Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पर्यावरण को कैसे परिभाषित किया जा सकता है? अथवा, पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण को समस्त भूमण्डलीय विरासत और सभी संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमे वे सभी जैविक और अजैविक तत्त्व आते हैं जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 2.
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है तो क्या होता है?
उत्तर:
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनः जन्म की दर बढ़ जाती है तो पर्यावरण जीव पोषण का अपना तीसरा ओर महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 3.
निम्न को नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें –
(क) वृक्ष
(ख) मछली
(ग) पैट्रोलियम
(घ) कायेला
(ङ) लौह अयस्क
(च) जल
उत्तर:
1. नवीकरणीय संसाधन:
वृक्ष, मछली, तथा जल नवीकरणीय संसाधन हैं

2. गैर नवीकरणीय संसाधन:
पेट्रोलियम, कोयला तथा लौह अयस्क गैर नवीकरणीय संसाधन हैं।

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प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए आजकल विश्व के सामने ……… और ……….. की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्याएँ हैं।
उत्तर:
आजकल विश्व के सामने तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानक की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्यायें हैं।

प्रश्न 5.
निम्न कारक भारत में पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? ये कारक सरकार के समझ कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं?

  1. बढ़ती जनसंख्या
  2. वायु प्रदूषण
  3. जल प्रदूषण
  4. सम्पन्न उपयोग मानक
  5. निरक्षरता
  6. औद्योगीकरण
  7. वन क्षेत्र में कमी
  8. अवैध वन कटाई
  9. वैश्विक उष्णता

उत्तर:

  1. बढ़ती जनसंख्या से आवास, स्वास्थ्य, शुद्ध वायु, शुद्ध जल आदि की प्राप्ति में कठिनाइयाँ आती हैं –
    सरकार के सामने बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है।
  2. वायु प्रदूषण से कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम के लिए काफी व्यय करना पड़ता है।
  3. जल प्रदूषण से भी कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे-हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम काफी व्यय करना पड़ता है।
  4. औद्योगीकरण से शहरीकरण को बढ़ावा मिलता है। शहरों में गंदी बस्तियों का निर्माण होता है। कीमतों में वृद्धि होती है।
  5. अवैध वन कटाई से वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बाढ़ आने लगती है। झरने आदि सूख जाते हैं। जलवायु में ग्रीष्मता आ जाती है। वन्य जीव कम हो जाते हैं आदि। अन्य कारकों का दुष्परिणाम इसी प्रकार लिखा जा सकता है।

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प्रश्न 6.
पर्यावरण के क्या कार्य है?
उत्तर:
पर्यावरण के निम्नलिखित कार्य होते हैं –

  1. पर्यावरण नवीनीकरण और गैर-नवीनीकरणीय संसाधनों की पूर्ति करता है।
  2. यह अवशेष को समाहित करता है।
  3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है।
  4. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य।

प्रश्न 7.
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।
उत्तर:
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी कारक –

  1. वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि
  2. अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे के निष्कर्षण
  3. खेती-बाड़ी
  4. वन भूमि का अतिक्रमण
  5. वनों में आग और अत्यधिक चराई
  6. कृषि रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे रासायनिक खाद और कीटनाशक

प्रश्न 8.
समझायें कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों का अवसर लागत उच्च क्यों होती है?
उत्तर:
अवसर लागत का अधिक होना (High Opportunity Cost):
जब पर्यावरण दूषित हो जाता है तो विकास के क्रम में नदियों और अन्य जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं और सूख जाते हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन जाती है। इसके साथ नवीनीकरण और गैर-नवीकरण संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक संसाधन लुप्त हो गए हैं और हम नए संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसन्धान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए मजबूर हैं।

वायु तथा जल की गुणवत्ता में कमी आई है। दूषित जल तथा वाय में साँस और जल संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति की ओर गम्भीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करना पड़ा। इस प्रकार हम देखते हैं कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत अधिक होती है।

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प्रश्न 9.
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा रहे हैं –
1. ग्रामीण क्षेत्रों में एल.पी.जी., गोबर गैस:
गाँवों में सहायिकी द्वारा कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त गोबर संयंत्र आसन ऋण और सहायिकी देकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) के ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति प्रायः तीव्र होती है वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्तकी जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता।

4. फोटो सेल द्वारा सौर शक्ति:
भारत में सूर्य किरण के माध्यम से सौर ऊर्जा भारी मात्रा में उपलब्ध है। हम इसका प्रयोग विभिन्न तरीकों से करते हैं। इससे हम कपड़े, अनाज तथा अन्य कृषि उत्पाद सुखाते हैं। सर्दी कमें सूर्य किरण का उपयोग हम गरमाहट के लिए करते हैं। अब फोटो वोल्टिक सेलों की सहायता से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

5. लघु जलीय प्लांट:
लघु जलीय प्लांट पहाड़ी इलाकों में लगाकर बिजली पैदा की जा रही है जिसका प्रयोग स्तर पर किया जा रहा है। ये प्लांट (प्रखर प्लांट) पर्यावरण के लिए हितकर हैं।

6. पारम्परिक ज्ञान व व्यवहार:
पारम्परिक रूप से भारतीय पर्यावरण के निकट आ रहे हैं। वे पर्यावरण के एक अंग के रूप में रहे हैं न कि उसके नियंत्रक के रूप में। आजकल हम अपनी पारम्परिक प्रणालियों से दूर हो गए हैं जिससे हमारे पर्यावरण और हमारी ग्रामीण विरासत को भारी हानि पहुँची है। अब हम पारम्परिक ज्ञान की ओर ध्यान दें रहे हैं। आजकल सभी सौन्दर्य उत्पाद जैसे बालों के लिए तेल, टूथपेस्ट, शरीर के लिए लोशन चेहरे की क्रीम इत्यादि हर्बल उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं अपितु उनसे कोई हानि नहीं होती।

7. जैविक कंपोस्ट खाद:
पिछले पाँच दशकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में हमने जैविक कंपोस्ट खाद की अवहेलना की और पूरी तरह रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे। इनसे हमें कई हानियाँ हुईं। भूतल जल प्रणाली दूषित हो गई। अतः अब जैविक कंपोस्ट खाद का प्रयोग किया जाने लगा है। देश के कुछ भागों में जानवर इसलिए पाले जा रहे हैं जिससे वे गोबर दे सकें।

8. जैविक कीट नियन्त्रण:
हरित क्रांति के पश्चात् अधिक उत्पादन के लिए देश में रासायनिक कीटनाशक का अधिक से अधिक प्रयोग होने लगा। इससे कई प्रतिकूल प्रभाव पड़े। भोज्य पदार्थ दूषित हो गए। दूध, माँस और मछलियाँ दूषित पाई गईं। मृदा जलाशय यहाँ तक की भूतल जल भी कीटनाशकों के कारण प्रदूषित हो गए।

इस चुनौती का सामना करने के लिए अब बेहतर नियन्त्रक विधियों को बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें एक उपाय पौधों के उत्पाद पर आधारित कीटनाशकों का उपयोग है। नीम के पेड़ इसमें काफी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जानवर और पक्षियों के बारे में जागरूकता बढ़ी है जो कीट नियन्त्रण में सहायक हैं।

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प्रश्न 10.
“भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है।” इस कथन के समर्थन में तर्क दें।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता (Excessive natural resources in India) इस विषय में कोई दो मत नहीं हैं कि प्रकृति भारत पर बहुत ही कृपालु है। प्रकृति ने भारत की गोद को प्राकृतिक संसाधनों से भर रखा है। भारत की भूमि उच्च गुणवत्ता वाली है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। यहाँ हरे-भरे वन हैं। यहाँ की मिट्टी काफी उपजाऊ है। यहाँ पर कई प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। देश में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% उपलब्ध है। हमारे देश के विभिन्न भागों में बॉक्साइट, ताँबा, हीरा, सीसा, भूरा कोयला, मैंगनीज जिंक, यूरेनियम इत्यादि भी मिलते हैं। हिन्द महासागर का विस्तृत क्षेत्र है। यहाँ पर पहाड़ों की श्रृंखलाएँ हैं।

प्रश्न 11.
क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर:
हाँ, पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है। इसका कारण यह है कि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं, में पर्यावरण संसाधनों की माँग पूर्ति से कम थी। प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीलर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दर से थी। इसलिए पर्यावरण उत्पन्न नहीं हुई थी परन्तु जनसंख्या विस्फोट और जनसंख्या की बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औद्योगिक क्रान्ति के आगमन से स्थिति बदल गई है। परिणामस्वरूप उत्पादन और उपभोग के लिए संसाधनों की माँग संसाधनों की पुनः सृजन की दर से बहुत अधिक हो गई है। यह प्रवृत्ति आज भी जारी है। अब हमारे सामने पर्यावरण संसाधनों और सेवाओं की माँग अधिक है परन्तु उनकी पूर्ति सीमित है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है।

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प्रश्न 12.
इनके दो उदाहरण दें –

  1. पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग
  2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग

उत्तर:
1. पर्यावरणीय संसाधनों का अतिप्रयोग:
(क) कोयला
(ख) पेट्रोलियम

2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग:
(क) जल
(ख) पेट्रोलियम

प्रश्न 13.
पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण चार आवश्यक क्रिया करता है –
1. यह संसाधनों की पूर्ति करता है, जिसमें नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधन सम्मिलित होते हैं। नवीकरण-योग्य संसाधन वे हैं जिनका उपयोग संसाधन की पूर्ति निरंतर बनी रहती है। नवीकरणीय संसाधनों के उदाहरणों में वनों में पेड़ और समुद्र में मछलियाँ हैं। दूसरी ओर, गैर-नवीकरण योग्य संसाधन वे हैं जो कि निष्कर्षण और उपयोग करने पर समाप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन।

2. यह अवशेष को समाहित कर लेता है।

3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य। पर्यावरण इन कार्यों को बिना किसी व्यवधान के तभी कर सकता है, जब तक कि ये कार्य उसको धारण क्षमता की सीमा में है।

4. इसका अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इनके पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है। जब ऐसा नहीं होता है तो पर्यावरण संकट उत्पन्न होता है। पूरे विश्व में आज यही स्थिति है।

विकासशील देशों में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है। अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं सृजित अवशेष पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है।

अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं और सृजित अवशेष पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के बाहर हैं। अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है। इसके कारण ही आज हम पर्यावरण संकट की दहलीज पर खड़े हैं।

विकास के क्रम में नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषितं हुए हैं और सूख गए हैं इसने जल को एक आर्थिक वस्तु बना दिया है। इसके साथ ही नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक महत्त्वपूर्ण संसाधन विलुप्त हे गए हैं और हम नये संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसंधान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए तत्पर हैं।

इसके साथ जुड़ी है पर्यावरण अपक्षय की गुणवत्ता की स्वास्थ्य लागत। जल और वायु में गुणवत्ता की गिरावट (भारत में 70 प्रतिशत जल प्रदूषित है) ये साँस और जल-संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक पर्यावरण मुद्दों जै, वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करन पड़ा। अत: यह स्पष्ट है कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत बहुत अधिक है।

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प्रश्न 14.
पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति माँग के उत्क्रमण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण के कई कार्य हैं। उनमें एक कार्य संसाधनों का उपभोग करती है। बढ़ती हुई जनसंख्या तथा विकसित देशों के समृद्ध उपभोग से संसाधनों की माँग में वृद्धि होती जाती है और बढ़ते-बढ़ते यह संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है। जब संसाधनों की माँग संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है तो ऐसी स्थिति को पर्यावरण की पूर्ति माँग अतिक्रम कहते हैं। पूर्ति माँग अतिक्रमण की स्थिति में पर्यावरण जीवन पोषण का अपना तीसरा और महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल हो जाती है और इससे पर्यावरण संकट पैदा होता है। पूरे विश्व में आज भी यही स्थिति है।

प्रश्न 15.
वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।
उत्तर:
वर्तमान पर्यावरण संकट-पर्यावरण संकट का नवीन परिकल्पना है। विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट नहीं था। उस समय पर्यावरण संसाधनों की माँग और सेवाएँ उनकी पूर्ति से बहुत कम थी अर्थात् प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीतर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दरे से कम थी।

अत: पर्यावरण संकट नहीं था, परन्तु आज विपरीत परिस्थिति हो गई है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है। वायु तथा जल प्रदूषित हो गए हैं। नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषित और सूख गए हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन गई है। अवसर लागत में वृद्धि हो गई है। वायु प्रदूषण तथा ध्वनि के फलस्वरूप अनेक बीमारियों ने जन्म लिया है। लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

प्रश्न 16.
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो यह निर्धनता जनित है और दूसरे जीवन स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?
उत्तर:
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभाव-भारत खनिज पदार्थों के मामलों में एक धनी देश है। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुरता में पाए जाते हैं। यहाँ भूमि की गुणवत्ता उच्च है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। खेती के लिए काफी भूमि है परन्तु भारत में विकास गतिविधियों के फलस्वरूप तथा जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होने पर प्राकृतिक संसाधनों पर बदाव पड़ रहा है।

भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा में हो रहा है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि चराई, मानव बस्तियों और उद्योगों के प्रतिस्पर्धा उपभागों से देश के निश्चित भू-संसाधनों पर भारी प्रभाव पड़ा है। देश में प्रति व्यक्ति जंगल भूमि केवल 0.08 हेक्टेयर है जबकि आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह यह संख्या 0.47 हेक्टेयर होनी चाहिए।

भारत में शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण बहुत अधिक है। भारत सकार के अनुसार प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलयिन टन पोषक तत्त्वों की हानि होती है। नदियाँ और उपनदियाँ शीघ्र सूख रही हैं और वर्षा की मात्रा भी अनियमित हो गई हैं। ऐसी बीमारियाँ और कीटाणु जो पहले नहीं थे, फसलों को हानि पहुँचा रहे हैं। यह कथन बिल्कुल सत्य है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो निर्धनता जनित है और दूसरे स्तर में सम्पन्नता का कारण भी है।

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प्रश्न 17.
धारणीय विकास क्या है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से होता है जिसमें वर्तमान जनसंख्यया की आपूर्ति तो होती है, किन्तु भावी पीढ़ी (Generation) के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों को पोषण होता है। धारणीय विकास की अवधारणा वर्तमान पीढ़ी तथा भावी दोनों के हितों की ओर ध्यान देती है।

धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करें तथा भावी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे। धारणीय विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि की जानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रयोग करना चाहिए। पर्यावरण को शुद्ध रखना चाहिए और अर्थव्यवस्था को प्रदूषण से बचना चाहिए।

प्रश्न 18.
अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।
उत्तर:
1. गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतो का प्रयोग-गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के अन्तर्गत हम गोबर गैस प्लांट का प्रयोग कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रायः लकड़ी उपले और अन्य जैविक पदार्थों का प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। इससे वन विनाश, हरित-क्षेत्र में कमी, मवेशियों केक गोबर का अपव्यय और वायु प्रदूषण जैसे अनेक प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके अतिरिक्त गोबर गैस संयंत्र आसान ऋण देकर उपलब्ध कराये जा रहे है। जहाँ एक तरल पेट्रोलियम गैस का संबंध है, यह एक स्वच्छ ईंधन है जो कि प्रदूषण को काफी हद तक कम करता है। इसमें ऊर्जा का अपव्यय भी न्यूनतम होता है। गोबर गैस संयंत्र को चलाने के लिए गोबर को संयत्र में डाला जाता है और उससे गैस का उत्पादन होता है, जिसका ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। जो बच जाता है, वह एक बहुत की अच्छा जैविक उर्वरक और मृदा अनुकूलक है।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्चदाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्चदाब प्रकृतिक गैस (CNG) को ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति आमतौर पर तीव्र होती है, वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्त की जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं डालता। हवा के साथ-साथ टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा होती है।

4. लघु जलीय प्लांट:
पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग सभी जगहों में झरने मिलते हैं। इन झरनों में से अधिकांश स्थायी होते हैं। मिनिहाइल प्लांट इन झरनों की ऊर्जा से छोटी टरबाइन चलाते हैं। टरबाइन से बिजली का उत्पादन होता है, जिसका प्रयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। इस प्रकार के पावर प्लांट पर्यावरण के लिए हितकर होते हैं, क्योंकि जहाँ वे लगाए जाते हैं वहाँ भू-उपयोग की प्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं करते। इसका यह भी अर्थ है कि ऐसे प्लांटों के उपयोग से बड़े-बड़े संचरण टावर (Tansmission tower) और तारों की इसमें जरूरत नहीं होती है और संचरण की हानि को रोका जा सकता है।

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प्रश्न 19.
धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।
उत्तर:
धारणीय विकास की परिभाषा देते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन में कहा गया है कि धारणीय विकास ऐसा है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता बिना पूरा करे। इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि हमें ऐसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकतायें तो पूरी हों परन्तु भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता चाहिए। वर्तमान भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के पास प्रचुर मात्रा में संसाधन होने चाहिए।

हमें ऐसे विकास की आवश्यकता है जो भावी पीढ़ियों को जीवन की संभावित औसत गुणवत्ता प्रदान करे जो कम से कम वर्तमान पीढ़ी के द्वारा उपभोग की गई सुविधाओं के बराबर हों। ब्रुटलैण्ड कमीशन ने भावी पीढ़ी को एक व्यवस्थित भूमण्डल प्रदान करें। दूसरे शब्दों में वर्तमान पीढ़ी की आगामी पीढ़ी द्वारा एक बेहतर पर्यावरण उत्तराधिकार के रूप में सौंपा जाना चाहिए। कम से कम हमें आगामी पीढ़ी के जीवन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली परिसम्पत्तियों का भण्डार छोड़ना चाहिए जो कि हमें उत्तराधिकारी के रूप में प्राप्त हुआ है।

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संसाधनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
संसाधनों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. नवीनीकरणीय योग्य संसाधन और
  2. गैर नवीकरणीय योग्य संसाधन

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प्रश्न 2.
नवीनीकरणीय योग्य संसाधन किन्हें कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
नवीकरणीय योग्य संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका उपयोग संसाधन के क्षेत्र में समाप्त होने की आशंका के बिना किया जा सकता है अर्थात् संसाधनों की आपूर्ति निरन्तर बनी रहती है। जैसे-वन, जल, सूर्य का प्रकाश आदि।

प्रश्न 3.
गैर नवीकरणीय संसाधन किन्हें कहते हैं? उदारहण दें।
उत्तर:
गैर:
नवीकरणीय संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जो कि निष्कर्षण और उपभोग में समाप्त हो जाते हैं। जैसे-जैसे इन संसाधनों का प्रयोग किया जाता है, वैसे-वैसे इनके भण्डार कम होते जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन आदि।

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प्रश्न 4.
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री जैविक और अजैविक घटकों के बीच अन्तः सम्बन्ध है।

प्रश्न 5.
जैविक और अजैविक तत्त्वों के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. जैविक तत्त्व: पक्षी, पशु तथा पौधे।
  2. अजैविक तत्त्व: हवा, पानी तथा पौधे।

प्रश्न 6.
पर्यावरण के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर:

  1. पर्यावरण संसाधनों की पूर्ति करता है जिसमें नवीकरणीय तथ गैर-नवीकरणीय। दोनों प्रकार के संसाधन होते हैं।
  2. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है।

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प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण के कारण होने वाली एक-एक बीमारी का नाम लिखें।
उत्तर:
वायु प्रदूषण से दमा की बीमारी तथा जल प्रदूषण से हैजा की बीमारी होती है।

प्रश्न 8.
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है।

प्रश्न 9.
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा से क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा का अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है।

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प्रश्न 10.
किस परिस्थिति में पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है?
उत्तर:
जब संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक हो जाता है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के बाहर होते हैं तो उस समय पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 11.
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के किन कार्यों पर भारी दबाव डाला है?
उत्तर:
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपयोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के निम्न दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है –

  1. संसाधन पूर्ति तथा
  2. अपशिष्ट विसर्जन

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प्रश्न 12.
आर्थिक विकास का क्या मुख्य लक्ष्य है?
उत्तर:
आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं व समाजों के उत्पादन को बढ़ाना है।

प्रश्न 13.
विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट क्यों नहीं उत्पन्न हुआ?
उत्तर:
क्योंकि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संसाधनों की माँग की पूर्ति से कम थी। अतः ऐसा संकट नहीं उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 14.
धारणीय विकास का लक्ष्य किस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है?
उत्तर:
धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास कस संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करे और भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं का पूरा करें।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

प्रश्न 15.
विश्व में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं। उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 16.
भारत में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 17.
धारणीय विकास कैस संभव हो पायोगा?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन, संरक्षण और परिस्थितिक पुनः जनन क्षमता को बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरीय संकटों के निवारण से धारणीय विकास संभव हो पाएगा।

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प्रश्न 18.
भारत में वनों की कटाई स्वीकार्य सीमा से कितने क्यूबिक मीटर अधिक होती है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष की कटाई स्वीकार्य सीमा से लगभग 15 मिलियन क्यूबिक मीटर अधिक होती है।

प्रश्न 19.
भारत में एक वर्ष में भूमि का क्षरण कितने प्रतिशत की दर से हो रहा है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष में भूमि क्षरण 5.3 मिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है।

प्रश्न 20.
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से तट पोषक तत्त्वों की कितनी क्षति होती है?
उत्तर:
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्त्वों की क्षति होती है।

प्रश्न 21.
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः किन कारणों से होता है?
उत्तर:
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः वाहनों उद्योगों के भारी जमाव और थर्मल पावर संयंत्रों के कारण होता है।

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प्रश्न 22.
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण क्यों है?
उत्तर:
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण इसिलए है क्योंकि यह धरातल पर वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत है और इसका प्रभाव साधारण जनता पर अधिकतम पड़ता है।

प्रश्न 23.
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का कितना प्रतिशत भण्डार उपलब्ध है?
उत्तर:
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% भण्डार उपलब्ध है।

प्रश्न 24.
भारत में पाए जाने वाले कोई पाँच खनिज पदार्थ लिखें।
उत्तर:

  1. ताँबा
  2. लोहा
  3. सोना
  4. सीसा, और
  5. मैंगनीज

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रणबोर्ड के कार्य लिखें।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण के बोर्ड के कार्य (Functions of CPCB) केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के निम्नलिखित कार्य हैं –

  1. ये बोर्ड जल, वायु और भूमि प्रदूषण से सम्बन्धित सूचनाओं का संकलन और वितरण करते हैं।
  2. ये बोर्ड सरकारों को जल प्रदूषण के रोकथाम नियन्त्रण और कमी के लिए जल-धाराओं नदियों और कुओं की स्वच्छता के संवर्धन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
  3. ये वायु की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं।
  4. ये देश में वायु-प्रदूषण के नियन्त्रण द्वारा भी सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास क्या है? उन तीन प्रकार की पूंजियों के नाम बताइए जिनका धारणीय विकास के अन्तर्गत संरक्षण किया जाता है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से है जिससे वर्तमान जनसंख्या की आवश्यकताओं की आपूर्ति तो होती है भावी पीढ़ी के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का पोषण होता है। यह अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि भावी पीढ़ी के कल्याण में वही स्तर प्राप्त हो जो आज हमें प्राप्त है।

पूंजियों के प्रकार (Types of Capital):
धारणी विकास के अन्तर्गत तीन प्रकार की पूंजियों का संरक्षण किया जाता है –

  1. प्राकृतिक पूँजी (प्राकृतिक संसाधन, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी आदि)
  2. भौतिकी पूँजी (मशीनें, औजार, पूंजी उपकरण आदि) तथा
  3. मानवीय पूँजी (शिक्षा और तकनीकी प्रगति)

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प्रश्न 3.
हमें भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण (Protection of the Interest of future generation):
स्थायी विकास की अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि वर्तमान पीढ़ी के लोगों के हितों को आधात न पहुँचे अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए।

भावी के पीढ़ी हितों के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि पिछले वर्षों में विकास के लाभों को तो बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है, जबकि विकास की लागत (विशेषकर पर्यावरण हानि की लागतों के बारे में भी सोचना चाहिए। संरक्षण के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि पिछली पीढ़ियों ने जिन अवसरों का लाभ उठाता है भावी पीढ़ियों को उसी प्रकार के अवसरों की गारंटी होनी चाहिए।

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प्रश्न 4.
प्राकृतिक संसाधनों में तेजी से बढ़ती हुई माँग के प्रभाव से कौन सी दो समस्याएँ उत्पन्न हुई है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की तेज गति से बढ़ती माँग के प्रभाव में निम्नलिखित दो समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं –
1. Taichunie net Harri ant 319ra (Scarcity of renewable resources):
जब नवीकरण संसाधनों का उपभोग एक गति से अधिक तेज हो जाता है तो प्रकृति के द्वारा उस। तेज गति से ऐसे संसाधनों की नई आपूर्ति नहीं की जा सकती। परिणामस्वरूप नवीकरणीय योग्य संसाधनों का अभाव हो जाता है।

2. प्रदूषण (Pollution):
प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते प्रयोग से प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। अनेक उत्पादन क्रियाएँ जल, वायु एवं भूमि को प्रदूषित करती हैं। लाखों करोड़ों वर्षों से पर्यावरण यह सहन करता है क्योंकि जनसंख्या सीमित थी तथा प्रकृति पर धीमा ही आघात होता था परन्तु जनसंख्या के बढ़ने के साथ ही प्रदूषण की मात्रा तेज हो गई है। बढ़ता हुआ धुआँ, रसायन, अणु शक्ति का बढ़ता प्रयोग आदि अनेक कारणों से प्रकृति पर जो आघात हो रहा है वह प्रकृति की सहन शक्ति से परे है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धारणीय विकास के आपका क्या अभिप्राय है? क्या यह वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या है या भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली संसाधनों की समाप्ति की?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास की अवधारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) में किया गया। जिसने इसे इस प्रकार परिभाषित किया – “ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता किए बिना पूरा करें।” मानवीय विकास के फलस्वरूप प्राकृतिक साधनों का बहुत अधिक शोषण होता है। प्राकृतिक संसाधनों का निरन्तर क्षरण हो रहा है। कारखानों तथा यातयात के साधनों से धुआँ उठता है तथा हानिकारक पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जो जल तथा वायु प्रदूषण की समस्या पैदा करते हैं।

अतः यह कहा गया है कि धारणीय विकास आर्थिक विकास की वह प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाये वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों दोनों के जीवन गुणवत्ता को कायम रखना जिससे आर्थिक विकास के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली दीर्घकालीन शुद्ध लाभ वर्तमान तथा भावी पीढ़ी के लिए अधिकतम हों। धारणीय विकास की अवधारणा का सम्बन्ध प्राकृतिक साधनों के कुशलतम प्रयोग से है।

यह भावी पीढ़ी की जीवन गुणवत्ता की ओर भी ध्यान देती है। यह वातावरण को दूषित होने से बने का प्रयत्न करती है। यह प्रकृति साधनों तथा पर्यावरण को इस प्रकार प्रयोग करने का परमर्श देती है जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान में ही नहीं अपितु भवष्यि में भी आर्थिक विकास की दरे को कायम रखा जा सके। धारणीय विकास वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या तथा भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाले संसाधनों के निवेश दोनों की समस्या है।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ लिखें। (Write down the main feature of Sustainable Development)
उत्तर:
धारणी विकास की प्रमुख विशेषताएँ (Main feature of Sustainable Development):
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. पर्यावरण का संरक्षण (Protection of Environment):
धारणीय विकास. पर्यावरण के संरक्षण पर जोर देता है। यह अवधारणा विकास की लागत विशेषकर पर्यावरण हानि की लागत की ओर ध्यान देती है।

2. वर्तमान भावी पीढ़ी की आवश्यकता पर ध्यान देना (Attention towards present and futuregeneration):
धारणीय विकास की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि भावी पीढ़ी को कल्याण के उसी स्तर को प्राप्त करने के अवसर मिलने चाहिए जो आज हमें प्राप्त है-दूसरे शब्दों में यह अवधारणा वर्तमान पीढ़ी और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने पर जोर देती है।

3. वितरणात्मक समानता (Distributive equality):
यह अवधारणा विभिन्न पीढ़ियों के बीच तथा एक पीढ़ी के विभिन्न वर्गों के बीच समानता पर जोर देती है। इस अवधारणा के अनुसार प्राकृतिक साधनों तथा पर्यावरण का इस प्रकार प्रयोग किए जाए जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान ही नहीं भविष्य में भी विकास की दरे को कायम (Maintain) रखा जा सके।

4. मानवीय पूंजी भौतिक पूंजी तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण (Preservation of human capital, physical capital and natural capital):
स्थायी विकस की अवधारणा इस बात पर भी जोर देती है कि मानवीय पूंजी, तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण करना चाहिए जिससे भावी पीढ़ियों को कम से कम उतना अवश्य मिल सके जितना वर्तमान पीढ़ी को विरासत में मिला है। इसके लिए संसाधनों का प्रबन्ध इस प्रकार करना चाहिए कि हम वर्तमान आवश्यकताओं की संतुष्टि के साथ-साथइन संसाधनों की गुणवत्ता को भी बढ़ा सकें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जैविक घटक में शामिल किया जाता है –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव
(c) जीव एवं निर्जीव दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी जीव

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प्रश्न 2.
अजैविक घटक में शामिल करते हैं –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव चीजें
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी निर्जीव चीजें

प्रश्न 3.
वायुमण्डल में कार्बन डाइआक्साइड की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 31 प्र.श.

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प्रश्न 4.
वायुमण्डल में मिथेन की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 149 प्र.श.

प्रश्न 5.
पिछली सदी में वायुमंडल का औसत ताप बढ़ा है –
(a) 0.6°C
(b) 1.1°C
(c) 1.0°C
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 0.6°C

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प्रश्न 6.
ओजोन परत के क्षय से कौन सी किरण पृथ्वी पर पहुँच जाती है –
(a) अवरक्त
(b) दृश्य
(c) पराबैंगनी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पराबैंगनी

प्रश्न 7.
Montreal Protocol किसके प्रयोग पर पाबंदी लगाता है –
(a) कार्बोनेट यौगिक
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक
(c) कार्बन यौगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक

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प्रश्न 8.
चिपको आन्दोलन का संबंध है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण

प्रश्न 9.
अप्पिको आन्दोलन संबंधित है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

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प्रश्न 10.
भारत दुनिया की कितनी प्र.श. आबादी का आश्रय है –
(a) 16 प्र.श.
(b) 20 प्र.श.
(c) 25 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 16 प्र.श.

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय के किस भाग में करेवा मिलते हैं ……………………
(क) उत्तर:पूर्व
(ख) पूर्वी
(ग) हिमाचल-उत्तरांचल
(घ) कश्मीर हिमालय
उत्तर:
(घ) कश्मीर हिमालय

प्रश्न 2.
लोटक झील किस राज्य में स्थित है ……………………..
(क) केरल
(ख) मनीपुर
(ग) उत्तरांचल
(घ) राजस्थान
उत्तर:
(ख) मनीपुर

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प्रश्न 3.
अंडमान द्वीप तथा निकोबार द्वीप को कौन-सी रेखा पृथक् करती है ……………………
(क) 11° चैनल
(ख) 10 चैनल
(ग) खाड़ी मनार
(घ) अंडमान सागर
उत्तर:
(क) 11° चैनल

प्रश्न 4.
डोडावेटा चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ी शृखंला में स्थित है?
(क) नीलगिरी
(ख) का मम
(ग) अनामलाई
(घ) नलामलाई
उत्तर:
(क) नीलगिरी

प्रश्न 5.
हिमालय किस प्रकार का पर्वत है?
(क) ज्वालामुखी
(ख) मोड़दार
(ग) अविशष्ट
(घ) भ्रशारेथ
उत्तर:
(ख) मोड़दार

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन-से तटीय मैदान होकर जायेगा और क्यों?
उत्तर:
लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित है। यह केरल तट से 280 किलोमीटर ने 480 – किलोमीटर दूर स्थित है। अत: केरल तट से इसकी दूरी सबसे कम 280 किलोमीटर है। इसलिए केरल के तटीय मैदान से होकर हम लक्षद्वीप सकम मय में पहुँच जायेगें।

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प्रश्न 2.
भारत में ठण्डा मरुस्थल कहाँ स्थित है ? इस क्षेत्र की मख्य श्रेणियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
कश्मीर हिमालय का उत्तरी-पूर्वी भाग, जो वहत् हिमालय और कराकोरम श्रेणियों के बीच स्थित है, एक ठण्डा मरुस्थल है। कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत श्रेणियाँ हैं जैसे-कराकोरम, लद्दाख, जाकर और बाल ।

प्रश्न 3.
पश्चिमी तटीय मैदान पर कोई डेल्टा क्यों नहीं है?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान मध्य में संकीर्ण है लेकिन उत्तर और दक्षिण में चौड़े हो जाते हैं। इसलिए इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती ।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं-एक बंगाल की खाड़ी और दूसरा अरब सागर हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप हैं। ये द्वीप 6° उत्तर से 14° उत्तर और 92° पूर्व से 94° पूर्व के बीच स्थित हैं। राँची और लबरीन्थ द्वीप, यहाँ के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीपों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार । बैरन आइलैंड नामक भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।

अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं। ये द्वीप 80° उत्तर से 12° उत्तर और 71° पूर्व से 74° पूर्व के बीच बिखरे हुए हैं। ये केरल तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है। पूरा द्वीप समूह प्रवाल निक्षेप से बना है। यहाँ 36 द्वीप हैं और इनमें से 11 पर मानव आवास हैं। मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किलोमीटर है। पूरा द्वीप समूह 11 डिग्री चैनल द्वारा दो भागों में बाँटा गया है, उत्तर में अमीनी द्वीप दक्षिण में कनानोरे द्वीप । इस द्वीप समूह पर तूफान निर्मित पुलिन है जिस पर आबद्ध गुटिकायें शिंगिल, गोलश्मिकाएँ तथा गोलाश्म पूर्वी समुद्र तट पर पाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
नदी घाटी मैदान में पाए जाने वाली महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ कौन-सी हैं? इनका विवरण दें।
उत्तर:
प्रायद्वीप भाग में बहने वाली नदी घाटियाँ उथली और उनकी प्रवणता कम होती है। पूर्व की ओर बहने वाली अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा निर्माण करती हैं। महानदी, गोदावरी और कृष्णा द्वारा निर्मित डेल्टा इसके उदारहण हैं। हिमालय और अन्य अतिरिक्त पर्वतमालाओं में तेज बहाव वाली नदियों से अपरदित ये पर्वत गॉर्ज V – आकार घाटियाँ, क्षिप्रिकाएँ व जल-प्रपात इत्यादि इसका प्रमाण हैं। इस क्षेत्र के जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है।

कश्मीर हिमालय में श्रीनगर का डल झील एक रोचक प्राकृतिक स्थल है। कश्मीर घाटी में झेलम नदी प्रौढ़ावस्था में निर्मित होने वाली विशिष्ट आकृति विसों का निर्माण करतीहै। प्रदेश के दक्षिणी भाग में अनुदैर्ध्य घाटियाँ पाई जाती हैं जिन्हें दून कहा जाता है। हिमाचल हिमालय के दो महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ शिवालिक और दून हैं। दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय की पर्वत श्रेणियाँ उत्तर से दक्षिण दिशा में तेज बहती हुई गहरे गॉर्ज बनाने वाली नदियों द्वारा विच्छेदित होती हैं। कामेंग; सुबनसरी, दिहांग, दिबांग, लोहित और तीस्ता यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं, जो बहुत से जल-प्रपात बनाती हैं।

मणिपुर घाटी के मध्य एक झील स्थित है जिसे ‘लोक ताक’ झील कहा जाता है। उत्तरी भारत के मैदान में हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे सुंदर वनन का डेल्टा। प्रायद्वीपीय पठार में बहने वाली नदियाँ टार, ब्लॉक पर्वत, भ्रंश घाटियाँ पर्वत स्कंध नग्न चट्टान संरचना, टेकरी (hummocky) पहाड़ी, शृंखला और क्वार्ट्साइट भित्तियाँ आदि का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय पूर्वी-घाट अवतरित नहीं हैं और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा अपरदित हैं। यहाँ की कुछ श्रेणियाँ जावदी पहाड़ियाँ पालकोण्डा श्रेणी, नल्लामाला पहाड़ियाँ और महेंद्रगिरि पहाड़ियाँ हैं।

मरुस्थल में बहने वाली नदियाँ थोड़ी दूरी तय करने के बाद लुप्त हो जाती हैं या किसी झील में या प्लाया में मिल जाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती। पूर्वी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ लम्बे-चौड़ें डेल्टा बनाती है। इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का डेल्टा शामिल है।

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प्रश्न 3.
यदि आप बद्रीनाथ से संदर वन डेल्टा तक गंगा नदी के साथ-साथ चलते हैं तो आपके रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएंगी?
उत्तर:
गंगा, हिमालय पर्वत में गोमुख हिमनदी से निकलती है। इस स्थान पर इसे गंगोत्री कहते हैं। 290 कि० मी० पर्वतीय प्रदेश से निकल कर हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इलाहाबाद के बाद इसमें यमुना नदी आकर मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है। इससे आगे उत्तर की गोमती, घाघरा. गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं । दक्षिण की ओर सोन नदी आकर मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक . विशाल डेल्टा तक इसकी लम्बाई 2525 किलोमीटर है। इसके किनारे पर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, वारणसी, पटना, कोलकाता आदि महत्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। यमुना भी गंगा के समानान्तर बहती है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
एटलस की सहायता से पश्चिम से पूर्व की ओर स्थित हिमालय की चोटियों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर:
पश्चिमी हिमालय में काराकोरम, नंगा पर्वत तथा पूर्वी हिमालय मे नामचा बरूआ, कंचनजंगा, मकालू और ऐवरेस्ट आदि चोटियाँ पाई जाती हैं। (चित्र 2.2 एवं 2.4 देखें।)

प्रश्न 2.
आप अपने राज्य में पाई जाने वाली स्थालाकृतियों की पहचान करें और इन पर चलाए जा रहे मुख्य आर्थिक कार्यों का विश्लेषण करें।
उत्तर:
उत्तरी भारत का मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है। इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लगभग 3200 किलोमीटर है। इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है। जलोढ़ निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है। उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बाँट सकते हैं-भामर, तराई और जलोढ़ मैदान । जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बाँटा जाता है-खादर और बांगर । भामर 8 से 10 किमी चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपाद के समानांतर फैल हुई है।

उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-बड़े शैल और गोलाश्म जमा करा देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। तराई से दक्षिण में मैदान है जो नए जलोढ़ से बना होने के कारण बाँगर और खादर कहलाता है। जैसे-बालू-रोपिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधिकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। ‘उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे-सुन्दर वन डेल्टा। हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है। गंगा नदी द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदानों में गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई जाती है। [ आर्थिम कार्यों का विश्लेषण अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।]

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अरब सागर कब अस्त्वि में आया?
उत्तर:
प्लायसीन युग में।

प्रश्न 2.
उस सागर का नाम बतायें जो हिमालय के किनारे पर स्थित था।
उत्तर:
टैथीज सागर।

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प्रश्न 3.
हिमालय किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
टर्शियरी युग में।

प्रश्न 4.
हिमालय के उत्तर में कौन-सा भू-खण्ड स्थित है?
उत्तर:
अंगारालैण्ड।

प्रश्न 5.
टशियरी युग में हिमालय के दक्षिण में स्थित भू-खण्ड का नाम बताएँ।
उत्तर:
गोंडवानालैण्ड।

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प्रश्न 6.
कश्मीर घाटी में पाई जाने वाली झील निक्षेप का नाम लिखो।
उत्तर:
करेवा।

प्रश्न 7.
दक्कन पठार की पश्चिमी सीमा का नाम बताएँ।
उत्तर:
अरावली।

प्रश्न 8.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप बताओ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 9.
चो के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र का नाम बताएँ।
उत्तर:
होशियारपुर (पंजाब)।

प्रश्न 10.
भारत में पाये जानेवाली दो रिफ्ट घाटियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती घाटियां।

प्रश्न 11.
दक्कन पठार में निर्मित लावा की सतहें कैसे बनी?
उत्तर:
लावा बहने के कारण।

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प्रश्न 12.
अरावली पर्वत किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
विन्ध्य युग में।

प्रश्न 13.
भारत का प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण कब हुआ?
उत्तर:
पूर्व कैम्बरियन युग में।

प्रश्न 14.
दक्कन पठार के पूर्वी सीमाओं के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजमहल की पहाड़ियाँ।

प्रश्न 15.
भारत का सबसे प्राचीन पठार कौन-सा है?
उत्तर:
दक्कन पठार।

प्रश्न 16.
वृहद् स्तर पर भारत के धरातल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 17.
पूर्वी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
900 मीटर।

प्रश्न 18.
अरब सागर में पाये जाने वाले मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर:
लक्षद्वीप समूह।

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प्रश्न 19.
प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ऊंची चोटी का नाम बताएँ।
उत्तर:
अनाईमुदी (2695 मीटर)।

प्रश्न 20.
पश्चिमी तटीय मैदान के दो विभागों के नाम लिखें।
उत्तर:
कोंकण तट, मालबार तट।

प्रश्न 21.
यदि आपको लक्षद्वीप तक यात्रा करनी है तो किस तटीय मैदान से गुजरेंगे?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान।

प्रश्न 22.
भारत में शीत मरुस्थल कहाँ है?
उत्तर:
लाख में।

प्रश्न 23.
पश्चिमी तट पर डेल्टे क्यों नहीं हैं?
उत्तर:
तीव्र गति वाली छोटी नदियाँ तलछट का जमाव नहीं करतीं।

प्रश्न 24.
सिन्धु गार्ज तथा ब्रह्मपुत्र गार्ज के मध्य हिमालय का क्या विस्तार है?
उत्तर:
2400 किलोमीटर।

प्रश्न 25.
हिमालय में सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
3200 किलोमीटर

प्रश्न 26.
गंगा के मैदान में तलछट की अधिकतम ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
2000 मीटर।

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प्रश्न 27.
भारत के प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
600-900 मीटर

प्रश्न 28.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप का नाम बताएँ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 29.
पश्चिमी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी हैं?
उत्तर:
1600 मीटर।

प्रश्न 30.
भारत के उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ ग्रेनाइट तथा नीस घट्टानें पाई जाती है।
उत्तर:
कर्नाटक।

प्रश्न 31.
दक्कन पठार के एलान की दिशा बताओ।
उत्तर:
दक्षिण-पूर्व।

प्रश्न 32.
प्रायद्वीपीय भारत के पूर्व में पाये जाने वाले पठार का नाम बतायें।
उत्तर:
शिलांग पठार।

प्रश्न 33.
उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ बरखान पाये जाते हैं।
उत्तर:
जैसलमेर।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत में मिलने वाले ऊँचे पर्वत शिखर तथा उनकी ऊँचाई बताओ।
उत्तर:
वृहत् हिमालय में संसार के 40 ऐसे पर्वत शिखर मिलते हैं जिनकी ऊँचाई 7000 मीटर से भी अधिक है। जैसे –

  1. एवरेस्ट (Everest) – 8848 मीटर
  2. कंचनजंगा (Kanchenjunga) – 8598 मीटर
  3. नंगा पर्वत (Nanga Parbat) – 8126 मीटर
  4. नंदा देवी (Nanda Devi) – 7817 मीटर
  5. नामचा बरवा (Namcha Barwa) – 7756 मीटर
  6. धौलागिरी (Dhaulagiri) – 8172 मीटर

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प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत को किन-किन श्रेणियों में बाँटा जाता है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत की कई श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ नामक घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। भौगोलिक दृष्टि से हिमालय पर्वत के केन्द्रीय अक्ष के समानान्तर तीन पर्वत श्रेणियाँ हैं

  • वृहत् हिमालय (Greater Himalayas)
  • लघु हिमालय (Lesser Himalayas)
  • उप-हिमालय (Sub-Himalayas)
  • या शिवालिक श्रेणी (Siwaliks)

उक्त पर्वत श्रेणियों को तीन अन्य नामों से भी पुकारा जाता है –

  • आन्तरिक हिमालय (Inner Himalayas)
  • मध्य हिमालय (Middle Himalayas)
  • बाह्य हिमालय (Outer Himalayas)

प्रश्न 3.
भारतीय पठार के प्रमुख भौतिक विभागों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय पठार की भौतिक स्थलाकृतियों में बहुत विविधता है। फिर भी इसे मोटे तौर पर निम्नलिखित भौतिक इकाइयों में बाँटा जा सकता है –

  1. दक्षिणी पठारी खंड
  2. दक्कन का लावा पठार
  3. मालवा का पठार
  4. अरावली पहाड़ियाँ
  5. नर्मदा तथा तापी की द्रोणियाँ
  6. महानदी, गोदावरी तथा कावेरी की नदी घाटियाँ
  7. संकरे तटीय मैदान

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प्रश्न 4.
वृहत् स्तर पर भारत को कितनी भू-आकृतियों इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत की तीन भू-आकृतियों विभागों के उच्चावच के लक्षणों का विकास एक लम्बे काल में हुआ है।

  1. उत्तर हिमालय पर्वतीय श्रृंखला।
  2. उत्तरी भारत का मैदान।
  3. प्रायद्वीपीय पठार।

प्रश्न 5.
दोआब से आप क्या समझते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप से पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नो नदियों के मध्य के मैदानी भाग को दोआब कहते हैं। नदियों द्वारा निक्षेप से पुरानी कांप मिट्टी के प्रदेश इन नदियों को एक दूसरे से अलग करते हैं। भारतीय उप-महाद्वीप में निम्नलिखित दोआब मिलते हैं

  1. गंगा-यमुना नदियों के मध्य दोआब।
  2. ब्यास-समलुज नदियों के मध्य जालन्धर दोआब।
  3. ब्यास रावी के मध्य बारी दोआब।
  4. रावी-चनाब के मध्य रचना दोआब।
  5. चनाब-झेलम के मध्य छाज दोआब।

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प्रश्न 6.
तराई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
हिमालय पर्वत के दामन में भाबर के मैदान के साथ-साथ का संकरा मैदान स्थित है। यह मैदान लगभग 30 किमी चौड़ा है। इस मैदान का अधिकतर भाग दलदली है क्योंकि भाबर प्रदेशों में लुप्त हुई निदयों का जल रिस-रिस कर इस प्रदेश को अत्यधिक आई कर देता है। इस प्रदेश में ऊँची घास तथा वन पाए जाते हैं। भाबर के दक्षिण में स्थित ये मैदान बारीक कंकड़ चिकनी मिट्टी से बना है। उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र में बड़े-बड़े फर्मा बनाकर कृषि की जा रही है।

प्रश्न 7.
भाबर क्या है? भाबर पट्टी के दो प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
बाह्य हिमालय की शिवालिक श्रेणियों के दक्षिण में इनके गिरिपद प्रदेश को भाबर का मैदान कहते हैं। पर्वतीय क्षेत्र में बहने वाली नदियों के मन्द बहाव के कारण यहाँ बजरी, कंकड़ का जमाव हो जाता है। इस क्षेत्र में पहुँच कर अनेक नदियाँ लुप्त हो जाती हैं। क्योंकि यह प्रदेश पारगम्य चट्टानों (Pervious Rocks) का बना हुआ है। भाबर का मैदान एक संकरी पट्टी के रूप में 8 से 16 किमी की चौड़ाई तक पाया जाता है।

प्रश्न 8.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं। डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार हैं –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

प्रश्न 9.
दून किसे कहते हैं? हिमालय पर्वत से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत की समानान्तर श्रेणियों के मध्य सपाट तलछठी वाली संरचनात्मक घाटियाँ मिलती हैं। इन घाटियों द्वारा पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे से अलग होती हैं। इन घाटियों को ‘दून’ (Doon) कहा जाता है। हिमालय पर्वत में इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं –

  • देहरादून (Dehra Dun)
  • कोथरीदून (KothriDun)
  • पाटलीदून (PatliDun)

कश्मीर घाटी को भी हिमालय पर्वत में एक दन की संज्ञा दी जाती है।

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प्रश्न 10.
भारत में भ्रंशन क्रिया (Faulting) के प्रमाण किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठीय भ्रंशन के प्रमाण सामान्य रूप से दक्षिणी पठार पर पाए जाते हैं। गोदावरी, महानदी तथा दामोदर घाटियों में भ्रशंन के प्रमाण पाए जाते हैं। नर्मदा तथा ताप्ती नदी घाटी दरार घाटियाँ हैं। भारत के पश्चिमी तट पर मालाबार तट तथा मेकरान तट के धरातल पर भ्रंशन क्रिया के प्रभाव देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 11.
भांगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्राचीन जलोढ़ मिट्टी के बने ऊँचे मैदानी प्रदेशों को भांगर कहते हैं। इन उच्च प्रदेशों में नदियों की बाढ़ का जल पहुँच नहीं पाता। इस प्रदेश की मिट्टी में चीका मिट्टी रेत, तथा कंकड़ पाए जाते हैं। भारत के उत्तरी मैदान में नदियों द्वारा जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप से भांगर प्रदेश की रचना हुई है।

प्रश्न 12.
भारत के किसी एक भौतिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर:
भू-वैज्ञानिक संरचना तथा धरातलीय स्वरूप के आधार पर भारत को तीन भौतिक विभागों में वर्गीकृत किया जाता है –

  • दक्षिण का प्रायद्वीप पठार।
  • उत्तर की विशाल पर्वतमाला।
  • दोनों के बीच स्थित विस्तृत मैदान।

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प्रश्न 13.
हिमालय से निकलने वाली नदियां सततवाहिनी क्यों हैं?
उत्तर:

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियों का उदगम् बर्फीले प्रदेशों में होते हैं।
  2. इन निकलने वाली नदियों में सालोभर जल प्रभावित होते हैं?
  3. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वर्षा द्वारा भी जल ग्रहण करती हैं। जैसे गंगा सिन्ध. ब्रह्मापुत्र प्रमुख सततवाहिन नदियाँ हैं, जिनके किनारे भारी मानव बसे हुए हैं और प्रमुखता
  4. से कृषि कार्य के साथ उद्योगों ने भी अपनी महत्त बनायी है।

प्रश्न 14.
बांगर तथा खादर प्रदेश में क्या अन्तर है?
उत्तर:
बांगर तथा खादर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 15.
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 16.
भारतीय पठार तथा हिमालय पर्वत के उच्चावच के लक्षणों में वैषम्य , बताइए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत तथा भारतीय पठार की भू-आकृतियों की इकाइयों के भौतिक लक्षणों में काफी अन्तर पाए जाते हैं।
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प्रश्न 17.
“पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों की एक क्रमिक शृंखला पाई जाती है।”
उत्तर:
हिमालय पर्वत में कई पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ या घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। पश्चिमी हिमालय में ये श्रेणियाँ स्पष्ट क्रम से दिखाई देती हैं। पंजाब के मैदानों के पश्चात पहली श्रेणी शिवालिक की पहाड़ियों के रूप में या बाह्य हिमालय के रूप में मिलती हैं। इसके पश्चात् सिन्धु नदी की सहायक नदियों की घाटियों हैं। दूसरी वेदी (stage) के रूप में पीर-पंजाल तथा धौलागार की घलु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाल तथा महान् हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी की लघु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाली की जास्कर श्रेणी पाई जाती है। इससे आगे लद्दाख तथा काराकोरम की पर्वत श्रेणियाँ हैं जिसके मध्य सिन्धु घाटी मिलती है।

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प्रश्न 18.
पश्चिमी तट पर अच्छी बंदरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों है?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  1. पश्चिमी तट अधिक कटा-फटा है जबकि पर्वी तट कम कटा-फटा है।
  2. पश्चिमी तट पर अधिक लैगून है जबकि पूर्वी तट पर कम है।
  3. यहाँ तीव्रगामी नदियाँ बहती है जबकि पूर्वी तट पर महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, जैसी बड़ी नदी है जो डेल्टाओं का निर्माण करती है।
  4. यहाँ सँकड़ा मैदान है जबकि पूर्वी तट पर चौड़ा मैदान है। इसलिए पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहों तथा पूर्वी तट पर बड़े-बड़े डेल्टा है।

प्रश्न 19.
जलचक्र का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर:
सूर्य ताप से महासागरों के जल वाष्पित होकर वायुमंडल द्वारा उठा लिया जाता है। यह जल अंततोगत्वा संघनित होता है और भूपृष्ठ को वर्षा, ओले ओस, हिम अथवा बजरी के रूप में लौटा दिया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र में निम्नलिखित की स्थिति दिखाए –

  1. थार मरुस्थल
  2. तटीय मैदान
  3. कंचनजंगा
  4. नाथुला और काराकोरम
  5. शिवालक पर्वत श्रेणी
  6. मेघालय का पठार
  7. दक्कन ट्रैप
  8. विंध्व और सतुपड़ा की पर्वत श्रेणियाँ

उत्तर:
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प्रश्न 2.
“उप महाद्वीप के वर्तमान भू-आकृति विभाग एक लम्बे भूगर्भिक इतिहास के दौरे में विकसित हए हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप की तीनों भू-आकृतिक इकाइयां इतिहास के लम्बे उत्तार चढ़ा के दौरे में विकसित हुई हैं। इनके निर्माण के सम्बन्ध में अनेक प्रकार के भू-वैज्ञानिक प्रमाण दिए जाते हैं फिर भी अतीत अपना रहस्य छिपाए हुए है। इनकी रचना प्राचीन काल से लेकर कई युगों में क्रमिक रूप में हुई है।

1. प्रायद्वीपीय पठार – इस पठार की रचना कैम्ब्रियन पूर्व युग में हुई है। कुछ विद्वानों की धारणा है कि यह उत्खण्ड (HORST) है जिसका उत्थान समुद्र से हुआ है। इस पठारके पश्चिमी भाग में अरावली पर्वत का उत्थान दक्षिण में नाला मलाई पर्वतमाला का एक उत्थान विंध्य-महायुग में हुआ है। इस स्थिर भाग में एक लम्बे समय तक भू-गर्भिक हलचलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ भागों में धरातल पर भ्रंश पड़ने के कारण धसाव के प्रमाण मिलते हैं। हिमालय के निर्माण के पश्चात् पठार के उत्तर:पश्चिम भाग के धंसने के कारण अरब सागर का निर्माण प्लीओसीन युग में हुआ है।

इस पठार को विशाल गोंडवाना महाद्वीप का भाग माना जाता है। इसका कुछ भाग अब भी उत्तरी मैदान के नीचे छिपा हुआ है। हिमालय के उत्थान के समय पठार के उत्तर:पश्चिमी भाग में विस्तृत रूप से ज्वालामुखी उदगार हुए जिससे दक्कन लावा क्षेत्र (Deccan Trap) का निर्माण हुआ। पठार के पश्चिम भाग में निमज्जन से पश्चिमी घाट ऊपर उभरे। दूसरी ओर पूर्वी तट शान्त क्षेत्र रहे।

2. हिमालय पर्वत – यह एक युवा तथा नवीन मोड़दार पर्वत है। मध्यजीवी काल तक यह पर्वत एक भू-अभिनति द्वारा घिरा हुआ था। इसे ‘टैथीस सांगर’ कहते हैं । टर्शियरी युग में टैथीस सागर में जमा तलछटों में बलन पड़ने से हिमालय पर्वत तथा इसकी शृखंलाओं का निर्माण हुआ। उत्तरी भू-खण्ड अंगारालैण्ड की ओर से दक्षिण-भूखण्ड गोंडवाना लैण्ड की ओर दबाव पड़ा। दक्षिणी भू-खण्ड के उत्तर अभिमुखी दाबाव ने टथीस सागर में जमा तलछट को ऊँचा उठा दिया जिससे हिमालय पर्वत में वलनों का निर्माण हुआ। हिमालय पर्वत नूतन युग में तथा तीसरी अवस्था उत्तर अभिनूतन युग में हुई।

आधुनिक प्रमाणों के आधार पर ये पर्वत निर्माणकारी हलचले (Mountain Building) प्लेट-विवर्तनिकी (Plate tectonics) से सम्बन्धित हैं। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी तथा यूरेशिया प्लेट को नीचे से धक्का देने से हिमालय पर्वतमाला की उत्पत्ति हुई।

3. उत्तरी मैदान – भारत का उत्तरी मैदान हिमालय पर्वत तथा दक्षिण पठार के मध्यवर्ती क्षेत्र में फैला है। यह मैदान एक समद्री गर्त के भर जाने से बना है। इस गर्त में हिमालय पवर्त तथा दक्षिणी पठार से बहने वाली नदियाँ भारी मात्रा में मलवे का निक्षेप करती रही है। इस गर्त का निर्माण हिमालय से पर्वत के उत्थान के समय एक अग्रगामी गर्त (Fore-deep) के रूप में हुआ। इसका निर्माण प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर अभिमुख दबाव के कारण हिमालय पर्वत के समान हुआ । यह सम्पूर्ण क्षेत्र निक्षेप क्रिया द्वारा लगातार पूरी होता रहा है। यह क्रिया चतुर्थ महाकल्प तक जारी है। इस प्रकार लम्बी अवधि में भारत के वर्तमान भौगोलिक स्वरूप का विकास हुआ

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 11 समानता के लिए संघर्ष

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 11 समानता के लिए संघर्ष Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 7 Social Science समानता के लिए संघर्ष Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
मछुआरे किन बातों से परेशान थे? उन्होंने इसके लिए क्या किया?
उत्तर-
दबंगों और जमींदारों द्वारा मछुआरों का शोषण किया जा रहा था। उनसे मछली मारने के बदले पैसे लिए जाते थे। फिर सरकार द्वारा फरक्का नामक स्थान पर गंगा नदी पर बाँध दिया गया। समुद्र से गंगा नदी में मछलियों एवं जीरे का बहाव आना बंद हो गया। फलस्वरूप गंगा नदी में मछलियों की कमी हो गयी । गंगा में दोनों तरफ फैक्ट्रियाँ लग जाने से उनसे निकलने वाले कचरे से गंगा और भी प्रदूषित होने लगी। प्रदूषण की वजह से मछलियाँ मरने लगी और उनकी प्रजनन क्षमता भी कम होने लगी।

इन वजहों से मछुआरों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गयी और इन्हीं कारणों से मछुआरे परेशान थे। इसके लिए इन्होंने 1982 में कहलगाँव के कागजी टोला से संघर्ष का ऐलान किया । लम्बी नौका यात्रा, नशाबन्दी शिविर, धरना प्रदर्शन, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के प्रयास किए । जाति प्रथा तोड़ने, शराबखोरी बंद करने, जलकर की समाप्ति, महिलाओं को बराबर का हक आदि उनके प्रमुख संकल्प थे।

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प्रश्न 2.
क्या कुछ समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं ? इनके हल के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
हाँ, कुछ समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं। जैसे – असमानता की भावना, जात-पात की भावना, महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानता की भावना आदि 1 आज भी हमारे समाज में जाति को लेकर बहुत भेद-भाव होता है। उच्च जातियों द्वारा निम्न जाति के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। दलितों के साथ छुआ-छूत का व्यवहार किया जाता है।

अपने घर के नौकरों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। आज भी कई जगह लड़कियों को शिक्षित नहीं किया जाता है। महिलाओं और पुरुषों को समान नजरों से नहीं देखा जाता है, जबकि आज के दौर में महिलाएँ हर जगह पुरुषों के कधों से कंधा मिलाकर काम करती है। । इन सभी समस्याओं के विरोध में हमें आवाज उठानी चाहिए।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अपने विद्यालय या आस-पास में समानता तथा असमानता दर्शाते दो-तीन व्यवहारों को लिखें।
उत्तर-
समान दर्शाने वाले व्यवहार-

  1. मतदान।
  2. विभिन्न जातियों के बच्चों का एक ही स्कल में पढ़ना।
  3. अलग-अलग संप्रदायों के लोगों का मिलकर रहना और काम करना।

असमानता दर्शाने वाले व्यवहार-

  1. दलितों के साथ होने वाला छुआ-छूत का व्यवहार ।
  2. किसी नौकरी के आवेदन में किसी खास वर्ग को प्राथमिकता देना ।
  3. किसी खास वर्ग के लिए आरक्षण की मांग करना।

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प्रश्न 2.
क्या साइकिल वितरण, पोशाक वितरण, मध्याह्न भोजन वितरण, छात्रवृति वितरण के समय असमान व्यवहार का भाव झलकता है?
उत्तर-
नहीं, साइकिल वितरण, पोशाक वितरण, मध्याह्न भोजन वितरण, छात्रवृत्ति वितरण के समय असमान व्यवहार का भाव नहीं झलकता है। इन सभी कार्यों के वक्त जैसे साइकिल देते, पोशाक देते वक्त छात्रों के जाति या रूप-रंग, अमीरी-गरीबी आदि को नहीं देखा जाता है। सभी छात्रों को एक समान की साइकिल और पोशाकें दी जाती हैं।

मध्याह्न भोजन के दौरान भी जात-पात के आधार पर अलग-अलग बैठाकर भोजन नहीं करवाया जाता है बल्कि सभी संप्रदाय के बच्चों को एक साथ, एक जगह बिठाकर एक ही तरह का भोजन कराया जाता है। भोजन बनाने वाला भी उच्च जाति का हो ये आवश्यक नहीं है। छात्रवृत्ति देने के दौरान भी जाति को नहीं देखा जाता है।

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प्रश्न 3.
अपने इलाके के संदर्भ में कुछ संघर्ष के मुद्दों को बताएँ।
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें।

प्रश्न 4.
अपने क्षेत्र के कुछ प्रदर्शनों/आन्दोलनों में से किसी एक की चर्चा करें।
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें।

Bihar Board Class 7 Social Science समानता के लिए संघर्ष Notes

पाठ का सार संक्षेप

इस पुस्तक के सभी पाठ में हमने समानता के लिए होते संघर्षों के बारे में पढ़ा । यहाँ हमारे सामने एक बात आई कि हम सभी समान पाने की इच्छा रखते हैं यानि समानता की उम्मीद करते हैं। पर हमें किसी-न-किसी रूप में असमानता दिख ही जाती है। हमें कई बार अपनी उम्मीदों से निराश भी होना पडता है। परंतु इस निराशा के बावजूद भी लोग न्याय के लिए संघर्ष करना नहीं छोड़ते और समानता की इच्छा बनाए रखते हैं। इसका सबसे सही उदाहरण है गंगा बचाओ आंदोलन जहाँ मछुआरे ने अपने कठिनाइयों से भरे जीवन को संघर्ष के बदौलत खुशियों से भर दिया।

बिहार के लिए गंगा जीवनदायिनी है। बिहार में ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है जो गंगा आधारित सिंचाई, यातायात तथा मछली व्यवसाय से अपना जीवन-यापन करते हैं। इस वजह से यहाँ के दबंगों और जमींदारों की नजरें गंमा पर गयी। वे लोग मछली मारने वाले मछुआरों, नाव चलाने वाले मल्लाहों आदि से रकम वसूलने का प्रचलन शुरू कर दिया ।

धीरे-धीरे इस व्यवस्था ने ठेकेदारी का रूप धारण कर लिया। मछुआरों ने एक सहकारी समिति का गठन किया । अब पहले की अपेक्षा मछुआरों और मल्लाहों का और अधिक शोषण होने लगा। बड़े मछुआरों ने सहकारी समिति और ठेकेदारों से पट्टे पर घाट एवं नदी के निर्धारित क्षेत्र लिया और फिर वे छोटे मछुआरों और उससे भी छोटे मछुआरों को देने लगे। इस प्रकार मछुआरों और मल्लाहों का शोषण और भी बढ़ने लगा, उन्हें उनकी रोटी छीनती नजर आ रही थी।

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इससे मछुआरों और मल्लाहों के बीच बेचैनी बढ़ने लगी। इसी बीच सरकार द्वारा फरक्का नामक स्थान पर गंगा नदी पर बाँध दिया गया जिससे समुद्र से गंगा में मछलियों एवं जीरे आना बंद हो गया ।

जिसके फलस्वरूप गंगा में मछलियों की कमी होने लगी। इस प्रकार मछुआरों के भूखे मरने की नौबत आ गयी । गंगा के दोनों किनारों पर फैक्ट्रियाँ लगने पर उनसे निकलने वाले कचरे से गंगा और भी प्रदूषित होने लगी। प्रदूषण की वजह से मछलियाँ मरने भी लगीं और उनकी प्रजनन क्षमता भी कम होने लगी। अपने जीने के आधारों को समाप्त होता देख मछुआरों ने अपने हक के लिए 1982 से कहलगाँव के कागजी टोला से संघर्ष का ऐलान किया ।

संघर्ष के लिए उन्होंने जाति प्रथा तोड़ने, शराबखोरी बंद करने, महिलाओं को बराबर का हक आदि का संकल्प लिया। इसके अंतर्गत मछुआरों द्वारा कई संगठनों का गठन किया गया । धरना प्रदर्शन, नशाबंदी शिविर, लंबी-नौका यात्रा तथा महिलाओं के भागीदारी के प्रयास किए गए जिसका सार्थक प्रभाव पड़ा। इस आंदोलन का विस्तार गंगा के दोनों किनारों पर हुआ।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.2

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BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.2

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प्रश्न 1.
ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें POR और S क्रमशः भुजाओं AB, BC, CD और DA के मध्य-बिन्दु हैं (देखिए आकृति) AC उसका एक विकर्ण है। दर्शाइए कि-
(i) SR || AC और SR = \(\frac{1}{2}\) AC है।
(ii) PQ = SR है।
(iii) RQRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.2 1
उत्तर:
(i) यहाँ त्रिभुज ACD में, बिन्दु S, AD का मध्य-बिन्दु है तथा बिन्दु R, CD का मध्य बिन्दु है।
⇒ SR || AC और SR = \(\frac{1}{2}\) AC ……… (1) (मध्य-बिन्दु प्रमेय)

(ii) ∆ABC में, बिन्दु P, Q क्रमश: रेखा AB और BC के मध्य बिन्दु हैं।
⇒ PQ || AC और PQ = \(\frac{1}{2}\) AC ……… (2)
समो. (1) व समी. (2) से, SR = PQ.
(iii) समी. (1) ष (2) से, PQ = SR तथा PQ || SR
⇒ PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है। (∵ सम्मुख भुजाओं का युग्ण बराबर और समान्तर होत है।)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.2

प्रश्न 2.
ABCD एक समचतुर्भुज है और P, Q, R और S क्रमशः भुजाओं AB, BC, CD और DA के मध्य विन्दु हैं। दशहिए कि चतुर्भुज PQRS एक आयत है।
उत्तर:
∆ADC में, बिन्दु P और Q, क्रमश: रेखा AB और BC के मध्य विन्द्र हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.2 2
PQ || AC तथा PQ = \(\frac{1}{2}\)AC ……. (1) (मध्य-बिन्दु प्रमेय)
∆ADC में, बिन्दु और क्रमशः रेखा CD और AD के मध्य बिन्दु है।
RS || AC तथा RS = \(\frac{1}{2}\)AC …….. (2) (मध्य-विन्दु प्रगेय)
समी- (1) व (2) से,
PQ = RS तथा PQ || RS
यहाँ सम्मुख भुजाओं का युग्म बराबर और सपनर है।
अत: PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
वहीं चतुर्भुज के दोनों विकर्ण O पर प्रतियोदित है।
चतुर्भुज OMQN में,
ON || MQ (∵ PS || AC)
OM || NQ (∵ RQ || BD)
अत: OMQN सनान्तर चतुर्भुज है।
⇒ ∠MQN = ∠NQM
⇒ ∠PQR = ∠NQM = 90° (∵ विकर्ष यहाँ लम्ब है क्योंकि OMQN समचतुर्भुज है)
अतः यदि किसी चतुज का आन्तरिक कोण 90 है तो बह आयत है।

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प्रश्न 3.
ABCD एक आयत है, जिसमें P, Q, R और S क्रमश: AB, BC, CD और DA के मध्य विन्दु हैं। दर्शाइए कि चतुर्भुज PQRS एक समचतुर्भुज है।
उत्तर:
∆ABC में, बिन्दु P व Q क्रमशः भुजा AB और BC के मध्य विन्दु हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.2 3
⇒ PQ || AC तथा PQ = \(\frac{1}{2}\)AC ……. (1)
∆ACD में, बिन्दु S व R क्रमशः भुजा AD और C के मध्य विन्दु हैं।
⇒ SR || AC तथा SR = \(\frac{1}{2}\)AC …….. (2)
समी. (1) व (2) से,
PQ || SR तथा PQ = SR
यहाँ सामुख भुजाओं का युम बराबर व समान्तर है।
अत: PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है।
यहाँ AD = BC (ABCD आवत है)
⇒ \(\frac{1}{2}\) AD + \(\frac{1}{2}\)BC
⇒ AS = BQ
∆APS और ∆BPQ में,
AP = PB (P मध्य बिन्दु है।)
AS = BQ (सिद्ध किया है।)
∠PAS = ∠PBQ = 90°
SAS सर्वांगसमता गुणधर्म से,
∆APS ≅ ∆BPQ
⇒ PS = PQ
अतः PS = PQ = SR
अतः चतुर्भुज PQRS समचतुर्भुज है।

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प्रश्न 4.
ABCD एक समलम्ब है, जिसमें AB || DC है। साथ ही, BD एक विकर्ण है और E भुजा AD का मध्य बिन्दु है। E से होकर एक रेखा AB के सपाजर खींची गई है, जो BC को F पर प्रतिच्छेद करती है (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए)। दर्शाइए किा भुजा BC का मध्य-बिन्दु है।
उत्तर:
यहाँचतर्भज ABCD में.
AB || DC, EF || AB तथा E भुजा AD का मध्य विन्दु है।
माना EF विकर्म BD को G पर मिलता है।
अब, ∆DAB में,
AB || EG तथा E, AD का मध्य विन्दु है।
आत: G भुजा DB का मध्य बिन्दु होगा। (विलोम मध्य-बिन्दु प्रमेय)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.2 4
∆DBC में,
GF || DC तथा G, BD का मध्य बिन्दु है।
अत: Fभुजा BC का मध्य बिन्दु होगा। (विलोम मध्य-बिन्दु प्रमेय)

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प्रश्न 5.
एक समान्तर चतुर्भुज ABCD में E और F क्रमशः भुजाओं AB और CD के मध्य-बिन्दु हैं(देखिए आकृति) दशाइए कि रेखाखण्ड AF तथा EC विकर्ण BD को समविभाजित करते हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex Q 8.2 5
उत्तर:
यहाँ ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है।
अत: AB = CD
तथा AB || DC
⇒ \(\frac{1}{2}\)AB = \(\frac{1}{2}\)CD
⇒ AE = FC
चतुर्भुज AECF में,
AE = FC तथा AE || FC
सम्पुष भुजाओं का युग्म समान व समान्तर है।
आत: AEFC एक समानर चतुर्भुज है।
⇒ EC || AF
⇒ EQ || AP
और Q C || PF
∆DQC में,
PF || QC नया F, CD का मध्य-बिन्दु है।
अत: P, DQ का मध्य-बिन्दु है।
(विलोम मध्य-बिन्दु प्रमेष)
इसी प्रकार ∆ABP सेने पर,
Q, PB का मध्य बिन्दु है।
⇒ DP = PQ = QB
आ: AF और EC विकर्ण BD को समत्रिभाजित करते हैं।

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प्रश्न 6.
दर्शाइए कि किसी चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाले रेखाखण्ड परस्पर समद्विभाजित करते हैं।
उत्तर:
माना ABCD एक चतुर्भुज है। P, Q, R और S क्रमशः AB, BC, CD और DA के मध्य बिन्दु हैं। PR और QS एक-दूसरे को बिन्दु पर प्रतिदिन करते हैं।
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∆ABC में,
विन्दु P व Q क्रमश: भुजा AB और BC के मध्य बिन्दु है।
⇒ PQ = \(\frac{1}{2}\)AC
तथा PQ || AC …….. (1) (मध्य-विन्दु प्रमेय)
∆ACD में,
बिन्दु S व R क्रमशः भुजा AD और CD मध्य-बिन्दु है।
⇒ SR = \(\frac{1}{2}\)AC
तथा SR || AC ……… (2) (मध्य-बिन्दु प्रमेय)
समी. (1) व (2) से,
PQ || SR तथा PQ = SR
⇒ PQRS एक समान्तर चतुर्भव है।
हमें ज्ञात है कि समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
∴ समान्तर चतुर्भुज PQRS के षिकर्ण PR और QS अर्थात् चतुर्भुज ABCD की सम्मुख भुजाओं के मध्य बिन्दुओं से मिलने वाले रेखाखण्ड एक-दूसरे को समद्विभानित करते हैं।

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प्रश्न 7.
ABC एक त्रिभुज है जिसका ∠C समकोण है। कर्ण AB के मध्य बिन्दु M से होकर RC के समान्तर खींची गई रेखा AC को D पर प्रतिच्छेद करती है। दर्शाइए कि-
(i) D भुजा AC का मध्य विन्दु है।
(b) MD ⊥ AC है।
(iii) CM = MA = \(\frac{1}{2}\)AB है।
उत्तर:
(i) ∆ABC में,
बिन्दु M भुजा AB का मध्य बिन्दु है।
तथा MD || BC
अत: D भुजा AC का मध्य बिन्दु है।।
(मध्य बिन्दु प्रमेय के पितोग से)
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(ii) MD || BC
⇒ ∠ADM = ∠ACB (संगत कोण)
∠ADM = 90°
अत: MD ⊥ AC.

(iii) ∆MCD और ∆MAD में,
MD = MD (उभयनिष्ठ)
∠MDA = ∠MDC = 90°. (∵ MD ⊥ AC)
AD = DC (D, AC का मध्य बिन्दु है)
∴ SAS सर्वांगसमता गुणधर्म में,
∆MCD ≅ ∆MAD
⇒ CM = MA
M भुवा AB का मध्य बिन्दु है
अतः CM = MA = \(\frac{1}{2}\)AB.

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Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 10 चलें मण्डी घूमने

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 10 चलें मण्डी घूमने Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 7 Social Science चलें मण्डी घूमने Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
इस रेखा चित्र के अनुसार बड़े शहर की मंडी तक चावल पहुंचने के क्या-क्या तरीके हैं ?
उत्तर-
इस रेखा चित्र के अनुसार बड़े शहर की मंडी तक चावल पहुँचने के दो तरीके हो सकते हैं

  1. पहले चावल किसान के पास से चावल मिल में जाता है और फिर वहाँ से सीधे बड़े शहर के थोक विक्रेता के पास जाता है।
  2. चावल किसान के पास से छोटे पिल में जाता है, फिर वहाँ से स्थानीय छोटे व्यापारी के पास और फिर वहाँ से स्थानीय मंडी के थोक व्यापारी के पास और फिर वहाँ से बड़े शहर के थोक विक्रेता के पास जाता है।

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प्रश्न 2.
थोक और खुदरा बाजार में क्या अंतर है?
उत्तर-
थोक बाजार में किसी भी वस्तु की खरीद या बिक्री बड़े पैमाने पर होती है। यहाँ कोई भी. समान किलो या पाव के हिसाब से नहीं मिलता हे । जैसे – अगर हम थोक बाजार में चावल खरीदंगे तो वे हमें टन के हिसाब या बोरियों से मिलता है। खुदरा बाजार में किसी भी वस्तु की खरीद-बिक्री छोटे पैमाने पर ही होती है। यहाँ पर किलो या पाव के हिसाब से भी मिलता है। जैसे- अगर हमें पाव भर चावल की भी आवश्यकता हो तो हमें यहाँ पर मिल जाएगी।

प्रश्न 3.
थोक बाजार की जरूरत क्यों होती है ? चर्चा करें।
उत्तर-
कोई भी सामान किसान के पास से सीधे खदरा व्यापारियों तक नहीं पहुंच पाता है। खुदरा व्यापारियों को समान खरीदने के लिए थोक बाजार जाना होता है। मोडयों से माल सीधे थोक बाजार में आता है और वहाँ से खुदरा व्यापारियों के पास ।

थोक बाजार के होने की वजह से खदरा व्यापारियों को सामान खरीदने के मंडी नहीं जाना पड़ता, बल्कि उन्हें अपने शहर के थोक बाजार में ही सारा सामान मिल जाता है। हमें भी अगर किसी समाहरोह के लिए अधिक सामान की जरूरत होती है, तो भी थोक बाजार से सामान ले सकते हैं और अधिक मात्रा में सामान लेने पर हमें सामान कुछ सस्ता भी मिलता है।

प्रश्न 4.
छोटे किसान को चावल का कम मूल्य क्यों मिलता है?
उत्तर-
टोटे किसान को चावल का कम मूल्य मिलता है क्योंकि वे अपने चावल को चावल खरीदने वाले छोटे व्यापारी को बेच देते हैं। जिससे उन्हें – पैसे तो तुरंत मिल जाते हैं, पर उतने नहीं मिलते जितने मिलने चाहिए।

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प्रश्न 5.
इन फसलों में से दो फसलों के बाजार की कड़ियों (किसान से उपभोक्ता) का रेखा-चित्र बनाएँ, जो आपके इलाके में उगाया जाता है।

  1. गेहूँ
  2. मक्का
  3. दलहन
  4. सरसों।

उत्तर-
(i) गेहूँ-किसान के पास से → स्थानीय छोटे व्यापारी → स्थानीय मंडी के थोक व्यापारी → बड़े शहर के थोक विक्रेता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता।

(ii) सरसों-किसान के पास से → मिल में → वहाँ से तेल पेराई के लिए→ वहाँ से थोक मंडी में → बड़े शहर के थोक विक्रेता →खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता।

प्रश्न 6.
तुम्हारे आस-पास कोई मिल है क्या ? वहाँ फसल कैसे पहुँचती है ? पता लगाओ।
उत्तर-
हाँ, मेरे आस-पास में एक मिल है। वहाँ एक फसल थोक मंडी से मंगवाए जाते हैं या फिर सीधे तौर पर बड़े किसानों से ही फसल खरीद लेते हैं।

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प्रश्न 7.
सरकार द्वारा चलायी गयी नियंत्रित मंडी क्या है ? शिक्षक के साथ चर्चा करें।
उत्तर-
सरकार द्वारा चलायी गयी नियंत्रित मंडी में किसानों को अपने उत्पाद को खुली नीलामी द्वारा बेचने का मौका मिलता है। खली नीलामी द्वारा उत्पाद बेचने पर किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलता है। पर नियंत्रित मंडी की व्यवस्था न होने की वजह से किसानों को अपनी फसल स्थानीय व्यवसायियों या निजी मिलों को बेचना पड़ता है और उनकी इसी मजबूरी का फायदा उठाकर ये व्यवसायी उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं देते हैं।

प्रश्न 8.
शीतगृहों के निर्माण से किसे फायदा हो सकता है ? चर्चा करें।”
उत्तर-
शीतगृहों के निर्माण से सब्जियों एवं फलों का व्यापार करने वाले को फायदा हो सकता है। जब इनके व्यापारियों के पास सब्जियाँ या फल ज्यादा मात्रा में आ जाते हैं और उस हिसाब से उनकी खपत नहीं होती पाती है तो इस वजह से वह धीरे-धीरे या तो सूखने लगती है या फिर सड़ जाती है। इससे उनका कोई खरीददार नहीं मिलता और व्यापारियों को बहुत नुकसान होता है।

अगर. शीतगहाँ का निर्माण हो जाए तो उसमें फलों और सब्जियों को रख दिया जाएगा। जिससे फल या सब्जियाँ न तो सूखेंगी और न ही सड़ेंगी। शीत गृहों में इनका सुरक्षित भंडारण हो पाएगा और व्यापारियों को नुकसान भी नहीं होगा।

प्रश्न 9.
बिहार में फल प्रसंस्करण आधारित उद्योग लगाने की क्या-क्या संभावनाएं हैं? चर्चा करें।
उत्तर-
बिहार में फल प्रसंस्करण आधारित उद्योग लगाने की संभावनाएँ अधिक है, क्योंकि बिहार में फलों की पैदावार बहुत अच्छी होती है। भारत में कुल लौची उत्पादन का 80 प्रतिशत बिहार में ही होता है। यहाँ केले और गन्ने की उपज भी अच्छी होती है। यहाँ फल प्रसंस्करण आधारित उद्योगों को कच्चा माल आसानी से प्राप्त हो जाएगा। इन उद्योगों में इन फलों से जूस, जेली, जैम, मधु आदि बनाए जाते हैं। इससे लोगों को कम लागत में अधिक मुनाफा होने की संभावना है।

प्रश्न 10.
अपने घर के आस-पास सर्वे करें कि पिछले 15 वर्षों में लोगों की फल को खपत में क्या-क्या परिवर्तन आए और क्यों ?
उत्तर-
पिछले 15 वर्षों में लोगों की फल की खपत में बहुत परिवर्तन आया है। लोगों के बीच फल की खपत बहुत कम हो गयी। बढ़ती महंगाई के चलते फल इतने महंगे हो गए हैं कि अब लोग अपने भोजन में फलों को शामिल नहीं कर पाते । जितनी आमदनी थोड़ी अधिक हैं, उन लोगों की थाली में फल कभी नजर भी आ जाए। पर गरीब लोगों के लिए फल खाना मुमकिन नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में फलों के दाम में इतनी तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है कि जो लोग पहले टोकड़े के हिसाब से फल लेते थे, अब किलो के हिसाब से फल लेने को मजबूर है।

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प्रश्न 11.
स्वतंत्रता के पूर्व बिहार को देश का चीनी का कटोरा कहा जाता था। 1942-43 में राज्य में कुल 32 चीनी मिलें थीं जबकि देश मे मिर्फ 140 चीनी मिलें थीं। वहीं 2000 तक राज्य में चीनी मिलों की संख्या घटकर सिर्फ 10 रह गयी जबकि भारतवर्ष में चीनी मिलों की संख्या बढ़कर 495 हो गयी।
उत्तर-
बिहार में चीनी मिलों की संख्या घटती गयी। पहले यहाँ के गन्नों में रस बहुत अधिक होता था, जिससे कम गन्ने में भी अधिक चीनी बनता था और कम लागत में अधिक मुनाफा होता है पर आज के समय में यहाँ पैदा होने वाले गन्नों में रस बहुत कम मात्रा होता है, जिससे बहुत अधिक गन्नों से भी बहुत थोड़ा-सा चीनी बनता है। इससे लोगों को अधिक लागत में भी उतना मुनाफा नहीं होता था। उन्हें घाटा लगने लगा। सरकार की तरफ से भी चीनी मिलों को कोई प्रोत्साहन नहीं मिला । जिससे धीरे-धीरे राज्य की ज्यादातर चीनी मिलें बंद हो गयीं।

प्रश्न 12.
बिहार में चम्पारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, शाहबाहू, पूर्णिया, पटना एवं सहरसा प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं इन्हें मानचित्र में दिखाएँ।
उत्तर-
छात्र इसे स्वयं करें।

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प्रश्न 13.
बिहार में मक्का उद्योग लगाने की काफी संभावनाएं हैं। इन इकाइयों के द्वारा मक्के के विभिन्न उत्पाद जैसे – स्टार्च, बेबीकान, पॉपकार्न, कार्न-फ्लेक्स, मक्के का आटा, मुर्गियों का चारा, मक्के का तेल । आदि बनाया जा सकता है। इनके क्या फायदे नुकसान है, चर्चा
करें।
उत्तर-
इन उत्पादों से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। ये उत्पाद हमारे खाने के उपयोग में आते हैं, मुर्गियों का चारा मुर्गियों के खाने में काम आता है। इन सभी उत्पादों को खाने से हमारे सेहत को नुकसान नहीं पहुंचता है।

बिहार में मक्के की उपज अच्छी होती है, इसलिए इन उत्पादों को बनाने के लिए कच्चे माल आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। जिससे लोगों को इन उत्पादों को बनाने कम लागत आता है, मुनाफा अधिक होता है। ये उत्पाद बिहार से दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आपके अनुसार अरहर किसान से किस प्रकार आपके घरों में दाल के रूप में पहुँचता है ? दिये गये विकल्पों में से खाली बॉक्स भरें। विकल्प

  1. दाल मिल
  2. खुदरा व्यवसायी
  3. स्थानीय छोटे व्यवसायी
  4. बड़ी मंडी के थोक व्यवसायी
  5. स्थानीय मंडी के थोक व्यवसायी

उत्तर-
किसान → दाल मिल →स्थानीय छोटे व्यवसायी → स्थानीय मंडी के थोक व्यवसायी → बड़ी मंडी के थोक व्यवसायी → खुदरा व्यवसायी।

प्रश्न 2.
स्तंभ ‘क’ को स्तंभ ‘ख’ से मिलान करें।
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उत्तर-

    1. शाही लीची → मुजफ्फरपुर
    2. दुधिया मालदह → दीघा (पटना)
    3. मखाना → दरभंगा
    4. जर्दालु आम → भागलपुर

प्रश्न 3.
कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से आप क्या समझते हैं ? इससे किसानों को क्या फायदा होता है?
उत्तर-
कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य वह मूल्य होता है, जो सरकार द्वारा किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने के लिए तय किया जाता है। इसमें सरकार किसानों के फसल के लिए एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित करती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य का उद्देश्य होता है किसानों की हितों की रक्षा करना। इससे किसानों को उनके फसल का उचित मल्य मिलता है. वे फसल उपजाने में जितनी मेहनत करते हैं, उन्हें उसका फल मिलता है। उन्हें घाटा नहीं होता है।

प्रत्येक किसान को अपने फसल के लिए सरकारी दर की उम्मीद होती है। किसानों से उनकी फसल सरकारी एजेंसियाँ निर्धारित न्यूनतम मूल्य पर ही फसल खरीदती है। अगर सरकार द्वारा यह मूल्य तय नहीं किया जाता तो किसानों से उनके फसलों को कम कीमत पर ही खरीद लिया जाता, जिससे किसान को अपनी मेहनत का उचित फल नहीं मिलता । लेकिन बिहार में इस योजना का पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। जिससे किसानों को उनका हक नहीं मिल पाता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित फसलों से बनाये जाने वाले विभिन्न उत्पादों को लिखें। इन उत्पादों को बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर-

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गेहूँ से सूजी, मैदा और आटा बनाने के लिए गेहूँ को मिल में भेजा जाता है, मक्का से भी सत्तू, आटा या दर्रा बनाने के मिल की आवश्यकता होती है। लीची से जुस, जैम, जेली या मधु बनाने के लिए इसे प्रसंस्करण उद्योग में भेजते हें। गन्ना से चीनी बनाने के लिए हम गन्ने को चीनी मिल भेजते हैं और गड बनाने के लिए गन्ना की पेड़ाई करती हैं। जूट से मशीनों द्वारा थैला बनाया जाता है।

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पाठ का सार संक्षेप

मण्डी कई प्रकार के होते हैं जैसे -अनाज की मंडी, फल की मंडी, सब्जी मंडी। ये मंडियाँ भी अलग-अलग भामों में बंटी होती है, जैसे फल की मंडी, में चारों तरफ ही देखने को मिलती है पर कहीं पर सिर्फ सेव को कहीं सिर्फ केले। इसी तरह अनाज और सब्जियों की मंडियों में भी जगह बंटी होती है।

हमें जगह-जगह पर ट्रक से माल उतारते या ट्रक पर माल लादते हुए लोग दिख जाएँगे। चावल बिहार का मुख्य खाद्यान्न है। चावल चम्पारण, सिवान, औरंगाबाद, वैशाली आदि जगहों से आती है। छोटे किसान अपने उपयोग भर चावल रखने के बाद शेष चावल छोटे व्यापारियों को बेच देते हैं। फिर छोटे व्यापारी चावल को स्थानीय मंडी के थोक व्यापारी को बेच देते हैं। फिर इन थोक व्यापारियों से चावल शहर के थोक व्यापारियों के पास आता है, फिर वहाँ से खुदरा व्यापारी के पास ।

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किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने के लिए सरकार द्वारा फसल के लिए एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाता है। जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य कहा जाता है, इसका उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना होता है। सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही फसल खरीदी जाती है। पर बिहार के किसानों को इस योजना का पूरा फायदा नहीं मिल जाता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन

Bihar Board Class 7 Science जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन Text Book Questions and Answers

अभ्यास

A. सही उत्तर चुनिए –

प्रश्न 1.
रक्त जन्तुओं के किस भाग के द्वारा प्रवाहित होता है –
(i) रक्त वाहिनियों में
(ii) काशिकाओं में
(iii) ऊतकों में
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) रक्त वाहिनियों में

प्रश्न 2.
रक्त का लाल रंग किस वर्णक के कारण होता है –
(i) ऑक्सीजन
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड
(iii) लाल रंग
(iv) हीमोग्लोबीन
उत्तर:
(iv) हीमोग्लोबीन

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन

प्रश्न 3.
रक्त की वे कोशिकाएँ जो रोगाणुओं को नष्ट करते हैं –
(i) RBC
(ii) WBC
(iii) प्लेटलेट्स
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iii) प्लेटलेट्स

प्रश्न 4.
रक्त का थक्का बनना किस कोशिका की उपस्थिति के कारण होता है –
(i) RBC
(ii) WBC
(iii) प्लेटलेट्स
(iv) इनमें से कोई नहीं
Answer:
(iii) प्लेटलेट्स

प्रश्न 5.
विश्राम की अवस्था में एक व्यस्क व्यक्ति की नाड़ी स्पंदन होती है –
(i) 27
(ii) 72
(iii) 82
(iv) 92
उत्तर:
(ii) 72

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन

रिक्त स्थज्ञानों की पूर्ति करें –

  1. वे रक्त वाहिनियाँ जो हृदय से ऑक्सीजन समृद्ध रक्त को शरीर के सभी भागों में ले जाती है, …………. कहलाती है।
  2. वे रक्त वाहिनियाँ जो कार्बन डाइऑक्साइड समृद्ध रक्त को शरीर के सभी भागों से वापस हृदय में ले जाती हैं …………. कहलाती है ।
  3. डॉक्टर हृदय धड़कन को मापने के लिए …………. नामक यंत्र इस्तेमाल करते हैं।
  4. अपशिष्ट पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया ……… कहलाती है।
  5. हमारे शरीर में लगभग …………. लीटर रक्त होता है।

उत्तर:

  1. धमनी
  2. शिग
  3. स्टेथोस्कोप
  4. उत्सर्जन
  5. पाँच।

C. सही उत्तर के सामने (✓) एवं गलत उत्तर के सामने (×) का चिह्न लगाएँ….

  1. हमारा हृदय चार कक्षों में बँटा होता है। (✓)
  2. गुर्दे की आकृति गेंद जैसी होती है। (×)
  3. स्पंज एवं हाइड्रा जैसे जन्तुओं में रक्त नहीं पाया जाता है। (✓)
  4. धमनियाँ ऑक्सीजन समृद्ध होती हैं। (✓)
  5. शिराएँ कार्बन डाइऑक्साइड विहीन होती हैं। (×)

D. मिलान कीजिए –
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उत्तर:
(i) (ङ)
(ii) (क)
(iii) (घ)
(iv) (ख)

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E. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 से 100 शब्दों में दीजिए –

प्रश्न 1.
धमनी किसे कहते हैं ? इसका क्या कार्य है ? बताएँ।
उत्तर:
हमारे शरीर में दो प्रकार की रक्त वाहिनियाँ पाई जाती हैं – (1) धमनी (2) शिरा।
धमनी रक्त को शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है। धमनियाँ हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के सभी भागों में ले जाती है। रक्त का प्रवाह तेजी से और अधिक दाब पर होता है। धमनियों की दीवार मोटी और लचीली होती है। धमनी में स्पंदन होता है। फेफड़ा धमनी हृदय से रक्त को ले जाती है। इसलिए इसे शिरा नहीं धमनी कहते हैं। धमनी से रक्त का प्रवाह हृदय से सभी अंगों में होता है। प्रति मिनट धमनी में उत्पन्न । धड़कन, हृदय दर को बताती है।

प्रश्न 2.
शिरा को परिभाषित कीजिए एवं यह धमनी से कैसे भिन्न है ?
उत्तर:
शिरा रक्तवाहिनियाँ हैं। शिराएँ कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त को शरीर के सभी भागों से वापस हृदय में लाती हैं। धमनियाँ ऑक्सीजन समृद्ध होती हैं जबकि शिराएँ कार्बन डाइऑक्साइड समृद्ध, धमनियों के द्वारा रक्त के प्रवाह की दिशा हृदय से शरीर के सभी अंगों की ओर होता है जबकि रक्त प्रवाह की दिशा शरीर के सभी अंगों से वापस हृदय की ओर होता है। अर्थात् ठीक एक-दूसरे के विपरीत होता है। धमनियों की दीवारें मोटी और . लचीली होती है जबकि शिराएँ पतली होती हैं।

प्रश्न 3.
गुर्दे का मुख्य कार्य बताइए।
उत्तर:
गुर्दा या किडनी, शरीर में पानी और नमक की मात्रा को संतुलित रखना तथा रक्त को शुद्ध करना और मूत्र को मूत्राशय में पहुँचाना है। किडनी की आकृति सेम जैसी होती है। जब रक्त गुद्म में पहुँचता है तो इसमें हानिकारक और उपयोगी दोनों प्रकार के पदार्थ होते हैं। उपयोगी पदार्थों को रक्त में अवशोषित कर लिया जाता है और हानिकारक पदार्थ जल में धूलकर मूत्र के रूप में अलग हो जाता है और मत्राशय में पहँच जाता है। यह एक उत्सर्जन तंत्र है । मानव के लिए उपयोगी है । इसके खराब होने पर हम ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह सकते हैं।

प्रश्न 4.
अपशिष्ट पदार्थ क्या है ? इन्हें हमारे शरीर से बाहर निकालने वाले उत्सर्जन अंगों के नाम बताइए।
उत्तर:
श्वसन प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड बनता है. जो अवशिष्ट पदार्थ है। इसी प्रकार भोजन का अपचित भाग अवशिष्ट पदार्थ कहलाता है। हमारे शरीर की कोशिकाएँ जब अपना कार्य करती है तो अवशिष्ट पदार्थ बनते हैं। ये अवशिष्ट पदार्थ विषैले होते हैं। अवशिष्ट पदार्थ को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। रक्त में अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से निकलना जरूरी है। उत्सर्जन करने वाले अंगों के समूह को उत्सर्जन तंत्र कहते हैं। गुर्दा, मूत्राशय, मूत्रनली उत्सर्जन के अंग हैं।

प्रश्न 5.
हृदय स्पंद से आप क्या समझते हैं ? एक स्वस्थ व्यक्ति में हृदय स्पंद की संख्या बताइए।
उत्तर:
हृदय वक्ष गुहा में स्थित है। इसकी दीवार मांसपेशियों की बनी होती है। ये पेशियाँ लयबद्ध रूप से सिकुड़ती और फैलती हैं। लयबद्ध . सिकुड़ने और फैलने की क्रिया मिलकर हृदय स्पंद कहलाती है। हृदय स्पंद प्रत्येक क्षण होता रहता है। हृदय धड़कन को महसूस कर सकते हैं। डॉक्टरों द्वारा हृदय स्पंद सुनने के लिए स्टेथोस्कोप यंत्र का प्रयोग करते हैं। प्रतिदिन लगभग एक लाख बार धड़कता है। हृदय मानव का महत्वपूर्ण अंग है, धडकन रूकने का मतलब मृत्यु।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 18 जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन

Bihar Board Class 7 Science जन्तुओं में रक्त पससिंचरण एवं उत्सर्जन Notes

शरीर की कोशिकाओं में श्वसन क्रिया होती है। रक्त ऑक्सीजन द्वारा कोशिकाओं में पहुँचता है। श्वसन क्रिया के फलस्वरूप CO2 फेफड़ों तक पहुँचकर उच्छवसन के बाहर निकलना रक्त के संचरण से होता है। मांसपेशी और स्नायु में अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। इनका उत्सर्जन शरीर के उत्सर्जन तंत्र से होता है। अपशिष्ट पदार्थों के मांसपेशियों से उत्सर्जन तंत्र तक पहुँचाने का कार्य रक्त परिसंचरण से होता है। नाड़ी धड़कन रक्त परिसंचरण के कारण होता है। सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति का स्पंदन दर 72 से 80 स्पंदन प्रति मिनट होता है। हृदय शरीर का आंतरिक अंग है। यह हमेशा धड़कता है। यह बिना रूके जीवन भर रक्त के साथ पदार्थों का पंप करता रहता है। हृदय वक्ष गुहा में स्थित होता है जिसका निचला सिरा थोड़ी बायीं ओर झुका रहता है। हृदय चार कक्षों में बंटा होता है। ऊपर दो कक्ष आलिन्द और निचली दो कक्ष निलय कहलाते हैं। हमारे शरीर में कई प्रकार के रक्त वाहिनियाँ होती है जो रक्त को शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का कार्य करती है। शरीर में दो प्रकार की रक्त वाहिनियाँ पाई जाती हैं-धमनी एवं शिरा (Vain)। धमनियाँ हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के सभी भागों में ले जाती हैं।

रक्त का प्रवाह तेजी से और अधिक दाब पर होता है। धमनियों की दीवार मोटी और लचीली होती है। शिराएँ कार्बन डाइऑक्साइड युक्त रक्त को शरीर के सभी भागों से वापस हृदय में जाती है और CO2 बाहर निकलता है। डॉक्टर हृदय की धड़कन की आवाज सुनने के लिए स्टेथोस्कोप यंत्र का. प्रयोग करते हैं। सभी जीवों में रक्त नहीं पाया जाता है। जैसे – स्पंज और हाइड़ा। हमारे शरीर में कोशिकाएँ अपना कार्य करती है। अवशिष्ट पदार्थ बनते हैं। अत: इन्हें शरीर से बाहर निकालने की आवश्यकता होती है। सजीव द्वारा कोशिकाओं में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं और निकालने वाले अंगों के समूह को उत्सर्जन तंत्र कहते हैं। उत्सर्जन तंत्र द्वारा रक्त में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों जैसे नाइट्रोजन युक्त विषैले पदार्थ है। गुर्दा, मूत्राशय, मूत्र नली आदि उत्सर्जन अंग है। किटनी जो स्त्री और पुरुष के शरीर में होते हैं। जब रक्त किटनी में जाता है तो हानिकारक और उपयोगी दोनों प्रकार के पदार्थ होते हैं। उपयोगी पदार्थ अवशोषित हो जाता है और अपशिष्ट पदार्थ मत्र केम्प में अलग हो जाता है। मंत्र मंत्राशय में पहुँचता है और मत्र मार्ग द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है।

त्वचा हमारे शरीर का तापमान को नियंत्रित करती है। त्वचा की निचली परत पर स्वेद ग्रंथियाँ होती हैं जिससे हमें पसीना आता है। स्वंद में जल और लवण होते हैं। गर्मियों के दिनों में पसीनों के रूप में बाहर निकलते हैं । पसीना हमारे शरीर को ठंडा बनाए रखने में मदद करता है । जब किडनी काम करना बंद कर देता है तो रक्त में अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है। किडनी खराब होने के कारण या तो संक्रमण अथवा चोट लगना है। किडनी खराब व्यक्ति को अधिक दिनों तक जीवित नहीं रखा जा सकता है। अतः कृत्रिम किडनी लगाकर रक्त में उपस्थित अपशिष्ट पदार्थों को हटा दिया जाता है। समय-समय पर यह क्रिया करायी जाती है। कृत्रिम किडनी लगाकर रक्त को साफ करने की विधि को डायलाइसिस कहते हैं। शरीर के विभिन्न अंगों को हिलाने-डुलाने के लिए मांसपेशियों की जरूरत होती है और मांसपेशियाँ तभी कार्य करती हैं. जब लगातार रक्त का संचरण हो। रक्त का लाल रंग हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण है और रक्त का थक्का होना प्लेटलेट्स का कारण है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Geography भारत-स्थिति Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के विस्तार के संबंध कौन-सा कथन सही है …………………….
(क) 8°41’N-35°5’N
(ख) 8°4’N-35°6’N
(ग) 8°41’N-37°5’N
(घ) 6°45″N-35°6’N
उत्तर:
(ग) 8°41’N-37°5’N

प्रश्न 2.
भारत के साथ किस देश की स्थल सीमा सबसे लम्बी है …………………….
(क) बंग्लादेश
(ख) पाकिस्तान
(ग) चीन
(घ) म्यांमार
उत्तर:
(ख) पाकिस्तान

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प्रश्न 3.
कौन-सा देश क्षेत्रफल में भारत से अधिक बड़ा है ………………………
(क) चीन
(ख) फ्रांस
(ग) मिस्र
(घ) ईरान
उत्तर:
(क) चीन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित याम्योत्तर में से कौन-सा भारत का मानक याम्योत्तर है?
(क) 69°30’E
(ख) 75°30’E
(ग) 82°30’E
(घ) 90° 30’E
उत्तर:
(ग) 82°30’E

प्रश्न 5.
यदि आप एक सीधी रेखा में राजस्थान से नागालैंड की यात्रा करें तो निम्नलिखित नदियों में से किसको आर-पार नहीं करेंगे?
(क) यमुना
(ख) सिंधु
(ग) ब्रह्मपुत्र
(घ) गंगा
उत्तर:
(ख) सिंधु

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प्रश्न 6.
क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में भारत का स्थान है।
(क) तीसरा
(ख) चौथा
(ग) पांचवाँ
(घ) सातवाँ
उत्तर:
(घ) सातवाँ

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
क्या भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है? यदि हाँ, तो आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर:
हाँ, भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है क्योंकि देशांतर रेखाओं के मानों से स्पष्ट होता है कि इनमें लगभग 30 डिग्री का अंतर है जो हमारे देश के सबसे पूर्वी व सबसे पश्चिमी भागों के समय में लगभग 2 घंटों का अंतर पैदा करता है। कुछ ऐसे देश हैं जिनमें अधिक पूर्व-पश्चिम विस्तार के कारण एक से अधिक मानक देशांतर रेखाएँ हैं। उदाहरण : संयुक्त राज्य अमेरिका में छह समय कटिबंध हैं।

हाँ, सूक्ष्म अवलोकन करने से पता चलता है कि प्रत्येक राज्य के जिलों की संख्या का उस राज्य के क्षेत्रफल से गहरा सम्बन्ध है। जिन राज्यों का क्षेत्रफल अधिक है उन राज्यों की संख्या अधिक है। जिन राज्यों का क्षेत्रफल कम है उन राज्यों के जिलों की संख्या कम है। उदाहरणतया मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण वहाँ पर जिलों की संख्या अधिक है। जबकि मेघालय, गोवा आदि का क्षेत्रफल कम होने के कारण उन राज्यों में जिलों की संख्या कम है।

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प्रश्न 2.
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान तथा जम्मू और कश्मीर में से कौन-सा राज्य सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला और कौन-सा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है ?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल राज्य सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है जबकि अरुणाचल प्रदेश सबसे कम घनत्व वाला राज्य है।

प्रश्न 3.
राज्य के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या के बीच संबंध को ढूँढ़िए।
उत्तर:
राज्यों के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या का संबंध –

  1. भौतिक कारकों जैसे भू – आकार, जलवायु तथा मृदा
  2. सामाजिक – आर्थिक कारक जैस राजनैतिक कारक, आर्थिक (प्राकृतिक) संसाधनों की उपलब्धताओं से है।

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प्रश्न 4.
तटीय सीमाओं से संलग्न राज्यों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, त्रिपुरा, पं० बंगाल।

प्रश्न 5.
पश्चिम से पूर्व की ओर स्थलीय सीमा वाले राज्यों का क्रम तैयार कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तरीसगढ़, बिहार, झारखंड ।

(ग) परिशिष्ट – II पर आधारित क्रियाकलाप (इस अभ्यास को समझने व विद्यार्थियों से करवाने में अध्यापक सहायता कर सकते हैं।)

प्रश्न 1.
उन केंद्र शासित क्षेत्रों की सूची बनाइए जिनकी स्थिति तटवर्ती है।
उत्तर:
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप दमन व दीव दादरा व नगर हवेली पांडिचेरी।

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रफल दिल्ली तथा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रफल और जनसंख्या में अंतर की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की जनसंख्या 13,850,507 है और इसका क्षेत्रफल 1,483 वर्ग किमी है। जबकि अंडमान व निकोबार केंद्र शासित प्रदेश की जनसंख्या 356,152 है और इसका क्षेत्रफल 8,243 वर्ग किमी है। अंडमान व निकोबार का क्षेत्रफल अधिक होते हुए भी वहाँ की जनसंख्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से काफी कम लगभग 30 गुणा कम है। ये अंतर आर्थिक, राजनैतिक तथा भौगोलिक कारणें से है।

प्रश्न 3.
एक ग्राफ पेपर पर दंड आरेख द्वारा केंद्र शासित क्षेत्रों के क्षेत्रफल व जनसंख्या को आलेखित कीजिए।
उत्तर:
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Bihar Board Class 11 Geography भारत-स्थिति Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कौन-सा महासागरीय मार्ग भारत को यूरोप से जोड़ता है?
उत्तर:
स्वेज नहर मार्ग।

प्रश्न 2.
भारत का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल) कौन-सा है?
उत्तर:
राजस्थान।

प्रश्न 3.
भारत का सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
गोआ।

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प्रश्न 4.
भारत में सबसे छोटे केन्द्र शासित प्रदेश का नाम लिखें।
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 5.
कौन-सा राज्य पांच राज्यों से घिरा हुआ है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 6.
भारत में कितने तटीय राज्य हैं?
उत्तर:
नौ राज्य तटीय राज्य हैं-गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोआ, केरल, तमिलनाडु, आंध प्रदेश, उड़ीसा तथा पश्चिमी बंगाल।

प्रश्न 7.
अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में कुल कितने द्वीप हैं?
उत्तर:
204

प्रश्न 8.
लक्षद्वीप में कुल कितने द्वीप हैं?
उत्तर:
36

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प्रश्न 9.
मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 10.
भारत की वास्तविक शक्ति क्या है?
उत्तर:
अनेकता में एकता।

प्रश्न 11.
भारत का कुल कितना क्षेत्रफल है?
उत्तर:
36,67,263 किलोमीटर।

प्रश्न 12.
भारत के किस राज्य से कर्क रेखा तथा प्रमाणिक रेखाएँ अधिक दूरी तय करती हैं?
उत्तर:
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 13.
कौन-सी स्ट्रीट भारत को श्रीलंका से अलग करती है?
उत्तर:
पार्क स्ट्रीट।

प्रश्न 14.
भारत की तट रेखा की कुल लम्बाई लिखो।
उत्तर:
75166.6 किलोमीटर।

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प्रश्न 15.
कर्क रेखा द्वारा भारत में निर्मित दो प्रदेशों के नाम लिखो।
उत्तर:
उष्ण कटिबन्ध तथा शीतोष्ण कटिबन्ध।

प्रश्न 16.
कौन-सी अक्षांश रेखा भारत के गुजरती है?
उत्तर:
कर्क रेखा (23\(\frac { 1 }{ 2 }\)°उत्तर)।

प्रश्न 17.
जनसंख्या के आधार पर भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा।

प्रश्न 18.
कौन-सी अक्षांश रेखाएं भारत की उत्तरी तथा दक्षिणी विस्तार बनाती हैं?
उत्तर:
37° उत्तर तथा 8° उत्तर।

प्रश्न 19.
भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी सिरे में कितना समय लगता है?
उत्तर:
2 घंटे।

प्रश्न 20.
उस राज्य का नाम बताए जिसकी सबसे लम्बी तट रेखा है?
उत्तर:
गुजरांत।

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प्रश्न 21.
अण्डमान तथा निकोबार द्वीपों का कैसे निर्माण हुआ है?
उत्तर:
जलमग्न पहाड़ियों के शिखरों के कारण।

प्रश्न 22.
‘हिन्द महासागर के पूर्वी तथा पश्चिमी भाग में सागरों के नाम लिखो।
उत्तर:
अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी।

प्रश्न 23.
हिन्द महासागर के साथ कौन-से महाद्वीप हैं?
उत्तर:
अफ्रीका, एशिया ऑस्ट्रेलिया, अण्टार्कटिका।

प्रश्न 24.
‘संसार की छत’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
पामीर को।

प्रश्न 25.
किसके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा?
उत्तर:
राजा दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम पर।

प्रश्न 26.
क्षेत्रफल के आधार पर भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
सातवां।

प्रश्न 27.
किस राज्य को Land of Dawn कहते हैं?
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश।

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प्रश्न 28.
भारत तथा चीन के मध्य सीमा का नाम लिखो।
उत्तर:
मैक्मोहन लाइन।

प्रश्न 29.
भारत में कर्क रेखा पर स्थित दो शहरों के नाम लिखो।
उत्तर:
अहमदाबाद तथा जबलपुर।

प्रश्न 30.
भारत के मध्य से कौन-सी अक्षांश रेखा गुजरती है?
उत्तर:
कर्क रेखा।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय उपमहाद्वीप के हिमालय पर्वत को पार करने वाले चार दरों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भारत के उत्तर में हिमालय एक पर्वतीय दीवार के रूप में आवागमन साधनों के लिए एक रूकावट है। फिर इस पर्वत को पार करने के लिए कई दरें लाभदायक हैं, जैसे –

  • सतलुज गार्ज से शिपकी ला दर्रा (भारत-तिब्बत सड़क मार्ग)
  • काराकोरम दर्रे से कश्मीर लेहमार्ग।
  • सिक्किम में नाथूला दर्रा।
  • सिक्किम में जैल्पला दर्रा (ल्हासा-कालिम्पोंग मार्ग)।

प्रश्न 2.
उत्तर:पश्चिम भारत में स्थित दरें तथा इनका महत्त्व बताएँ।
उत्तर:
विदेशी उत्तर:पश्चिम में स्थित खैबर और बोलन दरों से होकर ही भारत में प्रवेश कर सकते थे। खैबर, हिन्दुकुश पर्वत में सफेद कोह के निकट तथा बोलन, सुलेमान और किरथर पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है। पहले तो मध्य और पश्चिम एशिया की जन-जातियों इन्हीं मार्गों द्वारा भारत में आई और बाद में सिकंदर, अफगानी तथा फारसी फौजों ने भी इन्हीं भागों का अनुसारण किया । व्यापार के लिए भारत पश्चिम एशिया, पूर्व-अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया से समुद्री मार्गों द्वारा जुड़ा था।

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प्रश्न 3.
क्षेत्रफल के आधार पर संसार के देशों में भारत की स्थिति क्या है?
उत्तर:
क्षेत्रफल के आधार पर भारत संसार में सातवां बड़ा देश है। भारत से अधिक क्षेत्रफल वाले छः देश रूस, ब्राजील कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया हैं। भारत का क्षेत्रफल रूस को छोड़ कर पूरे यूरोप के बराबर है। यह इंग्लैण्ड से 13 गुणा तथा जापान से 9 गुणा बड़ा है, परन्तु रूस भारत से 7 गुणा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका से तीन गुणा बड़ा है। भारत का पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर:दक्षिण विस्तार पृथ्वी की परिधि का लगभग 12 है।

प्रश्न 4.
उप-महाद्वीप किसे कहते हैं? इसकी व्याख्या दक्षिण एशिया की हिमालय पर्वत श्रेणी के दक्षिण स्थित देशों के सदर्भ में कीजिए।
उत्तर:
उप-महाद्वीप एक विशाल स्वतन्त्र भौगोलिक इकाई को कहा जाता है। यह स्थल खण्ड मुख्य महाद्वीप से स्पष्ट रूप से अलग होता है। इस विशालता के कारण इस भू-भाग में आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक स्वरूपों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भू’भाग की सीमाएँ विभिन्न स्थलाकृतियों द्वारा बनाई जाती हैं जो इसे सीमावर्ती प्रदेश से पृथक् करती हैं। भारत एक महान देश है।

इसे प्रायः भारतीय उप-महाद्वीप (Indian Sub-continent) कहा जाता है। हिमालय पर्वत की प्राकृतिक सीमा भारतीय उप-महाद्वीप को एक परिबद्ध चरित्र देकर विलगता प्रदान करती है। यह भौगोलिक इकाई इस भूखण्ड को एशिया महाद्वीप से अलग करती है। इसमें पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा मालदीप देश स्थित हैं। इन्हें सार्क (SAARC) देश भी कहते है।

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प्रश्न 5.
जब अरुणाचल में सूर्योदय हो चुका होता है सब सौराष्ट्र में रात होती है। कारण बताएँ। अथवा, भारत के सबसे पूर्वी भाग अरुणाचल प्रदेश और सबसे पश्चिमी भाग गुजरात के स्थानीय समय में दो घण्टे का अन्तर क्यों है? अथवा, भारत का देशान्तरीय विस्तार हमें किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
भारत पूर्व पश्चिम की ओर लगभग तीन हजार किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ है। इसका सबसे पश्चिमी सीमा बिन्दु सौराष्ट्र में हैं, जबकि पूर्वी सीमा बिन्दु अरुणाचल प्रदेश में है। इस प्रकार भारत का पूर्व-पश्चिम विस्तार 30° है । सूर्य को 1° देशान्तर पार करने के लिए 4 मिनट का समय लगता है। इसलिए 30° देशान्तर के लिए (30 x 4 = 120) मिनट या दो घण्टे का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश पूर्व में है।

यह भाग सूर्य के सामने अंत में आता है, इसलिए वहाँ सूर्योदय बाद में अर्थात् दो घण्टे देर से होता है तो सौराष्ट्र में रात होती हैं। इसलिए अरुणाचल प्रदेश में सूर्य उदय हो चुका होता है तो सौराष्ट्र में रात होती है। इसलिए अरुणाचल को ‘सूर्योदय का प्रदेश’ (Land of Dawn) भी कहते हैं। इस तथ्य से भारत की विशालता का ज्ञान होता है परन्तु आधुनिक जेट युग में दूरियाँ अपना महत्त्व खो चुकी हैं। आप श्रीनगर में नाश्ता करके दोपहर के खाने पर तिरुवनन्तपुरम पहुंच सकते हैं। जामनगरी और गुवाहाटी के मध्य की यात्रा उतना ही समय लेगी जितनी देर में आप एक भारतीय फिल्म देखते हैं।

प्रश्न 6.
भारत के दक्षिण में स्थित महासागर को ‘हिन्द महासागर’ क्यों कहा जाता है? हिन्द महासागर भारत को किन देशों से जोड़ता है?
उत्तर:
हिन्द महासागर सचमुच ‘हिन्द’ (भारत) का महासागर है। यह संसार में एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम के कारण है। भारत की तट रेखा हिन्द महासागर के अधिकतर भाग को घेरती है। इस क्षेत्र में भारत जैसे महत्त्वपूर्ण देश का प्रभाव है। प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में भारत ही सब से उन्नत देश था। इस महत्त्व के कारण ही इसे हिन्द महासागर कहा जाता है। हिन्द महासागर भारत को पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पश्चिमी एशिया, यूरोप तथा उत्तरीय अमेरिका से स्वेज मार्ग द्वारा जोड़ता है। पूर्व में यह चीन, जापान तथा इण्डोनेशिया से जुड़ा हुआ है।

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प्रश्न 7.
भारत के विस्तार का वर्णन करें। भारत के निकटवर्ती 6 पड़ोसी देश तथा तुलनात्मक रूप से कुछ दूर के 6 पड़ोसी देश बताएँ । भारतीय भूखण्ड का कौन-सा भाग इण्डोनेशिया के निकटतम है ?
उत्तर:
क्षेत्रफल के आधार पर भारत संसार का सातवां बड़ा देश है। इसका अक्षांशीय विस्तार 80-4° से 37°-6′ उत्तर तक है। इसका देशान्तरीय विस्तार 68°-7′ से 970-25′ पूर्वी तक है। भारत का उत्तर से दक्षिण दूरी 3214 किमी है। भारत की पश्चिम-पूर्व दूरी 2933 कि०मी० है। इन्दिरा प्वाईंट (निकोबार द्वीप) भारत का दक्षिण छोर है। भारत के छ: निकटवर्ती पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल म्यांमार, चीन, श्रीलंका तथा बांग्लादेश हैं। भारत के तुलनात्मक रूप से कुछ दूर के छ: पड़ोसी देश अफगानिस्तान, ईरान, रूस, मलेशिया, इण्डोनेशिया तथा थाईलैण्ड हैं। निकोबार द्वीप इण्डोनेशिया के निकट है।

प्रश्न 8.
मैक्मोहन रेखा किसे कहते हैं ? इसका क्या महत्त्व है? इसका निर्धारण किस सिद्धान्त पर किया गया है?
उत्तर:
मैक्मोहन रेखा भारत तथा चीन के मध्य सीमा रेखा है। यह सीमा रेखा हिमालय रेखा के साथ-साथ कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। इस सीमा के पार चीन के सिक्यांग तथा तिब्बत पठार स्थित हैं। इसके उत्तर:पूर्वी भाग में मयन्मार (बर्मा), चीन एवं भारत आपस में मिलते हैं। यह सीमा रेखा अधिकांशतः प्राकृतिक है तथा ऐतिहासिक रूप से निर्धारित है। हिमालय पर्वत हमारी उत्तरी सीमा का प्रहरी है। उच्च हिमालय के शिखर भारत तथा चीनको अलग-अलग करते हैं। ये शिखर एक जल विभाजक के रूस में फैल हुए है तथा चीन सीम रेखा को प्राकृतिक रूप देते हैं।

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प्रश्न 9.
उन राज्यों और संघीय प्रदेशों के नाम बताइए जिनकी सीमा बांग्लादेश से मिलती है। अथवा, भारत की स्थल सीमाओं का वर्णन करें। भारत के कौन-से राज्य सीमावर्ती देशों के साथ लगते हैं?
उत्तर:

  1. बांग्लादेश के साथ स्थल सीमा-भारत तथा बांग्लादेश के मध्य पूर्व में एक स्थलीय सीमा है। बांग्लादेश के पूर्व में असम, मेघालय, त्रिपुरा राज्य तथा मिजोरम प्रदेश की सीमाएँ हैं। बांग्लादेश के पश्चिम में पश्चिमी बंगाल राज्य की सीमा है।
  2. पाकिस्तान के साथ स्थल सीमा-भारत तथा पाकिस्तान के बीच कश्मीर से लेकर खाड़ी कच्छ तक एक स्थलीय सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान तथा गुजरात राज्यों की सीमाएँ मिलती हैं
  3. नेपाल के साथ स्थल सीमा-भारत के उत्तर में हिमालय पर्वतों में स्थित नेपाल देश है। इन देश के बीच यह एक प्राकृतिक सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तारंचल, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा सिक्कम राज्यों की सीमाएँ मिलती हैं।
  4. म्यंमार के साथ स्थल सीमा-हिमालय पर्वत की पूर्वी शाखाएँ भारत-वर्मा सीमा बनाती हैं। यह एक प्राकृतिक स्थलीय सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ नागालैण्ड, मणिपुर राज्य, अरुणाचल और मिजोरम प्रदेश की सीमाएँ बनाते हैं।
  5. पामीर गांठ के शीर्ष के साथ देश-भारत की उत्तरी सीमा के शीर्ष (पामीर गांठ) पर पाँच देशों की सीमाएँ आपस में मिलती है। इस मिलन बिन्दु पर भारत, चीन, तजाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान की सीमाएँ मिलती हैं। पामीर गांठ को ‘संसार की छत’ (Roof of the world) कहते हैं।

प्रश्न 10.
भारत का प्रायद्वीपीय आकार किस प्रकार लाभदायक है? तीन उदारहण देकर स्पष्ट करें। अथवा, भारत की प्रायद्वीपीय स्थिति के तीन प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
भारतीय प्रायद्वीप त्रिभुजाकार है। इससे भारत के तीन पड़ोसी सागरों तक (बंगाल की खाड़, अरब सागर, हिन्द महासागर) पहुँचना बहुत सुगम है। इस आकार के कारण मालबार तट तथा कोरोमण्डल तट पर मत्स्य क्षेत्रों को विकास हुआ है। दोनों तटों पर कई प्राकृतिक बंदरगाहों जैसे-विशाखापट्टनम्, चेन्नई, कोचीन, मुम्बई आदि का विकास हुआ है जहाँ से अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग गुजरते हैं।

प्रश्न 11.
‘भारत न तो दानव है और न बौना’ इस कथन की व्याख्या कीजिए। अथवा, “भारत न तो संसार का सबसे बड़ा देश है और न ही सबसे छोटा।” उदाहरण सहित व्याख्या करो।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में सातवाँ स्थान है। भारत पृथ्वी के धरातल के लगभग 22% क्षेत्रफल में फैला हुआ है फिर भी कई देशों का आकार भारत से बड़ा है। रूस भारत से लगभग सात गुना बड़ा है। भारत इंग्लैंड से 13 गुना तथा जापान से नौ गुणा बड़ा है। इस प्रकार क्षेत्रफल के आधार पर भारत न बहुत बड़ा और न ही बहुत छोटा देश है । इसलिए यह कथन कि “भारत न तो दानव है और न ही बौना” (“India is neither againt nor a niomv.”)

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प्रश्न 12.
“भारत को हिन्द महासागर में सर्वाधिक केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है।” यह कथन कहाँ तक सही है ?
उत्तर:
हिन्द महासागर का विस्तार 40° पूर्व से 120° पूर्व देशान्त तक है। भारत का दक्षिणी सिरा कन्याकुमारी लगभग 80° पूर्वी देशान्त पर स्थित है। इस प्रकार भारत को हिन्द महासागर में केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है। भारतीय प्रायद्वीप अरब सागर तथा खाड़ी बंगाल के मध्य में स्थित है। हिन्द महासागर में किसी भी देश की तट रेखा भारतीय तट रेखा जितनी लम्बी नहीं है। सभी समुद्री मार्ग भारत के तट को छू कर गुजरते हैं। भारत पूर्व तथा पश्चिम दोनों दिशाओं में स्थित देशों के मध्य में स्थित है। इसलिए भारत को हिन्द महासागर में सर्वाधिक केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है। भारत हिन्द महासागर में है। अत: हिन्द महासागर वास्तव में “हिन्द महासागर” है।

प्रश्न 13.
भारत में वन जीवन अभ्यारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यान में अंतर बताएँ।
उत्तर:
वन्य जीवन अभ्यारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यान में निम्नलिखित अंतर हैं जो सुक्ष्म हैं –
1. वन्यजीव अभ्यारण्य – भारत में कुल 482 वन्यजीव अभ्यारण्य हैं, जिसका कुल क्षे० 1,15,40,000 हेक्टेयर हैं। देश के प्रमुख वन्य जीव अभ्यारणों में चन्द्रप्रभा, दाचीगाम, पेरियार
आदि के नाम हैं। अभ्यारणों में मानवीय क्रियाकलापों की अनुमति होती हैं। अनुमति वगैर इनमें शिकार करना मना होता है, लेकिन चराई और गो-पशुओं का आना-जाना नियमित होता है।

2. राष्ट्रीय उद्यान – राष्ट्रीय उद्यान एक या अनेक परितंत्रों व्यापक वृहत क्षेत्र होता है ।यह क्षेत्र मानव के शक्ति और अधिग्रहण द्वारा भी अभी तक परिवर्तित नहीं हुआ है। विशिष्ट वैज्ञानिक शिक्षा और मनोरंजन हेतु इसके पेड़ पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियों भू-आकृतिक स्थलों और आवासों को संरक्षित किया गया है। राष्ट्रीय उद्यानों में शिकार और चारण पूर्णतया वर्जित होते हैं। भारत के कुल 40,60,600 हेक्टेयर भूमि में राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इनमें काजीरंगा, मानस, कान्हा दुधवा आदि प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।

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प्रश्न 14.
पूर्वी दुनिया में भारत के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पूर्वी दुनिया में भारत की स्थिति – भारत पश्चिमी एशिया तथा पूर्वी एशिया के मध्य में स्थित है। अफ्रिका, औद्योगिक दृष्टि से विकसित यूरोप तथा तेल-सम्पन्न पश्चिमी एशिया को दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों, चीन विकसित उद्योग वाले जापान, आस्ट्रेलिया तथा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पश्चिमी तट जोड़ने वाले महासागरीय जल-मार्ग भारत से होकर गुजरते हैं। दक्षिण-पूर्वी एशिया, पश्चिमी एशिया तथा अफ्रीका के पूर्वी तटवर्ती पड़ोसी देशों के साथ विदेशी सम्बधों में सागर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। दक्षिण-पूर्वी एशिया में भारतीय और चीन संस्कृति का संगम हुआ है।

इन दोनों संस्कृतियों ने स्थानीय संस्कृति के साथ मिलकर एक नई मिली-जुली संस्कृति को जन्म दिया है, जो हिन्द चीन जैसे शब्दों में प्रतिबिंबित हुई है। इसके बाद इस्लाम, ईसाई धर्म और यूरोपवासियों के आवागमन से यह प्रदेश और समृद्ध हो गया। इससे यहाँ की संस्कृति में विविधता के नए रंग भर गए हैं जो आज दक्षिण-पूर्वी एशिया में झलकते हैं। जिन देशों में भारतीय संस्कृति की छाप आज भी स्पष्ट है उनमें लाओस, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, मलेशिया और इंडोनशिया उल्लेखनीय हैं। इन्डोनेशिया के द्वीपों के नाम जैसे सुमात्रा, जावा और बाली भारतीय प्रभाव के स्पष्ट उदाहरण हैं। थाईलैंड (पुराना नाम स्याम) और कंबोडिया की स्थिति भी समान ही है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
“भारत की सीमाएँ अधिकांशत : प्राकृतिक हैं और वे ऐतिहासिक रूप से निर्धारित हैं।” उदाहरण सहित स्पष्ट करो।
उत्तर:
भारतीय सभ्यता बहुत प्राचीन है। इसकी सीमाएँ ऐतिहासिक हैं तथा अधिकांशतः प्राकृतिक हैं।

  1. हिन्द माहासागर भारत की दक्षिणी सीमा बनाता है। समुद्र के पार हमारा निकटतम पड़ोसी देश श्रीलंका है जिसे पाक जलडमरू मध्य भारत से अलग करता है।
    इण्डोनेशिया निकोबार द्वीप के दक्षिण में अलग-अलग स्थित है।
  2. भारत की पूर्वी सीमा पर बंगाल की खाड़ी के पास बांग्लादेश, मलेशिया, मयन्मार, थाईलैण्ड, कम्बोडिया, वियतनाम तथा लाओस स्थित हैं। यह सीमा घने जंगलों तथा पूर्वांचल की पहाड़ियों द्वारा बनी हुई है।
  3. पश्चिम की ओर अरब सागर से परे ईराक, ईरान, अरब, मिस्र, सूडान, इथोपिया, केनिया आदि देश स्थित हैं।
  4. भारत की उत्तरी सीमा पर हिमालय पर्वत की एक अखण्ड दीवार के परे तिब्बत, चीन सिक्यिांग, बेसिन तजाकिस्तान तथा अफगानिस्तान स्थिति हैं। मैक्मोहन रेखा भारत तथा चीन के मध्य एक प्राकृतिक सीमा है।
  5. भारत की उत्तरी सीमा पर नेपाल तथा भूटान स्थित हैं।
  6. हमारी पश्चिमी सीमा पाकिस्तान से लगती है। यह देश ऐतिहासिक रूप से प्राचीन सभ्यता के समय से भारत का सहभागी रहा है। पाँच नदियों का देश (पंजाब) तथा राजस्थान मरूभूमि एवं सिंधु (पाकिस्तान) ऐतिहासिक रूप से समकालीन प्रदेश है।

इससे स्पष्ट है कि भारत की सीमाएँ अधिकांशत : प्राकृतिक है तथा तथा ऐतिहासिक रूप से निर्धारित हैं।

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प्रश्न 2.
क्या भारत को एक उप-महाद्वीप कहा जा सकता है?
उत्तर:
भारत : एक उप-महाद्वीप (India: ASub-Continent) – भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में सातवां स्थान है। भारत से अधिक क्षेत्रफल वाले छः देश रूस, ब्राजील, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया है : भारत पृथ्वी के धरातल के लगभग 2.2% क्षेत्रफल में फैला है फिर भी कई देशों का आकार भारत से बड़ा है। रूस भारत से लगभग सात गुना तथा संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग तीन गुना बड़ा है। इस प्रकार क्षेत्रफल के आधार पर भारत न बहुत बड़ा और न ही बहुत छोटा देश है। इसलिए यह कथन सही है कि भारत न तो “दानव है और न ही बौना” (India is neither aGaint nor a Pigmy.) उप-महाद्वीप एक विशाल स्वतन्त्र भौगोलिक इकाई को कहा जाता है। यह स्थल खण्ड मुख्य महाद्वीप से स्पष्ट रूप से अलग होता है। इस विशालता के कारण इस भू-भाग में आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक समरूपों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं।

भू-भाग की सीमाएँ विभिन्न स्थलाकृतियों द्वारा बनाई जाती है जो इसे सीमावर्ती प्रदेश से पृथक् करती हैं भारत एक महान् देश है। इसे प्रायः भारतीय उप-महाद्वीप (Indian Sub-continent) भी कहा जाता है। डॉo केंसी के अनुसार भारत को यूरोप की भांति एक महाद्वीप कहलाने का अधिकार है। प्रायः ये कथन विशाल क्षेत्रफल तथा जनसंख्या के आधार पर कहे जाते हैं । ग्लोब पर एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में एक विशाल स्थलखण्ड के रूप में भारतीय उप-महाद्वीप दिखाई देता है। इसे उप-महाद्वीप कहे जाने के कई कारण हैं –

1. प्राकतिक सीमाएँ – भारत की प्राकृतिक सीमाएं इसे एक बिलगता का स्वरूप प्रदान करती हैं। उत्तर में हिमालय पर्वत, दक्षिण में हिन्द महासागर, पूर्व में घने वन तथा पश्चिम में थार मरूस्थल इसे मुख्य महाद्वीप से पृथक् करके उप-महाद्वीप का स्वरूप प्रदान करते हैं।

2. परिबद्ध चरित्र – भारत चारों ओर से एशिया के मुख्य क्षेत्रों से घिरा है। इसे विशाल पर्वतों ने हजारों किलोमीटर तक अखंडता रूप से घेर कर परिबद्ध (Enclosed) चरित्र दे दिया है। इस पर्वतीय घेरे के कारण यह एशिया के अन्य क्षेत्रों से व्यावहारिक रूप से अलग-अलग है।

3. क्षेत्रफल तथा जनसंख्या – क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत संसार का सातवां बड़ा देश है। यह देश भू-मण्डल के एक बड़े भाग में फैला हुआ है। चीन को छोड़कर यह संसार के सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। यहाँ के लोगों की शारीरिक बनावट, रहन-सहन तथा संस्कृति संसार के दुसरे प्रदेशों से भिन्न है ।

4. विविधता में एकता – भारत विभिन्नताओं का देश है, फिर भी भारतीय सभ्यता में एक विशिष्ट एकरूपता विद्यमान है। इस आधार पर कई लेखकों ने इस भू-भाग को एक उप-महाद्वीप की संज्ञा दी है।

5. जलवायु – जलवायु के आधार पर सम्पूर्ण देश में उष्ण मानूसनी जलवायु पाई जाती है। इस भू-भाग पर मानसून पवनें स्वतन्त्र रूप में उत्पन्न होती हैं। मानसून पवनों का पूर्ण रूप इसी उप-महाद्वीप पर मिलता है। सम्पूर्ण देश में ऋतुओं का एक जैसा क्रम पाया जाता है। ये पवनें इसे एशिया महाद्वीप में पृथक् प्रकार की जलवायु प्रदान करके उप-महाद्वीप का स्वरूप प्रदान करने में सहायक हैं।

6. प्राकृतिक संसाधन – भारत में प्रकृतिक साधनों की प्रचुरता है। सारे देश की आर्थिकता कृषि पर आधारित है। ये साधन किसी महाद्वीप में मिलने वाले साधनों की तुलना में कम नहीं हैं। इन विशेषताओं के आधार पर भारत को एक उप-महाद्वीप कहना सही है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 9 बाजार श्रृंखला खरीदने और बेचने की कड़ियाँ

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Civics Samajik Aarthik Evam Rajnitik Jeevan Bhag 2 Chapter 9 बाजार श्रृंखला खरीदने और बेचने की कड़ियाँ Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 7 Social Science बाजार श्रृंखला खरीदने और बेचने की कड़ियाँ Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

प्रश्नों के उत्तर दें-

प्रश्न 1.
सलमा को सहकारी समिति से तालाब क्यों नहीं मिला ?
उत्तर-
सलमा को सहकारी समिति से तालाब इसलिए नहीं मिला क्योंकि सहकारी समितियाँ छोटे मछुआरे को छोटे तालाब नहीं देती। इन लोगों को बड़े तालाबों का हिस्सा ही लेना होता है, जिसके लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है और सलमा इतने पैसे नहीं दे सकती है।

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प्रश्न 2.
सलमा सहकारी समिति से तालाब लेती तो क्या फर्क पडता?
उत्तर-
सलमा अगर सहकारी समिति से तालाब लेती तो उसे बड़े आकार में तालाब लेना पड़ता, जिससे उसे दूसरे से ज्यादा कर्ज लेना पड़ता । सहकारी समितियाँ छोटे मछुआरों को तालाब नहीं देती, क्योंकि वो हमेशा तालाब का बड़ा टुकड़ा देती है, जिसे लेना छोटे किसानों के लिए मुश्किल होता है।

प्रश्न 3.
सलमा को इस बार अच्छे फसल की उम्मीद क्यों थी?
उत्तर-
पिछले साल बाढ़ आने की वजह से तालाब में से मखाना के बीज बह गए थे, जिस वजह से मखाना का उत्पादन बहुत कम हुआ था। पर इस बाढ़ नहीं आयी थी और फिर सलमा ने मखाना उपजाने में बहुत मेहनत की थी। उसने समय पर कीटनाशक, खाद तथा पानी का उचित इंतजाम किया था। इसलिए सलमा को इस बार अच्छे फसल की उम्मीद थी।

प्रश्न 4.
सलमा ने मखाने की फसल के लिए क्या-क्या तैयारी की?
उत्तर-
सलमा ने मखाने की फसल के लिए अच्छे खाद की व्यवस्था की। उसने कीटनाशक तथा पानी की भी उचित व्यवस्था की और इन सबके अलावे सलमा ने मखाने की उपज में बहुत मेहनत भी की और उसे उम्मीद थी कि इस बार मखाने की अच्छी उत्पादन होगी।

प्रश्न 5.
तालाब से गुडी निकालने का काम कौन करता है?
उत्तर-
तालाब से गुड़ी निकालने का काम मछुआरे ही करते हैं, जो कि इस काम में बहुत कुशल होते हैं। तालाब से गुड़ी निकालने के लिए एक साथ कई लोगों की आवश्यकता होती है। ये लोग तालाब के अंदर से गडी निकालते हैं। यह काम तीन बार में होता है। पहली बार में अधिक गडिया निकलती है पर दूसरी और तीसरी बार में गुड़ी की संख्या कम हो जाती है, इसलिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

प्रश्न 6.
गुड़ी में मखाना कैसे बनाया जाता है? अपने शब्दों में समझाओ।
उत्तर-
गुड़ी से मखाना बनाने के लिए खास कुशलता और मेहनत की आवश्यकता होती है। गुंड़ी से मखाना बनाने के लिए पहले गुड़ियों को कराही में बालू डालकर भुना जाता है। फिर जब यह बहुत गर्म हो जाता है तब इसे कड़ाही में से निकालकर पीठ पर रखते हैं और फिर लकड़ी के हथौड़े से जोड़ से पीटा जाता है। ऐसे करने पर उन गुड़ियों से लावा निकलता है, जिसे हम मखाना कहते हैं।

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प्रश्न 7.
मखाने बनाने तक सलमा ने किन-किन चीजों पर खर्च किया। सची बनाओ।
उत्तर-
मखाने बनाने तक सलमा ने निम्न चीजों पर खर्च किया। सबसे पहले उसने 15 कट्टे तालाब को 400 रु० सलाना की दर से किराए पर लिया। इसके लिए उसे अपने रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा। उसने खाद, कीटनाशक की व्यवस्था की। फिर उसने तालाब से गुडिया निकलवाने के लिए मजदूरों को 6800 रुपये मजदूरी दी और फिर गुड़ियों से लावा निकलवाने पर भी उसका काफी पैसा खर्च हुआ।

प्रश्न 8.
सलमा को मखाना बेचने की जल्दी क्यों थी?
उत्तर-
सलाम को मखाना बेचने की जल्दी इसलिए थी, क्योंकि उसके पास जगह की कमी थी और इस वजह से वह मूल्य बढ़ने तक मखाने को अपने पास नहीं रख सकती थी। फिर उसे रिश्तेदारों के कर्ज भी वापस करने थे, जो उसने तालाब किराए पर लेने के लिए उनसे ली थी। उसे तालाब के मालिक को तालाब का किराया भी देना था।

प्रश्न 9.
सलमा ने जो सोचा था क्या उसे वह पूरा कर सकती है? चर्चा करें।
उत्तर-
सलाम ने सोचा था कि इस बार बाढ़ नहीं आने की वजह से मखाना की उपज अच्छी होगी। उसने इसकी उपज पर काफी मेहनत भी की थी। फिर उसने सुना था कि मखाना का बाजार निरन्तर बढ़ रहा है। मखाना आधारित उद्योगों में मखाना से विभिन्न प्रकार कीमती उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, इसका लाभ उसे भी मिलेगा और उसे इस बार मखाने की अच्छी कीमत मिलेगी और अधिक पैसा मिलने पर वह अपने टूटे घर की मरम्मत भी करवा – लंगी और अगले साल बिंना कर्ज लिए ही मखाना ही खेती कर लेगी।

पर जब उसने आढ़तिया को अपना मखाना दिया तो आढ़तिया ने उसे 200 किलो मखाना के लिए 100 रु प्रति किलो के हिसाब से 2000 रु. दिए और उसने बताया कि मखाना का उत्पादन बहुत अच्छा हआ है. इसलिए मखाना का मूल्य नहीं बढ़ा । इस कारण अब वह अपना सोचा हुआ काम जैसे-घर की मरम्मत और बिना कर्ज के मखाने की खेती नहीं कर पाएगी। क्योंकि 20000 में से 15000 का खर्च उसे मखाना की खेती पर आया उसे सिर्फ 500 रूका फायदा हुआ।

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प्रश्न 10.
अपने आस-पास के अनुभवों द्वारा पता करें कि छोटे किसान अपना उत्पादन किन्हें बेचते हैं ? उन्हें किन समस्याओं का सामना करना होता है ?
उत्तर-
छोटे किसान ज्यादातर अपना उत्पाद आढ़तिया को ही बेचते हैं। क्योंकि सीधे मंडी में अपना उत्पाद बेचने का साधन नहीं होता और उनके पास इतने पैसे नहीं होता और उन्हें अपना कर्ज चुकाने के लिए तुरंत पैसे की आवश्यकता होती है।

इससे उन्हें अपने उत्पाद का सही मूल्य नहीं मिलता। आढ़तिया उनके उत्पादों को मंडी में ले जाकर ऊँचे मूल्यों पर बेचता है और इनसे प्राप्त रुपये में से 6 से 8 प्रतिशत तक अपना कमीशन काटकर शेष पैसा किसानों को देता है। कई बार आढ़तिया कम दामों पर किसानों से उनका उत्पाद खरीद लेता है और फिर मूल्य बढ़ने पर उन्हें बेचकर ज्यादा लाभ कमाता है।

प्रश्न 11.
मखाने की खेती करने वाले किसान अपनी फसल को खुद मंडी में ले जाकर क्यों नहीं बेचते?
उत्तर-
मखाने की खेती करने वाले किसानों के पास ज्यादातर अपना तालाब नहीं होता है, वे किराए पर तालाब लेकर मखाने की खेती करते हैं। उसके बाद फिर इसके लिए खाद, कीटनाशक आदि की व्यवस्था करना, गुड़ी निकलवाना, फिर गड़ियों से लावा निकलवाने आदि में उनका काफी खर्च आता है। जिस कारण उन्हें पैसे की तुरंत जरूरत होती है। फिर मखाने को मंडी तक लाने में लगने वाला भाड़ा, फिर मखानों की पैकिंग का खर्च भी अधिक होता है। इसलिए वे लोग मखाने को आढतिया को ही बेच देते हैं।

प्रश्न 12.
थोक व्यापारी और खुदरा व्यापारी में क्या अंतर है?
उत्तर-
थोक व्यापारी एक बार में ही बहुत अधिक समान खरीद लेते हैं और फिर खुदरा दुकानदारों को प्रति किलो 10 से 12 रु. लाभ लेकर सामान बेचते हैं। थोक व्यापारी लाभ भी अधिक कमाते हैं क्योंकि ये लोग बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री करते हैं।

खुदरा दुकान थोक व्यापारी से एक बार में अधिक समान खरीद लेते हैं और फिर उपभोक्ताओं को 30 से 40 रु. प्रति किलो या इससे कम लाभ पर सामान बेचते हैं। खुदरा दुकानदार का लाभ थोक व्यापारी की अपेक्षा कम होता है क्योंकि ये छोटी मात्रा में खरीद-बिक्री करते हैं।

प्रश्न 13.
थोक व्यापारी और खुदरा व्यापारी में कौन अधिक लाभ कमाता है और क्यों?
उत्तर-
थोक व्यापारी और खुदरा व्यापारी में थोक व्यापारी अधिक लाभ कमाता है। क्योंकि थोक व्यापारी बडी मात्रा में सामानों की खरीद-बिक्री करता है और खुदरा व्यापारी छोटी मात्रा में सामानों की खरीद-बिक्री करता

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प्रश्न 14.
आपके घर पर उपयोग की जाने वाली किन्हीं दो वस्तओं के बारे में पता करें कि वे किन कड़ियों से गजरकर आपके पास पहुँचती है?
उत्तर-
(i) चावल → किसान → छोटे मिल में चावल → स्थानीय छोटे व्यापारी → स्थानीय मंत्री के थोक व्यापारी → बड़े शहर के थोक विक्रेता । → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता । चावल → किसान → चावल मिल → बड़े शहर के थोक विक्रेता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता।

(ii) गेहूँ→किसान → स्थानीय छोटे व्यापारी स्थानीय मंडी के थोक विक्रेता → बड़े शहर के थोक विक्रेता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता ।

प्रश्न 15.
क्या इस बेहतर भाव का लाभ उत्पादक को प्राप्त हो सकता है? यदि हाँ तो कैसे?
उत्तर-
हाँ, इस बेहतर भाव का लाभ उत्पादक को भी प्राप्त हो सकता है। अगर वह अपने उत्पादक को सीधे शहर के थोक विक्रेताओं को बेचे, क्योंकि आढ़तिए को उत्पाद बेचने से वे किसानों को उनके उत्पादों का सही कीमत भी नहीं देता है। जिससे इनलोगों को अपने उत्पाद का सही कीमत नहीं मिलता है।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या सलमा को अपने मेहनत का उचित पारिश्रमिक प्राप्त हुआ? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर-
नहीं, सलमा को अपने मेहनत का उचित परिश्रमिक प्राप्त नहीं हुआ। क्योंकि सलमा ने मखाने को खुद मंडी में न बेचकर आढतियाँ को बेचा था, जिसकी वजह से उसे मखाने का उचित मूल्य नहीं मिला । उसे पैसे की

जरूरत थी क्योंकि उसे अपने रिश्तेदार का चर्क चुकाना था। तालाब के मालिक को किराया देना था। अपने टूटे घर की मरम्मत करानी थी और फिर उसके पास जगह की कमी थी, इस कारण वह मखाने को अपने पास रखकर मूल्य बढ़ने पर उसे बेचकर मुनाफा भी नहीं कमा सकती थी। आढ़तिया को मखाना बेचने से उसे मखाने का कम मूल्य मिला और आढ़तिए ने कहा कि अच्छी फसल होने की वजह से मखाने का मूल्य नहीं बढ़ा।

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प्रश्न 2.
आर्थिक रूप से सम्पन्न बड़े मखाना उत्पादक किसान अपने फसल को कहाँ बेचेंगे ?
उत्तर-
आर्थिक रूप से सम्पन्न बड़े मखाना उत्पादक किसान अपने फसल को शहर के बड़े मंडियों में बेचेंगे। इससे उन्हें अपने उत्पाद की सही कीमत प्राप्त होगी। उन्हें उनके मेहनत का सही फल मिलेगा। बड़े मखाना उत्पादकों के पास सुविधा होने की वजह से वे लोग आसानी से अपने मखाने को लेकर शहर की मंडी में आ सकते हैं और अपने मखाने को बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं। वे लोग अपने मखाने को अपने पास रख सकते हैं और मूल्य बढ़ने पर इन्हें बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक लाभ होगा।

प्रश्न 3.
मखाना उत्पादक किसान एवं उनसे जुड़े मजदूरों के काम के हालात और उन्हें प्राप्त होने वाले लाभ या मजदूरी का वर्णन करें ? क्या आप सोचते हैं कि उनके साथ न्याय होता है?
उत्तर-
मखाना उत्पादक किसान एवं उनसे जुड़े मजदूरों के काम बहुत कठिन होते हैं। मखाना उत्पादन करना, उनकी गुंडियों तालाब से निकालकर फिर उनका लावा तैयार करना बहुत मुश्किल का काम होता है, इसके लिए मजदूरों का कुशल होना आवश्यक है। कुछ छोटे किसान ही कर्ज लेकर मखाना उत्पादन करते हैं।

छोटे किसानों को पैसे की आवश्यकता तुरंत होती है और उनके पास जगह की कमी के कारण वे मखाने को अपने पास रखकर मूल्य बढ़ने पर बेच भी नहीं सकते। इसी कारण वे लोग अपना मखाना आढ़तिए को बेच देते हैं, जिससे उन्हें मखाने का सही मूल्य नहीं मिलता। जिससे उन्हें बहुत नुकसान होता है और उन्हें अपने मेहनत का फल भी नहीं मिलता ।

इसी तरह गुड़ियो से लावा निकालने का काम करने वालों और गुड़ियो से लावा निकालने वाली को भी उनकी मेहनत के हिसाब से मजदूरी नहीं मिलती। 2.5 किलो गुड़ी का लावा निकालने पर उन्हें आधा किलो गुड़ी दी जाती है। नहीं उनके साथ न्याय नहीं होता, उन्हें उनके मेहनत के हिसाब से लाभ या मजदूरी नहीं मिलती।

प्रश्न 4.
पीने के लिए चाय बनाने में चीनी ध तथा चाय पत्ती का प्रयोग होता है। आपस में चर्चा करें कि ये वस्तुएँ बाजार की किस शृंखला से होते हुए आप तक पहुँचती है ? क्या आप उन सब लोगों के बारे में सोच सकते हैं जिन्होंने इन वस्तुओं के उत्पदन एवं व्यापार में मदद की होगी?
उत्तर-
चीनी गन्नों के द्वारा चीनी मिल में बनाई जाती है, फिर वहाँ से चीनी थोक मंडी में पहुँचती है वहाँ से खुदरा व्यापारी के पास पहुँचती है और वहाँ से उपभोक्ता के पास। चाय की खेती मुख्यतः आसाम में होती है। यह पत्ते के रूप में उपजाई जाती है, फिर इसे मन में डालकर छोटे-छोटे दानों का रूप देते हैं, पर इसे पैक कर थोक व्यापारियों के पास भेजा जाता है, वहाँ से खुदरा दुकान के पास और वहाँ से उपभोक्ता के पास। । दूध उत्पादन ग्वाले करते हैं और फिर ये हमारे घर पर आकर दूध देते हैं या फिर बाजारों में भी पाश्च्युकृत किया हुआ दूध पैकेटों में उपलब्ध होता है।

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प्रश्न 5.
यहाँ दिये गये कथनों का सही क्रम में सजाएं और फिर नीचे बने गोलों में सही क्रम के अंक भर दें। प्रथम दो गोलों में आपके लिए पहले से ही अंक भर दिये गये हैं।

  1. सलमा मखाना उपजाती है।
  2. स्थानीय आढ़तिया पटना के थोक व्यापारी को बेचता है।
  3. आशापुर में मखाना का लावा बनवाने लाती है।
  4. खाड़ी देशों को निर्यात करते हैं।
  5. दिल्ली के व्यापारियों को बेचते हैं।
  6. मजदूर गुड़ियों को इकट्ठा हलते हैं।
  7. सलमा आशापुर के आढ़तियों को मखाना बेचती है।
  8. आशापुर में गुड़िया से लावा बनाया जाता है।
  9. खुदरा व्यापारी को बेचते हैं।
  10. उपभोक्ता को प्राप्त होता है।

उत्तर-

  1. सलमा मखाना उपजाती है ।
  2. आशापुर में गुड़ियों से लावा बनाया जाता है।
  3. मजदूर गुड़िया इकट्ठा करते हैं।
  4. आशापुर में मखाना का लावा बनवाने लाती है।
  5. सलमा आशापुर के आढ़तियों को मखाना बेचती है।
  6. आढ़तिया पटना के थोक व्यापारी को मखाना बेचती है।
  7. दिल्ली के व्यापारियों को बेचते हैं।
  8. खाड़ी देशों को निर्यात करते हैं।
  9. खुदरा व्यापारी को बेचते हैं ।
  10. उपभोक्ता को प्राप्त होता है।

Bihar Board Class 7 Social Science बाजार श्रृंखला खरीदने और बेचने की कड़ियाँ Notes

पाठ का सार संक्षेप

किसी भी वस्तु को उसके उत्पादक से उपभोक्ता तक पहुँचने में बहत-सी – कड़ियों से गुजरना पड़ता है। ये कड़ियाँ कैसे बनती है ? और इन कड़ियों से जुड़े लोगों को एक सा लाभ प्राप्त हो पाता है ? इस अध्याय में हम इन्हीं बातों को समझने की कोशिश करेंगे मखाना की उपज, किसान तथा बाजार की श्रृंखला के उदाहरण द्वारा।”

मखाना – मखाना की खेती तालाब में की जाती है। इसकी खेती प्रायः मछुआरों द्वारा की जाती है। तालाबों का 60 प्रतिशत हिस्सा सरकार का तथा 40 प्रतिशत हिस्सा निजी व्यक्तियों का होता है। मखाना की खेती के ये तालाब मछुआरों द्वारा बनाई गई सहकारी समितियों को तीन से सात साल के लिए एक निश्चित लगान पर दी जाती है। मखना की खेती हर कोई नहीं कर सकता है। क्योंकि मखाना के उत्पादन एवं उसका लावा बनाने में जिस कुशलता की आवश्यकता होती है, वह मछुआरों के एक खास समूह में पायी जाती है।

पटना के बाजार – कुछ व्यापारी आढ़तियों से मखाना खरीदकर शहरों के थोक मंडी में बेचते हैं। फिर किसी दूसरे शहर के व्यापारी इन मंडियों से मखाना खरीदकर ले जाते हैं। इस क्रम में वे खरीदे गए मखाने का मूल्य, परिवहन का खर्च तथा पैकिंग का खर्च सभी जोड़ लेते हैं और अपने शहर की थोक मंडियों में वे 10 रु. प्रति किलो के लाभ पर बेचता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Civics Solutions Chapter 9 बाजार श्रृंखला खरीदने और बेचने की कड़ियाँ

थोक विक्रेता बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री करता है इसलिए वह अधिक कमा लेता है। खुदरा व्यापारी प्रति किलो 30 से 40 रु. लाभ पर बेचता है। इस प्रकार शहरी उपभोक्ता को मिलने तक उसकी कीमत अधिक हो जाती है। इससे हमें पता चलता है कि किसानों को सबसे अधिक मेहनत करने के बावजूद उचित लाभ नहीं मिल पाता।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.5

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BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.5

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.5

प्रश्न 1.
ABC एक त्रिभुज है। इसके अभ्यंतर में एक ऐसा बिन्दु जात कीजिए जो ∆ABC के तीनों शीर्षों से समदूरस्थ है।
उत्तर:
हमें ज्ञात है कि किसी भी त्रिभुज की भुजाओं के लम्ब समद्विभानकों का प्रतिच्छेद बिन्दु तीन शोषों से समदूरस्थ होता है।
आत: वह बिंदु तीनों भुजाओं के लम्य समद्विभाजकों का प्रतिचोद बिन्दु होगा।

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प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के अध्यंतर में एक ऐसा बिन्दु ज्ञात कीजिए, जो त्रिभुज की सभी भुजाओं से समदूरस्थ हो।
उत्तर:
वह बिन्दुजे त्रिभुज की तीनों भुजाओं से समदूरस्थ होता है वह तीनों कोगों के समद्विभाजक का प्रतिच्छेद बिन्दु होता है।

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प्रश्न 3.
एक बड़े पार्क में,लोग तीन बिन्दुओं (स्थानों) पर केन्द्रित हैं। (वेखिए पाठ्य पुस्तक में आकृति)
A : जहाँ बच्चों के लिए फिसलपट्टी और झूले हैं।
B : जिसके पास मानव-निर्मित एक झील है।
C : जो एक बड़े पार्किंग स्थल और बाहर निकलने के रास्ते के निकट है।
एक आइसक्रीम का स्टॉल कहां लगाना चाहिए ताकि वहाँ लोगों की अधिकतम संख्या पहुंच सके?
उत्तर:
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आइसक्रोम का स्टॉल वहाँ लगाना चाहिए जो तीनों बिन्दुओं से समान दूरी पर हो।
अत: वह बिन्दु A, B तथा C से समान दूरी पर हो।
अगर हम विन्दुA, B तथा C को मिलाएँ तो एक त्रिभुज ∆ABC प्राप्त होगा।
आत: वह बिंदु तीनों भुजाओं के लम्ब समद्विभाजकों का प्रतिच्छेदन बिन्दु O होगा।

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प्रश्न 4.
घट्भुजीय और तारे के आकार की रंगोलियों (देखिए आकृति) को 1 cm भुजा वाले समबाडुप्रिभुजों से भरकर पूरा कीजिए । प्रत्येक स्थिति में, त्रिभुजों की संख्या गिनिए। किसमें अधिक प्रिभुज हैं?
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उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं हल करें।

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.4 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुज Ex 7.4

प्रश्न 1.
दर्शाइए कि समकोण त्रिभुज में कर्ण सबसे लम्बी भुजा होती है।
उत्तर:
माना ∆ABC समकोण त्रिभुज है जिसमें ∠A = 90°
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∆ABC में,
∠ABC + ∠BCA + ∠CAB = 180°
∠ABC + ∠BCA = 180° – 90°
∠ABC + ∠BCA = 90°
अत: ∠ABC तथा
∠BCA न्यून कोण हैं।
⇒ ∠ABC < 90°
तथा ∠BCA < 90°
⇒ AC < BC
तथा AB < BC
(∵ बड़े कोण के सम्मुख भुजा बड़ी होती है।)
अग: कर्ण BC सबसे लम्बी भुजा है।

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प्रश्न 2.
आकृति में, ∆ABC की भुजाओं AB और AC को क्रमशः बिंदुओं P और Q तक बढ़ाया गया है। साथ ही, ∠PDC < ∠QCB है। दर्शाइए कि AC > AB है।
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उत्तर:
∠PBC < ∠QCB (दिया है)
⇒ 180 – ∠PBC > 180° – ∠QCB
∠ABC > ∠ACB
⇒ AC > AB.

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प्रश्न 3.
आकृति में, ∠B < ∠A और ∠C < ∠D है। दर्शाइए कि AD < BC है।
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उत्तर:
∆ABO में, ∠B < ∠A
⇒ OA < OB …….. (1)
तथा ∆COD में, ∠C < ∠D
OD < OC ……… (2)
समो. (1) व (2) को जोहने पर,
OA + OD < OB + OC
AD < BC.

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प्रश्न 4.
AB और CD क्रमशः एक चतुर्भुज ABCD की सबसे छोटी और सबसे बड़ी भुजाएँ है (देखिए पाठ्य पुस्तक में आकृति)। दर्शाइए कि ∠A > ∠C और ∠B > ∠D है।
उत्तर:
AC तथा BD को मिलाने पर (देखें आकृति)
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∴ ∆ABC में, BC > AB (∵ AB सबसे छोटी भुगा है)
∠8 > ∠3 ……. (1)
∴ ∆ACD में, CD > AD (∵ CD सबसे बड़ी भुजा है।
∠7 > ∠4 …….. (2)
समी. (1) व समी. (2) को जोड़ने पर,
∠8 + ∠7 > ∠4 + ∠3
∠A > ∠C
पुन: ∆ABD में, AD > AB
∠1 >∠6 …….. (3)
पुन: ∆BCD ने, CD > BC
∠2 > ∠5 …….. (4)
समी. (3) व समी-(4) को जोड़ने पर,
∠1 + ∠2 > ∠5 +∠6
∠B > ∠D
अत: ∠A > ∠C तथा ∠B > ∠D है।

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प्रश्न 5.
आकृति में, PR > PQ है और PS कोण QPR को समद्विभाजित करता है। सिद्ध कीजिए कि ∠PSR > ∠PSQ है।
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उत्तर:
दिया है कि PR > PQ =
⇒ ∠PQS > ∠PRS …….. (1)
(∵ बड़ी भुजा के सम्मुख कोण बड़ा ह्यता है।)
यहाँ PS, ∠QPR को समद्विभाजित करता है।
∠QPS = ∠RPS ……… (2)
समो. (1) व समी. (2) को जोड़ने पर,
∠PQS + ∠QPS > ∠PRS + ∠RPS
⇒ 180° – (∠PQS + ∠QPS) < 180° – (∠PRS + ∠RPS)
∠PSQ < ∠PSR.

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प्रश्न 6.
दर्शाइए कि एक रेखा पर एक दिए हुए विन्दु मे.जो उस रेखा पर स्थित नहीं है, जितने रेखाखण्ड खींचे जा सकते हैं उनमें लम्य रेखाखण्ड सबसे छोटा होता है।
उत्तर:
माना कि p कोई बिन्दु है, जो कि सीधी रेखा l पर नहीं है तथा PM ⊥ l.
अब, l पर कोई अन्य बिन्दु N लेने पर
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∆PMN में,
∠M = 90°
तपा ∠N + ∠P + ∠M = 180°
⇒ ∠N + ∠P = 90°
अतः ∠N < 90°
∠M > ∠N
PN > PM
अत: PM सबसे छोटा रेखाखण्ड है।

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Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 17 पौधों में जनन

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 17 पौधों में जनन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 17 पौधों में जनन

Bihar Board Class 7 Science पौधों में जनन Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
सही विकल्प पर (✓) निशान लगाएँ-

(क) पौधों का जनन अंग है –
(i) तना
(ii) जड़
(iii) फूल
(iv) पत्ती
उत्तर:
(iii) फूल

(ख) परागकण का वर्तिकान पर स्थानान्तरण कहलाता है –
(i) निषेचन
(ii) परागण
(iii) जनन
(iv) फल का बनना
उत्तर:
(ii) परागण

(ग) परिपक्व होने पर भ्रूण विकसित होकर बदल जाता है –
(i) फल में
(ii) बीज में
(iii) पुंकेसर में
(iv) जड़ में
उत्तर:
(i) फल में

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(घ) नर एवं मादा युग्मक का मिलना कहलाता है –
(i) परागकण
(ii) निषेचन
(ii) जनन
(iv) बीज निर्माण
उत्तर:
(ii) निषेचन

प्रश्न 2.
रिक्त स्थनों को भरें –
(क) जनन पौधों के कायिक भागों से नए पौधों का उत्पन्न होना ………………. कहलाता है।
(ख) जिन फूलों में केवल नर या मादा जनन अंग होते हैं वे ………………. फूल कहे जाते हैं।
(ग) पराग कोष से परागकणों का वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण की क्रिया ………………. कहलाती है।
(घ) नर एवं मादा युग्मकों के मिलने से ………………. का निर्माण होता है।
उत्तर:
(क) अलैंगिक
(ख) एकलिंगी
(ग) परागण
(घ) युग्मनज ।

प्रश्न 3.
पौधों में अलैंगिक जनन की विधियों की चर्चा करें।
उत्तर:
पौधों के जड़, तना, पत्तियाँ, कली आदि कायिक भागों से नए पौधे की उत्पत्ति होती है। कायिक प्रवर्धन एक प्रकार का अलैंगिक जनन है। आलू, गन्ना, ब्रायोफाइलम, गुलाब, चमेली अलैंगिक जनन प्रक्रिया करते हैं। अलैंगिक जनन की विधि इस प्रकार होता है।

(1) लेयरिंग विधि – इस विधि में पौधों की तना को मिट्टी में दबा दिया -जाता है। वहाँ पानी देते रहना चाहिए ताकि नमी रहे। 10-15 दिनों में वहाँ से जड़ें निकलने लगती हैं। काड़ेंकर दूसरी जगह लगा देते हैं।

(2) मुकुलन – यीस्ट एककोशिकीय जीव है। जब पावरोटी या बिस्कुट को छोड़ दिया जाए और उसे पोषण उपलब्ध हो तो तेजी से जनन करने लगता है। यीस्ट कोशिकाओं से छोटी-छोटी बल्ब जैली संरचना करने लगता है इसे मुकुल संरचना कहते हैं। वृद्धि के फलस्वरूप जनक कोशिका से बदलकर यीस्ट कोशिका में बदल जाता है और फिर नई कोशिकाएँ उत्पन्न करता है।

खंडन – शैवाल को जब जल और पोषक तत्व प्राप्त होते हैं तो खंडन द्वारा तेजी से बढ़ते हैं। शैवाल दो या दो से अधिक भागों में खंडित हो जाते हैं जो कुछ दिनों में अपने जनकों के समान हो जाते हैं।

बीजाणु – अनुकूल परिस्थिति में बीजाणु अंकुरित होते हैं और नये जीव में विकसित होते हैं। माँस तथा फर्न निम्न स्तरीय पौधों में भी जनन बीजाणुओं द्वारा ही होता है।

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प्रश्न 4.
बीजों के बनने के लिए लैंगिक जनन आवश्यक है। क्यों ?
उत्तर:
लैंगिक जनन में नर युग्मक मादा युग्मक से बीजाण्ड में मिलते हैं। मिलन के फलस्वरूप निषेचन होता है। निषेचन के कारण युग्मनक भ्रूण में विकसित होता है और भ्रूण विकसि होकर बीज बनते हैं। अण्डाशय का आकार बढ़ता है और फल के रूप में विकसित होता है। निषेचन के लिए लैंगिक जनन आवश्यक है।

प्रश्न 5.
स्व-परागण तथा पर परागण में अन्तर बताएँ ?
उत्तर:
परागकण का वर्तिकाग्र तक जाने की क्रिया को परागण कहते हैं। जब परागकण अपने ही फूल के वर्तिकाग्र तक जाता है तो इसे स्व-परागण कहते हैं और यदि परागकणों का अपने ही पौधों के दूसरे फूलों के वर्तिकाग्र तक अपने जाति या दूसरे फूलों के वर्तिकाग्र तक ले जाने की क्रिया को पर – परागण कहते हैं।

प्रश्न 6.
बीजों के प्रकीर्णन से क्या समझते हैं ? ये किस प्रकार होते हैं, चर्चा करें।
उत्तर:
अधिकांश पौधे बीजों के कारण नये पौधे उगते हैं। पौधों के विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में धूप, जल खनिज एवं स्थान की आवश्यकता होती है। एक स्थान पर ज्यादा पौधे विकसित नहीं हो पाते हैं। बीजों का दूर-दूर तक विभिन्न स्थानों तक पहुँचना बीजों का प्रकीर्णन कहलाता है। बीज हवा, पानी से बहकर तथा जन्तुओं द्वारा बीजों का प्रकीर्णन होता है। सूर्यमुखी, घास, नारियल के बीज पानी में बहकर । काँटेदार एवं हुक जैसी आकृति वाले बीज जन्तुओं के माध्यम से पीपल, बरगद के बीज पक्षियों द्वारा प्रकीर्णन होता है।

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प्रश्न 7.
फूल का चित्र बनाकर उनके प्रमुख अंगों को नामांकित करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 17 पौधों में जनन 1

प्रश्न 8.
जिन पौधों में कायिक प्रवर्धन होता है उनकी एक सूची बनाएँ ?
उत्तर:
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प्रश्न 9.
यदि पौधों में बीजों का निर्माण न हो तो क्या होगा? कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर:
नये पौधों का उगना ज्यादातर बीजों के द्वारा ही होता है। अगर बीज का निर्माण न होगा तो पृथ्वी पर पौधों की संख्या कम होगी और CO2 और O2 का संतुलन बिगड़ जाएगा। जंगल खत्म हो जाएँगे। पौधों की कमी मानव के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होगा। गेहूँ, धान, मक्का बहुत सारे खाद्य पदार्थों का खात्मा हो गया । इस तरह कई तरह की कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

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Bihar Board Class 7 Science पौधों में जनन Notes

सभी जीव और पौधे अपने वंश को कायम रखने की प्रवृत्ति होती है। जनकों द्वारा संतति उत्पन्न करना अथवा जन्म देना ‘जनन’ कहलाता है। जनन के फलस्वरूप ही अपनी जाति को बनाये रखते हैं। पौधों की उत्पत्ति बीज के अलावा अन्य भागों से भी होती है। पौधों में जड़, तना तथा पत्तियाँ होती हैं इन्हें कायिक अंग कहते हैं। पौधों की वृद्धि के बाद फूल निकलते हैं। फूलों से फल और फल से बीज प्राप्त होते हैं। बीजों से एक नये पौधे उत्पन्न होते हैं। कायिक अंगों जैसे जड़, तना, पत्ती से भी नये पौधे उत्पन्न होते हैं। पौधे दो प्रकार से जनन क्रिया करते हैं और संतति उत्पन्न करते हैं। जनन के प्रकार अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन । अलैंगिक जनन में पौधे बिना बीजों के ही नए पौधे उत्पन्न करते हैं। पौधों के जड़, तना और पत्तियों से नये पौधों की उत्पत्ति अलौंगक विधि कहलाती है। कायिक भागों द्वारा जनन होने के कारण इसे कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) कहते हैं। गुलाब का तना, ब्रायोफाइलम को पनियाँ, मुकुलन द्वारा नये पौधे की उत्पत्ति होती हैं। लैंगिक जनन-फूलों में पुंकेसर नर जनन अंग और स्त्री केसर (Pistil) मादा जनन अंग होते हैं।

जिन फूलों में दोनों जनन अंग होते हैं उसे द्विलिंगी फूल, कहते हैं। एक ही जनन अंग वाले फूल एकलिंगी (Unisexual) फूल कहते हैं। पँकेसर के ऊपर परागकोष होते हैं इनमें परागकण रहते हैं। ये नर युग्मक बनाते हैं। स्वीकंसर के अण्डाशय में एक या अधिक बीजाण्ड होते हैं जो मादा युग्मक बनाते हैं। लैंगिक जनन प्रक्रिया में नर युग्मक मादा युग्मक से बीजाण्ड में मिलते हैं और एक संरचना का निर्माण होता है वह युग्मनज कहलाता है। रागकणों का, स्थानान्तरण परागकोष से वर्तिकान तक होता है। परागकणों का वर्तिकान पर स्थानान्तरण वायु, कीट, जल आदि के माध्यम से होता है। परागकण हल्के होते हैं। जब हवा बहती है तो उड़कर वर्तिकार तक पहुँच जाते हैं। कीटों के द्वारा भी वर्तिकाग्र एक पहुँच जाते हैं। परागकण वर्तिकाग्र के चिपचिपा होने के कारण चिपक जाते हैं।

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इस प्रकार परागकण वर्तिकाग्र तक पहुंच जाता है। परागकण का वर्तिकान तक आना परागकण कहलाता है। जल पराग कण अपने ही फूल के वर्तिकान तक पहुँचता है तो इसे स्वयं परागकण कहते हैं । यदि परागकणों अपने ही पौधों के दूसरे फूलों के वर्तिकाग्र तक हो या अपने जाति के दूसरे के फूलों के वर्तिकाग्र तक हो तो परागण कहते हैं। जब वर्तिकान पर परागकण चिपकते हैं तो पागकण में अंकुर निकलता है और पराग नलिका का निर्माण करता है जो स्त्रीकेसर के वर्तिका से होते हुए बोजाण्ड तक जाता है इसी नली से पराग नर युग्मक के रूप में बीजाण्ड (मादा युग्मक) से मिलता है। इस मिलन को क्रिया को निषेचन कहते हैं। निषेचन के कारण युग्मनक भ्रूण में विकसित होने लगता है और चीज बनता है। अण्डाशय का आकार बढ़ने लगता है, फल बन जाता है। बीजों को दूर दूर तक दूसरे स्थानों तक पहुँचाना बीजों का प्रकोर्णन कहलता है । जल, वायु तथा जन्तुओं द्वारा स्थानान्तरण होता है। पीपल, बरगद वृक्षों के बीज चिड़ियों द्वारा होता है। काँटेदार एवं हक जैसी आकृति वाले बीज जन्तुओं के माध्यम से दूर-दूर तक जाते हैं।