Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 Text Book Questions and Answers.

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[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

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प्रश्न 1.
उस गोले का आयतन ज्ञात कीजिए जिसकी त्रिज्या निम्न है:
(i) 7 m
(ii) 0.63 m
उत्तर:
(i) दिया है, r = 7 cm
गोले का आयतन = \(\frac{4}{3}\) πr³ = \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 × 7
= 1437\(\frac{1}{3}\) cm³.

(ii) गोले का आयतन = \(\frac{4}{3}\) πr³
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 0.63 × 0.63 × 0.63
= 1.05 m³.

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प्रश्न 2.
अठोस गोलाकार गेंद द्वारा हटाए गए(विस्थापित) पानी का आवतन ज्ञात कीजिए, जिसका व्यास निम्न है:
(i) 28 cm
(ii) 0.-21 m
उत्तर:
(i) दिया है, व्यास = 28 m, प्रिया (r) = 14 cm
गेंद का विस्थापित पानी का आयतन = गेंद का आयतन
= \(\frac{4}{3}\) πr³ = \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14 × 14
= \(\frac{34496}{3}\) = 11498\(\frac{2}{3}\) cm³

(ii) दिया है, व्यास = 21 m,
त्रिच्या (r) = \(\frac{0.21}{2}\) = 0.105 m
गेंद द्वारा विस्थापित पानी का आयतन = गेंद का आयतन
= \(\frac{4}{3}\) πr³
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 0.105 × 0.105 × 0.105
= 0.004851 m³

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प्रश्न 3.
धातु की एक गेंद का व्यास 4.2 cm हैं यदि इस धातु का घनत्य 8.9 ग्राम प्रति cm³ है, तो इस गेंद का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिवा है, गेंद को त्रिज्या
= (\(\frac {व्यास}{2}\)) = \(\frac {4.2}{2}\) = 2.1 cm
अत: गेंद का आयतन = \(\frac{4}{3}\) πr³
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 2.1 × 2.1 × 2.1
= 38.808 cm³
∴ 1 cm³ में धातु का घनत्व = 8.9 ग्राम
∴ 38.808 cm³ में धातु का पनत्व = 38.808 × 8.9
= 345.39 ग्राम। (लगभग)

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प्रश्न 4.
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। चन्द्रमा का आयतन पृथ्वी के आयतन की कौन-सी भिन है?
उत्तर:
दिया है, चन्द्रमा का व्यास (d)
= \(\frac{1}{4}\) × पृथ्वी का व्यान (D)
तो, चन्द्रमा की त्रिज्या (r) = \(\frac{1}{4}\) × पृथ्वी की त्रिज्या (R)
⇒ r = R/4
चन्द्रमा का आयतन (V1) = \(\frac{4}{3}\) π(r)³
= \(\frac{4}{3}\) π (\(\frac{R}{4}\))³ …… (1)
पृथ्वी का आयतन (V2) = \(\frac{4}{3}\) πR³ ……. (2)
समी (1) व (2) से, \(\frac{V_1}{V_2}\) = \(\frac{\frac{4}{3}π(\frac{R}{4})^3}{\frac{4}{3} πR^3}\)
⇒ V1 = \(\frac{1}{4^3}\) = \(\frac{1}{64}\)
⇒ चन्द्रमा का आयतन पृथ्वी का आयतन का \(\frac{1}{64}\) है।

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प्रश्न 5.
व्यास 10.5 cm वाले एक अर्धगोलाकार कटोरे में कितने लीटर दूध आ सकता है?
उत्तर:
दिया है, कटोरे की त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\)
= \(\frac {10.5}{2}\) = 5.25 cm
∴ कटोरे में दूध की क्षमता = कटोरे का आयतन
= \(\frac {2}{3}\)πr³ = \(\frac {2}{3}\) × \(\frac {22}{7}\) × (5.25)³
= 303.18 cm
= (\(\frac {303.18}{1000}\)) लोटर
= 0.30318 लीटर
अत: अर्धगोलाकार कटोरे में 0.30318 लीटर दूध आ सकता है।

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प्रश्न 6.
एक अर्धगोलाकार टंकी 1 cm मोटी एक सोहे की चादर (sheet) से बनी है। यदि इसकी आंतरिक त्रिज्या 1 m है, तो इस टंकी के बनाने में लगे लोहे का आयतन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, आन्तरिक त्रिन्या r = 1 m
मोटाई = 1 cm = 0.01 m
∴ बाहरी त्रिज्या, R = (आंतरिक त्रिन्या + मोटाई)
= (1 + 0.01) = 1.01 m
प्रयुक्त लोहे का आयतन
= बानी अक्तन – अन्तरिक आयतन
= \(\frac {2}{3}\) πR³ – = \(\frac {2}{3}\) πr³
= \(\frac {2}{3}\) π (R³ – r³)
= \(\frac {2}{3}\) × \(\frac {22}{7}\) [(1.01)³ – (1)³]
= 0.06348 m³. (लगभग)

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प्रश्न 7.
अ गोले का आयतन ज्ञात कीजिए जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 154 cm² है।
उत्तर:
माना गोले की त्रिज्या r cm है।
अतः पृष्ठीय क्षेत्रफरल = 154 cm²
⇒ 4 × \(\frac {22}{7}\) × r² = 154
⇒ r = \(\sqrt {\frac{154×7}{4×22}}\)
= 3.5 cm
अत: गोले का आयतन = \(\frac{4}{3}\) πr³
= \(\frac {4}{3}\) × \(\frac {22}{7}\) × (3.5)³
= 179 \(\frac {2}{3}\) cm³.

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प्रश्न 8.
किसी भवन का गुंबद एक अर्थगोले के आकार का है। अंदर से, इसमें सफेदी कराने में Rs 498.96 व्यय हुए। बदि सफेदी कराने की दर Rs 2 प्रति वर्ग मीटर है. तो ज्ञात कीजिए।
(i) गुंबद का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) गुंबद का अंदर की हवा का आयतन।
उत्तर:
(i) गुंबद का आंतरिक वक्र पृष्तीय क्षेत्रफल
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= 249.48 m².

(ii) माना गुंबद की त्रिज्या r है,
∴ पृष्ठीय क्षेत्रफल = 249.48
2πr² = 249.48
⇒ 2 × \(\frac {22}{7}\) × r² = 249.48
⇒ r = \(\sqrt {\frac{249.48×7}{2×22}}\) = 6.3 m
अत: गुंबद के अन्दर हवा का आयतन-गुंबद का अयतन
= \(\frac {2}{3}\) πr³
= \(\frac {2}{3}\) × \(\frac {22}{7}\) × 6.3 × 6.3 × 6.3
= 523.9 m³. (लगभग)

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प्रश्न 9.
लोहे के सत्ताइस ठोस गोलों को पिघलाकर जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या है और पृष्ठीय क्षेत्रफल है, एक बड़ा गोला बनाया जाता है जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल है। ज्ञात कीजिए।
(i) नए गोले की त्रिज्या r’
(ii) S और S’ का अनुपात।
उत्तर:
(i) r त्रिज्या के 27 ठोस गोलों का आयतन
= r’ त्रिज्या के नए गोले का आयतन।
⇒ 27 × \(\frac {4}{3}\) πr³ = \(\frac {4}{3}\) πr’³
⇒ r’ = \(\sqrt[3]{27r^3}\)
⇒ r’ = 3r
अत: नये गोले की त्रिज्या r’ = 3r.

(ii) S तथा S’ का अनुपात = \(\frac {S}{S’}\) = \(\frac {4πr^2}{4π(r’)^2}\) = \(\frac {r^2}{(3r)^2}\)
= \(\frac {r^2}{9r^2}\) = 1 : 9
अन: S तथा S’ में अभीष्ट अनुपात = 1 : 9

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प्रश्न 10.
दवाई का एक कैपसूल (capsule) 3.5 mm व्यास का एक गोला (गोली) है। इस कैपमूल को भरने के लिए कितनी दवाई (mm³ में) की आवश्यकता होगी?
उत्तर:
दिया है, कंपसूल की त्रिज्या
\(\frac {व्यास}{2}\) = \(\frac {3.5}{2}\) =1.75 mm
अत: कैपसूल को भरने के लिए दवाई
= कैपसूल का आयतन
= \(\frac{4}{3}\) πr³
= \(\frac{4}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 × 1.75
= 22.46 mm³. (लगभग)

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.7

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[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

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प्रश्न 1.
उस लम्बवृत्तीय शंकु का आयतन ज्ञात कीजिए, जिसकी
(i) त्रिज्या 6 cm और ऊँचाई 7 cm है।
(ii) त्रिज्या 3-5 cm और ऊँचाई 12 m है।
उत्तर:
(i) दिया है, r = 6 cm तथा h = 7 cm
आयतन = \(\frac{1}{3}\) πr²h = \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 6 × 6 × 7
= 264 cm³

(ii) दिया है, r = 3.5 cm तथा r = 12 cm
आयतन = \(\frac{1}{3}\) πr²h = \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 3.5 × 3.5 × 12
= 154 cm³.

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प्रश्न 2.
शंकु के आकार के उस बल की लीटरों में पारिता ज्ञात कीजिए जिसकी
(i) त्रिज्या 7 cm और तिर्यक ऊँचाई 25 cm है।
(ii) ऊँचाई 12 m और तिर्यक ऊंचाई 13 cm है।
उत्तर:
(i) दिया है. r = 7 m तथा l = 25 m
मला शंकु की ऊँचाई = h
h = \(\sqrt {l^2 – r^2}\) = \(\sqrt {25^ – 7^2}\) = \(\sqrt {576}\)
= 24 cm
शवबांकार वर्तन का आयतन
= \(\frac{1}{3}\) πr²h = \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 × 24
= 1232 cm³
∴ अर्तन की धारिता = (\(\frac{1232}{1000}\)) l = 1.232 लीटर।

(ii) दिया है. h = 12 cm तथा l = 13 cm
माना शंकु की प्रिया = r
r = \(\sqrt {l^2 – h^2}\) = \(\sqrt {13^ – 12^2}\) = 5 cm
शक्वांकार बर्तन का आयतन
= \(\frac{1}{3}\) πr²h = \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 5 × 5 × 12
= \(\frac{2200}{7}\) cm³
∴ वर्तन की धारिता = \(\frac{2200}{7}\) × \(\frac{1}{1000}\) = \(\frac{11}{35}\) लीटर।

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प्रश्न 3.
एक शंकु की ऊंचाई 15 cm है। यदि इसका आयतन 1570 cm³ है, तो इसके आधार की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
दिया है, शंकु की ऊँचाई (h) = 15 cm
माना शंकु के आधार की त्रिज्या = r cm
शंकु का आयतन = 1570
\(\frac{1}{3}\) πr²h = 1570
⇒ r = \(\sqrt{\frac{3×1570}{3.14×15}}\) = 10 cm
अत: आधार की त्रिज्या = 10 cm.

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प्रश्न 4.
यदि 9 cm ऊँचाई वाले एक लंबवृत्तीय शंकु का आयतन 48 π cm³ है, तो इसके आधार का व्यास ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, शंकु की ऊंचाई (h) = 9 cm
शंकु का आयतन (V) = 48 π cm³
\(\frac{1}{3}\) πr²h = 48π
⇒ r = \(\sqrt{\frac{48×3}{9}}\) = 4 cm
अत: आधार का व्यास = 2r = 2 × 4 = 8 cm.

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प्रश्न 5.
ऊपरी व्यास 3.5 m वाले शंकु के आकार का एक गइट 12 m गहरा है। इसकी पारिता किलोलीटरों में कितनी है?
उत्तर:
दिया है, शंकु की त्रिव्या (r)
= \(\frac {व्यास}{2}\) = \(\frac {3.5{2}\) = 1.75 m
गड्डे की गहराई (h) = 12 m
धारिता = आयतन =\(\frac{1}{3}\) πr²h
= \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 × 12
= 38.5 m
शंक्वाकार गड्डे की धारिता = 38.5 किलोलीटर

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प्रश्न 6.
एक लंबवृत्तीय शंकु का आयतन 9856 cm³ है। यदि इसके आधार का व्यास 28 cm है, तो ज्ञात कीजिए।
(i) शंकु की ऊंचाई
(ii) शंकु की तिर्थक ऊँचाई
(iii) शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल।
उत्तर:
दिया है, त्रिन्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = \(\frac {28}{2}\) = 14 cm
(1) आयतन = 9856 = \(\frac{1}{3}\) πr²h
h = \(\frac {9856×3×7}{14×14×22}\) = 48 cm
अत: शंकु की ऊँचाई = 48 cm.

(ii) माना, तिर्यक ऊँचाई = l
l = \(\sqrt {h^2 + r^2}\) = \(\sqrt {2304 + 196}\) = 50 cm
अत: शंक की तिर्यक ऊँचाई = 50 cm.

(iii) शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac {22}{7}\) × 14 × 50
= 2200 cm³.

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प्रश्न 7.
भुजाओं 5 cm, 12 cm और 13 cm वाले एक समकोण त्रिभुज ABC को भुजा 12 cm के परितः पुमाया जाता है। इस प्रकार प्राप्त ठोस का आयतन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
समकोण ∆ABC को भुजा AB के परित: घुमाने पर हमें एक शंकु प्राप्त होता है।
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इस प्रकार बने ठोस का मायतन
V = \(\frac{1}{3}\) πr²h
⇒ V = \(\frac{1}{3}\) π × 5 × 5 × 12
= 100 π cm³.

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प्रश्न 8.
यदि प्रश्न 7 के प्रिभुज ABC को यदि भुजा 5 cm के परितः घुमाया जाए, तो इस प्रकार प्राप्त ठोस का आयतन ज्ञात कीजिए। प्रश्नों 7 और 8 में प्राप्त किए गए दोनों ठोसों के आयतनों का अनुपात भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
यदि ∆ABC को भुजा 5 cm के परितः घुमाया जाए तो शंकु प्राप्त होगा जिसकी त्रिज्या 12 cm होगी।
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अतः प्राप्त तोस का आयतन = \(\frac{1}{3}\) πr²h
= \(\frac{1}{3}\) π × 12 × 12 × 5
= 240 π cm³
अतः आयतनों का अनुपात = 100 π : 240 π = 5 : 12.

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प्रश्न 9.
गेहूँ की एक ढेरी 10.5 m व्यास और ऊंचाई 3 m वाले एक शंकु के आकार की है। इसका आयतन ज्ञात कीजिए। इस जेरी को वर्षा से बचाने के लिए केनवास से उका जाना है। वांछित केनवास का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, शंकु के आधार की त्रिज्या (r)
= \(\frac {व्यास}{2}\) = \(\frac {10.5}{2}\) = 5.25 m
ऊँचाई h = 3 m
अत: देर का आयतन = \(\frac{1}{3}\) πr²h
= \(\frac{1}{3}\) × \(\frac{1}{3}\) × 5.25 × 5.25 × 3
= 86.625 m³.
माना ढेर को तिर्यक ऊँचाई = l
l² = h² + r²
= 3² + (5.25)²
= 36.5625 m²
⇒ l = \(\sqrt {36.5625}\)
= 6.0467.
अत: ठर कोकने के लिए आवश्यक केनवास = चक्र पृष्ठ
= πrl
= \(\frac{1}{3}\) × 5.25 × 6.0467
= 99.77 m²

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[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

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प्रश्न 1.
एक बेलनाकार वर्तन के आधार की परिधि 132 cm और उसकी ऊँचाई 25 cm है। इस बर्तन में कितने लीटर पानी आ सकता है? (1000 cm³ = 1 लीटर)
उत्तर:
दिया है, h = 25 cm
तथा आधार की परिधि = 2πr = 132
r = \(\frac{132×7}{2×22}\) = 21 cm
अत: वर्तन की माता = बेलनाकार कान का आपतन
= πr²h = \(\frac{22}{7}\) × 21 × 21 × 25 = 14650 cm³
= \(\frac{34650}{1000}\) = 34.65 लीटर।

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प्रश्न 2.
लकड़ी के एक बेलनाकार पाइप का आंतरिक व्यास 24 cm है और बाहरी व्यास 28 cm है। इस पाइप की लंबाई 35 cm है। इस पाइप का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए, यदि 1 cm³ लकड़ी का द्रव्यमान 06 ग्राम है।
उत्तर:
दिया है, आंतरिक प्रिया = \(\frac {व्यास}{2}\) = 12 cm.
बाहरी त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 14 cm
पादप के लिए लकड़ी का आयतन
= बाहरी बेलन का आयतन – भीतरी बेलन का आवतन
= πR²h – πr²h = πh (R² – r²)
= \(\frac{22}{7}\) × 35 (14² – 12²) = 5720 cm²
1 cm³ लकड़ी का द्रव्यमान = 0.6 ग्राम
5720 cm³ लकड़ी का द्रव्यमान = 5720 × 0.6
= 3432 ग्राम = 3.432 किग्रा।

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प्रश्न 3.
एक सोफ्ट डिंक (soft drink) दो प्रकार के पैकों में उपलब्ध है-
(i) लंबाई 5 cm और चौड़ाई 4 m वाले एक आयताकार आधार का दिन का डिब्बा जिसकी ऊंचाई 15 cm है और
(ii) व्यास 7 cm वाले वत्तीय आधार और 10 cm ऊँचाई वाला एक प्लास्टिकका बेलनाकार डिब्या। किस डिब्बे की थारिता अधिक है और कितनी अधिक है?
उत्तर:
दिया है. l = 5 cm, b = 4 cm तथा h = 15 cm
टिन के डिब्बे की भारिता = lbh = 5 × 4 × 15
= 300 cm³
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(ii) दिया है, व्यास = 7 cm, त्रिज्या r = \(\frac{7}{2}\) cm ऊँचाई h = 10 cm
प्लास्टिक के डिब्बे का आयतन = πr²h
\(\frac{22}{7}\) × \(\frac{7}{2}\) × \(\frac{7}{2}\) × 10 = 385 cm³
अत: प्लास्टिक के डिब्बे की धारिता 385 – 300 = 85 cm³ अधिक है।

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प्रश्न 4.
यदि एक बेलन का पावं पृष्ठीय क्षेत्रफल 94.2 cm² है और उसकी ऊँचाई 5 cm है, तो ज्ञात कीजिए:
(i) आधार की त्रिज्या
(ii) बेलन का आयतन (π = 3.14)
उत्तर:
(i) दिल है. h = 5 cm
∴ पार्श्व क्षेत्रफल = 94.2
2πrh = 94.2
⇒ 2 × 3.14 × r × 5 = 94.2
⇒ r = \(\frac{94.2}{31.4}\) ⇒ r = 3

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = 3.14 × (3)² × (5)
= 141.3 cm³.

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प्रश्न 5.
10 m गहरे एक बेलनाकार बर्तन की आंतरिक वक़ पृष्ठको पेंट कराने का व्यय Rs 2,200 है। यदि पेंट कराने की दर Rs 20 प्रति m² है, तो ज्ञात कीजिए
(i) बर्तन का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आधार की प्रिज्या
(iii) बर्तन की धारिता।
उत्तर:
(i) आंतरिक वन पृष्टीय क्षेत्रफल
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= 110 m²

(i) बर्तन का वक्रपृष्ठ = 110
2πrh = 110
⇒ 2 × \(\frac{22}{7}\) × r × 10 = 110
⇒ r = 1.75 m

(iii) वर्तन की धारिता
= πr²h = \(\frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 × 10
= 96.25 m³

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प्रश्न 6.
ऊँचाई 1 m वाले एक बेलनाकार वर्तन की धारिता 15.4 लीटर है। इसको बनाने के लिए कितने वर्ग मीटर धातु की आवश्यकता होगी?
उत्तर:
दिया है, बेलन की धारिता = 15.4 लीटर = 0.0154 m³.
आयतन = πr²h = πr²
⇒ πr² = 0.0154
⇒ r = \(\sqrt{\frac{0.0154}{π}}\) = 0.7 m
अत: बर्तन के निर्माण हेतु आवश्यक शीट
= वनि का कुल पृष्टीय क्षेत्रफल
= 2 πrh + 2πr² = 2πr(r + h)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 0.07 (0.07 + 1) = 0.4708 m²

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प्रश्न 7.
सीसे की एक पेंसिल (lead pencil) लकड़ी के एक बेलन के अभ्यंतर ग्रेफाइट (graphite) से बने ठोस बेलन को डालकर बनाई गई है। पेंसिल का व्यास 7 mm है और बेफाइट का व्यास 1 mm है। यदि पसिल की लंबाई 14 cm है, तो लकड़ी का आयतन और ग्रेफाइट का आयतन जात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, शेफाइट की त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = \(\frac {1}{2}\) mm = \(\frac {1}{20}\) नया लम्बाई = 14 cm
वेलन का आयतन = (πr²h)
= \(\frac {22}{7}\) × \(\frac {1}{20}\) × \(\frac {1}{20}\) × 14
= 0.11 cm³
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पेंसिल की त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\)
= (\(\frac {0.7}{2}\)) cm
पेंसिल का आयतन = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × \(\frac {0.7}{2}\) × \(\frac {0.7}{2}\) × 14
= 53.9 cm³
अतः लकड़ी का आयतन
= पेंसिल का आयतन – ग्रेफाइट का आदतन
= 5.39 – 0.11 = 5.28 cm³.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6

प्रश्न 8.
एक अस्पताल (Hospital) के एक रोगी को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले एक बेलनाकार कटोरे में सूप (Soup) दिया जाता है। यदि एक कटोरा सूप से 4 cm ऊंचाई तक भरा जाता है, तो इस अस्पताल में 250 रोगियों के लिए प्रतिदिन कितना सूप तैयार किया जाता है?
उत्तर:
कटोरे की त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\)
= \(\frac {7}{2}\) cm
सबिग द्वारा दिया जाने वाला सूप = कटोरे का आयतन
= πr²h = \(\frac {22}{7}\) × = \(\frac {7}{2}\) × \(\frac {7}{2}\) × 4
= 154 cm³
अत: 250 रोगियों के लिए सूप = 250 × 154
= 38500 cm³ या 38.5 लीटर।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 6 जीवन के विभिन्न आयाम

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 6 जीवन के विभिन्न आयाम Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 6 जीवन के विभिन्न आयाम

Bihar Board Class 6 Social Science जीवन के विभिन्न आयाम Text Book Questions and Answers

अभ्यास

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न (क)
वेदों की कुल संख्या कितनी है ?
(i) 3
(ii) 4
(iii) 5
(iv) 8
उत्तर-
(ii) 4

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 6 जीवन के विभिन्न आयाम

प्रश्न (ख)
पुरुषसुक्त का उल्लेख किस वेद में है ?
(i) ऋग्वेद
(ii) सामवेद
(iii) यजुर्वेद
(iv) अथर्ववेद
उत्तर-
(i) ऋग्वेद

प्रश्न (ग)
ऋग्वैदिक काल का प्रमुख व्यवसाय क्या था?
(i) कृषि
(ii) पशुपालन
(iii) शिल्प
(iv) उद्योग
उत्तर-
(i) कृषि

प्रश्न (घ)
इनामगाँव किस राज्य में स्थित है?
(i) बिहार
(ii) उत्तर प्रदेश
(iii) पजाब
(iv) महाराष्ट्र
उत्तर-
(iv) महाराष्ट्र

II. खाल स्थान भर

  1. का विस्तार बिहार के ………….. नदी तक था।
  2. यस प्राचीन वद ……………… है। ।
  3. वदिक आय ………. अनाज पैदा करत या
  4. इनामगाँव एक …………….. बस्ती है।
  5. वैदिक कबीले के प्रधान को …………… कहा जाता था।

उत्तर-

  1. आर्यों का विस्तार बिहार के गंडक नदी तक था।
  2. सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद है।
  3. ऋग्वैदिक आर्य ‘यव’ अनाज पैदा करते थे।
  4. इनामगाँव एक ताम्रपाषाण बस्ती बस्ती है।
  5. वैदिक कबीले के प्रधान को सरदार कहा जाता था ।

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III. अपने उत्तर “हाँ” या “नहीं ” में, दें :

  1. ऋग्वैदिक आर्य पशुपालन करते थे। – (हाँ)
  2. आर्यों के जीवन में गाय एवं घोड़ा का महत्वपूर्ण स्थान था। – (हाँ)
  3. वैदिक क्षेत्र तमिलनाडु तक विस्तृत था। – (नहीं)
  4. आर्य लोग नगरों में निवास करते थे। – (नहीं)
  5. इनामगाँव के लोग मृतकों को जला देते थे। – (हाँ)

IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखें।

प्रश्न (क)
वेदों के नाम लिखें
उत्तर-
ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद

प्रश्न (ख)
आर्य लोग भारत के किन-किन क्षेत्रों में निवास करते थे ?
उत्तर-
आर्य लोग भारत के पंजाब, गंगा और यमुना के क्षत्रों तथा बिहार के गंडक नदी के क्षेत्र तक निवास करते थे।

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प्रश्न (ग)
उत्तरवैदिक कालीन समाज का उल्लेख करें।
उत्तर-
उत्तरवैदिक काल में लोग सबसे ज्यादा कृषि पर ध्यान देते थे। जनपदों का उदय हुआ। लोग खेती करते थे, चावल, गेहें जो मुख्य था। व्यवसाय जिनमें धातुकर्म, धातुशोधन, रथकार, स्वर्णकार, कुम्हार ये व्यापारी थे। धार्मिक आस्थाएँ थीं। ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ अनुष्ठान होता था। ब्राह्मणों का बोल-वाला था। ऊँच-नीच का भेद-भाव था।

प्रश्न (घ)
इनामगाँव के लोग मृतकों का अंतिम संस्कार किस प्रकार करते थे । प्रकाश डालें।
उत्तर-
इनामगाँव की ताम्रपाषाण संस्कृति के लोगों का सबस रोचक पहलू मृतकों को दफन करने का तरीका था । सामान्यतः मृतका को मिट्टी के बर्तनों के साथ दफनाया जाता है, जिनमें शायद खान-पान की वस्तुएं रखी होती थीं। कडा में मृतक के साथ औजार एव हाधयार गहने आदि भी खुदाई में मिल है।

V. आआ चर्चा करें

प्रश्न (1)
आर्य जिन देवताआ की पूजा करत थ उनम कुछ की सूची बनायें तथा यह बताये कि इनमें किन-किन देवताओं को पूजा आजकल की जाती ?
उत्तर-
हन्द्र, वरूण, आदिती. अग्नि, सोम, सूर्य वाय देवा-वदता का पूजा करता
इन् वरुण, अग्नि. सूर्य की पूजा आज माहाता है।

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प्रश्न (2)
ऋग्वैदिक आयं खेती नही करते । इसक कारण बताय।
उत्तर-
ऋग्वैदिक काल में आर्य खेती नहीं करते थे। इसका कारण है कि व पशुपालन पर ज्यादा ध्यान देते थे, पशुआ के भोजन के लिए वे एक जगह पर ज्यादा दिन तक ठहर नहीं पाते। बार-बार स्थान . बदलना पडता, यही मुख्य कारण था।

Bihar Board Class 6 Social Science जीवन के विभिन्न आयाम Notes

पाठ का सारांश

  • राजत्व की दैवी उत्पत्ति के सिद्धांत की चर्चा उत्तर वैदिक काल के साहित्य में मिलती है।
  • ऋग्वेद के परवर्तीकालीन (अंत के समय में) पुरुष सूक्त में ब्राह्मण, राजन्य (क्षत्रिय), वैश्य एवं शूद्र, अर्थात चार वर्ण, की कल्पना की गई।
  • उत्तर वैदिक काल स्पष्टतः वर्ण व्यवस्था पर आधारित था।
  • वैदिक काल में शिक्षा मौखिक रूप से दी जाती थी, शिक्षार्थियों से वेदों के मूल पाठ को कंठस्थ करवाया जाता था।
  • विद्यार्थियों को गुरु के आश्रम में 12 वर्षों तक रहना पड़ता था।
  •  वेद चार हैं-ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद।
  • वेद को श्रुति (सुना हुआ) भी कहते हैं।
  • वेद की भाषा को प्राक् संस्कृत या वैदिक संस्कृत कहते हैं।
  • संस्कृत भाषा भारोपीय (भारत-यूरोप) भाषा वर्ग का अंग है।
  • भारत की अनेक भाषाएँ- असमिया, गुजराती, हिन्दी, कश्मीरी और सिंधी तथा यूरोप की बहुत-सी भाषाएँ जैसे-अंग्रेजी, फ्रांसीसी, जर्मन, ग्रीक (यूनानी) स्पैनिश आदि इसी परिवार से जुड़ी हुई है। इन्हें भाषा परिवार इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके अनेक शब्द एक जैसे थे।
  • वैदिक साहित्य के आधार पर वैदिक युग को दो कालखंडों में विभाजित
    किया जाता हैऋग्वैदिक युग (1500 B.C. से 1000 B.C.) एवं उत्तर वैदिक युग (1000 B.C. से 600 B.C.)
  • वैदिक आर्य कई समूहों में भारत आये।
  • ऋग्वेद में आर्य निवास स्थल के लिए सप्तसैन्धवः शब्द का प्रयोग किया गया है।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 9 प्रथम साम्राज्य Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम साम्राज्य Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न (क)
सम्राट अशोक कहाँ का शासक था?
(i) काशी
(ii) मगध
(iii) वैशाली
(iv) कलिंग
उत्तर-
(ii) मगध

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

प्रश्न (ख)
किसके उपदेश ने सम्राट अशोक को प्रभावित किया?
(i) महावीर
(ii) महात्मा बुद्ध
(iii) कन्फ्यूसियस
(iv) ईसा मसीह
उत्तर-
(ii) महात्मा बुद्ध

प्रश्न (ग)
अशोक के साम्राज्य में जनपदीय न्यायालय के न्यायाधीश को कहा जाता था –
(i) ग्रामक
(ii) समाहर्ता
(iii) पुरोहित
(iv) राजुक
उत्तर-
(iv) राजुक

प्रश्न (घ)
किस युद्ध की जीत के बाद अशोक का मन दुःख से भर गया?
(i) तक्षशिला
(ii) कलिंग
(iii) उज्जयिनी
(iv) सुवर्णगिरी
उत्तर-
(ii) कलिंग

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

प्रश्न (ङ)
सर्वप्रथम ब्राह्मी लिपि को किसने पढ़ा ?
(i) जेम्स प्रिंसेप
(ii) हेनरी
(iii) शैम्पेल्यो
(iv) वाणभट्ट
उत्तर-
(i) जेम्स प्रिंसेप

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सही वाक्यों के आगे (✓) व गलत वाक्यों के आगे (✗) चिह्न लगायें।

  1. तक्षशिला उत्तर-पश्चिम और मध्य के लिए आने-जाने का मार्ग था।
  2. सम्राट अशोक ने अपने संदेश पुस्तकों में लिखवाये थे।
  3. कलिंग बंगाल का प्राचीन नाम था।
  4. अशोक के धम्म में पूजा-पाठ करना अनिवार्य था।
  5. 1837 ई० में जेम्स प्रिंसेप नामक अंग्रेज विद्वान सर्वप्रथम ब्राह्मी लिपि को पढ़ा।
  6. अशोक के प्रशासन में प्रांतों को जिलों में बाँटा गया था।

उत्तर-

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में ‘द :

प्रश्न (i)
सम्राट अशोक की राजधानी कहाँ थी ?
उत्तर-
सम्राट अशोक की राजधानी पाटलीपुत्र थी ।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

प्रश्न (ii)
आज कलिंग भारत के किस राज्य में है ?
उत्तर-
आज कलिंग भारत के उड़ीसा राज्य में है।

प्रश्न (iii)
अशोक के धम्म में निहित एक अच्छी बात को लिखें ।
उत्तर-
राजा और उच्चपदाधिकारी हर क्षण प्रजा के हित के बारे में सोचें।

प्रश्न (iv)
राजस्व संग्रहकर्ता के क्या कार्य थे?
उत्तर-
राजस्व संग्रहकर्ता का काम ‘कर’ इकट्ठा करना था।

प्रश्न (v)
भारत का राष्ट्रीय चिह्न कहाँ से लिया गया है ?
उत्तर-
भारत का राष्ट्रीय चिह्न सारनाथ के स्तम्भ से लिया गया था।

प्रश्न (vi)
अशोक के ज्यादातर अभिलेख किस भाषा में लिखे गये हैं?
उत्तर-
अशोक के ज्यादातर अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गये हैं।

प्रश्न 4.
अशोक के धम्म में निहित मानव मूल्यों को लिखें।
उत्तर-
कलिंग के युद्ध के बाद अशोक को मानव के प्रति संवेदना उत्पन्न हुआ। ‘मानव’ जो युद्ध में मारे जाते हैं निर्दोष ज्यादा होते हैं। मनुष्य को शांतिपूर्ण और सदाचारी बना सकते हैं। बड़ों का आदर करना चाहिए। छोटों को सम्मान, माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर करना चाहिए। साथी, दास सभी से उचित व्यवहार करना चाहिए। वृद्धों की सेवा करनी चाहिए।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

प्रश्न 5.
आओ चर्चा करें :

प्रश्न (i)
अशोक ने अपने विचार, प्राकृत भाषा में ही क्यों खुदवाये ?
उत्तर-
अशोक के साम्राज्य में अनेक प्रांत थे, लेकिन ज्यादातर प्रांतों में ब्राह्मी लिपि थी, प्राकृत भाषा संरल थी। अतः उसने अपने विचारों को प्राकृत भाषा में खुदवाये।

प्रश्न (ii)
अशोक के प्रशासन की कौन-कौन-सी बातें आज के प्रशासन में भी देखने को मिलती हैं ? चर्चा करें ।
उत्तर-
न्याय की व्यवस्था, ‘कर इकट्ठा करने की व्यवस्था, प्रजा का ध्यान, सड़कों और यात्रियों पर ध्यान।

प्रश्न (iii)
अशोक अपने से पहले आने वाले राजाओं से किन बातों में अलग लगते हैं ?
उत्तर-
अशोक के पहले राजाओं में कर्मकाण्डों , धर्म पर ज्यादा विश्वास करते, प्रजा की भलाई के लिए काम करते. साम्राज्य के विस्तार पर ज्यादा ध्यान देते। अशोक ही एक ऐसा सम्राट था जो कलिंग पर विजय पाने के बाद साम्राज्य का विस्तार न करने, युद्ध न करने की प्रतिज्ञा ली और मानव कल्याण की बात सोची।

प्रश्न 6.
आओ करके देखें :

प्रश्न (i)
उन वस्तुओं की सूची बनायें जिन पर अशोक चिह्न आपको मिलते हैं?
उत्तर-
सिक्के पर, नोट पर, राष्ट्रीय झंडे पर, पुरस्कारों पर, विशिष्ट स्थानों पर।

प्रश्न (ii)
अशोक के धम्म में तुम और कौन-कौन बातों को जोड़ना चाहोगे ?
उत्तर-
शिक्षा पर विशेष ध्यान, सभी धर्मों का आदर करना, ऊँच-नीच का भेद-भाव न करना।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 9 प्रथम साम्राज्य

प्रश्न (iii)
बिहार में अशोक से जुड़े अभिलेखों की सूची बनाये।
उत्तर-
जहानाबाद की पहाड़ी की तीन गुफाओं की दीवारों पर अभिलेख, सारनाथ के अभिलेख, राजपुरवा के स्तम्भ।

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम साम्राज्य Notes

पाठ का सारांश

  • अशोक महात्मा बुद्ध के उपदेशों से काफी प्रभावित था।
  • 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप नामक अंग्रेज विद्वान ने सर्वप्रथम ब्राम्ही लिपि को पढ़ा।
  • भ्राबरू अभिलेख से अशोक का बौद्ध धर्मावलम्बी होना और धम्म तथा संघ में विश्वास करना सिद्ध होता है।
  • मौर्य सम्राज के भीतर कई छोटे क्षेत्र या प्रांत थे, इनमें चार प्रांत मगध, तक्षशिला, उज्जैन एवं स्वर्णगिरी प्रमुख थे।
  • अशरेल पहला शासक था जिसने अभिलेखों द्वारा अपना संदेश आम लोगों तक पहुंचाया।
  • जब राज्य बहुत बड़ा हो जाता है तब उसे साम्राज्य कहते हैं।
  • अशोक का साम्राज्य पश्चिम में हिन्दुकुश से लेकर पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक और उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक फैला था।
  • कलिंग की विजय से मौर्य साम्राज्य अपने विस्तार की चरम सीमा पर पहुंच गया था।
  • अशोक ने जिस धम्मे का रूप संसार के सामने रखा उसमें कई अच्छी बातें निहित थी। अशोक के धम्म में न तो कोई देवी-देवता थे और न ही उसमें कोई व्रत, उपवास या यज्ञ करने की बात कही गई थी।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 5 प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions HistoryAatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 5 प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 5 प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण

Bihar Board Class 6 Social Science प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

प्रश्न (क)
निम्नलिखित में से कौन हड़प्पा कालीन स्थल नहीं है?
(i) मोहनजोदड़ो
(ii) कालीबंगा
(iii) लोथल
(iv) हस्तिनापुर
उत्तर-
(iv) हस्तिनापुर

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प्रश्न (ख)
किस शहर से बन्दरगाह के अवशेष मिले हैं ?
(i) लोथल
(ii) रापेड़
(iii) कालीबंगा
(iv) धौलावीरा
उत्तर-
(i) लोथल

प्रश्न (ग)
निम्न में से कौन हड़प्पा सभ्यता की विशेषता नहीं है ?
(i) शहरी जीवन
(ii) ग्रामीण जीवन
(iii) विदेशों के साथ व्यापार
(iv) सुनियोजित नगर निर्माण
उत्तर-
(iii) विदेशों के साथ व्यापार

प्रश्न (घ)
हड़प्पा सभ्यता की खोज किस वर्ष हुई थी?
(i) 1921
(ii) 1925
(iii) 1927
(iv) 1940
उत्तर-
(i) 1921

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प्रश्न (ङ)
महास्नानागार किस नगर से प्राप्त हुआ है?
(i) हड़प्पा
(ii) लोथल
(iii) मोहनजोदड़ो
(iv) कालीबंगा
उत्तर-
(iii) मोहनजोदड़ो

प्रश्न 2.
निम्नलिखित का सुमेल करें

  1. सोना – गुजरात
  2. फिरोजा – कर्नाटक
  3. चौदो – मध्य एशिया
  4. सीपियाँ – ईरान

उत्तर-

  1. सोना – कर्नाटक
  2. फिरोजा – मध्य एशिया
  3. चाँदी – ईरान
  4. सीपियाँ – गुजरात

प्रश्न 3.
आइए विचार करें –

प्रश्न (i)
ड़प्पा सभ्यता के नगरीय जीवन पर प्रकाश डालें ।
उत्तर-
हड़प्पाई नगरों में पाई गई रिहाइशी इमारतें, सड़कें, गलियों एवं नालियों की सुनियोजित व्यवस्था इस तथ्य को उजागर करती है कि हड़प्या के शहरों की योजना में कुशल शासक वर्ग का हाथ रहा । शासक शहर के लिए जरूरी धातुओं बहुमूल्य पत्थर एवं अन्य उपयोगी चीजों को .मैंगवाने के लिए लोगों को दूर-दूर के प्रदेशों में भेजा जाता था । लोग व्यापक पैमाने पर ईंट बनाने का काम भी करते थे । इन नगरों में लिपिक भी होते थे जो भोजपत्र या कपड़े पर लेखन-कार्य करते थे जो अब नष्ट

हो चुके हैं। उनके द्वारा मुहरों, हाथी-दांत आदि पर लिखे अभिलेख प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा नगरों में सोनार, पत्थर काटने वाले, बुनकर, नाव-निर्माता जैसे शिल्पकार भी रहते थे जो अपने घरों या उद्योग-स्थल पर तरह-तरह की चीजें बनाते थे ।

हड़प्पाई नगरों के निवासी सूती वस्त्रों तथा गरम कपड़ों का उपयोग करते थे । स्त्री-पुरुष हार, बाजूबन्द, अंगूठी, चूड़ी, करमबन्द, कान की बाली तथा पायल जैसे गहने पहनते थे। इनके निर्माण में सामान्यतः सोना-चाँदी, हाथी-दाँत तथा ताँबों का प्रयोग होता था । गहनों के निर्माण में गोमेद, स्फाटिक जैसे बहुमूल्य पत्थरों का भी इस्तेमाल किया जाता था ।

लोग चाक पर निर्मित आग में पके हुए मिट्टी के सादा तथा चित्रकारी वाले बर्तन का इस्तेमाल करते थे | ताँबा, कांस्य, चाँदी तथा चीनी-मिट्टी के बर्तनों का भी उनके द्वारा उपयोग किया जाता था | सख्त पत्थरों से नाप-तौल के लिए बाट तथा गहने के तौर पर इस्तेमाल के लिए मनके का निर्माण किया जाता था । बच्चों के खिलौनों में छोटे चक्के वाली बैलगाड़ियाँ, पशुमूर्तियों आदि प्रमुख रूप से बनायी जाती थीं । लोग पासे का खेल भी खेलते थे ।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 5 प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण

प्रश्न (ii)
हडप्पा संस्कृति को हडप्पा सभ्यता क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
हड़प्पा संस्कृति, छोटी-छोटी नई संस्कृतियों के मिलने पर विकसित हुआ । जैसे-लेखन कला का विकास, शहर का निर्माण, व्यापार, कारीगरी, कलाकारी और विज्ञान सभी का विकास | यह सभी हड़प्पा संस्कृति में विकसित थी। इसी आधार पर हड़प्पा संस्कृति को हड़प्पा सभ्यता कहते हैं।

प्रश्न 4.
आइए चर्चा करें –

प्रश्न (i)
किसी समाज का नगरीकरण के लिए जिन तत्वों की आवश्यकता होती है, उन तत्वों की एक सूची बनाओ।
उत्तर-
यातायात के साधन, बिजली, सफाई , पक्के और ऊँचे मकान, आवासीय कॉलोनी, शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा की समुचित व्यवस्था। खान-पान, वस्त्र, व्यवसाय संबंधी कार्यालय, सुरक्षा, रोजगार आदि तत्व जरूरी हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 5 प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण

प्रश्न (ii)
हड़प्पाई लोग देवी-देवता, पशु आदि की पूजा करते थे. उनकी एक सूची बनाओ।
उत्तर-
हड़प्पाई लोग देवी, देवता और पशु की पूजा करते थे। पृथ्वी, पशुपति महादेव, वृक्ष, गैंडा, साँड़ की पूजा विशेष रूप से करते थे। जादू-टोना में भी विश्वास करते थे।

प्रश्न (iii)
हड़प्पाई लोग जिन फसलों से परिचित थे, उनकी एक सूची बनाओ और तुम जिन फसलों के बारे में जानते हो, उनकी एक सूची बनाओ।
उत्तर-
हड़प्पाई लोग गेहूँ, जौ, मटर, धान, तिल, सरसों आदि से , परिचित थे। मैं जानता हूँ- गेहूँ, जौ, मटर, धान, तिल, सरसों, मसूर, चना, मकई, सोयाबीन, राजमा, बाजरा, मूंग, राई. तिसी, खेसाड़ी आदि।

प्रश्न 5.
आइए करके देखें –

प्रश्न (i)
हड़प्पा शहर जिस तरह बसा हुआ था, उसका एक नक्शा बनाओ और तुम अपने गाँव या शहर का एक नक्शा बनाओ । दोनों नक्शों में समानता और असमानता को चिन्हित करें ।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 6 Social Science प्रारंभिक शहर प्रथम नगरीकरण Notes

पाठ का सारांश

  • भारतीय संस्कृति काफी पुरानी है।
  • आग के आविष्कार ने उनके जीवन की राह को आसान बनाया ।
  • आग से अपने भोजन को पकाकर खाने लगे, खूखार जंगली जानवरों से खुद की रक्षा की और आग तापने के लिए वे एक दूसरे के पास पहुँचे ।
  • नवपाषाणयुग में मानव-संस्कृति सरल से जटिल हो गई ।
  • मानव सांस्कृतिक विकास ने वन्यावस्था से ग्राम जीवन में प्रवेश किया ।
  • हड़प्पा संस्कृति को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है।
  • संस्कृति से तात्पर्य व्यक्ति के परिष्कृत व्यवहार से है जिसे समाज द्वारा सीखा जाता है और जिसका हस्तांतरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में होता रहता है।
  • पुरातत्वविदों ने अनेक नगरों का पता लगाया जिनमें मोहनजोदड़ों, कालीबांगा, बनवली, लोथल और धौलावीरा प्रमुख शहर हैं।
  • खुदाईयों के आधार पर वर्तमान में 2800 हड़प्पा सभ्यता के स्थल प्रकाश में आए हैं।
  • हड़प्पा सभ्यता के सभी शहरों का निर्माण लगभग 4700 साल पहले हुआ था।
  • हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर दो हिस्सों में विभाजित थे।
  • कुछ नगरों के नगर-दुर्ग वाले हिस्से में बड़ी इमारते और आवासीय ढांचे मिले है।
  • मोहनजोदड़ों, हड़प्पा, कालिबंगन और लोथल में एक समान विशेषताओं वाली संरचनाएं मिली है।
  • हड़प्पाई नगरों के घर प्रायः एक या दो मंजिलें और कुछ तीन मंजिलें भी होते थे।
  • नगर ग्रिड प्रणाली के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से बसाए गए थे जिसकी गलियाँ तथा सड़कें एक दूसरे को लगभग समकोण पर काटती थी।
  • हड़प्पाई नगर गाँवों से घिरा होता था । गाँव के लोग ही शहर में रहने वाले लोगों के लिए खाने का सामान उपलब्ध कराते थे । हड़प्पा संस्कृति में व्यापार का बड़ा महत्त्व था
  • हड़प्पाई लोग धरती को उवर्रता की देवी समझते थे और उनमें मातृदेवी की पूजा का खूब प्रचलन था ।
  • हड़प्पा में पकी हुई मिट्टी की स्त्री-मूर्तिकाएँ भारी संख्या में मिली है।
  • नगरीय जीवन पद्धति से तात्पर्य नगर में निवास करने वाले लोगों के वस्त्र, आभूषण, खान-पान, बात-चीत, संबंध व्यवहार, पेशा इत्यादि से है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

Bihar Board Class 11 Economics सूचकांक Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मदों के सापेक्षिक महत्त्व को बताने वाले सूचकांक को –
(a) भारित सूचकांक कहते हैं।
(b) सरल समूहित सूचकांक कहते हैं।
(c) सरलमूल्यानुपात का औस कहते हैं।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) भारित सूचकांक कहते हैं।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 2.
अधिकांश भारित सूचकांकों में भार का संबंध –
(a) आधार वर्ष होता है।
(b) वर्तमान वर्ष होता है।
(c) आधार एवं वर्तमान वर्ष दोनों से होता है।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आधार वर्ष होता है।

प्रश्न 3.
ऐसी वस्तु जिसका सूचकांक से कम भार है, उसकी कीमत में परिवर्तन से सूचकांक में कैसा परिवर्तन होगा?
(a) कम
(b) अधिक
(c) अनिश्चित
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कम

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 4.
कोई उपभोक्ता कीमत सूचकांक किस परिवर्तन को मापता है?
(a) खुदरा कीमत
(b) थोक कीमत
(c) उत्पादकों की कीमत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) खुदरा कीमत

प्रश्न 5.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक में किस मद के लिए उच्चतम भार होता है?
(a) खाद्य पदार्थ
(b) आवास
(c) कपड़े
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) खाद्य पदार्थ

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 6.
सामान्यतः मुद्रा स्फीति के परिवर्तन में किसका प्रयोग होता है?
(a) थोक कीमत सूचकांक
(b) उपभोक्ता कीमत सूचकांक
(c) उत्पादक कीमत सूचकांक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) थोक कीमत सूचकांक

प्रश्न 7.
हमें सूचकांक की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
आर्थिक चरों में दो समय बिंदुओं से सम्बन्धित औसत प्रतिशत परिवर्तन की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें सूचकांक की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 8.
आधार वर्ष अवधि के वांछित गुण क्या होते हैं?
उत्तर:
आधार अवधि के वांछित गुण (Desirable properties of the base year) इस प्रकार हैं –

  1. आधार अवधि सामान्य अवधि होनी चाहिए।
  2. आधार अवधि ने तो अधिक पुरानी होनी चाहिए और न ही अधिक नई।
  3. यह वह अवधि होनी चाहिए जिसके आंकड़े उपलब्ध हों।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 9.
भिन्न उपभोक्ताओं के लिए भिन्न उपभोक्ता कीमत सूचकांकों की अनिवार्यता क्यों होती है?
उत्तर:
उपभोक्ता की विभिन्न श्रेणियों के लिए विभिन्न उपभोक्ता सूचकांक बनाना इलिए आवश्यक है क्योंकि उनके खान-पान (कोई वर्ग गेहूँ की रोटी खाता है और कोई वर्ग गेहूँ के स्थान पर चावल का अधिक प्रयोग करता है), पहनावे जीवन-स्तर और रीति-रिवाजों में विभिन्नता पाई जाती है।

प्रश्न 10.
औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता कीमत सूचकांक क्या मापता है?
उत्तर:
औद्योगिक कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सामान्य स्फीति मापता है।

प्रश्न 11.
कीमत सूचकांक तथा मात्रा सूचकांक में क्या अन्तर है?
उत्तर:
कीमत सूचकांक को बनाने का उद्देश्य वस्तुओं के समूहों के कीमतों में होने वाले सापेक्ष परिवर्तनों को मापना है जबकि मात्रा सूचकांक बनाने का उद्देश्य विभिन्न वस्तुओं की मात्रा में होने वाले सापेक्ष परिवर्तनों को मापना है।

प्रश्न 12.
क्या किसी भी तरह का कीमत परिवर्तन एक कीमत सूचकांक में प्रतिबिंबित होता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 13.
क्या शहरी गैर-शारीरिक कर्मचारियों के उपभोक्ता कीमत सूचकांक भारत के राष्ट्रपति के निर्वाह लागत में परिवर्तन का प्रतिनिधित्व कर सकता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 14.
नीचे एक औद्योगिक केन्द्र के श्रमिकों द्वारा 1980 एवं 2005 के दौरान निम्न मदों पर प्रतिव्यक्ति मासिक व्यय को दर्शाया गया है। इन मदों का भार 75, 10,5,6 तथा 4 है। 1980 को आधार मानकर 2005 के लिए जीवन निर्वाह लागत का एक भारित सूचकांक तैयार कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 1
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 2

प्रश्न 15.
निम्नलिखित सारणी को ध्यानपूर्वक पढ़िए एवं अपनी टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 3
उत्तर:
सारणी से पता चलता है कि व्यापक श्रेणियों के संवृद्धि निष्पादन में विभिन्नता है, सामान्य सूचकांक इन श्रेणियों के औसत निष्पादन को दिखाता है।
खनन तथा उत्खनन के अपेक्षाकृत निम्न निष्पादन के बावजूद सामान्य सूचकांक नीचे नहीं गिरा। इसका मुख्य कारण विनिर्माण तथा विद्युत में अच्छा निष्पादन होना है।

प्रश्न 16.
स्फीति परिवार में उपभोग की जाने वाली महत्त्वपूर्ण मदों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
गेहूँ, चीनी, चावल, दाल, कपड़ा, पैट्रोल, मकान, मनोरंजन, टेलीफोन, मोबाइल, टी. वी., रेडियो, वाहन, स्टेशनरी, पुस्तकें आदि।

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प्रश्न 17.
यदि एक व्यक्ति का वेतन आधार वर्ष में 4000 रु0 प्रति वर्ष था और उका वर्तमान वर्ष में वेतन 6000 रु0 है।
उसके जीवन स्तर को पहले जैसा ही बनाए रखने के लिए उसके वेतन में कितनी वृद्धि होनी चाहिए, यदि उपभोक्ता कीमत सूचकांक 400 हो।
उत्तर:
आधार वर्ष में आय = 4000 रुपये
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक = 400 रुपये
अतः वर्तमान आय हो होनी चाहिए = 4000 × \(\frac{400}{100}\) = 1600 रुपये
वर्तमान वार्षिक आय = 6,000 रुपये
आय में वृद्धि हो होनी चाहिए = 16000 – 6,000 = 10,000 रुपये

प्रश्न 18.
जून 2005 में उपभोक्ता कीमत सूचकांक 125 था। खाद्य सूचकांक 120 तथा अन्य मदों को सूचकांक 135 था। खाद्य पदार्थों को दिया जाने वाला भार कुल भार का कितना प्रतिशत था।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक = 125
भोजन का सूचकांक = 120
उपभोक्ता सूचकांक का विचलन = 125 – 120 = 5
अन्य मदों का सूचकांक = 135
उपभोक्ता सूचकांक से विचलन = 135 – 120 = 5
अतः भोजन का भार = \(\frac{5}{5+15}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 19.
किसी शहर में एक मध्यवर्गीय पारिवारिक वजट में जांच-पड़ताल से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त होती है:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 4
1995 की तुलना में 2004 में निर्वाह सूचकांक का मान क्या होगा?
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 5
निर्वाह सूचकांक = \(\frac{18650}{100}\) = 186.5

प्रश्न 20.
दो सप्ताह तक अपने परिवार के (प्रति इकाई) दैनिक व्यय, खरीदी गई मात्रा तथा दैनिक खरीददारी को अभिलिखित कीजिए। कीमत में आए परिवर्तन आपको किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थियों को परामर्श दिया जाता है कि वे अपने माता/पिता से पिछले दो सप्ताह होने वाले दैनिक व्ययों के बारे में पूछे।
उनसे यह भी पूछे कि वह कौन-सी वस्तु कितनी मात्रा में क्रय करते हैं और प्रति इकाई उस वस्तु की क्या कीमत है। इन सब बातों को अपनी कापी में लिखें।

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प्रश्न 21.
निम्नलिखित आँकड़ों दिए गए हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 6
(क) विभिन्न सूचकांकों को प्रयुक्त करते हुए मुद्रा स्फीति की दर का परिकलन कीजिए।
(ख) सूकांकों के सापेक्षिक मानों पर टिप्पणी लिखें।
(ग) क्या ये तुलना योग्य हैं?
उत्तर:
(क) मुद्रा स्फीति की दर गणना –

1. औद्योगिक श्रमिक –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 7

2. नगरीय गैर-शारीरिक कर्मचारी –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 8

3. कृषि श्रमिक –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 9

4. थोक कीमत सूचकांक –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 10

(ख) सूचकांकों के सापेक्षिक मान पर टिप्पणी –

  • औद्योगिक श्रमिकों का C.P.I. आरम्भ के वर्षों में तेजी से बढ़ा परन्तु बाद में इसकी वृद्धि दरों में कमी आई।
  • नगरीय गैर-शारीरिक कर्मचारियों के C.P.I. में काफ़ी उतार-चढाव आए।
  • कृषि श्रमिकों के C.P.I में काफी उतार-चढ़ाव पाए गए।

(ग) ये तुलना योग्य नहीं हैं।

Bihar Board Class 11 Economics सूचकांक Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्फीति दर की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
स्फीति दर = \(\frac { X_{ 1 }-X_{ t }-1 }{ X-t-1 } \times 100\)
xt – 1 = पिछले माह, वर्ष, सप्ताह या दिन थोक मूल्य सूचकांक (WPI)
Xt = वर्तमान मास, वर्ष, सप्ताह या दिनों का थोक मूल्य सूचकांक।

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प्रश्न 2.
मुद्रा की क्रय शक्ति तथा वास्तविक मजदूरी की गणना करने के लिए किस सूचकांक का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)।

प्रश्न 3.
पाशे की सूचकांक के भार क्या आधार है?
उत्तर:
पाशे की सूचकांक के भार का आधार चालू वर्ष की मात्रा है।

प्रश्न 4.
सामान्य मूल्य सूचकांक क्या माप करते हैं?
उत्तर:
सामान्य मूल्य सूचकांक मूल्य स्तर पर होने वाले परिवर्तन की माप करते हैं।

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प्रश्न 5.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्या है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसी वर्ग के व्यक्तियों द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के फुटकर मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों का मापन करते हैं।

प्रश्न 6.
सूचकांक बनाने में कौन-सी माध्य विधि उपयुक्त है?
उत्तर:
गुणात्मक. माध्य (Geometric Mean)।

प्रश्न 7.
सरल समूही विधि सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 = \(\frac { ΣP_{ 1 } }{ ΣP_{ 0 } } \times 100\) × 100

प्रश्न 8.
मूल्यानुपामों (Price Relatives) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 11

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प्रश्न 9.
मूल्यानुपात सूचकांक ज्ञान करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 \(\frac { Σ(P_{ 1 }/P_{ 0 }\times 10) }{ N } \)

प्रश्न 10.
सूचकांकों को बनाने की भारित समूही विधि में किसी प्रकार के भार प्रयोग में लाये जाते हैं?
उत्तर:
मात्रा के भार (Quantity weight)।

प्रश्न 11.
भारित समूही विधि द्वारा सूचकांक ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
P01 = \(\frac { ΣP_{ 1 } q_{ 1 }}{ ΣP_{ 0 } q_{ 0 }} \times 100\) × 100

प्रश्न 12.
सचूकांको की भारित मूल्यानुपात विधि में किस प्रकार के भार का प्रयोग किया जाता हैं?
उत्तर:
मूल्य भार (Value Weight)।

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प्रश्न 13.
भारित मूल्यानुपात विधि से सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 12

प्रश्न 14.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसे कहते हैं?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक वे सूचकांक हैं जो एक समयाविधि में कीमत स्तर में होने वाले परिवर्तनों को उपभोक्ताओं के जीवन निर्वाह पर पड़ने वाले प्रभाव को मापता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को जीवन-निर्वाह व्यय सूचकांक कहते हैं।

प्रश्न 15.
थोक मूल्य सूचकांक किसे कहते हैं?
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक वे सूचकांक हैं जो एक समयाविधि में वस्तुओं के थोक मूल्यों में हाने वाले परिवर्तनों को मापते हैं। भारत में सूचकांक सप्ताहिक आधार पर तैयार किये जाते हैं।

प्रश्न 16.
मुद्रा-स्फीति की दर निकालने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 13

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प्रश्न 17.
वर्ष 1999 में एक देश की चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय 800 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर वर्ष 2000 में 910 करोड़ रुपये हो गई। इसी अवधि में थोक मूल्य सूचकांक 120 से बढ़कर 130 हो गया।
राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि कितनी हुई?
उत्तर:
वर्ष 2000 में वास्तविक राष्ट्रीय आय = \(\frac{910×120}{130}\) = 840 करोड़ रुपये।
राष्ट्रीय आय मे वास्तविक वृद्धि = 840 – 800 = 40 करोड़ रुपये।

प्रश्न 18.
अभारित सूचकांक को परिभारित करें।
उत्तर:
अभारित सूचकांक को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 14

प्रश्न 19.
भारित सूचकांक क्या है?
उत्तर:
भारित सूचकांक कीमत सापेक्षों का भारित माध्य है।
सूत्र के रूप में P01 = Σwl\(\frac { P_{ 11 } }{ P_{ 10 } } \)

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प्रश्न 20.
भारत में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के निर्माण के लिये उद्योगों को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है? उन श्रेणियों के नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में औद्योगिक सूचकांकों का निर्माण करने के लिए उद्योगों का निम्न तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है –
(क) खनन (Mining)।
(ख) विनिर्माण (Manufacturing)।
(ग) बिजली (Electricity)।

प्रश्न 21.
अभारित सूचकांक की क्या सीमाएँ (दोष) हैं?
उत्तर:
अभारित सूचकांक की एक सीमा यह है कि सभी मदों को एक जैसा भार (महत्त्व) देता है चाहे कुछ मदें दूसरी मदों से अधिक आवश्यक ही क्यों न हों। जैसे-यह माचिस कीकीमत और मकान के किराये को एक जैसा महत्त्व देता है।

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प्रश्न 22.
सूचकांक बनाने की विभिन्न विधियां कौन-सी हैं?
उत्तर:
सूचकांक बनाने की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. साधारण समूह विधि (Simple Aggregative Method)
  2. साधारण मूल्यानुपात माध्य विधि (Simple Average of Price Relative Method)
  3. भारित समूह विधि (Weighted Aggregative Method)
  4. मूल्यों की भारित माध्य विधि (Weighted average ofPrice Relative Method)

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्या है?
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह-व्यय में होनेवाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा को प्रकट करते हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को निर्वाह व्यय सूचकांक भी कहते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक विभिन्न स्थानों के लिए अलग-अलग बनाये जाते हैं।

प्रश्न 2.
सूचकांक क्या है?
उत्तर:
सूचकांक एक विशेष प्रकार का माध्यम है जो किसी समय अथवा के आधार पर सम्बन्धित चरों के समूह में होने वाले सापेक्षिक परिवर्तनों को मापता है।
इसमें किसी एक समय के मूल्यों को 100 मानकर दूसरे समय के मूल्यों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है ओर इन प्रतिशतों की माध्य निकाली जाती है। प्रतिशतों की यह माध्य ही सूचकांक या निर्देशांक कहलाता है। प्रो. ब्लेयर के शब्दों में, “सूचकांक विशिष्ट प्रकार के माध्य होते हैं।” (Index Number are specified type of averages)

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प्रश्न 3.
थोक मूल्य सूचकांक तालिका बनाएँ जिसमें उद्योगों के समूहीकरण तथा उनके दिये गये भार दिखाये गये हों।
उत्तर:
उद्योगों का समूहीकरण तथा उनके भार (Industrial grouping and their weights)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 15

प्रश्न 4.
सूचकांक बनाने में अनेकों कठिनाइयां सामने आती हैं। किन्हीं तीन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of Base Year):
आधार वर्ष सामान्य होना चाहिए अर्थात् वह एक ऐसा वर्ष हो जो बाढ़, युद्ध, महामारी आदि असाधारण प्रकोपों से मुक्त हो। आधार वर्ष बहुत ही छोटा या बहुत बढ़ा नहीं होना चाहि। यह बहुत पुराना भी नहीं होना चाहिए।

2. वस्तुओं का चुनाव (Selection of Commodities):
केवल उन्हीं चुनाव किया जाना चाहिए जो सम्बन्धित वर्ग में लोकप्रिय हों तथा उनकी आदतों व आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करें। वस्तुओं के गुणों में स्थिरता होनी चाहिए।

3. मूल्यों का चुनाव (Selection of Prices):
वस्तुओं के कवेल प्रतिनिधि मूल्यों का ही चुनाव किया जाना चाहिए। ये मूल्य उन मण्डियों से प्राप्त किया जाने चाहिये जहाँ पर उन वस्तुओं का काफी मात्रा में क्रय-विक्रय होता है।

प्रश्न 5.
थोक कीमत सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक के लाभ इस प्रकार हैं –

  1. थोक मूल्य सूचकांक के द्वारा मुद्रास्फिीति दर की गणना की जाती है। मुद्रास्फीति दर की गणना करने के लिये निम्नसूत्र का प्रयोग किया जाता है।
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 16
  2. थोक कीमत सूचकांक में परिवर्तनों की दशाओं को देखकर भविष्य में मांग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  3. थोक कीमतों की सूचकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि ओर कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  4. विभिन्न परियोजनाओं की लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

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प्रश्न 6.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या जीवन-निर्वाह सूचकांक की उपयोगिता लिखें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता निम्नलिखित है –

  1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सहायत से एक वर्ग विशेष के रहन सहन के व्यय में होने। वाले परिवर्तनों का ज्ञान होता है।
  2. इसके आधार पर सरकार विभिन्न कर्मचारियों को महंगाई भत्ता व न्यूनतम आदि निश्चित करती है।
  3. व्यय में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार यथासम्भव नीतियों निर्धारण किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
साधारण सूचकांक का निर्माण की कौन-सी विधियाँ हैं? प्रत्येक किया जाने वाला सूत्र लिखिए।
उत्तर:
1. सही समूह विधि (Aggregative Method):
इस विधि द्वारा सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र निम्न है –
P01 = \(Σ(\frac { P_{ 1 } }{ P_{ 0 } } \times 100)\)
P1 = चालू वर्ष की कीमतों का योग
P0 = आधार वर्ष की कीमतों का योग

2. मूल्यानुपति विधि इस विधि द्वारा सूचकांक को ज्ञात करने का सूत्र निम्लिखित है –
P01 = \(\frac { Σ(\frac { P_{ 1 } }{ P_{ 0 } } \times 100) }{ N } \)

प्रश्न 8.
भारित सूचकांक बनाने की लैसपियर तथा पाश्चे विधियों में अन्तर के तीन बिन्दु बताएँ।
उत्तर:
लैसपियर तथा पाश्चे विधियों में अन्तर (Difference between Laspeyre’s method and Pasche’s method)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 17

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प्रश्न 9.
थोक कीमत सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
थोक कीमत सूचकांक के लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. थोक मूल्य सूचकांक के द्वारा स्फीति की दर की गणना की जाती है। मुद्रा-स्फीति दर की गणना करने क लिये निम्नलिखित सूख का प्रयोग किया जाता है –
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 18
  2. थोक कीमत सूचकांक में परिवर्तनों की दशाओं को देखकर भविष्य में मांग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाया जा सकता है।
  3. थोक कीमतों की सूचकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि और कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  4. विभिन्न परियोजनाओं की लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

प्रश्न 10.
सेंसेक्स पर एक संक्षिप्त नोट लिखों।
उत्तर:
सेंसेक्स का पूरा नाम Bomaby Stock Exchange Sensitive Index है। इसका आधार वर्ष 1978-79 सूचकांक की मूल्य इसी आधार वर्ष के संदर्भ में होता है।
यदि हम कहें कि सेंसेक्स अब 10,000 रुपये है। इसका अभिप्राय यह है कि 1978-78 में सेंक्स 100 रुपये था जो अब बढ़कर 10,000 रुपये हो गया है।
बम्बई स्टॉक एक्यचेंज में 30 स्टाक हैं जो 30 उद्योगों का प्रतिनिधि करते हैं। यदि सेंसेक्स बढ़ जाता है, तो इसका अभिप्राय है कि बाजार ठीक चल रहा है और निवेशाक अधिक लाभ कमाने की आशा करते हैं।

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प्रश्न 11.
कुछ मुख्य सूचकांकों के नाम लिखकर किसी सूचकांक को समझाएँ।
उत्तर:
कुछ मुख्य सूचकांक (Some Important Index Number):
उपभोक्ता सूचकांक, थोक मूल्य सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, कृषि उत्पादन का सूचकांक, सेंसेक्स, उत्पादन मूल्य सूचकांक, मानव विकास सूचकांक आदि कुछ महत्त्वपूर्ण सूचकांक हैं।

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index):
यह आर्थिक विकास के माप का एक संयुक्त सूचकांक है। इसका निर्माण तीन तत्त्वों (जीवन दीर्घता, ज्ञान या शिक्षा प्राप्ति प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद) के आधार पर तैयार किया जाता है।
समीकरण के रूप में HdI = \(\frac{1}{3}\) (IRI + EAI + SLI)

प्रश्न 12.
सरल समूह विधि की सीमाएँ लिखें।
उत्तर:
सीमाएँ (Limitations):
सरल समूह विधिक की मुख्य सीमाएं निम्नलिखित हैं –

  1. जिस वस्तु की कीमत अधिक होगी उसके पक्ष मे छिपे रूप में भार मिल जाता है। उदाहरण के लिये सोने की कीमत अधिक होने से अधिक भार मिल जाता है।
  2. जिस इकाई की कीमत व्यक्त की जाती है, यदि उसका आकारया मात्रा बड़ी है तो उसको अधिक भार मिल जाता है।
    उदाहरण के लिये जिस वस्तु की कीमत प्रति टन मे व्यक्त की जायेगी उसको अधिक भार मिलेगा और जिस वस्तु की कीमत कि ग्राम में व्यक्त की जायेगी उसको भार कम मिलेगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक निर्माण विधि में निहित चरण लिखें। उपभोक्ता कीमत सूचकांक किन-किन मान्यताओं पर आधारित है?
उत्तर:
उपभोक्ता कीमत सूचकांक के निर्माण की प्रक्रिया में निहित चरण-उपभोक्ता कीमत सूचकांक के निर्माण चरण निहित हैं –

1. कार्यक्षेत्र (Scope):
सबसे पहला महत्त्वपूर्ण चरण यह तय करना है कि समाज के किस वर्ग के विषय में सूचकांक बनाना है।

2. सीमाक्षेत्र (Coverage):
कार्य क्षेत्र निर्धारित करने के बाद सीमा क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है अर्थात् किस क्षेत्र में श्रमिकों, विद्यार्थियों आदि से सूचकांक का सम्बन्ध है। एक जिला या एक राज्य।

3. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of the base year):
यह एक महत्त्वपूर्ण चरण आधार वर्ष का चुनाव करते समय दो बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। एक आधार वर्ष आर्थिक दृष्टि से न एक सामान्य वर्ष होना चाहिए। दूसरे वह चालू वर्ष से अधिक दूर और न ही अधिक नजदीक होना चाहिए।

4. परिवार बजट के विषय में सूचना प्राप्त करना (Conducting an enquires about family budget):
इसके अन्तर्गत एक परिवार बजट में एक समय काल में विभिन्न मदों की जानकारी प्राप्त की जाती है।

5. कीमत की जानकारी प्राप्त करना (Obtaining Prince Quotation):
परिवार बजट के बाद उन कीमतों की जानकारी ली जाती है जिनको सूचकांक में शामिल किया जाना है। कीमतें प्रायः उन्हीं बाजारों से प्राप्त करनी चाहिए जहाँ से सामान्यत: सम्बन्धित वर्ग समूह सामान खरीदता है।

मान्यताएँ (Assumption):
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक निम्न मान्यताओं पर आधारित है –

  1. उपभोक्ता के एक विशेष वर्ग में सभी व्यक्तियों की आवश्यकतायें एक जैसी हों।
  2. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सम्मिलित की जाने वाली वस्तुओं की कीमतें विभिन्न स्थानों पर समान हों।
  3. उपभोग की जाने वाली वस्तुओं की मात्रायें आधार वर्ष चालू वर्ष में समान रहती हैं।

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प्रश्न 2.
सूचकांको (निर्देशांकों) के निर्माण की साधारण विधि लिखें।अथवा, सूचकांक का निर्माण करते समय कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं? अथवा, एक सूचकांक बनाते समय हमें कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिये?
उत्तर:
सूचकांक के निर्माण की साधारण विधि (General method of Constructing of index Numbers)
सूचकांक के निर्माण में निम्नलिखित मुख्य समस्याएँ हैं –

1. सूचकांक का उद्देश्य (Purpose of Index Number):
सूचकांक बनाने के पूर्व यह निर्धारित कर लेना आवश्यक है कि इसका उद्देश्य क्या है क्योंकि उद्देश्य के अनुसार ही सूचनाएँ एकत्र की जायेंगी। उदाहरणार्थ जीवन निर्वाह लागत सूचकांक (Cost of Living Index Number) उत्पादन सूचकांक का निर्माण करता है।

2. आधार वर्ष का चुनाव (Selection of the Base Year):
सूचकांक के निर्माण में एक आधार वर्ष का चुनाव आवश्यक है क्योंकि इसकी तुलना में चर मूल्यों के परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। आधार वर्ष का चुनाव कठिन होता है।
आधार वर्ष का चुनाव इस बात को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए कि वह आर्थिक दृष्टि से सामान्य वर्ष हो। उस वर्ष कोई राजनैतिक, प्राकृतिक आर्थिक दृष्टि से असामान्य घटना न घटी हो।

3. मदों का चुनाव (Selection of Items):
निर्देश में शामिल की जाने वाली मदों का चुनाव करना आवश्यक है। यह चुनाव के अनुकूल होना चाहिए। निर्देशांक बनाने के लिए उद्देश्य के अनुसार उचित संख्या में प्रतिनिधि वस्तुओं को शामिल किया जा सकता है।

4. प्रतिनिधि मूल्यों का चुनाव (Selection of Representative):
दिर्नेशांक बनाते समय चुनी हुई वस्तुओं के मूल्यों की समस्या आती है। अत: उपभोक्ता सूचकांक बनाते समय वे मूल्य लेने जिन पर आम उपभोक्ता को वस्तु उपलब्ध होती है।

5. वस्तुओं को भार देना (Assigning Weightage):
निर्देशांक के लिए चुनी हुई वस्तुओं का महत्त्व या भार एक समान उपभोक्ता को वस्तु उपलबध होती है।

6. माध्य का चुनाव (Selection of Suitable Average):
सूचकांक एक विशेष प्रकार को माध्य होते हैं। केन्द्रीय प्रवृत्तियों की मापों के लिए माध्य, माध्यिका भूयिष्ठक में से किसी का भी प्रयोग किया जा सकता हैं।
यहाँ किसी औसत का प्रयोग करने से यह समस्या आती है। प्रायः समान्तर माध्य प्रयोग किया जाता है। अलग-अलग माध्यमों से भिन्न भिन्न सूचकांक प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 3.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की विशेषतायें (Features of Consumer Price Index):
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित हैं –

1. भारत में तीन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाये जाते हैं –

  • औद्योगिक कर्मचारियों के लिये
  • शहरी गैर-शारीरिक कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिये
  • कृषि श्रमिकों के लिये।

2. इन तीन प्रकार के उपभोक्ता मूल्य सचूकांकों के आधार वर्ष 1982 (औद्योगिक कर्मचारियों के लिये), 1984-85 (शहरी गैर-शारीरिक कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिये) तथा 1986-82 (कृषि श्रमिकों के लिये) हैं।

3. इन तीनों सूचकांकों की गणना प्रतिमास की जाती है ताकि इस बात का विश्लेषण किया जा सके कि कीमतों में होने वाले परिवर्तनों का प्रभाव इन तीन श्रेणीके लोगों के जीवन निर्वाह व्यय पर क्या पड़ा है।

4. औद्योगिक कर्मचारियों तथा कृषि श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रकाशन श्रमिक ब्यूरों (Bureau) द्वारा किया जाता है।

5. शहरी गैर कार्मिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रकाशन केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा किया जाता है।

6. औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में ली गई मुख्य मदों को निम्न तालिका में दर्शाया गया है। तालिका से हमें पता चलता है कि भोजन को सबसे अधिक भार दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 19

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प्रश्न 4.
सूचकांक के लाभ लिखें।
उत्तर:
निर्देशांक ठीक उसी प्रकार से देश के आर्थिक परिवर्तनों को मापने के लिए उपयोगी हैं, जैसे वायुमापक यन्त्र (Barometer) के द्वारा वायु के दबाव व मौसम की स्थिति की जानकारी प्राप्त होती है। निर्देशांकों की उपयोगिता अथवा लाभ निम्नलिखित हैं –
1. जटिल तथ्यों को सरल करना (To Simplify Complexities):
व्यापार या व्यवसाय में ऐसे परिवर्तन होते रहते हैं जिनका प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन नहीं हो सकता। निर्देशांक ऐसे जटिल तथ्यों को सरल करके उन्हें ऐसा रूप प्रदान करते हैं ताकि वे तथ्य प्रत्येक व्यक्ति की समझ में आ सकें।

2. भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाना (To Make Predicitions):
सूचकांकों द्वारा भूतकाल के तथ्यों तथा उनमें वर्तमान में होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए ‘भविष्य’. में क्या होगा’ इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

3. तुलनात्मक अध्ययन में सहायक (Helpful in Comparative Study):
सूचकांकों या निर्देशांकों की सहायता से तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। जैसे-इनके द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि किसी वस्तु किस वर्ष कितनी थी तथा अब कितनी है। इसमें कितने प्रतिशत कमी या वृद्धि हुई है।

4. सापेक्ष माप करना (Relative Measurement):
सूचकांक केवल सापेक्ष परिवर्तनों का मापने का कार्य करते हैं। अत: जहाँ आर्थिक तथ्यों का निरपेक्ष या प्रत्यक्ष माप संभव न हो वहाँ सूचकांक तथ्यों का सापेक्ष या अप्रत्यक्ष माप प्रस्तुत करते हैं।

5. मुद्रा की क्रय का माप (To Measure Value of Money):
निर्देशांक मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को मापता है। यदि मूल्यों में कमी होती है तो मुद्रा का मूल्य बढ़ जाता है और यदि वृद्धि का मूल्य कम हो जाता है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 5.
निम्न मूल्य से 1984 को आधार मानकर 1985 से 2001 के लिए सूचकांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 20
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 21

प्रश्न 6.
निम्नलिखित आंकड़ों से वर्ष 1984 को आधार मानकर मूल्यानुपात ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 22
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 23

प्रश्न 7.
1985 को आधार मानकर निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से वर्ष 1988 के लिए सूचकांक (index) तैयार करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 24
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 25

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 8.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का निर्धारण करें –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 26
उत्तर:
उपभोक्ता-मूल्य सूचकांक का निर्माण
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 27

प्रश्न 9.
निम्न आँकड़ों की सहायता से जीवन निर्वाह लागत सूचकांक ज्ञात कीजिये। (Calculate the cost of living index number from the following data)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 29

प्रश्न 10.
1980 को आधार मानकर 1985 का भारित सूचकांक मूल्यानुपात निकालो।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 30
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 31

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 8 सूचकांक

प्रश्न 11.
मूल्यानुपात माध्य कीमत विधि द्वारा सूचकांक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 32
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 33
दूसरे शब्दों में कीमतों में 70.3% वृद्धि हुई।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से जीवन-निर्वाह लागत सूचकांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 34
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 35
जीवन निर्वाह सूचकांक = \(\frac{25350}{100}\) = 253.50

प्रश्न 13.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से मूल्यनुपात माध्य विधि द्वारा साधारण सूचकांक ज्ञात कीजिए:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 36
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 37
दूसरे शब्दों में कीमतों में 49% वृद्धि हुई।

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प्रश्न 14.
भारित मूल्यानुपात माध्य विधि से सूचकांक की गणना कीजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 37
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 39

प्रश्न 15.
निम्न तालिका को ध्यान से पढ़े और अपनी टिप्पणी दें:
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आधार वर्ष 1993-94 (Index of Industrial Production Base 1993-94)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 40
उत्तर:
टिप्पणी तालिका से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था की मुख्य श्रेणियों के संवर्धन में वृद्धि में अंतर है।
सामान्य इन श्रेणियों की औसत उपलब्धियों को दर्शाता है। सामान्य सूचकांक में 45% की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में खनन उत्खनन में केवल 25% हुई है। खनन तथा उत्खनन में उत्पादन में कम प्रतिशत उत्पादन होने पर भी सामान्य सूचकांक में कमी नहीं आई है। इसका कारण विनिर्माण में 47% तथा विद्युत में 41% वृद्धि होना है। इसके अतिरिक्त विनिर्माण को अधिक भार दिया गया है।

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प्रश्न 16.
निम्नलिखित तालिका को ध्यान से पढ़े और उस टिप्पणी करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 41
उत्तर:
तालिका से हमें निम्नलिखित बातों की जानकारी प्राप्त होती है –

  1. भारत के उद्योगों को मुख्य तीन समूहों में विभाजित किया गया है।
  2. विनिर्माण को सबसे अधिक भार दिया गया है।
  3. मई 2005 में सामान्य सूचकांक 213 था।
  4. खनन और उत्खनन में तुलनात्मक रूप से सबसे कम वृद्धि हुई है।
  5. खनन और उत्खनन में कम वृद्धि होने के बावजूद सामान्य सूचकांक नीचे नहीं आया। इसका मुख्य कारण विनिर्माण में अधिक वृद्धि होना है।

प्रश्न 17.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से आप क्या समझते हैं? उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता का वर्णन करें।
उत्तर:
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumber price Index):
यह किसी स्थान विशेष पर वर्ग विशेष के व्यक्तियों के निर्वाह व्यय में होने वाले परिवर्तन की दशा व मात्रा को प्रकट करती हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को निर्वाह व्यय सूचकांक भी कहते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक विभिन्न स्थानों के लिए अलग-अलग बनाए जाते हैं।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की उपयोगिता –

  1. इनकी सहायता से एक वर्ग विशेष के रहन-सहन में व्यय में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान होता है।
  2. इसके आधार पर विभिन्न कर्मचारियों का महँगाई भत्ता व न्यूनतम वेतन आदि निश्चित किया जाता है।
  3. व्यय में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार यथासंभव नीतियों का निर्धारण किया जाता है।

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प्रश्न 18.
थोक मूल्य सूचकांक क्या है? इसके लाभों का वर्णन करो।
उत्तर:
थोक मूल्य सूचकांक किसी स्थान पर विभिन्न वस्तुओं के थोक मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों की दिशा व मात्रा का ज्ञान कराते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 42

  1. थोक मूल्य सूचकांक में परिवर्तन की दशाओं को देखकर भविष्य में माँग और पूर्ति में होने वाले परिवर्तनों को अनुमान लगाया जा सकता है।
  2. थोक कीमतों की सपकांक की सहायता से राष्ट्रीय आय में वास्तविक वृद्धि और कमी की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  3. विभिन्न परिजयोजनों के लागत अंकन में थोक कीमत सूचकांक सहायक होते हैं।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से 1985 को आधार मानकर समूह रीति से 1989 का मूल्यानुप ती निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 43
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 8 सूचकांक Part - 2 img 44

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सूचकांक के स्तर में लगातार वृद्धि होने पर मुद्रा स्फीति की दर।
(a) बढ़ती है
(b) कम होती है
(c) स्थिति रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) बढ़ती है

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प्रश्न 2.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक का वैकल्पिक नाम है –
(a) अभारित सूचकांक
(b) भारित सूचकांक
(c) निर्वाह व्यय सचकांक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) निर्वाह व्यय सचकांक

प्रश्न 3.
भारत वर्ष में सूचकांकों का निर्माण करने के लिए आधार वर्ष है –
(a) 1981 – 82
(b) 1993 – 94
(c) 2000 – 2001
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1993 – 94

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प्रश्न 4.
कीमत सूचकांक में वृद्धि से मुद्रा की क्रय शक्ति –
(a) घटती है
(b) बढ़ती है
(c) कोई फर्क नहीं पड़ता है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 5.
सूचकांक का निर्माण करने के लिए आधार वर्ष होना चाहिए –
(a) सामान्य वर्ष
(b) असमान्य वर्ष
(c) कोई भी नहीं
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सामान्य वर्ष

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प्रश्न 6.
कीमत सापेक्ष होती हैं –
(a) अशुद्ध संख्या
(b) शुद्ध संख्या
(c) शब्दों में विवरणात्मक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 7.
संयुक्त सूचकांक के निर्माण में शामिल कीजाती हैं –
(a) दो वस्तुएँ
(b) एक वस्तु
(c) दोनों
(a) और (c)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) दो वस्तुएँ

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प्रश्न 8.
संयुक्त सूचकांक होता है –
(a) सापेक्ष कीमतों का गुणात्मक माध्य
(b) सापेक्ष कीमतों का सामांतर माध्य
(c) दोनों (a) और (b)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सापेक्ष कीमतों का सामांतर माध्य

प्रश्न 9.
सूचकांक निर्माण के लिए जो वस्तुएँ ली जाती हैं वे नहीं होना चाहिए।
(a) समूह की प्रतिनिधि
(b) समूह से कोई संबंध नहीं होना चाहिए
(c) दोनों (a) और (c)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) समूह की प्रतिनिधि

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प्रश्न 10.
थोक मूल्य सूचकांक का प्रकाशन भारत में होता है –
(a) दैनिक आधार पर
(b) साप्ताहिक आधार पर
(c) मासिक आधार पर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) साप्ताहिक आधार पर

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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध

Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. कद (फूटों) में तथा वजन (कि. ग्राम) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई है –
(क) कि. ग्राम/पुट
(ख) प्रतिशत
(ग) अविद्यमान
उत्तर:
(क) कद (फूटों में) तथा वजन (किग्रा.) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई अविद्यमान है।

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प्रश्न 2.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा –
(क) 0 से अनन्त तक
(ख) -1 से +1 तक
(ग) ऋणात्मक अनन्त से धनात्मक अनन्तक तक
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास -1 तथा +1 के बीच है।

प्रश्न 3.
यदि rxy धनात्मक है तो और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है –
(क) जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है
(ख) जब y में घटता है, तो x बढ़ता है
(ग) जब y में बढ़ता है, तो x नहीं बदलता है
उत्तर:
यदि ru धनात्मक है तो x और y के बीच का सम्बन्ध इस प्रकार का होता है जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है।

प्रश्न 4.
यदि rxy = 0 है तब चर x तथा y के बीच:
(क) रैखिक संबंध होगा
(ख) रैखीय संबंध नहीं होगा
(ग) स्वतंत्र संबंध होगा
उत्तर:
यदि rsy = 0 है तब चर x तथा y के बीच स्वतंत्र होगा।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन मापों में, कौन – सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप सकता है –
(क) कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध
(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध
(ग) प्रकीर्ण आरेख
उत्तर:
प्रकीर्ण आरेख सभी प्रकार के सम्बन्धों को माप सकता है।

प्रश्न 6.
यदि परिशुद्ध रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध हों तो सरल महासंबंध गुणांक –
(क) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।
(ख) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से कम सही होता है।
(ग) कोटि सहसम्बन्ध की ही भांति सही होता है।
उत्तर:
यदि परिशुद्ध रूप से मापित ऑकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसम्बन्ध गुणांक कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।

प्रश्न 7.
साहचर्य के माप के लिए 7 को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
उत्तर:
साहचर्य के माप के लिए को तब अधिक प्राथमिकता दी जाती है जब चरम मान दिए गए हों। सामान्यत: rk का मान r से कम या इसके बराबर होता है।

प्रश्न 8.
क्या आंकड़ों के प्रकार के आधार पर r – 1 तथा +1 के बाहर स्थित हो सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 9.
क्या सहसम्बन्ध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी मिलती है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 10.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक की तुलना में कोटि सहसम्बन्ध गुणांक कब अधिक परिशुद्ध होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध साधारण सहसम्बन्ध गुणांक से इस अवस्था में अच्छा है जब चरों का मापन सही ढंग से किया जा सके।

प्रश्न 11.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
नहीं। किन्तु स्वतंत्रता की संभावना बनी रहती है।

प्रश्न 12.
क्या सरल सहसम्बन्ध गुणांक किसी भी प्रकार के सम्बन्ध को माप सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 13.
एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें । उनका सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए। परिणाम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रत्यन करें।

प्रश्न 14.
अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रयत्न करें।

प्रश्न 15.
कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो।
उत्तर:
निष्पक्षता, धर्मनिरपेक्षता, ईमानदारी, सत्यता, देशभक्ति, सद्भावना, परोपकार, नि:स्वार्थता आदि कुछ ऐसे चर हैं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है।

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प्रश्न 16.
r के विभिन्न मानों +1, -1 तथा 0 की व्याख्या करें।
उत्तर:

  1. यदि का मूल्य 1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों X तथा Y में पूर्णत: धनात्मक सम्बन्ध है।
  2. यदि का मूल्य -1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों x तथा Y में पूर्णत: ऋणात्मक सम्बन्ध है।
  3. यदि r का मूल्य 0 है तो इसका तात्पर्य यह है कि x तथा Y चरों में कोई सहसम्बन्ध नहीं है।

प्रश्न 17.
पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक से कोटि सहसम्बन्य गुणांक क्यों भिन्न होता है?
उत्तर:
पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों X एवं Y के बीच रेखीय संबंधों के सही संख्यात्मक मान की कोटि दर्शाता है। जबकि कोटि सहसम्बन्ध जब चरों का सार्थक रूप से मापन नहीं किया जा सकता, जैसे कीमत, आय, वजन आदि। कोटि निर्धारण तब अधिक होता है जब चरों की माप भ्रामक हो।

प्रश्न 18.
पिताओं (x) और उनके पुत्रों (Y) के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है। इन दोनों के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 1
उत्तर:
सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 2
Rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×22.50}{8(64-1)}\)
= 1 – \(\frac{6×22.50}{8×6.3}\) = 1 – \(\frac{135}{504}\) = 1 – 0.305 = 0.695

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प्रश्न 19.
X और Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए और उसके सम्बन्धों पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 3
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 4

प्रश्न 20.
X तथा Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए तथा उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 5
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विक्षेप चित्र
  2. काल पियर्सन का सहसम्बन्ध गुणांक तथा
  3. कोटि अंतर विधि

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प्रश्न 2.
विक्षेप चित्र का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप नहीं देता।

प्रश्न 3.
सहसम्बन्ध गुणांक क्या है?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों के बीच सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप (Numerical Measurement) है।

प्रश्न 4.
यदि r = ±1, तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि = ± 1 तो इसका अर्थ पूर्ण धनात्मक यसा ऋणात्मक सहसम्बन्ध है।

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प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध गुणांक (r) की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) प्रायः -1 तथा + 1 के बीच होता है। गणित की भाषा में – 1 ≤ r ≤ 1

प्रश्न 6.
सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा के मापन को सहसम्बन्ध कहते हैं।

प्रश्न 7.
सहसम्बन्ध गुणांक सदैव –
तथा +1 के बीच होता है। गणित की भाषा में इसे आप किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
उत्तर:
1 ≤ r ≤ + 1

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प्रश्न 8.
धनात्मक (Positive) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो चर x तथा y एक ही दिशा में विचरित (परिवर्तित) होते हैं, तो उनके बीच सम्बन्ध धनात्मक सह-सम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 9.
विलोम (Negative) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर के विपरीत होता है तो उनके बीच सम्बन्ध विलोम सहसम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 10.
धनात्मक सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की कीमत तथा पूर्ति के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 11.
विलोम सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा तथा उसके मूल्य के बीच विलोम सहसम्बन्ध पाया जाता है।

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प्रश्न 12.
यदि x तथा y स्वतंत्र चर हों, उनके बीच सहसम्बन्ध गुणांक (r) (Coefficient. of Correlation) का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = 0

प्रश्न 13.
यदि दो श्रणियों में पूर्ण सहसम्बन्ध (Perfect Correlation) है तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध गुणांक (r) का मूल्य क्या होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = ±1

प्रश्न 14.
सहसम्बन्ध को रेखीय कब कहा जाता है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में परिवर्तन का अनुपात होता है तो उसे रेखीय सहसम्बन्ध कहते हैं।

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प्रश्न 15.
सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं होता तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध अनुस्थिति होती है अर्थात् सहसम्बन्ध का अभाव होता है। सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य शून्य होता है।

प्रश्न 16.
यदि विक्षेप रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर हो तो वर्गों में किस प्रकार सहसम्बन्ध होगा?
उत्तर:
दो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित आंकड़ों में सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 7
उत्तर:
% r = -1 क्योंकि चरों का विपरीत सम्बन्ध है।

प्रश्न 18.
जब कोटियाँ (Ranks)समान होती हैं तो ऐसी अवस्था में Rk की गणना करने के लिये कौन सा सूत्र लगाया जाता है? वह सूत्र लिखें।
उत्तर:
कोटियाँ समान होने का अवस्था में Rk की गणना के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 8

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प्रश्न 19.
यदि r = 0 तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि r = 0 तो इसका अर्थ सहसम्बन्ध का अभाव है।

प्रश्न 20.
सहसम्बन्ध गुणांक को ज्ञात करने का कार्ल पियरसन द्वारा दिया गया सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 9

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक का प्रतिपादन किसने किया?
उत्तर:
स्पियरमैन ने।

प्रश्न 22.
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग कहाँ उपयुक्त होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग वहाँ उपयुक्त होता है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप संभव न हो तथा उन्हें क्रम के अनुसार रखा जा सकता है।

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प्रश्न 23.
सहसम्बन्ध को मापने के लिये स्पियरमैन का सूत्र लिखो।
उत्तर:
\(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)

प्रश्न 24.
r को सह के माप का सहचर क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि r सहचर को मापता है न कि कारणों को।

प्रश्न 25.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
हाँ

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धनात्मक तथा ऋणात्मक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
धनात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन एक ही दिशा की ओर होता है, तो उनमें धनात्मक सहसम्बन्ध होगा। उदाहरण के लिए यदि आय में वृद्धि के साथ उपभोग में भी वृद्धि होती है तो उपभोग और आय में धनात्मक सहसम्बन्ध है।

ऋणात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन विभिन्न दिशाओं में होते हैं अर्थात् जब x चर में वृद्धि होने से y चर में कमी होती है तो उनमें ऋणात्मक सहसम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 2.
पूर्ण सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है? इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
यदि दो चरों में मूल्यों के परिवर्तन की मात्रा बिल्कुल समान है, तो उनमें पूर्ण धनात्मक या ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है। ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध का गुणांक (r) का मूल्य + 1 होगा।
उदाहरण:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 10
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 11
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

प्रश्न 3.
सरल बहुगुणी एवं आंशिक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। बहुगुणी सहसम्बन्ध दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। आंशिक सहसम्बन्ध भी दो से अधिक चरों का अध्ययन करता है, परंतु अन्य चरों के प्रभाव को स्थिर रखकर केवल दो चरों का पारस्परिक सम्बन्ध निकलता है।

प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन का सह-सम्बन्ध गुणांक क्या है? इसकी गणना का सूत्र दीजिए। इसकी सीमाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप है। इसकी गणना का सूत्र निम्नलिखित है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 12
r = सहसम्बन्ध गुणांक।

सीमाएँ (Limited degree of correlation cd-efficient):
सहसम्बन्ध गुणांक का मान सदैव ही -1 तथा +1 के बीच में होगा 1 गणित की भाषा में इसे निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है – -1 ≤ r ≤ + 1

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध

प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए। सहसम्बन्ध के निम्न मानों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा मापने को सहसम्बन्ध कहते हैं। सहसम्बन्ध द्वारा विभिन्न चरों में पाये जाने वाले परस्पर सम्बन्धों व मात्रा को दिशा का ज्ञान होता है।

  1. जब r = 0, तो इसका अभिप्राय है कि चरों में सहसम्बन्ध का अभाव पाया जाता है।
  2. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।
  3. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्न अवस्था में सहसम्बन्ध का मूल्य बताओ –
(क) सहसम्बन्ध ऋणात्मक तथा पूर्ण।
(ख) सहसम्बन्ध धनात्मक तथा पूर्ण।
(ग) कोई सहसम्बन्ध नहीं।
उत्तर:

  • जब सहसम्बन्ध पूर्ण ऋणात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = -1
  • जब सहसम्बन्ध गुणांक धनात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = +1
  • जब कोई सहसम्बन्ध नहीं पाया जाता है तो सहसम्बन्ध गुणांक r = 0

प्रश्न 7.
10 विद्यार्थियों के अंग्रेजी और अर्थशास्त्र के प्राप्तांकों की कोटियों के अंतर, में वर्गों का योग 33 है। कोटि सम्बन्ध गुणांक (Rank Correlation Coefficient) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
चिह्नों के रूप में निम्नलिखित दिया हुआ है –
R = 10, ΣD2 = 33
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac { 6\times 33 }{ 10^{ 0 }(10-1^{ 0 }) } \) = 1 – \(\frac{198}{990}\) = \(\frac{990-198}{990}\) = 8

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प्रश्न 8.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की कोटि क्रम विधि की विवेचना करो।
उत्तर:
कोटि क्रम विधि के अन्तर्गत सर्वप्रथम x तथा y पद मूल्यों को अलग-अलग कोटि प्रदान किये जाते हैं। सबसे अधिक आकार वाले मूल्य को 1 उससे कम आकार वाले को 2 और इसी प्रकार क्रम निश्चित किये जाते हैं। द्वितीय x के क्रमों में से y के तत्सम्बन्धी क्रम घटाए जाते हैं और कोटि अंतर निकाले जाते हैं। तृतीय कोटि क्रम वर्ग करके उन वर्गों का जोड़ निकाला जाता है। अन्त में निम्न सूत्र प्रयोग किया जाता है –
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)
R = कोटि सहसम्बन्ध गुणांक
ΣD2 = क्रम अंतर में वर्गों का जोड़
N = पद युग्मों की संख्या

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों में विक्षेप चित्र (Scatter Diagram) द्वारा सहसम्बन्ध (Correlation) बताइये:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 13
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 14
विक्षेप चित्र में स्पष्ट है कि X तथा Y में पूर्ण धनात्मक (Perfect positive) सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 10.
यदि विक्षेप चित्र में बिन्दु उस सरल रेखा पर जमघट लगाते हैं जो रेखा x अक्ष पर 30° का कोण बनाती है तो आप x तथा Yचरों में किस प्रकार का सम्बन्ध पायेंगे?
उत्तर:
इससे पता चलता है कि X तथा Y में कम मात्रा में सहसम्बन्ध है। दूसरे शब्दों में Y में उसी अनुपात में परिवर्तन नहीं होता जिस अनुपात में X में।

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प्रश्न 11.
निम्न X और Y युग्मों को विक्षेप चित्र में प्रस्तुत कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 15
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 16

प्रश्न 12.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक को कैसे परिभाषित किया गया?
उत्तर:
सहसम्बन्ध के ज्ञान को गणितीय विधि से प्रतिपादित करने का श्रेय प्रो. कार्ल पियरसन को है। कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक समांतर माध्य तथा प्रमाप विचलन पर आधारित है। इस गुणांक को गुण परिघात सहसम्बन्ध (Product, moment correlation) कहते हैं। इस सहसंबंध को कहते हैं। यदि x तथा Y दो चरों का सम्बन्ध रेखिक (Linear) है तो हम. उनमें कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की सहायता से सम्बन्ध की मात्रा का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
(क) सहसम्बन्ध गुणांक
(r) की क्या सीमायें हैं?
(ख) यदि r = +1 है तो दो चरों X और Y में किस प्रकार का सम्बन्ध है?
उत्तर:
(क) सह – सम्बन्ध गुणांक हमेशा -1 और +1 की सीमा में होगा।
(ख) यदि r = +1 या r = -1 है तो उसका अभिप्राय है कि दो घरों X तथा Y में सम्बन्ध निश्चित (Exact) है।
यदि r = +1 है तो दोनों चरों में पूर्णतः धनात्मक सम्बन्ध होगा और यदि r = -1 है तो दोनों चरों (x, y) में पूर्णतः ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विक्षेप चित्र के गुण तथ दोष लिखिए।
उत्तर:
गुण (merits):

  1. दो चरों में सम्बन्ध जानने की यह बहुत ही सरल विधि है।
  2. चित्र पर नजर डालते ही पता चल जाता है कि दो चरों के बीच कोई सम्बन्ध है या नहीं।
  3. विक्षेप चित्रों की सहायता से इस बात का भी ज्ञान होता है कि सहसम्बन्ध धनात्मक है या ऋणात्मक।

दोष (Demerits):

  1. विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध के गुणांक का पूरा माप नहीं है।
  2. यह सम्बन्धों के बारे में अनुमानतः ज्ञान देता है।
  3. यह संख्यात्मक परिवर्तन को संख्या में ही प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 2.
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ (Properties of correlationcoefficient) सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएं अनलिखित हैं –

  1. r की कोई इकाई (unit) नहीं है। यह एक शुद्ध संख्या है। इसका तात्पर्य यह है कि माप की इकाइयाँ इसका भाग नहीं हैं। दूसरे शब्दों में फुटों में ऊँचाई तथा किलोग्राम में वजन का r 0.7 है।
  2. r के ऋणात्मक मूल्य का अर्थ है कि दो चरों X तथा Y में विपरीत सम्बन्ध है। एक चर में परिवर्तन होने से दूसरे चर में विपरीत दिशा में परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिये जब एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो उसकी मांग में कमी आती है।
  3. यदि धनात्मक है तो इसका अभिप्राय है कि X तथा Y चर एक ही दिशा की ओर चलते हैं। जब कॉफी (चाय का प्रतिस्थापन) की कीमत में वृद्धि होती है, चाय की मांग में वृद्धि होती है, जब तापक्रम में वृद्धि होती है, आइसक्रीम की बिक्री में वृद्धि होती है।
  4. यदि r = 0 तो X तथा Y चरों में सहसम्बन्ध का अभाव होता है। उनके बीच कोई रेखीय सम्बन्ध नहीं होता।
  5. यदि r = 1 अथवा r = – 1 है तो सहसम्बन्ध पूर्णता है। उन दो चरों में सम्बन्ध निश्चित है।
  6. r का अधिक मूल्य इस बात का संकेत देता है कि दो चरों x तथा Y में दृढ़ रैखीय सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी ऊँचा कहा जायेगा जब यह +1 अथवा -1 के समीप होगा।
  7. r का कम मूल्य इस बात को इंगित करता है कि दो चरों X तथा Y में कमजोर रेखीय. सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी नीचा कहा जायेगा जब वह शून्य के समीप होगा।
  8. सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य -1 तथा +1 के बीच में होता है। दूसरे शब्दों में 1 ≤ r ≤ 1 यदि किसी प्रश्न में r का मूल्य इस सीमा के बाहर आता है, इसका तात्पर्य यह है कि की गणना करने में कोई त्रुटि हुई है।
  9. मूल में परिवर्तन से या पैमाने के परिवर्तन से के मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं रहता। मान लो दो चर X तथा Y दिये गये हैं। इन दो चरों को निम्न प्रकार परिभाषित करें -rxy = ruy

A तथा B क्रमश: X और Y के काल्पनिक औसत (A.M.) हैं। B तथा D कॉमन फैक्टर (Common factors) हैं।

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प्रश्न 3.
विक्षेप चित्र से क्या अभिप्राय है? इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र (Scatter Diagram):
विक्षेप चित्र दो चरों के बीच सहसम्बन्ध मापने की एक विधि है। इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध की दिशा के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जाता है। विक्षेप चित्र बनाने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण निहित है –

  1. स्वतंत्र चरों को X अक्ष पर लिया जाता है।
  2. आश्रित चरों को Y अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है।
  3. बिन्दु अंकित समंक से एक मूल्य स्वतंत्र चर कर लिया जाता है तथा एक मूल्य आश्रित चर। इन मूल्यों की सहायता से ग्राफ पेपर पर एक बिन्दु अंकित किया जाता है।
  4. श्रेणी में जितने जोड़े होते हैं, उतने ही बिन्दु अकित किये जाते हैं।
  5. बिन्दु जितने एक दूसरे के पास होंगे, सहसम्बन्ध को डिग्री उतनी ही अधिक होगी और बिन्दु जितने अधिक बिखरे होंगे, सहसम्बन्धों की डिग्री उतनी ही कम होगी। बिन्दुओं की दिशा को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है।

विक्षेप चित्र में प्रदर्शित बिन्दुओं की प्रवृत्ति यदि एक निश्चित दिशा में जाने की हो तो दोनों चरों में सहसम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी।

यदि बिन्दुओं को छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी। यदि बिन्दुओं की छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दाहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा।
इसके विपरीत यदि रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर है तो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की प्रत्यक्ष विधि से गणना करने की प्रक्रिया में कौन-कौन से चरण निहित हैं?
उत्तर:

  1. सबसे पहले X और Y श्रेणी का माध्य मूल्य ज्ञात करें।
  2. फिर X श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी के समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को x से प्रकट करें।
  3. इसके बाद Y श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी से समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को Y से प्रकट करें।
  4. अब इन विचलनों का वर्ग लें।
  5. X तथा Y का गुणनफल लें और गुणनफल को XY से प्रकट करें।
  6. सहसम्बन्ध गुणांक करने के लिये निम्न सूत्र का प्रयोग करें:

r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }.Σy^{ 2 } } } \)
r = \(\frac { Σxy }{ N\sigma x\times \sigma y } \)
x = X – \(\bar { X } \) y = Y – \(\bar { Y } \)
σx = x श्रेणी का प्रमाप विचलन
σy = y श्रेणी का प्रमाप विचलन
N = मदों की संख्या

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प्रश्न 5.
पद विचलन विधि से r ज्ञात कीजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 17
उत्तर:
माना A = 100, h = 10, B = 1700 तथा k = 100
पद विचलन विधि से की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 18

प्रश्न 6.
वास्तविक समान्तर माध्य से कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 19
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 20
सहसम्बन्ध निम्न धनात्मक है।

प्रश्न 7.
दो श्रृंखलाएँ हैं। प्रत्येक के 50 पद हैं। उनका प्रमाप विचलन क्रमश: 4.5 और 3.5 है। दोनों श्रृंखलाओं के वास्तविक माध्य से विचलनों का गुणनफल 420 है।x और Y सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया है N = 50
σx = 4.5 σy = 33.5
Σdxdy = 420
r = \(\frac{Σdxdy}{Nσx×σy}\) = \(\frac{420}{50×4.5×3.5}\) = \(\frac{420×10×10}{50×45×35}\) = 533

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प्रश्न 8.
X और Y के बीच में निम्नलिखित समंकों से सह-सम्बन्ध गुणांक ज्ञात करें –

  1. X श्रेणी का समांतर माध्य = 15
  2. Y श्रेणी का समांतर माध्य = 28
  3. X श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 144
  4. Y श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 225
  5. X व Y श्रेणियों के समांतर माध्य से विचलनों के गुणनफल का योग = 20
  6. मदों की संख्या

उत्तर:
दिया हुआ है –
\(\bar { X } \) = 15 \(\bar { Y } \) = 28
Σx2 = 144 Σy2 = 225
r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }\times y^{ 2 } } } \) = \(\frac { 20 }{ \sqrt { 144\times 225 } } \) = \(\frac{20}{12×15}\)
= \(\frac{20}{80}\) = \(\frac{1}{9}\) = 0.111

प्रश्न 9.
निम्न समंकों से कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 21
उत्तर:
कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 22

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प्रश्न 10.
वास्तविक समांतर माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 24
सहसम्बन्ध पूर्णतया ऋणात्मक है।

प्रश्न 11.
कल्पित माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 25
उत्तर:
कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 26
x का कल्पित माध्य = 85
y का कल्पित माध्य = 80
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 27

प्रश्न 12.
A तथा B में कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 29

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प्रश्न 13.
A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 30
उत्तर:
यहाँ पर A तथा B के कोटि क्रम दिये गये हैं। अतः हम सीधे ही कोटि क्रम का अंतर निकालेंगे और सूत्र की सहायता से A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध की गणना करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 31

प्रश्न 14.
5 विद्यार्थियों को गणित तथा अर्थशास्त्र में योग्यता के अनुसार दर्जा (Rank) दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 32
स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 33
r = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×0}{6(36-1)}\) = 1

प्रश्न 15.
दो जजों द्वारा 5 व्यक्तियों को सौंदर्य में निम्नलिखित कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 34

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प्रश्न 16.
A तथा C द्वारा 5 व्यक्तियों को निम्न कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 35
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 36

प्रश्न 17.
यदि D2 = 39.50 और N = 10 हो तो R का मूल्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 37

प्रश्न 18.
निम्नलिखित आँकड़ों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 38
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 39
(नोट : कोटि बढ़ते हुए क्रम से दी गई है अर्थात् सबसे छोटे मूल्य को एक तथा सबसे बड़े मूल्य को दस।)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 40

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प्रश्न 19.
नीचे 5 विद्यार्थियों के द्वारा अर्थशास्त्र और सांख्यिकी में प्राप्त अंक प्रतिशत में दिये गये हैं। कोटि सहसम्बन्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 41

प्रश्न 20.
नीचे दिये समंकों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 42
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 43

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 44
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 45

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि चरों में का मूल्य -1 है तो यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) पूर्ण ऋणात्मक

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प्रश्न 2.
यदि चरों में r का मूल्य +1 है को यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूर्ण धनात्मक

प्रश्न 3.
दो चरों के बीच सहसम्बन्ध शून्य है तो इसका अर्थ है –
(a) उच्च सहसंबंध
(b) सहसंबंध का अभाव
(c) निम्न सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सहसंबंध का अभाव

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प्रश्न 4.
rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N^{ 3 }-N } \) सूत्र है –
(a) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक का
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का

प्रश्न 5.
सहसंबंध को गणितीय विधि से प्रतिपादन करने का श्रेय जाता है –
(a) मार्शल को
(b) बाउले को
(c) कार्ल पियरसन को
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) कार्ल पियरसन को

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प्रश्न 6.
यदि दो चर एक-दूसरे के प्रति एक दिशा में या विपरीत दिशा में परिवर्तित होते हैं तो इसे कहा जाता है –
(a) केंद्रीय प्रवृत्ति की माप
(b) परिक्षेपण की माप
(c) सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सहसंबंध

प्रश्न 7.
यदि एक चर के बढ़ने पर दूसरे चर में भी बढ़ोतरी होती है तो उनमें सहसंबंध होगा –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शून्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

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प्रश्न 8.
कार्ल पियरसन विधि से सहसंबंध गुणांक ज्ञात करने का सूत्र है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 46
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 48
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47

प्रश्न 9.
यदि कोटि सहसंबंध में किसी चर की पुनरावृत्ति होती है तो प्रत्येक मूल्य कोटि प्रदान करते हैं –
(a) अलग-अलग क्रमागत आधार पर
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है

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प्रश्न 10.
कोटि सहसंबंध (rk) तथा गुणन आघूर्ण सहसंबंध में संबंध होता है –
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(b) rk > गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम कृषक एवं पशुपालक Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न (क)
सबसे पहले किस जानवर को आदमी ने पालतू बनाया ?
(i) कुत्ता
(ii) बंदर
(iii) गाय
(iv) बकरी
उत्तर-
(i) कुत्ता

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

प्रश्न (ख)
गेहूँ का प्राचीन साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुआ है ?
(i) मेहरगढ़
(ii) महागढ़
(iii) हल्लूर
(iv) पैयमपल्ली
उत्तर-
(i) मेहरगढ़

प्रश्न 2.
निम्नलिखित का सुमेल करें :

  1. चिरांद – आधुनिक उत्तरप्रदेश
  2. मेहरगढ़ – आधुनिक बिहार
  3. बुर्जहोम – आधुनिक पाकिस्तान
  4. कोल्डिहवा – आधुनिक काश्मीर

उत्तर-

  1. चिरांद – आधुनिक बिहार (छपरा)
  2. मेहरगढ़ – आधुनिक पाकिस्तान
  3. बुर्जहोम – आधुनिक काश्मीर
  4. कोल्डिहवा – आधुनिक उत्तरप्रदेश

आइए करके देखें 

प्रश्न (i)
खेती की शुरुआत कैसे हुई ?
उत्तर-
मानव जब भोजन की खोज के लिए इधर-उधर एक स्थान – से दूसरे स्थान तक जाते रहते थे। इसी क्रम में मानव को पौधों के फल पकने का ज्ञान हुआ। उनके बीज से सदृश पौधे को उगते देखा होगा, इसी प्रकार गेहूँ, जौ और मटर के पौधे से प्राप्त अनाज और उसके गिर जाने सदृश्य पौधे की उत्पत्ति होते देखा और धीरे-धीरे बीजों का गह कर फसलों को नियमित रूप से उपजाने लगा।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

प्रश्न (ii)
मानव जीवन में खेती के बाद क्या परिवर्तन आया?
उत्तर-
खेती की शुरुआत ने मानव-जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। खाद्य संग्राहक से खाद्य उत्पादक बन गया। एक निश्चित जगह पर समूहों में रहने लगा। गाँव का विकास हुआ। सहयोग की भावना का जन्म हुआ। नाते-रिश्तेदारी पर आधारित जन जातीय समुदाय का उदय हुआ। रहने के लिए छप्पड़ वाली झोपड़ियाँ बनने लगीं। कपड़े पहनने लगे।

प्रश्न (iii)
नवपाषाण युग के औजारों की क्या विशेषता थी ?
उत्तर-
पुरापाषाण युग की औजारों की अपेक्षा नवपाषाणयुग की औजारों के आकार छोटे, दृढ़, पहले से ज्यादा धारदार एवं चमकदार थे।

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम कृषक एवं पशुपालक Notes

पाठ का सारांश

  • सबसे पहले कुत्ता, सुअर, भेड़-बकरी और मवेशी को पालतू बनाया गया।
  • पालतू जानवर उसे कहते हैं जिसे मनुष्य अपने लाभ के लिए अपने पास रखता है और उसका उपयोग करता है।
  • पशु पालन के माध्यम से भी भोजन की समस्या का समाधान हुआ।
  • कृषि एवं पशुपालन से मानव जीवन में प्रथम क्रांति हुई।
  • प्रारंभिक मानव अपने भोजन का उत्पादन स्वयं नहीं करते थे ।
  • कृषि से कृषकों के बीच सहयोग की भावना पनपी और स्थायी रूप से एक जगह रहने लगे एवं लोगों के बीच आपसी संबंध कायम हुए।
  • नव पाषाण युग में मानव के खाने, रहने आदि के अंदाज में मूलभूत परिवर्तन हुए इसलिए इसे ‘क्रांतिकाल’ कहा जाता है ।
  • नवं पाषाण युग में ग्राम आधारित सामाजिक संगठन का विकास हुआ।
  • लगभग 12,000 वर्ष पहले दुनिया की जलवायु में परिवर्तन आया और शिकारी संग्रहकर्ता के लिए प्रकृति ने भोजन के अनेक अवसर उपलब्ध कराए ।
  • जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप जनसंख्या में वृद्धि होने लगी।
  • शिकारी संग्रहकर्ता अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए फसलों को बोना शुरू किया।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास InText Questions and Answers

अनुच्छेद 9.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण – A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण – B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता
है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?
उत्तर:
लक्षण-B पहले उत्पन्न हुआ होगा; क्योंकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनुकूलनता के कारण लक्षण का प्रतिशत बढ़ता जाता है।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?
उत्तर:
किसी प्रजाति में वातावरणीय कारकों के प्रभाव से उत्पन्न विभिन्नताएँ उसे विपरीत परिस्थितियों में जीवित रखने में सहायक होती हैं। विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार हैं।

अनुच्छेद 9.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
मेण्डल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
या शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के बीच एकसंकर संकरण का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
मेण्डल ने दो विकल्पी मटर के पौधे चुने जैसे लंबे जो कि लंबे मटर के पौधे ही पैदा करते थे तथा बौने जो कि बौने मटर के पौधे ही उत्पन्न करते थे। मेण्डल ने इन दोनों पौधों का संकरण कराया, तो प्रथम संतति पीढ़ी (F1 ) में सभी मटर के पौधे लंबे उगे। इसका अर्थ यह है कि लंबाई का लक्षण ही F1 पीढ़ी संतति में दिखाई दिया और बौनेपन का लक्षण प्रदर्शित नहीं हुआ। जब मेण्डल ने F1 पीढी के पौधों में स्वपरागण कराया तो F2 पीढी में दोनों लक्षण दिखे अर्थात् लंबे पौधे भी और बौने भी (3 : 1 अनुपात में)। इसका अर्थ हुआ कि लंबे होने का लक्षण प्रभावी और बौनेपन का लक्षण अप्रभावी है।
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यह इंगित करता है कि F1 पौधों द्वारा लंबाई एवं बौनेपन दोनों के विकल्पी लक्षणों की वंशानुगति हुई। F1 पीढ़ी में लंबाई वाला विकल्प अपने आपको व्यक्त कर पाया क्योंकि वह प्रभावी विकल्प है और बौनापन अप्रभावी विकल्प है।

प्रश्न 2.
मेण्डल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?
उत्तर:
मेण्डल ने दो विकल्पी जोड़ों गोल बीज वाले लंबे पौधों तथा झुर्शीदार बीज वाले बौने पौधों का संकरण कराया तो F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे एवं गोल बीज वाले थे। अतः लंबाई तथा गोल बीज प्रभावी लक्षण हैं।
F1 पीढ़ी के पौधों का स्वपरागण कराने पर चार प्रकार के पौधे पाए गए –
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F2 पीढ़ी की संतति:
में झुरींदार बीज वाले लंबे पौधे तथा गोल बीज वाले बौने पौधे नए संयोजन प्रदर्शित करते हैं, इससे सिद्ध होता है कि विभिन्न विकल्पी लक्षण स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

प्रश्न 3.
एक ‘A-रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘O’ है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग – ‘O’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षण-रुधिर वर्ग – ‘A’ अथवा ‘O’ प्रभावी लक्षण है? का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर:
यह सूचना पर्याप्त नहीं है। इसमें माता-पिता के इस लक्षण का जीनोम भी देना चाहिए। क्योंकि इस सूचना से यह नहीं पता चलता कि पिता में इस लक्षण के IA IA जीन हैं अथवा IA IO जीन हैं। पूर्वज्ञान के आधार पर हम कह सकते हैं कि IA IO लक्षण प्रभावी है और पिता में IA IO का जोड़ा होगा एवं माता में IA IO विकल्प होंगे तथा पुत्री में IO IO जीन का जोड़ा होगा।
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प्रश्न 4.
मानव में बच्चे का लिंग-निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर:
लिंग गुणसूत्र लिंग-निर्धारण का कार्य करते हैं –

  • महिलाओं में दोनों लिंग गुणसूत्र एक ही प्रकार युग्मक के होते हैं- X और X(XX)।
  • पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्र भिन्न-भिन्न होते हैं- X और Y(XY)।
  • पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु बराबर मात्रा में उत्पन्न करते हैं। एक प्रकार के शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है जबकि दूसरे प्रकार के शुक्राणु Y गुणसूत्र रखते हैं।
  • महिलाएँ एक ही प्रकार के अंडाणु उत्पन्न करती हैं जिसमें x गुणसूत्र होते हैं।
  • जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है तो (XX) युग्मनज लड़की में विकसित होता है।
  • जब Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है तो (XY) युग्मनज लड़के में विकसित होता है।
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अनुच्छेद 9.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?
उत्तर:
एक विशेष लक्षण वाले वयष्टि जीवों की संख्या समष्टि में निम्नलिखित कारणों से बढ़ सकती है –
1. जनन के दौरान विभिन्नता का उद्भव जो कि पर्यावरण के अनुकूल हो और इस विभिन्नता का वंशागत होना। उदाहरण के लिए, लाल भंग की समष्टि में हरे रंग के भंगों का उत्पन्न होना। कौए हरे रंग के भंग हरी पत्तियों के बीच पहचान नहीं पाते और लाल रंग के भुंग को शिकार बनाते हैं। जिससे लाल रंग के भृग की संख्या समष्टि में कम होती जाती है और हरे रंग के भंग की संख्या समष्टि में बढ़ती जाती है। यह एक प्राकृतिक चयन था जो कि कौओं के द्वारा सम्पन्न हुआ।

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2. आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण। उदाहरण के लिए, भृग समष्टि में लाल भुंग नीले भंग की अपेक्षा संख्या में अधिक थे। परन्तु संयोग से एक हाथी ने उन झाड़ियों को कुचल डाला जिनमें भृग रहते थे। इसमें लाल रंग के भंग रौंद दिए गए पर कुछ नीले शृंग बच गए। धीरे-धीरे नीले रंग के भंगों की संख्या प्रजनन द्वारा बढ़ती जाती है जिससे समष्टि का रूप बदल जाता है। यह मात्र संयोग था कि एक दुर्घटना के कारण एक रंग की भृग समष्टि बच गई।

प्रश्न 2.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों?
उत्तर:
उपार्जित लक्षण का प्रभाव केवल कायिक ऊतकों पर पड़ता है परन्तु जनन कोशिकाओं के डी०एन०ए० पर नहीं पड़ता। अतः ये लक्षण वंशानुगत नहीं होते।

प्रश्न 3.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है?
उत्तर:
1. बाघों की संख्या में कमी दर्शाती है कि बाघ प्राकृतिक चयन में पिछड़ गए हैं। उनमें उत्तम परिवर्तन उत्पन्न नहीं हो रहे जो कि पर्यावरण के अनुकूल हों और जिसके कारण वे अपनी समष्टि का आकार बढ़ा सकें।

2. छोटी समष्टि पर दुर्घटनाओं का प्रभाव अधिक पड़ता है। छोटी समष्टि में दुर्घटनाएँ किसी जीन की आवृत्ति को भी प्रभावित कर सकती हैं चाहे उनका उत्तरजीविता हेतु कोई लाभ हो या न हो। प्राकृतिक चयन और दुर्घटनाओं के कारण बाघों की प्रजाति लुप्त भी हो सकती है।

अनुच्छेद 9.4 पर आधारित

प्रश्न 1.
वे कौन-से कारक हैं जो नयी स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं?
उत्तर:
निम्न कारक नयी स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं –

  1. प्राकृतिक चयन।
  2. जीन प्रवाह का न होना अथवा बहुत कम होना।
  3. आनुवंशिक विचलन।
  4. डी०एन०ए० में गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन जिससे कि दो समष्टियों के सदस्यों की जनन कोशिकाएँ (युग्मक) संलयन न कर पाएँ।
  5. दो उप-समष्टियों का रूपेण अलग होना जिससे कि उनके सदस्य परस्पर लैंगिक प्रजनन न कर पाएँ।

प्रश्न 2.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर:
नई स्पीशीज़ का उद्भव तब होता है जबकि एक समष्टि की दो उप-समष्टियाँ परस्पर लैंगिक जनन न कर पाएँ। लैंगिक जनन में डी०एन०ए० में आनुवंशिक विचलन एवं प्राकृतिक वरण और भौगोलिक पृथक्करण के कारण एक उप-समष्टि दूसरी उप-समष्टि से भिन्न होती जाती है। अन्ततः एक नई स्पीशीज़ का उद्भव होता है। स्वपरागित स्पीशीज़ में अन्य जीवों से नए जीन समष्टि में नहीं आ पाते।

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अतः आने वाली पीढ़ियों में नए-नए संगठन नहीं हो पाते और अधिक विभिन्नताएँ उत्पन्न नहीं हो पातीं। ऐसे पौधों में विभिन्नता केवल तभी आती है जब डी०एन०ए० प्रतिकृति के समय त्रुटि के कारण डी०एन०ए० में परिवर्तन आ जाए जिसकी संभावना बहुत कम होती है। अतः भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता।

प्रश्न 3.
क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता। क्योंकि अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति में परस्पर बहुत कम अंतर होता है, समानताएँ बहुत अधिक होती हैं। जो थोड़ी-बहुत विविधता होती है वह DNA प्रतिकृति के समय न्यून त्रुटियों के कारण होती है। ये नई विभिन्नताएँ इतनी प्रमुख नहीं होती जिससे कि किसी नई जाति का उद्भव हो सके।

अनुच्छेद 9.5 पर आधारित

प्रश्न 1.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं?
उत्तर:
समजात अभिलक्षण से भिन्न दिखाई देने वाली विभिन्न स्पीशीज़ के बीच विकासीय सम्बन्ध की पहचान करने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, मेंढक, छिपकली, पक्षी तथा मनुष्य के अग्रपादों की आधारभूत संरचना एकसमान है। यद्यपि ये विभिन्न कशेरुकों में भिन्न-भिन्न कार्य करने के लिए रूपान्तरित हैं। ये समजात अंग समान पूर्वज की ओर इशारा करते हैं।
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प्रश्न 2.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
तितली और चमगादड़ के पंख समजात अंग नहीं होते। ये समरूप अंग हैं जो उड़ने का कार्य करते हैं। कारण तितली के पंखों की संरचना चमगादड़ के पंख से बिल्कुल भिन्न होती है। चमगादड़ के पंख में अग्रपाद की अंगुली की हड्डियाँ होती हैं जबकि तितली के पंख में हड्डियाँ नहीं होती।

प्रश्न 3.
जीवाश्म क्या हैं? वे जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं?
उत्तर:
लाखों अथवा हजारों साल पहले पाए जाने वाले जीवों के परिरक्षित कठोर अवशेष, चट्टानों पर पैरों के निशान, मिट्टी में बने मृत जीवों के साँचे आदि को जीवाश्म कहते हैं।

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जीवाश्म हमें जैव विकास के बारे में निम्नलिखित बातें दर्शाते हैं –
1. ऐसी कौन-सी स्पीशीज़ हैं जो कभी जीवित थीं परन्तु अब लुप्त हो गई हैं।
2. ऐसे जीवों के अवशेष जीवाश्म के रूप में मिले हैं जोकि एक वर्ग के जीवों का उनसे विकसित उच्च वर्ग के बीच की कड़ी के जीवों का स्वरूप बताते हैं।
उदाहरण के लिए, आर्कीऑप्टैरिक्स जीवाश्म में कुछ लक्षण सरीसृप के हैं तो अन्य लक्षण पक्षियों के। यह इंगित करता है कि पक्षी सरीसृप से विकसित हुए
3. जीवाश्म पृथ्वी के अंदर विभिन्न स्तर पर खुदाई करके निकाले जाते हैं। इससे पता चलता है कि पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए हैं।

अनुच्छेद 9.6 पर आधारित

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं?
उत्तर:
आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ (होमो सैपिएन्स) के सदस्य हैं।

1. यह बात उत्खनन, समय-निर्धारण, जीवाश्म अध्ययन तथा डी०एन०ए० अनुक्रम के निर्धारण द्वारा सिद्ध होती है। हम सभी का उद्भव अफ्रीका से हुआ। जहाँ से हमारे पूर्वज सारे संसार में फैले और उनमें धीरे-धीरे आकृति, आकार, रंग-रूप की विभिन्नता आती गई। परन्तु उनके डी०एन०ए० में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं हुआ जो उनको नई जाति-उद्भव का स्तर दे पाता।

2. किसी भी स्पीशीज़ के सदस्य किसी अन्य स्पीशीज के सदस्यों के साथ सफल लैंगिक प्रजनन नहीं कर पाते (गुणसूत्रों की संरचना तथा संख्या में भिन्नता के कारण)। परन्तु मानव आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न होते हुए भी परस्पर सफल लैंगिक प्रजनन कर सकते हैं। उनसे उत्पन्न संतति अपनी पीढी बनाए रख सकती है। वे परस्पर रक्त का अनुदान कर सकते हैं। अतः आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं।

प्रश्न 2.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जीवाणु, मछली, मकड़ी तथा चिम्पैंजी में से चिम्पैंजी में शारीरिक अभिकल्प की जटिलता सबसे अधिक है। चिम्पैंजी का शारीरिक डिज़ाइन, विकसित शारीरिक अंग संस्थान, मस्तिष्क का जीवाणु, मकड़ी और मछली से अधिक विकसित होना तथा हाथों में अंगूठे का अँगुलियों के विपरीत होना जिससे वे चीजें पकड़ सकें आदि लक्षण उनको बाकी सभी से उत्तम बना देते हैं। हालाँकि विकास की दृष्टि से इसे अतिउत्तम नहीं माना जा सकता।

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क्योंकि सरलतम अभिकल्प वाले जीवाणु के समूह विभिन्न पर्यावरण में आज भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, जीवाणु आज भी विषम पर्यावरण; जैसे कि-उष्ण झरने, गहरे समुद्र के गर्म स्रोत तथा अन्टार्कटिका की बर्फ में भी पाए जाते हैं। दूसरे शब्दों में यह नहीं कहा जा सकता कि चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प अन्य से उत्तम है, वरन् वह जैव विकास शृंखला में उत्पन्न एक और स्पीशीज़ है।

Bihar Board Class 10 Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मेण्डल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी।
(a) TTWW
(b) TTww
(c) TtWW
(d) TtWw
उत्तर:
(c) TtWW

प्रश्न 2.
समजात अंगों का उदाहरण है –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है?
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंजी
(c) मकड़ी।
(d) जीवाणु
उत्तर:
(a) चीन के विद्यार्थी

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हलके रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हलके रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हलके रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी?
उत्तर:
इस विवरण के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आँखों के हलके रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी। क्योंकि जनक (माता-पिता) दोनों में ही आँखें हलके रंग की हैं। यह हो सकता है कि माता तथा पिता में जीन के दोनों विकल्प अप्रभावी हों। इसलिए आँखों के रंग का दूसरा विकल्प है ही नहीं। अतः सन्तान में हलके रंग की आँखें पाई गईं। अगर दूसरी संधारणा पर विचार करें कि आँखों का हलके रंग का लक्षण प्रभावी है तो इस अवस्था में कुछ बच्चों की आँखें गहरे रंग की होनी चाहिए। क्योंकि अप्रभावी लक्षण 4 में से 1 बच्चे (3 : 1 अनुपात में) में व्यक्त होना चाहिए।

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प्रश्न 5.
जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र किस प्रकार परस्पर संबंधित है?
उत्तर:
जैव-विकास के अध्ययन से पता चलता है कि पहले उत्पन्न जीवों का शरीर बाद में उत्पन्न जीवों के शरीर से सरलतम है। अर्थात् जीवों के शरीर में सरलता से जटिलता की तरफ विकास हुआ है। यही आधार वर्गीकरण का भी है। जीवों को उनके शरीर के डिज़ाइन के आधार पर ही विभिन्न वर्गों में रखा गया है। अत: जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन परस्पर संबंधित है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
समजात अंग उन अंगों को जो अलग-अलग स्पीशीज़ के जीवों में अलग-अलग कार्य करते हैं परन्तु आधारभूत संरचना में एकसमान हैं, समजात अंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षी के पंख तथा मनुष्य का हाथ दोनों ही रूपान्तरित अग्रपाद हैं। समरूप अंग ऐसे अंग जो अलग-अलग जीवों में एकसमान कार्य करते हैं परन्तु उनकी आधारभूत संरचना समान नहीं होती है, उन्हें समरूप अंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, तितली के पंख और कबूतर के पंख दोनों ही उड़ने का कार्य करते हैं, परन्तु कबूतर के पंख में हड्डियाँ होती हैं, तितली के पंख में नहीं होती।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग कत्ता कुतिया ज्ञात करने के उद्देश्य से एक काली खाल (BB) x (bb) सफ़ेद खाल प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर:
इसके लिए एक शुद्ध काली खाल वाले कुत्ते (BB) तथा एक शुद्ध सफेद खाल वाली F1 संतान पिल्ले कुतिया (bb) का चयन किया जाता है। उनका समय पर संकरण कराएँ। यदि उनसे उत्पन्न सभी पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) काली खाल वाले हैं, तो (Bb) सभी काली खाल वाले काली खाल का लक्षण प्रभावी है।
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प्रश्न 8.
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जीवाश्म पुराने जीवों के अवशेष अथवा चिह्न या साँचे होते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि अमक जीव कब पाया जाता था, कब लुप्त हो गया, जीवों के विकास क्रम में पहले जीवों की संरचना कैसी थी और बाद में उसमें क्या-क्या परिवर्तन होते गए।

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है?
या स्टैनले मिलर के प्रयोग का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011, 12, 13, 17)
उत्तर:
वैज्ञानिक जे०बी०एस० हाल्डेन ने 1929 ई. में सुझाव दिया कि जीवों की सर्वप्रथम उत्पत्ति उन सरल अकार्बनिक अणुओं से ही हुई होगी जो पृथ्वी को उत्पत्ति के समय बने थे। स्टेनले मिलर तथा हेराल्ड सी० यूरे ने 1953 ई. में प्रयोग किए और प्रमाण दिए कि सरल अकार्बनिक अणुओं से कार्बनिक अणु उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने ऐसे वातावरण का निर्माण किया जो सम्भवतः प्राथमिक वातावरण के समान था।

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जिसमें अमोनिया, मीथेन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैसें तो थीं परन्तु स्वतन्त्र ऑक्सीजन नहीं थी। पात्र में जल भी था। इस सम्मिश्रण को 100°C से कुछ कम ताप पर रखा गया। गैसों के इस मिश्रण में कृत्रिम रूप से समय-समय पर चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं; जैसे किआकाश में तड़ित बिजली उत्पन्न होती है।
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इस प्रयोग में देखा गया कि 15% मीथेन का कार्बन उपयोग हुआ और सरले अकार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित हो गया। इन अकार्बनिक यौगिकों में विभिन्न, अमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो कि प्रोटीन के अणुओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। उपर्युक्त प्रमाण के आधार पर हम परिकल्पना कर सकते हैं कि शायद जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
अलैंगिक जनन में जनक एक ही होता है और उसी का डी०एन०ए० संतति में जाता है। अतः संतति में विभिन्नता तभी आती है जब डी०एन०ए० प्रतिकृति में त्रुटियाँ हों जो कि न्यून होती हैं। लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं जो कि डी०एन०ए० का एक-एक सेट संतति को प्रदान करते हैं। इससे संतति में भिन्न-भिन्न लक्षणों का समावेश होता है और अलैंगिक जनन से लैंगिक जनन में विविधता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताएँ जीन (डी०एन०ए०) में परिवर्तन के कारण होती हैं। अतः ये स्थिर होती हैं और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती हैं। प्राकृतिक चयन के कारण वही विभिन्नताएँ प्रगति करती हैं जो कि पर्यावरण वरण के अनुकूल हों। अतः समय काल में मौजूदा पीढ़ी अपने पूर्वजों से इतनी भिन्न हो सकती हैं कि वे उनसे लैंगिक जनन न कर पाएँ और एक अन्य स्पीशीज़ के रूप में उभरकर आ जाएँ तथा जीवों के विकास में सहायक हों।

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प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर:
जैसा कि चित्र में दिखाया गया है कि मटर के गोल बीज वाले लंबे पौधों का यदि झुर्रादार बीज वाले बौने पौधों से संकरण कराया जाए तो F2 पीढी में P RRYy लंबे/बौने लक्षण तथा गोल/झुरींदार लक्षण स्वतन्त्र रूप से (गोल, हरे बीज) (झुरींदार, पीले बीज) वंशानुगत होते हैं।

यदि संतति पौधे को जनक पौधे से संपूर्ण जीनों का एक पूर्ण सेट प्राप्त होता है तो चित्र में दिया प्रयोग सफल नहीं हो सकता। क्योंकि दो लक्षण R तथा Y सेट में एक-दूसरे से संलग्न रहेंगे तथा स्वतन्त्र रूप में आहरित नहीं हो सकते। (गोल, पीले बीज) वास्तव में जीन सेट केवल एक डी०एन०ए० श्रृंखला के रूप में न होकर, डी०एन०ए० के अलग-अलग स्वतन्त्र अणु के रूप में होते हैं। इनमें से प्रत्येक एक गुणसूत्र का अनुपात निर्माण करता है।

इसलिए प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतिकृति होती है। जिनमें से एक उन्हें नर तथा दूसरी मादा जनक से प्राप्त होते हैं। प्रत्येक जनक कोशिका से गुणसूत्र के प्रत्येक जोड़े का केवल एक गुणसूत्र ही एक जनन कोशिका (युग्मक) में जाता है। जब दो युग्मकों का संलयन होता है, तो इनसे बने युग्मज में गुणसूत्रों की संख्या पुनः सामान्य हो जाती है। इस प्रकार लैंगिक जनन 556 बीज द्वारा संतति में जनक कोशिकाओं जैसी ही गुणसूत्रों की संख्या निश्चित बनी रहती है।
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प्रश्न 12.
“केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्यों एवं क्यों नहीं?
उत्तर:
इस कथन से हम सहमत हैं; क्योंकि जो विभिन्नताएँ एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी हैं, वे वर्तमान पर्यावरण के अनुकूल हैं और प्राकृतिक चयन प्रक्रम में वे अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। इसका अर्थ है कि समय के साथ-साथ इन विभिन्नताओं वाले जीव समष्टि में प्रमुख हो जाएँगे क्योंकि इनकी विभिन्नताएँ (लक्षण) परिवर्तित पर्यावरण में जीवित रह सकती हैं। ये जीव प्रकृति में सफल रहेंगे तथा अपनी संतति को सतत बनाए रख सकते हैं।

Bihar Board Class 10 Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता के प्रयोग के लिए मेण्डल ने निम्नलिखित में से कौन-से पौधों का उपयोग किया? (2016, 18)
(a) पपीता
(b) आलू
(c) मटर
(d) अंगूर
उत्तर:
(c) मटर

प्रश्न 2.
विपरीत लक्षणों के जोड़ों को कहते हैं – (2013)
(a) युग्मविकल्पी या एलिलोमॉर्फ
(b) निर्धारक
(c) समयुग्मजी
(d) समरूप
उत्तर:
(a) युग्मविकल्पी या एलिलोमॉर्फ

प्रश्न 3.
मटर में बीजों का गोल आकार तथा पीला रंग दोनों होते हैं –
(a) अप्रभावी
(b) अपूर्ण प्रभावी
(c) संकर
(d) प्रभावी
उत्तर:
(d) प्रभावी

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प्रश्न 4.
उद्यान मटर में अप्रभावी लक्षण है – (2015, 16)
(a) लम्बे तने
(b) झुर्रादार बीज
(c) गोल बीज
(d) फैली हुई फली
उत्तर”:
(b) झुरींदार बीज

प्रश्न 5.
एकसंकर संकरण के F2 पीढ़ी में शुद्ध तथा संकर लक्षणों वाले पौधों का अनुपात होगा
(a) 2 : 1
(b) 3 : 1
(c) 1 : 1
(d) 1 : 3
उत्तर:
(c) 1 : 1

प्रश्न 6.
एक संकर क्रॉस का जीन प्रारूप अनुपात होता है –
(a) 3 : 1
(b) 1 : 2 : 1
(c) 2 : 1 : 2
(d) 9 : 3 : 3 : 1
उत्तर:
(b) 1 : 2 : 1

प्रश्न 7.
मटर के लम्बे पौधों का क्रॉस बौने पौधों से कराने पर प्रथम पीढ़ी में लम्बे मटर के पौधे प्राप्त होते हैं, द्वितीय पीढ़ी में प्राप्त पौधे होंगे (2017)
(a) लम्बे तथा बौने दोनों
(b) लम्बे मटर के पौधे
(c) बौने मटर के पौधे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) लम्बे तथा बौने दोनों

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प्रश्न 8.
F2 पीढ़ी में 3 : 1 अनुपात प्राप्त होता है – (2015)
(a) एक संकर क्रॉस में
(b) द्विसंकर क्रॉस में
(c) (i) तथा (ii) दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) एक संकर क्रॉस में

प्रश्न 9.
पृथक्करण का नियम प्रस्तुत किया था – (2012, 14)
(a) चार्ल्स डार्विन ने
(b) ह्यूगो डी वीज ने
(c) जॉन ग्रेगर मेण्डल ने
(d) राबर्ट हुक ने
उत्तर:
(c) जॉन ग्रेगर मेण्डल ने।

प्रश्न 10.
गुणसूत्र किस पदार्थ के बने होते हैं? (2013)
(a) प्रोटीन
(b) आर०एन०ए०
(c) डी०एन०ए०
(d) डी०एन०ए० और प्रोटीन
उत्तर:
(d) डी०एन०ए० और प्रोटीन

प्रश्न 11.
मनुष्य में कौन-सा गुणसूत्र जोड़ा स्त्रीलिंग निर्धारण करता है?
(a) XY
(b) XX
(c) XXY
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) XX

प्रश्न 12.
सामान्य मनुष्य में गुणसूत्रों की संख्या है –
(a) 45
(b) 46
(c) 30
(d) 23
उत्तर:
(b) 46

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प्रश्न 13.
मनुष्य के शुक्राणु में ऑटोसोम की संख्या कितनी होती है? (2016)
(a) 22
(b) 24
(c) 42
(d) 44
उत्तर:
(d) 44

प्रश्न 14.
मनुष्य में लड़का पैदा होगा जब –
(a) माँ का पोषण गर्भावस्था में अधिक पौष्टिक हो
(b) पिता माँ से अधिक शक्तिशाली हो
(c) बच्चे में XY गुणसूत्र हों
(d) बच्चे में XX गुणसूत्र हों
उत्तर:
(c) बच्चे में XY गुणसूत्र हों

प्रश्न 15.
लक्षण, जिनके जीन्स x गुणसूत्रों पर होते हैं, कहलाते हैं। (2011)
(a) लिंग प्रभावित
(b) लिंग सहलग्न
(c) लिंग सीमित
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) लिंग सहलग्न

प्रश्न 16.
जीवन की उत्पत्ति हई – (2012)
(a) सागर में
(b) धरती पर
(c) वायुमण्डल में
(d) अंतरिक्ष में
उत्तर:
(a) सागर में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता की खोज करने वाले वैज्ञानिक का पूरा नाम बताइये। या आनुवंशिकता के जनक का नाम बताइये।
या आनुवंशिकता के जन्मदाता कौन थे? (2012, 13)
उत्तर:
ग्रेगर जॉन मेण्डल।

प्रश्न 2.
मेण्डल ने आनुवंशिकता का प्रयोग किस पौधे पर किया था? उसका वैज्ञानिक नाम लिखिए। (2018)
उत्तर:
मटर। वैज्ञानिक नाम-पाइसम सटाइवम (Pisum satism)

प्रश्न 3.
मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को क्यों चुना? (2017)
उत्तर:
मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को चुना; क्योंकि –
1. मटर कम समय में ही उगने वाला पौधा है जिसे आसानी से उगाया जा सकता है तथा इसमें स्वपरागण के फलस्वरूप अनेक बीज बनाने की समान क्षमता है।
2. मटर में विभिन्न-विभिन्न लक्षणों वाली प्रजातियाँ सरलता से मिल जाती हैं तथा ये विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी सामान्य प्रजनन क्षमता रखती हैं।

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प्रश्न 4.
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षणों से आप क्या समझते हैं? (2017)
उत्तर:
एक लक्षण के दो कारकों में जो अपना प्रभाव प्रदर्शित करता है वह प्रभावी लक्षण कहलाता है जबकि दूसरा जो होते हुए भी अपने प्रभाव को प्रदर्शित नहीं कर पाता, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं।

प्रश्न 5.
लक्षणरूपी 9:3:3:1 मेण्डल के किस नियम का प्रतिपादन करता है?
उत्तर:
स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम का।

प्रश्न 6.
मनुष्य के नर तथा मादा गुणसूत्रों को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
नर गुणसूत्र = 22 + XY तथा मादा गुणसूत्र = 22 + XX गुणसूत्र।

प्रश्न 7.
यदि किसी जीव की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या 20 है, तो उसकी जनन कोशिकाओं में कितने गुणसूत्र होंगे?
उत्तर:
जनन कोशिका अर्थात् युग्मकों में n = 10 गुणसूत्र होंगे।

प्रश्न 8.
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में डी०एन०ए० कहाँ पाया जाता है? (2013)
उत्तर:
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में डी०एन०ए० एक गुणसूत्र के रूप में कोशिकाद्रव्य में पड़ा रहता है।

प्रश्न 9.
आनुवंशिक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो रोग आनुवंशिक विशेषकों की त्रुटिपूर्ण संख्या. प्रभावी या अप्रभावी स्वरूप आदि के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशानुगत होते रहते हैं, उन्हें आनुवंशिक रोग कहते हैं।

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प्रश्न 10.
किस आनुवंशिक लक्षण के जीन्स x गुणसूत्रों पर पाये जाते हैं? (2011)
उत्तर:
वर्णान्धता।

प्रश्न 11.
यदि किसी व्यक्ति को हल्की चोट लगने पर भी रक्तस्राव नहीं रुकता तो उसे कौन-सा रोग हो सकता है?
उत्तर:
उसे हीमोफीलिया रोग है।

प्रश्न 12.
लिंग सहलग्नता से सम्बन्धित किन्हीं दो बीमारियों के नाम लिखिए। (2013, 15, 18)
उत्तर:
हीमोफीलिया तथा वर्णान्धता लिंग सहलग्न रोग हैं।

प्रश्न 13.
एक व्यक्ति हीमोफीलिया का रोगी है और उसकी पत्नि में हीमोफीलिया का एक जीन है। उस दंपत्ति के बच्चों में रोग से ग्रसित होने की संभावना क्या होगी? (2013)
उत्तर:
50%

प्रश्न 14.
यदि किसी बच्चे में 46 के स्थान पर 47 गुणसूत्र हों, तो उस बच्चे में किस प्रकार के रोग होने की सम्भावना है? या एक बच्चे में 47 गुणसूत्र हैं। उसे किस रोग की सम्भावना है?
उत्तर:
उसे मंगोली जड़ता रोग हो सकता है। इस प्रकार का दोष

प्रश्न 15.
मानव आनुवंशिकी विशेषकों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मनुष्य में जो लक्षण वंशानुगत होते हैं उन्हें मानव आनुवंशिकी विशेषक कहते हैं।

प्रश्न 16.
स्वत: जनन सिद्धान्त में विश्वास रखने वाले किसी एक वैज्ञानिक का नाम बताइये। या स्वतः जननवाद मत के प्रवर्तक का नाम लिखिये।
उत्तर:
स्वत: जनन सिद्धान्त में बैप्टिस्ट वॉन हेलमॉण्ट (1652) का विश्वास था।

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प्रश्न 17.
मिलर ने अपने प्रयोग में कौन-कौन सी गैसों का मिश्रण लिया?
उत्तर:
मिलर ने अपने प्रयोग में मेथेन (CH4) अमोनिया (NH3) हाइड्रोजन (H2) तथा जलवाष्प (H2O) गैसें लीं।

प्रश्न 18.
जीवन के उद्भव का आधुनिक ओपेरिन सिद्धान्त क्या है ? (2011, 13)
उत्तर:
रूस के प्रसिद्ध जीव-रसायनज्ञ ए० आई० ओपेरिन ने नवीनतम खोजों के आधार पर जीवन के उद्भव की जीव-रसायन परिकल्पना प्रस्तुत की। इस परिकल्पना के अनुसार आदिकालीन पृथ्वी पर केवल कार्बनिक यौगिक उपस्थित थे जो समुद्र के जल में घुले हुए थे। इन्हीं यौगिकों के संयोग से एक ऐसी रचना का निर्माण हुआ जिसमें जीवन के लक्षण विद्यमान थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता को परिभाषित कीजिए। इसकी खोज कब और किसने की? (2011, 17)
उत्तर:
कुछ ऐसे लक्षण सभी जीवों में होते हैं, जो उन्हें अपने जनकों से प्राप्त होते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं। इन लक्षणों को आनुवंशिक लक्षण कहते हैं। इन लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी या एक जीव से दूसरे जीव में जाना आनुवंशिकता (heredity) कहलाता है। आनुवंशिकता के कारण ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवों में समानता बनी रहती है।

इसी कारण मनुष्य की सन्तान मनुष्य, बन्दर की सन्तान बन्दर, गाय की सन्तान गाय तथा हाथी की सन्तान सदैव हाथी ही रहती है। विज्ञान की उस शाखा को जिसमें आनुवंशिक लक्षणों के माता-पिता से सन्तान में आने की रीतियों का अध्ययन करते हैं, आनुवंशिकी कहते हैं। इसकी खोज ग्रेगर जॉहन मेण्डल ने सन् 1866 में की।

प्रश्न 2.
मानव आनुवंशिकी से आप क्या समझते हैं? इसके जनक कौन थे? इसके क्या लाभ हैं? (2013)
उत्तर:
मानव आनुवंशिकी में मनुष्य के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाने वाले लक्षणों या गुणों का अध्ययन किया जाता है। मानव आनुवंशिकी के जनक गाल्टन थे। मानव आनुवंशिकी के लाभ (Advantages of Human Genetics) मानव आनुवंशिकी का अध्ययन मानव समाज के लिए अनेक प्रकार से लाभप्रद है। इसके द्वारा मानव संततियों में आने वाले रोगों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इन रोगों के निदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर, मनुष्य इनकी चिकित्सा पहले से ही कर सकता है।

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सुजननिकी (eugenics) द्वारा अच्छे लक्षणों की वंशागति के लिए समाज के आनुवंशिकी स्तर का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद निषेधात्मक (negative) अथवा स्वीकारात्मक (positive) विधियाँ काम में लायी जाती हैं, अर्थात् निम्नकोटि के आनुवंशिकी लक्षणों की वंशागति से व्यक्तियों को रोका जाता है अथवा उच्च कोटि के लक्षणों वाले व्यक्तियों को वंशागति के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

दोनों प्रकार की सुजननिकी. के लिए विभिन्न प्रकार की विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं; जैसे-निषेधात्मक सुजननिकी के लिए वैवाहिक प्रतिबन्ध, बन्ध्यीकरण, सन्तति नियन्त्रण आदि के लिए गर्भपात इत्यादि; तथा स्वीकारात्मक सुजननिकी के लिए उत्कृष्ट चयन, उच्च आनुवंशिक लक्षणों का अधिकाधिक उपयोग, उच्चकोटि के लक्षणों वाले पुरुष का वीर्य संचित करना तथा कृत्रिम गर्भाधान के लिए उसका उपयोग करना आदि।

यूथेनिक्स (euthenics) द्वारा पहले से ही वंशानुगत गुणों को अच्छा वातावरण प्रदान कर उपचारित किया जा सकता है। वर्तमान समय में जीन की खोजों के आधार पर अच्छे जीन को खराब जीन के स्थान पर बदला जा सकता है। इसको जीन सर्जरी तथा जीन इन्जीनियरिंग या जीन अभियान्त्रिकी (genic surgery and genetic engineering) कहा जाता है। इस प्रकार हम मानव आनुवंशिकता का अध्ययन करके एक सुदृढ़ मानव समाज की कल्पना कर सकते हैं, जिसमें कोई भी मनुष्य बीमार, निम्नस्तरीय अथवा बुद्धिहीन उत्पन्न नहीं होगा।

प्रश्न 3.
आनुवंशिकी के गुणसूत्र सिद्धान्त का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
इस सिद्धान्त के अनुसार –

  1. सभी जीवों में प्रत्येक लक्षण के लिए कम-से-कम एक जोड़ी जीन या कारक अवश्य होते हैं।
  2. आनुवंशिक लक्षणों के जीन या आनुवंशिक कारक गुणसूत्रों पर पंक्तिबद्ध होते हैं और गुणसूत्रों के साथ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होते हैं।
  3. बहुकोशिकीय जीवों में जनन कोशिकाओं के माध्यम से विभिन्न पीढ़ियों में जैविक सम्बन्ध स्थापित रहता है। इसका अर्थ है कि आनुवंशिक लक्षणों के जीन जनन कोशिकाओं या युग्मकों द्वारा दूसरी पीढ़ी के जीवों में पहुँचते हैं।
  4. किसी जीव के लक्षणों में शुक्राणु व अण्डाणु दोनों ही का बराबर का योगदान होता है।
  5. युग्मक निर्माण के समय अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों के व्यवहार से प्रमाणित होता है कि जीन गुणसूत्रों पर होते हैं।
  6. जीवों की प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्र जोड़ों में मिलते हैं किन्तु युग्मकों में प्रत्येक गुणसूत्र-युग्म में से केवल एक गुणसूत्र होता है।
  7. अगुणित शुक्राणु व अण्डाणु के संलयन से बना युग्मज द्विगुणित होता है जिससे पूर्ण जीव का विकास होता है।

प्रश्न 4.
एकसंकर तथा द्विसंकर क्रॉस से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देते हुए समझाइए। (2015, 17)
उत्तर:
एकसंकर संकरण Monohybrid cross विपरीत लक्षण वाले नर तथा मादा के मध्य जब केवल एक जोड़ा विपरीत लक्षणों के अध्ययन के लिए संकरण कराया जाता है तो इन विपरीत लक्षणों के संकरण को एकसंकर (गुण) संकरण कहते हैं; जैसे-लाल फूल वाले तथा सफेद फूल वाले पौधों के मध्य संकरण। द्विसंकर संकरण Dihybrid cross जब विपरीत लक्षणों वाले नर तथा मादा के मध्य दो जोड़ा विपरीत लक्षणों के अध्ययन के लिए संकरण कराया जाता है तो इसे द्विसंकर संकरण कहते हैं; जैसे-पीले-गोल बीज वाले और हरे-झुरींदार बीज वाले पौधों के मध्य संकरण।

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प्रश्न 5.
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण में अन्तर कीजिए। (2013)
उत्तर:
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण में अन्तर –
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प्रश्न 6.
लक्षण प्रारूप तथा जीन प्रारूप में अन्तर कीजिए। (2011, 12, 16, 18)
या जीनोटाइप तथा फीनोटाइप में अन्तर कीजिए। (2013, 15, 18)
या फीनोटाइप एवं जीनोटाइप को स्पष्ट कीजिए। (2018)
उत्तर:
जीनोटाइप या जीन प्ररूपी आकारिक लक्षण में जीव चाहे जैसा हो उसमें पायी जाने वाली जीनी संरचना को जीन प्ररूपी या जीनोटाइप कहते हैं। फीनोटाइप या समलक्षणी जीन किसी भी प्रकार की हों यदि बाह्य रूप में समान लक्षण या उसका प्रभाव दिखायी दे रहा है तो उसे समलक्षणी या फीनोटाइप कहते हैं।

प्रश्न 7.
समयुग्मजी तथा विषमयुग्मजी में अन्तर कीजिए। (2011, 12, 16)
उत्तर:
समयुग्मजी तथा विषमयुग्मजी में अन्तर –
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प्रश्न 8.
एलिलोमॉर्फ एवं कारक को उदाहरण सहित समझाइए। (2011)
या एलील पर टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर:
एलील या एलिलोमॉर्फ विपरीत लक्षणों वाले युग्मों को एलील्स कहते हैं; जैसे – पौधों की लम्बाई के लिए लम्बा-बौना, बीज के लिए गोल-झुरींदार, पुष्प के लिए लाल-सफेद रंग इत्यादि। कारक जीवों में सभी लक्षण इकाइयों के रूप में होते हैं जिन्हें कारक कहते हैं। प्रत्येक इकाई लक्षण कारकों के एक युग्म से नियन्त्रित होता है। इनमें से एक कारक मातृक तथा दूसरा पैतृक होता है। युग्म के दोनों कारक विपरीत प्रभाव के हो सकते हैं, किन्तु उनमें से एक ही कारक अपना प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। दूसरा छिपा रहता है।

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प्रश्न 9.
शुद्ध एवं संकर जाति ( नस्ल) में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2013)
उत्तर:
शुद्ध एवं संकर जाति (नस्ल) में अन्तर –
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प्रश्न 10.
गुणसूत्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013)
या कायिक गुणसूत्र एवं लिंग गुणसूत्र में अन्तर कीजिए। (2013)
उत्तर:
‘गुणसूत्र’ शब्द का प्रयोग वाल्डेयर (Waldeyer) ने सन् 1888 में उन गहरी अभिरंजित छड़ सदृश रचनाओं के लिए किया था जो केन्द्रक में कोशिका विभाजन के समय दिखाई देती हैं। ये केन्द्रक में पाये जाने वाले न्यूक्लिओ-प्रोटीन जालक के संघनन से बनते हैं। गुणसूत्र या क्रोमोसोस का अर्थ है रंगीन कार्य।

गुणसूत्रों के कार्य

  • आनुवंशिकी में भूमिका गुणसूत्र पर जीन्स उपस्थित होते हैं, जीन्स आनुवंशिक लक्षणों के वाहक होते हैं।
  • जनक की इकाई गुणसूत्रों के प्रतिलिपिकरण से संतति गुणसूत्र बनते हैं जो संतति कोशिकाओं में पहुँचते हैं।

गुणसूत्रों के प्रकार:
1. कायिक गुणसूत्र या ऑटोसोम (Autosome) जो गुणसूत्र लिंग-लक्षणों को छोड़कर जीन के अन्य लक्षणों का निर्धारण करते हैं, कायिक गुणसूत्र कहलाते हैं। ये नर तथा मादा दोनों प्रकार के जीवों में समान होते हैं।

2. लिंग गुण सूत्र (Sex chromosomes) जो गुणसूत्र लिंग-निर्धारण करते हैं उन्हें लिंग गुणसूत्र या हेटरोसोम कहते हैं। ये नर तथा मादा में अलग-अलग होते हैं। ये प्राय: X तथा Y गुणसूत्र कहलाते हैं। मनुष्य में लिंग निर्धारण XY गुणसूत्र द्वारा होता है। मनुष्य में 22 जोड़ी कायिक या ऑटोसोम तथा एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र या हेटरोसोम होते हैं।

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प्रश्न 11.
जीन का क्या अर्थ है? जीन की प्रकृति संक्षेप में समझाइये। (2018)
या जीन क्या है? इसका सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया? इसकी उपयोगिता का उल्लेख कीजिए। (2014, 15)
उत्तर:
सभी जीवों में आनुवंशिक लक्षणों का नियन्त्रण एवं संचरण आनुवंशिक इकाइयों द्वारा होता है। मेण्डल ने इन इकाइयों को कारक (factor) कहा था तथा जोहनसन ने इनके लिए जीन शब्द का प्रयोग किया।
जीन की विशेषताएँ –

  1. जीन गुणसूत्र के क्रोमोनीमा पर माला के मोतियों के समान रैखिक क्रम में लगी रचनाएँ हैं जो आनुवंशिक लक्षणों का नियन्त्रण करती हैं।
  2. जीन संचरण की इकाई (unit of transmission) हैं जो जनक से सन्तानों में पहुँचती हैं।
  3. जीन उत्परिवर्तन की इकाई (unit of mutation) हैं जिनकी संरचना में परिवर्तन होता रहता है।
  4. जीन कार्यिकी की इकाई (physiological units) हैं। ये जीवों के विभिन्न लक्षणों का नियन्त्रण करती हैं।
  5. जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन या पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के संश्लेषण की सूचना होती है।

प्रश्न 12.
मनुष्य में लिंग सहलग्न गुण से क्या तात्पर्य है? वे किस प्रकार वंशागत होते हैं? (2013, 14)
या लिंग सहलग्न लक्षण को समझाइए। (2017)
या लिंग सहलग्न रोग क्या है? मानव के किन्हीं दो लिंग सहलग्न रोगों के नाम लिखिए। (2018)
उत्तर:
लिंग सहलग्न लक्षण तथा इनकी वंशागति:
प्राय: लिंग गुणसूत्रों पर जो लक्षणों के जीन्स होते हैं, उनका सम्बन्ध लैंगिक लक्षणों से होता है। ये जीन्स ही जन्तु में लैंगिक द्विरूपता के लिए जिम्मेदार होते हैं, फिर भी जन्तुओं की लैंगिकता अत्यन्त जटिल तथा व्यापक होती है और इसे बनाने के लिए अनेक अन्य जीन्स, जो सामान्य गुणसूत्रों पर होते हैं, भी प्रभावी होते हैं। दूसरी ओर लिंग गुणसूत्रों पर कुछ जीन्स लैंगिक लक्षणों के अतिरिक्त अन्य लक्षणों वाले अर्थात् कायिक या दैहिक लक्षणों वाले भी होते हैं। ये लिंग सहलग्न जीन्स कहलाते हैं, और लिंग सहलग्न लक्षण उत्पन्न करते हैं।

इनकी वंशागति लिंग सहलग्न वंशागति अथवा लिंग सहलग्नता (sex linkage) कहलाती है। मनुष्य में लगभग 120 प्रकार के लक्षणों की वंशागति ज्ञात है। मनुष्य में लिंग निर्धारित करने वाले गुणसूत्र; X तथा Y गुणसूत्र कहलाते हैं। यद्यपि इनकी संरचना में भिन्नता दिखायी देती है, फिर भी वर्तमान जानकारी के अनुसार इन गुणसूत्रों में कुछ भाग समजात होता है। ये भाग अर्द्धसूत्री विभाजन के समय सूत्रयुग्मन करते हैं, अन्यथा शेष भाग असमजात होता है।

उपर्युक्त आधार पर लिंग-सहलग्न लक्षण तीन प्रकार के हो सकते हैं –
1. X-सहलग्न लक्षण X गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर इनके लक्षणों के जीन्स स्थित होते हैं अर्थात् इनके एलील्स Y गुणसूत्र पर नहीं होते। वंशागति में ये लक्षण पुत्रों को केवल माता से तथा पुत्रियों को माता व पिता दोनों से प्राप्त हो सकते हैं। इन्हें डायेण्ड्रिक (diandric) लिंग सहलग्न लक्षण भी कहा जाता है; जैसे-वर्णान्धता (colour blindness), रतौंधी (night blindness) तथा हीमोफीलिया (haemophilia)।

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2. Y-सहलग्न लक्षण इसके जीन्स Y गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर स्थित होते हैं। इस प्रकार सहयोगी x गुणसूत्रों पर इनके एलील्स नहीं पाये जाते, अत: प्रत्येक संतति में पिता से केवल पुत्रों तक ही जाते हैं। इन्हें होलैण्ड्रिक लिंग सहलग्न गुण भी कहते हैं तथा इनकी वंशागति को होलैण्डिक वंशागति कहा जाता है; उदाहरणार्थ-बाह्य कर्ण पर बालों की उपस्थिति।

3. XY-सहलग्न लक्षण इनके जीन्स एलील्स के रूप में X एवं Y गुणसूत्रों के समजात खण्डों पर स्थित होते हैं, अतः इनकी वंशागति पुत्रों एवं पुत्रियों में सामान्य ऑटोसोमल लक्षणों की भाँति होती है। इन्हें अपूर्ण लिंग सहलग्न गुण भी कहा जाता है।

प्रश्न 13.
लिंग प्रभावित एवं लिंग सीमित लक्षणों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
लिग प्रभावित लक्षण मनुष्य में कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिनके जीन्स तो ऑटोसोम्स पर होते हैं, परन्तु इनका विकास व्यक्ति के लिंग से प्रभावित होता है अर्थात् पुरुष और स्त्री में जीनप्ररूप (genotype) समान होते हुए भी लक्षणप्ररूप (phenotype) भिन्न होता है। उदाहरण के लिए मनुष्य में गंजापन (baldness) काफी पाया जाता है। यह विकिरण, थाइरॉइड ग्रन्थि की अनियमितताओं आदि के कारण हो सकता है अथवा आनुवंशिक भी होता है।

आनुवंशिक गंजापन एक ऑटोसोमल एलीलोमॉर्फिक जीन जोड़ा (B, b) पर निर्भर करता है। समयुग्मकी प्रभावी जीनप्ररूप (BB) हो तो गंजापन पुरुषों और स्त्रियों दोनों में विकसित होता है, लेकिन विषमयुग्मकी जीनप्ररूप (Bb) होने पर यह स्त्रियों में नहीं, केवल पुरुषों में ही प्रदर्शित होता है क्योंकि इस जीनप्ररूप के प्रदर्शित होने के लिए नर हॉर्मोन्स का होना आवश्यक होता है। समयुग्मकी अप्रभावी जीनप्ररूप (bb) में गंजापन नहीं होता है।

लिंग सीमित लक्षण
कुछ ऑटोसोम्स पर कुछ ऐसे आनुवंशिक लक्षणों के जीन्स भी होते हैं जिनकी वंशागति सामान्य मेण्डेलियन नियमों के अनुसार ही होती है, किन्तु इनका विकास पीढ़ी-दर-पीढ़ी केवल एक ही लिंग के सदस्यों में होता है। इस प्रकार का प्रदर्शन इनमें विशेष हॉर्मोन्स (hormones) के बनने के कारण होता है। गाय, भैंस आदि में दुग्ध का स्रावण, भेड़ों की कुछ जातियों में केवल नर में सींगों का विकास, पुरुष में दाढ़ी आदि के लक्षण ऐसे ही होते हैं। इनको हम लिंग सीमित लक्षण कहते हैं।

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प्रश्न 14.
मनुष्य में वर्णान्धता की वंशागति को समझाइए। यदि वर्णान्ध पुरुष सामान्य स्त्री से विवाह करता है, तो उनसे उत्पन्न सन्तानों में वर्णान्धता की वंशागति स्पष्ट कीजिए। (2016)
उत्तर:
वर्णान्ध पुरुष के x-गुणसूत्र पर वर्णान्धता का जीन होता है। यह जीन पिता से पुत्री में और पुत्री से पुत्र में वंशागत होता है। सामान्य स्त्री एवं वर्णान्ध पुरुष की पुत्रियाँ वाहक होती हैं क्योंकि इनमें सामान्य X-गुण सूत्र माता से और वर्णान्ध जीन वाला गुणसूत्र पिता से मिलता है। वर्णान्ध व्यक्ति (XC Y) व सामान्य स्त्री (XX) की सभी सन्ताने सामान्य होती हैं क्योंकि सभी पुत्रों को माता से सामान्य X-गुणसूत्र मिलता है अत: वे सभी सामान्य होते हैं।

पुत्रियों को सामान्य X-गुणसूत्र माता से तथा दूसरा X गुणसूत्र पिता से प्राप्त होता है जिस पर वर्णान्धता का जीन होता है। इस जीन के अप्रभावी होने के कारण पुत्रियों में वर्णान्धता का लक्षण प्रकट नहीं हो पाता। ये केवल वाहक होती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेण्डल के आनुवंशिकता के नियमों की विवेचना कीजिए। (2018)
या मेण्डल के वंशागति के नियमों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। (2011, 12, 14, 18)
या मेण्डल के प्रभाविता नियम (प्रथम नियम ) से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए। (2012, 15)
या मेण्डल का प्रथम नियम लिखिए। इसको विस्तृत रूप से समझाइए। (2016)
या यदि शुद्ध लम्बा एवं शुद्ध बौना पौधों के मध्य संकरण हो, तो ई पीढ़ी में किस प्रकार के वंशज प्राप्त होंगे? (2011)
या मेण्डल के पृथक्करण नियम को उपयुक्त उदाहरण सहित समझाइए। (2013, 16, 17)
या मेण्डल द्वारा प्रतिपादित स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम उदाहरण देकर समझाइए। (2014)
उत्तर:
मेण्डल के आनुवंशिकता के नियम या मेण्डलवाद मेण्डल ने मटर के विभिन्न गुणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया और संकरण प्रयोगों से प्राप्त परिणामों के आधार पर वंशागति के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले। उनके बाद जब डी वीज, कार्ल कॉरेन्स तथा एरिक वॉन शैरमैक नामक तीन वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मेण्डल जैसे प्रयोग किये तथा उनसे मेण्डल के काम की पुष्टि हुई तब जाकर मेण्डल का सिद्धान्त प्रकाश में आ सका। मेण्डल के सैद्धान्तिक बिन्दुओं का ही तीनों वैज्ञानिकों ने नियमों के रूप में प्रतिपादन किया। इन्हें मेण्डल के आनुवंशिकता के नियम कहा गया।

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ये नियम निम्नलिखित हैं –
1. एकल लक्षण तथा प्रभाविता का नियम जीवों में सभी लक्षण इकाइयों के रूप में होते हैं। इन्हें कारक (जीन) कहते हैं। प्रत्येक इकाई लक्षण कारकों के एक युग्म से नियन्त्रित होता है। वास्तव में, इसमें से एक कारक मातृक तथा दूसरा पैतृक होता है। युग्म के दोनों कारक एक-दूसरे के विपरीत प्रभाव के हो सकते हैं, किन्तु उनमें से एक ही कारक अपना प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है, दूसरा छिपा रहता है। जब विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो उनकी सन्तानों में इन लक्षणों में से एक लक्षण ही परिलक्षित होता है और दूसरा दिखाई नहीं देता। पहले लक्षण को प्रभावी तथा दूसरे लक्षण को अप्रभावी कहते हैं।

उदाहरणार्थ:
जब शुद्ध समयुग्मजी (गुणसूत्रों में एक ही प्रकार के लक्षणों की उपस्थिति) लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) में विपरीत लक्षणों में से केवल एक लक्षण (लम्बापन), जो प्रभावी है, दिखाई देता है और अप्रभावी लक्षण (बौनापन) छिपा रहता है। (F1) पीढ़ी के सन्तान पौधे विषमयुग्मजी Tt होते हैं।
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2. लक्षणों के पृथक्करण का नियम जब F पीढ़ी के विषमयुग्मजी पौधों में स्वपरागण (self pollination) कराया जाता है, तो दूसरी पीढ़ी (F2) की सन्तानों में परस्पर विपरीत लक्षणों का एक निश्चित अनुपात में पृथक्करण हो जाता है। इसे लक्षणों के पृथक्करण का नियम कहते हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रथम पीढ़ी में साथ-साथ रहने पर भी लक्षणों का आपस में मिश्रण नहीं होता और युग्मक निर्माण के समय ये लक्षण अलग-अलग हो जाते हैं अर्थात् युग्मकों की शुद्धता बनी रहती है। इसलिए इस नियम को युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहते हैं।
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उदाहरणार्थ:
मटर के पौधे के संकरण के उपर्युक्त उदाहरण में द्वितीय पीढ़ी (F2 पीढ़ी) प्राप्त करने के लिए जब स्वपरागण कराया जाता है तो लम्बेपन तथा बौनेपन के लक्षण फिर से प्राप्त हो जाते हैं। अर्थात् लम्बेपन का कारक (T) तथा बौनेपन का कारक (t) शुद्ध रूप में फिर से मिलकर 3 : 1 के अनुपात में लम्बे तथा बौने पौधे उत्पन्न करते हैं। इनमें 25% शुद्ध लम्बे, 50% संकर लम्बे तथा 25% शुद्ध बौने पौधे होते हैं अर्थात् यह अनुपात 1:2 :1 का होता है।

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3. स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम जब दो लक्षणों के लिए दो जोड़ा विपरीत प्रभावों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो इन लक्षणों का पृथक्करण स्वतन्त्र रूप से होता है, अर्थात् एक लक्षण की वंशागति दूसरे को प्रभावित नहीं करती है।
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इस नियम को मेण्डल ने द्विसंकर क्रॉस से स्पष्ट किया। इसके लिए उन्होंने दो प्रकार के मटर के पौधों को चुना। एक प्रकार के पौधे के बीज का आकार गोल तथा रंग पीला था। दूसरे प्रकार के पौधे के बीज का आकार झुर्सदार तथा रंग हरा था। इन दो विपरीत प्रभावों के लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराने पर जो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) प्राप्त हुई उसमें सभी बीज गोल तथा पीले थे। इस पीढ़ी (F2) के स्वपरागण से उत्पन्न द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी (F1) में चार प्रकार के बीज प्राप्त हुए।
(क) गोल व पीले
(ख) गोल व हरे
(ग) झुरींदार व पीले
(घ) झुरींदार व हरे।

उपर्युक्त चार प्रकार के बीजों के प्राप्त होने से यह स्पष्ट होता है कि (F2) पीढ़ी की सन्तानों में दोनों लक्षण गोल आकार व पीला रंग तथा झुरींदार आकार व हरा रंग जो जनकों में एक साथ थे, संकरण से प्राप्त F1 पीढ़ी में अलग-अलग लक्षणों के प्रभाव से पृथक् हो गये तथा (F2) पीढ़ी में ये स्वतन्त्र रूप से संयुक्त होकर प्रकट हुए। इसी कारण झुर्रादार बीजों के साथ पीला रंग भी और गोल बीजों के साथ हरा रंग भी प्रकट हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि लक्षणों का पृथक्करण स्वतन्त्र रूप से होता है और एक लक्षण की वंशागति दूसरे को प्रभावित नहीं करती है। यहाँ बीज के आकार व रंग का F2 पीढ़ी में अनुपात= 9:3:3:1

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प्रश्न 2.
मेण्डल के स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम को द्विसंकरीय संकरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2014)
या मेण्डल के द्विसंकर संकरण से आप क्या समझते हैं? मटर के गोल एवं पीले बीजों का मटर के हरे व झुर्रादार बीजों के साथ संकरण किया। F1 पीढ़ी में या सभी मटर के बीज पीले व गोल थे।F2 पीढ़ी का फीनोटाइप का अनुपात ज्ञात कीजिए। (2014)
या द्विसंकर क्रॉस क्या होता है? इसको उदाहरण सहित समझाइए। (2015, 17)
या स्वतन्त्र अपव्यूहन से आप क्या समझते हैं? केवल रेखाचित्र द्वारा द्विसंकर क्रॉस समझाइए। (2017, 18)
उत्तर:
द्विसंकरीय संकरण –
जब दो युग्म विकल्पी लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराया जाता है तो उसे द्विसंकरीय या द्विसंकर संकरण (dihybrid cross) कहते हैं। एक उदाहरण में मटर के बीज के बीजावरण के रंग तथा उसके आकार के आधार पर अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन के लिए निम्न प्रकार के मटर के बीज लिए गये तथा संकरण कराया गया –
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इन दो युग्मविकल्पी लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराने पर जो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) उत्पन्न हुई उसमें सभी बीज गोल तथा पीले थे। इस प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) से उत्पन्न द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी (F2) में चार प्रकार के बीज प्राप्त हुए।

  • गोल-पीले
  • गोल-हरे
  • झुरींदार-पीले
  • झुरींदार-हरे।

इन चार प्रकार के बीजों में 9 : 3 : 3 : 1 का अनुपात था अर्थात् 16 बीजों में से 9 बीज गोल-पीले, 3 बीज गोल-हरे, 3 बीज झुरींदार-पीले तथा 1 बीज झुरींदार-हरा प्राप्त हुआ अर्थात् बीजावरण का पीला या हरा रंग बीज के गोल या झुरींदार आकार में से किसी के साथ भी जा सकता है। या यों कहें – “किसी लक्षण के कारक युग्म में से कारकों का चयन स्वतन्त्र होता है।”
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प्रश्न 3.
लिंग गुणसूत्र का क्या अर्थ है? मनुष्य में लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है? रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। (2012, 15)
लिंग गुणसूत्र पर टिप्पणी लिखिए। (2013)
लिंग निर्धारण को समझाइए। (2013)
लिंग गुणसूत्र से आप क्या समझते हैं? नर तथा मादा में लिंग गुणसूत्र का विन्यास लिखिए। (2014)
उत्तर:
लिंग गुणसूत्र मनुष्य की सभी कायिक तथा जनन कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 44 गुणसूत्रों के 22 समजात जोड़े होते हैं, जिन्हें ऑटोसोम्स (autosomes) कहते हैं। शेष एक जोड़ा गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। पुरुष तथा स्त्री में यह गुणसूत्रों का जोड़ा एक-दूसरे से भिन्न होता है। पुरुष में इस जोड़े (23वें जोड़े) के दोनों गुणसूत्र एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, जिनमें से एक छोटा तथा दूसरा बड़ा होता है। इस प्रकार ये हेटरोसोम्स (heterosomes) हैं। इनमें से बड़ा ‘X’ तथा छोटा ‘Y’ गुणसूत्र कहलाता है। स्त्री में दोनों लिंग गुणसूत्र भी समजात तथा ‘X’ प्रकार के होते हैं।

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इस प्रकार –
पुरुष की जनन कोशिका में 22 जोड़ा + XY = 46 गुणसूत्र तथा
स्त्री की जनन कोशिका में 22 जोड़ा + XX = 46 गुणसूत्र होते हैं अर्थात् मनुष्य में लड़के अथवा लड़की का होना इन्हीं लिंग गुणसूत्रों पर निर्भर करता है।

मनुष्य में लिंग निर्धारण:
संकेत – कृपया ‘पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर’ शीर्षक में पृष्ठ 174 पर प्रश्न 4 का उत्तर देखें।

प्रश्न 4.
विकास के आधुनिक संश्लेषणात्मक वाद को समझाइये। (2014)
या जीवन की उत्पत्ति की आधुनिक संकल्पना (ओपैरिन परिकल्पना) पर टिप्पणी दीजिए। (2013)
या जीवन के उद्भव की आधुनिक परिकल्पना का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति:
ओपैरिन की आधुनिक परिकल्पना जीवन की उत्पत्ति के विषय में यह आधुनिकतम मत (संश्लेषणात्मक वाद) है। इस मत को और अधिक स्पष्ट रूप से रूसी वैज्ञानिक ओपैरिन (A. I. Oparin, 1924) ने प्रस्तुत किया। पदार्थवाद (materialistic theory) के रूप में प्रचलित अपने मत को ओपैरिन ने सन् 1936 में ‘जीवन की उत्पत्ति’ (The Origin of Life) नामक पुस्तक द्वारा प्रकाशित किया। उपर्युक्त परिकल्पना के अनुसार आधुनिक पृथ्वी के निर्माण एवं

इस पर जीवन की उत्पत्ति की प्रक्रिया को निम्नलिखित आठ चरणों में विभाजित किया जा सकता है –
1. परमाणु अवस्था प्रारम्भिक चरण में पृथ्वी आग का गोला थी, जिसमें सभी तत्त्व परमाणु के रूप में उपस्थित थे जो अपने घनत्व के अनुसार व्यवस्थित थे। भारी परमाणु; जैसे लोहा, निकिल आदि केन्द्र में और हल्के परमाणु; जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन आदि बाहर की ओर थे।

2. अणु अवस्था द्वितीय चरण में पृथ्वी का तापक्रम अपेक्षाकृत कम हो जाने के कारण स्वतन्त्र परमाणुओं का परस्पर संयोग सम्भव हुआ, जिसके फलस्वरूप अणुओं (molecules) की उत्पत्ति हुई। आदि वायुमण्डल अपचायक (reducing) था तथा इसमें हाइड्रोजन के परमाणु लगभग 90% थे। आदि वायुमण्डल में जल, वाष्प, अमोनिया व मेथेन गैसें अस्तित्व में आयीं।

पृथ्वी का तापक्रम और ठण्डा होने पर जल-वाष्प ने बादलों एवं कोहरे का रूप लिया तथा पृथ्वी पर वर्षा के रूप में यह जल बरसने लगा; अतः धीरे-धीरे पृथ्वी की सतह पर झरनों, नदियों एवं समुद्रों की उत्पत्ति हुई। इन आदि स्रोतों के जल में आदि वायुमण्डल की गैसें; जैसे मेथेन (CH4) व अमोनिया (NH3) आदि घुल गयीं।

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3. कार्बनिक यौगिकों का निर्माण आदि भूमण्डल पर सघन ज्वालामुखी थे, जिनसे निरन्तर लावा निष्कासित होता रहता था। लावा के धातु तत्त्वों ने आदि वायुमण्डल की नाइट्रोजन व कार्बन से संयोग कर नाइट्राइड्स व कार्बाइड्स बनाये, जिनसे भूपटल (earth’s crust) का निर्माण सम्भव हुआ। आदि वायुमण्डल में सर्वप्रथम मेथेन बनी तथा तापमान और कम होने पर एथेन व प्रोपेन आदि बनीं।

इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणों, कॉस्मिक किरणों एवं ज्वालामुखी के तापक्रम आदि से प्राप्त ऊर्जा की उपस्थिति में उपर्युक्त अणुओं के संघनन एवं बहुलीकरण के फलस्वरूप जटिल कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हुआ। इनमें शर्करायें, वसीय अम्ल, पिरीमिडीन, प्यूरीन तथा अमीनो अम्ल आदि मुख्य रूप से थे।

4. जटिल कार्बनिक अणुओं का निर्माण उबलते हुए गर्म समुद्र में तीसरे चरण के बने कार्बनिक यौगिक परस्पर क्रिया करके तथा जुड़-जुड़ कर जटिल कार्बनिक यौगिक तथा उनके बहुलकों का निर्माण करते रहे। ये गर्म सूप में विभिन्न शर्कराओं से पॉलीसैकैराइड्स; जैसे स्टार्च (starch), सेल्युलोज (cellulose), ग्लिसरॉल (glycerol) आदि।

विभिन्न वसीय अम्लों व ग्लिसरॉल से वसायें तथा अमीनो अम्लों से विभिन्न जटिल पॉलीपेप्टाइड शृंखलायें तथा प्रोटीन्स (proteins), एन्जाइम्स आदि का निर्माण हुआ। विभिन्न क्षारकों; जैसे प्यूरीन्स व पिरिमिडीन्स ने शर्कराओं तथा फॉस्फेट्स के साथ मिलकर न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) तथा बाद में इनकी पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से न्यूक्लियक अम्लों का निर्माण हुआ। हेल्डेन (Haldane, 1929) ने आदि समुद्र में इस उबलते कार्बनिक पदार्थों के जलीय मिश्रण को ‘कार्बनिक यौगिकों का एक गर्म, पतला सूप’ या पूर्वजीवी सूप’ (probiotic soup) कहा

5. कोलॉइड्स, कोएसरवेट्स एवं वैयक्तिकता आदि सागर के ‘पूर्वजीवी सूप’ के विभिन्न यौगिकों के अणुओं में परस्पर प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप कोलॉइडल कण बने, जिनसे अघुलनशील बूंदों के रूप में कोलॉइडलीय तन्त्रों का निर्माण हुआ। प्रोटीन की कोलॉइडलीय बूंदों के विद्युतावेशित होने के कारण इनकी सतह पर जल की नन्हीं-नन्हीं बूंदें चिपक जाती थीं। इन्हें फॉक्स (Fox, 1958) द्वारा प्रोटीनॉइड माइक्रोस्फीयर्स कहा गया। इसके विपरीत विद्युतावेशित कोलॉइडलीय बूंदों के परस्पर संयोग से अपेक्षाकृत बड़े व घने कोलॉइडलीय यन्त्र बने, इन्हें ओपैरिन ने कोएसरवेट्स कहा।

उन्होंने प्रयोगों द्वारा गोंद व जिलेटिन आदि से कृत्रिम कोएसरवेट्स बनाकर दिखाये। कोएसरवेट्स के धातु तत्त्वों अथवा प्रोटीन्स ने विकर अथवा कार्बनिक उत्प्रेरकों का कार्य किया। इस प्रकार इनमें प्रारम्भिक जैविक क्रियाओं का उदय हुआ। अपने चिपचिपेपन की सामर्थ्य के आधार पर कोएसरवेट्स एक निश्चित आकारीय वृद्धि के पश्चात् छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाते थे। इस प्रकार इनमें गुणन की क्रिया प्रारम्भ हुई।

इसी तारतम्य में इन कोलॉइडलीय तन्त्रों में स्वउत्प्रेरक तन्त्र, जीन्स, विषाणु एवं प्रारम्भिक जीवन की उत्पत्ति हुई क्योंकि अब तक न्यूक्लियक अम्ल तथा प्रोटीन के मिलने से न्यूक्लियोप्रोटीन का निर्माण हो चुका था। न्यूक्लियोप्रोटीन एक ओर तो वर्तमान जीन्स के समान कार्य करते अथवा दूसरी ओर गुणन करके विषाणुओं (viruses) के समान विषाणुओं को ‘प्रारम्भिक जीव’ माना गया है।

6. असीमकेन्द्रकीय कोशिका की उत्पत्ति न्यक्लियक अम्लों द्वारा अपने चारों ओर खाद्य पदार्थ एकत्र करके अथवा कोएसरवेट्स में उत्पत्ति द्वारा असीमकेन्द्रकीय कोशिकाओं (prokaryotic cells) का निर्माण हुआ, जीवाणु इसी प्रकार की कोशिकायें हैं जिनसे स्पष्ट केन्द्रक की कोशिकायें अर्थात् सुकेन्द्रकीय कोशिकायें (eukaryotic cells) बनी थीं।

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7. स्वपोषण की उत्पत्ति आदि सागर में उत्पन्न असीम केन्द्रकीय कोशिकायें परपोषी थीं। धीरे-धीरे ये कोशिकायें आदि सागर में उपलब्ध सरल अकार्बनिक पदार्थों से जटिल कार्बनिक पदार्थों का संश्लेषण करने लगीं। यह स्वपोषण की दिशा का प्रथम चरण था। इसके बाद कोशिकाओं में मैग्नीशियम पोरफाइरिन्स से वर्तमान पर्णहरित के समान उत्प्रेरक उत्पन्न हुए। वर्तमान जीवाणु-पर्णहरित इसका उदाहरण है।

इसकी सहायता से कोशिकायें सौर ऊर्जा से प्रकाश संश्लेषण करने लगीं। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के परिणामस्वरूप वायुमण्डल में ऑक्सीजन का मुक्त होना, आदि जीवों के उद्विकास क्रम में एक क्रान्तिकारी घटना थी। पृथ्वी से लगभग 24 किमी ऊँचाई पर ओजोन का एक स्तर बन गया जो सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर पहुँचने से रोकने लगा।

8. सुकेन्द्रीय कोशिकाओं की उत्पत्ति आदि भूमण्डल लगभग 2 अरब वर्ष पूर्व वायवीय अथवा ऑक्सी श्वसन के योग्य हो चुका था। इसके साथ ही आदि कोशिकाओं की रचना में क्रमिक विकास का क्रम प्रारम्भ हो गया। आदि सुकेन्द्रकीय कोशिकायें सामान्यत: दो प्रकार की थीं –

  • क्लोरोप्लास्ट विहीन जन्तु कोशिकायें तथा
  • क्लोरोप्लास्ट युक्त पादप कोशिकायें।

इन दोनों प्रकार की कोशिकाओं ने सम्मिलित रूप से प्रकृति में जैव सन्तुलन की स्थापना की। इन्हीं कोशिकाओं के क्रमिक विकास के फलस्वरूप जन्तुओं एवं पादपों की वर्तमान जातियों का विकास हुआ है।

प्रश्न 5.
डार्विन के प्राकृतिक वरणवाद को उदाहरण सहित समझाइए। (2015, 18)
या  जैव विकास के सम्बन्ध में डार्विन के प्राकृतिक वरण एवं योग्यतम की उत्तरजीविता के सिद्धान्त को समझाइए। चार्ल्स डार्विन के अनुसार जैव विकास या  के मुख्य कारकों का वर्णन कीजिए। प्राकृतिक वरणवाद सिद्धान्त किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया है ?
या  इसको उदाहरण देकर समझाइए। नई जातियों के उद्भव का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?
या  इसकी मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2011)
या डार्विन के प्राकृतिक वरणवाद के मुख्य चार बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए। (2018)
या  जीव जगत में जीवन संघर्ष होता है। यह किस वैज्ञानिक का मत है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैव विकास के सम्बन्ध में डार्विन का सिद्धान्त या डार्विनवाद चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin, 1809-1882) एक अंग्रेज जीव वैज्ञानिक थे। डार्विन ने समुद्री यात्राओं द्वारा विभिन्न देशों तथा द्वीपों के जीवों का अध्ययन किया और जीवों के विकास के सम्बन्ध में अपने सिद्धान्त को “प्राकृतिक वरण द्वारा जातियों का उद्भव”(Origin of Species by Natural Selection) नामक पुस्तक में प्रकाशित किया। डार्विन का सिद्धान्त प्राकृतिक वरणवाद या डार्विनवाद (theory of natural selection or Darwinism) के नाम से प्रचलित है।

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यह सिद्धान्त निम्नलिखित तथ्यों को आधार मानकर प्रतिपादित किया गया –
1. जीवों में सन्तानोत्पत्ति की प्रचुर क्षमता प्रत्येक जीव प्रजनन द्वारा अपनी सन्तान उत्पन्न करता है। जीवों में सन्तान उत्पन्न करने की बहुत अधिक क्षमता होती है। निम्न श्रेणी के जन्तुओं में तो प्रजनन क्षमता इतनी अधिक होती है कि अगर सभी सन्तानें जीवित रहें, तो पृथ्वी पर उनके सिवा और कोई जन्तु दिखाई भी न देगा, परन्तु ऐसा नहीं होता। जीवों की संख्या की वृद्धि इस प्रकार रेखागणितीय अनुपात में हो सकती है।

2. जीवन संघर्ष सभी जीवों को जीवित रहने के लिए स्थान, प्रकाश तथा भोजन चाहिए, परन्तु सीमित स्थान तथा भोजन के कारण यह सम्भव नहीं हो पाता। अत: पैदा होते ही प्रत्येक जीव को जीवित रहने की आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसको जीवन संघर्ष कहते हैं। इस जीवन संघर्ष के कारण ही रेखागणितीय अनुपात में बढ़ती जनसंख्या स्थिर रहती है। एक ही जाति के जीवों के मध्य होने वाला जीवन संघर्ष सबसे अधिक घातक होता है।

3. योग्यतम की उत्तरजीविता वही जीव जीवित रहता है, जो जीवन संघर्ष में वातावरण के अनुकूल होता है और आवश्यकतानुसार परिवर्तन करके स्वयं को और अधिक अनुकूल बना लेता है। अनुकूलन से वह सशक्त हो जाता है। संघर्ष में निर्बल जीव नष्ट हो जाते हैं अर्थात् योग्यतम ही जीवित रहता है। इस प्रकार प्रत्येक जाति के जीवों की संख्या लगभग स्थिर बनी रहती है।

4. प्राकृतिक वरण जीवित रहने के लिए जीवों में जो संघर्ष होता है, इसमें जो जीव प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल होते हैं, वे ही जीवित रहते हैं तथा अन्य नष्ट हो जाते हैं। अतः प्रकृति स्वयं ही श्रेष्ठ व अनुकूल जीवों का वरण करती है, जिसको प्राकृतिक वरण कहते हैं।

5. विभिन्नतायें प्रत्येक जाति के जीवों में विभिन्नतायें मिलती हैं। इन्हीं विभिन्नताओं के कारण कुछ जीव वातावरण के अनुकूल होते हैं। जो विभिन्नतायें उत्पन्न होती हैं, वे सन्तानों में वंशानुगत हो जाती हैं, जिससे सन्तान भी उस वातावरण के लिए अनुकूलित हो जाती है। यहाँ यह भी माना गया है कि विभिन्नतायें लाभदायक अथवा हानिकारक हो सकती हैं। लाभदायक अथवा उपयोगी विभिन्नतायें ही जीव को योग्य बनाने में सक्षम होती हैं तथा उस जीव को जीवित रहने में सहायता करती हैं।

6. नयी जातियों की उत्पत्ति जीवन संघर्ष में योग्य सिद्ध करने के लिए उत्पन्न विभिन्नतायें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशानुगत होती रहती हैं, साथ-ही-साथ सन्तान में भी स्वयं कुछ विशेष लक्षण तथा विभिन्नतायें उत्पन्न हो जाती हैं। कुछ पीढ़ियों के बाद लक्षणों तथा विभिन्नताओं की वंशागति इतनी अधिक हो जाती है कि सन्तानें अपने पूर्वजों से भिन्न हो जाती हैं और इस तरह नयी जातियों की उत्पत्ति हो जाती हैं।

प्रश्न 6.
लैमार्कवाद को समझाइए। लैमार्कवाद की आलोचनाओं पर प्रकाश डालिए। (2013, 15, 17)
या उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिद्धान्त क्या है? (2012)
उत्तर:
लैमार्कवाद जैव विकास के प्रचलित सिद्धान्तों में यह सबसे पुराना सिद्धान्त है। लैमार्क (1744-1829) एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक थे। इन्होंने 1809 ई० में जैव विकास के बारे में अपने सिद्धान्त को फिलोसॉफी जूलोजिक (Philosophie Zollogique) नामक पुस्तक में प्रकाशित कराया। उनका सिद्धान्त लैमार्कवाद (Lamarckism) के नाम से प्रचलित हुआ।

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इन्होंने मुख्यत: चार बातों पर प्रकाश डाला –
1. जीवों की आकार में वृद्धि की प्रवृत्ति जीवों में उनके शरीर अथवा विभिन्न अंगों के आकार में वृद्धि करते रहने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।

2. वातावरण का प्रभाव वातावरण के परिवर्तन के अनुसार जीव स्वयं को अनुकूल बनाने के लिए अपने शरीर की संरचना तथा आदतों में परिवर्तन कर लेता है। इस प्रकार के प्रभावों से उसके कुछ अंगों का उपयोग बढ़ सकता है, अन्य का अपेक्षाकृत कम हो जाता है। इस प्रकार उसके शरीर की रचना में परिवर्तन आ जाते हैं।

3. अंगों का उपयोग और अनुपयोग वातावरण में किसी अंग के उपयोग की अधिक आवश्यकता हो जाती है, तो वह अंग अधिकाधिक पुष्ट तथा विकसित हो जाता है। इसके विपरीत जो अंग कम प्रयोग में आता है, वह धीरे-धीरे क्षीण हो जाता है और अन्त में लुप्त हो जाता है या अवशेषी अंग (vestigeal organ) का रूप ले लेता है।

4. उपार्जित लक्षणों की वंशागति वातावरण के प्रभाव से शारीरिक अंगों के लगातार उपयोग या अनुपयोग से जो नये परिवर्तन उत्पन्न होते हैं, उन्हें उपार्जित लक्षण (acquired character) कहते हैं। ये लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँच जाते हैं। यदि उपार्जित लक्षणों की वंशागति का क्रम चलता रहे, तो सन्तानों में नये परिवर्तन स्थायी तथा नये लक्षण विकसित हो जायेंगे।

इस प्रकार बनने वाली सन्तति अपने पूर्वजों से पूर्णतया भिन्न हो जायेंगी और इस तरह नयी जाति का निर्माण हो जायेगा। अपने सिद्धान्त के समर्थन में लैमार्क ने जिराफ का उदाहरण दिया है। जिराफ दक्षिण अफ्रीका के रेगिस्तान में मिलते हैं। इनकी गर्दन तथा अगली टाँगें अधिक लम्बी होती हैं, जिनकी सहायता से ये ऊँचे वृक्षों की पत्तियाँ खाकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं। लैमार्क के अनुसार जिराफ के पूर्वज आकार में अपेक्षाकृत छोटे थे, उनकी गर्दन कम लम्बी तथा अगली टाँगें पिछली टाँगों के बराबर लम्बी थीं। ये ऐसे युग में रहते थे, जब अफ्रीका की जलवायु इतनी गर्म तथा रेगिस्तानी नहीं थी।

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वहाँ घास के मैदान थे जिनमें वे चरते रहते थे। धीरे-धीरे यहाँ की जलवायु शुष्क तथा रेगिस्तानी होने लगी। घास के मैदान लुप्त होते गये। अत: उन्हें गर्दन तथा अगली टाँगों को उचका-उचकाकर ऊँचे-ऊँचे वृक्षों की पत्तियाँ खाने के लिए विवश होना पड़ा। इस प्रकार गर्दन तथा अगली टाँगों के निरन्तर अधिक उपयोग करने के कारण दोनों ही अंगों की लम्बाई बढ़ती गयी।

यह उपार्जित लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होते रहे और अन्त में जिराफ की वर्तमान जाति के स्थायी लक्षण बन गये। एक अन्य उदाहरण में उन्होंने बताया कि सर्प का शरीर लम्बा होने के कारण उसे झाड़ियों आदि में घुसने में उसकी टाँगें असुविधाजनक थीं। इस प्रकार उसने टाँगों का उपयोग करना बन्द कर दिया। धीरे-धीरे उसकी टाँगें अनुपयुक्त होकर विलुप्त हो गईं और वर्तमान बिना टाँगों वाली सर्यों की जातियाँ विकसित हुईं।

लैमार्कवाद की आलोचना लैमार्कवाद के जैव विकास सम्बन्धी विचारों में अंगों के उपयोग-अनुपयोग की बात कही गई है, साथ ही इनसे उपार्जित लक्षणों को वंशानुगत लक्षण मान लिया गया है। वैज्ञानिकों ने अप्रमाणिकता के आधार पर इस विचार को पूर्णत: अस्वीकार कर दिया। इस आधार पर तो पहलवान का बच्चा पहलवान, अन्धे माता-पिता का बच्चा अन्धा होना चाहिए। एक लोहार के बराबर लोहा पीटते रहने से, उसके हाथ की पेशियाँ अत्यधिक मजबूत हो जाती हैं, किन्तु उसका यह लक्षण उसकी सन्तान में नहीं आता।

वीजमान (Wiesmann) नामक जर्मन वैज्ञानिक ने लैमार्कवाद का अत्यधिक विरोध किया। उन्होंने चूहों पर अनेक प्रयोग किये। एक प्रयोग में कई पीढ़ियों तक वे चूहों की पूँछ काटते रहे, किन्तु उन्हें अन्त तक एक भी पूँछ कटा चूहा प्राप्त नहीं हो सका। किसी भी सन्तति में चूहे की पूँछ उतनी ही लम्बी, मोटी तथा मजबूत मिली जितनी से उन्होंने अपने प्रयोग आरम्भ किये थे। लैमार्क के अनुसार तो अन्तिम पीढ़ी में प्राप्त चूहे बिना पूंछ वाले उत्पन्न होने चाहिए थे। वीजमान का मानना था कि अंगो में उपार्जित होने वाले लक्षण कायिक होते हैं तथा ये वंशानुगत नहीं होते, केवल जननद्रव्य में पहुँचने वाले लक्षणों की ही वंशानुगति होती है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

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प्रश्न 1.
एक पार्क चतुर्भुज ABCD के आकार का है, जिसमें ∠C = 90°, AB = 9m. BC = 12m, CD = 5 m और AD = 8 m है। इस पार्क का क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 1
∆BCD में,
पादपागोरस प्रमेय से,
BD² = BC² + CD²
⇒ BD² = (12)² + (5)²
⇒ BD² = 169
⇒ BD² = 13 m
∴ ∆BCD का.
= \(\frac {1}{2}\) × BC × CD
= \(\frac {1}{2}\) × 12 × 5 = 30 m²
∵ s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (9 + 8 + 13) = 15
∴ ∆ABD का हो = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {15 × 6 × 7 × 2}\)
= 6\(\sqrt {35}\) = 6 × 5.9 = 35.4 m²
[∵ \(\sqrt {35}\) = 5.9]
अत: पार्क का क्षेत्रफल
= ∆BCD का + ∆ABD का झे.
= 30 + 35.4
= 65.4 m²

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प्रश्न 2.
एक चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसमें AB = 3 cm, BC = 4 cm, CD = 4 cm, DA = 5 cm और AC = 5 है।
उत्तर:
पाइथागोरस प्रमेय से.
AC² = AB² + BC²
⇒ (5)² – (3)² + (4)²
⇒ 25 = 25
अत: ∆ABC एक समकोण त्रिभुज है।
⇒ ∆ABC का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × AB × BC
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × 4 = 6 cm²
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अब ∆ADC में,
s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (5 + 4 + 5) = 7 cm
∴ ∆ADC का क्षे. = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {7 × 2 × 3 × 2}\)
= 2\(\sqrt {21}\) = 9.2 m²
[∵ \(\sqrt {21}\) = 4.6]
अत: चतुर्भुज का क्षे. = ABC का हो. + ∆ADC का के.
= 6 + 9.2 = 15.2 cm².

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प्रश्न 3.
राधा ने एक रंगीन कागज से एक हवाई जहाज का चित्र बनाया, जैसा कि आकृति 12.6 में दिखाया गया है। प्रयोग किए गए कागज का कुल क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
(i) भाग का क्षेत्रफल
यहाँ s = \(\frac {5+5+1}{2}\) = 5.5 cm
अतः क्षेत्रफल =\(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {5.5 × 0.5 × 0.5 × 4.5}\)
आत: क्षेत्रफल = 0.75\(\sqrt {11}\) = 0.75 × 3.31
= 2.4825 cm²

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(ii) भाग का क्षेत्रफल
लम्बाई × चौड़ाई = 6.5 × 1 = 6.5 cm².

(iii) भाग का क्षेत्रफल-
समलम्बचतुर्भुज का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × (समान्तर भुजाओं का योग) × लम्बवत् दूरी
= \(\frac {1}{2}\) (AB + DC) × AE
= \(\frac {1}{2}\) (1 + 2) × \(\sqrt {AD^2-DE^2}\)
= \(\frac {1}{2}\) (1 + 2) × \(\sqrt {1-25}\)
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × \(\frac {√3}{2}\) = \(\frac {3×1.732}{4}\) = 1.299 cm².
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iv तथा v भाग का क्षेत्रफल-
2(\(\frac {1}{2}\) × 1.5 × 6) = 9 cm²
कुल क्षेत्रफल = 2.4825 + 6.5 + 1.299 + 9 = 19.28 cm².

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प्रश्न 4.
एक त्रिभुज और एक समाजर चतुर्भज का एक ही आधार है और क्षेत्रफल भी एक ही है। यदि त्रिभुज की भुजाएँ 26 cm, 28 cm और 30 cm है तथा समान्तर चतुर्भुज 28 cm के आधार पर स्थित है, तो उसकी संगत ऊँचा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
नाना त्रिभुज की भुजाएँ a = 26 cm b = 28 cm तथा c = 30 cm
अब, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c) = \(\frac {1}{2}\) (26 + 28 + 30)
= 42 cm
अत: त्रिभुज का क्षेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {42 × 16 × 14 × 12}\)
= \(\sqrt {7 × 6 × 4 × 4 × 7 × 2 × 6 × 2}\)
= 336 cm²
त्रिभुज का क्षेत्रफल = समानार चतुर्भुज का क्षेत्रफल
336 = आधार × ऊंचाई
⇒ ऊँबाई = \(\frac {336}{28}\) = 12 cm.

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प्रश्न 5.
एक समचतुर्भुजाकार धाम के खेत में 18 गावों के चरने के लिए घास है। यदि इस समचतर्भज की प्रत्येक भजा 30 m है और बड़ा विकर्ण 48 m है, तो प्रत्येक गाय को चरने के लिए इस पास के खेत का कितना क्षेत्रफल प्राप्त होगा?
उत्तर:
घास समचतुभुजाकार है तो विकर्ग परस्पर समकोण पर समति भाजित करेंगे।
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तब, पाइथागोरस प्रमेय
की
OA² = AB² – OB²
OA = \(\sqrt {30^2-24^2}\)
= \(\sqrt {(30+24)(30-24)}\)
= \(\sqrt {54×6}\)
= 18 m
⇒ 18 गायों के चरने के लिए घास का क्षेत्रफल
= समचतुर्भुज का क्षेत्रफल
= 4 × ∆AOB का क्षेत्रफल
= 4 × \(\frac {1}{2}\) × 24 × 18 = 864 m²
अत: प्रत्येक गाय के चरने के लिए पास = \(\frac {864}{18}\) = 48 m².

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प्रश्न 6.
दो विभिन्न रंगों के कपड़ों के 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों को सीकर एक छाता बनाया गया है (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए) प्रत्येक टुकड़े के माप 20 cm, 50 cm और 50 cm हैं। छाने में प्रत्येक रंग का कितना कपड़ा लगा है?
उत्तर:
गाना a = 20 cm, b = 50 cm तथा c = 30 cm
राब, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c) = \(\frac {1}{2}\) (20 + 50 + 50) = 60 cm
अत: एक त्रिभुजाकार टुकड़े का गेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {60 × 40 × 10 × 10}\)
= 200√6 cm²
∴ 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों से खाता बना है। अत: दोनों रंगों के समान अर्थात् 5 – 5 टुकड़े लगेंगे।
माना पहले पीले रंग के टुकड़े का क्षेत्रफल
= 5 × 200 √6 = 1000 √6 cm²
नषा दूसरे लाल रंग के टुकड़े का क्षेत्रफला
= s × 200 √6 = 1000 √6 cm².

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प्रश्न 7.
एक पतंग तीन भिन-भिन शेडों (Shades) के कागजों से बनी है। इन्हें पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में I, II और III से दर्शाया गया है। पतंग का ऊपरी भाग 32 cm विकर्ण का एक वर्ग है और निचला भाग 6 cm, 6 cm और 8 cm भुजाओं का एक सपद्विबाहु त्रिभुज है। ज्ञात कीजिए कि प्रत्येक शेड का कितना कागज प्रयुक्त किया गया है।
उत्तर:
माना ABCD एक वर्ग है जिसकी भुजा a cm नया विकर्ण AC = BD = 32 cm
समकोण त्रिभुव ABC मैं,
AB² + BC² = AC²
⇒ a² + a² = (32)²
⇒ 2a² = 32 × 32
⇒ a² = \(\frac {32×32}{2}\) = 512
⇒ वर्ग का क्षेत्रफल = 512 cm²
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वर्ग का विकर्ण वर्ग को दो बराबर भागों । नघा में बोटना है।
∴ I भाग का क्षेत्रफल = II भाग का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × 512 = 256 cm
अब, भाग III के लिए (s) = \(\frac {6+6+8}{2}\) = 10 cm
III भाग का क्षेत्रफल = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {10 × 4 × 4 × 2}\)
= 8√5 = 8 × 2.236 = 17.88 cm²

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प्रश्न 8.
फर्श पर एक फूलों का डिजाइन 16 त्रिभुजाकार टाइलों से बनाया गया है, जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ9 cm, 28 cm और 35 cm हैं (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए)। इन टाइलों को 50 पैसे प्रति cm² की दर से पालिश कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, त्रिभुजाकार को भुजाएँ 9 cm, 28 cm तथा 35 cm
माना a = 9 cm, b = 28 cm नया c = 35 cm
हम जानते हैं, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (9 + 28 + 35) = 36 cm
प्रत्येक टाइल का क्षेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {36 × 27 × 8 × 1}\)
= 36√6 cm² = 88.2 cm²
[∵ √6 = 2.45]
अत: 16 राइलों का क्षेत्रफल = 16 × 88.2 = 1411.2 cm²
∵ 50 पैसे प्रति cm’ की दर से पालिश कराने का व्यय
= (1411.2 × \(\frac {50}{100}\)) = Rs 705.60.

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प्रश्न 9.
एक खेत समलम्ब के आकार का है जिसकी समानर भुजाएँ 25 m और 10 m हैं। इसकी असमान्तर भुजाएँ 14 m और 13 m हैं। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं. AP = BQ
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⇒ AP² = BQ²
⇒ (13)² – (x)² = (14)² – (15 – x)²
⇒ 169 – x² = 196 – 225 – x² + 30
⇒ 30x = 198
⇒ x = 6.6 m
अतः AP = \(\sqrt {AD^2-DP^2}\)
= \(\sqrt {13^2-(6.6)^2}\) = 11.2 m
अत: खेत का क्षेत्रफल = \(\frac {1}{2}\) × (AB + DC) × AP
= \(\frac {1}{2}\) (25 + 10) × 11.2
= \(\frac {1}{2}\) × 35 × 11.2
= 196 m².

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