Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?

1. एक वर्ग मध्य-बिन्दु बराबर है –
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के।
(ख) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के।
(ग) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्नं वर्ग सीमा के अनुपात के।
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के

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2. दो चरों के बारम्बारता वितरण को इस नाम से जानते हैं –
(क) एक विचर वितरण
(ख) द्वितर वितरण
(ग) बहुचर वितरण
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) द्वितर वितरण

3. वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन आधारित होता है –
(क) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर
(ख) उच्च वर्ग सीमाओं पर
(ग) निम्न वर्ग सीमाओं पर
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर
उत्तर:
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर

4. अपवर्जी विधि के अंतर्गत –
(क) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते हैं।
(ख) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
(ग) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(घ) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
उत्तर:
(ग) किसी वर्ग की उच्च सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।

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5. परास का अर्थ है –
(क) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ख) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ग) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का औसत
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात
उत्तर:
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात।

प्रश्न 2.
वस्तुओं के वर्गीकरण का क्या कोई लाभ हो सकता है। अपने जीवन से उदाहरण लेकर समझाएँ।
उत्तर:
वस्तुओं के वर्गीकरण से कई लाभ होते हैं। इस बात को मैं अपने जीवन से उदाहरण देकर समझाता हूँ। पिछले वर्ष मैं दसवीं कक्षा का विद्यार्थी था। मैं पढ़ाई में तो होशियार था, परंतु अन्य बातों में बहुत ही लापरवाह था। मेरा पढ़ने का एक अलग कमरा था। कमरे में मेरी किताबें तथा कापियाँ इधर-उधर बिखरी थीं। पेन, पेंसिलें तथा अन्य पाठ्य-सामग्री इधर-उधर बिखरी रहती थीं, विज्ञान की कुछ पुस्तकें अलमारी में होती थीं और कुछ इधर-उधर पड़ी रहती थीं। अन्य विषय की पुस्तकों तथा अभ्यास पुस्तिकाओं का भी यही हाल था। पुस्तकें जल्द फट जाती थीं।

कापियों तथा किताबों को तलाश करने में काफी समय लगता था और परेशानी भी बहुत होती थी। कई बार किताबें ढूँढते-ढूँढ़ते इतना समय बरबाद हो जाता था कि पढ़ने का मन भी नहीं करता था। एक बार मेरे घर मेरा एक मित्र आया। वह पढ़ाई में कमजोर था। वह कुछ सवाल समझने मेरे घर पर आया। जब वह मेरे अध्ययन-कक्ष में आया तो हैरान हो गया। उसने मुझे बताया कि तुम्हारा अध्ययन तो कबाड़ बना हुआ है। उसने मेरी पुस्तकों तथा अध्ययन-सामग्री का वर्गीकरण किया। उनको उचित स्थान पर रखा। तब से मेरी आदत वस्तुओं को अपने स्थान पर रखने की बन गई, अब मुझे किसी विषय की कोई पुस्तक पढ़नी हो तो वह पुस्तक बड़ी सरलता से मिल जाती है तथा समय नष्ट नहीं होता। पुस्तक तलाश करने में कोई।

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प्रश्न 3.
चर क्या है? सतत तथा विविक्त चरों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
चर (Variable):
चर वह संख्या है जिसका मान परिवर्तित होता रहा है (A Variable is one that takes Chaniging Values) जैसे:
पिछले दस वर्षों में भारत में खाद्यान्न का उत्पादन, किसी स्थान का विभिन्न समयों पर तापमान, पाशा फेंकने पर पाया गया अंक, सिक्का उछालने पर प्राप्त परिणाम इत्यादि। परिवर्तन के आधार पर चरों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है –
(क) सतत (Continuous)
(ख) विविक्त (Discrete)

सतत चर (Continuous Variables):
सतत चर का कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है। यह पूर्णांक मान (0, 1, 2, 3, 4, …..) भिन्नात्मक मान (1/2, 3/4, 911) तथा वे मान जो यथातय भिन्न नहीं हैं (\(\sqrt{2}\), \(\sqrt{3}\), \(\sqrt{17}\) इत्यादि) हो सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक छात्र का कद 80-160 सेमी. तक बढ़ता है, तो उसके कद के मान इसके बीच आने वाले सभी मान हो सके हैं, जैसे-90 सेमी. 102.34 सेमी 156.49 सेमी. आदि। इस तरह ऊँचाई चर एक सतत चर है। सतत चर के अन्य उदाहरण भार, समय दूरी उपज आदि हैं।

विविक्त चर:
विविक्त चर केवल निश्चित मान लेते हैं। किन्हीं दो मानों के बीच एक अंतराल होता है। जैसे-पाशा फेंकने पर आया हुआ अंक। यह अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6 में से कोई भी एक हो सकता है। नतीजा 1 और 2 के बीच नहीं हो सकता, इसी तरह किसी कक्षा में छात्रों की संख्या एक विविक्त चर है। यह संख्या केवल पूर्णांक ही हो सकती है। उदाहरणस्वरूप, छात्रों की संख्या 30 और 31 के बीच 30.5 (माना) नहीं हो सकती। आधा छात्र निरर्थक होगा।

इसका मतलब यह कतई नहीं है कि विविक्त चर भिन्नांक मान नहीं ले सकते। माना कि ‘X’ एक चर है जिसके मान \(\frac{1}{4}\), \(\frac{1}{8}\), \(\frac{1}{16}\), \(\frac{1}{32}\) हैं। यह एक विविक्त चर है, क्योंकि X के मान इन भिन्नों में से हो सकते हैं, तथापि ये दो सन्निकट भिन्नों के बीच नहीं, हो सकते। विविक्त चरों के कुछ उदाहरण हैं – सड़क पर किसी समय वाहनों की संख्या, पासे पर आने वाली संख्या, दो सिक्के उछालने पर आए हुए सरों (Heads) की संख्या इत्यादि।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयोग किए गए ‘समावेशी’ तथा ‘अपवर्जी’ विधियों को समझाएँ।
उत्तर:
आँकड़ों को दो विधियों से वर्गीकृत किया जा सकता है –

  1. समावेशी विधि
  2. अपवर्जी विधि।

1. समावेशी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग के सभी मद ऊपरी सीमा सहित वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा पर अगले वर्ग की निचली सीमा नहीं बनाती। यह विधि निम्न तालिका से स्पष्ट हो जाएगी।
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2. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग की अपनी सीमा छोड़ा कर वर्ग के सी मद वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होगी। जैसे-0-10 तक 10-20 में क्रमश: 10 और 20 शामिल वर्गों में तालिका है और पहले वर्ग की उच्च सीमा 10 दूसरे वर्ग की निम्न सीमा है। यह बात निम्न तालिका से और भी स्पष्ट हो जाएगी।
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ऊपरी दी गई जानकारी के आधार पर चाहे हम 0 से 30 तक अंकों के लिए 5 के वर्गान्तर के आधार पर 0 से आरंभ होकर शृंखला बनानी है तो दोनों विधियों के अनुसार निम्न प्रकार से अखंडित आवृत्ति होगा।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में 50 गृहस्थों द्वारा भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय को रुपए में दर्शाया गया है।
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  1. भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का विस्तार बताएँ।
  2. विस्तार को उचित वर्गान्तर की संख्या से विभाजित करें और लाभ का आवृत्ति वितरण ज्ञात करें।
  3. उन परिवारों की संख्या बताएँ जिनकी मासिक व्यय –

(क) 2,000 रुपए से कम हो
(ख) 3,000 रुपए से अधिक हो
(ग) 1,500 रुपए से 2,500 रुपए के बीच में हो
उत्तर:
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(क) 2,000 रुपए से कम मासिक खर्चे वाले परिवार = 19 + 14 = 33
(ख) 3,000 रुपए से अधिक मासिक खर्चे वाले परिवार = 2 + 1 + 2 + 1 = 6
(ग) 1,500 – 2,500 के बीच मासिक खर्च वाले परिवार = 14 + 6 = 20 परिवार

प्रश्न 6.
एक शहर में 45 परिवारों का घरेलू उपकरण के प्रयोग की संख्या के बारे में सर्वेक्षण किया गया। उनके द्वारा नीचे दिये उत्तरों के आधार पर आवृत्ति विन्यास तैयार करें।
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उत्तर:
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प्रश्न 7.
वर्गीकृत आँकड़ों में सूचनाओं की हानि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अंकों को वर्गीकृत करने से आँकड़े सरलता से समझे जा सकते हैं। परंतु आँकड़ों को वर्गीकृत करने से आँकड़ों की विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती। एक बार आँकड़ों के समूहों में वर्गीकृत करने से व्यक्तिगत मदों का या अन्य सांख्यिकी का महत्त्व गणना में कम हो जाता है। मान लो हमारे पास 6 मद दिए गए हैं – 25, 25, 20, 22, 21 तथा 28। जब इन मदों को 20-30 आवृत्ति वितरण में वर्गीकृत करते हैं तो हमें केवल इस बात का ज्ञान होता है कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में 6 आवृत्तियाँ या मदें हैं।

परंतु इस बात का ज्ञान नहीं होता कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में कौन-कौन से मूल्य वाली मदें हैं। यह मान लिया जाता है कि इस वर्ग में जितनी भी मदें हैं, उनका मूल्य वर्गान्तर का मद मूल्य (यहाँ पर 25) मान लिया जाता है। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी गणना वर्गान्तर के मध्य मूल्य के आधार पर की जाती है न कि मदों के वास्तविक मूल्यों के आधार पर। इस तरह आँकड़ों के वर्गीकरण से मदों के वास्तविक मूल्य का पता नहीं चलता। इसे सूचनाओं की हानि कहते हैं।

प्रश्न 8.
क्या आप सहमत हैं कि वर्गीकृत आँकड़े मूले शुद्ध आँकड़ों से अच्छे हैं?
उत्तर:
शुद्ध या मूल आँकड़े अवर्गीकृत होते हैं। वे प्रायः इतने अधिक और बोझिल होते हैं कि उनको सँभालना भी कठिन हो जाता है। उन आँकड़ों से कोई निष्कर्ष निकालना बहुत ही कठिन कार्य है। यह बात निम्नलिखित 100 विद्यार्थियों के प्राप्तांक के लिए गए आँकड़ों से स्पष्ट होता है।
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अब यदि आप से पूछा जाए कि आप तालिका देखकर बताएं कि गणित में सबसे अधिक कितने अंक हैं। तब आपको पहले 100 विद्यार्थियों के अंकों को बढ़ते या घटते क्रम में लिखना होगा। यह सब बहुत ही कठिन कार्य है। यह काम और अधिक कठिन बन जाएगा जब 100 विद्यार्थियों के स्थान पर आपको 1000 विद्यार्थियों के प्राप्तांक दिए गए हों। जब हम इन्हीं अंकों को वर्गीकृत करते हैं तो सूचनाएँ सरलता से मिल जाएँगी। नीचे इन्हीं आँकड़ों का वर्गीकरण दिखाया गया है –
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ऊपरी दी गई तालिका से हम बिना किसी कठिनाई के निष्कर्ष निकाल सकते हैं और तुलना कर सकते हैं। इस तालिका से हमें पता चलता है कि 6 विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके प्राप्तांक 70 80 के बीच में है। 90 से 100 के बीच अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 4 है। इस प्रकार हम देखते हैं कि वर्गीकृत आँकड़े शुद्ध या अवर्गीकृत आँकड़ों से श्रेष्ठ हैं।

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प्रश्न 9.
एकल-विचार तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
एकल चर तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर (Differences betweena univarite and bivariate frequency distribution):
एक चर के आवृत्ति वितरण को एकल चर आवृत्ति वितरण (Univariate Distribution) कहते हैं। इसके विपरीत दो चरों के आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Freuency Distribution) कहते हैं। नीचे दोनों पद के आवृत्ति वितरण के उदाहरण दिए गए हैं।
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द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Frequency Distribution):
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इस तालिका से पता चलता है कि कुल 20 कंपनियाँ हैं। इनका विज्ञापन पर व्यय तथा उनके द्वारा विक्रय की मात्रा दी गई है। अर्थात् यहाँ दो चर हैं –

  1. विज्ञापन पर व्यय तथा
  2. विक्रय। विक्रय के मूल्य को विभिन्न स्तंभों में दिखाया गया है तथा विज्ञापन के व्यय को विभिन्न पंक्तियों में दिखाया गया है। तालिका से हमें पता चलता है कि तीन फर्म ऐसी हैं, जिनका विक्रय 135 – 145 लाख के बीच में है और उनका विज्ञापन पर व्यय 64-66 हजार रुपयों के बीच में है।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित तालिका की सहायता से 7 तक के वर्ग अंतराल में समावेशी विधि के अनुसार आवृत्ति वितरण बनाएँ।
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उत्तर:
आवृत्ति वितरण (Frequency Distribution):
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Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
खुले सिरे वाले वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
खुले सिर वाले वर्ग होते हैं जिसमें या तो निम्न सिरा या ऊपरी सिर परिभाषित नहीं होता।

प्रश्न 2.
वर्ग का मध्य बिन्दु क्या है?
उत्तर:
उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा का औसत मूल्य का मध्य बिन्दु कहते हैं।

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पश्न 3.
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण कहते हैं।

प्रश्न 4.
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी गणना किस पर आधारित होती है?
उत्तर:
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी की गणना वर्ग के मध्य बिंदुओं पर आधारित होती है।

प्रश्न 5.
निम्न तालिका में से भारत की जनसंख्या का विस्तार बताइए।
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उत्तर:
भारत की जनसंख्या का विस्तार = 102 – 35.7 = 67 करोड़।

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प्रश्न 6.
उत्पादन की दृष्टि से देशों के नाम बढ़ते हुए क्रम में लिखें।
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उत्तर:
बढ़ते हुए क्रम में।
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित की प्रकृति क्या है – “गुणात्मक या मात्रात्मक (परिणामात्मक)?

  1. राष्ट्रीयता
  2. साक्षरता
  3. धर्म
  4. लिंग
  5. वैवाहिक स्थिति आदि

उत्तर:
राष्ट्रीयता, साक्षरता, धर्म, लिंग, वैवाहिक, आदि की प्रकृति गुणात्मक है।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें आँकड़ों को उनकी विशेषताओं के आधार पर वर्गों में विभाजित किया जाता है।

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प्रश्न 9.
वर्गीकरण को कोई एक उद्देश्य लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के विशाल समूह को उनकी विशेषताओं के आधार पर संक्षिप्त करना ताकि उनकी समानताएँ व असमानताएँ स्पष्ट हो सकें।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत श्रेणी का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्तिगत श्रेणी वह श्रेणी है जिसमें प्रत्येक मद का माप अलग दिया जाता है।

प्रश्न 11.
अपवर्जी श्रेणी क्या है?
उत्तर:
अपवर्जी श्रेणी वह श्रेणी है जिसके अंतर्गत वर्ग की ऊपरी सीमाओं को छोड़कर अन्य सभी समान मदों को वर्ग समूह में सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 12.
20-30 वर्ग समूह का मध्यमूल निकालें।
उत्तर:
25

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित आँकड़ों के बढ़ते क्रम में क्रमबद्ध कीजिए। 18, 30, 15, 20, 10, 25, 19 तथा 28
उत्तर:
10, 15, 18, 19, 20, 25, 28 तथा 30

प्रश्न 14.
वर्ग अंतराल किसे कहते हैं?
उत्तर:
उच्च और निम्न वर्ग-सीमा के अंतर को वर्ग-अंतराल कहते हैं।

प्रश्न 15.
आवृत्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब किसी श्रेणी में मद का मूल्य बार-बार आता है तो हम उसे आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 16.
वर्ग सीमाएँ कितनी होती हैं?
उत्तर:
वर्ग सीमाएँ दो होती हैं।

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प्रश्न 17.
निम्न सीमा किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक वर्ग की पहली संख्या को निचली सीमा कहते हैं। जैसे 5-10 में 5 निम्न सीमा है।

प्रश्न 18.
प्रवेश पत्रिका के दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. प्रवेश पत्रिका से किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि को सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः भी किया जाता है।

प्रश्न 19.
शुद्ध आँकड़ों तथा व्यक्तिगत श्रृंखला में क्या अंतर है?
उत्तर:
शुद्ध आँकड़े मूल रूप में व्यक्त किए जाते हैं जबकि व्यक्तिगत श्रृंखला में मूल आँकड़ों को किसी क्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है।

प्रश्न 20.
विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब व्यक्तिगत आँकड़ों को बढ़ते हुए क्रम में या घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो उसे विन्यास कहते हैं।

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प्रश्न 21.
यदि समान अंतराल आवृत्ति वितरण में आँकड़े एक या दो वर्गों में केन्द्रित हैं तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
उस अवस्था में हम असमान अंतराल आवृत्ति का निर्माण करेंगे।

प्रश्न 22.
एकल संतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
वजन, समय तथा दूरी एकल सतत चरों के तीन उदाहरण हैं।

प्रश्न 23.
तीन ऐसे गुणों के नाम लिखो जो प्रकृति में परिणामात्मक हैं।
उत्तर:

  1. ऊँचाई
  2. आयु तथा
  3. आय

प्रश्न 24.
सतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
छात्रों की ऊँचाई, विभिन्न वर्षों में भारत में चावल का उत्पादन, भार।

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प्रश्न 25.
एक आवृत्ति वितरण में साधारणतया कितने वर्ग होने चाहिए।
उत्तर:
एक आवृत्ति वितरण में कम-से-कम 5 और अधिक-से-अधिक 15 वर्ग होने चाहिए।

प्रश्न 26.
समावेशी विधि में किन वर्ग सीमाओं को शामिल किया जाता है।
उत्तर:
समावेशी विधि में वर्ग की दोनों सीमाओं-उच्च सीमा तथा निम्न सीमा को शामिल किया जाता है।

प्रश्न 27.
तुम्हारे छोटे भाई की पुस्तकें हमेशा अव्यवस्थित पड़ी रहती हैं? इससे उसे क्या परेशानी होती हैं?
उत्तर:
उसे पुस्तकों को तलाश करने में काफी समय गँवाना पडता है।

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प्रश्न 28.
वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
समान गुण वाले आँकड़ों की वर्गों और समूहों में व्यवस्थित करने की क्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 29.
आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी मूल्य की बारम्बारता या पुनः को आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 30.
संख्यात्मक (परिणात्मक) वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण को संख्यात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

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प्रश्न 31.
गुणात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
गुणों के आधार पर आँकड़ों के वर्गीकरण को गुणात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 32.
भौगोलिक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
क्षेत्र के आधार पर वर्गीकरण को भौगोलिक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 33.
समयानुसार आँकड़ों के वर्गीकरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
काल-श्रेणी।

प्रश्न 34.
शुद्ध आँकड़ों को शुद्ध आँकड़ें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
मौलिक आँकड़ों को शुद्ध आँकड़े कहते हैं।

प्रश्न 35.
नीचे एक श्रृंखला दी गई हैं। इस श्रृंखला का नाम बताएँ – 19, 12, 15, 18, 20, 25, 20.
उत्तर:
यह व्यक्तिगत श्रृंखला है।

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प्रश्न 36.
वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
क्योंकि शुद्ध एवं अव्यवस्थित आँकड़ों का निर्वाचन एक जटिल क्रिया है।

प्रश्न 37.
क्रमबद्ध आँकड़ों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
इसका अभिप्राय आँकड़ों को एक क्रम (घटते या बढ़ते) में प्रस्तुत करना है।

प्रश्न 38.
संतत श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
संतत (अविच्छन) श्रृंखला उस श्रृंखला को कहते हैं जिसमें एक से दूसरे जुड़े हुए वर्गों की एक आवृत्ति व्यक्त की जाती है।

प्रश्न 39.
समायोजित वर्गचिह्न निकालने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
समायोजित वर्गचिह्न = (समायोजित उच्च सीमा + समायोजित निम्न सीमा) ÷ 2।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सतत तथा विविक्त (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाएँ।
उत्तर:
सतत तथा विविक्त चरों में अंतर (Differences between Continuous Series and Discrete Series):
एक चर को संतत चर उस समय कहा जाता है जब वह \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\),\(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 – 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊँचाई, भारत तथा उनकी आय को सतत चर कहा जा सकता है। इसके विपरीत यदि चर केवल एक विशेष मूल्य को ले सकता है तो इसे विविक्त चर कहेंगे जैसे-पूर्ण संख्या (Whole number) को विविक्त चर कहते हैं। एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

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प्रश्न 2.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के वर्गीकरण के अपवर्जी विधि तथा समावेशी विधि समझाइए।
उत्तर:
अंकों का वर्गीकरण दो विधियों से कर सकते हैं –

  1. अपवर्जी विधि
  2. समावेशी विधि

1. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि में वर्गान्तर की उच्च सीमा वाला मद उस वर्गान्तर में शामिल न होकर अगले वर्गान्तर में शामिल होगा। वर्गान्तर 0-10, 10-20, 20-30 किसी विशेष मद का मूल्य 10 है तो वह 0-10 में शामिल न होकर 10-20 वर्गान्तर में माना जाएगा।

2. समावेशी विधि (Inclusive Method):
जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि समंकमाला में आए हुए उच्च सीमा मूल्य उसी में शामिल होंगे, अगले में नहीं। वर्गान्तर 10 19, 20-29, 30-39 में। यदि कोई मूल्य 19 आता है तो वह 10-19 वाले वर्गान्तर में शामिल करना चाहिए, अगले में नहीं।

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प्रश्न 4.
एकल, द्वि तथा बहु चर वितरण को समझाइए।
उत्तर:

  1. एकल चर वितरण (Univariate Distribution): एकल चर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें केवल एक चर होता है, जैसे-जनसंख्या की केवल आय।
  2. द्विचर वितरण (Bivariate Distribution): द्विचर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें दो चर होते हैं। जैसे एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन।
  3. बहुचर वितरण (Multivariate Distribution): बहुचर वितरण उस वितरण को। कहते हैं जिसमें दो से अधिक चर होते हैं-उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपयोग की सभी मदों का व्यय।

प्रश्न 5.
चर (Variables) और गुणधर्म (Attributes) में उदाहरण सहित अंतर बताएँ।
उत्तर:
साधारण भाषा में चर से अभिप्राय किसी ऐसी विशेषता से है जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में बदलते हैं। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई और उनका वजन बदलते रहते हैं। इसी तरह एक व्यक्ति की योग्यता, वस्तुओं की कीमतों आदि चर हैं, परंतु सांख्यिकी में चर से अभिप्राय उस परिवर्तनशील चर से है जिसे संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई व वजन चर हैं, क्योंकि उन्हें संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है।

इसी तरह से व्यक्ति की आय, उपभोग के विभिन्न मदों पर पारिवारिक खर्चे, परिवार का आकार, फर्म का उत्पादन आदि चर के उदाहरण हैं। इसके विपरीत कला के प्रति रुचि और बुद्धिमता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है, परंतु इनको उसी तरह से संख्यात्मक रूप में नहीं मापा जा सकता जिस तरह व्यक्ति की आय या ऊँचाई को। इनको हम गुण-धर्म कहेंगे न कि चर।

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प्रश्न 6.
बारम्बारता सारणी तथा बारम्बारता वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
बारम्बारता सारणी में सभी मदों को व्यक्तिगत रूप से व्यक्त किया जाता है जबकि आवृत्ति वितरण में एक विशेष वर्ग की बारम्बारता को दर्शाया जाता है। यह सब नीचे की तालिकाओं से स्पष्ट है –
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प्रश्न 7.
वर्गान्तर के आधार पर निर्णय कैसे किया जाता है?
उत्तर:
वर्गान्तर के आधार का निर्धारण (Determination of the size of class intervals):
वर्गात्तर की संख्या निकालने के लिए हम विस्तार को वर्गों की संख्या से विभाजित करेंगे।
सूत्र में h = \(\frac{R}{N}\)
यहाँ h = वर्गान्तर का आकार
R = विस्तार
N = वर्गों की संख्या मान लें विस्तार 70 है और वर्गों की संख्या 10 है तो वर्गान्तर का आधार = 70 ÷ 10 = 7 होगा।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
वर्गीकरण की विशेषतायें (Characteristics of Classfication):
आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है, जैसे – 0 – 5, 5 – 10, 10 – 15, 15 – 20 आदि।

  1. समानता तथा सजातीयता के आधार पर तथ्यों को विभाजित करना।
  2. वर्गीकरण इस ढंग से विभाजित किया जाता है कि इकाई की विभिन्नता में उनकी एकता स्पष्ट हों।
  3. वर्गीकरण समय, गुण, मात्रा, क्षेत्र आदि के आधार पर किया जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक उदाहरण की सहायता से सिद्ध करें कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।
उत्तर:
यह सिद्ध करने के लिए कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल है, नीचे एक आवृत्ति विवरण तालिका बनाते हैं।
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विस्तार = 100 – 0 = 100
सभी वर्गान्तर का जोड़ = 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 = 100 (वर्गान्तर का जोड़)
अत: विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।

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प्रश्न 2.
नीचे एक कंपनी के 550 कर्मचारियों की आय की आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। तालिका वर्गान्तर की समायोजन की विधि लिखकर समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
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उत्तर:
वर्गान्तर में समायोजन (Adjustment in Class intervals):
दी गई तालिका से हमें पता चलता है कि दूसरे वर्ग में ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा में निरंतर नहीं है। उदाहरण के लिए पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है और दूसरे वर्ग की निचली सीमा 900 है। इन दोनों में 1 का अंतर (Gap) है। इन दोनों वर्गों को अखंडित बनाए रखने के लिए हमें वर्गान्तर में समायोजन करना पड़ता है। समायोजन के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है।

  1. दूसरे वर्ग की नीचे वाली सीमा तथा पहले वर्ग की ऊपरी सीमा का अंतर निकाला जाता है। तालिका में दूसरे वर्ग की नीचे की सीमा 900 है और पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है। इन दोनों में अंतर 1 (900-899) है।
  2. प्राप्त अंतर को दो से विभाजित करें अर्थात् 1 को 2 से विभाजित करें। ऐसा करने से उत्तर 0.5 आता है।
  3. 0.5 को सभी वर्गों की निम्न सीमा से घटा दें। जैसे 800, 900, 1000, 1100, 1200 तथा 1300 में से 0.5 घटाने पर क्रमश: 799.5, 899.5, 999.5, 1099.5 1299.5 तथा 1399.5 आता है।
  4. 0.5 को सभी वर्गों की उच्च सीमा से जोड़ दें। जैसे – 899, 999, 1099, 1199, 1299 तथा 1399 में 0.5 जोड़ने पर क्रमश: 899.5 999.5, 1199.5 तथा 1399.5 आता है।
  5. समायोजन करने के पश्चात् आवृत्ति वितरण तालिका में यह नए वर्ग लिख लें। इसके बाद समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालें। समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करें –
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अतः पहले वर्ग का मध्य-बिन्दु 849.5 (\(\frac{799.5+899.5}{2}\)) इसी प्रकार सभी समायोजित वर्गों के समायोजित मध्य – बिंन्दु ज्ञात करेंगे।

समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका (Adjusted Frequency Distribution Table)
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प्रश्न 3.
एक काल्पनिक द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका का निर्माण करें।
उत्तर:
द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका (Bivariate Frequency Distribution Table):
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संख्यात्मक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण को ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण में बदलें।
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उत्तर:
‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित ‘से कम’ संचयी आवृत्ति माला को सामान्य समंक-माला में बदलें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 27

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से बताएँ कि 149 सेमी, से कम लम्बाई के कितने विद्यार्थी हैं?
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उत्तर:
149 सेमी. से कम लम्बाई वाले विद्यार्थियों की संख्या = 1 + 7 + 7 + 13 = 25

प्रश्न 4.
एक देश के निर्यात के आँकड़े नीचे सारणी में दिए गए हैं। इन्हें आवृत्ति वक्र काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर:
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प्रश्न 5.
नीचे दी गई साधारण आवृत्ति वितरण को ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण बनाएँ।
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उत्तर:
से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण।
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प्रश्न 6.
निम्न संचयी आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलें।
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उत्तर:
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प्रश्न 7.
नीचे असमान वर्गान्तर में आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। इसकी सहायता से समान वर्गान्तर आवृत्ति वितरण तालिका तैयार करें।
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उत्तर:
दी हुई तालिका से पता चलता है कि वर्गान्तर में 5 और 10 अंतर है। अतः हम समान वर्गान्तर की तालिका बनने के लिए 5 या 10 का अंतर ले सकते हैं। परंतु यदि हम 5 के अंतर का वर्गान्तर लेंगे तो वर्गान्तरों की संख्या 20 हो जाएगी जो कि बहुत अधिक होगी। अतः हम 10 का अंतर लेकर वर्गान्तर लेंगे।
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित तालिका को आवृत्ति वक्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर:
तालिका में दिए गए आँकड़ों को नीचे बारम्बारता वक्र में दिखाया गया है। तालिका में मध्य-बिन्दु को x – अक्ष पर तथा आवृत्तियाँ को y – अक्ष पर दर्शाया गया है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों 10 के वर्ग-अंतराल में अपवर्जी विधि के अनुसार सतत श्रृंखला में प्रस्तुत कीजिए।
22, 25, 38, 40, 30, 50, 45, 55, 58, 60, 65, 42, 52, 23, 35, 45, 45, 55, 58, 47 तथा 37।
उत्तर:
सतत (अविच्छन) श्रृंखला (Continuous Series):
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प्रश्न 10.
एक गरीब में 30 परिवारों का सामान्य दैनिक खर्च (रुपयों) में इस प्रकार है।
11, 12, 14, 16, 16, 17, 18, 18, 20, 20, 20, 21, 21, 22, 22, 23, 23, 24, 25, 25, 26, 27, 28, 31, 32, 32, 26, 26, 38।
इन आँकड़ों का निम्नलिखित वर्गों के आधार पर एक बारम्बारता सारणी बनाएँ। 10 – 14, 15 – 19, 20 – 24, 25 – 29, 30 – 34, तथा 35 – 39।
उत्तर:
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
(अपवर्जी तथा समावेशी विधि के अनुसार।)
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उत्तर:
अपवर्जी विधि के अनुसार –
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक वर्ग की निचली और ऊपरी सीमा का अंतर कहलाता है –
(a) आवृत्ति वितरण
(b) वर्ग-आवृत्ति
(c) वर्ग-अंतरल
(d) वर्ग-सीमा
उत्तर:
(c) वर्ग-अंतरल

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प्रश्न 2.
10, 5, 7, 7, 8, 9, 10, 15 आँकड़े किस प्रकार के आँकड़े हैं?
(a) विविक्त श्रृंखला
(b) सतत श्रृंखला
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला
(d) शुद्ध आँकड़े
उत्तर:
(d) शुद्ध आँकड़े

प्रश्न 3.
वर्गीकरण का तात्पर्य है वस्तुओं को –
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना
(b) सजाना एवं सँवारना
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना

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प्रश्न 4.
आँकड़े को व्यवस्थित करते हैं –
(a) समयानुसार
(b) स्थानानुसार
(c) दोनों के अनुसार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) दोनों के अनुसार

प्रश्न 5.
चर पद का तात्पर्य ऐसी विशेषताओं से है जो –
(a) अपरिवर्तनशील होती हैं
(b) परिवर्तनशील होती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) परिवर्तनशील होती हैं

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी में चर पद का प्रयोग तभी किया जाता है जब ये विशेषताएँ –
(a) शब्दों में व्यक्त की जा सकें
(b) संख्याओं में मापी जा सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) संख्याओं में मापी जा सके

प्रश्न 7.
हम व्यक्तियों का वर्गीकरण उनके गुणों की –
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं
(b) संख्याओं के आधार पर कर सकते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं

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प्रश्न 8.
कोई चर तब संतत कहा जाता है जब यह किसी दिए परास के अंतर्गत –
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके
(b) कोई भी मूल्य धारण न कर सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके

प्रश्न 9.
असंतत या विविक्त चर धारण करते हैं –
(a) कोई भी मूल्य
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)

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प्रश्न 10.
सामान्य भाषा में समष्टि पद का अर्थ है किसी क्षेत्र में रहने वाले –
(a) विशिष्ट व्यक्तियों की संख्या
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)

प्रश्न 11.
आवृत्ति वितरण में परास का अर्थ है –
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य
(b) उच्चतम मूल्य + न्यूनतम मूल्य
(c) (a) और (b) दोन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य

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प्रश्न 12.
किसी विशेष वर्ग में मूल्यों की संख्या उस वर्ग की कहलाती है –
(a) आवृत्ति
(b) संचयो आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्ति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Geography मृदा Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में कौन-सी मृदा सबसे विस्तृत उपजाऊ है ………………………..
(क) जलोढ़
(ख) काली मृदा
(ग) लेटेराइट
(घ) वन मृदा
उत्तर:
(क) जलोढ़

प्रश्न 2.
किस मृदा को रेगुड़ मृदा भी कहते हैं ………………………
(क) नमकीन
(ख) काली
(ग) शुष्क
(ख) लेटेराइट
उत्तर:
(ग) शुष्क

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प्रश्न 3.
मृदा की ऊपरी तह के उड़ जाने का मुख्य कारण ………………………..
(क) पवन अपरदन
(ख) अपक्षातान
(ग) जल अपरदन
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) जल अपरदन

प्रश्न 4.
कृषिकृत भूमि में जल सिंचित क्षेत्र में खाई वन का क्या कारक है …………………………
(क) जिप्सम
(ख) अति-जल सिंचाई
(ग) अति पशुचारण
(घ) उर्वरक
उत्तर:
(ख) अति-जल सिंचाई

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मृदा क्या है?
उत्तर:
मृदा भू-पर्पटी की सबसे महत्त्वपूर्ण परत है। यह एक मूल्यवान संसाधन है। ‘मृदा शैल, मलवा और जैव सामग्री का सम्मिश्रण होती है जो पृथ्वी की सतह पर विकसित होते हैं। मृदा का विकास हजारों वर्ष में होता है।

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक हैं-उच्चावच, जनक सामग्री, जलवायु, वनस्पति तथा अन्य जीव रूप और समय । इनके अतिरिक्त मानवीय क्रियाएँ भी पर्याप्त सीमा तक इसे प्रभावित करती है। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस, जल तथा वायु होते हैं।

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प्रश्न 3.
मृदा परिच्छदिका के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
क’ संस्तर सबसे ऊपरी खण्ड होता है, जहाँ पौधों की वृद्धि के लिए अनिवार्य जैव पदार्थों का खनिज पदार्थ, पोषक तत्त्वों तथा जल से संयोग होता है । ‘ख’ संस्तर, ‘क’ संस्तर तथा ‘ग’ सस्तर के बीच संक्रमण खण्ड होता है जिसे नीचे व ऊपर दोनों से पदार्थ प्राप्त होते हैं। इसमें कुछ जैव पदार्थ होते हैं । तथापि खनिज पदार्थ का अपक्षय स्पष्ट नजर आता है। ‘ग’ संस्तर की रचना ढीली सामग्री से होती है। यह परत मृदा निर्माण की प्रक्रिया में प्रथम अवस्था होती है और अंततः ऊपर की दो परतें इसी से बनती हैं।

प्रश्न 4.
मृदा अवकर्षण क्या होता है?
उत्तर:
मृदा अवकर्षण को मृदा की उर्वरता के हास के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसमें मृदा का पोषण स्तर गिर जाता है और अपरदन तथा दुरुपयोग के कारण मृदा की गहराई कम हो जाती है। भारत में मृदा संसाधनों के क्षय का मुख्य कारक मृदा अवकर्षण हैं। मृदा अवकर्षण की दर भू-आकृति, पवनों की गति तथा वर्षा की मात्रा के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है।

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प्रश्न 5.
खादर और बांगर में क्या अंतर है?
उत्तर:
खादर प्रतिवर्ष बाढ़ों के द्वारा निक्षेपित होने वाला नया जलोढ़क है, जो महीन गाद होने के कारण मृदा की उर्वरता बढ़ा देता है। बांगर पुराना जलोढ़क होता है जिसका जमाव दाइकृत मैदानों से दूर होता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
काली मृदा किन्हें कहते हैं ? इनके निर्माण तथा विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
काली मृदा दक्कन के पठार के अधिकतर भाग पर पाई जाती हैं। इसमें महाराष्ट्र के कुछ भाग, गुजरात, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के कुछ भाग शामिल हैं। गोदावरी और कृष्णा नदियों के ऊपरी भागों और दक्कन के पठार के उत्तरी-पश्चिमी भाग में गहरी काली मृदा पाई जाती है। इन्हें ‘रेगूर’ तथा ‘कपास वाली काली मिट्टी’ भी कहा जाता है। आमतौर पर काली मृदाएँ, मृण्मय, गहरी और अपारगम्य होती हैं। ये मृदाएँ गीली होने पर फूल जाती हैं और चिपचिपी हो जाती हैं। सूखने पर ये सिकुड़ जाती हैं। इस प्रकार शुष्क ऋतु में इन मृदाओं में चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। इस समय ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इनमें ‘स्वतः जुताई’ हो गई हो । नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की इस विशेषता के कारण काली मृदा में एक लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इसके कारण फसलों को, विशेष रूप से वर्षाधीन फसलों को, शुष्क ऋतु में भी नमी मिलती रहती है और वे फलती-फूलती रहती हैं।

रासायनिक दृष्टि से काली मृदाओं में चूने, लौह, मैग्नीशिया तथा ऐलुमिना के तत्त्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें पोटाश की मात्रा भी पाई जाती है। लेकिन इनमें फॉसफोरस, नाइट्रोजन और जैव पदार्थों की कमी होती है। इस मृदा का रंग गाढ़े काले और स्लेटी रंग के बीच की विभिन्न आभाओं का होता है।

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प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण क्या होता है? मृदा संरक्षण के कुछ उपाय सुझाएँ।
उत्तर:
मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मिट्टी के अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की निम्नीकृत दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन मूल रूप से दोषपूर्ण पद्धतियों द्वारा बढ़ता है। किसी भी तर्कसंगत समाधान के अंतर्गत पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल प्रवणता वाली भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी भी हो जाए तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और स्थानांतरी कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है, जिससे विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें नियमित और नियंत्रित करना चाहिए । समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेत बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन आदि उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

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प्रश्न 3.
आप यह कैसे जानेंगे कि कोई मृदा उर्वर है या नहीं ? प्राकृतिक रूप से निर्धारित उर्वरता और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महीन कणों वाली लाल और पीली मृदाएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं। इसके विपरित मोटे कणों वाली उच्च भूमियों की मृदाएँ अनुर्वर होती हैं। इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉसफोरस और ह्यूमस की कमी होती है। जलोढ़क मृदाओं में महीन गाद होती है जो मुदा की उर्वरता को बढ़ा देती हैं। इस प्रकार की मृदा में कैल्सियम संग्रथन अर्थात् कंकड़ पाए जाते हैं। काली मृदाओं में नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की विशेषता के कारण लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इस कारण शुष्क ऋतु में भी फसलें फलती-फूलती रहती हैं। लैटेराइट मृदाओं में लोहे के ऑक्साइड और अल्यूमीनियम के यौगिक तथा पोटाश अधिक मात्रा में होते हैं। ह्यूमस की मात्रा कम होती है। इन मृदाओं में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्सियम की कमी होती है।

शुष्क मृदाओं में ह्यूमस और जैव पदार्थ कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए ये मृदाएँ अनुर्वर हैं। लवण मृदाएँ ऊसर मृदाएँ भी कहलाती हैं। लवण मृदाओं में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है। अतः ये अनुर्वर होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की वनस्पति नहीं उगती। इनमें लवण की मात्रा अधिक होती है। पीटमय मृदाएँ उर्वर होती हैं। इस प्रकार की मृदा में ह्युमस और जैव तत्त्व पर्याप्त मात्रा में माजूद होते हैं। वन मृदाएँ अम्लीय और कम ह्यूमस वाली होती हैं। घाटियों में ये दुमटी और पांशु होती हैं तथा ऊपरी ढालों पर ये मोटे कणों वाली होती हैं। निचली घाटियों में पाई जाने वाली मृदाएँ उर्वर होती हैं। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस जल तथा वायु होते हैं। इनमें से प्रत्येक की वास्तविक मात्रा मृदा की उर्वरता को बढ़ाती है। लवण मृदा की उर्वरता को नष्ट कर देता है। रासायनिक उर्वरक भी मृदा के लिए हानिकारक है। लवणीय मृदा में जिप्सम डालने से मृदा की उर्वरता बढ़ी जाती है।

प्राकृतिक रूप से मृदा की उर्वरता पोषक तत्त्वों की विद्यमानता पर निर्भर करती हैं। मृदा में फॉस्फोरस, पोटैशियम, गंधक, मैग्नीशियम, नाइट्रोजन, बोरॉन ये सभी तत्त्व भिन्न-भिन्न मात्रा में होते हैं। मृदा की उत्पादकता कई भौतिक गुणों पर निर्भर करती है।
जब मृदा में विभिन्न तत्त्वों की कमी हो जाती है तो मानव निर्मित रसायन जैसे पोटाश, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, गंधक, मैग्नीशियम, बोरान आदि उचित मात्रा में मिलाकर मृदा की उर्वरता को बढ़ाया जाता है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
अपने क्षेत्र से मृदा के विभिन्न नमूने एकत्रित कीजिए तथा मृदा के प्रकारों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
मृदा के नमूने स्वयं या अपने अध्यापक की सहायता से एकत्रित करें और मदा के प्रकारों पर एक रिपोट इस अध्याय को पढ़कर आप भली-भाँति तैयार कर सकते हैं।

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प्रश्न 2.
भारत के रेखा मानचित्र पर मृदा के निम्नलिखित प्रकारों से ढके क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए

  • लाल मृदा
  • लैटेराइट मृदा
  • जलोढ़ मृदा।

उत्तर:
चित्र 6.1 देखें इसमें भारत के मानचित्र पर उपर्युक्त पूछी गई सभी मृदाओं का विवरण दिया गया है।

Bihar Board Class 11 Geography मृदा Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उत्तरी भारत में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी की दो मुख्य किस्में लिखें।
उत्तर:
खादर तथा बागर मिट्टी।

प्रश्न 2.
भारतीय मैदानों के विशाल क्षेत्रों में पाई जाने वाली मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

प्रश्न 3.
खादर तथा बांगर मिट्टी के दो स्थानीय नाम लिखें।
उत्तर:
खादर मिट्टी-बैठ, बांगर मिट्टी-धाया।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 4.
तीन क्षेत्रों के नाम बतायें जहाँ पर खादर मिट्टी पाई जाती है।
उत्तर:
सतलुज बेसिन, गंगा का मैदान, यमुना बेसिन।

प्रश्न 5.
जलोढ़ मिट्टी में उत्पादित होने वाली दो खाद्य पदार्थों के नाम लिखें।
उत्तर:
गेहूँ, चावल।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल की जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक किस फसल के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
पटसन के लिए।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 7.
मृदा महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर:
यह सभी जीवित वस्तुओं के लिए भोजन उत्पादन करती है।

प्रश्न 8.
मिट्टी में पाये जाने वाले मुख्य आवश्यक तत्त्व लिखें।
उत्तर:
सिलिका, चीका तथा ह्यूमस।

प्रश्न 9.
मिट्टी में चीका का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह जल को सोख लेती है।

प्रश्न 10.
मृदा की तीन परतों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. A – स्तर
  2. B – स्तर
  3. c – स्तर

प्रश्न 11.
मृदा की परिभाषा दें।
उत्तर:
यह असंगठित पदार्थों की पतली परत होती है।

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प्रश्न 12.
उन तत्त्वों के नाम बतायें जिन पर मृदा की बनावट निर्भर करती है?
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. धरातल
  3. जलवायु

प्रश्न 13.
भारत में मृदा के तीन व्यापक प्रादेशिक भागों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीप की मिट्टियाँ
  2. उत्तरी मैदान की मिट्टियाँ
  3. हिमालय की मिट्टियाँ

प्रश्न 14.
बनावट के आधार पर मृदा की तीन किस्में लिखें।
उत्तर:

  1. रेतीली मिट्टियाँ
  2. चीका मिट्टी
  3. दोमट मिट्टी

प्रश्न 15.
भारत में पाई जाने वाली अधिकतर व्यापक मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

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प्रश्न 16.
लैटेराइट मिट्टी की दो किस्में लिखें।
उत्तर:
उच्च मैदान लैटेराइट मिट्टी तथा निम्न मैदान लैटेराइट मिट्टी।

प्रश्न 17.
उन तीन राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर लैटेराइट मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा उड़ीसा।

प्रश्न 18.
लैटेराइट मिट्टी किस फसल के लिए सबसे अधिक उपयोगी है?
उत्तर:
बागानी फसल लगाने के लिए।

प्रश्न 19.
मरुस्थलीय मिट्टी किस प्रदेश में पाई जाती है?
उत्तर:
शुष्क मरुस्थल।

प्रश्न 20.
भारत के किस क्षेत्र में मरुस्थलीय मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
थार मरुस्थल (राजस्थान का सिंध)।

प्रश्न 21.
मरुस्थलीय मिट्टी में उपज का क्या कारण है.?
उत्तर:
सिंचाई।

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प्रश्न 22.
रेतीले मरुस्थल में पाई जाने वाली मिट्टी के दो प्रकार लिखें।
उत्तर:
तेजाबी तथा नमकीन।

प्रश्न 23.
मदा किसे कहते हैं?
उत्तर:
मिट्टी भूतल की ऊपरी सतह का आवरण है। भू-पृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थ ऊपरी परत को मृदा कहते हैं।

प्रश्न 24.
दक्कन पठार के छोर पर कौन-सी मिट्टी मिलती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 25.
कौन-सी मृदा प्रायद्वीपीय भारत में पाई जाती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 26.
उन दो राज्यों के नाम बतायें जहाँ पर लाल मिट्टी अधिकतर पाई जाती है।
उत्तर:
तमिलनाडु तथा छत्तीसगढ़।

प्रश्न 27.
उन तीन रंगों के नाम बतायें जिनसे लाल मिट्टी का निर्माण होता है।
उत्तर:
भूरा, चाकलेट तथा पीला।

प्रश्न 28.
रेगुड़ मिट्टी का रंग बताओ।
उत्तर:
काला।

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प्रश्न 29.
उन दो राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर काली मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश।

प्रश्न 30.
काली मिट्टी के दो अन्य नाम लिखें।
उत्तर:
कपास मिट्टी तथा रेगुड़ मिट्टी।

प्रश्न 31.
काली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
दक्कन ट्रैप के ज्वालामुखी चट्टानों के लावा द्वारा।

प्रश्न 32.
एक फसल का नाम लिखें जिसके लिये काली मिट्टी बहुत उपयोगी है।
उत्तर:
कपास।

प्रश्न 33.
किस प्रकार की जलवायु में लेटेराइट मिट्टी का निर्माण होता है?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय मानसून जलवायु।

प्रश्न 34.
मृदा के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए। उत्तर:A स्तर, B स्तर, C स्तर

प्रश्न 35.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-तल की ऊपरी सतह के उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बहना मृदा अपरदन कहलाता है।

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प्रश्न 36.
बीहड़ किसे कहते हैं?
उत्तर:
अवनालिका अपरदन द्वारा बने गड्ढों को बीहड़ कहते हैं।

प्रश्न 37.
मृदा कैसे बनती है?
उत्तर:
मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मृदा का निर्माण होता है। इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश मिलने से मृदा का विकास होता है।

प्रश्न 38.
मृदा निर्माण के प्रमुख कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. उच्चावच
  3. जलवायु
  4. प्राकृतिक वनस्पति

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा का मूल पदार्थ क्या है?
उत्तर:
आधार चट्टानों के रासायनिक तथा यांत्रिक अपक्षरण से प्राप्त होने वाले पदार्थों को मृदा का मूल पदार्थ कहा जाता है। इन सभी पदार्थों से मृदा का निर्माण होता है। मृदा का रंग, उपजाऊपन आदि मूल पदार्थों पर निर्भर करता है। लावा चट्टानों से बनने वाली मृदा का रंग काला होता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण के छः तत्त्वों के नाम बताइए जो मृदा जनन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु, चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है। धरातल तथा भूमि की ढाल भी मृदा जनन पर प्रभाव डालते हैं।

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प्रश्न 3.
जलोढ़ मृदा की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
जलोढ़ मृदा की विशेषताएं –

  1. इसका निक्षेपण मुख्यतः नदी द्वारा होता है।
  2. इसका विस्तार नदी बेसिन तथा मैदानों तक सीमित होता है।
  3. यह अत्यधिक उपजाऊ मृदा होती है।
  4. इसमें बारीक कणों वाली मृदा पाई जाती है।
  5. इसमें काफी मात्रा में पोटाश पाया जाता है, परंतु फॉस्फोरस की कमी होती है।
  6. यह मृदा बहुत गहरी होती है।

प्रश्न 4.
भारत में उपलब्ध मिट्टी के प्रकारों में प्रादेशिक विभिन्यता के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत की मिट्टियों में पाई जाने वाली प्रादेशिक विभिन्नता निम्नलिखित घटकों पर निर्भर करती है –

  1. शैल-समूह,
  2. उच्चावच के धरातलीय लक्षण
  3. ढाल का रूप
  4. जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति
  5. पशु तथा कीड़े-मकोड़े।

प्रश्न 5.
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में क्या अंतर है?
उत्तर:
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में मुख्य अंतर मूल पदार्थों में पाया जाता है। पठारों में आधार चट्टानें कठोर होती हैं। इसकी मिट्टी में मूल पदार्थों की प्राप्ति इन चट्टानों से होती है। यह मिट्टी मोटे कणों वाली तथा कम उपजाऊ होती है। मैदानों में मिट्टी का निर्माण नदियों के निक्षेपण कार्य से होता है। मैदानों में प्रायः जलोढ़ मिट्री मिलती है। नदी में प्रत्येक बाढ़ के कारण महीन सिल्ट (Silt) तथा मृतिका (clay) का निक्षेप होता रहता है।

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प्रश्न 6.
चट्टानों में जंग लगने से कौन-सी मिट्टी का निर्माण होता है? भारत में इस मिट्टी के तीन प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
इस क्रिया से लाल मिट्टी का निर्माण होता है –
1. विस्तार (Extent) – भारत की सब मिट्टियों में से लाल मिट्टी विस्तार सबसे अधिक है। यह मिट्टी लगभग 8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाती है। दक्षिण में तमिलनाडु कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, छोटा नागपुर तथा प्रायद्वीप पठार के बाहरी भागों में लाल मिट्टी का विस्तार मिलता है।

2. विशेषताएँ (Characteristics) – इस मिट्टी का निर्माण प्रायद्वीप के आधारभूत आग्नेय चट्टानों, ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों की टूट-फूट से हुआ है। इस मिट्टी का रंग लौहयुक्त चट्टानों में ऑक्सीकरण (Oxidiation) की क्रिया से लाल हो जाता है।

वर्षा के कारण ह्यूमस नष्ट हो जाता है तथा आयरन ऑक्साइड ऊपरी सतह पर आ जाती है। इस मिट्टी में लोहा और एल्यूमीनियम की अधिकता होती है, परंतु नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी होती है। यह मिट्टी कम गहरी तथा कम उपजाऊ होती है। इस मिट्टी में ज्वार, बाजरा, कपास, दालें, तम्बाकू की कृषि होती है।

प्रश्न 7.
मृदा क्या है? इसका निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
भू-पृष्ठ (Crust) पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। इस परत की मोटाई कुछ सेमी से लेकर कई मीटर तक हो सकती है। इसमें कई तत्त्व जैसे मिट्टी के बारीक कण, ह्यूमस, खनिज तथा जीवाणु मिले होते हैं। इन तत्त्वों के कारण इसमें कई परतें होती हैं। मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के मूल पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक ऋतु अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मिट्टी का निर्माण आरम्भ होता है।

इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश के मिलने से कोई भौतिक तथा रासायनिक कारकों के सहयोग से मृदा का पूर्ण विकास होता है। इस प्रकार मृदा की परिभाषा है, “Soil is the end product of the physical, chemical, biological and cultural fctors which act and react together.”

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प्रश्न 8.
मृदा जनन की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है।

प्रश्न 9.
दक्षिणी पठार में पाई जाने वाली मृदा का लाल रंग क्यों है ?
उत्तर:
दक्षिणी पठार के बाह्य प्रदेशों में लाल मिट्टी का अधिकतर विस्तार है। इस मिट्टी का मूल पदार्थ पठारी प्रदेश के पुराने क्रिस्टलीय तथा रूपान्तरित चट्टानों से प्राप्त होता है। इनमें ग्रेनाइट, नाईस तथा शिल्ट की चट्टानों का विस्तार है। इन चट्टानों में लोहा तथा मैग्नीशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है। उष्ण कटिबंधीय जलवायु जलीकरण की क्रिया के कारण आयरन-ऑक्साइड द्वारा इस मिट्टी का रंग लाल हो जाता है।

प्रश्न 10.
वनस्पति जाति और वनस्पति में क्या अंतर है?
उत्तर:
वनस्पति जाति और वनस्पति में अंतर –
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प्रश्न 11.
वनस्पति और वन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
वनस्पति और वन में अंतर –
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प्रश्न 12.
समोच्च रेखा बंधन किसे कहते हैं? मृदा को विनाश से बचाने के लिए इसका किस प्रकार प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर:
समोच्च रेखा बंधन (Contour Bunding) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई-की रेखा के साथ-साथ सीढ़ीदार खेत बनाए जाते हैं ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके। ऐसे प्रदेश में खड़ी ढाल वाले खेतों में समान ऊँचाई की रेखा के साथ बाँध या ढाल बनाई जाती है। ऐसे बाँध को समोच्च रेखा बंधन कहते हैं। इससे वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन से बचाया जा सकता है। इससे वर्षा के जल को नियंत्रित करके बहते हुए पानी द्वारा मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 13.
मृदा की उर्वरा शक्ति को विकसित करने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए?
उत्तर:
मृदा की उर्वरा शक्ति का विकास करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए –

  1. मृदा अपरदन को रोकने का उपाय होना चाहिए।
  2. मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए उर्वरकों और खादों का प्रयोग करना चाहिए।
  3. फसलों के हरे-फेर की प्रणाली का प्रयोग करना चाहिए।
  4. कृषि की वैज्ञानिक विधियों को अपनाना चाहिए।
  5. मिट्टी के उपजाऊ तत्त्वों का संरक्षण करके रासायनिक तत्त्वों को मिलाना चाहिए।

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प्रश्न 14.
किसी प्रदेश के आर्थिक विकास में मृदा की विशेषता किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है? इसकी व्याख्या करने के लिए दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
मृदा मानव के लिए बहुत मूल्यवान प्राकृतिक सम्पदा है। मिट्टी पर बहुत-सी मानवीय क्रियाएँ आधारित हैं। मिट्टी पर कृषि, पशुपालन तथा वनस्पति जीवन निर्भर करता है। किसी प्रदेश का आर्थिक विकास मिट्टी की उर्वरी शक्ति पर निर्भर करता है। कई देशों की कृषि अर्थव्यवस्था मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। संसार के प्रत्येक भाग में जनसंख्या का एक बड़ा भाग भोजन की पूर्ति के लिए मिट्टी पर निर्भर करता है।

अनुपजाऊ क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व तथा लोगों का जीवन-स्तर दोनों ही निम्न होते हैं। उदाहरण के लिए पश्चिमी बंगाल के डेल्टाई प्रदेश तथा केरल तट जलोढ़ मिट्टी से बने उपजाऊ क्षेत्र हैं। यहाँ उन्नत कृषि का विकास हुआ है। यह प्रदेश भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है। दूसरी ओर तेलंगाना में मोटे कणों वाली मिट्टी मिलती है तथा राजस्थान के शुष्क प्रदेश में रेतीली मिट्टी कृषि के अनुकूल नहीं है। इन प्रदेशों में विरल जनसंख्या। पाई जाती है।

प्रश्न 15.
मुदा की उर्वरता समाप्ति के तीन कारण बताइए।
उत्तर:
मृदा एक मूल्यावान प्राकृतिक संसाधन है। अधिक गहरी तथा उपजाऊ मिट्टी वाले प्रदेशों में कृषि का अधिक विकास होता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के हास के निम्नलिखित कारण हैं

  1. कृषि भूमि पर निरंतर कृषि करते रहने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। मृदा को उर्वरा शक्ति प्राप्त करने का पूरा समय नहीं मिलता।
  2. दोषपूर्ण कृषि पद्धतियों के कारण मृदा की उर्वरा शक्ति समाप्त होने लगती है। स्थानान्तरी कृषि के कारण मृदा के उपजाऊ तत्त्वों का नाश होने लगती है। प्रतिवर्ष एक ही
  3. फसल बोने से मृदा में विशिष्ट प्रकार के खनिज कम होने लगते हैं।
  4. वायु तथा जल अपरदन से मृदा की उर्वरता समाप्त होती रहती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं ? इसके क्या कारण हैं ? मानव ने मृदा अपरदन से बचाव के कौन-कौन से तरीके अपनाए हैं?
उत्तर:
मृदा अपरदन (Soil Erosion) – भूतल की ऊपरी सतह से उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है। भूतल की मिट्टी धीरे-धीरे अपना स्थान छोड़ती रहती है जिससे यह कृषि के अयोग्य हो जाती है।

मृदा अपरदन के प्रकार (Types of Soil Erosion) – मृदा अपरदन तीन प्रकार से होता है-:

  • धरातलीय कटाव (Sheet Erosion)
  • नालीदार कटाव (Guly Erosion)
  • वायु द्वारा कटाव (Wind Erosion)

मृदा अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) –

  • मूसलाधार वर्षा (Torrential Rain) – सर्वती प्रदेशों की तीव्र ढलानों पर मूसलधार वर्षा का जल मिट्टी की परत बहा कर ले जाता है। इससे यमुना घाटी में उत्खात भूमि की रचना
  • वनों की कटाई (Deforestation) – वनों के अन्धाधुन्ध कटाव से मृदा अपरदन बढ़ जाता है। जैसे-पंजाब में शिवालिक पहाड़ियों पर तथा मैदानी भाग में चो (Chos) द्वारा मृदा अपरदन एक गम्भीर समस्या है।
  • स्थानान्तरी कृषि (Shifting Agriculture) – वनों को जलाकर कृषि के लिए प्राप्त करने की प्रथा से झुमिंग (Jhumming) से उत्तर:पूर्वी भारत में मृदा अपरदन होता है।
  • नर्म मिट्टी (Soft Soils) – कई प्रदेशों में नर्म मिट्टी के कारण मिट्टी की परत जाती है।
  • अनियंत्रित पशु चारण (Uncontrolled Cattle Grazing) – पर्वतीय ढलानों पर चरागाहों में अनियंत्रित पशुचारण से मिट्टी के कण ढीले होकर बह जाते हैं।
  • धूल भरी आंधियाँ (Dust Strons) – मरुस्थलों के निकटवर्ती प्रदेश में तेज धूल भरी आधियों के कारण मिट्टी परत का अपरदन होता है।

मृदा अपरदन रोकने के उपाय (Methods to Check Soil Erosion) – मिट्टी के उपजाऊपन को कायम रखने के लिए मिट्टी का संरक्षण आवश्यक है। मृदा अपरदन रोकने के लिए कई प्रकार का परत अपरदन होता है।

  • वृक्षारोपण (Afforestation) – पर्वतीय ढलानों पर मिट्टी को संगठित रखने के लिए वृक्ष लगाए जाते हैं। नदियों के ऊपरी भागों में वन क्षेत्रों का विस्तार करके मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। इसी प्रकार राजस्थान मरुस्थल की सीमाओं पर वन लगाकर वायु द्वारा अपरदन रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।
  • नियंत्रित पशुचारण (Controlled Grazing) – ढलानों पर चरागाहों में बे-रोक-टोक पशुचारण को रोका जाए ताकि घास को फिर से उगने और बढ़ने का समय मिल सके।
  • सीढ़ीनुमा कृषि (Terraced Agriculture) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई की रेखा के साथ सीढ़ीदार खेत बनाकर वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • बाँध बनाना (River Dams) – नदियों के ऊपरी भागों पर बाँध बनाकर बाढ़ नियंत्रण द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • अन्य उपाय – भूमि को पवन दिशा के समकोण पर जोतना चाहिए जिससे पवन द्वारा मिट्टी कटाव कम हो सके। स्थानान्तरी कृषि को रोका जाए। वायु की गति को कम करने के
  • लिए वृक्ष लगा कर वायु रोक (Wind Break) – क्षेत्र बनाना चाहिए। फसलों के हेर-फेर तथा भूमि को परती छोड़ देने से मृदा अपरदन कम किया जा सकता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के मुख्य घटकों के प्रभाव का वर्णन करों।
उत्तर:
मृदा निर्माण कई भौतिक तथा रासायनिक तत्त्वों पर निर्भर करता है। इन तत्त्वों के कारण मृदा प्रकारों के वितरण में भिन्नता पाई जाती है। ये तत्त्व स्वतंत्र रूप से अलग से नहीं बल्कि एक दूसरे के सहयोग से काम करते हैं।
1. मूल पदार्थ – मृदा निर्माण करने वाले पदार्थ की प्राप्ति आधार चट्टानों से होती है। प्रायः पठारों की मिट्टी का सम्बन्ध आधार चट्टानों से होता है। मैदानी भागों में मृदा निर्माण का मूल पदार्थ नदियों द्वारा जमा किए जाते हैं। नदियों में बाढ़ के कारण प्रत्येक वर्ष मिट्टी की नई परत बिछ जाती है।

2. उचावच – किसी प्रदेश का उच्चावच तथा ढाल मृदा निर्माण पर कई प्रकार से प्रभाव डालता है। मैदानी भागों में गहरी मिट्टी मिलती है जबकि खड़ी ढाल वाले प्रदेशों में कम गहरी मिट्टी का आवरण होता है। पठारों पर भी मिट्टी की परत कम गहरी होती है। तेज ढाल वाले क्षेत्रों में अपरदन के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बह जाती है। इस प्रकार किसी प्रदेश के धरातल तथा ढाल के अनुसार जल प्रवाह की मात्रा मृदा निर्माण को प्रभावित करती है।

3. जलवायु – वर्षा, तापमान तथा पवनें किसी प्रदेश में मृदा निर्माण पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। जलवायु के अनुसार सूक्ष्म जीव तथा प्राकृतिक वनस्पति भी मृदा पर प्रभाव डालते हैं। शुष्क प्रदेशों में वायु मिट्टी के ऊपी परत को उड़ा ले जाती है। अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में मिट्टी कटाव अधिक होता है।

4. प्राकृतिक वनस्पति – किसी प्रदेश में मिट्टी का विकास प्राकृतिक वनस्पति की वृद्धि के साथ ही आरम्भ होता है। वनस्पति के गले-सड़े अंश के कारण मिट्टी में हमस की मात्रा बढ़ जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसी कारण घास के मैदानों में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण होता है। भारत के विभिन्न प्रदेशों में मृदा तथा वनस्पति के प्रकारों में गहरा सम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में मृदा संरक्षण पर एक निबंध लिखें।
उत्तर:
मृदा संरक्षण-यदि मृदा अपरदन और मृदाक्षय मानव द्वारा किया जाता है, तो स्पष्टतः मानवों द्वारा ही इसे रोका भी जा सकता है। मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मृदा अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की अपक्षरित दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन वास्तव में मनुष्यकृत समस्या है।

1. किसी भी तर्कसंगत समाधान में पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल वाली भूमि का उपयोग कृपि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी हो जाए, तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

2. भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और झूम कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है। इस कारण विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें (अति चराई और झूम कृषि) नियमित और नियंत्रित करना चाहिए।

3. समोच्च रेखा के अनुसार मेड़बंदी, समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेती बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, वरणात्मक खरतपवार नाशन, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन, उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

4. वनालिका अपरदन को रोकने तथा उनके बनने पर नियंत्रण के प्रयत्न किए जाने चाहिए । अंगुल्याकार अवनलिकाओं को सीढ़ीदार खेत बनाकर खत्म किया जा सकता है। अवनलिकाओं के शीर्ष की ओर के विकास को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस कार्य को अवनलिकाओं को बंद करके. सीढीदार खेत बनाकर या आवरण वनस्पति का रोपण करके किया जा सकता है।

5. मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि पर बालू के टीलों के प्रसार को वनों की रक्षक मेखला बनाकर रोकना चाहिए। कृषि के अयोग्य भूमि को चराई के लिए चरागाहों में बदल देना चाहिए। बालू के टीलों को स्थिर करने के उपाय भी अपनाए जाने चाहिए।
मृदा संरक्षण के कुछ महत्वपूर्ण और सुविज्ञात उपाय नीचे दिए गए हैं

वैज्ञानिक भूमि उपयोग अर्थात् भूमि का केवल उसी उद्देश्य के लिए उपयोग, जिसके लिए यह सबसे अधिक उपयुक्त है। वैज्ञानिक शस्यावर्तन। समाच्चरेखीय जुताई और मेड़बंदी। वनरोपण, विशेष रूप से नदी द्रोणियों के ऊपरी भागों में। आर्द्र-प्रदेशों में अवनालिका अपरदन और मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय प्रदेशों में । पवन-अपरदन रोकने के लिए अवरोधों का निर्माण। जैव खादों का अधिकाधिक उपयोग । बाढ़ सिंचाई के स्थान पर सिंचाई की फुहारा और टपकन विधियों का उपयोग।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 4.
विश्व की मिट्टियों के मुख्य प्रकार बताइये और इनमें से किसी एक के विवरण एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में पायी जाने वाली मिट्टियों को छः प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

  • जलोढ़ या कॉप मिट्टी
  • काली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • पर्वतीय मिट्टी

जलोढ़ एवं काँप मिट्टी (Alluvial Soil) – जलोढ़ एवं काँप मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाये गये अवसाद के निक्षेप से हुआ है। यह मिट्टी भारत के विस्तृत मैदानी भाग एवं प्रायद्वीपीय पठार के तटीय मैदानों में मिलती है। यह लगभग 15 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। उत्तर भारत के मैदान में इसका क्षेत्रफल लगभग 9 लाख वर्ग किमी. है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सबसे अधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। इस मिट्टी पर भारत की लगभग आधी आबादी की जीविका निर्भर है।

जलोढ़ मिट्रियों को नवीनता एवं प्राचीनता के आधार पर दो भागों में विभक्त किया जाता है – (1) बांगर (2) खादर

  • बांगर – यह पुराना जलोढ़ मिट्टी है जो अपेक्षाकृत ऊँचे भावों में पाया जाता है। इन मिट्टियों तक बाढ़ का पानी नहीं पाता है। यह खादर की अपेक्षा कम उपजाऊ मिट्टी होती है।
  • खादर – नवीन जलोढ मिट्रियाँ हैं जो नदी के बाढ मैदान, दियारा तथा डेल्टा क्षेत्रों में पायी जाती है। इसके कण प्राय: महीन होते हैं और इनमें जल धारण की शक्ति बांगूर मिट्टी से अधिक होती है तथा बांगर से इसकी उपजाऊपन ज्यादा है।

प्रश्न 5.
भारत की मिट्टियों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनकी विशेषताएँ एवं वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की मिट्टियों की उत्पत्ति, रंग, संघटन और स्थिति के आधार पर भारतीय मृदाओं को निम्नलिखित आठ वर्गों में विभाजित किया गया है –

  • जलोढ़ मृदा
  • काली मिट्टी
  • लाल एवं पीली मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • क्षारीय मिट्टी
  • पीटमय और जैव मृदायें तथा
  • वन मृदायें।

1. जलोढ़ मृदा – यह सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी हैं, जिनमें अनेक फसलें उपजायी जाती हैं। इसका मिट्टी का वितरण गंगा के संपूर्ण मैदानी भागों में पायी जाती है। प्रायद्वीपीय भारत में ये पूर्वी तट के नदियों के डेल्टाओं और कुछ नहीं घाटियों में पायी जाती है। इस मिट्टी का विस्तार भारत के 22% क्षेत्रफल पर पायी जाती है।

2. काली मिट्टी – इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाता है। काली मिट्टी देश के कुल क्षेत्रफल के 30% मात्रा पर पाई जाती है। इन्हें रेगुड़ भी कहते हैं। काली मिट्टी महाराष्ट्र पश्चिमी मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में विकसित है।

3. लाल एवं पिली मिट्टी – यह मिट्टी अपेक्षाकृत बलई और लाल-पीले रंग ही होती है। महीन कणों वाली मृदायें सामान्यतः उपजाऊ होती हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक आंध्रप्रदेश और उड़ीसा के अधिकांश भूमि पर लाल बलुई मृदायें पायी जाती हैं।

4. लैटेराइट मिट्टी – उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लैटेराइट मिट्टी पायी जाती है जहाँ ऋतुनिष्ठ भारी वर्षा होती है। यह फसलों की कृषि हेतु उपजाऊ मिट्टी है। तमिलनाडु, कर्नाटक, के रण्य, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और असम के पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ है।

5. मरुस्थलीय मृदायें – इस मिट्टी का रंग लाल से लेकर किशमिशी तक होता है। यह सामान्यतः बलुई एवं क्षारीय होती है। पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीय मृदायें विशेष रूप में विकसित हुई हैं।

6. वन मृदाएँ – यह मिट्टी प्रर्याप्त वर्षा वाले वन क्षेत्रों में निर्मित होती हैं। मृदाओं का निर्माण पर्वतीय वातावरण में होती हैं। निचली घाटियों में पायी जाने वाली मृदायें उपजाऊ होती हैं और इनमें प्रायः चावल एवं गेहूँ की खेती होती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 6.
भारत में काली मिट्टी का क्षेत्र एवं उसकी विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
काली मिट्टी का निर्माण ज्वालामुखी लावा के अनावृत्तिकरण से होती है। महाराष्ट्र एवं गुजरात के अधिकांश भाग, पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा आंध्रप्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ भागों में मिलती हैं। इस मिट्टी का विस्तार 5.5 लाख वर्ग किमी. में भारत में है। इसका विस्तार लावा क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि नदियों ने इसे ले जाकर अपनी घाटियों में भी जमा करते रहते हैं। काली मिट्टी को विशेषता-यह मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है। कपास की उपज हेतु तो यह मिट्टी विश्वविख्यात इतनी हुई कि इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाने लगा। इस मिट्टी में नमी रखने की शक्ति प्रचूर मात्रा में है। यद्यपि इस क्षेत्र में वर्षा कम होती है फिर भी इस मिट्टी से कपास के पौधों को पर्याप्त नमी प्राप्त हो जाती है और सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
इनमें से भारत के किस राज्य में बाढ़ अधिक आती है?
(क) बिहार
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) असम
(घ) उत्तर प्रदेश
उत्तर:
(ग) असम

प्रश्न 2.
उत्तरांचल के किस जिले में मालपा भूस्खलन आपदा घटित हुई थी?
(क) बागेश्वर
(ख) चंपावत
(ग) अल्मोड़ा
(घ) पिथौरागढ़
उत्तर:
(घ) पिथौरागढ़

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प्रश्न 3.
इनमें से कौन-से राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
(क) असम
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु
उत्तर:
(घ) तमिलनाडु

प्रश्न 4.
इनमें से किस नदी में मजौली नदीय द्वीप स्थित है?
(क) गंगा
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गोदावरी
(घ) सिंधु
उत्तर:
(ख) ब्रह्मपुत्र

प्रश्न 5.
बर्फानी तूफान किस तरह की प्राकृतिक आपदा है?
(क) वायुमंडलीय
(ख) जलीय
(ग) भौमिकी
(घ) जीवमंडलीय
उत्तर:
(क) वायुमंडलीय

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन से भारतीय क्षेत्रों में भूकंप के आने की संभावना सर्वाधिक होती है?
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य
(ख) दक्कन का पठार
(ग) कोरोमण्डल तट
(घ) गंगा का मैदान
उत्तर:
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें

प्रश्न 1.
संकट किस दशा में आपदा बन जाती है?
उत्तर:
प्राकृतिक संकट या मानव निर्मित संकट द्वारा जब धन-जन दोनों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है तब वह संकट आपदा बन जाती है।

प्रश्न 2.
हिमालय और भारत के उत्तर:पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
उत्तर:
इंडियन प्लेट प्रतिवर्ष उत्तर:पूर्व दिशा में एक सेंटीमीटर खिसक रही है। लेकिन उत्तर में स्थित यूरेशियन प्लेट इसके लिए अवरोध पैदा करती है। परिणाम स्वरूप इन प्लेटों के किनारे लॉक हो जाते हैं। ऊर्जा संग्रह से तनाव बढ़ता है प्लेटों के लॉक टूट जाते हैं और भूकंप आ जाता है।

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प्रश्न 3.
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियों अनुकूल हैं ?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कम दबाव वाले उग्र मौसम तंत्र जो 30° उत्तर तथा 30° दक्षिण अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं। तीव्र कोरियोलिस बल, क्षोभ मण्डल में अस्थिरता, तथा मजबूत ऊर्ध्वाधर वायु फान (wedge) की अनुपस्थिति आदि स्थितियाँ अनुकूल हैं।

प्रश्न 4.
पूर्वी भारत की बाढ़, पश्चिमी भारत की बाढ से अलग कैसे होती है?
उत्तर:
पूर्वी भारत की बाढ़ अंधाधुंध वन कटाव तथा प्राकृतिक अपवाह तंत्रों के अवरुद्ध होने तथा बाढ़कृत मैदानों पर मानव बसाव के कारण आती है जबकि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब आदि में मानसूनी वर्षा तथा मानवीय क्रियाकलापों के द्वारा बाढ़ आती है।

प्रश्न 5.
पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं?
उत्तर:
पश्चिमी और मध्य भारत में कम वर्षा होती है जिसके कारण भतल पर जल की कमी हो जाती है। कम वर्षा, अत्यधिक वाष्पीकरण और जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक , प्रयोग से सूखे की स्थिति पैदा होती है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दे

प्रश्न 1.
भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें और इस आपदा के निवारण के कुछ उपाय बताएँ।
उत्तर:
ज्यादा अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी । घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र, जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते हैं। हिमालय क्षेत्र के सारे राज्य और उत्तर:पूर्वी भाग (असम को छोड़कर) इस क्षेत्र में शामिल हैं।

पार हिमालय के कम वृष्टिवाले क्षेत्र लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में स्थिति, अरावली पहाड़ियों में कम वर्षा वाला क्षेत्र, पश्चिमी व पूर्वी घाट के व दक्कन पठार के वृष्टिछाया क्षेत्र ऐसे इलाके हैं. जहाँ कभी-कभी भूस्खलन होता है। इसके अतिरिक्त झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और केरल में खादानों और भूमि धंसने से भूस्खलन होता रहता है।

राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल (दार्जलिंग जिले को छोड़कर), असम (कार्बी अनलोंग को छोड़कर) और दक्षिण प्रान्तों के तटीय क्षेत्र भूस्खलन युक्त हैं। भूस्खलन आपदा के निवारण के कुछ उपाय-भूस्खलन से निपटने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग उपाय होने चाहिए। अधिक भू-स्खलन संभावी क्षेत्रों में सड़क और बड़े बाँध बनाने जैसे निर्माण कार्य तथा विकास कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए।

इन क्षेत्रों में कृषि नदी घाटी तथा कम ढाल वाले क्षेत्रों तक सीमित होनी चाहिए तथा बडी विकास परियोजनाओं पर नियंत्रण होना चाहिए। सकारात्मक कार्य जैसे-वृहत् स्तर पर वनीकरण को बढ़ावा और जल बहाव को कम करने के लिए बाँध का निर्माण भू-स्खलन के उपायों के पूरक हैं। स्थानांतरी कृषि वाले उत्तर:पूर्वी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जानी चाहिए।

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प्रश्न 2.
सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा भेद्यता क्षेत्रों में विभाजित करें और इसके निवारण के उपाय बताएँ।
उत्तर:
अधिक अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते है। सखा एक जटिल परिघटना है जिसमें कई प्रकार के मौसम विज्ञान संबंधी तथा अन्य तत्त्व, जैसे-वृष्टि, वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, भौम जल, मृदा में नमी, जल भंडारण व भरण, कृषि पद्धतियाँ, विशेषतः उगाई जाने वाली फसलें, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियाँ पारिस्थितिकी शामिल हैं।

भारत में सूखाग्रस्त क्षेत्र-भारतीय जलवायु तंत्र में सूखा और बाढ़ महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। कुछ अनुमानों के अनुसार भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 19 प्रतिशत भाग और जनसंख्या का 12 प्रतिशत हिस्सा हर वर्ष सुखे से प्रभावित होता है। देश का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र सखे से प्रभावित हो सकता है 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। सूखे की तीव्रता के आधार पर भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है

अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान का अधिकतर भाग, विशेषकर अरावली के पश्चिम में स्थित मरुस्थल और गुजरात का कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा प्रभावित है। इसमें राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिले भी शामिल हैं, जहाँ 90 मिलीलीटर से कम वार्षिक
औसत वर्षा होती है। अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-इसमें राजस्थान के पूर्वी भाग, मध्य प्रदेश के अधिकतर भाग, महाराष्ट्र के पूर्वी भाग, आंध्र प्रदेश के अंदरुनी भाग, कर्नाटक का पठार, तमिलनाडु का उत्तरी भाग, झारखंड का दक्षिणी भाग और उड़ीसा का आंतरिक भाग शामिल है।

मध्य सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान के उत्तरी भाग, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी जिले, गुजरात के बचे हुए जिले, कोंकणं को छोड़कर महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु में कोयंबटूर पठार और आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। निवारण के उपाय-सूखे की स्थिति में तात्कालिक सहायता से सुरक्षित पेयजल वितरण, दवाइयाँ, पशुओं के लिए चारे और जल की उपलब्धता तथा लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुँचना शामिल है।

दीर्घकालिक योजनाओं में विभिन्न कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे- भूमिगत जल के भण्डारण का पता लगाना, जल अधिक्य क्षेत्रों में अल्पजल क्षेत्रों में पानी पहुँचना, नदियों को जोड़ना और बाँध व जलाशयों का निर्माण इत्यादि। द्रोणियों की पहचान तथा भूमिगत जः भंडारण की संभावना का पता लगाने के लिए सुदूर संवेदन और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों का प्रयोग करना। सूखा प्रतिरोधी फैसलों के बारे में प्रचार-प्रसार। वर्षा जल संलवन (Rain water harvesting) सूखे का प्रभाव कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 3.
किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?
उत्तर:
तकनीकी विकास ने मानव को, पर्यावरण को प्रभावित करने की बहुत क्षमता प्रद कर दी है। परिणमतः मनुष्य ने आपदा के खतरे वाले क्षेत्रों में गहन क्रियाकलाप शुरू कर दि है और इस प्रकार आपदाओं की सुभेद्यता को बढ़ा दिया है। अधिकांश नदियों में, बाढ़-मैद में भू-उपयोग तथा भूमि की कीमतों के कारण क्या तटों पर बड़े नगरों एवं बंदरगाहों, जैसेतथा चेन्नई आदि के विकास ने इन क्षेत्रों को चक्रवातों, प्रभंजनों तथा सुनामी आदि के लिए बना दिया है।

देश की आर्थिक उन्नति के लिए औद्योगिक और परमाणु विकास कभी-कभी आपदा का कारण बन जाता है। किसी जहरीली गैस का रिसाव (उदाहरण भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत, हजारों अपंग एवं बीमार), बाँध जलाशयों का निर्माण कार्य, आग तथा विस्फोट आदि हजारों लोगों की जान ले सकते हैं और लोगों को प्रभावित कर सकते हैं।

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(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए विषयों पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें –

  1. मालपा भूस्खलन
  2. सुनामी
  3. उड़ीसा चक्रवात और गुजरात चक्रवात
  4. नदियों को आपस में जोड़ना
  5. टिहरी बाँध या सरदार सरोवर बाँध
  6. भुज/लातूर भूकंप
  7. डेल्टा या नदीय द्वीप में जीवन
  8. छत वर्षा जल संचयन का मॉडल तैयार करें।

उत्तर:
इस अध्याय को ध्यान से पढ़ें और अपने अध्यापक की मदद से या किसी अन्य पाठ्य-पुस्तक या अपने कक्षा की पाठ्य-पुस्तक से जानकारियाँ इकट्ठी करके इस परियोजना की रिपोर्ट तैयार करें। लगभग सभी जानकारियाँ आपको पाठ्य-पस्तक में ही मिल जायेंगी।

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूकम्पमापक यंत्र को क्या कहते हैं?
उत्तर:
सिस्मोग्राफ।

प्रश्न 2.
भूकंप की तीव्रता किस पैमाने पर मापी जाती है?
उत्तर:
रिक्टर पैमाने पर।

प्रश्न 3.
लाटूर भूकंप (महाराष्ट्र) का क्या कारण था?
उत्तर:
भारतीय प्लेट का उत्तर की और खिसकना।

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प्रश्न 4.
भूकंप किस सिद्धांत से सम्बन्धित है?
उत्तर:
प्लेट टेक्टानिक।

प्रश्न 5.
भारत में प्रभाव डालने वाले प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
बाढ़, सूखा, भूकंप तथा भू-स्खलन।

प्रश्न 6.
प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
आकस्मिक भूगर्भिक हलचलें।

प्रश्न 7.
वर्तमान समय में भारत में आये विनाशकारी भूचाल का नाम लिखें।
उत्तर:
भुज, गुजरात-26 जनवरी, 2001

प्रश्न 8.
विभिन्न भूकंपीय तरंगों के नाम लिखें।
उत्तर:
P-Waves, S-Waves, L-Waves.

प्रश्न 9.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कोई जलभृत भाग किसी ढलान से अचानक नीचे गिरती हैं।

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प्रश्न 10.
तीन प्रदेशों के नाम लिखो जो चक्रवातों से प्रभावित हैं।
उत्तर:
उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

प्रश्न 11.
प्राकृतिक आपदायें किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के धरातल पर आन्तरिक हलचलों द्वारा अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। इनसे मानव पर हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इन्हें प्राकृतिक आपदायें कहते हैं।

प्रश्न 12.
कुछ सामान्य आपदाओं के नाम बताएँ।।
उत्तर:
सामान्य आपादाएँ इस प्रकार हैं-ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप, सागरकम्प, सूखा, बाढ़, चक्रवात, मृदा अपरदन, अपवाहन, पंकप्रवाह, हिमधाव।

प्रश्न 13.
संकट किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रेजी भाषा में प्राकृतिक आपदाओं को प्राकृतिक संकट भी कहा जाता है। फ्रेंच भाषा में डेस (Des) का अर्थ बुरा (Bad) तथा (Aster) का अर्थ सितारे (Stars) से है। मानवीय जीवन और अर्थव्यवस्था को भारी हानि पहुँचाने वाली प्राकृतिक आपदाओं को संकट और महाविपत्ति कहते हैं।

प्रश्न 14.
भूकंप का परिणाम क्या होता है?
उत्तर:
भूकंप की शक्ति को रिक्टर पैमाने पर मापा जात है जिसे परिमाण कहते हैं। यह भूकंप द्वारा विकसित भूकंपीय ऊर्जा की माप होती है।

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प्रश्न 15.
भूकंप की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूकंप द्वारा होने वाली हानि की माप को तीव्रता कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारत के अधिक तथा अत्यधिक भूकंपनीय खतरे वाले क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भूकंप की दृष्टि से भारत के अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्रों के नाम हैं-हिमालय पर्वत, उत्तरपूर्वी भारत, कच्छ रत्नागिरी के आस-पास का पश्चिमी तटीय तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह। अधिक खतरे वाले क्षेत्र हैं-गंगा का मैदान, पश्चिमी राजस्थान ।

प्रश्न 17.
रिक्टर पैमाने पर कितने विभाग होते हैं?
उत्तर:
1-9 तक।

प्रश्न 18.
कोएना भूकंप का क्या कारण था?
उत्तर:
कोएना जलाशय में अत्यधिक जलदाब।

प्रश्न 19.
सूखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्षा की कमी के कारण खाद्यान्नों की कमी होना।

प्रश्न 20.
भारत में सूखे का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
अनिश्चित वर्षा।

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प्रश्न 21.
भारत में कितना क्षेत्रफल भाग बाढ़ों तथा सूखे से प्रभावित है?
उत्तर:
सूखे से 10% भाग तथा बाढ़ों से 12% भाग।

प्रश्न 22.
भारत में बाढ़ों का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
भारी मानसून वर्षा तथा चक्रवात।

प्रश्न 23.
दक्षिणी प्रायद्वीप में बाढ़ कम आती हैं। क्यों?
उत्तर:
मौसमी नदियों के कारण।

प्रश्न 24.
भारत के बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गंगा बेसिन, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल
  2. आसाम में ब्रह्मपुत्र घाटी
  3. उड़ीसा प्रदेश।

प्रश्न 25.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आधार शैलों का भारी मात्रा में तेजी से खिसकना भू-स्खलन कहलाता है। तीव्र पर्वतीय ढलानों पर भूकंप के कारण अचानक शैलें खिसक जाती हैं।

प्रश्न 26.
आपदा प्रबंधन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आपदाओं को सुरक्षा के उपाय, तैयारी तथा प्रभाव को कम करने की क्रिया को आपदा प्रबंधन कहते हैं। इसमें राहत कार्यों की व्यवस्था भी शमिल की जाती है।

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प्रश्न 27.
चक्रवात की उत्पत्ति के लिए आधारभूत आवश्यकताएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव क्षेत्र के चारों और तापमान की क्षतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है।

प्रश्न 28.
चक्रवात की गति और सामान्य अवधि कितनी होती है?
उत्तर:
चक्रवात की गति 150 km प्रति घंटा तथा अवधि एक सप्ताह तक होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि का वर्णन करो।
उत्तर:
विश्व में प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं से एक लाख व्यक्तियों की जानें जाती हैं तथा 20.000 करोड़ रुपये की सम्पत्ति की हानि होती है। यह मानवीय विकास के लिए रुकावट है। U.N.O. के अनुसार 1990-99 के दशक को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का दशक घोषित किया गया। प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त विश्व के प्रमुख 10 देशों में से भारत एक देश है।

प्रति वर्ष 6 करोड़ लोग इनसे प्रभावित होते हैं। विश्व की 50% प्राकृतिक आपदाएँ भारत में अनुभव की जाती हैं। फिर भी भारत में इन आपदाओं से सुरक्षा के लिए एक व्यापक प्रबंध किया गया है जिसमें भूकंपीय स्टेशन, चक्रवात, बाढ़, रडार, जल प्रवाह के बारे में सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं तथ सुरक्षा के प्रबंध किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रमुख प्राकृतिक आपदाएं कौन-सी हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक आपदाएँ वे भूगर्मिक हलचलें हैं जो अचानक ही भू-तल पर परिवर्तन लाकर जन, धन व सम्पत्ति की हानि करती हैं। सूखा, बाढ़, चक्रवात, भू-स्खलन, भूकंप विभिन्न प्रकार की मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

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प्रश्न 3.
भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों पर नोट लिखें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात खाड़ी बंगाल तथा अरब सागर में उत्पन्न होते हैं। चक्रवात पवनों का एक भंवर होता है जो मूसलाधार वर्षा प्रदान करता है। ये प्रायः अक्टूबर-नवम्बर के महीनों में चलते हैं। इनकी दिशा परिवर्तनशील होती है। ये प्रायः पश्चिम की ओर तथा उत्तर:पश्चिम, उत्तर पूर्व की ओर चलते हैं। इनका प्रभाव तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा के तटों पर होता है।

प्रभाव (Effects) –

  • ये चक्रवात मूसलाधार वर्षा, तेज़ पवनें तथा घने मेघ लाते हैं। औसत रूप से 50 सेमी वर्षा एक दिन में होती है।
  • ये चक्रवात जन-धन की हानि व्यापक रूप से करते हैं।
  • खाड़ी बंगाल में निम्न वायु दाब केन्द्र बनने से ये चक्रवात उत्पन्न करते हैं।
  • ये चक्रवात एक दिन में पूर्वी तट से गुजर कर प्रायद्वीप को पार करके पश्चिमी तट पर पहुँच जाते हैं।
  • गोदावरी, कृष्ण, कावेरी डेल्टाओं में भारी हानि होती है।
  • सुन्दरवन डेल्टा तथा बंग्ला देश में भी भारी हानि होती है।

प्रश्न 4.
भू-स्खलन से क्या अभिप्राय है ? इनके प्रभाव बताओ।
उत्तर:
भू-स्खलन (Landslides) – भूमि के किसी भाग के अचानक फिसल कर पहाडी से नीचे गिर जाने की क्रिया को भू-स्खलन कहते हैं। कई बार भूमिगत जल चट्टानों में भर कर उनका भार बढ़ा देता है। यह जल मूल चट्टानी ढलान के साथ नीचे फिसल जाती हैं। इनके कई प्रकार होते हैं।

  • स्लम्प (Slumps) – जब चट्टानें थोडी दुरी से गिरती हैं।
  • रॉक स्लाइड (Rockslide) – जब चट्टानें अधिक दूरी से अधिक भाग में गिरती हैं।
  • रॉक फाल (Rockfall) – जब किसी मूल से चट्टानें ट कर गिरती हैं।

कारण (Causes) –

  • जब वर्षा का जल या पिघलती हिम एक स्नेहक (Lubricant) के रूप में कार्य करता है।
  • तीव्र ढलान के कारण।
  • भूकंप के कारण।
  • किसी सहारे के हट जाने पर।
  • भ्रंशन या खदानों के कारण।
  • ज्वालामुखी विस्फोट के कारण।

प्रभाव (Effects) –

  • भवन, सड़कें, पुल आदि का नष्ट होना।
  • चट्टानों के नीचे दबकर लोगों की मृत्यु हो जाना।
  • सड़क मार्गों का अवरुद्ध हो जाना।
  • नदियों के मार्ग अवरुद्ध होने से बाढ़ आना।
  • 1957 में कश्मीर में भू-स्खलन से राष्ट्रीय मार्ग बंद हो गया था।
  • गत वर्ष में टेहरी-गढ़वाल में बादल फटने से भूस्खलन हुआ।

प्रश्न 5.
शुष्कता और सूखा में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
शुष्कता और सूखा में अंतर –
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प्रश्न 6.
आपदाएँ एवं संकट में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
आपदाएँ एवं संकट में अंतर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के सूखाग्रस्त इलाकों का वर्णन करते हुए सूखे के अर्थव्यवस्था पर होनेवाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में सूखे का सर्वाधिक प्रभाव राजस्थान और इसके निकटवर्ती हरियाणा एवं मध्यप्रदेश के क्षेत्र, गुजरात का अधिकांश भाग, मध्यवर्ती महाराष्ट्र, पूर्वी व मध्यवर्ती कर्नाटक, पश्चिमी व मध्य तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में पड़ता है। इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी कभी-कभी सूखा पड़ जाता है। इन क्षेत्रों में 100 cm.से भी कम वर्षा होती है और पर्याप्त सिंचाई की उपलब्धता भी नहीं है।

यद्यपि देश के किसी भी भाग में वर्षा कम होने पर सखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अनुमानतः भारत का 19% क्षेत्र तथा देश का 12% जनसंख्या प्रतिवर्ष सूखे की चपेट में रहती है। सूखे का अर्थव्यवस्था पर भयानक परिणाम होते हैं। जब फसलें नष्ट होती है तो अन्न की कमी हो जाती है और अकाल पड़ जाता है। पशुओं के लिए चारा कम हो जाता है तो ऋण अकाल पड़ जाता है। जल की कमी की अवस्था को जल अकाल कहा जाता है। जब तीनों परिस्थितियाँ एक साथ उत्पन्न हो जाती है।

तो त्रि-अकाल कहलाती है जो सबसे भयंकर होती है। भीषण अकाल पड़ने पर भारी संख्या में स्त्री, पुरुष तथा बच्चे एवं जीव-जन्तुओं को भोजन के अभाव में मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। सूखाग्रस्त क्षेत्रों से मानव प्रवास तथा पश पलायन एवं सामान्य सी घटना बन जाती है। जलाभाव में लोग दुषित जल पीने को बाध्य होते हैं। जिस कारण पेयजल संबंधी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।

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प्रश्न 2.
भूकंप की परिभाषा दें। भारत में भूकंप क्षेत्रों का वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भूकंप (Earthquake) – पृथ्वी के किसी भाग के अचानक हिलने को भकप कहते हैं। इस हलचल से भूपृष्ठ पर झटके (Tremors) अनुभव किए जाते हैं। भूकंपीय तरंगें सभी दिशाओं में लहरों की भान्ति आगे बढ़ती हैं। ये तरंगें उद्रम (Focus) से आरंभ होती हैं। ये तरंगें तीन प्रकार की होती हैं-P-Waves,S-Waves, L-Waves.

भूकंप के कारण (Causes of Earthquake) – भूकंप के सामान्य कारण ज्वालामुखी विस्फोट, भू-हलचलें, चट्टानों का लचीलापन तथा स्थानीय कारण है। भारत में सामान्य रूप से भारतीय प्लेट तथा यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। ये एक दूसरे के नीचे घुसने का यत्न करती हैं। हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में इनका सम्बन्ध वलन एवं भ्रंशन क्रिया से है। दक्षिणी भारत एक स्थिर भूखण्ड है तथा भूकंप बहुत कम होते हैं। भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने से मापी जाती है जिसका माप 1 से 9 तक होता है। अधिक तीव्र भूकंप भारत के निम्नलिखित क्षेत्रों में अनुभव किए जाते हैं

1. हिमालयाई क्षेत्र (Himalayan Zone) – क्षेत्र में क्रियाशील भूकंप जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल तथा उत्तर:पूर्वी राज्यों में आते हैं जिनसे बहुत हानि होती है। यह भूकंप भारतीय प्लेट तथा यूरेशियम प्लेट के आपसी टकराव के कारण उत्पन्न होते हैं। भारतीय प्लेट प्रति वर्ष 5 सेमी. की गति से उत्तर तथा उत्तर:पूर्व की ओर बढ़ रही है। यहाँ 1905 में कांगड़ा में, 1828 में कश्मीर में, 1936 में क्वेटा में तथा 1950 में असम में भयानक भूकंप अनुभव किए गए।

2. सिन्धु-गंगा प्रदेश (Indo – Gangetion Zone) – इस क्षेत्र में सामान्य तीव्रता के भूकंप, अनुभव किए जाते हैं। इनकी तीव्रता 6 से 6.5 तक होती है। परंतु इन सधन बसे क्षेत्रों में बहुत हानि होती है।

3. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Zone) – यह एक स्थिर क्षेत्र है परंतु फिर भी यहाँ भूकंप अनुभव किए जाते हैं। 1967 में कोयना, 1993 में लातूर, 2001 में भुज के भूकंप बहुत विनाशकारी थे। कोयना भूकंप कोयला डैम के जलाशम में जल के अत्यधिक दबाव के कारण आया परंतु भूकंप भारतीय प्लेट की उत्तर की ओर गति के कारण आए हैं।

4. अन्य भूकंपीय क्षेत्र (Other Sesonic Zones) –

  • बिहार-नेपाल क्षेत्र
  • उत्तर-पश्चिमी हिमालय
  • गुजरात क्षेत्र
  • कोयना क्षेत्र

भारत के प्रमुख विनाशकारी भूकंप –
Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ 3

भूकंप के परिणाम – केवल बसे हुए क्षेत्रों के आने वाला भूकंप ही आपदा या संकट बनता है। भूकंप का प्रभाव सदैव विध्वंसक होता है। भूकंप के कारण प्राकृतिक पर्यावरण में कई तरह से परिवर्तन हो जाते हैं। भूकंपीय तरंगों से धरातल में दरारें पड़ जाती हैं जिनसे कभी-कभी पानी के फब्बारे छूटने लगते हैं। इसके साथ बड़ी भारी मात्रा में रेत बाहर आ जाता है तथा इससे रेत के बांध बन जाते हैं। क्षेत्र के अपवाह तंत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं। नदियों के मार्ग बदल जाने से बाढ आ जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन हो जाते हैं तथा इनके साथ भारी मात्रा में चढ़ानी मलबा नीचे आ जाता है। इससे वहतक्षरण होता है। हिमानियाँ फट जाती हैं तथा इनके हिमधाव सुदूर स्थित स्थानों पर बिखर जाते हैं।

नए जल प्रपातों और सरिताओं की उत्पत्ति भी हो जाती है। भूकम्पीय आपदाओं से मनुष्य निर्मित भवन बच नहीं पाते हैं। सड़कें, रेलमार्ग, पुल और टेलीफोन की लाइनें टूट जाती हैं। गगनचुम्बी भवनों और सघन जनसंख्या वाले कस्बों और नगरों पर भूकंपों का सबसे बुरा असर होता है।

सनामी लहरें (Tsunami Tadial Waves) – समुद्री तल पर भूकंप उत्पन्न होने से 30 मीटर तक ऊँची ज्वारीय लहरें (सुनामी) उत्पन्न होती हैं। 26 दिसम्बर, 2004 को हिन्द महासागर में इण्डोनेशिया के निकट उत्पन्न भूकंप के कारण भयंकर सुनामी लहरें उत्पन्न हुई । इनका प्रभाव इण्डोनेशिया, थाईलैण्ड, म्यानमार, भारत तथा श्रीलंका के तटों पर अनुभव किया गया । इन भयंकर लहरों के कारण इन क्षेत्रों में लगभग 2 लाख लोगों की जाने गई तथा करोडों रुपयों की सम्पत्ति की हानि हुई है। यह पृथ्वी के इतिहास में सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा थी।

भूकंप के प्रभाव को कम करना-भूकंप के प्रभाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसकी निरंतर खोज-खबर रखना तथा लोगों को इसके आने की सम्भावना की सूचना देना । इससे आशंकित क्षेत्रों से लोगों को हटाया जा सकता है। भूकंप से अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्र में भूकम्परोधी भवन बनाने की आवश्यकता है। भूकंप की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को भूकम्परोधी भवन और मकान बनाने की सलाह दी जा सकती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

प्रश्न 3.
आपदा प्रबंधन पर एक लेख लिखें।
उत्तर:
आपदा प्रबंधन (Disaster Management) – आपदा प्रबंधन में निवारक और संरक्षी उपाय, तैयारी तथा मानवों पर आपदा के प्रभाव को कम करने की व्यवस्था तथा आपदा प्रवण क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक पक्ष शामिल किए जाते हैं। आपदा प्रबंध की सम्पूर्ण प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। प्रभाव चरण, पुनर्वास और पुननिर्माण चरण तथा समन्वित दीर्घकालीन विकास और तैयारी चरण ।

प्रभाव चरण के तीन अंग हैं –

  • आपदा की भविष्यवाणी करना
  • आपदा के प्रेरक कारकों की बारीकी से खोजबीन तथा
  • आपदा आने के बाद प्रबंधन के कार्य

जलग्रहण क्षेत्र में हुई वर्षा का अध्ययन करके बाढ़ की भविष्यवाणी की जा सकती है। उपग्रहों के द्वारा चक्रवातों के मार्ग, गति आदि की खोज-खबर ली जा सकती है। इस प्रकार प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पूर्व चेतावनी तथा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के प्रयत्ल शुरू किए जा सकते हैं। आपदा के लिए जिम्मेदार कारकों की बारीकी से की गई खोजबीन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने, भोजन, वस्त्र और पेय जल की आपूर्ति के लिए कार्यदल नियुक्त किए जा सकते हैं।

आपदाएँ मृत्यु और विनाश के चिह्न छोड़ जाती हैं। प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा और अन्य विभिन्न प्रकार की सहायता की जरूरत होती है। दीर्घकालीन विकास के चरण के अन्तर्गत विविध प्रकार के निवारक और सुरक्षात्मक उपायों की योजना बना लेनी चाहिए।

ससार के लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यूनेस्को ने 1990-2000 के दौरान प्राकृतिक आपदा राहत दशक मनाया था। संसार के अन्य देशों के साथ भारत ने भी दशक के दौरान अक्टूबर में विश्व आपदा राहत दिवस मनाया था। इस अवसर पर भूकंप, बाढ़ और चक्रवात प्रवण क्षेत्रों के लोगों के लिए भारत सरकार ने जो करणीय और अकरणीय कर्म प्रचारित किए थे, वे बहुत उपयोगी हैं।

प्रश्न 4.
भूकंप आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
तत्काल कार्यवाही घर के अंदर-बाहर मत भागिए, अपने परिवार को दरवाजों और मेजों के नीचे. पलंगों पर लेटे व्यक्ति को पलगों के नीचे ले आइऐ, खिडकियों और चिमनियों से दूर रहिए। घर के बाहर-भवनों, ऊँची दीवारों, बिजली के झूलते तारे से दूर रहिए। क्षतिग्रस्त भवनों में दुबारा मत जाइए। वाहन चलाते समय-अगर कार या बस में यात्रा करते समय भूकंप के झटके महसस होने लगें तो ड्राइवर को वाहन रोकने के लिए कहिए। वाहन में ही बैठे रहिए।

तत्काल करने योग्य कार्य-घर में सभी आग बुझा दीजिए तथा हीटर बंद कर दीजिए। यदि घर क्षतिग्रस्त हो गया है, तो बिजली, गैस और पानी बंद कर दीजिए। यदि घर में लगभग आग को तत्काल न बुझाया जा सके, तो तुरंत घर छोड़ दीजिए। गैस जलाने के बाद यदि गैस के रिसाव का पता चले तो घर से निकल जाइए संभव हो तो रेगुलेटर बंद कर दें। पालतू और घरेलू जीव-जन्तुओं (कुत्ता-बिल्ली और गोपशु) को बंधन से मुक्त कर दीजिए।

प्रश्न 5.
भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का वर्णन करो। बाढ़ों के कारणों का उल्लेख करते हुए इनसे होने वाली क्षति का वर्णन करो। बाढ़ नियंत्रण के उपाए बताओ।
उत्तर:
बाढ़ समस्या (Flood Problem) – सूखे की भान्ति बाद भी एक प्राकृतिक विपदा है। प्रत्येक वर्ष भारत के किसी-न-किसी भाग में बाढ़ों द्वारा विस्तृत क्षेत्रों से धन-जन की हानि होती है। कई बार देश के एक भाग में भयानक सूखे की स्थिति तो दूसरे भाग में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इससे समस्या अधिक गम्भीर हो जाती है। भारत में बाढ़ एक मौसमी समस्या है जब मानसून की अनियमित वर्षा से नदियों में बाढ़ आ जाती है। जब नदी के किनारों के ऊपर से पानी बह कर समीपवर्ती क्षेत्रों में दूर-दूर तक फैल जाता है तो इसे बाढ़ का नाम दिया जाता है।

भारत ‘नदियों का देश’ है जहाँ अनेक छोटी-बडी नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ वर्षा ऋतु में भरपूर बहती हैं, परंतु शुष्क ऋतु में इनमें बहुत कम जल होता है। निरंतर भारी वर्षा के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। वर्षा की तीव्रता तथा वर्षाकाल की अवधि अधिक होने से बाढ़ों को सहायता मिलती है। मानसून के पूर्व आरम्भ या देर तक समाप्त होने से बाढ़ उत्पन्न होती है।

ब्रह्मपुत्र नदी में मई-जून मास में बाढ़ साधारण बात है। उत्तरी भारत की नदियों में वर्षा ऋतु में बाढ़ आती हैं। नर्मदा नदी में अचानक बाढ़ (Flash floods) आती हैं। तटीय भागों में चक्रवातों के कारण मई तथा अक्टूबर मास में भयानक बाढ़ आती हैं । सन् 1990 में मई मास में आन्ध्र प्रदेश में खाड़ी बंगाल के चक्रवात से भारी क्षति हुई जिसमें लगभग 1000 व्यक्ति मर गए।

बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र (Flood Affected Areas) – भारत में मैदानी भाग में नदी घाटियों में अधिक बाढ़ें आती हैं। देश का लगभग 1/8 भाग बाढ़ों से प्रभावित रहता है। 60 प्रतिशत बाढ़ अधिक वर्षा के कारण उत्पन्न होती हैं। असम, बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्य स्थायी रूप से बाढ़ ग्रस्त रहते हैं। इन प्रदेशों में अधिक वर्षा तथा बड़ी-बड़ी नदियों के कारण बाढ़ समस्या गम्भीर है। एक अनुमान के अनुसार देश में 78 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्रति वर्ष बाढ़ आती हैं। नदी घाटियों के अनुसार बाढ़ क्षेत्रों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है

1. हिमालय क्षेत्र की नदियाँ (The Rivers of the Himalayas) – इस भाग में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र दो प्रमुख नदियाँ हैं जिनमें प्रत्येक वर्ष बाढ़ें आती हैं। गंगा घाटी में यमुना, घाघरा, गंडक तथा कोसी जैसी सहायक नदियाँ शामिल हैं। इन नदियों में जल की मात्रा अधिक होती है। इनकी ढलान तीव्र होती है तथा इन नदियों के मार्ग में परिवर्तन होता रहता है। उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विस्तृत क्षेत्रों में बाढों से भारी क्षति पहुँचती हैं। देश में बाढ़ों से कुल क्षति का 33% भाग उत्तर प्रदेश में तथा 27% भाग बिहार में होता है। कोसी नदी को बाढों के कारण ‘शोक की नदी” (River of Sorrow) कहा जाता है।

ब्रह्मपुत्र नदी असम, मेघालय तथा बंगलादेश में बाढों से हानि पहुँचती है। ब्रह्मपुत्र घाटी भारत में सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहाँ अधिक वर्षा तथा रेत व मिट्टी के जमाव से बाढ़ उत्पन्न होती हैं। भूकंप के आने के कारण नदियाँ अपना मार्ग बदल लेती हैं तथा बाढ़ की समस्या अधिक गम्भीर हो जाती हैं। दामोदर घाटी में दामोदर नदी के कारण भयंकर बाढ़ें आती रही हैं। इस नदी को “बंगाल का शोक” भी कहा जाता था परंतु दामोदर घाटी योजना के पूरा होने के बाद भी बाढ़ समस्या कम हो गई हैं

2. उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India) – इस भाग में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं। यहाँ झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास तथा रावी नदियों के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। बरसाती नदियों में भी बाढ़ें आती हैं।

3. मध्य भारत (Central India) – इस भाग में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश तथा उड़ीसा शामिल हैं। यहाँ ताप्ती, नर्मदा तथा चम्बल नदियों में कभी-कभी बाढ़ें आती हैं। यहाँ अधिक वर्षा के कारण बाढ़ उत्पन्न होती हैं।

4. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Region) – इस क्षेत्र में महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा काबेरी, नदियों में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के कारण बाढ आती हैं। कई बार ज्वार-भाटा के कारण डेल्टाई क्षेत्रों में रेत और मिट्टी के जमाव से भी बाढ़ आती हैं।

बाढ़ों के कारण (Causes of Floods) – भारत एक उष्ण कटिबंधीय मानसूनी देश है। यहाँ मानसूनी वर्षा के अधिक होने से बाढ़ की समस्या गम्भीर हो जाती है। बाढ निम्नलिखित कारणों से आती है –

1. भारी वर्षा (Heavy Rain) – किसी भाग में एक दिन में निरंतर वर्षा की मात्रा 15 सेमी. से अधिक होने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

2. चक्रवात (Cyclones) – भारत के पूर्वी तट पर खाडी बंगाल के तीव्र गति के चक्रवातों से भयानक बाढ़ आती हैं। जैसे-मई, 1990 में आन्ध्र प्रदेश में चक्रवातों द्वारा निरंतर वर्षा से नदी क्षेत्रों में बाढ़ उत्पन्न होने से भारी हानि हुई।

3. वनों की कटाई (Deforestation) – नदियों के ऊपरी भागों में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से अचानक बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं। शिवालिक की पहाड़ियों, असम, मेघालय तथा छोटा नागपुर के पठार में वृक्षों की कटाई के कारण बाढ़ की समस्या गम्भीर है।

4. नदी तल का ऊँचा उठना (Rising of the River Bed) – रेत तथा बजरी जमाव से नदी तल ऊँचा उठ जाता है जिससे समीपवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का जल फैल जाता है।

5. अपर्याप्त जल प्रवाह (Inadequate Drainage) – कई निम्न क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रबंध न होने से बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं।

बाढ़ से क्षति (Damage due to Floods) – बाढ़ से कृषि क्षेत्र में फसलों की हानि होती है। मकानों, संचार साधनों तथा रेलों, सड़कों को क्षति पहुँचती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कई बीमारियाँ फैल जाती हैं। देश में लगभग 2 करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र है जिसमें से 25 लाख हेक्टेयर भूमि में फसलें नष्ट हो जाती हैं। प्रतिवर्ष औसत रूप से 1 करोड़ जनसंख्या पर बाढ़ से क्षति का प्रभाव पड़ता है। लगभग 30 हजार पशुओं की हानि होती है।

एक अनुमान है कि औसत रूप से प्रति वर्ष 505 व्यक्तियों की बाढ़ के कारण मृत्यु हो जाती है। इस प्रकार देश में लगभग 1500 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचती है। सन् 1990 में देश में कुल क्षति 41.25 करोड़ रुपए की थी तथा 50 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त 162 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। 28 करोड़ रुपये की फसलें नष्ट हुई। 862 जानें गई तथा 1,22,498 पशु नष्ट हो गये।

बाढ़ से रोकथाम (Flood Control) – भारत में प्राचीन समय से ही बाढ़ की रोकथाम के लिए उपाय किए जाते हैं। प्रायः नदियों के साथ-साथ तटबंध बनाकर बाढ़ नियंत्रण किया जाता था । सन् 1954 में राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण योजना शुरू की गई। इस योजना के अधीन बाढ़ नियंत्रण के लिए कई उपाय किए गए।

1. नदियों के जल सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे किए गए।

2. नदियों के साथ तटबंध बनाये गए। देश में लगभग 15.467 किमी लम्बे तटबंधों का निर्माण किया गया।

3. निम्न क्षेत्रों में लगभग 30,199 किमी लम्बी जल प्रवाह नलिकायें बनाई गई हैं। 762 नगरों तथा 4,700 गाँवों को बाढ़ों से सुरक्षित किया गया है।

4. कई नदियों पर जलाशय बना कर बाढ़ों पर नियंत्रण किया गया है। जैसे-दामोदर घाटी बहुमुखी योजना तथा भाखडा नांगल योजना। देश में बाढ़ों का पूर्व अनुमान लगाने के लिए (Flood Foredacasting) 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

5. नदियों के ऊपरी भागों में वन रोपण किया गया है। सातवीं पंचवर्षीय योजना के अन्त तक 2710 करोड़ रुपए बाढ़ नियंत्रण पर व्यय किए गए जबकि आठवीं योजना पर 9470 करोड रुपये के व्यय का अनुमान है।

6. केरल तट पर सागरीय प्रभाव से बचाव के लिए 42 किमी लम्बी समद्री दीवारों का निर्माण किया गया तथा कर्नाटक तट पर 73 किमी लम्बी समुद्री दीवारें बनाई गई।

7. देश में बाढ़ के पूर्व निर्माण संगठन (Flood Fore-casting Organisation) की स्थापना की गई है। इसके अधीन 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं जिनकी संख्या इस शताब्दी के अन्त तक 300 हो जायगी।

8. महानदी घाटी में हीराकुड बाँध, दामोदर घाटी में कई बाँध, सतलुज नदी पर भाखड़ा डैम, व्यास नदी पर पौंग डैम तथा ताप्ती नदी पर डकई बाँध बनाकर बाढ़ों की रोकथाम की गई है।

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प्रश्न 6.
सूखा क्या है? भारत में इसके कारणों एवं प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
जब जल तथा नमी की उपलब्धता कुछ देर के लिये सामान्य से काफी कम होती हे तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। High Powered Committce on Disaster Management के अनुसार कृषि, पशुधन, उद्योग अथवा मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं से कम जल उपलब्ध होने की सूखा कहा जाता है।

सूखे का मुख्य कारण-भारत में वर्षा का अपर्याप्त होना तथा असमान वितरण के कारण मुख्य रूप से सूखा होता है। पश्चिमी और मध्य भारत को मौनसूनी वर्षा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। यही नहीं यहाँ वर्षा केवल अनिश्चित ही नहीं अपर्याप्त भी है। वर्षा की कमी जल विज्ञान संबंधी और कृषीय सूखे को प्रेरित करती है।

भारत के कुल क्षेत्रफल के 19% भाग को सूखे की मार झेलनी पड़ती है। इस क्षेत्र में देश की 12% जनसंख्या रहती है। भारत के कुछ राज्यों में सूखा एक स्थायी लक्षण है। देश का लगभग 30% क्षेत्र सूखा प्रदेश है।

सूखे का प्रभाव – सूखे के कारण खाद्यान्नों जल और चारे की कमी हो जाती है, इन्हें क्रमश: अकाल, जलकाल और तिनकोण कहते हैं। कभी-कभी तीनों की कमी एक साथ हो जाती है तब इसे त्रिकाल कहते हैं।

  • सूखे के बाद होनेवाले अकाल के कारण मानवों एवं पशुधन का भारी मात्रा में पलायन आरंभ हो जाता है।
  • सन् 1987 में भारत के आंध्रप्रदेश, गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश आदि 12 राज्यों में भयंकर सूखा पड़ा था।
  • सन् 2002 में मानसूनी वर्षा के न होने से भारत के मध्यवर्ती पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में भयंकर सूख पड़ा।

प्रश्न 7.
चक्रवात आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनते रहिए। बचाव के लिए पर्याप्त समय दीजिए चक्रवात कुछ घंटों में मार्ग की दिशा, गति तथा तीव्रता बदल सकता है। अतः नवीनतम सूचना के लिए रेडियो को निरंतर चलाए रखिए। यदि आपके क्षेत्र के लिए तूफानी पवनों या प्रबल झंडा की भविष्यवाणी की गई हो तो खुले तख्ते, नालीदार, टीन, खाली डिब्बे या ऐसी ही अन्य वस्तुएँ, जो पवन के साथ उड़कर खतरा बन सके, बांध दीजिए या स्टोर में रख दीजिए।

खिड़कियों को टूटने से बचाने के लिए उन्हें बंद रखिए। निकट के सुरक्षित स्थान में चले जाइए या किसी अधिकार प्राप्त सरकारी संस्था के आदेश पर क्षेत्र को छोड़ दीजिए। जब तूफान आ ही जाए, तो घर के अंदर रहिए। अपने घर के सबसे मजबूत भाग में शरण लीजिए।

रेडियो सुनिए और निर्देशों का पालन कीजिए। यदि छत उड़ने लगे, तो मकान के सुरक्षित भाग की खिड़की को खोल दीजिए। यदि आप खले में फंस गए हैं, तो शरण खोजिए। तूफान के दौरान पवनों के शान्त होने पर घर से बाहर या पुलिन (beach) पर मत जाइए। चक्रवातों के साथ प्रायः या झील में ऊँची-ऊंची लहरें उठती हैं।

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प्रश्न 8.
बाढ़ आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनिए। बिजली के सभी उपकरण बंद कर दीजिए। घर के सभी कीमती सामान और कपडे बाढ के पानी की पहुँच से दूर रखिए। ऐसा तभी कीजिए जब बाढ की चेतावनी मिली हो या आपको आशंका हो कि बाढ़ का पानी आपके घर में घुस जायगा। वाहनों, फार्म के पशुओं तथा आसानी से उठाई जा सकने वाली वस्तुओं को निकट की ऊँची – भूमि पर पहुँचा दीजिए। खतरनाक प्रदूषण को रोकिए।

सभी कीटनाशकों को पानी की पहुँच से दूर रखिए। यदि आपको घर छोड़ना पड़े तो बिजली और गैस बंद कर दीजिए। घर छोड़ने की मजबूरी में सभी बाहरी खिड़कियों और दरवाजों पर ताले लगा दीजिए। यदि आप बच सकते हैं, तो बाढ़ के पानी में पैदल या कार में बैठकर प्रवेश मत कीजिए। अपने आप बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के इधर-उधर मत घूमिए ।

प्रश्न 9.
भारत के प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर:
प्राकृतिक आपदा, महाविनाशकारी, अप्रत्याशित और अनियंत्रणीय परिघटना है। ये आपदायें –

  • जैव
  • भू-वैज्ञानिक
  • भूकंपीय
  • जल विज्ञान या मौसमी दशाएँ या प्राकृतिक पर्यावरण की प्रतिक्रियाएँ होती है?

भूकंप, चक्रवाती तूफान, आकस्मिक बाढ़, बादलों का फटना, सूखा आदि प्राकृतिक आपदायें कही जाती हैं। चक्रवात-600 किमी. या इससे अधिक व्यास तफानों में सबसे विनाशक या भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सर्वाधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के विषय में कोई भी सर्वमान्य सिद्धांत नहीं बना है। जब कमजोर रूप से विकसित कम उबाव के क्षेत्र में चारों ओर तापमान की क्षतीज प्रवणता बहुत कम होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है।

अधिकांशतः चक्रवातीय क्षति, तेज पवनों, मुसलाधार वर्षा और समुद्र में उठने वाली ऊँची तूफानों ज्वारीय लहरों के द्वारा होती है। पवनों की तुलना में चक्रवातीय वर्षा के कारण आई बाढ अधिक विनाशकारी होती है। वर्तमान संयम में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने से तथा प्रर्याप्त और सामूहिक कार्यवाही से चक्रवात में मरने वालों की संख्या में कमी आयी है।

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प्रश्न 10.
चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवातों द्वारा क्षति का वर्णन करें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – 600 किमी या इससे अधिक व्यास वाले चक्रवात, पृथ्वी के वायुमंडलीय तूफानों में सबसे अधिक विनाशक और भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सबसे अधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र हैं। संसार में अपने वाले चक्रवातों में से 6 प्रतिशत यहीं आते हैं।

उत्पत्ति – जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव के क्षेत्र के चारों ओर तापमान की क्षैतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है, तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजिन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है। संघनन के बाद मुक्त ऊष्मा, चक्रवात के लिए गतिज ऊर्जा (kinetic energy) में बदल जाती हैं।

चक्रवात की उत्पत्ति की निम्नलिखित अवस्थाएँ हैं –

  • महासागरीय तल का तापमान 26° से अधिक।
  • बंद समदाब रेखाओं का आविर्भाव।
  • निम्न वायु दाब, 1,000 मि.बा. से कम होना।
  • चक्रीय गति के क्षेत्रफल, प्रारम्भ से इसके अर्धव्यास 30 से 50 किमी फिर क्रमश: 100200 किमी और 1,000 किमी तक भी बढ़ जाते हैं।
  • ऊर्ध्वाधर रूप में पवन की गति का प्रारम्भ में 6 किमी की ऊँचाई तक बढ़ना तथा इसके बाद और भी ऊँचा उठाना।

चक्रवातों द्वारा क्षति-प्रभंजन की गति वाली पवनों, प्रभंजन की लहरों तथा मूसलाधार वर्षा से उत्पन्न बाढ़ों के कारण ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों का विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। अधिकतर तूफान अत्यन्त तेज पवनों और तूफानी लहरों के द्वारा भारी क्षति पहुँचाते हैं । पर्वतीय क्षेत्रों में ढाल पर अत्यन्त तीव्रता से बहने वाला वर्षा जल अपने सामने आने वाली हर वस्तु को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान करता है।

तूफानी लहरों की तीव्रता, पवन की गति, दाब प्रवणता, समुद्र की तली की स्थलाकृतियाँ तथा तटरेखा की बनावट पर निर्भर करती है। अनेक क्षेत्रों में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था के बावजूद, ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात धन-जन को अपार क्षति पहुँचाते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Set – 1

प्रश्न संख्या 1 से 2 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ख’ किसे इंगित करता है?
(a) गल्क स्ट्रीय धारा
(b) विषुवतीय धारा
(c) ब्राजील धारा
(d) ओयाशियो धारा
उत्तर:
(b) विषुवतीय धारा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ग’ किसे इंगित करता है?
(a) 200 सेमी. से अधिक वर्षा वाला क्षेत्र
(b) 100 से 200 सेमी. वर्षा वाला क्षेत्र
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र

Set – 2

प्रश्न संख्या 1 से 4 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘B निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) ब्राजील धारा
(b) क्यूरोशिने धारा
(c) विषुवतीय धारा
(d) कैलिफोर्निया धारा
उत्तर:
(d) कैलिफोर्निया धारा

प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकन प्लेट
(b) यूरेशियम प्लेट
(c) दक्षिण अमेरिकन प्लेट
(d) अरेबियन प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकन प्लेट

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 3.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) रॉकी पर्वत
(b) अरावली पर्वत
(c) अल्पस पर्वत
(d) हिमालय पर्वत
उत्तर:
(a) रॉकी पर्वत

Set – 3

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र
(b) तप्त स्थल
(c) छिछले भूकंप केन्द्र
(d) ज्वालामुखी उद्गार
उत्तर:
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र

प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) भूकंपों का देश
(b) बागों का देश
(c) समुद्री धारा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बागों का देश

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकी प्लेट
(b) अरेबियन प्लेट
(c) इंडो-आस्ट्रेलियम प्लेट
(d) नजका प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकी प्लेट

Set – 4

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ किससे संबंधित है?
(a) गर्म जलधारा
(b) ठण्डी जलधारा
(c) व्यापारिक पवनें
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ठण्डी जलधारा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ किससे संबंधित है?
(a) सर्वाधिक वर्षा वाला लेग
(b) कम वर्षा वाला तेज
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज

प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ किस हवा की दिशा को दिखाया गया है?
(a) द.प. मानसून
(b) उत्तरी-पूर्वी मानसून
(c) जेट प्रवाह
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(a) द.प. मानसून

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक वनस्पति Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रोजेक्ट टाईगर का उद्देश्य क्या था ……………………..
(क) शेरों का शिकार करना
(ख) अवैध शिकार को रोककर शेरों की सुरक्षा
(ग) शेरों को चिड़ियाघरों में रखना
(घ) शेरों पर चित्र बनाना
उत्तर:
(ख) अवैध शिकार को रोककर शेरों की सुरक्षा

प्रश्न 2.
नन्दा देवी जीव आरक्षण क्षेत्र किस राज्य में है ………………………
(क) बिहार
(ख) उत्तरांचल
(ग) उत्तरप्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर:
(ख) उत्तरांचल

प्रश्न 3.
संदल किस प्रकार के वन की लकड़ी है?
(क) सदाबहार
(ख) डेल्टय वन
(ग) पतझड़ीय
(घ) कंटीले वन
उत्तर:
(ग) पतझड़ीय

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 4.
IUCN द्वारा कितने जीव आरक्षण स्थल मान्यता प्राप्त हैं ……………………..
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर:
(घ) 4

प्रश्न 5.
वन नीति के अधीन वन क्षेत्र का लक्ष्य कितना था ……………………….
(क) 33%
(ख) 55%
(ग) 44%
(घ) 22%
उत्तर:
(क) 33%

प्रश्न 6.
चंदन वन किस प्रकार का वन है …………………….
(क) सदाबहार
(ख) डेल्टाई
(ग) पर्णपाती
(घ) काँटेदार
उत्तर:
(ग) पर्णपाती

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति क्या है ? जलवायु की किन परिस्थितियों में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति से अभिप्राय उस पौधा समुदाय से है, जो लम्बे समय तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगता है और इसकी विभिन्न प्रजातियाँ वहाँ पाई जाने वाली मिट्टी और जलवायु में यथासंभव स्वयं को ढाल लेती हैं। उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उष्ण और आई प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22° सेल्सियस से अधिक रहता है।

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प्रश्न 2.
जलवायु की कौन-सी परिस्थितियाँ सदाबहार वन उगने के लिए अनुकूल हैं ?
उत्तर:
सदाबहार वन ऊष्ण और आई प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200, सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22-20° सेल्सियस से अधिक रहता है।

प्रश्न 3.
सामाजिक वानिकी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सामाजिक वानिकी का अर्थ है पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद के उद्देश्य से वनों का प्रबंध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनरोपण। राष्ट्रीय कृषि आयोग (1976-79) ने सामाजिक वानिकी को तीन वर्गों में बाँटा है-शहरी वानिकी, ग्रामीण वानिकी और फार्म वानिकी।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 4.
जीव मंडल निचय को पारिभाषित करें। वन क्षेत्र और वन आवरण में क्या अंतर है?
उत्तर:
जीव मंडल निचय (आरक्षित क्षेत्र) विशेष प्रकार के भौतिक और तटीय पारिस्थितिक तंत्र हैं, जिन्हें यूनेस्को (UNESCO) के मानव और जीव मंडल प्रोग्राम (MAB) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। जीव मंडल निचय के तीन मुख्य उद्देश्य हैं –

  • जीव विविधता और पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण
  • पर्यावरण और विकास का मेल-जोल
  • अनुसंधान और देख-रेख के लिए अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।

वन क्षेत्र राजस्व विभाग के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र है, चाहे वहाँ वृक्ष हों या न हों, जबकि वन आवरण प्राकृतिक वनस्पति का झुरमुट है और वास्तविक रूप में वनों से ढंका है। वन क्षेत्र राज्यों के राजस्व विभाग से प्राप्त होता है जबकि वन आवरण की पहचान वायु चित्रों और
उपग्रहों से प्राप्त चित्रों से की जाती है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें।

प्रश्न 1.
वन संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
वन संरक्षण नीति के अंतर्गत निम्न कदम उठाए गए हैं – सामाजिक वानिकी – सामाजिक वानिको का अर्थ पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद के उद्देश्य से वनों का प्रबंध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनरोपण । सामाजिक वानिकी को तीन वर्गों में बाँटा गया है-शहरी वानिकी, ग्रामीण वानिकी और फार्म वानिकी।

सार्वजनिक भूमि जैसे – पार्क, सड़कों, हरित पट्टी, औद्योगिक व व्यापारिक स्थलों पर वृक्ष लगाना और उसका प्रबंध इत्यादि से शहरी वानिकी को बढ़ावा दिया जाता है। कृषि वानिकी का अर्थ कृषि योग्य तथा बंजर भूमि पर पेड़ और फसलें एक साथ लगाना । फार्म वानिकी के अंतर्गत किसान अपने खेतों में व्यापारिक महत्त्व वाले या दूसरे पेड़ लगाते है। वन विभाग इसके लिए छोटे और मध्यम किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराता है। इस प्रकार की योजना के अंतर्गत कई प्रकार की भूमि जैसे-खेतों की मेड़, चरागाह, घास स्थल, घर के पास पड़ी खाली जमीन और पशुओं के बाड़ों में भी पेड़ लगाए जाते हैं।

कृषि वानिकी का उद्देश्य वानिकी और खेती एक साथ करना है, जिससे खाद्यान्न, चारा, ईंधन, इमारती लकड़ी और फलों का उत्पादन एक साथ किया जाय। समुदायिक वानिकी सार्वजनिक भूमि जैसे-गाँव-चरागाह, मंदिर-भूमि, सड़कों के दोनों ओर, नहर किनारे, रेल पट्टी के साथ पटरी और विद्यालयों में पेड़ लगाना है। इस योजना का एक उद्देश्य भूमिविहीन लोगों को वानिकीकरण से जोड़ना तथा इससे उन्हें लाभ पहुंचाना है जो केवल भूस्वामियों को ही प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 2.
वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
वन और वन्य प्राणी संरक्षण का दायरा काफी बढ़ा है और इसमें मानव कल्याण की . असीम संभावनाएँ निहित हैं। यद्यपि इस लक्ष्य को तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब हर व्यक्ति इसका महत्त्व समझे और अपना योगदान दे।

वन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में हमें बहुत अधिक आर्थिक व सामाजिक लाभ पहुंचाते हैं। अतः वनों के संरक्षण की मानवीय विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। वनों और जनजाति समुदायों में घनिष्ठ सम्बन्ध है और इनमें से एक का विकास दूसरे के बिना असंभव है। वनों के विषय में इनके प्राचीन व्यावहारिक ज्ञान को वन विकास में प्रयोग किया जा सकता है। जनजातियों को वनों से गौण उत्पाद संग्रह करने वाले न समझकर, उन्हें वन संरक्षण में भागीदार बनाया जाना चाहिए।

हमें पर्यावरण संतुलन बनाए रखना चाहिए तथा पारिस्थितिक असंतुलित क्षेत्रों में वन लगाना चाहिए। देश की प्राकृतिक धरोहर जैव-विविधता तथा आनुवांशिक पूल का संरक्षण करना चाहिए। मृदा अपरदन तथा मरुस्थलीयकरण को रोकने का प्रयास करना चाहिए तथा बाढ़ व सूखे पर नियंत्रण पाने की कोशिश करते रहनी चाहिए । वनों की उत्पादकता बढ़ाकर वनों पर निर्भर ग्रामीण जनजातियों को इमारती लकड़ी, ईंधन, चारा और भोजन उपलब्ध करवाना चाहिए और लकड़ी के स्थान पर हमें अन्य वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। पेड़ लगाने को बढ़ावा देने के लिए, पेड़ों की कटाई रोकने के लिए जन-आंदोलन चलाना चाहिए तथा हमें वन्य प्राणियों का शिकार नहीं करना चाहिए। दुर्लभ प्राणियों और पौधों को संरक्षित रखने के लिए उनकी संख्या में बढ़ोतरी के लिए प्रयास करना चाहिए।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को पहचान कर चिह्नित करें।

  1. मैंग्रोव वन वाले क्षेत्र।
  2. नंदा देवी, सुंदर वन, मन्नार की खाड़ी और नीलगिरी, जीवमंडल निचय।
  3. भारतीय वन सर्वेक्षण मुख्यालय की स्थिति का पता लगाएं और रेखांकित करें।

उत्तर:
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Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक वनस्पति Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के दो राज्य बतायें जहाँ देवदार के वृक्ष मिलते हैं।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 2.
काँटेदार वन के दो पड़ों के नाम बतायें।
उत्तर:
खैर तथा खजूरी।

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प्रश्न 3.
बबूल के वृक्ष से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
गोंद तथा रंगने वाले पदार्थ।

प्रश्न 4.
ज्वारीय वन में गुंझलदार जड़ों का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह कीचड़ में वृक्षों का संरक्षण करती हैं।

प्रश्न 5.
भारत का वन अनुसंधान केन्द्र कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
देहरादून में।

प्रश्न 6.
ज्वारीय वन में पाये जाने वाले दो पेड़ों के नाम लिखें।
उत्तर:
सुन्दरी, गुर्जन।

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प्रश्न 7.
वैज्ञानिक नियम पर वनों के अन्तर्गत कुल कितना क्षेत्र होना चाहिए।
उत्तर:
33%

प्रश्न 8.
कोणधारी वन के तीन वृक्षों के नाम लिखें।
उत्तर:
पाइन, देवदार, सिल्वर फर्र।

प्रश्न 9.
3500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर किस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है?
उत्तर:
एल्पाइन चरागाह।

प्रश्न 10.
उन दो राज्यों के नाम लिखें जहाँ देवदार पाये जाते हैं।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 11.
मयरो बोलान वृक्ष का उपयोग बताएं।
उत्तर:
रंगने वाले पदार्थ प्रदान करना।

प्रश्न 12.
ज्वारीय वातावरण में कौन-से वन मिलते हैं?
उत्तर:
मैंग्रोव वन।

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प्रश्न 13.
भारत में आर्थिक पक्ष से कौन-सा वनस्पति क्षेत्र महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
पतझड़ीय वन।

प्रश्न 14.
भारत का कुल कितना भौगोलिक क्षेत्र वनों के अंतर्गत है?
उत्तर:
22%

प्रश्न 15.
भारत का कुल कितना क्षेत्र (हेक्टेयर में) वनों के अन्तर्गत है?
उत्तर:
750 लाख हेक्टेयर।

प्रश्न 16.
लकड़ी के दो प्रयोग लिखें।
उत्तर:

  1. इमारत निर्माण के लिये।
  2. ईंधन के लिए लकड़ी।

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प्रश्न 17.
लकड़ी का एक औद्योगिक प्रयोग लिखें।
उत्तर:
खेलों का सामान बनाना, रेयॉन उद्योग।

प्रश्न 18.
बाँस तथा वन के घास के दो उपयोग लिखो।
उत्तर:

  1. कागज बनाने के लिए
  2. कृत्रिम रेशा।

प्रश्न 19.
वनों से प्राप्त तीन उत्पादों के नाम लिखें।
उत्तर:
रबड़, गोंद तथा चमड़ा रंगने वाले पदार्थ।

प्रश्न 20.
उन दो भौगोलिक तत्त्वों के नाम लिखो जो वनों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:

  1. वर्षा की मात्रा
  2. ऊँचाई।

प्रश्न 21.
उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा तथा तापमान बताओ।
उत्तर:

  1. 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा
  2. 25°-27°C

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प्रश्न 22.
पतझड़ीय मानसून वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा तथा तापमान बताओ।
उत्तर:
150-200 सेंटीमीटर।

प्रश्न 23.
उस राज्य का नाम बताओ जहाँ उष्ण कटिबंधीय सदाबहार बन पाये जाते हैं।
उत्तर:
केरल।

प्रश्न 24.
भारत के प्रदेश के नाम बताओ जहाँ काँटे तथा झाड़ियों के बन पाये जाते हैं?
उत्तर:
थार मरुस्थल।

प्रश्न 25.
हिन्द महासागर में द्वीपों के समूह बताएँ जहाँ उष्ण कटिबंधीय बन पाये जाते हैं।
उत्तर:
अण्डमान-निकोबार द्वीप।

प्रश्न 26.
उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों में पाये जाने वाले तीन महत्वपूर्ण पेड़ों के नाम लिखो।
उत्तर:
रोजवुड, अर्जुन, आबनूस।

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प्रश्न 27.
मानसून वनों को पतझड़ीय वन क्यों कहते हैं?
उत्तर:
क्योंकि ये गर्मियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं।

प्रश्न 28.
उन तीन राज्यों के नाम बताएँ जहाँ मानसून वन पाये जाते हैं।
उत्तर:
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा झारखण्ड।

प्रश्न 29.
मध्य प्रदेश के एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक वृक्ष का नाम बताएँ।
उत्तर:
सागवान।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
नम उष्ण कटिबंधीय सदाबहार एवं अर्द्ध-सदाबहार बनों की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। ये भी बताइए कि ये मुख्यतः किन प्रदेशों में पाए जाते हैं?
उत्तर:
नम उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन-ये वन उष्ण कटिबंधीय वनों के समान सदाबहार घने वन होते हैं। ऊष्ण-आई जलवायु के कारण ये वन तेजी से बढ़ते हैं तथा अधिक ऊँचे होते हैं। भारत में पाए जाने वाले ये वन कुछ खुले तथा दूर-दूर पाए जाते हैं। इन वनों में कठोर लकड़ी के वृक्ष मिलते हैं जिनके शिखर पर छाता जैसा आकार बन जाता है। भारत में ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में (केरल तथा कर्नाटक) पाए जाते हैं। ये वन शिलांग पठार के पर्वतीय प्रदेश में पाए जाते हैं। महोगनी, खजूर, बांस मुख्य वृक्ष हैं। अर्द्ध-सदाबहार वन-ये वन पश्चिमी घाट तथा उत्तर:पूर्वी भारत में कम वर्षा के क्षेत्रों में मिलते हैं। ये मानसूनी पतझड़ीय वन हैं।

प्रश्न 2.
भारत में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार बन कहाँ पाए जाते हैं ? ऐसे बनों की वनस्पति भूमध्यरेखीय वनों से किस प्रकार समान हैं तथा किस प्रकार से असमान हैं?
उत्तर:
भारत में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शिलांग पठार, असम प्रदेश तथा पश्चिमी घाट पर पाए जाते हैं। ये वन भूमध्यरेखीय वनों से मिलते-जुलते हैं क्योंकि ये कठोर लकड़ी के वन हैं तथा ये अधिक आई क्षेत्रों में मिलते हैं जहाँ 200 सेमी. से अधिक वार्षिक वर्षा होती है। ये वन भूमध्यरेखीय वनों की भान्ति घने नहीं हैं, परंतु ये वन अधिक खुले-खुले मिलते हैं तथा इनका उपयोग आसान हो जाता है।

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प्रश्न 3.
सामाजिक वानिकी पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सामाजिक वानिकी (Social Forestryi):
1. 1976 के राष्ट्रीय कृषि आयोग ने पहले – पहल ‘सामाजिक वानिकी’ शब्दावली का प्रयोग किया था। इसका अर्थ है-ग्रामीण जनसंख्या के लिए जलावन, छोटी इमारती लकड़ी और छोटे-छोटे वन उत्पादों की आपूर्ति करना ।

2. अनेक राज्य सरकारों ने सामाजिक वानिकी के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। अधिकतर राज्यों में वन विभागों के अन्तर्गत सामाजिक वानिकी के अलग से प्रकोष्ठ बनाए गए हैं। सामाजिक वानिकी के मुख्य रूप से तीन अंग हैंकृषि वानिकी-किसानों को अपनी भूमि पर वृक्षरोपण के लिए प्रोत्साहित करना; वन – भूखण्ड (वुडलाट्स) – वन विभागों द्वारा लोगों की जरूरतों को पूर करने के लिए सड़कों के किनारे, नहर के तटों, तथा ऐसी अन्य सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण सामुदायिक वन-भूखण्ड-लोगों द्वारा स्वयं बराबर की हिस्सेदारी के आधार पर भूमि पर वृक्षारोपण।

3. सामाजिक वानिकी योजनाएँ असफल हो गईं, क्योंकि इसमें उन निर्धन महिलाओं को शामिल नहीं किया गया, जिन्हें इससे अधिकतर फायदा होना था। यह योजना पुरुषोन्मुख हो गई। यही नहीं, यह कार्यक्रम लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कार्यक्रम के स्थान पर किसानों का धनोपार्जन कार्यक्रम बन गया ।

4. सामाजिक वानिकी कार्यक्रम के द्वारा उत्पादित लकड़ी ग्रामीण भारत के गरीबों को न मिलकर, नगरों और कारखानों में पहुंचने लगी है। इससे गाँवों में रोजगार के अवसर घटे हैं और अन्य उत्पादन करने वाली भूमि पर पेड़ लग गए है। इससे अनिवासी भू-स्वामित्व को बढ़ावा मिला है।

प्रश्न 4.
कौन-सी वनस्पति जाति बंगाल का आतंक मानी जाती है और क्यों?
उत्तर:
कुछ विदेशज वनस्पति जाति के कारण कई प्रदेशों में समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। भारत में वनस्पति का 40% भाग विदेशज है। ये पौधे चीनी-तिब्बती, अफ्रीका तथा इण्डो-मलेशियाई क्षेत्र से लाए गए हैं। जलहायसिंथ पौधा भारत में बाग के सजावट के पौधे के रूप में लाया गया था। इस पौधे के फैल जाने के कारण पश्चिमी बंगाल में जलमार्गों, नदियों, तलाबों तथा नालों कं मुंह बड़े पैमाने पर बंद हो गए हैं। इस पौधे के हानिकारक प्रभावों के कारण इसे “बंगाल का आतंक” (Terror of Bengal) भी कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
“हमारी अधिकांश प्राकृतिक वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है।” इस कथन की व्याख्या करो।
उत्तर:
यह कथन काफी हद तक सही है कि भारत में अधिकांश ‘प्रकृतिक’ वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है। इस देश में मानवीय निवास के कारण प्राकृतिक वनस्पति का अधिकतर भाग नष्ट हो गया है या परिवर्तित हो गया है। अधिकांश वनस्पति अपनी कोटि तथा गुणों के उच्च स्तर के अनुसार नहीं हैं। केवल हिमालय प्रदेश के कुछ अगम्य क्षेत्रों में एवं थार मरुस्थल के कुछ भागों को छोड़ कर अन्य प्रदेशों में प्राकृतिक वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है। इन प्रदेशों की वनस्पति स्थानिक जलवायु तथा मिट्टी के अनुसार पनपती है तथा इसे प्राकृतिक कहा जा सकता है।

प्रश्न 6.
भारत में मुख्य वनस्पतियों के प्रकार को प्रभावित करने वाले भौगोलिक घटकों के नाम बताइए तथा उनके एक-दूसरे पर पड़ने वाले प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
भारत में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। वनस्पति की प्रकार, सघनता आदि वातावरण में कई तत्वों पर निर्भर है। भारत में वनस्पति विभाजन के अनुसार उष्ण कटिबंधीय सदाबहार एवं मानसूनी वन, शीतोष्ण वन, घास के मैदान आदि वनस्पति को निम्नलिखित भौगोलिक घटक प्रभावित करते हैं –

  • वर्षा की मात्रा
  • धूप
  • ताप की मात्रा
  • मिट्टी की प्रकृति

ये जलवायुविक घटक अन्य स्थानिक तत्त्वों के साथ मिल कर एक-दूसरे पर विशेष प्रभाव डालते हैं। अधिक वर्षा तथा उच्च तापमान के कारण असम तथा पश्चिमी घाट पर ऊष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनस्पति पाई जाती है। परंतु मरुस्थलीय क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण कांटेदार झाड़ियाँ पाई जाती हैं। कई भागों में मौसमी वर्षा के कारण पतझड़ीय वनस्पति पाई जाती है। उष्ण जलवायु के कारण अधिकतर चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष पाए जाते हैं परंतु हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में कम तापमान के कारण कोणधारी वन तथा अल्पला घास पाई जाती है। स्थानीय मिट्टी के प्रभाव से नदी के डेल्टाई क्षेत्रों में ज्वारीय वन या मैंगरोव पाई जाती है। इसी प्रकार बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में बबूल के वृक्ष मिलते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 7.
“हिमालय क्षेत्रों में ऊँचाई के क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाईन वनस्पति प्रदेशों तक का अनुक्रम पाया जाता है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत में दक्षिणी ढलानों से लेकर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति मिलती है। ऊंचाई के क्रम के अनुसार वर्षा तथा ताप की मात्रा में अंतर पडता है। इस अंतर के प्रभाव से वनस्पति में एक क्रमिक अंतर पाया जाता है। धरातल के अनुसार तथा ऊँचाई के साथ-साथ वनों के प्रकार में भिन्नता आ जाती है। इस क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति तक का विस्तार पाया जाता है।

1. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन – हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर 1200 मीटर की ऊँचाई तक उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं। यहाँ वर्षा की मात्रा अधिक होती है। यहाँ सदाबहार घने वानों में साल के उपयोगी वृक्ष पाए जाते हैं।

2. शीत उष्ण कटिबंधीय वन – 2000 मीटर की ऊंचाई पर नम शीत उष्ण प्रकार के घने वन पाए जाते हैं। इनमें ओक, चेस्टनट और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं।

3. शंकुधारी वन – दो हजार से अधिक ऊंचाई पर शंकुधार वृक्षों का विस्तार मिलता है। यहाँ कम वर्षा तथा अधिक शीत के कारण वनस्पति में अंतर पाया जाता है। स्परूस, देवदार, चिनार और अखरोट के वृक्ष पाए जाते हैं। हिम रेखा के निकट पहुंचने पर बर्च, जूनीपर आदि वृक्ष पाए जाते हैं।

4. अल्पाइन चरागाहें – 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई के कई भागों में छोटी-छोटी घास के कारण चरागाहें पाई जाती हैं। पश्चिमी हिमालय में गुजरों जैसी जन-जातियाँ मौसमी पशुचरण हेतु इन चरागाहों का उपयाग करते हैं।

प्रश्न 8.
प्राकृतिक वनस्पति को परिभाषित कीजिए । जलवायु की उन परिस्थितियों का वर्णन कीजिए, जिसमें उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं।
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति उन वनस्पतियों को कहा जाता है जो मानव के प्रत्यक्ष या परोक्ष सहायता के बिना पृथ्वी पर उगते हैं और अपने आकार संरचना तथा अपनी जरूरतों को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुसार ढाल लेते हैं। निम्न परिस्थितियों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं –

  • जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 20 cm से अधिक हो
  • जहाँ सापेक्ष आर्द्रता 70% से अधिक हो।

अर्थात् जहाँ अधिक वर्षा हो, उच्च आर्द्रता हो तथा उच्च तापमान हो वहीं उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उंगते हैं।

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प्रश्न 9.
भारत में वनों के क्षेत्र के कम होने के क्या कारण है?
उत्तर:
किसी प्रदेश के कुल क्षेत्र के कम-से-कम 1/3 भाग में वनों का विस्तार होना चाहिए ताकि उस प्रदेश में पारिस्थितिक स्वास्थ्य कायम रखा जा सके। भारत में कई कारणों से बन सम्पत्ति का कम विस्तार है –

  • वनों के विशाल क्षेत्र की कटाई
  • स्थानान्तरित कृषि की प्रथा
  • अत्यधिक मृदा अपरदन
  • चारागाहों की अत्यधिक चराई
  • लकड़ी एवं ईंधन के लिए वृक्षों की कटाई
  • मानवीय हस्तक्षेप

प्रश्न 10.
वन सम्पदा के संरक्षण के लिए क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं?
उत्तर:
जनसंख्या के अत्यधिक दबाव तथा पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण वन सम्पदा का संरक्षण आवश्यक है। वन संरक्षण कृषि एवं चराई के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता के कारण आवश्यक है। इसके लिए वनवर्द्धन के उत्तम तरीकों को अपनाया जा रहा है। तेजी से उगने वाले पौधों की जातियों को लगाया जा रहा है। घास के मैदानों का पुनर्विकास किया जा रहा है। वन क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

प्रश्न 11.
भारत में विभिन्न प्रकार के घासों का वर्णन करो।
उत्तर:
घासें-बारहमासी घासों की 60 प्रजातियाँ हैं। इनसे मिलकर ही हमारा पारितंत्र बना है, जो हमारे पशुधन के जीवन का आधार है। वास्तविक चारागाह और घास भूमियाँ लगभग 12.04 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तीर्ण हैं। चराई के लिए अन्य भूमि, वृक्ष-फसलों और उद्यानों, बंजर भूमि तथा परती भूमि के रूप में हैं। जिनका क्षेत्रफल क्रमशः 37 लाख हेक्टेयर, 15 लाख हेक्टेयर और 23.3 लाख हेक्टेयर है।

वनों के अपकर्ष (डिग्रेडेशन) और विनाश के परिणामस्वरूप ही चरागाह और घासभूमियाँ विकसित हुई हैं। कालांतर में चारागाह सवाना में बदल जाते हैं। हिमालय की अधिक ऊँचाइयों वाले उप-अल्पाइन और अल्पाइन क्षेत्रों में वास्तविक चारागाह पाए जाते हैं। भारत में घास के तीन पृथक् आवरण हैं। ऊष्ण कटिबंधीय-यह मैदानों में पाया जाता है। उपोष्ण कटिबंधीय घास भूमियाँ मुख्य रूप से हिमालय की पर्वत में ही पाई जाती हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 12.
वन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वनों का संरक्षण-मनुष्यों और पशुओं की बढ़ती हुई संख्या का प्राकृतिक वनस्पति पर दुष्प्रभाव पड़ा है। जो क्षेत्र कभी वनों से ढंके थे, आज अर्द्ध-मरुस्थल बन गए हैं। राजस्थान में भी कभी वन थे। पारिस्थितिक संतुलन के लिए वन अनिवार्य हैं। मानव का अस्तित्व और विकास पारिस्थितिक संतुलन पर निर्भर है। संतुलित पारितंत्र और स्वस्थ पर्यावरण के लिए भारत के कम-से-कम एक तिहाई भाग पर वन होना चाहिए । दुर्भाग्य से हमारे देश के एक चौथाई भाग पर भी बन नहीं है। इसलिए वन संसाधनों की संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक नीति की आवश्यकता है।

प्रश्न 13.
भारत की वन नीति के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
सन् 1988 में नई राष्ट्रीय वन नीति, वनों के क्षेत्रफल में हो रही कमी को रोकने के लिए बनाई गई थी।

  1. इस नीति के अनुसार देश के 33 प्रतिशत भू-भाग को वनों के अन्तर्गत लाना था। संसार के कुल भू-भाग का 27 प्रतिशत तथा भारत का लगभग 19 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है।
  2. वन नीति में आगे कहा गया है कि पर्यावरण की स्थिरता कायम रखने का प्रयत्न किया जायगा तथा जहाँ पारितंत्र का संतुलन बिगड़ गया है, वहाँ पुनः बनारोपण किया जायगा।
  3. आनुवांशिक संसाधनों की जैव विविधता को देश की प्राकृतिक विरासत कहा जाता है। इस विरासत का संरक्षण, वन नीति का अन्य उद्देय है।
  4. इस नीति में मृदा-अपरदन, मरुभूमि के विस्तार तथा सूखे पर नियंत्रण का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
  5. इस नीति में जलाशयों में गाद के जमाव को रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण का भी प्रावधान है।
  6. इस नीति के और भी उद्देश्य हैं जैसे-अपरदित और अनुत्पादक भूमि पर सामाजिक वानिकी और वनरोपण द्वारा वनावरण में अभिवृद्धि, वनों की उत्पादकता बढ़ाना, ग्रामीण और जन-जातीय जनसंख्या के लिए इमारती लकड़ी, जलावन, चारा और भोजन जुटाना
  7. यही नहीं इस नीति में महिलाओं को शामिल करके, व्यापक जनान्दोलन द्वारा वर्तमान वनों पर दबाव कम करने के लिए भी बल दिया गया है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में वास्तविक वनावरण का वितरण बताएँ।
उत्तर:
वनक्षेत्र की भांति बनावरण में भी बहुत अंतर है। जम्मू और कश्मीर में वास्तविक वनावरण एक प्रतिशत है, जबकि अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह की 92 प्रतिशत भूमि पर वास्तविक बनावरण है। परिशिष्ट 1 में दी गई सारणी से स्पष्ट है कि 9 ऐसे राज्य हैं जहाँ कुल क्षेत्रफल के एक तिहाई भाग से अधिक पर वनावरण है। एक तिहाई वनारण पारितंत्र का संतुलन बनाए रखने के लिए मानक आवश्यकता है। चार ऐसे राज्य हैं जहाँ वन का प्रतिशत आदर्श स्थिति जैसा ही है। अन्य राज्यों में वनों की स्थिति असंतोषजनक या संकटपूर्ण है। ध्यान देने योग्य बातम यह है कि तीन नवीन राज्यों, उत्तरांचल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में प्रत्येक के कुल क्षेत्रफल के 40 प्रतिशत भाग पर वन हैं। इन राज्यों के पृथक् आँकड़े न मिलने के कारण इन्हें इनके पूर्व राज्यों में ही सम्मिलित किया गया है।

वास्तविक वनावरण के प्रतिशत के आधार पर भारत के राज्यों को चार प्रदेशों में विभाजित किया गया है –

  • अधिक वनावरण वाले प्रदेश
  • मध्यम वनावरण वाले प्रदेश
  • कम वनावरण वाले प्रदेश
  • बहुत कम वनावरण वाले प्रदेश

1. अधिक बनावरण वाले प्रदेश – इस प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक वनावरण वाले राज्य सम्मिलित हैं। असम के अलावा सभी पूर्वी राज्य इस वर्ग में सम्मिलित हैं। जलवायु की अनुकूल दशाएँ मुख्य रूप से वर्षा और तापमान अधिक वनावरण में होने का मुख्य कारण हैं। इस प्रदेश में भी वनावरण भिन्नताएँ पाई जाती हैं। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह और मिजोरम, नागालैण्ड तथा अरुणाचल प्रदेश के राज्यों में कुल भौगोलिक क्षेत्र के 80 प्रतिशत भाग पर वन पाए जाते हैं। मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम और दादर और नागर हवेली में वनों का प्रतिशत 40 और 80 के बीच हैं।

2. मध्य बनावरण वाले प्रदेश – इसमें मध्य प्रदेश, उड़ीसा, गोवा, केरल, असम और हिमाचल प्रदेश सम्मिलित हैं। गोवा में वास्तविक वन क्षेत्र 33.79 प्रतिशत है, जो कि इस प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके बाद असम और उड़ीसा का स्थान है। अन्य राज्यों में कुल क्षेत्र के 30 प्रतिशत भाग पर वन हैं।

3. कम वनावरण वाले प्रदेश – यह प्रदेश लगातार नहीं है। इसमें दो उप-प्रदेश हैं: एक प्रायद्वीप भारत में स्थित है। इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। दूसरा उप-प्रदेश उत्तरी भारत में है। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य शामिल हैं।

4. बहुत कम वनावरण वाले प्रदेश – भारत के उत्तर:पश्चिमी भाग को इस वर्ग में रखा जात है। इस वर्ग में शामिल राज्य हैं-राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात । इसमें चंडीगढ़ और दिल्ली दो केन्द्र शासित प्रदेश भी हैं। इनके अलावा पंश्चिम बंगाल का राज्य भी इसी वर्ग में हैं। भौतिक और मानवीय कारणों से इस प्रदेश में बहुत कम वन है।

प्रश्न 2.
भारत में प्राकृतिक वनस्पति किस प्रकार वर्षा के वार्षिक वितरण पर आश्रित हैं ? अपने उत्तर को उचित उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में प्राकृतिक वनस्पति वर्षा के वार्षिक वितरण पर आश्रित है जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 cm से अधिक होती है वहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं। रबड़, महोगिनी, एबीनी, नारियल, बाँस, बेत एवं आदनवुड के वृक्ष मुख्य रूप से उगते हैं। ये वन अंडमान निकोबार, असम, मेघालय, नागालैंड, नागपुर, मेजोरम, त्रिपुरा एवं पश्चिम बंगाल में पाये जाते हैं।

वार्षिक वर्षा जहाँ 70 से 200 cm होती है वहाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती बन उगते हैं। इन वनों का विस्तार तोता के मध्य एवं निचली घाटी, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में है। प्रमुख वृक्ष साल, चंदन, सागवान, शीशम, आम आदि हैं। वार्षिक वर्षा 50 cm से कम जिन क्षेत्रों में है वहाँ उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन पाये जाते हैं। बबूल, कीकर, बेर, खजूर, खैर, नीम, खेजड़ी, पलास आदि के वृक्ष मुख्य रूप से राजस्थान, द.पू. में पंजाब, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में आते हैं। शुष्क जलवायु के कारण इनके पत्ते छोटे खाल मोटी तथा जड़ें खरी होती हैं। इस प्रकार जहाँ अधिक वर्षा होती है वहाँ लंबे-लंबे वृक्ष उगते हैं जो आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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प्रश्न 3.
भारत के विभिन्न प्रकार के वनों के भौगोलिक वितरण तथा आर्थिक महत्त्व वर्णन करों।
उत्तर:
भारत की वन सम्पदा (Forrest Wealth of India) – प्राचीन समय में भारत के एक बड़े भाग पर वनों का विस्तार था, परंतु अब बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण वन क्षेत्र घटता जा रहा है। इस समय देश में 747 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों पर वनों का विस्तार है जो कि देश के कुल क्षेत्रफल का 22.7% भाग है। भारत में प्रति व्यक्ति वन क्षेत्र लगभग 0.1 हेक्टेयर है जो कि बहुत कम है। भौगोलिक दृष्टि से मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वन क्षेत्र हैं।

भारतीय वनों का वर्गीकरण-भारत में वनों का वितरण वर्षा, तापमान तथा ऊँचाई के अनुसार है। भारत में निम्नलिखित प्रकार के वन पाए जाते हैं –
1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी से अधिक तथा औसत तापमान 24°C है। इन वनों का विस्तार निम्नलिखित प्रदेशों में है

  • पश्चिमी घाट तथा पश्चिमी तटीय मैदान
  • अण्डमान द्वीप समूह
  • उत्तर-पूर्व में हिमालय पर्वत की ढलानों पर।

अधिक वर्षा तथा ऊँचे तापमान के कारण ये वन बहुत घने होते हैं। ये सदाबहार वन हैं। तथा भूमध्य रेखीय वनों की भांति कठोर लकड़ी के वन हैं। वृक्षों की ऊँचाई 30 से 60 मीटर तक है। इन वनों में रबड़, महोगनी, आबनुस लौह-काष्ठ, ताड़ तथा चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। इन वृक्षों की लकड़ी फर्नीचर, रेल के स्लीपर, जलपोत निर्माण, नावें बनाने में प्रयोग की जाती हैं।

2. पतझड़ीय मानसूनी बन (Monsoon Deciduous Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 100 सेमी से 200 सेमी तक होती है। इसलिए इन्हें पतझड़ीय वन कहते हैं। ये वन निम्नलिखित प्रदेशों में मिलते हैं –

  • तराई प्रदेश
  • डेल्टाई प्रदेश
  • पश्चिमी घाट की पूर्वी ढलान
  • प्रायद्वीप का पूर्वी भाग – मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु। ये वन अधिक घने नहीं होते। इनमें वृक्ष कम ऊँचे होते हैं। ये वृक्ष लगभग 30 मीटर तक ऊँचे होते हैं। इन वृक्षों को सुगमतापूर्वक काटा जा सकता है। कई भागों में कृषि के लिए इन वनों को साफ कर दिया गया है।

आर्थिक महत्त्व (Economical Importance) – इन वनों में साल, सागौन, चन्दन, रोजवुड, आम, महुआ आदि वृक्ष पाए जाते हैं। साल वृक्ष की लकड़ी रेल के स्लीपर तथा डिब्बे बनाने के काम में आती है। सागौन की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इसका प्रयोग इमारती लकड़ी तथा फर्नीचर में किया जाता है। इन वृक्षों पर लाख, बीड़ी, चमड़ा रंगने तथा कागज बनाने के उद्योग आधारित है।

3. शुष्क वन (Dry Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 50 सेमी से 100 सेमी तक होती है। ये वन निम्नलिखित क्षेत्रों में मिलते हैं –

  • पूर्वी राजस्थान
  • दक्षिणी हरियाणा
  • दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश
  • कर्नाटक पठार

ये वृक्ष वर्षा की कमी के कारण अधिक ऊँचे नहीं होते। इन वृक्षों की जड़ें लम्बी तथा वाष्पीकरण को रोकते हैं।

आर्थिक महत्त्व (Economic Importance) – इन वनों में शीशम, बबूल, कीकर, हल्दू आदि वृक्ष पाए जाते हैं। ये कठोर तथा टिकाऊ लकड़ी के वृक्ष होते हैं। इनका उपयोग कृषि यंत्र, फर्नीचर, लकड़ी का कोयला, बैलगाड़ियाँ बनाने में किया जाता है।

4. डेल्टाई वन (Deltaic Forests) – ये वन डेल्टाई क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन्हें ज्वारीय वन (Tidal Forests) भी कहते हैं। मैनग्रोव वृक्ष के कारण इन्हें मैनग्रोव वन (Mangrove Forests) भी कहते हैं। ये वन निम्नलिखित डेल्टाई क्षेत्रों में मिलते हैं

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुन्दर वन)
  • महानदी, कृष्णा, गोदावरी डेल्टा
  • दक्षिणी-पूर्वी तटीय क्षेत्र।

ये वन प्रायः दलदली होते हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुन्दरी नामक वृक्ष मिलने के कारण इसे ‘सुन्दर वन’ कहते है।

आर्थिक महत्त्व (Economic Importance) – इन वनों में नारियल, मैनग्रोव, ताड़, सुन्दरी आदि वृक्ष मिलते हैं। ये वन आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनका प्रयोग ईंधन, इमारती लकड़ी, नावें बनाने तथा माचिस उद्योग में किया जाता है।

5. पर्वतीय वन (Mountain Forests) – ये वन हिमालय प्रदेश की दक्षिणी ढलानों पर कश्मीर से लेकर असम तक पाए जाते हैं। पूर्वी हिमालय में वर्षा की मात्रा अधिक है। वहाँ सदाबहार तथा चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों की अधिकता के कारण कोणधारी वन पाए जाते हैं। इस प्रकार पूर्वी हिमालय तथा पश्चिमी हिमालय के वनों में काफी अंतर मिलता है। हिमालय प्रदेश में दक्षिणी ढलानों से लेकर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति मिलती है । ऊँचाई के क्रमानुसार वर्षा तथा ताप की मात्रा में भी अंतर पड़ता है। धरातल के अनुसार तथा ऊँचाई के साथ-साथ वनों के प्रकार में भिन्नता आ जाती है। इस क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति तक का विस्तार पाया जाता है।

(a) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन – हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर 1200 मीटर की ऊँचाई तक उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं। वहाँ वर्षा की मात्रा अधिक होती है। वहाँ सदाबहार घने वनों में साल के उपयोगी वक्ष पाए जाते हैं।

(b) शीत उष्ण कटिबंधीय वन – 2000 मीटर की ऊंचाई पर नम शीत उष्ण प्रकार के घने वन पाए जाते हैं। इनमें ओक, चेस्टनट और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। चीड़ के वृक्ष से बिरोजा तथा तारपीन का तेल प्राप्त किया जाता है । इसकी हल्की लकड़ी होती है जिससे चाय की पेटियाँ बनाई जाती हैं।

(c) शंकुधारी वन – दो हजार से अधिक ऊँचाई पर शंकुधारी वृक्षों का विस्तार मिलता है। यहाँ कम वर्षा तथा अधिक शीत के कारण वनस्पति में अंतर पाया जाता है। यहाँ स्परुस, देवदार, चिनार और अखरोट के वृक्ष पाए जाते हैं। हिम रेखा के निकट पहुँचने पर बर्च, जूनीपद आदि वृक्ष पाए जाते हैं। देवदार की लकड़ी रेल के स्लीपर, पुला डिब्बे बनाने में प्रयोग की जाती है। सिवरफर का प्रयोग कागज की लुग्दी, पैकिंग का सामान तथा दियासलाई बनाने में किया जाता है।

(d) अल्पाइन चरागाहें – 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई के कई भागों में छोटी-छोटी घास के कारण चरागाहें पाई जाती हैं। पश्चिमी हिमालय में गुजरों जैसी जन-जातियाँ मौसमी पशु चारण द्वारा इन चरागहों का उपयोग करते हैं।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के कम-से-कम चार उपर्युक्त बहुविकल्पीय वाक्यों की रचना करें –

  1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?
  2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?
  3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?
  4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?
  5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

उत्तर:

1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?

  • कीमत
  • कपड़ा
  • डिजाइन
  • फिटिंग

2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?

  • चार
  • दो
  • तीन
  • एक बार

3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?

  • हिन्दुस्तान
  • नवभारत टाइम्स
  • दैनिक जागरण
  • पंजाब केसरी

4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?

  • न्यायोचित है
  • न्यायोचित नहीं है
  • (a) व (b) दोनों विकल्प गलत हैं
  • सभी विकल्प सही हैं

5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

  • 2,000 रुपये से 5,000 रुपये तक
  • 5,000 से 10,000 रुपये तक
  • 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक
  • 15,000 रुपये तक

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प्रश्न 2.
पाँच द्विमार्गी प्रश्नों की रचना करें (हाँ/नहीं) के साथ।
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प्रश्न 3.
सही विकल्प को चिह्नित करें –

(क) आँकड़ों के अनेक स्रोत होते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ख) आँकड़ा-संग्रह के लिए टेलीफोन सर्वेक्षण सर्वाधिक उपयुक्त विधि है, विशेष रूप से जहाँ पर जनता निरक्षर हो और दूर-दराज के काफी बड़े क्षेत्रों में फैली हो (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ग) सर्वेक्षक/शोधकर्ता द्वारा संग्रह किए गए आँकड़े द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

(घ) प्रतिदर्श के अयादृच्छिक चयन में पूर्वाग्रह (अभिनति) की संभावना रहती है (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ङ) अप्रतिचयन त्रुटियों को बड़ा प्रतिदर्श अपनाकर कम किया जा सकता है (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या आपको इन प्रश्नों में कोई समस्या दिख रही है? यदि हाँ, तो कैसे?
(क) आप अपने सबसे नजदीक के बाजार से कितनी दूर रहते हैं?
(ख) यदि हमारे कूड़े में प्लास्टिक थैलियों की मात्रा 5 प्रतिशत है तो क्या इन्हें निषेधित किया जाना चाहिए?
(ग) क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध नहीं करेंगे?
(घ) क्या आप रासायनिक उर्वरक के उपयोग के पक्ष में हैं?
(ङ) (अ) क्या आप अपने खेतों में उर्वरक इस्तेमाल करते हैं?
(ब) आपके खेत में प्रति हेक्टेयर कितनी उपज होती है?
उत्तर:
(क) मैं अपने सबसे नजदीक के बाजार से 6 किमी. दूर रहता हूँ।

(ख) पर्यावरण के हिसाब से प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग हानिकारक है। प्लास्टिक अविघटनीय पदार्थ है, इसलिए यह भू-प्रदूषण पैदा करता है। प्लास्टिक थैलियाँ नालियों एवं पाइपों में पानी के बहाव को अवरुद्ध करती हैं।

(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध अवश्य होना चाहिए, क्योंकि इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमत भी बढ़ जायेगी।

(घ) फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही होना चाहिए। उर्वरकों के अधिक प्रयोग से भू एवं जल प्रदूषण होता है।

(ङ)
(अ) हाँ, मैं विवेकपूर्ण तरीके से अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करता हूँ।
(ब) 50 क्विंटल प्रति हेक्टेअर।

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प्रश्न 5.
आप बच्चों के बीच शाकाहारी आटा नूडल की लोकप्रियता का अनुसंधान करना चाहते हैं। इस उद्देश्य से सूचना-संग्रह करने के लिए एक उपयुक्त प्रश्नावली बनाएँ।
उत्तर:
प्रश्नावली –

  1. क्या आप शाकाहारी आटा नूडल का इस्तेमाल करते हैं?
  2. क्या आपको इसका स्वाद दूसरों से अच्छा लगता है?
  3. आप एक दिन में कितनी बार इसका प्रयोग करते हैं?
  4. प्रतिदिन इस पर आप कितना खर्च करते हैं?
  5. आप इसे किसलिए पसंद करते हैं?
  6. क्या आपको अपने स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर दिखाई पड़ता है?
  7. क्या आप इसके स्थान पर कुछ और प्रयोग करना चाहेंगे?

प्रश्न 6.
200 फार्म वाले एक गाँव में फसलें उत्पादन के स्वरूप पर एक अध्ययन आयोजित किया गया। इनमें से 50 फार्मों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 50 प्रतिशत पर केवल गेहूँ उगाए जाते हैं। यहाँ पर समष्टि और प्रतिदर्श को पहचान कर बताएँ।
उत्तर:
समष्टि 200 खेत हैं और प्रतिदर्श 50 खेत हैं।

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प्रश्न 7.
प्रतिदर्श, समष्टि तथा चर के दो-दो उदाहरण।
उत्तर:
(क) प्रतिदर्श (Sample):

  • एक विद्यालय में 2,000 विद्यार्थी हैं। इनमें से 100 विद्यार्थियों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 100 विद्यार्थी ही प्रतिदर्श हैं।
  • एक गाँव में 30 खेत हैं। उनमें से 3 खेतों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 5 खेत प्रतिदर्श के उदाहरण हैं।

(ख) समष्टि (Population):

  • एक पाठशाला में 100 विद्यार्थी पढ़ते हैं। 100 समग्र का उदाहरण है।
  • एक गाँव में 100 परिवार हैं। उसका सर्वेक्षण किया गया। 100 परिवार समग्र हैं।

(ग) चर (Variable):

  • कक्षा XI के विद्यार्थियों की ऊँचाई
  • जुलाई के महीने में दिल्ली में हुई प्रतिदिन वर्षा।

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प्रश्न 8.
इनमें से कौन सी विधि द्वारा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और क्यों?
(क) गणना (जनगणना)
(ख) प्रतिदर्श
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च बहुत कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अत: उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छा तालमेल हो सकता है।

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन-सी त्रुटियाँ अधिक गंभीर हैं?
(क) प्रतिचयन त्रुटियाँ
(ख) अप्रतिचयन त्रुटियाँ।
उत्तर:
अप्रतिचयन त्रुटियाँ प्रतिचयन त्रुटियों से अधिक गंभीर हैं, क्योंकि प्रतिचयन त्रुटियों के बड़े प्रतिदर्श लेकर कम किया जा सकता है। परंतु अप्रतिचयन त्रुटियों को कम नहीं किया जा सकता। चाहे हम कितना भी बड़ा छोटा प्रतिदर्श क्यों न लें।

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प्रश्न 10.
मान लीजिए आपकी कक्षा में 10 छात्र हैं। इनमें से आपको तीन को चुनना है तो इसमें कितने प्रतिदर्श संभव हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का आकार (N) = 10
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प्रश्न 11.
अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 को चुनने के लिए लाटरी विधि का उपयोग कैसे करेंगे? चर्चा करें?
उत्तर:
लाटरी द्वारा 10 में 3 छात्रों का चुनाव करना (Selecting 3 students out of 10 students by lottery):

  1. एक जैसी आकार तथा आकृति वाली 10 पर्चियाँ बनाएँगे।
  2. इन पर्चियों पर छात्रों के नाम लिखेंगे। एक पर्ची पर एक नाम लिखा जाएगा।

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प्रश्न 12.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
लाटरी विधि द्वारा हमेशा यादृच्छिक प्रतिचयन ही प्राप्त होता है। इस विधि में प्रत्येक इकाई को शामिल किया जाता है। अतः प्रत्येक इकाई के चुनाव की समान संभावना रहती है। इस विधि में सभी प्रतिभागियों के पर्चियों पर नाम लिखें जाते हैं और उन पर्चियों को एक डिब्बे में डालकर, अच्छी तरह हिलाकर, किसी निष्पक्ष व्यक्ति से उतनी पर्चियाँ एक-एक करके निकलवायी जाती हैं जितने प्रत्याशियों का चुनाव करना होता है, अथवा लोगों को नम्बर वाले टिकट प्रदान किए जाते हैं। टिकटों को बक्से में डालकर, मशीन में हिलाकर, निश्चित संख्या में टिकट निकालकर चयन किया जाता है।

प्रश्न 13.
यादृच्छिक संख्या सारणी का उपयोग करते हुए, अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 छात्रों के चयन के लिए यादृच्छिक प्रतिदर्श की चयन प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
10 विद्यार्थियों को 01, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 09, 10 अंक प्रदान करते हैं। इन संख्याओं में से किसी एक संख्या का दैव आधार पर चयन कर लिया जाता है। अगली दो क्रमागत संख्याओं का और चुनाव करके 3 छात्रों का चयन कर लिया जाता है। माना दैव आधार पर चुनाव की गई संख्या 3 है, तो चयनित छात्रों की संख्याएँ होगी 3, 4 व 5।

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प्रश्न 14.
क्या सर्वेक्षणों की अपेक्षा प्रतिदर्श बेहतर परिणाम देते हैं? अपने उत्तर की कारण सहित व्याख्या करें।
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना. एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अतः उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छी तालमेल हो सकती है।

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संपूर्ण सर्वेक्षण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
संपूर्ण सर्वेक्षण में समष्टि की प्रत्येक इकाई से संबंधित सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

प्रश्न 2.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में संगणना सर्वेक्षण की अपेक्षा कौन-कौन सा गुण पाया जाता है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समय, धन तथा श्रम की बचत होती है।

प्रश्न 3.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
इसमें संदेह नहीं कि लाटरी सबसे अधिक प्रचलित और सरल विधि है और यादृच्छिक प्रतिदर्श का एक रूप है। परंतु लाटरी विधि हमें हमेशा यादृच्छिक प्रतिदर्श नहीं देती, क्योंकि यह विधि संयोग (Chance) पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 4.
सामान्य विकल्प प्रश्न किसे कहते हैं?
उत्तर:
सामान्य विकल्प प्रश्न उन प्रश्नों को कहते हैं, जिनके उत्तर ‘प्राय’ हाँ या नहीं सही या गलत के रूप में दिए जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
बहु-विकल्प प्रश्नों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
बहु-विकल्प प्रश्नों से अभिप्राय उन प्रश्नों से है जिनके कई संभव उत्तर हो सकते हैं। ये उत्तर प्रश्नावली में ही छिपे होते हैं।

प्रश्न 6.
आँकड़ों की शुद्धता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों की शुद्धता से अभिप्रायः तथ्य या घटना का यथार्थ वर्णन करने वाले आँकड़ों से है।

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प्रश्न 7.
सांख्यिकी आँकड़ों के पूर्ण शुद्ध न होने के दो कारण बताएँ।
उत्तर:
अनुसंधानकर्ता की अपूर्णता, माप, यंत्रों एवं उपकरणों की अपूर्णता।

प्रश्न 8.
अभिनत त्रुटियों के उत्पन्न होने के दो कारण लिखें।
उत्तर:
सूचनाओं की संकलन विधि का दोषपपूर्ण होना तथा आंकड़ों के व्यवस्थितीकरण का दोषपूर्ण होना।

प्रश्न 9.
आवृत्तियों का विन्यास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आवृत्तियों के विन्यास से अभिप्राय प्रत्येक वर्ग में आने वाली पदों की गणना करके उसकी आवृत्तियों को लिखना है।

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प्रश्न 10.
प्रवेश-पत्रिका के कोई दो लाभ लिखें?
उत्तर:
प्रवेश पत्रिका से –

  1. किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
अनुरोध-पत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुरोध-पत्र से अभिप्राय उस पत्र से है जिसके द्वारा अनुसंधानकर्ता अपना परिचय और अनुसंधान के उद्देश्य का विवरण सूचक को देता है।

प्रश्न 12.
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि क्या है?
उत्तर:
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि वह विधि है जिसके अंतर्गत समग्र की सभी इकाइयों को किसी एक आधार (संख्यात्मक, भौगोलिक या अक्षरात्मक द्वारा क्रमबद्ध किया जाता है।

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प्रश्न 13.
प्रतिचयन अतंराल की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रतिचयन अंतराल = समष्टि का आकार

प्रश्न 14.
प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
ये वे आँकड़े होते हैं, जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने उद्देश्यों के अनुकूल सबसे पहले संकलित करता है या गणकों द्वारा संकलित करवाता है।

प्रश्न 15.
द्वितीयक आँकड़े क्या होते हैं?
उत्तर:
यदि किसी दूसरी संस्था द्वारा प्राथमिक तौर पर प्राप्त आँकड़ों को संगृहीत एवं संशोधित (संवीक्षित एवं सारणीकृत) किया जाता है तो इन आँकड़ों को दूसरी संस्था के लिए द्वितीयक आँकड़े कहते हैं।

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प्रश्न 16.
प्रश्नावली किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रश्नावली प्रश्नों की वह सूची है, जिसकी आवश्यकता जानकारी स्वयं-सूचकों द्वारा प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 17.
द्वितीयक आँकड़े संकलित करते समय कौन सी तीन सावधानियां बरतनी चाहिए?
उत्तर:

  1. विश्वसनीयता
  2. अनुकूलता
  3. पर्याप्तता

प्रश्न 18.
एक प्रश्नावली में प्रश्नों की कितनी संख्या होनी चाहिए?
उत्तर:
एक उचित संख्या जो उत्तरदाइओं को हतोत्साहित नहीं करे।

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प्रश्न 19.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Sample Survey) क्या है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समष्टि में से कुछ चुनी हुई प्रतिनिधि इकाइयों के विषय में आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं।

प्रश्न 20.
प्रतिचयन की प्रचलित विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. यादृच्छिक प्रतिचयन
  2. स्तरित प्रतिचयन
  3. बहु-स्तरीय प्रतिचयन
  4. गुच्छा प्रतिचयन

प्रश्न 21.
यादृच्छिक प्रतिचयन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन में समष्टि में से इकाइयाँ इस प्रकार छाँटी जाती हैं, ताकि प्रत्येक इकाई के प्रतिदर्श में सम्मिलित होने की बराबर संभावना हो।

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प्रश्न 22.
समष्टि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुसंधान क्षेत्र की संपूर्ण इकाइयों को समष्टि कहते हैं।

प्रश्न 23.
प्रतिदर्श से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रतिदर्श समष्टि की इकाइयों का वह भाग है जो पूर्ण समष्टि के अध्ययन हेतु चुना जाता है।

प्रश्न 24.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण किस प्रकार के अनुसंधान के लिए अधिक उपयुक्त है?
उत्तर:

  1. अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत हो
  2. समष्टि अनन्त हो
  3. समष्टि की किसी इकाई को परखने से उसका विनाश हो जाए

प्रश्न 25.
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्त्रत कौन-से हैं?
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –

  1. माप की त्रुटियाँ
  2. गणितीय त्रुटियाँ
  3. प्रश्नों का गणक या सूचक द्वारा सही समझ न पाना
  4. रिकॉर्ड करने में त्रुटियाँ

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प्रश्न 26.
जनगणना 2001 के प्रकाशन से हमें तालिका के रूप में जो जिलेवार जन्म तथा मृत्युदर के आँकड़े प्राप्त हुए हैं क्या आप उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहेंगे या द्वितीयक आँकड़ें?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़े।

प्रश्न 27.
अप्रतिचयन त्रुटियाँ क्यों उत्पन्न होती हैं? एक कारण लिखें?
उत्तर:
सूचकों की लापरवाही या भूल से।

प्रश्न 28.
प्रतिदर्श अभिनीति क्या हैं?
उत्तर:
ये वे त्रुटियाँ जो गणकों के पक्षपाती (पूर्वाग्रहित) व्यवहार के कारण पैदा होती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मापन अशुद्धि तथा दर्ज (लेखन) गलतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
मापन अशुद्धियाँ (Measurement Errors):
मापन अशुद्धियों से अभिप्राय उन अशुद्धियों से है जो माप के कारण पैदा होती हैं। ये अशुद्धियाँ मापन यंत्र के दोषपूर्ण होने से उत्पन्न होती है या माप को निकटतम इकाई तक लाने में हो सकती हैं।

लेखन (दर्ज) गलतियाँ (Recording Mistakes):
सूचनाओ को गलत कॉलम में लिखने से अधूरी सूचना दर्ज करने से या गंदा लेख (अस्पष्ट लेख) के कारण उत्पन्न गलतियों को दर्ज गलतियाँ कहते हैं। मान लें गणक 13 के स्थान पर प्रश्नावली में 31 लिख देता है। इस प्रकार की गलती दर्ज गलती कहलाएगी।

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प्रश्न 2.
आँकड़ों के संकलन की प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान विधियों में तीन अंतर बताएँ।
उत्तर:
प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान में अंतर।
(Differences Between Direct Personal Investigation and Indirect Oral Investigation)
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प्रश्न 3.
अनुसंधानकर्ता, गणक तथा सूचक को परिभाषित कीजिए?
उत्तर:

  1. अनुसंधानकर्ता (Investigator): अनुसंधानकर्ता उस विशेष व्यक्ति को कहते हैं, जो अनुसंधान कार्यों को अपनाता है।
  2. गणक (Enumerator): गणक उस व्यक्ति विशेष को कहते हैं जो अनुसंधान” को तथ्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।
  3. सूचक (Respondent): सूचना देने वाले व्यक्ति को सूचक कहते हैं।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. मितव्ययी (Economical): इस विधि के द्वारा एक बड़े समूह के छोटे से भाग का अध्ययन किया जाता है। अत: समय व धन की बचत होती है।
  2. वैज्ञानिक (Scientific): यह विधि वैज्ञानिक भी है, क्योंकि बड़े समूह में से एक अन्य प्रतिदर्श लेकर परिणामों की शुद्धता की जाँच की जा सकती है।
  3. विश्वसनीय (Reliable): यदि प्रतिदर्श प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा ध्यानपूर्वक लिया गया हो तो प्राप्त निष्कर्ष भी शुद्ध रहते हैं।
  4. सरल (Simple): यह विधि बहुत सरल है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।

प्रश्न 5.
यादृच्छिक प्रतिचयन को परिभाषित करें। यह मनमाने निदर्शन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन (Random Sampling):
यादृच्छिक प्रतिचयन को प्रतिनिधि प्रतिचयन भी कहते हैं। यह प्रतिचयन की वह विधि है, जिसके अंतर्गत समष्टि की प्रत्येक इकाई की प्रतिचयन की तरह किसी प्रकार का पक्षपात नहीं होता। उदाहरण के लिए, यदि हमने 1,200 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल में 60 का प्रतिदर्श चुनने हैं तो इस विधि के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिदर्श में चुनने जाने की संभावना समान है। इस प्रकार इकाइयों का चुनाव पक्षपात या व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से प्रभावित नहीं होता। इसमें अनुसंधानकर्ता की अपनी मर्जी नहीं चलती। इस विधि के अंतर्गत लाटरी विधि अथवा होल घुमाकर प्रतिदर्श चुना जाता है।

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प्रश्न 6.
प्राथमिक आँकड़ों को एकत्रित करने की प्रश्नावली विधि समझाइए।
उत्तर:
प्रश्नावली विधि में आँकड़ों का एकत्रीकरण प्रश्नावलियों की सहायता से किया जाता है। अनुसंधान के लिए जिन-जिन बातों के संबंध में आँकड़े एकत्रित करने होते हैं, उनके लिए कुछ प्रश्नों की एक सूची (प्रश्नावली) बना ली जाती है। प्रश्नावली में दिए प्रश्नों के उत्तर के आधार पर संबंधित आँकड़ों का एकत्रीकरण किया जाता है। प्रश्नावली विधि के मुख्य रूप है –

  1. डाक द्वारा प्रश्नावली भेजना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता प्रश्नावली को डाक द्वारा सूचना देने वालों के पास भेज देता है। वे उसे भरकर निश्चित तिथि तक लौटा देते हैं।
  2. प्रगणकों द्वारा प्रश्नावली भरना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता कुछ प्रणगकों को नियुक्त करता है, जो घर-घर जाकर सूचकों से पूछाताछ करके स्वयं प्रश्नावलियाँ भरते हैं।

प्रश्न 7.
एक अच्छी प्रश्नावली में कौन-कौन से गुणों का होना आवश्यक है?
उत्तर:
एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

  1. प्रश्न संक्षिप्त तथा स्पष्ट होने चाहिए।
  2. प्रश्नों की संख्या उचित होनी चाहिए।
  3. प्रश्न सरल तथा समझने में आसान हों।
  4. प्रश्न ऐसे हो जिनका उत्तर हाँ या नहीं में दिया जा सके।
  5. उत्तर एक-दूसरे से मेल खाते हों।
  6. कुछ विशेष प्रकार के प्रश्न, जैसे चरित्र से संबंधित नहीं पूछे जाने चाहिए।
  7. प्रश्नावली का पूर्व परीक्षण एवं संशोधन आवश्यक है।

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प्रश्न 8.
द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत निम्न हैं –

  1. सरकार प्रशासन जैसे: (Statistical Abstract of India (Annual); Reserve bank of India Bulletin, Census of India आदि।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन जैसे: The U.N. Statistical Year Book, Annual Report of I.M.F.आदि।
  3. अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन जैसे: नगरपालिकाओं, जिला समितियों, पंचायतों आदि द्वारा प्रकाशित जन्म-मरण स्वास्थ्य, शिक्षा इत्यादि।
  4. समितियों व आयागों की रिपोर्ट, जैसे-वित्त आयोग, एकाधिकार कमीशन इत्यादि।
  5. व्यापारिक संस्थाओं व परिषदों के प्रकाशित रिपोर्ट जैसे: Hindustan Lever LTD., General Insurance Co. इत्यादि।
  6. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री, जैसे: Economic Times (Daily), Business Today (Weekly) आदि।
  7. अनुसंधान संस्थाओं के प्रकाशन।
  8. वेबसाइट (इंटरनेट)।

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प्रश्न 9.
द्वितीयक आँकड़ों के प्रयोग में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं? किन्हीं तीन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. उद्देश्य व क्षेत्र (Purpose & Scope):
सर्वप्रथम यह देख लेना चाहिए कि प्राथमिक रूप से जब प्रस्तुत आँकड़े एकत्रित किए गए थे, जो अनुसंधान के उद्देश्य के क्षेत्र वही थे, जिनके लिए उनका अब द्वितीयक आँकड़ों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

2. शुद्धता की मात्रा (Degree of Accuracy):
इस बात पर भी विचार करना आवश्यक है कि प्रस्तुत आँकड़ों में शुद्धता का स्तर क्या रखा गया था और उसे प्राप्त करने में कितनी सफलता हुई।

3. font partahaf at great (Ability of Last investigation):
यह भी देखना चाहिए कि द्वितीयक आँकड़े पहले किस अनुसंधानकर्ता द्वारा प्राथमिक रूप से कि विधि द्वारा एकत्र किए गए थे। यदि इन प्रश्नों का उत्तर संतोषजनक प्राप्त होता है तो इन आँकड़ों का प्रयोग किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा सूचकों को प्रश्नावली भेजने के क्या गुण तथा दोष हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण (Advantages of Direct Interview):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण निम्नलिखित हैं –

  1. सूचना अधिक स्पष्ट होती है।
  2. इस विधि के द्वारा संकलित आँकड़े अधिक शुद्ध तथा विश्वसनीय होते हैं।
  3. सूचना देने वाले को प्रश्न पूछने का उद्देश्य बताकर उसे विश्वास में लिया जा सकता है।
  4. व्यक्तिगत साक्षात्कार लचीला है। अनुसंधानकर्ता अपने प्रश्नों में आवश्यकतानुसार फेर-बदल कर सकता है।
  5. सीमित क्षेत्र में व्यक्तिगत साक्षात्कार बहुत ही उपयोगी है।

दोष (Demerits):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं –

  1. इस विधि में व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना रहती है।
  2. इस विधि में अधिक समय और धन खर्च होता है।
  3. यह एक जटिल विधि है।
  4. इस विधि में प्रशिक्षित, कुशल और निष्पक्ष अनुसंधानकर्ता की आवश्यकता होती है। यदि अनुसंधानकर्ता कुशल, प्रशिक्षित तथा निष्पक्ष नहीं हैं तो परिणाम भ्रामक हो सकते हैं।

सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने के गुण (Advantages of Malting Questionnaries to Respondents):
सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने में निम्नलिखित गुण हैं –

  1. यह विधि वहाँ उपयुक्त है जहाँ सूचना एकत्रित करने का क्षेत्र विस्तृत है।
  2. इस विधि के अंतर्गत सूचनाएँ नियमित रूप से प्राप्त होती हैं।
  3. यह मितव्ययी प्रणाली है।
  4. इसमें पक्षपात की संभावना नहीं होती।

दोष-इस प्रणाली के निम्नलिखित दोष हैं –

  1. सूचक उत्तर गलत खानों में भर सकता है।
  2. सूचक को प्रश्न ठीक तरह से समझ न आए और उसे गलतफहमी हो जाए।
  3. उत्तरों की सत्यता का पता लगाना कठिन हो जाता है।
  4. हो सकता है कि प्रश्नावली वापस न आए।

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प्रश्न 2.
प्राथमिक तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर बताएँ। द्वितीयक आँकड़ों के कम-से-कम तीन स्रोत लिखें।
उत्तर:
प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में अंतर –
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आँकड़ों के तीन स्रोत (Three Sources of Secondary Data):

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. अंतराष्ट्रीय प्रकाशन
  3. वेबसाइट

प्रश्न 3.
क्षेत्र सर्वे की योजना में कौन-से मुख्य चरण हैं।
उत्तर:
इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं –

1. प्रश्नावली तैयार करना (Preparation of the Questionnaire):
प्रश्नावली अनुसंधानकर्ता से संबंधित प्रश्नों की एक सूची होती है। इसे अनुसंधान तैयार करता है। प्रायः इसे टाइप करवाया जाता है। या छपवाया जाता है। प्रश्नों के साथ-साथ ही उत्तर देने के लिए खाली स्थान छोड़ दिया जाता है।

इसके साथ एक अनुरोध-पत्र भी भेजा जाता है, जिसमें सूचकों को विश्वास दिलाया जाता है। कि उनके द्वारा भेजी सूचना नितांत गुप्त रखी जाएँगी। डाक व्यय आदि पहले ही चुकाया (प्रीपेड) होता है। प्रश्नावली को लौटाने की तारीख व उसके उद्देश्य साफ-साफ लिख दिए जाने चाहिए।

प्रश्नावलियाँ बनाने की शते-ये शर्ते निम्नलिखित हैं –

  • प्रश्न संख्या सीमित हो।
  • प्रश्न उद्देश्य के अनुकूल हो।
  • प्रश्नों की पुरावृत्ति न हों।
  • प्रश्न एक-दूसरे के पूरक हों।
  • प्रश्नों की भाषा सरल तथा स्पष्ट हो।
  • सूचनाएँ गोपनीय रखी जानी चाहिए।
  • सूचकों को शिष्टाचार के शब्दों से संबोधित किया जाएँ।

2. पूछताछ का तरीका (Mode of Enquiry):
आँकड़ों का संकलन डाक द्वारा हो सकता है या साक्षात्कार (mode of Enquiry Interview) के माध्यम से। पहली विधि काफी प्रमाणित है। इस विधि के अंतर्गत सूचकों को एक प्रश्नावली भेजी जाती है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे निश्चित तिथि तक प्रश्नावली भरकर भेजें। यह विधि वहाँ अधिक उपर्युक्त है जहाँ अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत है। इसके अतिरिक्त यह विधि मितव्ययी है और इससे हमें विश्वसनीय आँकड़े प्राप्त होते हैं, परंतु यह विधि शिक्षित वर्ग तक सीमित है। सूचक प्राय: प्रश्नावली भरकर भेजने में रुचि नहीं लेते।

सूचना संकलन करने की दूसरी विधि साक्षात्कार (Interview) है। इस विधि के अंतर्गत गणक अनुसूची (प्रश्नावली) लेकर स्वयं सूचक के पास जाता है। गणक सूचक को पहले सारी बातें समझा देता है और फिर उनसे सूचना एकत्रित करता है। यह विधि उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है जहाँ सूचक अशिक्षित हो। जटिल व कठिन प्रश्नों के उत्तर सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं: परंतु यह विधि बहुत महँगी है। गणक पक्षपाती भी हो सकते है और यदि गुणक कुशल नहीं है तो प्राप्त सूचना गलत भी हो सकती है।

3. गणकों को प्रशिक्षण देना (Training for Enumerators):
गणकों को प्रशिक्षण देना बहुत ही आवश्यक है, ताकि वे प्रश्नों को अच्छी तरह स्वयं समझ सकें और सूचकों को समझ सकें।

4. छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण (Pilot Surveys):
यदि अनुसंधान विस्तृत क्षेत्र का करना है तो यह अच्छा होगा कि विस्तृत क्षेत्र का अनुसंधान करने से पूर्व छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण कर लिया जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी और बड़े पैमाने पर होने वाली सर्वेक्षण की लागत का पता चल जाएगा।

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प्रश्न 4.
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र में सर्वेक्षण से आप किस प्रकार की त्रुटियों (विभ्रमों) की आशा करते हैं?
उत्तर:
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण से हम निम्नलिखित प्रकार की त्रुटियों की आशा करते हैं –

1. माप की गलतियाँ या त्रुटियाँ (Errors of measurement):
सर्वेक्षण में माप की गलती हो सकती है। दूसरे शब्दों में जब हम किसी व्यक्ति की आयु या आय के विषय में पूछते हैं तो वह अपनी आयु (विशेषतः अशिक्षित व्यक्ति) अनुमान से बताएँगे और कहेंगे लिख लो 30-35 वर्ष। आय के विषय में बताएँगे कि उनकी मासिक आय 2000-3000 रुपए है। इस प्रकार अनुमानित आयु या माप की गलतियाँ कहलाती हैं।

2. प्रश्नावली के कुछ प्रश्नों का गलत समझना या गलत अर्थ (Misunderstanding and misinterpreting some questions of the questionnaire):
जनगणना विधि में बहुत ही गुणकों की नियुक्ति की जाती है और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है, परंतु सारे गणक एक जैसी कुशलता वाले नहीं होते, और कुछ लापरवाह भी होते हैं। अतः वे प्रश्नावली के कई प्रश्नों को गलत समझते हैं या उनका गलत अर्थ लगाते हैं। ऐसी अवस्था में विभ्रम उत्पन्न हो सकती है। कई बार सूचक को भी प्रश्न ठीक ढंग से समझ नहीं आता है और वह गलत उत्तर देकर जान बचाता है।

3. लेखन त्रुटि (Recording mistakes):
कई बार गणक सूचक की सूचनाओं के लेखन में गलती कर बैठता है। उदाहरण के लिए, वह 31 के स्थान पर 13 लिख सकता है। कई बार लेख इतना गंदा होता है कि वह पढ़ा नहीं जाता और तालिका बनाने वाला लिखित उत्तरों को कंप्यूटर की फाइल में गलत बढ़ा देता है।

4. उत्तर न मिलने से त्रुटि (Errors of non-responses):
ये गलतियाँ या त्रुटियाँ उस समय उत्पन्न होती हैं, जब सूचक प्रश्नावली को भरने से इंकार करता है या गणक के बार-बार उससे मिलने जाने पर भी वह उपलब्ध नहीं होता।

5. गणितीय विभ्रम या त्रुटियाँ (Arithmetic errors):
कई प्रश्नों में थोड़ी-सी गणित या गणितीय गणना की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी अवस्था में गणना करने में गलती हो सकती है। उदाहरण के लिए, प्रश्नावली में एक प्रश्न है, ‘गत माह भोजन पर कुल कितना खर्च हुआ? ऐसी अवस्था में परिवार के मुखिया को गेहूँ, चावल, नमक, चीनी, दूध आदि पर होने वाले खर्चों को जोड़ना पड़ेगा। उससे जोड़ लगाने में गलती हो सकती है। मदों और उनकी कीमतों को याद करने में उसे गलती हो सकती है। ऐसी गलतियों को गणितीय गलतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 5.
प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियों में अंतर बताइए।
उत्तर:
प्रतिचयन और प्रतिचयन में अंतर
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प्रश्न 6.
एक व्यक्ति ने एक प्रश्नावली तैयार करने के लिए निम्न प्रश्न बनाए हैं। ये प्रश्न दोषपूर्ण हैं। उनके स्थान पर अच्छे प्रश्न बनाएँ।

  1. आप एक महीने में पुस्तकों पर कितने रुपए खर्च करते हैं?
  2. आप अच्छा लगने के लिए अपनी आय का कितना प्रतिशत कपड़ों पर खर्च करते हैं?
  3. क्या आप नहीं सोचते कि धूम्रपान निषेध होना चाहिए।
  4. क्या आप कॉलेज के पश्चात् नौकरी करेंगी या गृहिणी बनेंगी?
  5. आपको इस उच्च कोटि की चाय की सुगंध कैसी लगी?

उत्तर:
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प्रश्न 7.
एक आदर्श प्रश्नावली में क्या-क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर:
एक आदर्श प्रश्नावली में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –

  1. सीमितता (Limitations): अच्छी प्रश्नावली वही मानी जाती है जो गागर में सागर भरे अर्थात् प्रश्न केवल विषयानुकूल ही हों।
  2. सरल व स्पष्ट (Simple and clear): प्रश्नावली में प्रश्न सीमित के साथ सरल व स्पष्ट भाषा में हों।
  3. उचित क्रम (Systematic order): प्रश्न आपस में जुड़े होने चाहिए और क्रम से होने चाहिए। ऐसा न हो कि बच्चों की संख्या पूछने के बाद, फिर यह पूछे कि आप शादीशुदा हैं? यह निरर्थक एवं हास्यास्पद प्रश्न होगा।
  4. उचित व सम्मानजनक प्रश्न (Proper and respectable questions): प्रश्न सम्मनजनक होने चाहिए जिससे कि सूचक के स्वाभिमान को ठेस न लगे। यह पूछना कि आप जुआ खेलते हैं, उचित नहीं है।
  5. प्रश्नों के प्रकार (Kinds of questions):
    • (क) वैकल्पिक प्रश्न (Alternative question): ये वे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हाँ या ना, गलत या सही दिशा में दिया जा सकता है।
    • (ख) बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple-alternative questions): ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर कई हो सकते हैं, जैसे-आपने स्कूल क्यों खोला है? धन कमाने को, यश कमाने को या गरीब बच्चों की सहायता के लिएं? आदि।
    • (ग) विशिष्ट प्रश्न (Specific question): ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि कोई विशिष्ट जानकारी प्राप्त करनी हो, जैसे-किसी की मासिक आय।
    • (घ) खुले प्रश्न (Open questions): ये ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि सूचक इनका उत्तर मनमर्जी से दे। जैसे-नशाबंदी, दहेज प्रथा पर रोक।
  6. निर्देश (Direction): प्रश्नावली में यह भी ठीक-ठीक लिखा होना चाहिए कि प्रश्नावली को भेजने की अंतिम तारीख क्या है तथा उत्तर कैसे हों।
  7. प्रश्न के नीचे की टिप्पणी (Footnot after the questions): प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों में से किसी प्रश्न का अधिक विश्लेषण चाहिए तो ऐसे प्रश्नों के नीचे टिप्पणी अवश्य लिख देनी चाहिए।
  8. प्रश्नावली की पूर्व जाँच (Pre-checking of questionnaire): प्रश्नावली को सूचकों तक भेजने से पहले पूर्ण रूप से जाँच कर लेनी चाहिए। कोई किसी तरह की कमी न हो।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि हम किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या का अध्ययन करना चाहते हैं तो हमें –
(a) रुपयों की आवश्यकता होती है
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है

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प्रश्न 2.
क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा संग्रहीत आँकड़े कहलाते हैं –
(a) प्राथमिक आंकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्राथमिक आंकड़े

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़े अन्वेशणकर्ता द्वारा
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं
(b) स्वयं एकत्र नहीं करवाये जाते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं

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प्रश्न 4.
जो आँकड़े अन्वेषणकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र एवं संशोधित नहीं किए जाते, कहलाते हैं –
(a) मौलिक आँकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) द्वितीयक आँकड़े

प्रश्न 5.
सभी प्रकाशित आँकड़े कहलाते हैं –
(a) द्वितीयक आँकड़े
(b) प्राथमिक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्राथमिक आँकड़े

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

प्रश्न 6.
जो वास्तविक आँकड़े एकत्र करने क्षेत्र में जाता है, उसे कहते हैं –
(a) गणनाकार
(b) पर्यवेक्षक
(c) अन्वेषक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) गणनाकार

प्रश्न 7.
उत्तरदाता प्रश्नावली के प्रश्नों का उत्तर देकर –
(a) वास्तविक आँकड़े प्रदान नहीं करता है
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है

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प्रश्न 8.
जनगणना विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

प्रश्न 9.
प्रतिदर्शी विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

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प्रश्न 10.
क्षेत्रीय कार्य की योजना में आँकड़ों के संग्रह के लिए अपनाई जाती है –
(a) गणना विधि
(b) प्रतिदर्श विधि
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन सही हैं अथवा गलत? इन्हें तदनुसार चिह्नित करें –
(क) सांख्यिकी केवल मात्रात्मक आँकड़ों का अध्ययन करती है।
(ख) साख्यिकी आर्थिक समस्याओं का समाधान करती है।
(ग) आँकड़ों के बिना अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का कोई उपयोग नहीं है।
उत्तर:
(ख) सही है शेष
(क) एवं
(ग) गलत हैं

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प्रश्न 2.
उन क्रिया-कलापों की सूची बनाएँ, जो जीवन के सामान्य कारोबार के अंग होते हैं? क्या ये आर्थिक क्रिया-कलाप हैं –
उत्तर:

  1. बैंक में नौकरी करना
  2. अध्यापक के द्वारा पाठशाला में पढ़ाना
  3. डॉक्टर के द्वारा रोगी का इलाज करना
  4. टैक्सी ड्राइवर
  5. भुगतान के बदले वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना
  6. विद्युत बोर्ड के द्वारा बिजली की आपूर्ति करना
  7. जल बोर्ड द्वारा पानी की आपूर्ति करना
  8. किसान के द्वारा खेत में हल चलाना
  9. लाभ कमाने के लिए दुकानदार के द्वारा वस्तुओं को बेचना

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प्रश्न 3.
सरकार और नीति-निर्माता आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त नीतियों के निर्माण के लिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं। दो उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
आर्थिक विकास के लिए सरकार तथा नीति-निर्देश बनाने वाले उचित नीतियाँ बनाते हैं। इन नीतियों के निर्माण के लिए वे सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं।
यह तथ्य निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट है –

1. वर्तमान समय में विश्वभर में तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। अतः सरकार को अब यह निर्णय लेना है कि सरकार विदेशों से कितनी मात्रा में तेल का आयात करे। इस बात का निर्णय लेने के पहले यह देखना पड़ेगा कि वर्ष 2010 में तेल का घरेलू उत्पादन कितना होगा और उस समय तेल की कितनी माँग होगी। बिना सांख्यिकी के सरकार इस मद में तथ्य नहीं जान पाएगी। अतः विदेशों से कितना तेल आयात करना है, इसका निर्णय नहीं लिया जा सकेगा, जब तक हमें तेल की वास्तविक मांग का पता नहीं चलेगा।

2. विकास का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सांख्यिकी का योगदान महत्त्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए; आँकड़ों के अभाव में हम इस बात का निर्णय नहीं ले सकते हैं कि हमारा खाद्यान्नों का उत्पादन कितना होना चाहिए। हम साधनों को देखते हुए कितनी अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।

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प्रश्न 4.
आपकी आवश्यकताएँ असीमित हैं तथा उनकी पूर्ति करने के लिए आपके पास संसाधन सीमित हैं। दो उदाहरणों द्वारा इसकी व्याख्या करें।
उत्तर:
अन्य व्यक्तियों की तरह मेरी भी आवश्यकताएँ असीमित हैं और उनकी संतुष्टि के लिए साधन सीमित हैं। इस बात की पुष्टि मैं निम्नलिखित दो उदाहरणों द्वारा करता हूँ –
1. मुझे 2,000 रुपए महीना जेब खर्च मिलता है और मेरी आवश्यकताएँ बहुत हैं-जैसे क्रिकेट का सामना खरीदना, सिनेमा देखना। 2,000 रुपए में मैं अपनी सारी आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। इन आवश्यकताओं के अतिरिक्त मुझे अपने मित्रों को उनके जन्मदिन पर उपहार भी देने पड़ते हैं। हर महीने मेरी कुछ आवश्यकताएं पूरी नहीं होती।

2. मैं संयुक्त परिवार में रहता हूँ। हम जिस भवन में रहते हैं वह कोई विशेष बड़ा नहीं है। घर में कोई ऐसा कमरा नहीं है, जिसमें अध्ययन कक्ष (study room) बना लूँ। उसी कक्ष में मेरा अलग बिस्तर है। पढ़ने-लिखने में मेरा अलग बिस्तर है। अपने क्रिकेट का सामान वहीं रखू। परंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता, क्योंकि हमारे परिवार की आय सीमित है।

प्रश्न 5.
उन आवश्यकताओं का चुनाव आप कैसे करेंगे, जिनकी आप पूर्ति करना चाहेंगे?
उत्तर:
हम उस संतुष्ट की जानेवाली आवश्यकता का चयन करेंगे जो परमावश्यक होगी। आवश्यकताएं कई प्रकार की होती हैं –

  1. अनिवार्य आवश्यकता अर्थात् अस्तित्व बनाए रखने की आवश्यकता
  2. आरामदायक आवश्यकता तथा
  3. सुविधाजनक आवश्यकता। आवश्यकताओं की तीव्रता में भी अंतर होता है। हम सबसे पहले उस आवश्यकता की पूर्ति करेंगे, जिसमें सबसे अधिक तीव्रता होगी।

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प्रश्न 6.
आप अर्थशास्त्र का अध्ययन क्यों करना चाहते हैं? कारण बताइए?
उत्तर:
वर्तमान में हमारा देश गंभीर आर्थिक समस्याओं जैसे-महँगाई, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, बेरोजगारी, गरीबी आदि से जूझ रहा है। अर्थशास्त्र में इन समस्याओं के हल को खोजने का प्रयास किया जाता है। इसके अतिरिक्त अर्थशास्त्र शासन की आर्थिक नीतियों का भी निरंतर अध्ययन करता रहता है, जिससे देश की दशा और दिशा का ज्ञान होता है। इन सभी कारणों से हम अर्थशास्त्र का अध्ययन करना चाहते हैं।

प्रश्न 7.
“सांख्यिकीय विधियाँ सामान्य बुद्धि का स्थानापन्न नहीं होती।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
सांख्यिकी का क्षेत्र बहुत व्यापक है। आज ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में इसका प्रयोग किया जाता है। परंतु यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सांख्यिकी विधियों का प्रयोग बड़े ध्यान और सावधानी से किया जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे सांख्यिकी विधियाँ गलत परिणाम भी दे सकती हैं। इन्हें अज्ञानतावश प्रयोग करने से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इनका प्रयोग एक अंधे मनुष्य के समान नहीं करना चाहिए जो किसी बिजली के खंभे से प्रकाश प्राप्त करने के स्थान पर सहारे का कार्य लेता है। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग केवल वही व्यक्ति कर सकते हैं जो समझदार तथा विशेषज्ञ हैं। यूल और केंडाल के शब्दों में-“अयोग्य व्यक्ति के हाथों में सांख्यिकीय रीतियाँ (विधियाँ) सबसे भयानक हथियार हैं।” इस बात का स्पष्टीकरण नीचे उदाहरणों से किया जा सकता है –

उदाहरण 1:
एक बार एक राज्य के किसी गाँव में एक भयानक बीमारी फैल गई। उस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए तात्कालिक कई कदम उठाए गए। उस गाँव में सहायता के तौर पर डॉक्टर तथा दवाइयाँ भेजी गईं। एक राजनेता जो दावा करता था कि वह अच्छा सांख्यिकीय निपुण है (उसका दावा झूठा था) उस गाँव में गया। वहाँ जाकर उसने आँकड़ों का संकलन किया और इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि जहाँ पर अधिक डॉक्टर हैं वहाँ पर अधिक मृत्यु हुई है। उसने कहा कि डॉक्टर मृत्यु के लिए दोषी हैं तथा उन्हें दंड मिलना चाहिए।

उदाहरण 2:
कहते हैं कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी तथा दो बच्चों के साथ दूसरे गाँव के लिए गया। रास्ते में एक नदी पड़ती थी। पिता को उस नदी की औसत गहराई मालूम थी। उसने अपनी तथा अपने परिवार के सदस्यों की औसत ऊँचाई की गणना की। उसके परिवार के सदस्यों। की औसत ऊँचाई नदी की औसत ऊँचाई से अधिक थी। अतः उसने सोचा कि वे नदी को सरलता से पार कर सकते हैं, परंतु नदी पार करते समय उसका छोटा बच्चा (जिसकी ऊँचाई नदी की, गहराई से कम थी) नदी में डूब गया। इसका कारण यह था कि उसने समांतर माध्य का प्रयोग सोच-समझकर नहीं किया था।

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मार्शल ने अर्थशास्त्र को कैसे परिभाषित किया है?
उत्तर:
मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय में मानव क्रियाओं का अध्ययन है।

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प्रश्न 2.
जीवन के साधारण व्यवसाय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जीवन के साधारण व्यवसाय से अभिप्राय मौद्रिक लाभ के लिए की गई क्रियाएँ जैसे-किसी कार्यालय में काम करना, टैक्सी चलाना, पाठशाला में पढ़ना इत्यादि।

प्रश्न 3.
ए. मार्शल कौन थे?
उत्तर:
ए. मार्शल आधुनिक अर्थशास्त्र के जन्मदाता में से एक थे।

प्रश्न 4.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
एक उपभोग को अपनी निश्चित आय से क्या खरीदना चाहिए, जबकि उसके पास क्रय की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं की सूची है तथा उन वस्तुओं की उसे कीमत भी ज्ञात है। यही उपभोग की विषय-सामग्री है।

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प्रश्न 5.
उत्पादन से क्या अभिप्राय?
उत्तर:
वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन करना या वस्तुओं की उपयोगिता में वृद्धि करना उत्पादन कहलाता है। साधारण शब्दों में वस्तुओं का निर्माण करना ‘उत्पादन’ है।

प्रश्न 6.
उत्पादन में हम क्या अध्ययन करते हैं?
उत्तर:
उत्पादन में हम इस बात का अध्ययन करते हैं कि उत्पादक बाजार के लिए किन वस्तुओं का उत्पादन करे, जब उसे लागत तथा की मतों का ज्ञान है।

प्रश्न 7.
वितरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन से प्राप्त होने वाली राष्ट्रीय आय को मजदूरी, लाभ तथा ब्याज के रूप. में बाँटने को वितरण कहते हैं।

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प्रश्न 8.
हमें दुर्लभता का सामना क्यों करना पड़ता है?
उत्तर:
हमें दुर्लभता का सामना इसलिए करना पड़ता हैं, क्योंकि इच्छाओं का पूर्ति करने के लिए जो वस्तुएँ हमें चाहिए, वे सीमित मात्रा में उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 9.
संसाधनों की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. आवश्यकताओं की संतुष्टि के संसाधन सीमित हैं।
  2. सीमित से साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं।

प्रश्न 10.
एक उदाहरण देकर स्पष्ट करें कि साधन के वैकल्पिक प्रयोग क्या होते हैं?
उत्तर:
भूमि एक साधन है। इसके वैकल्पिक प्रयोग हैं। भूमि पर भवन बनाया जा सकता है। इस पर रबर की खेती की जा सकती है अथवा इस पर गेहूँ की खेती भी की जा सकती है।

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प्रश्न 11.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं का तथा सेवाओं का उपयोग ‘उपभोग’ कहलाता है। वस्तुओं के उपभोग करने से उनकी उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है।

प्रश्न 12.
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने से हमारा क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने का उद्देश्य इन समस्याओं का सामना तथा उनके उत्पन्न होने के कारणों का वर्णन करना है।

प्रश्न 13.
अर्थशास्त्र में नीतियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में सहायता करने वाले उपायों को नीतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 14.
अंग्रेजी भाषा का (Statistics) शब्द लैटिन भाषा के किस शब्द से लिया गया है?
उत्तर:
Stat Status से।

प्रश्न 15.
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ है?
उत्तर:
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ अंकों में व्यक्त तथ्यों से है जो व्यवस्थित रूप से एकत्रित किए गए हैं। दूसरे शब्दों में बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ समंक (आँकड़े) हैं।

प्रश्न 16.
समंकों से क्या अभिप्राय है।
उत्तर:
समंकों से अभिप्राय मात्रात्मक तथा गुणात्मक तथ्यों से है, जिनका अर्थशास्त्र में प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 17.
मात्रात्मक तथ्यों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मात्रात्मक तथ्यों से अभिप्राय उन तथ्यों से है जो अंकों से प्रकट किए जाते हैं। उदाहरण के लिए भारत में चावल का उत्पादन 1995-96 में 769.8 लाख टन था, जो बढ़कर 2004-05 में 853.1 लाख टन हो गया।

प्रश्न 18.
समंक या आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़े (समंक) उन आर्थिक घटनाओं को कहते हैं, जिन्हें अंकों में प्रकट किया जा सकता है, जैसे-जनसंख्या, कीमत-वृद्धि, उत्पादन आदि के आँकड़े।

प्रश्न 19.
आर्थिक समस्या क्या है?
उत्तर:
आर्थिक समस्या मूल रूप से चयन की समस्या है, जो साधनों की दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 20.
साधनों की मितव्ययिता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की मितव्ययिता से अभिप्राय साधनों का बुद्धिमत्ता से प्रयोग करना है।

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प्रश्न 21.
आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकता में
  2. सीमित साधनों
  3. साधनों का वैकल्पिक प्रयोग

प्रश्न 22.
सीमित साधन से क्या अभिप्राय है? अथवा, साधनों की दुर्लभता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की दुर्लभता से अभिप्राय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधों का उनकी माँग से कम होना है।

प्रश्न 23.
हम दुर्लभता का सामना क्यों करते हैं?
उत्तर:
क्योंकि हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधन सीमित हैं।

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प्रश्न 24.
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से अभिप्राय है-साधनों के विभिन्न प्रयोग। उदाहरण के लिए भूमि का प्रयोग खाद्य फसलों के लिए किया जा सकता है अथवा वाणिज्यिक फसलों के लिए या किसी अन्य उपयोग के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 25.
कोई दो उदाहरण दें जिससे पता चले कि सांख्यिकी का प्रयोग विभिन्न कारकों में संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है।
उत्तर:

  1. कीमत तथा मात्रा में संबंध।
  2. कीमत तथा पूर्ति में संबंध।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिक विश्वसनीय है?

  1. सन् 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ जितनहा 2001 ई. में।
  2. सन् 2000 ई. में गेहूँ का उत्पादन 100 मिलियन टन था, जबकि 2001 ई. में यह 121 मिलियन टन था।

उत्तर:
2. दूसरा कथन अधिक विश्वसनीय है।

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प्रश्न 27.
निम्नलिखित तथ्यों में से कौन-सा तथ्य अधिक विश्वसनीय है?

  1. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में 310 व्यक्ति मरे।
  2. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में सैकड़ों व्यक्ति मरे।

उत्तर:
पहला तथ्य अधिक विश्वसनीय है।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से आपको कौन से गुणात्मक समंक मिलेंगे –

  1. सुन्दरता
  2. समझदारी
  3. अर्जित आय
  4. एक विषय में प्राप्त अंक
  5. गाने की योग्यता
  6. सीखने की कला

उत्तर:

  1. सुंदरता
  2. समझदारी तथा गाने की योग्यता
  3. सीखने की कला

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प्रश्न 29.
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में क्या संबंध है? अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में विपरीत संबंध है। कीमत तथा माँग विपरीत दिशाओं में चलती है। अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर कीमत में वृद्धि होने से उसकी माँग में कमी आएगी।

प्रश्न 30.
हम सांख्यिकी का प्रयोग किन गंभीर आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण तथा उसके समाधान के लिए करते हैं?
उत्तर:

  1. कीमतों में वृद्धि
  2. जनसंख्या में वृद्धि
  3. बेरोजगारी
  4. निर्धनता आदि

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण लिखें।
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकताएँ (Unlimited Needs): मनुष्य की आवश्यकताएँ अनंत हैं। उनकी कोई गिनती नहीं। ये आवश्यकताएं बार-बार उत्पन्न होती है।
  2. सीमित साधन (Limited Sources): आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित (दुर्लभ) हैं। दूसरे शब्दों में आवश्यकताओं की पूर्ति के उपलब्ध साधन दुर्लभ हैं।
  3. सीमित साधनों का वैकल्पिक प्रयोग (Alternative Uses of Resources): आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए साधन न केवल सीमित हैं, अपितु उनका वैकल्पिक प्रयोग भी है। एक साधन को विभिन्न रूपों में उपयोग किए जा सकते हैं।

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प्रश्न 2.
एक कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 2,500 है। क्या इसे सांख्यिकीय कहा जाएगा? तर्कयुक्त उत्तर दें।
उत्तर:
इसे सांख्यिकी नहीं कहा जाएगा। इसका कारण यह है कि सांख्यिकी तथ्यों का एक समूह है। यह एक तथ्य नहीं है। सांख्यिकी केवल तथ्यों के समूह का अध्ययन करती है। और इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। विद्यार्थियों की संख्या एक तथ्य है। इससे हम कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। यदि हमें यह दिया हुआ हो कि पिछले वर्ष एक कॉलेज में 2,300 विद्यार्थी थे और इस वर्ष 2,500 विद्यार्थी हैं, तब इसे सांख्यिकी कहा जाएगा, क्योंकि यहाँ समक तथ्यों का समूह है तथा इनमें तुलना की जा सकती है।

प्रश्न 3.
सांख्यिकी के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर:
सांख्यिकी के दो कार्य (Two functions of statistics):
सांख्यिकी के कई कार्य हैं। उनमें से दो कार्य निम्नलिखित हैं –

1. जटिल तथ्यों को सरल तथा स्पष्ट बनाना (Presenting comple facts into simple and clear form):
सांख्यिकी साधारण तथा असाधारण सभी जटिल आर्थिक तथ्यों को संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रकट किए गए तथ्य सरलता से समझे जा सकते हैं।

2. नीति निर्धारण में सहायता करना (Helpful in the furmulation of policies):
उचित नीतियाँ निर्धारित करने में सांख्यिकी आधारभूत सामग्री प्रदान करती है। बिना पूर्ण संकलित तथ्यों के कुशल नीति निर्धारण अत्यंत कठिन है। उदाहरण के लिए यह निर्णय करना है कि भारत 2007 में कितना पेट्रोल दूसरे देशों से आयात करेगा। इसके लिए हमें यह पता लगाना पड़ेगा कि उस वर्ष देश में कितना उत्पादन होगा। इस जानकारी के बिना हम पेट्रोल के आयात के विषय में नीति नहीं बना सकते।

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प्रश्न 4.
सांख्यिकी का बहुवचन तथा एकवचन रूप में अर्थ समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है – कवचन, बहुवचन –

  1. बहुवचन के रूप में अर्थ अंकों में व्यक्त की गई सूचना तथा अन्य आँकड़ों से होता है।
  2. जैसे-जनसंख्या के आँकड़े, रोजगार सम्बन्धी आँकड़े की की परिभाषा लिखिए।

प्रश्न 5.
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
उत्तर:
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं –

  1. सांख्यिकी जटिल तथ्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है।
  2. सांख्यिकीय आंकड़ों को तुलनात्मक बनाती है, जिनसे लाभदायक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
  3. सांख्यिकी पूर्वानुमान तथा उचित नीतियों के निर्णय में सहायता करती है।
  4. सांख्यिकी से व्यक्ति के ज्ञान तथा अनुभव में वृद्धि होती है।
  5. सांख्यिकी में दो या दो से अधिक तथ्यों के संबंध में भी ज्ञात किया जा सकता है।

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी की प्रमुख विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
सभी समंक सांख्यिकी नहीं कहला सकते हैं। जिनमें निम्नलिखित विशेषताएँ विद्यमान होती हैं –

  1. समंक तथ्यों के समूह होते हैं।
  2. समंक संख्याओं में व्यक्त किए जा सकते हैं।
  3. समंक अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. समंक का संकलन गणना या अनुमान विधि द्वारा किया जा सकता है।
  5. समंकों का संग्रहण किसी पूर्व निश्चित उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
  6. समंकों को सुव्यवस्थित ढंग से एकत्र किया जाना चाहिए।
  7. समंक एक-दूसरे से संबंधित रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
सांख्यिकी अर्थशास्त्री तथा प्रशासक के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
1. अर्थशास्त्रियों के लिए उपयोगी (Useful for Economicst):
एक अर्थशास्त्री आर्थिक समूहों, जैसे-कुल राष्ट्रीय उत्पाद, उपभोग, बचत, निवेश और मुद्रा के मूल्य होने वाले परिवर्तनों के मापन के लिए समंकों पर निर्भर रहता है। आर्थिक सिद्धांतों का सत्यापन करने तथा परिकल्पनाओं की जाँच करने के लिए भी सांख्यिकीय विधियों का ही प्रयोग किया जाता है।

2. प्रशासक के लिए उपयोगी (Useful for Administrator):
एक सफल प्रशासक को उचित नीति निर्माण के लिए देश में बसने वाले लोगों की संख्या, देश की संपत्ति, आयात और निर्यात की मात्रा, औद्योगिक और कृषि उत्पादकता, श्रम स्थिति, मूल्य स्थिति आदि सभी संबंधित आँकड़ों का ज्ञान होना जरूरी है। ये सभी आँकड़े उसे सांख्यिकी से प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 8.
सांख्यिकी एक व्यापार के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
एक कुशल व्यापारी उपयुक्त आँकड़ों के आधर पर ही वस्तु की माँग का अनुमान लगाता है और क्रय-विक्रय व विज्ञापन नीतियाँ निर्धारित करता है। माँग का पूर्वानुमान लगाते समय ऋतुकालीन परिवर्तनों, व्यापार चक्रों, ग्राहकों की अभिरुचि, रीति-रिवाज, जीवन-स्तर आदि के यथेष्ट आँकड़ों को ध्यान में रखता है।

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प्रश्न 9.
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती।
  2. इनमें केवल संख्यात्मक इकाइयों का अध्ययन किया जाता है।
  3. इसमें गुणात्मक तथ्यों जैसे-वृद्धि, व्यवस्था इत्यादि का अध्ययन नहीं किया जाता है।
  4. सांख्यिकी नियम केवल औसत रूप में ही सत्य है।
  5. सांख्यिकीय का दुरुपयोग किया जाता है।

प्रश्न 10.
“झूठ तीन प्रकार के होते हैं-झूठ, सफेद झूठ और सांख्यिकी।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी को सबसे बड़ा झूठ का रूप का मानने का अभिप्राय है कि हम इसके द्वारा किसी भी सही चीज को झूठा सिद्ध कर सकते हैं। राजनीति तथा प्रशासन में सांख्यिकी का इस संदर्भ में बहुत उपयोग किया जाता है। आँकड़ों (सांख्यिकी) के आधार पर सत्ताधारी दल यह सिद्ध कर सकता है कि पंचवर्षीय योजनाओं से भारत में प्रत्येक क्षेत्र में आशातीत प्रगति हुई है जबकि विरोधी दलों के सदस्यों आँकड़ों से यह सिद्ध कर सकते हैं कि योजना काल में सामान्य व्यक्ति की स्थिति पहले से खराब हो गई है।

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प्रश्न 11.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकी विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में प्रमुख निम्नलिखित सांख्यिकीय विधियों का उपयोग होता है –

  1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data): सांख्यिकी की पहली विधि में किसी समस्या से संबंधित आँकड़ों को एकत्रित करते हैं।
  2. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Data): सांख्यिकी की दूसरी विधि का संबंध के प्रस्तुतीकरण से है।
  3. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data): सांख्यिकी की तीसरी विधि का संबंध आँकड़ों के विश्लेषण से है।
  4. आँकड़ों का निर्वाचन (Interpretation of Data): इस विधि में आँकड़ों के निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

प्रश्न 12.
सांख्यिकी को अंकों में प्रकट तथ्यों के समूह में परिभाषित किया जाता है। कुछ उदाहरण दें।
उत्तर:
सांख्यिकी तथ्यों का समूह है। किसी एक तथ्य से संबंधित आँकड़ों को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति विशेष की आय को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता है। इसका कारण यह है कि इसकी तुलना नहीं की जा सकती। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी तथ्य संख्या में व्यक्त होना चाहिए। यदि तथ्यों को गुणात्मक रूप में प्रकट किया जाता है तो वह सांख्यिकी नहीं कहलाएगी। जैसे-सुन्दरता, ईमानदारी, स्वास्थ्य आदि। राजा ने 80% अंक प्राप्त किए और मोहन ने 90% तो यह संख्या में प्रकट किए तथ्यों का समूह सांख्यिकी कहलाएगा।

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प्रश्न 13.
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार सांख्यिकी की परिभाषा को लिखें।
उत्तर:
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार समंक तथ्यों के उस समूह को कहते हैं, जो अनेक कारणों – से पर्याप्त सीमा तक प्रभावित होते हैं, जो अंकों में प्रकट किए जाते हैं, यथोचित शुद्धता के अनुसार जिनकी गणना अथवा अनुमान लगाया जाता है, जिन्हें किसी-न-किसी पूर्व-निश्चित उद्देश्य के लिए एक सुव्यस्थित विधि द्वारा एकत्र किया जाता है तथा जिन्हें तुलना के लिए एक-दूसरे के संबंध में रखा जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकीय विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकीय उपकरणों (विधियों) का प्रयोग (Statistical methods used in economic analysis):
सांख्यिकीय सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग होने वाले सांख्यिकीय उपकरण या विधियाँ निम्नलिखित हैं –

1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data):
आँकड़ों का संकलन एक सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत हम आँकड़ों के प्रकार-प्राथमिक व द्वितीयक तथा संकलन की विधियों, संगणना विधियों और न्यायादर्श विधि का अध्ययन करते हैं। आर्थिक विश्लेषण में सर्वप्रथम तथ्यों से संबंधित आँकड़ों का संकलन किया जाता है। सांख्यिकी आँकड़े आर्थिक अनुसंधान के आधार होते हैं।

2. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकी उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

3. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

4. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data):
इस सांख्यिकी उपकरण का प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक है। आँकड़ों के विश्लेषण की विभिन्न विधियाँ, केन्द्रीय प्रवृत्तियों की माप, सहसंबंध, सूचकांक आदि आर्थिक विश्लेषण में बहुत उपयोगी हैं।

5. आँकड़ों का निर्वचन (Interpretation of Data):
आँकड़ों के निर्वचन से अभिप्राय उन्हें अर्थ प्रदान करना है। आँकड़े अपने आप कुछ नहीं बोलते, इन्हें सही अर्थ प्रदान करना तथा इनसे सही अर्थ निकालना होता है। यह भी एक सांख्यिकीय उपकरण है, जिसका आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग किया जाता है। यह एक कठिन कार्य है।

6. पूर्वानुमान (Forecasting):
पूर्वानुमान एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है जिसका आर्थिक विश्लेषण से संबंधित पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन पूर्वानुमानित आँकड़ों पर अनेक आर्थिक नीतियाँ आधारित होती हैं। उदाहरणार्थ, यह अनुमान लगाना कि दसवीं पचवर्षीय योजना के अंत तक जनसंख्या कितनी होगी और तदनुसार रोजगार आय, उत्पादकता आदि का पूर्वानुमान लगाय जा सकता है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

प्रश्न 2.
सांख्यिकी के प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर:
1, तथ्यों को स्पष्टता प्रदान करना (Facts are clearly presented):
सांख्यिकी का पहला कार्य है कि यह तथ्यों को आंकड़ों में प्रस्तुत करके उन्हें अधिक विश्वसनीय बना देता है। यह कहना कि वर्ष 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ था जितना कि 2001 में यदि इस बात को आँकड़ों में कहें कि वर्ष 2000 में गेहूँ का उत्पादन 1000 मिलियन टन था जबकि 2001 में यह 121 मिलियन टन था। दूसरा वाक्य बहुत अधिक विश्वसनीय है।

2. जटिल तथ्यों को सरल बनाना (Simplification of complex facts):
सांख्यिकी विधियाँ अनेक हैं, जैसे-माध्य, माध्यिका, अपरिकरण, जो कि जटिल तथ्यों को सरल बना देती हैं।

3. तथ्यों की तुलना को आसान करना (To make comparisn of facts easy):
विभिन्न प्रकार की सांख्यिकीय विधियाँ आँकड़ों को तुलनात्मक बनाती हैं। प्रतिशत दर और अनुपात इसमें सहायक हैं।

4. व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाना (To increase personal experience):
बाउले ने ठीक ही कहा है कि सांख्यिकी निस्संदेह व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाती है।

5. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in making reasonable policy):
उचित नीति निर्धारण में ये आँकड़े बुनियाद का काम करते हैं।

6. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in forecasting):
भूतकाल में एकत्रित आँकड़े आने वाले भविष्य का अनुमान लगाने में बड़े सहायक होते हैं।

7. तथ्यों के संबंधों का अध्ययन करना (To study relationship between the facts):
सांख्यिकी दो या अधिक तथ्यों के आपस के संबंधों का अध्ययन करती है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

प्रश्न 3.
सांख्यिकी की सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी केवल समूह का अध्ययन करती है। व्यक्तिगत इकाइयों का इसमें अध्ययन नहीं किया जाता है।
  2. सांख्यिकी केवल संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है। इसमें किसी के गुण, बुराई, भलाई का अध्ययन नहीं किया जाता।
  3. सांख्यिकी के नियम इतने यथार्थ नहीं होते जितने भौतिक शास्त्र या रसायन शास्त्र के नियम होते हैं। सांख्यिकी के नियम अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. सांख्यिकी समस्या का सर्वश्रेष्ठ हल नहीं बता सकती है। किसी समस्या को हल करने की अनेक विधियाँ व विधान हैं। सांख्यिकी उनमें से एक है।
  5. सांख्यिकी का दुरुपयोग किया जा सकता है। सांख्यिकी का सबसे बड़ा दोष यह है कि कोई भी दक्ष प्राणी इसकी विधि का गलत प्रयोग करके अपने उपयोग के अनुरूप परिणाम निकाल सकता है। इसका दुरुपयोग भी कर सकता है।

प्रश्न 4.
सांख्यिकी का क्या महत्व (लाभ) है? अथवा, आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में सांख्यिकी की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
सांख्यिकी के अनेक कार्यों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सांख्यिकी का ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में बहुत ही महत्त्व है।

1. सांख्यिकी व व्यापार (Statistics and business):
व्यापारी वर्ग अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करना चाहता है। अत: उसे उत्पाद, क्रय, विक्रय, कीमत निर्धारण में सांख्यिकी का सहारा लेना पड़ता है। अनुमान सांख्यिकी पर निर्भर करते हैं।

2. सांख्यिकी व अर्थशास्त्र (Statistics and economics):
अर्थशास्त्र का अंग सांख्यिकी है। अर्थशास्त्र की लगभग प्रत्येक समस्या सांख्यिकीय सहायता से हल होती है। देश में फैली गरीबी, बेकारी, आय, असमानता का समाधन सांख्यिकी से ही सुलभ है।

3. सांख्यिकी तथा बैंकर (Statistics and bankers):
सांख्यिकी के बिना पूर्व अनुमान गलत हो सकते हैं। वह जनता का विश्वास खो सकता है। ऐसी हालत में सांख्यिकी से ही सुलभ ज्ञान उनके लिए आवश्यक है।

4. सांख्यिकी तथा बीमा कंपनियाँ (Statistics and insurance companies):
बीमा कंपनियाँ व्यक्तियों के जीवन आदि का बीमा करती हैं। ये जीवन की प्रत्याशा के आधार पर बीमा-दर निश्चित करती हैं। किसी कंपनी के सारे काम संभवना सिद्धांत पर आधारित होते हैं और यह सिद्धांत सांख्यिकी का है।

5. सांख्यिकी व अनुसंधान (Statistics and research):
सांख्यिकी उपकरण विधियाँ अनुसंधानकर्ता के लिए विशेष लाभदायक है। सांख्यिकी उपकरणों की सहायता से अनुसंधानकर्ता अपनी खोज में तभी सफल होगा जब उसने आँकड़े एकत्रित किए हुए हों।

6. सांख्यिकी व सरकार (Statistics and Government):
वर्तमान समय में सरकार कल्याणकारी सरकार कहलाती है। वह अधिक-से-अधिक जनसुख की भावना से शासन करती है। यातायात, कृषि, व्यापार, आयत-निर्यात, डाक-तार आदि सभी क्षेत्र आँकड़ों पर निर्भर करते हैं। देश का वार्षिक बजट तो सांख्यिकी ही है।

7. सांख्यिकी व मानव कल्याण (Statistics and human welfare):
मानव कल्याण तभी हो सकता है जब है जब उसकी समस्याएँ (गरीबी, बेकारी) हल हुई हों। उनका हल सांख्यिकी के द्वारा हो सकता है।

8. सांख्यकी व पूर्व अनुमान (Statistics and forecasting):
सांख्यिकी का प्रयोग व्यापार, ऋतु-विज्ञान, सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण आदि के पूर्वानुमान लगाने के काम आता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार सांख्यिकी शब्द का प्रयोग यदि बहुवचन में हो तो इसका अर्थ है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

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प्रश्न 2.
रैन्डम हाउस डिक्शनरी सांख्यिकी का अर्थ बनाती है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक विज्ञान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अप्रायोगिक विज्ञान

प्रश्न 3.
सांख्यिकी आँकड़ों के विश्लेषण की विधियाँ हो सकती हैं –
(a) अविवरणात्मक या अप्रायिकतात्मक
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक

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प्रश्न 4.
इस पाठ्य पुस्तक की विषय-वस्तु है –
(a) विवरणात्मक विधियाँ
(b) प्रायिकतात्मक विधियाँ
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) विवरणात्मक विधियाँ

प्रश्न 5.
जिन चरों को संख्याओं द्वारा मापा जाता है, वे कहलाते हैं –
(a) मात्रात्मक आँकड़े
(b) गुणात्मक आँकड़े
(c) मात्रात्मक व गुणात्मक दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मात्रात्मक आँकड़े

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प्रश्न 6.
गुणात्मक आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) संख्याओं में
(b) कोटियों में
(c) संख्याओं व कोटियों दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) संख्याओं में

प्रश्न 7.
अर्थशास्त्री. सांख्यिकी का प्रयोग करते हैं –
(a) मौद्रिक नीति बनाने में
(b) राजकोषीय नीति बनाने में
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में

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प्रश्न 8.
सांख्यिकी की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है –
(a) प्रायोगिक विज्ञानों में
(b) अप्रायोगिक विज्ञानों में
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में

प्रश्न 9.
प्रयोगात्मक आँकड़े आविष्कारक –
(a) स्वयं तैयार करता है
(b) स्वयं या गणकों से एकत्र करवाता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं तैयार करता है

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प्रश्न 10.
सांख्यिकीय संबंधों में –
(a) शत प्रतिशत शुद्धता होती है
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था?
(क) गंडक
(ख) कोसी
(ग) सोन
(घ) दामोदर
उत्तर:
(घ) दामोदर

प्रश्न 2.
किस नदी का बेसिन भारत में सबसे बड़ा है?
(क) सिंधु
(ख) गंगा
(ग) ब्रह्मापुत्र
(घ) कृष्णा
उत्तर:
(ग) ब्रह्मापुत्र

प्रश्न 3.
कौन-सी नदी पंचनद में सम्मिलित नहीं है?
(क) रावी
(ख) सिंधु
(ग) चनाब
(घ) झेलम
उत्तर:
(ख) सिंधु

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प्रश्न 4.
कौन सी नदी दरार घाटी में बहती है ……………………..
(क) सोन
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) लूनी
उत्तर:
(ग) नर्मदा

प्रश्न 5.
अलकनन्दा तथा भागरथी नदी के संगम को क्या कहते हैं?
(क) विष्णु प्रयाग
(ख) कर्ण प्रयाग
(ग) रूद्र प्रयाग
(घ) देव प्रयाग
उत्तर:
(घ) देव प्रयाग

प्रश्न 6.
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को किस नाम से जाना जाता है?
(क) सांगपो
(ख) अरुण
(ग) मूला
(घ) त्रिशूली
उत्तर:
(क) सांगपो

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी है?
(क) महानदी
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) कावेरी
उत्तर:
(ख) गोदावरी

प्रश्न 8.
किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
(क) कोशी
(ख) वागमती
(ग) गंडक
(घ) दामोदर
उत्तर:
(क) कोशी

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 10 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
निम्न में अंतर स्पष्ट करें –

  • नदी द्रोणी और जल-संभर
  • वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप
  • अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप
  • डेल्टा और ज्वारनदमुख ।

उत्तर:
1. नदी द्रोणी और जल – संभर-बड़ी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र को नदी-द्रोणी जबकि छोटी नदियों व नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को ‘जल-संभर’ कहा जाता है। नदी द्रोणी का आकार बड़ा होता है, जबकि जल-संभ का आकार छोटा होता है।

2. वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप – जो अपवाह प्रतिरूप पेड़ की शाखाओं के अनुरूप हो, से वृक्षाकार (Dendritic) प्रतिरूप कहा जाता है, जैसे उत्तरी मैदान की नदियाँ । जब मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समांतर बहती हों तथा सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर मिलती हों तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा (Trellis) अपवाह प्रतिरूप कहते हैं।

3. अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप – जब नदियाँ किसी पर्वत से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं, तो इसे अपकेंद्रीय प्रतिरूप कहा जाता है। जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील या गर्त में विसर्जित होती हैं, तो ऐसे अपवाह प्रतिरूप को अभिकेंद्रीय (Centripetal) प्रतिरूप कहा जाता है।

4. डेल्टा और ज्वारनदमुख – नदियों के मुहाने तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनाता है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश है, इसे डेल्टा कहा जाता है । जवारनदमुख की रचना नदी के तीव्र लम्बवत् कटाव से होती है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए 

प्रश्न 1.
भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
उत्तर:
भारत की नदियाँ प्रतिवर्ष जल की विशाल मात्रा का वहन करती हैं, लेकिन समय व स्थान की दृष्टि से इसका वितरण समान नहीं है। वर्षा ऋतु में, अधिकांश जल बाढ़ में व्यर्थ हो जाता है और समुद्र में बह जाता है। इसी प्रकार, जब देश के एक भाग में बाढ़ होती है तो दूसरा भाग सूखाग्रस्त हाता है। यदि हम नदियों की द्रोणियों को आपस में जोड़ दें तो बाढ़ और सूखे की समस्या हल हो जायेगी। पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होने के कारण पीने के पानी की समस्या भी हल हो जायेगी तथा हजारों, करोड़ों रुपये की बचत होगी और पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। किसानों की आर्थिक हालत सुधरेगी।

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प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीपीय नदियाँ सुनिश्चित मार्ग पर चलती है
  2. ये नदियाँ विसर्प नहीं बनाती; और
  3. ये नदियाँ बारहमासी नहीं हैं।

(घ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों से अधिक में न दें 

प्रश्न 1.
उत्तर भारतीय नदियों की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
उत्तर भारतीय नदियों में हिमालय से निकलने वाली नदियाँ आती हैं। हिमालयी नदी तंत्र के अंतर्गत ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र, सिंधु नदी तंत्र तथा गंगा नदी तंत्र मुख्य हैं। प्रारम्भ में ये नदियाँ हिमालय के अक्ष के समानान्तर बहती हैं, फिर अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती हैं। इन नदियों के निरन्तर बहने के कारण इनके किनारे ऊँचे और ऊँचे होते गए। ये नदियाँ विशाल द्रोणियों का निर्माण करती हैं। ये सदानीरा नदियाँ हैं। अधिकतर प्रायद्वीपीय नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं तथा ये नदियाँ वर्षाधीन हैं। इसके अतिरिक्त ये तटीय नदियाँ होती हैं जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर में जाकर मिलती हैं। हिमालयी नदियाँ हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं जबकि प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी होती हैं। हिमालयी (उत्तर भारतीय नदियाँ) और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में मुख्य अंतर उनको जलवायु के कारण होता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

प्रश्न 2.
मान लीजिए आप हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वारा से सिलीगुड़ी तक यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियों के नाम बताएँ। इनमें से किसी एक नदी की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा करने पर गंगा, यमुना, शारदा, सोन, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानदी आदि नदियाँ मार्ग में आती हैं। गंगा अपनी द्रोणी और सांस्कृति महत्त्व दोनों के दृष्टिकोणों से भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह भारत का सबसे बड़ा अपवाह तंत्र है, जिसमें उत्तर हिमालय से निकलने वाली बारहमासी व अनित्यवाही नदियाँ और दक्षिण में प्रायद्वीप से निकलने वाली अनित्यवाही नदियाँ शामिल हैं। यह भारत की सबसे पवित्र नदी है। इलाहाबाद के आगे यमुना इसमें आकार मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है।

इससे आगे उत्तर की ओर से गोमती, घाघरा, गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं। दक्षिण की ओर से सोन नदी आकार मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदरवन में विश्व के सबसे बड़े डेल्ट का निर्माण करती है। इसके किनारे पर हरिद्वारा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, कोलकाता आदि महात्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। इसका अधिकांश जल सिंचाई के उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका जल अमृत के समान माना गया है।

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य विभाजक का नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट।

प्रश्न 2.
एक ट्रांस हिमालयी नदी का नाम बताएँ जो सिन्धु नदी की सहायक नदी है।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 3.
गंगा की सहायक नदी का नाम बताओं जो दक्षिण से मिलती है?
उत्तर:
सोन नदी।

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प्रश्न 4.
सिन्धु नदी की कुल लम्बाई कितनी है?
उत्तर:
2880 किलोमीटर।

प्रश्न 5.
सिन्धुनदी का उदग्म बताएँ।
उत्तर:
मानसरोवर झील (तिब्बत)।

प्रश्न 6.
उत्तरी भारत तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मध्य जल विभाजन का नाम बताएँ।
उत्तर:
विंध्या-सतपुड़ा श्रेणी।

प्रश्न 7.
दरार घाटियों में बहने वाली दो नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा, ताप्ती।

प्रश्न 8.
सिन्धु नदी का कुल बेसिन क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
1,165,000 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 9.
भारत के दो जल-प्रवाह तन्त्र बताएँ।
उत्तर:
हिमालय नदियाँ तथ प्रायद्वीपीय नदियाँ।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती जल प्रवाह की एक नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सिन्धु।

प्रश्न 11.
प्राचीन समय में कौन-सी नदी पंजाब से असम की ओर बहती थी?
उत्तर:
सिन्ध-ब्रह्मा नदी।

प्रश्न 12.
झेलम नदी का स्रोत बताएँ।
उत्तर:
बुल्लर झील।

प्रश्न 13.
गंगा नदी द्वारा निर्मित डेल्टे का नाम लिखें।
उत्तर:
सुंदरवन।

प्रश्न 14.
किस नदी को तिब्बत में सांग-पो कहा जाता है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र।

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प्रश्न 15.
किस नदी को दक्षिण की गंगा कहते हैं?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्री नदी।

प्रश्न 16.
जलबपुर के निकट नर्मदा नदी कौन-सा जल प्रवाह बनाती है?
उत्तर:
मार्बली रॉक।

प्रश्न 17.
प्राचीन समय में हरियाणा के शुष्क क्षेत्र में बहने वाली नदी का नाम लिखों।
उत्तर:
सरस्वती।

प्रश्न 18.
जोग जल प्रपात कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
शरबती नदी पर (कर्नाटक)।

प्रश्न 19.
भारतीय पठार की नदी का नाम लिखों जो अरब सागर की ओर बहती है।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती।

प्रश्न 20.
प्रायद्वीपीय भारत की एक नदी बताओं जो ज्वारनदमुख बनाती है।
उत्तर:
नर्मदा।

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प्रश्न 21.
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
गोदावरी।

प्रश्न 22.
कृष्णा नदी का स्रोत कौन-सा है?
उत्तर:
महाबलेश्वर।

प्रश्न 23.
भारत में गंगा नदी का कुल कितना कितना बेसिन क्षेत्रफल है?
उत्तर:
8,61,404 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 24.
बंग्लादेश में गंगा नदी को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर:
पद्मा।

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प्रश्न 25.
उन नदियों के नाम लिखो जो हिमालय नदी तंत्र बनाती हैं।
उत्तर:
सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 26.
प्रायद्वीपीय भारत की बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी।

प्रश्न 27.
एक ट्रांस हिमालय नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 28.
खम्बात की खाड़ी में गिरने वाली नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
माही।

प्रश्न 29.
अरावली से निकलने वाली नदी का नाम लिखो।
उत्तर:
साबरमती।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं । डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निरक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार है –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

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प्रश्न 2.
गंगा की दो शीर्ष नदियों (Head Streams) के नाम बताइए जो देव प्रयोग में मिलती हैं।
उत्तर:
गंगा नदी उत्तर प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है तथा दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है। देव प्रयाग में इससे दो शीर्ष नदियाँ–अलकनन्दा और भागीरथी आ कर मिलती हैं। इसके बाद इनका नाम गंगा पड़ता है।

प्रश्न 3.
प्रायद्वीप भारत की प्रमुख नदियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीप की कुछ नदियां पूर्व की ओर बहती हुई खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। इनमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेनार महत्त्वपूर्ण नदियाँ हैं। कुछ नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं। इसमें नर्मदा, ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं।

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प्रश्न 4.
गार्ज (महाखंड) क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पर्वतीय भागों में बहुत गहरे तथा तंग नदी मार्गों को गार्ज कहते हैं। इसे महाखंड भी कहा जाता है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं तथा लगातार ऊपर उठते रहते हैं। इसका तल लगातार गहरा होता है। हिमालय पर्वत में ऐसे कई गार्ज मिलते हैं। जैसे – सिन्धु, सतलुज, गार्ज, ब्रह्मपुत्र (दिहांग) गार्ज।

प्रश्न 5.
हिमालय की नदियों के तीन प्रमुख नदी तन्त्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
हिमालय की नदियों का विकास एक लम्बे समय में हुआ है। हिमालय की नदियों को तीन मुख्य तन्त्रों (System) में बाँटा जाता है

  • सिन्धु तन्त्र (Indus System)
  • गंगा तन्त्र (Ganges System)
  • ब्रह्मपुत्र तन्त्र (Brahmaputra System)

प्रश्न 6.
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियाँ लूनी साबरमती तथा माही हैं। अधिकतर नदियाँ रेत में लुप्त हो जाती हैं।

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प्रश्न 7.
उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों को कितने वर्गों में बांटा जाता है?
उत्तर:
भारत का जल प्रवाह देश की भू-संरचना पर निर्भर करता है। इस आधार पर देश की नदियों को दो वर्गों में बांटा जाता है –

  • हिमालय की नदियाँ
  • प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रश्न 8.
पश्चिमी तट पर नदियाँ डल्टा क्यों नहीं बनाती हैं जबकि वे बड़ी मात्रा में तलछट बहा कर लाती हैं?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर नर्मदा औरर ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं। ये नदियाँ काफी मात्रा में तलछट बहा कर ले जाती हैं परन्तु ये डेल्टा नहीं बनाती। इस तट पर मैदान की चौड़ाई बहुत कम है। प्रदेश की तीव्र ढाल है। नदियाँ तेज गति से समुद्र में गिरती हैं। इसलिए तलछट का निक्षेप नहीं होता। संकरे मैदान के कारण नदियों के अन्तिम भाग की लम्बाई कम है जिससे डेल्टे का निर्माण नहीं होता।

प्रश्न 9.
गोदावरी को वृद्ध गंगा या दक्षिणी गंगा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गोदावरी नदी प्रायद्वीप की सबसे बड़ी नदी है। इसका एक विशाल अपवहन क्षेत्र है जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा तथा आन्ध प्रदेश में फैला हुआ है। विशाल आकार और विस्तार के कारण इसकी तुलना गंगा नदी से की जाती है। जिस प्रकार उत्तरी भारत में गंगा नदी का महत्त्व है। गंगा नदी की तरह इसकी भी अनेक सहायक नदियाँ हैं।

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प्रश्न 10.
उस प्रायद्वीपीय नदी का नाम बताइए जिसकी सहायक नदियों का विकास नहीं हुआ है।
उत्तर:
नर्मदा नदी एक द्रोण-घाटी में बहती है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है। इसकी कोई सहायक नदी लम्बी नहीं है। कोई भी नदी 200 किमी से अधिक लम्बी नहीं है।’

प्रश्न 11.
पश्चिमी घाट से निकलने वाली प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय नदियों का जल विभाजक है जहाँ से कई नदियाँ निकल कर पूर्व की ओर बहती हैं। कावेरी नदी ब्रह्मगिरि माला से निकल कर खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। कृष्णा नदी महाबलेश्वर से तथा गोदावरी नदी नासिक क्षेत्र से निकल कर पूर्व की ओर बहती है। कई छोटी-छोटी नदियाँ पश्चिमी घाट से निकल कर पश्चिमी तटीय मैदान में पश्चिम की ओर बहती हैं।

प्रश्न 12.
गंगा तन्त्र में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
गंगा का उदग्म प्रदेश उत्तर प्रदेश के हिमालय में है। गंगा के दाहिने किनारे की मुख्य सहायक नदियाँ यमुना तथा सोन जैसी बड़ी नदियाँ हैं। इसके अतिरिक्त टोन्स तथा पुनपुन जैसी छोटी नदियाँ भी गंगा में मिलती हैं। गंगा के बाएँ पर कई बड़ी नदियाँ इसकी सहायक नदियों के रूप में मिलती हैं । जैसे-राम गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी तथा महानन्दा । ये सब नदियाँ मिल कर गंगा तन्त्र की रचना करती हैं।

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प्रश्न 13.
सिन्धु तन्त्र में बहने वाली नदियों के नाम लिखें।।
उत्तर:
हिमालय पर्वत के पश्चिम में बहने वाली नदियाँ सिन्धु तन्त्र की रचना करती हैं। सिन्धु तिब्बत में 5,180 मीटर की ऊंचाई पर मान सरोवर झील से निकल कर कश्मीर, पंजाब (पाकिस्तान) में बहती हुई अरब सागर में गिरती हैं। इनकी प्रमुख सहायक नदियाँ सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम हैं।

प्रश्न 14.
गंगा तथा महानदी के डेल्टा के मध्य कौन-सी नदियाँ बहती हैं ?
उत्तर:
गंगा नदी का डेल्टा पश्चिमी बंगाल में तथा महानदी का डेल्टा उड़ीसा राज्य में फैला हुआ है। इनके मध्य में बिहार, उड़ीसा मध्य प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्यों के क्षेत्रों में स्वर्ण रेखा तथा ब्राह्मणी नदी का विस्तार है।

प्रश्न 15.
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर:
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में थोड़ा सा अंतर है। एक अपवाह द्रोणी को दूसरे से अलग करनेवाली सीमा को ‘जल संभर’ कहते है। जबकि नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं। जल संभरों का क्षेत्रफल 1000 हेक्टेयर से कम होता है जबकि नदी द्रोणियों का क्षेत्रफल बड़ा होता।

प्रश्न 16. प्रायद्वीपीय
भारत की पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय भारत को पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर –
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प्रश्न 17.
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर बताएँ।
उत्तर:
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में बाढ़ प्रवण क्षेत्र बताओं।
उत्तर:
बाढ़ प्रवण क्षेत्र- भारत में प्रतिवर्ष बाढ़ आती हैं। प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है। ऊँची बाढ़ों से फसलों, मकानों और सार्वजनिक सुविधाओं को – बहुत हानि होती है। अनेक लोग और पशु मर जाते हैं, परिवहन और संचार के साधन अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। इनमें सामान्य जन-जीवन भी गड़-बड़ हो जाता है। देश की उत्तरी विशाल मैदान तथा बड़ी नदियों के तटीय क्षेत्रों में गम्भीर बाढ़ के आने की आशंका बनी रहती है।

बिहार के मैदान, पश्चिम बंगाल के उत्तरी तथा दक्षिणी भाग, असम घाटी और कछार प्रायः आने वाली बाढ़ों के लिए कुख्यात हैं। कश्मीर घाटी, पंजाब के मैदान, उत्तर प्रदेश के मैदान, महानदी गोदावरी और कृष्णा के डेल्टा, कावेरी डेल्टा तथा नर्मदा और ताप्ती के निचले भागों में बाढ़ कभी-कभी ही आती है। बाढ़ आने के प्रमुख कारण ये हैं-भारी वर्षा, नदी घाटियों का मंद ढाल, नदी तल में गाद का भारी मात्रा में जमाव तथा जल ग्रहण क्षेत्रों में वनविहीन पहाड़ियाँ। कुछ क्षेत्रों में सड़कों रेलमार्गों और नहरों के निर्माण से जल के प्रवाह में बाधा पड़ती है। जिससे बाढ़ आ जाती है। तटीय क्षेत्रों में कुछ बाढ़े चक्रवातीय तूफानों के कारण भी आती हैं।

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प्रश्न 2.
भारत की नदियाँ किस तरह देश के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
भारत की नदियाँ अनेक तरह से हमारे लिये तथा हमारे देश के लिये उपयोगी है। नदियों के किनारे ही मानव बसाव हुआ है और प्रमुख सभ्यता और उत्कृष्ट संस्कृतियाँ विकसित हुई हैं। नदियों से बड़ी मात्रा मे जल नगरों तथा गाँवों तक पहुँचाया जाता है। बहुत से उद्योग भी काफी हद तक जल की आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। हमारे जीवन में मीठे जल की अधिकांश आवश्यकताएँ नदियों से ही पूरी होती है।

भारतीय नदियों के जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई में होती है। भारतीय नदियाँ प्रतिवर्ष 167753 करोड़ घन मीटर जल बहता है जिसका मात्र 33% अर्थात् 55,517 करोड़ घन मीटर जल ही सिंचाई के उपयोग में आ पाती है। भारतीय नदियों में जलशक्ति की बड़ी संभावनाएँ हैं । कुल नदी जल प्रवाह का 60% हिमालय में, 16% मध्यवर्ती भारत की नदियों में तथा शेष दक्कन के पठार की नदियों में नीहित है। इन नदियों से 60% कार्यक्षमता के आधार पर 4.1 करोड़ किलोवाट जलशक्ति उत्पादन किया जा सकता है।

देश के उत्तर तथा उत्तर पूर्व में क्रमशः गंगा और ब्रह्मपुत्र में, उड़ीसा में महानदी में, आंध्रप्रदेश के गोदावरी एवं कृष्णा गुजरात में नर्मदा एवं ताप्पी नदियों में देश के प्रमुख जलमार्ग हैं। देश के लगभग 10,600 कि०मी० लम्बे नाव्य जलमार्ग है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी प्रमुख नदियाँ हैं। गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और ताप्पी नदी केवल मुहानों के निकट ही नाव्य है। इस प्रकार भारत की नदियाँ देश के लिए पूर्णरूपेण उपयोगी हैं।

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प्रश्न 3.
नदी प्रवृत्तियों से क्या अभिप्राय है? हिमालयी प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना करें।
उत्तर:
नदी प्रवृत्तियाँ-किसी नदी में जल के ऋतुनिष्ठ प्रवाह के प्रतिरूप को इसकी प्रवृत्ति कहते हैं। हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में अन्तर का मुख्य कारण जलवायु में अन्तर है। हिमालय नदियाँ सदानीरा हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ, हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ मानसूनी और हिमनदीय दोनों ही हैं। इसके विपरीत प्रायद्वीप नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी हैं, क्योंकि इन पर केवल वर्षा का ही नियंत्रण है। प्रायद्वीप की विभिन्न नदियों की प्रवृत्तियाँ भी एक समान नहीं हैं, क्योंकि पठार के विभिन्न भागों की वर्षा के ऋतुनिष्ठ वितरण में अन्तर होता है।

गंगा नदी की प्रवृत्ति-जनवरी से लेकर जून तक गंगा में जल का न्यूनतम प्रवाह रहता है। अगस्त या सितम्बर में अधिकतम प्रवाह होता है। सितम्बर के बाद प्रवाह निरन्तर घटता जाता है। इस प्रकार गंगा नदी में एक विशिष्ट मानसूनी प्रवृत्ति है। गंगा की द्रोणी के पूर्वी और पश्चिमी भाग की नदी प्रवृत्तियों में असाधारण अन्तर पाए जाते हैं। मानसूनी वर्षा से पहले या ग्रीष्म ऋतु के पहले भाग में गंगा में पर्याप्त जल बहता है। इसका मुख्य कारण हिमालय पर बरफ का पिघलना है। गंगा की प्रवृत्ति की तुलना, हिमालय की ही अन्य नदी झेलम से की जा सकती है। झेलम में अधिकतम प्रवाह जून या मई में ही हो जाता है, क्योंकि इसका प्रवाह मुख्य रूप से हिमालय की बरफ से पिघलने पर निर्भर करता है। इन दोनों नदियों की प्रवृत्तियों में एक रोचक अन्तर है। इस अन्तर को इन नदियों के अधिकतम और न्यूनतम प्रवाह की भिन्नता के परास (range) में देखा जा सकता है। झेलम की तुलना में, गंगा में अन्तर अधिक सुस्पष्ट है।

प्रायद्वीपीय नदियाँ-प्रायद्वीप की दो नदियों की प्रवृत्तियों में हिमालयी नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना में काफी अन्तर है। नर्मदा में जल विसर्जन की मात्रा जनवरी से जलाई तक काफी कम रहती है लेकिन अगस्त में यह अचानक बढ़कर अधिकतम स्तर पर पहुँच जाती है। अगस्त में नर्मदा में जिस तेजी से जल की मात्रा बढ़ती है उसी तेजी से अक्तूबर में यह घट जाती है। गोदावरी में उस प्रवाह का स्तर मई तक नीचा रहता है। इसमें दो बार जल की अधिकतम मात्रा रहती है। एक बार मई मैं और दूसरी बार जुलाई-अगस्त में। अगस्त के बाद जल प्रवाह तेजी घटता है। जनवरी से लेकर मई तक के किसी भी महीने की तुलना में अक्टूबर और नवम्बर में जल प्रवाह की मात्रा अधिक होती है।

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प्रश्न 4.
भारत की तटीय नदियों का वर्णन करें।
उत्तर:
तटीय नदियाँ पश्चिम में अरब सागर की ओर तथा पूर्व में बंगाल के खाड़ी की ओर बहती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ ये हैं-शतरंजी, भद्रा वैतरणा, काली नदी, बेड़ती शरावती, भारतपुझा, पेरियार तथा पंबा । शतरंजी अमरेली जिले के दलकहवा के निकट से, भद्रा राजकोट जिले में अनियाली गाँव के पास से तथा धांधर गुजरात के ही पंचमहल जिले के घंटार गाँव के निकट से निकलती हैं। धांधर 135 किमी लम्बी है तथा इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,770 वर्ग किमी है। वैतरणा का उदगम स्रोत महाराष्ट्र के नासिक जिले में 670 मी की ऊँचाई पर त्रियंबक की पहाड़ियों के दक्षिणी ढालों पर है।

172 किमी की यात्रा के बाद यह बलसाड़ के निकट अरब सागर में गिरती है। काली नदी कर्नाटक के बेलगाँव जिले में बीड़ी नामक गाँव के निकट से निकलती है औ कारवाड़ की खाड़ी में गिरती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 5,179 वर्ग किमी है। 161 वर्गकिमी है। 161 किमी लम्बी बेड़ती नदी का उदगम स्रोत हुबली-धारवाड़ के आस-पास की पहाड़ियों में 701 मी की ऊँचाई पर है। शरावती का उदग्म स्थान कर्नाटक के शिमोगा जिले में है। इसी नदी पर प्रसिद्ध गरसोपा (जोग) जल-प्रपात है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,209 वर्ग किमी है। भारतपझा को पोन्नानी भी कहते हैं । यह केरल की सबसे लम्बी नदी है। यह अन्नामलाई की पहाड़ियों के पास से निकलती है। इसका अपवाह क्षेत्र 5.397 वर्ग किमी है। 177 किमी लम्बी पंबा नदी वेबनाद झील में गिरती है।

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ-सुवर्ण रेखा, वैतरणी और ब्राह्मणी के अलावा पूर्व की ओर बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं-दंशधारा, पेन्नर, पलार और वैगाई। वंशधारा का उद्गम तो उड़ीसा के दक्षिणी भाग में है, लेकिन यह आन्ध्र प्रदेश में बहती है। पलार का जलग्रहण क्षेत्र 17,870 वर्ग किमी नदियाँ हैं । पोइनी और चेय्यार इसकी दो प्रमुख नदियाँ हैं। वैगाई केरल से निकलती हैं। यह पेरियार के अपवर्तित जल को लेकर अंत में पाक की खाड़ी में गिर जाती है। छोटी-छोटी तटीय नदियों की विशेषताएँ हैं-तीव्र ढाल, भारी मात्रा में गाद तथा प्रवाह में शीघ्र घट-बढ़। तटीय क्षेत्रों की कृषि की सिंचाई में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव

Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कुछ क्षेत्रीय और आर्थिक समूहों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सार्क, यूरोपियन संघ, एशियन, जी – 8, जी – 20 आदि क्षेत्रीय और आर्थिक समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
विभिन्न साधन कौन से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं?
उत्तर:
निम्नलिखित साधनों की सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं –
1980 ई. के दशक में पाकिस्तान भारत में आगे था, परंतु 1990 के दशक में पाकिस्तान की संवृद्धि दर से 3.6 की गिरावट आई। कुछ विद्वानों का मत है कि संवृद्धि दर में गिरावट के अग्रलिखित दो कारण थे –

  1. 1988 में आरम्भ की गई सुधार प्रक्रिया।
  2. पाकिस्तान में राजनैतिक अस्थिरता।

विकास की सामान्य प्रक्रिया के दौरान पाकिस्तान ने सबसे पहले रोजगार और कृषि उत्पाद से सम्बन्धित अपनी नीतियों को बदल कर उन्हें विनिर्माण और उसके बाद सेवाओं की ओर परिवर्तित कर दिया। पाकिस्तान में विनिर्माण में लगे श्रम बल का अनुपात 18% था। जब पाकिस्तान में सीधे सेवा क्षेत्रक पर जोर दिया जा रहा है। 1980 के दशक में पाकिस्तान में सेवा क्षेत्रक में 27% श्रम बल कार्यरत था। वर्ष 2000 में यह बढ़कर 37% हो गया।

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प्रश्न 7.
चीन में ‘एक संतान’ नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ क्या है?
उत्तर:
चीन में “एक संतान” नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ जनसंख्या में वृद्धि रोकना है।

प्रश्न 8.
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतक – 2000-2001:
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प्रश्न 9.
मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए। अथवा, पाकिस्तान तथा भारत के मुख्य मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चीन, पाकिस्तान और भारत के मुख्य जनांकिकीय संकेत – 2003
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प्रश्न 10.
स्वतंत्रता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतंत्रता संकेतकों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता संकेतक से अभिप्राय उन संकेतकों से है जो मनुष्य की सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता को इंगित करते हैं। मानव विकास के संकेतकों में इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता संकेतक के कुछ उदाहरण-नागरिक अधिकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा, न्यायपालिका का स्वतंत्रता को संरक्षण देने की संवैधानिक सीमा तथा विधि सम्मत शासन आदि।

प्रश्न 11.
उन विभिन्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि (तीव्र आर्थिक विकास हुआ) हुई।
उत्तर:
चीन में तीव्र आर्थिक विकास के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं –

  1. विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दिशा निर्देशों के बिना 1978 में आधारित संरचना सुधार लागू करना।
  2. चीन ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में आधारित संरचना का विकास किया, जिससे वहाँ सामाजिक एवं आय के सूचकों में सुधार हुआ।
  3. चीन ने कृषि क्षेत्र सुधार कार्यक्रम लागू किया, जिससे उसकी उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई।
  4. विकेन्द्रीयकृत नियोजन काफी लम्बे समय तक लागू रहा।
  5. व्यक्तिगत उत्पादक इकाइयों का आकार छोटा रखा गया। उपरोक्त सभी कारकों ने आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान प्रदान किया। चीन ने सभी सुधारात्मक उपाय पहले छोटे स्तर पर परखे, उसके बाद ही समष्टि स्तर पर उन्हें लागू किया।

प्रश्न 12.
भारत चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित विशेषताओं को तीन शीर्षकों के अन्तर्गत समूहित कीजिए –

  1. एक संतान का नियम
  2. निम्न प्रजनन दर
  3. नगरीयकरण का उच्च स्तर
  4. मिश्रित अर्थव्यवस्था
  5. अति उच्च प्रजनन दर
  6. भारी जनसंख्या
  7. जनसंख्या का अत्यधिक घनत्व
  8. विनिर्माण क्षेत्रक के कारण संवृद्धि, सेवा क्षेत्रक के कारण संवृद्धि

उत्तर:
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प्रश्न 13.
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण बताइए।
उत्तर:
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण हैं –

  1. कृषि संवृद्धि और खाद्यपूर्ति, तकनीकी परिवर्तन का संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित न होकर अच्छी फसल पर आधारित होना, तथा
  2. पाकिस्तान की विदेशी ऋणों पर निर्भरता की प्रवृत्ति।

प्रश्न 14.
कुछ विशेष मानव विकास संकेतकों के संदर्भ में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कुछ मानव विकास सूचकों की तुलना निम्नलिखित ढंग से है –

  1. कुछ मानव विकास सूचकों जैसे GDP, प्रति व्यक्ति आय आदि में चीन, भारत व पाकिस्तान से आगे है।
  2. निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. चीन में सबसे कम है। इसके बाद क्रमशः पाकिस्तान एवं भारत का स्थान है।
  3. शिशु मृत्यु दर, मातृ दर, पोषक तत्त्व न पाने वालों का प्रतिशत आदि चीन में सबसे कम है।
  4. स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता एवं पीने योग्य पानी प्राप्त करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत चीन में, भारत व पाकिस्तान से अच्छा है।
  5. पाकिस्तान में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. भारत से कम है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने योग्य पानी की उपलब्धता के बारे में पाकिस्तान की स्थिति भारत से बेहतर है।

उपरोक्त तथ्यों से यह कहा जा सकता है कि चीन, भारत व पाकिस्तान से मानव विकास सूचकों के मामलों में आगे चल रहा है। यह भी सत्य है कि कई सूचकों के मामले में पाकिस्तान, भारत से अच्छी स्थिति में है। तीनों देशों के मानव विकास सूचक निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं –
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प्रश्न 15.
पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गई संवृद्धि दर की प्रवृत्तियों पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर:
पिछले दो दशकों में भारत व चीन में संवृद्धि की प्रवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं। जैसे –

  1. दोनों देशों में कृषि क्षेत्र का GDP में योगदान घटा है।
  2. चीन ने. विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि दर हासिल करके उसे बरकरार बनाए रखा, जबकि भारत में इस क्षेत्र की संवृद्धि में गिरावट आयी है।
  3. भारत ने 1990 के पाद सेवा क्षेत्र में संवृद्धि को आगे बढ़ाया है, जबकि चीन में सेवा क्षेत्र का योगदान घटा है।
  4. चीन में आर्थिक संवृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र का अहम योगदान रहा है। भारत में आर्थिक संवृद्धि के लिए सेवा क्षेत्र का योगदान ज्यादा है।
    विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि की प्रवृत्तियाँ 1990 – 2003
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Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि क्या है?
उत्तर:
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2001-2006 ई. है।

प्रश्न 2.
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल लिखें।
उत्तर:
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल 2002-2007 ई है।

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प्रश्न 3.
किस दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान तीन देशों की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति आय समान थी?
उत्तर:
1980 ई. के दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति दर समान थी।

प्रश्न 4.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. कितना प्रतिशत बढ़ी है?
उत्तर:
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. लगभग 8 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है।

प्रश्न 5.
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से कितने लोगों की जानें गई थीं?
उत्तर:
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से 75,000 लोगों की जानें गई थीं।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित किन देशों में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है?

  1. भारत
  2. चीन, और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
भारत और पाकिस्तान में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है।

प्रश्न 7.
अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाई गई विकासात्मक प्रक्रियाओं को समझने की हमें क्यों कोशिश करनी चाहिए?
उत्तर:
क्योंकि ऐसा करने से हमें अपने पड़ोसी देशों की शक्तियों और कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।

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प्रश्न 8.
भारत और पाकिस्तान को कब स्वतंत्रता मिली?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान को 1947 ई. में स्वतंत्रता मिली।

प्रश्न 9.
चीनी गणराज्य की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
चीनी गणराज्य की स्थापना 1949 ई. में हुई?

प्रश्न 10.
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा कब की गई थी?
उत्तर:
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा 1951-56 में की गई थी।

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प्रश्न 11.
चीन ने कब अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की?
उत्तर:
चीन ने 1953 ई. में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की।

प्रश्न 12.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद से विकासशील देश अपने आस-पास के देशों की विकास प्रक्रियाओं और नीतियों को समझने के लिए उत्सुक हैं। क्यों?
उत्तर:
क्योंकि उन्हें केवल विकसित देशों से ही नहीं अपितु अपने जैसे विकासशील देशों में भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा रहा है।

प्रश्न 13.
भारत में नगरीय क्षेत्रों में कितने प्रतिशत लोग रहते हैं?
उत्तर:
भारत में नगरीय क्षेत्रों में 28 प्रतिशत लोग रहते हैं।

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प्रश्न 14.
विद्वानों का मानना है कि भारत, चीन एवं पाकिस्तान सहित अनेक विकासशील देशों में पुत्र को वरीयता देना, एक सामान्य बात है। क्या आप इस बात को अपने परिवार या पड़ोस में देखते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम परिवार और अपने पड़ोस में यह बात देखते हैं।

प्रश्न 15.
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर कितना प्रतिशत थी?
उत्तर:
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर क्रमशः 58%, 97% और 3.6% थी।

प्रश्न 16.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण लिखों।
उत्तर:
राजनैतिक अस्थिरता, प्रेषणों और विदेशी सहायता पर बहुत ही अधिक निर्भरता और कृषि क्षेत्रक का अस्थिर निष्पादन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण हैं।

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प्रश्न 17.
माओ ने कब महान् सांस्कृतिक क्रांति शुरू की?
उत्तर:
माओ ने 1965 में महान् सहारा सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।

प्रश्न 18.
जी. एल. एफ. अभियान में कौन-कौन सी समस्याएँ आईं?
उत्तर:
जी. एल. एफ. अभियान में कई समस्याएँ आई जैसे-भयंकर सूखे का आना जिसने चीन में तबाही मचा दी और उसमें 30 मिलियन लोग मारे गए। चीन और रूस के बीच संघर्ष हुआ और इस संघर्ष में रूस ने अपने विशेषज्ञों को वापस बुला लिया जिन्हें उद्योगीकरण प्रक्रिया के दौरान सहायता करने भेजा गया था।

प्रश्न 19.
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में किन-किन क्षेत्रकों में सुधार किए गए?
उत्तर:
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में कृषि, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए।

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प्रश्न 20.
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का अर्थ यह है कि कीमतों की निर्धारण दो प्रकार से किया जाता था। किसानों और औद्योगिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों के आधार पर आगातों और निर्गतों को निर्धारित मात्रा में खरीदेंगे और बचेंगे और शेष वस्तुएँ बाजार कीमतों पर खरीदी और बेची जाती थीं।

प्रश्न 21.
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए क्या किया गया?
उत्तर:
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किए गए।

प्रश्न 22.
पाकिस्तान में किस प्रकार की अर्थव्यवस्था अपनाई गई है?
उत्तर:
पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है।

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प्रश्न 23.
निम्नलिखित देश में से किस देश की जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है?

  1. भारत
  2. चीन और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
2. चीन और

प्रश्न 24.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6, 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।

प्रश्न 25.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्या थी?
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्रमशः 3.0, 1.8 तथा 5.1 थी।

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प्रश्न 26.
निम्नलिखित देशों में से किस देश में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि सबसे अधिक है और वह कितनी है?
उत्तर:
पाकिस्तान में जनसंख्या की वार्षिक संवृद्धि दर सबसे अधिक है। यह संवृद्धि दर 2.5 है।

प्रश्न 27.
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात किस लिंग (पुरुष महिला) के पक्ष में कम था?
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में कम था।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें –

  1. आयात प्रतिस्थापन
  2. आसियान
  3. जन्म के समय जीवन प्रत्यशा
  4. जी-8
  5. जी-20
  6. मातृत्व (प्रसव) मृत्यु दर
  7. मृत्यु दर
  8. यूरोपियन संघ
  9. सार्क

उत्तर:
1. आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution):
सरकार की आर्थिक विकास की ऐसी नीति जिसमें आयात की जा रही वस्तुओं का स्थान देश की स्वनिर्मित वस्तुएँ ले लेती हैं। इस नीति में आयात नियंत्रण, आयात शुल्क तथा अन्य नियंत्रणों को अपनाया जाता है। इस नीति के ध्येय की प्राप्ति के लिए आन्तरिक उद्योगों को आत्मनिर्भरता की प्राप्ति तथा रोजगार संवर्धन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

2. आसियान (Association of South East Asian Nations):
इसका पूरा नाम दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन है। थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपीन्स, बूनी, जेरुस्लम, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, वियतनाम आदिश इस संगठन के सदस्य हैं।

3. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth):
जन्म के समय विद्यमान आयु-विशेष मृत्युदर के पैटर्न के जीवन पर स्थिर रहने पर उस नवजात शिशु की जीवित रहने की प्रत्याशा (वर्षों में) होती है।

4. जी-8 (G – 8):
यह आठ देशों का गुट है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, उत्तर आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी महासंघ इसके सदस्य हैं। यहाँ राज्याध्यक्षों और अन्तर्राष्ट्रीय अधिकारियों का वार्षिक आर्थिक, राजनैतिक शिखर सम्मेलन होता है। वहाँ अनेक बैठकें और नीतिगत अनुसंधान होते रहते हैं। गुट की अध्यक्षता की अवधि एक वर्ष है जो बारी-बारी से सदस्यों को प्रदान की जाती है। वर्ष 2006 का अध्यक्ष रूस है।

5. जी-20 (G – 20):
इस संगठन के सदस्य अर्जेंटीना, बोलिविया, ब्राजील, चिल्ली, चीन, क्यूबा, मिश्र, ग्वेटेमाला, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाईजीरिया, पाकिस्तान, पराग्वे, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, तंजानिया, वेनेजुएला तथा जिम्बाबे हैं। इसका उद्देश्य विश्व व्यापार संगठन में व्यापार और कृषि से जुड़े प्रश्नों पर ध्यान दिलवाना है।

6. मातृत्व मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate):
यह प्रसव काल में माताओं की मृत्यु और सजीव जन्मों का अनुपात है। अनुपात की गणना एक वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

7. मृत्यु दर (Mortality Rate):
यह शब्द मृत्यु दर पर आधारित है। इसे वर्ष भर में प्रति हजार जनसंख्या में हुई मृत्यु की संख्याओं द्वारा अभिव्यक्ति किया जाता है। यह रुग्णता दर से भिन्न है।

8. यूरोपियन संघ (European Union):
यह 25 स्वतंत्र देशों द्वारा गठित महासंघ है। इसके सदस्य देश हैं-आस्ट्रिया, बेल्जियम, साईप्रस, चेक गणराज्य, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लीबिया, लिथुआनिया, लक्सेवर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडेन, युनाइटेड किंगडम, माल्टा, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया और स्लोवोनिया। इस संगठन का उद्देश्य यूरोप महाद्वीप से राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।

9. सार्क (South Asia Asociation of Regional Corporation):
इसका पूरा नाम दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ है। यह आठ देशों का संघ है। ये देश हैं भारत, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान। सार्क दक्षिण एशियाई जनसमुदायों को मैत्री, विश्वास और सूझ-बूझ के आधार पर मिल-जुल कर कार्य करने का मंच प्रदान करता है। इसका ध्येय सदस्य देशों में आर्थिक तथा सामाजिक विकास का संवर्धन करना है।

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प्रश्न 2.
आजकल विभिन्न देशों में अपने पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने की जिज्ञासा क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
आजकल विभिन्न देशों में पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने एवं समझने की उत्सुकता बढ़ रही है क्योंकि इसके जरिए वे अपनी शक्तियों एवं कमजोरियों को जानने एवं समझने के साथ-साथ पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं की शक्तियों एवं कमजोरियों को भली-भाँति समझ सकते हैं। वे एक-दूसरे की आर्थिक नीतियों की तुलना कर सकते हैं एवं उन नीतियों के परिणामों को भी भली-भाँति जान सकते हैं। तुलना के माध्यम से राष्ट्र अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए सुरक्षात्मक एवं ठीक उपाय अपना सकते हैं।

प्रश्न 3.
चीन द्वारा ग्रेट लीप फोरवर्ड आंदोलन को वापिस लेना आवश्यक क्यों हो गया था? इसको किस कार्यक्रम द्वारा प्रतिस्थापित किया था?
उत्तर:
ग्रेट लीप फोरवर्ड कार्यक्रम वर्ष 1958 में चीन में आरम्भ किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद देश में बड़े पर औद्योगीकरण करना था। लेकिन इस कार्यक्रम को निम्नलिखित कई समस्याओं से गुजरना पड़ा –
1. एक भयंकर ‘सूखा काल’ का सामना करना पड़ा, जिसने 30 मिलियन लोगों की जान लेकर चीन में कोहराम मचा दिया था।

2. रूस के साथ मतभेद होने पर उसने चीन से अपने उन विशिष्ट लोगों को वापिस बुला लिया जो औद्योगीकरण करने के लिए मदद हेतु भेजे गए थे। उपरोक्त समस्याओं के मद्देनजर Great Leap Forward Campaign को हटाकर Great Proletarian Cultural Revolution. कार्यक्रम को लागू किया गया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत व्यवसायों के जानकार व्यक्तियों एवं छात्रों को देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया।

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प्रश्न 4.
पाकिस्तान में नए निवेश के लिए तैयार माहौल के लिए उत्तरदायी कारक बताइए।
उत्तर:
नए निवेश हेतु कई कारक उत्तरदायी थे। उनमें से कुछ निम्नांकित हैं –

  1. 1970 व 1980 के दशकों में ज्यादा जरूरी क्षेत्रों का विकेन्द्रीकरण कर दिया गया था।
  2. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया।
  3. पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।
  4. पाकिस्तान से ढेर सारे लोग मध्य एशिया की ओर प्रवास कर गए।
  5. पाकिस्तान सरकार ने निजी निवेशकों को प्रोत्साहन प्रदान किया।

प्रश्न 5.
चीन, भारत एवं पाकिस्तान की जनसंख्याओं के बारे में बताएँ।
उत्तर:
चीन, भारत एवं पाकिस्तान तीनों एशिया महाद्वीप के देश हैं। येद तीनों ही अर्थव्यवस्थाएँ विकासशील हैं। विश्वभर में चीन सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। पाकिस्तान की जनसंख्या का आकार छोटा है। इस दुनिया में रहने वाले छः व्यक्तियों में एक चीनी है तो दूसरा भारतीय है। पाकिस्तान की जनसंख्या, चीन अथवा भारत की जनसंख्या का आठवाँ भाग है। जनसंख्या आकार के आँकड़े नीचे लिखे गए हैं –
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प्रश्न 6.
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्य-बल की तुलना, उनके सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के साथ करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों की अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल का अनुपात उद्योग तथा सेवा क्षेत्रों की तुलना में ऊँचा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे कम एवं भारत में इस क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। भारत व पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र का उनके संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में अनुपात एक समान है। लेकिन चीन में कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान सबसे कम है। तीनों अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं उनके सकल घरेलू उत्पादन में योगदान से संबंधित आँकड़े निम्न प्रकार से हैं –
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प्रश्न 7.
भारत, चीन तथा पाकिस्तान के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबलों के प्रतिशत एवं उनका संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में योगदान की तुलना करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत इनके कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल के प्रतिशत से कम है। चीन के मामले में सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र का योगदान, सकल घरेलू उत्पाद में भारत एवं पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा है। पाकिस्तान में उद्योग क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की स.घ.उ. में योगदान की दर एक समान है। भारत में उद्योग क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान कृषि क्षेत्र में थोड़ा अधिक है। उक्त तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के आँकड़े निम्नलिखित तालिका में दर्शाए गए हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव img 8

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प्रश्न 8.
स्वातंत्र्य सूचक को क्या कहा जा सकता है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकों को पर्याप्त बनाने हेतु स्वातंत्र्य सूचकों का समावेशन अति आवश्यक है। इसे सामाजिक एवं राजनैतिक निर्णयों में भागीदारी का सूचक भी कहते हैं। स्वातंत्र्य सूचक इस बात का भी सूचक है कि संविधान वहाँ के लोगों को किस हद तक संरक्षण/सुरक्षा का अधिकार देता है। दूसरे शब्दों में, स्वातंत्र्य सूचक न्याय एवं कानून स्वतंत्रता की भी माप है। अतः स्वातंत्र्य सूचकों के.समावेशन के अभाव में मानव विकास सूचक अपूर्ण कहे जा सकते हैं अथवा इनकी उपयोगिता कम हो जाती है।

प्रश्न 9.
चीन में माओवादी विकास की अवधारणा के बारे में नए नेतृत्व के क्या विचार थे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
1978 तक चीन में आर्थिक विकास की स्थिति भारत की तुलना में बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नए नेतृत्व ने विचार किया कि आत्मनिर्भरता, विकेन्द्रीयकरण, विदेशी तकनीक की चमक आदि असफल रहे हैं। हालांकि चीन ने 1950 के दशक के मध्य में कृषि क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू कर दिए थे, इसके बावजूद भी 1978 तक प्रति व्यक्ति आय का स्तर 1950 जितना ही रहा।

अत: नए नेतृत्व ने 1978 में संरचनात्मक आर्थिक सुधारों को लागू कर दिया। चीन में सुधार कार्यक्रमों का आरम्भ बिना किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के किया गया था। विश्व बैंक अथवा मुद्रा कोष के दिशा-निर्देशों के बिना ही स्वेच्छापूर्वक सुधार कार्यक्रम शुरू कर दिया गया। इस सुधार कार्यक्रम में विकेन्द्रीयकरण, आधुनीकरण, उदारीकरण एवं विदेशी निवेशकों के लिए प्रोत्साहन आदि शामिल थे।

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प्रश्न 10.
अगस्त 2004-2005 के लिए पाकिस्तान सरकार की कार्य निष्यादन क्षमता के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अगस्त 2004-2005 वर्ष के लिए पाकिस्तान सरकार के कार्य निष्पादन का ब्यौरा निम्न प्रकार से है –

  1. तीन सतत वर्षों के लिए पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद की बढ़ोतरी दर 8 प्र.श. हो गई थी।
  2. इस संकरात्मक परिवर्तन के लिए तीनों उत्पादक क्षेत्रों कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र का योगदान था।
  3. अर्थव्यवस्था को उच्च मुद्रा स्फीति एवं निजीकरण का सामना करना पड़ा।
  4. सरकार ने ऐसे कई सामाजिक कार्यों पर खर्च किया, जिनसे गरीबी दूर हो सकती थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन व पाकिस्तान के विकास अनुभवों से हमें क्या-क्या सीख मिलती है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
चीन व पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं के विकास चुनाव से प्राप्त सीख का ब्यौरा निम्नवत है –
1. वर्ष 1978 तक चीन एवं पाकिस्तान में विकास का स्तर भारत जैसा ही था।

2. चीन में राजनैतिक स्वतंत्रता का अभाव पाया जाता है। आज भी मानवता से जुड़े मुद्दे वहाँ के लिए विचारणीय हैं। पिछले तीन दशकों में राजनैतिक दृष्टिकोण में बदलाव किए बिना चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था में ‘बाजार व्यवस्था’ का विकास किया है। उच्च आर्थिक संवृद्धि के साथ चीन ने निर्धनता उन्मूलन में सफलता हासिल कर ली है।

सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादक इकाइयों का निजीकरण किए बिना भी चीन ने ऐसी बाजार व्यवस्था विकसित की है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक एवं आर्थिक विकास के अवसरों में बढ़ोतरी हुई है। वहाँ भू-स्वामित्व सामूहिक आधार पर है, लेकिन किसानों को खेती करने एवं चुकाने के उपरांत कृषि की पूरी आय को अपने पास रखने का अधिकार दे रखा है। चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग सामाजिक सुरक्षा के लिए आश्वस्त हैं। चीन में मानव विकास सूचक सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

3. भारत की भाँति पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली है। वहाँ सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों का सहअस्तित्व कायम है। वहाँ की राजनीति में सेना का प्रभुत्व है। पाकिस्तान के निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम में अस्थायित्व देखने को मिलता है।

विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दबाव में 1988 में संरचनात्मक सुधार कार्यक्रम पेश किए गए। इन सुधार कार्यक्रमों का मानव विकास सूचकों पर बुरा प्रभाव पड़ा। राजनैतिक अस्थिरता, विदेशों पर अधिक निर्भरता, कृषि क्षेत्र की लचर कार्य निष्पादन क्षमता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ज्यादा अच्छा नहीं कर पायी। हाल के कुछ वर्षों में वहाँ सकल घरेलू उत्पाद की उच्च वृद्धि दर से हालात अच्छे होने लगे हैं।

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प्रश्न 2.
आर्थिक एवं मानव विकास में किस प्रकार चीन, भारत एवं पाकिस्तान से आगे निकल गया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:

  1. शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्रों में आधारित संरचना का विकास, भू-सुधार, दीर्घकाल तक विकेन्द्रीयकृत नियोजन छोटे आकार की उत्पादन इकाइयों आदि कारकों ने चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अधिक अवसर प्रदान किए, जिससे वह भारत व पाकिस्तान से आगे निकल गया।
  2. आजादी प्राप्ति के आरम्भ से ही ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बड़े पैमाने पर किया गया। जबकि भारत व पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत अच्छा विकास नहीं किया गया।
  3. चीन में कृषि क्षेत्र में Commune व्यवस्था को लागू किया। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में आर्थिक समानता को बढ़ावा मिल गया।
  4. प्रत्येक सुधार कार्य पहले छोटे भाग पर करके परखा गया। इसके बाद इसको आगे बढ़ाया गया। भारत व पाकिस्तान में समष्टि आधार पर ही सुधार कार्यक्रम लागू किए गए।
  5. चीन की अर्थव्यवस्था में परंपरागत ढंग से उत्पादक क्षेत्रों में रूपान्तरण किया गया। कृषि क्षेत्र से उद्योग क्षेत्र, इसके बाद सेवा क्षेत्र का विकास किया गया लेकिन भारत ने प्रत्यक्ष रूप में कृषि क्षेत्र से सेवा क्षेत्र में छलांग लगा दी।
  6. राजनैतिक विचारधारा बदले बिना भी चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग किया।
  7. चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग अतिरिक्त आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अवसर विकसित करने के लिए किया।
  8. चीन ने भारत व पाकिस्तान से काफी पहले संरचनात्मक सुधार कार्यक्रमों को लागू कर दिया था, वो भी किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के बिना व जबकि भारत व पाकिस्तान ने विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के आह्वान पर आर्थिक सुधार लागू किए हैं।
  9. उपरोक्त बातों के कारण चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास सूचकों का स्तर भारत व पाकिस्तान से ज्यादा है।

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प्रश्न 3.
चीन में लाग किए गए आर्थिक सुधारों के चरणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
चीन की अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को विभिन्न चरणों में लागू किया गया है। सर्वप्रथम चीन के सुधार कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में लागू किए गए। इस क्षेत्र में Commune व्यवस्था लागू की गई। भू-आवंटन केवल प्रयोग के लिए किया गया। स्वामित्व के मामले में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। किसी को कर चुकाने के बाद कृषि क्षेत्र की पूरी आय को रखने की आजादी प्रदान की गई। इसके उपरांत सुधार कार्यक्रमों को उद्योग क्षेत्र में लागू किया गया।

स्थानीय सामूहिक स्वामित्व के आधार पर गाँवों एवं शहरों में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करके उन्हें उत्पादन करने छूट प्रदान की गई और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को इन इकाइयों के साथ प्रतियोगिता करनी पड़ती। चीन में दोहरी कीमत प्रणाली अपनायी गई है। किसानों एवं औद्योगिक इकाइयों को आगतों की निश्चित मात्रा का क्रय एवं उत्पाद की निश्चित मात्रा का विक्रय सरकार द्वारा तय कीमत पर करना पड़ता है। शेष उत्पादन को बाजार की कीमतों पर बेचा जा सकता है। अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए गए हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पाकिस्तान स्वतंत्र देश बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1947 में

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प्रश्न 2.
चीन स्वतंत्र राष्ट्र बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1949 में

प्रश्न 3.
पाकिस्तान ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1956 में

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प्रश्न 4.
चीन ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 1953 में

प्रश्न 5.
पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार शुरू किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 6.
चीन ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1978 में

प्रश्न 7.
भारत ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 8.
किस देश की जनसंख्या सबसे ज्यादा है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

प्रश्न 9.
किस देश का भौगोलिक क्षेत्र सबसे अधिक है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

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प्रश्न 10.
वह सूचक कौन-सा है जिसको ध्यान में रखना आवश्यक है –
(a) स्वतंत्रता सूचक
(b) स्वास्थ्य सूचक
(c) शिक्षा सूचक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वतंत्रता सूचक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पर्यावरण को कैसे परिभाषित किया जा सकता है? अथवा, पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण को समस्त भूमण्डलीय विरासत और सभी संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमे वे सभी जैविक और अजैविक तत्त्व आते हैं जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 2.
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है तो क्या होता है?
उत्तर:
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनः जन्म की दर बढ़ जाती है तो पर्यावरण जीव पोषण का अपना तीसरा ओर महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 3.
निम्न को नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें –
(क) वृक्ष
(ख) मछली
(ग) पैट्रोलियम
(घ) कायेला
(ङ) लौह अयस्क
(च) जल
उत्तर:
1. नवीकरणीय संसाधन:
वृक्ष, मछली, तथा जल नवीकरणीय संसाधन हैं

2. गैर नवीकरणीय संसाधन:
पेट्रोलियम, कोयला तथा लौह अयस्क गैर नवीकरणीय संसाधन हैं।

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प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए आजकल विश्व के सामने ……… और ……….. की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्याएँ हैं।
उत्तर:
आजकल विश्व के सामने तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानक की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्यायें हैं।

प्रश्न 5.
निम्न कारक भारत में पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? ये कारक सरकार के समझ कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं?

  1. बढ़ती जनसंख्या
  2. वायु प्रदूषण
  3. जल प्रदूषण
  4. सम्पन्न उपयोग मानक
  5. निरक्षरता
  6. औद्योगीकरण
  7. वन क्षेत्र में कमी
  8. अवैध वन कटाई
  9. वैश्विक उष्णता

उत्तर:

  1. बढ़ती जनसंख्या से आवास, स्वास्थ्य, शुद्ध वायु, शुद्ध जल आदि की प्राप्ति में कठिनाइयाँ आती हैं –
    सरकार के सामने बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है।
  2. वायु प्रदूषण से कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम के लिए काफी व्यय करना पड़ता है।
  3. जल प्रदूषण से भी कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे-हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम काफी व्यय करना पड़ता है।
  4. औद्योगीकरण से शहरीकरण को बढ़ावा मिलता है। शहरों में गंदी बस्तियों का निर्माण होता है। कीमतों में वृद्धि होती है।
  5. अवैध वन कटाई से वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बाढ़ आने लगती है। झरने आदि सूख जाते हैं। जलवायु में ग्रीष्मता आ जाती है। वन्य जीव कम हो जाते हैं आदि। अन्य कारकों का दुष्परिणाम इसी प्रकार लिखा जा सकता है।

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प्रश्न 6.
पर्यावरण के क्या कार्य है?
उत्तर:
पर्यावरण के निम्नलिखित कार्य होते हैं –

  1. पर्यावरण नवीनीकरण और गैर-नवीनीकरणीय संसाधनों की पूर्ति करता है।
  2. यह अवशेष को समाहित करता है।
  3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है।
  4. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य।

प्रश्न 7.
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।
उत्तर:
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी कारक –

  1. वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि
  2. अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे के निष्कर्षण
  3. खेती-बाड़ी
  4. वन भूमि का अतिक्रमण
  5. वनों में आग और अत्यधिक चराई
  6. कृषि रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे रासायनिक खाद और कीटनाशक

प्रश्न 8.
समझायें कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों का अवसर लागत उच्च क्यों होती है?
उत्तर:
अवसर लागत का अधिक होना (High Opportunity Cost):
जब पर्यावरण दूषित हो जाता है तो विकास के क्रम में नदियों और अन्य जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं और सूख जाते हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन जाती है। इसके साथ नवीनीकरण और गैर-नवीकरण संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक संसाधन लुप्त हो गए हैं और हम नए संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसन्धान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए मजबूर हैं।

वायु तथा जल की गुणवत्ता में कमी आई है। दूषित जल तथा वाय में साँस और जल संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति की ओर गम्भीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करना पड़ा। इस प्रकार हम देखते हैं कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत अधिक होती है।

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प्रश्न 9.
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा रहे हैं –
1. ग्रामीण क्षेत्रों में एल.पी.जी., गोबर गैस:
गाँवों में सहायिकी द्वारा कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त गोबर संयंत्र आसन ऋण और सहायिकी देकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) के ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति प्रायः तीव्र होती है वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्तकी जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता।

4. फोटो सेल द्वारा सौर शक्ति:
भारत में सूर्य किरण के माध्यम से सौर ऊर्जा भारी मात्रा में उपलब्ध है। हम इसका प्रयोग विभिन्न तरीकों से करते हैं। इससे हम कपड़े, अनाज तथा अन्य कृषि उत्पाद सुखाते हैं। सर्दी कमें सूर्य किरण का उपयोग हम गरमाहट के लिए करते हैं। अब फोटो वोल्टिक सेलों की सहायता से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

5. लघु जलीय प्लांट:
लघु जलीय प्लांट पहाड़ी इलाकों में लगाकर बिजली पैदा की जा रही है जिसका प्रयोग स्तर पर किया जा रहा है। ये प्लांट (प्रखर प्लांट) पर्यावरण के लिए हितकर हैं।

6. पारम्परिक ज्ञान व व्यवहार:
पारम्परिक रूप से भारतीय पर्यावरण के निकट आ रहे हैं। वे पर्यावरण के एक अंग के रूप में रहे हैं न कि उसके नियंत्रक के रूप में। आजकल हम अपनी पारम्परिक प्रणालियों से दूर हो गए हैं जिससे हमारे पर्यावरण और हमारी ग्रामीण विरासत को भारी हानि पहुँची है। अब हम पारम्परिक ज्ञान की ओर ध्यान दें रहे हैं। आजकल सभी सौन्दर्य उत्पाद जैसे बालों के लिए तेल, टूथपेस्ट, शरीर के लिए लोशन चेहरे की क्रीम इत्यादि हर्बल उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं अपितु उनसे कोई हानि नहीं होती।

7. जैविक कंपोस्ट खाद:
पिछले पाँच दशकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में हमने जैविक कंपोस्ट खाद की अवहेलना की और पूरी तरह रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे। इनसे हमें कई हानियाँ हुईं। भूतल जल प्रणाली दूषित हो गई। अतः अब जैविक कंपोस्ट खाद का प्रयोग किया जाने लगा है। देश के कुछ भागों में जानवर इसलिए पाले जा रहे हैं जिससे वे गोबर दे सकें।

8. जैविक कीट नियन्त्रण:
हरित क्रांति के पश्चात् अधिक उत्पादन के लिए देश में रासायनिक कीटनाशक का अधिक से अधिक प्रयोग होने लगा। इससे कई प्रतिकूल प्रभाव पड़े। भोज्य पदार्थ दूषित हो गए। दूध, माँस और मछलियाँ दूषित पाई गईं। मृदा जलाशय यहाँ तक की भूतल जल भी कीटनाशकों के कारण प्रदूषित हो गए।

इस चुनौती का सामना करने के लिए अब बेहतर नियन्त्रक विधियों को बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें एक उपाय पौधों के उत्पाद पर आधारित कीटनाशकों का उपयोग है। नीम के पेड़ इसमें काफी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जानवर और पक्षियों के बारे में जागरूकता बढ़ी है जो कीट नियन्त्रण में सहायक हैं।

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प्रश्न 10.
“भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है।” इस कथन के समर्थन में तर्क दें।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता (Excessive natural resources in India) इस विषय में कोई दो मत नहीं हैं कि प्रकृति भारत पर बहुत ही कृपालु है। प्रकृति ने भारत की गोद को प्राकृतिक संसाधनों से भर रखा है। भारत की भूमि उच्च गुणवत्ता वाली है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। यहाँ हरे-भरे वन हैं। यहाँ की मिट्टी काफी उपजाऊ है। यहाँ पर कई प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। देश में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% उपलब्ध है। हमारे देश के विभिन्न भागों में बॉक्साइट, ताँबा, हीरा, सीसा, भूरा कोयला, मैंगनीज जिंक, यूरेनियम इत्यादि भी मिलते हैं। हिन्द महासागर का विस्तृत क्षेत्र है। यहाँ पर पहाड़ों की श्रृंखलाएँ हैं।

प्रश्न 11.
क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर:
हाँ, पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है। इसका कारण यह है कि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं, में पर्यावरण संसाधनों की माँग पूर्ति से कम थी। प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीलर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दर से थी। इसलिए पर्यावरण उत्पन्न नहीं हुई थी परन्तु जनसंख्या विस्फोट और जनसंख्या की बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औद्योगिक क्रान्ति के आगमन से स्थिति बदल गई है। परिणामस्वरूप उत्पादन और उपभोग के लिए संसाधनों की माँग संसाधनों की पुनः सृजन की दर से बहुत अधिक हो गई है। यह प्रवृत्ति आज भी जारी है। अब हमारे सामने पर्यावरण संसाधनों और सेवाओं की माँग अधिक है परन्तु उनकी पूर्ति सीमित है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है।

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प्रश्न 12.
इनके दो उदाहरण दें –

  1. पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग
  2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग

उत्तर:
1. पर्यावरणीय संसाधनों का अतिप्रयोग:
(क) कोयला
(ख) पेट्रोलियम

2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग:
(क) जल
(ख) पेट्रोलियम

प्रश्न 13.
पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण चार आवश्यक क्रिया करता है –
1. यह संसाधनों की पूर्ति करता है, जिसमें नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधन सम्मिलित होते हैं। नवीकरण-योग्य संसाधन वे हैं जिनका उपयोग संसाधन की पूर्ति निरंतर बनी रहती है। नवीकरणीय संसाधनों के उदाहरणों में वनों में पेड़ और समुद्र में मछलियाँ हैं। दूसरी ओर, गैर-नवीकरण योग्य संसाधन वे हैं जो कि निष्कर्षण और उपयोग करने पर समाप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन।

2. यह अवशेष को समाहित कर लेता है।

3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य। पर्यावरण इन कार्यों को बिना किसी व्यवधान के तभी कर सकता है, जब तक कि ये कार्य उसको धारण क्षमता की सीमा में है।

4. इसका अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इनके पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है। जब ऐसा नहीं होता है तो पर्यावरण संकट उत्पन्न होता है। पूरे विश्व में आज यही स्थिति है।

विकासशील देशों में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है। अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं सृजित अवशेष पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है।

अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं और सृजित अवशेष पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के बाहर हैं। अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है। इसके कारण ही आज हम पर्यावरण संकट की दहलीज पर खड़े हैं।

विकास के क्रम में नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषितं हुए हैं और सूख गए हैं इसने जल को एक आर्थिक वस्तु बना दिया है। इसके साथ ही नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक महत्त्वपूर्ण संसाधन विलुप्त हे गए हैं और हम नये संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसंधान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए तत्पर हैं।

इसके साथ जुड़ी है पर्यावरण अपक्षय की गुणवत्ता की स्वास्थ्य लागत। जल और वायु में गुणवत्ता की गिरावट (भारत में 70 प्रतिशत जल प्रदूषित है) ये साँस और जल-संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक पर्यावरण मुद्दों जै, वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करन पड़ा। अत: यह स्पष्ट है कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत बहुत अधिक है।

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प्रश्न 14.
पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति माँग के उत्क्रमण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण के कई कार्य हैं। उनमें एक कार्य संसाधनों का उपभोग करती है। बढ़ती हुई जनसंख्या तथा विकसित देशों के समृद्ध उपभोग से संसाधनों की माँग में वृद्धि होती जाती है और बढ़ते-बढ़ते यह संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है। जब संसाधनों की माँग संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है तो ऐसी स्थिति को पर्यावरण की पूर्ति माँग अतिक्रम कहते हैं। पूर्ति माँग अतिक्रमण की स्थिति में पर्यावरण जीवन पोषण का अपना तीसरा और महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल हो जाती है और इससे पर्यावरण संकट पैदा होता है। पूरे विश्व में आज भी यही स्थिति है।

प्रश्न 15.
वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।
उत्तर:
वर्तमान पर्यावरण संकट-पर्यावरण संकट का नवीन परिकल्पना है। विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट नहीं था। उस समय पर्यावरण संसाधनों की माँग और सेवाएँ उनकी पूर्ति से बहुत कम थी अर्थात् प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीतर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दरे से कम थी।

अत: पर्यावरण संकट नहीं था, परन्तु आज विपरीत परिस्थिति हो गई है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है। वायु तथा जल प्रदूषित हो गए हैं। नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषित और सूख गए हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन गई है। अवसर लागत में वृद्धि हो गई है। वायु प्रदूषण तथा ध्वनि के फलस्वरूप अनेक बीमारियों ने जन्म लिया है। लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

प्रश्न 16.
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो यह निर्धनता जनित है और दूसरे जीवन स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?
उत्तर:
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभाव-भारत खनिज पदार्थों के मामलों में एक धनी देश है। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुरता में पाए जाते हैं। यहाँ भूमि की गुणवत्ता उच्च है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। खेती के लिए काफी भूमि है परन्तु भारत में विकास गतिविधियों के फलस्वरूप तथा जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होने पर प्राकृतिक संसाधनों पर बदाव पड़ रहा है।

भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा में हो रहा है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि चराई, मानव बस्तियों और उद्योगों के प्रतिस्पर्धा उपभागों से देश के निश्चित भू-संसाधनों पर भारी प्रभाव पड़ा है। देश में प्रति व्यक्ति जंगल भूमि केवल 0.08 हेक्टेयर है जबकि आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह यह संख्या 0.47 हेक्टेयर होनी चाहिए।

भारत में शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण बहुत अधिक है। भारत सकार के अनुसार प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलयिन टन पोषक तत्त्वों की हानि होती है। नदियाँ और उपनदियाँ शीघ्र सूख रही हैं और वर्षा की मात्रा भी अनियमित हो गई हैं। ऐसी बीमारियाँ और कीटाणु जो पहले नहीं थे, फसलों को हानि पहुँचा रहे हैं। यह कथन बिल्कुल सत्य है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो निर्धनता जनित है और दूसरे स्तर में सम्पन्नता का कारण भी है।

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प्रश्न 17.
धारणीय विकास क्या है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से होता है जिसमें वर्तमान जनसंख्यया की आपूर्ति तो होती है, किन्तु भावी पीढ़ी (Generation) के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों को पोषण होता है। धारणीय विकास की अवधारणा वर्तमान पीढ़ी तथा भावी दोनों के हितों की ओर ध्यान देती है।

धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करें तथा भावी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे। धारणीय विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि की जानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रयोग करना चाहिए। पर्यावरण को शुद्ध रखना चाहिए और अर्थव्यवस्था को प्रदूषण से बचना चाहिए।

प्रश्न 18.
अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।
उत्तर:
1. गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतो का प्रयोग-गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के अन्तर्गत हम गोबर गैस प्लांट का प्रयोग कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रायः लकड़ी उपले और अन्य जैविक पदार्थों का प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। इससे वन विनाश, हरित-क्षेत्र में कमी, मवेशियों केक गोबर का अपव्यय और वायु प्रदूषण जैसे अनेक प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके अतिरिक्त गोबर गैस संयंत्र आसान ऋण देकर उपलब्ध कराये जा रहे है। जहाँ एक तरल पेट्रोलियम गैस का संबंध है, यह एक स्वच्छ ईंधन है जो कि प्रदूषण को काफी हद तक कम करता है। इसमें ऊर्जा का अपव्यय भी न्यूनतम होता है। गोबर गैस संयंत्र को चलाने के लिए गोबर को संयत्र में डाला जाता है और उससे गैस का उत्पादन होता है, जिसका ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। जो बच जाता है, वह एक बहुत की अच्छा जैविक उर्वरक और मृदा अनुकूलक है।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्चदाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्चदाब प्रकृतिक गैस (CNG) को ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति आमतौर पर तीव्र होती है, वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्त की जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं डालता। हवा के साथ-साथ टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा होती है।

4. लघु जलीय प्लांट:
पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग सभी जगहों में झरने मिलते हैं। इन झरनों में से अधिकांश स्थायी होते हैं। मिनिहाइल प्लांट इन झरनों की ऊर्जा से छोटी टरबाइन चलाते हैं। टरबाइन से बिजली का उत्पादन होता है, जिसका प्रयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। इस प्रकार के पावर प्लांट पर्यावरण के लिए हितकर होते हैं, क्योंकि जहाँ वे लगाए जाते हैं वहाँ भू-उपयोग की प्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं करते। इसका यह भी अर्थ है कि ऐसे प्लांटों के उपयोग से बड़े-बड़े संचरण टावर (Tansmission tower) और तारों की इसमें जरूरत नहीं होती है और संचरण की हानि को रोका जा सकता है।

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प्रश्न 19.
धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।
उत्तर:
धारणीय विकास की परिभाषा देते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन में कहा गया है कि धारणीय विकास ऐसा है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता बिना पूरा करे। इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि हमें ऐसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकतायें तो पूरी हों परन्तु भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता चाहिए। वर्तमान भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के पास प्रचुर मात्रा में संसाधन होने चाहिए।

हमें ऐसे विकास की आवश्यकता है जो भावी पीढ़ियों को जीवन की संभावित औसत गुणवत्ता प्रदान करे जो कम से कम वर्तमान पीढ़ी के द्वारा उपभोग की गई सुविधाओं के बराबर हों। ब्रुटलैण्ड कमीशन ने भावी पीढ़ी को एक व्यवस्थित भूमण्डल प्रदान करें। दूसरे शब्दों में वर्तमान पीढ़ी की आगामी पीढ़ी द्वारा एक बेहतर पर्यावरण उत्तराधिकार के रूप में सौंपा जाना चाहिए। कम से कम हमें आगामी पीढ़ी के जीवन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली परिसम्पत्तियों का भण्डार छोड़ना चाहिए जो कि हमें उत्तराधिकारी के रूप में प्राप्त हुआ है।

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संसाधनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
संसाधनों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. नवीनीकरणीय योग्य संसाधन और
  2. गैर नवीकरणीय योग्य संसाधन

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प्रश्न 2.
नवीनीकरणीय योग्य संसाधन किन्हें कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
नवीकरणीय योग्य संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका उपयोग संसाधन के क्षेत्र में समाप्त होने की आशंका के बिना किया जा सकता है अर्थात् संसाधनों की आपूर्ति निरन्तर बनी रहती है। जैसे-वन, जल, सूर्य का प्रकाश आदि।

प्रश्न 3.
गैर नवीकरणीय संसाधन किन्हें कहते हैं? उदारहण दें।
उत्तर:
गैर:
नवीकरणीय संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जो कि निष्कर्षण और उपभोग में समाप्त हो जाते हैं। जैसे-जैसे इन संसाधनों का प्रयोग किया जाता है, वैसे-वैसे इनके भण्डार कम होते जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन आदि।

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प्रश्न 4.
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री जैविक और अजैविक घटकों के बीच अन्तः सम्बन्ध है।

प्रश्न 5.
जैविक और अजैविक तत्त्वों के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. जैविक तत्त्व: पक्षी, पशु तथा पौधे।
  2. अजैविक तत्त्व: हवा, पानी तथा पौधे।

प्रश्न 6.
पर्यावरण के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर:

  1. पर्यावरण संसाधनों की पूर्ति करता है जिसमें नवीकरणीय तथ गैर-नवीकरणीय। दोनों प्रकार के संसाधन होते हैं।
  2. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है।

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प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण के कारण होने वाली एक-एक बीमारी का नाम लिखें।
उत्तर:
वायु प्रदूषण से दमा की बीमारी तथा जल प्रदूषण से हैजा की बीमारी होती है।

प्रश्न 8.
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है।

प्रश्न 9.
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा से क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा का अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है।

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प्रश्न 10.
किस परिस्थिति में पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है?
उत्तर:
जब संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक हो जाता है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के बाहर होते हैं तो उस समय पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 11.
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के किन कार्यों पर भारी दबाव डाला है?
उत्तर:
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपयोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के निम्न दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है –

  1. संसाधन पूर्ति तथा
  2. अपशिष्ट विसर्जन

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प्रश्न 12.
आर्थिक विकास का क्या मुख्य लक्ष्य है?
उत्तर:
आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं व समाजों के उत्पादन को बढ़ाना है।

प्रश्न 13.
विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट क्यों नहीं उत्पन्न हुआ?
उत्तर:
क्योंकि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संसाधनों की माँग की पूर्ति से कम थी। अतः ऐसा संकट नहीं उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 14.
धारणीय विकास का लक्ष्य किस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है?
उत्तर:
धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास कस संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करे और भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं का पूरा करें।

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प्रश्न 15.
विश्व में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं। उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 16.
भारत में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 17.
धारणीय विकास कैस संभव हो पायोगा?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन, संरक्षण और परिस्थितिक पुनः जनन क्षमता को बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरीय संकटों के निवारण से धारणीय विकास संभव हो पाएगा।

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प्रश्न 18.
भारत में वनों की कटाई स्वीकार्य सीमा से कितने क्यूबिक मीटर अधिक होती है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष की कटाई स्वीकार्य सीमा से लगभग 15 मिलियन क्यूबिक मीटर अधिक होती है।

प्रश्न 19.
भारत में एक वर्ष में भूमि का क्षरण कितने प्रतिशत की दर से हो रहा है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष में भूमि क्षरण 5.3 मिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है।

प्रश्न 20.
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से तट पोषक तत्त्वों की कितनी क्षति होती है?
उत्तर:
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्त्वों की क्षति होती है।

प्रश्न 21.
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः किन कारणों से होता है?
उत्तर:
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः वाहनों उद्योगों के भारी जमाव और थर्मल पावर संयंत्रों के कारण होता है।

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प्रश्न 22.
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण क्यों है?
उत्तर:
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण इसिलए है क्योंकि यह धरातल पर वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत है और इसका प्रभाव साधारण जनता पर अधिकतम पड़ता है।

प्रश्न 23.
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का कितना प्रतिशत भण्डार उपलब्ध है?
उत्तर:
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% भण्डार उपलब्ध है।

प्रश्न 24.
भारत में पाए जाने वाले कोई पाँच खनिज पदार्थ लिखें।
उत्तर:

  1. ताँबा
  2. लोहा
  3. सोना
  4. सीसा, और
  5. मैंगनीज

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रणबोर्ड के कार्य लिखें।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण के बोर्ड के कार्य (Functions of CPCB) केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के निम्नलिखित कार्य हैं –

  1. ये बोर्ड जल, वायु और भूमि प्रदूषण से सम्बन्धित सूचनाओं का संकलन और वितरण करते हैं।
  2. ये बोर्ड सरकारों को जल प्रदूषण के रोकथाम नियन्त्रण और कमी के लिए जल-धाराओं नदियों और कुओं की स्वच्छता के संवर्धन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
  3. ये वायु की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं।
  4. ये देश में वायु-प्रदूषण के नियन्त्रण द्वारा भी सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास क्या है? उन तीन प्रकार की पूंजियों के नाम बताइए जिनका धारणीय विकास के अन्तर्गत संरक्षण किया जाता है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से है जिससे वर्तमान जनसंख्या की आवश्यकताओं की आपूर्ति तो होती है भावी पीढ़ी के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का पोषण होता है। यह अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि भावी पीढ़ी के कल्याण में वही स्तर प्राप्त हो जो आज हमें प्राप्त है।

पूंजियों के प्रकार (Types of Capital):
धारणी विकास के अन्तर्गत तीन प्रकार की पूंजियों का संरक्षण किया जाता है –

  1. प्राकृतिक पूँजी (प्राकृतिक संसाधन, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी आदि)
  2. भौतिकी पूँजी (मशीनें, औजार, पूंजी उपकरण आदि) तथा
  3. मानवीय पूँजी (शिक्षा और तकनीकी प्रगति)

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प्रश्न 3.
हमें भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण (Protection of the Interest of future generation):
स्थायी विकास की अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि वर्तमान पीढ़ी के लोगों के हितों को आधात न पहुँचे अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए।

भावी के पीढ़ी हितों के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि पिछले वर्षों में विकास के लाभों को तो बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है, जबकि विकास की लागत (विशेषकर पर्यावरण हानि की लागतों के बारे में भी सोचना चाहिए। संरक्षण के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि पिछली पीढ़ियों ने जिन अवसरों का लाभ उठाता है भावी पीढ़ियों को उसी प्रकार के अवसरों की गारंटी होनी चाहिए।

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प्रश्न 4.
प्राकृतिक संसाधनों में तेजी से बढ़ती हुई माँग के प्रभाव से कौन सी दो समस्याएँ उत्पन्न हुई है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की तेज गति से बढ़ती माँग के प्रभाव में निम्नलिखित दो समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं –
1. Taichunie net Harri ant 319ra (Scarcity of renewable resources):
जब नवीकरण संसाधनों का उपभोग एक गति से अधिक तेज हो जाता है तो प्रकृति के द्वारा उस। तेज गति से ऐसे संसाधनों की नई आपूर्ति नहीं की जा सकती। परिणामस्वरूप नवीकरणीय योग्य संसाधनों का अभाव हो जाता है।

2. प्रदूषण (Pollution):
प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते प्रयोग से प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। अनेक उत्पादन क्रियाएँ जल, वायु एवं भूमि को प्रदूषित करती हैं। लाखों करोड़ों वर्षों से पर्यावरण यह सहन करता है क्योंकि जनसंख्या सीमित थी तथा प्रकृति पर धीमा ही आघात होता था परन्तु जनसंख्या के बढ़ने के साथ ही प्रदूषण की मात्रा तेज हो गई है। बढ़ता हुआ धुआँ, रसायन, अणु शक्ति का बढ़ता प्रयोग आदि अनेक कारणों से प्रकृति पर जो आघात हो रहा है वह प्रकृति की सहन शक्ति से परे है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धारणीय विकास के आपका क्या अभिप्राय है? क्या यह वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या है या भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली संसाधनों की समाप्ति की?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास की अवधारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) में किया गया। जिसने इसे इस प्रकार परिभाषित किया – “ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता किए बिना पूरा करें।” मानवीय विकास के फलस्वरूप प्राकृतिक साधनों का बहुत अधिक शोषण होता है। प्राकृतिक संसाधनों का निरन्तर क्षरण हो रहा है। कारखानों तथा यातयात के साधनों से धुआँ उठता है तथा हानिकारक पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जो जल तथा वायु प्रदूषण की समस्या पैदा करते हैं।

अतः यह कहा गया है कि धारणीय विकास आर्थिक विकास की वह प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाये वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों दोनों के जीवन गुणवत्ता को कायम रखना जिससे आर्थिक विकास के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली दीर्घकालीन शुद्ध लाभ वर्तमान तथा भावी पीढ़ी के लिए अधिकतम हों। धारणीय विकास की अवधारणा का सम्बन्ध प्राकृतिक साधनों के कुशलतम प्रयोग से है।

यह भावी पीढ़ी की जीवन गुणवत्ता की ओर भी ध्यान देती है। यह वातावरण को दूषित होने से बने का प्रयत्न करती है। यह प्रकृति साधनों तथा पर्यावरण को इस प्रकार प्रयोग करने का परमर्श देती है जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान में ही नहीं अपितु भवष्यि में भी आर्थिक विकास की दरे को कायम रखा जा सके। धारणीय विकास वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या तथा भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाले संसाधनों के निवेश दोनों की समस्या है।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ लिखें। (Write down the main feature of Sustainable Development)
उत्तर:
धारणी विकास की प्रमुख विशेषताएँ (Main feature of Sustainable Development):
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. पर्यावरण का संरक्षण (Protection of Environment):
धारणीय विकास. पर्यावरण के संरक्षण पर जोर देता है। यह अवधारणा विकास की लागत विशेषकर पर्यावरण हानि की लागत की ओर ध्यान देती है।

2. वर्तमान भावी पीढ़ी की आवश्यकता पर ध्यान देना (Attention towards present and futuregeneration):
धारणीय विकास की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि भावी पीढ़ी को कल्याण के उसी स्तर को प्राप्त करने के अवसर मिलने चाहिए जो आज हमें प्राप्त है-दूसरे शब्दों में यह अवधारणा वर्तमान पीढ़ी और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने पर जोर देती है।

3. वितरणात्मक समानता (Distributive equality):
यह अवधारणा विभिन्न पीढ़ियों के बीच तथा एक पीढ़ी के विभिन्न वर्गों के बीच समानता पर जोर देती है। इस अवधारणा के अनुसार प्राकृतिक साधनों तथा पर्यावरण का इस प्रकार प्रयोग किए जाए जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान ही नहीं भविष्य में भी विकास की दरे को कायम (Maintain) रखा जा सके।

4. मानवीय पूंजी भौतिक पूंजी तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण (Preservation of human capital, physical capital and natural capital):
स्थायी विकस की अवधारणा इस बात पर भी जोर देती है कि मानवीय पूंजी, तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण करना चाहिए जिससे भावी पीढ़ियों को कम से कम उतना अवश्य मिल सके जितना वर्तमान पीढ़ी को विरासत में मिला है। इसके लिए संसाधनों का प्रबन्ध इस प्रकार करना चाहिए कि हम वर्तमान आवश्यकताओं की संतुष्टि के साथ-साथइन संसाधनों की गुणवत्ता को भी बढ़ा सकें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जैविक घटक में शामिल किया जाता है –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव
(c) जीव एवं निर्जीव दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी जीव

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प्रश्न 2.
अजैविक घटक में शामिल करते हैं –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव चीजें
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी निर्जीव चीजें

प्रश्न 3.
वायुमण्डल में कार्बन डाइआक्साइड की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 31 प्र.श.

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प्रश्न 4.
वायुमण्डल में मिथेन की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 149 प्र.श.

प्रश्न 5.
पिछली सदी में वायुमंडल का औसत ताप बढ़ा है –
(a) 0.6°C
(b) 1.1°C
(c) 1.0°C
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 0.6°C

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प्रश्न 6.
ओजोन परत के क्षय से कौन सी किरण पृथ्वी पर पहुँच जाती है –
(a) अवरक्त
(b) दृश्य
(c) पराबैंगनी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पराबैंगनी

प्रश्न 7.
Montreal Protocol किसके प्रयोग पर पाबंदी लगाता है –
(a) कार्बोनेट यौगिक
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक
(c) कार्बन यौगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक

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प्रश्न 8.
चिपको आन्दोलन का संबंध है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण

प्रश्न 9.
अप्पिको आन्दोलन संबंधित है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

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प्रश्न 10.
भारत दुनिया की कितनी प्र.श. आबादी का आश्रय है –
(a) 16 प्र.श.
(b) 20 प्र.श.
(c) 25 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 16 प्र.श.

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय के किस भाग में करेवा मिलते हैं ……………………
(क) उत्तर:पूर्व
(ख) पूर्वी
(ग) हिमाचल-उत्तरांचल
(घ) कश्मीर हिमालय
उत्तर:
(घ) कश्मीर हिमालय

प्रश्न 2.
लोटक झील किस राज्य में स्थित है ……………………..
(क) केरल
(ख) मनीपुर
(ग) उत्तरांचल
(घ) राजस्थान
उत्तर:
(ख) मनीपुर

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प्रश्न 3.
अंडमान द्वीप तथा निकोबार द्वीप को कौन-सी रेखा पृथक् करती है ……………………
(क) 11° चैनल
(ख) 10 चैनल
(ग) खाड़ी मनार
(घ) अंडमान सागर
उत्तर:
(क) 11° चैनल

प्रश्न 4.
डोडावेटा चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ी शृखंला में स्थित है?
(क) नीलगिरी
(ख) का मम
(ग) अनामलाई
(घ) नलामलाई
उत्तर:
(क) नीलगिरी

प्रश्न 5.
हिमालय किस प्रकार का पर्वत है?
(क) ज्वालामुखी
(ख) मोड़दार
(ग) अविशष्ट
(घ) भ्रशारेथ
उत्तर:
(ख) मोड़दार

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन-से तटीय मैदान होकर जायेगा और क्यों?
उत्तर:
लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित है। यह केरल तट से 280 किलोमीटर ने 480 – किलोमीटर दूर स्थित है। अत: केरल तट से इसकी दूरी सबसे कम 280 किलोमीटर है। इसलिए केरल के तटीय मैदान से होकर हम लक्षद्वीप सकम मय में पहुँच जायेगें।

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प्रश्न 2.
भारत में ठण्डा मरुस्थल कहाँ स्थित है ? इस क्षेत्र की मख्य श्रेणियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
कश्मीर हिमालय का उत्तरी-पूर्वी भाग, जो वहत् हिमालय और कराकोरम श्रेणियों के बीच स्थित है, एक ठण्डा मरुस्थल है। कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत श्रेणियाँ हैं जैसे-कराकोरम, लद्दाख, जाकर और बाल ।

प्रश्न 3.
पश्चिमी तटीय मैदान पर कोई डेल्टा क्यों नहीं है?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान मध्य में संकीर्ण है लेकिन उत्तर और दक्षिण में चौड़े हो जाते हैं। इसलिए इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती ।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं-एक बंगाल की खाड़ी और दूसरा अरब सागर हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप हैं। ये द्वीप 6° उत्तर से 14° उत्तर और 92° पूर्व से 94° पूर्व के बीच स्थित हैं। राँची और लबरीन्थ द्वीप, यहाँ के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीपों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार । बैरन आइलैंड नामक भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।

अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं। ये द्वीप 80° उत्तर से 12° उत्तर और 71° पूर्व से 74° पूर्व के बीच बिखरे हुए हैं। ये केरल तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है। पूरा द्वीप समूह प्रवाल निक्षेप से बना है। यहाँ 36 द्वीप हैं और इनमें से 11 पर मानव आवास हैं। मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किलोमीटर है। पूरा द्वीप समूह 11 डिग्री चैनल द्वारा दो भागों में बाँटा गया है, उत्तर में अमीनी द्वीप दक्षिण में कनानोरे द्वीप । इस द्वीप समूह पर तूफान निर्मित पुलिन है जिस पर आबद्ध गुटिकायें शिंगिल, गोलश्मिकाएँ तथा गोलाश्म पूर्वी समुद्र तट पर पाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
नदी घाटी मैदान में पाए जाने वाली महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ कौन-सी हैं? इनका विवरण दें।
उत्तर:
प्रायद्वीप भाग में बहने वाली नदी घाटियाँ उथली और उनकी प्रवणता कम होती है। पूर्व की ओर बहने वाली अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा निर्माण करती हैं। महानदी, गोदावरी और कृष्णा द्वारा निर्मित डेल्टा इसके उदारहण हैं। हिमालय और अन्य अतिरिक्त पर्वतमालाओं में तेज बहाव वाली नदियों से अपरदित ये पर्वत गॉर्ज V – आकार घाटियाँ, क्षिप्रिकाएँ व जल-प्रपात इत्यादि इसका प्रमाण हैं। इस क्षेत्र के जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है।

कश्मीर हिमालय में श्रीनगर का डल झील एक रोचक प्राकृतिक स्थल है। कश्मीर घाटी में झेलम नदी प्रौढ़ावस्था में निर्मित होने वाली विशिष्ट आकृति विसों का निर्माण करतीहै। प्रदेश के दक्षिणी भाग में अनुदैर्ध्य घाटियाँ पाई जाती हैं जिन्हें दून कहा जाता है। हिमाचल हिमालय के दो महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ शिवालिक और दून हैं। दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय की पर्वत श्रेणियाँ उत्तर से दक्षिण दिशा में तेज बहती हुई गहरे गॉर्ज बनाने वाली नदियों द्वारा विच्छेदित होती हैं। कामेंग; सुबनसरी, दिहांग, दिबांग, लोहित और तीस्ता यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं, जो बहुत से जल-प्रपात बनाती हैं।

मणिपुर घाटी के मध्य एक झील स्थित है जिसे ‘लोक ताक’ झील कहा जाता है। उत्तरी भारत के मैदान में हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे सुंदर वनन का डेल्टा। प्रायद्वीपीय पठार में बहने वाली नदियाँ टार, ब्लॉक पर्वत, भ्रंश घाटियाँ पर्वत स्कंध नग्न चट्टान संरचना, टेकरी (hummocky) पहाड़ी, शृंखला और क्वार्ट्साइट भित्तियाँ आदि का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय पूर्वी-घाट अवतरित नहीं हैं और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा अपरदित हैं। यहाँ की कुछ श्रेणियाँ जावदी पहाड़ियाँ पालकोण्डा श्रेणी, नल्लामाला पहाड़ियाँ और महेंद्रगिरि पहाड़ियाँ हैं।

मरुस्थल में बहने वाली नदियाँ थोड़ी दूरी तय करने के बाद लुप्त हो जाती हैं या किसी झील में या प्लाया में मिल जाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती। पूर्वी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ लम्बे-चौड़ें डेल्टा बनाती है। इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का डेल्टा शामिल है।

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प्रश्न 3.
यदि आप बद्रीनाथ से संदर वन डेल्टा तक गंगा नदी के साथ-साथ चलते हैं तो आपके रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएंगी?
उत्तर:
गंगा, हिमालय पर्वत में गोमुख हिमनदी से निकलती है। इस स्थान पर इसे गंगोत्री कहते हैं। 290 कि० मी० पर्वतीय प्रदेश से निकल कर हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इलाहाबाद के बाद इसमें यमुना नदी आकर मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है। इससे आगे उत्तर की गोमती, घाघरा. गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं । दक्षिण की ओर सोन नदी आकर मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक . विशाल डेल्टा तक इसकी लम्बाई 2525 किलोमीटर है। इसके किनारे पर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, वारणसी, पटना, कोलकाता आदि महत्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। यमुना भी गंगा के समानान्तर बहती है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
एटलस की सहायता से पश्चिम से पूर्व की ओर स्थित हिमालय की चोटियों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर:
पश्चिमी हिमालय में काराकोरम, नंगा पर्वत तथा पूर्वी हिमालय मे नामचा बरूआ, कंचनजंगा, मकालू और ऐवरेस्ट आदि चोटियाँ पाई जाती हैं। (चित्र 2.2 एवं 2.4 देखें।)

प्रश्न 2.
आप अपने राज्य में पाई जाने वाली स्थालाकृतियों की पहचान करें और इन पर चलाए जा रहे मुख्य आर्थिक कार्यों का विश्लेषण करें।
उत्तर:
उत्तरी भारत का मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है। इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लगभग 3200 किलोमीटर है। इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है। जलोढ़ निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है। उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बाँट सकते हैं-भामर, तराई और जलोढ़ मैदान । जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बाँटा जाता है-खादर और बांगर । भामर 8 से 10 किमी चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपाद के समानांतर फैल हुई है।

उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-बड़े शैल और गोलाश्म जमा करा देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। तराई से दक्षिण में मैदान है जो नए जलोढ़ से बना होने के कारण बाँगर और खादर कहलाता है। जैसे-बालू-रोपिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधिकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। ‘उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे-सुन्दर वन डेल्टा। हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है। गंगा नदी द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदानों में गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई जाती है। [ आर्थिम कार्यों का विश्लेषण अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।]

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अरब सागर कब अस्त्वि में आया?
उत्तर:
प्लायसीन युग में।

प्रश्न 2.
उस सागर का नाम बतायें जो हिमालय के किनारे पर स्थित था।
उत्तर:
टैथीज सागर।

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प्रश्न 3.
हिमालय किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
टर्शियरी युग में।

प्रश्न 4.
हिमालय के उत्तर में कौन-सा भू-खण्ड स्थित है?
उत्तर:
अंगारालैण्ड।

प्रश्न 5.
टशियरी युग में हिमालय के दक्षिण में स्थित भू-खण्ड का नाम बताएँ।
उत्तर:
गोंडवानालैण्ड।

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प्रश्न 6.
कश्मीर घाटी में पाई जाने वाली झील निक्षेप का नाम लिखो।
उत्तर:
करेवा।

प्रश्न 7.
दक्कन पठार की पश्चिमी सीमा का नाम बताएँ।
उत्तर:
अरावली।

प्रश्न 8.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप बताओ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 9.
चो के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र का नाम बताएँ।
उत्तर:
होशियारपुर (पंजाब)।

प्रश्न 10.
भारत में पाये जानेवाली दो रिफ्ट घाटियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती घाटियां।

प्रश्न 11.
दक्कन पठार में निर्मित लावा की सतहें कैसे बनी?
उत्तर:
लावा बहने के कारण।

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प्रश्न 12.
अरावली पर्वत किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
विन्ध्य युग में।

प्रश्न 13.
भारत का प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण कब हुआ?
उत्तर:
पूर्व कैम्बरियन युग में।

प्रश्न 14.
दक्कन पठार के पूर्वी सीमाओं के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजमहल की पहाड़ियाँ।

प्रश्न 15.
भारत का सबसे प्राचीन पठार कौन-सा है?
उत्तर:
दक्कन पठार।

प्रश्न 16.
वृहद् स्तर पर भारत के धरातल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 17.
पूर्वी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
900 मीटर।

प्रश्न 18.
अरब सागर में पाये जाने वाले मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर:
लक्षद्वीप समूह।

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प्रश्न 19.
प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ऊंची चोटी का नाम बताएँ।
उत्तर:
अनाईमुदी (2695 मीटर)।

प्रश्न 20.
पश्चिमी तटीय मैदान के दो विभागों के नाम लिखें।
उत्तर:
कोंकण तट, मालबार तट।

प्रश्न 21.
यदि आपको लक्षद्वीप तक यात्रा करनी है तो किस तटीय मैदान से गुजरेंगे?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान।

प्रश्न 22.
भारत में शीत मरुस्थल कहाँ है?
उत्तर:
लाख में।

प्रश्न 23.
पश्चिमी तट पर डेल्टे क्यों नहीं हैं?
उत्तर:
तीव्र गति वाली छोटी नदियाँ तलछट का जमाव नहीं करतीं।

प्रश्न 24.
सिन्धु गार्ज तथा ब्रह्मपुत्र गार्ज के मध्य हिमालय का क्या विस्तार है?
उत्तर:
2400 किलोमीटर।

प्रश्न 25.
हिमालय में सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
3200 किलोमीटर

प्रश्न 26.
गंगा के मैदान में तलछट की अधिकतम ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
2000 मीटर।

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प्रश्न 27.
भारत के प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
600-900 मीटर

प्रश्न 28.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप का नाम बताएँ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 29.
पश्चिमी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी हैं?
उत्तर:
1600 मीटर।

प्रश्न 30.
भारत के उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ ग्रेनाइट तथा नीस घट्टानें पाई जाती है।
उत्तर:
कर्नाटक।

प्रश्न 31.
दक्कन पठार के एलान की दिशा बताओ।
उत्तर:
दक्षिण-पूर्व।

प्रश्न 32.
प्रायद्वीपीय भारत के पूर्व में पाये जाने वाले पठार का नाम बतायें।
उत्तर:
शिलांग पठार।

प्रश्न 33.
उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ बरखान पाये जाते हैं।
उत्तर:
जैसलमेर।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत में मिलने वाले ऊँचे पर्वत शिखर तथा उनकी ऊँचाई बताओ।
उत्तर:
वृहत् हिमालय में संसार के 40 ऐसे पर्वत शिखर मिलते हैं जिनकी ऊँचाई 7000 मीटर से भी अधिक है। जैसे –

  1. एवरेस्ट (Everest) – 8848 मीटर
  2. कंचनजंगा (Kanchenjunga) – 8598 मीटर
  3. नंगा पर्वत (Nanga Parbat) – 8126 मीटर
  4. नंदा देवी (Nanda Devi) – 7817 मीटर
  5. नामचा बरवा (Namcha Barwa) – 7756 मीटर
  6. धौलागिरी (Dhaulagiri) – 8172 मीटर

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प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत को किन-किन श्रेणियों में बाँटा जाता है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत की कई श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ नामक घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। भौगोलिक दृष्टि से हिमालय पर्वत के केन्द्रीय अक्ष के समानान्तर तीन पर्वत श्रेणियाँ हैं

  • वृहत् हिमालय (Greater Himalayas)
  • लघु हिमालय (Lesser Himalayas)
  • उप-हिमालय (Sub-Himalayas)
  • या शिवालिक श्रेणी (Siwaliks)

उक्त पर्वत श्रेणियों को तीन अन्य नामों से भी पुकारा जाता है –

  • आन्तरिक हिमालय (Inner Himalayas)
  • मध्य हिमालय (Middle Himalayas)
  • बाह्य हिमालय (Outer Himalayas)

प्रश्न 3.
भारतीय पठार के प्रमुख भौतिक विभागों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय पठार की भौतिक स्थलाकृतियों में बहुत विविधता है। फिर भी इसे मोटे तौर पर निम्नलिखित भौतिक इकाइयों में बाँटा जा सकता है –

  1. दक्षिणी पठारी खंड
  2. दक्कन का लावा पठार
  3. मालवा का पठार
  4. अरावली पहाड़ियाँ
  5. नर्मदा तथा तापी की द्रोणियाँ
  6. महानदी, गोदावरी तथा कावेरी की नदी घाटियाँ
  7. संकरे तटीय मैदान

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प्रश्न 4.
वृहत् स्तर पर भारत को कितनी भू-आकृतियों इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत की तीन भू-आकृतियों विभागों के उच्चावच के लक्षणों का विकास एक लम्बे काल में हुआ है।

  1. उत्तर हिमालय पर्वतीय श्रृंखला।
  2. उत्तरी भारत का मैदान।
  3. प्रायद्वीपीय पठार।

प्रश्न 5.
दोआब से आप क्या समझते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप से पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नो नदियों के मध्य के मैदानी भाग को दोआब कहते हैं। नदियों द्वारा निक्षेप से पुरानी कांप मिट्टी के प्रदेश इन नदियों को एक दूसरे से अलग करते हैं। भारतीय उप-महाद्वीप में निम्नलिखित दोआब मिलते हैं

  1. गंगा-यमुना नदियों के मध्य दोआब।
  2. ब्यास-समलुज नदियों के मध्य जालन्धर दोआब।
  3. ब्यास रावी के मध्य बारी दोआब।
  4. रावी-चनाब के मध्य रचना दोआब।
  5. चनाब-झेलम के मध्य छाज दोआब।

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प्रश्न 6.
तराई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
हिमालय पर्वत के दामन में भाबर के मैदान के साथ-साथ का संकरा मैदान स्थित है। यह मैदान लगभग 30 किमी चौड़ा है। इस मैदान का अधिकतर भाग दलदली है क्योंकि भाबर प्रदेशों में लुप्त हुई निदयों का जल रिस-रिस कर इस प्रदेश को अत्यधिक आई कर देता है। इस प्रदेश में ऊँची घास तथा वन पाए जाते हैं। भाबर के दक्षिण में स्थित ये मैदान बारीक कंकड़ चिकनी मिट्टी से बना है। उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र में बड़े-बड़े फर्मा बनाकर कृषि की जा रही है।

प्रश्न 7.
भाबर क्या है? भाबर पट्टी के दो प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
बाह्य हिमालय की शिवालिक श्रेणियों के दक्षिण में इनके गिरिपद प्रदेश को भाबर का मैदान कहते हैं। पर्वतीय क्षेत्र में बहने वाली नदियों के मन्द बहाव के कारण यहाँ बजरी, कंकड़ का जमाव हो जाता है। इस क्षेत्र में पहुँच कर अनेक नदियाँ लुप्त हो जाती हैं। क्योंकि यह प्रदेश पारगम्य चट्टानों (Pervious Rocks) का बना हुआ है। भाबर का मैदान एक संकरी पट्टी के रूप में 8 से 16 किमी की चौड़ाई तक पाया जाता है।

प्रश्न 8.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं। डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार हैं –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

प्रश्न 9.
दून किसे कहते हैं? हिमालय पर्वत से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत की समानान्तर श्रेणियों के मध्य सपाट तलछठी वाली संरचनात्मक घाटियाँ मिलती हैं। इन घाटियों द्वारा पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे से अलग होती हैं। इन घाटियों को ‘दून’ (Doon) कहा जाता है। हिमालय पर्वत में इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं –

  • देहरादून (Dehra Dun)
  • कोथरीदून (KothriDun)
  • पाटलीदून (PatliDun)

कश्मीर घाटी को भी हिमालय पर्वत में एक दन की संज्ञा दी जाती है।

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प्रश्न 10.
भारत में भ्रंशन क्रिया (Faulting) के प्रमाण किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठीय भ्रंशन के प्रमाण सामान्य रूप से दक्षिणी पठार पर पाए जाते हैं। गोदावरी, महानदी तथा दामोदर घाटियों में भ्रशंन के प्रमाण पाए जाते हैं। नर्मदा तथा ताप्ती नदी घाटी दरार घाटियाँ हैं। भारत के पश्चिमी तट पर मालाबार तट तथा मेकरान तट के धरातल पर भ्रंशन क्रिया के प्रभाव देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 11.
भांगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्राचीन जलोढ़ मिट्टी के बने ऊँचे मैदानी प्रदेशों को भांगर कहते हैं। इन उच्च प्रदेशों में नदियों की बाढ़ का जल पहुँच नहीं पाता। इस प्रदेश की मिट्टी में चीका मिट्टी रेत, तथा कंकड़ पाए जाते हैं। भारत के उत्तरी मैदान में नदियों द्वारा जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप से भांगर प्रदेश की रचना हुई है।

प्रश्न 12.
भारत के किसी एक भौतिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर:
भू-वैज्ञानिक संरचना तथा धरातलीय स्वरूप के आधार पर भारत को तीन भौतिक विभागों में वर्गीकृत किया जाता है –

  • दक्षिण का प्रायद्वीप पठार।
  • उत्तर की विशाल पर्वतमाला।
  • दोनों के बीच स्थित विस्तृत मैदान।

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प्रश्न 13.
हिमालय से निकलने वाली नदियां सततवाहिनी क्यों हैं?
उत्तर:

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियों का उदगम् बर्फीले प्रदेशों में होते हैं।
  2. इन निकलने वाली नदियों में सालोभर जल प्रभावित होते हैं?
  3. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वर्षा द्वारा भी जल ग्रहण करती हैं। जैसे गंगा सिन्ध. ब्रह्मापुत्र प्रमुख सततवाहिन नदियाँ हैं, जिनके किनारे भारी मानव बसे हुए हैं और प्रमुखता
  4. से कृषि कार्य के साथ उद्योगों ने भी अपनी महत्त बनायी है।

प्रश्न 14.
बांगर तथा खादर प्रदेश में क्या अन्तर है?
उत्तर:
बांगर तथा खादर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 15.
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 16.
भारतीय पठार तथा हिमालय पर्वत के उच्चावच के लक्षणों में वैषम्य , बताइए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत तथा भारतीय पठार की भू-आकृतियों की इकाइयों के भौतिक लक्षणों में काफी अन्तर पाए जाते हैं।
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प्रश्न 17.
“पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों की एक क्रमिक शृंखला पाई जाती है।”
उत्तर:
हिमालय पर्वत में कई पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ या घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। पश्चिमी हिमालय में ये श्रेणियाँ स्पष्ट क्रम से दिखाई देती हैं। पंजाब के मैदानों के पश्चात पहली श्रेणी शिवालिक की पहाड़ियों के रूप में या बाह्य हिमालय के रूप में मिलती हैं। इसके पश्चात् सिन्धु नदी की सहायक नदियों की घाटियों हैं। दूसरी वेदी (stage) के रूप में पीर-पंजाल तथा धौलागार की घलु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाल तथा महान् हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी की लघु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाली की जास्कर श्रेणी पाई जाती है। इससे आगे लद्दाख तथा काराकोरम की पर्वत श्रेणियाँ हैं जिसके मध्य सिन्धु घाटी मिलती है।

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प्रश्न 18.
पश्चिमी तट पर अच्छी बंदरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों है?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  1. पश्चिमी तट अधिक कटा-फटा है जबकि पर्वी तट कम कटा-फटा है।
  2. पश्चिमी तट पर अधिक लैगून है जबकि पूर्वी तट पर कम है।
  3. यहाँ तीव्रगामी नदियाँ बहती है जबकि पूर्वी तट पर महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, जैसी बड़ी नदी है जो डेल्टाओं का निर्माण करती है।
  4. यहाँ सँकड़ा मैदान है जबकि पूर्वी तट पर चौड़ा मैदान है। इसलिए पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहों तथा पूर्वी तट पर बड़े-बड़े डेल्टा है।

प्रश्न 19.
जलचक्र का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर:
सूर्य ताप से महासागरों के जल वाष्पित होकर वायुमंडल द्वारा उठा लिया जाता है। यह जल अंततोगत्वा संघनित होता है और भूपृष्ठ को वर्षा, ओले ओस, हिम अथवा बजरी के रूप में लौटा दिया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र में निम्नलिखित की स्थिति दिखाए –

  1. थार मरुस्थल
  2. तटीय मैदान
  3. कंचनजंगा
  4. नाथुला और काराकोरम
  5. शिवालक पर्वत श्रेणी
  6. मेघालय का पठार
  7. दक्कन ट्रैप
  8. विंध्व और सतुपड़ा की पर्वत श्रेणियाँ

उत्तर:
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प्रश्न 2.
“उप महाद्वीप के वर्तमान भू-आकृति विभाग एक लम्बे भूगर्भिक इतिहास के दौरे में विकसित हए हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप की तीनों भू-आकृतिक इकाइयां इतिहास के लम्बे उत्तार चढ़ा के दौरे में विकसित हुई हैं। इनके निर्माण के सम्बन्ध में अनेक प्रकार के भू-वैज्ञानिक प्रमाण दिए जाते हैं फिर भी अतीत अपना रहस्य छिपाए हुए है। इनकी रचना प्राचीन काल से लेकर कई युगों में क्रमिक रूप में हुई है।

1. प्रायद्वीपीय पठार – इस पठार की रचना कैम्ब्रियन पूर्व युग में हुई है। कुछ विद्वानों की धारणा है कि यह उत्खण्ड (HORST) है जिसका उत्थान समुद्र से हुआ है। इस पठारके पश्चिमी भाग में अरावली पर्वत का उत्थान दक्षिण में नाला मलाई पर्वतमाला का एक उत्थान विंध्य-महायुग में हुआ है। इस स्थिर भाग में एक लम्बे समय तक भू-गर्भिक हलचलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ भागों में धरातल पर भ्रंश पड़ने के कारण धसाव के प्रमाण मिलते हैं। हिमालय के निर्माण के पश्चात् पठार के उत्तर:पश्चिम भाग के धंसने के कारण अरब सागर का निर्माण प्लीओसीन युग में हुआ है।

इस पठार को विशाल गोंडवाना महाद्वीप का भाग माना जाता है। इसका कुछ भाग अब भी उत्तरी मैदान के नीचे छिपा हुआ है। हिमालय के उत्थान के समय पठार के उत्तर:पश्चिमी भाग में विस्तृत रूप से ज्वालामुखी उदगार हुए जिससे दक्कन लावा क्षेत्र (Deccan Trap) का निर्माण हुआ। पठार के पश्चिम भाग में निमज्जन से पश्चिमी घाट ऊपर उभरे। दूसरी ओर पूर्वी तट शान्त क्षेत्र रहे।

2. हिमालय पर्वत – यह एक युवा तथा नवीन मोड़दार पर्वत है। मध्यजीवी काल तक यह पर्वत एक भू-अभिनति द्वारा घिरा हुआ था। इसे ‘टैथीस सांगर’ कहते हैं । टर्शियरी युग में टैथीस सागर में जमा तलछटों में बलन पड़ने से हिमालय पर्वत तथा इसकी शृखंलाओं का निर्माण हुआ। उत्तरी भू-खण्ड अंगारालैण्ड की ओर से दक्षिण-भूखण्ड गोंडवाना लैण्ड की ओर दबाव पड़ा। दक्षिणी भू-खण्ड के उत्तर अभिमुखी दाबाव ने टथीस सागर में जमा तलछट को ऊँचा उठा दिया जिससे हिमालय पर्वत में वलनों का निर्माण हुआ। हिमालय पर्वत नूतन युग में तथा तीसरी अवस्था उत्तर अभिनूतन युग में हुई।

आधुनिक प्रमाणों के आधार पर ये पर्वत निर्माणकारी हलचले (Mountain Building) प्लेट-विवर्तनिकी (Plate tectonics) से सम्बन्धित हैं। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी तथा यूरेशिया प्लेट को नीचे से धक्का देने से हिमालय पर्वतमाला की उत्पत्ति हुई।

3. उत्तरी मैदान – भारत का उत्तरी मैदान हिमालय पर्वत तथा दक्षिण पठार के मध्यवर्ती क्षेत्र में फैला है। यह मैदान एक समद्री गर्त के भर जाने से बना है। इस गर्त में हिमालय पवर्त तथा दक्षिणी पठार से बहने वाली नदियाँ भारी मात्रा में मलवे का निक्षेप करती रही है। इस गर्त का निर्माण हिमालय से पर्वत के उत्थान के समय एक अग्रगामी गर्त (Fore-deep) के रूप में हुआ। इसका निर्माण प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर अभिमुख दबाव के कारण हिमालय पर्वत के समान हुआ । यह सम्पूर्ण क्षेत्र निक्षेप क्रिया द्वारा लगातार पूरी होता रहा है। यह क्रिया चतुर्थ महाकल्प तक जारी है। इस प्रकार लम्बी अवधि में भारत के वर्तमान भौगोलिक स्वरूप का विकास हुआ