Bihar Board Class 12 Economics Solutions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

Bihar Board Class 12 Economics Solutions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Economics Solutions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

Bihar Board Class 12 Economics प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल संप्राप्ति वक्र –
(a) a मूल बिन्दु से गुजरती हुई धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो।
(b) a समस्तरीय रेखा हो।
उत्तर:
(a) माँग वक्र का ढाल नीचे की ओर या ऋणात्मक होगा।
(b) माँग वक्र का ढाल x – अक्ष (क्षैतिज अक्ष) के समान्तर होगा।
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प्रश्न 2.
नीचे दी गई सारणी से कुल संप्राप्ति माँग वक्र और माँग की कीमत लोच की गणना कीजिए।
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उत्तर:
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फर्म का माँग वक्र व उद्योग का माँग वक्र एकदम समान होंगे।
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इकाई 1 से 3 तक माँग वक्र ऋणात्मक ढाल वाला है। इकाई 3 से 5 तक माँग क्षैतिज अक्ष के समांतर है इकाई 5 से 6 तक माँग वक्र पुनः ऋणात्मक ढाल वाला है। 5 वीं इकाई के बाद वस्तु की कोई माँग नहीं है।
माँग की लोच
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प्रश्न 3.
जब माँग वक्र लोचदार हो तो सीमांत संप्राप्ति का मूल्य क्या होगा?
उत्तर:
जब माँग पूर्णतया लोचदार होती है तो सीमांत आगम का मूल्य शून्य होता है। जब माँग वक्र लोचदार अर्थात् माँग की लोच इकाई से अधिक होती है तब सीमांत आगम धनात्मक होता है।

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प्रश्न 4.
एक एकाधिकारी फर्म की कुल स्थिर लागत 100 रुपये और निम्नलिखित माँग सारणी है –
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अल्पकाल में संतुलन मात्रा, कीमत और कुल लाभ प्राप्त कीजिए। दीर्घकाल में संतुलन मात्रा क्या होगी? जब कुल लागत 1000 रुपये हो तो अल्पकाल और दीर्घकाल में संतुलन का वर्णन करें।
उत्तर:
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अल्पकालीन संतुल उस बिन्दु पर होता है जहाँ एकाधिकारी फर्म को अधिकतम आगम प्राप्त होता है। अनुसूची में उत्पादन स्तर 6 पर अधिक आगम 300 फर्म को प्राप्त हो रहा है।
अतः अल्पकालीन साम्य मात्रा = 6
कीमत = 50
कुल लाभ = कुल आगम – कुल लागत
= 300 – 0 = 300
जब कुल लागत 1000 रुपये है तो अल्पकाल में संतुलन उस बिन्दु पर होता है जहाँ एकाधिकारी फर्म की कुल आगम व कुल लागत का अंतर अधिक होता है।
अधिकतम लाभ = कुल आगत – कुल लागत
= 300 – 1000 = -700 रुपये
उपरोक्त सूचना यह दर्शाती है कि फर्म को 700 रुपये की हानि हो रही है। अतः संतुलन अवस्था का प्रश्न ही नहीं उठता है। दीर्घकाल के लिए भी एकाधिकारी फर्म के संतुलन की वही शर्त लागू होती है।

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प्रश्न 5.
यदि अभ्यास 3 का एकाधिकारी फर्म सार्वजनिक क्षेत्र का फर्म हो, तो सरकार इसके प्रबंधक के लिए दी हुई सरकारी स्थिर कीमत (अर्थात् वह कीमत स्वीकार करता है और इसलिए पूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक बाजार के फर्म जैसा व्यवहार करता है) स्वीकार करने के लिए नियम बनाएगी और सरकार यह निर्धारित करेगी कि ऐसी कीमत निर्धारित हो, जिससे बाजार माँग और पूर्ति समान हो। उस स्थिति में संतुलन कीमत, मात्रा और लाभ क्या होंगे?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत संतुलन स्थापित वहाँ होता है जहाँ वस्तु की बाजार माँग व बाजार पूर्ति समान होती है। संतुलन बिन्दु पर कीमत को साम्य कीमत तथा बेची व खरीदी गई मात्रा को साम्य मात्रा कहते हैं। साम्य कीमत एवं मात्रा को नीचे चित्र में दिखाया गया है।
माँग वक्र DD, पूर्ति वक्र SS, साम्य बिन्दु E, साम्य कीमत Op, साम्य मात्रा Oq
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पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत एक फर्म को शून्य लाभ प्राप्त होता है। इसका अभिप्राय है कि प्रतियोगी फर्म को सामान्य लाभ प्राप्त होता है।

प्रश्न 6.
उस स्थिति में सीमांत संप्राप्ति वक्र के आकार पर टिप्पणी कीजिए, जिसमें कुल संप्राप्ति वक्र –

  1. धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो।
  2. समस्तरीय सरल रेखा हो।

उत्तर:
1. कुल आगम वक्र धनात्मक ढाल वाली सीधी रेखा है –
नीचे बताई गई तीन स्थितियाँ हो सकती हैं –

  • यदि कुल आगम वक्र धनात्मक ढाल वाला होता है लेकिन उसमें समान दर से वृद्धि होती है तो सीमांत आगम वक्र क्षैतिज अक्ष (x – अक्ष) के समांतर होगा।
  • यदि कुल आगम वक्र धनात्मक ढाल वक्र है और बढ़ती हुई दर से बड़ता है तो सीमांत आगम वक्र का ढाल धनात्मक होता है।
  • यदि कुल वक्र का ढाल धनात्मक परंतु कम दर से बढ़ता है तो सीमांत का ढाल ऋणात्मक होता है।

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प्रश्न 7.
नीचे सारणी में वस्तु की बाजार माँग वक्र और वस्तु उत्पादक एकाधिकारी फर्म के लिए कुल लागत दी हुई है। इनका उपयोग करके निम्नलिखित की गणना करें –
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  1. सीमांत संप्राप्ति और सीमांत लागत सारणी।
  2. वह मात्रा जिस पर सीमांत संप्राप्ति और सीमांत लागत बराबर है।
  3. निर्गत की संतुलन मात्रा और वस्तु की संतुलन कीमत।
  4. संतुलन में कुल संप्राप्ति, कुल लागत और कुल लाभ।

उत्तर:
1.
सीमांत संप्राप्ति।
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सीमांत लागत अनुसूची
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2. उत्पादन स्तर c फर्म की सीमांत लागत व सीमांत आगम दोनों समान हैं। इस उत्पादन स्तर पर MR = MC = 4

3. संतुलन बिन्दु वहाँ स्थापित होता है जहाँ MR = MC इस शर्त में निम्नलिखित सूचना प्राप्त होती है –
साम्य मात्रा = 6
इकाइयाँ साम्य कीमत = 19

4. साम्य उत्पाद स्तर = 6 इकाई
साम्य उत्पादन स्तर पर
कुल आगम = 114
कुल लागत = 109
कुल लाभ = कुल आगाम – कुल लागत
= 114 – 109 = 5

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प्रश्न 8.
निर्गत के उत्तम अल्पकाल में यदि घाटा हो, तो क्या अल्पकाल में एकाधिकारी फर्म उत्पादन को जारी रखेगी?
उत्तर:
यदि अल्पकाल में किसी फर्म को हानि उठानी पड़ती है तो वह उत्पादन जारी रखेगी इसका निर्धारण निम्न प्रकार से किया जाता है –
1. यदि उत्पादन के इस स्तर पर सीमांत लागत वक्र सीमांत आगम वक्र को ऊपर से काटता है अथवा सीमांत लागत वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है तो फर्म हानि की स्थिति में भी उत्पादन जारी रखेगी क्योंकि उत्पादन के इस स्तर के बाद फर्म को लाभ प्राप्त होगा ऐसा इसलिए संभव होता है कि सीमांत लागत घट रही है।

2. यदि उत्पादन के इस स्तर पर सीमांत लागत वक्र, सीमांत आगम वक्र को नीचे से काटता है अथवा सीमांत लागत वक्र धनात्मक ढाल का है तो फर्म इस उत्पादन स्तर से आगे उत्पादन नहीं करेगी। इस उत्पादन स्तर से आगे उत्पादन करने पर सीमांत लागत में वृद्धि होती है और फर्म की हानि में और बढ़ोतरी होगी।

प्रश्न 9.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में किसी फर्म की माँग वक्र की प्रवणता ऋणात्मक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता में एक फर्म वस्तु की कीमत घटाकर ही ज्यादा इकाइयाँ बेच सकती है। क्योंकि कीमत घटने पर माँग बढ़ जाती है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि सीमांत आगम वक्र का ढाल ऋणात्मक होगा। एकाधिकारात्मक प्रतियोगी फर्म का औसत आगम, माँग वक्र के समान होता है। अतः इस बाजार में फर्म का माँग वक्र ऋणात्मक ढाल वाला होता है।

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प्रश्न 10.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाल के लिए किसी फर्म का संतुलन शून्य लाभ पर होने का क्या कारण है?
उत्तर:
एकाधिकारात्मक प्रतियोगी बाजार में फर्मों की अधिक संख्या होती है। फर्मों का प्रवेश व गमन स्वतंत्र होता है। इस बाजार में फर्म विभेदीकृत वस्तु का उत्पादन करती है। अल्पकाल में फर्मों की संख्या कम होने के कारण प्रतियोगिता कम पायी जाती है। अतः फर्मों को असामान्य लाभ प्राप्त हो सकता है। असामान्य लाभ से आकर्षित होकर नई फमें बाजार में प्रवेश कर सकती है।

वस्तु का उत्पादन बढ़ेगा। इससे वस्तु की कीमत घटेगी। नई फर्मों का प्रवेश, उत्पादन में बढ़ोतरी, वस्तु की कीमत में गिरावट का सिलसिला उस सीमा तक रहता है जब तक फर्म का लाभ शून्य नहीं हो जाता है। इस स्तर पर बाजार में प्रवेश पाने के लिए नई फर्मों के पास कोई आकर्षण नहीं रहता है।

इसके विपरीत यदि अल्पकाल में कोई फर्म हानि उठा रही है तो नुकसान उठाने वाली कुछ फर्म उत्पादन बंद करक बाजार छोड़कर बाजार से बाजार जा सकती है। उत्पादन में संकुचन होगा जिससे बाजार कीमत में बढ़ोतरी होगी। फर्मों का प्रवेश, उत्पादन में संकुचन आदि तब तक जारी रहेगा जब तक लाभ शून्य नहीं होगा। इस प्रकार फर्मों का प्रवेश व गमन उस समय रुक जाता है जब दीर्घकाल में लाभ शून्य हो जाता है। यह स्थिति ही दीर्घकालीन संतुलन की स्थिति होती है।

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प्रश्न 11.
तीन विभिन्न विधियों की सूची बनाइए, जिसमें अल्पाधिकारी फर्म व्यवहार कर सकता है।
उत्तर:
वह बाजार संरचना जिसमें एक अधिक परंतु सीमित फर्म होती है अल्पाधिकार कहलाता है। अल्पाधिकारी में एक फर्म निम्नलिखित तीन प्रकार से व्यवहार कर सकती है –
1. यदि वस्तु बाजार में दो फर्म मौजूद होती हैं तो इस संरचना को द्वैदाधिकार कहते हैं। दोनों फर्म मिलकर विलय कर सकती है और प्रतियोगिता न करने का निर्णय कर सकती है। सामूहिक रूप से दोनों फर्मे अपना लाभ अधिकतम कर सकती है। इस स्थिति में दोनों फर्मे अलग-अलग उत्पादन इकाई के रूप में उत्पादन करती है परंतु अधिक लाभ कमाने के लिए एकाधिकारी फर्म की तरह व्यवहार करती है।

2. यह भी हो सकता है कि दोनों फर्मे आपस में अधिकतम लाभ के लिए उत्पादन की मात्राएँ तय कर सकती हैं। निर्णय के बाद दोनों में से कोई भी फर्म उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन न करने की बात स्वीकार करती है।

3. कुछ अर्थशास्त्री ऐसा भी मानते हैं कि अल्पाधिकार बाजार संरचना में कठोर कीमत नीति काम करती है। अर्थात् बाजार कीमत में बाजार माँग के अनुसार परिवर्तन नहीं होता है। इस संरचना में कीमत परिवर्तन करना कोई भी फर्म विवेकपूर्ण नहीं मानती है। यदि कोई एक फर्म कीमत बढ़ाने का निर्णय लेती है तो वह फर्म अपने लाभ को कम कर सकती है। यदि दूसरी फर्म कीमत नहीं बदलती है तो पूर्व फर्म को कम माँग का सामना करना पड़ेगा।

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प्रश्न 12.
यदि द्वि – अधिकारी का व्यवहार कुर्नोट के द्वारा वर्णित व्यवहार के जैसा हो, तो बाजार माँग वक्र को समीकरण q = 200 – 4p द्वारा दर्शाया जाता है तथा दोनों फर्मों की लागत शून्य होती है। प्रत्येक फर्म के द्वारा संतुलन और संतुलन बाजार कीमत में उत्पादन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माँग फलन q = 200 – 4p
जब माँग वक्र एक सीधी रेखा होता है और उत्पादन लागत शून्य होती है तो माँग की आधी पूर्ति करना एकाधिकारी के लिए अधिकतम लाभकारी होता है।

माँग वक्र समीकरण q = 200 – 4p = 200 – 4 × 0 (कीमत स्तर शून्य पर अधिकतम माँग)
फर्म व वस्तु की शून्य इकाइयों की पूर्ति करती है –
फर्म अ के लिए माँग = 200 इकाइयाँ
फर्म अ की आपूर्ति = \(\frac{200}{2}\) इकाइयाँ = 100 इकाइयाँ
फर्म ब के लिए माँग = 200 – \(\frac{200}{2}\)
फर्म ब की आपूर्ति = \(\frac{1}{2}\) (200 – \(\frac{200}{2}\)) = 50 इकाइयाँ
फर्म ब की आपूर्ति 0 से 50 इकाइयाँ तक बदल चुकी है। अतः फर्म अ के लिए माँग = 200 – 50 = 150 इकाइयाँ
अतः फर्म अ आपूर्ति करना चाहेगी \(\frac{150}{2}\) = 75 इकाइयाँ
इन चक्रों का क्रम तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों फर्मों की आपूर्ति समान नहीं हो जायेगी। इसकी गणना निम्नलिखित तालिका में की गई है –

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इस प्रकार अन्त में दोनों फर्म समान मात्रा की आपूर्ति करेंगी।
आपूर्ति = \(\frac{200}{2}\) – \(\frac{200}{4}\) + \(\frac{200}{8}\) – \(\frac{200}{16}\) + \(\frac{200}{32}\) – \(\frac{200}{64}\) + …………. = \(\frac{200}{3}\)
बाजार पूर्ति = फर्म अ आपूर्ति + फर्म ब आपूर्ति = \(\frac{200}{3}\) + \(\frac{200}{3}\) = \(\frac{400}{3}\) इकाइया
कीमत निर्धारण q = 200 – 4p
या 4p = 200 – q
= 200 – \(\frac{400}{3}\) (मूल्य प्रतिस्थापित करने पर)
या = \(\frac{200}{3}\)
या p = \(\frac{200}{3×4}\) = \(\frac{50}{3}\)
प्रत्येक फर्म द्वारा की गई आपूर्ति = \(\frac{200}{3}\) इकाइयाँ
दोनों फर्मों द्वारा की गई पूर्ति = \(\frac{400}{3}\) इकाइयाँ
साम्य कीमत = \(\frac{50}{3}\) रु.

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प्रश्न 13.
आय अनन्य कीमत का क्या अभिप्राय है? अल्पाधिकार के व्यवहार से इस प्रकार का निष्कर्ष कैसे निकल सकता है?
उत्तर:
अल्पाधिकारी बाजार में वस्तु की कीमत में परिवर्तन मुक्त रूप से माँग में परिवर्तन के अनुसार नहीं होता है। यदि एक फर्म अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तु की कीमत बढ़ा देती है और दूसरी फर्म ऐसा नहीं करती है। कीमत में वृद्धि के कारण पहली फर्म की वस्तु की माँग अधिक मात्रा में घट जायेगी। इससे इस फर्म के कुल आगम में कमी आ जायेगी। अतः कीमत बढ़ाना किसी भी फर्म के लिए विवेकपूर्ण निर्णय नहीं होगा।

दूसरी ओर यदि कोई फर्म कीमत घटाकर कुल लाभ अधिकतम करना चाहती है और दूसरी फर्म इस निर्ण को चुनौती मानकर कीमत को घटा देती है। इस प्रकार कीमत को घटाकर माँग में वृद्धि की हिस्सेदारी दोनों फर्मों को प्राप्त होगी। तरह कीमत घटाकर माँग में वृद्धि का फायदा इस बाजार में कोई फर्म थोड़े समय के लिए उठा सकती है। दूसरी फर्म द्वारा कीमत घटाने पर फम का कुल आगम भी घटेगा और कुल लाभ में भी कमी आयेगी। इसलिए अल्पाधिकार में कीमत स्थिर पाई जाती है।

Bihar Board Class 12 Economics प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एकाधिकार को परिभाषित करो।
उत्तर:
वह बाजार संरचना जिसमें एक वस्तु का बाजार में एक अकेला विक्रेता होता है, एकाधिकार कहलाती है।

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प्रश्न 2.
एकाधिकारी फर्म के कुल आगम वक्र की प्रकृति किस बात पर निर्भर करती है?
उत्तर:
कुल आगम वक्र की प्रकृति औसत आगम पर निर्भर करती है।

प्रश्न 3.
एकाधिकारी फर्म का बाजार माँग वक्र क्या होता है?
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म का औसत आगम वक्र ही फर्म का माँग वक्र होता है।

प्रश्न 4.
एकाधिकारी फर्म द्वारा पूर्ति की गई वस्तु की कीमत का निर्धारण किस पर निर्भर होता है?
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म द्वारा पूर्ति की गई वस्तु की मात्रा के आधार पर वस्तु की कीमत का निर्धारण होता है।

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प्रश्न 5.
वह शर्त लिखो जिससे वस्तु बाजार एकाधिकार संरचना रखता है।
उत्तर:
वस्तु बाजार की संरचना एकाधिकारी होती है यदि उस बाजार में केवल एक विक्रेता हो, वस्तु की कोई निकट प्रतिस्थापन वस्तु न हो तथा बाजार बाजार में नई फर्म के प्रवेश पर प्रतिबंध हो।

प्रश्न 6.
सीमांत आगम वक्र की स्थिति और माँग वक्र के ढाल में क्या संबंध होता है?
उत्तर:
ऋणात्मक ढाल वाला माँग वक्र जितना अधिक ढाल होता है सीमांत आगम वक्र उतना ही नीचे होता है।

प्रश्न 7.
औसत आगम वक्र कब नीचे गिरता है?
उत्तर:
जब सीमांत आगम औसत आगम से कम होती है तब औसत आगम वक्र नीचे गिरता है।

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प्रश्न 8.
कुल आगम वक्र का आकार क्या होगा यदि माँग वक्र ऋणात्मक ढाल वाली सीधी रेखा है?
उत्तर:
माँग ऋणात्मक ढाल वाली रेखा होने पर कुल आगम वक्र उल्टे परवलय की तरह का होता है।

प्रश्न 9.
कुल आगम से औसत आगम वक्र की गणना किस प्रकार की जाती है?
उत्तर:
उत्पादन के किसी भी स्तर पर कुल आगम वक्र पर स्थित संबंधित बिन्दु से मूल बिन्दु को मिलाने वाली रेखा के ढाल के आधार पर औसत आगम की गणना की जाती है।

प्रश्न 10.
कुल आगम से सीमांत आगम ज्ञात करने की विधि लिखो।
उत्तर:
उत्पादन के किसी भी स्तर कुल आगम वक्र के संबंधित बिन्दु से स्पर्श खींची गई, स्पर्श रेखा के द्वारा सीमांत आगम की गणना की जाती है।

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प्रश्न 11.
साम्य कीमत किससे प्राप्त होती है?
उत्तर:
वह माँग वक्र जिससे साम्य मात्रा प्राप्त होती है साम्य कीमत प्रदान करता है।

प्रश्न 12.
साम्य मात्रा की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
साम्य कीमत पर खरीदी व बेची गई मात्रा को साम्य मात्रा कहते हैं।

प्रश्न 13.
यदि फर्म की लागत शून्य हो तो एकाधिकारी फर्म द्वारा आपूर्ति की गई मात्रा कितनी होती है?
उत्तर:
साम्य की अवस्था में पूर्ति की गई मात्रा उस बिन्दु पर प्राप्त होती है जहाँ सीमांत आगम शून्य होती है।

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प्रश्न 14.
प्रतियोगी फर्म द्वारा पूर्ति की गई साम्य मात्रा किस प्रकार प्राप्त होती है?
उत्तर:
प्रतियोगी फर्म द्वारा पूर्ति की गई साम्य मात्रा उस बिन्दु पर प्राप्त होती है जहाँ औसत आगम शून्य होती है।

प्रश्न 15.
वस्तु बाजार में अल्पाधिकार की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
उत्तर:
जब कम संख्या में फर्म एक समान वस्तु का उत्पादन करती है।

प्रश्न 16.
अपूर्ण प्रतियोगी बाजार में दीर्घकाल में लाभ का स्तर क्या होता है?
उत्तर:
अपूर्ण प्रतियोगी वस्तु बाजार में दीर्घकाल में लाभ का स्तर शून्य होता है।

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प्रश्न 17.
अपूर्ण प्रतियोगी वस्तु बाजार में फर्म का लाभ शून्य क्यों होता है?
उत्तर:
अपूर्ण प्रतियोगी बाजार में फर्मों का प्रवेश स्वतंत्र होता है। फर्मों की संख्या बढ़ने पर अल्पकाल फर्मों के बीच पूर्ण प्रतियोगिता हो जाती है इसलिए लाभ का स्तर शून्य हो जाता है।

प्रश्न 18.
पूर्ण प्रतियोगिता एवं अपूर्ण प्रतियोगिता के अल्पकालीन साम्य की तुलना करो।
उत्तर:
अल्पकाल में अपूर्ण प्रतियोगिता में पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में उत्पादन मात्रा कम व कीमत ऊँची होती है।

प्रश्न 19.
वस्तु बाजार में एकाधिकार प्रतियोगिता उत्पन्न होने का कारण लिखो।
उत्तर:
वस्तु विभेद के कारण एकाधिकार प्रतियोगिता वस्तु बाजार में उत्पन्न होती है।

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प्रश्न 20.
कौन से बाजार में दीर्घकाल में भी लाभ का धनात्मक स्तर प्राप्त होता है?
उत्तर:
एकाधिकार में दीर्घकाल में भी लाभ का धनातमक स्तर होता है।

प्रश्न 21.
एकाधिकारी फर्म के संतुलन को परिभाषित करो।
उत्तर:
सीमांत आगम वक्र जहाँ सीमांत लागत वक्र को काटता है उसे फर्म का संतुलन बिन्दु कहते हैं।

प्रश्न 22.
एकाधिकार प्रतियोगिता की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
वह बाजार संरचना जिसमें अनेक क्रेता व विक्रेता होते हैं। विभिन्न फर्म विभेदीकृत वस्तु को बेचती हैं, फर्मों का प्रवेश स्वतंत्र होता है, एकाधिकार प्रतियोगिता कहलाती है।

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प्रश्न 23.
पूर्ण प्रतियोगिता की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
वह बाजार संरचना जिसमें विशाल संख्या में क्रेता व विक्रेता होते हैं, सभी विक्रेता समांगी वस्तु बेचते हैं, फर्मों का प्रवेश व गमन स्वतंत्र होता है।

प्रश्न 24.
बाजार की परिभाषा दो।
उत्तर:
वह संरचना जिसमें वस्तु के क्रेता व विक्रेता निकट संपर्क में रहकर विनिमय का कार्य करते हैं, बाजार कहलाती है।

प्रश्न 25.
जब सीमांत आगम का मूल्य धनात्मक हो तो माँग की लोच क्या होती है?
उत्तर:
जब सीमांत आगम का मूल्य धनात्मक होता है तो माँग लोचदार होती है।

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प्रश्न 26.
एकाधिकारी फर्म के लिए माँग कब बेलोचदार हो जाती है?
उत्तर:
जब सीमांत आगम का मूल्य ऋणात्मक होता है तो एकाधिकारी फर्म के लिए माँग बेलोचदार होती है।

प्रश्न 27.
उस बाजार का नाम लिखो जिसमें फर्म स्वयं ही उद्योग होती है?
उत्तर:
एकाधिकार वह बाजार है जिसमें फर्म स्वयं ही उद्योग होती है।

प्रश्न 28.
समांगी वस्तु की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
समांगी उत्पाद से अभिप्राय उद्योग की सभी फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तु शक्ल, आकार, स्वाद आदि गुणों में एक समान हों।

प्रश्न 29.
विभेदीकृत वस्तु की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
विभेदीकृत उत्पाद से अभिप्राय उद्योग की विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ जो ‘शक्ल, आकार, स्वाद आदि गुणों में भिन्न हों।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कुल आगम वक्र से औसत आगम ज्ञात करने की विधि लिखो।
उत्तर:
ज्यामितीय रूप से औसत आगम का मूल्य उत्पाद के किसी भी स्तर पर कुल आगम वक्र से ज्ञात किया जा सकता है। इसकी विधि नीचे लिखी गई है –

  1. कुल आगम वक्र (TR) खींचिए।
  2. उत्पाद का कोई भी स्तर लेकर क्षैतिज अक्ष से लम्ब खींचो।
  3. क्षैतिज अक्ष से लम्ब कुल आगम वक्र को जिस बिन्दु पर काटता है उसको a लिखो।
  4. बिन्दु a को मूल बिन्दु से मिलाओ।
  5. किरण Oa का ढाल ही औसत आगम होता है।
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प्रश्न 2.
अन्य बाजार संरचनाओं की तुलना में एकाधिकारी फर्म के साम्य निर्धारण की विभिन्नता की मान्यताएँ लिखिए।
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म की मान्यताएँ –

  1. माँग पक्ष की तरफ से बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता है। इसका अभिप्राय है कि उपभोक्ता इस बाजार में कीमत स्वीकारक होते हैं।
  2. वस्तु के उत्पादन में प्रयुक्त साधन बाजार में माँग पक्ष व पूर्ति पक्ष दोनों पूर्ण प्रतियोगिता होती है।

प्रश्न 3.
वे शर्ते लिखो जिनके आधार पर पूर्ण प्रतियोगी बाजार की संरचना का अनुमान लगाया जाता है।
उत्तर:
वह बाजार संरचना जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, पूर्ण प्रतियोगी बाजार कहलाता है –

  1. इस बाजार में एक वस्तु के क्रेताओं एवं विक्रेताओं की भारी संख्या होती है। एक फर्म द्वारा पूर्ति की मात्रा कुल बाजार पूर्ति की तुलना में नगण्य होती है। इसी प्रकार एक उपभोक्ता की वस्तु के लिए माँग बाजार माँग की तुलना में नगण्य होती है।
  2. बाजार में फर्मों को प्रवेश व बाहर जाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
  3. उद्योग में सभी फर्मों का उत्पाद समांगी होता है। दूसरे उद्योग की कोई फर्म प्रतियोगी वस्तु की पूर्ति नहीं करती है।
  4. क्रेता व विक्रेताओं को उत्पाद व उसकी कीमत की पूर्ण जानकारी होती है।

प्रश्न 4.
एकाधिकारी फर्म के लिए कुल आगम वक्र सीधी रेखा नहीं होता इसकी आकृति माँग वक्र की आकृति पर निर्भर करती है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कुल आगम वक्र बेची गई मात्रा का फलन होता है।
TR = p × q माँग फलन …………….. (i)
q = a – bp ………… (ii)
सभी (i) व (ii) से
TR = p(a – bp)
= ap – bp2
अतः एकाधिकारी फर्म का कुल आगम द्विघात समीकरण है जिसका वर्ग वाला पद ऋणात्मक है। इस प्रकार की समीकरण का चित्र उल्टा परवलय होता है। इसे नीचे चित्र में दर्शाया गया है –
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प्रश्न 5.
एकाधिकारी फर्म की कीमत बेची गई मात्रा का घटता हुआ फलन है, संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म उत्पाद की अधिक मात्रा की बिक्री कीमत घटाकर ही कर सकती है। दूसरी ओर उत्पाद की कम मात्रा बेचकर फर्म ऊँची प्राप्त कर सकती है। इस प्रकार एकाधिकारी बाजार कीमत पूर्ति की गई मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए एकाधिकारी के लिए कीमत बेची गई मात्रा का घटता प्रतिफल होता है। बाजार माँग वक्र आपूर्ति की गई विभिन्न मात्राओं के लिए उपलब्ध बाजार कीमत को दर्शाता है। एकाधिकार फर्म का माँग वक्र ही बाजार माँग वक्र होता है।

प्रश्न 6.
एकाधिकारी फर्म के संतुलन को समझाइए जब फर्म को लागत वहन करनी पड़ती है।
उत्तर:
फर्म की कुल आगम एवं कुल लागत के अंतर को लाभ कहते हैं। कुल आगम वक्र व कुल लागत वक्र के मध्य ऊर्ध्वाधर अंतर एकाधिकारी फर्म के लाभ को दर्शाता है। जब कुल लागत वक्र कुल आगम वक्र से ऊपर स्थित होता है तो इसका अभिप्राय है कि कुल लागत, कुछ आगम से अधिक है। अर्थात् फर्म को ऋणात्मक लाभ या हानि हो रही है।

जिस उत्पादन स्तर पर कुल आगम वक्र, कुल लागत वक्र से ऊपर होता है तो कुल आगम, कुल लागत से अधिक होती है। इसका अभिप्राय है फर्म को लाभ प्राप्त हो रहा है। एकाधिकारी फर्म हमेशा उस उत्पाद स्तर तक उत्पादन करती है जहाँ लाभ अधिकतम होता है। यह उत्पादन स्तर वह स्तर होता है जिस पर कुल आगम वक्र व कुल लागत वक्र के बीच ऊर्ध्वाधर दूरी अधिकतम होती है। फर्म का लाभ उल्टे परवलय द्वारा दर्शाया जाता है।
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 16
उत्पादन स्तर Oq2 से कम स्तर फर्म को हानि होती है।
उत्पादन स्तर 0q2 से 0q3 के मध्य फर्म को लाभ प्राप्त होता है।
उत्पादन स्तर Oq0 पर अधिकतम लाभ प्राप्त होगा। फर्म उत्पादन स्तर Oq0 कीमत स्तर पर वस्तु का विक्रय करेगी।

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प्रश्न 7.
शून्य लागत की स्थिति में एकाधिकारी फर्म के अल्पकालीन संतुलन को समझाइए।
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म स्टॉक नहीं बनाती है। यह फर्म जितना उत्पादन करती है उतनी ही मात्रा में बाजार में बेच देती है। कुल आगम व कुल लागत के अंतर को लाभ कहते हैं।
लाभ = कुल आगम – कुल लागत लाभ = कुल आगम (कुल लागत 30) कुल लाभ जब अधिकतम होता है जब फर्म का कुल आगम अधिकतम होता है। जिस उत्पाद स्तर पर कुल आगम अधिकतम होता है उसे साम्य उत्पादन स्तर तथा उस उत्पाद स्तर की कीमत को साम्य कीमत कहते हैं।
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 17

प्रश्न 8.
एकाधिकारी फर्म के लिए औसत आगम व सीमांत आगम में संबंध लिखों उत्तर-औसत आगम एवं सीमांत आगम में संबंध –

  1. उत्पादन के सभी स्तरों पर सीमांत आगम वक्र औसत आगम वक्र के नीचे स्थित रहता है।
  2. यदि औसत आगम वक्र अधिक ढालू होता है तो सीमांत आगम वक्र तथा औसत आगम वक्र में ज्यादा अंतर होता है।
  3. यदि औसत आगम वक्र कम ढालू होता है तो सीमांत आगम वक्र तथा औसत आगम वक्र के मध्य अंतर कम होता है।Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 18

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प्रश्न 9.
एकाधिकारी फर्म के लिए सीमांत आगम तथा माँग लोच में संबंध लिखो।
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म के लिए सीमांत आगम तथा कीमत माँग लोच में संबंध –

  1. जब सीमांत आगम का मान धनात्मक होता है तो माँग की कीमत लोच इकाई से अधिक होती है।
  2. जब सीमांत आगम का मान ऋणात्मक होता है तो माँग की कीमत लोच इकाई से कम होती है।
  3. जब सीमांत आगम का मूल्य शून्य होता है तो कीमत माँग, लोच इकाई के बराबर होती है।

प्रश्न 10.
अपूर्ण प्रतियोगी बाजार संरचनाओं के नाम लिखो तथा पूर्ण प्रतियोगी बाजार की दीर्घकाल में अधिकतम लाभ की शर्त लिखो।
उत्तर:
अपूर्ण प्रतियोगी बाजार संरचनाओं के नाम –

  1. एकाधिकार
  2. अपूर्ण प्रतियोगिता तथा
  3. अल्पाधिकार

पूर्ण प्रतियोगी बाजार संरचना की दीर्घकाल में लाभ की शर्त-वस्तु की कीमत तथा दीर्घकाल सीमांत लागत दोनों बराबर होनी चाहिए। यह फर्म का दीर्घकाल औसत आगम तथा दीर्घकाल सीमांत लागत दोनों बराबर हों।

प्रश्न 11.
एकाधिकार के बारे में कुछ आलोचनात्मक विचार लिखो।
उत्तर:
1. यह माना जाता है कि एकाधिकारी फर्म उपभोक्ताओं की लागत पर लाभ कमाती है। एकाधिकारी फर्म दीर्घकाल में भी लाभ कमाती है। उपभोक्ता भुगतान ज्यादा करते हैं और संतुष्टि कम प्राप्त करते हैं। कुछ अर्थशास्त्री ऐसा भी मानते हैं कि व्यवहार में एकाधिकारी फर्म नहीं होती है क्योंकि सभी वस्तुओं का प्रतिस्थापन इस या उस वस्तु से हो जाता है।

अतः सभी फर्मों को उपभोक्ताओं के हाथ से आय प्राप्त करने के लिए प्रतियोगिता करनी पड़ती है। प्रत्येक अर्थव्यवस्था स्थैतिक होने की बजाय गतिशील होती है इसलिए शुद्ध एकाधिकारी फर्म भी प्रतियोगिता से नहीं बचती है। नई खोजों व तकनीक के प्रयोग से उत्पादित नई वस्तुओं के कारण एकाधिकारी फर्म को प्रतियोगिता के लिए बाध्य कर सकती है।

2. एकाधिकार के बारे में दूसरा पक्ष भी है। कुछ अर्थशास्त्री तर्क देते हैं कि एकाधिकारी समाज के लिए भी उपयोगी हो सकता है। एकाधिकारी फर्म को अधिक लाभ प्राप्त होता है। अतः यह फर्म अनुसंधान व विकास के लिए अधिक कोष जुटा सकती है। प्रतियोगी फर्मों के अनुसंधान व विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना मुश्किल होता है। आर्थिक समृद्धता के कारण एकाधिकारी उन्नत एवं आधुनिक उत्पादन तकनीक का प्रयोग करके उत्पादन लागत को कम कर सकती है। कम उत्पादन लागत वाले उत्पाद को यह प्रतियोगिता की तुलना में नीची कीमत पर उपभोक्ताओं को बेच सकती है।

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प्रश्न 12.
औसत व सीमांत आगम तथा औसत व सीमांत लागत वक्रों सहायता से एकाधिकारी फर्म के साम्य को समझाइए।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 19
उत्पादन स्तर Oq0 से कम पर MR का मान MC से अधिक है। इसका अभिप्राय है प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन से फर्म को अतिरिक्त लाभ प्राप्त होगा। फर्म उस स्तर तक उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करती है जब तक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन से फर्म के अतिरिक्त लाभ में बढ़ोतरी होती है। उत्पादन स्तर बढ़ाने का सिलसिला Oq0 उत्पाद स्तर बंद हो जायेगा क्योंकि इस उत्पादन स्तर पर MR व MC समान हैं।

उत्पादन बढ़ाने से अतिरिक्त लाभ में वृद्धि नहीं होगी। उत्पादन स्तर Oq0 से अधिक पर MR, MC से कम रह जाती है। इसका अभिप्राय है कि उत्पादन से फर्म को हानि होगी। अतः फर्म उत्पादन स्तर को घटाने का प्रयास करेगी जब तक फर्म की हानि शून्य हो जाए या फर्म की MR व MC समान हो जाए। अतः उत्पादन स्तर Oq0 साम्य उत्पादन स्तर है। इस स्तर पर फर्म का लाभ अधिकतम होगा। लाभ उस बिन्दु पर अधिकतम होता है जहाँ MC व MR दोनों समान होते हैं और MC ऊपर की ओर उठती हुई होती है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित का अर्थ लिखो –
(a) विक्रय लागते
(b) विज्ञापन लागतें तथा
(c) विश्वासोत्पादक विज्ञापन
उत्तर:
(a) विक्रय लागत:
एकाधिकार प्रतियोगी संरचना वाले बाजार में विभिन्न फर्मे विभेदीकृत वस्तु का उत्पादन करती हैं। सभी फर्मों की वस्तुएँ एक-दूसरे के लिए निकट प्रतियोगी होती हैं। अत: प्रत्येक फर्म को अपना उत्पाद उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाने की बहुत आवश्यकता पड़ती है। उत्पाद को उपभोक्ताओं के मध्य लोकप्रिय बनाने अथवा अधिक संख्या में उपभोक्ताओं को उत्पाद की ओर आकर्षित करने के लिए किए गए व्यय को विक्रय लागत कहते हैं।

(b) विज्ञापन लागत:
दूरदर्शन, रेडियो, समाचार पत्रों, मैग्जीन, हैण्ड बिल, पोस्टर आदि के माध्यम से उत्पाद को प्रचारित करने पर किया गया व्यय विज्ञापन लागत कहलाता है।

(c) विश्वासोत्पादक विज्ञापन:
यदि कोई फर्म अधिक क्रय शक्ति वाले उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए खर्च करती है तो इन्हें चित्त आकर्षक लागतें या विश्वासोत्पादक विज्ञापन कहते हैं। इस प्रकार के विज्ञापन किसी नामीगिरामी व्यक्तित्व (खिलाड़ी/कलाकार/संगीतकार) के माध्यम से दिए जाते हैं।

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प्रश्न 14.
एकाधिकारी बाजार में औसत आगम तथा सीमांत आगम में क्या संबंध होगा?
उत्तर:
एकाधिकारी बाजार संरचना में फर्म का माँग वक्र ही बाजार माँग वक्र होता है। एकाधिकारी को वह कीमत स्वीकार करनी पड़ती है जिसे उपभोक्ता चुकाने को तैयार होते हैं। दूसरे शब्दों में, एकाधिकारी फर्म उस कीमत पर आपूर्ति करती है जिस पर उपभोक्ता अधिकतम माँग करते हैं। अत: एकाधिकारी फर्म का माँग वक्र ऋणात्मक ढाल का होता है।

फर्म की औसत आगम सदैव कीमत के समान इसलिए होती है क्योंकि औसत आगम वक्र भी ऋणात्मक ढाल वाला होता है। फर्म वस्तु की कीमत घटाकर ही कुल आगम बढ़ोतरी कर सकती है। अतः प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के विक्रय से कुल आगम में बढ़ोतरी घटती दर से होती है या सीमांत आगम भी ऋणात्मक ढाल का होता है। सीमांत आगम वक्र सदैव औसत वक्र से नीचे रहता है।
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित की परिभाषा लिखो –
(a) असामान्य लाभ तथा
(b) असामान्य हानि। पूर्ण प्रतियोगिता में उपरोक्त दोनों का फर्मों की संख्या पर प्रभाव भी लिखो।
उत्तर:
असामान्य लाभ-जब फर्म को वस्तु के विक्रय से प्राप्त कुल आगम, उसकी कुल लागत से अधिक होता है तो फर्म को असामान्य लाभ प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में वस्तु के उत्पादन में आयी कुल लागत पर उसके विक्रय से प्राप्त कुल आगम के अधिशेष को असामान्य लाभ कहते हैं। असामान्य लाभ की स्थिति में पूर्ण प्रतियोगी बाजार में फर्मों की संख्या बढ़ती है जब तक असामान्य लाभ समाप्त होकर सामान्य लाभ की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है।

असामान्य हानि-जब फर्म को वस्तु के विक्रय से प्राप्त कुल आगम, उसकी कुल लागत से कम होता है तो फर्म को हानि होती है। हानि को ऋणात्मक लाभ भी कहते हैं। असामान्य हानि की स्थिति में पूर्ण प्रतियोगी बाजार संरचना में फर्मों की संख्या में कमी आती है। यह कभी उस समय तक जारी रहती है जब जक हानि, शून्य लाभ में नहीं बदल जाती।

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प्रश्न 16.

  1. दीर्घकालिक प्रतियोगी संतुलन में सीमांत लागत और औसत लागत का संबंध लिखो तथा इस बिन्दु पर कीमत और सीमांत लागत का संबंध लिखो।
  2. दीर्घकालीन संतुलन की दशा में पूर्ण प्रतियोगी फर्म दीर्घकालीन औसत लागत वक्र के किस बिन्दु पर उत्पादन करेगी?

उत्तर:
1. दीर्घकालीन प्रतियोगी संतुलन में सीमांत लागत और औसत लागत दोनों समान होते हैं और सीमांत लागत ऊपर उठती (बढ़ती) हुई होती है दीर्घकालीन संतुलन या समकारी बिन्दु पर कीमत और सीमांत लागत दोनों समान होते हैं। इस बिन्दु पर सीमांत लागत बढ़ती हुई होती है।
p = MC तथा MC बढ़ रही हो

2. MR > MC तथा MC बढ़ रही हो
उत्तर:
2. MR > MC तथा MC बढ़ रही हो

प्रश्न 17.
बाजारों की संरचना के वर्गीकरण का आधार बताइए।
उत्तर:
बाजार संरचनाओं का वर्गीकरण कई आधार पर किया जाता है। उनमें से कुछ प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं –

  1. वस्तु की प्रकृति-समरूप या वस्तु विभेद।
  2. वस्तु की कीमत-वस्तु की समान या असमान कीमत।
  3. कीमत निर्धारण-कीमत का निर्धारण उद्योग द्वारा, कीमत का निर्धारण फर्म द्वारा अथवा वस्तु की कीमत का निर्धारण फर्म व उद्योग दोनों के द्वारा।
  4. विक्रेताओं की संख्या-बहुत अधिक, बहुत कम, कम या एक विक्रेता।
  5. बाजार का ज्ञान-पूर्ण या अपूर्ण।
  6. माँग वक्र-पूर्ण लोचशील, लोचशील या बेलोचशील।
  7. साधनों की गतिशीलता-पूर्ण गतिशीलता, अपूर्ण गतिशीलता या गतिशीलता का अभाव।
  8. लाभ-सामान्य – या असामान्य लाभ।

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प्रश्न 18.
विशुद्ध प्रतियोगिता क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
विशुद्ध प्रतियोगिता की अवधारणा पूर्ण प्रतियोगिता की अवधारणा से संकुचित है। वह बाजार संरचना जिसमें असंख्य विक्रेता एवं क्रेता होते हैं, सभी विक्रेता समरूप वस्तु का विक्रय करते हैं तथा फर्मों को उद्योग में प्रवेश करने व छोड़कर जाने की स्वतंत्रता होती विशुद्ध प्रतियोगिता कहलाती है।

विशुद्ध प्रतियोगिता के लक्षण –
1. फर्मों की अधिक संख्या:
इस बाजार संरचना में क्रेता व विक्रेताओं की बहुत अधिक संख्या होती है। एक विक्रेता, कुल बाजार पूर्ति की तुलना वस्तु की नगण्य मात्रा की पूर्ति करती है इसलिए एक फर्म वस्तु की बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती है।

2. समरूप:
इस प्रतियोगिता में विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तु समरूप होती है। दूसरे उद्योग में उत्पादित वस्तु/वस्तुओं से एक उद्योग में उत्पादित वस्तु से प्रतिस्थापन नहीं किया जा सकता है। समरूप वस्तु होने के कारण इस बाजार में वस्तु की कीमत समान होती है।

3. फर्मों का उद्योग में प्रवेश व गमन:
इस बाजार में लाभ से प्रभावित होकर कोई भी नई फर्म प्रवेश कर सकती है इसी प्रकार हानि उठाने वाली फर्म बाजार छोड़कर जाने के लिए स्वतंत्र होती है।

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प्रश्न 19.
एकाधिकारी प्रतियोगी फर्म का माँग वक्र लोचदार क्यों होता है?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतियोगी फर्म का माँग वक्र लोचदार होने के कारण –
1. विक्रेताओं की अधिक संख्या:
इस बाजार में छोटे-छोटे विक्रेताओं की अधिक संख्या होती है। एक विक्रेता कुल बाजार पूर्ति का थोड़ा भाग ही पूर्ति करता है। वह बाजार को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाता है।

2. निकट प्रतियोगी वस्तुएँ:
एकाधिकार प्रतियोगी बाजार विभिन्न फर्म विभेदित वस्तु का उत्पादन करती है परंतु उनकी वस्तुएं एक-दूसरे की निकट प्रतिस्थापक होती है। निकट प्रतिस्थापन्नता के कारण इस बाजार में मांग वक्र लोचशील होता है।

प्रश्न 20.
दो फर्मों के विलय से दक्षता में वृद्धि कैसे संभव है? समझाइए।
उत्तर:
प्रतियोगिता से बचने के लिए या अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए कभी-कभी दो या अधिक फर्म अपने निजी अस्तित्व को कायम रखते हुए उत्पादन की मात्रा व कीमत नीति से इस प्रकार से समन्वय करती हैं कि उनके निर्णय एक फर्म द्वारा लिए गए निर्णय प्रतीत होते हैं। इस प्रक्रिया को फर्मों का विलय कहते हैं। विलय होने के बाद इनकी गतिविधियों का संचालन एकाधिकारी फर्म की तरह होता है। विलय के बाद फर्म विशिष्ट सेवाओं का उपयोग कर सकती है। उनमें नई खोज या विकास की भावना बढ़ जाती है। एकता के कारण उपभोक्ताओं से ऊँची कीमत वसूल सकती है।

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प्रश्न 21.
पेटेन्ट अधिकारों का अनुमोदन किस ध्येय से किया जाता है?
उत्तर:
पेटेन्ट अधिकारों का अनुमोदन निम्नलिखित ध्येयों से किया जाता है –

  1. पेटेन्ट अधिकार का अनुमोदन होने पर पेटेन्ट काल में केवल पेटैन्ट अधिकार प्राप्त फर्म वस्तु का उत्पादन/तकनीक का प्रयोग कर सकती है। इससे वस्तु बाजार या उत्पादन तकनीक के क्षेत्र में फर्म का एकाधिकार हो जाता है । एकाधिकार के कारण फर्म उत्पाद के लिए ऊँची कीमत प्राप्त कर सकती है और उसे असामान्य लाभ प्राप्त हो सकता है।
  2. पेटेन्ट अधिकार से फर्मों में नए उत्पाद या नई उत्पादन तकनीक खोजने की प्रवृत्ति प्रबल होती है। इससे आर्थिक विकास को गति प्राप्त होती है।
  3. उत्पादन लागत घटाने वाली तकनीक के प्रयोग से क्रेताओं को सस्ती कीमत पर भी वस्तु प्राप्त हो सकती है।

प्रश्न 22.
पेटेन्ट अधिकार क्या होते हैं? पेटेन्ट का जीवन काल क्या होता है?
उत्तर:
पेटेन्ट अधिकार-इस अधिकार के माध्यम से कानूनी तौर पर यह घोषणा होती है कि जिस फर्म/कंपनी ने नए उत्पाद या नई तकनीक की खोज की है केवल वे फर्म या उससे अनुमति प्राप्त फर्म ही उस वस्तु का उत्पादन या उस उत्पादन तकनीक का प्रयोग कर सकती है। किसी अन्य फर्म के लिए ऐसे उत्पाद या तकनीक का प्रयोग गैर कानूनी करार कर दिया जाता है। पेटेन्ट का कोई सुनिश्चित जीवन काल नहीं होता है। एक पेटेन्ट से दूसरे पेटेन्ट का जीवन काल भिन्न हो सकता है। फिर भी पेटेन्ट का जीवन काल कुछ वर्षों का होता है या जितने वर्ष के लिए फर्म या कंपनी को पेटेन्ट अधिकार प्राप्त होता है उसे पेटेन्ट काल कहते हैं।

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प्रश्न 23.
पूर्ण प्रतियोगिता एवं विशुद्ध प्रतियोगिता में अंतर लिखो।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 21
पहली तीन विशेषताएँ पूर्ण प्रतियोगिता एवं विशुद्ध प्रतियोगिता के लिए समान होती हैं। अंतिम दो विशेषताएँ केवल पूर्ण प्रतियोगिता के लिए आवश्यक होती हैं विशुद्ध प्रतियोगिता के लिए आवश्यक नहीं होती है।

प्रश्न 24.
अल्पाधिकारी की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
अल्पाधिकार बाजार संरचना की विशेषताएँ –

  1. अल्पाधिकार बाजार में फर्मों की संख्या दो से अधिक परंतु कम होती है।
  2. अल्पाधिकारी फर्म का माँग वक्र अनिश्चित होता है। माँग वक्र की आकृति कोनेदार
  3. अल्पाधिकार में फर्मों में कीमत प्रतियोगिता के अलावा गैर कीमत प्रतियोगिता भी पायी जाती है।
  4. फर्म उत्पादन की मात्रा व कीमत के संबंध में आपसी तालमेल से नीति बनाती है। अथवा तालमेल के अभाव में उनमें कठोर प्रतियोगिता हो जाती है।
  5. प्रत्येक फर्म स्वतंत्र कीमत नीति बना सकती है। परंतु इस नीति को दूसरी फर्मों की नीति को भांपकर ही लागू करने का प्रयास करती है।

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प्रश्न 25.
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म का मांग वक्र पूर्णतया लोचशील क्यों होता है?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगी संरचना वाले बाजार में फर्मों की व क्रेताओं की संख्या बहुत ज्यादा होती है। एक फर्म बाजार आपूर्ति का बहुत छोटा (नगण्य) भाग ही आपूर्ति करती है। अतः अकेली फर्म बाजार पूर्ति को प्रभावित नहीं कर सकती है। इसलिए फर्म को उद्योग द्वारा तय की गई कीमत पर ही वस्तु की आपूर्ति करनी है। इस बाजार में सभी फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तु समरूप होती है। वस्तु विभेद के आधार पर भी फर्म वस्तु की कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती है। इसी प्रकार एक क्रेता भी वस्तु की पूर्ति तथा कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता है। अर्थात् पूर्ण प्रतियोगी माँग वक्र पूर्णतया लोचशील होता।
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वे विभिन्न कारक समझाइए जो एकाधिकार को जन्म देते हैं।
उत्तर:
एकाधिकार के लिए उत्तरदायी कारक –
1. पेटेन्ट अधिकार:
यदि कोई फर्म किसी उत्पाद या उत्पादन तकनीक को खोजने का दावा पेश करती है और उसके दावे की पुष्टि हो जाती है तो उस फर्म को उस उत्पाद या तकनीक के लिए पेटेन्ट अधिकार स्वीकृत किया जा सकता है। पेटेन्ट अधिकार मिलने पर कोई अन्य फर्म उस उत्पाद या तकनीक का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं कर सकती है। पेटेन्ट अधिकार से फर्मों को अनुसंधान व विकास के कार्यों की प्रेरणा मिलती है।

2. सरकार द्वारा लाइसेंस (अनुज्ञा पत्र):
यदि सरकार कानून के माध्यम से किसी एक वस्तु के उत्पादन का कार्य एक ही फर्म को सौंप देती है तो अन्य फमैं उस वस्तु बजार में कानून की बाध्यता के कारण प्रवेश नहीं कर सकती है। जैसे अंतर राष्ट्रीय दूरभाषा सेवाएं प्रदान कराने का अधिकार वी.एस.एन.एस. (VSNL) कंपनी को भारत सरकार ने प्रदान किया हुआ है।

3. कारटेल का गठन:
यदि कुछ फर्मों का विलय इस प्रकार से हो जाता है कि वे एकाधिकार के लाभ उठायेंगे तो इस गठन को कारटेल कहते हैं। इसके अन्तर्गत फर्म अलग-अलग उत्पादन इकाई के रूप में कार्य करती हैं परंतु उन सभी का निर्णय एक और सामूहिक होता है। जैसे तेल उत्पादक देशों ने OPEC नामक संगठन बनाया हुआ है जो एकाधिकारी की तरह कार्य करता है।

4. बाजार का आकार:
यदि किसी वस्तु की बाजार का आकार इतना छोटा होता है कि मौजूदा एक फर्म के उत्पादन की भी खपत उसमें नहीं हो पाती है तो अन्य फर्मे उसमें प्रवेश नहीं करती हैं।

5. भारी निवेश:
यदि किसी वस्तु के उत्पादन के लिए भारी निवेश की आवश्यकता पड़ती है तो कम वित्तीय संसाधन वाली फम उस वस्तु बाजार में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाती हैं। आदि।

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प्रश्न 2.
रेखाचित्रों की सहायता से पूर्ण प्रतियोगिता एवं एकाधिकार के औसत आगम वक्रों का अंतर समझाइए।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत औसत आगम वक्र:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत औसत आगम वक्र क्षैतिज अक्ष के समांतर एक सीधी रेखा होती है। प्रतियोगी फर्म उद्योग द्वारा निर्धारित की गई कीमत की स्वीकारक होती है। अर्थात् पूर्ण प्रतियोगी बाजार में वस्तु की कीमत उद्योग तय करता है। दी गई कीमत पर वस्तु की कितनी भी मात्रा फर्म बेच सकती है। बिक्री के प्रत्येक स्तर पर कीमत समान रहने के कारण प्रति इकाई बिक्री से प्राप्त आगम समान रहता है। इसलिए पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत फर्म का औसत आगम वक्र क्षैतिज अक्ष के समांतर होता है।
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एकाधिकारी फर्म का औसत आगम वक्र:
एकाधिकारी फर्म के औसत आगम वक्र का ढाल ऋणात्मक होता है। एकाधिकारी फर्म केवल कीमत स्तर को कम करके ही वस्तु की अधिक इकाइयों का विक्रय कर सकती है। निकट प्रतिस्थापन वस्तु न होने के कारण एकाधिकारी द्वारा उत्पादित वस्तु की माँग बेलोचदार होती है। इसलिए औसत आगम वक्र भी बेलोचदार या कम ढाल वाला होता है।
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प्रश्न 3.
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत एक फर्म कीमत स्वीकारक होती जबकि एकाधिकारी फर्म कीमत निर्धारक होती है। स्पष्ट करें।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत वस्तु की कीमत का निर्धारण बाजार माँग व बाजार पूर्ति के साम्य द्वारा होता है। बाजार में किसी वस्तु के सभी उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के सामूहिक समूह को उद्योग कहते हैं। दूसरे शब्दों में, बाजार माँग उद्योग की माँग तथा बाजार पूर्ति उद्योग की पूर्ति है। बाजार माँग की तुलना में व्यक्तिगत माँग लगभग नगण्य होती है इसलिए एक उपभोक्ता बाजार माँग को प्रभावित नहीं कर सकता है। इसी प्रकार एक फर्म वस्तु की बाजार पूर्ति को प्रभावित नहीं कर सकती है।

अत: फर्म को उद्योग द्वारा निर्धारित कीमत स्वीकार करके ही अपना उत्पाद बेचना पड़ता है। इसीलिए पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म को कीमत स्वीकारक कहा जाता है। एकाधिकार में एक वस्तु के उत्पादन पर एक ही फर्म का अधिकार होता है। अकेला विक्रेता होने के कारण फर्म वस्तु की आपूर्ति को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। इसी कारण एकाधिकारी फर्म कीमत निर्धारक होती है। एकाधिकारी फर्म वस्तु की आपूर्ति को प्रभावित करके वस्तु की कीमत को प्रभावित कर सकती है।

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प्रश्न 4.
स्वतंत्र प्रवेश व गमन का क्या अभिप्राय है? पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत स्वतंत्र प्रवेश व गमन का बाजार पर प्रभाव बताइए।
उत्तर:
स्वतंत्र प्रवेश व गमन का अभिप्राय है कि कोई भी फर्म उद्योग में स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकती है और जब चाहे बाजार छोड़कर जा भी सकती है। स्वतंत्र प्रवेश व गमन का बाजार पर प्रभाव –
1. यदि उद्योग में किसी उत्पाद का मूल्य ऊँचा तय कर दिया जाता है तो मौजूदा फर्मों को असामान्य लाभ मिलता है। असामान्य लाभ से आकर्षित होकर नई फमैं बाजार में प्रवेश करेंगी। वस्तु की आपूर्ति में वृद्धि होगी और कीमत का स्तर कम हो जायेगा। फर्मों की संख्या बढ़ने से साधन बाजार में साधनों की माँग बढ़ेगी और साधनों की कीमत भी बढ़ जायेगी। इससे औसत लागत में वृद्धि हो जायेगी। कम कीमत व ऊंची औसत लागत के कारण फर्मों को केवल सामान्य लाभ ही मिल पायेगा।

2. यदि उद्योग में वस्तु की कीमत नीची तय की जाती है तो मौजूदा कुछ फर्मों को हानि उठानी पड़ सकती है। अल्पकाल में फर्म कुछ सीमा तक हानि हो वहन कर सकती है लेकिन दीर्घकाल में हानि की स्थिति में फर्म बाजार छोड़कर चली जाती है। उद्योग में फर्मों की संख्या कम होने से आपूर्ति कम हो जायेगी और वस्तु की कीमत में वृद्धि हो जायेगी। उद्योग को छोड़कर जाने का सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक मौजूदा सभी फर्मों को सामान्य लाभ नहीं मिलेगा। इस प्रकार मुक्त प्रवेश व गमन का बाजार पर यह प्रभाव होता है कि सभी फर्मों को शून्य लाभ या सामान्य लाभ प्राप्त होता है। दूसरे शब्दों में, शून्य लाभ स्तर पर फर्म संतुलन में होती है। संतुलन की अवस्था LAC, LMC व कीमत समान होते हैं।
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प्रश्न 5.
विशेषताओं के आधार पर पूर्ण प्रतियोगिता एवं एकाधिकार में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता तथा एकाधिकार में अंतर:

1. वस्तु की प्रकृति:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत सभी फमें समांगी वस्तु का उत्पादन करती हैं। एकाधिकार में वस्तु समांगी हो भी सकती है और नहीं भी।

2. क्रेता-विक्रेताओं की संख्या:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत एक वस्तु को बेचने व खरीदने वालों की बहुत विशाल संख्या होती है। जबकि एकाधिकार में एक वस्तु का विक्रय करने वाली केवल एक फर्म होती है लेकिन क्रेता अधिक संख्या में होते हैं।

3. प्रवेश व गमन:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत नई फर्म स्वतंत्र रूप से उद्योग में शामिल हो सकती है। उसके प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है। इसी प्रकार हानि उठाने वाली फर्म उद्योग को छोड़कर जाने के लिए भी स्वतंत्र होती है। जबकि एकाधिकार में नई फर्म के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है।

4. वस्तु की कीमत:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत वस्तु की कीमत का निर्धारण उद्योग द्वारा किया जाता है और उद्योग द्वारा जय की गई कीमत पर फर्म वस्तु का विक्रय करती है। जबकि एकाधिकारी फर्म स्वयं ही कीमत निर्धारक होती है। पूर्ण प्रतियोगिता बिक्री के प्रत्येक स्तर पर कीमत समान रहती है। लेकिन एकाधिकारी कीमत करके ही वस्तु की अधिक मात्रा का विक्रय कर सकता है।

5. आपूर्ति वक्र:
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत एक फर्म के आपूर्ति वक्र का आंकलन उसकी सीमांत आगम वक्र से किया जाता है। फर्म दी गई कीमत पर उत्पाद का विक्रय करती है इस कीमत पर फर्म केवल उत्पाद की मात्रा में ही समन्वय कर सकती है। जबकि एकाधिकार में फर्म के आपूर्ति वक्र का कोई सुनिश्चित आकार नहीं होता है।

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प्रश्न 6.
एकाधिकार एवं एकाधिकारी प्रतियोगिता में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 42

प्रश्न 7.
समझाइए कि दीर्घकाल में निर्बाध प्रवेश/निकासी के कारण एकाधिकारी प्रतियोगी फर्म के असामान्य लाभ शून्य कैसे हो जाते हैं?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतियोगी बाजार में फर्मों की संख्या पूर्ण प्रतियोगी बाजार की तुलना में कम होती हैं। सभी फर्मे विभेदित वस्तु का उत्पादन करती हैं। अल्पकाल में प्रतियोगिता का स्तर कम होने के कारण एकाधिकारी प्रतियोगी फर्म कुछ अधिक कीमत उत्पादकों से वसूल कर असामान्य लाभ कमाती है। प्रवेश की स्वतंत्रता के कारण नई फर्म असामान्य लाभ से आकर्षित होकर बाजार में प्रवेश करने लगती है। नई फर्मों के प्रवेश से बाजार में फर्मों की संख्या बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप बाजार में वस्तु की आपूर्ति बढ़ने लगती है।

इसके कारण मौजूदा फर्मों में प्रतियोगिता का स्तर बढ़ जाता है। अपने उत्पाद को बेचने के लिए फर्मों को कीमत स्तर घटाना पड़ता है। फर्मों के प्रवेश का क्रम उस स्तर तक चलता है जब तक असामान्य लाभ पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता है। दूसरी ओर यदि प्रतियोगी एकाधिकार बाजार में मौजूदा फर्मों को हानि उठानी पड़ती है तो स्वतंत्रता के कारण वे फर्म बाजार से बाहर होने लगती हैं। उद्योग में फर्मों की संख्या कम होने के कारण मौजूदा फर्मों में प्रतियोगिता का स्तर घटने लगता है। परिणामस्वरूप वस्तु की कीमत बढ़ने लगती है और हानि के स्तर में कमी आ जाती है। फर्मों के बाहर जाने की क्रिया उस समय तक चलती है जब तक हानि समाप्त नहीं हो जाती है।

प्रश्न 8.
एकाधिकारी प्रतियोगिता के लक्षणों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
एकाधिकारी के लक्षण –
1. क्रेता तथा विक्रेताओं की संख्या:
इस बाजार में फर्मों की संख्या अधिक होती है। एक फर्म कुल उत्पादन के एक छोटे भाग का उत्पादन करती है। इस बाजार में क्रेताओं की संख्या भी अधिक होती है। एक क्रेता बाजार माँग का छोटा हिस्सा ही क्रय करता है।

2. वस्तु विभेद:
एकाधिकारी प्रतियोगी बाजार में सभी फर्म रूप, रंग, आकार, गुणवत्ता. आदि गुणों में अलग-अलग वस्तु का उत्पादन करती हैं। अत: इस बाजार में वस्तु विभेद पाया जाता है।

3. प्रवेश पाने व बाहर जाने की स्वतंत्रता:
इस बाजार में नई फर्मों को बाजार में प्रवेश करने व पुरानी फर्मों को उद्योग से बाहर जाने की स्वतंत्रता होती है। यदि इस बाजार में मौजूदा फर्मों को असामान्य लाभ प्राप्त होता है तो नई फर्म इससे आकर्षित होकर बाजार में प्रवेश कर सकती है। दूसरी ओर यदि फर्मों को हानि होती है तो हानि उठाने वाली फर्म बाजार छोड़कर बाहर जाने के लिए स्वतंत्र होती है।

4. बिक्री लागत:
इस बाजार में वस्तु विभेद होने के कारण बिक्री लागतों का बहुत अधिक महत्त्व होता है। इन लागतों की मदद से एक फर्म अधिक संख्या में उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करके लाभ को बढ़ा सकती है।

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प्रश्न 9.
पूर्ण प्रतियोगिता तथा एकाधिकारी प्रतियोगिता में अंतर स्पष्ट करो।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 27

आंकिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किसी एकाधिकारी फर्म की MR सारणी नीचे दी जा रही है। उसकी AR तथा TR सारणी बनाइये।
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 29

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प्रश्न 2.
प्रौद्योगिकी इस प्रकार की है कि 10 इकाई उत्पादन पर फर्म की दीर्घकालीन औसत लागत न्यूनतम हो जाती है। यह न्यूनतम लागत 15 रुपये है। कल्पना करो कि वस्तु की माँग निम्न सारणी में दी गई है –
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 30

  • बाजार में बिक्री की कुल मात्रा क्या होगी तथा दीर्घकाल संतुलन में कितनी फर्म कार्यशील होंगी?
  • माना उत्पादन तकनीक में प्रगति के कारण न्यूनतम औसत लागत 12 रुपये हो जाती है और न्यूनतम लागत संयोजन उत्पाद की 8 इकाइयों पर प्राप्त होता है। अब दीर्घकाल में कितनी फर्म कार्य करेंगी?

उत्तर:
1.
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 31a
AC = 15
AR = 15 (12000 इकाइयों की माँग पर)
दीर्घकालीन संतुलन की अवस्था में –
AR = AC = 15
फर्मों की संख्या = \(\frac{1200}{10}\) फर्म = 120 फर्म
बाजार में बिक्री की मात्रा 12000 इकाइयाँ
बाजार में कार्यशील फर्मों की संख्या = 120 फर्म

2. AC = 12
AR = 12 (1440 इकाइयों की माँग पर)
अतः दीर्घकालीन संतुलन की अवस्था में –
AR = AC = 12
फर्मों की संख्या = \(\frac{1440}{8}\) = 180
दीर्घकाल में 180 फर्म कार्य करेंगी।

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प्रश्न 3.
एकाधिकारी फर्म का माँग वक्र नीचे सारणी में दिया गया है। इसकी TR,AR तथा MR सारणियाँ बनाओ।
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 32
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 part - 2 img 33a

प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका से कुल आगम तथा औसत आगम तालिका बनाओ।
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 34
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 35

प्रश्न 5.
एक एकाधिकारी फर्म की कुल स्थिर लागत 20 रुपये है। फर्म का माँग वक्र नीचे दिया गया है –
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 36
अल्पकालीन साम्य मात्रा, कीमत तथा कुल लाभ ज्ञात करो।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 37
एकाधिकारी फर्म का अल्पकालीन संतुलन वहाँ होता है जहाँ फर्म को अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। तालिका में अधिकतम आगम उत्पादन स्तर 6 पर है।
अल्पकालीन संतुलन उत्पादन स्तर = 6
अल्पकालीन संतुलन कीमत स्तर = 5
कुल लाभ = कुल आगम – कुल लागत
= 30 – 20
= 10
साम्य उत्पादन स्तर = 6
साम्य कीमत = 6
कुल लाभ = 10

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प्रश्न 6.
वस्तु की बाजार माँग व कुल लागत एकाधिकारी फर्म के लिए नीचे दिए गए हैं –
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 38
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 39
निम्नलिखित की गणना करो –

  1. सीमांत आगम व लागत अनुसूची बनाओ।
  2. उत्पाद की वह मात्रा जिस पर MR तथा MC समान हों।
  3. साम्य मात्रा एवं वस्तु की साम्य कीमत।

उत्तर:
1. सीमांत आगम तालिका
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 40

2. सीमांत लागत तालिका
Bihar Board Class 12 Economics Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार part - 2 img 41

3. उत्पादन इकाई 6 के लिए
MR = MC = 4
साम्य कीमत यह स्तर है जिसमें उत्पादन स्तर पर MR = MC

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एकाधिकार के बारे में मान्यता है –
(A) कि एक फर्म उत्पादित वस्तु की मात्रा का स्टॉक नहीं बनाती है
(B) कि एक फर्म उत्पादित सम्पूर्ण मात्रा को विक्रय के लिए पेश करती है
(C) (A) तथा (B) दोनों
(D) (A) तथा (B) में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) तथा (B) दोनों

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प्रश्न 2.
फर्म द्वारा प्राप्त लाभ होता है –
(A) फर्म द्वारा प्राप्त कुल आगम व कुल लागत का अंतर
(B) फर्म द्वारा प्राप्त कुल आगम व कुल लागत का योग
(C) फर्म द्वारा प्राप्त कुल आगम व कुल लागत का गुणनफल
(D) फर्म द्वारा प्राप्त कुल आगम व कुल लागत का भागफल
उत्तर:
(A) फर्म द्वारा प्राप्त कुल आगम व कुल लागत का अंतर

प्रश्न 3.
यदि कुल लागत शून्य होती है तो लाभ अधिकतम होता है जब –
(A) कुल आगम न्यूनतम होता है
(B) कुल आगम अधिकतम होता है
(C) कुल आगम धनात्मक होता है
(D) कुल आगम ऋणात्मक होता है
उत्तर:
(C) कुल आगम धनात्मक होता है

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प्रश्न 4.
कुल आगम होता है –
(A) फर्म द्वारा बेची गई मात्रा व औसत आगम का योग
(B) फर्म द्वारा बेची गई मात्रा व औसत आगम का अंतर
(C) फर्म द्वारा बेची गई मात्रा व औसत आगम का गुणनफल
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) फर्म द्वारा बेची गई मात्रा व औसत आगम का गुणनफल

प्रश्न 5.
पूर्ण प्रतियोगिता में साम्य स्थापित होता है अधिक मात्रा –
(A) ऊँची कीमत पर बेचकर
(B) कम कीमत पर बेचकर
(C) न तो ऊँची कीमत न ही नीची कीमत पर बेचकर
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) कम कीमत पर बेचकर

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प्रश्न 6.
यदि कुल लागत वक्र कुल आगम वक्र से ऊपर होता है तो –
(A) लाभ ऋणात्मक होता है और फर्म लाभ कमाती है
(B) लाभ धनात्मक होता है और फर्म लाभ कमाती है
(C) लाभ ऋणात्मक होता है और फर्म को हानि होती है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) लाभ ऋणात्मक होता है और फर्म को हानि होती है

प्रश्न 7.
एकाधिकार का लाभ अधिकतम होता है उस उत्पादन स्तर पर जिस पर –
(A) कुल आगम व कुल लागत वक्रों में से ऊर्ध्वाधर दूरी अधिकतम होती है
(B) कुल आगम वक्र, कुल लागत वक्र से ऊपर होता है
(C) (A) तथा (B) दोनों
(D) (A) तथा (B) में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) तथा (B) दोनों

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प्रश्न 8.
एकाधिकार का लाभ उस उत्पादन स्तर पर अधिकतम होता है जिस पर –
(A) MR = MC तथा MC बढ़ रही हो
(B) MR = MC तथा MC घट रही हो
(C) MR > MC तथा MC बढ़ रही हो
(D) MR > MC तथा MC बढ़ रही हो
उत्तर:
(C) MR > MC तथा MC बढ़ रही हो

प्रश्न 9.
एकाधिकार में उत्पादित की मात्रा का निर्धारण होता है उस कीमत पर जिस पर –
(A) उपभोक्ता खरीदने को तैयार होते हैं
(B) उत्पादक बेचने को तैयार होते हैं
(C) उपभोक्ता प्राप्त करने को तैयार होते है
(D) उत्पादक देने को तैयार होते हैं
उत्तर:
(C) उपभोक्ता प्राप्त करने को तैयार होते है

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प्रश्न 10.
पूर्ण प्रतियोगी फर्म होती है –
(A) कीमत निर्धारक
(B) कीमत स्वीकारक
(C) (A) तथा (B) में से कोई नहीं
(D) (A) तथा (B) दोनों
उत्तर:
(B) कीमत स्वीकारक

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 2 Chapter 12 मौसम और जलवायु Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 7 Social Science मौसम और जलवायु Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें:

प्रश्न (i)
मौसम के अन्तर्गत किन-किन तत्वों का अवलोकन किया जाता है?
उत्तर-
मौसम के अन्तर्गत निम्नलिखित तत्वों का अवलोकन किया जाता है :

  1. तापमान
  2. वर्षा
  3. आर्द्रता
  4. वायु का वेग

यदि एक वाक्य में कहें तो हम कह सकते हैं कि “किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय में वायुमंडल की तत्कालीन दशा को मौसम कहते हैं।”

प्रश्न (ii)
जलवायु को परिभाषित करें। इसका निर्धारण कैसे होता है ?
उत्तर-
किसी क्षेत्र विशेष में लम्बे समय तक मौसम की औसत दशा को – जलवायु कहते हैं।” मौसम का निर्धारण करने के लिए एक लम्बे समय (सामान्यत: 33 वर्ष) तक वहाँ के तापमान की स्थिति, वर्षा की मात्रा, पवन की दिशा अदि का आंकड़ा एकत्र कर समय से भाग देकर उसका औसत निकाला जाता है।

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प्रश्न (iii)
जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं
उत्तर-
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:

  1. अक्षांश
  2. समुद्र तट से दूरी
  3. पर्वत की दिशा और अवरोध
  4. समुद्री धाराओं की दिशा
  5. पवन की दिशा
  6. समुद्र तल से ऊँचाई तथा
  7. तापमान।

प्रश्न (iv)
पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग क्यों होता है?
उत्तर-
किसी भी स्थान का तापमान का आधार वहाँ प्राप्त होने वाली सूर्य की किरणें हैं । जहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं वहाँ का तापमान अधि’ क होता है। जहाँ-जहाँ सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, वहाँ-वहाँ का तापमान कम होते जाता है। अतः स्पष्ट है कि सूर्य की किरणों की कमी-बेसी तथा सीधी-तिरछी पड़ने के कारण पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों का तापमान अलग-अलग होता है।

प्रश्न (v)
“तापमान का प्रभाव मौसम पर पड़ता है ।” उचित उदाहरण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
ऐसे तो मौसम को प्रभावित करने वाले अनेक कारक हैं लेकिन उन सभी कारकों में प्रमुख कारक तापमान है । तापमान को बढ़ाने या घटाने में प्रमुख भूमिका सौर ऊर्जा की होती है । कारण कि मुख्य रूप से सौर-ऊर्जा जिन स्थानों पर अधिक मिलती है, वहाँ का वातावरण गर्म हो जाता है । जहाँ

पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वहाँ का वातावरण ठंडा हो जाता है । गर्म और ठंडा, वातावरण से वहाँ का मौसम प्रभावित होता है।

प्रश्न (vi)
पृथ्वी पर कितने ताप कटिबंध हैं ? इसका क्या महत्त्व है ?
उत्तर-
पृथ्वी पर कुल पाँच ताप कटिबंध हैं । विषुवत रेखा के दोनों तरफ ऊष्णकटिबंध हैं। यहाँ पर सूर्य की सीधी किरणें पड़ती हैं । इससे उस रेखा के दोनों ओर का क्षेत्र उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में आता है । इसके उत्तर में उत्तरी समशीतोष्ण कटिबंध है । इसे 239 डिग्री कर्क वृत्त के नाम से भी जाना जाता है । इसके उत्तर में उत्तर शीत कटिबंध है । इसे 66/2 डिग्री उत्तर ध्रुववृन के नाम से जानते हैं। विषुवत रेखा के दक्षिण में दक्षिण समशीतोष्ण कटिबंध है ।

इसे 2314 डिग्री मकर वृत्त कहते हैं। इसके दक्षिण में दक्षिण शीतकटिबंध है । इसे 66% डिग्री दक्षिण ध्रुव वृत्त कहते हैं। इन कटिबंधों का महत्त्व है कि विषुवत रेखा के उत्तर-दक्षिण उष्ण कटिबंध के पास तापमान अधिक रहता है । समशीतोष्ण कटिबंधों के आसपास तापमान सामान्य रहता है । उत्तर-दक्षिण शीत कटिबंधों के पास बर्फ जमी रहती है।

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प्रश्न (vii)
वायु में गति के क्या कारण हैं ?
उत्तर-
पृथ्वी पर जहाँ कहीं तापमान अधिक हो जाता है वहाँ की हवा गर्म होकर ऊपर चली जाती है । इससे वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है । इस निम्न दाब को भरने के लिए उच्च दाब के क्षेत्र से हवा चल देती है। जिस चाल से हवा चलती है उसे वायु की गति कहते हैं । वायु की गति के ये ही कारण हैं।

प्रश्न (viii)
पवन के कितने प्रकार हैं ? प्रत्येक का नाम सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर-
पवन के तीन प्रकार हैं-

  1. स्थायी पवन
  2. मौसमी पवन तथा
  3. स्थानीय पवन ।

1. स्थायी पवन-स्थायी पवन हमेशा एक निश्चित दिशा में चलता है । यह पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्पन्न होता है । स्थायी पवन अधि क दाब पेटियों से कम दाब वाली पेटियों की ओर चलता है । पछुआ, पूर्वी तथा व्यापारिक पवन स्थायी पवन के उदाहरण हैं।

2. मौसमी पवन-जिस पवन की दिशा मौसम के अनुसार बदलती रहती है, उसे मौसभी पवन कहते हैं । यह पवन ऋतु के अनुसार अपनी दिशा बदल लेता है । भारत में मौसमी पवन से ही वर्षा होती है।

3. स्थानीय पवन-वर्षा के खास समय और खास भू-खंड (स्थान) पर चलने वाली हवाएँ स्थायी पवन कहलाती है। उदाहरण है उत्तर भारत के मैदानी भाग में मई-जून महीनों में चलने वाली गर्म हवा पछुआ पवन । इस पवन के साथ कभी-कभी लू भी चलता है । लूका विभिन्न स्थानों पर विभिन्न नाम है।

प्रश्न (ix)
स्थलीय समीर एवं समुदी समीर में क्या अंतर है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब हवा स्थल की ओर से समुद्र की ओर चलती है तब इस हवा को स्थलीय समीर कहते हैं । ठीक इसके विपरीत जब हवा समुद्र की ओर से स्थल की ओर चलने लगती है तब इसे समुद्री समीर कहते हैं । स्थलीय समीर सदैव रात में चलता है, वहीं समुद्री समीर सदा दिन में चला करता है।

प्रश्न (x)
चक्रवात क्या है ? इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तूफानी हवाओं के अति शक्तिशाली भंवर को चक्रवात कहते है। . चक्रवात के प्रभाव से भारी आँधी आती है और जन-जीवन को काफी कुप्रभावित करती है । हवा नाचते-नाचते काफी ऊँचाई पर चली जाती है और भारी वर्षा कराती है । चक्रवात यदि जमीन पर आते हैं तो आँधी-वर्षा लाते हैं और यदि समुद्र में आते हैं तो उसकी लहरें काफी ऊँचाई तक उठ जाती है।

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प्रश्न (xi)
वर्षा कैसे होती है ? इसके कितने प्रकार हैं ?
उत्तर-
ऊँचाई पर जलवाष्प के संघनन होने से वर्षा होती है। यह सदैव चलते रहने वाली प्रक्रिया है। वर्षा होती है पृथ्वी पर पानी पहुँचता है फिर ताप प्राप्त कर पानी वाष्प बनकर ऊपर चला जाता है । संघनन होता और वर्षा होती है । सदैव चलते रहने वाले इसी प्रक्रम को ‘जलचक्र’ कहते हैं । वर्षा तीन प्रकार की होती है

  1. संताइनिक वर्षा
  2. पर्वतीय वर्षा तथा
  3. चक्रवातीय वर्षा ।

प्रश्न (xii)
अत्यधिक वर्षा से क्या-क्या नकसान हो सकते हैं?
उत्तर-
अत्यधिक वर्षा से सबसे पहले तो बाढ़ आ जाती है। बाढ़ में घर-के-घर ही क्या गाँव-के-गाँव बह जाते हैं । आदमी के साथ जीव जंतु भी ऊँचे स्थानों की ओर भागते हैं । लगी-लगाई फसल, यहाँ तक कि कभी-कभी तैयार फसल भी बह जाती है। सरकार तथा गैरसरकारी संस्थओं को आदमियों के रहने तथा खाने-पीने की व्यवस्था में जुट जाना पड़ता है।

प्रश्न (xiii)
अधिक वर्षा एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों के जन-जीवन में क्या-क्या अंतर होंगे?
उत्तर-
जहाँ अधिक वर्षा होती है वहाँ के लोग घर के छप्पर की ढाल अधिक रखते हैं, ताकि पानी जल्दी बह जाय । कम वर्षा वाले क्षेत्रों में घर के छप्पर की ढाल कम रहती है या रहती ही नहीं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तरह-तरह के वृक्ष पाये जाते हैं और फसलें भी तरह-तरह की होती है और खूब होती हैं ।

कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मात्र बाजरा जैसे मोटे अनाज ही उपज पाते हैं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की कोई किल्लत नहीं होती, जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों को पीने के पानी के भी लाले पड़े रहते हैं। इन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्र के लोग अपेक्षाकृत अधिक आराम से जीवन व्यतीत करते हैं जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र के लोगों का जीवन मशक्कत से भरा रहता है।

प्रश्न (xiv)
यदि वर्षा कम हो तो क्या-क्या परेशानी होती है?
उत्तर-
वर्षा कम होने पर फसलें नहीं उपजतीं । अन्न की कमी हो जाती है। गर्मी आते-आते कुएँ तालाब सूख जाते हैं । नदियों में भी पानी नहीं रहता। अतः दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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प्रश्न (xv)
हमें वर्षा जल का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर-
हमें वर्षा जल का संरक्षण इसलिये करना चाहिए ताकि हमें सालों भर पानी मिल सके । इस संरक्षित जल से पीने से लेकर सिंचाई तक के काम हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
पता कीजिए कि ये पवन कहाँ बहते हैं ?
(लू, चिनूक, गरजता चालिसा, दहाड़ता पचासा, हरिकेन, टॉरनेडो, टाइफून, विलीविली, कैटरिना, काल वैशाखी।)
उत्तर-
Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 12 मौसम और जलवायु 1

प्रश्न 3.
एक माह तक प्रतिदिन मौसम का अवलोकन कर अभिलेख तैयार कर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए ।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

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पाठ का सार संक्षेप

किसी निश्चित स्थान पर निश्चित समय में वायुमंडल की तत्कालीन दशा मौसम कहलाती है । तापमान तथा वर्षा दोनों ही मौसम के अन्तर्गत आते हैं। एक ही समय में अलग-अलग स्थानों का तापमान तथा वर्षा की मात्रा अलग-अलग रह सकती है । वायुमंडलीय दशा में भी अंतर आ सकता है ।

वायुमंडलीय दशा का अर्थ है-आकाश की स्थिति । इसके तहत धूप, बादल, वर्षा, आर्द्रता, वायु वेग तथा वायु की दिशा । इन सबका विवरण अखबारों में नित्य छपता है । जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक हैं-

  1. अक्षांश
  2. समुद्र से दूरी
  3. पर्वतों की दिशा और अवरोध
  4. समुद्री धाराओं की दिशा
  5. पवन की दिशा
  6. समुद्र तल से ऊंचाई तथा
  7. तापमान ।

लेकिन इसके बावजूद जलवायु को प्रभावित करने में सौर-ऊर्जा की विशेष भूमिका होती है । जिन स्थानों पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वह स्थान अधिक गर्म होता है और जिन स्थानों पर सौर ऊर्जा कम मिलती है वहाँ ठंड होता है । इस प्रकार हम देखते हैं कि पृथ्वी पर ताप का मुख्य स्रोत सूर्य का ताप है। सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर सीधी पड़ती है । इस कारण इसके आसपास गर्मी अधिक पड़ती है। लेकिन भूमध्यरेखा के उत्तर या दक्षिण जाने पर तापमान कम होते जाता है, क्योंकि यहाँ सूर्य की किरणें क्रमश: तिरछी होती जाती है । तापमान के कम होने का यही कारण है ।

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उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रवों पर सालों भर बर्फ जमी रहती है। वायुमंडल का तापमान, सर्य की किरणों का झुकाव, दिन की लम्बाई, प्रचलित हवाओं, जल और थल के वितरण आदि के कारण भी मौसम प्रभावित होता है । पृथ्वी की सतह पर पड़नेवाले वायु के भार को वायुदाब कहते हैं। जैसे-जैसे ऊँचाई पर जाते हैं, वैसे-वैसे वायुदाब घटता जाता है। पृथ्वी पर सर्वत्र वायुदाब समान नहीं होता । हवा सदैव उच्च दाब से निम्नदाब की ओर बहती है। भूगोल की भाषा में बहने वाली हवा को पवन कहते हैं ।

पवन तीन प्रकार के होते हैं-

  1. स्थायी पवन
  2. मौसमी पवन तथा
  3. स्थानीय पवन

कुछ सामान्य मौसमी घटनाएँ हैं-

  1. चक्रवात
  2. प्रतिचक्रवात तथा
  3. वर्षा

लेकिन वर्षा भी तीन प्रकार की होती है-

  1. संवाहनिक वर्षा
  2. पर्वतीय वर्षा तथा
  3. चक्रवातीय वर्षा

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

प्रश्न 1.
एक नोटबुक की कीमत एक कलप की कीमत से दो गुनी है। इस कथन को निरूपित करने के लिए दो चरों बाला एक रैखिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
माना, एक नोटबुक की कीमत = Rs x
तथा एक कलम की कीमत = Rs y
प्रश्नानुसार, एक नोटबुक की कीमत एक कलम की कीमत से दो गुनी है, अत: दो चरों वाला रैखिक समीकरण, x – 2y अर्थात्, x – 2y = 0 है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित रैखिक समीकरणों को ax + by + c = 0 के रूप में व्यक्त कीजिए और प्रत्येक स्थिति में और का मान बनाइए-
(i) 2x + 3y = 9.\(\overline{35}\)
(ii) x – \(\frac{y}{5}\) – 10 = 0
(i) -2x + 3y = 6
(iv) x = 3y
(v) 2x = -5
(vi) 3x + 2 = 0
(vii) y – 2 = 0
(viii) 5 = 2x
उत्तर:
(i) 2x + 3y = 9.\(\overline{35}\)
⇒ 2 + 3y = 9.\(\overline{35}\) = 0
इसको समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 2 b = 3 तथा c = -9.\(\overline{35}\)

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

(ii) x – \(\frac{y}{5}\) – 10
इसकी समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 1 b = 1/5 तथा c = -10.

(iii) -2x + 3y = 6
⇒ -2x + 3y – 6 = 0
इसकी समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = -2, b = 3 तथा c = -6.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

(iv) x = 3y
⇒ x – 3y = 0
इसकी समी. ax + by + c = 0 से शुलना करने पर,
a = 1, b = -3 तथा c = 0.

(v) 2x = -5y
⇒ 2x + 5y = 0
इसकी समी ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 2, b = 5 तथा c = 0.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

(vi) 3x + 2 = 0
इसकी समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 3, b = 0 तथा c = 2.

(vii) y – 2 = 0
इसकी समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 0, b = 1 तथा c = -2.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

(viii) 5 = 2x
2x -5 = 0
इसकी समी. ax + by + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 2, b = 0 तथा c = -5.

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 4 दो चरों वाले रैखिक समीकरण Ex 4.1

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 2 Chapter 11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 11 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन

Bihar Board Class 7 Social Science मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : तटीय प्रदेश केरल में जन-जीवन Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
केरल प्रदेश की जलवायु और वनस्पति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
केरल प्रदेश की जलवायु ऊष्ण-आर्द्र मानसूनी प्रकार की है । यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी या इससे अधिक होती है । यहाँ ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 32°C तथा शीत ऋत में 23°C रहता है । वार्षिक तापान्तर 2°C से 5°C तक रहता है।

वनस्पति के क्षेत्र में देखा जाए तो राज्य का 1/4 भाग वनों से ढंका है। यहाँ सदाबहार वन पाये जाते हैं । सागवान, चन्दन, सुपारी, नारियल, रबर, बाँस प्रमुख वनस्पतियाँ हैं । यहाँ केले भी खूब होते हैं।

प्रश्न 2.
पी. वेल्लू सुंदरम् ने केरल की किन-किन विशेषताओं का जिक्र किया ?
उत्तर-
पी० वेल्लू सुन्दरम् ने केरल की विभिन्न विशेषताओं का जिक्र किया है। सबसे पहले इन्होंने केरल की अवस्थिति का जिक्र किया । उन्होंने प्राकृतिक तथा भौतिक विशेषताएँ बताई । अधिकतम तथा न्यूनतम ताप को बताया है और उसके बाद वर्षा की मात्रा का वर्णन किया है। वन, वनस्पति तथा वन्य जीवों की चर्चा की। लोगों के आर्थिक जीवन के साथ खान-पान तथा पहनावे की बात बताई। जो खनिज मिलते हैं उनके नाम बताएँ । उन्होंने आवागमन के साधनों की विशेषता बताई।

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प्रश्न 3.
केरल मसालों का प्रदेश है। कैसे?
उत्तर-
केरल में अनेक तरह के मशाले उपजाय जात हैं । काली मिर्च, इलायची, गरम मसाले, जैसे जावत्री, दालचीनी, कबाब चीनी आदि खूब होते हैं । इसी कारण केरल को मसालों का प्रदेश कहते हैं ।

प्रश्न 4.
लोग पर्यटन के लिये केरल जाना क्यों पसंद करते हैं ?
उत्तर-
लोग पर्यटन के लिये केरल जाना इसलिए पसन्द करते हैं, क्योंकि यहाँ नौका दौड़ का आयोजन होता है । कत्थकली यहाँ का विश्व प्रसिद्ध नृत्य नाटिका है । मोहनी अट्टम यहाँ का प्रसिद्ध नृत्य है । मार्शल आर्ट के रूप में कलारीपयट्ट शैली है। मलखम्भ यहाँ का प्रसिद्ध खेल है। सबरीमाला एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इन्हीं सब आकर्षणों से पर्यटक यहाँ खींचे चले आते हैं ।

यहाँ कश्मीर की तरह हाउस वोट मिलते हैं । विदेशी पर्यटक इन्हीं में रहना पसन्द करते हैं। वे विलासिता युक्त नौकाओं में भ्रमण करना विशेष पसंद करते हैं। यहाँ के लोग सेवा भाव से पूर्ण होते हैं। अत: पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होती।

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प्रश्न 5.
अपने मुहल्ले के दुकानदार से मसालों की आपूर्ति के स्रोत का वर्णन करें।
उत्तर-
हमने अपने मुहल्ले के दुकानदार से मसालों की आपूर्ति के स्रोत का पता किया । उन्होंने बताया कि हम तो थोक मंडी से मसाल लाते हैं ।

लेकिन वे लोग प्रायः दक्षिण भारत के राज्यों, खासकर केरल से ट्रकों द्वारा मसाले मँगवाते हैं।

प्रश्न 6.
केरल के खान-पान बनाने में किन खाद्य पदार्थों की जरूरत होगी? सूची बनाइए।
उत्तर-
केरल के खान-पान बनाने में निम्नलिखित खाद्य पदार्थों की जरूरत होगी:
चावल, मिर्च मसाला, नमक, आलू, नारियल, नारियल का तेल आदि ।

प्रश्न 7.
बिहार और केरल के पहनावा में क्या-क्या अंतर है?
उत्तर-
बिहार की महिलाएँ साड़ी, पेटीकोट तथा ब्लाऊज पहनती हैं तो केरल की महिलाएं भी यही पहनती है। बिहार में पुरुष धोती, कुरता, गंजी, गमछा का व्यवहार करते हैं, लेकिन केरल के पुरुष हाफ कमीज और लुंगी पहनते हैं । लुंगी तो बिहार के लोग भी पहनते हैं, लेकिन तब जब वे घर पर रहते हैं या रात में । बिहार में पायजामा कुरता का विशेष चलन हो गया है । फुलपैंट-शर्ट दोनों राज्यों के लोग पहनते हैं।

प्रश्न 8.
केरल के नौका दौड़ का आयोजन अपने राज्य में करने के लिये आप क्या करेंगे? .
उत्तर-
बिहार में केरल जैसा नौका दौड़ करने के लिए हमें किसी सीध बहती नदी का चुनाव करना होगा । नौका चालकों को ट्रेंड करना होगा । तभी हम केरल जैसा नौका दौड़ का आयोजन कर सकते हैं।

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प्रश्न 9.
केरल व बिहार के भोजन में कौन-सा खाद्यान्न समान है ?
उत्तर-
केरल व बिहार के भोजन में चावल समान है।

प्रश्न 10.
राष्ट्रीय सेवा योजना के बारे में पता कीजिए।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें ।
प्रश्न-सही मिलान करें:

  1. मलखंभ – एक प्रकार की भाषा
  2. पश्चिमी घाट – एक प्रकार की चिकित्सा पद्धति
  3. केरली मसाज – एक प्रकार का खाद्य पदार्थ
  4. उत्पम – एक खेल
  5. मलयालम – नीलगिरि की पहाड़ियाँ

उत्तर-

  1. ‘मलखंभ – एक खेल
  2. पश्चिमी घाट – नीलगिरि की पहाड़ियाँ
  3. केरली मसाज – एक प्रकार की चिकित्सा पद्धति
  4. उत्पम – एक प्रकार का खाद्य पदार्थ
  5. मलयालम – एक प्रकार की भाषा

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प्रश्न 11.
सही विकल्प पर (✓) का निशान लगाएँ :

प्रश्न (i)
केरल प्रदेश की जलवायु है:
(क) उष्ण
(ख) शीतोष्ण
(ग) समशीतोष्ण
उत्तर-
(क) उष्ण

प्रश्न (ii)
केरल में नहीं उपजाया जाता है :
(क) कहवा
(ख) काजू
(ग) जूट
(घ) इलायची
उत्तर-
(ग) जूट

प्रश्न (iii)
साइलेंट वैली स्थित है:
(क) पूर्वी घाट में
(ख) पश्चिमी घाट में
(ग) य० एन० ओ० में
उत्तर-
(ख) पश्चिमी घाट में

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प्रश्न (iv)
केरल में सबरीमाला क्या है ?
(क) तीर्थ स्थान
(ख) पर्यटन स्थल
(ग) नौका दौड़
(घ) एक प्रकार का नृत्य
उत्तर-
(क) तीर्थ स्थान

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पाठ का सार संक्षेप

केरल प्रदेश भारत के पश्चिमी तट पर सूदुर दक्षिण की ओर एक लम्बी संकरी पट्टी के रूप में फैला है । यह अरब सागर के तट पर तो है ही. इसका दक्षिणी छोर हिन्द महासागर में घुसा हुआ है । इसके पूरब में पश्चिमी घाट की नीलगिरि और अन्नामलाई की पहाड़ियाँ हैं। केरल संकरा मैदान है जिसकी अधिकतम चौड़ाई 100 किमी है । मैदान नदियों द्वारा बहाकर लाई मिट्टी से बना है। मैदान के तीन भाग हैं :

(1) तटीग भाग, जो बलुई है । (2) बलूई भाग के पूरब में उपजाऊ काँप मिट्टी का मैदान है । (3) मैदान के पूरब की ओर पहाड़ी भाग है, जो प्राचीन चट्टानों से बना है । यहाँ दो बार वर्षा होती है । पहली वर्षा मानसून आने के शुरुआत में और दूसरी मानसून के लौटते समय । ऐसे समुद्री तट पर अवस्थित होने के कारण सालों भर वर्षा होती ही रहती है ।

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ग्रीष्म ऋतु में औसत तापमान 32°C तथा शीत ऋतु में 23°C रहता है । यहाँ वार्षिक तापांतर 2°C से 5°C तक रहता है । इस प्रकार यहाँ की जलवायु सम और नम है। यहाँ न तो जाड़े में अधिक जाड़ा पड़ता है और न गर्मी में अधिक गर्मी पड़ती है । यहाँ वार्षिक औसत वर्षा 200 सेमी या इससे भी अधिक पड़ती है । यहाँ की जलवायु उष्ण-आर्द्र मानसूनी प्रकार की है।

प्रदेश का 1/4 भाग वनाच्छादित है । उच्च तापमान और अधिक वर्षा के कारण यहाँ सघन सदाबहार बन पाये जाते हैं । सागवान, चंदन, सुपारी, नारियल, रबर, बाँस यहाँ के मुख्य पेड़- पाने हैं ।

यहाँ केला भी खूब होता है। यहाँ की मुख्य उपज चावल, नारियल, का-‘ मिर्च, कहवा, काज, इलायची, रबर, चाय, सुपारी, गरम मसाले आदि हैं। तटीय क्षेत्र में मछलियाँ पकड़ी जाती हैं । यहाँ धान के खेत में मछली पालन का भी काम होता है । चावल और मछली यहाँ का मुख्य भोजन है। सुपारी, मसाले, अन्नानास, गन्ना आदि नकदी फसलें हैं। यहाँ के वनों में अनेक

वन्य जीव पाये जाते हैं । हाथी, बंदर, किंग कोबरा, विभिन्न प्रकार के पक्षियों की बहुलता है । यहाँ हिन्दू, इस्लाम तथा इसाई धर्म को मानने वाले हैं, जो सभी धार्मिक प्रवृति के हैं । इस्लाम यहाँ का मुख्य धर्म है । यहाँ गंगा-यमुना संस्कृति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । यहाँ की नौका दौड़ विश्व में प्रसिद्ध है । ‘कत्थकली’ नृत्य नाटिका है । मोहनी अट्टम प्रसिद्ध नृत्य है। मलखम्भ यहाँ का मुख्य खेल है । सबरीमाला के मंदिर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं। मंदिर ऊँची पहाड़ी पर अवस्थित हैं। भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा साक्षरता दर यहाँ सर्वाधिक है । यहाँ मोनोजाइट, जिप्सम, थोरियम, यूरेनियम आदि खनिज पाये जाते हैं ।

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यहाँ चीनी मिट्टी, चूना-पत्थर और ग्रेफाइट भी मिलता है । तिरुवनन्तपुरम, अलवाये, पुन्नलूर, कोजीकोड केरल के प्रमुख औद्योगिक नगर । हैं। केरल की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में निवास करती है। यहाँ का

जनघनत्व 2000 से 4000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है । यहाँ सड़क, रेल और . वायु मार्ग की सुविधा तो है ही, जल मार्ग का उपयोग भी खूब होता है । तट पर बन चुके लेंगून झीलों को एक में मिलाकर जल मार्ग बनाया गया है । फलस्वरूप नाव से भी एक कोने से दूसरे कोने में जाया जा सकता है ।

केरल का मुख्य नाश्ता और भोजन चावल, इडली, डोसा, सांभर, पट, उत्पम, अवियल, उपमा, अटपम तथा नारियल से बनी खाद्य सामग्री, मछली और समुद्री उत्पाद है। यहाँ केले के पत्ते पर भोजन परोसा जाता है।

महिलाएँ पेटीकोट, साडी, ब्लाउज पहनती हैं । परुष कमीज और लुंगी पहनते हैं । पुरुष धोती कुरता भी पहनते हैं । पुरुप चंदन का तिलक लगाते हैं। महिलाएँ फूलों से बालों को सजाती हैं। छाता सबके हाथ में दिखाई देता है।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 2 Chapter 10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 7 Social Science मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बिहार की भौगोलिक दशाओं की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
बिहार गंगा के मध्य मैदान में अवस्थित है । इसके पूरब में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर-प्रदेश तथा दक्षिण में झारखंड राज्य है । यहाँ की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है । यहाँ मानसून के समय वर्षा होती है । वार्षिक 100 से 150 मार्ग के बीच होती है । गर्मी के मौसम में तापमान 40° सेल्सियस तक चला जाता है । जाड़े के मौसम में यहाँ का अधिकतम तापमान 29° से 30° सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 8° सेल्सियस के लगभग रहता है।

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प्रश्न 2.
बिहार में लोगों का मुख्य पेशा क्या है ?
उत्तर-
बिहार में लोगों का मुख्य पेशा कृषि है । वैसे नौकरी करने वालों की संख्या भी कम नहीं हैं।

प्रश्न 3.
बिहार को किन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है ? इसका जन-जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर-
बिहार को बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है । प्रायः कोसी क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होते ही रहता है । जन-जीवन पर इसका बड़ा बुरा प्रभाव पड़ता है । जमी-जमाई गृहस्थी अस्त-व्यस्त हो जाती है । घर और घर का अधिकांश सामान योंहीं छोड़ इन्हें अन्यत्र शरण लेना पड़ता हैं । जो लोग दूसरों को खिलाते रहते हैं वे अब दूसरों की कृपा पर निर्भर हो जाते हैं ।

सरकारी और गैर-सरकारी सहायता का उन्हें बेसब्री से इन्तजार करना पड़ता है । कभी-कभी बिहार को सूखे जैसही आपदा को भी झेलना पड़ता है ।

प्रश्न 4.
बिहार की सांस्कृतिक विशेषताएं लिखिए ।
उत्तर-
बिहार की सांस्कृतिक विशेषताओं में यहाँ के पर्व-त्योहारों की प्रमुखता है । दशहरा का त्योहार सार्वजनिक रूप में मनाया जाता है वही

दीपावली घर-घर व्यक्तिगत रूप में मनाते हैं। ईद पर व्यक्तिगत और सामहिक दोनों का समाहार देखने को मिलता है । वैसे ही होली मिल-जुलकर मनाया जाने वाला पर्व है। बिहार की मधुबनी पेंटिंग विश्व प्रसिद्ध है । मिथिला क्षेत्र की यह खास है जिसमें प्राकृतिक रंगां और प्रतीकों का उपयोग किया जाता है । बहुतों को यह रोजगार मुहैया कराता है ।

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प्रश्न 5.
बिहार की मुख्य फसलें क्या-क्या हैं ?
उत्तर-
बिहार की मुख्य फसल धान है । अन्य फसलों में गेहँ, मकई.. मडुआ, चना, अरहर, मसूर, मटर आदि दलहन; सरसों, तीसी, सूर्यमुखी जैसे तेलहन; हल्दी, जीरा, धनिया, मिरचाई, प्याज, लहसुन आदि मसालों की भी खंती होती है । कुछ जिलों में पान, मखाना, लीची, तंबाकू की भी खंती होती है । आम भी यहाँ खूब होता है । दीघा का दुधिया तथा भागलपुर का जर्दाल माल्दह प्रसिद्ध है । कला के लिये हाजीपुर तथा शाही लीची के लिए मुजफ्फरपुर प्रसिद्ध है ।

प्रश्न 6.
बिहार किन-किन खाद्य पदार्थों के लिए प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
बिहार का मुख्य भाजन चावल, दाल और सब्जी है । रोटी-सब्जी भी चाव से खाई जाती है । छपरा जिला में सत्त, लिटटी-चोखा मशहूर है। मैथिली क्षेत्र में दही-चूड़ा- चाव से खाया जाता है ।

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प्रश्न 7.
मिथिला पेंटिंग की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर-
मिथिला पेंटिंग की मुख्य विशेषताएँ हैं कि चित्र के लिए स्थानीय परिवेश तथा प्रतीकों को अपनाया जाता है । चित्रकार रंग स्वयं बनाते हैं । रंग बनाने के लिए प्राकृतिक साधनों खासकर रंगीन फूलों का उपयोग किया जाता है । इस कला को पारंपरिक धरोहर के रूप में माना जाता है ।

प्रश्न 8.
बिहार के मानचित्र में नदियों की दर्शाए ।
उत्तर-
Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया अपना प्रदेश बिहार 1

प्रश्न 9.
मैंगो शावर से आपके घर-मोहल्ले में क्या परिवर्तन दिखता है ? बताइए।
उत्तर-
अप्रैल-मई की पहली वर्षा को मैंगो-शावर कहते हैं । मैंगो-शावर से आम को बढ़ने की गति मिलती ही है । हमारे घर-मोहल्ले के लांग जेठ की लू वाली गर्मी से निजात महसूस करते हैं । इस वर्षा से सर्वत्र खुशियाँ छा जाती हैं । बच्चे वर्षा में उछल-कूद मचाने और नहाने का मजा लेते हैं

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प्रश्न 10.
नीचे ग्यारह किस्म के आमों के नाम दिए गए हैं उन्हें ढूँढें :
उत्तर-

  1. बीज़
  2. चौसा
  3. डंका
  4. बम्बइया
  5. जर्दालु
  6. शुकुल
  7. मिदुआ
  8. दशहर्ग
  9. गुलाबखास
  10. तोतापुरी
  11. मालदह

प्रश्न 11.
सही विकल्प पर (✓) का निशान लगाएँ :

प्रश्न (i)
बिहार के पूरब में है :
(क) पश्चिम बंगाल
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) सोन नदी
(घ) छत्तीसगढ़
उत्तर-
(क) पश्चिम बंगाल

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प्रश्न (ii)
मधुबनी पेंटिंग जुड़ी है :
(क) मगध क्षेत्र में
(ख) अंग क्षेत्र में
(ग) भोजपुरी क्षेत्र में
(घ) मिथिला क्षेत्र में
उत्तर-
(घ) मिथिला क्षेत्र में

प्रश्न (iii)
जमालपुर में है :
(क) सिगरेट कारखाना
(ख) जूट कारखाना
(ग) बारूद कारखाना
(घ) रेलवे कार्यशाला
उत्तर-
(घ) रेलवे कार्यशाला

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प्रश्न 12.
सही मिलान करें :

  1. चूना पत्थर – भागलपुर
  2. रेलवे वैगन प्लांट – बरौनी
  3. जर्दालु – कैमूर
  4. तेलशोधन कारखाना – मोकामा

उत्तर-

  1. चूना पत्थर – कैमूर
  2. रेलवे वैगन प्लांट – मोकामा
  3. जर्दालु – भागलपुर
  4. तेलशोधन कारखाना – बरौनी

Bihar Board Class 7 Social Science मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार Notes

पाठ का सार संक्षेप

बिहार गंगा के मध्य मैदान में अवस्थित है। इसके उत्तर में नेपाल तथा हिमालय पहाड़ का दक्षिणी भाग तथा तराई क्षेत्र है । इसके पूरब में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर-प्रदेश तथा दक्षिण में झारखंड राज्य है । झारखंड प्रायद्वीपीय पठार का दक्षिणी भाग हैं । गंगा बिहार की मुख्य नदी है । गंगा की सहायक नदियों में सरयू (घाघरा), गंडक, बढी गंडक, कोसी, महानंदा उत्तर की ओर से आकर मिलती है । दक्षिण से सोन, पुनपुन, फल्गू आदि नदियाँ मिलती हैं ।

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जाड़े के मौसम में यहाँ का अधिकतम तापमान 29° से 30° सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 8° सेल्सियस के लगभग रहता है । गर्मी में पछुआ हवा के साथ लू चलती है तब तापमान कभी-कभी 40° सेल्सियस से भी अधिक हो जाता है । बंगाल की खाडी से लौटती मानसून से यहाँ वर्षा होती है । यदि सामान्य वर्षा हो तो वह औसतन वार्षिक 100 से 150 सेमी तक हो जाती है। अप्रैल-मई में पहली वर्षा के साथ आम का आकार बढ़ने लगता है और वह पकने की ओर अग्रसर होने लगता है । लीची पक जाती है और

उसमें रस आ जाता है। कभी-कभी आंधी आती है, जिससे आम की फसल कुप्रभावित होती है । हिमालय पर और उसकी तराइयों में होने वाली भारी वर्षा से बिहार की कुछ नदियों में बाढ़ का कहर आम बात हो गई है । समुद्र के तल से बिहार की ऊँचाई लगभग 100 मीटर है। जनसंख्या का घनत्व सघन है।

बिहार की समस्त भूमि का 75% कृषि योग्य है । 12% भूमि बंजर है। दक्षिण पूर्व के कुछ जिलों को छोड़कर वनों का अभाव है । पश्चिम चम्पारण का उत्तर भाग वनों से पूर्णतः आच्छादित है। बिहार की कृषि मानसून का मुहताज है । हालाँकि कुछ जिलों में नहरों की सुविधा है । यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि ही है । धान यहाँ की मुख्य फसल है । लेकिन गहें, मकई, मआ, दलहन, तेलहन, गन्ना, मिरचाई, हल्दी, धनिया, प्याज, लहसुन आदि मसालें भी उपजा लिये जाते हैं।

उत्तर बिहार के खास-खास जिलों में आम, लीची, केला, तम्बाकू, पान तथा मखाना की खेती खूब होती है । भागलपुर में सिल्क तथा पूर्णिया में जूट, गया में सूती वस्त्र तथा पूर्वो चरण में सीप का बटन बनाने का गृह उद्योग चलता है । मुंगेर में सिगरेट कारखाना, बरौनी में उर्वरक तथा तेलशोधन

का कारखाना है। मुजफ्फरपुर और मोकामा में रेलवे वैगन प्लांट है । जमालपुर में रेलवे की कार्यशाला है । रेलवे तथा बारूद के कारखाने अभी प्रगति पर हैं।

खनिज का बिहार में अभाव है । बिहार के दक्षिणी जिलों में कहीं, टीन, कहीं अभ्रक पाया जाता है ! कमर की पहाड़ियों में चूना-पत्थर, बालू पत्थर और थाइराईट मिलते हैं।

बिहार में पहले जहाँ हल-बैल उपयोग होता था, अब अधिकतर ट्रैक्टर भी दिखाई पड़ने लगे हैं। सिंचाई में डीजल इंजन चालित पम्प का उपयोग . होने लगा है । यहाँ का मुख्य भोजन चावल, गेहूँ, दाल, आलू और हरी सब्जियाँ

है । पेयजल का मुख्य स्रोत परम्परागत कुंआ तथा चापाकल है । पुरुष सामान्यतः धोती, कुरता, शर्ट, पैंट, गमछा, लँगी, पायजामा तथा औरतें साड़ी, ब्लाउज, सलवार, समीज पहनती हैं । यातायात के लिये सड़क और रेल मुख्य हैं । पटना तथा गया हवाई मार्ग से भी जुड़े हैं । खपड़ापोश मकानों की अधि कता है। गाय तथा भैंस दूध के मुख्य स्रोत हैं । बकरियाँ भी पाली जाती है । लेकिन वह दूध के लिए कम और मांस के लिए अधिक ।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 10 मानव पर्यावरण अंतःक्रिया : अपना प्रदेश बिहार

लिट्टी-चोखा जल्दी तैयार हो जानेवाला भोजन है । एक-दो खास जिलों में दही-चूड़ा या सत्तू खाने का विशेष रिवाज हे । पों में छठ की प्रमुखता है । इसके पहले दशहरा और दीपावली बीत चुकी होती है । होली बड़े उल्लास से मनाई जाती है । मधुबनी की पेंटिंग विश्व में प्रसिद्ध है । यहाँ की मेधा शक्ति का लोहा दुनिया मानती है ।

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग Questions and Answers

प्रश्न
लिंग की परिभाषा दीजिए। उसके कितने भेद हैं ?
उत्तर-
लिंग संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘चिह्न’ या निशान। जिन चिह्न से शब्दों का स्त्रीवाचक या पुरुषवाचक होना प्रकट हो, उन्हें लिंग कहते हैं।
लिंग के भेद हिन्दी भाषा में दो लिंग होते हैं-(i) पुलिंग, (ii) स्त्रीलिंग।
(i) पुलिंग- पुरुषत्व का बोध कराने वाले शब्दों या चिह्नों को पुलिंग कहते हैं। जैसे-पिता, घोड़ा।
(ii) स्त्रीलिंग- स्त्री जाति के बोध करानेवाले शब्दों को स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे-गायिका। लिंग-भेद
एक ही प्रकार के दीखने वाले शब्दों में इतना लिंग-भेद है कि विद्वानों को भी सरदर्द हो जाता है। लिंग-भेद कई स्थितियों में संभव है; इसके प्रायः सभी नियमों में अपवाद पाए जाते हैं। कारण यह है कि सुपरिचित प्राणिवाचक संज्ञाओं की पहचान करना तो सरल है, किन्तु अपरिचित जीवों तथा अप्राणिवाचक संज्ञाओं का लिंग-निर्धारण करना अत्यन्त कठिन है। वे न तो पुरुषवाचक होते हैं और न स्त्रीवाचक। जैसे पहाड़, नदी। पहाड़ को पुलिंग मान लेना केवल एक रूढ़ि है।

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लिंग-निर्णय के कुछ सामान्य नियम

1. पुलिंग शब्दों की पहचान-
(क) मनुष्य और बड़े पशुओं में नर पुलिंग होते हैं और । नारियाँ स्त्रीलिंग। जैसे—लड़का, युवक, बूढा, हाथी, ऊँट आदि नर हैं, अतः पुलिंग हैं।
(ख) छोटे पक्षियों, कीड़ों आदि का या जिनमें जोड़ों का भेद करना कठिन है उन प्राणियों का लिंग-निर्णय व्यवहार के आधार पर होता है। जैसे-कौआ, खटमल, गिरगिट, गीदड़, चीता, छछूदर, बटेर, भेडिया, बिच्छू, मच्छर आदि शब्द पुंलिंग हैं; परंतु कोयल, गिलहरी, मछली, मैना, गौरैया आदि स्त्रीलिंगा :
(ग) द्वंद्वसमास के प्राणिवाचक शब्द पुलिंग होते हैं। जैसे-नर-नारी, भाई-बहन, मां-बाप, राधा-कृष्ण आदि। ,
(घ) संस्कृत के अकारान्त तत्सम शब्द प्रायः पुलिंग होते हैं। जैसे-अध्याय, अभिप्राय, उपाय, इतिहास, अध्यक्ष, अंधकार, उपहार, उपचार, व्यय आदि। ‘पुस्तक’ का स्त्रीलिंग में व्यवहार होता है। .
(ङ) अप्राणिवाचक संज्ञाओं का लिंग-निर्णय रूप के आधार पर होता है। जैसे-ये तमाम शब्द पुलिंग हैं
वनस्पति- अनार, आम, खजूर, पीपल, ताड़, अशोक, बाँस आदि।
तरल पदार्थ– दूध, दही, तेल, पानी, शर्बत आदि।
धातु- अल्युमीनियम, पीतल, रजत, लोहा, सोना आदि।
मसाला- जीरा, तेजपात आदि।
अन्न- उड़द, गेहूँ, चना, दाल आदि।
पर्वत-हिमालय, अमरकण्टक, हिन्दूकुश आदि।
दिन- रवि, सोम, मंगल आदि। . .
रत्न- हीरा, मोती, नीलम, मूंगा आदि।
वनस्पति आदि में से कुछ शब्द-इमली, मूंगफली आदि-स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होते हैं।
(च) हिन्दी की वे भाववाचक संज्ञाएँ पुलिंग होती हैं, जिनके अंत में आ, आव, आवा, ना, पा अथवा पन पाया जाता है; जैसे-घेरा, बचाव, भुलावा, मरना, बुढ़ापा, लड़कपन आदि।
(छ) तत्सम शब्दों को छोड़कर हिन्दी की वे संज्ञाएँ जिसके अंत में आकार हो (परन्तु ‘इया’ प्रत्यय न हो) पुलिंग होती हैं; जैसे—रुपया, बच्चा, छाता, आटा, कपड़ा आदि।

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2. स्त्रीलिंग शब्दों की पहचान-(क) जिन संस्कृत-संज्ञाओं के अंत में आ, इ अथवा उ । हो वे स्त्रीलिंग होती हैं; जैसे-
आ-क्षमता, दया, छाया, कृपा, करुणा, वन्दना, याचना आदि। इ-सिद्धि, रीति, मति, केलि आदि। उ मृत्यु, रेणु, धेनु आदि।
(ख) ट, आवट और आहट प्रत्ययान्त संज्ञाएं स्त्रीलिंग हैं; जैसे-झंझट, बनावट, रुकावट, सजावट, चिकनाहट आदि।
(ग) हिन्दी की वे संस्कृत से भिन्न भाववाचक संज्ञाएं जिनके अन्त में ‘अ’ अथवा ‘न’ हो; जैसे—चमक, दमक, पुकार, समझ, दौड़, चाल, उलझन, जलन आदि।
(घ) संस्कृत को छोड़कर हिन्दी की वे संज्ञाएँ जिनके अन्त में ई, इया, ऊ, ख, त अथवा
स हो और संस्कृत को छोड़कर दोड, चाल, उलझन, जनक
ई – उदासी, टोपी, लड़की, धोती, चोटी आदि।
इया-खटिया, पुड़िया, बुढ़िया आदि।
ऊ-गेरू, लू आदि।
ख-ईख, भूख, आँख, साख, राख, कोख आदि।
त-बात, रात, लात, छत आदि।
स-आस, प्यास, साँस आदि।
प्रश्न-पुलिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम बताएँ।
पुलिंग से स्त्रीलिंग बनाने के नियम-
जिन प्रत्ययों के योग से पुलिंग शब्द स्त्रीलिंग में बदल जाते हैं, उन्हें स्त्रीवाची प्रत्यय कहते हैं।
हिन्दी में मुख्य स्त्री प्रत्यय हैं—आ, ई, नी, आनी, आइन, इनी, इका, इया, इन, वती, मती। इन प्रत्ययों का प्रयोग करते समय मूल शब्द के अन्तिम स्वर को हटा दिया जाता है। कई बार :
मूल शब्द का मूलतः ही परिवर्तन हो जाता है। प्रत्ययों के योग से बने स्त्रीलिंग शब्दों के कुछ रूप आगे दिए जा रहे हैं-

(i) अकारान्त तत्सम शब्दों के अन्तिम ‘अ’ को ‘आ’ कर देते हैं। जैसे-
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग-1

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(ii) कुछ अकारान्त शब्दों के अन्तिम ‘अ’ को ‘ई’ कर देते हैं। जैसे-
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(iii) कुछ आकारान्त शब्दों के अन्तिम ‘आ’ की ‘ई’ हो जाती है। जैसे-
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(iv) कुछ अकारान्त तथा आकारान्त शब्दों के अन्तिम ‘आ’ को ‘इया’ करके पहला स्वर .. ह्वस्व कर दिया जाता है। जैसे-
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(v) अन्तिम शब्द को परिवर्तित कर ‘इन’ कर देते हैं। जैसे-
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(vi) उपनाम या पदवीवाचक शब्दों के अन्त में स्वर को ‘आइन’ कर दिया जाता है। जैसे-
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग-6

(vii) कुछ पुलिंग शब्दों के अन्त में ‘नी’ लंगा देते हैं। जैसे-
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(viii) कुछ अकारान्त शब्दों के अन्त में ‘आनी’ करने से स्त्रीलिंग बनते हैं। जैसे-
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग-8
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(ix) संस्कृत के ‘वान्’ और ‘मान्’ शब्दों में ‘ कथा ‘मान’ को ‘वती’ और ‘मती’ कर देने से स्त्रीलिंग बनाया जाता है। जैसे-
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण लिंग-9

(x) जिन पुलिंग शब्दों के अन्त में अक’ होता है, उनमें ‘अक’ के स्थान पर ‘इका’ कर देने से शब्द स्त्रीलिंग बन जाते हैं। जैसे-
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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 8 वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 8 वायुमंडल का संघटन तथा संरचना Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 8 वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

Bihar Board Class 11 Geography वायुमंडल का संघटन तथा संरचना Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 8 वायुमंडल का संघटन तथा संरचना

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी गैस वायुमण्डल में सबसे अधिक मात्रा में मौजूद है?
(क) ऑक्सीजन
(ख) आर्गन
(ग) नाइट्रोजन
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर:
(ग) नाइट्रोजन

प्रश्न 2.
वह वायुमण्डलीय परत जो मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है ………………
(क) समताप मण्डल
(ख) क्षोभमण्डल
(ग) मध्य मण्डल
(घ) आयनमण्डल
उत्तर:
(ग) नाइट्रोजन

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प्रश्न 3.
समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिमा, महीन मिट्टी-किससे सम्बन्धित हैं?
(क) गैस
(ख) जलवाष्प
(ग) धूलकण
(घ) उल्कापात
उत्तर:
(ग) धूलकण

प्रश्न 4.
निलिखित में से कितनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है?
(क) 90 किमी
(ख) 100 किमी
(ग) 120 किमी
(घ) 150 किमी
उत्तर:
(ग) 120 किमी

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-सी गैस सौर विकिरण के लिए पारदर्शी है तथा पार्थिव विकिरण के लिए अपारदर्शी?
(क) ऑक्सीजन
(ख) नाइट्रोजन
(ग) हिलीयम
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर:
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड

प्रश्न 6.
वायुमण्डल की कौन-सी परत पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगों को परावर्तित कर पुनः वापस कर पृथ्वी तल पर भेज देती है?
(क) समताप मण्डल
(ख) मध्य मण्डल
(ग) आयन मण्डल
(घ) बर्हिमण्डल
उत्तर:
(ग) आयन मण्डल

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
वायुमण्डल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है और यह पृथ्वी को सभी ओर से ढके हुए है। इसमें मनुष्यों एवं जन्तुओं के जीवन के लिए आवश्यक गैसों जैसे ऑक्सीजन तथा पौधों के लिए कार्बन डाईऑक्साइड पाई जाती हैं।

प्रश्न 2.
मौसम और जववायु के कौन-कौन से तत्त्व हैं?
उत्तर:
ताप, दाब, हवा, आर्द्रता, बादल और वर्षण ये मौसम और जलवायु के महत्त्वपूर्ण तत्त्व हैं, जो पृथ्वी पर मुनष्य के जीवन को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 3.
वायुमण्डल की संरचना के बारे में लिखिए।
उत्तर:
वायुमण्डल का निर्माण लगभग एक अरब वर्ष पूर्व हुआ। यह अनेक गैसों का मिश्रण है। नाइट्रोजन 78.8% तथा ऑक्सीजन 20.95% मुख्य गैसें हैं। इनके अतिरिक्त आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, नीऑन, हीलियम, क्रेप्टो, जेनन तथा हाइड्रोजन भी कुछ मात्रा में है। वायुमण्डल में पाँच मुख्य संस्तर हैं-क्षोभमण्डल, समतापमण्डल, मध्यमण्डल, आयनमण्डल, बाह्ममण्डल । कुल वायुमण्डल का 99% भाग भूपृष्ठ से 32 कि.मी. की ऊँचाई तक सीमित हैं और गुरुत्वाकर्षक बल द्वारा पृथ्वी से सटा हुआ है। वायुमण्डल को ऊर्जा सूर्य से मिलती है।

प्रश्न 4.
वायुमण्डल के सभी संस्तरों से क्षोभमण्डल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?
उत्तर:
क्षोभमण्डल वायुमण्डल का सबसे नीचे का संस्तर है। इसकी ऊंचाई 13 किमी है, तथा यह ध्रुव के निकट 8 किमी तथा विषुवत् रेखा पर 18 किमी की ऊँचाई तक है। इस मण्डल में धुलकण तथा जलवाष्प मौजूद होते हैं। मौसम में परिवर्तन इसी संस्तर में होता है। इस संस्तर में प्रत्येक 165 मी. की ऊँचाई पर तापमान 1°C घटता है। जैविक क्रिया के लिए यह सबसे महत्त्वपूर्ण संस्तर है।

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प्रश्न 5.
ग्रीन हाऊस प्रभाव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
वायु प्रदूषण से सम्बन्धित एक बड़ी समस्या विश्व के तापमान में वृद्धि (Global Warming) या हरित गृह प्रभाव (Green House effect) है । मानवीय स्त्रोतों से उत्पन्न कुछ गैस कार्बन डायऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रस ऑक्साइड और मीथेन है, जो हरित गृह प्रभाव में वृद्धि करतें हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण कार्बन डाइऑक्साइड है, जो सौर ऊर्जा को पृथ्वी की ओर आने तो देता है, किन्तु पृथ्वी से जो धरातलीय विकरण होता है, उसे बाहर जाने से रोकती है और उसका अवशोषण करता है। अतः वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड के वृद्धि होने से पृथ्वी की सतह और वायुमण्डल के निचले भाग में तापमान की वृद्धि होती है जिसे हरित गृह प्रभाव कहा जाता है।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल के मुख्य संघटनों का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर:
1. वायुमण्डल गैसों का एक आवरण है, जो भूपृष्ठ के ऊपर हजारों किमी. की ऊँचाई तक फैला है। लगभग 90 किमी. की ऊँचाई तक यह तीन प्रमुख गैसों-नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा आर्गन में एक समान है। इसके अतिरिक्त इनमें नियॉन, क्रिप्टन एवं जीनॉन जैसी दुर्लभ गैसें हैं, जिन्हें उत्कृष्ट गैसें कहते हैं।

2. 90 किमी. से ऊपर का संघटन अधिकाधिक हल्की गैसों की वृद्धि के साथ परिवर्तित होने लगता है। इसमें कम मात्रा में कार्बन डाय ऑक्साइड, जलवाष्प, ओजोन, अक्रीय गैसें जैसे जीनॉन, क्रिप्टन, नियान, आखान तथा अधिक मात्रा में ठोस एवं द्रव कण जिन्हें सामूहिक रूप से वायु कहते है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
वायुमण्डल की संरचना की व्याख्या करें।
उत्तर:
वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है और यह पृथ्वी को सभी ओर से ढके हुए है। इसमें मनुष्यों एवं जन्तुओं के जीवन के लिए आवश्यक गैसों जैसे ऑक्सीजन तथा पौधों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड पाई जाती है। वायु पृथ्वी के द्रव्यमान का अभिन्न भाग है, तथा इसके कुल द्रव्यमान का 99% पृथ्वी की सतह से 32 किमी की ऊँचाई तक स्थित है । वायु रंगहीन तथा गंधहीन होती है, तथा जब यह पवन की तरह बहती है, तभी हम इसे महसूस कर सकते हैं। वायुमण्डल अलग-अलग घनत्व तथा तापमान वाले विभिन्न परतों का बना होता है। पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अधिक होता है, जबकि ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ यह घटता जाता है। तापमान की स्थिति के अनुसार वायुमण्डल को पाँच विभिन्न संस्तरों में बांटा गया है। ये हैं-क्षोभमण्डल, समतापमण्डल, मध्यमण्डल, आयनमण्डल, बाह्यमण्डल।

क्षोभमण्डल वायुमण्डल का सबसे नीचे का संस्तर है.। इसकी ऊँचाई 13 किमी है। यह ध्रुव के निकट 8 किमी तथा विषुवत रेखा पर 18 किमी की ऊँचाई तक है। क्षोभमण्डल की मोटाई विषुवत् रेखा पर सबसे अधिक है; क्योंकि तेज वायु प्रवाह के कारण ताप का अधिक ऊँचाई तक सम्वहन किया जाता है। इस संस्तर में धुलकण तथा जलवाष्प मौजूद होते हैं। मौसम में परिवर्तन इसी संस्तर में होता है। इस संस्तर में प्रत्येक 165मी की ऊँचाई पर तापमान 1°C घटता है। जैविक क्रिया के लिए यह सबसे महत्त्वपूर्ण संस्तर है। वायुमण्डल का सबसे ऊपरी संस्तर जो आयनमण्डल के ऊपर स्थित होता है, उसे बाह्यमण्डल कहते हैं। यह सबसे ऊँचा संस्तर है, तथा इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। इस संस्तर में मौजूद सभी घटक विरल है, जो धीरे-धीरे बाहरी आंतरिक्ष में मिल जोते हैं।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल की संरचना का चित्र खींचे और व्याख्या करें।
उत्तर:
वायुमण्डल विभिन्न प्रकार की गैसों का मिश्रण है। इनमें सबसे अधिक 78.8% नाइट्रोजन (N2) गैस, ऑक्सीजन (O2)20.95% आर्गन (Ar) 0.93% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) 0.036% नीऑन (Ne) 0.002% हिलीयम (He) 0.0005% क्रेप्टो (Kr) 00.001% जेनन (Xe) 0.00009% तथा हाइड्रोजन (H20.)00005% पाई जाती है। इसके पांच विभिन्न संस्तर है। वायुमण्डल का चित्र नीचे है।
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Bihar Board Class 11 Geography वायुमंडल का संघटन तथा संरचना Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वायुमण्डल को कितने भागों में विभक्त किया गया है?
उत्तर:
रासायनिक संघटन के आधार पर वायुमण्डल को दो विस्तृत परतों में विभक्त किया गया है-होमोस्फेयर तथा हेट्रोस्फेयर।

प्रश्न 2.
सीमा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
होमोस्फेयर की तीन परतें हैं-क्षोभमण्डल. समतापमण्डल तथा मध्यमण्डल । प्रत्येक उप-परत अपने साथ वाली परत से एक पतले संक्रमण क्षेत्र द्वारा अलग होती है, इसे सीमा कहते हैं।

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प्रश्न 3.
जेट वायुयान वायुमण्डल के किस भाग में उड़ते हैं ?
उत्तर:
जेटवायुयान निम्न समतापमण्डल में उड़ते है, क्योंकि यह परत उड़ान के लिए अत्यन्त सुविधाजनक दशाएँ रखती है। यह मण्डल क्षोभ सीमा के ऊपर स्थित है।

प्रश्न 4.
मौसम और जलवायु के प्रमुख तत्त्व कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
मौसम एवं जलवायु के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित है –

  1. तापमान
  2. वायुदाब एवं पवनें
  3. आर्द्रता एवं वर्षण।

ये जलवायु तत्त्व कहलाते हैं, इन्हीं से विभिन्न प्रकार की जलवायु और मौसम की रचना होती है।

प्रश्न 5.
मौसम किसे कहते हैं ?
उत्तर:
किसी दिए गए समय में वायुमण्डल की भौतिक दशा को मौसम कहते है, जैसे ही. ये दशाएँ बदलती हैं, वैसे ही मौसम बदल जाता है।

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प्रश्न 6.
वायुमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल गैस का एक आवरण हैं, जो पृथ्वी के ऊपर हजारों किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है। पृथ्वी पर अधिकांश जीवन तथा जीवन प्रक्रियाओं का अस्तित्व वायुमण्डल से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 7.
वायुमण्डल की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर:
वायुमण्डल की उत्पत्ति लगभग पाँच अरब वर्ष पूर्व ठण्डे कणों, मुख्य रूप से लोहे एवं मैग्नीशियम के सिलिकेट, लोहे एवं ग्रेफाइट की अभिवृद्धि द्वारा धीमे परिवर्तनों से हुई।

प्रश्न 8.
वायुमण्डल में नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन की प्रतिशत मात्रा कितनी है ?
उत्तर:
ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन मिलकर स्वच्छ शुष्क हवा के 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करती हैं फिर भी जलवायु की दुष्टि से इनकी महत्ता कम है।

प्रश्न 9.
कौन सी गैसें हमें हानिकारक किरणों से बचाती हैं ?
उत्तर:
ओजोन गैस अत्यन्त उपयोगी गैस है, क्योंकि यह पराबैंगनी किरणों का अवशोषण करती है, तथा इन हानिकारक किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।

प्रश्न 10.
मौसम तथा जलवायु के प्रमुख चर क्या हैं?
उत्तर:
जलवाष्प एवं धूलकण मौसम एवं जलवायु में प्रमुख चर है। ये सभी प्रकार के संसाधन के स्रोत हैं तथा सूर्य से प्राप्त होने वाली अथवा पृथ्वी से विकसित ऊर्जा के प्रमुख अवशोषक हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विभिन्न क्षेत्रों में वायुमण्डल का महत्त्व बताएँ।
उत्तर:

  1. जीवन का आधार-पृथ्वी पर मानव जीवन का आधार वायुमण्डल ही है। सौरमण्डल में केवल पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है. जिस पर वायुमण्डल विद्यमान है। ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जीवन का आधार है।
  2. ताप सन्तुलन-वायुमण्डल एक ग्रीन हाउस की भाँति कार्य करता है। इस प्रभाव से पृथ्वी का तापमान औसत रूप से 35°C रहता है। वायुमण्डल के बिना बहुत अधिक तापमान पर जीवन असम्भव होता है।
  3. ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है। आयनमण्डल रेडियो. तरंगों को पृथ्वी पर लौटाकर रेडियो प्रसारण में सहायता करता है।
  4. वायुमण्डल की विभिन्न घटनाएँ, जैसे वाष्पीकरण, वर्षा, पवनें आदि मानव जीवन पर प्रभाव डालती है। सौरमण्डल से पृथ्वी पर गिरने वाली उल्काएँ वायुमण्डल में जलकर नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 2.
क्षोभमण्डल तथा समतापमण्डल में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
क्षोभमण्डल तथा समतापमण्डल में अन्तर –
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प्रश्न 3.
वायुमण्डल कैसे पृथ्वी से जुड़ा रहता है?
उत्तर:
पृथ्वी पर अधिकांश जीवन वायुमण्डल की तली, जहाँ स्थल तथा महासागर मिलते हैं, पर मौजद है। जीवन प्रतिक्रियाओं का अस्तित्व इससे जुड़ा हुआ है। मानव पर वायुमण्डल का न केवल प्रत्यक्ष बल्कि अप्रत्यक्ष प्रभाव भी है। कुल वायुमण्डल का 99 प्रतिशत भाग भूपृष्ठ से 32 किमी की ऊँचाई तक सीमित है और गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा पृथ्वी से सटा हुआ है।

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प्रश्न 4.
विषमण्डल (हेट्रोस्फेयर) क्या है?
उत्तर:
विषमण्डल (हेट्रोस्फेयर) एक परतदार ऊष्ण मण्डल है, जो मध्य सीमा के ऊपर स्थित है और आंतरिक्ष के आधार तक विस्तृत है। ऊष्ण मण्डल के निम्न भाग में 100 से 400 किमी के मध्य की ऊँचाई तक सीमित है और गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा पृथ्वी से सटा हुआ है।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल की स्वच्छ शुष्क हवा के मुख्य संघटक कौन-से हैं ?
उत्तर:
ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन वायुमण्डल की स्वच्छ शुष्क हवा के मुख्य घटक हैं। ये दोनों मिलकर होमोस्फेयर की स्वच्छ शुष्क हवा के 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 6.
कौन-सी गैस कम मात्रा में होने पर भी वायुमण्डल प्रक्रियाओं के लिए महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम है, फिर भी वायुमण्डलीय प्रक्रिया में यह एक महत्त्वपूर्ण गैस है। यह ऊष्मा को अवशोषित कर सकता है और इस प्रकार निचले वायुमण्डल को सौर विकिरण तथा पार्थिव विकिरण द्वारा गर्म होने का अवसर प्रदान करता है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया में हरे पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं।

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प्रश्न 7.
वायुमण्डल की परिभाषा बताएँ।
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर घिरे हुए वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। पृथ्वी की गुरुवाकर्षण शक्ति के कारण वायुमण्डल सदा पृथ्वी के साथ सटा रहता है, तथा पृथ्वी का एक अभिन्न अंग है। वायुमण्डल के कारण ही पृथ्वी पर जीवन है, तथा पृथ्वी एक महत्त्वपूर्ण ग्रह है। वायुमण्डल का निर्माण लगभग एक अरब वर्ष पूर्व हुआ वायुमण्डल अनेक गैसों का मिश्रण है। नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य गैसें हैं। वायुमण्डल में पाँच मुख्य संस्तर हैं-क्षोभमण्डल, समतापमण्डल, मध्यमण्डल, आयनमण्डल, बाह्यमण्डल।।

प्रश्न 8.
वायुमण्डल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
वायुमण्डल का मानवीय जीवन में बहुत महत्त्व हैं –

  1. ऑक्सीजन गैस पृथ्वी पर जीवन का आधार है।
  2. पेड़ – पौधों तथा वनस्पति के लिए कार्बन डाइऑक्साइड महत्त्वपूर्ण है।
  3. वायुमण्डल सूर्यताप की अवशोषित करके ग्लास हाऊस का काम करता है।
  4. वायुमण्डल का जलवाष्प वर्षा का मुख्य साधन है।
  5. वायुमण्डल फसलों, मौसम, जलवायु तथा वायुमार्गों पर प्रभाव डालता है।

प्रश्न 9.
वायुमण्डल की मुख्य परतों के नाम बताएँ।
उत्तर:
वायुमण्डल में मुख्य रूप से पाँच परतें पाई जाती हैं। रासायनिक संरचना के आधार पर वायुमण्डल को इन परतों में विभक्त किया गया है,

  1. क्षोभमण्डल – यह वायुमण्डल की सबसे निचली परत है।
  2. समतापमण्डल – इस भाग में वायूयान उड़ते है।
  3. आयनमण्डल – इसका तापमान आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ता है।
  4. बाह्यमण्डल।
  5. चुम्बकमण्डल।

प्रश्न 10.
वायुमण्डल की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर:
वायुमण्डल की उत्पत्ति पाँच अरब वर्ष ठण्डे कणों, मुख्य रूप से लोहे एवं मैग्नीशियम सिलिकेट, लोहे एवं ग्रेफाइट की अभिवृद्धि द्वारा शुरू हुए धीमें परिवर्तनों का परिणाम है। गुरुत्वाकर्षण विखण्डन तथा रेडियोधर्मी क्षति से पृथ्वी गर्म हुई, जिसमें पृथ्वी के केन्द्र में ठोस निकिल, लौह धातु निर्मित क्रोड, द्रव लौह सिलिकेट खोल, मैंटल तथा स्थलमण्डल की रचना हुई। इस प्रक्रिया में गैस का निकास हुआ, जिससे एक नए वायुमण्डल एवं जलमण्डल की रचना हुई। कार्बन नाइटोजन, ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन के यौगिकों की उत्पत्ति, ऊर्जा स्रोतों जैसे बिजली का चमकना, सौर विकिरण अथवा रेडियोधर्मी विसर्जन से हुई।

कार्बन डाइऑक्साइड और भूपर्पटी के सिलिकेट के मध्य हुई प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप कार्बनेट का निर्माण हुआ। अत: कार्बन डाइऑक्साइड धीरे-धीरे वायुमण्डल से लुप्त हो गई। वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हुई। ओजोन ने पृथ्वी पर आने वाली पराबैंगनी विकिरण के विरुद्ध एक परदे या आवरण का काम किया तथा जैविक निक्षेप कोयले एवं तेल भण्डारों के रूप से संचित होने लगे। इन सभी घटनाओं ने मौलिक रूप से पृथ्वी के भू-रसायन को परिवर्तित कर दिया। अधिकांश रासायनिक तत्त्वों के चक्रों का पुन-अभिविन्यास हुआ। इस प्रकार पृथ्वी के वायुमण्डल की रचना हुई।

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प्रश्न 11.
आयनमण्डल का वर्णन करो।
उत्तर:
यह धरातल के ऊपर वायुमण्डल का चौथा संस्तर है। इसकी ऊँचाई 80 से 400 कि.मी. के मध्य है। इस मण्डल में तापमान ऊंचाई बढ़ने के साथ बढ़ता है। यहाँ की हवा विद्युत आवेशित होती है। रेडियो तरंगें इसी मण्डल से परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर लौट जाती हैं। यह परत रेडियो प्रसारण में उपयोगी है। इसमें तापमान का वितरण असमान एवं अनिश्चित है। इस मण्डल में बड़ी ही विस्मयकारी विद्युतकीय घटनाएँ दृष्टिगोचर होती हैं।

प्रश्न 12.
क्षोभमण्डल सीमा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ऊँचाई के साथ-साथ तापमान में एक असमान दर से परिवर्तन होता है –

  1. 15 किमी तक तापमान में एक असमान दर से परिवर्तन होता है।
  2. 80 किमी तक तापमान स्थिर रहता है।
  3. 80 किमी से ऊपर तापमान में वृद्धि होने लगती है।

इस ऊँचाई के पश्चात् क्षोभमण्डल से ऊपर समतापमण्डल का भाग आरम्भ होता है। समताप मण्डल तथा क्षोभमण्डल को अलग करने वाले संक्रमण क्षेत्र को क्षोभमण्डल सीमा कहते हैं।

प्रश्न 13.
वायुमण्डल में धुल कणों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
वायुमण्डल में धूल कण निचले भागों में पाए जाते हैं। वायुमण्डल में धूल कणों का कई प्रकार से विशेष महत्त्व है –

  1. धूल कण सौर ताप का कुछ भाग सोख लेते हैं, तथा कुछ भाग परावर्तन हो जाता है। ताप सोख लेने के कारण वायुमण्डल का तापक्रम अधिक हो जाता है।
  2. धूल कण आर्द्रताग्रही नाभि के रूप में काम करते हैं। इनके चारों ओर जलवाष्प का संघनन होता है, जिससे वर्षा, कोहरा, बादल बनते हैं। धूल कणों के अभाव के कारण वर्षा नहीं हो सकती।
  3. धूल कणों के कारण वायूमण्डल की दर्शन क्षमता कम होती है, तथा धुंधलापन छा जाता है।
  4. धूल कणों के सन्योग से कई रंग-बिरगे दृश्य सूर्य उदय, सूर्य अस्त तथा इन्द्रधनुष दृश्य बनते हैं।

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प्रश्न 14.
क्षोभमण्डल को वायुमण्डल की सबसे महत्त्वपूर्ण परत क्यों माना जाता है?
उत्तर:
क्षोभमण्डल वायुमण्डल की सबसे निचली परत है, जो कई कारणों से महत्त्वपूर्ण हैं –

  1. पृथ्वी के धरातल पर जलवायु स्थितियों का निर्माण करने वाली महत्त्वपूर्ण क्रियाएँ इसी परत में होती हैं।
  2. इस परत में गैसों, धूल कण तथा जलवाष्म की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसलिए मेघ, वर्षा, कोहरा आदि क्रियाएँ इसी परत में होती हैं।
  3. इस अस्थिर भाग में संवाहिक धाराएँ चलती हैं, जो ताप और आर्द्रता को ऊँचाई तक ले जाती हैं।
  4. इस भाग में संचालन क्रिया द्वारा वायुमण्डल की विभिन्न परतें गर्म होती हैं। ऊंचाई के साथ-साथ तापमान कम होता है। तापमान कम होने की दर 1°C प्रति 165 मीटर हैं।
  5. क्षोभमण्डल में अस्थिर वायु के कारण आँधी-तूफान चलते हैं। वायु परिवर्तन से मौसम परिवर्तन होता है। इसी क्षेत्र मे चक्रवात उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 15.
क्षोभ सीमा पर भूमध्य रेखा के ऊपर न्यूनतम ताप क्यों पाया जाता है?
उत्तर:
पृथ्वी पर निम्नतम तापमान धुवों पर पाया जाता है। परन्तु वायु में क्षोभ सीमा पर निम्नतम तापमान भूमध्य रेखा पर पाया जाता है। क्षोभमण्डल पर भूमध्य रेखा पर -80C तथा ध्रुवों पर-45°C तापमान पाया जाता है। इसका कारण यह है, कि भूमध्य रेखा पर क्षोभ सीमा की ऊँचाई 18 किमी होती है, जबकि ध्रुवों पर यह ऊँचाई केवल 8 किमी होती है। ऊँचाई के साथ तापमान कम होता है, इसलिए अधिक ऊंचाई होने के कारण भूमध्य रेखा पर निग्नताप पाए जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वायुमण्डल की संरचना एवं प्रत्येक परत की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक संघटन के आधार पर वायुमण्डल को दो विस्तृत परतों में विभक्त किया गया है-होमोस्फेयर हेट्रोस्फेयर। होमोस्फेयर (सममण्डल)-यह 90 किमी की ऊंचाई के मध्य स्थित है। इसकी तीन परतें हैं-क्षोभमण्डल, समतापमण्डल तथा मध्यमण्डल। प्रत्येक उप-परत अपने साथ वाली परत से एक पतले संक्रमण क्षेत्र द्वारा अलग होती है, जिसे सीमा कहते हैं । क्षोभमण्डल वायुमण्डल की सबसे निचली परत है। यहाँ ऊँचाई के साथ तापमान घटता है। इस परत में तापमान प्रत्येक 100 मीटर. की ऊँचाई पर 0.65°C से कम हो जाता है। इसे सामान्य क्रास दर कहते हैं। सभी वायुमण्डलीय प्रक्रियाएँ, जो जलवायु से सम्बन्धित हैं, इस परत में घटती है।

क्षोभ सीमा के ऊपर समतापमण्डल की स्वच्छ एवं शान्त वायु मौजूद है। इस परत में जलवाष्य का पूर्ण अभाव मेघों के निर्माण को रोकता है, जिससे यहाँ दृश्यता सर्वाधिक होती है। ओजोन परत भी समतापमण्डल में ही है। यह पृथ्वी को पराबैगनी विकिरण से सुरक्षा प्रदान करती है। समताप सीमा के ऊपर मध्यमण्डल स्थित है। इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान फिर कम होने लगता है। मध्यमण्डल के उच्च अक्षांशों में गर्मियों में तंतुनुमा मेघ देखने को मिलते है, जो उल्का धूल कणों से परावर्तित सूर्य किरणें हैं।

विषय मण्डल (हेस्ट्रोस्फेयर)-यह एक परतदार उष्णमण्डल है। यह मध्यसीमा के ऊपर स्थिल है और अंतरिक्ष एक विस्तृत क्षेत्र है। उष्णमण्डल के निम्न भाग में 100 से 400 किमी के मध्य की ऊँचाई और वायुमण्डलीय गैसों का आयनीकरण हो जाता है। यह परत रेडियो तरंगों को परावर्तित करती है। आयनीकृत धूल कण अंतर्विराम पर चादर के समान प्रकाश फैलाते हैं, जिसे उत्तरी गोलाद्ध ऑरोरा बोरिलिस तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में ऑरोरा आस्ट्रेलिस कहते हैं। ऊष्णमण्डल के ऊपरी भाग में फिर से आयनों का संकेन्द्रण होता है। इसे एलेन विकिरण पट्टी कहते हैं। सबसे ऊपरी परत को चुबकीय मण्डल भी कहते हैं। इस मण्डल में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम तथा हाइड्रोजन की विशिष्ट परतें होती है।

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प्रश्न 2.
वायुमण्डल की संरचना एवं प्रत्येक परत की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर सैकड़ों किमी की ऊँचाई में आवृत करनेवाला गैसीय आवरण ही वायुमण्डल है। इसकी संरचना लगभग 1 अरब वर्ष पूर्व सम्भावित मानी गयी है, जबकि यह वर्तमान अवस्था में लगभग 58 करोड़ वर्ष पूर्व आया। पृथ्वी का गैसीय आवरण पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ही बंधा है। वायुमण्डल में वायु एवं गैसों की अनेक संकेन्द्रित परतें विद्यमान है, जो घनत्व, तापमान एवं संभव की दष्टि से एक दूसरे से पूर्णतः भिन्न है।

सामान्यतः वायुमण्डल पाँच मण्डलों में विभक्त है –

  1. क्षोभ मण्डल
  2. समताप मण्डल
  3. मध्य मण्डल
  4. आयन मण्डल
  5. बाह्य मण्डल

1. क्षोभ मण्डल – मानव हेतु अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। ऋतु एवं मौसम सम्बन्धी लगभग सभी घटनाएँ इसी परत में होती है। बादल, वर्षा, धूलकण, आँधी-तूफान आदि मौसम सम्बन्धी घटनाएँ घटित होती है।

2. समताप मण्डल – की ऊँचाई 50km तक मानी जाती है। यहाँ संवाहनीय धाराएँ, आँधी, बादलों की गरज, धूल-कण आदि कुछ भी नहीं पाया जाता है। कभी-कभी मोतियों जैसे दुर्लभ बादल दिखाई पड़ते हैं।

3. मध्य मण्डल – का विस्तार 50 से 90km. तक है, इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान गिरने लगता है।

4. आयन मण्डल – इसकी सीमा 100 km. से 400 km. ऊ तक है। यहाँ पर उपस्थित गैस के कण विद्युत आवेशित होते हैं। जिसे आयन मण्डल कहा जाता है।

5. बाह्य मण्डल – वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत बाह्य मण्डल कहा जाता है। यहाँ वायु नहीं के बराबर होती है।

प्रश्न 3.
वायुमण्डल की संरचना एवं संघटन का वर्णन करें।
उत्तर:
वायुमण्डल की संरचना –

  • रासायनिक संघटन के आधार पर वायुमण्डल दो विस्तृत परतें होमोस्फेयर तथा हेट्रोस्फेयर में विभक्त है। होमोस्फेयर 90 कि०मी० तक स्थित है।
  • इसकी तीन तापीय परतें हैं-क्षोभमण्डल, समताप मण्डल तथा मध्य मण्डल।
  • प्रत्येक उपपरत अपने साथ वाली परत से एक पतले संक्रमण क्षेत्र द्वारा अलग होती है, जिसे सीमा कहते है और उसे निचले परत के नाम से जोड़ते हैं, जैसे क्षोभ सीमा।
  • ट्रेटोस्फेयर का रासायनिक संगठन असमान है। इसमें क्रमशः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम है। इसमें क्रमशः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम तथा हाइड्रोजन की परतदार सरचनाएँ हैं।

वायुमण्डल का संघटन –
1. वायुमण्डल गैस का एक आवरण है, जो भूपष्ठ के ऊपर हजारों किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला है। लगभग 90 कि०मी० की ऊंचाई तक यह तीन प्रमुख गैसों-नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा आरगन में एक समान है। इसके अतिरिक्त इनमें नियॉन क्रिप्टन एवं नीयॉन जैसी दुर्लभ गैसें है, जिन्हें उत्कृष्ट गैसें भी कहते हैं।

2. ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन मिलकर होमोस्फेयर की स्वच्छ शुष्क हवा के 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करते है। इसके अतिरिक्त कार्बन डायऑक्साइड, जलवाष्प ओजोन, अक्रिय गैसें जैसे-क्रिप्टन निर्यान, आरगन तथा अधिक मात्रा में ठोस एवं द्रव कण जिन्हें सामूहिक रूप से सेरोसॉल या वायुविलय कहते हैं। .

प्रश्न 4.
वायुमण्डल की रचना का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर:
वायुमण्डल अनेक गैसों, जलवाष्प तथा धूल कणों के मिश्रण से बना हुआ है। वायुमण्डल में ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन प्रमुख गैसें हैं। ये दोनों मिलकर वायुमण्डल का 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करती है। शेष 1 प्रतिशत में अन्य गैसें कार्बन डाइऑक्साइड, मिथेन, ओजोन, आर्गन, हाइड्रोजन, हीलियम आदि शामिल हैं। इन गैसों की मात्रा कम व अधिक होती रहती है। भारी गैसें वायुमण्डल की निचली परतों में तथा हल्की गैसें ऊपरी परतों में पाई जाती हैं ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड जीव-जन्तुओं तथा पौधों के जीवन का मूल आधार है।
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वायुमण्डल में लगभग 2% मात्रा में जलवाष्प पाया जाता है। ऊँचाई के साथ जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है। कुल जलवाष्प का लगभग आधा हिस्सा दो हजार मीटर ऊँचाई के नीचे पाया जाता है। जलवाष्प तापमान पर भी निर्भर करता है। भमध्य रेखा से धवों की ओर जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है। पृथ्वी पर वर्षा एवं संघनन का मुख्य स्रोत जलवाष्प ही है। सूर्यताप को सोखकर जलवाष्प तापक्रम नियन्त्रण करता है । इसके अतिरिक्त वायुमण्डल में बहुत अधिक ठोस कण पाए जाते हैं जिनमें धूलकण प्रमुख है। इनके स्रोत मरुस्थलीय मैदान, समुद्री तट, शुष्क घाटियाँ तथा झील तल होते हैं। धूल कण सूर्यताप को बिखेरते तथा विकेन्द्रित करते हैं। धूल कण अधिकतर वायुमण्डल के निचले हिस्सों में पाए जाते हैं। वायुमण्डल में धूल कणों का विशेष महत्त्व है।

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प्रश्न 5.
वायुमण्डलीय क्रियाएँ मौसम तथा जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? वर्णन करें। अथवा, मौसम और जलवायु के मुख्य तत्त्वों तथा जलवायु के प्रमुख नियन्त्रकों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
मौसम और जलवायु के प्रमुख तत्त्व हैं –

  • तापमान
  • वायुदाब एवं पवनें
  • आर्द्रता एवं वर्षण।

ये जलवायु तत्त्व कहलाते हैं, क्योंकि इन्हीं से विभिन्न प्रकार के मौसम और जलवायु के प्रकारों की रचना होती है। तापमान तथा वर्षण मुख्य आधारभूत तत्त्व है, जिनसे वायुदाब, पवनें तथा अन्य तत्त्व जुडे हुए हैं। व्यावहारिक रूप से पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा सूर्याताप अथवा सूर्य से आने वाले विकिरणों को फल है । पृथ्वी के तापमान के असमान वितरण से वायुदाब में भिन्नता आती है, जिससे पवनों की उत्पत्ति होती है। वायुमण्डल में आर्द्रता जलवाष्प के रूप में उपस्थित रहती है, जो अक्सर संघटित होकर मेघों को जन्म देती हैं। इसका वर्षण वर्षा, ओले, बजरी अथवा हिम के रूप में हो सकता है। वायु की अपने अन्दर जलवाष्य रखने की क्षमता इसके तापमान पर निर्भर करती है। जलवायु नियंत्रकों के कारण जलवायु के तत्त्व एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न-भिन्न होते हैं।

जलवायु नियन्त्रक निम्न हैं –

  • अक्षांश अथवा सूर्यताप
  • स्थल एवं जल का वितरण
  • अर्धस्थाई उच्च दाब एवं निम्न दाब की विशाल पट्टियाँ
  • पवनें
  • ऊँचाई
  • महासागरीय धाराएँ
  • विभिन्न प्रकार के तुफान
  • पर्वतीय अवरोध

ये नियन्त्रक विभिन्न गहनता तथा विभिन्न संयोजनों के साथ काम करते हुए, तापमान एवं वर्षण में परिवर्तन लाते हैं, जो विभिन्न प्रकार की जलवायु और मौसम के लिए उत्तरदायी हैं।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें –

  1. होमोस्फेयर
  2. वायुमण्डलीय गैसों का आयनीकरण।

उत्तर:
1. होमोस्फेयर (सममण्डल) – वायुमण्डल की सबसे निचली परत क्षोभमण्डल कहलाती है। यह भूमध्य रेखा पर 16 किमी. तथा धुवों पर 10 किमी की ऊँचाई पर स्थिल है। यहाँ तापमान घटता जाता है, क्योंकि वायुमण्डल अधिकतर भूपृष्ठ द्वारा विकरित ऊष्मा से गर्म होता है। इस परत में तापमान प्रत्येक 100 मीटर की ऊँचाई पर 0.65°C कम हो जाता है। इसे सामान्य ह्यास दर कहते हैं। क्षोभ सीमा के पास यह न्यूनतम -60°C पर पहुँच जाता है सभी वायुमण्डलीय प्रक्रियाएँ जो जलवायविक तथा मौसमी दशाओं के लिए उत्तरदायी हैं, इस परत में घटती हैं।

क्षोभ सीमा के ऊपर समतामण्डल की स्वच्छ एवं शान्त वायु मौजूद है। ओजोन परत भी समतापमण्डल में ही है। इसकी अधिकता 20 से 22 किमी. ऊँचाई वाले क्षेत्र में है। ओजोन परत पृथ्वी को पराबैगनी विकिरण से सुरक्षा प्रदान करती है। तापमान समतापमण्डल के आधार पर -600 C से बढ़कर इसकी ऊपरी सीमा पर जिसे समताप सीमा कहते हैं,0°C हो जाता है। समताप सीमा के ऊपर मध्यमण्डल स्थित है, जो 50 से 90 किमी की ऊँचाई के मध्य स्थित है।

2. वायुमण्डलीय गैसों का आयनीकरण – उष्णमण्डल अंतरिक्ष के आधार तक विस्तृत है। इस परत का तापमान आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ता है। उष्णमण्डल के निम्न भाग में 100 से 400 किमी के मध्य ऊँचाई पर वायुमण्डलीय गैसों का आयनीकरण हो जाता है। इन आयनीकृत कणों का 250 किमी. की ऊंचाई पर सर्वाधिक संकेन्द्रता होता है। यह परत रेडियो तरंगों को परिवर्तित करती है।

आयनीकृत धूलकण अंत विराम पर चादर के समान प्रकाश फैलाती है, जिसे उत्तरी गोलार्द्ध में ऑरोरा बोरिलिस और दक्षिणी गोलार्ध में ऑरोरा आस्ट्रेलिस कहते हैं। उष्णमण्डल के ऊपरी भाग में फिर से आयनों का संकेन्द्रण होता है। इसे वान एलेन विकिरण पट्टी कहते हैं। सबसे ऊपरी भाग को चुम्बकीय मण्डल भी कहते हैं । ऊष्णमण्डल में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हीलियम तथा हाइड्रोजन की विशिष्ट परतें हैं, जो भूपृष्ठ से क्रमशः 200 किमी., 1000 किमी, 2600 किमी. तथा 9600 किमी. की औसत ऊँचाईयों पर स्थित हैं।

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प्रश्न 7.
वायुमण्डल के संघटन और ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, तथा कार्बन डाइऑक्साइड के महत्त्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
लगभग 90 किमी. की ऊँचाई तक नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा आर्गन एक समान है। इसके अतिरिक्त इनमें नियॉन, क्रिष्टन, एवं जीनॉन जैसी दुलर्भ गैसें हैं। इन्हें उत्कृष्ठ गैसें भी कहते हैं। ये अक्रिय गैसें हैं। यह परत सामान्यतः होमोस्फेयर या सममण्डल कहलाती है। ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन मिलकर होमोस्फेयर की स्वच्छ शुष्क हवा के 99 प्रतिशत भाग का निर्माण करते हैं। इसके अतिरिक्त कम मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, आजोन, अक्रिय गैसें तथा अधिक मात्रा में ठोस एवं द्रव कण, जिन्हें, सामूहिक रूप से ऐरासॉल या वायु-विलय कहते है, शामिल हैं।

नाइट्रोजन अन्य पदार्थों के साथ रासायनिक संयोग नहीं करता है, लेकिन मृदा में स्थिर हो जाता है। यह एक घोलक का काम करता है तथा दहन को नियन्त्रित करता है। इसके विपरीत, ऑक्सीजन लगभग सभी तत्त्वों के साथ मिल जाता है और अत्यधिक दहनशील है। यद्यपि वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का भाग कम है फिर भी वायुमण्डलीय प्रक्रिया में यह एक महत्त्वपूर्ण गैस है।

यह ऊष्मा को अवशोषित कर सकता है और इस प्रकार निचले वायुमण्डल को सौर विकिरण तथा पार्थिव विकिरण द्वारा गर्म करता है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में हरे पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं। ओजोन बहुत कम मात्रा में समतापमण्डल में भूपृष्ठ के मध्य मिलती है, परन्तु यह अत्यन्त उपयोगी गैस है, यह परबैंगनी किरणों का अवशोषण करती हैं और हानिकारक किरणों से भूपृष्ठ पर जीवन की रक्षा करती हैं।

वायुमण्डल का संघटन – (देखें तालिका 8.1)
जलवाष्प एवं धूल कण मौसम एवं जलवायु के प्रमुख चर हैं। ये सभी संघनन के स्रोत है, तथा सूर्य से प्राप्त होने वाली अथवा पृथ्वी से विकिरित ऊर्जा के प्रमुख अवशोषक हैं। ये वायुमण्डल की स्थिरता को भी प्रभावित करते हैं। वायुमण्डल में जलवाष्य की मात्रा विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने के साथ कम होती जाती है। इसका लगभग 90 प्रतिशत भाग वायुमण्डल से 6 किमी नीचे रहता है। वायुमण्डल के इस भाग में ही धूल कण, नमक तथा पराग आदि के ठोस कण निलम्बित रहते है।

वायुमण्डल की ऊपरी परत मे अति सूक्ष्म धूल कण पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की किरणों को प्रकीर्णन कर देते हैं और नीले रंग के अतिरिक्त सभी रंगों को अवशोषित कर लेते हैं। इसके विपरीत बड़े आकार वाले कण सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय के लाल और नारंगी रंगों के लिए उत्तरदायी हैं।

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 13 हम बीमार क्यों होते हैं Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science हम बीमार क्यों होते हैं  InText Questions and Answers

प्रश्न श्रृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 200)

प्रश्न 1.
अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियाँ बताइए।
उत्तर:
अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियाँ हैं –

  1. सामुदायिक एवं व्यक्तिगत स्वच्छता तथा अच्छी आर्थिक परिस्थिति।
  2. अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ तथा किसी स्वास्थ्य समस्या के होने पर विशेषज्ञ से सलाह।

प्रश्न 2.
रोगमुक्ति की कोई दो आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए।.
उत्तर:
रोगमुक्ति की दो आवश्यक परिस्थितियाँ हैं

  1. व्यक्तिगत स्वच्छता एवं स्वास्थ्य रोगमुक्ति के लिए आवश्यक है।
  2. सन्तुलित भोजन तथा पर्याप्त आराम (नींद) रोगमुक्ति हेतु आवश्यक है।

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प्रश्न 3.
क्या उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे हैं ? अथवा भिन्न क्यों ?
उत्तर:
नहीं, उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे होना आवश्यक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि रोगमुक्त अवस्था तथा स्वास्थ्य समान नहीं हो सकते। हम बिना किसी रोग के भी अस्वस्थ हो सकते हैं। केवल कोई रोग न होने का अर्थ यह नहीं है कि आप स्वस्थ हैं। अच्छे स्वास्थ्य का तात्पर्य है अपनी विशिष्ट क्षमताओं को प्रदर्शित करने की सामर्थ्य। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य समाज तथा समुदाय से भी सम्बन्धित होता है। अतः अच्छे स्वास्थ्य की स्थितियाँ तथा रोगमुक्त परिस्थितियाँ समान या भिन्न हो सकती हैं।

प्रश्न शृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 203)

प्रश्न 1.
ऐसे तीन कारण लिखिए जिससे आप सोचते हैं कि आप बीमार हैं तथा चिकित्सक के पास जाना चाहते हैं। यदि इनमें से एक भी लक्षण हो तो क्या आप फिर भी चिकित्सक के पास जाना चाहेंगे? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर:
जब हम बीमार होते हैं तब शरीर के एक अथवा अनेक अंगों एवं तन्त्रों की क्रिया या संरचना में खराबी परिलक्षित होती है। ये बदलाव रोग के लक्षण के रूप में खराबी का संकेत देते हैं, जो सिरदर्द, खाँसी, दस्त, किसी घाव से पस आना हो सकते हैं। इनके आधार पर हमें यह ज्ञात होता है कि हम बीमार हैं लेकिन हमें बीमारी का प्रकार नहीं पता होता। अत: यह आवश्यक हो जाता है कि हम चिकित्सक के पास जायें ताकि वह रोग को पहचान कर सही निदान कर सके।

यदि इन लक्षणों में से कोई एक ही लक्षण प्रदर्शित हो रहा है तो सामान्यतः हम डॉक्टर के पास नहीं जाते क्योंकि किसी एक लक्षण से हमारे सामान्य स्वास्थ्य तथा हमारी कार्य करने की सामर्थ्य पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। लेकिन यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण बार-बार प्रदर्शित हों तो उसे चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए तथा उसके परामर्शानुसार उचित निदान कराना चाहिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से किसके लम्बे समय तक रहने के कारण आप समझते हैं कि आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा तथा क्यों ?

  1. यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं।
  2. यदि आपके शरीर पर जूं है।
  3. यदि आप मुँहासों से ग्रस्त हैं।

उत्तर:
पीलिया रोग के लम्बे समय तक रहने से हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। यह एक दीर्घकालिक यकृत रोग है जो तेजी से न फैलकर धीरे-धीरे फैलता है तथा इसका बुरा प्रभाव शरीर पर लम्बे समय तक रहता है।

प्रश्न श्रृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 210)

प्रश्न 1.
जब आप बीमार होते हैं तो आपको सुपाच्य तथा पोषणयुक्त भोजन करने का परामर्श क्यों दिया जाता है ?
उत्तर:
जब हम बीमार होते हैं तो हमें सुपाच्य एवं पोषण युक्त भोजन करने का परामर्श दिया जाता है जिससे कि हम जल्दी से जल्दी आहार से पोषक तत्वों को ग्रहण कर, उससे प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बीमारी से लड़ने में कर सकें।

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प्रश्न 2.
संक्रामक रोग फैलने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर:
संक्रामक रोग सूक्ष्मजीवों द्वारा फैलते हैं। इनके फैलने की प्रमुख विधियाँ हैं –

  1. अनेक सूक्ष्मजीव वायु द्वारा फैलते हैं। जब हम खाँसते या छींकते हैं तो उस समय ये सूक्ष्मजीव छोटी-छोटी बूंदकों के रूप में वायुमण्डल में फैल जाते हैं। ये स्वस्थ मनुष्य में रोग के संक्रमण फैलते हैं। इस विधि द्वारा क्षयरोग तथा न्यूमोनिया फैलाता है।
  2. कभी-कभी सूक्ष्मजीव पेयजल के साथ मिलकर रोग फैलाते हैं; जैसे-हैजा के जीवाणु।
  3. लैंगिक सम्पर्क द्वारा भी संक्रामक रोगों का संक्रमण होता है। इस विधि से सिफलिस, एड्स जैसे रोगों का संक्रमण होता है।
  4. कुछ रोग रोगवाहक कीटों द्वारा फैलते हैं; जैसे-मलेरिया, मच्छर द्वारा फैलता है।

प्रश्न 3.
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए आपके विद्यालय में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक
उत्तर:
संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए हमारे विद्यालय में निम्नलिखित सावधानियाँ आवश्यक हैं- .

  1. विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को विद्यालय में प्रवेश से वंचित रखना।
    स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था करना।
  2. साफ-सफाई की उचित व्यवस्था, विशेष रूप से शौचालयों की सफाई की नियमित एवं उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना।
  3. विद्यालय के किसी भाग में जल का भराव न होने देना ताकि मच्छर न विकसित हो पायें।
  4. विद्यालय में समय-समय पर कीटनाशकों का छिड़काव की व्यवस्था होना।
  5. समय-समय पर टीकाकरण की सुविधा तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता हेतु व्याख्यान द्वारा विद्यार्थियों को स्वच्छता के लिए जागरूक करना।

प्रश्न 4.
प्रतिरक्षीकरण क्या है ?
उत्तर:
प्रतिरक्षीकरण शरीर की एक प्रतिरक्षात्मक क्रिया है जिसके द्वारा संक्रामक रोगों से शरीर की प्रतिरक्षा होती है। इसके अन्तर्गत हम किसी विशिष्ट संक्रामक कारक को मृत अवस्था (अरोग्य अवस्था) में शरीर में प्रवेश करा देते हैं जिससे शरीर उस रोगाणु विशेष से बचने हेतु प्रतिरक्षी उत्पन्न कर उस रोग विशेष से प्रतिरक्षा उत्पन्न कर लेता है।

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प्रश्न 5.
आपके पास में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में टीकाकरण के कौन-कौन से कार्यक्रम उपलब्ध हैं ? आपके क्षेत्र में कौन-कौन सी स्वास्थ्य सम्बन्धी मुख्य समस्याएँ हैं?
उत्तर:
हमारे पास में स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में टीकाकरण के प्रमुख कार्यक्रम हैं-DPT (डिफ्थीरिया, परटुसिस तथा टिटेनस), हिपेटाइटिस B, पोलियो वैक्सीन, MMR (खसरा, मम्स तथा रुबेला), पीलिया एवं टायफॉइड आदि। . हमारे क्षेत्र में पीलिया एवं टायफॉइड सम्बन्धी समस्याएँ मुख्य हैं।

क्रियाकलाप 13.1 (पृष्ठ संख्या 198)

प्रश्न 1.
भूकम्प अथवा चक्रवात जैसी आपदाओं के वास्तव में घटने के समय हमारे ऊपर क्या-क्या प्रभाव पड़ेंगे?
उत्तर:
इन आपदाओं का हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। हमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक तथा सामाजिक सभी प्रकार से क्षति उठानी पड़ेगी। हमारी अर्थव्यवस्था चरमरा जायेगी। अपने सगे-सम्बन्धियों को खोने का गम हमें भीतर तक हिला देगा। हमारे भूख और प्यास से कमजोर शरीर में अनेक संक्रामक रोगों के होने की सम्भावना बढ़ जायेगी तथा जगह-जगह पड़ी गन्दगी इन रोगों को बढ़ाने में उत्प्रेरक का कार्य करेगी।

प्रश्न 2.
आपदा घटित होने के पश्चात् कितने समय तक विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ पैदा होती रहेंगी?
उत्तर:
आपदा घटित होने के काफी समय पश्चात् तक (लगभग 1 से 2 माह) विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के पैदा होने की सम्भावना रहेगी।

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प्रश्न 3.
पहली स्थिति में (आपदा के समय) स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ते हैं ? तथा दूसरी स्थिति में (आपदा के पश्चात्) स्वास्थ्य सम्बन्धी कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
पहली स्थिति में (आपदा के समय) हमारा रक्त चाप अत्यधिक बढ़ जायेगा, हमें अत्यधिक घबराहट होगी। हृदयाघात भी हो सकता है। जबकि दूसरी स्थिति में (आपदा के पश्चात्) विभिन्न संक्रामक रोगों के होने की सम्भावना बढ़ जायेगी, अनिद्रा तथा मानसिक आघात जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

क्रियाकलाप 13.3 (पृष्ठ संख्या 199)

प्रश्न 4.
आपका स्थानीय प्राधिकरण आपके मोहल्ले में उत्पन्न कचरे का निपटारा कैसे करता है ?
उत्तर:
निर्धारित स्थान से कचरे को उठाकर, शहर से बाहर फेंककर।

प्रश्न 5.
क्या प्राधिकरण द्वारा किये गये उपाय पर्याप्त हैं ?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 6.
यदि नहीं, तो इनके सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
निर्धारित स्थान से कचरे को नियमित रूप से उठाना चाहिए। कचरे से ऐसी वस्तुएँ जिनका चक्रीकरण सम्भव है; जैसे-प्लास्टिक के टुकड़े, पॉलीथिन, टिन, ग्लास आदि को पृथक् कर चक्रीकरण हेतु भेजना चाहिए तथा शेष कचरे को विघटित करके खाद के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए है।

प्रश्न 7.
आप अपने घर में दैनिक/साप्ताहिक उत्पन्न होने वाले कचरे को कम करने के लिए क्या करेंगे?
उत्तर:
घर में दो डस्टबिन रखेंगे। एक डस्टबिन में गीला कचरा; जैसे-फल एवं सब्जियों के छिलके आदि इकट्ठा करेंगे तथा दूसरी डस्टबिन में ऐसा कचरा जो अपघटन योग्य नहीं है; जैसे-प्लास्टिक, काँच, धातु के टुकड़े आदि इकट्ठा करेंगे। अब पहली डस्टबिन के कचरे का उपयोग गमले के पौधों के लिए खाद बनाने या पशुओं के चारे के रूप में करेंगे तथा दूसरी डस्टबिन के कचरे को चक्रीकरण हेतु देकर उसका निदान करेंगे।

क्रियाकलाप 13.5 (पृष्ठ संख्या 205)

प्रश्न 8.
पता कीजिए कि आपकी कक्षा में कुछ दिनों पहले कितने विद्यार्थियों को जुकाम/खाँसी/बुखार हुआ था ?
उत्तर:
4 (चार) विद्यार्थियों को।

प्रश्न 9.
उनको बीमारी कितने दिनों तक रही ?
उत्तर:
4-7 दिनों तक।

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प्रश्न 10.
इनमें से कितनों ने एण्टीबायोटिक का उपयोग किया ?
उत्तर:
दो विद्यार्थियों ने।

प्रश्न 11.
जिन्होंने एण्टीबायोटिक लिया था वे कितने दिनों तक बीमार रहे।
उत्तर:
4-7 दिन।

प्रश्न 12.
जिन्होंने एण्टीबायोटिक नहीं लिया वे कितने दिनों तक बीमार रहे ?
उत्तर:
4-7 दिन।

प्रश्न 13.
क्या इन दोनों में कोई अन्तर है ? यदि हाँ तो क्यों; यदि नहीं तो क्यों नहीं ?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि जुकाम/खाँसी/बुखार वाइरस के संक्रमण द्वारा हुआ तथा कोई भी एण्टीबायोटिक वाइरस के संक्रमण पर प्रभावकारी नहीं है। अतः विद्यार्थियों के एण्टीबायोटिक लेने से रोग की तीव्रता या उसकी समय अवधि कम नहीं हुई।

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क्रियाकलाप 13.7 (पृष्ठ संख्या 210)

प्रश्न 14.
स्थानीय प्रशासन रैबीज को फैलने से रोकने के लिए क्या कर रहा है ? क्या ये उपाय पर्याप्त हैं ? यदि नहीं, तो आप इसके सुधार के लिए क्या सुझाव देंगे ?
उत्तर:
रैबीज को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा केवल जिला चिकित्सालयों में कुत्ता यां बन्दर के काटे व्यक्ति को प्रति रैबीज टीके उपलब्ध कराये जा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या सीमित है जिससे अनेक गरीब लोग इससे वंचित रह जाते हैं। ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इस समस्या के उपाय के लिए प्रतिरैबीज टीकों का बजट बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही आवारा कुत्तों एवं बन्दरों की संख्या को नियन्त्रित करने हेतु समय-समय पर अभियान चलाकर इन पशुओं को पकड़कर उनका बधियाकरण कर देना चाहिए। साथ ही उनके (पशुओं के) भी प्रतिरैबीज टीके लगा देने चाहिए।

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प्रश्न 1.
पिछले एक वर्ष में आप कितनी बार बीमार हुए ? बीमारी क्या थी?
(a) इन बीमारियों को हटाने के लिए आप अपनी दिनचर्या में क्या परिवर्तन करेंगे?
(b) इन बीमारियों से बचने के लिए आप अपने पास-पड़ोस में क्या परिवर्तन करना चाहेंगे ?
उत्तर:
यह व्यक्ति विशेष के ऊपर निर्भर करता है कि वह एक वर्ष में कितनी बार बीमार हुआ। एक व्यक्ति वर्ष में एक बार भी बीमार नहीं होता जबकि दूसरा कई बार बीमार होता है। यह व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता तथा उसके स्वास्थ्य सम्बन्धी अच्छी आदतों पर निर्भर करता है। यदि व्यक्ति पोषक तत्वों युक्त सन्तुलित आहार ग्रहण करे तथा पर्याप्त आराम एवं व्यायाम करे और अपने आस-पड़ोस में स्वच्छ वातावरण रखे तो वह संक्रामक रोगों से आसानी से बच सकता है।

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प्रश्न 2.
डॉक्टर/नर्स/स्वास्थ्य कर्मचारी अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा रोगियों के सम्पर्क में अधिक रहते हैं। पता करो कि वे अपने आप को बीमार होने से कैसे बचाते हैं ?
उत्तर:
डॉक्टर/नर्स/स्वास्थ्य कर्मचारी रोगियों के सम्पर्क में आते समय अनेक सावधानियाँ अपनाते हैं जिनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं –

  1. जब वे रोगियों का परीक्षण करते हैं तो दस्ताने एवं मास्क का प्रयोग करते हैं।
  2. वे जब चिकित्सालय में या संक्रमित स्थान में होते हैं तो हमेशा अपने शरीर को मेडिकेटेड कवर से ढके रखते हैं।
  3. रोगी का परीक्षण करने के बाद वे अपने हाथों को कीटाणुनाशक से साफ करते हैं। इसके अतिक्ति वे पोषक तत्वों युक्त सन्तुलित आहार ग्रहण कर अपनी प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ रखते हैं तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं।

प्रश्न 3.
अपने पास-पड़ोस में एक सर्वेक्षण कीजिए तथा पता लगाइए कि सामान्यतः कौन-सी तीन बीमारियाँ होती हैं ? इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए अपने स्थानीय प्रशासन को तीन सुझाव दीजिए।
उत्तर:
प्रमुख तीन सामान्य बीमारियाँ हैं- मलेरिया, क्षयरोग तथा पीलिया। इन बीमारियों को फैलने से रोकने हेतु सुझाव –

  1. मलेरिया उन्मूलन हेतु जल भराव को रोकना, नाली. आदि की उचित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा कीटनाशकों के छिड़काव द्वारा मच्छरों को नष्ट करना।
  2. वाहित मल का उचित प्रकार से निस्तारण करना तथा स्वच्छ पीने के जल आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  3. क्षयरोग से बचाव हेतु उचित साफ-सफाई की व्यवस्था करना।

प्रश्न 4.
एक बच्चा अपनी बीमारी के बारे में नहीं बता पा रहा है। हम कैसे पता करेंगे कि
(a) बच्चा बीमार है ?
(b) उसे कौन-सी बीमारी है ?
उत्तर:
(a) बच्चा बीमार है, यह उसके व्यवहार से पता चल जाता है; जैसे वह रो रहा है, खाना नहीं ले रहा, या उसका व्यवहार अचानक परिवर्तित हो रहा है।
(b) उसे कौन-सी बीमारी है ? ये दिखाई देने वाले लक्षणों; जैसे-बुखार, दस्त एवं मल का रंग, शरीर का पीलापन, उल्टी आदि द्वारा निर्धारित होता है।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति पुनः बीमार हो सकता है ? क्यों ?
(a) जब वह मलेरिया से ठीक हो रहा है।
(b) वह मलेरिया से ठीक हो चुका है और वह चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है।
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है ?
उत्तर:
(c) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और फिर चेचक के रोगी की सेवा करने वाले व्यक्ति की पुनः बीमार होने की सम्भावना अधिक है। क्योंकि मलेरिया से ठीक होने के पश्चात् चार दिन के उपवास से उसका प्रतिरोधक तन्त्र और कमजोर हो जायेगा। अब यदि ऐसा व्यक्ति चेचक के रोगी की सेवा करेगा तो उसे चेचक के वाइरस से संक्रमण की सम्भावना अधिक रहेगी क्योंकि उसका प्रतिरोधक तन्त्र अत्यन्त कमजोर है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से किन परिस्थिति में आप बीमार हो सकते हैं ? क्यों?
(a) जब आपकी परीक्षा का समय है ?
(b) जब आप बस तथा रेलगाड़ी में दो दिन तक यात्रा कर चुके हैं ?
(c) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है।
उत्तर:
(c) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है तो आपके बीमार होने की सम्भावना अधिक है। खसरा वायु द्वारा फैलने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वाइरस रोग है। आपके मित्र के पास रहने से इसका संक्रमण श्वसन द्वारा आपको हो सकता है तथा आप बीमार हो सकते हैं।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3

प्रश्न 1.
किस चतुर्थांश में या किस अक्ष पर बिन्दु (-2, 4), (3, -1),(-1, 0) (1, 2) और (-3, -5) स्थित है?
कातीय तल पर इनका स्थान निर्धारण करके अपने उत्तर सत्यापित कीजिए।

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उत्तर:
बिन्दु। (-2, 4) में भुज ऋणात्मक तथा कोटि धनाराक है, अत: यह द्वितीय ननुर्थाश में स्थित होगा।
बिन्दु (3, -1) में शुज पनात्मक तथा कोटि ऋणात्मक है. अत: क चतुर्थ चतुर्थाश में स्थित होगा।
विन्दु (-1, 0) में भुन रूपात्मक तथा कोटि शुन्य है. अतः वह ऋणात्मक -अक्ष पर स्थित होगा।
बिन्दु (1, 2) में भुज व कोटि धनात्मक है, अत: वर प्रथम चतुर्वाश में स्थित होगा।
बिन्दु। (1, -5) में भूत्र व कोटि अनामक है, अत: यह तृतीय चर्याश में स्थित होगा।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3

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प्रश्न 2.
अक्षों पर दूरी का उपयुक्त एकक लेकर नीचे सारणी में दिए गए बिंदुओं को तल पर आलेखित कीजिए:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3

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उत्तर:
1 cm = 1 एकक लेकर हम x – अक्ष और y – अक्ष खाँचते हैं। बिन्दुओं की रिपतियों को आकृति में गहरे बिन्दुओं से दिखाया गया है। सारणी में दिए गए संख्या-युग्मों (-2, 8), (-1, 7), (0, -1.25) (1, 3) और (3, -1) को क्रमश: A, B, C, D और E से निरूपित किया गया है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.3

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दीजिए
(i) कार्तीय तल में किसी बिन्दु की स्थिति निर्धारित करने वाली क्षैतिज और ऊख्याधर रेखाओं के क्या नाम है?
(ii) इन दो रेखाओं से बने तल के प्रत्येक भाग का नाम बताए।
(iii) उस विन्दु का नाम बताइए जहाँ ये दो रेखाएं प्रतिच्छेदित होती है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2

उत्तर:
(i) कार्तीय तल में किसी बिन्दु की स्थिति निर्धारित करने वाली मैतिज और साधर रेखाओं को हम निर्देशांक अक्ष कहते हैं तथा इनके नाम :-अक्ष और न अक्ष
(ii) दोनों अक्ष तल को चार भानों में विभाजित करते हैं। प्रत्येक भाग को मतुपाश (quadrants) कहा जाता है।
(iii) वह बिन्दु जहाँ तिज व उध्वाधर रेखाएँ प्रतियोदित होती है उसे मूलबिन्दु कहते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्न आकृति 34 देखकर निम्नलिखित को लिखिए
(i) B के निर्देशांक
(ii) C के निर्देशांक
(iii) निर्देशांक (-3, -5) द्वारा पहचाना गया बिन्दु
(iv) निर्देशांक (2, -4) द्वारा पहचाना गया बिन्दु
(v) D का भुज
(vi) विन्दु H को कोटि
(vii) बिन्दु L के निर्देशांक
(viii) बिन्दु M के निर्देशांक

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.2
उत्तर:
आकृति 34 से स्पष्ट है कि:
(i) बिन्दु B जे x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमश: -5 और 2 है। अत: विन्दु B के निर्देशांक (-5, 2) हैं।
(ii) बिन्दु C के x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमशः 5 और -5 है। अतः बिन्दु के निर्देशांक (5, -5) हैं।
(iii) यह बिन्दु जिसके x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमशः -3 और 5 हैं, E है।
(iv) यह बिन्दु जिसके x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमशः 2 और -4 है. G है।
(v) बिन्दु D का x – निर्देशांक 6 है अनः बिन्दु D का भुन 6 है।
(vi) बिन्दु H का y – निर्देशांक – 3 है, अत: बिन्दु H की कोटि -3 है।
(vily बिन्दु L के x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमशः 0 और 5 हैं। अतः बिन्दु L के निशंक (0. 5) हैं।
(viii) बिन्दु M के x – निर्देशांक और y – निर्देशांक क्रमश: – 3 और 0 है। आत: बिन्दु M के निर्देशांक (-3, 0) हैं।

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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.1

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BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.1

प्रश्न 1.
एक अन्य व्यक्ति को आप अपने अध्ययन मेज पर रखे टेबल लैंप की स्थिति किस तरह वताएंगे?
उत्तर:
माना लैंप बिन्दु P पर है तथा मेज एक तल है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.1
अब मेज के दो लम्बवत् किनारों को ox और OY मान – लो अर्थात् x-axis और y-axis अब दोनों किनारों से टेबल लैंप की दूरी मापो। माना OX से टेबल लैंप की दूरी 2 cm है और OY से 4 cm है।
अत: टेबल लैंप P की स्थिति OX तथा OY किनारों के सन्दर्भ में (4, 2) है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.1

प्रश्न 2
(सड़क योजना) : एक नगर में दो मुख्य सड़कें हैं,जो नगर के केन्द्र पर मिलती हैं। ये दो सड़कें उत्तर-दक्षिण की दिशा और पूर्व-पश्चिम की दिशा में हैं। नगर की अन्य सभी सड़कें इन मुख्य सड़कों के समांतर परस्पर 200 मीटर की दूरी पर हैं। प्रत्येक दिशा में लगभग पाँच सड़कें हैं। 1 सेंटीमीटर = 200 मीटर का पैमाना लेकर अपनी नोट बुक में नगर का एक मॉडल बनाइए। सड़कों को एकल रेखाओं से निरूपित कीजिए। आपके मॉडल में एक-दूसरे को काटती हुई अनेक क्रॉस-स्ट्रीट (चौराहे) हो सकती हैं। एक विशेष क्रॉस-स्ट्रीट दो सड़कों से बनी है, जिनमें से एक उत्तर-दक्षिण दिशा में जाती है और दूसरी पूर्व-पश्चिम की दिशा में। प्रत्येक क्रॉस-स्ट्रीट का निर्देशन इस प्रकार किया जाता है : यदि दूसरी सड़क उत्तर-दक्षिण दिशा में जाती है और पांचवीं सड़क पूर्व-पश्चिम दिशा में जाती है और ये एक क्रॉसिंग पर मिलती हैं, तब इसे हम क्रॉस-स्ट्रीट (2, 5) कहेंगे। इसी परंपरा से यह ज्ञात कीजिए कि
(1) कितनी क्रॉस-स्ट्रीटों को (4, 3) माना जा सकता है?
(ii) कितनी क्रॉस-स्ट्रीटों को (3, 4) माना जा सकता है?
उत्तर:
स्ट्रीट प्लान आकृति 3-3 में दिखाया गया है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 3 निर्देशांक ज्यामिति Ex 3.1
(i) एक क्रॉस-स्ट्रीट को (4, 3) माना जा सकता है, इसे यहाँ विन्दु P से दर्शाया गया है।
(ii) एक क्रॉस-स्ट्रीट को (3, 4) माना जा सकता है, इसे यहाँ बिन्दु Q से दर्शाया गया है।

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