Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3 आँखों देखा गदर

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3 आँखों देखा गदर (विष्णुभट्ट गोडसे वरसईकर)

 

आँखों देखा गदर पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

Aankhon Dekha Gadar Bihar Board Class 11th प्रश्न 1.
अंग्रेजों को किले को समझने में कितने दिन लगे? फिर उन्होंने क्या किया?
उत्तर-
झाँसी का किला बड़ा मजबूत और सुरिक्षत था। बाहरी लोगों के लिए उस पर कब्जा जमाना मुश्किल था। अंग्रेजों ने जब उस पर चढ़ाई की तो वे मोर्चा बाँधने में पहले दो दिन विफल रहे और तीसरे दिन वे मौके समझ गये। जब अंग्रेजों को झाँसी के किले पर चढ़ाई हेतु मौके समझ आ गये तब उन्होंने रात होने पर सभी ठिकाने साधकर साधारण मोर्चे बाँधे और चार घड़ी रात रहते ही किले के पश्चिमी बाजू पर गरनाली तोपों से वार करने लगे।

Class 11 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई को पहली बार निराशा कब हुई?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का एक अद्भुत वीरांगना थी। वे बड़े साहस और धैर्यपूर्वक किले पर कब्जा जमाने आये अंग्रेजों के मोर्चों को विफल कर रही थी। लेकिन जब उन्होंने देखा कि अंग्रेज रात में ही मोर्चे बाँधकर शहर पर गरनाली तोपों से गोले बरसाने शुरू : कर दिये है, तब उन्हें पहले-पहल निराशा हुई।

Digant Hindi Book Class 11 Pdf Download Bihar Board प्रश्न 3.
शहर में गोले पड़ने से आम जनता को क्या-क्या कष्ट होने लगें?
उत्तर-
जब अंग्रेजों की ओर से झाँसी शहर में गोले पड़ने लगे, तब वहाँ की जनता को भयंकर परेशानियाँ हाने लगी। गोला जहाँ भी गिरता, वहाँ सौ-पचास आदमियों को घायल कर देता और दस पाँच को तो मौत के मुंह में सुला ही देता। गोला यदि घर पर गिरता तो वह घर जलकर राख हो जाता तथा उसके धक्के से आस-पास के छोटे-छोटे घर भी गिर जाते। गोलों . के गिरने से जहाँ-तहाँ आग लग जाती थी। इस प्रकार सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गई। कोई कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था।

Digant Hindi Book Class 11 Bihar Board प्रश्न 4.
सातवें दिन सूर्यास्त के बाद क्या हुआ? रात के समय तो क्यों चालू की गई?
उत्तर-
लड़ाई के दौरान सातवें दिन सूर्यास्त के बाद झाँसी की तरफ से पश्चिमी मोर्चे की तोप बंद हो गई, क्योंकि शत्रुओं के बार के आगे वहाँ कोई गोलंदाज टिक नहीं पाया। इस प्रकार शत्रुओं द्वारा जब झाँसी के किले का वह मोर्चा भी तोड़ डाला गया तो उसके प्रतिकार और अपने बचाव में रातों-रात कुशल कारीगरों द्वारा बूर्ज पर मोर्चा बाँधकर तोपें चालू कर दी गई, ताकि असावधान अंग्रेज सैनिकों को मार भगाया जा सके।

Bihar Board Class 11th Hindi Book प्रश्न 5.
सिपाहियों को जब लगा कि झाँसी अंग्रेजों के हाथ लग जाएगी तो उन्होंने क्या किया?
उत्तर-
हिन्दुस्तानी सिपाहियों ने यह जानते-समझते हुए भी कि अब हमारी हार होने वाली है और झाँसी अंग्रेजों को हाथ लग जाएगी, अपनी हिम्मत न हारी। वे सच्चे शूर-वीर की तरह
और भी दूने-चौगुने उत्साह एवं वेग से उनका मुकाबला करने को तैयार हुए।

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf Download प्रश्न 6.
बाई साहब ने सरदारों से क्या कहा? बाई साहब के कहने का सरदारों पर क्या असर पड़ा?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी पर आये संकट और अपनी हार देख सब सरदारों को इकट्ठा कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होने स्पष्ट कहा कि अब तक झाँसी अपने ही बल पर लड़ी है और आगे भी लड़ेगी। इसे पेशवा अथवा किसी दूसरे के बल की कोई दरकार नहीं। बाई साहब के ऐसा कहने का सभी सरदारों पर अनुकूल असर पड़ा। वे सभी ओज एवं तेज से भर गये और मोर्चे बंदी के लिए कठिनतम परिश्रम करने लगे।

Class 11th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 7.
दसवें दिन की लड़ाई का क्या महत्त्व था? दसवें दिन की लड़ाई का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर-
झाँसी के किलों को जीतने के लिए अंग्रेजों और झांसी के बीच जारी युद्ध का दसवाँ दिन बेहद महत्त्वपूर्ण था। इस युद्ध पर झाँसी का भविष्य निर्धारित होने वाला था। क्योंकि, इधर झाँसी की मदद हेतु तात्या टोपे पंद्रह हजार फौजें लेकर पहुंच चुके थे और उधर कप्तान साहब भी अंग्रजी फौजों के साथ आ धमका था। इस प्रकार उस दिन की लड़ाई एक तरह से निर्णायक लड़ाई समझी जा रही थी।

उस दिन बड़ा भीषण युद्ध हुआ। दोनों ओर के सिपाही जी-जान लगाकर लड़ रहे थे। . आमने-सामने की लड़ाई हो रही थी। बिगुल, नरसिंघों, तोपों इत्यादि से सारा वातावरण थर्रा रहा था। चारों तरफ मार-काट और चीख-पुकार मची थी। किन्तु इस लड़ाई में धीरे-धीरे तात्यां-टोपे एवं एवं झाँसी की रानी पिछड़ने लगी और अंग्रेज फौज भारी पड़ी।

Bihar Board 11th Hindi Book Pdf प्रश्न 8.
भेदिए ने लक्ष्मीबाई को आकर क्या खबर दी? लक्ष्मीबाई पर इस खबर का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में झाँसी अंग्रेजों से बड़ी बहादुरी से लगातार पिछले ग्यारह दिनों से लड़ रही थी। उस रात जब बाई साबह रात को रोजाना की तरह ही शहर के और किले पर गश्त लगाकर जब बंदोबस्त कर रही थी तो एक भेदिए ने आकर यह खबर दी कि अंग्रेजी फौजी को इतनी मशक्कत के बाद भी अपनी जय मिलती नहीं दिखाई दे रही है और उनका गोला-बारूद भी अब समाप्तप्रायः हो गया। इसलिए कल पहर भर लड़ने के बाद उनका लश्कर. उठ जाएगा।’

भेदिए की उक्त खबर सुनकर बाई साहब को बहुत राहत मिली और असीम आनंद मिला। उनका चेहरा खुशी से खिल उठा तथा उनमें नई शक्ति और साहस का संचार हुआ।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Solution प्रश्न 9.
विलायती बहादुर कौन थे? पाठ में वर्णित उनकी भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के यहाँ जो पंद्रह सौ मुसलमान बहुत दिनों से नौकर थे, उन्हें ही विलायती बहादर कहा गया है। अंग्रेजों के साथ युद्ध में उनकी भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण रही थी। वे सब के सब विलायती बहादुर सचमुच बड़े बहादुर थे। जब-जब झाँसी पर विपत्ति आयी, इन विलायती बहादुरों ने अपनी जान की बाजी लगाई और लक्ष्मीबाई को तरफ से ब्रिटिश फौजों को छुट्टी का दूध याद कराया। शत्रुओं से घिरी झाँसी से लक्ष्मीबाई को बाहर निकालने में उनकी भूमिका सर्वथा सराहनीय रही।

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf प्रश्न 10.
लम्मीबाई को वृद्ध सरदार ने किन-किन अवसरों पर सलाह दी, इसके क्या परिणाम हुए?
उत्तर-
प्रस्तुत पाठ ‘आँखें देखी गदर’ में वृद्ध सरदार दो अवसरों पर लक्ष्मीबाई को सलाह देता है और दोनों ही बार उसके अच्छे परिणाम निकले हैं। जब पचहत्तर वर्ष का वह वृद्ध सरदार देखता है कि गोरे लोग विलायती बहादुरों की मार से घबराकर भाग गये हैं तथा छुप-छुपकर वार करने लगे है और बाई साहब बढ़ती ही जा रही है तो उसने समझाया कि इस समय आगे जाकर गोलियों का शिकार होना बेकार है। सैकड़ों गोरे अंदर घुस गये है और इमारतों की आड़ से गोलियाँ चला रहे है।

इसलिए इस समय मुफ्त में जान गँवाने से अच्छा है कि आप किले में जाकर दरवाजा बंद करके पहले सुरक्षित हो जाएँ और फिर कोई उपाय सोचे। बाई साहब उसकी बात मानकर वापस आ गई। दूसरी बार जब बाई साहब अंग्रेजी फौजों के वार से झाँसी की बर्बादी और लोगों की त्रासदी को देखते हुए जब अत्यंत खिन्न एवं उदास मन से लोगों की महल के बाहर चले जाने और स्वयं को महल में गोला-बारूद भरकर आग लगा कर जल-मरने की बात कहती हैं तो वही अनुभवी वृद्ध सरदार बड़ी समयोचित सलाह सुझाता है।

वह स्पष्ट समझाता है कि महारानी आपको इस तरह निराश नहीं होना चाहिए। आत्महत्या करना बड़ा पाप है। इससे तो बहुत अच्छा है कि आदमी युद्ध करता हुआ स्वर्ग जीतने का उद्यम करे। इसलिए आपको इस समय धैर्य एवं गंभीरतापूर्वक इस कठिन स्थिति से उबरने का रास्ता निकालना चाहिए। उस वृद्ध सरदार के प्रबोधन क बाद रानी लक्ष्मीबाई को बहुत कुछ धीरज बँधा और वे स्वस्थ हुई। उनकी निराशा दूर हुई तथा उनमें तथा उनमें आशा एवं ओज का संचार हुआ।

Bihar Board Class 11 Hindi Book प्रश्न 11.
शहर की दीवार पर चढ़ने के लिए अंग्रेजों ने कौन-सी युक्ति सोची?।
उत्तर-
झाँसी के शहर की दीवार पर चढ़ने के लिए अंग्रेजों ने यह उपाय किया कि हजारों मजदूरों के सिर पर घास के हजारों गट्ठर रखे दीवार के पास चले आये। वहाँ मजदूरों ने घास के गट्ठरों को एक पर एक रखकर उनकी सीढ़ि बना दी। इस प्रकार घास के गट्ठरों की बनी सीढ़ी के सहारे अंग्रेज शहर की दीवार पर चढ़कर उस पार से इस पार चले आये।

Class 11 Bihar Board Hindi Book प्रश्न 12.
गोरे लोगा झाँसी में घुसकर क्या करने लगे? अपने बचाने के लिए लोगों ने क्या किया?
उत्तर-
गोरे लोग झाँसी में घुसते ही कहर ढाने लगे। वे बच्चे बूढ़े और जवान किसी को भी न बख्शते थे। जो भी सामने पड़ता उसे गोली से उड़ा देते या तलवार के वार से काट देते। इसके अतिरिक्त वे लूट-पाट भी करने लगे।

गोरे सिपाहियों के इस आतंक से सबके प्राण काँपने लगे। अतः जान बचाने के लिए जिसे जो उपाय सूझता, वही करता। सभी लोग इधर-उधर भागने लगे। कोई इधर गली में भागा तो कोई घर के तहखाने में दुबका तो कोई खेतो में जा छिपा।

11th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 13.
“मैं महल में गोला-बारूद भर कर इसी में आग लगाकर मर जाऊँगी, लोग रात होते ही किले को छोड़कर चल जाएँ और अपने प्रणों की रक्षा के लिए उपाय करें।” लक्ष्मीबाई ने ऐसा क्यों कहा? इस कथन से उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है? अपने शब्दों मे लिखें।।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों को विद्वान लेखक विष्णुभट गोडसे बरसईकर ने लिखा है कि-जब लक्ष्मीबाई ने देखा कि गोरे सिपाही लोग शहर में उपद्रव मचा रहे हैं और निरीहप्रजा बैमौत मारी जा रही है, उसका सर्वस्व बड़ी निर्ममता से लूटा जा रहा है और वह इस दर्द और दुःख से बेहाल और असहाय बनी है तो उनके मन में करुण और दुख भर गया। उन्हें ऐसा लगा कि प्रजा की इस दारुण दशा का जिम्मेदार मै ही हूँ और शोक की इसी अतिशयता में उन्होंने अत्यंत निराश होकर कहा कि लोग रात होते ही किले से बाहर चल जाएँ और अपनी जान बचाएँ। मै इस महल में गोला-बारूद भरकर आग लगा दूंगी और उसी में जलकर भस्म हो जाऊँगी।

उपर्युक्त कथन से रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की स्त्री सुलभ कोमलता, परदुःखकातरता और करुणार्द्रता आदि विशेषताएँ प्रकट होती हैं। साथ ही साथ इससे उनके व्यक्तित्व का यह वीरता से भरा महत्त्वपूर्ण पक्ष भी ध्वनित होता है कि वे शत्रुओं के हाथ पड़ने की अपेक्षा स्वयं मरण को वरण करना अच्छा समझती थी।

Bihar Board 11th Hindi Book Pdf Download प्रश्न 14.
“यहाँ आत्महत्या करके पाप संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जीतना है।” वृद्ध सरदार के इस कथन का लक्ष्मीबाई पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ में लेखक ने देखा कि जब झाँसी में अंग्रेजी द्वारा प्रजा का सर्वस्व बड़ी निर्ममता से लूटा जा रहा था, तब बाई ने महल में गोला-बारुद भरकर आग लगाकर आत्म हत्या की बात कही तो वृद्ध सरदार ने यह कहा कि आत्म हत्या करके पाप संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जीतना उत्तम है, रानी लक्ष्मीबाई के मन में व्याप्त निराशा और दुःख की काली घटा छंट जाता है और उनमें पुनः आशा, ओज एवं वीरत्व का प्रकाश भर जाता है।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Name प्रश्न 15.
“मै आध सेर चावल की हकदार, मेरी ऐसी रांडमुड़ को विधवा धर्म छोड़कर यह सब उद्योग करने की कुछ जरूरत नहीं थी, परन्तु धर्म की रक्षा के लिए जब इस कर्म में प्रवृत्त हुई हूँ तो उसके लिए ऐश्वर्य, सुख, मान, प्राण सबकी आशा छोड़ बैठी हूँ।” लक्ष्मीबाई के इस कथन की सप्रसंग व्याख्या करें।
उत्तर-
सप्रसंग व्याख्या प्रस्तुत सारगर्भित व्याख्येय गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1’ में संकलित ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से अवतरित है, जिसके मूल मराठी लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर तथा हिन्दी अनुवाद अमृतलाल नागर है। जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रजों के सैन्य-व्यूह को वीरतापूर्वक भेदती हुई झाँसी के छोड़ चली तो लेखक भी वहाँ से अन्य लोगों के साथ निकल चले। रास्ते में कालपी से करीब छ: कोस पहले एक जगह उन्होने रात्रि-विश्राम किया। वहीं शोर में एकाएक हल्ला सुन उनकी नींद टूट गई। पहले तो वे बहुत घबराये पर पीछे यह जानकर निश्चित हुए कि ये फौजी दस्ते अंग्रेजी के नहीं, अपितु लक्ष्मीबाई के हैं। बाद में दोनों की पहचान होती है और रानी लक्ष्मीबाई बड़ी निराश मन-स्थिति में यह उद्गार प्रकट करती हैं।

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बड़ी वीरतापूर्वक कई दिनों से अंग्रेजों के साथ लड़ाई करती चली आ रही थीं। पर, दुर्भाग्वया दिन पर दिन विजयश्री उनसे दूर ही होती जा रही थी, अत: उनके अंदर निराशा और अवसाद घर कर चुके थे। उसी मनःस्थिति में वे यह हृदयोद्गार व्यक्त करती है कि मुझे किसी भोग-विलास की कोई इच्छा नहीं। मै तो सिर्फ आध सेर चावल की हकदार थी और वह मुझे आसानी से मिल जाता, इसलिए मुझे अपने विधवा-धर्म को परित्याग कर युद्ध-कर्म में प्रवृत्त होने की कोई जरूरत न थी।

किन्तु मै निश्चिंतता का जीवन छोड़ प्रजा एवं धर्म की रक्षा के विचार से युद्ध में कूद पड़ी हूँ और अब, जबकि मैं युद्ध छेड़ चुकी हूँ तो मुझे अपने लिए, सुख ऐश्वर्य मान या प्राण का कोई महत्त्व नहीं। मुझे इनमें से किसी की परवाह नहीं, मैं सबकी आशा छोड़ चुकी हूँ। रानी लक्ष्मीबाई के उपर्युक्त कथन में उनके हृदय की निराशा, प्रजावत्सलता एवं धर्म परायणता का भाव सहज रूप तें अभिव्यक्त है। किन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें अपने किये पर कुछ अफसोस था, बल्कि यह तो युद्ध के दौरान विपक्षी की बढ़ती शक्ति और अपनी पराजय स्थिति से उत्पन्न वीरांगना की सहज, अकृत्रिम प्रतिक्रिया है।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Pdf प्रश्न 16.
“आप विद्वान हैं। अत: मेरे लिए पानी न खींचे।” लक्ष्मीबाई के इस कथन से उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है?
उत्तर-
जब युद्ध करते-करते पूरी तरह थक चुकी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को प्यास से परेशान देख लेकख पं. विष्णुट वरसईकर ने मटके से पानी निकालकर उन्हें पानी पिलाना चाहा तभी लक्ष्मीबाई ने कहा कि आप विद्वान व्यक्ति है, इसलिए मेरे लिए पानी न खीचे। मै खुद पी लेती हूँ लक्ष्मीबाई के इस कथन से यह पता चलता है कि उनके दिल में गुणियों-विद्वानों के लिए बड़ा आदर मान-सम्मान का भाव था। वे गुणी जनों से काम कराना अधर्म समझती थीं।

प्रश्न 17.
कालपी की लड़ाई का वर्णन लेखक ने किस तरह किया है? कालपी के युद्ध के तीसरे दिन सिपाहियों ने क्या किया?
उत्तर-
‘आँखों देख गदर’ पाठ के अंतर्गत लेखक ने कालपी की लड़ाई का बड़ा यथार्थपरक वर्णन किया है। कालपी में लगातार तीन दिन लड़ाई चली 1 पेशवा की फौज पहले ही बेकार हो चुकी थी। दिल्ली, लखनऊ, झाँसी वगैरह में भी अंग्रेजी की फतह हो चुकी थी, जिससे गदरवाले निराश हो चुके थे। बहुत-से पुराने अनुभवी सैनिक डर से पलटने छोड़कर चले गये थे। उनके स्थान पर नये लोग भर्ती किये गये। इन नये लोगों में सिपाहियों के साथ चोर, लुच्चे, लुटेरे भी शामिल थे। जिनका लक्ष्य लड़ाई न होकर लूट-पाट करना था।

कालपी में युद्ध के तीसरे दिन जब सिपाहियों को लगा कि अंग्रेजी फौजों से पार पाना मुश्किल है और जीत उन्हीं की होगी, तो उनमें से सैकड़ों लोग युद्ध का मैदान छोड़ शहर में घुसकर दंगा, लूट और स्त्रियों की दुर्दशा करने लगे। इतने में जब अंग्रेजों फौज भी आ गई तो वे सिपाही वहा से भाग चले।

प्रश्न 18.
लक्ष्मीबाई की मृत्यु किस तरह हुई? उनकी वीरता का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई एक अदभूत और अप्रतिम वीरांगना थी। यदि उन्हें शक्ति एवं साहस की देवी दुर्गा का अवतार कहा जाए, तो कदाचित अनुचित न होगा। झाँसी पर संकट का बादल मंडराया देख साहस की पुतली-सी स्वाभिमानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने की बजाय उनसे लोहा लेने के उपाय में लग गई। वे बड़ी कठिन परिश्रम करतीं, रात-रात भर जागकर रणनीति बनातीं और युद्ध के समय स्वयं दौड़-दौड़ कर सैनिकों को मनोबल और उत्साहवर्द्धन करती थीं। फिर भी, जब कालचक्र विपरीत रहा और झाँसी के दुर्ग में अंग्रेज प्रवेश कर गये तो उन्होंने न तो हिम्मत हारी और न ही आत्मसमर्पण किया, बल्कि एक वीर क्षत्राणी की भाँति अपने बहादुर जवानों को साथ लिये शत्रु-सेना को छिन्न-भिन्न करती हुई रणनीति के तहत कालपी पहुँची।

फिर जब मुरार पर अंग्रेजों का हमला हुआ तो तात्या टोपे और राव साहब कि साथ लक्ष्मीबाई ने भी वहाँ भीषण युद्ध किया। मुरार के भीषण संग्राम में ही उन्हें गोली लगी। फिर भी वीरता की प्रतिमूर्ति लक्ष्मीबाई आगे बढ़-बढ़ कर दुश्मनों का सफाया करती रहीं। इसी बीच उनकी जाँघ पर तलवार का करारा प्रहार हुआ और वे घोड़े से गिरने लगीं। यह देख तात्या टोपे ने उन्हें संभाला और घोड़े को आगे बढ़ा दिया। इस प्रकार झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने लड़ाई में कभी भी शत्रुओं को पीठ नहीं दिखाई और युद्ध क्षेत्र में ही वीरगति को प्राप्त हुई। वस्तुतः उनकी वीरता अनुपम थी, जो सदैव वीरों को प्रेरित और अनुप्रमाणित करती रहेगी।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित वाक्यों की सप्रसंग व्याख्या करें :

(क) परन्तु निराशा की शक्ति भी कुछ विलक्षण ही होती है।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगार्मिक पंक्ति पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग -1’ के ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से उद्धत है। इसके लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं। इसमें 1857 ई. के प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के आँखों देखा हाल का वर्णन किया गया है। झाँसी पर अंग्रेजी फौज हमला बोल चुकी है। झाँसी की मदद को तात्या टोपे भी पहुंचे हुए है। अंग्रेज और झाँसी के बीच भीषण संग्राम छिड़ा है, पर धीरे-धीरे झांसी की फौज पस्त होने लगती है और अंग्रेजों का हौसला बढ़ता जा रहा है। यह पंक्ति उसी संदर्भ में कथित है।

ऐसे तो अंग्रेजों की विजय देख झाँसी में हाहाकार मचा हुआ है, पर यह सच्चे शूर-वीरों की धरती है, जो अपनी आन की रक्षा में जान देना जानते हैं। जिनके लिए दुश्मन के आगे घुटने और यादहयों को यह ठित होने कापक्ति में निरी टेकने की बजाय उन्हें मारते हुए शहीद हो जाना, लाख गुना अच्छा है। सच्चे वीर कभी निराश नहीं होते और यदि कभी निराशा पास फटकती है तो उसी से वे विलक्षण शक्ति-स्फोट कराते है। झाँसी के सिपाहियों को यह जानकर कि निर्मम और निर्दय अंग्रेज ही जीतेंगे और झाँसी उन्हीं के हाथ लगेगी, साहस और शौर्य कुंठित होने की बजाय और बढ़ जाता है। वे और उत्साह एवं मनोबल के साथ युद्ध में जुट जाते हैं। प्रस्तुत पंक्ति में निराशा की विलक्षण शक्ति का संकेत किया गया है।

(ख) भेड़िए जब भेड़ों के झुंड पर झपटते हैं, तब भेड़ों के प्राण की जो दशा होती है वही इस समय लोगों की थी।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1’ में संकलित ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से ली गई है। इसके लेखक मराठी के सुप्रसिद्ध विद्वान पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर है। इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने गदर के दौरान झाँसी में अंग्रेजी फौजों के आत्याचार-उत्पात और उससे प्रभावित-भयातुर नागरिकों की असहायावस्था का बड़ा मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया है।

अंग्रेजी फौज झाँसी शहर में घुस चुकी थी और जनता पर बेंइतहा जुल्म ढा रही थी। बच्चा या बूढा जिसे भी सामने पाती; मौत के घाट उतार देती इतना ही नहीं, इन वहशियों ने शहर के एक भाग में आग भी लगा दी, जिससे सर्वत्र हाहाकार मच गया। उस समय निरीह नागरिकों को प्राण बचाने का कोई उपाय न सूझता था। इसी भीषण और करुण दृश्य का वर्णन करते हुए भेड़ों पर भेड़ियों के आक्रमण का उदाहरण दिया गया है। भेड़े अत्यंत निरीह और दुर्बल जीव होती हैं। भेड़िए के सामने उनका कोई वश नहीं चलता। जब भेडिये आक्रमण करते है तो भेड़ों की दशा अत्यंत करुण हो जाती है, उनके प्राण नशों में समा जाते हैं। वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती, अपनी जान भी नहीं बचा सकती। यही हाल उस गोरे सिपाहियों के आतंक और जुल्म के सामने झाँसी के निरीह एवं निहत्थी जनता की थी। इस पंक्ति के क्रूर सिपाहियों के लिए भेड़िए और निरीह जनता के लिए भेड़ों की उपमा बड़ी सटीक बैठती है।

(ग) आत्महत्या करना बड़ा पाप है, दुःख में धैर्य धारण करके गंभीरतापूर्वक सोचना चाहिए कि उससे बचने के लिए आगे कोई रास्ता निकल सकता है या नहीं।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित व्याख्येय पंक्तियों हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1 में संकलित ‘आँखें देखा गदर’ पाठसे अवतरित है। इसके लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं। इन पंक्तियों में लेखक ने जब लक्ष्मीबाई अंग्रजों की विजय और अपनी पराजय के साथ प्रजाजनों की असहायावस्था को देखती हैं तो वे अत्यंत चिन्तित, निराश और उदास-हताश हो जाती हैं।वे कहती है कि प्रजालोग रात में ही भाग कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ और मै इस महल में गोला बारूद भरकर आग लगाकर जल मरूँगी। उनके इसी कथन पर उनके वृद्ध सरदार का यह सारगर्भित कथन उल्लिखित है।

झाँसी का वह वृद्ध सरदार रानी लक्ष्मीबाई को प्रबोध देता हुआ कहता है कि आप जैसी वीर नारी के लिए ऐसा करना कदापि उचित नहीं। वीर कभी पलायनवादी नहीं होते, वे तो हँसकर संकटों का सामना करते हैं। वास्तव में आत्म हत्या की बात करना कायस्व. यह वीरों का धर्म नहीं। विपत्ति आने पर धैर्य से काम लिया जाना चाहिए और गंभीरतापूर्वक सोचकर आगे के लिए बचाव का रास्ता निकालना चाहिए। इस प्रकार यहाँ वृद्ध सरदार श्रांत-क्लांत तथा निराश-हताश एवं पीड़ित झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को समयोचित सही सलाह देता है। रान पर इसका तदनुकूल प्रभाव पड़ता है और वे पुनः अपने पुण्य-कर्म में सन्नद्ध होती है। विपत्ति में धैर्य धारण करने की सीख तथा आत्महत्या जैसे कृत्य की निन्दा की बात सर्वथा उचित लगता है।

भाषा की बात।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण चुनें
(i) दूरबीन से बेचूक निशाना साधकर तोप में पलीता लगाया और तीसरे धमाके में ही अंग्रेजों के उत्तम गोलंदाज को ठंडा कर दिया।
(ii) ये लाल भड़के गोले रात्रि के अंधकार में गेंद की तरह इधर-उधर आसमान में उड़ते हुए बड़े विचित्र लगते थे।
(iii) उस दिन महलों पर ही अंग्रेजी तोपों की शनि दृष्टि थी।
(iv) बहुत-से पुराने तजुर्बेकार पलटनी लोग अपने प्रणों के भय से पलटने छोड़कर चले गए थे।
(v) राव साहब ने कहा कि शत्रु का कहर है; महलों में बड़े धोख होंगे।
(vi) इस तरह बड़ी राजी-खुशी से श्रीमंत राव साहब ने वहाँ अठारह दिन बिताए।
(vii) शहर का प्रबंध बहुत अच्छा कर रखा था।
(viii) कारीगर भी बड़े ही चतुर और काम में निपुण थे।
उत्तर-
इन पंक्तियों में निम्नलिखित विशेषण है-
(i) बेचूक, तीसरे, उत्तम, ठंडा।
(ii) लाल, भडके, बड़े, विचित्र।
(iii) अंग्रेजी, शनि।
(iv) बहुत, पुराने, तजुर्बेकार, पलटनी, अपने।
(v) बड़े।
(vi) बड़ी।
(vii) अच्छा।
(viii) चतुर, निपुण।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाएँ हलचल, हौलदिली, नाकाबंदी, जर्जर, बुर्ज, भाग्य, दूरबीन, मंजिल, भिक्षुक, किला, धूल
उत्तर-
हलचल-(स्त्रीलिंग)-पुलिस के आते ही चारों ओर हलचल मच गई। हौलदिली-(स्त्रीलिंग)-बम की मौजूदगी की अफवाह से रेलयात्रियों में हौलदिली फैल गई। नाकाबंदी-(स्त्रीलिंग)-विद्रोहियों ने गाँव की नाकाबंदी कर रखी है। जर्जर-(पुल्लिंग)-बरसात से सड़क जर्जर हो गया है। बुर्ज-(पुल्लिंग)-संध्या समय लोग किले के बुर्ज पर चढ़ गये। भाग्य-(पुल्लिंग)-सभी का अपना-अपना भाग्य होता है।

दूरबीन-(स्त्रीलिंग)-यह दूरबीन पुरानी है। मंजिल-(पुल्लिंग)-हमें अपनी मंजिल पर पहुँचना है। भिक्षुक-(स्त्रीलिंग)-भिक्षुक को देख किसे दया नहीं आती। किला-(पुल्लिंग)-झाँसी का किला बड़ा मजबूत था। धूल-(पुल्लिंग)-आपके चरणों के धूल भी पावन हैं।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ चैत, ग्रीष्म, नागरिक, पल्टन, वायव्य, बहादुर, शहर, बंबों, तंबू, नाकाबंदी, परकोटा, फौज, दालान, किला, खबर, गली, तहखाना, प्राण, ब्रह्मवर्त
उत्तर-

  • चैत – तद्भव
  • ग्रीष्म – तत्सम
  • नागरिक – तत्सम
  • पल्टन – विदेशज
  • वायव्य – तत्सम
  • बहादुर – विदेशज
  • गहर – विदेशज
  • बंबों – अनुकरणात्मक
  • तंबू – देशज
  • नाकाबंदी – संकर (नाका-हिन्दी, बंदी-फारसी)
  • परकोटा – तद्भव
  • फौज – विदेशज
  • दालान – विदेशज
  • किला – विदेशज
  • खबर – विदेशज
  • गली – तद्भव
  • तहखाना – विदेशज
  • प्राण – तत्सम
  • ब्रह्मवर्त – तत्सम।

उत्पत्ति की दृष्टि से शब्द मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं-तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज।

प्रश्न 4.
‘सारी हकीकत सनकर सबके पेट में पानी हो गया और हमारे प्राण भीतर ही भीतर घुटने लगे।’ यहाँ ‘पेट में पानी होना’ और ‘प्राण घुटना’ का क्या अर्थ है? इन मुहावरों के प्रयोग के बिना इस वाक्य को इस तरह लिखे कि अर्थ परिवर्तित न हो।
उत्तर-
पेट में पानी-स्तब्ध रह जाना, प्राण घुटना-भयाक्रांत होना, वाक्य-सारी हकीकत सुनकर सब के सब स्तब्ध रह गये और भयाक्रांत हो गये।

प्रश्न 5.
‘सर कर लिया’ मुहावरा का क्या अर्थ है? पाठ से अलग वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
‘सर कर लिया’ मुहावरे का अर्थ है- ‘जीत लिया’ वाक्यगत प्रयोग- 1962 ई. के आक्रमण में चीन ने भारतीय भू-भाग को सर कर लिया।

प्रश्न 6.
‘सीग समाना’ का क्या अर्थ है? वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
‘सींग समाना’ का अर्थ है- ‘गुजाइश होना’। दंगे के दौरान जहाँ सींग समाय भाग जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
इस पाठ में प्रयुक्त मुहावरों का सावधानी के साथ चयन करें और पाठ के आधार पर उनका अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं करें।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।

आँखों देखा गदर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के महत्व का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर-
हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम की सबसे पहली लड़ाई 1857 ई. में हुई थी। इसमें अन्य सभी देशी राजाओं और रानियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उनहोंने 1857 के गदर में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया था। जब अंग्रेजों ने झासी पर आक्रमण किया तो लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों का डटकर सामना किया और उनसे लोहा लिया। उन्होने अंग्रेजों के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया। लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के बीच घमासान युद्ध हुआ। बहुत-से अंग्रेज सैनिक इस युद्ध में मारे गए। दूसरी झाँसी की रानी अंतिम साँस तक युद्ध करती रही और अंत में वीरगति को प्राप्त हुयी। वास्तव में, भारतीय स्वंतत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई का महत्वपूर्ण योगदान था। वे देश को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराना चाहती थीं।

आँखों देखा गदर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आँखों देखा गदर नाम पाठ के लेखक कौन हैं।
उत्तर-
आँखों देखा गदर नामक पाठ के लेखक विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं।

प्रश्न 2.
आँखों देखा गदर किस प्रकार की रचना है?
उत्तर-
आँखों देखा गदर एक संस्मरण है।

प्रश्न 3.
1857 ई. का गदर किस कारण हुआ?
उत्तर-
चर्बी वाली कारतूस के कारण 1857 ई. का गदर प्रारंभ हुआ।

प्रश्न 4.
1857 ई. के गदर में किन-किन देशी राजाओं ने भाग लिया?
उत्तर-
1857 ई. के गदर में बहादुरशाह जफर, तात्या टोपे, वीर कुंवर सिंह तथा झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि ने भाग लिया।

आँखों देखा गदर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर।

I. सही उत्तर का सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग, या घ) लिखें।

प्रश्न 1.
‘आँखें देखा गदर’ के लेखक हैं
(क) रामचन्द्र शुल्क
(ख) हरिशंकर परसाई
(ग) विष्णुभट्ट
(घ) गोडसे बरसईकर
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 2.
‘आँखो देखा गदर’ कहाँ से लिया गया है?
(क) चिन्तामणि
(ख) माझा प्रवास
(ग) झाँसी की रानी
(घ) इसमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 3.
झाँसी की रानी की मृत्यु किस युद्ध में हुई?
(क) मुरार के युद्ध में
(ख) कालपी के युद्ध में
(ग) कानपुर के युद्ध में
(घ) ग्यालियर के युद्ध में
उत्तर-
(क)

प्रश्न 4.
‘माझा प्रवास’ का भाषांतर किसने किया था?
(क) चिन्तामणि विनायक वैद्य
(ख) जैनेन्द्र
(ग) अमृतलाल नागर
(घ) नामवर सिंह
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 5.
अंग्रेजों को किले समझने में कितने दिन लगे?
(क) तीन दिन
(ख) चार
(ग) पाँच दिन
(घ) आठ दिन
उत्तर-
(क)

प्रश्न 6.
सातवें दिन सूर्यास्त के बाद क्या हुआ?
(क) भयंकर तूफान आया
(ख) मोर्चे की तोप बन्द हो गई
(ग) अंग्रेज सैनिक भाग गए
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर-
(ख)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न.
1. शहर पर तोप के गोले शुरू होने से ……………. को बड़ा त्रास हुआ।
2. रात में शहर और किले पर …………. पड़ते थे।
3. परंतु …………… की शक्ति भी कुछ विलक्षण होती है।
4. दुख में धैर्य धारण करके गंभीरता पर्वक ……………… चाहिए।
5. आप विद्वान हैं, अतः मेरे लिए ……………… न खींचे।
उत्तर-
1. रैयत
2. गोले
3. निराशा
4. सोचना
5. पानी।

आँखों देखा गदर लेखक परिचय विष्णुभट्ट गोडसे वरसईकर (1828)

भारम के प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के गदर का आँखों देखा विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने वाले श्री विष्णुभट गोडसे वरसईकर का जन्म 1828 ई. में महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के ‘वरसई’ ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम पं. बालकृष्ण भट था। विष्णुभटजी ने स्वाध्याय द्वारा परंपरागत रूप में संस्कृत, मराठी आदि का गहन ज्ञान अर्जित किया था। उनका व्यक्तित्व आकर्षक एवं प्रभावशाली था। गौरवर्ण के ऊँचे और भव्य शरीर वाले विष्णुभटजी विद्वान एवं तेजस्वी पुरूष थे।

पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर कोई पेशेवर लेखक नहीं, अपितु आजीविका से कर्मकांडी और पुरोहित थे। उनकी थोड़ी-बहुत खेती थी, परन्तु अपर्याप्त। परिवार को ऋण मुक्त करने तथा उसके समुचित निर्वाह के लिए धनार्जन हेतु वे उत्तर भारत की ओर आये थे, किन्तु सन् 1857 के गदन में फंस गये। मार्च 1857 में बैलगाड़ी से वे पुणे पहुँचे और वहाँ से इंदौर, अहमदनगर, धुलिया, सतपुड़ा होते हुए मध्यप्रदेश में महू पहुँचे जहाँ उन्हें सिपाहियों से क्रांति की खबरें पहले-पहल मिलीं। सिपाहियों की मनाही के बावजूद वे आगे बढ़ते हुए उज्जैन, धारा होते हुए ग्वालियर पहुँचे।

इस बीच उन्होंने गदर की घटनाओं को बड़ी नजदीक से देखा-सुना था पुनः वे झाँसी आकर फंस गये। वहाँ वे इतिहासप्रसिद्ध वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रत्यक्ष संपर्क में आये और उनका आश्रय तथा विश्वास प्राप्त कर काफी दिनों तक उनके साथ किले में रहे। उन्होंने अनेक कष्ट सहकर उत्तर भारत के कई तीर्थो की यात्रा की और करीब ढाई साल बाद अपने गाँव वरसई वापस लौटे। वहीं उन्होंने अपने प्रिय यजमान श्री चिन्तामणि विनायक वैद्य के अनुरोध पर अपनी यात्रा का आँखों देखा हाल स्मरण के आधार पर लिखा-‘माझाा प्रवास’।

पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर की एक ही रचना है-माझा प्रवास (मेरा प्रवास), जो मूल रूप से मराठी में लिखित है। इस कृति में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित उनके संस्मरण प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत हुए है। इसका हिन्दी अनुवाद सुप्रसिद्ध कथाकार और लेखक अमृतलाल नागर ने ‘आँखों देखा गदर’ नाम से बीसवी सदी के चौथे दशक में प्रस्तुत किया। इस प्रकार यह एक उत्कृष्ट यात्रा-संस्मरण है, जिसमें विद्वान लेखक विष्णुभट द्वारा यात्राओं के दौरान देखी-सुनी बातों का बड़ा यथार्थ, जीवंत और चित्ताकर्षक वर्णन हुआ है।

आँखों देखा गदर पाठ का सारांश

भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के गदर का आँखों देखा विस्तृत विवरण प्रस्तुत करनेवाले भारतीय विष्णुभट गोडसे की उत्कृष्ट स्मृति ‘माझा प्रवास’ का प्रमाणिक भाषांतर ‘आँखों देखा गदर’ झाँसी प्रवास और लक्ष्मीबाई से जुड़े संस्मरण में अविकल रूप में प्रस्तुत है।

वसंत की विदाई और ग्रीष्म ऋतु के राज्य में एक दिन झांसी शहर के दक्षिणी मैदान में गोरे पलटनों ने तम्बू झाँसी को अपने-अपने खूनी पंजों में गाड़ चुका था। दूसरे दिन गोरे पलटनों ने मोर्चा बाँधकर युद्ध का शंखनाद कर दिया। झाँसी के सैनिकों ने भी अंग्रेजी आक्रान्ताओं को खदेड़ने के लिए रणभेड़ी की दुर्दभि बजा दिया। तीसरे दिन अंग्रेजी पलटनों को शहर या किले के मोर्चा का पता चल गया और उनकी गरनाली तोपें चलने लगीं।

शहर में तोप के गोले की अन्धाधुन्ध बारिस ने रैयतों को भयाक्रान्त कर दिया और छोटे घर खंडहर बनकर गिरने लगे। बाई साहब ने भी अंग्रेजों को ‘ईट का जनाब पत्थर’ से देने के लिए जबरदस्त नाकेबन्दी की। चौथे दिन अंग्रेजों के आक्रमक प्रहार ने किले के दक्षिण बुर्ज को बन्द कराकर हौलदिली फैला दी। दिन-रात लगातार युद्ध होने से शहर जर्जर हो गया। पाँचवें और छठे दिन भी युद्ध अनवरत जारी रहा। सातवें दिन सूर्यास्त के बाद शत्रुओं की तोपों ने बाई साहब के पश्चिमी मोर्चे को तोड़ डाला।

कारीगर की चतुरता से पुनः मोर्चा बन्दी कर तोपों का मुँह खोल देने से अंग्रेज बहुत हताहत हुए। आठवें दिन बड़ा प्रलय मचा तथा घनघोर युद्ध हुआ। इस विकट घड़ी में पेशवा की तरफ से मदद न मिलने से बाई साहब किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। दसवें दिन कालपी से तात्यां टोपें पन्द्रह हजार फौजों को लेकर झाँसी पहुँचे। परन्तु तात्या टोपी की अकुशलता या हिन्दी सिपहियों को अशूरता ने उन्हें टूटकर भागने पर मजबूर कर दिया।

इस प्रकार युद्ध की विभीषिका लगातार ग्यारह दिनों तक कायम रही। रानी लक्ष्मीबाई स्वयं अपने नेतृत्व में युद्ध का संचालन कुशलतापूर्वक की। परन्तु गोरी पलटनों ने घास की सीढ़ी बनाकर किले में घुस गए और भारी रक्तपात किया। बाई साहब ने भी पन्द्रह सौ विलायती बहादुरों की फौज का नेतृत्व कर अंग्रेजी पलटनों पर कहर ढा दिया। अंग्रेजी पलटनों की भीषण रक्तपात निरापराध प्राणियों की निर्मम हत्या ने बाई साहब को हिलाकर रख दिया। वह निरापराध प्राणियों की हत्या का पापी खुद को समझकर आत्महत्या के लिए उद्धत हो गई। परन्तु एक वृद्ध द्वारा आत्महत्या को महापाप करार देने तथा “आत्महत्या के पाप को संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जितना उत्तम है।” इन शब्दों से प्रभावित होकर वह मर्दाना पोशाक धारण कर अपने फौजों की जत्था के साथ कालपी के रास्ते चल दी।

कालपी के रास्ते में लेखक से उनकी मुलाकात हुई। प्यास से व्याकुल बाई साहब को पानी के लिए तैयार लेखक को मना कर दिया कि ‘आप विद्वान है’। उन्हें खुद कुएँ से पानी खींचकर पीया जिससे उनकी महानता के प्रति उनका सर श्रद्ध से झुक गया। कालपी में युद्ध तीन दिनों तक चला। सैकड़ों की हत्या हुई। युद्ध में हार का अभास मिलते ही बाई साहब, तात्या टोपे और राव साहब जंगलों के लिए निकल गए। ग्वालियर में शिंदे की बहुत पलटनियों ने पेशवा पर मुरार नदी पर गोली चलाने से इंकार कर दिया।

मुरार के घमासान युद्ध में झाँसीबाई को गोली लगी फिर तलवार का करार चोट खाकर महारानी घोड़े से गिरने लगीं। तात्यां टोपे ने उन्हें संभालकर घोड़ा आगे बढ़ा दिया। बाई साहब की नश्वर शरीर को एक जगह लोगों ने चिता पर रखकर तेज को तेज में विलीन कर दिया। रणाणण में क्रान्ति के दूत, मनुजता की पुजारी देवी स्वरूपिणी वीरांगना ने मृत्यु पाकर स्वर्ण जीता। इस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के देदीप्यमान सूर्य सदा के लिए अस्त हो गया। जब तक सृष्टि है, सूर्य और चन्द्रमा, धरती और जगत का अस्तित्व कायम है; उत्साह और शूरता से चमकनेवाली अनुजता के प्रेमाधिकारी, कालदधि का महास्तंभ आत्मा के नभ के तुंग केतू तथा मानवता के मर्मी सुजान, कालजयी, कालोदधि महास्तम्भ महारानी लक्ष्मीबाई का यशोगान इतिहास गाता रहेगा।

आँखों देखा गदर कठिन शब्दों का अर्थ।

बंदोबस्त-प्रबंध। गोलंदाज-गोला दागने वाला। रैय्यत-प्रजा। त्रास-भय। बंबा-पानी वाला बड़ा कनस्तर। नाकाबंदी-घेराबंदी। वायव्य-उत्तर-पश्चिम। बुर्ज-किले का सबसे ऊपरी गोलाकार हिस्सा। हौलदिली-भय, आतंक की मनोदशा। बुरुज-बुर्ज, गुंबद। अप्रतिम-फीका, चमकविहीन। जर्जर-कमजोर, पुराना। पलटन-सेना। नसेनी-सीढ़ी। ग्रास-निवाला। किंकर्तव्यविमूढ़-यह मनोदशा जिसमें कोई उपाय न सूझे। नरसिंहा-एक प्रकार का वाद्ययंत्र जो युद्ध में बजाया जाता है। बिगुल–एक प्रकार का वाद्ययंत्र जो युद्ध में बजाया जाता है। गाफिल-लापरवाह। परकोटा-किले की सुरक्षा दीवार। नादान- भोला।

रिसाला-घुड़सवार। भेदिया-जासूस, भेद बताने वाला। बख्शीश-इनाम। शनि दृष्टि-बुरी नजर। भंबक-बड़ा छेद। गश्त लगाना-पहरा देना। बाजू-बाँह और सहस्त्र हजार। विजन-निर्जन, जनशून्य। दीवानखाना-मुख्य हॉल। शोक विह्वल-दुःख से व्याकुल। आर्तनाद-दुःख से भरी पुकार। जुगत-उपाय, युक्ति। माल-असबाब-समान। चिंताक्रांत-चिंता से घिरा हुआ। महापातकी-महानीय, महापापी। शूर-वीर। खास महल-महल का भीतरी हिस्सा जिसमें राजा-रानी रहते हैं। लश्कर-सेना का पड़ाव। हकीकत-वास्तविकता। सर कर लेना-जीत लेना। आब-आभा, चमक।

युक्ति-उपाय। निरूपाय-लाचार। दत्तक पुत्र-गोद लिया पुत्र। खेड़ा-निर्जन मैदान। किंचित-थोड़ा। आरक्त-लाल। म्लान-मुरझाया हुआ। दैवगति-भाग्य का लिखा। संचय-जमा, इकट्ठा। अर्थ-धन। प्रत्यूष बेला-भोर का समय। लिलार-ललाट, भाग्य। दक्षिणी-दक्षिण में रहनेवाला। ब्रह्मावर्त-पुष्कर के आस-पास का इलाका। तजुर्बेकार-अनुभवी। जाहिरनामा-विज्ञप्ति, प्रकाशित सूची। नौसिखिए-अनुभवहीन। कवायद-परेड। मास-युद्ध में बजाया जाने वाला वाद्य। कारकुन-कर्मचारी। ताकीद-विदित, . चेतावनी, सावधान।

महत्त्वपूर्ण पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या

1. मुसर में घमासान युद्ध छिड़ गया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को गाली लगी, लेकिन वे लड़ती रहीं, अंग्रेजों की तलवार का करारा हाथ उनकी जाँघ पर लगा और वे वीरगति की प्राप्ति हुयीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ विष्णुभट गोडसे वरसईकर द्वारा रचित आँखें देखा गदर नमक संस्मरण से ली गयी हैं। इन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है कि अंग्रेजों और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बीच मुरार में निर्णायक युद्ध हुआ। इस युद्ध में लक्ष्मीबाई ने बड़ी वीरता से युद्ध किया और अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिए। युद्ध करते ही उन्हें गोली लगी और उनकी जाँघ पर तलवार से वार हुआ। जिसके कारण वे वीरगति को प्राप्त हुयी। इन पंक्तियों से उनके अदम्य उत्साह और वीरता की झलक दिखलायी पड़ती है। इसलिए झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 3 Now the leaves are falling fast

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 3 Now the leaves are falling fast

Now The Leaves Are Falling Fast Objective Questions Bihar Board 12th English Question 1.
Who is the poet of ‘Now the Leaves Are Falling Fast’ ?
(A) John Keats
(B) W.H. Auden
(C) Rupert Brooke
(D) T.S. Eliot
Answer:
(B) W.H. Auden

Now The Leaves Are Falling Fast Question Answer Bihar Board 12th English Question 2.
W.H. Auden was born in ?
(A) 1917
(B) 1908
(C) 1907
(D) 1913
Answer:
(C) 1907

Now The Leaves Are Falling Fast Questions And Answers Bihar Board 12th English Question 3.
W.H. Auden died in ?
(A) 1963
(B) 1953
(C) 1973
(D) 1965
Answer:
(C) 1973

Question Answer Of Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board 12th English Question 4.
The prams are-
(A) Running
(B) Rolling
(C) Standing
(D) Broken
Answer:
(B) Rolling

Now The Leaves Are Falling Fast Ka Question Answer Bihar Board 12th English Question 5.
Who disturb the ‘real delight’ of the ageing persons-
(A) Nurse’s flowers
(B) Starving people
(C) Whispering neighbours
(D) Cold
Answer:
(C) Whispering neighbours

Now The Leaves Are Falling Fast Meaning In Hindi Bihar Board 12th English Question 6.
W.H. Auden won the Pulitzer Prise in the year ?
(A) 1947
(B) 1958
(C) 1948
(D) 1946
Answer:
(C) 1948

12th English Objective Questions And Answers Pdf 2020 Question 7.
What are falling fast ?
(A) Snow
(B) Flowers
(C) Leaves
(D) Ball
Answer:
(C) Leaves

Bihar Board 12th English Objective Question Question 8.
In the second line of the poem, Now The Leaves Are Falling Fast’ ‘Nurse’ stands for—
(A) a plant
(B) a fruit
(C) a tree
(D) None of these
Answer:
(C) a tree

12th English Objective Questions And Answers Pdf Question 9.
In the poem, ‘Now The Leaves Are Falling Fast’ ‘Whispering neighbours’ stand for—
(A) agents of Life Insurance
(B) agents of State Bank of India
(C) agents of Sahara India
(D) agents of death
Answer:
(D) agents of death

Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board 12th English Question 10.
‘Trolls’ mentioned in the poem, ‘Now The Leaves are Falling Fast’ are mythological creatures.
(A) Scandinavian
(B) Indian
(C) Russian
(D) None of these
Answer:
(A) Scandinavian

12th English Objective Question Answer Question 11.
‘Now the Leaves are Falling Fast’ is poem.
(A) a pessimistic
(B) optimistic
(C) a pessimistic-cum-optimistic
(D) None of these
Answer:
(C) a pessimistic-cum-optimistic

English Class 12 Objective Questions Question 12.
Who has composed the poem, Now The Leaves Are Falling Fast’?
(A) W.H. Auden
(B) Walter de la Mare
(C) D.H. Lawrence
(D) Rupert Brooke
Answer:
(A) W.H. Auden

Now The Leaves Are Falling Fast Talks About The Of Human Life Question 13.
Auden won the Pulitzer prize in—
(A) 1947
(B) 1948
(C) 1949
(D) 1950
Answer:
(B) 1948

Class 12th English Objective Question Question 14.
For Auden poetry was—
(A) a light game
(B) an interesting game
(C) a serious game
(D) None of these

Question 15.
Auden was—
(A) a poet
(B) a verse dramatist
(C) a serious game
(D) All of these
Answer:
(D) All of these

Question 16.
‘Now The Leaves are Falling’ is
(A) a lyric
(B) an ode
(C) a sonnet
(D) an elegy
Answer:
(A) a lyric

Question 17.
‘Now The Leaves Are Falling Fast the ………….. frustration inherent in human life.
(A) reacts
(B) enacts
(C) accepts
(D) protests
Answer:
(B) enacts

Question 18.
W.H. Auden has written the poem—
(A) John Keats
(B) Walt Whitman
(C) W.H. Auden
(D) T.S. Eliot
Answer:
(C) W.H. Auden

Question 19.
The prams are —
(A) running
(B) standing
(C) lying
(D) rolling
Answer:
(D) rolling

Question 20.
The travellers are we beings, moving towards our death.
(A) human
(B) animal
(C) urbon
(D) rural
Answer:
(A) human

Question 21.
Human life is no better than —
(A) life
(B) death
(C) journey
(D) None of these
Answer:
(B) death

Question 22.
The leaves are falling —
(A) slow
(B) soon
(C) fast
(D) None of these
Answer:
(C) fast

Question 23.
Trees shed their leaves in —
(A) rain
(B) summer
(C) winter
(D) autumn
Answer:
(D) autumn

Question 24.
The ………….. has become dumb to see the leafless trees.
(A) hen
(B) sparrow
(C) nightingale
(D) peacock
Answer:
(C) nightingale

Question 25.
……………….. waterfall could bless the travellers passing through that way.
(A) Yellow
(B) White
(C) Red
(D) Grey
Answer:
(B) White

Question 26.
The falling of ………….. refer to the speedy arrival of death.
(A) leaves
(B) stones
(C) snows
(D) None of these
Answer:
(A) leaves

Question 27.
The ………….. of death are the whispering neighbour.
(A) messenger
(B) friends
(C) enemies
(D) God
Answer:
(A) messenger

Question 28.
‘Whispering neighbours, left and right’ is a line from the poem—
(A) An Epitaph
(B) Song of Myself
(C) Now the Leaves Are falling Fast
(D) Snake
Answer:
(C) Now the Leaves Are falling Fast

Question 29.
‘Nurse’s flowers will not last’ is a line written by—
(A) John keats
(B) John Donne
(C) Walt Whitman
(D) W.H. Auden
Answer:
(D) W.H. Auden

Question 30.
Who is the poet of ‘Now The Leaves Are Falling Fast ?
(A) John Keats
(B) W. H. Auden
(C) Rupert Brooke
(D) T.S. Eliot
Answer:
(B) W. H. Auden

Question 31.
The prams were……….
(A) big
(B) still
(C) rolling
(D) Lost
Answer:
(C) rolling

Question 32.
W. H. Auden was born in ?
(A) 1917
(B) 1900
(C) 1907
(D) 1910
Answer:
(C) 1907

Question 33.
W.H. Auden died in?
(A) 1968
(B) 1958
(C) 1973
(D) 1965
Answer:
(C) 1973

Question 34.
W. H. Auden won the Pulitzer prize in
(A) 1937
(B) 1958
(C) 1948
(D) 1842
Answer:
(C) 1948

Question 35.
The travellers are the persons.
(A) young
(B) old
(C) sick
(D) orphan
Answer:
(B) old

Question 36.
Travellers will be blessed with the
(A) river
(B) waterfall
(C) pond
(D) lake
Answer:
(B) waterfall

Question 37.
Diseases make human life……….
(A) miser
(B) mouser
(C) miserable
(D) wealthier
Answer:
(C) miserable

Question 38.
The leaves were fast
(A) snowing
(B) cut
(C) falling
(D) growing
Answer:
(C) falling

Bihar Board Class 9 History Solutions Chapter 5 जर्मनी में नाजीवाद का उदय

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 1 Chapter 5 जर्मनी में नाजीवाद का उदय Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 9 History जर्मनी में नाजीवाद का उदय Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

History Class 9 Bihar Board प्रश्न 1.
हिटलर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जर्मनी
(ख) इटली
(ग) जापान
(घ) आस्ट्रिया
उत्तर-
(घ) आस्ट्रिया

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 2.
नाजी पार्टी का प्रतीक चिह्न क्या था?
(क) लाल झंडा
(ख) स्वास्तिक
(ग) ब्लैक शर्ट
(घ) कबूतर
उत्तर-
(ख) स्वास्तिक

Bihar Board Solution Class 9 Objective Question प्रश्न 3.
‘मीनकेम्फ’ किसकी रचना है ?
(क) मुसोलनी
(ख) हिटलर
(ग) हिण्डेनवर्ग
(घ) स्ट्रेसमैन
उत्तर-
(ख) हिटलर

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 4.
जर्मनी का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र था
(क) आल्सस-लॉरेन
(ख) रूर
(ग) इवानो
(घ) बर्लिन
उत्तर-
(ख) रूर

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 5.
जर्मनी की मुद्रा का नाम क्या था ?
(क) डॉलर
(ख) पौंड
(ग) मार्क
(घ) रूबल
उत्तर-
(ग) मार्क

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

1. हिटलर का जन्म …………… ई० में हुआ था।
2. हिटलर जर्मनी के चांसलर का पद …………… ई० में संभाला था।
3. जर्मनी ने राष्ट्रसंघ से संबंध विच्छेद …………… ई० में किया था।
4. नाजीवाद का प्रवर्तक …………… था।
5. जर्मनी के निम्न सदन को …………… कहा जाता था।
उत्तर-
1. 20 अप्रैल, 1889,
2. 30 जनवरी, 1933,
3. 1933,
4. हिटलर,
5. राइख स्टैग ।

स्तम्भ मिलान सम्बन्धी प्रश्न :

Bihar Board Solution Class 9 Social Science Objective प्रश्न 1.
स्तम्भ ‘क’ और स्तम्भ ‘ख’ से मिलान करें-
Bihar Board Solution Class 9 History
उत्तर-
(i)-(ग), (ii)-(क), (iii)-(ख), (iv)-(घ), (v)-(ङ)

सही और गलत :

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 1.
हिटलर लोकतंत्र का समर्थक नहीं था।
उत्तर-
सही

Bihar Board 9th Class History Book प्रश्न 2.
नाजीवादी कार्यक्रम यहूदी समर्थक था।
उत्तर-
सही

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 3.
नाजीवाद में निरंकुश सरकार का प्रावधान था।
उत्तर-
सही

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 4.
वर्साय संधि में हिटलर के उत्कर्ष के बीज निहित थे।
उत्तर-
सही .

Bihar Board Class 9 History प्रश्न 5.
नाजीवाद में सैनिक शक्ति एवं हिंसा को गौरवान्वित किया जाता है।
उत्तर-
सही

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Class 9 History Solution प्रश्न 1.
टिप्पणी लिखें
(i) तानाशाह
(ii) वर्साय संधि
(iii) तुष्टिकरण की नीति
(iv) वाइमर गणराज्य
(v) साम्यवाद
(vi) तृतीय राइख
उत्तर-
(i) तानाशाह-शासन की ऐसी व्यवस्था जिसमें शासक निरंकुश तथा दूसरे का हस्तक्षेप नहीं रखता जिसमें जनता राज्य के लिए होता है।
(ii) वर्साय संधि-प्रथम विश्वयुद्ध के बाद विश्वशांति के लिए 28 जून, 1919 को विजित राष्ट्रों जर्मनी के साथ एक संधी फ्रांस के वर्साय शहर में की गई।
(iii) तुष्टिकरण की नीति-किसी आक्रामक शक्ति की कार्यवाही को मूक सहमति देना है । जैसे फासिस्ट राष्ट्र कई देशों पर आक्रमण करते रहे और ब्रिटेन, फ्रांस चुप रहे।
(iv) वाइमर गणराज्य-जर्मन संविधान सभा का प्रथम बैठक 5 फरवरी, 1919 ई० को बाइमर नामक स्थान पर हुई । इसलिए यह वाइमर गणराज्य कहलाया।
(v) साम्यवाद-प्राचीन काल से चली आ रही पूँजीवादी पद्धति एवं सामंत वाद को मिटाकर ऐसी शासन व्यवस्था कायम किया जाना जिसमें स्वतंत्रता, समानता और वंधुत्व की भावना का विकास हो, साम्यवाद है।
(vi) तृतीय राइख-हिटलर के चांसलर बनने पर जर्मनी में गणतंत्र की समाप्ति हुई और नात्सी क्रान्ति का आरंभ हुआ जिसे हिटलर ने ‘तृतीय राइख’ का नाम दिया।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

Bihar Board Class 9 History Book प्रश्न 1.
वर्षाय संधि ने हिटलर के उदय की पृष्ठभूमि तैयार की। कैसे?
उत्तर-
वर्षाय की संधि ने जर्मनी और हिटलर को उद्वेलित कर दिया। हिटलर ने इसे ‘राजमार्ग की डकैती’ कहा । हिटलर का व्यक्तित्व बड़ा ही आकर्षक और प्रभावोत्पादक था । हिटलर जर्मन जाति की मनोदशा से पूरी तरह परिचित था। वह जानता था कि जर्मनीवासी वर्षाय की संधि के अपमान को भूले नहीं हैं। अतः अपने भाषणों में वह संधि का और संधि करनेवाले को ‘नवंबर क्रिमिनल्स’ कहना नहीं भूलता । वह यहाँ तक कहता था कि वर्साय के संधि पत्र को फाड़ दो । जनता उसके विचारों से उसकी ओर आकृष्ट हुई। जनता उसे अपने राष्ट्रीय अपमान का बदला लेनेवाला एवं राष्ट्रीय गौरव की स्थापना करने वाला समझने लगे। इस प्रकार वर्साय की संधि उसके उत्थान की पृष्ठ भूमि तैयार कर दी थी।

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 2.
वाइमर गणतंत्र नाजीवाद के उदय में सहायक बना, कैसे?
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी में एक क्रान्ति हुई । जर्मनी का सम्राट केसर विलियम देश छोड़ कर भाग गया और वहाँ राजतंत्र का पतन हो गया । राजतंत्र के पतन के बाद वहाँ गणराज्य की स्थापना हुई। जर्मनी के इतिहास में यह गणराज्य वाइमर गणराज्य के नाम से विख्यात है। हिटलर के उत्थान से पूर्व इसने अनेक समस्याओं को जन्म दिया। इसी ने वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर किए । महंगाई और बेरोजगारी बहुत बढ़ गयी। 1929 ई० की महामंदी ने और जटिल बना दिया । सेना भी असंतुष्ट थी। फलस्वरूप जनता का इससे मोह भंग हो गया हिटलर को अच्छा अवसर मिल गया, उसने गणराज्य का विरोध किया, उसकी असफलताओं पर विचार किया और उसने नाजीवाद को बढ़ावा दिया । बढ़ावा ही नहीं बल्कि नाजीवाद कायम कर दिया।

Class 9 History Bihar Board प्रश्न 3.
नाजीवाद कार्यक्रम ने द्वितीय विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की कैसे?
उत्तर-
नाजीवाद के निम्नलिखित कार्यक्रम थे

  • नाजीवाद उदारवाद और लोकतंत्र का कहर विरोध की अवधारणा है। अतः सत्ता प्राप्त करते ही हिटलर ने लोकतांत्रिक आवाज को दफन करने का प्रयास किया जो राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हुआ ।
  • नाजीवाद समाजवाद का प्रबल विरोधी है। हिटलर ने ॥ समाजवाद के विरुद्ध आवाज बुलंद किया। उसने अपने पूँजीपतियों का अपनी ओर मिला लिया। हिटलर के इस कार्य से इंग्लैंड तथा फ्रांस की ओर से अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त हुआ जिसके कारण उसका मनोबल बढ़ता गया जिससे पूरा विश्व एक भयंकर युद्ध के नजदीक अपने को खड़ा पाया।
  • उग्रराष्ट्रवाद-हिटलर प्रचंड उग्रवादी एवं निरंकुश था । उसने राजनीतिक विरोधियों का दमन किया । उसने दूसरे का राजनैतिक जीवन समाप्त कर दिया। अब जर्मनी में एक पार्टी थी-नाजी पार्टी एवं एक नेता था-हिटलर । इस प्रकार नाजीवाद कार्यक्रम ने द्वितीय विश्वयुद्ध के तटपर ला खड़ा किया।

प्रश्न 4.
क्या साम्यवाद के भय ने जर्मन पूँजीपतियों को हिटलर का समर्थक बनाया?
उत्तर-
1917 ई० की रूसी क्रान्ति का प्रभाव जर्मनी पर पड़ा यहाँ भी अनेक युवक साम्यवादी संगठन का निर्माण किए। साम्यवादियों ने वाइमर गणतंत्र को उखाड़ने एवं सर्वहारा वर्ग का अधिनायकवाद लाने का प्रयास किया । यह प्रयास जर्मनी में राष्ट्रीयता के लिए एक निश्चित खतरा था। देश के उदारवादी लोग साम्यवाद की बढती हई शक्ति देश के लिए संकट समझते थे। हिटलर ने जनता को साम्यवाद के विनाशकारी परिणामों से अवगत कराया। जर्मनी का उद्योगपति, पूँजीपति एवं जमींदार वर्ग काफी भयभीत हो गए। क्योंकि साम्यवादी व्यवस्था में-देश की सारी सम्पत्ति राष्ट्रीय संपत्ति हो जाती । उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व समाप्त कर दिया जाता और उत्पादन व्यवस्था में निजी मुनाफे की भावना को निकाल दिया जाता । उद्योग पर मजदूरों का नियंत्रण हो जाता। इसी भय से भयभीत होकर जर्मन पूँजीपतियों ने हिटलर का साथ दिया।

प्रश्न 5.
रोम-बर्लिन टोकियो धुरी क्या है ?
उत्तर-
अबीसीनियई युद्ध में जर्मनी ने इटली की सहायता की थी। अतः रोम (इटली की राजधानी) और बर्लिन (जर्मनी की राजधानी) ने आपस में एक संधि कर ली यह रोम-बर्लिन धुरी के नाम से जाना जाता है। 1936 ई० में जर्मनी और जापान ने साम्यवाद के विरुद्ध एक आपसी समझौता किया । फलतः यह त्रिदलीय संधि रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी के नाम से विख्यात हुआ। ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिटलर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 ई० को आस्ट्रिया के ब्रौना नामक शहर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उसका लालन-पालन सही तरह से नहीं हो सका। बचपन में वह चित्रकार बनना चाहता था परन्तु उसकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अंततः उसने सेना में नौकरी कर ली । प्रथम विश्वयुद्ध में वह जर्मनी की तरफ से लड़ा और युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के लिए उसे ‘आयरन क्रास’ प्राप्त हुआ था

हिटलर 1921 ई० में नाजी पार्टी की स्थापना की, और जर्मनी की सत्ता हथियाने का प्रयास करने लगा । पर असफल हो गया और जेल भेज दिया गया। जहाँ उसने मेन केम्फ (Mein Kemf) अर्थात ‘मेरा संघर्ष’ नामक पुस्तक की रचना की। जेल से बाहर आने के बाद, जर्मनी के राष्ट्रपति ने उसे 30 जनवरी, 1933 ई० को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। 1934 ई० में जर्मन राष्ट्रपति हिंडेनवर्ग की मृत्यु हो गई। अब वह पूर्णतः तानाशाह बन गया । वे देश का फ्यूहरर (नेता) बन गया। उसने ‘एक राष्ट्र, एक देश और एक नेता’ (one people. one impire and one leader) का नारा दिया। 1945 ई० तक वह जर्मनी का भाग्य विध पता बन गया। हिटलर का आकर्षक और प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व था। वह भाषण देने में अत्यंत निपुण था । अपने भाषणों से वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर अपनी ओर आकर्षित कर लेता था उसके सतारूढ़ होने में जनमत का उसके पक्ष में होना अत्यन्त सहायक सिद्ध हुआ । हिटलर जर्मन जाति की मनोभावना से भली भाँति परिचित था । वह जानता था कि जर्मन निवासी वर्साय की संधि के अपमान को नहीं भूले हैं । इसलिए वह अपने भाषणों से संधि और इसे करनेवाले’ ‘नवम्बर क्रिमिनल्स’ कहना नहीं भूलता था। जनता उसके विचारों से उसकी ओर आकृष्ट हुई। जर्मनी में उसकी धाक जम गई।

प्रश्न 2.
हिटलर की विदेश नीति जर्मनी की खोई प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक साधन था । कैसे?
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पराजित जर्मनी पर मित्र राष्ट्रों द्वारा वर्साय संधि की अपमानजनक शर्ते लाद दी गई थी, जिसे हिटलर नहीं भूल पाया था। निजी दर्शन के अनुसार वह शक्ति के बल पर जर्मन साम्राज्य की सीमा और गौरव को बढ़ाना चाहता था इसी से उसकी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त होने की संभावना थी। ऐसा हिटलर समझता था । हिटलर की विदेश नीति के मूलतत्व में अपमानजनक वर्साय संधि को समाप्त करना, जर्मनी को एक सूत्र में बाँधना तथा जर्मन साम्राज्य का विस्तार करना था। यूरोप में साम्यवाद को रोकना चाहता था। इन सब नीतियों को लागू कर हिटलर अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहता था और .. वह अपनी नीतियों को कार्यान्वयन में सक्रिय हो गया।

  • राष्ट्रसंघ से पृथक होना-वर्साय की कठोरता और अपमानजनक संधि से जर्मन आहत थे । राष्ट्रसंघ का सदस्य बने रहने से जर्मनी को कोई लाभ नहीं था। अतः उसने 1933 ई० में जेनेवा निःशस्त्रीकरण की शर्ते सभी राष्ट्रों पर समान रूप से लागू करने की मांग की परन्तु जब उसे सफलता नहीं मिली तो उसने 1933 ई० में राष्ट्रसंघ की सदस्यता छोड़ने की घोषणा कर दी।
  • वर्साय की संधि को भंग करना-हिटलर ने वर्साय की संधि को मानने से इन्कार कर दिया, उसे नहीं मानते हुए संधि की धज्जियाँ उड़ा दी और 1935 ई० से वर्साय की संधि को मानने से इन्कार कर दिया ।
  • पोलैंड के साथ दस वर्षीय समझौता-1934 ई० में हिटलर ने पोलैंड के साथ 10 वर्षीय समझौता किया कि वे एक दूसरे की वर्तमान सीमाओं का किसी भी प्रकार अतिक्रमण नहीं करेंगे।
  • ब्रिटेन से समझौता-जून, 1935 में जर्मनी तथा ब्रिटेन में समझौता हो गया जिसके अनुसार ब्रिटेन ने स्वीकार कर लिया कि वह (जर्मनी) अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा सकता है, वशर्ते वह अपनी नौ सेना 35 प्रतिशत से अधिक न बढ़ाए । हिटलर की यह कूटनीतिक विजय थी।
  • रोम-बर्लिन धुरी-जर्मनी मित्र की तलाश में इटली की ओर हाथ बढ़ाया फलतः रोम-वर्लिन धुरी का निर्माण हुआ।
  • कामिन्टन विरोधी समझौता-साम्यवादी खतरा से बचने के लिए जर्मनी, इटली एवं जापान के बीच कामिन्टन विरोधी समझौता 1936 ई० में संपन्न हुआ जो बाद में ‘धुरी राष्ट्र’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।
  • आस्ट्रिया एवं चेकोस्लोवाकिया का विलयन-जर्मन भाषा-भाषी को एक सूत्र में बाँधने का हिटलर को विदेश नीति का लक्ष्य था । उसने आस्ट्रिया को अपने राज्य में मिला कर वह गौरवान्वित हुआ। उसका मनोबल काफी बढ़ गया । इस तरह वह अपनी साख बनाने में सफल हुआ।

प्रश्न 3.
नाजीवादी दर्शन निरंकुशता का समर्थक एवं लोकतंत्र का विरोध था। विवेचना कीजिए।
उत्तर-
नाजी दर्शन सर्वाधिकारवाद या निरंकुशता का समर्थक था। वह सारी शक्ति एक व्यक्ति अथवा राज्य में केन्द्रित करना चाहता था । इसलिए यह जनतंत्रात्मक व्यवस्था एवं लोकतंत्र का विरोधी था । नाजी दर्शन में संसदीय संस्थाओं के लिए कोई स्थान नहीं था। नाजी सारी शक्ति एक महान और शक्तिशाली नेता के हाँथों में सौंप देने की बात करते थे।

(i) लोकतंत्र का विरोध-जर्मनी में सत्ता सँभालने के बाद ही हिटलर ने सारी शक्तियाँ अपने हाथों में केन्द्रित कर ली तथा एक तानाशाह बन बैठा । उसने प्रेस तथा वाक् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया एवं विरोधी दलों का पूर्णतः सफाया कर दिया। उसने शिक्षण संस्थाओं तथा जनसंचार पर भी प्रतिबंध लागू किया। इस प्रकार जर्मनी में लोकतांत्रिक आवाज को दफन करने का प्रयास हुआ जो बाद में राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हुआ।

(ii) निरंकुशता का समर्थक-नाजीवाद राजा की निरंकुश शक्ति पर बल प्रदान करता है । जर्मनी में हिटलर निरंकुश शक्ति का सहारा लिया । सत्ता में आते ही उसने गुप्तचर पुलिस ‘गेस्टापो’ का संगठन किया जिसका आतंक पूरे जर्मनी पर छा गया । उसने विशेष कारागृह की स्थापना की जिसके माध्यम से राजनीतिक विरोधियों का दमन किया । राइस्टांग की इमारत में हिटलर ने खुद आग लगवाई परन्तु उसका दोषारोपण समाजवादियों पर लगा दिया । इस तरह राजनैतिक जीवन समाप्त कर दिया गया । अब जर्मनी में एक पार्टी थी, एक नेता था-हिटलर ।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 2 ढहते विश्वास

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 2 Chapter 2 ढहते विश्वास Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 2 ढहते विश्वास

Bihar Board Class 10 Hindi ढहते विश्वास Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

ढहते विश्वास कहानी Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
लक्ष्मी कौन थी? उसकी पारिवारिक परिस्थिति का चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
लक्ष्मी ‘ढहते विश्वास’ कहानी की प्रमुख पात्र है। उसका पति (लक्ष्मण) कलकत्ता में नौकरी करता है। पति द्वारा प्राप्त राशि से उसका घर-गृहस्थी नहीं चलता है तो वह तहसीलदार साहब के घर का कामकर किसी तरह जीवन-यापन कर लेती है। पूर्वजों के द्वारा छोड़ा गया एक बीघा खेत है। किसी तरह लक्ष्मी ने उसमें खेती करवायी है। वर्षा नहीं होने से अंकुर जल गये तो कहीं-कहीं धान सूख गये। एकतरफ सूखा तो दूसरी तरफ लगातार वर्षा से लक्ष्मी का हृदय काँप उठठा है। उसे बाढ़ का भयावह दृश्य नजर आने लगता है।

Dhate Vishwas Question Answer Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
कहानी के आधार पर प्रमाणित करें कि उड़ीसा का जन-जीवन बाढ़ और सूखा से काफी प्रभावित रहा है?.
उत्तर-
उड़ीसा का भौगोलिक परिदृश्य ऐसा है कि वहाँ प्रायः बाढ़ और सूखा का प्रकोप होता रहता है। प्रकृति की विकरालता शायद उड़ीसा के लिए ही होता है। प्रस्तुत कहानी सूखा और बाढ़ दोनों का सजीवात्मक चित्रण किया गया है। देवी नयी के तट पर बसा हुआ एक गाँव जहाँ कुछ दिन पहले अनावृष्टि के कारण खेतों में लगी हुई फसलें जल-भुन गई। हताश और विवश ग्रामीण आने वाले भविष्य को लेकर चिन्तित थे कि अचानक अतिवृष्टि होने लगी। लोगों की आंशकाएँ बढ़ गई कि कहीं बाढ़ न आ जाये। नदी का उत्थान बढ़ता जा रहा था। ग्रामीण बाँध टूटे नहीं इसके लिए रात-दिन उसका मरम्मत करने में लग जाते हैं। उन ग्रामीणों के लिए यह पहला बाढ़ नहीं है। वृद्ध लोग पुराने दृश्यों को याद कर संशंकित हो उठते हैं। नदी का प्रवाह बढ़ता जाता है और बाँध टूट जाता है। चारों तरफ पानी फैल जाता है। लोग ऊँचे स्थान पर आश्रय लेते हैं। लोग जीवन-मौत से जुझने लगते हैं। उस क्षेत्र के लोग बाढ़ और सूखा से परिचित हो गये हैं। धीरे-धीरे बाढ़ समाप्त हो जाती है किन्तु उसकी त्रासदी का दंश उन्हें आज भी सहनी पड़ती है।

ढहते विश्वास कहानी के लेखक Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 3.
कहानी में आये बाढ़ के दृश्यों का चित्रण अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।
उत्तर-
बाढ़ शब्द सुनते ही मन-मस्तिष्क में तरह-तरह के प्रश्न उठने लगते हैं। त्रासदी का ऐसा तांडव जो जीव-जगत को तबाह कर दे। उड़ीसा जैसा प्रदेश प्रायः बाढ-सूखा से त्रस्त रहता . है। प्रस्तुत कहानी में आये हुए बाढ़ का चित्रण बड़ा ही त्राग्दीपूर्ण है। देवी नदी के किनारे स्थित लक्ष्मी का गाँव प्राय: बाढ़ की चपेट में आ जाता है। लगातार वर्षा होने से लक्ष्मी को अन्दर से झकझोर देता है। मनुष्य की आवाज उसके शब्द, आनन्द, कोलाहल सब रेत में दफन हो गये हैं। दलेई बाँध टूटने से नदी का पानी सर्वत्र फैल गया है। चारों तरफ चीत्कार सुनाई पड़ती है। लक्ष्मी के मन में अच्छे-बुरे ख्याल आने लगते हैं। पति की अनुपस्थिति उसे खटकने लगती है। लोग ऊँची जगहों पर शरण पाने के लिए बेतहाशा दौड़ पड़ते हैं। लक्ष्मी अपने बेटे की प्रतीक्षा में बिछड़ जाती है। किसी तरह अपने बच्चों को लेकर वह दौड़ पड़ती है। धारा में उसके पैर उखड़ जाते हैं। बरगद की जंटा पकड़कर किसी तरह पेड़ पर चढ़ जाती है। देखते-देखते बरगद का पेड़ भी डूबने लगता है। लक्ष्मी अपनी साड़ी के आधी-भाग से कमर का बाँध लेती है। वह कुछ ही समय में अचेत हो जाती है। टीले पर चढ़े हुए लोग अपने परिचितों को ढूंढ रहे थे। कोई किसी की सहायता नहीं कर सकता था। लाश की तरह एक जगह टिकी हुई लक्ष्मी को सहसा होश आ जाता है। वह अपने छोटे बेटे को ढूँढने लगती है। हिम्मत हार चुकी वह अनायास पेड़ की शाखा-प्रशाखा की जोड़ में फंसे एक छोटे बच्चे को उठा लेती है। वह उसका बेटा नहीं है। उसका शरीर फुला हुआ है। फिर भी वह उस नन्हें से बच्चे को अपने स्तन से सटा लेती है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 4.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।
उत्तर-
रचना-भाव का मुख्य द्वार शीर्षक होता है। शीर्षक रचना की रुख्ता एवं व्यापकता को परिलक्षित करता है। शीर्षक का चयन रचनाकार मुख्यत: घटना, पत्र, घटना-स्थल, उद्देश्य एवं मुख्य विचार-विन्दु के आधार पर करता है। विद्वानों के अनुसार शीर्षक की सफलता, औचित्य एवं मुख्य विचार सार्थकता उसकी लघुता सटीकता मुख्य विचार एवं भाव व्यंजना पर करती है।

आलोच्य कहानी का शीर्षक इस कहानी के मुख्य चरित्र से जुड़ा हुआ है। पूरी कहानी पर लक्ष्मी का व्यक्तित्व और कृतित्व छाया छितराया हुआ है। मेहनत करनेवाली लक्ष्मी पति से दूर रहकर भी अपना भरण-पोषण कर लेती हो पति द्वारा भेजे गये राशि से उसका घर-खर्च नहीं चलता है अत: वह तहसीलदार साहब के घर में काम कर अपने बेटा-बेटी को पालन-पोषण करती है। देबी नदी के किनारे स्थित उसका घर पानी के प्रकोप का हिस्सा है। कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ से त्रस्त वह मातृत्व का अक्षरशः पालन करती हैं।

लगातार वर्षा होने से उसका आत्मविश्वास ढहने लगता है। बीती हुई बातें उसे याद आने लगती है। बाढ़ की त्रासदी आज भी उसके मानस पटल पर अंकित हो उठे आभास होने लगता है। शायद पुन: बाढ़ का प्रकोप न हो जाये। वह नदी में दुआ माँगती है। किन्तु नदी की निष्ठुरता अपने आगोश में ले लेती है। टीले पर जाने की होड़ में वह सबकुछ खो देती है। बगरद के पेड़ पर आश्रय तो पा लेती है। किन्तु उसका छोटा बेटा प्रवाह में बह जाता है। पेड़ की शाखा में फंसा हुआ एक छोटे-से बालक को अपना दूध तो पिला देती है। किन्तु उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। कथाकार ने कथानक के माध्यम से कहानी के तत्त्वों को सुन्दर रूप से नियोजित किया है। बाढ़ आने के भय से लक्ष्मी एवं उस गाँव के लोगों का जैसे आत्मविश्वास खो जाता है शायद लेखक का मन भी बैठ गया है। अत: उपर्युक्त दृष्टान्तों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सार्थक और समीचीन है।

ढाते विश्वास Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 5.
लक्ष्मी के व्यक्तित्व पर विचार करें।
उत्तर-
लक्ष्मी प्रस्तुत कहानी की प्रधान, नायिका है। वह इस कहानी का केन्द्रीय चरित्र है। एक नारी का जो स्वरूप होता है वह इस कहानी में देखने को मिलता है। जीवनरूपी. रथ का एक चक्र होनेवाली पत्नी की भंगिमा का लक्ष्मी प्रतिनिधित्व करती है। पति के बाहर रहने पर भी वह घर-गृहस्थी का बोझ अपने सिर पर ढोती है। पति द्वारा प्राप्त राशि से जब घर का खर्च नहीं चलता है तब वह तहसीलदार साहब के यहाँ काम कर खर्च जुटाती है। पहले सूखा और फिर बाढ़ के भय से लक्ष्मी सशंकित हो उठती है। उसका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। विधि के विधान को कौन टाल सकता है। लक्ष्मी को जिस बात का भय था वह उसके सामने आ जाता है। बाढ़ का पानी चारों तरफ फैलने लगता है। लोग ऊची टीले पर दौड़ पड़ते हैं। लक्ष्मी भी अपने बेटा-बेटी लेकर जैसे-तैसे दौड़ पड़ती है। प्रवाह ने उसके पैर उखड़ जाते हैं फिर भी वह हिम्मत नहीं हारती है। किसी तरह वरगद के पेड़ पर आश्रय पा लेती है। उसका छोटा बेटा प्रवाह में बह जाता है। किन्तु एक अन्य छोटे से बालक को अपना दूध पीलाता है। मातृत्व उसका उमड़ जाता है।

प्रश्न 6.
गुणनिधि का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
गुणनिधि गाँव का नौजवान है। कंटक में पढ़ता है। वह साहसी है, उसे अपने सामाजिक दायित्व का बोध है और नेतृत्वगुण संपन्न है। जब गाँव आता है और बाढ़ का खतरा देखता है तो स्वयं सेवक दल का गठन करता है। स्वयं सदा उनके साथ रहकर उनका उत्साह बढ़ाता है-‘निठल्लों के लिए जगह भी नहीं है दुनिया में जिस मनुष्य ने काठ-जोड़ी का पत्थर-बाँध बाँध है, वह मनुष्य अभी मरा.थोड़े ही है’ खुद पैंट-शर्ट उतार कर काँछ. लगाकर कमर कस कर काम पर रात-दिन जुटा रहता है।

प्रश्न 7.
बिहार का जन-जीवन भी बाढ़ और सूखा से प्रभावित होता रहा है। इस संबंध में आप क्या सोचते हैं ? लिखें।
उत्तर-
बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ बाढ़ और सूखा का प्रकोप होना ही है। उत्तरी बिहार एवं दक्षिणी बिहार की कुछ ऐसी नदियाँ है जो हमेशा बरसात में उफानी रूप ले लेती है। दक्षिण बिहार में बहनेवाली नदियों का जलस्तर कम वर्षा होने पर भी जल्दी ही बढ़ जाती है। ये नदियाँ हिमालय पर्वत से निकलकर मैदानी भाग में कहर ढा देती है। नेपाल से सटे होने एवं राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन क्षेत्रों में बाढ़ का प्रायः प्रकोप होता है। हर वर्ष बिहार का कुछ क्षेत्र बाढ़ से बहुत प्रभावित होता है। जानमाल की अपार क्षति होती है। पिछले वर्ष कोशी का ताडव अपना एक अलग इतिहास लिख दिया है। कितने गाँव बह गये। बाढ़ समाप्त हुआ कि महामारी फैल गया। एक तरफ बिहार बाढ़ की चपेट में आ गया तो दूसरी तरफ अनावृष्टि के कारण कई जिले सूखे के चपेट में आ गये। बाढ़ और सूखा की आँखमिचौनी बिहारवासियों के लिए जीवन का अंग बन गया है। बिहारी इन दोनों से अभिशप्त है किन्तु कुछ राजनेता इनके दुःख-दर्द को बाटने के बजाय राजनीति खेल शुरू कर देते हैं। केन्द्र की उदासीनता और राज्य की शिथिलता के कारण बिहारवासी इन त्रासदियों का दंश झेलने के लिए विवश हैं।

प्रश्न 8.
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर-
उड़ीसा के प्रमुख कथाकार सातकोड़ी होता द्वारा रचित ‘ढहते विश्वास’ शीर्षक कहानी एक चर्चित कहानी है। इस कहानी में मानवीय मूल्यों का सफल अंकन किया गया है। वस्तुतः होता जी के कथा साहित्य में उड़ीसा के गहरी जीवन की आंतरिकता का उल्लेख मिलता है। उड़ीसा का जन-जीवन प्रायः बाढ़ और सूखा से प्रभावित रहता है। इस कहानी में बाढ़ से प्रभावित लोगों की जीवन-शैली के साथ-साथ एक माँ की वात्सल्यता का चित्रण मिलता है। इस कहानी की प्रमुख पात्र लक्ष्मी है। उसका पति कोलकात्ता में नौकरी करता है।

पति के पैसे से उसकी गृहस्थी नहीं चल पाती है इसलिए वह तहसीलदार साहेब के घर में काम कर अपना जीवन-यापन करती है। देबी नदी के तट पर बसा हुआ उसका गाँव बाढ़ से हमेशा प्रभावित हो जाता है। इस वर्ष उसे सूखा के साथ-साथ बाढ़ का भी प्रकोप सहना पड़ता है। लगातार वर्षा होने के कारण नदी का बाँध टूट जाता है। बाढ़ की विकरालता जन-जीवन को निःशेष करने लगती है। लक्ष्मी अपनी संतान के साथ ऊंचे टीले की ओर दौड़ती है।

देखते-देखते पानी उसके गर्दन तक पहुँच जाता है। किसी तरह वह बरगद के पेड़ पर आश्रय पाती है। उसका आत्म विश्वास ढहने लगता है। उसे लगता है कि मृत्यु अब समीप है। साड़ी के आधे भाग से वह अपने शरीर को बाँध लेती है। कुछ देर के बाद ही वह अचेत हो जाती है। चेतना आते ही वह अपने छोटे बेटे,को ढूँढने लगती है। टहनियों के बीच एक फंसे हुए बच्चा को उठा लेती है। मृत-अर्धमृत बच्चा उसका नहीं है फिर भी वह उसे अपने स्तन से लगा लेती है। उस समय लक्ष्मी के मन में केवल ममत्व था।
वस्तुतः इस कहानी के द्वारा लेखक मानवीय मूल्यों को उद्घाटित किया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
ढहते विश्वास के रचयिता हैं
(क) साँवर दइया
(ख) सुजाता
(ग) सातकोड़ी होता
(घ) श्री निवास
उत्तर
(ग) सातकोड़ी होता

प्रश्न 2.
सातकोड़ी होता कथाकार हैं………………….
(क) तमिल
(ख) राजस्थानी
(ग) गुजराती
(घ) उड़िया
उत्तर-
(घ) उड़िया

प्रश्न 3.
लक्ष्मी लक्ष्मण की …………..” थी।
(क) माँ
(ख) बेटी
(ग) सास
(घ) पत्नी
उत्तर-
(घ) पत्नी

प्रश्न 4.
लक्ष्म ण ……………” में रहता था।
(क) दिल्ली
(ख) भुवनेश्वर
(ग) आगरा
(घ) कोलकाता
उत्तर-
(ब)

प्रश्न 5.
लोग हाँफते हुए दौड़ने लगे
(क) नदी की ओर
(ख) सड़क की ओर
(ग) टीले की ओर
(घ) गाँव की ओर
उत्तर-
(ग) टीले की ओर

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
‘ढहते विश्वास’ के रचयिता ………..” हैं।
उत्तर-
सात कोड़ी होता

प्रश्न 2.
……….नदी के बाँध के नीचे लक्ष्मी का घर था।
उत्तर-
देवी

प्रश्न 3.
सतकोडी होता ………. के कथाकार हैं।
उत्तर-
उड़िया

प्रश्न 4.
…………. अकेले न आकर संगी-साथियों के साथ आती है।
उत्तर-
विपत्ति

प्रश्न 5.
मन ………… नहीं मानता।
उत्तर-
हार

प्रश्न 6.
पानी में रहकर ………….. से वैर करना मुश्किल है।
उत्तर-
मगरमच्छ

प्रश्न 7.
……… हॉफते हुए टीले की ओर दौड़ने लगे।
उत्तर-
लो

प्रश्न 8.
चारों ओर …………… भरा था।
उत्तर-
पानी

अतिलघु उत्तरीय पश्व

प्रश्न 1.
लक्ष्मी कौन थी?
उत्तर-
लक्ष्मी उड़ीसा के एक गृहस्थ परिवार की स्त्री थी जिसका घर देवी बाँध के नीचे था।

प्रश्न 2.
“उहते विश्वास” कहानी का वर्श्व-विषय क्या है ?
उत्तर-
ढहतें विश्वास कहानी का वर्ण्य-विषय है उड़ीसा में सूखा, बाढ़ का तांडव और इन दोनों से जुझते लोगों का अदम्य साहस।

प्रश्न 3.
सातकोड़ी होता के कथा-साहित्य की विशेषता क्या है ?
उत्तर-
सात कोड़ी होता के कथा-साहित्य में उड़ीसा का जन-जीवन पूरी आन्तरिकता के साथ प्रकट हुआ है।

प्रश्न 4.
हीराकुंद बाँध कहाँ और किस नदी पर बांधा गया है?
उत्तर-
हीराकुंद बाँध उड़ीसा में है और महानदी पर बाँधा गया है।

प्रश्न 5.
अच्युत कौन था?
उत्तर-
अच्युत लक्ष्मण-लक्ष्मी का बड़ा बेटा था, कर्मठ और साहसी।

प्रश्न 6.
बाढ़ का प्रभाव लोगों पर क्या पड़ा?
उत्तर-
लोगों को किसी का भरोसा नहीं रहा। देवी-देवताओं पर से भी लोगों का विशवास उठने लगा।

प्रश्न 7.
बाढ़ से घर छोड़ने की आशंका से लक्ष्मी ने क्या तैयारी की?
उत्तर-
बाढ़ से घर छोड़ने की आशंका से लक्ष्मी ने एक बारे में थोड़ा-सा चिवड़ा, कुछ कपड़े और दो-चार बर्तन बाँध कर रख लिए। गाय-बछड़े का पगहा खोल दिया। बकरियों को खोल दिया।

ढहते विश्वास  लेखक परिचय

सातकोड़ी होता उड़िया के एक प्रमुख कथाकार हैं । इनका जन्म 29 अक्टूबर 1929 ई० में मयूरभंज, उड़ीसा में हुआ था । अबतक इनकी एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। होता जी भुवनेश्वर में भारतीय रेल यातायात सेवा के अंतर्गत रेल समन्वय आयुक्त व उड़ीसा सरकार के वाणिज्य एवं यातायात विभाग में विशेष सचिव तथा उड़ीसा राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं । इनके कथा साहित्य में उड़ीसा का जीवन गहरी आंतरिकता के साथ प्रकट हुआ है । यह कहानी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा संपादित एवं अनूदित ‘उड़िया की चर्चित कहानियाँ’ (विभूति प्रकाशन, दिल्ली) से यहाँ साभार संकलित है।

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

Bihar Board Class 10 History Notes प्रश्न 1.
महात्मा गाँधी ने किस पत्र का संपादन किया?
(क) कामनबील
(ख) यंग इंडिया
(ग) बंगाली
(घ) बिहारी
उत्तर-
(ख) यंग इंडिया

Bihar Board Class 10 History Solution प्रश्न 2.
किस पत्र ने रातों-रात वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए अपनी भाषा बदल दी ?
(क) हरिजन
(ख) भारत मित्र
(ग) अमृतबाजर पत्रिका
(घ) हिन्दुस्तान रिव्यू
उत्तर-
(ग) अमृतबाजर पत्रिका

Bihar Board Class 10th History Solution प्रश्न 3.
13वीं सदी में किसने ब्लॉक प्रिंटिंग के नमूने यूरोप में पहुँचाए ?
(क) मार्कोपोलो
(ख) निकितिन
(ग) इत्सिंग
(घ) मेगास्थनीज
उत्तर-
(क) मार्कोपोलो

Bihar Board Class 10 History Book Solution प्रश्न 4.
गुटेनबर्ग का जन्म किस देश में हुआ था?
(क) अमेरिका
(ख) जर्मनी
(ग) जापान
(घ) इंगलैंड
उत्तर-
(ख) जर्मनी

Class 10th History Chapter 1 Notes Bihar Board प्रश्न 5.
गुटेनबर्ग ने सर्वप्रथम किस पुस्तक की छपाई की ?
(क) कुरान
(ख) गीता
(ग) हदीस
(घ) बाइबिल
उत्तर-
(घ) बाइबिल

Bihar Board History Solution Class 10 प्रश्न 6.
इंगलैंड में मुद्रणकला को पहुँचाने वाला कौन था ?
(क) हैमिल्टन
(ख) कैक्सटन
(ग) एडिसन
(घ) स्मिथ
उत्तर
(ख) कैक्सटन

History Class 10 Bihar Board प्रश्न 7.
किसने कहा “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम् देन है, सबसे बड़ा तोहफा”?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) मार्टिन लूथर
(ग) मुहम्मद पैगम्बर
(घ) ईसा मसीह
उत्तर-
(ख) मार्टिन लूथर

Bihar Board Class 10 History Notes In Hindi प्रश्न 8.
रूसो कहाँ का दार्शनिक था? ।
(क) फ्रांस
(ख) रूस
(ग) अमेरिका
(घ) इंगलैंड
उत्तर-
(क) फ्रांस

Bihar Board History Solution प्रश्न 9.
विश्व में सर्वप्रथम मुद्रण की शुरूआत कहाँ हई?
(क) भारत
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) अमेरिका
उत्तर-
(ग) चीन

Bihar Board Class 10 History Book प्रश्न 10.
किस देश की सिविल सेवा परीक्षा ने मुद्रित पुस्तकों (सामग्रियों) की माँग बढ़ाई?
(क) मिस्र
(ख) भारत
(ग) चीन
(घ) जापान
उत्तर-
(ग) चीन

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें:

Class 10 History Bihar Board प्रश्न 1.
1904-05 के रूस-जापान युद्ध में…………… की पराजय हुई।
उत्तर-
रूस

History 10th Class Bihar Board प्रश्न 2.
फिरोजशाह मेहता ने ……………का संपादन किया।
उत्तर-
बाम्बे कॉनिकल

Class 10 Bihar Board History Question Answer प्रश्न 3.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट……………ई. में पास किया गया।
उत्तर-
1878 ई,

Class 10 Social Science Bihar Board प्रश्न 4.
भारतीय समाचार पत्रों के मुक्तिदाता के रूप में……………को विभूषित किया गया।
उत्तर-
चार्ल्स मेटकॉफ

प्रश्न 5.
अल-हिलाल का सम्पादन…………ने किया।
उत्तर-
मौलाना आजाद

सुमेलित करें:

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद - 1
उत्तर-
(i) (ग),
(ii) (क),
(iii) (घ),
(iv) (ङ),
(v) (ख)।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
निम्नांकित के बारे में 20 शब्दों में लिखो:
(क) छापाखाना
Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद - 2
उत्तर-
(क) छापाखाना-वह स्थान जहाँ मुद्रण यंत्र के उपयोग से छपाई कार्य किया जाता है। छापाखाना कहलाता है।
(ख) गटेनबर्ग जर्मनी के मेन्जनगर के कृषक-जमींदार व्यापारी परिवार में जन्मा व्यक्ति जिसने मुद्रण कला के ऐतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया।
(ग) बाइबिल- इसाइयों का पवित्र धर्म ग्रंथ जिसमें ईसा मसीह के बारे में वर्णन मिलता है। – (घ) रेशम मार्ग- समरकन्द-पर्शिया-सिरिया मार्ग को ही रेशम मार्ग कहा जाता है यह व्यापारिक मार्ग है।
(ङ) मराठा बाल गंगाधर तिलक के संपादन में 1881 में बंबई से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित समाचारपत्र।
(च) यंग इंडिया महात्मा गाँधी द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका जो राष्ट्रवादी विचारों से ओत-प्रोत था।
(छ) वर्नाक्यलर प्रेस एक्ट- 1878 में लार्ड लिटन द्वारा लाया गया प्रेस एक्ट जो भारतीय भाषाओं में छपने वाले समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं को प्रतिबंधित करता है।
(ज) सर सैय्यद अहमद- अलीगढ़ जर्नल नामक पत्र के सम्पादक जिसने राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
(झ) प्रोटेस्टेन्टवाद मार्टिन लूथर द्वारा पोप के आधिपत्य का विरोध करने के लिए अपनाया गया मार्ग प्रोटेस्टेंटवाद कहलाता है।
(ञ) मार्टिन लथर- एक धर्म सुधारक जिसने रोमन कैथोलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपनी 95वें स्थापनाएँ लिखीं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
गेटेनबर्ग ने मुद्रण यंत्र का विकास कैसे किया.?
उत्तर-
गेटेनबर्ग ने अपने ज्ञान एवं अनुभव से टुकड़ों में बिखरी मुद्रण कला के एतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया। टाइपों के लिए पंच, मैट्रिक्स, मोल्ड आदि बनाने पर योजनाबद्ध तरीके से कार्यारम्भ किया। उसने हैण्डप्रेस में लकड़ी के चौखट में दो समतल भाग प्लेट एवं बेड-एक के नीचे दूसरा समानान्तर रूप से रखा। कम्पोज किया हुआ टाइप मैटर बेड पर कस दिया एवं उसपर स्याही लगाकर एवं कागज रखकर पलेट्स द्वारा दबाकर मुद्रणकार्य को । विकसित किया।

प्रश्न 2.
छापाखाना यूरोप में कैसे पहँचा?
उत्तर-
पुनर्जागरण एवं व्यापारिक केन्द्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना लेने के बाद 1475 में सर विलियम कैक्स्टन मुद्रणकला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्ट मिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ। इस प्रकार छापाखाना यूरोप पहुंचा।

प्रश्न 3.
इन्क्वीजीशन से आप क्या समझते हैं। इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर-
ईश्वर एवं सृष्टि के बारे में रोमन कैथोलिक चर्च की मान्यताओं के विपरीत विचार आने से कैथोलिक चर्च क्रुद्ध हो गया और तथाकथित धर्मविरोधी विचारों को दबाने के लिए शुरू किया गया आन्दोलन इन्क्वीजीशन कहलाता है।
इसकी सहायता से विरोधी विचारधारा के प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया।

प्रश्न 4.
पाण्डुलिपि क्या है ? इसकी क्या उपयोगिता है?
उत्तर-
मुद्रण कला के आविष्कार के पूर्व हाथ द्वारा विभिन्न प्रकार के चित्रों का उपयोग कर ली गयी लिखाई को पाण्डुलिपि कहा जाता है। पुरानी बातों के संबंध में ज्ञानार्जन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता था।

प्रश्न 5.
लार्ड लिटन ने राष्ट्रीय आन्दोलन को गतिमान बनाया। कैसे?
उत्तर-
लार्ड लिटन ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट द्वारा भारतीय समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे जनमानस उद्वेलित हो गया और इससे राष्ट्रीय आन्दोलन को बल मिला।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर-
मुद्रण क्रांति ने आम लोगों की जिंदगी ही बदल दी। आम लोगों का जुड़ाव सूचना, ज्ञान, संस्था और सत्ता से नजदीकी स्तर पर हुआ। फलतः लोक चेतना एवं दृष्टि में बदलाव संभव हुआ।

मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप किताबें समाज के सभी तबकों तक पहुँच गईं। किताबों की पहुंच आसान होने से पढ़ने की नई संस्कृति विकसित हुई। एक नया पाठक वर्ग और तैयार हुआ चूंकि साक्षर ही पुस्तक को पढ़ सकते थे। अतः साक्षरता बढ़ाने हेतु पुस्तकों को रोचक तस्वीरों, लोकगीत और लोक कथाओं से सजाया जाने लगा। पहले जो लोग सुनकर ज्ञानार्जन करते थे अब पढ़कर भी कर सकते थे। इससे उनके अंदर तार्किक शक्ति का विकास हुआ।

पठन-पाठन से विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ तथा तर्कवाद और मानवतावाद का द्वारा खुला। स्थापित विचारों से असहमत होने वाले लोग भी अपने विचारों को फैला सकते थे।

मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप प्रगति और ज्ञानोदय का प्रकाश फैलने लगा। लोगों में निरंकुश सत्ता से लड़ने के लिए नैतिक साहस का संचार होने लगा था। वाद-विवाद की नई संस्कृति को जन्म दिया। पुराने परंपरागत मूल्यों, संस्थाओं और वायदों पर आम लोगों के बीच मूल्यांकन शुरू हो गया। धर्म और आस्था को तार्किकता की कसौटी पर कसने से मानवतावादी दृष्टिकोण विकसित हुए। इस तरह की नई सार्वजनिक दुनियाँ ने सामाजिक क्रांति को जन्म दिया।

प्रश्न 2.
19वीं सदी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित करें।
उत्तर-
भारत में समाचारपत्रों का उदय 19वीं सदी की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यह न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलाने वाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन गया बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, प्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्रनिर्माण में | महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहण किया। । भारतीयों द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचारपत्र 1816 में गंगाधर भटाचार्य का साप्ताहिक बंगाल गजट था। 1818 में ब्रिटिश व्यापारियों ने जैम्स सिल्क वर्धिम नामक पत्रकार की सेवा प्राप्त की।

इसने बड़ी योग्यता से कलकत्ता जर्नल का सम्पादन करके लार्ड हेस्टिंग्स तथा जॉन एडम्स को परेशानी तथा उलझन में डाल दिया। बकिंघम ने अपने पत्रकारिता के माध्यम से प्रेस को जनता का प्रतिनिधि बनाया। इसने प्रेस को आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने, जाँच-पड़ताल करके समाचार देने तथा नेतृत्व प्रदान करने की ओर प्रवृत किया। अनेक प्रगतिशील राष्ट्रीय प्रवृति के समाचारपत्रों का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इन समाचारपत्रों के संस्थापक राजाराम मोहन राय थे। इन्होंने सामाजिक धार्मिक सुधार आन्दोलन को हथियार भी बनाया। अंग्रेजी में ब्राझिनिकल मैगजीन भी राममोहन राय ने निकाला। 1822 में बंबई से गुजराती भाषा में दैनिक बम्बई समाचार निकलने लगे। द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राममोहन राय के प्रयास से 1830 में बेंगदत की स्थापना हुई। 1831 में जामे जमशेद 1851 में गोफ्तर तथा अखबार सौदागर का प्रकाशन आरम्भ हुआ।

प्रश्न 3.
भारतीय प्रेस की विशेषताओं को लिखें।
उत्तर
भारतीय प्रेस की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • यह न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलानेवाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन मया बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, उसकी नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने एवं देशप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन किया।
  • इसके द्वारा न्यायिक निर्णयों में पक्षपात, धार्मिक हस्तक्षेप और प्रजातीय भेदभाव की आलोचना करने से धार्मिक एवं सामाजिक सुधार-आन्दोलन को बल मिला तथा भारतीय जनमत जागृत हुआ।
  • इसने न केवल राष्ट्रवादी आन्दोलन को एक नई दिशा दी अपितु भारत में शिक्षा को प्रोत्साहन, आर्थिक विकास एवं औद्योगीकरण तथा श्रम आन्दोलन को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया।
  • प्रेस ने राष्ट्रीय आन्दोलन के हर पक्ष चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हो या सांस्कृतिक-सबको प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
  • विदेशी सता से त्रस्त जनता.को सन्मार्ग दिखाने एवं साम्राज्यवाद के विरोध में निर्भीक . स्वर उठाने का कार्य प्रेस के माध्यम से ही किया गया।
  • नई शिक्षा नीति के प्रति व्यापक असंतोष को सरकार के समक्ष पहुँचाने का कार्य प्रेस ने ही किया। .
  • सामाजिक सुधार के क्षेत्र में, प्रेस ने सामाजिक रूढ़ियों, रीति-रिवाजों, अंधविश्वास तथा अंग्रेजी सभ्यता के प्रभाव को लेकर लगातार आलोचनात्मक लेख प्रकाशित किए।
  • प्रेस भारत की विदेश नीति की भी खूब समीक्षा करती थी।
  • देश के राष्ट्रीय आन्दोलन को नई दिशा देने एवं राष्ट्रनिर्माण में भी प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय आन्दोलन को भारतीय प्रेस ने कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर-
प्रेस ने न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलानेवाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन गया ‘बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, उसकी नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने एवं देशप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहण किया।
19वीं शता दी में प्रकाशित कई समाचारपत्रों ने राष्ट्रीय आन्दोलन की भावना को विकसित किया।

  • 1858 में ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने बंगाली में साप्ताहिक पत्रिका ‘सोम प्रकाश’ का प्रकाशन किया जो राष्ट्रवादी विचारों से ओत-प्रोत था। इसने नीलहे किसानों के हितों का जोरदार समर्थन किया।
  • 1868 से मोतीलाल घोष के संपादन में ‘अमृत बाजार’ अंग्रेजी बंगला साप्ताहिक के रूप में बाजार में आने लगा। इसका भारतीय प्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए यह रातों-रात अंग्रेजी में प्रकाशित होने लगा जिसने राष्ट्रीयता की भावना को जगाने में मुख्य भूमिका अदा की। .
  •  भारतेंदु हरिश्चन्द्र के संपादन में 1867 से प्रकाशित ‘कविवचन सुधा’ की संपादकीय टिप्पणियाँ राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर होती थीं जो राष्ट्रवादी विचारों को सशक्त करने का काम कर रही थी।
    इन्हीं की मासिक पत्रिका हरिश्चन्द्र भी देशप्रेम और समाज सुधार से अनुप्राणित थी।
  • बाल गंगाधर तिलक के संपादन में 1881 में बंबई से अंग्रेजी भाषा में मराठा और मराठी में केसरी की शुरूआत हुई। दोनों पत्र उग्रराष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित थे। इनका जनमानस पर व्यापक प्रभाव था।
  • अरविन्द घोष और वारींद्र घोष ने युगांतर तथा वंदेमातरम के माध्यम से उग्र राष्ट्रवाद को फैलाने का काम किया।
  • महात्मा गाँधी ने यंग इंडिया एवं हरिजन पत्रिका के माध्यम से अपने विचारों एवं राष्ट्रवादी आंदोलन का प्रचार किया। गांधी के सीधे एवं सरल लेख से आम जनता के साथ-साथ क्षेत्रीय पत्रकारिता को भी राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहन मिला।

समाचारपत्रों ने न केवल राष्ट्रवादी आन्दोलन को एक नई दिशा दी अपितु भारत में शिक्षा के प्रोत्साहन आर्थिक विकास एवं औद्योगीकरण तथा श्रम आन्दोलन को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया।

प्रश्न 5.
मुद्रण यंत्र की विकास यात्रा को रेखांकित करें। यह आधुनिक स्वरूप में कैसे पहुंचा।
उत्तर-
हम जानते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है। अत: सूचना की आवश्यकता ने आविष्कार हेतु ज्ञान जगत को प्रेरित किया।
मुद्रण कला के आविष्कार और विकास का श्रेय चीन को जाता है। 1041 ई. में एक चीनी व्यक्ति पि-शिंग ने मिट्टी के मुद्रा बनाए। इन अक्षर मुद्रों का संयोजन कर छपाई का कार्य किया जाता था। बाद में इस पद्धति ने ब्लाक प्रिंटिंग का स्थान ले लिया। कोरियन लोगों ने कुछ समय पश्चात लकड़ी एवं धातु पर खोदकर टाइप बनाए। धातु के मूवेबुल टाइपों द्वारा प्रथम पुस्तक 13वीं सदी के पूर्वार्द्ध में मध्य कोरिया में छापी गई।

यद्यपि मूवेबल टाइपों द्वारा मुद्रण कला का आविष्कार तो पूरब में ही हुआ परन्तु इस कला का विकास यूरोप में अधिक हुआ। लकड़ी के ब्लॉक द्वारा होने वाली मुद्रण कला समरकन्द-पर्शिया मार्ग से व्यापारियों द्वारा यूरोप, सर्वप्रथम रोम में प्रविष्ट हुई। 13वीं सदी के अंतिम में रोमन मिशनरी एवं मार्कोपोलो द्वारा ब्लॉक प्रिंटिंग के नमूने यूरोप पहुँचे। वहाँ इस कला का प्रयोग ताश खेलने एवं धार्मिक चित्र छापने के लिए किया गया। इसी बीच कागज बनाने की कला 11वीं शताब्दी में पूरब से यूरोप पहुँची तथा 1336 में प्रथम पेपर मिल की स्थापना जर्मनी में हुई। इसी काल में शिक्षा के प्रसार, व्यापार एवं मिशनरियों की बढ़ती गतिविधियों से सस्ती मुद्रित सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ी। इसी की पूर्ति के लिए तेज और सस्ती मुद्रण तकनीक की आवश्यकता थी जिसे (1430 के दशक में) स्ट्रेस बर्ग के योहान गुटेनबर्ग ने अंततः कर दिखाया।

गुटेनबर्ग ने अपने ज्ञान एवं अनुभव से टुकड़ों में बिखरी मुद्रण कला के ऐतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया तथा टाइपों के लिए पंच, मेट्रिक्स, मोल्ड आदि बनाने पर योजनाबद्ध तरीके से कार्यारम्भ किया।

गुटेनबर्ग ने आवश्यकतानुसार मुद्रण स्याही बनायी और हैण्डप्रेस ने प्रथम बार मुद्रण कार्य सम्पन्न किया। इसने लकड़ी के चौखट में दो समतल भाग-प्लेट एवं बेड-एक के नीचे दूसरा समानान्तर रूप से रखा। कम्पोज किया हुआ टाइप मैटर वेड पर कसा एवं उसपर स्याही लगाकर तथा कागज रखकर प्लेट्स द्वारा दबाकर मुद्रण कार्य किया। बाद में गुटेन बर्ग ने ही पुनः मुद्रा एवं हैण्ड प्रेस का विकास किया।
हालाँकि विवादों में घिरने के बावजूद मेंज में शुरू होकर पूर्णता को पहुंची मुद्रण कला का प्रसार शीघ्रता से यूरोपीय देशों एवं अन्य स्थानों में हुआ।

1475 ई. में सर विलयम कैक्सटनं मुद्रण कला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्ट मिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ। पुर्तगाल में इसकी शुरूआत 1544 ई. में हुई, तत्पश्चात् यह आधुनिक रूप में विश्व के अन्य देशों में पहुंची। 18वीं सदी के अंत तक प्रेस धातु के बनने लगे। 19वीं सदी के मध्य तक न्यूयार्क के रिचर्ड एम. हो ने शक्ति चालित बेलनाकार प्रेस को कारगर बना दिया। 20वीं सदी के अंत तक ऑफसेट प्रेस आ गया।

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
छपाइ का आरंभ किस देश में हुआ ?
उत्तर-
चीन में।

प्रश्न 2.
छापाखाना का आविष्कार किस देश में
उत्तर-
जर्मनी में।

प्रश्न 3.
इटली में वुडलॉक छपाई की तकनीक कौन लाया ?
उत्तर-
मार्कोपोलो ने।

प्रश्न 4.
मार्टिन लूथन ने अपनी पिच्चानवें स्थापनाएँ किस चर्च के दरवाजे पर टाँग दी ?
उत्तर-
गुटेन वर्ग चर्च।

प्रश्न 5.
तिलक ने किस भाषा में मराठा का प्रकाशन किया ?
उत्तर-
अंग्रेजी भाषा में।

प्रश्न 6.
जापानी उकियो चित्रकला शैली की विषय वस्तु क्या थी?
उत्तर-
जापानी उकियो चित्रकला शैली की विषय वस्तु शहरी लोगों के जीवन पर आधारित थी।

प्रश्न 7.
इटली में वुड ब्लॉक छपाई की तकनीक कहाँ से और किसके द्वारा लाई गई?
उत्तर-
इटली में वुड ब्लॉक छपाई की तकनीक चीन से मार्कोपोलो द्वारा लाई गई।

प्रश्न 8.
किसने कहा था “किताबें भिनमिनाती मक्खियों की तरह हैं।
उत्तर-
कैथोलिक धर्म सुधारक इरैस्मस ने।

प्रश्न 9.
रोमन चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
उत्तर-
नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तका विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगाया।

प्रश्न 10.
मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए किस प्रकार अनुकूल परिस्थितियों बनाई ? किसी एक का उल्लेख करें?
उत्तर-
वाद-विवाद की संस्कृति-पुस्तकों और लेखों में वाद-विवाद की संस्कृति को जन्म दिया। नए विचारों के प्रसार के साथ ही तर्क की भावना का विकास हुआ। अब लोग पुरानी मान्यताओं की समीक्षा कर उनपर अपने विचार प्रकट करने लगे। इससे नई सोच उभरी। राजशाही चर्च और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। फलतः क्रांतिकारी विचारधारा का उदय हुआ। इस तरह मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाई।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
मार्टिन लूथर के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
मार्टिन लूथर (जर्मनी) एक महान धर्म सुधारक था। वह चर्च में व्याप्त बुराइयों का विरोधी था और इसमें सुधार लाना चाहता था। उसे धर्म सुधार आंदोलन का अग्रदूत कहा जाता है। 1517 में लूथर ने पंचानवें स्थापनाएँ लिखीं जिसमें उसने रोमन कैथोलिक चर्च में प्रचलित अनेक परम्पराओं एवं धार्मिक विधियों पर प्रहार किया। लूथर के लेखक के व्यापक प्रभाव से रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टैंक कहलाए। धीरे-धीरे प्रोटेस्टेंट संप्रदाय ईसाई धर्म का प्रमुख संप्रदाय बन गया।

प्रश्न 2.
इन्क्वीजीशन से आप क्या समझते हैं ? इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर-
रोमन चर्च धर्म विरोधी भावना को दबाने के लिए प्रयासरत थी क्योंकि पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रही थी। पुस्तकें पढ़कर सामान्य जनता और बुद्धिजीवियों ने ईसाई धर्म और बाइबिल में दिए गए उपदेशों पर नए ढंग से चिंतन-मनन आरंभ कर दिया। धर्म विरोधी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने इन्क्वीजीशन नामक संस्था का गठन किया। यह एक प्रकार का धार्मिक न्यायालय था। इसका काम धर्म विरोधियों की पहचान कर उन्हें दंडित करना था। इन्क्वीजीशन की जरूरत इसलिए पड़ी कि नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विशेषताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए जिससे वे धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें। 1558 से चर्च प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखने लगा जिससे उसका पुनर्मुद्रण और वितरण नहीं हो सकें।

प्रश्न 3.
गुटेनबर्ग के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
जर्मनी का गुटेन्बर्ग ने 1450 ई. में छापाखाना का अधिकार किया। वह बहुत ही जिज्ञासु . प्रवृति का था। जैतून पैरने की मशीन को आधार बनाकर उसने प्रिटिंग प्रेस (हैंड प्रेस) का विकास किया। गुटेनबर्ग ने मुद्रण स्याही का भी इजाद किया। गुटेन्बर्ग ने जो छपाई मशीन विकसित की उसे मूवेबल टाइप प्रिंटिंग मशीन’ कहा गया। क्योंकि रोमन वर्णमाला के सभी 26 अक्षरों के लिए टाइप बनाए गए तथा इन्हें घुमाने या ‘मूव’ करने की व्यवस्था की गयी। इस प्रक्रिया के द्वारा पुस्तकें तेजी से छापी जाने लगी। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस मशीन में प्रति घंटे अढाई सौ पन्नों के एक ओर छपाई की जा सकती थी। गुटेनबर्ग प्रेस में जो पहली पुस्तक छपी वह ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल थी।

प्रश्न 4.
रोमन कैथोलिक चर्च ने 16 वीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखनी क्यों आरंभ की?
उत्तर-
मार्टिन लूथर के पिच्चानवें स्थापनाएं 11517) ने रोमन कैथोलिक चर्च में प्रचलित अनेक परंपराओं एवं धार्मिक विधियों पर प्रहार किया। लूथर के इस लेख का व्यापक प्रचार हुआ जिसके कारण रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टैंट कहलाए। दूसरी ओर रोमन कैथोलिक चर्च धर्म विरोधी भावना को दबाने के लिए प्रयासरत थी क्योंकि पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रही थी। नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने ने प्रकाशकों और पुस्तक बिक्रेताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए जिससे वे धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें चर्च ने अनेक पुस्तकों को प्रतिबंधित भी कर दिया। 1558 से चर्च प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखने लगा जिससे उनका पुनर्मुद्रण और वितरण नहीं हो सके।

प्रश्न 5.
तकनीकी विकास का मुद्रण पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
तकनीकी विकास का मुद्रण पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अब कम समय, कम श्रम तथा कम लागत में ज्यादा से ज्यादा छपाई होने लगी। 18वीं सदी के अंतिम चरण तक धातु के बने छापाखाने काम करने लगे। 19वीं 20वीं सदी में छापाखानों में और अधिक तकनीकी सुधार किए गए। 19वीं शताब्दी में न्यूयॉर्क निवासी एम. ए. हो ने शक्ति चालित बेलनाकार प्रेस का निर्माण किया। इसके द्वारा प्रतिघंटा आठ हजार ताव छापे जाने लगे। इससे मुद्रण में तेजी-आई। इसी सदी के अंत तक ऑफसेट प्रेस भी व्यवहार में आया। इस छापाखाना द्वारा एक ही साथ छह रंगों में छपाई की जा सकती थी। 20वीं सदी के आरंभ से बिजली संचालित प्रेस व्यवहार में आया। इसने छपाई को और गति प्रदान की। प्रेस में अन्य तकनीकी बदलाव भी लाए गए, जैसे कागज लगाने की विधि में सुधार किया गया तथा प्लेट की गुणवत्ता बढ़ाई गई। साथ ही स्वचालित पेपर शील और रंगों के लिए फोटो विद्युतीय नियंत्रण का व्यवहार किया जाने लगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
स्वातंत्र्योत्तर भारत में प्रेस की भूमिका की व्याख्या करें।
उत्तर-
वैश्विक स्तर पर मुद्रण अपने आदि काल से भारत में स्वाधीनता आंदोलन तक भिन्न-भिन्न परिस्थितियों से गुजरते हुए आज अपनी उपादेयता के कारण ऐसी स्थिति में पहुँच गया है जिससे ज्ञान जगत की हर गतिविधियाँ प्रभावित हो रही है। आज पत्रकारिता साहित्य, मनोरंजन ज्ञान-विज्ञान, प्रशासन, राजनीति आदि को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है। – स्वातत्र्योत्तर भारत में पत्र-पत्रिकाओं का उद्देश्य भले ही व्यवसायिक रहा हो किन्तु इसने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अभिरूचि जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।

पत्र-पत्रिकाओं ने दिन-प्रतिदिन घटने वाली घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में नई और सहज शब्दावली का प्रयोग करते हुए भाषाशास्त्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रेस ने समाज में नवचेतना पैदा कर सामाजिक धार्मिक राजनीतिक एवं दैनिक जीवन में क्रांति का सूत्रपात किया। प्रेस ने सदैव सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, विधवा विवाह, बालिकावधु, बालहत्या, शिशु विवाह जैसे मुद्दों को उठाकर समाज के कुप्रथाओं को दूर करने में मदद की तथा व्याप्त अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास किया।

आज प्रेस समाज में रचनात्मकता का प्रतीक भी बनता जा रहा है। यह समाज की नित्यप्रति की उपलब्धियों, वैज्ञानिक अनुसंधानों, वैज्ञानिक उपकरणों एवं साधनों से परिचित कराता है। आज के आधुनिक दौर में प्रेस साहित्य और समाज की समृद्ध चेतना की धरोहर है। प्रेस लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने हेतु सजग प्रहरी के रूप में हमारे सामने खडा है।

प्रश्न 2.
फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में मुद्रण की भूमिका की विवेचना करें।
उत्तर-
फ्रांस की क्रांति में बौद्धिक कारणों का भी काफी महत्वपूर्ण योगदान था। फ्रांस के
लेखकों और दार्शनिकों ने अपने लेखों और पुस्तकों द्वारा लोगों में नई चेतना जगाकर क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी। मुद्रण ने निम्नलिखित प्रकारों से फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में अपनी भूमिका निभाई

(i) ज्ञानोदय के दार्शनिकों के विचारों का प्रसार- पुस्तकों और लेखों ने ज्ञानोदय के चिंतकों के विचारों का प्रचार-प्रसार किया जिन्हें पढ़कर लोगों में नई चेतना जगी। फ्रांसीसी दार्शनिकों में रूढ़िगत सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था की कटु आलोचना की। इन लोगों ने इस बात पर बल दिया कि अंधविश्वास और निरंकुशवाद के स्थान पर तर्क और विवेक पर आधृत व्यवस्था की स्थापना हो। चर्च और राज्य की निरंकुश सत्ता पर प्रहार किया गया। वाल्टेयर और रूसो ऐसे महान दार्शनिक थे जिनके लेखन का जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा।

(ii) वाद-विवाद की संस्कृति- पुस्तकों और लेखों ने वाद-विवाद की संस्कृति को जन्म दिया। अब लोग पुरानी मान्यताओं की समीक्षा कर उनपर अपने विचार प्रकट करने लगे। इससे नई सोच उभरी। राजशाही, चर्च और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। फलतः क्रांतिकारी विचारधारा का उदय हुआ।

(ii) राजशाही के विरुद्ध असंतोष- 1789 की क्रांति के पूर्व फ्रांस में बड़ी संख्या में ऐसा साहित्य प्रकाशित हो चुका था जिसमें तानाशाही राज व्यवस्था और इसके नैतिक पतन की कटु आलोचना की गयी थी। निरंकुशवाद और राजदरबार के नैतिक पतन का चित्रण भी इस साहित्य में किया गया। साथ ही सामाजिक व्यवस्था पर भी क्षोभ प्रकट किया गया। अनेक व्यंगात्मक चित्रों द्वारा यह दिखाया गया कि किस प्रकार आम जनता का जीवन कष्टों और अभावों से ग्रस्त था जकि राजा और उसके दरबारी विलासिता में लीन हैं। इससे जनता में राजतंत्र के विरुद्ध असंतोष बढ़ गया।

इस प्रकार फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि को तैयार करने में मुद्रण सामग्री की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही जिससे प्रभावित होकर जनता क्रांति के लिए तत्पर हो गयी।

प्रश्न 3.
भारत मेंसामाजिक-धार्मिक सुधारों को पुस्तकों एवं पत्रिकाओं ने किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर-
18वीं, 19वीं शताब्दी में प्रेस ज्वलंत राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक प्रश्नों को उठानेवाला एक सशक्त माध्यम बन गया। 19वीं सदी में बंगाल में “भारतीय पुनर्जागरण” हुआ। इससे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ। परंपरावादी और नई विचारधारा रखनेवालों ने अपने-अपने विचारों का प्रचार करने के लिए पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया। राजा राममोहन राय ने अपने विचारों को प्रचारित करने के लिए बंगाली भाषा में संवाद कौमुदी नामक पत्रिका का प्रकाशन 1821 में किया। उनके विचारों का खंडन करने के लिए रूढ़िवादियों ने समाचार चंद्रिका नामक पत्रिका प्रकाशित की।

राममोहन राय ने 1822 में फारसी भाषा में मिरातुल अखबार तथा अंग्रेजी में ब्रासृनिकल मैंगजीन भी प्रकाशित किया। उनके ये अखबार सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रभावशाली अस्त्र बन गए। 1822 में ही बंबई से गुजराती दैनिक समाचारपत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राममोहन राय के प्रयासों से 1830 में बंगदत्त की स्थापना हुई।

1831 में जामे जमशेद, 1851 में रास्ते गोफ्तार तथा अखबारे सौदागर प्रकाशित किया गया। ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारी भारतीय समाचारपत्रों द्वारा सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक चेतना के विकास को शंका की दृष्टि से देखते थे। इसलिए 19वीं शताब्दी में भारतीय प्रेस पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया। भारतीय समाचार पत्रों ने सामाजिक धार्मिक समस्याओं से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों को उठाया। समाचारपत्रों ने न्यायिक निर्णयों में किए गए पक्षपातों, धार्मिक मामले में सरकारी हस्तक्षेप और औपनिवेशिक प्रजातीय विभेद की नीति की आलोचना कर राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।

प्रश्न 4.
बदलते परिगेक्ष्य में भारतीय प्रेस की विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
19वीं शताब्दी से भारत में समाचार पत्रों के प्रकाशन में तेजी आई परंतु अबतक इसका प्रकाशन और वितरण सीमित स्तर पर होता रहा। इसका एक कारण यह था कि सामान्य जनता एवं समृद्ध कुलीन और सामंत वर्ग राजनीति में रूचि नहीं लेता था। इसी वर्ग के पास प्रेस चलाने के लिए धन और समय था परंतु यह वर्ग इस ओर उदासीन था। प्रेस चलाना घाटा का व्यवसाय माना जाता था। सरकार भी समाचार को कोई विशेष महत्व नहीं देती थी क्योंकि जनमत को प्रभावित करने में समाचार पत्रों की भूमिका नगण्य थी। इसके बावजूद भारतीय समाचिार पत्रों ने सामाजिक-धार्मिक समस्याओं से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों को उठाया। समाचार पत्रों ने न्यायिक निर्णयों में किए गए पक्षपातों, धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप और औपनिवेशिक प्रजातीय विभेद की नीति की आलोचना कर राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।

यद्यपि 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय समाचार पत्रों की संख्या में वृद्धि हुई परंतु ये प्रजातीय आधार पर दो वर्गों एंग्लो इंडियन और भारतीय प्रेस में विभक्त हो गई। ऐंग्लो इंडियन प्रेस ने सरकार समर्थन रूख अपनाया। इसे सरकारी समर्थन और संरक्षण प्राप्त था। ऐंगलो-इंडियन प्रेस. को अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। यह अंगरेजों के ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति को बढ़ावा देता था तथा सांप्रदायिक एकता को बढ़ावा देनेवाले प्रयासों का विरोध करता था। इसका एकमात्र उद्देश्य ब्रिटिश राज के प्रति वफादारी की भावना का विकास करना था। इस समय अंग्रेजी भाषा और अंगरेजों द्वारा संपादित समाचार पत्रों में प्रमुख थे टाइम्स ऑफ इंडिया, स्टेट्स मैन, इंगलिशमैन, मद्रासमेल, फ्रेंड ऑफ इंडिया, पायनियर, सिविल एंड मिलिट्री गजट इत्यादि। इनमें इंगलिशमैन सबसे अधिक रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी समाचार पत्र था। पायनि पर सरकार का समर्थक और भारतीयों का आलोचक था।

ऐंग्लों इंडियन समाचार पत्रों के विपरीत अंग्रेजी और देशी भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्रों में अंगरेजी सरकारी नीतियों की आलोचना की गयी। भारतीय दृष्टिकोण को ज्वलंत प्रश्नों को रखा गया तथा भारतीयों में राष्ट्रीयता एवं एकता की भावना जागृत करने का प्रयास किया गया। ऐसे समाचार-पत्रों में प्रमुख थे हिन्दू पैट्रियट, अमृत बाजार पत्रिका इत्यादि। अनेक प्रबुद्ध भारतीयों ने 19वीं, 20वीं शताब्दियों में भारतीय प्रेस को अपने लेखों द्वारा प्रभावशाली एवं शक्तिशाली बनाया।

प्रश्न 5.
औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए क्या किया ?
उत्तर-
औपनिवेशिक काल में प्रकाशन के विकास के साथ-साथ इसे नियंत्रित करने का भी प्रयास किया गया। ऐसा करने के पीछे दो कारण थे पहला, सरकार वैसी कोई पत्र-पत्रिका अथवा समाचार पत्र मुक्त रूप से प्रकाशित नहीं होने देना चाहती थी जिससे सरकारी व्यवस्था और नीतियों की आलोचना हो। तथा दूसरा, जब अंग्रेजी राज की स्थापना हुई उसी समय से भारतीय राष्ट्रवाद का विकास भी होने लगा। राष्ट्रवादी संदेश के प्रसार को रोकने के लिए प्रकाशन पर नियंत्रण लगाना सरकार के लिए आवश्यक था। अतः समय-समय पर सरकार विरोधी प्रकाशनों पर नियंत्रण लगाने का प्रयास किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी सुरक्षात्मक और राजनीतिक कारणों से प्रेस पर नियंत्रण लगाने के प्रयास किए गए। 1857 के विद्रोह के परिणामस्वरूप सरकार का रूख प्रेस के प्रति पूर्णतः बदल गया। राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए प्रेस को कुंठित करने के प्रयास किए गए। प्रेस को नियंत्रित करने के लिए पारित विभिन्न अधिनियम उल्लेखनीय हैं

  • 1799 का अधिनियम-फ्रांसीसी क्रांति के प्रभाव को भारत में फैलने से रोकने के लिए गवर्नर जनरल वेलेस्ली ने 1799 में एक अधिनियम पारित किया। इसके अनुसार समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगा दिया गया।
  • 1823 का लाइसेंस अधिनियम-इस अधिनियम द्वारा प्रेस स्थापित करने से पहले सरकारी अनुमति लेना आवश्यक बना दिया गया।
  • 1867 का पंजीकरण अधिनियम-इस अधिनियम द्वारा यह, आवश्यक बना दिया गया कि प्रत्येक पुस्तक, समाचार-पत्र एवं पत्र-पत्रिका पर मुद्रक, प्रकाशक तथा मुद्रण के स्थान का नाम अनिवार्य रूप से दिया जाए। साथ ही प्रकाशित पुस्तक की एक प्रति सरकार के पास जमा करना आवश्यक बना दिया गया।
  • बर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878)- लार्ड लिटन के शासनकाल में पारित प्रेस को प्रतिबंधित करनेवाला सबसे विवादास्पद अधिनियम यही था। इसका उद्देश्य देशी भाषा के समाचार पत्रों पर कठोर अंकुश लगाना था। अधिनियम के अनुसार भारतीय समाचार पत्र ऐसा कोई समाचार प्रकाशित नहीं कर सकती थी जो अंगरेजी सरकार के प्रति दुर्भावना प्रकट करता हो। भारतीय राष्ट्रवादियों ने इस अधिनियम का कड़ा विरोध किया।

सरकार ने प्रेस पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर अन्य कानून भी बनाए। द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने पर भारत रक्षा अधिनियम बनाया गया। इसके द्वारा युद्ध संबंधी समाचारों के प्रकाशन को नियंत्रित किया गया। ‘भारत छोड़ आंदोलन के दौरान सरकार ने समाचार पत्रों पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। 1942 में लगभग 90 समाचार पत्रों का प्रकाशन रोक दिया गया। इस प्रकार औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए विभिन्न अधिनियों के द्वारा काफी प्रयास किए।

प्रश्न 6.
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रेस की भूमिका एवं इसके प्रभावों की समीक्षा करें।
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्धव एवं विकास में प्रेस की प्रभावशाली भूमिका थी। इसने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिवावं अन्य मुद्दों को उठाकर उन्हें जनता के समक्ष लाकर उनमें राष्ट्रवादी भावना का विकास किये तथा लोगों में नई जागृति ला दी।

(i) राजनीतिक क्षेत्र में योगदान प्रेस में प्रकाशित लेखों और समाचार-पत्रों से भारतीय औपनिवेशिक शासन के वास्तविक स्वरूप से परिचित हुए। समाचार पत्रों ने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के घिनौने मुखौटे का पर्दाफाश कर दिया तथा इनके विरूद्ध लोकमत को संगठित किया। जनता को राजनीतिक शिक्षा देने का दायित्व समाचारपत्रों ने अपने ऊपर ले लिया। समाचार पत्रों ने देश में चलनेवाले विभिन्न आंदोलनों एवं राजनीतिक कार्यक्रमों से जनता को परिचित कराया। काँग्रेस के कार्यक्रम हो या उसके अधिवेशन, बंग-भंग आंदोलन अथवा असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह या भारत छोड़ो आंदोलन, समाचारों द्वारा ही लोगों को इनमें भाग लेने की प्रेरणा मिलती थी। काँग्रेस की भिक्षाटन नीति का प्रेस ने विरोध किया तथा स्वदेशी और बहिष्कार की भावना को बढ़ावा देकर राष्ट्रवाद का प्रसार किया। भारतीयों की नजर में महात्मा गांधी भी प्रेस के माध्यम से ही आए।

(ii) आर्थिक क्षेत्र में योगदान आर्थिक क्षेत्र में भी प्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निबाही। इसने अंग्रेजी सरकार द्वारा भारत के आर्थिक शोषण की घोर निंदा की। धन-निष्कासन की नीति, आयात-निर्यात एवं औद्योमिक नीति की आलोचना समाचार पत्रों में प्रमुखता से की गई। अनेक समाचार पत्रों ने भारत की आर्थिक दुर्दशा के लिए सरकारी आर्थिक नीतियों को उत्तरदायी बताकर उनमें परिवर्तन की मांग की। समाचार-पत्रों ने आदिवासियों, किसानों के शोषण और उनके आंदोलनों को प्रमुखता से छापा। समाचार-पत्रों ने बहिष्कार और स्वदेशी की भावना को समर्थन दकर एक ओर राष्ट्रीयता की भावना को विकसित किया तो दूसरी ओर ब्रिटिश आर्थिक हितों पर कुठाराघात किया।

(iii) सामाजिक क्षेत्र में योगदान- सामाजिक सुधार आंदोलनों को भी समाचार पत्रों ने समर्थन दिया। इसने रूढ़िगत परंपरावादी समाज में सुधार लाने के लिए किए गए प्रयासों को अपना समर्थन दिया। इसने जाति प्रथा, छुआछुत की आलोचना की महत्वपूर्ण योगदान यह था कि इसने सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने तथा हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रयासों की सराहना कर इसे प्रोत्साहित किया। इस प्रकार पाष्टीय आंदोलन में प्रेस ने अपनी सराहनीय . भूमिका निभाई।

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Notes

  • मुद्रण कला का आविष्कार 1041 में एक चीनी व्यक्ति पि-शेंग ने किया था। .
  • धात के मवेबल टाइपों द्वारा प्रथम पुस्तक 13वीं सदी के पर्वार्ट में मध्य कोरिया में छापी गयी।
  • स्याही से लगे काठ के ब्लॉक पर कागज को रखकर छपाई की विधि को ब्लॉक प्रिटिग कहते हैं।
  • जर्मनी के गुटेन बर्ग ने सर्वप्रथम हैण्डप्रेस का विकास किया और 46 लाइ न में बाइबिल को 1448 में छापा।
  • मार्टिन लूथर ने कहा- “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है सबसे बड़ा तोहफा।
  • प्रिंटिंग प्रेस सबसे पहले भारत में पुर्तगाली धर्मप्रचारकों द्वारा 16वीं सदी में लाया गया।
  • प्रेस ने राष्ट्रीय आन्दोलन के हर पक्ष-चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हो या. सांस्कृतिक-सबको प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
  • भारतीय समाचार पत्रों के मुक्तिदाता के रूप में चार्ल्स मेटकॉफ को विभूषित किया गया।
  • चीन की सिविल सेवा परीक्षा ने मुद्रित सामग्रियों की मांग बढ़ाई।
  • भारतीयों द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचार-पत्र 1816 में गंगाधर भटाचार्य का साप्ताहिक ‘बंगाल गजट’ था।
  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 से बचने के लिए अमृत बाजार पत्रिका ने अपनी भाषा बदल ली और अंग्रेजी में उसका प्रकाशन होने लगा।
  • मोतीलाल नेहरू ने 1919 में इंडिपेंडेंस, शिव प्रसाद गुप्ता हिन्दी दैनिक आज, के. एम. पन्निकर ने 1922 में हिन्दुस्तान टाइम्स का संपादन प्रारंभ किया। बाद में हिन्दुस्तान टाइम्स का सम्पादन कार्य मदन मोहन मालवीय के हाथ में आया और अंततः 1927 में इस पत्र को जी. डी. बिड़ला ने अपने हाथों में ले लिया।
  • ग्यारहवीं शताब्दी में चीन से रेशम मार्ग द्वारा कागज यूरोप पहुँचा।
  • 1295 ई. में मार्कोपोलो नामक खोजी यात्री चीन से इटली वापस आया तो वह अपने साथ काठ की तख्ती (वुड ब्लॉक) पर छपाई की तकनीक लेता आया।
  • 1336 में कागज बनाने का पहला कारखाना जर्मनी में खोला गया।
  • छापाखाना का आविष्कार जर्मनी के गटेन्वर्ग ने 1450 में किया।
  • गेटेन्बर्ग छपाई मशीन को ‘मूवेबल टाइप प्रिटिंग मशीन’ कहा गया।
  • गुटेन्बर्ग प्रेस में जो पहली पुस्तक छपी वह ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल थी।
  • 1475 ई. में सर विलियम कैक्सटन मुद्रणकला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्टमिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ।.
  • मार्टिन लूथर को धर्म सुधार आंदोलन का अग्रदूत कहा जाता है।
  • मार्टिन लूथर ने 1517 में पिच्चानवें स्थापनाएं लिखी। लूथर ने बाइबिल के न्यू टेस्टामेंट का जर्मन अनुवाद भी प्रकाशित करवाया।
  • धर्म-विरोधी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने इक्बीजीशन नामक संस्था का गठन किया।
  • मार्टिन लूथर का कथन है, “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद Questions and Answers

 

वाक्य का विभाजन प्रमुखतया दो आधारों पर किया जाता है-

  1. रचना के आधार पर
  2. अर्थ के आधार पर

रचना की दृष्टि से वाक्य के भेद:

रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद होते हैं-

  1. सरल,
  2. संयुक्त
  3. मिश्रा

सरल वाक्य

जिस वाक्य में एक क्रिया होती है, उसे सरल वाक्य कहते हैं। सरल वाक्य में एक कर्ता तथा एक क्रिया का होना आवश्यक है। उदाहरणतया-

मोहन स्कूल जाता है।
यहाँ ‘मोहन’ कर्ता है तथा जाता है’ क्रिया है। एक क्रिया होने के कारण यह सरल वाक्य है।
सरल वाक्य में कर्ता और क्रिया के अतिरिक्त कर्म, पूरक, क्रियाविशेषण, संप्रदान, अधिकरण, करण, अपादान घटक हो सकते हैं। यथा-

(क) मोहन हँसता है। (कर्ता-क्रिया)
(ख) राजेश बीमार है। (कर्ता पूरक-क्रिया)
(ग) पुलिस ने चोर को पीटा। (कर्ता-कर्म-क्रिया)
(घ) माता जी न शीला को एक साड़ी दी। (कर्ता-कर्म-कर्म-क्रिया)
(ङ) शीला आपको अपना बड़ा भाई मानती है (कर्ता-कर्म-पूरक-क्रिया)

संयुक्त वाक्य

जिस वाक्य में दो या अधिक मुख्य तथा स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं, वे संयुक्त वाक्य कहलाते हैं। ये दोनों पूर्ण अर्थ देने में सक्षम होते हैं। ये और, तथा, फिर, या, अथवा, अन्यथा, किंतु, लेकिन, इसलिए आदि योजकों से जुड़े होते हैं। जैसे-

हम लोग पुणे घूमने गए और वहाँ चार दिन रहे।
(i) हम लोग पुणे घूमने गए।
(ii) (हम) वहाँ चार दिन रहे।

वह आई तो थीकिंत उसने कुछ कहा नहीं था।
(i) वह आई थी।
(ii) उसने कुछ कहा नहीं था।

सत्य बोलोपरत कटु सत्य न बोलो।
(i) सत्य बोलो।
(ii) कटु सत्य न बोलो।

चुपचाप बैठोया यहाँ से बाहर
(i) चुपचाप बैठो।
(ii) यहाँ से चले जाओ।

वे बीमार हैं,अतः आने में असमर्थ हैं।
(i) वे बीमार हैं।
(ii) (वे) आने में असमर्थ हैं।

स्पष्ट है कि संयुक्त वाक्य में उपवाक्यों में जो शब्द दोनों ओर आते हैं, उनमें से एक का’ लोप कर दिया जाता हैं यथा

1. पिताजी चाय पिएँगे। (या) (और)
2. पिताजी कॉफी पिएंगे।

संयुक्त वाक्य
(i) पिताजी चाय या कॉफी पिएंगे।
(ii) पिताजी चाय और कॉफी पिएंगे।

मिश्र वाक्य

मिश्र वाक्य में एक से अधिक उपवाक्य होते हैं। उनमें एक उपवाक्य प्रधान होता है तथा अन्य एक-या-अधिक उपवाक्य उस पर आश्रित होते हैं। ये उपवाक्य परस्पर व्यधिकरण योजकों (जैसे कि, यदि, अगर, तो, तथापि, यद्यपि, इसलिए आदि) से जुड़े हुए होते हैं। उदाहरणतया –
यदि मैं न आया होता तो काम न बनता।
इसमें ‘काम न बनता’ प्रधान उपवाक्य पर ‘यदि मैं न आया होता’। उपवाक्य आश्रित है।

अन्य कुछ उदाहरण
(क) अध्यापक ने बताया कि कल स्कूल में छुट्टी होगी।
(ख) जो लड़का कमरे में बैठा है,वह मेरा भाई है।
(ग) जब मैं छोटा था तब साइकिल खूब चलाता था।
(घ) यदि इस बार वर्षा न हुई तो सारी फसल नष्ट हो जाएगी।
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद 1

आश्रित उपवाक्यों के भेद –
आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं-

(क) संज्ञा उपवाक्य- जो उपवाक्य प्रधान वाक्य की किसी संज्ञा या ‘संज्ञा-पदबंध’ के बदले में प्रयुक्त हुआ हो, उसे संज्ञा उपवाक्य कहते हैं। जैसे-
रहीम बोला कि मैं कर्नाटक जा रहा हूँ।

यहाँ ‘मैं कर्नाटक जा रहा हूँ’ उपवाक्य प्रधान वाक्य ‘रहीम बोला’ के कर्म के रूप में प्रयुक्त हो रहा है। अतः संज्ञा उपवाक्य है। संज्ञा उपवाक्य से पहले प्रायः ‘कि’ का प्रयोग होता है। कभी-कभी यह लुप्त भी हो जाता है। जैसे-

जान पड़ता है कि माता जी कुछ अस्वस्थ हैं।
इनसे यह न पूछिए कि ये कौन हैं?
तुम नहीं आओगे, मैं जानता था।

(ख) विशेषण उपवाक्य जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताता है, उसे ‘विशेषण उपवाक्य’ कहते हैं। जैसे-

आपकी वह किताब कहाँ है, जो आप कल लाए थे।.
-यहाँ ‘जो आप कल लाए थे’ उपवाक्य ‘वह किताब’ की विशेषता प्रकट कर रहा है, अतः विशेषण उपवाक्य है।

हिंदी में ‘जो’, ‘जिस’, ‘जिसे’, ‘जिसको’ से आरंभ होने वाले उपवाक्य विशेषण उपवाक्य कहलाते हैं। ये कभी वाक्य के प्रारंभ में आते हैं और कभी अंत में। यथा-
जो पैसे मुझे मिले थे, वे खर्च हो गए। (प्रारंभ में).
वे पैसे खर्च हो गए, जो मुझे मिले थे। (अंत में)

अन्य उदाहरण-
वह घर कौन-सा है, जहाँ आपके पिताजी रहा करते थे।
(ग) क्रियाविशेषण उपवाक्य जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की कोई विशेषता बताता है, वह क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाता है। इसके पाँच भेद होते हैं-
(i) कालवाची उपवाक्य
ज्योंही मैं स्टेशन पहुंचा, त्योंही गाड़ी ने सीटी बजाई।
जब पानी बरस रहा था, तब मैं घर के भीतर था।

(ii) स्थानवाची उपवाक्य
जहाँ तुम पढ़ते थे वहीं मैं पढ़ता था।
जिधर तुम जा रहे हो, उधर आगे रास्ता बंद है।

(iii) रीतिवाची उपवाक्य
मैंने वैसे ही किया है जैसे आपने बताया था।
वह उसी प्रकार खेलता है जैसा उसके कोच सिखाते हैं।

(iv) परिमाणवाची उपवाक्य
‘जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे महँगाई बढ़ती जाती है।
तुम जितना पढ़ोगे, उतना ही तुम्हारा लाभ होगा।

(v) परिणाम (कार्य-कारण) वाची उपवाक्य
वह जाएगा जरूर क्योंकि उसका साक्षात्कार है।
यदि मैंने पढ़ा होता तो अवश्य उत्तीर्ण हो गया होता।

स्पष्ट है कि क्रियाविशेषण उपवाक्य में जब’, ‘जहाँ’, ‘जैसा’, ‘ज्यों-ज्यों’ आदि समुच्चयबोधक अव्ययों का प्रयोग होता है।

वाल्य-विश्लेषण

प्रश्न
वाक्य-विश्लेषण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर किसी वाक्य के अंग-प्रत्यंग (कर्ता, कर्ता-विस्तार, कर्म, कर्म-विस्तार, कारक, क्रिया-विशेषण, क्रिया, योजक आदि) को पृथक्-पृथक् करके उनके आपसी संबंधों का अध्ययन-विश्लेषण करना ‘वाक्य-विश्लेषण’ कहलाता है। इसे वाक्य-विग्रह भी कहते हैं।

1. सरल वाक्य का विश्लेषण

सरल वाक्य का विश्लेषण करने के लिए सर्वप्रथम उसको दो भागों में विभाजित किया जाता है-

  1. उद्देश्य
  2. विधेय।

उद्देश्य- वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाए, वह ‘उद्देश्य’ कहलाता है। इसके अंतर्गत ‘कर्ता’ तथा ‘उसका विस्तार’ आते हैं।
विधेय— उद्देश्य के संबंध में जो कुछ कहा जाए, वह ‘विधेय’ कहलाता है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित पद आते हैं-

  1. कर्म
  2. कर्म का विस्तार (विशेषण या पदबंध)
  3. क्रिया
  4. क्रिया-विस्तार
  5. पूरक
  6. पूरक-विस्तार
  7. अन्य कारकीय पद।

साधारण वाक्य में इन्हीं वाक्यांशों को पृथक्-पृथक् करके स्पष्ट करना होता है। उदाहरणतया
मैदान में चार लड़के फुटबाल खेल रहे हैं।

इसका विश्लेषण इस प्रकार होगा-
उद्देश्य- लड़के (कर्ता)
चार (कर्ता-विस्तार ‘विशेषण’)
विधय – फुटबाल (कर्म)
खेल रहे हैं। (क्रिया पदबंध)
मैदान में। (अधिकरण कारक)

इस वाक्य को विस्तृत करके यों भी लिखा जा सकता है-
सामने वाले बड़े मैदान में, वे चारों काली नेकर पहने लड़के, बिल्कुल नया फुटबाल, बहुत अच्छा, खेल रहे हैं। अब इसका विश्लेषण इस प्रकार होगा-

उद्देश्य- कर्ता-लड़के।
कर्ता-विस्तार-वे चारों काली नेकर पहने
विधेय- कर्म- फुटबाल
कर्म-विस्तार-बिल्कुल नया
क्रिया पदबंध- खेल रहे हैं
क्रियाविशेषण- अच्छा
क्रियाविशेषण-विस्तार- बहुत
अधिकरण कारक- मैदान में
विस्तार–सामने वाले बड़े

2. संयुक्त वाक्य का विश्लेषण

संयुक्त वाक्य में दो उपवाक्य योजक चिह्नों से जुड़े हुए होते हैं। सर्वप्रथम संयुक्त वाक्य का योजक हटाकर उन्हें साधारण वाक्यों में बदलना चाहिए। उन साधारण वाक्यों का उपर्युक्त रीति से विश्लेषण करना चाहिए। उन साधारण वाक्यों में भी एक मुख्य तथा दूसरा उससे जुड़ा रहता है। इस प्रकार प्रथम उपवाक्य प्रधान तथा दूसरा उपवाक्य समानाधिकरण कहलाता है।
संयुक्त वाक्य का विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित बातों का उल्लेख करना चाहिए-

  1. प्रधान उपवाक्य
  2. समानाधिकरण उपवाक्य
  3. समुच्चयबोधक (अव्यय)

उदाहरण-

  1. रंजन ने अत्यधिक परिश्रम किया, परंतु वह सफल न हो सका।
  2. हमारे मित्र कल यहाँ से जाएंगे और आगरा पहुँचकर वहाँ ताजमहल देखेंगे।
  3. गाँव वालों ने बाढ़ के पानी को रोकने का बहुत प्रयत्न किया, परंतु वह रुक न सका।
  4. जासूस को अपाधियों का भेद लेना था, इसलिए वह उनके पास ठहर गया।
  5. रात्रि हुई और तारे निकले।
  6. मेरा मित्र रोज विद्यालय जाता है और मन लगाकर पढ़ता है।

विश्लेषण-
Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद 2

3. मिश्र वाक्य का विश्लेषण

मिश्र वाक्य में प्रधान उपवाक्य और गौण उपवाक्य योजक द्वारा संबद्ध रहते हैं। उसके विश्लेषण के लिए पहले प्रधान उपवाक्य की पहचान करनी चाहिए। तत्पश्चात् गौण उपवाक्यों की पहचान करके उनके कार्य का उल्लेख करना चाहिए। योजकों को पृथक् करके साधारण वाक्यों की रीति के अनुसार उनका विश्लेषण करना चाहिए।

मिश्र वाक्य के विश्लेषण में निम्न बातों का उल्लेख करना चाहिए-

  1. मुख्य उपवाक्य
  2. आश्रित उपवाक्य
  3. आश्रित उपवाक्य का प्रकार और मुख्य उपवाक्य से संबंध ।
  4. समुच्चयबोधक अव्यय

उदाहरण –

  1. जो छात्र परिश्रमपूर्वक पढ़ते हैं, वे सफलता अवश्य प्राप्त करते हैं।
  2. आपको सुनकर प्रसन्नता होगी कि उसने अपना कार्य पूर्ण कर लिया है।
  3. हमें चाहिए कि हम वार्ता में ही समय व्यतीत न करें।
  4. यहाँ जो दुष्ट लोग रहते हैं, हम उनका संहार करते हैं।
  5. जब मैं छोटा लड़का था तब साइकिल खूब चलाता था।

विश्लेषण-

Bihar Board Class 10 Hindi व्याकरण वाक्य-भेद - 3

वाक्य-संश्लेषण

वाक्य-विश्लेषण का विपरीतार्थक है-वाक्य संश्लेषण। वाक्य-विश्लेषण में एक सुगठित वाक्य को खंड-खंड करके समझा जाता है, जबकि वाक्य-संश्लेषण में खंड-खंड वाक्यों, वाक्यांशों को एक सुगठित रूप प्रदान किया जाता है। दूसरे शब्दों में, एक से अधिक साधारण वाक्यों को एक वाक्य में निबद्ध करना वाक्य-संश्लेषण कहलाता है।

अनेक साधारण वाक्यों का एक साधारण वाक्य में संश्लेषण-

वाक्य-संश्लेषण व्यक्तिगत अभ्यास से आता है। फिर भी इसके लिए कुछ सूत्र हैं

  1. सभी वाक्यों में से किसी एक वाक्य की क्रिया को मुख्य क्रिया के रूप में चुन लेना चाहिए।
  2. अन्य वाक्यों की क्रियाओं को पूर्वकालिक क्रिया, विशेषण पदबंध अथवा संज्ञा पदबंध में बदल देना चाहिए।
  3. आवश्यकता पड़ने पर उपसर्ग और प्रत्ययों के योग से नए शब्दों का निर्माण कर लेना चाहिए।

उदाहरणतया नीचे आठ सरल वाक्य दिए जा रहे हैं

  1. सामने एक मैदान है। (केवल पृष्ठभूमि स्थान की)
  2. मैदान बड़ा है। (मैदान की विशेषता)
  3. मैदान में लड़के खेल रहे हैं। (खेलने की क्रिया, खेलने वाले लड़के, स्थान मैदान)
  4. लड़के गेंद खेल रहे हैं। (खेलने की क्रिया, कर्ता-लड़के, कर्म-गेंद)
  5. लड़के संख्या में दो हैं। (लड़कों की संख्यात्मक विशेषता)
  6. लड़के नेकर पहने हैं। (लड़कों की गुणात्मक विशेषता)
  7. नेकर का रंग काला है। (नेकर की गुणात्मक विशेषता)
  8. गेंद बिल्कुल नई है। (गेंद की गुणात्मक विशेषता)

इन वाक्यों में से मुख्य क्रिया-वाक्य का चयन कीजिए। यथा ‘खेल रहे हैं।’ अब इनके साथ कर्ता, कर्ता-विस्तार, कर्म, कर्म-विस्तार, क्रियाविशेषण तथा अन्य विशेषण जोडिए। उपर्युक्त वाक्यों को ही विशेषण आदि में परिवर्तित कीजिए।
सामने वाले बड़े मैदान में काले नेकर पहने दो लड़के नई गेंद खेल रहे हैं।

उदाहरण-1.
आगरा उत्तर प्रदेश में स्थित है।
आगरा में ताजमहल है।
ताजमहल बहुत सुंदर और दर्शनीय है।
पर्यटके विश्व के कोने-कोने से उसे देखने के लिए आते हैं।

इन चारों वाक्यों का एक ही वाक्य में संश्लेषण इस प्रकार होगा
उत्तर प्रदेश में स्थित आगरा के सुंदर और दर्शनीय ताजमहल को देखने के लिए पर्यटक विश्व के कोने-कोने से आते हैं।

उदाहरण – 2
वहाँ एक गाँव था।
वह गाँव छोटा-सा था।
उसके चारों ओर जंगल था।
उस गाँव में आदिवासियों के दस परिवार रहते थे।

वाक्य-संश्लेषण वहाँ चारों ओर जंगल से घिरे एक छोटे से गाँव में आदिवासियों के दस परिवार रहते थे।

उदाहरण-3
वहाँ एक गाँव था।
वह गाँव छोटा-सा था।
उसके चारों ओर जंगल था।

संश्लेषण- उस छोटे से गाँव के चारों ओर जंगल था।
क्रियामलक विशेषणों का महत्त्व वाक्य-संश्लेषण की प्रक्रिया में क्रियामूलक विशेषणों का बहुत महत्त्व है। छात्रों को सरल वाक्यों को क्रिया के कृदंती रूप में बदलने का अभ्यास करना चाहिए। कृदंती रूपों की रचना-प्रक्रिया इस प्रकार है-

वर्तमान कृदंत (-ता, -ती, -ते) चलते हुए, गिरता हुआ, खाती हुई
पूर्ण कृदंत (ने वाला) जाने वाला
अन्य कृदंत (खिलाड़ी, पियक्कड़ आदि)

उदाहरण-

1. चिड़िया आकाश में उड़ रही है + चिड़िया कितनी सुंदर है →
आकाश में उडती हुई चिड़िया कितनी संदर है। आकाश में उठ रही चिड़िया कितनी सुंदर है।
आकाश में उडने वाली चिड़िया कितनी सुंदर है।

2. वह लड़का बहुत थक गया है + लड़का अब पेड़ के नीचे बैठा है →
वह बहुत थका हुआ लड़का अब पेड़ के नीचे बैठा है।

3. यह लड़का मैदान में रोज खेला करता था + वह लड़का आज नहीं आया →
मैदान में रोज खेलने वाला लड़का आज नहीं आया।

अनेक साधारण वाक्यों का मिश्र अथवा संयुक्त वाक्य में संश्लेषण-
अनेक साधारण वाक्यों को मिश्र अथवा संयुक्त वाक्यों में भी संश्लिष्ट किया जा सकता है। इसके लिए भी कठोर परिश्रम और अभ्यास आवश्यक है।

उदाहरण-साधारण वाक्य-

  1. पुस्तक में एक कठिन प्रश्न था।
  2. कक्षा में उस प्रश्न को कोई हल नहीं कर सका।
  3. मैंने उस प्रश्न को हल कर लिया।

मिश्र वाक्य में संश्लेषण-

1. पुस्तक के जिस कठिन प्रश्न को कक्षा में कोई भी हल नहीं कर सका, मैंने उसे हल कर लिया। ।
अथवा
2. मैंने पुस्तक के उस कठिन प्रश्न को हल कर लिया, जिसे कक्षा में कोई भी हल नहीं कर सका था।
संयुक्त वाक्य में संश्लेषण-पुस्तक के एक कठिन प्रश्न को कक्षा में कोई नहीं हल कर पायो, लेकिन मैंने कर दिया।

वाक्य-रचनांतरण (रूपांतरण)

एक प्रकार के वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना वाक्य-रचनांवरण कहलाता है। ” रचना की दृष्टि से वाक्य-रचनांतरण की प्रक्रिया निम्नलिखित है-

1. रचना की दृष्टि से वाक्य-परिवर्तन ।

सरल वाक्य को मिश्र अथवा संयुक्त वाक्य में बदलना; मिश्र वाक्य को सरल अथवा संयुक्त वाक्य में बदलना तथा संयुक्त वाक्य को सरल और मिश्र वाक्य में बदलना इस कोटि के अंतर्गत आता है। यह ध्यान रखने योग्य है कि वाक्य-रचना बदलनी चाहिए, किंतु अर्थ नहीं बदलना चाहिए।

रचनांतरण-प्रक्रिया मिश्र और संयुक्त वाक्यों को सरल वाक्य में बदलते हुए वाक्य-संश्लेषण की प्रक्रिया का उपयोग करना पड़ता है। पहले मुख्य क्रिया का चयनफिर अन्य उपवाक्यों को विशेषण, कृदंती क्रिया आदि रूपों में रखना—यही उचित प्रक्रिया है। सरल वाक्य को मिश्र अथवा संयुक्त वाक्य में बदलते हुए वाक्य-संश्लेषण की विपरीत क्रिया को अपनाना चाहिए। अर्थात् विशेषणों को सरल उपवाक्यों में बदलना चाहिए: कृदंती क्रिया रूपों को गौण उपवाक्यों में बदलना चाहिए। उदाहरणतया-

सरल वाक्य से संयुक्त वाक्य:

1. उसने घर आकर भोजन किया। (सरल)
वह घर आया और उसने भोजन किया। (संयुक्त)

2. वह फल खरीदने के लिए बाजार गया। (सरल)
उसे फल खरीदने थे इसलिए वह बाजार गया। (संयुक्त)

3. मोहन हिंदी पढ़ने के लिए शास्त्री जी के यहाँ गया है। (सरल)
मोहन को हिंदी पढ़नी है इसलिए शास्त्री जी के यहाँ गया है। (संयुक्त)

4. रात को आकाश में तारों का मेला लग गया। (सरल)
रात आई और आकाश में तारों का मेला लग गया। (संयुक्त)

सरल वाक्य से मिश्र वाक्य :

1. मोहन शास्त्री जी के यहाँ हिंदी पढ़ने गया है। (सरल)
मोहन शास्त्री जी के यहाँ गया है, क्योंकि उसे हिंदी पढ़नी है। (मिश्र)

2. देश के लिए मर-मिटने वाला सच्चा देशभक्त होता है। (सरल)
जो देश के लिए मर मिटता है, वही सच्चा देशभक्त होता है। (मिश्र)

3. शिक्षक के सामने छात्र शांत रहते हैं। (सरल)
जब तक शिक्षक रहता है, छात्र शांत रहते हैं। (मिश्र)

4. मोहन ने मुझे जल्दी भोजन करने के लिए कहा। (सरल)
मोहन ने कहा कि मुझे जल्दी भोजन करना है। (मिश्र)

संयुक्त वाक्य से मिश्र वाक्य :

1. शीला ने एक पुस्तक माँगी और वह उसे मिल गई। (संयुक्त)
शीला ने जो पुस्तक मांगी थी, वह उसे मिल गई। (मिश्र)

2. मजदूर मेहनत करता है, लेकिन उसका लाभ उसे नहीं मिलता। (संयुक्त)
मजदूर जितनी मेहनत करता है, उसका उसे उतना लाभ नहीं मिलता। (मिश्र)

3. मोहन बहुत खिलाड़ी है लेकिन फेल कभी नहीं होता! (संयुक्त)
मोहन ऐसा खिलाड़ी है, जो कभी फेल नहीं होता। (मिश्र)

संयुक्त वाक्य से सरल वाक्य

संयुक्त – मजदूर मेहनत करता है लेकिन उसका लाभ उसे नहीं मिलता।
साधारण – मजदूर को अपनी मेहनत का लाभ नहीं मिलता।
संयुक्त – मोहन बहुत खिलाड़ी है, लेकिन फेल कभी नहीं होता।
सरल – मोहन बहुत खिलाड़ी होने पर भी फेल कभी नहीं होता।
मिश्र – यद्यपि मोहन बहुत खिलाड़ी है, तथापि फेल कभी नहीं होता।
संयुक्त – गरीब मेहनत करते हैं परंतु उन्हें भरपेट रोटी नहीं मिलती।
साधारण – मेहनत करने पर भी गरीबों को भरपेट रोटी नहीं मिलती।
संयुक्त – वह बाजार गया और संतरे लाया।
साधारण – वह बाजार जाकर संतरे लाया।

मिश्र वाक्य से सरल वाक्य :

– जब तक मोहन घर पहुंचा तब तक उसके पिता चल चुके थे।
मोहन के घर पहुंचने से पूर्व उसके पिता चल चुके थे।
– मैंने एक आदमी देखा जो बहुत बीमार था।
मैंने एक बहुत बीमार आदमी देखा।
– अध्यापक ने छात्रों से कहा कि तुम परिश्रमपूर्वक पढ़ो और परीक्षा में अच्छी श्रेणी लाओ।
अध्यापक ने छात्रों को परिश्रमपूर्वक पढ़कर परीक्षा में अच्छी श्रेणी लाने के लिए कहा।
– उसने कहा कि मैं निर्दोष हूँ।
उसने स्वयं को निर्दोष बताया।
– एक व्यक्ति जो सड़क पार कर रहा था, बस से टकराकर मर गया।
सड़क पार करता हुआ एक व्यक्ति बस से टकराकर मर गया।

मिश्र वाक्य से संयुक्त वाक्य

– यदि वह तेज दौड़ता तो गाड़ी मिल जाती। →
वह तेज दौड़ता तो गाड़ी मिल जाती।।
– मेरी जो गाय काली है वह खेत में चर रही है →
मेरी गाय काली है और खेत में चर रही है।
– जब सभा समाप्त हुई तो सब लोग चले गए →
सभा समाप्त हुई और सब लोग चले गए।
– जो तोता पिंजड़े में है, वह दाल खा रहा है →
तोता पिंजड़े में है और दाल खा रहा है।

वाच्य-परिवर्तन

प्रश्न
वाच्य किसे कहते हैं ? उसके भेदों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
वाच्य’ का शाब्दिक अर्थ है ‘बोलने का विषय क्रिया के जिस रूपांतर से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किए गए विधान का केंद्र-बिंदु कर्ता है, कर्म है अथवा क्रिया-भाव, उसे वाच्य कहते हैं। उदाहरणतया-
रमेश खेल रहा है।
– इसमें खेलना क्रिया का कथ्य-बिंदु है-रमेश (कर्ता)। अतः यह कर्तृवाच्य वाक्य है।

दूसरा उदाहरण-
रमेश द्वारा फुटबाल खेली जा रही है।
– इसमें खेलने का कथ्य-बिंदु है ‘फुटबाल’ (कर्म)। अत: यह कर्मवाच्य है।

तीसरा उदाहरण-
मुझसे खेला नहीं जा रहा।
– इसमें स्वयं ‘खेला जाना’ (क्रिया-भाव) ही वाक्य का कथ्य-बिंदु है। अतः यह भाववाच्य वाक्य है। उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि वाच्य के तीन भेद होते हैं-

वाच्य के भेद

वाच्य के दो भेद हैं-कर्तृवाच्य और अकर्तृवाच्या
1. कर्तवाच्य-जिस वाक्य में वाच्य-बिंदु ‘कर्ता’ है, उसे ‘कर्तृवाच्य’ कहते हैं। जैसे-
बच्चे खेल रहे हैं।
अशोक पुस्तक पढ़ता है।
कन्याएँ ढोलकं बजाएँगी।
इन तीनों वाक्यों में कथ्य-बिंदु कर्ता (बच्चे, अशोक, कन्याएँ) हैं। अत: ये कर्तृवाक्य वाक्य

2. अकर्तृवाच्य जिन वाक्यों में कर्ता गौण अथवा लुप्त होता है, उन्हें अकर्तृवाच्य कहते हैं। इसके दो भेद हैं-(क) कर्मवाच्य तथा (ख) भाववाच्य।
(क) कर्मवाच्य जहाँ वाच्य-बिंदु कर्ता न होकर ‘कर्म’ हो, वहाँ कर्मवाच्य होता है। इन वाक्यों में या तो कर्ता का लोप हो जाता है, या उसके साथ “से’ या ‘के द्वारा’ का प्रयोग होता है। जैसे
रमेश से अब दूध पिया नहीं जा रहा है। (कर्ता + से)
– इस वाक्य में वाच्य-बिंदु ‘दूध’ (कर्म) है। अतः यह कर्मवाच्य वाक्य है। कुछ अन्य उदाहरण देखिए-

दवाईदे दी गई है। (कर्ता का लोप)
पतंगबहुत अच्छी तरह उड़ रही है। (कर्ता का लोप)
हमसे सुंदर चित्रदेखे गए। (कर्ता + से)
रोगी को भोजनदिया गया। (कर्ता का लोप)
यह उपन्यास प्रेमचंदद्वारा लिखा गया। (कर्ता + द्वारा)

(ख) भाववाच्य जिस वाक्य में वाच्य-केंद्र क्रिया हो अर्थात् जहाँ न कर्ता की प्रधानता हो, न कर्म की, बल्कि जहाँ ‘क्रिया का भाव’ ही मुख्य हो, उसे भाववाच्य कहते हैं। भाववाच्य की क्रिया सदा अन्यपुरुष पुल्लिंग एकवचन में रहती है।
उदाहरणतया-
मुझसे अब चलानहीं जाता।
– यहाँ चलने की असमर्थता ही प्रमुख है, कर्ता नहीं। अतः यह भाववाच्य वाक्यहै। अन्य उदाहरण-

गर्मियों में खूबनहाया जाता है।
अबचला जाए।
थोड़ी देरसो लिया जाए।
राधा से रात-भर कैसेजागा जाएगा।

टिप्पणी कर्तृवाच्य में सकर्मक और अकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग होता है। … कर्मवाच्य में सकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है। भाववाच्य में केवल अकर्मक क्रिया का प्रयोग : होता है। कर्मवाच्य के प्रयोग-स्थल निम्नलिखित स्थलों पर कर्मवाच्य वाक्यों का प्रयोग होता है

(क) जब कर्ता का निश्चित रूप से पता न हो या किसी कारणवश उसका उल्लेख न करना चाहते हों। जैसे-
डाकपेटी में चिट्ठी डाल दी गई है।
उसकी घड़ी मेज पर से चुरा ली गई है।
चिट्ठी भेजी गई।

(ख) जब आपके बिना चाहे कोई कर्म अचानक हो गया हो। जैसे-
शोशा गिर गया और टूट गया।
शीशे का गिलास छूट गया।

(ग) जब कर्ता स्वतंत्र रूप से कोई व्यक्ति न हो बल्कि कोई व्यवस्था या तंत्र (सभा, समिति, सरकार आदि हो, या जहाँ व्यक्ति ने जो किया है, वह व्यक्तिगत रूप से नहीं किया है बल्कि पदेन किया है।) जैसे-

सरकार द्वारा गरीबों के लिए बहुत से काम किए जा रहे हैं।
आपको सूचित किया जाता है कि ……….
दंगाग्रस्त लोगों की आर्थिक सहायता पार्टी द्वारा की जा रही है।
रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
सभी द्वारा जनहित के अनेक कार्य किए जा रहे हैं।

(घ) सूचना विज्ञप्ति आदि में जहाँ कर्ता निश्चित नहीं है, जैसे-
पटरी पार करने वालों को सजा दी जाएगी।
अभियुक्त को न्यायालय में पेश किया जाए।

(ङ) असमर्थता बताने के लिए ‘नहीं’ के साथ। जैसे-
अब अधिक दूध नहीं पिया जाता।
यह खाना हमसे नहीं खाया जाता।
आजकल गरीब की बात नहीं सुनी जाती।
अब अधिक भोजन नहीं खाया जाएगा।
अब तो पत्र भी नहीं लिखा जाता।

भाववाच्य के प्रयोग-स्थल-

(क) प्रायः असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए ‘नहीं’ के साथ भाववाच्य का प्रयोग होता है। जैसे-
अब खड़ा तक नहीं हुआ जाता।
अब तो हमसे चला भी नहीं जा रहा।
रातभर कैसे जागा जाएगा?

(ख) जहाँ ‘नहीं’ का प्रयोग नहीं होता, वहाँ मूल कर्ता जन-सामान्य होता है, जैसे-
गर्मियों में छत पर सोया जाता है।
अब तो चला जाए।
आओ, जरा घूमा जाए।

वाच्य-परिवर्तन

कर्तवाच्य से कर्मवाच्य बनाने की विधि-

  1. कर्तृवाच्य के कर्ता और कर्म की विभक्तियाँ हटाकर कर्ता के साथ ‘से’, ‘के द्वारा’ या ‘द्वारा’ लगाना चाहिए।
  2. कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया में बदलकर उसके साथ ‘जाना’ क्रिया का (मुख्य क्रिया के लिंग, वचन, पुरुष अनुसार) रूपांतरित रूप जोड़ देना चाहिए।

इन नियमों-विधियों के अनुसार किसी भी कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में सुगमता से बदला जा सकता है। उदाहरणतया

  1. बालक पत्र लिखता है। – बालक से पत्र लिखा जाता है।
  2. माँ ने पुत्र को सुला दिया। – माँ के द्वारा पुत्र सुला दिया गया।
  3. रजिया ने कपड़े धोए। – रजिया से कपड़े धोए गए।
  4. तुम फूल तोड़ोगे। – तुमसे फूल तोड़े जाएंगे।
  5. रमेश अब दूध नहीं पी रहा है। – रमेश से अब दूध नहीं पिया जा रहा है।
  6. रमेश पतंग उड़ा रहा है। – रमेश द्वारा पतंग उड़ाई जा रही है।
  7. रजिया ने पुस्तक पढ़ी। – रजिया से पुस्तक पढ़ी गई।
  8. अशोक पुस्तक पढ़ता है। – अशोक द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।
  9. मोहन फूल तोड़ता है। – मोहन से फूल तोड़ा जाता है।
  10. तुम लिख नहीं सकते।। – तुमसे लिखा नहीं जा सकता।

कर्तवाच्य से भाववाच्य बनाने की विधि-
(क) कर्ता के आगे ‘से’, ‘द्वारा’ अथवा ‘के द्वारा विभक्ति लगा दें।
(ख) मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल की क्रिया के एकवचन में बदलकर उसके साथ . ‘जाना’ धातु के एकवचन, पुल्लिंग, अन्य पुरुष का वही काल लगा दें जो कर्तृवाच्य की क्रिया का है।

इन नियमों के अनुसार किसी भी कर्तृवाच्य को भाववाच्य में आसानी से बदला जा सकता है। उदाहरणतया-

  1. बच्चे खेलेंगे। – बच्चों द्वारा खेला जाएगा।
  2. लड़की आँगन में सो रही थी। – लड़की के द्वारा आँगन में सोया जा रहा था।
  3. पक्षी आकाश में उड़ते हैं। – पक्षियों से आकाश में उड़ा जाता है।
  4. मैं अब चल नहीं पाता। – मुझसे अब चला नहीं जाता।
  5. गर्मियों में लोग खूब नहाते हैं। – गर्मियों में (लोगों द्वारा) खूब नहाया जाता है।
  6. बच्चे जागेंगे। – बच्चों द्वारा जागा जाएगा।
  7. राम नहीं सोता। – राम से नहीं सोया जाता।
  8. बच्चा रोता है। – बच्चे से रोया जाता है।

कर्तवाच्य बनाना- कर्मवाच्य या भाववाच्य से कर्तृवाच्य बनाना उपर्युक्त विधि के विपरीत है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं-

  1. बच्चों से खेला जाएगा। – बच्चे खेलेंगे।
  2. राम से पढ़ा नहीं जाता। – राम नहीं पढ़ता।
  3. सुरेश द्वारा कल पत्र लिखा जाएगा। – सुरेश कल पत्र लिखेगा।
  4. अमित से दौड़ा नहीं जाता। – अमित दौड़ नहीं सकता।

Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 तुम कल्पना करो

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 6 तुम कल्पना करो Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 6 तुम कल्पना करो

Bihar Board Class 6 Hindi तुम कल्पना करो Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से –

Tum Kalpana Karo Bihar Board Class 6 प्रश्न 1.
पाठ के आधार पर आप किस प्रकार की कल्पना कीजिएगा?
उत्तर:
पाठ के आधार पर हम अपनी कल्पना करना कि पुरानी नीतियों, रीतियों एवं पुरानी कुरीतियों से दूर होकर हरेक क्षेत्र में नवीनता की कल्पना करेंगे।

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
‘राष्ट्र के शरीर’ कहने से आपके मन में किसका चित्र आता
उत्तर:
‘राष्ट्र के शरीर’ कहने से हमारे मा में भारत माता का चित्र मन में आता है।

तुम कल्पना करो कविता Bihar Board Class 6 प्रश्न 3.
चित्तौड़ के ‘प्रताप’ की कहानी हमें क्या सिखलाती है?
उत्तर:
चित्तौड़ के प्रताप’ की कहानी हमें सिखलाती है कि गुलामी हम . कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए।

Bihar Board Class 6 Hindi Book प्रश्न 4.
इस कविता के माध्यम से हमें क्या-क्या करने की बात कही गई है?
उत्तर:
इस कविता के माध्यम से हमें नवीन कल्पना, राष्ट्रशक्ति के लिए नवीन कामना, दरिद्रता दूर करने के लिए सूर्य-चन्द्रमा से समृद्धि और ऋद्धि-सिद्धि याचना तथा स्वतंत्र योजना बनाने की बात कही गई है।

Bihar Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 5.
नीचे लिखी गई पंक्तियों को पूरा कीजिए –
प्रश्नोत्तरजंजीर टूटती कभी न अश्रु-धार से,
दुख-दर्द दूर भागते नहीं दुलार से।
हटती न दासता पुकार से, गुहार से,
इस गंग-तीर बैठ आज राष्ट्र-शक्ति की।
तुम कामना करो, किशोर कामना करो,
तुम कामना करो।

पाठ से आगे –

Tum Kalpana Karo Kavita Bihar Board Class 6 प्रश्न 1.
आकाश को स्वतंत्र क्यों कहा गया है ?
उत्तर:
आकाश पर किसी का प्रभुत्व नहीं है। इसलिए उसे स्वतंत्र कहा गया है।

Kislay Hindi Book Bihar Class 6 प्रश्न 2.
कविता को पढ़ने के बाद अपने मन में कौन-सा भाव उत्पन्न होता है?
उत्तर:
कविता को पढ़ने के बाद हमें स्वतंत्र होने तथा स्वतंत्र नवीन कल्पना करने का भाव उत्पन्न होता है।

तुम कल्पना करो कविता का सारांश Bihar Board Class 6 प्रश्न 3.
इस पाठ के प्रत्येक पद में एक-एक काम करने के लिए कहा गया है। उन्हें खोजिए और प्रत्येक के संबंध में पाँच पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
प्रथम पद में नवीन कल्पना करने को कहा गया है। नवीन कल्पना से ही नया समाज, नया राष्ट्र का निर्माण सम्भव है। नवीन कल्पना के माध्यम से हम पुरानी नीतियों, रीतियों और कुरीतियों को दूर कर सकते हैं। जब पुरानी परम्परा रीति-रिवाज आदि दूर होगा तो हममें नई धारणाएँ नई सोच उत्पन्न होगा।

दूसरे पद में किशोर (नवीन) कामना की बात कही गई है। वस्ततः में नई कामना (इच्छाएँ) से ही समाज में या देश में बदलाव सम्भव है। जो किसी के सामने आँसू बहाने या पुचकारने या किसी का गुहार लगाने से सम्भव नहीं है। नई कामना पूरी होने के लिए हमें पूज्य होना होगा। तभी हमारी – इच्छा पूर्ण हो सकता है।

तीसरे पद में याचना करने की बात कही गई है। वस्तुत: पूर्ण से ही पूर्णता की याचना करना चाहिए । सूर्य चन्द्रमा जो पूर्ण है। हमें उससे समृद्धि आदि की याचना करना चाहिए जिससे हमारा समाज या हमारा देश सब प्रकार से समृद्ध होगा। हमारे देश से गरीबी दूर होगी।

चौथे पद में स्वतंत्र योजना बनाने के लिए कहा गया है। स्वतंत्र योजना से हम कोई कार्य को भलीभाँति कर सकते हैं। स्वतंत्र योजना से ही समृद्धिशाली समाज या देश बन सकता है। स्वतंत्र योजना ही सफलता का कारण है। यदि हमारी योजना में किसी का दखलअंदाजी होता है तो योजना के तरफ से मन टूटता नजर आता है।

तुम कल्पना करो कविता का अर्थ Bihar Board Class 6 प्रश्न 4.
इस कविता को पढ़ने से मेरा मन ………….. से भर गया।
(प्रेम, श्रद्धा, उत्साह, देश-प्रेम) उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थान को भरिए तथा इसके लिए अपना तर्क दीजिए।
उत्तर:
इस कविता को पढ़ने से मेरा मन उत्साह से भर गया।

व्याकरण

Bihar Board Class 6 Hindi Solution In Hindi प्रश्न 1.
रके भिन्न-भिन्न रूपों का प्रयोग करते हुए पाँच-पाँच शब्द लिखिए।
(क) उम्र …….. …….. …….. ……..
(ख) कर्म …….. …….. …….. ……..
(ग) ट्रक …….. …….. …….. ……..
उत्तर:
(क) उम्र, कब्र, कद्र, नम्र, भद्र ।
(ख) कर्म, दर्द, फर्क, मर्द, दर्द।
(ग) ट्रक, ट्रस्ट, राष्ट्र, ड्राम, ट्राम।

Class 6 Bihar Board Hindi Book प्रश्न 2.
निम्नलिखित उपसर्गों से दो-दो शब्द बनाइए।
प्र – प्रहार प्रबल परि …….. ……..
कु – ………. ………. पर …….. ……..
उप – ………. ………. स्व …….. ……..
अ – ………. ……….. प्रति …….. ……..
यहाँ प्र, क, उप, अ, परि, स्व, प्रति इत्यादि शब्दांश शब्द के शुरू में जुड़कर शब्द के अर्थ में विशेषता लाते हैं। इस प्रकार के वाक्यांश उपसर्ग कहलाते हैं।
उत्तर:
प्र- प्रहार, प्रबल।
परि – परिश्रम, परिवार ।
कु – कुकर्म, कुपुत्र । पर – परोपकार, पराधीन।
उप – उपयोग, उपमान । स्व-स्वकर्म, स्वतंत्र ।
अ – अविचल, अचल । प्रति – प्रतिदिन, प्रत्येक।

कुछ करने को –

Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 1.
आप एक अच्छे विद्यालय की कल्पना कीजिए और बताइए कि विद्यालय में क्या होना चाहिए?
उत्तर:
एक अच्छे विद्यालय में खेल का मैदान, पुष्पवाटिका, खेल का उपकरण, प्रयोगशाला, सभा भवन, शौचालय, पुस्तकालय और वाचनालय होना चाहिए।

Bihar Board Class 6 Hindi Solution प्रश्न 2.
आप अपने समाज की किन-किन प्रथाओं को समाप्त करना चाहते हैं और क्यों?
उत्तर:
हम अपने समाज से छुआ-छूत, श्राद्ध आदि अवसर पर अधिक खर्च इत्यादि प्रथाओं को दूर करना चाहते हैं इसलिए कि छुआ-छुत से समाज बढ़ता है तथा प्रथाओं के हि अधिक खर्च करना हम अनुचित समझते हैं।

तुम कल्पना करो Summary in Hindi

अर्थ-लेखन

तुम कल्पना ……………………………… तुम कल्पना करो।

अर्थ – अब नवीन कल्पना का समय आ गया है। अब समाज की तमाम . नीतियाँ घिस गई हैं, पुरानी रीतियाँ घिस गई है। कुरीतियाँ अब चुनौतियाँ दे रही हैं। अब अपने देश भारत माता के शरीर सिंगार के लिए नवीन कल्पना करो।

जंजीर टूटती ……………………………… किशोर कामना करो, तुम कामना करो।

अर्थ – आँसू बहाने से गुलामी की जंजीर नहीं टूटती । दुलार करने से दुख-दर्द नहीं भागता । पुकार और गुहार से .दासता नहीं हटती । इसलिए तुम गंगा के किनारे लौटकर आज राष्ट्र-शक्ति की कामना करो। नई कामना करो।

जो तुम गए, स्वदेश ……………………………… दरिद्र याचना करो, तुम याचना करो। .

अर्थ – यदि तुम कामना करने में चुक गये तो स्वदेश की जवानियाँ चली जायेंगी। चित्तौड़ के महाराणा प्रताप की वीरता की कहानी मिट जायेगा । आजाद भारत का रक्त बहाव रूक जायेगी। अब सूर्य-चन्द्रमा से भारत की समृद्धि तथा ऋद्धि-सिद्धि की याचना तुम करो। तुम गरीब हो, इसलिए याचना करो।

आकाश है स्वतंत्र ……………………………… योजना करो, तुम योजना करो।

अर्थ – आकाश स्वतंत्र है, भारत की मेखला (करधनी) गंगा-यमुना आदि नदियाँ स्वतंत्र हैं। पर्वत के शिखर भी स्वतंत्र रूप में खड़े हैं, ढलकाऊँ बनाकर झरना, पर्वत की चोटियों के सदैव स्वतंत्रतापूर्वक काटती रहती। इसलिए स्वतंत्रतापूर्वक तुम भी आनन्द या शोक, जन्म या मृत्यु के लिए अपनी स्वतंत्र योजना बनाओ।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 9 अशोक का शास्त्र-त्याग

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 3 Chapter 9 अशोक का शास्त्र-त्याग Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 9 अशोक का शास्त्र-त्याग

Bihar Board Class 8 Hindi अशोक का शास्त्र-त्याग Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से

Ashok Ka Shastra Tyag Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
पद्मा के ललकारने पर भी अशोक ने युद्ध करना स्वीकार क्यों नहीं किया?
उत्तर:
पद्मा स्त्रियों की सेना लेकर युद्ध के लिए ललकार रही थी। लेकिन अशोक ने युद्ध स्वीकार नहीं किया क्योंकि अशोक स्त्रियों पर हाथ उठाना पाप मानते थे । स्त्रियों के साथ पुरुष का युद्ध करना शास्त्र में अनुचित कहा गया है।

Ashok Ka Shastra Tyag Class 8 Bihar Board प्रश्न 2.
पदमा को अशोक से बदला लेने का अच्छा अवसर था, तब भी उसने अशोक को जीवित क्यों छोड़ दिया?
उत्तर:
पद्मा के सामने सम्राट अशोक नतमस्तक थे । वे शस्त्र का त्याग कर चुके थे तथा प्रण कर लिए कि आगे कभी यद्ध नहीं करूँगा। वीर सैनिक कभी भी निहत्थों पर वार नहीं करते इसीलिए पद्मा अवसर पाकर भी अशोक से बदला नहीं लेकर जीवित छोड़ दिया।

Ashok Ka Shastra Tyag Bihar Board प्रश्न 3.

  1. बुद्धं शरणं गच्छामि।।
  2. धर्मं शरणं गच्छामि।
  3. संघं शरणं गच्छामि।

बॉक्स में दिए गए उपर्युक्त वाक्य संस्कृत भाषा में लिखे गये हैं। इन्हें हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:

  1. भगवान बुद्ध के शरण में जाता हूँ।
  2. बौद्ध धर्म के शरण में जाता हूँ।
  3. तथा संघ के शरण में जाता हूँ।

पाठ से आगे

अशोक का शस्त्र त्याग कहानी Bihar Board प्रश्न 1.
सैनिकों को उत्साहित करने के लिए राजकुमारी पद्मा और सम्राट अशोक द्वारा कही गई बातों की तुलना कीजिए और बताइए कि अधिक प्रभावशाली कौन है ?
उत्तर:
तुलनात्मक दृष्टिकोण से राजकुमारी पद्मा द्वारा कही गई बातें सैनिकों के लिए अधिक प्रभावशाली थे । अशोक ने कलिंग पर विजय कर अधिकार में लेने या मृत्यु प्राप्त करने की बात अपने सैनिकों से कहा । लेकिन पद्मा अपने सैनिकों को वीर कन्या, वीर भगनी, वीरों की पत्नी कह स्त्रियों में वीर रस का संचार कर देती है। इसके साथ-साथ पिता, भाई, पुत्र-पति के हत्यारों से लोहा लेकर मातृभूमि को पराधीन होते नहीं देखने की प्रतिज्ञा करवाती है। जो अधिक प्रभावशाली है।

Class 8 Hindi Chapter 9 Bihar Board प्रश्न 2.
इस एकांकी को कहानी रूप में लिखिए।
उत्तर:
कहानी रूप में सारांश है । उन्हें लिख देने से उत्तर हो जायेगा।

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solution Bihar Board प्रश्न 3.
अगर आप अशोक या पद्मा की जगह होते तो क्या करते और – क्यों?
उत्तर:
अगर हम अशोक या पदमा की जगह होते तो वही व्यवहार करते -जो वीरोचित व्यवहार दोनों ने किया।

Bihar Board Solution Class 8 Hindi Bihar Board प्रश्न 4.
कल्पना कर बताइए कि यदि अशोक और पद्मा का युद्ध हो गया होता तो क्या होता?
उत्तर:
अगर अशोक और पद्मा का युद्ध हो गया होता तो कल्पना किया जा सकता है कि लाखें लोग मारे जाते, लाखों घायल होते तथा अशोक और भी क्रूर हो जाता । वह बौद्ध धर्म स्वीकार नहीं करता।

Class 8 Hindi Chapter 9 Question Answer Bihar Board प्रश्न 5.
अस्त्र और शस्त्र के अंतर को लिखिए।
उत्तर:
अस्त्र-वह हथियार है जो हाथ में लेकर चलाया जाता है। जैसे-तलवार, गदा, फलसा इत्यादि । शस्त्र-वह हथियार जिसको फेंककर चलाया जाता है। जैसे-तीर, भाला, बम इत्यादि।

अशोक का शस्त्र त्याग पाठ Bihar Board प्रश्न 6.
युद्ध से हानियाँ” विषय पर अपने मित्र को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
भागलपुर
दिनांक 12-4-2012

प्रिय मित्र
कवीन्द्र नमस्ते

मैं कुशल से हूँ। तुम भी सपरिवार कुशल होगे। आगे पत्र में युद्ध से हानियों के विषय में लिखना चाहूंगा । आज के परमाणु युग में युद्ध बहुत हानिकारक साबित होगा। युद्ध से मानव का विनाश निश्चित है । लाखों लोग निरापराध मारे जाते हैं। धन-जन की अपार हानियाँ होती है।

हमारे विचार से युद्ध से होने वाली हानियों के मद्देनजर रखते हुए युद्ध का अंत अनिवार्य है।

तुम्हारा मित्र
विजय

व्याकरण

Class 8 Hindi Chapter 9 Summary Bihar Board प्रश्न 1.
नीचे तीन वाक्य दिए गए हैं जो प्रश्नवाचक, पूर्णविराम और .. विस्मयादि स्थितियों को प्रकट करते हैं। पढ़िए और समझिए।
(क) मगध की विजय हुई है ?
(ख) मगध की विजय हुई है।
(ग) मगध की विजय हुई है,
उक्त उदाहरण के आधार पर ऐसे ही तीन वाक्यों को लिखिए।
उत्तर:

  1. रमेश संस्कृत पढ़ा है ?
  2. रमेश संस्कृत पढ़ा है।
  3. रमेश संस्कृत पढ़ा है।

Ashok Ka Shastra Tyag Question Answer Class 7 Bihar Board प्रश्न 2.
वाक्य में प्रयोग करके “शस्त्र और शास्त्र” में अन्तर स्थापित कीजिए। ”
उत्तर:

  1. शस्त्र से युद्ध होता है।
  2. शास्त्र अध्ययन योग्य है।।

गतिविधि

Hindi Class 8 Chapter 9 Bihar Board प्रश्न 1.
इस एकांकी के कुछ संवाद जोशीली आवाज में कहे गये हैं और कछ नरम आवाज में ऐसे दो-दो संवादों को लिखिए और अभिनीत कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 8 Hindi Solution In Hindi प्रश्न 2.
किसी भी उत्सव के मौके पर इस एकांकी का मंचन कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

अशोक का शास्त्र-त्याग Summary in Hindi

स्थान : मैदान जिसमें मगध के सैनिकों का शिविर है। बीच में एक पताका पहरा रही है वहीं पर सम्राट अशोक का शिविर है। संध्या बीत चुकी है। तारे चमकने लगे हैं। दीपक जल रहे हैं। अशोक टहलते हुए दिखते हैं उनके मुख पर चिन्ता की छाया है कुछ सोचते हुए आसन पर बैठ जाते हैं।

अशोक सोचते हुए (स्वत:)-चार साल से युद्ध हो रहा है। लाखों मारे गये, लाखों घायल हुए लेकिन कलिंग नहीं जीता जा सका है।

उसी समय द्वारपाल-गुप्तचर आकर संवाद देता है कि कलिङ्ग के महाराज लड़ाई में मारे जा चुके । लेकिन कलिंग का दरवाजा अभी भी बंद है। ” अशोक उत्तेजित होकर काल स्वयं सेना का संचालन करते हैं।

मगध की सेना कलिंग के द्वार पर अस्त्र-शस्त्र से सजी हैं और सेनाओं, को कलिंग विजय या मृत्यु प्राप्त करने को ललकारते हैं। उसी समय फाटक

खुलता है, हजारों स्त्रियाँ वीर वेश में द्वार से बाहर हो मगध की सेना को चुनौतियाँ देती हैं। लेकिन सम्राट अशोक स्त्रियों पर हाथ उठाना, उससे युद्ध करना उचित नहीं मानकर शस्त्र त्याग कर युद्ध नहीं करने की प्रतिज्ञा लेते हैं।

पद्मा भी उन्हें क्षमा कर देती है। अशोक बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेते

  • बौद्ध भिक्षु उन्हें
  • बुद्धं शरणं गच्छामि।
  • धर्मं शरणं गच्छामि।
  • संघं शरणं गच्छामि।
  • का पाठ पढ़ाया।

Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 4 Ice Cream Man

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BSEB Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 4 Ice Cream Man

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Bihar Board Class 8 English Ice Cream Man Text Book Questions and Answers

A. Warmer

Bihar Board Class 8 English Chapter 4 Question 1.
List the occasions, when you eat ice-cream ?
Answer:
In summer and in parties.

Ice Cream Man Class 8 Bihar Board Question 2.
Which ice-cream do you like most ? Name some of the flavors that you have tasted ?
Answer:
I like Vanilla Ice-cream most I also like chocolate flavor and strawberry.

Bihar Board Class 8 English Book Solution Question 3.
Where do you go to buy ice-cream ?
Answer:
I go to a ice-cream parlour to buy ice-cream. The parlour is near to my home. Ice-cream man also comes to my school. I purchase ice-cream with him too.

B. Let’s Comprehend

B. 1. Think and Tell

Ice Cream Man Chapter 4 Bihar Board Question 1.
Who sells ice-cream ?
Answer:
The ice-cream man

Bihar Board Solution Class 8 English Question 2.
Where does the ice-cream man go ?
Answer:
Street to street and near schools.

Bihar Board Class 8 English Solutions Question 3.
What does the ice-cream man have over his head ?
Answer:
Umbrella.

Bihar Board Class 8 English Solution In Hindi Question 4.
Who feels joy to see the ice-cream man ?
Answer:
Children.

B. 2. Think and Write

B. 2. 1. Answer the following questions briefly.

Class 8 English Bihar Board Question 1.
What are the buyers of ice-cream compared to in the poem ? What does the comparison suggest ?
Answer:
The buyers are compared to honeybees. The comparison suggest that they make crowd around him.

Class 8 Bihar Board English Solution Question 2.
“Beneath his round umbrella Oh, what a joyful sight”
Who says these words? Which expression suggests the attitudes of the speaker ?
Answer:
A child, the speaker of this poem says these words. The following expression suggests the attitude of the speaker “To see him fill the cones with mounds of cooling brown and white.

B. 2. 2. Answer the following questions in about 30 words.

The Ice Cream Man Question Answer Bihar Board Question 1.
Why do you feel joyful to see the ice-cream man in summer ? Give reasons.
Answer:
We feel very hot in summer. Ice-cream eating makes us cool for sometime. So, we feel joyful to see the ice-cream man in summer.

Bihar Board Class 8 English Question 2.
List different flavors of ice-cream mentioned in the poem that the ice-cream man sells. And some more to the list
Answer:
The ice-cream man sells these different flavors of ice-cream – Vanilla, Chocolate, strawberry, some more flavors are – Butter-scotch Ice-cream, mango, litchi, pine-apple flavored ice-cream etc.

C. Word Study

Bihar Board Class 8 English Solution Question 1.
Pick out the words/expressions that convey the idea of intensity of heat in summer.
Answer:
‘And brick’s blaze of heat’.

Ice Cream Man Question Answer Bihar Board Question 2.
Pick out the word that means ‘a huge amount’.
Answer:
Mounds.

Ice Cream Man Poem Translation In Hindi Bihar Board Question 3.
When you hear the words ‘winter’ and ‘summer’, what are the things that come to your mind ? Write them down in the circles.
Ice Cream Man Poem Translation In Hindi Bihar Board
Answer:
Ice Cream Man Poem Pdf Bihar Board

D. Rhyme time & Figures of Speech

D. 1. Look at the following pairs of words:
Heat-street
Sight-White

You have already been told that the pairs of words that end with a similar sound are called rhyming pairs/words.

Line circle words that rhyme with the words given in bold each box. One has been done for you.

rise:
stag – (prize) – leg – (acries)
Answer:
(prize) – (acries)

sky:
fry – dry – body – forty
Answer:
fry – dry

fight:
bought – night – right – eight
Answer:
night-right

late:
rope – rate – ripe – fate
Answer:
rate – fate

fun:
shut – man – run – sun
Answer:
run – sun

thumb:
some – lamp – dump – plum
Answer:
dump – plum

change:
orange – range – strange – sponge
Answer:
range – strange

flash:
crash – fresh – brush – clash
Answer:
crash – clash

Compose:
cross – suppose – broke – oppose
Answer:
suppose – oppose

taught:
caught – laughed – bought – bright
Answer:
caught – bought

D. 2. SIMILE

Study the following lines

“The children duster around As thick as honeybens ”
Here, children are compared to honeybens. Such obvious comparison using-‘as’ are known as similes.

Look at some more examles :
as white as snow (the colour of snow is compared to white) as red as blood (the colour of blood is compared tored) as hot as fire (the heat of fire is compared to hot).

Now complete the following similes by choosing appropriate words from the box :

(coal, elephant, statue, giraffe, sky, grass, pig, ice, banyan, cotton, diamond, honey)

  1. as blue as _________
  2. as tall as _________
  3. as green as _________
  4. as black as _________
  5. as fat as _________
  6. as hard as _________
  7. as huge as _________
  8. as sweet as _________
  9. as cool as _________
  10. as dumb as _________
  11. as old as _________
  12. as soft as _________

Answer:

  1. as blue as sky.
  2. as tall as giraffe.
  3. as green as grass.
  4. as black as coal.
  5. as fat as pig.
  6. as hard as diamond.
  7. as huge as elephant.
  8. as sweet as honey.
  9. as cool as ice.
  10. as dumb as statue.
  11. as old as banyan.
  12. as soft as cotton.

D. 3. Speak aloud the following words and notice whether you can hear the “z” sound at the end of each of these words.

blaze – roses

Question 1.
Read the poem aloud.and encircle the words which end with the sound “z”.
Answer:
Blaze, frosty – fizz, peas, honeybees.

E. Let’s Talk

Work in groups

  1. Children like to eat and drink lots of cold things in summer. Name some of them.
  2. Name some of the things that you and your friends do in the rainy season.
  3. Name some of the interesting and enjoyable things that you and your friends, do in winter.

Answer:
Anil : In summer, when it is too hot, we like to eat ice-cream, the most.
Sunil : We also like to have cold drinks.
Mohit : I prefer to lassi the most.
Anil : In rainy season we all like to play and be wet in the rain.
Sunil: Yes, I too like rain-bath.
Mohit: In the winter season we enjoy hot tea and coffee. We enjoy sitting near the fire

F. Composition

Question 1.
The Managing Committee of your school has decided to organise an inter school kabaddi tournament in your school on its Foundation Day. As the Secretary of the Sports and Games Committee of the school circulate letters of invitation to the headmasters of different schools of your locality to send their teams to take part in the tournament. Time, date, place and procedure of registration must be mentioned in it.
Answer:

March 15, 2012

High School, Jainagar

To,
The Principal,
Respected Sir,

The Managing Committee of our school has decided to -organise an Inter-school Kabaddi tournament in our school.

We would like to in form you to send your schools best team to participate in the said tournament. Please let us know your kind consideration soon.

The Kabaddi tournament will be organised on 25th May from 3 p.m. to 5.30 p.m. in our school’s campus.

Virendra Kumar
Secretary,
(Sports and Games)

G. Translation

Question 1.
Translate the poem in Hindi or your mother tongue.
Answer:
Hindi translation of the poem is given before the exercise.
Word meaning : Brick (n) [ब्रिक] = ईंट । Blaze (n) [ब्लेज] = प्रदीप्ति, आग का दहन | Cart (n) [कार्ट] = छकड़ा, दो पहियों वाली छोटी ठेलागाड़ी । Trundle (v)[ट्रन्डल] = लुढ़कना | Beneath (prep)(बीनिथ) = नीचे । Oh (interj)[ओह] = ओह । Joyfull (adj) ज्वॉयफुल) = आनन्द भरा | Sight (n) (साइट] = दृश्य । Fill (v)[फिल] = भरना । Mound (n) [माउन्ड] = ऊपर को उठा हुआ ढेर, उभार Cooling (adj) [कूलिंग 3 ठण्डा करने वाला । Vanilla (n) [वनीला] = एक प्रकार का आइसक्रीम । Drinks (n) [ड्रिंक्स] = पेय पदार्थ । Drink (v) [ड्रिंक] = पीना । Frosty-fizz (n) [फ्रॉस्टी-फिज) = शीतल पेय | Might (v) [माइट] = संभव होना । Be (v) [बी] = होना । Way (n) [वे] = तरीका । Honey bee (n) (हनीबी] = मधुमक्खी । Thick (adj) [थिक] = घना।

H. Activity

  1. Consult an encyclopedia and write down the recipe for making vanilla ice-cream/custard at home.
  2. Follow the procedure and taste the ice-cream/custard you make.

Hints: Do the activity work yourselves.

Ice Cream Man Summary in English

‘Ice-cream Man’ is a real child’s poem. The beautiful poem is penned by the English poet, Rachel Field. The poet says in this poem that in the summer season, in the city, the ice¬cream man is the most desiring person. Children gather around his cart as thick as honey bees. They ask different kinds of ice cream and cold drinks from him. In the hot summer, in the city, the ice-cream man brings some cold enjoyable moments.

Ice Cream Man Summary In Hindi

‘आइस-क्रीम मैन’ खास कर बच्चों के लिए लिखी गई कविता है । इस सुंदर कविता के कवि हैं, अंग्रेजी भाषा के कवि रैचेल फील्ड । कवि प्रस्तुत कविता में कहता है कि गर्मी के मौसम में, शहर में, आईसक्रीम वाला सबसे ज्यादा अपेक्षित व्यक्ति होता है। उसकी माँग सबसे ज्यादा होती है। बच्चे उसके ठेले के चारों ओर मधुमक्खियों की तरह झण्ड बनाकर उसके इर्द-गिर्द ‘जमा हो जाते हैं। उसके चारों ओर मँडराते रहते हैं। वे उससे भिन्न प्रकार के आइसक्रीम और शीतल पेय पदार्थों की मांग करते रहते हैं। गर्मी के मौसम में, शहर में, यह आइसक्रीम वाला ही है जो कि कुछ सहावने ठंढे आनन्द लेने वाले क्षणों को लेकर आता है।

Ice Cream Man Hindi Translation of The Chapter

Word meaning : Brick (n) [ब्रिक] = ईंट । Blaze (n) [ब्लेज] = प्रदीप्ति, आग का दहन | Cart (n) [कार्ट] = छकड़ा, दो पहियों वाली छोटी ठेलागाड़ी । Trundle (v)[ट्रन्डल] = लुढ़कना | Beneath (prep)(बीनिथ) = नीचे । Oh (interj)[ओह] = ओह । Joyfull (adj) ज्वॉयफुल) = आनन्द भरा | Sight (n) (साइट] = दृश्य । Fill (v)[फिल] = भरना । Mound (n) [माउन्ड] = ऊपर को उठा हुआ ढेर, उभार Cooling (adj) [कूलिंग 3 ठण्डा करने वाला । Vanilla (n) [वनीला] = एक प्रकार का आइसक्रीम । Drinks (n) [ड्रिंक्स] = पेय पदार्थ । Drink (v) [ड्रिंक] = पीना । Frosty-fizz (n) [फ्रॉस्टी-फिज) = शीतल पेय | Might (v) [माइट] = संभव होना । Be (v) [बी] = होना । Way (n) [वे] = तरीका । Honey bee (n) (हनीबी] = मधुमक्खी । Thick (adj) [थिक] = घना।

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Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure

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BSEB Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure

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Bihar Board Class 8 English Measure for Measure Text Book Questions and Answers

A. Warmer

Measure For Measure Class 8 Bihar Board Question 1.
Have you ever met or seen a person who may be excellent in certain things, but is asked to do things in which he/she has no experience ? How did he/she perform ? Were you amused/annoyed to see his/her performance Tell your classmates the lesson that you learnt from this experience.
Answer:
Yes, my father is excellent in teaching. He is a teacher in a school. He has no experience of cooking. Once, my mother was sick. My father started cooking and spoiling things. We were amused to see his bad performance in cooking.

B. 1. Think And Tell

Bihar Board Class 8 English Book Solution Question 1.
Why did the king make Raja Verma the chief minister ?
Answer:
The king was impressed by his art. So he made him the chief minister of his state.

Bihar Board Solution Class 8 English Question 2.
Whom did the elders approach to get rid of the chief minister ?
Answer:
The elders approached to Tenali Raman.

Bihar Board Class 8 English Solutions Question 3.
Why did Tenali Raman appoint a carpenter as a cook ?
Answer:
To realise the king his mistake, to appoint an artist as chief minister.

Measure For Measure Class 8 Questions And Answers Question 4.
When did the king realise his mistake ?
Answer:
When the king ate badly cooked food by a carpenter he realised his mistake.

B. 2. Think and Write

B. 2. 1 Write ‘T’ for true arid ‘F’ for false statement.

Bihar Board Class 8 English Solution In Hindi Question 1.

  1. The king was fond of games.
  2. Tenali Raman was a’ wise man.
  3. The carpepter made very delicious food for the guests.
  4. Only the king and the queen were invited for lunch.
  5. All the guests ate the dishes with much interest.

Answer:

  1. False
  2. True
  3. False
  4. False
  5. False

B. 2. 2. The following sentences of this story are in order. Arrange them in proper order.

Bihar Board Class 8 English Book Question 1.

  1. The king was very pleased with the artist when his portrait was ready.
  2. The king rewarded Raja Varma with the chief ministership.
  3. Apart from this Raja Varma drew images of famous character from Puranas, men and women.
  4. Krishna Deva Raya was known for his patronage of poets, scholars and fine arts.
  5. Overwhelmed by joy Krishna Deva Raya called the artist and asked him what he wanted.
  6. He invited a famous artist to draw’a portrait.

Answer:

  1. Krishna Deva Raya was known for his patronage of poets, scholars and fine arts.
  2. He invited a famous artist to draw a portrait.
  3. The king was very pleased with the artist when his portrait was ready.
  4. Apart from this Raja Varma drew images of famous character from Puranas, men and women.
  5. Overwhelmed by joy Krishna Deva Raya called the artist and asked him what he wanted.
  6. The king rewarded Raja Varma with the Chief minister ship.

B. 2. 3. Answer the following in about 30 words

Bihar Board Class 8 English Solutions In Hindi Question 1.
What was Krishna Deva Raya known for ?
Answer:
The king Krishna Deva Raya was fond of fine arts. He was widely known for his patronage of poets and scholars.

Measure For Measure Questions And Answers Question 2.
Why was the king very pleased with the artist when he saw his portrait ?
Answer:
The artist Raja Verma had made an excellent portrait of the king. The portrait looked very alive. So, the king was very pleased with the artist when he saw his portrait.

Class 8 English Bihar Board Question 3.
Who rewarded Raja Varma and how ?
Answer:
The king rewarded Raja Varma for making his live portrait. As a reward he made him the Chief Minister of his state.

Bihar Board Class 8 English Solution Question 4.
How was the food cooked by the carpenter ?
Answer:
The cook had prepared very bad food. The food was very hot and spicy.

B. 2. 4. Answer the following Questions in about 70 words.

Bihar Board Class 8 English Question 1.
What does the title “Measure and Measure” mean ? Do you like the title ? Give reasons in support of your answer.
Answer:
I think that the title ‘Measure for Measure’ means to do as alike as one does. I do like the title. If Tenali Raman hadn’t presented the same example before the king as he had done, the king would not be able to realise his mistake.

Bihar Board 8th Class English Book Question 2.
Did Raja Varma really feel happy to remain an artist ? Give reason for your answer.
Answer:
Raja Varma felt very happy to remain only an artist. The reason for the statement is that at last, he had self said to Tenali Raman that he was happy to be once more only an artist.

Class 8 Bihar Board English Book Question 3.
What made the people unhappy with Raja Varma’s administration ? List them and also write what they wanted the king to do.
Answer:
Raja Varma was no doubt a good artist but proved to be a bad administrator. He had no experience of the job of an administrator. His bad decisions and bad management put the state into disorder. The people wanted the king to remove the unexpierenced and inept chief minister from his port.

Bihar Board Class 8 English Book Pdf Question 4.
Could Raja Varma, in yoiir opinion, have grown into a good administrator ? Give reasons.
Answer:
Yes, Raja Varma could have grown into a good administrator. If he had got some good advisors to help him for the purpose.

Class 8 English Book Bihar Board Question 5.
What was wrong with the king rewarding Raja Varma as the chief minister ? Give reasons in support of your answer.
Answer:
Yes, the king was wrong in rewarding the artist Raja Verma as the chief minister. Experience is needed for any job. Raja Varma had no experience in this regard. So, he should not have been rewarded with the Chief Ministership.

C. Word study

C. 1. Rearrange the letters in following groups to make meaningful words.

One has been done for you.

Pypah – happy

English Class 8 Bihar Board Question 1.
(sitrat, pencarter, siminter, nemow, leepop)
Answer:
sitrat – Artist
pencarter – Carpenter
siminter – Minister
newmow – Women
leepop – People

C. 2. Correct the spellings of the following words

Question 1.
(Equaly, overwhalmed, inapt, majastry, resined)
Answer:
Incorrect spelling – Correct spelling
Equaly – Equally
Overwhalmed – Overwhelmed
In pat t – Inept
Majasty – Majesty
Resined – Resigned

C. 3. Look at the following words from the story

disorder, ‘unhappy’.

Words ‘disorder’ and ‘unhappy’, begin with the prefixes ‘dis-‘ and ‘un-‘. In English prefixes ‘dis-‘, ‘un’, ‘in-‘ ‘if, ‘im-‘, and ‘mis-‘ are used to make words which just the opposite of the actual word (antonyms).

Write the antonym of the following words by adding appropriate prefixes before them:

Question 1.
(literate, measurable, mobile, satisfy,relevant, manage, pleasant, organize,eligible, regular)
Answer:
Words – Antonyms (opposite words)

Literate – Illiterate
Measurable – Unmeasurable
Mobile – Unmobile
Satisfy – Dissatisfy
Relevant – Unrelevant
Manage – Mismanage
Pleasant – Unpleasant
Organize Disorganize
Eligible – Uneligible
Regular – Irregular

C. 4. Match the words given under ‘A’ with their meanings given under ‘B’. One has been done for you. [1. image (e) picture]

Question 1.
Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 1
Answer:
Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 2

D. Grammar

D. 1. Present Perfect Tense

We use the present perfect tense to show that an action or state started in the past- and continues to the present; e.g. Abhinav has been in Kolkata since 2001.

Forms of the present perfect tense:

I/we/You/they + have + past participle
We have seen the Golghar.
I have received your, letter.
Have you read this novel ?
He/She/It + has = past participle.
She has bought a new watch.
My English has improved a lot have/has + adverb + past participle.
I have never eaten Dosa.
She has always had a bicycle.

The difference between the simple present and the present perfect is that the simple present refers only to the present time, but the present perfect connects the past to the present (usually with for, since, always, never, etc.).

Examples:
Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 3

In many situations, with a present time expression (today, this week, etc.) we may use either the present perfect or the simple past. For example :

  1. (a) Ankit has eaten four mangoes today.
    (b) Ankit ate four mangoes today.
  2. (a) We have learned five new words today.
    (b) We learned five new words today.
  3. (a) Ani has been absent twice this month.
    (b) Ani was absent four times last month.

In sentences 1 (a) and 2 (a), the number may not be final. In sentences 1 (b) and 2 (b). the number may be final. In sen-tence 3 (a), the month is not finished. There is a possibility that Ani may be absent more times this month. In sentence 3 (b), last month is finished and the number four is final.

Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 4

Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 5

D. 1. 1. Fill in the blanks with the missing word (not every sentence needs a word).

Example : Anwesha has been in Delhi for two years.

  1. Have you ______ Aamir Khan’s new movie ?
  2. I have ______ many poems.
  3. She ______ been sick ______ Monday.
  4. Ayesha and Anwesha ______ known each other for many years.
  5. ______ the train ______ at the platform ?

Answer:

  1. seen
  2. read
  3. has, since
  4. have been
  5. has, arrived.

D. 1. 2. Fill in the blanks with the correct form of the verb in brackets to form the present perfect tense.

Example : Saumya has got (get) a letter from her mother.

  1. Anu _____ (send) a gift to her friend.
  2. We _____ (see) Tajmahal
  3. I _____ (read) your letter.
  4. Namita _____ (never, work) as a driver.
  5. Alok _____ (recently, pass) from college.
  6. I _____ (teach) in many schools.

Answer:

  1. has sent
  2. have seen
  3. have read
  4. has never worked
  5. has recetantly passed
  6. have teached.

D. 1. 3. Fill in the blanks with the present perfect or simple past to complete each dialogue.
Example:

A. Have you ever studied Urdu ?
B. Yes, I studied Urdu in high school.

A. I like Urdu a lot. Do you ?
B. No. 1 never studied Urdu.

Question 1.
A Have you ever ________ to Sikkim?
B. No, I never have. But I would like to go there some day.

A ________ you ever ________ to Delhi ?
B. Yes I ________ there two year ago.
Answer:
A. Have you ever been to Sikkim.
B. No, I never have. But I would like to go there some day.

A. Have you ever been to Delhi ?
B. Yes, I have been there two years ago.

Question 2.
A Have you ever broken your leg or arm ?
B. Yes, I ______ my arm when I was ten years old. I was climbing a tree when U.. (fail.).
C. Which arm ________ you ________ ?
D. I broke my left arm.
Answer:
A. Have you ever broken your leg or arm ?
B. Yes, I broke my arm when I was ten years old. I was climbing a tree when I fell down.
C. Which arm did you break ?
D. I broke my left arm.

Question 3.
A ________ you ever ________ an English movie ?
B. No, I haven’t But I ________ seen many Bengali movies.
C. I ________ never ________ a Bengali movie.
Answer:
A. Have you ever seen an English movie ?
B. No, I haven’t. But I have seen many Bengali movies.
C. I have never seen a Bengali movie.

Question 4.
A. you ever ________ to the district library ?
B. Yes, I ________ gone there many times. Last week I ________ tehre on Saturday and checked out a novel by Tagore. I have never ________ Tagore’s book in English.
C. ________ you ever” ________ his books in translation ?
D. Yes, In high school I ________ two of his novels in
Answer:
A. Have you ever gone to the district library ?
B. Yes, I have gone there many times. Last week I had been there on Saturday and checked out a novel by Tagore. I have never read Tagore’s book in English.
C. Have you ever read his books in translation ?
D. Yes, In high school I read two of his novels in Hindi.

Question 5.
A. Have your parents ever come here to visit you ?
B. No, they never came. But last year my brother came to visit me for a week.
Answer:
A. Have your parents ever come here to visit you ?
B. No, they never came. But last year my brother came to visit me for a week.

D. 2. The Past Perfect Tense

The past perfect is used to show the relationship of one past event to a later past event or time. The past perfect tense is formed with had + past participle; e.g.

He had traveled by ship before.
The winter had been very mild.
The radio had been invented in 1912.
The past perfect continuous is formed with had + been + verb-ing; e.g.
He had been travelling for three days.
The children had been studying English for six years.

Comparative statement and Question word order

STATEMENT : The train had left the station.
YES/NO Question : Had the train left the station ?
WH-Question : When had the train left the station ?

Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 6

Bihar Board Class 8 English Book Solutions Chapter 8 Measure for Measure 7

Answer:
1. yet, already, just for + time period, and never……….. before are often used with the past perfect to help show the time relationship of one past time or event to another.

2. the past perfect can be used with before and after, but it is not necessary because the time relationship is clear,
e.g. Before the Titanic hit the iceberg, the captain tried to turn the ship around.
OR
Before the Titanic hit the iceberg, the captain had tried to turn the ship around.

3. Either the past perfect or the simple past can be used with because when the cause and result are close in time. How-ever, if the cause and result are not close in time, usually the past perfect is used for the cause, e.g.,
I couldn’t call you because I (had) lost your phone number. There were not enough lifeboats because several had been removed.

(The past perfect is used when we look back from a time in the past. The present perfect is used when we look back from the present time.)

D. 2. 1. Fill in the blanks with the past perfect of the verb in brackets.

Example : Poor emigrants on the ship had left (leave) behind a way of life’.

  1. By 1912, the Wright brothers had ______ (already, made) a successful flight.
  2. The Titanic- had ______ (originally, have) 32 life boats.
  3. The captain of the Titanic didn’t pay attention to the warnings he ______ (receive).
  4. Passengers heard a noise but didn’t understand what ______ (happen).
  5. By 1912, the radio ______ (passive : already, in-vent).
  6. I failed the test because I ______ (be) absent for two weeks.
  7. The story of the Titanic was not new to me because I ______ (see) the movie.
  8. I didn’t recognize her because she ______ (cut) her hair.

Answer:

  1. all ready made
  2. originally
  3. had received
  4. had happened
  5. had been already invented
  6. had been absent
  7. had seen
  8. had cut.

D. 2. 2. The sentence below tell you which action happened first. Connect these sentences with by the time and already.
Example:
First: My brother and sister ate lunch.
Second : I came home from school.
By the time I came home from school, my brother and sister had already eaten lunch.

  1. First: Anu saw the movie.
    Second : Her brother saw the movie.
  2. First: He fell asleep on the sofa.
    Second : The TV serial was over.
  3. First: The building burned down.
    Second : The first fighters arrived.
  4. First: I saw the movie Titanic.
    Second : I read about the Titanic in my textbook.

Answer:

  1. By-the time Anu saw the movie, her brother had allready seen the movie,
  2. By the time he fell asleep on the sofa the TV serial had already been over.
  3. By the time the fire fighters arrived the building had already been burned down.
  4. By the time 1 saw the movie Titanic I had already read about the Titanic in my text book.

(iii) Combine the two sentences.
Example : First: They made a big mistake.
Second : They realised it later.
They realised that they had made a big mistake.

  1. First: I left my umbrella at school.
    Second : I realised this later.
  2. First: You studied Urdu when you were in Hyderabad. Second : 1. didn’t know this.
  3. First : You lived in Nepal w’hen you w’ere a child.
    Second : I didn’t know’this.

Answer:

  1. I released that I had left my Umbrella at school.
  2. I didn’t knew that you had studied Urdu when you were in Hyderabad.
  3. I didn’t knew that you lived in Nepal when you were a child.

(iv) Tell if the following had already happened yet when you came to this school.”
Example : finish secondary examination.
When 1 came to this school. I had already finished secondary examination.

(Or)

When I came to this school. I hadn’t finished secondary examination yet.

  1. buy an English dictionary.
  2. study English.
  3. know a lot about this school.

Answer:
1. When I came to this school, I had already bought an English dictionary.
OR
When I came to this school. I hadn’t bought an English dictionary.

2. When 1 came to this school, 1 had already studied English.
OR
When I came to this school, I hadn’t studied English.

3. When I came to this school, I had already known a lot about this school.
OR
When I came to this school, I hadn’t known a lot about this school.

D. Let’s Talk

Work in groups

Question 1.
Discuss why the carpenter made a mess of the food he cooked.
Answer:
Rohan : The carpenter did not know cooking.
Juli : To be a good carpenter is one thing and to be a good cook is another thing.
Anju : Yes, you both are right. The carpenter did not know cooking and made a mess of the food he cooked.

F. Translation

Translate the following passage into English.

Question 1.
पुण्यजीत एक कला प्रेमी राजा थे। वे विद्वानों एवं कवियों का आदर करते थे। वे अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे। वे उदारता में कभी-कभी भूलकर बैठते थे। एक बार उन्होंने एक गीतकार को मंत्री बना दिया । गीतकार एक अच्छा प्रशासक नहीं हो सका। लोग दु:खी हो गये। बाद में राजा को भी अपनी भूल का एहसास हुआ। अतः हमें सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
Answer:
Punyajeet was an art-lover king. He used to respect the scholars and poets. He was famous for his kindness. Due to his kind behaviour, sometimes he used to do mistakes. Once, he had appointed a singer as a minister. The singer couldn’t be a good administrator. People became unhappy. Later, the king too realized his mistake. So, we should take any of our decision attentively.

F. Composition

Question 1.
Write a short paragraph on the importance of wisdom.
Answer:
Importance of Wisdom Wisdom is a great quality. Only human beings possess this quality. The one who possess wisdom is praised by one and all. Tenali Raman had got wisdom. Within him. So, only he could make the king realise his mistake. In our world, many people are honoured even after many years of their death. We praise them, honour them for their wisdom.

G. Activity

Read one story of Tenali Rama’s or Birbal’s or Mulla Nasiruddin’s wisdom and humour and tell it to the class.
Answer:
Birbal Out Wits The Cheat In Emperor Akbar’s court, there was a wise minister. His name was Birbal. Akbar trusted Birbal to solve any of the state’s problem. Once a villager came to the emperor’s court. He compained that he had sold his well to a villager Gopal. But Gopal didn’t pay him for the water of the well.

The village asked for justice. He demanded that Gopal should pay for water. Birbal applied his wit. He knew that the villager was a cheat. He said to the villager that since his water was in Gopal’s well, so he should pay to Gopal for the water. The villager became afraid for paying. He asked the emperor to forgive him. Thus, Barbal applied his wit and outwitted the cheater villager.

(Tell this story to the class yourself)

Measure for Measure Summary in English

Sikkim is a tiny mountainous state. It is the least populated state of India. In 1975, Sikkim became the 22nd state of India. It has only 540, 493 inhabitants and a total area of 7,096 square kilometres.

The word ‘Sikkim’ means ‘new housed or ‘new palace’. Gangtok is the capital of Sikkim. The Tibetan name for Sikkim is ‘Denjong’ which means the ‘valley of rice’. It is a very beautiful place for tourism. It is rich and flora and fauna. Nepali is the main language of Sikkim. Here people mostly follow ‘Buddhism’. So, they mostly celebrate the festivals of buddhist. Christmas, Diwali and Dussehra are also celebrated by the people of Sikkim.

Measure for Measure Summary in Hindi

राजा कृष्णदेव राय कला प्रेमी थे और कवियों व कलाकारों को खूब मदद दिया करते थे। एक बार, एक चित्रकार राजा वर्मा ने उनकी शानदार तस्वीर बना दी। उसकी कला से खुश होकर राजा ने उसे राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया ।

राजा वर्मा को तो शासन के बारे में कुछ भी जानकारी थी नहीं। लोग उससे नाखुश रहने लगे। वे नये और गैरअनुभवी मुख्यमंत्री से राज्य को छुटकारा दिलाने के लिए कुछ उपाय करने का निवेदन लेकर तेनाली राम के पास आये । तेनाली राम ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस समस्या का समाधान जल्द ही निकाल लेगा।

कुछ सप्ताह के बाद, तेनाली राम के निमंत्रण पर, राजा अपनी रानियों और कुछ दरबारियों के साथ तेनाली राम के घर पर.दोपहर का भोजन खाने के लिए आए । खाना बहुत ही तीखा बना था। राजा गुस्सा हो गया।

तेनाली राम ने राजा को बताया कि उसे एक बहुत ही शानदार बढ़ई मिला जिसे उसने रसोईए की नौकरी पर लगा दिया और खाना उसी ने बनाया है।

राजा ने हँसकर तेनाली राम का मजाक उड़ाया कि उसने एक बढ़ई को रसोईया बना दिया। तब तेनाली राम ने बड़े विनीत होकर राजा से कहा, “यदि एक कलाकार मुख्यमंत्री बन सकता है तो एक बढ़ई, रसोईया क्यों नहीं बन सकता?”

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया । कलाकार राजा वर्मा को. तेनाली राम के घर में घटित घटना की जानकारी हुई। उसने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में, उसने तेनाली राम से कहा कि वह फिर से मात्र कलाकार बनकर बड़ा ही खुश है।

Measure for Measure Hindi Translation of The Chapter

Patronage (n) [पैट्रोनेज] = मदद, संरक्षण | Scholar (n)[स्कॉलर) = विद्वान । Equally (adv) [इक्वली] = बराबर रूप से | Fond of (phr) [फॉन्ड ऑफ] = शौकीन होना किसी चीज का । Brilliant (adj) [ब्रिलिएन्ट) = तेज, प्रतिभाशाली । Portrait (n) [पोट्रेट] = तस्वीर । Majestic (n) [मैजेस्टिक] = महाराजा । To come alive (phr) [टू कम अलाइव] = बिल्कुल सजीव-सा लगना | Apart from (phr) [अपार्ट फ्रॉम = किसी चीज से बिल्कुल अलग ।

Image (n) [इमेज] = आकृति । Skill (n) [स्किल] = कला, चतुराई | Overwhelmed (v) [ओवरव्हेल्म्ड] = अभिभूत होकर । Generous (adj) [जेनरस] = उदार, दानी। Impulse (n) [इम्पल्स] = प्रभाव | Reward (n) [रिवार्ड) = इनाम । Spur of a generous impulse (phr) [स्पर ऑफ अजेनरस इम्पल्स) = कुछ कर बैठना अचानक से परिणाम की परवाह किये बिना। Chief minister ship (n) [चीफ मिनिस्टरशिप] = मुख्यमंत्री का पद । though (adv)[दो] = यद्यपि । Whatsoever (pron) [वाटसोएवर] = जो कुछ भी । Dare (v) [डेअर) = दु:स्साहस करना । Administration (n) [एडमिनिस्ट्रेशन] = प्रशासन । Elders (adj) [एल्डर्स) = बड़े, बुजुर्ग व्यक्ति । Invited (v) [इनवाइटेड] = निमंत्रित किया । Courtier (n) [कोर्टिअर] = दरबारी । Meanwhile (adv) [मीनवाइल] = इसी बीच । Grand (adj) [ग्रैन्ड] = शानदार ।

Feast (n) [फीस्ट] = भोज । Order (n) [ऑर्डर] = आदेश | Morsel (n) [मॉर्शल] = कौर (भोजन का निवाला)। Again and again (phr) [अगेन एण्ड अगेन] = बार-बार | Tasting (v) [टेस्टिंग] = स्वाद लेना। Realised (v) [रिअलाइज्ड] = महसूस किया। Unbearably (adv) [अनबीअरेबली] = असह्य रूप से। Hot (adj) [हॉट] = (यहाँ) तीखा । Suffer (v) [सफर] = कष्ट सहना । Horrible (adj) [हॉरिबल] = बहुत खराब । Usual (adj) [यूजुअल] = सामान्य रूप से।

Humble (adj) [हम्बल]= नम्र, विनीत । Forgiveness (n)[फॉरगिवनेस] = क्षमा । Excellent (adj) [एक्सेलेन्ट] = शानदार | Loudly (adv) [लाउडली] = जोरों से । Sense (n) [सेन्स] = समझ, होना । Employed to (v) [एम्प्लॉयड टू] = काम पर लगना, नौकरी करना । Funny (adj) [फनी] = मजाकिया । Idea (n) [आइडिया) = विचार । Lord (n) [लॉर्ड] = महाराज | Atonce (phr) [एट वन्स] = अचानक । Realise (v) [रिअलाइज] = महसूस करना । Embarrassment (n) [एम्बरासमेन्ट] = अप्रिय स्थिति । Post (n) [पोस्ट] = पद। Awkward (adj) [ऑकवर्ड) = अप्रिय, खराब । Incident (n) [इन्सिडेन्ट] = घटना । Resigned (v) [रिजाइन्ड] = त्यागपत्र दे दिया। Remain (v) (रिमेन] = बने रहना । Artist (n) [आर्टिस्ट] = कलाकार ।।

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Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका

Bihar Board Class 10 History अर्थव्यवस्था और आजीविका Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

Bihar Board Solution Class 10 Social Science प्रश्न 1.
स्पिनिंग जेनी का आविष्कार कब हुआ ?
(क) 1769
(ख) 1770
(ग) 1773
(घ) 1775
उत्तर-
(ख) 1770

Bihar Board Class 10 Social Science Solution प्रश्न 2.
सेफ्टी लैम्प का आविष्कार किसने किया?
(क) जेम्स हारग्रीब्ज
(ख) जॉन के
(ग) क्राम्पटन
(घ) हम्फ्री डेवी.
उत्तर-
(घ) हम्फ्री डेवी.

Class 10th History Chapter 1 Notes Bihar Board प्रश्न 3.
बम्बई में सर्वप्रथम सूती कपड़े के मिलों की स्थापना कब हुई ?
(क) 1851
(ख) 1885
(ग). 1907
(घ) 1914
उत्तर-
(क) 1851

Bihar Board Class 10 History Chapter 1 प्रश्न 4.
1917 ई० में भारत में पहली जूट मिल किस शहर में स्थापित हुआ?
(क) कलकत्ता
(ख) दिल्ली
(ग) बम्बई
(घ) पटना
उत्तर-
(क) कलकत्ता

Bihar Board Class 10th Social Science Solution प्रश्न 5.
भारत में कोयला उद्योग का प्रारम्भ कब हुआ?
(क) 1907
(ख) 1914
(ग) 1916
(घ) 1919
उत्तर-
(ख) 1914.

Bihar Board Class 10 Geography Solutions प्रश्न 6.
जमशेदजी टाटा ने टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी की स्थापना कब की?
(क) 1854
(ख) 1907
(ग) 1915
(घ) 1919
उत्तर-
(ख) 1907

Bihar Board Class 10 History Solution प्रश्न 7.
वैज्ञानिक समाजवाद का प्रतिपादन किसने किया?
(क) राबर्ट ओवन
(ख) लुई ब्लांक
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) लाला लाजपत राय
उत्तर-
(ग) कार्ल मार्क्स

प्रश्न 8.
इंगलैंड में सभी स्त्री एवं पुरुषों को वयस्क मताधिकार कब प्राप्त हुआ?
(क) 1838
(ख) 1881
(ग) 1885
(घ) 1932
उत्तर-
(ग) 1885

प्रश्न 9.
‘अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन काँग्रेस’ की स्थापना कब हुई?
(क) 1848
(ख) 1881
(ग) 1885
(घ) 1920
उत्तर-
(घ) 1920

प्रश्न 10.
भारत के लिए पहला फैक्ट्री एक्ट कब पारित हुआ?
(क) 1838
(ख) 1858
(ग) 1881
(घ) 1911
उत्तर-
(ग) 1881

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें:

प्रश्न 1.
सन् 1838 ई. में………..चार्टिस्ट आन्दोलन की शुरूआत हुई।
उत्तर-
लंदन म

प्रश्न 2.
सन्…………. में मजदूर संघ अधिनियम पारित हुआ।
उत्तर-
1926

प्रश्न 3.
न्यूनतम मजदूरी कानून, सन् ……….ई. में पारित हुआ।
उत्तर-
1948

प्रश्न 4.
अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ की स्थापना…………….ई. में हुई।
उत्तर-
1920

प्रश्न 5.
प्रथम फैक्ट्री एक्ट में महिलाओं एवं बच्चों की…………………एवं………………….. को निश्चित किया
उत्तर-
आयु, काम का घंटा

सुमेलित करें
Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका - 2
उत्तर-
1. (ङ), 2. (घ), 3. (ख), 4. (ग), 5. (क)।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
फैक्ट्री प्रणाली के विकास के किन्हीं दो कारणों को बतायें।
उत्तर-
(i) मशीनों एवं नये-नये यंत्रों का आविष्कार।
(ii) मानव की आवश्यकता।

प्रश्न 2.
बुर्जुआ वर्ग की उत्पति कैसे हुई ?
उत्तर-
औद्योगिकीकरण के फलस्वरूप ब्रिटिश सहयोग से भारत के उद्योग में पूँजी लगाने वाले उद्योगपति पूँजीपति बन गए। अतः समाज में तीन वर्गों का उदय हुआ- पूँजीपति, बुर्जुआ वर्ग (मध्यम वर्ग) एवं मजदूर वर्ग।

प्रश्न 3.
अठारहवीं शताब्दी में भारत के मुख्य उद्योग कौन-कौन से थे?
उत्तर-
भारतीय हस्तकला, शिल्प उद्योग।

प्रश्न 4.
निरुद्योगीकरण से आपका क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
कल कारखानों की स्थापना के बाद भारत में कुटीर उद्योग बन्द होने की कगार पर पहुँच गया? जिसे इतिहासकारों ने निरुद्योगीकरण की संज्ञा दी है।

प्रश्न 5.
औद्योगिक आयोग की नियुक्ति कब हुई ? इसके क्या उद्देश्य थे?
उत्तर-
सन् 1916 में औद्योगिक आयोग की स्थापना हुई जिसका उद्देश्य था भारतीय उद्योग तथा व्यापार के भारतीय वित्त से संबंधित प्रयत्नों के लिए सहायक क्षेत्रों का पता लगाना।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कृषि क्षेत्र में एवं उद्योग जगत में नई-नई मशीनों को स्थापित करना तथा कल कारखाने स्थापित करना औद्योगीकरण कहलाता है। और इसके कारण मनुष्य के आर्थिक और सामाजिक जीवन में हुए परिवर्तन को औद्योगिक क्रांति कहते हैं।

प्रश्न 2.
औद्योगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को किस तरह प्रभावित किया ?
उत्तर-
साधारणतया औद्योगीकरण ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें उत्पादन मशीनों द्वारा कारखानों में होता है जिससे मजदूरों की आजीविका पर बुरा प्रभाव पड़ने लगता हैं क्योंकि मशीनों को संचालित करने के लिए कम संख्या में एवं विशेष मजदूरों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
स्लम पद्धति की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर-
औद्योगीकरण के फलस्वरूप जब मिल मालिकों द्वारा मजदूरों का शोषण होने लगा तो उनकी स्थिति दयनीय होती गयी जिससे वे सुविधाविहीन घरों में रहने को बाध्य हो गये, जिसे ‘स्लम कहा जाने लगा।

प्रश्न 4.
न्यूनतम मजदूरी कानून कब पारित हुआ और इसके क्या उद्देश्य थे?
उत्तर-
न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 में पारित हुआ जिसके द्वारा कुछ उद्योगों में मजदूरी की दरें निश्चित की गई और कहा गया कि मजदूरी ऐसी होनी चाहिए जिससे मजदूर केवल अपना ही गुजारा न कर सके, बल्कि इससे कुछ और अधिक हो, ताकि वह अपनी कुशलता को भी बनाये रख सके।

प्रश्न 5.
कोयला एवं लौह उद्योग ने औद्योगीकरण को गति प्रदान की। कैसे?
उत्तर-
कोयला एवं लोहा दोनों को औद्योगीकरण प्रक्रिया की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि कोयला ईंधन की जरूरत को पूरा करता है और लोहा मशीनों के निर्माण में काम आता है। और कोई भी कारखाना बिना इंधन और मशीन के नहीं चल सकता। अतः कोयला एवं लोहा उद्योग
औद्योगीकरण की गति को तीव्रता प्रदान करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
औद्योगीकरण क कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर-
औद्योगीकरण के कारण निम्न हैं

  • आवश्यकता आविष्कार की जननी-नई-नई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तत्कालीन समय में उद्योगों का विकास प्रारंभ हुआ।
  • नये-नये मशीनों का आविष्कार-18वीं शताब्दी के उतरार्द्ध में ब्रिटेन में नये-नये यंत्रों एवं मशीनों के आविष्कार ने उद्योग जगत में ऐसी क्रांति का सूत्रपात किया, जिससे औद्योगीकरण एवं उपनिवेशवाद दोनों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • कोयले एवं लोहे की प्रचुरता–किसी भी उद्योग की प्रगति कोयले एवं लोहे के उद्योग पर बहुत अधिक निर्भर करती है। ब्रिटेन में लोहे एवं कोयले की खानें थीं जिससे औद्योगीकरण
    को बढ़ावा मिला।
  • फैक्ट्री प्रणाली की शुरूआत-मशीनों एवं नये-नये यंत्रों के आविष्कार ने फैक्ट्री प्रणाली को विकसित किया, फलस्वरूप उद्योग तथा व्यापार के नये-नये केन्द्रों का जन्म हुआ।
  • सस्ते श्रम को उपलब्धता–18वीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों में बड़ाबन्दी प्रथा की शुरूआत हुई, जिसमें जमींदारों ने छोटे-छोटे खेतों को खरीदकर बड़े-बड़े फार्म स्थापित कर लिये। अपनी जमीन बेच देने वाले छोटे किसान मजदूर बन गए। ये आजीविका उपार्जन के लिए काम धंधों की खोज में निकटवर्ती शहर चले गए। इस तरह मशीनों द्वारा फैक्ट्री में काम करने के लिए असंख्य मजदूर कम मजदूरी पर भी तैयार हो जाते थे। सस्ते श्रम ने उत्पादन के क्षेत्र में सहायता पहुँचाई।
  • यातायात की सुविधा-फैक्ट्री में उत्पादित वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने तथा कच्चा माल को फैक्ट्री तक लाने के लिए ब्रिटेन में यातायात की अच्छी सुविधा उपलब्ध थी। जहाजरानी उद्योग में यह विश्व में अग्रणी देश था और सभी देशों के सामानों का आयात निर्यात मुख्यतः ब्रिटेन के व्यापारिक जहाजी बेड़े से ही होता था, जिसका आर्थिक लाभ औद्योगीकरण की गति को तीव्र करने में सहायक बना।
  • विशाल औपनिवेशक स्थिति-औद्योगीकरण की दिशा में ब्रिटेन द्वारा स्थापित विशाल उपनिवेशों ने भी योगदान दिया। इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों में प्राप्त करना तथा उत्पादित वस्तुओं को वहाँ के बाजारों में महंगे दामों पर बेचना ब्रिटेन के लिए आसान था।

प्रश्न 2.
औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप होनेवाले परिवर्तनों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-

  • नगरों का विकास-सन् 1850 से 1950 ई. के बीच भारत में वस्त्र उद्योग, लौह उद्योग, सीमेन्ट उद्योग, कोयला उद्योग जैसे कई उद्योगों का विकास हुआ। जिससे जमशेदपुर, सिन्दरी, धनबाद, डालमिया नगर इत्यादि नये व्यापारिक नगरों का विकास हुआ।
  • कुटीर उद्योग का पतन जैसे-जैसे बड़े-बड़े मशीनों और यंत्रों का विकास हुआ वैसे-वैसे शिल्प उद्योग, बुनकर उद्योग इत्यादि कुटीर उद्योगों का पतन हो गया।
  • साम्राज्यवाद का विकास औद्योगीकरण के परिणाम-स्वरूप बड़े पैमाने पर उत्पादन होना शुरू हुआ, जिसकी खपत के लिए यूरोप में उपनिवेशों की होड़ शुरू हो गयी और आगे चलकर इस उपनिवेशवाद ने साम्राज्यवाद का रूप ले लिया।
  • समाज में वर्ग विभाजन एवं बुर्जुआ वर्ग का उदय औद्योगीकरण के फलस्वरूप ब्रिटिश सहयोग से भारत के उद्योग में पूंजी लगाने वाले उद्योगपति पूँजीपति बन गये। अतः समाज में तीन वर्गों का उदय हुआ – पूँजीपति वर्ग, बुर्जुआ (मध्यम) वर्ग एवं मजदूर (वर्ग)।
  • फैक्ट्री मजदूर वर्ग का जन्म बड़े-बड़े उद्योगों में कार्य करने वाले मजदूरों का उद्योगपतियों द्वारा शोषण होने लगा जिससे उनका जीवन स्तर काफी निम्न होता गया, फलस्वरूप मजदूर वर्ग का जन्म हुआ।
  • स्लम पद्धति की शुरूआत छोटे-छोटे घरों में जहाँ किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, वहाँ मजदूर वर्ग के लोग रहने को बाध्य थे, ऐसे ही घरों को स्लम कहा जाता है।

प्रश्न 3.
उपनिवेशवाद से आप क्या समझते हैं ? औद्योगीकरण ने उपनिवेशवाद को जन्म दिया। कैसे?
उत्तर-
उपनिवेशवाद की व्याख्या विभिन्न कालों में विभिन्न विद्वानों द्वारा भिन्न-भिन्न प्रकार से की गई है। पर, इतिहास की दृष्टि से उन्नत एवं शक्तिशाली देशों द्वारा पिछड़े और निर्बल देशों के राजनीतिक तथा आर्थिक आधिपत्य की स्थिति को उपनिवेशवाद कहते हैं।

जैसे ही इंगलैंड में औद्योगीकरण हुआ वैसे ही वहाँ बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों की स्थापना होने लगी और कारखानों में विभिन्न प्रकार के औद्योगिक वस्तुओं का उत्पादन होने लगा। इन वस्तुओं की खपत के लिए उसे विस्तृत बाजार की आवश्यकता पड़ी। व्यापारिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने विभिन्न देशों की ओर रुख किया। संसाधनों की प्रचुरता ने उसे भारत की तरफ व्यापार करने के लिए आकर्षित किया। धीरे-धीरे उसने भारत में शक्ति का प्रयोग कर अपने उपनिवेश की स्थापना कर ली। इस प्रकार उपनिवेशवाद का जन्म हुआ। अन्य देशों जैसे पुर्तगाल, फ्रांस, अमेरिका इत्यादि देशों ने भी इसी प्रकार से अपने उपनिवेशों की स्थापना की।

प्रश्न 4.
कुटीर उद्योग के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
कम पूँजी में घरेलू स्तर पर स्थापित उद्योग को कुटीर उद्योग कहते हैं। कुटीर उद्योग किसी भी राष्ट्र के विकास में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इसमें देश की अधि कांश आबादी की भागीदारी होती है। इसमें किसी विशेष तकनीकी जानकारी की आवश्यकता नहीं होती। इसमें श्रम, पूँजी और समय तीनों कम लगते हैं तथा घर बैठे लोग अपना-अपना काम पर लेते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि इसमें घरेलू महिलाओं का योगदान भी सराहनीय होता है। कुटीर उद्योग के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं -सूत कताई, बुनाई, उनका रंग रोगन करना, अचार बनाना, पापड़ बनाना, सिलाई कढ़ाई करना इत्यादि। भारत में औद्योगीकरण के पूर्व कुटीर उद्योग काफी विकसित था परन्तु औद्योगीकरण के बाद उन्हें कच्चे माल के लाले पड़ने लगे और धीरे-धीरे यह मृतप्राय हो गया।

कुटीर उद्योग की उपयोगिता निम्नलिखित है-

  • यह मध्यम एवं निम्नवर्ग के अधिकांश लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
  • यह घरेलू महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान करता है।
  • इसमें रोजगार के तलाश में जाने वाले लोगों के पलायन को रोकने में सहायता मिलती है।
  • यह सामाजिक आर्थिक प्रगति व संतुलित क्षेत्रवार विकास के लिए एक शक्तिशाली औजार का कार्य करता है।
  • यह कौशल में वृद्धि, उद्यमिता में वृद्धि तथा उपयुक्त तकनीक का बेहतर प्रयोग सुनिश्चित करता है।

प्रश्न 5.
औद्योगीकरण ने सिर्फ आर्थिक ढाँचे को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि राजनैतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया। कैसे?
उत्तर-
औद्योगीकरण ने आर्थिक ढाँचे को तो परिवर्तित किया ही बल्कि राजनैतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया, क्योंकि औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप कुलीनता का गौरव समाप्तः हो गया। श्रमजीवियों को जमींदारों के शोषण से मुक्ति मिल गई। नए उद्योग-केन्द्रों में उनकी स्थिति पहले से अच्छी थी और उनकी आय भी बढ़ गई थी। उनके जीवनस्तर में भी परिवर्तन हो गया था। शहरों में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं था। इस तरह, व्यक्ति का महत्व बढ़ गया और लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी बढ़ गई।

मिल-मालिक मजदूरों के शोषण के द्वारा अपनी पूँजी बढ़ा रहे थे। अतः मजदूर अपनी संगठन तथा ट्रेड यूनियन बनाकर और हड़ताल करके वे मिल-मालिकों को अपनी मांग पूरी करने के लिए विवश करने लगे। इससे लोगों में नेतृत्व क्षमता का विकास होने लगा।

औद्योगिक क्रांति के कारण समाज में पूँजीवाद का विकास हुआ। फलतः समाज में पूँजीपति वर्ग का प्रादुर्भाव हुआ। पूँजीपतियों ने शासन और राजनीति को प्रभावित किया। पूँजीवाद से ही साम्राज्यवाद का जन्म हुआ। यूरोपीय राष्ट्रों के द्वारा एशिया, अमेरिका, अफ्रीका के महादेशों में उपनिवेश स्थापित किए गए। यूरोपीय देशों में ही नहीं, बल्कि सारे विश्व में साम्राज्यवादी होड़ के कारण अशांति एवं संघर्ष का वातावरण उत्पन्न हो गया। प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध इसी व्यवस्था का अभिशाप था जिसने विश्व की राजनीति को काफी प्रभावित किया।

Bihar Board Class 10 History अर्थव्यवस्था और आजीविका Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
फ्लाईंग शटल का आविष्कार किसने किया ?
उत्तर-
जॉन के।

प्रश्न 2.
वाष्पचालित रेल इंजन का आविष्कार किसने किया?
उत्तर-
जॉर्ज स्टीफेंशन ने।

प्रश्न 3.
ईस्ट इंडिया कंपनी ने गुमाश्तों को क्यों बहाल किया ?
उत्तर-
बुनकरों पर नियंत्रण रखने के लिए।

प्रश्न 4.
जमशेदपुर में पहला लौह इस्पात संयंत्र किसने स्थापित किया ?
उत्तर-
जे. एन. टाटा ने (1912)।

प्रश्न 5.
आदि औद्योगीकरण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
यूरोप और इंगलैंड में कारखानों में उत्पादन होने के पूर्व की स्थिति को आदि-औद्योगीकरण कहते हैं।

प्रश्न 6.
चार्टर एक्ट का भारतीय व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
चार्टर एक्ट (1813) के द्वारा भारतीय व्यापार पर से ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 7.
कलकत्ता में पहली जूट मिल किसने स्थापित की।
उत्तर-
हुकुम चन्द ने।

प्रश्न 8.
उत्पादन अपने उत्पादों का प्रचार करने के लिए कौन साधन अपनाते थे?
उत्तर-
उत्पादक अपने उत्पादों का प्रचार करने के लिए अपने सामानों पर लेबल लगाते थे। लेबलों से उत्पाद की गुणवत्ता स्पष्ट होती थी। 19वीं सदी के अंतिम चरण से उत्पादकों ने अपने-अपने उत्पाद के प्रचार के लिए आकर्षक कैलेंडर छपवाने आरंभ किए।

प्रश्न 9.
वर्तमान समय में भारत में कितने स्टील प्लांट हैं ? ।
उत्तर-
वर्तमान समय में भारत में 7 स्टील प्लांट कार्यरत हैं।

प्रश्न 10.
पहली देशी जूट मिल कहाँ स्थापित हुई ?
उत्तर-
पहली जूट मिल बंगाल के रिशरा नामक स्थान में 1855 में खोली गई।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
जॉबर कौन थे ?
उत्तर-
कारखानों तथा मिलों में मजदूरों और कामगारों की नियुक्ति का माध्यम जॉबर होते थे। प्रत्येक मिल मालिक जॉबर को नियुक्त करते थे। यह मालिक का पुराना तथा विश्वस्त कर्मचारी होता था। वह आवश्यकतानुसार अपने गाँव से लोगों को लाता था और उन्हें कारखानों में नौकरी दिलवाता था। मजदूरों को शहर में रहने और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने का काम जॉबर ही करते थे।

प्रश्न 2.
ब्रिटेन में महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी पर क्यों हमले किए ?
उत्तर-
बेरोजगारी की आशंका से मजदूर कारखानेदारी एवं मशीनों के व्यवहार का विरोध कर रहे थे। इसी क्रम में ऊन उद्योग में स्पिनिंग जेनी मशीन का जब व्यवहार होने लगा तब इस उद्योग में लगी महिलाओं ने इसका विरोध आरंभ किया। उन लोगों को अपना रोजगार छिनने की आशंका दिखाई पड़ने लगी। अतः ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर आक्रमण कर उन्हें तोड़ना आरंभ किया।

प्रश्न 3.
लंदन को फिनिशिंग सेंटर’ क्यों कहा जाता था?
उत्तर-
इंगलैंड के कपड़ा व्यापारी वैसे लोगों से जो रेशों के हिसाब से ऊन छांटते थे। (स्टेप्लसे) ऊन खरीदते थे। इस ऊन को वे सूत कातने वालों तक पहुँचाते थे। तैयार धागा वस्त्र बुनने वालों, चुन्नटो के सहारे कपड़ा समेटने वालों (पुलजे) और कपड़ा रंगने वालों (रंग साजों) के पास ले जाया जाता था। रंगा हुआ वस्त्र लंदन पहुँचता था। जहाँ उसकी फिनिशिंग होती थी। इसलिए लंदन को फिनिशिंग सेंटर कहा जाता था।

प्रश्न 4.
इंगलैंड ने अपने वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या किया?
उत्तर-
इंगलैंड में यांत्रिक युग का आरंभ सूती वस्त्र उद्योग से हुआ। 1773 में लंकाशायर के वैज्ञानिक जान के वे फ्लाइंग शट्ल नामक मशीन बनाई। इससे बुनाई की रफ्तार बढ़ी तथा सूत की माँग बढ़ गई। 1765 में ब्लैकबर्न के जेम्स हारग्रीज ने स्पिनिंग जेनी बनाई जिससे सूत की कताई आठ गुना बढ़ गई। रिचर्ड आर्कराइट ने सूत कातने के लिए स्पिनिंग फ्रेम का आविष्कार किया जिससे अब हाथ से सूत कातने का काम बंद हो गया। क्रॉम्पटन ने स्पिनिंग म्युल नामक मशीन बनाई। इन मशीनों के आधार पर इंगलैंड में कम खर्च में ही बारीक सूत अधिक मात्रा में बनाए जाने लगे। इससे वस्त्र उद्योग में क्रांति आ गई। इन संयंत्रों की सहायता से इंगलैंड में वस्त्र उद्योगों को बढ़ावा मिला तथा 1820 तक इंगलैंड सूती वस्त्र उद्योगों का प्रमुख केन्द्र बन गया।

प्रश्न 5.
भारत में निरुद्योगीकरण क्यों हुआ?
उत्तर-
भारत इंगलैंड का सबसे महत्वपूर्ण उपनिवेशों में से श्रम था। सरकार ने भारत से कच्चे , माल का आयात और इंगलैंड के कारखानों से तैयार माल का भारत में निर्यात करने की नीति
अपनाई। इसके लिए सुनियोजित रूप स भारतीय उद्योगों विशेषतः वस्त्र उद्योग को नष्ट कर दिया गया। 1850 के बाद अंगरेजी सरकार की औद्योगिक नीतियाँ मुक्त व्यापार की नीति, भारतीय
वस्तुओं के निर्यात पर सीमा और परिवहन शुल्क लगाने, रेलवे, कारखानों में अंगरेजी पूंजी निवेश, भारत में अंगरेजी आयात का बढ़ावा देने इत्यादि के फलस्वरूप भारतीय उद्योगों का विनाश हुआ। कारखानों की स्थापना की प्रक्रिया बढ़ी जिससे देशी उद्योग अपना महत्व खोने लगे। इससे भारतीय उद्योगों का निरूद्योगीकरण हुआ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
19वीं शताब्दी में यरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों के बजाए हाथ से काम करनेवाले श्रमिकों को प्राथमिकता देते थे। इसका क्या कारण था?
उत्तर-
19वीं शताब्दी में औद्योगीकरण के बावजूद हाथ से काम करनेवाले श्रमिकों की मांग बनी रही। अनेक उद्योगपति मशीनों के स्थान पर हाथ से काम करनेवाले श्रमिकों को ही प्राथमिकता देते थे। इसके प्रमुख निम्नलिखित कारण थे-

(i) इंगलैंड में कम मजदूरी पर काम करनेवाले श्रमिक बड़ी संख्या में उपलब्ध थे। उद्योगपतियों को इससे लाभ था। मशीन लगाने पर आनेवाले खर्च से कम खर्च पर ही इन श्रमिकों से काम करवाया जा सकता था। इसलिए उद्योगपतियों ने मशीन लगाने ‘ में अधिक उत्साह नहीं दिखाया।

(ii) मशीनों को लगवाने में अधिक पूंजी की आवश्यकता थी। साथ ही मशीन के खराब होने पर उसकी मरम्मत कराने में अधिक धन खर्च होता था। मशीनें उतनी अच्छी नहीं थी, जिसका दावा आविष्कारक करते थे।

(iii) एक बार मशीन लगाए जाने पर उसे सदैव व्यवहार में लाना पड़ता था, परंतु श्रमिकों की संख्या आवश्यकतानुसार घटाई-बढ़ाई जा सकती थी। मौसमी आधार पर श्रमिकों की संख्या की आवश्यकता पड़ती थी। उदाहरण के लिए इंगलैंड में जाड़े के मौसम में गैस घटों और शराबखानों में अधिक काम रहता था। बंदरगाहों पर जाड़ा में ही जहाजों की मरम्मत तथा सजावट का काम किया जाता था। क्रिसमस के अवसर पर बुक बाइंडरों और प्रिटरों को अतिरिक्त श्रमिकों की जरूरत पड़ती थी। उद्योगपति मौसम के अनुसार उत्पादन में कमी-बेशी को ध्यान में रखकर आसानी से मजदूरों की संख्या घटा-बढ़ा सकते थे। इसलिए उद्योमपति मशीनों के व्यवहार से अधिक हाथ से काम करनेवाले मजदूरों को रखना ज्यादा पसंद करते थे।

(iv) विशेष प्रकार के सामान सिर्फ कुशल कारीगर ही हाथ से बना सकते थे। मशीन विभिन्न डिजाइन और आकार के सामान नहीं बना सकते थे।

(v) विक्टोरियाकालीन ब्रिटेन में हाथ से बनी चीजों की बहुत अधिक मांग थी। हाथ से बने सामान परिवष्कृत, सुरुचिपूर्ण, अच्छी फिनिशवाली, बारीक डिजाइन और विभिन्न आकार की होती थी। कुलीन वर्ग इसकी उपयोग करना गौरव की बात मानते थे। इसलिए आधुनिकीकरण के युग में मशीनों के व्यवहार के बावजूद हाथ से काम करनेवाली श्रमिकों की मांग बनी रही।

प्रश्न 2.
18वीं शताब्दी तक अंतराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्त्रों की माँग बने रहने का क्या कारण था?
उत्तर-
प्राचीन काल से ही भारत का वस्त्र उद्योग अत्यंत विकसित स्थिति में था। यहाँ विभिन्न प्रकार के वस्त्र बनाए जाते थे। उनमें महीन सूती (मलमल) और रेशमी वस्त्र मुख्य थे। उनकी माँग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी थी। कंपनी सत्ता की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण के आरंभिक चरण तक भारत के वस्त्र निर्यात में गिरावट नहीं आई। भारतीय वस्त्रों की मांग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बनी हुई थी जिसका मुख्य कारण था कि ब्रिटेन में वस्त्र उद्योग उस समय तक विकसित स्थिति में नहीं पहुंचा था। एक अन्य कारण यह था कि जहाँ अन्य देशों में मोटा सूत बनाया जाता था, वहीं भारत में महीन किस्म का सूत बनाया जाता था जिससे महीन सूती वस्त्र बनाया जाता था। ” इसलिए आर्मीनियम और फारसी व्यापारी पंजाब, अफगानिस्तान, पूर्वी फारस और मध्य एशिया के मार्ग से भारतीय सामान ले जाकर इसे बेचते थे। महीन कपड़ो के धान ऊँट की पीठों पर लादकर पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत से पहाड़ी दरों और रेगिस्तानों के पार ले जाए जाते थे। मध्य एशिया में इन्हें यूरोपीय मंडियों में भेजा जाता था।

प्रश्न 3.
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी वस्त्र की नियमित आपूर्ति के लिए क्या व्यवस्था की ?
उत्तर-
बंगाल में राजनीतिक सत्ता की स्थापना के पहले ईस्ट इंडिया कंपनी को भारतीय बुनकरों से कपड़ा प्राप्त कर उनका निर्यात करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बुनकरों से वस्त्र प्राप्त करने के लिए यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों में प्रतिद्वंद्विता होती थी। इसका लाभ स्थानीय व्यापारी भी उठाते थे। बुनकरों से वस्त्र खरीदकर वे ऊंची कीमत देनेवाली कंपनी को बेचते थे। कंपनी राज्य की स्थापना से परिदृश्य बदल गया। सूती वस्त्र उद्योग में व्याप्त प्रतिद्वंद्विता को समाप्त कर उसपर अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने नियंत्रण एवं प्रबंधन की नई नीति अपनाई जिससे उसे वस्त्र की आपूर्ति लगातार होती रही। इसके लिए कंपनी ने निम्नलिखित कदम उठाए
(i) गुमाश्तो की नियुक्ति कपड़ा व्यापार परं एकाधिकार स्थापित करने के लिए बिचौलियों को समाप्त करना एवं बुनकरों पर सीधा नियंत्रण रखना आवश्यक था। इसके लिए कंपनी ने अपने नियमित कर्मचारी नियुक्त किए जो गुमाश्ता कहे जाते थे। इनका मुख्य काम बुनकरों पर नियंत्रण रखना, उनसे कपड़ा इकट्ठा करना तथा बुने गए वस्त्रों की गुणवत्ता का जांच करना था।

(ii) बुनकरों की पेशगी की व्यवस्था बुनकरों से स्वयं तैयार सामान प्राप्त करने के लिए कंपनी ने उन्हें अग्रिम राशि या पेशगी देने की नीति अपनाई। अग्रिम राशि प्राप्त कर बुनकर अब सिर्फ कंपनी के लिए ही वस्त्र तैयार कर सकते थे। वे अपना माल कंपनी के अतिरिक्त अन्य किसी कम्पनी या व्यापारी को नहीं बेच सकते थे। बुनकरों को कच्चा माल खरीदने के लिए ऋण भी उपलब्ध कराया गया। अग्रिम राशि और कर्ज से कपड़ा तैयार कर बुनकरों को माल गुमाश्तों को सौंपना पड़ा।

प्रश्न 4.
प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा? व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध तक भारत का औद्योगिक उत्पादन की धीमा रहा। परंतु युद्ध के दौरान और उसके बाद भारत का औद्योगिक उत्पादन में काफी तेजी आई जिसके निम्नलिखित प्रमुख कारण थे

(i) प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन में सैनिक आवश्यकता के अनुरूप अधिक सामान बनाए जाने लगे जिससे मैनचेस्टर में बनने वाले वस्त्र उत्पादन में गिरावट आई। इससे भारतीय उद्यमियों को अपने बनाए गए वस्त्र की खपत के लिए देश में ही बहुत बड़ा बाजार मिल गया। फलतः सूती वस्त्रों का उत्पादन तेजी से बढ़ा।

(ii) विश्वयुद्ध के लम्बा खींचने पर भारतीय उद्योगपतियों ने भी सैनिकों की आवश्यकता के लिए सामान बनाकर मुनाफा कमाना आरंभ कर दिया। सैनिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए देशी कारखानों में भी सैनिकों के लिए वर्दी, जूते, जूट की बोरियाँ, टेन्ट, जीन इत्यादि बनाए जाने लगे। इससे देशी कारखानों में उत्पादन बढ़ा।

(iii) युद्धकाल में कारखानों में उत्पादन बढ़ाने के अतिरिक्त अनेक नये कारखाने खोले गए। मजदूरों की संख्या में भी वृद्धि की गई। इनके कार्य करने की अवधि में भी बढ़ोतरी हुई। फलस्वरूप प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन ये तेजी से वृद्धि हुई।

Bihar Board Class 10 History अर्थव्यवस्था और आजीविका Notes

  • औद्योगिकीकरण के कारण –
    • आवश्यकता आविष्कार की जननी
    • नये-नये मशीनों का आविष्कार
    • कोयले एवं लोहे की प्रचुरता
    • फैक्ट्री प्रणाली की शुरूआत
    • सस्ते श्रम की उपलब्धता
    • यातायात की सुविधा
    • विशाल औपनिवेशिक स्थिति
  • 18वीं शताब्दी के उतरार्द्ध में ब्रिटेन ने नये-नये यंत्रों एवं मशीनों के आविष्कार ने उद्योग जगत में ऐसी क्रांति का सूत्रपात किया, जिससे औद्योगिकीकरण एवं उपनिवेशवाद दोनों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • सन् 1769 में जेम्सवाट ने वाष्प इंजन का आविष्कार किया।
  • सन् 1815 में हम्फ्री डेवी ने खानों में काम करने के लिए एक सेफ्टी लैम्प का और इसी वर्ष हेनरी वेसेमर ने एक शक्तिशाली भट्ठी को विकसित करके लौह उद्योग को और भी बढ़ाने में सहायता की।
  • भारत में कारखानों की स्थापना 1850 के बाद होने लगी, इसके बाद भारत में कुटीर उद्योग बन्द होने लगे। भारतीय इतिहासकारों ने इसे भारत के लिए निरूद्योगीकरण की संज्ञा दी।
  • सर्वप्रथम सूती कपड़े की मिल 1851 में बम्बई में स्थापित की गयी।
  • 1869 में स्वेनजहर के खुल जाने से बम्बई के बन्दरगाह पर इंगलैंड से आने वाला सूती कपड़ों का आयात बढ़ने लगा।
    Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका - 1
  • सूती वस्त्र उद्योग ब्रिटेन का सबसे बड़ा उद्योग 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक बन चुका था।
  • लिवरपुल स्थित लंकाशायर सूती वस्त्र उद्योग का बड़ा केन्द्र बन गया।
  • 1805 के बाद न्यू साउथ वेल्स ऊन उत्पादन का केन्द्र बना।
  • अंग्रेज व्यापारी एजेंट की मदद से भारतीय कारीगरों को पेशगी रकम देकर उनसे उत्पादन करवाते थे। ये एजेंट ‘गुमाश्ता’ कहलाते थे।
  • 1835 ई. में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित चार्टर एक्ट के द्वारा व्यापार पर से ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार समाप्त कर दिया।
  • कारखानों की स्थापना के क्रम में सन् 1830-40 के दशक में बंगाल में द्वारकानाथ टैगोर ने 6 संयुक्त उद्यम कम्पनियाँ लगाई।
  • सर्वप्रथम सूती कपड़े की मिल की नींव 1851 ई. में बम्बई में डाली गई।
  • सन् 1917 में कलकत्ता में देश का पहला जूट मिल एक मारवाड़ी व्यवसायी हुकुम चंद ने स्थापित किया।