 7.
1905 ई. में चीन में प्रचलित परीक्षा प्रणाली को समाप्त क्यों कर दिया गया?
उत्तर:
चीन में प्रचलित परीक्षा प्रणाली में केवल साहित्यिक कौशल की ही माँग होती है। यह क्लासिक चीनी सीखने की कला पर ही आधारित थी, जिसकी आधुनिक विश्व में कोई प्रासंगिकता नजर नहीं आती थी। दूसरे, यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में भी बाधक थी। इसलिए 1905 ई. में इस परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 8.
चियांग काइ शेक कौन थे? उन्होंने महिलाओं को कौन-से चार सद्गुण अपनाने के लिए प्रेरित किया?
उत्तर:
चियांग काइ शेक (1887-1975) कुओमीनतांग के नेता थे। वह सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् कुओमीनतांग के नेता बने। उन्होंने महिलाओं को ये चार सद्गुण अपनाने के लिए प्रेरित किया-सतीत्व, रंगरूप, वाणी और काम।

प्रश्न 9.
चीनी गणराज्य में महिला मजदूरों (शहरी) की क्या समस्याएँ थीं?
उत्तर:

  • महिला मजदूरों को बहुत कम वेतन मिलता था।
  • काम करने के घंटे बहुत लम्बे थे।
  • काम करने की परिस्थितियाँ बहुत खराब थीं।

प्रश्न 10.
देश (चीन) को एकीकृत करने के प्रयासों के बावजूद कुओमीनतांग असफल रहा। क्यों?
उत्तर:

  • कुओमीनतांग का सामाजिक आधार संकीर्ण था और राजनीतिक दृष्टिकोण सीमित था।
  • सनयात सेन के कार्यक्रम में शामिल पूंजी के नियमन और भूमि-अधिकारों में समानता को लागू न किया जा सका।
  • पार्टी ने किसानों की अनदेशी की और लोगों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान न दिया।

प्रश्न 11.
1945-49 के दौरान ग्राणीम चीन में कौन-से दो मुख्य संकट थे?
उत्तर:

  • पर्यावरण सम्बन्धी संकट-इसमें बंजर भूमि, वनों का विनाश तथा बाढ़ शामिल थे।
  • सामाजिक आर्थिक संकट-यह संकट विनाशकारी भूमि-प्रथा, ऋण, प्राचीन प्रौद्योगिकी तथा निम्न स्तरीय संचार के कारण था।

प्रश्न 12.
1930 ई. में माओत्सेतुंग ने किस बात का सर्वेक्षण किया? इसका क्या उद्देश्य था?
उत्तर:
1930 ई. में माओत्सेतुंग ने जुनवू में एक सर्वेक्षण किया। इसमें नमक तथा सोयाबीन जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं, स्थानीय संगठनों की तुलनात्मक मजबूतियों, धार्मिक संगठनों की मजबूतियों, दस्तकारों, लोहारों तथा वेश्याओं आदि का सर्वेक्षण किया। इसका उद्देश्य शोषण के स्तर की जानकारी प्राप्त करना था।

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प्रश्न 13.
लाँग मार्च (1934-35) क्या था? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
लाँग मार्च चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शांग्सी तक 6000 मील की एक कठिन यात्रा थी। इस यात्रा के बाद येनान पार्टी का नया अड्डा बन गया। यहाँ माओत्सेतुंग ने वारलॉर्डिज्म को आगे बढ़ाया। इसमें उन्हें मजबूत सामाजिक आधार मिला।

प्रश्न 14.
चीन के लिए 4 मई का आन्दोलन क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
4 मई का आन्दोलन 1919 में पीकिंग में हुआ। इस आन्दोलन में छात्रों की सक्रिय भूमिका थी। इसके परिणामस्वरूप चीन में साम्यवादी दल की स्थापना का मार्ग खुला और चीन के छात्रों और श्रमिकों में जागृति की भावनाएँ उत्पन्न हुईं।

प्रश्न 15.
कुओमितांग दल की स्थापना के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
डॉ. सनयात सेन ने 1919 में तुंग-हुई तथा कई अन्य दलों को मिलाकर चीन में एक राष्ट्रीय दल की स्थापना की। यह दल कुओमिनतांग दल के नाम से जाना गया। इसी दल ने 1920 में दक्षिणी चीन में कैन्टन सरकार की स्थापना थी।

प्रश्न 16.
1911 की चीनी क्रान्ति के दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  • मन्चू सरकार अप्रिय हो रही थी और जनता का रोष उसके प्रति बढ़ रहा था।
  • मन्चू सरकार की रेल नीति 1911 की क्रान्ति का तात्कालिक कारण बनी। रेल नीति को केन्द्र के अधीन करने से अनेक समस्याएँ उत्पन्न हुईं और अन्ततः इसी ने 1911 की क्रान्ति को भड़काया।

प्रश्न 17.
1911 की चीनी क्रान्ति के दो परिणाम बताएँ।
उत्तर:

  • 1911 की चीनी क्रान्ति के परिणामस्वरूप चीन में मंचू राजवंश का शासन समाप्त हो गया।
  • चीन की जनता को नवीन संविधान प्राप्त हुआ और चीनी गणतन्त्र की स्थापना हुई।

प्रश्न 18.
1949 की चीनी क्रान्ति के क्या कारण थे?
उत्तर:

  • साम्यवादियों ने जेंसी में साम्यवादी शासन का गठन कर लिया था। यह समाजवादी राज्य पूरे चीन में साम्यवादी शासन की स्थापना करना चाहता था।
  • चीन में गृह-युद्ध छिड़ गया। परन्तु साम्यवादी और राष्ट्रीय सरकार किसी साँझे संविधान पर राजी न हुए।

प्रश्न 19.
चीन में साम्यवादी राज्य का आरम्भ कब और कैसे हुआ?
उत्तर:
अक्टूबर, 1949 में साम्यवादियों ने राष्ट्रीय सरकार की राजधानी कैन्टन पर अधिकार कर लिया। च्यांग-काई-शेक भागकर फारमूसा चला गया। पहली अक्टूबर, 1949 को साम्यवादियों ने चीन की राष्ट्रीय सरकार की घोषणा की और पीकिंग को चीन की राजधानी बना दिया।

प्रश्न 20.
कमोडोर पैरी की जापान यात्रा के बारे में दो तथ्य लिखो।
उत्तर:

  • पैरी मिशन 1854 में अमेरिका के राष्ट्रपति फिलमोर ने जापान भेजा था। उसका काम अमेरिका की सरकार का सन्देश जापार की सरकार तक पहुँचाना था।
  • वह युद्ध करके भी जापान से अपना उद्देश्य पूरा कर सकता था।

प्रश्न 21.
कमोडोर पैरी के दो मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:

  • यदि कोई अमेरिकन जहाज जापान के समुद्र तट पर टूट जाए, तो उसके नाविकों और यात्रियों को जापान मे आश्रय दिया जाए।
  • अमेरिकन जहाजों को यह अनुमति हो कि वे जापान के बन्दरगाहों से कोयला, जल खाद्य सामग्री आदि ले सकें।

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प्रश्न 22.
कंगावा की सन्धि किन दो देशों बीच हुई ? इसकी दो शर्ते कौन-सी थीं?
उत्तर:
कंगावा की सन्धि जापान और अमेरिका में होने वाली पहली सन्धि थी। दो शर्ते-

  • विदेशी जहाजों को जापान के कुछ बन्दरगाहों से कोयला भरने तथा खाद्यान एवं जल लेने का अधिकार होगा।
  • अमेरिका के किसी जहाज के टूटने पर उसके नाविकों और यात्रियों के साथ परम मित्रता का व्यवहार किया जाएगा।

प्रश्न 23.
पश्चिमी देशों से सन्धियाँ करने से जापान पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:

  • पश्चिमी देशों के सम्पर्क में आकर जापान ने उनके ज्ञान को अपनाया और पचास वर्षों के भीतर ही उनके समान सबल हो गया।
  • विदेशी सम्पर्क के कारण गोकुगावा वंश के शोगुनों का प्रभाव समाप्त हुआ और देश में जापानी सम्राट ने फिर से शक्ति पकड़ ली।

प्रश्न 24.
जापान में मेजियों की पुर्नस्थापना के लिए उत्तरदायी कोई दो कारण बताएँ।
उत्तर:
1867-1868 में मेजी वंश के नेतृत्व में तोकुगावा वंश के शासन को समाप्त कर दिया गया। मेन्जियों की पुर्नस्थापना के पीछे कई कारण थे-

  • देश में विभिन्न क्षेत्रों में असन्तोष व्याप्त था।
  • अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार तथा कूटनीतिक सम्बन्धों की मांग की जा रही थी।

प्रश्न 25.
मेजी युग में जापान ने कृषि क्षेत्र में क्या प्रगति की?
उत्तर:

  • कृषक कृषि करने वाली भूमि के स्वामी बन गए।
  • जापान ने पश्चिमी देशों से कृषि विशेषज्ञों की सेवाएँ प्राप्त की और कृषि क्रान्ति के बीज बोए।

प्रश्न 26.
मेजी युग के दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखें।
उत्तर:

  • जापान में संयुक्त राज्य अमेरिका की पद्धति पर एक राष्ट्रीय बैंक की स्थापना की गई। इस बैंक को नोट छापने का अधिकार दिया गया।
  • जापान में शिक्षा विभाग की स्थापना की गई। छः साल के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य कर दी गई।

प्रश्न 27.
रूस-जापान युद्ध की दो विशेष बातें बताएँ।
उत्तर:

  • रूस-जापान युद्ध 1904-05 में हुआ था।
  • इसमें छोटे से देश जापान ने रूस को पराजित किया।

प्रश्न 28.
‘सर्वहारा की तानाशाही’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘सर्वहारा की तानाशाही’ की अवधारणा कार्ल मार्क्स की देन है। इसमें इस बात पर बल दिया गया था कि धनी वर्ग की दमनकारी सरकार का स्थान श्रमिक वर्ग की क्रान्तिकारी सरकार लेगी। यह लोकतन्त्र वर्तमान अर्थ में अधिनायकतन्त्र नहीं होगा।

प्रश्न 29.
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ की स्थापना कब हुई? यह सरकार रूस की सात्यवादी सरकार से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर:
‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ की स्थापना 1949 में हुई। यह नये लोकतन्त्र को सिद्धान्तों पर आधारित थी, जो सभी सामाजिक वर्गों का गठबन्धन था। इसके विपरित सरकार साम्यवादी सरकार का आधार ‘सर्वहारा की तानाशाही’ था।

प्रश्न 30.
चीन के पीपुल्स कम्यूंस क्या थे?
उत्तर:
पीपुल्स कम्यूंस चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में आरम्भ किए गए। इनमें लोग सामूहिक रूप से भूमि के स्वामी होते थे और मिल-जुलकर फसल उगाते थे। 1954 तक देश में 26,000 ऐसे समुदाय थे।

प्रश्न 31.
सांस्कृतिक क्रान्ति का चीन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:

  • सांस्कृतिक क्रान्ति से देश में अव्यवस्था फैल गई जिससे पार्टी कमजोर हुई।
  • अर्थव्यवस्था तथा शिक्षा के प्रसार में भी बाधा पड़ी।

प्रश्न 32.
1976 में चीन में आधुनिकीकरण के लिए किस चार सूत्री लक्ष्य की घोषणा की गई?
उत्तर:
इस चार सूत्री लक्ष्य में ये चार बातें शामिल थीं-विज्ञान, उद्योग, कृषि तथा रक्षा का। विकास।

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प्रश्न 33.
चीन में 4 मई के आन्दोलन की 70वीं वर्षगांठ (1989 में) पर घठित घटना की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:

  • इस अवसर पर अनेक बुद्धिजीवियों ने अधिक खुलेपन की माँग की और कड़े सिद्धान्तों को समाप्त करने के लिए आवाज उठाई।
  • बीजिंग के तियानमेन चौक पर लोकतन्त्र की मांग करने वाले छात्रों के प्रदर्शन का क्रूरतापूर्वक दमन कर दिया गया।

प्रश्न 34.
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आज ताइवान की क्या स्थिति है?
उत्तर:
आज राजनयिक स्तर पर अधिकांश देशों के व्यापार मिशन केवल ताइवान में ही हैं। परन्तु वे ताइवान में अपने दूतावास स्थापित नहीं कर सकते और न ही. वहाँ की सरकार के साथ राजनयिक सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि ताइवान को आज भी चीन का अंग माना जाता है।

प्रश्न 35.
चीन के साम्यवादी दल और उसके समर्थकों ने परम्परा को समाप्त करने का प्रयास क्यों किया?
उत्तर:
चीन के साम्यवादी दल तथा उसके समर्थकों ने निम्नलिखित कारणों से परम्परा को समाप्त करने का प्रयास किया-

  • उनका विचार था कि परम्परा लोगों को गरीबी में जकड़े हुए है।
  • उनका मानना था कि परम्परा महिलाओं को उनकी स्वतन्त्रता से वंचित रखती है और देश के विकास में बाधा डालती है।

प्रश्न 36.
19वीं शताब्दी के आरम्भ में चीन और जापान की राजनीतिक स्थिति की तुलना कीजिए।
उत्तर:
19वीं शताब्दी के आरम्भ में चीन का पूर्वी एशिया पर प्रभुत्व था। वहाँ छींग राजवंश की सत्ता बहुत ही सुरक्षित जान पड़ती थी। दूसरी ओर जापान एक छोटा-सा देश था, जो अलग-अलग जान पड़ता था।

प्रश्न 37.
चीन और जापान के भौतिक भूगोल में कोई दो अन्तर बताइए।
उत्तर:

  • चीन एक विशाल महाद्वीपीय देश है। इसमें कई तरह के जलवायु क्षेत्र हैं। इसके विपरीत जापान एक द्वीप श्रृंखला है। इसमें चार मुख्य द्वीप हैं। होश, क्यूश, शिकोक तथा होकाइदो।
  • चीन भूकम्प क्षेत्र में नहीं आता, जबकि जापान बहुत ही सक्रिय भूकम्प क्षेत्र में आता है।

प्रश्न 38.
चीन के प्रमुख जातीय समूह तथा प्रमुख भाषा का नाम बताएँ। यहाँ की अन्य राष्ट्रीयताएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
चीन का प्रमुख जातीय समूह ‘हान’ तथा प्रमुख भाषा चीनी (पुतोंगहुआ) है। यहाँ की अन्य राष्ट्रीयताएँ हैं-उइघुर, हुई, मांचू तथा तिब्बती।

प्रश्न 39.
जापान की जनसंख्या में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
उत्तर:
जापान की अधिकतर जनसंख्या जापानी है। इसके अतिरिक्त यहाँ कुछ आयनू अल्पसंख्यक तथा कुछ कोरिया के लोग भी रहते हैं। कोरिया के लोगों को यहाँ उस समय मजदूर के रूप में लाया गया था जब कोरिया जापान का उपनिवेश था।

प्रश्न 40.
जापान के लोगों के भोजन.की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
जापान के लोगों का मुख्य भोजन चावल है और मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। यहाँ कच्ची मछली साशिमी या सूशी बहुत ही लोकप्रिय है क्योंकि इसे बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

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प्रश्न 41.
16वीं शताब्दी के अन्तिम चरण में जापान में भविश्य के राजनीतिक विकास की भूमिका तैयार करने में किन परिवर्तनों का योगदान था?
उत्तर:

  • किसानों से शस्त्र ले लिए गए। अब केवल समुराई ही तलवार रख सकते थे। इससे शान्ति और व्यवस्था बनी रही।
  • दैम्यो को अपने क्षेत्रों की राजधानी में रहने के आदेश दिए गए। उन्हें काफी सीमा तक स्वायत्तता प्रदान की गई।
  • मालिकों और करदाताओं का निर्धारण करने के लिए भूमि का सर्वेक्षण किया गया और भूमि का वर्गीकरण उत्पादकता के आधार पर किया गया। इसका उद्देश्य राजस्व के लिए स्थायी आधार बनाना था।

प्रश्न 42.
17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान में होने वाले नगरों के विस्तार की विशेषताएं बताओ।
उत्तर:

  • 17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान का एदो नगर संसार का सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर बन गया।
  • ओसाका और क्योतो भी बड़े शहरों के रूप में उभरे।
  • दुर्गों वाले कम-से-कम 6 शहर ऐसे थे जहाँ की जनसंख्या 50,000 से अधिक थी। इसकी तुलना में अधिकतर यूरोपीय देशों में केवल एक-एक ही बड़ा शहर था।

प्रश्न 43.
जापानी लोग (16वीं शताब्दी के अन्तिम चरण में) छपाई कैसे करते थे?
उत्तर:
जापानी लोगों को यूरोपीय छपाई पसन्द नहीं थी। वे लकड़ी के ब्लाकों से छपाई करते थे। पुस्तकों की लोकप्रियता से पता. चलता है कि पुस्तकों की छपाई व्यापक स्तर पर की जाती थी।

प्रश्न 44.
16वीं तथा 17वीं शताब्दी में जापान को एक धनी देश क्यों समझा जाता था?
उत्तर:
जापान चीन से रेशम जैसी विलास की वस्तुएँ तथा भारत से कपड़े का आयात करता था। जापान इसका मूल्य सोने में चुकाता था। इसी कारण जापान को एक धनी देश समझा जाता था।

प्रश्न 45.
जापान द्वारा अपने आयातों का मूल्य सोने में चुकाने से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े बोझ को कम करने के लिए उठाए गए कोई दो पग बताइए।
उत्तर:

  • बहुमूल्य धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी गई।
  • निशिजिन (क्योतो) में रेशम उद्योग का विकास किया गया, ताकि रेशम का आयात न करना पड़े। शीघ्र ही यह उद्योग संसार का सबसे बड़ा उद्योग बन गया।

प्रश्न 46.
कॉमोडोर पेरी (अमेरिका) जापान कब आया? उसके प्रयत्नों से अमेरिका तथा जापान के बीच हुई सन्धि की कोई दो शर्ते बताएँ।
उत्तर:
कॉमोडोर पेरी 1853 ई. में जापान आया। उसके प्रयत्नों से अमेरिका तथा जापान के बीच हुई सन्धि के अनुसार-

  • जापान के दो बन्दरगाह अमेरिकी जहाजों के लिए खोल दिए गए।
  • अमेरिका को जापान में थोड़ा-बहुत व्यापार करने की छूट भी मिल गई। इस घटन को ‘जापान का खुलना’ भी कहते हैं।

प्रश्न 47.
निशिजिन (क्योतो) में रेशम उद्योग के विकास के कोई तीन पहलू बताइए :
उत्तर:

  • 1713 से यहाँ केवल देशी रेशमी धागा प्रयोग किया जाने लगा, जिससे इस उद्योग को और अधिक प्रोत्साहन मिला।
  • निशिजिन में केवल विशिष्ट प्रकार के महंगे उत्पाद बनार जाते थे।
  • 1859 ई. में देश का व्यापार आरम्भ होने पर रेशम जापान की अर्थव्यवस्था व लिए मुनाफे का प्रमुख स्रोत बन गया।

प्रश्न 48.
मेजी पुर्नस्थापना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
1867-68 ई. में जापान में शोगुन (तोकुगोवा वंश का) शासन समाप्त कर दिए गया और उसके स्थान पर नये अधिकारी तथा सलाहकार सामने आये। ये लोग जापानी सम्रा के नाम पर शासन चलाते थे। इस प्रकार देश में सम्राट फिर से सर्वेसर्वा बन गया। उसने मेज की उपाधि धारण की। जापान के इतिहास में इस घटना को मेजी पुर्नस्थापना कहा जाता है।

प्रश्न 49.
जापान में मेजी शासन के अधीन ‘फुकोकु क्योहे’ के नारे से क्या तात्पर्य था?
उत्तर:
फुकोकु क्योहे के नारे से तात्पर्य था-समृद्ध देश, मजबूत सेना। वास्तव में सरकार ने यह जान लिया था कि उसे अपनी अर्थव्यवस्था का विकास तथा मजबूत सेना का निर्माण करने की आवश्यकता है, वरना उन्हें भी भारत की तरह दास बना लिया जाएगा। इसीलिए फुकोकु क्योहे का नारा दिया गया।

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प्रश्न 50.
‘सम्राट व्यवस्था’ से जापानी विद्वानों का क्या अभिप्राय था?
उत्तर:
सम्राट व्यवस्था से जापानी विद्वानों का अभिप्राय ऐसी व्यवस्था से था, जिसमें सम्राट नौकरशाही और सेना मिलकर सत्ता चलाते थे। नौकरशाही तथा सेना सम्राट के प्रति उत्तरदायी होती थी।

प्रश्न 51.
जापान में नयी विद्यालय व्यवस्था क्या थी? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
1870 के दशक से जापान में नयी विद्यालय-व्यवस्था अपनाई गई। इसके अनुसार सभी लड़के-लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य कर दिया गया। पढ़ाई की फीस बहुत कम थी। परिणाम यह हुआ कि 1910 तक ऐसी स्थिति आ गई कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रहा।

प्रश्न 52.
मेजी शासन के अधीन किए गए कोई दो सैनिक परिवर्तन बताएँ।
उत्तर:
मेजी शासन के अधीन निम्नलिखित सैनिक परिवर्तन हुए-

  • 20 साल से अधिक आयु वाले प्रत्येक नवयुवक के लिए एक निश्चित समय के लिए सैनिक सेवा अनिवार्य कर दी गई।
  • एक आधुनिक सैन्य बल तैयार किया गया।

प्रश्न 53.
जापान में लोकतान्त्रिक संविधान और आधुनिक सेना के दो अलग आदर्शों को महत्त्व देने के क्या परिणाम निकलें ?
उत्तर:

  • जापान आर्थिक रूप से विकास करता रहा।
  • सेना ने साम्राज्य विस्तार के लिए दृढ़ विदेश नीति अपनाने के लिए दबाव डाला। इस कारण चीन और रूस के साथ युद्ध हुए, जिनमें जापान विजयी रहा। शीघ्र ही उसने अपना एक औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित कर लिया।

प्रश्न 54.
1902 की आंग्ल-जापान संधि पर ब्रिटेन ने हस्ताक्षर क्यों किए? जापान के लिए इस संधि का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
1902 की आंग्ल-जापान संधि पर ब्रिटेन ने इसलिए हस्ताक्षर किए क्योंकि वह चीन में रूसी प्रभाव को रोकना चाहता था। जापान के लिए इस संधि.का यह महत्त्व था कि इसके अनुसार उसे विश्व के अन्य उपनिवेशवादियों के बराबर का दर्जा मिल गया।

प्रश्न 55.
मेजी युग में अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए उठाए गए कोई तीन कदम बताइए।
उत्तर:

  • कृषि पर कर लगाकर धन एकत्रित किया गया।
  • 1870-1872 में तोक्यो (Tokyho) और योकोहामा बन्दरगाह के बीच जापान की पहली रेल लाइन बिछाई गई।
  • वस्तु उद्योग के विकास के लिए यूरोप में मशीनें आयात की गई।

प्रश्न 56.
जापान में 1920 के बाद जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
उत्तर:
जापान में जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने प्रवास को बढ़ावा दिया। पहले लोगों को उत्तरी द्वीप होकायदो की ओर भेजा गया। यह काफी हद तक एक स्वतन्त्र प्रदेश था और वहाँ आयनू कहे जाने वाले लोग रहते थे। इसके बाद उन्हें हवाई, ब्राजील और जापान का बढ़ते हुए औपनिवेशिक साम्राज्य की ओर भेजा गया।

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लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीनी कोमितांग पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें।
उत्तर:
कोमितांग की स्थापना 1912 ई. में चीन के राष्ट्रवादी नेता सनयात सेन ने की थी। उनके तीन मुख्य उद्देश्य थे-

  • चीन को विदेशी प्रभुत्व से मुक्त करवाना
  • चीन में आधुनिक लोकतन्त्र की स्थापना करना तथा
  • भूमि सुधारों द्वारा कृषकों को सामन्ती नियन्त्रण से मूक्त। करवाना।

सनयात सेन के अधीन कोमिनतांग की लोकप्रियता दूर-दूर तक फैल गई। इस संस्था के उद्देश्य 1921 ई. में स्थापित साम्यवादी दल से मेल खाते थे। परन्तु शीघ्र ही दोनों दलों में मतभेद उत्पन्न हो गए। 1925 ई. में सनयात सेनं की मृत्यु हो गई और कोमिनतांग का नेतृत्व च्यांग-काई-शेक के हाथों में आ गया। उसने साम्यवादियों पर क्रूर अत्याचार करना आरम्भ कर दिए। विवश होकर साम्यवादी नेता माओ जेड़ांग ने महाप्रस्थान (600 मील की लम्बी यात्रा) का कार्यक्रम अपनाया और उत्तरी चीन में अपना प्रभाव बढ़ा लिया। अन्ततः 1949 ई. में उसने च्यांग-काई-शेक को फारमोसा (वर्तमान ताइवान) भाग जाने के लिए विवश कर दिया। इस प्रकार कोतिनतांग का पतन हो गया।

प्रश्न 2.
चीन की महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति (1965) क्या थी? इसका क्या। परिणाम निकला?
उत्तर:
‘समाजवादी व्यक्ति’ की रचना के इच्छुक माओवादियों और माओ की साम्यवादी विचारधारा के आलोचकों के बीच संघर्ष छिड़ गया। 1965 की महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति इसी संघर्ष का परिणाम थी। माओ ने यह क्रान्ति आलोचकों का सामना करने के लिए आरम्भ की थी पुरानी संस्कृति, पुराने रिवाजों और पुरानी आदतों के विरुद्ध अभियान छेड़ने के लिए रेड गार्ड्स-मुख्यतः छात्रों और सेना का प्रयोग किया गया। छात्रों और पेशेवर लोगों को जनता से सीख लेने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में भेजा गया। साम्यवादी होने की विचारधारा पेशेवर ज्ञान से भी अधिक महत्त्वपुर्ण बन गई। तर्कसंगत वादविवाद का स्थान दोषरोपण और नारेबाजी ने ले लिया।

परिणाम – सांस्कृतिक क्रान्ति से देश में खलबली मच गई, जिससे पार्टी कमजोर हुई अर्थव्यवस्था और शिक्षा के प्रसार में भी भारी बाधा आई। परन्तु 1960 के उत्तरार्द्ध से स्थिति बदलने लगी। 1975 में पार्टी ने एक बार फिर कड़े सामाजिक अनुशासन और औद्योगिक अर्थव्यवस्था के निर्माण पर बल दिया, ताकि देश बीसवीं शताब्दी के अन्त तक एक शक्तिशाली देश बन सके।

प्रश्न 3.
चीन में हुई सांस्कृतिक क्रान्ति की व्याख्या करें।
उत्तर:
चीन में सन् 1965 में माओ ने महान सर्वहारा सांस्कृतिक क्रान्ति की शुरूआत की। माओ समाजवादी व्यक्ति की रचना के इच्छुक थे तथा दक्षता के बजाय विचारधारा पर बल देते थे। इसके विपरीत चीन में कुछ लोग समाजवादी विचारधारा के स्थान पर पूँजीवाद पर बल दे रहे थे। माओ ने इसी द्वन्द की समाप्ति हेतु सांस्कृतिक क्रान्ति की शुरुआत की जिसके तहत प्राचीन संस्कृति और पुराने रिवाजों और पुरानी आदतों के खिलाफ रेड गार्डस का इस्तेमाल किया गया। रेड गार्डस में मुख्यत: सेना एवं छात्रों का प्रयोग होता था। नागरिकों के दोषरोपण ने तर्कसंगत बहस का स्थान ले लिया और चीन सांस्कृतिक परिवर्तन की करवट लेने लग गया।

प्रश्न 4.
माओ-त्से-तुंग ने पार्टी (साम्यवादी) द्वारा निर्धारित लक्ष्या की प्राप्ति के लिए क्या किया? क्या उनके तौर-तरीके पार्टी के सभी लोगों को पसंद थे?
उत्तर:
माओ-त्से-तुंग पार्टी द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जनसमुदाय को प्रेरित करने में सफल रहे। उनकी चिन्ता ‘समाजवादी व्यक्ति’ बनाने की थी जिसे पांच चीजें प्रिय होनी थीं-पितृभूमि, जनतप, काम, विज्ञान और जन सम्पत्ति। किसानों, महिलाओं, छात्रों और अन्य गुटों के लिए जन संस्थाएँ बनाई गईं। उदाहरण के लिए ‘ऑल चाइना डेमोक्रेटिक वीमेंस फेडरेशन’ के 760 लाख सदस्य थे। इसी प्रकार ‘ऑल चाइना स्टूडेंट्स फेडरेशन’ के 32 लाख 90 हजार सदस्य थे। परन्तु ये लक्ष्य और तरीके पार्टी के सभी लोगों को पसन्द नहीं थे। 1953-54 में कुछ लोग. औद्योगिक (1896-1969) तथा तंग शीयाओफी (1904-97) ने कम्यून प्रथा को बदलने की चेष्ठा को क्योंकि यह कुशलतापूर्वक काम नहीं कर रही थी। घरों के पिछवाड़े में बनाया गया स्टील औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी नहीं था।

प्रश्न 5.
चीन में भयंकर अकाल क्यों पड़ा? अथवा, माओ का ‘आगे की ओर महान छलांग’ कार्यक्रम क्यों असफल रहा?
उत्तर:
चीन का भयंकर अकाल ‘आगे की ओर महान छलांग’ कार्यक्रम की असफलता का परिणाम था। यह कार्यक्रम मुख्यतः तकनीकी कारणों से असफल रहा। कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए त्रुटिपूर्ण कृषि तकनीकों का प्रयोग किया गया। उदाहरण के लिए-

  • भूमि में सामान्य मात्रा से दस गुणा अधिक बीज डाला गया। इससे पौधे बढ़ने से पहले ही मर गए।
  • गेहूँ और मक्का को एक साथ बोने का प्रयास किया गया। परन्तु यह प्रयास असफल रहा।
  • चिड़ियाँ खेत में बिखरे बीजों को खा जाती थी। इसलिए उन्हें बड़ी संख्या में मार दिया गया। दुर्भाग्य से इसके भी बुरे परिणाम निकले। जब फसलों पर कीड़े आए तो उन्हें खाने के लिए चिड़ियाँ न रहीं।

अतः फसलें नष्ट हो गई। इसके अतिरिक्त सिंचाई यन्त्रों को गलत स्थानों पर स्थापित किया गया, जिससे भूमि का बड़े पैमाने पर अपरदन हुआ। बोई जाने वाली फसलों के सम्बन्ध में कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं दिए गए थे। इसके परिणामस्वरूप सब्जियों तथा अन्य फसलों का उत्पादन शून्य हो गया। इस प्रकार देश में भयंकर अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई।

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प्रश्न 6.
चीन में भयंकर अकाल के दौरान सरकार द्वारा भ्रामक प्रचार तथा उसकी त्रुटिपूर्ण नीति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीनी नेता केवल आधिकारिक आंकड़ों में विश्वास रखने लगे थे। फसलों की रिकार्ड वृद्धि केवल मात्र दिखावा थी। वास्तव में उत्पादन आँकड़ों का मात्र एक तिहाई था। सरकार ने स्थिति को वश में रखने के लिए भ्रामक प्रचार की नीति अपनाई तथा नये-नये नारे गढ़ लिए। उदाहरण के लिए 1959 ई. में अकाल के समय लोगों को घास को उबालकर खाना पड़ रहा था उस समय पार्टी ने लोगों को सुझाव दिया कि “अधिक उत्पादन वाले वर्ष में भी कम खायें”। लोग इतने कमजोर हो गए कि वह काम भी नहीं कर सकते थे। वे सारा दिन घर पर रहने लगे। इस स्थिति में देश के रेडियो लोगों को आराम करने की सलाह देने लगे। देश के डॉक्टरों ने प्रचार किया कि चीन के लोगों को विटामिन तथा वसा की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका शारीरिक गठन ही विशेष प्रकार का है। सरकार की इस त्रुटिपूर्ण नीति ने अकाल की स्थिति को और भी गम्भीर बना दिया।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(i) माओ की आगे की महान छलांग (Great Leap Forward) कार्यक्रम
(ii) पिंगपोंग (Ping Pong) कूटनीति
(iii) तियाननमेन स्क्वायर हत्याकांड।
उत्तर:
(i) माओ की आगे की ओर महान छलांग (Great Leap Forward) कार्यक्रम – ‘आगे की ओर महान् छलांग’ माओ का एक आर्थिक कार्यक्रम था। यह कार्यक्रम 1959 ई. में आरम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत ग्रामीण सहकारी समितियों और सामूहिक खेतों को मिलाकर बड़े-बड़े कम्यून बना दिए गए। ये कम्यून राष्ट्र के स्वामित्व के प्रतीक थे। इसका उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ औद्योगिकीरण को बढ़ावा देना था। परन्तु इसके विनाशकारी परिणाम निकले। इसका कारण यह था कि कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पार्टी के अधिकारी इसे उस पैमाने पर लागू करने में सक्षम नहीं थे, जैसा माओ ने सोचा था। अत: एक बार फिर चीन को खाद्यान्न के अभाव तथा औद्योगिक मन्दी का सामना करना पड़ा।

(ii) पिंगपोंग (Ping Pong) कूटनीति – साम्यवादी चीन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सम्बन्ध तनावपूर्ण थे। इसके दो मुख्य कारण थे-एक तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था अलग-अलग थी। दूसरे अमेरिका ने अभी तक जनबादी चीन को मान्यता नहीं दी थी। वह ताइवान में स्थित च्यांग-काई-शेक को चीन की वास्तविक सरकार मानता था। संयुक्त राष्ट्र में भी ताइवान को ही सदस्यता प्राप्त थी। परन्तु 1972 ई. में अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्यन ने एकाएक चीन की यात्रा करने का कार्यक्रम बना लिया।

यह कार्यक्रम दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगभग दस वर्षों से चल रही कूटनीतिक वार्ताओं का परिणाम था। इन्हीं गुप्त वार्ताओं को ही पिंगपोंग कूटनीति का नाम दिया जाता था। दोनों देशों के बीच सम्बन्ध में पाकिस्तान ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अन्ततः मार्च, 1972 ई. में निक्सन ने चीन की यात्रा की। उसने जनवादी चीन को ही वास्तविक चीन स्वीकार कर लिया और उसे मान्यता दे दी। इसके परिणामस्वरूप ताइवान का स्थान जनवादी चीन को मिल गया। इस प्रकार अमेरिका और चीन के बीच स्थायी रूप से राजनीतिक सम्बन्ध स्थापित हो गए।

(iii) तियाननमेन स्क्वायर हत्याकांड – चीन में साम्यवादी पार्टी के कुछ नेता कठोर नीति में विश्वास रखते थे। उन्हें चीनी शासक डेंग के उदारवादी तरीके पसन्द नहीं थे। इसलिए वे डेंग पर कठोर नीति अपनाने के लिए दबाव डाल रहे थे। डेंग ने अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए विद्यार्थियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया कि वे पार्टी की कठोर नीतियों के समर्थकों की कमजोरियों का पता लगाएँ। परन्तु 1988-89 में उसके अपने आर्थिक सुधार ही असफल होते दिखाई देने लगे। वस्तुओं के दाम वेतनों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गए। मई, 1989 ई. में बीजिंग के विद्यार्थी नगर के प्रसिद्ध तियाननमेन चौक में शान्तिपूर्वक इकट्ठे होने लगे। वे और अधिक राजनीतिक सुधारों, प्रजातन्त्र तथा पार्टी में भ्रष्टाचार को समाप्त करने की मांग करने लगे।

अपनी मांग को पूरा करवाने के लिए उन्होंने संगीतमय रंगारंग प्रदर्शन भी किए। प्रजातन्त्र को अर्पित एक बुत भी बनाया गया, जिसके गाने में उत्साहपूर्वक मालाएं पहनाई गई। इन प्रदर्शनों की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए सरकार के कान खड़े हो गए। उसने इन्हें साम्यवादी पार्टी की सत्ता के लिए चुनौती माना। डेंग स्वयं कठोर नीतिः पर उतर आया। उसने अपने दो उदारवादी अधिकारियों को हय दिया। 3 जून, 1989 की रात को चौक में टैंकों सहित सेना भेज दी गई। चौक में एकत्रित 1500-3000 लोगों को गोलियों से उड़ा दिया गया। इस हत्याकांड की पूरे विश्व में भर्त्सना हुई। परन्तु चीन ने इसकी कोई परवाह न की।

प्रश्न 8.
1911 ई. की चीनी क्रान्ति के कारणों का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर:
कारण-1911 ई. की क्रान्ति का एक महत्त्वपूर्ण कारण उसकी बढ़ती हुई जनसंख्या थी। इससे भोजन की समस्या गम्भीर होती जा रही थी। इसके अतिरिक्त 1910-1911 ई. की भयंकर बाढ़ों के कारण लाखों लोगों की जानें गई तथा देश में भुखमरी फैल गई। इससे लोगों में असन्तोष बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप विद्रोह की आग भड़क उठी। क्रान्ति का दूसरा कारण ‘प्रवासी चीनियों का योगदान’ था। विदेशों में रहने वाले चीनी लोग काफी धनी हो गए थे। वे चीन में सत्ता परिवर्तन के पक्ष में थे।

अतः उन्होंने क्रान्तिकारी संस्थाओं की खूब सहायता की। मंचू सरकार के नए कर भी क्रान्ति लाने में सहायक सिद्ध हुए। इन करों के लगने से चीन के लोगों में क्रान्ति की भावनाएँ भड़क उठीं। जापान की उन्नति भी चीनी क्रान्ति एक कारण था। चीन के लोग मंचू सरकार को समाप्त करके जापान की भाँति उन्नति करना चाहते थे। चीन में यातायात के साधनों का सुधार होने के कारण चीनी क्रान्ति के विचारों के प्रसार को काफी बल मिला। अतः यह भी क्रान्ति का एक अन्य कारण था।

प्रश्न 9.
1911 की चीनी क्रान्ति के परिणामों तथा महत्त्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
1911 ई. की क्रान्ति के दो मुख्य परिणाम निकले-मंचू राजवंश का अन्त तथा गणतन्त्र की स्थापना। परन्तु इस क्रान्ति का महत्त्व इन्हीं दो बातों तक ही सीमित नहीं था। वास्तव में यह क्रान्ति गणतन्त्र की राजतन्त्र पर विजय थी। इसकी एक विशेष बात यह भी थी कि वह विजय बिना किसी रक्तपात के प्राप्त की गई थी। इसके अतिरिक्त चीन की जनता को एक संविधान प्राप्त हुआ और देश में जनता की सम्प्रभुत्ता की घोषणा की गई। इस क्रान्ति की एक और विशेष बात यह रही कि क्रान्तिकारियों ने सम्राट के प्रतिनिधि युआन शिकाई को ही चीनी गणतन्त्र के राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार कर लिया। इसके अतिरिक्त विदेशी शक्तियाँ भी इस क्रान्ति के प्रति पूर्णतया तटस्थ (Neutral) रहीं। देश में 1911 की क्रान्ति ने राष्ट्रीय भावना का संचार किया। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि इसने चीनियों को शोषण से मुक्ति दिलाई और उनके सम्मान को बढ़ाया।

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प्रश्न 10.
आधुनिक चीन का संस्थापक किसे माना जाता है? उनका तथा उनके सिद्धान्तों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
सन-यात-सेन (1866-1925) को आधुनिक चीन का संस्थापक माना जाता है। वह एक गरीब परिवार से थे। उन्होंने मिशन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण की जहाँ उनका परिचय लोकतन्त्र और ईसाई धर्म से हुआ। उन्होंने टास्टरी की पढ़ाई की। परन्तु वह चीन में भविष्य को लेकर चिन्तित थे। उनका कार्यक्रम तीन सिद्धान्त (सन-मिन-चुई) के नाम से विख्यात है। ये तीन सिद्धान्त हैं-

  • राष्ट्रवाद-इसका अर्थ था मांचू वंश, जिसे विदेशी राजवंश माना जाता था को सत्ता से हटाना।
  • गणतन्त्र-गणतान्त्रिक सरकार की स्थापना करना।
  • समाजवाद-पूँजी का नियमन करना और भूस्वामित्व में बराबरी लाना। सन-यात-सेन के विचार फुओयीनतांग के राजनीतिक दर्शन का. आधार बने। उन्होंने कपड़ा, भोजन, घर और परिवहन-इन चार बड़ी आवश्यकताओं को रेखांकित किया।

प्रश्न 11.
चीन में 4 मई के आन्दोलन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
4 मई, 1919 को प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुए शान्ति सम्मेलन के निर्णयों के विरोध में बीजिंग में एक जोरदार प्रदर्शन हुआ। भले ही चीन ने ब्रिटेन के नेतृत्व में विजयी आन्दोलन का रूप ले लिया जिसने एक पूरी पीढ़ी को परम्परा से हटकर चीन को अधुनिक विज्ञान, लोकतन्त्र और राष्ट्रवाद द्वारा बचाने के लिए प्रेरित किया। क्रान्तिकारियों ने देश के संसाधनों को विदेशियों से मुक्त कराने, असमानताएँ समाप्त करने और गरीबी को कम करने का नारा लगाया। उन्होंने लेखन में सरल भाषा का प्रयोग करने, पैरों को बाँधने की प्रथा और औरतों की अधीनस्थता को समाप्त करने, विवाह में बराबरी लाने और गरीबी को समाप्त करने के लिए आर्थिक विकास की माँग की।

प्रश्न 12.
चीन में अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश दिलाने वाली परीक्षा प्रणाली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीन में अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश अधिकतर परीक्षा द्वारा ही होता था। इसमें 8 भाग वाला निबन्ध निर्धारित प्रपत्र में (पा-कू-वेन) शास्त्रीय चीनी में लिखना होता था। यह परीक्षा विभिन्न स्तरों पर प्रत्येक 3 वर्ष में 2 बार आयोजित की जाती थी। पहले स्तर की परीक्षा में केवल 1-2 प्रतिशत लोग ही 24 साल की आयु तक पास हो पाते थे और वे ‘सुन्दर प्रतिभा’ बन जाते थे। इस डिग्री से उन्हें निचले कुलीन वर्ग में प्रवेश मिल जाता था। 1850 से पहले देश में 526869 सिविल और 212330 सैन्य प्रान्तीय (शेंग हुआन) डिग्री वाले लोग मौजूद थे।

क्योंकि देश में केवल 27000 राजकीय पद थे। इसलिए निचले दर्जे के कई डिग्रीधारकों को नौकरी नहीं मिल पाती थी। यह परीक्षा विज्ञान और प्रोद्योगिकी के विकास में बाधक थी। इसका कारण यह था कि इसमें केवल साहित्यिक कौशल पर ही बल दिया जाता था। केवल क्लासिक चीनी सीखने की कला पर ही आधारित होने के कारण 1905 ई. में इस परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 13.
1930 ई. जुनवू (चीन) में क्या सर्वेक्षण किया गया? इसका क्या उद्देश्य और महत्त्व था?
उत्तर:
1930 में जुनवू में किए गए एक सर्वेक्षण में माओ-त्से-तुंग ने नमक और सोयाबीन जैसे दैनिक प्रयोग की वस्तुओं, स्थानीय संगठनों की तुलनात्मक मजबूतियों, छोटे व्यापारियों, दस्तकारों और लोहारों, वेश्याओं तथा धार्मिक संगठनों की मजबूतियों का परीक्षण किया। इसका उद्देश्य शोषण के अलग-अलग स्तरों को समझना था। उन्होंने ऐसे आँकड़े इकट्ठे किए कि कितने किसानों ने अपने बच्चों को बेचा है और इसके लिए उन्हें कितने पैसे मिले। लड़के 100-200 यूआन पर बिकते थे। परन्तु लड़कियों की बिक्री के कोई प्रमाण नहीं मिले, क्योंकि जरूरत मजदूरों की थी लैंगिक शोषण की नहीं। इस अध्ययन के आधार पर उन्होंने सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के तरीके पेश किए।

प्रश्न 14.
चीन की ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ सरकार की सफलताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीन में 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार स्थापित हुई। यह ‘नए लोकतन्त्र’ के सिद्धान्तों पर आधारित थी। नया लोकतन्त्र सभी सामाजिक वर्गों का गठबन्धन था। अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्र सरकार के नियन्त्रण में रखे गए। निजी कारखानों और भूस्वामित्व को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया गया। यह कार्यक्रम 1953 तक चला, जब सरकार ने समाजवादी परिवर्तन का कार्यक्रम आरम्भ करने की घोषणा की। 1958 में ‘लम्बी छलांग वाले’ आन्दोलन द्वारा देश का तेजी से औद्योगीकरण करने का प्रयास किया गया। लोगों को अपने घर के पिछवाड़े में इस्पात की भट्टियाँ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीण इलाकों में पीपुल्स कम्यूंस आरम्भ किए गए। इसमें लोग सामूहिक रूप से भूमि के स्वामी थे और मिल-जुल कर फसल उगाते थे।

प्रश्न 15.
चीन के भौतिक भूगोल, प्रमुख जातीय समूहों तथा भाषाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक भूगोल – चीन एक विशालकाय महाद्वीपीय देश है। इसमें कई प्रकार की जलवायु वाले क्षेत्र शामिल हैं। इसके मुख्य क्षेत्र में 3 प्रमुख नदियाँ हैं-पीली नदी अथवा हुआंग हो, संसार की तीसरी सबसे लम्बी नदी यांग्त्सी और पर्ल नदी। देश का बहुत बड़ा भाग पहाड़ी है।

जातीय समूह तथा भाषाएँ – चीन का सबसे प्रमुख जातीय समूह हान है और यहाँ की प्रमुख भाषा है-चीनी । हाल के अतिरिक्त चीन में कई अन्य राष्ट्रीयताएं भी हैं; जैसे-उइघुर, हुई, मांचू और तिब्बती। इसी प्रकार कई अन्य भाषाएं भी बोली जाती हैं । जैस-कैंटनीज कैंटन (गुआंगजाओ) की बोली-उए और शंघाईनीज (शंघाई की बोली-वू)।

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प्रश्न 16.
चीनी भोजनों पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चीनी भोजनों में क्षेत्रीय विविधता पायी जाती है। इनमें मुख्य रूप से चार प्रकार के भोजन शामिल हैं।-

  • सबसे प्रसिद्ध पाक प्रणाली दक्षिणी या केंटोनी है। यह कैंटन तथा उसके आन्तरिक क्षेत्रों की पाक प्रणाली है। इसकी प्रसिद्धि इस बात के कारण है कि विदेशों में रहने वाले अधिकतर चीनी कैंटन प्रान्त से सम्बन्धित हैं। डिम सम (शाब्दिक अर्थ दिल को छूना) यहीं का जाना माना खाना है। यह गुंधे हुए आटे को सब्जी आदि भरकर उबाल कर बनाया गया व्यंजन है।
  • उत्तर में गेहूँ मुख्य आहार है।
  • शेचुओं में प्राचीन काल में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा लाए गए मसाले और रेशम मार्ग द्वारा पन्द्रहवीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा लाई गई मिर्च के कारण झालदार और तीखा खाना मिलता है।
  • पूर्वी चीन में चावल और गेहूँ दोनों खाए जाते हैं।

प्रश्न 17.
जापान की भौतिक विशेषताओं की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
जापान की मुख्य भौतिक विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • जापान एक द्वीप शृंखला है । इनमें से चार सबसे बड़े द्वीप हैं-होंशू, क्यूशू, शिकोकू और होकाइदो। सबसे दक्षिण में ओकिनावा द्वीपों की श्रृंखला है। मुख्य द्वीपों की 50 प्रतिशत से अधिक भूमि पहाड़ी है।
  • जापान बहुत ही सक्रिय भूकम्प क्षेत्र में आता है।
  • जापान की भौगोलिक परिस्थितियों ने वहाँ की वास्तुकला को प्रभावित किया है।
  • देश की अधिकतर जनसंख्या जापानी है। परन्तु यहाँ कुछ आयनू अल्पसंख्यक और कुछ कोरिया के लोग भी रहते हैं। कोरिया के लोगों को यहाँ श्रमिकों के रूप में उस समय लाया गया था जब कोरिया जापान का उपनिवेश था।
  • जापान में पशु नहीं पाले जाते हैं।
  • चावल यहाँ की मुख्य खाद्य फसल है और मछली प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। यहाँ की कच्ची मछली साशिमी अथवा सूशी अब संसार भर में लोकप्रिय है क्योंकि इसे बहुत ही स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है।

प्रश्न 18.
जापान पर तोकुगावा वंश के शोगुनों ने कब से कब तक शासन किया? वे अपना शासन किस प्रकार चलाते थे?
उत्तर:
जापान.पर क्योतो में रहने वाले सम्राट का शासन हुआ करता था। परन्तु बारहवीं शताब्दी तक वास्तविक सत्ता शोगुनों के हाथ में आ गई। वे सैद्धान्तिक रूप से राजा के नाम पर शासन करते थे। 1603 से 1867 तक तोकुगावा परिवार के लोग शोगुन पद पर आसीन थे। देश 250 भागों में विभाजित था, जिनका शासन दैम्यों लार्ड चलाते थे। शोगुन दैम्यो पर नियन्त्रण रखते थे। उन्होंने दैम्यो को लम्बे समय तक राजधानी एदो (आधुनिक तोक्यो) में रहने का आदेश दिया, ताकि वे उनके लिए कोई खतरा न बन जाएँ। शोगुन प्रमुख शहरों और खदानों पर भी नियन्त्रण रखते थे। जापान का योद्धा वर्ग सामुराई (शासन करने वाला) अभिजात था। वे शोगुन तथा दैम्यो की सेवा में थे।

प्रश्न 19.
जापान में नगरों का आकार कैसे बढ़ा ? इसका क्या महत्त्व था?
उत्तर:
जापान में दैम्यो की राजधानियों का आकार लगातार बढ़ने लगा। 17वीं शताब्दी के मध्य तक जापान में एदो (आधुनिक तोक्यो) संसार का सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर बन गया। इसके अतिरिक्त ओसाका और क्योतो भी बड़े शहरों के रूप में उभरे। दुर्गों बाले कम-से-कम छ: शहर ऐसे थे जहाँ की जनसंख्या 50,000 से भी अधिक थी। इसकी तुलना में उस समय के अधिकतर यूरोपीय देशों में केवल एक-एक ही बड़ा शहर था।
महत्तव-

  • बड़े शहरों के परिणामस्वरूप जापान की वाणिज्यिक अर्थव्यवस्था का विकास हुआ और वित्त एवं ऋण की प्रणालियाँ स्थापित हुईं।
  • व्यक्ति के गुण उसके पद से अधिक मूल्यवान समझे जाने लगे।
  • शहरों में जीवंत संस्कृति का प्रसार होने लगा।
  • बढ़ते हुए व्यापारी वर्ग ने नाटकों और कलाओं को संरक्षण प्रदान किया।
  • लोगों की पढ़ने में रुचि ने होनहार लेखकों को अपने लेखन द्वारा अपनी जीविका चलाने में सहायता पहुँचाई।

प्रश्न 20.
ताकुगावा शासन के अधीन जापान की अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तनों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
ताकुगावा शासन के अधीन जापान को बस धनी देश समझा जाता था। इसका कारण यह था कि वह चीन से रेशम जैसी विलासी वस्तुएँ, भारत से कपड़े का आयात करता था। इन आयतों का मूल्य चाँदी और सोने में चुकाया जाता था। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक भार पड़ा। अतः तामुगावा ने मूल्यवान् धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी। उन्होंने क्योतो में निशिजिन में रेशम उद्योग के विकास के लिए भी पग उठाये, ताकि रेशम का आयात कम किया जा सके। निशिजिन का रेशम विश्व भर में सबसे अच्छा. रेशम माना जाने लगा। मुद्रा के बढ़ते हुए प्रयोग और चावल के शेयर बाजार के निर्माण से पता चलता है कि अर्थतन्त्र नयी दिशाओं में विकसित हो रहा था।

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प्रश्न 21.
जापान में कामोडोर पेरी के आगमन और इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
1853 में अमेरिका ने कॉमोडोर मैथ्यू पेरी को जापान भेजा। उसने जापान सरकार से ए’ समझौते पर हस्ताक्षर करने की माँग। इसके अनुसार को अमेरिका के रराजनयिक और व्यापारिक सम्बन्ध बनाने थे। इस समझौते पर जापान ने अगले वर्ष हस्ताक्षर किए। वास्तव में जापान चीन के रास्ते में पड़ता था और अमेरिका के लिए चीन का विस्तृत बाजार बहुत ही महत्त्व रखता था। इसके अतिरिक्त अमेरिका को प्रशान्त महासागर में अपने बेड़ों के लिए ईंधन लेने के लिए स्थान चाहिए था। उस समय केवल एक ही पश्चिमी देश जापान के साथ व्यापार करता था और वह था-हालैंड।

महत्त्व – पेरी के आगमन ने जापान की राजनीति पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डाला। सम्राट का अचानक ही महत्त्व बढ़ गया। इससे पहले तक उसे बहुत ही कम राजनैतिक अधिकार प्राप्त थे। 1864 में एक आन्दोलन द्वारा शोगुन को जबरदस्ती सत्ता से हटा दिया गया और सम्राट मेजी को एदो में लाया गया। एदो को राजधनी बना दिया गया । इसका नया नाम तोक्यो रख गया जिसका अर्थ है पूर्वी राजधानी।

प्रश्न 22.
जापान को बाहरी संसार के लिए खोलने के पक्ष और विपक्ष में क्या तर्क दिया गए?
उत्तर:
जापान के अधिकारीगण और लोग यह जानते थे कि कुछ यूरोपीय देश भारत तथा कई अन्य स्थानों पर औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित कर रहे हैं। अंग्रेजों के हाथों चीन की पराजय के समाचार फैल रहे थे और इन्हें लोकप्रिय नाटकों में भी दर्शाया जा रहा था। इससे लोगों में यह भय उत्त्पन्न हो गया कि बाहरी दुनिया के साथ सम्पर्क से जापान को भी उपनिवेश बनाया जा सकता है। फिर भी देश के बहुत से विद्वान और नेता युरोप के नए विचारों तथा तकनीकों से सीख लेना चाहते थे. जबकि कछ अन्य विद्वान यरोपीय लोगों को अपने से दूर रखना चाहते थे। कुछ लोगों ने देश को बाहरी संसार के लिए धीरे-धीरे और सीमित रूप से खोलने के लिए तर्क दिया।

अतः जापानी सरकार ने फुकोकु क्योहे (समृद्ध देश, मजबूत सेना) के नारे के साथ नयी नीति की घोषणा की। उन्होंने यह समझ लिया कि उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था का विकास और मजबुत सेना का निर्माण करने की आवश्यकता है, अन्यथा उन्हें भी भारत की तरह दास बना दिया जाएगा। इस कार्य के लिए जनता में राष्ट्रीय भावना का विकास करने और प्रजा को नागरिक की श्रेणी में लाने की आवश्यकता थी।

प्रश्न 23.
जापान में ‘सम्राट व्यवस्था’ का पुनर्निर्माण किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
जापान में मेजी सरकार ने ‘सम्राट-व्यवस्था’ के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। सम्राट व्यवस्था से जापानी विद्वानों का अभिप्राय ऐसी व्यवस्था से था जिसमें सम्राट नौकरशाही और सेना मिलकर सत्ता चलाते थे और नौकरशाही तथा सेना सम्राट से प्रति उत्तरदायी होती थी। राजतान्त्रिक व्यवस्था की पूरी जानकारी के लिए कुछ अधिकारियों को यूरोप भेजा गया। सम्राट को सीधे-सीधे सूर्य देवी का वंशज माना गया। वह पश्चिमी ढंग के सैनिक वस्त्र पहनने लगा। उसके नाम से आधुनिक संस्थाएँ स्थापित करने के लिए अधिनियम बनाए जाने लगे। 1890 की शिक्षा सम्बन्धी राजाज्ञा ने लोगों को पढ़ने तथा जनता के सार्वजनिक एवं साँझे हितों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न 24.
जापान में 1870 के दशक में अपनाई गई नयी विद्यालय-व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1870 के दशक से जापान में नयी विद्यालय-व्यवस्था अपनाई गई। इसके अनुसार सभी लड़के-लड़कियों के लिए स्कूल जाना अनिवार्य कर दिया गया। 1910 तक ऐसी स्थिति आ गई कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वो नहीं रहा। पढ़ाई की फीस बहुत न थी। आरम्भ में पाठ्यक्रम पश्चिमी नमूनों पर आधारित था। परन्तु बाद में आधुनिक विचारों पर बल देने के साथ-साथ राज्य के प्रति निष्ठा और जापानी इतिहास के अध्ययन पर बल दिया जाने लगा। पाठ्यक्रम किताबों के चयन तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण पर शिक्षा मन्त्रालय नियन्त्रण रखता था। नैतिक संस्कृति का विषय पढ़ना प्रत्येक के लिए जरूरी था। पुस्तकों में माता-पिता के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति बफादारी और अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा विकसित की जाती थी।

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प्रश्न 25.
राष्ट्र के एकीकरण के लिए जापान की मेजी सरकार ने क्या पग उठाए?
उत्तर:
राष्ट्र के एकीकरण के लिए मेजी सरकार ने पुराने गाँव और क्षेत्रीय सीमाओं को बदल कर एक नया प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया। प्रत्येक प्रशासनिक इकाई के पास पर्याप्त राजस्व होना जरूरी था, ताकि स्थानीय स्कूल तथा स्वस्थ्य सुविधाएँ जारी रखी जा सकें। साथ ही ये इकाइयाँ सेना के लिए भर्ती केन्द्रों के रूप में भी कार्य कर सके 20 साल से अधिक आयु वाले प्रत्येक नवयुवक के लिए निश्चित अवधि के लिए सैनिक सेवा अनिवार्य कर दी गई।

एक आधुनिक सैन्य बल तैयार किया गया। राजनीतिक दलों के गठन को नियन्त्रित करने के लिए एक कानून-प्रणाली स्थापित की गई। सेंसर व्यवस्था को भी कठोर बनाया जाना था। ऐसे परिवर्तनों के कारण सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा। सेना और नौकरशाही को सीधा सम्राट के अधीन रखा गया। इसका उद्देश्य यह था कि संविधान बनने के बाद भी सेना और नौकरशाही सरकारी नियन्त्रण से बाहर रहे।

प्रश्न 26.
जापान की लिपियों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
जापानियों ने अपनी लिपि छठी शताब्दी में चीनियों से ली थी। परन्तु जापानी भाषा चीनी भाषा से बहुत अलग है। इसलिए उन्होंने दो ध्वन्यात्मक वर्णमालाओं का विकास भी किया-हीरागाना और काकाना। हीरागाना नारी सुलभ समझी जाती है, क्योंकि हेआन काल में बहुत-सी लेखिकाएँ इसका प्रयोग करती थीं। यह चीनी चित्रात्मक चिन्हों और ध्वन्यात्मक अक्षरों को मिलाकर लिखी जाती है। शब्द का प्रमुख भाग चीनी लिपि कांजी के चिह्न से लिया जाता है और शेष भाग हीरागाना से-

ध्वन्यात्मक अक्षरमाला द्वारा ज्ञान को पूरे समाज में फैलाने में सहायता मिली। 1880 के दशक में यह सुझाव दिया गया कि जापानी या तो पुरी तरह से ध्वन्यात्मक लिपि का विकास करें या कोई यूरोपीय भाषा अपना लें। परन्तु दोनों में कुछ भी नहीं किया जा सका।

प्रश्न 27.
1889 में जापान को जो नया संविधान मिला, उसकी कोई चार विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
1889 में जापान को जो नया सम्विधान मिला, उसकी चार मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है-
(i) सम्राट कार्यकारिणी का प्रधान था। उसकी स्थिति काफी महत्त्वपुर्ण थी। सभी मन्त्रियों की नियुक्ति सम्राट ही करता था और वे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे। लोगों का विश्वास। था कि सम्राट पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि है और वह दैवी-गुणों से सम्पन्न है। इसलिए उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

(ii) संविधान में एक संसद का प्रावधान था, जिसे डाएट (राजा की सभा) कहते थे। डाएट की शक्तियाँ काफी सीमित थीं। सेना के अधिकार इतने अधिक थे कि धीरे-धीरे डाएट पर सेना का प्रभुत्त्व स्थापित हो गया।

(iii) माताधिकार बहुत अधिक सीमित था। यह अधिकार देश की तीन प्रतिशत से भी कम जनता को प्राप्त था।

(iv) राजसत्ता पर कुलीनतन्त्र का नियन्त्रण बढ़ाने के लिए पुलिस को व्यापक अधिकार दिए गए। प्रेस को नियन्त्रित करने, जनसभाओं पर रोक लगाने तथा प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस को विशेष शक्तियाँ प्राप्त थीं।

प्रश्न 28.
प्रथम विश्व-युद्ध से पूर्व कोई दो घटानाओं को बताइए, जिन्होंने जापान का एक साम्राज्यवादी शक्ति के रूप में अभ्युदय किया। कोई दो देश बताइए जिनके साथ जापान का इस काल में टकराव हुआ।
उत्तर:
1853 में अमेरिका का जल सेनानायक पैरी जापान के एक बन्दरगाह पर पहुँचा। उसने जापान में अनेक सुविधाएँ प्राप्त की, परन्तु जापान एशियाई देशों की तुलना में भाग्यशाली निकला। वहाँ मेजी शासन के बाद सैनिक तथा औद्योगिक उन्नति हुई। अतः जापान भी यूरोप के साम्राज्यवादी देशों की भाँति मंडियों की खोज में लग गया।
(i) जापान के निकट चीन था और चीन उसके लिए अच्छी मंडी सिद्ध हो सकता था। दोनों देश 1894 में कोरिया के प्रश्न पर एक-दूसरे से युद्ध कर चुके थे। इसके बाद जापान का चीन में प्रभाव काफी बढ़ गया था।

(ii) 1902 में इंग्लैंड तथा जापान का समझौता हुआ। इसके अनुसार जापान को अन्य यूरोपियन शक्तियों के समान दर्जा मिल गया।

(iii) 1904 में उसने रूस को पराजित किया। इसके परिणामस्वरूप उसे सखालिन का दक्षिणी भाग प्राप्त हुआ। जापान के लियोनतुंग प्रायद्वीप पर भी उसका अधिकार हो गया। उसने पोर्ट आर्थर पट्टे पर ले ली।

(iv) 1910 में कोरिया जापान का उपनिवेश बन गया। 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के समय जापान एक महाशक्ति बन चुका था। अत: जापान की आकांक्षाएँ भी हर साम्राज्यवादी देश की भाँति आर्थिक तथा राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने की थी। टकराव-जापान का प्रथम विश्व-युद्ध से पूर्व चीन तथा रूस से टकराव हुआ।

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प्रश्न 29.
जापान की उपनिवेशवादी (साम्राज्यवादी) नीति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जापान 1890 के दशक में औपनिवेशिक होड़ में सक्रिय हुआ। उसका पहला निशाना चीन था। वह चीन में अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति करके पूर्वी एशिया पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता था। बाद में उसने समस्त एशिया तथा प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता स्थापित करना अपना लक्ष्य बना लिया। 1895 ई. में उसने चीन से युद्ध किया और उसे परास्त करके फारमोंसा को अपने साम्राज्य का अंग बना लिया। यह प्रदेश पहले चीन का भाग था। 1905 ई. में कोरिया को जापान का संरक्षित राज्य बना दिया गया और इसके पाँच वर्ष बाद कोरिया का जापान में विलय हो गया।

कोरिया भी पहले चीन के अन्तर्गत था। इससे पूर्व 1899 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोपीय देशों ने जापान को महाशक्ति के रूप में स्वीकार कर लिया था। 1902 ई. में आंग्ल-जापान सन्धि हुई। इसके अनुसार जापान को अन्य उपनिवेशवादियों के बराबर का स्थान दिया गया। 1904-1905 में रूस-जापान युद्ध में जापान विजयी रहा। परिणामस्वरूप पंचूरिया के दक्षिणी भाग को जापान का प्रभाव क्षेत्र मान लिया गया। इसके अतिरिक्त सखालिन द्वीप का आधा भाग तथा लियोनतुंग प्रायद्वीप भी उसके नियन्त्रण में आ गए। इस प्रकार जापान ने एक बहुत बड़े औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना कर ली।

प्रश्न 30.
फुफुजावा यूकिची कौन थे? उनकी सफलताओं तथा विचारों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
फुफुजावा यूकिची (1835-1901) का जन्म एक निर्धन सामुराई परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा नागासाका और ओसाका में हुई। उन्होंने डच और पश्चिमी विज्ञान पढ़ा और बाद में अंग्रेजी भी सीखी। 1860 में वह अमरीका में पहले जापानी दूतावास में अनुवादक के रूप में गए। इससे इन्हें पश्चिम पर पुस्तक लिखने के लिए पर्याप्त सामग्री मिली। उन्होंने अपने विचार क्लासिकी में नहीं बल्कि बोल-चाल की भाषा में लिखे। यह पुस्तक बहुत ही लोकप्रिय हुई।

उन्होंने एक शिक्षा संस्थान स्थापित किया, जो आज केओ विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। वह मेरोकुश संस्था के मुख्य सदस्यों में से थे। यह संस्था पश्चिमी शिक्षा का प्रचार करती थी। . अपनी एक पुस्तक ‘ज्ञान को प्रोत्साहन’ में उन्होंने जापानी ज्ञान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा ‘जापान के पास प्राकृतिक दृश्यों के अतिरिक्त गर्व करने के लिए कुछ भी नहीं है।’ इनका सिद्धान्त था, “स्वर्ग ने इंसान को इंसान के ऊपर नहीं बनाया न ही इंसान को इंसान के नीचे।”

प्रश्न 31.
जापान में सत्ता केन्द्रित राष्ट्रवाद के क्या परिणाम निकले?
उत्तर:
1930-40 में जापान में सत्ता केन्द्रित राष्ट्रवाद को बढ़ावा मिला। इस अवधि में जापान ने साम्राज्य विस्तार के लिए चीन और एशिया के अन्य भागों में युद्ध किए। जापान द्वारा अमेरिका के पर्ल हार्बर पर आक्रमण, दूसरे विश्व युद्ध का भाग बन गया। इसी आक्रमण के परिणामस्वरूप अमेरीका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया।

इस दौर में जापान में सामाजिक नियन्त्रण में वृद्धि हुई। असहमति प्रकट करने वालों पर अत्याचार किए गए और उन्हें जल भेजा गया। देशभक्तों की ऐसी संस्थाएँ बनीं, जो बुद्ध का समर्थन करती थीं। इनमें महिलाओं के भी कई संगठन शामिल थे। 1943 में एक संगोष्ठी हुई ‘आधुनिकता पर विजय’ का आयोजन हुआ। इसमें इस विषय पर विचार किया गया कि आधुनिक रहते हुए पश्चिम पर कैसे विजय पाई जाए। दर्शनशास्त्री निशिवानी केजी ने ‘आधुनिक को तीन पश्चिमी धाराओं के मिलन और एकता से परिभाषित किया-पुर्नजागरण, प्रोटस्टेन्ट सुधार और प्राकृतिक विज्ञानों का विकास। उन्होंने कहा कि जापान की ‘नैतिक ऊर्जा’ ने उसे एक उपनिवेश बनने से बचा लिया। अब जापान को एक नई विश्व पद्धति अर्थात् एक विशाल पूर्वी एशिया का निर्माण करना चाहिए।

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प्रश्न 32.
चीन के आधुनिक इतिहास से सम्बन्धित विषयों के बारे में तीन अलग-अलग विचारधाराएँ कौन-सी थीं ?
उत्तर:
चीन के आधुनिक इतिहास का सम्बन्ध सम्प्रभुत्ता की पुनः प्राप्ति, विदेशी नियन्त्रण से हुए अपमान से मुक्ति तथा समानता एवं विकास को सम्भव बनाने से है। इस सम्बन्ध में तीन अलग-अलग विचारधाराएँ थीं-

  • कांग योवेल (1858-1927) तथा लियांग किचाउ (1873-1929) जैसे सुधारक पश्चिम की चुनौतियों का सामना करने के लिए पारम्परिक विचारों के नए ढंग से प्रयोग करने के पक्ष में थे।
  • चीनी गणतन्त्र के पहले राष्ट्राध्यक्ष सन-यात-सेन जैसे गणतान्त्रिक क्रान्तिकारी जापान और पश्चिम के विचारों से प्रभावित थे।
  • चीन की कम्युनिष्ट पार्टी युगों-युगों की असमानताओं को समाप्त करना और देश से विदेशियों को खदेड़ना चाहती थी।

प्रश्न 33.
चीन में साम्राज्यवादी प्रभुत्व का आरम्भ कौन-से प्रसिद्ध युद्धों से हुआ? इन युद्ध के दो कारण तथा दो परिणाम व गएँ।
उत्तर:
चीन में साम्राज्यवादी प्रभुत्व का आरम्भ ‘अफीम के युद्धों’ से हुआ।
कारण-

  • अंग्रेज व्यापारी चीन में बड़े पैमाने पर चोरी-चोरी अफीम ला रहे थे, जिससे चीनियों का शारीरिक एवं नैतिक पतन हो रहा था।
  • 1839 ई. में चीन के एक सरकारी अफसर ने जहाजों पर लदी अफीम को पकड़ लिया और उसे नष्ट कर दिया। अतः ब्रिटेन ने चीन के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

परिणाम-

  • इन युद्धों में चीन की पराजय हुई। चीनियों को हर्जाने के रूप में अत्यधिक धनराशि देनी पड़ी। उन्हें अपने पाँच बन्दरगाहों में व्यापार का अधिकार भी अंग्रेजों को देना पड़ा।
  • चीनी सरकार को इस बात के लिए सहमत होना पड़ा कि इन बन्दरगाहों में यदि कोई अंग्रेज अपराध करेगा तो उस पर मुकदमा चीन की नहीं बल्कि इंग्लैंड की अदालतों में चलाया जाएगा।

प्रश्न 34.
उन्नीसवीं शताब्दी में साम्राज्यवादियों ने चीन में अपना प्रभुत्व किस प्रकार स्थापित किया?
अथवा
‘चीनी खरबूजे का काटा जाना’ उक्ति की व्याख्या कीजिए।
अथवा
चीन पर साम्राज्यवाद के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
ब्रिटेन के विरुद्ध अफीम युद्धों में चीन पराजित हुआ था। परिणामस्वरूप उसे हांग-कांग का प्रदेश अंग्रेजों को देना पड़ा और अपने पाँच बन्दरगाह अंग्रेज व्यापारियों के लिए खोलने पड़े। शीघ्र ही फ्राँस ने भी ऐसी असमान संधियाँ चीन पर लाद दी और उससे अनेक सुविधाएँ प्राप्त कर लीं। तत्पश्चात् चीन तथा जापान के बीच युद्ध हुआ, जिसमें जापान विजयी रहा। इसके परिणामस्वरूप चीन ने फारमोसा तथा कुछ अन्य द्वीप जापान को सौंप दिए। चीन पर 15 करोड़ डालर का हर्जाना भी डाला गया।

चीन को यह राशि फ्राँस, रूस, ब्रिटेन तथा जर्मनी ने ऋण के रूप में दी और बदले में चीन को अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों में बाँट लिया। संयुक्त राज्य अमेरिका भी पीछे न रहा। उसने ‘मुझे भी’ की नीति द्वारा चीन में पश्चिमी देशों के बराबर की सुविधाएँ प्राप्त कर लीं। इस प्रकार चीन पूरी तरह से भिन्न-भिन्न देशों के प्रभाव क्षेत्रों में बँट गया। इसी प्रक्रिया को ‘चीनी खरबूजे का काटा जाना’ कहते हैं।

प्रश्न 35.
‘खुले द्वार’ अथवा ‘मुझे भी’ नीति से क्या अभिप्राय था ? ब्रिटेन ने इस नीति का समर्थन क्यों किया?
उत्तर:
‘खुले द्वार’ अथवा ‘मुझे भी’ नीति का सुझाव संयुक्त राज्य अमेरिका ने दिया था। इस नीति का अर्थ यह था कि सभी देशों को चीन के प्रत्येक भाग में व्यापार करने के समान अवसर मिलने चाहिए। अमेरिका ने यह सुझाव इसलिए दिया था, क्योंकि उसे भय था कि अन्य देश चीन में पूर्ण रूप से अपने प्रभाव क्षेत्र स्थापित कर लेंगे और उसे वहाँ व्यापार करने का कोई अवसर नहीं मिलेगा। ब्रिटेन ने भी इस नीति का समर्थन किया, क्योंकि वह नहीं चाहता था कि जापान और रूस चीन को हड़प जाएँ। दूसरे, संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह वह भी चीन में अपनी सेनाएँ आसानी से भेज सकता था।

प्रश्न 36.
संयुक्त राज्य अमरिका ने ‘खुले द्वार की नीति’ (Open Door Policy) क्यों और कैसे अपनाई?
उत्तर:
अमेरिका ने खुले द्वार की नीति चीन के सम्बन्ध में अपनाई। 1890 के दशक में यूरोपीय शक्तियाँ चीन को आपस में विभाजित कर लेने की योजना बना रही थीं। अमेरिका को इस बात का भय था कि कहीं उसे अलग-थलग न कर दिया जाए। वह चाहता था कि यूरोपीय शक्तियों की भाँति उसे भी चीन में सुविधाएँ प्राप्त हों। इसलिए उसने एक नई ति की घोषणा की जो इतिहास में ‘खुले द्वार की नीति’ के नाम से विख्यात है।

इसका अर्थ था कि चीन के मामले में किसी भी देश के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा, उन क्षेत्रों के सम्बन्ध में भी नहीं जिन्हें यूरोपीय देश अपना प्रभाव क्षेत्र बताते हैं। परिणामस्वरूप यूरोपीय देशों की भाँति अमेरिका ने भी सन्धि द्वारा चीन से सुविधाएँ प्राप्त की। कुछ समय पश्चात् चीन में विदेशी शक्तियों के बढ़ते हुए प्रभाव के विरुद्ध बॉक्सर विद्रोह हुआ । इस विद्रोह को दबाने में अमेरीकी सेनाओं ने भी यूरोपीय सेनाओं का पूरा साथ दिया।

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प्रश्न 37.
प्रथम आंग्ल-चीन युद्ध अथवा अफीम युद्ध के क्या कारण थे?
उत्तर:
प्रथम आंग्ल-चीन युद्ध, अथवा अफीम युद्ध के अनेक कारण थे-

  • अंग्रेज व्यापारी चीन के साथ व्यापारिक सम्बन्ध स्थापित करना चाहते थे। परन्तु चीनी शासक विदेशियों को असभ्य समझते थे और उनके साथ कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहते थे।
  • चीनी सरकार ने देश में चोरी छिपे अफीम का व्यापार करने वाले व्यापारियों को कैंटन से बाहर निकल जाने का आदेश दिया। इससे चीन और इंग्लैंड के बीच तनाव पैदा हुआ।
  • ब्रिटेन और चीन के बीच इस बात का भी झगड़ा था कि कैंटन के अंग्रेज निवासी कानून की दृष्टि से चीन की बजाय इंग्लैंड के अधीन थे।
  • अंग्रेज व्यापारी इस बात से चिढ़े हुए थे कि चीनी व्यापारियों पर उनका जो ऋण बकाया था, उसे वे दे नहीं पा रहे थे। अत: इंग्लैंड की सरकार के लिए यह आवश्यक हो गया कि वह अंग्रेज व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए चीन में हस्तक्षेप करें।
  • अंग्रेज व्यापारियों ने अपनी सरकार पर दबाव डाला कि वह शक्ति प्रदर्शन अथवा युद्ध द्वारा चीनी सरकार को इस बात के लिए विवश करे कि वह अफीम व्यापार पर रोक न लगाए।

इसी बीच अंग्रेज तथा चीनी नाविकों की एक झड़प में एक चीनी नाविक मारा गया। परिणामस्वरूप चीनी सरकार अंग्रेज व्यापारियों के प्रति कठोर नीति अपनाने लगी। मामला गम्भीर होता गया। आखिर-इंग्लैंड के प्रधानमन्त्री पामर्स्टन ने चीन के विरुद्ध युद्ध के आदेश जारी कर दिए।

प्रश्न 38.
प्रथम अफीम युद्ध के क्या परिणाम निकले?
उत्तर:
प्रथम अफीम युद्ध के परिणाम चीन के लिए बड़े हानिकारक सिद्ध हुए। इस युद्ध के परिणामों का वर्णन इस प्रकार है-
(i) इस युद्ध के परिणामस्वरूप चीन का आर्थिक शोषण होना आरम्भ हो गया। अब अंग्रेज चीन में बिना किसी रोक-टोक के अफीम का व्यापार करने लगे। इससे चीन पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया

(ii) नानकिंग की सन्धि के कारण चीन के सम्मान को भारी ठेस पहुंची। इसके साथ ही चीन की सैनिक शक्ति का महत्त्व भी घट गया। अतः अब वे विदेशी शक्तियाँ चीन पर दबाव डालकर सुविधाएँ प्राप्त करने का प्रयत्न करने लगीं।

(iii) प्रथम अफीम युद्ध के पश्चात् चीन को विशेषाधिकार के सिद्धान्त को विवश होकर स्वीकार करना पड़ा। चीन ने इस बात को स्वीकार कर लिया कि वह अपराध करने वाले विदेशियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं करेगा। इसके परिणामस्वरूप चीन की सर्वोच्चता का अन्त हो गया।

(iv) चीन ने काफी लम्बे समय से अपने व्यापार के लिए बन्द द्वार की नीति अपना रखी थी। विदेशी व्यापारियों को कैंटन के अतिरिक्त कहीं और व्यापारिक केन्द्र स्थापित करने की आज्ञा नहीं थी। परन्तु प्रथम अफीम युद्ध के परिणामस्वरूप चीन सरकार को खुले द्वार की नीति अपनाने के लिए विवश होना पड़ा।

(v) कुछ ही समय पश्चात् यूरोपीय देशों ने चीन में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना आरम्भ कर दिया। इसके परिणामकारूप साम्राज्यवादी युग आरम्भ हो गया और चीन अपनी स्वाधीनता खोने लगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक चीन का आरम्भ कब से माना जाता है ? इसका उदय किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
आधुनिक चीन का आरम्भ सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में, पश्चिम के साथ उसका पहला सामना होने के समय से, माना जाता है। इस काल में जेसुइट मिशनरियों ने खगोलविद्या और गणित जैसे पश्चिमी विज्ञानों को चीन पहुँचाया।
(i) अफीम युद्ध की भूमिका-आधुनिक चीन का उदय – 19वीं शताब्दी में ब्रिटेन ने अपने अफीम के व्यापार को बढ़ाने के जिए चीन के विरुद्ध सैन्य बल का प्रयोग किया। इस प्रकार पहला युद्ध (1839-42) हुआ। इसने सत्ताधारी क्विंग (छांग) राजवंश को कमजोर किया और सुधार तथा बदलाव की मांगों को मजबुती दी।

वास्तव में चीनी उत्पादों जैसे चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तनों की माँग ने ब्रिटिश व्यापार में भारी असन्तुलन पैदा कर दिया था। परन्तु पश्चिमी उत्पादों को चीन में बाजार नहीं मिला। इसलिए चीन से आयातित माल का भुगतान चाँदी में करना पड़ता था। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने एक विकल्प ढुंढा-अफीम। यह भारत के कई भागों में उगाई जाती थी। चीन में अफीम की बिक्री द्वारा चाँदी कमाकर कैंटन में उधार पत्रों के बदले कम्पनी के प्रतिनिधियों को देने लगे।

कम्पनी इस चाँदी का प्रयोग ब्रिटेन के लिए चाय, रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तन खरीदने के लिए करने लगी। ब्रिटेन, भारत और चीन के बीच यह उत्पादों का ‘त्रिकोणीय व्यापार’ था।

(ii) आधुनिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण-क्विंग सुधारकों कांग यूवेई और लियांग किचाउ ने व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। इस उद्देश्य से उन्होंने एक आधुनिक प्रशासकीय व्यवस्था, नयी सेना और शिक्षा व्यवस्था के निर्माण के लिए नीतियाँ बनाइँ। संवैधानिक सरकार की स्थपना के लिए स्थानीय विधानपालिकाओं का गठन भी किया गया। उन्होंने चीन को उपनिवेशीकरण से बचाने पर विचार किया।

(iii) उपनिवेश बनाये गए देशों के नकारात्मक उदाहरण-उपनिवेश बनाए गए देशों के नकारात्मक उदाहरणों ने चीनी विचारकों पर गहरा प्रभाव डाला। 18वीं शताब्दी में पोलैंड का बँटवारा. इसका सर्वाधिक चर्चित उदाहरण था। यहाँ तक कि 1890 के दशक में पोलैंड का शब्द ‘बोलान ब’ नामक क्रिया (Verb) के रूप में प्रयोग किया जाने लगा। क्रिया इसका अर्थ था-‘हमें पोलैंड करने के लिए’। चीन के सामने भारत का उदाहरण भी था। लियांग किचाउ का मानना था कि चीनी लोगों में एक राष्ट्र की भावना जागृत करके ही पश्चिम का विरोध किया जा सकता है।

1930 में उन्होंने लिखा कि भारत ऐसा देश है, जो किसी अन्य देश द्वारा नहीं, बल्कि एक कम्पनी अर्थात् ईस्ट इंडिया कम्पनी के हार्थों बर्बाद हो गया। ब्रिटेन की सेवा करने और अपने ही लोगों के प्रति क्रूर होने के लिए भारतीयों की आलोचना करते थे। उनके तर्कों से अधिकांश चीनी प्रभावित थे, क्योंकि ब्रिटेन ने चीन के साथ युद्ध में भारतीय सैनिकों का ही प्रयोग किया था।

(iv) चीनियों की परम्परागत सोंच में बदलाव-चीनियों की परम्परागत सोंच को बदलना भी आवश्यक था। कन्फयूशिसवाद चीन की प्रमुख विचारधारा कन्फयूशियस (551-479 ई.पू) और उसके अनुयायियों की शिक्षा से विकसित की गई थी। इसका सम्बन्ध अच्छे व्यवहार, समझदारी और उति। सामाजिक सम्बन्धों से था। इस वि रधारा ने चीनियों के जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बदल दिया और नये समाजिक मानक स्थापित किए। इसने चीनी राजनीतिक सोच और संगठनों को भी ठोस आधार प्रदान किया।

(v) नए विषय-लोगों को नये विषयों में प्रशिक्षित करने के लिए विद्यार्थियों को जापान, ब्रिटेन और फ्रांस में पढ़ने के लिए भेजा गया। 1890 के दशक में बहुत बड़ी संख्या में चीनी विद्यार्थी पढ़ने लिए जापान गए। वे नये विचार लेकर वापस आए उन्होंने चीन में गणतन्त्र की स्थापना में भी अग्रणी भुमिका निभाई। चीन ने जापान से ‘न्याय’ ‘अधिकार’ और ‘क्रान्ति’ के शब्द ग्रहण किए। 1905 में रूस-जापान युद्ध हुआ। यह एक ऐसा युद्ध था, जो चीन की धरती पर और चीनी प्रदेशों पर प्रभुत्व के लिए लड़ा गया था। इस युद्ध के बाद सदियों पुरानी चीनी परीक्षा-प्रणाली समाप्त कर दी गई। यह परीक्षा प्रणाली प्रत्याशियों को अभिजात सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश दिलाने का काम करती थी।

(vi) गणतन्त्र की स्थापना-1911 ई. में चीन में क्रान्ति हुई, जिसने मंचू शासन का अन्त कर दिया। इसके साथ ही चीन ने सच्चे अर्थों में आधुनिक युग में प्रवेश किया।

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प्रश्न 2.
सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् कुओतिनतांग के अधीन देश के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक विकास की समीक्षा किजिए।
उत्तर-सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् च्यांग काइ शेक (1878-1975) कुओमिनतांग के नेता बनकर उभरे।
(i) उन्होंने सैन्य अभियान द्वारा वार-लार्डस (स्थानीय नेता जिन्होंने सत्ता छीन ली थी) को अपने नियन्त्रण में किया और साम्यवादियों की शक्ति नष्ट की। उन्होंने सेक्युलर और विवेकपुर्ण इहलौकिक, कन्फूशियसवाद का समर्थन किया। इसके साथ-साथ उन्होंने राष्ट्र का सैन्यीकरण करने की भी चेष्टा की।

(ii) उन्होंने कहा कि लोगों को एकताबद्ध व्यवहार की प्रवृत्ति और आदत का विकास करना चाहिए।

(iii) उन्होंने महिलाओं को चार सदगुण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया-सतीत्व, रूप-रंग, वाणी और काम। महिलाओं की भूमिका को घरेलू स्तर पर ही रखने पर बल दिया गया। यहाँ तक कि उनके कपड़ों की लम्बाई निर्धारित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

(iv) कुओमितांग का सामाजिक आधार शहरी प्रदेश में थों। देश का औद्योगिक विकास धीमा था और गिने-चुने क्षेत्रों तक सीमित था। शंघाई जैसे शहरों में 1919 में औद्योगिक मजदूर वर्ग का विस्तार हो रहा था। इनकी संख्या लगभग 5 लाख थी। परन्तु इनमें से केवल कुछ प्रतिशत मजदूर ही जहाज निर्माण जैसे आधुनिक उद्योगों में लगे हुए थे। अधिकतर लोग ‘नगण्य शहरी’ (शियाओं शिमिन), व्यापारी और दुकानदार होते थे।

(v) शहरी मजदूरों, विशेषकर महिलाओं को बहुत कम वेतन मिलता था। काम करने के घंटे बहुत लम्बे थे और काम करने की परिस्थितियाँ बहुत खराब थीं। जैसे-जैसे व्यक्तिवाद बढ़ा, महिलाओं के अधिकारों, परिवार बनाने के तरीकों और प्रेम-प्यार आदि विषयों पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा।

(vi) समाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन लाने में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के विस्तार से सहायता मिली। 1920 में पीकिंग विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। पत्रकारिता फली-फूली जो कि सांच का प्रतिरूप थी। शाओ तोआफैन (1895-1944) द्वारा सम्पादित लोकप्रिय ‘लाइफ व: ली’ उसी नयी विचारधारा का प्रति त्व करती थी। इसने अपने पाठक को नए विचारों के साथ-साथ महात्मा गाँधी और तुर्की के आधुनिकतावादी नेता कमाल आतातुर्क से अवगत करवाया।

(vii) देश को एकीकृत करने के प्रयासों के बावजूद कुओमिनतांग अपने संकीर्ण सामाजिक आधार और सीमित राजनीतिक दृष्टिकोण के कारण असफल रहा। सन-यात सेन के कार्यक्रम का बहुत ही महत्त्वपूर्ण भाग “पुंजी नियमन और भूमि-अधिकारों में समानता” को कभी भी लागू न किया जा सका। इसका कारण यह था कि पार्टी ने किसानों और बढ़ती सामाजिक असमानता की अनदेखी की। इसने लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की बजाय सैनिक व्यवस्था थोपने का प्रयास किया।

(viii) 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण किया तो कुओमीनतांग पीछे हट गया। इस लम्बे और थका देने वाले युद्ध ने चीन की कमजोर बना दिया। 1945 और 1949 के दौरान कीमतें 30 प्रतिशत प्रति महीने की दर से बढ़ीं। इससे आम आदमी को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। ग्रामीण चीन में भी दो संकट थे। एक पर्यावरण सम्बन्धी था, जिससे बंजर भूमि, वनों का नाश और बाढ़ शामिल थे। दूसरा सामाजिक-आर्थिक था। यह संकट भूमि-प्रथा, ऋण, प्राचीन प्रौद्योगिकी और निम्न स्तरीय सन्चार के कारण था।

प्रश्न 3.
चीन में साम्यवादी पार्टी की स्थापना कब और कैसे हुई ? 1949 माओत्सेतुंग के अधीन यह किस प्रकार शक्तिशाली बनी?
उत्तर:
चीन में साम्यवादी पार्टी की स्थापना 1921 में, रूस क्रान्ति के कुछ समय बाद हुई थी। रूसी क्रान्ति कि सफलता ने पूरे विश्व पर गहरा प्रभाव डाला था। लेनिन और ट्राट्स्की जैसे नेताओं ने मार्च 1918 में कौमिंटर्न अथवा तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय (Third International) का गठन किया, ताकि विश्व स्तरीय सरकार बनाई जा सके जो शोषण को समाप्त करे। कौमिंटर्न और सोवियत संघ विश्व भर में साम्यवादी पार्टियों का समर्थन किया। मार्क्सवादी विचारधारा पर आधारित इन पार्टियों का मानना था कि शहरी क्षेत्रों में क्रान्ति मजदूर वर्गो द्वारा आयेगी। आरम्भ में विभिन्न देशों के लोग कौटिर्न के प्रति बहुत आकर्षित हुए। शीघ्र ही यह सोवियत संघ के स्वार्थों की पूर्ति का शस्त्र बन गया। 1943 में इसे समाप्त कर दिया गया।

माओत्सेतुंग (1893-1976) के अधीन साम्यवादी पार्टी सी.सी.पी. (साम्यवादी पार्टी)-माओ-त्से तुंग मार्क्सवादी पार्टी (सी.सी.पी.) के प्रमुख नेता के रूप में उभरे। उन्होंने क्रान्ति के कार्यक्रम को किसानों से जोड़ते हुए .एक अलग मार्ग अपनाया। उनकी सफलता से चीनी साम्यवादी पार्टी एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बन गई, जिसने अन्ततः कुओमिनतांग पर विजय प्राप्त की।

माओत्सेतुंग के आमूल परिवर्तनवादी तौर तरीके-माओत्सेतुंग के आमूल परिवर्तनवादी तौर-तरीके जियांग्सी नामक स्थान पर दिखाई दिए। 1928-1934 के बीच उन्होंने यहाँ के पर्वतों में कुओमितांग के आक्रमणों से सुरक्षित शिविर लगाए। एक सशक्त किसान परिषद् (सोवियत) का गठन किया गया। भूमि पर नियन्त्रण और इसके पुनर्वितरण के साथ इसका एकीकरण हुआ। अन्य नेताओं से हटकर, माओने स्वतन्त्र सरकार और सेना पर बल दिया। माओत्सेतुंग महिलाओं की समस्याओं से भी अवगत थे। इसलिए उन्होंने ग्रामीण महिला संघों को प्रोत्साहन दिया। उन्होंने विवाह के नए कानून बनाए। आयोजित विवाहों और विवाह के समझौतों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई। तलाक को आसान बनाया गया।

लाँग मार्च तथा साम्यवादियों का सत्ता में आना-कुओमितांग द्वारा कम्यनिस्टों की सोवियत का नाकेबन्दी ने पार्टी को कोई अन्य आधार ढूंढ़ने पर विवश किया। इसके च। उन्हें लाँग मार्च (1934-1935) पर जाना पड़ा, जो कि शांग्सी तक 6000 मील की कठिन यात्रा थी। अपने नये अड्डे येनान में उन्होंने वारलॉर्डिज्म को समाप्त करने, भूमि सुधार लागू करने और विदेशी साम्राज्यवाद से लड़ने के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। इससे उन्हें मजबूत सामाजिक आधार मिला द्वितीय विश्व युद्ध के कठिन वर्षों में साम्यवादियों और कुओमीनतांग ने मिलकर काम किया। युद्ध समाप्त होने के बाद कुओमीनतांग की पराजय हुई और साम्यवादी सत्ता में आ गए।

प्रश्न 4.
प्रथम विश्व युद्ध के तत्काल बाद के सालों में चीन के राष्ट्रवादी आन्दोलन की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं? सनयात सेन की मौत के बाद वहाँ जो घटनाएँ घटी, उनका वर्णन कीजिए और यह भी बताइए कि उनके क्या परिणाम निकले।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन का आरम्भ तथा विशेषताएँ-प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के समय चीन में दो प्रमुख सरकारें थीं। इनमें से एक पर कोमिनतांग का अधिकार था। इस सरकार का मुख्यालय कैन्टन में था। दूसरे सरकार का शासनाध्यक्ष एक सैनिक जनरल था। उसका मुख्यालय बीजिंग में था। 1919 ई. में पेरिस शान्ति सम्मेलन ने शान्तुंग को जापान के हवाले करने का निर्णय दिया। इससे चीन में साम्राज्यवाद के विरुद्ध एक राष्ट्रीय आन्दोलन आरम्भ हो गया इसका श्रीगणेश 4 मई, 1919 को बीजिंग विविद्यालय के छात्रों द्वारा साम्राज्यवाद विरोधी प्रदर्शन से हुआ। ‘यह आन्दोलन ‘चार मई आन्दोलन’ के नाम से विख्यात है।

आन्दोलन शीघ्र ही वीन के अन्य भागों में भी फैल गया। 1921 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई जो शीघ्र ही देश की एक प्रमुख शक्ति बन गई। इस समय प्रसिद्ध चीनी नेता सनयात सेन भी चीन को एकीकृत करने के लिए प्रयत्नशील थे। वे पश्चिमी देशों की सहायता से अपने उद्देश्य की पूर्ति करना चाहते थे। परन्तु जब उन्हें पश्चिम की ओर से कोई सहायता न मिली, तो उन्होंने सोवियत संघ से समर्थन माँगा। अन्ततः 1925 ई. में कोमिनतांग तथा कम्युनिस्ट पार्टी के सहयोग से एक राष्ट्रीय सरकार गठित करने का निर्णय लिया गया। इस सेना ने शीघ्र ही युद्ध सरदारों के विरुद्ध अपना अभियान आरम्भ कर दिया। परन्तु मार्च, 1925 ई. में डॉ. सनयात सेन का देहान्त हो गया, जिससे स्थिति बदल गई।।

डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् की घटनाएँ-
(i) डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् कोमिनतांग तथा कम्युनिस्ट का गठबन्धन हो गया और देश में गृह-युद्ध छिड़ गया। अब वहाँ किसान तथा मजदूर सक्रिय हो उठे। 1925 में शंघई में मजदूर की हत्या के विरोध में हड़तालें और. प्रदर्शन हुए। ये हत्याएँ जापानी उद्योगपतियों तथा ब्रिटिश पुलिस की कार्यवाही से हुई थीं। विद्रोही किसानों ने कई स्थानों पर अपने भू-स्वामियों से उनकी भूमि छीन ली।

(ii) 1927 ई. के मार्च मास में राष्ट्रीय क्रान्तिकारी सेना नानकिंग पहुँचा। वहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ब्रिटेन के युद्ध पोतों ने गोलाबारी आरम्भ कर दी। इस गोलाबारी में सैकड़ों लोग मारे गए। परन्तु उसी समय कोविनतांग में फूट पड़ गई और राष्ट्रीय क्रान्तिकारी सेना के नेता च्यांग-काई शेक ने नानकिंग में अपनी सरकार स्थापित कर ली। कोतिनतांग में विद्यमान वामपन्थी तत्वों में कम्युनिस्ट दल (मजदूरों) की शक्ति का दमन करना चाहता था। उसकी सैनिक टुकड़ियों ने शंघाई में मजदूरों के घरों में छापे मार कर हजारों की संख्या में मजदूरों को मार डाला।

(iii) 1 दिसम्बर, 1927 को कैन्टन में कम्युनिस्टों में एक विद्रोह का नेतृत्व किया और सोवियत रूप की एक सरकार स्थापित की, परन्तु इस विद्रोह को कुचल दिया गया। इस घटना में लगभग 5000 मजदूर मारे गये। इससे चीन के राष्ट्रीय आन्दोलन में फूट पड़ गयी। सोवियत सलाहकारों को चीन से बाहर निकाल दिया गया तथा कगिनतांग के अनेक नेता देश छोड़कर चले गये। इनमें सनयात सेन की विधवा भी शामिल थी। परन्तु देश में कम्युनिस्टों की शक्ति का पूरी तरह पतन नहीं हुआ। कई कम्युनिस्ट देश के विभिन्न भागों में फैल गये और उन्होंने कुछ प्रदेशों को अपने नियन्त्रण में ले लिया। इस प्रकार चीन का गृह-युद्ध एक नये चरण में प्रवेश कर गया, जो कम्युनिस्टों तथा च्यांग-काई-शेक सरकार के बीच चला।

(iv) मंचूरिया पर जापानी अधिकार के कारण चीन में जापानी माल के बहिष्कार का भी एक आन्दोलन चला। परन्तु इस सम्बन्ध में कोमिनतांग के नेता च्यांग-काई-शेक तथा कम्युनिस्टों के बीच एकता स्थापित न हो सकी । कोमिनतांग ने जापान के विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाय कम्युनिस्टों की शक्ति कुचलने की ओर ही अपना ध्यान लगाया। परन्तु ग्रामीण प्रदेशों में कम्युनिस्टों की शक्ति निरन्तर बढ़ती ही चली गई। इसी बीच माओ-त्से-तुंग एक प्रभावशाली कम्युनिस्ट नेता के रूप में उभर कर सामने आये। उन्होंने किसान शक्ति की सहायता से देश में समाजवादी क्रान्ति लाने की योजना बनाई। परन्तु 1934 ई. में च्यांग-काई-शेक ने एक विशाल सेना के साथ कम्युनिस्टों के प्रभाव क्षेत्रों पर आक्रमण कर दिया।

कम्युनिस्ट यह नहीं चाहते थे कि उनका पूरी तरह सफाया कर दिया जाये। अतः वे अपने प्रभाव क्षेत्रों को छोड़कर चले गये। उनमें से लगभग 1 लाख कम्युनिस्ट उत्तर-पश्चिम की ओर येनान क्षेत्र में पहुँचे। येनान पहुँचने में कम्युनिस्टों ने लगभग छः हजार मील की लम्बी यात्रा की। इसी कारण इतिहास में यह घटना ‘लम्बी यात्रा’ (Long March) के नाम से विख्यात है। इस घटना के कारण कम्युनिस्टों की लोकप्रियता में काफी वृद्धि हुई। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान अनेक जमींदारों से भूमि छीन कर किसानों में बाँट दी थी। अतः लोगों के मन में यह बात पूरी तरह बैठ गई कि कम्युनिस्ट दल ही जन-साधारण का भला कर सकता है। लोग च्यांग-काई-शेक की सरकार को जमींदारों, सूदखोरों तथा सौदागरों की सरकार समझने लगे।

(v) 1937 में चीन पर एक भीषण जापानी आक्रमण हुआ। च्यांग-काई-शेक की सेना, जो केवल कम्युनिस्ट विरोधी कार्यवाही में ही व्यस्त थी, जापानी सेना के सामने न टिक सकी। परिणामस्वरूप उसे पीछे हटना पड़ा। उनकी सरकार का मुख्यालय मानकिंग से हटकर चंगकिंग में पहुंच गया। परन्तु इसी बीच जापानी आक्रमण को रोकने के लिए एक संयुक्त मोर्चे का गठन भी किया जा चुका था। यह सब एक महत्त्वपूर्ण घटना के कारण सम्भव हुआ था, जिसमें च्यांग-काई-शेक को बन्दी बना लिया गया था और उसे तब तक नहीं छोड़ा गया था, जब तक कि कोमिनतांग कम्युनिस्टों के साथ मिलकर जापान का विरोध करने के लिए तैयार न हो गये। परन्तु इस एकता के बावजुद भी दोनों दलों के लोग एक-दूसरे को सन्देह की दृष्टि से देखते रहे।

परिणाम – डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के पश्चात् चीन में जो घटना. चक्र चला, उसका सबसे महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि कम्यूनिस्ट दल एक शक्शिाली दल के रूप में उभरकर सामने आया।

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प्रश्न 5.
मेइजी पुर्नस्थापना के पश्चात् जापान के आधुनिकीकरण हेतु कौन-कौन से कदम उठाये गये।
उत्तर:
मेइजी पुर्नस्थापना के पश्चात जापान ने शिक्षा, उद्योग, सैन्य, राजनीति, आधुनिकीकरण के पीछे यूरोपीय देशों द्वारा जापान को अपने अपने उपनिवेश बना लेने का डर उच्च करों को वसूलने में उठने वाले विद्रोहों को दबाने तथा विश्व के मान चित्र पर एक सशक्त देश के उभरने की महत्त्वकांक्षा थी। अतः इन्हीं बातों के आधार पर जापान ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण के औचित्य को सही हराया। अशिक्षा, सामन्ती व्यवस्था, ..र्थिक अव्यवस्था तथा विदेशी शक्ति द्वारा जापान की आन्तरिक व्यवस्था से लाभ उठाकर उपनिवेश बनाने की कोशिश ने 1867 में जापान के सम्राट मुत्सहितो को, जिसने ‘मेइजी’ की उपाधि धारण की, सत्ता सौंप दिया। इसे ही इतिहास में मेइजी पुर्नस्थापना कहते हैं।

उपर्युक्त समस्याओं के निराकरण हेतु आवश्यकता थी जापान के आधुनिकीकरण करने की, जिसे सम्राट ने धैर्य के साथ किया। इसी हेतु 1871 में सामन्तवादी व्यवस्था का वहाँ अन्त कर दिया गया। शासन में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिये दो सदन वाली डायर की स्थापना की गई। नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का दर्जा दिया गया। – मेइजी पुर्नस्थापना के पश्चात् शिक्षा की अतीव उन्नति जापान में हुई। जापान में शिक्षा का आधार राष्ट्रीयता के प्रसार को बनाया गया।

प्रश्न 6.
जापान ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण के औचित्य को किस प्रकार सही ठहराया?
उत्तर:
जापान में मेजी पुर्नस्थापना के पश्चात जापान ने शिक्षा, उद्योग, सैन्य, राजनीति आदि अनेक क्षेत्रों का आधुनिकीकरण किया। सैन्य आधुनिकीकरण के पीछे यूरोपीय देशें द्वारा जापान को अपने-अपने उपनिवेश बना लेने का डर, उच्च करों को वसूलने में उठने वाले विद्रोहों को दबाने तथा विश्व के मानचित्र पर एक सशक्त देश के उभरने की महत्वाकांक्षा थी। अतः इन्हीं बातों के आधार पर जापान ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण के औचित्य को सही ठहराया।

प्रश्न 7.
चीन में साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना कैसे हुई? इस क्रान्ति के चीन पर पड़े प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
चीन में 1949 की क्रान्ति कैसे हुई। चीन पर इसके क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर:
चीन में साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना निम्नलिखित चरणों में हुई
(i) डॉ. सनयात-सेन की मृत्यु के पश्चात् च्यांग-काई के नेतृत्व में कोमिंतांग और माओ जेदांग (माओ-त्ये-तुंग) के नेतृत्व में कम्युनिष्ट पार्टी के बीच गृहयुद्ध छिड़ गया।

(ii) चीन पर जापानी आक्रमण के समय दोनों पार्टियों और उनकी सेनाओं ने जापानी आक्रमण का सामना करने के लिए कुछ समय तक आपस में सहयोग किया। परन्तु इनका आपसी टकराव फिर भी समाप्त न हुआ।

(iii) कोमिंतांग मुख्यतः पुंजीपतियों और जमींदारों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी थी। दूसरी ओर कम्युनिस्ट पार्टी मजदूरों और किसानों की पार्टी थी। कम्यूनिस्ट पार्टी के नियन्त्रण वाले क्षेत्रों में जमींदारों की जागीरें जब्त करके जमीन को किसानों के बीच बाँट दिया गया। अपनी इन नीतियों से कम्युनिस्ट पार्टी ने धीरे-धीरे करोड़ों चीनी लोगों को अपना समर्थक बना लिया था। कम्युनिस्ट पार्टी ने जनमुक्ति सेना नाम से एक बड़ी सेना भी बना ली थी।

(iv) जापान की हार तथा चीन से जापानी सैनिकों के भागने के बाद गृहयुद्ध फिर से भड़क उठा। अमेरिकी सरकार ने च्यांग-काई-शेक को भारी सहायता दी। परन्तु उसकी सेनाएँ 1949 तक पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं। अपनी बची-खुची सेना के साथ च्यांग-काई-शेक ताइवान (फारमोसा) चला गया। अक्टूबर, 1949 को चीनी लोक गणराज्य की स्थापना की घोषणा की गई औरी माओ जंदांग के नेतृत्व में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में आई।

चीन पर क्रान्ति के प्रभाव –

  • 1949 की चीनी क्रान्ति ने चीनी समाज के स्वरूप को बदल डाला। परम्परागत चीनी समाज कन्फयूशियस के सिद्धान्तों और विचारों पर आधारित था। परन्तु क्रान्ति के बाद देश में नई विचारधारा उन्न हुई। अब श्रमिक वर्ग और चीनी गरिकों को उचित सम्मान दिया जाने लगा।
  • इस क्रान्ति से चीनी लोगों का दैनिक जीवन काफी सुखी हो गया। क्रान्ति के बाद साम्यवादी सरकार ने देश में राशन प्रणाली आरम्भ की और जीवन की आवश्यकताओं को लोगों तक पहुँचाया। बीमारियों, आगजनी और लूटमार के अपराधों पर भी नियन्त्रण करने का प्रयास किया गया।
  • इस क्रान्ति से भूमिहीन किसानों को भूमि मिली। इसके अतिरिक्त सरकार ने किसानों की सहायता के लिए सहकारी समितियाँ बनाई।
  • इस क्रान्ति से स्त्रियों की दशा में भी परिवर्तन आया। क्रान्तिकारी सरकार ने स्त्रियों के उत्थान के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाये। उनके क्रय-विक्रय को अवैध घोषित कर दिया गया।
  • चीनी क्रान्ति से विश्व में समाजवादी विचारधारा को बल मिला।

प्रश्न 8.
जापान में मेजी शासन के अधीन अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण किस प्रकार हुआ ? उद्योगों के विकास का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था का आधुनिकीकरण मेजी सुधारों की एक महत्त्वपर्ण विशेषता थी। इसके लिए निम्नलिखित पग उठाए गए-
(i) कृषि पर कर लगाकर धन एकत्रित किया गया।

(ii) 1870-1872 में तोक्यो (Tokyo) से योकोहामा बन्दरगाह के बीच जापान की पहली रेल लाइन बिछाई गई।

(iii) वस्त्र उद्योग के लिए यूरोप से मशीनें आयात की गईं। मजदूरों के प्रशिक्षण तथा देश के विश्वविद्यालयों और स्कूलों में पढ़ाने के लिए विदेशी कारीगरों को बुलाया गया ।

(iv) कई जापानी विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए विदेश भी भेजा गया।

(v) 1872 में आधुनिक बैंकिंग संस्थाओं की स्थापना की गई।

(vi) मित्सुबिशी और सुमितोमो जैसी कम्पनियाँ सब्सिडी और करों में छूट के कारण प्रमुख जहाज निर्माता कम्पनियाँ बन गईं। अब जापान का व्यापार जापानी जहाजों द्वारा होने लगा। बड़ी-बड़ी व्यापारिक संस्थाओं ‘जायबात्सु’ का प्रभुत्व दूसरे विश्व युद्ध के बाद तक अर्थव्यवस्था पर बना रहा।

(vii) 1874 में जापान की जनसंख्या 3.5 करोड़ थी, जो 1920 में 5.5 करोड़ हो गई। जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने प्रवास को बढ़ावा दिया। पहले लोगों को उत्तरी द्वीप होकायदो की ओर भेजा गया। यह काफी सीमा तक एक स्वतन्त्र प्रदेश था और वहाँ आयनू कहे जाने वाले लोग रहते थे। इसके बाद उन्हें हवाई, ब्राजील और जापान के बढ़ते हुए औपनिवेशिक साम्राज्य की ओर भेजा गया। उद्योगों के विकास के साथ-साथ लोग शहरों की ओर आने लगे। 1925 तक 21 प्रतिशत जनता शहरों में रहती थी। 1935 तक यह बढ़ कर 32 प्रतिशत हो गई।

(viii) जापान में औद्योगिक मजदूरों की संख्या 1870 में 7 लाख से बढ़कर 1913 में 40 लाख पहुँच गई। अधिकतर मजदूर ऐसी इकाइयों में काम करते थे, जिनमें 5 से भी कम लोग थे और जिनमें मशीनों तथा विद्युत्त-ऊर्जा का प्रयोग नहीं होता था। कारखानों में काम करने वाले मजदूरों में आधे से अधिक महिलाएँ थीं। 1900 के बाद कारखानों में पुरुषों की संख्या बढ़ने लगी। परन्तु 1930 के दशक में ही आकर पुरुषों की संख्या महिलाओं में अधिक हुई। कारखानों में मजदूरों की संख भी बढ़ने लगी। फिर भी 1940 में 5 लाख 50 हजार कारखानों में पाँच-पाँच से भी कम मजदूर काम करते थे।

पर्यावरण पर प्रभाव – उद्योगों के तीव्र और अनियन्त्रित विकास तथा लकड़ी की अधिक माँग से पर्यावरण का विनाश हुआ। संसद के निम्न सदन में सदस्य तनाको शोजो ने 1897 में औद्योगिक प्रदूषण के विरुद्ध पहला आन्दोलन छेड़ा। 800 गाँववासी जन विरोध में एकत्रित हुए और उन्होंने सरकार को कार्यवाही करने के लिए विवश किया।

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प्रश्न 9.
जापान के आक्रामक राष्ट्रवाद, पश्चिमीकरण तथा परम्परा की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आक्रामक राष्ट्रवाद-मेजी संविधान सीमित मताधिकार पर आधारित था। संविधान द्वारा बनाई गई डायट (संसद) के अधिकार सीमित थे। शाही पुनः स्थापना करने वाले नेता सत्ता में बने रहे और उन्होंने राजनीतिक पार्टियों का गठन किया। 1918-1931 के दौरान जनमत द्वारा चुने गए प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिपरिषद् बनाई। इसके बाद उन्होंने पार्टियों का भेद भुला कर राष्ट्रीय मंत्रिपरिषद् बनाईं। सम्राट सैन्य बलों का कमांडर था और 1890 से यह माना जाने लगा कि थलसेना और नौसेना का नियन्त्रण स्वतन्त्र है। 1899 में प्रधानमंत्री ने आदेश दिया कि केवल सेवारत जनरल और एडमिरल ही मंत्री बन सकते हैं। सेना को मजबूत बनाने का अभियान और जापान के उपनिवेशों की वृद्धि इस भय से एक-दूसरे से सम्बन्धित थी कि जापान पश्चिमी शक्तियों की दया पर निर्भर है। यह भय दिखा कर सैन्य-विस्तार के और सैन्यबलों को अधिक धन जुटाने के उद्देश्य से ऊँचे कर वसूले गए। इन करों के विरुद्ध आवाजें उठीं परन्तु उन्हें दबा दिया गया।

पश्चिमीकरण तथा परम्परा – अन्य देशों के साथ जापान के सम्बन्धों के बारे में जापानी बुद्धिजीवियों की आने वाली पीढ़ियों के विचार भिन्न-भिन्न थे। कुछ का विचार था कि अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देश सभ्यता की ऊँचाइयों पर हैं। जापान को भी उसी ऊँचाई पर पहुँचने की आकांक्षा रखनी चाहिए। फुकुजावा यूकिची मेजी काल के प्रमुख बुद्धिजीवियों में से थे। उनका कहना था कि जापान को ‘अपने में से एशिया को निकाल फेंकना’ चाहिए। उनके कहने का अभिप्राय यह था कि जापान को अपने एशियाई लक्षण छोड़ कर पश्चिम का भाग बन जाना चाहिए।

अगली पीढ़ी ने पश्चिमी विचारों को पूरी तरह से अपनाने पर आपत्ति की और कहा कि राष्ट्रीय गौरव का निर्माण देशी मूल्यों पर ही होना चाहिए। दर्शनशास्त्री मियाके सेत्सरे (18601945) ने तर्क पेश किया कि विश्व सभ्यता के हित में प्रत्येक राष्ट्र को अपने विशेष गुणों का विकास करना चाहिए। स्वयं को अपने देश के लिए समर्पित करना स्वयं को विश्व के प्रति समर्पित करने के समान है। दूसरी ओर बहुत से बुद्धिजीवी पश्चिमी उदारवाद की ओर आकर्षित थे। वे चाहते थे कि जापान अपना निर्माण सेना की बजाय लोकतन्त्र के आधार पर करे।

संवैधानिक सरकार की माँग करने वाले आन्दोलन के नेता उएको एमोरी (1857-1892) फ्रांसीसी क्रान्ति के मानव के प्राकृतिक अधिकारों और जन प्रभुसत्ता के सिद्धान्तों के प्रशंसक थे। वह उदारवादी शिक्षा के पक्ष में थे, जो प्रत्येक व्यक्ति को विकसित कर सके। कुछ दूसरे लोगों ने तो महिलाओं के मताधिकार की भी सिफारिश की। इस दबाव ने सरकार को संविधान की घोषणा करने पर बाध्य किया।

प्रश्न 10.
दो विश्वयुद्धों के बीच में जापान में सैनिकवाद के उत्थान की विवेचना कीजिए। यह विकास जापान द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेने के लिए कहाँ तक उत्तरदायी था?
उत्तर:
1918 ई. तक जापान आर्थिक दृष्टि से काफी समृद्ध था। परन्तु देश में राजनीतिक अस्थि॥ का वातावरण था। देश में लोकतन्त्र की स्थापना के प्रयास किए जा रहे थे। परन्तु सेना सता पर अपना प्रभाव बढ़ाने में व्यस्त थी। फलस्वरूप जापान पुनः सैनिकवाद की ओर बढ़ने
लगा।
माणन में सैनिकवाद के बढ़ते कदम – द्वितीय विश्व युद्ध तक जापान में सैनिकवाद के विकास र्णन इस प्रकार है-
(i) 1929 की महान् आर्थिक मन्दी-1929 ई. में विश्व तथा. विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका। महान् आर्थिक मन्दी का सामना करना पड़ा। फलस्वरूप संयुक्त राज्य में वस्तुओं का उपभोग बहुत ही कम हो गया। इसका जापान की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। इसका कारण यह था कि अमेरिका जापान से निर्यात होने वाले कृषि उत्पादन का सबसे बड़ा बाजार था। देश का निर्यात कम होने से कृषकों को घोर निर्धनता का सामना करना पड़ा। तंग आकर वे सेना में भर्ती होने लगे। इस अवसर का लाभ उठा कर देश के सेनानायकों ने सैन्यवाद महिमा गान करना आरम्भ कर दिया । वे चाहते थे कि जापान चीन में चल रहे गृह युद्ध का लाभ उठा कर चीन को एक उपनिवेश के रूप में प्रयोग करे।

(ii) मंचूरिया संकट 1931-मंचूरिया चीन का एक प्रान्त था। यहाँ चीन की कम्पनियों का बहुत अधिक प्रभाव था। चीन की राष्ट्रवादी सरकार ने उसकी शक्ति को नियन्त्रित करने का प्रयास किया। अतः टोक्यो (जापान) के सैनिकवादियों ने देश के अनुसार राजनेताओं के सहयोग से मंचूरिया पर आक्रमण कर दिया और वहाँ एक कठपुतली सरकार की स्थापना कर दी। इस सम्बन्ध में देश के प्रधानमंत्री इनुकई (Inukai) से पूछा तक नहीं गया। जब इनुकई ने इस घटना का विरोध किया, तो उसकी हत्या कर दी गई और देश का शासन सेना के अधीन कर दिया गया। फलस्वरूप जापान में सैनिकवाद की जड़ें और अधिक गहरी हो गईं।

(iii) सैनिक फासीवाद-उपरोक्त घटना के पश्चात् द्वितीय विश्व युद्ध तक जापान में सैनिक फासीवाद का बोलबाला रहा। वहाँ सेना सर्वेसर्वा बन गई और सम्राट नाममात्र का मुखिया बना रहा। सैनिक सत्ता का विरोध करने वाले लोगों के साथ सख्ती के साथ निपटा गया। ऐसे अधिकांश लोगों को साम्यवादी होने की आड़ में गोलियों से उड़ा दिया गया। विचारों की अभिव्यक्ति तथा शिक्षा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। जापान की विदेश नीति ने आक्रामक रूप धारण कर लिया। इसका मुख्य उद्देश्य एशिया में तेजी से औपनिवेशिक विस्तार करना था।

इस दिशा में ब्रिटेन तथा अमेरिका के हितों को चोट पहुँचाने का हर सम्भव प्रयास किया गया। जापान द्वारा 1937 में चीन पर आक्रमण के समय अनेक निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस हत्याकांड का जापानी सम्राट भी विरोध करने का साहस न कर सका। इस प्रकार जापान में सैनिकवाद इतना अधिक हावी हो गया कि इसने जापान को द्वितीय विश्व युद्ध में धकेल दिया। उसने अन्य दो फासीवादी देशों इटली तथा जर्मनी का साथ दिया।

प्रश्न 11.
‘मेजी पुनःस्थापन’ का अर्थ क्या है? जापान के विकास पर इसके भावी परिणाम क्या थे?
उत्तर:
जापान में शताब्दियों तक ‘शोगुन’ शासक सत्ता के वास्तविक स्वामी बने रहे। परन्तु 1869 में ‘शोगुन’ गासन समाप्त कर दिया गया और उस स्थान पर नए शासक तथा सलाहकाः सामने आए। ये लोग जापानी सम्राट के नाम पर शासन चलाते थे। इस प्रकार देश में सम्राट फिर से सर्वेसर्वा बन गया। उसने ‘मेजी’ की उपाधि धारण की। इसलिए जापान के इतिहास में इस घटना को ‘मेजी पुनः स्थापना’ का नाम दिया गया।

महत्त्व – ‘मेजी पुनःस्थापना’ का जापान की भावी प्रगति पर गहरा प्रभाव पड़ा जिसका वर्णन इस प्रकार है-
(i) औद्योगिक प्रगति-मेजी युग में जापान ने औद्योगिक क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति की। देश की सरकार ने उद्योगों में व्यापक पूंजी निवेश किया। बाद में उद्योग पूंजीपतियों को बेच दिए गए। इस प्रकार ब नए उद्योग आरम्भ करने के लिए सरकारी सहायता की कोई आवश्यकता न रही। किसानों की दरिद्रता का भी उद्योगों को लाभ पहुँचा। अनेक निर्धन किसान गाँवों को छोड़कर नगरों में बसे। परिणमस्वरूप उद्योगों के लिए सस्ते मजदूर उपलब्ध होने लगे। 20वीं शताब्दी के आरम्भ तक जापान उद्योगों में इतना अधिक शक्तिशाली हो गया कि वह अन्तराष्ट्रीय बाजार में यूरोप के औद्योगिक देशों के साथ टक्कर लेने लगा।

(ii) नवीन संविधान-सन् 1889 में जापान को एक नया संविधान मिला। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-
1. सम्राट को कार्यकारिणी के प्रधान के रूप में विशेष शक्तियाँ दी गईं थीं। सभी मन्त्रियों की नियुक्ति सम्राट द्वारा होती थी और वे अपने कार्यों के लिए सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे। वास्तव में सम्राट को दैवी शक्तियाँ प्राप्त थीं उसे पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि समझा जाता था। अतः उसे पवित्र एवं श्रेष्ठतम मानकर उसकी पूजा की जाती थी।
2. संविधान में एक संसद का प्रावधान था, जिसे डायट कहते थे। परन्तु डायट की शक्तियाँ काफी सीमित थीं। उस पर सेना का नियन्त्रण स्थापित किया गया था ।
3. पुलिस को व्यापक अधिकार दिए गए थे। वह राजतन्त्र विरोधी गतिविधियों पर आसानी से रोक लगा सकती थी।

(iii) औपनिवेशिक विस्तार-1890 के दशक में जापान यूरोपीय देशों के साथ औपनिवेशिक होड़ में शमिल हो गया। इसने 1895 ई. में चीन से युद्ध किया और उसे परास्त करके फारमोसा पर अपना अधिकार कर लिया। फिर 1905 ई. में कोरिया उसका संरक्षित राज्य बन गया और इसके पाँच वर्ष पश्चात् यह प्रदेश जापानी सम्राज्य का अंग बन गया।
इस प्रकार मेजी पुनः स्थापना के बाद जापान एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरने लगा। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोपीय देशों ने 1899 में ही उसे एक महाशक्ति के रूप में स्वीकार कर लिया था। कुछ देरों ने उसके साथ समानता के आधार पर संधियाँ भी की थीं।

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प्रश्न 12.
19वीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों से लेकर प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति तक एक विश्व शक्ति के रूप में जापान के विकास क्रम का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जापान एशिया का एकमात्र साम्राज्यवादी शक्ति था। उसने अपना साम्राज्यवादी प्रसार 19वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में किया। इससे पूर्व जापान स्वयं साम्राज्यवाद का शिकार होते-होते बचा था। 1853 ई. में कमोडोर पेरी के नेतृत्व में जंगी जहाज जापान के तट पर पहुँचे थे। पेरी ने बल प्रयोग द्वारा जापान को अमेरिकी जहाजरानी तथा व्यापार की छूट देने के लिए बाध्य किया। जापान के साथ ब्रिटेन, हालैंड तथा रूस ने भी समझौते किए। फिर भी जापान अन्य एशियाई देशों के कटु अनुभव से बचा रहा।

जापान का शक्तिशाली बनना – 1876 ई. में जापान में महत्त्वपूर्ण सत्ता-परिवर्तन हुआ, जिसे मेजी पुर्नस्थापना कहा जाता है मेजी काल में जापान ने बहुत उन्नति की। उसने अपनी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाना आरम्भ कर दिया और कुछ ही दशकों में वह विश्व का एक प्रमुख औद्योगिक देश बन गया। इसके अतिरिक्त वे शक्तियाँ जिन्होंने पश्चिमी देशों को साम्राज्यवादी बनया था, जापान में भी सक्रिय थीं पश्चिमी देशों की भांति जापान के पास भी अपने उद्योगों के लिए कच्चा माल बहुत कम था। उसे अपने माल की खपत के लिए नए बाजार नी चाहिए थे। अतः उसकी नजर ऐसे देश पर पड़ी जो उसकी इन दोनों आवश्यक्ताओं की ते कर सकते थे। इस प्रकार वह भी साम्राज्यवाद की होड़ में सम्मिलित हो गया।

साम्राज्यवाद विस्तार – जापान के साम्राज्यवादी विस्तार प वर्णन इस प्रकार है-

  • जापान के निकट चीन था और चीन में उसके साम्राज्यवादी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पर्याप्त अवसर थे। दोनों देश 1894 में कोरिया के प्रश्न पर एक-दूसरे से युद्ध कर चुके थे। इसके बाद जापान का चीन में प्रभाव काफी बढ़ गया था।
  • 1902 में इंग्लैंड तथा जापान का समझौता हुआ। इसके अनुसार जापान को अन्य यूरोपीय शक्तियों के समान दर्जा मिल गया।
  • 1940-05 में उसने रूस को पराजित किया। इसके परिणामस्वरूप उसे सखालिन का दक्षिणी भाग प्राप्त हुआ । जापान का लियाओतुंग प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग पर भी अधिकार हो गया। उसने पोर्ट आर्थर पट्टे (किराये)पर ले ली।
  • 1910 में कारिया जापान का उपनिवेश बन गया।

इस प्रकार प्रथम विश्व-युद्ध के समय तक जापान एक महाशक्ति बन चुका था। यदि पश्चिमी शक्तियाँ उसके मार्ग में बाधा न बनतीं, तो वह चीन में अपना और अधिक प्रसार कर सकता था। परन्तु यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य है कि पश्चिमी देशों की तुलना में जापान के साम्राज्यवादी कारनामे काफी बदतर थे।

प्रश्न 13.
द्वितीय विश्वयुद्ध में पराजय के पश्चात् जापान का विश्व की आर्थिक शक्ति। के रूप में उत्थान किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
युद्ध के बाद की स्थिति-द्वितीय विश्व युद्ध में पराजय के बाद जापान के औपनिवेशिक साम्राज्य के प्रयास थम गए। यह तर्क दिया गया था कि युद्ध को जल्दी समाप्त करने के लिए जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराये गये थे। परन्तु बहुत से लोगों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाली विनाशलीला पूरी तरह से अनावश्यक थी। अमेरिका नियन्त्रण (1945-47) के दौरान जापान का विसैन्यीकरण कर दिया गया।

एक नया संविधान भी लागू हुआ। इसके अनुच्छेद 9 के ‘युद्ध न करने’ की तथाकथित धारा के अनुसार जापान युद्ध को राष्ट्रीय नीति नहीं बना सकता । कृषि सुधार, व्यापारिक संगठनों के पुनर्गठन और जापानी अर्थव्यवस्था में जायबात्सु अर्थात् बड़ी एकाधिकार कम्पनियों को पकड़ को समाप्त करने का प्रयास किया गया । राजनीतिक पार्टियों को पुनर्जीवित किया गया और युद्ध के पश्चात् 1946 में पहले चुनाव हुए । इन चुनावों में पहली बार महिलाओं ने भी मतदान किया।

आर्थिक शक्ति के रूप में उत्थान – युद्ध में भयंकर हार के बावजूद जापानी अर्थव्यवस्था का बड़ी तेजी से पुनर्निर्माण हुआ। संविधान को औपचारिक रूप से लोकतान्त्रिक बनाया गया। परन्तु जापान में जनवादी आन्दोलन और राजनीतिक भागीदार का आधार बढ़ाने की ऐतिहासिक परम्परा रही थी। अतः युद्ध से पहले के काल की सामाजिक सम्बद्धता को सुदृढ़ किया गया। इसके परिणामस्वरूप सरकार नौकरशाही और उद्योग के बीच एक निकट सम्बन्ध स्थापित हुआ।

अमेरीकी समर्थन और कोरिया तथा वयतनाम में युद्ध से उत्पन्न माँग ने जापानी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायता की। 1964 में हुए ओलम्पिक खेल जापानी अर्थव्यवस्था की परिपक्वता। के प्रतीक थे। तेज गति वाली शिकाँसेन अर्थात् बुलेट ट्रेन का जाल भी 1964 में आरम्भ हुआ। ये गाड़ियाँ 200 मील प्रति घंटे की गति से चलती थीं। अब वे 300 मील प्रति घंटे की गति से चलती हैं। यह बात भी जापानियों की सक्षमता को दर्शाती है कि उन्होंने नयी प्रौद्योगिकी द्वारा बेहतर और सस्ते उत्पाद बाजार में उतारे।

1960 के दशक में ‘नागरिक समाज आन्दोलन’ का उदय हुआ। इस आन्दोलन द्वारा बढ़ते औद्योगीकरण के कारण स्वास्थ और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव की पुरी तरह से उपेक्षा कर देने का विरोध किया गया। कैडमियम का विष, जिसके कारण एक बहुत ही कष्टप्रद बीमारी होती थी, औद्योगिक दुष्प्रभाव का आरम्भिक सूचक था। इसके बाद 1960 के दशक में वायु प्रदूषण से भी समस्याएँ उत्पन्न हुई। दबाव गुटों ने इन समस्याओं को पहचानने और भृतकों के लिए मुआवजा देने की माँग की।

सक्रियता से नए कानूनों से स्थिति में सुधार आने लगा। 1980 के दशक के मध्य से पर्यावरण सम्बन्धी विषयों में लोगों की रुचि में कमी आई है, क्योंकि जापान ने विश्व के कुछ कठोरतम पर्यावरण नियन्त्रण कानून बनाए हैं। आज जापान एक विकसित देश है। वह अपनी राजनीतिक और प्रौद्योगिकीय क्षमताओं का प्रयोग करके स्वयं को एक विश्व शक्ति बनाए रखने का प्रयास रहा है।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
रेड गार्डस में कौन शामिल थे?
(क) किसान और मजदूर
(ख) सामन्त
(ग) छात्र और सेना
(घ) गाँवों के लोग
उत्तर:
(ग) छात्र और सेना

प्रश्न 2.
कोमिंतांग पार्टी का निम्नलिखित में कौन-सा कार्य नहीं होता?
(क) एक दमनकारी सरकार की स्थापना की।
(ख) सत्ता में स्थनीय आबादी को शामिल नहीं किया गया।
(ग) भूमि सुधार का कार्यक्रम चलाया।
(घ) बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगा दी।
उत्तर:
(घ) बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगा दी।

प्रश्न 3.
ताइवान में मार्शल-लॉ कब हटाया गया?
(क) 1687
(ख) 1787
(ग) 1887
(घ) 1987
उत्तर:
(ग) 1887

प्रश्न 4.
जापान के आधुनिकीकरण का एक दुष्परिणाम था?
(क) सैनिकवाद
(ख) शैक्षणिक विकास
(ग) औद्योगिक विकास
(घ) सांस्कृतिक पतन
उत्तर:
(क) सैनिकवाद

प्रश्न 5.
जापानी सैन्यबलों का सर्वोच्च कमांडर निम्न में से कौन है?
(क) सम्राट
(ख) जनरल
(ग) एडमिरल
(घ) ब्रिगेडियर
उत्तर:
(क) सम्राट

प्रश्न 6.
जापान में आधुनिक बैंकिंग संस्थाओं का प्रारम्भ कब हुआ?
(क) 1772
(ख 1815
(ग) 1852
(घ) 1872
उत्तर:
(घ) 1872

प्रश्न 7.
कोमिंतांग (नेशनल पीपुल्स पार्टी) का संस्थापक कौन था?
(क) सनयात-सेन
(ख) चियांग काई शेक
(ग) माओ जेदोंग
(घ) देंग जियोपिंग
उत्तर:
(क) सनयात-सेन

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में कौन-सी समस्या कारखानों के मजदूनरों की समसया नहीं थी?
(क) काम करने के घंटे बहुत लम्बे थे।
(ख) शहर में कार बहुत चलती थी।
(ग) मजदूरों को कम वेतन मिलता था।
(घ) काम करने की परिस्थितियाँ खराब होती थीं।
उत्तर:
(ख) शहर में कार बहुत चलती थी।

प्रश्न 9.
चीन में पीकिंग विश्वविद्यालय कब स्थापित हुआ?
(क) 1802
(ख) 1812
(ग) 1902
(घ) 2002
उत्तर:
(ग) 1902

प्रश्न 10.
कौंमिटर्न का अन्य नाम क्या है?
(क) प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय
(ख) द्वितीय अन्तर्राष्ट्रीय
(ग) तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय
(घ) चतुर्थ अन्तर्राष्ट्रीय
उत्तर:
(ग) तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय

प्रश्न 11.
लाँग मार्च (1934-35) के यात्रा की दूरी क्या थी?
(क) 3000 मील
(ख) 4000 मील
(ग) 5000 मील
(घ) 6000 मील
उत्तर:
(घ) 6000 मील

प्रश्न 12.
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना कब हुई?
(क) 1948
(ख) 1949
(ग) 1950
(घ) 1951
उत्तर:
(ख) 1949

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

प्रश्न 13.
पीपुल्स कम्यून्स क्या थे?
(क) जहाँ लोग एकत्र जमीन के मालिक थे और मिल-जुलकर फसल उगाते थे।
(ख) जहाँ एकत्र होकर लोग युद्ध करते थे।
(ग) जहाँ राजा के साथ मनोरंजन किया जाता था।
(घ) जहाँ सामन्तों की महत्त्वपुर्ण बैठकें होती थीं।
उत्तर:
(क) जहाँ लोग एकत्र जमीन के मालिक थे और मिल-जुलकर फसल उगाते थे।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग

Bihar Board Class 11 Economics सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़े वे होते हैं जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने उद्देश्य के लिये पहली बार मौलिक रूप से संकलित करता है।

प्रश्न 2.
प्राथमिक आँकड़ों का संग्रह करने के लिये किन-किन विधियों का प्रयोग किया जा सकता है? उन विधियों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसंधान
  2. अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान
  3. संवाददाता द्वारा सूचना
  4. सूचना देने वालों द्वारा अनुसूचियों को भरना
  5. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियों द्वारा भरना

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प्रश्न 3.
एक अच्छी प्रश्नावली (अनुसूची) की कोई तीन विशेषतायें लिखें।
उत्तर:

  1. प्रश्न सरल स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष होना चाहिये
  2. प्रश्नों की संख्या सीमित होनी चाहिये
  3. प्रश्नों का एक निश्चित और सुव्यवस्थित क्रम होना चाहिये

प्रश्न 4.
द्वितीयक आँकड़े किसे कहते है?
उत्तर:
1. द्वितीयक आँकड़े उन आंकड़ों को कहते हैं जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने प्रयोग के लिये स्वयं एकत्रित नहीं करता अपितु किसी अन्य स्रोत कार्यलय आदि से प्राप्त करता है।

प्रश्न 5.
द्वितीय आंकड़ों के स्रोत लिखें।
उत्तर:
सरकारी प्रकाशन तथा अर्द्धसरकारी प्रकाशन द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख्य स्रोत है। इसे अतिरिक्त द्वितीयक आँकड़ों के गैर-प्राकशित स्रोत भी हैं-जैसे निजी शोध संस्थाएँ विश्वविद्यालय आदि।

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प्रश्न 6.
द्वितीयक आँकड़ों का प्रयोग प्राय: कब किया जाता है?
उत्तर:
द्वितीयक स्रोतों के आँकड़ों का प्रयोग प्रायः तब किया जाता है जब समय, धन एवं मानव संसाधन कीकमी हो या सूचनाएँ आसानी से उपलब्ध हों।

प्रश्न 7.
कोई तीन आर्थिक गतिविधियाँ लिखें।
उत्तर:

  1. बैंकिंग
  2. बीमा तथा
  3. व्यापार

प्रश्न 8.
परियोजना का प्रथम चरण लिखें।
उत्तर:
परियोजना का प्रथम चरण समस्या को पहचानना है।

प्रश्न 9.
आपके अध्ययन के क्षेत्र कौन-कौन से हो सकते हैं? कोई से तीन क्षेत्र लिखें।
उत्तर:

  1. कार
  2. मोबाइल फोन
  3. नहाने का साबुन

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प्रश्न 10.
अध्ययन के लिये उपयुक्त प्रश्नों की प्रश्नावली बनाने के लिये क्या महत्त्वपूर्ण होता है?
उत्तर:
अध्ययन के लिये उपयुक्त प्रश्नों की एक प्रश्नावली बनाने के लिये लक्षित समूह का .. चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 11.
यदि आपकी परियोजना कार से सम्बन्धित है तब आपका लक्ष्य समूह मुख्यतः क्या होगा?
उत्तर:
यदि हमारी परियोजना कार से सम्बन्धित है तब हमारा लक्ष्य मुख्यतः मध्य आय वर्ग या उच्च वर्ग होगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अच्छी प्रश्नावली की विशेषताएं लिखें।
उत्तर:

  1. प्रश्न सरल, स्पष्ट तथा प्रत्यक्ष होना चाहिये।
  2. प्रश्न वैयक्तिक नहीं होना चाहिए।
  3. प्रश्न की संख्या समिति होनी चाहिये।
  4. प्रश्नों का निर्माण इस ढंग से किया जाना चाहिये ताकि उनका उत्तर हाँ या न में संभव हो सके।
  5. प्रश्न एक-दूसरे के पूरक होना चाहिये।
  6. प्रश्न सर्वेक्षण से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होना चाहिये।
  7. बहुविकल्पीय उत्तर वाले प्रश्नों के साथ सभी विकल्प उत्तर संख्या दिया जाना चाहिये।
  8. प्रश्न क्रम में पूछ जाना चाहिये।

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प्रश्न 2.
प्राथमिक आंकड़े तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर बतायें।
उत्तर:
प्राथमिक आंकड़ों तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 1

प्रश्न 3.
निम्न तालिका से बतायें कि लोग किस प्रकार से एयरकंडीशनर को प्राथमिकता देते हैं। (आधार निम्नलिखित हैं)

  1. ब्राण्ड
  2. कीमत
  3. विक्रयव उपान्त सेवायें तथा
  4. तकीकी
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 2

उत्तर:
तालिका से मिली जानकारी:

  1. ब्राण्ड: विडियोंकान या सेमसंग।
  2. कीमत: एल० जी० या विडियोकान।
  3. विक्रय सेवा के बाद सेवाएं: जी० एल० या विडियोकॉन।
  4. तकनीकी: विडियोकान अथवा एल० जी०।
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 3

उत्तर:
उच्च एयर कंडीशनर जानने के लिए हम समान्तर माध्य की गणना करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 4
उत्तर:
ब्राण्ड, कीमत, विक्रय के पश्चात सेवाओं तथा तकनीक को ध्यान में रखते हुए हम पा सकते हैं कि लोग विडियो एयरकंडीशनर खरीदेंगे क्योंकि औसत प्रतिशत सबसे अधिक है (22.5%)।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित सूचना को दंड – आरेख में प्रकट करें और बतायें कि परिवार किस संचार माध्यम से अधिक प्रभावित होते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 5
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 6
प्रक्षेप: अधिकांश लोगों को उत्पादन के बारे में टेलीविजन या समचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
घरेलू ईंधन के रूप में रसोई वाली गैस की माँग का अनुमान लगाने के लिए प्रश्नावली तैयार करें।
उत्तर:
प्रश्नावली …………………….. घरेलू ईंधन के रूप में रसोई वाली गैस की माँग का अनुमान (Estimation of demond for cooking gas as sources of house hold fuel)
1. घर के मुखिया का नाम …………………………

2. आयु ………………………………………….

3. घर का पता ……………………………….

4. वैवाहिक स्थिति Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 विवाहित Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 अविवाहित Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

5. परिवार के सदस्यों की संख्या (आश्रित) ………………..

6. व्यवसाय: नौकरी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 स्वयं नियोजन Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

7. औसत मासिक आय (रुपया में) –

  • 500 रुपए में 1000 रुपए के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 1000 रुपए से 1200 रुपए के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 2000 रुपए से 5000 रुपए के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 5000 रुपए से 10,000 रुपए के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 10,000 रुपए से अधिक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

8. किस ईंधन – पदार्थ का प्रयोग करते हैं?
लकड़ी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 कोयला Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 मिट्टी का तेल गैस Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

9. क्या आप गैस का प्रयोग करते हैं?
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

10. क्या आप केवल गैस का ही प्रयोग करते हैं?
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

11. यदि आप गैस का प्रयोग करते हैं तो उसका मुख्य कारण क्या है?

  • गैस कनैक्शन का न मिलना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • कनैक्शन लेने के लिये पैसों की कमी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • गैस के प्रयोग का ठीक न समझना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • गैस का प्रयोग सुरक्षित नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

12. यदि आप गैस साथ अन्य ईंधन पदार्थ का प्रयोग करते हैं तो उसका मुख्य कारण है –

  • पर्याप्त गैस का न मिलना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • गैस की कीमत अधिक होने के कारण केवल आवश्यक कार्यों के लिये इसका प्रयोग Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • स्वास्थ्य की दृष्टि से गैस का प्रयोग सभी कार्यों के लिये ठीक नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

13. यदि आप गैस का प्रयोग करते हैं तो इसका मुख्य कारण है –

  • अन्य ईंधन पदार्थों की अपेक्षा सस्ती होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • इसका प्रयोग सुविधाजनक होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • कोई अन्य कारण Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

14. आपका गैस वितरण एजेन्सी आपके निवास स्थान से कितना दूर है?

  • एक किलोमीटर तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • एक किलोमीटर से पाँच किलोमीटर तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • पाँच किलोमीटर से अधिक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

15. आपके पास कितने गैस सिलेंडर हैं?

  • एक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • दो Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • दो से अधिक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

16. यदि आपके पास गैस कनेक्शन नहीं है तो मिलने पर आप इसे लेना चाहेंगे –
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

17. आपके गैस सिलेंडर की सप्लाई कब मिलती है?

  • सूचना देते ही Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • एक सप्ताह के अंदर Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • एक सप्ताह के बाद Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

18. आपका गैस कनैक्शन क्या आपके नाम है?
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

19. एक महीने में आपके कितने गैस सिलेंडर प्रयुक्त किये जाते हैं?

  • कम से कम Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • एक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • दो Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • दो से अधिक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग

प्रश्न 2.
समस्त जनता को उचित मूल्यों की दुकानों द्वारा वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली सुविधाओं का मूल्यांकन करने के लिए एक प्रश्नावली तैयार करें।
उत्तर:
प्रश्नावली
1. उपभोक्ता का नाम ………………………

2. निवास स्थान ………………………

3. परिवार में सदस्यों की संख्या ……………………….

4. औसत मासिक आय (रुपयों में) –

  • 1000 रुपये तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 1000 रुपये से 20000 रुपये के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 2000 रुपये से 5000 रुपये के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 5000 रुपये से 10,000 हजार रुपये के बीच Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 10,000 रुपये से अधिक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

5. आपका व्यवसाय
नौकरी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 व्यापार Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 अन्य Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

6. राशन की दुकान आपके घर में कितनी दूर है?

  • 200 मीटर तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • 500 मीटर तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • एक किलो मीटर तक Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

7. क्या आप उचित मूल्य की दुकान से राशन लेते हैं ?
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

8. आप उचित मूल्यों की दुकान से किन-किन वस्तुओं का राशन लेते हैं?
चीनी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 गेहूँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 चावल Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 पी Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 अन्य Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 दालें Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

9. यदि आप उचित मूल्यों की दुकानों से राशन नहीं लेते तो उसका मुख्य कारण है –

  • लम्बी कतारें Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • घटिया, वस्तुएँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • कीमतों में विशेष अन्तर न होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • समय का अभाव Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • प्रायः संबंधित वस्तु का उपलब्ध न होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • राशन की दुकान का दूर होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

10. यदि आप उचित मूल्यों की दुकानों से राशन लेते हैं, तो उसका मुख्य कारण है –

  • कीमतों का कम होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • आय का कम होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • निसास स्थान के पास होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

11. क्या आप केवल चीनी का ही राशन लेते हैं? हाँ/नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 यदि हाँ तो उसका मुख्य कारण है –

  • खुले बाजार की चीनी और राशन की चीनी की कीमतों में अंतर बहुत है। Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • चीनी प्रायः मिल जाती है, अन्य वस्तुओं का स्टॉक का अभाव रहता है। Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

12. क्या आप राशन के गेहूँ का प्रयोग करते हैं? हाँ नहीं। यदि हाँ तो उसका मुख्य कारण है –

  • गेहूँ का घटिया किस्म का होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • गेहूँ का प्रायः उपलब्ध न होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • चावल का प्रयोग Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • प्रत्यक्ष आटे का प्रयोग Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

13. क्या राशन के खाद्य-तेल (घी) का प्रयोग करते हैं?
हाँ Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7 नहीं Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

यदि नहीं तो उसका मुख्य कारण है –

  • घी का प्रायः उपलब्ध न होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • उपभोग की जाने वाली ब्राण्ड का उपलब्ध न होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • अन्य कारण Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

14. आपकी दृष्टि से राशन-वितरण प्रणाली में सुधार के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण उपाय होगा –

  • सभी वस्तुओं का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • और अधिक बस्तुओं का उपलब्ध होना, जैसे जूते, कपड़े आदि Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7
  • उचित मूल्यों की दुकानों की संख्या में वृद्धि Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 7

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प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़ों की सहायता से मदर डेयरी में कुछ सब्जियों की कीमतों में होने वाले परिवर्तनों पर एक परियोजना तैयार करना
उत्तर:
मद डेयरी सब्जी विभाग में जनवरी-फरवरी-2006 में सब्जियों की कीमतें।, (Vegetable Prices at Mother Dairy (Vegetable outlet) durig Jan-Feb-2006)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 10

आँकड़ों का वर्गीकरण:
आँकड़ों को पहले ही तालिका में संकलित किया गया है।

आँकड़ों का चित्रमय प्रदर्शन (Graphic Presentation of Data):
सब्जियों की कीमतों का चित्रमय प्रदर्शन किया जा सकता है। हम यहाँ केवल आलू की कीमतों का चित्रमय प्रदर्शन करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 11
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 12

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग

प्रश्न 4.
उपभोक्ता में जागृति के विषय में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त की गई है। इन्हें तालिका में प्रदर्शित करें।
(क) ग्रामीण उपभोक्ता से सम्बन्धित आंकड़े
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 13
उत्तर:
गृहस्थों में उपभोक्ता जागृति (Consumed Awarness among Households):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 सांख्यिकीय विधियों के उपयोग Part - 2 img 15

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

Bihar Board Class 11 Economics सूचकांक Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मदों के सापेक्षिक महत्त्व को बताने वाले सूचकांक को –
(a) भारित सूचकांक कहते हैं।
(b) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं।
(c) सरलमूल्यानुपात का औस कहते हैं।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) भारित सूचकांक कहते हैं।

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प्रश्न 2.
अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का संबंध –
(a) आधार वर्ष होता है।
(b) वर्तमान वर्ष होता है।
(c) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आधार वर्ष होता है।

प्रश्न 3.
ऐसी वस्तु जिसका सूचकांक से कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा?
(a) कम
(b) अधिक
(c) अनिश्चित
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कम

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प्रश्न 4.
कोई उपभोक्ता कीमत सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है?
(a) खुदरा कीमत
(b) थोक कीमत
(c) उत्पादकों की कीमत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) खुदरा कीमत

प्रश्न 5.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है?
(a) खाद्य पदार्थ
(b) आवास
(c) कपड़े
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) खाद्य पदार्थ

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प्रश्न 6.
सामान्यतः मुद्रा स्फीति के परिवर्तन में किसका प्रयोग होता है?
(a) थोक कीमत सूचकांक
(b) उपभोक्ता कीमत सूचकांक
(c) उत्पादक कीमत सूचकांक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) थोक कीमत सूचकांक

प्रश्न 7.
हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
आर्थिक चरों में दो समय बिंदुओं से सम्बन्धित औसत प्रतिशत परिवर्तन की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें सूचकांक की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 8.
आधार वर्ष अवधि के वांछित गुण क्या होते हैं?
उत्तर:
आधार अवधि के वांछित गुण (Desirable properties of the base year) इस प्रकार हैं –

  1. आधार अवधि सामान्य अवधि होनी चाहिए।
  2. आधार अवधि ने तो अधिक पुरानी होनी चाहिए और न ही अधिक नई।
  3. यह वह अवधि होनी चाहिए जिसके आंकड़े उपलब्ध हों।

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प्रश्न 9.
भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती है?
उत्तर:
उपभोक्ता की विभिन्न श्रेणियों के लिए विभिन्न उपभोक्ता सूचकांक बनाना इलिए आवश्यक है क्योंकि उनके खान-पान (कोई वर्ग गेहूँ की रोटी खाता है और कोई वर्ग गेहूँ के स्थान पर चावल का अधिक प्रयोग करता है), पहनावे जीवन-स्तर और रीति-रिवाजों में विभिन्नता पाई जाती है।

प्रश्न 10.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर:
औद्योगिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सामान्य स्फीति मापता है।

प्रश्न 11.
कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अन्तर है?
उत्तर:
कीमत सूचकांक को बनाने का उद्देश्य वस्तुओं के समूहों के कीमतों में होने वाले सापेक्ष परिवर्तनों को मापना है जबकि मात्रा सूचकांक बनाने का उद्देश्य विभिन्न वस्तुओं की मात्रा में होने वाले सापेक्ष परिवर्तनों को मापना है।

प्रश्न 12.
क्या किसी भी तरह का कीमत परिवर्तन एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिंबित होता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 13.
क्या शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व कर सकता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 14.
नीचे एक औद्योगिक केन्द्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रतिव्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार 75, 10,5,6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिए जीवन निर्वाह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 1
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 2

प्रश्न 15.
निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढ़िए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 3
उत्तर:
सारणी से पता चलता है कि व्यापक श्रेणियों के संवृद्धि निष्पादन में विभिन्नता है, सामान्य सूचकांक इन श्रेणियों के औसत निष्पादन को दिखाता है।
खनन तथा उत्खनन के अपेक्षाकृत निम्न निष्पादन के बावजूद सामान्य सूचकांक नीचे नहीं गिरा। इसका मुख्य कारण विनिर्माण तथा विद्युत में अच्छा निष्पादन होना है।

प्रश्न 16.
स्फीति परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
गेहूँ, चीनी, चावल, दाल, कपड़ा, पैट्रोल, मकान, मनोरंजन, टेलीफोन, मोबाइल, टी. वी., रेडियो, वाहन, स्टेशनरी, पुस्तकें आदि।

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प्रश्न 17.
यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4000 रु0 प्रति वर्ष था और उका वर्तमान वर्ष में वेतन 6000 रु0 है।
उसके जीवन स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृद्धि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।
उत्तर:
आधार वर्ष में आय = 4000 रुपये
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक = 400 रुपये
अतः वर्तमान आय हो होनी चाहिए = 4000 × \(\frac{400}{100}\) = 1600 रुपये
वर्तमान वार्षिक आय = 6,000 रुपये
आय में वृद्धि हो होनी चाहिए = 16000 – 6,000 = 10,000 रुपये

प्रश्न 18.
जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदों को सूचकांक 135 था। खाद्य पदार्थों को दिया जाने वाला भार कुल भार का कितना प्रतिशत था।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक = 125
भोजन का सूचकांक = 120
उपभोक्ता सूचकांक का विचलन = 125 – 120 = 5
अन्य मदों का सूचकांक = 135
उपभोक्ता सूचकांक से विचलन = 135 – 120 = 5
अतः भोजन का भार = \(\frac{5}{5+15}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 19.
किसी शहर में एक मध्यवर्गीय पारिवारिक वजट में जांच-पड़ताल से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त होती है:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 4
1995 की तुलना में 2004 में निर्वाह सूचकांक का मान क्या होगा?
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 5
निर्वाह सूचकांक = \(\frac{18650}{100}\) = 186.5

प्रश्न 20.
दो सप्ताह तक अपने परिवार के (प्रति इकाई) दैनिक व्यय, खरीदी गई मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभिलिखित कीजिए। कीमत में आए परिवर्तन आपको किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थियों को परामर्श दिया जाता है कि वे अपने माता/पिता से पिछले दो सप्ताह होने वाले दैनिक व्ययों के बारे में पूछे।
उनसे यह भी पूछे कि वह कौन-सी वस्तु कितनी मात्रा में क्रय करते हैं और प्रति इकाई उस वस्तु की क्या कीमत है। इन सब बातों को अपनी कापी में लिखें।

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प्रश्न 21.
निम्नलिखित आँकड़ों दिए गए हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 6
(क) विभिन्न सूचकांकों को प्रयुक्त करते हुए मुद्रा स्फीति की दर का परिकलन कीजिए।
(ख) सूकांकों के सापेक्षिक मानों पर टिप्पणी लिखें।
(ग) क्या ये तुलना योग्य हैं?
उत्तर:
(क) मुद्रा स्फीति की दर गणना –

1. औद्योगिक श्रमिक –
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2. नगरीय गैर-शारीरिक कर्मचारी –
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3. कृषि श्रमिक –
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4. थोक कीमत सूचकांक –
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(ख) सूचकांकों के सापेक्षिक मान पर टिप्पणी –

  • औद्योगिक श्रमिकों का C.P.I. आरम्भ के वर्षों में तेजी से बढ़ा परन्तु बाद में इसकी वृद्धि दरों में कमी आई।
  • नगरीय गैर-शारीरिक कर्मचारियों के C.P.I. में काफ़ी उतार-चढाव आए।
  • कृषि श्रमिकों के C.P.I में काफी उतार-चढ़ाव पाए गए।

(ग) ये तुलना योग्य नहीं हैं।

Bihar Board Class 11 Economics सूचकांक Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्फीति दर की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
स्फीति दर = \(\frac { X_{ 1 }-X_{ t }-1 }{ X-t-1 } \times 100\)
xt – 1 = पिछले माह, वर्ष, सप्ताह या दिन थोक मूल्य सूचकांक (WPI)
Xt = वर्तमान मास, वर्ष, सप्ताह या दिनों का थोक मूल्य सूचकांक।

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प्रश्न 2.
मुद्रा की क्रय शक्ति तथा वास्तविक मजदूरी की गणना करने के लिए किस सूचकांक का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)।

प्रश्न 3.
पाशे की सूचकांक के भार क्या आधार है?
उत्तर:
पाशे की सूचकांक के भार का आधार चालू वर्ष की मात्रा है।

प्रश्न 4.
सामान्य मूल्य सूचकांक क्या माप करते हैं?
उत्तर:
सामान्य मूल्य सूचकांक मूल्य स्तर पर होने वाले परिवर्तन की माप करते हैं।

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प्रश्न 5.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्या है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसी वर्ग के व्यक्तियों द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के फुटकर मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों का मापन करते हैं।

प्रश्न 6.
सूचकांक बनाने में कौन-सी माध्य विधि उपयुक्त है?
उत्तर:
गुणात्मक. माध्य (Geometric Mean)।

प्रश्न 7.
सरल समूही विधि सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 = \(\frac { ΣP_{ 1 } }{ ΣP_{ 0 } } \times 100\) × 100

प्रश्न 8.
मूल्यानुपामों (Price Relatives) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 11

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प्रश्न 9.
मूल्यानुपात सूचकांक ज्ञान करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 \(\frac { Σ(P_{ 1 }/P_{ 0 }\times 10) }{ N } \)

प्रश्न 10.
सूचकांकों को बनाने की भारित समूही विधि में किसी प्रकार के भार प्रयोग में लाये जाते हैं?
उत्तर:
मात्रा के भार (Quantity weight)।

प्रश्न 11.
भारित समूही विधि द्वारा सूचकांक ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 = \(\frac { ΣP_{ 1 } q_{ 1 }}{ ΣP_{ 0 } q_{ 0 }} \times 100\) × 100

प्रश्न 12.
सचूकांको की भारित मूल्यानुपात विधि में किस प्रकार के भार का प्रयोग किया जाता हैं?
उत्तर:
मूल्य भार (Value Weight)।

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प्रश्न 13.
भारित मूल्यानुपात विधि से सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 12

प्रश्न 14.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसे कहते हैं?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वे सूचकांक हैं जो एक समयाविधि में कीमत स्तर में होने वाले परिवर्तनों को उपभोक्ताओं के जीवन निर्वाह पर पड़ने वाले प्रभाव को मापता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक कहते हैं।

प्रश्न 15.
थोक मूल्य सूचकांक किसे कहते हैं?
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक वे सूचकांक हैं जो एक समयाविधि में वस्तुओं के थोक मूल्यों में हाने वाले परिवर्तनों को मापते हैं। भारत में सूचकांक सप्ताहिक आधार पर तैयार किये जाते हैं।

प्रश्न 16.
मुद्रा-स्फीति की दर निकालने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 13

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प्रश्न 17.
वर्ष 1999 में एक देश की चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय 800 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर वर्ष 2000 में 910 करोड़ रुपये हो गई। इसी अवधि में थोक मूल्य सूचकांक 120 से बढ़कर 130 हो गया।
राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि कितनी हुई?
उत्तर:
वर्ष 2000 में वास्तविक राष्ट्रीय आय = \(\frac{910×120}{130}\) = 840 करोड़ रुपये।
राष्ट्रीय आय मे वास्तविक वृद्धि = 840 – 800 = 40 करोड़ रुपये।

प्रश्न 18.
अभारित सूचकांक को परिभारित करें।
उत्तर:
अभारित सूचकांक को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 14

प्रश्न 19.
भारित सूचकांक क्या है?
उत्तर:
भारित सूचकांक कीमत सापेक्षों का भारित माध्य है।
सूत्र के रूप में P01 = Σwl\(\frac { P_{ 11 } }{ P_{ 10 } } \)

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प्रश्न 20.
भारत में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के निर्माण के लिये उद्योगों को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है? उन श्रेणियों के नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में औद्योगिक सूचकांकों का निर्माण करने के लिए उद्योगों का निम्न तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है –
(क) खनन (Mining)।
(ख) विनिर्माण (Manufacturing)।
(ग) बिजली (Electricity)।

प्रश्न 21.
अभारित सूचकांक की क्या सीमाएँ (दोष) हैं?
उत्तर:
अभारित सूचकांक की एक सीमा यह है कि सभी मदों को एक जैसा भार (महत्त्व) देता है चाहे कुछ मदें दूसरी मदों से अधिक आवश्यक ही क्यों न हों। जैसे-यह माचिस कीकीमत और मकान के किराये को एक जैसा महत्त्व देता है।

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प्रश्न 22.
सूचकांक बनाने की विभिन्न विधियां कौन-सी हैं?
उत्तर:
सूचकांक बनाने की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. साधारण समूह विधि (Simple Aggregative Method)
  2. साधारण मूल्यानुपात माध्य विधि (Simple Average of Price Relative Method)
  3. भारित समूह विधि (Weighted Aggregative Method)
  4. मूल्यों की भारित माध्य विधि (Weighted average ofPrice Relative Method)

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्या है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह-व्यय में होनेवाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा को प्रकट करते हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को निर्वाह व्यय सूचकांक भी कहते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक विभिन्न स्थानों के लिए अलग-अलग बनाये जाते हैं।

प्रश्न 2.
सूचकांक क्या है?
उत्तर:
सूचकांक एक विशेष प्रकार का माध्यम है जो किसी समय अथवा के आधार पर सम्बन्धित चरों के समूह में होने वाले सापेक्षिक परिवर्तनों को मापता है।
इसमें किसी एक समय के मूल्यों को 100 मानकर दूसरे समय के मूल्यों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है ओर इन प्रतिशतों की माध्य निकाली जाती है। प्रतिशतों की यह माध्य ही सूचकांक या निर्देशांक कहलाता है। प्रो. ब्लेयर के शब्दों में, “सूचकांक विशिष्ट प्रकार के माध्य होते हैं।” (Index Number are specified type of averages)

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प्रश्न 3.
थोक मूल्य सूचकांक तालिका बनाएँ जिसमें उद्योगों के समूहीकरण तथा उनके दिये गये भार दिखाये गये हों।
उत्तर:
उद्योगों का समूहीकरण तथा उनके भार (Industrial grouping and their weights)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 15

प्रश्न 4.
सूचकांक बनाने में अनेकों कठिनाइयां सामने आती हैं। किन्हीं तीन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of Base Year):
आधार वर्ष सामान्य होना चाहिए अर्थात् वह एक ऐसा वर्ष हो जो बाढ़, युद्ध, महामारी आदि असाधारण प्रकोपों से मुक्त हो। आधार वर्ष बहुत ही छोटा या बहुत बढ़ा नहीं होना चाहि। यह बहुत पुराना भी नहीं होना चाहिए।

2. वस्तुओं का चुनाव (Selection of Commodities):
केवल उन्हीं चुनाव किया जाना चाहिए जो सम्बन्धित वर्ग में लोकप्रिय हों तथा उनकी आदतों व आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करें। वस्तुओं के गुणों में स्थिरता होनी चाहिए।

3. मूल्यों का चुनाव (Selection of Prices):
वस्तुओं के कवेल प्रतिनिधि मूल्यों का ही चुनाव किया जाना चाहिए। ये मूल्य उन मण्डियों से प्राप्त किया जाने चाहिये जहाँ पर उन वस्तुओं का काफी मात्रा में क्रय-विक्रय होता है।

प्रश्न 5.
थोक कीमत सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक के लाभ इस प्रकार हैं –

  1. थोक मूल्य सूचकांक के द्वारा मुद्रास्फिीति दर की गणना की जाती है। मुद्रास्फीति दर की गणना करने के लिये निम्नसूत्र का प्रयोग किया जाता है।
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 16
  2. थोक कीमत सूचकांक में परिवर्तनों की दशाओं को देखकर भविष्य में मांग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  3. थोक कीमतों की सूचकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि ओर कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  4. विभिन्न परियोजनाओं की लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

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प्रश्न 6.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या जीवन-निर्वाह सूचकांक की उपयोगिता लिखें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता निम्नलिखित है –

  1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सहायत से एक वर्ग विशेष के रहन सहन के व्यय में होने। वाले परिवर्तनों का ज्ञान होता है।
  2. इसके आधार पर सरकार विभिन्न कर्मचारियों को महंगाई भत्ता व न्यूनतम आदि निश्चित करती है।
  3. व्यय में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार यथासम्भव नीतियों निर्धारण किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
साधारण सूचकांक का निर्माण की कौन-सी विधियाँ हैं? प्रत्येक किया जाने वाला सूत्र लिखिए।
उत्तर:
1. सही समूह विधि (Aggregative Method):
इस विधि द्वारा सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र निम्न है –
P01 = \(Σ(\frac { P_{ 1 } }{ P_{ 0 } } \times 100)\)
P1 = चालू वर्ष की कीमतों का योग
P0 = आधार वर्ष की कीमतों का योग

2. मूल्यानुपति विधि इस विधि द्वारा सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र निम्लिखित है –
P01 = \(\frac { Σ(\frac { P_{ 1 } }{ P_{ 0 } } \times 100) }{ N } \)

प्रश्न 8.
भारित सूचकांक बनाने की लैसपियर तथा पाश्चे विधियों में अन्तर के तीन बिन्दु बताएँ।
उत्तर:
लैसपियर तथा पाश्चे विधियों में अन्तर (Difference between Laspeyre’s method and Pasche’s method)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 17

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प्रश्न 9.
थोक कीमत सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
थोक कीमत सूचकांक के लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. थोक मूल्य सूचकांक के द्वारा स्फीति की दर की गणना की जाती है। मुद्रा-स्फीति दर की गणना करने क लिये निम्नलिखित सूख का प्रयोग किया जाता है –
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 18
  2. थोक कीमत सूचकांक में परिवर्तनों की दशाओं को देखकर भविष्य में मांग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  3. थोक कीमतों की सूचकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि और कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  4. विभिन्न परियोजनाओं की लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

प्रश्न 10.
सेंसेक्स पर एक संक्षिप्त नोट लिखों।
उत्तर:
सेंसेक्स का पूरा नाम Bomaby Stock Exchange Sensitive Index है। इसका आधार वर्ष 1978-79 सूचकांक की मूल्य इसी आधार वर्ष के संदर्भ में होता है।
यदि हम कहें कि सेंसेक्स अब 10,000 रुपये है। इसका अभिप्राय यह है कि 1978-78 में सेंक्स 100 रुपये था जो अब बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है।
बम्बई स्टॉक एक्यचेंज में 30 स्टाक हैं जो 30 उद्योगों का प्रतिनिधि करते हैं। यदि सेंसेक्स बढ़ जाता है, तो इसका अभिप्राय है कि बाजार ठीक चल रहा है और निवेशाक अधिक लाभ कमाने की आशा करते हैं।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 11.
कुछ मुख्य सूचकांकों के नाम लिखकर किसी सूचकांक को समझाएँ।
उत्तर:
कुछ मुख्य सूचकांक (Some Important Index Number):
उपभोक्ता सूचकांक, थोक मूल्य सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, कृषि उत्पादन का सूचकांक, सेंसेक्स, उत्पादन मूल्य सूचकांक, मानव विकास सूचकांक आदि कुछ महत्त्वपूर्ण सूचकांक हैं।

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index):
यह आर्थिक विकास के माप का एक संयुक्त सूचकांक है। इसका निर्माण तीन तत्त्वों (जीवन दीर्घता, ज्ञान या शिक्षा प्राप्ति प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद) के आधार पर तैयार किया जाता है।
समीकरण के रूप में HdI = \(\frac{1}{3}\) (IRI + EAI + SLI)

प्रश्न 12.
सरल समूह विधि की सीमाएँ लिखें।
उत्तर:
सीमाएँ (Limitations):
सरल समूह विधिक की मुख्य सीमाएं निम्नलिखित हैं –

  1. जिस वस्तु की कीमत अधिक होगी उसके पक्ष मे छिपे रूप में भार मिल जाता है। उदाहरण के लिये सोने की कीमत अधिक होने से अधिक भार मिल जाता है।
  2. जिस इकाई की कीमत व्यक्त की जाती है, यदि उसका आकारया मात्रा बड़ी है तो उसको अधिक भार मिल जाता है।
    उदाहरण के लिये जिस वस्तु की कीमत प्रति टन मे व्यक्त की जायेगी उसको अधिक भार मिलेगा और जिस वस्तु की कीमत कि ग्राम में व्यक्त की जायेगी उसको भार कम मिलेगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक निर्माण विधि में निहित चरण लिखें। उपभोक्ता कीमत सूचकांक किन-किन मान्यताओं पर आधारित है?
उत्तर:
उपभोक्ता कीमत सूचकांक के निर्माण की प्रक्रिया में निहित चरण-उपभोक्ता कीमत सूचकांक के निर्माण चरण निहित हैं –

1. कार्यक्षेत्र (Scope):
सबसे पहला महत्त्वपूर्ण चरण यह तय करना है कि समाज के किस वर्ग के विषय में सूचकांक बनाना है।

2. सीमाक्षेत्र (Coverage):
कार्य क्षेत्र निर्धारित करने के बाद सीमा क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है अर्थात् किस क्षेत्र में श्रमिकों, विद्यार्थियों आदि से सूचकांक का सम्बन्ध है। एक जिला या एक राज्य।

3. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of the base year):
यह एक महत्त्वपूर्ण चरण आधार वर्ष का चुनाव करते समय दो बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। एक आधार वर्ष आर्थिक दृष्टि से न एक सामान्य वर्ष होना चाहिए। दूसरे वह चालू वर्ष से अधिक दूर और न ही अधिक नजदीक होना चाहिए।

4. परिवार बजट के विषय में सूचना प्राप्त करना (Conducting an enquires about family budget):
इसके अन्तर्गत एक परिवार बजट में एक समय काल में विभिन्न मदों की जानकारी प्राप्त की जाती है।

5. कीमत की जानकारी प्राप्त करना (Obtaining Prince Quotation):
परिवार बजट के बाद उन कीमतों की जानकारी ली जाती है जिनको सूचकांक में शामिल किया जाना है। कीमतें प्रायः उन्हीं बाजारों से प्राप्त करनी चाहिए जहाँ से सामान्यत: सम्बन्धित वर्ग समूह सामान खरीदता है।

मान्यताएँ (Assumption):
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक निम्न मान्यताओं पर आधारित है –

  1. उपभोक्ता के एक विशेष वर्ग में सभी व्यक्तियों की आवश्यकतायें एक जैसी हों।
  2. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सम्मिलित की जाने वाली वस्तुओं की कीमतें विभिन्न स्थानों पर समान हों।
  3. उपभोग की जाने वाली वस्तुओं की मात्रायें आधार वर्ष चालू वर्ष में समान रहती हैं।

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प्रश्न 2.
सूचकांको (निर्देशांकों) के निर्माण की साधारण विधि लिखें।अथवा, सूचकांक का निर्माण करते समय कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं? अथवा, एक सूचकांक बनाते समय हमें कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिये?
उत्तर:
सूचकांक के निर्माण की साधारण विधि (General method of Constructing of index Numbers)
सूचकांक के निर्माण में निम्नलिखित मुख्य समस्याएँ हैं –

1. सूचकांक का उद्देश्य (Purpose of Index Number):
सूचकांक बनाने के पूर्व यह निर्धारित कर लेना आवश्यक है कि इसका उद्देश्य क्या है क्योंकि उद्देश्य के अनुसार ही सूचनाएँ एकत्र की जायेंगी। उदाहरणार्थ जीवन निर्वाह लागत सूचकांक (Cost of Living Index Number) उत्पादन सूचकांक का निर्माण करता है।

2. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of the Base Year):
सूचकांक के निर्माण में एक आधार वर्ष का चुनाव आवश्यक है क्योंकि इसकी तुलना में चर मूल्यों के परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। आधार वर्ष का चुनाव कठिन होता है।
आधार वर्ष का चुनाव इस बात को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए कि वह आर्थिक दृष्टि से सामान्य वर्ष हो। उस वर्ष कोई राजनैतिक, प्राकृतिक आर्थिक दृष्टि से असामान्य घटना न घटी हो।

3. मदों का चुनाव (Selection of Items):
निर्देश में शामिल की जाने वाली मदों का चुनाव करना आवश्यक है। यह चुनाव के अनुकूल होना चाहिए। निर्देशांक बनाने के लिए उद्देश्य के अनुसार उचित संख्या में प्रतिनिधि वस्तुओं को शामिल किया जा सकता है।

4. प्रतिनिधि मूल्यों का चुनाव (Selection of Representative):
दिर्नेशांक बनाते समय चुनी हुई वस्तुओं के मूल्यों की समस्या आती है। अत: उपभोक्ता सूचकांक बनाते समय वे मूल्य लेने जिन पर आम उपभोक्ता को वस्तु उपलब्ध होती है।

5. वस्तुओं को भार देना (Assigning Weightage):
निर्देशांक के लिए चुनी हुई वस्तुओं का महत्त्व या भार एक समान उपभोक्ता को वस्तु उपलबध होती है।

6. माध्य का चुनाव (Selection of Suitable Average):
सूचकांक एक विशेष प्रकार को माध्य होते हैं। केन्द्रीय प्रवृत्तियों की मापों के लिए माध्य, माध्यिका भूयिष्ठक में से किसी का भी प्रयोग किया जा सकता हैं।
यहाँ किसी औसत का प्रयोग करने से यह समस्या आती है। प्रायः समान्तर माध्य प्रयोग किया जाता है। अलग-अलग माध्यमों से भिन्न भिन्न सूचकांक प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 3.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की विशेषतायें (Features of Consumer Price Index):
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित हैं –

1. भारत में तीन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाये जाते हैं –

  • औद्योगिक कर्मचारियों के लिये
  • शहरी गैर-शारीरिक कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिये
  • कृषि श्रमिकों के लिये।

2. इन तीन प्रकार के उपभोक्ता मूल्य सचूकांकों के आधार वर्ष 1982 (औद्योगिक कर्मचारियों के लिये), 1984-85 (शहरी गैर-शारीरिक कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिये) तथा 1986-82 (कृषि श्रमिकों के लिये) हैं।

3. इन तीनों सूचकांकों की गणना प्रतिमास की जाती है ताकि इस बात का विश्लेषण किया जा सके कि कीमतों में होने वाले परिवर्तनों का प्रभाव इन तीन श्रेणीके लोगों के जीवन निर्वाह व्यय पर क्या पड़ा है।

4. औद्योगिक कर्मचारियों तथा कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रकाशन श्रमिक ब्यूरों (Bureau) द्वारा किया जाता है।

5. शहरी गैर कार्मिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रकाशन केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा किया जाता है।

6. औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में ली गई मुख्य मदों को निम्न तालिका में दर्शाया गया है। तालिका से हमें पता चलता है कि भोजन को सबसे अधिक भार दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 19

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प्रश्न 4.
सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
निर्देशांक ठीक उसी प्रकार से देश के आर्थिक परिवर्तनों को मापने के लिए उपयोगी हैं, जैसे वायुमापक यन्त्र (Barometer) के द्वारा वायु के दबाव व मौसम की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। निर्देशांकों की उपयोगिता अथवा लाभ निम्नलिखित हैं –
1. जटिल तथ्यों को सरल करना (To Simplify Complexities):
व्यापार या व्यवसाय में ऐसे परिवर्तन होते रहते हैं जिनका प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन नहीं हो सकता। निर्देशांक ऐसे जटिल तथ्यों को सरल करके उन्हें ऐसा रूप प्रदान करते हैं ताकि वे तथ्य प्रत्येक व्यक्ति की समझ में आ सकें।

2. भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाना (To Make Predicitions):
सूचकांकों द्वारा भूतकाल के तथ्यों तथा उनमें वर्तमान में होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए ‘भविष्य’. में क्या होगा’ इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

3. तुलनात्मक अध्ययन में सहायक (Helpful in Comparative Study):
सूचकांकों या निर्देशांकों की सहायता से तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। जैसे-इनके द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि किसी वस्तु किस वर्ष कितनी थी तथा अब कितनी है। इसमें कितने प्रतिशत कमी या वृद्धि हुई है।

4. सापेक्ष माप करना (Relative Measurement):
सूचकांक केवल सापेक्ष परिवर्तनों का मापने का कार्य करते हैं। अत: जहाँ आर्थिक तथ्यों का निरपेक्ष या प्रत्यक्ष माप संभव न हो वहाँ सूचकांक तथ्यों का सापेक्ष या अप्रत्यक्ष माप प्रस्तुत करते हैं।

5. मुद्रा की क्रय का माप (To Measure Value of Money):
निर्देशांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को मापता है। यदि मूल्यों में कमी होती है तो मुद्रा का मूल्य बढ़ जाता है और यदि वृद्धि का मूल्य कम हो जाता है।

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प्रश्न 5.
निम्न मूल्य से 1984 को आधार मानकर 1985 से 2001 के लिए सूचकांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 20
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 21

प्रश्न 6.
निम्नलिखित आंकड़ों से वर्ष 1984 को आधार मानकर मूल्यानुपात ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 22
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 23

प्रश्न 7.
1985 को आधार मानकर निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से वर्ष 1988 के लिए सूचकांक (index) तैयार करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 24
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 25

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का निर्धारण करें –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 26
उत्तर:
उपभोक्ता-मूल्य सूचकांक का निर्माण
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 27

प्रश्न 9.
निम्न आँकड़ों की सहायता से जीवन निर्वाह लागत सूचकांक ज्ञात कीजिये। (Calculate the cost of living index number from the following data)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 29

प्रश्न 10.
1980 को आधार मानकर 1985 का भारित सूचकांक मूल्यानुपात निकालो।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 30
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 31

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प्रश्न 11.
मूल्यानुपात माध्य कीमत विधि द्वारा सूचकांक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 32
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 33
दूसरे शब्दों में कीमतों में 70.3% वृद्धि हुई।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से जीवन-निर्वाह लागत सूचकांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 34
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 35
जीवन निर्वाह सूचकांक = \(\frac{25350}{100}\) = 253.50

प्रश्न 13.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से मूल्यनुपात माध्य विधि द्वारा साधारण सूचकांक ज्ञात कीजिए:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 36
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 37
दूसरे शब्दों में कीमतों में 49% वृद्धि हुई।

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प्रश्न 14.
भारित मूल्यानुपात माध्य विधि से सूचकांक की गणना कीजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 37
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 39

प्रश्न 15.
निम्न तालिका को ध्यान से पढ़े और अपनी टिप्पणी दें:
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आधार वर्ष 1993-94 (Index of Industrial Production Base 1993-94)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 40
उत्तर:
टिप्पणी तालिका से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था की मुख्य श्रेणियों के संवर्धन में वृद्धि में अंतर है।
सामान्य इन श्रेणियों की औसत उपलब्धियों को दर्शाता है। सामान्य सूचकांक में 45% की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में खनन उत्खनन में केवल 25% हुई है। खनन तथा उत्खनन में उत्पादन में कम प्रतिशत उत्पादन होने पर भी सामान्य सूचकांक में कमी नहीं आई है। इसका कारण विनिर्माण में 47% तथा विद्युत में 41% वृद्धि होना है। इसके अतिरिक्त विनिर्माण को अधिक भार दिया गया है।

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प्रश्न 16.
निम्नलिखित तालिका को ध्यान से पढ़े और उस टिप्पणी करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 41
उत्तर:
तालिका से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है –

  1. भारत के उद्योगों को मुख्य तीन समूहों में विभाजित किया गया है।
  2. विनिर्माण को सबसे अधिक भार दिया गया है।
  3. मई 2005 में सामान्य सूचकांक 213 था।
  4. खनन और उत्खनन में तुलनात्मक रूप से सबसे कम वृद्धि हुई है।
  5. खनन और उत्खनन में कम वृद्धि होने के बावजूद सामान्य सूचकांक नीचे नहीं आया। इसका मुख्य कारण विनिर्माण में अधिक वृद्धि होना है।

प्रश्न 17.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से आप क्या समझते हैं? उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता का वर्णन करें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumber price Index):
यह किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह व्यय में होने वाले परिवर्तन की दशा व मात्रा को प्रकट करती हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को निर्वाह व्यय सूचकांक भी कहते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक विभिन्न स्थानों के लिए अलग-अलग बनाए जाते हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता –

  1. इनकी सहायता से एक वर्ग विशेष के रहन-सहन में व्यय में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान होता है।
  2. इसके आधार पर विभिन्न कर्मचारियों का महँगाई भत्ता व न्यूनतम वेतन आदि निश्चित किया जाता है।
  3. व्यय में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार यथासंभव नीतियों का निर्धारण किया जाता है।

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प्रश्न 18.
थोक मूल्य सूचकांक क्या है? इसके लाभों का वर्णन करो।
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक किसी स्थान पर विभिन्न वस्तुओं के थोक मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा का ज्ञान कराते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 42

  1. थोक मूल्य सूचकांक में परिवर्तन की दशाओं को देखकर भविष्य में माँग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों को अनुमान लगाया जा सकता है।
  2. थोक कीमतों की सपकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि और कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  3. विभिन्न परिजयोजनों के लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से 1985 को आधार मानकर समूह रीति से 1989 का मूल्यानुप ती निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 43
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 44

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सूचकांक के स्तर में लगातार वृद्धि होने पर मुद्रा स्फीति की दर।
(a) बढ़ती है
(b) कम होती है
(c) स्थिति रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) बढ़ती है

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प्रश्न 2.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक का वैकल्पिक नाम है –
(a) अभारित सूचकांक
(b) भारित सूचकांक
(c) निर्वाह व्यय सचकांक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) निर्वाह व्यय सचकांक

प्रश्न 3.
भारत वर्ष में सूचकांकों का निर्माण करने के लिए आधार वर्ष है –
(a) 1981 – 82
(b) 1993 – 94
(c) 2000 – 2001
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1993 – 94

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प्रश्न 4.
कीमत सूचकांक में वृद्धि से मुद्रा की क्रय शक्ति –
(a) घटती है
(b) बढ़ती है
(c) कोई फर्क नहीं पड़ता है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 5.
सूचकांक का निर्माण करने के लिए आधार वर्ष होना चाहिए –
(a) सामान्य वर्ष
(b) असमान्य वर्ष
(c) कोई भी नहीं
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सामान्य वर्ष

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प्रश्न 6.
कीमत सापेक्ष होती हैं –
(a) अशुद्ध संख्या
(b) शुद्ध संख्या
(c) शब्दों में विवरणात्मक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 7.
संयुक्त सूचकांक के निर्माण में शामिल कीजाती हैं –
(a) दो वस्तुएँ
(b) एक वस्तु
(c) दोनों
(a) और (c)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) दो वस्तुएँ

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प्रश्न 8.
संयुक्त सूचकांक होता है –
(a) सापेक्ष कीमतों का गुणात्मक माध्य
(b) सापेक्ष कीमतों का सामांतर माध्य
(c) दोनों (a) और (b)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सापेक्ष कीमतों का सामांतर माध्य

प्रश्न 9.
सूचकांक निर्माण के लिए जो वस्तुएँ ली जाती हैं वे नहीं होना चाहिए।
(a) समूह की प्रतिनिधि
(b) समूह से कोई संबंध नहीं होना चाहिए
(c) दोनों (a) और (c)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) समूह की प्रतिनिधि

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प्रश्न 10.
थोक मूल्य सूचकांक का प्रकाशन भारत में होता है –
(a) दैनिक आधार पर
(b) साप्ताहिक आधार पर
(c) मासिक आधार पर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) साप्ताहिक आधार पर

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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. कद (फूटों) में तथा वजन (कि. ग्राम) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई है –
(क) कि. ग्राम/पुट
(ख) प्रतिशत
(ग) अविद्यमान
उत्तर:
(क) कद (फूटों में) तथा वजन (किग्रा.) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई अविद्यमान है।

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प्रश्न 2.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा –
(क) 0 से अनन्त तक
(ख) -1 से +1 तक
(ग) ऋणात्मक अनन्त से धनात्मक अनन्तक तक
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास -1 तथा +1 के बीच है।

प्रश्न 3.
यदि rxy धनात्मक है तो और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है –
(क) जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है
(ख) जब y में घटता है, तो x बढ़ता है
(ग) जब y में बढ़ता है, तो x नहीं बदलता है
उत्तर:
यदि ru धनात्मक है तो x और y के बीच का सम्बन्ध इस प्रकार का होता है जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है।

प्रश्न 4.
यदि rxy = 0 है तब चर x तथा y के बीच:
(क) रैखिक संबंध होगा
(ख) रैखीय संबंध नहीं होगा
(ग) स्वतंत्र संबंध होगा
उत्तर:
यदि rsy = 0 है तब चर x तथा y के बीच स्वतंत्र होगा।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन मापों में, कौन – सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप सकता है –
(क) कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध
(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध
(ग) प्रकीर्ण आरेख
उत्तर:
प्रकीर्ण आरेख सभी प्रकार के सम्बन्धों को माप सकता है।

प्रश्न 6.
यदि परिशुद्ध रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध हों तो सरल महासंबंध गुणांक –
(क) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।
(ख) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से कम सही होता है।
(ग) कोटि सहसम्बन्ध की ही भांति सही होता है।
उत्तर:
यदि परिशुद्ध रूप से मापित ऑकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसम्बन्ध गुणांक कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।

प्रश्न 7.
साहचर्य के माप के लिए 7 को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
उत्तर:
साहचर्य के माप के लिए को तब अधिक प्राथमिकता दी जाती है जब चरम मान दिए गए हों। सामान्यत: rk का मान r से कम या इसके बराबर होता है।

प्रश्न 8.
क्या आंकड़ों के प्रकार के आधार पर r – 1 तथा +1 के बाहर स्थित हो सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 9.
क्या सहसम्बन्ध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी मिलती है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 10.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक की तुलना में कोटि सहसम्बन्ध गुणांक कब अधिक परिशुद्ध होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध साधारण सहसम्बन्ध गुणांक से इस अवस्था में अच्छा है जब चरों का मापन सही ढंग से किया जा सके।

प्रश्न 11.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
नहीं। किन्तु स्वतंत्रता की संभावना बनी रहती है।

प्रश्न 12.
क्या सरल सहसम्बन्ध गुणांक किसी भी प्रकार के सम्बन्ध को माप सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 13.
एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें । उनका सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए। परिणाम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रत्यन करें।

प्रश्न 14.
अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रयत्न करें।

प्रश्न 15.
कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो।
उत्तर:
निष्पक्षता, धर्मनिरपेक्षता, ईमानदारी, सत्यता, देशभक्ति, सद्भावना, परोपकार, नि:स्वार्थता आदि कुछ ऐसे चर हैं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है।

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प्रश्न 16.
r के विभिन्न मानों +1, -1 तथा 0 की व्याख्या करें।
उत्तर:

  1. यदि का मूल्य 1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों X तथा Y में पूर्णत: धनात्मक सम्बन्ध है।
  2. यदि का मूल्य -1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों x तथा Y में पूर्णत: ऋणात्मक सम्बन्ध है।
  3. यदि r का मूल्य 0 है तो इसका तात्पर्य यह है कि x तथा Y चरों में कोई सहसम्बन्ध नहीं है।

प्रश्न 17.
पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक से कोटि सहसम्बन्य गुणांक क्यों भिन्न होता है?
उत्तर:
पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों X एवं Y के बीच रेखीय संबंधों के सही संख्यात्मक मान की कोटि दर्शाता है। जबकि कोटि सहसम्बन्ध जब चरों का सार्थक रूप से मापन नहीं किया जा सकता, जैसे कीमत, आय, वजन आदि। कोटि निर्धारण तब अधिक होता है जब चरों की माप भ्रामक हो।

प्रश्न 18.
पिताओं (x) और उनके पुत्रों (Y) के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है। इन दोनों के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 1
उत्तर:
सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 2
Rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×22.50}{8(64-1)}\)
= 1 – \(\frac{6×22.50}{8×6.3}\) = 1 – \(\frac{135}{504}\) = 1 – 0.305 = 0.695

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प्रश्न 19.
X और Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए और उसके सम्बन्धों पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 3
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 4

प्रश्न 20.
X तथा Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए तथा उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 5
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विक्षेप चित्र
  2. काल पियर्सन का सहसम्बन्ध गुणांक तथा
  3. कोटि अंतर विधि

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प्रश्न 2.
विक्षेप चित्र का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप नहीं देता।

प्रश्न 3.
सहसम्बन्ध गुणांक क्या है?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों के बीच सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप (Numerical Measurement) है।

प्रश्न 4.
यदि r = ±1, तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि = ± 1 तो इसका अर्थ पूर्ण धनात्मक यसा ऋणात्मक सहसम्बन्ध है।

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प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध गुणांक (r) की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) प्रायः -1 तथा + 1 के बीच होता है। गणित की भाषा में – 1 ≤ r ≤ 1

प्रश्न 6.
सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा के मापन को सहसम्बन्ध कहते हैं।

प्रश्न 7.
सहसम्बन्ध गुणांक सदैव –
तथा +1 के बीच होता है। गणित की भाषा में इसे आप किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
उत्तर:
1 ≤ r ≤ + 1

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प्रश्न 8.
धनात्मक (Positive) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो चर x तथा y एक ही दिशा में विचरित (परिवर्तित) होते हैं, तो उनके बीच सम्बन्ध धनात्मक सह-सम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 9.
विलोम (Negative) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर के विपरीत होता है तो उनके बीच सम्बन्ध विलोम सहसम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 10.
धनात्मक सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की कीमत तथा पूर्ति के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 11.
विलोम सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा तथा उसके मूल्य के बीच विलोम सहसम्बन्ध पाया जाता है।

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प्रश्न 12.
यदि x तथा y स्वतंत्र चर हों, उनके बीच सहसम्बन्ध गुणांक (r) (Coefficient. of Correlation) का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = 0

प्रश्न 13.
यदि दो श्रणियों में पूर्ण सहसम्बन्ध (Perfect Correlation) है तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध गुणांक (r) का मूल्य क्या होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = ±1

प्रश्न 14.
सहसम्बन्ध को रेखीय कब कहा जाता है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में परिवर्तन का अनुपात होता है तो उसे रेखीय सहसम्बन्ध कहते हैं।

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प्रश्न 15.
सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं होता तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध अनुस्थिति होती है अर्थात् सहसम्बन्ध का अभाव होता है। सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य शून्य होता है।

प्रश्न 16.
यदि विक्षेप रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर हो तो वर्गों में किस प्रकार सहसम्बन्ध होगा?
उत्तर:
दो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित आंकड़ों में सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 7
उत्तर:
% r = -1 क्योंकि चरों का विपरीत सम्बन्ध है।

प्रश्न 18.
जब कोटियाँ (Ranks)समान होती हैं तो ऐसी अवस्था में Rk की गणना करने के लिये कौन सा सूत्र लगाया जाता है? वह सूत्र लिखें।
उत्तर:
कोटियाँ समान होने का अवस्था में Rk की गणना के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 8

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प्रश्न 19.
यदि r = 0 तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि r = 0 तो इसका अर्थ सहसम्बन्ध का अभाव है।

प्रश्न 20.
सहसम्बन्ध गुणांक को ज्ञात करने का कार्ल पियरसन द्वारा दिया गया सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 9

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक का प्रतिपादन किसने किया?
उत्तर:
स्पियरमैन ने।

प्रश्न 22.
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग कहाँ उपयुक्त होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग वहाँ उपयुक्त होता है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप संभव न हो तथा उन्हें क्रम के अनुसार रखा जा सकता है।

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प्रश्न 23.
सहसम्बन्ध को मापने के लिये स्पियरमैन का सूत्र लिखो।
उत्तर:
\(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)

प्रश्न 24.
r को सह के माप का सहचर क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि r सहचर को मापता है न कि कारणों को।

प्रश्न 25.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
हाँ

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धनात्मक तथा ऋणात्मक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
धनात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन एक ही दिशा की ओर होता है, तो उनमें धनात्मक सहसम्बन्ध होगा। उदाहरण के लिए यदि आय में वृद्धि के साथ उपभोग में भी वृद्धि होती है तो उपभोग और आय में धनात्मक सहसम्बन्ध है।

ऋणात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन विभिन्न दिशाओं में होते हैं अर्थात् जब x चर में वृद्धि होने से y चर में कमी होती है तो उनमें ऋणात्मक सहसम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 2.
पूर्ण सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है? इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
यदि दो चरों में मूल्यों के परिवर्तन की मात्रा बिल्कुल समान है, तो उनमें पूर्ण धनात्मक या ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है। ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध का गुणांक (r) का मूल्य + 1 होगा।
उदाहरण:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 10
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 11
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

प्रश्न 3.
सरल बहुगुणी एवं आंशिक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। बहुगुणी सहसम्बन्ध दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। आंशिक सहसम्बन्ध भी दो से अधिक चरों का अध्ययन करता है, परंतु अन्य चरों के प्रभाव को स्थिर रखकर केवल दो चरों का पारस्परिक सम्बन्ध निकलता है।

प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन का सह-सम्बन्ध गुणांक क्या है? इसकी गणना का सूत्र दीजिए। इसकी सीमाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप है। इसकी गणना का सूत्र निम्नलिखित है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 12
r = सहसम्बन्ध गुणांक।

सीमाएँ (Limited degree of correlation cd-efficient):
सहसम्बन्ध गुणांक का मान सदैव ही -1 तथा +1 के बीच में होगा 1 गणित की भाषा में इसे निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है – -1 ≤ r ≤ + 1

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प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए। सहसम्बन्ध के निम्न मानों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा मापने को सहसम्बन्ध कहते हैं। सहसम्बन्ध द्वारा विभिन्न चरों में पाये जाने वाले परस्पर सम्बन्धों व मात्रा को दिशा का ज्ञान होता है।

  1. जब r = 0, तो इसका अभिप्राय है कि चरों में सहसम्बन्ध का अभाव पाया जाता है।
  2. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।
  3. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्न अवस्था में सहसम्बन्ध का मूल्य बताओ –
(क) सहसम्बन्ध ऋणात्मक तथा पूर्ण।
(ख) सहसम्बन्ध धनात्मक तथा पूर्ण।
(ग) कोई सहसम्बन्ध नहीं।
उत्तर:

  • जब सहसम्बन्ध पूर्ण ऋणात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = -1
  • जब सहसम्बन्ध गुणांक धनात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = +1
  • जब कोई सहसम्बन्ध नहीं पाया जाता है तो सहसम्बन्ध गुणांक r = 0

प्रश्न 7.
10 विद्यार्थियों के अंग्रेजी और अर्थशास्त्र के प्राप्तांकों की कोटियों के अंतर, में वर्गों का योग 33 है। कोटि सम्बन्ध गुणांक (Rank Correlation Coefficient) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
चिह्नों के रूप में निम्नलिखित दिया हुआ है –
R = 10, ΣD2 = 33
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac { 6\times 33 }{ 10^{ 0 }(10-1^{ 0 }) } \) = 1 – \(\frac{198}{990}\) = \(\frac{990-198}{990}\) = 8

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प्रश्न 8.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की कोटि क्रम विधि की विवेचना करो।
उत्तर:
कोटि क्रम विधि के अन्तर्गत सर्वप्रथम x तथा y पद मूल्यों को अलग-अलग कोटि प्रदान किये जाते हैं। सबसे अधिक आकार वाले मूल्य को 1 उससे कम आकार वाले को 2 और इसी प्रकार क्रम निश्चित किये जाते हैं। द्वितीय x के क्रमों में से y के तत्सम्बन्धी क्रम घटाए जाते हैं और कोटि अंतर निकाले जाते हैं। तृतीय कोटि क्रम वर्ग करके उन वर्गों का जोड़ निकाला जाता है। अन्त में निम्न सूत्र प्रयोग किया जाता है –
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)
R = कोटि सहसम्बन्ध गुणांक
ΣD2 = क्रम अंतर में वर्गों का जोड़
N = पद युग्मों की संख्या

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों में विक्षेप चित्र (Scatter Diagram) द्वारा सहसम्बन्ध (Correlation) बताइये:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 13
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 14
विक्षेप चित्र में स्पष्ट है कि X तथा Y में पूर्ण धनात्मक (Perfect positive) सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 10.
यदि विक्षेप चित्र में बिन्दु उस सरल रेखा पर जमघट लगाते हैं जो रेखा x अक्ष पर 30° का कोण बनाती है तो आप x तथा Yचरों में किस प्रकार का सम्बन्ध पायेंगे?
उत्तर:
इससे पता चलता है कि X तथा Y में कम मात्रा में सहसम्बन्ध है। दूसरे शब्दों में Y में उसी अनुपात में परिवर्तन नहीं होता जिस अनुपात में X में।

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प्रश्न 11.
निम्न X और Y युग्मों को विक्षेप चित्र में प्रस्तुत कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 15
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 16

प्रश्न 12.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक को कैसे परिभाषित किया गया?
उत्तर:
सहसम्बन्ध के ज्ञान को गणितीय विधि से प्रतिपादित करने का श्रेय प्रो. कार्ल पियरसन को है। कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक समांतर माध्य तथा प्रमाप विचलन पर आधारित है। इस गुणांक को गुण परिघात सहसम्बन्ध (Product, moment correlation) कहते हैं। इस सहसंबंध को कहते हैं। यदि x तथा Y दो चरों का सम्बन्ध रेखिक (Linear) है तो हम. उनमें कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की सहायता से सम्बन्ध की मात्रा का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
(क) सहसम्बन्ध गुणांक
(r) की क्या सीमायें हैं?
(ख) यदि r = +1 है तो दो चरों X और Y में किस प्रकार का सम्बन्ध है?
उत्तर:
(क) सह – सम्बन्ध गुणांक हमेशा -1 और +1 की सीमा में होगा।
(ख) यदि r = +1 या r = -1 है तो उसका अभिप्राय है कि दो घरों X तथा Y में सम्बन्ध निश्चित (Exact) है।
यदि r = +1 है तो दोनों चरों में पूर्णतः धनात्मक सम्बन्ध होगा और यदि r = -1 है तो दोनों चरों (x, y) में पूर्णतः ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विक्षेप चित्र के गुण तथ दोष लिखिए।
उत्तर:
गुण (merits):

  1. दो चरों में सम्बन्ध जानने की यह बहुत ही सरल विधि है।
  2. चित्र पर नजर डालते ही पता चल जाता है कि दो चरों के बीच कोई सम्बन्ध है या नहीं।
  3. विक्षेप चित्रों की सहायता से इस बात का भी ज्ञान होता है कि सहसम्बन्ध धनात्मक है या ऋणात्मक।

दोष (Demerits):

  1. विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध के गुणांक का पूरा माप नहीं है।
  2. यह सम्बन्धों के बारे में अनुमानतः ज्ञान देता है।
  3. यह संख्यात्मक परिवर्तन को संख्या में ही प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 2.
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ (Properties of correlationcoefficient) सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएं अनलिखित हैं –

  1. r की कोई इकाई (unit) नहीं है। यह एक शुद्ध संख्या है। इसका तात्पर्य यह है कि माप की इकाइयाँ इसका भाग नहीं हैं। दूसरे शब्दों में फुटों में ऊँचाई तथा किलोग्राम में वजन का r 0.7 है।
  2. r के ऋणात्मक मूल्य का अर्थ है कि दो चरों X तथा Y में विपरीत सम्बन्ध है। एक चर में परिवर्तन होने से दूसरे चर में विपरीत दिशा में परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिये जब एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो उसकी मांग में कमी आती है।
  3. यदि धनात्मक है तो इसका अभिप्राय है कि X तथा Y चर एक ही दिशा की ओर चलते हैं। जब कॉफी (चाय का प्रतिस्थापन) की कीमत में वृद्धि होती है, चाय की मांग में वृद्धि होती है, जब तापक्रम में वृद्धि होती है, आइसक्रीम की बिक्री में वृद्धि होती है।
  4. यदि r = 0 तो X तथा Y चरों में सहसम्बन्ध का अभाव होता है। उनके बीच कोई रेखीय सम्बन्ध नहीं होता।
  5. यदि r = 1 अथवा r = – 1 है तो सहसम्बन्ध पूर्णता है। उन दो चरों में सम्बन्ध निश्चित है।
  6. r का अधिक मूल्य इस बात का संकेत देता है कि दो चरों x तथा Y में दृढ़ रैखीय सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी ऊँचा कहा जायेगा जब यह +1 अथवा -1 के समीप होगा।
  7. r का कम मूल्य इस बात को इंगित करता है कि दो चरों X तथा Y में कमजोर रेखीय. सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी नीचा कहा जायेगा जब वह शून्य के समीप होगा।
  8. सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य -1 तथा +1 के बीच में होता है। दूसरे शब्दों में 1 ≤ r ≤ 1 यदि किसी प्रश्न में r का मूल्य इस सीमा के बाहर आता है, इसका तात्पर्य यह है कि की गणना करने में कोई त्रुटि हुई है।
  9. मूल में परिवर्तन से या पैमाने के परिवर्तन से के मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं रहता। मान लो दो चर X तथा Y दिये गये हैं। इन दो चरों को निम्न प्रकार परिभाषित करें -rxy = ruy

A तथा B क्रमश: X और Y के काल्पनिक औसत (A.M.) हैं। B तथा D कॉमन फैक्टर (Common factors) हैं।

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प्रश्न 3.
विक्षेप चित्र से क्या अभिप्राय है? इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र (Scatter Diagram):
विक्षेप चित्र दो चरों के बीच सहसम्बन्ध मापने की एक विधि है। इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध की दिशा के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जाता है। विक्षेप चित्र बनाने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण निहित है –

  1. स्वतंत्र चरों को X अक्ष पर लिया जाता है।
  2. आश्रित चरों को Y अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है।
  3. बिन्दु अंकित समंक से एक मूल्य स्वतंत्र चर कर लिया जाता है तथा एक मूल्य आश्रित चर। इन मूल्यों की सहायता से ग्राफ पेपर पर एक बिन्दु अंकित किया जाता है।
  4. श्रेणी में जितने जोड़े होते हैं, उतने ही बिन्दु अकित किये जाते हैं।
  5. बिन्दु जितने एक दूसरे के पास होंगे, सहसम्बन्ध को डिग्री उतनी ही अधिक होगी और बिन्दु जितने अधिक बिखरे होंगे, सहसम्बन्धों की डिग्री उतनी ही कम होगी। बिन्दुओं की दिशा को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है।

विक्षेप चित्र में प्रदर्शित बिन्दुओं की प्रवृत्ति यदि एक निश्चित दिशा में जाने की हो तो दोनों चरों में सहसम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी।

यदि बिन्दुओं को छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी। यदि बिन्दुओं की छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दाहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा।
इसके विपरीत यदि रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर है तो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की प्रत्यक्ष विधि से गणना करने की प्रक्रिया में कौन-कौन से चरण निहित हैं?
उत्तर:

  1. सबसे पहले X और Y श्रेणी का माध्य मूल्य ज्ञात करें।
  2. फिर X श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी के समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को x से प्रकट करें।
  3. इसके बाद Y श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी से समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को Y से प्रकट करें।
  4. अब इन विचलनों का वर्ग लें।
  5. X तथा Y का गुणनफल लें और गुणनफल को XY से प्रकट करें।
  6. सहसम्बन्ध गुणांक करने के लिये निम्न सूत्र का प्रयोग करें:

r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }.Σy^{ 2 } } } \)
r = \(\frac { Σxy }{ N\sigma x\times \sigma y } \)
x = X – \(\bar { X } \) y = Y – \(\bar { Y } \)
σx = x श्रेणी का प्रमाप विचलन
σy = y श्रेणी का प्रमाप विचलन
N = मदों की संख्या

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प्रश्न 5.
पद विचलन विधि से r ज्ञात कीजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 17
उत्तर:
माना A = 100, h = 10, B = 1700 तथा k = 100
पद विचलन विधि से की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 18

प्रश्न 6.
वास्तविक समान्तर माध्य से कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 19
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 20
सहसम्बन्ध निम्न धनात्मक है।

प्रश्न 7.
दो श्रृंखलाएँ हैं। प्रत्येक के 50 पद हैं। उनका प्रमाप विचलन क्रमश: 4.5 और 3.5 है। दोनों श्रृंखलाओं के वास्तविक माध्य से विचलनों का गुणनफल 420 है।x और Y सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया है N = 50
σx = 4.5 σy = 33.5
Σdxdy = 420
r = \(\frac{Σdxdy}{Nσx×σy}\) = \(\frac{420}{50×4.5×3.5}\) = \(\frac{420×10×10}{50×45×35}\) = 533

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प्रश्न 8.
X और Y के बीच में निम्नलिखित समंकों से सह-सम्बन्ध गुणांक ज्ञात करें –

  1. X श्रेणी का समांतर माध्य = 15
  2. Y श्रेणी का समांतर माध्य = 28
  3. X श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 144
  4. Y श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 225
  5. X व Y श्रेणियों के समांतर माध्य से विचलनों के गुणनफल का योग = 20
  6. मदों की संख्या

उत्तर:
दिया हुआ है –
\(\bar { X } \) = 15 \(\bar { Y } \) = 28
Σx2 = 144 Σy2 = 225
r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }\times y^{ 2 } } } \) = \(\frac { 20 }{ \sqrt { 144\times 225 } } \) = \(\frac{20}{12×15}\)
= \(\frac{20}{80}\) = \(\frac{1}{9}\) = 0.111

प्रश्न 9.
निम्न समंकों से कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 21
उत्तर:
कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 22

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प्रश्न 10.
वास्तविक समांतर माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 24
सहसम्बन्ध पूर्णतया ऋणात्मक है।

प्रश्न 11.
कल्पित माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 25
उत्तर:
कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 26
x का कल्पित माध्य = 85
y का कल्पित माध्य = 80
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 27

प्रश्न 12.
A तथा B में कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 29

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प्रश्न 13.
A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 30
उत्तर:
यहाँ पर A तथा B के कोटि क्रम दिये गये हैं। अतः हम सीधे ही कोटि क्रम का अंतर निकालेंगे और सूत्र की सहायता से A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध की गणना करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 31

प्रश्न 14.
5 विद्यार्थियों को गणित तथा अर्थशास्त्र में योग्यता के अनुसार दर्जा (Rank) दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 32
स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 33
r = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×0}{6(36-1)}\) = 1

प्रश्न 15.
दो जजों द्वारा 5 व्यक्तियों को सौंदर्य में निम्नलिखित कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 34

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प्रश्न 16.
A तथा C द्वारा 5 व्यक्तियों को निम्न कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 35
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 36

प्रश्न 17.
यदि D2 = 39.50 और N = 10 हो तो R का मूल्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 37

प्रश्न 18.
निम्नलिखित आँकड़ों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 38
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 39
(नोट : कोटि बढ़ते हुए क्रम से दी गई है अर्थात् सबसे छोटे मूल्य को एक तथा सबसे बड़े मूल्य को दस।)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 40

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प्रश्न 19.
नीचे 5 विद्यार्थियों के द्वारा अर्थशास्त्र और सांख्यिकी में प्राप्त अंक प्रतिशत में दिये गये हैं। कोटि सहसम्बन्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 41

प्रश्न 20.
नीचे दिये समंकों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 42
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 43

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 44
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 45

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि चरों में का मूल्य -1 है तो यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) पूर्ण ऋणात्मक

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प्रश्न 2.
यदि चरों में r का मूल्य +1 है को यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूर्ण धनात्मक

प्रश्न 3.
दो चरों के बीच सहसम्बन्ध शून्य है तो इसका अर्थ है –
(a) उच्च सहसंबंध
(b) सहसंबंध का अभाव
(c) निम्न सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सहसंबंध का अभाव

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प्रश्न 4.
rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N^{ 3 }-N } \) सूत्र है –
(a) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक का
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का

प्रश्न 5.
सहसंबंध को गणितीय विधि से प्रतिपादन करने का श्रेय जाता है –
(a) मार्शल को
(b) बाउले को
(c) कार्ल पियरसन को
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) कार्ल पियरसन को

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प्रश्न 6.
यदि दो चर एक-दूसरे के प्रति एक दिशा में या विपरीत दिशा में परिवर्तित होते हैं तो इसे कहा जाता है –
(a) केंद्रीय प्रवृत्ति की माप
(b) परिक्षेपण की माप
(c) सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सहसंबंध

प्रश्न 7.
यदि एक चर के बढ़ने पर दूसरे चर में भी बढ़ोतरी होती है तो उनमें सहसंबंध होगा –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शून्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

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प्रश्न 8.
कार्ल पियरसन विधि से सहसंबंध गुणांक ज्ञात करने का सूत्र है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 46
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 48
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47

प्रश्न 9.
यदि कोटि सहसंबंध में किसी चर की पुनरावृत्ति होती है तो प्रत्येक मूल्य कोटि प्रदान करते हैं –
(a) अलग-अलग क्रमागत आधार पर
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है

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प्रश्न 10.
कोटि सहसंबंध (rk) तथा गुणन आघूर्ण सहसंबंध में संबंध होता है –
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(b) rk > गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी बारम्बारता वितरण को समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है, टिप्पणी लिखें।
(‘A measure of dispersion is a good supplement to the central value in understanding a frequency distribution.’ Comment.)
उत्तर:
परिक्षेपण का माप केन्द्रीय माप का एक सम्पूरक (A measure of dispersion a good supplement to the central value):
परिक्षेपण का माप किसी बारम्बारता वितरण को समझने में केन्द्रीय माप का एक अच्छा सम्पूरक है। केन्द्रीय माप वितरण केवल पहले के बारे में बताता है। यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता। उदाहरण के लिये यदि 10 विद्यार्थियों के समूह के औसत अंक 60 हैं, तो इससे यह अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है कि औसत रूप में विद्यार्थियों का स्तर कैसा है।

परन्तु इससे यह बिल्कुल पता नहीं चलता कि 10 विद्यार्थियों के अंकों में परस्पर कितना अन्तर है। सभी के अंक 60 हैं या कुछ एक के बहुत अधिक हैं और कुछ के बहुत कम है। इसी बात का स्पष्टीकरण एक और उदाहरण लेकर किया जा सकता है। नीचे राम, रहीम और मारिया के परिवारों की आय के आँकड़े दिये गये हैं। राम के परिवार में चार सदस्य हैं। रहीम के परिवार में 6 सदस्य हैं और मारिया के परिवार में 5 सदस्य हैं।
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तालिका से पता चलता है कि प्रत्येक परिवार की औसत आय 15000 रुपये (\(\frac { 60,000 }{ 4 } \), \(\frac{90,000}{5}\), \(\frac{75,000}{5}\)) है परन्तु व्यक्तिगत आय में बहुत भिन्नताएँ हैं। अतः यह स्पष्ट है कि औसत वितरण केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् मानों का प्रतिनिधि आकार इसे बेहतर ढंग से समझने के लिये हमें मानों के प्रसार की आवश्यकता है। राम के परिवार में आय की भिन्नता अपेक्षाकृत कम है।

रहीम के परिवार में आय की यह भिन्नता काफी अधिक है, जबकि मारिया के परिवार की यह भिन्नता अधिकतम है। केवल औसत का ज्ञान अपर्याप्त है। यदि आपको किसी अन्य मान की जानकारी हो, जो मान में वितरण की मात्रा को प्रदर्शित करता है, तो उस वितरण के बारे में आपका ज्ञान बढ़ जायेगा। उदाहरण के लिये प्रति व्यक्ति आय केवल औसत आय का प्रदर्शन करती है। परिक्षेपण की माप आपको आय की असमानताओं के बारे में बता सकती है। इस तरह से समाज के विभिन्न वर्गों में लोगों के सापेक्ष जीवनस्तर के बारे में आपको जानकारी में वृद्धि होगी।

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प्रश्न 2.
परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
उत्तर:
प्रमाप विचलन परिक्षेपण का सबसे अच्छा माप है, क्योंकि इसमें अच्छे परिक्षेपण की लगभग सभी विशेषताएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं लेकिन कुछ केन्द्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं।

प्रश्न 4.
एक कस्बे में 25% लोग 45,000 रुपये से अधिक आय अर्जित करते हैं, जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिये।
उत्तर:
1. परिक्षेपण का सापेक्ष मान अर्थात् चतुर्थक विचलन –
= \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = \(\frac{45,000-18,000}{45,000+18,000}\) = \(\frac{27,000}{63,000}\) = 0.428

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प्रश्न 5.
एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल फसल की उपज निम्नवत् है –
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प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें –
(क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से विचलन
(घ) माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) सिक फसल में अधिक विचरण है
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों की तुलना कीजिए
उत्तर:
गेहूँ की फसल –
(क) परास: 1 – S = 25 – 9 = 16
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q1 = 3\(\frac{(N+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इसी प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से विभाजित करें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें। उसे जोड़ें तथा योगफल को 10 से भाग दें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

चावल की फसल –
परास: 1 – S = 34 – 12 = 22
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q3 = 3\(\frac{(10+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इस प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से भाग दें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें और उसका योगफल ज्ञात करें और योगफल को 10 से विभाजित करें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 6.
पूर्ववर्ती प्रश्न में विचरण के सापेक्ष मापों का परिकलन कीजिए. और वह मान बताएँ, जो आपके विचार में सर्वधिक विश्वसनीय है।
उत्तर:
परास का कोण सापेक्ष माप है परास गुणांक। अतः हम परांस गुणांक की गणना करेंगे।

  1. गेहूँ का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{25-9}{25+9}\) = \(\frac{16}{36}\) = 0.44
  2. चावल का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{34-12}{34+12}\) = \(\frac{22}{43}\) = 0.47
    इसी प्रकार दोनों फसलों की उपजों के चतुर्थक विचलन गुणांक तथा विचरण गुणांक ज्ञात किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन X और Y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है, जो निम्नवत् है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 3
किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिये?
(क) अधिक स्कोर बनाने वाले को या
(ख) अधिक भरोसेमन्द बल्लेबाज को।
उत्तर:
X बल्लेबाज का स्कोर (Score of X batsman):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 4
माध्य (AM) = \(\frac{Σx}{N}\) = \(\frac{350}{5}\) = 70
औसत स्कोर = 70 रन
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \)  = \(\frac{5750}{5}\) = 1150 रन (स्कोर)
प्रमाप विचलन का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) = \(\frac{33.91}{70}\) = 0.84
विचारण (variance) = \(\frac { Σ(X-\bar { X) } }{ N } \) = \(\frac { ΣX^{ 2 } }{ N } \) = \(\frac{5750}{5}\) रन
विचारण का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) × 100 = \(\frac{12.88}{62}\) × 100 = 20.77%

निष्कर्ष (Conclusion):

  1. x बल्लेबाज को चुना जाना चाहिए क्योंकि उसका औसत स्कोर (70 रन) y बल्लेबाज के औसत (62 रन) से अधिक है।
  2. y बल्लेबाज अधिक भरोसेमन्द (विश्वसनीय) है, क्योंकि उसका विचरण गुणांक (C.V = 20.70%) X बल्लेबाज का विचरण गुणांक (48.44%) से कम है।

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प्रश्न 8.
दो ब्राण्डों के बल्ब की गुणवत्ता जाँचने के लिये ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवनकाल को प्रत्येक ब्राण्ड के 100 बल्वों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है –
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(क) किस ब्राण्ड का जीवन काल अधिक है?
(ख) कौन-सा ब्राण्ड अधिक भरोसेमंद है?
उत्तर:
ब्राण्ड ‘क’ बल्ब
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of variation)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 7
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 7a
विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of Variation)
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निष्कर्ष (Conclusion):

  1. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब का जीवन काल अधिक है क्योंकि बल्ब ‘ख’ का माध्य जीवन काल बल्ब ‘क’ बल्ब के माध्य जीवन काल से अधिक है।
  2. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब अधिक भरोसेमंद है क्योंकि इस बल्ब के इस ब्राण्ड का विचरण गुणांक ‘क’ ब्राण्ड के बल्ब के विचरण गुणांक से कम है।

प्रश्न 9.
एक कारखाने में 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रुपये है तथा मानक विचलन 40 रुपये था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रुपये की वृद्धि की गई, अब मजदूर की औसत मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आई?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में वृद्धि = 20 रुपये
मजदूरी में कुल बृद्धि = 50 × 20 – 1000
मजदूरी बृद्धि से पूर्व कुल मजदूरी का योगफल = 10,000 + 1,000 = 11,000 रुपये
नई औसत मजदूरी = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{11000}{50}\) = 220
अत: नई औसत मजदूरी = 220 रुपये
औसत मजदूरी में परिवर्तन होगा, परन्तु मानक विचलन में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। अब मजदूरी में समानता ज्ञात करने के लिए विचरणता गुणांक ज्ञात करेंगे। आरम्भ में –
C.V. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) = 100 = 20%
बाद में C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) × 100 = 18.18%
अब मजदूरी में अधिक समानता आ गई है क्योंकि विचरण कम हो गया है।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती प्रश्न में यदि प्रत्येक मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाये, तो माध्य और मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि करने पर नया माध्य 200 रुपये (200 + 20) होगा।
मानक विचलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित वितरण के लिये माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन किजिये।
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उत्तर:
माध्य से माध्य विचलन और मानक विचनल की गणना (Calculation of mean and standard deviation):
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मध्यिका से विचलन की.गणना (Calculation mean deviation mean):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 11
माध्य विचलन = \(\frac{Σf|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.68
अत: माध्य विचलन = 19.68
माध्य विचलन = \(\frac{f|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.968

प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation);
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 12

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प्रश्न 12.
10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात किजिये।
उत्तर:
प्रमाप विचलन σ = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 3 } }{ N } -(X)^{ 2 } } \)
अथवा, σ2 = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \) – (X)2 = \(\frac{1090}{10}\) – (10)2 = 109 – 100 = 9
अथ्वा, σ = \(\sqrt{9}\) = 3
अतः विचरण गुणाक = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{3}{10}\) × 100 = 300

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक व्यक्तिगत श्रेणी में विचलन की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
माध्य विचलन (M.D.) = (Q.D.) = \(\frac{Σf(d)}{V}\)

प्रश्न 2.
माध्य विचलन प्रायः माध्यिका से ही नहीं लिए जाते हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्यिका से इसलिए लिये जाते हैं, क्योंकि माध्यिका से लिए गये विचलनों का योग न्यूनतम होता है।

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प्रश्न 3.
व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाण विचलन (Standard Deviation) की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रमाण विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σ(X-X)^{ 2 } }{ N } } \)

प्रश्न 4.
प्रमाप विचलन सदैव किस माध्य से लिये जाते हैं?
उत्तर:
प्रमाप विचलन सदैव समान्तर माध्य से लिये जाते हैं, क्योंकि इससे लिए गए विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है।

प्रश्न 5.
प्रसरण (Variance) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसरण (Variance):
(प्रमाण विचलन)2

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प्रश्न 6.
यदि किसी आवृत्ति बंटन का प्रसरण (Variance) 100 है, तो इसका प्रमाण विचलन क्या होगा?
उत्तर:
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt{100=10}\)

प्रश्न 7.
पाँच संख्याओं 1, 4, 5, 7 तथा 8 का प्रमाप विचलन 2, 4, 5 है। यदि प्रत्येक संख्या में 10 जोड़ दिया जाये, तो नया प्रमाप विचलन क्या होगा?
उत्तर:
नया प्रमाण विचलन (σ) = 2.45

प्रश्न 8.
यदि किसी श्रेणी का प्रमाप विचलन 5 है, तो उसका प्रसरण (Variance) कितना होगा?
उत्तर:
प्रसरण (Vriance) (5)2 = 25

प्रश्न 9.
विचरण गुणांक (Coefficient of Variation) क्या होता है?
उत्तर:
विचरण गूणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

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प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य 100 और प्रमाप विचलन 10 है, तो उसका विचरण गुणांक (Coefficlent of Variation) निकालें।
उत्तर:
विचरण गणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

प्रश्न 11.
दो श्रेणियों A तथा B का विचरण गुणांक 20% तथा 10% है, कौन-सी श्रेणी सजातीय अथवा समरूप कहलायेगी?
उत्तर:
B श्रेणी समाजतीय अथवा समरूप कहलायेगी, क्योंकि इसका विचरण गुणांक अपेक्षाकृत कम है।

प्रश्न 12.
एक प्रसामान्य बंटन x + 36 के अन्तर्गत कितनी प्रतिशत मदें शामिल होती हैं?
उत्तर:
\(\bar { X } \) ± 3σ = 99.37% मदें।

प्रश्न 13.
परिक्षेपन की माप कौन-सी श्रेणी की माध्य कहलाती है?
उत्तर:
द्वितीय श्रेणी की।

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प्रश्न 14.
परिक्षेपण के तीन प्रचलित मापों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. प्रमाण विचलन

प्रश्न 15.
विस्तार (Range) किसे कहते हैं?
उत्तर:
विस्तार (R) अधिकतम मूल्य तथा न्यूनतम मूल्य में अन्तर है।
सूत्र के रूप में, R = H – L

प्रश्न 16.
किसी स्कूल में पाँच छात्र के मासिक खर्च क्रमश: 12 रु., 20 रु., 5 रु.,, 40 रु. और 62 रु. है, विस्तार (Range) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विस्तार = 62 रु., – 12 रु. = 50 रु.

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या होता है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन कियी श्रेणी के तीसरे तथा पहले चतुर्थक के अन्तर का आधार है। सूत्र के रूप में,
Q.D = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 18.
कौन से परिक्षेपन के माप में विचलन चिह्नों (+ तथा -) की उपेक्षा की जाती है?
उत्तर:
माध्य विचलन।

प्रश्न 19.
माध्य विचलन (Mean Deviation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक समंकमाला के किसी माध्य (समान्तर माध्य, माध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गये विचलनों को जोड़ के समान्तर माध्य विचलन कहते हैं।

प्रश्न 20.
निम्न सूचनाओं के आधार पर विस्तार ज्ञात करें 20, 30, 40, 50 तथा 200
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 21.
यदि प्रश्न 33 में यदि दिये गये आँकड़ों में 200 हटा दिया जाये तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 50 – 20 = 30

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प्रश्न 22.
प्रश्न 33 में यदि 50 के स्थान पर यदि 150 कर दिया जाये, तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 23.
खले सिरे वाले वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
खुले सिरे वितरण से अभिप्राय उस वितरण से है, जिसमें निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की उच्चतम सीमा या दोनों ही न दिये गये हों।

प्रश्न 24.
उदाहरण से बतायें कि विस्तार अधिकतम सीमा मूल्य से प्रभावित होता है।
उत्तर:
मान लो हम निम्न मूल्य लेते हैं।
10, 15, 20, 50
ऐसी अवस्था में विस्तार = 50 – 10 = 40
यदि अधिकतम सीमा का मूल्य 50 के स्थान पर 100 हो जाये, तो ऐसी अवस्था में विस्तार = 100 – 10 = 90 होगा।
इस प्रकार हम देखते हैं कि विस्तार उच्चतम सीमा के मूल्य से प्रभावित होता है।

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प्रश्न 25.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध अन्तर चतुर्थक विस्तार (Semi-inter-Quartile Range) है।

प्रश्न 26.
प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रमाप विचलन गुणांक = \(\frac{σ}{X}\)

प्रश्न 27.
विचरण गुणांक की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विचरण गुणांक = \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 28.
निम्नलिखित सूचना के आधार पर विचरण गुणांक (C.V.) की गणना करें –

  1. प्रतिदिन प्रति व्यक्ति में मजदूरी के आधार पर विचरण = 9 रुपये
  2. औसत मजदूरी = 120
  3. मजदूरों की संख्या = 50

उत्तर:
C.F. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac { \sqrt { 9 } }{ 20 } \) × 100 = \(\frac{3}{120}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 29.
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विभिन्न विधियाँ लिखें।
उत्तर:
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विधियाँ हैं –

  1. वास्तविक माध्य विधि
  2. काल्पनिक माध्य विधि
  3. प्रत्यक्ष विधि तथा
  4. पद विचलन विधि

प्रश्न 30.
निरपेक्ष तथा सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
निरपेक्ष परिक्षेपण को उन्हीं इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, जिनमें समंक होते हैं (जैसे रुपये, कि. ग्राम)। इसके विपरीत सापेक्ष परिक्षेपण प्रतिशत में या निरपेक्ष परिक्षेपण के गुणांक में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 31.
परिक्षेपण का बिन्दुरेखीय माप कौन-सा है?
उत्तर:
लॉरेंज वक्र।

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प्रश्न 32.
लॉरेंज वक्र किस आर्थिक समस्या के अध्ययन के लिए उपयुक्त है?
उत्तर:
किसी देश की आय तथा सम्पत्ति में असमानताओं की समस्या का अध्ययन करने के लिए लॉरेंज वक्र बहुत उपयुक्त है।

प्रश्न 33.
परिक्षेपण का कौन-सा माप दो श्रेणियों की तुलना के लिए अधिक उपयुक्त हैं?
उत्तर:
विचरण गुणांक।

प्रश्न 34.
विस्तार का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
यह केवल दो चरण मूल्यों पर आधारित है।

प्रश्न 35.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से लिए गए विचलन के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है।

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प्रश्न 36.
निम्न श्रृंखला का विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 13
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{105-50}{105+50}\) = \(\frac{55}{155}\) = 0.354

प्रश्न 37.
यदि प्रमाप विचलन 9 है, तो प्रसरण का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
प्रसारण = σ2 = 9 × 9 = 81

प्रश्न 38.
विस्तार गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\)

प्रश्न 39.
प्रमाप विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
विचलन वर्ग माध्य मूल।

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प्रश्न 40.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध-अन्तर चतुर्थक (Semi-inter-quartile) है।

प्रश्न 41.
सर्वप्रथम प्रसारण शब्द का प्रयोग किसने किया था?
उत्तर:
आर. ए. फिशर ने।

प्रश्न 42.
अच्छे परिक्षेपण के माप की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अच्छा परिक्षेपण श्रृंखला के सभी मदों पर आधारित होता है।
  2. इसकी गणना सरल चाहिए।

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प्रश्न 43.
परिक्षेपण के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. श्रृंखला के गठन अथवा बनावट के विषय में जानकारी देना।
  2. माध्य से प्रभावीपन को जाँचना।

प्रश्न 44.
एक कार्यालय में 10 व्यक्तियों का मध्यमान वेतन 5400 रुपये है। उनमें से एक कर्मचारी का वेतन 6000 रुपये है। बताएं कि इस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है या ऋणात्मक।
उत्तर:
उस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है।

प्रश्न 45.
परिक्षेपण के कौन से माप मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।
उत्तर:
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 46.
परिक्षेपण के कौन से माप मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं।

प्रश्न 47.
परिक्षेपण के माप कितने प्रकार के हो सकते हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण माप दो प्रकार के हो सकते हैं –

  1. निरपेक्ष तथा
  2. सापेक्ष

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प्रश्न 48.
प्रमाप विचलन का एक मुख्य दोष क्या है?
उत्तर:
इसे समझना एवं ज्ञात करना अपेक्षाकृत कठिन है।

प्रश्न 49.
परिक्षेपण के विभिन्न मापों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. निरपेक्ष माप
  2. सापेक्ष माप

प्रश्न 50.
विस्तार का एक दोष लिखें।
उत्तर:
वे श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं हैं।

प्रश्न 51.
कौन-सी परिक्षेपण की माप 50 प्रतिशत मूल्य से सम्बन्धित है?
उत्तर:
अन्तर चतुर्थक विस्तार।

प्रश्न 52.
विचरण क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन के वर्ग को विचरण कहते हैं। समीकरण में, प्रसारण = σ2

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प्रश्न 53.
विचरण गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 54.
प्रमाप विचलन की एक बीजगणितीय विशेषता बताएँ।
उत्तर:
समान्तर माध्य से लिए गए विचलन वर्गों का योग सदैव न्यूनतम होता है।

प्रश्न 55.
सामूहिक प्रमाप विचलन ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 14

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निरपेक्ष और सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जब किसी समंकमाला के विस्तार, बिखराव या विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उसकी इकाई द्वारा ज्ञात किया जाता है, तो उसे परिक्षेपण का निरपेक्ष माप कहते हैं और जब परिक्षेपण के निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग दे और इस प्रकार जो अनुपात या प्रतिशत प्राप्त होता है, परिक्षेपण का सापेक्ष माप कहते हैं।

प्रश्न 2.
परिक्षेपण के आदर्श माप के कोई तीन गुण बताओ।
उत्तर:

  1. आदर्श परिक्षेपन का माप स्पष्ट एवं सरल होता है।
  2. यह सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
  3. निदर्शन में परिवर्तनों का परिक्षेपण के आदर्श माप पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

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प्रश्न 3.
माध्य विचलन (Mean Deviation) और प्रमाप विचलन (Standard Deviation) में अन्तर बताइये।
उत्तर:
1. माध्य विचलन में श्रेणी के मूल्यों में विचलन किसी भी सांख्यिकी माध्य (सामानान्तर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से निकाले जा सकते हैं, जबकि प्रमाप विचलनों में श्रेष्ठ के मूल्यों के विचलन सदैव सामानान्तर माध्य से लिये जाते हैं।

प्रश्न 4.
परिक्षेपण किसे कहते हैं? निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित मापों के नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण से अभिप्राय समंकमाला में विभिन्न मूल्यों के विस्तार, दूरी तथा बिखराव से होता है। बऊले के अनुसार, “परिक्षेपण पदों के विचरण या अन्तर का माप है। परिक्षेपण की सहायता से मदों के केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचलन ज्ञात किये जाते है।” निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित माप –

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. माध्य विचलन
  4. प्रमाप विचलन इत्यादि हैं

प्रश्न 5.
प्रमाप विचलन का क्या अर्थ है? इसको किस चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है?
उत्तर:
किसी श्रेणी के समानान्तर माध्य के विचलनों के वर्गों के समानान्तर माध्य का वर्गमूल प्रमाप विचलन कहलाता है। प्रमाप विचलन के माप के लिए ग्रीक वर्णमाला का अक्षर सिग्मा (Small Sigma) प्रयुक्त किया जाता है। सूत्र के रूप में  –
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X } )^{ 2 } }{ N } } \)

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प्रश्न 6.
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन क्या हैं? इसकी गणना का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
विस्तार परिक्षेपण का सरल माप है। किसी श्रेणी के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अन्तर को विस्तार कहते हैं। इसकी गणना के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
विस्तार = R = L – S
चतुर्थक विचलन को अर्द्ध अन्तर चतुर्थ विस्तार भी कहते हैं। परिक्षेपण का यह माप शृंखला के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के मूल्यों पर आधारित है। इसकी गणना करने के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया हाता है।
चतर्थक विचलन Q.D. = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

प्रश्न 7.
मूल तथा पैमाने में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन, माध्य तथा विचरण पर क्या प्रभाव पड़ोगा?
उत्तर:
1. मूल में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। परन्तु मूल में परिवर्तन आने पर माध्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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प्रश्न 8.
प्रमाप विचलन को विचलन का वर्गों के माध्य मूल भी क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन को विचलन के वर्गों का माध्य मूल भी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह माध्य के विचलनों के वर्गों के माध्य का मूल है। प्रमाप विचलन की गणना में हम पहले माध्य की गणना करते हैं फिर माध्य से मदों विचलन ज्ञात किया जाता फिर विचलनों का वर्ग निकालकर उसका योगफल निकाला जाता है। विचलन के वर्गों के जोड़ को मदों की संख्या से विभाजित किया जाता है और जो परिणाम आता है. उसका वर्गमूल ज्ञात किया हाता है प्रमाप विचलन का चिह्न है। सूत्र रूप में।
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X)N } }{ } } \)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक विशेष वितरण में चतुर्थ विचलन 15 अंक है और चतुर्थ विचलन का गुणांक 0.6 है। Q1 तथा Q2 ज्ञात करें।
उत्तर:
माध्य विचलन (Q.D.) = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \) = 15 अंक
अथवा, Q3 – Q1 = 30
माध्य विचलन का गुणांक = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6
\(\frac { 30 }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6; अथवा, Q3 + Q1 = \(\frac{30}{0.6}\)

  1. तथा
  2. को जोड़ने पर

∴ Q3 + Q1 = 50
Q3 – Q1 = 30
Q3 + Q1 = 50
2Q3 = 80
Q1 = 40 अंक
अब Q3 – Q1 = 30
अतः – Q1 = 30 – Q3
-Q1 = 30 – 40 = -10
Q1 = 10
Q1 = 10 अंक तथा Q3 = 30 अंक उत्तर।

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प्रश्न 2.
11 मनुष्यों की ऊँचाई 61, 64, 68, 67, 68, 66, 70, 65, 67 तथा 72 इंच है। विस्तार ज्ञात किजिए। यदि सबसे छोटे कद वाले व्यक्ति को हटा दिया जाये तब विस्तार में कितने प्रतिशत परिवर्तन होगा?
उत्तर:

  1. विस्तार = L – S = 72 – 61 = 11 इंच
  2. नया विस्तार (सबसे छोटे आदमी को हटाने के पश्चात् = 72 – 64 = 8 इंच
  3. विस्तार में परिवर्तन = 11 – 8 = 3 इंच विस्तार में प्रतिशत परिवर्तन = \(\frac{3}{11}\) × 100 = 27.2%

प्रश्न 3.
निम्न तालिका में 100 व्यक्तियों की ऊँचाई दी गई है। विस्तार विधि से परिक्षेपण ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 15
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 16
विस्तार = L – S = 170 – 161 = s
विस्तार का गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{170-161}{170+161}\) = \(\frac{9}{331}\) = 0.3

प्रश्न 4.
सिद्ध किजिये कि माध्य विचलन सभी मानों पर आधरित होता है। अतः एक भी मान में परिवर्तन इस पर प्रभाव डालेगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनका माध्य विचलन ज्ञात करते हैं – 2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 17
माध्य \(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{15}{5}\) = 2.4
अब हम मान बदल देते हैं। 9 के स्थान पर 14 लेते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 18
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{35}{5}\) = 7
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{16}{5}\) = 3.2
इस प्रकार हम देखते हैं कि मान के बदलने से माध्य विचलन में अंतर आ गया है। पहले माध्य विचलन 24 मान बदलने के बाद यह 3.2 हो गया है।

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प्रश्न 5.
सिद्ध करें कि यदि माध्य विचलन माध्य से परिकलित किया जाये, तो यह अधिक होगा और यदि इसे मध्यिका से परिकलित किया जाये तो यह निम्नतम होगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनसे माध्य विचलन तथा मध्यिका से माध्य विचलन कि गणना करते हैं -2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 19
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य से माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{12}{5}\) = 2.4
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 20
माध्य = \(\frac{N+1}{2}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{5+1}{2}\) = तीसरे मद का मूल्य = 7
माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{11}{5}\) = 2.2
माध्य से विचलन 2.4 है और माध्यिका से माध्य विचलन 2.2 है। अत: सिद्ध हुआ कि मध्यिका से माध्य विचलन से माध्य विचलन से कम होता है।

प्रश्न 6.
इंचों में मापा गया ऊँचाई का प्रमाप विचलन व्यक्ति के उसी समूह में फुटों में मापे गये ऊँचाई के प्रमाप विचलन से अधिक होगा।
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सत्य है। इसका कारण यह है प्रमाप विचलन निरपेक्ष माप है। यह माप कठिनाई उत्पन्न कर सकता है, जब माप की इकाइयाँ भिन्न-भिन्न होती हैं। माप इकाई जितनी कम होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही अधिक बढ़ता जायेगा और माप इकाई जितनी अधिक होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही कम होता जायेगा।

उदाहरण के लिये हम रुपयों के स्थान पर पैसों में आय की गणना करते हैं तो प्रमाप विचलन 100 गुणा बढ़ जायेगा। प्रमाप विचलन में बढ़ोत्तरी बारह गुना होगी। (1 फुट = 12 इंच) इसे हम उदाहरण द्वारा समझा सकते हैं। मान लो 5 वस्तुओं की ऊँचाई नीचे फुटों में दी गई है। इसका हम प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 21
अब हम इन्हीं ऊँचाई को इंचों में लेकर प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 22
इस तरह हम देखते हैं कि प्रमांप विचलन 12 गुण बढ़ गया है।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से निम्न चतुर्थक (Q1) तृतीय चतृर्थक (Q) की गणना करें –
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 24

प्रश्न 8.
फार्मों में एक क्विंटल गेहूँ की उत्पादन लागत का वितरण (रुपयों) में निम्नलिखित हैं।
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(क) विचरण ज्ञात करें।

  • प्रत्यक्ष विधि से
  • पद – विचलन विधि से तथा परिणामों को समान्तर माध्य से और माध्य विचलन से तुलना करें।

(ख) विचरण गुणांक की गणना करें।

  • मूल्यों के प्रमाप विचलन से
  • समान्तर माध्य से, माध्य विचलन से तथा दोनों की तुलना करें। लागतों में विचरण से आप किस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं?

उत्तर:
प्रत्यक्ष विधि से विचरण की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 26
विचरण गुणांक की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 27

  1. विचरण गुणांक (प्रमाप विचलन से) = \(\frac{σ}{X}\) = \(\frac{12}{71}\) = 0.169 या 0.17 लगभग
  2. विचरण गुणांक (माध्य विचलन से) = \(\frac{MD}{X}\) = \(\frac{492/50}{50}\) = \(\frac{9.84}{71}\) = 0.138 = 0.04 लगभग

निष्कर्ष:
दो परिणामों में आपस में तुलना करने पर हम कह सकते हैं कि माध्य विचलन को तुलना में प्रमाप विचलन में विचरण गुणांक अधिक है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित विधियों से नीचे दी गई तालिका से प्रमाप विचलन ज्ञात करें। (Calculate standard deviation from the following table)

  1. वास्तविक माध्य विधि (Actual Mean Method)
  2. काल्पनिक माध्य विधि (Assumed Mean Method)
  3. 6 faasta farfa (Step Deviation Method)

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1. वास्तविक माध्य विधि द्वारा प्रमाप विचलन की गणना (Calculationofs.D.with the help of Actual Mean Method)
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2. कल्पित माध्य विधि से प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation by Assumed Mean Method)
हमने यहाँ कल्पित माध्य 40 लिया है।
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3. पद विचलन विधि से प्रमाप विचलन को गणना (Calculation of S.D.by step Deviation Method)
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प्रश्न 10.
लारेंज वक्र के निर्माण में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
लारेंज वक्र के निर्माण में निम्नलिखित चरण निहित हैं –

  1. वर्गों के मध्य बिन्दु परिकल्पित करें तथा उनका संचयी योग पता लगाएं।
  2. संचयी योग को प्रतिशत में बदलें।
  3. बारम्बारता को जोड़ें तथा संचयी बारम्बारता प्राप्त करें।
  4. संचयी बारम्बारता को प्रतिशत में बदलें।
  5. अब ग्राफ पेपर पर चर के संचयी प्रतिशत को y अक्ष पर तथा बारम्बारता के संचयी प्रतिशत को x अक्ष पर प्रदर्शित करें। इस तरह से प्रत्येक अक्ष पर 0 से 100 तक का मान होगा।
  6. निर्देशांक (0,0) को (100, 100) से जोड़ते हुए एक रेखा खींचे। इसे समवितरण रेखा कहा जाता है।
  7. चर के संचयी प्रतिशत को बारम्बारता के संगत संचयी प्रतिशत के साथ अभिलेखित करें। इन बिन्दुओं को मिलाकर एक वक्र प्राप्त करें। आगे लारेंज वक्र का ग्राफ दिया गया।

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प्रश्न 11.
नीचे एक कम्पनी के कर्मचारियों की मासिक आय दी गई है। इसकी सहायता से एक लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 34
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12. नीचे तालिका की सहायता से लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 37
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प्रश्न 13.
निम्न समंकमाला का प्रसारण (02) तथा इमाप विचलन प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा ज्ञात कीजिए। दोनों विधियों का प्रयोग कीजिए।
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उत्तर:
(क) प्रत्यक्ष विधि द्वारा (Direct Method) –
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प्रश्न 14.
परिक्षेपणं के वैकल्पिक मापों की तलनात्मक विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण के वैकल्पिक मापों की तुलनात्मक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. कठोरता से परिभाषित (Rigidiy defined):
परिक्षेपण के चारों प्रमाण-विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन तथा प्रमापे विचलन को कठोरता से परिभाषित किया जाता है।

2. गणना में सरल (Easyof calculation):
विस्तार की गणना सबसे अधिक सरलता से की जा सकती है। चतुर्थक विचलन की गणना करने के लिए उच्च चतुर्थक (Q3) तथा न्यूनतम (Q2) की गणना करनी पड़ती है। परन्तु इनकी गणना सरलता से की जा सकती है। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन की गणना के लिये थोड़ी अधिक विधिपूर्वक गणना करने की आवश्यकता होती है।

3. सरल व्याख्या (Simple interpretation):
परिक्षेपण के सभी मापों की सरलता से व्याख्या की जा सकती है और उन्हें सरलता से समझा जा सकता है। विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सामान्य रूप से परिक्षेपण को मापते हैं। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मूल्य के विचलन के रूप में करते हैं। अत: माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन मूल्य के परिक्षेपण के बारे में अधिक अच्छी जानकारी देते हैं।

4. सभी मूल्यों पर आधारित (Based on all values):
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सभी मूल्य पर निर्भर नहीं करते। इसके विपरीत माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन चरों के सभी मूल्यों के लेते हैं। विस्तार तो चरम (Extrement) मूल्यों से बहुत ही प्रभावित होती हैं।

5. बीजगणितीय व्यवहार (Algebrical treatment):
लगभग परिक्षेपण के सभी मापों से बीजगणितीय व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 15.
(क) व्यक्तिगत श्रेणी तथा खण्डित श्रेणी से माध्य विचलन की गणना कैसे की जाती है?
(ख) निम्नलिखित सारणी में माध्यिका तथा माध्य विचलन ज्ञात करें। (Calculate mean deviation from median and mean)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 42
उत्तर:
(क) व्यक्तिगत श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of mean Deviation from Individual Series):

  • वह माध्य ज्ञात करें, जिससे विचलन ज्ञात करना है।
  • माध्यिका/माध्य से (+) या (-) संकेतों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करें।
  • इन विचलनों का योग ΣD ज्ञात करें।
  • कुल योग ΣD को मदों की कुल संख्या से विभाजित करें। सूत्र के रूप में माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\)
  • भजनफल माध्य विचलन होगा।

(ख) खण्डित-श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of Mean Deviation in Discrete Series):

  • दी हुई श्रेणी से माध्यिका ज्ञात करें।
  • के चिह्नों की अवहेलना करते हुए विलचन ज्ञात करना व Σf |D| ज्ञात करें।
  • विचलनों को इनकी आवृत्तियों से गुणा करके इनका योग (Σf |D|) ज्ञात करना।
  • अन्त में, प्राप्त योगफल को पदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन का मूल्य प्राप्त होगा।

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प्रश्न 16.
(क) अखण्डित श्रेणी से माध्य की गणना कैसे की जाती है? (How is mean deviation calculated in case of continuous series?)
(ख) नीचे 50 श्रमिकों की मजदूरी का वितरण दिया गया है। माध्य विचलन ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 45
उत्तर:
(क) अखण्डित श्रेणी के माध्य विचलन की गणना में निम्नलिखित चरण निहित है –

  • वर्गान्तर के मध्य बिन्दु ज्ञात करना। मान लो वर्गान्तर 0 – 10, 10 – 20, 20 – 30 आदि है, तो इनके मध्य बिन्दु 5, 15, 25 होंगे।
  • मध्य बिन्दुओं से माध्यिका या माध्य ज्ञात करें।
  • ± चिह्नों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करना ΣD ज्ञात करना।
  • विचलनों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करना फिर उनका योग निकालना को ΣfD से प्रकट करना।
  • अन्त में प्राप्त योग को मदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन ज्ञात हो जायेगा।

(ख) माध्य विचलन किसी भी माध्य द्वारा निकाला जा सकता है। यहाँ माध्यों का प्रयोग करके माध्य – विचलन की गणना की गई है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 46

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
परिक्षेपण के सापेक्ष मापक की इकाई –
(a) चर की इकाई होती है।
(b) कोई इकाई नहीं होती है।
(c) चर की इकाई का वर्ग होती है।
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) कोई इकाई नहीं होती है।

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प्रश्न 2.
मानक विचलन की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) चर की इकाई

प्रश्न 3.
विचरण मापक की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चर की इकाई का वर्ग

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प्रश्न 4.
विस्तार से विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 47
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48

प्रश्न 5.
चतुर्थक विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)

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प्रश्न 6.
मध्यायका से विचरण गुणांक का सूत्र है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(c) \(\frac{MD}{M}\)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac{MD}{M}\)

प्रश्न 7.
लघु विधि से मानक विचलन का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 50
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 49

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प्रश्न 8.
विचरण मापांक का सूत्र है –
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 51
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52

प्रश्न 9.
चतुर्थक विचलन होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 4 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(b) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 10.
माध्य विचलन न्यूनतम होता है जब –
(a) मध्यिका से लिया जाता है।
(b) समान्तर माध्य से लिया जाता है।
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मध्यिका से लिया जाता है।

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एजटेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग जिन्हें टेनोका भी कहते हैं ने टेनोक्ट्टिलान, टेलाटेलोका नाम की दो राजधानियाँ बसायौं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवताओं और अन्य ईवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननी मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे। 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

मेसोपोटामिया की सभ्यता – मेसोपोटामिया की सभ्यता के अंतर्गत तीन सभ्यताओंसमेरिया, वेबीलोनिया और सीरिया की गणना की जाती है। तीनों सभ्यताओं का जन-जीवन लगभग समान था। समाज में उच्च, मध्य तथा निम्न तीन वर्ग थे। पहले दोनों वर्ग सुखी ऐश्वर्य का जीवन व्यतीत करते थे। निम्न वर्ग के लोग दु:खी थे। समाज में पुरुषों की अपेक्षा सियों का स्थान निम्न था। कृषि सिंचाई द्वारा की जाती थी। मेसोपोटामिया के लोग टीन, ताँबा काँसे से परिचित थे। वस्त्र उद्योग उनका प्रमुख व्यवसाय था। वे अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

मैसोपोटामिया के लोगों ने महान् उपलब्यिाँ प्राप्त की। उन्होंने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। उन्होंने चन्द्रमा के आधार पर एक पंचांग बनाया। इसकी सहायता से वे ऋतुओं तथा ग्रहण लगने का अनुमान लगाते थे। उन्होंने षट्दाशमिक प्रणाली की खोज भी की। इसके आधार पर उन्होंने। घंटे में 60 मिनट और 1 मिनट में 60 सैकेण्ड निश्चित किए। उन्होंने ही सबसे पहली ‘हम्बुराबी की विधि संहिता- नामक कानूनों की एक पुस्तक तैयार की। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुम्हार के चाक, शीशे के बर्तनों और भवन निर्माण की नवीन शैलियों का आविष्कार किया।

प्रश्न 2.
ऐसे कौन-से कारण थे जि+4 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचार।। को सहायता मिली?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौ-चालन में निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुँचाई –

  1. 1380 ई. में कुतबनुमा अर्थात् दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। इससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिल सकती थी।
  2. समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण होने लगा था, जो विशाल मात्रा में माल की ढुलाई कर सकते थे।
  3. ये जहाज आत्मरक्षा के अस्त्र-शस्त्रों से भी लैस होते थे, ताकि शत्रु के आक्रमण का सामना किया जा सके।
  4. पंद्रहवीं शताब्दी के दौरान यात्रा-वृत्तातों, सृष्टि-वर्णन तथा भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने लोगों के ज्ञान में वृद्धि की।
  5. उदाहरण के लिए मिस्रवासी टॉलेमी ने अपनी पुस्तक में विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति अक्षांश और देशांतर रेखाओं द्वारा समझायी थी।
  6. इसे पढ़ने से यूरोपवासियों को संसार के बारे में और अधिक जानकारी मिली। टॉलमी ने यह भी बताया था कि पृथ्वी गोल (Spherical) है।

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प्रश्न 3.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पंद्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया?
उत्तर:

  1. कुछ विशेष आर्थिक कारणों ने स्पेन के लोगों को महासागरी शूरवीर बनाया।
  2. स्पेन तथा पुर्तगाल के साहसी नाविक हर समय समुद्र में उतरने को तैयार रहते थे क्योंकि उन्होंने अटलांटिक महासागर की दूसरी ओर की भूमि को बहुत कम आँका था।
  3. स्पेन और पुर्तगाल के शासक नयी समुद्री खोजों के लिए धन जुटाने को तैयार रहते थे।

प्रश्न 4.
कौन-सी नई खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमेरिका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका से मक्का, कसावा, कुमाला, आलू आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं।

प्रश्न 5.
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राजील ले जाए गये सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करों।
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए लड़के की यात्रा बहुत ही कष्टमय थी। उसे अन्य गुलामों के साथ जहाज में ढूंसा गया और बेड़ियों से जकड़ा गया । उसे कई दिनों तक भूखा-प्यासा भी रखा गया।

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प्रश्न 6.
दक्षिणी अमेरिका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया?
उत्तर:
यूरोप के देश विशेषकर स्पेन तथा पुर्तगाल सोना-चाँदी के लालची थे। उन्हें दक्षिणी अमेरिका में भारी मात्रा में सोना मिलने की आशा थी। इसलिए यूरोपवासी दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न प्रदेशों में जा बसे। उन्होंने अपने सैन्य-बल तथा बारुद के प्रयोग द्वारा वहाँ अपना शासन स्थापित कर लिया। विरोध होने पर उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों को बुरी तरह कुचला। उन्होंने वहाँ के लोगों से नजराने वसूल किए। स्थानीय प्रधानों का प्रयोग उन्होंने नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए किया।

सोने-चांदी के विशाल भंडारों का पता चलने पर और अधिक यूरोपवासी वहाँ जा बसे। उन्होंने स्थानीय लोगों को दास बना लिया और उन्हें ‘खानों” में काम करने के लिए विवश किया। इस प्रकार दक्षिणी अमेरिका पूरी तरह यूरोपीय साम्राज्यवाद की जकड़ में आ गया।

Bihar Board Class 11 History संस्कृतियों का टकराव Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूमि उद्धार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भूमि उद्धार से अभिप्राय बंजर भूमि को आवासीय या कृषि योग्य भूमि में बदलने से है। कई बार विभिन्न जलस्रोत से जमीन लेकर भी भूमि उद्धार किया जाता है।

प्रश्न 2.
एजटेक लोगों के ‘चिनाम्पा’ क्या थे?
उत्तर:
चिनाम्या मैक्सिको झील में बने कृत्रिम द्वीप थे। एजटेक लोगों ने इन्हें सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और मिट्टी तथा पत्रों से ढंक कर बनाया था। ये द्वीप अत्यंत उपजाऊ थे।

प्रश्न 3.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की दो विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:

  • वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  • इनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशु-पालन से अपरिचित थे।

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प्रश्न 4.
माया लोगों की दो अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:

  • गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  • हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों की लिपि अंशत: चित्रात्मक तथा अंशत: ध्वन्यात्मक थी।

प्रश्न 5.
माया सभ्यता का विस्तार बताएँ।
उत्तर:
माया सभ्यता 300 ई० के बीच अपनी उन्नति की चरम सीमा पर थी। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग पर फैली हुई थी। इसमें ग्वातेमाला, मैक्सिको, हांडूरास तथा यूकातान के प्रदेश सम्मिलित थे।

प्रश्न 6.
अमेरिकी मूल सभ्यताओं के पतन के बारे में लिखें।
उत्तर:
1532 ई० में स्पेन की सेना ने फ्रांसिस्को पिजारों के नेतृत्व में इंका सभ्यता को नष्ट कर दिया। इस प्रकार विदेशी आक्रमणों के कारण 16वीं शताब्दी में अमेरिकी सभ्यताओं का पतन हो गया।

प्रश्न 7.
इंका सभ्यता के मुख्य केंद्र बताएँ।
उत्तर:
इंका सभ्यता का प्रमुख केंद्र टिंट्टीका की झील थी। इसके अन्य मुख्य केंद्र आधुनिक इक्वाडोर, पेरू तथा बोलीविया थे।

प्रश्न 8.
माया सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • कृषि इनका मुख्य व्यवसाय था। इनका मुख्य आहार मक्का था।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। उन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया।

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प्रश्न 9.
प्राचीन मिस्त्र तथा माया पंचांगों में दो असमानताएं बताएँ।
उत्तर:

  • मिस्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचागों में वर्ष 18 महीने का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की दो : गगनताएँ बताओ।
उत्तर:

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे। इसका कारण यह था कि ये दोनों सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

प्रश्न 11.
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों के बस जाने का क्या परिणाम निकाला?
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ। इसी से दास-व्यापार आरंभ हुआ। इसके अंतर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से दास पकडकर या खरीदकर उन्हें उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खानों तथा बगानों में काम करने के लिए बेचने लगे।

प्रश्न 12.
हम अमेरिका के मूल निवासियों तथा यरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के बारे में मूलनिवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते पर यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। इसका क्या कारण है?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि अमेरिका की यात्राओं पर जाने वाले यूरोपवासी अपने साथ रोजनामचा (log-book) और डायरियाँ रखते थे। इनमें वे अपनी यात्राओं का दैनिक विवरण लिखते थे। हमें सरकारी अधिकारियों, एवं जेसुइट धर्मप्रचारकों के विवरणों से भी इसके बारे में जानकारी मिलती है। परंतु यूरोपवासियों ने अपनी अमेरिका की खोज तथा वहाँ के देशों का जो इतिहास लिखा है उनमें यूरोपीय बस्तियों के बारे में ही अधिक बताया गया है। स्थानीय लोगों के बारे में बहुत कम या न के बराबर ही लिखा गया है।

प्रश्न 13.
15वीं से 17वीं शताब्दी तक दक्षिणी तथा मध्य अमेरिका का भौगोलिक परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका घने जंगल और पहाड़ों से ढंका हुआ था। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेशों से होकर बहती थी। मध्य अमेरिका में, मैक्सिकों में समुद्र तट के आसपास के क्षेत्र और मैदानी प्रदेश घने बसे हुए थे, जबकि सघन वनों वाले क्षेत्रों में गाँव दूर-दूर स्थित थे।

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प्रश्न 14.
जीववादी (Animists) कौन होते हैं?
उत्तर:
जीववादी वे लोग होते हैं जो इस बात में विश्वास रखते हैं कि वैज्ञानिक जिन वस्तुओं को निर्जीव मानते हैं, उनमें भी जीवन या आत्मा हो सकती है।

प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे ? उनकी दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरोबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीपसमूहों तथा वृहत्तर ऐटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे।

विशेषताएं –

  • ये लोग लडने की बजाय बातचीत से झगडा निपटाना अधिक पसंद करते थे।
  • वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ों के खोखले तनों से अपनी डॉगियाँ बनाते थे।

प्रश्न 16.
दक्षिणी अमेरिका के तुपिनांबा लोगों को कृषि पर निर्भर क्यों नहीं होना पड़ा?
उत्तर:

तुपिनांवा लोगों के पास भेड़ काटने के कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके।
उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा।

प्रश्न 17.
मध्य-अमेरिका में शहरीकृत सभ्यताओं के विकास में किन तत्वों ने सहायता पहुँचाई? इन शहरों की क्या मुख्य विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
मध्य अमेरिका में कुछ अत्यंत सुगठित राज्य थे । वहाँ मक्का का भरपूर उत्पादन होता था। जो एजटेक, माया और इंका जनसमुदायों की शहरीकृत सभ्यताओं का आधार बना। इन शहरों की मुख्य विशेषता इनकी भव्य वास्तुकला थी।

प्रश्न 18.
माया सभ्यता के लोगों के धर्म की कोई दो विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:

  • माया सभ्यता के लोग वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि, मक्का आदि देवताओं की पूजा करते थे।
  • माया लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अपने शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि का भी रिवाज था।

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प्रश्न 19.
कोलंबस को वापसी यात्रा अधिक कठिन क्यों थी?
उत्तर:
कोलंबस की वापसी यात्रा निम्नलिखित कारणों से अधिक कठिन थी –

  • उसके जहाजों को दीमक लग गई थी।
  • उसके साथी नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी।

प्रश्न 20.
कोलंबस कहाँ का निवासी था? वह ‘इंडीज’ कब पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस स्पेन का निवासी था। वह 12 अप्रैल, 1492 ई० को इंडीज पहुँचा।

प्रश्न 21.
कैपिटुलैसियोन (Capitulaciones) क्या थे?
उत्तर:
कैपिटुलैसियोन एक प्रकार के इकरारनामे थे। इन इकरारनामे द्वारा स्पेन का शासक नए जीते हुए प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता जमा लेता था। उन्हें जीतने वाले नेताओं को पुरस्कार के रूप में पदवियाँ और जीते गए देशों पर शासनाधिकार दिया जाता था।

प्रश्न 22.
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) क्या थी?
उत्तर:
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप पर प्राप्त की गई सैनिक विजय थी । इस विजय द्वारा इन राजाओं ने 1492 ई. में इस प्रायद्वीप को अरबों के नियंत्रण से मुक्त करा लिया था।

प्रश्न 23.
14वीं शताब्दी के बाद यूरोप, विशेषकर, इटली के लंबी दूरी के व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
14वीं शताब्दी के बाद के दशकों में यूरोप के लंबी दूरी के व्यापार में गिरावट आ गई। 1453 ई. में तुकों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) की विजय के बाद तो यह और भी कठिन हो गया। इटलीवासियों ने किसी प्रकार तुकों के साथ व्यापारिक संबंध तो बनाए रखा, पर उन्हें व्यापार पर अधिक कर देना पड़ता था।

प्रश्न 24.
सृष्टिशास्त्र (Cosmography) क्या था?
उत्तर:
सृष्टिशास्त्र विश्व का मानचित्र बनाने का विज्ञान था। इसमें स्वर्ग और पृथ्वी दोनों का वर्णन किया जाता था। परंतु इसे भूगोल और खगोल से अलग शास्त्र माना जाता था।

प्रश्न 25.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियों की कुछ समानताएँ यूरोपीय संस्कृति से बहुत भिन्न थीं। इनका उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एजटेक तथा इंका समाज श्रेणीबद्ध था परंतु वहाँ यूरोप की तरह संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।
  2. पुरोहितों और शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था । यद्यपि भव्य मंदिर बनाए जाते थे, जिनमें सोने दा प्रयोग किया जाता था।
  3. फिर भी सोने, चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता था। तत्कालीन यूरोपीय समाज की स्थिति इससे बिलकुल विपरीत थी।

प्रश्न 26.
इंका लोगों ने उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति कैसे की?
उत्तर:
ईका सभ्यता का आधार कृषि था। परंतु भूमि अधिक उपजाऊ नहीं थी। इसलिए उन्होंने पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल-निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित की। इस प्रकार इंका लोगों ने कम उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति की।

प्रश्न 27.
एजटेक जाति ने कब और किस प्रकार सत्ता प्राप्त की? इनका राज्य विस्तार कितने क्षेत्र में था?
उत्तर:
एजेटक जाति ने 1220 ई० में टोलटेक शक्ति को समाप्त करके उनके राज्य पर अधिकार कर लिया। उनका राज्य विस्तार दो लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था।

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प्रश्न 28.
एजटेक सभ्यता की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
एजटेक एक युद्धप्रिय जाति थी। उन्होंने अपनी वीरता से एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 29.
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था पर नोट लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था कृषि पर आधारित थी। इसके अतिरिक्त कई लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने आदि का कार्य भी करते थे।

प्रश्न 30.
एजटेक लोगों के धर्म के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
एजटेक लोग सूर्य देवता और अन्न देवी की पूजा करते थे। उनमें मानव बलि का बहुत रिवाज था। उनके अधिकतर भव्य मंदिर युद्ध के देवताओं तथा सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि वे युद्धों को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका पर स्पेन तथा पर्तगाल का शासन था। स्पेनी तथा पुर्तगाली दोनों ही भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार की हैं। इसी कारण दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पोटोसी (Potasi) के ‘नरक का मुख’ किसने कहा था और क्यों?
उत्तर:
पोटोसी को एक संन्यासी डोमिनिगो डि सैंटो टॉमस ने ‘नरक का मुख’ कहा था। इसका कारण यह था कि वहाँ की खानों में काम करने वाले हजारों इंडियन हर साल मौत का शिकार हो जाते थे। वहाँ के खान मालिक लालची और निर्दयी थे जो इंडियन लोगों के साथ जानवरों जैसे व्यवहार करते थे।

प्रश्न 33.
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली वह प्रणाली होती है जिसमें उत्पादन तथा वितरण का स्वामित्व निजी हाथों में होता है। उत्पदन मुख्यतः मुनाफा कमाने के लिए पिया जाता है जिसमें खुली प्रतिस्पर्धा होती है।

प्रश्न 34.
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए यूरोपीय अभियानों के क्या तात्कालिक परिणाम निकले?
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए, इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए।

  1. जैसे मार काट के कारण मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई।
  2. उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया।
  3. उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

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प्रश्न 35.
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले जेसुइट पादरियों को पसंद नहीं करते थे क्यों?
उत्तर:
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले पादरियों को निम्नलिखित कारणों से पसंद नहीं करते थे –
1. ये पादरी वहाँ के मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे। वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और उन्हें यह सिखाते थे ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें उसका आनंद लेना चाहिए।

2. सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्म प्रचारक दास प्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

प्रश्न 36.
स्पेनियों की मैक्सिको विजय का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
स्पेनियों द्वारा मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने के दो वर्ष पश्चात् कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन-जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया । मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala) निकारगुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 37.
कोलंबस की विशेष उपलब्धि क्या रही?
उत्तर:
कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 38.
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों का नामकरण किसके नाम पर हुआ?
उत्तर:
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिंगों वेस्पुस्सी’ (AmerigoVespucci) के नाम पर किया गया जिसने उनके विस्तार को समझा और उन्हें ‘नयी दुनिया’ (New world) का नाम दिया। इन महाद्वीपों के लिए ‘अमेरिका’ (America) नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशन द्वारा 1507 ई० में किया गया।

प्रश्न 39.
डोना मैरीना कौन थी?
उत्तर:
बर्नार्ड डियाज डेल कैस्टिलो (Bernard Diaz DelCastillo) ने अपने टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको में लिखा है कि टैबैस्को (Tabasco) के लोगों ने कोर्टस को डोना मैरीना नाम की एक सहायिका दी थी। वह तीन भाषाओं में प्रवीण थी और उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये का काम किया था। डियाज के विचार में वह एक राजकुमारी थी। परंतु मैक्सिकन लोग उसे ‘मालिंच’, अर्थात् विश्वासघातिनी कहते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिकी मूल संस्कृतियों के आर्थिक प्रबंध के बारे में बताएँ।
उत्तर:
अमेरिकी मूल संस्कृतियों से अभिप्राय माया, एजटेक तथा इंका सभ्यताओं से है।

  1. माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। मक्का उस समय की मुख्य उपज थी। कुछ लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने तथा अन्य हस्तशिल्पों में लगे हुए थे।
  2. एजटेक लोगों के मुख्य उद्योग-धंधे, धातु-कर्म, बर्तन बनाना तथा सूती कपड़ा बुनना था। कुछ लोग कृषि करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू तथा शक्करकंद उगाते थे।
  3. इंका लोगों की आर्थिक अवस्था सोने तथा चाँदी से संबंधित थी। इन धातुओं से सजावट का सामान तथा अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं। कुछ लोग व्यापार भी करते थे, जो वस्तुओं की अदला-बदली (वस्तु-विनिमय) द्वारा होता था।

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प्रश्न 2.
अमेरिका के आंरभिक लोगों तथा भौगोलिक विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका और निकटवर्ती द्वीप समूहों में हजारों वर्षों से अनेक जनसमुदाय रहते आए थे। एशिया तथा दक्षिणी सागर के द्वीपों (South Sea Island) से भी लोग वहाँ जाकर बसते थे। दक्षिणी अमेरिका घने जंगलों और पहाड़ों से ढका हुआ था। आज भी उसके अनेक भाग जंगलों से ढंके हुए हैं। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेश से होकर बहती है। मध्य अमेरिका में, गाँव दूर-दूर स्थित थे।

प्रश्न 3.
अरवाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे? उनकी तथा उनकी संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और बृहत्तर एंटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे। कैरिव (Caribs) नामक एक खूखार कबीले ने उन्हें लधु ऐंटिलीज (Lesser Antilles) प्रदेश से खदेड़ दिया था। दूसरी ओर खरावाक लोग लड़ने की बजाय बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे। वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ के खोखले तनों से अपनी डॉगियां बनाते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू, कंद-मूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति – अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animasts) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक सामज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्पूर्ण भूमिका निभाते थे।

प्रश्न 4.
यूरोपीय लोगों (स्पेनिश) की अरावाकों के प्रति क्या नीति थी? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भाँति वे सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले शीशे के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न हो जाते थे, क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अराबाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सी की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया । इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाकों और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 5.
तुपिनाँबा लोग कौन थे? यूरोपवासियों को उनसे ईर्ष्या क्यों होती थी?
उत्तर:
‘तुपिनांबा’ (Tupinamba) कहे जाने वाले लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्र तट पर ओर ब्राजील नामक वृक्षों से बसे गाँवों में रहते थे। उनके पास पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था। इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके। परंतु उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इनके जीवन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था। वहाँ न तो कोई राजा था, न सेना और नहीं कोई चर्च । अतः उनके संपर्क में आने वाले यूरोपवासी उनके इस स्वतंत्र विचरण को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगे।

प्रश्न 6.
एजटेक लोगों का समाज श्रेणीबद्ध था। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एजटेक समाज वास्तव में ही श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। रिवाज में योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को गुलामों के रूप में बेंच देते थे। परंतु यह बिक्री प्रायः कुछ वर्षों के लिए ही रहती थी। गुलाम अपनी स्वतंत्रता फिर खरीद सकते थे।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 7.
एजटेक लोगों के आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (Reclamation) किया। उन्होंने सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर माक्सको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये । इन्हें चिनाम्पा (Chinampas) कहते थे।

2. इन अत्यंत उपजाऊ द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिट्लान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील के बाहर झाँकते दिखाई देते थे।

3. एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

4. साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्, कसावा, आलू तथा अन्य कुछ फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतीहर लोग अभिजात की जमीनें जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था।

प्रश्न 8.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की मुख्य सामान्य विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
आदि अमेरिका सभ्यताओं में अनेक सामान्य विशेषताएँ थीं –

  1. वे लोग पत्थर की वास्तुकला में निपुण थे। उनके औजार पत्थर के ही बने हुए थे। धातुओं का प्रयोग केवल आभूषण बनाने में किया जाता था।
  2. वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  3. उनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशुपालन से अपरिचित थे।
  4. इन सभ्यताओं के लोगों ने बर्तन बनाने, बुनाई और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी निपुणता प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 9.
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –

  1. पंचांग – सौर पंचांग की भाँति माया वर्ष में भी 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिन को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे।
  2. गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  3. हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।
  4. कलात्मक उपलब्धियाँ – माया लोग भवन-निर्माण कला, चित्रकला तथा मूर्ति कला में बड़े निपुण थे। उन्होंने भव्य पिरामिड, चौक, मंदिर तथा वेधशालाओं का निर्माण किया ।
  5. चाक पर बने बर्तन – माया लोगों ने चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की तुलना करें।
उत्तर:
समानताएँ –

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे अर्थात् वे दोनों ही सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

असमानताएँ –

  • मिस्त्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचांग में वर्ष 18 महीने. का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।
  • माया सभ्यता के लोग वर्ष में शेष पाँच दिनों को अशुभ समझते थे जबकि मिस्त्री लोग शेष पाँच दिनों में उत्सव मनाया करते थे।

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प्रश्न 11.
इंका और एजटेक सभ्यताओं की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर:
इंका सभ्यता-इस सभ्यता की उपलब्धियां निम्नलिखित थीं –

  • कुशल प्रशासन – इंका साम्राज्य चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन, पुरुष शासन करता था।
  • उन्नत नगर – का साम्राज्य में नगरों की भरमार थी। उन नगरों में बहुत-से विशाल भवन होते थे। इनमें किले, मंदिर, महल आदि शामिल थे।
  • कला तथा दस्तकारी – इंकः सभ्यता में कलाएँ तथा दस्तकारियाँ की विकसित थीं।
  • धातुओं का योग – इंका सभ्यता के लोग सोने, चाँदी तथा ताँबे के आभूषण बनाते थे। वे अपने हथियार और औजार बनाने के लिए काँसे का प्रयोग करते थे।

एजटेक सभ्यता – इस सभ्यता की उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –

  • शक्तिशाली साम्राज्य – एजटेक लोगों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। वह साम्राज्य 38 प्रांतों में बँटा हुआ था।
  • पंचांग – एजटेक लोगों का अपना अलग पंचांग था। उनके पंचांग के अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • धातुओं का प्रयोग – उन्होंने नरम धातुओं को पिघलाना सीख लिया था।
  • धर्म – वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे जैसे-सूर्य देवता और अन्न देवी।

प्रश्न 12.
आदिम अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ किन मुख्य अर्थों में प्राचीन एशियाई और यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं?
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ निम्नलिखित अर्थों में प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं –
1. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों को कृषि के विषय में काफी ज्ञान था परंतु वे पशुपालन से अपरिचित थे। धार्मिक दृष्टि से उन लोगों में मक्का की कृषि का बड़ा महत्त्व था। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोगों ने कृषि तथा पशुपालन का कार्य एक साथ ही आरंभ किया।

2. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों ने धातु का प्रयोग केवल आभूषण बनाने के लिए ही आरंभ किया। फिर भी उन्होंने बर्तन निर्माण, बुनाई, पंख-मोजेक और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी दक्षता प्राप्त कर ली थी। आदिम अमेरिकी सभ्यता की यह विशेषता प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न थी।

3. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोग हल तथा पहिये के प्रयोग से अपरिचित थे। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोग इन दोनों के प्रयोग के विषय में जानकारी रखते थे।

4. आदिम अमेरिकी लोगों ने बहुत लंबे समय तक पत्थर के औजारों का ही प्रयोग किया। यहाँ तक कि स्मारकों की वास्तुकला तथा महान् अमेरिकी सभ्यताओं की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ भी केवल पत्थर के औजारों की सहायता से ही तैयार की गई। इस दृष्टि से प्राचीन एशिया तथा यूरोप की सभ्यताओं के लोग कहीं आगे थे। वे पत्थर के हथियारों को लगभग भूल चुके थे और लोहे के मजबूत हथियारों का प्रयोग करने लगे थे।

5. आदिम अमेरिकी लोगों की कोई लेखन प्रणाली नहीं थी। इसके विपरीत एशिया तथा यूरोप में विकसित सभ्यताओं की अपनी-अपनी लेखन प्रणालियाँ थीं।

प्रश्न 13.
इंका लोगों के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन का वर्णन करें।
उत्तर:
1. सामाजिक जीवन – इंका समाज में सम्राट् को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। उसे सूर्य का वंशज समझा जाता था। सम्राट् के पश्चात् समाज में दूसरा स्थान कुलीन तथा पुरोहितों का था। उनके पश्चात् साधारण लोगों की श्रेणी थी जिसमें दस्तकार तथा किसान सम्मिलित थे।

2. आर्थिक जीवन – इंका लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू और शकरकंद उगाते थे। इंका सभ्यता में कला और शिल्प काफी उन्नत थे। इन शिल्पों में मिट्टी के बर्तन बनाना, कपड़े बुनना तथा लामा और अल्पाका से ऊन प्राप्त करना शामिल था। इसके अतिरिक्त इंका लोग काँसे के हथियार तथा औजार और सौने-चाँदी के आभूषण भी बनाते थे।

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प्रश्न 14.
अमेरिकी सभ्यताओं के विज्ञान की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –
1. पंचांग – लोगों ने अपना पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा । प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिनों को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे। एजटेक लोगों ने भी अपना पंचांग बनाया जो माया पंचांग जैसा ही था।

2. गणित का ज्ञान-माया लोगों को गणित का भी अच्छा ज्ञान था। वे शून्य के लिए विशेष प्रकार के चिह्न प्रयोग करते थे।

3. हेरोग्लिफिक लिपि-माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।

4. चिकित्सा विज्ञान-इंका सभ्यता में चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत था । लोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते थे। यहाँ से मानव खोपड़ियाँ तथा कंकाल मिले हैं। इनसे पता चलता है कि लोगों को चीर-फाड़ (शल्य-चिकित्सा) का भी ज्ञान था।

प्रश्न 15.
खोज यात्राओं और व्यापार के बीच के संबंध पर विचार-विमर्श करो। अमेरिका और अफ्रीका के लोगों पर खोज यात्रियों के कार्यों के तात्कालिक प्रभाव क्या थे?
उत्तर:
खोज यात्राओं तथा व्यापार के बीच बड़ा गहरा संबंध था। वास्वत में खोज यात्राओं का उद्देश्य नये देशों की खोज करना था और वहाँ उपनिवेश स्थापित करना था। केवल इतना ही नहीं, इन उपनिवेशों से अधिक-से-अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करना खोज यात्राओं का मुख्य उद्देश्य था। यही कारण था कि विभिन्न देशों के शासकों ने खोज यात्रियों की पूरी सहायता की। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका पर विजय प्राप्त करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहत-से देश अपनी स्वतंत्र खो बैठे। केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

प्रश्न 16.
वाणिज्य तथा व्यापार की वृद्धि के क्या परिणाम निकले ? (Imp.)
उत्तर:

  1. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप के लोग समृद्ध बने।
  2. यूरोप के देशों ने खोजे गए प्रदेशों में उपनिवेश बसाये जिनको मंडियों के रूप में प्रयुक्त किया।
  3. नवीन खोजों के कारण इटली का परंपरागत व्यापारिक महत्त्व कम हो गया। अब व्यापार के केंद्र वे देश बन गए जो अटलांटिक महासागर के समीप थे।
  4. व्यापार के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियाँ स्थापित हुई जिनमें शासक वर्ग के सदस्य भी शामिल थे।
  5. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप छ मध्यम वर्ग के सदस्यों की संख्या में जो वहाँ की राजनीति में महत्त्वपू’ भूमिका निभाने लगे।

प्रश्न 17.
अमेरिका में स्पेन के राज्य की स्थापना में किन तत्त्वों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार सैन्य-शक्ति के बल पर हुआ। इसमें बारूद तथा घोड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय लोगों को या तो नजराना देना पड़ता था या फिर राज्य के लिए सोने-चाँदी की खानों में काम करना पड़ता था। अमेरिका को ‘खोज’ के बाद आरंभ में एक छोटी-सी बस्ती बसायी गई। इसमें रहने वाली स्पेनी लोग स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। स्थानीय प्रधानों को नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था।

सोने की लालच के कारण गंभीर हिंसक घटनाएँ हुई, जिनका स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया। स्पेनी विजेताओं के कठोर आलोचना कैथोलिक भिक्षु (friar) बार्टोलोम डि लास कैसास (Bartolome de las Casas) ने कहा है कि स्पेनी उपनिवेशकों को इन अभियानों के लिए अस्त्र-शस्त्र भी अभियानों में शामिल लोगों ने स्वयं मुहैया कराए थे। इसका कारण यह था कि उन्हें विजय के बाद होने वाली लूट में से एक बड़ा हिस्सा मिलने की आशा थी।

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प्रश्न 18.
कोर्टेस द्वारा मैक्सिको की विजय तथा टलैक्सकलानों के सफाये की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। 1519 ई. में, कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था। जहाँ उसने टाटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटनैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मॉटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा। वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया।

उसे यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टेस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों न टलैक्सकलानों (Tlaxcalans) पर हमला बोल दिया। टलैक्सकलान भी खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया। फिर वे टेनोंटिटलैन (Tenochtitlan) की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 को वहाँ पहुँच गए।

प्रश्न 19.
स्पेनी सेनानायक कोर्टस तथा एजटेक शासक मोंटेजुमा के बीच भेंट का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्पेनी आक्रमणकारी 8 नवंबर, 1519 को टेनोक्किटलैन (एजटेक साम्राज्य की राजधानी) पहुँचे। यह नगर मेडिड से पाँच गुणा बड़ा था। वहाँ एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया । एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु टलैक्सलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोगों के मन में आशंका थी। हर आदमी भयभीत होकर काँप रहा था, मानो सारी दुनिया की आँते ही बाहर निकाली जा रही हों।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मुल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट् मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के प्रयास में, कोर्टेस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई पनिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिर में एजटेक और ईसाई, दोनों की प्रतिमाएं रखवा दी गईं।

प्रश्न 20.
कोर्टेस की अनुपस्थिति में स्पेनिश सैनिकों तथा एजटेक लोगों के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्वारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटाना पड़ा था। स्पेनी शासक के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर मांगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडो ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 को कोर्टस वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जल मार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कम का सामना करना पड़ा। विवश होकर कोर्टस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोटेजुमा की रहस्मय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही टलैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस भयंकर रात को आँसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टेस को नए एजटेक शासक क्वेटेमोक (Cvatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस टलैक्सकलान में शरण लेनी पड़ी। अंततः उसने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टेनोक्लिान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट् ने अपना जीवन त्याग देना ही ठीक समझा।

प्रश्न 21.
कोलंबस ने अपनी खोज यात्रा किस प्रकार आरंभ की?
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। उसने पश्चिम की ओर से यात्रा करते हए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोज। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ। उसने इस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजनाएँ प्रस्तुत की। परन्तु वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के अधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई. को जहाज द्वारा पालोस के पत्तन से अपने अभियान पर निकल पड़ा।

प्रश्न 22.
कोलंबस के बेड़े की जानकारी देते हुए यह बताइए कि वह गुआनाहानि द्वीप पर कैसे पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (नाव) (Nao) तथा दो कैरेवल (Caravel) छोटे हलके जहाज पिंटा और ‘नीना’ शामिल थे। सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे थे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की माँग करने लगे।

अंतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई. को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा। परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह में गृआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। गआनाहानि में इस बड़े के नाविकों का अरावाक लोगों न स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को पाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

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प्रश्न 23.
वापसी यात्रा से पूर्व कोलंबस की कठिनाइयों तथा उसकी तीन अन्य यात्राओं की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटना में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापसी यात्रा अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। वापसी यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे। आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गई।

इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। इन यात्राओं से यह पता चला कि नाविकों ने ‘इंडीज (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

प्रश्न 24.
नए देशों तथा मार्गों की खोज किन कारणों से की गई?
उत्तर:
नए देशों और मार्गों की खोज अनेक कारणों से की गई। यरोप के लोग एशिया में व्यापार से बहुत धन कमाते थे, परंतु जब प्रचलित भागों पर तुकों का अधिकार हो गया तो वे नवीन मार्ग खोजने के लिए विवश हो गए। कारपीनी और मार्कोपोलो आदि के यात्रा संबंधी वृत्तातों अथवा कहानियों ने यात्रा करने की इच्छा को बलवती किया। कम्पास के आविष्कार ने दूर-दूर समुद्रों में यात्रा करना सरल कर दिया। इन सब बातों से लोगों के मन में यह भावना आ गई कि उन्हें कठिन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्राणों की बाजी लगा देनी है।

प्रश्न 25.
15वीं और 16वीं शताब्दी के किन्हीं तीन नाविकों के नाम लिखें तथा उनकी खोजों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
15वीं तथा 16वीं शताब्दी के तीन प्रसिद्ध नाविक कोलंबस, वास्कोडिगामा और मैगलेन थे। इनकी खोजों का वर्णन इस प्रकार है –

  1. कोलंबस – कोलंबस इटली का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह भारत का मार्ग ढूंढना चाहता था। अपनी यात्रा में पश्चिमी की ओर जाते हुए 1402 ई० में कोलंबस ने अमेरिका को खोज निकाला।
  2. वास्कोडिगामा – यह पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह आशा-अंतरीप से होता 1498 ई० में भारत आ पहुँचा । इस प्रकार उसने भारत पहुँचने के लिए समुद्री मार्ग की खोज की।
  3. मैगलेन – मैगलेन भी पुर्तगाल का ही रहने वाला था। 1519 ई० में उसने फिलीपाइन द्वीप तथा दक्षिण अमेरिका की खोज की।

प्रश्न 26.
नए मार्गों की खोजों से कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण परिणाम निकला? (V.Imp.)
उत्तर:
नए मागों का पता लगाने के बाद यूरोपीय लोगों ने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में व्यापार करना आरंभ कर दिया। अब वे धन, धरती और धर्म की वृद्धि सोंचने लगे। उन्होंने इन महाद्वीपों में अपने-अपने उपनिवेश बसाए। शीघ्र ही इन उपनिवेशों का धन यूरोपीय देशों में पहुँचने लगा। दासों का क्रय-विक्रय होने लगा। पादरियों ने इन उपनिवेशों में ईसाई धर्म का प्रचार शुरू किया जिसके फलस्वरूप यह धर्म विश्व का सबसे महान् धर्म बन गया । व्यापार और उपनिवेशों की स्थापना से ‘पूंजीवाद’ का उदय हुआ।

प्रश्न 27.
“16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजें आधुनिक युग को लाने में सहायक सिद्ध हुई।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
उत्तर:

  1. इन खोजों से पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  2. इन खोजों से नए-नए देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाए और इनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  3. नई खोजों से पुराने बंदरगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्बन, एंटवर्प आदि नए नगर व्यापार के केंद्र बन गए।
  4. भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गए।
  5. प्रत्येक यूरोपीय जाति ने अपने-अपने उपनिवेशों में अपने धर्म का प्रचार करने का प्रयत्न किया।
  6. 16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजों के ये महत्त्वपूर्ण परिणान आधुनिक युग के ही प्रतीक थे।

प्रश्न 28.
माया-संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
माया संस्कृति ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दियों के दौरान मैक्सिको में फली-फूली। मक्का की खेती उनकी सभ्यता का मुख्य आधार थी। उनके अनेक धार्मिक क्रिया-कलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े हुए थे। खेती करने के तरीके उन्नत और कुशलतापूर्ण थे, जिसके कारण खेतों में बहुत अधिक पैदावार होती थी। इससे शासक वर्ग, पुरोहितों और प्रधानों को एक उन्नत संस्कृति का विकास करने में सहायता मिली। माया लोगों ने वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त की। माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी। परंतु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 29.
इंका संस्कृति के राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिकी देशज संस्कृतियों में से पेरू की क्वेचुआ (Qvechuas) या इंका संस्कृति सबसे विशाल थी। प्रथम इंका शासक मैंको कपाक (Manco Capac) ने बारहवीं शताब्दी में कुजको (Cuzco) में अपनी राजधानी स्थापित की थी। नौवें शासक के काल में राज्य का बहुत अधिक विस्तार शुरू हुआ। इस प्रकार इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक लगभग 3000 मील में फैल गया। इंका साम्राज्य अत्यंत केंद्रीकृत था। राज्य की संपूर्ण शक्ति राजा में ही निहित थी।

वही सत्ता का उच्चतम स्रोत था। नए जीते गए कबीलों और जनजातियों को पूरी तरह इंका साम्राज्य में मिला लिया गया। सभी लोगों को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी। प्रत्येक कबीला स्वतंत्र रूप से वरिष्ठों की एक सभा द्वारा शासित होता था। परंतु कुल मिलाकर पूरा कबीला अपने शासक के प्रति निष्ठावान था । स्थानीय-शासकों को उनसे सैनिक सहयोग के लिए पुरस्कृत किया जाता था। इस प्रकर इंका एक संघ के समान था जिस पर इंका लोगों का शासन था। एक अनुमान के अनुसार इस साम्राज्य में 10 लाख से भी अधिक लोग थे।

प्रश्न 30.
इंका लोगों की वास्तुकला पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इंका लोग उच्चकोटि कं भवन – निर्माता थे। उन्होंने इक्वेडोर से चिली तक पहाड़ों के बीच अनेक सड़कें बनाई। उनके किले शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए गए थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे जैसी किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती थी। वे निकटवर्ती प्रदेशों में टूटकर गिरी हुई चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते थे।

इसके लिए अपेक्षा अधिक मजदूरों की जरूरत पड़ती हैं : राज मिस्त्री खंडों को सुंदर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। पत्थर के कई टुकड़े 100 मैट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे। उनके पास इतने बड़े शिलाखंडों को ढोने के लिए पहियेदार गाड़ियाँ नहीं थीं। अतः यह काम मजदूरों को जुटाकर बड़ी सावधानी से करवाया जाता था।

प्रश्न 31.
समुद्री खोजों के पीछे वास्तविक प्रेरक तत्त्व क्या थे?
उत्तर:
समुद्री खोज यात्राओं के पीछे प्रेरक तत्त्व निम्नलिखित थे –

  1. नए स्थानों की खोज करके लोगों को दास बनाना और दास व्यापार से भारी मुनाफा कमाना।
  2. व्यापार वृद्धि तथा धन कमाने की प्रबल इच्छा का उत्पन्न होना।
  3. मसाले और सोना प्राप्त करके धन और यश कमाना।
  4. रोमांचकारी साहसिक यात्राएँ करके विदेशों में ईसाई धर्म का प्रचार करना।
  5. इस समय की प्रसिद्ध समुद्री यात्राएँ वास्कोडिगामा, कोलंबस और मैगलेन आदि ने की थी।

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प्रश्न 32.
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों की क्या नीति थी?
उत्तर:
शिक्षा के प्रति एजटेक लोग बहुत ही सजग थे। वे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmecac) में भर्ती किए जाते थे। यहां उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्ने पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochacalli) में पढ़ते थे। उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिका की आदि सभ्यताओं की सामाजिक व्यवस्था व भवन-निर्माण कला की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिका की आदि सभ्यताओं-माया, इंका तथा एजटेक-के सामाजिक प्रबंध तथा भवन-निर्माण कला की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है
1. सामाजिक प्रबंध –

  • माया सभ्यता के समाज में पुरोहितों को बहुत ही ऊँचा स्थान प्राप्त था।
  • इंका सभ्यता के समय अमेरिकी समाज बहुत बड़ा हो गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान राजा का था जिसे सूर्यवंशी समझा जाता था।
  • राजा के पश्चात् कुलीन वर्ग तथा पुरोहित वर्ग का स्थान आता था।
  • राज्य की सारी भूमि पर राजा का अधिकार होता था । वह परिवार के आकार के आधार पर भूमि किसानों में बाँट देता था। कुलीनों,
  • पुरोहितों तथा राज्य कर्मचारियों को सरकारी गोदामों से अनाज मिलता था, परंतु फसल खराब हो जाने की दशा में साधारण जनता को भी सरकारी गोदाम से अनाज दिया जाता था।
  • इंका समाज का जीवन बड़ा नियोजित था। पुरुष के विवाह के लिए 24 वर्ष तथा स्त्री के विवाह के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु निश्चित थी। पेड़-पौधों तथा पशुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता था।
  • इंका समाज के कानून बड़े कठोर थे। कानून तोड़ने वाले को जीवित जला दिया जाता था। झूठ बोलने वाले की जीभ पर कील गाढ़ दी जाती थी।
  • चोरों की पहचान के लिए उनके शरीर पर विशेष मोहर लगा दी जाती थी।
  • एजटेक समाज में सैनिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे। राज-कर्मचारी सम्मानित परिवारों से चुने जाते थे।

2. भवन निर्माण कला –
भवन-निर्माण कला में अमेरिका की आदि सभ्यताओं के लोगों ने बहुत उन्नति की। उनके महल, मंदिर तथा अन्य भवन इतने सुंदर थे कि आज भी यात्री उनकी प्रशंसा करते हैं। प्रायः भवन-निर्माण पिरामिड पर होता था। कुछ भवन 200 फुट ऊंचे थे। मैक्सिकों में सूर्य का पिरामिड 216 फुट ऊँचा है। यह वर्गाकार है जो 750 वर्ग फुट क्षेत्र है। भवनों को पत्थर की मूर्तियों तथा चित्रकारी से सजाया जाता था। कोपान में एक खगोलशाला थी।

इंका सभ्यता में शानदार भवन बनाए जाते थे। कुजको में सूर्य मंदिर इंका सभ्यता की भवन निर्माण कला का उच्चतम नमूना है। इसके अतिरिक्त किले, सड़क, पुल तथा महल बहुत ही सुंदर ढंग से बने थे। भवन बनाने के लिए पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों का प्रयोग किया जाता था। इन भवनों के कारण नगरों की सुंदरता बहुत बढ़ गई थी। एजटेक लोगों की राजधानी ‘टेनोक्टिटलांग’ अथवा ‘टेकोना का प्रासाद’ की गणना मध्य अमेरिका के अत्यंत सुंदर नगरों में की जाती थी। इंका की इंजीनियरिंग कला बहुत प्रसिद्ध थी। कुजको नगर में सड़कों की एक श्रृंखला साम्राज्य के सभी भागों को जोड़ती थौं । नगरों में सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं।

प्रश्न 2.
अमेरिका की मूल माया सभ्यता के लोगों के समाज, धर्म व विज्ञान के बारे में लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता अमेरिका की मूल सभ्यताओं में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इस सभ्यता के समाज, धर्म तथा विज्ञान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –
1. समाज – माया सभ्यता का समाज पुरोहित प्रधान था। समाज में पुरोहित का बहुत ही आदर था। इस सभ्यता के नगर-राज्य चीचेन इटजा में शासन पर पुरोहितों का पूरा प्रभुत्व था। ये लोग राज्य में अपनी मनमानी कर सकते थे, परंतु स्थानीय प्रबंध में स्वशासन की व्यवस्था थी।

माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। माया लोगों की मुख्य फसल मक्का थी। कछ लोग वस्त्र बनाने, वस्रों को रंगने तथा कछ अन्य हस्त-शिल्पों में लगे हुए थे। लोगों का मुख्य भोजन मक्का, सेम, आलू, पपीता आदि थे। वे मिर्च का प्रयोग भी करते थे।

2. धर्म – माया सभ्यता के लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे। इनमें वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि तथा मक्का देवता सम्मिलित थे। अधिक वर्षा के लिए माया अपनी मूल्यवान वस्तुएँ पानी में फेंक देते थे। कई लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि की भी प्रथा प्रचलित थी।

3. विज्ञान –

  • माया लोगों ने विज्ञान में काफी प्रगति की। उन्होंने एक कैलेंडर का आविष्कार किया। यह कैलेंडर उनकी खगोल विज्ञान में प्रगति का प्रतीक है।
  • इस कलेंडर के अनुसार वर्ष में 365 दिन तथा 18 महीने होते थे। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे।
  • गणित के ई। में माया लोगों ने शून्य की जानक: दी।
  • कागज का प्रयोग तथा हेरोग्लिफिक लिपि उनकी अन्य मुख्य उपलब्धियाँ थीं। सच तो यह है कि माया सभ्यता अन्य अमेरिकी सभ्यताओं की तुलना में किसी भी दृष्टि में पीछे नहीं थी।

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प्रश्न 3.
एजटेक लोग कौन थे? उनकी सभ्यता एवं संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एजटेक लोग बारहवीं शताब्दी में उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया। पराजित लोगों से वे नजराना वसूल करने लगे।

समाज – एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। अभिजातों की संख्या बहुत कम थी। वे सरकार तथा सेना में ऊँचे पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। समाज में योद्ध, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्राय: सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

भूमि उद्धार तथा निर्माण कार्य-एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (reclamation) किया। उन्होंने सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर मैक्सिको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये। इन्हें चिनाम्या (Chinampas) कहते थे। इन अति उपजाक द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील से बाहर झाँकते दिखाई देते थे। एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह है कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

साम्राज्य का ग्रामीण होना-साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियां, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू तथा कुछ अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतिहर लोग अभिजातों की जमीन जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था। शिक्षा नीति-एजटेक लोग इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ।

कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmeacac) में भर्ती किए जाते थे। यहाँ उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्चे पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochcalli) में पढ़ते थे, जहाँ उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था। साम्राज्य का अंत-16वीं शताब्दी के आरंभ में एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता के लक्षण दिखाई देने लगे। 1516 ई० में शक्तिशाली एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

प्रश्न 4.
कोटेंस के नेतृत्व में स्पेनवासियों को दक्षिणी अमेरिका की विजय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। कोर्टस 1519 ई० में क्यूबा से मैक्सिको आया था। वहाँ उसने टोंटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटानैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा।

वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया। स्वयं मोंटेजुमा को भी यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों ने टूलैक्सकलानों पर हमला बोल दिया। लैक्सकलान खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद अंततः समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया।

फिर वे टेनोस्टिटलैन की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 ई. को वहाँ पहुंच गए। स्पेनी आक्रमणकारी टेनोक्टिटलैन के दृश्य को देखकर हक्के-बक्के रह गए। यह स्पेन की राजधानी मैडिड से पाँच गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े शहर सेविली (Seville) से दो गुनी थी। कोटेंस की एजटेक शासक से भेंट-एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टस का हार्दिक स्वागत किया। एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों-बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु लैक्सकलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोग भयभीत होकर काँप रहे थे।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मूल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट् को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के लिए, कोर्टस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई प्रतिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिरों में एजटेक और ईसाई प्रकार की प्रतिमाएँ रखवा दी गईं।

कोर्टेस का क्यूबा जाना और वापसी-इसी समय कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्चारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटना पड़ा। स्पेनी शासन के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर माँगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडी ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 ई० को कोर्टस जब वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जलमार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कमी का सामना करना पड़ा । विवश होकर कोर्टेस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोंटेजुमा की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही लैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस ‘भांकर रात’ को आंसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टस को नए एजटक शासक कवेटेमोक (Cuatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस लैंक्सकलान में शरण लेनी पड़ी।

उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आए चेचक के प्रकोप से मर रहे थे। कोर्टस ने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ नोक्टिट्लान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट ने अपना जीवन त्याग देना हो ठीक समझा। मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया। मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala), निकारागुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 5.
पिजारों कौन था? अमेरिका (इंका प्रदेश) में इसकी सफलताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पिजारो (Pizarro) एक गरीब और अनपढ़ स्पेनिश था। वह सेना में भर्ती होकर 1520 ई० में कैरीबियन द्वीपसमूह में आया था। उसने इंका राज्य के बारे में यह सुन रखा था कि वह चाँदी और सोने का देश (EI-dor-ado) है। उसने प्रशांत से वहाँ पहुँचने के लिए कई प्रयत्न किए। एक बार जब वह अपनी यात्रा से स्वदेश लौटा तो वह स्पेन के राजा से मिलने में सफल हो गया। इस मुलाकात के दौरान उसने राजा को इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए सोने के आकर्षक मर्तबान दिखाए।

राजा के मन में लोभ जाग उठा और उसने पिजारो को यह वचन दे दिया कि यदि वह इंका प्रदेश को जीत लेगा तो वह उसे वहाँ का गवर्नर बना देगा। पिजारो ने कोर्टस का तरीका अपनाने की योजना बनाई। परंतु वह यह देखकर क्षुब्ध हो गया कि इंका साम्राज्य की स्थिति भिन्न थी। पिजारो का इंका साम्राज्य में प्रवेश-1532 ई० में अताहुआल्पा (Atahualpa) ने एक गृहयुद्ध के बाद इंका साम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। तभी वहाँ पिजारो ने प्रवेश किया।

उसने जाल बिछाकर राजा को बंदी बना लिया। राजा ने अपने आप को मुक्त कराने के लिए एक कमरा भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव रखा। परंतु पिजारो ने अपना वचन नहीं निभाया । उसने राजा का वध करवा दिया और उसके सैनिकों ने जी भरकर लूटमार मचाई। इसके बाद पिजारो ने इंका राज्य पर अधिकार कर लिया। विजेताओं की क्रूरता के कारण वहाँ 1534 ई० में विद्रोह भड़क उठा जो दो साल तक चलता रहा। परिणामस्वरूप हजारों लोगों की युद्ध तथा महामारियों के कारण मौत हो गई। अगले पांच साल में स्पनियों ने पोटोसी (आज का बोलीविया) में चाँदी के विशाल भंडारों का पता लगा लिया। इन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को दास बना लिया।

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प्रश्न 6.
पेड्रो अल्वारिस कैबाल ब्राजील कैसे पहुँचा? ब्राजील में पुर्तगालियों द्वारा इमारती लकड़ी के व्यापार का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर भारत के लिए रवाना हुआ। तूफानी समुद्रों से बचने के लिए उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक बड़ा चक्कर लगाया । वह यह देखकर हैरान रह गया कि वह वर्तमान ब्राजील के समुद्र तट पर जा पहुंचा है। दक्षिणी अमेरिकी का वह पूर्वी भाग उस क्षेत्र में आता था जिसे पोप ने पुर्तगाल को सौंप रखा था। इसलिए पुर्तगाली अनवादित रूप से इसे अपना प्रदेश मानते थे।

ब्राजील की महत्वपूर्ण संपदा-पुर्तगालवासी कैबाल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर रवाना हुआ क्योंकि वह भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अधिक उत्सुक था तथा ब्राजील में सोना मिलने की कोई संभावना नहीं थी। परंतु ब्राजील का एक प्राकृतिक संसाधन इनके लिए और भी महत्त्वपूर्ण था, जिसका उन्होंने भरपूर लाभ उठाया। यह संपदा थी-इमारती लकड़ी। वहाँ के ब्राजीलवुड वृक्ष से एक सुंदर लाल रंजक (Dye) भी मिलता था।

ब्राजील के मूल निवासी लोहे के चाकू-छुनियों और आरियों के बदले में इन पेड़ों को काट कर इनके लढे जहाजों तक ले जाने के लिए भी तुरंत तैयार हो गए। वैसे भी एक हँसिए, चाकू या कंधे के बदले ढेरों मुर्गियाँ, बंदर, तोते, शहद, मोम, सूती धागा आदि वस्तुएँ देने को सदैव तैयार रहते थे। इमारती लकड़ी का व्यापार-इमारती लकड़ी के इस व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुई। इनमें अंततः पुर्तगालियों की जीत हुई।

1534 ई० में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवांशिक कप्तानियों (Captaincies)” में बाँट दिया । इनके स्वामित्व उन पुर्तगालियों को सौंपे गये जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उन्हें स्थानीय लोगों को दास बनाने का अधिकार भी दे दिया गया । ब्राजील में बसने वाले बहुत-से पुर्तगाली भूतपूर्व सैनिक थे जिन्होंने भारत के गोवा क्षेत्र में लड़ाइयाँ लड़ी थीं । स्थानीय लोगों के प्रति उनका व्यापार अत्यंत क्रूर था।

प्रश्न 7.
1540 ई० से ब्राजील में पुर्तगालियों की गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील के बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना आरंभ कर दिया। गन्ना से चीनी बनाने के लिए मिलें भी लगाई। यह चीनी यूरोप के बाजारों में बेची जाती थी। बहुत ही गर्म और नम जलवायु में चीनी की मिलों में काम करने के लिए वे स्थानीय लोगों पर निर्भर थे- जब उन लोगों ने इस नीरस काम को करने से इन्कार कर दिया तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण कर उन्हें दास बनाना आरंभ कर दिया। स्थानीय लोग दास बनाने वाले इन मिल मालिकों से बचने के लिए गाँव छोड़कर जंगलों की ओर भागने लगे। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया, तटीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लगभग सभी गाँव उजह गए।

वहाँ अब यूरोपीय लोगों के सुनियोजित कस्बे बस गए। मिल मालिकों को दास लाने के लिए अब पश्चिमी अफ्रीका की ओर मुड़ना पड़ा। परंतु स्पेनी उपनिवेशों में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। वहाँ पहले से ही एजटेक और इंका साम्राज्यों के अधिकांश लोगों से खदानों और खेतों में काम कराया जाता था। इसलिए स्पेनिश लोगों को ‘औपचारिक रूप से उन्हें दास बनाने अथवा कहीं और से दास लाने की जरूरत नहीं पड़ी।

154980 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया (Bahia) सैलवाडोर (Salvador) को उसकी राजधानी बनाया गया। इस समय तक जेसुइट पादरियों ने भी ब्राजील में आना शुरू कर दिया था। वहाँ बसे यूरोपीय लोग इन पादरियों को पसंद नहीं करते थे इसके कई कारण थे –

  • ये पादरी मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे।
  • वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और वह उन्हें यह सिखाते थे कि ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें आनंद लेना चाहिए।
  • सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्मप्रचार दास प्रा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

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प्रश्न 8.
भौगोलिक खोजों से क्या अभिप्राय है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर:
1490 ई० से 1523 ई. तक का 33 वर्ष का समय महान् भौगोलिक खोजों के लिए प्रसिद्ध है। इस काल में उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खोज की गई और इसे नई दुनिया का नाम दिया गया। अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर को पार किया गया। अनेक नवीन भौगोनिक मार्ग ढूंढे गये। हिंद महासागर और चीनसागर में भी यूरोपीय जहाज चलने लगे। अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी तट के साथ पूर्व की ओर मार्ग ढूंढा गया। इस प्रकार संसार के मानचित्र का रूप बदलने लगा।

भौगोलिक खोजों के कारण-इन भौगोलिक खोजों के कई कारण थे। यूरोप निवासियों को एशिया और विशेष रूप से भारत की वस्तुओं में बड़ी रुचि थी। व्यापारी अपना माल थल मार्ग से रोम सागर तथा काला सागर तक लाया करते थे। वहाँ से आगे समुद्री मार्ग से माल यूरोप की मंडियों में पहुंचा दिया जाता था। 15वीं शताब्दी के मध्य में तुर्की तथा इसके आस-पास के देशों पर तुकों का अधिकार हो गया। फलस्वरूप यूरोप का एशियाई व्यापार बंद हो गया। परंतु यूरोप के लोग इस लाभदायक व्यापार को समाप्त नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नवीन मार्ग खोजने के प्रयल आरंभ किये। तब यह सारा व्यापार लगभग बंद हो गया।

1. इन्हीं दिनों यूरोपियन यात्री कारपीनी और मार्कोपोलो एशिया का चक्कर लगाकर आये थे। उन्होंने अपने यात्रा विवरणों में इन देशों के विषय में अनेक अद्भुत कहानियाँ लिखीं । इन रोमांचकारी कहानियों ने यूरोप निवासियों के दिलों में इन देशों की यात्रा करने की प्रबल इच्छा पैदा की।

2. विज्ञान के नये आविष्कारों ने भी उनकी कल्पना को उभारा। कोपरनिकस ने यह घोषणा की कि पृथ्वी गोल है, जिसका यह अर्थ लिया गया कि मनुष्य चाहे किसी दिशा में यात्रा करे वह अपने लक्ष्य पर वापस पहुंचेगा। कंपास के आविष्कार के कारण दूर-दूर तक समुद्रों में यात्रा करना सरल हो गया।

3. पुनर्जागरण की लहर ने भी बड़ा प्रभाव डाला। इसने लोगों के मन में कठिन लक्ष्य पर विजय प्राप्त करने की इच्छा पैदा कर दी। नये स्थापित राष्ट्रीय राज्यों ने इस प्रकार के वातावरण का लाभ उठाया तथा उनके राजाओं ने जी-जान से उन वीरों को प्रोत्साहित किया जो खोज कार्य में भाग लेना चाहते थे।

प्रश्न 9.
सोलहवीं शताब्दी की महत्त्वपूर्ण खोजों का वर्णन कीजिए। आधुनिक युग को लाने में वे किस प्रकार सहायक सिद्ध हुई?
उत्तर:
भौगोलिक खोजों का क्रम वैसे तो 15वीं शताब्दी में आरंभ हुआ था, परंतु 16वीं शताब्दी में इस दिशा में और भी महत्त्वपूर्ण खोज यात्राएँ हुई। 1492 ई० में बार्थेलाम्यू डियाज ने आशा अंतरीप की खोज की। उससे अमेरिका, न्यूफाउंडलैंड और लैब्रेडोर का पता चला। 1498 ई० में वास्कोडिगामा ने यूरोप से भारत पहुंचने का नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। 16वीं शताब्दी के आरंभ में कोर्टिस नाविक मैक्सिको जा पहुंचा। उसने 1531 ई० में पिजारू की खोज की। परंतु इस शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक यात्रा मैगलेन नामक पुर्तगाली नाविक ने की।

वह अपने साथियों सहित अंध महासागर को पार करके दक्षिणी अमेरिका के तट तक और फिर जलडमरू के मार्ग से प्रशांत महासागर में पहुँचा। यहाँ से वह फिलिपाइन के द्वीपों में पहुंचा। यहाँ मैगलेन की मृत्यु हो गई। परंतु उसके 18 साधी एक जहाज में संसार का चक्कर काट कर स्वदेश लौट आये। इस प्रकार मनुष्य ने संसार के गिर्द अपना पहला चक्कर पूरा कर लिया।

आधुनिक युग लाने में भौगोलिक खोजों का योगदान –

  • इन खोजों से नयी समुद्री-मार्गों की खोज की गई। फलस्वरूप पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  • इन खोजों से नये-नये देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन नये प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाये और उनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  • नई खोजों से पुराने बंदगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्वन आदि नये नगर व्यापार के केंद्र बन गये।
  • भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गये।
  • प्रत्येक यूरोपीय जाति अपने-अपने देशों के उपनिवशों में जा बसी और वहाँ व्यापार करना आरंभ कर दिया।

व्यापारी वर्ग ने मध्यवर्ग को जन्म दिया। 16वीं शताब्दी के भौगोलिक खोजों से ये महत्त्वपूर्ण परिणाम आधुनिक युग के ही प्रतीक थे। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हुए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका को विजय करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहुत-से देश अपनी स्वतंत्रता खो बैठे । केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

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प्रश्न 10.
कोलंबस कौन था? उसके द्वारा अमेरिका की खोज-यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) इटली का एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। इस आधार पर वह यह जानता था कि उसके भाग्य में पश्चिम की ओर से यात्रा करते हुए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोजना लिखा है। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ।

उसने उस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजना प्रस्तुत की। वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के प्राधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई० को जहाज द्वारा पालोस के पतन से अपने अभियान पर, निकल पड़ा। कोलंबस की यात्रा-कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (Nao) तथा दो कैरवल (Caravel) छोटे हल्के जहाज हपंटा और ‘नौना’ शामिल थे।

सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की मांग करने लगे। अतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई० को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह का गुआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। वहाँ के अरावाक लोगों ने इस बेड़े के नाविकों का स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को खाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

कोलंबस ने गुआनाहानि में स्पेन का झंडा गाड़ दिया। उसने इस द्वीप का नया नाम सैन सैल्वाडोर (San, Salvador) रखा। वहाँ उसने एक सार्वजनिक उपासना कराई और स्थानीय लोगों से बिना पूछे ही अपने आपको वहाँ का वाइसराय घोषित कर दिया। उसने वहाँ के बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन (Cubanascan) और किस्केया (Kiskeya) तक जाने के लिए इन स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

कठिनाइयाँ और वापसी यात्रा – कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटनाओं में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापस यात्रा और भी अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। इस संपूर्ण यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे।

आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं। इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया । इन यात्राओं से ये पता चला कि स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही थी कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। उसके द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ (Amerigo Vespucci) के नाम पर किया गया।

प्रश्न 11.
खोज यात्राओं ने उपनिवेशीकरण तथा दास व्यापार को किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर:
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय समुद्री परियोजनाओं ने एक बात स्पष्ट कर दी कि एक महासागर से दूसरे महासागर तक यात्रा की जा सकती है। इससे पहले तक, इनमें से अधिकांश मार्ग यूरोप के लोगों के लिए अज्ञात थे। कुछ मार्गों को तो कोई भी नहीं जानता था। तब तक कोई भी जहाज कैरीबियन या अमेरिका महाद्वीपों के जल क्षेत्रों में नहीं पहुंचा था। दक्षिणी अटलांटिक तो पूरी तरह अछूता था। किसी भी जहाज ने उसके पार जाना तो दूर, उसके पानी में भी प्रवेश नहीं किया था। न ही कोई जहाज दक्षिणी अटलांटिक से प्रशांत महासागर या हिंद महासागर तक पहुँचा था।

15वीं शताब्दी के अंतिम और 16वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में ये सभी साहसिक कार्य सफलतापूर्वक किए गए। प्रारंभिक समुद्री यात्रियों के अतिरिक्त अन्य यूरोपवासियों के लिए भी अमेरिका की खोज के दीर्घकालीन परिणाम निकले। सोना-चाँदी की बाढ़ ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण में वृद्धि की। 1560 से 1600 ई० तक सैकड़ों जहाज प्रति वर्ष दक्षिणी अमेरिका की खानों से चाँदी स्पेन में लाते रहे। परंतु स्पेन और चुर्तगाल को इसका अधिक लाभ नहीं मिला।

इसका कारण यह था कि उन्होंने अपने व्यापार या व्यापारी जहाजों के बेडे का विस्तार करने में इस धन को नहीं लगाया। उनकी बजाय इसका लाभ फ्रांस, बेल्यिजम, हालैंड आदि देशों ने उठाया। उनके व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूंजी कंपनियां बनाई और अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए । उन्होंने उपनिवेश स्थापित करकं यूरोपवासियों को नयी दुनिया में पैदा होने वाली फसलों तंबाक, आलू, गन्ना, कैकाओं (Cacao) और रबड़ आदि से परिचित कराया।

इसके बाद ये फसलें भारत तथा अन्य देशों में ले जाई गई। उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए –

  • मार – काट के कारण मूल निवासियों को जनसंख्या कम हो गई।
  • उनकी जीवन – शैली का विनाश हो गया।
  • उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

इन मुठभेड़ों की बर्बरता का एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि हारे हुए लोगों को दास बना लिया जाता था। इसके साथ-साथ वहाँ उत्पादन की पूंजीवाद प्रणाली का प्रादुभाव हुआ। काम की परिस्थितियाँ भयावह थीं। परंतु स्पेनी मालिकों का मानना था कि उनके आर्थिक लाभ के लिए इस प्रकार का शोषण अत्यंत आवश्यक है।

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प्रश्न 12.
दास-व्यापार का वर्णन करते हुए यह बताइए कि दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क दिए गए?
उत्तर:
1601 ई० में, स्पेन के फिलिप द्वितीय ने सार्वजनिक रूप से बेगार की प्रथा पर रोक लगा दी। परंतु एक गुप्त आदेश द्वारा उसने इसे चालू रखने की व्यवस्था भी कर दी। 1609 ई० में एक काननू बनाया गया जिसके अंतर्गत ईसाई और गैर-ईसाई सभी प्रकार के स्थानीय लोगों को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई। इससे यूरोप से अमेरिका में आकर बसे लोग नाराज हो गए। उन्होंने दो साल के भीतर ही राजा को यह कानून हटाने और दास बचाने की प्रथा को चालू रखने के लिए मजबूर कर दिया।

दास व्यापार-अब नयी-नयी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गई। जंगलों को साफ करके प्राप्त की गई भूमि पर पशुपालन किया जाने लगा। 1700 ई० में सोने की खोज के बाद खानों का काम जोरों से चल पड़ा। इन कार्यों के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। यह भी स्पष्ट था कि स्थानीय लोग दास बनने का विरोध करेंगे। अब यही विकल्प बचा था कि दास अफ्रीका से मंगवाए जाएँ। 1550 ई० के दशक से 1880 ई० के दशक तब ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी दासों का आयात किया गया। 1750 ई० में कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास हजार-हजार दास होते थे।

दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में तर्क-दास प्रथा के उन्मूलन के बारे में 1780 ई० – के दशक में हुए वाद-विवाद में कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि यूरोपवासियों के अफ्रीका में आने से पहले भी वहाँ दास प्रथा प्रचलित थी। यहाँ तक कि पंद्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका में स्थापित किए जाने वाले राज्यों में भी अधिकांश मजदूर-वर्ग दासों का ही था। उन्होंने यह भी बताया था कि यूरोपीय व्यापारियों को युवा स्त्री-पुरुषों को दास बनाने में स्वयं अफ्रीकी लोग भी सहायता देते थे। बदले में यूरोपीय व्यापारी उन अफ्रीकावासियों को दक्षिणी अमेरिका से आयात किए गए खाद्यान्न देते थे। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में दक्षिणी अमेरिका के उपनिवशों में आकर बसे यूरोपीय लोगों ने स्पेन और पुर्तगाल के शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस प्रकार ये उपनिवेश स्वतंत्र देश बन गए।

प्रश्न 13.
माया सभ्यता का वर्णन करें।
उत्तर:
ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य मैक्सिको में माया सभ्यता उन्नति की ओर अग्रसर थी। अमेरिका महादेश में आरंभिक सभ्यताओं में यह सभ्यता काफी विकसित थी। यह सभ्यता कृषि प्रधान थी। माया लोग मक्के उपजाया करते थे। उनके धार्मिक उत्सवों का संबंध मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े थे। वे अधिशेष उत्पादन करते थे। माया समाज विभिन्न वर्गों में बँटा था।

शासक वर्ग प्रायः भोग विलास का जीवन जीते थे। पुरोहित वर्ग का समाज में विशेष महत्त्व था क्योंकि यह सभ्यता धर्म प्रधान थी। कृषक वर्ग बड़ी संख्या में थे और यही मुख्य कर-दाता वर्ग थे। माया लोगों ने वस्तु, कला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कुछ उपलब्धियाँ हासिल .. की थी। उनकी लिपि चित्रात्मक थी, जिस लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 14.
दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। [B.M.2009]
उत्तर:
इतिहासकारों ने दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के सम्बन्ध में काफी अनुसंधान किये हैं। दक्षिणी अमेरिका की संस्कृतियों के नगरे में जो जानकारी मिलती है इनमें से 12वीं शताब्दी में एजटेक लोगों की सभ्यता काफी महत्त्वपूर्ण थी। उनका समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक रहता था। समाज में व्यापारियों का भी स्थान काफी महत्त्वपूर्ण था। भूमि उपजाऊ नहीं थी। वे लोग मक्का, आलू और अन्य फसलें उपजाते थे।

दक्षिणी अमेरिका में ही माया सभ्यता के बारे में जानकारी मिलती है। माया सभ्यता के लोगों के समाज में भी पुरोहितों का काफी उच्च स्थान होता था। वे भी मुख्यतः मक्का का उत्पादन करते थे, जो उनके किलों से स्पष्ट होता है। उत्तरी अमेरिका में मिलने वाली सबसे पुरानी मानव कृति एक तीर की नोंक है जो लगभग 11000 वर्ष पहले की है। आरंभिक मूल के लोग नदी घाटी के क्षेत्र में रहा करते थे। वे मक्का एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियों उपजाते थे।

मांस, मछली भी खाया करते थे। शिकार उनके भोजन प्राप्त करने के तरीके में मुख्य होता था। वे कई भाषाएँ बोलते थे। किन्तु लिपि विकसित नहीं कर पाये थे। धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिका में यूरोपियनों का आगमन और वर्चस्व बढ़ने लगा जिससे मूल निवासियों की संस्कृति कमजोर पड़ने लगी।

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प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय की मुख्य विशेषताएँ बताइए। उनकी जीवन शैली का अंत किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और वृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। कैरिब नामक एक बूंखार कबीले ने उन्हें लघु ऐटिलीज प्रदेश से खदेड़ दिया था। अरावाकी लोग खेती तथा शिकार करके और मछली पकड़कर अपना जीवन निर्वाह करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू और कंदमूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति-अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो । वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animists) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक समाज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

अरावाकी लोगों का यूरोपियों से संपर्क तथा उनके जीवन का अंत-अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भांति सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न होते थे क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अरावाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सोने की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदा तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया। इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: स्पेनी लोगों के संपर्क में आने के बाद लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाक और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 16.
आदि अमेरिका की प्रमुख सभ्यताओं की मुख्य-मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदि अमेरिका में यों तो अनेक सभ्यताएँ फली-फूली परंतु इसमें से तीन सभ्यताएँ प्रमुख है-माया सभ्यता, एजटेक सभ्यता तथा इंका सभ्यता।
(क) माया सभ्यता – माया सभ्यता का उदय 1100 ई० के लगभग हुआ। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग में फैली हुई थी। फिर भी इन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण उपलिब्धियां प्राप्त की। माया सभ्यता की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –

  • ये लोग अनाज के खेतों के पास बस्तियों में रहते थे। उनके भोजन में मक्का, सेम, आल. पपीता, स्वकाश तथा मिर्च शामिल थे। वे सूती वस्रों का प्रयोग करते थे। वे चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग भी करते थे।
  • इनका मुख्य व्यवसाय कृषि था। भोजन के लिए अधिक-से-अधिक मक्का उगाने के उद्देश्य से ये अपने देवताओं को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते थे।
  • वे अनेक प्रकार के धार्मिक कृत्यों और कर्मकांडों में विश्वास रखते थे। उनका एक धार्मिक कृत्य रबड़ की गेंद का खेल था। उनके
  • अनेक देवता थे जिनमें अग्नि देवता और मक्का देवता मुख्य थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि चढ़ायी जाती थी।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। कहीं-कहीं स्वरों का प्रयोग भी होता था।
  • उन्होंने अनेक भव्य पिरामिड, चौक, वेधशालाएँ तथा मंदिर बनाए। वे मूर्तिकला और चित्रकला में भी बड़े निपुण थे।
  • इन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया जिसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे।
  • उन्होंने गणित के ज्ञान, हेराग्लिफिक लेखन और कागज के प्रयोग में भी निपुणता दिखायी।

(ख) एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग, जिन्हें टेनोका भी कहते हैं टेनोक्ट्टिलान, टलाटेलोको नाम की दो राजधानियाँ बसायीं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं –

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवता और अन्न देवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननो मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

(ग) इंका सभ्यता – इस सभ्यता के निर्माता इंका लोग थे। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दियों के बीच दक्षिण अमेरिका के एडियन क्षेत्र में अपनी सभ्यता को विकसित किया। इस सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थी

  • इंका लोगों ने विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसमें अनेक बड़े नगर थे। कुज्को नगर इस साम्राज्य का मुख्य केंद्र था। सारा साम्राज्य
  • चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन पुरुष शासन करता था।
  • उन्होंने नगरों में भव्य किलों, सड़कों और मंदिरों का निर्माण किया। वे सीढ़ीदार खेत बनाकर आलू, शकरकंद आदि की खेती करते थे।
  • अनाज को बड़े-बड़े सरकारी गोदामों में संकट के लिए सुरक्षित रखा जाता था।
  • कुछ लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने, कपड़ा बनाने और लामा तथा अल्पाका से ऊन प्राप्त करने के व्यवसाय भी अपनाए हुए थे।
  • इंका लोग सोने, चाँदी और ताँबे को गलाकर उनके आभूषण बनाते थे।
  • अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए काँसा प्रयोग में लाया जाता था।
  • उन्होंने चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में भी उन्नति की।
  • 16वीं शताब्दी के मध्य तक अमेरिका की आदि सभ्यताओं का अंत हो गया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्वाहिली क्या है?
(क) भाषा
(ख) तटबंध
(ग) राज्य
(घ) धर्म
उत्तर:
(क) भाषा

प्रश्न 2.
झूलते बाग किस सभ्यता की विशेषता थी?
(क) इंका
(ख) पेरू
(ग) हड़प्पा
(घ) आर्य
उत्तर:
(क) इंका

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प्रश्न 3.
कुश साम्राज्य का उदय कब हुआ?
(क) 1000 ई०पू०
(ख) 2000 ई०पू०
(ग) 3000 ई०पू०
(घ) 4000 ई०पू०
उत्तर:
(क) 1000 ई०पू०

प्रश्न 4.
ब्राजील का नाम किस पर पड़ा?
(क) पशुओं
(ख) मानव
(ग) भूमि
(घ) पेड़
उत्तर:
(घ) पेड़

प्रश्न 5.
दिशासूचक यंत्र का आविष्कार कब हुआ?
(क) 1380
(ख) 1370
(ग) 1360
(घ) 1350
उत्तर:
(क) 1380

प्रश्न 6.
तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया को कब जीता?
(क) 1653
(ख) 1553
(ग) 1453
(घ) 1353
उत्तर:
(ग) 1453

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प्रश्न 7.
पुर्तगाल के किस राजकुमार को ‘नाविक’ कहा जाता था?
(क) फ्रेडरिक
(ख) हेनरी
(ग) ड्यूक
(घ) विलियम
उत्तर:
(ख) हेनरी

प्रश्न 8.
1410 ई० में लिखी गई पुस्तक ‘इमगो मुंडी’ (डि एली द्वारा) किस विषय की है?
(क) भूगोल
(ख) इतिहास
(ग) जीव विज्ञान
(घ) रसायन विज्ञान
उत्तर:
(क) भूगोल

प्रश्न 9.
बाजामार क्या है?
(क) गहरा समुद्र
(ख) छिछला समुद्र
(ग) गहरी खाई
(घ) छिछली खाई
उत्तर:
(ख) छिछला समुद्र

प्रश्न 10.
कोलम्बस ने स्पेन का झंडा कहाँ गाड़ा था?
(क) क्यूबा
(ख) गुआनाहानि
(ग) किस्केया
(घ) इंडीज
उत्तर:
(ख) गुआनाहानि

प्रश्न 11.
इंडीज की खोज किसने की?
(क) मार्कोपोलो
(ख) वास्कोडिगामा
(ग) कोलम्बस
(घ) डिएले
उत्तर:
(ग) कोलम्बस

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प्रश्न 12.
जिगुरात क्या था?
(क) एक सीढ़ीदार मीनार
(ख) कब्रगाह
(ग) मंदिर
(घ) स्नानागार
उत्तर:
(क) एक सीढ़ीदार मीनार

प्रश्न 13.
सोने की खानों में कार्य करने हेतु दास कहाँ से आते थे?
(क) एशिया से
(ख) उत्तरी अमेरिका से
(ग) दक्षिणी अमेरिका से
(घ) अफ्रीका से
उत्तर:
(घ) अफ्रीका से

प्रश्न 14.
गोल्डरश संयुक्त राज्य अमेरिका के किस राज्य से संबंधित है?
(क) ओहियो
(ख) सैनफ्रासिको
(ग) न्यूयार्क
(घ) कैलिफोर्निया
उत्तर:
(घ) कैलिफोर्निया

प्रश्न 15.
तुर्कों के द्वारा कुस्तुंतुनिया का पतन कब हुआ?
(क) 1421 ई०
(ख) 1443 ई०
(ग) 1453 ई०
(घ) 1481 ई०
उत्तर:
(ग) 1453 ई०

प्रश्न 16.
दुनिया की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?
(क) गंगा
(ख) नील
(ग) आमेजन
(घ) मिसीमिपी
उत्तर:
(ग) आमेजन

प्रश्न 17.
सूडानी सभ्यता का केन्द्र नहीं था ………………..
(क) डेन्यूब
(ख) घाना
(ग) माली
(घ) बोनू
उत्तर:
(क) डेन्यूब

प्रश्न 18.
माया पंचांग में प्रत्येक मास कितने दिन का होता था?
(क) 20 दिन
(ख) 24 दिन
(ग) 21 दिन
(घ) 22 दिन
उत्तर:
(क) 20 दिन

प्रश्न 19.
माया लोगों के पंचांग में वर्ष में कितने दिन होते थे?
(क) 365
(ख) 365.5
(ग) 367
(घ) 161
उत्तर:
(क) 365

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प्रश्न 20.
पिजारो ने इंका राज्य को जीता …………………
(क) 1532
(ख) 1533
(ग) 1534
(घ) 1535
उत्तर:
(क) 1532

प्रश्न 21.
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ……………….
(क) 1600
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1600

प्रश्न 22.
डच इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ………………..
(क) 1602
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1602

प्रश्न 23.
कोलम्बस ने क्यूबा पर हक जमाया ………………..
(क) 1492
(ख) 1493
(ग) 1494
(घ) 1495
उत्तर:
(क) 1492

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 History 5 यायावर साम्राज्य Textbook Questions and Answers

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
मंगोलों के लिए व्यापार निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण था –
1. स्टेपी प्रदेश की जलवायु कृषि के अनुकूल नहीं थी। मौसमों के अनुसार प्रायः अत्यधिक ठंडा और गरम होता था। भीषण लम्बी शीत ऋतु के बाद थोड़े समय के लिए शुष्क ग्रीष्म ऋतु आती थी। इसलिए वहाँ व्यापार के अलावा कृषि कार्य संभव नहीं थी।

2. पशुपालक और आखेट संग्राहक अर्थव्यवस्था में घनी आबादी का अस्तित्व संभव नहीं था। इसी कारण इन क्षेत्रों में कोई भी नगर नहीं बन सके। इसलिए उन्हें वस्तुएँ बेचने के लिए दूर जाना पड़ता था।

प्रश्न 2.
चंगेज खान ने यह क्यों अनुभव किया कि मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवश्यकता है?
उत्तर:
चंगेज खान को मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवयश्कता महसूस हुई। वस्तुत: मंगोलों के विभिन्न निकायों में अविश्वसनीय रूप से अलग अलग प्रकार के लोगों का एक विशाल समूह शामिल था जिन्होंने उसकी सत्ता को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था। इसमें पराजित लोग भी शामिल थे। चंगेज खान उन विभिन्न जनजातीय समूहों की पहचान को क्रमबद्ध रूप से मिटाना चाहता था।

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प्रश्न 3.
‘यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिंतन किस तरह चंगेज खान की स्मृति के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करता है?
उत्तर:
अनेक इतिहासकारों ने यास को चंगेज खान की ‘विधि संहिता’ कहा है। वस्तुतः चंगेज खान ने 1206 ई. में कुरिलताई’ में घोषणा की थी। उसके उन जटिल विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है जो महान खान की स्मृति को बनाए रखने के लिए उसने उत्तराधिकारियों ने प्रयुक्त की थी।

अपने प्रारम्भिक स्वरूप में यह शब्द ‘यसाक’ लिखा जाता था जिसका अर्थ ‘नियम’ ‘आदेश’ या आज्ञा था। प्राप्त अल्प विवरण से ज्ञात होता है कि ‘यासक’ का संबंध प्रशासनिक विनियमों से है। 13वीं शताब्दी के मध्य तक किसी प्रकार से मंगोलों से सम्बद्ध शब्द ‘यासा’ का प्रयोग और अधिक सामान्य अर्थ में करना शुरू कर दिया।

प्रश्न 4.
यदि इतिहास नगरों में रहने वाले साहित्यकारों के लिखित विवरणों पर निर्भर करता है तो यायावर समाजों के बारे में हमेशा प्रतिकूल विचार ही रखे जायेंगे क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्या आप इसका कारण बताएंगे कि फारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियानों में मारे गए लोगों की इतनी बढ़ा-चढ़ाकर संख्या क्यों बताई है?
उत्तर:
यह सही है कि यदि इतिहास लिखित तथ्यों पर भरोसा रखता है जिसे नगरों में रहने वान साहित्यकारों ने तो यायावार समाजों के बारे में प्रतिकूल विचार ही रखे जाएँगे। वस्तुतः इन लेखकों ने यायावरों के जीवन संबंध में सूचनाएँ अत्यधिक दोषपूर्ण और पक्षापात रूप में प्रस्तुत की है।

फारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियान में मारे गये लोगों की इतनी बढ़ा संख्या चढ़ाकर निम्नलिखित कारण से बताई है –

  • इतिवृत्तकारों की सोच मंगोल के प्रति गलत थी। वे सदैव उनसे गलत कार्य विशेषरूप लूटमार और हत्या की ही आशा करते थे।
  • मारे गये लोगों की संख्या अनुमान पर आधारित है। इल्खन के फारसी इतिवृत्ताकार जुवेनी ने कहा कि मर्व में 1,300,000 लोगों का वध किया गया।
  • उसने इस संख्या का अनुमान इस प्रकार लगाया कि तेरह दिन तक 100,000 शव प्रतिदिन गिने जाते थे।

प्रश्न 5.
मंगोल और बेदोइन समाज की यायावरी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए, यह बताइए कि आपके विचार में किस तरह उनके ऐतिहासिक अनुभव एक दूसरे से भिन्न थे? इन भिन्नताओं से जुड़े कारणों को समझाने के लिए आप क्या स्पष्टीकरण देंगे?
उत्तर:
मंगोल और बेदोइन समाज घुम्मकड़ समाज था। जब तक किसी स्थान पर धन, विलास की वस्तुएँ और अन्य आवश्यकता की वस्तुएँ उपलब्ध रहती, रूके रहते थे और प्रयास, लूट और हत्या की द्वारा इन्हें प्राप्त करते थे। वस्तुत: स्टेपी-प्रदेशों में स्रोतों की कमी के कारण मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों को व्यापार और वस्तुओं के विनिमय के लिए इन अभ्रमणशील चीन बासियों के पास जाना पड़ता था। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी।

यायावर कबीले खेती के प्राप्त उत्पादों और लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे और घोड़े, फर और शिकार का विनिमय करते थे। उन्हें व्यापारिक क्रियाकलापों में काफी तनाव का सामना करना पड़ता था, क्योंकि दोनों पक्ष अधिक लाभ प्राप्त करने को होड़ में बेधड़क सैनिक कार्यवाही भी कर बैठते थे। कभी-कभी यायावर व्यापारिक शर्तो को नकार कर तत्काल लूटपाट करने लगते थे। उनकी इन प्रवृत्तियों के कारण सीमा युद्धों ने यायावर समाज को कमजोर बना दिया।

इससे कृषि कार्य में बाधा उत्पन्न हुई और नगर लूटे गये। दूसरी और यायावर, लूटपाटकर संघर्ष क्षेत्र से दूर भाग जाते थे जिससे उन्हें बहुत कम हानि होती थी। यायावरी समाज का यह कार्य ऐतिहासिक अनुभव से भिन्न नहीं है। इससे पूर्व प्राचीन काल में हुण भी यही कार्य करते थे।

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प्रश्न 6.
तेरहवीं शताब्दी के मध्य में मंगोलिया द्वारा निर्मित “पैक्स मंगोलिका” का निम्नलिखित विवरण उसके चरित्र को किस तरह उजागर करता है? फ्रेन्सिसकन मठवासी, रूबुक के विलियम को फ्रांस के सम्राट लुई IX ने राजदूत बनाकर महान खान के दरबार में भेजा। वह 1254 ई. में मोन्के की राजधानी कराकोरम पहुँचा और वहाँ वह लोरेन फ्रांस की एक महिला पेक्विटे के सम्पर्क में आया। जिसे हंगरी से लाया गया था। यह महिला राजकुमार की पलियों में से एक पत्नी की सेवा में नियुक्त थी जो लेक्टोरियन इसाई थी। वह दरबार में एक पारिशियन स्वर्णकार गुलौम बाउचर के संपर्क में आया, “जिसका भाई पेरिस के ‘ओल्ड पोल्ट’ में रहता था।” इस व्यक्ति को सर्वप्रथम रानी सोरधाक्तानी ने और उसके उपरांत मोन्के के छोटे भाई ने अपने पास नौकरी में रखा। रूबुक ने यह देखा कि विशाल दरबारी उत्सवों में सर्वप्रथम नेस्टोरिन को उनके चिट्ठों के साथ तथा इसके उपरांत मुसलमान, बौद्ध और ताओ पुजारिन को महान खान को आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया जाता था –
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य में मंगोलिया द्वारा निर्मित “पैक्स मंगोलिया” (मंगोल शांति) का उपरोक्त विवरण उसकी धर्म सहिष्णुता को दर्शाता है। मंगोल राजदरबार में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं था और विभिन्न देशों के निवासी राजदरबार में कार्य करते थे। जहाँ फ्रांस और हंगरी से सम्बद्ध थी, ईसाई थी। पर्सियन स्वर्णकार गुलौम बाउचर का भी देश अलग था। राजदरबार में शासक सभी धर्मों का आदर करता था, इसीलिए उसने ईसाई, इस्लाम, बौद्ध और ताओ धर्म के अनुयायियों को आशिर्वाद दिया। सहिष्णुता इस बात से भी झलकती है। विभिन्न धर्मों के साहित्यकार मंगोल शासकों के दरबार की शोभा बढ़ाते रहे।

Bihar Board Class 11 History यायावर साम्राज्य Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान कौन था? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
चंगेज खान का जन्म लगभग 1162 ई. में आधुनिक मंगोलिया में हुआ था । उसका प्रारंभिक नाम तेमुजिन था। उसका पिता येसुजेई कियात कबीले का मुखिया था।

प्रश्न 2.
अपने शत्रुओं को पराजित करने के बाद तेमुजिन को किस प्रकार सम्मानित किया गया?
उत्तर:
1206 ई. तक तेमुजिन ने अपने शत्रुओं को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया था। अतः मंगोल कबीले के सरदार ने उसे चंगेजखान, ‘समुद्री खान’ अथवा ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि प्रदान की। उसे मंगोलों का महानायक घोषित किया गया।

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प्रश्न 3.
चंगेज खान के चीन अभियान से पहले चीन कौन-कौन से तीन राज्यों में विभक्त था?
उत्तर:

  • उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में तिब्बती मूल के सी-सिआ लोगों का राज्य।
  • जरचेन लोगों का चिन राजवंश जिसका पेकिंग से उत्तरी चीन के क्षेत्र पर शासन था।
  • शुंग राजवंश जिसका दक्षिणी चीन पर अधिकार था।

प्रश्न 4.
चंगेज खान ने निशापुर को ध्वस्त करने का आदेश क्यों दिया?
उत्तर:
निशापुर के घेरे के दौरान एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दी गई थी। इसी कारण चंगेज खान ने निशापुर को ध्वस्त करने का आदेश दिया।

प्रश्न 5.
चंगेज खान द्वारा निशापुर को ध्वस्त कर देने के आदेश में क्या कहा गया था?
उत्तर:
इस आदेश में यह कहा गया था, “नगर का इस तरह विध्वंस किया जाए कि संपूर्ण नगर में हल चलाया जा सके। ऐसा संहार किया जाए कि बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।”

प्रश्न 6.
चंगेज खान सिंधु नदी से मंगोलिया असम मार्ग होकर वापस लौटना चाहता था परंतु उसे अपना विचार क्यों बदलना पड़ा?
उत्तर:
चंगेज खान को निम्नलिखित कारणों से अपना विचार बदलना पड़ा।

  • गर्मी बहुत अधिक थी।
  • प्राकृतिक आवास में कठिनाइयाँ थीं।
  • उसके शमन (पैगम्बर) ने कुछ अशुभ संकेत दिए थे।

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प्रश्न 7.
चंगेज खान की सैनिक सफलताओं में सहायक कोई दो कारक बताइए।
उत्तर:

  • मंगोलों तथा तुर्की की कुशल घुड़सवारी ने उसकी सेना को गति प्रदान की थी।
  • उनका घोड़े पर सवार होकर तीरंदाजी का कौशल अद्भुत था।

प्रश्न 8.
1260 के दशक के बाद मंगोल राजनीति में नई प्रवृत्तियों के उदय के क्या कारण थे?
उत्तर:

  • मंगोल हंगरी के स्टेपी क्षेत्र से पीछे हट गए थे।
  • मंगोल सेनाओं को मिस्र की सेनाओं ने पराजित कर दिया था।

प्रश्न 9.
मंगोल सेनाओं को मिस्र के हाथों पराजित क्यों होना पड़ा?
उत्तर:
मंगोल शासक चीन में अधिक रुचि लेने लगे थे। अतः उन्होंने अपनी सेनाओं को मंगोल साम्राज्य के मुख्य भागों की ओर भेज दिया । मिस में केवल एक छोटी सी सेना ही भेजी जा सकी। परिणामस्वरूप मंगोलों को पराजय का मुँह देखना पड़ा।

प्रश्न 10.
मंगोल (चंगेज खान की) सेना ने एक विशाल एवं संगठित सेना का रूप कैसे धारण किया?
उत्तर:
मंगोल जनजातियों के एकीकरण तथा विभिन्न लोगों के विरुद्ध अभियानों से चंगेज खान की सेना में अनेक नए सैनिक शामिल हो गए। ये सैनिक विविध जातियों से संबंध रखते थे। इस प्रकार मंगोल सेना ने एक विशाल एवं संगठित सेना का रूप धारण कर लिया।

प्रश्न 11.
‘बर्बर’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर:
‘बर्बर’ शब्द यूनानी भाषा के शब्द ‘बारबरोस’ शब्द से निकला है जिसका तात्पर्य गैर-यूनानी लोगों से है। यूनानियों को इनकी भाषा एक बेतरतीब शोर ‘बरबर’ के समान लगती थी।

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प्रश्न 12.
मोंके कौन था? उसने फ्रांस के शासक लुई नौवाँ को क्या चेतावनी दी थी?
उत्तर:
मोंके चंगेज खान का पोता था। उसने फ्रांस के शासक लुई नौवें को यह चेतावनी दी थी कि वह मंगोलों पर आक्रमण करने का साहस न करे।

प्रश्न 13.
चंगेज खान के पोते बाटू के 1236-1241 ई. के सैनिक अभियानों की दो सफलताएँ बताओ।
उत्तर:

  • बाटू ने रूस की भूमि को मास्को तक रौंद डाला।
  • वह पोलैंड तथा हंगरी पर विजय प्राप्त करके वियना तक जा पहुंचा।

प्रश्न 14.
मंगोल कौन थे?
उत्तर:
मंगोल विविध यायावर लोगों का जनसमुदाय था। ये लोग पूर्व के तातार, खितान तथा मंचू लोगों से संबंधित थे। ये पशुपालक तथा शिकार संग्रहक थे। पश्चिम में इनका संबंध तुर्क कबीलों से था। .

प्रश्न 15.
मंगोलों के समय में स्टेपी क्षेत्र में कोई नगर क्यों नहीं उभर पाया?
उत्तर:
मंगोलों ने कृषि को नहीं अपनाया। उनकी पशुपालक तथा शिकार संग्राहक अर्थव्यवस्थाएँ भी घनी आबादी वाले क्षेत्रों का भरण-पोषण करने में समर्थ नहीं थीं इसलिए स्टेपी क्षेत्र में कोई नगर नहीं उभर पाया।

प्रश्न 16.
धनी मंगोल परिवारों के अनेक अनुयायी होते थे। क्यों?
उत्तर:
धनी मंगोल परिवारों के पास अधिक संख्या में पशु तथा विशाल चारण भूमि होती थी। स्थानीय राजनीति में भी उनका अधिक दबदबा होता था। इसी कारण उनके अनेक अनुयायी होते थे।

प्रश्न 17.
मंगोल कबीलों को चरागाहों की खोज में क्यों भटकना पड़ता था?
उत्तर:
शीत ऋतु में मंगोल कबीलों द्वारा एकत्रित खाद्य सामग्री समाप्त हो जाती थी। वर्षा न होने पर घास के मैदान भी सूख जाते थे। इसलिए उन्हें चरागाहों की खोज में भटकना पड़ता था।

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प्रश्न 18.
उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि चंगेज खान द्वारा स्थापित राजनीतिक व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी थी।
उत्तर:

  • चंगेज खान द्वारा स्थापित राजनीतिक व्यवस्था उसकी मृत्यु के बाद भी जीवित रही।
  • यह व्यवस्था चीन, ईरान तथा पूर्वी यूरोप के देशों की उन्नत शस्त्रों से लैस विशाल सेनाओं का सामना करने में सक्षम थी।

प्रश्न 19.
मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
मंगोल स्टेपी क्षेत्र में रहते थे। इस क्षेत्र में संसाधनों की कमी थी। इसी कारण मंगोलों के लिए व्यापार महत्त्वपूर्ण था।

प्रश्न 20.
वाणिज्यिक क्रियाकलापों (व्यापार के मामलों) में मंगोलों को कभी-कभी तनाव का सामना क्यों करना पड़ता था?
उत्तर:
कभी – कभी व्यापार करने वाले दोनों पक्ष अधिक लाभ कमाने की होड़ में सैनिक कार्यवाही पर उतर आते थे। इसी कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी।

प्रश्न 21.
चीन के साथ मंगोलों के व्यापार की मुख्य मदें (वस्तुएँ) बताएँ।
उत्तर:
मंगोल चीन से कृषि उत्पाद तथा लोहे के उपकरण लाते थे। बदले में वे चीनी लोगों को शिकार किए गए पशु, घोड़े तथा फर देते थे।

प्रश्न 22.
‘चीन की महान् दीवार’ क्यों बनवाई गई?
उत्तर:
यायावर कबीले चीन पर बार-बार आक्रमण करते थे और नगरों को लूट लेते थे। उनके आक्रमणों से चीन की सुरक्षा के लिए महान दीवार बनाई गई।

प्रश्न 23.
क्या कारण था कि 13वीं शताब्दी में चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी स्टेपी के गिरोहों को भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे?
उत्तर:
स्टेपी के खानाबदोश गिरोहों ने चंगेज खान के अधीन नगरों को बुरी तरह लूटा था और उन्हें ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने अनेक नगरवासियों की निर्मम हत्याएं भी की थीं। इसी कारण चीन, ईरान तथा पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी स्टेपी के गिरोहों को भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे।

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प्रश्न 24.
यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिंतन किस तरह चंगेज खान की स्मृति के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंध को उजागर करता है?
उत्तर:
परवर्ती मंगोलों ने यास को चंगेज खान की विधि संहिता कह कर पुकारा । इसका अर्थ यह था कि वे स्वयं का विधान लागू करना चाहते थे। यही बात चंगेज खान की स्मृति (विधान) के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करती है।

प्रश्न 25.
आज मंगोलिया में चंगेज खान का क्या स्थान दिया जाता है?
उत्तर:
आज मंगोलिया में चंगेज खान को महान् राष्ट्र नायक का स्थान दिया जाता है और उसका सार्वजनिक रूप से सम्मान किया जाता है। वह मंगोलों के लिए एक आराध्य व्यक्ति है।

प्रश्न 26.
चंगेज खान के वंशजों का पृथक्-पृथक् समूहों में बँट जाने का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
चंगेज खान के वंशजों के पृथक्-पृथक् समूहों में बँटने से उनकी अपने पुराने परिवार से जुड़ी स्मृतियाँ तथा परंपराएँ बदल गईं।

प्रश्न 27.
मंगोलों द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासक कभी-कभी खानों की नीति को भी प्रभावित करने में सफल हो जाते थे। इस संबंध में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • 1230 के दशक में चीनी मंत्री ये-लू-चुत्साई ने मंगोल शासक ओगोदेई की लूटमार करने की प्रवृत्ति को बदल दिया था।
  • गजनखान के लिए उसके वजीर रशीदुद्दीन ने एक भाषण लिखा था। इस भाषण द्वारा खान को किसानों को सताने की बजाय उनकी रक्षा करने की बात कही थी।

प्रश्न 28.
मंगोल द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भर्ती का क्या महत्त्व था?
उत्तर:

  • मंगोलों द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भर्ती से दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में सहायता मिली।
  • इनके प्रशिक्षण से साम्राज्य के स्थानबद्ध लोगों की खानाबदोशों द्वारा होने वाली लूटमार में भी कमी आई।

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प्रश्न 29.
कुबकुर (qubcur) नामक कर क्या था?
उत्तर:
चंगेज खान ने एक हरकारा संचार प्रणाली आरंभ की थी। इसके लिए मंगोल यायावर अपने घोड़ों अथवा अन्य पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे इसे कुबकुर कर कहते थे।

प्रश्न 30.
विजित लोगों को अपने नये यायावर शासकों से कोई लगाव नहीं था। इसके लिए उत्तरदायी कोई चार कारण बताइए।
उत्तर:

  • नव विजित क्षेत्रों के अनेक नगर नष्ट कर दिये गए थे।
  • कृषि – भूमि को क्षति पहुंची थी।
  • व्यापार चौपट हो गया था।
  • दस्तकारियाँ अस्त-व्यस्त हो गई थीं।

प्रश्न 31.
यायावरों द्वारा नव विजित प्रदेशों में भारी पारिस्थितिक विनाश क्यों हुआ?
उत्तर:
यायावर आक्रमणों से अस्थिरता फैली। इस कारण ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों का मरम्मत कार्य नियमित रूप से न हो सका। परिणामस्वरूप मरुस्थल का विस्तार होने लगा जिससे भारी पारिस्थितिक विनाश हुआ।

प्रश्न 32.
मंगोलों के सैनिक अभियानों में विराम आने का व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मंगालों के सैनिक अभियानों में विराम आने के पश्चात् यूरोप और चीन के भू-भाग आपसी संपर्क में आए । फलस्वरूप दोनों भागों के व्यापारिक संबंध गहरे हो गए। मंगोलों की देखरेख में रेशम मार्ग का व्यापार अपने शिखर पर पहुंच गया।

प्रश्न 33.
अपने साम्राज्य में सुरक्षित यात्रा के लिए मंगोलों ने क्या व्यवस्था की हई थी? इसने मंगोल सत्त को किस प्रकार मजबूत बनाया ?
उत्तर:
मंगोल अपने साम्राज्य में सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को पास देते थे। इसके लिए व्यापारी (यात्री) टैक्स देते थे और मंगोल चंगेज खान तथा उनके उतराधिकारियों की सत्ता को समर्थन देते थे। इससे मंगोल सत्ता मजबूत बनी।

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प्रश्न 34.
चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को कौन-कौन से दो चरण में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर:
चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को निम्नलिखित दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है।

  • पहला चरण 1236 – 1242 तक का था। इस दौरान मंगोलों ने रूस के स्टेपी-क्षेत्र, बुलघार, कीव, पोलैंड तथा हंगरी में भारी सफलता प्राप्त की।
  • दूसरा चरण 1255 – 1300 तक रहा। इसमें मंगोलों ने समस्त चीन, ईरान, ईराक तथा सीरिया पर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 35.
चार उलुस (Ulus) का गठन कैसे हुआ?
उत्तर:
उलुस से अभिप्राय है साम्राज्य सीमा। अपनी नई व्यवस्था में चंगेज खान ने नव-विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इस प्रकार चार उलुस का गठन हुआ।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान की सेना विविध जातियों का मिश्रण थी। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मंगोलों तथा अन्य यायावर समाजों में सभी स्वस्थ वयस्कों के लिए शस्त्र धारण करना अनिवार्य था। आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं लोगों से सशस्त्र सेना तैयार की जाती थी। विभिन्न मंगोल जनजातियों के एकीकरण और विभिन्न लोगों के विरुद्ध अभियानों से चंगेज खान की सेना में कई नए सदस्य शामिल हो गए। ये सैनिक विविध जातियों से संबंध रखते थे। इससे छोटी-सी मंगोल सेना एक विशाल संगठन में परिवर्तित हो गई।

इसमें मंगोल सत्ता को स्वेच्छता से स्वीकार करने वाले तुर्की मूल के उइगूर समुदाय के लोग भी सम्मिलित थे। इसके अतिरिक्त इसमें केराइट सम्मिलित थे, जिन्हें अपनी पुरानी शत्रुता के बावजूद महासंघ में शामिल कर लिया गया था।

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प्रश्न 2.
चंगेज द्वारा अपनाई गई संचार प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
चंगेज खान ने एक फुर्तीली संचार (हरकारा) पद्धति अपना रखी थी जिससे राज्य के दूर स्थित स्थानों में आपसी संपर्क बना रहता था। अपेक्षित दूरी पर सैनिक चौकियाँ बनाई गई थों। इन चौकियों में स्वस्थ एवं शक्तिशाली घोड़े तथा घुड़सवार तैनात रहते थे। ये घुड़सवार संदेशवाहक का काम करते थे। इस संचार पद्धति के संचालन के लिए मंगोल यायावर अपने घोड़ों अथवा पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे।

इसे ‘कुबकुर’ कर कहते थे। यायावर लोग यह कर अपनी इच्छा से प्रदान करते थे। इससे उन्हें अनेक लाभ प्राप्त होते थे। चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् इस हरकारा पद्धति (याम) में और भी सुधार लाये गये। इस पद्धति से महान् खानों को अपने विस्तृत साम्राज्य के सुदूर स्थानों में होने वाली घटनाओं पर निगरानी रखने में सहायता मिलती थी।

प्रश्न 3.
मंगोल वंश का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मंगोल वंश का संस्थापक चंगेज खान था। उसके अनेक बच्चे थे। परंतु उसके वंश को उसकी पटरानी बोरटे के गर्भ से पैदा हुए उसके चार पुत्रों ने आगे बढ़ाया। इनके नाम थे-जोची, चघताई, ओगोदाई तथा तोलोए। चंगेज खान का सबसे बड़ा पुत्र जोची था। उसके पास अपार शक्ति थी। परंतु उसके यहाँ कोई शरवीर पैदा नहीं हुआ। जोची के पुत्र बातू ने ओगोदेई के वंश को समर्थन देने से इंकार कर दिया। अतः शक्ति तोलोए परिवार के हाथों में आ गई। इस बात ने मोंके र कुबलई के लिए सत्ता के द्वार खोल दिए।

प्रश्न 4.
मंगोलों के सैन्य अभियानों में विराम आने का राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मंगोलों के सैन्य अभियानों में विराम आने के पश्चात् यूरोप और चीन के भू-भाग आपसी संपर्क में आए। मंगोल विजय (Pax Mongolica) के कारण आई शांति से दोनों भू-भागों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हुए। मंगोलों की देख-रेख में रेशम मार्ग (Silknoute) पर व्यापार अपने शिखर पर पहुँच गया। अब व्यापारिक मार्ग चीन में ही समाप्त नहीं हो जाते थे। अब व्यापार मार्ग उत्तर की ओर मंगोलिया तथा नए साम्राज्य के केंद्र कराकोरम तक पहुँच गए।

मंगोल शासन में मेल-जोल बनाए रखने के लिए संचार तथा व्यापारियों एवं यात्रियों के लिए यात्रा को सुलभ बनाना आवश्यक था। सुरक्षित यात्रा के लिएण्यात्रियों को पास जारी किए जाते थे। इन्हें फारसी में फैजा तथा मंगोल भाषा में जेरेज कहते थे। इस सुविधा के लिए व्यापारी ‘बाज’ नामक कर अदा करते थे। इसका तात्पर्य यह था कि वे मंगोल शासक की सत्ता को स्वीकार करते हैं।

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प्रश्न 5.
तेरहवीं शताब्दी में यायावरों तथा स्थायी समुदायों के बीच विरोध कम होने से कृषि को किस प्रकार बढ़ावा मिला? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य में यायावरों और स्थायी समुदायों के बीच विरोध कम होने लगा। इससे कृषि को बहुत बढ़ावा मिला। उदाहरण के लिए 1230 के दशक में जब मंगोलों ने उत्तरी चीन के चिन वंश के विरुद्ध युद्ध में सफलता प्राप्त की तब मंगोल नेताओं के एक क्रुद्ध वर्ग ने यह विचार रखा कि वहाँ के सभी कृषकों को मौत के घाट उतार दिया जाए और उनकी कृषि-भूमि को चरागाह में बदल दिया जाए।

परंतु 1270 के दशक में शुंग वंश की पराजय के बाद जब दक्षिण चीन को मंगोल साम्राज्य में मिला लिया गया, तब चंगेज खान का पोता कुलबई खान कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में सामने आया। इसी प्रकार 1290 के दशक में मंगोल शासक गजन खान ने अपने परिवार के सदस्यों तथा संनापतियों को आदेश दिया कि वे कृषकों को न लूटें। एक बार अपने भाषण के दौरान उसने कहा था कि कृषकों को परेशान करने से राज्य में स्थायित्व और समृद्धि नहीं आती।

प्रश्न 6.
मंगोल प्रशासन में विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मंगोलों ने चंगेज खान के शासनकाल से ही विजित राज्यों से नागरिक प्रशासकों को अपने यहाँ भी करना आरंभ कर दिया था। इन्हें कभी-कभी एक स्थान से दूसरे पर भी भेज दिया जाता था। इस तरह इन्होंने दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में भी सहायता की। इससे खानाबदोश द्वारा जनजीवन पर होने वाली स्थानबद्ध लूटमार में भी कमी आई। मंगो का इन प्रशासकों पर तब तक विश्वास बना रहता था, जब तक वे अपने स्वामियों के लिए कर एकत्रित करते रहते थे।

इनमें से कुछ प्रशासक काफी प्रभावशाली थे। कभी-कभी वे खानों की नीति को भी प्रभावित करने में सफल हो जाते थे। उदाहरण के लिए 1230 के दशक में चीनी मंत्री ये-लू-चुत्साई ने ओगोदेई की लूटने की प्रवृत्ति को बदल दिया था। जुवैनी परिवार ने भी ईरान में इसी तरह की भूमिका निभाई। इसी प्रकार गजन खान के लिए वह भाषण वजीर रशीदद्दीन ने तैयार किया था, जिसमें उसने कृषक-वर्ग को सताने की बजाय उनकी रक्षा करने की बात कती थी।

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प्रश्न 7.
13वीं शताब्दी में चंगेज खान के वंशजों का अलग-अलग वंश समूहों में विभाजन किस प्रकार हुआ? यह किस बात का संकेत था?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक भाइयों द्वारा पिता के धन का मिल-बाँटकर उपयोग करने का स्थान व्यक्तिगत राजवंश स्थापित करने की भावना ने ले लिया। प्रत्येक राजवंश का – अपने-अपने क्षेत्रीय राज्य (उलुस) पर स्वामित्व होता था। इसी के परिणामस्वरूप चंगेज खान के वंशजों के बीच महान् पर तथा उत्कृष्ट चरागाही भूमि पाने के लिए होड़ लगी रहती थी। फलस्वरूप उनका अलग-अलग वंशों में विभाजन हो गया।

  • चंगेज खान के वेशज चीन और ईरान दोनों पर शासन करने के लिए आगे आए। टोलुई के वंशजों ने युआन और इल-खानी वंशों की स्थापना की।
  • जोची ने ‘सुनहरा गिरोह’ का गठन किया और रूस में स्टेपी-क्षेत्रों पर शासन किया।

प्रश्न 8.
मंगोल परिसंघ किस प्रकृति के होते थे? अंटीला तथा चंगेज खान द्वारा बनाए गए परिसंघों में क्या समानता तथा क्या असमानता थी?
उत्तर:
मंगोल परिसंघ प्राय: बहुत छोटे और अल्पकालिक होते थे। चंगेज खान ने मंगोल और तुर्की कबीलों को मिलाकर एक परिसंघ बनाया। आकार में यह परिसंघ पाँचवीं शताब्दी के अंटीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के बराबर ही था। परंतु अंटीला के बनाए परिसंघ के विपरीत चंगेज खान के परिसंघ की व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी सिद्ध हुयी। परिसंघ व्यवस्था इतनी सशक्त थी कि यह चीन, ईरान और पूर्वी यूरोपीय देशों की उन्नत शस्त्रों से लैस विशाल, सेनाओं का सामना करने में भी सक्षम थी।

यही कारण था कि मंगोल इन क्षेत्रों में नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे। उन्होंने जटिल कृषि-अर्थव्यवस्थाओं तथा स्थानबद्ध समाजों का भी बड़ी कुशलता से संचालन किया। एक बात और चंगेज खान द्वारा स्थापित परिसंघा उसकी मृत्यु के बाद भी जीवित रहा।

प्रश्न 9.
चंगेज खान के अधीन मंगोलों की सैनिक सफलताओं में किन कारकों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
चंगेज खान के अधीन मंगोलों की सफलता में मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुंचाई –

  • मंगोलों और तुकों के घुड़सवारी कौशल ने उन्की सेना को गति प्रदान की।
  • घोड़े पर सवार होकर मंगोल सैनिकों का तीरंदाजी का कौशल अद्भुत था। यह कौशल जंगलों में पशओं का शिकार करते समय प्राप्त किया था।
  • उनकी इस तीरदाजी ने उनकी सैनिक गति को और अधिक तेज कर दिया।
  • सैनिकों को अपने आसपास के भू-भागों तथा मौसम की जानकारी हो गई थी। इस बात ने सेना को अतिरिक्त क्षमता प्रदान की।
  • अत: उन्होंने प्रचंड शीत ऋतु में युद्ध अभियान प्रारंभ किए तथा शत्रु के नगरों एवं शिविरों में प्रवेश करने के लिए बर्फ से जमी हुई नदियों का राजमार्गों की तरह प्रयोग किया।
  • यायावर लोग यूं तो किलेबंद शिविरों तक पहुँचने में सक्षम नहीं थे; परंतु चंगेज खान। ने घेराबंदी की नीति अपनाकर इस कार्य को सरल बना दिया।
  • चंगेज खान के इंजीनियरों ने हलके चल-उपस्करों का निर्माण किया। ये उपस्कर शत्रु के लिए घातक सिद्ध हुए।

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प्रश्न 10.
मंगोल किम क्षेत्र के निवासी थे। इस क्षेत्र का परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र के निवासी थे। यह प्रदेश आज के आधुनिक मंगोलिया राज्य का भू-भाग था। उस समय इस क्षेत्र का परिदृश्य आज जैसा ही मनोरम था। यह प्रदेश लहरदार मैदानों से घिरा था। इसके पश्चिमी भाग में अल्ताई पहाड़ों की बर्फीली चोटियाँ। थी, जबकि दक्षिणी भाग में गोबी का शुष्क मरुस्थल फैला था। इसके उत्तर और पश्चिम के। क्षेत्र का ओनोन एवं सेलेंगा नदियाँ और बर्फीली पहाड़ियों से निकले सैकड़ों झरने सींचते थे।

पशुपालन के लिए यहाँ पर हरी-भरी घास के मैदान थे। अनुकूल ऋतुओं में यहाँ प्रचुर मात्रा में। छोटे-मोटे शिकार उपलब्ध हो जाते थे। स्टेपी क्षेत्र में तापमान सारा साल लगभग एक समान रहता था। शीत ऋतु के कठोर और लंबे मौसम के बाद छोटी एवं शुष्क गर्मियों की अवधि आती थी। चारण क्षेत्र में साल की कुछ सीमित अवधियों में ही कृषि करना संभव था।

प्रश्न 11.
मंगोल कबीलों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  • मंगोल कबीले नृजातीय और भाषायी संबंधों के कारण आपस में जुड़े हुए थे। परंतु उपलब्ध आर्थिक संसाधनों के अभावों के कारण उनका समाज अनेक पितृपक्षीय वंशों में विभाजित था।
  • धनी-परिवार विशाल होते थे। उनके पास अधिक संख्या में पशु और चारण भूमि होती थी। स्थानीय राजनीति में भी उनका अधिक दबदबा होता था। इसलिए उनके अनेक अनुयायी होते थे।
  • समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक पदाओं जैसे कि भीषण शात-ऋतु के दौरान उनके द्वारा एकत्रित शिकार-सामग्रियाँ तथा अन्य
  • गद्य भंडार समाप्त हो जाते थे। वर्षा न होने पर घास के मैदान भी सूख जाते थे। इसलिए न्हें चरागाहों की खोज में भटकना पड़ता था।मंगोल कबीलों में आपसी संघर्ष में ता था। पशुधन प्राप्त करने के लिए वे लूटपाट भी करते थे।
  • प्रायः परिवारों के समूह आक्रमण रने अथवा अपनी रक्षा करने के लिए शक्तिशाली जों से मित्रता कर लेते थे और परिसंघ ना लेते थे।

प्रश्न 12.
मंगोल कौन-कौन थे? नके जन-जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मंगोल विविध यायावरी लोर का जनसमुदाय था। ये लोग पूर्व में तातार, खितान र मंचू लोगों से संबंधित थे। पश्चि में इनका संबंध भाषागत समानता होने के कारण तुर्की बीलों से था। कुछ मंगोल पशुपालक और कुछ शिकार-संग्राहक थे। पशुपालक भेड़-बकरियाँ, आदि पशु पालते थे।

शिकारी – संग्राहक लोग, पशुपा क कबीलों के आवास क्षेत्र के उत्तर में साइबेरिया के वनों मंहले थे। वे पशुपालक लोगों की अपेक्षा अधिक गरीब थे। अपना जीवन-निर्वाह ग्रीष्म काल में गए जानवरों की खाल के पापार से करते थे। मंगोल तंबुओं और जर में निवास करते थे। मामयों में वे अपने पशुधन के ‘राथ शीतकालीन निवास स्थल से ग्रीष्मकालीन चारण-भूमि की ओर चले जाते थे।

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प्रश्न 13.
मंगोल साम्राज्य को चंगेज खान की क्या देन थी?
उत्तर:
देखने में ऐसा लगता है कि चंगेज खान एक हत्यारा और लुटेरा था जिसने नगरों को ध्वस्त किया और हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसलिए तेरहवीं शताब्दी में चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी चंगेज खान के लूटेरे गिराहों को भय तथा घृणा की दृष्टि से देखते थे। परंतु मंगोलों के लिए चंगेज खान अब तक का सबस महान् शासक था।

उसने मंगोलों को संगठित किया और लंबे समय से चली आ रही कबीलाई लड़ाईयों तथा चीनियों द्वारा शोषण से मुक्ति दिलवाई। उसने एक शानदार पारमहाद्वीपीय साम्राज्य स्थापित किया और व्यापार मार्गों और बाजारों को नया जीवन दिया। फलस्वरूप मंगोल सड बने।

प्रश्न 14.
विजित लोग अपने मंगोल शासकों को पसंद क्यों नहीं करते थे? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
विजित लोग अपने मंगोल शासकों को पसंद नहीं करते थे। इस कई कारण थे –

  • तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हुए युद्धों में अनेक नगर नष्ट कर दिए गए थे।
  • कृषि भूमि को भारी हानि पहुंची थी।
  • व्यापार चौपट हो गया था तथा दस्तकारी अस्त-व्यस्त हो गई थी।
  • इन युद्धों में हजारों लोग मारे गए थे और इससे भी अधिक लोग दास बना लिए गए थे।
  • अत: संभ्रांत लोगों से लेकर कृषक-वर्ग तक सभी लोगों को भारी कष्टों का सामना करना पड़ा।

परिणाम – इससे राज्य में अस्थिरता के कारण ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों का मरम्मत कार्य नियमित रूप से न हो सका । नहरों की मरम्मत न होने से मरुस्थल का विस्तार होने लगा, जिससे भारी पारिस्थितिक विनाश हुआ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चार ‘उलुस’ का गठन किस प्रकार हुआ? इन ‘उलुस’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
चंगेज खन ने नव-विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इससे चार ‘उलुस’ का गठन हुआ। उलुस से अभिप्राय साम्राज्य की सीमा से था। दूसरी ओर चंगेज खान अभी भी निरंतर विजयों और साम्राज्य को अधिक-से-अधिक बढ़ाने में व्यस्त था। इसलिए साम्राज्य की सीमाएं लगातार बदलती रहती थीं।

चार उलस –

  • चंगेज खान के सबसे बड़े पुत्र जोची को रूसी स्टेपी-क्षेत्र प्राप्त हुआ। परंतु इसकी दूरस्थ सीमा निश्चित नहीं थौं। इसका विस्तार सुदूर पश्चिम तक था।
  • उसके दूसरे पुत्र चघताई को तरान का स्टेपी-क्षेत्र तथा पामीर पर्वत का उत्तरी क्षेत्र मिला जो उसके भाई के प्रदेश के साथ लगता था। संभवतः जैसे-जैसे वह पश्चिम की ओर बढ़ता गया होगा, वैसे-वैसे उसका अधिकार क्षेत्र भी बढ़ता गया होगा।
  • चंगेज खान ने संकेत दिया था कि उसका तीसरा पुत्र ओगोदोई उसका उत्तराधिकारी होगा और उसे महान् खान की उपाधि दी जाएगी। ओगोदोई ने अपने राज्याभिषेक के बाद अपनी राजधानी कराकोरम में स्थापित की।
  • चंगेज खान के सबसे छोटे पुत्र तोलोए को अपनी पैतृक भूमि मंगोलिया प्राप्त हुई।
  • चंगेज खान का विचार था कि उसके पुत्र आपस में मिल कर साम्राज्य का शासन सम्भालेंगे। इसलिए उसने विभिन्न राजकुमारों के लिए
  • अलग-अलग सैन्य टुकड़ियाँ (तामा) निर्धारित कर दी। ये सैनिक टुकड़ियाँ प्रत्येक ‘उलुस’ में तैनात रहती थीं। राज्य में परिवार के सदस्यों की भागीदारी का आभास सरदारों की परिषद् में होता था।
  • इस परिषद् में परिवार या राज्य के भविष्य, अभियानों, लूट के माल के बँटवारे, चरागाह भूमि और उत्तराधिकारी आदि से संबंधित निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते थे।

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प्रश्न 2.
13वीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य की क्या स्थिति थी? इसमें यास की क्या भूमिका थी?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक मंगोलों ने एक एकीकृत जनसमूह का रूप धारण कर लिया था। उन्होंने एक बहुत विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। उन्होंने अति जटिल शहरी समाजों पर शासन किया जिनके अपने-अपने इतिहास, संस्कृतियाँ और नियम थे। भले ही मंगोलों का अपने साम्राज्य पर राजनैतिक प्रभुत्व था, फिर भी संख्या की दृष्टि से वे अल्पसंख्यक ही थे। वे अपनी पहचान और विशिष्टता की रक्षा केवल उसी पवित्र नियम (यास) द्वारा कर सकते थे, जो उन्हें अपने पूर्वजों से प्राप्त हुआ था।

इस बात की पूरी संभावना है कि यास मंगोल जनजाति की ही प्रधागत परंपराओं का एक संकलन था। परंतु उसे चंगेज खान की विधि-संहिता कहकर मंगोलों ने स्वयं के विधान-निर्माता (कानून बनाने वाले) होने का ही दावा किया। इसका अर्थ था। इसका कारण यह था कि दोनों पक्ष अधिक लाभ प्राप्त करने की होड़ में एक-दूसरे के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही पर उतर आते थे।

चीन की अर्थव्यवस्था तथा राजनीति पर प्रभाव-जब मंगोल कबीलों के लोगों के साथ मिलकर व्यापार करते थे, तो वे चीनी लोगों को व्यापार में बेहतर शर्ते रखने के लिए विवश कर देते थे। कभी-कभी ये लोग व्यापारिक संबंधों की उपेक्षा करके लूटपाट भी करने लगते थे। मंगोलों का जीवन अस्त-व्यस्त होने पर स्थिति चीनियों के पक्ष में हो जाती थी। ऐसी स्थिति में चीनी लोग स्टेपी-क्षेत्र में अपने प्रभाव का प्रयोग बड़े आत्मविश्वास से करते थे।

इन सीमावर्ती झड़पों से चीन का स्थायी कमजोर पड़ने लगा। कृषि अव्यवस्थित हो गई और चीनी नगरों को लूट लिया गया। दूसरी ओर यायावर कबीले लूटमार करके दूर भाग जाते थे जिससे उन्हें बहुत कम क्षति पहुँचती थी। इसके विपरीत चीन को इन यायावरों से बहत अधिक क्षति पहुँची । अतः शताब्दी ई. पू. से इस किलेबंदियों का एकीकरण करके एक विशाल रक्षात्मक ढाँचा तैयार किया गया। यह ढाँचा ‘चीन की महान् दीवार’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
चंगेज खान के बाद मंगोलों की राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
1227 ई. में चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है –
1. पहला चरण 1236 – 1242 तक था। इसके दौरान मंगोलों ने रूस के स्टेपी-क्षेत्र, बलवार, कीव, पोलैंड तथा हंगरी में भारी सफलता प्राप्त की।

2. दूसरा चरण 1255 – 1300 तक रहा। इसमें मंगोलों ने समस्त चीन, ईरान, ईराक तथा सीरिया पर विजय प्राप्त की। इन दोनों चरणों में मंगोल शासकों की राजनीतिक गतिविधियों का वर्णन इस प्रकार हैं

1230 ई. के बाद के दशकों में मंगोल सेनाओं को बहुत ही कम प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परंतु 1260 के दशक के बाद पश्चिम के सैन्य अभियानों के आवेश को जारी न रखा जा सका तथा उसमें शिथिलता आ गयी। यद्यपि वियना और उससे आगे पश्चिमी यूरोप एवं मिय, मंगोल सेनाओं के अधिकार में ही रहे, तथापि उन्हें हंगरी के स्टेपी-क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा और मिस्र की सेनाओं के हाथों पराजय का मुंह देखना पड़ा इससे मंगोल राजनीति में नई प्रवृत्तियों का उदय हुआ। इस प्रवृत्ति के दो पहलू थे।

1. पहला था – मंगोल परिवार में उत्तराधिकर को लेकर आंतरिक राजनीति जिसमें जोची और ओगोदोई के उत्तराधिकारी ‘महान खान’ के राज्य पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए एकजुट हो गए। वे यूरोप में आभयान जारी रखने की अपेक्षा अपने राजनीतिक हितों की रक्षा करने में जुट गए।

2. दूसरी स्थिति तब उत्पन्न हुई जब चंगेज खान के वंश की तोलयिद शाखा के उत्तराधिकारियों ने जोची और ओगोदेई वंशों को कमजोर बना दिया। चंगेज खान के सबसे छोटे पुत्र तोलुई के एक वंशज मोंके के राज्याभिषेक के बाद तोलुइयों ने 1250 के दशक में ईरान के विरुद्ध शक्तिशाली अभियान किए। परंतु 1260 के दशक में तोलई के वंशज चीन विजय में रुचि लेने लगे। इसलिए सैनिकों तथा रसद-सामग्री को मंगोल साम्राज्य के मुख्य भागों की ओर भेज दिया गया।

परिणामस्वरूप मिस्र की सेना का सामना करने के लिए केवल एक छोटी-सी सैनिक टुकड़ी को ही भेजा जा सका जिसके कारण मंगोलों को पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस पराजय और तोलुई परिवार की चीन के प्रति निरंतर बढ़ती रुचि के कारण उनका पश्चिम की ओर विस्तार चलीं। परंतु चंगेज खान अपने अभियानों की प्रगति से पूरी तरह संतुष्ट था। इसलिए वह उस क्षेत्र के सैनिक मामले अपने अनुयायियों की देख-रेख में छोड़ 1216 में अपनी मातृभूमि मंगोलिया लौट आया।

रुक गया। इसी दौरान रूस और चीन की सीमा पर जोची और तोलूई वंशजों के अंदरूनी झगड़ों ने जोची वंशजों का उनके संभावित यूरोपीय अभियानों से ध्यान हटा दिया। पश्चिम में मंगोलों का विस्तार रुक जाने पर भी चीन में उनके अभियान में कोई बाधा न पड़ी। अत: उन्होंने चीन को एकीकृत किया।

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प्रश्न 6.
चंगेज खान कौन था? वह मंगोलों का महानायक कैसे बना?
उत्तर:
चंगेज खान का जन्म लगभग 1162 ई. में आधुनिक मंगोलिया में ओनोन नदी के निकट हुआ था। उसका प्रारंभिक नाम तेमुजिन था। उसके पिता का नाम येसूजेई (Yesugei) था जो कियात कबीले का मुखिया था। उसके पिता की अल्पायु में ही हत्या कर दी गई थी। अत: उसकी माता ओलुन-इकेले ने तेमुजिन और उसके सगे तथा सौतेले भाइयों का लालन-पालन बड़ी कठिनाई से किया। 1170 के दशक में तेमुजिन का अपहरण कर उसे दास बना लिया गया।

उसकी पत्नी बोरटे (Borte) का भी अपहरण कर लिया गया। अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए उसे लड़ाई लड़नी पड़ी। विपत्ति के इन वर्षों में भी वह अनेक मित्र बनाने में सफल रहा। नवयुवक बोघरचू उसका पहला मित्र था। उसने सदैव एक विश्वस्त साथी के रूप में तेमुजिन का साथ दिया। तेमुजिन का सगा भाई जमूका उसका एक अन्य विश्वसनीय मित्र था। तेजिन ने अपने पिता के वृद्ध भाई तुगरिल उर्फ ओंग खान के साथ पुराने रिश्तों को पुनः जीवित किया। वह कैराईट लोगों का शासक था।

चंगेज खान महानायक बनने की राह पर-तेमूजिन का साग भई जमूका बाद में उसका शत्रु बन गया। 1180 और 1190 के दशकों में तेमुजिन ने ऑग खान की सहायता से जमूका जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वनि यों को परास्त किया । जमूका को पराजित करने के बाद तेमुजिन का आत्म-विश्वास बढ़ गया। अब वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध के लिए निकल पड़ा। इनमें से उसके पिता के हत्यारे शक्तिशाली तातार, कैराईट और स्वयं ऑग खान शामिल थे। 1206 में उसने शक्तिशाली जमूका और नेमन लोगों को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया।

चंगेज खान महानायक घोषित-अपने शत्रुओं पर विजय पा लेने के पश्चात् तेमुजिन स्टेपी-क्षेत्र की राजनीति में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरा । उसकी इस प्रतिष्ठा को मंगोल कबीले के सरदार अर्थात् कुरिलताई की एक सभा में मान्यता दी गई। इस सभा में उसे चंगेज खान ‘समुद्र खान’ अर्थात् ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि देकर मंगोलों का महानायक घोषित किया गया ।

प्रश्न 7.
कुरिलताई से मान्यता मिलने के पश्चात् चंगेज खान की सैनिक सफलताओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
1206 ई. में कुरिलताई से मान्यता मिलने से पूर्व चंगेज खान ने मंगोलों को एक सशक्त एवं अनुशासित सैन्य शक्ति के रूप में पुनर्गठित कर लिया था। अब वह चीन विजय प्राप्त करना चाहता था। चीन उस समय तीन राज्यों में विभक्त था। वे थे –

  • उत्तर – पश्चिम प्रांतों पर सी-सिआ (Hsi-Hsia) लोगों का शासन था।
  • चिन वंश जो पेकिंग से उत्तरी चीन का शासन चला रहा था।
  • दक्षिणी चीन पर शुंग वंश का आधिपत्य था।

चीन-विजय –

  • 1209 में सी-सिआ लोग मंगोल से परास्त हो गए।
  • 1213 ई. में चीन की महान् दीवार का अतिमण हो गया। इसके दो वर्ष बाद 1215 ई. में पेकिंग नगर को लूटा गया। वहाँ के चिन वंश के विरुद्ध 1234 तक मंगोलों की लंबी लड़ाइयाँ
  • 1218ई. में मंगोलों ने चीन के उत्तर:पश्चिम में स्थित तियेन-शान की पहाड़ियों को नियंत्रित करने वाली करा खिता (qarakhita) को
  • पराजित कर दिया। इस विजय से मंगोलों का साम्राज्य अमूदरिया, तुरान और ख्वारजम राज्यों तक फैला गया। ख्वारजम के सुल्तान
  • मोहम्मद को मंगोल दूतों का वध करने के कारण चंगेज खान की प्रचंड क्रोधाग्नि का सामना करना पड़ा।

अन्य अभियान – 1219.1221 ई. के अभियानों में बड़े-बड़े नगरों-ओट्रार, बुखारा, समरकंद, बल्ख, गुरगंज, पर्व, निशापुर और हेरात-ने मंगोल सेनाओं के सामने आत्म-समर्पण कर दिया। जिन नगरों ने मंगोलों का प्रतिरोध किया उनका विनाश कर दिया गया। निशापुर के घेरे के दौरान जब एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दी गई तो चंगेज खान ने यह आदेश दिया, “नगर का इस तरह विध्वंस किया जाए कि संपूर्ण नगर में हल चलाया जा सके, ऐसा संहार किया जाए कि नगर के बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।”

इसी बीच मंगोल सेनाएँ सुल्तान मोहम्मद का पीछा करते हुए अजरबैजान तक आ पहुंची। क्रीमिया में रूसी सेनाओं को हराने के बाद उन्होंने कैस्पियन सागर को घेर लिया। सेना की एक अन्य टुकड़ी ने सुल्तान के पुत्र जलालुद्दीन का अफगानिस्तान और सिंध तक पीछा किया। सिंधु नदी के तट पर पहुँच कर चंगेज खान ने उत्तरी भारत और असम मार्ग होते हुए वापिस मंगोलिया लौटने का विचार किया।

परंतु अत्यधिक गर्मी, प्राकृतिक आवास की कठिनाइयों तथा अपने पैगंबर द्वारा दिए गए अशुभ संकेतों ने उसे अपना विचार बदलने पर विवश कर दिया। अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में व्यतीत करने के बाद 1227 में चंगेज खान की मृत्यु हो गई। उसकी सैनिक सफलताएँ नि:संदेह विस्मित करने वाली थीं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान का जन्म कब हुआ था?
(क) 1062 में
(ख) 1162 में
(ग) 1150 में
(घ) 1170 में
उत्तर:
(ख) 1162 में

प्रश्न 2.
चंगेज खान की मृत्यु कब हुई?
(क) 1227 में
(ख) 1230 में
(ग) 1240 में
(घ) 1260 में
उत्तर:
(क) 1227 में

प्रश्न 3.
तेमुजिन किस मंगोल खान का मूल नाम था?
(क) चंगेज खाँ
(ख) बाटू खाँ
(ग) कुबलई खाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) चंगेज खाँ

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प्रश्न 4.
किस मंगोल सेना नायक ने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम ग्रहण किया?
(क) चंगेज खाँ
(ख) चगताई खाँ
(ग) कुबलई खाँ
(घ) गजन खाँ
उत्तर:
(घ) गजन खाँ

प्रश्न 5.
अफीम युद्ध किन दो देशों के बीच हुआ?
(क) चीन एवं फ्रांस
(ख) जापान एवं रूस
(ग) चीन एवं जापान
(घ) चीन एवं ब्रिटेन
उत्तर:
(घ) चीन एवं ब्रिटेन

प्रश्न 6.
चीन में साम्यवादी पार्टी की स्थापना कब हुई?
(क) 1911
(ख) 1921
(ग) 1945
(घ) 1947
उत्तर:
(ख) 1921

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प्रश्न 7.
साम्यवादियों के द्वारा पराजित होकर च्यांग काई शेक भागकर कहाँ गया?
(क) ताईवान
(ख) शैन्सी
(ग) कैन्टन
(घ) फुन्ना
उत्तर:
(क) ताईवान

प्रश्न 8.
आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं …………………
(क) माओ-त्से-तुंग
(ख) डा. सनयात सेन
(ग) चियांग काई शेक
(घ) चाऊ एनलाई
उत्तर:
(ख) डा. सनयात सेन

प्रश्न 9.
यायावर का अर्थ है ………………….
(क) घुमक्कड़
(ख) आबारा
(ग) जनजाति
(घ) प्रजाति
उत्तर:
(क) घुमक्कड़

प्रश्न 10.
चंगेज खान का प्रारंभिक नाम था …………………
(क) तेमुजिन
(ख) सीसुजिन
(ग) च्यांग
(घ) सनयात् सेन
उत्तर:
(क) तेमुजिन

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प्रश्न 11.
रूस में मंगोलों का राज्य कितने वर्षों तक रहा?
(क) 300
(ख) 400
(ग) 200
(घ) 600
उत्तर:
(क) 300

प्रश्न 12.
ओगोदेई किसका पुत्र था?
(क) चंगेज खान
(ख) अरब खान
(ग) च्यांग सेन
(घ) गुयूक
उत्तर:
(क) चंगेज खान

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प्रश्न 13.
मंगोलिया गणराज्य कब बना?
(क) 1921 में
(ख) 1920 में
(ग) 1930 में
(घ) 1940 में
उत्तर:
(क) 1921 में

प्रश्न 14.
चीन में यूआन राजवंश का अंत कब हुआ?
(क) 1368 में
(ख) 1360 में
(ग) 1367 में
(घ) 1371 में
उत्तर:
(क) 1368 में

प्रश्न 15.
चंगेज खान का वंशज था …………………..
(क) तैमूर
(ख) अकबर
(ग) जहाँगीर
(घ) गजनवी
उत्तर:
(क) तैमूर

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Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था (Positive Feedback Mechanism) को दर्शाने वाले आरेख को देखिए क्या आप उन निवेशों (Inputs) की सूची दे सकते हैं जो औजारों के निर्माण में सहायक हुई? औजारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला?

सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था –

किसी बॉक्स विशेष की ओर इंगित तीर के निशान उन प्रभावों को बताते हैं जिनकी वजह से कोई विशेषता विकसित हुई।
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उत्तर:
औजारों के निर्माण में सहायक निवेश –

  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि।
  • औजारों के इस्तेमाल के लिए और बच्चों व चीजों को ले जाने के लिए हाथों का मुक्त होना।
  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।

प्रक्रियाएँ जिनको औजारों के निर्माण से बल मिला –

  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।
  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि

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प्रश्न 2.
मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पाई जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ। (क) व्यवहार और (ख) शरीर रचना शीर्षकों के अंतर्गत दो अलग-अलग स्तंभ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अंतरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्वपूर्ण समझते हैं ?
उत्तर:
समानताएँ :
(क) व्यवहार और –
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(ख) शरीर रचना –
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असमानताएँ:
(क) व्यवहार और –
Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत स
(ख) शरीर रचना –
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प्रश्न 3.
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए हैं। तर्कों पर चर्चा कीजिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है?
उत्तर:
मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न ‘देशों में रहने वाले होमो सैपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया। इस तर्क का आधार आज के मनुष्यों में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं। इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचारों के मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्त्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं-(क) संग्रहण, (ख) औजार बनाना, (ग) आग का प्रयोग।
उत्तर:
औजार बनाना।

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प्रश्न 5.
भाषा के प्रयोगों से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी ? इस पर चर्चा करिए । इन क्रियाकलापों के लिए विचार-संप्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?
उत्तर:
भाषा के प्रयोगों से शिकार करने तथा आश्रय बनाने में बहुत अधिक सुविधा मिली होगी जिसका वर्णन इस प्रकार है
(क) शिकार करने में –

  • लोग शिकार की योजना बना सकते थे।
  • वे शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा कर सकते थे।
  • वे विभिन्न क्षेत्रों में जानवरों के बहुतायत की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे जानवरों की प्रकृति एवं स्वभाव पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे शिकार के लिए औजारों में सुधार ला सकते थे।
  • वे मारे गए जानवर के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों के उपयोग पर चर्चा कर सकते थे।

(ख) आश्रय बनाने में –

  • लोग आश्रय बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों पर चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल के निकट उपलब्ध सुविधाओं पर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के तरीकों तथा तकनीकों की जानकारी एक-दृशो को दे सकते थे। इन क्रिया-कलापों के लिए लाग भाषा के अतिरिक्त संकेतों तथा चित्रकारियों का प्रयोग कर सकते थे।

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प्रश्न 6.
अध्याय के अंत में दिए गए प्रत्येक कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइये कि इनका क्या महत्व है?
उत्तर:
1. होमिनॉइड और होमोनिड शाखा विभाजन (64 लाख वर्ष पूर्व) – लगभग 64 लाख वर्ष पूर्व होमिनॉइड उपसमूह में ‘होमिनिइड’ वर्ग का विकास हुआ। यह प्राणियों का पहले से अधिक विकसित रूप था। इनके मस्तिष्क का आकार होमिनॉइड से बड़ा था । होमिनॉइड चार पैरों के बल चलते थे। जबकि होमिनिड सीधे खड़े होकर दो पैरों के बल चलते थे। होमिनिड के हाथ भी विशेष प्रकार के थे। इनकी सहायता से वे औजार बना सकते थे और उनका प्रयोग कर सकते थे।

2. पत्थर के सबसे पहले औजार (26-25 लाख वर्ष पूर्व) – आज से लगभग 26-25 लाख वर्ष पूर्व मानव ने पत्थर के सबसे पहले औजार बनाये और उनका प्रयोग करना सीखा। भले ही ये सादे तथा खुरदरे थे, तो भी मानव हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो गया। उसके लिए जानवरों का शिकार करके भोजन प्राप्त करना भी सरल हो गया ।

कालानुक्रम – 2

1. स्वर – तंत्र का विकास-मानव में स्वर तंत्र के विकास का विशेष महत्त्व है। इससे मानव को बोलने की शक्ति मिली और वह अपने मन के विचार बोल कर प्रकट करने लगा। इससे शिकार करने, औजार बनाने तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए नये तरीकों तथा तकनीकों का विकास. भी हुआ।

2. चूल्हों के इस्तेमाल के बारे में सबसे पहला साक्ष्य – चूल्हों के इस्तेमाल का सबसे पहला साक्ष्य दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा से मिला है। यहाँ दो चूल्हे पाये गए हैं। ये आग के नियंत्रित प्रयोग को दर्शाते हैं। इससे पता चलता है कि मानव लगभग 25000 वर्ष पूर्व आग का नियत्रित प्रयोग करना सीख गया था। वह आग से गुफाओं में प्रकाश करता था, उष्णता प्राप्त करता था और भोजन पकाता था। वह आग का इस्तेमाल भाले की नोक बनाने तथा खतरनाक जानवरों को भगाने के लिए भी करता था।

Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रजाति या स्पीशीज क्या होती है?
उत्तर:
प्रजाति ऐसे जीवों का एक समूह होती है जो प्रजनन द्वारा नई संतान उत्पन्न कर सकते हैं। परंतु एक प्रजाति के जीव किसी अन्य प्रजाति के जीवों से प्रजनन करके संतान पैदा नहीं कर सकते।

प्रश्न 2.
आदि मानव के इतिहास की जानकारी में किन-किन खोजों ने सहायता पहुंचाई है?
उत्तर:
मानव के जीवाश्मों, पत्थर के औजारों तथा गुफाओं की चित्रकारियों की खोजों ने।

प्रश्न 3.
विलुप्त हो चुकी मानव प्रजातियों के जीवाश्मों का तिथि-निर्धारण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:

  • प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा तथा
  • उन परतों की परोक्ष तिथि-निर्धारण द्वारा जिनमें वे दबे हुए पाये जाते हैं।

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प्रश्न 4.
चार्ल्स डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम बताएँ । विकास के संबंध में डार्विन ने क्या तर्क दिया?
उत्तर:
डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम ‘ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज’ है। उन्होंने तर्क दिया कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से क्रमिक विकास के रूप में हुआ।

प्रश्न 5.
एशिया और अफ्रीका में प्राइमेट्स कब अस्तित्व में आये?
उत्तर:
लगभग 36 मिलियन (360 लाख) वर्ष पहले।

प्रश्न 6.
होमिनिड्ज (homonoids) का उदय अफ्रीका में हुआ था। इस संबंध में कौन-कौन से दो प्रमाण दिए जा सकते हैं?
उत्तर:

  1. यह अफ्रीकी वानरों का समूह है जिनका अफ्रीकी होमिनिडों से बहुत ही निकट का संबंध है।
  2. पूर्वी अफ्रीका में पाये गए आस्ट्रेलोपिथिकस वर्ग से संबंधित आरंभिक होमोनिड के जीवाश्म लगभग 56 लाख वर्ष पुराने हैं। इनके विपरीत अफ्रीका से बाहर पाये गए जीवाश्म 18 लाख वर्ष से अधिक पुराने नहीं हैं।

प्रश्न 7.
होमिनिड्ज की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. मस्तिष्क का बड़ा आकार
  2. सीधे खड़ा होना
  3. दो पावों पर चलना
  4. हाथ विशेष क्षमता युक्त जिससे वह औजार बना सकता था तथा उनका प्रयोग कर सकता था।

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प्रश्न 8.
होमोनिड्ज के दो महत्त्वपूर्ण वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस तथा
  2. होमो।

प्रश्न 9.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो में क्या अंतर है?
उत्तर:
होमो की तुलना में आस्ट्रेलोपिथिकस के दिमाग का आकार छोटा, बड़ा, भारी तथा दाँत भी ज्यादा बड़े होते हैं।

प्रश्न 10.
वैज्ञानिकों ने विभिन्न मानव प्रजातियों को उनका नाम देने के लिए किन दो भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है?
उत्तर:
यूनानी तथा लैटिन (लातिनी) भाषाओं में।

प्रश्न 11.
आस्ट्रेलोपिथिकस के कौन-से शारीरिक लक्षण उसे वृक्षों पर रहने के अनुकूल बनाते थे?
उत्तर:

  1. आगे के अवयवों का लंबा होना
  2. हाथों तथा पैरों की मुड़ी हुई हड्डियों तथा
  3. टखनों के घुमावदार जोड़।

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प्रश्न 12.
औजार बनाने तथा लंबी दूरी तक चलने से आस्ट्रेलोपिथिकस में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
उसमें कई मानवीय लक्षणों का विकास हुआ।

प्रश्न 13.
‘होमो’ शब्द का क्या अर्थ है ? होमो के अवशेषों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:’
होमो’ लातिनी (Latin) भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’ भले ही इसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। होमो को उनकी विशेषताओं के अनुसार तीन वर्गों में बांटा गया है-

  1. होमो हैबिलिस (औजार बनाने वाले)
  2. होमो एरेक्टस (सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले)
  3. होमो सेपियंस (चिंतनशील मनुष्य)।

प्रश्न 14.
कोई दो उदाहरण दीजिए जिनमें होमो के जीवाश्मों को उनकी प्राप्ति-स्थल के नाम पर नामित किया गया हो।
उत्तर:

  1. जर्मनी के शहर हाइडलबर्ग में पाए गए जीवाश्मों को होमोहाइडल बर्गेसिस (Homo heidel bergenisis) कहा गया है।
  2. निअंडर घाटी में पाए गए जीवाश्मों को होमो निअंडरथलैंसिस श्रेणी में रखा गया है।

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प्रश्न 15.
यूरोप में पाये जाने वाले सबसे पुराने ‘होमो’ जीवाश्म कौन-कौन से हैं। ये किस प्रजाति के हैं?
उत्तर:
यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्म होमो हाइडलबर्गसिस तथा होमो निअंडरथलैंसिस हैं। ये दोनों ही होमो सैपियंस प्रजाति के हैं।

प्रश्न 16.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से भोजन प्राप्त करता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन प्राप्त करता था-जैसे संग्रहण (Gatherings), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing)।

प्रश्न 17.
मस्तिष्क का आकार होमो के किस लक्षण को दर्शाता है?
उत्तर:
अधिक बुद्धिमत्ता तथा अधिक अच्छी स्मृति को।।

प्रश्न 18.
किस बात से संकेत मिलता है कि होमिनिड्ज पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया तथा यूरोप में पहुंचे?
उत्तर:
एशिया में पाए गए होमिनिड के जीवाश्म अफ्रीका में पाए गए जीवाश्मों की तुलना में बाद के हैं। इसलिए यह संभव है कि होमीनिड पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया और यूरोप में पहुंचे।

प्रश्न 19.
आदिकालीन गुफाओं में पाये गए चूल्हे किस बात के द्योतक हैं?
उत्तर:
आग के नियंत्रित उपयोग के द्योतक हैं।

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प्रश्न 20.
मनुष्य की भांति वानर औजारों का निर्माण तथा उनका उपयोग क्यों नहीं कर पाते थे?
उत्तर:
स्मरण शक्ति तथा आवश्यक कौशल के अभाव के कारण।

प्रश्न 21.
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य कहाँ से मिला है? ये संभवतः किस प्रजाति ने बनाए थे?
उत्तर:
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल किए जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथियोपिया और केन्या के पुरा स्थलों से मिला है। ये औजार संभवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे।

प्रश्न 22.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में आदिकालीन चित्रकारियाँ पाई गई हैं? इन चित्रकारियों में किन-किन जानवरों के चित्र शामिल हैं ?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। ये 30,000 से 12,000 वर्ष पहले बनाई गई थीं। इनमें जंगली भैसों, घोड़ों, हिरणों, गेण्डों, शेरों, भालुओं तेंदुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

प्रश्न 23.
मानव विज्ञान से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विज्ञान वह विज्ञान है जो मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन करता है।

प्रश्न 24.
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन क्या है। वे किस जानवर का मांस नहीं खाते?
उत्तर:
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन जंगली साग-सब्जियाँ तथा पशुओं का मांस हैं। वे हाथी का मांस नहीं खाते।

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प्रश्न 25.
हादजा लोग जमीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि –

  1. वे जहाँ चाहे रह सकते हैं।
  2. पशुओं का शिकार कर सकते हैं।
  3. कंदमूल और शहद इकट्ठा कर सकते है और पानी ले सकते हैं।

प्रश्न 26.
हादजा लोगों के पास सूखा पड़ने पर भी भोजन की कमी क्यों नहीं होती?
उत्तर:
हादजा लोगों के इलाके में सूखे के मौसम में भी पर्याप्त मात्रा में खाने वाले कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि मिलते हैं। इसीलिए उनके पास भोजन की कमी नहीं होती।

प्रश्न 27.
आज के शिकारी समाजों में पाई जाने वाली तीन भिन्नताएं बताएँ।
उत्तर:

  1. आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्व देते हैं।
  2. उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-छोटे हैं।
  3. उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है।

प्रश्न 28.
अंतिम हिमयुग का अंत होने के कोई दो परिणाम बताओ।
उत्तर:

  1. अपेक्षाकृत अधिक गर्म और नम मौसम की शुरूआत हुई।
  2. जंगली जौ और गेहूँ जैसे जंगली अनाज उगाने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हो गई।

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प्रश्न 29.
जीवाश्म किस प्रकार लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं?
उत्तर:
जीवाश्म प्राय: चट्टानों में दबे रहते हैं। फलस्वरूप वे लाखो वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 30.
विश्व के एक क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ आज से लगभग दस हजार साल पहले खेती और पशुचारण प्रारंभ हुआ?
उत्तर:
मध्य सागर के तट से लेकर ईरान में जागरोस (Zagros) पर्वतमाला तक फैला हुआ क्षेत्र जिसे फर्टाइल क्रीसेंट यानी उर्वर अर्धचंद्राकार क्षेत्र कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आरंभिक मानव-प्रतिरूप के दो पैरों पर चलने से क्या लाभ हुए ? दो पैरों पर चलने वाले मानव के प्रारंभिक प्रत्यक्ष प्रमाण कहाँ से मिले हैं?
उत्तर:
दो पैरों पर चलने से मानव कं हाथ कार्यमुक्त हो गये। अब वह हाथों का प्रयोग बच्चों को उठाने अथवा आवश्यक वस्तु को उठाने के लिए कर सकता था। हाथों के लगातार प्रयोग से मानव की खड़ा होकर चलने की कुशलता धीरे-धीरे बढ़ती गई। इसके अतिरिक्त उसके चलने में चौपायों की तुलना में कहीं कम ऊर्जा खर्च लगी, भले ही दौड़ने में उसे अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती थी। दो पैरों पर चलने वाले मानव-प्रतिरूप के प्रमाण हादर (Hadar) इथोपिया से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 2.
‘होमो’ का क्या अर्थ है ? इन्हें कौन-कौन सी प्रजातियों में बाँटा गया है?
उत्तर:
‘होमो’ लातिनी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’। वैज्ञानिकों ने होमो को कई प्रजातियों में बाँटा है और इन प्रजातियों को उनकी विशेषताओं के अनुसार अलग-अलग नाम दिए गए हैं। इस प्रकार जीवाश्मों को निम्नलिखित तीन प्रजातियों में बाँटा

  • होमो हैबिलिस औजार बनाने वाले
  • होमो एरेक्टस सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले
  • होमो सैपियंस-चिंतनशील मनुष्य

होमो हैबिलिस के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो (Ome) और तंजानिया में ओल्डवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हुए हैं। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका और एशिया महाद्वीपों में पाए गए हैं।

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प्रश्न 3.
आदिकालीन मानव के खुले स्थलों पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर:
आदिकालीन मानव के खुले स्थान पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है। उनके द्वारा निर्मित शिल्पकृतियों के फैलाव की जाँच करना। उदाहरण के लिए केन्या में किलोंबे (Kilomble) और ओलोर्जेसाइली (Olorgesaillie) के खनन स्थलों पर हजारों की संख्या में शल्क-उपकरण और हस्तकुठार मिले हैं। ये औजार 700,000 से 500,000 साल पुराने हैं। इतने अधिक औजार एक ही स्थान पर इकट्ठे होने का अर्थ है कि इन स्थानों पर आदि मानव लंबे समय तक रहा होगा या बार-बार आता होगा । वास्तव में जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन प्रचुर मात्रा से उपलब्ध थे, वहाँ लोग बार-बार आते रहते होंगे।

ऐसे क्षेत्रों में लोग शिल्पकृतियाँ सहित अपने क्रियाकलापों के चिह्न छोड़ जाते होंगे। जमा शिल्पकृतियों कुछ ही क्षेत्रों में मिलती है और वे क्षेत्र कुछ अलग से दिखाई पड़ते हैं। जिन स्थानों पर लोगों का आवागमन कम होता था वहाँ ऐसी शिल्पकृतियाँ कम मात्रा में मिलती हैं।

प्रश्न 4.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं? ये चित्रकारियाँ क्यों की गई थी, इसके बारे में क्या बताया जाता है?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकाक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं। और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई है। ये 3000 से 12,000 साल पहले बनाई गई थीं। इनमें गौरों (जंगली बैलों), घोड़ों, पहाड़ी बकरों (Abox), हिरनों, मेमनों, विशालकाय जानवरों, गैडों, शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्घों, उल्लुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

बताया जाता है कि इन चित्रकारियाँ का संबंध धार्मिक क्रियाओं अथवा जादू-टोनों से है। संभवत: चित्रकारी के रूप में जादू-टोना करके मनुष्य अपने शिकार को सफल बनाने का प्रयास करता होगा। यह भी कहा जाता है कि शायद ये गुफाएँ संगम स्थल थीं। यहाँ लोगों के यहाँ छोटे-छोटे समूह आपस में मिलते थे और सामूहिक क्रियाकलाप संपन्न करते थे। संभव है कि वहाँ ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते हों अथवा शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा करते हों। यह भी संभव है ये चित्रकारियाँ आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों।

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प्रश्न 5.
यह किस आधार पर कहा जाता है कि मानव का निकास क्रमिक रूप से हुआ?
उत्तर:
वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। मानव की एक के बाद एक कई प्रजातियाँ उत्पन्न हुई और लुप्त हो गई । लाखों वर्षों की इस प्रक्रिया के बाद आधुनिक मानव का उद्भव हुआ। इसका साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों के अवशेषों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। इनके शारीरिक लक्षण भिन्न-भिन्न थे। इनका काल निर्धारण प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का परोक्ष रूप से काल का निर्धारण करके किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि ये प्रजातियाँ एक क्रम में अलग-अलग काल में जीवित रहीं। इनके शारीरिक लक्षण बदलते रहे और इस प्रकार आज का मानव अस्तित्व में आया ।

प्रश्न 6.
होमिनिड का विकास किससे हुआ है ? दोनों में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनिड का विकास होमिनॉइड से हुआ है। इन दोनों में निम्नलिखित अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड के दिमाग का आकार होमिनिइज की तुलना में छोटा होता है।
  2. वे चौपाये होते हैं और चारों पैरों के बल चलते हैं। इसके विपरीत होमिनिड् का शरीर सीधा होता है। वे दो पैरों पर चलते हैं।
  3. उनके हाथों में भी काफी अंतर पाया जाता है। होमिनिड के हाथों की रचना इस प्रकार होती है कि उन्हें औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7.
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदिमानव की जीवन शैली में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदि मानव के जीवन शैली में निम्नलिखित परिवर्तन आए –

  1. फेंककर मारने वाले भालों तथा तीर-कमान जैसे नए औजार बनाए जाने लगे। इससे जानवरों को मारने के तरीकों में सुधार हुआ।
  2. मांस को साफ किया जाने लगा। उसमें से हड्डियाँ निकाल दी जाती थीं। फिर उसे सुखाकर, हल्का सेकते हुए सुरक्षित रख लिया जाता था। इस प्रकार सुरक्षित रखे मांस को बाद में खाया जा सकता था।
  3. समूरदार जानवरों को पकड़ा जाने लगा और उनके रोएँदार खाल का कपड़े की तरह प्रयोग किया जाने लगा।
  4. सिलने के लिए सुई का आविष्कार भी हुआ। सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य लगभग 21,000 वर्ष पुराना है।
  5. छेनी या रूखानी जैसे छोटे-छोटे औजारों के बनाने की तकनीक का आविष्कार हुआ । इन नुकीले ब्लेडों से हड्डी, सींग, हाथी दाँत या लकड़ी पर नक्काशी करना संभव हो गया।

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प्रश्न 8.
मानव उद्भव के प्रतिस्थापन मॉडल की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है।

दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक विभिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है । भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही यं भिन्नताएँ उत्पन्न की क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

प्रश्न 9.
आटिमानव दवारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदिमानव द्वारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथोपिया और केन्या के पुरास्थलों से मिला है। ये औजार संभवत: आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे। वास्तव में मनुष्य के जीवन में औजारों का विशेष महत्त्व था। उसमें वानरों से हटकर कुछ ऐसी शारीरिक विशेषताएँ थीं जिन्होंने उसे औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता दी। उसकी सबसे पहली विशेषता थी-हाथों का कुशलतापूर्व प्रयोग । इसके अतिरिक्त उसमें वानरों से अधिक स्मरण शक्ति और जटिल संगठनात्मक कौशल भी था।

प्रश्न 10.
प्राइमेट्स से क्या अभिप्राय है? इनकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राइमेट्स स्तनधारियों के बहुत बड़े वर्ग का एक उपवर्ग है। इस वर्ग में वानर, लंगूर तथा मानव आदि शामिल हैं। इस वर्ग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. इनके शरीर पर बाल होते हैं।
  2. इनका गर्भकाल अपेक्षाकृत लंबा होता है।
  3. ये बच्चों को जन्म देते हैं।
  4. माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रंथियाँ होती हैं।
  5. इनके दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।
  6. इनमें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने की क्षमता होती है।

प्रश्न 11.
होमिनॉइड तथा बंदर में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनॉइड तथा बंदर में निम्नलिखित कई अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड्ज का शरीर बंदर के शरीर से बड़ा होता है।
  2. उनको पूँछ नहीं होती।
  3. उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता है।
  4. होमिनॉइड के बच्चे बंदर के बच्चों की तुलना में लंबे समय तक उन पर निर्भर रहते हैं

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प्रश्न 12.
आस्ट्रेलोपिथिकस को यह नाम क्यों दिया गया?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस दो शब्दों के मेल से बना है-लैटिन शब्द ‘आस्ट्रल’ (austral) जिसका अर्थ होता है ‘दक्षिणी’ तथा यूनानी शब्द ‘पिथिकस’ (pithekos) जिसका अर्थ है वानर । यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि मानव के बन रहे प्रारंभिक प्रतिरूपों में वानर अवस्था के कई लक्षण पाये जाते थे। उदाहरण के लिए –

  • होमो की तुलना में उनके दिमाग का आकार छोटा था।
  • उनके पिछले दाँत बड़े थे।
  • उनके हाथों की दक्षता सीमित थी।
  • वे सीधे खड़े होकर बहुत कम चल पाते थे क्योंकि वे अभी भी अपना अधिकतर समय वृक्षों पर बिताते थे अतः उनके शारीरिक लक्षण वृक्षों पर रहने के अनुकूल थे।

प्रश्न 13.
क्या खानाबदोश पशुचारक शहरी जीवन के लिये खतरा थे?
उत्तर:
मेसोपोटामिया का मुख्य भूमि प्रदेश काफी उपजाऊ था। फलतः खानाबदोश पशुचारकों का झुंड यहाँ आता था। ये किसानों के बोये हुए खेतों में अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने ले जाते थे, जिससे फसल को नुकसान पहुँचता था। इसके अतिरिक्त ये पशुचारक किसानों के गाँवों को लूट लेते थे। इस प्रकार ये स्थानीय किसानों हेतु खतरा थे। इसके कारण शासकों को यह डर बना रहता था कि ये पशुचारक कहीं छापे अथवा हमलों की कोई योजना तो नहीं बना रहे।

प्रश्न 14.
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर:
ऐसा माना जाता है कि होमोहैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना संभव हुआ होगा। यह विकास संभवतः 20 लाख वर्ष पूर्व शुरू हुआ होगा। मस्तिष्क में हुए परिवर्तन के अतिरिक्त स्वर-तंत्र का विकास भी महत्त्वपूर्ण था। यह विकास लगभग 200,000 वर्ष पहले हुआ था। इसका संबंध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है। एक अन्य सुझाव यह है कि भाषा-कला के साथ-साथ लगभग 40,000-35000 वर्ष पहले विकसित हुई। बोली जाने वाली भाषा-कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, क्योंकि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

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प्रश्न 15.
संजाति वृत्त Ethnography) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संजाति वृत्त में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। इससे उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधनों, तकनीकों आदि का पता लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त समूहों में स्त्री-पुरुष की भूमिका, राजनीतिक संस्थाओं तथा सामाजिक रूढ़ियों की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही उनके कर्मकांडों तथा रीति-रिवाजों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 16.
हिमयुग कब आया? इससे मानव की प्रक्रिया में कैसे और क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
हिमयुग लगभग 25 लाख वर्ष पहले आया। पृथ्वी के बड़े-बड़े भाग बर्फ से ढंक गए । फलस्वरूप जलवायु तथा वनस्पति में बड़े-बड़े परिवर्तन देखने को मिले । तापमान और वर्षा में कमी आ गई जिसके कारण वन कम हो गए। इसके विपरीत घास के मैदानों का क्षेत्रफल बढ़ा गया। परिणामस्वरूप आस्ट्रलोपिथिकस के प्रारंभिक रूप धीरे-धीरे लुप्त हो गए, क्योंकि ये वनों में रहने के आदी थे। अब उनके स्थान पर उनकी प्रजातियाँ प्रकट हुईं जो सूखी परिस्थितियों में आराम से रह सकती थीं। प्रजातियों में जीनस होमो के सबसे पुराने प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रश्न 17.
पूर्व (आदिकालीन) मानव कुछ स्थलों को सोच समझकर शिकार के लिए चुनता था । क्यों ? उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर:
पूर्व मानव कुछ स्थलों को सोच समझ कर चुनता था। ऐसा एक स्थल चेक गणराज्य में दोलनी वेस्तोनाइस (Dolni Vestonice) था जो एक नदी के पास स्थित है। मानव ऐसे स्थल इसलिए चुनता था क्योंकि वह जानवरों की आवाजाही के बारे में जानता था। वह जल्दी से बड़ी संख्या में जानवरों को मारने के तरीकों से भी परिचित था । उदाहरण के लिए मानव ने जो स्थल चेक गणराज्य के नदी के पास चुना था, वहाँ पतझड़ और बसंत के मौसम में रैडियर तथा घोड़ों जैसे स्थान बदलने वाले जानवरों के झुंड के झुंड आते थे। इनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था।

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प्रश्न 18.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच क्या शारीरिक अंतर थे? ये अंतर क्या दर्शाते हैं?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच निम्नलिखित शारीरिक अंतर थे –

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो के मस्तिष्क का आकार बड़ा था।
  2. होमो के जबड़े कम बाहर निकले हुए थे।
  3. होमो के दाँत अपेक्षाकृत छोटे थे।
  4. होमो के मस्तिष्क का बड़ा आकार उसके बुद्धिमान तथा उसकी बेहतर स्मृति को दर्शाता है।
  5. जबड़ों तथा दाँतों में हुआ परिवर्तन संभवतः उनके खान-पान की भिन्नता से संबंधित है।

प्रश्न 19.
भाषा का विकास किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है। भाषा के विकास के विषय में कई प्रकार के मत हैं –

  1. होमिनिड भाषा में अंगविक्षेप (हाव-भाव) या हाथों का संचालन (हिलाना) शामिल था।
  2. उच्चरित अथवा बोली जाने वाली भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अ-शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
  3. मनुष्य की वाणी का प्रारंभ संभवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसे कि नर-वानर करते हैं। प्रारंभिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत ही कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। यही ध्वनियाँ आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से अपना भोजन जुटाता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन जुटाता था जैसे संग्रहण (Gathering), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing) –
1. संग्रहण – संग्रहण की क्रिया में पेड़ों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों, जैसे बीज, गुठलियाँ, बेर फल एवं कंदमूल को इकट्ठा करना शामिल था। संग्रहण के संबंध में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि इस बारे में प्रत्यक्ष साक्ष्य बहुत कम मिलते हैं। हमें हड्डयों के जीवाश्म तो बहुत मिल जाते हैं परंतु पौधे के जीवाश्म दुर्लभ ही हैं। पौधों से भोजन जुटाने के बारे में सूचना प्राप्त करने का एक मात्र तरीका दुर्घटनाओं या संयोगवश जले हुए पौधों के प्राप्त अवशेष हैं।

इस प्रक्रिया से कार्बनीकरण हो जाता है और जला हुआ जैविक पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। फिर भी, अभी तक पुरातत्वविदों को अति पुराने जमाने के संबंध में कार्बनीकृत बीजों का साक्ष्य नहीं मिला है।

2. शिकार – शिकार संभवतः बाद में शुरू हुआ-लगभग 5 लाख साल पहले। स्तनपायी जानवरों के योजनाबद्ध शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य दो स्थलों से मिलता है। ये स्थल हैं दक्षिण इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव (Boxgrove) और जमनी में शोनिंजन (Schoningen).

3. अपमार्जन – अपमार्जन से तात्पर्य त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है ! अब मुख्य रूप से यह माना जाने लगा है कि आदिकालीन होमिनिड अपमार्जन के द्वारा उन जानवरों की लाशों सं मांस-मजा खुरच कर निकालने लग थ जो जानवर अपने आप मर जाते थे या अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। यह भी इतना ही संभव है कि पूर्व होमिनीड छोटे स्तनपायी जानवरों-चूहे, छछूदर जैसे कृतकों (Rodents), पक्षियों (और उनके अंडों), सरीसृपों और यहाँ तक कि कीड़े-मकोड़े भी खा जाते थे।

4. मछली पकड़ना – मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका इस बात की जानकारी अनेक खोज स्थलों से मछली की हड्डियाँ मिलने से होती है।

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प्रश्न 2.
क्या वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त जानकारी को सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है?
उत्तर:
वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों की जानकारी के आधार पर आदिकालीन शिकारी-संग्राहक समाजों के अध्ययन के बारे में दो परस्पर विरोधी विचारधाराएँ चल रही हैं।
1. पहली विचारधारा – विद्वानों के एक वर्ग ने आज के शिकारी-संग्राहक समाजों से प्राप्त तथ्यों तथा आँकड़ों का सीधे अतीत के अवशेषों की व्याख्या करने के लिए उपयोग कर लिया है। उदाहरण के लिए कुछ पुरातत्वविदों का कहना है कि 20 लाख साल के होमिनिड स्थल जो तुर्काना झील के किनारे स्थित हैं, संभवतः आदिकालीन मानवों के शिविर या निवास स्थान थे। वे यहाँ सूखे के मौसम में आकर रहते थे। वर्तमान हादजा और फुग सैन समाज भी ऐसा ही करते हैं।

2. दूसरी विचारधारा – दूसरी ओर कुछ विद्वानों का मत है कि संजाति वृत्त संबंधी तथ्यों और आंकड़ों का उपयोग अतीत के समाजों को समझने के लिए नहीं किया जा सकता है। उनके अनुसार ये चीजों एक-दूसरे से बिल्कुल आर्थिक कियाकलापों में भी लगी हुई हैं। वे जंगलों में पाई जाने वाली छोटी-छोटी चीजों का विनिमय और व्यापार करते हैं। कुछ समाज पड़ोस के किसानों के खेतों में मजदूरी करते हैं। इसके अतिरिक्त जिन परिस्थितियों में रहते हैं। वे आरंभिक मानव की अवस्था से बहुत भिन्न हैं।

आज के शिकारी – संग्राहक समाजों की जीवन-शैली भी भिन्न-भिन्न है। कई बातों में तो परस्पर विरोधी तथ्य दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं। उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-बड़े होते हैं। उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है। भोजन प्राप्त करने में श्रम विभाजन को लेकर भी कोई आम सहमति नहीं है।

यह सच है कि आज भी अधिकतर स्त्रियाँ ही खाने पीने की सामग्री जुटाने का काम करती हैं और पुरुष शिकार करते हैं। परंतु ऐसे समाजों के भी उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियाँ और पुरुष दोनों ही शिकार और संग्रहण तथा औजार बनाने के काम करते हैं। संभवत: इसी बात से यह सुनिश्चित होता है कि आज के शिकारी-संग्राहक समाजों में स्त्री-पुरुष दोनों की भूमिका लगभग एक समान है। अतः वर्तमान स्थिति में अतीत के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना कठिन है।

प्रश्न 3.
आदि मानव के गुफाओं तथा खुले स्थानों पर आवास के बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्र का प्रचलन 400,000 से 125,000 वर्ष पहले शुरू हो गया था। इसके साक्ष्य यूरोप के पुरास्थलों में मिलते हैं।
1. दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा की दीवार को 12×4 मीटर आकार के एक निवास स्थान से सटाकर बनाया गया है। इसके अंदर दो चूल्हों (Hearths) के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न प्रकार के खाद्य स्रोतों जैस फलों, वनस्पतियों, बीजों, काष्ठफला, पक्षियों के अण्डों और मीठे जल की मछलियों (ट्राउट, पर्च और कार्प) के साक्ष्य मिले हैं। दक्षिणी फ्रांस के समुद्रतट पर स्थित टेरा अमाटा (Terra Amata) एक अन्य पुरास्थल है। यहाँ घास-फूस और लकड़ी की छत वाली कच्ची झोपड़ियाँ बनाई जाती थीं। ये झोपड़ियाँ किसी विशेष मौसम में थोड़े समय के आवास के लिए बनाई जाती थी।

केन्या में चसीबांजा (Chesowanja) और दक्षिण अफ्रीका से स्वार्टक्रान्स (Swarkarns) में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकायी गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े मिले हैं। ये 14 लाख से 10 लाख साल पुराने हैं। यह पता नहीं चल पाया कि ये चीजें प्राकृतिक रूप से झाड़ियों में लगी आग या ज्वालामुखी से उत्पन्न अग्नि से जलने का परिणाम हैं अथवा एक सुनियोजित ढंग से लगाई गई आग में पकाकर बनाई गई थीं।

दूसरी ओर, चूल्हे आग के नियंत्रित प्रयोग के प्रतीक हैं। इसके कई लाभ थे।

  • इनका प्रयोग गफाओं के अंदर प्रकाश और उष्णता प्राप्त करने के लिए किया जाता होगा।
  • इससे भोजन भी पकाया जा सकता था।
  • इसके अतिरिक्त लकड़ी को कठोर करने में भी आग का इस्तेमाल होता था जैसे कि भाले की नोंक बनाने में।
  • शल्क निकाल कर औजार बनाने में भी आग की उष्णता की सहायता ली जाती थी।
  • साथ ही इसका उपयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में किया जाता था।

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प्रश्न 4.
आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ? इस संबंध में प्रचलित मतों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदि मानव के उद्भव स्थल के बारे में बहुत अधिक वाद-विवाद हुआ है। आज इस संबंध में दो मत प्रचलित हैं जो एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। ये मत आगे दिए गए हैं
1. क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (Continuity Model) – मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले होमो सेपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया । इस तर्क का आधार आज के मनुष्य में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं।

इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचार में यह मॉडल पुरातात्त्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

2. प्रतिस्थापन मॉडल (Replacement Model) – प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगृह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे।

वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है। दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक भिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरंतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है। भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही ये भिन्नताएँ उत्पन्न का क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की पथतियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव के उद्भव से संबंधित प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार कौन-सा मत सही है।
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ
(ख) अनेक क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों की उत्पत्ति हुई
(ग) मनुष्य का उद्भव यूरोप में हुआ
(घ) सभी क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों को उत्पत्ति नहीं हुई
उत्तर:
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 2.
अपमार्जन का अर्थ है ………………………
(क) भोजन की तलाश करना
(ख) भोजन एकत्रित करना
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना
(घ) कंदमूल जमा करना
उत्तर:
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना

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प्रश्न 3.
गुफा चित्रकला का प्राचीनतम प्रमाण किस काल का मिला है?
(क) पुरापाषाण
(ख) मध्यपाषाण
(ग) नवपाषाण
(घ) हड़प्पा
उत्तर:
(ग) नवपाषाण

प्रश्न 4.
हमें प्रथम होमिनिड्स का साक्ष्य मिलता है ………………………..
(क) 50 मिलियन वर्ष पूर्व
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व
(ग) 10 मिलियन वर्ष पूर्व
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व

प्रश्न 5.
साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि होमिनिड्स का उद्भव ……………………..
(क) एशिया में हुआ
(ख) यूरोप में हुआ
(ग) अफ्रीका में हुआ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 6.
जीवों का ऐसा समूह, जिसके नर और मादा मिल कर बच्चे पैदा कर सकते हैं और बाद में भी ये क्रम जारी रहता है, कहलाता है।
(क) प्राइमेट्स
(ख) स्पीशीज
(ग) होमोनिड
(घ) जीवाश्म
उत्तर:
(ख) स्पीशीज

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प्रश्न 7.
होमो लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ………………………..
(क) आदमी
(ख) स्त्री
(ग) वानर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) आदमी

प्रश्न 8.
होमिनिड समूह की विशेषताएँ हैं ……………………….
(क) मस्तिष्क का बड़ा आकार
(ख) दौ पैरों पर चलना
(ग) हाथ की विशेष आकृति
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
आस्ट्रोलोपिथिकस की उत्पत्ति हुई है ………………………
(क) लैटिन भाषा से
(ख) ग्रीक भाषा से
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से

प्रश्न 10.
चार्ल्स डारविन की पुस्तक ‘ओरिजिन ऑफ स्पेसिज’ कब प्रकाशित हुई?
(क) 1852
(ख) 1856
(ग) 1857
(घ) 1859
उत्तर:
(घ) 1859

प्रश्न 11.
आधुनिक मानव का उद्भव लगभग कितने वर्ष पूर्व हुआ?
(क) 45000
(ख) 200000
(ग) 300000
(घ) 400000
उत्तर:
(क) 45000

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प्रश्न 12.
केन्या के किलोबे और ऑलार्जेसाइली स्थल से किस काल के हस्त कुठार मिलते हैं?
(क) पुरापाषाण काल
(ख) मध्यपाषाण काल
(ग) नवपाषाण काल
(घ) ताम्रपाषाण काल
उत्तर:
(क) पुरापाषाण काल

प्रश्न 13.
पत्थर के औजार संभवतः सबसे पहले किसने बनाए थे?
(क) रामापिथेकस
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस
(ग) निअंडर थाल
(घ) हीमोसैपियंस
उत्तर:
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस

प्रश्न 14.
लैसकॉक्स और शोवे की गुफा की चित्रकला कहाँ पायी गयी है?
(क) फ्रांस
(ख) नार्वे
(ग) डेनमार्क
(घ) रूस
उत्तर:
(क) फ्रांस

प्रश्न 15.
शहरी जीवन की शुरूआत सर्वप्रथम कहाँ हुई?
(क) मेसोपोटामिया
(ख) चीन
(ग) यूनान
(घ) रोम
उत्तर:
(क) मेसोपोटामिया

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प्रश्न 16.
वार्का शीर्ष कहाँ मिला है?
(क) उरुक
(ख) यमन
(ग) जॉर्डन
(घ) तुर्की
उत्तर:
(क) उरुक

प्रश्न 17.
ओल्डुबई गोर्ज रिफ्ट घाटी, जहाँ आदिकालीन मानव के इतिहास के चिह्न पाये गये हैं कहाँ स्थित हैं?
(क) द. अमेरिका
(ख) पूर्वी अफ्रीका
(ग) इंडोनेशिया
(घ) मध्य यूरोप
उत्तर:
(ख) पूर्वी अफ्रीका

प्रश्न 18.
यूरोप में मिले सबसे पुराने होमो जीवाश्म किसके हैं?
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस
(ख) रामापिथेकेस
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस
(घ) क्रोमैतानम्
उत्तर:
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस

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प्रश्न 19.
योजनाबद्ध तरीके से जानवरों का शिकार का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य कहाँ से मिलता …………………………
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)
(ख) शोमिंजन
(ग) सोजन घाटी (पाकिस्तान)
(घ) बलन घाटी
उत्तर:
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)

प्रश्न 20.
दफनाने की परंपरा का प्राचीनत्तम साक्ष्य लगभग कितने लाख वर्ष पहले का मिला है?
(क) 5 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 4 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 2 लाख वर्ष पूर्व
उत्तर:
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
दंड-आरेख –
उत्तर:
एक विमीय आरेख है।

प्रश्न 2.
आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किए गए आँकड़ों द्वारा हम आलेखी रूप में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –
उत्तर:
मध्यिका

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प्रश्न 3.
तोरणों के द्वारा आलेखी रूप में निम्न की स्थिति जानी जा सकती है –
उत्तर:
माध्यिका

प्रश्न 4.
अंकगणितीय रेखाचित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है
उत्तर:
दीर्घकालिक प्रवृत्ति

प्रश्न 5.
दंड-आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 6.
आयत चित्र में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 7.
आयत चित्र की रचना केवल आँकड़ों के सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 8.
आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए एक जैसी: विधियाँ है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 9.
आयत चित्र की मदद से बारंबारता वितरण के बहुलक को आलेखी रूप में राज्य जा सकता है।
उत्तर:
सही

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प्रश्न 10.
तोरणों में बारम्बारता वितरण की माध्यिका को नहीं जाना जा सकता है।
उत्तर:
गलत

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख प्रभावी होता है?
(क) वर्ष विशेष की मासिक वर्षा
(ख) धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन
(ग) एक कारखाने में लागत घटक
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 1

प्रश्न 12.
मान लीजिए आप भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या में वृद्धि तथा भारत में शहरीकरण के निम्न स्तर पर बल देना चाहते हैं, जैसा कि उदाहरण 4.2 में दिखाया गया है, तो आप उसका सारणीयन कैसे करेंगे? उत्तर:
भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 2

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प्रश्न 13.
यदि किसी बारम्बारता सारणी में समान वर्ग अन्तरालों की तुलना में वर्ग अंतराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?
उत्तर:
आवृत्ति तालिका में वर्गान्तर समान भी हो सकते हैं और असमान भी। दोनों प्रकार के वर्गान्तर से आयत चित्र बनाने के विधि कुछ भिन्न है। जब सभी वर्गान्तर समान हैं तो सभी आयतों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु आयतों की ऊँचाई वर्गों की आवृत्तियों पर निर्भर करती है। जितनी आवृत्तियाँ अधिक होंगी आयतों की ऊँचाई भी उतनी ही अधिक होगी। इसके अतिरिक्त वर्गान्तर समान होने पर आवृत्तियों में कोई फेरबदल नहीं हो जाती, आवृत्तियों को मौलिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इसके विपरीत जब वर्गान्तर समान नहीं होते तो वर्गान्तरों की ऊँचाई करने के लिए आवृत्तियों का संशोधन किया जाता है। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और वर्ग 20-40 का वर्गान्तर 20 है जो न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है। अतः वर्ग की संशोधित आवृत्ति 20 के स्थान पर 10 (20 ÷ 2) होगी। मान लो 40-70 वर्गान्तर की आवृत्तियाँ 15 हैं। यह वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का तीन गुना है। अतः इसकी संशोधित आवृत्ति 5(15 ÷ 2) होगी।

प्रश्न 14.
भारतीय चीनी उद्योग संघ ने बताया कि दिसम्बर 2001 से पहले 15 दिन चीनी का उत्पादन लगभग 3,87,000 टन था जबकि पिछले वर्ष 2000 में उन्हीं 15 दिनों का उत्पादन 3,78,000 टन था।
दिसम्बर 2001 के पहले 15 दिनों में आन्तरिक उपभोग के लिये 2,83,000 टन चीनी खरीदी गई और निर्यात के लिए 41,000 टन जबकि पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 1,54,000 टन चीनी आन्तरिक उपभोग के लिए ली गई थी।

  1. आँकड़ों को तालिका में प्रस्तुत करें।
  2. यदि अपने इन आँकड़ों को आरेख में प्रदर्शित करना है तो आप किस प्रकार का आरेख प्रयोग करेंगे और क्यों?
  3. इन आँकड़ों को आरेख में प्रकट करें।

उत्तर:
1. भारत में चीनी उत्पादन (Production of Sugar in India):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 3

2. यदि हमें इनको आँकड़ों में प्रदर्शित करना है तो बहु दंड आरेख में प्रदर्शित करेंगे, क्योंकि यह आरेख दो या दो से अधिक तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए सबसे अधिक उपयोगी है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 4

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प्रश्न 15.
निम्नलिखित तालिका अनुमानित क्षेत्रीय वास्तविक वृद्धि दरों को प्रतिशत में प्रदर्शित करती है। इन आँकड़ों को बहु समय श्रृंखला ग्राफ में प्रदर्शित करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 5
उपर्युक्त आंकड़ों को बहु काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सारणीयन के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. आँकड़ों को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना।
  2. आँकड़ों का सरलीकरण करना।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण तथा सारणीयन में कोई एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
वर्गीकरण सांख्यिकी विश्लेषण की एक विधि है जब कि सारणीयन समंकों को प्रस्तुत करने की एक विधि है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 3.
सारणी के कोई पाँच प्रमुख अंग लिखें।
उत्तर:

  1. सारणीयन संख्या
  2. शीर्षक
  3. शीर्ष टिप्पणी
  4. उप-शीर्षक व पक्तिशीर्षक
  5. सारणी का मुख्य भाग
  6. सारणी का मुख्य भाग

प्रश्न 4.
यदि सारणी में एक निश्चित संख्या को महत्त्व दिया जाना है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
विशेष महत्त्व वाले समंकों को मोटे अंकों में लिखा जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
सरल सारणी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सरल सारणी वह सारणी है जो सांख्यिकीय आंकड़ों की किसी एक विशेषता अथवा गुण को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 6.
जटिल सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जटिल सारणी उस सारणी को कहते हैं जो कि एक से अधिक विशेषताओं को दर्शाती है।

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प्रश्न 7.
स्तंभों के शीर्षक को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
स्तंभों के शीर्षक को उप-शीर्षक कहते हैं।

प्रश्न 8.
आरेखीय प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन वह विधि है जिसके द्वारा आंकड़ों को आरेखों (दंड आरेख, आयत चित्र, वृत्तीय आरेख) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 9.
आरेखों की कोई दो सीमाएं लिखो।
उत्तर:

  1. आरेख अनुमानों पर आधारित होते हैं
  2. ये विस्तृत जानकारी नहीं देते।

प्रश्न 10.
आरेखों के कोई दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. गोखों द्वारा आंकड़ों की प्रस्तुति मिनची होती है।
  2. इनका व्यापक प्रयोग होता है।

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प्रश्न 11.
सरल दंड आरेख पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सरल दंड आरेखों में मूल्यों को दंडों की ऊंचाई द्वारा दिखाया जाता है। दण्डों की पीटाई तथा उनके बीच की दूरी एक समान रखी जाती है। ये आरेख जनसंख्या, उत्पादन तथा भौगोलिक आँकड़ों को प्रदर्शित करने में उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 12.
सूचना के स्रोत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सूचना के स्रोत से अभिप्राय उस स्रोत से है जिससे आँकड़े लिए गए हैं।

प्रश्न 13.
बहुभुजी सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो गुणों से अधिक विशेषताओं के आधार पर निर्मित की गई सारणी को बहुभुजी सारणी कहते हैं।

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प्रश्न 14.
एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी की कोई तीन विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. यह सरल तथा संक्षिप्त होनी चाहिए
  2. स्पष्ट तथा देखने में आकर्षक होनी चाहिए
  3. विश्वसनीय होनी चाहिए।

प्रश्न 15.
सारणीयन में प्रयोग किया जाने वाला वर्गीकरण कितने प्रकार का होता हैं?
उत्तर:
चार प्रकार का –

  1. परिमाणात्मक
  2. गुणात्मक
  3. समय संबंधी तथा
  4. स्थान संबंधी।

प्रश्न 16.
परिमाणात्मक या मात्रात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिमाणात्मक वर्गीरण उस वर्गीकरण को कहते हैं, जिसमें वर्गीकरण का आधार ‘परिमाणात्मक विशेषताएं हैं। दूसरे शब्दों में इन विशेषताओं को मात्रा में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए आयु, ऊँचाई, उत्पादन, आय आदि मात्रात्मक विशेषताएं हैं।

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प्रश्न 17.
सारणी का मुख्य भाग कौन-सा है?
उत्तर:
सारणी का मुख्य भाग कलेवर (Body) है।

प्रश्न 18.
आँकड़ों को दर्शाने के लिए. मुख्य आरेख निम्नलिखित हैं –
उत्तर:

  1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagram)। जैसे-दंडभुज।
  2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagram)।
  3. गणितीय रेखा आरेख (Arithmatic Line graph)।

प्रश्न 19.
सांख्यिकीय सारणी क्या है?
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी एक संयंत्र है जिसमें आँकड़ों को पंक्तियों और स्तम्भों में . व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

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प्रश्न 20.
सारणीयन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आंकड़ों को सारणी के रूप में अर्थात् पंक्तियों तथा स्तंभों के रूप में प्रकट करने को सारणीयंन कहते हैं।

प्रश्न 21.
आयत चित्र का अर्थ बताएँ।
उत्तर:
यह वह चित्र है जो अखंडित श्रृंखलाओं से जुड़ी हुई आयातों (adjacent rectangles) द्वारा प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 22.
यदि सभी वर्ग अंतराल (Class Intervals) समान हैं तो आयत चित्र की चौड़ाई समान होगी या असमान?
उत्तर:
समान होगी।

प्रश्न 23.
आवृत्ति बहुभुज कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
आवृत्ति बहुभुज को आयत चित्र के सिरे के मध्य बिन्दुओं को जोड़कर बनाया जाता है।

प्रश्न 24.
श्रम पर खर्च कुल खर्चे का 30% है। इसकी कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = 30 × 3.6 = 108°

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प्रश्न 25.
102 मजदूरों में मुख्य मजदूर 31 हैं। मुख्य मजदूरों की कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = \(\frac{31}{102}\) × 360 = 1090

प्रश्न 26.
दो तोरण (Ogive) से कम और ‘से अधिक’ एक दूसरे को M बिन्दु पर काटते हैं। माध्यिका (Meidan) निकालने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
माध्यिका निकालने के लिए M बिन्दु से आधार रेखा पर लंब डालना चाहिए। आधार बिन्दु आधार रेखा को जिस बिन्दु पर काटेगा, वह बिन्दु माध्यिका प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख अधिक प्रभावशली है?

  1. वर्ष विशेष की मासिक वर्षा।
  2. धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन।
  3. एक कारखाने में लागत-घटक।

उत्तर:

  1. काल श्रेणी आरेख।
  2. सरल दण्ड आरेख तथा
  3. वृत्त आरेख।

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प्रश्न 28.
जब वर्गान्तर असमान हैं तो आयत चित्र की ऊँचाई कैसे निर्धारित की जाती है?
उत्तर:
सबसे कम वर्गान्तर से वर्गान्तर जितना अधिक होगा, आयत की ऊँचाई के लिए उस वर्गान्तर की आवृत्ति उसी अनुपात से कम कर दी जाती है। मान लो एक वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है तो ऐसी अवस्था में उसके आयत की ऊँचाई कर दी जाएगी। अर्थात् उसकी आवृत्तियाँ 6 हैं तो वह 3(6 ÷ 2) होंगी।

प्रश्न 29.
संचयी आवृत्ति के कितने रूप हो सकते हैं?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति के दो रूप हो सकते हैं –
से कम’ तथा ‘से अधिक’। ‘से कम’ ओजाइन नीचे से ऊपर दाईं ओर उठती है और ‘से अधिक’ ओजाइब ऊपर से नीचे की ओर दाईं ओर ढालू होती है।

प्रश्न 30.
आयत चित्र बनाने के लिए समावेशी पर आधारित श्रृंखला को अपवर्ती वर्ग पर आधारित श्रृंखला में क्यों परिवर्तित करते हैं?
उत्तर:
समावेशी वर्ग पर आधारित शृंखला में अंतर होता है और आवृत्ति चित्र बनाने के लिये निरंतरता चाहिए। अतः निरन्तरता प्राप्त करने के लिए हम समावेशी वर्ग पर आधारित श्रृंखला को अपवर्जी वर्ग पर आधारित श्रृंखला में परिवर्तित करते हैं।

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प्रश्न 31.
ओजाइब का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
ओजाइब का दूसरा नाम संचयी आवृत्ति वक्र या तोरण है।

प्रश्न 32.
दोनों ओजाइब की विशेष विशेषता क्या है?
उत्तर”
दोनों ओजाइब जिस बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं उस बिन्दु से हमें माध्यिका प्राप्त होती है।

प्रश्न 33.
सरल दंड आरेख द्वारा कितने चरों को प्रदर्शित किया जा सकता है?
उत्तर:
सरल दंड आरेख द्वारा केवल एक ही चर को प्रदर्शित किया जा सकता है।

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प्रश्न 34.
किस प्रकार के दंड आरेख का हमें प्रयोग करना होगा, यदि हमें विभिन्न वर्षों के एक से अधिक चरों के मूल को प्रदर्शित करना हो तो?
उत्तर:
बहुदंड आरेख को।

प्रश्न 35.
हमें एक देश के आयात तथा निर्यात के मूल्यों को दंड आरेख द्वारा प्रदर्शित करना है। इसके लिये हम किस प्रकार के दंड आरेख का प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
बहुदंड आरेख का।

प्रश्न 36.
एक उदाहरण दीजिए जहाँ सरल दंड आरेख का प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
जब विभिन्न जनगणना वर्षों में एक ही राज्य की जनसंख्या प्रदर्शित करनी हो।

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प्रश्न 37.
सरल दंड आरेख तथा बहुदंड आरेख में एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
सरल दंड आरेख में एक ही चर के मूल्यों को विभिन्न वर्षों में व्यक्त किया जाता है। जबकि बहु दंड आरेख में एक से अधिक चर के मूल्यों को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 38.
समय कालिक श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
समय कालिक श्रृंखला वह श्रृंखला है जहाँ किसी चर का मूल्य समयानुसार दिया हो, जैसे-विभिन्न वर्षों के कृषि उत्पादन के आँकड़े।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आंकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ (Avantages of diagrammatic presentation of data)

  1. आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली साधन हैं, क्योंकि आरेख रोचक तथा आकर्षक होते हैं।
  2. आरेख आँकड़ों को सरल तथा बोधगम्य बनाते हैं।
  3. ये समंकों के तुलनात्मक अध्ययन में सहायक होते हैं।
  4. इनका प्रयोग उत्पादन, व्यापार, वाणिज्य, परिवहन आदि के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है।

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प्रश्न 2.
दंड आरेख की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
विशेषताएँ (Features) –

  1. दंड आरेख एकपक्षीय (One Dimensional) होते हैं।
  2. दंड क्षैतिज (Horizontal) तथा शीर्ष (Vertical) दोनों रूप में हो सकते हैं।
  3. दंड आरेखों को आकर्षक बनाने के लिए सभी दंडों में रंग भर दिया जाता है।
  4. दंड आरेख कई प्रकार के होते हैं-जैसे सरल दंड आरेख, बहु दंड आरेख, घटक दंड आरेख, प्रतिशत घटक दंड आरेख आदि।

प्रश्न 3.
परिमाणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 7

प्रश्न 4.
गुणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 8

प्रश्न 5.
समयानुसार या कालिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
1995-2000 में एक चाय की दुकान की वार्षिक बिक्री –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 9

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प्रश्न 6.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख बनाने की विधि (Method of constructing a piediagram) –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत रूप में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में दिया गया है तो यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को.3.6 से गुणा करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त बनाया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।
  6. वृक्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरा जाता है।

प्रश्न 7.
तिशत घटक दंड आरेख तथा घटक दंड आरेख में अंतर बताएँ।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 10

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प्रश्न 8.
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निम्नलिखित चरण होते हैं –

  1. इन्हें बनाने के लिए पहले सभी समय (वर्षों आदि) से सम्बन्धित जोड़ को 100 मान लिया जाता है।
  2. दूसरे, सभी विभागों को प्रतिशत रूप में बदल दिया जाता है।
  3. चौथे, अलग-अलग समय (वर्षों) के अलग-अलग दंड बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई समान अथवा 100 होती है। फिर बाद में संचयी प्रतिशत के बराबर विभिन्न विभागों को काट दिया जाता है और उनमें अलग-अलग रंग भर दिया जाता है।

प्रश्न 9.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख की विधि के चरण इस प्रकार हैं –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में हो तब यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को 3.6 से गुण करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त का निर्माण किया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख. के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।

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प्रश्न 10.
सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले आरेखों के विभिन्न रूप लिखें।
उत्तर:
सामान्य प्रयोग में लाए जानेवाले आरेखों के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं –
1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagrams):

  • दंड आरेख
  • बहुदंड आरेख
  • वृत्तीय आरेख

2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagrams):

  • आयत चित्र
  • आवृत्ति बहुभुज
  • आवृत्ति वक्र तथा
  • तोरण

3. गणितीय समय ग्राफ (Arithmetic Time Graph):
काल श्रेणी आरेख।

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प्रश्न 11.
सामान्य उद्देश्य सारणी तथा विशेष उद्देश्य सारणी में अंतर बताएँ।
उत्तर:
सामान्य उद्देश्य सारणी का कोई महत्त्व नहीं होता। ये सामान्यतः प्रकाशित प्रतिवेदनों (Report) के पीछे दी जाती है। विभिन्न व्यक्ति इसका प्रयोग अपने ढंग से करते हैं। इसके विपरीत विशेष उद्देश्य सारणी किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई गई होती है। यह प्रायः संक्षिप्त होती है।

प्रश्न 12.
स्थानिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 11

प्रश्न 13.
घटक दण्ड आरेख का प्रयोग कब किया जाता है? इस आरेख को बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
जब तथ्यों के जोड़ और उसके विभिन्न विभागों (जैसे-कॉलेज के विद्यार्थियों और उसके विभिन्न घटकों की संख्या जैसे लड़के तथा लड़कियों आदि) का प्रदर्शन करना हो तो घटक दण्ड आरेख का प्रयोग किया जाता है।

बनाने की विधि (Method of preparing):
पहले समय अथवा स्थान के आधार पर, तथ्यों के जोड़ के आधार दंड बनाए जाते हैं। बाद में प्रत्येक खंड के विभिन्न भागों में अलग-अलग रंग भरा जाता है परंतु एक वस्तु से संबंधित सभी दंडों के भागों में एक ही रंग भरा जाता है।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से हम एक आयत चित्र बनाना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए हम वर्गान्तर में क्या परिवर्तन करेंगे?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 12
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 13

प्रश्न 15.
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) का क्या अभिप्राय है? एकल, द्वि तथा बहु जनसंख्या समझाएँ।
उत्तर:
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) से अभिप्राय अनुसंधान क्षेत्र की सभी इकाइयों से होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी पाठशाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्तर का अध्ययन करना चाहते हैं तो पाठशाला के सभी विद्यार्थी सांख्यिकी की दृष्टि से ‘जनसंख्या’ कहलाते हैं। जनसंख्या को समग्र भी कहते हैं। रोसन्दर (Rosander) के अनुसार, “समग्र विचाराधीन विषय इकाइयों का योग होता है।”

एकल समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित केवल एक चर। जैसे जनसंख्या केवल आय। द्वि-समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित दो चर। उदाहरण के लिए एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन। बहु जनसंख्या से अभिप्राय समग्र के विषय से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारी के आँकड़े। उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपभोग की सभी मदों का व्यय।

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प्रश्न 16.
अविछिन्न तथा खंडित (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाइएँ।
उत्तर:
अविछिन्न तथा विछिन्न चरों में अंतर (Difference between Continuous Series):
एक चर को विभिन्न चर उस समय कहा जाता है जब वह विस्तार में कोई भी मूल्य ले सकता है। उसका मूल्य 1, 2, 3 भी हो सकता है और = \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\), \(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊंचाई व भार तथा उनकी आय को अविछिन्न चर कहा जा सकता है तो इसे विछिन्न चर कहेंगे जैसे पूर्ण संख्या (whole number) को विछिन्न चर कहते हैं। जैसे-एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

प्रश्न 17.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण निरंतर का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना। चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आँकड़ों का आयत आरेख बनाएँ तथा बहुलक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 14
उत्तर:
आँकड़ों का आवृत्ति आरेख बनाने से पहले हम संशोधित वर्ग बनाएँगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 15
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 16

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प्रश्न 2.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पर ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 17
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 18
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 19

प्रश्न 3.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पेर ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 20
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 21
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प्रश्न 4.
नीचे दी गई सूचना के आधार पर आरेखीय विधि द्वारा माध्यिका का निर्धारण करें। (Calculate median graphically with the help of following date)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 24
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित सूचना को एक वृत्त आरेख में दिखाएँ –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 26
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 27
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प्रश्न 6.
एक सारणी के मख्य भागों का वर्णन करें।
उत्तर:
एक सारणी के मुख्य भाग (Main parts ofa Table):
एक सांख्यिकी सारणी के मुख्य भाग इस प्रकार हैं –
1. सारणी की संख्या (Table Number):
सारणी को सबसे पहले एक संख्या (सारणी संख्या) अर्थात 1, 2, 3 …. आदि की जानी चाहिए। एक अध्ययन में तालिकाएं जिस क्रम में बनाई जाती हैं उसी के अनुसार उनकी संख्या दी जानी चाहिए। सारणी संख्या से उन्हें ढूँढ़ने में सहायता मिलती है तथा उनका उल्लेख सरलता से किया जा सकता है।

2. शीर्षक (Title):
प्रत्येक सारणी में संख्या के बाद सबसे ऊपर उसका शीर्षक दिया जाना चाहिए। शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ताकि तुरंत ही ध्यान आकर्षित कर सके। शीर्षक सरल, स्पष्ट और छोटा होना चाहिए। शीर्षक इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पढ़ते ही ज्ञात हो जाए कि –

  • आँकड़े किस समस्या (What) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस समय (When) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस स्थान (Where) से संबंधित हैं।
  • आँकड़ों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है। एक अच्छा शीर्षक छोटा, परंतु पूर्ण होता है।

3. शीर्ष टिप्पणी (Head Note):
यदि शीर्षक से पूरी सूचना प्रकट नहीं होती तो उसके तुरंत नीचे शीर्ष टिप्पणी (Head Note) दी जाती है। इसमें एक अतिरिक्त सूचना दी जाती है जो शीर्षक में नहीं दी जा सकी। उदाहरण के लिए शीर्षक टिप्पणी में यह बताया जाता है कि आँकड़े किस इकाई में व्यक्त किए गए हैं। उन्हें कोष्ठक (Brackets) में लिखा जाना चाहिए।

4. पंक्ति शीर्षक (Stubs):
सारणी की पंक्तियों (Rows) के शीर्षक को पंक्ति शीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा सरल भाषा में ज्ञात होता है कि पंक्तियों द्वारा क्या दिखाया जा रहा है।

5. उपशीर्षक (Caption):
सारणी के स्तंभों (Columns) के शीर्षक को उपशीर्षक कहा जाता है। इसके शीर्षक से यह ज्ञात होता है कि कॉलम मद की किस विशेषता को बता रहे हैं।

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प्रश्न 7.
अंतर बताएँ।

  1. दंड आरेख तथा (Bar diagram)
  2. आयत चित्र (Histogram)

उत्तर:
दंड आरेख तथा आयत चित्र में अंतर (Difference between bar diagram and histogram):
दंड ओरख वह आरेख है जिसमें आँकड़ों को दंडों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। दंडों की ऊँचाई चरों के मूल्यों पर निर्भर करती है जबकि इनकी चौड़ाई केवल आरेख को आकर्षक बनाने के लिए ली जाती है। दंडों के बीच दूरी समान होती है।

ये सामान्यतः व्यक्तिगत मूल्यों, कालश्रेणियों, भौगोलिक श्रेणियों को प्रदर्शित करने में प्रयोग में लाई जाती हैं। इसके विपरीत आयत चित्र आवृत्ति वितरण को प्रस्तुत करता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को आवृत्तियों के समीपवर्ती (Adjacent) आयतों में प्रकट किया जाता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को X अक्ष पर लेते हैं तथा आवृत्तियों को Y अक्ष पर लेते हैं।
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प्रश्न 8.
आरेखों द्वारा सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आरेखों के लाभ (Advantages of Diagrams):
यह सर्वविदित है कि जैसे-जैसे समंकों का जमघट अधिक होता जाता है, उन्हें समझने में असुविधा होती है तथा समय लगता है। जनसाधारण अंकों में रुचि नहीं रखते हैं। यदि हम अपनी बातों को अंकों के द्वारा समझने की बजाय किसी अन्य सरल साधन द्वारा समझाने का प्रयत्न करें, जहाँ अंकों का कम-से-कम प्रयोग किया गया हो, तो हमारी बात जनसाधारण के लिए सरल, समझने तथा याद करने के योग्य हो जाती है। आरेखों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –

1. सरल (Simple):
आरेखों की सहायता से जटिल आँकड़ों को सरल तथा सुबोध बनाया जा सकता है।

2. समझने में सुगमता (Easy to understand):
आरेखों को समझने के लिए विशेष शिक्षा या ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।

3. समय व श्रम की बचत (Saving of time and labour):
आरेखों की सहायता से आँकड़ों को समझने में बहुत कम समय लगता है।

4. अधिक समय तक स्मरणीय (Memorable for a long time):
अंकों को कुछ समय बाद भूल जाना स्वाभाविक है, लेकिन आरेखों द्वारा आँकड़ों की एक ऐसी छाप मस्तिष्क पर पड़ जाती है कि आँकड़े बहुत दिनों तक याद रहते हैं।

5. आरेख आकर्षक होते हैं (Diagrams are attractive):
अंकों की अपेक्षा रेखाचित्र अधिक आकर्षक होते हैं। इसलिए मेलों, प्रदर्शनियों आदि में जनता को प्रभावित करने के आरेखों का प्रयोग अधिक उपयोगी होता है।

6. तुलना में सहायक (Easy to comprison):
रेखाचित्रों की सहायता से सांख्यिकी सामग्री में तुलना बहुत सरल हो जाती है। उदाहरणार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के पिछले वर्ष और इस वर्ष के परीक्षा परिणामों की तुलना रेखाचित्रों द्वारा बड़े सुचारु रूप से की जा सकती है।

7. सूचना प्रसार में सहायक (Publicity):
रेखाचित्रों द्वारा सूचना प्रसार आसानी से किया जा सकता है।

8. सृजनात्मक मनोरंजन (Creative entertainment):
रेखाचित्र सूचना प्रदान करने के साथ-साथ मनोरंजन भी करते हैं। अंकों को देखने से जहाँ आँखें तिलमिला जाती हैं, वहाँ आरेखों को देखने से रुचि बढ़ती है और मनोरंजन भी हो जाता है।

9. सार्वभौमिक उपयोगिता (Universal Utility):
विभिन्न लाभों के कारण अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकी रेखाचित्रों का बहुत प्रयोग होता है। व्यापार, वाणिज्य तथा विज्ञापन के क्षेत्र में से बहुत उपयोगी और महत्त्वपूर्ण होते हैं। इस प्रकार रेखाचित्रों की उपयोगिता सार्वभौमिक है। ये सभी क्षेत्रों में नवजीवन प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 9.
सारणीयन के लाभ लिखें।
उत्तर:
सारणीयन के लाभ (Advantages of tabulation):

1. समझने में सरलता (Easy to understand):
सारणी से आंकड़ों को सरलता से समझा जा सकता है, क्योंकि सारणी आंकड़ों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

2. संक्षिप्त (Simple):
सारणी द्वारा अव्यवस्थित आंकड़ें कम-से-कम स्थान में इस प्रकार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं कि उनसे अधिक-से-अधिक सूचना प्राप्त हो सके।

3. तुलना में सुविधा (Convenient in comparision):
सारणी द्वारा आंकड़ों को विभिन्न वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। अतः उनकी तुलना करना सुविधाजनक हो जाता है।

4. प्रस्तुतीकरण में सहायक (Helpful Presentation):
सारणी की सहायता से ही आँकड़ों को आरेखों तथा रेखा-आरेखों द्वारा आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कराना संभव हो जाता है।

5. विश्लेषण में सहायक (Helpful in Analysis):
सारणी द्वारा आँकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलती है। आँकड़ों को सारणी के रूप में व्यवस्थित करके ही माध्य (Mean), उपकिरण (Dispersion) आदि ज्ञात किए जाते हैं।

6. आँकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं (Clarifies the Chief Charactetistic of Data):
सारणी द्वारा आकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं। आँकड़ों को याद रखना भी सरल हो जाता है।

7. बचत (Economic):
सारणी द्वारा आँकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप समय तथा कागज की बचत होती है। आवश्यक आँकड़ों को आसानी से ज्ञान किया जा सकता है।

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प्रश्न 10.
आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण में विवरणात्मक तथा सारणीयन विधियों की तुलना करें।
उत्तर:
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण कई विधियों से किया जा सकता है। उनमें दो विधियाँ विवरणात्मक विधि तथा सारणीयन विधि है। विवरणात्मक विधि से आँकड़ों का विवरण दिया जाता है जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2002 के अनुसार भारत में 2000-2001 में खाद्यान्नों का उत्पादन 2000 मिलियन टेन था। जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमशः 85.5, 69.0 और 45.5 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42.75%, 34.50% और 22.75% था।

सारणीयन विधि में ऊपर दिए आँकड़ों को एक सारणी में प्रस्तुत किया जाता है ताकि आंकड़ों को सरलता से समझे जा सके। ऊपर दिए गए तथ्यों को सारणी में निम्न प्रकार प्रस्तुत कर सकते है –
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए। (Write short notes on)
(अ) विवतर्मुखी वर्ग
(ब) असमान वर्गान्तर
(स) संचयी आवृत्ति वितरण।
उत्तर:
(अ) विवतर्मुखी वर्ग-विवतर्मुखी वर्ग वह है जिसमें या तो निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की ऊपरी सीमा को छोड़ा है। इस प्रकार के वर्गों का प्रयोग बहुत कम होता है, क्योंकि विवतर्मुखी वर्ग का मध्य मूल्य नहीं ज्ञात कर सकते। उदाहरणार्थ – 10 से कम, 10-20, 20-30, 30-40, 40 और अधिक।

(ब) असमान वर्गान्तर-असमान वर्गान्तर से अभिप्राय ऐसी अखंडित श्रृंखला से है जिसमें वर्गों के बीच का अंतर एक समान नहीं होता। हम ऐसे वर्गों की आवृत्ति की तुलना नहीं कर सकते। आवृत्तियों की तुलना करने के लिए हम वर्गान्तरों को समान मानकर आवृत्तियों की पुनर्गणना द्वारा प्रत्येक वर्ग की आवृत्तियाँ ज्ञात करके तुलना करते हैं।

(स) संचयी आवृत्ति वितरण-जब विभिन्न मूल्यों की आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर रखा जाता है तो उसे संचयी आवृत्ति वितरण कहते हैं। स्पष्ट है कि अंतिम वर्ग की संचयी आवृत्ति सब वर्गों की आवृत्तियों का योगफल होता है। संचयी आवृत्ति वितरण को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है –

  • से कम (Less than type)
  • से अधिक (More than type)।

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प्रश्न 12.
संचयी आवृत्ति वितरण किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति वितरण (Cumulative frequency distribution):
संचयी आवृत्ति वितरण उस आवृत्ति वितरण को कहते हैं, जिसमें आवृत्तियों को सरल विधि से वर्गानुसार अलग-अलग न लिखकर संचयी रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार के आवृत्ति वितरण के अन्तर्गत केवल एक सीमा (निचली, ऊपरी) दी जाती है। यदि वर्ग समूह में निचली सीमा के आधार पर संचयी आवृत्ति दी गई है तो ‘से कम’ शब्दों का प्रयोग लिख कर किया जाता है। दोनों पर की गई संचयी आवृत्तियों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं।
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संचयी आवृत्ति वितरण का महत्त्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाता है:

  1. संचयी आवृत्ति वितरण की सहायता से हम किसी दिए गए चर से कम या अधिक मूल्य ज्ञात कर सकते हैं।
  2. विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।
  3. किसी वर्गान्तर विशेष में सम्मिलित मदों की संख्या भी ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 13.
आयत बहुभुज बनाने के लिए असमान वर्गान्तर पर आवृत्तियों का संशोधन क्यों किया जाता है? आवृत्तियों को संशोधित करने की विधि लिखो।
उत्तर:
बड़े वर्गान्तर को न्यूनतम वर्गान्तर के बराबर लाने के लिए आवृत्तियों में संशोधन किया जाता हैं। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और उच्च वर्ग (40 – 70) में वर्गान्तर 30 है और उसकी आवृत्ति 15 है। अत: 40 – 70 वर्ग के तीन वर्ग 40 – 50, 50 – 60 तथा 60 – 70 बनते हैं और उनकी आवृत्तियाँ 15 तीन वर्गों में बँट जाती हैं और प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति 5(5 + 5 + 5) होती है। आवृत्तियों में संशोधन करने के लिए न्यूनतम वर्गान्तर लेते हैं। कोई वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर किया जाता है –
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आँकड़ों को एक आयत चित्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक आयत चित्र बनाइए।
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उत्तर:
प्रश्न में वर्गान्तर समावेशी विधि (Inclusive method) द्वारा दिए गए हैं। अतः इनमें पहले संशोधन करना आवश्यक होगा ताकि समीपवर्ती आयतें बन जाएँ।
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प्रश्न 16.
भारत सरकार को पिछली तीन वर्षों के दौरान करों से प्राप्त आगम के बारे में निम्न जानकारी उपलब्ध है –
वर्ष 1997 – 98 में सरकार को कर-आगम के रूप में कुल 77,693 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई। इसमें से 11,165 करोड़ रुपए प्रत्यक्ष करों तथा 66,528 करोड़ रुपए परोक्ष करों के रूप में प्राप्त हुए। वर्ष 1998-99 में यह राशि क्रमशः 89,303 करोड़ रुपए, 13,397 करोड़ रुपए तथा 75,906 करोड़ रुपए थी। 1999-2000 में कुल राशि। 1.02,896 करोड़ रुपए तथा प्रत्यक्ष तथा परोक्ष करों का योगदान क्रमशः 15,338 करोड़ रुपए तथा 87,558 करोड़ रुपए था।
उत्तर:
भारत सरकार को करों से प्राप्त आगम
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प्रश्न 17.
भारत में चीनी निर्यात से आय के आँकड़े नीचे दिए गए हैं। इन्हें निरपेक्ष कालिक आरेख में प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
X अक्ष पर वर्ष और Y अक्ष पर आय (करोड़ रुपए में) प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक वर्ष के सामने आय के चिह्नों को लगाइए, फिर चिह्नों को छूती हुई रेखा बनाइए। इस आरेख को निरपेक्ष कालिक आरेख कहते हैं, जैसा कि नीचे आरेख में दिखलाया गया है।
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प्रश्न 18.
द्विवीय आरेख (Two dimentional) किसे कहते हैं? नीचे दो परिवारों के आय-व्यय सम्बन्धी आँकड़ें दिए गए हैं। उन्हें द्विवीम आरेख द्वारा निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष रूप में दिखाएँ।
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उत्तर:
द्वितीय आरेख उस रेखाचित्र को कहते हैं जिसमें लम्बाई के साथ-साथ चौड़ाई को भी दिखाया जाता है। चौड़ाई कुल मूल्यों के अनुपात में होती है। इन्हें निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष (Relative) दो रूपों में दिखाया जा सकता है। निरपेक्ष में दिए गए मूल्यों को आरेख में प्रदर्शित करते हैं जबकि सापेक्ष द्विविम आरेख के मूल्यों को प्रतिशत में बदलकर प्रतिशत खंड़ों में काटकर लिखते हैं।

सापेक्ष द्विविम आरेख (Relative Two Dimensional):
तुलनात्मक अध्ययन के लिए मूल्यों को प्रतिशत में बदल लेते है। इस प्रकार ऊँचाई समान हो जाती है और चौड़ाई कुल व्यय के अनुपात में रखी जाती है।
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निरपेक्ष द्विविम आरेख (Absolute Two Dimensional):
आय का अनुपात 500:1000 = 1:2
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प्रश्न 19.
भारत में 1951, 1961, 1971, 1981 और 1991 तथा 2001 की जनगणना में कुल जनसंख्या क्रमशः 361, 38, 439, 23, 548, 16, 683.3, 843.9 तथा 1020 मिलियन थी। कुल जनसंख्या में पुरुषों की संख्या क्रमश: 185.68, 226.29, 284.05, 353.9, 441.8 तथा 530 मिलियन थी तथा स्त्रियों की संख्या क्रमशः 175.70, 212.94, 264.11, 329, 4, 402.1 तथा 490 मिलियन थी। इन आँकड़ों को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या (Population of India) दस लाख में।
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प्रश्न 20.
भारत में 2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन 172.25 मिलियन टन था, जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमश: 70, 76, 53.99 और 45.0 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42, 0, 32.0 तथा 26.0 था। दी गई सूचना को एक उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन
(Production of Food-grain during 2004 – 2005):
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित विवरण को एक तालिका में प्रदर्शित करें भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत की जनसंख्या बढ़कर 102 करोड़ हो गई, जिसमें 49 करोड़ महिलाएँ हैं और 53 करोड़ पुरुष हैं। 74 करोड़ लोग ग्रामीण भारत में रहते हैं और केवल 28 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं। सम्पूर्ण भारत में 62 करोड़ लोग काम करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और 47 करोड़ लोग काम करने वाले हैं। शहरी जनसंख्या में 19 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी नहीं हैं और 9 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 74 करोड़ लोगों में 31 करोड़ काम पर लगे हुए हैं। इस सूचना को एक तालिका द्वारा दिखाएँ।
उत्तर:
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
समंकों को खानों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित करने को कहते हैं –
(a) वर्गीकरण
(b) सारणीयन
(c) चित्रमय प्रदर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणीयन

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प्रश्न 2.
एक अच्छी सारणी की विशेषता है –
(a) सुन्दर
(b) स्वर्य परिचायक
(c) संक्षिप्त
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
निम्न में कौन अधिक प्रभावशाली होती/होता है –
(a) सारणी
(b) त्रिमय प्रदर्शन
(c) वर्गीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रिमय प्रदर्शन

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प्रश्न 4.
दो या अधिक चरों के मूल्यों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है –
(a) दण्ड चित्र
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र
(c) अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र

प्रश्न 5.
चित्रमय प्रदर्शन की उपयोगिता है –
(a) सार्वभौमिक
(b) राष्ट्रीय
(c) स्थानीय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सार्वभौमिक

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प्रश्न 6.
सारणी स्रोत लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सारणी के नीचे

प्रश्न 7.
सारणी शीर्षक को प्रायः लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणी के ऊपर

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प्रश्न 8.
चित्रमय प्रदर्शन का सबसे सरल रूप है –
(a) सरल दण्ड चित्र
(b) वृत्त चित्र
(c) चित्र व लेख
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सरल दण्ड चित्र

प्रश्न 9.
कालिक चित्र में आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) यथातथ्य रूप में
(b) प्रतिशत में
(c) अनुपात में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्रतिशत में

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प्रश्न 10.
आवृत्ति वितरण आयत चित्र बनाए जाते हैं –
(a) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(b) अखण्डित श्रृंखला में
(c) खण्डित श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अखण्डित श्रृंखला में

प्रश्न 11.
आवृत्ति आयत चित्र में आवृत्तियों का दर्शाया जाता है –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

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प्रश्न 12.
आवृत्ति आयत चित्र में वर्गान्तराल दर्शाए जाते हैं –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

प्रश्न 13.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय ध्यान रखा जाता है –
(a) उपयुक्त शीर्षक
(b) पैमाना
(c) कृत्रिम आधार रेखा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

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प्रश्न 14.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय x – अक्ष पर दर्शाते हैं –
(a) वर्ग अंतराल
(b) आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वर्ग अंतराल

प्रश्न 15.
आवृत्ति वक्र के अंदर क्षेत्र समानुपाती है –
(a) आवृत्तियों के
(b) वर्ग अंतरालों के
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्तियों के

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प्रश्न 16.
काल श्रेणी आरेख के x-अक्ष पर दर्शाया जाता है –
(a) चर मूल्य
(b) समय
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समय

प्रश्न 17.
समावेशी श्रृंखला से आयत चित्र बनाने के लिए इस श्रृंखला को दिलाते हैं –
(a) अपवर्जी श्रृंखला में
(b) खंडित श्रृंखला में
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अपवर्जी श्रृंखला में

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प्रश्न 18.
‘से अधिक’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ऋणात्मक

प्रश्न 19.
‘से कम’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक