Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह स्वरूप

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : भूमि एवं लोग Chapter 3 अपवाह स्वरूप Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Geography Solutions Chapter 3 अपवाह स्वरूप

Bihar Board Class 9 Geography अपवाह स्वरूप Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 1.
लक्ष्मीसागर झील किस राज्य में स्थित है ?
(क) मध्यप्रदेश
(ख) उतर प्रदेश
(ग) बिहार
(घ) झारखंड
उत्तर-
(ग) बिहार

Bihar Board Class 9 Geography Book Solution प्रश्न 2.
निम्न में से कौन लवणीय झील है ?
(क) वूलर
(ख) डल
(ग) सांभर
(घ) गोविन्दसागर
उत्तर-
(ग) सांभर

कक्षा 9 भूगोल अध्याय 3 Question And Answer Bihar Board प्रश्न 3.
गंगा नदी पर गांधी सेतु किस शहर के निकट अवस्थित है ?
(क) भागलपुर
(ख) कटिहार
(ग) पटना
(घ) गया
उत्तर-
(ग) पटना

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 4.
कौन-सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है ?
(क) महानदी
(ख) कृष्णा
(ग) तापी
(घ) तुंगभ्रदा
उत्तर-
(ग) तापी

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 5.
कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी है ?
(क) नर्मदा
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) महानदी
उत्तर-
(ख) गोदावरी

Bihar Board Class 9th Geography Solution प्रश्न 6.
सिंधु जल समझौता कब हुआ था ?’
(क) 1950 ई० में
(ख) 1955 ई० में
(ग) 1960 ई० में
(घ) 1965 ई० में
उत्तर-
(ग) 1960 ई० में

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 7.
‘शांग-पो’ किस नदी का उपनाम है
(क) गंगा
(ख) ब्रह्ममपुत्र
(ग) सतलुज
(घ) गोदावरी
उत्तर-
(ख) ब्रह्ममपुत्र

Bihar Board Class 9 Sst Solution प्रश्न 8.
इनमें से गर्म जल का जल प्रपात कौन है ?
(क) ककोलत
(ख) गरसोप्पा
(ग) ब्रह्मकुंड
(घ) शिवसमुद्रम
उत्तर-
(ग) ब्रह्मकुंड

Bihar Board Class 9 Geography Solution प्रश्न 9.
कोसी नदी का उद्गम स्थल है ?
(क) गंगोत्री
(ख) मानसरोवर
(ग) गोसाईंथान
(घ) सतपुड़ा श्रेणी
उत्तर-
(ग) गोसाईंथान

लघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 1.
जल विभाजक का क्या कार्य है ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जब कोई ऊँचा.क्षेत्र, जैसे पर्वत या उच्चभूमि दो निकटवर्ती अपवाह श्रेणियों को एक-दूसरे से अलग करती है तब ऐसी उच्च भूमि जल विभाजक कहलाती है। जैसे-दिल्ली की उच्चभूमि सतलज बेसिन और गंगा बेसिन को अलग करने के कारण जल विमाजका का उदाहरण है।

Bihar Board Class 9 Economics Solution प्रश्न 2.
भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन-सी है?
उत्तर-
भारत की सबसे विशाल नदी द्रोणी गंगा है। इसकी लम्बाई 2525 किमी० है।

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 3.
सिंध एवं गंगा नदियाँ कहाँ से निकलती हैं ?
उत्तर-
सिंधु नदी तिब्बत के निकट मानसरोवर झील से निकलती है जबकि गंगा हिमालय की गंगोत्री नामक हिमानी से निकलती है ।

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 4.
गंगा की दो प्रारंभिक धाराओं के नाम लिखिए ? ये कहाँ पर एक-दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं ?
उत्तर-गंगा की दो मुख्य धाराएँ अलकनंदा और भागीरथी हैं । ये देव प्रयाग नामक स्थान पर मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं।

Class 9 History Bihar Board प्रश्न 5.
लम्बी धारा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्र में कम गाद(सिल्ट) क्यों है ?
उत्तर-
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी का मार्ग काफी लम्बा है । परन्तु इस मार्ग में इसे वर्षा अथवा अन्य साधनो से कम जल प्राप्त होता है । कम जल के कारण इसकी अपरदन शक्ति कम होती है । इसी कारण इसमें गाद (सिल्ट) की मात्रा कम होती है ।

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 6.
कौन-सी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ धासान घाटी से होकर बहती हैं ? समुद्र में प्रवेश करने के पहले वे किस प्रकार की आकृतियों का निर्माण करती हैं ?
उत्तर-
नर्मदा एंव तापी दो प्रायाद्वीप में प्रवेश करने के पहले ज्वारनदमुख (estury) का निर्माण करती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Class 9 Civics Solution प्रश्न 1.
हिमालय तथा प्रायद्वीपीय भारत की नदियों की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत की नदियों के दो वर्ग हैं –

(1) हिमालय की नदियाँ तथा (2) प्रायद्वीपीय नदियाँ अलग-अलग भौगोलिक प्रदेशों में इनकी उत्पत्ति होने के कारण नदियाँ एक दूसरे से । भिन्न हैं । इनकी भिन्नता के कारन ही इनकी खास विशेषता हो गई हैं

(i) हिमालय की अधिकांश नदियाँ बारहमासी अथवा स्थायी हैं । इन्हें वर्षा के जल के अतिरिक्त पर्वत की चोटियों पर जमे हिम के पिघलने से सलो भर जलापूर्ति होती रहती है।

(ii) सिंधु एंव ब्रह्मपुत्र जैसी भारत की प्रमुख नदियाँ हिमालय से निकलती हैं । इन नदियों ने प्रवाह के क्रम में पर्वतों को काटकर गार्ज का निर्माण किया है । जसै-ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय के नामचा बरवा शिखर के पास अंग्रेजी के ‘U’ आकार का मोड़ बनाकर अरुणाचल प्रदेश में गार्ज का निर्माण करती है ।

(iii) हिमालय जनित नदियाँ उद्गम स्थल से समुद्र तक यात्रा के दौरान अनेक प्रकार के क्रिया-कलाप को अंजाम देती हैं।

(iv) ये नदियाँ अपने मार्ग के ऊपरी भाग में तीव्र अपरदन करती है और सिल्ट (गाद) बालू, मिट्टी जैसे-अपरदित पदार्थो को ढोते चलती है। नदियाँ ज्यों-ज्यों आगे बढ़ती है, अबसाद की मात्रा बढ़ती जाती है । इसे मध्य एंव निचले मार्ग में जहाँ भूमि की ढाल की हो जाती है, नदियों का संवहन करने में कठिनाई होती है ।

(v) परिणामतः नदियाँ उसे जमा करती है, जिससे गोखर झील, बाढ़ का मैदान और डेल्टा जैसे अनेक आकृतियों का निर्माण करती हैं ।

प्रायद्वीपीय नदियाँ : इनकी निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  • यहाँ की अधिकांश नदियाँ मौसमी हैं, जिनका स्रोत मुख्यतः वर्षा का जल है ।
  • ग्रीष्म काल में जब वर्षा नहीं होती है तो नदियाँ सिकुड़ कर पतली हो जाती हैं और छोटी धाराओं में बहने लगती है ।
  • नर्मदा तथा तापी नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं पठारी भाग से ही निकलती हैं। सागर में गिरने के पहले ज्वारनदमुख का निर्माण करती है।
  • कृष्णा, कावेरी, महानदी, गोदावरी पश्चिमी घाटी से निकलकर

पूरब में बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व एवं पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों की तुलना कीजिए।
उत्तर-
प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियाँ अनुगामी या अनुवर्ती नदी-प्रणाली कहलाती हैं। यहाँ पूर्व में बहने वाली मुख्य नदियाँ-महानदी, गोदावरी, तथा कृष्णा और कावेरी है तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में नर्मदा और ताप्ती है। दोनों की तुलना इस प्रकार हैं

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ –

  • पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
  • गोदावरी को दक्षिण की गंगा कहा जाता है।
  • मुहाने के निकट इन नदियों की गति बहुत मंद पड़ जाती है। ये नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं।
  • कुछ नदियों में शिवनाथ, हंस देव, मांद, जोंक, तेल, दूध गंगा, पंचगंगा, तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मालप्रभा, वैतरणी एवं सुवर्णरेखा

पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ –

  • ये नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं।
  • मुहाने के निकट इन नदियों की गति बहुत तेज हो जाती है।
  • ये नदियाँ अपने मुहाने पर ज्वारनदमुख अथ्वा एस्चुअरी का निर्माण करती हैं।
  • कुछ नदियों में गोवा का मांडवी और जुआरी, कर्नाटक की कालिन्दी, गंगावली, शर्वती तथा नेत्रवती, केरल की पेरियार, पम्बा तथा मनिमाला हैं जो अरब सागर में गिरती हैं। ये सभी तीव्रगामी नदियाँ हैं।

प्रश्न 3.
भारत की अर्थव्यवस्था में नदियों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
भारत की अर्थव्यवस्था में नदियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। –

  • इन नदियों के प्रवाह से ही कृषि भूमि का आज 40% प्रतिशत भूभाग जलोढ़ मिट्टी से ढका हुआ है जो नदी घाटी, डेल्टा और तटीय मैदानी भागों में फैले हुए हैं ।
  • गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र के डेल्टा एवं मैदानी भाग में जलोढ़ की प्रचुरता हैं जो अत्यंत ही उपजाऊ है।
  • ये यातायात के साधन भी रही हैं। आज भी ब्रह्ममपुत्र, गंगा और यमुना में दूर-दूर तक स्टीमरें चलती हैं।
  • ये जल विद्युत उत्पन्न कर रही हैं और जलशक्ति का भंडार भी है।
  • ये नदियाँ मछलियाँ प्राप्त के साधन हैं । पूर्वी भारत के कितने ही लोगों के आहार में मछली की प्रमुखयता है। अतः मछली उद्योग – बहुतों की अजीबिका है।
  • नदियाँ उद्योग केन्द्र और नगरों की स्थापना और विकास में मदद पहुँचाती हैं । जैसे स्वर्णरेखा का जमशेदपुर के विकास में, हुगली का कोलकाता के विकास में, गंगा का वाराणसी और कानपुर के विकास में ।
  • नदियाँ पर्यटन के आकर्षक केन्द्र भी हैं।
  • अनेक परियोजनाओं के द्वारा इसे और भी महत्वपूर्ण बनाया जा रहा है।

प्रश्न 4.
भारत में झीलों के प्रकार का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर-
निर्माण की दृष्टि से झीलों के निम्नलिखित प्रकार हैं

  • धंसान घाटी झील-धंसान घाटी में जब जल जमाव होता है तो इस प्रकार की झील का निर्माण होता है । जैसे-अफ्रीका में विक्टोरिया, रूडोल्फा, न्यासा । भारत में तिलैया बाँध द्वारा कृत्रिम झील बनाया गया
  • गोखुर झील-नदियों में जब अवसाद की मात्रा बढ़ जाती है या – भूमि का जल कम जाता हैं । तब उसके मार्ग में विसर्पण कम जाता है। विसर्पण भाग कटकर मुख्यधारा से अलग हो जाता है, जिसका आकार गाय के ‘खुर’ के समान होता है । इसे गोखुर या परिव्यक्त झील भी कहा जाता है । जैसे- बिहार के बेतिया का ‘सरैयामान’ बेगूसराय का ‘कांवर झील’ इनके उदाहरण है।
  • लैगून झील-ऐसी झीलें समुद्र तट पर मिलती हैं । जहाँ समुद्र का जल बंदी बन कर रह जाता है । पूर्वी समुद्र तट पर चिलका तथा पुलीकट झीलें हैं।
  • अवरोधक झील-पर्वतीय प्रदेशों में भू-स्खलन के कारण चट्टाने गिरकर नदियों के प्रवाह को रोक देते हैं, जिसके कारण झील बन जाती है । इसे अवरोधक झील कहते हैं। जैसे-हिमालय क्षेत्र में गोहना झील ।
  • क्रेटर झील-पुराने ज्वालामुखी के मुँह पर बने झील को क्रेटर झील कहते हैं । जैसे- महाराष्ट्र का नोलार झील ।
  •  हिमानी झील-हिमालय क्षेत्र में हिमानी द्वारा निर्मित झीलों में नैनीताल, भीमताल, सातताल आदि हिमानी झीलें हैं।
  • भूगर्भीय क्रिया से निर्मित झील-जम्मू-कश्मीर में ‘वूलर झील’ मीठे पानी का झील है । यह मीठे पानी की भारत में सबसे बड़ी झील है।

मानचित्र कौशल

(क) भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित नदियों को चिह्नित कीजिए
तथा उनके नाम लिखिए-
(i) गंगा, (ii) सतलुज, (iii) दामादर, (iv) कृष्णा , (v) नर्मदा, (vi) तापी, (vii) महानदी ।

(ख) भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित झीलों को चिह्नित
कीजिए –
(a) चिल्का, (b) सांभर, (c) वूलर, (d) पुलीकट, (e) कोलेरू ।
उत्तर-
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह स्वरूप - 1

Bihar Board Class 11 English Book Solutions Poem 6 Three Years She Grew

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Bihar Board Class 11 English Three Years She Grew Textual Questions and Answers

A. Work in small groups and discuss these questions :

Nature is all around you. You see its different manifestations in plants, birds, animals, rivers, lakes etc :

Three Years She Grew Question And Answer Bihar Board Question 1.
Have you ever observed nature closely ?
Answer:
Yes, I have observed nature closely many times. Once I went to Rajgir with my parents. There was solar eclipse that day. We took bath in ‘Surya Kund’, the was hot. Afterwards we went to see the ‘stupas’ and temples of Lord Buddha. We again took bath after eclipse was over in ‘Brahm Kunda’. The important and the most attractive thing which I observed that no body knows from where the water in those ‘Kundas’ came and why the water was so hot.

The second thing was that the ‘kundas’ and small market of there were surrounded by mountains. The sight was so much beautiful that I wanted to settle there Perhaps the water of ‘kundas’ also coming from the mountains, and the reason of it being hot sulpher through which water has to pass.

The Education Of Nature Questions And Answers Bihar Board Question 2.
How do you feel when you see any of these manifestation ?
Answer:
We feel very delighted when we see any of the manifestation of nature. We forget all the anxieties and problems to see the beauty of nature.

Three Years She Grew Question And Answer Pdf Bihar Board Question 3.
Do you learn anything from them ?
Answer:
We learn from the manifestations of nature that nature has provided us a huge treasure in which all the things of our joy can be found. We should have only the love and sensibility for the nature. We learn to be selfless and to do welfare for all as the nature spreads beauty and pleasure for all without any interest and selfish motive.

B. 1. Answer these questions briefly :

Education Of Nature Poem Questions And Answers Bihar Board Question 1.
Who is ‘she’ in the first line ? Where and how long did she grow ?
Answer:
She is Lucy. She grew in sun and shower for three years.

Three Years She Grew Line By Line Explanation Bihar Board Question 2.
What is meant by ‘A lovelier flower on earth was never sown’ ?
Answer:
This means that Lucy was the loveliest child ever born on earth. The poet compares Lucy to a flower.

Three Years She Grew Bihar Board Question 3.
Who decided to take care of the girl ?
Answer:
Nature decided to take care of the girl.

Three Years She Grew In Sun And Shower Bihar Board Question 4.
What is meant by ‘law and impulses’ in line 8 ?
Answer:
Law means check and control, impulse means a sudden inclination to act. Nature will teach Lucy what to do and when to restrain herself.

Three Years She Grew Poem Bihar Board Question 5.
Where will Nature take the girl ?
Answer:
Nature will take the girl in the hills and the open plains, in glades and bowers.

Three Years She Grew Summary Bihar Board Question 6.
What is meant by ‘overseeing power’ in line 11 ? Who will feel it ?
Answer:
‘Overseeing power’ means divine spirit that will keep a watchful eye on Lucy. Lucy will feel its presence everywhere.

Three Years She Grew Is A Poem By Bihar Board Question 7.
What will the girl learn from the ‘fawn’ ?
Answer:
From the fawn Lucy will learn to be cheerful and to be playful. She will leap and run among the hills and across the lawns.

Question 8.
What will the floating cloud lend to her ?
Answer:
The floating cloud will lend her its stateliness—grace and dignity.

Question 9.
Who did she learn grace from ?
Answer:
She learnt grace from the motion of storms.

Question 10.
What shall mould the Maiden’s form ? How ?
Answer:
The silent influence of nature, the grace and flexibility of the willow, the movement of clouds, and even the storms will mould her figure.

B. 2. Answer the following questions :

Question 1.
What will be dear to the girl ?
Answer:
The glittering, twinkling stars in the midnight sky will be dear to her.

Question 2.
Where will she lean her ear ?
Answer:
She will listen to the sounds of flowing rivers in lonely places.

Question 3.
Where will rivulets dance ?
Answer:
Rivulets dance among hills as they flow in and out in a zigzag way.

Question 4.
What will pass into her face ?
Answer:
The beauty bom of murmuring sound will pass into her face.

Question 5.
What effect will the ‘vital feelings of delight’ have on the girl ?
Answer:
The vital feelings of delight will help her to grow tall, and fill her innocent heart with joy.

Question 6.
What does the phrase ‘such thoughts’ mean in line 34 ?
Answer:
‘Such thoughts’ mean vital feelings of delight as are necessary for the growth and development of human body and mind.

Question 7.
Who will give such thoughts and when ?
Answer:
Nature will give such thoughts to Lucy when they live together in the happy valley.

Question 8.
Who is the speaker of the poem ?
Answer:
The poet is the speaker of the poem.

Question 9.
Explain the line ‘How soon my Lucy’s race was run’ ?
Answer:
The poet is grieved to say that Lucy died very young.

C. 1. Long Answer Questions :

Question 1.
What does Nature decide about Lucy ? Give details.
Answer:
Nature decides to adopt Lucy as her own child and make her a lady of her own. She decides to educate Lucy in her own way. She will teach her how to restrain herself from evil deeds, and prompt her to do good and noble things. She will grow tall and beautiful. She will be sportive like the fawn.

Question 2.
Describe the process by which Nature intends to mould Lucy’s character and her outward form ?
Answer:
Nature herself will be Lucy’s teacher. Floating clouds will teach Lucy majesty of movement. The willow will teach her to bend. This will teach Lucy to be humble. Her body will become flexible. Even the motion of storms will teach her to be graceful. Lucy’s education will not be a passive process. Lucy will be an active participant in her education. She will look at the midnight stars, and will learn to appreciate beauties of Nature. She will listen to the music of flowing streams. This will give her delight, and her face will become beautiful. All these activities and feelings will mould her character as well as her physical form. She will grow to be a cheerful, tall and beautiful young woman.

Question 3.
What are the ideas contained in the poem ?
Answer:
The poem contains William Wordsworth’s ideas about education. He believed that Nature has an immense influence on the development and growth of human body and mind. Lucy is presented as a flower that blossoms into to its natural form under sun and shower.

Question 4.
What did Lucy leave to the speaker ?
Answer:
Lucy died young. She left behind her memory and the calm and quiet heath.

Question 5.
Give critical estimate of the poem ‘Three Years She Grew’.
Answer:
The poem is one of Wordsworth’s Lucy poems that appear in his Lyrical Ballads. Wordsworth was influenced by Rousseau’s philosophy of education. He believes that Nature is the best teacher. School education is artificial.

Through Lucy, he describes how Nature wants to mould her form and character. He describes the process by which Nature will achieve her objective. The process consists of taking up opposing polarities and reconciling them. Lucy will learn ‘law and impulse’. She will play in ‘rock and plain’ and ‘glade and bower’. She will learn from the floating clouds, bending willow, sportive fawn, dancing streams and insensate things.

The poem is divided into seven stanzas of six lines each. The rhyme scheme is a a a b c c b.

Question 6.
Find out instances of simile in the poem.
Answer:
Following are the instances of simile sportive as the fawn.

Question 7.
Find out instances of metaphor in the poem.
Answer:
Following are the instances of metaphor.
‘A lovelier flower on earth was never sown.
Lucy is looked upon as a flower.

Question 8.
Can you find instances of personification in the poem ?
Answer:
The instances of personification are :
The Nature said – Nature is personified.
The floating clouds their state shall lend.
For her the willow bend. rivulets dance their wayward round.
And vital feelings of delight/shall rear her form.

C. 2. Group Discussion :

Discuss the following in groups or pairs.

Question a.
Nature is our best teacher.
Answer:
There is no doubt that all our knowledge and experiences have come from Nature. For a long time man lived entirely in natural environment. Even today all our scientific knowledge comes from the study of natural objects and their functions. But Nature does not want passive pupils. You have to participate actively in the teaching-learning process. We observe natural phenomena and draw inferences. If we just watched nature like other animals our knowledge would have remained limited.

Question b.
Nature has many things to offer.
Answer:
There is variety in Nature. There is no monotony. If animals consume oxygen and give out carbon dioxide, plants do quite the opposite. Then there are animals that will be drowned in water, but there are animals that can breathe only in water. Some animals can live both in water and land. Then all animals and plants have a variety of behaviour. Then there is the boundless sky with huge stars, plants and galaxies. Life is Nature’s greatest secret.

Nature has so much to offer that we cannot even name them.

C. 3. Composition :

Write a paragraph in about 100 words on the following:

Question a.
Nature as the storehouse of learning
Answer:
Since early times man has been fascinated by the mysteries of Nature. Today all our knowledge and sciences are based on the study of Nature. Nature is a storehouse of learning, our physics, chemistry, biology, zoology, geography, geology, astronomy, etc. are nothing but our little effort to learn from Nature. Even a great scientist like Newton felt that he could only gather a pebble here and there on the seashore of knowledge. The sea of knowledge remained unfathomed by him. Indeed Nature is a storehouse of learning. That’s why we must preserve nature because there is so much to learn.

Question b.
Bliss of solitude.
Answer:
Man is a social being. We live together in big cities. Yet we get tired of the noise of crowded cities. We seek solitude because only in solitude we can be in communion with our soul and with God. Our saints and sages sought solitude in forests and mountains. There they could meditate and experience the bliss of solitude. In our times solitude is hard to find. But we all do seek it. Nature is the best place for solitude, and only there we can find peace of mind.

C. 2. Group Discussion :

Discuss the following in groups or pairs:
(a) Nature is our best teacher.
(b) Nature has many things to offer.
Answer:
(a) Nature teaches us to spread selfless love. It is very beautiful because it knows only to give. It is so much beautiful because it only gives. It never takes anything from anybody. It gives to all. It never descriminates between good and bad.
(b) Nature has a huge treasure to give us. It gives us air to breath, water to drink, fruits and cerials to eat. It provides shelter and light. Everything which we require for our life is provided by nature.

D. Word study:

D. 1. Dictionary Use

Ex. 1. Look up a dictionary and write two meanings to each of the following words-the one in which it is used in the lesson and the other which is more common:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Poem 6 Three Years She Grew 1
Answer:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Poem 6 Three Years She Grew 2

E. Grammar :

Ex. 1. Read the sentences picked up from the poem. Some of them are in the active voice and other in die passive one. Change the voice of the sentences given below and note the change in effect after the change in voice.

  1. A lovelier flower on earth was never sown.
  2. She shall be mine.
  3. She will feel an overseeing power.
  4. Vital feelings of delight shall rear her form.
  5. I will give such thoughts to Lucy.
  6. The work was done.
  7. How soon my Lucy’s race was run!

Answer:

  1. Nobody every sowed a lovelier flower on earth. (Agent in prominent) –
  2. I shall own her. (Agent prominent)
  3. An overseeing power will be felt by her. (object prominent)
  4. Her form shall be reared by vital feelings of delight, (object prominent)
  5. Lucy will be given such thoughts by me. (object prominent)
  6. Some one did the work. (Agent prominent)
  7. How somebody ran my Lucy’s race ! (Agent prominent)

Ex. 2. Read the lines from the poem carefully and mark the different cases of the personal pronoun ‘I’:
This child I to myself will take;
She shall be mine, and / will make
A Lady of my own.
…………. and with me.
The Girl …………. shall feel an overseeing power.
Specify the instances of different cases –

Subjective, objective, possessive, and reflexive – in the lines above and write the different cases for other personal pronouns – we, you, he, she, it, they.
Answer:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Poem 6 Three Years She Grew 3

F. Activities

Ex. 1. Gather five stories / fables / tales / poems from any language that tell about the benign influence of nature.
Answer:
1. The Daffodils – Wordsworth.
2. The world is Too Much With Us – Wordsworth
3. She Walks In Beauty, Like The Night – Byron
4. Break, Break, Break – Tennyson
5. The Education of Nature – Wordsworth.

Ex. 2. Find out rhyme scheme of the poem.
Answer:
a a b c c b
d d e f f e
g g h i i h
j j k l l k
m m n o o n p p
q r r q s s t u u t.

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Bihar Board Class 10 Political Science Solutions Chapter 3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Political Science राजनीति विज्ञान : लोकतांत्रिक राजनीति भाग 2 Chapter 3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Political Science Solutions Chapter 3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष

Bihar Board Class 10 Political Science लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. सही विकल्प चुनें।

प्रश्न 1.
वर्ष 1975 ई. भारतीय राजनीति में किसलिए जाना जाता है ?
(क) इस वर्ष आम चुनाव हुए थे
(ख) श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनी थी
(ग) देश के अंदर आपातकाल लागू हुआ था
(घ) जनता पार्टी की सरकार बनी थी
उत्तर-
(ग) देश के अंदर आपातकाल लागू हुआ था

प्रश्न 2.
भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के विरुद्ध जन आक्रोश किस दशक से प्रारंभ हुआ ?
(क) 1960 के दशक से
(ख) 1970 के दशक से
(ग). 1980 के दशक से
(घ) 1990 के दशक से
उत्तर-
(ख) 1970 के दशक से

प्रश्न 3.
बिहार में सम्पूर्ण क्रांति का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) नीतीश कुमार
(ग) इंदिरा गाँधी
(घ) जयप्रकाश नारायण
उत्तर-
(घ) जयप्रकाश नारायण

प्रश्न 4.
भारत में हुए 1977 ई. के आम चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला था?
(क) काँग्रेस पार्टी को
(ख) जनता पार्टी को
(ग) कम्युनिस्ट पार्टी को
(घ) किसी पार्टी को भी नहीं
उत्तर-
(ख) जनता पार्टी को

प्रश्न 5.
‘चिपको आन्दोलन’ निम्नलिखित में से किससे संबंधित नहीं है ?
(क) अंगूर के पेड़ काटने की अनुमति से
(ख) आर्थिक शोषण से मुक्ति से
(ग) शराबखोरी के विरुद्ध आवाज से
(घ) कांग्रेस पार्टी के विरोध से ..
उत्तर-
(क) अंगूर के पेड़ काटने की अनुमति से

प्रश्न 6.
‘दलित पैंथर्स’ के कार्यक्रम में निम्नलिखित में कौन संबंधित नहीं हैं ?
(क) जाति प्रथा का उन्मूलन
(ख) दलित सेना का गठन
(ग) भूमिहीन गरीब किसान की उन्नति
(घ) औद्योगिक मजदूरों का शोषण से मुक्ति
उत्तर-
(ख) दलित सेना का गठन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन ‘भारतीय किसान यूनियन’ के प्रमुख नेता थे?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) जैयप्रकाश नारायण
(ग) महेन्द्र सिंह टिकैत
(घ) चौधरी चरण सिंह
उत्तर-
(ग) महेन्द्र सिंह टिकैत

प्रश्न 8.
‘ताड़ी-विरोधी आंदोलन’ निम्नलखित में से किस प्रांत में शुरू किया गया?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) आंध्र प्रदेश
(घ) तमलनाडु
उत्तर-
(ग) आंध्र प्रदेश

प्रश्न 9.
‘नर्मदा घाटी परियोजना’ किन राज्यों से संबंधित है ?
(क) बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
(ख) तमिलनाडु, करेल, कर्नाटक
(ग) पं. बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब
(घ) गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
उत्तर-
(घ) गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश

प्रश्न 10.
“सूचना के अधिकार आंदोलन’ की शुरूआत कहाँ से हुई ?
(क) राजस्थान
(ख) दिल्ली
(ग) तमिलनाडु
(घ) बिहार
उत्तर-
(क) राजस्थान

प्रश्न 11.
‘सूचना का अधिकार’ संबंधी कानून कब बना?
(क) 2004 ई. में
(ख) 2005 ई. में
(ग) 2006 ई० में
(घ) 2007 ई. में
उत्तर-
(ख) 2005 ई. में

प्रश्न 12.
नेपाल में सप्तदलीय गठबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
(क) राजा को देश छोड़ने पर मजबूर करना
(ख) लोकतंत्र की स्थापना करना
(ग) भारत-नेपाल के बीच संबंधों को और बेहतर बनाना
(घ) सर्वदलीय सरकार की स्थापना करना
उत्तर-
(ख) लोकतंत्र की स्थापना करना

प्रश्न 13.
बोलिविया में जनसंघर्ष का मुख्य कारण था
(क) पानी की कीमत में वृद्धि
(ख) खाद्यान्न की कीमत में वृद्धि
(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि ।
(घ) जीवन रक्षक दवाओं की कीमत में वृद्धि :
उत्तर-
(क) पानी की कीमत में वृद्धि

प्रश्न 14.
श्रीलंका कब आजाद हुआ ?
(क) 1947 में
(ख) 1948 में
(ग) 1949 में
(घ) 1950 में
उत्तर-
(क) 1947 में

प्रश्न 15.
राजनीतिक दल का आशय है
(क) अफसरों के समूह से
(ख) सेनाओं के समूह से
(ग) व्यक्तियों के समूह से
(घ) किसानों के समूह से
उत्तर-
(ग) व्यक्तियों के समूह से

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख उद्देश्य प्रायः सभी राजनीतिक दलों का होता है ?
(क) सत्ता प्राप्त करना
(ख) सरकारी पदा का प्राप्त करना
(ग) चुनाव लड़ना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क) सत्ता प्राप्त करना

प्रश्न 17.
राजनीतिक दलों की नींव सर्वप्रथम किस देश में पड़ी ?
(क) ब्रिटेन
(ख) भारत में
(ग) फ्रांस में
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका में ।
उत्तर-
(क) ब्रिटेन

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में किसे लोकतंत्र का प्राण माना जाता है ?
(क) सरकार को
(ख) न्यायपालिका को
(ग) संविधान को
(घ) राजनीतिक दल को
उत्तर-
(घ) राजनीतिक दल को

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में कौन-सा कार्य राजनीतिक दल नहीं करता है?
(क) चुनाव लड़ना
(ख) सरकार की आलोचना करना
(ग) प्राकृतिक आपदा में राहत से
(घ) अफसरों की बहाली संबंधित
उत्तर-
(घ) अफसरों की बहाली संबंधित

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में कौन-सा विचार लोकतंत्र में राजनीतिक दलों से मेल नहीं खाता है ?
(क) राजनीतिक दल लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़कर सरकार के सामने रखता
(ख) राजनीतिक दल देश में एकता और अखंडता स्थापित करने का साधन है।
(ग) देश के विकास के लिए सरकारी नीतियों में राजनीतिक दल बाधा उत्पन्न करता है।
(घ) राजनीतिक दल विभिन्न वर्गों, जातियों, धर्मों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाता है।
उत्तर-
(ग) देश के विकास के लिए सरकारी नीतियों में राजनीतिक दल बाधा उत्पन्न करता है।

प्रश्न 21.
किस देश में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है ?
(क) पाकिस्तान
(ख) भारत
(ग) बांग्लादेश
(घ) ब्रिटेन
उत्तर-
(घ) ब्रिटेन

प्रश्न 22.
गठबंधन की सरकार बनाने की संभावना किस प्रकार की दलीय व्यवस्था में रहती है ?
(क) एकदलीय व्यवस्था
(ख) द्विदलीय व्यवस्था
(ग) बहुदलीय व्यवस्था
(घ) उपर्युक्त में किसी से भी नहीं
उत्तर-
(ग) बहुदलीय व्यवस्था

प्रश्न 23.
किसी भी देश में राजनीतिक स्थायित्व के लिए निम्नलिखित में क्या नहीं आवश्यक
(क) सभी दलों द्वारा सरकार को रचनात्मक सहयोग देना
(ख) किसी भी ढंग से सरकार को अपदस्थ करना
(ग) निर्णय-प्रक्रिया में सरकार द्वारा सबकी सहमति लेना
(घ) सरकार द्वारा विरोधी दलों में नजरबंद करना
उत्तर-
(ख) किसी भी ढंग से सरकार को अपदस्थ करना

प्रश्न 24.
निम्नलिखित में कौन-सी चुनौती राजनीतिक दलों को नहीं है ?
(क) राजनीतिक दलों के भीतर समय पर सांगठनिक चुनाव नहीं होना
(ख) राजनीतिक दलों में युवाओं और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना
(ग) राजनीतिक दलों द्वारा जनता की समस्याओं को सरकार के पास रखना
(घ) विपरीत सिद्धांत रखनेवाले राजनीतिक दलों से गठबंधन करना
उत्तर-
(ख) राजनीतिक दलों में युवाओं और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना

प्रश्न 25.
दल-बदल कानून निम्नलिखित में से किस पर लागू होता है ?
(क) सांसदों एवं विधायकों पर
(ख) राष्ट्रपति पर
(ग) उपराष्ट्रपति पर
(घ) उपर्युक्त में सभी पर
उत्तर-
(क) सांसदों एवं विधायकों पर

प्रश्न 26.
राजनीतिक दलों की मान्यता और उसका चिह्न किसके द्वारा प्रदान किया जाता है ?
(क) राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा
(ख) प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा
(ग) निर्वाचन आयोग द्वारा
(घ) संसद द्वारा
उत्तर-
(ग) निर्वाचन आयोग द्वारा

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में कौन राष्ट्रीय दल नहीं है ?
(क) राष्ट्रीय जनता दल
(ख) बहुजन समाज पार्टी
(ग) लोक जनशक्ति पार्टी
(घ) भारतीय जनता पार्टी
उत्तर-
(ग) लोक जनशक्ति पार्टी

प्रश्न 28.
जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी का गठन कब हुआ?
(क) 1992 में
(ख) 1999 में
(ग) 2000 में
(घ) 2004 में
उत्तर-
(ख) 1999 में

II. (i) मिलान करें-
Bihar Board Class 10 Political Science Solutions Chapter 3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष - 1
उत्तर-
1. साइकिल
2. लालटेन
3. बंगला
4. तीर।

(ii) मिलान करें-
Bihar Board Class 10 Political Science Solutions Chapter 3 लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष - 2
उत्तर-
1. य. पी. ए.
2. एनडीए.
3. राष्ट्रीय दल
4. क्षेत्रीय पार्टी।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बिहार में हए ‘छात्र आंदोलन’ के प्रमख कारण थे?
उत्तर-
बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी और कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बिहार में छात्रों ने सरकार के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया।

प्रश्न 2.
‘चिपको आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर-
चिपको आंदोलन के मुख्य उद्देश्यों में जंगल की कटाई पर रोक तथा पेड़ को नहीं काटने , देना था। इस आंदोलन में स्थानीय भूमिहीन वन्य कर्मचारियों के आर्थिक मुद्दा को उठाकर उनके लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी की मांग की गयी। महिलाओं ने इस आंदोलन का दायरा और विस्तृत कर दिया। महिलाओं ने शराबखोरी की लत के विरुद्ध आवाज उठायी। अन्य सामाजिक मसले भी इस आंदोलन से जुड़ गए।

प्रश्न 3.
स्वतंत्र राजनीतिक संगठन कौन होता है ?
उत्तर-
स्वतंत्र राजनीतिक संगठन वैसा संगठन होता है जो प्रत्यख रूप से राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं होता है। अपितु राजनीतिक दल द्वारा समर्थित होता है जैसे अखिल भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान यूनियन आदि।

प्रश्न 4.
भारतीय किसान यूनियन की मुख्य मांगें क्या थीं?
उत्तर-
भारतीय किसान यनियन ने,गन्ने और गेहूँ के सरकारी खरीद मल्य में बढोत्तरी करने, कृषि से संबंधित उत्पादों के अंतरराज्यीय आवाजाही पर लगी पाबंदियों को समाप्त करने, समुचित दर पर गारंटी युक्त बिजली आपूर्ति करने, किसानों के बकाये कर्ज माफ करने तथा किसानों के लिए पेंशन योजना का प्रावधान करने की मांग की।

प्रश्न 5.
सूचना के अधिकार आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर-
सूचना का अधिकार का मुख्य उद्देश्य लोगों तक समस्त सूचनाओं का आदान-प्रदान होना था जिसमें सरकारी तथा गैरसरकारी प्रश्न शामिल हैं। इसके अन्तर्गत लोगों को यह अधिकार होता है कि सरकार द्वारा बनाए सूचना सेल से हम अपनी समस्त जानकारी मुहैया कर सकें जिसके अन्तर्गत सरकारी दफ्तरों के विभिन्न कामकाज, कार्य-विधि, सरकार की नीति, सरकार की भावी योजना इत्यादि इसमें शामिल हैं।

प्रश्न 6.
राजनीतिक दल की परिभाषा दें।
उत्तर-
राजनीतिक दल का अर्थ ऐसे व्यक्तियों के किसी भी समूह से है जो एक समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करता है। यदि उस दल का उद्देश्य राजनीतिक कार्य-कलापों से संबंधित होता है तो उसे हम राजनीतिक दल कहते हैं। किसी भी राजनीतिक दल में व्यक्ति एक समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एकजुट होते हैं, जैसे मतदान करना, चुनाव लड़ना, नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार करना आदि।

प्रश्न 7.
किस आधार पर आप कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनता एवं सरकारों के बीच कड़ी का काम करता है ?
उत्तर-
राजनीतिक दल जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को सरकार के सामने प्रस्तुत करते हैं और सरकार की कल्याणकारी योजना और कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचाते हैं इस प्रकार राजनीतिक दल जनता एवं सरकार के बीच कड़ी का काम करता है।

प्रश्न 8.
दल-बदल कानून क्या है ?
उत्तर-
दल-बदल कौनून विधायकों और सांसदों के एक दल से दूसरे दल में पलायन को रोकने के लिए संविधान में संशोधन कर कानून बनाया गया है। इसे ही दल-बदल कानून कहते हैं।

प्रश्न 9.
राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं?
उत्तर-
राष्ट्रीय राजनीतिक दल वैसे सामाजिक दल हैं जिनका अस्तित्व पूरे देश में होता है उनके कार्यक्रम एवं नीतियाँ राष्ट्रीय स्तर के होते हैं। इनकी इकाइयाँ राज्य स्तर पर भी होती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने पक्ष में उत्तर दें।
उत्तर-
हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ कि जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है। अपने इस कथन से सहमति के लिए निम्नलिखित पक्ष या तर्क हैं पूरे विश्व में लोकतंत्र का विकास प्रतिस्पर्धा और जनसंघर्ष के चलते हुआ है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि जनसंघर्ष के माध्यम से ही लोकतंत्र का विकास हुआ है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने एवं उसे और सुदृढ़ करने में जनसंघर्ष की अहम भूमिका होती है। लोकतंत्र जनसंघर्ष के द्वारा विकसित होता है। लोकतंत्र में फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं। यदि सरकार फैसले लेने में जनसाधारण के विचारों की अनदेखी करती है तो ऐसे फैसलों के खिलाफ जनसंघर्ष होता है और सरकार पर दबाव बनाकर आम सहमति से फैसले लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे विकास में आनेवाली बाधाएं दूर हो जाती हैं।

लोकतंत्र में संघर्ष होना आम बात होती है। इन संघर्षों का समाधान जनता व्यापक एकजुटता  के माध्यम से करती है। कभी-कभी इस तरह के संघर्षों का समाधान संसद या न्यायपालिका जैसी संस्थाओं द्वारा भी होता है। सरकार को हमेशा जनसंघर्ष का खतरा बना रहता है और सरकार तानाशाह होने एवं मनमाना निर्णय लेने से बचती है। जनसंघर्ष से राजनीतिक संगठनों आदि का विकास होता है। राजनीतिक संगठन लोकतंत्र के लिए प्राण होते हैं। यह राजनीतिक संगठन जन भागीदारी के द्वारा समस्याओं को सुलझाने में सहायक होते हैं।

वास्तव में उपर्युक्त कथन का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र जनसंघर्ष से ही मजबूत होता है।

प्रश्न 2.
किस आधार पर आप कह सकते हैं कि बिहार से शुरू हुआ ‘छात्र आंदोलन’ का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया? ।
उत्तर-
बिहार में ‘छात्र आंदोलन’ बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी और कीमतों में बेतहासा वृद्धि के चलते सरकार के विरुद्ध हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व जय प्रकाश नारायण ने किया। इनके आह्वान पर जीवन के हर क्षेत्र से संबंधित लोग आंदोलन में कूद पड़ें। उन्होंने बिहार की कांग्रेस सरकार को बरखास्त करने की मांग कर सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सम्पूर्ण क्रांति का आहवान किया। जयप्रकाश की सम्पूर्ण क्रांति का उद्देश्य भारत में सरल लोकतंत्र की स्थापना करना था। जयप्रकाश की इच्छा थी कि बिहार का यह आंदोलन अन्य प्रांतों में भी फैले। उसी समय रेलवे कर्मचारी ने भी केन्द्र सरकार के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। उस हड़ताल का व्यापक प्रभाव पड़ा। जयप्रकाश नारायण 1975 में दिल्ली में आयोजित संसद मार्च का नेतृत्व किया। इससे पहले राजधानी दिल्ली में अब तक इतनी बड़ी रैली कभी नहीं हुई थी।

जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इंदिरा गाँधी के इस्तीफे के लिए प्रभाव डालना शुरू किया। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल जन प्रदर्शन कर जय प्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी से इस्तीफे की मांग करते हुए राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह की घोषणा की। उन्होंने अपने आह्वान में सेना और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारी को भी सरकार का आदेश नहीं मानने के लिए निवेदन किया। इंदिरा गांधी ने इस आंदोलन को अपने विरुद्ध एक षड्यंत्र मानते हुए 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा करते हुए जयप्रकाश नारायण सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को जेल में डाल दिया। आपातकाल के बाद 1977 की लोकसभा चुनाव के जनता पार्टी ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली और मोरारजी देसाई जनता पार्टी के सरकार में प्रधान मंत्री बने।

वास्तव में बिहार का ‘छात्र आंदोलन’ कालांतर में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का स्वरूप ले चुका था। जिसकी परिणति 1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी की हार और जनता पार्टी की जीत से हुई। अत: हम उपर्युक्त कथनों के आधार पर यह कह सकते हैं कि बिहार से शुरू हुआ ‘छात्र आंदोलन’ का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वक्तव्यों को पढ़ें और अपने पक्ष में उत्तर दें
(क) क्षेत्रीय भावना लोकतंत्र को मजबूत करती है।
(ख) दबाव समूह स्थायी तत्वों का समूह है। इसलिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।
(ग) जनसंघर्ष लोकतंत्र का विरोधी है।
(घ) भारत के लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलन में महिलाओं की भूमिका नगण्य है।
उत्तर-
(क) क्षेत्रीय भावना उग्र होने पर क्षेत्रवाद की स्थिति पैदा होती है जिससे देश की अखंडता खतरे में पड़ जाती है। अतः क्षेत्रीय भावना कुछ हद तक लोकतंत्र के लिए अभिशाप । बन सकती है।
(ख) वास्तव में दबाव समूह ऐसे संगठन होते हैं जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। अत: यह कहना कि दबावं समूह स्वार्थी तत्वों का समूह है, बिल्कुल ही निराधार है। इसे समाप्त करने का कोई औचित्य नहीं है।
(ग) जनसंघर्ष से ही लोकतंत्र का विकास होता है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने एवं इसे और सुदृढ़ करने में जनसंघर्ष की अहम भूमिका होती है। अतः लोकतंत्र जब संघर्ष के द्वारा विकसित होता है यह लोकतंत्र का विरोधी नहीं बल्कि लोकतंत्र के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक माध्यम होता है।
(घ) यह कहना कि लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलन में महिलाओं की भूमिका नगण्य है, सरासर गलत है। ज्ञातव्य हो कि चिपको आंदोलन एवं ताड़ी विरोधी आंदोलन में महिलाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त नर्मदा बचाव आंदोलन की मुखिया मेधा ने इस आंदोलन
को राष्ट्रव्यापी बना दिया। अतः समय-समय पर लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलन में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

प्रश्न 4.
राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
किसी भी लोकतंत्र में राजनीतिक दल का होना आवश्यक है। बिना राजनीतिक दल के लोकतंत्र की परिकल्पना करना बेईमानी है। लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दल जीवन का एक अंग बन चुके हैं। इसलिए उन्हें लोकतंत्र का प्रांण कहा जाता है।

प्रश्न 5.
राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं ?
उत्तर-
किसी भी देश का विकास वहाँ के राजनीतिक दलों की स्थिति पर निर्भर करता है। जिस देश में राजनीतिक दलों के विचार, सिद्धांत एवं दृष्टिकोण ज्यादा व्यापक होंगे उस देश का राष्ट्रीय विकास उतना ही ज्यादा होगा। इसलिए कहा जाता है कि किसी भी देश के राष्ट्रीय विकास में राजनीतिक दलों की मुख्य भूमिका होती है। दरअसल राष्ट्रीय विकास के लिए जनता को जागरूक, समाज एवं राज्य में एकता एवं राजनीतिक स्थायित्व का होना आवश्यक है। इन सभी कार्यों में राजनीतिक दल ही मुख्य भूमिका निभाते हैं। लोकतांत्रिक देशों में साधारणत: यह देखने को मिलता है कि सामान्य नागरिक को जिस कार्य के बदले जितना मिलता है उसी में वह संतुष्ट रहता है। उसे ज्यादा पाने की इच्छा उसमें कम रहती है। इसका मुख्य कारण जनजागरुकता का अभाव रहता है। ऐसी स्थिति में राजनीतिक दल ही नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित करते हैं।

राष्ट्रीय विकास के लिए राज्य एवं समाज में एकता स्थापित होना आवश्यक है। इसके लिए राजनीतिक दल एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में काम करता है। राजनीतिक दलों में विभिन्न जातियों धर्मों, वर्गों एवं लिंगों के सदस्य होते हैं। ये सभी अपने-अपने जाति, धर्म, एवं लिंग का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। राजनीतिक दल ही किसी देश में राजनीतिक स्थायित्व ला सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि राजनीतिक दल सरकार के विरोध की जगह उसकी रचनात्मक आलोचना करें।

राष्ट्रीय विकास के लिए यह भी आवश्यक है कि शासन के निर्णयों में सबकी सहमति और सभी लोगों की भागीदारी हो। इस प्रकार के काम को राजनीतिक दल ही करते हैं। राजनीतिक दल संकट के समय रचनात्मक कार्य भी करते हैं, जैसे प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत का कार्य आदि। राष्ट्रीय विकास के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं। लोकतांत्रिक देशों में इस तरह की नीतियों एवं कार्यक्रम को विधानमण्डल से पास होना आवश्यक होता है। सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सहयोग से विधानमण्डल ऐसे नीतियों एवं कार्यक्रम पास कराने में सहयोग करते हैं। इन्हीं सब बातों के आधार पर हम समझ सकते हैं कि राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः राष्ट्रीय विकास में राजनीतिक दल बहुत ही व्यापक रूप से योगदान करते हैं।

प्रश्न 6.
राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य बताएँ।
उत्तर-
राजनीतिक दलों के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं-
1. नीतियाँ एवं कार्यक्रम तय करना- राजनीतिक दल जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए नीतियाँ एवं कार्यक्रम तैयार करते हैं। इन्हीं नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर ये चुनाव भी लड़ते हैं। राजनीतिक दल भाषण, टेलीविजन, रेडियो, समाचार-पत्र आदि के माध्यम से अपनी नीतियाँ एवं कार्यक्रम जनता के सामने रखते हैं और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। मतदाता भी उसी राजनीतिक दल को अपना समर्थन देते हैं जिसकी नीतियाँ एवं कार्यक्रम जनता के कल्याण के लिए एवं राष्ट्रीय हित को मजबूत करने वाले होते हैं।

2. लोकतंत्र का निर्माण –लोकतंत्र में जनता की सहमति या समर्थन से ही सत्ता प्राप्त होती है। इसके लिए शासन की नीतियों पर लोकमत प्राप्त करना होता है और इस तरह के लोकमत का निर्माण राजनीतिक दल के द्वारा ही हो सकता है। राजनीतिक दल लोकमत निर्माण करने के लिए जनसभाएँ, रैलियों, समाचार-पत्र, रेडियो, टेलीविजन आदि का सहारा लेते हैं।

3. राजनीतिक प्रशिक्षण राजनीतिक दल मतदाताओं को राजनीतिक प्रशिक्षण देने का भी काम करता है। राजनीतिक दल खासकर चुनावों के समय अपने समर्थकों को राजनैतिक कार्य, जैसे मतदान करना, चुनाव लड़ना, सरकार की नीतियों की आलोचना करना या समर्थन करना आदि बताते हैं। इसके अलावा, सभी राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक एवं शैक्षिक गतिविधियाँ तेज कर उदासीन मतदाताओं को अपने से जोड़ने का भी काम करते हैं जिससे लोगों में राजनीतिक चेतना की जागृति होती है।

4. दलीय कार्य-प्रत्येक राजनीतिक दल कुछ दल-संबंधी कार्य भी करते हैं, जैसे अधिक-से-अधिक मतदाताओं को अपने दल का सदस्य बनाना, अपनी नीतियाँ एवं कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करना तथा दल के लिए चंदा इक्कट्ठा करना आदि।

5.चुनावों का संचालन-जिस प्रकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में राजनीतिक दलों का होना भी आवश्यक है, उसी प्रकार दलीय व्यवस्था में चुनाव का होना भी आवश्यक है। हमें पहले से यह जानकारी प्राप्त है कि सभी राजनीतिक दल अपनी विचार-धाराओं और सिद्धांतों के अनुसार कार्यक्रमों एवं नीतियाँ तय करते हैं। यही कार्य एवं नीतियाँ चुनाव के दौरान जनता के पास रखते हैं जिसे चुनाव घोषणा-पत्र कहते हैं। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को खड़ा करने और कई तरीके से उन्हें चुनाव जिताने का प्रयत्न करते हैं। इसीलिए राजनीतिक दल का एक प्रमुख कार्य चुनाव का संचालन है।

6.शासन का संचालन राजनीतिक दल चुनावों में बहुमत प्राप्त करके सरकार का निर्माण करते हैं। जिस राजनीतिक दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है वे विपक्ष में बैठते हैं जिन्हें विपक्षी दल कहा जाता है। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष शासन का संचालन करता है वहीं विपक्षी दल सरकार पर नियंत्रण रखता है और सरकार को गड़बड़ियाँ करने से रोकता है।

.7.सरकार एवं जनता के बीच मध्यस्थता का कार्य राजनीतिक दल का एक प्रमुख कार्य जनता और सरकार के बीच मध्यस्थता करना। राजनीतिक दल ही जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं को सरकार के सामने रखते हैं और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचाते हैं। इस तरह राजनीतिक दल सरकार एवं जनता के बीच पुननिर्माण का कार्य करते हैं।

8. गैर-राजनीतिक कार्य राजनीतिक दल न केवल राजनैतिक कार्य करते हैं बल्कि गैर-राजनैतिक कार्य भी करते हैं, जैसे प्राकृतिक आपदाओं-बाढ़, सुखाड़, भूकम्प आदि के दौरान राहत संबंधी कार्य आदि। अत: उपयुक्त प्रमुख कार्य राजनीतिक दलों के लिए आवश्यक हैं। तभी वे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में अपनी साख बचा सकते हैं।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मान्यता कौन प्रदान करते हैं और इसके मापदंड क्या हैं ?
उत्तर-
राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दल को मान्यता चुनाव आयोग प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय राजनीतिक दल की मान्यता प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों को लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में 4 या अधिक राज्यों द्वारा कुल डाले गए वैध मतों का 6 प्रतिशत प्राप्त करने के साथ किसी राज्य या राज्य से लोकसभा की कम-से-कम 4 सीटों पर विजयी होना आवश्यक है या लोक सभा में कम-से-कम 4 सीटों पर विजयी होना आवश्यक है। या लोकसभा में कम-से-कम 2 प्रतिशत सीटें अर्थात् 11 सीटें जीतना आवश्यक है जो कम-से-कम तीन राज्यों से होनी चाहिए। इसी तरह राज्य स्तरीय राजनीतिक दल को मान्यता प्राप्त करने के लिए उस दल को लोकसभा या विधान सभा के चुनावों में डाले गएं वैध मतों का कम-से-कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करने के साथ-साथ राज्य विधानसभा की कम-स-कम 3 प्रतिशत सीटें या 3 सीटें जीतना आवश्यक है।

Bihar Board Class 10 History लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बोलिविया में जनसंघर्ष का मुख्य कारण क्या था ?
(क) पीजी की कीमत में वृद्धि
(ख) खाद्यान की कीमत में वृद्धि
(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि
(घ) जीवन रक्षक दवाओं की कीमत में वृद्धि
उत्तर-
(क) पीजी की कीमत में वृद्धि

प्रश्न 2.
किसी विशेष वर्ग या समूहों के हितों को बढ़ावा देनेवाले संगठन को किस नाम से पुकारा जाता है ?
(क) राजनीतिक दल
(ख) आंदोलन
(ग) हित समूह
(घ) लोककल्याणकारी राज्य
उत्तर-
(ग) हित समूह

प्रश्न 3.
राजनीतिक दल और हित समूह में मुख्य अंतर क्या है ?
(क) राजनीतिक दल का संबंध सिर्फ राजनीतिक पक्ष से है जबकि हित समूह का संबंध सिर्फ राजनीतिक पक्ष से है।
(ख), हितसमूह का उद्देश्य सीमित लोगों के लिए काम करना है, परंतु राजनीतिक दल को सभी लोगों के लिए काम करना पड़ता है।
(ग) हित समूह का उद्देश्य सत्ता पर आधिपत्य करना नहीं होता जबकि राजनीतिक दल का मुख्य उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना होता है।
(घ) हित-समूह लोगों की लामबंदी में विश्वास नहीं रखते, परंतु राजनीतिक दल रखते हैं।
उत्तर-
(ग) हित समूह का उद्देश्य सत्ता पर आधिपत्य करना नहीं होता जबकि राजनीतिक दल का मुख्य उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना होता है।

प्रश्न 4.
राजनीतिक दल का संबंध किससे है।
(क) किसी वर्ग विशेष या समूह के हितों को बढ़ावा देने से
(ख) जनसामान्य के कल्याण से
(ग) सिर्फ सामाजिक समस्या के समाधान से
(घ) राजनीतिक सत्ता पाने के लिए लोगों को लाभबंद करने से
उत्तर-
(घ) राजनीतिक सत्ता पाने के लिए लोगों को लाभबंद करने से

प्रश्न 7.
नेपाल में लोकतंत्र की वापसी कब हुई ?
(क) 2002 में
(ख) 2003 में
(ग) 2004 में
(घ) 2006 में
उत्तर-
(घ) 2006 में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लोकतंत्र की बहाली के लिए किस देश में सप्तदलीय गठबंधन तैयार किया गया था?
उत्तर-
नेपाल में।

प्रश्न 2.
सूचना के अधिकार के लिए सर्वप्रथम कहाँ और कब आवाज उठाई गई थी?
उत्तर-
राजस्थान के भीम तहशील में, 1990 में।

प्रश्न 3.
दलित पैंथर्स नामक संगठन कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर-
महाराष्ट्र में।

प्रश्न 4.
जनसंघर्ष के रूप में राजनीतिक आंदोलन के उदाहरण दें। ..
उत्तर-
जनसंघर्ष के रूप में राजनीतिक आंदोलन के उदाहरण हैं-चिली में सैनिक तानाशाही के विरुद्ध राजनीतिक आंदोलन, नेपाल में राजशाही के विरुद्ध आंदोलन, पोलैंड में एकल दल की तानाशाही के विरुद्ध जनसंघर्ष तथा म्यांमार में सैनिक शासन के विरुद्ध चल रहा जनसंघर्ष इत्यादि।

प्रश्न 5.
जन संघर्ष के रूप में सुधारवादी आंदोलन के उदाहरण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
जनसंघर्ष के रूप में सुधारवादी आंदोलन के उदाहरण हैं- महाराष्ट्र में दलित पैंथर्स का आंदोलन, भारतीय किसान यूनियन का आंदोलन, आंध्र प्रदेश में महिलाओं द्वारा चलाया गया ताड़ी विरोधी आंदोलन।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दबाव समूह किसे कहते हैं ? इसके उदाहरण दें।
उत्तर-
दबाव समूह का लक्ष्य सत्ता पर प्रत्यक्ष नियंत्रण करने अथवा सत्ता में भागीदारी करने से नहीं होता। जब कभी जनसंघर्ष या आंदोलन होता है तब राजनीतिक दलों के साथ-साथ दबाव-समूह भी उसमें सम्मिलित हो जाते हैं और वे संघर्षकारी समूह बन जाते हैं। दबाव समूह किसी आंदोलन का समर्थन किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए करते हैं। उद्देश्य की पूर्ति के बाद उनका सत्ता से कोई लेना-देना नहीं होता। दबाव समूह के उदाहरणों में 1974 की संपूर्ण क्रांति नेपाल में सात राजनीतिक दल, किसान, मजदूर व्यवसायियों शिक्षक अभियंता के समूह , बोलिविया में फोडेकोर इत्यादि दबाव समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
दबाव समूह तथा राजनीतिक दल में मुख्य अंतर बताएँ।
उत्तर-
राजनीतिक दल एवं दबाव समूह में सबसे बड़ा अंतर यह है कि राजनीतिक दल का – उद्देश्य सत्ता में परिवर्तन लाकर उसपर आधिपत्य करना होता है, वहीं दबाव समूह का लक्ष्य सत्ता पर प्रत्यक्ष नियंत्रण करने अथवा सत्ता में भागीदारी नहीं होता। दबाव समूह किसी आंदोलन का समर्थन किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए करते हैं। उद्देश्य की पूर्ति के बाद उनका सत्ता से कोई लेना-देना नहीं होता। इसके विपरीत राजनीतिक दल उद्देश्य की पूर्ति के बाद सत्ता पर नियंत्रण भी करना चाहते हैं।

प्रश्न 3.
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में हित समूहों की उपयोगिता पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में हित समूहों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। दबाव समूह या हित समूहों की निम्नलिखित मुख्य उपयोगिताएँ हैं

  • सरकार को सजग बनाए रखना दबाव समूह विभिन्न तरीकों से सरकार का ध्यान जनता की उचित माँगों की ओर दिलाकर एक सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके लिए हित समूह जनता का समर्थन और सहानुभूति भी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।
  • आंदोलन को सफल बनाना- लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था में कई तरह के जनआंदोलन चलते रहते हैं हित समूह या दबाव समूह ऐसे आंदोलनों को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • दबाव समूह और उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों से लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत
    हुई हैं। लोकतंत्र की सफलता के मार्ग में हित समूह बाधक नहीं है, बल्कि सहायक होती हैं।

प्रश्न 4.
हित समूह या दबाव समूह राजनीतिक दलों पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं।
उत्तर-
दबाव समूह सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं लेते, परंतु अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजनीतिक दलों पर भी प्रभाव डालते हैं। प्रत्येक आंदोलन का राजनीतिक पक्ष अवश्य होता है जिसके कारण दबाव समूह एवं राजनीतिक दलों के बीच प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध अवश्य स्थापित हो जाता है। कभी-कभी राजनीतिक दल ही सरकार को प्रभावित करने के उद्देश्य से दबाव समूहों का गठन कर डालते हैं। ऐसे समूहों का नेतृत्व भी राजनीतिक दल ही.करने लगते हैं। ऐसे. दबाव समूह उस राजनीतिक दल की एक शाखा के रूप में काम करने लगते हैं।

प्रश्न 5.
जन संघर्ष का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
जन संघर्ष का अर्थ जनता द्वारा कुछ निश्चित बातों या वस्तुओं से संतुष्ट नहीं रहने पर सत्ता के विरुद्ध किया जानेवाला संघर्ष है। जनसंघर्ष अथवा जन आंदोलन का अर्थ “वर्तमान व्यवस्था के विरुद्ध अपनी असंतुष्टि तथा असहमति को अभिव्यक्त करना है।” यह जनसंघर्ष का नकारात्मक अर्थ है। लेकिन साकारात्मक अर्थ में सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में अनेक विकृतियाँ उत्पन्न होती रहती हैं। इन विकृतियों को दूर करने के उद्देश्य से जो जन संघर्ष अथवा आंदोलन होते हैं उसे जन संघर्ष का सकारात्मक पक्ष कहा जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतंत्र में जनसंघर्ष की उपयोगिता पर प्रकाश डालें
उत्तर-
विभिन्न देशों में जनसंघर्ष की विवेचना से यह स्पष्ट है कि लोकतंत्र में इसकी अनेक उपयोगिताएँ हैं जिनमें कुछ निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपयोगिता हैं-

  • लोकतंत्र के विस्तार में सहायक-जनसंघर्ष की सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि यह लोकतंत्र की स्थापना और उसकी वापसी में तो सहायक होता ही है, लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में लोकतंत्र के विस्तार में भी सहायक होता है। जनसंघर्ष के माध्यम से लोकतंत्र ये भागीदारी प्राप्त करनेवालों को भी सफलता मिलती है। इससे लोकतंत्र का विस्तार होता है तथा लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होती हैं।
  • लामबंदी और संगठन को बल-जनसंघर्ष लोगों की लामबंदी और उन्हें संगठित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनसंघर्ष की सफलता इसीपर निर्भर करती है।
  • विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों को सक्रिय करने में सहायक- जनसंघर्ष होने पर विभिन्न संगठनों तथा राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ जाती है। अनेक दबाव एवं हित समूह इसमें सम्मिलित होकर जनसंघर्ष को सफल बना देते हैं।

प्रश्न 2.
नेपाल में लोकतंत्र की वापसी का सविस्तार वर्णन करें।
उत्तर-
नेपाल में लोकतंत्र की वापसी के लिए व्यापक जनसंघर्ष हुआ। नेपाल में इक्कीसवीं शताब्दी के पूर्व ही लोकतंत्र की स्थापना हो चुकी थी। नेपाल के पूर्ववर्ती राजा वीरेन्द्र विक्रम सिंह ने नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना के मार्ग प्रशस्त कर दिया था और स्वयं को औपचारिक रूप . से राज्य का प्रधान बनाए रखा। परंतु दुर्भाग्यवश उनकी हत्या कर दी गई। ज्ञानेन्द्र नेपाल के नए राजा बने जिनका लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में विश्वास नहीं था। उन्होंने 2002 में संसद को भंगकर पूर्ण राजशाही की घोषणा कर दी। 2005 में राजा ज्ञानेंद्र ने जनता के द्वारा निर्वाचितं सरकार को भंग करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री शेखबहादुर देउबा को अपदस्थ कर दिया। देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई। इतना ही नहीं अपने अधीन नए मंत्रिमंडल का गठन करते हुए तीन वर्ष तक सभी अधिकार अपने हाथ में लेने की भी घोषणा कर दी।

राजा ज्ञानेन्द्र के इस फैसले के खिलाफ नेपाल में लोकतंत्र की वापसी के लिए देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने आपस में समझौता कर सात दलों के गठबंधन की स्थापना कर ली। आगे चलकर माओवादी आंदोलनकारी जो राजशाही के विरुद्ध पहले से सक्रिय थे इस गठबंधन में शामिल हो गए। नेपाल में लोकतंत्र की वहाली के लिए राजनीतिक शक्तियों के एकजुट हो जाने . से जनता के बीच एक नया संदेश गया। जनता खुलकर लोकतंत्र की वापसी के लिए आंदोलन जो 6 अप्रैल 2006 से सात राजनीतिक दलों के गठबंधन द्वारा चलाया गया था के साथ जुड़ गई। इस प्रकार यह आंदोलन जनसंघर्ष में बदल गया। राजशाही के विरुद्ध जनता के आक्रोश के जनसैलाब के आगे सजशाही को झुकना पड़ा। 24 अप्रैल, 2006 के दिन नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र नेnसंसद को बहाल कर सत्ता सात राजनीतिक दलों के गठबंधन को सौंपने की घोषणा कर दी। इस . प्रकार नेपाल में लोकतंत्र की वापसी के साथ जनसंघर्ष का अंत हो गया।

प्रश्न 3.
भारत में 1974 के संघर्ष का वर्णन करें।
उत्तर-
जनसंघर्ष सिर्फ लोकतंत्र की स्थापना अथवा वापसी के लिए ही नहीं होता है, बल्कि एक लोकतांत्रिक और निर्वाचित सरकार को जनता की मांग मानने के लिए बाध्य करने के उद्देश्य से भी होता है। कुछ जनसंघर्ष ऐसे भी हैं जो एक निर्वाचित सरकार को बदलने के उद्देश्य से भी होते हैं। भारत में 1974 का जनसंघर्ष इसका ज्वलंत उदाहरण है। 1974 के जनसंघर्ष की पृष्ठभूमि बिहार में तत्कालीन सरकार के विरुद्ध छात्र आंदोलन से तैयार हुई। उसके बाद केन्द्र की काँग्रेसी सरकार की गलत नीतियों के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों ने विकल्प की तलाश शुरू कर दी। 14 अप्रैल 1974 को दिल्ली में तत्काल काँग्रेस के बीजू पटनायक के निवास स्थान पर भारतीय क्रांति दल के चौधरी चरण सिंह की अध्यक्षता में आठ गैर-काँग्रेसी राजनीतिक दलों के विलय का निर्णय लिया गया। इसके ठीक एक दिन पहले 13 अप्रैल को दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान में ‘जनतंत्र समाज’ का गठन किया गया जिसमें जयप्रकाश नारायण और आचार्य कृपलानी की सक्रियता अधिक देखी गयी।

धीरे-धीरे तत्कालीन काँग्रेसी सरकार के विरुद्ध लोग संगठित होते गए और संपूर्ण देश में आंदोलन प्रारंभ हो गया। यह आंदोलन जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति के नाम से प्रसिद्ध हो गया। इस आंदोलन को जनता का अपार समर्थन मिला। इस प्रकार इसने जनसंघर्ष का रूप धारण कर लिया। जनता पार्टी का गठन हुआ। आंदोलन को दबाने का भरसक प्रयास किया गया, परंतु यह जनसंघर्ष दबने की जगह उग्र रूप लेता गया। सरकार को राष्ट्रीय आपात की घोषणा करनी पड़ी। 1977 में देश में आम निर्वाचन हुआ तो जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और केन्द्र में पहली बार मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व में गैर-काँग्रेसी सरकार का गठन हुआ।

प्रश्न 4.
जनसंघर्ष में राजनीतिक दलों एवं दबाव-समूहों की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-
लोकतंत्र में जनसंघर्ष तभी सफल होता है जब इसका संचालन किसी संगठन द्वारा किया जाता है। नेपाल में सांत राजनीतिक दलों के गठबंधन तथा माओवादियों के सहयोग से जनसंघर्ष सफल हुआ। म्यांमार में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी नामक राजनीतिक दल की नेत्री आंग सान सूची के नेतृत्व में लोकतंत्र की वापसी का जनसंघर्ष जारी है। बोलिविया में फेडेकोर (FEDECOR) नामक संगठन के नेतृत्व में जनसंघर्ष चला जिसे किसानों, मजदूरों छात्र संघों और सोशलिस्ट पार्टी नामक राजनीतिक दल का भी समर्थन प्राप्त था। भारत में भी 1974 के जयप्रकाश’ । नारायण के जन आंदोलन को छात्रों, वकीलों, शिक्षकों इत्यादि के संघों के समर्थन के साथ-साथ जनतंत्र समाज जैसी गैर-राजनीतिक संस्था एवं विभिन्न राजनीतिक दलों का भी समर्थन प्राप्त था। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न संगठनों अथवा विभिन्न वर्गों के संघों के माध्यम से आंदोलन करके सरकार को अपनी मांग मानने के लिए बाध्य किया जाता है। इसे दबाव-समूह के नाम से जाना जाता है। इन दबाव समूहों से जनसंघर्ष को तो सफल बनाया ही जाता है, नागरिकों की भी सत्ता में भागीदारी बढ़ जाती है।

दबाव समूहों की भूमिका भी जनसंघर्ष में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। दबाव समूहों द्वारा ही सरकार की नीतियों को प्रभावित किया जाता है और जनता की मांगों को सरकार से मानने के लिए भी दबाव डाला जाता है। विभिन्न पेशे में लगे लोग जैसे वकील शिक्षक, डॉक्टर, अभियंता, सरकारी कर्मचारी अपने-अपने.हितों की रक्षा के लिए जब संघ बनाते हैं तो उसे हित-समूह कहा जाता है। जब ऐसे समूह द्वारा अपने पक्ष में सरकार को निर्णय करने के लिए बाह्य किया जाता है तब हित समूह दबाव समूह के रूप में कार्य करने लगते हैं। आधुनिक युग में राजनीतिक दल विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ हो जाते हैं। अतः राजनीतिक दलों के साथ-साथ अनेक हित-समूहों का भी विकास हो जाता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि जनसंघर्ष में राजनीतिक दलों के साथ-साथ दबाव-समूहों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।

Bihar Board Class 10 History  लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष Notes

  • जब जनता वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट हो जाती है तब जनसंघर्ष और आंदोलनों का शुरू करती है।
  • जनसंघर्ष एवं आंदोलन का अर्थ जनता द्वारा कुछ निश्चित बातों या वस्तुओं से संतुष्ट नहीं रहने पर सत्ता के विरुद्ध किया जानेवाला संघर्ष है।
  • भारत में 1974 में सरकार के विरुद्ध असंतोष की ज्वाला फूट पड़ी और जनसंघर्ष प्रारंभ हो गया। इसे संपूर्ण क्रांति की संज्ञा दी गयी।
  • नकारात्मक अर्थ में जनसंघर्ष अथवा आंदोलन का अर्थ वर्तमान व्यवस्था के विरुद्ध अपनी असंतुष्टि तथा असहमति को अभिव्यक्त करना है।
  • साकारात्मक दृष्टि से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में उत्पन्न विभूतियों को दूर करने की दृष्टि से जनसंघर्ष और आंदोलन होते हैं।
  • लोकतंत्र की बहाली के लिए नेपाल, चिली तथा म्यांमार में काफी आंदोलन एवं जनसंघर्ष हुए।
  • चिली में सैनिक तानाशाही के विरुद्ध, नेपाल में राजशाही के विरुद्ध पोलैंड में एक दल की तानाशाही के विरुद्ध जनसंघर्ष हुआ। म्यांमार में सैनिक शासन के विरुद्ध जनसंघर्ष चल रहा है।
  • लोकतंत्र की स्थापना हेतु नेपाल में देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने आपस में समझौता कर सात दलों के गठबंधन की स्थापना कर ली।
  • 24 अप्रैल, 2006 को नेपाल के राजा ज्ञानेन्द्र ने संसद को बहाल कर सत्ता सात राजनीतिक दलों के गठबंधन को सौंपने की घोषणा कर दी।
  • चिली में सैनिक शासन स्थापित हो गया जब आगस्तो पिनोशे ने सत्ता हथिया ली। लेकिन .
    2006 में लोकतंत्र की स्थापना हुई और मिशेवल बैशेले चिली की प्रथम राष्ट्रपति निर्वाचित हुई।
  • म्यांमार में सैनिक शासन के विरुद्ध जनसंघर्ष जारी है। आंगसान सूची के नेतृत्व वाली नेशनल लीग फॉरडेमोक्रेसी पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ था लेकिन सैनिक शासक ने उस निर्वाचन को अस्वीकार कर दिया।
  • लैटिन अमेरिकी देश बोलिविया में सरकार ने जलापूर्ति के निजीकरण का निर्णय लिया उसके विरूद्ध जनता ने एक सफल जनसंघर्ष किया।
  • 1974 के जनसंघर्ष की पृष्ठभूमि बिहार में तत्कालीन सरकार के विरुद्ध छात्र आंदोलन से  तैयार हुई। जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति के प्रणेता थे। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी की सरकार बनी। केन्द्र में पहली बार मोरारजी देसाई के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ।
  • 1970 के दशक में उत्तरप्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड) में सरकार द्वारा जंगलों की कटाई की अनुमति के विरुद्ध चिपको आंदोलन शुरू हुआ।
  • 1972 में महाराष्ट्र में दलित युवकों का एक संगठन बना जो “दलित पैंथर्स” के नाम से जाना गया।
  • दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में महिलाओं द्वारा ताड़ी-विरोधी आंदोलन चलाया गया।
  • 1990 के प्रारंभ में मध्य भारत के नर्मदा नदी पर सरकार द्वारा बाँधों के निर्माण का निर्णय के विरुद्ध नर्मदा बचाओ आंदोलन शुरू किया गया।
  • अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार जम्मू कश्मीको विशेष सुविधा प्रदान की गयी।
  • 2005 में केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम बनाया।
  • बोलिविया में फेडेकोर (FEDECORमक संगठन के नेतत्व में जनसंघर्ष चला जिसे मनटों टान संघों और सोशलिस्ट पार्टी नामक राजनीतिक दलका भी समर्थन प्राप्त था।
  • हित समूह व्यक्तियों के वैसे समूहको कहा जाता है जो किसी विशेष लाभ के लिए आपस में बंधे होते हैं।
  • कभी-कभी किसी उद्देश्य से गठित दबाव समूह ही राजनीतिक दल का रूप धारण कर लेते हैं। बाट मति मोर्चा असम गण परिषद डी. एम. के. अन्ना. डी. एम. कादि इसके उदाहरण हैं।
  • लोकतंत्र की सफलता में दबाव समूह बाधक नहीं, बल्कि सहायक होते हैं। इस कारण दबाव समूह को ‘अदृश्य सरकार की संज्ञा दी जाती है।

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता

Bihar Board Class 11 Political Science धर्मनिरपेक्षता Textbook Questions and Answers

धर्मनिरपेक्षता के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सी बातें धर्मनिरपेक्षता के विचार से संगत है? कारण सहित बताइए।
(क) किसी धार्मिक समूह पर दूसरे धार्मिक समूह का वर्चस्व न होना।
(ख) किसी धर्म को राज्य के धर्म के रूप में मान्यता देना।
(ग) सभी धर्मों को राज्य का समान आश्रय होना।
(घ) विद्यालयों में अनिवार्य प्रार्थना होना।
(ड) किसी अल्पसंख्यक समुदाय को अपने पृथक शैक्षित संस्थान बनाने की अनुमति होना।
(च) सरकार द्वारा धार्मिक संस्थाओं की प्रबन्धन समितियों की नियुक्ति करना।
(छ) किसी मंदिर में दलितों के प्रवेश के निषेध को रोकने के लिए सरकार का हस्तक्षेप।
उत्तर:
निम्नलिखित कथन धर्मनिरपेक्षवाद के अनुकूल हैं –

(क) एक धार्मिक समूह द्वारा प्रभावित की अनुपस्थित:
धर्मनिरपेक्षवाद की प्रथम एवं सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण शर्त राज्य और धर्म का अलग-अलग होना है परन्तु धर्मनिरपेक्षवाद के लिए यह भी आवश्श्यक है कि अन्तर या अंतः धार्मिक प्रभावित नहीं होनी चाहिए क्योंकि धर्मनिरपेक्षता में समानता स्वतंत्रता में समानता स्वतंत्रता, भेदभाव एवं शोषण का अभाव भी शामिल है।

(ङ) किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को अलग शिक्षा संस्थाओं को बनाने की अनुमति देना:
धर्मनिरपेक्षता किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा शैक्षिक संस्थाओं को खोलने पर प्रतिबन्ध नहीं लगाता भारत में अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित कोई संस्था (शैक्षिक) समानता के आधार पर सरकारी सहायता प्राप्त कर सकती है। शिक्षा का उद्देश्य पथ प्रदर्शन है।

धर्मनिरपेक्षता पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 2.
धर्मनिरपेक्षता के पश्चिमी और भारतीय मॉडल की कुछ विशेषताओं का आपस में घालमेल हो गया है। उन्हें अलग करें और एक नई सूची बनाएँ।
धर्मनिरपेक्षता के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षता पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11

धर्मनिरपेक्षता पाठ के प्रश्न उत्तर कक्षा 11 Bihar Board प्रश्न 3.
धर्म निरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? क्या इसकी बराबरी धार्मिक सहनशीलता से की जा सकती है।
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षवाद का तात्पर्य धर्म के मामले में राज्य का उदासीन होना है। इसका तात्पर्य यह कि किसी धर्म के मामले में रुचि नहीं रखनी चाहिए। राज्य को न तो किसी धर्म को आश्रय देना चाहिए और न ही किसी धर्म के विरुद्ध भेदभाव करना चाहिए। लोगों को धर्म के मामले में स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए, यह सोचते हुए कि यह उनका व्यक्तिगत मामला है।

धर्मनिरपेक्षवाद केवल इस बात से संबंधित नहीं है कि राज्य और धर्म को अलग होना चाहिए बल्कि उसे सामाजिक व्यवस्था पर आधारित समानता की स्थापना पर भी जोर देना चाहिए और इसका उद्देश्य अंतः धार्मिक प्रभुता और शोषण को समाप्त करने को होना चाहिए। धर्म निरपेक्षवाद द्वारा धर्म के अंदर स्वतंत्रता और समानता को भी बढ़ावा देना चाहिए। धर्मनिरपेक्षवाद एक विचार है। इसकी धर्म से समानता नहीं स्थापित की जा सकती। यह धर्मनिरपेक्ष का पहलू है।

धर्मनिरपेक्षता के क्वेश्चन आंसर Bihar Board Class 11 प्रश्न 4.
क्या आप नीचे दिए गए कथनों से सहमत हैं? उनके समर्थन या विरोध के कारण भी दीजिए।
(क) धर्मनिरपेक्षता हमें धार्मिक पहचान बनाए रखने की अनुमति नहीं देती है।
उत्तर:
नहीं, हम इस कथन से सहमत नहीं हैं कि धर्मनिरपेक्षवाद का सम्बन्ध धार्मिक पहचान से नहीं है। हम इसका समर्थन नहीं करते। धर्मनिरपेक्षवाद धार्मिक पहचान में कोई बाधा नहीं डालता। धर्मनिरपेक्षवाद धर्म व्यक्ति का निजी मामला है और यह राज्य और धर्म को अलग-अलग मानता है। व्यक्ति अपने मनपसंद धार्मिक पहचान को कायम रख सकता है।

(ख) धर्मनिरपेक्षता किसी धार्मिक समुदाय के अंदर या विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच असमानता के खिलाफ है।
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षवाद एक धार्मिक समूह या विभिन्न सामाजिक समूह में असमानता के विरुद्ध है, सही है।

धर्मनिरपेक्षवाद का केवल यही अर्थ नहीं है कि धर्म और राजनीति एक दूसरे से अलग हैं बल्कि यह भी है कि एक धार्मिक समुदाय में यह समानता पर भी जोर देता है। यह बात विभिन्न धार्मिक समूहों में भी देखने को मिलती है। यह सभी धार्मिक समूहों में भेदभाव के सभी रूपों को समाप्त करना चाहता है। एक ऐसा राज्य जो धर्मनिरपेक्ष माना जाता है उसको सिद्धान्तों ओर उद्देश्यों के प्रति समर्पित होना चाहिए जो कम से कम गैर-धार्मिक स्रोतों से लिया गया है। उसके अंत में शांति, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और भेदभाव से स्वतंत्रता शामिल होनी चाहिए।

(ग) धर्मनिरपेक्षता के विचार का जन्म पश्चिमी और ईसाई समाज में हुआ है। यह भारत के लिए उपयुक्त नहीं है।
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षवाद की उत्पत्ति पश्चिमी ईसाइयत से हुई है। यह भारत के अनुकूल नहीं है-सही है। यह सर्वथा सही है कि धर्मनिरपेक्षवाद की उत्पत्ति पश्चिम से विशेष रूप में अमरीका में उत्पन्न हुई है जिसमें राज्य और राजनीति का स्पष्ट रूप से पृथकता है। राज्य धर्म के मामले में न तो हस्तक्षेप करेगा और न ही धर्म राज्य के मामले में हस्तक्षेप करेगा। दोनों का स्वतंत्र क्षेत्र में अपनी सीमा है। उसी प्रकार राज्य किसी धार्मिक संस्था की सहायता नहीं कर सकता।

यह किसी शैक्षिक संस्था, जो धार्मिक समुदाय द्वारा संचालित हो, उसकी वित्तीय सहायता नहीं कर सकता। धर्म सर्वथा, व्यक्तिगत मामला है और कानून की या राज्य नीति का मामला नहीं है। इस विचार के लिए कोई स्थान नहीं है कि एक समुदाय अपनी मनपसंद का कार्य करने को स्वतंत्र है। समुदाय पर अधिकार या अल्पसंख्यक अधिकार का थोड़ा क्षेत्र इसमें अवश्य है।

भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद की हू-ब-हू अनुकृति नहीं है। केवल समान अवधारणा यह है कि राज्य और धर्म दोनों अलग हैं और राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता दोनों में पर्याप्त असमानता है। राज्य को सभी धर्मों का आदर करने का अधिकार है परन्तु भेदभाव करने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद अल्पसंख्यक अधिकार समर्थक है और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित शैक्षिक संस्थाओं की आर्थिक मदद भी करता है।

धर्मनिरपेक्षता के पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 5.
भारतीय धर्मनिरपेक्षता का जोर धर्म और राज्य के अलगाव पर नहीं वरन् उससे अधिक किन्ही और बातों पर है। इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
अनेक पश्चिमी और अमरीकी देशों के समान भारतीय धर्म निरपेक्षवाद राज्य और धर्म के अलगाव पर जोर देता है। परन्तु यह न केवल शर्त है बल्कि भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद का लक्षण है। यह निश्चित रूप से इससे कहीं अधिक है। इसका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच भेदभाव को समाप्त करना है। यह अंतर और अंतर्धार्मिक समुदायों में समानता और न्याय की स्थापना करता है। भारत में शोषण के अनेक मामले मिलते हैं। ये न केवल अंतर्धार्मिक समूहों में होते हैं बल्कि उसी धार्मिक समुदायों में भी होते हैं।

भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद उसे समाप्त करता है। भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद का दूसरा पहलू यह है कि सामाजिक सुधार लाने के लिए यह धार्मिक मामले में हस्तक्षेप कर सकता है। पं. नेहरू ने स्वयं भेदभव समाप्त करने संबन्धी और गलत सामाजिक बुराइयां जैसे-दहेज प्रथा, सती प्रथा के विरुद्ध कानून निर्माण में अहम् भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं के अधिकार में वृद्धि और सामाजिक स्वतंत्रता के लिए भी महत्त्वपूर्ण कार्य किए। नेहरू के लिए धर्मनिरपेक्षवाद का तात्पर्य साम्प्रदायिकता का पूर्ण विरोध था।

धर्मनिरपेक्षता Class 11 Question Answer Bihar Board प्रश्न 6.
सैद्धान्तिक दूरी क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षता का भारतीय दृष्टिकोण और पश्चिमी दृष्टिकोण का समान महत्त्वपूर्ण लक्षण है-राज्य और धर्म का अलगाव। राज्य को न तो सैद्धान्तिक होना चाहिए और न धर्म की स्थापना करनी चाहिए। इसलिए धर्मनिरपेक्षवाद का यह सुनिश्चित सिद्धान्त है कि राज्य धार्मिक कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। इसी प्रकार धर्म भी राज्य के किसी कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेगा। राज्य का अपना कोई निजी धर्म नहीं होना चाहिए और धर्म को व्यक्तिगत मामले के रूप में छोड़ देना चाहिए। राज्य और धर्म दोनों का अपना स्वतंत्र क्षेत्र होना चाहिए।

Bihar Board Class 11 Political Science धर्मनिरपेक्षता Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

कक्षा 11 धर्मनिरपेक्षता पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
धर्मनिरपेक्ष राज्य की परिभाषा लिखिए। (Define the secular state)
उत्तर:
एच. बी. कामथ के अनुसार “एक धर्मनिरपेक्ष राज्य न तो ईश्वर रहित राज्य है, न ही वह अधर्मी राज्य है न ही धर्म-विरोधी है। धर्मनिरपेक्ष राज्य होने का यह अर्थ है कि इसमें ईश्वर के अस्तित्व को नहीं माना जाता है।”

Dharmnirpekshta Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
पंथ निरपेक्ष अथवा धर्मनिरपेक्षता से क्या आशय है? (Define the term Secular)
उत्तर:
पंथ या धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ (Meaning of the word Secular):
धर्म या पंथ निरपेक्ष शब्द अंग्रेजी भाषा के सेक्युलर (Secular) शब्द का हिन्दी पर्याय है। सेक्युलर शब्द लैटिन भाषा के सरकुलम (Surculam) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है- ‘संसार या युग’।

धर्मनिरपेक्षता के प्रश्न उत्तर कक्षा 11 Bihar Board प्रश्न 3.
पंथ निरपेक्ष राज्य धर्मों के प्रति सहिष्णु किस प्रकार है? (A Secular state is tolerate towards all the religions How?)
उत्तर:
पंथ निरपेक्ष राज्य इस बात का प्रतिपादन करता है कि सभी धर्म आधारभूत रूप में एक है। अतः धर्म के आधार पर एक दूसरे के प्रति असहनशीलता का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। हम चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, हमारे द्वारा यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि एकमात्र हमारा धर्म ही सत्य का प्रतिपादन करता है। हमारे द्वारा अन्य सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।

धर्मनिरपेक्षता प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 4.
“धर्मनिरपेक्षता विश्व राज्य की आदर्श पूर्ति में सहायक है” व्याख्या कीजिए। (Explain the Secularism is helpful in making a idealistic globally state)
उत्तर:
विश्व राज्य एक अत्याधिक उदार और भव्य आदर्श है, जिसकी प्राप्ति धीरे-धीरे ही की जा सकती है। पंथ निरपेक्ष राज्य मानवीय स्वतन्त्रता और समानता पर आधरित होता है। इसके द्वारा प्रेम, दया, सहिष्णुता, सहयोग और मानवीय सद्भावना के गुणों पर जोर दिया जाता है। इस बात का भी प्रयत्न किया जाता है कि सभी व्यक्ति धर्म, जाति और अन्य भेदों पर विचार किए बिना परस्पर बन्धुत्व के विचार को अपना लें। पंथ निरपेक्षता के विचार की उदार व्याख्या है कि मानव-मानव है और उसके संदर्भ में जाति, धर्म, राष्ट्रीयता और अन्य किसी भेद को महत्त्व नहीं दिया जाना चाहिए। विश्व राज्य का आदर्श भी यही कहता है और इस प्रकार धर्मनिरपेक्षता विश्व राज्य के आदर्श की पूर्ति में सहायक है।

Dharmnirpekshta Class 11 Question Answer Bihar Board प्रश्न 5.
पंथ निरपेक्ष राज्य की शासन प्रणाली का आधार क्या होता है? (What is the base of the government in a Secular state?)
उत्तर:
पंथ निरपेक्ष राज्य धर्म से पृथकता पर आधारित होने के कारण आवश्यक रूप से भौतिक होता है और इसके अन्तर्गत मनुष्यों के नैतिक एवं आध्यात्मिक हितों की साधना नहीं हो सकती। प्रो. पुन्ताम्बेकर ने इस विषय में कहा है “इसके अन्तर्गत किसी धर्म या नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं होता। पंथनिरपेक्ष राज्य गाँधीवादी राज्य हो ही नहीं सकता न तो वह प्राचीन धार्मिक विचारधाराओं पर और न सांस्कृतिक विचारों पर चल सकता है।”

धर्मनिरपेक्षता Class 11 Bihar Board प्रश्न 6.
धर्मनिरपेक्षता का मूल आधार क्या है? (What is main base of Secularism?)
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षता का मूल आधार निम्नलिखित हैं –

  1. पंथ निरपेक्ष राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता।
  2. सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता।
  3. धार्मिक कट्टरता को निरूत्साहित करना।
  4. सर्वाधिकार का विरोध।
  5. सभी नागरिकों को समान अधिकार।
  6. शासन द्वारा धार्मिक शिक्षा का निषेध।
  7. व्यक्तियों को अन्य धर्मों में दखल देने का अधिकार नहीं।
  8. नैतिकता के नियमों को अस्वीकार नहीं करना।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

Dharmnirpekshta Ke Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
भारतीय संविधान में पंथ-निरपेक्षता के कौन-से आदर्श पाए जाते हैं? (What ideals of Secularism is to be given in Indian constitution?)
उत्तर:
धर्मनिरपेक्षता के आदर्श-भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता या पंथ-निरपेक्षता सम्बन्धी निम्नलिखित चार आदर्श दृष्टिगत होते हैं –
(क) राज्य अपने को किसी धर्म विशेष से सम्बद्ध नहीं करेगा, न ही किसी धर्म विशेष के अधीन रहेगा।
(ख) राज्य जब किसी व्यक्ति को धार्मिक मान्यता, आचरण एवं प्रचार-प्रसार सम्बन्धी स्वतंत्रता प्रदान करेगा, तो वह किसी व्यक्ति विशेष को अपेक्षाकृत (Preferential) सुविधा नहीं देगा।
(ग) किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध धर्म अथवा धार्मिक विचार के आधार पर राज्य कोई भेदभाव नहीं करेगा।
(घ) राज्य के अधीन किसी पद को प्राप्त करने हेतु सभी के धर्मावलम्बियों को समान अवसर प्राप्त होंगे।

प्रश्न 2.
धर्मनिरपेक्ष राज्य की प्रमुख परिभाषाएँ लिखिए। (Write the definitions of a Secular state)
उत्तर:
धर्मनिरपेक्ष राज्य की कुछ परिभाषाएँ निम्नांकित हैं –
(क) जॉर्ज ऑसलर के शब्दों में “धर्मनिरपेक्ष का अर्थ इस विश्व या वर्तमान जीवन से सम्बन्धित है तथा जो धार्मिक या द्वैतवादी विचारों से बन्धा हुआ न हो।” इस दृष्टि से धर्मनिरपेक्ष राज्य से अभिप्राय एक ऐसे राज्य से होता है जो संसारिक, लौकिक और ऐच्छिक है तथा जिसका अपना कोई धर्म नहीं। ऐसा राज्य धर्म के नाम पर व्यक्ति-व्यक्ति के मध्य किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं करता।

यह राज्य धर्म को व्यक्ति की व्यक्तिगत और आन्तरिक वस्तु मानते हुए धर्म को राजनीति से पृथक रखने में विश्वास रखता है। इस प्रकार का राज्य किसी धर्म विशेष का प्रचार-प्रसार नहीं करता, बल्कि यह सभी धर्मों को समान मानते हुए धार्मिक सहिष्णुता का पोषण करता है।”

(ख) एच.बी.कामथ के अनुसार, “एक धर्मनिरपेक्ष राज्य न तो ईश्वर. रहित राज्य है, न ही वह अधर्मी राज्य है और न ही धर्म-विरोधी। धर्मनिरपेक्ष राज्य होने का यह अर्थ है कि इसमें ईश्वर के अस्तित्व को नहीं माना जाता है।”

(ग) डोनाल्ड स्मिथ के शब्दों में, “धर्मनिरपेक्ष राज्य, वह राज्य है जिसके अंतर्गत-विषयक, व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है, जो व्यक्ति के साथ व्यवहार करते समय धर्म को बीच में नहीं लाता, जो संवैधानिक रूप से किसी धर्म से सम्बन्धित नहीं है और न किसी धर्म की उन्नति का प्रयत्न करता है और न ही किसी धर्म के मामले में हस्तक्षेप करता है।”

(घ) लक्ष्मीकान्त मैत्र के शब्दों में, “धर्मनिरपेक्ष राज्य से मेरा अभिप्राय यह है कि ऐसा राज्य धर्म या जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई भेद-भाव नहीं करता है। इसका अर्थ यह है कि राज्य की ओर से किसी विशिष्ट धर्म को मान्यता प्राप्त नहीं होगी।”

प्रश्न 3.
पंथ निरपेक्ष राज्य मानव-धर्म पर आधारित होता है। स्पष्ट कीजिए। (The Secular State is based on Humanism Clarify)
उत्तर:
पंथ निरपेक्ष राज्य किसी धर्म विशेष पर आधारित नहीं होता है और इसके द्वारा किसी प्रकार की धार्मिक क्रियाओं का सम्पादन भी नहीं किया जाता है किन्तु धर्म से पृथ्कता का तात्पर्य यह नहीं है कि पंथ निरपेक्ष राज्य पूर्ण रूप से भौतिक या अनाध्यात्मिक हो। इस प्रकार के राज्य को अधर्मी, विधर्मी, धर्म-विरोधी, अनाचारी या अधार्मिक नहीं कहा जा सकता है।

इसका कारण यह है कि किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित न होने पर भी इस प्रकार का राज्य सत्य, अहिंसा, प्रेम और विश्व-बन्धुत्व आदि सर्वमान्य सिद्धान्तों के प्रति आस्था रखता है और इसका धर्म और नैतिकता से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित नहीं होता, वरन् सभी धर्मों का सार मानव-धर्म पर आधारित होता है।

प्रश्न 4.
पंथ निरपेक्षता की आलोचना के कोई तीन बिन्दु लिखिए। (Write three points of criticis of Secularism)
उत्तर:
(क) प्रासन-प्रणाली का आधार भौतिक:
आलोचकों के अनुसार पंथ निरपेक्ष राज्य, राज्य की धर्म से पृथकता पर आधारित होने के कारण आवश्यक रूप से भौतिक होता है और इसके अन्तर्गत मनुष्यों के नैतिक एवं आध्यात्मिक हितों की साधना नहीं हो सकती। प्रो. पुन्ताम्बेकर ने इस सम्बन्ध में कहा है, “इसके अन्तर्गत किसी धर्म-या नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं होता। पंथ निरपेक्ष राज्य गाँधीवादी राज्य हो ही नहीं सकता न तो वह प्राचीन धार्मिक विचारधाराओं पर और न सांस्कृतिक विचारों पर चल सकता है।”

(ख) राज्य का छिन्न हो जाना सम्भव:
आलोचकों का कथन है कि राज्य में एक धर्म विशेष को मान्यता देने से धार्मिक एकता के आधार पर एक ऐसी राजनीतिक एकता स्थापित हो जाती है, जो राज्य को स्थायित्व प्रदान करती है। किन्तु धर्म से पृथक होने के कारण पंथ निरपेक्ष राज्य में इस प्रकार की धार्मिक एकता नहीं होती है और इस प्रकार की धार्मिक एकता के अभाव में राज्य के छिन्न-भिन्न हो जाने की आशंका बनी रहती हैं आलोचकों के अनुसार एक पंथ निरपेक्ष राज्य में विभिन्न धर्मों के जो अनुयायी होते हैं, उनके द्वारा धार्मिक भेदों के कारण परस्पर निरन्तर लड़ाई-झगड़े राज्य की एकता को नष्ट कर देते हैं।

(ग) लोककल्याणकारी नहीं हो सकता:
लोककल्याणकारी राज्य जनहित और सामाजिक कल्याण पर आधारित होता है और लोककल्याण की यह भावना नैतिक आदशों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ही उत्पन्न हो सकती है लेकिन पंथ निरपेक्ष सत्य धर्म और नैतिकता के प्रति उदासीन होता है और इस कारण यह कभी सच्चा लोककल्याणकारी राज्य नहीं हो सकता। आलोचकों के अनुसार, राज्य में लोककल्याण की भावनाओं का पतन हो जाता है और इसमें उन स्वार्थपूर्ण तत्त्वों को बढ़ावा मिलता है, जो लोककल्याण के विरुद्ध होते हैं।

प्रश्न 5.
पंथ निरपेक्षता के पक्ष में तीन तर्क दीजिए। (Give three arguments in favour of the Secularism)
उत्तर:
1. पंथ निरपेक्ष राज्य की आलोचनाएँ मिथ्या धारणा पर आधारित हैं:
पंथ निरपेक्ष राज्य की आलोचना करते हुए जो विभिन्न बातें कही जाती है।, वे सभी इस मिथ्या धारणा पर आधारित है कि पंथ निरपेक्ष राज्य धर्म-विरोधी राज्य होती है, जबकि वस्तुस्थिति इसके नितान्त विपरीत है। पंथ निरपेक्ष राज्य धर्म-विरोधी राज्य नहीं होता वरन् सभी धर्मों के सार मानव धर्म’ पर आधारित वास्तविक आध्यत्मिक राज्य होता है। इस प्रकार का राज्य, उसके कानून और सत्ता, सब कुछ नैतिकता पर आधारित होते हैं। न्यायमूर्ति रामास्वामी के शब्दों में “पंथ निरपेक्ष राज्य का तात्पर्य यह नहीं है कि कानून नैतिक आचार-विचार में पृथक हों।”

2. राष्ट्रीय एकता की प्राप्ति पंथ निरपेक्ष राज्य में ही सम्भव:
एक राज्य जिसके अन्तर्गत विविध धर्मों के अनुयायी रहते हैं, यदि किसी एक विशेष धर्म को अन्य धर्म के अनुयायी राज्य के प्रति उदासीनता का भाव अपना लेते हैं और बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक वर्ग में सदैव ही संघर्ष की स्थिति बनी रहती है लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य के अन्तर्गत सभी धर्मों के अनुयायियों को समान समझा जाता है और स्वतन्त्रता तथा समानता पर आधारित यह मातृभाव राष्ट्रीय एकता के लक्ष्य की प्राप्ति में बहुत अधिक सहायक होता है।

इतिहास इस बात का साक्षी है कि अकबर की पंथ निरपेक्षता ने मुगल साम्राज्य को एकता और सुदृढ़ता प्रदान की, लेकिन औरंगजब की धार्मिक पक्षपात की नीति ने मुगल साम्राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया। भारतीय संविधान सभा के सदस्यों का भी यही विचार था कि पंथ निरपेक्षता ही राज्य की एकता को बनाए रख सकती है और इसलिए उन्होंने भारत के लिए पंथ निरपेक्षता के आदर्श की अपनाया।

3. पंथ निरपेक्षता लोकतंत्र के आदर्श की पूरक:
पंथ निरपेक्षता का आदर्श लोकतंत्र के विचार का भी पूरक है। लोकतंत्र का आदर्श मूल रूप से समानता और स्वतंत्रता की धारणा पर आधारित है और पंथ निरपेक्ष राज्य में इन दोनों ही आदर्शों को उचित महत्त्व प्रदान किया जाता है। पंथ निरपेक्ष राज्य सभी धर्मों को समान समझाता है ओर पंथ निरपेक्षता की धारण धार्मिक क्षेत्र में व्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी आधारित है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि पंथ निरपेक्षता का विचार मूल रूप से लोकतन्त्रात्मक ही है।

आलोचक कहते हैं कि पंथ निरपेक्ष राज्य विकृत होकर तानाशाही का रूप ग्रहण कर लेता है, किन्तु वास्तव में इस प्रकार की आशंका पंथ निरपेक्ष राज्य की अपेक्षा धर्माचार्य राज्य में ही अधिक है। धर्माचार्य राज्य में शासन अपने आपको ईश्वर का प्रतिनिधि बतलाकर जनता पर मनमाने अत्याचार करते हैं। भूतकाल में इन धर्माचार्य राज्य में धर्म के नाम पर दूसरे धर्मों के अनुयायियों पर जिस प्रकार के अत्याचार किए गए, उनकी कल्पना ही भयावह है। पंथ निरपेक्ष राज्य तो सर्वाधिकारवाद की धारणा का विरोधी होने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा समानता पर आधारित होने के कारण अधिनायकवाद का विरोधी और प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था का पूरक है।

प्रश्न 6.
पंथ निरपेक्षता के कोई तीन मूल आधार लिखिए। (Write Three Tenets of Secularism)
उत्तर:
पंथ निरपेक्षता के मूल आधार-पंथ निरपेक्ष राज्य को सही रूप में समझने के लिए पंथ निरपेक्ष राज्य की विशेषताओं का अध्ययन उपयोगी है। पंथ निरपेक्ष राज्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –

1. धर्म समाज का सामूहिक कार्य न होकर व्यक्ति का व्यक्तिगत कार्य है:
प्राचीन और मध्य युग में धर्म को सामान्यतया समाज का सामूहिक कार्य माना जाता था और राजा तथा प्रजा सभी के द्वारा राजा के नेतृत्व में प्राकृतिक शक्तियों की पूजा की जाती थी लेकिन धार्मिक जीवन के दो अंग (विश्वास और आडम्बर) होते हैं, उनमें पंथ निरपेक्ष राज्य विश्वास को ही महत्त्वपूर्ण मानता है। उसकी मान्यता है कि धर्म आन्तरिक विश्वास की वस्तु है। अतः धर्म को समाज का सामूहित कार्य न माना जाकर व्यक्ति का व्यक्तिगत कार्य माना जाना चाहिए और सभी व्यक्तियों को अपनी इच्छानुसार धार्मिक जीवन व्यतीत करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

2. पंथ निरपेक्ष राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता:
धर्म और राज्य के पारस्परिक सम्बन्ध की दृष्टि से दो प्रकार के राज्य होते हैं – पंथ निरपेक्ष राज्य और धर्माचार्य राज्य। धर्माचार्य राज्य का अपना एक विशेष धर्म होता है और उसके द्वारा इस धर्म की वृद्धि के लिए विशेष प्रयत्न किए जाते हैं। पाकिस्तान इस्लामी राज्य के रूप में धर्माचार्य राज्य का एक उदाहरण है लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता। यह सभी धर्मों को समान समझता है और इसके द्वारा किसी विशेष धर्म के प्रभाव को बढ़ाने या कम करने का कोई प्रयत्न नहीं किया जाता।

3. धर्म विशेष पर आधारित न होते हुए भी अधार्मिक नहीं:
पंथ निरपेक्ष राज्य किसी धर्म विशेष पर आधारित नहीं होता है और इसके द्वारा किसी प्रकार की धार्मिक क्रियाओं का सम्पादन भी नहीं किया. जाता है किन्तु धर्म से पृथकता का तात्पर्य यह नहीं है कि पंथ निरपेक्ष राज्य पूर्ण रूप से भौतिक या अनाध्यात्मिक हो। इस प्रकार के राज्य को अधर्मी, विधर्मी, धर्मविरोधी, अनाचारी या अधार्मिक नहीं कहा जा सकता है। इसका कारण यह है कि किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित न होने पर भी इस प्रकार का राज्य सत्य, अहिंसा, प्रेम और विश्व-बन्धुत्व आदि सर्वमान्य सिद्धान्तों के प्रति आस्था रखता है और इसका धर्म एवं नैतिकता से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित नहीं होता, वरन् सभी धर्मों का सार ‘मानव धर्म’ पर आधारित होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में पंथ निरपेक्षता की विस्तृत विवेचना कीजिए। (Discuss in detail the Secularism in India) अथवा, भारत में पंथ निरपेक्षता पर एक निबन्ध लिखिए। (Explain the Secular Character of Indian Democracy) अथवा, भारत में पंथ निरपेक्षता पर एक निबन्ध लिखिए। (Write an essay on Secularism in India)
उत्तर:
भारत में पंथ निरपेक्षता-भारत में सदैव से ही धर्म का जीवन के अन्तर्गत विशेष महत्त्व रहा है किन्तु कालांतर में धर्म के संकुचित रूप का प्रचलन हो गया, उसके आडम्बरमय रूप को ही सब कुछ समझ लिया गया और इससे भारत की राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक प्रगति को गहरा आघात पहुँचा। भारतीय समाज में धर्म के नाम पर इतने अधिक रूपान्तर प्रचलित हो गए कि इससे समाज विभिन्न टुकड़ों में विभक्त हो गया और राष्ट्रीय एकता को भीषण आघात पहुँचा।

सदियों तक परतन्त्रता इन परिस्थितियों का स्वाभाविक परिणाम हुआ धार्मिक मत-मतान्तरों के इन दुष्परिणामों को देखते हुए भारतीय संविधान के निर्माताओं द्वारा पंथ निरपेक्षता के आदर्श को अपनाया गया लेकिन संविधान सभा के अनेक प्रमुख सदस्यों द्वारा यह बात नितान्त स्पष्ट कर दी गयी कि पंथ निरपेक्षता का आशय धर्म-विरोध से नहीं है और भारत राज्य एक धर्म-विरोधी राज्य न होकर नैतिकता, आध्यात्मिक और मानव धर्म पर आधारित एक वास्तविक धार्मिक राज्य होगा। पंथ निरपेक्षता, के आदर्श को प्राप्त करने के लिए भारतीय संविधान के अन्तर्गत निम्न व्यवस्थाएँ की गयी हैं –

1. अस्पृश्यता का अन्त:
पंथ निरपेक्षता का उदार आदर्श इस बात पर बल देता है कि सामाजिक जीवन में भी जाति या अन्य किसी आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। इस दृष्टि से संविधान की धारा 17 के द्वारा अस्पृश्यता का उन्मूलन कर दिया गया है। इस प्रकार धर्म की आड़ में भारतीय समाज के अन्तर्गत मनुष्य, मनुष्य पर जो अत्याचार करते रहे, उसे इस व्यवस्था के आधार पर समाप्त कर दिया गया है।

2. धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं:
संविधान के द्वारा नागरिकों को यह विश्वास दिलाया गया है कि धर्म के आधार पर उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। संविधान की धारा 15 (ii) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा। धारा 16 (i) के अनुसार सार्वाजनिक पदों पर नियुक्तियाँ करने में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

3. धार्मिक स्वतंत्रता:
भारतीय संविधान के द्वारा प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गयी है और संविधान की धारा 25 के द्वारा प्रत्येक नागरिक को यह मौलिक अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी धर्म में विश्वास और उसके अनुसार आचरण करे। इसका अभिप्राय यह है कि किसी भी नागरिक को किसी धर्म विशेष का पालन करने या न करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

4. धार्मिक संस्थाओं की स्थापना और धर्म-प्रचार की स्वतंत्रता:
संविधान के द्वारा धर्म को सामूहिक स्वतंत्रता भी प्रदान की गयी है। संविधान की धारा 26 में कहा गया है कि प्रत्येक सम्प्रदाय को धार्मिक तथा परोपकारी उद्देश्यों के लिए संस्थाएँ स्थापित करने और उन्हें चलाने, धार्मिक मामलों का प्रबंध करने, चल तथा अचल सम्पत्ति रखने और प्राप्त करने और ऐसी सम्पत्ति को कानून के अनुसार प्रबंध करने का अधिकार है। संविधान के द्वारा नागरिकों को धर्म के प्रचार और प्रसार की स्वतंत्रता दी गयी है किन्तु उनके द्वारा उस सम्बन्ध में लोभ, लालच और अन्य साधनों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

5. धार्मिक कार्यों के लिए किया जाने वाला व्यय कर-मुक्त:
भारतीय संविधान अपने नागरिकों को न केवल धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं की स्थापना की स्वतंत्रता प्रदान करता है, वरन् इस सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 27 में कहा गया है कि “धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए खर्च की जाने वाली सम्पत्ति पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा”। संविधान की इस व्यवस्था से यह नितान्त स्पष्ट है कि भारत राज्य एक धर्मविरोधी राज्य नहीं, वरन् विशुद्ध धर्म को प्रोत्साहित करने वाला राज्य है।

6. धार्मिक शिक्षा का निषेध:
पंथ निरपेक्षता की परम्परा के अनुरूप संविधान की धारा 28 में कहा गया है कि किसी सरकारी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती तथा गैर-सरकारी, किन्तु सरकार से आर्थिक सहायता या मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में किसी को धार्मिक शिक्षा या उपासना में भाग लेने को बाध्य नहीं किया जा सकता। इस सभी उपबन्धों से यह नितान्त स्पष्ट है कि भारत एक पंथ निरपेक्ष राज्य है, धर्म-विरोधी राज्य नहीं।

इस. पथ सिंपेक्ष राज्य के अन्तर्गत उच्च धार्मिक पदाधिकारी पद ग्रहण के समय ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकते हैं। भारत राज्य के सर्वोच्च पदाधिकारी धार्मिक उपासना आदि में भाग ले सकते हैं। मार्मिक और परोपकारी कार्यों के लिए किए जाने वाले व्यय पर कर-मुक्ति की व्यवस्था की गयी है और शिक्षण संस्थाओं में नैतिक शिक्षा प्रारम्भ करने पर भी विचार किया जा रहा है। भारतीय इतिहास और संविधान में प्रतिपादित लोकतंत्र एवं लोककल्याण के आदर्श को दृष्टि में रखते हुए कहा जा सकता है कि भारत के लिए पंथ निरपेक्षता का यह आदर्श ही नितान्त औचित्यपूर्ण है –

भारत के सम्बन्ध में स्थिति यह है कि भारत देश ‘विविधता में एकता’ का आदर्श उदाहरण रहा है और हमारे संविधान-निर्माता ‘सर्वधर्म समभाव’ के प्रति निष्ठा रखते थे। अत: उनके द्वारा पंथ निरपेक्षता के आदर्श को अपनाया गया लेकिन एक पंथ निरपेक्ष राज्य की स्थिति को पूर्ण अंशों में ‘पंथ निरपेक्ष समाष (Secular Society) में ही प्राप्त किया जा सकता है और भारतीय जीवन का चिन्ताजनक तथ्य यह है कि हम इक्कीसवीं सदी तक भी पंथ निरपेक्ष समाज की स्थिति को प्राप्त नहीं कर सके हैं। अभी हाल ही के वर्षों में तो भारतीय समाज में धर्म पर आधारित भेदों ने अधिक तीव्र रूप धारण कर लिया है। इस स्थिति का समाधान केवल यही है भारतीय नागरिक ‘सर्वधर्म समभाव’ और ‘सभी धर्मों के प्रति सद्भाव एवं सम्मान’ की स्थिति को अपने मन, मस्तिष्क और हृदय में सदैव के लिए संजो लें।

न केवल भारत, वरन् विश्व के अन्य प्रगतिशील राज्यों द्वारा भी पंथ निरपेक्षता के मार्ग को अपनाया गया है वर्तमान समय में पाकिस्तान, लीबिया, युगाण्डा, सउदी, अरब, बंग्लादेश और मध्य-पूर्व के अन्य कुछ राज्य ही धर्माचार्य राज्य के उदाहरण हैं। वर्तमान युग पंथ निरपेक्षता का ही युग है तथा अब तो रूस और पूर्वी यूरोप के अन्य राज्यों ने भी ‘धर्म-विरोध’ की स्थिति का त्याग कर यथार्थ रूप में पंथ निरपेक्षता की स्थिति को अपना लिया है।

प्रश्न 2.
पंथ या धर्मनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं? पंथ निरपेक्षता के मूल सिद्धान्तों का परीक्षण कीजिए। (What do you mean by Secularism? Examine the fundamental principles of Secularism)
उत्तर:
पंथ या धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ (Meaning of the Word Secular):
धर्म या पंथ-निरपेक्ष शब्द ‘अंग्रेजी’ भाषा के ‘सेक्युलर’ (Secular) शब्द का हिन्दी पर्याय है। सेक्युलर (Seculare) शब्द, लैटिन भाषा के ‘सरकुलम’ (Surculam) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है-संसार अथवा युग। धर्मनिरपेक्ष राज्यों की कुछ परिभाषाएँ निम्नंकित हैं –

1. जार्ज ऑसलर के शब्दों में “धर्मनिरपेक्ष का अर्थ इस विश्व या वर्तमान जीवन से सम्बन्धित है तथा जो धार्मिक या द्वैतवादी से बंधा हुआ न हो।” इस दृष्टि से धर्मनिरपेक्ष राज्य से अभिप्राय एक ऐसे राज्य से होता है जो सांसारिक, लौकिक और ऐच्छिक है तथा जिसका अपना कोई धर्म नहीं। ऐसा राज्य धर्म के नाम पर व्यक्ति-व्यक्ति के मध्य किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं करता। यह राज्य धर्म को व्यक्ति की व्यक्तिगत और आन्तरिक वस्तु मानते हुए धर्म को राजनीति से पृथक रखने में विश्वास रखता है। इस प्रकार का राज्य किसी धर्म विशेष का प्रचार-प्रसार नहीं करता, बल्कि यह सभी धर्मों को समान मानते हुए धार्मिक सहिष्णुता का पोषण करता है।

2. एच.बी.कामथ के अनुसार, “एक धर्मनिरपेक्ष राज्य न तो ईश्वर रहित राज्य है, न ही यह अधर्मी राज्य है और न ही धर्म-विरोधी। धर्मनिरपेक्ष राज्य होने का यह अर्थ है कि इसमें ईश्वर के अस्तित्व को नहीं माना जाता है।”

3. डोनाल्ड स्मिथ के शब्दों में, “धर्मनिरपेक्ष राज्य, वह राज्य है जिसके अन्तर्गत धर्म-विषयक, व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है, जो व्यक्ति के साथ व्यवहार करते समय धर्म को बीच में नहीं लाता, जो संवैधानिक रूप से किसी धर्म से सम्बन्धित नहीं है और न किसी धर्म की उन्नति का प्रयत्न करता है और न ही किसी धर्म के मामले में हस्तक्षेप करता है।”

4. लक्ष्मीकान्त मिश्र के शब्दों में, “धर्मनिरपेक्ष राज्य से मेरा अभिप्राय यह है कि ऐसा राज्य धर्म या जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई भेद-भाव नहीं करता है। इसका अर्थ यह है कि राज्य की ओर से किसी विशिष्ट धर्म को मान्यता प्राप्त नहीं होगी।”

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि धर्मनिरपेक्ष राज्य से अभिप्राय एक ऐसे राज्य से है जिसका कोई अपना धर्म नहीं होता और जो धर्म के आधार पर व्यक्तियों में कोई भेद-भाव नहीं करता। इसका अर्थ एक धर्म-विरोधी, अधार्मिक या ईश्वर रहित राज्य से नहीं बल्कि एक ऐसे राज्य से है जो धार्मिक मामलों में पूर्णतया तटस्थ रहता है क्योंकि यह धर्म को व्यक्ति की व्यक्तिगत वस्तु मानता है। पंथ निरपेक्षता के मूल आधार-पंथ निरपेक्ष राज्य को सही रूप में समझने के लिए पंथ निरपेक्ष राज्य की विशेषताओं का अध्ययन उपयोगी होगा। पंथ निरपेक्ष राज्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्न इस प्रकार हैं –

1. धर्म समाज का सामूहिक कार्य न होकर व्यक्ति का व्यक्तिगत कार्य है:
प्राचीन और मध्य युग में धर्म को सामान्यता समाज का सामूहिक कार्य माना जाता था और राजा तथा प्रजा सभी के द्वारा राजा के नेतृत्व में प्राकृतिक शक्तिओं की पूजा की जाती थी लेकिन धार्मिक जीवन के दो अंग (विश्वास और आडम्बर) होते हैं, उनमें पंथ निरपेक्ष राज्य विश्वास को ही महत्त्वपूर्ण मानना है। उसकी मान्यता है कि धर्म आन्तरिक विश्वास की वस्तु है, अतः धर्म को समाज का सामूहिक कार्य न माना जाकर व्यक्ति का व्यक्तिगत कार्य माना जाना चाहिए और सभी व्यक्तियों को अपनी इच्छानुसार धार्मिक जीवन व्यतीत करने की स्वतंत्रता चाहिए।

2. पंथ निरपेक्ष राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता:
धर्म और राज्य के पारस्परिक सम्बन्ध की दृष्टि से दो प्रकार के राज्य होते हैं-पंथ निरपेक्ष राज्य और धर्माचार्य राज्य। धर्माचार्य राज्य का अपना एक विशेष धर्म होता है और उसके द्वारा इस धर्म की वृद्धि के लिए विशेष प्रयत्न किए जाते हैं। पाकिस्तान इस्लामी राज्य के रूप में धर्माचार्य राज्य का एक उदाहरण है। लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य का अपना कोई धर्म नहीं होता। यह सभी धर्मों को समान समझता है और इसके द्वारा किसी विशेष धर्म के प्रभाव को बढ़ाने या कम करने का कोई प्रयत्न नहीं किया जाता।

3. धर्म विशेष पर आधारित न होते हुए भी अधार्मिक नहीं:
पंथ निरपेक्ष राज्य किसी धर्म विशेष पर आधारित नहीं होता है और इसके द्वारा किसी प्रकार के धार्मिक क्रियाओं का सम्पादन भी नहीं किया जाता है किन्तु धर्म से पृथ्कता का तात्पर्य यह नहीं है कि पंथ निरपेक्ष राज्य पूर्ण रूप से भौतिक या अनाध्यात्मिक हो। इस प्रकार के राज्य सत्य, अहिंसा, प्रेम और विश्व-बन्धुत्व आदि सर्वमान्य सिद्धान्तों के प्रति आस्था रखता है और इसका धर्म एवं नैतिकता से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। धर्मनिरपेक्ष राज्य किसी विशेष धर्म से सम्बन्धित नहीं होता, वरन् सभी धर्मों के सार ‘मानव धर्म’ पर आधारित होता है।

4. सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता:
पंथ निरपेक्ष राज्य इस बात का प्रतिपादन करता है कि सभी धर्म आधारभूत रूप से एक है। अतः धर्म के आधार पर एक-दूसरे के प्रति असहनशीलता का बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए। हम चाहे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, हमारे द्वारा यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि एकमात्र हमारा धर्म ही सत्य का प्रतिपादन करता है। हमारे द्वारा अन्य सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए।

5. धार्मिक कट्टरता (Bigotry) को निरुत्साहित करना:
पंथ निरपेक्ष राज्य धार्मिक उदारवाद का प्रशंसक और धार्मिक कट्टरता का विरोधी होता है। इसके द्वारा राष्ट्रीय एकता और शक्ति के हित में ऐसा प्रगातिशील संस्थओं को प्रोत्साहित किया जाता है जो धार्मिक कट्टरता और कठमुल्लापन के प्रभाव को कम करने के लिए कार्य करती हैं।

6. सर्वाधिकार का विरोध:
सर्वाधिकार का तात्पर्य यह है कि राज्य व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन पर नियत्रंण रखे लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य की मान्यता यह है कि धर्म व्यक्ति के आन्तरिक विश्वास और व्यक्तिगत जीवन की वस्तु है और इसलिए राज्य के द्वारा उस समय तक व्यक्ति के धार्मिक जीवन में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि व्यक्ति का धार्मिक जीवन सार्वजनिक हित में बाधक न हो। इस प्रकार पंथ निरपेक्षता का आदर्श इस विचार पर आधारित है कि राज्य का अधिकार व कार्यक्षेत्र सर्वव्यापी न होकर प्रतिबन्धित और सीमित होना चाहिए।

7. सभी नागरिकों को समान अधिकार:
पंथ निरपेक्ष राज्य अपने सभी नागरिकों को किसी भी वर्ग के साथ बिना कोई पक्षपात किए सामाजिक और राजनीतिक अधिकार प्रदान करता है। सरकारी सेवाओं या जीवन के अन्य क्षेत्रों में धर्म, जाति, वर्ग या अन्य किसी आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

8. पंथ निरपेक्ष राज्य मौलिक रूप से लोकतन्त्रात्मक:
लोकतन्त्र का विचार मूल रूप से समानता और स्वतंत्रता की धारणा पर आधारित है और पंथ निरेपक्ष राज्य में इन दोनों ही विचारों को उचित महत्त्व प्रदान किया गया है। पंथ निरपेक्ष राज्य सभी धर्मों को समान समझता है।

9. पंथ निरपेक्ष राज्य का सर्वोच्च कर्त्तव्य लोककल्याण:
धर्म के दो पक्ष होते हैं लौकिक और पारलौकिक। पक्ष का तात्पर्य है ईश्वर की सेवा, पूजा आराधना कर आगे आने वाले जीवन को सुधारना और लौकिक पक्ष का तात्पर्य है मानव जाति की सेवा कर स्वयं अपने और अन्य व्यक्तियों के इसी जीवन को सुधारना। पंथ निरपेक्ष राज्य धर्म के लौकिक रूप में विश्वास करता है और इसके द्वारा सामूहिक रूप से अपने सभी नागरिकों के कल्याण का कार्य करता है।

10. शासन द्वारा धार्मिक शिक्षा का निषेध-पंथ निरपेक्ष राज्य स्वयं धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं करता और सामान्यतया उसके द्वारा ऐसी संस्थाओं को आर्थिक सहायता भी प्रदान नहीं की जाती, जिनके पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के लिए निश्चित और महत्त्वपूर्ण स्थान होता है।

11. नैतिकता के नियमों को अस्वीकार नहीं करता:
पंथ निरपेक्ष राज्य में धार्मिक शिक्षा के निषेध का तात्पर्य यह नहीं लिया जाना चाहिए कि राज्य नैतिकता के नियमों को स्वीकार नहीं करता। नैतिकता पंथ निरपेक्ष राज्य का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधार है और संस्कृतियों से सम्बन्धित व्यक्ति सामूहिक रूप से राज्य के कल्याण हेतु कार्य करता है। इस प्रकार से विभिन्न हितों और धार्मिक मतों के बीच सहयोग उनमे निहित सामान्य नैतिक भावना के आधार पर ही सम्भव होता है। इस प्रकार एक सच्चा पंथ निरपेक्ष राज्य नैतिकता को अस्वीकार नहीं करता और न ही उसके द्वारा ऐसा किया जाना चाहिए।

12. व्यक्तियों को अन्य धर्मों का अधिकार नहीं:
पंथ निरपेक्ष राज्य में सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार धार्मिक जीवन व्यतीत करने का तो अधिकार होता है, किन्तु उन्हें अन्य धर्मों के विरोध का अधिकार नहीं होता। उनके द्वारा ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता है जिससे अन्य धर्मों के अनुयायियों की धार्मिक भावना को आघात पहुँचे।

13. कोई भी पंथ निरपेक्ष राज्य के कानूनों से मुक्त नहीं:
पंथ निरपेक्ष राज्य के अन्तर्गत कोई भी धर्म या उस धर्म से सम्बन्धित पुरोहित वर्ग राज्य के कानूनों से मुक्त नहीं होता। यदि धर्म या उसके सिद्धान्त, उसके अनुयायियों या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक हैं, तो राज्य कानून द्वारा ऐसे हानिकारक सिद्धान्तों व धार्मिक व्यवहारों की मनाही कर सकता है।

प्रश्न 3.
पंथ निरपेक्षता की धारणा की आलोचना कीजिए। (Criticism the Concept of Secularism)
उत्तर:
प्राचीन और मध्य युग में धर्म और राजनीति का गठबन्धन था, लेकिन इस प्रकार के गठबन्धन के परिणामस्वरूप धर्म और राजनीति दोनों, का ही स्वरूप विकृत हो गया। इसलिए इस प्रकार से धर्माचार राज्य के विरुद्ध प्रतिक्रिया प्रारम्भ हुई और धर्म या राजनीति के पृथक्करण पर आधारित पंथ निरपेक्षता के विचार का उद्य हुआ किन्तु पंथ निरपेक्षता के विचार या पंथ निरपेक्षता की भी आलोचना की जाती है। इस प्रकार की आलोचना के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

1. शासन-प्रणाली का आधार भौतिक:
आलोचना के अनुसार पंथ निरपेक्ष राज्य, राज्य की धर्म से पृथकता पर आधारित होने के कारण आवश्यक रूप से भौतिक होता है इसके अन्तर्गत मनुष्यों के नैतिक एवं आध्यात्मिक हितों की साधना नहीं हो सकती। प्रो. पुन्ताम्बेकर ने इस सम्बन्ध में कहा है, “इसके अन्तर्गत किसी धर्म या नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं होता। पंथ निरपेक्ष राज्य गाँधीवादी राज्य हो ही नहीं सकता …… न तो वह प्राचीन धार्मिक विचारधाराओं पर और न सांस्कृतिक विचारों पर चल सकता है।”

2. राज्य का छिन्न-भिन्न हो जाना सम्भव:
आलोचकों का कथन है कि राज्य में एक धर्म विशेष को मान्यता देने से धार्मिक एकता के आधार पर एक ऐसी राजनीतिक एकता स्थापित हो जाती है, जो राज्य में इस प्रकार की धार्मिक एकता नहीं रहने देती है और इस प्रकार की धार्मिक एकता के अभाव में राज्य के छिन्न-भिन्न हो जाने की आशंका बनी रहती है। आलोचकों के अनुसार एक पंथ निरपेक्ष राज्य में विभिन्न धर्मों के जो अनुयायी होते हैं, उनके द्वारा धार्मिक भेदों के कारण परस्पर एवं निरन्तर लड़ाई-झगड़े राज्य की एकता को नष्ट कर देते हैं।

3. लोककल्याणकारी राज्य नहीं हो सकती:
लोककल्याणकारी राज्य जनहित और सामाजिक कल्याण पर आधारित होता है और लोककल्याण की यह भावना नैतिक आदर्शों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ही उत्पन्न हो सकती है लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य धर्म और नैतिकता के प्रति उदासीन होता है और इस कारण यह कभी सच्चा लोककल्याणकारी राज्य नहीं हो सकता। आलोचकों के अनुसार, राज्य में लोककल्याण की भावनाओं का पतन हो जाता है और इसमें उन स्वार्थपूर्ण तत्त्वों को बढ़ावा मिलता है, जो लोककल्याण के विरुद्ध होते हैं।

4. सरलता से विकृत हो सकता है:
आलोचकों का यह भी कथन है कि पंथ निरपेक्ष राज्य में शासन का कोई नैतिक आधार नहीं होता, इसलिए इस प्रकार का राज्य सरलतापूर्वक विकृत हो सकता है और तानाशाही का रूप ग्रहण कर सकता है। राज्य में धार्मिक तथा नैतिक भावनाओं का पोषण न होने के कारण इस बात की आशंका रहती है कि कोई व्यक्ति शासन-शक्ति हथिया कर तानाशाही की स्थापना न कर ले जैसा कि मुसोलिनी ने 1922 ई. में और हिटलर ने 1933 ई. में किया।

5. धार्मिक शिक्षा की व्यवस्था न होने के दुष्परिणाम:
राज्य के अन्तर्गत शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों को किसी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाती है। इस प्रकार की धार्मिक शिक्षा के अभाव में विद्यार्थी पूर्ण भौतिकता के वातावरण में पलकर बड़े होते है और नैतिक-अनैतिक मार्ग से भौतिक साधनों की प्राप्ति ही उनके द्वारा अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लिया जाता है। जिस देश की युवा पीढ़ी नैतिक और धार्मिक आचरण से हटकर इस प्रकार का कलुषित मार्ग अपना लेती है। उस देश का भविष्य अन्धकारमय ही कहा जा सकता है।

6. बहुसंख्यक धार्मिक वर्ग की भावनाओं को आघात:
एक राज्य के अन्तर्गत धर्म की दृष्टि से जो वर्ग बहुमत में है, सदैव ही यह चाहता हैं कि उसे राज्य के अन्तर्गत अधिक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त होना चाहिए। धर्म की दृष्टि से बहुमत वर्ग को विशेष स्थिति प्राप्त होने या धर्माचार्य राज्य होने पर इस बहुमत वर्ग के द्वारा राज्य के प्रति धर्म मिश्रित देशभक्ति का दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है और वे राज्य के कल्याण को अपना विशेष कर्तव्य समझते हैं लेकिन पंथ निरपेक्ष राज्य में जब बहुमत और अल्पमत वर्ग को समान स्थिति प्राप्त होती है तो बहुमत वर्ग को अल्पमत वर्ग के लिए अपनी भावनाओं और हितों पर अंकुश रखना होता है। इससे बहुमत वर्ग की भावनाओं पर आघात पहुँचता है और वे राज्य के प्रति उस श्रद्धा-भक्ति का परिचय नहीं दे पाते, जिसका परिचय वे दे सकते थे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
इनमें से कौन धर्म निरपेक्ष राज्य नहीं है –
(क) नेपाल
(ख) अमेरिका
(ग) भारत
(घ) पाकिस्तान
उत्तर:
(घ) पाकिस्तान

प्रश्न 2.
‘धर्म से जीवन के विभिन्न कार्यों में संगति आती हैं और इससे उसको दिशा प्राप्त होती है।’ धर्म निरपेक्षता के सम्बन्ध में यह कथन किस महापुरुष का है?
(क) शंकराचार्य
(ख) महात्मा गाँधी
(ग) डॉ. राधाकृष्णन
(घ) विनोबा भावे
उत्तर:
(ग) डॉ. राधाकृष्णन

प्रश्न 3.
‘अस्पृश्यता का अन्त’ का वर्णन किस अनुच्छेद में किया गया है?
(क) अनुच्छेद – 14
(ख) अनुच्छेद – 17
(ग) अनुच्छेद – 23
(घ) अनुच्छेद – 12
उत्तर:
(ख) अनुच्छेद – 17

Bihar Board Class 10 English Book Solutions Poem 6 Koel

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Panorama English Book Class 10 Solutions Poem 6 Koel (The Black Cuckoo)

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B.1.1: Write ‘T’ for true and ‘F’ for false statement:

(1) Koel is called the black cuckoo.
(2) Koel sings in the apple-leaves.
(3) The song of the cuckoo brings a thousand memories.
(4) The poet does not become restless to hear its voice.
(5) “Thy wings” means “your wings”.
Answer:
(1) – T
(2) – F
(3) – T
(4) – F
(5) – T.

B.2. Answer the following questions very briefly:

Koel Poem Bihar Board Class 10 English Question 1.
Who wrote the poem, Koel?
Answer:
Puran Singh wrote the poem, Koel.

Koyal In English Bihar Board Class 10 Question 2.
What do you write for “thy” and “art” in prose?
Answer:
I write you for thy and are for art in prose.

Koel Poem In English Bihar Board Class 10 Question 3.
What makes thousand memories in heart?
Answer:
The high-pitched strains of Koel (Cuckoo) makes thousand memories in the poet’s heart.

Koyal Poem In Hindi Bihar Board Class 10 English Question 4.
What happens with the shades of mangoes?
Answer:
The shades of mangoes burn.

10th Class English Poem Bihar Board Question 5.
“O little Bird !” Why capital ‘B’ has been used here?
Answer:
Capital ‘B’ has been used in “O Little Bird” because the poet has used it for a particular cuckoo (Koel).

B.1. Answer the following questions very briefly:

Class 10th English Poem Bihar Board Question 1.
What charred the wings of Koel?
Answer:
The fire of love charred the wings of Koel.

कोयल In English Bihar Board Class 10 Question 2.
Why is Koel restless?
Answer:
Koel is restless for her ‘Beloved’.

10th Standard Poem Bihar Board English Question 3.
What fires the Koel?
Answer:
The sight of mango blossoms fires the Koel.

Koyal Hindi Poem Bihar Board Class 10 English Question 4.
What burns her heart?
Answer:
The bright greenness of the garden burns her (Koel’s) heart.

Question 5.
What does the flaming soul of the Koel ask?
Answer:
The flaming-soul of the Koel asks about her Beloved.

C. 1. Long Answer Questions:

Question 1.
In response to the speaker’s question.” What singed thy wings?”
The Koel replies, “The fire of love has charred my wings.” What does the Koel’s answer suggest? Can love burn like fire? Is this burning a positive thing on a negative one? Explain.
Answer:
The Koel’s answer suggests the separation from his beloved is unbearable. His heart is always at his beloved. His mind was rapt in the feeling of love.

No, love can not burn like fire, but its effect on a lover is great. His feeling make him hot. Regarding burning it is a negative one. Because it is fire which burns everything good or bad.

Question 2.
Why does the poet call the Koel “a rain of spark” Explain?
Answer:
“The Koel’s strains likes a rain of spark” means as raindrops cover a vast area So is the spark. In spark tinny glowing fit is thrown off from a burning substance, and fire the others. So do the Koel’s voice. So the poet has compared Koel’s voice to the rain of spark.

Question 3.
Why is the Koel restless? Is she able to win over his restlessness? If no, why?
Answer:
The Koel is restless because he is far from his beloved, that is why his song is shedding a sad song which seems to be setting on fire.

Question 4.
Why is a Koel praised? How do you feel when you hear its voice?
Answer:
A Koel is praised for his/her song. The bird is praised and welcomed as the darling bird of spring. It is a sweet singing bird which sing in spring. It is the darling of the spring. I have been hearing his song in the spring ever since my school-boy days. The Koel’s song reminds him of his memories. The Koel’s song echoes through out the valley and seems to pass hill to hill.

Question 5.
Do you think that the Koel symbolises true love?
Answer:
No, the Koel does not symbolise true love. The koels do not build their own nest and so he koel and she koel do not live together. They are wandering birds. Their lives are separate They are seen only in Spring and his/. her voice is heard. They do not live togather like other birds.

C.2. Group Discussion

Discuss the following in a group or pairs:

Question 1.
Nature always soothes our aggrieved soul.
Answer:
Nature exercises a positive influence on man. The great poet of nature william Wordsworth Says’ “Man bring the child of nature all the qualities and appearances of Nature find their counterpart in him.” In fact, this imaginative fusion of Nature and man was so complete with Wordsworth that he found a close affinity between the law of Nature and the highest moral laws. So by keeping close contact with Nature man can absorb politeness that soothes our aggrieve.

Question 2.
We always look forward to meeting whom we love.
Answer:
The man who loves any lady, runs after him. His mind is rapt in the feeling of love. His eyes are fixed on meeting time. It is an experience of love that gives him strange emotions of love. He wants to meet his beloved. He thinks that his beloved grows lovelier every day. Daily she looks more and more fresh like a rose in June. that is why there is always emotion in his bosom, who looks forward to meet his or her love.

C. 3. Composition

Question 1.
Write a paragraph in about 100 words on each of the following:
(i) A caged bird finds it difficult to sing.
Answer:
(i) A caged bird finds it difficult to Sing.
A caged bird does not find natural environment. It is not free. It does not get natural surroundings. For it, even spring is useless. It can’t see and observe the beauty of spring with budding flowers and new leaves. it forgets the beauty of running water’ and fresh air. So it becomes emotionless. It does not find its way of singing. The birds are the best free creatures on earth. They know to fly in the sky freely and singing, but when they are caged they do not find emotion to sing and enjoy.

(II)                                                        The Cuckoo’s Voice
The most remarkable thing about the cuckoo is its sweet voice. Its two fold notes has made it the favorite of poets, who have described it as an ‘ethereal minstrel can embodiment of melody and song.’ The poet have describe it as the ‘herald of spring the messenger of cupid; Its sweet voice makes us forget for a time the cares and anxieties of the world and carries us off to a dreamland of poetry and romance.

Question 2.
Write a letter to your friend describing how a koel though black in appearance stands for the sweetness of the soul.
Answer:

G.B.Road
Gaya
May 5, 2012

My dear Anita,
I was exceedingly glad to learn about your zeal and passion for studies. It is highly admirable.

In this letter. I shall give you a brief account about a Koel. The Koel though black in appearance stands for the sweetness of the soul. It is black and ugly to look at. It is so called from its two fold note coo-coo. We Judge things or persons by their outward look. Appearance cheat us. Persons or things are not always what they look like. We must look much below the surface and know its real worth. The Koel is the symbol of the same thing. Its heart is clear so it sings sweetly.
With all good wishes.

Yours affectionately
Reena

D. 3. Write the synonyms of the following words:

Keep little speak
conceal freedom sight

Answer:

Words Synonyms
Keep hold
Conceal secret
Little liny
Freedom liberty
Speak utter
Sight glance

F. Translation

Translate unit-I of Koel (text before the questions inbox) in Hindi or any other language that you know.
Answer:
कोयल! क्या बिजली पड़ी? तुम्हारे पंख कैसे जलकर काले हो गए?
आम की पत्तियों में छिप कर तुम गीत गाते हो।
तुम्हारे ऊंचे स्वर के गीत हमारी सोई हुई आत्मा को जगाते हैं।
हजारों स्मृतियों के साथ।
तुम उतना अधीर क्यों हो कि तुम्हारे गीत अग्नि प्रज्वलित करते हैं ?
देखो! गुलाब भी अंगार बन गए हैं, जो वायु और जल ग्रहण करते हैं।
आम के वृक्षों की छाया भी जलती है।
तुमने कैसी अग्नि की वर्षा की, ओ छोटी चिड़िया।
कोयल! क्या बिजली गिरी? तुम्हारे पंख कैसे जलकर काले हो गए।

Comprehensive Based Questions with Answers

1. Koel ! What lightning fell ? What singed thy wings?
What keeps thee fresh, yet charred?
Concealed in the mango-leaves, thou singest!
Thy high-pitched strains wake in my soul a
thousand memories!
Questions :
(i) Who is the speaker? How do you recognise him?
(ii) Name the poem.
(iii) Why does the poet call “the roses are on fire”?
(iv) Find words from the passage which mean :
(a) set on fire
(b) hid
Answers:
(i) The speaker of the poem is the poet, Puran Singh, himself. He goes on asking and telling about the Koel. The line, ‘Thy high pitched strains wake in my soul a thousand memories.” Here ‘in my soul’ refers to the poet.
(ii) The name of the poem is’Koel’ (The Black Cuckoo).
(iii) The poet’s mind is full of love, in the absence of his beloved. Everything of nature has become fire for him. It seems they are to …. hurt the poet. So the beautiful flowers seem him burning on fire.
(iv) (a) Kindling
(B) Concealed.

हिन्दी रूपान्तर :

  • कोयल! कैसी बिजली गिरी? तुम्हारे पंख क्या गाते हैं?
  • शरीर जल जाने पर भी तुम तरोताजा किस प्रकार हो?
  • आम की पत्तियों में छिपकर तुम गाती हो!
  • तुम्हारे द्वारा उच्च स्वर में रट लगाने से मेरी आत्मा में जागृति हुई है।
  • हजारों स्मृतियाँ ।

2. Why so restless that they spark-shedding notes go forth kindling fire?
Lo! The roses are on fire which winds and waters catch!
The shades of mangoes burn!
What a rain of sparks art thou, O Little Bird!
Koel! What lightning fell? What singed thy wings?
Questions:
(i) Who is restless?
(ii) Whose beloved has been described here?
(iii) Is a Koel the symbol of love?
(iv) Find word from the passage which means : ‘Sing’.
Answers :
(i) The Koel is restless.
(ii) the Koel’s beloved has been described here.
(iii) No, Koel is not the symbol of true love.

हिन्दी रूपान्तर :

  • इतनी बेचैन क्यों, जिस कारण तुम्हारी चिनगारी से युक्त रट
  • आग प्रज्वलित करती है ? ..
  • देखो कि किस प्रकार गुलाब जल रहे हैं जिसे तेज पवन तथा
  • जल पकड़ते हैं।
  • आम की छाया जलती है
  • ऐ छोटी चिड़िया ! तुम कैसी चिनगारी की वर्षा करती हो। ….
  • ऐ कोयल ! यह कैसी बिजली गिरी? तुम्हारे पेखों ने क्या गाया?

Third Stanza:
The Fire of Love has charred my wings and made me a new
I am restless ! Where is my Beloved?
The sight of mango-blossoms fires me all the more!
The greener the garden, the brighter burns my heart!
My flaming soul asks, “Where! where is my Beloved ?”
“Speak ! speak ! why are thy leaves so still ?”

हिन्दी रूपान्तर:

  • प्रेमाग्नि ने मेरे पखों को जलाकर काला कर दिया है और
  • मुझे नया बना दिया है (अर्थात् मेरा नया रूप बना दिया है।).
  • मैं अशान्त हूँ। कहाँ है मेरी प्रेमिका?
  • आम (के वृक्ष) पर विकसित मंजर मुझे अत्यधिक दग्ध करता (जलाता) है।
  • भेरी अग्नि की लपटों के समान प्रज्वलित अत्मा पूछती है, “कहाँ ? कहाँ है ?
  • मेरी प्रेमिका?”
  • “बोलो ! बोलो ! क्यों हैं ये पत्तियाँ इस प्रकार स्थिर?”

सरलार्थ:
अपनी प्रेमिका के मिलन के लिए आकुर कोयल अपने कष्टों का वर्णन करते हुए कहती है कि विरहाग्नि ने उसके पंखों को जलाकर काला कर दिया है तथा यह नया रूप प्रदान किया है। आम्र-वृक्ष के मंजर उसे शीतलता प्रदापन न कर उसे दग्ध’ (जला) रहे हैं । हरा-भरा उद्यान भी उसके हृदय को शान्ति प्रदान नहीं कर रहे । वृक्ष की पत्तियों से पूछती है कि उसकी प्रेमिका कहाँ है । उनसे कोई उत्तर न पाकर तथा उन पत्तियों को स्थिर देखकर वह विस्मित है।

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Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 8 मंत्र

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 8 मंत्र Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 8 मंत्र

Bihar Board Class 6 Hindi मंत्र Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से –

मंत्र कहानी के प्रश्न उत्तर Class 8 Bihar Board प्रश्न 1.
डाक्टर के लड़के कैलाश ने साँप को पाल रखा था फिर . भी साँप ने उसे क्यों काटा?
उत्तर:
साँप को लगा कि कैलाश उसपर आक्रमण करना चाहता है। अतः आत्मरक्षा में उतरे कैलाश पर आक्रमण कर अंगुली को काट खाया। साँप की – यह प्रकृति होती है कि वह तबतक आक्रमण नहीं करता जबतक उसे यह न लगे कि यह व्यक्ति उसे मारना या चोट पहुँचाना चाहता है।

मंत्र’ कहानी के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
डा. चड्ढा बूढ़े व्यक्ति को क्यों खोज रहा था?
उत्तर:
डा. चड्ढा उस बूढ़े व्यक्ति के उपकार का बदला चुकाना चाहता । था तथा पूर्व में अपने व्यवहार के लिये उस बूढ़े से क्षमा मांगना चाहता था।

Mantra Chapter Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
डाक्टर के लड़के कैलाश को साँघ ने काट लिया। इस खबर को सुनकर बूढ़े व्यक्ति को नींद क्यों नहीं आ रही थी?
उत्तर:
मानवता का तकाजा और कर्त्तव्य की पुकार के कारण बुड्ढा चाहकर भी नहीं सो पा रहा था। अस्सी वर्ष के उसके जीवन में यह पहला अवसर था कि ऐसा समाचार पाकर भी वह दौड़कर न गया हो। इसका अन्तर्मन उसे अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक कर रहा था।

पाठ से आगे –

Mantra By Premchand Questions And Answers Bihar Board प्रश्न 1.
डाक्टर द्वारा बूढ़े के लड़के को देखने से इन्कार करने पर । बूढ़ा व्यक्ति कैसा महसूस कर रहा होगा? अपने शब्दों में लिखिये।
उत्तर:
बूढ़ा डाक्टर के इन्कार करने पर हतप्रभ हो गया। उसके मन को . ठेस लगी। वह मन ही मन समझ गया कि उसके जीवन की आखिरी निशानी थी अब नहीं बचेगी। वह अन्दर से टूट गया पर कोई उपाय नहीं देख डोली उठवा ली और अपने घर को लौट गया।

Mantra Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
समाज में गरीबों का जीवन-स्तर सुधारने के लिये आप क्या करना चाहेंगे?
उत्तर:
उसके लिये समाज में शिक्षा का प्रचार-प्रसार आवश्यक है।’ शिक्षा से जागरूकता आयेगी -समाज में सबको आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।

Bihar Board Class 6 Hindi Book प्रश्न 3.
इस पाठ में आपको किसका चरित्र सबसे अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर:
इस पाठ में सबसे अच्छा चरित्र उस बूढ़े का है जिसने मानव-मूल्यों की रक्षा की और डाक्टर चड्ढा के बेटे की जान बचाने के लिये आधी रात .. को उसके घर पहुँच गया। डाक्टर चडढा से बदला लेने की भावना उसके मन में आयी पर बूढ़े ने उस पर नियन्त्रण करते हुये डाक्टर चड्ढा के यहाँ जाने का निर्णय लिया। डाक्टर चड्ढा से इनाम या पारिश्रमिक पाने की अपेक्षा किये बिना वह घर वापस आ गया। इस प्रकार बूढ़े ने इन्सानियत का उच्च उदाहरण प्रस्तुत किया।

मंत्र कहानी के प्रश्न उत्तर Class 6 Bihar Board प्रश्न 4.
इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
यह कहानी हमें शिक्षा देती है कि मानव मूल्य सर्वोपरि है –
जो तोको काँटा बोये, ताही बोउते तुम फूल
तोहे फूल का फूल है, ताको है त्रिशूल।।
मानवता की रक्षा के लिये ही ईश्वर ने मानव को इस धरती पर जन्म दिया है।

व्याकरण

Mantra By Premchand Questions And Answers In Hindi प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

(क) चैन न आना
उत्तर:
चिंता के कारण बूढ़े को चैन नहीं आ रहा था।

(ख) हवा देना
उत्तर:
राम ने आंदोलन को और हवा दी।

(ग) पगड़ी उतारकर रखना
उत्तर:
निर्धन पिता ने दहेज नहीं देने के कारण अपनी पगड़ी उतार कर पैर पर रख दी।

(घ) भूत सवार होना
उत्तर:
उसे पैसा कमाने का भूत सवार है।

(ङ) कलेजा ठण्डा होना
उत्तर:
पाकिस्तान की हार से भारत का कलेजा ठंडा हो गया।

(च) सीधा मुँह बात न करना
उत्तर:
वह इतना घमंडी है कि सीधा मुँह बात भी नहीं करता।

Bihar Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में अ उपसर्ग लगाकर विलोम बनाइए।
उत्तर:
(क) धर्म = अधर्म ।
(ख) ज्ञान = अज्ञान ।
(ग) भाव = अभाव
(घ) सहमत = असहमत
(ङ) सावधानी = असावधानी ।

मंत्र Summary in Hindi

पाठ का सार-संक्षेप

कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचन्द लिखित अनेक कहानियों से चुनी गयी यह कहानी मानव-मूल्यों की स्थापना.का सन्देश देती है। मनुष्य अहंकार भाव को प्रधानता देते हुये किस प्रकार इन्सानियत की अपेक्षा करता है और फिर. मानव-मूल्यों की बलि देता है, इसकी स्थापना इस कहानी का मूल उद्देश्य है। इस कहानी के दो मुख्य पात्र हैं – एक डाक्टर चड्ढा और दूसरा एक बूढ़ा जो सांप के विष को झाड़ने का मन्त्र जानता है और पास के एक गाँव में अपनी पत्नी के साथ रहता है।

बूढे के सात बच्चों में से छ: की मौत एक -एक कर हो चुकी है। यह सातवाँ भी गम्भीर रूप से बीमार हो गया है और अपने बीमार बेटे को डोली में सुलाकर वह बूढ़ा डाक्टर चड्ढा की डिस्पेन्सरी (औषधालय) पर पहुँचता है। उस समय सन्ध्या हो चुकी थी और डाक्टर चड्ढा नित्य की तरह टेनिस खेलने के लिये जाने की तैयारों में लगे थे। बूढ़ा घर के सामने डोली पर बीमार – बच्चे को छोड़कर, डॉक्टर साहब के घर के दरवाजे पर लगी चिक (परदा) उठाकर झांकता है।

उसको अन्दर प्रवेश करने की हिम्मत नहीं होती है- कहीं कोई डाँट न दे? अन्दर से डॉक्टर साहब की कड़क आवाज आती है- कौन . है? क्या चाहता है? बूढ़ा गिड़गिड़ाता हुआ विनती करता है “हूजूर! बड़ा गरीब आदमी हूँ, मेरा लड़का कई दिन से बीमार है।” डॉक्टर साहब घर के अन्दर ” से उत्तर देते हैं “कल सवेरे आओ, कल सवेरे। हम इस वक्त मरीजों को नहीं -देखते।”

बूढ़ा कहता है – “दुहाई है सरकार की, लड़का मर जायेगा, हुजूर! चार दिन से आँखें नहीं खोली हैं।”

डाक्टर साहब घड़ी देखते हैं-कुल दस मिनट का समय बाकी है। उन्होंने फिर कहा – “कल सवेरे आओ। यह हमारे खेलने का समय है।”

बूढ़ा ने अपनी पगड़ी उतारकर चौखट पर रख दी और रोते हुये कहा-“हुजूर एक निगाह देख लें। बस, एक निगाह! लड़का मर जायेगा, हुजूर! सात – लड़कों में से यही एक बच रहा है। हम रो-रोकर ही मर जायेंगे।”

डाक्टर साहब ने बूढ़े की बात अनसुनी कर दी। उन्होंने चिक उठायी और बाहर निकलकर अपनी मोटर की ओर बढ़ गये। बढे ने अन्तिम प्रयास किया दया कीजिये हुजूर, इस लड़के को छोड़कर इस संसार में मेरा कोई नहीं है।” डाक्टर साहब ने मुँह फेर लिया और अपनी गाड़ी पर बैठकर बोले – “कल आना”

डोली जिधर से आयी थी. उधर चली गयी और फिर उसी रात उसका हँसता-खेलता लड़का, इस संसार से विदा हो गया।

कई साल बीत गये। डाक्टर चड्ढा की प्रैक्टिस दिन दुनी रात चौगनी बढ़ती गयी। उन्होंने यश भी कमाया और धन भी। डाक्टर चड्ढा की दो संतान थी – एक लड़का और एक लड़की। लड़की का विवाह डाक्टर साहब ने कर दिया था। लड़का अभी कॉलेज में पढ़ता था। उसका नाम था कैलाश। कैलाश को सांप पालने-खिलाने और नचाने का शौक था। आज कैलाश की बीसवीं सालगिरह का समारोह डाक्टर चड्ढा मना रहे थे। इस समारोह में कैलाश के सहपाठी और खास मित्र बुलाये गये थे, जिनमें मृणालिनी भी थी। मृणालिनी, कैलाश से प्यार करती थी। मृणालिनी आज जिद कर बैठी कि वह सांप देखेगी। -कैलाश इस भीड़ में सांपों को नहीं निकालने का बहाना करता रहा, पर मृणालिनी की जिद् के आगे झुकना ही पड़ा। वह मृणालिनी और अन्य मित्रों को लेकर सांपों के रखने की जगह पर गया और बीन बजाने लगा। वह – एक-एक सांप निकालता और उनके करतब दिखाता। उन्हें अपने गले में डाल लेता था फिर बीन बजाकर उन्हें नचाता। एक मित्र ने व्यंग्य किया – इन सांपों के दाँत नहीं होंगे अन्यथा ये अभी तक काट लिये होते। (कैलाश ने हँसकर – कहा – दाँत तोड़ना तो मदारियों का काम है। इनके दाँत सही सलामत हैं –

कहो तो दिखा दूँ। इनके काटे की कोई दवा नहीं है। यह अत्यन्त जहरीला है। कैलाश को जोश आ गया। उसने उस सांप की गर्दन दबायी और मुँह खोलकर . उसके दाँत सबको दिखा दिये। सांप को उसके पालने वालों का आज का

व्यवहार ठीक नहीं लगा क्योंकि सांप क्षणभर में क्रोध से पागल हो गया। – कैलाश ने उसकी गर्दन ढीली कर दी। सांप ने आत्मरक्षा में अपने फन फैला दिये और कैलाश की अंगुली में अपने दाँत गड़ा दिये। कैलाश की अंगुली से खून टपकने लगा। सांप छुटते ही वहाँ से भाग निकला। कैलाश ने अंगुली . दबा ली। एक जड़ी पीसकर लगायी गयी पर उसका कोई फायदा नहीं निकला। कैलाश की आँखें झपकने लगीं और होठों पर नीलापन दौड़ने लगा। कैलाश की हालत खराब होने लगी। मेहमान कमरे में इकट्ठा हो गये। एक सपेरे को बुलाया गया जो विप झाड़ने का काम करता था। वह आया पर कैलाश की सूरत देख कर बोला-“अब क्या हो सकता है सरकार! जो कुछ होना था सो हो चुका।” घर में कोहराम मच गया। सभी रोने लगे।।

शहर से कुछ दूर एक झोपड़ी में एक बूढा और एक बढिया अंगीठी के सामने बैठे जाड़े की रात काट रहे थे। घर में न चारपाई थी और न कोई विछावन। एक छोटी-सी ढिवरी ताक पर जल रही थी। किसी ने द्वार पर आकर आवाज दी “भगत, भगत! क्या सो गये? जरा किवाड़ खोलो।” भगत ने दरवाजा खोल दिया। एक आदमी अन्दर आकर बोला – “कुछ सुना. डाक्टर चड्ढा के लड़के को सांप काट लिया। तुम चले जाओ, आदमी बन जाओगे। खूब पैसा मिलेगा।

बूढ़े न इन्कार करते हुये कहा – “मैं नहीं जाता। मेरी बला से मरे। मेरा लड़का अन्तिम सांसें गिन रहा था। मैं बेटा को लेकर उन्हीं के पास गया था। मैं पैरों पर गिर पड़ा कि एक नजर देख लीजिये। मगर उसने सीधे मुँह बात तक नहीं की। अब पता चलेगा कि बेटे का गम क्या होता है। उन्हें तनिक भी – दया नहीं आयी थी।”

भगत अपनी बातों पर अटल रहा और वह आदमी लौट गया। भगत ने किवाड़ बन्द कर लिया और चिलम पीने लगा। बुढ़िया ने कहा- “इतनी रात गये जाड़े में कौन जायेगा?”

“अरे, दोपहर ही होती तो भी मैं नहीं जाता। सवारी दरवाजे पर लेने आती तो भी न जाता। भूला थोड़े ही हूँ। मेरे बेटे को निर्दयी ने एक नजर देखा भी न था” – बूढ़े ने कहा। बूढ़े के जीवन में यह पहला अवसर था कि सांप काटे की खबर पाकर भी वह नहीं गया। मौसम कैसा भी हो, लेन-देन का विचार कभी मन में आया ही नहीं।

बुढ़िया सो गयी थी। बूढ़े का मन भारी हो रहा था। उसके मन को चैन नहीं आ रहा था। उसने अपनी लकड़ी उठायी और धीरे से किवाड़ खोले। बुढ़िया की नींद टूट गयी – पृछा “कहाँ जाते हो?” बूढ़े ने बहाना कर दिया-देख रहा था कि कितनी रात है? बुढ़िया ने कहा – ” अभी बहुत रात है, सो जाओ।” “नींद नहीं आती” – बूढ़े ने उत्तर दिया। ” नींद काहे को आयेगी? मन तो चड्ढा के घर लगा हुआ है। बुढ़िया ने व्यंग्य-वाण छोड़े।” चड्ढा ने हमारे साथ कौन-सी नेकी कर दी है, जो वहाँ जाऊँ” बूढ़े ने कहा। बुढ़िया फिर सो गयी। भगत ने धीरे से किवाड़ खोला ताकि बुढ़िया जग न जाय। उसके पैर अपने आप आगे बढ़ गये। वह लपका चला जा रहा था। उसके मन ने उसे कई बार पीछे खींचा। पर उसका अंतर्मन उसे आगे की ओर ठेलता गया।

इसने में दो आदमी आता दिखायी दिया। वे आपस में बातें करते चले आ रहे थे। -“चड्ढा बाबू का घर उजड़ गया। वही तो एक लड़का था।” भगत के कानों में ये शब्द पड़े और उसकी चाल तेज हो गयी। अपनी उम्र में इतना तेज वह कभी नहीं चला था। चड्ढ़ा साहब के घर बूढ़ा पहुँच गया। रात के दो बज चुके थे। मेहमान सांत्वना देकर विदा हो गये थे। भगत ने द्वार पर पहुँचकर आवाज दी। डाक्टर साहब बाहर आये। देखा, एक बूढ़ा आदमी खड़ा है- कमर झुकी हुयी, पोपला मुँह, भौंहे तक सफेद हो गयी हैं। लकड़ी के सहारे कांप रहा है।

बूढ़ा ने कहा- “भैया कहाँ है? जरा मुझे दिखा दीजिये” चड्ढा ने कहा “चलो, देख लो, मगर तीन-चार घंटे हो गये – जो कुछ होना था सो हो चुका। बहुतेरे झाड़ने-फूंकने वाले देखकर चले गये।”

डाक्टर चड्ढा, भगत को अन्दर ले गये। उसने कैलाश की हालत एक मिनट तक देखी, फिर मुस्कुरा कर कहा – “अभी कुछ नहीं बिगड़ा है, बाबूजी! आप पानी का इन्तजाम करवाइये।”

लोगों ने कैलाश को नहलाना शुरू किया और बूढ़ा भगत खड़ा मुस्कुराकर मंत्र पढ़ता जाता। मंत्र की समाप्ति पर एक जड़ी कैलाश को सुंघा देता। यह क्रम सुबह तक चलता रहा। सुबह होते-होते कैलाश ने लाल-लाल आँखें खाली, अंगडाई ली और पीने को पानी मांगा। भगत का काम पूरा हो चुका था। वह घर की तरफ भागा। भगत बढिया के जागने के पहले अपने घर पहुँच जाना चाहता था। यहाँ चारो तरफ भगत की खोज होने लगी।

जब सब चले गये तो डाक्टर साहब ने अपनी पत्नी से कहा – “बुड्ढा न जाने कहाँ चला गया? एक चिलम, तम्बाकू का भी हकदार नहीं हुआ।” पत्नी (नारायणी) ने कृतज्ञतापूर्वक कहा – “मैंने तो सोचा था इसे कोई बड़ी रकम दूँगी।

चड्ढा ने कहा – “रात को तो मैंने नहीं पहचाना, पर जरा साफ होने पर गहचान गया। एक बार यह एक मरीज को लेकर आया था। मैं खेलने के लिये जा रहा था। मैंने मरीज को देखने से इन्कार कर दिया था। आज मुझे जितनी ग्लानि हो रही है, उसे प्रकट नहीं कर सकता। मैं अब उसे खोज निकालूँगा और उसके पैरों पर गिरकर अपना अपराध क्षमा कराऊँगा। वह कुछ लेगा नहीं, यह जानता हूँ। उसका जन्म यश की वर्षा ही के लिये हुआ है। उसकी सज्जनता ने मुझे ऐसा आदर्श दिखा दिया है जो अब से जोवनपर्यन्त मेरे सामने रहेगा।”

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3 आँखों देखा गदर

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3 आँखों देखा गदर (विष्णुभट्ट गोडसे वरसईकर)

 

आँखों देखा गदर पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

Aankhon Dekha Gadar Bihar Board Class 11th प्रश्न 1.
अंग्रेजों को किले को समझने में कितने दिन लगे? फिर उन्होंने क्या किया?
उत्तर-
झाँसी का किला बड़ा मजबूत और सुरिक्षत था। बाहरी लोगों के लिए उस पर कब्जा जमाना मुश्किल था। अंग्रेजों ने जब उस पर चढ़ाई की तो वे मोर्चा बाँधने में पहले दो दिन विफल रहे और तीसरे दिन वे मौके समझ गये। जब अंग्रेजों को झाँसी के किले पर चढ़ाई हेतु मौके समझ आ गये तब उन्होंने रात होने पर सभी ठिकाने साधकर साधारण मोर्चे बाँधे और चार घड़ी रात रहते ही किले के पश्चिमी बाजू पर गरनाली तोपों से वार करने लगे।

Class 11 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई को पहली बार निराशा कब हुई?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का एक अद्भुत वीरांगना थी। वे बड़े साहस और धैर्यपूर्वक किले पर कब्जा जमाने आये अंग्रेजों के मोर्चों को विफल कर रही थी। लेकिन जब उन्होंने देखा कि अंग्रेज रात में ही मोर्चे बाँधकर शहर पर गरनाली तोपों से गोले बरसाने शुरू : कर दिये है, तब उन्हें पहले-पहल निराशा हुई।

Digant Hindi Book Class 11 Pdf Download Bihar Board प्रश्न 3.
शहर में गोले पड़ने से आम जनता को क्या-क्या कष्ट होने लगें?
उत्तर-
जब अंग्रेजों की ओर से झाँसी शहर में गोले पड़ने लगे, तब वहाँ की जनता को भयंकर परेशानियाँ हाने लगी। गोला जहाँ भी गिरता, वहाँ सौ-पचास आदमियों को घायल कर देता और दस पाँच को तो मौत के मुंह में सुला ही देता। गोला यदि घर पर गिरता तो वह घर जलकर राख हो जाता तथा उसके धक्के से आस-पास के छोटे-छोटे घर भी गिर जाते। गोलों . के गिरने से जहाँ-तहाँ आग लग जाती थी। इस प्रकार सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच गई। कोई कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था।

Digant Hindi Book Class 11 Bihar Board प्रश्न 4.
सातवें दिन सूर्यास्त के बाद क्या हुआ? रात के समय तो क्यों चालू की गई?
उत्तर-
लड़ाई के दौरान सातवें दिन सूर्यास्त के बाद झाँसी की तरफ से पश्चिमी मोर्चे की तोप बंद हो गई, क्योंकि शत्रुओं के बार के आगे वहाँ कोई गोलंदाज टिक नहीं पाया। इस प्रकार शत्रुओं द्वारा जब झाँसी के किले का वह मोर्चा भी तोड़ डाला गया तो उसके प्रतिकार और अपने बचाव में रातों-रात कुशल कारीगरों द्वारा बूर्ज पर मोर्चा बाँधकर तोपें चालू कर दी गई, ताकि असावधान अंग्रेज सैनिकों को मार भगाया जा सके।

Bihar Board Class 11th Hindi Book प्रश्न 5.
सिपाहियों को जब लगा कि झाँसी अंग्रेजों के हाथ लग जाएगी तो उन्होंने क्या किया?
उत्तर-
हिन्दुस्तानी सिपाहियों ने यह जानते-समझते हुए भी कि अब हमारी हार होने वाली है और झाँसी अंग्रेजों को हाथ लग जाएगी, अपनी हिम्मत न हारी। वे सच्चे शूर-वीर की तरह
और भी दूने-चौगुने उत्साह एवं वेग से उनका मुकाबला करने को तैयार हुए।

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf Download प्रश्न 6.
बाई साहब ने सरदारों से क्या कहा? बाई साहब के कहने का सरदारों पर क्या असर पड़ा?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी पर आये संकट और अपनी हार देख सब सरदारों को इकट्ठा कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होने स्पष्ट कहा कि अब तक झाँसी अपने ही बल पर लड़ी है और आगे भी लड़ेगी। इसे पेशवा अथवा किसी दूसरे के बल की कोई दरकार नहीं। बाई साहब के ऐसा कहने का सभी सरदारों पर अनुकूल असर पड़ा। वे सभी ओज एवं तेज से भर गये और मोर्चे बंदी के लिए कठिनतम परिश्रम करने लगे।

Class 11th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 7.
दसवें दिन की लड़ाई का क्या महत्त्व था? दसवें दिन की लड़ाई का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर-
झाँसी के किलों को जीतने के लिए अंग्रेजों और झांसी के बीच जारी युद्ध का दसवाँ दिन बेहद महत्त्वपूर्ण था। इस युद्ध पर झाँसी का भविष्य निर्धारित होने वाला था। क्योंकि, इधर झाँसी की मदद हेतु तात्या टोपे पंद्रह हजार फौजें लेकर पहुंच चुके थे और उधर कप्तान साहब भी अंग्रजी फौजों के साथ आ धमका था। इस प्रकार उस दिन की लड़ाई एक तरह से निर्णायक लड़ाई समझी जा रही थी।

उस दिन बड़ा भीषण युद्ध हुआ। दोनों ओर के सिपाही जी-जान लगाकर लड़ रहे थे। . आमने-सामने की लड़ाई हो रही थी। बिगुल, नरसिंघों, तोपों इत्यादि से सारा वातावरण थर्रा रहा था। चारों तरफ मार-काट और चीख-पुकार मची थी। किन्तु इस लड़ाई में धीरे-धीरे तात्यां-टोपे एवं एवं झाँसी की रानी पिछड़ने लगी और अंग्रेज फौज भारी पड़ी।

Bihar Board 11th Hindi Book Pdf प्रश्न 8.
भेदिए ने लक्ष्मीबाई को आकर क्या खबर दी? लक्ष्मीबाई पर इस खबर का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में झाँसी अंग्रेजों से बड़ी बहादुरी से लगातार पिछले ग्यारह दिनों से लड़ रही थी। उस रात जब बाई साबह रात को रोजाना की तरह ही शहर के और किले पर गश्त लगाकर जब बंदोबस्त कर रही थी तो एक भेदिए ने आकर यह खबर दी कि अंग्रेजी फौजी को इतनी मशक्कत के बाद भी अपनी जय मिलती नहीं दिखाई दे रही है और उनका गोला-बारूद भी अब समाप्तप्रायः हो गया। इसलिए कल पहर भर लड़ने के बाद उनका लश्कर. उठ जाएगा।’

भेदिए की उक्त खबर सुनकर बाई साहब को बहुत राहत मिली और असीम आनंद मिला। उनका चेहरा खुशी से खिल उठा तथा उनमें नई शक्ति और साहस का संचार हुआ।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Solution प्रश्न 9.
विलायती बहादुर कौन थे? पाठ में वर्णित उनकी भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के यहाँ जो पंद्रह सौ मुसलमान बहुत दिनों से नौकर थे, उन्हें ही विलायती बहादर कहा गया है। अंग्रेजों के साथ युद्ध में उनकी भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण रही थी। वे सब के सब विलायती बहादुर सचमुच बड़े बहादुर थे। जब-जब झाँसी पर विपत्ति आयी, इन विलायती बहादुरों ने अपनी जान की बाजी लगाई और लक्ष्मीबाई को तरफ से ब्रिटिश फौजों को छुट्टी का दूध याद कराया। शत्रुओं से घिरी झाँसी से लक्ष्मीबाई को बाहर निकालने में उनकी भूमिका सर्वथा सराहनीय रही।

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf प्रश्न 10.
लम्मीबाई को वृद्ध सरदार ने किन-किन अवसरों पर सलाह दी, इसके क्या परिणाम हुए?
उत्तर-
प्रस्तुत पाठ ‘आँखें देखी गदर’ में वृद्ध सरदार दो अवसरों पर लक्ष्मीबाई को सलाह देता है और दोनों ही बार उसके अच्छे परिणाम निकले हैं। जब पचहत्तर वर्ष का वह वृद्ध सरदार देखता है कि गोरे लोग विलायती बहादुरों की मार से घबराकर भाग गये हैं तथा छुप-छुपकर वार करने लगे है और बाई साहब बढ़ती ही जा रही है तो उसने समझाया कि इस समय आगे जाकर गोलियों का शिकार होना बेकार है। सैकड़ों गोरे अंदर घुस गये है और इमारतों की आड़ से गोलियाँ चला रहे है।

इसलिए इस समय मुफ्त में जान गँवाने से अच्छा है कि आप किले में जाकर दरवाजा बंद करके पहले सुरक्षित हो जाएँ और फिर कोई उपाय सोचे। बाई साहब उसकी बात मानकर वापस आ गई। दूसरी बार जब बाई साहब अंग्रेजी फौजों के वार से झाँसी की बर्बादी और लोगों की त्रासदी को देखते हुए जब अत्यंत खिन्न एवं उदास मन से लोगों की महल के बाहर चले जाने और स्वयं को महल में गोला-बारूद भरकर आग लगा कर जल-मरने की बात कहती हैं तो वही अनुभवी वृद्ध सरदार बड़ी समयोचित सलाह सुझाता है।

वह स्पष्ट समझाता है कि महारानी आपको इस तरह निराश नहीं होना चाहिए। आत्महत्या करना बड़ा पाप है। इससे तो बहुत अच्छा है कि आदमी युद्ध करता हुआ स्वर्ग जीतने का उद्यम करे। इसलिए आपको इस समय धैर्य एवं गंभीरतापूर्वक इस कठिन स्थिति से उबरने का रास्ता निकालना चाहिए। उस वृद्ध सरदार के प्रबोधन क बाद रानी लक्ष्मीबाई को बहुत कुछ धीरज बँधा और वे स्वस्थ हुई। उनकी निराशा दूर हुई तथा उनमें तथा उनमें आशा एवं ओज का संचार हुआ।

Bihar Board Class 11 Hindi Book प्रश्न 11.
शहर की दीवार पर चढ़ने के लिए अंग्रेजों ने कौन-सी युक्ति सोची?।
उत्तर-
झाँसी के शहर की दीवार पर चढ़ने के लिए अंग्रेजों ने यह उपाय किया कि हजारों मजदूरों के सिर पर घास के हजारों गट्ठर रखे दीवार के पास चले आये। वहाँ मजदूरों ने घास के गट्ठरों को एक पर एक रखकर उनकी सीढ़ि बना दी। इस प्रकार घास के गट्ठरों की बनी सीढ़ी के सहारे अंग्रेज शहर की दीवार पर चढ़कर उस पार से इस पार चले आये।

Class 11 Bihar Board Hindi Book प्रश्न 12.
गोरे लोगा झाँसी में घुसकर क्या करने लगे? अपने बचाने के लिए लोगों ने क्या किया?
उत्तर-
गोरे लोग झाँसी में घुसते ही कहर ढाने लगे। वे बच्चे बूढ़े और जवान किसी को भी न बख्शते थे। जो भी सामने पड़ता उसे गोली से उड़ा देते या तलवार के वार से काट देते। इसके अतिरिक्त वे लूट-पाट भी करने लगे।

गोरे सिपाहियों के इस आतंक से सबके प्राण काँपने लगे। अतः जान बचाने के लिए जिसे जो उपाय सूझता, वही करता। सभी लोग इधर-उधर भागने लगे। कोई इधर गली में भागा तो कोई घर के तहखाने में दुबका तो कोई खेतो में जा छिपा।

11th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 13.
“मैं महल में गोला-बारूद भर कर इसी में आग लगाकर मर जाऊँगी, लोग रात होते ही किले को छोड़कर चल जाएँ और अपने प्रणों की रक्षा के लिए उपाय करें।” लक्ष्मीबाई ने ऐसा क्यों कहा? इस कथन से उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है? अपने शब्दों मे लिखें।।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों को विद्वान लेखक विष्णुभट गोडसे बरसईकर ने लिखा है कि-जब लक्ष्मीबाई ने देखा कि गोरे सिपाही लोग शहर में उपद्रव मचा रहे हैं और निरीहप्रजा बैमौत मारी जा रही है, उसका सर्वस्व बड़ी निर्ममता से लूटा जा रहा है और वह इस दर्द और दुःख से बेहाल और असहाय बनी है तो उनके मन में करुण और दुख भर गया। उन्हें ऐसा लगा कि प्रजा की इस दारुण दशा का जिम्मेदार मै ही हूँ और शोक की इसी अतिशयता में उन्होंने अत्यंत निराश होकर कहा कि लोग रात होते ही किले से बाहर चल जाएँ और अपनी जान बचाएँ। मै इस महल में गोला-बारूद भरकर आग लगा दूंगी और उसी में जलकर भस्म हो जाऊँगी।

उपर्युक्त कथन से रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की स्त्री सुलभ कोमलता, परदुःखकातरता और करुणार्द्रता आदि विशेषताएँ प्रकट होती हैं। साथ ही साथ इससे उनके व्यक्तित्व का यह वीरता से भरा महत्त्वपूर्ण पक्ष भी ध्वनित होता है कि वे शत्रुओं के हाथ पड़ने की अपेक्षा स्वयं मरण को वरण करना अच्छा समझती थी।

Bihar Board 11th Hindi Book Pdf Download प्रश्न 14.
“यहाँ आत्महत्या करके पाप संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जीतना है।” वृद्ध सरदार के इस कथन का लक्ष्मीबाई पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ में लेखक ने देखा कि जब झाँसी में अंग्रेजी द्वारा प्रजा का सर्वस्व बड़ी निर्ममता से लूटा जा रहा था, तब बाई ने महल में गोला-बारुद भरकर आग लगाकर आत्म हत्या की बात कही तो वृद्ध सरदार ने यह कहा कि आत्म हत्या करके पाप संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जीतना उत्तम है, रानी लक्ष्मीबाई के मन में व्याप्त निराशा और दुःख की काली घटा छंट जाता है और उनमें पुनः आशा, ओज एवं वीरत्व का प्रकाश भर जाता है।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Name प्रश्न 15.
“मै आध सेर चावल की हकदार, मेरी ऐसी रांडमुड़ को विधवा धर्म छोड़कर यह सब उद्योग करने की कुछ जरूरत नहीं थी, परन्तु धर्म की रक्षा के लिए जब इस कर्म में प्रवृत्त हुई हूँ तो उसके लिए ऐश्वर्य, सुख, मान, प्राण सबकी आशा छोड़ बैठी हूँ।” लक्ष्मीबाई के इस कथन की सप्रसंग व्याख्या करें।
उत्तर-
सप्रसंग व्याख्या प्रस्तुत सारगर्भित व्याख्येय गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1’ में संकलित ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से अवतरित है, जिसके मूल मराठी लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर तथा हिन्दी अनुवाद अमृतलाल नागर है। जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रजों के सैन्य-व्यूह को वीरतापूर्वक भेदती हुई झाँसी के छोड़ चली तो लेखक भी वहाँ से अन्य लोगों के साथ निकल चले। रास्ते में कालपी से करीब छ: कोस पहले एक जगह उन्होने रात्रि-विश्राम किया। वहीं शोर में एकाएक हल्ला सुन उनकी नींद टूट गई। पहले तो वे बहुत घबराये पर पीछे यह जानकर निश्चित हुए कि ये फौजी दस्ते अंग्रेजी के नहीं, अपितु लक्ष्मीबाई के हैं। बाद में दोनों की पहचान होती है और रानी लक्ष्मीबाई बड़ी निराश मन-स्थिति में यह उद्गार प्रकट करती हैं।

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बड़ी वीरतापूर्वक कई दिनों से अंग्रेजों के साथ लड़ाई करती चली आ रही थीं। पर, दुर्भाग्वया दिन पर दिन विजयश्री उनसे दूर ही होती जा रही थी, अत: उनके अंदर निराशा और अवसाद घर कर चुके थे। उसी मनःस्थिति में वे यह हृदयोद्गार व्यक्त करती है कि मुझे किसी भोग-विलास की कोई इच्छा नहीं। मै तो सिर्फ आध सेर चावल की हकदार थी और वह मुझे आसानी से मिल जाता, इसलिए मुझे अपने विधवा-धर्म को परित्याग कर युद्ध-कर्म में प्रवृत्त होने की कोई जरूरत न थी।

किन्तु मै निश्चिंतता का जीवन छोड़ प्रजा एवं धर्म की रक्षा के विचार से युद्ध में कूद पड़ी हूँ और अब, जबकि मैं युद्ध छेड़ चुकी हूँ तो मुझे अपने लिए, सुख ऐश्वर्य मान या प्राण का कोई महत्त्व नहीं। मुझे इनमें से किसी की परवाह नहीं, मैं सबकी आशा छोड़ चुकी हूँ। रानी लक्ष्मीबाई के उपर्युक्त कथन में उनके हृदय की निराशा, प्रजावत्सलता एवं धर्म परायणता का भाव सहज रूप तें अभिव्यक्त है। किन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें अपने किये पर कुछ अफसोस था, बल्कि यह तो युद्ध के दौरान विपक्षी की बढ़ती शक्ति और अपनी पराजय स्थिति से उत्पन्न वीरांगना की सहज, अकृत्रिम प्रतिक्रिया है।

Bihar Board Class 11 Hindi Book Pdf प्रश्न 16.
“आप विद्वान हैं। अत: मेरे लिए पानी न खींचे।” लक्ष्मीबाई के इस कथन से उनके व्यक्तित्व का कौन-सा पहलू उभरता है?
उत्तर-
जब युद्ध करते-करते पूरी तरह थक चुकी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को प्यास से परेशान देख लेकख पं. विष्णुट वरसईकर ने मटके से पानी निकालकर उन्हें पानी पिलाना चाहा तभी लक्ष्मीबाई ने कहा कि आप विद्वान व्यक्ति है, इसलिए मेरे लिए पानी न खीचे। मै खुद पी लेती हूँ लक्ष्मीबाई के इस कथन से यह पता चलता है कि उनके दिल में गुणियों-विद्वानों के लिए बड़ा आदर मान-सम्मान का भाव था। वे गुणी जनों से काम कराना अधर्म समझती थीं।

प्रश्न 17.
कालपी की लड़ाई का वर्णन लेखक ने किस तरह किया है? कालपी के युद्ध के तीसरे दिन सिपाहियों ने क्या किया?
उत्तर-
‘आँखों देख गदर’ पाठ के अंतर्गत लेखक ने कालपी की लड़ाई का बड़ा यथार्थपरक वर्णन किया है। कालपी में लगातार तीन दिन लड़ाई चली 1 पेशवा की फौज पहले ही बेकार हो चुकी थी। दिल्ली, लखनऊ, झाँसी वगैरह में भी अंग्रेजी की फतह हो चुकी थी, जिससे गदरवाले निराश हो चुके थे। बहुत-से पुराने अनुभवी सैनिक डर से पलटने छोड़कर चले गये थे। उनके स्थान पर नये लोग भर्ती किये गये। इन नये लोगों में सिपाहियों के साथ चोर, लुच्चे, लुटेरे भी शामिल थे। जिनका लक्ष्य लड़ाई न होकर लूट-पाट करना था।

कालपी में युद्ध के तीसरे दिन जब सिपाहियों को लगा कि अंग्रेजी फौजों से पार पाना मुश्किल है और जीत उन्हीं की होगी, तो उनमें से सैकड़ों लोग युद्ध का मैदान छोड़ शहर में घुसकर दंगा, लूट और स्त्रियों की दुर्दशा करने लगे। इतने में जब अंग्रेजों फौज भी आ गई तो वे सिपाही वहा से भाग चले।

प्रश्न 18.
लक्ष्मीबाई की मृत्यु किस तरह हुई? उनकी वीरता का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई एक अदभूत और अप्रतिम वीरांगना थी। यदि उन्हें शक्ति एवं साहस की देवी दुर्गा का अवतार कहा जाए, तो कदाचित अनुचित न होगा। झाँसी पर संकट का बादल मंडराया देख साहस की पुतली-सी स्वाभिमानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने की बजाय उनसे लोहा लेने के उपाय में लग गई। वे बड़ी कठिन परिश्रम करतीं, रात-रात भर जागकर रणनीति बनातीं और युद्ध के समय स्वयं दौड़-दौड़ कर सैनिकों को मनोबल और उत्साहवर्द्धन करती थीं। फिर भी, जब कालचक्र विपरीत रहा और झाँसी के दुर्ग में अंग्रेज प्रवेश कर गये तो उन्होंने न तो हिम्मत हारी और न ही आत्मसमर्पण किया, बल्कि एक वीर क्षत्राणी की भाँति अपने बहादुर जवानों को साथ लिये शत्रु-सेना को छिन्न-भिन्न करती हुई रणनीति के तहत कालपी पहुँची।

फिर जब मुरार पर अंग्रेजों का हमला हुआ तो तात्या टोपे और राव साहब कि साथ लक्ष्मीबाई ने भी वहाँ भीषण युद्ध किया। मुरार के भीषण संग्राम में ही उन्हें गोली लगी। फिर भी वीरता की प्रतिमूर्ति लक्ष्मीबाई आगे बढ़-बढ़ कर दुश्मनों का सफाया करती रहीं। इसी बीच उनकी जाँघ पर तलवार का करारा प्रहार हुआ और वे घोड़े से गिरने लगीं। यह देख तात्या टोपे ने उन्हें संभाला और घोड़े को आगे बढ़ा दिया। इस प्रकार झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने लड़ाई में कभी भी शत्रुओं को पीठ नहीं दिखाई और युद्ध क्षेत्र में ही वीरगति को प्राप्त हुई। वस्तुतः उनकी वीरता अनुपम थी, जो सदैव वीरों को प्रेरित और अनुप्रमाणित करती रहेगी।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित वाक्यों की सप्रसंग व्याख्या करें :

(क) परन्तु निराशा की शक्ति भी कुछ विलक्षण ही होती है।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगार्मिक पंक्ति पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग -1’ के ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से उद्धत है। इसके लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं। इसमें 1857 ई. के प्रथम भारतीय स्वाधीनता संग्राम के आँखों देखा हाल का वर्णन किया गया है। झाँसी पर अंग्रेजी फौज हमला बोल चुकी है। झाँसी की मदद को तात्या टोपे भी पहुंचे हुए है। अंग्रेज और झाँसी के बीच भीषण संग्राम छिड़ा है, पर धीरे-धीरे झांसी की फौज पस्त होने लगती है और अंग्रेजों का हौसला बढ़ता जा रहा है। यह पंक्ति उसी संदर्भ में कथित है।

ऐसे तो अंग्रेजों की विजय देख झाँसी में हाहाकार मचा हुआ है, पर यह सच्चे शूर-वीरों की धरती है, जो अपनी आन की रक्षा में जान देना जानते हैं। जिनके लिए दुश्मन के आगे घुटने और यादहयों को यह ठित होने कापक्ति में निरी टेकने की बजाय उन्हें मारते हुए शहीद हो जाना, लाख गुना अच्छा है। सच्चे वीर कभी निराश नहीं होते और यदि कभी निराशा पास फटकती है तो उसी से वे विलक्षण शक्ति-स्फोट कराते है। झाँसी के सिपाहियों को यह जानकर कि निर्मम और निर्दय अंग्रेज ही जीतेंगे और झाँसी उन्हीं के हाथ लगेगी, साहस और शौर्य कुंठित होने की बजाय और बढ़ जाता है। वे और उत्साह एवं मनोबल के साथ युद्ध में जुट जाते हैं। प्रस्तुत पंक्ति में निराशा की विलक्षण शक्ति का संकेत किया गया है।

(ख) भेड़िए जब भेड़ों के झुंड पर झपटते हैं, तब भेड़ों के प्राण की जो दशा होती है वही इस समय लोगों की थी।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1’ में संकलित ‘आँखों देखा गदर’ पाठ से ली गई है। इसके लेखक मराठी के सुप्रसिद्ध विद्वान पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर है। इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने गदर के दौरान झाँसी में अंग्रेजी फौजों के आत्याचार-उत्पात और उससे प्रभावित-भयातुर नागरिकों की असहायावस्था का बड़ा मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया है।

अंग्रेजी फौज झाँसी शहर में घुस चुकी थी और जनता पर बेंइतहा जुल्म ढा रही थी। बच्चा या बूढा जिसे भी सामने पाती; मौत के घाट उतार देती इतना ही नहीं, इन वहशियों ने शहर के एक भाग में आग भी लगा दी, जिससे सर्वत्र हाहाकार मच गया। उस समय निरीह नागरिकों को प्राण बचाने का कोई उपाय न सूझता था। इसी भीषण और करुण दृश्य का वर्णन करते हुए भेड़ों पर भेड़ियों के आक्रमण का उदाहरण दिया गया है। भेड़े अत्यंत निरीह और दुर्बल जीव होती हैं। भेड़िए के सामने उनका कोई वश नहीं चलता। जब भेडिये आक्रमण करते है तो भेड़ों की दशा अत्यंत करुण हो जाती है, उनके प्राण नशों में समा जाते हैं। वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती, अपनी जान भी नहीं बचा सकती। यही हाल उस गोरे सिपाहियों के आतंक और जुल्म के सामने झाँसी के निरीह एवं निहत्थी जनता की थी। इस पंक्ति के क्रूर सिपाहियों के लिए भेड़िए और निरीह जनता के लिए भेड़ों की उपमा बड़ी सटीक बैठती है।

(ग) आत्महत्या करना बड़ा पाप है, दुःख में धैर्य धारण करके गंभीरतापूर्वक सोचना चाहिए कि उससे बचने के लिए आगे कोई रास्ता निकल सकता है या नहीं।
सप्रसंग व्याख्या-
प्रस्तुत सारगर्भित व्याख्येय पंक्तियों हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1 में संकलित ‘आँखें देखा गदर’ पाठसे अवतरित है। इसके लेखक पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं। इन पंक्तियों में लेखक ने जब लक्ष्मीबाई अंग्रजों की विजय और अपनी पराजय के साथ प्रजाजनों की असहायावस्था को देखती हैं तो वे अत्यंत चिन्तित, निराश और उदास-हताश हो जाती हैं।वे कहती है कि प्रजालोग रात में ही भाग कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ और मै इस महल में गोला बारूद भरकर आग लगाकर जल मरूँगी। उनके इसी कथन पर उनके वृद्ध सरदार का यह सारगर्भित कथन उल्लिखित है।

झाँसी का वह वृद्ध सरदार रानी लक्ष्मीबाई को प्रबोध देता हुआ कहता है कि आप जैसी वीर नारी के लिए ऐसा करना कदापि उचित नहीं। वीर कभी पलायनवादी नहीं होते, वे तो हँसकर संकटों का सामना करते हैं। वास्तव में आत्म हत्या की बात करना कायस्व. यह वीरों का धर्म नहीं। विपत्ति आने पर धैर्य से काम लिया जाना चाहिए और गंभीरतापूर्वक सोचकर आगे के लिए बचाव का रास्ता निकालना चाहिए। इस प्रकार यहाँ वृद्ध सरदार श्रांत-क्लांत तथा निराश-हताश एवं पीड़ित झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को समयोचित सही सलाह देता है। रान पर इसका तदनुकूल प्रभाव पड़ता है और वे पुनः अपने पुण्य-कर्म में सन्नद्ध होती है। विपत्ति में धैर्य धारण करने की सीख तथा आत्महत्या जैसे कृत्य की निन्दा की बात सर्वथा उचित लगता है।

भाषा की बात।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण चुनें
(i) दूरबीन से बेचूक निशाना साधकर तोप में पलीता लगाया और तीसरे धमाके में ही अंग्रेजों के उत्तम गोलंदाज को ठंडा कर दिया।
(ii) ये लाल भड़के गोले रात्रि के अंधकार में गेंद की तरह इधर-उधर आसमान में उड़ते हुए बड़े विचित्र लगते थे।
(iii) उस दिन महलों पर ही अंग्रेजी तोपों की शनि दृष्टि थी।
(iv) बहुत-से पुराने तजुर्बेकार पलटनी लोग अपने प्रणों के भय से पलटने छोड़कर चले गए थे।
(v) राव साहब ने कहा कि शत्रु का कहर है; महलों में बड़े धोख होंगे।
(vi) इस तरह बड़ी राजी-खुशी से श्रीमंत राव साहब ने वहाँ अठारह दिन बिताए।
(vii) शहर का प्रबंध बहुत अच्छा कर रखा था।
(viii) कारीगर भी बड़े ही चतुर और काम में निपुण थे।
उत्तर-
इन पंक्तियों में निम्नलिखित विशेषण है-
(i) बेचूक, तीसरे, उत्तम, ठंडा।
(ii) लाल, भडके, बड़े, विचित्र।
(iii) अंग्रेजी, शनि।
(iv) बहुत, पुराने, तजुर्बेकार, पलटनी, अपने।
(v) बड़े।
(vi) बड़ी।
(vii) अच्छा।
(viii) चतुर, निपुण।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाएँ हलचल, हौलदिली, नाकाबंदी, जर्जर, बुर्ज, भाग्य, दूरबीन, मंजिल, भिक्षुक, किला, धूल
उत्तर-
हलचल-(स्त्रीलिंग)-पुलिस के आते ही चारों ओर हलचल मच गई। हौलदिली-(स्त्रीलिंग)-बम की मौजूदगी की अफवाह से रेलयात्रियों में हौलदिली फैल गई। नाकाबंदी-(स्त्रीलिंग)-विद्रोहियों ने गाँव की नाकाबंदी कर रखी है। जर्जर-(पुल्लिंग)-बरसात से सड़क जर्जर हो गया है। बुर्ज-(पुल्लिंग)-संध्या समय लोग किले के बुर्ज पर चढ़ गये। भाग्य-(पुल्लिंग)-सभी का अपना-अपना भाग्य होता है।

दूरबीन-(स्त्रीलिंग)-यह दूरबीन पुरानी है। मंजिल-(पुल्लिंग)-हमें अपनी मंजिल पर पहुँचना है। भिक्षुक-(स्त्रीलिंग)-भिक्षुक को देख किसे दया नहीं आती। किला-(पुल्लिंग)-झाँसी का किला बड़ा मजबूत था। धूल-(पुल्लिंग)-आपके चरणों के धूल भी पावन हैं।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ चैत, ग्रीष्म, नागरिक, पल्टन, वायव्य, बहादुर, शहर, बंबों, तंबू, नाकाबंदी, परकोटा, फौज, दालान, किला, खबर, गली, तहखाना, प्राण, ब्रह्मवर्त
उत्तर-

  • चैत – तद्भव
  • ग्रीष्म – तत्सम
  • नागरिक – तत्सम
  • पल्टन – विदेशज
  • वायव्य – तत्सम
  • बहादुर – विदेशज
  • गहर – विदेशज
  • बंबों – अनुकरणात्मक
  • तंबू – देशज
  • नाकाबंदी – संकर (नाका-हिन्दी, बंदी-फारसी)
  • परकोटा – तद्भव
  • फौज – विदेशज
  • दालान – विदेशज
  • किला – विदेशज
  • खबर – विदेशज
  • गली – तद्भव
  • तहखाना – विदेशज
  • प्राण – तत्सम
  • ब्रह्मवर्त – तत्सम।

उत्पत्ति की दृष्टि से शब्द मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं-तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज।

प्रश्न 4.
‘सारी हकीकत सनकर सबके पेट में पानी हो गया और हमारे प्राण भीतर ही भीतर घुटने लगे।’ यहाँ ‘पेट में पानी होना’ और ‘प्राण घुटना’ का क्या अर्थ है? इन मुहावरों के प्रयोग के बिना इस वाक्य को इस तरह लिखे कि अर्थ परिवर्तित न हो।
उत्तर-
पेट में पानी-स्तब्ध रह जाना, प्राण घुटना-भयाक्रांत होना, वाक्य-सारी हकीकत सुनकर सब के सब स्तब्ध रह गये और भयाक्रांत हो गये।

प्रश्न 5.
‘सर कर लिया’ मुहावरा का क्या अर्थ है? पाठ से अलग वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
‘सर कर लिया’ मुहावरे का अर्थ है- ‘जीत लिया’ वाक्यगत प्रयोग- 1962 ई. के आक्रमण में चीन ने भारतीय भू-भाग को सर कर लिया।

प्रश्न 6.
‘सीग समाना’ का क्या अर्थ है? वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
‘सींग समाना’ का अर्थ है- ‘गुजाइश होना’। दंगे के दौरान जहाँ सींग समाय भाग जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
इस पाठ में प्रयुक्त मुहावरों का सावधानी के साथ चयन करें और पाठ के आधार पर उनका अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं करें।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।

आँखों देखा गदर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के महत्व का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर-
हमारे देश में स्वतंत्रता संग्राम की सबसे पहली लड़ाई 1857 ई. में हुई थी। इसमें अन्य सभी देशी राजाओं और रानियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इसमें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उनहोंने 1857 के गदर में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया था। जब अंग्रेजों ने झासी पर आक्रमण किया तो लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों का डटकर सामना किया और उनसे लोहा लिया। उन्होने अंग्रेजों के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया। लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के बीच घमासान युद्ध हुआ। बहुत-से अंग्रेज सैनिक इस युद्ध में मारे गए। दूसरी झाँसी की रानी अंतिम साँस तक युद्ध करती रही और अंत में वीरगति को प्राप्त हुयी। वास्तव में, भारतीय स्वंतत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई का महत्वपूर्ण योगदान था। वे देश को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराना चाहती थीं।

आँखों देखा गदर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आँखों देखा गदर नाम पाठ के लेखक कौन हैं।
उत्तर-
आँखों देखा गदर नामक पाठ के लेखक विष्णुभट गोडसे वरसईकर हैं।

प्रश्न 2.
आँखों देखा गदर किस प्रकार की रचना है?
उत्तर-
आँखों देखा गदर एक संस्मरण है।

प्रश्न 3.
1857 ई. का गदर किस कारण हुआ?
उत्तर-
चर्बी वाली कारतूस के कारण 1857 ई. का गदर प्रारंभ हुआ।

प्रश्न 4.
1857 ई. के गदर में किन-किन देशी राजाओं ने भाग लिया?
उत्तर-
1857 ई. के गदर में बहादुरशाह जफर, तात्या टोपे, वीर कुंवर सिंह तथा झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई इत्यादि ने भाग लिया।

आँखों देखा गदर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर।

I. सही उत्तर का सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग, या घ) लिखें।

प्रश्न 1.
‘आँखें देखा गदर’ के लेखक हैं
(क) रामचन्द्र शुल्क
(ख) हरिशंकर परसाई
(ग) विष्णुभट्ट
(घ) गोडसे बरसईकर
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 2.
‘आँखो देखा गदर’ कहाँ से लिया गया है?
(क) चिन्तामणि
(ख) माझा प्रवास
(ग) झाँसी की रानी
(घ) इसमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 3.
झाँसी की रानी की मृत्यु किस युद्ध में हुई?
(क) मुरार के युद्ध में
(ख) कालपी के युद्ध में
(ग) कानपुर के युद्ध में
(घ) ग्यालियर के युद्ध में
उत्तर-
(क)

प्रश्न 4.
‘माझा प्रवास’ का भाषांतर किसने किया था?
(क) चिन्तामणि विनायक वैद्य
(ख) जैनेन्द्र
(ग) अमृतलाल नागर
(घ) नामवर सिंह
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 5.
अंग्रेजों को किले समझने में कितने दिन लगे?
(क) तीन दिन
(ख) चार
(ग) पाँच दिन
(घ) आठ दिन
उत्तर-
(क)

प्रश्न 6.
सातवें दिन सूर्यास्त के बाद क्या हुआ?
(क) भयंकर तूफान आया
(ख) मोर्चे की तोप बन्द हो गई
(ग) अंग्रेज सैनिक भाग गए
(घ) इनमें से कुछ नहीं
उत्तर-
(ख)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न.
1. शहर पर तोप के गोले शुरू होने से ……………. को बड़ा त्रास हुआ।
2. रात में शहर और किले पर …………. पड़ते थे।
3. परंतु …………… की शक्ति भी कुछ विलक्षण होती है।
4. दुख में धैर्य धारण करके गंभीरता पर्वक ……………… चाहिए।
5. आप विद्वान हैं, अतः मेरे लिए ……………… न खींचे।
उत्तर-
1. रैयत
2. गोले
3. निराशा
4. सोचना
5. पानी।

आँखों देखा गदर लेखक परिचय विष्णुभट्ट गोडसे वरसईकर (1828)

भारम के प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के गदर का आँखों देखा विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने वाले श्री विष्णुभट गोडसे वरसईकर का जन्म 1828 ई. में महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के ‘वरसई’ ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम पं. बालकृष्ण भट था। विष्णुभटजी ने स्वाध्याय द्वारा परंपरागत रूप में संस्कृत, मराठी आदि का गहन ज्ञान अर्जित किया था। उनका व्यक्तित्व आकर्षक एवं प्रभावशाली था। गौरवर्ण के ऊँचे और भव्य शरीर वाले विष्णुभटजी विद्वान एवं तेजस्वी पुरूष थे।

पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर कोई पेशेवर लेखक नहीं, अपितु आजीविका से कर्मकांडी और पुरोहित थे। उनकी थोड़ी-बहुत खेती थी, परन्तु अपर्याप्त। परिवार को ऋण मुक्त करने तथा उसके समुचित निर्वाह के लिए धनार्जन हेतु वे उत्तर भारत की ओर आये थे, किन्तु सन् 1857 के गदन में फंस गये। मार्च 1857 में बैलगाड़ी से वे पुणे पहुँचे और वहाँ से इंदौर, अहमदनगर, धुलिया, सतपुड़ा होते हुए मध्यप्रदेश में महू पहुँचे जहाँ उन्हें सिपाहियों से क्रांति की खबरें पहले-पहल मिलीं। सिपाहियों की मनाही के बावजूद वे आगे बढ़ते हुए उज्जैन, धारा होते हुए ग्वालियर पहुँचे।

इस बीच उन्होंने गदर की घटनाओं को बड़ी नजदीक से देखा-सुना था पुनः वे झाँसी आकर फंस गये। वहाँ वे इतिहासप्रसिद्ध वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्रत्यक्ष संपर्क में आये और उनका आश्रय तथा विश्वास प्राप्त कर काफी दिनों तक उनके साथ किले में रहे। उन्होंने अनेक कष्ट सहकर उत्तर भारत के कई तीर्थो की यात्रा की और करीब ढाई साल बाद अपने गाँव वरसई वापस लौटे। वहीं उन्होंने अपने प्रिय यजमान श्री चिन्तामणि विनायक वैद्य के अनुरोध पर अपनी यात्रा का आँखों देखा हाल स्मरण के आधार पर लिखा-‘माझाा प्रवास’।

पं. विष्णुभट गोडसे वरसईकर की एक ही रचना है-माझा प्रवास (मेरा प्रवास), जो मूल रूप से मराठी में लिखित है। इस कृति में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित उनके संस्मरण प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत हुए है। इसका हिन्दी अनुवाद सुप्रसिद्ध कथाकार और लेखक अमृतलाल नागर ने ‘आँखों देखा गदर’ नाम से बीसवी सदी के चौथे दशक में प्रस्तुत किया। इस प्रकार यह एक उत्कृष्ट यात्रा-संस्मरण है, जिसमें विद्वान लेखक विष्णुभट द्वारा यात्राओं के दौरान देखी-सुनी बातों का बड़ा यथार्थ, जीवंत और चित्ताकर्षक वर्णन हुआ है।

आँखों देखा गदर पाठ का सारांश

भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम 1857 के गदर का आँखों देखा विस्तृत विवरण प्रस्तुत करनेवाले भारतीय विष्णुभट गोडसे की उत्कृष्ट स्मृति ‘माझा प्रवास’ का प्रमाणिक भाषांतर ‘आँखों देखा गदर’ झाँसी प्रवास और लक्ष्मीबाई से जुड़े संस्मरण में अविकल रूप में प्रस्तुत है।

वसंत की विदाई और ग्रीष्म ऋतु के राज्य में एक दिन झांसी शहर के दक्षिणी मैदान में गोरे पलटनों ने तम्बू झाँसी को अपने-अपने खूनी पंजों में गाड़ चुका था। दूसरे दिन गोरे पलटनों ने मोर्चा बाँधकर युद्ध का शंखनाद कर दिया। झाँसी के सैनिकों ने भी अंग्रेजी आक्रान्ताओं को खदेड़ने के लिए रणभेड़ी की दुर्दभि बजा दिया। तीसरे दिन अंग्रेजी पलटनों को शहर या किले के मोर्चा का पता चल गया और उनकी गरनाली तोपें चलने लगीं।

शहर में तोप के गोले की अन्धाधुन्ध बारिस ने रैयतों को भयाक्रान्त कर दिया और छोटे घर खंडहर बनकर गिरने लगे। बाई साहब ने भी अंग्रेजों को ‘ईट का जनाब पत्थर’ से देने के लिए जबरदस्त नाकेबन्दी की। चौथे दिन अंग्रेजों के आक्रमक प्रहार ने किले के दक्षिण बुर्ज को बन्द कराकर हौलदिली फैला दी। दिन-रात लगातार युद्ध होने से शहर जर्जर हो गया। पाँचवें और छठे दिन भी युद्ध अनवरत जारी रहा। सातवें दिन सूर्यास्त के बाद शत्रुओं की तोपों ने बाई साहब के पश्चिमी मोर्चे को तोड़ डाला।

कारीगर की चतुरता से पुनः मोर्चा बन्दी कर तोपों का मुँह खोल देने से अंग्रेज बहुत हताहत हुए। आठवें दिन बड़ा प्रलय मचा तथा घनघोर युद्ध हुआ। इस विकट घड़ी में पेशवा की तरफ से मदद न मिलने से बाई साहब किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। दसवें दिन कालपी से तात्यां टोपें पन्द्रह हजार फौजों को लेकर झाँसी पहुँचे। परन्तु तात्या टोपी की अकुशलता या हिन्दी सिपहियों को अशूरता ने उन्हें टूटकर भागने पर मजबूर कर दिया।

इस प्रकार युद्ध की विभीषिका लगातार ग्यारह दिनों तक कायम रही। रानी लक्ष्मीबाई स्वयं अपने नेतृत्व में युद्ध का संचालन कुशलतापूर्वक की। परन्तु गोरी पलटनों ने घास की सीढ़ी बनाकर किले में घुस गए और भारी रक्तपात किया। बाई साहब ने भी पन्द्रह सौ विलायती बहादुरों की फौज का नेतृत्व कर अंग्रेजी पलटनों पर कहर ढा दिया। अंग्रेजी पलटनों की भीषण रक्तपात निरापराध प्राणियों की निर्मम हत्या ने बाई साहब को हिलाकर रख दिया। वह निरापराध प्राणियों की हत्या का पापी खुद को समझकर आत्महत्या के लिए उद्धत हो गई। परन्तु एक वृद्ध द्वारा आत्महत्या को महापाप करार देने तथा “आत्महत्या के पाप को संचय करने की अपेक्षा युद्ध में स्वर्ग जितना उत्तम है।” इन शब्दों से प्रभावित होकर वह मर्दाना पोशाक धारण कर अपने फौजों की जत्था के साथ कालपी के रास्ते चल दी।

कालपी के रास्ते में लेखक से उनकी मुलाकात हुई। प्यास से व्याकुल बाई साहब को पानी के लिए तैयार लेखक को मना कर दिया कि ‘आप विद्वान है’। उन्हें खुद कुएँ से पानी खींचकर पीया जिससे उनकी महानता के प्रति उनका सर श्रद्ध से झुक गया। कालपी में युद्ध तीन दिनों तक चला। सैकड़ों की हत्या हुई। युद्ध में हार का अभास मिलते ही बाई साहब, तात्या टोपे और राव साहब जंगलों के लिए निकल गए। ग्वालियर में शिंदे की बहुत पलटनियों ने पेशवा पर मुरार नदी पर गोली चलाने से इंकार कर दिया।

मुरार के घमासान युद्ध में झाँसीबाई को गोली लगी फिर तलवार का करार चोट खाकर महारानी घोड़े से गिरने लगीं। तात्यां टोपे ने उन्हें संभालकर घोड़ा आगे बढ़ा दिया। बाई साहब की नश्वर शरीर को एक जगह लोगों ने चिता पर रखकर तेज को तेज में विलीन कर दिया। रणाणण में क्रान्ति के दूत, मनुजता की पुजारी देवी स्वरूपिणी वीरांगना ने मृत्यु पाकर स्वर्ण जीता। इस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के देदीप्यमान सूर्य सदा के लिए अस्त हो गया। जब तक सृष्टि है, सूर्य और चन्द्रमा, धरती और जगत का अस्तित्व कायम है; उत्साह और शूरता से चमकनेवाली अनुजता के प्रेमाधिकारी, कालदधि का महास्तंभ आत्मा के नभ के तुंग केतू तथा मानवता के मर्मी सुजान, कालजयी, कालोदधि महास्तम्भ महारानी लक्ष्मीबाई का यशोगान इतिहास गाता रहेगा।

आँखों देखा गदर कठिन शब्दों का अर्थ।

बंदोबस्त-प्रबंध। गोलंदाज-गोला दागने वाला। रैय्यत-प्रजा। त्रास-भय। बंबा-पानी वाला बड़ा कनस्तर। नाकाबंदी-घेराबंदी। वायव्य-उत्तर-पश्चिम। बुर्ज-किले का सबसे ऊपरी गोलाकार हिस्सा। हौलदिली-भय, आतंक की मनोदशा। बुरुज-बुर्ज, गुंबद। अप्रतिम-फीका, चमकविहीन। जर्जर-कमजोर, पुराना। पलटन-सेना। नसेनी-सीढ़ी। ग्रास-निवाला। किंकर्तव्यविमूढ़-यह मनोदशा जिसमें कोई उपाय न सूझे। नरसिंहा-एक प्रकार का वाद्ययंत्र जो युद्ध में बजाया जाता है। बिगुल–एक प्रकार का वाद्ययंत्र जो युद्ध में बजाया जाता है। गाफिल-लापरवाह। परकोटा-किले की सुरक्षा दीवार। नादान- भोला।

रिसाला-घुड़सवार। भेदिया-जासूस, भेद बताने वाला। बख्शीश-इनाम। शनि दृष्टि-बुरी नजर। भंबक-बड़ा छेद। गश्त लगाना-पहरा देना। बाजू-बाँह और सहस्त्र हजार। विजन-निर्जन, जनशून्य। दीवानखाना-मुख्य हॉल। शोक विह्वल-दुःख से व्याकुल। आर्तनाद-दुःख से भरी पुकार। जुगत-उपाय, युक्ति। माल-असबाब-समान। चिंताक्रांत-चिंता से घिरा हुआ। महापातकी-महानीय, महापापी। शूर-वीर। खास महल-महल का भीतरी हिस्सा जिसमें राजा-रानी रहते हैं। लश्कर-सेना का पड़ाव। हकीकत-वास्तविकता। सर कर लेना-जीत लेना। आब-आभा, चमक।

युक्ति-उपाय। निरूपाय-लाचार। दत्तक पुत्र-गोद लिया पुत्र। खेड़ा-निर्जन मैदान। किंचित-थोड़ा। आरक्त-लाल। म्लान-मुरझाया हुआ। दैवगति-भाग्य का लिखा। संचय-जमा, इकट्ठा। अर्थ-धन। प्रत्यूष बेला-भोर का समय। लिलार-ललाट, भाग्य। दक्षिणी-दक्षिण में रहनेवाला। ब्रह्मावर्त-पुष्कर के आस-पास का इलाका। तजुर्बेकार-अनुभवी। जाहिरनामा-विज्ञप्ति, प्रकाशित सूची। नौसिखिए-अनुभवहीन। कवायद-परेड। मास-युद्ध में बजाया जाने वाला वाद्य। कारकुन-कर्मचारी। ताकीद-विदित, . चेतावनी, सावधान।

महत्त्वपूर्ण पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या

1. मुसर में घमासान युद्ध छिड़ गया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को गाली लगी, लेकिन वे लड़ती रहीं, अंग्रेजों की तलवार का करारा हाथ उनकी जाँघ पर लगा और वे वीरगति की प्राप्ति हुयीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ विष्णुभट गोडसे वरसईकर द्वारा रचित आँखें देखा गदर नमक संस्मरण से ली गयी हैं। इन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है कि अंग्रेजों और झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बीच मुरार में निर्णायक युद्ध हुआ। इस युद्ध में लक्ष्मीबाई ने बड़ी वीरता से युद्ध किया और अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिए। युद्ध करते ही उन्हें गोली लगी और उनकी जाँघ पर तलवार से वार हुआ। जिसके कारण वे वीरगति को प्राप्त हुयी। इन पंक्तियों से उनके अदम्य उत्साह और वीरता की झलक दिखलायी पड़ती है। इसलिए झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 3 Now the leaves are falling fast

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 3 Now the leaves are falling fast

Now The Leaves Are Falling Fast Objective Questions Bihar Board 12th English Question 1.
Who is the poet of ‘Now the Leaves Are Falling Fast’ ?
(A) John Keats
(B) W.H. Auden
(C) Rupert Brooke
(D) T.S. Eliot
Answer:
(B) W.H. Auden

Now The Leaves Are Falling Fast Question Answer Bihar Board 12th English Question 2.
W.H. Auden was born in ?
(A) 1917
(B) 1908
(C) 1907
(D) 1913
Answer:
(C) 1907

Now The Leaves Are Falling Fast Questions And Answers Bihar Board 12th English Question 3.
W.H. Auden died in ?
(A) 1963
(B) 1953
(C) 1973
(D) 1965
Answer:
(C) 1973

Question Answer Of Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board 12th English Question 4.
The prams are-
(A) Running
(B) Rolling
(C) Standing
(D) Broken
Answer:
(B) Rolling

Now The Leaves Are Falling Fast Ka Question Answer Bihar Board 12th English Question 5.
Who disturb the ‘real delight’ of the ageing persons-
(A) Nurse’s flowers
(B) Starving people
(C) Whispering neighbours
(D) Cold
Answer:
(C) Whispering neighbours

Now The Leaves Are Falling Fast Meaning In Hindi Bihar Board 12th English Question 6.
W.H. Auden won the Pulitzer Prise in the year ?
(A) 1947
(B) 1958
(C) 1948
(D) 1946
Answer:
(C) 1948

12th English Objective Questions And Answers Pdf 2020 Question 7.
What are falling fast ?
(A) Snow
(B) Flowers
(C) Leaves
(D) Ball
Answer:
(C) Leaves

Bihar Board 12th English Objective Question Question 8.
In the second line of the poem, Now The Leaves Are Falling Fast’ ‘Nurse’ stands for—
(A) a plant
(B) a fruit
(C) a tree
(D) None of these
Answer:
(C) a tree

12th English Objective Questions And Answers Pdf Question 9.
In the poem, ‘Now The Leaves Are Falling Fast’ ‘Whispering neighbours’ stand for—
(A) agents of Life Insurance
(B) agents of State Bank of India
(C) agents of Sahara India
(D) agents of death
Answer:
(D) agents of death

Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board 12th English Question 10.
‘Trolls’ mentioned in the poem, ‘Now The Leaves are Falling Fast’ are mythological creatures.
(A) Scandinavian
(B) Indian
(C) Russian
(D) None of these
Answer:
(A) Scandinavian

12th English Objective Question Answer Question 11.
‘Now the Leaves are Falling Fast’ is poem.
(A) a pessimistic
(B) optimistic
(C) a pessimistic-cum-optimistic
(D) None of these
Answer:
(C) a pessimistic-cum-optimistic

English Class 12 Objective Questions Question 12.
Who has composed the poem, Now The Leaves Are Falling Fast’?
(A) W.H. Auden
(B) Walter de la Mare
(C) D.H. Lawrence
(D) Rupert Brooke
Answer:
(A) W.H. Auden

Now The Leaves Are Falling Fast Talks About The Of Human Life Question 13.
Auden won the Pulitzer prize in—
(A) 1947
(B) 1948
(C) 1949
(D) 1950
Answer:
(B) 1948

Class 12th English Objective Question Question 14.
For Auden poetry was—
(A) a light game
(B) an interesting game
(C) a serious game
(D) None of these

Question 15.
Auden was—
(A) a poet
(B) a verse dramatist
(C) a serious game
(D) All of these
Answer:
(D) All of these

Question 16.
‘Now The Leaves are Falling’ is
(A) a lyric
(B) an ode
(C) a sonnet
(D) an elegy
Answer:
(A) a lyric

Question 17.
‘Now The Leaves Are Falling Fast the ………….. frustration inherent in human life.
(A) reacts
(B) enacts
(C) accepts
(D) protests
Answer:
(B) enacts

Question 18.
W.H. Auden has written the poem—
(A) John Keats
(B) Walt Whitman
(C) W.H. Auden
(D) T.S. Eliot
Answer:
(C) W.H. Auden

Question 19.
The prams are —
(A) running
(B) standing
(C) lying
(D) rolling
Answer:
(D) rolling

Question 20.
The travellers are we beings, moving towards our death.
(A) human
(B) animal
(C) urbon
(D) rural
Answer:
(A) human

Question 21.
Human life is no better than —
(A) life
(B) death
(C) journey
(D) None of these
Answer:
(B) death

Question 22.
The leaves are falling —
(A) slow
(B) soon
(C) fast
(D) None of these
Answer:
(C) fast

Question 23.
Trees shed their leaves in —
(A) rain
(B) summer
(C) winter
(D) autumn
Answer:
(D) autumn

Question 24.
The ………….. has become dumb to see the leafless trees.
(A) hen
(B) sparrow
(C) nightingale
(D) peacock
Answer:
(C) nightingale

Question 25.
……………….. waterfall could bless the travellers passing through that way.
(A) Yellow
(B) White
(C) Red
(D) Grey
Answer:
(B) White

Question 26.
The falling of ………….. refer to the speedy arrival of death.
(A) leaves
(B) stones
(C) snows
(D) None of these
Answer:
(A) leaves

Question 27.
The ………….. of death are the whispering neighbour.
(A) messenger
(B) friends
(C) enemies
(D) God
Answer:
(A) messenger

Question 28.
‘Whispering neighbours, left and right’ is a line from the poem—
(A) An Epitaph
(B) Song of Myself
(C) Now the Leaves Are falling Fast
(D) Snake
Answer:
(C) Now the Leaves Are falling Fast

Question 29.
‘Nurse’s flowers will not last’ is a line written by—
(A) John keats
(B) John Donne
(C) Walt Whitman
(D) W.H. Auden
Answer:
(D) W.H. Auden

Question 30.
Who is the poet of ‘Now The Leaves Are Falling Fast ?
(A) John Keats
(B) W. H. Auden
(C) Rupert Brooke
(D) T.S. Eliot
Answer:
(B) W. H. Auden

Question 31.
The prams were……….
(A) big
(B) still
(C) rolling
(D) Lost
Answer:
(C) rolling

Question 32.
W. H. Auden was born in ?
(A) 1917
(B) 1900
(C) 1907
(D) 1910
Answer:
(C) 1907

Question 33.
W.H. Auden died in?
(A) 1968
(B) 1958
(C) 1973
(D) 1965
Answer:
(C) 1973

Question 34.
W. H. Auden won the Pulitzer prize in
(A) 1937
(B) 1958
(C) 1948
(D) 1842
Answer:
(C) 1948

Question 35.
The travellers are the persons.
(A) young
(B) old
(C) sick
(D) orphan
Answer:
(B) old

Question 36.
Travellers will be blessed with the
(A) river
(B) waterfall
(C) pond
(D) lake
Answer:
(B) waterfall

Question 37.
Diseases make human life……….
(A) miser
(B) mouser
(C) miserable
(D) wealthier
Answer:
(C) miserable

Question 38.
The leaves were fast
(A) snowing
(B) cut
(C) falling
(D) growing
Answer:
(C) falling

Bihar Board Class 9 History Solutions Chapter 5 जर्मनी में नाजीवाद का उदय

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 1 Chapter 5 जर्मनी में नाजीवाद का उदय Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science History Solutions Chapter 5 जर्मनी में नाजीवाद का उदय

Bihar Board Class 9 History जर्मनी में नाजीवाद का उदय Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

History Class 9 Bihar Board प्रश्न 1.
हिटलर का जन्म कहाँ हुआ था ?
(क) जर्मनी
(ख) इटली
(ग) जापान
(घ) आस्ट्रिया
उत्तर-
(घ) आस्ट्रिया

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 2.
नाजी पार्टी का प्रतीक चिह्न क्या था?
(क) लाल झंडा
(ख) स्वास्तिक
(ग) ब्लैक शर्ट
(घ) कबूतर
उत्तर-
(ख) स्वास्तिक

Bihar Board Solution Class 9 Objective Question प्रश्न 3.
‘मीनकेम्फ’ किसकी रचना है ?
(क) मुसोलनी
(ख) हिटलर
(ग) हिण्डेनवर्ग
(घ) स्ट्रेसमैन
उत्तर-
(ख) हिटलर

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 4.
जर्मनी का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र था
(क) आल्सस-लॉरेन
(ख) रूर
(ग) इवानो
(घ) बर्लिन
उत्तर-
(ख) रूर

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 5.
जर्मनी की मुद्रा का नाम क्या था ?
(क) डॉलर
(ख) पौंड
(ग) मार्क
(घ) रूबल
उत्तर-
(ग) मार्क

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

1. हिटलर का जन्म …………… ई० में हुआ था।
2. हिटलर जर्मनी के चांसलर का पद …………… ई० में संभाला था।
3. जर्मनी ने राष्ट्रसंघ से संबंध विच्छेद …………… ई० में किया था।
4. नाजीवाद का प्रवर्तक …………… था।
5. जर्मनी के निम्न सदन को …………… कहा जाता था।
उत्तर-
1. 20 अप्रैल, 1889,
2. 30 जनवरी, 1933,
3. 1933,
4. हिटलर,
5. राइख स्टैग ।

स्तम्भ मिलान सम्बन्धी प्रश्न :

Bihar Board Solution Class 9 Social Science Objective प्रश्न 1.
स्तम्भ ‘क’ और स्तम्भ ‘ख’ से मिलान करें-
Bihar Board Solution Class 9 History
उत्तर-
(i)-(ग), (ii)-(क), (iii)-(ख), (iv)-(घ), (v)-(ङ)

सही और गलत :

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 1.
हिटलर लोकतंत्र का समर्थक नहीं था।
उत्तर-
सही

Bihar Board 9th Class History Book प्रश्न 2.
नाजीवादी कार्यक्रम यहूदी समर्थक था।
उत्तर-
सही

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 3.
नाजीवाद में निरंकुश सरकार का प्रावधान था।
उत्तर-
सही

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 4.
वर्साय संधि में हिटलर के उत्कर्ष के बीज निहित थे।
उत्तर-
सही .

Bihar Board Class 9 History प्रश्न 5.
नाजीवाद में सैनिक शक्ति एवं हिंसा को गौरवान्वित किया जाता है।
उत्तर-
सही

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Class 9 History Solution प्रश्न 1.
टिप्पणी लिखें
(i) तानाशाह
(ii) वर्साय संधि
(iii) तुष्टिकरण की नीति
(iv) वाइमर गणराज्य
(v) साम्यवाद
(vi) तृतीय राइख
उत्तर-
(i) तानाशाह-शासन की ऐसी व्यवस्था जिसमें शासक निरंकुश तथा दूसरे का हस्तक्षेप नहीं रखता जिसमें जनता राज्य के लिए होता है।
(ii) वर्साय संधि-प्रथम विश्वयुद्ध के बाद विश्वशांति के लिए 28 जून, 1919 को विजित राष्ट्रों जर्मनी के साथ एक संधी फ्रांस के वर्साय शहर में की गई।
(iii) तुष्टिकरण की नीति-किसी आक्रामक शक्ति की कार्यवाही को मूक सहमति देना है । जैसे फासिस्ट राष्ट्र कई देशों पर आक्रमण करते रहे और ब्रिटेन, फ्रांस चुप रहे।
(iv) वाइमर गणराज्य-जर्मन संविधान सभा का प्रथम बैठक 5 फरवरी, 1919 ई० को बाइमर नामक स्थान पर हुई । इसलिए यह वाइमर गणराज्य कहलाया।
(v) साम्यवाद-प्राचीन काल से चली आ रही पूँजीवादी पद्धति एवं सामंत वाद को मिटाकर ऐसी शासन व्यवस्था कायम किया जाना जिसमें स्वतंत्रता, समानता और वंधुत्व की भावना का विकास हो, साम्यवाद है।
(vi) तृतीय राइख-हिटलर के चांसलर बनने पर जर्मनी में गणतंत्र की समाप्ति हुई और नात्सी क्रान्ति का आरंभ हुआ जिसे हिटलर ने ‘तृतीय राइख’ का नाम दिया।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

Bihar Board Class 9 History Book प्रश्न 1.
वर्षाय संधि ने हिटलर के उदय की पृष्ठभूमि तैयार की। कैसे?
उत्तर-
वर्षाय की संधि ने जर्मनी और हिटलर को उद्वेलित कर दिया। हिटलर ने इसे ‘राजमार्ग की डकैती’ कहा । हिटलर का व्यक्तित्व बड़ा ही आकर्षक और प्रभावोत्पादक था । हिटलर जर्मन जाति की मनोदशा से पूरी तरह परिचित था। वह जानता था कि जर्मनीवासी वर्षाय की संधि के अपमान को भूले नहीं हैं। अतः अपने भाषणों में वह संधि का और संधि करनेवाले को ‘नवंबर क्रिमिनल्स’ कहना नहीं भूलता । वह यहाँ तक कहता था कि वर्साय के संधि पत्र को फाड़ दो । जनता उसके विचारों से उसकी ओर आकृष्ट हुई। जनता उसे अपने राष्ट्रीय अपमान का बदला लेनेवाला एवं राष्ट्रीय गौरव की स्थापना करने वाला समझने लगे। इस प्रकार वर्साय की संधि उसके उत्थान की पृष्ठ भूमि तैयार कर दी थी।

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 2.
वाइमर गणतंत्र नाजीवाद के उदय में सहायक बना, कैसे?
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी में एक क्रान्ति हुई । जर्मनी का सम्राट केसर विलियम देश छोड़ कर भाग गया और वहाँ राजतंत्र का पतन हो गया । राजतंत्र के पतन के बाद वहाँ गणराज्य की स्थापना हुई। जर्मनी के इतिहास में यह गणराज्य वाइमर गणराज्य के नाम से विख्यात है। हिटलर के उत्थान से पूर्व इसने अनेक समस्याओं को जन्म दिया। इसी ने वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर किए । महंगाई और बेरोजगारी बहुत बढ़ गयी। 1929 ई० की महामंदी ने और जटिल बना दिया । सेना भी असंतुष्ट थी। फलस्वरूप जनता का इससे मोह भंग हो गया हिटलर को अच्छा अवसर मिल गया, उसने गणराज्य का विरोध किया, उसकी असफलताओं पर विचार किया और उसने नाजीवाद को बढ़ावा दिया । बढ़ावा ही नहीं बल्कि नाजीवाद कायम कर दिया।

Class 9 History Bihar Board प्रश्न 3.
नाजीवाद कार्यक्रम ने द्वितीय विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की कैसे?
उत्तर-
नाजीवाद के निम्नलिखित कार्यक्रम थे

  • नाजीवाद उदारवाद और लोकतंत्र का कहर विरोध की अवधारणा है। अतः सत्ता प्राप्त करते ही हिटलर ने लोकतांत्रिक आवाज को दफन करने का प्रयास किया जो राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हुआ ।
  • नाजीवाद समाजवाद का प्रबल विरोधी है। हिटलर ने ॥ समाजवाद के विरुद्ध आवाज बुलंद किया। उसने अपने पूँजीपतियों का अपनी ओर मिला लिया। हिटलर के इस कार्य से इंग्लैंड तथा फ्रांस की ओर से अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त हुआ जिसके कारण उसका मनोबल बढ़ता गया जिससे पूरा विश्व एक भयंकर युद्ध के नजदीक अपने को खड़ा पाया।
  • उग्रराष्ट्रवाद-हिटलर प्रचंड उग्रवादी एवं निरंकुश था । उसने राजनीतिक विरोधियों का दमन किया । उसने दूसरे का राजनैतिक जीवन समाप्त कर दिया। अब जर्मनी में एक पार्टी थी-नाजी पार्टी एवं एक नेता था-हिटलर । इस प्रकार नाजीवाद कार्यक्रम ने द्वितीय विश्वयुद्ध के तटपर ला खड़ा किया।

प्रश्न 4.
क्या साम्यवाद के भय ने जर्मन पूँजीपतियों को हिटलर का समर्थक बनाया?
उत्तर-
1917 ई० की रूसी क्रान्ति का प्रभाव जर्मनी पर पड़ा यहाँ भी अनेक युवक साम्यवादी संगठन का निर्माण किए। साम्यवादियों ने वाइमर गणतंत्र को उखाड़ने एवं सर्वहारा वर्ग का अधिनायकवाद लाने का प्रयास किया । यह प्रयास जर्मनी में राष्ट्रीयता के लिए एक निश्चित खतरा था। देश के उदारवादी लोग साम्यवाद की बढती हई शक्ति देश के लिए संकट समझते थे। हिटलर ने जनता को साम्यवाद के विनाशकारी परिणामों से अवगत कराया। जर्मनी का उद्योगपति, पूँजीपति एवं जमींदार वर्ग काफी भयभीत हो गए। क्योंकि साम्यवादी व्यवस्था में-देश की सारी सम्पत्ति राष्ट्रीय संपत्ति हो जाती । उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व समाप्त कर दिया जाता और उत्पादन व्यवस्था में निजी मुनाफे की भावना को निकाल दिया जाता । उद्योग पर मजदूरों का नियंत्रण हो जाता। इसी भय से भयभीत होकर जर्मन पूँजीपतियों ने हिटलर का साथ दिया।

प्रश्न 5.
रोम-बर्लिन टोकियो धुरी क्या है ?
उत्तर-
अबीसीनियई युद्ध में जर्मनी ने इटली की सहायता की थी। अतः रोम (इटली की राजधानी) और बर्लिन (जर्मनी की राजधानी) ने आपस में एक संधि कर ली यह रोम-बर्लिन धुरी के नाम से जाना जाता है। 1936 ई० में जर्मनी और जापान ने साम्यवाद के विरुद्ध एक आपसी समझौता किया । फलतः यह त्रिदलीय संधि रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी के नाम से विख्यात हुआ। ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिटलर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
एडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 ई० को आस्ट्रिया के ब्रौना नामक शहर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उसका लालन-पालन सही तरह से नहीं हो सका। बचपन में वह चित्रकार बनना चाहता था परन्तु उसकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अंततः उसने सेना में नौकरी कर ली । प्रथम विश्वयुद्ध में वह जर्मनी की तरफ से लड़ा और युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के लिए उसे ‘आयरन क्रास’ प्राप्त हुआ था

हिटलर 1921 ई० में नाजी पार्टी की स्थापना की, और जर्मनी की सत्ता हथियाने का प्रयास करने लगा । पर असफल हो गया और जेल भेज दिया गया। जहाँ उसने मेन केम्फ (Mein Kemf) अर्थात ‘मेरा संघर्ष’ नामक पुस्तक की रचना की। जेल से बाहर आने के बाद, जर्मनी के राष्ट्रपति ने उसे 30 जनवरी, 1933 ई० को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। 1934 ई० में जर्मन राष्ट्रपति हिंडेनवर्ग की मृत्यु हो गई। अब वह पूर्णतः तानाशाह बन गया । वे देश का फ्यूहरर (नेता) बन गया। उसने ‘एक राष्ट्र, एक देश और एक नेता’ (one people. one impire and one leader) का नारा दिया। 1945 ई० तक वह जर्मनी का भाग्य विध पता बन गया। हिटलर का आकर्षक और प्रभावोत्पादक व्यक्तित्व था। वह भाषण देने में अत्यंत निपुण था । अपने भाषणों से वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर अपनी ओर आकर्षित कर लेता था उसके सतारूढ़ होने में जनमत का उसके पक्ष में होना अत्यन्त सहायक सिद्ध हुआ । हिटलर जर्मन जाति की मनोभावना से भली भाँति परिचित था । वह जानता था कि जर्मन निवासी वर्साय की संधि के अपमान को नहीं भूले हैं । इसलिए वह अपने भाषणों से संधि और इसे करनेवाले’ ‘नवम्बर क्रिमिनल्स’ कहना नहीं भूलता था। जनता उसके विचारों से उसकी ओर आकृष्ट हुई। जर्मनी में उसकी धाक जम गई।

प्रश्न 2.
हिटलर की विदेश नीति जर्मनी की खोई प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक साधन था । कैसे?
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पराजित जर्मनी पर मित्र राष्ट्रों द्वारा वर्साय संधि की अपमानजनक शर्ते लाद दी गई थी, जिसे हिटलर नहीं भूल पाया था। निजी दर्शन के अनुसार वह शक्ति के बल पर जर्मन साम्राज्य की सीमा और गौरव को बढ़ाना चाहता था इसी से उसकी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त होने की संभावना थी। ऐसा हिटलर समझता था । हिटलर की विदेश नीति के मूलतत्व में अपमानजनक वर्साय संधि को समाप्त करना, जर्मनी को एक सूत्र में बाँधना तथा जर्मन साम्राज्य का विस्तार करना था। यूरोप में साम्यवाद को रोकना चाहता था। इन सब नीतियों को लागू कर हिटलर अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त करना चाहता था और .. वह अपनी नीतियों को कार्यान्वयन में सक्रिय हो गया।

  • राष्ट्रसंघ से पृथक होना-वर्साय की कठोरता और अपमानजनक संधि से जर्मन आहत थे । राष्ट्रसंघ का सदस्य बने रहने से जर्मनी को कोई लाभ नहीं था। अतः उसने 1933 ई० में जेनेवा निःशस्त्रीकरण की शर्ते सभी राष्ट्रों पर समान रूप से लागू करने की मांग की परन्तु जब उसे सफलता नहीं मिली तो उसने 1933 ई० में राष्ट्रसंघ की सदस्यता छोड़ने की घोषणा कर दी।
  • वर्साय की संधि को भंग करना-हिटलर ने वर्साय की संधि को मानने से इन्कार कर दिया, उसे नहीं मानते हुए संधि की धज्जियाँ उड़ा दी और 1935 ई० से वर्साय की संधि को मानने से इन्कार कर दिया ।
  • पोलैंड के साथ दस वर्षीय समझौता-1934 ई० में हिटलर ने पोलैंड के साथ 10 वर्षीय समझौता किया कि वे एक दूसरे की वर्तमान सीमाओं का किसी भी प्रकार अतिक्रमण नहीं करेंगे।
  • ब्रिटेन से समझौता-जून, 1935 में जर्मनी तथा ब्रिटेन में समझौता हो गया जिसके अनुसार ब्रिटेन ने स्वीकार कर लिया कि वह (जर्मनी) अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा सकता है, वशर्ते वह अपनी नौ सेना 35 प्रतिशत से अधिक न बढ़ाए । हिटलर की यह कूटनीतिक विजय थी।
  • रोम-बर्लिन धुरी-जर्मनी मित्र की तलाश में इटली की ओर हाथ बढ़ाया फलतः रोम-वर्लिन धुरी का निर्माण हुआ।
  • कामिन्टन विरोधी समझौता-साम्यवादी खतरा से बचने के लिए जर्मनी, इटली एवं जापान के बीच कामिन्टन विरोधी समझौता 1936 ई० में संपन्न हुआ जो बाद में ‘धुरी राष्ट्र’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।
  • आस्ट्रिया एवं चेकोस्लोवाकिया का विलयन-जर्मन भाषा-भाषी को एक सूत्र में बाँधने का हिटलर को विदेश नीति का लक्ष्य था । उसने आस्ट्रिया को अपने राज्य में मिला कर वह गौरवान्वित हुआ। उसका मनोबल काफी बढ़ गया । इस तरह वह अपनी साख बनाने में सफल हुआ।

प्रश्न 3.
नाजीवादी दर्शन निरंकुशता का समर्थक एवं लोकतंत्र का विरोध था। विवेचना कीजिए।
उत्तर-
नाजी दर्शन सर्वाधिकारवाद या निरंकुशता का समर्थक था। वह सारी शक्ति एक व्यक्ति अथवा राज्य में केन्द्रित करना चाहता था । इसलिए यह जनतंत्रात्मक व्यवस्था एवं लोकतंत्र का विरोधी था । नाजी दर्शन में संसदीय संस्थाओं के लिए कोई स्थान नहीं था। नाजी सारी शक्ति एक महान और शक्तिशाली नेता के हाँथों में सौंप देने की बात करते थे।

(i) लोकतंत्र का विरोध-जर्मनी में सत्ता सँभालने के बाद ही हिटलर ने सारी शक्तियाँ अपने हाथों में केन्द्रित कर ली तथा एक तानाशाह बन बैठा । उसने प्रेस तथा वाक् अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया एवं विरोधी दलों का पूर्णतः सफाया कर दिया। उसने शिक्षण संस्थाओं तथा जनसंचार पर भी प्रतिबंध लागू किया। इस प्रकार जर्मनी में लोकतांत्रिक आवाज को दफन करने का प्रयास हुआ जो बाद में राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध हुआ।

(ii) निरंकुशता का समर्थक-नाजीवाद राजा की निरंकुश शक्ति पर बल प्रदान करता है । जर्मनी में हिटलर निरंकुश शक्ति का सहारा लिया । सत्ता में आते ही उसने गुप्तचर पुलिस ‘गेस्टापो’ का संगठन किया जिसका आतंक पूरे जर्मनी पर छा गया । उसने विशेष कारागृह की स्थापना की जिसके माध्यम से राजनीतिक विरोधियों का दमन किया । राइस्टांग की इमारत में हिटलर ने खुद आग लगवाई परन्तु उसका दोषारोपण समाजवादियों पर लगा दिया । इस तरह राजनैतिक जीवन समाप्त कर दिया गया । अब जर्मनी में एक पार्टी थी, एक नेता था-हिटलर ।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 2 ढहते विश्वास

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BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 2 ढहते विश्वास

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बोध और अभ्यास

ढहते विश्वास कहानी Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
लक्ष्मी कौन थी? उसकी पारिवारिक परिस्थिति का चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
लक्ष्मी ‘ढहते विश्वास’ कहानी की प्रमुख पात्र है। उसका पति (लक्ष्मण) कलकत्ता में नौकरी करता है। पति द्वारा प्राप्त राशि से उसका घर-गृहस्थी नहीं चलता है तो वह तहसीलदार साहब के घर का कामकर किसी तरह जीवन-यापन कर लेती है। पूर्वजों के द्वारा छोड़ा गया एक बीघा खेत है। किसी तरह लक्ष्मी ने उसमें खेती करवायी है। वर्षा नहीं होने से अंकुर जल गये तो कहीं-कहीं धान सूख गये। एकतरफ सूखा तो दूसरी तरफ लगातार वर्षा से लक्ष्मी का हृदय काँप उठठा है। उसे बाढ़ का भयावह दृश्य नजर आने लगता है।

Dhate Vishwas Question Answer Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
कहानी के आधार पर प्रमाणित करें कि उड़ीसा का जन-जीवन बाढ़ और सूखा से काफी प्रभावित रहा है?.
उत्तर-
उड़ीसा का भौगोलिक परिदृश्य ऐसा है कि वहाँ प्रायः बाढ़ और सूखा का प्रकोप होता रहता है। प्रकृति की विकरालता शायद उड़ीसा के लिए ही होता है। प्रस्तुत कहानी सूखा और बाढ़ दोनों का सजीवात्मक चित्रण किया गया है। देवी नयी के तट पर बसा हुआ एक गाँव जहाँ कुछ दिन पहले अनावृष्टि के कारण खेतों में लगी हुई फसलें जल-भुन गई। हताश और विवश ग्रामीण आने वाले भविष्य को लेकर चिन्तित थे कि अचानक अतिवृष्टि होने लगी। लोगों की आंशकाएँ बढ़ गई कि कहीं बाढ़ न आ जाये। नदी का उत्थान बढ़ता जा रहा था। ग्रामीण बाँध टूटे नहीं इसके लिए रात-दिन उसका मरम्मत करने में लग जाते हैं। उन ग्रामीणों के लिए यह पहला बाढ़ नहीं है। वृद्ध लोग पुराने दृश्यों को याद कर संशंकित हो उठते हैं। नदी का प्रवाह बढ़ता जाता है और बाँध टूट जाता है। चारों तरफ पानी फैल जाता है। लोग ऊँचे स्थान पर आश्रय लेते हैं। लोग जीवन-मौत से जुझने लगते हैं। उस क्षेत्र के लोग बाढ़ और सूखा से परिचित हो गये हैं। धीरे-धीरे बाढ़ समाप्त हो जाती है किन्तु उसकी त्रासदी का दंश उन्हें आज भी सहनी पड़ती है।

ढहते विश्वास कहानी के लेखक Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 3.
कहानी में आये बाढ़ के दृश्यों का चित्रण अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।
उत्तर-
बाढ़ शब्द सुनते ही मन-मस्तिष्क में तरह-तरह के प्रश्न उठने लगते हैं। त्रासदी का ऐसा तांडव जो जीव-जगत को तबाह कर दे। उड़ीसा जैसा प्रदेश प्रायः बाढ-सूखा से त्रस्त रहता . है। प्रस्तुत कहानी में आये हुए बाढ़ का चित्रण बड़ा ही त्राग्दीपूर्ण है। देवी नदी के किनारे स्थित लक्ष्मी का गाँव प्राय: बाढ़ की चपेट में आ जाता है। लगातार वर्षा होने से लक्ष्मी को अन्दर से झकझोर देता है। मनुष्य की आवाज उसके शब्द, आनन्द, कोलाहल सब रेत में दफन हो गये हैं। दलेई बाँध टूटने से नदी का पानी सर्वत्र फैल गया है। चारों तरफ चीत्कार सुनाई पड़ती है। लक्ष्मी के मन में अच्छे-बुरे ख्याल आने लगते हैं। पति की अनुपस्थिति उसे खटकने लगती है। लोग ऊँची जगहों पर शरण पाने के लिए बेतहाशा दौड़ पड़ते हैं। लक्ष्मी अपने बेटे की प्रतीक्षा में बिछड़ जाती है। किसी तरह अपने बच्चों को लेकर वह दौड़ पड़ती है। धारा में उसके पैर उखड़ जाते हैं। बरगद की जंटा पकड़कर किसी तरह पेड़ पर चढ़ जाती है। देखते-देखते बरगद का पेड़ भी डूबने लगता है। लक्ष्मी अपनी साड़ी के आधी-भाग से कमर का बाँध लेती है। वह कुछ ही समय में अचेत हो जाती है। टीले पर चढ़े हुए लोग अपने परिचितों को ढूंढ रहे थे। कोई किसी की सहायता नहीं कर सकता था। लाश की तरह एक जगह टिकी हुई लक्ष्मी को सहसा होश आ जाता है। वह अपने छोटे बेटे को ढूँढने लगती है। हिम्मत हार चुकी वह अनायास पेड़ की शाखा-प्रशाखा की जोड़ में फंसे एक छोटे बच्चे को उठा लेती है। वह उसका बेटा नहीं है। उसका शरीर फुला हुआ है। फिर भी वह उस नन्हें से बच्चे को अपने स्तन से सटा लेती है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 4.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।
उत्तर-
रचना-भाव का मुख्य द्वार शीर्षक होता है। शीर्षक रचना की रुख्ता एवं व्यापकता को परिलक्षित करता है। शीर्षक का चयन रचनाकार मुख्यत: घटना, पत्र, घटना-स्थल, उद्देश्य एवं मुख्य विचार-विन्दु के आधार पर करता है। विद्वानों के अनुसार शीर्षक की सफलता, औचित्य एवं मुख्य विचार सार्थकता उसकी लघुता सटीकता मुख्य विचार एवं भाव व्यंजना पर करती है।

आलोच्य कहानी का शीर्षक इस कहानी के मुख्य चरित्र से जुड़ा हुआ है। पूरी कहानी पर लक्ष्मी का व्यक्तित्व और कृतित्व छाया छितराया हुआ है। मेहनत करनेवाली लक्ष्मी पति से दूर रहकर भी अपना भरण-पोषण कर लेती हो पति द्वारा भेजे गये राशि से उसका घर-खर्च नहीं चलता है अत: वह तहसीलदार साहब के घर में काम कर अपने बेटा-बेटी को पालन-पोषण करती है। देबी नदी के किनारे स्थित उसका घर पानी के प्रकोप का हिस्सा है। कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ से त्रस्त वह मातृत्व का अक्षरशः पालन करती हैं।

लगातार वर्षा होने से उसका आत्मविश्वास ढहने लगता है। बीती हुई बातें उसे याद आने लगती है। बाढ़ की त्रासदी आज भी उसके मानस पटल पर अंकित हो उठे आभास होने लगता है। शायद पुन: बाढ़ का प्रकोप न हो जाये। वह नदी में दुआ माँगती है। किन्तु नदी की निष्ठुरता अपने आगोश में ले लेती है। टीले पर जाने की होड़ में वह सबकुछ खो देती है। बगरद के पेड़ पर आश्रय तो पा लेती है। किन्तु उसका छोटा बेटा प्रवाह में बह जाता है। पेड़ की शाखा में फंसा हुआ एक छोटे-से बालक को अपना दूध तो पिला देती है। किन्तु उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। कथाकार ने कथानक के माध्यम से कहानी के तत्त्वों को सुन्दर रूप से नियोजित किया है। बाढ़ आने के भय से लक्ष्मी एवं उस गाँव के लोगों का जैसे आत्मविश्वास खो जाता है शायद लेखक का मन भी बैठ गया है। अत: उपर्युक्त दृष्टान्तों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सार्थक और समीचीन है।

ढाते विश्वास Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 5.
लक्ष्मी के व्यक्तित्व पर विचार करें।
उत्तर-
लक्ष्मी प्रस्तुत कहानी की प्रधान, नायिका है। वह इस कहानी का केन्द्रीय चरित्र है। एक नारी का जो स्वरूप होता है वह इस कहानी में देखने को मिलता है। जीवनरूपी. रथ का एक चक्र होनेवाली पत्नी की भंगिमा का लक्ष्मी प्रतिनिधित्व करती है। पति के बाहर रहने पर भी वह घर-गृहस्थी का बोझ अपने सिर पर ढोती है। पति द्वारा प्राप्त राशि से जब घर का खर्च नहीं चलता है तब वह तहसीलदार साहब के यहाँ काम कर खर्च जुटाती है। पहले सूखा और फिर बाढ़ के भय से लक्ष्मी सशंकित हो उठती है। उसका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। विधि के विधान को कौन टाल सकता है। लक्ष्मी को जिस बात का भय था वह उसके सामने आ जाता है। बाढ़ का पानी चारों तरफ फैलने लगता है। लोग ऊची टीले पर दौड़ पड़ते हैं। लक्ष्मी भी अपने बेटा-बेटी लेकर जैसे-तैसे दौड़ पड़ती है। प्रवाह ने उसके पैर उखड़ जाते हैं फिर भी वह हिम्मत नहीं हारती है। किसी तरह वरगद के पेड़ पर आश्रय पा लेती है। उसका छोटा बेटा प्रवाह में बह जाता है। किन्तु एक अन्य छोटे से बालक को अपना दूध पीलाता है। मातृत्व उसका उमड़ जाता है।

प्रश्न 6.
गुणनिधि का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
गुणनिधि गाँव का नौजवान है। कंटक में पढ़ता है। वह साहसी है, उसे अपने सामाजिक दायित्व का बोध है और नेतृत्वगुण संपन्न है। जब गाँव आता है और बाढ़ का खतरा देखता है तो स्वयं सेवक दल का गठन करता है। स्वयं सदा उनके साथ रहकर उनका उत्साह बढ़ाता है-‘निठल्लों के लिए जगह भी नहीं है दुनिया में जिस मनुष्य ने काठ-जोड़ी का पत्थर-बाँध बाँध है, वह मनुष्य अभी मरा.थोड़े ही है’ खुद पैंट-शर्ट उतार कर काँछ. लगाकर कमर कस कर काम पर रात-दिन जुटा रहता है।

प्रश्न 7.
बिहार का जन-जीवन भी बाढ़ और सूखा से प्रभावित होता रहा है। इस संबंध में आप क्या सोचते हैं ? लिखें।
उत्तर-
बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ बाढ़ और सूखा का प्रकोप होना ही है। उत्तरी बिहार एवं दक्षिणी बिहार की कुछ ऐसी नदियाँ है जो हमेशा बरसात में उफानी रूप ले लेती है। दक्षिण बिहार में बहनेवाली नदियों का जलस्तर कम वर्षा होने पर भी जल्दी ही बढ़ जाती है। ये नदियाँ हिमालय पर्वत से निकलकर मैदानी भाग में कहर ढा देती है। नेपाल से सटे होने एवं राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन क्षेत्रों में बाढ़ का प्रायः प्रकोप होता है। हर वर्ष बिहार का कुछ क्षेत्र बाढ़ से बहुत प्रभावित होता है। जानमाल की अपार क्षति होती है। पिछले वर्ष कोशी का ताडव अपना एक अलग इतिहास लिख दिया है। कितने गाँव बह गये। बाढ़ समाप्त हुआ कि महामारी फैल गया। एक तरफ बिहार बाढ़ की चपेट में आ गया तो दूसरी तरफ अनावृष्टि के कारण कई जिले सूखे के चपेट में आ गये। बाढ़ और सूखा की आँखमिचौनी बिहारवासियों के लिए जीवन का अंग बन गया है। बिहारी इन दोनों से अभिशप्त है किन्तु कुछ राजनेता इनके दुःख-दर्द को बाटने के बजाय राजनीति खेल शुरू कर देते हैं। केन्द्र की उदासीनता और राज्य की शिथिलता के कारण बिहारवासी इन त्रासदियों का दंश झेलने के लिए विवश हैं।

प्रश्न 8.
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर-
उड़ीसा के प्रमुख कथाकार सातकोड़ी होता द्वारा रचित ‘ढहते विश्वास’ शीर्षक कहानी एक चर्चित कहानी है। इस कहानी में मानवीय मूल्यों का सफल अंकन किया गया है। वस्तुतः होता जी के कथा साहित्य में उड़ीसा के गहरी जीवन की आंतरिकता का उल्लेख मिलता है। उड़ीसा का जन-जीवन प्रायः बाढ़ और सूखा से प्रभावित रहता है। इस कहानी में बाढ़ से प्रभावित लोगों की जीवन-शैली के साथ-साथ एक माँ की वात्सल्यता का चित्रण मिलता है। इस कहानी की प्रमुख पात्र लक्ष्मी है। उसका पति कोलकात्ता में नौकरी करता है।

पति के पैसे से उसकी गृहस्थी नहीं चल पाती है इसलिए वह तहसीलदार साहेब के घर में काम कर अपना जीवन-यापन करती है। देबी नदी के तट पर बसा हुआ उसका गाँव बाढ़ से हमेशा प्रभावित हो जाता है। इस वर्ष उसे सूखा के साथ-साथ बाढ़ का भी प्रकोप सहना पड़ता है। लगातार वर्षा होने के कारण नदी का बाँध टूट जाता है। बाढ़ की विकरालता जन-जीवन को निःशेष करने लगती है। लक्ष्मी अपनी संतान के साथ ऊंचे टीले की ओर दौड़ती है।

देखते-देखते पानी उसके गर्दन तक पहुँच जाता है। किसी तरह वह बरगद के पेड़ पर आश्रय पाती है। उसका आत्म विश्वास ढहने लगता है। उसे लगता है कि मृत्यु अब समीप है। साड़ी के आधे भाग से वह अपने शरीर को बाँध लेती है। कुछ देर के बाद ही वह अचेत हो जाती है। चेतना आते ही वह अपने छोटे बेटे,को ढूँढने लगती है। टहनियों के बीच एक फंसे हुए बच्चा को उठा लेती है। मृत-अर्धमृत बच्चा उसका नहीं है फिर भी वह उसे अपने स्तन से लगा लेती है। उस समय लक्ष्मी के मन में केवल ममत्व था।
वस्तुतः इस कहानी के द्वारा लेखक मानवीय मूल्यों को उद्घाटित किया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
ढहते विश्वास के रचयिता हैं
(क) साँवर दइया
(ख) सुजाता
(ग) सातकोड़ी होता
(घ) श्री निवास
उत्तर
(ग) सातकोड़ी होता

प्रश्न 2.
सातकोड़ी होता कथाकार हैं………………….
(क) तमिल
(ख) राजस्थानी
(ग) गुजराती
(घ) उड़िया
उत्तर-
(घ) उड़िया

प्रश्न 3.
लक्ष्मी लक्ष्मण की …………..” थी।
(क) माँ
(ख) बेटी
(ग) सास
(घ) पत्नी
उत्तर-
(घ) पत्नी

प्रश्न 4.
लक्ष्म ण ……………” में रहता था।
(क) दिल्ली
(ख) भुवनेश्वर
(ग) आगरा
(घ) कोलकाता
उत्तर-
(ब)

प्रश्न 5.
लोग हाँफते हुए दौड़ने लगे
(क) नदी की ओर
(ख) सड़क की ओर
(ग) टीले की ओर
(घ) गाँव की ओर
उत्तर-
(ग) टीले की ओर

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
‘ढहते विश्वास’ के रचयिता ………..” हैं।
उत्तर-
सात कोड़ी होता

प्रश्न 2.
……….नदी के बाँध के नीचे लक्ष्मी का घर था।
उत्तर-
देवी

प्रश्न 3.
सतकोडी होता ………. के कथाकार हैं।
उत्तर-
उड़िया

प्रश्न 4.
…………. अकेले न आकर संगी-साथियों के साथ आती है।
उत्तर-
विपत्ति

प्रश्न 5.
मन ………… नहीं मानता।
उत्तर-
हार

प्रश्न 6.
पानी में रहकर ………….. से वैर करना मुश्किल है।
उत्तर-
मगरमच्छ

प्रश्न 7.
……… हॉफते हुए टीले की ओर दौड़ने लगे।
उत्तर-
लो

प्रश्न 8.
चारों ओर …………… भरा था।
उत्तर-
पानी

अतिलघु उत्तरीय पश्व

प्रश्न 1.
लक्ष्मी कौन थी?
उत्तर-
लक्ष्मी उड़ीसा के एक गृहस्थ परिवार की स्त्री थी जिसका घर देवी बाँध के नीचे था।

प्रश्न 2.
“उहते विश्वास” कहानी का वर्श्व-विषय क्या है ?
उत्तर-
ढहतें विश्वास कहानी का वर्ण्य-विषय है उड़ीसा में सूखा, बाढ़ का तांडव और इन दोनों से जुझते लोगों का अदम्य साहस।

प्रश्न 3.
सातकोड़ी होता के कथा-साहित्य की विशेषता क्या है ?
उत्तर-
सात कोड़ी होता के कथा-साहित्य में उड़ीसा का जन-जीवन पूरी आन्तरिकता के साथ प्रकट हुआ है।

प्रश्न 4.
हीराकुंद बाँध कहाँ और किस नदी पर बांधा गया है?
उत्तर-
हीराकुंद बाँध उड़ीसा में है और महानदी पर बाँधा गया है।

प्रश्न 5.
अच्युत कौन था?
उत्तर-
अच्युत लक्ष्मण-लक्ष्मी का बड़ा बेटा था, कर्मठ और साहसी।

प्रश्न 6.
बाढ़ का प्रभाव लोगों पर क्या पड़ा?
उत्तर-
लोगों को किसी का भरोसा नहीं रहा। देवी-देवताओं पर से भी लोगों का विशवास उठने लगा।

प्रश्न 7.
बाढ़ से घर छोड़ने की आशंका से लक्ष्मी ने क्या तैयारी की?
उत्तर-
बाढ़ से घर छोड़ने की आशंका से लक्ष्मी ने एक बारे में थोड़ा-सा चिवड़ा, कुछ कपड़े और दो-चार बर्तन बाँध कर रख लिए। गाय-बछड़े का पगहा खोल दिया। बकरियों को खोल दिया।

ढहते विश्वास  लेखक परिचय

सातकोड़ी होता उड़िया के एक प्रमुख कथाकार हैं । इनका जन्म 29 अक्टूबर 1929 ई० में मयूरभंज, उड़ीसा में हुआ था । अबतक इनकी एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। होता जी भुवनेश्वर में भारतीय रेल यातायात सेवा के अंतर्गत रेल समन्वय आयुक्त व उड़ीसा सरकार के वाणिज्य एवं यातायात विभाग में विशेष सचिव तथा उड़ीसा राज्य परिवहन निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं । इनके कथा साहित्य में उड़ीसा का जीवन गहरी आंतरिकता के साथ प्रकट हुआ है । यह कहानी राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा संपादित एवं अनूदित ‘उड़िया की चर्चित कहानियाँ’ (विभूति प्रकाशन, दिल्ली) से यहाँ साभार संकलित है।

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

Bihar Board Class 10 History Notes प्रश्न 1.
महात्मा गाँधी ने किस पत्र का संपादन किया?
(क) कामनबील
(ख) यंग इंडिया
(ग) बंगाली
(घ) बिहारी
उत्तर-
(ख) यंग इंडिया

Bihar Board Class 10 History Solution प्रश्न 2.
किस पत्र ने रातों-रात वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए अपनी भाषा बदल दी ?
(क) हरिजन
(ख) भारत मित्र
(ग) अमृतबाजर पत्रिका
(घ) हिन्दुस्तान रिव्यू
उत्तर-
(ग) अमृतबाजर पत्रिका

Bihar Board Class 10th History Solution प्रश्न 3.
13वीं सदी में किसने ब्लॉक प्रिंटिंग के नमूने यूरोप में पहुँचाए ?
(क) मार्कोपोलो
(ख) निकितिन
(ग) इत्सिंग
(घ) मेगास्थनीज
उत्तर-
(क) मार्कोपोलो

Bihar Board Class 10 History Book Solution प्रश्न 4.
गुटेनबर्ग का जन्म किस देश में हुआ था?
(क) अमेरिका
(ख) जर्मनी
(ग) जापान
(घ) इंगलैंड
उत्तर-
(ख) जर्मनी

Class 10th History Chapter 1 Notes Bihar Board प्रश्न 5.
गुटेनबर्ग ने सर्वप्रथम किस पुस्तक की छपाई की ?
(क) कुरान
(ख) गीता
(ग) हदीस
(घ) बाइबिल
उत्तर-
(घ) बाइबिल

Bihar Board History Solution Class 10 प्रश्न 6.
इंगलैंड में मुद्रणकला को पहुँचाने वाला कौन था ?
(क) हैमिल्टन
(ख) कैक्सटन
(ग) एडिसन
(घ) स्मिथ
उत्तर
(ख) कैक्सटन

History Class 10 Bihar Board प्रश्न 7.
किसने कहा “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम् देन है, सबसे बड़ा तोहफा”?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) मार्टिन लूथर
(ग) मुहम्मद पैगम्बर
(घ) ईसा मसीह
उत्तर-
(ख) मार्टिन लूथर

Bihar Board Class 10 History Notes In Hindi प्रश्न 8.
रूसो कहाँ का दार्शनिक था? ।
(क) फ्रांस
(ख) रूस
(ग) अमेरिका
(घ) इंगलैंड
उत्तर-
(क) फ्रांस

Bihar Board History Solution प्रश्न 9.
विश्व में सर्वप्रथम मुद्रण की शुरूआत कहाँ हई?
(क) भारत
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) अमेरिका
उत्तर-
(ग) चीन

Bihar Board Class 10 History Book प्रश्न 10.
किस देश की सिविल सेवा परीक्षा ने मुद्रित पुस्तकों (सामग्रियों) की माँग बढ़ाई?
(क) मिस्र
(ख) भारत
(ग) चीन
(घ) जापान
उत्तर-
(ग) चीन

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें:

Class 10 History Bihar Board प्रश्न 1.
1904-05 के रूस-जापान युद्ध में…………… की पराजय हुई।
उत्तर-
रूस

History 10th Class Bihar Board प्रश्न 2.
फिरोजशाह मेहता ने ……………का संपादन किया।
उत्तर-
बाम्बे कॉनिकल

Class 10 Bihar Board History Question Answer प्रश्न 3.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट……………ई. में पास किया गया।
उत्तर-
1878 ई,

Class 10 Social Science Bihar Board प्रश्न 4.
भारतीय समाचार पत्रों के मुक्तिदाता के रूप में……………को विभूषित किया गया।
उत्तर-
चार्ल्स मेटकॉफ

प्रश्न 5.
अल-हिलाल का सम्पादन…………ने किया।
उत्तर-
मौलाना आजाद

सुमेलित करें:

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद - 1
उत्तर-
(i) (ग),
(ii) (क),
(iii) (घ),
(iv) (ङ),
(v) (ख)।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
निम्नांकित के बारे में 20 शब्दों में लिखो:
(क) छापाखाना
Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद - 2
उत्तर-
(क) छापाखाना-वह स्थान जहाँ मुद्रण यंत्र के उपयोग से छपाई कार्य किया जाता है। छापाखाना कहलाता है।
(ख) गटेनबर्ग जर्मनी के मेन्जनगर के कृषक-जमींदार व्यापारी परिवार में जन्मा व्यक्ति जिसने मुद्रण कला के ऐतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया।
(ग) बाइबिल- इसाइयों का पवित्र धर्म ग्रंथ जिसमें ईसा मसीह के बारे में वर्णन मिलता है। – (घ) रेशम मार्ग- समरकन्द-पर्शिया-सिरिया मार्ग को ही रेशम मार्ग कहा जाता है यह व्यापारिक मार्ग है।
(ङ) मराठा बाल गंगाधर तिलक के संपादन में 1881 में बंबई से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित समाचारपत्र।
(च) यंग इंडिया महात्मा गाँधी द्वारा प्रकाशित एक पत्रिका जो राष्ट्रवादी विचारों से ओत-प्रोत था।
(छ) वर्नाक्यलर प्रेस एक्ट- 1878 में लार्ड लिटन द्वारा लाया गया प्रेस एक्ट जो भारतीय भाषाओं में छपने वाले समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं को प्रतिबंधित करता है।
(ज) सर सैय्यद अहमद- अलीगढ़ जर्नल नामक पत्र के सम्पादक जिसने राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
(झ) प्रोटेस्टेन्टवाद मार्टिन लूथर द्वारा पोप के आधिपत्य का विरोध करने के लिए अपनाया गया मार्ग प्रोटेस्टेंटवाद कहलाता है।
(ञ) मार्टिन लथर- एक धर्म सुधारक जिसने रोमन कैथोलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपनी 95वें स्थापनाएँ लिखीं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
गेटेनबर्ग ने मुद्रण यंत्र का विकास कैसे किया.?
उत्तर-
गेटेनबर्ग ने अपने ज्ञान एवं अनुभव से टुकड़ों में बिखरी मुद्रण कला के एतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया। टाइपों के लिए पंच, मैट्रिक्स, मोल्ड आदि बनाने पर योजनाबद्ध तरीके से कार्यारम्भ किया। उसने हैण्डप्रेस में लकड़ी के चौखट में दो समतल भाग प्लेट एवं बेड-एक के नीचे दूसरा समानान्तर रूप से रखा। कम्पोज किया हुआ टाइप मैटर बेड पर कस दिया एवं उसपर स्याही लगाकर एवं कागज रखकर पलेट्स द्वारा दबाकर मुद्रणकार्य को । विकसित किया।

प्रश्न 2.
छापाखाना यूरोप में कैसे पहँचा?
उत्तर-
पुनर्जागरण एवं व्यापारिक केन्द्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना लेने के बाद 1475 में सर विलियम कैक्स्टन मुद्रणकला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्ट मिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ। इस प्रकार छापाखाना यूरोप पहुंचा।

प्रश्न 3.
इन्क्वीजीशन से आप क्या समझते हैं। इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर-
ईश्वर एवं सृष्टि के बारे में रोमन कैथोलिक चर्च की मान्यताओं के विपरीत विचार आने से कैथोलिक चर्च क्रुद्ध हो गया और तथाकथित धर्मविरोधी विचारों को दबाने के लिए शुरू किया गया आन्दोलन इन्क्वीजीशन कहलाता है।
इसकी सहायता से विरोधी विचारधारा के प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया।

प्रश्न 4.
पाण्डुलिपि क्या है ? इसकी क्या उपयोगिता है?
उत्तर-
मुद्रण कला के आविष्कार के पूर्व हाथ द्वारा विभिन्न प्रकार के चित्रों का उपयोग कर ली गयी लिखाई को पाण्डुलिपि कहा जाता है। पुरानी बातों के संबंध में ज्ञानार्जन करने के लिए इसका उपयोग किया जाता था।

प्रश्न 5.
लार्ड लिटन ने राष्ट्रीय आन्दोलन को गतिमान बनाया। कैसे?
उत्तर-
लार्ड लिटन ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट द्वारा भारतीय समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे जनमानस उद्वेलित हो गया और इससे राष्ट्रीय आन्दोलन को बल मिला।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर-
मुद्रण क्रांति ने आम लोगों की जिंदगी ही बदल दी। आम लोगों का जुड़ाव सूचना, ज्ञान, संस्था और सत्ता से नजदीकी स्तर पर हुआ। फलतः लोक चेतना एवं दृष्टि में बदलाव संभव हुआ।

मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप किताबें समाज के सभी तबकों तक पहुँच गईं। किताबों की पहुंच आसान होने से पढ़ने की नई संस्कृति विकसित हुई। एक नया पाठक वर्ग और तैयार हुआ चूंकि साक्षर ही पुस्तक को पढ़ सकते थे। अतः साक्षरता बढ़ाने हेतु पुस्तकों को रोचक तस्वीरों, लोकगीत और लोक कथाओं से सजाया जाने लगा। पहले जो लोग सुनकर ज्ञानार्जन करते थे अब पढ़कर भी कर सकते थे। इससे उनके अंदर तार्किक शक्ति का विकास हुआ।

पठन-पाठन से विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ तथा तर्कवाद और मानवतावाद का द्वारा खुला। स्थापित विचारों से असहमत होने वाले लोग भी अपने विचारों को फैला सकते थे।

मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप प्रगति और ज्ञानोदय का प्रकाश फैलने लगा। लोगों में निरंकुश सत्ता से लड़ने के लिए नैतिक साहस का संचार होने लगा था। वाद-विवाद की नई संस्कृति को जन्म दिया। पुराने परंपरागत मूल्यों, संस्थाओं और वायदों पर आम लोगों के बीच मूल्यांकन शुरू हो गया। धर्म और आस्था को तार्किकता की कसौटी पर कसने से मानवतावादी दृष्टिकोण विकसित हुए। इस तरह की नई सार्वजनिक दुनियाँ ने सामाजिक क्रांति को जन्म दिया।

प्रश्न 2.
19वीं सदी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित करें।
उत्तर-
भारत में समाचारपत्रों का उदय 19वीं सदी की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यह न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलाने वाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन गया बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, प्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्रनिर्माण में | महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहण किया। । भारतीयों द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचारपत्र 1816 में गंगाधर भटाचार्य का साप्ताहिक बंगाल गजट था। 1818 में ब्रिटिश व्यापारियों ने जैम्स सिल्क वर्धिम नामक पत्रकार की सेवा प्राप्त की।

इसने बड़ी योग्यता से कलकत्ता जर्नल का सम्पादन करके लार्ड हेस्टिंग्स तथा जॉन एडम्स को परेशानी तथा उलझन में डाल दिया। बकिंघम ने अपने पत्रकारिता के माध्यम से प्रेस को जनता का प्रतिनिधि बनाया। इसने प्रेस को आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने, जाँच-पड़ताल करके समाचार देने तथा नेतृत्व प्रदान करने की ओर प्रवृत किया। अनेक प्रगतिशील राष्ट्रीय प्रवृति के समाचारपत्रों का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इन समाचारपत्रों के संस्थापक राजाराम मोहन राय थे। इन्होंने सामाजिक धार्मिक सुधार आन्दोलन को हथियार भी बनाया। अंग्रेजी में ब्राझिनिकल मैगजीन भी राममोहन राय ने निकाला। 1822 में बंबई से गुजराती भाषा में दैनिक बम्बई समाचार निकलने लगे। द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राममोहन राय के प्रयास से 1830 में बेंगदत की स्थापना हुई। 1831 में जामे जमशेद 1851 में गोफ्तर तथा अखबार सौदागर का प्रकाशन आरम्भ हुआ।

प्रश्न 3.
भारतीय प्रेस की विशेषताओं को लिखें।
उत्तर
भारतीय प्रेस की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • यह न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलानेवाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन मया बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, उसकी नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने एवं देशप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन किया।
  • इसके द्वारा न्यायिक निर्णयों में पक्षपात, धार्मिक हस्तक्षेप और प्रजातीय भेदभाव की आलोचना करने से धार्मिक एवं सामाजिक सुधार-आन्दोलन को बल मिला तथा भारतीय जनमत जागृत हुआ।
  • इसने न केवल राष्ट्रवादी आन्दोलन को एक नई दिशा दी अपितु भारत में शिक्षा को प्रोत्साहन, आर्थिक विकास एवं औद्योगीकरण तथा श्रम आन्दोलन को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया।
  • प्रेस ने राष्ट्रीय आन्दोलन के हर पक्ष चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हो या सांस्कृतिक-सबको प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
  • विदेशी सता से त्रस्त जनता.को सन्मार्ग दिखाने एवं साम्राज्यवाद के विरोध में निर्भीक . स्वर उठाने का कार्य प्रेस के माध्यम से ही किया गया।
  • नई शिक्षा नीति के प्रति व्यापक असंतोष को सरकार के समक्ष पहुँचाने का कार्य प्रेस ने ही किया। .
  • सामाजिक सुधार के क्षेत्र में, प्रेस ने सामाजिक रूढ़ियों, रीति-रिवाजों, अंधविश्वास तथा अंग्रेजी सभ्यता के प्रभाव को लेकर लगातार आलोचनात्मक लेख प्रकाशित किए।
  • प्रेस भारत की विदेश नीति की भी खूब समीक्षा करती थी।
  • देश के राष्ट्रीय आन्दोलन को नई दिशा देने एवं राष्ट्रनिर्माण में भी प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय आन्दोलन को भारतीय प्रेस ने कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर-
प्रेस ने न सिर्फ विचारों को तेजी से फैलानेवाला अनिवार्य सामाजिक संस्था बन गया ‘बल्कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना को एक रूप देने, उसकी नीतियों एवं शोषण के विरुद्ध जागृति लाने एवं देशप्रेम की भावना जागृत कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहण किया।
19वीं शता दी में प्रकाशित कई समाचारपत्रों ने राष्ट्रीय आन्दोलन की भावना को विकसित किया।

  • 1858 में ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने बंगाली में साप्ताहिक पत्रिका ‘सोम प्रकाश’ का प्रकाशन किया जो राष्ट्रवादी विचारों से ओत-प्रोत था। इसने नीलहे किसानों के हितों का जोरदार समर्थन किया।
  • 1868 से मोतीलाल घोष के संपादन में ‘अमृत बाजार’ अंग्रेजी बंगला साप्ताहिक के रूप में बाजार में आने लगा। इसका भारतीय प्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए यह रातों-रात अंग्रेजी में प्रकाशित होने लगा जिसने राष्ट्रीयता की भावना को जगाने में मुख्य भूमिका अदा की। .
  •  भारतेंदु हरिश्चन्द्र के संपादन में 1867 से प्रकाशित ‘कविवचन सुधा’ की संपादकीय टिप्पणियाँ राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर होती थीं जो राष्ट्रवादी विचारों को सशक्त करने का काम कर रही थी।
    इन्हीं की मासिक पत्रिका हरिश्चन्द्र भी देशप्रेम और समाज सुधार से अनुप्राणित थी।
  • बाल गंगाधर तिलक के संपादन में 1881 में बंबई से अंग्रेजी भाषा में मराठा और मराठी में केसरी की शुरूआत हुई। दोनों पत्र उग्रराष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित थे। इनका जनमानस पर व्यापक प्रभाव था।
  • अरविन्द घोष और वारींद्र घोष ने युगांतर तथा वंदेमातरम के माध्यम से उग्र राष्ट्रवाद को फैलाने का काम किया।
  • महात्मा गाँधी ने यंग इंडिया एवं हरिजन पत्रिका के माध्यम से अपने विचारों एवं राष्ट्रवादी आंदोलन का प्रचार किया। गांधी के सीधे एवं सरल लेख से आम जनता के साथ-साथ क्षेत्रीय पत्रकारिता को भी राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहन मिला।

समाचारपत्रों ने न केवल राष्ट्रवादी आन्दोलन को एक नई दिशा दी अपितु भारत में शिक्षा के प्रोत्साहन आर्थिक विकास एवं औद्योगीकरण तथा श्रम आन्दोलन को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया।

प्रश्न 5.
मुद्रण यंत्र की विकास यात्रा को रेखांकित करें। यह आधुनिक स्वरूप में कैसे पहुंचा।
उत्तर-
हम जानते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है। अत: सूचना की आवश्यकता ने आविष्कार हेतु ज्ञान जगत को प्रेरित किया।
मुद्रण कला के आविष्कार और विकास का श्रेय चीन को जाता है। 1041 ई. में एक चीनी व्यक्ति पि-शिंग ने मिट्टी के मुद्रा बनाए। इन अक्षर मुद्रों का संयोजन कर छपाई का कार्य किया जाता था। बाद में इस पद्धति ने ब्लाक प्रिंटिंग का स्थान ले लिया। कोरियन लोगों ने कुछ समय पश्चात लकड़ी एवं धातु पर खोदकर टाइप बनाए। धातु के मूवेबुल टाइपों द्वारा प्रथम पुस्तक 13वीं सदी के पूर्वार्द्ध में मध्य कोरिया में छापी गई।

यद्यपि मूवेबल टाइपों द्वारा मुद्रण कला का आविष्कार तो पूरब में ही हुआ परन्तु इस कला का विकास यूरोप में अधिक हुआ। लकड़ी के ब्लॉक द्वारा होने वाली मुद्रण कला समरकन्द-पर्शिया मार्ग से व्यापारियों द्वारा यूरोप, सर्वप्रथम रोम में प्रविष्ट हुई। 13वीं सदी के अंतिम में रोमन मिशनरी एवं मार्कोपोलो द्वारा ब्लॉक प्रिंटिंग के नमूने यूरोप पहुँचे। वहाँ इस कला का प्रयोग ताश खेलने एवं धार्मिक चित्र छापने के लिए किया गया। इसी बीच कागज बनाने की कला 11वीं शताब्दी में पूरब से यूरोप पहुँची तथा 1336 में प्रथम पेपर मिल की स्थापना जर्मनी में हुई। इसी काल में शिक्षा के प्रसार, व्यापार एवं मिशनरियों की बढ़ती गतिविधियों से सस्ती मुद्रित सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ी। इसी की पूर्ति के लिए तेज और सस्ती मुद्रण तकनीक की आवश्यकता थी जिसे (1430 के दशक में) स्ट्रेस बर्ग के योहान गुटेनबर्ग ने अंततः कर दिखाया।

गुटेनबर्ग ने अपने ज्ञान एवं अनुभव से टुकड़ों में बिखरी मुद्रण कला के ऐतिहासिक शोध को संघटित एवं एकत्रित किया तथा टाइपों के लिए पंच, मेट्रिक्स, मोल्ड आदि बनाने पर योजनाबद्ध तरीके से कार्यारम्भ किया।

गुटेनबर्ग ने आवश्यकतानुसार मुद्रण स्याही बनायी और हैण्डप्रेस ने प्रथम बार मुद्रण कार्य सम्पन्न किया। इसने लकड़ी के चौखट में दो समतल भाग-प्लेट एवं बेड-एक के नीचे दूसरा समानान्तर रूप से रखा। कम्पोज किया हुआ टाइप मैटर वेड पर कसा एवं उसपर स्याही लगाकर तथा कागज रखकर प्लेट्स द्वारा दबाकर मुद्रण कार्य किया। बाद में गुटेन बर्ग ने ही पुनः मुद्रा एवं हैण्ड प्रेस का विकास किया।
हालाँकि विवादों में घिरने के बावजूद मेंज में शुरू होकर पूर्णता को पहुंची मुद्रण कला का प्रसार शीघ्रता से यूरोपीय देशों एवं अन्य स्थानों में हुआ।

1475 ई. में सर विलयम कैक्सटनं मुद्रण कला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्ट मिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ। पुर्तगाल में इसकी शुरूआत 1544 ई. में हुई, तत्पश्चात् यह आधुनिक रूप में विश्व के अन्य देशों में पहुंची। 18वीं सदी के अंत तक प्रेस धातु के बनने लगे। 19वीं सदी के मध्य तक न्यूयार्क के रिचर्ड एम. हो ने शक्ति चालित बेलनाकार प्रेस को कारगर बना दिया। 20वीं सदी के अंत तक ऑफसेट प्रेस आ गया।

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
छपाइ का आरंभ किस देश में हुआ ?
उत्तर-
चीन में।

प्रश्न 2.
छापाखाना का आविष्कार किस देश में
उत्तर-
जर्मनी में।

प्रश्न 3.
इटली में वुडलॉक छपाई की तकनीक कौन लाया ?
उत्तर-
मार्कोपोलो ने।

प्रश्न 4.
मार्टिन लूथन ने अपनी पिच्चानवें स्थापनाएँ किस चर्च के दरवाजे पर टाँग दी ?
उत्तर-
गुटेन वर्ग चर्च।

प्रश्न 5.
तिलक ने किस भाषा में मराठा का प्रकाशन किया ?
उत्तर-
अंग्रेजी भाषा में।

प्रश्न 6.
जापानी उकियो चित्रकला शैली की विषय वस्तु क्या थी?
उत्तर-
जापानी उकियो चित्रकला शैली की विषय वस्तु शहरी लोगों के जीवन पर आधारित थी।

प्रश्न 7.
इटली में वुड ब्लॉक छपाई की तकनीक कहाँ से और किसके द्वारा लाई गई?
उत्तर-
इटली में वुड ब्लॉक छपाई की तकनीक चीन से मार्कोपोलो द्वारा लाई गई।

प्रश्न 8.
किसने कहा था “किताबें भिनमिनाती मक्खियों की तरह हैं।
उत्तर-
कैथोलिक धर्म सुधारक इरैस्मस ने।

प्रश्न 9.
रोमन चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
उत्तर-
नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तका विक्रेताओं पर प्रतिबंध लगाया।

प्रश्न 10.
मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए किस प्रकार अनुकूल परिस्थितियों बनाई ? किसी एक का उल्लेख करें?
उत्तर-
वाद-विवाद की संस्कृति-पुस्तकों और लेखों में वाद-विवाद की संस्कृति को जन्म दिया। नए विचारों के प्रसार के साथ ही तर्क की भावना का विकास हुआ। अब लोग पुरानी मान्यताओं की समीक्षा कर उनपर अपने विचार प्रकट करने लगे। इससे नई सोच उभरी। राजशाही चर्च और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। फलतः क्रांतिकारी विचारधारा का उदय हुआ। इस तरह मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाई।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
मार्टिन लूथर के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
मार्टिन लूथर (जर्मनी) एक महान धर्म सुधारक था। वह चर्च में व्याप्त बुराइयों का विरोधी था और इसमें सुधार लाना चाहता था। उसे धर्म सुधार आंदोलन का अग्रदूत कहा जाता है। 1517 में लूथर ने पंचानवें स्थापनाएँ लिखीं जिसमें उसने रोमन कैथोलिक चर्च में प्रचलित अनेक परम्पराओं एवं धार्मिक विधियों पर प्रहार किया। लूथर के लेखक के व्यापक प्रभाव से रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टैंक कहलाए। धीरे-धीरे प्रोटेस्टेंट संप्रदाय ईसाई धर्म का प्रमुख संप्रदाय बन गया।

प्रश्न 2.
इन्क्वीजीशन से आप क्या समझते हैं ? इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर-
रोमन चर्च धर्म विरोधी भावना को दबाने के लिए प्रयासरत थी क्योंकि पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रही थी। पुस्तकें पढ़कर सामान्य जनता और बुद्धिजीवियों ने ईसाई धर्म और बाइबिल में दिए गए उपदेशों पर नए ढंग से चिंतन-मनन आरंभ कर दिया। धर्म विरोधी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने इन्क्वीजीशन नामक संस्था का गठन किया। यह एक प्रकार का धार्मिक न्यायालय था। इसका काम धर्म विरोधियों की पहचान कर उन्हें दंडित करना था। इन्क्वीजीशन की जरूरत इसलिए पड़ी कि नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने प्रकाशकों और पुस्तक विशेषताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए जिससे वे धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें। 1558 से चर्च प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखने लगा जिससे उसका पुनर्मुद्रण और वितरण नहीं हो सकें।

प्रश्न 3.
गुटेनबर्ग के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
जर्मनी का गुटेन्बर्ग ने 1450 ई. में छापाखाना का अधिकार किया। वह बहुत ही जिज्ञासु . प्रवृति का था। जैतून पैरने की मशीन को आधार बनाकर उसने प्रिटिंग प्रेस (हैंड प्रेस) का विकास किया। गुटेनबर्ग ने मुद्रण स्याही का भी इजाद किया। गुटेन्बर्ग ने जो छपाई मशीन विकसित की उसे मूवेबल टाइप प्रिंटिंग मशीन’ कहा गया। क्योंकि रोमन वर्णमाला के सभी 26 अक्षरों के लिए टाइप बनाए गए तथा इन्हें घुमाने या ‘मूव’ करने की व्यवस्था की गयी। इस प्रक्रिया के द्वारा पुस्तकें तेजी से छापी जाने लगी। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस मशीन में प्रति घंटे अढाई सौ पन्नों के एक ओर छपाई की जा सकती थी। गुटेनबर्ग प्रेस में जो पहली पुस्तक छपी वह ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल थी।

प्रश्न 4.
रोमन कैथोलिक चर्च ने 16 वीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखनी क्यों आरंभ की?
उत्तर-
मार्टिन लूथर के पिच्चानवें स्थापनाएं 11517) ने रोमन कैथोलिक चर्च में प्रचलित अनेक परंपराओं एवं धार्मिक विधियों पर प्रहार किया। लूथर के इस लेख का व्यापक प्रचार हुआ जिसके कारण रोमन कैथोलिक चर्च में विभाजन हो गया। लूथर ने ईसाई धर्म की नई व्याख्या प्रस्तुत की। उसके समर्थक प्रोटेस्टैंट कहलाए। दूसरी ओर रोमन कैथोलिक चर्च धर्म विरोधी भावना को दबाने के लिए प्रयासरत थी क्योंकि पुस्तकें धार्मिक मान्यताओं एवं चर्च की सत्ता को चुनौती दे रही थी। नए धार्मिक विचारों के प्रसार को रोकने के लिए चर्च ने ने प्रकाशकों और पुस्तक बिक्रेताओं पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए जिससे वे धार्मिक स्वरूप को चुनौती देनेवाली सामग्री का प्रकाशन नहीं कर सकें चर्च ने अनेक पुस्तकों को प्रतिबंधित भी कर दिया। 1558 से चर्च प्रतिबंधित पुस्तकों की सूची रखने लगा जिससे उनका पुनर्मुद्रण और वितरण नहीं हो सके।

प्रश्न 5.
तकनीकी विकास का मुद्रण पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
तकनीकी विकास का मुद्रण पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अब कम समय, कम श्रम तथा कम लागत में ज्यादा से ज्यादा छपाई होने लगी। 18वीं सदी के अंतिम चरण तक धातु के बने छापाखाने काम करने लगे। 19वीं 20वीं सदी में छापाखानों में और अधिक तकनीकी सुधार किए गए। 19वीं शताब्दी में न्यूयॉर्क निवासी एम. ए. हो ने शक्ति चालित बेलनाकार प्रेस का निर्माण किया। इसके द्वारा प्रतिघंटा आठ हजार ताव छापे जाने लगे। इससे मुद्रण में तेजी-आई। इसी सदी के अंत तक ऑफसेट प्रेस भी व्यवहार में आया। इस छापाखाना द्वारा एक ही साथ छह रंगों में छपाई की जा सकती थी। 20वीं सदी के आरंभ से बिजली संचालित प्रेस व्यवहार में आया। इसने छपाई को और गति प्रदान की। प्रेस में अन्य तकनीकी बदलाव भी लाए गए, जैसे कागज लगाने की विधि में सुधार किया गया तथा प्लेट की गुणवत्ता बढ़ाई गई। साथ ही स्वचालित पेपर शील और रंगों के लिए फोटो विद्युतीय नियंत्रण का व्यवहार किया जाने लगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
स्वातंत्र्योत्तर भारत में प्रेस की भूमिका की व्याख्या करें।
उत्तर-
वैश्विक स्तर पर मुद्रण अपने आदि काल से भारत में स्वाधीनता आंदोलन तक भिन्न-भिन्न परिस्थितियों से गुजरते हुए आज अपनी उपादेयता के कारण ऐसी स्थिति में पहुँच गया है जिससे ज्ञान जगत की हर गतिविधियाँ प्रभावित हो रही है। आज पत्रकारिता साहित्य, मनोरंजन ज्ञान-विज्ञान, प्रशासन, राजनीति आदि को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है। – स्वातत्र्योत्तर भारत में पत्र-पत्रिकाओं का उद्देश्य भले ही व्यवसायिक रहा हो किन्तु इसने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अभिरूचि जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।

पत्र-पत्रिकाओं ने दिन-प्रतिदिन घटने वाली घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में नई और सहज शब्दावली का प्रयोग करते हुए भाषाशास्त्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रेस ने समाज में नवचेतना पैदा कर सामाजिक धार्मिक राजनीतिक एवं दैनिक जीवन में क्रांति का सूत्रपात किया। प्रेस ने सदैव सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, विधवा विवाह, बालिकावधु, बालहत्या, शिशु विवाह जैसे मुद्दों को उठाकर समाज के कुप्रथाओं को दूर करने में मदद की तथा व्याप्त अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास किया।

आज प्रेस समाज में रचनात्मकता का प्रतीक भी बनता जा रहा है। यह समाज की नित्यप्रति की उपलब्धियों, वैज्ञानिक अनुसंधानों, वैज्ञानिक उपकरणों एवं साधनों से परिचित कराता है। आज के आधुनिक दौर में प्रेस साहित्य और समाज की समृद्ध चेतना की धरोहर है। प्रेस लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने हेतु सजग प्रहरी के रूप में हमारे सामने खडा है।

प्रश्न 2.
फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में मुद्रण की भूमिका की विवेचना करें।
उत्तर-
फ्रांस की क्रांति में बौद्धिक कारणों का भी काफी महत्वपूर्ण योगदान था। फ्रांस के
लेखकों और दार्शनिकों ने अपने लेखों और पुस्तकों द्वारा लोगों में नई चेतना जगाकर क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी। मुद्रण ने निम्नलिखित प्रकारों से फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार करने में अपनी भूमिका निभाई

(i) ज्ञानोदय के दार्शनिकों के विचारों का प्रसार- पुस्तकों और लेखों ने ज्ञानोदय के चिंतकों के विचारों का प्रचार-प्रसार किया जिन्हें पढ़कर लोगों में नई चेतना जगी। फ्रांसीसी दार्शनिकों में रूढ़िगत सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था की कटु आलोचना की। इन लोगों ने इस बात पर बल दिया कि अंधविश्वास और निरंकुशवाद के स्थान पर तर्क और विवेक पर आधृत व्यवस्था की स्थापना हो। चर्च और राज्य की निरंकुश सत्ता पर प्रहार किया गया। वाल्टेयर और रूसो ऐसे महान दार्शनिक थे जिनके लेखन का जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा।

(ii) वाद-विवाद की संस्कृति- पुस्तकों और लेखों ने वाद-विवाद की संस्कृति को जन्म दिया। अब लोग पुरानी मान्यताओं की समीक्षा कर उनपर अपने विचार प्रकट करने लगे। इससे नई सोच उभरी। राजशाही, चर्च और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। फलतः क्रांतिकारी विचारधारा का उदय हुआ।

(ii) राजशाही के विरुद्ध असंतोष- 1789 की क्रांति के पूर्व फ्रांस में बड़ी संख्या में ऐसा साहित्य प्रकाशित हो चुका था जिसमें तानाशाही राज व्यवस्था और इसके नैतिक पतन की कटु आलोचना की गयी थी। निरंकुशवाद और राजदरबार के नैतिक पतन का चित्रण भी इस साहित्य में किया गया। साथ ही सामाजिक व्यवस्था पर भी क्षोभ प्रकट किया गया। अनेक व्यंगात्मक चित्रों द्वारा यह दिखाया गया कि किस प्रकार आम जनता का जीवन कष्टों और अभावों से ग्रस्त था जकि राजा और उसके दरबारी विलासिता में लीन हैं। इससे जनता में राजतंत्र के विरुद्ध असंतोष बढ़ गया।

इस प्रकार फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि को तैयार करने में मुद्रण सामग्री की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही जिससे प्रभावित होकर जनता क्रांति के लिए तत्पर हो गयी।

प्रश्न 3.
भारत मेंसामाजिक-धार्मिक सुधारों को पुस्तकों एवं पत्रिकाओं ने किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर-
18वीं, 19वीं शताब्दी में प्रेस ज्वलंत राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक प्रश्नों को उठानेवाला एक सशक्त माध्यम बन गया। 19वीं सदी में बंगाल में “भारतीय पुनर्जागरण” हुआ। इससे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ। परंपरावादी और नई विचारधारा रखनेवालों ने अपने-अपने विचारों का प्रचार करने के लिए पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया। राजा राममोहन राय ने अपने विचारों को प्रचारित करने के लिए बंगाली भाषा में संवाद कौमुदी नामक पत्रिका का प्रकाशन 1821 में किया। उनके विचारों का खंडन करने के लिए रूढ़िवादियों ने समाचार चंद्रिका नामक पत्रिका प्रकाशित की।

राममोहन राय ने 1822 में फारसी भाषा में मिरातुल अखबार तथा अंग्रेजी में ब्रासृनिकल मैंगजीन भी प्रकाशित किया। उनके ये अखबार सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रभावशाली अस्त्र बन गए। 1822 में ही बंबई से गुजराती दैनिक समाचारपत्र का प्रकाशन आरंभ हुआ। द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राममोहन राय के प्रयासों से 1830 में बंगदत्त की स्थापना हुई।

1831 में जामे जमशेद, 1851 में रास्ते गोफ्तार तथा अखबारे सौदागर प्रकाशित किया गया। ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारी भारतीय समाचारपत्रों द्वारा सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक चेतना के विकास को शंका की दृष्टि से देखते थे। इसलिए 19वीं शताब्दी में भारतीय प्रेस पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया। भारतीय समाचार पत्रों ने सामाजिक धार्मिक समस्याओं से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों को उठाया। समाचारपत्रों ने न्यायिक निर्णयों में किए गए पक्षपातों, धार्मिक मामले में सरकारी हस्तक्षेप और औपनिवेशिक प्रजातीय विभेद की नीति की आलोचना कर राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।

प्रश्न 4.
बदलते परिगेक्ष्य में भारतीय प्रेस की विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
19वीं शताब्दी से भारत में समाचार पत्रों के प्रकाशन में तेजी आई परंतु अबतक इसका प्रकाशन और वितरण सीमित स्तर पर होता रहा। इसका एक कारण यह था कि सामान्य जनता एवं समृद्ध कुलीन और सामंत वर्ग राजनीति में रूचि नहीं लेता था। इसी वर्ग के पास प्रेस चलाने के लिए धन और समय था परंतु यह वर्ग इस ओर उदासीन था। प्रेस चलाना घाटा का व्यवसाय माना जाता था। सरकार भी समाचार को कोई विशेष महत्व नहीं देती थी क्योंकि जनमत को प्रभावित करने में समाचार पत्रों की भूमिका नगण्य थी। इसके बावजूद भारतीय समाचिार पत्रों ने सामाजिक-धार्मिक समस्याओं से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों को उठाया। समाचार पत्रों ने न्यायिक निर्णयों में किए गए पक्षपातों, धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप और औपनिवेशिक प्रजातीय विभेद की नीति की आलोचना कर राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।

यद्यपि 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय समाचार पत्रों की संख्या में वृद्धि हुई परंतु ये प्रजातीय आधार पर दो वर्गों एंग्लो इंडियन और भारतीय प्रेस में विभक्त हो गई। ऐंग्लो इंडियन प्रेस ने सरकार समर्थन रूख अपनाया। इसे सरकारी समर्थन और संरक्षण प्राप्त था। ऐंगलो-इंडियन प्रेस. को अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। यह अंगरेजों के ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति को बढ़ावा देता था तथा सांप्रदायिक एकता को बढ़ावा देनेवाले प्रयासों का विरोध करता था। इसका एकमात्र उद्देश्य ब्रिटिश राज के प्रति वफादारी की भावना का विकास करना था। इस समय अंग्रेजी भाषा और अंगरेजों द्वारा संपादित समाचार पत्रों में प्रमुख थे टाइम्स ऑफ इंडिया, स्टेट्स मैन, इंगलिशमैन, मद्रासमेल, फ्रेंड ऑफ इंडिया, पायनियर, सिविल एंड मिलिट्री गजट इत्यादि। इनमें इंगलिशमैन सबसे अधिक रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी समाचार पत्र था। पायनि पर सरकार का समर्थक और भारतीयों का आलोचक था।

ऐंग्लों इंडियन समाचार पत्रों के विपरीत अंग्रेजी और देशी भाषाओं में प्रकाशित समाचार पत्रों में अंगरेजी सरकारी नीतियों की आलोचना की गयी। भारतीय दृष्टिकोण को ज्वलंत प्रश्नों को रखा गया तथा भारतीयों में राष्ट्रीयता एवं एकता की भावना जागृत करने का प्रयास किया गया। ऐसे समाचार-पत्रों में प्रमुख थे हिन्दू पैट्रियट, अमृत बाजार पत्रिका इत्यादि। अनेक प्रबुद्ध भारतीयों ने 19वीं, 20वीं शताब्दियों में भारतीय प्रेस को अपने लेखों द्वारा प्रभावशाली एवं शक्तिशाली बनाया।

प्रश्न 5.
औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए क्या किया ?
उत्तर-
औपनिवेशिक काल में प्रकाशन के विकास के साथ-साथ इसे नियंत्रित करने का भी प्रयास किया गया। ऐसा करने के पीछे दो कारण थे पहला, सरकार वैसी कोई पत्र-पत्रिका अथवा समाचार पत्र मुक्त रूप से प्रकाशित नहीं होने देना चाहती थी जिससे सरकारी व्यवस्था और नीतियों की आलोचना हो। तथा दूसरा, जब अंग्रेजी राज की स्थापना हुई उसी समय से भारतीय राष्ट्रवाद का विकास भी होने लगा। राष्ट्रवादी संदेश के प्रसार को रोकने के लिए प्रकाशन पर नियंत्रण लगाना सरकार के लिए आवश्यक था। अतः समय-समय पर सरकार विरोधी प्रकाशनों पर नियंत्रण लगाने का प्रयास किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी सुरक्षात्मक और राजनीतिक कारणों से प्रेस पर नियंत्रण लगाने के प्रयास किए गए। 1857 के विद्रोह के परिणामस्वरूप सरकार का रूख प्रेस के प्रति पूर्णतः बदल गया। राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए प्रेस को कुंठित करने के प्रयास किए गए। प्रेस को नियंत्रित करने के लिए पारित विभिन्न अधिनियम उल्लेखनीय हैं

  • 1799 का अधिनियम-फ्रांसीसी क्रांति के प्रभाव को भारत में फैलने से रोकने के लिए गवर्नर जनरल वेलेस्ली ने 1799 में एक अधिनियम पारित किया। इसके अनुसार समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगा दिया गया।
  • 1823 का लाइसेंस अधिनियम-इस अधिनियम द्वारा प्रेस स्थापित करने से पहले सरकारी अनुमति लेना आवश्यक बना दिया गया।
  • 1867 का पंजीकरण अधिनियम-इस अधिनियम द्वारा यह, आवश्यक बना दिया गया कि प्रत्येक पुस्तक, समाचार-पत्र एवं पत्र-पत्रिका पर मुद्रक, प्रकाशक तथा मुद्रण के स्थान का नाम अनिवार्य रूप से दिया जाए। साथ ही प्रकाशित पुस्तक की एक प्रति सरकार के पास जमा करना आवश्यक बना दिया गया।
  • बर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878)- लार्ड लिटन के शासनकाल में पारित प्रेस को प्रतिबंधित करनेवाला सबसे विवादास्पद अधिनियम यही था। इसका उद्देश्य देशी भाषा के समाचार पत्रों पर कठोर अंकुश लगाना था। अधिनियम के अनुसार भारतीय समाचार पत्र ऐसा कोई समाचार प्रकाशित नहीं कर सकती थी जो अंगरेजी सरकार के प्रति दुर्भावना प्रकट करता हो। भारतीय राष्ट्रवादियों ने इस अधिनियम का कड़ा विरोध किया।

सरकार ने प्रेस पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर अन्य कानून भी बनाए। द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने पर भारत रक्षा अधिनियम बनाया गया। इसके द्वारा युद्ध संबंधी समाचारों के प्रकाशन को नियंत्रित किया गया। ‘भारत छोड़ आंदोलन के दौरान सरकार ने समाचार पत्रों पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। 1942 में लगभग 90 समाचार पत्रों का प्रकाशन रोक दिया गया। इस प्रकार औपनिवेशिक सरकार ने भारतीय प्रेस को प्रतिबंधित करने के लिए विभिन्न अधिनियों के द्वारा काफी प्रयास किए।

प्रश्न 6.
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में प्रेस की भूमिका एवं इसके प्रभावों की समीक्षा करें।
उत्तर-
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के उद्धव एवं विकास में प्रेस की प्रभावशाली भूमिका थी। इसने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिवावं अन्य मुद्दों को उठाकर उन्हें जनता के समक्ष लाकर उनमें राष्ट्रवादी भावना का विकास किये तथा लोगों में नई जागृति ला दी।

(i) राजनीतिक क्षेत्र में योगदान प्रेस में प्रकाशित लेखों और समाचार-पत्रों से भारतीय औपनिवेशिक शासन के वास्तविक स्वरूप से परिचित हुए। समाचार पत्रों ने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के घिनौने मुखौटे का पर्दाफाश कर दिया तथा इनके विरूद्ध लोकमत को संगठित किया। जनता को राजनीतिक शिक्षा देने का दायित्व समाचारपत्रों ने अपने ऊपर ले लिया। समाचार पत्रों ने देश में चलनेवाले विभिन्न आंदोलनों एवं राजनीतिक कार्यक्रमों से जनता को परिचित कराया। काँग्रेस के कार्यक्रम हो या उसके अधिवेशन, बंग-भंग आंदोलन अथवा असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह या भारत छोड़ो आंदोलन, समाचारों द्वारा ही लोगों को इनमें भाग लेने की प्रेरणा मिलती थी। काँग्रेस की भिक्षाटन नीति का प्रेस ने विरोध किया तथा स्वदेशी और बहिष्कार की भावना को बढ़ावा देकर राष्ट्रवाद का प्रसार किया। भारतीयों की नजर में महात्मा गांधी भी प्रेस के माध्यम से ही आए।

(ii) आर्थिक क्षेत्र में योगदान आर्थिक क्षेत्र में भी प्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निबाही। इसने अंग्रेजी सरकार द्वारा भारत के आर्थिक शोषण की घोर निंदा की। धन-निष्कासन की नीति, आयात-निर्यात एवं औद्योमिक नीति की आलोचना समाचार पत्रों में प्रमुखता से की गई। अनेक समाचार पत्रों ने भारत की आर्थिक दुर्दशा के लिए सरकारी आर्थिक नीतियों को उत्तरदायी बताकर उनमें परिवर्तन की मांग की। समाचार-पत्रों ने आदिवासियों, किसानों के शोषण और उनके आंदोलनों को प्रमुखता से छापा। समाचार-पत्रों ने बहिष्कार और स्वदेशी की भावना को समर्थन दकर एक ओर राष्ट्रीयता की भावना को विकसित किया तो दूसरी ओर ब्रिटिश आर्थिक हितों पर कुठाराघात किया।

(iii) सामाजिक क्षेत्र में योगदान- सामाजिक सुधार आंदोलनों को भी समाचार पत्रों ने समर्थन दिया। इसने रूढ़िगत परंपरावादी समाज में सुधार लाने के लिए किए गए प्रयासों को अपना समर्थन दिया। इसने जाति प्रथा, छुआछुत की आलोचना की महत्वपूर्ण योगदान यह था कि इसने सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने तथा हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रयासों की सराहना कर इसे प्रोत्साहित किया। इस प्रकार पाष्टीय आंदोलन में प्रेस ने अपनी सराहनीय . भूमिका निभाई।

Bihar Board Class 10 History प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद Notes

  • मुद्रण कला का आविष्कार 1041 में एक चीनी व्यक्ति पि-शेंग ने किया था। .
  • धात के मवेबल टाइपों द्वारा प्रथम पुस्तक 13वीं सदी के पर्वार्ट में मध्य कोरिया में छापी गयी।
  • स्याही से लगे काठ के ब्लॉक पर कागज को रखकर छपाई की विधि को ब्लॉक प्रिटिग कहते हैं।
  • जर्मनी के गुटेन बर्ग ने सर्वप्रथम हैण्डप्रेस का विकास किया और 46 लाइ न में बाइबिल को 1448 में छापा।
  • मार्टिन लूथर ने कहा- “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है सबसे बड़ा तोहफा।
  • प्रिंटिंग प्रेस सबसे पहले भारत में पुर्तगाली धर्मप्रचारकों द्वारा 16वीं सदी में लाया गया।
  • प्रेस ने राष्ट्रीय आन्दोलन के हर पक्ष-चाहे वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हो या. सांस्कृतिक-सबको प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
  • भारतीय समाचार पत्रों के मुक्तिदाता के रूप में चार्ल्स मेटकॉफ को विभूषित किया गया।
  • चीन की सिविल सेवा परीक्षा ने मुद्रित सामग्रियों की मांग बढ़ाई।
  • भारतीयों द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचार-पत्र 1816 में गंगाधर भटाचार्य का साप्ताहिक ‘बंगाल गजट’ था।
  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 से बचने के लिए अमृत बाजार पत्रिका ने अपनी भाषा बदल ली और अंग्रेजी में उसका प्रकाशन होने लगा।
  • मोतीलाल नेहरू ने 1919 में इंडिपेंडेंस, शिव प्रसाद गुप्ता हिन्दी दैनिक आज, के. एम. पन्निकर ने 1922 में हिन्दुस्तान टाइम्स का संपादन प्रारंभ किया। बाद में हिन्दुस्तान टाइम्स का सम्पादन कार्य मदन मोहन मालवीय के हाथ में आया और अंततः 1927 में इस पत्र को जी. डी. बिड़ला ने अपने हाथों में ले लिया।
  • ग्यारहवीं शताब्दी में चीन से रेशम मार्ग द्वारा कागज यूरोप पहुँचा।
  • 1295 ई. में मार्कोपोलो नामक खोजी यात्री चीन से इटली वापस आया तो वह अपने साथ काठ की तख्ती (वुड ब्लॉक) पर छपाई की तकनीक लेता आया।
  • 1336 में कागज बनाने का पहला कारखाना जर्मनी में खोला गया।
  • छापाखाना का आविष्कार जर्मनी के गटेन्वर्ग ने 1450 में किया।
  • गेटेन्बर्ग छपाई मशीन को ‘मूवेबल टाइप प्रिटिंग मशीन’ कहा गया।
  • गुटेन्बर्ग प्रेस में जो पहली पुस्तक छपी वह ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल थी।
  • 1475 ई. में सर विलियम कैक्सटन मुद्रणकला को इंगलैंड में लाए तथा वेस्टमिन्सटर कस्बे में उनका प्रथम प्रेस स्थापित हुआ।.
  • मार्टिन लूथर को धर्म सुधार आंदोलन का अग्रदूत कहा जाता है।
  • मार्टिन लूथर ने 1517 में पिच्चानवें स्थापनाएं लिखी। लूथर ने बाइबिल के न्यू टेस्टामेंट का जर्मन अनुवाद भी प्रकाशित करवाया।
  • धर्म-विरोधी विचारों के प्रसार को रोकने के लिए रोमन चर्च ने इक्बीजीशन नामक संस्था का गठन किया।
  • मार्टिन लूथर का कथन है, “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा