Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन

Bihar Board Class 10 History शहरीकरण एवं शहरी जीवन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

शहरीकरण एवं शहरी जीवन Bihar Board प्रश्न 1.
सामंती व्यवस्था से हटकर किस प्रकार की शहरी व्यवस्था की प्रवृत्ति बढ़ी?
(क) प्रगतिशील प्रवृति
(ख) आक्रामक प्रवृति
(ग) रूढ़िवादी प्रवृति
(घ) शोषणकारी प्रवृति
उत्तर-
(क) प्रगतिशील प्रवृति

Bihar Board Class 10 Sst Solution प्रश्न 2.
शहर को आधुनिक व्यक्ति का किस प्रकार का क्षेत्र माना जाता है ?
(क) सीमित क्षेत्र
(ख) प्रभावी क्षेत्र
(ग) विस्तृत क्षेत्र ।
(घ) सभी
उत्तर-
(ख) प्रभावी क्षेत्र

Bihar Board 10th Social Science Solution प्रश्न 3.
स्थायी कृषि के प्रभाव से कैसा जमाव संभव हुआ?
(क) संपत्ति
(ख) ज्ञान
(ग) शांति
(घ) बहुमूल्य धातु
उत्तर-
(क) संपत्ति

Bihar Board Class 10 Economics Solution प्रश्न 4.
एक प्रतियोगी एवं उद्यमी प्रवृति से प्रेरित किस प्रकार की अर्थव्यवस्था लागू की गई?
(क) जीवन-निर्वाह अर्थव्यवस्था
(ख) मृदा प्रधान अर्थव्यवस्था
(ग) शिथिल अर्थव्यवस्था
(घ) सभी
उत्तर-
(ख) मृदा प्रधान अर्थव्यवस्था

Bihar Board Class 10 History Notes Pdf प्रश्न 5.
आधुनिक काल में औद्योगीकरण ने किसके स्वरूप को गहन रूप से प्रभावित किया ?
(क) ग्रामीणीकरण
(ख) शहरीकरण
(ग) कस्बा
(घ) बन्दरगाहो
उत्तर-
(ख) शहरीकरण

Bihar Board Class 10th Geography प्रश्न 6.
जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक कहाँ होता है ?
(क) ग्रामा
(ख) कस्बा
(ग) नगर
(घ) महानगर
उत्तर-
(घ) महानगर

Bihar Board Class 10th Geography Solution प्रश्न 7.
1810 से 1880 ई. तक लंदन की आबादी 10 लाख से बढ़कर कहाँ तक पहुंची ?
(क) 20 लाख
(ख) 30 लाख
(ग) 40 लाख
(घ) 50 लाख
उत्तर-
(ग) 40 लाख

प्रश्न 8.
लंदन में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा कब लागू हुई ?
(क) 1850
(ख) 1855
(ग) 1860
(घ) 1870
उत्तर-
(घ) 1870

प्रश्न 9.
कौन-सा सामाजिक वर्ग बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में उभरकर आया?
(क) उद्योगपति वर्ग
(ख) पूँजीपति वर्ग
(ग) श्रमिक वर्ग
(घ) मध्यम वर्ग
उत्तर-
(घ) मध्यम वर्ग

प्रश्न 10.
पूँजीपति वर्ग के द्वारा किस वर्ग का शोषण हुआ?
(क) श्रमिक वर्ग
(ख) मध्यम वर्ग
(ग) कृषक वर्ग
(घ) सभी
उत्तर-
(क) श्रमिक वर्ग

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें:

प्रश्न 1.
शहरों के विस्तार में भव्य………..”का निर्माण हुआ।
उत्तर-
परफोटोक

प्रश्न 2.
लंदन भारी संख्या में………….”को आकर्षित करने में सफल हुआ।
उत्तर-
प्रवासिया

प्रश्न 3.
शहरों में रहने वाले…………”से सीमित थे।
उत्तर-
बाध्यताआ

प्रश्न 4.
…………”देशों में नगरों के प्रति रुझान देखा जाता है।
उत्तर-
विकासशील

प्रश्न 5.
…………..”के द्वारा निवास तथा आवासीय पद्धति, जन यातायात के साधन, जन स्वास्थ्य इत्यादि के उपाय किये गये।
उत्तर-
नगर प्रबंधन

समूहों का मिलान करें:
Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन - 1
उत्तर-
1. (ङ), 2. (घ), 3. (क), 4. (ख), 5. (ग)।

लघ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
किन तीन प्रक्रियाओं के द्वारा आधुनिक शहरों की स्थापना निर्णायक रूप से हई?
उत्तर-
औद्योगिक पूँजीवाद का उदय, विश्व के विशाल भूभाग पर औपनिवेशिक शासन की स्थापना एवं लोकतांत्रिक आदर्शों का विकास। यही तीन प्रक्रियाएँ हैं जिसने आधुनिक शहरों की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई।

प्रश्न 2.
समाज़ का वर्गीकरण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में किस भिन्नता के आधार पर किया जाता है ?
उत्तर-
ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में समाज का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया जाता है – (i) आर्थिक तथा (ii) प्रशासनिक संदर्भ।

प्रश्न 3.
आर्थिक तथा प्रशासनिक संदर्भ में ग्रामीण तथा नगरीय बनावट के दो प्रमुख आधार क्या हैं ?
उत्तर-
(i) जनसंख्या का घनत्व तथा (ii) कृषि आधारित क्रियाओं का अनुपात।

प्रश्न 4.
गाँव के कृषि जन्य आर्थिक क्रियाकलापों की विशेषता को दर्शायें।
उत्तर-
गाँवों की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि-संबंधी व्यवसाय से जुड़ा ह अधिकांश वस्तुएँ कृषि उत्पाद ही होती हैं जो इनकी आय का प्रमुख स्रोत होता है। आय का प्रमुख स्रोत होता होता है।

प्रश्न 5.
शहर किस प्रकार की क्रियाओं का केन्द्र होता है
उत्तर-
शहर राजनीतिक प्राधिकार का केन्द्र होता है जहाँ दस्तकार, व्यापारी और अधिकारी बसने लगते हैं।

प्रश्न 6.
नगरीय जीवन एवं आधुनिकता एक-दूसरे से अभिन्न रूप से कैसे जुड़े हुए हैं ?
उत्तर-
परिवर्तन प्रकृति का अटूट नियम है। समय के साथ आ रहे बदलावों को हम आधुनिकता की श्रेणी में रखते हैं। यह परिवर्तन हमारे वेशभूषा, जीवन स्तर इत्यादि में आता है जो सर्वप्रथम शहरी क्षेत्रों में ही परिलक्षित होता है। आधुनिक संचार सुविधाएँ, आधुनिक घरेलू उपयोगी पदार्थों, नई-नई डिजाइनों वाले वेशभूषा इत्यादि, सर्वप्रथम नगरीय जीवन में ही दिखाई देता है क्योंकि उन्हें अपनाने के लिए वहाँ आवश्यक संसाधन एवं माध्यम उपलब्ध है।

प्रश्न 7.
नगरों में विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग अल्पसंख्यक है ऐसी मान्यता क्यों बनी है?
उत्तर-
किसी भी नगर में विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग अल्पसंख्यक होता है। ऐसी मान्यता का मुख्य कारण है पूँजी का असमान वितरण। पूँजी कुछ मुट्ठी पर लोगों के पास ही सीमित होती है जिसे पूँजीपति वर्ग कहते हैं और अपनी पूँजी के बल पर वह हर कार्यक्षेत्र में विशेष रूप से सफलता प्राप्त कर लेता है।

प्रश्न 8.
नागरिक अधिकारों के प्रति एक नई चेतना किस प्रकार के आंदोलन या प्रयास से बनी?
उत्तर-
नागरिक अधिकारों के प्रति एक नई चेतना का विकास मुख्यतः आर्थिक एवं राजनैतिक प्रयास से हुआ, क्योंकि लोगों को अपनी आर्थिक स्थिति को उन्नत करने के लिए राजनैतिक अधिकारों को जानना जरूरी हो गया।

प्रश्न 9.
व्यावसायिक पूँजीवाद ने किस प्रकार नगरों के उदभव में अपना योगदान दिया?
उत्तर-
व्यावसायिक पूँजीवाद ने नगरों के उद्भव में काफी महत्वपूर्ण योगदान दिया क्योंकि इनके कारण ही नगरों में शिक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सुविधाएँ आदि का विकास हुआ। व्यापार एवं धर्म शहरों की स्थापना के मुख्य आधार थे। व्यावसायिक पूँजीवाद के कारण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती गयी जिससे नगरों के उद्भव को बल मिला।

प्रश्न 10.
शहरों के उद्भव में मध्यम वर्ग की भूमिका किस प्रकार की रही ?
उत्तर-
मध्यम वर्ग एक नए शिक्षित वर्ग के रूप में उभरा, जो विभिन्न पेशों में रहकर भी औसतन एक समान आय प्राप्त करने वाले वर्ग के रूप में उभर कर आया एवं बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में स्वीकार किए गए। यह विभिन्न रूप में कार्यरत रहे जैसे शिक्षक, वकील, चिकित्सक, इंजीनियर, क्लर्क, एकाउंटेंट्स परन्तु इनके जीवन मूल्य के आदर्श समान रहे और आर्थिक स्थिति भी एक वेतनभोगी वर्ग के रूप में उभर कर आई।

प्रश्न 11.
श्रमिक वर्ग का आगमन शहरों में किन परिस्थितियों के अन्तर्गत हुआ?
उत्तर-
शहरों में फैक्टरी प्रणाली की स्थापना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का भूमिविहीन कृषक वर्ग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने लगा।

प्रश्न 12.
शहरों ने किन नई समस्याओं को जन्म दिया?
उत्तर-
शहरों ने निम्नलिखित नई समस्याओं को जन्म दिया

  • आवास की समस्या,
  • जलापूर्ति की समस्या,
  • प्रदूषण की समस्या।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
शहरों क विकास की पृष्ठभूमि एवं उसकी प्रक्रिया पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
शहरों के विकास की पृष्ठभूमि मध्यकालीन सामंती सामाजिक संरचना एवं मध्यकालीन जीवन मूल्य तेरहवीं शताब्दी तक अपने शिखर पर था। कई प्रतिरोधों के पश्चात भी यह व्यवस्था ने नई एवं बाह्य शक्तियों को जो इसे परिवर्तित करना चाहती थी यथासंभव नियंत्रित रखा, रोका और अपने में समाहित किया। अंततः एक नई सामाजिक एवं राजनीतिक संरचना विकसित हुई, जो अपनी परम्पराओं एवं स्वरूप के लिए प्राचीन परिपाटी के प्रति ऋणी तो थी, किन्तु नवीन राजनीतिक एवं आर्थिक अवधारणाओं को स्वीकार करती थी जो अधिक लौकिक एवं जिज्ञासु प्रवृत्ति से प्रेरित थी। इसी पृष्ठभूमि में शहरी जीवन का पुनः उदय हुआ।
शहरीकरण की प्रक्रिया- तीन ऐतिहासिक प्रक्रियाओं ने आधुनिक शहरों की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई।

  • औद्योगिक पूँजीवाद का उदय।
  • विश्व के विशाल भू-भाग पर औपनिवेशिक शासन की स्थापना।
  • लोकतांत्रिक आदशों का विकास।

इस तरह ग्रामीण एवं सामंती व्यवस्था से हटकर एक प्रगतिशील शहरी व्यवस्था की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ी। अतः नगरवाद जनसमूह के एक बड़े भाग की जीवन पद्धति के रूप में आधुनिक घटना है।

प्रश्न 2.
ग्रामीण तथा नगरीय जीवन के बीच की भिन्नता को स्पष्ट करें।
उत्तर-
(i) गाँव और शहर के बीच काफी भिन्नताएं हैं। गाँव की आबादी कम होती है नगर की ज्यादा; गाँव में खेती और पशुपालन मुख्य आजीविका है, शहर में व्यापार और उत्पादन, गाँव में प्राकृतिक वातावरण स्वच्छ है, शहर में प्रदूषित। शिक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सुविधाएँ आदि में शहर अधिक उन्नत अवस्था में होते हैं। शहर में आधुनिकताओं का बोलबाला होता है जबकि ग्रामीण क्षेत्र आधुनिकता से काफी दूर होता है।

नगर में रोजगार के साधनों की अधिकता होती है जबकि गाँव में रोजगार के साधन नहीं के बराबर होते हैं। ग्रामीणों का जीवन स्तर निम्न होता है, नगरीय लोगों का जीवन स्तर उच्च होता है। ग्रामीण लोग सामान्य तौर पर निष्कपट और ईमानदार होते हैं जबकि नगरीय लोगों में घृणा, इर्ष्या, द्वेष इत्यादि अधिक होते हैं।

प्रश्न 3.
शहरी जीवन में किस प्रकार के सामाजिक बदलाए आए।
उत्तर-
शहरीकरण की प्रक्रिया ने सामाजिक जीवन में काफी बदलाव लाया। ग्रामीण जीवन मुख्यतः कृषिप्रधान अर्थव्यवस्था पर आधारित थी परंतु नगरीय जीवन गतिशील मुद्रा प्रधान अर्थव्यवस्था पर आधारित था।

रोजगार के साधनों की अधिकता के कारण शहर में लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठने लगा जिससे शिक्षा का प्रसार सामाजिक जीवन में एक नया बदलाव लेकर आया। लोगों में स्वार्थ की भावना बढ़ने लगी, अधिकाधिक धनपार्जन के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल बढ़ने लगा। लोगों के जीवन में सुविधाएँ तो बढ़ने लगीं परन्तु कलुषता और कुविचार भी बढ़ने लगे जिससे मानवता की भावना घटने लगी। लोग सिर्फ अपने ही बारे में सोचने लगे। सामाजिक जीवन में आधुनिकता का बोलबाला बढ़ने लगा। नगरीय जीवन और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक बन गए। व्यक्तिवाद की भावना बढ़ने लगी।

प्रश्न 4.
शहरीकरण की प्रक्रिया में व्यवसायी वर्ग, मध्यम वर्ग मजदूर वर्ग की भूमिका की चर्चा करें।
उत्तर-
शहरीकरण की प्रक्रिया में व्यवसायी वर्ग, मध्यम वर्ग एवं मजदूर वर्ग की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
व्यवसायी वर्ग ने अपने व्यापारिक उद्देश्य की पूर्ति हेतु वाणिज्यिक कार्यस्थलों, जन परिवहन प्रणाली औद्योगिक केन्द्रों इत्यादि की स्थापना करना प्रारंभ किया जिससे धीरे-धीरे वहाँ की आबादी बढ़ने लगी, सामाजिक परिवर्तन होने लगा और छोटा-सा क्षेत्र शहर में तब्दील होने लगा।
मध्यम वर्ग धीरे-धीरे एक नए शिक्षित वर्ग के रूप में उभरने लगा। इस वर्ग से शिक्षक, वकील, चिकित्सक, इंजीनियर, क्लर्क, एकाउंटेंट्स इत्यादि विभिन्न पदों पर लोग आसीन होने लगे। इनकी आर्थिक स्थिति उन्नत होने लगी जिससे सामाजिक जीवन में परिवर्तन आया और शहरीकरण की प्रक्रिया आरंभ हुई।

गांव के किसान और मजदूर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ओर पलायन करने लगे जिससे शहरीकरण की प्रक्रिया को बल मिला।

प्रश्न 5.
एक औपनिवेशिक शहर के रूप में बम्बई शहर के विकास की समीक्षा करें।
उत्तर-
बम्बई औपनिवेशिक भारत की वाणिज्यिक राजधानी थी। एक प्रमुख बंदरगाह होने के नाते यह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र था जहाँ से कपास और अफीम जैसे कच्चे माल बड़ी तादाद में रवाना किए जाते थे। इस व्यापार के कारण न सिर्फ व्यापारी और महाजन बल्कि कारीगर एवं दुकानदार भी बम्बई में बसे। कपड़ा मिलें खुलने पर और अधिक संख्या में लोग इस शहर की ओर उन्मुख हुए। 1954 ई. में पहली कपड़ा मिल स्थापित हुई और 1921 ई. तक वहाँ 85 कपड़ा मिलें खुल चुकी थीं जिनमें लगभग 1,46,000 मजदूर काम कर रहे थे। 1931 तक लगभग एक चौथाई ही बम्बई के निवासी थे बाकी निवासी बाहर से आकर बसे थे। बम्बई का प्रति व्यक्ति क्षेत्रफल केवल 9.5 वर्ग गज था। वहाँ प्रति मकान में 20 व्यक्ति रहते थे।

मुम्बई का विकास सुनियोजित तरीके से नहीं हो सका। बल्कि 1800 के आसपास बम्बई फोर्ट एरिया का केन्द्र था और दो हिस्सों में बंटा हुआ था। एक हिस्से में ‘नेटिव’ रहते थे और दूसरे में यूरोपीय या ‘गोरे’ रहते थे। कोर्ट आबादी उत्तर में एक यूरोपीय उपनगर और औद्योगिक पट्टी में भी विकसित होने लगी थी। दक्षिण में इसी तरह की उपनगरीय आबादी और एक छावनी थी। यह नस्ली विभाजन अन्य प्रेसीडेंसी शहरों में भी रही।

19वीं शताब्दी के मध्य तक व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए और अधिक जमीन की जरूरत महसूस हुई तो सरकार और निजी कम्पनियों के द्वारा नयी योजनाएँ बनाई गईं। 1864 में मालाबार हिल से कोलबा के आखिरी छोर तक के पश्चिमी तट को विकसित करने का ठेका बैंक बेरिक्लेमेशन कम्पनी को मिला। 20वीं शताब्दी के आने तक जिस प्रकार आबादी तेजी से बढ़ी अधिक-से-अधिक जमीन को घेर लिया गया और समुद्री जमीन को विकसित किया जाने लगा।

एक सफल भूमि विकास परियोजना बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट के अन्तर्गत शुरू की गई। ट्रस्ट ने 1914 से 1918 के बीच एक सूखी गोद का निर्माण किया और उसकी खुदाई से जो मिट्टी निकली उसका इस्तेमाल करके 22 एकड़ का बालार्ड एस्टेट बना डाला। इसके बाद मशहूर मरीन ड्राइव बनाया गया।

Bihar Board Class 10 History शहरीकरण एवं शहरी जीवन Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
प्राचीन इराक का सबसे प्रमख नगर कौन-सा था?
उत्तर-
उर प्राचीन इराक का सबसे प्रमुख नगर था।

प्रश्न 2.
1880 में दुर्गाचरण राय की प्रकाशित पुस्तक का क्या नाम था ?
उत्तर-
देबोगेरमत्ये आगमन।

प्रश्न 3.
इंगलैंड में संयमता आन्दोलन किसने चलाया ?
उत्तर-
इंगलैंड में संयमता आन्दोलन मध्यमवर्ग ने चलाया।

प्रश्न 4.
भारत में धुआँ निरोधक कानून सबसे पहले कहाँ और कब बनाया गया?
उत्तर-
भारत में धुआँ निरोधक कानून सबसे पहले कलकत्ता में 1863 में बनाया गया।

प्रश्न 5.
आधुनिक काल में शहरीकरण पर सबसे बड़ा प्रभाव किसका पड़ा है?
उत्तर-
आधुनिक शहरों के उदय को औद्योगिक पूँजीवाद के उदय ने गहरे रूप से प्रभावित किया है।

प्रश्न 6.
उन दो कानूनों के नाम लिखें जिनके द्वारा इंगलैंड में बाल श्रमिकों को कारखानों में काम करने से रोक दिया गया ?
उत्तर-
जिन दो कानूनों ने इंगलैंड में बाल श्रमिकों को कारखानों में नाम करने से रोक दिया था वे है-

  1. अनिवार्य ये प्राथमिक शिक्षा तथा
  2. 1902 का फैक्ट्री कानून।

प्रश्न 7.
शहरीकरण का पुरुषों और महिलाओं पर समान रूप से क्या प्रभाव पड़ा?
उत्सर-
शहरीकरण का पुरुषों और महिलाओं पर समान प्रभाव पड़ा। दोनों के व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिकारों और कार्यों पर बल दिया गया।

प्रश्न 8.
बंबई की चॉल किस प्रकार की इमारत थी? इनका निर्माण कबसे आरंभ हुआ?
उत्तर-
बंबई में बाहर से आए हुए मजदूरों के आवास के लिए ही बड़ी संख्या में चॉल बनवाए गए। चॉल बहुमंजिली इमारतें थी। इसका निर्माण 1860 के दशक से आरंभ हुआ था।

प्रश्न 9.
उन दो फिल्मों के नाम लिखे जिनमें बंबई के अंतर्विरोधी आयामों का उल्लेख किया गया है?
उत्तर-
सी.आई.डी. और गेस्ट हाउस।

प्रश्न 10.
शहरों की सबसे बड़ी समस्या क्या थी?
उत्तर-
शहरों की सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या एवं उनके पुर्नवास (आवास) की थी।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
8वीं शताब्दी के मध्य से लंदन की आबादी बढ़ने के क्या कारण थे?
उत्तर-
लंदन इंगलैंड का एक बड़ा नगर था। इंगलैंड की राजधानी होने के कारण इसकी आबादी लगातार बढ़ती गई। जहां 1750 तक इसकी आबादी 6 लाख थी वहीं 1890 तक लंदन की जनसंख्या 40 लाख हो गई। यद्यपि लंदन में कारखाने नहीं थे परंतु वहाँ रोजगार के अन्य अवसर उपलब्ध थे। इसलिए इंगलैंड के विभिन्न भागों से लोग वहाँ आकर बसने लगे। प्रथम विश्वयुद्ध तक लंदन में मोटर और बिजली के समान भी बड़े स्तर पर बनाए जाने लगे। इससे नए-नए कारखाने खुले। इससे भी लंदन की आबादी बढ़ती गयी।

प्रश्न 2.
19 वीं शताब्दी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर-
19वीं शताब्दी के मध्य से बंबई का विकास एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर के रूप में होने लगा था। यहाँ से अफीम और कपास का निर्यात किया जाता था। व्यापार के विकास के साथ-साथ यह प्रशासनिक रूप में पश्चिम भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय भी बन गया।
औद्योगीकरण का जब विकास हुआ तो बम्बई बड़े औद्योगिक केन्द्र के रूप में बदल गया। 1819 में आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठों की पराजय के बाद ईस्ट इंडिया कम्पनी ने बम्बई को बम्बई प्रेसीडेंसी की राजधानी बनाई। इसके बाद बम्बई शहर का तेजी से विकास हुआ। व्यापारी, कारीगर, उद्योगपति, दुकानदार, श्रमिक बड़ी संख्या में यहाँ आकर बसने लगे। इससे बम्बई पश्चिमी भारत का सबसे प्रमुख नगर बन गया तथा इसकी आबादी में काफी वृद्धि हुई।

प्रश्न 3.
19 वीं 20 वीं शताब्दियों में लंदन में कामकाजी महिलाओं में किस प्रकार का बदलाव आया ? इसके क्या कारण थे?
उत्तर-
18वीं, 20वीं शताब्दी में जब इंगलैंड में कारखाने स्थापित होने लगे तब बड़ी संख्या में स्त्रियाँ भी इनमें काम करने लगी। लेकिन कुछ समय बाद तकनीक में परिवर्तन के कारण जब कुशल श्रमिकों की आवश्यकता हुई तो इन स्त्रियों को कारखानों से हटाया जाने लगा। कारखानों में काम बंद होने पर स्त्रियाँ घरेलु काम-धंधों में लग गई। कुछ स्त्रियाँ अपने घर ही रहकर कपड़े सिलने, ऊनी वस्त्र बुनने तथा कपड़ा धोने का काम करने लगी। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जब पुरुष बड़ी संख्या में युद्ध में शामिल होने लगे तथा युद्धकालीन आवश्यक सामग्रियों की मांग बढ़ गई तो लंदन की कामकाजी महिलाओं में फिर से बदलाव आया। वे विभिन्न उद्योगों तथा दफ्तरों में काम करने लगी। इस प्रकार महिलाओं के आर्थिक क्रियाकलापों में महत्वपूर्ण बदलाव आया। औद्योगीकरण तथा प्रथम विश्वयुद्ध इस बदलाव के प्रमुख कारण थे।

प्रश्न 4.
19 वीं शताब्दी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की वकालत क्यों की?
उत्तर-
19 वीं शताब्दी में लंदन में गरीबों के आवास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या थी। कारखाने व्यवस्था ने लंदन नगर का स्वरूप परिवर्तित कर दिया। कारखानों में काम करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इंगलैंड के विभिन्न भागों से लंदन में आकर बसने लगे थे। परंतु उनके सामने मुख्य समस्या आवास की थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए धनी लंदन वासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की वकालत शुरू की। वैसे धनी लोग जिनके पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध की शहर में बाहर से आनेवाले गरीब लोगों के लिए टेनेमेंट्स बनाने लगे। ये कामचलाऊ और असुरक्षित अपार्टमेंट या मकान थे। ऐसे मकान शहर के गरीब इलाकों में बनवाए गए।

प्रश्न 5.
बम्बई की बहुतेरी फिल्में शहर में बाहर से आनेवालों की जिन्दगी पर क्यों आधृत होती थी?
उत्तर-
बंबई नगर भीड़-भाड़, गंदगी, गरीबी, सम्पन्नता के साथ-साथ सपनों का शहर भी था। यहाँ अनेक लोग सुनहरे सपने संजोए हुए आते थे। इनमें बहुतों के सपने पूरे होते थे तो अनेक निराश हो जाते थे। बंबई को लोग सपनों का शहर या ‘मायापुरी’ मानते थे। औद्योगिक और आर्थिक केन्द्र होने के अतिरिक्त बम्बई रूपहले दुनिया या फिल्म उद्योग का भी केन्द्र था। पिल्मी दुनिया से आकृष्ट होकर इस उद्योग में अपना भविष्य तलाशने एवं सँवारने प्रतिवर्ष हजारों लोग इस शहर में आते इसलिए बंबई में अधिकांश फिल्में शहर से आनेवालों की जिन्दगी और उनकी आशाओं और निराशा पर केन्द्रित कर बनाई जाती थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
शहरीकरण से आप क्या समझते हैं ? शहरीकरण ने सहायक तत्वों का उल्लेख करें?
उत्तर-
शहरीकरण का इतिहास काफी पुराना है। मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ शहरों का भी उदय और विकास हुआ। सुमेर (मेसोपोटामिया), हड़प्पा (भारत-पाकिस्तान) रोम और यूनानी सभ्यताओं में अनेक नगर विकसित हुए। मध्यकालीन और आधुनिक काल में भी शहरीकरण की प्रक्रिया जारी रही। प्राचनी, मध्यकालीन और आधुनिक शहरों के स्वरूप में अंतर देखा जा सकता है। इन सभी शहरों की एक साझा विशेषता थी कि नगर गैर-कृषक उत्पादन व्यवसाय व्यापार के केन्द्र थे। शहरों की जीवन-शैली ग्रामों से भिन्न थी शहरों में नगरी जीवन एवं संस्कृति का विकास हुआ।

शहरीकरण उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके अंतर्गत गाँव, छोटे कस्बे, शहर, नगर और महानगर में तब्दील हो जाते हैं। शहरों के उदय और विकास में अनेक कारणों का योगदान रहा है। इनमें आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक कारण प्रमुख हैं।

शहरीरकण के सहायक तत्व-आधुनिक शहरों के उदय में तीन तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ये हैं-

  1. औद्योगिक पूँजीवाद का उदय
  2. उपनिवेशवाद का विकास तथा
  3. लोकतांत्रिक आदर्शों का विकास। शहरीकरण ने आर्थिक व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डाला।

प्रश्न 2.
19 वीं सदी में इंगलैंड में मनोरंजन के कौन-से साधन थे ?
उत्तर-
19वीं सदी में इंगलैंड के शहरवासियों के लिए विभिन्न प्रकार के मनोरंजन की व्यवस्था की गयी। मशीनी जीवन व्यतीत करने के साथ-साथ रविवार एवं छुट्टियों का दिन आराम और मनोरंजन में व्यतीत करने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों ने अलग-अलग रास्ते ढूँढे। 18वीं सदी के अंतिम दशक से तीन-चार सौ घनी एवं संभ्रात परिवार के लोगों के मनोरंजन के लिए अपेक्ष, रंगमंच और शास्त्रीय संगीत के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। 19वीं सदी में । मनोरंजन का एक प्रमुख केन्द्र शराबखाना था। रेलवे का आरंभ होने के पूर्व शराबखानों में लोग घोड़ा गाड़ियों से आते थे। शराबखाने सामान्यतः घोड़ागाड़ियों के रास्ते में स्थापित किए गए। इनमें मुसाफिर आकार ठहरते थे और रात्रि विश्राम भी करते थे। ये मुगलकालीन भारत में प्रचलित सराय के समान थे। जब रेल और बस का उपयोग बढ़ा तो घोड़ागाड़ियों का व्यवहार कम हो गया। अब शराबखाने रेलवे स्टेशन और बस पड़ावों के निकट बनाए गए।

19वीं शताब्दी से लंदनवासियों को अपने इतिहास की जानकारी देने के लिए संग्रहालय एवं कला दीर्घाएँ सरकार द्वारा खोली गई। पुस्तकालय भी स्थापित किए गए जो एक ही साथ मनोरंजन एवं ज्ञान-वर्द्धन के केन्द्र बन गए। 1810 में संग्रहालयों में प्रवेश शुल्क समाप्त कर देने से दर्शकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। लाखों लोग इन संग्रहालयों में आने लगे। समाज के निम्न तबके । के लोग अपने मनोरंजन के लिए संगीत सभा का आयोजन करते थे।

प्रश्न 3.
लंदन में भूमिगत रेलवे का निर्माण क्यों किया गया ? इसकी क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर-
उमर लंदन शहर का जब विस्तार हुआ तब यह शहर इतना विशालकाय हो गया कि लोगों को अपने कार्यस्थल पर पैदल पहुंचना मुश्किल होने लगा। लंदन में बाहर से आनेवाले को भी यहाँ पहुँचना मुश्किल हो रहा था। इसलिए परिवहन के साधनों के विकास के अंतर्गत भूमिगत रेलवे के विकास की योजना बनाई गई। इसका सबसे बड़ा लाभ यह था कि लोग उपनगरीय बस्तियों से सुविधापूर्वक लंदन आकर अपना काम कर सकते थे। इसका दूसरा लाभ यह था कि भूमिगत रेलवे की सुविधा होने से लंदन पर आबादी का बोझ कम हो जाता। इसलिए 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में लंदन में भूमिगत रहा था विकास किया गया। लंदन में ही विश्व की पहली भूमिगत रेल बनी। इसका आरंभ 10 जनवरी 1863 को हुआ। यह रेल लाइन लंदन के पैडिंग्टन और फैरिंग्टन स्ट्रीट के बीच चलाई गई।

लेकिन भूमिगत रेलवे के विकास के साथ लोगों द्वारा इसकी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की गई। आरंभ में लोगों को भूमिगत रेल से यात्रा करना असुविधाजनक और भयभीत कर देनेवाला लगता था। अखबार में एक पाठक ने भूमिगत रेल में अपनी यात्रा का अनुभव करते हुए लिखा था कि भूमिगत रेलगाड़ियों को फौरन बंद कर देना चाहिए। ये स्वास्थ्य के लिए भयानक खतरा है। इसी तरह की निराशाजनक प्रतिक्रिया कुछ अन्य लोगों की भी थी। उनका कहना था कि “इन लौह दैत्यों ने शहर की अफरातफरी और अस्वास्थ्यकर माहौल को और बढ़ा दिया है।” विख्यात अंग्रेजी उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस भी अपने उपन्यास ‘डॉम्बी एंडवसन’ में भूमिगत रेलवे द्वारा लाएगा विनाश का उल्लेख करते हैं। भूमिगत रेल निर्माण से गरीब तबकों पर बुरा असर पड़ा। अनुमानतः दो मील लम्बी लाइन बिछाने के लिए नौ सौ घर गरीबों के गिरा दिए जाते थे। इस प्रकार भूमिगत रेलवे के निर्माण द्वारा बड़ी संख्या में गरीबों की बस्तियाँ उजाड़ी जा रही थी।

प्रश्न 4.
शहरीकरण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा? प्रदूषण को रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए?
उत्तर-
शहरीकरण की प्रक्रिया का प्रतिकूल प्रभाव पर्यावरण पर पड़ता है। शहरों में कल-कारखानों के खुलने, बेतरतीब भीड़, गाड़ियों और लोगों की लगातार आवाजाही, धूल और गंदगी से पर्यावरण प्रदूषित होता है। शहरों के विस्तार के क्रम में प्राकृतिक वातावरण को नष्ट कर दिया गया था। जंगल का काटना, पहाड़ियों को समतल करना तथा तटीय इलाकों को भूमि के रूप में परिवर्तित करना आदि से पर्यावरण प्रदूषित हुई। हवा पानी को गंदगी ने प्रदूषित कर दिया। शहरों की भीड़, शोर-शराबे ने वायु प्रदूषण को बढ़ाया।

लेकिन धीरे-धीरे नगर नियोजक इन समस्याओं की ओर ध्यान देने लगे। सरकार ने समय-समय पर शहरों के पर्यावरण में सुधार लाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास किए। शहर में गंदगी फैलानेवाले इलाकों की सफाई करवाई गई। गंदे कारखाने को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया। भारत में पहली बार कलकत्ता में ही धुआं निरोधक कानून 1863 में पारित किया गया। बंगाल धुआं निरोधक आयोग के प्रयासों से कलंकत्ता में औद्योगिक इकाइयों से निकलनेवाले धुएँ पर नियंत्रण लाकर वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया गया। इसके पूर्व 1840 के दशक तक इंगलैंड के प्रमुख औद्योगिक शहरों में धुआँ नियंत्रक कानून लागू किए गए।

Bihar Board Class 10 History शहरीकरण एवं शहरी जीवन Notes

  • समाजशास्त्री के अनुसार नगरीय जीवन तथा आधुनिकता एक दूसरे के पूरक हैं और शहर को आधुनिक व्यक्ति का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।
  • तीन ऐतिहासिक प्रक्रियाओं ने आधुनिक शहरों की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई।  पहला-औद्योगिक पूँजीवाद का उदय, दूसरे विश्व के विशाल भू-भाग पर औपनिवेशिक शासन की स्थापना और तीसरा लोकतांत्रिक आदर्शों का विकास।
  • कस्बा -ग्रामीण अंचल में एक छोटे नगर को माना जाता है जो अधिकांशतः स्थानीय विशिष्ट व्यक्ति का केन्द्र होता है।
  • गंज -एक छोटे स्थायी बाजार को कहा जाता है। कस्बा और गंज दोनों कपड़ा, फूल, सब्जी
    तथा दूध उत्पादों से संबद्ध थे।
  • महानगर -किसी प्रांत या देश का विशाल घनी आबादी वाला शहर जो प्रायः वहाँ की राजधानी भी होता है।
  • दुनिया की सबसे पहली भूमिगत रेल के पहले खंड का उद्घाटन 10 जनवरी, 1863 ई. को. किया गया। यह रेल लाइन लंदन की पैडिंग्ल और कैरिंगटन के बीच स्थित थी।
  • 1911 ई. के दिल्ली दरबार में बिहार को पृथक राज्य का रूप दिया गया। 1912 ई. में बिहार एवंउड़ीसा को पृथक राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ और पटना इसकी राजधानी बनी।
  • वर्तमानपटना की आबादी 12 लाख से अधिक है और इसका क्षेत्रफल 250 वर्ग किमी है। कोलकाता के बाद पूर्वी भारत का सबसे बड़ा नगर है आबादी के घनत्व के दृष्टिकोण से
  • यह भारत का 14वाँ सर्वाधिक आबादी वाला नगर है।
  • घेटा -सामान्यतः यह शब्द मध्य यूरोपीय शहरों में यहूदियों की बस्ती के लिए प्रयोग किया जाता है। आज के संदर्भ में यह विशिष्ट धर्म, नृजाति, या समान पहचान वाले लोगों के साथ रहने को इंगित करता है।
  • बम्बई औपनिवेशिक भारत की वाणिज्यिक राजधानी थी।
  • 1854 ई. में बम्बई में पहली सूती मिल की स्थापना हुई।
  • 1901 की जनगणना के अनुसारबम्बई की लगभग 80 प्रतिशत आबादी चॉलों में रहती थी।
  • बम्बई के सुनियोजित विकास के लिए 1898 मेंसिटी ऑफ बंबई इम्प्रवमेंट ट्रस्ट की स्थापना की गयी।
  • शेरशाह के समय प्राचीन पाटलिपुत्र, पटना के नाम से विख्यात हुआ।
  • 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में मुगलराजकुमार अजीमुशान ने इस पटना का पुनर्निमाण कराया और इसे अजीमाबाद नाम दिया।
  • 1870 में लंदन में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा कानून लागू किए गए।
  • कामचलाऊ और अक्सर बेहिसाब भीड़ वाले अपार्टमेंट मकान ट्रेनेमेंट्स कहलाते थे।
  • सभ्यता आंदोलन को मध्यम वर्ग ने चलाया।
  • लंदन के धनी लोगों के लिए वास्तुकार और योजनाकार वेनेजर हावर्ड ने बागीचों के शहर या गार्डन सिटी की योजना तैयार की। दुनिया की सबसे पहली भूमिगत रेल लाइन 10 जनवरी, 1863 कोलंदन के पैडिग्टन और फैरिंग्टन स्ट्रीट के बीच चलाई गई।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 12 शिक्षा और संस्कृति

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 12 शिक्षा और संस्कृति Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

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Bihar Board Class 10 Hindi शिक्षा और संस्कृति Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

शिक्षा और संस्कृति क्लास 10th Bihar Board प्रश्न 1.
गाँधी जी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं?
उत्तर-
अहिंसक प्रतिरोध सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा है। वह बच्चों को मिलनेवाली साधारण अक्षर ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं, पहले होनी चाहिए। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बच्चे को, वह वर्णमाला लिखे और सांसारिक ज्ञान प्राप्त करे उसके पहले यह जानना चाहिए कि आत्मा क्या है सत्य क्या है, प्रेम क्या है और आत्मा में क्या-क्या शक्तियाँ छुपी हुई हैं। शिक्षा का ज़रूरी अंग यह होना चाहिए कि बालक जीवन-संग्राम में प्रेम से घृणा को, सत्य से असत्य को कष्ट-सहन से हिंसा को आसानी के साथ जीतना सीखें।

शिक्षा और संस्कृति Bihar Board प्रश्न 2.
इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग सीखना क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द-से-जल्द और उत्तम तरीका है। परन्तु शरीर और मस्तिष्क के विकास के साथ आत्मा की जागृति भी उतनी ही नहीं होगी, तो केवल बुद्धि का विकास घटिया और एकांगी वस्तु ही साबित होगा। आध्यात्मिक शिक्षा से मेरा मतलब हृदय की शिक्षा है। इसलिए मस्तिष्क का ठीक-ठीक और सर्वांगीण विकास तभी हो सकता है, जब साथ-साथ बच्चे की शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों की भी शिक्षा होती रहे।

Class 10 Hindi Chapter 12 Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
शिक्षा का अभिप्राय गांधी जी क्या मानते हैं?
उत्तर-
शिक्षा का मेरा अभिप्राय यह है कि बच्चे और मनुष्य के शरीर, बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों को प्रकट किया जाय। पढ़ना-लिखना तो शिक्षा का अन्त है ही नहीं; वह आदि भी नहीं है। वह पुरुष और स्त्री को शिक्षा देने के साधनों में केवल एक साधन है। साक्षरता स्वयं कोई शिक्षा नहीं है। इसलिए तो मैं बच्चे की शिक्षा का प्रारंभ इस तरह करूँगा कि उसे कोई उपयोगी दस्तकारी सिखाई जाए और जिस क्षण से वह अपनी तालिम शुरू करे उसी क्षण उसे उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए।

प्रश्न 4.
मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है?
उत्तर-
इस प्रकार की शिक्षा पद्धति में मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास संभव है। इतनी ही बात है कि आजकल की तरह प्रत्येक दस्तकारी केवल यांत्रिक ढंग से न सिखाकर वैज्ञानिक ढंग से सिखानी पड़ेगी। अर्थात् बच्चे की प्रत्येक प्रक्रिया का कारण जानना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि सारी शिक्षा किसी दस्तकारी या उद्योगों के द्वारा दी जाय। आपको यह ध्यान में रखना चाहिए कि प्रारंभिक शिक्षा में सफाई, तन्दुरुस्ती, भोजनशास्त्र, अपना काम आप करने और घर पर माता-पिता को मदद देने वगैरह के मूल सिद्धान्त शामिल हों। मौजूदा पीढ़ी के लड़कों को स्वच्छता और स्वावलंबन का कोई ज्ञान नहीं होता और वै शरीर से कमजोर होते हैं। इसलिए मैं संगीतमय कवायद के जरिए उनको अनिवार्य शारीरिक तालीम दिलवाऊंगा।

प्रश्न 5.
गाँधी जी कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों द्वारा सामाजिक क्रांति कैसे संभव मानते थे? .
उत्तर-
कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों के संबंध में गाँधीजी की कल्पना थी कि यह एक ऐसी शांत सामाजिक क्रांति की अग्रदूत बने जिसमें अत्यंत दूरगामी परिणाम भरे हुए हैं। इससे नगर और ग्राम के संबंधों का एक स्वास्थ्यप्रद और नैतिक आधार प्राप्त होगा और समाज की मौजूदा आरक्षित अवस्था और वर्गों के परस्पर विषाक्त संबंधों की कुछ बड़ी-से-बड़ी बुराइयों को दूर करने में बहुत सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण जन-जीवन विकसित होगा और गरीब-अमीर का अप्राकृतिक भेदें नहीं होगा।

प्रश्न 6.
शिक्षा का ध्येय गाँधी जी क्या मानते थे और क्यों?
उत्तर-
शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र-निर्माण करना मानते थे। उनके विचार से शिक्षा के
माध्यम से मनुष्य में साहस, बल, सदाचार जैसे गुणों का विकास होना चाहिए, क्योंकि चरित्र-निर्माण होने से सामाजिक उत्थान स्वयं होगा। साहसी और सदाचारी व्यक्ति के हाथों में समाज के संगठन का काम आसानी से सौंपा जा सकता है।

प्रश्न 7.
मांधीजी देशी भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद कार्य बमों आवश्यक मानते थे?
उत्तर-
गाँधीजी का मानना था कि देशी भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से किसी भी भाषा के विचारों को ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सकता है। अंग्रेजी या संसार के अन्य भाषाओं में जो ज्ञान-भंडार पड़ा है, उसे अपनी ही मातृभाषा के द्वारा प्राप्त करना सरल है। सभी भाषाओं से ग्राह्य ज्ञान के लिए अनुवाद की कला परमावश्यक है। अतः इसकी आवश्यकता बड़े पैमाने।

प्रश्न 8.
दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की महरी सबा को जरूरी है?
उतर-
दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति की कद्र होने और उसे हजम कर लेने के बाद होनी चाहिए, पहले हरगिज नहीं। कोई संस्कृति इतने रत्न-भण्डार से भरी हुई नहीं है जितनी हमारी अपनी संस्कृति है। सर्वप्रथम हमें अपनी संस्कृति को जानकर उसमें निहित . बातों को अपनाना होगा। इससे चरित्र-निर्माण होगा जो संसार के अन्य संस्कृति से कुछ सीखने की क्षमता प्रदान करेगा। अपनी संस्कृति संसार से कुछ ग्रहण करने का मूलाधार है। अतः इससे पहले और अन्य संस्कृतियों से बाद में जुड़ना चाहिए।

प्रश्न 9.
अपनी संस्कृति और मातृभाषा की बुनियाद पर दूसरी संस्कृतियों और भाषाओं से सम्पर्क क्यों बनाया जाना चाहिए? मांधी जी की सब स्पष्ट कीजिहा.
उत्तर-
गाँधीजी के विचारानुसार हमें अपनी संस्कृति और मातृभाषा का महत्त्व अवश्य देना चाहिए। अपनी मातृभाषा का माध्यम बनाकर हम अत्यधिक विकास कर सकते हैं। अपनी संस्कृति के माध्यम से जीवन में तेज गति से उत्थान किया जा सकता है। लेकिन हम कूपमंडूक नहीं बनें। दूसरी संस्कृति की अच्छी बातों को अपनाने में परहेज नहीं किया जाय। इसके लिए ध्यान रखने की बात है कि अपनी संस्कृति एवं भाषा के महत्त्व को कम नहीं आँको साथ-ही इसे आधार बनाकर अन्य भाषा एवं संस्कृति को अपने जीवन से युक्त करें।

प्रश्न 10.
गांधी जी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं और क्यों?
उत्तर-
गांधीजी भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजय को भारत के लिए बेहतर मानते हैं, क्योंकि भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का सामंजस्य भारतीय जीवन को प्रभावित किया है और स्वयं भी भारतीय जीवन से प्रभावित हुई है। रर सामंजस्य कुदरती तौर पर स्वदेशी ढंग का होगा, जिसमें प्रत्येक संस्कृति के लिए अपना उचित स्थान सुरक्षित होगा।

प्रश्न 11.
आशयस्कर करें
(क)मैं चाहता हूं कि सारी शिक्षा विकसी दस्तकारी या उद्योगों के द्वारा दी जाए।
व्याया-
गाँधीजी के विचारानुसार सच्ची और सही शिक्षा वही है जो मनुष्य को मनुष्यता सिखाए। दस्तकारी और उद्योगों के द्वारा जो शिक्षा ही जाएगी उससे गाँवों की बेरोजगारी दूर होगी। व्यावहारिक जीवन में आत्मीयता, प्रेम, करुणा, दया, धर्म, अहिंसा, सत्य और कर्म के प्रति लोगों का रुडार कहेंगा। एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा होगा। मन और मस्तिष्क का उचित विकास होगा। गाँवों स्पिकला, कुटीर उद्योगों का विकास होगा। शारीरिक, मानसिक और आर्थिक विकास में इससे सहयोम मिलेगा। शरीर-बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों का विकास अलग-अलग रूपों में होगा। आजकल ही शिक्षा मात्र यांत्रिक नहीं होगी बल्कि वैज्ञानिक होगी। ऐसी शिक्षा द्वारा ही मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास संभव हो जायेगा। दस्तकारी और उद्योगों के माध्यम से प्राप्त शिक्षा द्वारा स्वावलम्बन के प्रति लोगों की भावना जागेगी। सभी तत्पर होकर कार्य करेंगे। अपनी संस्कृति के प्रति रुचि दिखायेंगे। उत्पादन विनिमय, वितरण में सुगमता होगी (जनजीवन सुखी और समृद्ध होगा) गाँवों का विकास, उनका विकास और आर्थिक स्वावलंबन होगा। हस्तकला-शिल्पकला की महत्ता और उपयोगिता से लोग अवगत होंगे। ग्राम आधारित उद्योग-धंधों का विकास और जनता के बीच खुशहाली बढ़ेगी।

(ख) इमारत में आर्वसम्मति सी कोई चीननद नहीं है।
व्याया-
गाँधी जी का विचार है कि इस समय जो संस्कृति का विकसित रूप हम देख रहे हैं वह शुद्ध आर्य संस्कृति नहीं है, यह अनेक जातियों एवं धर्मों के सम्मिश्रण के समन्वय का स्वरूप है, आर्य कहाँ से आयें, कैसे आयें या ये मूल निवासी भारत के थे? इस विवाद में गाँधीजी पड़ना नहीं चाहते थे। उनका कहना है कि मेरे पूर्वज एक-दूसरे के साथ बड़ी आजादी के साथ मिल गये और वर्तमान में जो पीढ़ी है, उसी मिश्रण या मिलावट की उपज है। शक, हूण, कुषाण, आर्य, अनार्य, स्वेत श्याम सबका सम्मिश्रण रूप भारत है और यहाँ के निवासी उसी की उपज हैं।

(स) मेस धर्म कैदखाने का बर्ष नहीं है।
व्याख्या-
भारतीय धर्म के बारे में गाँधीजी के विचार हैं कि भारतीय धर्म कैदखाने का धर्म नहीं है। बलात् किसी पर थोपा नहीं गया है। बलात् किसी धर्मांतरण के लिये प्रताड़ित या सताया गया नहीं है। यह तो समन्वय का धर्म है। प्रेम का धर्म है। अपनत्व और आत्मीयता का धर्म है। यह तो विश्व-बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम का विराट स्वरूप है। इस प्रकार गाँधीजी ने भारतीय धर्म की विराटता, खुलापन, व्यापक दृष्टिकोण समन्वयवाद भावना आदि रूपों, विशेषताओं की
ओर ध्यान खींचा है और इसे व्यापक मानव हितकारी धर्म कहा है। यहाँ चिन्तन की गहरायी है, आजादी है, सहिष्णुता और सम्मान की भावना है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के विग्रह करते हुए समास के प्रकार बताए
उत्तर-
बुद्धिपूर्जक – बुद्धि से युक्त – तत्पुरुष
हृदयांकित – हृदय में अंकित – तत्पुरुष
सर्वांगीण – सभी अंगों के साथ – अव्ययीभाव
अविभाज्य – जो विभाजित नहीं है – नब समास
भोजनशास्त्र – भोजन का शास्त्र – तत्पुरूष
उत्तरार्ध – बाद का – तत्पुरूष
रक्तरंजित – रक्त से रंजित – तत्पुरूष
कूपमंडूक – कुंए का मेढ़क – तत्पुरूष
अग्रदूत – आगे चलने वाला – कर्मधारय
एकांगी – एक ही अंग का – कर्मधारय

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के पर्यायवाची बताएँ
उत्तर-
शारीरिक = शरीर, देह
प्रगट = प्रत्यक्ष, सामने
दस्तकारी = हस्तकौशल, हाथ की गारीगरी
मौजूदा = उपस्थित, मौजूद
कोशिश = प्रयास
परिणाम = प्रतिफल
तालीम = शिक्षा, विद्या
पूर्वज = पुरखे

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के संधि-विच्छेद करें-
उत्तर-
साक्षर = स + अक्षर
एकांगी = एक + अंगी।
उत्तरार्ध = उत्तर + अर्थ
स्वावलंबन = स्व + अवलंबन
संस्कृति = सम् + कृति
बहिष्कार = बहिः + कार
प्रत्यक = प्रति + एक
अध्यात्म = अधि + आत्म

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1.अहिंसक प्रतिरोध सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा है। वह बच्चों की मिलनेवाली साधारण अक्षर-ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं, पहले होनी चाहिए। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बच्चे को, वह वर्णमाला लिखे और सांसारिक ज्ञान प्राप्त करें उसके पहले यह जानना चाहिए कि आत्मा क्या है, सत्य क्या है, प्रेम क्या है और आत्मा में क्या-क्या शक्तियाँ छुपी हुई हैं। शिक्षा का जरूरी अंग यह होना चाहिए कि बालक जीवन-संग्राम में प्रेम से घृणा को, सत्य का बल अनुभव करने के कारण ही मैंने सत्याग्रह-संग्राम के उत्तरार्द्ध में पहले टॉल्सटाय फार्म में और बाद में फिनिक्स आश्रम में बच्चों को इसी ढंग की तालीम देने की भरसक कोशिश की थी।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा क्या है ?
(ग) बच्चे को सांसारिक ज्ञान से पहले क्या जानना चाहिए?
(घ) शिक्षा का जरूरी अंग क्या होना चाहिए?
(ङ) हिंसा को कैसे जीता जा सकता है?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-शिक्षा और संस्कृति।
लेखक का नाम महात्मा गाँधी।
(ख) अहिंसक प्रतिरोध सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा है।
(ग) बच्चे को सांसारिक ज्ञान से पहले यह जानना चाहिए कि आत्मा क्या है, सत्य क्या है, प्रेम क्या है और आत्मा में क्या-क्या शक्तियाँ छुपी हुई हैं।
(घ) शिक्षा का जरूरी अंग यह होना चाहिए कि बालक जीवन-संग्राम में प्रेम से घृणा को, सत्य से असत्य को और कष्ट सहन से हिंसा को आसानी से जीतना सीखें।
(ङ) जीवन में कष्ट सहने की क्षमता विकसित करके हिंसा को आसानी से जीता जा सकता है।

2. मेरी राय में बुद्धि की शिक्षा शरीर की स्थूल इन्द्रियों, अर्थात् हाथ, पैर, आँख, कान, नाक वगैरह के ठीक-ठीक उपयोग और तालीम के द्वारा ही हो सकती है। दूसरे शब्दों में, बच्चे द्वारा इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द-से-जल्द और उत्तम तरीका है। परन्तु, शरीर और मस्तिष्क के विकास के साथ आत्मा की जागृति भी उतनी ही नहीं होगी, तो केवल बुद्धि का विकास घटिया और एकांकी वस्तु ही साबित होगा। आध्यात्मिक शिक्षा से मेरा मतलब हृदय की शिक्षा है। इसलिए मस्तिष्क का ठीक-ठीक और सर्वांगीण विकास तभी हो सकता है, जब साथ-साथ बच्चे की शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों की भी शिक्षा होती रहे। ये सब बातें अविभाज्य हैं, इसलिए इस सिद्धांत के अनुसार यह मान लेना कुतर्क होगा कि उनका . विकास अलग-अलग या एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप में किया जा सकता है।

प्रश्न
(क) पाठ एवं लेखक का नाम लिखें।
(ख) बुद्धि की सच्ची शिक्षा कैसे हो सकती है?
(ग) बच्चे की बुद्धि के विकास का उत्तम तरीका क्या है?
(घ) आध्यात्मिक शिक्षा का अभिप्राय क्या है? ..
(ङ) मस्तिष्क का ठीक-ठीक विकास किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-शिक्षा और संस्कृति।
लेखक का नाम-महात्मा गाँधी।
(ख) बुद्धि की सच्ची शिक्षा शरीर की स्थूल इन्द्रियों, अर्थात् हाथ, पैर, आँख, कान, नाक वगैरह के ठीक-ठीक उपयोग और तालीम के द्वारा ही हो सकती है।
(ग) बच्चे द्वारा इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द-से-जल्द और उत्तम तरीका है।
(घ) आध्यात्मिक शिक्षा से मतलब हृदय की शिक्षा है।
(ङ) मस्तिष्क का ठीक-ठीक विकास तभी हो सकता है जब साथ-साथ बच्चे की शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों की भी शिक्षा होती रहे।

3. शिक्षा से मेरा अभिप्राय यह है कि बच्चे और मनुष्य के शरीर, बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों को प्रकट किया जाए। पढ़ना-लिखना शिक्षा का अन्त तो है ही नहीं; वह आदि भी नहीं है। वह पुरुष और स्त्री को शिक्षा देने के साधनों में केवल एक साधन है। साक्षरता स्वयं कोई शिक्षा नहीं है। इसलिए तो मैं बच्चे की शिक्षा का प्रारंभ इस तरह करूँगा कि उसे कोई उपयोगी दस्तकारी सिखाई जाए और जिस क्षण से वह अपनी तालीम शुरू करे उसी क्षण उसे उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) शिक्षा से गाँधीजी का क्या अभिप्राय है?
(ग) क्या साक्षरता को वास्तविक शिक्षा माना जा सकता है?
(घ) बच्चे की शिक्षा का प्रारंभ किस तरह से होनी चाहिए?
(ङ) बच्चे को उत्पादन का काम करने योग्य कब बना देना अच्छा होगा?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम–शिक्षा और संस्कृति।।
लेखक का नाम-महात्मा गाँधी।
(ख) शिक्षा से गाँधीजी का अभिप्राय यह है कि बच्चे और मनुष्य के शरीर, बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों को प्रकट किया जाए।
(ग) साक्षरता को कोई शिक्षा नहीं माना जा सकता है।
(घ) बच्चे की शिक्षा का प्रारंभ इस तरह से हो कि उसे कोई उपयोगी दस्तकारी सिखाई जाए और जिंस क्षण से वह अपनी तालीम शुरू करें उसी क्षण उसे उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए।
(ङ) प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के समय ही बच्चे को उत्पादन का काम करने योग्य बना देना अच्छा होगा।

4. मैं चाहता हूँ कि उस भाषा (अंग्रेजी) में और इसी तरह संसार की अन्य भाषाओं में जो ज्ञान-भंडार भरा पड़ा है, उसे राष्ट्र अपनी ही देशी भाषाओं में प्राप्त करे। मुझे रवीन्द्रनाथ की अपूर्व रचनाओं की खूबियाँ जानने के लिए बंगला सीखने की जरूरत नहीं। वे मुझे अच्छे अनुवादों से मिल जाती हैं। गुजराती लड़कों और लड़कियों को टॉल्सटाय की छोटी-छोटी कहानियों से लाभ उठाने के लिए रूसी भाषा सीखने की आवश्यकता नहीं। वे तो उन्हें अच्छे अनुवादों के जरिए सीख लेते हैं। अंग्रेजों को गर्व है कि संसार में जो उत्तम साहित्य होता है, वह प्रकाशित होने के एक सप्ताह के भीतर सीधी-सादी अंग्रेजी में उस राष्ट्र के हाथों में आ जाता है।

प्रश्न
(क) इस गद्यांश के लेखक कौन हैं ?
(ख) गांधीजी क्या चाहते हैं ?
(ग) गाँधीजी को रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचनाओं का आनन्द कैसे प्राप्त हो जाता है?
(घ) अंग्रेजों को किस बात का गर्व है?
उत्तर-
(क) इस गद्यांश के लेखक हैं महात्मा गाँधी।।
(ख) गाँधीजी चाहते हैं कि संसार की विभिन्न भाषाओं में जो ज्ञान-भंडार है, वह देश के . लोगों को देशी भाषा में हासिल हो।
(ग) गाँधीजी को रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचनाओं का आनन्द अनुवाद के द्वारा प्राप्त हो जाता है।
(घ) अंग्रेजों को इस बात का गर्व है कि संसार में जिस किसी भाषा में उत्तम साहित्य . का प्रकाशन होता है, वह एक सप्ताह के अन्दर सरल अंग्रेजी में उपलब्ध हो जाता है।

5. मैं नहीं चाहता कि मेरे घर के चारों ओर दीवारें खड़ी कर दी जाएँ और मेरी खिड़कियाँ बन्द कर दी जाएँ। मैं चाहता हूँ कि सब देशों की संस्कृतियों की हवा मेरे घर के चारों ओर अधिक-से-अधिक स्वतंत्रता से बहती रहे। मगर मैं उनमें से किसी के झोंके में उड़ नहीं जाऊँगा। मैं चाहूँगा कि साहित्य में रुचि रखनेवाले हमारे युवा स्त्री-पुरुष जितना चाहें अंग्रेजी और संसार की भाषाएँ और फिर उनसे आशा रखूगा कि वे अपनी विद्वता का लाभ भारत और संसार को उसी तरह दें जैसे बोस, राय या स्वयं कविवर दे रहे हैं लेकिन मैं यह नहीं चाहूँगा कि एक भी भारतवासी अपनी मातृभाषा भूल जाए उसकी उपेक्षा करे उस पर शर्मिंदा हो या यह अनुभव करे कि वह अपनी खुद की देशी भाषा में विचार नहीं कर सकता या अपने उत्तम विचार प्रकट नहीं कर सकता। मेरा धर्म कैदखाने का धर्म नहीं है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नाम लिखें।
(ख) लेखक का आसानी और अन्य देशों की संस्कृतियों के बारे में क्या विचार हैं?
(ग) संसार की अन्य भाषाओं के बारे में लेखक की क्या साय है?
(घ) मातृभाषा के संबंध में लेखक की धारणा क्या है ?
(ङ) लेखक का अपने धर्म को कैदखाना न मानने का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा और संस्कृति। लेखक-महात्मा गाँधी।
(ख) लेखक चाहते हैं कि अन्य देशों की संस्कृतियों की जानकारी ली जाती रहे किन्तु उनके प्रवाह में बहा नहीं जाए। जो अच्छी बातें हैं उन्हें स्वीकार करने में हिचक न हो।
(ग) लेखक चाहते हैं कि हमारे युवा संसार की अन्य भाषाएँ सीखना चाहते हैं तो सीखें लेकिन अपनी जानकारी और विद्वता का लाभ देश को दें जैसे—जगदीशचन्द्र बोस और रवीन्द्रनाथ ठाकुर आदि दे रहे हैं।
(घ) लेखक चाहते हैं कि लोग अपनी मातृभाषा न भूलें, इसकी उपेक्षा न करें। ऐसा न हो कि अपने उत्तम विचार हमारे लोग अपनी मातृभाषा में प्रकट न कर सकें।
(ङ) लेखक अपने धर्म को कैदखाना नहीं मानते अर्थात् वे मानते हैं कि अपना हिन्दू धर्म नयी बातें सीखने में समर्थ है।

6. भारतीय संस्कृति उन भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य की प्रतीक है जिनके हिन्दुस्तान में पैर जम गए हैं, जिनका भारतीय जीवन पर प्रभाव पड़ चुका है और जो स्वयं भारतीय जीवन से प्रभावित हुई है। यह सामंजस्य कुदरती तौर पर स्वदेशी ढंग का है, जिसमें प्रत्येक संस्कृति के लिए अपना स्थान सुरक्षित है। यह अमरीकी ढंग का सामंजस्य नहीं है जिसमें एक प्रमुख संस्कृति बाकी संस्कृतियों को हजम कर लेती है और जिसका लक्ष्य मेल की तरफ नहीं बल्कि कृत्रिम जबरदस्ती की एकता की ओर है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक कारण बतार।
(ख) भारतीय संस्कृति कैसी है?
(म) भारतीय संस्कृति का सामंजस्व किस प्रकार का है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क) पाठ-शिक्षा और संस्कृति। लेखक-महात्मा गाँधी।
(ख) भारतीय संस्कृति उन अनेक संस्कृतियों के सामंजस्य का प्रतीक है, जिनके पैर.भारत में जम चुके हैं या वे स्वयं भारतीय जीवन से प्रभावित हैं।
(ग) भारतीय संस्कृति का सामंजस्य कुदरती है, स्वदेशी है। यह अमरीकी ढंग का नहीं है जिसमें एक संस्कृति बाकी संस्कृतियों को जबरदस्ती या कृत्रिम रूप से हजम कर लेती है। यह सामंजस्य आन्तरिक है। वस्तुतः भारतीय संस्कृति एक अनुपम संस्कृति है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें-

प्रश्न 1.
“शिक्षा और संस्कृति’ पाठ के लेखक कौन हैं ?
(क) रवीन्द्र नाथ ठाकुर
(ख) भीमराव अम्बेदकर
(ग) मैक्समूलर
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर-
(घ) महात्मा गाँधी

प्रश्न 2.
“शिक्षा और संस्कृति’ शीर्षक पाठ गद्य की कौन-सी विधा है?
(क) निबंध
(ख) गद्य काव्य
(ग) रेखाचित्र
(घ) साक्षात्कार
उत्तर-
(क) निबंध

प्रश्न 3.
गाँधीजी को ‘महात्मा’ किसने कहा?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(ग) राजेन्द्र प्रसाद
(घ) सरदार पटेल
उत्तर-
(ख) रवीन्द्रनाथ ठाकुर

प्रश्न 4.
गाँधीजी की दृष्टि में उदात्त और बढ़िया शिक्षा क्या है ?
(क) अहिंसक प्रतिरोध
(ख) अक्षर-ज्ञान
(ग) अनुवाद
(घ) अंग्रेजी की शिक्षा
उत्तर-
(ख) अक्षर-ज्ञान

प्रश्न 5.
गाँधीजी शिक्षा का उद्देश्य क्या मानते थे?
(क) नौकरी पाना
(ख) वैज्ञानिक बनना
(ग) चरित्र-निर्माण
(घ) यांत्रिक दक्षता
उत्तर-
(ग) चरित्र-निर्माण

प्रश्न 6.
टॉल्सटाखन थे?
(क) रूसी लेखक
(ख) चीनी लेखक
(ग) अंग्रेजी लेखक
(घ) फ्रेंच लेखक
उत्तर-
(क) रूसी लेखक

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
गाँधीजी के पिता का नाम ………. था। .
उत्तर-
करमचंद

प्रश्न 2.
गाँधीजी का पूरा जीवन ………… के प्रति समर्पित था।
उतर-
राष्ट्र

प्रश्न 3.
……….. स्वयं कोई शिक्षा नहीं है।
उत्तर-
साक्षरता

प्रश्न 4.
शिक्षा का उद्देश्य है …………।
उत्तर-
चरित्र निर्माण

प्रश्न 5.
दूसरों का बहिष्कार करनेवाली ……… जिन्दा नहीं रहती।
उत्तर-
संस्कृति

प्रश्न 6.
भारतीय संस्कृति भिन्न-भिन्न संस्कृतियों ………… का प्रतीक है।
उत्तर-
के सामंजस्य

अतिलघु उत्तरीय पश्व

प्रश्न 1.
किनका जन्म-दिन अहिंसा-दिवस के रूप में मनाया जाता है?
उत्तर-
गाँधीजी का जन्म-दिन अहिंसा-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्रश्न 2.
गाँधीबी सबसे बढ़िया शिक्षा किसे बनते थे?
उत्तर-
अहिंसक प्रतिरोध को गांधीजी सबसे बढ़िया शिक्षा मानते थे।

प्रश्न 3.
याँधोकी सारी शिक्षा कैसे देना चाहते थे?
उत्तर-
गाँधीजी सारी शिक्षा किसी दस्तकारी या उद्योगों के द्वारा देना चाहते थे।

प्रश्न 4.
गाँधीजी किस भाषा में संसार का ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे?
उत्तर-
गाँधीजी अपनी ही देशी भाषा में संसार का ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे।

प्रश्न 5.
भारतीय संस्कृति को गाँधीजी क्या समझाते थे ?
उत्तर-
गाँधीजी की दृष्टि में भारतीय संस्कृति रत्नों से भरी है।

प्रश्न 6.
कौन-सी संस्कृति जीवित नहीं रहती?
उत्तर-
जो संस्कृति दूसरों का बहिष्कार करने की कोशिश करती है, वह जीवित नहीं रहती।

प्रश्न 7.
अमरीकी संस्कृति की प्रवृत्ति क्या है ?
उत्तर-
अमरीकी संस्कृति की प्रवृत्ति है बाकी संस्कृतियों को हजम करना, कृत्रिम और जबरदस्ती की एकता कायम करना।

शिक्षा और संस्कृति लेखक परिचय

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई० में पोरबंदर, गुजरात में हुआ था । उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई थां । उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और उसके आस-पास हुई । 4 दिसंबर 1888 ई० में वे वकालत की पढ़ाई के लिए । यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन यूनिवर्सिटी, लंदन गए । 1883 ई०में कम उम्र में ही उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ जो स्वाधीनता संग्राम में उनके साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलीं । गाँधीजी के जीवन में दक्षिण अफ्रीका (1893-1914 ई०) के प्रवास का ऐतिहासिक महत्त्व है । वहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का पहला प्रयोग किया ।

1915 ई० में गाँधीजी भारत लौट आए और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्होंने. सत्य के प्रयोग किए । अहिंसा और सत्याग्रह उनका सबसे बड़ा हथियार था। उन्होंने स्वराज की माँग की, अछूतोद्धार का काम किया, सर्वोदय का कार्यक्रम चलाया, स्वदेशी का नारा दिया, समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, जाति-धर्म के विभेदक भाव को मिटाने की कोशिश की और अंततः अंग्रेजों की गुलामी से भारत को आजादी दिलाई।।

गाँधीजी को रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘महात्मा’ कहा । उन्हें ‘बापू’, ‘राष्ट्रपिता आदि कहकर कृतज्ञ राष्ट्र याद करता है । गाँधीजी ने ‘हिंद स्वराज’, ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ आदि पुस्तकें लिखीं। उन्होंने ‘हरिजन’, ‘यंग इंडिया’ आदि पत्रिकाएँ भी संपादित की । उनका पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित था । उन्होंने शिक्षा, संस्कृति, राजनीति तथा सामाजिक एवं आर्थिक पक्षों पर खूब लिखा और उनके प्रयोग के द्वारा भारतवर्ष को फिर से एक उन्नत एवं गौरवशाली राष्ट्र बनाने की कोशिश की । 30 जनवरी 1948 ई० में नई दिल्ली में एक सिरफिरे ने उनकी हत्या कर दी । गाँधीजी की स्मृति में पूरा राष्ट्र 2 अक्टूबर को उनकी जयंती मनाता है । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके जन्म दिवस को ‘अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

शिक्षा और संस्कृति जैसे विषय पर यहाँ ‘हरिजन’, ‘म इंडिया जैसे ऐतिहासिक पत्रों के अग्रलेखों से संकलित-संपादित राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचार प्रस्तुत हैं । इस पाठ में उनके क्रांतिकारी शिक्षा दर्शन के अनुरूप वास्तविक जीवन में उपयोगी, व्यावहारिक दृष्टिकोण और विचार हैं जिनके बल पर आत्मा, बुद्धि, मानस एवं शरीर के संतुलित परिष्कार के साथ मनुष्य
के नैतिक विकास के लिए जरूरी प्रेरणाएँ हैं । गाँधीजी की शिक्षा और संस्कृति की परिकल्पना. निरी सैद्धांतिक नहीं है, वह जटिल और पुस्तकीय भी नहीं है, बल्कि हमारे साधारण दैनंदिनं जीवन-व्यवहार से गहरे अर्थों में जुड़ी हुई है ।

शिक्षा और संस्कृति Summary in Hindi

पाठ का सारांश

अहिंसक प्रतिरोध सबसे उदात्त और बढ़िया शिक्षा है। वह बच्चों को मिलनेवाली साधारण उक्षतर-ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं, पहले होनी चाहिए। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बच्चे को वह वर्णमाला लिखे और सांसारिक ज्ञान प्राप्त करे उसके पहले यह जानना चाहिए कि आत्मा क्या है, सत्य क्या है, प्रेम क्या है और आत्मा में क्या-क्या शक्तियाँ छुपी हुई हैं।

मेरी राय में बुद्धि की सच्ची शिक्षा शरीर की स्थूल इन्द्रियों अर्थात् हाथ, पैर, आँख, कान, नाक वगैरह के ठीक-ठीक उपयोग और तालीम के द्वारा ही हो सकता है। आध्यात्मिक शिक्षा से मेरा अभिप्राय हृदय की शिक्षा है। इसलिए मस्तिष्क का ठीक-ठीक और सर्वांगीण विकास तभी हो सकता है, जब साथ-साथ बच्चे की शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों की भी शिक्षा होती रहे।

शिक्षा से मेरा अभिप्राय यह है कि बच्चे और मनुष्य के.शरीर बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों को प्रयास किया जाए। पढ़ना-लिखना शिक्षा का अन्त तो है ही नहीं, वह आदि भी नहीं है। मैं चाहता हूँ कि सारी शिक्षा किसी दस्तकारी या उद्योगों के द्वारा दी जाए।

आपको यह ध्यान में रखना चाहिए कि प्रारंभिक शिक्षा में सफाई, तन्दुरूस्ती, भोजनशास्त्र, अपना काम आप करने और घर पर माता-पिता को मदद देने वगैरह के मूल सिद्धान्त शामिल हों।

जब भारत को स्वराज्य मिल जाएगा तब शिक्षा का ध्येय होगा? चरित्र-निर्माण। मैं साहस, बल, सदाचार और बड़े लक्ष्य के लिए काम करने में आत्मोत्सर्ग की शक्ति का विकास कराने की कोशिश करूँगा। यह साक्षरता से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, किताबी ज्ञान तो उस बड़े उद्देश्य का एक साधनमात्र है। यह अच्छी मितव्ययिता होगी यदि हम विद्यार्थियों का एक अलग वर्ग ऐसा रख दें, जिसका काम यह हो कि संसार की भिन्न-भिन्न भाषाओं में से सीखने की उत्तम बातें वह ज्ञान ले और उनके अनुवाद देशी भाषाओं में करके देता रहे। मेरा नम्रतापूर्वक यह कथन जरूर है कि दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति है। मैं नहीं चाहता कि मेरे घर के चारों ओर दीवारें खड़ी कर दी जायें और मेरी खिड़कियाँ बन्द कर दी जायें। मैं चाहता हूँ कि सब देशों की संस्कृतियों की हवा मेरे घर के चारों ओर अधिक-से-अधिक स्वतंत्रता के साथ बहती रहे। मगर मैं उनमें से किसी के झोंक में उड़ नहीं जाऊँगा। लेकिन मैं नहीं चाहता हूँ कि भारतवासी अपनी मातृभाषा को भूल जाए, उसकी उपेक्षा करे, उस पर शर्मिन्दा हो।

शब्दार्थ

प्रतिरोध : विरोध, संघर्ष
उदात्त : उन्नत
उत्तरार्ध : बाद का, परवर्ती आधा भाग
स्थूल : मोटा ।
जागृति : जागरण
एकांगी : एकपक्षीय
सर्वांगीण : सम्पूर्ण, समग्र
अविभाज्य : अविभक्त, जिसे अलग-अलग न बाँटा जा सके
दस्तकारी : हस्तकौशल, हस्तशिल्प, हाथ की कारीगरी
यांत्रिक : मशीनी, यंत्र पर आधारित
कवायद : ड्रील, भागदौड़
अग्रदूत : आगे-आगे चलने वाला
दूरगामी : दूर तक जाने वाला
गुजर : निर्वाह, पालन
रक्तरंजित : खून से सना हुआ
दक्षता : कौशल
आत्मोत्सर्ग : खुद को न्योछावर करना, आत्म-त्याग
कूपमंडूक : कुएँ का मेढक, संकीर्ण
हजम : पचना
हरगिज : किसी भी हाल में
अमल : व्यवहार
हृदयांकित : हृदय में अंकित

Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 6 घर्षण के कारण

Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 6 घर्षण के कारण Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 6 घर्षण के कारण

Bihar Board Class 8 Science घर्षण के कारण Text Book Questions and Answers

अभ्यास

घर्षण Class 8 Bihar Board प्रश्न 1.
कौन-सा गतिशील गेंद की गति को मंद करता है?
उत्तर-
घर्षण बल गतिशील गेंद की गति को मंद करता है

Gharshan Ke Karan Bihar Board प्रश्न 2.
घर्षण बल क्या है ?
उत्तर-
किसी वस्तु पर लगने वाला वह बल जो हमेशा गति का विरोध करता हो उस विरोधी बल को घर्षण बल कहते हैं। प्रत्येक वस्तु पर घर्षण बल उसकी गति के विपरीत दिशा में होता है। घर्षण बल हमेशा गति का विरोधी बल होता है तथा कभी भी गति बढ़ाने में मदद नहीं करता। घर्षण बल दो सतहों के बीच कार्य करता है इसलिए इसे सम्पर्क बल कहते हैं।

घर्षण के कारण Bihar Board प्रश्न 3.
स्थैतिक घर्षण तथा सी घर्षण में अन्तर बताइए।
उत्तर-
जब किसी वस्तु को विराम की स्थिति से गति में लाने का प्रयास किया जाता है। उस स्थिति में लगने वाले घर्षण बल को स्थैतिक घर्षण कहते.

जब कोई एक वस्तु, दूसरे वस्तु पर गतिमान हो तो उन दोनों सतहों के बीच लगने वाले घर्षण को सी घर्षण कहते हैं। सी घर्षण, स्थैतिक घर्षण से कम होता है।

Bihar Board Class 8 Science Solution In Hindi प्रश्न 4.
घर्षण बल की दिशा क्या होती है?
उत्तर-
घर्षण बल की दिशा हमेशा गति के विपरीत होती है।

Science बुक बिहार क्लास 8 Solution प्रश्न 5.
जब गेंद को समान वेग से फेकेंगे तो गेंद क्यों

  1. पक्की समतल सतह पर लम्बी दूरी तय करती है।
  2. कच्ची सड़क पर कम दूरी तय करती है।
  3. कंकड़ी सड़क पर बहुत कम दूरी तय कर पाती है।

उत्तर-

  1. जब गेंद को समान वेग से फेंकते हैं तो गेंद पक्की समतल सतह पर लम्बी दूरी तय करती है क्योंकि पक्की समतल सतह की प्रकृति चिकनी होती है जिसके कारण घर्षण बल कम लगता है।
  2. कच्ची सड़क पर गेंद कम दूरी तय करती है क्योंकि यहाँ घर्षण बल ज्यादा लगता है।
  3. कंकडीली सड़क की सतह काफी खरदरा है जिसके कारण यहाँ घर्षण बल बहुत अधिक कार्य करता है। परिणामस्वरूप गेंद बहुत कम दूरी तय कर पाती है।

घर्षण के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 6.
जब एक वस्तु दूसरी वस्तु की सतह पर गति करती है तो कौन वस्तु घर्षण प्रदर्शित करेगी?

  1. निचली वस्तु की सतह
  2. ऊपर गतिशील वस्तु की सतह
  3. दोनों वस्तु की सतह ।

उत्तर-
3. दोनों वस्तु की सतह ।

Bihar Board Science Book Class 8 प्रश्न 7.
खिलाड़ी द्वारा जूतों में काँटी का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर-
काँटी जमीन में घुस जाती है जिसके कारण जूता और जमीन में बहुत अच्छी सम्पर्क स्थापित हो जाता है। परिणामस्वरूप घर्षण बल का मान अधिक हो जाता है और खिलाड़ी फिसल नहीं पाते हैं तथा अपने क्षमता के अनुसार प्रदर्शन कर पाते हैं।

Gharshan Class 8 Bihar Board प्रश्न 8.
घर्षण हानिकारक वस्तु अनिवार्य है। क्यों?
उत्तर-
सतहों के बीच घर्षण ऊर्जा का अपव्यय करते हैं। घर्षण के कारण वस्तुएँ घिस जाती हैं। कपड़ा, जूता, चाकू, पेंसिल, पेन, बॉल बेयरिंग आदि घर्षण के कारण घिसकर खराब हो जाते हैं। मशीनों में घर्षण के कारण ऊर्जा का क्षय होता रहता है तो दूसरी तरफ बिना घर्षण के हम पृथ्वी चल नहीं पाएंगे। वाहन सड़क पर दौड़ नहीं पाएगी। घर्षण के कारण ही वाहनों पें गति संभव है। वाहनों की दिशा परिवर्तन में, कागज पर लिखने इत्यादि ऐसे बहुत कार्य हैं जिसमें घर्षण सहायक होते हैं।

इस प्रकार घर्षण जहाँ हानिकारक है, वहीं अत्यंत लाभकारी भी है। यानि अनिवार्य भी है।

Bihar Board Class 8 Science प्रश्न 9.
धारा रेखीय आकृति से क्या समझते हैं ? हवाई जहाज की आकृति या नाव । जहाज को विशेष आकृति क्यों प्रदान की जाती है ?
उत्तर-
तरल पदार्थ (गैस तथा द्रव) में गति करने वाली वस्तुओं की आकृति’ को विशेष रूप प्रदान किया जाता है जिससे घर्षण के मान को कम किया जाता है । इसी विशेष आकृति को धारा-रेखीय आकृति कहते हैं। हवाई जहाज,

नाव, जहाज की धारा रेखीय आकृति दिया जाता है। ताकि हवा तथा जल से कम से कम अवरोध या घर्षण हो सके। घर्षण कम होने से ऊर्जा का क्षय कम होता है और आसानी से यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक गमन कर पाती है।

Bihar Board Class 8th Science Solution प्रश्न 10.
खाली स्थानों को भरें।

  1. घर्षण वह बल है जो गति का ……….. करता है।
  2. चिकनी सतह की अपेक्षा रूखड़ी सतह ……….. घर्षण उत्पन्न करती है।
  3. कैरमबोर्ड पर पाउडर के प्रयोग से घर्षण ………. हो जाता है।
  4. तरल घर्षण को ……….. कहते हैं।
  5. हवाई जहाज की आकृति ………. होती है जिससे हवा के कारण घर्षण कम हो जाए।

उत्तर-

  1. विरोध
  2. अधिक
  3. कम
  4. कर्षण
  5. धारा रेखीय

Bihar Board 8 Class Science Solution प्रश्न 11.
नीचे दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य ?

  1. जब किसी गेंद को किक करते हैं तो सदा के लिए लुढ़कती रहती
  2. घर्षण के कारण ऊष्मा ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  3. वस्तु के भार पर घर्षण का मान निर्भर करता है।
  4. स्नेहक के प्रयोग से घर्षण का मान घट जाता है।

उत्तर-

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 1 बिहार का लोकगायन

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 1 Chapter 1 बिहार का लोकगायन Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions Varnika Chapter 1 बिहार का लोकगायन

Bihar Board Class 9 Hindi बिहार का लोकगायन Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
लोकगीत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ग्रामीण एवं प्रदेश के स्तर पर जन्म, जनेऊ, तिलकोत्सव, विवाहोत्सव, व्रत-उत्सव, कँटोनी पिसौनी, रोपनी आदि के समय जो गीत गाये जाते हैं, लोकगीत कहलाते हैं।

ये गीत आकृत्रिम उल्लासपूर्ण, भक्ति, प्रेम परिहास, उलाहना के साथ स्वागत एवं विदाई के भाव से युक्त होते हैं। खिलौना, सोहर, झूमर, ज्योनार, अँतसार, साझा, पराती, रोपनी गीत, होली, चैता आदि दर्जनों प्रकार के गीत बिहार की मिट्टी की अपनी गूंज है, अंतस की अभिव्यक्ति है। जनेऊ तथा विवाह के हल्दी मण्डपाच्छादन, स्नान, तिलक, स्वांगत, भोजन गुरहथी, सिंदूरदान, कोहबर, कन्या विदाई आदि विभिन्न प्रसंगों के गीत हमारी ग्रामीण कृषि संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। इन्हें नारी समाज ने सदियों से अपनी चेतना और स्मृति में सँजो रखा है। इनमें हमारी हजारों वर्ष के प्राचीन संस्कृति का इतिहास गुँथा हुआ दिखाई पड़ता है। मिथिला और नचारी जैसे गीतों की मोहक परंपरा भी बिहार के लोक-गीत की मूल्यवान निधि है। भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका आदि भाषाओं में गाये जाने वाली लोकगीत समान भाव से गाये जाते हैं।

Bihar Board Solution Class 9 Hindi प्रश्न 2.
लोकगीत के प्रमुख भेदों का परिचय दें। उत्तर-लोकगीत के पाँच प्रमुख भेद हैं
(i) संस्कार गीत (i) पर्व गीत (iii) श्रम गीत (iv) प्रेम मनोरंजन के गीत, गाथा गीत और (v) ऋतु गीत ।
उत्तर-
(i) संस्कार गीत-जन्म, जनेऊ, तिलक विवाह आदि के शुभ-अवसर पर विभिन्न प्रसंगों पर गाये जाने वाले गीत संस्कार गीत कहे जाते हैं।
(ii) पर्व गीत-भक्तिमूलक गीतों का गायन पर्व गीतों में किये जाते हैं। ग्राम देवी, शंकर पार्वती या गंगा की भक्ति के गीतों के अलावे छठ के गीत इस संदर्भ में विशेष उल्लेखनीय हैं।
(iii) श्रम गीत-श्रम गीतों में जाँते में गेहूँ पीसती नारियाँ और धान का विचड़ा रोपती मजदरिनों द्वारा जो गीत गाये जाते हैं अर्थात् अँतसार और रोपनी गीतों का विशेष स्थान है। हल जोतते हलवाहे, गाय भैंस चराते चरवाहे जो अन्य प्रेमगीत, गाथा गीत हैं वह भी एक हद तक श्रमगीत के अन्तर्गत कहा जा सकता है किन्तु ग्वालों के निजी उत्सव पर विरहा गायन की परंपरा श्रमगीत है।
(iv) प्रेम मनोरंजन के गीत-इस प्रकार के गीतों का प्रचलन श्रमशील पुरुषों (चरवाहे, हलवाहे, गाड़ीवान आदि) में रहा है जो मन की मौज के अनुसार बिरहा, लारिकायन आदि भी मक्त भाव स गाते हैं। लोरिका. भरथरी और नैका गाथा गीतों के गायक रहे हैं।
(v) ऋतु गीत-होली और चैता का गायन ऋतु गीत के अन्तर्गत आते हैं किन्तु ये उत्सव गीत भी कहे जाते हैं।

Bihar Board 9th Class Hindi Book Solution प्रश्न 3.
संस्कार गीत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जन्म, जनेऊ, तिलक, विवाह आदि के विभिन्न प्रसंगों पर गाये जाने वाले संस्कार गीत कहलाते हैं। गृहों में जनेऊ संस्कार जिस अधिकारी कुमार का किया जाता है उन्हें गीतों में बडुआ कर सम्बोधित किया जाता है। तिलकोत्सव लड़के वाले के यहाँ सम्पन्न होता है इसलिये यह उन्हीं के यहाँ गाये जाते हैं. जिसमें लडके को अधिक गुणवान और दहेज को कम बता कर उलाहना भरा गीत गाया जाता है। हल्दी कलश स्थापन से चौथारी तक अलग-अलग प्रसंगों के गीत वर और कन्या दोनों के यहाँ नियमित रूप से गाये जाते हैं। संध्यावाती के समय घर की बुजुर्ग महिलायें धीमी स्वर में गाती हुई पितरों का आह्वान और वन्दन करती हैं।

द्वार पूजा के लिये दरवाजे पर आयी बारात के स्वागत में गीत गाती नारियों का. समूह घर के वयस्क सदस्यों का नाम ले-लेकर अगवानी करने का आग्रह करते हैं। इससे आगे परिछावन, चुमावन आदि के गीत भी होते हैं। भोजन करने आये समधी एव बारातियों के पैर धोने की परम्परा गोर-धुलाई और भोजन करते समय भी अलग-अलग गीतों से वातावरण आह्लादित होते रहता है।

विवाह गीतों में सिंदूर-दान एवं बेटी की विदाई के करुण भाव मांगलिक पक्ष के परिचायक हैं। करुण गीत का प्रयोग सिंदरदान में प्रवेश करता है और विदाई के समय चरम स्थिति में परिणत हो जाता है।
इस प्रकार संस्कार गीत लोकगीत का एक प्रमुख गीत है।

बिहार बोर्ड ९थ क्लास बुक Hindi प्रश्न 5.
आपको अपने क्षेत्र में विवाह के किन-किन प्रसंगों के गीत गाये जाते
उत्तर-
हमारे क्षेत्र में विवाह के विभिन्न प्रसंगों पर भिन्न-भिन्न प्रकार के गीत गाये जाते हैं। जैसे बारात के द्वार लगने पर द्वार पूजा, समधी मिलन, पाँव परिक्षालन, चुमावन, सिंदूरदान, कोहवर, विदाई आदि के प्रसंगों पर भिन्न-भिन्न भाव और अर्थ के गीत गाये जाते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions प्रश्न 6.
किस पर्व के गीत आपको सबसे अधिक अच्छे लगते हैं और क्यों?
उत्तर-
हमें छठ पर्व का गीत सबसे अच्छा लगता है। क्योंकि छठ बिहार का अपना प्रादेशिक पर्व है और इसके गीतों की अपनी सर्वथा अलग धुन तथा लय होती है। छठ पर्व के गीत बिहार की कृषि संस्कृति वाले परिवार को समर्पित सूर्यभक्ति की निष्कलुष व्यंजना करते हैं। “कांच ही बाँस के बहंगिया बहँगी लचकत जाय”।
से अलग “उगी न सरुजदेव लीही न अरिघिया” में एक भिन्न छन्द बनता है।
छठ के गीत पर्वगीत के अन्तर्गत आते हैं। पर्वो के भक्तिमूलक लोकगायन में पूर्णतः पारिवारिक-सामाजिक संदर्भ होता है, जिसमें देव या देवी की कृपालुता, रुष्टता, लीला, स्वरूप, सौंदर्य आदि का वर्णन-चित्रण हुआ करता है।

Bihar Board Class 9th Hindi Solutions प्रश्न 7.
शास्त्रीय गीत तथा लोकगीत का सामान्य अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
शास्त्रीय संगीत शास्त्र सम्मत होते हैं और लोकगीत अकृत्रिम होते हैं। लोकगीत स्वच्छंद चेतना पर आधारित है। लोकगीत गाँवों में ग्रामीण और शास्त्रीय गीत नगरीय है। शास्त्रीय संगीत में गीतकार के भिन्न घराने होते हैं किन्त लोकगीत में विभिन्न अंचलों की संवेदना स्पष्ट होती है और दोनों परम्परागत हैं। शास्त्रीय संगीत परम्परा पर निर्भर नहीं है और लोकगीत निर्भर है।
(iii) लोकगीतकार अधिक लोकप्रिय हैं। शास्त्रीय के नियम और गायकी के रूप एवं उसकी सीमा आदि पर संगीतकार को आश्रित रहना पड़ता है। लोकगीत इसके विरुद्ध परम्परा पर
है, उसमें कोई नियम सीमा नहीं होती है। लोकगीत अनपढ़ द्वारा भी गाया और रचा जाता है।

9th Class Hindi Book Bihar Board प्रश्न 8.
विवाह गीतों में किन्हीं पाँच का परिचय दें।
उत्तर-
विवाहोत्सव में बारात जब द्वार पर आती है तो द्वार पूजा के समय महिलाओं का समूह गीत से स्वागत करते हैं। तत्पश्चात् समधी एवं नजदीकी संबंधी के साथ बारात का पाँव परिछालन प्रसंग पर गीत गाये जाते हैं उन्हें गोरधोआई गीत . कहा जाता है। तत्पश्चात् चुमावन के गीत होते हैं। द्वारपूजा के बाद भोजन करने बैठ . चुके बारातियों के साथ परिहास भाव की अभिव्यक्ति के रूप में उनकी पत्नी, बहन, बुआ आदि को लगाकर जो गालियाँ गायी जाती हैं उसमें किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की उम्र एवं पद की सारी मर्यादायें ध्वस्त हो जाती हैं। किन्तु बराती इतनी गालियाँ सुनकर मुसकुराते हुए भोजन करते रहते हैं। सिंदूरदान और विदाई के समय कारुणिक एवं मांगलिक गीत गाये जाते हैं करुणा तो बेटी की विदाई के समय चरम रूप ले लेती है और विदाई की गीत तो सभी को रुलाकर ही छोड़ती है।

Hindi Class 9 Bihar Board प्रश्न 9.
किन्तु शास्त्रीय संगीत में संगीतकार जो राग रागिनी के जानकार हैं
उत्तर-
उसका पालन करते हैं कुल मिलाकर लोकगीत एक निर्मल झरना है गंभीरता, गहराई आदि पर ध्यान देते हुए शास्त्रीय नियम का पालन करना शास्त्रीय गीतकार के लिये अनिवार्य है।

Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 19 बसंती हवा

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 19 बसंती हवा Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 19 बसंती हवा

Bihar Board Class 6 Hindi बसंती हवा Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से –

बसंती हवा कविता का सारांश Bihar Board प्रश्न 1.
बसंती हवा ने अपने आपको दूसरे मुसाफिरों से अलग क्यों बताया ?
उत्तर:
एक मुसाफिर जिसकी कोई मंजिल नहीं, कोई रास्ता नहीं बर्मनी हवा कहती है- ” जिधर चाहती हूँ, उधर घूमती हूँ”

आम तौर पर एक मुसाफिर का अपना एक गंतव्य स्थान हाताह जहाँ उसे पहुँचना होता है। फिर अपने स्थान तक पहुँचने का उसका एक निर्धारित मार्ग होता है पर बसंती हवा के सफर का कोई मार्ग नहीं, कोई अन्तिम पड़ाव नहीं। इसीलिये बसंती हवा ने अपने को अन्य मुसाफिरों से अलग माना है।

बसंती हवा कविता का प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
इस पाठ में कवि ने खेत-खलिहानों के हँसने की बात कही है। ऐसा उन्होंने क्यों कहा?
उत्तर:
बसन्त ऋतु में खेतो में पौधे लहलहाने लगते हैं। सरसों में पीले-पीले फूल निकल आते हैं, अलसी के नीलं फूलों की छटा ही न्यारी होती है-खेतों की हरियाली मन को मोहती है और बसन्ती हवा के झोकों से हरे, पीले, नीले रंग लहराते हैं तो अद्भुत छटा से दिशायें हँस उठती हैं। यही है खेत-खलिहानों का हँसना।

Basanti Hawa Poem Summary In Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
बसंती हवा का कौन-सा अंश आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करता है?
उत्तर:
छात्र उत्तर हेतु भावार्थ का अन्तिम अंश (पाराग्राफ) देखें।

पाठ से आगे –

बसंती हवा के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
बसंत का आगमन कब होता है? इस ऋतु में आप कैसा अनुभव करते हैं?
उत्तर:
बसन्त का आगमन शरद ऋतु के अवसान यानी समाप्ति पर जनवरी माह के मध्य भाग से लगभग होता है जो मार्च तक रहता है। हिन्दी महीने की गणना के अनुसार इस ऋतु का आगमन -काल माघ माह के शुक्ल पक्ष से माना जाता है। इसी माह में बसन्तोत्सव के रूप में बसन्तपंचमी को सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। होलिका दहन और होली के रंगोत्सव के साथ इसकी समाप्ति मानी जाती है।

इसे ऋतुओं का राजा माना जाता है क्योंकि इस ऋतु के आते ही कंपकपाने वाली सर्दी खत्म हो जाती है और पसीने तथा लू वाली गर्मी का आगमन नहीं हुआ रहता है। अतः मौसम का कष्ट नहीं झेलना पड़ता है।

प्रकृति दुल्हन की तरह सज-सँवरकर लोगों का स्वागत करती है। इसी समय विद्यार्थियों के लिये परीक्षा का समय आ जाता है, जिसके कारण हम विद्यार्थियों की बेचैनी भी बढ़ जाती है। फिर भी यह मौसम मन को सुकून देता है।

बसंती हवा की विशेषताएं Bihar Board प्रश्न 2.
इस पाठ को पढ़ने के बाद हवा के प्रति आप के मन में किस प्रकार के भाव उठते हैं?
उत्तर:
इस पाठ में हवा का मानवीकरण किया गया है। यूँ तो हवा जीवन के लिये जान है। बिना हवा के पृथ्वी पर जीवन असम्भव है। इस कविता को पढ़कर हवा के प्रति एक आत्मीय भाव मन में उपजता है। हवा की यह उक्ति अत्यन्त प्यारी लगती है –

अनोखी हवा हूँ, बड़ी बावली हूँ। बड़ी मस्तमौला, बड़ी ही निडर हूँ जिधर चाहती हूँ, उधर घूमती हूँ।

हवा की सर्वव्यापकता ही मनुष्य जीवन का आधार है। हमारे अन्दर का प्राणवायु ही हमें जीवन देता है।

Basanti Hawa Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
सरस्वती पूजा को वसंत पंचमी के नाम से भी जानते हैं। सरस्वती पूजा पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर:
वसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा भारत त्योहारों का देश है। त्योहार हमारे जीवन में आशा का संचार करते हैं। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, वसंत-पंचमी के नाम से जानी … जाती है। प्रत्येक वर्ष रोमन कैलेंडर के अनुसार माघ माह का आगमन वर्ष के प्रथम माह यानी जनवरी में हो जाता है। बसंत ऋतु का प्रवेश भी इसी माह में होता है । वसंत पंचमी के दिन देश के एक बड़े भू-भाग में वसतंत-पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की आराधना की जाती है—विद्यालय, महाविद्यालय एवं शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

इस दिन पूजा स्थलों पर सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की जाती है और अत्यन्त श्रद्धा और भक्ति से विद्यार्थी इनकी पूजा करते हैं। इस दिन सर्वत्र . एक विशेष उत्सव के साथ वसंत पंचमी पूजा का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थी इस दिन से होली पर्व’का भी आगाह करते हैं और एक-दूसरे के माथे पर रंग-अबीर लगाते हैं। शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। विद्यार्थी मिलजुलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं और संगीत, नृत्य और वाद्य का एक मनोहारी प्रदर्शन पूजा स्थलों पर आयोजित होता है।

व्याकरण

बसंती हवा के प्रश्न उत्तर दिखाओ Bihar Board प्रश्न 1.
नीचे दिये गये पद्यांश में विशेषण शब्दों को रेखांकित कीजिये –
अनोखी हवा हूँ। बड़ी बावली हूँ। बड़ी मस्तमौला। नहीं कुछ फिकर है बड़ी ही निडर हूँ।
पद्यांश में आये शब्द अनोखी, बावली, मस्तमौला, निडर वसंती हवा की विशेषता बताते हैं।

बसंती हवा कक्षा 6 Bihar Board प्रश्न 2.
योजक चिह्न ( – ) इस बात को दर्शाता है कि इसके दोनों ओर के शब्द परस्पर मिले हुये हैं। जैसे दिन-रात। इस प्रकार के और शब्द लिखिये।
उत्तर:
दिन-रात, सुबह-शाम, दाल-भात, मौज-मस्ती, घर-द्वार, उल्टा-पुल्टा, सोच-समझ, घर-बार, खिलाया-पिलाया, बनाया-मनाया, आकाश-पाताल, राई-पर्वत, भोजन-पानी, दिया-बत्ती, माता-पिता, सुख-दुःख आदि।

कुछ करने को –

बसंती हवा कविता का व्याख्या Bihar Board प्रश्न 1.
ऋतु से संबंधित किसी कविता का संकलन कर अपनी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बसंती हवा प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
आप किन-किन चिड़ियों को आवाज से पहचान सकते हैं ? उनकी बोली के साथ सूची बनाइए। .
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बसंती हवा का भावार्थ Bihar Board प्रश्न 3.
वायु को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाये जाने चाहिए ? कक्षा में अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
उत्तर:
वायु को प्रदूषण मुक्त करने के लिये वातावरण में कार्बन-डाइआक्साइड गैस का उत्सर्जन कम किया जाना चाहिये। इस जहरीले गैस के कारण हवा प्रदूषित होती है जो पृथ्वी पर वास करने वाले जीव-जन्तुओं के लिये खतरनाक होता है। कार्बन डाइआक्साइड गैस की वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है-पृथ्वी पर से वृक्षों का काटा जाना और सड़कों पर चलने वाले लाखों-लाख वाहनों द्वारा कार्बन डाइआक्साइड मिश्रित धुयें का छोड़ा जाना है। इनके अतिरिक्त उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण देश में उद्योगों का तेजी से विकास हो रहा है। इन उद्योगों ने असंख्य कल-कारखानों को जन्म दिया है जो तरह-तरह के गैस का सृजन करते हैं जिसे हवा में छोड़ दिया जाता है। ये हवा को जहरीली बनाते हैं।

अतः वायु को प्रदूषण मुक्त करने के लिये वृक्षों का विनाश बन्द किया जाना चाहिये। साथ ही अधिक-से-अधिक वृक्ष लगाये जाने चाहिये ताकि ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ज्यादा से ज्यादा हो तथा वाहनों के परिचालन हेतु ऐसे ईंधन का उपयोग किया जाय जिससे कार्बन की मात्रा पर नियंत्रण हो। कल-कारखानों में भी धुयें का उत्सर्जन कम किया जाना चाहिये और उसे वातावरण में मिश्रित होने के पूर्व ही नियन्त्रित कर लिया जाना चाहिये।

बसंती हवा Summary in Hindi

कविता का सार-संक्षेप

कवि केदारनाथ अग्रवाल लिखी इस कविता में कुल छ: छंद हैं। इस कविता के माध्यम से कवि बसंत ऋतु के आगमन का सजीव चित्र खींचता है। इस कविता में कवि ने बसंती हवा को सन्देशवाहक बनाया है। बसंती हवा मतवाली बनी बहती है और प्रकृति के अंग-अंग को सहलाती चलती है। बसंती हवा अपनी कथा स्वयं कहती है –

1. बसंती हवा कहती है – मैं बसंती हवा हूँ, जिधर चाहती हूँ उधर बह निकलती हूँ। बड़ी मस्तमौला मन है मेरा। मैं निडर भी हैं और बेफिक्री में जीती हूँ। मेरा यह चरित्र अपना है पर सबको यह चरित्र मेरा भाता
2. मेरे मन में किसी प्रकार की आशा-अभिलाषा नहीं है। मेरा न कोई दोस्त है और न दुश्मन और मुझे जीवन में कोई चाह नहीं। न मेरा कोई घर, बसेरा है और न कोई इच्छा। मैं प्राण खोलकर जीवन जीती हूँ और मलमस्त हुयी विचरती हूँ।

3. शहर, गाँव, बस्ती, नदी, रेत (बालू) हरे-भरे खेत, पोखर-तालाब और वे सभी स्थल जहाँ मनुष्य नहीं रहता यानी निर्जन भूमि- सब जगह मैं झूमती, गाती विचरण करती हूँ। एक दिशा से निकलकर दूसरी दिशा तक बहना मेरी प्रकृति है।

4. महुआ के पेड़ों पर जब मैं चढ़ी तो महुआ के फल टपटप चूने लगे। आम के पड़ों को भी झकझोरा जहाँ कोयल बैठी मीठे स्वर में कू-कू कर गाती है। उसका मधुर स्वर सुनकर मैं गेहूँ के लहलहाते खोतों को झूमने को मजबूर करती हुयी बहती हूँ। उन खेतों में में सुबह से शाम तक (पहर, दोपहर, अनेक पहर) अठखेलियाँ करती हुयी बहती सहलाती चलती हूँ।

5. खेतों में खड़ी अलसी (तीसी) के पौधों को मैंने खूब झकझोरा पर उनके माथ पर रखी अलसी के दानों की कलसी (घड़ा) गिरी नहीं। वे तो जस-के तस माथे पर चढ़े रहे। यह एक प्रकार से मेरी हार थी- इस हार से सबक लेकर मैंने सरसों के फूलों को नहीं छुआ। उन्हें मैंने नहीं झकझोरा, नहीं हिलाया।

6. मुझ आता देख अड़हरी(अड़हर के पौधे) लजा गयी। पर मैंने उसे भी नहीं छोड़ा। उसे मनाया, प्यार से थपथपाया पर वह नहीं मानी। एक पथिक उस खेत से आता हुआ दिखा। उसे देखकर मैं खिलखिला कर हँस पड़ी। मुझे हँसता देख सभी दिशायें हँस पड़ीं। लहलहाते खेत हँसने लगे – चमचमाती धूप भी प्रकृति का साथ देती हँसकर सबका स्वागत करने लगी। सारी सृष्टि में ही मुस्कान दौड़ गयी। दिशायें प्रसन्न हो गयीं। प्रकृति न्यारी लगने लगी, सृष्टि में जीवन का नया संचार होने लगा। मैं हवा हूँ, बसंती हवा हूँ। कवि ने बासंती हवा का मानवीकरण किया है यानी इसे एक मानव के रूप में चित्रित किया है। बसंती हवा की संवेदनायें उसक क्रिया-कलाप, उसका इठलाना, झूम-झूम कर चलना सब मानव जीवन के रंगों को ही रूप देते हैं। बसंती हवा का घुमन्तु मन कहता है –

न घर-बार मरा, न उद्देश्य मेरा
न इच्छा किसी की, न आशा किसी की,
न प्रेमी, न दुश्मन,
जिधर चाहती हूँ उधर घूमती हूँ।

ये पंक्तियाँ इस कविता की सर्वश्रेष्ठ पंक्तियाँ हैं, जो एक पाठक के हृदय को छूती हैं और प्रभावित करती हैं।

शब्दार्थ – बावली = पगली । मुसाफिर = यात्री। सृष्टि = संसार । कलसी = घड़ा, गगरी । अलसी = तीसी, एक प्रकार का छोटा पौधा जिसके बीज से तेल निकलता है। मस्तमौला = आजादी पसन्द करने वाला । निर्जन = सुनसान । शीश = माथा, सिर । पथिक = यात्री, राही।

Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 2 चट्टान एवं खनिज

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 2 Chapter 2 चट्टान एवं खनिज Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science Geography Solutions Chapter 2 चट्टान एवं खनिज

Bihar Board Class 7 Social Science चट्टान एवं खनिज Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 7 Hamari Duniya Solution प्रश्न 1.
अपने घर में खनिज से बनी हुई चीजों की सूची बनाइए ।
उत्तर-

  1. तराजू के पलड़े
  2. आभूषण
  3. सायकिल
  4. हल का फाल
  5. खुरपी
  6. हसिया
  7. पहँसुल
  8. लालटेन

उसे जलाने के लिए किरासन तेल आदि खनिज से बनी हुई हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science Solution प्रश्न 2.
छत की ढलाई में कौन-सा पत्थर इस्तेमाल होता है?
उत्तर-
छत की ढलाई में पहाड़ों से काटकर निकाले गए पत्थरों को टुकड़े बना कर इस्तेमाल होता है । इन पत्थरों का रंग भूरा-स्लेटी होती है । ये आग्नेय चट्टान के उदाहरण कहे जा सकते हैं।

Bihar Board Class 7 Geography Book Solution प्रश्न 3.
उन खेलों की सूची बनाइए, जिनमें पत्थरों का इस्तेमाल होता हो।
उत्तर-
पत्थरों से खेलने वाले कोई अधिक खेल नहीं, है । हाँ, ग्रामीण क्षेत्र के बीच पत्थर के टुकड़ों से एकट-दोकट तथा सरगोटिया खेलते हैं ।

Bihar Board Class 7 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 4.
पत्थरों का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है ? सूची बनाइए ।
उत्तर-
पत्थरों का उपयोग पहले घर, महल, कोठी और किला बनाने में होता था । वाराणसी के प्राय: सभी प्राचीन भवन पत्थर के ही बने हैं। आज भी झारखंड में पत्थरों का उपयोग घर तथा चहार-दीवारी बनाने में होता है ‘वैसे आम तौर पर सड़क बनाने, मकानों की छत बनाने तथा फर्श को पक्का करने के लिए विभिन्न आकारों के पत्थरों का उपयोग होता है ।

Bihar Board Class 7 History Book Solution प्रश्न 5.
पता करके लिखिए कि निम्न भवन किन-किन पत्थरों से बने हैं:
उत्तर :

प्रश्न : भवन उत्तर : पत्थर के प्रकार
रोहतास गढ़ का किला बलुआ पत्थर
लाल किला (दिल्ली) लाल बलुआ पत्थर
पत्थर की मस्जिद (पटना) बलुआ पत्थर
विष्णुपद मन्दिर (गया) काला बलुआ पत्थर
आगरा का किला लाल बलुआ पत्थर
कुतुबमीनार (दिल्ली) बलुआ पत्थर
विशला बुद्ध मूर्ति (गया)  काला बलुआ पत्थर

Bihar Board Class 7 Hamari Duniya प्रश्न 6.
थर्मोकोल/काँच के टुकड़ों को जोड़कर पृथ्वी के आंतरिक परतों को दिखालाइये ।
उत्तर-
संकेत: यह परियोजना कार्य है । छात्र स्वयं यकरें ।

Class 7 Hamari Duniya प्रश्न 7.
चट्टानों के प्रकार और उनकी बनावट के बारे में लिखिए।
उत्तर-
चट्टानें मुख्यत: तीन प्रकार की होती हैं-

  1. आग्नेय चट्टान
  2. अवसादी चट्टान तथा
  3. रूपांतरित चट्टान ।

1. आग्नेय चट्टान-पृथ्वी के अन्दर पिघला पदार्थ धरातल पर आने के क्रम में कभी पहले ही जम जाता है और कभी धरातल के ऊपर पहुँचकर जमता है। ऐसी चट्टानों में परतें नहीं होतीं। इनमें रवा पाये जाते हैं । जो चट्टानें पृथ्वी के अन्दर जमती हैं इनके रवे बड़े होते हैं जबकि पृथ्वी के ऊपर जमने वाली चट्टानों के रवे छोटे या महीन होते हैं । ग्रेनाइट और बेसाल्ट आदि आग्नेय चट्टान के ही उदाहरण हैं।

2. अवसादी चट्टानें-अवसादी चट्टानें अवसादों के एकत्र होने से बनती हैं । ये दो प्रकार की होती हैं : एक पानी के अन्दर तथा दूसरी पानी के बाहर जमीन पर । पानी के अन्दर जमने वाली चट्टानों की परतें अधिक होती हैं क्योंकि ये परत-दर-परत जमी होती हैं । काफी दबाव के कारण ये कड़ी हो जाती हैं और चूना-पत्थर का रूप धारण करती हैं । पानी से बाहर की अवसादी चट्टानें परत-दर-परत ही होती हैं और अपने ही दबाव से दबकर अवसादी चट्टान बन जाती हैं। उदाहरण है बलुआ पत्थर | बलुआ पत्थर कई रंग के होते हैं-लाल, भूरा, काला ।

3. रूपांतरित चट्टानें-कभी-कभी आग्नेय या परतदार चट्टानों में ताप और दाब की वृद्धि होती है तो इनके रूप और गुण दोनों में बदलाव आ जाता है । रूप में अंतर के कारण ही इन्हें रूपांतरित चट्टान कहते हैं । चूना-पत्थर अपना रूप बदलकर संगमरमर में बदल जाता है । इसी प्रकार ग्रेनाइट रूपांतरित होकर नाइस बन जाता है ।

Bihar Board Class 7 Civics Book Solution प्रश्न 8.
इन्हें उपयुक्त स्थानों में बैठाइए

  1. सेंधा नमक – आग्नेय चट्टान
  2. ग्रेनाइट – अवसादी चट्टान
  3. संगमरमर – रूपान्तरित चट्टान

उत्तर-

  1. सेंधा नमक – अवसादी चट्टान
  2. ग्रेनाइट – आग्नेय चट्टान
  3. संगमरमर – रूपान्तरित चट्टान

Bihar Board Class 7 History Solution In Hindi प्रश्न 9.
खाली जगहों को भरिए :

  1. जो चट्टान ज्वालामुखी से निकले लावा के ठंडा होने से बनती हैं वे ………चट्टानें कहलाती हैं।
  2. जिन चट्टानों में परत पायी जाती है उन्हें ……… चट्टानें कहते
  3. ज्वालामुखी से निकला गर्म पदार्थ ……कहलाता है।
  4. अत्यधिक ……… एवं ……… के कारण चट्टानों के लक्षण बदल जाते हैं.।

उत्तर-

  1. आग्नेय
  2. परतदार
  3. लावा
  4. ताप, दाब।

Bihar Board Class 7 Social Science चट्टान एवं खनिज Notes

पाठ का सार संक्षेप

पहाड़ों की चट्टानों से काटकर पत्थर निकाले जाते हैं और उन्हें प्रेसर से दल कर छोटे-छोटे टुकड़े बनाये जाते हैं । इन टुकड़ों के आकार जरूरत के मुताबिक रखे जाते हैं । सड़क बनाने वाले पत्थर के टुकड़े कुछ बड़े होते हैं । मकान के पीलर तथा छत बनाने वाले टुकड़े कुछ छोटे होते हैं । मकान के फर्श बनाने वाले टुकड़े रहर और मटर के साइज के होते हैं ।

सड़क, छत या फर्श की मजबूती पत्थरों के रंग से भी निश्चित की जाती है। सफेद रंग के तथा काले पत्थर बहुत अच्छे माने जाते हैं । भूरा रंग के पत्थर भी अच्छे माने जाते हैं । रोहतास, शेखपुरा, पटना जिले के दक्षिण भाग में राजगीर की पहाड़ियों से अब तक पत्थर मंगाये जाते रहे हैं । झारखंड के पाकुड़ का पत्थर बहुत अच्छा माना जाता है । बनावट के आधार पर चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं :

  1. आग्नेय चट्टान
  2. अवसादी चट्टान तथा
  3. रूपांतरितं चट्टान ।

1. आग्नेय चट्टान-पिघला हुआ गर्म पदार्थ पृथ्वी के अन्दर से ऊपर ‘धरातल पर आने के क्रम में धरातल के निकट भू-पर्पटी पर जम जाता है। यह कभी-कभी भरातल तक पहुंच जाता है और जम जाता है आग्नेय चट्टान सदैव परतदार ही नहीं होते । छूने पर पता चलता है कि ये चिकने नहीं, बल्कि रुखड़े है अर्थात् ये रवादार है। जो रवा जल्दी जमते हैं, वे अपेक्षाकृत महीन होते हैं और जो देर से जमते हैं, उनके रवे मोटे होते हैं

2. अवसादी चट्टान-जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, अवसादी चट्टानें अवसादों के एकत्र होने से बनती हैं । नदियाँ बाढ के साथ काफी अवसाद अपने साथ लाती हैं, और लौटते समय ये अवसाद अपने किनारों पर जमा कर देती हैं । चूना पत्थर और बलुआ पत्थर अवसादी चट्टान के ही उदाहरण हैं।

3. रूपांतरित चट्टानें-जब आग्नेय चट्टानें ताप और दाब के कारण अपने रूप और गुण में बदलाव कर लेती हैं तो ऐसी चट्टानें रूपांतरित चट्टानें कहलाती हैं। चूना पत्थर अत्यधिक दबाव के कारण संगमरमर बन जाता है। वैसे ही ग्रेनाइट ताप और दाब के कारण नाइस में बदल जाता है।
चट्टानों के बनने की प्रक्रिया तथा गुण अलग-अलग होते हैं, अत: इनके नाम अलग-अलग होते हैं । इस चट्टानों को परतों में यदि पेड़-पौधे तथा जीव जन्तु दबे रह जाते हैं तो हजारों-हजार वर्षों में अपने रूप बदल लेते हैं और जीवाश्म कहलाते हैं ।

प्रायः ये पत्थर का रूप ले लेते हैं। कुछ चट्टानों में खनिज भी पाये जाते हैं । खनिज हमारे अनेक कामों में व्यवहार किये जाते हैं। आज की जो उन्नत सभ्यता है, वह इन खनिजों के बल पर ही है । सोना, चाँदी, लोहा, कोयला, किरासन तेल, पेट्रोल, रसोई गैस, सब खनिजों से ही प्राप्त होते हैं।

Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : संसाधन एवं उपयोग Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Geography Solutions Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन

Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 10th Geography Solution प्रश्न 1.
पंजाब में भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है ?
(क) वनोन्मूलन
(ख) गहन खेती
(ग) अतिपशुचारण
(घ) अधिक सिंचाई
उत्तर-
(क) वनोन्मूलन

प्राकृतिक संसाधन प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
सोपानी कृषि किस राज्य में प्रचलित है ?
(क) हरियाणा
(ख) पंजाब
(ग) बिहार का मैदानी क्षेत्र
(घ) उत्तराखंड
उत्तर-
(ग) बिहार का मैदानी क्षेत्र

Bihar Board Class 10 Geography Solutions प्रश्न 3.
मरुस्थलीय मृदा का विस्तार निम्न में से कहाँ है ?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) राजस्थान
(ग) कर्नाटक
(घ) महाराष्ट्र
उत्तर-
(ख) राजस्थान

Prakritik Sansadhan Class 10 Bihar Board प्रश्न 4.
मेढक के प्रजनन को नष्ट करने वाला रसायन कौन है ?
(क) बेंजीन
(ख) यूरिया
(ग) एड्रिन
(घ) फास्फोरस .
उत्तर-
(ग) एड्रिन

Bihar Board Class 10 Sst Solution प्रश्न 5.
काली मृदा का दूसरा नाम क्या है ?
(क) बलुई मिट्टी
(ख) रेगुर मिट्टी
(ग) लाल मिट्टी
(घ) पर्वतीय मिट्टी
उत्तर-
(ख) रेगुर मिट्टी

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 10th Social Science Solution प्रश्न 1.
जलोढ़ मिट्टी के विस्तार वाले राज्यों के नाम बतावें। इस मृदा में कौन-कौन सी फसलें लगायी जा सकती हैं ?
उत्तर-
बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, बंगाल इत्यादि राज्यों में जलोढ़ मिट्टी का विस्तार है। इस मृदा में गन्ना, चावल, गेहूँ, मक्का, दलहन इत्यादि फसलें उगाई जाती हैं।

Bihar Board Class 10 History Notes Pdf प्रश्न 2.
समोच्च कृषि से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
पहाड़ी ढलानों पर जल के तेज बहाव से बचने के लिए सीढ़ीनुमा ढाल बनाकर की जाने वाली खेती को समोच्च कृषि कहते हैं। इससे मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।

Social Science In Hindi Class 10 Bihar Board Pdf प्रश्न 3.
पवन अपरदन वाले क्षेत्र में कृषि की कौन-सी पद्धति उपयोगी मानी जाती है?
उत्तर-
पवन अपरदन वाले क्षेत्रों में पट्टिका कृषि श्रेयस्कर है, जो फसलों के बीच घास की पट्टियाँ विकसित कर की जाती हैं।

Geography Class 10 Bihar Board प्रश्न 4.
भारत के किन भागों में डेल्टा का विकास हुआ है ? वहाँ की मदा की क्या विशेषता है?
उत्तर-
गंगा नदी द्वारा पश्चिम बंगाल में, महानदी, कृष्णा, कावेरी और गोदावरी नदियों द्वारा पूर्वी तटीय मैदान में डेल्टा का निर्माण हुआ है।
इन क्षेत्रों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी का गठन बालू, सिल्ट एवं मृतिका के विभिन्न अनुपात से होता है। इसका रंग धुंधला से लेकर लालिमा लिये भूरे रंग का होता है।

Bihar Board Class 10 History Chapter 1 प्रश्न 5.
फसल चक्रण मृदा संरक्षण में किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
दो धान्य फसलों के बीच एक दलहन की फसल को उगाना, फसल चक्रण कहलाता है। इसके द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है, क्योंकि दलहनी पौधों की जड़ों में नाइट्रोजनी स्थिरीकारक जीवाणु पाये जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 10 Social Science Notes प्रश्न 1.
जलाक्रांतता कैसे उपस्थित होता है ? मृदा अपरदन में इसकी क्या भूमिका है ?
उत्तर-
अति सिंचाई से जलाक्रांतता की समस्या पैदा होती है। पंजाब, हरियाणा और प. उत्तर प्रदेश में इससे भूमि का निम्नीकरण हुआ है।
जलाक्रांतता से मृदा में लवणीय और क्षारीय गुण बढ़ जाते हैं जो भूमि के निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी होते हैं। इससे मृदा की उर्वरा शक्ति घटते जाती है और भूमि धीरे-धीरे बंजर हो जाती है।
जलाक्रांतता एक बड़ी समस्या है जो मृदा अपरदन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

Bihar Board Class 10 History Book प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण पर. एक निबंध लिखिए।
उत्तर-
मृदा पारितंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह न केवल पौधों के विकास का मध्यम है। बल्कि पृथ्वी पर विविध जीव समुदायों का पोषण भी करती है। मृदा में निहित उर्वरता मानव के आर्थिक क्रियाकलाप को प्रभावित करती है और देश की नियति का भी निर्धारण करती है। मृदा निर्माण एक लंबी अवधि में पूर्ण होने वाली जटिल प्रक्रिया है। इसके नष्ट होने के साथ संपत्ति एवं संस्कृति दोनों ध्वस्त हो जाती है।

मदा का अपने स्थान से विविध क्रियाओं द्वारा स्थानांतरित होना भ-क्षरण कहलाता है। यह मृदा की एक बहुत बड़ी समस्या है। मृदा का क्षरण कई कारणों जैसे वायु और जल के तेज बहाव से, जलक्रांतता से, अतिपशुचारण से, खनन रसायनों का अत्यधिक उपयोग जैसी मानवीय अनुक्रियाओं द्वारा होता है। – वृक्षारोपण, पट्टिका कृषि, फसलचक्रण, समोच्च कृषि इत्यादि द्वारा भू-क्षरण को रोकना मृदा संरक्षण का मुख्य तरीका है।

वृक्षारोपण मृदा संरक्षण की सबसे बड़ी शर्त है; जिससे मृदा को बाधा पहुँचती है और इनकी पत्तियों से प्राप्त ह्यूमस मृदा की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग मृदा संरक्षण में सहायक होता है।

प्रश्न 3.
भारत में अत्यधिक पशुधन होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका योगदान लगभग नगण्य है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
भारत में पशुधन के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल किया जाता है। किन्तु स्थायी चारागाह के लिए बहुत कम भूमि उपलब्ध है जो पशुधन के लिए पर्याप्त नहीं है। अतः पशुपालन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में परती के अतिरिक्त अन्य परती भूमि अनुपजाऊ है। ऐसी भूमि में दो तीन वर्ष में अधिक से अधिक दो बार बोया जा सकता है। अगर ऐसी भूमि को भी शुद्ध बोया गया क्षेत्र में शामिल कर लिया जाय तब भी वर्तमान उपलब्ध क्षेत्रफल का मात्र 54% भूमि ही कृषि योग्य है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुधन का नगण्य योगदान का कारण निम्न है-

  • उन्नत पशुनस्लों की अपर्याप्तता।
  • चारागाह के लिए भूमि की कमी।
  • वैज्ञानिक प्रणाली एवं तकनीकी ज्ञान का अभाव।
  • बढ़ती जनसंख्या का अति दबाव।
  • पूँजी का अभाव इत्यादि।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1.
अपने आस-पास के क्षेत्र में उपलब्ध मृदा संसाधन के उपयोग एवं संरक्षण हेतु एक परियोजना तैयार करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
ग्राम प्रतिनिधि, विद्यालय प्रधान से मिलकर संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन पर एक संगोष्ठी का आयोजन करें।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इनमें काली मिट्टी का क्षेत्र कौन है ?
(क) छोटानागपुर
(ख) महाराष्ट्र
(ग) गंगाघाटी
(घ) अरूणाचल प्रदेश
उत्तर-
(क) छोटानागपुर

प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय भारत की नदीघाटियों में कौन-सी मिट्टी मिलती है ?
(क) काली
(ख) लाल
(ग) रेतीली
(घ) जलोढ़
उत्तर-
(घ) जलोढ़

प्रश्न 3.
भारत में चारागाह के अन्तर्गत कितनी भूमि है ?
(क) 4%
(ख) 12%
(ग) 19%
(घ) 26%
उत्तर-
(क) 4%

प्रश्न 4.
इनमें कौन उपाय भूमि-हास के संरक्षण में उपयुक्त हो सकता है ?
(क) भूमि को जलमग्न बनाए रखना
(ख) बाढ़ नियंत्रण
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर में तेजी लाना
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) बाढ़ नियंत्रण

प्रश्न 5.
भारत में पहाड़ों से भरी भूमि का प्रतिशत क्या है ?
(क) 10
(ख) 27
(ग) 30
(घ) 48
उत्तर-
(ख) 27

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि-क्षेत्र का योगदान कितना प्रतिशत है ?
उत्तर-
भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि-क्षेत्र का योगदान लगभग 22 प्रतिशत है।

प्रश्न 2.
भारत की प्रमुख भू-आकृतियों के नाम लिखें।
उत्तर-
भारत की प्रमुख भू-आकृतियों के नाम ये हैं (i) पर्वतीय क्षेत्र – 30% (ii) मैदानी क्षेत्र – 43% (iii) पठारी क्षेत्र – 27%।

प्रश्न 3.
एक वर्ष से भी कम समय तक जिस खेत से फसल-उत्पादन न हो रहा हो उसका क्या नाम है?
उत्तर-
एक वर्ष से भी कम समय तक जिस खेत से फसल-उत्पादन न हो रहा हो उसे ‘वर्तमान परती’ कहते हैं।

प्रश्न 4.
किन दो राज्यों में सबसे अधिक व्यर्थ भूमि पायी जाती है ?
उत्तर-
जम्मू कश्मीर (60%) और राजस्थान (30%) में सबसे अधिक व्यर्थ भूमि पायी जाती है।

प्रश्न 5.
क्षारीय मिट्टी का pH मान 7 से अधिक होता है या कम?
उत्तर-
क्षारीय मिट्टी का pH मान 7 से अधिक होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भूमि किस प्रकार महत्वपूर्ण संसाधन है ?
उत्तर-
भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है। भूमि पर ही मिट्टी मिलती है जिसमें कृषि-कार्य की जाती है। भूमि पर कृषि-कार्य करने से मनुष्यों को अन्न की प्राप्ति होती है। भूमि पर ही मानव-आवास मिलता है, गाँव-नगर बसते हैं। भूमि पर ही मनुष्य अपना मकान बनाकर उसमें रहते हैं। जो जंगली और खतरनाक पशुओं से उनकी रक्षा करता है। भूमि पर ही पशुपालन होता है। भूमि पर ही मनुष्य पालतू पशुओं को दूध, ऊन, चमरे, मांस इत्यादि की प्राप्ति के लिए पालते हैं। पशु मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी होते हैं, जो मनुष्य के कृषि-कार्य करने में सहायक होते हैं, भूमि पर ही मनुष्य द्वारा वाणिज्य-व्यवसाय किया जाता है, व्यवसाय करने से मनुष्य को अन्न की प्राप्ति होती है। भूमि पर ही मनुष्यों द्वारा तरह-तरह के उद्योग-धन्धे चलाए जाते हैं। उद्योग-धन्धे करने से मनुष्य को आर्थिक लाभ होता है, आर्थिक लाभ होने से मनुष्य का आर्थिक विकास होता है और मनुष्य के आय में वृद्धि होती है। मनुष्य के आय में वृद्धि होने से देश के राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, अत: इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भूमि एक महत्वपूर्ण संसाधन है।

प्रश्न 2.
किन सुविधाओं के कारण भारत में गहन कृषि की जाती है?
उत्तर-
भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्या का दबाव और सीमित कृषि योग्य भूमि के कारण गहन कृषि की जाती है।
भारत मॉनसूनी वर्षा वाला देश है। वर्षा एक विशेष मौसम में होती है और अनियमित रूप से होती है वहीं बाढ़ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है और वर्षा का अभाव देखने को मिलता है। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई का सहारा लिया जाता है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सदा जलपूरित रहती हैं। उन नदियों पर बाँध बनाकर नहरें निकाली जाती हैं और उससे जलाभाव क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा प्रदान की जाती है। भारत के मैदानी भागों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है जो अत्यन्त उपजाऊ है। इन्हीं कारणों से भारत में गहन कृषि की जाती है।

प्रश्न 3.
भौतिक गुणों के आधार पर मिट्टी के तीन वर्ग कौन-कौन हैं ? गंगा के मैदान में सामान्यतः इनमें से कौन मिट्टी पायी जाती है ?
उत्तर-
भौतिक गुणों के आधार पर मिट्टी के तीन वर्ग ये हैं ।

  • बलुई मिट्टी (Sandy Soil)-इसमें पंक (मृत्तिका, चिकनी मिट्टी) की अपेक्षा बालू का प्रतिशत अधिक रहता है, यह मिट्टी जल की बड़ी भूखी होती है, अर्थात बहुत जल सोखती है।
  • (चीका या चिकनी मिट्टी (Clayey Soil)- इसमें पंक या गाद (Silt) का प्रतिशत अधिक रहता है। यह मिट्टी सूखने पर बहुत कड़ी और दरार युक्त होती है तथा गीली होने पर चिपचिपी और अभेद्य हो जाती है। इस मिट्टी की जुतायी कठिन होती है।
  • दुमटी मिट्री (Loamy Soil)-इसमें बालू और पंक दोनों का मिश्रण लगभग बराबर रहता है। कृषि के लिए यह मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। क्योंकि इसमें गहरी जुताई हो सकती है।
    गंगा के मैदान में सामान्यतः दुमटी मिट्टी पायी जाती है।

प्रश्न 4.
स्थानबद्ध और वाहित मिट्टी में क्या अन्तर है?
उत्तर-
स्थानबद्ध मिट्टी वह है जो ऋतुक्षरण के ही क्षेत्र में पायी जाती है। यह पर्शिवका मिट्टी होती है। इसमें आधारभूत चट्टान और मिट्टी के खनिज कणों में समरूपता होती है। काली मिट्टी, लाल मिट्टी तथा लैटेराइट मिट्टी इसके उदाहरण हैं।

वाहित मिट्टी वह है जिसका ऋतुक्षरण तथा विकास किसी दूसरे प्रदेश में हुआ है किन्तु अपरदन दूतों द्वारा उसे किसी दूसरे प्रदेश में निक्षेपित किया गया है। चूँकि इसका परिवहन होता है, इसलिए इसे वाहित मिट्टी कहते हैं। ये मिट्टियाँ मौलिक चट्टानों से विसंगति रखती हैं। जलोढ़ मिट्टी इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। भारत का वृहद् जलोढ़ मैदान उस मिट्टी का बना है जिसका ” निक्षेप गंगा और उसकी सहायक नदियों तथा पठारी भारत के उत्तर बहने वाली नदियों से हुआ है। भारत के तटीय मैदान में भी वाहित जलोढ़ मिट्टी ही पायी जाती है।

प्रश्न 5.
भारत में लाल मिट्टी और काली मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र बताएँ।
उत्तर-
लाल मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र-यह मिट्टी दक्कन पठार, पूर्वी और दक्षिणी भागों के 100 सेमी से कम वर्षा के क्षेत्रों में पायी जाती है।
काली मिट्टी के प्रमुख क्षेत्र यह मिट्टी महाराष्ट्र का बड़ा भाग, गुजरात का सौराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा और गोदावरी घाटी, तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, राजस्थान के मालवा खण्ड में पायी जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय मिटियों के तीन प्रमुख प्रकार कौन-कौन हैं ? उनका निर्माण किस प्रकार हुआ है ?
उत्तर-
भारतीय मिट्टियों के तीन प्रमुख प्रकार ये हैं (i) जलोढ़ मिट्टी, (ii) काली मिट्टी, (iii) लाल मिट्टी।
इन तीनों प्रकार की मिट्टियों से संबंधित निर्माण की प्रक्रिया को निम्नलिखित विचार-बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

(i) जलोढ़ मिट्टी भारत में यह मिट्टी विस्तृत रूप से फैली हुयी है और उपजाऊ होने के कारण कृषि कार्य के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है। नदियों द्वारा बहाकर लायी गयी मिट्टी बाढ़ में उसके बेसिन में जमा हो जाती है। साथ ही समुद्री लहरें अपने तटों पर ऐसी ही मिट्टी की परत जमा कर देती हैं जिससे जलोढ़ मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी की आयु के आधार पर जलोढ़ मिट्टी को बांगर और खादर कहा जाता है। बिहार में बालू मिश्रित जलोढ़ मिट्टी को दियारा की मिट्टी कहा जाता है।

(ii) काली मिट्टी स्थानीय स्तर पर काली मिट्टी को रेगुढ़ भी कहा जाता है। काली मिट्टी का निर्माण दक्षिणी क्षेत्र के लावा (बेसाल्ट क्षेत्र) वाले भागों में हुआ है जहाँ अर्द्धशद्ध भागों में इसका रंग काला पाया जाता है। इसमें लोहा, ऐलुमिनियमयुक्त पदार्थ टाइटैनोमैग्नेटाइट के साथ जीवांश तथा ऐलुमिनियम के सिलिकेट मिलने के कारण इसका रंग काला होता है। इसमें पोटाश, चूना, ऐलुमिनियम, कैल्सियम और मैग्नीशियम के कार्बोनेट प्रचुर मात्रा में होते हैं।

(iii) लाल मिट्टी भारत के विस्तृत क्षेत्र में भी यह मिट्टी पायी जाती है। इसका निर्माण लोहे और मैग्नीशियम के खनिजों से युक्त रवेदार और रूपांतरित आग्नेय चट्टानों के द्वारा होता है। इसका रंग लोहे की उपस्थिति के कारण लाल होता है, अधिक नम होने पर इसका रंग पीला भी हो जाता है। यह मिट्टी ग्रेनाइट चट्टाने के टूटने से बनी मिट्टी है। इसकी बनावट हल्की रंध्रमय और मुलायम है।

प्रश्न 2.
काली मिट्टी और लाल मिट्टी की अलग-अलग विशेषताओं पर प्रकाश डालें। भारत में उनके अलग-अलग क्षेत्रों का उल्लेख करें।
उत्तर-
भारत में काली मिट्टी और लाल मिट्टी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। इन मिट्टियों की विशेषताओं और पाए जाने वाले क्षेत्रों का अलग-अलग वर्णन निम्नलिखित है
(i) काली मिट्टी की विशेषताएं निम्न हैं

  • इनमें ममी बनाए रखने की क्षमता होती है।
  • काली मिट्टी सूखने पर बहुत कड़ी हो जाती है।
  • इसका रंग काला होता है, क्योंकि इसमें लोहा, ऐलुमिनियमयुक्त पदार्थ टाइटैनोमैग्नेटाइट के साथ जीवांश तथा ऐलुमिनियम के सिलिकेट मिलते हैं।
  • काली मिट्टी कपास और गन्ने की खेती के लिए बहुत सर्वोत्तम है।
  • भींगने पर यह मिट्टी चिपचिपी हो जाती है। परन्तु सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ती। हैं। इससे हवा का नाइट्रोजन इसे प्राप्त होता है।

काली मिट्टी महाराष्ट्र, गुजरात का सौराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, राजस्थान इत्यादि क्षेत्रों में पायी जाती है।

(ii) लाल मिट्टी की विशेषताएँ निम्न हैं-

  • इस मिट्टी का रंग लोहे की उपस्थिति के कारण लाल होता है। साथ ही अधिक नमी होने पर इसका रंग पीला भी हो जाता है।
  • इस मिट्टी की बनावट हल्की रंध्रमय और मुलायम होती है।
  • इसमें खनिजों की मात्रा कम है, कार्बोनेटों का अभाव है, साथ ही नाइट्रोजन और फॉस्फोरस भी नहीं होता है। जीवांश तथा चूना भी कम मात्रा में उपलब्ध होता है।
  • इस मिट्टी में हवा मिली होती है, अत: बुआई के बाद सिंचाई करना आवश्यक है जिससे बीज अंकुरित हो सके।
  • इस मिट्टी में सिंचाई की अधिक आवश्यकता पड़ती है क्योंकि यह मिट्टी कम उपजाऊ होती है।

लाल मिट्टी दक्कन पठार, पूर्वी और दक्षिणी भागों के 100 सेमी. से कम वर्षा के क्षेत्रों में पायी जाती है। तमिलनाडु के दो-तिहाई भाग में यह मिट्टी पायी जाती है। इसका विस्तार पूरब में राजमहल का पहाड़ी क्षेत्र, उत्तर में झाँसी, पश्चिम में कच्छ तथा पश्चिमी घाट के पर्वतीय ढालों तक है।

प्रश्न 3.
भारत में जलोढ़ मिट्टी कहाँ-कहाँ पायी जाती है ? इनमें सबसे बड़ा क्षेत्र कौन है ? इस मिट्टी की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
जलोढ़ मिट्टी-भारत में यह मिट्टी नदियों द्वारा बहाकर लाई गई और नदियों के बेसीन में जमा की गई मिट्टी है। समुद्री लहरों के द्वारा भी ऐसी मिट्टी तटों पर जमा की जाती है।

भारत में जलोढ़ मिट्टी के निम्नलिखित मुख्य क्षेत्र हैं-

  • सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र की घाटियों का क्षेत्र,
  • नर्मदा और ताप्ती घाटियों का क्षेत्र
  • महानदी, गोदावरी, कावेरी, कावेरी का डेल्टाई क्षेत्र। भारत में जलोढ मिट्टी का सबसे बडा क्षेत्र सतलज, गंगा और ब्रह्मपत्र की घाटियों का क्षेत्र है।

इस मिट्टी की विशेषता यह है कि इसमें सभी प्रकार के खाद्यान्न, दलहन, तेलहन, कपास, गन्ना, जूट और सब्जियाँ ऊगाई जाती हैं। इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी पाई जाती है जिसके लिए उर्वरक का सहारा लेना पड़ता है। आयु के आधार पर इसे बांगर और खादर के रूप में बांटा जाता है।

Bihar Board Class 10 Geography प्राकृतिक संसाधन Notes

  • भारत में कुल उपलब्ध भूमि का लगभग 43 प्रतिशत भाग पर मैदान का विस्तार है, जो बारहमासी नदियों को सुनिश्चित करता है। 27 प्रतिशत भूभाग पठार के रूप में विस्तृत है, जहाँ खनिज, जीवाश्म, ईंधन एवं वन सम्पदा के कोष संचित हैं।
  • भारत में छः प्रमुख प्रकार की मृदा पाई जाती है (i) जलोढ़ मृदा (ii) काली मृदा (iii) लाल एवं पीली मृदा (iv) लैटेराइट मृदा (v) मरुस्थलीय मृदा (vi) पर्वतीय मृदा।
  • भूक्षरण के कारण निम्न हैं-वनोन्मूलन, अतिपशुचारण, खनन, रसायनों का अत्यधिक उपयोग इत्यादि।
  • भूक्षरण रोकने या मृदा संरक्षण के उपाय निम्न हैं-
    वृक्षारोपण, फसलचक्रण, समोच्च कृषि, पट्टिका कृषि, जैविक खाद का उपयोग इत्यादि।
  • भूमि एक प्रकृति-प्रदत्त संसाधन है, क्योंकि प्रकृति ने ही भूमि की सृष्टि की है।
  • मनुष्य भूमि-संतान है, क्योंकि भूमि पर ही मनुष्य अपनी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए क्रियाकलाप करता है।
  • भूमि एक महत्वपूर्ण प्रकृति-प्रदत्त संसाधन है। भूमि पर ही मिट्टी मिलती है जिसमें कृषि की जाती है। साथ ही भूमि पर ही मानव आवास मिलता है। गाँव-नगर बसते हैं। पशुपालन का काम होता है और वाणिज्य-व्यवसाय, उद्योग-धन्धे चलते हैं।
  • भूमि पर ही आने-जाने के लिए मार्ग उपलब्ध होते हैं।
  • भूमि के गर्भ में ही सभी खनिज-पदार्थ के भण्डार पाए जाते हैं जिन्हें आधुनिक तकनीक  के आधार पर उन्हें भूमि से निकाला जाता है।
  •  विश्व-स्तर पर कृषि-भूमि का 11.9 प्रतिशत भाग भारत के पास है जिसका समुचित उपयोग करके खाद्यान्न फसलों तथा व्यावसायिक फसलों को उपजाया जाता है।
  • भूमि मनुष्य के आर्थिक विकास का आधार है। क्योंकि भूमि पर ही कृषि-कार्य किए जाते हैं, उद्योग के क्षेत्र और व्यापार-केंद्र भी भूमि पर ही अवस्थित हैं। खनिज क्षेत्र भूमि पर ही पाए जाते हैं।
  • विश्व में 1137 करोड़ हेक्टेयर भूमि कृषि-कार्य के लिए उपयुक्त है जो कि विश्व के विभिन्न देशों में उपलब्ध है।
  • भारत के भू-भाग का क्षेत्रफल 32.87 करोड़ हेक्टेयर है। इसमें 47% भूमि पर कृषि कार्य की जाती है।
  • भूमि की उर्वरा-शक्ति बनाए रखने के लिए उसका संरक्षण करना भी आवश्यक है। भूमि का संरक्षण होने से सृष्टि की इस अनमोल देन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • उपयोग के आधार पर भूमि को पाँच वर्गों में बाँटा जा सकता है-(i) वन-क्षेत्र (ii) निवल ‘बोई भूमि (iii) परती भूमि के अतिरिक्त अन्य बिना जोती जानेवाली भूमि (v) अकृषीय भूमि।
  • भारत के राष्ट्रीय उत्पादन में कृषि का योगदान 22% है तथा रोजमार के अवसर में इसका योगदान 65% है।
  • भारत के चार राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल बहुत अधिक है और इनकी अधिकांश भूमि पर खेती की जाती है।
  • जलवायु की दशायें भूमि उपयोग को प्रभावित करती हैं। मैदानी भूमि पर भी अनुकूल जलवायु न मिले तो कृषि-कार्य सुचारु रूप से नहीं किया जा सकता है।
  • छोटे राज्यों पंजाब और हरियाणा की प्रायः 80% भूमि पर फसलें उगायी जाती हैं।
  • उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड तथा अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में 10% भूमि पर ही कृषि-कार्य की जाती है।
  • पहाड़ी भूमि की अपेक्षा मैदानी भूमि का उपयोग अधिक होता है। मैदानी भूमि में लोग अधिक रहते हैं।
  • नेशनल रिमोट सेंसिग एजेंसी (NRSA) हैदराबाद के अनुसार भारत में 533 लाख हेक्टेयर भूमि व्यर्थ है।
  • भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20.60% वन क्षेत्र हैं।
  • भारत सरकार की वन नीति के अनुसार कम-से-कम 33% भू-भाग वनाछादित रहना चाहिए।
  • भूमि उपयोग का प्रारूप भू-आकृतिक स्वरूप जलवायु मिट्टी और मानव प्रश्नों के अन्तसंबंधों का परिणाम होता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन के दृष्टिकोण से एक-तिहाई भूमि पर वनों का वितरण होना चाहिए। लेकिन भारत के कितने ही राज्य में नाममात्र के वन हैं। इसलिए वन-क्षेत्र के भूमि को बढ़ाना चाहिए। यानी वन-क्षेत्र को बढ़ाना चाहिए।
  • भूमि पर बढ़ते हुए जनसंख्या के दबाव को देखते हुए भूमि उपयोग की योजना बनाना आवश्यक है।
  • प्रति वर्ष भारत की जनसंख्या बढ़ जाने के कारण प्रति व्यक्ति भूमि की कमी होती जा रही है। कल-कारखानों के बढ़ने तथा नगरों के विकास से भी भूमि का ह्रास हुआ है। इसलिए भूमि के बढ़ते ह्रास को रोकना आवश्यक है।
  • भारत में लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर भूमि का निम्नीकरण हुआ है। इससे भूमि के ह्रास की स्थिति उत्पन्न हुयी है।
  • भारत की क्षतिग्रस्त भूमि लगभग 13 करोड़ हेक्टेयर है। इसका 28% वन भूमिक्षरण से, 10% पवन अपरदन से, 56% जल से और शेष 6% लवण तथा क्षारीय निक्षेपों से प्रभावित है।
  • भारत में भूमि के ह्रास को रोकने के लिए कुछ उपाय करना चाहिए, जैसे-उपजाऊ भूमि पर कल-कारखाने और मकान नहीं बनाना चाहिए, जनसंख्या की वृद्धि दर में कमी लाना चाहिए, भूमि के कटाव को रोकना चाहिए, प्राकृतिक आपदाओं से भूमि की रक्षा करनी चाहिए पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर और पेड़ लगाकर भूमि के ह्रास को रोका जा सकता है।
  • पृथ्वी की ऊपरी सतह जिस पर वनस्पतियाँ उगती हैं, कृषि-कार्य किया जाता है, उसे मिट्टी कहा जाता है।
  • मृदा एक सजीव पदार्थ है, क्योंकि इसमें अनेक जैविक पदार्थों का निवास है।
  • मृदा पृथ्वी का नैसर्गिक आवरण है जिसमें चट्टानों और खनिजों के सूक्ष्म कण, नष्ट हुयी वनस्पतियाँ, अनेक जीवित सूक्ष्म पदार्थ, छोटे जीव और कार्बनिक पदार्थ उपस्थित रहते हैं।
  • मिट्टी के कई वर्ग हैं जो उत्पत्ति और गुणों के आधार पर प्रस्तुत किए जाते हैं।
  • मृदा निर्माण के विभिन्न कारक होते हैं, जैसे-खनिजों का छोटे कण में बदलना, रासायनिक प्रक्रिया इत्यादि।
  • मृदा निर्माण के पाँच मुख्य घटक हैं (i) स्थानीय जलवायु, (ii) पूर्ववर्ती चट्टानें और खनिज कण (iii) वनस्पति और जीव (iv) भू-आकृति और ऊँचाई (v) मिट्टी बनने का समय।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 7 टॉलस्टाय के घर में

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 गद्य खण्ड Chapter 7 टॉलस्टाय के घर में Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 7 टॉलस्टाय के घर में

Bihar Board Class 9 Hindi टॉलस्टाय के घर में Text Book Questions and Answers

 

टॉलस्टॉय के घर में Bihar Board प्रश्न 1.
टॉल्सटाय ने अपनी अमर कृतियों की रचना कहाँ की थी?
उत्तर-
यासनाया पोलयाना में टॉल्सटाय ने अपनी अमर कृतियों की रचना की थी।

Bihar Board Solution Class 9 Hindi प्रश्न 2.
यासनाया पोलयाना के लिए जाते हुए लेखक के मन में कैसा भय समा रहा था और क्यों?
उत्तर-
यासनाया पोलयाना जाते समय लेखक के मन में यह भय लग रहा था कि जहाँ विश्व साहित्य की अमर कृतियाँ लिखी गई थीं, जहाँ आना का चरित्र कागज पर उतरा था, जहाँ ‘युद्ध और शांति’ के कितने ही सजीव चित्र रचे गए थे। प्रसत्रता के साथ-साथ एक प्रकार का भय भी उत्पन्न हो रहा था कि कैसे मैं वह सब अपनी आँखों से देख सकूँगा, कैसे उस वातावरण के साथ अपने आपको समन्वय कर पाऊँगा।

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
यूरा कौन था? लेखक की यात्रा के दरम्यान उसकी भूमिका पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
लेखक की यात्रा में यूरा एक अनुवादक था। टॉल्सटाय की जीवनी के संबंध में यूरो रूसी भाषा में कहते जा रहे थे।

Bihar Board 9th Class Hindi Book Solution प्रश्न 4.
टॉल्सटाय के परिवार में चित्रकारी का शौक किन्हें था?
उत्तर-
टॉल्सटाय के अभिन्न मित्र को चित्रकारी का शौक था।

Godhuli Bhag 1 Bihar Board प्रश्न 5.
रामकुमार के अनुसार टॉल्सटाय के मकान का सबसे महत्वपूर्ण भाग कौन था? उसका एक संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
रामकुमार के अनुसार टॉल्सटाय के मकान का सबसे महत्त्वपूर्ण वह कमरा था जहाँ वें पढ़ते-लिखते थे। एक कोने में छोटी सी मेज और बिना सिरहाने की एक तिपाई थी। मेज पर एक कलम और दवात रखी थी। इस तिपाई पर बैठकर उन्होंने अपने जीवन का कितना बड़ा भाग बिताया होगा, यहीं बैठकर उन्होंने ‘आना करीबिना’ और ‘युद्ध और शांति’ की रचना की होगी।

गोधूलि भाग 1 Class 9 Solution प्रश्न 6.
टॉल्सटाय रूसी के अलावा और कौन-कौन विषय पढ़ लेते थे?
उत्तर-
टॉल्सटाय रूसी के अलावा जर्मन, फ्रांसीसी और अंग्रेजी भी पढ़ लेते थे।

Godhuli Class 9 Bihar Board प्रश्न 7.
टाल्सटाय ने अंतिम बार जब घर छोड़ा तो उनके साथ कौन गया था?
उत्तर-
टॉल्सटाय ने जब अंतिम बार घर छोड़ा था तो उनके साथ केवल डाक्टर ही गया था।

गोधूलि भाग 1 Class 9 Bihar Board प्रश्न 8.
टॉल्सटाय ने अपने निजी कमरे का चित्रण किस उपन्यास के किस पात्र के कमरे के रूप में किया है? कमरे की कुछ विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
टॉल्सटाय के मकान में एक और कमरा था जो उन्हें बेहद पसंद था क्योंकि यह घर के शोरगुल से दूर था और यहाँ उन्हें सदा एकांत मिलता था। इस कमरे का बहुत-सा वर्णन उन्होंने ‘आना करीनिना’ में लेनिन के कमरे की चर्चा करते समय किया था क्योंकि लेबिन के चरित्र में उन्होंने बहुत कुछ अपनी बातें कही थीं।

कमरे की सादगी, बाहर खुलती हुई एक खिड़की एक चारपाई बहुत कुछ वही था। एक कोने में पानी भरने का एक बर्तन रखा हुआ था जिसमें टॉल्सटाय अपने अंतिम दिनों में स्वयं ही पानी भरकर लाते थे।

गोधूलि भाग 2 Class 9 Solution Bihar Board प्रश्न 9.
टॉल्सटाय ने अपनी समाधि के विषय में क्या कहा था?
उत्तर-
अपनी मृत्यु से पूर्व टॉल्सटाय ने अपनी समाधि के विषय में विस्तार से आदेश दिया था कि जैसी निर्धन से निर्धन व्यक्ति की समाधि होती है वैसी ही उनकी भी बने, उनकी मृत्यु पर किसी भी व्यक्ति का भाषण न हो।

Bihar Board Class 9 Hindi Book प्रश्न 10.
टॉल्सटाय के गाँव का एक संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
लगभग सौ डेढ़ सौ घरों के एक छोटे से गाँव के सिरे पर टॉल्सटाय का घर है जिसके चारों ओर दूर-दूर तक फैले हुए बाग-बगीचे हैं। पास ही एक तालाब है जिसके किनारे टॉल्सटाय घंटों जाकर बैठे रहते थे। आजकल इस मकान को सरकार ने म्यूजियम बना दिया है, जिसमें टॉल्सटाय का सब सामान तरतीबवार सजा हुआ है।

टालस्टाय के कपड़े कहां लगे हुए थे Bihar Board प्रश्न 11.
लेखक ने अपनी इस यात्रा को तीर्थयात्रा क्यों कहा है?
उत्तर-
अपनी सुखद यात्रा का अनुभव कर जब लेखक लौट रहा था तो लेखक अतीत की दुनियाँ से बाहर आकर वर्तमान की ओर बहुत तेजी से बढ़ा जा रहा था। सुबह आते वक्त खिड़की के बाहर जिन गाँवों, शहरों और मकानों को देखने में लेखक की जो दिलचस्पी थी वह अब समाप्त हो गई थी। लेखन ने अपनी आँखें बन्दकर ली परन्तु यासनाया पोलयाना की दुनिया से अपने-आपको अलग नहीं कर सका। २. इसलिए लेखक ने अपनी इस यात्रा को तीर्थयात्रा कहा है।

नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. यह उनका सोने का कमरा था। खिड़की के पास उनकी चारपाई बिछी हुई थी। दूसरी मंजिल से दूर तक फैले हुए खेत गाँव के मकानों की छतें और छोटी-छोटी हरी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनकी पत्नी के सोने का कमरा अलग था, क्योंकि अंतिम वर्षों में आपस में खटपट रहने के कारण उनके सोने के कमरे अलग-अलग थे। सुबह उठकर कुछ घंटे वह अपनी चारपाई पर बैठकर ही लिखा करते थे। एक अन्य कमरे में एक और मेज भी थी जिस पर टॉल्सटाय की पत्नी पहले उनकी पांडुलिपियों की नकल किया करती थीं और शायद ‘युद्ध और शांति’ जैसी बड़ी पुस्तक की उन्होंने तीन बार नकल की थी, परंतु बाद में उन्होंने यह सब छोड़ दिया था।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) सोने के कमरे की खिड़की से कौन-सा दृश्य दिखाई पड़ता था?
(ग) टॉल्सटाय कब और किस रूप में लिखा करते थे?
(घ) टॉल्सटाय की पत्नी वहाँ क्या लिखा करती थी?
(ङ) अंतिम वर्षों में टॉल्सटाय का अपनी पत्नी के साथ कैसा संबंध था? सोदाहरण लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-टॉल्सटाय के घर में, लेखक का नाम-रामकुमार।
(ख) टॉल्सटाय के सोने के कमरे में खुली खिड़की थी। लेखक उसमें पहुँचा। उसे खुली खिड़की से दूर तक फैले खेत, गाँव के मकानों की छतें और आसपास फैली हुई छोटी-छोटी तथा हरी पहाड़ियों की श्रृंखला दिखलाई पड़ रही थी।
(ग) टॉल्सटाय जीवन के अंतिम वर्षों में सोने के कमरे में ही सुबह उठकर कुछ घंटे चारपाई पर बैठकर लिख लिया करते थे। उसी कमरे के बगल में एक अन्य कमरे में एक मेज थी उस पर भी पहले वे लिखा करते थे।
(घ) बगल के कमरे में जो एक मेज थी उस पर टॉल्सटाय की पत्नी पहले के कुछ वर्षों तक अपने पति की पांडुलिपियों की नकल किया करती थी और एक समय था कि उन दिनों उनकी पत्नी ने उनके द्वारा लिखित चर्चित उपन्यास पुस्तक “युद्ध और शान्ति” की तीन बार स्वयं लिखकर नकल की थी।
(ङ) अंतिम वर्षों में टॉल्सटाय का पत्नी से अच्छा सम्बन्ध नहीं था। दोनों में खटपट का रूप ऐसा कुछ विकृत हो चुका था कि टॉल्सटाय और उनकी पत्नी के सोने के कमरे अलग-अलग थे।

2. नीचे की मंजिल में कुछ अतिथियों के लिए कमरे थे। एक उनके डॉक्टर का था जो उनके साथ ही रहता था और अंतिम बार जब सदा के लिए टॉल्सटाय ने अपना घर छोड़ा तो केवल डॉक्टर ही उनके साथ गया था। एक और उनका निजी कमरा था। उनके सेक्रेटरी ने बतलाया कि यह कमरा उन्हें बेहद पसंद था क्योंकि यह घर के शोरगुल से दूर था यहाँ उन्हें सदा एकांत मिलता था। इस कमरे का बहुत-सा वर्णन उन्होंने ‘आना करीनिना’ में लेविन के कमरे की चर्चा करता था। इस कमरे का बहुत-सा वर्णन उन्होंने ‘आना करीनिना’ में लेविन के कमरे की चर्चा करते समय किया था, क्योंकि लेविन के चरित्र में उन्होंने बहुत कुछ अपनी बातें कहीं थीं। कमरे की सादगी, बाहर खुलती हुई एक खिड़की, एक चारपाई बहुत कुछ वही था। एक कोने में पानी भरने का एक बर्तन रखा हुआ था जिसमें टॉल्सटाय अपने अंतिम दिनों में बाहर जाकर कुएं से स्वयं ही पानी भरकर लाते थे।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) टॉल्सटाय को अपने घर का कौन-सा कमरा विशेष प्रिय था : और क्यों?
(ग) टॉल्सटाय ने अपने प्रिय कमरे की चर्चा कहाँ, क्यों और किस रूप में की है?
(घ) एक उदाहरण देकर बताएं कि टॉल्सटाय अपना कार्य स्वयं करते थे।
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-टॉलस्टाय के घर में, लेखक-रामकुमार

(ख) टॉल्सटाय के मकान के नीचे की मंजिल में उसका एक निजी कमरा था। यह कमरा टॉल्सटाय को बहुत पसंद था क्योंकि यह घर-मकान के शोरगुल से कुछ दूर हटकर स्थित था और टॉल्सटाय को यहाँ एकांत का सुख मिलता था

(ग) टॉल्सटाय ने अपने प्रिय कमरे की चर्चा अपने चर्चित उपन्यास ‘आना करीनिना’ पुस्तक में उपन्यास के पात्र लेविन के कमरे की चर्चा के क्रम में की है। कमरे की सादगी और बाहर के खुलापन के कारण वह कमरा स्वाभाविक रूप से टॉल्सटाय के लिए बड़ा प्रिय था।

(घ) टॉल्सटाय अपना काम स्वयं करते थे इसकी जानकारी हमें इस उदाहरण से मिलती है, टॉल्सटाय के निजी कमरे के कोने में पानी भरने का एक बर्तन रखा रहता था। टॉल्सटाय कमरे से बाहर जाकर कुएँ से स्वयं ही पानी भरकर लाया करते थे। यह घटना उनके जीवन के अंतिम दिनों की है।

(ङ) लेखक ने इस गद्यांश में टॉल्सटाय के स्वभाव, उनकी पसंद और उनकी दिनचर्या का वर्णन किया है। टॉल्सटाय का निजी कमरा उनके मकान से कुछ दूर दूसरे हिस्से में स्थित था। वहाँ मकान का शोरगुल नहीं पहुंच पाता था। वहाँ उन्हें एकांत का सुख मिलता था। कमरा बड़ा साफ-सुथरा था। जीवन के अंतिम दिनों में टॉल्सटाय स्वयं घर से बाहर जाकर कुएँ से पानी भरकर लाते थे।

3. म्यूजियम को देखकर ऐसा जान पड़ा कि जिस व्यक्ति को जीवन में कभी नहीं देखा, जिसकी मृत्यु हुए भी लगभग पचास साल बीत गए हैं, उनके जीवन की एक झाँकी, एक धुंधली-सी छाया आज दिखाई दी जिसकी स्मृति शायद कभी धुंधली नहीं पड़ सकेगी। सूने मकान के कमरों में आज भी मुझे आना और लेविन की हल्की-हल्की पदचाप सुनाई दी, वे सब व्यक्ति शायद इस स्थान को कभी नहीं छोड़ सकेंगे। इस मकान में केवल टॉल्सटाय के जीवन का इतिहास ही नहीं पता चलता, बल्कि कितनी ही आत्माओं के स्वर सुनाई देते हैं जिन्हें टॉल्सटाय ने जन्म दिया था।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) लेखक को किसकी स्मृति कभी धुंधली नहीं पड़ेगी और क्यों?
(ग) लेखक ने गद्यांश में वर्णित कमरे की क्या विशेषताएँ बतलाई हैं? उन्हें स्पष्ट करें।
(घ) म्यूजियम को देखकर लेखक को कैसा जान पड़ा?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय/सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-टॉल्सटाय के घर में, लेखक-रामकुमार।
(ख) म्यूजियम बने टॉल्सटाय के घर को देखकर लेखक को उनके जीवन की एक झाँकी की धुंधली सी छाया दिखलाई पड़ी, लेकिन लेखक को यह यकीन है कि टॉल्सटाय की स्मृति कभी धुंधली नहीं पड़ सकेगी, क्योंकि वह स्मृति उनके गहरे दिल में घर कर गई थी।
(ग) लेखक द्वारा वर्णित कमरा टॉल्सटाय के मकान का कमरा है जिसे सरकार ने म्यूजियम का रूप दिया है। उस सूने मकान के कमरे में लेखक को आज भी उनके उपन्यासों के पात्र ‘आना’ और ‘लेविन’ की हल्की-हल्की पदचाप सुनाई पड़ती है। क्योंकि टॉल्सटाय ने उसी कमरे में बैठकर अपने उपन्यासों को लिखा था।
(घ) म्यूजियम को देखकर लेखक को ऐसा जान पड़ा कि टॉल्सटाय के जीवन की एक झाँकी एक धुंधली-सी छाया के रूप में वहाँ आज भी विद्यमान है। लेखक ने टॉल्सटाय को कभी देखा नहीं था। उनकी मृत्यु हुए भी पचास साल से ज्यादा बीत चुके थे लेकिन म्यूजियम को देखकर उसे उनके जीवन की एक झाँकी के दर्शन का अनुभव हुआ।
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने महान विचारक साहित्यकार टॉल्सटाय की पावन-स्मृति की अपने दिल पर पड़ी छाप का वर्णन किया है। म्यूजियम बने टॉल्सटाय के कमरे में लेखक गया हुआ था। उस कमरे में पहुँचकर उसे ऐसा लगा कि टॉल्सटाय की पवित्र स्मृति वहाँ बैठकर टॉल्सटाय द्वारा लिखे गए उपन्यास के पात्रों की सजीवता के रूप में विद्यमान है। उस मकान के कमरे में कितनी ही आत्माओं के स्वर जिन्हें टॉल्सटाय ने जन्म दिया था, सुनाई पड़ी।

4. जब मकान से बाहर निकले तो हम तीनों ही चुप थे मानो दो घंटों तक कोई स्वप्न देख रहे थे। बाहर तेज धूप निकली हुई थी और कुछ क्षणों के लिए मेरी आँखें उस रोशनी में चौधिया सी गईं। लोगों के झुंड इधर-उधर घूम रहे थे। कुछ देर बाद हम टॉल्सटाय की समाधि की ओर बढ़ गए जो उस घर से दो फलांग की दूरी पर थी। पतली-सी सड़क के दोनों ओर विशालकाय हरे-भरे पड़ों की कतारें आकाश को ढंके हुए थीं। छोटे-छोटे बाग, कहीं फूलों की क्यारियों और कहीं ऊबड़-खाबड़ झाड़ियाँ थीं। सेक्रेट्री धीमें स्वर में धीरे-धीरे टॉल्सटाय के विषय में कुछ कह रहे थे, परंतु मेरे कानों तक उनका स्वर पहुँच नहीं पा रहा था। चारों ओर उदासी थी और सन्नाटा छाया हुआ था।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) मकान से बाहर निकलने के बाद लेखक क्यों चुप की स्थिति में थे?
(ग) समाधि-स्थल के आसपास का प्राकृतिक परिवेश कैसा था?
(घ) सेक्रेट्री धीमे स्वर में क्या बात कर रहे थे? (ङ) इस गद्यांश का सारांश लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-‘टॉल्सटाय के घर में’, लेखक-रामकुमार।

(ख) टॉल्सटाय के मकान से सब कुछ देखने-सुनने के बाद जब लेखक अपने कुछ आदमियों के साथ बाहर निकले तब सब-के-सब खामोश थे। लेखक दो घंटे तक उस मकान में रहा। वह जब तक वहाँ रहा तब तक एक स्वप्नदर्शी के रूप में रहा। उसे ऐसा लगा मानो वह दो घंटे तक सपनों के सिवा कुछ नहीं देख रहा था। वह अतिशय भावुकता के साथ विचारशीलता की मन:स्थिति में था जिसमें मौन रहना उसके लिए स्वाभाविक स्थिति थी।

(ग) लेखक के अनुसार समाधि-स्थल टॉल्सटाय के घर से कुछ दूर स्थित थी। वहाँ तक जाने वाली सड़क पतली-सी थी। उस सड़क के दोनों ओर हरे-भरे, बड़े-बड़े ऊंचे पेड़ आकाश को ढंके हुए थे। आसपास में कई छोटे-छोटे बाग लगे थे जिनमें फूलों की क्यारियों के साथ उबड़-खाबड़ झाड़ियाँ थीं।

(घ) सेक्रेट्री धीमे स्वर में जो कुछ बात कर रहे थे उसे लेखक ने स्पष्ट रूप से कुछ सुना नहीं। हाँ उसने जो कुछ हल्के-फुल्के रूप से सुना उससे उसे लगा कि सेक्रेट्री टॉल्सटाय के विषय में कुछ कह रहे थे या बता रहे थे जबकि वहाँ उदासी भरा शांत वातावरण व्याप्त था।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने टॉल्सटाय के समाधि-स्थल, वहाँ के प्राकृतिक परिवेश तथा वहाँ व्याप्त माहौल का चित्रण किया है। टॉल्सटाय का समाधि-स्थल टॉल्सटाय के मकान से दो फाग की दूरी पर था। वहाँ तक हरे-भरे बड़े-बड़े वृक्षों से आच्छादित एक पतली सी. सड़क जाती थी। उस स्थल के आस-पास कुछ फूलों और झाड़ियों से भरे बाग लगे थे। वहाँ का माहौल उदासी और सन्नाटे में डूबा था।

5. हमारी कार फिर तेजी से मास्को की ओर रवाना हो गई। रेडियो से फिर संगीत की ध्वनि हमारे कानों तक पहुँचने लगी। शाम की धुंधली रोशनी में पेड़ों की परछाइयाँ लंबी होने लगीं। अतीत की दुनिया से बाहर आकर वर्तमान की ओर हम बहुत तेजी से बढ़े जा रहे थे। सुबह आते वक्त खिड़की से बाहर जिन गाँवों, शहरों और मकानों को देखने में जो मेरी दिलचस्पी थी वह अब समाप्त हो गई थी। मैंने आँखें बंद कर ली, परंतु यासनाया पोलयाना की दुनिया से अपने-आपको अलग नहीं कर सका।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) लेखक की कार की मास्को की ओर रवानगी के समय का क्या परिवेश था?
(ग) “अतीत की दुनिया से बाहर आकर वर्तमान की ओर हम बहुत तेजी से बढ़े जा रहे थे।”-लेखक के इस कथन को स्पष्ट करें।
(घ) लेखक की सुबह वाली दिलचस्पी लौटते समय क्यों समाप्त हो चली थी?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-टॉल्सटाय के घर में, लेखक-रामकुमार।

(ख) लेखक म्यूजियम से बाहर निकलकर अपनी कार से मास्को की ओर रवाना हो गया। उस समय का माहौल और वातावरण सहज शांत था। कार में लगे रेडियो से संगीत की मंद ध्वनि निकल रही थी। शाम का समय था। संध्या की रोशनी धुंधली पड़ रही थी। सूर्य के अस्ताचलगामी हो रहने की स्थिति में पेड़ों की परछाइयाँ लंबी हो रही थीं।

(ग) लेखक दो घंटे से टॉल्सटाय के मकान में भ्रमण कर रहा था। वहाँ टॉल्सटाय तो नहीं थे, क्योंकि वे अतीत की दुनिया में पचास वर्ष पहले खो गए थे, लेकिन लेखक का मन अतीत बने टॉल्सटाय की स्मृति से जुड़ा था। वहाँ से बाहर निकलने पर उसे वर्तमान के एहसास का आभास हुआ। इसीलिए उसे लगा कि वह अतीत की दुनिया से निकलकर बाहर आ रहा है।

(घ) लेखक सुबह में टॉल्सटाय के मकान को देखने के लिए चला था। इसलिए, उसके मन में एक प्रकार की उत्सुकता थी और एक प्रकार का उतावलापन था। लेकिन, उस मकान में भ्रमण करने के बाद जब वह वहाँ से निकला तो उसका सारा जोश, उत्साह और लगन सब कुछ शिथिल पड़ गया था, क्योंकि अब उसमें वह दिलचस्पी ही शांत हो गई थी।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने टॉल्सटाय के मकान देखने के बाद की अपनी मानसिक अवस्था का वर्णन किया है। लेखक टॉल्सटाय के मकान से निकलकर कार से मास्को की ओर रवाना हो गया। उसे लगा कि जब तक वह टॉल्सटाय के मकान में भ्रमण कर रहा था तब तक वह खुद को अतीत में डूबा पा रहा था। वहाँ से लौटने पर उसे वर्तमान का एहसास हुआ। सुबह जिस समय वह मकान देखने चला था उस समय उसके मन में काफी उत्साह था। वह अब ठंडा हो चुका था। वह कार में आँखें बंद कर टॉल्सटाय के घर के बारे में सोचने में खोया हुआ था।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 अक्षर-ज्ञान

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड Chapter 10 अक्षर-ज्ञान Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 10 अक्षर-ज्ञान

Bihar Board Class 10 Hindi अक्षर-ज्ञान Text Book Questions and Answers

 

कविता के साथ

अक्षर ज्ञान कविता Bihar Board प्रश्न 1.
कविता में तीन उपस्थितियां हैं। स्पष्ट करें कि वे कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में प्रवेश, बोध और विकास तीन उपस्थितियाँ आयी हैं अक्षर ज्ञान की प्रक्रिया सबसे पहले प्रवेश की वातावरण में प्रारंभ हुई है। प्रवेश के संपूर्ण वातावरण को यहाँ तैयार किया गया है जहाँ अक्षर ज्ञान की रेखाएँ प्रारंभ से अंत तक सिमटती सिकुड़ती ‘क’, ‘ख’ के चित्र अंकित करती हैं। उसके बाद बोध में कुछ परिपक्वता दिखाई पड़ने लगती है जहाँ अक्षर ज्ञान का एक सुदृढ़ वातावरण आता है जो मूल रूप में बोध कराता है और कौतूहल को जगाता है। अंत में विकास क्रम उपस्थित होता है जहाँ निरंतर आगे बढ़कर अक्षर का मूर्त रूप देने का प्रयास सफल होता है। यह एक सफलता है जहाँ से विकास-क्रम का सिलसिला पूर्णरूपेण जारी हो जाता है।

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 10 प्रश्न 2.
कविता में ‘क’ का विवरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में कवयित्री छोटे बालक द्वारा प्रारम्भिक अक्षर-बोध को साकार रूप में चित्रित करते हुए कहती हैं कि ‘क’ को लिखने में अभ्यास पुस्तिका का चौखट छोटा पड़ जाता है। कर्म पथ भी इसी प्रकार प्रारंभ में फिसलन भरा होता है। ‘क’ को कबूतर मानकर प्रतीकात्मक रूप से अक्षर बोध कराने के सरलतम मार्ग का चित्रण है। साथ ही बालक की चंचलता कबूतर का फुदकना प्रकट करता है। इसी प्रकार ‘क’ की चर्चा में व्यापकता का भाव निहित है।

Hindi Akshar Gyan Book Pdf प्रश्न 3.
खालिस बेचैनी किसकी है ? बेचैनी का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
खालिस बेचैनी खरगोश की है। ‘क’ सीखकर ‘ख’ सीखने के कर्म पथ पर अग्रसर होता हुआ साधक की जिज्ञासा बढ़ती है और वह आगे बढ़ने को बेचैन हो जाता है। खरगोश के माध्यम से ‘ख’ सिखाया जाना बच्चा के लिए सरल है। साथ ही खरगोश की तरह चंचल एवं तेज होकर बालक अपनी सीखने की गति तेज करता है। आशा और विश्वास में वृद्धि होता है। बंचैनी का अभिप्राय है आगे बढ़ने की लालसा, जिज्ञासा एवं कर्म में उत्साह।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 4.
बेटे के लिए ” क्या है और क्यों ?
उत्तर-
बेटे के लिए ‘ङ’ उसको गोद में लेकर बैठने वाली माँ है। माँ स्नेह देती है, वात्सल्य प्रेम देती है। सीखने के क्रम में विफलता का मुँह देखता हुआ, कठिनाइयों का सामना करता हुआ जब बच्चा थके हुए अवस्था में आगे बढ़ता है तब माँ स्नेह की गोद में बिठाकर सांत्वना देती हुई आशा की किरण जगाती है। ‘ङ’ भी ‘क’ से लेकर ‘घ’ तक सीखने के क्रम के बाद आता है। वहाँ स्थिरता आ जाती है, साधना क्रम रुक जाता है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार कर्मरत बालक माँ की गोद में स्थिर हो जाता है।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 5.
बेटे को आँस कब आते हैं और क्यों ?
उत्तर-
यहाँ संघर्षशीलता का चित्रण है। सीखने के क्रम में कठिनाइयों का सामना करते हुए बालक थक जाता है। ‘क’ से लेकर ‘घ’ तक अनवरत सीखते हुए ‘ङ’ सीखने का प्रयास करना कठिन हो जाता है। यहाँ वह पहले-पहल विफल होता है और आँसू आ जाते हैं। कर्म पथ पर
या जीवन पथ पर जब बच्चा अग्रसर होता है और संघर्ष करते हुए, गिरते-उठते चलने का प्रयास करते हुए माँ के निकट जब आता है तब स्नेह का आश्रय पाकर, ममत्व के निकट होकर रो देता है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 प्रश्न 6.
कविता के अंत में कवयित्री ‘शायद’ अव्यय का क्यों प्रयोग करती है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
यह पूर्ण सत्य है कि प्रस्तुत कविता में अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया एक चित्रात्मक शैली में की गई है। यह सृष्टि के विकासवाद का सूत्र उपस्थित करता है। सीखाने के क्रम में जो तीन उपस्थिलियाँ उत्पन्न हुई वे विकास का ही द्योतक है। यहाँ कविता के अंत में

‘कवियत्री’ शायद अव्यय का प्रयोग करके यह स्पष्ट करना चाहती है कि जो अक्षर-ज्ञान में बच्चों को मसक्कत करना पड़ता है वही मसक्कत सृष्टि के विकास में करना पड़ा होगा। शायद सृष्टि का प्रारंभिक कर्म गति से चला होगा।

Class 10 Hindi Bihar Board प्रश्न 7.
कविता किस तरह एक सांत्वना और आशा जगाती है ? विचार करें।
उत्तर-
कविता में एक प्रवाह है जो विवासवाद के प्रवाह का बोध कराता है। सांत्वना और आशा सफलता का मूल मंत्र है। विकास क्रम में व्यक्ति जब प्रवेश करता है तब उसे उत्थान-पतन के मार्ग से गुजरना पड़ता है। जैसे अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया अति संघर्षशील होती है। लेकिन अक्षर ज्ञान करवाने वाली ममता की मूर्ति माँ सांत्वना और आशा का बोध कराते हुए शिशु को कोमलता प्रदान करती है और इसी कोमलता में शिशु का प्रयास सफलता के चरम सीमा पर स्थापित करता है।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions प्रश्न 8.
व्याख्या करें “गमले-सा टूटता हुआ उसका ‘ग’ घड़े-सा लुढ़कता हुआ उसका ‘घ’
उत्तर-
प्रस्तुत व्याख्येय पक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के ‘अक्षर-ज्ञान’ शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत ‘अंश में हिन्दी साहित्यं के समसामयिक कवयित्री अनामिका ने अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक-शिक्षण प्रक्रिया में संघर्षशीलता का मार्मिक वर्णन किया है।
कवयित्री कहते हैं कि बच्चों को अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण प्रक्रिया कौतुकपूर्ण है। एक चित्रमय वातावरण में विफलताओं से जूझते हुए अनवरत प्रयासरत आशान्वित निरंतर आगे बढ़ते हुए बच्चे की कल्पना की गई है। ‘ग’ को सीखना गमले की तरह नाजुक है जो टूट जाता है। साथ ही ‘घ’ घड़े का प्रतीक है जिसे लिखने का प्रयास किया जाता है लेकिन लुढक जाता है अर्थात् गमले की ध्वनि से बच्चा ‘ग’ सीखता है और ‘घडे’ की ध्वनि से ‘घ’ सीखता है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf प्रश्न 9.
‘अक्षर-ज्ञान कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
समकालीन कवियत्री अनामिका ने ‘अक्षर-ज्ञान’ शीर्षक कविता में अक्षर-ज्ञान कः प्रक्रिया उसमें आने वाली बाधाओं, हताशाओं और अन्ततः संघर्ष कर असफलता को सफलता में बदलने के संकल्प के साथ सृष्टि की विकास-कथा में मानव की संघर्ष-शक्ति को रेखांकित किया है।

कवयित्री कहती हैं कि माँ ने बेटे की चौखट या स्लेट देकर अक्षर-ज्ञान देना शुरू किया लेखन और ज्ञान प्राप्ति की प्रक्रिया का सरल और रोचक बनाने के लिए उसने कुछ संकेता प्रतीक दिए। बेटे को बताया-‘क’ सं कबूतर, ‘ख’ से खरगोश, ‘ग’ से गमला और ‘घ’ से घड, आदि। बेटे ने लिखना शुरू किया। कबूतर का ध्यान करने के कारण ‘क’ चौखट में न अँटा, ‘ख भी खरगोश की तरह फुदक गया। इसी प्रकार गमला के चक्कर में ‘ग’ टूट गया और ‘घडा के ध्यान में ‘घ’ लुढ़क गया। लंकिन कठिनाई पैदा हुई ‘ङ’ को लेकर। माँ ने समझाया-‘ड’ और बिन्दु (.) उसकी गोद में बैठा बेटा। कोशिश शुरू हुई किन्तु ‘ङ’ सधता ही नहीं था। ब: कोशिश के बाद भी जब ‘ङ’ की मुश्किल हल न हुई हो तो बेटे की आँखों में आँसू आ : किन्तु ये आँसू ‘ङ’ को साधने के प्रयत्न छोड़ने के न थे, इन आँसुओं में ‘ङ’ को साधने का असफलता को धता बताने का संकल्प था।

इस कविता के माध्यम से सृष्टि-विकास-कथा को प्रस्तुत किया गया है। अक्षर-ज्ञान के क्रम __ में आने-वाली कठिनाइयाँ मानव-जीवन की कठिनाइयाँ हैं। मनुष्य जीवन-संघर्ष के शुरुआती दौर में डगमगाता है, लड़खड़ाता है, फिर भी चलता है। किन्तु कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण आत हैं जब आदमी बेहाल हो जाता है। उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं किन्तु मनुष्य हारता ना वह अपनी असफलता को सफलता में बदलने के लिए सन्निद्ध हो जाता है। ये आँसू ही सृष्टि-विकास-कथा के प्रथमाक्षर हैं अर्थात् संघर्ष ही मनुष्य की जिन्दगी की फितरत है। यही इस . कविता की भावना है, सार है।

भाषा की बात

Class 10 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नांकित भिन्नार्थक शब्दों के वाक्य-प्रयोग करते हुए अर्थ स्पष्ट करें-
चौखट-चोखट, बेटा-बाट, खालिस-खलासी, खलिश, थमना-थमकनो, थामना, सपना, साधना, साध, गोदी-गद्दी-गाद, कोशिश-कशिश, विफलता-विकलता।
उत्तर-
चौखट – वह चौखट पर खड़ा है।
चोखट – चोखट दूर गया।
बेटा – वह राम का बेटा है।
बाट – तुम किसकी बाट खोज रहे हो।
खालिस – वह खालिस बेचैनी में है।
खलासी – बस का खलासी भाग गया है।
खलिश – उसके खलिश का क्या कहना?
थमना – उसका पैर थम गया।
थमकना – पैर-थमकना अच्छी बात नहीं है।
थामना – उसने ईश्वर का दामन थाम लिया।
सघना – उसका काम सध गया।
साधना – उसने अपनी साधना पूरी कर ली।
साध – उसने अपना काम साध लिया।
गोदी – शिशु माँ की गोद में बैठा है।
गादी – वह गद्दी पर बैठा है।
गाद – कड़ाही में गाद बैठा हुआ है।
कोशिश – उसने भरपूर कोशिश नहीं की।
कशिश – उसकी कशिश देखने में बनती है।
विफलता – मुझे इस काम में विफलता मिली है।
विकलता – उसकी विकलता बढ़ गई।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 2.
कविता में प्रयुक्त क्रियापदों का चयन करते हुए उनसे स्वतंत्र वाक्य बनाएँ।
उत्तर-
अँटता – यह बक्सा चौखट में नहीं अँटता है।
फुदक – चिड़ियाँ फुदकती है।
उतरना – बंदर पंड़ से उतरता है।
लुढकता – गेंद लुढ़कता है।
सघता – उससे यह नहीं सधता है।
मानता – वह अपने गुरू को भगवान मानता है।
छलक. – आँसू छलक पड़े।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution In Hindi प्रश्न 3.
निम्नांकित के विपरीतार्थक शब्द दें :
बेटा, कबूतर, माँ, उतरना, टूटना, बेचैनी, अनवरत, आँसू, विफलता, प्रथमाक्षर, विकास-कथा, सृष्टि।।
उत्तर-
बेटा – बेटी
कबुतर – कबूतरी
मा – बाप
उतरना -चढ़ना
टूटना – बचना
बंदैनी – शान्ति
अनवरत – यदा-कदा
आँसू – हँसी
विफलता – सफलता
प्रथमाक्षर – अन्त्याक्षर
विकास – कथा अंतकथा
सृष्टि – प्रलय।

काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. चौखटे में नहीं अँटता
बेटे का ‘क’
कबूतर ही है न –
फुदक जाता है जरा-सा !

Class 10 Hindi Chapter 1 Bihar Board प्रश्न
(क) कवयित्री तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) काव्यांश का प्रसंग स्पष्ट करें।
(ग) दिये गये पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता-अक्षर-ज्ञान।
कवयित्री-अनामिका।

(ख) प्रसंग प्रस्तुत काव्यांश में कवयित्री ने अबोध बालक के द्वारा प्रारंभिक अवस्था में अक्षर बोध का मनोरम चित्रण किया है। अक्षर-ज्ञान के क्रम में बच्चा बार-बार गलती करता है, असफल हो जाता है इसकी झलक दिखायी गयी है। किसी प्रतीक के माध्यम से अक्षर बोध आसानी से होता है यह भी कबूतर की चर्चा करके बताया गया है।

(ग) सरलार्थ प्रस्तुत पद्यांश में शुरुआत में बच्चा अक्षर ज्ञान किस प्रकार प्राप्त करता है, क्या कठिनाइयाँ आती हैं, किस प्रकार असफल हो जाता है इन तथ्यों की अभिव्यक्ति है। कवयित्री कहते हैं कि माँ बच्चा को अभ्यास-पुस्तिका में बने खाने के अन्दर ‘क’ लिखना सिखा रही है। वह चाहती है कि ‘क’ को सुन्दरतम रूप में चौखट के अन्दर लिखे। इसके लिए प्रतीक स्वरूप कबूतर को उपस्थित करते हुए बालक को कबूतर के का लिखने को प्रेरित करती है। किन्तु प्रारंभिक अवस्था के कारण लिखित ‘क’ चौखट से बाहर तक छा जाता है। वह उसके अंदर ठीक से नहीं लिखता मानो कबूतर फुदक रहा हो।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत पद्यांश में बताया गया है कि बच्चों के अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया कौतुकपूर्ण होती है। सीखने की उत्सुकता बच्चों को विभिन्न वस्तुओं के माध्यम से जागृत कराया जाता है। इन बातों का इस पद्यांश में मनोरम चित्रण है। बहुत ही सुन्दरतम भाव से इसका चित्रण किया गया है। इसमें बाल सुलभ भाव का दर्शन है।

(ङ) काव्य-सौंदर्य-
(i) प्रस्तुत कविता पूर्ण रूप से चित्रात्मक शैली में लिखी गयी है।
(ii) रस की दृष्टि से वात्सल्य रस की पुट देखी जा रही है।
(iii) बाल मनोविज्ञान का अनोखा सामंजस्य होने के कारण भाषा सरल और सुबोध है।
(iv) खड़ी बोली की इस कविता में तद्भव एवं देशज शब्दों का प्रयोग मार्मिकता ला देता है।

2. पंक्ति से उतर जाता है
उसका ‘ख’
खरगोश की खालिम बेचैनी में।
गमले-सा टूटता हुआ उसका ‘ग’
घड़े-सा लुढ़कता हुआ उसका ‘घ’

Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न
(क) कवयित्री तथा कविता का नाम लिखें।
(ख) प्रसंग लिखें।
(ग) सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता- अक्षर-ज्ञान।
कवयित्री- अनामिका।

(ख) प्रसंग… इस पद्यांश में किसी प्रतीक के माध्यम से बच्चों को अक्षर का बोध आसानी से कराने की बात कही गयी है। साथ ही यह भी बताया गया है कि अक्षर-ज्ञान सीखने में बच्चा बार-बार असफल होता है।

(ग) सरलार्थ… प्रस्तुत पंक्ति में कवयित्री ने चित्रण किया है कि बालक प्रारंभ में बहुत प्रयास से अक्षर ज्ञान प्राप्त करता है। धीरे-धीरे उसे अक्षर का बोध होता है। वह बार-बार अपने मानस-पटल पर अक्षर अंकित करता है और साथ ही साथ बार-बार भूलता भी है। जिस तरह खरगोश अस्थिर होता है, गमला टूट जाता है, घड़ा लुढ़क जाता है उसी प्रकार बच्चा भी चंचलतावश ख, ग, घ इत्यादि अक्षरों के स्मरण-विस्मरण का खेल खेलते रहता है। माँ की गोद में जिस प्रकार बच्चा बैठता है उसी प्रकार किसी अक्षर पर अनुस्वार देने की कल्पना की गई है। इस तरह अनवरत प्रयास, लगातार कोशिश, बार-बार असफल होने के बावजूद विकास-क्रम को कायम करता है।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत कविता में कवयित्री ने बालक के अनवरत प्रयास, उसकी चंचलता एवं स्मरण-विस्मरण को बड़े ही सुन्दर भाव में प्रस्तुत किया है। खरगोश, गमला एवं घड़ा की प्रतीकात्मकता अक्षर-ज्ञान के लिए सरलतम मार्ग है। इस बात की झलक सहज भाव में कराया गया है।

(ङ) काव्य-सौंदर्य-
(i) इस कविता की शैली चित्रात्मक है।
(ii) वात्सल्य रस की पुट है।
(iii) भाषा सरल और सुबोध है।

ङ पर आकर थमक जाता है
उससे नहीं सधता है ‘ङ’।
“ङ’ के ‘ड’ को वह समझता है ‘माँ’
और उसके बगल के बिंदु (.) को मानता है
गोदी में बैठा ‘बेटा’
माँ-बेटे सधते नहीं उससे
और उन्हें लिख लेने की
अनवरत कोशिश में
उसके आ जाते हैं आँसू।।
पहली विफलता पर छलके ये आँसू ही
हैं शायद प्रथमाक्षर
सृष्टि की विकास-कथा के।

प्रश्न
(क) कवयित्री एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखिए।
(ग) काव्यांश का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता- अक्षर-ज्ञान।
कवयित्री- अनामिका।

(ख) प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश में कवयित्री बालक के अक्षर-ज्ञान के प्रयास का चित्रण करते हुए कहती है कि ‘ड’ माँ का प्रतीक है और (.) बिन्दु बेटे का साथ ही ‘ङ’ माँ की गोद में बैठे बेटे का। ‘ङ’ को सीखने का प्रयास कठिनतम लगता है और इस क्रम में आँसू आ जाता है। आँसू आ जाना कठिन मेहनत से जूझने का प्रतीक है। साथ ही विकास का क्रम की आशय को अभिव्यक्त करते हुए कहती हैं कि विकास की पहली सीढ़ी वही चढ़ता है जो आशा नहीं खोता, आशान्वित रहते हुए, असफलताओं को धक्का देते हुए, अनवरत प्रयासरत रहकर आगे बढ़ता रहता है।

(ग) सरलार्थ- प्रस्तुत पद्यांश में कवयित्री ने अक्षर-ज्ञान प्राप्त कर रहे बच्चे का मनोरम चित्रण किया है। बालक ‘ङ’ को साधने का प्रयास करता है लेकिन सधता नहीं है। फिर भी बालक रुकता नहीं भले ही उसे इसे साधने में आँसू आ जाएँ। अनवरत प्रयास सफलता का द्योतक है, विकास का सूत्र है ऐसा बताया गया है।

कवयित्री कहती है कि माँ-बेटे अर्थात् ‘ङ’ व अक्षर को सीखने में बार-बार असफलता हाथ लगती है। यहाँ तक कि उसे सीखने में असफल होने पर आँसू आ जाते हैं। फिर भी बालक सीखने हेतु जूझते रहता है और विकास-क्रम का प्रथम चरण को छू लेता है। इसमें कहा गया है कि बालक की ज्ञान प्राप्ति कौतुकतापूर्ण एवं कठिनतम होता है। फिर भी अनवरत प्रयास, जिज्ञासा उसे पीछे नहीं मुड़ने देती और विफलताओं का डटकर सामना करते हुए अपने साध्य को साध लेता है। जीवन के विकास कथा का यही मूल मंत्र है। केवल अक्षर ज्ञान नहीं बल्कि सृष्टि का विकास-कथा भी अनवरत प्रयास परिश्रम, विफलता, आशा और जिज्ञासा से युक्त रही है।

(घ) भाव-सौंदर्य– प्रस्तुत काव्यांश में बाल मनोविज्ञान का यथार्थ चित्रण हुआ है। छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान सीखने की प्रक्रिया में माँ की कोमलता और ममता का महत्त्वपूर्ण स्थान माना गया है। अक्षर ज्ञान छोटे बच्चों के निरंतर प्रयास को सम्पूर्ण सफलता का अंतिम चरण माना गया है।

(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) खड़ी बोली की इस कविता में तद्भव एवं देशज शब्दों का प्रयोग मार्मिकता ला देता है।
(ii) बाल मनोविज्ञान का अनोखा सामंजस्य होने के कारण भाषा सरल और सुबोध है।
(iii) यह कविता पूर्णरूपेण चित्रात्मक शैली में लिखित है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
‘अक्षर-ज्ञान’ किस कवि की रचना है ?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) रामधारी सिंह दिनकर
(ग) रेनर मारिया रिल्के
(घ) अनामिका
उत्तर-
(घ) अनामिका

प्रश्न 2.
अनामिका किस काल की कवयित्री हैं ?
(क) रीतिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) समकालीन
(घ) आदिकाल
उत्तर-
(ग) समकालीन

प्रश्न 3.
चौखट में बेटे का क्या नहीं अँटता?
(क) क
(ख) ख
(ग) ग
(घ) घ
उत्तर-
(क) क

प्रश्न 4.
बच्चा कहाँ आकर थमक जाता है ?
(क) ‘ख’ पर
(ख) ‘ग’ पर
(ग) ‘घ’ पर
(घ) ‘ङ’ पर
उत्तर-
(घ) ‘ङ’ पर

प्रश्न 5.
कवियत्री अनामिका के अनुसार सृष्टि की विकास-कथा के प्रथमाक्षर क्या हैं ?
(क) सफलता की खुशी
(ख) विफलता के आँसू
(ग) मुक्ति की खोज
(घ) सुख की प्राप्ति
उत्तर-
(ख) विफलता के आँसू

प्रश्न 6.
काव्य-रचना के अलावा अनामिका किन विधाओं में सक्रिय हैं ?
(क) गद्य लेखन और आलोचना
(ख) नाट्य-लेखन
(ग) पत्रकारिता
(घ) उपन्यास-लेखन
उत्तर-
(क) गद्य लेखन और आलोचना

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
………समकालीन हिन्दी कविता की महत्त्वपूर्ण कवयित्री हैं।
उत्तर-
अनामिका

प्रश्न 2.
अनामिका का जन्म में हुआ।
‘उत्तर-
मुजफ्फरपुर

प्रश्न 3.
कबूतर ही है.न ……….जाता है जरा-सा।
उत्तर-
फुदक

प्रश्न 4.
…………से उतर जाता है उसका ‘ख’
उत्तर-
पक्ति

प्रश्न 5.
‘ङ’ के ‘ड’ को वह समझता है ………. ।
उत्तर-
माँ

प्रश्न 6.
…….. सधते नहीं उससे।
उत्तर-
माँ-बेटे

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अनामिका को अब तक कौन-कौन पुरस्कार प्राप्त हुए हैं?
उत्तर-
अनामिका को अबतक राष्ट्रभाषा परिषद पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, ऋतुराज साहित्यकार सम्मान और गिरिजा कुमार माथुर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 2.
अनामिका की रचनाएँ किस लिए जानी जाती हैं ?
उत्तर-
अनामिका की रचनाएँ समसामचिक बोध और समाज के वंचितों के प्रति सहानुभूति
के लिए जानी जाती हैं।

प्रश्न 3.
किस अक्षर को लिखने की अनवरत् कोशिश में बालक के आँसू निकल आते हैं ?
उत्तर-
‘ङ’ लिखने की अनवरत् कोशिश में बच्चे के आँसू निकल आते हैं।

प्रश्न 4.
बच्चे की आँखों में आँसू क्यों निकलते हैं ?
उत्तर-
बच्चे की आँखों से आँसू न लिखने की विफलता पर निकलते हैं।

प्रश्न 5.
कवियत्री की दृष्टि में विफलता के आँसू क्या हैं ?
उत्तर-
कवियत्री की दृष्टि में विफलता के आँसू सृष्टि की विकास-कथा के प्रथमाक्षर हैं।

व्याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
चौखटे में नहीं अँटता
बेटे का ‘क’
कबूतर ही है न-
फुदुक जाता है जरा-सा!
पंक्ति से उतर जाता है
उसका ‘ख’
खरगोश की खालिस बेचैनी में !
गमले-सा टूटता हुआ उसका ‘ग’
“घड़े-सा लुढ़कता हुआ उसका ‘घ’
“ड’ पर आकर थमक जाता है
उससे नहीं सधता है ‘ङ’।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘अक्षर-ज्ञान’ काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन काव्य पंक्तियों का प्रसंग मनुष्य के बचपन में अक्षर-ज्ञान से है। कवयित्री का कहना है कि बेटा इतना अबोध है कि उसका ‘क’ बनाये गए कोष्ठकों यानी चौखटे में नहीं अँटता है। ‘क’ से कबूतर की संज्ञा देते हुए बच्चा लिखता है बच्चे में और कबूतर में समानता झलकती है। दोनों फुदकने, कूदने, स्वछंद विचरण करने की अवस्था में हैं। दोनों की प्रकृति मिलती-जुलती है। ‘क’ लिखने के क्रम में कोष्ठक से अक्षर इधर-उधर बढ़ जाता है। जिस प्रकार कबूतर स्थिर नहीं सका ठीक उसी प्रकार ‘क’ भी कोष्ठक में नहीं अँटता। कोठे से बाहर इधर-उधर बढ़ जाता है वह कोठे की सीमा-रेखा को लाँघ जाता है। ‘ख’ भी खरगोश की तरह लिखता है ‘ख’ लिखने में भी खरगोश सदृश वह खेसा करता है जिससे ठीक कोई में वह नहीं अँटता।

‘ग’ भी वह ऐसा लिखता है मानो टूटे हुए गमले को दिखाता हो ! वह घड़े की तरह लुढ़कते रूप में ‘घ’ लिखता है। कहने का मूल भाव यह है कि बचपन तो बचपन होता है। उसमें अबोधता, अल्पज्ञता और मासूमियत होती है। चंचलता और निर्मलता का भाव होता है। कबूतर, खरगोश और घड़ा, ये ऐसे प्रतीक रूप हैं जिनसे बच्चे का मनोविज्ञान जुड़ा हुआ है। अक्षर-ज्ञान के क्रम में इन पक्षियों, जंतुओं और पात्रों से उसके बाल-मन पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। यहाँ मनोवैज्ञानिक भाव दिखाये गए हैं। बचपन में बच्चा कैसे अक्षर-ज्ञान की ओर उन्मुख होता है और धीरे-धीरे अक्षर-ज्ञान से परिचित होता है। ‘ङ’ पर उसके हाथ रुक जाते हैं। वह ‘ङ’ लिखने में दिक्कतों का अनुभव करता है। बच्चा ङ को माँ और उससे सटं शून्य को बेटा का रूप मानकर अक्षर-ज्ञान सीखता है।

इस अक्षर-ज्ञान द्वारा कवयित्री ने सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक भावों, हमारी सृष्टि की क्षमता का सूक्ष्म चित्रण, सृजन की महत्ता और माँ-बेटे के रिश्ते को ‘ङ’ अक्षर के माध्यम से प्रदर्शित किया है, व्याख्यायित किया है। यहाँ सरल भाव के साथ गूढ़ भावार्थ भी कविता में निहित है। इसमें बचपन से लेकर सृष्टि की सूक्ष्म व्याख्या भी कवयित्री ने अक्षर-ज्ञान के माध्यम से हमें करायी है। इसमें मनोवैज्ञानिक स्थितियों का सूक्ष्म चित्रण भी है।

प्रश्न 2.
ङ के ‘ड’ को वह समझता है ‘माँ’
और उसके बगल के बिन्दु (.) को मानता है
गोदी में बैठा ‘बेटा’
माँ-बेटे सधते नहीं उससे
और उन्हें लिख लेने की
अनवरत कोशिश में
उसके आ जाते हैं आँसू।
पहली विफलता पर छलके ये आँसू ही
हैं शायद प्रथमाक्षर
सृष्टि की विकास-कथा के।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के अक्षर-ज्ञान काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग बच्चे के अक्षर-ज्ञान के साथ सृष्टि की सृजन-प्रक्रिया से भी है। यहाँ अक्षर-ज्ञान का वर्णन तो हुआ ही है—माँ-बेटे के बीच के कोमल संबंधों की सूक्ष्म व्याख्या भी की गयी है। कवयित्री अक्षर-ज्ञान के बहाने बच्चे के उर्वर मस्तिष्क के प्रति भी हमें आकृष्ट करती है। यहाँ ‘ङ’ अक्षर-ज्ञान के सिलसिले में बच्चा को माँ के रूप में देखता है तथा ङ के पेट में जो (.) बिन्दु है उसे बेटा मानता है। कवयित्री की सूक्ष्म एवं पैनी दृष्टि की दाद देनी होगी। बच्चे को अक्षर-ज्ञान के साथ सृष्टि के सृजनकारी रूपों से भी परिचय कराती है। यहाँ एक साथ दो ज्ञान उपलब्ध कराकर सज्ञान बनाना अत्यंत ही चिंतन का विषय है।

माँ-बेटे के कोमल एवं प्राकृतिक संबंधों को एक अक्षर ‘ङ’ के माध्यम से व्यक्त कर कवयित्री ने अपनी काव्य प्रतिभा के साथ तेजस्विता का भी परिचय दिया है। माँ बेटे को बार-बार अक्षर-ज्ञान कराकर उसे सिद्ध रूप में स्थिर कर देना चाहती है लेकिन बच्चा अबोध और चंचल है। बार-बार कोशिश के बावजूद भी वह थक जाता है। कभी रोने लगता है। यह उसकी विफलता के आँसू हैं। लेकिन इन आँसुओं में, प्रथमाक्षर-ज्ञान में सृष्टि की विकास-कथा भी छिपी हुई है। अंध युग से अपनी यात्रा को अबाध गति से ले चलते हुए मनुष्य आज यहाँ तक आया है। उसका बचपन उसकी प्रौढ़ता में ढल चुका है। उसका ‘क’ उसकी कुशलता के रूप में दिखायी पड़ता है।
आज वह धीरे-धीरे चलकर विकास-यात्रा के लक्ष्य शिखर तक पहुँच पाया है। उसको इस यात्रा में अनेक यंत्रणाओं, संघर्षों को झेलना पड़ा है।

अक्षर-ज्ञान कवित्री परिचय

समकालीन हिंदी कविता में अपनी एक अलग पहचान रखनेवाली कवयित्री अनामिका का जन्म 17 अगस्त 1961 ई० में मुजफ्फरपुर, बिहार में हुआ । उनके पिता श्यामनंदन किशोर हिंदी के गीतकार और बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष थे । अनामिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम० ए० किया और वहीं से पीएच० डी० की उपाधि पायी। सम्प्रति, वे सत्यवती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में प्राध्यापिका हैं।
अनामिका कविता और गद्य लेखन में एकसाथ सक्रिय हैं । वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखती – हैं। उनकी रचनाएँ हैं – काव्य संकलन : ‘गलत पते की चिट्ठी’, ‘बीजाक्षर’, ‘अनुष्टुप’ आदि आलोचना : ‘पोस्ट-एलिएट पोएट्री’, ‘स्त्रीत्व का मानचित्र’ आदि । संपादन : ‘कहती हैं औरतें’ ‘(काव्य संकलन) । अनामिका को राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर पुरस्कार ऋतुराज साहित्यकार सम्मान आदि प्राप्त हो चुके हैं।

एक कवयित्री और लेखिका के रूप में अनामिका अपने वस्तुपरक समसामयिक बोध और संघर्षशील वंचित जन के प्रति रचनात्मक सहानुभूति के लिए जानी जाती हैं । स्त्री विमर्श में सार्थक हस्तक्षेप करने वाली अनामिका अपनी टिप्पणियों के लिए भी उल्लेखनीय हैं।

प्रस्तुत कविता समसामयिक कवियों की चुनी गई कविताओं की चर्चित शृंखला ‘कवि ने कहा’ से यहाँ ली गयी है । प्रस्तुत कविता में बच्चों के अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया के कौतुकपूर्ण वर्णन-चित्रण द्वारा कवयित्री गंभीर आशय व्यक्त कर देती हैं।

अक्षर-ज्ञान Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

समकालीन हिन्दी कविता में अपनी एक अलग पहचान रखने वाली कवयित्री और लेखिका के रूप में अनामिका अपने वस्तु परक और समसामयिक बोध और संघर्षशील वंचित जन के प्रति रचनात्मक सहानुभूति के लिए जानी जाती है। स्त्री विमर्श में सार्थक हस्तक्षेप करनेवाली अनामिका अपनी टिप्पणियों के लिए भी उल्लेखनीय हैं।

प्रस्तुत कविता समसामयिक कवियों की चुनी गई कविताओं की चर्चित श्रृंखला ‘कवि ने कहा’ से यहाँ ली गयी है। प्रस्तुत कविता में बच्चों के अक्षर ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। बच्चों का अक्षर ज्ञान वैविध्यपूर्ण होता है। उसके मनोभावों को पढ़ना और उसके सहज बोध के द्वारा सीखाना अध्यापक अध्यापिका की शिक्षण कला का प्रदर्शन होता है। बच्चों को पढ़ाने के लिए स्वयं बच्चा बनना पड़ता है। माँ पहली अध्यापिका होती है। जीवन बोध की पहला अक्षर ज्ञान उसी के द्वारा प्राप्त होता है। ‘क’ लिखाने की प्रक्रिया पूरी भी नहीं होती है कि ‘ख”आकर नीचे उत्तर जाती है। ‘ग’ में बेचैनी दिखती है कि ‘घ’ घड़ा की तरह लुढ़क जाता है। वस्तुतः कवयित्री माँ और बेटे के माध्यम से अक्षर ज्ञान को सहज बोध को अपने ढंग से प्रस्तुत करना चाहती है। माँ-बेटे अक्षर ज्ञान के लिए अथक परिश्रम करते हैं फिर भी असफलता ही हाथ  लगती है। पहली विफलता पर आँसू छलक जाते हैं। ये आँसू ही अक्षर-ज्ञान का पहला अक्षर हैं। सृष्टि की विकास की कथा इसी अक्षर ज्ञान से लिखी हुई है।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 8 जित-जित मैं निरखत हूँ

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 8 जित-जित मैं निरखत हूँ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 8 जित-जित मैं निरखत हूँ

Bihar Board Class 10 Hindi जित-जित मैं निरखत हूँ Text Book Questions and Answers

वोध और अभ्यास

पाठ के साथ

Jit Jit Main Nirkhat Hun Bihar Board प्रश्न 1.
लखनऊ और रामपुर से बिरजू महाराज का क्या संबंध है ?
उत्तर-
लखनऊ में बिरजू महाराज का जन्म हुआ था। और बहनों का जन्म रामपुर में। रामपुर में बिरजू महाराज काफी दिन रहे।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
रामपुर के नवाब की नौकरी छुटने पर हनुमान जी को प्रसाद क्यों चढ़ाया ?
उत्तर-
रामपुर के नवाब की नौकरी छूटने पर हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया क्योंकि महाराज जी छह साल की उम्र में नवाब साहब के यहाँ नाचते थे। अम्मा परेशान थी। बाबूजी नौकरी छूटने । के लिए हनुमान जी का प्रसाद माँगते थे। नौकरी से जान छूटी इसलिए हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया गया।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 3.
नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके सम्पर्क में आए ?
उत्तर-
पहले-पहल उन्होंने निर्मला जी के स्कूल दिल्ली में हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक से जुड़े। वहाँ वे कपिला जी, लीला कृपलानी आदि के संपर्क में आये।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 4.
किनके साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला?
उत्तर-
कलकत्ता में बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला। इसमें शम्भू महाराज चाचा जी और बाबू जी दोनों नाचे।

Bihar Board 10th Hindi Book प्रश्न 5.
बिरजू महाराज के गुरु कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दें।
उत्तर-
बिरजू महाराज के गुरु उनके बाबूजी थे। वे अच्छे स्वभाव के थे। वे अपने दुःख को व्यक्त नहीं करते थे। उन्हें कला से बेहद प्रेम था। जब बिरजू महाराज साढ़े नौ साल के थे, उसी समय बाबूजी की मृत्यु हो गई। महाराज को तालीम बाबूजी ने ही दिया।

Class 10th Hindi Bihar Board प्रश्न 6.
बिरजू महाराज ने नृत्य की शिक्षा किसे और कब देने शुरू की?
उत्तर-
बिरजू महाराज ने नृत्य की शिक्षा रश्मि जी को करीब 56 के आसपास जब उन्हें सीखने वाले की खोज थी, देनी शुरू की। उस समय महाराज को सही पात्र की खोज थी।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution In Hindi Pdf Download प्रश्न 7.
बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुःखद, समय कब आया ? उससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
जब महाराज जी के बाबूजी की मृत्यु हुई तब उनके लिए बहुत दुखदायी समय व्यतीत हुआ। घर में इतना भी पैसा नहीं था कि दसवाँ किया जा सके। इन्होंने दस दिन के अन्दर दो प्रोग्राम किए। उन दो प्रोग्रामों से 500 रु० इकट्ठे हुए तब दसवाँ और तेरह की गई। ऐसी हालत में नाचना एवं पैसा इकट्ठा करना महाराजजी के जीवन में दु:खद समय आया।

Class 10th Hindi Godhuli Question Answer प्रश्न 8.
शंभू महाराज के साथ बिरजू महाराज के संबंध में प्रकाश डालिए।
उत्तर-
शंभू महाराज के साथ बिरजू महाराज बचपन में नाचा करते थे। आगे भारतीय कला केन्द्र में उनका सान्निध्य मिला। शम्भ महाराज के साथ सहायक रहकर कला के क्षेत्र में विकास किया। शम्भू महाराज उनके चाचा थे। बचपन से महाराज को उनका मार्गदर्शन मिला।

Hindi Bihar Board Class 10 Bihar Board प्रश्न 9.
कलकत्ते के दर्शकों की प्रशंसा का बिरजू महाराज के नर्तक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
कलकत्ते के एक कांफ्रेंस में महाराजजी नाचे। उस नाच की कलकत्ते के श्रोताओं दर्शकों ने प्रशंसा की। तमाम अखबारों में छा गये। वहाँ से इनके जीवन में एक मोड़ आया। उस समय से निरंतर आगे बढ़ते गये।

प्रश्न 10.
संगीत भारती में बिरजू महाराज की दिनचर्या क्या थी?
उत्तर-
संगीत भारती में प्रारंभ में 250 रु० मिलते थे। उस समय दरियागंज में रहते थे। वहाँ से प्रत्येक दिन पाँच या नौ नंबर का बस पकड़कर संगीत भारतीय पहुँचते थे। संगीत भारती में इन्हें प्रदर्शन का अवसर कम मिलता था। अंततः दुःखी होकर नौकरी छोड़ दी।

प्रश्न 11.
बिरजू महाराज कौन-कौन से वाद्य बजाते थे।
उत्तर-
सितार, गिटार, हारमोनियम, बाँसुरी, तबला और सरोद।

प्रश्न 12.
अपने विवाह के बारे में बिरजू महाराज क्या बताते हैं ?
उत्तर-
बिरजू महाराज की शादी 18 साल की उम्र में हुई थी। उस समय विवाह करना महाराज अपनी गलती मानते हैं। लेकिन बाबूजी की मृत्यु के बाद माँ ने घबराकर जल्दी में शादी कर दी। शादी को नुकसानदेह मानते हैं। विवाह की वजह से नौकरी करते रहे।

प्रश्न 13.
बिरजू महाराज की अपने शागिर्दो के बारे में क्या राय है?
उत्तर-
बिरजू महाराज अपने शिष्या रश्मि वाजपेयी को भी अपना शार्गिद बताते हैं। वे उन्हें शाश्वती कहते हैं। इसके साथ ही वैरोनिक, फिलिप, मेक्लीन, टॉक, तीरथ प्रताप प्रदीप, दुर्गा इत्यादि को प्रमुख शार्गिद बताये हैं। वे लोग तरक्की कर रहे हैं, प्रगतिशील बने हुए हैं, इसकी भी चर्चा किये हैं।

प्रश्न 14.
व्याख्या करें
(क) पांच सौ रुपए देकर मैंने गण्डा बंधवाया।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संबंध बिरजू महाराज से है।
बिरजू महाराज को शिक्षा उनके पिताजी से ही मिली थी। वे ही उनके आरंभिक गुरु थे। गुरु-दक्षिणा में पिताजी ने अम्मा से कहा कि जबतक तुम्हारा लड़का नजराना यानी गुरु दक्षिणा नहीं देगा तबतक मैं उसे गण्डा नहीं बांधूंगा। बिरजूजी को 500/- पाँच सौ रुपये के दो प्रोग्राम मिले थे। जब बिरजूजी ने 500 रुपये पिताजी को दिया, तभी पिताजी ने गंडा बाँधा। उन्होंने कहा कि यह दक्षिणा मेरी है अतः, इसमें से एक भी पैसा नहीं दूंगा। मैं इसका गुरु हूँ और इसने नजराना मुझे दिया है तब 500 रुपये देकर बिरजूजी ने अपने पिता से गंडा बंधवाया।

इन पंक्तियों से आशय यह झलकता है कि गुरु-शिष्य की परंपरा बड़ी पवित्र परंपरा है। इसकी मर्यादा रखनी चाहिए। तभी तो पिता-पुत्र का संबंध रहते हुए बिरजू महाराज के पिताजी ने गुरु-शिष्य का संबंध रखा, पिता-पुत्र का नहीं। गुरु-दक्षिणा में 500/- रुपये लेकर ही गंडा बाँधा। इस प्रकार गुरु की महिमा बड़ी है। मर्यादायुक्त है, उसकी रक्षा होनी चाहिए।

(ख) मैं कोई चीज चुराता नहीं हूँ कि अपने बेटे के लिए ये रखना है, उसको सिखाना है।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक से ‘जित जित मैं निरखत हूँ’ पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संबंध बिरजू महाराज के गुरु-शिष्य संबंध से है। जब बिरजूजी किसी को नृत्य सिखाते थे तो कोई भी कला चुराते नहीं थे। यानी लड़का-लड़की का भेदभाव नहीं रखते थे। समान व्यवहार और समान शिक्षा देते थे। यह नहीं कि किसी को किसी भाववश कुछ सिखाया और कुछ चुरा लिया। अपने बेटे और अन्य शिष्यों में भी कोई भेदभाव नहीं रखते थे।

उनकी शिष्यों के प्रति उदार भावना थी और भीतर मन में किसी भी प्रकार की कलुषित भावना नहीं थी।
उनमें यह भेद नहीं था कि बेटे के लिए अच्छी चीजों को चुराकर रखना है, दूसरों को आधी-अधूरी शिक्षा देनी है।
इन पंक्तियों में बिरजूजी के मनोभावों का पता चलता है। उनमें पुत्र-शिष्य का लड़का-लड़की का भेदभाव नहीं था। विचार में पवित्रता और गुरु की सदाशयता थी।

(ग) मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ। उस नाचने वाले कार
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘जित-जित मैं निरखत’ हूँ। पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संबंध लेखक के नृत्य और उनके व्यक्तिगत जीवन से है। बिरजूजी का कहना है कि मेरे नाच पर बहुत लोग खुश हो जाते हैं, देखने आते हैं, ये मेरे चाहनेवाले हैं, मरे आशिक हैं। लेकिन फिर बिरजू महाराज स्वयं को प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि मेरा क्या? लोग तो मेरे
नृत्य की वजह से मेरी तारीफ करते हैं, मुझे चाहते हैं। मेरे और लोगों के बीच जो प्रेम-संबंध है वह तो नाच के कारण है। उसमें मैं कहाँ। वहाँ तो कला है, नाच है। मैं तो उस नाच का ‘ असिस्टेंट हूँ। सहायक हूँ।

इन पंक्तियों में बिरजूजी अपने को और नाच के बीच लोगों के प्यार, स्नेह, सम्मान की चर्चा करते हुए कहते हैं कि सम्मान मेरा नहीं मेरे नाच का है। मैं तो उसका सहायक हूँ। इस प्रकार कला या गुण सर्वोपरि है। आदमी कुछ नहीं है। उसकी गुणवत्ता की पूजा होती है, सम्मान मिलता है।

प्रश्न 15.
विग्ज महाराज अपना सबसे बड़ा जज किसको मानते थे?
उत्तर-
बिरजू महाराज अपना सबसे बड़ा जज अपनी अम्मा को मानते थे। जब वे नाचते थे और अम्मा देखती थी तब वे अम्मा से अपनी कमी या अच्छाई के बारे में पूछा करते थे। उसने बाबूजी से तुलना करके इनमें निखार लाने का काम किया।

प्रश्न 16.
पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं ?
उत्तर-
पुराने नर्तक कला प्रदर्शन करते थे। कला प्रदर्शन शौक था। साधन के अभाव में भी उत्साह होता था। कम जगह में गलीचे पर गड्ढा, खाँचा इत्यादि होने के बावजूद बेपरवाह होकर कला प्रदर्शन करते थे। लेकिन आज के कलाकार मंच की छोटी-छोटी गलतियों को ढूंढते हैं। चर्चा का विषय बनाते हैं। उस समय न एयर कंडीशन होता, न ही बहुत अधिक अन्य सुविधाएँ। उसके बावजूद उत्साह था, लेकिन आज सुविधा की पूर्णता होते हुए भी मीन-मेख निकालने की परिपाटी विकसित हुई है।

प्रश्न 17.
पांच सौ रुपए देकर गण्डा बंधवाने का क्या अर्थ है?
उत्तर-
बिरजू महाराज के पिता ही उनके गुरु थे। उनके पिता में गुरुत्व की भावना थी। बिरजू महाराज अपने गुरु के प्रति असीम आस्था और विश्वास व्यक्त करते हुए अपने ही शब्दों में कहते हैं कि यह तालीम मुझे बाबूजी से मिली है। गुरु दीक्षा भी उन्होंने ही मुझे दी है। गण्डा भी उन्होंने ही मुझे बांधा। गण्डा का अभिप्राय यहाँ शिष्य स्वीकार करने की एक लौकिक परंपरा का स्वरूप है। जब बिरजू महाराज के पिता उन्हें शिष्य स्वीकार कर लिये तो बिरजू महाराज ने गुरु दक्षिणा के रूप में अपनी कमाई का 500 रुपये उन्हें दिये।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
काल रचना स्पष्ट करें
(क) ये शायद 43 की बात रही होगी।
उत्तर-
1943 ई की।

(ख) यह हाल अभी भी है।
उत्तर-
1943 ई की।

(ग) उस उम्र में न जाने क्या नाचा रहा होऊँगा।
उत्तर-
5 वर्ष की उम्र में (43 ई. में)

(घ) अब पचास रुपये में रिक्शे पर खर्च करता तो क्या बचता, और ट्यूशन में नागा हो तो पैसा अलग काट लेते थे।
उत्तर-
1948 ई. में।

(ङ) पचास रुपए में काम करके किसी तरह पढ़ता रहा मैं।
उत्तर-
1948 ई।

प्रश्न 2.
चौदह साल की उम्र में, जब मैं वापस लखनऊ आया फेल होकर, तब कपिला जी अचानक लखनऊ पहुंची मालूम करने कि लड़का जो है वह कुछ करता भी है या आवारा या गिटकट हो गया, वह है कहाँ।
उत्तर-
चौदह साल की उम्र में फेल होकर लखनऊ आया कपिला जी अचानकं लखनऊ आकर पता किया कि लड़का क्या कर रहा है।

(ख) वह तीन साल मैं खूब रियाज किया, मतलब यही सोचकर कि यही टाइम है अमर कुछ बढ़ना है तो अंधेरा करा किया करके करता था जब बाद में थक जाऊँ मैं तो जो भी साज हाथ आए कभी सितार, कभी गिटार, कभी हारमोनियम लेकर बजाऊं मतलब रिलैक्स होने के लिए।
उत्तर-
अंधेरा कमरा करके तीन साल मैं खूब रियाज किया और थक जाने पर सितार, गिटार, हारमोनियम रिलेक्स के लिए बजाता।

प्रश्न 3.
पाठ से ऐसे दस वाक्यों का चयन कीजिए जिससे यह साबित होता हो कि ये वाक्य आमने-सामने बैठे व्यक्तियों के बीच की बातचीत के हैं, लिखित भाषा के नहीं।
उत्तर-
(क) जन्म मेरा लखनऊ के जफरीन अस्पताल में 1938, 4 फरवरी, शुक्रवार, सुबह 8 बजे।
(ख) आपको मंच का कुछ अनुभव या संस्मरण बचपन के हैं।
(ग) आपको आगे बढ़ाने में अम्मा जी का बहुत बड़ा हाथ है।
(घ) अपने शार्गिों के बारे में बताएँ।
(ङ) अब तुम हो इतने अर्से से।
(च) शाश्वती लगी हुई है।
(छ) लड़कों में कृष्णमोहन, राममोहन को उतना ध्यान नहीं है।
(ज) आपको संगीत नाटक अकादेमी अवार्ड कब मिला। (अ) केशवभाई और मैं साथ ही रहते थे।
(अ) शागिर्द मैं बाबूजी का हूँ।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों से अव्यय का चुनाव करें।
(क) जब अंडा कहकर पूछे तो नहीं खाता था, पर जब मूंग की दाल कहें तो बड़े मजे से खा लेता था।
उत्तर-
जब, तो, पर, तो आदि।

(ख) एक सीताराम बागला करके लड़का था अमीर घर का।
उत्तर
एक करके।

(ग) बिलकुल पैसा नहीं था घर में कि उनका दसवाँ किया जा सके।
उत्तर-
बिलकुल, जा आदि।

(घ) फिर जब एक साल हो गया तो कहने लगे कि अब तुम परमानेंट हो गए।
उत्तर-
फिर, जब, एक, तो, अब आदि।

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1.बिरजू महाराज : जन्म मेरा लखनऊ के जफरीन अस्पताल में 1938, 4 फरवरी, शुक्रवार, सुबह 8 बजे; वसंत पंचमी के एक दिन पहले हुआ। घर में आखिरी सन्तान। तीन बहनों के बाद। सबसे छोटी बहन मुझसे आठ नौ साल बड़ी। अम्मा तब 28 के लगभग रही होंगी। बहनों का जन्म रामपुर में क्योंकि बाबूजी यहाँ 22 साल रहे। बड़ी बहन लगभग 15 साल बड़ी। उस समय बाबूजी रायगढ़ आदि राजांओं के यहाँ भी गए। मैं डेढ़ दो साल का था। उस समय विभिन्न राजा कुछ समय के लिए कलाकारों को माँग लिया करते थे। पटियाला भी गए थे पहले। रायगढ़ दो ढाई साल रहे होंगे। रामपुर लौटकर आए। रामपुर काफी अरसे रहे। जब पाँच छह साल के थे तो अकसर नवाब याद कर लिया करते थे। हलकारे आ गए तो जाना ही पड़ता था। चाहे जो भी वक्त हो।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) बिरजू महाराज का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
(ग) महाराज अपने माता-पिता की कौन-सी संतान थे ?
(घ) महाराज की बहनों का जन्म कहाँ हुआ था?
(ङ) बडी बहन महाराज से कितने बडी थी?
(च) बाबूजी रामपुर में कितने दिन रहे थे?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-जित-जित मैं निरखत हैं।
लेखक का नाम- पं बिरजू महाराज।
(ख) बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी, 1938 में जफरीन अस्पताल, लखनऊ में हुआ था।
(ग) महाराज अपने माता-पिता की आखिरी संतान थे।
(घ) महाराज की बहनों का जन्म रामपुर में हुआ था।
(ङ)बड़ी बहन महाराज से लगभग 15 साल बड़ी थी।
(च) बाबूजी रामपुर में 22 साल रहे थे।

2. छह साल की उम्र में मैं नवाब साहब को बहुत पसंद आ मया। मैं नाचता था जाकर। पीछे पैर मोड़कर बैठना पड़ता था। चूड़ीदार पैजामा साफा, अचकन पहन कर। अम्मा जी बेचारी बहुत परेशान। उन्होंने हमारे तनख्वाह भी बाँध दी थी। बाबूजी रोज हनुमानजी का प्रसाद माँगे कि 22 साल गुजर गए, अब नौकरी छूट जाए। नवाब साहब बहुत नाराज कि तुम्हारा लड़का नहीं होगा तो तुम भी नहीं रह सकते। खैर बाबू जी बहुत खुश हुए और उन्होंने मिठाई बांटी। हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया कि जान छूटी।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) कितने साल की उम्र में महाराज नवाब को पसंद आ गये थे।
(ग) बचपन में नवाब के समक्ष क्या पहनकर महाराज नाचते थे।
(घ) बाबूजी हनुमान जी का प्रसाद क्यों मांगते थे?
(ङ) बाबूजी हनुमान जी को प्रसाद क्यों चड़ाये ?
उत्तर-
(क)पाठ का नाम–जित-जित मैं निरखत हूँ। लेखक का नाम-बिरजू महाराज।
(ख) छह साल की उम्र में बिरजू नवाब को पसंद आ गये थे।
(ग) बचपन में महाराज चूड़ीदार पैजामा, साफा, अचकन पहनकर नवाब के समक्ष नाचते थे।
(घ) बाबूजीं चाहते थे कि नौकरी छूट जाए, इसलिए हनुमान जी का प्रसाद माँगते थे।
(ङ) नौकरी से जान छूटने की खुशी में हनुमान जी को प्रसाद चढ़ाया।

3. मेरी एक बड़ी खास आदत रही है, जैसे कि मेरे बाबूजी की भी थी कि जब शार्गिद को सिखा रहे हैं तो पूर्ण रूप से मेहनत कर सिखाना और अच्छा बना देना है। ऐसा बना देना कि मैं खुद हूँ। यह कोशिश है। पर अब भगवान की कृपा भी होनी चाहिए तब। मतलब कोशिश यही रहती है कि मैं कोई चीज चुराता नहीं हूं कि अपने बेटे के लिए ये रखना है उसको सिखाना है।

प्रश्न
(क) पाठ और वक्ता का नामोल्लेख करें।
(ख) बिरजू महाराज का यह कथन किस संदर्भ में है ?
(ग) बिरजू महाराज अपनी किस आदत के बारे में क्या बताते हैं?
उत्तर-
(क) पाठ-जित-जित मैं निरखत हूँ। वक्ता–बिरजू महाराज।
(ख) बिरजू महाराज का यह कथन शिष्यों की शिक्षा के संदर्भ में है।
(ग) बिरजू महाराज अपने शिष्यों को शिक्षा देने के संदर्भ में अपनी आदत का उल्लेख करते – हुए कहते हैं कि अपने पिता की तरह उनकी खास आदत रही है शिष्यों को मेहनत करके सिखाना और उन्हें अच्छा अपने जैसा बनाने की चेष्टा करना है। वे कहते हैं कि वे बेटों और शिष्यों में ‘ भेद नहीं करते। वे जो अपने बेटों-बेटियों को सिखाते हैं, वह सब कुछ अपने शिष्यों को भी सिखाते हैं।

4. बि.म:-अम्माजी का बहुत बड़ा हाथ है। अम्माजी ने तो शुरू से उन बुजुर्गों की तारीफ कर करके मेरे सामने हरदम कि, बेटा वो ऐसे थे, उनको कम-से-कम इतना नाम तो याद था उन बुजुर्गों का। अभी आप दूसरे किसी से पूछे घर में तो उन्हें नाम भी नहीं मालूम था कि कौन थे। चाची (शंभू महाराज की पत्नी) से आप पूछे महाराज बिन्दादीन के बाद पहले और कौन थे तो उनको नहीं मालूम। तुमरियाँ भी मैंने उनसे सीखीं। मेरी वाकई में गुरुवाइन थी; वो माँ तो थीं ही। गुरुवाइन भी। और जब भी मैं नाचता था तो सबसे बड़ा एक्जामिनर या जज अम्मा को समझता था। जब भी वो नाच देखती थीं तो मैं कहता था उनसे कि मैं कहीं गलत तो नहीं कर रहा हूँ। मतलब बाबूजी वाला ढंग है ना कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। तो कही नहीं बेटा नहीं। उन्हीं की तस्वीर हो। पर बैले वैले यह तो मेरा भैया क्रियेशन है। वो हरदम ऐसे ही कहती रहीं और लखनऊ के जो बुजुर्ग थे उनसे भी, गवाही ली मैंने। चेंज तो नहीं लग रहा है। “नहीं बेटा वही ढंग है। और तुम्हारा शरीर वगैरह टोटल ढंग वैसा ही है। बैठने का, उठने का, बात करने का। मतलब जैसा था उनका।

प्रश्न
(क) बिरजू को आगे बढ़ाने में किनका हाथ है?
(ख) बिरजू ने अपनी माँ को गुरुवाइन क्यों कहा है ?
(ग) नृत्य करते समय बिरजू अपना जज किसे मानते थे? और क्यों ?
(घ) बिरजू को गवाही लेने के लिए क्या करना पड़ता था ?
उत्तर-
(क) बिरजू को आगे बढ़ाने में उनकी मां का हाथ है।
(ख) बिरजू की माँ अक्सर पूर्वजों का गुणगान कर उनमें हौसला भरा करती थीं। किसी का नाम पूछने पर झट से बता देती थीं। नृत्य में, गलत होने पर समझा देती थीं। अपनी माँ को गुरुवाइन कहा है।
(ग) जज का काम न्याय करना होता है। न्याय के मंच पर बैठा हुआ व्यक्ति अपना-पराया नहीं देखता है। बिरजूजी की मां नृत्य करते समय अच्छे-बुरे की ताकीद किया करती थीं। अच्छा होने पर ही वह अच्छा कहती थीं।
(घ.) नृत्य अच्छा हुआ या नहीं इसके लिए बिरजू महाराज अपनी माँ को नियुक्त करते थे। गायन और नृत्य में कहीं अन्तर तो नहीं हुआ इसके लिए माँ से पूर्वजों का उदाहरण लिया करते थे। इतना ही नहीं लखनऊवासियों से भी हामी भरवाते थे।

5. रामपुर नवाब के महल में भी नाचा हूँ नेपाल महाराज के यहाँ भी नाचा हूँ और जमींदारों के यहाँ भी नाचा हूँ जहाँ का मैं अक्सर तमाशा सुनाता रहता हूँ कि जहाँ महफिल भी लगी है कि लड़का नाचेगा जरा चारों तरफ थोड़ा खिसककर जगह बनाओ तो सब खिसक जायें तो नीचे गलीचा गलीचे पर चांदनी और चाँदनी गलीचे के नीचे जमीन पर कहीं पर गड्ढे हैं कहीं पर खाँचा है मतलब यह सब नहीं कौन परवाह करे। आजकल हमारे नये डांसर हैं कि स्टेज बड़ा खराब है बड़ा टेढ़ा है बड़ा गड्ढा है। हम लोगों को यह सब सोचने का कहाँ मौका मिलता था। अब गर्मी के दिनों में जरा सोचो न एयरकंडीशन; न कुछ वो बड़े-बड़े पंखे लेकर जो नौकर-चाकर थे, वो हाँकते रहते थे। उनसे भी हाथ बचाना पड़ता था। नाचने में उससे न लड़ जायें कहीं। दूसरे कि गैस लाइट जल रही है उसकी भी गर्मी।

प्रश्न
(क) बिरजूजी का नृत्य कहाँ-कहाँ हुआ है ?
(ख) उस समय स्टेज की व्यवस्था कैसे होती थी?
(ग) पहले और आज के नर्तकों में क्या अन्तर है ?
(घ) सफल नर्तक की क्या पहचान है?
उत्तर-
(क) बिरजूजी का नृत्य रामपुर नवाब के महल में, नेपाल महाराज के भवन में, अनेक जमींदारों आदि के यहाँ हुआ है।
(ख) उस समय स्टेज की व्यवस्था अजीबोगरीब होती थी। न समुचित रोशनी की व्यवस्था होती और न ही समतल फर्श आदि की होती थी। नृत्य हो इसके लिए साधारण रूप से व्यवस्था कर दी जाती थी।
(ग) पहले के नर्तक अपनी कला को प्रदर्शन करना जानते थे। उन्हें वाद्य-संयंत्रों, बिजली आदि की व्यवस्था से उतना संबंध नहीं रहता था। जो था उसी पर वे अपनी कला प्रदर्शित कर देते थे। आज के नर्तक कला, प्रदर्शन नहीं बाह्य आडंबर प्रदर्शित करते हैं। आज के लिए उन्हें चकाचौंध स्टेज, परिपूर्ण वाद्य-यंत्र चाहिए।
(घ) सफल नर्तक रंगमंच से प्रभावित नहीं होता है। बल्कि अपनी कला का आत्मसात करना * चाहता है। कला प्रदर्शन की क्षमता ही सफल नर्तक की पहचान है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
बिरजू महाराज की ख्याति किस रूप में है ?
(क) शहनाईवादक
(ख) नर्तक
(ग) तबलावादक
(घ) संगीतकार
उत्तर-
(ख) नर्तक

प्रश्न 2.
बिरजू महाराज किस शैली के नर्तक हैं?
(क) कथक
(ख) मणिपुरी
(ग) कुचिपुडी
(घ) कारबा
उत्तर-
(क) कथक

प्रश्न 3.
बिरजू महाराज का संबंध किस घराने से है ?
(क) लखनऊ
(ख) डुमराँव
(ग) बनारस
(घ) किसी भी नहीं।
उत्तर-
(क) लखनऊ

प्रश्न 4.
“जित-जित मैं निरखत हूँ’-पाठ का संबंध किससे है ?
(क) शंभु महाराज
(ख) लच्छू महाराज
(ग) बिरजू महाराज
(घ) किशन महाराज
उत्तर-
(ग) बिरजू महाराज

प्रश्न 5.
बिरजू महाराज को संगीत नाटक अकादमी अवार्ड किस उम्र में मिला?
(क) 37 वर्ष
(ख) 27 वर्ष
(ग) 47 वर्ष
(घ) 57 वर्ष
उत्तर-
(ख) 27 वर्ष

प्रश्न 6.
‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ पाठ साहित्य की कौन-सी विधा है ?
(क) ललित निबंध
(ख) कहानी
(ग) कविता
(घ) साक्षात्कार
उत्तर-
(घ) साक्षात्कार

II. रिक्त स्थानों की पर्ति

प्रश्न 1.
बिरजू महाराज कथन के लालित्य के …… हैं।
उत्तर-
कवि

प्रश्न 2.
रश्मि वाजपेयी ……… पत्रिका की संपादिका है।
उत्तर-
‘नटरंग’

प्रश्न 3.
बिरजू महाराज का जन्म ……….. 1938 ई. को हुआ।
उत्तर-
4 फरवरी

प्रश्न 4.
शागिर्द मैं …………. का हूँ।
उत्तर-
बाबूजी

प्रश्न 5.
…………. भी मैंने उनसे सीखी।
उत्तर-
ठुमरियाँ

प्रश्न 6.
वैसे-वैसे मेरा …………… है।
उत्तर-
क्रियेशन

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लच्छु महाराज कैसे आदमी थे ?
उत्तर-
लच्छु महाराज शौकीन आदमी थे और अप-टू-डेट रहते थे।

प्रश्न 2.
बिरजू महाराज के पिता की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर-
बिरजू महाराज के पिता की मृत्यु 54 वर्ष की उम्र में लू लगने से हुई।

प्रश्न 3.
बिरजू महाराज कौन-कौन से वाद्य बजाते थे?
उत्तर-
बिरजू महाराज सितार, गिटार, बाँसुरी, हारमोनियम के अलावा तबला शौक के तौर पर बजाते थे।

प्रश्न 4.
बिरजू महाराज का जन्म कहाँ और कब हआ था?
उत्तर-
बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 ई में लखनऊ के जफरीन अस्पताल में हुआ था।

प्रश्न 5.
बिरजू महाराज किस घराने के कलाकार थे?
उत्तर-
बिरजू महाराज लखनऊ घराने के वंशज और उसकी सातवीं पीढ़ी के कलाकार थे।

प्रश्न 6.
बिरजू महाराज नृत्य की किस शैली के महान नर्तक थे ?
उत्तर-
बिरजू महाराज “कत्थक” नृत्य में पारंगत एक महान नर्तक थे।

प्रश्न 7.
बिरजू महाराज को नृत्य का प्रशिक्षण सर्वप्रथम किससे प्राप्त हुआ?
उत्तर-
बिरजू महाराज के प्रारम्भिक गुरु उनके पिताजी थे और उन्हें सर्वप्रथम प्रशिक्षण उनसे ही प्राप्त हुआ।

प्रश्न 8.
बिरजू महाराज ने सर्वप्रथम नृत्य का प्रदर्शन कब प्रारम्भ किया ?
उत्तर-
मात्र छः साल की उम्र में रामपुर के नवाब साहब की हवेली में उन्होंने नृत्य करना प्रारम्भ किया।

प्रश्न 9.
निर्मला जी कौन थीं तथा बिरजू महाराज का उनसे किस प्रकार का संबंध था अथवा किस प्रकार जुड़े ?
उत्तर-
निर्मला (जोशी) दिल्ली में हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक नामक संस्था चलाती थीं, जहाँ बिरजू महाराज ने लगभग तीन वर्षों तक कार्य किया।

प्रश्न 10.
लखनऊ और रामपुर से बिरजू महाराज का क्या संबंध है ?
उत्तर-
बिरजू महाराज का जन्म लखनऊ में हुआ था। रामपुर में महाराज जी का अत्यधिक समय व्यतीत हुआ था एवं वहाँ विकास का सुअवसर मिला था।

प्रश्न 11.
नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके संपर्क में आए?
उत्तर-
नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज जी दिल्ली में हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक से जुड़े और वहां निर्मला जी जोशी के संपर्क में आए।

प्रश्न 12.
किनके साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला?
उत्तर-
शम्भू महाराज चाचाजी एवं बाबूजी के साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला।

जित-जित मैं निरखत हूँ Summary in Hindi

पाठ का सारांश

जन्म मेरो लखनऊ के जफरीन अस्पताल में 1938, 4 फरवरी, शुक्रवार, सुबह 8 बजे : घर में आखिरी सन्तान। तीन बहनों के बाद। छह साल थी उम्र में मैं नवाब साहब को बहुत पसंद आ गया। मैं नवाब साहब के पास जाकर नाचता था।

वहाँ से फिर निर्मला जी के स्कूल में यहाँ दिल्ली में हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक में चले गए। यहाँ दो तीन साल काम करते रहे। ये शायद 43 की बात रही होगी।

जहाँ वे खुद नाचते तो पहले मुझे नचवाते थे और खूब जोरों से जमकर नाचता था। प्रायवेट प्रोग्राम जिनमें बाबू जी जाते थे जौनपुर, मैनपुरी, कानपुर, देहरादून, कलकत्ता, बंबई आदि, इनमें मुझे जरूर रखते थे। पहले इसीलिए कलकत्ते में बहुत मजा आया। उसमें फर्स्ट प्राइज मिलने वाला था। उसमें शम्भू महाराज चाचाजी और बाबू जी दोनों नाचे। पर उसमें फर्स्ट प्राइज मुझे मिला।

हाँ साढ़े नौ साल की उम्र में बाबू जी मृत्यु हो गई। मुझे तालीम बाबूजी से ही मिला। 500 रुपए देकर मैंने गण्डा बंधवाया। तो शागिर्द मैं बाबू जी का हूँ। उनके मरते ही हम लोगों के बहुत खराब दिन शुरू हो गए। कानपुर में दो ढाई साल रहा। आर्यानगर में 25-25 रुपए की दो ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। 50 रुपए में काम कर किसी तरह पढ़ता रहा मैं। पिताजी की मृत्यु के समय उनके श्राद्ध कर्म करने के लिए पैसे नहीं। दस दिन के अंदर मैंने दो प्रोग्राम किए। 500 रु. इकट्ठे हुए तो दसवाँ और तेरहवीं की गई।

चौदह साल का था तो संगीत भारती आया। मैंने यहाँ साढ़े चार साल काम किया। संगीत भारती की कमाई से मैंने एक साइकिल खरीदी थी जो मेरे पास आज भी है। और उस साइकिल को मैं नहीं बेचता।

खैर उसमें से रश्मि जी एक लड़की मिली थी। उन्हें पूरे मन से सिखाया। वो तालीम देखकर जो महाराज के यहाँ की लड़कियाँ अट्रेक्ट हुई। क्योंकि तालीम जरा अच्छी थी मेरी। संगीत भारती के जमाने में कलकत्ते में एक कांफ्रेंस में नाचा हूँ। कलकत्ते की ऑडियन्स ने मेरी बड़ी प्रशंसा की। इतनी की कि तमाम अखबारों में मैं छप गया एकदम। उसके बाद हरिदास स्वामी कांफ्रेंस बंबई ब्रजनारायण ने बुलाया। मेरा प्रोग्राम बहुत अच्छा हुआ। उसके बाद से बम्बई, कलकत्ते, मद्रास आदि जगहों पर मेरा प्रोग्राम होने लगा। विदेश दूर में सबसे पहले रूस गये। उसके बाद जर्मनी, जापान, हांगकांग, लाओस, बर्मा आदि।

अम्मा को मैं सबसे बड़ा जज मानता हूँ। जब वो नाच देखती तो मैं पूछता था कि मैं कहीं गलत तो नहीं कर रहा हूँ। मतलब बाबूजी वाला ढंग है ना कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। तो कहती नहीं बेटा नहीं। उन्हीं की तस्वीर हो।

शब्दार्थ

क्रोड़स्थ : गोद या अंक में स्थित
हलकार : संदेशवाहक, कारिंदा
साफा : साफ लंबा वस्त्र जिसे नर्तक कंधे से लेकर कमर तक लपेट लेता है
अचकन : पोशाक विशेष
मेजरमेंट : नाप, माप नाप, माप
मस्का : मक्खन (मस्का लगाना या मक्खन लगाना मुहावरा भी है)
परन : तबले के वे बोल जिन पर नर्तक नाचता और ताल देता है ‘
बंदिश : ठुमरी या अन्य प्रकार के गायन के बोल, स्थायी
दाल का चिल्ला : उबले हुए दाल को मसलकर बनाया गया व्यंजन
गण्डा बांधना : दीक्षित करना, शिष्य स्वीकार करना
नजराना : भेंट, उपहार, गुरुदक्षिणा
नागा : अनुपस्थित, हाजिर नहीं होना, गायब रहना
गिरहकट : पैंतरेबाज, गाँठ काट लेनेवाला, पाकेटमार विशेष
परमानेंट : स्थायी
चरण : छंद की एक इकाई
टुकड़े : किसी पद की पंक्ति
तिहाइयाँ : तीसरे हिस्से
बैले : यूरोपीय नृत्य विशेष जिसमें कथानक, भावाभिनय और नृत्य तीनों शामिल
होते हैं
अरसा : समय, अवधि
गलीचा : फर्श या बिस्तर जो नरम हो
मिजराब : सितार बजाने का एक तरह का छल्ला
लहरा : छंदमय आरोही गति जो भावप्रसंग के साथ हो ।
शागिर्द : शिष्य
लाजवाब : जिसका जवाब न हो, अद्वितीय, अनुपम

Bihar Board 9th English Objective Answers Chapter 2 Yayati

Bihar Board 9th English Objective Questions and Answers

BSEB Bihar Board 9th English Objective Answers Chapter 2 Yayati

 

Yayati Was A Brave Bihar Board Question 1.
Yayati was filled with
(a) Cruelness
(b) kindness
(c) sadness
(d) happiness
Answer:
(c) sadness

Yayati Question Answer Bihar Board Question 2.
Yayati went to Kubera’s
(a) form
(b) house
(c) park
(d) garden
Answer:
(d) garden

Yayati Class 9 Questions And Answers Question 3.
At kubera’s garden, Yayati spent many years with an
(a) apsara
(b) old lady
(c) old man
(d) saint
Answer:
(a) apsara

Yayati Class 9 Bihar Board Question 4.
Yayati realised that man’s desires can never be completely.
(a) unhappy
(b) satisfied
(c) completed
(d) unsatisfied
Answer:
(b) satisfied

Yayati Realised That Man’s Desire Question 5.
How many sons did Yayati have ?
(a) five
(b)three
(c) four
(d) one
Answer:
(a) five

Yayati Meaning Bihar Board Question 6.
Who showed great respect to his ancestor
(a) Puru
(b) Yayati
(c) The Pandavas
(d) Sukracharya
Answer:
(b) Yayati

Yayati Was A Brave Answer Bihar Board Question 7.
Yayati was a brave
(a) king
(b) fighter
(c) man
(d) minister
Answer:
(a) king

Yayati Was Brave Bihar Board Question 8.
Yayati was famous for his devotion to the welfare of his
(a) son
(b) subjects
(c) daughter
(d) father
Answer:
(b) subjects

Yayati Was A Brave King Bihar Board Question 9.
Yayati’s youngest son was
(a)Kunce
(b)Charu
(c) Puru
(d) Mayur
Answer:
(c) Puru

Puru The Brave Question And Answers Bihar Board Question 10.
Emperor Yayati had never been
(a) won
(b) lost
(c) conquest
(d) defeated
Answer:
(d) defeated

Puru The Brave Story In English Bihar Board Question 11.
Yayati was one of the ancestors of the
(a) Pandavas
(b) Kauravas
(c) Dashrath
(d) Ravana
Answer:
(a) Pandavas

Question 12.
Yayati has become old at an early age by the curse of
(a) Vishwamitra
(b) Sukracharya
(c) Brihshpati
(d) Kripacharya
Answer:
(b) Sukracharya

Question 13.
Yayati was full of sorrow at the refusal of the
(a) eldest son
(b) three sons
(c) third son
(d) four sons
Answer:
(d) four sons

Question 14.
In the end Yayati retired to
(a) his kingdom
(b) the forest
(c) Kubera’s garden
(d) heaven
Answer:
(b) the forest

Question 15.
Where did Yayati return after spending many years in Kubera’s garden?
(a) To Puru
(b) To his kingdom
(c) To his five sons
(d) To the forest
Answer:
(a) To Puru

Question 16.
Yayati became prematurely old by the curse of
(a) Sukracharya
(b) DronaCharya
(c) Vishwamitra
(d) Kripacharya
Answer:
(a) Sukracharya

Question 17.
Yayati had never known
(a) win
(b) defeat
(c) conquest
(d)lose
Answer:
(b) defeat

Question 18.
Yayati greatly respected his
(a) ancient
(b) old
(c) ancenstors
(d) forefather
Answer:
(c) ancenstors

Question 19.
The story of Yayati is taken from the
(a) Quran
(b) Bible
(c) Puran
(d) Mahabharata
Answer:
(d) Mahabharata

Question 20.
Sensual desire is never satisfied by ‘
(a) indulgence
(b) negligence
(c) gratitude
(d) magnitude
Answer:
(a) indulgence

Question 21.
Yayati was not devoid of sensual
(a) overcomes
(b) desires
(c) feeling
(d) attitude
Answer:
(b) desires

Question 22.
At last, Yayati returned and realised that sensual desire can not be
(a) quenched
(b) unsatisfied
(c) ignored
(d) remained
Answer:
(a) quenched

Question 23.
‘Yayati’ the story has been rendered in English by
(a) Kunal verma
(b) C. Rajgopalachari
(c) Moti Nisane
(d) Nehru
Answer:
(b) C. Rajgopalachari

Question 24.
C. Rajgopalachari became the first Indian Governor General of ………….. India on 15th Aug, 1947.
(a) dependent
(b) free
(c) independent
(d) undivided
Answer:
((c) independent

Question 25.
Yayati was one of the ancestores of the
(a) Kauravas
(b) Suryavanshi
(c) Drupadas
(d) Pandavas
Answer:
(d) Pandavas

Question 26.
Yayati became prematurely old by the Curse of Sukracharya for having wronged his wife
(a) Kalyani
(b) Devayani
(c) Dayamati
(d) Damyanti
Answer:
(b) Devayani

Question 27.
Yayati was struck with sorrow at the refusal of the
(a) three sons
(b) one son
(c) two sons
(d) four sons
Answer:
(d) four sons

Question 28.
Yayati became old due to
(a) hard work
(b) sickness
(c) curse
(d) illness
Answer:
(c) curse

Question 29.
Wife of Yayati was
(a) Dayamati
(b) Damyanti
(c) Devmani
(d) Devayani
Answer:
(d) Devayani

Question 30.
Yayati bad
(a) four sons
(b)two sons
(c) five sons
(d) three sons
Answer:
(c) five sons

Question 31.
Youngest son of Yayati was
(a) Kam
(b) Charu
(c) Piyush
(d) Puru
Answer:
(d) Puru

Question 32.
Who accepted the proposal of his father, Yayati
(a) Nal
(b) Charu
(c) Puru
(d) Devayani
Answer:
(c) Puru

Question 33.
Grand father of puru was
(a) Vishwamitra
(b) Kripacharya
(c) Dronacharya
(d) Sukracharya
Answer:
(b) Kripacharya

Question 34.
Father-in-law of Yayati was
(a) Sukracharya
(b) Kripacharya
(c) Ramdev
(d) Ramanjucharya
Answer:
(a) Sukracharya

Question 35.
Who was Devayani of Sukracharya
(a) wife
(b) sister
(c) daughter
(d) mother
Answer:
(c) daughter

Question 36.
Yayati became prematurely old by the curse of
(a) Santanu
(b) God
(c) Angel
(d) Sukracharya
Answer:
(d) Sukracharya

Question 37.
Yayati told his sons that one of ought to bear the burden of his
(a) kingdom
(b) old age
(c) youth
(d) life
Answer:
(b) old age

Question 38.
The fourth son begged to be
(a) kept
(b) keep silent
(c) for given
(d) excused
Answer:
(c) for given

Question 39.
It is needless to describe the misery
(a) vigorous youth
(b) youth only
(c) old
(d) nothing
Answer:
(a) vigorous youth

Question 40.
Yayati found himself suddenly
(a) a vigorous youth
(b) an old man
(c) a boy
(d) great king
Answer:
(b) an old man

Question 41.
Yayati was still haunted by the desire for
(a) young lady
(b) the girl.
(c) wealth
(d) sensual enjoyment
Answer:
(d) sensual enjoyment

Question 42.
Which son agreed to give Yayati his youth and take his old age?
(a) The smallest son
(b) The youngest son
(c) Both (a) & (b)
(d) All sons
Answer:
(b) The youngest son

Question 43.
Yayati has been written by
(a) K. Verma
(b) Moti Nisani
(c) O. Henry
(d) C. Rajgopalachari
Answer:
(d) C. Rajgopalachari

Question 44.
Yayati was full of sorrow at the refusal of the
(a) eldest son
(b) three sons
(c) four sons
(d) second sons
Answer:
(c) four sons

Question 45.
The emperor desired to enjoy life in full
(a) youth
(b) young age
(c) vigour
(d) vigour of youth
Answer:
(d) vigour of youth

Question 46.
Puru, the youngest sons, moved by
(a) father’s love
(b) self love
(c) his love
(d) filial love
Answer:
(a) father’s love

Question 47.
Sensual desire is never quenched by
(a) love
(b) women
(c) himself
(d) indulgence
Answer:
(d) indulgence

Question 48.
One can reach peace only by a
(a) good work
(b) mental pose
(c) hating others
(d) service
Answer:
(a) good work

Question 49.
Puru told that he relieved his father of the sorrows of old age and the cares of
(a) kingdom
(b) state affairs
(c) state be happy
(d) life
Answer:
(a) kingdom

Question 50.
Yayati went to Kubera’s garden to get more
(a) sensual satisfaction
(b) financial satisfaction
(c) physical satisfaction
(d) mental peace
Answer:
(a) sensual satisfaction

Question 51.
Choose the correct one
(a) vigor
(b) vigur
(c) vigour
(d) vigour
Answer:
(c) vigour

Question 52.
Choose the correct one
(a) pitiful
(b) pityful
(c) piteful
(d) pitifool
Answer:
(a) pitiful

Question 53.
WhIch of them is correct.
(a) relieva
(b) ralieve
(c) relievee
(d) relieve
Answer:
(d) relieve

Question 54.
Which of them ¡s correct.
(a) bestouw
(b) bestowe
(c) bestow
(d) bestou
Answer:
(c) bestow

Question 55.
Which is the correct spelling
(a) indulgence
(b) induijence
(e) indulgense
(d) indulginee
Answer:
(a) indulgence

Question 56.
Defeat means
(a) loss
(b)win
(c) wrong
(d) easy
Answer:
(a) loss

Question 57.
Meaning of desire Is
(a) interest
(b) want
(e) heaven
(d) exchange
Answer:
(b) want

Question 58.
Choose the correct adjective of ‘Joy’
(a) Joyful
(b) Joyee
(e) Joyious
(d) Joyous
Answer:
(d) Joyous

Question 59.
Choose the correct adjective of ‘merit’
(a) meritorious
(b) mentious.
(e) meritorius
(d) mentious
Answer:
(a) meritorious

Question 60.
Choose the correct noun of ‘Attain’.
(a) Attainess
(b) Attaintness
(c) Attainment
(d) Attaintee
Answer:
(c) Attainment