Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी बारम्बारता वितरण को समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है, टिप्पणी लिखें।
(‘A measure of dispersion is a good supplement to the central value in understanding a frequency distribution.’ Comment.)
उत्तर:
परिक्षेपण का माप केन्द्रीय माप का एक सम्पूरक (A measure of dispersion a good supplement to the central value):
परिक्षेपण का माप किसी बारम्बारता वितरण को समझने में केन्द्रीय माप का एक अच्छा सम्पूरक है। केन्द्रीय माप वितरण केवल पहले के बारे में बताता है। यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता। उदाहरण के लिये यदि 10 विद्यार्थियों के समूह के औसत अंक 60 हैं, तो इससे यह अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है कि औसत रूप में विद्यार्थियों का स्तर कैसा है।

परन्तु इससे यह बिल्कुल पता नहीं चलता कि 10 विद्यार्थियों के अंकों में परस्पर कितना अन्तर है। सभी के अंक 60 हैं या कुछ एक के बहुत अधिक हैं और कुछ के बहुत कम है। इसी बात का स्पष्टीकरण एक और उदाहरण लेकर किया जा सकता है। नीचे राम, रहीम और मारिया के परिवारों की आय के आँकड़े दिये गये हैं। राम के परिवार में चार सदस्य हैं। रहीम के परिवार में 6 सदस्य हैं और मारिया के परिवार में 5 सदस्य हैं।
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तालिका से पता चलता है कि प्रत्येक परिवार की औसत आय 15000 रुपये (\(\frac { 60,000 }{ 4 } \), \(\frac{90,000}{5}\), \(\frac{75,000}{5}\)) है परन्तु व्यक्तिगत आय में बहुत भिन्नताएँ हैं। अतः यह स्पष्ट है कि औसत वितरण केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् मानों का प्रतिनिधि आकार इसे बेहतर ढंग से समझने के लिये हमें मानों के प्रसार की आवश्यकता है। राम के परिवार में आय की भिन्नता अपेक्षाकृत कम है।

रहीम के परिवार में आय की यह भिन्नता काफी अधिक है, जबकि मारिया के परिवार की यह भिन्नता अधिकतम है। केवल औसत का ज्ञान अपर्याप्त है। यदि आपको किसी अन्य मान की जानकारी हो, जो मान में वितरण की मात्रा को प्रदर्शित करता है, तो उस वितरण के बारे में आपका ज्ञान बढ़ जायेगा। उदाहरण के लिये प्रति व्यक्ति आय केवल औसत आय का प्रदर्शन करती है। परिक्षेपण की माप आपको आय की असमानताओं के बारे में बता सकती है। इस तरह से समाज के विभिन्न वर्गों में लोगों के सापेक्ष जीवनस्तर के बारे में आपको जानकारी में वृद्धि होगी।

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प्रश्न 2.
परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
उत्तर:
प्रमाप विचलन परिक्षेपण का सबसे अच्छा माप है, क्योंकि इसमें अच्छे परिक्षेपण की लगभग सभी विशेषताएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं लेकिन कुछ केन्द्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं।

प्रश्न 4.
एक कस्बे में 25% लोग 45,000 रुपये से अधिक आय अर्जित करते हैं, जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिये।
उत्तर:
1. परिक्षेपण का सापेक्ष मान अर्थात् चतुर्थक विचलन –
= \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = \(\frac{45,000-18,000}{45,000+18,000}\) = \(\frac{27,000}{63,000}\) = 0.428

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प्रश्न 5.
एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल फसल की उपज निम्नवत् है –
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प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें –
(क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से विचलन
(घ) माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) सिक फसल में अधिक विचरण है
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों की तुलना कीजिए
उत्तर:
गेहूँ की फसल –
(क) परास: 1 – S = 25 – 9 = 16
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q1 = 3\(\frac{(N+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इसी प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से विभाजित करें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें। उसे जोड़ें तथा योगफल को 10 से भाग दें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

चावल की फसल –
परास: 1 – S = 34 – 12 = 22
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q3 = 3\(\frac{(10+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इस प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से भाग दें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें और उसका योगफल ज्ञात करें और योगफल को 10 से विभाजित करें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 6.
पूर्ववर्ती प्रश्न में विचरण के सापेक्ष मापों का परिकलन कीजिए. और वह मान बताएँ, जो आपके विचार में सर्वधिक विश्वसनीय है।
उत्तर:
परास का कोण सापेक्ष माप है परास गुणांक। अतः हम परांस गुणांक की गणना करेंगे।

  1. गेहूँ का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{25-9}{25+9}\) = \(\frac{16}{36}\) = 0.44
  2. चावल का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{34-12}{34+12}\) = \(\frac{22}{43}\) = 0.47
    इसी प्रकार दोनों फसलों की उपजों के चतुर्थक विचलन गुणांक तथा विचरण गुणांक ज्ञात किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन X और Y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है, जो निम्नवत् है –
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किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिये?
(क) अधिक स्कोर बनाने वाले को या
(ख) अधिक भरोसेमन्द बल्लेबाज को।
उत्तर:
X बल्लेबाज का स्कोर (Score of X batsman):
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माध्य (AM) = \(\frac{Σx}{N}\) = \(\frac{350}{5}\) = 70
औसत स्कोर = 70 रन
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \)  = \(\frac{5750}{5}\) = 1150 रन (स्कोर)
प्रमाप विचलन का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) = \(\frac{33.91}{70}\) = 0.84
विचारण (variance) = \(\frac { Σ(X-\bar { X) } }{ N } \) = \(\frac { ΣX^{ 2 } }{ N } \) = \(\frac{5750}{5}\) रन
विचारण का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) × 100 = \(\frac{12.88}{62}\) × 100 = 20.77%

निष्कर्ष (Conclusion):

  1. x बल्लेबाज को चुना जाना चाहिए क्योंकि उसका औसत स्कोर (70 रन) y बल्लेबाज के औसत (62 रन) से अधिक है।
  2. y बल्लेबाज अधिक भरोसेमन्द (विश्वसनीय) है, क्योंकि उसका विचरण गुणांक (C.V = 20.70%) X बल्लेबाज का विचरण गुणांक (48.44%) से कम है।

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प्रश्न 8.
दो ब्राण्डों के बल्ब की गुणवत्ता जाँचने के लिये ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवनकाल को प्रत्येक ब्राण्ड के 100 बल्वों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है –
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(क) किस ब्राण्ड का जीवन काल अधिक है?
(ख) कौन-सा ब्राण्ड अधिक भरोसेमंद है?
उत्तर:
ब्राण्ड ‘क’ बल्ब
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of variation)
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of Variation)
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निष्कर्ष (Conclusion):

  1. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब का जीवन काल अधिक है क्योंकि बल्ब ‘ख’ का माध्य जीवन काल बल्ब ‘क’ बल्ब के माध्य जीवन काल से अधिक है।
  2. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब अधिक भरोसेमंद है क्योंकि इस बल्ब के इस ब्राण्ड का विचरण गुणांक ‘क’ ब्राण्ड के बल्ब के विचरण गुणांक से कम है।

प्रश्न 9.
एक कारखाने में 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रुपये है तथा मानक विचलन 40 रुपये था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रुपये की वृद्धि की गई, अब मजदूर की औसत मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आई?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में वृद्धि = 20 रुपये
मजदूरी में कुल बृद्धि = 50 × 20 – 1000
मजदूरी बृद्धि से पूर्व कुल मजदूरी का योगफल = 10,000 + 1,000 = 11,000 रुपये
नई औसत मजदूरी = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{11000}{50}\) = 220
अत: नई औसत मजदूरी = 220 रुपये
औसत मजदूरी में परिवर्तन होगा, परन्तु मानक विचलन में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। अब मजदूरी में समानता ज्ञात करने के लिए विचरणता गुणांक ज्ञात करेंगे। आरम्भ में –
C.V. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) = 100 = 20%
बाद में C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) × 100 = 18.18%
अब मजदूरी में अधिक समानता आ गई है क्योंकि विचरण कम हो गया है।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती प्रश्न में यदि प्रत्येक मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाये, तो माध्य और मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि करने पर नया माध्य 200 रुपये (200 + 20) होगा।
मानक विचलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित वितरण के लिये माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन किजिये।
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उत्तर:
माध्य से माध्य विचलन और मानक विचनल की गणना (Calculation of mean and standard deviation):
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मध्यिका से विचलन की.गणना (Calculation mean deviation mean):
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माध्य विचलन = \(\frac{Σf|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.68
अत: माध्य विचलन = 19.68
माध्य विचलन = \(\frac{f|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.968

प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation);
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प्रश्न 12.
10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात किजिये।
उत्तर:
प्रमाप विचलन σ = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 3 } }{ N } -(X)^{ 2 } } \)
अथवा, σ2 = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \) – (X)2 = \(\frac{1090}{10}\) – (10)2 = 109 – 100 = 9
अथ्वा, σ = \(\sqrt{9}\) = 3
अतः विचरण गुणाक = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{3}{10}\) × 100 = 300

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक व्यक्तिगत श्रेणी में विचलन की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
माध्य विचलन (M.D.) = (Q.D.) = \(\frac{Σf(d)}{V}\)

प्रश्न 2.
माध्य विचलन प्रायः माध्यिका से ही नहीं लिए जाते हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्यिका से इसलिए लिये जाते हैं, क्योंकि माध्यिका से लिए गये विचलनों का योग न्यूनतम होता है।

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प्रश्न 3.
व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाण विचलन (Standard Deviation) की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रमाण विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σ(X-X)^{ 2 } }{ N } } \)

प्रश्न 4.
प्रमाप विचलन सदैव किस माध्य से लिये जाते हैं?
उत्तर:
प्रमाप विचलन सदैव समान्तर माध्य से लिये जाते हैं, क्योंकि इससे लिए गए विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है।

प्रश्न 5.
प्रसरण (Variance) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसरण (Variance):
(प्रमाण विचलन)2

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प्रश्न 6.
यदि किसी आवृत्ति बंटन का प्रसरण (Variance) 100 है, तो इसका प्रमाण विचलन क्या होगा?
उत्तर:
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt{100=10}\)

प्रश्न 7.
पाँच संख्याओं 1, 4, 5, 7 तथा 8 का प्रमाप विचलन 2, 4, 5 है। यदि प्रत्येक संख्या में 10 जोड़ दिया जाये, तो नया प्रमाप विचलन क्या होगा?
उत्तर:
नया प्रमाण विचलन (σ) = 2.45

प्रश्न 8.
यदि किसी श्रेणी का प्रमाप विचलन 5 है, तो उसका प्रसरण (Variance) कितना होगा?
उत्तर:
प्रसरण (Vriance) (5)2 = 25

प्रश्न 9.
विचरण गुणांक (Coefficient of Variation) क्या होता है?
उत्तर:
विचरण गूणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

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प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य 100 और प्रमाप विचलन 10 है, तो उसका विचरण गुणांक (Coefficlent of Variation) निकालें।
उत्तर:
विचरण गणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

प्रश्न 11.
दो श्रेणियों A तथा B का विचरण गुणांक 20% तथा 10% है, कौन-सी श्रेणी सजातीय अथवा समरूप कहलायेगी?
उत्तर:
B श्रेणी समाजतीय अथवा समरूप कहलायेगी, क्योंकि इसका विचरण गुणांक अपेक्षाकृत कम है।

प्रश्न 12.
एक प्रसामान्य बंटन x + 36 के अन्तर्गत कितनी प्रतिशत मदें शामिल होती हैं?
उत्तर:
\(\bar { X } \) ± 3σ = 99.37% मदें।

प्रश्न 13.
परिक्षेपन की माप कौन-सी श्रेणी की माध्य कहलाती है?
उत्तर:
द्वितीय श्रेणी की।

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प्रश्न 14.
परिक्षेपण के तीन प्रचलित मापों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. प्रमाण विचलन

प्रश्न 15.
विस्तार (Range) किसे कहते हैं?
उत्तर:
विस्तार (R) अधिकतम मूल्य तथा न्यूनतम मूल्य में अन्तर है।
सूत्र के रूप में, R = H – L

प्रश्न 16.
किसी स्कूल में पाँच छात्र के मासिक खर्च क्रमश: 12 रु., 20 रु., 5 रु.,, 40 रु. और 62 रु. है, विस्तार (Range) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विस्तार = 62 रु., – 12 रु. = 50 रु.

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या होता है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन कियी श्रेणी के तीसरे तथा पहले चतुर्थक के अन्तर का आधार है। सूत्र के रूप में,
Q.D = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 18.
कौन से परिक्षेपन के माप में विचलन चिह्नों (+ तथा -) की उपेक्षा की जाती है?
उत्तर:
माध्य विचलन।

प्रश्न 19.
माध्य विचलन (Mean Deviation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक समंकमाला के किसी माध्य (समान्तर माध्य, माध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गये विचलनों को जोड़ के समान्तर माध्य विचलन कहते हैं।

प्रश्न 20.
निम्न सूचनाओं के आधार पर विस्तार ज्ञात करें 20, 30, 40, 50 तथा 200
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 21.
यदि प्रश्न 33 में यदि दिये गये आँकड़ों में 200 हटा दिया जाये तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 50 – 20 = 30

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प्रश्न 22.
प्रश्न 33 में यदि 50 के स्थान पर यदि 150 कर दिया जाये, तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 23.
खले सिरे वाले वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
खुले सिरे वितरण से अभिप्राय उस वितरण से है, जिसमें निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की उच्चतम सीमा या दोनों ही न दिये गये हों।

प्रश्न 24.
उदाहरण से बतायें कि विस्तार अधिकतम सीमा मूल्य से प्रभावित होता है।
उत्तर:
मान लो हम निम्न मूल्य लेते हैं।
10, 15, 20, 50
ऐसी अवस्था में विस्तार = 50 – 10 = 40
यदि अधिकतम सीमा का मूल्य 50 के स्थान पर 100 हो जाये, तो ऐसी अवस्था में विस्तार = 100 – 10 = 90 होगा।
इस प्रकार हम देखते हैं कि विस्तार उच्चतम सीमा के मूल्य से प्रभावित होता है।

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प्रश्न 25.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध अन्तर चतुर्थक विस्तार (Semi-inter-Quartile Range) है।

प्रश्न 26.
प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रमाप विचलन गुणांक = \(\frac{σ}{X}\)

प्रश्न 27.
विचरण गुणांक की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विचरण गुणांक = \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 28.
निम्नलिखित सूचना के आधार पर विचरण गुणांक (C.V.) की गणना करें –

  1. प्रतिदिन प्रति व्यक्ति में मजदूरी के आधार पर विचरण = 9 रुपये
  2. औसत मजदूरी = 120
  3. मजदूरों की संख्या = 50

उत्तर:
C.F. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac { \sqrt { 9 } }{ 20 } \) × 100 = \(\frac{3}{120}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 29.
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विभिन्न विधियाँ लिखें।
उत्तर:
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विधियाँ हैं –

  1. वास्तविक माध्य विधि
  2. काल्पनिक माध्य विधि
  3. प्रत्यक्ष विधि तथा
  4. पद विचलन विधि

प्रश्न 30.
निरपेक्ष तथा सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
निरपेक्ष परिक्षेपण को उन्हीं इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, जिनमें समंक होते हैं (जैसे रुपये, कि. ग्राम)। इसके विपरीत सापेक्ष परिक्षेपण प्रतिशत में या निरपेक्ष परिक्षेपण के गुणांक में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 31.
परिक्षेपण का बिन्दुरेखीय माप कौन-सा है?
उत्तर:
लॉरेंज वक्र।

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प्रश्न 32.
लॉरेंज वक्र किस आर्थिक समस्या के अध्ययन के लिए उपयुक्त है?
उत्तर:
किसी देश की आय तथा सम्पत्ति में असमानताओं की समस्या का अध्ययन करने के लिए लॉरेंज वक्र बहुत उपयुक्त है।

प्रश्न 33.
परिक्षेपण का कौन-सा माप दो श्रेणियों की तुलना के लिए अधिक उपयुक्त हैं?
उत्तर:
विचरण गुणांक।

प्रश्न 34.
विस्तार का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
यह केवल दो चरण मूल्यों पर आधारित है।

प्रश्न 35.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से लिए गए विचलन के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है।

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प्रश्न 36.
निम्न श्रृंखला का विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 13
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{105-50}{105+50}\) = \(\frac{55}{155}\) = 0.354

प्रश्न 37.
यदि प्रमाप विचलन 9 है, तो प्रसरण का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
प्रसारण = σ2 = 9 × 9 = 81

प्रश्न 38.
विस्तार गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\)

प्रश्न 39.
प्रमाप विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
विचलन वर्ग माध्य मूल।

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प्रश्न 40.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध-अन्तर चतुर्थक (Semi-inter-quartile) है।

प्रश्न 41.
सर्वप्रथम प्रसारण शब्द का प्रयोग किसने किया था?
उत्तर:
आर. ए. फिशर ने।

प्रश्न 42.
अच्छे परिक्षेपण के माप की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अच्छा परिक्षेपण श्रृंखला के सभी मदों पर आधारित होता है।
  2. इसकी गणना सरल चाहिए।

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प्रश्न 43.
परिक्षेपण के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. श्रृंखला के गठन अथवा बनावट के विषय में जानकारी देना।
  2. माध्य से प्रभावीपन को जाँचना।

प्रश्न 44.
एक कार्यालय में 10 व्यक्तियों का मध्यमान वेतन 5400 रुपये है। उनमें से एक कर्मचारी का वेतन 6000 रुपये है। बताएं कि इस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है या ऋणात्मक।
उत्तर:
उस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है।

प्रश्न 45.
परिक्षेपण के कौन से माप मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।
उत्तर:
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 46.
परिक्षेपण के कौन से माप मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं।

प्रश्न 47.
परिक्षेपण के माप कितने प्रकार के हो सकते हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण माप दो प्रकार के हो सकते हैं –

  1. निरपेक्ष तथा
  2. सापेक्ष

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प्रश्न 48.
प्रमाप विचलन का एक मुख्य दोष क्या है?
उत्तर:
इसे समझना एवं ज्ञात करना अपेक्षाकृत कठिन है।

प्रश्न 49.
परिक्षेपण के विभिन्न मापों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. निरपेक्ष माप
  2. सापेक्ष माप

प्रश्न 50.
विस्तार का एक दोष लिखें।
उत्तर:
वे श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं हैं।

प्रश्न 51.
कौन-सी परिक्षेपण की माप 50 प्रतिशत मूल्य से सम्बन्धित है?
उत्तर:
अन्तर चतुर्थक विस्तार।

प्रश्न 52.
विचरण क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन के वर्ग को विचरण कहते हैं। समीकरण में, प्रसारण = σ2

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प्रश्न 53.
विचरण गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 54.
प्रमाप विचलन की एक बीजगणितीय विशेषता बताएँ।
उत्तर:
समान्तर माध्य से लिए गए विचलन वर्गों का योग सदैव न्यूनतम होता है।

प्रश्न 55.
सामूहिक प्रमाप विचलन ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 14

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निरपेक्ष और सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जब किसी समंकमाला के विस्तार, बिखराव या विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उसकी इकाई द्वारा ज्ञात किया जाता है, तो उसे परिक्षेपण का निरपेक्ष माप कहते हैं और जब परिक्षेपण के निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग दे और इस प्रकार जो अनुपात या प्रतिशत प्राप्त होता है, परिक्षेपण का सापेक्ष माप कहते हैं।

प्रश्न 2.
परिक्षेपण के आदर्श माप के कोई तीन गुण बताओ।
उत्तर:

  1. आदर्श परिक्षेपन का माप स्पष्ट एवं सरल होता है।
  2. यह सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
  3. निदर्शन में परिवर्तनों का परिक्षेपण के आदर्श माप पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

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प्रश्न 3.
माध्य विचलन (Mean Deviation) और प्रमाप विचलन (Standard Deviation) में अन्तर बताइये।
उत्तर:
1. माध्य विचलन में श्रेणी के मूल्यों में विचलन किसी भी सांख्यिकी माध्य (सामानान्तर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से निकाले जा सकते हैं, जबकि प्रमाप विचलनों में श्रेष्ठ के मूल्यों के विचलन सदैव सामानान्तर माध्य से लिये जाते हैं।

प्रश्न 4.
परिक्षेपण किसे कहते हैं? निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित मापों के नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण से अभिप्राय समंकमाला में विभिन्न मूल्यों के विस्तार, दूरी तथा बिखराव से होता है। बऊले के अनुसार, “परिक्षेपण पदों के विचरण या अन्तर का माप है। परिक्षेपण की सहायता से मदों के केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचलन ज्ञात किये जाते है।” निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित माप –

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. माध्य विचलन
  4. प्रमाप विचलन इत्यादि हैं

प्रश्न 5.
प्रमाप विचलन का क्या अर्थ है? इसको किस चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है?
उत्तर:
किसी श्रेणी के समानान्तर माध्य के विचलनों के वर्गों के समानान्तर माध्य का वर्गमूल प्रमाप विचलन कहलाता है। प्रमाप विचलन के माप के लिए ग्रीक वर्णमाला का अक्षर सिग्मा (Small Sigma) प्रयुक्त किया जाता है। सूत्र के रूप में  –
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X } )^{ 2 } }{ N } } \)

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प्रश्न 6.
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन क्या हैं? इसकी गणना का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
विस्तार परिक्षेपण का सरल माप है। किसी श्रेणी के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अन्तर को विस्तार कहते हैं। इसकी गणना के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
विस्तार = R = L – S
चतुर्थक विचलन को अर्द्ध अन्तर चतुर्थ विस्तार भी कहते हैं। परिक्षेपण का यह माप शृंखला के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के मूल्यों पर आधारित है। इसकी गणना करने के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया हाता है।
चतर्थक विचलन Q.D. = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

प्रश्न 7.
मूल तथा पैमाने में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन, माध्य तथा विचरण पर क्या प्रभाव पड़ोगा?
उत्तर:
1. मूल में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। परन्तु मूल में परिवर्तन आने पर माध्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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प्रश्न 8.
प्रमाप विचलन को विचलन का वर्गों के माध्य मूल भी क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन को विचलन के वर्गों का माध्य मूल भी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह माध्य के विचलनों के वर्गों के माध्य का मूल है। प्रमाप विचलन की गणना में हम पहले माध्य की गणना करते हैं फिर माध्य से मदों विचलन ज्ञात किया जाता फिर विचलनों का वर्ग निकालकर उसका योगफल निकाला जाता है। विचलन के वर्गों के जोड़ को मदों की संख्या से विभाजित किया जाता है और जो परिणाम आता है. उसका वर्गमूल ज्ञात किया हाता है प्रमाप विचलन का चिह्न है। सूत्र रूप में।
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X)N } }{ } } \)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक विशेष वितरण में चतुर्थ विचलन 15 अंक है और चतुर्थ विचलन का गुणांक 0.6 है। Q1 तथा Q2 ज्ञात करें।
उत्तर:
माध्य विचलन (Q.D.) = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \) = 15 अंक
अथवा, Q3 – Q1 = 30
माध्य विचलन का गुणांक = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6
\(\frac { 30 }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6; अथवा, Q3 + Q1 = \(\frac{30}{0.6}\)

  1. तथा
  2. को जोड़ने पर

∴ Q3 + Q1 = 50
Q3 – Q1 = 30
Q3 + Q1 = 50
2Q3 = 80
Q1 = 40 अंक
अब Q3 – Q1 = 30
अतः – Q1 = 30 – Q3
-Q1 = 30 – 40 = -10
Q1 = 10
Q1 = 10 अंक तथा Q3 = 30 अंक उत्तर।

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प्रश्न 2.
11 मनुष्यों की ऊँचाई 61, 64, 68, 67, 68, 66, 70, 65, 67 तथा 72 इंच है। विस्तार ज्ञात किजिए। यदि सबसे छोटे कद वाले व्यक्ति को हटा दिया जाये तब विस्तार में कितने प्रतिशत परिवर्तन होगा?
उत्तर:

  1. विस्तार = L – S = 72 – 61 = 11 इंच
  2. नया विस्तार (सबसे छोटे आदमी को हटाने के पश्चात् = 72 – 64 = 8 इंच
  3. विस्तार में परिवर्तन = 11 – 8 = 3 इंच विस्तार में प्रतिशत परिवर्तन = \(\frac{3}{11}\) × 100 = 27.2%

प्रश्न 3.
निम्न तालिका में 100 व्यक्तियों की ऊँचाई दी गई है। विस्तार विधि से परिक्षेपण ज्ञात करें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 16
विस्तार = L – S = 170 – 161 = s
विस्तार का गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{170-161}{170+161}\) = \(\frac{9}{331}\) = 0.3

प्रश्न 4.
सिद्ध किजिये कि माध्य विचलन सभी मानों पर आधरित होता है। अतः एक भी मान में परिवर्तन इस पर प्रभाव डालेगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनका माध्य विचलन ज्ञात करते हैं – 2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 17
माध्य \(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{15}{5}\) = 2.4
अब हम मान बदल देते हैं। 9 के स्थान पर 14 लेते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 18
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{35}{5}\) = 7
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{16}{5}\) = 3.2
इस प्रकार हम देखते हैं कि मान के बदलने से माध्य विचलन में अंतर आ गया है। पहले माध्य विचलन 24 मान बदलने के बाद यह 3.2 हो गया है।

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प्रश्न 5.
सिद्ध करें कि यदि माध्य विचलन माध्य से परिकलित किया जाये, तो यह अधिक होगा और यदि इसे मध्यिका से परिकलित किया जाये तो यह निम्नतम होगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनसे माध्य विचलन तथा मध्यिका से माध्य विचलन कि गणना करते हैं -2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 19
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य से माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{12}{5}\) = 2.4
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 20
माध्य = \(\frac{N+1}{2}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{5+1}{2}\) = तीसरे मद का मूल्य = 7
माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{11}{5}\) = 2.2
माध्य से विचलन 2.4 है और माध्यिका से माध्य विचलन 2.2 है। अत: सिद्ध हुआ कि मध्यिका से माध्य विचलन से माध्य विचलन से कम होता है।

प्रश्न 6.
इंचों में मापा गया ऊँचाई का प्रमाप विचलन व्यक्ति के उसी समूह में फुटों में मापे गये ऊँचाई के प्रमाप विचलन से अधिक होगा।
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सत्य है। इसका कारण यह है प्रमाप विचलन निरपेक्ष माप है। यह माप कठिनाई उत्पन्न कर सकता है, जब माप की इकाइयाँ भिन्न-भिन्न होती हैं। माप इकाई जितनी कम होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही अधिक बढ़ता जायेगा और माप इकाई जितनी अधिक होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही कम होता जायेगा।

उदाहरण के लिये हम रुपयों के स्थान पर पैसों में आय की गणना करते हैं तो प्रमाप विचलन 100 गुणा बढ़ जायेगा। प्रमाप विचलन में बढ़ोत्तरी बारह गुना होगी। (1 फुट = 12 इंच) इसे हम उदाहरण द्वारा समझा सकते हैं। मान लो 5 वस्तुओं की ऊँचाई नीचे फुटों में दी गई है। इसका हम प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
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अब हम इन्हीं ऊँचाई को इंचों में लेकर प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
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इस तरह हम देखते हैं कि प्रमांप विचलन 12 गुण बढ़ गया है।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से निम्न चतुर्थक (Q1) तृतीय चतृर्थक (Q) की गणना करें –
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उत्तर:
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प्रश्न 8.
फार्मों में एक क्विंटल गेहूँ की उत्पादन लागत का वितरण (रुपयों) में निम्नलिखित हैं।
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(क) विचरण ज्ञात करें।

  • प्रत्यक्ष विधि से
  • पद – विचलन विधि से तथा परिणामों को समान्तर माध्य से और माध्य विचलन से तुलना करें।

(ख) विचरण गुणांक की गणना करें।

  • मूल्यों के प्रमाप विचलन से
  • समान्तर माध्य से, माध्य विचलन से तथा दोनों की तुलना करें। लागतों में विचरण से आप किस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं?

उत्तर:
प्रत्यक्ष विधि से विचरण की गणना –
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विचरण गुणांक की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 27

  1. विचरण गुणांक (प्रमाप विचलन से) = \(\frac{σ}{X}\) = \(\frac{12}{71}\) = 0.169 या 0.17 लगभग
  2. विचरण गुणांक (माध्य विचलन से) = \(\frac{MD}{X}\) = \(\frac{492/50}{50}\) = \(\frac{9.84}{71}\) = 0.138 = 0.04 लगभग

निष्कर्ष:
दो परिणामों में आपस में तुलना करने पर हम कह सकते हैं कि माध्य विचलन को तुलना में प्रमाप विचलन में विचरण गुणांक अधिक है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित विधियों से नीचे दी गई तालिका से प्रमाप विचलन ज्ञात करें। (Calculate standard deviation from the following table)

  1. वास्तविक माध्य विधि (Actual Mean Method)
  2. काल्पनिक माध्य विधि (Assumed Mean Method)
  3. 6 faasta farfa (Step Deviation Method)

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1. वास्तविक माध्य विधि द्वारा प्रमाप विचलन की गणना (Calculationofs.D.with the help of Actual Mean Method)
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2. कल्पित माध्य विधि से प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation by Assumed Mean Method)
हमने यहाँ कल्पित माध्य 40 लिया है।
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3. पद विचलन विधि से प्रमाप विचलन को गणना (Calculation of S.D.by step Deviation Method)
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प्रश्न 10.
लारेंज वक्र के निर्माण में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
लारेंज वक्र के निर्माण में निम्नलिखित चरण निहित हैं –

  1. वर्गों के मध्य बिन्दु परिकल्पित करें तथा उनका संचयी योग पता लगाएं।
  2. संचयी योग को प्रतिशत में बदलें।
  3. बारम्बारता को जोड़ें तथा संचयी बारम्बारता प्राप्त करें।
  4. संचयी बारम्बारता को प्रतिशत में बदलें।
  5. अब ग्राफ पेपर पर चर के संचयी प्रतिशत को y अक्ष पर तथा बारम्बारता के संचयी प्रतिशत को x अक्ष पर प्रदर्शित करें। इस तरह से प्रत्येक अक्ष पर 0 से 100 तक का मान होगा।
  6. निर्देशांक (0,0) को (100, 100) से जोड़ते हुए एक रेखा खींचे। इसे समवितरण रेखा कहा जाता है।
  7. चर के संचयी प्रतिशत को बारम्बारता के संगत संचयी प्रतिशत के साथ अभिलेखित करें। इन बिन्दुओं को मिलाकर एक वक्र प्राप्त करें। आगे लारेंज वक्र का ग्राफ दिया गया।

Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 32

प्रश्न 11.
नीचे एक कम्पनी के कर्मचारियों की मासिक आय दी गई है। इसकी सहायता से एक लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
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12. नीचे तालिका की सहायता से लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 37
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प्रश्न 13.
निम्न समंकमाला का प्रसारण (02) तथा इमाप विचलन प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा ज्ञात कीजिए। दोनों विधियों का प्रयोग कीजिए।
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उत्तर:
(क) प्रत्यक्ष विधि द्वारा (Direct Method) –
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प्रश्न 14.
परिक्षेपणं के वैकल्पिक मापों की तलनात्मक विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण के वैकल्पिक मापों की तुलनात्मक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. कठोरता से परिभाषित (Rigidiy defined):
परिक्षेपण के चारों प्रमाण-विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन तथा प्रमापे विचलन को कठोरता से परिभाषित किया जाता है।

2. गणना में सरल (Easyof calculation):
विस्तार की गणना सबसे अधिक सरलता से की जा सकती है। चतुर्थक विचलन की गणना करने के लिए उच्च चतुर्थक (Q3) तथा न्यूनतम (Q2) की गणना करनी पड़ती है। परन्तु इनकी गणना सरलता से की जा सकती है। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन की गणना के लिये थोड़ी अधिक विधिपूर्वक गणना करने की आवश्यकता होती है।

3. सरल व्याख्या (Simple interpretation):
परिक्षेपण के सभी मापों की सरलता से व्याख्या की जा सकती है और उन्हें सरलता से समझा जा सकता है। विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सामान्य रूप से परिक्षेपण को मापते हैं। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मूल्य के विचलन के रूप में करते हैं। अत: माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन मूल्य के परिक्षेपण के बारे में अधिक अच्छी जानकारी देते हैं।

4. सभी मूल्यों पर आधारित (Based on all values):
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सभी मूल्य पर निर्भर नहीं करते। इसके विपरीत माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन चरों के सभी मूल्यों के लेते हैं। विस्तार तो चरम (Extrement) मूल्यों से बहुत ही प्रभावित होती हैं।

5. बीजगणितीय व्यवहार (Algebrical treatment):
लगभग परिक्षेपण के सभी मापों से बीजगणितीय व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 15.
(क) व्यक्तिगत श्रेणी तथा खण्डित श्रेणी से माध्य विचलन की गणना कैसे की जाती है?
(ख) निम्नलिखित सारणी में माध्यिका तथा माध्य विचलन ज्ञात करें। (Calculate mean deviation from median and mean)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 42
उत्तर:
(क) व्यक्तिगत श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of mean Deviation from Individual Series):

  • वह माध्य ज्ञात करें, जिससे विचलन ज्ञात करना है।
  • माध्यिका/माध्य से (+) या (-) संकेतों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करें।
  • इन विचलनों का योग ΣD ज्ञात करें।
  • कुल योग ΣD को मदों की कुल संख्या से विभाजित करें। सूत्र के रूप में माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\)
  • भजनफल माध्य विचलन होगा।

(ख) खण्डित-श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of Mean Deviation in Discrete Series):

  • दी हुई श्रेणी से माध्यिका ज्ञात करें।
  • के चिह्नों की अवहेलना करते हुए विलचन ज्ञात करना व Σf |D| ज्ञात करें।
  • विचलनों को इनकी आवृत्तियों से गुणा करके इनका योग (Σf |D|) ज्ञात करना।
  • अन्त में, प्राप्त योगफल को पदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन का मूल्य प्राप्त होगा।

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प्रश्न 16.
(क) अखण्डित श्रेणी से माध्य की गणना कैसे की जाती है? (How is mean deviation calculated in case of continuous series?)
(ख) नीचे 50 श्रमिकों की मजदूरी का वितरण दिया गया है। माध्य विचलन ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 45
उत्तर:
(क) अखण्डित श्रेणी के माध्य विचलन की गणना में निम्नलिखित चरण निहित है –

  • वर्गान्तर के मध्य बिन्दु ज्ञात करना। मान लो वर्गान्तर 0 – 10, 10 – 20, 20 – 30 आदि है, तो इनके मध्य बिन्दु 5, 15, 25 होंगे।
  • मध्य बिन्दुओं से माध्यिका या माध्य ज्ञात करें।
  • ± चिह्नों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करना ΣD ज्ञात करना।
  • विचलनों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करना फिर उनका योग निकालना को ΣfD से प्रकट करना।
  • अन्त में प्राप्त योग को मदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन ज्ञात हो जायेगा।

(ख) माध्य विचलन किसी भी माध्य द्वारा निकाला जा सकता है। यहाँ माध्यों का प्रयोग करके माध्य – विचलन की गणना की गई है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 46

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
परिक्षेपण के सापेक्ष मापक की इकाई –
(a) चर की इकाई होती है।
(b) कोई इकाई नहीं होती है।
(c) चर की इकाई का वर्ग होती है।
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) कोई इकाई नहीं होती है।

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प्रश्न 2.
मानक विचलन की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) चर की इकाई

प्रश्न 3.
विचरण मापक की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चर की इकाई का वर्ग

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प्रश्न 4.
विस्तार से विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 47
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48

प्रश्न 5.
चतुर्थक विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)

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प्रश्न 6.
मध्यायका से विचरण गुणांक का सूत्र है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(c) \(\frac{MD}{M}\)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac{MD}{M}\)

प्रश्न 7.
लघु विधि से मानक विचलन का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 50
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 49

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प्रश्न 8.
विचरण मापांक का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52

प्रश्न 9.
चतुर्थक विचलन होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 4 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(b) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 10.
माध्य विचलन न्यूनतम होता है जब –
(a) मध्यिका से लिया जाता है।
(b) समान्तर माध्य से लिया जाता है।
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मध्यिका से लिया जाता है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science जीव जनन कैसे करते है InText Questions and Answers

अनुच्छेद 8.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
डी०एन०ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है?
उत्तर:
प्रजनन की मूल घटना है डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियाँ तैयार करना। इसके लिए कोशिकाएँ रासायनिक अभिक्रियाएँ करती हैं जिससे डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियाँ बन जाती हैं। इन प्रतिकृतियों को अलग होने के लिए एक अलग कोशिकीय संरचना की आवश्यकता होती है। डी०एन०ए० की दोनों प्रतिकृतियाँ अलग होकर दो कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। इस प्रकार प्रजनन में दो कोशिकाओं को बनाने के लिए डी०एन०ए० प्रतिकृति आवश्यक है।

प्रश्न 2.
जीवों में विभिन्नता स्पीशीज़ के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों?
उत्तर:
जीवों में विभिन्नताओं की किसी जीव के अस्तित्व के लिए आवश्यकता नहीं है क्योंकि उसके जीवित रहने पर कुछ विभिन्नताओं का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। वह समानता के आधार पर अधिक अनुकूल होता है। लेकिन डी०एन०ए० की दोनों प्रतिकृतियाँ बिल्कुल समान नहीं होतीं उनमें कुछ-न-कुछ विभिन्नताएँ अवश्य होती हैं जो धीरे-धीरे गहरी होती जाती हैं। जनन में होने वाली ये विभिन्नताएँ अन्ततः नई स्पीशीज़ के विकास में योगदान देती हैं तथा जैव विकास का आधार बनती हैं। अतः विभिन्नताएँ स्पीशीज़ के उद्भव के लिए आवश्यक हैं लेकिन जीव के जीवित रहने के लिए इनकी कोई आवश्यकता नहीं है।

अनुच्छेद 8.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
द्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
द्विखंडन इस विधि द्वारा एककोशिकीय जीव दो भागों में विभक्त होता है और प्रत्येक भाग एक नए जीव में विकसित होता है; जैसे-अमीबा । बहुखंडन इस विधि में एककोशिकीय जीव अनेक भागों में विभक्त होता है तथा प्रत्येक भाग एक नए जीव में विकसित होता है; जैसे मलेरिया परजीवी (प्लैज़्मोडियम)।

प्रश्न 2.
बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है? उत्तर-बहुत-से सरल बहुकोशिकीय जीवों के वृन्त पर एक कैप्सूल जैसी संरचना होती है जिसे बीजाणुधानी कहते हैं। बीजाणुधानी में बहुत-से बीजाणु भरे होते हैं। ये बीजाणु बड़ी संख्या में होते हैं। इस प्रकार एक बीजाणुधानी से एक बड़ी संख्या में नए जीव उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार यह ऐसे जीवों के लिए लाभदायक होता है जिनमें जनन बीजाणु द्वारा होता है। जैसे – राइजोपस।

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प्रश्न 3.
क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नयी संतति उत्पन्न नहीं कर सकते?
उत्तर:
जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते; क्योंकि –

  1. ऐसे जीवों की संरचना अत्यन्त जटिल होती है।
  2. ऐसे जीवों में एक विशिष्ट कार्य करने के लिए विशिष्ट अंग/अंगों की आवश्यकता होती है।
  3. ऐसे जीवों में श्रम विभाजन होता है।
  4. पुनरुद्भवन विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा होता है। ऐसी कोशिकाएँ जटिल जीवों में नहीं होती।

प्रश्न 4.
कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
कायिक प्रवर्धन केवल ऐसे पौधों में ही संभव है जिनके जड, तना या पत्तियों में नए पौधों को उगाने की क्षमता होती है। कुछ पौधों में बीज नहीं होते, ऐसे पौधों को केवल कायिक प्रवर्धन द्वारा ही उगाया जा सकता है। कायिक प्रवर्धन बीजरहित पौधों को उगाना संभव बनाता है। केला, नारंगी, गुलाब, जासमीन व गन्ने में बीज बनने की क्षमता कम है या बिल्कुल नहीं है अतः ऐसे पौधे कायिक प्रवर्धन द्वारा ही उगाये जा सकते

प्रश्न 5.
डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?
उत्तर:
डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक है। यह जनन के लिए एक मूल घटना है। डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियों से ही जनक कोशिका की दो कोशिकाएँ बनती हैं। ये दोनों प्रतिकृतियाँ अलग होना आवश्यक हैं तभी जनन हो सकता है। इसके लिए एक अलग से कोशिकीय संरचना आवश्यक है। एक प्रतिकृति नई संरचना में तथा एक मूल कोशिका में रह जाती है। इस प्रकार दो प्रतिकृतियाँ दो नई कोशिकाएँ बनाने में सहायता करती हैं; और जनन होता है।

अनुच्छेद 8.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
परागण परागकणों के परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया को परागण क्रिया कहते हैं। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की दो कोशिकाओं में संलयन नहीं होता है। यह निषेचन से पहले की क्रिया है। निषेचन निषेचन में नर व मादा युग्मकों का संलयन होता है तथा युग्मनज बनता है। यह परागण के बाद की क्रिया है।

प्रश्न 2.
शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?
उत्तर:
नर जनन तंत्र में कुछ ग्रंथियाँ; जैसे-शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथियाँ होती हैं। इन ग्रंथियों के स्राव शुक्राणु के साथ मिलते हैं। इस प्रकार शुक्राणु एक द्रव में आ जाते हैं। यह द्रव शुक्राणुओं के स्थानांतरण को आसान बनाता है। यह द्रव शुक्राणुओं को पोषण भी प्रदान करता है।

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प्रश्न 3.
यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन से परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर:
यौवनारंभ के समय लड़कियों में निम्न परिवर्तन दिखाई देते है –

  1. स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है।
  2. स्तनाग्र की त्वचा का रंग गहरा होने लगता है।
  3. रजोधर्म प्रारम्भ होने लगता है।
  4. त्वचा तैलीय हो जाती है, चेहरे पर मुहासे निकलने लगते हैं।
  5. श्रोणिभाग चौड़ा तथा नितम्भ भारी हो जाते हैं।
  6. आवाज महीन एवं सुरीली हो जाती है।

प्रश्न 4.
माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?
उत्तर:
निषेचन के बाद युग्मनज बनता है जो धीरे-धीरे भ्रूण में विकसित होने लगता है। भ्रण गर्भाशय की भित्ति से चिपक जाता है। इस प्रक्रिया को इम्प्लांटेशन कहते हैं। भ्रूण माता के शरीर से अपना भोजन प्राप्त करता है। इसके लिए एक विशिष्ट ऊतक, जिसे प्लेसेंटा कहते हैं, होता है। यह एक तश्तरीनुमा संरचना है जो गर्भाशय की भित्ति में घुसा होता है। माता के गर्भाशय की भित्ति विलाई से बनी होती है जो गर्भाशय का क्षेत्रफल बढ़ाता है। इससे भ्रूण को अधिक ग्लूकोज व ऑक्सीजन मिलती है। इस प्रकार भ्रूण माता के शरीर से अपना पोषण प्राप्त करता है।

प्रश्न 5.
यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा करेगा?
उत्तर:
यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा नहीं करेगा।

Bihar Board Class 10 Science जीव जनन कैसे करते है Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है –
(a) अमीबा में
(b) यीस्ट में
(c) प्लैज्मोडियम में
(d) लेस्मानिया में
उत्तर:
(b) यीस्ट में

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?
(a) अंडाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिका
(d) डिबवाहिनी
उत्तर:
(c) शुक्रवाहिका

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प्रश्न 3.
परागकोश में होते हैं।
(a) बाह्यदल
(b) अंडाशय
(c) अंडप
(d) परागकण
उत्तर:
(d) परागकण

प्रश्न 4.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. लैंगिक जनन से जनन संतति में विविधता आती है।
  2. जीन के नए युग्मक बनते हैं जिसके कारण आनुवंशिक विविधिता का विकास होता है।
  3. नए जीवों के विकास में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रश्न 5.
मानव में वृषण के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
नर में प्राथमिक जनन अंग अंडाकार आकृति का वृषण होता है। नर में एक जोड़ी वृषण उदर गुहा के बाहर छोटे अंडानुमा मांसल संरचना में रहते हैं जिसे वृषण कोष कहते हैं। वृषण में शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन की उत्पत्ति होती है। वृषण कोष शुक्राणु बनने के लिए उचित ताप प्रदान करता है।

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प्रश्न 6.
ऋतुस्राव क्यों होता है?
उत्तर:
यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता है तो वह एक दिन बाद नष्ट हो जाता है। गर्भाशय भी निषेचित अंडाणु को प्राप्त करने की तैयारी करता है। गर्भाशय की दीवार मोटी तथा स्पंजी हो जाती है। लेकिन निषेचन न होने पर ये धीरे-धीरे टूटती है और रुधिर व म्यूकस के रूप में योनि मार्ग से बाहर निकलती है। इस प्रक्रिया को रजोधर्म या ऋतुस्राव कहते हैं। अतः ऋतुस्राव निषेचन न होने की अवस्था में होता है।

प्रश्न 7.
पुष्प की अनुदैर्घ्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 8.
गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं? (2011, 13, 14, 16, 17)
या परिवार नियोजन की स्थायी विधियाँ कौन-कौन सी हैं? किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)
उत्तर:
गर्भनिरोधन के लिए बहुत-सी विधियों का विकास किया गया है जो निम्नवत् हैं –

  1. अवरोधिका विधियाँ इन विधियों में कंडोम, मध्यपट और गर्भाशय ग्रीवा आच्छद का उपयोग किया जाता है। ये मैथुन के दौरान मादा जननांग में शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकती हैं।
  2. रासायनिक विधियाँ इस प्रकार की विधि में स्त्री दो प्रकार – मुखीय गोलियाँ तथा योनि गोलियाँ प्रयोग करती है। ये गोलियाँ मुख्यतः हॉर्मोन्स से बनी होती हैं जो अंडाणु को डिम्बवाहिनी नलिका में उत्सर्जन से रोकती हैं।
  3. शल्य या स्थायी विधियाँ इस विधि में पुरुष शुक्रवाहिका तथा स्त्री की डिम्बवाहिनी नली के छोटे-से भाग को शल्यक्रिया द्वारा काट या बाँध दिया जाता है। इसे क्रमशः नर नसबंदी तथा स्त्री नसबंदी कहते हैं।

प्रश्न 9.
एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?
उत्तर:
एक-कोशिक जीवों में केवल एक ही कोशिका होती है। उनमें जनन के लिए अलग से कोई ऊतक या अंग नहीं होता है। अत: उनमें जनन केवल द्विविखंडन या बहुविखंडन द्वारा ही हो सकता है। कुछ जीवों जैसे यीस्ट में मुकुलन द्वारा भी जनन होता है। बहुकोशिक जीवों का शरीर बहुत-सी कोशिकाओं से बना होता है। इनमें जनन के लिए अलग से ऊतक या जनन तंत्र होते हैं। अतः इनमें जनन लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रकार से होता है।

प्रश्न 10.
जनन किसी स्पीशीज़ की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
अपनी जनन क्षमता का उपयोग कर जीवों की समष्टि पारितंत्र में स्थान अथवा निकेत ग्रहण करते हैं। जनन के दौरान DNA प्रतिकृति का बनना जीव की शारीरिक संरचना एवं डिजाइन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है जो उसे विशिष्ट निकेत के योग्य बनाती है। अतः किसी प्रजाति (स्पीशीज़) की समष्टि के स्थायित्व का सम्बन्ध जनन से है।

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प्रश्न 11.
गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
जनन एक ऐसा प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी समष्टि की वृद्धि करते हैं। एक समष्टि में जन्मदर एवं मृत्युदर उसके आकार का निर्धारण करते हैं। जनसंख्या का विशाल आकार बहुत लोगों के लिए चिन्ता का विषय है। इसका मुख्य कारण यह है कि बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन-स्तर में सुधार लाना आसान कार्य नहीं है। अत: जनसंख्या की बढ़ती हुई संख्या पर नियन्त्रण रखना जरूरी है। इसलिए गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनानी चाहिए।

Bihar Board Class 10 Science जीव जनन कैसे करते है Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवों में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं – (2014)
(a) वर्धी (कायिक) जनन द्वारा
(b) अलैंगिक जनन द्वारा
(c) लैंगिक जनन द्वारा
(d) स्पोर (बीजाणु) निर्माण द्वारा
उत्तर:
(c) लैंगिक जनन द्वारा

प्रश्न 2.
मुकुलन (Budding) द्वारा अलिंगी जनन निम्नलिखित में से किस जन्तु में होता है? (2017)
(a) मेंढक
(b) अमीबा
(c) केंचुआ
(d) हाइड्रा
उत्तर:
(d) हाइड्रा

प्रश्न 3.
लघु बीजाणु पैदा होते हैं – (2010)
(a) पुमंग में
(b) जायांग में
(c) पुंकेसरों में
(d) परागकोष में
उत्तर:
(d) परागकोष में

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प्रश्न 4.
पुष्प में कितने भाग होते हैं? (2017)
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छः
उत्तर:
(b) चार

प्रश्न 5.
एक पुष्प के स्त्रीकेसर के मध्य भाग को कहते हैं (2014)
(a) वर्तिकाग्र
(b) वर्तिका
(c) अण्डाशय
(d) अण्ड (बीजाण्ड)
उत्तर:
(b) वर्तिका

प्रश्न 6.
परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक स्थानान्तरण कहलाता है। (2014)
(a) परागण
(b) अण्डोत्सर्ग
(c) निषेचन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) परागण

प्रश्न 7.
परागकण का जनन केन्द्रक नर युग्मक बनाता है – (2010)
(a) 4
(b) 2
(c) 3
(d) 1
उत्तर:
(b) 2

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प्रश्न 8.
कीट परागण होता है – (2010)
(a) मक्का में
(b) वैलिस्नेरिया में
(c) सैल्विया में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सैल्विया में

प्रश्न 9.
परागनली में नरयुग्मक की संख्या होती है – (2017)
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 8
उत्तर:
(b) 2

प्रश्न 10.
द्विनिषेचन विशेष लक्षण है – (2014)
या द्विनिषेचन पाया जाता है – (2015, 16)
(a) जन्तुओं का
(b) आवृतबीजी पादप का
(c) अनावृतबीजी पादप का
(d) शैवाल का
उत्तर:
(b) आवृतबीजी पादप का

प्रश्न 11.
द्विनिषेचन क्रिया में त्रिक संलयन के पश्चात् बनने वाले ऊतक का नाम है? (2011)
(a) इन्डोस्पर्म
(b) भ्रूण
(c) मूलांकुर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) इन्डोस्पर्म

प्रश्न 12.
पुष्पी पादपों में निषेचन होता है – (2009)
(a) बीजाण्ड में
(b) अण्डाशय में
(c) पराग नलिका में
(d) भ्रूणकोष में
उत्तर:
(d) भ्रूणकोष में

प्रश्न 13.
एन्जिओस्पर्स में निषेचनोपरान्त बीज कवच बनता है – (2012)
(a) द्वितीयक केन्द्रक से
(b) अध्यावरण से
(c) अण्डाशय भित्ति से
(d) भ्रूणपोष से
उत्तर:
(b) अध्यावरण से

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प्रश्न 14.
निषेचन के बाद पुष्प का कौन-सा भाग फल में बदल जाता है? (2013, 15, 18)
(a) पुंकेसर
(b) वर्तिका
(c) अण्डाशय
(d) बीजाण्ड
उत्तर:
(c) अण्डाशय

प्रश्न 15.
निषेचन के दौरान परागकण से निकलने वाली परागनलिका सामान्यतः किसके द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश करती है? (2016)
(a) अध्यावरण
(b) बीजाण्डकाय
(c) निभागी
(d) अण्डद्वार
उत्तर:
(d) अण्डद्वार

प्रश्न 16.
परिवार नियोजन की स्थायी विधि है – (2018)
(a) गर्भ निरोधक गोलियाँ
(b) निरोध का प्रयोग
(c) वैसेक्टॉमी
(d) गर्भ समापन (गर्भपात)
उत्तर:
(c) वैसेक्टॉमी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कायिक प्रवर्धन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
पौधे के किसी भी कायिक भाग से जब इसी अवस्था में जनन हो जाता है तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

प्रश्न 2.
पुमंग एवं जायांग में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2014, 17)
उत्तर:
पुमंग पुष्प के नर जननांग हैं जबकि जायांग पुष्प के मादा जननांग हैं।

प्रश्न 3.
आवृतबीजी बाह्यअण्डप के अनुदैर्घ्य काट का नामांकित चित्र बनाइए। (2013, 17)
उत्तर:
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प्रश्न 4.
फल तथा बीज निर्माण करने वाले पुष्प के भागों के नाम बताइए।
उत्तर:
फल अण्डाशय से तथा बीज बीजाण्ड से बनते हैं।

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प्रश्न 5.
परिवार नियोजन से आप क्या समझते हैं? छोटे परिवार के महत्त्व को समझाइए। (2017)
उत्तर:
परिवार कल्याण हेतु बच्चों की संख्या सीमित कर परिवार को नियोजित करने की प्रक्रिया को परिवार नियोजन कहते हैं। यदि परिवार में बच्चों की संख्या सीमित होगी तो वह परिवार अधिक सुखी जीवन तथा अच्छा रहन-सहन रख सकेगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बीजरहित पौधों में जनन क्रिया किस विधि द्वारा होती है? उदाहरण भी दीजिए। (2013)
या पौधों में कायिक प्रजनन की दो विधियों का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए। (2012, 16)
या कायिक जनन किसे कहते हैं? तने द्वारा इस विधि का एक उदाहरण दीजिए। (2014, 17)
या कायिक जनन किसे कहते हैं? पौधों में इस विधि से क्या लाभ है? (2015, 17)
या पादपों में, अलैंगिक जनन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
उत्तर:
बीजरहित पौधों में जनन क्रिया, कायिक जनन (अलैंगिक जनन) विधि द्वारा होती है। इसके अन्तर्गत पौधे के किसी कायिक अंग; जैसे-जड़, तना, पत्ती, कलिकाओं द्वारा नया पौधा तैयार हो जाता है। पौधों में कायिक जनन की दो प्रमुख विधियाँ कलम लगाना व दाब लगाना हैं।

1. कलम लगाना: (Cutting) इस विधि में तने के कलिका युक्त छोटे-छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं। इन टुकड़ों को कलम (cutting) कहते हैं। इनके निचले सिरों को उचित स्थान पर भूमि में दबा देते हैं, जिनसे कुछ दिनों के बाद जड़ें निकल आती हैं और उपस्थित कलिकाएँ वृद्धि करके नया पौधा बना लेती हैं। गुलाब, कैक्टस, अन्नास, गुड़हल आदि में हम कलम से ही
पौधे उगाते हैं। गन्ने में कलम को भूमि के अन्दर क्षैतिज अवस्था में दबा देते हैं।

2. दाब लगाना: (Layering) कुछ पौधों में हम पौधे की किसी शाखा को झुका कर नम मिट्टी में दबा देते हैं। कुछ समय बाद इससे जड़ें निकल आती हैं और उसके बाद नयी पौध बन जाती है। नयी पौध को इसके पैतृक पौधे से काटकर अलग कर देते हैं। यह वृद्धि करके पूर्ण पौधा बन जाता है। बेला, चमेली, कनेर आदि में यह विधि अपनायी जाती है।

कायिक जनन से लाभ –

  1. जिन पौधों में बीज नहीं बनते (जैसे – केला, अंगूर व अन्नास) इनमें कायिक जनन द्वारा नये पौधे उगाये जाते हैं।
  2. नये पौधे कम समय में उत्पन्न हो जाते हैं।
  3. नये पौधे मातृ पौधों के समान होते है। इनमें विभिन्नताएँ नहीं होती हैं।
  4. पौधों के विशेष ऐच्छिक लक्षणों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनाये रखा जा सकता है।

प्रश्न 2.
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर बताइए तथा एक-एक उदाहरण दीजिए। (2011, 16)
या परपरागण के महत्त्व का वर्णन कीजिए। (2015, 18)
या स्वपरागण के लिए आवश्यक अनुकूलन तथा इनके लाभ एवं हानियाँ बताइए। (2018)
उत्तर:
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर क्र०सं० स्वपरागण –
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प्रश्न 3.
निषेचन क्या है? बाह्य एवं आंतरिक निषेचन में अन्तर बताइए। (2014, 17)
उत्तर:
युग्मकों (एक नर व एक मादा) के संलयन को निषेचन कहते हैं। जब निषेचन मादा जन्तु के शरीर के बाहर होता है तो इसे बाह्य निषेचन कहते हैं। इसके विपरीत यदि निषेचन मादा जन्तु के शरीर के अन्दर होता है तो इसे आन्तरिक निषेचन कहते हैं।

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प्रश्न 4.
पौधों तथा जंतुओं के अलैंगिक व लैंगिक जनन में अन्तर बताइए। (2014, 16, 18)
उत्तर:
अलैंगिक व लैंगिक जनन में अन्तर –
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प्रश्न 5.
एक मानव शुक्राणु का नामांकित चित्र बनाइए तथा उस कोशिका का उल्लेख कीजिए जिससे इसका निर्माण होता है। (2013, 17)
उत्तर:
शुक्राणु एक विशिष्ट, दीर्घित (elongated), पुच्छयुक्त कोशिका है जो पोषक तरल (वीर्य) में रहती है। यह नर युग्मक है, जिसका निर्माण शुक्राणु जन कोशिका के अर्द्धसूत्री विभाजन से होता है। वीर्य में सहस्रों की संख्या में शुक्राणु होते हैं।
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प्रश्न 6.
जनसंख्या विस्फोट क्या है ? जनसंख्या वृद्धि से होने वाली हानियाँ तथा बचाव का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2012)
या मानव जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्यायें (चार हानियाँ ) बताइये। (2012)
या जनसंख्या वृद्धि का मानव समाज पर दुष्प्रभाव पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए। (2014)
या जनसंख्या वृद्धि से होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए तथा इसकी वृद्धि को रोकने के उपाय बताइए। (2016)
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में जनसंख्या का उस स्थिति तक बढ़ जाना कि उस क्षेत्र में उपलब्ध खाद्य सामग्री व जल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन उस जनसंख्या के लिए अपर्याप्त हो जाए जनसंख्या विस्फोट कहलाता है। इससे निम्नलिखित प्रमुख हानियाँ (समस्यायें) उत्पन्न होती हैं –

  1. अपर्याप्त भोजन, कुपोषण आदि के कारण बच्चों की मृत्यु दर बढ़ना तथा दुर्बल सन्तति उत्पन्न होना।
  2. अपर्याप्त आवासों के कारण गन्दे स्थानों पर रहना, जिससे अनेक बीमारियाँ फैलती हैं।
  3. अपर्याप्त वस्त्रों व साधनों के कारण विषम परिस्थितियों ( भीषण गर्मी व सर्दी) में अकाल मृत्यु।
  4.  अपर्याप्त रोजगार के अवसरों के कारण बेरोजगारी जो मानसिक तनाव व अपराधों को बढ़ावा देती है।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के निम्नलिखित बचाव हैं –

  1. शिक्षा की सुविधाओं का अत्यधिक विस्तार होना चाहिए।
  2. प्रति परिवार बच्चों की संख्या निर्धारित की जानी चाहिए।
  3. विवाह की आयु स्त्रियों के लिए कम से कम 21 वर्ष तथा पुरुषों के लिए 25 वर्ष की जानी चाहिए।
  4. गर्भपात को ऐच्छिक एवं सुविधापूर्ण बनाया जाना चाहिए।
  5. परिवार कल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना चाहिए।

प्रश्न 7.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कोई चार कारण लिखिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख चार कारण निम्नवत् हैं –

  1. जन्म दर का अत्यधिक तथा मृत्यु दर का कम होना।
  2. विवाह बन्धन, विवाह की आयु कम तथा वंश चलाने हेतु सन्तान, वह भी पुत्र की अनिवार्यता।
  3. अनेक प्रकार के अन्धविश्वास तथा अशिक्षा।
  4. सन्तति निरोध का अल्प-ज्ञान होना।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुष्प का नामांकित चित्र बनाइए। इसके विभिन्न चक्रों के कार्य बताइए। (2012)
उत्तर:
आवृतबीजी पौधों में नर तथा मादा जननांग पुष्पों में स्थित होते हैं। पुष्प को रूपान्तरित शाखा कहते हैं। इसमें निम्नलिखित चार चक्र (whorls) होते हैं –

  1. बाह्यदल: यह हरे रंग की पत्ती सदृश रचनाओं का चक्र है, जो पुष्प के भीतरी चक्रों की रक्षा करता है।
  2. दल: ये रंगीन होते हैं तथा परागण की क्रिया के लिए कीटों को आकर्षित करते हैं।
  3. पुमंग या एंड्रीशियम: नर जनन अंग इसकी प्रत्येक इकाई को पुंकेसर कहते हैं। पुंकेसर का अगला फूला हुआ भाग परागकोष होता है। परागकोष या एंथर के अन्दर नरयुग्मक या परागकण बनते हैं। परागकण में एकसूत्री नर केन्द्रक होता है।
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  4. जायांग या गाइनीशियम: मादा जनन अंग इसकी प्रत्येक इकाई को अण्डप या काल कहते हैं। काल का निचला फूला हुआ भाग अण्डाशय होता है जिसमें बीजाण्ड या ओव्यूल होता है। बीजाण्ड में मादा युग्मक या अण्ड बनता है। बीजाण्ड से बीज बनता है।

प्रश्न 2.
पुष्पी पौधों में परागण के उपरान्त निषेचन तथा बीज बनने तक जनन की प्रकियाओं को समझाइये।
या द्विनिषेचन या निषेचनोपरान्त पुष्प में होने वाले परिवर्तनों को समझाइए।
या फूलों वाले पौधों में निषेचन क्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए। परागण को परिभाषित कीजिए।
या परागण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए तथा इसके महत्त्व को समझाइए।
या पर-परागण किसे कहते हैं? पर-परागण की विभिन्न विधियों का केवल नाम लिखिए।
या निषेचन के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में होने वाले परिवर्तनों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
या द्विनिषेचन पर टिप्पणी लिखिए। (2012, 13, 17)
या पर-परागण को परिभाषित कीजिए। इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
पौधों में परागण से बीज निर्माण तक की अवस्थाएँ लैंगिक जनन के सभी भाग पुष्प में होते हैं।
1. परागकण तथा परागण:
परागकोषों में परागकण बनने के बाद आवश्यक है कि परागकण के –
नर केन्द्रक मादा युग्मक (अण्ड) तक पहुँचे। पुष्प के परागकोष से परागकणों के उसी पुष्प अथवा दूसरे पौधों के किसी पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचने की क्रिया को परागण (pollination) कहते हैं। जब एक पुष्प में परागकोषों से परागकण निकलकर उसी पुष्प के वर्तिकान पर गिर जाते हैं तथा अंकुरित हो जाते हैं तो वह क्रिया स्वपरागण (self pollination) तथा जब एक पुष्प से परागकण किसी दूसरे पुष्प (उसी जाति) के वर्तिकाग्र पर आते हैं तो इसे परपरागण (cross pollination) कहते हैं।

इस प्रकार, सभी एकलिंगी पुष्पों में परपरागण ही होता है, किन्तु द्विलिंगी पुष्पों में दोनों में से किसी भी प्रकार का परागण हो सकता है। इनमें परपरागण अधिक महत्त्वपूर्ण है। परपरागण में परागकणों को एक पुष्प से दूसरे पौधे पर उपस्थित पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचाना होता है। इसके लिए किसी-न-किसी साधन या कारक की आवश्यकता पड़ती है। परपरागण के इन कारकों को कर्मक (agents) भी कहते हैं, और ये सामान्यत: वायु, जल अथवा जन्तु (प्रायः कीट) होते हैं। इन्हीं कारकों के आधार पर परपरागण की विभिन्न विधियाँ कीट-परागण, वायु-परागण, जल-परागण आदि होती हैं।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

2. परागकण का अंकुरण:
परागण के द्वारा वर्तिकान पर आये हुए परागकण वर्तिकाग्र के तरल पदार्थ को अवशोषित कर फूल जाते हैं। उनका अन्त:कवच अंकुरण छिद्र (germ pore) से एक नलिका के रूप में बाहर निकलता है जिसे पराग नलिका (pollen tube) कहते हैं। इस समय परागकण का केन्द्रक, दो केन्द्रकों, वर्धी केन्द्रक तथा जनन केन्द्रक में विभाजित हो जाता है। वर्धी केन्द्रक नलिका में आ जाता है और नलिका केन्द्रक कहलाता है। जनन केन्द्रक दो बराबर भागों में विभाजित होकर दो अचल, नर युग्मक (male gametes) बनाता है, जो पराग नलिका में आ जाते हैं।

3. पराग नलिका का बढ़ना तथा भ्रूणकोष में पहुँचना:
पराग नलिका वर्तिकाग्र के ऊतक में होकर वर्तिका में पहुँचती है। यह दोनों नर युग्मकों तथा अपने सिरे पर उपस्थित नलिका केन्द्रक के साथ वर्तिका में नीचे की ओर बढ़ती ही रहती है। इस प्रकार पराग नलिका वर्तिका में से होती हई अण्डाशय में पहुँचती है और बीजाण्ड में प्रवेश कर नर युग्मकों को भ्रूणकोष (embryo sac) के जीवद्रव्य में मुक्त कर देती है [देखें चित्र (b)]
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4. निषेचन बीजाण्ड के भ्रूणकोष (embryo sac) में प्रवेश करने के बाद पराग नलिका का शीर्ष गल जाता है तथा इसमें उपस्थित नलिका केन्द्रक भी लुप्त हो जाता है। दोनों नर युग्मक अब भ्रूणकोष के जीवद्रव्य में मुक्त हो जाते हैं और इनमें से एक अण्ड-कोशिका में घुसकर उसके केन्द्रक के साथ संलयित (fuse) हो जाता है। इस प्रकार, मुख्य निषेचन क्रिया समाप्त हो जाती है। इसमें युग्मनज (zygote) का निर्माण होता है। यह युग्मनज आगे चलकर भ्रूण बनाता है।

दूसरा नर युग्मक, दोनों ध्रुवीय केन्द्रकों (या द्विगुणित केन्द्रक) के साथ संलयन करके एक त्रिगुणित केन्द्रक बनाता है जिसे प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक कहते हैं। इस क्रिया को त्रिक संलयन कहते हैं। प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बार-बार विभाजित हो जाता है तथा इसके फलस्वरूप सभी केन्द्रकों के चारों ओर भित्तियाँ बन जाती हैं। इस प्रकार जो ऊतक बनता है उसे भ्रूणपोष कहते हैं। भ्रूणपोष में भोज्य-पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं। यह भ्रूण के परिवर्धन के समय उसे पोषण प्रदान करता है। दोहरा निषेचन होने के कारण ही, आवृतबीजियों में यह क्रिया द्विनिषेचन (double fertilization) कहलाती है।

5. निषेचन के पश्चात् बीज का निर्माण:
निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड के भीतर युग्मनज से भ्रूण का तथा त्रिगुणित केन्द्रक से भ्रूणपोष का निर्माण होता है। बीजाण्डों का आकार बढ़ जाता है। अध्यावरण सख्त होकर बीजावरण बनाते हैं। जिस स्थान पर बीजाण्ड बीजाण्डवृन्त से जुड़ता है, वहाँ एक चिह्न बन जाता है जो वृन्तक कहलाता है। भोज्य पदार्थ या तो बीजपत्र में, या भ्रूणपोष में एकत्र हो जाते हैं।

पानी की मात्रा धीरे-धीरे कम हो जाती है। कोमल बीजाण्ड अब कड़ी व शुष्क रचना में बदल जाता है। धीरे-धीरे बीजाण्ड के अन्दर की जैविक क्रियाएँ रुक जाती हैं तथा भ्रूण सुषुप्तावस्था में पहुँच जाता है। अत: बीजाण्ड बीजावरण से घिरे, भोजन संचित किये हुए तथा सुषुप्त भ्रूण को अपने अन्दर समेटे होते हैं, इस रचना को बीज कहते हैं।

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प्रश्न 3.
प्रजनन क्या है? नामांकित चित्र की सहायता से नर अथवा मादा मानव जनन तंत्र का वर्णन कीजिए। (2012, 14)
उत्तर:
जीवधारियों द्वारा लैंगिक क्रियाओं के फलस्वरूप अपने जैसी सन्तानों की उत्पत्ति करने की क्रिया को प्रजनन कहते हैं। पुरुष (नर ) जनन तन्त्र पुरुषों के जनन तन्त्र में एक जोड़ा वृषण (testes) तथा अन्य कई सहायक अंग होते हैं। ये निम्नलिखित हैं –

1. वृषण: (Testes) मनुष्य में लगभग 5 सेमी लम्बे तथा 2.5 सेमी मोटे, गुलाबी रंग के तथा अण्डाकार दो वृषण पाये जाते हैं। ये वृषण उदरगुहा के निकट दो छोटी-छोटी थैलियों जैसी रचनाओं, वृषण कोष (scrotal sacs) में स्थित होते हैं। वृषण कोष उदर गुहा से वंक्षण नाल (inguinal canal) द्वारा सम्बन्धित रहते हैं। वृषणों का उदरगुहा के बाहर वृषण कोषों में स्थित होने का यह लाभ है कि शुक्राणु उदरगुहा के अधिक ताप से बच जाते हैं तथा वृषण कोषों के कम ताप पर इनका परिपक्वन सहज हो जाता है।

प्रत्येक वृषण की संरचना एक पेशी से युक्त लचीले वृषण खोल (testicular capsule) के अन्दर संयोजी ऊतक से बने पिण्डकों से होती है। प्रत्येक पिण्डक में अत्यधिक कुण्डलित शुक्रजनन नलिकाएँ (seminiferous tubules) एक ढीले संयोजी ऊतक में निलम्बित होती हैं। इन नलिकाओं के अन्दर जनन एपिथीलियम कोशिकाओं से शुक्रजनन (spermatogenesis) के द्वारा शुक्राणुओं (sperms) का निर्माण होता है।

2. अधिवृषण या एपिडिडाइमिस: (Epididymis) प्रत्येक वृषण से चिपकी एक लम्बी, संकरी व चपटी संरचना होती है। यह लगभग 6 मीटर लम्बी व अत्यधिक कुण्डलित नली होती है जो वृषण की अपवाहक नलिकाओं के मिलने से बनती है। इसका निचला भाग लचीले तन्तुओं के बने गुबरनैकुलम (gubernaculum) नामक गुच्छे द्वारा वृषण कोष की पिछली भित्ति से जुड़ा रहता है। इसी प्रकार के लचीले तन्तु एपिडिडाइमिस के ऊपरी भाग को वंक्षण नाल में होकर उदरगुहा की पृष्ठ भित्ति से जोड़ते हैं। इन्हीं तन्तुओं के साथ वृषण से सम्बन्धित धमनी, शिरा, तन्त्रिका आदि भी वंक्षण नाल से होकर आती-जाती हैं। ये सभी संयोजी ऊतक के साथ मिलकर छड़ जैसे आकार का वृषण दण्ड (spermatic cord) बनाते हैं।

3. शुक्रवाहिनियाँ: (Vas deferens) अधिवृषण के निचले पश्च भाग से लगभग 45 सेमी लम्बी शुक्रवाहिनी (vas deferens) निकलती है। यह पहले वंक्षण नाल में होकर उदरगुहा में मूत्राशय के पृष्ठ तल पर स्थित अपनी ओर की मूत्रवाहिनी पर एक फन्दा (loop) बनाती है। बाद में यह नीचे मुड़कर पास में ही स्थित शुक्राशय की छोटी-सी नलिका से जुड़ जाती है।

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4. शुक्राशय: (Seminal vesicles) ये मूत्राशय के पीछे स्थित लगभग 5 सेमी लम्बी, वलित थैली के समान संरचनाएँ होती हैं। इनकी भित्तियाँ ग्रन्थिल होती हैं। इनमें एक हल्का पीला, क्षारीय, चिपचिपा तथा पोषक तरल स्रावित होता है। यही तरल वीर्य (semen) का अधिकांश (लगभग 60%) भाग बनाता है जिसमें शुक्राणु गति कर सकते हैं। शुक्राशय से निकलने वाली छोटी-सी नलिका शुक्रवाहिनी के साथ मिलकर स्खलन नलिका (ejaculatory duct) बनाती है जो मूत्रमार्ग (urethra) में खुलती है।
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5. शिश्न: (Penis) यह पेशीय मैथुनांग (copulatory organ) है। शिश्न की संरचना पेशियों एवं रुधिर कोटरों (blood sinuses) से होती है।

6. सहायक ग्रन्थियाँ: (Accessory glands) निम्नलिखित प्रमुख ग्रन्थियाँ जनन की किसी-न-किसी क्रिया में सहायता करने के लिए विशेष स्राव बनाती हैं।

(i) प्रोस्टेट ग्रन्थियाँ: (Prostate glands) एक जोड़ा, द्विपालित ग्रन्थियाँ मूत्राशय के मूत्रमार्ग में खुलने के स्थान से लगी रहती हैं। इससे विशेष गन्धयुक्त, पतला तथा दूधिया तरल स्रावित होता है। यह तरल वीर्य का लगभग 25% भाग बनाता है।

(ii) काउपर ग्रन्थियाँ: (Cowper’s glands) एक जोड़ा, फ्लास्क के आकार की ये ग्रन्थियाँ मूत्रमार्ग के शिश्न में प्रवेश के स्थान पर खुलती हैं। इनसे निकलने वाला स्राव श्लेष्मी तथा क्षारीय होता है। यह वीर्य के साथ मिलकर मार्ग को चिकना बनाता है तथा अम्लता को नष्ट करता है। वीर्य तथा उसके कार्य यह पुरुष के जननांगों के परिपक्वन के बाद बनने वाला एक सफेद तरल पदार्थ है।

इसी तरल पदार्थ में शुक्राणु, श्लेष्मक तथा नर जननांगों में उपस्थित सहायक ग्रन्थियों का स्राव होता है। यह शुक्राणुओं का पोषण करता है। यह एक तरल माध्यम का कार्य करता है जिससे शुक्राणु सुरक्षित स्थानान्तरित हो सकें। मनुष्य में शुक्राणु (Sperms in Man) शुक्राणु एक विशिष्ट, दीर्घित (elongated), पुच्छयुक्त कोशिका है जो पोषक तरल (वीर्य) में रहती है। यह नर युग्मक है। वीर्य में सहस्त्रों की संख्या में शुक्राणु होते हैं।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Bihar Board Class 11 History संस्कृतियों का टकराव Textbook Questions and Answers

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एजटेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग जिन्हें टेनोका भी कहते हैं ने टेनोक्ट्टिलान, टेलाटेलोका नाम की दो राजधानियाँ बसायौं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवताओं और अन्य ईवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननी मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे। 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

मेसोपोटामिया की सभ्यता – मेसोपोटामिया की सभ्यता के अंतर्गत तीन सभ्यताओंसमेरिया, वेबीलोनिया और सीरिया की गणना की जाती है। तीनों सभ्यताओं का जन-जीवन लगभग समान था। समाज में उच्च, मध्य तथा निम्न तीन वर्ग थे। पहले दोनों वर्ग सुखी ऐश्वर्य का जीवन व्यतीत करते थे। निम्न वर्ग के लोग दु:खी थे। समाज में पुरुषों की अपेक्षा सियों का स्थान निम्न था। कृषि सिंचाई द्वारा की जाती थी। मेसोपोटामिया के लोग टीन, ताँबा काँसे से परिचित थे। वस्त्र उद्योग उनका प्रमुख व्यवसाय था। वे अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

मैसोपोटामिया के लोगों ने महान् उपलब्यिाँ प्राप्त की। उन्होंने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। उन्होंने चन्द्रमा के आधार पर एक पंचांग बनाया। इसकी सहायता से वे ऋतुओं तथा ग्रहण लगने का अनुमान लगाते थे। उन्होंने षट्दाशमिक प्रणाली की खोज भी की। इसके आधार पर उन्होंने। घंटे में 60 मिनट और 1 मिनट में 60 सैकेण्ड निश्चित किए। उन्होंने ही सबसे पहली ‘हम्बुराबी की विधि संहिता- नामक कानूनों की एक पुस्तक तैयार की। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुम्हार के चाक, शीशे के बर्तनों और भवन निर्माण की नवीन शैलियों का आविष्कार किया।

प्रश्न 2.
ऐसे कौन-से कारण थे जि+4 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचार।। को सहायता मिली?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौ-चालन में निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुँचाई –

  1. 1380 ई. में कुतबनुमा अर्थात् दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। इससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिल सकती थी।
  2. समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण होने लगा था, जो विशाल मात्रा में माल की ढुलाई कर सकते थे।
  3. ये जहाज आत्मरक्षा के अस्त्र-शस्त्रों से भी लैस होते थे, ताकि शत्रु के आक्रमण का सामना किया जा सके।
  4. पंद्रहवीं शताब्दी के दौरान यात्रा-वृत्तातों, सृष्टि-वर्णन तथा भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने लोगों के ज्ञान में वृद्धि की।
  5. उदाहरण के लिए मिस्रवासी टॉलेमी ने अपनी पुस्तक में विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति अक्षांश और देशांतर रेखाओं द्वारा समझायी थी।
  6. इसे पढ़ने से यूरोपवासियों को संसार के बारे में और अधिक जानकारी मिली। टॉलमी ने यह भी बताया था कि पृथ्वी गोल (Spherical) है।

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प्रश्न 3.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पंद्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया?
उत्तर:

  1. कुछ विशेष आर्थिक कारणों ने स्पेन के लोगों को महासागरी शूरवीर बनाया।
  2. स्पेन तथा पुर्तगाल के साहसी नाविक हर समय समुद्र में उतरने को तैयार रहते थे क्योंकि उन्होंने अटलांटिक महासागर की दूसरी ओर की भूमि को बहुत कम आँका था।
  3. स्पेन और पुर्तगाल के शासक नयी समुद्री खोजों के लिए धन जुटाने को तैयार रहते थे।

प्रश्न 4.
कौन-सी नई खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमेरिका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका से मक्का, कसावा, कुमाला, आलू आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं।

प्रश्न 5.
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राजील ले जाए गये सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करों।
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए लड़के की यात्रा बहुत ही कष्टमय थी। उसे अन्य गुलामों के साथ जहाज में ढूंसा गया और बेड़ियों से जकड़ा गया । उसे कई दिनों तक भूखा-प्यासा भी रखा गया।

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प्रश्न 6.
दक्षिणी अमेरिका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया?
उत्तर:
यूरोप के देश विशेषकर स्पेन तथा पुर्तगाल सोना-चाँदी के लालची थे। उन्हें दक्षिणी अमेरिका में भारी मात्रा में सोना मिलने की आशा थी। इसलिए यूरोपवासी दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न प्रदेशों में जा बसे। उन्होंने अपने सैन्य-बल तथा बारुद के प्रयोग द्वारा वहाँ अपना शासन स्थापित कर लिया। विरोध होने पर उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों को बुरी तरह कुचला। उन्होंने वहाँ के लोगों से नजराने वसूल किए। स्थानीय प्रधानों का प्रयोग उन्होंने नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए किया।

सोने-चांदी के विशाल भंडारों का पता चलने पर और अधिक यूरोपवासी वहाँ जा बसे। उन्होंने स्थानीय लोगों को दास बना लिया और उन्हें ‘खानों” में काम करने के लिए विवश किया। इस प्रकार दक्षिणी अमेरिका पूरी तरह यूरोपीय साम्राज्यवाद की जकड़ में आ गया।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूमि उद्धार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भूमि उद्धार से अभिप्राय बंजर भूमि को आवासीय या कृषि योग्य भूमि में बदलने से है। कई बार विभिन्न जलस्रोत से जमीन लेकर भी भूमि उद्धार किया जाता है।

प्रश्न 2.
एजटेक लोगों के ‘चिनाम्पा’ क्या थे?
उत्तर:
चिनाम्या मैक्सिको झील में बने कृत्रिम द्वीप थे। एजटेक लोगों ने इन्हें सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और मिट्टी तथा पत्रों से ढंक कर बनाया था। ये द्वीप अत्यंत उपजाऊ थे।

प्रश्न 3.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की दो विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:

  • वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  • इनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशु-पालन से अपरिचित थे।

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प्रश्न 4.
माया लोगों की दो अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:

  • गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  • हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों की लिपि अंशत: चित्रात्मक तथा अंशत: ध्वन्यात्मक थी।

प्रश्न 5.
माया सभ्यता का विस्तार बताएँ।
उत्तर:
माया सभ्यता 300 ई० के बीच अपनी उन्नति की चरम सीमा पर थी। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग पर फैली हुई थी। इसमें ग्वातेमाला, मैक्सिको, हांडूरास तथा यूकातान के प्रदेश सम्मिलित थे।

प्रश्न 6.
अमेरिकी मूल सभ्यताओं के पतन के बारे में लिखें।
उत्तर:
1532 ई० में स्पेन की सेना ने फ्रांसिस्को पिजारों के नेतृत्व में इंका सभ्यता को नष्ट कर दिया। इस प्रकार विदेशी आक्रमणों के कारण 16वीं शताब्दी में अमेरिकी सभ्यताओं का पतन हो गया।

प्रश्न 7.
इंका सभ्यता के मुख्य केंद्र बताएँ।
उत्तर:
इंका सभ्यता का प्रमुख केंद्र टिंट्टीका की झील थी। इसके अन्य मुख्य केंद्र आधुनिक इक्वाडोर, पेरू तथा बोलीविया थे।

प्रश्न 8.
माया सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • कृषि इनका मुख्य व्यवसाय था। इनका मुख्य आहार मक्का था।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। उन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया।

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प्रश्न 9.
प्राचीन मिस्त्र तथा माया पंचांगों में दो असमानताएं बताएँ।
उत्तर:

  • मिस्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचागों में वर्ष 18 महीने का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की दो : गगनताएँ बताओ।
उत्तर:

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे। इसका कारण यह था कि ये दोनों सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

प्रश्न 11.
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों के बस जाने का क्या परिणाम निकाला?
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ। इसी से दास-व्यापार आरंभ हुआ। इसके अंतर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से दास पकडकर या खरीदकर उन्हें उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खानों तथा बगानों में काम करने के लिए बेचने लगे।

प्रश्न 12.
हम अमेरिका के मूल निवासियों तथा यरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के बारे में मूलनिवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते पर यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। इसका क्या कारण है?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि अमेरिका की यात्राओं पर जाने वाले यूरोपवासी अपने साथ रोजनामचा (log-book) और डायरियाँ रखते थे। इनमें वे अपनी यात्राओं का दैनिक विवरण लिखते थे। हमें सरकारी अधिकारियों, एवं जेसुइट धर्मप्रचारकों के विवरणों से भी इसके बारे में जानकारी मिलती है। परंतु यूरोपवासियों ने अपनी अमेरिका की खोज तथा वहाँ के देशों का जो इतिहास लिखा है उनमें यूरोपीय बस्तियों के बारे में ही अधिक बताया गया है। स्थानीय लोगों के बारे में बहुत कम या न के बराबर ही लिखा गया है।

प्रश्न 13.
15वीं से 17वीं शताब्दी तक दक्षिणी तथा मध्य अमेरिका का भौगोलिक परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका घने जंगल और पहाड़ों से ढंका हुआ था। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेशों से होकर बहती थी। मध्य अमेरिका में, मैक्सिकों में समुद्र तट के आसपास के क्षेत्र और मैदानी प्रदेश घने बसे हुए थे, जबकि सघन वनों वाले क्षेत्रों में गाँव दूर-दूर स्थित थे।

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प्रश्न 14.
जीववादी (Animists) कौन होते हैं?
उत्तर:
जीववादी वे लोग होते हैं जो इस बात में विश्वास रखते हैं कि वैज्ञानिक जिन वस्तुओं को निर्जीव मानते हैं, उनमें भी जीवन या आत्मा हो सकती है।

प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे ? उनकी दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरोबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीपसमूहों तथा वृहत्तर ऐटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे।

विशेषताएं –

  • ये लोग लडने की बजाय बातचीत से झगडा निपटाना अधिक पसंद करते थे।
  • वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ों के खोखले तनों से अपनी डॉगियाँ बनाते थे।

प्रश्न 16.
दक्षिणी अमेरिका के तुपिनांबा लोगों को कृषि पर निर्भर क्यों नहीं होना पड़ा?
उत्तर:

तुपिनांवा लोगों के पास भेड़ काटने के कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके।
उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा।

प्रश्न 17.
मध्य-अमेरिका में शहरीकृत सभ्यताओं के विकास में किन तत्वों ने सहायता पहुँचाई? इन शहरों की क्या मुख्य विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
मध्य अमेरिका में कुछ अत्यंत सुगठित राज्य थे । वहाँ मक्का का भरपूर उत्पादन होता था। जो एजटेक, माया और इंका जनसमुदायों की शहरीकृत सभ्यताओं का आधार बना। इन शहरों की मुख्य विशेषता इनकी भव्य वास्तुकला थी।

प्रश्न 18.
माया सभ्यता के लोगों के धर्म की कोई दो विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:

  • माया सभ्यता के लोग वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि, मक्का आदि देवताओं की पूजा करते थे।
  • माया लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अपने शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि का भी रिवाज था।

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प्रश्न 19.
कोलंबस को वापसी यात्रा अधिक कठिन क्यों थी?
उत्तर:
कोलंबस की वापसी यात्रा निम्नलिखित कारणों से अधिक कठिन थी –

  • उसके जहाजों को दीमक लग गई थी।
  • उसके साथी नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी।

प्रश्न 20.
कोलंबस कहाँ का निवासी था? वह ‘इंडीज’ कब पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस स्पेन का निवासी था। वह 12 अप्रैल, 1492 ई० को इंडीज पहुँचा।

प्रश्न 21.
कैपिटुलैसियोन (Capitulaciones) क्या थे?
उत्तर:
कैपिटुलैसियोन एक प्रकार के इकरारनामे थे। इन इकरारनामे द्वारा स्पेन का शासक नए जीते हुए प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता जमा लेता था। उन्हें जीतने वाले नेताओं को पुरस्कार के रूप में पदवियाँ और जीते गए देशों पर शासनाधिकार दिया जाता था।

प्रश्न 22.
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) क्या थी?
उत्तर:
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप पर प्राप्त की गई सैनिक विजय थी । इस विजय द्वारा इन राजाओं ने 1492 ई. में इस प्रायद्वीप को अरबों के नियंत्रण से मुक्त करा लिया था।

प्रश्न 23.
14वीं शताब्दी के बाद यूरोप, विशेषकर, इटली के लंबी दूरी के व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
14वीं शताब्दी के बाद के दशकों में यूरोप के लंबी दूरी के व्यापार में गिरावट आ गई। 1453 ई. में तुकों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) की विजय के बाद तो यह और भी कठिन हो गया। इटलीवासियों ने किसी प्रकार तुकों के साथ व्यापारिक संबंध तो बनाए रखा, पर उन्हें व्यापार पर अधिक कर देना पड़ता था।

प्रश्न 24.
सृष्टिशास्त्र (Cosmography) क्या था?
उत्तर:
सृष्टिशास्त्र विश्व का मानचित्र बनाने का विज्ञान था। इसमें स्वर्ग और पृथ्वी दोनों का वर्णन किया जाता था। परंतु इसे भूगोल और खगोल से अलग शास्त्र माना जाता था।

प्रश्न 25.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियों की कुछ समानताएँ यूरोपीय संस्कृति से बहुत भिन्न थीं। इनका उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एजटेक तथा इंका समाज श्रेणीबद्ध था परंतु वहाँ यूरोप की तरह संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।
  2. पुरोहितों और शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था । यद्यपि भव्य मंदिर बनाए जाते थे, जिनमें सोने दा प्रयोग किया जाता था।
  3. फिर भी सोने, चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता था। तत्कालीन यूरोपीय समाज की स्थिति इससे बिलकुल विपरीत थी।

प्रश्न 26.
इंका लोगों ने उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति कैसे की?
उत्तर:
ईका सभ्यता का आधार कृषि था। परंतु भूमि अधिक उपजाऊ नहीं थी। इसलिए उन्होंने पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल-निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित की। इस प्रकार इंका लोगों ने कम उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति की।

प्रश्न 27.
एजटेक जाति ने कब और किस प्रकार सत्ता प्राप्त की? इनका राज्य विस्तार कितने क्षेत्र में था?
उत्तर:
एजेटक जाति ने 1220 ई० में टोलटेक शक्ति को समाप्त करके उनके राज्य पर अधिकार कर लिया। उनका राज्य विस्तार दो लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था।

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प्रश्न 28.
एजटेक सभ्यता की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
एजटेक एक युद्धप्रिय जाति थी। उन्होंने अपनी वीरता से एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 29.
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था पर नोट लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था कृषि पर आधारित थी। इसके अतिरिक्त कई लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने आदि का कार्य भी करते थे।

प्रश्न 30.
एजटेक लोगों के धर्म के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
एजटेक लोग सूर्य देवता और अन्न देवी की पूजा करते थे। उनमें मानव बलि का बहुत रिवाज था। उनके अधिकतर भव्य मंदिर युद्ध के देवताओं तथा सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि वे युद्धों को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका पर स्पेन तथा पर्तगाल का शासन था। स्पेनी तथा पुर्तगाली दोनों ही भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार की हैं। इसी कारण दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पोटोसी (Potasi) के ‘नरक का मुख’ किसने कहा था और क्यों?
उत्तर:
पोटोसी को एक संन्यासी डोमिनिगो डि सैंटो टॉमस ने ‘नरक का मुख’ कहा था। इसका कारण यह था कि वहाँ की खानों में काम करने वाले हजारों इंडियन हर साल मौत का शिकार हो जाते थे। वहाँ के खान मालिक लालची और निर्दयी थे जो इंडियन लोगों के साथ जानवरों जैसे व्यवहार करते थे।

प्रश्न 33.
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली वह प्रणाली होती है जिसमें उत्पादन तथा वितरण का स्वामित्व निजी हाथों में होता है। उत्पदन मुख्यतः मुनाफा कमाने के लिए पिया जाता है जिसमें खुली प्रतिस्पर्धा होती है।

प्रश्न 34.
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए यूरोपीय अभियानों के क्या तात्कालिक परिणाम निकले?
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए, इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए।

  1. जैसे मार काट के कारण मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई।
  2. उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया।
  3. उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

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प्रश्न 35.
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले जेसुइट पादरियों को पसंद नहीं करते थे क्यों?
उत्तर:
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले पादरियों को निम्नलिखित कारणों से पसंद नहीं करते थे –
1. ये पादरी वहाँ के मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे। वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और उन्हें यह सिखाते थे ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें उसका आनंद लेना चाहिए।

2. सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्म प्रचारक दास प्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

प्रश्न 36.
स्पेनियों की मैक्सिको विजय का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
स्पेनियों द्वारा मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने के दो वर्ष पश्चात् कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन-जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया । मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala) निकारगुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 37.
कोलंबस की विशेष उपलब्धि क्या रही?
उत्तर:
कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 38.
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों का नामकरण किसके नाम पर हुआ?
उत्तर:
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिंगों वेस्पुस्सी’ (AmerigoVespucci) के नाम पर किया गया जिसने उनके विस्तार को समझा और उन्हें ‘नयी दुनिया’ (New world) का नाम दिया। इन महाद्वीपों के लिए ‘अमेरिका’ (America) नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशन द्वारा 1507 ई० में किया गया।

प्रश्न 39.
डोना मैरीना कौन थी?
उत्तर:
बर्नार्ड डियाज डेल कैस्टिलो (Bernard Diaz DelCastillo) ने अपने टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको में लिखा है कि टैबैस्को (Tabasco) के लोगों ने कोर्टस को डोना मैरीना नाम की एक सहायिका दी थी। वह तीन भाषाओं में प्रवीण थी और उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये का काम किया था। डियाज के विचार में वह एक राजकुमारी थी। परंतु मैक्सिकन लोग उसे ‘मालिंच’, अर्थात् विश्वासघातिनी कहते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिकी मूल संस्कृतियों के आर्थिक प्रबंध के बारे में बताएँ।
उत्तर:
अमेरिकी मूल संस्कृतियों से अभिप्राय माया, एजटेक तथा इंका सभ्यताओं से है।

  1. माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। मक्का उस समय की मुख्य उपज थी। कुछ लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने तथा अन्य हस्तशिल्पों में लगे हुए थे।
  2. एजटेक लोगों के मुख्य उद्योग-धंधे, धातु-कर्म, बर्तन बनाना तथा सूती कपड़ा बुनना था। कुछ लोग कृषि करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू तथा शक्करकंद उगाते थे।
  3. इंका लोगों की आर्थिक अवस्था सोने तथा चाँदी से संबंधित थी। इन धातुओं से सजावट का सामान तथा अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं। कुछ लोग व्यापार भी करते थे, जो वस्तुओं की अदला-बदली (वस्तु-विनिमय) द्वारा होता था।

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प्रश्न 2.
अमेरिका के आंरभिक लोगों तथा भौगोलिक विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका और निकटवर्ती द्वीप समूहों में हजारों वर्षों से अनेक जनसमुदाय रहते आए थे। एशिया तथा दक्षिणी सागर के द्वीपों (South Sea Island) से भी लोग वहाँ जाकर बसते थे। दक्षिणी अमेरिका घने जंगलों और पहाड़ों से ढका हुआ था। आज भी उसके अनेक भाग जंगलों से ढंके हुए हैं। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेश से होकर बहती है। मध्य अमेरिका में, गाँव दूर-दूर स्थित थे।

प्रश्न 3.
अरवाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे? उनकी तथा उनकी संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और बृहत्तर एंटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे। कैरिव (Caribs) नामक एक खूखार कबीले ने उन्हें लधु ऐंटिलीज (Lesser Antilles) प्रदेश से खदेड़ दिया था। दूसरी ओर खरावाक लोग लड़ने की बजाय बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे। वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ के खोखले तनों से अपनी डॉगियां बनाते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू, कंद-मूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति – अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animasts) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक सामज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्पूर्ण भूमिका निभाते थे।

प्रश्न 4.
यूरोपीय लोगों (स्पेनिश) की अरावाकों के प्रति क्या नीति थी? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भाँति वे सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले शीशे के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न हो जाते थे, क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अराबाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सी की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया । इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाकों और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 5.
तुपिनाँबा लोग कौन थे? यूरोपवासियों को उनसे ईर्ष्या क्यों होती थी?
उत्तर:
‘तुपिनांबा’ (Tupinamba) कहे जाने वाले लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्र तट पर ओर ब्राजील नामक वृक्षों से बसे गाँवों में रहते थे। उनके पास पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था। इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके। परंतु उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इनके जीवन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था। वहाँ न तो कोई राजा था, न सेना और नहीं कोई चर्च । अतः उनके संपर्क में आने वाले यूरोपवासी उनके इस स्वतंत्र विचरण को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगे।

प्रश्न 6.
एजटेक लोगों का समाज श्रेणीबद्ध था। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एजटेक समाज वास्तव में ही श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। रिवाज में योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को गुलामों के रूप में बेंच देते थे। परंतु यह बिक्री प्रायः कुछ वर्षों के लिए ही रहती थी। गुलाम अपनी स्वतंत्रता फिर खरीद सकते थे।

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प्रश्न 7.
एजटेक लोगों के आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (Reclamation) किया। उन्होंने सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर माक्सको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये । इन्हें चिनाम्पा (Chinampas) कहते थे।

2. इन अत्यंत उपजाऊ द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिट्लान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील के बाहर झाँकते दिखाई देते थे।

3. एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

4. साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्, कसावा, आलू तथा अन्य कुछ फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतीहर लोग अभिजात की जमीनें जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था।

प्रश्न 8.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की मुख्य सामान्य विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
आदि अमेरिका सभ्यताओं में अनेक सामान्य विशेषताएँ थीं –

  1. वे लोग पत्थर की वास्तुकला में निपुण थे। उनके औजार पत्थर के ही बने हुए थे। धातुओं का प्रयोग केवल आभूषण बनाने में किया जाता था।
  2. वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  3. उनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशुपालन से अपरिचित थे।
  4. इन सभ्यताओं के लोगों ने बर्तन बनाने, बुनाई और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी निपुणता प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 9.
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –

  1. पंचांग – सौर पंचांग की भाँति माया वर्ष में भी 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिन को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे।
  2. गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  3. हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।
  4. कलात्मक उपलब्धियाँ – माया लोग भवन-निर्माण कला, चित्रकला तथा मूर्ति कला में बड़े निपुण थे। उन्होंने भव्य पिरामिड, चौक, मंदिर तथा वेधशालाओं का निर्माण किया ।
  5. चाक पर बने बर्तन – माया लोगों ने चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की तुलना करें।
उत्तर:
समानताएँ –

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे अर्थात् वे दोनों ही सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

असमानताएँ –

  • मिस्त्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचांग में वर्ष 18 महीने. का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।
  • माया सभ्यता के लोग वर्ष में शेष पाँच दिनों को अशुभ समझते थे जबकि मिस्त्री लोग शेष पाँच दिनों में उत्सव मनाया करते थे।

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प्रश्न 11.
इंका और एजटेक सभ्यताओं की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर:
इंका सभ्यता-इस सभ्यता की उपलब्धियां निम्नलिखित थीं –

  • कुशल प्रशासन – इंका साम्राज्य चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन, पुरुष शासन करता था।
  • उन्नत नगर – का साम्राज्य में नगरों की भरमार थी। उन नगरों में बहुत-से विशाल भवन होते थे। इनमें किले, मंदिर, महल आदि शामिल थे।
  • कला तथा दस्तकारी – इंकः सभ्यता में कलाएँ तथा दस्तकारियाँ की विकसित थीं।
  • धातुओं का योग – इंका सभ्यता के लोग सोने, चाँदी तथा ताँबे के आभूषण बनाते थे। वे अपने हथियार और औजार बनाने के लिए काँसे का प्रयोग करते थे।

एजटेक सभ्यता – इस सभ्यता की उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –

  • शक्तिशाली साम्राज्य – एजटेक लोगों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। वह साम्राज्य 38 प्रांतों में बँटा हुआ था।
  • पंचांग – एजटेक लोगों का अपना अलग पंचांग था। उनके पंचांग के अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • धातुओं का प्रयोग – उन्होंने नरम धातुओं को पिघलाना सीख लिया था।
  • धर्म – वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे जैसे-सूर्य देवता और अन्न देवी।

प्रश्न 12.
आदिम अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ किन मुख्य अर्थों में प्राचीन एशियाई और यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं?
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ निम्नलिखित अर्थों में प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं –
1. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों को कृषि के विषय में काफी ज्ञान था परंतु वे पशुपालन से अपरिचित थे। धार्मिक दृष्टि से उन लोगों में मक्का की कृषि का बड़ा महत्त्व था। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोगों ने कृषि तथा पशुपालन का कार्य एक साथ ही आरंभ किया।

2. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों ने धातु का प्रयोग केवल आभूषण बनाने के लिए ही आरंभ किया। फिर भी उन्होंने बर्तन निर्माण, बुनाई, पंख-मोजेक और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी दक्षता प्राप्त कर ली थी। आदिम अमेरिकी सभ्यता की यह विशेषता प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न थी।

3. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोग हल तथा पहिये के प्रयोग से अपरिचित थे। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोग इन दोनों के प्रयोग के विषय में जानकारी रखते थे।

4. आदिम अमेरिकी लोगों ने बहुत लंबे समय तक पत्थर के औजारों का ही प्रयोग किया। यहाँ तक कि स्मारकों की वास्तुकला तथा महान् अमेरिकी सभ्यताओं की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ भी केवल पत्थर के औजारों की सहायता से ही तैयार की गई। इस दृष्टि से प्राचीन एशिया तथा यूरोप की सभ्यताओं के लोग कहीं आगे थे। वे पत्थर के हथियारों को लगभग भूल चुके थे और लोहे के मजबूत हथियारों का प्रयोग करने लगे थे।

5. आदिम अमेरिकी लोगों की कोई लेखन प्रणाली नहीं थी। इसके विपरीत एशिया तथा यूरोप में विकसित सभ्यताओं की अपनी-अपनी लेखन प्रणालियाँ थीं।

प्रश्न 13.
इंका लोगों के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन का वर्णन करें।
उत्तर:
1. सामाजिक जीवन – इंका समाज में सम्राट् को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। उसे सूर्य का वंशज समझा जाता था। सम्राट् के पश्चात् समाज में दूसरा स्थान कुलीन तथा पुरोहितों का था। उनके पश्चात् साधारण लोगों की श्रेणी थी जिसमें दस्तकार तथा किसान सम्मिलित थे।

2. आर्थिक जीवन – इंका लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू और शकरकंद उगाते थे। इंका सभ्यता में कला और शिल्प काफी उन्नत थे। इन शिल्पों में मिट्टी के बर्तन बनाना, कपड़े बुनना तथा लामा और अल्पाका से ऊन प्राप्त करना शामिल था। इसके अतिरिक्त इंका लोग काँसे के हथियार तथा औजार और सौने-चाँदी के आभूषण भी बनाते थे।

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प्रश्न 14.
अमेरिकी सभ्यताओं के विज्ञान की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –
1. पंचांग – लोगों ने अपना पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा । प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिनों को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे। एजटेक लोगों ने भी अपना पंचांग बनाया जो माया पंचांग जैसा ही था।

2. गणित का ज्ञान-माया लोगों को गणित का भी अच्छा ज्ञान था। वे शून्य के लिए विशेष प्रकार के चिह्न प्रयोग करते थे।

3. हेरोग्लिफिक लिपि-माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।

4. चिकित्सा विज्ञान-इंका सभ्यता में चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत था । लोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते थे। यहाँ से मानव खोपड़ियाँ तथा कंकाल मिले हैं। इनसे पता चलता है कि लोगों को चीर-फाड़ (शल्य-चिकित्सा) का भी ज्ञान था।

प्रश्न 15.
खोज यात्राओं और व्यापार के बीच के संबंध पर विचार-विमर्श करो। अमेरिका और अफ्रीका के लोगों पर खोज यात्रियों के कार्यों के तात्कालिक प्रभाव क्या थे?
उत्तर:
खोज यात्राओं तथा व्यापार के बीच बड़ा गहरा संबंध था। वास्वत में खोज यात्राओं का उद्देश्य नये देशों की खोज करना था और वहाँ उपनिवेश स्थापित करना था। केवल इतना ही नहीं, इन उपनिवेशों से अधिक-से-अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करना खोज यात्राओं का मुख्य उद्देश्य था। यही कारण था कि विभिन्न देशों के शासकों ने खोज यात्रियों की पूरी सहायता की। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका पर विजय प्राप्त करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहत-से देश अपनी स्वतंत्र खो बैठे। केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

प्रश्न 16.
वाणिज्य तथा व्यापार की वृद्धि के क्या परिणाम निकले ? (Imp.)
उत्तर:

  1. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप के लोग समृद्ध बने।
  2. यूरोप के देशों ने खोजे गए प्रदेशों में उपनिवेश बसाये जिनको मंडियों के रूप में प्रयुक्त किया।
  3. नवीन खोजों के कारण इटली का परंपरागत व्यापारिक महत्त्व कम हो गया। अब व्यापार के केंद्र वे देश बन गए जो अटलांटिक महासागर के समीप थे।
  4. व्यापार के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियाँ स्थापित हुई जिनमें शासक वर्ग के सदस्य भी शामिल थे।
  5. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप छ मध्यम वर्ग के सदस्यों की संख्या में जो वहाँ की राजनीति में महत्त्वपू’ भूमिका निभाने लगे।

प्रश्न 17.
अमेरिका में स्पेन के राज्य की स्थापना में किन तत्त्वों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार सैन्य-शक्ति के बल पर हुआ। इसमें बारूद तथा घोड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय लोगों को या तो नजराना देना पड़ता था या फिर राज्य के लिए सोने-चाँदी की खानों में काम करना पड़ता था। अमेरिका को ‘खोज’ के बाद आरंभ में एक छोटी-सी बस्ती बसायी गई। इसमें रहने वाली स्पेनी लोग स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। स्थानीय प्रधानों को नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था।

सोने की लालच के कारण गंभीर हिंसक घटनाएँ हुई, जिनका स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया। स्पेनी विजेताओं के कठोर आलोचना कैथोलिक भिक्षु (friar) बार्टोलोम डि लास कैसास (Bartolome de las Casas) ने कहा है कि स्पेनी उपनिवेशकों को इन अभियानों के लिए अस्त्र-शस्त्र भी अभियानों में शामिल लोगों ने स्वयं मुहैया कराए थे। इसका कारण यह था कि उन्हें विजय के बाद होने वाली लूट में से एक बड़ा हिस्सा मिलने की आशा थी।

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प्रश्न 18.
कोर्टेस द्वारा मैक्सिको की विजय तथा टलैक्सकलानों के सफाये की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। 1519 ई. में, कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था। जहाँ उसने टाटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटनैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मॉटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा। वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया।

उसे यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टेस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों न टलैक्सकलानों (Tlaxcalans) पर हमला बोल दिया। टलैक्सकलान भी खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया। फिर वे टेनोंटिटलैन (Tenochtitlan) की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 को वहाँ पहुँच गए।

प्रश्न 19.
स्पेनी सेनानायक कोर्टस तथा एजटेक शासक मोंटेजुमा के बीच भेंट का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्पेनी आक्रमणकारी 8 नवंबर, 1519 को टेनोक्किटलैन (एजटेक साम्राज्य की राजधानी) पहुँचे। यह नगर मेडिड से पाँच गुणा बड़ा था। वहाँ एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया । एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु टलैक्सलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोगों के मन में आशंका थी। हर आदमी भयभीत होकर काँप रहा था, मानो सारी दुनिया की आँते ही बाहर निकाली जा रही हों।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मुल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट् मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के प्रयास में, कोर्टेस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई पनिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिर में एजटेक और ईसाई, दोनों की प्रतिमाएं रखवा दी गईं।

प्रश्न 20.
कोर्टेस की अनुपस्थिति में स्पेनिश सैनिकों तथा एजटेक लोगों के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्वारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटाना पड़ा था। स्पेनी शासक के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर मांगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडो ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 को कोर्टस वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जल मार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कम का सामना करना पड़ा। विवश होकर कोर्टस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोटेजुमा की रहस्मय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही टलैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस भयंकर रात को आँसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टेस को नए एजटेक शासक क्वेटेमोक (Cvatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस टलैक्सकलान में शरण लेनी पड़ी। अंततः उसने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टेनोक्लिान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट् ने अपना जीवन त्याग देना ही ठीक समझा।

प्रश्न 21.
कोलंबस ने अपनी खोज यात्रा किस प्रकार आरंभ की?
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। उसने पश्चिम की ओर से यात्रा करते हए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोज। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ। उसने इस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजनाएँ प्रस्तुत की। परन्तु वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के अधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई. को जहाज द्वारा पालोस के पत्तन से अपने अभियान पर निकल पड़ा।

प्रश्न 22.
कोलंबस के बेड़े की जानकारी देते हुए यह बताइए कि वह गुआनाहानि द्वीप पर कैसे पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (नाव) (Nao) तथा दो कैरेवल (Caravel) छोटे हलके जहाज पिंटा और ‘नीना’ शामिल थे। सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे थे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की माँग करने लगे।

अंतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई. को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा। परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह में गृआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। गआनाहानि में इस बड़े के नाविकों का अरावाक लोगों न स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को पाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

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प्रश्न 23.
वापसी यात्रा से पूर्व कोलंबस की कठिनाइयों तथा उसकी तीन अन्य यात्राओं की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटना में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापसी यात्रा अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। वापसी यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे। आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गई।

इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। इन यात्राओं से यह पता चला कि नाविकों ने ‘इंडीज (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

प्रश्न 24.
नए देशों तथा मार्गों की खोज किन कारणों से की गई?
उत्तर:
नए देशों और मार्गों की खोज अनेक कारणों से की गई। यरोप के लोग एशिया में व्यापार से बहुत धन कमाते थे, परंतु जब प्रचलित भागों पर तुकों का अधिकार हो गया तो वे नवीन मार्ग खोजने के लिए विवश हो गए। कारपीनी और मार्कोपोलो आदि के यात्रा संबंधी वृत्तातों अथवा कहानियों ने यात्रा करने की इच्छा को बलवती किया। कम्पास के आविष्कार ने दूर-दूर समुद्रों में यात्रा करना सरल कर दिया। इन सब बातों से लोगों के मन में यह भावना आ गई कि उन्हें कठिन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्राणों की बाजी लगा देनी है।

प्रश्न 25.
15वीं और 16वीं शताब्दी के किन्हीं तीन नाविकों के नाम लिखें तथा उनकी खोजों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
15वीं तथा 16वीं शताब्दी के तीन प्रसिद्ध नाविक कोलंबस, वास्कोडिगामा और मैगलेन थे। इनकी खोजों का वर्णन इस प्रकार है –

  1. कोलंबस – कोलंबस इटली का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह भारत का मार्ग ढूंढना चाहता था। अपनी यात्रा में पश्चिमी की ओर जाते हुए 1402 ई० में कोलंबस ने अमेरिका को खोज निकाला।
  2. वास्कोडिगामा – यह पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह आशा-अंतरीप से होता 1498 ई० में भारत आ पहुँचा । इस प्रकार उसने भारत पहुँचने के लिए समुद्री मार्ग की खोज की।
  3. मैगलेन – मैगलेन भी पुर्तगाल का ही रहने वाला था। 1519 ई० में उसने फिलीपाइन द्वीप तथा दक्षिण अमेरिका की खोज की।

प्रश्न 26.
नए मार्गों की खोजों से कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण परिणाम निकला? (V.Imp.)
उत्तर:
नए मागों का पता लगाने के बाद यूरोपीय लोगों ने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में व्यापार करना आरंभ कर दिया। अब वे धन, धरती और धर्म की वृद्धि सोंचने लगे। उन्होंने इन महाद्वीपों में अपने-अपने उपनिवेश बसाए। शीघ्र ही इन उपनिवेशों का धन यूरोपीय देशों में पहुँचने लगा। दासों का क्रय-विक्रय होने लगा। पादरियों ने इन उपनिवेशों में ईसाई धर्म का प्रचार शुरू किया जिसके फलस्वरूप यह धर्म विश्व का सबसे महान् धर्म बन गया । व्यापार और उपनिवेशों की स्थापना से ‘पूंजीवाद’ का उदय हुआ।

प्रश्न 27.
“16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजें आधुनिक युग को लाने में सहायक सिद्ध हुई।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
उत्तर:

  1. इन खोजों से पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  2. इन खोजों से नए-नए देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाए और इनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  3. नई खोजों से पुराने बंदरगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्बन, एंटवर्प आदि नए नगर व्यापार के केंद्र बन गए।
  4. भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गए।
  5. प्रत्येक यूरोपीय जाति ने अपने-अपने उपनिवेशों में अपने धर्म का प्रचार करने का प्रयत्न किया।
  6. 16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजों के ये महत्त्वपूर्ण परिणान आधुनिक युग के ही प्रतीक थे।

प्रश्न 28.
माया-संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
माया संस्कृति ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दियों के दौरान मैक्सिको में फली-फूली। मक्का की खेती उनकी सभ्यता का मुख्य आधार थी। उनके अनेक धार्मिक क्रिया-कलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े हुए थे। खेती करने के तरीके उन्नत और कुशलतापूर्ण थे, जिसके कारण खेतों में बहुत अधिक पैदावार होती थी। इससे शासक वर्ग, पुरोहितों और प्रधानों को एक उन्नत संस्कृति का विकास करने में सहायता मिली। माया लोगों ने वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त की। माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी। परंतु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 29.
इंका संस्कृति के राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिकी देशज संस्कृतियों में से पेरू की क्वेचुआ (Qvechuas) या इंका संस्कृति सबसे विशाल थी। प्रथम इंका शासक मैंको कपाक (Manco Capac) ने बारहवीं शताब्दी में कुजको (Cuzco) में अपनी राजधानी स्थापित की थी। नौवें शासक के काल में राज्य का बहुत अधिक विस्तार शुरू हुआ। इस प्रकार इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक लगभग 3000 मील में फैल गया। इंका साम्राज्य अत्यंत केंद्रीकृत था। राज्य की संपूर्ण शक्ति राजा में ही निहित थी।

वही सत्ता का उच्चतम स्रोत था। नए जीते गए कबीलों और जनजातियों को पूरी तरह इंका साम्राज्य में मिला लिया गया। सभी लोगों को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी। प्रत्येक कबीला स्वतंत्र रूप से वरिष्ठों की एक सभा द्वारा शासित होता था। परंतु कुल मिलाकर पूरा कबीला अपने शासक के प्रति निष्ठावान था । स्थानीय-शासकों को उनसे सैनिक सहयोग के लिए पुरस्कृत किया जाता था। इस प्रकर इंका एक संघ के समान था जिस पर इंका लोगों का शासन था। एक अनुमान के अनुसार इस साम्राज्य में 10 लाख से भी अधिक लोग थे।

प्रश्न 30.
इंका लोगों की वास्तुकला पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इंका लोग उच्चकोटि कं भवन – निर्माता थे। उन्होंने इक्वेडोर से चिली तक पहाड़ों के बीच अनेक सड़कें बनाई। उनके किले शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए गए थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे जैसी किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती थी। वे निकटवर्ती प्रदेशों में टूटकर गिरी हुई चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते थे।

इसके लिए अपेक्षा अधिक मजदूरों की जरूरत पड़ती हैं : राज मिस्त्री खंडों को सुंदर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। पत्थर के कई टुकड़े 100 मैट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे। उनके पास इतने बड़े शिलाखंडों को ढोने के लिए पहियेदार गाड़ियाँ नहीं थीं। अतः यह काम मजदूरों को जुटाकर बड़ी सावधानी से करवाया जाता था।

प्रश्न 31.
समुद्री खोजों के पीछे वास्तविक प्रेरक तत्त्व क्या थे?
उत्तर:
समुद्री खोज यात्राओं के पीछे प्रेरक तत्त्व निम्नलिखित थे –

  1. नए स्थानों की खोज करके लोगों को दास बनाना और दास व्यापार से भारी मुनाफा कमाना।
  2. व्यापार वृद्धि तथा धन कमाने की प्रबल इच्छा का उत्पन्न होना।
  3. मसाले और सोना प्राप्त करके धन और यश कमाना।
  4. रोमांचकारी साहसिक यात्राएँ करके विदेशों में ईसाई धर्म का प्रचार करना।
  5. इस समय की प्रसिद्ध समुद्री यात्राएँ वास्कोडिगामा, कोलंबस और मैगलेन आदि ने की थी।

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प्रश्न 32.
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों की क्या नीति थी?
उत्तर:
शिक्षा के प्रति एजटेक लोग बहुत ही सजग थे। वे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmecac) में भर्ती किए जाते थे। यहां उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्ने पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochacalli) में पढ़ते थे। उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिका की आदि सभ्यताओं की सामाजिक व्यवस्था व भवन-निर्माण कला की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिका की आदि सभ्यताओं-माया, इंका तथा एजटेक-के सामाजिक प्रबंध तथा भवन-निर्माण कला की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है
1. सामाजिक प्रबंध –

  • माया सभ्यता के समाज में पुरोहितों को बहुत ही ऊँचा स्थान प्राप्त था।
  • इंका सभ्यता के समय अमेरिकी समाज बहुत बड़ा हो गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान राजा का था जिसे सूर्यवंशी समझा जाता था।
  • राजा के पश्चात् कुलीन वर्ग तथा पुरोहित वर्ग का स्थान आता था।
  • राज्य की सारी भूमि पर राजा का अधिकार होता था । वह परिवार के आकार के आधार पर भूमि किसानों में बाँट देता था। कुलीनों,
  • पुरोहितों तथा राज्य कर्मचारियों को सरकारी गोदामों से अनाज मिलता था, परंतु फसल खराब हो जाने की दशा में साधारण जनता को भी सरकारी गोदाम से अनाज दिया जाता था।
  • इंका समाज का जीवन बड़ा नियोजित था। पुरुष के विवाह के लिए 24 वर्ष तथा स्त्री के विवाह के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु निश्चित थी। पेड़-पौधों तथा पशुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता था।
  • इंका समाज के कानून बड़े कठोर थे। कानून तोड़ने वाले को जीवित जला दिया जाता था। झूठ बोलने वाले की जीभ पर कील गाढ़ दी जाती थी।
  • चोरों की पहचान के लिए उनके शरीर पर विशेष मोहर लगा दी जाती थी।
  • एजटेक समाज में सैनिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे। राज-कर्मचारी सम्मानित परिवारों से चुने जाते थे।

2. भवन निर्माण कला –
भवन-निर्माण कला में अमेरिका की आदि सभ्यताओं के लोगों ने बहुत उन्नति की। उनके महल, मंदिर तथा अन्य भवन इतने सुंदर थे कि आज भी यात्री उनकी प्रशंसा करते हैं। प्रायः भवन-निर्माण पिरामिड पर होता था। कुछ भवन 200 फुट ऊंचे थे। मैक्सिकों में सूर्य का पिरामिड 216 फुट ऊँचा है। यह वर्गाकार है जो 750 वर्ग फुट क्षेत्र है। भवनों को पत्थर की मूर्तियों तथा चित्रकारी से सजाया जाता था। कोपान में एक खगोलशाला थी।

इंका सभ्यता में शानदार भवन बनाए जाते थे। कुजको में सूर्य मंदिर इंका सभ्यता की भवन निर्माण कला का उच्चतम नमूना है। इसके अतिरिक्त किले, सड़क, पुल तथा महल बहुत ही सुंदर ढंग से बने थे। भवन बनाने के लिए पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों का प्रयोग किया जाता था। इन भवनों के कारण नगरों की सुंदरता बहुत बढ़ गई थी। एजटेक लोगों की राजधानी ‘टेनोक्टिटलांग’ अथवा ‘टेकोना का प्रासाद’ की गणना मध्य अमेरिका के अत्यंत सुंदर नगरों में की जाती थी। इंका की इंजीनियरिंग कला बहुत प्रसिद्ध थी। कुजको नगर में सड़कों की एक श्रृंखला साम्राज्य के सभी भागों को जोड़ती थौं । नगरों में सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं।

प्रश्न 2.
अमेरिका की मूल माया सभ्यता के लोगों के समाज, धर्म व विज्ञान के बारे में लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता अमेरिका की मूल सभ्यताओं में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इस सभ्यता के समाज, धर्म तथा विज्ञान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –
1. समाज – माया सभ्यता का समाज पुरोहित प्रधान था। समाज में पुरोहित का बहुत ही आदर था। इस सभ्यता के नगर-राज्य चीचेन इटजा में शासन पर पुरोहितों का पूरा प्रभुत्व था। ये लोग राज्य में अपनी मनमानी कर सकते थे, परंतु स्थानीय प्रबंध में स्वशासन की व्यवस्था थी।

माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। माया लोगों की मुख्य फसल मक्का थी। कछ लोग वस्त्र बनाने, वस्रों को रंगने तथा कछ अन्य हस्त-शिल्पों में लगे हुए थे। लोगों का मुख्य भोजन मक्का, सेम, आलू, पपीता आदि थे। वे मिर्च का प्रयोग भी करते थे।

2. धर्म – माया सभ्यता के लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे। इनमें वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि तथा मक्का देवता सम्मिलित थे। अधिक वर्षा के लिए माया अपनी मूल्यवान वस्तुएँ पानी में फेंक देते थे। कई लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि की भी प्रथा प्रचलित थी।

3. विज्ञान –

  • माया लोगों ने विज्ञान में काफी प्रगति की। उन्होंने एक कैलेंडर का आविष्कार किया। यह कैलेंडर उनकी खगोल विज्ञान में प्रगति का प्रतीक है।
  • इस कलेंडर के अनुसार वर्ष में 365 दिन तथा 18 महीने होते थे। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे।
  • गणित के ई। में माया लोगों ने शून्य की जानक: दी।
  • कागज का प्रयोग तथा हेरोग्लिफिक लिपि उनकी अन्य मुख्य उपलब्धियाँ थीं। सच तो यह है कि माया सभ्यता अन्य अमेरिकी सभ्यताओं की तुलना में किसी भी दृष्टि में पीछे नहीं थी।

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प्रश्न 3.
एजटेक लोग कौन थे? उनकी सभ्यता एवं संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एजटेक लोग बारहवीं शताब्दी में उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया। पराजित लोगों से वे नजराना वसूल करने लगे।

समाज – एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। अभिजातों की संख्या बहुत कम थी। वे सरकार तथा सेना में ऊँचे पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। समाज में योद्ध, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्राय: सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

भूमि उद्धार तथा निर्माण कार्य-एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (reclamation) किया। उन्होंने सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर मैक्सिको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये। इन्हें चिनाम्या (Chinampas) कहते थे। इन अति उपजाक द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील से बाहर झाँकते दिखाई देते थे। एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह है कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

साम्राज्य का ग्रामीण होना-साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियां, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू तथा कुछ अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतिहर लोग अभिजातों की जमीन जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था। शिक्षा नीति-एजटेक लोग इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ।

कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmeacac) में भर्ती किए जाते थे। यहाँ उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्चे पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochcalli) में पढ़ते थे, जहाँ उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था। साम्राज्य का अंत-16वीं शताब्दी के आरंभ में एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता के लक्षण दिखाई देने लगे। 1516 ई० में शक्तिशाली एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

प्रश्न 4.
कोटेंस के नेतृत्व में स्पेनवासियों को दक्षिणी अमेरिका की विजय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। कोर्टस 1519 ई० में क्यूबा से मैक्सिको आया था। वहाँ उसने टोंटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटानैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा।

वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया। स्वयं मोंटेजुमा को भी यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों ने टूलैक्सकलानों पर हमला बोल दिया। लैक्सकलान खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद अंततः समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया।

फिर वे टेनोस्टिटलैन की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 ई. को वहाँ पहुंच गए। स्पेनी आक्रमणकारी टेनोक्टिटलैन के दृश्य को देखकर हक्के-बक्के रह गए। यह स्पेन की राजधानी मैडिड से पाँच गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े शहर सेविली (Seville) से दो गुनी थी। कोटेंस की एजटेक शासक से भेंट-एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टस का हार्दिक स्वागत किया। एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों-बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु लैक्सकलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोग भयभीत होकर काँप रहे थे।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मूल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट् को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के लिए, कोर्टस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई प्रतिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिरों में एजटेक और ईसाई प्रकार की प्रतिमाएँ रखवा दी गईं।

कोर्टेस का क्यूबा जाना और वापसी-इसी समय कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्चारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटना पड़ा। स्पेनी शासन के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर माँगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडी ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 ई० को कोर्टस जब वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जलमार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कमी का सामना करना पड़ा । विवश होकर कोर्टेस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोंटेजुमा की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही लैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस ‘भांकर रात’ को आंसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टस को नए एजटक शासक कवेटेमोक (Cuatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस लैंक्सकलान में शरण लेनी पड़ी।

उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आए चेचक के प्रकोप से मर रहे थे। कोर्टस ने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ नोक्टिट्लान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट ने अपना जीवन त्याग देना हो ठीक समझा। मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया। मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala), निकारागुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 5.
पिजारों कौन था? अमेरिका (इंका प्रदेश) में इसकी सफलताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पिजारो (Pizarro) एक गरीब और अनपढ़ स्पेनिश था। वह सेना में भर्ती होकर 1520 ई० में कैरीबियन द्वीपसमूह में आया था। उसने इंका राज्य के बारे में यह सुन रखा था कि वह चाँदी और सोने का देश (EI-dor-ado) है। उसने प्रशांत से वहाँ पहुँचने के लिए कई प्रयत्न किए। एक बार जब वह अपनी यात्रा से स्वदेश लौटा तो वह स्पेन के राजा से मिलने में सफल हो गया। इस मुलाकात के दौरान उसने राजा को इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए सोने के आकर्षक मर्तबान दिखाए।

राजा के मन में लोभ जाग उठा और उसने पिजारो को यह वचन दे दिया कि यदि वह इंका प्रदेश को जीत लेगा तो वह उसे वहाँ का गवर्नर बना देगा। पिजारो ने कोर्टस का तरीका अपनाने की योजना बनाई। परंतु वह यह देखकर क्षुब्ध हो गया कि इंका साम्राज्य की स्थिति भिन्न थी। पिजारो का इंका साम्राज्य में प्रवेश-1532 ई० में अताहुआल्पा (Atahualpa) ने एक गृहयुद्ध के बाद इंका साम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। तभी वहाँ पिजारो ने प्रवेश किया।

उसने जाल बिछाकर राजा को बंदी बना लिया। राजा ने अपने आप को मुक्त कराने के लिए एक कमरा भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव रखा। परंतु पिजारो ने अपना वचन नहीं निभाया । उसने राजा का वध करवा दिया और उसके सैनिकों ने जी भरकर लूटमार मचाई। इसके बाद पिजारो ने इंका राज्य पर अधिकार कर लिया। विजेताओं की क्रूरता के कारण वहाँ 1534 ई० में विद्रोह भड़क उठा जो दो साल तक चलता रहा। परिणामस्वरूप हजारों लोगों की युद्ध तथा महामारियों के कारण मौत हो गई। अगले पांच साल में स्पनियों ने पोटोसी (आज का बोलीविया) में चाँदी के विशाल भंडारों का पता लगा लिया। इन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को दास बना लिया।

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प्रश्न 6.
पेड्रो अल्वारिस कैबाल ब्राजील कैसे पहुँचा? ब्राजील में पुर्तगालियों द्वारा इमारती लकड़ी के व्यापार का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर भारत के लिए रवाना हुआ। तूफानी समुद्रों से बचने के लिए उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक बड़ा चक्कर लगाया । वह यह देखकर हैरान रह गया कि वह वर्तमान ब्राजील के समुद्र तट पर जा पहुंचा है। दक्षिणी अमेरिकी का वह पूर्वी भाग उस क्षेत्र में आता था जिसे पोप ने पुर्तगाल को सौंप रखा था। इसलिए पुर्तगाली अनवादित रूप से इसे अपना प्रदेश मानते थे।

ब्राजील की महत्वपूर्ण संपदा-पुर्तगालवासी कैबाल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर रवाना हुआ क्योंकि वह भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अधिक उत्सुक था तथा ब्राजील में सोना मिलने की कोई संभावना नहीं थी। परंतु ब्राजील का एक प्राकृतिक संसाधन इनके लिए और भी महत्त्वपूर्ण था, जिसका उन्होंने भरपूर लाभ उठाया। यह संपदा थी-इमारती लकड़ी। वहाँ के ब्राजीलवुड वृक्ष से एक सुंदर लाल रंजक (Dye) भी मिलता था।

ब्राजील के मूल निवासी लोहे के चाकू-छुनियों और आरियों के बदले में इन पेड़ों को काट कर इनके लढे जहाजों तक ले जाने के लिए भी तुरंत तैयार हो गए। वैसे भी एक हँसिए, चाकू या कंधे के बदले ढेरों मुर्गियाँ, बंदर, तोते, शहद, मोम, सूती धागा आदि वस्तुएँ देने को सदैव तैयार रहते थे। इमारती लकड़ी का व्यापार-इमारती लकड़ी के इस व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुई। इनमें अंततः पुर्तगालियों की जीत हुई।

1534 ई० में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवांशिक कप्तानियों (Captaincies)” में बाँट दिया । इनके स्वामित्व उन पुर्तगालियों को सौंपे गये जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उन्हें स्थानीय लोगों को दास बनाने का अधिकार भी दे दिया गया । ब्राजील में बसने वाले बहुत-से पुर्तगाली भूतपूर्व सैनिक थे जिन्होंने भारत के गोवा क्षेत्र में लड़ाइयाँ लड़ी थीं । स्थानीय लोगों के प्रति उनका व्यापार अत्यंत क्रूर था।

प्रश्न 7.
1540 ई० से ब्राजील में पुर्तगालियों की गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील के बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना आरंभ कर दिया। गन्ना से चीनी बनाने के लिए मिलें भी लगाई। यह चीनी यूरोप के बाजारों में बेची जाती थी। बहुत ही गर्म और नम जलवायु में चीनी की मिलों में काम करने के लिए वे स्थानीय लोगों पर निर्भर थे- जब उन लोगों ने इस नीरस काम को करने से इन्कार कर दिया तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण कर उन्हें दास बनाना आरंभ कर दिया। स्थानीय लोग दास बनाने वाले इन मिल मालिकों से बचने के लिए गाँव छोड़कर जंगलों की ओर भागने लगे। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया, तटीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लगभग सभी गाँव उजह गए।

वहाँ अब यूरोपीय लोगों के सुनियोजित कस्बे बस गए। मिल मालिकों को दास लाने के लिए अब पश्चिमी अफ्रीका की ओर मुड़ना पड़ा। परंतु स्पेनी उपनिवेशों में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। वहाँ पहले से ही एजटेक और इंका साम्राज्यों के अधिकांश लोगों से खदानों और खेतों में काम कराया जाता था। इसलिए स्पेनिश लोगों को ‘औपचारिक रूप से उन्हें दास बनाने अथवा कहीं और से दास लाने की जरूरत नहीं पड़ी।

154980 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया (Bahia) सैलवाडोर (Salvador) को उसकी राजधानी बनाया गया। इस समय तक जेसुइट पादरियों ने भी ब्राजील में आना शुरू कर दिया था। वहाँ बसे यूरोपीय लोग इन पादरियों को पसंद नहीं करते थे इसके कई कारण थे –

  • ये पादरी मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे।
  • वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और वह उन्हें यह सिखाते थे कि ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें आनंद लेना चाहिए।
  • सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्मप्रचार दास प्रा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

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प्रश्न 8.
भौगोलिक खोजों से क्या अभिप्राय है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर:
1490 ई० से 1523 ई. तक का 33 वर्ष का समय महान् भौगोलिक खोजों के लिए प्रसिद्ध है। इस काल में उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खोज की गई और इसे नई दुनिया का नाम दिया गया। अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर को पार किया गया। अनेक नवीन भौगोनिक मार्ग ढूंढे गये। हिंद महासागर और चीनसागर में भी यूरोपीय जहाज चलने लगे। अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी तट के साथ पूर्व की ओर मार्ग ढूंढा गया। इस प्रकार संसार के मानचित्र का रूप बदलने लगा।

भौगोलिक खोजों के कारण-इन भौगोलिक खोजों के कई कारण थे। यूरोप निवासियों को एशिया और विशेष रूप से भारत की वस्तुओं में बड़ी रुचि थी। व्यापारी अपना माल थल मार्ग से रोम सागर तथा काला सागर तक लाया करते थे। वहाँ से आगे समुद्री मार्ग से माल यूरोप की मंडियों में पहुंचा दिया जाता था। 15वीं शताब्दी के मध्य में तुर्की तथा इसके आस-पास के देशों पर तुकों का अधिकार हो गया। फलस्वरूप यूरोप का एशियाई व्यापार बंद हो गया। परंतु यूरोप के लोग इस लाभदायक व्यापार को समाप्त नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नवीन मार्ग खोजने के प्रयल आरंभ किये। तब यह सारा व्यापार लगभग बंद हो गया।

1. इन्हीं दिनों यूरोपियन यात्री कारपीनी और मार्कोपोलो एशिया का चक्कर लगाकर आये थे। उन्होंने अपने यात्रा विवरणों में इन देशों के विषय में अनेक अद्भुत कहानियाँ लिखीं । इन रोमांचकारी कहानियों ने यूरोप निवासियों के दिलों में इन देशों की यात्रा करने की प्रबल इच्छा पैदा की।

2. विज्ञान के नये आविष्कारों ने भी उनकी कल्पना को उभारा। कोपरनिकस ने यह घोषणा की कि पृथ्वी गोल है, जिसका यह अर्थ लिया गया कि मनुष्य चाहे किसी दिशा में यात्रा करे वह अपने लक्ष्य पर वापस पहुंचेगा। कंपास के आविष्कार के कारण दूर-दूर तक समुद्रों में यात्रा करना सरल हो गया।

3. पुनर्जागरण की लहर ने भी बड़ा प्रभाव डाला। इसने लोगों के मन में कठिन लक्ष्य पर विजय प्राप्त करने की इच्छा पैदा कर दी। नये स्थापित राष्ट्रीय राज्यों ने इस प्रकार के वातावरण का लाभ उठाया तथा उनके राजाओं ने जी-जान से उन वीरों को प्रोत्साहित किया जो खोज कार्य में भाग लेना चाहते थे।

प्रश्न 9.
सोलहवीं शताब्दी की महत्त्वपूर्ण खोजों का वर्णन कीजिए। आधुनिक युग को लाने में वे किस प्रकार सहायक सिद्ध हुई?
उत्तर:
भौगोलिक खोजों का क्रम वैसे तो 15वीं शताब्दी में आरंभ हुआ था, परंतु 16वीं शताब्दी में इस दिशा में और भी महत्त्वपूर्ण खोज यात्राएँ हुई। 1492 ई० में बार्थेलाम्यू डियाज ने आशा अंतरीप की खोज की। उससे अमेरिका, न्यूफाउंडलैंड और लैब्रेडोर का पता चला। 1498 ई० में वास्कोडिगामा ने यूरोप से भारत पहुंचने का नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। 16वीं शताब्दी के आरंभ में कोर्टिस नाविक मैक्सिको जा पहुंचा। उसने 1531 ई० में पिजारू की खोज की। परंतु इस शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक यात्रा मैगलेन नामक पुर्तगाली नाविक ने की।

वह अपने साथियों सहित अंध महासागर को पार करके दक्षिणी अमेरिका के तट तक और फिर जलडमरू के मार्ग से प्रशांत महासागर में पहुँचा। यहाँ से वह फिलिपाइन के द्वीपों में पहुंचा। यहाँ मैगलेन की मृत्यु हो गई। परंतु उसके 18 साधी एक जहाज में संसार का चक्कर काट कर स्वदेश लौट आये। इस प्रकार मनुष्य ने संसार के गिर्द अपना पहला चक्कर पूरा कर लिया।

आधुनिक युग लाने में भौगोलिक खोजों का योगदान –

  • इन खोजों से नयी समुद्री-मार्गों की खोज की गई। फलस्वरूप पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  • इन खोजों से नये-नये देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन नये प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाये और उनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  • नई खोजों से पुराने बंदगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्वन आदि नये नगर व्यापार के केंद्र बन गये।
  • भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गये।
  • प्रत्येक यूरोपीय जाति अपने-अपने देशों के उपनिवशों में जा बसी और वहाँ व्यापार करना आरंभ कर दिया।

व्यापारी वर्ग ने मध्यवर्ग को जन्म दिया। 16वीं शताब्दी के भौगोलिक खोजों से ये महत्त्वपूर्ण परिणाम आधुनिक युग के ही प्रतीक थे। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हुए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका को विजय करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहुत-से देश अपनी स्वतंत्रता खो बैठे । केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

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प्रश्न 10.
कोलंबस कौन था? उसके द्वारा अमेरिका की खोज-यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) इटली का एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। इस आधार पर वह यह जानता था कि उसके भाग्य में पश्चिम की ओर से यात्रा करते हुए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोजना लिखा है। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ।

उसने उस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजना प्रस्तुत की। वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के प्राधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई० को जहाज द्वारा पालोस के पतन से अपने अभियान पर, निकल पड़ा। कोलंबस की यात्रा-कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (Nao) तथा दो कैरवल (Caravel) छोटे हल्के जहाज हपंटा और ‘नौना’ शामिल थे।

सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की मांग करने लगे। अतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई० को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह का गुआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। वहाँ के अरावाक लोगों ने इस बेड़े के नाविकों का स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को खाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

कोलंबस ने गुआनाहानि में स्पेन का झंडा गाड़ दिया। उसने इस द्वीप का नया नाम सैन सैल्वाडोर (San, Salvador) रखा। वहाँ उसने एक सार्वजनिक उपासना कराई और स्थानीय लोगों से बिना पूछे ही अपने आपको वहाँ का वाइसराय घोषित कर दिया। उसने वहाँ के बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन (Cubanascan) और किस्केया (Kiskeya) तक जाने के लिए इन स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

कठिनाइयाँ और वापसी यात्रा – कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटनाओं में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापस यात्रा और भी अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। इस संपूर्ण यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे।

आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं। इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया । इन यात्राओं से ये पता चला कि स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही थी कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। उसके द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ (Amerigo Vespucci) के नाम पर किया गया।

प्रश्न 11.
खोज यात्राओं ने उपनिवेशीकरण तथा दास व्यापार को किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर:
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय समुद्री परियोजनाओं ने एक बात स्पष्ट कर दी कि एक महासागर से दूसरे महासागर तक यात्रा की जा सकती है। इससे पहले तक, इनमें से अधिकांश मार्ग यूरोप के लोगों के लिए अज्ञात थे। कुछ मार्गों को तो कोई भी नहीं जानता था। तब तक कोई भी जहाज कैरीबियन या अमेरिका महाद्वीपों के जल क्षेत्रों में नहीं पहुंचा था। दक्षिणी अटलांटिक तो पूरी तरह अछूता था। किसी भी जहाज ने उसके पार जाना तो दूर, उसके पानी में भी प्रवेश नहीं किया था। न ही कोई जहाज दक्षिणी अटलांटिक से प्रशांत महासागर या हिंद महासागर तक पहुँचा था।

15वीं शताब्दी के अंतिम और 16वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में ये सभी साहसिक कार्य सफलतापूर्वक किए गए। प्रारंभिक समुद्री यात्रियों के अतिरिक्त अन्य यूरोपवासियों के लिए भी अमेरिका की खोज के दीर्घकालीन परिणाम निकले। सोना-चाँदी की बाढ़ ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण में वृद्धि की। 1560 से 1600 ई० तक सैकड़ों जहाज प्रति वर्ष दक्षिणी अमेरिका की खानों से चाँदी स्पेन में लाते रहे। परंतु स्पेन और चुर्तगाल को इसका अधिक लाभ नहीं मिला।

इसका कारण यह था कि उन्होंने अपने व्यापार या व्यापारी जहाजों के बेडे का विस्तार करने में इस धन को नहीं लगाया। उनकी बजाय इसका लाभ फ्रांस, बेल्यिजम, हालैंड आदि देशों ने उठाया। उनके व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूंजी कंपनियां बनाई और अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए । उन्होंने उपनिवेश स्थापित करकं यूरोपवासियों को नयी दुनिया में पैदा होने वाली फसलों तंबाक, आलू, गन्ना, कैकाओं (Cacao) और रबड़ आदि से परिचित कराया।

इसके बाद ये फसलें भारत तथा अन्य देशों में ले जाई गई। उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए –

  • मार – काट के कारण मूल निवासियों को जनसंख्या कम हो गई।
  • उनकी जीवन – शैली का विनाश हो गया।
  • उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

इन मुठभेड़ों की बर्बरता का एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि हारे हुए लोगों को दास बना लिया जाता था। इसके साथ-साथ वहाँ उत्पादन की पूंजीवाद प्रणाली का प्रादुभाव हुआ। काम की परिस्थितियाँ भयावह थीं। परंतु स्पेनी मालिकों का मानना था कि उनके आर्थिक लाभ के लिए इस प्रकार का शोषण अत्यंत आवश्यक है।

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प्रश्न 12.
दास-व्यापार का वर्णन करते हुए यह बताइए कि दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क दिए गए?
उत्तर:
1601 ई० में, स्पेन के फिलिप द्वितीय ने सार्वजनिक रूप से बेगार की प्रथा पर रोक लगा दी। परंतु एक गुप्त आदेश द्वारा उसने इसे चालू रखने की व्यवस्था भी कर दी। 1609 ई० में एक काननू बनाया गया जिसके अंतर्गत ईसाई और गैर-ईसाई सभी प्रकार के स्थानीय लोगों को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई। इससे यूरोप से अमेरिका में आकर बसे लोग नाराज हो गए। उन्होंने दो साल के भीतर ही राजा को यह कानून हटाने और दास बचाने की प्रथा को चालू रखने के लिए मजबूर कर दिया।

दास व्यापार-अब नयी-नयी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गई। जंगलों को साफ करके प्राप्त की गई भूमि पर पशुपालन किया जाने लगा। 1700 ई० में सोने की खोज के बाद खानों का काम जोरों से चल पड़ा। इन कार्यों के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। यह भी स्पष्ट था कि स्थानीय लोग दास बनने का विरोध करेंगे। अब यही विकल्प बचा था कि दास अफ्रीका से मंगवाए जाएँ। 1550 ई० के दशक से 1880 ई० के दशक तब ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी दासों का आयात किया गया। 1750 ई० में कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास हजार-हजार दास होते थे।

दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में तर्क-दास प्रथा के उन्मूलन के बारे में 1780 ई० – के दशक में हुए वाद-विवाद में कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि यूरोपवासियों के अफ्रीका में आने से पहले भी वहाँ दास प्रथा प्रचलित थी। यहाँ तक कि पंद्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका में स्थापित किए जाने वाले राज्यों में भी अधिकांश मजदूर-वर्ग दासों का ही था। उन्होंने यह भी बताया था कि यूरोपीय व्यापारियों को युवा स्त्री-पुरुषों को दास बनाने में स्वयं अफ्रीकी लोग भी सहायता देते थे। बदले में यूरोपीय व्यापारी उन अफ्रीकावासियों को दक्षिणी अमेरिका से आयात किए गए खाद्यान्न देते थे। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में दक्षिणी अमेरिका के उपनिवशों में आकर बसे यूरोपीय लोगों ने स्पेन और पुर्तगाल के शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस प्रकार ये उपनिवेश स्वतंत्र देश बन गए।

प्रश्न 13.
माया सभ्यता का वर्णन करें।
उत्तर:
ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य मैक्सिको में माया सभ्यता उन्नति की ओर अग्रसर थी। अमेरिका महादेश में आरंभिक सभ्यताओं में यह सभ्यता काफी विकसित थी। यह सभ्यता कृषि प्रधान थी। माया लोग मक्के उपजाया करते थे। उनके धार्मिक उत्सवों का संबंध मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े थे। वे अधिशेष उत्पादन करते थे। माया समाज विभिन्न वर्गों में बँटा था।

शासक वर्ग प्रायः भोग विलास का जीवन जीते थे। पुरोहित वर्ग का समाज में विशेष महत्त्व था क्योंकि यह सभ्यता धर्म प्रधान थी। कृषक वर्ग बड़ी संख्या में थे और यही मुख्य कर-दाता वर्ग थे। माया लोगों ने वस्तु, कला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कुछ उपलब्धियाँ हासिल .. की थी। उनकी लिपि चित्रात्मक थी, जिस लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 14.
दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। [B.M.2009]
उत्तर:
इतिहासकारों ने दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के सम्बन्ध में काफी अनुसंधान किये हैं। दक्षिणी अमेरिका की संस्कृतियों के नगरे में जो जानकारी मिलती है इनमें से 12वीं शताब्दी में एजटेक लोगों की सभ्यता काफी महत्त्वपूर्ण थी। उनका समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक रहता था। समाज में व्यापारियों का भी स्थान काफी महत्त्वपूर्ण था। भूमि उपजाऊ नहीं थी। वे लोग मक्का, आलू और अन्य फसलें उपजाते थे।

दक्षिणी अमेरिका में ही माया सभ्यता के बारे में जानकारी मिलती है। माया सभ्यता के लोगों के समाज में भी पुरोहितों का काफी उच्च स्थान होता था। वे भी मुख्यतः मक्का का उत्पादन करते थे, जो उनके किलों से स्पष्ट होता है। उत्तरी अमेरिका में मिलने वाली सबसे पुरानी मानव कृति एक तीर की नोंक है जो लगभग 11000 वर्ष पहले की है। आरंभिक मूल के लोग नदी घाटी के क्षेत्र में रहा करते थे। वे मक्का एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियों उपजाते थे।

मांस, मछली भी खाया करते थे। शिकार उनके भोजन प्राप्त करने के तरीके में मुख्य होता था। वे कई भाषाएँ बोलते थे। किन्तु लिपि विकसित नहीं कर पाये थे। धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिका में यूरोपियनों का आगमन और वर्चस्व बढ़ने लगा जिससे मूल निवासियों की संस्कृति कमजोर पड़ने लगी।

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प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय की मुख्य विशेषताएँ बताइए। उनकी जीवन शैली का अंत किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और वृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। कैरिब नामक एक बूंखार कबीले ने उन्हें लघु ऐटिलीज प्रदेश से खदेड़ दिया था। अरावाकी लोग खेती तथा शिकार करके और मछली पकड़कर अपना जीवन निर्वाह करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू और कंदमूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति-अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो । वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animists) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक समाज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

अरावाकी लोगों का यूरोपियों से संपर्क तथा उनके जीवन का अंत-अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भांति सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न होते थे क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अरावाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सोने की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदा तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया। इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: स्पेनी लोगों के संपर्क में आने के बाद लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाक और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 16.
आदि अमेरिका की प्रमुख सभ्यताओं की मुख्य-मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदि अमेरिका में यों तो अनेक सभ्यताएँ फली-फूली परंतु इसमें से तीन सभ्यताएँ प्रमुख है-माया सभ्यता, एजटेक सभ्यता तथा इंका सभ्यता।
(क) माया सभ्यता – माया सभ्यता का उदय 1100 ई० के लगभग हुआ। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग में फैली हुई थी। फिर भी इन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण उपलिब्धियां प्राप्त की। माया सभ्यता की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –

  • ये लोग अनाज के खेतों के पास बस्तियों में रहते थे। उनके भोजन में मक्का, सेम, आल. पपीता, स्वकाश तथा मिर्च शामिल थे। वे सूती वस्रों का प्रयोग करते थे। वे चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग भी करते थे।
  • इनका मुख्य व्यवसाय कृषि था। भोजन के लिए अधिक-से-अधिक मक्का उगाने के उद्देश्य से ये अपने देवताओं को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते थे।
  • वे अनेक प्रकार के धार्मिक कृत्यों और कर्मकांडों में विश्वास रखते थे। उनका एक धार्मिक कृत्य रबड़ की गेंद का खेल था। उनके
  • अनेक देवता थे जिनमें अग्नि देवता और मक्का देवता मुख्य थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि चढ़ायी जाती थी।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। कहीं-कहीं स्वरों का प्रयोग भी होता था।
  • उन्होंने अनेक भव्य पिरामिड, चौक, वेधशालाएँ तथा मंदिर बनाए। वे मूर्तिकला और चित्रकला में भी बड़े निपुण थे।
  • इन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया जिसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे।
  • उन्होंने गणित के ज्ञान, हेराग्लिफिक लेखन और कागज के प्रयोग में भी निपुणता दिखायी।

(ख) एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग, जिन्हें टेनोका भी कहते हैं टेनोक्ट्टिलान, टलाटेलोको नाम की दो राजधानियाँ बसायीं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं –

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवता और अन्न देवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननो मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

(ग) इंका सभ्यता – इस सभ्यता के निर्माता इंका लोग थे। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दियों के बीच दक्षिण अमेरिका के एडियन क्षेत्र में अपनी सभ्यता को विकसित किया। इस सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थी

  • इंका लोगों ने विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसमें अनेक बड़े नगर थे। कुज्को नगर इस साम्राज्य का मुख्य केंद्र था। सारा साम्राज्य
  • चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन पुरुष शासन करता था।
  • उन्होंने नगरों में भव्य किलों, सड़कों और मंदिरों का निर्माण किया। वे सीढ़ीदार खेत बनाकर आलू, शकरकंद आदि की खेती करते थे।
  • अनाज को बड़े-बड़े सरकारी गोदामों में संकट के लिए सुरक्षित रखा जाता था।
  • कुछ लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने, कपड़ा बनाने और लामा तथा अल्पाका से ऊन प्राप्त करने के व्यवसाय भी अपनाए हुए थे।
  • इंका लोग सोने, चाँदी और ताँबे को गलाकर उनके आभूषण बनाते थे।
  • अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए काँसा प्रयोग में लाया जाता था।
  • उन्होंने चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में भी उन्नति की।
  • 16वीं शताब्दी के मध्य तक अमेरिका की आदि सभ्यताओं का अंत हो गया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्वाहिली क्या है?
(क) भाषा
(ख) तटबंध
(ग) राज्य
(घ) धर्म
उत्तर:
(क) भाषा

प्रश्न 2.
झूलते बाग किस सभ्यता की विशेषता थी?
(क) इंका
(ख) पेरू
(ग) हड़प्पा
(घ) आर्य
उत्तर:
(क) इंका

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प्रश्न 3.
कुश साम्राज्य का उदय कब हुआ?
(क) 1000 ई०पू०
(ख) 2000 ई०पू०
(ग) 3000 ई०पू०
(घ) 4000 ई०पू०
उत्तर:
(क) 1000 ई०पू०

प्रश्न 4.
ब्राजील का नाम किस पर पड़ा?
(क) पशुओं
(ख) मानव
(ग) भूमि
(घ) पेड़
उत्तर:
(घ) पेड़

प्रश्न 5.
दिशासूचक यंत्र का आविष्कार कब हुआ?
(क) 1380
(ख) 1370
(ग) 1360
(घ) 1350
उत्तर:
(क) 1380

प्रश्न 6.
तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया को कब जीता?
(क) 1653
(ख) 1553
(ग) 1453
(घ) 1353
उत्तर:
(ग) 1453

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प्रश्न 7.
पुर्तगाल के किस राजकुमार को ‘नाविक’ कहा जाता था?
(क) फ्रेडरिक
(ख) हेनरी
(ग) ड्यूक
(घ) विलियम
उत्तर:
(ख) हेनरी

प्रश्न 8.
1410 ई० में लिखी गई पुस्तक ‘इमगो मुंडी’ (डि एली द्वारा) किस विषय की है?
(क) भूगोल
(ख) इतिहास
(ग) जीव विज्ञान
(घ) रसायन विज्ञान
उत्तर:
(क) भूगोल

प्रश्न 9.
बाजामार क्या है?
(क) गहरा समुद्र
(ख) छिछला समुद्र
(ग) गहरी खाई
(घ) छिछली खाई
उत्तर:
(ख) छिछला समुद्र

प्रश्न 10.
कोलम्बस ने स्पेन का झंडा कहाँ गाड़ा था?
(क) क्यूबा
(ख) गुआनाहानि
(ग) किस्केया
(घ) इंडीज
उत्तर:
(ख) गुआनाहानि

प्रश्न 11.
इंडीज की खोज किसने की?
(क) मार्कोपोलो
(ख) वास्कोडिगामा
(ग) कोलम्बस
(घ) डिएले
उत्तर:
(ग) कोलम्बस

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प्रश्न 12.
जिगुरात क्या था?
(क) एक सीढ़ीदार मीनार
(ख) कब्रगाह
(ग) मंदिर
(घ) स्नानागार
उत्तर:
(क) एक सीढ़ीदार मीनार

प्रश्न 13.
सोने की खानों में कार्य करने हेतु दास कहाँ से आते थे?
(क) एशिया से
(ख) उत्तरी अमेरिका से
(ग) दक्षिणी अमेरिका से
(घ) अफ्रीका से
उत्तर:
(घ) अफ्रीका से

प्रश्न 14.
गोल्डरश संयुक्त राज्य अमेरिका के किस राज्य से संबंधित है?
(क) ओहियो
(ख) सैनफ्रासिको
(ग) न्यूयार्क
(घ) कैलिफोर्निया
उत्तर:
(घ) कैलिफोर्निया

प्रश्न 15.
तुर्कों के द्वारा कुस्तुंतुनिया का पतन कब हुआ?
(क) 1421 ई०
(ख) 1443 ई०
(ग) 1453 ई०
(घ) 1481 ई०
उत्तर:
(ग) 1453 ई०

प्रश्न 16.
दुनिया की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?
(क) गंगा
(ख) नील
(ग) आमेजन
(घ) मिसीमिपी
उत्तर:
(ग) आमेजन

प्रश्न 17.
सूडानी सभ्यता का केन्द्र नहीं था ………………..
(क) डेन्यूब
(ख) घाना
(ग) माली
(घ) बोनू
उत्तर:
(क) डेन्यूब

प्रश्न 18.
माया पंचांग में प्रत्येक मास कितने दिन का होता था?
(क) 20 दिन
(ख) 24 दिन
(ग) 21 दिन
(घ) 22 दिन
उत्तर:
(क) 20 दिन

प्रश्न 19.
माया लोगों के पंचांग में वर्ष में कितने दिन होते थे?
(क) 365
(ख) 365.5
(ग) 367
(घ) 161
उत्तर:
(क) 365

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प्रश्न 20.
पिजारो ने इंका राज्य को जीता …………………
(क) 1532
(ख) 1533
(ग) 1534
(घ) 1535
उत्तर:
(क) 1532

प्रश्न 21.
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ……………….
(क) 1600
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1600

प्रश्न 22.
डच इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ………………..
(क) 1602
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1602

प्रश्न 23.
कोलम्बस ने क्यूबा पर हक जमाया ………………..
(क) 1492
(ख) 1493
(ग) 1494
(घ) 1495
उत्तर:
(क) 1492

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भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गम्भीरता और चुस्त शैली के लिए यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों (पदों) के प्रयोग में संयम से काम लें, ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से-थोड़े शब्दों में व्यक्त कर सके। ‘गागर में सागर भरना’ कहावत यहीं चरितार्थ होती है । समास, तद्धित और कृदन्त वाक्यांश या वाक्य एक शब्द या पद के रूप में संक्षिा किये जा सकते हैं। ऐसी हालत में मूल वाक्यांश या काव्य के शब्दों के अनुसार ही एक शब्द या पद का निर्माण होना चाहिए । दूसरी बात यह कि वाक्यांश को संक्षेप में सामासिक-पद का भी रूप दिया जाता है । कुछ ऐसे लाक्षणिक पद या शब्द भी हैं, जो अपने में पूरे एक वाक्य या वाक्यांश का अर्थ रखते हैं। निम्नलिखित वाक्यखण्डों के संक्षिप्त शब्दरूपों को याद रखना चाहिए, तभी हम थोड़े में अधिक-से-अधिक लिखने में समर्थ हो सकेंगे। अभ्यास के लिए कुछ उदाहरण यहाँ दिये जाते हैंवाक्यखण्ड
एक शब्द जिसके पाणि (हाथ) में चक्र है –

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मुहावरे-जब कोई पद या पदबंध अपना साधारण (कोशीय) अर्थ न देकर विशेष अर्थ देता है तो उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे “सिर हथेली पर रखना’ का सामान्य अर्थ सम्भव नहीं है क्योंकि कोई भी अपना सिर हथेली पर नहीं रखता। अतः इसका लाक्षणिक (रूढ़) अर्थ लिया जाता है-बड़े से बड़े बलिदान के लिए प्रस्तुत होना। मुहावरे मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति को अधिक चुस्त, सशक्त, आकर्षक और प्रभावी बनाते हैं।

लोकोक्ति-यह ‘लोक + उक्ति’ से बना है जिसका अर्थ है-जनसाधारण में प्रचलित कथन। लोकोक्तियों का निर्माण जीवन के अनुभवों के आधार पर होता है। अपने कथन की पुष्टि करने के लिए उदाहरण देने या अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लोकोक्तियों का प्रयोग किया जाता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

यहाँ यह बात ध्यान रखने की है कि मुहावरा वाक्य का अंग बनकर आता है किन्तु लोकोक्ति का स्वतंत्र प्रयोग होता है। दूसरे शब्दों में इस प्रकार भी कह सकते हैं कि मुहावरे का वाक्य-प्रयोग होता है, लोकोक्ति वाक्य के अंत में प्रयुक्त होती हैं।

मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर-बहुत-से लोग मुहावरे तथा लोकावित में कोई अंतर ही नहीं समझते। दोनों का अंतर निम्नलिखित बातों से स्पष्ट है-

क) लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जो भूतकाल का लोक-अनुभव लिए हुए होती है, जबकि मुहावरा अपने रूढ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है।
(ख) लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है, जबकि मुहावरा वाक्य का अंश होता है।
(ग) पूर्ण वाक्य होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र एवं अपने-आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है, जबकि मुहावरा किसी वाक्य का अंश बनकर आता है।
(घ) पूर्ण इकाई होने के कारण लोकोक्ति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता, जबकि मुहावरे में वाक्य के अनुसार परिवर्तन होता है।

मुहावरे

1. अँगूठा दिखाना (साफ इनकार कर देना)-जब मैंने मंदिर के लिए सेठ जी से दान माँगा तो उन्होंने अंगूठा दिखा दिया।
2. अपना उल्लू सीधा करना (स्वार्थ सिद्ध करना)-आजकल अधिकांश राजनेता गद्दी मिलते ही अपना उल्लू सीधा करने लगते हैं।
3. अगर-मगर करना (टाल-मटोल करना)-जब भी मैं अपने मित्र से पुस्तक वापस माँगता हूँ तो वह अगर-मगर करने लगता है।
4. अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना)-तुम्हारी अक्ल पर तो पत्थर पड़ गए हैं, बार-बार समझाने पर भी तुम नहीं मातने।
5. अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारना (स्वयं अपनी हानि करना)-दुष्ट से झगड़ा मोल लेकर मैंने अपने पाँव पाप कुल्हाड़ी मार ली।
6. अपनी खिचड़ी अलग पकाना (साथ मिलकर न रहना)-भारत के मुसलमान व राजपूत अपनी खिचड़ी अलग पकाते रहे, इसीलिए विदेशी लोग यहाँ शासन करने में सफल हो गए।
7. अक्ल का दुश्मन (मुर्ख)-हो तुम अक्ल के दुश्मन ही, जो थोड़ी-सी पैतृक-संपत्ति के लिए भाई के प्राण लेने की सोच रहे हो।
8. अंधेरे घर का उजाला (इकलौता पुत्र, जिस पर आशाएँ टिकी हों)-मोहन की मृत्यु उसके पिता से सही नहीं जाएगी। वह उनके अंधेरे घर का उजाला था।
9. अड़ियल टटू (हठी)-वत्सराज को समझाना बहुत कठिन है, वह अड़ियल टटू है।
10. अंधे की लकड़ी (एकमात्र सहारा)-सेठ जी के मरने के पश्चात् अब यह लड़का ही सेठानी जी के लिए अंधे की लकड़ी है।
11. अपने मुँह मियाँ मिठू बनना (अपनी प्रशंसा स्वयं करना)-आजकल के नेता अपने मुँह मिठू बनने में तनिक संकोच का अनुभव नहीं करते। 12. अपने पैरों पर खड़ा होना (आत्म-निर्भर रहना)-लालबहादुर शास्त्री ने बाल्यावस्था से ही अपने पैरों पर खड़ा होना सीख लिया था। ।
13. अपना ही राग अलापना (अपनी ही बात करते होना)–तुम सदैव अपना ही राग अलापते रहते हो, कभी दूसरों की भी सुन लिया करो।
14. अठखेलियाँ सूझना (मजाक करना)-मैं संकटों के जाल में फँसा हूँ और तुम्हें अठखेलियाँ सूझ रही हैं।
15. आँख दिखाना (गुस्से से देखना)-जो मुझे आँख दिखाएगा, मैं उसकी आँख फोड़ दूंगा।
16. आँखें खुलना (होश आना)-जब सभी कुछ जुए में लुट गया, तब कहीं, जाकर उसकी आँखें खुली।
17. आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना)-शिवाजी औरंगजेब की आँखों में धूल झोंककर उसके चंगुल से बच निकले।
18. आँखों का तारा (बहुत प्यारा)-श्याम अपनी माँ की आँखों का तारा है।
19. आँखें बंद करना (अनदेखा करना)-विदेशी शक्तियाँ देश को लूटे जा रही हैं, तो भी हमारे नेता आँखें बंद करके अपनी राजनीति का खेल खेल रहे हैं।
20. आँखें फेर लेना (प्रतिकूल होना, पहले-सा प्रेम न रखना)-जब सेमेरी नौकरी छूटी है, दोस्तों-मित्रों की तो क्या; घरवालों ने भी मुझसे आँगने फेर
ली हैं।
21. आँखें नीली-पीली करना (नाराज होना)-तुम व्यर्थ ही आँखें नीली-पीली कर रहे हो, मैंने कोई अपराध नहीं किया है।
22. आँखें चुरा लेना (अनदेखा करना)-ऋणी सदा ऋणदाता से आँखें चुराने का प्रयास करता है।
23. आँखों से गिरना (सम्मान नष्ट होना)–अपराधी व्यक्ति समाज की नहीं स्वयं अपनी आँखों से भी गिर जाता है।
24. आँखें बिछाना (बहुत आदर करना)- श्रद्धालु जन अपने नेता की राह में आँखें बिछाए बैठे हैं और नेताजी जनता को उल्लू बनाने के चक्कर में हैं।
25. आँसू पोंछना (सांत्वना देना)-कश्मीर से लाखों हिन्दूजन उजड़कर बर्बाद होने के बावजूद कोई भी नेता उनके आँसू तक पोंछने नहीं गया। 26. आँसू पीकर रह जाना (दुख को चुपचाप सहना)-अपने बंधु-बांधवों को इस प्रकार काल का ग्रास बनते देखकर आँसू पीकर रह जाने के अतिरिक्त उसके पास चारा भी क्या था ?
27. आँच न आने देना (तनिक भी कष्ट न होने देना)-तुम निर्भय होकर अपने कर्तव्य का पालन करो, मैं तुम पर आँच न आने दूंगा।
28. आसमान पर चढ़ना (बहुत अभिमान करना)-रमेश परीक्षा में प्रथम क्या आया, उसका दिमाग आसमान पर चढ़ गया है।
29. आकाश के तारे तोड़ना (असम्भव काम करना)-शादी से पहले जो प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए आकाश के तारे तोड़ने को तैयार था, वह अब उसे काटने दौड़ता है।
30. आकाश-पाताल का अन्तर (बहुत अन्तर)-महात्मा गाँधी और सुभाषचन्द्र बोस के स्वभाव में आकाश-पाताल का अन्तर था।
31. आकाश से बातें करना (बहुत ऊँचा होना)-कुतुबमीनार आकाश से बातें करती है।
32. आग बबूला होना (गुस्से से भर जाना)-इस समय आग बबूला होने बजाय शांति से इस समस्या का समाधान ढूँढने का प्रयत्न करो।
33. आकाश को छूना (बहुत ऊँचा होना)-दिल्ली की भव्य अट्टालिकाएँ आकाश को छूती-सी नजर आती हैं।

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34. आसमान सिर पर उठाना (बहुत शोर करना)-शिक्षक के वर्ग से प्रस्थान करते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठाना शुरू कर दिया।
35. आकाश-पाताल एक करना (बहुत परिश्रम करना)-परीक्षा का समय समीप आने पर छात्र आकाश-पाताल एक कर देते हैं।
36. आग में घी डालना (क्रोध को बढ़ाना)-वह पहले ही क्रोध से लाल हो रहा है, उसे छेड़कर तुम आग में घी डाल रहे हो।
37. आटे-दाल का भाव मालूम होना (कष्ट अनुभव होना)-पिता ने पुत्र से कहा कि जब अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा तब तुझे आटे-दाल का भाव मालूम होगा।
38. आपे से बाहर होना (बहुत क्रोधित होना)-बच्चे की साधारण-सी भूल पर आपे से बाहर होना उचित नहीं।
39. आगे-पीछे फिरना (चापलूसी करना)-अफसरों के आगे-पीछे फिर कर अपना काम निकालने में रामलाल बड़ा दक्ष है।
40. आस्तीन का साँप (धोखा देने वाला साथी)-सुभाष से सावधान रहना, वह आस्तीन का साँप है। तुम्हें मीठी-मीठी बातों में डस लेगा।
41. ओखली में सिर देना (जानबूझ कर विपत्ति में पड़ना)-मैंने उसे चलती बस में चढ़ने से खूब रोका परन्तु कोई ओखली में सिर देना ही चाहे तो मैं क्या कर सकता हूँ।
42. इधर-उधर की हाँकना (गप्पें मारना)-इधर-उधर की हाँकने से काम नहीं चलता, काम तो करने से ही होता है।
43. ईंट का जवाब पत्थर से देना (दुष्टता का उत्तर और अधिक दुष्टता से देना)-यदि पाकिस्तान ने पुनः हमारे देश पर आक्रमण करने का दुस्माहस किया ‘ तो हम ईंट का जवाब- पत्थर से देंगे।
44. ईद का चाँद (बहुत कम दिखाई देने वाला)-मित्र, आजकल तो तुम ईद के चाँद हो गए हो; कभी मिलते तक नहीं। ‘
45. ईंट से ईंट बजाना (समूल नष्ट-भ्रष्ट कर देना)-शिवाजी ने मुगलों की ईंट से ईंट बजाने की प्रतिज्ञा की थी।
46. ऊँगली उठाना (लाँछन लगाना)-सीता-सावित्री जैसी देवियों के चरित्र पर ऊँगली उठाना अनुचित है।
47. ऊँगली पर नाचना (वश में रखना)-आजकल की पलियाँ अपने पतियों को ऊँगली पर नचाती हैं।
48. उल्टी गंगा बहाना (विपरीत कार्य करना)-लोग प्रातः जल्दी उठकर पढ़ते हैं, तुम रात-भर पढ़कर प्रातः सोते हो; यह उल्टी गंगा बहाने की क्या सूझी?
49. एड़ी चोटी का जोर लगाना (बहुत प्रयत्न करना)-तुम एड़ी चोटी का जोर लगाकर भी परीक्षा में मुझसे अधिक अंक नहीं पा सकते।।
50. कंठ का हार होना (बहुत प्रिय होना)-राजा दशरथ कैकेयी को कंठ का हार समझते थे, परन्तु उसी ने उनकी पीठ में छरा घोंप दिया।
51. कंगाली में आटा गीला होना (अभाव में अधिक हानि होना)-उस दुखिया विधवा के घर पर चोरी होना तो कंगाली में आटा गीला होना है।
52. कमर कसना (तैयार होना)-कमर कस लो; पता नहीं, कब शत्रुओं से लोहा लेना पड़े।
53. कफन सिर पर बाँधना ( मरने के लिए तैयार होना)-वीर सिर पर कफन बाँधकर युद्ध की आग में कूद पड़ते हैं।
54. कठपुतली होना (पूर्णत: किसी के वश में होना)-प्राय: अच्छे-से-अच्छे पुरुष शादी के बाद पत्नी के हाथों की कठपुतली हो जाते हैं।
55. कलई खुलना (भेद खुल जाना)-यदि एक भी अपराधी हाथ में आ जाएगा तो मुम्बई बम-कांड की कलई खुल जाएगी।
56. कलेजे का टुकड़ा (बहुत प्रिय होना)-माँ बच्चे को अपने कलेजे का टुकड़ा मानती है, फिर भी बच्चे माँ का सम्मान नहीं करते।
57. कलेजा फटना (बहुत दुख होना)-पत्नी की मृत्यु का समाचार सुनकर । पति का कलेजा फट गया।
58. कलेजे पर साँप लोटना (ईर्ष्या से जलना)-जब से मेरे लड़के की नौकरी लगी है, तब से मोहन की माँ के कलेजे पर साँप लोटने लगा है।
59. कलेजा मुँह को आना (अत्यधिक व्याकुल होना)-लक्षमण तथा सीता सहित श्रीराम को वन में जाते देखकर अयोध्यावासियों का कलेजा मुँह को आ गय था।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

60. कलेजा ठंडा होना (संतोष होना)-जिस दिन तुमसे मैं अपनी पराजय का बदला ले लूँगा, उस दिन मेरा’ कलेजा ठंडा होगा।
61. कमर टूटना (निराश होना)-व्यापार में लाखों रुपये की हानि का समाचार पाकर सेठ घसीटामल की कमर टूट गई।
62. कान का कच्चा होना (बिना सोचे समझे बात पर विश्वास करना)-भई, घीसू की बात प्रमाणिक नहीं हो सकती।
63. काम आना (वीरगति प्राप्त करना)-गुरु गोविन्द सिंह के चारों पुत्र युद्ध में काम आ गए तो भी उनका उत्साह मंद नहीं हुआ।
64. कान पर जूं न रेंगना (बार-बार कहने पर भी असर न होना)-बार- बार पढ़ने के लिए कहने पर भी तुम्हारे कान पर जूं नहीं रेंगती।
65. कान भरना (चुगली करना)-किसी ने मेरे विरुद्ध मालिक के कान भर दिए, अत: मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है।
66. कानों-कान खबर न होना (बिल्कुल खबर न होना)-नेताजी सुभाषचन्द्र बोस घर छोड़कर चले गए परन्तु किसी को कानों-कान खबर न हुई।
67. काया पलट होना (बिल्कुल बदल जाना)-घर के वातावरण से निकलकर छात्रावास का नियमित जीवन जीने से छात्रों की काया पलट हो जाती है।
68. कोल्हू का बैल (लगातार काम में लगे रहना)-कोल्हू का बैत बनने पर भी मजदूर को पेट भर भोजन नहीं मिल पाता।
69. किताब का कीड़ा (हर समय पढ़ते रहना)-किताब का कीड़ा बनने से स्वास्थ्य नष्ट हो जाता है, तुम्हें थोड़ा खेलना भी चाहिए।
70. किरकिरा होना (मजा बिगड़ जाना)-तुम्हारे विवाह में अचानक मेरी तबियत बिगड़ जाने से सारा मजा किरकिरा हो गया।
71. खरी-खोटी सुनाना (बुरा-भला कहना)-खरी-खोटी सुनाने से क्या लाभ, शांति से समझौता कर लो।
72. खटाई में पड़ना (काम में अड़चन आना)-बिजली न होने के कारण कारखानों का उत्पादन-कार्य खटाई में पड़ गया है।
73. खाक में मिल जाना (नष्ट हो जाना)-हिन्दू जाति की गरिमा उसके असंगठित होने के कारण खाक में मिल गई।
74. खाला जी का घर (आसान काम)-एम.ए. की परीक्षा पास करना कोई खाला जी का घर नहीं है।
75. खून खौलना (जोश में आना)-निर्दोष को पिटते देखकर मेरा खून खौल उठा।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

76. खून का यूंट पीना (अपने क्रोध को भीतर ही भीतर सहना)-पुलिस के द्वारा अपमानित होने पर राम खून का चूंट पीकर रह गया।
77. खिल्ली उड़ाना (हँसी उड़ाना)-अपंग को देखकर खिल्ली उड़ाना भले लोगों का काम नहीं
78. गड़े मुर्दे उखाड़ना (पिछली बातें याद करना)-अगर गड़े मुर्दे उखाड़ोगे तो घर में शांति नहीं रह पाएगी।
79. गुलछर्रे उड़ाना (मौज उड़ाना)-वह अपने पिता के परिश्रम से अर्जित की हुई सम्पत्ति के बलबूते पर गुलछर्रे उड़ा रहा है।
80. गर्दन पर सवार होना (पीछा न छोड़ना)-जब तक उसका काम नहीं। कर दोगे, वह तुम्हारी गर्दन पर सवार रहेगा।
81. गले पड़ना (मुसीबतें पीछे पड़ना)-जब से यह दूरदर्शन की बीमारी हमारे गले पड़ी है, तब से बच्चे इसी से चिपके रहते हैं।
82. गागर में सागर भरना (बड़ी बात को थोड़े शब्दों में कहना)-बिहारी के संबंध में वह उक्ति पूर्णतया उचित है कि उन्होंने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
83. गाल बजाना (बढ़ा-चढ़ाकर अपनी प्रशंसा करना)-गाल बजाने के बजाय कुछ करके दिखाओ।
84. गिरगिट की तरह रंग बदलना (सिद्धान्तहीन होना)-आजकल के नेता इतने गिर चुके हैं कि वे नित्य गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
85. गुस्सा पीना (क्रोध को रोकना)-उस समय गुस्सा पीकर मैंने स्थिति को संभाल लिया अन्यथा झगड़ा बढ़ जाता।
86. गुदड़ी का लाल (निर्धन परिवार में जन्मा गुणी व्यक्ति)-‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोप करने वाले हमारे स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री वास्तव में गुदड़ी के लाल थे।
87. गुड़ गोबर का देना (बनी बात बिगाड़ देना)-लेट-लतीफ व्यक्ति महत्वपूर्ण कार्य का भी गुड़ गोबर कर देते हैं।
88. घड़ों पानी पड़ जाना (बहुत शर्मिंदा होना)-अपनी ईमानदारी की बातें करने वाले नेताजी को जब मैंने रिश्वत लेते हुए पकड़ा तो उन पर घड़ों पानी पड़ गया।
89. घर का चिराग (घर की आशा)-बच्चे ही घर का चिराग होते हैं।
90. घाव पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना)-वह अनुत्तीर्ण होने के कारण पहले से ही दुखी है, तुम जली-कटी सुनाकर उसके घाव पर नमक छिड़क रहे हो।
91. घाट-घाट का पानी पीना (अत्यन्त अनुभवी होना)-तुम क्या उसे अनाड़ी समझते हो ? उसने भी घाट-घाट का पानी पी रखा है। ।
92. घुटने टेकना (हार मान लेना)-महाराणा प्रताप ने जंगलों में भटकना स्वीकार किया, किन्तु शत्रु के सम्मुख घुटने टेकना स्वीकार नहीं किया।
94. घोड़े बेचकर सोना (निश्चित होना)-दिर-भर थकने के बाद मजदूर रात को घोड़े बेचकर सोते हैं।
95. चल बसना (मर जाना)-मेरे दादा जी कल चल बसे थे।

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96. चाँद पर थूकना (निर्दोष पर दोष लगाना)-अरे, उस संत-महात्मा पर व्यभिचार का आरोप लगाना चाँद पर थूकना है।
97. चादर से बाहर पैर पसारना (आमदनी से अधिक खर्च करना)-चादर से बाहर पैर पसारोगे तो कष्ट पाओगे।
98. चिराग तले अँधेरा (महत्वपूर्ण स्थान के समीप अपराध या दोष पनपना)-महात्मा जी के साथ रहकर भी चोरी करना वस्तुतः चिराग तले अँधेरा का होना है।
99. चिकना घड़ा (बेअसर)-अक्सर इकलौते लड़के लाड़-प्यार में बिगड़कर चिकने घड़े हो जाते हैं।
100. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (घबड़ा जाना)-जब चोर ने सामने से आते थानेदार को अपनी ओर लपकते देखा तो उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ गईं।
101. चैन की वंशी बजाना (आनन्द से रहना)-राम के राज्य में इतनी जन-सुविधाएँ थीं कि प्रजाजन चैन की वंशी बजाया करते थे।
102. छक्के छुड़ाना (हराना)-भारत ने युद्ध में पाक के छक्के छुड़ा दिए।
103. छठी का दूध याद आना (बहुत दुखी होना)-पुलिस ने चोर की ऐसी पिटाई की कि उसे छठी का दूध याद आ गया।
104. छाती पर साँप लोटना (जलना)-मझे प्रथम आया देखकर मेरी पडोसिन की छाती पर साँप लोट गया।
105. छाती से लगाना (बहुत प्यार करना)-सुदामा को देखते ही श्रीकृष्ण ने उसे छाती से लगा लिया।
106. छाती पर मूंग दलना (कष्ट पहुँचाना, सम्मुख अनुचित कार्य करना)-पिता ने नालायक पुत्र को घर से निकाल दिया, फिर भी वह उसी मुहल्ले में रहकर उनकी छाती पर मूंग दलता रहता है।
107. छिपा रुस्तम (देखने में साधारण, वास्तव में गुणी)-अरी संतोष ! तू तो छिपी रुस्तम निकली। तू इतना अच्छा गा लेती है, यह मैंने कभी सोचा भी न था।
108. छोटा मुँह बड़ी बात (अपनी सीमा से बढ़कर बोलना)-उस भ्रष्टाचारी लाला द्वारा आदर्शों पर दिया गया भाषण छोटा मुँह बड़ी बात है और कुछ नहीं।
109. जहर का यूंट पीना (अपमान सहन करना)-मेरे जीजा ने मुझ निरपराध को बुरी तरह पिटवाया परन्तु मैं अपनी बहन के हित में जहर की चूंट पीकर रह गया।
110. जान पर खेलना (जोखिम उठाना)-आजादी प्राप्त करने के लिए क्रांतिकारी वीर जान पर खेल जाते थे।
111. जूती चाटना (खुशामद करना)-अस्थायी नौकरी वालों को अपने उच्चाधिकारियों की जूतियाँ चाटनी पड़ती हैं, अन्यथा नौकरी से हाथ धो बैठने का खतरा रहता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

112. टका-सा जवाब देना (साफ इनकार करना)-मुसीबत पड़ने पर मैंने उससे थोड़ी-सी सहायता माँगी तो उसने टका-सा जवाब दे दिया।
113. टाँगे पसार कर सोना (निश्चित सोना)-परीक्षा देने के बाद छात्र टाँगे । पसार कर सोते हैं।
114. टाँग अड़ाना (व्यर्थ में दखल देना)-अपना काम करो, दूसरों के मामलों में क्यों टाँग अड़ाते हो ?
115. टालमटोल करना (बहाने बहाना)-कुछ लोगों का टालमटोल करने का स्वभाव बन जाता है।
116. टोपी उछालना (अपमानित करना)-बड़े बूढ़ों की टोपी उछालना भले लोगों का काम नहीं है।
117. ठोकरें खाना (धक्के खाना)-स्नातक होते हुए भी नौकरी के लिए ठोकरे खा रहा हूँ।
118. डींगें हाँकना (शेखियाँ जमाना)-उसे आता-जाता कुछ है नहीं, व्यर्थ में डींग हाँकता रहता है।
119. ढाक के तीन पात (कोई सुखद परिवर्तन न होना)-मैंने सोचा था कि अब जवानी में तुम्हारा स्वभाव कुछ मधुर हो गया होगा, किन्तु में देख रहा हूँ कि वही ढाक के तीन पात हैं।
120. तारे गिनना (व्यग्रता से प्रतीक्षा करना)-प्रेमी अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए दिन में तारे गिन रहा है और प्रेमिका को श्रृंगार से फुरसत नहीं।
121. तिल का ताड़ बनाना (छोटी-सी बात को बढ़ा देना)-बिना कारण माँ की तो तिल का ताड़ बनाने की आदत है।
122. तिल रखने की जगह न रहना (ज्यादा भीड़ होना)-शादी के अवसर पर घर-भर में इतने लोग इकट्ठे हो गए थे कि घर में तिल रखने की जगह नहीं रह गई थी।
123. तूती बोलना (बहुत प्रभाव होना)-स्वतंत्रता आंदोलन के समय सारे देश में महात्मा गाँधी की तूती बोलती थी।
124. थाली का बैंगन (सिद्धान्तहीन व्यक्ति)-उसे तुम अपनी पार्टी का । विश्वस्त कार्यकर्ता मत मानो, वह थाली का बैंगन है।
125. दाँतों तले अंगुली दबाना (आश्चर्यचकित होना)-भारतीय सैनिकों की वीरता के कारनामे सुनकर संसार दाँतों तले अंगुली दबाने लगा। 126. दाँत काटी रोटी होना (पक्की दोस्ती होना)-तुम मोहन और सोहन में फूट नहीं डाल सकते उनकी तो दाँत काटी रोटी है।
127. दाँत खट्टे करना ( हराना)-भारतीय सेना ने पाक सेना के दाँत खट्टे कर दिए।
128. दाल में कुछ काला (‘कुछ रहस्य होना)-दाल में कुछ काला है, तभी तो मरे समीप पहुँचते ही उन्होंने बातें करनी बंद कर दी।
129. दाल न गलना (सफल न होना)-अकबर ने अनेक चालें चलीं, परन्तु राणा प्रताप के सामने उसकी दाल न गल सकी।
130. दाहिना हाथ (बहुत बड़ा सहायक)-पंडित जवाहरलाल नेहरू । महात्मा गाँधी के दाहिने हाथ थे।
131. दिन फिरना (भाग्य पलटना)-मोहन, निराश होने की आवश्यकता नहीं है। दिन फिरते तनिक देर नहीं लगती।
132. दिन दुनी रात चौगुनी उन्नति करना ( अधिकाधिक उन्नति करना)-प्रत्येक माँ अपने बेटे को यही आशीर्वाद देती है कि बेटा दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करे।
133. दनिया से कच कर जाना (मर जाना)-संसार का प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि उसे इस दुनिया से कूच कर जाना है, फिर भी धन-संग्रह की लालसा समाप्त नहीं होती।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

134. दुम दबाकर भागना (डरकर भाग जाना)-पुलिस को आते देखकर चोर दुम दबाकर भाग गया।
135. दूध का दूध पानी का पानी (ठीक-ठीक न्याय करना)-सच्चा न्यायाधीश वही है, जो दूध का दूध पानी का पानी कर दे।
136. दूर के ढोल सुहावने लगना (पूरे परिचय के अभाव में कोई वस्तु आकर्षक लगना)-अपने देश को छोड़कर विदेशों में मत भागो। वहाँ भी कम कष्ट नहीं हैं। याद रखो, दुर के ढोल सुहावने गलते हैं।
137. दो नावों पर पैर रखना (एक साथ दो लक्ष्यों को प्राप्त करने की । चेष्ट करना)-दो नावों पर पैर रखने वाला कभी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता है।
138. धज्जियाँ उड़ाना (खंड-खंड कर देना)-सरोजिनी नायडू ने अपने वक्तव्य से अंग्रेजी के थोथे तर्कों की धज्जियाँ उड़ा डालीं।
139. धरती पर पाँव न पड़ना (अभिमान से भरा होना)-जब से सुबोध मंत्री बना है, तब से उसके पाँव धरती पर नहीं पड़ते।
140. धाक जमाना (रौब जमाना)-सरदार पटेल ने अपने परिश्रम और दृढ़ चरित्र से ऐसी धाक जमा रखी थी कि अंग्रेज सरकार भी उनका लोहा मानती थी।
141. नमक हलाल होना (कृतज्ञ होना)-राम नमक हलाल नौकर है।
142. नमक-मिर्च लगाना (बढ़ा-चढ़ाकर)-आजकल समाचार-पत्रों में नमक-मिर्च लगी हुई बातें छपी होती हैं जिससे साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठने की संभावना बनी रहती है!
143. नानी याद आना (संकट में पड़ना)-भारत-पाक युद्ध में पाक सेना को नानी याद आ गई।
144. नाक में दम करना (बहुत तंग करना)-राणा प्रताप ने अकबर की नाम में दम कर दिया।
145. नाक रखना (मान रखना)-कठिन समय में सहायता कर उसने समाज में मेरी नाक रख ली।
146. नाकों चने चबाना (बहुत तंग करना)-शिवाजी ने मुगल-सेना को अनेक बार नाकों चने चबवाए।
147. नाक कटना (इज्जत जाना)-चोरी के अपराध में अदालत की ओर से दण्डित होने पर उसकी नाक कट गई।
148, नाक-भौं चढ़ाना (घृणा प्रकट करना)-जब भी बहू घर का कोई काम करती है सास नाक-भौं चढाकर उसकी टियाँ निकालना शरू कर देती है।
149. नाक पर मक्खी न बैठने देना (अपने पर आक्षेप न आने देना):- ‘अफसर लोग चाहे कितने ही आरोपों से घिरे हों, पर वे अपनी नाक पर
मक्खी नहीं बैठने देते।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

150. नाक रगड़ना (गिड़गिड़ाकर क्षमा माँगना)-मोहन थोड़ी देर पहले
अकड़ रहा था, अब नाक रगड़ रहा है।
151. नाक में नकेल डालना (अच्छी तरह नियंत्रण में रखना)-रामलाल की पत्नी उसकी नाक में नकेल डालकर रखती है, परन्तु वह उसकी तनिक चिंता नहीं करता।
152. निन्यानवे के फेर में पड़ना (धन-संग्रह की चिंता करना)-निन्यानवे के फेर में पड़कर मैंने अनेकानेक चिंताओं को मोल ले लिया तथा समाज में बनी अपनी प्रतिष्ठा को गँवा दिया।
153. नीचा दिखाना ( पराजित करना)-पाकिस्तान ने जब कभी हमारी सीमाओं का उल्लंघन कर हम पर आक्रमण किया, हमने सदैव उसे नीचा दिखाया।
154. नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना)-बिल्ली को देखते ही चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।
155. पहाड़ टूटना (बहुत भारी कष्ट आ पड़ना)-अरे, जरा-सी खरोंच आने पर तुम तो ऐसे रो रहे हो जैसे पहाड़ टूट गया हो।
156. पर निकलना (स्वच्छंद हो जाना)-कॉलेज-जीवन में जाते ही प्रत्येक बच्चे के पर निकल आते हैं।
157. पत्थर की लकीर (पक्की बात)-मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे पत्थर की लकीर समझना।
158. पलकें बिछाना (प्रेमपूर्वक स्वागत करना)-नेहरू जी के सोनीपत आने पर नगरवासियों ने उनके स्वागत में पलकें बिछा दी।
159. पाँव उखड़ जाना (स्थिर न रहना, युद्ध में हार जाना)-शिवाजी की छापमार रणनीति से औरंगजेब की सेना के पाँव उखड़ जाते थे।
160. पाँचों ऊँगली घी में होना (बहुत लाभ होना)-जब से मेरा भाई उपमंत्री बना है, मेरी तो पाँचों ऊँगलियाँ घी में हैं।
161. पारा उतरना (क्रोध शांत होना)-मैं जानता हूँ कि माँ का पार तभी उतरेगा जब वह अपने एकाध बच्चे पर गरज-बरस लेंगी।
162. पानी-पानी होना (लज्जित होना)-पर्स खोलते हुए माँ के द्वारा देख लिए जाने पर पुत्र पानी-पानी हो गया।
163. पापड़ बेलना (कष्ट उठाना)-नौकरी पाने के लिए मैंने कितने ही पापड़ बेले परन्तु मुझे सफलता नहीं मिली।
164. पानी का बुलबुला (शीघ्र नष्ट हो जाने वाला)-साधु-संतों ने मानव-जीवन को पानी का बुलबुला बतलाकर उसकी वास्तविकता पर प्रकाश डाला है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

165. पीठ दिखाना (हार कर भागना)-भारतीय वीरों ने युद्ध में मरना सीखा है, पीठ दिखाना नहीं।
166. पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख लगना)-जब मैं निरन्तर तीन किलोमीटर की यात्रा तय करने के पश्चात घर पहुँचा, उस समय मेरे पेट में चूहे कूद रहे थे।
167. पैरों तले से जमीन निकल जाना (स्तब्ध रह जाना)-अपने भाई की हृदय-गति रूकने से मृत्यु हुई जानकर उसके पैरों तले से जमीन निकल गई।
168. प्राणों की बाजी लगाना (किसी कार्य के लिए प्राण देना)-अमर शहीद भगतसिंह ने देश की बलिवेदी पर हँसते-हँसते प्राणों की बाजी लगा दी।
169. फंक-फूंक कर कदम रखना (बड़ी सावधानी से काम करना)-व्यक्ति लाख फूंक-फूंक कर कदम रखे, परन्तु जो होनी में लिखा है; वह होकर रहता है।
170. फूटी आँख का सुहाना (जरा भी अच्छा न लगना)-जब से मुझे उसकी चुगली करने की आदत का पता चला है, वह मुझे आँख नहीं सुहाता।
171. फला न समाना (बहत खश होना)-परीक्षा में सफल होने का समाचार सुनकर कार फूला न समाया।
172. बगला भगत (धर्त आदमी)-यह साधु बगला भगत है।
173. बंदर घुड़की ( थोथी धमकी)-भारत चीन की बंदर घुड़कियों से डरने वाला नहां, सैनिक दृष्टि से अब हमारी पूर्ण तैयारी है।
174. बगलें झाँकना (निरुत्तर हो जाना)-जब मैंने रहस्य जानने के लिए उसमें घूमा-फिराकर प्रश्न पूछे, तो वह बगलें झाँकने लगा।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

175. बहती गंगा में हाथ धोना (अवसर का लाभ उठाना)-1977 के चुनावों में सरकार के विरोध की ऐसी लहर थी कि उस बहती गंगा में जो भी हाथ धो गया, वह मंत्री या नेता बन गया।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 1.
निम्न त्रिज्या वाले गोले का पृष्टीय क्षेत्रफल ज्ञास कीजिए।
(i) 10.5 cm
(ii) 5.6 cm
(iii) 14 cm
उत्तर:
(i) दिया है, गोले की प्रिग्या (r) = 10.5 cm
अतः गोले का पुष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 10.5 × 10.5
= 1386 cm².

(ii) दिया है, गोले की त्रिज्या (r) = 5.6 cm
अतः गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 5.6 × 5.6
= 394.24 cm².

(iii) दिया है, गोले की त्रिज्या (r) = 14 cm
अतः गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14
= 2464 cm².

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 2.
निम्न व्यास वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:
(i) 14 cm
(i) 21 cm
(iii) 3.5 cm
उत्तर:
(i) दिया है. व्यास = 14 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 7 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 = 616 cm²

(ii) दिया है. व्यास = 21 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 10.5 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 10.5 × 10.5 = 1386 cm²

(iii) दिया है. व्यास = 3.54 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 1.75 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 = 38.5 cm²

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प्रश्न 3.
10 cm त्रिज्या वाले एक अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए।)
उत्तर:
दिया है, त्रिज्या (r) = 10 m
अन: अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 3πr² = 3 × 3.14 × 10 × 10
= 942 cm²

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प्रश्न 4.
एक गोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर, आकी त्रिज्या 7 cm से 14 cm हो जाती है। इन दोनों स्थितियों में, गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना हवा भरने से पहले त्रिज्या r1 = 7 cm
तथा हवा भरने के बाद त्रिज्या r2 = 14 cm
पृष्टीय क्षेत्रफलों का अनुपात
= \(\frac{4πr_1^2}{4πr_2^2}\) = \(\frac{r_1^2}{r_2^2}\) = \(\frac{7×7}{14×14}\) = \(\frac{1}{4}\)
∴ दोनों स्थितियों का अनुपात 1 : 4.

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प्रश्न 5.
पीतल से बने एक अर्धगोलाकार कटोरे का आंतरिक व्यास 10.5 cm है। Rs 16 प्रति 100 cm² की दर से इसके आंतरिक पृष्ठ पर कलई का ज्यब ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, कटोरे का आंतरिक व्यास = 10.5 cm
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 5.25 cm
अतः कटोरे का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr²
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 5.25 × 5.25 = 173.25 cm²
∵ 100 cm² पर कलई का व्यय = Rs 16
∴ 173.25 पर कलई का व्यय = \(\frac{16×173.25}{100}\)
= Rs 27.72

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प्रश्न 6.
उस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका पृष्टीय क्षेत्रफल 154 cm² है।
उत्तर:
माना गोले को विन्या = r cm
दिया है, पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154
∴ 4πr² = 154
⇒ 4 × \(\frac{22}{7}\) × r² = 154
⇒ r = \(\sqrt{\frac{154×7}{4×22}}\) + \(\sqrt{12.25}\) = 3.5 cm
अत: गोले की त्रिज्या 3.5 cm है।

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प्रश्न 7.
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। इन दोनों के पृष्टीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
मन पृथ्वी का व्यास = d1
अत: चन्द्रमा का व्यास = \(\frac{d_1}{4}\)
∴ पृथ्वी की त्रिय, r1 = \(\frac{d_1}{2}\) तथा चन्द्रमा की जिज्या, r2 = \(\frac{d_1}{2×4}\) = \(\frac{d_1}{8}\)
दोनों के पचीय क्षेत्रफलों का अनुपात
= \(\frac{4π(\frac{d_1}{8})^2}{4π(\frac{d_1}{2})^2}\) = \(\frac{\frac{d_1^2}{64}}{\frac{d_1^2}{4}}\) = \(\frac{1}{16}\)
अत: पृष्टीय क्षेत्रफलों में अनुपात = 1 : 16

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प्रश्न 8.
एक अर्द्धगोलाकार कटोरा 0.25 cm मोटी स्टील से बना है। इस कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या 5 cm है। कटोरे का बाहरी पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, गोले को आन्तरिक त्रिज्या r = 5 cm
स्टील की मोटाई = 0.25 cm
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4
⇒ बाहरी प्रिया = r + 0.25
= 5 + 0.25 = 5.25 cm
कटोरे का बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr²
= 2 × \(\frac{22}{7}\) + 5.25 × 5.25
= 173.25 cm².

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प्रश्न 9.
एक लंबवृत्तीय बेलन त्रिज्या वाले एक गोले को पूर्णतया पेरे हुए है (देखिए पाठ्य-पुस्तक में आकृति)। जात कीजिए-
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(iii) ऊपर (i) और (ii) में प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात।
उत्तर:
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
(ii) बेलन की ऊंचाई = 2r
बेलन का चक्र पृष्ठीय क्षेत्रफ = 2πr (2r) = 4πr².
(iii) क्षेत्रफलों का अनुपात = \(\frac{4πr^2}{4πr^2}\)
= 1 : 1.
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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

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[जब तक अन्यथा न कहा जाए π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।]

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प्रश्न 1.
एक शंकु के आधार का व्यास 10.5 cm है और इसकी तिर्यक ऊँचाई 10 cm है। इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, शंकु को तिर्यक ऊँचाई (l) = 10 cm,
r = \(\frac {व्यास}{2}\) = 5.25 cm
अत: शंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) 5.25 × 10
= 165 cm².

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प्रश्न 2.
एक शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसकी तिर्यक ऊंचाई 21 m है और आधार का व्यास 24 m है।
उत्तर:
दिया है, तिर्यक ऊँचाई l = 21 m, आधार का व्यास = 24 m
अतः त्रिज्या r = \(\frac{22}{7}\) = 12 m
∴ पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr(r + l) = \(\frac{22}{7}\) × 12(12 + 21)
= 1244.57 m²

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प्रश्न 3,
एक शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 308 cm² है और इसकी तिर्यक ऊँचाई 14 cm है। ज्ञात कीजिए।
(i) आधार की प्रिज्या
(ii) शंकुका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
उत्तर:
दिया है तिर्यक ऊँचाई l = 14 cm
(i) माना आधार की त्रिज्या = r
पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl = 308
∴ \(\frac{22}{7}\) × r × 14 = 308 = r ⇒ 7 cm

(ii) शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr (r + l)
= \(\frac{22}{7}\) × 7(7 + 14) = 462 cm²

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प्रश्न 4.
शंकु के आकार का एक तंबू 10 m ऊँचा है और असके आधार की त्रिज्या 24 m है। ज्ञात कीजिए :
(i) तंबू को तिर्यक ऊंचाई
(ii) तंबू में लगे केनवास (canvas) की लागत, बदि 1 m² केनवास की लागत Rs 70 है।
उत्तर:
दिया है शंक्वाका तम्बू की ऊँचाई. h = 10 m तथा आधार की प्रिया r = 24 m
(i) माना तिर्यक ऊँचाई = l
∴ l² + h² + r² ⇒ l = \(\sqrt{10^2+24^2}\) = \(\sqrt{676}\) = 26 m

(ii) तंबू के लिए आवश्यक केनवास
= शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) × 24 × 26 = 1961.14 m²
∴ 1 m² केनवास की लागत = Rs 70
∴ 1961.14 m² केनवास को लागत
= 70 × 1961.14 = Rs 1,37,280

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प्रश्न 5.
8 m ऊंचाई और आपार की प्रिज्या 6 m वाले एक शंकु के आकार का तंबू बनाने में 3 m चौड़े तिरपाल की कितनी संबाई लगेगी? यह मान का बलिए कि इसकी सिलाई और कटाई में 20 cm तिरपाल अतिरिक्त लगेगा। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
दिया है, तम्बू की ऊँचाई, h = 8 m तथा आधार की त्रिज्या, r = 6 m
संयू की गिर्यक ऊँचाई (l)
= \(\sqrt{r^2+h^2}\) = \(\sqrt{6^2+8^2}\) = 10 m
तंन्यू के लिए आवश्यक तिरपाल का क्षेत्रफल
= तंबू का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = 3.14 × 6 × 10 = 188.4 m
∴ तिरपाल को लम्बाई =
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= \(\frac{188.4}{3}\) = 62.8 m
सिलाई कटाई के लिए अतिरिका तिरपाल = 20 cm = 0.2 m.
आत: तिरपाल को कुल लम्बाई = (62.8 + 0.2) = 63 m.

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प्रश्न 6.
शंकु के आधार के एक गुंबज की तिर्यक ऊँचाई और आधार का व्यास क्रमश: 25 m और 14 m है। इसकी वक्र पृष्ठ पर Rs 210 प्रति 100 m² की दर से सफेदी कराने काव्यय ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है. शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) = 25 m
⇒ शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 7 m
अत: शंकु का चक्रपृष्तीय क्षेत्रफल = πrl
= \(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 = 550 m²
∴ प्रति 100 m² सफेदी कराने का व्यय = Rs 210
∴ 50 m² सफेदी कराने का व्यय = \(\frac {210×550}{100}\)
= Rs 1,155.

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प्रश्न 7.
एक जोकर की टोपी एक शंकु के आकार की है, जिसके आधार की त्रिज्या 7 cm और ऊँचाई 24 cm है। इसी प्रकार की 10 टोपियाँ बनाने के लिए आवश्यक गने का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है. r = 7 रोमी, h = 24 सेनी
माना शंकु की तिर्यक ऊँचाई = l
∴ l = \(\sqrt{r^2+h^2}\) = \(\sqrt{7^2+24^2}\) = \(\sqrt{625}\) = 25 cm
एक टोपी के लिए आवश्यक गता
= शंकु का वक्र वृष्टीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 = 550 m²
आत: 10 टोपी के लिए आवश्यक गता
= 10 × 550 = 5500 cm².

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प्रश्न 8.
किसी बस स्टाप को पुराने गत्ते से बने 50 खोखले शंकुओं द्वारा सड़क से अलग किया हुआ है। प्रत्येक शंकु के आधार का व्यास 40 cm है और ऊँचाई 1 m है। यदि इन शंकुओं की बाहरी पृष्ठों को पेंट करवाना है और पेंट की दर 12 प्रति m² है, तो इनको पेंट कराने में कितनी लागत आएंगी?
(π = 3.14 और \(\sqrt{1.04}\) = 1.02 का प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
दिवा है, शंकु की ऊँचाई (h) = 1 m, त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 0.2 m
माना शंकु की तिर्दक ऊँचाई = l
∴ l = \(\sqrt{h^2+r^2}\) = \(\sqrt{1^2+(0.2)^2}\) = \(\sqrt{1.04}\) = 1.02 cm
प्रत्येक शंकु का शाहरी पृष्ठ = πrl = 3.14 × 1.02 × 0.2 = 0.64 m²
अत: 50 संकुों के बाहरी पृष्ठ = 50 × 0.64 = 32.0. m²
1 m² को पेंट कराने का व्यय = Rs 12
∴ 32.03 m² को गैट कराने का व्यय = 12 × 32.03
= Rs 384.34

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Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास Questions and Answers

समास की परिभाषा-दो या दो से अधिक पदों के मेल या संयोग को समास कहते हैं। उन पदों के मेल से बने हुए शब्द की सामाजिक शब्द कहते हैं।
जैसे-‘पाप’ और ‘पुण्य’ दो पदों को मिलाकर ‘पाप-पुण्य’ एक सामासिक शब्द हुआ।

समास के भेद

पदों की प्रधानता के आधार पर समास के निम्नलिखित चार भेद किए जाते

(1) पहला पद प्रधान-अव्ययीभाव
(2) दूसरा पद प्रधान-तत्पुरुष
(3) दोनों पद प्रधान-द्वंद्व
(4) कोई भी पद प्रधान नहीं-बहुब्रीहि ।

इन चारों प्रमुख भेदों के अतिरिक्त कर्मधारय और द्विगु दो समास और भी हैं, जिन्हें विद्वानों ने तत्पुरुष का भेद बताया है । इनको मिलाकर समास के छ: भेद हो जाते हैं

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

1. अव्ययीभाव

जिस समास में पहला पद प्रधान हो और समस्त पद अव्यय (फ़िया, विशेषण) का काम करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं । जैसे-यथाशक्ति, भरपेट, प्रतिदिन, बीचों बीच।

अव्ययीभाव के कुछ उदाहरण

यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
यथासंभव = जैसा संभव हो
यथामति = मति के अनुसार
यथाविधि = विधि के अनुसार
प्रतिदिन = दिन दिन
प्रत्येक = एक-एक
मनमन = मन ही मन
द्वार-द्वार = द्वार ही द्वार
निधडक = बिना धडक
आजीवन = जीवन-पर्यंत
बाकायदा = कायदे के अनुसार
आसमुद्र = समुद्र पर्यंत
बेखटके = खटके के बिना
दिनों दिन = दिन के बाद दिन

निडर = बिना डर
घर घर = हर घर ।
अनजाने जाने बिना
बीचों बीच = ठीक बीच में
रातों रात = रात ही रात
हाथों-हाथ = हाथ ही हाथ
हर रोज = रोज रोज
बेशक = बिना संदेह
वेफायदा = फायदे (लाभ) के बिना
आमरण = मरण-पर्यंत
आजानु = जानुओं (घुटनों) तक
भर-पेट = पेट भर कर
भरसक = पूरी शक्ति से

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

2. तत्पुरुष

तत्पुरुष का शाब्दिक अर्थ है (तत् = वह, पुरुष = आदमी) वह (दूसरा) आदमी । इस प्रकार ‘तत्पुरुष’ शब्द का अपना एक अच्छा उदाहरण है । इसी आध पर पर इसका नाम यह पड़ा है, क्योंकि ‘तत्पुरुष’ समास का दूसरा पद प्रधान होता है। इस प्रकार जिस समास का दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच प्रथम (कर्ता) तथा अंतिम (संबोधन) कारक के अतिरिक्त शेष किसी भी कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे –

राज-पुरुष = राजा का पुरुष
राह खर्च = राह के लिए खर्च
ऋण-मुक्त = ऋण से मुक्त
बनवास = वन में वास

तत्पुरुष के छः भेद हैं जिनका परिचय इस प्रकार है –

(क) कर्म तत्पुरुष

जिसमें कर्म कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है। जैसे –
ग्रंथ-कर्ता = ग्रंथ को करने वाला
आशातीत = आशा को लांघ कर गया हुआ
स्वर्ग प्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
जल-पिपासु = जल को पीने की इच्छा वाला
देशगत = देश को गत (गया हुआ)
गृहागत = गृह को आगत (आया हुआ)
यश प्राप्त = यश को प्राप्त
ग्रंथकार = ग्रंथ को रचने वाला
परलोक गमन = परलोक को गमन
ग्राम-गत = ग्राम को गत (गया हुआ)

(ख) करण तत्पुरुष

जिसमें करण कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है। जैसे –

हस्तलिखित = हस्त से लिखित
ईश्वर प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
तुलसीकृत = तुलसी से कृत
कष्ट साध्य = कष्ट से साध्य
बाणबिद्ध = बाण से बिद्ध
गुरुकृत = गुरु से किया हुआ
वज्र-हत = वज्र से हत
मदांध = मद से अंधा
दुःखार्त्त = दुःख से आर्त्त अकाल
पीड़ित = अकाल से पीड़ित
मन-माना = मन से माना हुआ
रेखांकित = रेखा से अंकित
मुँह-मांगा = मुँह से मांगा हुआ
कीर्ति-युक्त = कीर्ति से युक्त
मनगढंत = मन से गढ़ी हुई
अनुभव-जन्य = अनुभव से जन्य
कपड़छन = कपड़े से छना हुआ
गुण-युक्त = गुण से युक्त
मदमाता = मद से माता
जन्म-रोगी = जन्म से रोगी
शोकाकुल = शोक से आकुल
दईमारा – दई से मारा हुआ
प्रेमातुर = प्रेम से आतुर
बिहारी रचित = बिहारी द्वारा रचित
दयार्द्र = दया से आर्द्र

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(ग) संप्रदान तत्पुरुष जिसमें संप्रदान कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है । जैसे

देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
ठकुरसुहाती = ठाकुर को सुहाती
रण-निमंत्रण= रण के लिए निमंत्रण
आरामकुर्सी = आराम के लिए कुर्सी
कृष्णार्पण = कृष्ण के लिए अर्पण
बलि-पशु = बलि के लिए पशु
यज्ञ-शाला = यज्ञ के लिए शाला
विद्यागृह = विद्या के लिए गृह
क्रीड़ा-क्षेत्र = क्रीड़ा के लिए क्षेत्र
गुरु दक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
राह-खर्च = राह के लिए खर्च
हवन-सामग्री = हवन के लिए सामग्री

रसोई घर = रसोई के लिए घर
मार्ग-व्यय – मार्ग के लिए व्यय
रोकड़ बही = रोकड़ के लिए बही
युद्ध-भूमि – युद्ध के लिए भूमि
हथकड़ी = हाथों के लिए कड़ी
राज्यलिप्सा = राज्य के लिए लिप्सा
माल गाड़ी = माल के लिए गाड़ी
डाकगाड़ी = डाक के लिए गाड़ी
पाठशाला = पाठ के लिए शाला
जेब खर्च = जेब के लिए खर्च

(घ) अपादान तत्पुरुष जिसमें अपादान कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है । जैसे

पथ-भ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट
आकाश पतित = आकाश से पतित
भयभीत = भय से भीत
धर्म भ्रष्ट = धर्म से भ्रष्ट
पदच्युत = पद से च्युत
देश निकाला = देश से निकालना
ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त गुरु
भाई = गुरु के संबंध से भाई
देश निर्वासित = देश से निर्वासित
रोग मुक्त = रोग से मुक्त
बंधन मुक्त = बंधन से मुक्त
कामचोर = काम से जी चुराने वाला
ईश्वर विमुख = ईश्वर से विमुख
आकाशवाणी = आकाश से आगत वाणी
मदोन्मत्त = मद से उन्मत्त
जन्मांध = जन्म से अंधा व
विद्याहीन = विद्या से हीन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(ङ) संबंध तत्पुरुष जिसमें संबंध कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है। जैसे

मृगशावक = मृग का शावक
राजरानी = राजा का रानी
वज्रपात = वज्र का पात
अमचूर = आम का चूर
घुड़दौड़ = घोड़ों की दौड़
बैलगाड़ी = बैलों की गाड़ी
लखपति = लाखों (रुपये) का पति
वनमानुष = वन का मानुष
दीनानाथ = दीनों का नाथ
देवालय = देवों का आलय
रामकहानी = राम की कहानी
लक्ष्मी पति = लक्ष्मी का पति
रेलकुली = रेल का कुली
रामानुज = राम का अनुज
चायबगान = चाय के बगीचे आदि
पितृगृह = पिता का घर
वाचस्पति = वाचः (वाणी) के पति
राजपुत्र = राजा का पुत्र
विद्याभ्यासी = विद्या का अभ्यासी
पराधीन = पर (अन्य) का अधीन
रामाश्रय = राम का आश्रय
राष्ट्रपति = राष्ट्रपति का पति
अछूतोद्धार = अछूतों का उद्धार
पवनपुत्र = पवन का पुत्र
विचाराधीन = विचार के अधीन
राजकुमार = राजा का कुमार

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(च) अधिकरण तत्पुरुष जिसमें अधिकरण कारक की विभक्ति का लोप पाया जाता है। जैसे-

देशाटन – देशों का अटन
दानवीर = दान (देने) में वीर
वनवास = वन में वास
कविशिरोमणि = कवियों में शिरोमणि
कविश्रेष्ठ = कवियों में श्रेष्ठ
आत्म-विश्वास = आत्म (स्वयं) पर विश्वास
आनंद-मग्न = आनंद में मग्न
आप बीती = अपने घर बीती
गृह प्रवेश = गृह में प्रवेश
घुड़ सवार = घोड़े पर सवार
शरणागत = शरण में आगत
कानाफूसी = कानों में फुसफुसाहट
ध्यानावस्थित= ध्यान में अवस्थित
हरफनमौला = हरफन में मौला कला
प्रवीण = कला में प्रवीण
नगरवास = नगर में वास
शोक मग्न = शोक में मग्न
घर-वास = घर में वास

इनके अतिरिक्त तत्पुरुष के कुछ अन्य भेद और भी माने जाते हैं

(i) नञ् तत्पुरुष
निषेध या अभाव के अर्थ में किसी शब्द से पूर्व ‘अ’ या ‘अन्’ लगाने से जो । समास बनता है, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं । जैसे –

अहित = न हित
अपूर्ण = न पूर्ण
अधर्म = न धर्म
असंभव = न संभव
अब्राह्मण = न ब्राह्मण
अन्याय = न न्याय
अनुदार = न उदार
अनाश्रित = न आश्रित
अनिष्ट = न इष्ट
अनाचार = न आचार

विशेष-(क) प्रायः संस्कृत शब्दों में जिस शब्द के आदि में व्यंजन होता है,

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

तो ‘न’ समास में उस शब्द से पूर्व ‘अ’ जुड़ता है और यदि शब्द के आदि में स्वर होता है, तो उसप्से पूर्व ‘अन्’ जुड़ता है । जैसे –

अन् + अन्य = अनन्य
अन् + उत्तीर्ण = अनुत्तीर्ण
अ + वांछित = अवांछित
अ + स्थिर = अस्थिर

(ख) किन्तु उक्त नियम प्रायः तत्सम शब्दों पर ही लागू होता है, हिन्दी शब्दों पर नहीं। हिन्दी शब्दों में सर्वत्र ऐसा नहीं होता । जैसे –

अन् + चाहा = अनचाहा
‘अ+ काज = अकाज
अन् + होनी = अनहोनी
अन + वन = अनबन
अ + न्याय = अन्याय
अन + देखा = अनदेखा
अ + टूट = अटूट
अ + सुंदर = असुंदर

(ग) हिन्दी और संस्कृत शब्दों के अतिरिक्त ‘गैर’ और ‘ना’ आनेवाले शब्द भी ‘नञ्’ तत्पुरुष के अन्तर्गत आ जाते हैं। जैसे –

नागवर
नापसंद
गैर हाजिर
नाबालिग
नालायक
गैरवाजिब

(ii) अलुक् तत्पुरुष

जिस तत्पुरुष समास में पहले पद की विभक्ति का लोप नहीं होता, उसे ‘अलक्’ समास कहते हैं। जैसे –

मनसिज = मनों में उत्पन्न
युधिष्ठिर = युद्ध में स्थिर
वाचस्पति = वाणी का पति
धनञ्जय = धन की जय करने वाला
विश्वंभर = विश्व को भरने वाला
खेचर = आकाश में विचरने वाला

(iii) उपपद तत्पुरुष

जिस तत्पुरुष समास का स्वतंत्र रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता, ऐसे सामासिक शब्दों को ‘उपमद’ तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे-

जलज = जल + ज (‘ज’ का अर्थ उत्पन्न अर्थात् पैदा होनेवाला है, पर इस शब्द को अलग से प्रयोग नहीं किया जा सकता है ।)

इसी प्रकार –
तटस्थ = तट + स्थ
गृहस्थ = गृह + स्थ
पंकज = पंक + ज
जलद = जल + द
कृतघ्न = कृत + न
उरग = उर + ग
तिलचट्टा = तिल + चट्टा
लकड़फोड़ = लकड़ + फोड़
बटमार = बट + मार
घरघसा = घर + घसा
पनडुब्बी = पन + डुब्बी
घुड़चढ़ी = घुड़ + चढ़ी
कलमतराश = कलम + तराश
सौदागर = सौदा + गर
गरीबनिवाज = गरीब + निवाज
चोबदार = चोब + दार

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(iv) कर्मधारय

जिस समास के दोनों पदों के बीच विशेष्य विशेषण अथवा उपमेय-उपमान का संबंध हो और दोनों पदों में एक ही कारक (कर्ता कारक) की विभक्ति आए, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
जैसे –

नीलकमल = नीला है जो कमल
महाविद्यालय = महान् है जो विद्यालय
लाल मिर्च = लाल है जो मिर्च
काला-पानी = काल है जो पानी
पुरुषोत्तम = पुरुषों में है जो उत्तम
चरण-कमल = कमल रूपी चरण
महाराज = महान् है जो राजा
प्राण-प्रिय = प्राणों के समान प्रिय
चंद्रमुख = चंद्र के समान है जो मुख ।
बज्र देह = वज्र के समान देह
सिंहपुरुषः = सिंह के समान है जो पुरुष ।
विद्या धन = विद्या रूप धन ।
नील-कंठ = नीला है जो कंठ
देहलता = देह रूपी लता
महाजन = महान् है जो जन
घनश्याम = घन के समान श्याम
पीतांबर = पीत है जो अंबर
काली मिर्च = काली है जो मिर्च
सज्जन = सत् (अच्छा ) है जो जन
महारानी = महान् है जो रानी
भलामानस = भला है जो मानस (मनुष्य)
नील गाय = नीली है जो गाय
सद्गुण = सद् (अच्छे) है जो गुण
कर-कमल = कमल के समान कर
शुभागमन = शुभ है जो आगमन
मुखचंद्र = मुख रूपी चंद्र
नीलांबर = नीला है जो अंबर
नरसिंह = सिंह के समान है जो नर
भव-सागर = भव रूपी सागर
मानबोचित = मानवों के लिए है जो उचित
बुद्धिबल = बुद्धि रूपी बल
पुरुष रत्न = पुरुषों में है जो रत्न
गुरुदेव = गुरु रूपी देव
घृतान्न = घृत में मिला हुआ अन्न
कर पल्ल्व = पल्लव रूपी कर
पर्णशाला = पर्ण (पत्तों से) निर्गत शाला
कमल-नयन = कमल के समान नयन
छाया-तरु = छाया प्रधान तरु
कनक-लता = कनक की सी लता
वन मानुष = वन में निवास करने वाला
मानुष चंद्रमुख = चन्द्र के समान मुख
गुरु भाई = गुरु के संबंध से भाई
मृगनयन = मृग के नयन के समान नयन
बैलगाड़ी = बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी
कुसुम-कोमल = कुसुम के समान कोमल
माल-गाड़ी = माल ले जाने वाली गाड़ी
सिंह नाद = सिंह के नाद के समान नाद
गुड़म्बा = गुड़ से पकाया हुआ आम
जन्मान्तर = अंतर (अन्य) जन्म
दही-बड़ा = दही में डूबा हुआ बड़ा
नराधम = अधम है जो नर
जेब-घड़ी = जेब में रखी जाने वाली घड़ी
दीनदयालु = दीनों पर है जो दयालु
पन-चक्की = पानी से चलने वाली चक्की
मुनिवर = मुनियों में है जो श्रेष्ठ

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(v) द्विगु

जिस समास में पहला पद संख्यावाचक (गिनती बताने वाला) हो, दोनों पदों बीच विशेषण विशेष्य संबंध हो और समस्त पद समूह या समाहार का ज्ञान । राए, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे-

शताब्दी = शत (सौ) शब्दों (वर्षों) का समूह
त्रिवेणी = तीन वेणियों (नदियों) का समाहार
सतसई सात सौ दोहों का समूह सप्ताह
सप्त (सात) अह (दिनों) का समूह
चौराहा = चार राहों का समाहार
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
चौमासा = चार मासों का समाहार
अष्टाध्यायी = अष्ट (आठ) अध्यायों का समूह

अठन्नी = आठ आनों का समूह
त्रिभुवन = तीन भुवनों (लोकों) का समूह
पंसेरी = पांच सेरों को समाहार
पंचवटी = पांच बट (वृक्षों) का समाहार
दोपहर = दो पहरों का समाहार
नवग्रह = व ग्रहों का समाहार
त्रिफला = तीन फलों का समूह
चतुर्वर्ण = चार वर्णों का समाहार
चौपाई = चार पदों का समूह
चतुष्पदी = चार पदों का समाहार
नव-रत्न = नव रत्नों का समूह
पंचतत्व = मांन तत्वों का समह

(vi)द्वंद्व

जिस समस्त पद के दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह (अलग-अलग) करने पर दोनों पदों के बीच ‘और’, ‘तथा’, ‘अथवा’, ‘या’, आदि योजक शब्द लगे उसे द्वंद्व समास कहते हैं । जैसे –

अन्न जल = अन्न और जल
दीन-ईमान = दीन और ईमान
पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
लव-कुश = लव और कुश
धर्माधर्म = धर्म और अधर्म
नमक-मिर्च = नमक और मिर्च
वेद-पुराण = वेद और पुराण
अमीर गरीब = अमीर और गरीब
दाल रोटी = दाल और रोटी
राजा-रंक = राजा और रंक
नदी-नाले = नदी और नाले
राधा-कृष्ण = राधा और कृष्ण
रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
निशि-वासर = निश (रात) और वासर (दिन)
दूध-दही = दूध और दही
देश-विदेश = देश और विदेश
आबहवा = आब (आना) और हवा
माँ-बाप = माँ और बाप
आमद-रफ्त = आमद (आना) और रफ्त (जाना)
ऊंच नीच = ऊंच और नीच
नाम-निशान = नाम और निशान
सुख-दुःख = सुख और दुःख
भाता-पिता = माता और पिता
धन-धाम = धन और धाम
भाई-बहन = भाई और बह’
भला-बुरा = भला और बुरा
रात-दिन = रात और इन
पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
घी-शक्कर = घी और शक्कर
छोटा-बड़ा = छोटा या बड़ा
नर-नारी = नर और ना
जात-कुजात = जात या कुजात
गुण दोष = गुण तथा दोष
ऊँचा-नीचा = ऊँचा या नीचा
देश-विदे = देश और प्रदेश
न्यूनाधिक = न्यून (कम) अथवा अधिक
राम-लक्ष्मण = राम और लक्ष्मण
थेड़ा-बहु = थेड़ा बहुत
भीमार्जुन = भीम और अर्जुन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण समास

(vii) बहुब्रीहि

जिस समास का कोई भी पद प्रधान नहीं हो और दोनों पद मिलकर किसी अन्य शब्द (संज्ञा) के विशेषण होते हैं, उसे ‘बहुब्र हि’ समाहस ५ हते हैं । जैसे –

चक्रधर = चक्र को धारण करने वाला अर्थात विष्णु
गजानन = गज के समान आनन (मुख) है जिसका अर्थात् राश
बारहसिंगा = बारह सींग हैं जिसके ऐसा मृग विशेष
पीतांबर = पीत (पीले) अंबर (वस्त्र) हैं जिस्: के अर्थात् ‘कृष्ण’
चंद्रशेखर = चंद्र है शेखर (मस्तक) पर जिसके अर्थात् ‘शिव
नील-कंठ = नीला है कंठ जिसका अर्थात् शिन
शुभ्र स्त्र = शुभ्र (स्वच्छ) है वस्त्र जिसका अर्थात् सरस्वती
अजातशत्रु- नहीं पैदा हुआ हो शत्रु जिसका (कोई व्यक्ति)
कुरूप = कुत्सित (बुरा) हे रूप, जिसका (कोई व्यक्ति)

बड़बोला = बड़े बोल बोलने वाला (कोई व्यक्ति)
लंबोदर = लंबा है उदर (पेट) जिसका अर्थात् गणेश
महात्मा = महान् है आत्मा जिसकी (व्यक्ति-विशेष)
सुलोचना = सुंदर है लोचन (नेत्र) जिसके (स्त्री विशेष)
आजानुबाहु = अजानु (घुटनों तक) लंबी हैं भुजाएँ जिसको (व्यक्ति विशेष)
दिगंबर = दिशाएँ ही हैं वस्त्र जिसके अर्थात् नग्न
राजीव-लोचन = राजीव (कमल) के समान लोचन (नेत्र) हैं जिसके (व्यक्ति-विशेष)
चंद्रमुखी = चंद्र के समान मुख है जिसकी अर्थात् (कोई स्त्री)
चतुर्भुज = चार हैं भुजाएँ जिसकी अर्थात् विष्णु
अलोना = (अ) नहीं है लोन (नमक) जिसमें ऐसी कोई पकी सब्जी
अंशुमाली = अंशु (किरणें) हैं माला जिसकी अर्थात् सूर्य
लमकना = लंबे हो कान जिसके अर्थात् चूहा
तिमजिला = तीन है मंजिल जिसमें वह मकान
अनाथ – जिसका कोई नाथ (स्वामी या संरक्षक) न हो (कोई बालक)
असार = सार (तत्त्व) न हो जिसमें (वह वस्तु)
दशानन = दश हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण
पंचानन = पाँच 3 आनन जिसके अर्थात् सिंह
सहस्रबाहु – सहस्र (हजार) हैं भुजाएँ जिसकी अर्थात् दैत्यराज
षट्कोण = षट् (छ:) कोण है जिसमें (वह आकृति)
मृगलोचनी = मृग के समान लोचन हैं जिसके (कोई स्त्री)
बज्रांगी (बजरंगी) = बज्र के समान कठोर हो हृदय जिसका (कोई व्यक्ति)
पाषाण हृदय = पाषाण के समान कठोर हो हृदय जिसका (कोई व्यक्ति)
सतखंडा = सात है खंड जिसमें (वह भवन)
सितार = सितार (तीन) हों जिसमें (वह बाजा)
त्रिनेत्र = तीन हैं नेत्र जिसके अर्थात् शिव
द्विरद = द्वि (दो) हों दर (दाँत) जिसके अर्थात हाथी
चारपाई = चार हैं पाए जिसमें अर्थात् खाट
कलह प्रिय = कलह (क्लेश, झगड़ा, प्रिय हो जिसको (कोई व्यक्ति)
कनफटा = कान हो फटा हुआ जिसका (कोई व्यक्ति)
मनचल = मन रहता तो चलायमान जिसका (कोई व्यक्ति)
मृत्युञ्जय = मृत्यु को भी जीत लिया जिसने अर्थात् शंकर
सिरकटा = सिर हो कटा हुआ जिनका (कोई भूत प्रेतादि)
पतझड़ = पत्ते झड़ते हैं जिसमें वह ऋतु
भघनाद – मेघ के समान नाद है जिसका अर्थात् रावण का पुत्र
धनश्याम = घन के समान श्याम है जो अर्थात् कृष्ण
मक्खीचूस = मक्खी को भी चूस लेने वाला अर्थात् कृपण (कंजूस)
विषधर = विष को धारण करने वाला अर्थात् सर्प
गिरिधर = गिरी (पर्वत) को धारण करने वाला कृष्ण
जितेंद्रिय = जीत ली है इंद्रियां जिसने (संयमी पुरुष)
कृत-कार्य = कर लिया है कार्य जिसने (सफल व्यक्ति)
इन्द्रजित = इंद्र को जीत लिया है जिसने (मेघनाद)
विष-पायी = विष पी लिया है जिसने (शिव)
चक्रपाणि = चक्र है पाणि : (हाथ) में जिसके अर्थात् विष्णु
त्रिगुण = तीन हैं गुण जिसमें (ऐसी कोई वरतु)
रत्न-गर्भा = रत्न् हैं गर्भ हैं जिसके अर्थात् पृथ्वी
नीरज = नीर (जल) में जन्म लेने वाला अर्थात् कमल
स्वरान्त = स्वर है अंत में जिसके ( ऐसा शब्द)
त्रिभुज = तीन हैं भुजाएँ जिसमें (वह आकृति)
फुल्लोत्पल = फुल्ल (खिले) हैं उत्पल (कमल) जिसमें ऐसा तालाब)
धर्मात्मा = धर्म में आत्मा लीन है जिसकी (कोई व्यक्ति)।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

प्रश्न 1.
ऊँचाई 14 cm बाले एक लम्बवृत्तीच वेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 88 cm² है। बेलन के आधार का व्याम ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना वेलन के आधार को त्रिज्या = r cm तथा ऊंचाई h = 14 cm
तब, वक्र पृष्ठ = 2πrh = 88
⇒ 2 × \(\frac{22}{7}\) × r × 14 = 88
⇒ r = \(\frac{88 × 7}{22×2×14}\) = 1 cm
अत: वेलन के आधार का व्यास (d)
= 2r = 2 × 1 = 2 cm.

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प्रश्न 2.
धातु की एक चादर से 1 m ऊंची और 140 cm व्यास के आधार वाली एक बन्द बेलनाकार टंकी बनाई जाती है। इस कार्य के लिए कितने वर्ग मीटर चादर की आवश्यकता होगी?
उत्तर:
दिया है, टंकी की ऊँचाई (h) = 1 m तथा व्यास d = 140 cm
अत: त्रिज्या (r) = 70 cm = 0.7 m
टंकी बनाने के लिए आवश्यक चादर
= कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πr (r + h)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 0.7 (0.7 + 1)
= 44 × 0.1 × 1.7 = 7.48 m².

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प्रश्न 3.
धातु का एक पाइप 77 cm लम्बा है। इसके एक अनप्रस्थकाट का आन्तरिक व्यास 4 cm है और बाहरी व्यास 4.4 cm है (देखिए पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति)। जात कीजिए-
(i) आनारिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) बाहरी वक पृष्टीय क्षेत्रफल
(iii) कुल पृष्टीय क्षेत्रफल
उत्तर:
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दिया है, पाइप की लम्बाई (h) = 77 cm, आन्तरिक व्यास = 4 cm तथा बाहरी व्यास = 4.4 cm
∴ आन्तरिक त्रिज्या (r)
= \(\frac {व्यास}{2}\) = 2.0 m
बाहरी त्रिज्या (R)
= \(\frac {व्यास}{2}\) = 2.2 cm

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(i) आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πrh
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 2 × 77
= 968 cm²

(ii) बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 2.2 × 77
= 1064.8 cm²

(iii) कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + बाहरी वक्र पृष्ठोष क्षेत्रफल + दोनों आधारों का क्षेत्रफल
= 2πrh + 2πRh + 2π (R² – r²)
= 968 + 1064.8 + 2 × \(\frac {22}{7}\) {(2.2)² – 2²}
= 968 + 1064.8 + 5.28 = 2038.08 cm².

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प्रश्न 4.
एक रोलर (roller) का व्यास 84 cm है और लम्बाई 120 cm है। एक खेल के मैदान को एक बार समतल करने के लिए 500 चक्कर लगाने पड़ते हैं। खेल के मैदान का m² में क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, रोलर को लम्बाई (h) = 120 cm, रोलर को त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 42 cm
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अत: रोलर में एक चक्कर द्वारा तय दूरी
= गेलर का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 42 × 120
=3.168 m².
∴ मैदान का क्षेत्रफल
= 500 × रोलर की एक कार में तप दूरी
-500 × 3.168 = 1584 m².

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प्रश्न 5.
किमी बेलनाकार नामका व्यास 50 है और ऊँचाई 3.5 m है। Rs 12.50 प्रति m² की दर से इस स्तम्भ के खक पष्ठ पर पेन्ट कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, स्तम्भ को लम्बाई (h) = 3.5 m. व्यास = 50 cm, त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 0.25 m
स्तम्भ का षक पृष्टीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 0.25 × 3.5
= 5.5 m
स्वाध पर पेर कराने का व्यय = 5.5 × 12.5 = Rs 68.75

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प्रश्न 6.
एक लम्बवृत्तीय बेलन का बक पृष्टीय क्षेत्रफल 4.4 m² यदि वेलन के आधार की प्रिज्या 0.7 m है, तो उसकी ऊंचाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, येलन के आधार की प्रिया. r = 0.7 m तथा
वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh = 4.4
∴ 2 × \(\frac {22}{7}\) × 0.7 × h = 4.4
⇒ h = \(\frac {4.4×7}{2×22×0.7}\) = 1 m

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प्रश्न 7.
किसी वृत्ताकार कुएँ का आनरिक व्याम 3.5 m है और यह 10 m गहरा है। ज्ञात कीजिए
(i) आनरिक बक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) Rs 40 प्रति m² की दर से इसके वक़ पृष्ठ पर प्लास्टर कराने का व्यय।
उत्तर:
(i) कुएँ को आन्तरिक त्रिज्या (r)
= \(\frac {व्यास}{2}\) = 1.75 m तमा h = 10 m
कुएँ का वक्र पृष्टीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 1.75 × 10
= 110 m².

(ii) पलास्टर कराने का व्यय = 40 × 110 = Rs 4400

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प्रशन 8.
गरम पानी द्वारा गरम रखने वाले एक संयंत्र में 28 m लम्बाई और 5 cm व्यास वाला एक बेलनाकार पाइप है। इस संयंत्र में गभी देने वाला कुल कितना पृष्ठहै?
उत्तर:
दिया है, सयंत्र की लम्बाई (h) = 28 m.
त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 2.5 cm = 0.025 m.
अत: संत्र में गर्मी देने मला पृष्ठ
= पादप का वक्र पृष्टीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 0.025 × 28
= 4.4 m²

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प्रश्न 9.
जान कीजिए-
(i) एक बेलनाकार पेट्रोल की बन्द टंकी का पार्श्व या वन पृष्ठीय क्षेत्रफल, जिसका व्यास 4.2 m है और ऊँचाई 4.5 m है।
(ii) इस टंकी को बनाने में कुल कितना इस्पात (steel) लगा होगा, यदि कुल इस्पात का \(\frac {1}{12}\) भाग बनाने में नष्ट हो गया है?
उत्तर:
(i) दिया गया है. (h) = 4.5 m r = \(\frac {व्यास}{2}\) = 2.1 m
अन: टंकी का वक्र पृप्तीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 2.1 × 4.5
= 59.4 m²

(ii) टंकी का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2π (r + h)
= (2 × \(\frac {22}{7}\) × 2.1) + (2.1 + 4.5)
= 87.12 m²
दिया गया है प्रयुका इरपास का \(\frac {1}{12}\) का भाग यांब हो गया है।
अत: टंकी बनाने में प्रयुका इस्पात
= x का (1 – \(\frac {1}{12}\)) = x का \(\frac {11}{12}\)
∴ \(\frac {11}{12}\) = 87.12
⇒ x = 95.04 m².

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प्रश्न 10.
पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में आप एक लैंपशेड का फ्रेम देख रहे हैं। इसे एक सजावटी कपड़े से तका जाता है। इस फ्रेम के आधार का व्यास 20 cm है और ऊँचाई 30 cm है। फ्रेम के ऊपर और नीचे मोड़ने के लिए दोनों ओर 2.5 cm अतिरिक्त कपड़ा भी छोड़ा जाना है। ज्ञात कीजिए कि लैंपशेड को बकने के लिए कुल कितने कपड़े की आवश्यकता होगी।
उत्तर:
लैंपशेड की ऊंचाई (h) = 30 cm (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) =10 cm
चौक फ्रेम के ऊपर और नीचे मोड़ने के लिए दोनों और 2.5 cm अतिरिक्त कपड़ा भी छेड़ना है।
अतः कुल ऊँचाई = 30 + 2 × 2.5 = 35 cm
∴ कुल कपड़ा = फ्रेम का चक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πrh = 2 × \(\frac {22}{7}\) × 10 × 35 = 2200 cm²

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प्रश्न 11.
किसी विद्यालय के विद्यार्थियों से एक आधार वाले बेलनाकार कलमदानों को गले से बनाने और सजाने की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कहा गया। प्रत्येक कलमदान को 3 cm त्रिज्या और 10.5 cm ऊँचाई का होना या। विद्यालय को इसके लिए प्रतिभागियों को गत्ता देना था। यदि इसमें 35 प्रतिभागी थे, तो विद्यालय को कितना गत्ता खरीदना पड़ा होगा?
उत्तर:
दिया गया है, कलमदान की त्रिज्या (r) = 3 cm, (h) = 10.5 cm
अतः प्रत्येक प्रतियोगी के लिए गला = कलमदान का
वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल + आधार का क्षेत्रफल
= 2πrh + πr²
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 3 × 10.5 + \(\frac {22}{7}\) × 3 × 3
= 226.28 cm²
⇒ 35 प्रतियोगियों के लिए गत्ता
= 35 × 226.28 = 7920 cm².

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Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि Questions and Answers

सन्धि-दो-वर्गों के पारस्परिक मेल को सन्धि कहते हैं, जैसे-देव + आलय = देवालय । कपि + ईश = कपीश । महा + इन्द्र = महेन्द्र । जगत् + नाथ = जगन्नाथ । यहाँ देव + आलय में ‘देव’ (देव + अ) अन्तिम अक्षर ‘अ’ स्वर है और ‘आलय’ में ‘आ’ स्वर लगा हुआ है। इन दोनों के मेल से ‘आ’ हो जाता है इसलिए ‘देव’ और ‘आलय’ (अ + आ) मिलकर देवालय हो गया । इसी प्रकार जगत् + नाथ में ‘जगत्’ में त् व्यंजन है तथा ‘नाथ’ में न व्यंजन है । सन्धि में त् और न मिलकर ‘न्न’ हो गया । सन्धि में अक्षर बदल जाते हैं। तदनुसार उसके उच्चारण में अन्तर पड़ जाता है । जैसे-महा + इन्द्र = महेन्द्र । जिन अक्षरों के बीच सन्धि हुई हो उन्हें सन्धि के पहले रूप से पृथक करने की क्रिया की सन्धि-विच्छेद कहते हैं: जैसे-महेन्द्र का सन्धि-विच्छेद ‘महा + इन्द्र’ होगा । जिन अक्षरों की सन्धि की जाती है उनके बीच ‘+’ चिह्न देने का प्रचलन है।

सन्धि के प्रकार-सन्धि के तीन भेद हैं-(1) स्वर-सन्धि (2) व्यंजन-सन्धि और (3) विसर्ग-सन्धि ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(1) स्वर सन्धि

स्वर सन्धि की परिभाषा-दो स्वर वर्णों के पारस्परिक मेल को स्वर-सन्धि कहते हैं। जैसे-देव + इन्द्र । यहाँ ‘देव’ शब्द में ‘अ’ स्वर वर्ण है तथा इन्द्र शब्द में ‘इ’ स्वर वर्ण है । सन्धि में ये दोनों स्वर मिलकर ‘ए’ हो जाते हैं। अतः ‘देव’ और ‘इन्द्र’ मिलकर देवेन्द्र हो जाता है।

स्वर सन्धि के पाँच भेद हैं । (1) दीर्घ-सन्धि (2) गुण-सन्धि (3) वृद्धि-सन्धि (4) यण-सन्धि और (5) अयादि-सन्धि ।

(1) दीर्घ-सन्धि-ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, के बाद यदि हस्व या दीर्घ क्रमशः आ, इ, उ, हो तो दोनों मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। इस प्रकार की सन्धि को शीर्ष सन्धि कहते हैं, जैसे –

अ + अ = आ

अधम + अधम = अधमाधम
क्रम + अनुसार = क्रमानुसार
पर + अधीन = पराधीन
परम + अर्थ = परामर्थ

अ+ आ = आ

गज + आनन = गजानन
चित्र + आलय = चित्रालय ।
छात्र + आलय = छात्रालय
छात्र + आवास = छात्रावास
जल + आधार = जलाधार
जल + आशय = जलाशय

मंगल + आचरण = मंगलाचरण
मृत् + आत्मा = मृतात्मा
मर्म + आहत = मर्माहत
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
सत्य + आग्रह = सत्याग्रह
शिष्ट + आचार = शिष्टाचार

आ+ अ = आ

कदा + अपि = कदापि
तथा + अपि = तथापि
परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी ।
इच्छा + अनुसार = इच्छानुसार

यथा + अर्थ,= यथार्थ
रेखा + अंकित = रेखांकित
सहायता + अर्थ = सहायतार्थ
मुरा + अरी = मुरारी

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

आ + आ = आ

विद्या + आलय = विद्यालय
महा + आशय = महाशय
महा + आत्मा = महात्मा
कला + आत्मक = कलात्मक

इ + इ = ई

कवि + इन्द्र = कवीन्द्र
रवि + इन्द्र = रवीन्द्र
अति + इव = अतीव
अति + इत = अतीत

इ + ई = ई

गिरि + ईश = गिरीश
कवि + ईश्वर = कवीश्वर
ऋषि + ईश = ऋषीश
अधि + ईश = अधीश

ई + इ = ई

नदी + इन्द्र = नदीन्द्र
महती + इच्छा = महतीच्छा
गौरी + इच्छा = गौरीच्छा
रवी + इन्द्र = रवीन्द्र

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

ई + ई = ई

मही + ईश्वर = महीश्वर
सती + ईश = सतीश
नदी + ईश = नदीश
रजनी + ईश = रजनीश

उ + उ = ऊ

विधु + उदय = विधूदय
भानु + उदय = भानूदय
कटु + उक्ति = कटूक्ति
सु + उक्ति = सूक्ति ।

उ + ऊ = ऊ

लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
गुरु + ऊर्मि = गुरुर्मि
सिन्धु + ऊर्मि = सिन्धूर्मि
वायु + ऊर्ध्व = वायूर्ध्व ।

ऊ + उ = ऊ

वधू + उत्सव = वधूत्सव
भू + उन्नति = भून्नति
स्वयम्भू + उदय स्वयम्भूदय
वधू + उत्सुकता = वधूत्सुकता

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

ऊ + ऊ = ऊ

भू + ऊसर = भूसर
वधू + ऊर्मिला = वधूमिला
वधू + ऊहन = वधूहन
भू + ऊर्ध्व = भूल

(2) गुण सन्धि-यदि अ या आ के बाद ह्रस्व या दीर्घ इ, उ या ऋ रहे तो अ + इ मिलकर ए, अ + उ मिलकर ओ और अ +ऋ मिलकर अर होता है । इस प्रकार की सन्धि को गुण-सन्धि कहते है । जैसे –

अ + इ = ए

देव + इन्द्र = देवेन्द्र
नर + इन्द्र = नरेन्द्र
नव + इन्दु =नवेन्दु
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र

भारत + इन्दु = भारतेन्दु
गज + इन्द्र = गजेन्द्र
रस + इन्द्र = रसेन्द्र
स्व + इच्छा = स्वेच्छा

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

अ + ई = ए

गण + ईश = गणेश
धन + ईश = धनेश
नर + ईश = नरेश

कोशल + ईश = कोशलेश
परम् + ईश्वर = परमेश्वर
सुर + ईश = सुरेश

आ + इ = ए

महा + इन्द्र = महेन्द्र
यथा + इष्ट = यथेष्ट

आ + ई = ए

उमा + ईश = उमेश
रमा + ईश = रमेश

अ + उ = ओ

चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय
वीर + उचित = विरोचित
अरुण + उदय = अरुणोदय
ग्राम + उद्धार = ग्रामोद्धार
पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम

सूर्य + उदय = सूर्योदय
धन + उपार्जन = धनोपार्जन
पत्र + उत्तर = पत्रोत्तर
पर + उपकार = परोपकार
प्रश्र + उत्तर = प्रश्रोत्तर

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

अ + ऊ = ओ

जल + ऊर्मि =जलोमि
नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा

आ + उ = ओ

जीविका + उपार्जन = जीविकोपार्जन
महा + उत्सव = महोत्सव
महा + उदय = महोदय
यथा + उचित = यथोचित

आ + ऊ = ओ

बाल + ऊषा = बालोषा
महा + ऊसर = महोसर

अ + ऋ = अर

देव + ऋषि = देवर्षि
ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि
राज + ऋषि = राजर्षि
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि

आ + ऋ= अर

महा + ऋषि = महर्षि
राजा + ऋषि = राजर्षि

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(3) वृद्धि सन्धि-अ या आ के बाद यदि ए या ऐ रहे तो दोनों मिलकर ‘ऐ’ और ओ या औ रहे तो ‘औ’ होता है। इसे वृद्धि-सन्धि कहते हैं। जैसे –

अ + ए = ए = एक + एक = एकैक ।
अ + ऐ = ऐ = मत + एक्य = मतैक्य ।
आ + ए = ऐ = तथा + एव = तथैव ।
अ + ऐ = ऐ = महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य ।
आ + औ = औ = परम + औषध = परमौषध
अ + औ = औ = गुण + औदार्य = गुणौदार्य
आ + ओ = औ= महा + औषधि = महौषधि
आ + औ = औ = कला + औचित्य = कलौचित्य

हित + एषी = हितैषी
परम + ऐश्चर्य = परमैश्चर्य
सदा + एव = सदैव
सखा + ऐक्य = सखैक्य

(4) यण सन्धि-हस्व या दीर्घकार, इकार या ऋ के बाद यदि कोई भिन्न स्वर वर्ण रहे तो दोनों मिलकर क्रमशः य, व, या र होता है । इस प्रकार की सन्धि को यण सन्धि कहते है। जैसे- इ + अ = य्

यदि + अपि = यद्यपि
अति + अन्त = अत्यन्त
प्रति + अंग = प्रत्यंग

वि + अयव्यय
वि + अर्थ = व्यर्थ
वि+ अवस्था = व्यवस्था ।

इ + आ = या

इति + आदि = इत्यादि
अति + आचार = अत्याचार
वि + आख्या = व्याख्या

वि + आकुल = व्याकुल
वि + आपक = व्यापक
वि+ आहार = व्यवहार

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

ई + अ = य = रजनी + अन्त = रजयन्त
ई + आ = या = सती + ओसक्त = सत्यासक्त
इ + उ = यु = प्रति + उत्तर + प्रत्युत्तर
इ + ऊ = यू = नि + ऊन = न्यून
इ + ए =ऐ = प्रति + एक = प्रत्येक
इ + ए = 2 = अति + ऐश्वर्य = अत्यैश्वर्य
इ + अव = अनु + अय = अन्वय
उ + अ = वा = सु + आगत = स्वागत
उ + इ =वि = अनु + इत = अन्वित
उ + ए = वे = अनु + ऐषण = अन्वेषण ।
उ + ओ = वो = सु + औषधि = स्वौषधि

(5) अयादि सन्धि-ए, ऐ, ओ, या औ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ए का अय, ऐ, का आय, ओ का अव तथा औ का आव हो जाता है। जैसे-
ए + अ = अय = ने + अन = नयन
ऐ + अ = आय = ने + अक = नायक
ओ + अ =अव = पो + अन = पवन
औ + अ = आव् = पौ + अक = पावक
ओ + ई = आवि = पो + इत्र = पवित्र
औ + इ = आवि = नौ + इक = नाविक
औ + उ = आवु = भौ + उक = भावुक

(2) व्यंजन-सन्धि

व्यंजन-सन्धि-व्यंजन के साथ किसी स्वर या व्यंजन के संयोग संधि कहते हैं, जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि - 1

(i) किसी वर्ग के प्रथम वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प) के बाद कोई स्वर वर्ण हो तो प्रथम वर्ण के बदले में उस वर्ग का तीसरा वर्ण होता है, जैसे –

वाक् + इेश = वागीश
तत् + अनुसार = तदनुसार
अच् + अन्ता = अजन्ता
दिक् + अन्त = दिगन्त
दिक् + अम्बर = दिगम्बर
षट् + आनन = षडानन
उत् + हारण = उदाहरण
सत + इच्छा = सदिच्छा
जगत् + ईश्वर = जगदीश्वर
सत् + आचार = सदाचार

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(ii) किसी वर्ग के प्रथम वर्ण के पश्चात किसी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण र, या व् हो तो प्रथम वर्ण के बदले तीसरा वर्ण होता है, जैसे-

षट् + दर्शन = षड्दर्शन
सत् + गति =सद्रति
उत् + घाटन = उद्घाटन
दिक् + गज = दिग्गज

उत् + योग = उद्योग
उत् + वेग = उद्वेग
तत् + रूप = तद्रूप
अज + ज = अब्ज ।

(iii) किसी वर्ग के प्रथम वर्ण के बाद किसी वर्ग का पंचम वर्ण रहे, तो प्रथम – वर्ण का पंचम वर्ण (ङ, न, म) हो जाता है, जैसे

वाक् + मय = वाङ्मय
उत् + मत = उन्मत्त
जगत् + नाथ = जगन्नाथ
उत् + नत् = उन्नत

सत् + मार्ग = सन्मार्ग
उत् + नायक = उन्नायक
प्राक् + मुख = प्राङ्मुख
उत् + मद = उन्मद।

(iv) यदि म् के बाद किसी वर्ग का कोई वर्ण हो तो म् उस वर्ग का पंचम वर्ण होता है; जैसे-

आलम् + कार = अलंकार
अहम् + कार = अहंकार
सम् + चार = संचार
किम् + तु = किन्तु
सम् + जय = संजय

सम् + देह =सन्देह
सम् + धि = सन्धि
शम् + कर = शंकर
शाम् + ति = शांति
सम् + भव = सम्भव ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(v) यदि म् के बाद अन्तस्थ (य, र, ल, व्) या ऊष्म (श्, ष, ह) वर्ण हो तो स् का अनुस्वार होता है, जैसे –

सम् + वाद = संवाद
सम् + सार = संसार
सम् + हार = संहार

सम् + लग्न = संलग्न
सम् + रक्षक = संरक्षक
किम् + वदन्ति = किवदन्ती

(vi) न् या म् के बाद कोई स्वर वर्ण रहे तो दोनों मिलकर संयुक्त हो जाते है, जैसे –

अन् + अंग =अनंग
सम् + सार = संसार
सम् + हार = संहार

सम् + अन्वय = समन्वय
अन् + आदर = अनादर
अन् + इष्ट = अनिष्ट।

(vii) (क) त् के बाद अगर च, ज या ल हो तो त् + च = च्च, त् + ज = ज्ज, त् + ल = ल्ल हो जाता है, जैसे

उत् + चारण = उच्चारण
उत् + ज्वल = उज्जवल
उत्त + लंघन = उल्लंघन
तत् + लीन = तल्लीन
उत् + लेख = उल्लेख

उत् + जयिनि = उज्जयिनी
सत् + जन सज्जन
शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र
सत् + चरित्र = सच्चरित्र
उत् + लास + उल्लास

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(ख) त् के बाद छ् या श् हो, तो त के बदले में च और श के बदले में छ हो जाता है, जैसे

उत् + छंद = उच्छंद
उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
उत् + शृंखल = उच्छंखल
उत् + श्वास = उच्छवास

(ग) त् के बाद ह हो तो त् के बदले में ट् और ह, के बदले में ‘ध’ हो जाता है, जैसे

तत् + हित = तद्धित
उत् + हित = उद्धत
उत् + हरण = उद्धरण
उत् + हार = उद्धार ।

(घ) त् के बाद क, प् या स् हो तो दोनों मिलकर संयुक्त हो जाता हैं, जैसे

तत् + काल = तत्काल
तत् + त्व = तत्त्व
महत् + त्व = महत्त्व

उत् + पात = उत्पात
सत् + कर्म = सत्कर्म
सत् + संग = सत्संग

(viii) ए के पश्चात् त् या थ् हो तो त् के बदले में ट् और थ् के बदले में ठ हो जाता है, जैसे –

अष् + त= अष्ट
नष् + त =नष्ट
इष् + त = इष्ट
दुष् + त दुष्ट

षष् + थ = षष्ठ
पृष् + थ = पृष्ठ
शिष + त = शिष्ट
कष् + त = कष्ट

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(ix) मूल या दीर्घ स्वर के पश्चात् छ रहे तो छ के पहले च की वृद्धि हाती है, जैसे

अनु + छेद = अनुच्छेद
परि + छेद = परिच्छे
वि + छिन्न = विच्छिन्न

वि + छेद + विच्छेद
प्रति + छाया = प्रतिच्छाया
श्री + छाया = श्रीच्छाया

(x) यदि परि या सम् उपसर्ग के बाद कृ धातु का संयोग हो, तो ष् या स की वृद्धि होती है और म् के बदले अनुस्वार हो जाता है, जैसे –

परि + कार = परिष्कार
परि = कृत = परिष्कृत

सम् + कार = संस्कार
सम + कृत = संस्कृत

(3) विसर्ग सन्धि

विसर्ग सन्धि-विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल को विसर्ग-सन्धि कहते हैं, जैसे

निः+ फल = निष्फल
दुः+ लभ = दुर्लभ
तपः + वन = तपोवन

अन्तः + आत्मा = अन्तरात्मा
निः + काम = निष्काम
दु: + दशा = दुर्दशा

(i) यदि विसर्ग के पहले इ या उ हो तथा उसके बाद क, ख, ट, उ प या फ हो तो विसर्ग का प् हो जाता है, जैसे

आवि: + कार = आविष्कार
निः + कपट = निष्कपट
दुः+ कार = दुष्कार

धातुः + पद = चतुष्पद
निः + काम = निष्काम
निः+ ठुर = निष्ठुर

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(ii) यदि विसर्ग के पहले इ या उ हो तथा इसके बाद च या छ हो तो विसर्ग के स्थान में श् तथा त या थ रहे तो स् हो जाता है, जैसे

दुः+ चरित = दुश्चरित
दुः+ तर = दुस्तर
निः + छल =निश्छल
निः + तार = निस्तार

(iii) यदि विसर्ग के पहले इ या उ हो तथा विसर्ग के बाद श, ष, या स् हो तो विसर्ग का विसर्ग ही रह जाता है या उसके स्थान पर क्रमशः श, ष, या स् । हो जाता है, जैसे

दु: + शासन = दुःशासन, दुश्शासन
निः + संतान = नि:संतान, निस्संतान
दु: + साहस = दुःसाहस, दुस्साहस
निः + सन्देह = नि:संदेह, निस्संदेह

(iv) यदि विसर्ग के पहले अ या आ तथा उसके बाद कर या कार हो तो विसर्ग का स् हो जाता है, जैसे

तिरः + कार = तिरस्कार
नमः + कार = नमस्कार
भाः + कर = भास्कर
पुरः + कार = पुरस्कार

(v) विसर्ग के पहले अ या आ के अतिरिक्त कोई स्वर हो तथा उसके बाद किसी वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ण हो या य, स, व हो या स्वर वर्ण हो __ तो विसर्ग के स्थान पर र हो जाता है, जैसे-

दु: + दशा = दुर्दशा
निः + धन = निर्धन
दु: + लभ = दुर्लभ
निः + अक्षर = निरक्षर
निः + ईक्षण = निरीक्षण

दुः+ बल = दुर्बल
निः + मम = निर्मम
टुः + वचन = दुर्वचन|
नि: + अन्तर = निरंतर
निः + आदर = निरादर ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(vi) यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ हो तथा बाद में किसी वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ण हो या व, र, ल, द, हो तो विसर्ग के स्थान में ‘ओ’ हो जाता है, जैसे

अधः + गति = अधोगति
पयः + धि = पयोधि
मनः + मोहक =मनमोहक
मनः + रथ = मनोरथ
सरः + वर = सरोवर

तपः + बल = तपोबल
मनः + भाव = मनोभाव
मनः + योग = मनोयोग
यशः + लाभ = यशोलाभ
तपः + वन = तपोवन।

(vii) यदि विसर्ग के पहले इ या उ हो तथा उसके बाद र हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है तथा विसर्ग के पहले वाला स्वर दीर्घ हो जाता है, जैसे

दुः + राज = दूराज
निः + रस- नीरस
निः + रव = नीरव
निः + रोग = नीरोग ।

(viii) यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ हो और बाद में भी ‘अ’ हो तो विसर्ग और अ मिलकर ओ हो जाता है तथा बाद वाले का लोप हो जाता है, जैसे-

मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
मनः + अनुसार = मनोनुसार

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

(ix) र – जात विसर्ग के बाद किसी वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ग हो या य, र, ल, व, ह, हो या कोई स्वर हो तो विसर्ग का र् हो जाता है। जैसे

अन्तः + जातीय = अन्तर्जातीय
अन्तः + यामी = अन्तर्यामी
अतः+ आत्मा = अन्तरात्मा
अन्तः + नाद = अन्तर्नाद
पुनः + जन्म = पुनर्जन्म

(x) स-जात विसर्ग के बाद किसी वर्ग का प्रथम या द्वितीय वर्ण या व हो तो दूसरे नियम के अनुसार का स् य श् हो जाता है, जैसे
अन्तः + तल = अन्तस्थल
मनः + ताप = मनस्ताप

(xi) यदि विसर्ग के पहले अ हो या उसके बाद कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग लुप्त हो जाता है, जैसे-
अतः + एव = अतएव ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण सन्धि

अभ्यास प्रश्न

1. निम्नलिखित प्रश्नों में सन्धि कीजिए-

हिम + आलय
स + अवधान
पो + अक
उत् + ज्वल
सु + अगत
सम् + कृत
सूर्य + उदय
जगत् + ईश

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन Questions and Answers

कर्तवाक्य से कर्मवाच्य बनाने की विधि

(क) कंर्तृवाच्य के कर्ता को करण कारक बना दिया जाता है। अर्थात् कर्ता को उसकी विभक्ति (यदि लगी है तो) हटाकर ‘से’, ‘द्वारा’ विभक्ति लगा दी जाती है। जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन- 1

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन

(ख) कर्म के साथ यदि विभक्ति लगी हो तो उसे हटा दिया जाता है। जैसे –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन- 2

(ग) बदले हुए क्रिया के रूप के साथ काल, पुरुष, वचन और लिंग के अनुसार ‘जात्रा’ क्रिया का रूप जोड़ना चाहिए। कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया बना दिया जाता है। जैसे-
लिखता है – लिखा जाता है।
धोए – धोए गए।
तोड़ोगे – तोड़े जाएँगे।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने की विधि

(क) कर्ता के आगे ‘से’ अथवा ‘के द्वारा’ लगाया जाता है। जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन- 3

(ख) गख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया के एकवचन में बदल कर उसके साः क्रिया के एकवचन, पुल्लिंग, अन्य पुरुष का वही काल लगाया जाता है जो क क य की क्रिया का होता है। जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन- 4

कर्मचाव्य और भाववाच्य में कर्तृवाच्य बनाने के विधि

कर्मचाव्य और भाववाच्य में कर्तृवाच्य बनाने के लिए ‘से’, ‘द्वारा’; ‘के द्वारा’ आदि की जटा दिया जाता है। जैसे -.
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन- 5

कर्मवाच्य के प्रयोग स्थल

1. जब वाक्य में कर्ता का निश्चित रूप से पता न हो। जैसे
धन पानी की तरह बहाया जा रहा है।
पत्र भेज दिए गए हैं।
2. जब कर्ता कोई समिति, सभा या सरकार आदि हो जैसे
आर्य समाज द्वारा कई अन्तर्जातीय विवाह कराए गए।
सरकार द्वारा अतुल धनराशि जुटाई जाती है।
3. सूचना-विज्ञप्ति आदि में जहाँ कर्ता निश्चित नहीं होता। जैसे
सड़क पर अवरोध खड़ा करने वालों को दंड किया जाएगा।
आपका प्रार्थना-पत्र रद्द कर दिया गया है।
4. असमर्थता बताने के लिए ‘नहीं’ के साथ। जैसे-
अब अधिक दूध नहीं पिया जाता। गरीब का दुख नहीं देखा जाता।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन

भाववाच्य के प्रयोग स्थल ।

1. असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए ‘नहीं’ के साथ भाववाच्य का __ प्रयोग होता है। जैसे
मुझसे अब हँसा तक नहीं जाता।
सुरेश से चला तक नहीं जाता।

2. ‘नहीं’ का प्रयोग न होने पर मूल कर्ता जन सामान्य होता है। जैसे. सर्दियों में अन्दर सोया जाता है।

परसर्ग ‘ने’ का क्रिया पर प्रभाव

निम्नलिखित वाक्य का अध्ययन कीजिए-

राम खाना खा चुका है। – राम ने खाना खा लिया है।
(‘खा चुका है’ क्रिया ‘ने’ परसर्ग आने पर ‘खा लिया है’ हो गई)

मैं इस गर्जन से डर गया। – मुझे इस गर्जन ने डरा दिया।
(‘डर गया’ की जगह ‘डरा दिया’ हो गया।)

मुझसे डंडा छूट गया। – मैंने डंडा छोड़ दिया।
(‘छूट गया’ की जगह ‘छोड़ दिया’ हो गया।)

वह हिम्मत नहीं हारा। – उसने हिम्मत नहीं हारी।
(यहाँ ‘हारा’ की जगह ‘हारी’ हो गया।)

उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि ‘ने’ परसर्ग लगने से क्रिया के स्वरूप में परिवर्तन होता है। इस विषय में कुछ ध्यान देने योग्य तथ्य इस प्रकार हैं

‘ने’ वाले वाक्यों में यदि कर्म के साथ ‘को’ जुड़ जाए तो क्रिया हमेशा पुल्लिंग एकवचन में होती है। उदाहरणतया-
राम ने रावण को मारा। (पुल्लिंग एकवचन)
अशोक ने जलेबी को खाया। (पुल्लिंग एकवचन)
महेश ने गेंद को फेंका। (पुल्लिंग एकवचन)
अश्विनी ने जामुनों को फेंक दिया। (पुल्लिंग एकवचन)

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य परिवर्तन

स्पष्टीकरण-उपर्युक्त वाक्यों में यदि को’ परसर्ग न हो तो वाक्यों का स्वरूप इस प्रकार होगा –

अशोक ने जलेबी खाई। महेश ने गेंद फेंकी।
अश्विनी ने जामुन फेंक दिए।
‘ने’ का प्रयोग सदा क्रिया के पूर्ण पक्ष को दर्शाने के लिए होता है।

उदाहरणतया –

अशोक ने गलती की। मनोहर ने धमकी दी।
बाढ़ ने सारी फसलें तबाह कर दी।
चिंता ने उसे कमजोर बना दिया है।
खुशी ने उसे हृष्ट-पुष्ट कर दिया था।
उत्साह ने सबकी गति बढ़ा दी होगी।

सामान्यतः पूर्ण वर्तमान काल के लिए ‘चुका है’ सहायक क्रिया का प्रयोग होता है। परन्तु ‘ने’ परसर्ग लगने पर ‘चुका है’ की बजाय ‘लिया है’ आदि क्रिया-रूपों का प्रयोग होता है। उदाहरणतया

वह पुरस्कार ले चुका है।
उसने पुरस्कार ले लिया है।