Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

Bihar Board Class 6 Science जल Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
(क) जल को वाष्प में बदलने की क्रिया को ………… कहते हैं।
(ख) जलवाष्प को जल में बदलने की क्रिया को ………….. कहते हैं।
(ग) एक वर्ष या इससे अधिक समय तक वर्षा न होने से उस क्षेत्र में ………. होने की सम्भावना होगी।
(घ) अत्यधिक वर्षा से ……….. आती है।
उत्तर:
क – वाष्पन
ख – संघनन
ग – अकाल तथा भूखमरी
(घ) बाढ़।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से प्रत्येक का सम्बन्ध क्या वाष्पन अथवा संघनन से है?

(क) गीले कपड़ों पर इस्त्री करने प भाप का ऊपर उठना।
उत्तर:
वाप्पन।

(ख) सर्दियों में प्रातःकाल कोहरे का दिखना।
उत्तर:
संघनन

(ग) गीले कपड़े से पोंछने के पाद श्याम पट्ट कुछ समय बाद सूख जाता है।
उत्तर:
वाष्पना

(घ) गर्म छड़ पर जल छिड़कने से भाप का ऊपर उठना।
उत्तर:
वाष्पन।

प्रश्न 3.
बादल कैसे बनते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी का 2/3 भाग जल से घिरा है जिसमें कहीं तालाब तो कहीं नदी तो कहीं विशलकाय समुद्र तथा महासागर जल से भरा पड़ा है। ये जलाशय के जल सूर्य की गर्मी के करण वाष्प में बदल जाते हैं और यही वाष्प काफी ऊँचाई पर पहुंचकर संघनित होकर बादल बन जाते हैं। दूसरी तरफ पेड़-पौधे जमीन से जल को खींचकर पत्तियों के माध्यम से वाष्पोत्सर्जित करते हैं और ये जल-कणिकाएँ ऊपर जाकर ठंड पाकर आपस में संघनित होकर बादल का निर्माण करते हैं यानि वाष्पन तथा वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया के उपरांत जल – कणिकाएँ ऊपर जाकर संघनित होकर बादल का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 4.
गाँव में जल का संग्रहण कैसे करेंगे?
उत्तर:
वर्षा के जल को एकत्र करना तथा भंडारण करने के बाद उपयोग में लाना, जल की उपलब्धता में वृद्धि करना आदि को जल संग्रहण का आयाम कहते हैं।

गाँव में प्रायः घर मिट्टी तथा कच्चे गाड़ों पर या ईटों का बना होता है। जिसपर खपड़ा या छत रहता है। खपरैल के मकान में ओहाढ़ी के द्वारा जल को एक जगह पर गिराते हैं। फिर नाली के द्वार एक बड़े गड्ढों में जमा कर लेते हैं। दूसरी तरफ छत वाले मकान से नाली के माध्यम से गड्ढों में जल को जमा करते हैं। और अपनी आवश्यकता अनुसार इस जल का प्रयोग पीने से लेकर सिंचाई तक करते हैं।

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प्रश्न 5.
वर्षा के दिनों में कपड़े जल्दी क्यों नहीं सूखते हैं?
उत्तर:
वर्षा के दिनों में हवा में आर्द्रता या नमी की मात्रा बहुत अधिक रहती है। यदि हवा चलती भी है तो उसमें उपस्थित जलवाष्प कपड़े फिर से सोख लेती है। यानि वायुमंडल में उपस्थित नमी के कारण वर्षा-ऋतु में कपड़े जल्दी नहीं सूख पाते हैं।

Bihar Board Class 6 Science जल Notes

अध्ययन सामग्री:

“जल ही जीवन है” किसी ने ठीक ही कहा है। हम आप सोच सकते हैं यदि जल नहीं होता तो क्या होता। और यदि जल की मात्रा अधिक (बाढ़) हो जाए तो क्या तबाही होती है। इस अध्याय में जल हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है इसके साथ-साथ हमारे पर्यावरण में इसकी कमी से बचने के लिए हमें क्या कदम उठाने होंगे तथा इसकी कमी यानी घटता जल-स्तर के कारणों पर विशेष चर्चा होगी।

“पंच तत्व मिल बना शरीरा” में एक तत्व जल है। एक तरफ वायु जहाँ हमें जीवन जीने के लिए होती है तो वहीं जल मानव, जीव-जन्त, पेड़-पौधे आदि को जीवन के हर पल-पल में काम आता है। हमारे शरीर में 70% जल है। सोकर उठने के बाद शौच करते हैं, मुँह धोते हैं, दाँत की सफाई, स्नान, भोजन आदि में जल का प्रयोग होता. है।

जल का स्रोत–जल हमें प्राप्त कहाँ से होता है ? भूमि के अन्दर मिलने वाले जल को भूमिगत जल कहते हैं। भूमि के अन्दर वर्षा के जल का कुछ भाग रिस-रिसकर जमा होता रहता है जो भूमि के अन्दर विशाल जल-राशि का निर्माण कर देता है। यही जल कुँआ से चापाकल तथा बोरिंग से होते हुए घर के नलों में आता है। यह जल मुख्य रूप से पेयजल होता है तथा इस जल की मात्रा भूमि के अन्दर सीमित है। इसके अलावे नदी, झील, समुद्र जल के मुख्य स्रोत हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

जब जल को गर्म करते हैं तो गर्मी पाकर जलवाष्पं में बदल जाता है, इस क्रिया को वाष्पन कहते हैं। यही वाष्प पुनः ठंडा होकर जल में बदल जाता हैं तो इस क्रिया को संघनन कहते हैं। सूर्य के प्रकाश की गर्मी पाकर नदी, तालाबों, झरनों, समुद्र आदि जलाशयों के जल वाष्पित हो जाते हैं और काफी ऊँचाई पर वाष्प के इकट्ठा होने से वाष्प के छोटे-छोटे बन्द एक-दूसरे के समीप आकर बादल का रूप ले लेते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं, वाष्प के छोटे-छोटे बुन्द संघनित होकर बादल का निर्माण करते हैं। जल कणिकाएँ आपस में मिलकर बड़े आकार का जल-बूंद बनाती हैं। अपने वजन के कारण वे जमीन पर गिरने लगती हैं जिसे हम वर्षा कहते हैं।

प्रकृति में जल से वाष्प बनना, वाष्प से बादल बनना तथा वर्षा के रूप में जल का जमीन पर आना तथा इस क्रिया को दुहराते रहना ही जल चक्र कहलाता है। कभी-कभी जल की बूंदें बादल में तैरते रहते हैं और काफी ठंडी होकर छोटे-छोटे गोले बनाता है। जब इसका आकार बड़ा हो जाता है तो यह वर्षा की बूंदों के साथ जमीन पर गिरने लगता है। बर्फ के इन टुकड़ों को ओला कहते हैं।

जलाशयों तथा महासागरों के अलावा पेड़-पौधे की पत्तियों से जलवाष्प के रूप में निकलती रहती है। पत्तियों से निकलने वाली वाप्प की क्रिया को वाष्योत्सर्जन कहते हैं।

अत्यधिक वर्षा होने से तथा ऊँचे पर्वतों पर जमें बर्फ के पिघलने से नदियों में जल का स्तर बढ़ जाता है और यह बढ़ते-बढ़ते बड़े क्षेत्र में फैल जाता है। यह खेतों, वनों, गाँवों को जलमग्न कर देता है जिसे हम बाढ़ कहते हैं। बाढ़ से हमारे देश में फसलें; सम्पदा तथा मानव जीवन की काफी क्षति होती है।

कभी-कभी वाष्पन तथा वाष्पोत्सर्जन की सामान्य प्रक्रिया के बावजूद महासागरों के ऊपर बने बादल जिस स्थान पर आकर बरसना चाहिए, वहाँ हवा के विपरीत दिशा में चलने के कारण वर्षा नहीं होती है। वर्षा के नहीं होने से उस क्षेत्र में सभी जलाशय सूख जाते हैं। जमीन तथा मिट्टी सूख जाती है। वर्षा न होने की स्थिति में कुंआ का जल सूखने, चापाकल में पानी न आने तथा बोरिंग से पानी का नहीं आना आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जिसे सुखाड़ कहते हैं। सुखाड़ के कारण फसल नष्ट हो जाते हैं जिसका अनेक कुप्रभाव हमारे सजीव जगत पर पड़ता है। परिणामस्वरूप अकाल तथा भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

वर्तमान में इसी समस्याओं से हम संसार के लोग जुझ रहे हैं या आने वाली पीढ़ी को जुझना पड़ेगा। अत: हम और आप मिलकर जल-संग्रह करने का प्रयास करें।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

जल के घटते जल-स्तर रोकने के लिए विभिन्न कदम उढ़ाना आवश्यक है –

(क) अनावश्यक रूप से पानी को नहीं बहाना चाहिए।
(ख) ज्यादा से ज्यादा पानी स्नान और कपड़ा धोने में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
(ग) वर्षा के पानी को संग्रह करना चाहिए।
(घ) अधिक-से-अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
(ङ) वन-की कटाई पर रोक लगाना चाहिए।
(च) जलाशयों को साफ-सुथरा रखना चाहिए।
(छ) वायुमंडल तथा पृथ्वी के तापमान को बढ़ने से रोकने के उपाय करना चाहिए।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

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BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल Questions and Answers

काल का अर्थ है ‘समय’। अत: क्रिया के जिस रूप से उसके होने के समय का बोध होता है, उसे ‘काल’ कहते हैं। काल के तीन भेद हैं-(1) वर्तमान काल, (2) भूतकाल, (3) भविष्यत् काल।।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(1) वर्तमान काल-जिस ‘क्रिया’ का वर्तमान समय में होने का बोध हो, उसे ‘वर्तमानकाल’ क्रिया कहा जाता है।
मूल रूप से उपस्थित समय को ‘वर्तमान काल’ कहा जाता है। जैसे-वह खा रहा है। मैं रामायण पढ़ता हूँ, आदि।
वर्तमान काल के तीन भेद हैं-

(i) सामान्य वर्तमान
(ii) तात्कालिक वर्तमान
(iii) संदिग्ध वर्तमान।

(i) सामान्य वर्तमान-‘क्रिया’ का वह रूप, जिससे कार्य का ‘वर्तमान काल’ में होना समझा जाता है, उसे सामान्य वर्तमान कहा जाता है। जैसेवह पटना जाता है। वह सोता है। विपिन पढ़ता है। दमन गाता है, आदि।

(ii) तात्कालिक वर्तमान-जिस ‘क्रिया’ से यह पता चलता है कि काम ‘वर्तमान काल’ में लगातार चल रहा है, काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उसे तात्कालिक वर्तमान कहते हैं। काम की अपूर्णता के कारण इसे अपूर्ण वर्तमान भी कहा जाता है। जैसे–राम घर जा रहा है। विपिन पढ़ रहा हैं। गायक गा रहा हैं

(iii) संदिग्ध वर्तमान-जिस ‘क्रिया’ से उसके ‘वर्तमान काल’ में होने में संदेह हो, उसे संदिग्ध वर्तमान कहा जाता है। जैसे-विपिन पटना जाता होगा। संतोष पढ़ता होगा, आदि।

(2) भूतकाल-जिस ‘क्रिया’ से काम के समाप्त होने का बोध हो, उसे ‘भूतकाल’ की क्रिया कहते हैं।
इससे ‘बीत गये समय’ का बोध होता है। जैसे-1914 में प्रथम विश्वयुद्ध हुआ था। विपिन ने संतोष को पढ़ाया था, आदि
भूतकाल के छः भेद हैं(i) सामान्य भूत, (ii) आसन्न भूत (iii) पूर्ण भूत (iv) अपूर्ण भूत, (v) संदिग्ध भूत (vi) हेतुहेतुमद्भूत। –

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(i) सामान्य भूत-जिससे ‘क्रिया’ के समाप्त हो जाने का बोध होता है उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं। इससे ‘क्रिया’ का विशेष समय का बोध नहीं होता है। यह ‘भूतकाल’ का साधारण रूप होता है। जैसे-विपिन शहर गया। संतोष ने खाया। वह आया। मैं सोया आदि।

(ii) आसन्न भूत-जिस ‘क्रिया’ से यह जान पड़े कि काम अभी तुरंत खत्म हुआ है, उसे आसन्न भूतकाल की क्रिया कहते हैं। जैसे-रंजन भागलपुर से आया – है। विपिन खेत देखने गया है। वह स्कूल से लौटा है, आदि।

(iii) पूर्ण भूत-क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूत कहते हैं, जिससे क्रिया की समाप्ति के समय का स्पष्ट बोध होता है कि क्रिया को समाप्त हुए काफी समय बीता है। जैसे-उसने मुरारी को मारा था; वह आया था।

(iv) अपूर्ण भूत-इससे यह ज्ञात होता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, किन्तु उसकी समाप्ति का पता नहीं चलता। जैसे-सुरेश गाना गा रहा था; गीता सो रही थी।

(v) संदिग्ध भूत-इसमें यह सन्देह बना रहता है कि भूतकाल में कार्य पूरा हुआ या नहीं। जैसे-तुमने गाया होगा; तू गया होगा।

(vi) हेतुहेतुमद्भूत-इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सकी। जैसे-मैं आता; तू जाता; वह खाता।

(3) भविष्यत् काल-भविष्य में होनेवाली क्रिया को भविष्यत्काल की क्रिया कहते हैं, जैसे-वह कल घर जाएगा। भविष्यत्काल के तीन भेद हैं.

(i) सामान्य भविष्यत्-इससे यह प्रकट होता है कि क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी। जैसे मैं पढूंगा; वह जाएगा।

(ii) सम्भाव्य भविष्यत्-जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना करता है। जैसे-सम्भव है, रमेश कल आए।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(iii) हेतुहेतुमद्भविष्यत्-इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर करता है। जैसे-वह आये तो मैं जाऊँ; वह कमाये तो खाये।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

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BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन Questions and Answers

परिभाषा : संज्ञा के जिस कथन से यह मालूम होता है कि वह एक व्यक्ति या वस्तु के विषय में या एक से अधिक के विषय में कहता है, उसे वचन कहते हैं।
जैसे-
(क) घोड़ा हिनहिनाता है ।
(ख) घोड़े हिनहिनाते हैं।

पहले वाक्य से मालूम होता है कि ‘केवल’ एक घोड़ा है। दूसरे वाक्य से मालूम होता है कि घोड़े एक से अधिक हैं। . इसलिए संज्ञा के वचन दो प्रकार हैं–(i) एकवचन और (i) बहुवचन ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

1. एकवचन : जो एक व्यक्ति या वस्तु के विषय में कहता है, उसे एकवचन कहते हैं।
2. बहुवचन : जो एक से अधिक अर्थात्, बहुत व्यक्तियों या वस्तुओं के विषय में कहता है, उसे बहुवचन कहते हैं । जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 1
ईकारांत और ऊकारांत संज्ञाओं के बहुवचन रूप में दीर्घ मात्रा हस्व हो जाती है।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 2

वचन द्वारा संज्ञाओं का रूपान्तर पुंलिंग संज्ञाएँ

1. अकारांत संज्ञा-बालक, घर, फल आदि ।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 3

2. संस्कृत की आकारांत संज्ञा-भ्राता, पिता, राजा आदि ।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 4

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

3. हिन्दी में आकारांत संज्ञा-लड़का, घोड़ा, कपड़ा आदि ।
एक लड़का पढ़ता है ।चार लड़के पढ़ते हैं।
एक लड़के ने कहा। दो लड़कों ने कहा ।

स्त्रीलिंग संज्ञाएँ

1. अकारान्त संज्ञा-गाय, पुस्तक, बात, सड़क आदि ।
पुस्तक पढ़ी जाती है। – यहाँ पुस्तकें मिलती हैं ।

2. आकारान्त संज्ञा-माता, लता, बालिका आदि ।
एक माता आयी। – दो माताएँ आयीं ।
एक बालिक ने कहा। – दो बालिकाओं ने कहा ।

अभ्यास-प्रश्न

1. नीचे के रिक्त स्थानों में कोष्ठक में दिये गये शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर लिखो।
(क) दो ………………… आती हैं। (लड़की, लड़कियाँ)
(ख) बैलगाड़ी है। (आयी, आयी)
(ग) …………………. घोड़े तेज होते हैं। (काला, काले)
(घ) राम …………… दो भाई आये हैं। . (का, के)

2. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करें
(क) इस वर्ग में तीन लड़की है।
(ख) दो दासी तीसरे दासी से लड़ती हैं।
(ग) दो डाकू ने तीन धोड़ा लूटे।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

3. उद्देश्य शब्दों के वचन बदलकर वाक्य बनाओ
(क) एक घोड़ा दौड़ता है।
(ख) राम के पास किताब नहीं है ।
(ख) माता बच्चों को प्यार करती है।
(घ) एक काला कुत्ता दौड़ता है।
(ग) डाकुओं ने दो घोड़े लूट।
(च) दासियाँ सो रही हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

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BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग Questions and Answers

प्रश्न 1.
लिंग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उस चिह्न को लिंग कहते हैं जो पुरुष जाति और स्त्री जाति का भेद । प्रकट करता है, जैसे –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 1
(क) समूह में जितनी संज्ञाएँ हैं उनसे पुरुष जाति का बोध होता है, इसलिए उन्हें पुंलिंग कहते हैं।
(ख) समूह में जितनी संज्ञाएँ हैं उनसे स्त्री जाति का बोध होता है, इसलिए उन्हें स्त्रीलिंग कहते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 2.
सोदाहरण लिंग-भेद बताएँ।
उत्तर-
हिन्दी में केवल दो लिंग हैं-(1) पुलिंग और (2) स्त्रीलिंग।
(1) पुलिंग (Masculine)-पुरुषजाति की संज्ञाओं की पुलिंग कहते हैं; जैसे-राजा, धोबी, गदहा, पहाड़, नदी, बालक ।
(2) स्त्रीलिंग (Feminine)-स्त्री जाति की संज्ञाओं को स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे-रानी, धोबिन, गदही, पहाड़ी, नदी, बालिका ।

प्रश्न 3.
पुंलिंग से स्त्रीलिंग बनाने की रीति :
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 2
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 3
उत्तर-
(घ)

प्रश्न 4.
‘जेठ’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ?
(क) जेठिन
(ख) जेठराइन
(ग) जेठरानी
(घ) जेठानी’
उत्तर-
(ख) जेठराइन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 5.
‘कवि’ शब्द का स्त्रीलिंग शब्द क्या है ?
(क) कवियत्री
(ख) कवयित्री
(ग) कवियानी
(घ) कवायाइन
उत्तर-
(ग) कवियानी

प्रश्न 6.
‘नायक’ शब्द का स्त्रीलिंग शब्द क्या है ?
(क) नायका
(ख) नायीका
(ग) नायिका
(घ) नायिकी
उत्तर-
(क) नायका

प्रश्न 7.
‘चौधरी’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ?
(क) चौधरानी
(ख) चौधराइन
(ग) चौधरिन
(घ) चौधरीन
उत्तर-
(ख) चौधराइन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 8.
‘ठाकुर’ शब्द का स्त्रीलिंग में कैसा रूप होगा?
(क) ठकुराइन
(ख) ठाकुराइन
(ग) ठाकुरिन
(घ) ठाकुरीन
उत्तर-
(ग) ठाकुरिन

प्रश्न 9.
‘श्रीमान’ शब्द का स्त्रीलिंग में कैसा रूप होगा?
(क) श्रीमानी
(ख) श्रीमानां
(ग) श्रीमती
(घ) श्रीमति
उत्तर-
(घ) श्रीमति

प्रश्न 10.
‘देवर’ शब्द का स्त्रीलिंग क्या है?
(क) देवराइन्
(ख) देवरिन
(ग) देवरीन
(घ) रेवरानी
उत्तर-
(घ) रेवरानी

प्रश्न 11.
‘अभिनेता’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ? .
(क) अभिनेता
(ख) अभिनेत्री
(ग) अभिनेतृ
(घ) अभिनेताइन
उत्तर-
(ख) अभिनेत्री

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 12.
‘सम्राट’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप लिखें।
उत्तर-
सम्राज्ञी।

प्रश्न 13.
गत बीस वर्षों के लिंग सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
उत्तर-
1. अग्नि-(पुं०) : अग्नि प्रज्वलित हो उठा।
2. अनाज-(पुं०) : आजकल अनाज महँगा है।
3. बुढ़ापा-(पुं०) : बुढ़ापा धीरे-धीरे आता है।
4. घी-(पुं०) : मक्खन से घी तैयार होता है।
5. चना-(पुं०) : चना पुष्टिकारक होता है।
6. गेहूँ-(पुं०) : गेहूँ खेत में पैदा होता है।
7. जी-(पुं०) : जी मचलता है।
8. मोती-(पुं०) : वहाँ मोती मिलता है।
9. सोना-(पुं०) : कर्नाटक में सोना मिलता है ।
10. गूं-(स्त्री०) : जूं रेंग रही है।
11. दाल-(स्त्री०) : दाल गल गयी है।
12. जेब-(स्त्री०) : उसकी जब फटी है।
13. चमक-(स्त्री०) : बिजली की चमक तेज है।
14. चाल-(स्त्री०) : उसकी चाल अच्छी है।
15. खटमल-(पुं०) : खटमल काटता है। ..
16. संसद-(स्त्री०) : ग्रीष्मकालीन संसद् फिर बैठ रही है।
17. शरबत-(पुं०) : शरबत काफी मीठा बना है।
18. बूंद-(स्त्री०) : अमृत की एक बूंद भी पर्याप्त है।
19. जहाज-(पुं०) : जहाज चला जा रहा था ।
20. चुनाव-(पुं०) : पाँचवाँ चुनाव होनेवाला है।
21. गीत-(पुं०) : उसका गीत पसन्द आया।
22. गन्ध-(स्त्री०) : गुलाब की गन्ध अच्छी है।
23. किताब-(स्त्री०) : उसकी किताब पुरानी है।
24. तकिया-(स्त्री०) : यह तकिया बड़ी अच्छी मुलायम है।
25. ताला-(पुं०) : उसकी जबान पर ताला लगा था।
26. दाँत-(पुं०) : उसके दाँत में दर्द है।
27. तोप-(स्त्री०) : किले को लक्ष्य कर तोप दागी गयी।
28. आत्मा-(स्त्री०) : उसकी आत्मा प्रसन्न थी।
29. कपूर-(पुं०) : कपूर हवा में उड़ गया।
30. कमीज-(स्त्री०), : उसकी कमीज फट गयी ।
31. कबूतर-(पुं०) : कबूतर छटपटा रहा है।
32. मशाल-(स्त्री०) : क्रान्ति में मशाल जलती रहेगी।
33. कलम-(स्त्री०) : मेरी कलम काली है।।
34. कमर-(स्त्री०) : उसकी कमर टूट गयी।
35. कमल-(पुं०) : तालाब में कमल खिला है।
36. केसर-(पुं०) : कश्मीर का केसर नामी है ।।
37. करुणा-(स्त्री०) : गरीबों को देखकर करुणा आ जाती है।
38. कोयल-(पुं०) : डालों पर कोयल कूक रही थी।
39. कुशल-(पुं०) : आपका कुशल तो है ?
40. कीमत-(स्त्री०) : इस कलम की कीमत क्या है ?
41. कोशिश-(स्त्री०) : सफलता पाने की कोशिश करनी चाहिए।
कायापलट-(स्त्री०) : देखते-देखते शहर की कायापलट हो गयी।
43. कीचड़-(पुं०) : रास्ते पर कीचड़ फैला है।
44. आह-(स्त्री०) : गरीबों की आह व्यर्थ नहीं जाती।
45. आँसू-(पुं०) : आँसू टपक पड़े।
46. आमद-(स्त्री०) : उनकी आमद से खुशी हुई।
47. अरहर-(स्त्री०) : बाजार में अरहर महँगी है।
48. खेत-(पुं०) : धान के खेत लहरा रहे हैं।
49. खीर-(स्त्री०) : खीर मीठी है।
50. खोज-(स्त्री०) : चोर की खोज जारी है।
51. ईख-(स्त्री०) : इस बार ईख अच्छी हुई।
ईंट-(स्त्री०) : नींव की ईंटों का बड़ा महत्व होता है।
53. उड़ान-(स्त्री०) : वायुयान ने उड़ान भरी।
54. घास-(स्त्री०) : घास हरी है।
55. चील-(स्त्री०) : आसमान में चील उड़ रही है।
56. चिराग-(पुं०) : चिराग जल रहा है।
57. चूल्हा-(पुं०) : उसने चूल्हा जलाया।
58. चीलर-(पुं०) : कपड़ों में चीलर पड़ गया है।
59. चोंच-(स्त्री०) : कौए की चोंच लम्बी है।
60. चुंगी-(स्त्री०) : हर विदेशी माल पर चुंगी लगती है।
61. माँग-(स्त्री०) : श्रमिकों की माँग पूरी नहीं होनी चहिए।
62. मुहर-(स्त्री०) : उसकी आँखों में सच्चाई की मुहर है।
63. दर्द-(पुं०) : इस गीत में कवि के दिल का दर्द उतर आया ।
64. देह-(स्त्री०) : बीमारी के कारण उसकी देह कमजोर है।
65. दीमक-(स्त्री०) : किताब में दीमक लग गयी।
66. चश्मा-(पुं०) : उसका चश्मा खो गया।
67. परदा-(पुं०) : आँखों पर पड़ा अज्ञान का परदा हट गया ।
68. पहिया-(पुं०) : गाड़ी का पहिया टूट गया।
69. पिंजड़ा-(पुं०) : तोते का पिंजड़ा खाली है।
70. पुकार-(स्त्री०) : न्याय की पुकार आज कोई नहीं सुनता ।
71. पुल-(पुं०) : पटना में गंगा नदी पर पुल बन रहा है।
72. प्रशंसा-(स्त्री०) : अच्छे लड़के की प्रशंसा सभी करते हैं।
73. खाट-(स्त्री०) : खाट टूट गयी ।
74. खड़ाऊँ-(स्त्री०) : मेरी खड़ाऊँ कहाँ है ?
75. खबर-(स्त्री०) : आज की नयी खबर क्या है ?
76. खरीद-(स्त्री०) : जरूरी सामानों की खरीद हो गयी।
77. ओस-((स्त्री०) : रात भर ओस गिरती रही ।
78. आँचल-(पुं०) : माँ ने आँचल पसारा ।
79. ऋतु-((स्त्री०) : सुहावनी ऋतु आ गयी ।
80. चाँदी-((स्त्री०) : चाँदी भी महँगी हो गयी।
81. वेतन-(पुं०) : कर्मचारियों का वेतन बढ़ना चाहिए।
82. हथेली-(स्त्री०) : उसकी हथेली में मेंहदी लगी है।
83. चुटकुला-(पुं०) : श्याम ने एक प्यारा चुटकुला सुनाया।
84. छत-((स्त्री०) : मकान की छत टूट गयी ।
85. झंझट-((स्त्री०) : झंझट बढ़ती ही जाती है।
86. झील-((स्त्री०) : झील सुन्दर लगती है।
87. टीस-((स्त्री०) : उसके कलेजे में टीस उठने लगी।
88. जीभ-((स्त्री०) : उसकी जीभ कट गयी।
89. जोश-(पुं०) : भारतीय जवानों के जोश का क्या कहना ।
90. जाँच-((स्त्री०) : इस मामले की जाँच हो रही है।
91. जोंक-((स्त्री०) : उस बच्चे के पेट से जोंक निकली ।
92. जलन-((स्त्री०) : इस ज्वाला में बड़ी जलन है।
93. जमघट-((स्त्री०), : लोगों की जमघट लगी हुई है ।
94. डाक-((स्त्री०) : आज की डाक में तीन चिट्ठियाँ आयीं।
95. ढेर-(पुं०) : यह अनाज का ढेर है।
96. ढोल-(पुं०) : दूर का ढोल सुहावन होता है।
97. होश-(पुं०) : तिजोरी टूटी देख सेठजी के हाश उड़ गये।
98. हाल-(पुं०) : अपना हाल तो कहें ! ठीक तो हैं ?
99. हीरा-(पुं०) : मुकुट में हीरा जड़ा था।
100. हार-(स्त्री०) : इस बार उसकी हार निश्चित है।
101. हाट-(०) : यहाँ हाट काफी जमकर लगता है।
102. हठ-(पुं०) : तुम्हारा हठ बेकार है।
103. हवा-(स्त्री०) : मन्द हवा बह रही है।
104. हाहाकार-(पुं०) : चारों ओर पानी के लिए हाहाकार मचा है।
105. हालत-(स्त्री०) : उनकी हालत गम्भीर है ।
106. हड़ताल-(स्त्री०) : महाविद्यालय में हड़ताल चल रही है।
107. तारा-(पुं०) : आसमान में तारे चमक रहे हैं।
108. तलवार-(स्त्री०) : राणा की तलवार अचूक वार करती थी।
109. तलाक-(पुं०) : उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया।
110. थकान-(स्त्री०) : उनकी धकान दूर नहीं हुई थी।
111. दूकान-(स्त्री०) : एक नयी दूकान खुली है।
112. देर-(स्त्री०) : कथा-साहित्य को प्रेमचन्द की देन अमर रहेगी।
113. देर-(स्त्री०) : थोड़ी देर में वह आ रहा है ।
114. दूब-(स्त्री०) : हरी दूब बड़ी प्यारी लगती है।
115. दीपक-(पुं०) : दीपक जल रहा है।
116. दोपहर-(स्त्री०) : दोपहर हो चली, नहाओ ।
117. दर्शन-(पुं०) : बहुत दिनों बाद उनके दर्शन हुए ।
118. दराद-(स्त्री०) : नये बने पुल में दरार पड़ गयी ।
119. दम्पति-(पुं०) : दम्पति सानन्द बिहर कर रहे हैं ।
120. नीयत-(स्त्री०) : उसकी नीयत साफ है ।
121. नीम-(स्त्री०) : नीम कड़वी होती है ।
122. नस-(स्त्री०) : उसकी नस कट गयी ।
123. नींद-(स्त्री०) : उसे नींद आ गयी है।
124. नाच-(पुं०) : वहाँ नाच हो रहा है।
125. नाक-(स्त्री०) : उसकी नाक कट गयी।
126. निकास-(पुं०) : इस मकान का निकास किधर है।
127. धन-(पुं०) : गरीव का धन ईमान ही है।
128. धूल-(स्त्री०) : पथ की धूल उड़ रही है।
129. धूप-(स्त्री०) : धूप कड़ी है।
130. धातु-(स्त्री०) : धातु चिकनी है।
131. धनिया-(पं०) : धानिया महँगा है।
132. पीठ-(स्त्री०) : उसकी पीठ दुख रही है ।
133. पलंग-(पुं०) : मेरा पलंग टूट गया।
134. परिवार-(पुं०) : उनका परिवार छोटा है।
135. पराजय-(स्त्री०) : युद्ध में उसकी पराजय हो गयी।
136. पतझड़-(स्त्री०) : हेमन्त में पतझड़ आरम्भ हो जाती है।
137. फूट-(स्त्री०) : जनता पार्टी में फूट पड़ गयी है ।
138. पाठशाला-(स्त्री०) : पाठशाला खुल गयी।
139. पहचान-(स्त्री०) : आज असली और नकली की पहचान कठिन है।
140. पुलिस-(स्त्री०) : वहाँ पुलिस तैयार कर दी गयी है।
141. पुकार-(स्त्री०) : गरीबों की पुकार कौन. सुननेवाला है ?
142. पूछ-(स्त्री०) : सभी जगह धनियों की पूछ होती है। .
143. पलक-(स्त्री०) : मेरी पलक खुली थी।
144. प्यास-(स्त्री०) : मुझे प्यास लगी है।
145. पंछी-(पुं०) : पंछी आसमान में उड़ रहे हैं।
146. प्राण-(पुं०) : अपने बच्चों के लिए माँ के प्राण निकले थे।
147. पीतल-(पुं०) : पीतल चमकता है।
148. बोझ-(पुं०) : बुढ़ापे का बोझ ढोना कठिन है।
149. बचपन-(पुं०) : अपना बचपन बीत चुका है।
150. बाँह-(स्त्री०) : उनकी बाँह दुख रही है।
151. बात-(स्त्री०) : बात बढ़ती ही गयी ।
152. बर्फ-(स्त्री०) : जाड़ें में पर्वत पर बर्फ जम जाती है।
153. बाढ़-(स्त्री०) : नदी के इलाकों में बाढ़ आ गयी है।
154. भात-(पुं०) : इस चावल का भत अच्छा होता है ।
155. भूख-(स्त्री०) : हमलोगो की भूख बढ़ती जा रही है !
156. भेंट-(स्त्री०) : उन्होंने मेरी भेंट स्वीकार कर ली।
157. भीड़-(स्त्री०) : वहाँ लोगों को भीड़ लगी थी।
158. भूत-(पुं०) : मार के डर से भूत भी लागता है।
159. भरमार-(स्त्री०) : समाज में बेकारों की भरमार है।
160. यश-(पुं०) : उन्हें अपने अच्छे कार्यों का यश मिला।
161. राह-(स्त्री०) : किसीकी राह में टाँग अड़ाना बुरा है।
162. रात-(स्त्री०) : रात किसी तरह कट गयी।
163. राख-(स्त्री०) : चिता की राख उड़ रही थी।
164. रहन-सहन-(पुं०) : उनका रहन-सहन बड़ा सुन्दर है।
165. रास्ता-(पुं०) : वे अपना रास्ता भूल गये थे।
166. मोह-(पुं०) : धन का मोह सभी को होता है ।
167. [गा-(पुं०) : मूँगा समुद्र से निकाला जाता है।
168. मूंछ-(स्त्री०) : उन्होंने अपनी मूंछ मुड़वा ली थी।
169. माया-(स्त्री०) : ईश्वर की माया अपरम्पार है।
170. मटर-(पुं०) : इ बार मटर अच्छा हुआ है।
171. महल-(पुं०) : राजा का आलीशान महल खड़ा था।
172. मेड़-(स्त्री०) : यह मेड़ मेरे खेत की है।
173. माला-(स्त्री०) : वे फूलों की गाला लेकर आये थे।
174. मिठास-(स्त्री०) : इस गन्ने की मिठास का क्या कहना ।
175. मिलावट-(स्त्री०) : आजकल हर चीज में मिलावट होती है।
176. लाज-(स्त्री०) : राजू को बोलने में लाज लग रही है।
177. लाश-(स्त्री०) : लावारिश लाश पड़ी थी।
178. लात-(स्त्री०) : उसने उसे एक लात लगायी।
179. लू-(स्त्री०) : तेज लू चल रही है।
180. लगान-(पुं०) : इस खेत का लगान अधिक है।
181. लूट-(स्त्री०) : उनकी फसल की लूट हो गयी।
182. लीक-(स्त्री०) : गाड़ी के पहिये की लीक साफ नजर आती हैं।
183. विजय-(स्त्री०) : अन्धकार पर प्रकाश की विजय हुई।
184. विनय-(स्त्री०) : मेरी विनय सुनी आपने !
185. वायु-(स्त्री०) : वायु मंद-मंद वह रही है ।
186. बिल-(पुं०) : चूहे ने दीवाल में तीन बिल बनाए हैं।
187. बुलबुल-(स्त्री०) : डाल पर बैठ बुलबुल गा रही थी।
188. वेदना-(स्त्री०) : उसकी वेदना अधिक थी।
189. सौगात-(स्त्री०) : वे प्रेम की सौगात लेकर आये हैं।
190. शरीर-(पुं०) : उसका शरीर स्वस्थ है ।
191. शराब-(स्त्री०) : शराब नहीं पीनी चाहिये ।
192. शरण-(स्त्री०) : मैं परमात्मा की शरण चाहता हूँ।
193. शंका-(स्त्री०) : तुम्हें तो हर बात की शंका ही होती है।
194. सोन-(पुं०) : सोन गंगा में मिलता है ।
195. सामर्थ्य-(स्त्री०) : यह काम मेरी सामर्थ्य से बाहर है ।
196. सूत-(पुं०) : सूत टूट गया ।
197. सन्तान-(स्त्री०) : हम सभी एक ईश्वर की सन्तान है।
198. समाज-(पुं०) : महान् रचनाओं से समाज अवश्य प्रभावित होता है ।
199. सड़क-(स्त्री०) : सड़क चौड़ी है।
200. सफर-(पुं०) : रेल का सफर सुहाना होता है ।
201. साख-(स्त्री०) : बाजार में उनकी साख जम चुकी है।
202. सुझाव-(स्त्री०) : आपका सुझाव अच्छा है !
203. समझ-(स्त्री०) : आपकी समझ की दाद देता हूँ।
204. साँस-(स्त्री०) : वे गहरी साँस ले रहे थे।
205. सबूत-(पुं०) : तुम्हारे जबाव का सबूत क्या है।
206. सुलह-(स्त्री०) : दोनों गुटों में सुलह हो गयी।
207. सरकार-(स्त्री०) : हमारी सरकार निकम्मी है।
208. सिन्धु-(पुं०) : सामने अगाध सिन्धु लहरा रहा था ।
209. सूझ-(स्त्री०) : आपकी सूझ बड़ी अच्छी है।
210. सुबह-(स्त्री०) : सुबह हो चली थी।
211. मौसम-(पुं०) : आज का मौसम अच्छा है।
212. अनल-(पुं०) : यज्ञ कुण्ड में अनल धधक रहा।
213. आचरण-(पुं०) : आपका आचरण अच्छा है।
214. उपेक्षा-(स्त्री०) : काम की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए ।
215. आग-(पुं०) : एक घर में आग लग गयी ।
216. दही-(पुं०) : स्त्रलिंग. अपने दही को खटा नहीं कहती ।
217. विछावन-(पुं०) : वह विछावन गंदा है।
218. झाडू-(पुं०) : झाडू टूट गया ।
219. शाम-(स्त्री०) : शाम हो गयी।
220. मैल-(स्त्री०) : तुम्हारे हाथ में मैल लग गयी है।
221. रास-(स्त्री०, पु०) : घोड़े की रास ढीली हो गयी। राधा कृष्ण के रास पसद करती थी।
222. शशि-(पुं०) : पूर्णिमा का शशि उदय हुआ।
223. गन्ना-(पुं०) : खेत में गन्ने लगे हुए थे।
224. छाप-(स्त्री०) : ललाट पर रामानन्दी छाप थी।
225. नस-(स्त्री०) : मैं उसकी नस-नस पहचानता हूँ।
226. वयार-(स्त्री०) : चैती वयार बह रही थी।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science चुम्बक Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
(क) जो वस्तु चुम्बक की ओर खिंचती है ……………….. कहलाता है।
(ख) चुम्बक के जिन स्थानों पर ‘लोहे का बुरादा सबसे अधिक चिपकता है, चुम्बक का ……………कहलाता है।
(ग) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुम्बक सदा …………… की दिशा में ही रूकता है।
(घ) जब दो समान ध्रुव आमने-सामने रहते हैं तब ………… होता है।
(ङ) जब दो असमान ध्रुव आमने-सामने होते हैं तब ……….. होता है।
उत्तर:
(क) चुम्बकीय पदार्थ
(ख) ध्रुव
(ग) उत्तर-दक्षिण
(घ) विकर्षण
(ङ) आकार्षणः

प्रश्न 2.
मिलान कीजिए –
(1) मैग्नेटाइट – (क) उत्तरी एवं दक्षिणी
(2) लोहा, निकिल, कोबाल्ट – (ख) अचुम्बकीय पदार्थ
(3) दो ध्रुव – (ग) यूनान का चरवाहा
(4) लकड़ी – (घ) चुम्बकीय पदार्थ
(5) मेग्नस – (ङ) प्राकृतिक चुम्बक
उत्तर:
(1) – (ङ)
(2) – (घ)
(3) – (क)
(4) – (ख)
(5) – (ग)

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प्रश्न 3.
निम्न वाक्यों में जो सही हो उनके सामने (सही) का चिह्न एवं गलत कथन के सामने (गलत) का चिह्न लगायें।
(क) प्लास्टिक एक चुम्बकीय पदार्थ है।
(ख) कृत्रिम चुम्बक का आविष्कार यूनान में हुआ था।
(ग) जो वस्तु चुम्बक की ओर आकर्पित होती है। चुम्बकीय वस्तु कहलाती है।
(घ) चुम्बक के दो ध्रुव होते हैं।
उत्तर:
(क) गलत
(ख). सही
(ग) सही
(घ) सही

प्रश्न 4.
चुम्बक के किन्हीं दो गुणों को लिखिए।
उत्तर:
चुम्बक के दो प्रमुख गुण –
(क) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुम्बक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रूकता है।
(ख) चुम्बक, चुम्बकीय पदार्थ को अपनी ओर आकर्षित करता है।

प्रश्न 5.
छड़ चुम्बक के ध्रुव कहाँ स्थित होते हैं ?
उत्तर:
छड़ चुम्बक को प्रयोग में लाने के बाद पाया गया कि इसके दोनों सिराओं पर आकर्षण शक्ति सबसे ज्यादा होती है जिसे ध्रुव कहते हैं यानि छड़ चुम्बक के ध्रुव दोनों सिराओं पर स्थित होते हैं।
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक 1

प्रश्न 6.
आप लोहे की पत्ती को चुम्बक कैसे बनायेंगे?
उत्तर:
एक लोहा की पत्ती तथा एक चुम्बक लेंगे। चुम्बक को लोहे की पत्ती पर कुछ देर तक रगड़ते रहेंगे। कुछ देर के बाद पत्ती जब हटाते हैं तो उसमें चुम्बकीय गुण आ जाते हैं। इस प्रकार चुम्बक से रगड़ कर लोहे की पत्ती को चुम्बक बनाया जा सकता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

प्रश्न 7.
दिशा सूचक में कंपास का किस प्रकार प्रयोग होता है?
उत्तर:
घड़ी के केश या डायल की तरह का होता हैं जिसमें चारों दिशा अंकित रहते हैं। उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम। उसके ठीक केन्द्र पर एक कील होता है। जिस पर चुम्बक का बना हुआ सूई लगा होता है। जिसके एक तरफ लाल रंग चढ़ा होता है। यह सूई किसी भी दिशा में घूमने के लिए स्वतंत्र होता है। जब इसको हिला-डुला कर छोड़ देते हैं तो यह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में आकर रूक जाती है। इससे दिशा का निर्धारण हो जाता है। इसलिए इसे “दिक् सूचक सूई” या चुम्बक दिक्सूचक यंत्र कहते हैं।

प्रश्न 8.
नीचे लिखी चीजों में से कौन-सी एक छड़ चुंबक के दोनों ध्रुवों की ओर आकर्षित होगी ? हरेक का कारण भी बताइए ।
(क) किसी दूसरे छड़ चुम्बक का उत्तर ध्रुव
(ख) किसी दूसरे छड़ चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव
(ग) लोहे का टुकड़ा
(घ) लकड़ी का गुटका
उत्तर:
लोहे का टुकड़ा क्योंकि उसमें कोई ध्रुव नहीं होता है ।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science चुम्बक Notes

अध्ययन सामग्री :

आज से लगभग 2500 वर्ष पहले यूनान में क्रीट नामक द्वीप पर एक बूढ़ा चरवाहा मेगनस रहता था। उसकी छड़ी के निचले हिस्से में लोहा लगा हुआ था। एक भेड़-बकरी चराने के क्रम में उसकी छड़ी के निचले हिस्से में (लोहे की भाँति देखने) कोई पदार्थ चिपक गया जिसमें लोहे को आकर्षित करने के प्राकृतिक गुण में हैं। उस वस्तु (पत्थर) का नाम “लोडस्टोन” है जो लोहे का ही एक रूप है, पर इसमें प्राकृतिक रूप से ही चुम्बकीय गुण होते हैं। आगे चलकर महान वैज्ञानिक विलियम गिलर्बट ने अनेक प्रयोग कर चुम्बक के अनेके गुणों का विवरण किया। ईसा के जन्म के लगभग 600 वर्ष पूर्व से ज्ञात है कि “मैगनेटाइट” नामक खनिज पदार्थ के टुकड़ों में लोहे के पदार्थों को आकर्षित करने का गुण है। ऐसे पदार्थों को चुम्बक कहा गया।

प्रकृति में मिलने के कारण इसे प्राकृतिक चुम्बक कहते हैं। रासायनिक रूप से यह लोहे का ऑक्साइड (Fe2O4) होता है। इसकी कोई निश्चित आकृति नहीं होती है। कुछ पदार्थों को कृत्रिम विधियों द्वारा चुम्बक बनाया जा सकता है। जैसे लोहा, इस्पात, कोबाल्ट आदि इन्हें कृत्रिम चुम्बक कहते हैं। ये विभिन्न आकृति की होती है, जैसे – छड़-चुम्बक, घोड़ा-नाल चुम्बक, चुम्बकीय सूई आदि।

चुम्बक में लोहे, इस्पात आदि धातुओं को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता होती है। यदि किसी चुम्बक को लौह बुरादों के पास लाया जाय, तो बुरादा चुम्बक में चिपक जाता है। चिपके हए बरादे को मात्रा, चुम्बक के दोनों सिरों पर सबसे अधिक एवं मध्य में सबसे कम होती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि चुम्बक की आकर्षण शक्ति उसके दोनों किनारों पर सबसे अधिक एवं मध्य में सबसे कम होती है। चुम्बक के किनारे के दोनों सिरों को नुम्बक के ध्रुव कहते हैं।

यदि किसी चुम्बक को धागे से बाँधकर मुक्त रूप से लटका दिया जाय, तो स्थिर होने पर उसका एक ध्रुव उत्तर की ओर और दूसरा ध्रुव दक्षिण की ओर हो जाता है। उत्तर दिशा सूचित करने वाले ध्रुव को चुम्बक का उत्तरी ध्रुव N तथा दक्षिण दिशा सूचति करने वाले ध्रुव को चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव S कहते हैं। दंड चुम्बक के दोनों ध्रुवों से होकर गुजरने वाली काल्पनिक सरल रेखा को उस चुम्बक का चुम्बकीय अक्ष कहते हैं। दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी को चुम्बकीय लम्बाई कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

दो चुम्बकों के असमान ध्रुव एक-दूसरे को आकर्पित करते हैं तथा दो समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्पित करते हैं। किसी चुम्बक को बीच से तोड़ देने पर इसके ध्रुव अलग-अलग नहीं होते, बल्कि टूटे हुए भाग पुनः चुम्बक बन जाते हैं तथा प्रत्येक भाग में उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न हो जाते हैं। अतः एक अकेले चुम्बकीय ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता है। – चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव होता है, उसे चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।

चुम्बकीय क्षेत्र में बल रेखाएँ वे काल्पनिक रेखाएँ हैं, जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को अविरल प्रदर्शन करती है।

चुम्बकीय बल रेखाओं के गुण –

  • चुम्बकीय बल रेखाएँ सदैव चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं तथा वक्र बनाती हुई दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती हैं और चुम्बक के अन्दर से होती हुई पुनः उत्तरी ध्रुव पर वापस आती हैं।
  • दो बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती।
  • चुम्बकीय क्षेत्र जहाँ प्रबल होती है, वहाँ बल रेखाएँ पास-पास होती हैं।
  • एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ परस्पर समान्तर एवं बराबर-बराबर दूरियों पर होती हैं।

चुम्बक के आकर्षण के आधार पर सभी पदार्थों को दो भागों में विभाजित किया गया है।
(क) चुम्बकीय पदार्थ।
(ख) अचुम्बकीय पदार्थ।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

वे सभी पदार्थ जो चुम्बक के द्वारा आकर्षित हो जाते हैं उसे चुम्बकीय पदार्थ कहते हैं जैसे- लोहा, स्टील, निकेल आदि।

वे सभी पदार्थ जो चुम्बक के द्वारा आकर्षित नहीं होते हैं उसे अचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। जैसे- कागज, लकड़ी, पत्थर, अल्युमिनियम आदि।

चुम्बक का प्रयोग मोटर, पंखा, टेलीविजन, दिशा सूचक यंत्र आदि में किया जाता है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 10 बिहार दर्शन-2 Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-2 Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
खाली जगहों को भरें

  1. तख्त श्री हरमंदिर …………. में स्थित है।
  2. शेरशाह का मकबरा ………….. कोणीय है।
  3. ग्रैंडकोर्ड रेलवे ………… को जोड़ती है।
  4. गोलघर का निर्माण …………. में करवाया।
  5. दीदारगंज में ………… की मूर्ति मिली।

उत्तर-

  1. पटना सिटी
  2. अष्ट
  3. दिल्ली-हावड़ा
  4. जान गॉलस्टिन ने 1776 ई
  5. यक्षिणी।

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प्रश्न 2.
सही मिलान करें –

  1. लंगर – नि:शुल्क भोजन
  2. पटना संग्रहालय – सासाराम
  3. गोलघर – राजेन्द्र कक्ष
  4. रोहतास – अनाज का भंडारण

उत्तर-

  1. लंगर – नि:शुल्क भोजन
  2. पटना संग्रहालय – राजेन्द्र कक्ष
  3. गोलघर – अनाज का भंडारण
  4. रोहतास – सासाराम

प्रश्न 3.
सही कथनों में सही (✓) का चिह्न लगाएँ एवं गलत कथन में गलत (✗) का चिह्न लगाएँ

  1. शेरशाह को हराकर हुमायूँ ने भारत की गद्दी पर कब्जा किया। – (✗)
  2. पटना का गोलघर कैप्टन जान गॉलस्टीन ने बनवाया था। – (✓)
  3. पत्थर की मूर्ति “यक्षिणी” पटना के दीदारगंज में मिली थी। – (✓)
  4. गुरुगोविन्द सिंह का जन्म स्थल तख्त श्री हरमंदिर जी कहलाता है। – (✓)

प्रश्न 4.
बताइये –

प्रश्न (क)
गोलघर कहाँ है ? इसका निर्माण क्यों करवाया गया ?
उत्तर-
गोलघर पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1776 ई में अनाज के सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष काल या अकाल के समय इस अनाज से ‘मदद पहुँचाई जाये। जिससे सभी को अनाज की समस्याओं का सामना करना नहीं पड़े।

प्रश्न (ख)
शेरशाह कौन थे? इनका मकबरा कहाँ है?
उत्तर-
शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खाँ था जो युवा काल में ही – अपने संरक्षक की रक्षा करते हुए शेर को तलवार से एक ही बार में दो टुकड़े कर दिये थे। तभी से उसे शेरशाह के नाम से पुकारा जाने लगा। रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है। यह मकबरा अष्टकोणीय है। जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

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प्रश्न (ग)
अगर आप पटना संग्रहालय जायेंगे तो आपको कौन-कौन सी चीजें नजर आएंगी?
उत्तर-
पटना संग्रहालय का भवन राजस्थानी शैली में बना हुआ है। संग्रहालय के बगीचे में सामने ही तोप रखे हैं, चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी हैं। मुख्य भवन में जाते ही एक विशाल पेड़ देखने को मिलेगा। जो लगभग 50000 वर्ष पुराना है। उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं।

यह पत्थरनुमा जीवाश्म के उदाहरण हैं। यहाँ भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों को भी देखते हैं। पटना संग्रहालय में ही आगे बढ़कर जाने पर एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ है। यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले हुए उपहारों को भी देख सकते हैं जो उनकी स्मृति के रूप में रखा हुआ है।

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प्रश्न (घ)
गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज किस नाम से प्रसिद्ध है? वहाँ सिक्ख क्यों आते हैं?
उत्तर-
गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज तख्त श्री हरमंदिर साहब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। सफेद संगमरमर से बना हुआ है। यह सिक्खों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। गुरुगोविन्द सिंह के जन्मदिवस पर यहाँ मेला लगता -है। यहाँ देश-विदेश के सिक्ख भाग लेने आते हैं। इस पवित्र स्थल के अंदर गुरुग्रंथ साहिब रखा हुआ है और गुरुवाणी पढ़ी जाती है। यहाँ लंगर भी चलता

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-2 Notes

पाठ का सारांश

बिहार दर्शन-2 में बच्चों ने मिलकर रविवार के दिन सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा, पटना के गोलघर, संग्रहालय तथा पटना सिटी स्थित तख्त मंदिर साहेब घूमने गये।

अगले दिन सभी बच्चे सासाराम राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 के किनारे रोहतास का जिला मुख्यालय है और यहाँ से दिल्ली-हावड़ा जोड़ने वाली ग्रैंडकोर्ड रेलवे लाइन भी गुजरती है। इस प्रकार, सभी बच्चे तैयार हो गये बस के द्वारा दर्शनीय स्थलों को देखने।

प्रधानाचार्य ने बाल सभा में बच्चों को बताया कि रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है।

शेरशाह ने हुमायूँ को हराकर भारत की गद्दी पर कब्जा कर लिया था । यह मकबरा शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही बनवाना प्रारंभ करा दिया था। यह मकबरा अष्टकोणीय है जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। मकबरे की छत गोल गुम्बद के रूप में है। यह मकबरा एक तालाब के बीचों-बीच हे और वहाँ तक जाने के लिए बीचों-बीच एक पुलिया मुख्य द्वार से मकबरा तक बनी हुई है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है और इसके कर्मचारी इसकी देख-रेख करते हैं। फिर सभी लोग पटना के गोलघर देखने के लिए गये। यह जगह पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। गोलघर की गोल दीवारों पर एक सूचना पट्ट लगी है जिसमें गोलघर के सम्बन्ध में कई जानकारियाँ दी गई हैं। उसमें लिखा है कि इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1776 ई. में अनाज को सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष या अकाल के समय इस अनाज से मदद पहुँचाई जा सके ।

इसकी दीवारें 12 फीट मोटी और 96 फीट ऊँची है। इसके शीर्ष पर चढ़ने के लिए दोनों ओर से सीढियाँ बनी हुई हैं। सीढियाँ को चढ़कर ही गोलकर ऊपर जाया जाता है। वहाँ से पूरा पटना दिखाई देता है उत्तर दिशा में गंगा नदी बिल्कुल पास से बहती है । दूर पूरब में महात्मा गाँधी सेतु दिखाई पड़ता है।

गाँधी मैदान का विहंगम खुला क्षेत्र और एक किनारे पर स्थित श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल तथा चारों ओर ऊँची इमारतें बहुत ही आकर्षक लगती हैं। गोलघर के निकट में ही पटना संग्रहालय स्थित है। यहाँ स्कूली बच्चों को रियायती दुर पर प्रवेश टिकट मिलता है। टिकट लेने के बाद हमलोग अंदर गए। चारों और बड़ा-सा बगीचा है और बीच में संग्रहालय का भवन है। यह भवन राजस्थानी शैली में बना है। संग्रहालय का भवन के बगीचे में सामने ही तोच रखे हैं। ये तोपे अंग्रेजी शासन की हैं। चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी देखने को मिलती हैं।

भवन में मुख्य द्वार से जाते ही एक विशाल पेड़ है जो लगभग 5000 वर्ष पुराना है और उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं।

यह पत्थरनुमा वृक्ष जीवाश्म का उदाहरण है। संग्रहालय में भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों की कतार हैं। सभी वस्तुओं के पास नाम सहित उनकी आयु, उपयोगिता लिखी हुई है, जिसे पढ़कर उसके बारे में समझा जा सकता है। वहाँ एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ।

यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले उपहारों एवं वस्तुओं को स्मृति के रूप में रखा गया है। हाँ, हमें संग्रहालय में रखे गए चीजों को बर्बाद नहीं करना चाहिए संग्रहालय में हर जगह सूचनाएँ लिखी हुई हैं। हर कमरे में दीवार पर कैमरे लगे हुए हैं। अगर कोई छुएगा तो कैमरे में उसकी तस्वीर आ जाएगी।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

यहाँ पत्थर की एक सुंदर-सी मूर्ति थी जिस पर ‘दक्षिणी’ लिखा हुआ था। वह मूर्ति दीदारगंज में मिली थी। वह मूर्ति बहुत ही चमक रही थी और उसके गले में एक हार भी था। इमलोगों ने घूमकर सारा संहालय देखा।

संग्रहालय देखने से इतिहास की समझ बनती है। इस प्रकार हमलोगों ने बिहार के दार्शनिक स्थलों को देखा और बहुत-सी ज्ञानवर्द्धक रोचक बातें जानने को मिली । हमने गोलघर, पटना संग्रहालय, तख्त हरमंदिर साहेब के दर्शन भी किये।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

Bihar Board Class 6 Science बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) निम्न वस्तुओं में बिजली का चालक है –
(i) लकड़ी
(ii) कागज
(iii) प्लास्टिक
(iv) लोहा
उत्तर:
(iv) लोहा

(ख) बल्ब के आविष्कारक थे –
(i) जेम्सवाट
(ii) एडीसन
(iii) ग्राहम बेल
(iv) जहाँगीर भाभा
उत्तर:
(ii) एडीसन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

(ग) बल्ब की कुंडली किस धातु की बनी होती है –
(i) लोहा
(ii) पीतल
(iii) टंगस्टन
(iv) स्टील
उत्तर:
(iii) टंगस्टन

(घ) हवा है –
(i) बिजली का चालक
(ii) बिजली का कुचालक
(iii) कभी चालक कभी कुचालक
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) बिजली का चालक

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

(क) जब विद्युत धारा सेल के एक सिरे व तार व बल्ब से होते हुए सेल के दूसरे सिरे तक प्रवाहित होती है तो इस चक्कर को ………..कहते हैं।
(ख) किसी वस्तु को विद्युत परिपथ में जोड़ने पर बल्ब जल उठता है। तो इस वस्तु को विद्युत का ……………. कहते हैं ।
(ग) ऐसी चीजें जिनको सर्किट में जोड़ने से बल्ब नहीं जलता हैं, इन्हें ………………. कहा जाता है।
उत्तर:
(क) परिपथ
(ख) चालक
(ग) कुचालक

प्रश्न 3.
राहुल ने नया सेल खरीदा। उसकी धुंडी पर एक प्लास्टिक की सील बनी थी। प्लास्टिक की सील हटाए बिना राहुल ने सेल को टॉर्च में – डाला। बताएँ, राहुल की टॉर्च क्यों नहीं जली?
उत्तर:
सभी वस्तुओं को आवेश या धारा के गमन के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है। चालक तथा कुचालक। वैसी वस्तुएँ जिससे होकर धारा _आसानी से एक सिरे से दूसरे तक गमन करती हो उसे चालक तथा जिससे होकर धारा प्रवाहित नहीं होती हो उसे अचालक कहते हैं।
चालक – लोहा, ताँबा।
कुचालक – प्लास्टिक सीसा।

सेल की घंडी पर प्लास्टिक की सील लगी थी जिसके कारण धारा प्रवाहित नहीं हो पा रही थी। क्योंकि प्लास्टिक धारा का कुचालक होता है। यही कारण था कि राहुल की टॉर्च नहीं जली।

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प्रश्न 4.
बल्ब के अंदर की कुंडली टूटने के कारण जब फ्यूज हो जाता है, तो बताएँ बल्ब क्यों नहीं जलता है ?
उत्तर:
किसी यंत्र को संचालित करने के लिए विद्युत परिपथ पूर्ण होना चाहिए। कुंडल टूटने के कारण विद्युत परिपथ टूट जाता था जिसके कारण धारा प्रवाहित नहीं हो पाती है। यही कारण है कि बल्ब नहीं जल पाता है।

प्रश्न 5.
किशन के पास एक ही तार था। तार के एक सिरे को उसने अपने बल्ब की चूड़ी पर कसा और दूसरा सिरा सेल पर दबाया। फिर एक स्टील के डिब्बे पर सेल और बल्ब को दबाकर इस तरह रखा कि उसका बल्ब जल उठा। अपनी कॉपी में चित्र बना कर समझाएँ कि एक ही तार से परिपथ कैसे पूरा हो गया ?
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उत्तर:
टॉर्च के निचले ढक्कन में एक मोटे तार का स्प्रिंग होता है। स्प्रिंग होने से बल्ब की धुंडी और दोनों सेल आपस में सटकर जुड़े रहते हैं। स्प्रिंग वाला तार टॉर्च के किनारे-किनारे ऊपर चला जाता है। ऊपर इस तार के साथ स्विच की पत्ती जुड़ी होती है। स्विच को ऊपर दबाने से पत्ती ऊपर जाकर बल्ब के एक सिरे को छूती है। सर्किट पूरा होता है और बल्ब जल उठता है।

प्रश्न 6.
अपने शब्दों में समझाएँ कि बल्ब में रोशनी कैसे होती है?
उत्तर:
बल्ब के फिलामेंट टंग्सटन का बना होता है जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। अधिक प्रतिरोध होने के कारण फिलामेंट में जब धारा प्रवाहित – होती है तो वह काफी गर्म हो जाता है। क्योंकि लगभग सभी विद्युत ऊर्जा ऊष्मा . में परिवर्तित हो जाती है। फिलामेंट जब काफी गर्म होकर लाल हो जाता है तो यह प्रकाश और ऊष्मा देने लगती है।

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Bihar Board Class 6 Science बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Notes

अध्ययन सामग्री:

बल्ब की जगमग-जगमग रोशनी ने हमारे मानव जीवन को एक नई जिन्दगी प्रदान की। इसके पहले लकड़ी, किरोसिन आदि जला कर हम प्रकाश – उत्पन्न करते थे। परन्तु बल्ब की जगमग-रोशनी ने आज हमारे जीवन में चार चाँद लगा दिया। विद्युत का आविष्कार ने हमारे मानव जीवन को आज यहाँ तक पहुँचा दिया। विकास को चरम सीमा पर पहुँचाने में विद्युत की अह्म भूमिका रही। बल्ब की सबसे पहली खबर सन् 1879 के दिसंबर माह में अमेरिका के एक अखबार में छपी। इस खबर से पूरी दुनिया में तहलका मच गया। इस आविष्कार का श्रेय थॉमस एडीसन को गया। यह प्रतिभा के धनी और कड़ी मेहनत में विश्वास रखने वाले अपने जीवनकाल में उन्होंने एक हजार से अधिक आविष्कार किए।

इस अध्याय के अध्ययन का मुख्य विषय था-बल्ब कैसे जलता है। इसके लिए क्या-क्या आवश्यक उपकरण चाहिए तथा क्या-क्या आवश्यक कदम उठाने के बाद यह जलता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

बल्ब जलाने के लिए आवश्यक कदम –

1. तार को साफ करना—सबसे पहले तार के दोनों सिरों से प्लास्टिक हटा देते हैं। तार के दोनों सिरे साफ होना चाहिए। यदि सिरों पर पहले से ही प्लास्टिक हटा हुआ है और वे साफ नहीं हो तो उन्हें रेगमाल, पत्थर या किसी अन्य खुदरी चीज से घिसकर चमका लें।

2. बल्ब एवं होल्डर की जाँच-बल्ब एवं होल्डर की जाँच कर लेना चाहिए। उसके बाद परिपथ में उचित तरीके से जोड़ देते हैं।

3. सेल के सिरे पहचानिए सेल के दो सिरे होते हैं। एक तरफ पीतल को टोपी तो दूसरी तरफ धातु की पट्टी होती है। पीतल की टोपी को धन सिरा तथा दूसरी सिरा को ऋण सिरा कहते हैं। दोनों सेल सिरों को उचित तरीके से जोड़ते चले जाते हैं।

4. बढ़िया-सा सेल होल्डर–सेलों को होल्डर में उचित तरीके से लगा देते हैं।

5. अब जलेगा अपना बल्ब बल्ब होल्डर से जुड़े दोनों तारों को सेल से जोड़ देते हैं। एक तार को सेल की धुंडी पर लगा देते हैं। दूसरे तार को सेल के चपटे सिरे से जोड़ देते हैं।

6. अपना बल्ब बुझाएँगे कैसे-बल्ब को अनावश्यक रूप से जलने से बचाने के लिए तार को हटा देते हैं या उसमें एक स्विच लगा देते हैं।

इस प्रकार बल्ब जलाने की प्रक्रिया पूरी होती है। सेल से तार में, तार से बल्ब में और फिर बल्ब में से होकर तार के जरिए सेल के दूसरे सिरे तक बिजली के बहने का यह एक पूरा चक्कर लगाता है। बिजली के बहने का यह एक पूरा चक्कर को परिपथ (सर्किट) कहते हैं।

धारा का प्रवाह यदि परिपथ में होता रहता है तो उसे हम कहते हैं-सर्किट मूरा या चालू है। सर्किट में बिजली नहीं बहती तो हम कहते हैं। सर्किट अधूरा या कहीं से कटा हुआ है।

धारा के प्रवाह के आधार पर वस्तुओं को दो भागों में बाँटा गया है-चालक तथा अचालक या कुचालक। जिस पदार्थ से होकर धारा प्रवाहित हो जाती है उसे चालक कहते हैं। जैसे सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, अल्युमिनियम आदि। जिस पदार्थ से होकर धारा प्रवाहित नहीं होती है उसे अचालक कहते हैं। जेसे – लकड़ी, कागज, कपड़ा प्लास्टिक आदि।

धारा तथा विभिन्न यंत्रों का अध्ययन अब हमलोग आगे की कक्षा में करेंगे।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

प्रश्न 1.
आकृति में, केन्द्र O वाले एक वृत्त पर तीन बिन्दु A, B और C इस प्रकार है कि ∠BOC = 30° तथा ∠AOB = 60 है। यदि चाप ABC के अतिरिक्त वृत्त पर D एक बिन्दु है, तो ∠ADC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 1
उत्तर:
चित्रानुसार, ∠AOC = ∠AOB + ∠BOC
= 60° + 30° = 90°
हम जानते हैं कि केन्द्र पर बना कोण शेष परिधि पर भने कोण का दो गुना होता है।
∠ADC = \(\frac{1}{2}\) ∠AOC = \(\frac{1}{2}\) × 90° = 45°.

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प्रश्न 2.
किसी वृत्त को एक जीवा वृत्त की त्रिज्या के बराबर है। जीवा द्वारा लघु चाप के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण ज्ञात कीजिए तथा दीर्घचाप के किसी बिन्दु पर भी अंतरित कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∆OAB में,
AB = OA = OB त्रिज्या (दिया है)
∴ ∆AOB एक समबाहु त्रिभुज है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 2
अत: इस त्रिभुज का प्रत्येक अन्त:कोण -600
∴ ∠AOB = 60°
∠ACB = \(\frac{1}{2}\) ∠AOR = \(\frac{1}{2}\) + (60°) = 30°
अत: चक्रीव चतुर्भुज ACHD में,
∠ACB + ∠ADB = 180°
⇒ ∠ADB = 180° – 30° = 150°
अत: दौर्ष चाप द्वारा अंतरित कोण = 30°
तथा लघु चाप द्वारा अंतरित कोण = 150°.

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प्रश्न 3.
पाट्य-पुस्तक में दी गई आकृति में ∠PQR = 100° है, जहाँ P, Q तथा R, केन्द्र O वाले एक वृत्त पर स्थित बिन्दु हैं। ∠OPR ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दोपचाप पर कोई बिन्दुमानकर चक्रीय चतुर्भुज PQRS की रचना की।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 3
∠POR + ∠PSR = 180°
⇒ ∠PSR = 180° – 100° = 80°
हम जानते हैं कि केन्द्र पर बना कोन शेष परिधि पर बने कोण का दो गुना झेता है।
∴ ∠POR = 2∠PSR = 2(80°) = 160°
∆POR में, OP = OR
∠OPR + ∠ORP + ∠POR = 180°
2∠ORP + 160° = 180°
∠OPR = 10°.

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प्रश्न 4.
आकृति में, ∠ABC = 69° और ∠ACB = 31° हो, तो ∠BDC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 4
उत्तर:
∆ABC में,
∠BAC + ∠ABC + ∠ACB = 180°
⇒ ∠BAC + 69° + 31° = 180°
∠BAC = 180° – 100° = 80°
∠BDC = ∠BDC = 80°
(एक ही जूतखंड के कोष)

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प्रश्न 5.
आकृति में, एक वृत्त पर A, B, C और D चार बिन्द AC और BD एक बिन्द E पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि ∠BEC = 130° तथा ∠ECD = 20° है। ∠BAC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 5
उत्तर:
∆CDE में,
∠CDE + ∠ECD = ∠CED
⇒ ∠CDE + 20° = 130°
⇒ ∠CDE = 110°
अतः ∠BAC = ∠CDE = 110°.
(एक ही वृत्तखंड के कोण)

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प्रश्न 6.
ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जिसके विकर्ण एक बिन्दु E पर प्रतिच्छेद करते हैं। बदि ∠DBC = 70° और ∠BAC = 30° हो, तो ∠BCD ज्ञात कीजिए।
पुनः यदि AB = BC हो, तो ∠ECD ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
बोवा CD के लिए,
∠CBD = ∠CAD (समान वृत्तखंट के कोण)
∠CAD = 70°
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 6
∠BAD = ∠BAC + ∠CAD
30° + 70° = 100°
तथा ∠BCD + ∠BAD = 180°
∠BCD + 100° = 180°
∠BCD = 80°.
त्रिभुज ABC में,
AB = BC
∴ ∠BCA = ∠CAB
⇒ ∠BCA = 30°
तथा ∠BCD = 80°
⇒ ∠BCA + ∠ACD = 80°
30° + ∠ACD = 80°
⇒ ∠ACD = 50°
⇒ ∠ECD = 50°.

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प्रश्न 7.
यदि एक चक्रीय चतुर्भुज के विकर्ण उसके शीषों से जाने वाले वृत्त के व्यास हों, तो सिद्ध कीजिए कि वह एक आयत है।
उत्तर:
माना ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जिसके विकर्ण BD तथा AC है जो परस्पर O पर प्रतिचोद करते हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 7
∠BAD = \(\frac{1}{2}\) ∠BOD = \(\frac{180°}{2}\) = 90°
∠BCD + ∠BAD = 180°
∠BCD = 90°
∠ADC = \(\frac{1}{2}\) ∠AOC = (180°) = 90°
∠ADC + ∠ABC = 180°
90° + ∠ABC = 180°
⇒ ∠ABC = 90°
∵ चक्रीय चतुर्भुज का प्रत्येक अन्त:कोण 90° है।
अतः यह एक आयत है।

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प्रश्न 8.
यदि एक समलंब को असमांतर भुजाएँ बराबर हों, तो सिद्ध कीजिए कि वह चक्रीय है।
उत्तर:
माना ARCD एक समलंब है नहीं
AB || CD तथा BC = AD
AM ⊥ CD तथा BN ⊥ CD लाँचा।
∆AMD तथा ∆BNC में,
AD = BC
∠AMD = ∠ENC (रचना, प्रत्येक 90° से)
AM = BN
∴ ∆AMO ≅ ∆BNC (SAS सर्वागसमता से)
∴ ∠ADC = ∠BCD ……. (1)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 8
∠BAD तथा ∠ADC, AD से परावान भुजाएं हैं।
∠BAD + ∠ADC = 180°
∠BAD + ∠BCD = 180° ……. (2) समी (1) से समी]
सिद्ध करता है कि विपरीत कोण सपूरक हैं।
अत: ABCD एक चक्रीव चतुर्भुज है।

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प्रश्न 9.
दो वृत्त दो बिन्दुओं B और C पर प्रतिच्छेद करते है। B से जाने वाले दो रेखाखण्ड ABD और PBQ वृत्तों को A, D और P, Q पर क्रमश: AL प्रतिच्छेद करते हुए खींचे गए है (देखिए आकति) सिद्ध कीजिए कि ∠ACP = ∠QCD
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 9
उत्तर:
हम जानते हैं कि एक ही वृत्तण्ड पर बने कोण बराबर होते हैं।
∴ ∠ACP = ∠ABP ……. (1)
ब ∠QCD = ∠QBD ……. (2)
नषा ∠ABP = ∠QBD ……. (3)
अब, समी. (1), (2) तथा (3) से,
∠ACP = ∠QCD.

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प्रश्न 10.
यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाओं को व्यास मानकर वृत्त खींचे जाएं, तो सिद्ध कीजिए कि इन वृत्तों का प्रतिच्छेद बिन्दु तीसरी भुजा पर स्थित है।
उत्तर:
∆ABC, AB तथा AC को न्यास मानकर वृत्त खींचा सपा दोनों वृत्त परस्पर A तथा D पर प्रतिकोद करते हैं। AD को मिलाया।
माना दोनों वृत्त D पर प्रतिको करते हैं तथा D, BC पर स्थित नहीं है।
∠ADB = 90°
∠ADC = 90°
∠BDC = ∠ADB + ∠ADC.
= 90°+ 90° = 180°
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 10
अत: BDC एक सीधी रेखा है तथा हमारी अभिधारणा | गलत है।
अत: D तीसरी भुजा BC पर स्थित है।

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प्रश्न 11.
उभयनिष्ठ कर्ण AC वाले दो समकोण त्रिभुज ABC और ADC है। सिद्ध कीजिए कि
∠CAD = ∠CED है।
उत्तर:
दिया है : उभयनिष्ठ कर्ण AC को व्यास मानकर बनाये गये मृत में दो ∆ABC तथा ∆ADC है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 11
∴ ∠ADC = ∠ABC = 90°
स्पष्ट रूप से,
∠CAD = ∠CBD.(एक ही खण्ड में स्थित कोण समान होते हैं।)

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प्रश्न 12.
सिद्ध कीजिए कि चक्रीय समांतर चतुर्भुज आग्रत होता है।
उत्तर:
माना ABCD एक चक्रीय समांतर गार्भुज है।
∠A + ∠C = 180° ……. (1)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 12
हम जानते हैं कि समान्तर चतुर्भुज के विपरीत कोग समान होते हैं।
∴ ∠A = ∠C तथा ∠B = ∠D
समी. (1) से, ∠A = ∠C = 180°
⇒ ∠A + ∠A = 180°
⇒ 2∠A = 180°
⇒ ∠A = 90°
इसी प्रकार ABCD का प्रत्येक कोष = 90°
अत: ABCD एक आयत है।

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Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 9 बिहार दर्शन-1 Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-1 Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
खाली जगहों को भरें –

  1. पितृपक्ष का मेला ………… पक्ष में लगता है।
  2. महाबोधि मंदिर के निकट ………… सरोवर है।
  3. पावापुरी में ………… मंदिर है।
  4. महावीर ने ……….. महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
  5. नालंदा विश्वविद्यालय …….का अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र था।

उत्तर-

  1. कृष्णपक्ष
  2. मुचलिंद
  3. जलमंदिर
  4. शरीर त्यागकर
  5. ज्ञान-विज्ञान ।

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प्रश्न 2.
सही मिलान करें –

  1. मुचलिंद सरोवर – नवादा जिला
  2. रानी अहिल्याबाई – राजगीर की पहाड़ी
  3. शांति स्तूप – विष्णुपद मंदिर
  4. ककोलत नलप्रपात – बोध गया

उत्तर-

  1. मुचलिंद सरोवर – बोधगया
  2. रानी अहिल्याबाई – विष्णुपद मंदिर
  3. शांति स्तूप – राजगीर की पहाड़ी
  4. ककोलत जल प्रपात – नवादा जिला

प्रश्न 3.
सही विकल्प पर (✓) का चिह्न लगाएँ।

प्रश्न (i)
गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?
(क) पावापुरी
(ख) वैशाली
(ग) बोध गया
उत्तर-
(ग) बोध गया

प्रश्न (ii)
गया में अवस्थित विष्णुपद मंदिर किसने बनवाया था ?
(क) रानी अहिल्याबाई
(ख) अजातशत्रु
(ग) अशोक
उत्तर-
(क) रानी अहिल्याबाई

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प्रश्न (iii)
बिहार में गर्म जलकुंड कहाँ अवस्थित है ?
(क) पावापुरी
(ख) राजगीर
(ग) गया
उत्तर-
(ख) राजगीर

प्रश्न (iv)
ककोलत प्रसिद्ध है
(क) ठंडे जल के लिए
(ख) गर्म जल के लिए
(ग) मंदिरों के लिए
उत्तर-
(क) ठंडे जल के लिए

प्रश्न (v)
जरासंध का अखाड़ा अवस्थित है
(क) राजगीर में
(ख) नालंदा में
(ग) बोध गया में
उत्तर-
(क) राजगीर में

प्रश्न 4.
बताइये –

प्रश्न (क)
बोध गया क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर-
बोधगया में ही महाबोधि मंदिर है। यह मंदिर विश्व के धरोहरों में जाना जाता है। इसी मंदिर में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा है। बोधिवृक्ष इसी वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बद्ध कहलाने लगे। इन्हीं सभी जगहों पर भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया।

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प्रश्न (ख)
अपने स्कूल से आप राजगीर जाएँगे तो रास्ते में आपको क्या-क्या नजर आएगा?
उत्तर-
अपने स्कूल से राजगीर जाएँगे तो रास्ते में हमें सर्वप्रथम महाबोधि मंदिर के दर्शन होंगे और रास्ते में बोधिवृक्ष जहाँ वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे थे।

फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपदं’ मंदिर है। राजगीर के गर्म जलकुंड है। मनियारमठ और जरासंध का अखाड़ा, शांति नजर आएंगे।

प्रश्न (ग)
विष्णुपद मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ? इसमें किस तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है?
उत्तर-
विष्णपद मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह काले पत्थरों से बनवाया गया है। यहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं।

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प्रश्न (घ)
राजगीर में गर्म जल कुंड हैं क्यों?
उत्तर-
राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता रहता है। इसलिए राजगीर में गर्म जलकुंड हैं। राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पाव धोने से सभी की थकावट मिट जाती है।

प्रश्न (ङ)
जलमंदिर क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
जलमंदिर पावापुरी में स्थित है। यह तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर हैं। हमलोगों ने भगवान महावीर के दर्शन भी किये हैं। तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप में मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जलोदर अपना खास योगदान के द्वारा ही जलोदर मनमोहक और आकर्षित लगता है। इसी वजह से जलमंदिर दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-1 Notes

पाठ का सारांश

बिहार दर्शन में बिहार के ऐतिहासिक स्थलों के बारे में हमें जानकारी मिलती है। इसकी जानकारी के लिए मध्य विद्यालय में पढ़ने वाली रेशमा अपने वर्ग शिक्षक और छात्रों के साथ बोध गया, राजगीर, नालंदा और पावापुरी के ऐतिहासिक स्थलों को देखने जा रहे हैं। शिक्षक ने बच्चों को अपने साथ कलम, डायरी, पानी की बोतलों को रखकर सुबह 6 बजे सब कोई चलें।

‘बस के द्वारा सबसे पहले ‘बोध गया’ पहँच गये। सबसे पहले बच्चों ने महाबोधि मंदिर देखे । इस मंदिर को विश्व धरोहरों में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन के बाद सभी ने मंदिर के पीछे स्थित बोधिवृक्ष को देखा । इसी वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे। बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर कई बौद्ध भिक्षु भगवान बुद्ध की आराधना कर रहे थे। इस मंदिर के बगल में स्थित मुचालिद सरोवर में मछलियों को दाना खिलाये ।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

सरोवर में बहुत सारी मछलियाँ थीं। इतने सारे मछलियों को देखकर मन आनन्द से भर गया। मंदिर के ईद-गिर्द कई देशों ने भगवान बुद्ध की मंदिरें भी हैं। – इसके आगे फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपद’ मंदिर देखने के लिये गये । यहाँ भगवान विष्णु जी के पदचिह्न हैं।

इसी मंदिर को काले पत्थरों से रानी अहिल्याबाई ने बनवाया था। वहाँ के पुजारियों ने बताया कि प्रतिवर्ष आश्विन महीने के कृष्णपक्ष में यहाँ पितृपक्ष का मेला पन्द्रह दिनों के लिए लगता है। देश के कोने-कोने से आकर लोग पूर्वजों के मोक्ष प्राप्ति हेतु पिंडदाम करते हैं। विष्णुपद से सभी बच्चे राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पांव धोने से सभी की थकावट दूर हो गई। राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता है। सभी ने मनियारमठ, जरासंध का अखाड़ा भी देखा और शांति स्तूप देखने पहाड़ी पर चले गये।

यह शांति स्तूप पहाड़ी पर स्थित सफेद गुम्बदाकार स्तूप है जिसकी चारों दिशाओं में बुद्ध की चार प्रतिमाएँ अलग-अलग मुद्राओं में दिखाई पड़ती हैं। पहाड़ी पर जाने के लिए रज्जूमार्ग से पहुँचे । पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित शांति स्तूप अद्भुत दृश्य प्रदान करता है। यहाँ से चारों ओर पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं। यहीं मगध के राजा अजातशत्रु और बुद्ध के बारे में शिक्षक ने बताया ।

राजगीर से आगे नालंदा पहुँचे । नालंदा में 5वीं सदी में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर अवशेष रूप में दिखाई दिया। यही विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान के अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र के रूप में विख्यात था।

यहाँ नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा होती है। देश-विदेश से लगभग 10 हजार छात्र यहाँ रहकर अध्ययन करते थे। बच्चों ने पुस्तकालय, छात्रावास को देखा।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

यहीं पर एक संग्रहालय में कई दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ और मतियाँ भी देखीं। यहीं से सब पावापुरी स्थित जलमंदिर देखने गये। तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर के दर्शन किये । तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप से मंदिर की शोभा देखने लायक थी। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इस प्रकार हमलोगों ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और पावापुरी के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। एक मनोरम प्राकृतिक स्थलों को देखकर मन आनन्दित हो गया । इसके आगे नवादा जिला के ककोलत जलप्रपात अपने ठंडे जल के लिए प्रसिद्ध है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण InText Questions and Answers

अनुच्छेद 5.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
क्या डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं? तुलना करके पता कीजिए।
उत्तर:
हाँ, डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं।
उदाहरणार्थः
Li, Na, K डॉबेराइनर के त्रिक हैं जो न्यूलैंड्स के अष्टक के ‘रे’ स्तंभ में उपस्थित हैं।

प्रश्न 2.
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
1. उस समय ज्ञात सभी तत्त्वों का वर्गीकरण डॉबेराइनर के त्रिक के आधार पर नहीं हो सका।
2. डॉबेराइनर केवल तीन तत्त्वों के त्रिक को उस समय पहचान सके। यही कारण है कि डॉबेराइनर के त्रिक को मान्यता प्राप्त नहीं हुई।

प्रश्न 3.
न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धांत की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:

  1. यह नियम केवल Ca तक के परमाणु भार वाले तत्त्वों को वर्गीकृत कर पाता है। इसके बाद आठवाँ तत्त्व प्रथम तत्त्व से समानता प्रदर्शित नहीं करता है।
  2. न्यूलैंड्स ने माना कि केवल 56 तत्त्व ही सम्भव हैं, अन्य तत्त्वों का आविष्कार नहीं हो सकता।
  3. न्यूलैंड्स के अष्टक में कुछ ऐसे भी तत्त्व हैं जिनके गुणों में समानता नहीं पाई जाती है।

अनुच्छेद 5.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी का उपयोग कर निम्नलिखित तत्त्वों के ऑक्साइड के सूत्र का अनुमान कीजिए: K, C, Al, Si, Ba
3TR
K = K2O; C=CO2 ; Al= Al2O3; Si = SiO2; Ba = BaO

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प्रश्न 2.
गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन-कौन से तत्त्वों का पता चला है जिसके लिए मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-:
1. स्कैंडियम तथा
2. जर्मेनियम।

प्रश्न 3.
मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन-सा मापदंड अपनाया?
उत्तर:

  1. उन्होंने तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाया।
  2. उन्होंने समान गुण वाले तत्त्वों को एक समूह में रखने का प्रयास किया।
  3. उन्होंने तत्त्वों के हाइड्राइडों एवं ऑक्साइडों के अणु-सूत्रों को एक आधारभूत गुण मानकर तत्त्वों का वर्गीकरण किया।

प्रश्न 4.
आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
उत्तर:
अक्रिय या उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में रखा गया; क्योंकि –

  1. ये गैसें बहुत ही अक्रियाशील होती हैं एवं इनकी खोज बहुत बाद में हुई।
  2. इन गैसों को एक नये समूह में बिना आवर्त सारणी को छेड़-छाड़ किए हुए रखा गया।

अनुच्छेद 5.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया?
उत्तर:

  1. आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का प्रथम समूह में तर्कसंगत स्थान है; क्योंकि हाइड्रोजन विद्युत धनात्मक होती है।
  2. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु संख्या के क्रम में रखा गया है इसलिए किसी तत्त्व के समस्थानिकों को तत्त्व के साथ उसी स्थान पर आवर्त सारणी में रखा गया है।
  3. भारी एवं हल्के तत्त्वों का क्रम भी आधुनिक आवर्त सारणी में सही है जो मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में नहीं था।
  4. अक्रिय गैसों का स्थान भी तर्कसंगत 18वें समूह में है।

प्रश्न 2.
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रियाशीलता दिखाने वाले दो तत्त्वों के नाम लिखिए? आपके चयन का क्या आधार है?
उत्तर:
कैल्सियम (Ca) एवं बेरियम (Ba); क्योंकि –

  1. ये दोनों तत्त्व मैग्नीशियम समूह के हैं।
  2. इन दोनों तत्त्वों में मैग्नीशियम की तरह 2 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 3.
निम्न के नाम बताइए –
(a) तीन तत्त्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्त्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(c) तीन तत्त्वों जिनका बाहरी कोश पूर्ण हो।
उत्तर:
(a) Li, Na, K (लीथियम, सोडियम, पोटैशियम)
(b) Mg, Ca (मैग्नीशियम, कैल्सियम)
(c) हीलियम (He), निऑन (Ne), आर्गन (Ar)।

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प्रश्न 4.
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्त्वों के परमाणुओं में कोई समानता
(b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है जबकि निऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यंत कम है। इनके परमाणुओं में कोई समानता है?
उत्तर:
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम धातुओं की बाह्यतम कक्षा में केवल एक इलेक्ट्रॉन है।
(b) इन दोनों तत्त्वों की बाह्यतम कक्षा इलेक्ट्रॉनों से पूर्णतः भरी है।

प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त सारणी में पहले दस तत्त्वों में कौन सी धातुएँ हैं?
उत्तर:
केवल लीथियम, बेरीलियम एवं बोरॉन धातुएँ हैं।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्त्व में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण की विशेषता है? Ga Ge As Se Be
उत्तर:
Be में अधिकतम धात्विक लक्षण है; क्योंकि शेष अन्य तत्त्व आवर्त सारणी में दाईं ओर रखे गए हैं। आवर्त सारणी में बाईं तरफ वाले तत्त्व धातु एवं दाईं तरफ वाले तत्त्व अधातु होते हैं।

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर, प्रवृत्तियों के बारे में कौन- सा कथन असत्य है?
(a) तत्त्वों की धात्विक प्रकति घटती है।
(b) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।
(d) इनके ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
उत्तर:
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।

प्रश्न 2.
तत्त्व X, XCl2 सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्त्व संभवतः किस समूह के अंतर्गत होगा?
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
उत्तर:
(b) Mg

प्रश्न 3.
किस तत्त्व में
(a) दो कोश हैं तथा दोनों इलेक्ट्रॉनों से पूरित हैं?
(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है?
(c) कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं?
(d) कुल दो कोश हैं तथा संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन हैं?
(e) दूसरे कोश में पहले कोश से दोगुने इलेक्ट्रॉन हैं?
उत्तर:
(a) निऑन (Ne) → (2, 8)
(b) मैग्नीशियम (Mg) → (2, 8, 2)
(c) सिलिकॉन (Si) → (2, 8, 4)
(d) बोरॉन (B) → (2, 3)
(e) कार्बन (C) → (2, 4)

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प्रश्न 4.
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन के स्तंभ के सभी तत्त्वों के कौन-से गुणधर्म समान
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तंभ के सभी तत्त्वों के कौन-से गुणधर्म समान हैं?
उत्तर:
(a) ये सभी धातुएँ हैं और इनके गुणधर्म निम्नवत् हैं –

  1. ये सभी विद्युत के सुचालक होते हैं।
  2. ये दोनों आघातवर्ध्य होते हैं।

(b) ये सभी अधातुएँ हैं और इनके गुणधर्म निम्नवत् हैं –

  1. ये सभी विद्युत के अचालक होते हैं।
  2. ये सभी भंगुर होते हैं।

प्रश्न 5.
एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) इस तत्त्व की परमाणु संख्या क्या है?
(b) निम्न में किस तत्त्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु संख्या कोष्ठक में दी गई है)
N(7) F(9) Ar(18)
उत्तर:
(a) परमाणु संख्या = 17
(b) F (9) के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में तीन तत्त्व A, B तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है –
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अब बताइए कि
(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम?
(c) C का साइज़ B से बड़ा होगा या छोटा? ।
(d) तत्त्व A, किस प्रकार के आयन, धनायन या ऋणायन बनाएगा?
उत्तर:
(a) अधातु।
(b) C कम अभिक्रियाशील है।
(c) C का आकार B से छोटा होगा।
(d) A ऋणायन बनाएगा।

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प्रश्न 7.
नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्त्व हैं। इन दोनों तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन सा तत्त्व अधिक ऋण विद्युत होगा और क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्त्व होगा, क्योंकि फॉस्फोरस एवं नाइट्रोजन दोनों अधातुएँ हैं। फॉस्फोरस समूह में नाइट्रोजन से नीचे आता है। अतः नाइट्रोजन की विद्युत-ऋणात्मकता फॉस्फोरस से ज्यादा होगी। समूह में ऊपर से नीचे आने पर तत्त्व की विद्युत-ऋणात्मकता घटती है। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
नाइट्रोजन-2, 5
फॉस्फोरस-2, 8, 5

प्रश्न 8.
तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्व की स्थिति से क्या संबंध है? (2016)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तत्त्वों की आवर्त सारणी में स्थिति से सम्बन्धित होता है। बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस तत्त्व की समूह संख्या को सूचित करती है तथा बाह्यतम कोश संख्या उस तत्त्व की आवर्त को सूचित करती है।

प्रश्न 9.
आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु संख्या 20 ) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु संख्या वाले तत्त्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं?
उत्तर:
परमाणु संख्या 19 एवं 21 वाले तत्त्वों के भौतिक गुण कैल्सियम के समान होते हैं तथा परमाणु संख्या 12 एवं 38 वाले तत्त्वों के रासायनिक गुण कैल्सियम के समान होते हैं।

प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में तत्त्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर:

  1. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है एवं आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।
  2. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों का कोई स्थान नहीं था किन्तु आधुनिक आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों को 18वें समूह में रखा गया है।
  3. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में 8 समूह हैं जबकि आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह है।
  4. आधुनिक आवर्त सारणी में मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के सारे दोषों को हटा दिया गया है।

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्ती वर्गीकरण का आधार है – (2012)
(a) परमाणु भार
(b) परमाणु क्रमांक
(c) संयोजकता
(d) रासायनिक क्रियाशीलता
उत्तर:
(b) परमाणु क्रमांक

प्रश्न 2.
तृतीय आवर्त का तत्त्व है -(2011)
(a) 11Na
(b) 38Sr
(c) 5B
(d) 19K
उत्तर:
(a) 11Na

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प्रश्न 3.
Li विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है – (2013, 14, 17)
(a) Na के साथ
(b) K के साथ
(c) Al के साथ
(d) Mg के साथ
उत्तर:
(d) Mg के साथ।

प्रश्न 4.
निरूपक (प्रारूपिक) तत्त्व है – (2015, 17)
(a) Na
(b) K
(c) Sc
(d) He
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में क्षारीय धातु है – (2015)
(a) Na
(b) Be
(c) Al
(d) Zn
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 6.
किस तत्त्व का ऑक्साइड उभयधर्मी है?
(a) C का
(b) Na का
(c) Mg का
(d) Sn का
उत्तर:
(d) Sn का

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प्रश्न 7.
उभयधर्मी ऑक्साइड है – (2014)
(a) Na2O
(b) MgO
(c) Al2O3
(d) P2O5
उत्तर:
(c) Al2O3

प्रश्न 8.
एक तत्त्व M के कार्बोनेट का सूत्र MCO3 है। इसमें क्लोराइड का सूत्र होगा (2017)
(a) MCl2
(b) MCl3
(c) MCl
(d) M2Cl
उत्तर:
(a) MCl2

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अम्लीय ऑक्साइड है – (2014, 15)
(a) Al2O3
(b) K2 O
(c) MgO
(d) P2 O5
उत्तर:
(d) P2O5

प्रश्न 10.
तत्त्व जो क्षारीय ऑक्साइड बनाता है, का परमाणु क्रमांक है – (2016)
(a) 18
(b) 17
(c) 14
(d) 19
उत्तर:
(d) 19

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प्रश्न 11.
एक तत्त्व के ऑक्साइड का सूत्र MO है। उसके नाइट्रेट का सूत्र होगा (2013)
(a) MNO3
(b) M(NO3)2
(c) M2NO3
(d) M3(NO2)2
उत्तर:
(b) M(NO3)2

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व अधिक विद्युत धनी है? (2009, 16)
(a) Na
(b) K
(c) Mg
(d) F
उत्तर:
(b) K

प्रश्न 13.
निम्न तत्त्व में किसकी विद्युत ऋणात्मकता सबसे कम है? (2015)
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व है? (2016, 18)
(a) I
(b) Na
(c) Br
(d) Mg
उत्तर:
(c) Br

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प्रश्न 15.
मुद्रा धातु है – (2013, 14)
(a) Zn
(b) Sn
(c) Pb
(d) Cu
उत्तर:
(d) Cu

प्रश्न 16.
यूरेनियम है – (2016)
(a) क्षार धातु
(b) अधातु
(c) स्थायी तत्त्व
(d) अन्तः संक्रमण धातु
उत्तर:
(d) अन्त: संक्रमण धातु

प्रश्न 17.
कौन-सा युग्म उपधातु है?
(a) Sn, As
(b) As, Sb
(c) Ge, Sn
(d) Ge, As
उत्तर:
(b) As, Sb

प्रश्न 18.
एक तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p63s23p5 है। आवर्त-सारणी में इसका स्थान होगा (2009)
(a) आवर्त-3, वर्ग VA
(b) आवर्त-5, वर्ग IIIA
(c) आवर्त-3, वर्ग VIIA
(d) आवर्त-2, वर्ग VIIA
उत्तर:
(c) आवर्त-3, वर्ग VIIA

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त नियम लिखिए। (2009, 11, 13, 15, 16, 17)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 2.
मेन्डेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में क्या मौलिक अन्तर है?
उत्तर:
मेन्डेलीफ का आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु भारों पर आधारित है, जबकि आधुनिक आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों पर आधारित है।

प्रश्न 3.
क्षारीय मृदा तत्त्व क्या होते हैं ? या क्षारीय मृदा तत्त्व पर टिप्पणी लिखिए। (2009)
उत्तर:
II A समूह के तत्त्वों को क्षारीय मृदा तत्त्व कहते हैं; क्योंकि इस समूह के तत्त्वों के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं तथा मृदा के समान अगलनीय होते हैं।

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प्रश्न 4.
किसी एक क्षारीय ऑक्साइड तथा उदासीन ऑक्साइड का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
क्षारीय ऑक्साइड-MgO, उदासीन ऑक्साइड-COl

प्रश्न 5.
किस वर्ग के ऑक्साइड प्रबल क्षारीय एवं किस वर्ग के प्रबल अम्लीय होते हैं? (2013)
उत्तर:
IA वर्ग के ऑक्साइड प्रबल क्षारीय तथा VII A वर्ग के ऑक्साइड प्रबल अम्लीय होते हैं।

प्रश्न 6.
ns2p3 सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्त्वों का आधुनिक आवर्त-सारणी में समूह निर्धारित कीजिए और इनके एक ऑक्सी-अम्ल का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में इनका समूह VA होगा तथा इनके ऑक्सी-अम्ल का सूत्र HMO, होगा, जहाँ M, VA समूह का कोई तत्त्व है।

प्रश्न 7.
आवर्त-सारणी के किस ब्लॉक में नाइट्रोजन को रखा गया है? कारण देते हुए समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन को आवर्त-सारणी के p-ब्लॉक में रखा गया है; क्योंकि नाइट्रोजन में अन्तिम इलेक्ट्रॉन p-ऑर्बिटल में भरते हैं।

प्रश्न 8.
परमाणु क्रमांक 16 वाले तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, आवर्तसारणी में स्थान एवं इसके हाइड्राइड का सूत्र लिखिए। (2009)
उत्तर:
इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 6 है। चूंकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में तीन आवर्त हैं तथा अन्तिम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः यह तृतीय आवर्त के षष्ठम समूह में स्थित है। इसके हाइड्राइड का सूत्र H2S है।

प्रश्न 9.
परमाणु क्रमांक 19 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखकर तत्त्व का आवर्त एवं वर्ग संख्या तथा संयोजकता बताइए। (2015)
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 19 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न होगा 2, 8, 8, 1 चूँकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 4 आवर्त शामिल हैं तथा अन्तिम कक्षा में 1 इलेक्ट्रॉन है। अत: यह चतुर्थ आवर्त व प्रथम वर्ग का तत्त्व है। इसकी संयोजकता 1 होगी।

प्रश्न 10.
VA समूह के दो उपधातुओं का आवर्त में स्थान एवं नाम लिखिए।
उत्तर:
VA समूह के दो उपधातु आर्सेनिक व बिस्मथ हैं, जिनका आवर्त-सारणी में आवर्त क्रमशः चौथा व पाँचवाँ है।

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प्रश्न 11.
आवर्त-सारणी के VII A समूह के चार तत्त्वों के नाम व संकेत लिखिए।
उत्तर:
फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I)।

प्रश्न 12.
11Na तथा 12Mg में किस तत्त्व का आयनन विभव मान अधिक होगा ? कारण दीजिए। (2009)
उत्तर:
Mg का आयनन विभव मान अधिक होगा क्योंकि आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है और परमाणु का आकार कम होने लगता है जिससे परमाणु के आयनीकरण में अधिक ऊर्जा प्रयुक्त होती है जिससे आयनन विभव का मान बढ़ जाता है।

प्रश्न 13.
आवर्त-सारणी में एक ही आवर्त में परमाणु के आकार किस प्रकार परिवर्तित होते हैं व क्यों ?
उत्तर:
आवर्त-सारणी में एक ही आवर्त में परमाणु का आकार बायीं से दायीं ओर क्रमिक रूप से घटता है क्योंकि परमाणु की एक ही कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से उन पर नाभिक का आकर्षण बल बढ़ता जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डोबेराइनर के त्रिक सिद्धान्त पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
उत्तर:
जर्मन प्रोफेसर डोबेराइनर ने सन् 1829 ई० में समान गुण-धर्म वाले तीन-तीन तत्त्वों के समूह बनाये। उन्होंने कहा – “यदि समान गुण वाले तत्त्वों को एक ही समूह में बढ़ते परमाणु भार के क्रम में रखा जाये तो पहले तथा तीसरे तत्त्व के परमाणु भारों का माध्य बीच के तत्त्व के परमाणु भार के बराबर होता है।” जैसे –
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प्रश्न 2.
न्यूलैण्ड का अष्टक नियम क्या है ? स्पष्ट कीजिए (2010, 16)
उत्तर:
न्यूलैण्ड ने सन् 1863 ई० में एक अष्टक नियम की स्थापना की। इस नियम के अनुसार – “यदि तत्त्वों को बढ़ते परमाणु भारों के क्रम में लिखा जाये तो हर आठवाँ तत्त्व अपने से पहले तत्त्व के समान गुणों वाला होगा।” यह नियम संगीत के अष्टक नियम से समानता रखता है। जैसे कि संगीत में आठवीं ध्वनि पहली ध्वनि के समान होती है, उसी प्रकार की समानता तत्त्वों में पायी जाती है।
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Li, Na और K के गुणों में समानता पायी जाती है; क्योंकि ये एक-दूसरे से आठवें तत्त्व हैं। इसी प्रकार Be, Mg और Ca; B, AI; C, Si; N, P; O, S और F, Cl के गुणों में समानताएँ पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
मेन्डेलीफ का आवर्त नियम क्या है? इसकी व्याख्या कीजिए। (2011, 13, 17)
उत्तर:
इस नियम के अनुसार, तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाण भारों के आवर्ती फलन होते हैं, अर्थात् तत्त्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते क्रम में रखने पर समान गुणों वाले तत्त्व एक नियमित अन्तराल के बाद आते हैं।

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प्रश्न 4.
विकर्ण सम्बन्ध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2014, 17) या विकर्ण सम्बन्ध क्या है ? विकर्ण सम्बन्ध को प्रदर्शित करने वाले दो तत्त्वों का उल्लेख कीजिए। (2009, 15)
उत्तर:
आवर्त सारणी में दूसरे आवर्त के तत्त्व अगले समूह तथा तीसरे आवर्तके तत्त्वों के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करते हैं। चूँकि ये तत्त्व विकर्ण पर स्थित होते हैं; अतः इनके इस सम्बन्ध को विकर्ण सम्बन्ध कहते हैं –
उदाहरणार्थ:
दूसरे आवर्त के पहले समूह का तत्त्व लीथियम तीसरे आवर्त के द्वितीय समूह के तत्त्व मैग्नीशियम के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 5.
प्रारूपिक तत्त्व क्या हैं? इनकी विशेषताएँ लिखिए। (2009)
या प्रारूपिक तत्त्वों के मुख्य लक्षण लिखिए। इनके दो उदाहरण दीजिए।
या प्रारूपिक या निरूपक तत्त्व पर टिप्पणी लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
आवर्त-सारणी के तीसरे आवर्त के सभी तत्त्व प्रारूपिक तत्त्व कहलाते हैं। ये तत्त्व अपने-अपने समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन तत्त्वों के गुण इनके समूह की संयोजकता व विद्युत रासायनिक लक्षणों को प्रकट करते हैं। ये तत्त्व अपने समूह के A तथा B उपवर्गों के मध्य सेतु का कार्य करते हैं। ये तत्त्व किसी एक उपसमूह के तत्त्व से अधिक समानता रखते हैं। I, II और III वर्ग के प्रारूपिक तत्त्व ‘A’ उपवर्ग के तत्त्वों के गुणों से अधिक समानता रखते हैं, जबकि V, VI व VII वर्ग के प्रारूपिक तत्त्व इन वर्गों के ‘B’ उपवर्गों के तत्त्वों के गुणों से अधिक समानता रखते हैं। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि Na, Mg, AI, Si, P, S व Cl आदि प्रारूपिक तत्त्व हैं।
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प्रश्न 6.
दीर्घाकार आवर्त-सारणी द्वारा मेन्डेलीफ की संशोधित आवर्त-सारणी के दोषों को किस प्रकार दूर किया गया है? (2012)
उत्तर:
दीर्घाकार आवर्त सारणी द्वारा मेन्डेलीफ की आधुनिक संशोधित सारणी के बहुत से दोष दूर हो गये हैं।
उदाहरणार्थ:

  1. मेन्डेलीफ की आवर्त-सरणी में असमान गुणों वाले तत्त्वों को एक ही स्थान पर रखा गया था। उदाहरणार्थ: मेन्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में H, Li, Na, K, Rb, Cs तथा Fr को IA समूह में व Cu, Ag तथा Au को IB समूह में एक साथ एक ही ऊर्ध्वाधर कॉलम में रखा गया था, जबकि इनके गुणों में बहुत कम समानता होती है। दीर्घाकार आवर्त-सारणी में इन तत्त्वों को अलग-अलग स्थानों पर क्रमशः IA व IB उपवर्गों में रखा गया है।
  2. मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी में संक्रमण तत्त्वों को अलग-अलग स्थान पर रखा गया था। परन्तु दीर्घाकार आवर्त-सारणी में संक्रमण तत्त्व सारणी के मध्य में एक साथ रखे गये हैं।
  3. इस सारणी में प्रबल धात्वीय तत्त्वों को संक्रमण तत्त्वों के बायीं ओर तथा प्रबल अधात्वीय तत्त्वों को संक्रमण तत्त्वों के दायीं ओर रखा गया है।
  4. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर सभी लैन्थेनाइड व ऐक्टिनाइड तत्त्वों को आवर्त-सारणी के नीचे दो क्षैतिज पंक्तियों में रखा जाना उचित है। चूँकि इन दोनों श्रेणियों के तत्त्वों के इलेक्ट्रानिक विन्यासों में समानता है, अत: उन्हें एक स्थान पर एक साथ रखे जाना उचित है।

प्रश्न 7.
आवर्त-सारणी के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए कि Na2O, MgO, Al2O3, SiO2 में सबसे अधिक बेसिक (क्षारीय) गुण वाला ऑक्साइड कौन-सा है?
या निम्नलिखित में से किस तत्त्व का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा और क्यों? Na, Mg, A1 एवं si
उत्तर:
दिये गये सभी ऑक्साइड तृतीय आवर्त के (क्रमशः बायें से दायें चलने पर) तत्त्वों के ऑक्साइड हैं। चूँकि आवर्त में बायें से दायें चलने पर ऑक्साइडों का क्षारीय गुण घटता है। अत: Na2O सबसे अधिक बेसिक (क्षारीय) गुण वाला ऑक्साइड है।

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प्रश्न 8.
एक तत्त्व M आवर्त सारणी के दूसरे समूह में है। उसके ऑक्साइड एवं क्लोराइड का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
तत्त्व M दूसरे समूह में है। अत: इसकी संयोजकता 2 होगी तथा इसके ऑक्साइड व क्लोराइड के सूत्र क्रमश: MO व MCl2 होंगे।

प्रश्न 9.
1. निम्न तत्त्वों को विद्युत ऋणात्मकता के बढ़ते क्रम में लिखिए
16S,15P,17Cl
2. निम्न में से किस तत्त्व का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा?
Na, Mg, Al, Si
उत्तर:
1. क्योंकि किसी आवर्त में बायें से दायें चलने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती जाती है। अत: दी गयी तत्त्वों की विद्युत ऋणात्मकता का बढ़ता हुआ क्रम निम्न प्रकार होगा
15P< 16S < 17Cl
2. Na का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा।

प्रश्न 10.
तत्त्व Mg आवर्त सारणी के द्वितीय समूह में है। यदि Mg का तुल्यांकी भार 12 है, तो तत्त्व का परमाणु भार ज्ञात करें। (2014)
हल:
चूँकि Mg आवर्त सारणी के द्वितीय समूह में है। अतः इसकी संयोजकता 2 होगी। परमाणु भार = संयोजकता x तुल्यांकी भार = 2 x 12 = 24

प्रश्न 11. 17Cl35 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए तथा आवर्त-सारणी में इसका स्थान भी लिखिए। या परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व का आवर्त सारणी में वर्ग तथा आवर्त लिखिए। (2013, 14, 15, 16, 17)
उत्तर:
17Cl35 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7 चूँकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 3 कोश सम्मिलित हैं तथा इसके अन्तिम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः 17Cl35 आवर्त-सारणी में तृतीय आवर्त के सप्तम A समूह में स्थित है।

प्रश्न 12.
परमाणु संख्या 36 वाले तत्त्व का नाम लिखिए तथा आवर्त सारणी में इसका आवर्त बताइए। (2016)
उत्तर:
परमाणु संख्या 36 वाले तत्त्व का नाम क्रिप्टॉन है तथा यह आवर्त सारणी के चतुर्थ आवर्त का तत्त्व है।

प्रश्न 13.
आवर्त तथा वर्ग में परमाणु त्रिज्या का परिवर्तन किस प्रकार होता है? समझाइए। (2013, 15)
उत्तर:
आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है। नाभिक में आवेश बढ़ने से यह इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक बल से खींचता है जिससे परमाणु का आकार घटता जाता है। वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर परमाणु आकार बढ़ता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में एक कोश बढ़ जाता है।

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प्रश्न 14.
संक्रमण तत्त्वों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2014, 18)
या संक्रमण तत्त्व किसे कहते हैं? दीर्घाकार आवर्त-सारणी में उनका स्थान लिखिए।
या संक्रमण तत्त्व क्या हैं? इनके मुख्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
मेन्डेलीफ ने केवल आठवें समूह के तत्त्वों को संक्रमण तत्त्व माना, परन्तु अब दीर्घाकार आवर्त सारणी में इस शब्द का प्रयोग उन सब तत्त्वों के लिए किया जाता है जो प्रारूपिक तत्त्वों से भिन्न होते हैं। इस प्रकार सभी B उपवर्गों तथा VIII समूह के तत्त्व संक्रमण तत्त्व हैं। संक्रमण तत्त्वों के निम्नलिखित अभिलाक्षणिक गुण होते हैं –

  1. ये रंगीन आयन बनाते हैं।
  2. ये उत्प्रेरक की तरह कार्य करते हैं।
  3. ये परिवर्ती (variable) संयोजकता प्रदर्शित करते हैं।
  4. ये संकीर्ण लवण बनाते हैं।
  5. इन तत्त्वों में समचुम्बकीयता पायी जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी के गुण तथा दोषों का उल्लेख कीजिए। (2011, 12, 13)
मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी (मूल) के लाभों का वर्णन कीजिए। (2017)
या मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के किन्हीं भी दो दोषों को लिखिए। (2017)
उत्तर:
मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के लाभ/गुण या उपयोगिताएँ इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –
1. तत्त्वों के गुणों के अध्ययन में सुविधा मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी से तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन सरल हो गया। चूँकि समान गुणों वाले तत्त्वों को एक ही समूह में रखा गया है, अत: किसी समूह के किसी एक तत्त्व के अध्ययन से उस समूह के अन्य तत्त्वों के गुणों का पर्याप्त सीमा तक ज्ञान हो जाता है।

2. तत्त्वों का सही परमाणु भार ज्ञात करने में सहायता सन् 1869 से पहले बेरीलियम का परमाणु भार 13.5 माना जाता था। बेरीलियम के गुण मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के द्वितीय समूह के तत्त्व के गुणों के समान हैं। अत: मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में बेरीलियम द्वितीय समूह में स्थित होना चाहिए।

इस स्थिति में बेरीलियम का परमाणु भार लीथियम के परमाणु भार 7 तथा बोरॉन के परमाणु भार 11 के मध्य होना चाहिए। इससे मेन्डेलीफ ने निष्कर्ष निकाला कि बेरीलियम का परमाणु भार 13.5 नहीं है बल्कि 9.4 है। इसके बाद प्रयोगात्मक परीक्षणों द्वारा यह सिद्ध हो गया कि बेरीलियम का परमाणु भार लगभग 9 है। इसी प्रकार मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी से कुछ अन्य तत्त्वों के सही परमाणु भार ज्ञात करने में सहायता मिली।

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3. नये तत्त्वों की खोज में सहायता मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी में कुछ स्थान रिक्त छोड़ दिये गये। ये रिक्त स्थान उन तत्त्वों से सम्बन्धित थे जिनकी खोज तब तक नहीं हुई थी। इन अज्ञात तत्त्वों के गुणों तथा परमाणु भारों की भविष्यवाणी कर दी गई थी। नये तत्त्वों की खोज के साथ-साथ इन रिक्त स्थानों की पूर्ति होती चली गयी तथा उनके गुण तथा परमाणु भार पहले की तत्त्वों का आवर्त वर्गीकरण 99 गयी भविष्यवाणी के अनुरूप थे जिससे इनकी खोज की पुष्टि हुई। स्कैण्डियम (Sc, परमाणु भार = 44.9), गैलियम (Ga, परमाणु भार = 69.7) तथा जर्मेनियम (Ge, परमाणु भार = 72.6) इसके उदाहरण हैं। इस प्रकार मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी से नये तत्त्वों की खोज तथा अनुसन्धान में सहायता मिली।

मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के दोष इसके प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं –
1. अधिक परमाणु भार वाले तत्त्वों का कम परमाणु भार वाले तत्त्वों से पहले रखे जाना मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में सभी तत्त्वों के परमाणु भारों के प्रयोगों द्वारा स्थापित मानों को रखने पर यह पाया गया कि कहीं-कहीं परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में परिवर्तन हो जाता है।
उदाहरणार्थ:
(i) मेन्डेलीफ ने टेल्यूरियम (Te) का परमाणु भार 125 तथा आयोडीन (I) का परमाणु भार 127 मानकर टेल्यूरियम को आयोडीन से पहले रखा। प्रयोगों द्वारा यह स्थापित हो गया कि टेल्यूरियम का परमाणु भार 127.6 है तथा आयोडीन का परमाणु भार 126.9 है। अत: ये दो तत्त्व मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में न होकर घटते हुए क्रम में हैं।

(ii) मेन्डेलीफ ने कोबाल्ट (Co) का परमाणु भार 59 माना तथा निकिल (Ni) का परमाणु भार 59 ही मानकर कोबाल्ट को निकिल से पहले रखा। प्रयोगों द्वारा स्थापित कोबाल्ट तथा निकिल के परमाणु भार क्रमश: 58.933 तथा 58.71 हैं। अतः ये दो तत्त्व भी मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में न होकर घटते हुए क्रम में हैं। मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में इस प्रकार के परिवर्तन मेन्डेलीफ के मूल आवर्त नियम के विपरीत हैं।

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2. अनेक नये तत्त्वों के लिए उचित स्थान का अभाव अनेक नये तत्त्वों की खोज के बाद उनको मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में उचित स्थान नहीं मिल पाया; या तो उन्हें परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में रखा जा सकता था; या उन्हें समान गुणों वाले तत्त्वों के समूह में रखा जा सकता था लेकिन ऐसा स्थान नहीं दिया जा सकता था कि परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम के साथ-साथ वे समान गुणों वाले तत्त्वों के समूह में भी हों। उदाहरणार्थ अक्रिय गैसें, दुर्लभ-मृदा तत्त्व आदि।

3. समस्थानिकों तथा समभारिकों का स्थान समस्थानिकों तथा समभारिकों की खोज के बाद यह स्पष्ट हो गया कि तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं होता है। समस्थानिकों के परमाणु भार भिन्न होते हैं, परन्तु उनके गुण समान होते हैं। समभारिकों के परमाणु भार समान होते हैं, परन्तु उनके गुण भिन्न होते हैं। अतः मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में समस्थानिकों तथा समभारिकों को कोई स्थान नहीं दिया जा सकता है।

4. तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु क्रमांक है परमाणु संरचना व रेडियोऐक्टिवता की खोज के बाद यह स्थापित हो गया कि तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं वरन् परमाणु क्रमांक है; अतः तत्त्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में रख कर उनको वर्गीकृत करने का कोई औचित्य (justification) नहीं है।

प्रश्न 2
मेन्डेलीफ की आधुनिक संशोधित आवर्त-सारणी में आवर्तों के सामान्य लक्षण लिखिए।
या आवर्त-सारणी में आवर्तों के चार मुख्य लक्षण लिखिए। (2011, 16)
या आवर्त-सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर निम्नलिखित गुणों में क्या परिवर्तन होता है ?

  1. विद्युत धनात्मक गुण
  2. धात्विक गुण
  3. ऑक्साइडों का क्षारीय गुण
  4. आयनन विभव। (2009, 15)

या आवर्त-सारणी के द्वितीय/तृतीय आवर्त में निम्नलिखित गुणों में किस प्रकार परिवर्तन होता है ? समझाइए।

  1. धात्विक गुण
  2. हाइड्रोजन से सम्बन्धित संयोजकता। (2009, 13)

या किसी आवर्त के दो गुण लिखिए। (2011)
उत्तर:
मेन्डेलीफ ने आवर्त-सारणी में सात क्षैतिज (Horizontal) खाने बनाये, जिन्हें उन्होंने आवर्त कहा। उन्होंने प्रथम तीन आवर्तों को लघु आवर्त कहा, क्योंकि इनमें कम तत्त्व होते हैं। शेष आवर्तों को दीर्घ आवर्त कहा, क्योंकि इनमें अधिक तत्त्व होते हैं। इनके सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं
1. संयोजकता में क्रमिक परिवर्तन लघु आवों में बाईं से दाईं ओर बढ़ने पर तत्त्वों की हाइड्रोजन के प्रति संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है, तत्पश्चात् 4 से 1 तक घटती है। इन्हीं तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता 1 से 7 तक बढ़ती है; जैसे
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2. धात्विक गुण प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर धात्विक गुण घटता है तथा अधात्विक गुण बढ़ता जाता है; जैसे तृतीय आवर्त में,
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3. धन विद्युती गुण प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर तत्त्वों की धन विधुती प्रकृति क्रमश: घटती जाती है तथा ऋण विद्युती प्रकृति बढ़ती जाती है; जैसे-तृतीय आवर्त में,
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4. आयनन विभव लघु आवर्त में तत्त्वों का आयनन विभव (परमाणु से आयन बनने में लगने वाली ऊर्जा) बायीं से दायीं ओर बढ़ता जाता है।
5. घनत्व, क्वथनांक तथा गलनांक गुण यह आवर्त में बायीं से दायीं ओर बढ़ते हैं। आवर्त के मध्य में अधिकतम होकर पुनः घटते हैं।
6. ऑक्साइडों की अम्लीयता/क्षारीयता आवर्त में बायें से दायें चलने पर तत्त्वों के ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है तथा अम्लीय प्रकृति बढ़ती जाती है; जैसे तृतीय आवर्त के ऑक्साइडों में,
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प्रश्न 3.
आवर्त-सारणी में वर्गों के चार मुख्य लक्षण बताइए। (2016)
या मेन्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में समूहों के सामान्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
संशोधित मेन्डेलीफ आवर्त-सारणी में I से लेकर VIII समूह तथा उसके उपरान्त 0 (शून्य) समूह है। इस प्रकार इस सारणी में 9 खड़े खाने या समूह हैं। एक ही समूह के तत्त्वों के गुणों में समानताएँ पायी जाती हैं। I समूह से VII समूह तक प्रत्येक समूह में कुछ तत्त्व बायीं ओर को (sub group ‘A’ में) तथा कुछ तत्त्व दायीं ओर को (sub group ‘B’ में) रखे गये हैं। प्रत्येक समूह के बायीं ओर के तत्त्वों के गुणों में परस्पर समानता पायी जाती है तथा दायीं ओर के तत्त्वों के गुणों में परस्पर समानता पायी जाती है।

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1. संयोजकता प्रत्येक समूह के सभी तत्त्वों की संयोजकता एक ही होती है। किसी वर्ग की संख्या उस वर्ग के तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता बताती है। जैसे-शून्य समूह के सभी तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता शून्य है, प्रथम समूह के सभी तत्त्वों की संयोजकता 1 है, द्वितीय समूह की 2, तृतीय समूह की 3, चतुर्थ की 4, पंचम की 5, छठे की 6 तथा सातवें समूह के सभी तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता 7 है।

2. एक वर्ग के किसी उपवर्ग के सभी तत्त्वों के गुण धर्म समान होते हैं, परन्तु उसी वर्ग के दूसरे उपवर्ग के तत्त्वों से भिन्न होते हैं। उदाहरणार्थ – Li, Na, K, Rb, Cs आदि उपवर्ग I-A के तत्त्व हैं। इनके गुणधर्म लगभग समान हैं, परन्तु इनके गुणधर्म उपवर्ग I-B के तत्त्वों Cu, Ag, Au के गुणधर्मों से भिन्न होते हैं।

3. प्रत्येक समूह के गुणों में आधारभूत समानताएँ पायी जाती हैं, परन्तु समूह में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर तत्त्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन पाया जाता है।

4. प्रत्येक समूह में किसी तत्त्व के परमाणु भार से उसके नीचे वाले तत्त्व का परमाणु भार अधिक होता है।

5. प्रत्येक समूह के तत्त्वों में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर तत्त्वों की आयनिक त्रिज्या में वृद्धि होती जाती है, जिससे धन विद्युती प्रकृति तथा धात्विकता में क्रमिक वृद्धि होती जाती है। धात्विकता में क्रमिक वृद्धि के कारण क्षार बनाने की प्रकृति में भी वृद्धि होती जाती है। आयनिक त्रिज्या में वृद्धि के साथ आयनिक विभव तथा विद्युत ऋणीयता तथा गलनांक में ह्रास
होता जाता है।

प्रश्न 4.
दीर्घाकार आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।(2011, 12, 13, 14, 16, 18)
या दीर्घाकार आवर्त-सारणी के चार गुण लिखिए। (2018)
उत्तर:
दीर्घ आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ –

  1. यह सारणी तत्त्वों के अधिक मौलिक गुण (परमाणु क्रमांक) पर आधारित है।
  2. इसमें तत्त्वों की स्थिति का सीधा सम्बन्ध उसके परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से है; अतः यह एक अति आदर्श प्रबन्ध है।
  3. इससे तत्त्वों के रासायनिक गुणों में समानता, भिन्नता तथा अन्य क्रमिक परिवर्तनों का स्वयं ही आभास हो जाता है।
  4. इस आवर्त सारणी को याद करना सरल है।
  5. इसमें उप-समूहों को बिल्कुल ही पृथक् कर दिया गया है तथा उप-समूहों के अन्तर्गत सभी तत्त्व परस्पर समानता दर्शाते हैं।
  6. इस सारणी में आगे और भी विभाजन किये गये हैं; जैसे सक्रिय तत्त्व, संक्रमण तत्त्व, विरल मृदा धातु (लैन्थेनाइड) व रेडियो-ऐक्टिव धातु (ऐक्टिनाइड), उपधातु आदि।
  7. जैसे कि मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में अनेक अनुमान गलत निकाले गये, इस सारणी में ऐसा कोई गलत अनुमान नहीं निकलता।
  8. संक्रमण तत्त्वों का शब्दार्थ यहाँ अति स्पष्ट रूप से प्रकट होता है तथा साथ-ही-साथ इनका सारणी में स्थान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के परिप्रेक्ष्य में सराहनीय है।
  9. विरल मृदा धातुओं (लैन्थेनाइड, 58-71) तथा रेडियोऐक्टिव धातुओं (ऐक्टिनाइड, 90-103) की सारणी में पृथक् स्थिति इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है जिससे इनके रासायनिक गुणों की समानता प्रदर्शित होती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

Bihar Board Class 6 Science प्रकाश Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) किसी भी वस्तु को देखने के लिए आवश्यक है –
(i) प्रकाश
(ii) अंधेरा
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv). इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) प्रकाश

(ख) प्रकाश गमन करता है –
(i) सीधी रेखा में
(ii) टेढ़ी रेखा में
(iii) उल्टी रेखा में
(iv) उपर्युक्त सभी में
उत्तर:
(i) सीधी रेखा में

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(ग) प्रकाश स्रोत से पहला दर्पण पर पड़नेवाली किरण कहलाती है –
(i) परावर्तन किरण
(ii) आपतित किरण
(iii) सीधी रेखा
(iv) उल्टी रेखा
उत्तर:
(ii) आपतित किरण

(घ) जब किसी अपारदर्शी वस्तु को प्रकाश में रखते हैं तो वस्तु के दूसरी ओर प्रकाश नहीं जा पाता फलतः वस्तु अपनी तरह की आकृति बनाती है, इसे कहते हैं –
(i) प्रकाश
(ii) छाया
(iii) प्रतिछाया
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ii) छाया

(ङ) छया दिखाई दे सकती है –
(i) दीवार पर
(ii) परदे पर
(iii) जमीन पर
(iv) उपर्युक्त सभी में
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी में

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

(क) लकड़ी का टुकड़ा …………….. है (पारदर्शी/अपारदर्शी/ पारभासी)
(ख) काँच का टुकड़ा ……………. है। (पारदर्शी/अपारदर्शी/ पारभासी)
(ग) दर्पण में …………….. बनता है। (बिम्ब/प्रतिबिम्ब)
(घ) प्रकाश ……………. रेखा में गमन करती है। (सीधी/ टेढ़ी)
(ङ) किसी वस्तु को देखते हैं…………….. के कारण (परावर्तन/पारदर्शिता)
उत्तर:
(क) अपारदर्शी
(ख) पारदर्शी
(ग) प्रतिबिम्ब
(घ) सीधी
(ङ) परावर्तन

प्रश्न 3.
पारदर्शी, अपारदर्शी तथा पारभासी वस्तुओं के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
पारदर्शी वस्तु – शीशा (ग्लास), जल, हवा।
अपारदर्शी वस्तु – पुस्तक, लकड़ी, पत्थर।
पारभासी वस्तु – घीसा हुआ शीशा, तेल लगा कागज, तेला

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प्रश्न 4.
क्या अंधेरे कमरे में दर्पण के सामने अपना प्रतिबिम्ब देख सकते हैं? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर:
किसी वस्तु के दृश्य होने या उनका प्रतिबिम्ब के बनने के लिए तीन तत्व का होना आवश्यक होता है-प्रकाश, परावर्तक सतह तथा बिम्ब। यहाँ दो तत्व उपस्थित हैं-दर्पण तथा बिम्ब। लेकिन प्रकाश उपस्थित नहीं है। इसलिए हम अपना प्रतिबिम्ब दर्पण में नहीं देख सकते हैं। क्योंकि प्रकाश की किरणों के परावर्तन के कारण ही प्रतिबिम्ब बनता है।

प्रश्न 5.
छाया देखकर किन-किन वस्तुओं को पहचान सकते हैं? सूची बनाएँ।
उत्तर:
वृक्ष, पत्थर, ईंट, मानव, जानवर, घर आदि।

प्रश्न 6.
कैसे बताएंगे कि प्रकाश सीधी रेखा में चलती है? अपने साथियों के बीच प्रयोग करके दिखाएँ।
उत्तर:
चार पोस्टकार्ड को समान ऊँचाई तथा समान आकार का छिद्र कर लेते हैं। अब एक जलती मोमबती लेते हैं। चारों को सजा लेते हैं कुछ बीच में कुछ दूरी छोड़ते हुए पोस्टकार्ड के पीछे एक पर्दा लगा लेते हैं तथा सबसे आगे मोमबत्ती जलाकर रखते हैं। अब प्रयोग का अवलोकन करते हैं। तो पता चलता है कि पर्दा पर छिद्र के आकार के बराबर प्रकाशित होता है।

अब एक पोस्टकार्ड में पहले से अलग छिद्र कर इसे पोस्टकार्डों के बीच में डलते हैं। फिर अवलोकन करते हैं तो पता चलता है कि पर्दा पर की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं। यानि पर्दा का जो क्षेत्र पहले प्रकाशित था अब कोई भी क्षेत्र प्रकाशित नहीं होता है।

इस प्रकार यह साबित होता है कि बीच में कार्ड डालने से सीधी रेखा में छिद्र न रहकर ऊपर-नीचे हो गया जिसमें प्रकाश गमन नहीं कर पाया। अत: हम कह सकते हैं। “प्रकाश सभी रेखा में गमन करता है।”

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Bihar Board Class 6 Science प्रकाश Notes

अध्ययन सामग्री :

प्रकाश हमारे दैनिक जीवन में अति महत्वपूर्ण है। सूर्य के प्रकाश पर ही जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधे अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित रहते हैं। पौधे प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन बनाते हैं और उसी पेड़-पौधे से प्राप्त उत्पाद जीव-जन्तु अपने भोजन के लिए प्रयोग करते हैं। सूर्य के प्रकाश से जल वाष्पित होते हैं। पुनः वर्षा के रूप में जमीन पर आते हैं ‘ और हमारी धरती को हरा-भरा बनाती है।

प्रकाश के माध्यम से किसी को हम देख पाते हैं। यदि प्रकाश नहीं होता तो सभी वस्तु अदृश्य होती और आज हम यहाँ तक नहीं पहुँच पाते।

प्रकाश ऊर्जा का वह रूप होता है जो हमें देखने की अनुभूति प्रदान करता है। प्रकाश की किरणें जब किसी वस्तु पर आपतित होती हैं और उससे परावर्तित होकर हमारे आँख तक पहुँचती है, तब उस वस्तु का प्रतिबिंब हमारी आँख में बनता है। प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करता है। प्रकाश से कुछ वस्तु आर-पार हो जाता है। कुछ वस्तु से पार नहीं कर पाती है और कुछ वस्तु से होकर अंशतः पार करता है।

यानि वे वस्तुएँ जिनसे होकर प्रकाश की किरणे पार हो जाती हैं तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ साफ दिखायी पड़ती हों उसे पारदर्शी वस्तु कहते हैं। जैसे- शीशा, पानी आदि।

वे वस्तुएँ जिनसे होकरे प्रकाश की किरणें पार नहीं होती हों तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ बिल्कुल दिखाई नहीं पड़ती हों उसे अपारदर्शी वस्तु कहते हैं। जैसे —- लकड़ी, पुस्तक, दीवार, पत्थर आदि।

वे वस्तुएँ जिनसे होकर प्रकाश की किरणें आंशिक रूप से पार होती हों तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई पड़ती हों उसे पारभासी वस्तु कहते हैं। जैसे- घीसा हुआ शीशा, तेल लगा हुआ कागज आदि।

प्रकाश के गुण –

  • यह ऊर्जा का एक रूप होता है।
  • यह निर्वात में भी गमन करती है।
  • यह हमेशा सीधी रेखा में गमन करती है।
  • यह हमें देखने की अनुभूति प्रदान करती है।
  • यह एक तरंग के रूप में गमन करती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

प्रकाश की चाल (निर्वात में) 3 × 108 मी0/सं0 होती है।

प्रकाश का परावर्तन –

प्रकाश के चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश स्रोत से पहला दर्पण पर पड़ने वाली किरण आपतित किरण कहलाती है। और दूसरे दर्पण से वापस आने वाली किरण को परावर्तित किरण कहते हैं। सतह पर लम्ब को अभिलम्ब कहते हैं। अभिलम्ब तथा आपतित किरण के बीच बने कोण को आपतन कोण कहते हैं। अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण के बीच बने कोण का परावर्तन कोण कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश 1

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

परावर्तन के नियम –

परावर्तन के दो नियम हैं –
1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक ही समतल में होते हैं।
2. आपतन कोण परावर्त्तन कोण के बराबर होता है।

जब प्रकाश की किरणों के रास्ते में कोई अपारदर्शी वस्तु आ जाती है, तो प्रकाश की किरणें आगे नहीं जा पाती हैं। वस्तु के आगे परदा रहने पर परदे के प्रकाशित भाग के बीच कुछ भाग ऐसा होता है, जो काला दिखता है, इस भाग को छाया कहते हैं। छाया की लम्बाई तथा आकार (क) प्रकाश के उद्गम (ख) अपारदर्शी वस्तु के आकार तथा (ग) प्रकाश के उद्गम तथा वस्तु के बीच की दूरी पर निर्भर करता है।

जब प्रकाश का उद्गम बिन्दुवत हो तो उससे बनने वाली छाया में एक जैसा अंधकार रहता है। जब प्रकाश के उद्गम का विस्तार रूकावट की अपेक्षा बड़ा हो, तो छाया के मध्य भाग में प्रकाश एकदम नहीं पहुँचने के कारण पूर्ण अंधकार में रहता है, यह प्रच्छाया कहलाता है और जिस भाग में अंशतः प्रकाश-पहुँचता है। उसे उपछाया कहते हैं। इस प्रकार प्रकाश का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है।