Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.2

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए, जिसमें BC = 7 cm, ∠B = 75° और AB + AC = 13 cm हो।
उत्तर:
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(1) एक किरण BX खाँची जिसमें रेखाखण्ड BC = 7 cm लिया।
(2) ∠B = 75° बनाया।
∠XBY = 75°
(3) BY से BD = 13 cm लिया।
(4) CD को मिलाया तथा CD का लम्बा अईक साँचा जो BD को A पर काटता है।
(5) AC को मिलाया।
अतः प्राप्त ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

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प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए, जिसमें BC = 8 cm. ∠B = 45° और AB – AC = 3.5 cm हो।
उत्तर:
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रचना:
(1) एक किरण BQ खींची तथा रेखाखण्ड BC = 8 cm लिया।
(2) ∠ABC = 45° बनाया।
(3) BP से BD = 3.5 cm का रेखाखण्ड लिया।
(4) रेखाखण्ड CD को मिलाया।
(5) CD का लम्ब अद्धक RS साँचा जो A पर मिलना है। AC को मिलाया।
अत: प्राप्त ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

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प्रश्न 3.
एक त्रिभुज PQR की रचना कीजिए, जिसमें QR = 6 cm, ∠Q = 60° और PR – PQ = 2 cm हो।
उत्तर:
रचना:
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(1) एक किरण QX खींची, जिसमें QR रेखाखण्ड लिया।
(2) ∠YQR = 60° बनाया तथा YQ को YQZ तक बढ़ाया।
(3) QS = 2 cm लिया।
(4) RS को मिलाया।
(5) RS का लाबार्शक खींचा जो QY को P पर काटता है।
(6) PR को मिलाया।
अतः प्राप्त ∆PQR अभीष्ट त्रिभुज है।

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प्रश्न 4.
एक त्रिभुज XYZ की रचना कीजिए, जिसमें ∠Y = 30°, ∠Z = 90° तथा XY+ YZ + ZX = 11 cm हो।
उत्तर:
रचना:
(1) किरण AB स्त्रीची।
(2) बिन्दु पर ∠PAB = 30° तथा विन्दु B पर ∠QBA= 90° बनाया।
(3) ∠PAB तथा ∠QBA के अर्डक खीचे जो परस्पर X पर प्रतिच्छेदित करते हैं।
(4) ST तथा UV खाँचे वो AX तथा BX के लम्बाईक है।
(5) ST, AB को Y पर UV, AB को पर प्रतिच्छेदित करता है।
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(6) XY तथा YZ को निलाया।
अत: प्राप्त ∆XYZ अभीष्ट त्रिभुज है।

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प्रश्न 5.
एक सपकोण त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसका आधार 12 cm और कर्ण तथा अन्य भुजा का योग 18 cm है।
उत्तर:
रचना:
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(1) एक किरण QX खोची तथा रेखाखण्ड QR लिया।
(2) ∠XQY = 90° बनाया तथा रेखाखण्ड QS लिया। [∵ QS = 18 cm]
(3) RS को मिलाया राधा उसका लम्बअर्डकखौचाजी QY को P पर काटता है।
(4) RP को मिलाया।
अतः प्राप्त ∆PQR अभीष्ट त्रिभुज है।

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1

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प्रश्न 1.
एक दी हुई किरण के प्रारम्भिक बिन्दु पर 90° के कोण की रचना कीजिए और कारण सहित रचना की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 1
रचना:
(1) एक किरण OD खाँची।
(2) O को केन्द्र मानकर किसी भी त्रिज्या *E का चाप (खाँचा) जो किरण OD को A पर कर कारता है।
(3) A को कान्द्र मानकर समान पिच्या का0 एक चाप खींचा जो पहले मकान चाप को बिन्द पर तथा इसी प्रकार B को केन्द्र मानकर चाप खाँचा जो पहले चाचकोर C पर कारता है।
(4) B तथा C को केन्द्र मानकर BC के आधे से अधिक की त्रिज्या लेकर चाप खीचे जो परस्पर विन्दु E पर काटते हैं।
(5) OE को मिलाया। इस प्रकार ∠DOE = 90°.
सत्यापन: AB को मिलाया। तब,
OA = AB = OB (रचना मे)
∴ ∆OAB एक समबाहु त्रिभुज है।
अत: ∠AOB = 60°
अब BC को मिलाया।
OB = BC = OC (रचना से)
∴ ∆OBC भी एक समबाहु त्रिभुज है।
अत: ∠BOC = 60°
∴ OE द्विभाजित करता है ∠BOC को । अत:
∠EOB = 30°
⇒ ∠DOE = ∠AOB + ∠BOE
= 60° + 30° = 90°.

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प्रश्न 2.
एक दी हुई किरण के प्रारम्भिक बिन्दु पर 45° के कोण की रचना कीजिए और कारण महित रचना की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 2
(1) एक किरण OA खींचा।
(2) O को केन्द्र मानकर किसी भी त्रिज्या का चाप खींचा। जानकिरण OA को B पर काटता है।
(3) को केन्द्र मानवर समान त्रिया का एक चाप खाँचा जो पहले चाप को C पर तथा C को केन्द्र मानकर चाप खींचा जो पहले चापको D पर काटता है।
(4) C तथा D को केन्द्र मानकर CD के आधे से ज्यादा की त्रिज्या लेकर चापखांचे जो परस्पर विन्दु E पर काटने हैं।
(5) OE को मिलाया। अत: ∠AOE = 90°.
(6) ∠AOE का अर्द्धक OF खींचा। अत: ∠AOF = 45°.
सत्यापन:
∴ ∠AOE = 90° तथा OF अद्धक है ∠AOE का
आतः ∠AOF = \(\frac{1}{2}\) ∠ADE = 45°.

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प्रश्न 3.
निम्न मापों के कोणों की रचना कीजिए
(i) 30°
(ii) 22 \(\frac{1°}{2}\)
(iii) 15°.
उत्तर:
रचना:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 3
(1) एक किरण OA खाँची।
(2) O को केन्द्र मानकर किसी भी त्रिज्या का चापीच जो किरण OA की B पर कारते हैं।
(3) B को केन्द्र मानकर समान त्रिज्या का एक चाप पांचा जो पहले चाप को C पर काटता है।
(4) B तथा C को केन्द्र मानकर BC की आधी से ज्यादा त्रिज्या लेकर चाप खीचे जो परस्पर बिन्दु D पर कारते हैं।
(5) OD को मिलाया। अत: ∠DOA = 30°

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(ii) रचना:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 4
(1) ∠BOA = 90° की रचना की।
(2) ∠BOA का अर्द्धक ∠COA बनाया।
अत: ∠COA = 45°
(3) ∠COA का अर्द्धक ∠DOA बनाया।
अतः ∠DOA = 22 \(\frac{1°}{2}\)

(iii) रचना:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 5
(1) ∠BOA = 60° की रचना की।
(2) ∠BOA का अर्द्धक ∠BOC = 30° बनाया।
(3) इसी प्रकार ∠BOC का अक ∠BOD = 15°

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प्रश्न 4.
निम्न कोणों की रचना कीजिए और चाँद द्वारा मापकर पुष्टि कीजिए।
(i) 75°
(ii) 105°
(iii) 135°
उत्तर:
(i) रचना :
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 6
(1) एक किरण OA बीची।
(2) ∠AOP = 60° की रचना की।
(3) ∠AOQ = 90° की रचना की।
(4) ∠POQ का अर्द्धक बनाया।
∠POR = \(\frac{1}{2}\) ∠POQ = \(\frac{1}{2}\) (∠AOQ – ∠AOP)
= \(\frac{1}{2}\) (90° – 60°) = \(\frac{1}{2}\) × 30° = 15°
अत: ∠AOR
= ∠AOP + ∠POR
= 60° + 15° = 75°.
सत्यापन: चदि से मापने पर ∠AOR = 75°.

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(ii) रचना:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 7
(1) एक रेखाखण्ड XYखींचा।
(2) ∠YXF = 120° तथा ∠YXD = 90° की रचना की।
∴ ∠DXF = ∠YXF – ∠YXD
= 120° – 90° = 30°
(3) ∠DXF की अर्द्धक रेखा XE खींची।
अर्थात् ∠DXE = \(\frac{1}{2}\) ∠DXF = \(\frac{1}{2}\) × 30° = 15°
अतः ∠YXE = ∠YXD + ∠DXE
= 90° + 15° = 105°.
सत्यापन : पदि से नापने पर ∠YXE = 105°

(iii) रचना:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 8
(1) ∠AOE = 90° बनाया।
⇒ ∠GOE = 90°
(2) ∠GOE का अहंक OF चा।
अर्थात् ∠EOF आकृति 11.8
= \(\frac{1}{2}\) ∠GOE
= \(\frac{1}{2}\) × 90° = 45°
आत; ∠AOF = ∠AOE + ∠EOF
= 90° + 45°= 135°
सत्यापन-चाँद से मापने पर ∠AOF = 135°

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प्रश्न 5.
एक समबाहु त्रिभज की रचना कीजिए, जब इसकी भुजा दी हो तथा कारण सहित रचना की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Ex 11.1 9
रचना : माना समबाहु त्रिभुज की भुजा 5 cm है।
(1) AB = 5 cm खींची।
(2) A तथा B को केन्द्र मानकर 5 cm त्रिज्या के दो चाप खींचे जो परस्पर बिन्दु C पर काटते हैं।
(3) AC तथा BC को मिलाया।
अतः अभीष्ट ∆ABC एक समयाहु त्रिभुज है।
सत्यापन: रचना से, AB = BC = AC = 5 cm
अत: ∆ABC एक समबाहु त्रिभुज है।

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 1.
आकृति में, ∆ABC की एक माध्यिका AD पर स्थित E कोई विन्दु है। दर्शाइए कि
ar (∆ABE) = ar (∆ACE) है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 1
उत्तर:
यहाँ AD त्रिभुज ABC की माध्यिका है। –
⇒ ar (∆ABD) = ar (∆ACD) ……. (1)
इसी प्रकार ED त्रिभुन EBC की माध्यिका है।
⇒ ar (∆BED) = ar (∆CED) ……. (2)
समी- (1) में से समी. (2) को घटाने पर,
ar (∆ABD) = ar (∆BED) = ar (∆ACD) – (∆CED)
ar (∆ABE) = ar (∆ACE).

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 2.
∆ABC में, E माध्यिका AD का मध्य बिन्दु है। दर्शाइए कि ar (∆BED) = \(\frac{1}{4}\) ar (∆ABC) है।
उत्तर:
यहाँ AD त्रिभुव ABC की माध्यिका है।
⇒ ar (∆ABD) = ar (∆ACD)
= \(\frac{1}{2}\) ar (∆ABC) ………. (1)
अब BE त्रिभुज ABD को माध्यिका है।
⇒ ar (∆BED) = ar (∆BAE)
= \(\frac{1}{2}\) ar (∆ABD)
⇒ ar (∆BED) = \(\frac{1}{2}\) ar (∆ABD)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 2
समी. (1) से मान रखने पर,
ar (∆BED) = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{1}{2}\) ar (∆ABC)
ar (∆BED) = \(\frac{1}{4}\) ar (∆ABC).

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 3.
दर्शाइए कि समानर चतुर्भुज के दोनों विकर्ण असे बराबर क्षेत्रफलों वाले चार त्रिभुजों में बांटते हैं।
उत्तर:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है, अत: इसके विकर्ष AC और BD एक दूसरे को बिन्दु O पर इस प्रकार कारते हैं कि
OA = OC तथा OB = OD
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 3
एक लम्ब BL B से AC पर खींचने पर,
ar (∆AOB) = \(\frac{1}{2}\) × OA × BL …….. (1)
ar (∆BOC) = \(\frac{1}{2}\) × OC × BL
⇒ ar (∆BOC) = \(\frac{1}{2}\) × OA × BL ………. (2)
(∵ OA = OC)
अत: समी. (1) व (2) से,
ar (∆AOB) = ar (∆BOC)
इसी प्रकार, ar (∆AOB) = ar (∆AOD)
तथा ar (∆AOD) = ar (∆COD)
अतः ar (∆AOB) = ar (∆BOC) = ar (∆COD)
= ar (∆DOA)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 4.
आकृति में, ABC तथा ABD एक ही आधार AB पर बने दो त्रिभुज हैं। यदि रेखाखण्ड CD रेखाखण्ड AB बिन्दु O पर समद्वि भाजित होता है, तो दर्शाइए कि ar (ABC) = ar (ABD) है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 4
उत्तर:
∆ACD में
AO माध्यिका है।
ar (∆AOD) = ar (∆AOC) ………. (1)
अब, ∆CBD में BO माध्यिका है।। –
ar (∆BOD) = ar (∆BOC) ……. (2)
समो. (1) व (2) को जोड़ने पर,
ar (∆AOD) + ar (∆BOD) = ar (∆AOC)+ ar (∆BOC)
ar (∆ABD) = ar (∆ABC)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 5.
D, E और Fक्रमशः त्रिभुज ABC की भुजाओं BC, CA और AB के मध्य बिन्दु हैं। दर्शाइए कि-
(i) BDEF एक समान्तर चतुर्भुज है।
(ii) ar (DEF) = \(\frac{1}{4}\) ar (ABC)
(iii) ar (BDEF) = \(\frac{1}{2}\) ar (ABC)
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 5
(i) ∆ABC में,
∴ E नपा F क्रमशः भुजा AC चा AB के मध्य बिन्दु हैं।
⇒ EF || CB
∴ E था D. क्रमश: भुजा AC तथा BC के मध्य बिन्दु हैं।
⇒ ED || FB
अत: BDEF एक समान्तर चतुर्भुज है।

(ii) इसी तरह, FDCE और AFDE समान्तर चतुर्भुज है।
∴ ar (FED) = ar (DEF) …….. (1)
(∵ FD, चतुर्भुज FEDH का विकर्ण है।)
ar (CDE) = ar (DEF) ………. (2)
(∵ DE, चतुर्भुज FECD का विकर्ण है।)
ar (AFE) = ar (DEF) ………. (3)
(∵ FE, चतुर्भुज AEDF का विकर्ण है।)
⇒ ar (FBD) = ar (DEF) = ar (CDE) = ar (AFE)
∴ ar(FBD) + ar (DEF) + ar (CDE)+ar (AFE) = ar (ABC)
∴ 4ar (DEF) = ar (ABC)
⇒ ar (DEF) = \(\frac{1}{4}\) ar (ABC)

(iii) ∴ ar (DEF) = \(\frac{1}{4}\) ar (ABC) [∵ भाग (ii) से]
2ar (DEF) = \(\frac{1}{2}\) ar (ABC)
ar (DEF)+ ar (DEF) = \(\frac{1}{2}\) ar (ABC)
ar (DEF) + ar (BFD) = \(\frac{1}{2}\) ar (ABC)
ar (BDEF) = \(\frac{1}{2}\) ar (ABC).

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प्रश्न 6.
पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में, चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु ० पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि OB = OD है। यदि AB = CD है, तो दहिए कि-
(i) ar (DOC) = ar(AOB)
(ii) ar (DCB) = ar (ACB)
(iii) DA ||CB या ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
उत्तर:
रचना करें DN LAC और BM ⊥ AC
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 6
(i) ∆DON और ABOM में,
∠DNO = ∠BMO = 90° (रचना में)
OD = OB (दिया है।)
∠DON = ∠BOM (कधिर सम्मुख कोण)
∴ AAS सर्वांगसमता से,
∠DON ≅ ∠BOM
⇒ DN = BM
तथा ar (∆DON) = ar (∆BOM) ……. (1)
अब ∆DCN और ∆BAM में,
∠DNC = ∠BMA = 90°
DN = RM (सिद्ध किया है।)
DC = AB (दिया है।)
∴ RHS सर्वांगसमता से,
∆DCN ≅ ∆BAM
⇒ ar (∆DCN) = (∆BAM) ………. (2)
समी- (1) व (2) को जोड़ने पर,
ar (∆DON) + ar (∆DCN)
= ar (∆BOM) + ar (∆BAM)
अत: ar (∆DOC) = ar (∆AOB).

(ii) ar (∆DOC) = ar (∆AOB) [भाग (i) मे]
दोनों तरफ ar (∆COB) जोड़ने पर,
ar (∆DOC) + ar (∆COB)
= ar (∆AOB) + ar (∆COB)
⇒ ar (DCB) = ar (ACB).

(iii) ∆DCB और ∆ACB के क्षेत्रफल और आधार समान हैं। अत: उनके त्रिभुज समान्तर रेखाओं के मध्य स्पिन होंगे।
अत: DA || CB अर्थात्, ABCD एकसमान्तर चतुर्भुज है।

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प्रश्न 7.
विन्दु D और E क्रमश: ∆ABC की भुजाओं AB और AC पर इस प्रकार स्थित है कि
ar (∆DBC) = ar (∆EBC) है। दर्शावए कि DE || BC है।
उत्तर:
यहाँ ar (∆DBC) = ar (∆EBC)
दोनों त्रिभुजों के आधार समान है।
∴ ∆DBC तथा ∆EBC समान समान्तर रेखाओं के बीच बने हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 7
DE || BC.

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प्रश्न 8.
XY त्रिभुज ABC की भुजा BC के समानतर एक रेखा है। यदि BE || AC और CF || AR रेखा XY से क्रमश: E और F पर मिलती हैं, तो दर्शाइए कि-
ar (∆ABE) = ar (∆ACF).
उत्तर:
यहाँ XY || BC ⇒ EY || BC
BE || AC ⇒ BE || CY
⇒ BCYE एक समानार चतुर्भुव है।
तथा CE || BS ⇒ CF || Bx
XY || BC ⇒ XF || BC
⇒ BCFX एक समान्तर चतुर्भुज है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 8
यहाँ चतुर्भुज समान आधार BC तथा समान्तर रेखा BC तथा EF के मध्य है।
⇒ ar (BCEX) = ar (BCYE) …….. (1)
यहाँ ∆ABE तथा चतुर्भुज BCYE आधार BE तथा समान्तर रेखा AC के बीच में है।
अतः ar (∆ABE) = \(\frac{1}{2}\) ar (BCYE) ……. (2)
इसी तरह ar (ACF) = \(\frac{1}{2}\) ar (BCFX) ……… (3)
समी. (1), (2) व (3) से,
ar (∆ABE) = ar (∆ACF).

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प्रश्न 9.
समान्तर चतुर्भुज ABCD की एक भुजा AB को एक बिन्दु तक बढ़ाया गया है। A से होकर CP के समान्तर खींची गई रेखा बढ़ाई गई CB को Q ए पर मिलती है और फिर समान्तर चतुर्भुज PBQR को पूरा किया गया है (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए)। दर्शाइए कि
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 9
ar (ABCD) = ar (PBQR) है।
उत्तर:
AC और PQ को मिलाने पर,
∆ACQ तथा ∆AQP दाना आधार AQ पर तथा समान्तर रेसा AQ और CP के मध्य में बने हैं।
∴ ar (∆ACQ)
= ar (∆AQP)
⇒ ar (∆ACQ) – ar (∆ABQ)
= ar (∆AQP) – ar (∆ABQ)
⇒ ar (∆ABC) = ar (∆QBP) ……… (1)
यहाँ AC तमा PQ क्रमश: चतुर्भुज ABCD तथा BQRP के विकर्ण है।
⇒ 2 ar (∆ABC) = ar (ABCD] ………. (2)
तथा 2 ar (BPQ) = ar (BPRQ) ………. (3)
समी. (2) व (3) से,
ar (ABCD) = ar (PBQR)

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प्रश्न 10.
एक समलम्ब ABCD, जिसमें AB || DC है. के विकर्ण AC और BD परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। दर्शाइए कि ar (∆AOD) = ar (∆BOC) है।
उत्तर:
∆ABD तया ∆ABC आधार AB पर तघा समान्तर रेखा AB और DC के मध्य बने हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 10
= ar (∆ABD) = ar (∆ABC)
⇒ ar (∆ABD) = ar (∆AOB)
= ar (∆ABC) = ar (∆AOB)
अतः ar (∆AOD) = ar (∆BOC)

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प्रश्न 11.
आकृति में, ABCDE एक पचभुज है। B से होकर AC के समान्तर खींची गई रेखा बढ़ाई गई DC को F पर मिलती है। दर्शाइए कि-
(i) ar (∆ACB) = ar (∆ACF)
(ii) ar (AEDF) = ar (ABCDE).
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 11
उत्तर:
(i) ∆ACB तथा ∆ACF समान आधार AC तषा समान्तर रेखा AC और BF के योच में बने हैं।
अत: ar (∆ACR) = ar (∆ACF).

(ii) ar (∆ACB) = ar (∆ACF)
दोनों तरफ ar (CDEA) जोड़ने पर,
ar (∆ACB) + ar (CDEA)
= ar (∆ACF) + ar (CDEA)
ar (ABCDE) = ar (AEDF).

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प्रश्न 12.
गाँव के एक निवासी इतवारी के पास एक चतुभुजाकार भूखण्ड था। उस गाँव की ग्राम पंचायत ने उसके भूखण्ड के एक कोने से उसका कछ भाग लेने का निर्णय लिया ताकि वहाँ एक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण कराया जा सके। इतवारी इस प्रस्ताव को इस प्रतिबन्ध के साथ स्वीकार कर लेता है कि उसे इस भाग के बदले उसी भूखण्ड के संलग्न एक भाग ऐसा दे दिया जाए कि उसका भूखण्ड त्रिभुजाकार हो जाए। स्पष्ट कीजिए कि इस प्रस्ताव को किस प्रकार कार्यान्वित किया जा सकता है।
उत्तर:
माना ABCD एक चतुर्भुजाकार भूखण्ड है। (देखिए आकृति)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 12
AC को मिलाया।
एक रेखा DE || AC खांची तपा AB को आगे बढ़ाएँ और CE से मिलाएँ।
अतः इतवारी अपने चतुर्भुजाकार भूखण्ड से ACD ग्राम पंचायत को देगा तथा बदले में भूखण्ड ACE लेगा। इस प्रकार उसका भूखण्ड EBC झे जाएगा। जोकि त्रिभुजाकार है तथा क्षेत्रफल में मूल भूखण्ड के बराबर है।
यहाँ ∆ACE तथा ∆ACD समान आधार AC तथा समान्तर रेखा AC और ED के बीच बने है।
∴ (∆ACE) = ar (∆ACD) ……… (1)
अब, ar (ABCD) = ar (ABC) + ar (ACD)
= ar (ABC) + ar (ACE)
[समी. (1) से]
= ar (EBC)
∴ ar (ABCD) = ar (EBC).

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प्रश्न 13.
ABCD एक समलम्य है, जिसमें AB || DC है। AC के समान्तर एक रेखा AB को X पर और BC को Y पर प्रतिच्छेद करती है। सिद्ध कीजिए कि ar (ADX) = ar (ACY) है।
उत्तर:
∆AXD तथा ∆AXC समान आधार AX तथा समान्तर रेखा AX और CD के मध्य अने हैं।
∴ ar (∆ADX) = ar (∆ACX) ………. (1)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 13
दिया है, AC || XY
∆ACY तथा ∆ACX सनान आधार AC तथा समान्तर रेखा AC तथा XY के मध्य बने हैं।
∴ ar (∆ACY) = ar (∆ACX) …….. (2)
समी. (1) व (2) से,
ar (∆ADX) = ar (∆ACY).

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 14.
आकृति में AP || BQ || CR है। सिद्ध कीजिए कि ar (AQC) = ar (PBR) है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 14
उत्तर:
दिया है, AP || BQ
∆ABQ नया ∆PBQ समान आधार BQ तथा समान्तर रेखा AP और BQ के मध्य में हैं।
∴ ar (∆ABQ) = ar (∆PBQ) ……… (1)
दिया है, BQ || CR
∆BQC तथा ∆BQR समान आधार BQ तथा समान्तर रेखा BQ और CR के मध्य में है।
∴ ar (∆BQC) = ar (∆BQR) ……… (2)
समी. (1) व (2) को जोड़ने पर,
ar (∆ABQ) + ar (∆BQC)
= ar (∆PBQ) + ar (∆BQR)
ar (∆AQC) = ar (∆PBR).

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 15.
चतुर्भुज ABCD के विकणं AC और BD परस्पर बिन्दु O पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते है कि ar (∆AOD) = ar (∆BOC) है। सिद्ध कीजिए कि ARCD एक समलम्य है।
उत्तर:
दिया है, ar (∆AOD) = ar (∆BOC)
⇒ ar (∆AOD) + ar (∆DOC)
= ar (∆BOC) + ar (∆DOC)
[दोनों तरफ ar (∆DOC) जोड़ने पर]
⇒ ar (ADC) = ar (∆BDC)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 15
अतः ∆ADC और ∆BDC समान क्षेत्रफल के है तथा समान आधार पर हैं।
∴ AB || DC
अत: ABCD एक समलम्ब है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

प्रश्न 16.
आकृति में ar (∆DRC) = ar (∆DPC) है और ar (∆BDP) = ar (∆ARC) है। दर्शाइए कि दोनों चतुर्भुज ABCD और DCPR समलम्ब हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3 Q 16
उत्तर:
ar (∆DRC) = ar (∆DPC) ……… (1)
बोनों आधार DC पर बने हैं अर्थात् DC || RP
⇒ DCPR एक समलम्ब है।
∴ ar (∆BDP) = ar (∆ARC) …….. (2)
समी. (2) में से समी. (1) को पटाने पर,
ar (∆RDP) = ar (∆DPC) = ar (∆ARC) = ar (∆DRC)
⇒ ar (∆BDC) = ar (∆ADC)
दोनों आधार CD पर बने हैं अर्थात् AB || CD
⇒ ABCD एक समलम्ब है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Ex 9.3

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

Bihar Board Class 6 Science पेड़-पौधों की दुनिया Text Book Questions and Answers

अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न के चित्र बनायें।
उत्तर:
(क) मूसला जड़
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया 1

(ख) झकड़ा जड़
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया 2

(ग) पत्ती
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया 3

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

प्रश्न 2.
यदि किसी पौधे की पत्ती में समांतर शिरा-विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होंगी?
उत्तर:
निम पौधे की पत्ती में समांतर शिरा-विन्यास होता है उस पौधे की जड़ें झकड़ा या रेशेदार होती हैं। जैसे – मक्का, धान आदि।

प्रश्न 3.
यदि किसी पौधे की जड़ झकड़ा हो तो उसकी पत्ती का शिरा-विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर:
जिस पौधे की जड़ झकड़ा या रेशेदार होते हैं उसकी पत्ती का शिरा-विन्यास समानांतर होती है।

प्रश्न 4.
निम्न में से जालिका रूपी शिरा-विन्यास एवं समांतर शिरा-विन्यास वाली पत्तियों के अलग-अलग समूह बनायें। धान, गेहूँ, मक्का, पीपल, आम, धनिया, तुलसी।
उत्तर:
जालिका शिरा :
पीपल, आम, धनिया, तुलसी
समांतर शिरा :
धान, गेहूँ, मक्का

प्रश्न 5.
पौधे में जड़ का क्या कार्य है?.
उत्तर:
पौधे में जड़ जमीन से जल एवं खनिज लवण (पोषक तत्व) को अवशोषित करते हैं। इसके साथ पौधे को खड़ा रहने में मदद करता है जिसके कारण वह हवा, पानी तथा दुश्मन से अपनी सुरक्षा कर पाता है।

प्रश्न 6.
तना के दो कार्य बतायें।
उत्तर:
तना के दो प्रमुख कार्य –
(क) तना जल तथा खनिज लवण का संवहन करता है।
(ख) तना शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल-फल को सहारा देता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

प्रश्न 7.
जड़ कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
जड़ की संरचना के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है –
मूसला जड़ तथा रेशेदार या झकड़ा जड़।
जिस जड़ में कोई मुख्य जड़ नहीं होती है। बल्कि सभी जड़ें एक ही स्थान से निकलती है। उस जड़ को झकड़ा जड़ कहते हैं।
जिस जड़ में एक मुख्य जड़ होती है जिसमें से कई सहायक जड़ें निकली होती हैं। उसे मूसला जड़ कहते हैं।

प्रश्न 8.
जड़ के दो मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर:
जड़ के दो मुख्य कार्य निम्न हैं –
(क) जड़ जमीन से जल तथा खनिज लवण अवशोषित करता है।
(ख) पौधे को खड़ा रहने में मदद करता है।

प्रश्न 9.
पत्तियों के दो मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर:
पत्तियों के दो मुख्य कार्य –
(क) पत्ती जलवाष्प (जल) को वायुमंडल में छोड़ती है।
(ख) पत्ती पौधे का भोजन बनाती है।

प्रश्न 10.
यदि किसी पौधे की जड़ रेशेदार हो तो उसकी पत्ती का शिरा-विन्यास किस प्रकार का होगा।
उत्तर:
जिस पौधे की जड़ रेशेदार होती है उसकी पत्ती का शिरा-विन्यास जालिका होती है।

प्रश्न 11.
यदि किसी पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा-विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होगी?
उत्तर:
जिस पौधे की पत्ती में जालिकारूपी विन्यास होता है उस पौध की जड़ें रेशेदार या झकड़ा होती हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

प्रश्न 12.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(क) जड़ें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं मूसला जड़ तथा …………… जड़
(ख) जड़ें मिट्टी से जल एवं …………… का अवशोषण करती हैं।
(ग) पौधों को तीन वर्गों में रखा गया है – शाक, झाड़ी एवं ……………
(घ) झकड़ा जड़ का दूसरा नाम …………… जड़ है।
(ङ) जिन पत्तियों में शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर होती हैं उसे ……………. शिरा विन्यास कहते हैं।
उत्तर:
(क) रेशेदार
(ख) खनिज लवण
(ग) वृक्ष
(घ) रेशेदार
(ङ) रेशेदार

प्रश्न 13.
सही विकल्प चुनिए।

(क) आम है –
1. शाक
2. झाड़ी
3. वृक्ष
4. कोई नहीं
उत्तर:
3. वृक्ष

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(ख) पत्तियाँ जल को उपयोगी बनाने के लिए करती हैं –
1. भोजन
2. वाष्पोत्सर्जन
3. ऑक्सीजन
4. सभी में
उत्तर:
4. सभी में

(ग) जल की बूंदें पत्तियों से जलवाष्प के रूप में निकलती हैं। इस क्रिया – को कहते हैं।
1. वाष्पोत्सर्जन
2. प्रकाश-संश्लेषण
3. ऑक्सीकरण
4. कोई नहीं।
उत्तर:
1. वाष्पोत्सर्जन

(घ) मक्का के बीज में एक ही बीजपत्र होता है। अतः इसे …….. कहते हैं।
उत्तर:
एकल बीजपत्री।

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Bihar Board Class 6 Science पेड़-पौधों की दुनिया Notes

अध्ययन सामग्री

हरा-भरा पर्यावरण के लिए पेड़-पौधों का होना आवश्यक है। इसके बिना मानव जीवन की भी कल्पना नहीं कर सकते हैं। हवा से लेकर भोजन तक किसी न किसी रूप में हम पेड़-पौधों का प्रयोग करते हैं।

अतः पेड़-पौधे के बिना न पर्यावरण का और न ही जीव-जगत की कल्पना कर सकते हैं।

पेड़-पौधों की दुनिया में पत्ती को महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके कारण हम पेड़-पौधों को पहचान पाते हैं। इस अध्याय में पेड़-पौधों के सभी भागों के बारे में अध्ययन करना है और साथ ही पौधों के विकास में इसकी क्या भूमिका होती है, इन भागों के विभिन्न प्रकार यानि जड़ के आधार पर, पत्ती के आधार पर पौधों का वर्गीकरण का अध्ययन करना है। इस अध्याय में हमें पत्ती, जड़ तथा बीज के बीच संबंध का भी अध्ययन करना है।

पेड़-पौधों के पाँच भाग होते हैं—जड़, तना, पत्ती, फूल तथा फल। पेड़-पौधों की दुनिया में मौजूद सभी पेड़-पौधों को तना के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है – शाक, झाड़ी तथा पेड़ या वृक्षा

जिन पौधों का तना हरा और कोमल होता है तथा सामान्यतः कम ऊँचाई के होते है। उन्हें ‘शाक’ कहते हैं।

जिन पौधों में शाखाएँ तने के आधार से अधिक संख्या में निकलती हैं और जिनका तना सख्त, पतला तथा काष्ठीय होता है उन्हें ‘झाड़ी’ कहते हैं।

जिन पौधों का तना सख्त, भूरी छालवाला और मोटा होता है और जिनकी शाखाएँ तने के ऊपरी भाग से निकलती हैं उन्हें वृक्ष कहते हैं।

पेड़-पौधों में तना के ऊपर पत्ती की जमावट भी अलग-अलग होता है। किसी पौधे की डाली पर एक जगह से एक ही पत्ती निकलती है। ऐसी पत्ती को अकेली पत्ती या एकल पत्ती कहते हैं। किसी पौधे में पत्तियाँ जोड़ी में एक-दूसरे से विपरीत दिशा में निकलती हैं। ऐसी जमावट को जोड़ीदार जमावट कहते हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिनमें एक ही जगह से कई सारी पत्तियाँ गुच्छे के रूप में निकलती हैं जिसे गुच्छेदार जमावट कहते हैं।

पेड़-पौधों की जड़ों के अध्ययन से यह पता चलता है कि जड़ दो प्रकार के होते हैं –

(क) मूसला जड़
जिस जड़ में एक मुख्य जड़ होती है जिसमें से कई सहायक जड़ें निकली हों उस जड़ को मूसला जड़ कहते हैं। जैसे- आम की जड।

(ख) झकड़ा जड़/रेशेदार जड़
जिस जड़ में कोई मुख्य जड़ नहीं हो बल्कि सभी जड़ें एक ही स्थान से निकलती हैं, उस जड़ को झकड़ा या रेशेदार जड़ कहते हैं जैसे- मकई की जड़।

जड़ का मुख्य कार्य मिट्टी से जल तथा खनिज लवणों को अवशोषित कर पौधों को देना। इसके साथ-साथ हवा, पानी या अन्य अवरोधकों से रक्षा करना यानि पौधे को सीधा खड़ा रखने में सहायता प्रदान करना। तना, जड़, द्वारा अवशोपित जल एवं खनिज लवणों का संवहन करता है। इसके अलावे शाखाओं को अपने जोड़े में रखता है जिससे पौधों में पत्तियाँ. फल एवं फल लग पाते हैं।

पेड़ पौधों में जड़ और तना के बाद पत्नी का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हैं। कहा जाता है कि पत्ती पौधों का भोजन बनाती है। विभिन्न पौधों में पत्ती की – संरचना भी अलग-अलग होती है। पत्ती में रेखित संरचनाएँ होती हैं। पत्ती की इन रेखित संरचनाओं को ‘शिरा’ कहते हैं। पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहा जाता है। शिराओं के डिजाइन या विन्यास को “शिरा विन्यास” कहते हैं। शिराओं के विन्यास के आधार पर पत्ती को दो भागों में बाँटा गया है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

(क) जालिकारूपी विन्यास
(ख) समांतर शिरा-विन्यास

(क) वैसा विन्यास जिसमें मध्य शिरा के दोनों ओर जाल जैसा हो तो उसे जालिका रूपी विन्यास कहते हैं।
जैसे: गेहूँ, मक्का।

(ख) वैसा विन्यास जिसमें मध्य शिरा के दोनों ओर अन्य शिराएँ समानान्तर हों तो उसे समांतर शिरा विन्यास कहते हैं। जैसे – आम।

पत्ती भोजन बनाने के साथ-साथ वायुमंडल में प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के माध्यम से ऑक्सीजन छोड़ती है। पत्ती वाष्पोत्सर्जन क्रिया के माध्यम से वायुमंडल में जलवाष्प भी छोड़ती है।

बीज (फल) को पौध का जन्मदाता माना गया है। इन बीजों के अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि बीज की आंतरिक संरचना दो प्रकार की होती है –

(क) एक बीजपत्री वैसा बीज जिसमें एक ही बीजपत्र होते हैं। उसे एकबीजपत्री कहते हैं जैसे – मक्का ।
(ख) द्विबीजपत्री वैसा बीज जिसमें दो बीज पत्र होते हैं। उसे द्विबीजपत्री कहते हैं। जैसे – आम, चना आदि। बीजपत्र शीशु पौधों को पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 7 पेड़-पौधों की दुनिया

इस प्रकार जड़, तना, पत्ती एवं बीज के अध्ययनोपरांत यह भी निष्कर्ष निकलता है कि जिस पत्रियों में समानांतर विन्यास होता है। उसकी जड़ झकड़ा या रेशेदार होती है तथा बीज में एक बीज पत्र होते हैं। फूल के बारे में हमलोग आगे की कक्षा में अध्ययन करेंगे।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
दंड-आरेख –
उत्तर:
एक विमीय आरेख है।

प्रश्न 2.
आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किए गए आँकड़ों द्वारा हम आलेखी रूप में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –
उत्तर:
मध्यिका

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 3.
तोरणों के द्वारा आलेखी रूप में निम्न की स्थिति जानी जा सकती है –
उत्तर:
माध्यिका

प्रश्न 4.
अंकगणितीय रेखाचित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है
उत्तर:
दीर्घकालिक प्रवृत्ति

प्रश्न 5.
दंड-आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 6.
आयत चित्र में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए।
उत्तर:
गलत

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 7.
आयत चित्र की रचना केवल आँकड़ों के सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 8.
आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए एक जैसी: विधियाँ है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 9.
आयत चित्र की मदद से बारंबारता वितरण के बहुलक को आलेखी रूप में राज्य जा सकता है।
उत्तर:
सही

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 10.
तोरणों में बारम्बारता वितरण की माध्यिका को नहीं जाना जा सकता है।
उत्तर:
गलत

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख प्रभावी होता है?
(क) वर्ष विशेष की मासिक वर्षा
(ख) धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन
(ग) एक कारखाने में लागत घटक
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 1

प्रश्न 12.
मान लीजिए आप भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या में वृद्धि तथा भारत में शहरीकरण के निम्न स्तर पर बल देना चाहते हैं, जैसा कि उदाहरण 4.2 में दिखाया गया है, तो आप उसका सारणीयन कैसे करेंगे? उत्तर:
भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 2

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 13.
यदि किसी बारम्बारता सारणी में समान वर्ग अन्तरालों की तुलना में वर्ग अंतराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?
उत्तर:
आवृत्ति तालिका में वर्गान्तर समान भी हो सकते हैं और असमान भी। दोनों प्रकार के वर्गान्तर से आयत चित्र बनाने के विधि कुछ भिन्न है। जब सभी वर्गान्तर समान हैं तो सभी आयतों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु आयतों की ऊँचाई वर्गों की आवृत्तियों पर निर्भर करती है। जितनी आवृत्तियाँ अधिक होंगी आयतों की ऊँचाई भी उतनी ही अधिक होगी। इसके अतिरिक्त वर्गान्तर समान होने पर आवृत्तियों में कोई फेरबदल नहीं हो जाती, आवृत्तियों को मौलिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इसके विपरीत जब वर्गान्तर समान नहीं होते तो वर्गान्तरों की ऊँचाई करने के लिए आवृत्तियों का संशोधन किया जाता है। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और वर्ग 20-40 का वर्गान्तर 20 है जो न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है। अतः वर्ग की संशोधित आवृत्ति 20 के स्थान पर 10 (20 ÷ 2) होगी। मान लो 40-70 वर्गान्तर की आवृत्तियाँ 15 हैं। यह वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का तीन गुना है। अतः इसकी संशोधित आवृत्ति 5(15 ÷ 2) होगी।

प्रश्न 14.
भारतीय चीनी उद्योग संघ ने बताया कि दिसम्बर 2001 से पहले 15 दिन चीनी का उत्पादन लगभग 3,87,000 टन था जबकि पिछले वर्ष 2000 में उन्हीं 15 दिनों का उत्पादन 3,78,000 टन था।
दिसम्बर 2001 के पहले 15 दिनों में आन्तरिक उपभोग के लिये 2,83,000 टन चीनी खरीदी गई और निर्यात के लिए 41,000 टन जबकि पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 1,54,000 टन चीनी आन्तरिक उपभोग के लिए ली गई थी।

  1. आँकड़ों को तालिका में प्रस्तुत करें।
  2. यदि अपने इन आँकड़ों को आरेख में प्रदर्शित करना है तो आप किस प्रकार का आरेख प्रयोग करेंगे और क्यों?
  3. इन आँकड़ों को आरेख में प्रकट करें।

उत्तर:
1. भारत में चीनी उत्पादन (Production of Sugar in India):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 3

2. यदि हमें इनको आँकड़ों में प्रदर्शित करना है तो बहु दंड आरेख में प्रदर्शित करेंगे, क्योंकि यह आरेख दो या दो से अधिक तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए सबसे अधिक उपयोगी है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 4

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 15.
निम्नलिखित तालिका अनुमानित क्षेत्रीय वास्तविक वृद्धि दरों को प्रतिशत में प्रदर्शित करती है। इन आँकड़ों को बहु समय श्रृंखला ग्राफ में प्रदर्शित करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 5
उपर्युक्त आंकड़ों को बहु काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सारणीयन के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. आँकड़ों को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना।
  2. आँकड़ों का सरलीकरण करना।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण तथा सारणीयन में कोई एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
वर्गीकरण सांख्यिकी विश्लेषण की एक विधि है जब कि सारणीयन समंकों को प्रस्तुत करने की एक विधि है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 3.
सारणी के कोई पाँच प्रमुख अंग लिखें।
उत्तर:

  1. सारणीयन संख्या
  2. शीर्षक
  3. शीर्ष टिप्पणी
  4. उप-शीर्षक व पक्तिशीर्षक
  5. सारणी का मुख्य भाग
  6. सारणी का मुख्य भाग

प्रश्न 4.
यदि सारणी में एक निश्चित संख्या को महत्त्व दिया जाना है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
विशेष महत्त्व वाले समंकों को मोटे अंकों में लिखा जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
सरल सारणी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सरल सारणी वह सारणी है जो सांख्यिकीय आंकड़ों की किसी एक विशेषता अथवा गुण को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 6.
जटिल सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जटिल सारणी उस सारणी को कहते हैं जो कि एक से अधिक विशेषताओं को दर्शाती है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 7.
स्तंभों के शीर्षक को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
स्तंभों के शीर्षक को उप-शीर्षक कहते हैं।

प्रश्न 8.
आरेखीय प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन वह विधि है जिसके द्वारा आंकड़ों को आरेखों (दंड आरेख, आयत चित्र, वृत्तीय आरेख) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 9.
आरेखों की कोई दो सीमाएं लिखो।
उत्तर:

  1. आरेख अनुमानों पर आधारित होते हैं
  2. ये विस्तृत जानकारी नहीं देते।

प्रश्न 10.
आरेखों के कोई दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. गोखों द्वारा आंकड़ों की प्रस्तुति मिनची होती है।
  2. इनका व्यापक प्रयोग होता है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 11.
सरल दंड आरेख पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सरल दंड आरेखों में मूल्यों को दंडों की ऊंचाई द्वारा दिखाया जाता है। दण्डों की पीटाई तथा उनके बीच की दूरी एक समान रखी जाती है। ये आरेख जनसंख्या, उत्पादन तथा भौगोलिक आँकड़ों को प्रदर्शित करने में उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 12.
सूचना के स्रोत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सूचना के स्रोत से अभिप्राय उस स्रोत से है जिससे आँकड़े लिए गए हैं।

प्रश्न 13.
बहुभुजी सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो गुणों से अधिक विशेषताओं के आधार पर निर्मित की गई सारणी को बहुभुजी सारणी कहते हैं।

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प्रश्न 14.
एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी की कोई तीन विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. यह सरल तथा संक्षिप्त होनी चाहिए
  2. स्पष्ट तथा देखने में आकर्षक होनी चाहिए
  3. विश्वसनीय होनी चाहिए।

प्रश्न 15.
सारणीयन में प्रयोग किया जाने वाला वर्गीकरण कितने प्रकार का होता हैं?
उत्तर:
चार प्रकार का –

  1. परिमाणात्मक
  2. गुणात्मक
  3. समय संबंधी तथा
  4. स्थान संबंधी।

प्रश्न 16.
परिमाणात्मक या मात्रात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिमाणात्मक वर्गीरण उस वर्गीकरण को कहते हैं, जिसमें वर्गीकरण का आधार ‘परिमाणात्मक विशेषताएं हैं। दूसरे शब्दों में इन विशेषताओं को मात्रा में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए आयु, ऊँचाई, उत्पादन, आय आदि मात्रात्मक विशेषताएं हैं।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 17.
सारणी का मुख्य भाग कौन-सा है?
उत्तर:
सारणी का मुख्य भाग कलेवर (Body) है।

प्रश्न 18.
आँकड़ों को दर्शाने के लिए. मुख्य आरेख निम्नलिखित हैं –
उत्तर:

  1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagram)। जैसे-दंडभुज।
  2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagram)।
  3. गणितीय रेखा आरेख (Arithmatic Line graph)।

प्रश्न 19.
सांख्यिकीय सारणी क्या है?
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी एक संयंत्र है जिसमें आँकड़ों को पंक्तियों और स्तम्भों में . व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 20.
सारणीयन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आंकड़ों को सारणी के रूप में अर्थात् पंक्तियों तथा स्तंभों के रूप में प्रकट करने को सारणीयंन कहते हैं।

प्रश्न 21.
आयत चित्र का अर्थ बताएँ।
उत्तर:
यह वह चित्र है जो अखंडित श्रृंखलाओं से जुड़ी हुई आयातों (adjacent rectangles) द्वारा प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 22.
यदि सभी वर्ग अंतराल (Class Intervals) समान हैं तो आयत चित्र की चौड़ाई समान होगी या असमान?
उत्तर:
समान होगी।

प्रश्न 23.
आवृत्ति बहुभुज कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
आवृत्ति बहुभुज को आयत चित्र के सिरे के मध्य बिन्दुओं को जोड़कर बनाया जाता है।

प्रश्न 24.
श्रम पर खर्च कुल खर्चे का 30% है। इसकी कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = 30 × 3.6 = 108°

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प्रश्न 25.
102 मजदूरों में मुख्य मजदूर 31 हैं। मुख्य मजदूरों की कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = \(\frac{31}{102}\) × 360 = 1090

प्रश्न 26.
दो तोरण (Ogive) से कम और ‘से अधिक’ एक दूसरे को M बिन्दु पर काटते हैं। माध्यिका (Meidan) निकालने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
माध्यिका निकालने के लिए M बिन्दु से आधार रेखा पर लंब डालना चाहिए। आधार बिन्दु आधार रेखा को जिस बिन्दु पर काटेगा, वह बिन्दु माध्यिका प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख अधिक प्रभावशली है?

  1. वर्ष विशेष की मासिक वर्षा।
  2. धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन।
  3. एक कारखाने में लागत-घटक।

उत्तर:

  1. काल श्रेणी आरेख।
  2. सरल दण्ड आरेख तथा
  3. वृत्त आरेख।

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प्रश्न 28.
जब वर्गान्तर असमान हैं तो आयत चित्र की ऊँचाई कैसे निर्धारित की जाती है?
उत्तर:
सबसे कम वर्गान्तर से वर्गान्तर जितना अधिक होगा, आयत की ऊँचाई के लिए उस वर्गान्तर की आवृत्ति उसी अनुपात से कम कर दी जाती है। मान लो एक वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है तो ऐसी अवस्था में उसके आयत की ऊँचाई कर दी जाएगी। अर्थात् उसकी आवृत्तियाँ 6 हैं तो वह 3(6 ÷ 2) होंगी।

प्रश्न 29.
संचयी आवृत्ति के कितने रूप हो सकते हैं?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति के दो रूप हो सकते हैं –
से कम’ तथा ‘से अधिक’। ‘से कम’ ओजाइन नीचे से ऊपर दाईं ओर उठती है और ‘से अधिक’ ओजाइब ऊपर से नीचे की ओर दाईं ओर ढालू होती है।

प्रश्न 30.
आयत चित्र बनाने के लिए समावेशी पर आधारित श्रृंखला को अपवर्ती वर्ग पर आधारित श्रृंखला में क्यों परिवर्तित करते हैं?
उत्तर:
समावेशी वर्ग पर आधारित शृंखला में अंतर होता है और आवृत्ति चित्र बनाने के लिये निरंतरता चाहिए। अतः निरन्तरता प्राप्त करने के लिए हम समावेशी वर्ग पर आधारित श्रृंखला को अपवर्जी वर्ग पर आधारित श्रृंखला में परिवर्तित करते हैं।

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प्रश्न 31.
ओजाइब का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
ओजाइब का दूसरा नाम संचयी आवृत्ति वक्र या तोरण है।

प्रश्न 32.
दोनों ओजाइब की विशेष विशेषता क्या है?
उत्तर”
दोनों ओजाइब जिस बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं उस बिन्दु से हमें माध्यिका प्राप्त होती है।

प्रश्न 33.
सरल दंड आरेख द्वारा कितने चरों को प्रदर्शित किया जा सकता है?
उत्तर:
सरल दंड आरेख द्वारा केवल एक ही चर को प्रदर्शित किया जा सकता है।

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प्रश्न 34.
किस प्रकार के दंड आरेख का हमें प्रयोग करना होगा, यदि हमें विभिन्न वर्षों के एक से अधिक चरों के मूल को प्रदर्शित करना हो तो?
उत्तर:
बहुदंड आरेख को।

प्रश्न 35.
हमें एक देश के आयात तथा निर्यात के मूल्यों को दंड आरेख द्वारा प्रदर्शित करना है। इसके लिये हम किस प्रकार के दंड आरेख का प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
बहुदंड आरेख का।

प्रश्न 36.
एक उदाहरण दीजिए जहाँ सरल दंड आरेख का प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
जब विभिन्न जनगणना वर्षों में एक ही राज्य की जनसंख्या प्रदर्शित करनी हो।

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प्रश्न 37.
सरल दंड आरेख तथा बहुदंड आरेख में एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
सरल दंड आरेख में एक ही चर के मूल्यों को विभिन्न वर्षों में व्यक्त किया जाता है। जबकि बहु दंड आरेख में एक से अधिक चर के मूल्यों को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 38.
समय कालिक श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
समय कालिक श्रृंखला वह श्रृंखला है जहाँ किसी चर का मूल्य समयानुसार दिया हो, जैसे-विभिन्न वर्षों के कृषि उत्पादन के आँकड़े।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आंकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ (Avantages of diagrammatic presentation of data)

  1. आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली साधन हैं, क्योंकि आरेख रोचक तथा आकर्षक होते हैं।
  2. आरेख आँकड़ों को सरल तथा बोधगम्य बनाते हैं।
  3. ये समंकों के तुलनात्मक अध्ययन में सहायक होते हैं।
  4. इनका प्रयोग उत्पादन, व्यापार, वाणिज्य, परिवहन आदि के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है।

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प्रश्न 2.
दंड आरेख की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
विशेषताएँ (Features) –

  1. दंड आरेख एकपक्षीय (One Dimensional) होते हैं।
  2. दंड क्षैतिज (Horizontal) तथा शीर्ष (Vertical) दोनों रूप में हो सकते हैं।
  3. दंड आरेखों को आकर्षक बनाने के लिए सभी दंडों में रंग भर दिया जाता है।
  4. दंड आरेख कई प्रकार के होते हैं-जैसे सरल दंड आरेख, बहु दंड आरेख, घटक दंड आरेख, प्रतिशत घटक दंड आरेख आदि।

प्रश्न 3.
परिमाणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 7

प्रश्न 4.
गुणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 8

प्रश्न 5.
समयानुसार या कालिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
1995-2000 में एक चाय की दुकान की वार्षिक बिक्री –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 9

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प्रश्न 6.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख बनाने की विधि (Method of constructing a piediagram) –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत रूप में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में दिया गया है तो यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को.3.6 से गुणा करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त बनाया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।
  6. वृक्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरा जाता है।

प्रश्न 7.
तिशत घटक दंड आरेख तथा घटक दंड आरेख में अंतर बताएँ।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 10

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प्रश्न 8.
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निम्नलिखित चरण होते हैं –

  1. इन्हें बनाने के लिए पहले सभी समय (वर्षों आदि) से सम्बन्धित जोड़ को 100 मान लिया जाता है।
  2. दूसरे, सभी विभागों को प्रतिशत रूप में बदल दिया जाता है।
  3. चौथे, अलग-अलग समय (वर्षों) के अलग-अलग दंड बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई समान अथवा 100 होती है। फिर बाद में संचयी प्रतिशत के बराबर विभिन्न विभागों को काट दिया जाता है और उनमें अलग-अलग रंग भर दिया जाता है।

प्रश्न 9.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख की विधि के चरण इस प्रकार हैं –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में हो तब यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को 3.6 से गुण करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त का निर्माण किया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख. के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।

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प्रश्न 10.
सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले आरेखों के विभिन्न रूप लिखें।
उत्तर:
सामान्य प्रयोग में लाए जानेवाले आरेखों के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं –
1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagrams):

  • दंड आरेख
  • बहुदंड आरेख
  • वृत्तीय आरेख

2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagrams):

  • आयत चित्र
  • आवृत्ति बहुभुज
  • आवृत्ति वक्र तथा
  • तोरण

3. गणितीय समय ग्राफ (Arithmetic Time Graph):
काल श्रेणी आरेख।

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प्रश्न 11.
सामान्य उद्देश्य सारणी तथा विशेष उद्देश्य सारणी में अंतर बताएँ।
उत्तर:
सामान्य उद्देश्य सारणी का कोई महत्त्व नहीं होता। ये सामान्यतः प्रकाशित प्रतिवेदनों (Report) के पीछे दी जाती है। विभिन्न व्यक्ति इसका प्रयोग अपने ढंग से करते हैं। इसके विपरीत विशेष उद्देश्य सारणी किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई गई होती है। यह प्रायः संक्षिप्त होती है।

प्रश्न 12.
स्थानिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 11

प्रश्न 13.
घटक दण्ड आरेख का प्रयोग कब किया जाता है? इस आरेख को बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
जब तथ्यों के जोड़ और उसके विभिन्न विभागों (जैसे-कॉलेज के विद्यार्थियों और उसके विभिन्न घटकों की संख्या जैसे लड़के तथा लड़कियों आदि) का प्रदर्शन करना हो तो घटक दण्ड आरेख का प्रयोग किया जाता है।

बनाने की विधि (Method of preparing):
पहले समय अथवा स्थान के आधार पर, तथ्यों के जोड़ के आधार दंड बनाए जाते हैं। बाद में प्रत्येक खंड के विभिन्न भागों में अलग-अलग रंग भरा जाता है परंतु एक वस्तु से संबंधित सभी दंडों के भागों में एक ही रंग भरा जाता है।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से हम एक आयत चित्र बनाना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए हम वर्गान्तर में क्या परिवर्तन करेंगे?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 12
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 13

प्रश्न 15.
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) का क्या अभिप्राय है? एकल, द्वि तथा बहु जनसंख्या समझाएँ।
उत्तर:
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) से अभिप्राय अनुसंधान क्षेत्र की सभी इकाइयों से होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी पाठशाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्तर का अध्ययन करना चाहते हैं तो पाठशाला के सभी विद्यार्थी सांख्यिकी की दृष्टि से ‘जनसंख्या’ कहलाते हैं। जनसंख्या को समग्र भी कहते हैं। रोसन्दर (Rosander) के अनुसार, “समग्र विचाराधीन विषय इकाइयों का योग होता है।”

एकल समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित केवल एक चर। जैसे जनसंख्या केवल आय। द्वि-समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित दो चर। उदाहरण के लिए एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन। बहु जनसंख्या से अभिप्राय समग्र के विषय से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारी के आँकड़े। उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपभोग की सभी मदों का व्यय।

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प्रश्न 16.
अविछिन्न तथा खंडित (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाइएँ।
उत्तर:
अविछिन्न तथा विछिन्न चरों में अंतर (Difference between Continuous Series):
एक चर को विभिन्न चर उस समय कहा जाता है जब वह विस्तार में कोई भी मूल्य ले सकता है। उसका मूल्य 1, 2, 3 भी हो सकता है और = \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\), \(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊंचाई व भार तथा उनकी आय को अविछिन्न चर कहा जा सकता है तो इसे विछिन्न चर कहेंगे जैसे पूर्ण संख्या (whole number) को विछिन्न चर कहते हैं। जैसे-एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

प्रश्न 17.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण निरंतर का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना। चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आँकड़ों का आयत आरेख बनाएँ तथा बहुलक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 14
उत्तर:
आँकड़ों का आवृत्ति आरेख बनाने से पहले हम संशोधित वर्ग बनाएँगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 15
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 16

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प्रश्न 2.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पर ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 17
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 18
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 19

प्रश्न 3.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पेर ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 20
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 21
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प्रश्न 4.
नीचे दी गई सूचना के आधार पर आरेखीय विधि द्वारा माध्यिका का निर्धारण करें। (Calculate median graphically with the help of following date)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 24
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 25

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सूचना को एक वृत्त आरेख में दिखाएँ –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 26
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 27
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प्रश्न 6.
एक सारणी के मख्य भागों का वर्णन करें।
उत्तर:
एक सारणी के मुख्य भाग (Main parts ofa Table):
एक सांख्यिकी सारणी के मुख्य भाग इस प्रकार हैं –
1. सारणी की संख्या (Table Number):
सारणी को सबसे पहले एक संख्या (सारणी संख्या) अर्थात 1, 2, 3 …. आदि की जानी चाहिए। एक अध्ययन में तालिकाएं जिस क्रम में बनाई जाती हैं उसी के अनुसार उनकी संख्या दी जानी चाहिए। सारणी संख्या से उन्हें ढूँढ़ने में सहायता मिलती है तथा उनका उल्लेख सरलता से किया जा सकता है।

2. शीर्षक (Title):
प्रत्येक सारणी में संख्या के बाद सबसे ऊपर उसका शीर्षक दिया जाना चाहिए। शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ताकि तुरंत ही ध्यान आकर्षित कर सके। शीर्षक सरल, स्पष्ट और छोटा होना चाहिए। शीर्षक इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पढ़ते ही ज्ञात हो जाए कि –

  • आँकड़े किस समस्या (What) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस समय (When) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस स्थान (Where) से संबंधित हैं।
  • आँकड़ों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है। एक अच्छा शीर्षक छोटा, परंतु पूर्ण होता है।

3. शीर्ष टिप्पणी (Head Note):
यदि शीर्षक से पूरी सूचना प्रकट नहीं होती तो उसके तुरंत नीचे शीर्ष टिप्पणी (Head Note) दी जाती है। इसमें एक अतिरिक्त सूचना दी जाती है जो शीर्षक में नहीं दी जा सकी। उदाहरण के लिए शीर्षक टिप्पणी में यह बताया जाता है कि आँकड़े किस इकाई में व्यक्त किए गए हैं। उन्हें कोष्ठक (Brackets) में लिखा जाना चाहिए।

4. पंक्ति शीर्षक (Stubs):
सारणी की पंक्तियों (Rows) के शीर्षक को पंक्ति शीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा सरल भाषा में ज्ञात होता है कि पंक्तियों द्वारा क्या दिखाया जा रहा है।

5. उपशीर्षक (Caption):
सारणी के स्तंभों (Columns) के शीर्षक को उपशीर्षक कहा जाता है। इसके शीर्षक से यह ज्ञात होता है कि कॉलम मद की किस विशेषता को बता रहे हैं।

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प्रश्न 7.
अंतर बताएँ।

  1. दंड आरेख तथा (Bar diagram)
  2. आयत चित्र (Histogram)

उत्तर:
दंड आरेख तथा आयत चित्र में अंतर (Difference between bar diagram and histogram):
दंड ओरख वह आरेख है जिसमें आँकड़ों को दंडों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। दंडों की ऊँचाई चरों के मूल्यों पर निर्भर करती है जबकि इनकी चौड़ाई केवल आरेख को आकर्षक बनाने के लिए ली जाती है। दंडों के बीच दूरी समान होती है।

ये सामान्यतः व्यक्तिगत मूल्यों, कालश्रेणियों, भौगोलिक श्रेणियों को प्रदर्शित करने में प्रयोग में लाई जाती हैं। इसके विपरीत आयत चित्र आवृत्ति वितरण को प्रस्तुत करता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को आवृत्तियों के समीपवर्ती (Adjacent) आयतों में प्रकट किया जाता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को X अक्ष पर लेते हैं तथा आवृत्तियों को Y अक्ष पर लेते हैं।
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प्रश्न 8.
आरेखों द्वारा सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आरेखों के लाभ (Advantages of Diagrams):
यह सर्वविदित है कि जैसे-जैसे समंकों का जमघट अधिक होता जाता है, उन्हें समझने में असुविधा होती है तथा समय लगता है। जनसाधारण अंकों में रुचि नहीं रखते हैं। यदि हम अपनी बातों को अंकों के द्वारा समझने की बजाय किसी अन्य सरल साधन द्वारा समझाने का प्रयत्न करें, जहाँ अंकों का कम-से-कम प्रयोग किया गया हो, तो हमारी बात जनसाधारण के लिए सरल, समझने तथा याद करने के योग्य हो जाती है। आरेखों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –

1. सरल (Simple):
आरेखों की सहायता से जटिल आँकड़ों को सरल तथा सुबोध बनाया जा सकता है।

2. समझने में सुगमता (Easy to understand):
आरेखों को समझने के लिए विशेष शिक्षा या ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।

3. समय व श्रम की बचत (Saving of time and labour):
आरेखों की सहायता से आँकड़ों को समझने में बहुत कम समय लगता है।

4. अधिक समय तक स्मरणीय (Memorable for a long time):
अंकों को कुछ समय बाद भूल जाना स्वाभाविक है, लेकिन आरेखों द्वारा आँकड़ों की एक ऐसी छाप मस्तिष्क पर पड़ जाती है कि आँकड़े बहुत दिनों तक याद रहते हैं।

5. आरेख आकर्षक होते हैं (Diagrams are attractive):
अंकों की अपेक्षा रेखाचित्र अधिक आकर्षक होते हैं। इसलिए मेलों, प्रदर्शनियों आदि में जनता को प्रभावित करने के आरेखों का प्रयोग अधिक उपयोगी होता है।

6. तुलना में सहायक (Easy to comprison):
रेखाचित्रों की सहायता से सांख्यिकी सामग्री में तुलना बहुत सरल हो जाती है। उदाहरणार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के पिछले वर्ष और इस वर्ष के परीक्षा परिणामों की तुलना रेखाचित्रों द्वारा बड़े सुचारु रूप से की जा सकती है।

7. सूचना प्रसार में सहायक (Publicity):
रेखाचित्रों द्वारा सूचना प्रसार आसानी से किया जा सकता है।

8. सृजनात्मक मनोरंजन (Creative entertainment):
रेखाचित्र सूचना प्रदान करने के साथ-साथ मनोरंजन भी करते हैं। अंकों को देखने से जहाँ आँखें तिलमिला जाती हैं, वहाँ आरेखों को देखने से रुचि बढ़ती है और मनोरंजन भी हो जाता है।

9. सार्वभौमिक उपयोगिता (Universal Utility):
विभिन्न लाभों के कारण अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकी रेखाचित्रों का बहुत प्रयोग होता है। व्यापार, वाणिज्य तथा विज्ञापन के क्षेत्र में से बहुत उपयोगी और महत्त्वपूर्ण होते हैं। इस प्रकार रेखाचित्रों की उपयोगिता सार्वभौमिक है। ये सभी क्षेत्रों में नवजीवन प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 9.
सारणीयन के लाभ लिखें।
उत्तर:
सारणीयन के लाभ (Advantages of tabulation):

1. समझने में सरलता (Easy to understand):
सारणी से आंकड़ों को सरलता से समझा जा सकता है, क्योंकि सारणी आंकड़ों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

2. संक्षिप्त (Simple):
सारणी द्वारा अव्यवस्थित आंकड़ें कम-से-कम स्थान में इस प्रकार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं कि उनसे अधिक-से-अधिक सूचना प्राप्त हो सके।

3. तुलना में सुविधा (Convenient in comparision):
सारणी द्वारा आंकड़ों को विभिन्न वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। अतः उनकी तुलना करना सुविधाजनक हो जाता है।

4. प्रस्तुतीकरण में सहायक (Helpful Presentation):
सारणी की सहायता से ही आँकड़ों को आरेखों तथा रेखा-आरेखों द्वारा आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कराना संभव हो जाता है।

5. विश्लेषण में सहायक (Helpful in Analysis):
सारणी द्वारा आँकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलती है। आँकड़ों को सारणी के रूप में व्यवस्थित करके ही माध्य (Mean), उपकिरण (Dispersion) आदि ज्ञात किए जाते हैं।

6. आँकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं (Clarifies the Chief Charactetistic of Data):
सारणी द्वारा आकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं। आँकड़ों को याद रखना भी सरल हो जाता है।

7. बचत (Economic):
सारणी द्वारा आँकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप समय तथा कागज की बचत होती है। आवश्यक आँकड़ों को आसानी से ज्ञान किया जा सकता है।

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प्रश्न 10.
आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण में विवरणात्मक तथा सारणीयन विधियों की तुलना करें।
उत्तर:
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण कई विधियों से किया जा सकता है। उनमें दो विधियाँ विवरणात्मक विधि तथा सारणीयन विधि है। विवरणात्मक विधि से आँकड़ों का विवरण दिया जाता है जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2002 के अनुसार भारत में 2000-2001 में खाद्यान्नों का उत्पादन 2000 मिलियन टेन था। जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमशः 85.5, 69.0 और 45.5 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42.75%, 34.50% और 22.75% था।

सारणीयन विधि में ऊपर दिए आँकड़ों को एक सारणी में प्रस्तुत किया जाता है ताकि आंकड़ों को सरलता से समझे जा सके। ऊपर दिए गए तथ्यों को सारणी में निम्न प्रकार प्रस्तुत कर सकते है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 30

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए। (Write short notes on)
(अ) विवतर्मुखी वर्ग
(ब) असमान वर्गान्तर
(स) संचयी आवृत्ति वितरण।
उत्तर:
(अ) विवतर्मुखी वर्ग-विवतर्मुखी वर्ग वह है जिसमें या तो निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की ऊपरी सीमा को छोड़ा है। इस प्रकार के वर्गों का प्रयोग बहुत कम होता है, क्योंकि विवतर्मुखी वर्ग का मध्य मूल्य नहीं ज्ञात कर सकते। उदाहरणार्थ – 10 से कम, 10-20, 20-30, 30-40, 40 और अधिक।

(ब) असमान वर्गान्तर-असमान वर्गान्तर से अभिप्राय ऐसी अखंडित श्रृंखला से है जिसमें वर्गों के बीच का अंतर एक समान नहीं होता। हम ऐसे वर्गों की आवृत्ति की तुलना नहीं कर सकते। आवृत्तियों की तुलना करने के लिए हम वर्गान्तरों को समान मानकर आवृत्तियों की पुनर्गणना द्वारा प्रत्येक वर्ग की आवृत्तियाँ ज्ञात करके तुलना करते हैं।

(स) संचयी आवृत्ति वितरण-जब विभिन्न मूल्यों की आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर रखा जाता है तो उसे संचयी आवृत्ति वितरण कहते हैं। स्पष्ट है कि अंतिम वर्ग की संचयी आवृत्ति सब वर्गों की आवृत्तियों का योगफल होता है। संचयी आवृत्ति वितरण को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है –

  • से कम (Less than type)
  • से अधिक (More than type)।

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प्रश्न 12.
संचयी आवृत्ति वितरण किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति वितरण (Cumulative frequency distribution):
संचयी आवृत्ति वितरण उस आवृत्ति वितरण को कहते हैं, जिसमें आवृत्तियों को सरल विधि से वर्गानुसार अलग-अलग न लिखकर संचयी रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार के आवृत्ति वितरण के अन्तर्गत केवल एक सीमा (निचली, ऊपरी) दी जाती है। यदि वर्ग समूह में निचली सीमा के आधार पर संचयी आवृत्ति दी गई है तो ‘से कम’ शब्दों का प्रयोग लिख कर किया जाता है। दोनों पर की गई संचयी आवृत्तियों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 31
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 32

संचयी आवृत्ति वितरण का महत्त्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाता है:

  1. संचयी आवृत्ति वितरण की सहायता से हम किसी दिए गए चर से कम या अधिक मूल्य ज्ञात कर सकते हैं।
  2. विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।
  3. किसी वर्गान्तर विशेष में सम्मिलित मदों की संख्या भी ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 13.
आयत बहुभुज बनाने के लिए असमान वर्गान्तर पर आवृत्तियों का संशोधन क्यों किया जाता है? आवृत्तियों को संशोधित करने की विधि लिखो।
उत्तर:
बड़े वर्गान्तर को न्यूनतम वर्गान्तर के बराबर लाने के लिए आवृत्तियों में संशोधन किया जाता हैं। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और उच्च वर्ग (40 – 70) में वर्गान्तर 30 है और उसकी आवृत्ति 15 है। अत: 40 – 70 वर्ग के तीन वर्ग 40 – 50, 50 – 60 तथा 60 – 70 बनते हैं और उनकी आवृत्तियाँ 15 तीन वर्गों में बँट जाती हैं और प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति 5(5 + 5 + 5) होती है। आवृत्तियों में संशोधन करने के लिए न्यूनतम वर्गान्तर लेते हैं। कोई वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर किया जाता है –
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 14.
निम्नलिखित आँकड़ों को एक आयत चित्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक आयत चित्र बनाइए।
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उत्तर:
प्रश्न में वर्गान्तर समावेशी विधि (Inclusive method) द्वारा दिए गए हैं। अतः इनमें पहले संशोधन करना आवश्यक होगा ताकि समीपवर्ती आयतें बन जाएँ।
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प्रश्न 16.
भारत सरकार को पिछली तीन वर्षों के दौरान करों से प्राप्त आगम के बारे में निम्न जानकारी उपलब्ध है –
वर्ष 1997 – 98 में सरकार को कर-आगम के रूप में कुल 77,693 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई। इसमें से 11,165 करोड़ रुपए प्रत्यक्ष करों तथा 66,528 करोड़ रुपए परोक्ष करों के रूप में प्राप्त हुए। वर्ष 1998-99 में यह राशि क्रमशः 89,303 करोड़ रुपए, 13,397 करोड़ रुपए तथा 75,906 करोड़ रुपए थी। 1999-2000 में कुल राशि। 1.02,896 करोड़ रुपए तथा प्रत्यक्ष तथा परोक्ष करों का योगदान क्रमशः 15,338 करोड़ रुपए तथा 87,558 करोड़ रुपए था।
उत्तर:
भारत सरकार को करों से प्राप्त आगम
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 17.
भारत में चीनी निर्यात से आय के आँकड़े नीचे दिए गए हैं। इन्हें निरपेक्ष कालिक आरेख में प्रस्तुत कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 41
उत्तर:
X अक्ष पर वर्ष और Y अक्ष पर आय (करोड़ रुपए में) प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक वर्ष के सामने आय के चिह्नों को लगाइए, फिर चिह्नों को छूती हुई रेखा बनाइए। इस आरेख को निरपेक्ष कालिक आरेख कहते हैं, जैसा कि नीचे आरेख में दिखलाया गया है।
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प्रश्न 18.
द्विवीय आरेख (Two dimentional) किसे कहते हैं? नीचे दो परिवारों के आय-व्यय सम्बन्धी आँकड़ें दिए गए हैं। उन्हें द्विवीम आरेख द्वारा निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष रूप में दिखाएँ।
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उत्तर:
द्वितीय आरेख उस रेखाचित्र को कहते हैं जिसमें लम्बाई के साथ-साथ चौड़ाई को भी दिखाया जाता है। चौड़ाई कुल मूल्यों के अनुपात में होती है। इन्हें निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष (Relative) दो रूपों में दिखाया जा सकता है। निरपेक्ष में दिए गए मूल्यों को आरेख में प्रदर्शित करते हैं जबकि सापेक्ष द्विविम आरेख के मूल्यों को प्रतिशत में बदलकर प्रतिशत खंड़ों में काटकर लिखते हैं।

सापेक्ष द्विविम आरेख (Relative Two Dimensional):
तुलनात्मक अध्ययन के लिए मूल्यों को प्रतिशत में बदल लेते है। इस प्रकार ऊँचाई समान हो जाती है और चौड़ाई कुल व्यय के अनुपात में रखी जाती है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 44
निरपेक्ष द्विविम आरेख (Absolute Two Dimensional):
आय का अनुपात 500:1000 = 1:2
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 19.
भारत में 1951, 1961, 1971, 1981 और 1991 तथा 2001 की जनगणना में कुल जनसंख्या क्रमशः 361, 38, 439, 23, 548, 16, 683.3, 843.9 तथा 1020 मिलियन थी। कुल जनसंख्या में पुरुषों की संख्या क्रमश: 185.68, 226.29, 284.05, 353.9, 441.8 तथा 530 मिलियन थी तथा स्त्रियों की संख्या क्रमशः 175.70, 212.94, 264.11, 329, 4, 402.1 तथा 490 मिलियन थी। इन आँकड़ों को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या (Population of India) दस लाख में।
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प्रश्न 20.
भारत में 2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन 172.25 मिलियन टन था, जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमश: 70, 76, 53.99 और 45.0 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42, 0, 32.0 तथा 26.0 था। दी गई सूचना को एक उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन
(Production of Food-grain during 2004 – 2005):
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित विवरण को एक तालिका में प्रदर्शित करें भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत की जनसंख्या बढ़कर 102 करोड़ हो गई, जिसमें 49 करोड़ महिलाएँ हैं और 53 करोड़ पुरुष हैं। 74 करोड़ लोग ग्रामीण भारत में रहते हैं और केवल 28 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं। सम्पूर्ण भारत में 62 करोड़ लोग काम करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और 47 करोड़ लोग काम करने वाले हैं। शहरी जनसंख्या में 19 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी नहीं हैं और 9 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 74 करोड़ लोगों में 31 करोड़ काम पर लगे हुए हैं। इस सूचना को एक तालिका द्वारा दिखाएँ।
उत्तर:
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
समंकों को खानों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित करने को कहते हैं –
(a) वर्गीकरण
(b) सारणीयन
(c) चित्रमय प्रदर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणीयन

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प्रश्न 2.
एक अच्छी सारणी की विशेषता है –
(a) सुन्दर
(b) स्वर्य परिचायक
(c) संक्षिप्त
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
निम्न में कौन अधिक प्रभावशाली होती/होता है –
(a) सारणी
(b) त्रिमय प्रदर्शन
(c) वर्गीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रिमय प्रदर्शन

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प्रश्न 4.
दो या अधिक चरों के मूल्यों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है –
(a) दण्ड चित्र
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र
(c) अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र

प्रश्न 5.
चित्रमय प्रदर्शन की उपयोगिता है –
(a) सार्वभौमिक
(b) राष्ट्रीय
(c) स्थानीय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सार्वभौमिक

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प्रश्न 6.
सारणी स्रोत लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सारणी के नीचे

प्रश्न 7.
सारणी शीर्षक को प्रायः लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणी के ऊपर

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प्रश्न 8.
चित्रमय प्रदर्शन का सबसे सरल रूप है –
(a) सरल दण्ड चित्र
(b) वृत्त चित्र
(c) चित्र व लेख
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सरल दण्ड चित्र

प्रश्न 9.
कालिक चित्र में आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) यथातथ्य रूप में
(b) प्रतिशत में
(c) अनुपात में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्रतिशत में

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प्रश्न 10.
आवृत्ति वितरण आयत चित्र बनाए जाते हैं –
(a) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(b) अखण्डित श्रृंखला में
(c) खण्डित श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अखण्डित श्रृंखला में

प्रश्न 11.
आवृत्ति आयत चित्र में आवृत्तियों का दर्शाया जाता है –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

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प्रश्न 12.
आवृत्ति आयत चित्र में वर्गान्तराल दर्शाए जाते हैं –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

प्रश्न 13.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय ध्यान रखा जाता है –
(a) उपयुक्त शीर्षक
(b) पैमाना
(c) कृत्रिम आधार रेखा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

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प्रश्न 14.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय x – अक्ष पर दर्शाते हैं –
(a) वर्ग अंतराल
(b) आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वर्ग अंतराल

प्रश्न 15.
आवृत्ति वक्र के अंदर क्षेत्र समानुपाती है –
(a) आवृत्तियों के
(b) वर्ग अंतरालों के
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्तियों के

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प्रश्न 16.
काल श्रेणी आरेख के x-अक्ष पर दर्शाया जाता है –
(a) चर मूल्य
(b) समय
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समय

प्रश्न 17.
समावेशी श्रृंखला से आयत चित्र बनाने के लिए इस श्रृंखला को दिलाते हैं –
(a) अपवर्जी श्रृंखला में
(b) खंडित श्रृंखला में
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अपवर्जी श्रृंखला में

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प्रश्न 18.
‘से अधिक’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ऋणात्मक

प्रश्न 19.
‘से कम’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?

1. एक वर्ग मध्य-बिन्दु बराबर है –
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के।
(ख) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के।
(ग) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्नं वर्ग सीमा के अनुपात के।
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के

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2. दो चरों के बारम्बारता वितरण को इस नाम से जानते हैं –
(क) एक विचर वितरण
(ख) द्वितर वितरण
(ग) बहुचर वितरण
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) द्वितर वितरण

3. वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन आधारित होता है –
(क) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर
(ख) उच्च वर्ग सीमाओं पर
(ग) निम्न वर्ग सीमाओं पर
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर
उत्तर:
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर

4. अपवर्जी विधि के अंतर्गत –
(क) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते हैं।
(ख) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
(ग) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(घ) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
उत्तर:
(ग) किसी वर्ग की उच्च सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।

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5. परास का अर्थ है –
(क) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ख) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ग) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का औसत
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात
उत्तर:
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात।

प्रश्न 2.
वस्तुओं के वर्गीकरण का क्या कोई लाभ हो सकता है। अपने जीवन से उदाहरण लेकर समझाएँ।
उत्तर:
वस्तुओं के वर्गीकरण से कई लाभ होते हैं। इस बात को मैं अपने जीवन से उदाहरण देकर समझाता हूँ। पिछले वर्ष मैं दसवीं कक्षा का विद्यार्थी था। मैं पढ़ाई में तो होशियार था, परंतु अन्य बातों में बहुत ही लापरवाह था। मेरा पढ़ने का एक अलग कमरा था। कमरे में मेरी किताबें तथा कापियाँ इधर-उधर बिखरी थीं। पेन, पेंसिलें तथा अन्य पाठ्य-सामग्री इधर-उधर बिखरी रहती थीं, विज्ञान की कुछ पुस्तकें अलमारी में होती थीं और कुछ इधर-उधर पड़ी रहती थीं। अन्य विषय की पुस्तकों तथा अभ्यास पुस्तिकाओं का भी यही हाल था। पुस्तकें जल्द फट जाती थीं।

कापियों तथा किताबों को तलाश करने में काफी समय लगता था और परेशानी भी बहुत होती थी। कई बार किताबें ढूँढते-ढूँढ़ते इतना समय बरबाद हो जाता था कि पढ़ने का मन भी नहीं करता था। एक बार मेरे घर मेरा एक मित्र आया। वह पढ़ाई में कमजोर था। वह कुछ सवाल समझने मेरे घर पर आया। जब वह मेरे अध्ययन-कक्ष में आया तो हैरान हो गया। उसने मुझे बताया कि तुम्हारा अध्ययन तो कबाड़ बना हुआ है। उसने मेरी पुस्तकों तथा अध्ययन-सामग्री का वर्गीकरण किया। उनको उचित स्थान पर रखा। तब से मेरी आदत वस्तुओं को अपने स्थान पर रखने की बन गई, अब मुझे किसी विषय की कोई पुस्तक पढ़नी हो तो वह पुस्तक बड़ी सरलता से मिल जाती है तथा समय नष्ट नहीं होता। पुस्तक तलाश करने में कोई।

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प्रश्न 3.
चर क्या है? सतत तथा विविक्त चरों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
चर (Variable):
चर वह संख्या है जिसका मान परिवर्तित होता रहा है (A Variable is one that takes Chaniging Values) जैसे:
पिछले दस वर्षों में भारत में खाद्यान्न का उत्पादन, किसी स्थान का विभिन्न समयों पर तापमान, पाशा फेंकने पर पाया गया अंक, सिक्का उछालने पर प्राप्त परिणाम इत्यादि। परिवर्तन के आधार पर चरों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है –
(क) सतत (Continuous)
(ख) विविक्त (Discrete)

सतत चर (Continuous Variables):
सतत चर का कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है। यह पूर्णांक मान (0, 1, 2, 3, 4, …..) भिन्नात्मक मान (1/2, 3/4, 911) तथा वे मान जो यथातय भिन्न नहीं हैं (\(\sqrt{2}\), \(\sqrt{3}\), \(\sqrt{17}\) इत्यादि) हो सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक छात्र का कद 80-160 सेमी. तक बढ़ता है, तो उसके कद के मान इसके बीच आने वाले सभी मान हो सके हैं, जैसे-90 सेमी. 102.34 सेमी 156.49 सेमी. आदि। इस तरह ऊँचाई चर एक सतत चर है। सतत चर के अन्य उदाहरण भार, समय दूरी उपज आदि हैं।

विविक्त चर:
विविक्त चर केवल निश्चित मान लेते हैं। किन्हीं दो मानों के बीच एक अंतराल होता है। जैसे-पाशा फेंकने पर आया हुआ अंक। यह अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6 में से कोई भी एक हो सकता है। नतीजा 1 और 2 के बीच नहीं हो सकता, इसी तरह किसी कक्षा में छात्रों की संख्या एक विविक्त चर है। यह संख्या केवल पूर्णांक ही हो सकती है। उदाहरणस्वरूप, छात्रों की संख्या 30 और 31 के बीच 30.5 (माना) नहीं हो सकती। आधा छात्र निरर्थक होगा।

इसका मतलब यह कतई नहीं है कि विविक्त चर भिन्नांक मान नहीं ले सकते। माना कि ‘X’ एक चर है जिसके मान \(\frac{1}{4}\), \(\frac{1}{8}\), \(\frac{1}{16}\), \(\frac{1}{32}\) हैं। यह एक विविक्त चर है, क्योंकि X के मान इन भिन्नों में से हो सकते हैं, तथापि ये दो सन्निकट भिन्नों के बीच नहीं, हो सकते। विविक्त चरों के कुछ उदाहरण हैं – सड़क पर किसी समय वाहनों की संख्या, पासे पर आने वाली संख्या, दो सिक्के उछालने पर आए हुए सरों (Heads) की संख्या इत्यादि।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयोग किए गए ‘समावेशी’ तथा ‘अपवर्जी’ विधियों को समझाएँ।
उत्तर:
आँकड़ों को दो विधियों से वर्गीकृत किया जा सकता है –

  1. समावेशी विधि
  2. अपवर्जी विधि।

1. समावेशी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग के सभी मद ऊपरी सीमा सहित वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा पर अगले वर्ग की निचली सीमा नहीं बनाती। यह विधि निम्न तालिका से स्पष्ट हो जाएगी।
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2. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग की अपनी सीमा छोड़ा कर वर्ग के सी मद वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होगी। जैसे-0-10 तक 10-20 में क्रमश: 10 और 20 शामिल वर्गों में तालिका है और पहले वर्ग की उच्च सीमा 10 दूसरे वर्ग की निम्न सीमा है। यह बात निम्न तालिका से और भी स्पष्ट हो जाएगी।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 2

ऊपरी दी गई जानकारी के आधार पर चाहे हम 0 से 30 तक अंकों के लिए 5 के वर्गान्तर के आधार पर 0 से आरंभ होकर शृंखला बनानी है तो दोनों विधियों के अनुसार निम्न प्रकार से अखंडित आवृत्ति होगा।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में 50 गृहस्थों द्वारा भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय को रुपए में दर्शाया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 4

  1. भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का विस्तार बताएँ।
  2. विस्तार को उचित वर्गान्तर की संख्या से विभाजित करें और लाभ का आवृत्ति वितरण ज्ञात करें।
  3. उन परिवारों की संख्या बताएँ जिनकी मासिक व्यय –

(क) 2,000 रुपए से कम हो
(ख) 3,000 रुपए से अधिक हो
(ग) 1,500 रुपए से 2,500 रुपए के बीच में हो
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 5
(क) 2,000 रुपए से कम मासिक खर्चे वाले परिवार = 19 + 14 = 33
(ख) 3,000 रुपए से अधिक मासिक खर्चे वाले परिवार = 2 + 1 + 2 + 1 = 6
(ग) 1,500 – 2,500 के बीच मासिक खर्च वाले परिवार = 14 + 6 = 20 परिवार

प्रश्न 6.
एक शहर में 45 परिवारों का घरेलू उपकरण के प्रयोग की संख्या के बारे में सर्वेक्षण किया गया। उनके द्वारा नीचे दिये उत्तरों के आधार पर आवृत्ति विन्यास तैयार करें।
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उत्तर:
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प्रश्न 7.
वर्गीकृत आँकड़ों में सूचनाओं की हानि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अंकों को वर्गीकृत करने से आँकड़े सरलता से समझे जा सकते हैं। परंतु आँकड़ों को वर्गीकृत करने से आँकड़ों की विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती। एक बार आँकड़ों के समूहों में वर्गीकृत करने से व्यक्तिगत मदों का या अन्य सांख्यिकी का महत्त्व गणना में कम हो जाता है। मान लो हमारे पास 6 मद दिए गए हैं – 25, 25, 20, 22, 21 तथा 28। जब इन मदों को 20-30 आवृत्ति वितरण में वर्गीकृत करते हैं तो हमें केवल इस बात का ज्ञान होता है कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में 6 आवृत्तियाँ या मदें हैं।

परंतु इस बात का ज्ञान नहीं होता कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में कौन-कौन से मूल्य वाली मदें हैं। यह मान लिया जाता है कि इस वर्ग में जितनी भी मदें हैं, उनका मूल्य वर्गान्तर का मद मूल्य (यहाँ पर 25) मान लिया जाता है। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी गणना वर्गान्तर के मध्य मूल्य के आधार पर की जाती है न कि मदों के वास्तविक मूल्यों के आधार पर। इस तरह आँकड़ों के वर्गीकरण से मदों के वास्तविक मूल्य का पता नहीं चलता। इसे सूचनाओं की हानि कहते हैं।

प्रश्न 8.
क्या आप सहमत हैं कि वर्गीकृत आँकड़े मूले शुद्ध आँकड़ों से अच्छे हैं?
उत्तर:
शुद्ध या मूल आँकड़े अवर्गीकृत होते हैं। वे प्रायः इतने अधिक और बोझिल होते हैं कि उनको सँभालना भी कठिन हो जाता है। उन आँकड़ों से कोई निष्कर्ष निकालना बहुत ही कठिन कार्य है। यह बात निम्नलिखित 100 विद्यार्थियों के प्राप्तांक के लिए गए आँकड़ों से स्पष्ट होता है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 8

अब यदि आप से पूछा जाए कि आप तालिका देखकर बताएं कि गणित में सबसे अधिक कितने अंक हैं। तब आपको पहले 100 विद्यार्थियों के अंकों को बढ़ते या घटते क्रम में लिखना होगा। यह सब बहुत ही कठिन कार्य है। यह काम और अधिक कठिन बन जाएगा जब 100 विद्यार्थियों के स्थान पर आपको 1000 विद्यार्थियों के प्राप्तांक दिए गए हों। जब हम इन्हीं अंकों को वर्गीकृत करते हैं तो सूचनाएँ सरलता से मिल जाएँगी। नीचे इन्हीं आँकड़ों का वर्गीकरण दिखाया गया है –
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ऊपरी दी गई तालिका से हम बिना किसी कठिनाई के निष्कर्ष निकाल सकते हैं और तुलना कर सकते हैं। इस तालिका से हमें पता चलता है कि 6 विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके प्राप्तांक 70 80 के बीच में है। 90 से 100 के बीच अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 4 है। इस प्रकार हम देखते हैं कि वर्गीकृत आँकड़े शुद्ध या अवर्गीकृत आँकड़ों से श्रेष्ठ हैं।

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प्रश्न 9.
एकल-विचार तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
एकल चर तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर (Differences betweena univarite and bivariate frequency distribution):
एक चर के आवृत्ति वितरण को एकल चर आवृत्ति वितरण (Univariate Distribution) कहते हैं। इसके विपरीत दो चरों के आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Freuency Distribution) कहते हैं। नीचे दोनों पद के आवृत्ति वितरण के उदाहरण दिए गए हैं।
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द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Frequency Distribution):
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इस तालिका से पता चलता है कि कुल 20 कंपनियाँ हैं। इनका विज्ञापन पर व्यय तथा उनके द्वारा विक्रय की मात्रा दी गई है। अर्थात् यहाँ दो चर हैं –

  1. विज्ञापन पर व्यय तथा
  2. विक्रय। विक्रय के मूल्य को विभिन्न स्तंभों में दिखाया गया है तथा विज्ञापन के व्यय को विभिन्न पंक्तियों में दिखाया गया है। तालिका से हमें पता चलता है कि तीन फर्म ऐसी हैं, जिनका विक्रय 135 – 145 लाख के बीच में है और उनका विज्ञापन पर व्यय 64-66 हजार रुपयों के बीच में है।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित तालिका की सहायता से 7 तक के वर्ग अंतराल में समावेशी विधि के अनुसार आवृत्ति वितरण बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 12
उत्तर:
आवृत्ति वितरण (Frequency Distribution):
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Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
खुले सिरे वाले वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
खुले सिर वाले वर्ग होते हैं जिसमें या तो निम्न सिरा या ऊपरी सिर परिभाषित नहीं होता।

प्रश्न 2.
वर्ग का मध्य बिन्दु क्या है?
उत्तर:
उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा का औसत मूल्य का मध्य बिन्दु कहते हैं।

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पश्न 3.
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण कहते हैं।

प्रश्न 4.
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी गणना किस पर आधारित होती है?
उत्तर:
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी की गणना वर्ग के मध्य बिंदुओं पर आधारित होती है।

प्रश्न 5.
निम्न तालिका में से भारत की जनसंख्या का विस्तार बताइए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 14
उत्तर:
भारत की जनसंख्या का विस्तार = 102 – 35.7 = 67 करोड़।

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प्रश्न 6.
उत्पादन की दृष्टि से देशों के नाम बढ़ते हुए क्रम में लिखें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 15
उत्तर:
बढ़ते हुए क्रम में।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 16

प्रश्न 7.
निम्नलिखित की प्रकृति क्या है – “गुणात्मक या मात्रात्मक (परिणामात्मक)?

  1. राष्ट्रीयता
  2. साक्षरता
  3. धर्म
  4. लिंग
  5. वैवाहिक स्थिति आदि

उत्तर:
राष्ट्रीयता, साक्षरता, धर्म, लिंग, वैवाहिक, आदि की प्रकृति गुणात्मक है।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें आँकड़ों को उनकी विशेषताओं के आधार पर वर्गों में विभाजित किया जाता है।

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प्रश्न 9.
वर्गीकरण को कोई एक उद्देश्य लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के विशाल समूह को उनकी विशेषताओं के आधार पर संक्षिप्त करना ताकि उनकी समानताएँ व असमानताएँ स्पष्ट हो सकें।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत श्रेणी का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्तिगत श्रेणी वह श्रेणी है जिसमें प्रत्येक मद का माप अलग दिया जाता है।

प्रश्न 11.
अपवर्जी श्रेणी क्या है?
उत्तर:
अपवर्जी श्रेणी वह श्रेणी है जिसके अंतर्गत वर्ग की ऊपरी सीमाओं को छोड़कर अन्य सभी समान मदों को वर्ग समूह में सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 12.
20-30 वर्ग समूह का मध्यमूल निकालें।
उत्तर:
25

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित आँकड़ों के बढ़ते क्रम में क्रमबद्ध कीजिए। 18, 30, 15, 20, 10, 25, 19 तथा 28
उत्तर:
10, 15, 18, 19, 20, 25, 28 तथा 30

प्रश्न 14.
वर्ग अंतराल किसे कहते हैं?
उत्तर:
उच्च और निम्न वर्ग-सीमा के अंतर को वर्ग-अंतराल कहते हैं।

प्रश्न 15.
आवृत्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब किसी श्रेणी में मद का मूल्य बार-बार आता है तो हम उसे आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 16.
वर्ग सीमाएँ कितनी होती हैं?
उत्तर:
वर्ग सीमाएँ दो होती हैं।

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प्रश्न 17.
निम्न सीमा किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक वर्ग की पहली संख्या को निचली सीमा कहते हैं। जैसे 5-10 में 5 निम्न सीमा है।

प्रश्न 18.
प्रवेश पत्रिका के दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. प्रवेश पत्रिका से किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि को सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः भी किया जाता है।

प्रश्न 19.
शुद्ध आँकड़ों तथा व्यक्तिगत श्रृंखला में क्या अंतर है?
उत्तर:
शुद्ध आँकड़े मूल रूप में व्यक्त किए जाते हैं जबकि व्यक्तिगत श्रृंखला में मूल आँकड़ों को किसी क्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है।

प्रश्न 20.
विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब व्यक्तिगत आँकड़ों को बढ़ते हुए क्रम में या घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो उसे विन्यास कहते हैं।

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प्रश्न 21.
यदि समान अंतराल आवृत्ति वितरण में आँकड़े एक या दो वर्गों में केन्द्रित हैं तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
उस अवस्था में हम असमान अंतराल आवृत्ति का निर्माण करेंगे।

प्रश्न 22.
एकल संतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
वजन, समय तथा दूरी एकल सतत चरों के तीन उदाहरण हैं।

प्रश्न 23.
तीन ऐसे गुणों के नाम लिखो जो प्रकृति में परिणामात्मक हैं।
उत्तर:

  1. ऊँचाई
  2. आयु तथा
  3. आय

प्रश्न 24.
सतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
छात्रों की ऊँचाई, विभिन्न वर्षों में भारत में चावल का उत्पादन, भार।

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प्रश्न 25.
एक आवृत्ति वितरण में साधारणतया कितने वर्ग होने चाहिए।
उत्तर:
एक आवृत्ति वितरण में कम-से-कम 5 और अधिक-से-अधिक 15 वर्ग होने चाहिए।

प्रश्न 26.
समावेशी विधि में किन वर्ग सीमाओं को शामिल किया जाता है।
उत्तर:
समावेशी विधि में वर्ग की दोनों सीमाओं-उच्च सीमा तथा निम्न सीमा को शामिल किया जाता है।

प्रश्न 27.
तुम्हारे छोटे भाई की पुस्तकें हमेशा अव्यवस्थित पड़ी रहती हैं? इससे उसे क्या परेशानी होती हैं?
उत्तर:
उसे पुस्तकों को तलाश करने में काफी समय गँवाना पडता है।

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प्रश्न 28.
वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
समान गुण वाले आँकड़ों की वर्गों और समूहों में व्यवस्थित करने की क्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 29.
आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी मूल्य की बारम्बारता या पुनः को आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 30.
संख्यात्मक (परिणात्मक) वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण को संख्यात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

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प्रश्न 31.
गुणात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
गुणों के आधार पर आँकड़ों के वर्गीकरण को गुणात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 32.
भौगोलिक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
क्षेत्र के आधार पर वर्गीकरण को भौगोलिक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 33.
समयानुसार आँकड़ों के वर्गीकरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
काल-श्रेणी।

प्रश्न 34.
शुद्ध आँकड़ों को शुद्ध आँकड़ें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
मौलिक आँकड़ों को शुद्ध आँकड़े कहते हैं।

प्रश्न 35.
नीचे एक श्रृंखला दी गई हैं। इस श्रृंखला का नाम बताएँ – 19, 12, 15, 18, 20, 25, 20.
उत्तर:
यह व्यक्तिगत श्रृंखला है।

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प्रश्न 36.
वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
क्योंकि शुद्ध एवं अव्यवस्थित आँकड़ों का निर्वाचन एक जटिल क्रिया है।

प्रश्न 37.
क्रमबद्ध आँकड़ों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
इसका अभिप्राय आँकड़ों को एक क्रम (घटते या बढ़ते) में प्रस्तुत करना है।

प्रश्न 38.
संतत श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
संतत (अविच्छन) श्रृंखला उस श्रृंखला को कहते हैं जिसमें एक से दूसरे जुड़े हुए वर्गों की एक आवृत्ति व्यक्त की जाती है।

प्रश्न 39.
समायोजित वर्गचिह्न निकालने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
समायोजित वर्गचिह्न = (समायोजित उच्च सीमा + समायोजित निम्न सीमा) ÷ 2।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सतत तथा विविक्त (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाएँ।
उत्तर:
सतत तथा विविक्त चरों में अंतर (Differences between Continuous Series and Discrete Series):
एक चर को संतत चर उस समय कहा जाता है जब वह \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\),\(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 – 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊँचाई, भारत तथा उनकी आय को सतत चर कहा जा सकता है। इसके विपरीत यदि चर केवल एक विशेष मूल्य को ले सकता है तो इसे विविक्त चर कहेंगे जैसे-पूर्ण संख्या (Whole number) को विविक्त चर कहते हैं। एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

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प्रश्न 2.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के वर्गीकरण के अपवर्जी विधि तथा समावेशी विधि समझाइए।
उत्तर:
अंकों का वर्गीकरण दो विधियों से कर सकते हैं –

  1. अपवर्जी विधि
  2. समावेशी विधि

1. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि में वर्गान्तर की उच्च सीमा वाला मद उस वर्गान्तर में शामिल न होकर अगले वर्गान्तर में शामिल होगा। वर्गान्तर 0-10, 10-20, 20-30 किसी विशेष मद का मूल्य 10 है तो वह 0-10 में शामिल न होकर 10-20 वर्गान्तर में माना जाएगा।

2. समावेशी विधि (Inclusive Method):
जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि समंकमाला में आए हुए उच्च सीमा मूल्य उसी में शामिल होंगे, अगले में नहीं। वर्गान्तर 10 19, 20-29, 30-39 में। यदि कोई मूल्य 19 आता है तो वह 10-19 वाले वर्गान्तर में शामिल करना चाहिए, अगले में नहीं।

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प्रश्न 4.
एकल, द्वि तथा बहु चर वितरण को समझाइए।
उत्तर:

  1. एकल चर वितरण (Univariate Distribution): एकल चर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें केवल एक चर होता है, जैसे-जनसंख्या की केवल आय।
  2. द्विचर वितरण (Bivariate Distribution): द्विचर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें दो चर होते हैं। जैसे एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन।
  3. बहुचर वितरण (Multivariate Distribution): बहुचर वितरण उस वितरण को। कहते हैं जिसमें दो से अधिक चर होते हैं-उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपयोग की सभी मदों का व्यय।

प्रश्न 5.
चर (Variables) और गुणधर्म (Attributes) में उदाहरण सहित अंतर बताएँ।
उत्तर:
साधारण भाषा में चर से अभिप्राय किसी ऐसी विशेषता से है जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में बदलते हैं। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई और उनका वजन बदलते रहते हैं। इसी तरह एक व्यक्ति की योग्यता, वस्तुओं की कीमतों आदि चर हैं, परंतु सांख्यिकी में चर से अभिप्राय उस परिवर्तनशील चर से है जिसे संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई व वजन चर हैं, क्योंकि उन्हें संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है।

इसी तरह से व्यक्ति की आय, उपभोग के विभिन्न मदों पर पारिवारिक खर्चे, परिवार का आकार, फर्म का उत्पादन आदि चर के उदाहरण हैं। इसके विपरीत कला के प्रति रुचि और बुद्धिमता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है, परंतु इनको उसी तरह से संख्यात्मक रूप में नहीं मापा जा सकता जिस तरह व्यक्ति की आय या ऊँचाई को। इनको हम गुण-धर्म कहेंगे न कि चर।

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प्रश्न 6.
बारम्बारता सारणी तथा बारम्बारता वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
बारम्बारता सारणी में सभी मदों को व्यक्तिगत रूप से व्यक्त किया जाता है जबकि आवृत्ति वितरण में एक विशेष वर्ग की बारम्बारता को दर्शाया जाता है। यह सब नीचे की तालिकाओं से स्पष्ट है –
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प्रश्न 7.
वर्गान्तर के आधार पर निर्णय कैसे किया जाता है?
उत्तर:
वर्गान्तर के आधार का निर्धारण (Determination of the size of class intervals):
वर्गात्तर की संख्या निकालने के लिए हम विस्तार को वर्गों की संख्या से विभाजित करेंगे।
सूत्र में h = \(\frac{R}{N}\)
यहाँ h = वर्गान्तर का आकार
R = विस्तार
N = वर्गों की संख्या मान लें विस्तार 70 है और वर्गों की संख्या 10 है तो वर्गान्तर का आधार = 70 ÷ 10 = 7 होगा।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
वर्गीकरण की विशेषतायें (Characteristics of Classfication):
आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है, जैसे – 0 – 5, 5 – 10, 10 – 15, 15 – 20 आदि।

  1. समानता तथा सजातीयता के आधार पर तथ्यों को विभाजित करना।
  2. वर्गीकरण इस ढंग से विभाजित किया जाता है कि इकाई की विभिन्नता में उनकी एकता स्पष्ट हों।
  3. वर्गीकरण समय, गुण, मात्रा, क्षेत्र आदि के आधार पर किया जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक उदाहरण की सहायता से सिद्ध करें कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।
उत्तर:
यह सिद्ध करने के लिए कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल है, नीचे एक आवृत्ति विवरण तालिका बनाते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 19
विस्तार = 100 – 0 = 100
सभी वर्गान्तर का जोड़ = 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 = 100 (वर्गान्तर का जोड़)
अत: विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।

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प्रश्न 2.
नीचे एक कंपनी के 550 कर्मचारियों की आय की आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। तालिका वर्गान्तर की समायोजन की विधि लिखकर समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 20
उत्तर:
वर्गान्तर में समायोजन (Adjustment in Class intervals):
दी गई तालिका से हमें पता चलता है कि दूसरे वर्ग में ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा में निरंतर नहीं है। उदाहरण के लिए पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है और दूसरे वर्ग की निचली सीमा 900 है। इन दोनों में 1 का अंतर (Gap) है। इन दोनों वर्गों को अखंडित बनाए रखने के लिए हमें वर्गान्तर में समायोजन करना पड़ता है। समायोजन के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है।

  1. दूसरे वर्ग की नीचे वाली सीमा तथा पहले वर्ग की ऊपरी सीमा का अंतर निकाला जाता है। तालिका में दूसरे वर्ग की नीचे की सीमा 900 है और पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है। इन दोनों में अंतर 1 (900-899) है।
  2. प्राप्त अंतर को दो से विभाजित करें अर्थात् 1 को 2 से विभाजित करें। ऐसा करने से उत्तर 0.5 आता है।
  3. 0.5 को सभी वर्गों की निम्न सीमा से घटा दें। जैसे 800, 900, 1000, 1100, 1200 तथा 1300 में से 0.5 घटाने पर क्रमश: 799.5, 899.5, 999.5, 1099.5 1299.5 तथा 1399.5 आता है।
  4. 0.5 को सभी वर्गों की उच्च सीमा से जोड़ दें। जैसे – 899, 999, 1099, 1199, 1299 तथा 1399 में 0.5 जोड़ने पर क्रमश: 899.5 999.5, 1199.5 तथा 1399.5 आता है।
  5. समायोजन करने के पश्चात् आवृत्ति वितरण तालिका में यह नए वर्ग लिख लें। इसके बाद समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालें। समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करें –
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 21

अतः पहले वर्ग का मध्य-बिन्दु 849.5 (\(\frac{799.5+899.5}{2}\)) इसी प्रकार सभी समायोजित वर्गों के समायोजित मध्य – बिंन्दु ज्ञात करेंगे।

समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका (Adjusted Frequency Distribution Table)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 22

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प्रश्न 3.
एक काल्पनिक द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका का निर्माण करें।
उत्तर:
द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका (Bivariate Frequency Distribution Table):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 23

संख्यात्मक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण को ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण में बदलें।
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उत्तर:
‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित ‘से कम’ संचयी आवृत्ति माला को सामान्य समंक-माला में बदलें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 27

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से बताएँ कि 149 सेमी, से कम लम्बाई के कितने विद्यार्थी हैं?
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उत्तर:
149 सेमी. से कम लम्बाई वाले विद्यार्थियों की संख्या = 1 + 7 + 7 + 13 = 25

प्रश्न 4.
एक देश के निर्यात के आँकड़े नीचे सारणी में दिए गए हैं। इन्हें आवृत्ति वक्र काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 30

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प्रश्न 5.
नीचे दी गई साधारण आवृत्ति वितरण को ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण बनाएँ।
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उत्तर:
से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 32

प्रश्न 6.
निम्न संचयी आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 34

प्रश्न 7.
नीचे असमान वर्गान्तर में आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। इसकी सहायता से समान वर्गान्तर आवृत्ति वितरण तालिका तैयार करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 35
उत्तर:
दी हुई तालिका से पता चलता है कि वर्गान्तर में 5 और 10 अंतर है। अतः हम समान वर्गान्तर की तालिका बनने के लिए 5 या 10 का अंतर ले सकते हैं। परंतु यदि हम 5 के अंतर का वर्गान्तर लेंगे तो वर्गान्तरों की संख्या 20 हो जाएगी जो कि बहुत अधिक होगी। अतः हम 10 का अंतर लेकर वर्गान्तर लेंगे।
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित तालिका को आवृत्ति वक्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 37
उत्तर:
तालिका में दिए गए आँकड़ों को नीचे बारम्बारता वक्र में दिखाया गया है। तालिका में मध्य-बिन्दु को x – अक्ष पर तथा आवृत्तियाँ को y – अक्ष पर दर्शाया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 38

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों 10 के वर्ग-अंतराल में अपवर्जी विधि के अनुसार सतत श्रृंखला में प्रस्तुत कीजिए।
22, 25, 38, 40, 30, 50, 45, 55, 58, 60, 65, 42, 52, 23, 35, 45, 45, 55, 58, 47 तथा 37।
उत्तर:
सतत (अविच्छन) श्रृंखला (Continuous Series):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 39

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प्रश्न 10.
एक गरीब में 30 परिवारों का सामान्य दैनिक खर्च (रुपयों) में इस प्रकार है।
11, 12, 14, 16, 16, 17, 18, 18, 20, 20, 20, 21, 21, 22, 22, 23, 23, 24, 25, 25, 26, 27, 28, 31, 32, 32, 26, 26, 38।
इन आँकड़ों का निम्नलिखित वर्गों के आधार पर एक बारम्बारता सारणी बनाएँ। 10 – 14, 15 – 19, 20 – 24, 25 – 29, 30 – 34, तथा 35 – 39।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 40

प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
(अपवर्जी तथा समावेशी विधि के अनुसार।)
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उत्तर:
अपवर्जी विधि के अनुसार –
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक वर्ग की निचली और ऊपरी सीमा का अंतर कहलाता है –
(a) आवृत्ति वितरण
(b) वर्ग-आवृत्ति
(c) वर्ग-अंतरल
(d) वर्ग-सीमा
उत्तर:
(c) वर्ग-अंतरल

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प्रश्न 2.
10, 5, 7, 7, 8, 9, 10, 15 आँकड़े किस प्रकार के आँकड़े हैं?
(a) विविक्त श्रृंखला
(b) सतत श्रृंखला
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला
(d) शुद्ध आँकड़े
उत्तर:
(d) शुद्ध आँकड़े

प्रश्न 3.
वर्गीकरण का तात्पर्य है वस्तुओं को –
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना
(b) सजाना एवं सँवारना
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना

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प्रश्न 4.
आँकड़े को व्यवस्थित करते हैं –
(a) समयानुसार
(b) स्थानानुसार
(c) दोनों के अनुसार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) दोनों के अनुसार

प्रश्न 5.
चर पद का तात्पर्य ऐसी विशेषताओं से है जो –
(a) अपरिवर्तनशील होती हैं
(b) परिवर्तनशील होती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) परिवर्तनशील होती हैं

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी में चर पद का प्रयोग तभी किया जाता है जब ये विशेषताएँ –
(a) शब्दों में व्यक्त की जा सकें
(b) संख्याओं में मापी जा सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) संख्याओं में मापी जा सके

प्रश्न 7.
हम व्यक्तियों का वर्गीकरण उनके गुणों की –
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं
(b) संख्याओं के आधार पर कर सकते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं

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प्रश्न 8.
कोई चर तब संतत कहा जाता है जब यह किसी दिए परास के अंतर्गत –
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके
(b) कोई भी मूल्य धारण न कर सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके

प्रश्न 9.
असंतत या विविक्त चर धारण करते हैं –
(a) कोई भी मूल्य
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

प्रश्न 10.
सामान्य भाषा में समष्टि पद का अर्थ है किसी क्षेत्र में रहने वाले –
(a) विशिष्ट व्यक्तियों की संख्या
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)

प्रश्न 11.
आवृत्ति वितरण में परास का अर्थ है –
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य
(b) उच्चतम मूल्य + न्यूनतम मूल्य
(c) (a) और (b) दोन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

प्रश्न 12.
किसी विशेष वर्ग में मूल्यों की संख्या उस वर्ग की कहलाती है –
(a) आवृत्ति
(b) संचयो आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्ति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Bihar Board Class 11 Geography मृदा Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में कौन-सी मृदा सबसे विस्तृत उपजाऊ है ………………………..
(क) जलोढ़
(ख) काली मृदा
(ग) लेटेराइट
(घ) वन मृदा
उत्तर:
(क) जलोढ़

प्रश्न 2.
किस मृदा को रेगुड़ मृदा भी कहते हैं ………………………
(क) नमकीन
(ख) काली
(ग) शुष्क
(ख) लेटेराइट
उत्तर:
(ग) शुष्क

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 3.
मृदा की ऊपरी तह के उड़ जाने का मुख्य कारण ………………………..
(क) पवन अपरदन
(ख) अपक्षातान
(ग) जल अपरदन
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) जल अपरदन

प्रश्न 4.
कृषिकृत भूमि में जल सिंचित क्षेत्र में खाई वन का क्या कारक है …………………………
(क) जिप्सम
(ख) अति-जल सिंचाई
(ग) अति पशुचारण
(घ) उर्वरक
उत्तर:
(ख) अति-जल सिंचाई

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मृदा क्या है?
उत्तर:
मृदा भू-पर्पटी की सबसे महत्त्वपूर्ण परत है। यह एक मूल्यवान संसाधन है। ‘मृदा शैल, मलवा और जैव सामग्री का सम्मिश्रण होती है जो पृथ्वी की सतह पर विकसित होते हैं। मृदा का विकास हजारों वर्ष में होता है।

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक हैं-उच्चावच, जनक सामग्री, जलवायु, वनस्पति तथा अन्य जीव रूप और समय । इनके अतिरिक्त मानवीय क्रियाएँ भी पर्याप्त सीमा तक इसे प्रभावित करती है। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस, जल तथा वायु होते हैं।

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प्रश्न 3.
मृदा परिच्छदिका के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
क’ संस्तर सबसे ऊपरी खण्ड होता है, जहाँ पौधों की वृद्धि के लिए अनिवार्य जैव पदार्थों का खनिज पदार्थ, पोषक तत्त्वों तथा जल से संयोग होता है । ‘ख’ संस्तर, ‘क’ संस्तर तथा ‘ग’ सस्तर के बीच संक्रमण खण्ड होता है जिसे नीचे व ऊपर दोनों से पदार्थ प्राप्त होते हैं। इसमें कुछ जैव पदार्थ होते हैं । तथापि खनिज पदार्थ का अपक्षय स्पष्ट नजर आता है। ‘ग’ संस्तर की रचना ढीली सामग्री से होती है। यह परत मृदा निर्माण की प्रक्रिया में प्रथम अवस्था होती है और अंततः ऊपर की दो परतें इसी से बनती हैं।

प्रश्न 4.
मृदा अवकर्षण क्या होता है?
उत्तर:
मृदा अवकर्षण को मृदा की उर्वरता के हास के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसमें मृदा का पोषण स्तर गिर जाता है और अपरदन तथा दुरुपयोग के कारण मृदा की गहराई कम हो जाती है। भारत में मृदा संसाधनों के क्षय का मुख्य कारक मृदा अवकर्षण हैं। मृदा अवकर्षण की दर भू-आकृति, पवनों की गति तथा वर्षा की मात्रा के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है।

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प्रश्न 5.
खादर और बांगर में क्या अंतर है?
उत्तर:
खादर प्रतिवर्ष बाढ़ों के द्वारा निक्षेपित होने वाला नया जलोढ़क है, जो महीन गाद होने के कारण मृदा की उर्वरता बढ़ा देता है। बांगर पुराना जलोढ़क होता है जिसका जमाव दाइकृत मैदानों से दूर होता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
काली मृदा किन्हें कहते हैं ? इनके निर्माण तथा विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
काली मृदा दक्कन के पठार के अधिकतर भाग पर पाई जाती हैं। इसमें महाराष्ट्र के कुछ भाग, गुजरात, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के कुछ भाग शामिल हैं। गोदावरी और कृष्णा नदियों के ऊपरी भागों और दक्कन के पठार के उत्तरी-पश्चिमी भाग में गहरी काली मृदा पाई जाती है। इन्हें ‘रेगूर’ तथा ‘कपास वाली काली मिट्टी’ भी कहा जाता है। आमतौर पर काली मृदाएँ, मृण्मय, गहरी और अपारगम्य होती हैं। ये मृदाएँ गीली होने पर फूल जाती हैं और चिपचिपी हो जाती हैं। सूखने पर ये सिकुड़ जाती हैं। इस प्रकार शुष्क ऋतु में इन मृदाओं में चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। इस समय ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इनमें ‘स्वतः जुताई’ हो गई हो । नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की इस विशेषता के कारण काली मृदा में एक लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इसके कारण फसलों को, विशेष रूप से वर्षाधीन फसलों को, शुष्क ऋतु में भी नमी मिलती रहती है और वे फलती-फूलती रहती हैं।

रासायनिक दृष्टि से काली मृदाओं में चूने, लौह, मैग्नीशिया तथा ऐलुमिना के तत्त्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें पोटाश की मात्रा भी पाई जाती है। लेकिन इनमें फॉसफोरस, नाइट्रोजन और जैव पदार्थों की कमी होती है। इस मृदा का रंग गाढ़े काले और स्लेटी रंग के बीच की विभिन्न आभाओं का होता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण क्या होता है? मृदा संरक्षण के कुछ उपाय सुझाएँ।
उत्तर:
मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मिट्टी के अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की निम्नीकृत दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन मूल रूप से दोषपूर्ण पद्धतियों द्वारा बढ़ता है। किसी भी तर्कसंगत समाधान के अंतर्गत पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल प्रवणता वाली भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी भी हो जाए तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और स्थानांतरी कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है, जिससे विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें नियमित और नियंत्रित करना चाहिए । समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेत बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन आदि उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 3.
आप यह कैसे जानेंगे कि कोई मृदा उर्वर है या नहीं ? प्राकृतिक रूप से निर्धारित उर्वरता और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महीन कणों वाली लाल और पीली मृदाएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं। इसके विपरित मोटे कणों वाली उच्च भूमियों की मृदाएँ अनुर्वर होती हैं। इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉसफोरस और ह्यूमस की कमी होती है। जलोढ़क मृदाओं में महीन गाद होती है जो मुदा की उर्वरता को बढ़ा देती हैं। इस प्रकार की मृदा में कैल्सियम संग्रथन अर्थात् कंकड़ पाए जाते हैं। काली मृदाओं में नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की विशेषता के कारण लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इस कारण शुष्क ऋतु में भी फसलें फलती-फूलती रहती हैं। लैटेराइट मृदाओं में लोहे के ऑक्साइड और अल्यूमीनियम के यौगिक तथा पोटाश अधिक मात्रा में होते हैं। ह्यूमस की मात्रा कम होती है। इन मृदाओं में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्सियम की कमी होती है।

शुष्क मृदाओं में ह्यूमस और जैव पदार्थ कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए ये मृदाएँ अनुर्वर हैं। लवण मृदाएँ ऊसर मृदाएँ भी कहलाती हैं। लवण मृदाओं में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है। अतः ये अनुर्वर होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की वनस्पति नहीं उगती। इनमें लवण की मात्रा अधिक होती है। पीटमय मृदाएँ उर्वर होती हैं। इस प्रकार की मृदा में ह्युमस और जैव तत्त्व पर्याप्त मात्रा में माजूद होते हैं। वन मृदाएँ अम्लीय और कम ह्यूमस वाली होती हैं। घाटियों में ये दुमटी और पांशु होती हैं तथा ऊपरी ढालों पर ये मोटे कणों वाली होती हैं। निचली घाटियों में पाई जाने वाली मृदाएँ उर्वर होती हैं। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस जल तथा वायु होते हैं। इनमें से प्रत्येक की वास्तविक मात्रा मृदा की उर्वरता को बढ़ाती है। लवण मृदा की उर्वरता को नष्ट कर देता है। रासायनिक उर्वरक भी मृदा के लिए हानिकारक है। लवणीय मृदा में जिप्सम डालने से मृदा की उर्वरता बढ़ी जाती है।

प्राकृतिक रूप से मृदा की उर्वरता पोषक तत्त्वों की विद्यमानता पर निर्भर करती हैं। मृदा में फॉस्फोरस, पोटैशियम, गंधक, मैग्नीशियम, नाइट्रोजन, बोरॉन ये सभी तत्त्व भिन्न-भिन्न मात्रा में होते हैं। मृदा की उत्पादकता कई भौतिक गुणों पर निर्भर करती है।
जब मृदा में विभिन्न तत्त्वों की कमी हो जाती है तो मानव निर्मित रसायन जैसे पोटाश, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, गंधक, मैग्नीशियम, बोरान आदि उचित मात्रा में मिलाकर मृदा की उर्वरता को बढ़ाया जाता है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
अपने क्षेत्र से मृदा के विभिन्न नमूने एकत्रित कीजिए तथा मृदा के प्रकारों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
मृदा के नमूने स्वयं या अपने अध्यापक की सहायता से एकत्रित करें और मदा के प्रकारों पर एक रिपोट इस अध्याय को पढ़कर आप भली-भाँति तैयार कर सकते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
भारत के रेखा मानचित्र पर मृदा के निम्नलिखित प्रकारों से ढके क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए

  • लाल मृदा
  • लैटेराइट मृदा
  • जलोढ़ मृदा।

उत्तर:
चित्र 6.1 देखें इसमें भारत के मानचित्र पर उपर्युक्त पूछी गई सभी मृदाओं का विवरण दिया गया है।

Bihar Board Class 11 Geography मृदा Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उत्तरी भारत में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी की दो मुख्य किस्में लिखें।
उत्तर:
खादर तथा बागर मिट्टी।

प्रश्न 2.
भारतीय मैदानों के विशाल क्षेत्रों में पाई जाने वाली मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

प्रश्न 3.
खादर तथा बांगर मिट्टी के दो स्थानीय नाम लिखें।
उत्तर:
खादर मिट्टी-बैठ, बांगर मिट्टी-धाया।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 4.
तीन क्षेत्रों के नाम बतायें जहाँ पर खादर मिट्टी पाई जाती है।
उत्तर:
सतलुज बेसिन, गंगा का मैदान, यमुना बेसिन।

प्रश्न 5.
जलोढ़ मिट्टी में उत्पादित होने वाली दो खाद्य पदार्थों के नाम लिखें।
उत्तर:
गेहूँ, चावल।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल की जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक किस फसल के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
पटसन के लिए।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 7.
मृदा महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर:
यह सभी जीवित वस्तुओं के लिए भोजन उत्पादन करती है।

प्रश्न 8.
मिट्टी में पाये जाने वाले मुख्य आवश्यक तत्त्व लिखें।
उत्तर:
सिलिका, चीका तथा ह्यूमस।

प्रश्न 9.
मिट्टी में चीका का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह जल को सोख लेती है।

प्रश्न 10.
मृदा की तीन परतों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. A – स्तर
  2. B – स्तर
  3. c – स्तर

प्रश्न 11.
मृदा की परिभाषा दें।
उत्तर:
यह असंगठित पदार्थों की पतली परत होती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 12.
उन तत्त्वों के नाम बतायें जिन पर मृदा की बनावट निर्भर करती है?
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. धरातल
  3. जलवायु

प्रश्न 13.
भारत में मृदा के तीन व्यापक प्रादेशिक भागों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीप की मिट्टियाँ
  2. उत्तरी मैदान की मिट्टियाँ
  3. हिमालय की मिट्टियाँ

प्रश्न 14.
बनावट के आधार पर मृदा की तीन किस्में लिखें।
उत्तर:

  1. रेतीली मिट्टियाँ
  2. चीका मिट्टी
  3. दोमट मिट्टी

प्रश्न 15.
भारत में पाई जाने वाली अधिकतर व्यापक मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

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प्रश्न 16.
लैटेराइट मिट्टी की दो किस्में लिखें।
उत्तर:
उच्च मैदान लैटेराइट मिट्टी तथा निम्न मैदान लैटेराइट मिट्टी।

प्रश्न 17.
उन तीन राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर लैटेराइट मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा उड़ीसा।

प्रश्न 18.
लैटेराइट मिट्टी किस फसल के लिए सबसे अधिक उपयोगी है?
उत्तर:
बागानी फसल लगाने के लिए।

प्रश्न 19.
मरुस्थलीय मिट्टी किस प्रदेश में पाई जाती है?
उत्तर:
शुष्क मरुस्थल।

प्रश्न 20.
भारत के किस क्षेत्र में मरुस्थलीय मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
थार मरुस्थल (राजस्थान का सिंध)।

प्रश्न 21.
मरुस्थलीय मिट्टी में उपज का क्या कारण है.?
उत्तर:
सिंचाई।

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प्रश्न 22.
रेतीले मरुस्थल में पाई जाने वाली मिट्टी के दो प्रकार लिखें।
उत्तर:
तेजाबी तथा नमकीन।

प्रश्न 23.
मदा किसे कहते हैं?
उत्तर:
मिट्टी भूतल की ऊपरी सतह का आवरण है। भू-पृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थ ऊपरी परत को मृदा कहते हैं।

प्रश्न 24.
दक्कन पठार के छोर पर कौन-सी मिट्टी मिलती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 25.
कौन-सी मृदा प्रायद्वीपीय भारत में पाई जाती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 26.
उन दो राज्यों के नाम बतायें जहाँ पर लाल मिट्टी अधिकतर पाई जाती है।
उत्तर:
तमिलनाडु तथा छत्तीसगढ़।

प्रश्न 27.
उन तीन रंगों के नाम बतायें जिनसे लाल मिट्टी का निर्माण होता है।
उत्तर:
भूरा, चाकलेट तथा पीला।

प्रश्न 28.
रेगुड़ मिट्टी का रंग बताओ।
उत्तर:
काला।

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प्रश्न 29.
उन दो राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर काली मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश।

प्रश्न 30.
काली मिट्टी के दो अन्य नाम लिखें।
उत्तर:
कपास मिट्टी तथा रेगुड़ मिट्टी।

प्रश्न 31.
काली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
दक्कन ट्रैप के ज्वालामुखी चट्टानों के लावा द्वारा।

प्रश्न 32.
एक फसल का नाम लिखें जिसके लिये काली मिट्टी बहुत उपयोगी है।
उत्तर:
कपास।

प्रश्न 33.
किस प्रकार की जलवायु में लेटेराइट मिट्टी का निर्माण होता है?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय मानसून जलवायु।

प्रश्न 34.
मृदा के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए। उत्तर:A स्तर, B स्तर, C स्तर

प्रश्न 35.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-तल की ऊपरी सतह के उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बहना मृदा अपरदन कहलाता है।

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प्रश्न 36.
बीहड़ किसे कहते हैं?
उत्तर:
अवनालिका अपरदन द्वारा बने गड्ढों को बीहड़ कहते हैं।

प्रश्न 37.
मृदा कैसे बनती है?
उत्तर:
मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मृदा का निर्माण होता है। इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश मिलने से मृदा का विकास होता है।

प्रश्न 38.
मृदा निर्माण के प्रमुख कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. उच्चावच
  3. जलवायु
  4. प्राकृतिक वनस्पति

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा का मूल पदार्थ क्या है?
उत्तर:
आधार चट्टानों के रासायनिक तथा यांत्रिक अपक्षरण से प्राप्त होने वाले पदार्थों को मृदा का मूल पदार्थ कहा जाता है। इन सभी पदार्थों से मृदा का निर्माण होता है। मृदा का रंग, उपजाऊपन आदि मूल पदार्थों पर निर्भर करता है। लावा चट्टानों से बनने वाली मृदा का रंग काला होता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण के छः तत्त्वों के नाम बताइए जो मृदा जनन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु, चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है। धरातल तथा भूमि की ढाल भी मृदा जनन पर प्रभाव डालते हैं।

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प्रश्न 3.
जलोढ़ मृदा की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
जलोढ़ मृदा की विशेषताएं –

  1. इसका निक्षेपण मुख्यतः नदी द्वारा होता है।
  2. इसका विस्तार नदी बेसिन तथा मैदानों तक सीमित होता है।
  3. यह अत्यधिक उपजाऊ मृदा होती है।
  4. इसमें बारीक कणों वाली मृदा पाई जाती है।
  5. इसमें काफी मात्रा में पोटाश पाया जाता है, परंतु फॉस्फोरस की कमी होती है।
  6. यह मृदा बहुत गहरी होती है।

प्रश्न 4.
भारत में उपलब्ध मिट्टी के प्रकारों में प्रादेशिक विभिन्यता के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत की मिट्टियों में पाई जाने वाली प्रादेशिक विभिन्नता निम्नलिखित घटकों पर निर्भर करती है –

  1. शैल-समूह,
  2. उच्चावच के धरातलीय लक्षण
  3. ढाल का रूप
  4. जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति
  5. पशु तथा कीड़े-मकोड़े।

प्रश्न 5.
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में क्या अंतर है?
उत्तर:
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में मुख्य अंतर मूल पदार्थों में पाया जाता है। पठारों में आधार चट्टानें कठोर होती हैं। इसकी मिट्टी में मूल पदार्थों की प्राप्ति इन चट्टानों से होती है। यह मिट्टी मोटे कणों वाली तथा कम उपजाऊ होती है। मैदानों में मिट्टी का निर्माण नदियों के निक्षेपण कार्य से होता है। मैदानों में प्रायः जलोढ़ मिट्री मिलती है। नदी में प्रत्येक बाढ़ के कारण महीन सिल्ट (Silt) तथा मृतिका (clay) का निक्षेप होता रहता है।

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प्रश्न 6.
चट्टानों में जंग लगने से कौन-सी मिट्टी का निर्माण होता है? भारत में इस मिट्टी के तीन प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
इस क्रिया से लाल मिट्टी का निर्माण होता है –
1. विस्तार (Extent) – भारत की सब मिट्टियों में से लाल मिट्टी विस्तार सबसे अधिक है। यह मिट्टी लगभग 8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाती है। दक्षिण में तमिलनाडु कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, छोटा नागपुर तथा प्रायद्वीप पठार के बाहरी भागों में लाल मिट्टी का विस्तार मिलता है।

2. विशेषताएँ (Characteristics) – इस मिट्टी का निर्माण प्रायद्वीप के आधारभूत आग्नेय चट्टानों, ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों की टूट-फूट से हुआ है। इस मिट्टी का रंग लौहयुक्त चट्टानों में ऑक्सीकरण (Oxidiation) की क्रिया से लाल हो जाता है।

वर्षा के कारण ह्यूमस नष्ट हो जाता है तथा आयरन ऑक्साइड ऊपरी सतह पर आ जाती है। इस मिट्टी में लोहा और एल्यूमीनियम की अधिकता होती है, परंतु नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी होती है। यह मिट्टी कम गहरी तथा कम उपजाऊ होती है। इस मिट्टी में ज्वार, बाजरा, कपास, दालें, तम्बाकू की कृषि होती है।

प्रश्न 7.
मृदा क्या है? इसका निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
भू-पृष्ठ (Crust) पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। इस परत की मोटाई कुछ सेमी से लेकर कई मीटर तक हो सकती है। इसमें कई तत्त्व जैसे मिट्टी के बारीक कण, ह्यूमस, खनिज तथा जीवाणु मिले होते हैं। इन तत्त्वों के कारण इसमें कई परतें होती हैं। मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के मूल पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक ऋतु अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मिट्टी का निर्माण आरम्भ होता है।

इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश के मिलने से कोई भौतिक तथा रासायनिक कारकों के सहयोग से मृदा का पूर्ण विकास होता है। इस प्रकार मृदा की परिभाषा है, “Soil is the end product of the physical, chemical, biological and cultural fctors which act and react together.”

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प्रश्न 8.
मृदा जनन की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है।

प्रश्न 9.
दक्षिणी पठार में पाई जाने वाली मृदा का लाल रंग क्यों है ?
उत्तर:
दक्षिणी पठार के बाह्य प्रदेशों में लाल मिट्टी का अधिकतर विस्तार है। इस मिट्टी का मूल पदार्थ पठारी प्रदेश के पुराने क्रिस्टलीय तथा रूपान्तरित चट्टानों से प्राप्त होता है। इनमें ग्रेनाइट, नाईस तथा शिल्ट की चट्टानों का विस्तार है। इन चट्टानों में लोहा तथा मैग्नीशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है। उष्ण कटिबंधीय जलवायु जलीकरण की क्रिया के कारण आयरन-ऑक्साइड द्वारा इस मिट्टी का रंग लाल हो जाता है।

प्रश्न 10.
वनस्पति जाति और वनस्पति में क्या अंतर है?
उत्तर:
वनस्पति जाति और वनस्पति में अंतर –
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प्रश्न 11.
वनस्पति और वन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
वनस्पति और वन में अंतर –
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प्रश्न 12.
समोच्च रेखा बंधन किसे कहते हैं? मृदा को विनाश से बचाने के लिए इसका किस प्रकार प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर:
समोच्च रेखा बंधन (Contour Bunding) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई-की रेखा के साथ-साथ सीढ़ीदार खेत बनाए जाते हैं ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके। ऐसे प्रदेश में खड़ी ढाल वाले खेतों में समान ऊँचाई की रेखा के साथ बाँध या ढाल बनाई जाती है। ऐसे बाँध को समोच्च रेखा बंधन कहते हैं। इससे वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन से बचाया जा सकता है। इससे वर्षा के जल को नियंत्रित करके बहते हुए पानी द्वारा मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 13.
मृदा की उर्वरा शक्ति को विकसित करने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए?
उत्तर:
मृदा की उर्वरा शक्ति का विकास करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए –

  1. मृदा अपरदन को रोकने का उपाय होना चाहिए।
  2. मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए उर्वरकों और खादों का प्रयोग करना चाहिए।
  3. फसलों के हरे-फेर की प्रणाली का प्रयोग करना चाहिए।
  4. कृषि की वैज्ञानिक विधियों को अपनाना चाहिए।
  5. मिट्टी के उपजाऊ तत्त्वों का संरक्षण करके रासायनिक तत्त्वों को मिलाना चाहिए।

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प्रश्न 14.
किसी प्रदेश के आर्थिक विकास में मृदा की विशेषता किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है? इसकी व्याख्या करने के लिए दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
मृदा मानव के लिए बहुत मूल्यवान प्राकृतिक सम्पदा है। मिट्टी पर बहुत-सी मानवीय क्रियाएँ आधारित हैं। मिट्टी पर कृषि, पशुपालन तथा वनस्पति जीवन निर्भर करता है। किसी प्रदेश का आर्थिक विकास मिट्टी की उर्वरी शक्ति पर निर्भर करता है। कई देशों की कृषि अर्थव्यवस्था मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। संसार के प्रत्येक भाग में जनसंख्या का एक बड़ा भाग भोजन की पूर्ति के लिए मिट्टी पर निर्भर करता है।

अनुपजाऊ क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व तथा लोगों का जीवन-स्तर दोनों ही निम्न होते हैं। उदाहरण के लिए पश्चिमी बंगाल के डेल्टाई प्रदेश तथा केरल तट जलोढ़ मिट्टी से बने उपजाऊ क्षेत्र हैं। यहाँ उन्नत कृषि का विकास हुआ है। यह प्रदेश भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है। दूसरी ओर तेलंगाना में मोटे कणों वाली मिट्टी मिलती है तथा राजस्थान के शुष्क प्रदेश में रेतीली मिट्टी कृषि के अनुकूल नहीं है। इन प्रदेशों में विरल जनसंख्या। पाई जाती है।

प्रश्न 15.
मुदा की उर्वरता समाप्ति के तीन कारण बताइए।
उत्तर:
मृदा एक मूल्यावान प्राकृतिक संसाधन है। अधिक गहरी तथा उपजाऊ मिट्टी वाले प्रदेशों में कृषि का अधिक विकास होता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के हास के निम्नलिखित कारण हैं

  1. कृषि भूमि पर निरंतर कृषि करते रहने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। मृदा को उर्वरा शक्ति प्राप्त करने का पूरा समय नहीं मिलता।
  2. दोषपूर्ण कृषि पद्धतियों के कारण मृदा की उर्वरा शक्ति समाप्त होने लगती है। स्थानान्तरी कृषि के कारण मृदा के उपजाऊ तत्त्वों का नाश होने लगती है। प्रतिवर्ष एक ही
  3. फसल बोने से मृदा में विशिष्ट प्रकार के खनिज कम होने लगते हैं।
  4. वायु तथा जल अपरदन से मृदा की उर्वरता समाप्त होती रहती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं ? इसके क्या कारण हैं ? मानव ने मृदा अपरदन से बचाव के कौन-कौन से तरीके अपनाए हैं?
उत्तर:
मृदा अपरदन (Soil Erosion) – भूतल की ऊपरी सतह से उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है। भूतल की मिट्टी धीरे-धीरे अपना स्थान छोड़ती रहती है जिससे यह कृषि के अयोग्य हो जाती है।

मृदा अपरदन के प्रकार (Types of Soil Erosion) – मृदा अपरदन तीन प्रकार से होता है-:

  • धरातलीय कटाव (Sheet Erosion)
  • नालीदार कटाव (Guly Erosion)
  • वायु द्वारा कटाव (Wind Erosion)

मृदा अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) –

  • मूसलाधार वर्षा (Torrential Rain) – सर्वती प्रदेशों की तीव्र ढलानों पर मूसलधार वर्षा का जल मिट्टी की परत बहा कर ले जाता है। इससे यमुना घाटी में उत्खात भूमि की रचना
  • वनों की कटाई (Deforestation) – वनों के अन्धाधुन्ध कटाव से मृदा अपरदन बढ़ जाता है। जैसे-पंजाब में शिवालिक पहाड़ियों पर तथा मैदानी भाग में चो (Chos) द्वारा मृदा अपरदन एक गम्भीर समस्या है।
  • स्थानान्तरी कृषि (Shifting Agriculture) – वनों को जलाकर कृषि के लिए प्राप्त करने की प्रथा से झुमिंग (Jhumming) से उत्तर:पूर्वी भारत में मृदा अपरदन होता है।
  • नर्म मिट्टी (Soft Soils) – कई प्रदेशों में नर्म मिट्टी के कारण मिट्टी की परत जाती है।
  • अनियंत्रित पशु चारण (Uncontrolled Cattle Grazing) – पर्वतीय ढलानों पर चरागाहों में अनियंत्रित पशुचारण से मिट्टी के कण ढीले होकर बह जाते हैं।
  • धूल भरी आंधियाँ (Dust Strons) – मरुस्थलों के निकटवर्ती प्रदेश में तेज धूल भरी आधियों के कारण मिट्टी परत का अपरदन होता है।

मृदा अपरदन रोकने के उपाय (Methods to Check Soil Erosion) – मिट्टी के उपजाऊपन को कायम रखने के लिए मिट्टी का संरक्षण आवश्यक है। मृदा अपरदन रोकने के लिए कई प्रकार का परत अपरदन होता है।

  • वृक्षारोपण (Afforestation) – पर्वतीय ढलानों पर मिट्टी को संगठित रखने के लिए वृक्ष लगाए जाते हैं। नदियों के ऊपरी भागों में वन क्षेत्रों का विस्तार करके मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। इसी प्रकार राजस्थान मरुस्थल की सीमाओं पर वन लगाकर वायु द्वारा अपरदन रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।
  • नियंत्रित पशुचारण (Controlled Grazing) – ढलानों पर चरागाहों में बे-रोक-टोक पशुचारण को रोका जाए ताकि घास को फिर से उगने और बढ़ने का समय मिल सके।
  • सीढ़ीनुमा कृषि (Terraced Agriculture) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई की रेखा के साथ सीढ़ीदार खेत बनाकर वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • बाँध बनाना (River Dams) – नदियों के ऊपरी भागों पर बाँध बनाकर बाढ़ नियंत्रण द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • अन्य उपाय – भूमि को पवन दिशा के समकोण पर जोतना चाहिए जिससे पवन द्वारा मिट्टी कटाव कम हो सके। स्थानान्तरी कृषि को रोका जाए। वायु की गति को कम करने के
  • लिए वृक्ष लगा कर वायु रोक (Wind Break) – क्षेत्र बनाना चाहिए। फसलों के हेर-फेर तथा भूमि को परती छोड़ देने से मृदा अपरदन कम किया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के मुख्य घटकों के प्रभाव का वर्णन करों।
उत्तर:
मृदा निर्माण कई भौतिक तथा रासायनिक तत्त्वों पर निर्भर करता है। इन तत्त्वों के कारण मृदा प्रकारों के वितरण में भिन्नता पाई जाती है। ये तत्त्व स्वतंत्र रूप से अलग से नहीं बल्कि एक दूसरे के सहयोग से काम करते हैं।
1. मूल पदार्थ – मृदा निर्माण करने वाले पदार्थ की प्राप्ति आधार चट्टानों से होती है। प्रायः पठारों की मिट्टी का सम्बन्ध आधार चट्टानों से होता है। मैदानी भागों में मृदा निर्माण का मूल पदार्थ नदियों द्वारा जमा किए जाते हैं। नदियों में बाढ़ के कारण प्रत्येक वर्ष मिट्टी की नई परत बिछ जाती है।

2. उचावच – किसी प्रदेश का उच्चावच तथा ढाल मृदा निर्माण पर कई प्रकार से प्रभाव डालता है। मैदानी भागों में गहरी मिट्टी मिलती है जबकि खड़ी ढाल वाले प्रदेशों में कम गहरी मिट्टी का आवरण होता है। पठारों पर भी मिट्टी की परत कम गहरी होती है। तेज ढाल वाले क्षेत्रों में अपरदन के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बह जाती है। इस प्रकार किसी प्रदेश के धरातल तथा ढाल के अनुसार जल प्रवाह की मात्रा मृदा निर्माण को प्रभावित करती है।

3. जलवायु – वर्षा, तापमान तथा पवनें किसी प्रदेश में मृदा निर्माण पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। जलवायु के अनुसार सूक्ष्म जीव तथा प्राकृतिक वनस्पति भी मृदा पर प्रभाव डालते हैं। शुष्क प्रदेशों में वायु मिट्टी के ऊपी परत को उड़ा ले जाती है। अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में मिट्टी कटाव अधिक होता है।

4. प्राकृतिक वनस्पति – किसी प्रदेश में मिट्टी का विकास प्राकृतिक वनस्पति की वृद्धि के साथ ही आरम्भ होता है। वनस्पति के गले-सड़े अंश के कारण मिट्टी में हमस की मात्रा बढ़ जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसी कारण घास के मैदानों में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण होता है। भारत के विभिन्न प्रदेशों में मृदा तथा वनस्पति के प्रकारों में गहरा सम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में मृदा संरक्षण पर एक निबंध लिखें।
उत्तर:
मृदा संरक्षण-यदि मृदा अपरदन और मृदाक्षय मानव द्वारा किया जाता है, तो स्पष्टतः मानवों द्वारा ही इसे रोका भी जा सकता है। मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मृदा अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की अपक्षरित दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन वास्तव में मनुष्यकृत समस्या है।

1. किसी भी तर्कसंगत समाधान में पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल वाली भूमि का उपयोग कृपि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी हो जाए, तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

2. भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और झूम कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है। इस कारण विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें (अति चराई और झूम कृषि) नियमित और नियंत्रित करना चाहिए।

3. समोच्च रेखा के अनुसार मेड़बंदी, समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेती बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, वरणात्मक खरतपवार नाशन, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन, उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

4. वनालिका अपरदन को रोकने तथा उनके बनने पर नियंत्रण के प्रयत्न किए जाने चाहिए । अंगुल्याकार अवनलिकाओं को सीढ़ीदार खेत बनाकर खत्म किया जा सकता है। अवनलिकाओं के शीर्ष की ओर के विकास को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस कार्य को अवनलिकाओं को बंद करके. सीढीदार खेत बनाकर या आवरण वनस्पति का रोपण करके किया जा सकता है।

5. मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि पर बालू के टीलों के प्रसार को वनों की रक्षक मेखला बनाकर रोकना चाहिए। कृषि के अयोग्य भूमि को चराई के लिए चरागाहों में बदल देना चाहिए। बालू के टीलों को स्थिर करने के उपाय भी अपनाए जाने चाहिए।
मृदा संरक्षण के कुछ महत्वपूर्ण और सुविज्ञात उपाय नीचे दिए गए हैं

वैज्ञानिक भूमि उपयोग अर्थात् भूमि का केवल उसी उद्देश्य के लिए उपयोग, जिसके लिए यह सबसे अधिक उपयुक्त है। वैज्ञानिक शस्यावर्तन। समाच्चरेखीय जुताई और मेड़बंदी। वनरोपण, विशेष रूप से नदी द्रोणियों के ऊपरी भागों में। आर्द्र-प्रदेशों में अवनालिका अपरदन और मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय प्रदेशों में । पवन-अपरदन रोकने के लिए अवरोधों का निर्माण। जैव खादों का अधिकाधिक उपयोग । बाढ़ सिंचाई के स्थान पर सिंचाई की फुहारा और टपकन विधियों का उपयोग।

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प्रश्न 4.
विश्व की मिट्टियों के मुख्य प्रकार बताइये और इनमें से किसी एक के विवरण एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में पायी जाने वाली मिट्टियों को छः प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

  • जलोढ़ या कॉप मिट्टी
  • काली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • पर्वतीय मिट्टी

जलोढ़ एवं काँप मिट्टी (Alluvial Soil) – जलोढ़ एवं काँप मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाये गये अवसाद के निक्षेप से हुआ है। यह मिट्टी भारत के विस्तृत मैदानी भाग एवं प्रायद्वीपीय पठार के तटीय मैदानों में मिलती है। यह लगभग 15 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। उत्तर भारत के मैदान में इसका क्षेत्रफल लगभग 9 लाख वर्ग किमी. है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सबसे अधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। इस मिट्टी पर भारत की लगभग आधी आबादी की जीविका निर्भर है।

जलोढ़ मिट्रियों को नवीनता एवं प्राचीनता के आधार पर दो भागों में विभक्त किया जाता है – (1) बांगर (2) खादर

  • बांगर – यह पुराना जलोढ़ मिट्टी है जो अपेक्षाकृत ऊँचे भावों में पाया जाता है। इन मिट्टियों तक बाढ़ का पानी नहीं पाता है। यह खादर की अपेक्षा कम उपजाऊ मिट्टी होती है।
  • खादर – नवीन जलोढ मिट्रियाँ हैं जो नदी के बाढ मैदान, दियारा तथा डेल्टा क्षेत्रों में पायी जाती है। इसके कण प्राय: महीन होते हैं और इनमें जल धारण की शक्ति बांगूर मिट्टी से अधिक होती है तथा बांगर से इसकी उपजाऊपन ज्यादा है।

प्रश्न 5.
भारत की मिट्टियों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनकी विशेषताएँ एवं वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की मिट्टियों की उत्पत्ति, रंग, संघटन और स्थिति के आधार पर भारतीय मृदाओं को निम्नलिखित आठ वर्गों में विभाजित किया गया है –

  • जलोढ़ मृदा
  • काली मिट्टी
  • लाल एवं पीली मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • क्षारीय मिट्टी
  • पीटमय और जैव मृदायें तथा
  • वन मृदायें।

1. जलोढ़ मृदा – यह सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी हैं, जिनमें अनेक फसलें उपजायी जाती हैं। इसका मिट्टी का वितरण गंगा के संपूर्ण मैदानी भागों में पायी जाती है। प्रायद्वीपीय भारत में ये पूर्वी तट के नदियों के डेल्टाओं और कुछ नहीं घाटियों में पायी जाती है। इस मिट्टी का विस्तार भारत के 22% क्षेत्रफल पर पायी जाती है।

2. काली मिट्टी – इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाता है। काली मिट्टी देश के कुल क्षेत्रफल के 30% मात्रा पर पाई जाती है। इन्हें रेगुड़ भी कहते हैं। काली मिट्टी महाराष्ट्र पश्चिमी मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में विकसित है।

3. लाल एवं पिली मिट्टी – यह मिट्टी अपेक्षाकृत बलई और लाल-पीले रंग ही होती है। महीन कणों वाली मृदायें सामान्यतः उपजाऊ होती हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक आंध्रप्रदेश और उड़ीसा के अधिकांश भूमि पर लाल बलुई मृदायें पायी जाती हैं।

4. लैटेराइट मिट्टी – उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लैटेराइट मिट्टी पायी जाती है जहाँ ऋतुनिष्ठ भारी वर्षा होती है। यह फसलों की कृषि हेतु उपजाऊ मिट्टी है। तमिलनाडु, कर्नाटक, के रण्य, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और असम के पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ है।

5. मरुस्थलीय मृदायें – इस मिट्टी का रंग लाल से लेकर किशमिशी तक होता है। यह सामान्यतः बलुई एवं क्षारीय होती है। पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीय मृदायें विशेष रूप में विकसित हुई हैं।

6. वन मृदाएँ – यह मिट्टी प्रर्याप्त वर्षा वाले वन क्षेत्रों में निर्मित होती हैं। मृदाओं का निर्माण पर्वतीय वातावरण में होती हैं। निचली घाटियों में पायी जाने वाली मृदायें उपजाऊ होती हैं और इनमें प्रायः चावल एवं गेहूँ की खेती होती है।

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प्रश्न 6.
भारत में काली मिट्टी का क्षेत्र एवं उसकी विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
काली मिट्टी का निर्माण ज्वालामुखी लावा के अनावृत्तिकरण से होती है। महाराष्ट्र एवं गुजरात के अधिकांश भाग, पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा आंध्रप्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ भागों में मिलती हैं। इस मिट्टी का विस्तार 5.5 लाख वर्ग किमी. में भारत में है। इसका विस्तार लावा क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि नदियों ने इसे ले जाकर अपनी घाटियों में भी जमा करते रहते हैं। काली मिट्टी को विशेषता-यह मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है। कपास की उपज हेतु तो यह मिट्टी विश्वविख्यात इतनी हुई कि इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाने लगा। इस मिट्टी में नमी रखने की शक्ति प्रचूर मात्रा में है। यद्यपि इस क्षेत्र में वर्षा कम होती है फिर भी इस मिट्टी से कपास के पौधों को पर्याप्त नमी प्राप्त हो जाती है और सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 6 पदार्थों में परिवर्तन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 6 पदार्थों में परिवर्तन Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Science पदार्थों में परिवर्तन Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सही उत्तर को चुनिए –

(क) निम्न में से कौन-सा पदार्थ ठोस अवस्था से सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तन हो जाता है –
(i) बर्फ
(ii) जल
(iii) कपूर
(iv) दूध
उत्तर:
(iii) कपूर

(ख) बिना उबले हुए अंडे का द्रव गर्मी पाकर बदल जाता है –
(i) ठास
(ii) द्रव
(iii) गैस
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) ठास

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(ग) निम्न में से कौन-सा पदार्थ सामान्य रूप से पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है –
(i) जल
(ii) कपूर
(iii) नौसादर
(iv) दूध
उत्तर:
(i) जल

प्रश्न 2.
कपड़े से कुर्ता बनने के बाद क्या कपड़े को पुनः पहले वाली अवस्था में लाया जाता है ? इस प्रकार के तीन उदाहरण और दें।
उत्तर:
नहीं यह संभव नहीं है।
(i) आटा से रोटी बनाने के बाद पहले वाली अवस्था में नहीं लाया जा
(ii) दूध से दही
(iii) गेहूँ से आटा

प्रश्न 3.
रात्रि में एक सीमेंट की बोरी जो खुले मैदान में रखी हुई थी, वर्षा के कारण भीग जाती है। अगले दिन तेज धूप निकलती है। सीमेंट – कड़ा हो जाता है। क्या सीमेंट को पहले जैसी स्थिति में प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
सीमेंट पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं आ सकती है। क्योंकि सीमेंट में पानी मिलने से अनत्क्रमणीय क्रिया सम्पन्न होती है और वह ठोस बन जाता है। पुनः उस स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता है।

प्रश्न 4.
आगे दी गयी तालिका में कुछ परिवर्तन दिए गये हैं। प्रत्येक परिवर्तन के सामने रिक्त स्थान में लिखिए कि वह परिवर्तन उत्क्रमणीय है अथवा नहीं ?
उत्तर:
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Bihar Board Class 6 Science पदार्थों में परिवर्तन Notes

अध्ययन सामग्री :

पदार्थ की तीन अवस्थाएँ होती हैं। ठोस, द्रव तथा गैस। जैसे –

पत्थर, किताब – ठोस
पानी, तेल – द्रव
हवा, ऑक्सीजन – गैस

ये सभी पदार्थ ताप, दाब तथा स्थान के कारण इनकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं। जैसे-जल को गर्म करने पर वाप्प में बदल जाते हैं और जल को काफी ठंडा करने पर बर्फ बन जाते हैं। इस प्रकार अनेक परिवर्तन के आध र पर यह देखा गया है कि कुछ ऐसे परिवर्तन हैं जिसमें पदार्थ अपने पूर्ववत स्थिति में नहीं लौट पाते हैं। लेकिन कुछ परिवर्तन में पदार्थ अपने पूर्ववत स्थिति में लौट आते हैं। जैसे दूध से दही का बनना तथा पानी से बर्फ का बनना।

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जिस परिवर्तन में वस्तु अपनी पूर्वावस्था में वापस लौट आती है उसे उत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं तथा जिस परिवर्तन में वस्तु अपनी पूर्वावस्था में लौट नहीं पाती है उस अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं। इन दोनों परिवर्तनों के कारण ही हमारे व्यावहारिक जीवन के बहुत से कार्य सम्पादित होते हैं और इस सांसारिक जीवन-चक्र को चलाने में मददगार होते हैं। पहिया के आविष्कार से उस पर लाह की ढाल चढ़ाने से जीवन की रफ्तार को शुरू करने में भी इसी परिवर्तन का योगदान रहा। इतना ही नहीं, विज्ञान के वर्तमान युग में भी पदार्थ के इसी परिवर्तन का योगदान है।

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उत्क्रमणीय परिवर्तन वस्तुओं/पदार्थों में वैसा परिवर्तन जो अपनी पहली अवस्था में वापस आ जाती हो वह उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाता है।
जैसे – पानी से बर्फ।

अनुत्क्रमणीय परिवर्तन वस्तुओं/ पदार्थों में वैसा परिवर्तन जो अपनी पहली अवस्था में वापस नहीं लौटती हो उसे अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहते हैं।
जैसे – कपूर का जलना, दूध से दही बनना।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु

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Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु InText Questions and Answers

अनुच्छेद 3.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो –

  1. कमरे के ताप पर द्रव होती है।
  2. चाकू से आसानी से काटी जा सकती है।
  3. ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।
  4. ऊष्मा की कुचालक होती है।

उत्तर:

  1. पारा (मरकरी)
  2. सोडियम
  3. चाँदी (सिल्वर)
  4. सीसा (लेड)

प्रश्न 2.
आघातवर्ध्यता तथा तन्यता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
आघातवर्ध्यता धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने के गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते तन्यता धातुओं के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं।

अनुच्छेद 3.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
सोडियम को केरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
सोडियम बहुत अभिक्रियाशील धातु है। यह कमरे के सामान्य ताप पर भी वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके जलने लगता है। इसलिए इसे केरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।

प्रश्न 2.
इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए –
1. भाप के साथ आयरन।
2. जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम।
उत्तर:
1. 3Fe(s) + 4H4O(g) → Fe3O4(s) + 4H2 (g)
2. (a) Ca(s) + 2H2O(D) → Ca(OH)2(aq) + H2 (g)
(b) 2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2 (g) + ऊष्मा

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प्रश्न 3.
A, B, C एवं D चार धातुओं के नमूनों को लेकर एक-एक करके निम्न विलयन में डाला गया। इससे प्राप्त परिणाम को निम्न प्रकार से सारणीबद्ध किया गया है –
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इस सारणी का उपयोग कर धातु A, B, C एवं D के संबंध में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है?
  2. धातु B को कॉपर (II) सल्फेट के विलयन में डाला जाए तो क्या होगा?
  3. धातु A, B, C एवं D को अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर:
1. धातु ‘A’ Cu को विस्थापित कर सकती है, धातु ‘B’ Fe को विस्थापित कर सकती है तथा धातु ‘C’ Ag को विस्थापित कर सकती है। Cu, Fe तथा Ag को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –
Fe > Cu > Ag
अतः धातु ‘B’ सर्वाधिक अभिक्रियाशील है।

2. चूँकि धातु ‘B’ कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है, अत: यह कॉपर (II) सल्फ़ेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देगी। अतः कॉपर सल्फेट का गहरा नीला रंग हल्का हो जायेगा।

3. धातु ‘B’ Fe को विस्थापित कर सकती है, धातु ‘A’ Cu को विस्थापित कर सकती है, धातु धातु B Fe ‘C’ Ag को विस्थापित कर सकती है तथा धातु ‘D’ किसी को भी विस्थापित नहीं कर सकती है; अतः इन्की अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम निम्नवत् होगा
B> A>C>D

प्रश्न 4.
जब अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो कौन-सी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
जब अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो हाइड्रोजन गैस निकलती है। आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण निम्नवत् है –
Fe (s) + dil. H2SO4 → FeSO4(aq) + H2 (g)

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प्रश्न 5.
जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से जिंक, आयरन को आयरन (II) सल्फेट विलयन में से विस्थापित कर देता है तथा आयरन (II) सल्फेट विलयन का गहरा हरा रंग हल्का हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिंक आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है।
Zn(s) + FeSO4(aq) → ZnSO4 (aq) + Fe(s)

अनुच्छेद 3.3 पर आधारित

प्रश्न 1.

  1. सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम के लिए इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना लिखिए।
  2. इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के द्वारा Na,o एवं Mgo का निर्माण दर्शाइए।
  3. इन यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं?

उत्तर:
1. (a) सोडियम (Na) = 11
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1
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(b) ऑक्सीजन (O) =8
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 6
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(c) मैग्नीशियम (Mg) = 12
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 2
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2. (a) Na2O का निर्माण
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(b) Mgo का निर्माण
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3. Nano में Na+और O आयन उपस्थित हैं तथा Mgo में Mg+ और O आयन उपस्थित हैं।

प्रश्न 2.
आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर:
आयनिक यौगिकों के गलनांक बहुत उच्च होते हैं; क्योंकि इनके मध्य उपस्थित अन्तराअणुक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं।

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अनुच्छेद 3.4 पर आधारित

प्रश्न 1.
निम्न पदों की परिभाषा दीजिए –

  1. खनिज
  2. अयस्क
  3. गैंग

उत्तर:

  1. खनिज पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं।
  2. अयस्क कुछ स्थानों पर खनिजों में कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है जिसे निकालना लाभकारी होता है। इन खनिजों को अयस्क कहते हैं।
  3. गैंग पृथ्वी से खनित अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं, जिन्हें गैंग कहते हैं।

प्रश्न 2.
दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
उत्तर:
सोना और चाँदी धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए अपचयन प्रक्रम का उपयोग किया जाता है।

अनुच्छेद 3.5 पर आधारित

प्रश्न 1.
जिंक, मैग्नीशियम एवं कॉपर के धात्विक ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गर्म किया गया जिंक मैग्नीशियम कॉपर जिंक ऑक्साइड मैग्नीशियम ऑक्साइड धातुकॉपर ऑक्साइड किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?
उत्तर:
विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी जब –

  1. जिंक ऑक्साइड मैग्नीशियम से अभिक्रिया करेगा। चूँकि मैग्नीशियम जिंक से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह जिंक को जिंक ऑक्साइड से विस्थापित करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनायेगा।
  2. कॉपर ऑक्साइड जिंक से अभिक्रिया करेगा। चूँकि जिंक कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह कॉपर को कॉपर ऑक्साइड से विस्थापित करके जिंक ऑक्साइड बनायेगा।
  3. कॉपर ऑक्साइड मैग्नीशियम से अभिक्रिया करेगा। चूँकि मैग्नीशियम कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह कॉपर को कॉपर ऑक्साइड से विस्थापित करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनायेगा।

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प्रश्न 2.
कौन-सी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?
उत्तर:
वे धातुएँ जो सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित हैं; जैसे – सोना, चाँदी आदि, आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं।

प्रश्न 3.
मिश्रा क्या होते हैं? (2018)
उत्तर:
दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्रातु कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
पीतल, ताँबा एवं जस्ते की मिश्रातु है।

Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में कौन-सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?
(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु
(b) MgCl2 विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु
(c) FeSO4 विलयन एवं सिल्वर धातु
(d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु
उत्तर:
(d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु

प्रश्न 2.
लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त
(a) ग्रीस लगाकर
(b) पेंट लगाकर
(c) जिंक की परत चढ़ाकर
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) जिंक की परत चढ़ाकर

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प्रश्न 3.
कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है। यह तत्त्व क्या हो सकता है?
(a) कैल्सियम
(b) कार्बन
(c) सिलिकॉन
(d) लोहा
उत्तर:
(a) कैल्सियम

प्रश्न 4.
खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता है क्योंकि
(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है
(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है
(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है
उत्तर:
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है

प्रश्न 5.
आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है
(a) इनका उपयोग कर धातुओं एवं अधातुओं के नमूनों के बीच आप विभेद कैसे कर सकते हैं?
(b) धातुओं एवं अधातुओं में विभेदन के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिताओं का आकलन कीजिए।
उत्तर:
(a) हथौड़ा धातुओं को एक पतली चादर में परिवर्तित कर सकता है जबकि अधातुओं के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। इस प्रकार यह धातुओं तथा अधातुओं के बीच विभेद करने में हमारी सहायता कर सकता है।

बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच की सहायता से हम एक परिपथ तैयार कर सकते हैं। अब परिपथ के मध्य में धातुओं तथा अधातुओं के नमूनों को बारी-बारी से लगाकर हम धातुओं तथा अधातुओं के बीच विभेद कर सकते हैं। यदि नमूना धातु होगा तो परिपथ में स्थित बल्ब जलने लगेगा और यदि नमूना अधातु है (ग्रेफाइट को छोड़कर) तो बल्ब नहीं जलेगा।

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(b) उपर्युक्त परीक्षण धातुओं तथा अधातुओं के लक्षणों को बताते हैं इसलिए ये उपयोगी हैं।

प्रश्न 6.
उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय के साथ-साथ क्षारीय लक्षण भी प्रदर्शित करते हैं अर्थात् अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उदासीन ऑक्साइड कहलाते हैं। उदाहरणार्थः ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO)।

प्रश्न 7.
दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगी तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।
उत्तर:
जिंक तथा लोहा हाइड्रोजन को तनु अम्ल में से विस्थापित कर सकते हैं जबकि कॉपर तथा सिल्वर ऐसा नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 8.
किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?
उत्तर:
किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में हम अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की एक पतली छड़ को कैथोड बनाएँगे। धातु लवण के विलयन को हम विद्युत अपघट्य बनाएँगे।

प्रश्न 9.
प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर उसे गर्म किया। चित्र के अनुसार एक परखनली को उलटा करके उसने उत्सर्जित गैस को एकत्र किया – परखनली
(a) गैस की क्रिया क्या होगी

  • सूखे लिटमस पत्र पर?
  • आर्द्र लिटमस पत्र पर?

(b) ऊपर की अभिक्रियाओं के लिए बर्नर संतुलित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
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उत्तर:
(a) जब सल्फर को वायु में जलाया जाता है तो यह वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है।

  • सूखे लिटमस पत्र पर गैस की क्रिया सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस की प्रकृति अम्लीय होती है परन्तु यह सूखे लिटमस पत्र से अभिक्रिया नहीं करेगी और न ही उसका रंग परिवर्तित करेगी क्योंकि अम्लीय लक्षण केवल जल की उपस्थिति में परिलक्षित होता है। आर्द्र लिटमस पत्र पर गैस की क्रिया सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस की प्रकृति अम्लीय होती है।
  • आर्द्र लिटमस पत्र से क्रिया करके यह सल्फ्यूरस अम्ल बनाएगी जिससे नीला लिटमस पत्र लाल हो जाता है।

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प्रश्न 10.
लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइए।
उत्तर:
लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके निम्नवत् हैं –

  1. लोहे की सतह पर पेंट या ग्रीज़ लगाकर।
  2. यशदलेपन (लोहे की वस्तुओं पर जस्ते की परत चढ़ाकर) करके।

प्रश्न 11.
ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?
उत्तर:
ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं; परन्तु क्षारकीय ऑक्साइड कभी नहीं बनाती हैं।

प्रश्न 12.
कारण बताइए –
(a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अंदर संगृहीत किया जाता है।
(c) ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।
(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
उत्तर:
(a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी सबसे कम अभिक्रियाशील धातुएँ हैं इसलिए ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाती हैं। ये अपनी चमक बहुत लम्बे समय तक बनाए रखती हैं। यही कारण है कि इनका प्रयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।

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(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम बहुत अभिक्रियाशील हैं। ये कमरे के सामान्य ताप पर भी वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अपने ऑक्साइड बनाते हैं। यह अभिक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि आग भी लग सकती है। इसलिए किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए इन्हें केरोसिन में संगृहित किया जाता है।

(c) ऐलुमिनियम ऊष्मा का बहुत अच्छा सुचालक है तथा यह प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली धातु है। यह ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अपनी सतह पर ऑक्साइड की एक परत बना लेता है जो इसे और अधिक संक्षारित होने से बचाती है। यही कारण है कि अभिक्रियाशील होते हुए भी ऐलुमिनियम का प्रयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने में किया जाता है।

(d) कार्बोनेट अथवा सल्फाइड अयस्कों से धातु प्राप्त करना बहुत कठिन है जबकि धातु ऑक्साइडों से धातु प्राप्त करना बहुत सरल है। यही कारण है कि कार्बोनेट अथवा सल्फाइड अयस्कों को पहले धातु ऑक्साइडों में परिवर्तित किया जाता है।

प्रश्न 13.
आपने ताँबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ करने में क्यों प्रभावी हैं?
उत्तर:
ताँबे के मलीन बर्तनों पर धातु कार्बोनेट की एक परत जमी होती है जिसकी प्रकृति क्षारकीय होती है। नींबू या इमली के रस की प्रकृति अम्लीय होती है। जब हम इस रस से मलीन बर्तन को साफ़ करते हैं तो यह धातु कार्बोनेट की परत को उदासीन कर देता है यही कारण है कि हम ताँबे के मलीन बर्तनों को नींबू या इमली के रस से साफ करते हैं।

प्रश्न 14.
रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं और अधातुओं में विभेद
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प्रश्न 15.
एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है। उसने पुराने एवं मलीन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढोंग रचाया। कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है।

कंगन नए की तरह चमकने लगते हैं लेकिन उनका वजन अत्यंत कम हो जाता है। वह महिला बहुत दुखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है। एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते हैं?
उत्तर:
उस व्यक्ति ने जिस विलयन का उपयोग किया उसका नाम ऐक्वा रेजिया है। ऐक्वा रेजिया सांद्र नाइट्रिक अम्ल तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का 1:3 अनुपात में बना मिश्रण है। सोना केवल ऐक्वा रेजिया में ही घुलनशील है।

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प्रश्न 16.
गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परंतु इस्पात (लोहे की मिश्रातु) का नहीं। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परन्तु इस्पात (लोहे की मिश्रातु) का नहीं, क्योंकि ताँबा गर्म जल अथवा भाप से अभिक्रिया नहीं करता है जबकि इस्पात गर्म जल अथवा भाप से अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड बनाता है।
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Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हाइड्रोजन है –
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(b) अधातु

प्रश्न 2.
ऐन्टिमनी है – (2014, 16)
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(c) उपधातु

प्रश्न 3.
आघातवर्धनीयता प्रदर्शित करता है – (2018)
(a) सल्फर
(b) आयोडीन
(c) फॉस्फोरस
(d) ताँबा
उत्तर:
(d) ताँबा

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प्रश्न 4.
धातु जो सरलता से ऑक्सीकृत हो जाती है, वह है (2011)
(a) Cu
(b) Ag
(c) Al
(d) Pt
उत्तर:
(c) Al

प्रश्न 5.
धातुओं के ऑक्साइड होते हैं –
(a) अम्लीय
(b) क्षारीय
(c) उभयधर्मी
(d) उदासीन
उत्तर:
(b) क्षारीय

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु जल के साथ सामान्य ताप पर ही अभिक्रिया कर लेती है अर्थात् हाइड्रोजन गैस निकालती है? (2011, 12, 13)
या कौन-सी धातु ठंडे जल के साथ अभिक्रिया कर लेती है? (2018)
(a) कॉपर
(b) आयरन
(c) मैग्नीशियम
(d) सोडियम/कैल्सियम
उत्तर:
(d) सोडियम/कैल्सियम

प्रश्न 7.
निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है? (2014, 15)
(a) Fe
(b) Zn
(c) Cu
(d) Mg
उत्तर:
(c) Cu

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु अम्ल में से हाइड्रोजन विस्थापित करती है? (2011, 13, 17)
(a) Mg
(b) Pt
(c) Cu
(d) Hg
उत्तर:
(a) Mg

प्रश्न 9.
जस्ता धातु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करके कौन-सी गैस निष्कासित करती है? (2016)
(a) ओजोन
(b) ऑक्सीजन
(c) हाइड्रोजन
(d) नाइट्रोजन
उत्तर:
(c) हाइड्रोजन

प्रश्न 10.
तत्त्व A, B, C, D के मानक अपचयन विभव क्रमशः +0.60, -0.35, -1.50, – 2.71 वोल्ट हैं। सबसे अधिक क्रियाशील तत्त्व होगा- (2017)
(a) A
(b) B
(c) C
(d) D
उत्तर:
(d) D

प्रश्न 11.
ताँबे का अयस्क है – (2011)
(a) बॉक्साइट
(b) मैलेकाइट
(c) कार्नेलाइट
(d) सीडेराइट
उत्तर:
(b) मैलेकाइट

प्रश्न 12.
कॉपर पायराइट का सूत्र है –
(a) CuFeS2
(b) Cu2S
(c) CuCO3 Cu(OH)3
(d) Cu2O
उत्तर:
(a) CuFeS2

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प्रश्न 13.
फफोलेदार कॉपर है – (2009, 14, 16)
(a) शुद्ध कॉपर
(b) कॉपर का अयस्क
(c) कॉपर की मिश्र-धातु
(d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं
उत्तर:
(d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं

प्रश्न 14.
मैट में मुख्यतः होता है – (2015, 17)
(a) FeS
(b) Cu2S
(c) Cu2S तथा FeS
(d) Cu2S तथा Fe2S3
उत्तर:
(c) Cu2S तथा FeS

प्रश्न 15.
चैल्कोसाइट अयस्क है – (2011)
(a) आयोडीन का
(b) आयरन का
(c) सोडियम का
(d) कॉपर का
उत्तर:
(d) कॉपर का

प्रश्न 16.
क्लोराइड अयस्क का उदाहरण है – (2013)
(a) बॉक्साइट
(b) मैलेकाइट
(c) सीडेराइट
(d) हॉर्न सिल्वर
उत्तर:
(d) हॉर्न सिल्वर

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प्रश्न 17.
ताम्र ग्लान्स का रासायनिक सूत्र है। (2016)
(a) Cu2S
(b) Cu2O
(c) CuFeS2
(d) CuCO3
उत्तर:
(a) Cu2S

प्रश्न 18.
कॉपर पायराइट को वायु में गर्म करके सल्फर को दूर करने की क्रिया को कहते हैं – (2012)
(a) निस्तापन
(b) भर्जन
(c) प्रगलन
(d) बेसेमरीकरण
उत्तर:
(b) भर्जन

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से कौन-सा अयस्क ऐलमिनियम का नहीं है?
(a) बॉक्साइट
(b) डायस्पोर
(c) कोरण्डम
(d) ऐजुराइट
उत्तर:
(d) ऐजुराइट

प्रश्न 20.
क्रायोलाइट अयस्क है –
(a) Fe का
(b) Al का
(c) Cu का
(d) Ag का
उत्तर:
(b) Al का

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प्रश्न 21.
ऐलुमिनियम में विद्युत-अपघटन में क्रायोलाइट मिलाया जाता है –
(a) ऐलुमिना का गलनांक घटाने के लिए
(b) विद्युत-चालकता बढ़ाने के लिए
(c) ऐलुमिना की अशुद्धियाँ पृथक् करने के लिए
(d) ऐनोड प्रभाव कम करने के लिए
उत्तर:
(a) ऐलुमिना का गलनांक घटाने के लिए

प्रश्न 22.
परावर्तनी भट्ठी का उपयोग होता है – (2018)
(a) प्रगलन में
(b) निस्तापन में
(c) बेसेमरीकरण में
(d) अतिशीतलन में
उत्तर:
(b) निस्तापन में

प्रश्न 23.
मुद्रा मिश्रधातु है – (2016)
(a) Cu (95%), Sn (4%), P (1%)
(b) Cu (80%), Zn (20%)
(c) Cu (88%), Sn (12%)
(d) Cu (90%), Zn (2%), Sn (8%)
उत्तर:
(a) Cu (95), Sn (4%), P (1%)

प्रश्न 24. पीतल है – (2017)
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(d) मिश्रधातु

प्रश्न 25.
पीतल में होते हैं –
(a) Cu a sn
(b) Cu a Ni
(c) Cu a zn
(d) Mg a Al
उत्तर:
(c) Cu व Zn

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प्रश्न 26.
जर्मन सिल्वर में कौन-सी धातु नहीं होती है? (2014)
(a) Cu
(b) Zn
(c) Ag
(d) Ni
उत्तर:
(c) Ag

प्रश्न 27.
काँसे की प्रतिमाएँ बनी होती हैं – (2012)
(a) कॉपर-जिंक की
(b) कॉपर-टिन की
(c) कॉपर-निकिल की
(d) कॉपर-आयरन की
उत्तर:
(b) कॉपर-टिन की

प्रश्न 28.
अमलगम होते हैं – (2013)
(a) उपधातु
(b) मिश्र धातु
(c) यौगिक
(d) विषमांगी मिश्रण
उत्तर:
(d) विषमांगी मिश्रण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उप-धातु किसे कहते हैं। किन्हीं दो उपधातुओं के नाम लिखिए। या जिन तत्त्वों में धातु तथा अधातु दोनों के गुण पाये जाते हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर:
वे तत्त्व जिनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाये जाते हैं, उपधातु कहलाते हैं; जैसेआर्सेनिक, एन्टीमनी।

प्रश्न 2.
चार धातुएँ सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती हैं। इनमें से किसी एक का नाम लिखिए।
उत्तर:
मरकरी (पारा)।

प्रश्न 3.
किन्हीं दो अधातुओं के नाम लिखिए जिनमें चमक पायी जाती है।
उत्तर:
आयोडीन, ग्रेफाइट।

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प्रश्न 4.
लोहे पर निम्न में से किस धातु की परत चढ़ाई जा सकती है और क्यों? (2012) Mg, Cu, Ag
उत्तर:
लोहे पर Cu व Ag की परत चढ़ाई जा सकती है क्योंकि लोहा रासायनिक सक्रियता श्रेणी में इनसे ऊपर है। अत: यह इनके विलयनों से इन्हें विस्थापित कर देता है।

प्रश्न 5.
कॉपर के दो प्रमुख अयस्कों के नाम व सूत्र लिखिए। (2009, 11, 13, 15, 17, 18) या कॉपर के दो सल्फाइड अयस्कों के नाम एवं सूत्र लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
1. सल्फाइड अयस्क कॉपर ग्लान्स (Cu2S) व कॉपर पायराइट (Cures.)
2. ऑक्साइड अयस्क क्यूप्राइट (Cu2O)

प्रश्न 6.
कॉपर पाइराइट का सान्द्रण किस विधि द्वारा किया जाता है? (2017)
उत्तर:
फेन प्लवन विधि द्वारा।

प्रश्न 7.
नम वायु के साथ कॉपर की क्या अभिक्रिया होती है? रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय कार्बन डाइ-ऑक्साइड, नमी व ऑक्सीजन से क्रिया करके यह हरे रंग का भास्मिक कॉपर कार्बोनेट [CuCO3.Cu(OH)2] बनाता है।
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प्रश्न 8.
कॉपर मैट क्या है? (2018)
उत्तर:
कॉपर धातु के निष्कर्षण प्रक्रम में क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड का गलित मिश्रण प्राप्त होता है, जिसे मैट कहते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न को पूर्ण कीजिए –
2AgNO3 + Cu → ………. + ………..
उत्तर:
2AgNO3 + Cu → Cu(NO3)2 + 2Ag

प्रश्न 10.
बॉक्साइट तथा मैलेकाइट का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
बॉक्साइट Al2O3. 2H2O
मैलेकाइट CuCO3.Cu(OH)2

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प्रश्न 11.
ऐलुमिनियम के दो अयस्कों के नाम व सूत्र दीजिए।
उत्तर:
1. बॉक्साइट Al2O2.2H2O
2. क्रायोलाइट Na3 AIF6

प्रश्न 12.
गन मेटल की संरचना तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर:
गन मेटल में Cu – 88%, Sn – 10% तथा Zn – 2% होता है। इसका उपयोग बन्दूक, हथियार व मशीनों के पुर्जे बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 13.
फॉस्फर ब्रांज के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
रेडियो के एरियल तथा पुर्जे बनाने में।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धातु तथा अधातु तत्त्वों के किन्हीं चार सामान्य गुणों का उल्लेख कीजिए। (2012)
उत्तर:
धातुओं के भौतिक गुण –

  1. शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है। धातु के इस गुण-धर्म को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं।
  2. धातुएँ सामान्यत: कठोर होती हैं। प्रत्येक धातु की कठोरता अलग-अलग होती है।
  3. कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है। इस गुण-धर्म को आघातवर्धनीयता = कहते हैं। सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं।
  4. धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है। एक ग्राम सोने से 2 किमी लम्बा तार खींचा जा सकता है।

अधातुओं के भौतिक गुण –

  1. अधिकांश अधातुएँ साधारण ताप पर गैस अवस्था में होती हैं। ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो साधारण ताप पर द्रव होती है।
  2. ठोस अधातुएँ आघातवर्ध्य व तन्य नहीं होती हैं ये भंगुर होती हैं। उदाहरणार्थ-सल्फर और फॉस्फोरस को हथौड़े से पीटने पर ये टूट जाती हैं।
  3. अधातुओं में चमक नहीं पायी जाती है।
  4. अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। ग्रेफाइट एक अपवाद है जोकि विद्युत का सुचालक है।

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प्रश्न 2.
रासायनिक दृष्टिकोण से धातु तथा अधातु में मुख्य अन्तर क्या हैं? हाइड्रोजन में धनायन बनाने की प्रवृत्ति होती है तथापि यह अधातु है। क्यों स्पष्ट कीजिए। (2014)
उत्तर:
सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में धातु अपने परमाणुओं से एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करती है जबकि अधातु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं। हाइड्रोजन में धनायन बनाने की प्रवृत्ति होने के साथ-साथ ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति भी होती है। इसके अतिरिक्त इसमें धातुओं के अन्य सामान्य गुण भी नहीं पाये जाते हैं। यही कारण है कि यह धातु नहीं है बल्कि अधातु है।

प्रश्न 3.
विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं द्वारा अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता किस प्रकार ज्ञात करते हैं। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (2013)
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी में जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं वे अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं तथा श्रेणी में धातु का स्थान जितना ऊपर होता है उसकी अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता भी उतनी अधिक होती है। उदाहरणार्थ : विद्युत रासायनिक श्रेणी में सोडियम व कैल्सियम हाइड्रोजन से ऊपर हैं अत: ये दोनों ही अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करते हैं। परन्तु सोडियम अधिक शीघ्रता से हाइड्रोजन विस्थापित करती है।

प्रश्न 4.
विद्यत रासायनिक श्रेणी के आधार पर व्याख्या कीजिए कि क्यों कॉपर तन सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है? (2017, 18)
उत्तर:
हम जानते हैं कि जो धातु सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं, वे ही अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाती हैं। वैद्युत रासायनिक श्रेणी में कॉपर हाइड्रोजन से नीचे स्थित है। अत: कॉपर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 5.
कॉपर की छड़ को AgNO3 विलयन में डालने पर कुछ समय बाद विलयन का रंग नीला हो जाता है। विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर समझाइए। (2012, 17) क्या होता है जब कॉपर की छड़ को सिल्वर नाइट्रेट विलयन में डालते हैं? (2014, 17) या
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी का प्रत्येक तत्त्व अपने से नीचे स्थित तत्त्वों को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है। श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है, अत: यह AgNO से निम्नलिखित क्रिया देगा Cu (s) + 2Ag(NO3) → Cu2+ + 2NO3 + 2Ag↓
इस प्रकार विलयन में क्यूप्रिक आयन विद्यमान होने से विलयन का रंग नीला हो जाएगा।

प्रश्न 6.
जस्ता, कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर सकता है जबकि सोना ऐसा नहीं करता है। कारण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी में जस्ता, कॉपर से ऊपर स्थित है जबकि सोना, कॉपर से नीचे स्थित है। अतः इन धातुओं की सक्रियता का घटता हुआ क्रम Zn > Cu > Au है। हम जानते हैं कि अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।

Zn (जस्ता), कॉपर से अधिक क्रियाशील है। अत: Zn, कॉपर सल्फेट के विलयन में से कॉपर को विस्थापित कर देता है। परन्तु Au (सोना), Cu से कम क्रियाशील धातु है। अतः सोना, कॉपर को कॉपर सल्फेट विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता है।
Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
Au + CuSO4 → कोई क्रिया नहीं

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प्रश्न 7.
कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया सम्भव हैं या नहीं – (2011, 15)
Hg + H2SO4 → HgSO4 + H2
Cu + 2AgNO3 → Cu(NO3)2 + 2Ag
उत्तर:
अभिक्रिया Hg + H2SO4 → HgSO4 + H2 सम्भव नहीं है। क्योंकि विद्युत रासायनिक श्रेणी में Hg का स्थान H2 से नीचे है। अतः यह हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करेगी। अभिक्रिया Cu + 2AgNO3 → Cu (NO3)2 + 2Ag सम्भव है; क्योंकि वैद्युत रासायनिक श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है।

प्रश्न 8.
अयस्क व खनिज को परिभाषित कीजिए।अयस्क तथा खनिज में क्या अन्तर है? (2013)
या अयस्क व खनिज को स्पष्ट कीजिए। (2016)
उत्तर:
खनिज Minerals प्रकृति में पृथ्वी के अन्दर धातुएँ तथा उनके यौगिक जिस रूप में पाये जाते हैं, उनको खनिज कहते हैं। अयस्क Ores जिस खनिज से किसी धातु को प्रचुर मात्रा में कम व्यय पर आसानी से प्राप्त किया जा सके, उस खनिज को उस विशिष्ट धातु का अयस्क कहते हैं। खनिज तथा अयस्क में अन्तर सभी अयस्क खनिज होते हैं, परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।

प्रश्न 9.
निस्तापन क्रिया को उदाहरण देते हुए समझाइए। (2012, 16, 17)
उत्तर:
सान्द्रित अयस्क को उसके गलनांक के नीचे ताप पर वायु की अनुपस्थिति या कम मात्रा में गर्म करके उसमें से नमी, हाइड्रेशन जल तथा अन्य वाष्पशील पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं। इस प्रक्रम में अयस्क को बिल्कुल भी पिघलने नहीं दिया जाता है। धातु कार्बोनेटों तथा हाइड्रॉक्साइडों को गर्म करके कार्बन डाइ-ऑक्साइड तथा जल निष्कासित करके धातुई ऑक्साइडों को प्राप्त करना भी निस्तापन ही कहलाता है। निस्तापन प्रक्रम के फलस्वरूप अयस्क शुष्क तथा छिद्रमय (porous) हो जाता है।
उदाहरणार्थ:
बॉक्साइट (Al2O3 . 2H2O) अयस्क का निस्तापन करने पर उसमें उपस्थित हाइड्रोजन जल वाष्पित होकर बाहर निकल जाता है।
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प्रश्न 10.
भर्जन क्या है? यह क्रिया किन सान्द्रित अयस्कों के लिए प्रयोग में लायी जाती है? भर्जन को उदाहरण देते हुए समझाइए। (2012, 16)
या भर्जन क्रिया में प्रयुक्त होने वाली भट्ठी का नामांकित चित्र बनाइए तथा समीकरण दीजिए। (2017, 18)
या भर्जन क्या है ? कॉपर पायराइट के भर्जन में होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। (2014, 15, 17)
उत्तर:
सान्द्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ मिला करके उसके गलनांक के नीचे (बिना पिघलाये) वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में गर्म करने की क्रिया को भर्जन कहा जाता है। यह क्रिया मुख्यतः सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त की जाती है। भर्जन तथा निस्तापन में केवल इतना ही अन्तर होता है कि भर्जन निस्तापन की अपेक्षा कुछ अधिक ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में पूर्ण होती है।

भर्जन क्रिया के द्वारा अयस्क आंशिक या पूर्ण रूप से ऑक्सीकृत हो जाता है तथा अयस्क में उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक, ऐण्टीमनी आदि अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर वाष्पशील ऑक्साइडों के रूप में पृथक् हो जाती हैं। भर्जन की क्रिया को परावर्तनी भट्ठी में कराते हैं। [संकेत परावर्तनी भट्ठी का चित्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 के उत्तर में देखें।]
उदाहरणार्थ:
सान्द्रित कॉपर पायराइट (CuFeS2) को कम ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में परावर्तनी भट्ठी में गर्म करने पर निम्नलिखित अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं
2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2FeS + SO2
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O+ 2SO2
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2

अयस्क में उपस्थित S तथा As की अशुद्धियाँ वाष्पशील ऑक्साइडों में परिवर्तित हो जाती हैं।
S + O2 → SO2
4As + 3O2 → 2As2O3

प्रश्न 11.
निस्तापन तथा भर्जन में क्या अन्तर है? (2016)
उत्तर:
निस्तापन में अयस्क को निम्न ताप पर वायु की अनुपस्थिति (या कम मात्रा) में गर्म किया जाता है जबकि भर्जन में अयस्क को उच्च ताप पर (बिना पिघलाये) वायु की नियन्त्रित मात्रा में गर्म किया जाता है।

प्रश्न 12.
गालक किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए। किसी एक अम्लीय गालक की क्रिया को केवल रासायनिक समीकरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2011, 12, 15)
उत्तर:
वे पदार्थ जो अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों के साथ उच्च ताप पर क्रिया करके इन्हें सरलता से गलाकर अलग होने वाले पदार्थों के रूप में दूर कर देते हैं, गालक कहलाते हैं। सरलता से गलकर अलग होने वाले पदार्थों को धातुमल (slag) कहते हैं।
गालक दो प्रकार के होते हैं –
(1) अम्लीय गालक तथा
(2) क्षारीय गालक।
अम्लीय गालक की रासायनिक क्रिया सिलिकन डाइ-ऑक्साइड (SiO2) अम्लीय गालक है।
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प्रश्न 13.
धातुमल किसे कहते हैं? समझाइए। (2011, 18)
उत्तर:
अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों की गालक से क्रिया के फलस्वरूप बने गलनीय पदार्थ को धातुमल कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
जब क्षारीय गालक MgCO2, अम्लीय अशुद्धि SiO2 के साथ क्रिया करता है, तो मैग्नीशियम सिलिकेट धातुमल के रूप में पृथक् हो जाता है।
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प्रश्न 14.
प्रगलन पर टिप्पणी लिखिए। या प्रगलन को उदाहरण सहित समझाइए। (2012)
उत्तर:
निस्तापन तथा भर्जन क्रिया के उपरान्त प्राप्त अयस्क को कोक तथा उचित गालक (flux) के साथ मिलाकर मिश्रण को उच्च ताप तक गर्म करके गलाने (पिघलाने) की क्रिया को प्रगलन कहते हैं। प्रगलन क्रिया को वात्या भट्ठी में सम्पन्न कराते हैं। इस क्रिया में कोक प्रायः अपचायक का कार्य करता है तथा अयस्क को गलित धातु में परिवर्तित कर देता है।
उदाहरणार्थ:
हेमेटाइट (Fe2O3) से आयरन की प्राप्ति के लिए सान्द्रित, निस्तापित एवं भर्जित अयस्क में कोक तथा चूने का पत्थर (गालक) मिलाकर वात्या भट्ठी में गर्म करते हैं। इस क्रिया में Fe2O3, Fe में परिवर्तित हो जाता है –
Fe2O2 + 3C → 2Fe + 3CO↑
Fe2O3+ 3CO → 2Fe + 3CO2

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प्रश्न 15.
वात्या भट्ठी का नामांकित चित्र बनाइए। (2011)
उत्तर:
वात्या भट्ठी (Blast Furnace)
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प्रश्न 16.
फफोलेदार ताँबे के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि बताइए। या फफोलेदार कॉपर से शुद्ध कॉपर धातु प्राप्त करने की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011, 12, 15)
या फफोलेदार कॉपर से शुद्ध कॉपर धातु प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इस विधि में अशुद्ध (crude) ताँबे की प्लेटें ऐनोड का कार्य करती हैं और कैथोड शुद्ध कॉपर की प्लेटें होती हैं (चित्र)। विद्युत-अपघट्य कॉपर सल्फेट का अम्लीय विलयन होता है। विद्युत-धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध कॉपर कैथोड पर जमा हो जाता है। ऐनोड के नीचे कुछ अशुद्धियाँ, जिनमें सिल्वर, गोल्ड आदि धातुएँ होती हैं, जमा हो जाती हैं। इन्हें ऐनोड मड (anodic mud) कहते हैं। शेष अशुद्धियाँ घोल में सल्फेट के रूप में आ जाती हैं; जैसे निकिल, आयरन, जिंक आदि। विद्युत-अपघटन में 1.3 वोल्ट का विभवान्तर प्रयोग किया जाता है। इस विधि के द्वारा शोधित कॉपर 99.96-99.99% तक शुद्ध होता है।
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प्रश्न 17.
कॉपर पर सान्द्र H2SO4 तथा सान्द्र HNO3 की अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। (2011, 14, 15)
या क्या होता है जब कॉपर को सान्द्र गन्धक (सल्फ्यूरिक अम्ल) के साथ गर्म करते हैं? (2016, 17)
उत्तर:

  1. सान्द्र H2SO4 से क्रिया कॉपर सल्फेट व सल्फर डाइ-ऑक्साइड गैस बनती है।
  2. सान्द्र HNO3 से क्रिया नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड व कॉपर नाइट्रेट बनते हैं।

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प्रश्न 18.
बेसेमर परिवर्तक का नामांकित चित्र बनाइए। (2015)
उत्तर:
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प्रश्न 19.
बॉक्साइट से ऐलुमिना प्राप्त करने की सरपेक विधि का वर्णन समीकरण देते हुए कीजिए। (2017)
उत्तर:
जब बॉक्साइट में सिलिका की अशुद्धि अधिक होती है, तो उसका शोधन सरपेक विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में बॉक्साइट में कार्बन मिलाकर, मिश्रण को नाइट्रोजन की धारा में 1800°C पर गर्म किया जाता है, जिससे ऐलुमिनियम नाइट्राइड बन जाता है और बॉक्साइट में उपस्थित सिलिका का वाष्पशील सिलिकन में अपचयन हो जाता है।
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ऐलुमिनियम नाइट्राइड को जल के साथ गर्म किया जाता है, जिससे वह ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड और अमोनिया में अपघटित हो जाता है।
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ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड को अलग करके तेज गर्म करते हैं, जिससे वह ऐलुमिना में अपघटित हो जाता है और इस प्रकार शुद्ध निर्जल ऐलुमिना प्राप्त होता है।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धातुओं की सक्रियता श्रेणी क्या है ? हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय एवं दूसरा कम सक्रिय ऐसे एक-एक धातु का नाम लिखिए। (2012, 16)
या विद्युत रासायनिक श्रेणी क्या है ? इसके दो प्रमुख अनुप्रयोग दीजिए। (2011)
उत्तर:
धातुओं की सक्रियता श्रेणी (विद्युत रासायनिक श्रेणी) वह सूची है जिसमें धातुओं को क्रियाशीलता के अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। विस्थापन के प्रयोगों के बाद निम्न श्रेणी को विकसित किया गया है जिसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं।
सारणी:
सक्रियता श्रेणी-धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ पोटैशियम –
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अनुप्रयोग:
1. विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं की अभिक्रियाशीलता की तुलना की जा सकती है।
2. विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से विभिन्न धातुओं द्वारा अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाने की क्षमता की जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
ताँबे के (कॉपर पायराइट के अतिरिक्त) दो मुख्य अयस्कों के नाम व सूत्र लिखिए। कॉपर पायराइट से ताँबे के निष्कर्षण की विधि को मुख्य पदों व समीकरणों सहित समझाइए। (2014)
या कॉपर के निष्कर्षण में भर्जन तथा प्रगलन में होने वाली अभिक्रियाओं को समझाइए। आवश्यक समीकरण भी दीजिए। (2013)
या परावर्तनी भट्ठी का सचित्र वर्णन कीजिए। कॉपर के निष्कर्षण में इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का समीकरण लिखिए। कॉपर के धातुकर्म में प्रयुक्त भर्जन क्रिया को सचित्र या समझाइए।
या कॉपर के दो प्रमुख अयस्कों के नाम लिखिए। बेसेमरीकरण को सचित्र समझाइए एवं अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण दीजिए। (2011, 15)
या कॉपर पायराइट से फफोलेदार ताँबा प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। द्रवित मैट से शुद्ध ताँबा कैसे प्राप्त करेंगे? (2011)
या ताँबे के मुख्य अयस्क का नाम तथा सूत्र लिखिए। इसके सान्द्रण की विधि का वर्णन कीजिए। (2009)
या बेसेमरीकरण में प्रयुक्त रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2014)
या बेसेमरीकरण पर टिप्पणी लिखिए। (2016)
या फेन-प्लवन विधि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)
उत्तर:
ताँबे का मुख्य अयस्क कॉपर पायराइट (CuFeS2) है। कॉपर पायराइट के अतिरिक्त कॉपर के दो प्रमुख अयस्क कॉपर ग्लान्स (Cu2S) तथा क्यूप्राइट (Cu2O) हैं।

कॉपर का निष्कर्षण Extraction of Copper कॉपर का निष्कर्षण मुख्यत: सल्फाइड अयस्कों से किया जाता है। कॉपर पायराइट (CuFes,) कॉपर का मुख्य सल्फाइड अयस्क है। कॉपर पायराइट से कॉपर प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम अयस्क के बड़े-बड़े टुकड़ों को हथौड़ों से पीटकर, दलित्र द्वारा या स्टैम्प मिल के प्रयोग से एक महीन चूर्ण के रूप में प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद निम्नलिखित प्रक्रम किये जाते हैं

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1. अयस्क का सान्द्रण Concentration of the ore सल्फाइड अयस्क का सान्द्रण फेन वाय प्लवन (froth floatation) विधि द्वारा किया जाता है। बारीक पिसे सल्फाइड अयस्क को जल से भरे हुए एक अयस्क टैंक में डाल दिया जाता है और उसमें थोड़ा चीड़ का जल 100086000 तेल और पोटैशियम एथिल जैन्थेट मिलाकर वायु की का तेज धारा प्रवाहित की जाती है। सल्फाइड अयस्क के। कण तेल से भीगकर द्रव की सतह पर फेन (झाग) में अशुद्धियाँ एकत्रित हो जाते हैं और अशुद्धियाँ जल से भीगकर टैंक के पेंदे में बैठ जाती हैं। सान्द्रित अयस्क को अलग कर लेते हैं।
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2. सान्द्रित अयस्क का भर्जन Roasting of the concentrated ore कॉपर पायराइट के सान्द्रित अयस्क को परावर्तनी भट्ठी (reverberatory furnace) में रख कर कम ताप तथा नियन्त्रित वायु (controlled air) की उपस्थिति में इतना गर्म किया जाता है कि वह बिना पिघले ऑक्सीकृत हो जाये। इस प्रकार सान्द्रित अयस्क का

भर्जन हो जाता है। अयस्क में उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक तथा ऐण्टिमनी के अपद्रव्य ऑक्सीकृत होकर अपने ऑक्साइड बनाते हैं जो वाष्प के रूप में अलग हो जाते हैं।
S + O2 → SO2
4As + 3O2 → 2AS2O3
कॉपर पायराइट ऑक्सीकृत होकर कॉपर सल्फाइड (Cu2S), फेरस सल्फाइड (FeS) तथा सल्फर डाइ-ऑक्साइड (SO2) बनाता है।
2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2Fes + SO2
कॉपर सल्फाइड तथा फेरस सल्फाइड का कुछ भाग कॉपर ऑक्साइड (Cu2O) तथा फेरस ऑक्साइड (FeO) में बदल जाता है।
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2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O+ 2SO2
2FeS + 3O2→ 2FeO+ 2SO2

3. भर्जित अयस्क का प्रगलन (Smelting of the roasted ore) भर्जित अयस्क को रेत तथा कोक में मिलाकर ऊँचे ताप पर वात्या भट्ठी (blast furnace) में पिघलाया जाता है। रेत में SiO अधिकता में तथा कोक में कार्बन होता है। इस क्रिया को भर्जित अयस्क का प्रगलन कहते हैं। कॉपर पायराइट के भर्जित अयस्क के प्रगलन के फलस्वरूप उसमें उपस्थित Cu2O तथा Fes निम्न प्रकार से अभिक्रिया करते हैं

(i) क्यूप्रस ऑक्साइड फेरस सल्फाइड से क्रिया करके क्यूप्रस सल्फाइड में बदल जाता है।
Cu2O + Fes → Cu2S + FeO↑

(ii) फेरस सल्फाइड की पर्याप्त मात्रा फेरस ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2

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इस प्रकार प्राप्त Feo, प्रयुक्त गालक (SiO2) के साथ अभिक्रिया करके आयरन सिलिकेट बनाता है जो धातुमल (slag) कहलाता है। सिलिका गालक का कार्य करता है।
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क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड का गलित मिश्रण जिसे द्रवित मैट (matte) कहते हैं, भट्ठी के पेंदे में एकत्रित हो जाता है और मैट के ऊपर गलित धातुमल की परत जमा हो जाती है। मैट को निकास द्वार से बाहर निकाल लिया जाता है।

4. बेसेमरीकरण (Bessemerisation) प्रगलन से प्राप्त गलित मैट में थोड़ी क्वार्ट्स (सिलिका) मिलाकर एक बेसेमर परिवर्तक में भर दिया जाता है और उसमें वायु का झोंका प्रवाहित किया जाता है। गलित मैट और क्वार्ट्स के मिश्रण में वायु का झोंका प्रवाहित करने पर निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं

(i) मैट में उपस्थित फेरस सल्फाइड फेरस ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
2Fes + 3O2 → 2FeO + 2SO2
(ii) FeO सिलिका से संयोग करके आयरन सिलिकेट बनाता है जो धातुमल कहलाता है। यह हल्का होने के कारण ऊपर आ जाता है।
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(iii) अप्रयुक्त सिलिका को बेसेमर परिवर्तक का बेसिक स्तर अवशोषित कर लेता है।
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(iv) क्यूप्रस सल्फाइड का कुछ भाग क्यूप्रस ऑक्साइड में बदल जाता है। यह पुन: क्यूप्रस सल्फाइड से क्रिया करके फफोलेदार ताँबा (blister copper) बनाता है।
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प्रश्न 3.
ऐलुमिनियम के दो अयस्कों के नाम तथा सूत्र दीजिए। बॉक्साइट के शद्धिकरण की किसी एक विधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए। ऐलुमिना से धातु को कैसे प्राप्त किया
जाता है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के दो प्रमुख अयस्क बॉक्साइट व क्रायोलाइट हैं। ऐलुमिनियम का निष्कर्षण बॉक्साइट (Al2O3 : 2H2O) से किया जाता है। बॉक्साइट में फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3), सिलिका (SiO2) तथा अन्य अपद्रव्य मिले होते हैं। बॉक्साइट से ऐलुमिनियम का निष्कर्षण निम्न पदों में किया जाता है

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1. बॉक्साइट का शोधन बॉक्साइट का शोधन हॉल की विधि द्वारा किया जाता है हॉल विधि (Hall’s process) इस विधि में बॉक्साइट में सोडियम कार्बोनेट मिलाकर मिश्रण को गलाया जाता है, जिससे ऐलुमिनियम ऑक्साइड सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट में बदल जाता है।Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु
गलित मिश्रण को जल के साथ गर्म करके छान लिया जाता है। सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट विलयन में आ जाता है और फेरिक ऑक्साइड, सिलिका आदि की अशुद्धियाँ अविलेय पदार्थ के रूप में अलग हो जाती सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट विलयन को 30 – 60°C तक गर्म करके उसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड अवक्षेपित हो जाता है जिसे छान लेते हैं।
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अवक्षेप को जल से धोकर सुखाते हैं और फिर तेज गर्म करते हैं, जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड ऐलुमिनियम ऑक्साइड (ऐलुमिना) में अपघटित हो जाता है और इस प्रकार शुद्ध निर्जल ऐलुमिना प्राप्त होता है।
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2. ऐलुमिना का विद्युत्-अपघटन शुद्ध और निर्जल ऐलुमिना (Al2O3) से ऐलुमिनियम धातु हॉल (C.M. Hall, 1886) और हैरॉल्ट (Heroult) द्वारा प्रस्तुत विद्युत्-अपघटनी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। शुद्ध निर्जल ऐलुमिना को गलित क्रायोलाइट (Cryolite, Na3 AlF6) में घोलकर गलित मिश्रण का 875 से 950°C पर कार्बन इलेक्ट्रोडों के बीच विद्युत्-अपघटन करने पर कैथोड पर ऐलुमिनियम निक्षेपित (deposit) होता है और ऐनोड पर ऑक्सीजन निकलती है।
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विद्युत्-अपघटनी सेल (संलग्न चित्र) 8 फीट लम्बा और 6 फीट चौड़ा लोहे का बक्स होता है, जिसके अन्दर गैस कार्बन का अस्तर लगा होता है जो कैथोड का कार्य करता है। ऐनोड कई ग्रेफाइट की छड़ों का बना होता है जो ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण में डूबी रहती हैं। विद्युत्-अपघटनी सेल से समानान्तर क्रम (parallel) में एक विद्युत् लैम्प जुड़ा रहता है, जिसे नियन्त्रक लैम्प (controlling lamp) कहते हैं। गलित मिश्रण का विद्युत्-अपघटन करने पर ऐलुमिना की मात्रा घटने लगती है, जिसके फलस्वरूप सेल का प्रतिरोध बढ़ने लगता है।

जैसे ही सेल में ऐलुमिना समाप्त होने को होता है नियन्त्रक लैम्प जलने लगता है, क्योंकि सेल का प्रतिरोध बहुत बढ़ जाता है। ऐसा होने पर सेल में और निर्जल ऐलुमिना डाल दिया जाता है। निर्जल ऐलुमिना और क्रायोलाइट का गलित मिश्रण विद्युत्-अपघट्य का कार्य करता है। इसका ताप 875 – 950°C रखा जाता है। निर्जल ऐलुमिना (Al2O3) का गलनांक (2050°C) बहुत ऊँचा होता है, परन्तु उसमें क्रायोलाइट (Na3 AIF6 ) मिला देने से ऐलुमिना अपेक्षाकृत कम ताप पर (875 – 900°C) पिघल जाता है। विद्युत्-अपघटन लगभग 35000 ऐम्पियर (ampere) की विद्युत्-धारा द्वारा 4 – 5 वोल्ट की वोल्टता (voltage) पर किया जाता है।
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शुद्ध निर्जल ऐलुमिना और क्रायोलाइट का मिश्रण विद्युत्-अपघटनी सेल में भरकर विद्युत्-धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे क्रायोलाइट पिघल जाता है और उसमें निर्जल ऐलुमिना घुल जाता है। गलित क्रायोलाइट में ऐलुमिना के विलयन का विद्युत अपघटन होता है। कैथोड पर ऐलुमिनियम निक्षेपित होता है और ऐनोड पर ऑक्सीजन निकलती है। गलित अवस्था में ऐलुमिनियम सेल की तली में एकत्रित हो जाता है जिसे बाहर निकाल लेते हैं।
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ग्रेफाइट ऐनोडों पर मुक्त हुई ऑक्सीजन से ग्रेफाइट की छड़ें क्रिया करती हैं जिससे कार्बन मोनोक्साइड (CO) बनती है, जिसके जलने से चमक उत्पन्न होती है और CO2 बनती है। अत: ग्रेफाइट की ऐनोड छड़ें खराब हो जाती हैं और उनको बदलना पड़ता है। विद्युत्-अपघटन करने से पहले ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण में पिसा हुआ कार्बन डाल दिया जाता है जिससे ऊष्मा की हानि नहीं होती तथा आँखों में चमक नहीं लगती है। क्रायोलाइट की उपस्थिति में गलित ऐलुमिना के विद्युत्-अपघटन से लगभग 99.8% शुद्ध ऐलुमिनियम प्राप्त होता है।

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ऐलुमिनियम का शोधन ऐलुमिनियम का शोधन विद्युत्-अपघटनी विधि, हूप विधि (Hoope’s process) द्वारा किया जाता है। इस विधि में कार्बन का अस्तर लगे हुए एक आयरन के टैंक में सबसे नीचे (bottom) गलित अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत, मध्य में (middle) सोडियम, बेरियम और ऐलुमिनियम के फ्लु ओराइडों के गलित मिश्रण की परत और सबसे ऊपर (top) गलित शुद्ध ऐलुमिनियम की परत होती है (संलग्न चित्र) ऊपर की परत का आपेक्षिक घनत्व सबसे कम और नीचे (bottom) की परत का आपेक्षिक घनत्व सबसे अधिक होता है।

अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत ऐनोड का और शुद्ध ऐलुमिनियम की परत कैथोड का कार्य करती है। सोडियम, बेरियम और ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों का गलित मिश्रण विद्युत्-अपघट्य (electrolyte) का कार्य करता है। शुद्ध ऐलुमिनियम की परत में लटकी हुई ग्रेफाइट की छड़ें व अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत के सम्पर्क में स्थित कॉपर-ऐलुमिनियम मिश्र धातु की छड़ चालक का कार्य करती है।
Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु
विद्युत्-धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ऐलुमिनियम बीच की परत से ऊपर की परत में कैथोड पर एकत्रित होता है और उतना ही ऐलुमिनियम नीचे (bottom) की परत से बीच की परत में आ जाता है। इस प्रकार शुद्ध ऐलुमिनियम नीचे की परत (ऐनोड) से ऊपर की परत (कैथोड) में आ जाता है और अशुद्धियाँ नीचे रह जाती हैं। इस विधि द्वारा प्राप्त ऐलुमिनियम 99.98% शुद्ध होता है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 4.
मिश्र धातु किसे कहते हैं ? कॉपर की दो प्रमुख मिश्र धातुओं के नाम, संघटन व उपयोग दीजिए। (2010, 13, 14, 16, 18)
या मिश्र धातु किसे कहते हैं ? कोई एक उदाहरण दीजिए। (2009, 11)
या मिश्र धातु से आप क्या समझते हैं? धातु एवं उसकी मिश्र धातु के गुणों में प्रमुख भिन्नता क्या है?
उत्तर:
“जब दो या दो से अधिक धातुओं को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर पिघलाया जाता है तो ये धातुएँ परस्पर मिल जाती हैं और एक समांग मिश्रण बनाती हैं। ऐसे मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं।” इन मिश्र धातुओं के भौतिक गुण मूल धातुओं के भौतिक गुणों से बिल्कुल भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए-मिश्र धातु पीतल, जिसमें 2 भाग ताँबा व एक भाग जस्ता होता है, ताँबा व जस्ता की अपेक्षा अधिक कड़ा होता है।

मिश्र धातु बनाते समय यदि विभिन्न धातुओं को धीरे-धीरे गर्म किया जाये और फिर उन्हें धीरे-धीरे ठण्डा होने दिया जाये तो नरम मिश्र धातु प्राप्त होती है। यदि धातुओं को शीघ्रता से गर्म करके फिर शीघ्रता से ठण्डा किया जाये तो मिश्र धातु कठोर और भंगुर होती है। इस प्रकार धातुओं से मिश्र धातु बनाने में उनकी कठोरता, वायु, जल आदि से क्रिया करने का गुण, चमक, रंग, मूल्य आदि बदल कर अधिक उपयोगी बन जाते हैं। कॉपर की दो प्रमुख मिश्र धातुएँ, उनकी संरचना (संघटन) तथा मुख्य उपयोग निम्नांकित सारणी में दिये गये हैं –
Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 3 धातु एवं अधातु

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

Bihar Board Class 6 Science जन्तुओं में गति Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सही उत्तर चुनिए –

(क) शरीर का अंग जहाँ से मुड़ता है, उसे कहते हैं –
(i) संधि
(ii) जोड़
(iii) (i) तथा (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iii) (i) तथा (ii) दोनों

(ख) शरीर की अस्थियों का ढाँचा कहलाता है
(i) कंकाल तंत्र
(ii) पेशीतंत्र
(iii) पाचन तंत्र
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) कंकाल तंत्र

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

(ग) ऊपरी जबड़े एवं खोपड़ी (कपाल) की संधि है.
(i) चल संधि
(ii) अचल संधि
(iii) कब्जा संधि
(iv) धुरान संधि
उत्तर:
(ii) अचल संधि

(घ) निम्न में से किस जीव की अस्थियाँ खोखली किंतु मजबूत होती है –
(i) मनुष्य
(ii) पक्षी
(ii) मांसाहारी जानवर
(iv) छिपकली
उत्तर:
(ii) पक्षी

(ङ) निम्न में से कौन-सा जीव मिट्टी खाता है –
(i) साँप
(ii) मछली
(iii) कंचुआ
(iv) छिपकली
उत्तर:
(iii) कंचुआ

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(कब्जा-संधि, मांसपेशियाँ, गति, कंकाल तंत्र)

(क) अस्थियों की संधिया शरीर की …………. में सहायता करती है।
(ख) अस्थियाँ एवं उपास्थि संयुक्त रूप से शरीर का …………… बनाते हैं।
(ग) कोहनी की अस्थियाँ …………… द्वारा जुड़ी होती हैं।
(घ) गति करते समय ……………… के संकुचन से अस्थियाँ खिंचती हैं।
उत्तर:
(क) गति
(ख) कंकाल तंत्र
(ग) कब्जा-संधि
(घ) मांसपेशियों

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प्रश्न 3.
निम्न कशनों के आगे सत्य तथा असत्य को इंगित कीजिए।
(क) सभी जंतुओं की गति एवं चलन बिलकुल एक समान होता है।
(ख) उपास्थि अस्थि की अपेक्षा कठोर होती है।
(ग) अंगुलियों की अस्थियों में संधि नहीं होती।
(घ) अग्रभुजा में दो अस्थियाँ होती हैं।
(ङ) तिलचट्टों में बाह्य-कंकाल पाया जाता है।
उत्तर:
(क) असत्य
(ख) असत्य
(ग) असत्य
(घ) सत्य
(ङ) सत्य

प्रश्न 4.
स्तम्भ में दिए गए शब्दों का संबंध कॉलम 2 के एक अथवा अधि क कथन से जोड़िए।
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति 1
उत्तर:
1 – घ, ख,
2 – क, छ
3 – ङ
4 – च, ख
5 – ख, ग।

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प्रश्न 5.
निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) कंदुक-खल्लिका संधि क्या है?
उत्तर:
शरीर का वह अंग जहाँ पर मुड़ता है उस हिस्से को संधि या जाड़ कहते हैं। अस्थियों की संधियाँ अनेक प्रकार की होती हैं। यह उस संधि की प्रकृति एवं गति की दिशा पर निर्भर करता है।

कंधे की हड्डी और हाथ की हड्डी के जोड़ को कंदुक-खल्लिका संधि कहते हैं। इसे बॉल एवं सॉकेट ज्वाइंट भी कहते हैं। इसी संधि के कारण हमलोग अपने हाथ को चारों तरफ घुमा पाते हैं।

रबर का गेंद में कागज के बेलन को घुसाकर किसी कटोरे में घुमाकर कंदुक खल्लिका संधि का स्वरूप देख सकते हैं। यही संरचना होती है इस संधि की।

(ख) कपाल की अस्थि कौन-सी गति करती है?
उत्तर:
खोपड़ी अर्थात कपाल कई अस्थियों के जुड़ने से बनी है। खोपड़ी के अन्दर मस्तिष्क सुरक्षित रहता है। खोपड़ी अन्दर से खोखली होती है। ये अस्थियाँ इन संधियों पर हिल नहीं सकती। ऐसी संधि को अचल संधि कहते हैं। ऊपरी जबड़े एवं खोपड़ी अर्थात कपाल के मध्य अचल संधि होता है।

(ग) हमारी कोहनी पीछे की ओर क्यों नहीं मुड़ सकती?
उत्तर:
हमारी कोहनी में कब्जा संधि (हिन्ज ज्वाइंट) पाया जाता है। यह ‘ दरवाजे का कब्जा के रूप में होता है। ठीक वैसे ही जैसे दरवाजे में लगे कब्जे के कारण दरवाजा एक ही ओर खुलता है। इसी प्रकार हमारी कोहनी एक ही यानि ऊपर की ओर मुड़ती है। इसलिए कोहनी को पीछे की ओर नहीं मोड़ पाते हैं।

(घ) हमारे शरीर में पाई जाने वाली उपास्थि के उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
अस्थि की तरह कठोर न हो बल्कि लचीले होते हैं। उसे उपास्थि कहते हैं। हम आसानी से जहाँ-तहाँ मोड़ लेते हैं। जैसे- कान, नाक आदि अंगों में उपास्थि पाए जाते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

Bihar Board Class 6 Science जन्तुओं में गति Notes

अध्ययन सामग्री :

सजीव जगत के प्राणी चलते हैं, बोलते हैं, खाना खाते हैं, लिखते हैं आदि क्रिया-कलाप करते हैं। इन सभी क्रिया-कलापों में शरीर का कौन सा अंग सक्रिय होता है जब आप और हम कुछ लिखते और पढते हैं। तब कौन-सा भाग गति करता है। जब आप किसी को मुड़कर देखते हैं तो शरीर का कौन-सा हिस्सा मुड़ने में सक्रिय होता है। ये सभी जन्तु शरीर के किस अंग का उपयोग गति करने में करते हैं तो इस प्रकार की गति को गमन कहते हैं। यदि हम किसी दिशा में शरीर को झुकाते हैं, तो शरीर के अंगों की गति कहते हैं। हमारे शरीर के कुछ अंग किसी भी दिशा में आसानी से घूम सकता है तथा कुछ अंग एक ही दिशा में घूमता है। कुछ अंग नहीं घुमते हैं।

शरीर का अंग जिस जगह पर मुड़ता है उस हिस्से को संधि या जोड़ कहते हैं। यदि शरीर में यह संधि न होती तो शरीर के किसी भी अंग में गति संभव नहीं होती। हमारे शरीर की रचना में जो कठोर है-हड्डी या अस्थि कहते हैं। अस्थियाँ जिस जगह पर मुड़ती या घूमती हैं उसे संधि-स्थल कहते हैं। शरीर के मोदने, घुमाने, झुकाने में संधि-स्थल पर अस्थियाँ एक-दूसरे से किस प्रकार जुड़ी होती हैं तथा अस्थियों का संधि-स्थल की बनावट क्या है, अग्रलिखित पक्तियों में है।

शरीर में अस्थियों से बना ढाँचा कंकाल या कंकाल तंत्र कहलाता है। संधि या जोड़ अनेक प्रकार की होती है। वह संधि जो कंधे की हड्डी तथा हाथ की हड्डी को जोड़ती है उसे कंदुक-खल्लिका संधि या बॉल एवं सॉकेट ज्वाइंट कहते हैं। इस संधि के कारण ही हम अपने हाथों को चारों तरफ घुमा पाते हैं। कोहनी तथा घुटना दोनों ही कब्जा संधि द्वारा सिर्फ एक ही तरफ मुड़ पाता है। ठीक वैसे ही जैसे दरवाजे में लगे कब्जे के कारण दरवाजा एक ही ओर खुलता है। इसे कब्जा संधि या हिन्ज ज्वाइंट कहते हैं। गर्दन तथा सिर को जोड़ने वाली संधि को धुराग्र संधि कहते हैं। इसके माध्यम से सिर को किसी भी झुकाव पर घुमा सकते हैं। ऊपरी जबड़े तथा खोपड़ी अर्थात् कपाल के बीच स्थित संधि को अचल संधि कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

‘शरीर की सभी अस्थियाँ मिलकर शरीर का ढाँचा प्रदान कर शरीर को एक आकृति प्रदान करती है। अस्थियों को हिलाने-डुलाने के लिए अनेक पेशियाँ जुड़ी रहती हैं। ये पेशियाँ अस्थियों से एक विशेष प्रकार के रेशों से जुड़ी रहती हैं। इन रेशों को कंडरा (Tendon) कहते हैं। इसी प्रकार दो अस्थियाँ आपस में विशेष प्रकार के रेशों से जुड़ी रहती हैं। इन रेशों को स्नायु कहते हैं।

आप अपने शरीर के पीठ के बीच ऊपर से नीचे थोड़ा दबाकर देखें तो पता चलता है कि एक लम्बी एवं कठार अस्थियाँ हैं जो अनेक छोटी-छोटी अस्थियों से बनी होती हैं। उसे मेरूदण्ड कहते हैं और उन छोटी-छोटी अस्थियों को कशेरूक कहते हैं। कंधों के समीप दो उभरी हुई अस्थियाँ दिखाई . देती हैं। इन्हें कंधे की अस्थियाँ कहते हैं। कंधे की अस्थियों को अंश-अस्थियाँ कहते हैं। कमर की अस्थियों को श्रेणी अस्थियाँ कहते हैं। यह बॉक्स के समान एक ऐसी संरचना बनाती है, जो अमाशय के नीचे पाये जाने वाले विभिन्न अंगों की रक्षा करती है। अस्थि की तरह कठार न होकर बल्कि लचीले होते हैं तथा आसानी से मुड़ते हों तो उसे उपास्थि कहते हैं। कान तथा नाक में उपास्थि ही पाए जाते हैं।

अब हमलोग जीव-जन्तुओं की गति के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करें। कुछ जन्तु चलते हैं, कुछ दौड़ते हैं, कुछ रेंगते हैं, तो कुछ हवा में उड़ती है, तो कुछ पानी में तैरती है।

केंचुए का शरीर एक सिरे से दूसरे सिरे तक अनेक छल्लों का बना हुआ होता है तथा इसके शरीर काफी मुलायम होते हैं। इसके शरीर में अस्थियाँ नहीं होती हैं। इसके शरीर में पेशियाँ होती हैं। इन पेशियों के संकुचन एवं शिथिलन से इसका शरीर घटता-बढ़ता रहता है। इसी के माध्यम से केचुआ गमन कर ‘पाता है। केंचुए के शरीर पर छोटे-छोटे बाल जैसी आकृति होती है। इस बाल जैसी आकृतियों को शुक कहते हैं। केंचुए मिट्टी खाता है और इसकी उर्वरक क्षमता को बढ़ाता है।

यदा-कदा हमलोग घोंघा को देखते हैं। घोंघा का शरीर कठोर आवरण से ढंका रहता है। इसे कवच कहते हैं और यह घोंघे का बाह्य कंकाल होता है। यह कवच अस्थि से भिन्न है। इसमें कोई संधि नहीं होती है। कवच के नीचे जमीन पर फैली हुई मांसल संरचना होती है जिसे पाद कहते हैं। इसी पाद के माध्यम से घोंघा गमन करता है।

तिलचट्टा जमीन पर चलते हैं, दीवार पर चढ़ते हैं और हवा में उड़ते भी _हैं। इसके तीन जोड़े पैर होते हैं जो चलने में सहायता करते हैं। इसका शरीर कठोर बाह्य कंकाल से ढंका रहता है। यह कोई भागों में बँटा होता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

पक्षी हवा में उड़ते हैं तथा जमीन पर चलते हैं। इसका शरीर उड़ने के लिए अनुकूलित होता है। उनकी अस्थियाँ खोखली होती हैं। परन्तु मजबूत होती हैं। अस्थियों में खोखले हिस्से को वायुप्रकोष्ठ कहते हैं। अस्थियों के वायुप्रकोष्ठ में हवा भरे रहने के कारण इसका शरीर हल्का रहता है। अग्रपाद की अस्थियाँ रूपान्तरित होकर पक्षी का डैना. (पंख) बनाती है। वक्ष की अस्थियाँ नाव के आकार की होती है।

मछली एक जलीय जीव है। मछली का अगला तथा पिछला हिस्सा नाव से मिलता-जुलता है। मछली के शरीर पर पक्ष्म होते हैं तथा इसका शरीर ध । रारेखीय होता है। उसकी पूँछ पर भी पक्ष्म लगे रहते हैं। मछली का कंकाल दृढ़ पेशियों से ढंका रहता है। अपने मांसपेशियों को संकुचन तथा शिथिलन से ये पक्ष्म को ऊपर-नीचे तथा अलग-बगल करते हैं तथा शरीर को थोड़ा। तरंग गति देकर तैरने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। मछली गलफड़े से श्वास लेती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 9 जन्तुओं में गति

सजीव जगत में सर्प एक अलग तरह का जीव है जो मानव जाति के – दुश्मन माना जाता है। सर्प का मेरूदंड लम्बा तथा बहुत लचीला होता है। सांप के शरीर में अनगिनत वलय होते हैं। ये वलय मांसपेशियों की मदद से लहरदार गति उत्पन्न करते हैं।

अन्ततः यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि जन्तुओं का विशेष अध्ययन . अगली कक्षा में करेंगे। विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीव-जन्तुओं के बारे . अध्ययन करते हैं। उसे जन्तु-विज्ञान कहते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 10 निम्मो की मौत Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

Bihar Board Class 9 Hindi निम्मो की मौत Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्मो समाज के किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?
उत्तर-
‘निम्मो’ भारतीय समाज के शोषित, पीड़ित वर्ग का प्रतिनिधित्व करती _है। निम्मो, भारतीय समाज की आम जन है। निम्मो के माध्यम से पूरे भारतीय समाज के शोषित, पीड़ित, दमित, दलित जन की पीड़ा, वेदना जिन्दगी की विभिन्न स्थितियों  का सम्यक् चित्रण किया गया है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

प्रश्न 2.
कवि ने ‘निम्मो’ की तुलना ‘भींगी हुई चिड़िया’ से क्यों की है?
उत्तर-
कवि ने अपनी कविता में ‘निम्मो’ की तुलना एक भीगी हुई चिड़िया से किया है। जिस प्रकार भीगे हुए पंख से चिड़िया उड़ नहीं सकती, फुदक नहीं सकती, कुदुक नहीं सकती। वह भींगे पंख के कारण विवश, बेबस हो जाती है क्योंकि भीगे हुए पंख फड़फड़ा नहीं सकते और उसे उड़ने में सहयोग न देकर बाधक बन जाते हैं।

ठीक उसी भींगी हुई चिड़िया की तरह ‘निम्मो’ का भी जीवन है। ‘निम्मो’ एक महानगर की घरेलू नौकरानी है। वह आम-जन है। वह अपने जीवन में गुलाम है क्योंकि नौकर आजाद जिन्दगी नहीं जी सकता। वह अपने स्वामी के अधीन ही जी पाता है। उसकी आजादी, स्वच्छंदता बंधक में पड़ जाती है। इसी कारण निम्मो की स्थिति भीगी हुई चिड़िया जैसी है। वह नौकरी करती है। नौकर का सबकुछ उसका स्वामी होता है बिना उसके वह पलभर भी इधर-उधर नहीं घूम-फिर सकता। अपने मन की बात वह नहीं कर सकता। नौकर बनना ही गुलामी की निशानी है अतः निम्मो आजाद नहीं है। वह गुलामी की जिन्दगी जी रही है। इसी कारण वह विवश है। बेबश है, लाचार है।

प्रश्न 3.
निम्मो को जो यातनाएँ दी जाती थीं, उसे कविता के आधार पर अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
निम्मो एक घरेलू नौकरानी थी। वह मुंबई जैसे महानगर में रहती थी। महानगरीय संस्कृति में नौकर की विसात ही क्या? वहाँ भी निम्मो का कोई अपना अस्तित्व नहीं है।

कवि ने ‘निम्मो को जो यातनाएँ उसके मालिक द्वारा दी जाती थी, उसे अपनी आँखों से देखा था। वह उसकी पीडा से. यातना से स्वयं व्यथित था-कवि ख अपनी कविता में लिखा है-हमें मालुम था/लानतों, गाली, घूसों, के बाद/लेटी हुई ठंढे फर्श पर/गए रात जब/उसकी आँखें मूंदती थीं/एक कंपन/पूरी धरती पर पसर जाता था/उसकी थमी हुई हिचकियाँ/उसके पीहर तक/चली जाती थीं।
उपरोक्त पंक्तियों में कवि ने निम्मों के कारुणिक जीवन-व्यथा को अत्यंत ही करुण भावनाओं के साथ वर्णन किया है। कवि को सब कुछ मालूम था। जब . प्रताड़ना, उपहना, गाली, घूसों से मार-मार कर उसे घायलावस्था में छोड़ दिया जाता था तब वह अधमरी अवस्था में ठंढे फर्श पर आँखें मूंदकर अर्द्ध-बेहोशी की अवस्था में पड़ी रहती थी।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

प्रश्न 4.
‘उसकी थमी हुई हिचकियाँ उसके पीहर तक चली जाती थी’ । से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
‘निम्मो मर गई’ कविता में कवि ने प्रताड़ित निम्मो की हिचकियों का चित्रण बड़े ही मार्मिक भाव से किया है।
घोर यंत्रणा से पीड़ित होकर, घायल होकर जब निम्मो ठंढे फर्श पर बीती रात में निढाल बनकर गिर जाती है। तन-मन यंत्रणा की मार से वेदना युक्त हो गया है। पोर-पोर में दर्द और टीस उठ रही है। अत्यधिक रोने के कारण उसकी हिचकियाँ रुकने का नाम नहीं लेंती। लगता है-उसकी हिचकियाँ जो थम-थम कर उठ रही है-उसकी आवाज उसके पीहर यानि मैके (नैहर) तक पहुंच चुकी है। कहने का मूलभाव यह है कि निम्मो केवल मामली घरेल नौकरानी ही नहीं है। उसकी चीखें हिचकियाँ केवल निम्मो की नहीं है। वह तो भारतीय आम जन की पीड़ा है, चीखें हैं, हिचकियाँ हैं।

बेटी के दुख से सबसे ज्यादा पीड़ित मैके यानि नैहर के लोग ही होते हैं क्योंकि शादी के बाद बेटी परायी बन जाती है। दूर चली जाती है दूसरे के वश में जीने-मरने के लिए विवश हो जाती है। इस प्रकार निम्मो भी प्रतीक रूप में धरती की बेटी है। धरती पुत्री है। धरती ही उसके लिए मैके है, नैहर है। अतः जब-जब वह रोते-रोते थक जाती है और हिचकियाँ लेने लगती है तो सारी धरती प्रकंपित हो जाती है। सारी धरती आन्दोलित हो उठती है। निम्मो की पीड़ा भारतीय बेटियों की पीड़ा है। आमजन की पीड़ा है जो अभिशप्त जिन्दगी जीने के लिए विवश है। आधी रात में उसकी पीड़ा से व्यथा से प्रतीत होता था-सारी धरती कपित हो रही है। उसकी व्यथा, दुख-दर्द, सारी पृथ्वी पर पसर गया है, वह जो रोते-रोते सोते हुए हिचकियाँ ले रही है उसकी आवाज उसके मैके यानि नैहर (पीहर) तक पहुँच गयी है। यहाँ पृथ्वी ही उसकी माता है।

सारी पृथ्वी उसकी पीड़ा से व्यथित हो उठी है। उसकी हिचकियों से सारी धरती आन्दोलित हो उठी है। यह एक निम्मो की पीड़ा नहीं है, एक निम्मो की व्यथा नहीं है। यह धरती पर लाखों-करोड़ों निम्मो की पीड़ा, वेदना, कष्ट है जिससे सारी पृथ्वी कपित, आन्दोलित और व्यथित हो चुकी है। यहाँ निम्मो का प्रतीक प्रयोग हुआ है। भारतीय आमजन की व्यथा, पीड़ा वेदना को जीवन की विसंगतियों को, महानगरीय जीवन शैली और प्रभुत्व वर्ग की मनमानी, असंवेदना, निष्ठुरता, अकर्मण्यता, कठोरता का कवि ने यथार्थ चित्रण किया है।

निम्मो को खाने के लिए एक सूखी रोटी, तीन दिन का बासी साग दिया जाता है। क्या यही मानवीयता कहती है? ऐसा तो पशु के साथ भी व्यवहार नहीं किया जाता है। इस कविता में निष्ठुरता ने, संवेदनशून्यता ने सारी सीमाओं का अतिक्रमण कर दिया है। इन्हीं निष्ठुरता और निर्ममता को देखकर कवि का हृदय द्रवित हो उठता है और करुणा से ओत-प्रोत कविता का सृजन कवि करता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

प्रश्न 5.
इस कविता के माध्यम से कवि ने समाज के किस वर्ग के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की है?
उत्तर-
‘निम्मो मर गई’ कविता विजय कुमार द्वारा रचित अत्यंत ही मार्मिक और संवेदना से युक्त कविता है। इस कविता में निम्मो एक प्रतीक के रूप में प्रयुक्त है। ‘निम्मो’ मात्र एक घरेलू नौकरानी नहीं है बल्कि वह कवि की दृष्टि में समाज के अभावग्रस्त वंचित समाज का प्रतिनिधित्व करती है। इस कविता में मानवीय संवेदना का पता चलता है।

समाज के शोषित, दमित, पीड़ित, दलित और अभावग्रस्त समाज के आम जन की पीडा के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। भारतीय समाज में जो अराजकता और अव्यवस्था विद्यमान है, उस ओर भी कवि ने ध्यान आकृष्ट किया है।

. मिहनतकश वर्ग अभाव और दरिंदगी की जिन्दगी जीने के लिए अभिशप्त है। 21वीं सदी के बढ़ते कदम के कारण गाँवों और शहरों में बहुत कुछ परिवर्तन हो चुका है। महानगरीय संस्कृति में जीनेवाले लोग बेचैनी में जी रहे हैं। उनके पास संवेदना और समय दोनों नहीं है। किसी साधारण जन की समस्याओं से वे दूर रहना चाहते हैं। उन्हें उस वर्ग के प्रति प्रेम और दर्द का भाव नहीं दिखता। कवि ने इन्हीं सब कारणों को चिन्हित करते हुए अपनी कविता में आम-जन के प्रति सहानुभूति का भाव प्रकट किया है।

प्रश्न 6.
पूरी धरती पर कंपन पसर जाने का क्या कारण है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ नामक कविता में कवि ने आम आदमी की पीड़ा के प्रति सहानुभूति के शब्दों को व्यक्त किया है। कवि का कहना है जब तक _ ‘निम्मो’ के रूप में आम आदमी धरती पर पीड़ित रहेगा, शोषित रहेगा, कष्ट और परेशानियों से जूझता रहेगा, तब तक यह पूरी धरती प्रकर्पित होती रहेगी। इसके कंपन से सारी धरती पीड़ा के दर्द से कराह उठेगी। समग्र संसार आकुल-व्याकुल हो जाएगा। धरती को स्वर्ग के रूप में अगर देखना चाहते हैं।

शांति और अमन से युक्त धरती को देखना चाहते हैं तो हर व्यक्ति को जो साधन-संपन्न है उस आम आदमी के दुख-दर्द में हाथ बँटाना होगा। उसकी पीड़ा को बाँटना होगा। उसके साथ सहानुभूति रखनी होगी। आदमी-आदमी के बीच जबतक भेदभाव, गैर बराबरी, अमानवीयता, निष्ठुरत, निर्ममता के साथ व्यवहार किया जाएगा तब तक धरती अशांतमय रहेगी। अतः कवि का कहना है कि भेद-भाव की खाई को पाटो। आम आदमी के साथ जडकर उसके साथ सहयात्री बनो। उसकी पीडा को अपनी पीडा समझो। सहानुभूति और प्रेम के बल पर ही हम धरती को खुशहाल रख.पाएँगे।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

प्रश्न 7.
‘वह चोरों की तरह खाती रही कई बरस’ में कवि ने ‘चोरों की तरह’ का प्रयोग किस उद्देश्य से किया है?
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ नामक कविता में कवि ने ‘निम्मो’ जब खाना खाती थी तब वह चोरों की तरह छिपकर खाती थी। उस दृश्य का चित्रण कवि ने स्पष्ट रूप में अपनी कविताओं में किया है। कवि कहता है कि ‘निम्मो’ चोरों की तरह इस कारण छिपकर खाती थी क्योंकि उसे खाने के लिए एक सूखी रोटी और तीन दिन का बासी साग खाने को दिया जाता था। इस सड़े-गले खाना को कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? इसी लोक-लाज से निम्मो चोरों की तरह अँधेरे में छिपकर और दुबककर खाना खाती थी। यहाँ निम्मो को लोक-लाज की चिंता थी किन्तु उस समाज की कतई परवाह नहीं था जिस वर्ग ने निम्मो को ऐसा बासी खाना खाने के लिए दिया था।

इस प्रकार अपनी कविता में भारतीय संस्कृति का स्वरूप दृष्टिगत होता है। खाना परदे में ही खाना चाहिए लेकिन यहाँ कवि के कहने का भाव उपरोक्त पंक्तियों में वर्णित भाव से है। यही कारण है कि कवि ने चोरों की भाँति छिपकर दुबककर खाना खाने के दृश्य को चित्रित किया है।

प्रश्न 8.
और शायद कुछ अनकही प्रार्थनाएँ नींद में-इस पंक्ति में ‘प्रार्थनाओं को अनकही’ क्यों कहा गया है?
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ नामक कविता में निम्मो द्वारा की गई अनकही प्रार्थना पर प्रकाश डाला गया है। कवि ने अपने विचारों को कविता के माध्यम से व्यक्त किया है कि प्रार्थना जोर-जोर से चिल्लाकर नहीं की जाती। प्रार्थना तो मन ही मन हृदय से की जाती है।

यहाँ निम्मो की घायलावस्था की स्थितियों पर कवि काफी द्रवित है और वह कहता है कि निम्मो प्रताड़ना, गाली मार से घायल हो चुकी है। उसका तन ही नहीं मन भी घायलावस्था में है। उसके भीतर हृदय पर जो घाव के चिन्ह हैं वे देखे नहीं जा सकते हैं, महसूस किये जा सकते हैं। . निम्मो घायलावस्था में नींद में बेसुध पड़ी हुई है। कवि देखता है और सोचता है कि निम्मो नींद में ही अव्यक्त भाव से प्रार्थना में मौन है। वह अपनी मक्ति के लिए मौन प्रार्थना कर रही है।

प्रार्थना तो कहकर नहीं की जाती है। निम्मो बेसुध नींद में पड़ी हुई बिना बोले ही प्रार्थना में लीन है। प्रार्थना तो मौन और निर्मल भाव से ही किया जाता है। इस प्रकार निम्मो का जो दृश्य उभरता है उससे प्रतीत होता है कि वह अपने मन में अनकहे शब्दों के द्वारा मौन भाव से प्रार्थना में लीन है। प्रार्थना का नियम ही है-मौन भाव से शुद्ध हृदय से अंतर्मन द्वारा ही बिना शब्दों के प्रार्थना करना।

प्रश्न 9.
और तीस बरस उसे रहना था यहाँ-कहकर कवि हमें क्या बताना चाहता है?
उत्तर-
कवि की दृष्टि में भारतीय आम आदमी की औसत आयु 60 वर्ष की होती है। ‘निम्मो की मौत पर’ कवि ने अपने भाव को व्यक्त करते हुए कहा है कि निम्मो की अभी उम्र तो 30 वर्ष की हुई थी। निम्मो 30 वर्ष की प्रौढ़ावस्था को छू रही थी। उसे भारतीय औसत आयु के अनुसार तीस वर्ष और रहना चाहिए था किन्तु इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वह 60 वर्ष की उम्र को पार नहीं कर सकी साथ ही असमय में ही मृत्यु की गोद में चली गई। अभी उसे यहाँ जीना था। इस धरती पर रहना था निम्मो की अल्पायु मृत्यु पर कवि हृदय से अफशोस व्यक्त करता है और उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 निम्मो की मौत

अपनी काव्य पंक्तियों द्वारा भी कवि समाज की विसंगतियों पर भी अफसोस व्यक्त किया है। यह हमारा समाज कितना क्रूर और निष्ठुर है कि अपने दुर्व्यवहार द्वारा अल्पायु में ही किसी को मरने के पूर्व ही मार देता है। यहाँ भारतीय जनजीवन में व्याप्त अकर्मण्यता, अमानवीयता, दुर्व्यवहार संवेदना को दोषी ठहराते हुए कवि क्षोभ व्यक्त करता है और निम्मो की मृत्यु के माध्यम से आमजन की असामयिक मृत्यु पर चिंता व्यक्त करता है।

प्रश्न 10.
रेत की दीवार की तरह सहसा गिरने की क्या वजह हो सकती है?
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ विजय कुमार द्वारा लिखित आज के ज्वलंत समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट करने वाली एक महत्वपूर्ण कविता है। कवि निम्मो की असामयिक मृत्यु पर दुख और क्षोभ व्यक्त करते हुए कहता है कि उसे अभी यहाँ रहना आवश्यक था। कहने का भाव यह है कि उसके मरने की अभी उम्र नहीं थी। अचानक उसका इस धरा से उठ जाने में कई रहस्य छिपे हैं जिनका उद्घाटन कर आमजन को भी बताना आवश्यक है।

जिस प्रकार रेती की दीवार पर विश्वास नहीं किया जा सकता। कभी भी आँधी-पानी, तूफान के बीच वह ध्वस्त हो सकती है। ठीक उसी प्रकार अचानक निम्मो की भी, रेत की दीवार की तरह धराशायी हो जाना अत्यंत ही दुखद है।

निम्मो की जिन्दगी रेत की दीवार की तरह कैसे बनी ? किसने बनायी? इस पर सहसा विश्वास नहीं होता कि निम्मो भी इतना जल्दी मृत्यु को वरण कर लेगी। रेत की दीवार की तरह अचानक निम्मो की मौत हो गई। इस अचानक मृत्यु पर कवि को विश्वास नहीं होता। कवि निम्मो की मौत को अभी रहस्य ही मानता है। निम्मो की मौत की जिम्मेवारी भारतीय समाज के उस प्रभुत्व वर्ग को देना चाहता है जिसके पास अपार धन संपदा तो है लेकिन संवेदना नहीं है वह वर्ग इतना क्रूर, निष्ठुर, निर्मम है कि उसके चंगुल में फंसकर प्रतिदिन अनेक निम्मो मरने के लिए विवश होती है। अकारण ही मौत की मुँह में समा जाती है। इस प्रकार कवि ने अपनी काव्य पंक्तियों द्वारा निम्मो की मौत को रेत की दीवार से तुलना तो करता है किन्तु वह उसके मृत्यु के रहस्य को उद्घाटित भी करना चाहता है। कवि के विचार में निम्मो की मौत सामान्य मौत नहीं मानी जा सकती है।

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प्रश्न 11.
निम्मो की मौत पर” शीर्षक कहाँ तक सार्थक है? तर्क सहित उत्तर दीजिए या उत्तर दें।
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ शीर्षक से कवि विजय कुमार ने अपनी कविता का सृजन किया है। कविता की मुख्य पात्र निम्मो है जो मुंबई जैसे महानगर में घरेलू नौकरानी के रूप में जीवन व्यतीत करती है। कवि की दृष्टि में निम्मो महानगर के वंचित समाज का प्रतिनिधित्व करती है। भारतीय महानगर में एक प्रभुत्वशाली वर्ग है जो चित जन के प्रति जरा भी संवेदना या दर्द नहीं रखता है। वह निष्ठुर-निर्मम और क्रूर समाज है। वह अपनी धन-संपदा के बीच मौज-मस्ती में जीता है।

इस प्रकार ‘निम्मो की मौत पर’ शीर्षक स्वयं में सार्थक है। इस कविता में कवि ने भारतीय समाज की विसंगतियों के साथ आमजन की पीड़ा और सामाजिक संबंधों की चर्चा ईमानदारी से की है।

निम्मो एक घरेलू नौकरानी है, वह महानगर के बीच रहती है। उसकी जिंदगी भीगी हुई चिड़िया के समान है। वह आजाद नहीं है। वह जिस मालिक के यहाँ काम करती है वह निष्ठुर है। अमानवीय व्यवहार करते हुए वह निम्मो को खाने के लिए एक सूखी रोटी और तीन दिनों का बासी साग देता है। निम्मो उसे चोरों की तरह छिपकर खाती है क्योंकि रुखें सूखे भोजन को दूसरा देख न ले। निम्मो अपनी कुशल क्षेम की चर्चा भी पत्रों द्वारा कभी नहीं करती न अम्मा के पास कोई चिट्ठी ही भेजती है। टेलिफोन से बातें करना भी उसके लिए वर्जित है।

‘निम्मो की मौत पर’ शीर्षक एक यथार्थ और सही शीर्षक है। देश में लाखों निम्मो रोज मरती है. पैदा होती है, लेकिन यह महानगर या आज की अपसंस्कृति में निम्मो की मौत के बारे में सोचने को किसे फुर्सत है। .. भारतीय शोषित पीड़ित आम-जन की प्रतीक निम्मो सचमुच में अपने जीवन की विसंगतियों के साथ उपस्थित होती है और अचानक मृत्यु की गोद में जाकर बैठ जाती है।
इस कविता. में निम्मो के जीवन चरित्र से आम आदमी की पीड़ा, वेदना और जीवन- चर्या की चर्चा की गई है। – ‘निम्मो की मौत पर’ शीर्षक सही और यथार्थपरक शीर्षक है। इसमें निम्मो की मृत्यु भारतीय जन की वंचित समाज की मृत्यु है। कवि ने वचित जन की त्रासदी । की चर्चा करते हुए निम्मो के व्यक्तित्व, सामाजिक हैसियत और विशेष अन्य बातों पर भी ध्यान दिया है।

प्रश्न 12.
“यह शरीर जो तीस बरस से
इस दुनिया में था
और तीस बरस
उसे रहना था यहाँ।”
-यहाँ निम्मो का.कौन-सा दर्द अभिव्यक्त होता है?
उत्तर-
‘निम्मो की मौत पर’ नामक कविता में कवि ने निम्मो की जिन्दगी की पीड़ा वेदना को व्यक्त किया है। निम्मो का अचानक मर जाना कवि के लिए पीड़ादायी बन जाता है।
निम्मो तीस वर्ष की प्रौढ़ा थी। अभी उसकी उम्र ही क्या हुई थी। वह तो अभी अपनी असली उम्र की दहलीज को छू रही थी।
औसत भारतीय लोगों की उम्र साठ वर्ष है निम्मो भी 30 वर्ष का थी उसे अभी और औसत आयु के मुताबिक 30 वर्ष और इस धरती पर रहना, पन्द्र उसकी अकाल मृत्यु ने 30 वर्ष पूर्व ही हमसे छिन लिया। अचानक उसकी मृत्यु पर सभी लोग गाँव-पीहर चिंतित हो उठे।

कवि कहता है कि निम्मो की उम्र ही क्या हुई थी? वह तो तीम वर्ष की प्रौढ़ा नारी थी। इस दुनिया से वह आगे ही चली गयी जबकि उसे अभी कम से कम 30 वर्ष और अधिक यहाँ रहना चाहिए था। यहाँ कवि निम्मो की मौत पर पीड़ित और चिंतित है। इसी कारण मृत्यु के पूर्व निम्मो के मरने से कवि अत्यधिक दुखी है। वह निम्मो के मरने को लेकर अत्यधिक संवदेनशील है।

असामयिक उम्र से पहले ही निम्मो का मर जाना कवि के लिए पीड़ादायक है। यही निम्मो का मूल दर्द था कि वह अपनी पूरी जिन्दगी बिना जिए ही काल-कवलित हो गयी।

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काल ने मृत्यु से पूर्व ही उसे अपने जबड़ा में कस लिया। यहाँ निम्मों की असामयिक और पूरी उम्र बिना भोगे ही मर जाना कवि के लिए सर्वाधिक पीड़ादायी है।
इस प्रकार निम्मो भारतीय समाज की प्रबल प्रतीक के रूप में कविता में विद्यमान है। लाखों-करोड़ों निम्मो, पूरी जिन्दगी बिना भोगे ही प्रतिवर्ष मौत के मुंह में चली जाती है।

नीचे लिखे पद्यांशों को सावधानीपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. हमें मालूम था
लानतों, गाली, लात, घूसों के बाद
लेटी हुई ठंडे फर्श पर
गए रात जब
उनकी आँखें मूंदती थीं
एक कंपन
पूरी धरती पर
पसर जाता था
उसकी थमी हुई हिचकियाँ
उसके पीहर तक
चली आती थीं
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर यह बताएं कि निम्मो को कौन-सी यातनाएँ दी जाती थीं?
(ग) उन यातनाओं का कहाँ और क्या प्रभाव पड़ता था?
(घ) निम्मो की थमी हुई हिचकियों के बारे में कवि ने क्या कहा है?
(ङ) एक कपंन पूरी धरती पर पसर जाता था” पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि-विजय कुमार, कविता-निम्मो की मौत पर

(ख) कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में निम्मो को दी जानेवाली यातनाओं का उल्लेख करते हुए यह लिखा है कि निम्मो को प्रताड़ित किया जाता था। उसे गालियाँ दी . जाती थी, उसकी पिटाई की जाती थी और रात में बिना किसी बिछावन के उसे ठंडे एवं खुले फर्श पर सुलाया जाता था। खाने के लिए उसे सूखी रोटी और तीन दिन पहले का बना हुआ बासी साग दिए जाते थे। वह किसी से अपने कष्ट का बयान भी नहीं कर सकती थी।

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(ग) निम्मो उन यातनाओं की शिकार होकर शरीर और मन दोनों के तल पर घायल थी। कवि ने यहाँ अनुमान किया है कि उस कष्ट और पीड़ा में इतनी गहराई थी कि हर रोज एक घाव उसकी देह में जरूर लगता होगा। लेकिन वह किसी को दिखाई नहीं पड़ता था। वह बेचारी तो अपना दु:ख कहीं बयान करने की स्थिति में भी नहीं थी। अपनी इन यातनाओं के निवारण के लिए वह प्रभु से प्रार्थना भी करती होगी तो नींद में ही।

(घ) यातनाओं से पीड़ित बेचारी निम्मो रात्रि के समय पीड़ा और कष्ट के बढ़ जाने के कारण रोती रहती थी। करुण क्रंदन करती हुई बेचारी हिचकियाँ भी लेती रहती थीं। हिचकियों की आवाज में काफी दर्द था, काफी पीड़ा थी। उसकी हिचकियों की आवाज इतनी करुण कातर थी और इतनी दर्द-भरी थी कि उसका संदेश उसके नैहर तक पहुँच जाता था, जबकि वह बेचारी टेलीफोन और चिट्ठी के माध्यम से अपनी माँ के पास चाहकर भी कुछ खबर नहीं भेज पाती थी।

(ङ) निम्मो घरेलू नौकरानी के रूप में अपनी मालकिन और मालिक के यहाँ बड़ी निष्ठा के साथ कार्य करती रहती थी। फिर भी उसे गालियाँ दी जाती थीं। उसे लात और घूसों से पीट-पीटकर प्रताड़ित किया जाता था। जब रात गुजरती थीं तब वह बेचारी नंगे एवं ठंडे फर्श पर सोने के लिए बाध्य की जाती थी। संवेदनशील कवि निम्मो को इस कष्ट की स्थिति में देखकर यह महसूस करता था कि उसका कष्ट पूरी धरती पर कंपन के रूप में मानो पसर गया हो।

2. हर रोज
एक अनुपस्थित घाव
उसके शरीर के भीतर
कहीं रहा होगा
और शायद कुछ अनकही प्रार्थनाएं नींद में
यह शरीर जो तीस बरस से
इस दुनिया में था
और तीस बरस उसे रहना था यहाँ
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) “एक अनुपस्थित घाव उसके शरीर के भीतर रहा होगा”।
कथन का अर्थ स्पष्ट करें।
(ग) यहाँ कवि ने प्रार्थनाओं को अनकही क्यों कहा है? इसका अर्थ स्पष्ट करें।
(घ) निम्मो की उम्र का लेखा-जोखा कवि ने किस रूप में किया है?
(ङ) प्रस्तुत पद्यांश में अभिव्यक्त निम्मो के दर्द का परिचय दें।
उत्तर-
(क) कवि-विजय कुमार, कविता-निम्मो की मौत पर

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(ख) निम्मों दी जानेवाली कष्ट-भरी यातनाओं से अतिशय पीड़ित थी। संवेदनशील कवि उसकी पीड़ा को समझ और अनुभव कर रहा था। निम्मो के इस भयंकर कष्ट को देखकर भावुक कवि यह अनुभव करता था कि हर रोज एक कष्टकर घाव उसकी देह में कहीं-न-कहीं जरूर लगता होगा जो अदृश्य स्थिति में । था। अर्थात् उसकी पीड़ा का घाव शरीर के तल पर नहीं, बल्कि उसके मन के तल पर उगा हुआ था। ऐसा घाव विशेष कष्टदायी होता है।

(ग) कष्ट की भयावहता की स्थिति में बेचारी निम्मो उस कष्ट से मुक्ति पाने के लिए प्रभु से जरूर प्रार्थना करती होगी। लेकिन उस निरीह की प्रार्थना भला’ सुननेवाला कौन था। इसलिए वह मन-ही-मन प्रार्थना करने के लिए बाध्य थी। कवि कहता है कि वह बेचारी बोलकर नहीं, बल्कि मौन रहकर ही प्रार्थना करती थी। बेचारी प्रार्थना नींद में ही करती थी, इसलिए उसकी प्रार्थनाएँ अनकही रह जाती थीं। जाग्रतावस्था में वह प्रार्थना करने के लिए सोचती भी थीं तो वह प्रार्थना अंदर-ही-अंदर रह जाती थी सपनों में ही प्रकट होने के कारण प्रार्थना अनकही रह जाती थी।

(घ) सामान्य रूप से मनुष्य की आयु साठ वर्ष की मानी जाती है। इस दृष्टि से निम्मो को भी इस धरती पर साठ वर्ष तक रहना था। लेकिन उसके भाग्य की विडंबना तो कुछ और ही थी। उसे इतनी यातनाएँ दी गईं और इतना शोषित तथा पीड़ित किया गया कि वह बेचारी तीस वर्ष की अवस्था में ही भरी जवानी में इस संसार से विदा हो गई। कवि के अनुसार उसे कम-से-कम तीस वर्ष तक और भी जीना था। काश। उस बेचारी को तीस वर्ष तक और जीने के लिए अपेक्षित साधन मिला होता।

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(ङ) विविध यातनाओं से पीड़ित बेचारी निम्मो की व्यथा-कथा का क्या परिचय दिया जा सकता है? उसकी सीमाहीन पीड़ा, कल्पनातीत और परिचयातीत थी। उसकी शारीरिक पीड़ा का हाल तो यही था कि उसे भरपेट अच्छा खाना नहीं मिलता था। भोजन के नाम पर सूखी रोटी और तीन दिन पहले का बना बासी सांग ही उसके भाग्य में लिखे थे। उसे रोज गाली दी जाती थी तथा घूसों और लातों की मार से उसे प्रताड़ित किया जाता था। ठंडी नंगी फर्श पर बेचारी रातभर सिसकती, कलपती और तड़पती. रहती थी। उसके तन के नहीं, बल्कि मन के घाव बड़े गहरे थे। भय और संत्रास की मनः स्थिति में वह अपने दर्द और पीड़ा को , बताने के लिए मुँह भी नहीं खोल सकती थी। यही उसकी पीड़ा का परिचय था।