Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 सहसंबंध

Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. कद (फूटों) में तथा वजन (कि. ग्राम) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई है –
(क) कि. ग्राम/पुट
(ख) प्रतिशत
(ग) अविद्यमान
उत्तर:
(क) कद (फूटों में) तथा वजन (किग्रा.) के बीच सहसम्बन्ध गुणांक की इकाई अविद्यमान है।

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प्रश्न 2.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा –
(क) 0 से अनन्त तक
(ख) -1 से +1 तक
(ग) ऋणात्मक अनन्त से धनात्मक अनन्तक तक
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध गुणांक का परास -1 तथा +1 के बीच है।

प्रश्न 3.
यदि rxy धनात्मक है तो और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है –
(क) जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है
(ख) जब y में घटता है, तो x बढ़ता है
(ग) जब y में बढ़ता है, तो x नहीं बदलता है
उत्तर:
यदि ru धनात्मक है तो x और y के बीच का सम्बन्ध इस प्रकार का होता है जब y में बढ़ता है, तो x बढ़ता है।

प्रश्न 4.
यदि rxy = 0 है तब चर x तथा y के बीच:
(क) रैखिक संबंध होगा
(ख) रैखीय संबंध नहीं होगा
(ग) स्वतंत्र संबंध होगा
उत्तर:
यदि rsy = 0 है तब चर x तथा y के बीच स्वतंत्र होगा।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन मापों में, कौन – सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप सकता है –
(क) कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध
(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध
(ग) प्रकीर्ण आरेख
उत्तर:
प्रकीर्ण आरेख सभी प्रकार के सम्बन्धों को माप सकता है।

प्रश्न 6.
यदि परिशुद्ध रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध हों तो सरल महासंबंध गुणांक –
(क) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।
(ख) कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से कम सही होता है।
(ग) कोटि सहसम्बन्ध की ही भांति सही होता है।
उत्तर:
यदि परिशुद्ध रूप से मापित ऑकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसम्बन्ध गुणांक कोटि सहसम्बन्ध गुणांक से अधिक सही होता है।

प्रश्न 7.
साहचर्य के माप के लिए 7 को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
उत्तर:
साहचर्य के माप के लिए को तब अधिक प्राथमिकता दी जाती है जब चरम मान दिए गए हों। सामान्यत: rk का मान r से कम या इसके बराबर होता है।

प्रश्न 8.
क्या आंकड़ों के प्रकार के आधार पर r – 1 तथा +1 के बाहर स्थित हो सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 9.
क्या सहसम्बन्ध के द्वारा कार्यकारण संबंध की जानकारी मिलती है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 10.
सरल सहसम्बन्ध गुणांक की तुलना में कोटि सहसम्बन्ध गुणांक कब अधिक परिशुद्ध होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध साधारण सहसम्बन्ध गुणांक से इस अवस्था में अच्छा है जब चरों का मापन सही ढंग से किया जा सके।

प्रश्न 11.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
नहीं। किन्तु स्वतंत्रता की संभावना बनी रहती है।

प्रश्न 12.
क्या सरल सहसम्बन्ध गुणांक किसी भी प्रकार के सम्बन्ध को माप सकता है?
उत्तर:
नहीं।

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प्रश्न 13.
एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें । उनका सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए। परिणाम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रत्यन करें।

प्रश्न 14.
अपनी कक्षा के सहपाठियों के कद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं प्रयत्न करें।

प्रश्न 15.
कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो।
उत्तर:
निष्पक्षता, धर्मनिरपेक्षता, ईमानदारी, सत्यता, देशभक्ति, सद्भावना, परोपकार, नि:स्वार्थता आदि कुछ ऐसे चर हैं जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है।

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प्रश्न 16.
r के विभिन्न मानों +1, -1 तथा 0 की व्याख्या करें।
उत्तर:

  1. यदि का मूल्य 1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों X तथा Y में पूर्णत: धनात्मक सम्बन्ध है।
  2. यदि का मूल्य -1 है तो इसका तात्पर्य यह है कि दो चरों x तथा Y में पूर्णत: ऋणात्मक सम्बन्ध है।
  3. यदि r का मूल्य 0 है तो इसका तात्पर्य यह है कि x तथा Y चरों में कोई सहसम्बन्ध नहीं है।

प्रश्न 17.
पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक से कोटि सहसम्बन्य गुणांक क्यों भिन्न होता है?
उत्तर:
पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों X एवं Y के बीच रेखीय संबंधों के सही संख्यात्मक मान की कोटि दर्शाता है। जबकि कोटि सहसम्बन्ध जब चरों का सार्थक रूप से मापन नहीं किया जा सकता, जैसे कीमत, आय, वजन आदि। कोटि निर्धारण तब अधिक होता है जब चरों की माप भ्रामक हो।

प्रश्न 18.
पिताओं (x) और उनके पुत्रों (Y) के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है। इन दोनों के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 1
उत्तर:
सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 2
Rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×22.50}{8(64-1)}\)
= 1 – \(\frac{6×22.50}{8×6.3}\) = 1 – \(\frac{135}{504}\) = 1 – 0.305 = 0.695

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प्रश्न 19.
X और Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए और उसके सम्बन्धों पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 3
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 4

प्रश्न 20.
X तथा Y के बीच सहसम्बन्ध गुणांक को परिकलित कीजिए तथा उनके संबंध पर टिप्पणी कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 5
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics सहसंबंध Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विक्षेप चित्र
  2. काल पियर्सन का सहसम्बन्ध गुणांक तथा
  3. कोटि अंतर विधि

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प्रश्न 2.
विक्षेप चित्र का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप नहीं देता।

प्रश्न 3.
सहसम्बन्ध गुणांक क्या है?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों के बीच सहसम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप (Numerical Measurement) है।

प्रश्न 4.
यदि r = ±1, तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि = ± 1 तो इसका अर्थ पूर्ण धनात्मक यसा ऋणात्मक सहसम्बन्ध है।

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प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध गुणांक (r) की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) प्रायः -1 तथा + 1 के बीच होता है। गणित की भाषा में – 1 ≤ r ≤ 1

प्रश्न 6.
सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा के मापन को सहसम्बन्ध कहते हैं।

प्रश्न 7.
सहसम्बन्ध गुणांक सदैव –
तथा +1 के बीच होता है। गणित की भाषा में इसे आप किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
उत्तर:
1 ≤ r ≤ + 1

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प्रश्न 8.
धनात्मक (Positive) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो चर x तथा y एक ही दिशा में विचरित (परिवर्तित) होते हैं, तो उनके बीच सम्बन्ध धनात्मक सह-सम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 9.
विलोम (Negative) सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर के विपरीत होता है तो उनके बीच सम्बन्ध विलोम सहसम्बन्ध कहलाता है।

प्रश्न 10.
धनात्मक सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की कीमत तथा पूर्ति के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 11.
विलोम सहसम्बन्ध का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा तथा उसके मूल्य के बीच विलोम सहसम्बन्ध पाया जाता है।

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प्रश्न 12.
यदि x तथा y स्वतंत्र चर हों, उनके बीच सहसम्बन्ध गुणांक (r) (Coefficient. of Correlation) का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = 0

प्रश्न 13.
यदि दो श्रणियों में पूर्ण सहसम्बन्ध (Perfect Correlation) है तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध गुणांक (r) का मूल्य क्या होगा?
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक (r) = ±1

प्रश्न 14.
सहसम्बन्ध को रेखीय कब कहा जाता है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में परिवर्तन का अनुपात होता है तो उसे रेखीय सहसम्बन्ध कहते हैं।

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प्रश्न 15.
सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब दो श्रेणियों के मूल्यों में किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं होता तो ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध अनुस्थिति होती है अर्थात् सहसम्बन्ध का अभाव होता है। सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य शून्य होता है।

प्रश्न 16.
यदि विक्षेप रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर हो तो वर्गों में किस प्रकार सहसम्बन्ध होगा?
उत्तर:
दो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित आंकड़ों में सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 7
उत्तर:
% r = -1 क्योंकि चरों का विपरीत सम्बन्ध है।

प्रश्न 18.
जब कोटियाँ (Ranks)समान होती हैं तो ऐसी अवस्था में Rk की गणना करने के लिये कौन सा सूत्र लगाया जाता है? वह सूत्र लिखें।
उत्तर:
कोटियाँ समान होने का अवस्था में Rk की गणना के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 8

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प्रश्न 19.
यदि r = 0 तो इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
यदि r = 0 तो इसका अर्थ सहसम्बन्ध का अभाव है।

प्रश्न 20.
सहसम्बन्ध गुणांक को ज्ञात करने का कार्ल पियरसन द्वारा दिया गया सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 9

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक का प्रतिपादन किसने किया?
उत्तर:
स्पियरमैन ने।

प्रश्न 22.
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग कहाँ उपयुक्त होता है?
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध विधि का प्रयोग वहाँ उपयुक्त होता है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप संभव न हो तथा उन्हें क्रम के अनुसार रखा जा सकता है।

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प्रश्न 23.
सहसम्बन्ध को मापने के लिये स्पियरमैन का सूत्र लिखो।
उत्तर:
\(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)

प्रश्न 24.
r को सह के माप का सहचर क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि r सहचर को मापता है न कि कारणों को।

प्रश्न 25.
क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
उत्तर:
हाँ

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धनात्मक तथा ऋणात्मक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
धनात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन एक ही दिशा की ओर होता है, तो उनमें धनात्मक सहसम्बन्ध होगा। उदाहरण के लिए यदि आय में वृद्धि के साथ उपभोग में भी वृद्धि होती है तो उपभोग और आय में धनात्मक सहसम्बन्ध है।

ऋणात्मक सहसम्बन्ध:
जब दो चरों x तथा y में परिवर्तन विभिन्न दिशाओं में होते हैं अर्थात् जब x चर में वृद्धि होने से y चर में कमी होती है तो उनमें ऋणात्मक सहसम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 2.
पूर्ण सहसम्बन्ध से क्या अभिप्राय है? इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
यदि दो चरों में मूल्यों के परिवर्तन की मात्रा बिल्कुल समान है, तो उनमें पूर्ण धनात्मक या ऋणात्मक सहसम्बन्ध होता है। ऐसी स्थिति में सहसम्बन्ध का गुणांक (r) का मूल्य + 1 होगा।
उदाहरण:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 10
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 11
अतः कीमत तथा में पूर्ण में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध है।

प्रश्न 3.
सरल बहुगुणी एवं आंशिक सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
सरल सहसम्बन्ध दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। बहुगुणी सहसम्बन्ध दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा का मापन करता है। आंशिक सहसम्बन्ध भी दो से अधिक चरों का अध्ययन करता है, परंतु अन्य चरों के प्रभाव को स्थिर रखकर केवल दो चरों का पारस्परिक सम्बन्ध निकलता है।

प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन का सह-सम्बन्ध गुणांक क्या है? इसकी गणना का सूत्र दीजिए। इसकी सीमाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों में सम्बन्ध की मात्रा का संख्यात्मक माप है। इसकी गणना का सूत्र निम्नलिखित है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 12
r = सहसम्बन्ध गुणांक।

सीमाएँ (Limited degree of correlation cd-efficient):
सहसम्बन्ध गुणांक का मान सदैव ही -1 तथा +1 के बीच में होगा 1 गणित की भाषा में इसे निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है – -1 ≤ r ≤ + 1

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प्रश्न 5.
सहसम्बन्ध की परिभाषा दीजिए। सहसम्बन्ध के निम्न मानों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
दो या दो से अधिक चरों में सम्बन्ध की मात्रा मापने को सहसम्बन्ध कहते हैं। सहसम्बन्ध द्वारा विभिन्न चरों में पाये जाने वाले परस्पर सम्बन्धों व मात्रा को दिशा का ज्ञान होता है।

  1. जब r = 0, तो इसका अभिप्राय है कि चरों में सहसम्बन्ध का अभाव पाया जाता है।
  2. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।
  3. जब r = 1, तो इसका अभिप्राय है कि दो चरों में पूर्ण ऋणात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्न अवस्था में सहसम्बन्ध का मूल्य बताओ –
(क) सहसम्बन्ध ऋणात्मक तथा पूर्ण।
(ख) सहसम्बन्ध धनात्मक तथा पूर्ण।
(ग) कोई सहसम्बन्ध नहीं।
उत्तर:

  • जब सहसम्बन्ध पूर्ण ऋणात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = -1
  • जब सहसम्बन्ध गुणांक धनात्मक तथा पूर्ण होता है, तो सहसम्बन्ध गुणांक r = +1
  • जब कोई सहसम्बन्ध नहीं पाया जाता है तो सहसम्बन्ध गुणांक r = 0

प्रश्न 7.
10 विद्यार्थियों के अंग्रेजी और अर्थशास्त्र के प्राप्तांकों की कोटियों के अंतर, में वर्गों का योग 33 है। कोटि सम्बन्ध गुणांक (Rank Correlation Coefficient) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
चिह्नों के रूप में निम्नलिखित दिया हुआ है –
R = 10, ΣD2 = 33
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac { 6\times 33 }{ 10^{ 0 }(10-1^{ 0 }) } \) = 1 – \(\frac{198}{990}\) = \(\frac{990-198}{990}\) = 8

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प्रश्न 8.
सहसम्बन्ध ज्ञात करने की कोटि क्रम विधि की विवेचना करो।
उत्तर:
कोटि क्रम विधि के अन्तर्गत सर्वप्रथम x तथा y पद मूल्यों को अलग-अलग कोटि प्रदान किये जाते हैं। सबसे अधिक आकार वाले मूल्य को 1 उससे कम आकार वाले को 2 और इसी प्रकार क्रम निश्चित किये जाते हैं। द्वितीय x के क्रमों में से y के तत्सम्बन्धी क्रम घटाए जाते हैं और कोटि अंतर निकाले जाते हैं। तृतीय कोटि क्रम वर्ग करके उन वर्गों का जोड़ निकाला जाता है। अन्त में निम्न सूत्र प्रयोग किया जाता है –
R = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \)
R = कोटि सहसम्बन्ध गुणांक
ΣD2 = क्रम अंतर में वर्गों का जोड़
N = पद युग्मों की संख्या

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों में विक्षेप चित्र (Scatter Diagram) द्वारा सहसम्बन्ध (Correlation) बताइये:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 13
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 14
विक्षेप चित्र में स्पष्ट है कि X तथा Y में पूर्ण धनात्मक (Perfect positive) सहसम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 10.
यदि विक्षेप चित्र में बिन्दु उस सरल रेखा पर जमघट लगाते हैं जो रेखा x अक्ष पर 30° का कोण बनाती है तो आप x तथा Yचरों में किस प्रकार का सम्बन्ध पायेंगे?
उत्तर:
इससे पता चलता है कि X तथा Y में कम मात्रा में सहसम्बन्ध है। दूसरे शब्दों में Y में उसी अनुपात में परिवर्तन नहीं होता जिस अनुपात में X में।

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प्रश्न 11.
निम्न X और Y युग्मों को विक्षेप चित्र में प्रस्तुत कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 15
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 16

प्रश्न 12.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक को कैसे परिभाषित किया गया?
उत्तर:
सहसम्बन्ध के ज्ञान को गणितीय विधि से प्रतिपादित करने का श्रेय प्रो. कार्ल पियरसन को है। कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक समांतर माध्य तथा प्रमाप विचलन पर आधारित है। इस गुणांक को गुण परिघात सहसम्बन्ध (Product, moment correlation) कहते हैं। इस सहसंबंध को कहते हैं। यदि x तथा Y दो चरों का सम्बन्ध रेखिक (Linear) है तो हम. उनमें कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की सहायता से सम्बन्ध की मात्रा का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
(क) सहसम्बन्ध गुणांक
(r) की क्या सीमायें हैं?
(ख) यदि r = +1 है तो दो चरों X और Y में किस प्रकार का सम्बन्ध है?
उत्तर:
(क) सह – सम्बन्ध गुणांक हमेशा -1 और +1 की सीमा में होगा।
(ख) यदि r = +1 या r = -1 है तो उसका अभिप्राय है कि दो घरों X तथा Y में सम्बन्ध निश्चित (Exact) है।
यदि r = +1 है तो दोनों चरों में पूर्णतः धनात्मक सम्बन्ध होगा और यदि r = -1 है तो दोनों चरों (x, y) में पूर्णतः ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विक्षेप चित्र के गुण तथ दोष लिखिए।
उत्तर:
गुण (merits):

  1. दो चरों में सम्बन्ध जानने की यह बहुत ही सरल विधि है।
  2. चित्र पर नजर डालते ही पता चल जाता है कि दो चरों के बीच कोई सम्बन्ध है या नहीं।
  3. विक्षेप चित्रों की सहायता से इस बात का भी ज्ञान होता है कि सहसम्बन्ध धनात्मक है या ऋणात्मक।

दोष (Demerits):

  1. विक्षेप चित्र सहसम्बन्ध के गुणांक का पूरा माप नहीं है।
  2. यह सम्बन्धों के बारे में अनुमानतः ज्ञान देता है।
  3. यह संख्यात्मक परिवर्तन को संख्या में ही प्रदर्शित करता है।

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प्रश्न 2.
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएँ (Properties of correlationcoefficient) सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषताएं अनलिखित हैं –

  1. r की कोई इकाई (unit) नहीं है। यह एक शुद्ध संख्या है। इसका तात्पर्य यह है कि माप की इकाइयाँ इसका भाग नहीं हैं। दूसरे शब्दों में फुटों में ऊँचाई तथा किलोग्राम में वजन का r 0.7 है।
  2. r के ऋणात्मक मूल्य का अर्थ है कि दो चरों X तथा Y में विपरीत सम्बन्ध है। एक चर में परिवर्तन होने से दूसरे चर में विपरीत दिशा में परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिये जब एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो उसकी मांग में कमी आती है।
  3. यदि धनात्मक है तो इसका अभिप्राय है कि X तथा Y चर एक ही दिशा की ओर चलते हैं। जब कॉफी (चाय का प्रतिस्थापन) की कीमत में वृद्धि होती है, चाय की मांग में वृद्धि होती है, जब तापक्रम में वृद्धि होती है, आइसक्रीम की बिक्री में वृद्धि होती है।
  4. यदि r = 0 तो X तथा Y चरों में सहसम्बन्ध का अभाव होता है। उनके बीच कोई रेखीय सम्बन्ध नहीं होता।
  5. यदि r = 1 अथवा r = – 1 है तो सहसम्बन्ध पूर्णता है। उन दो चरों में सम्बन्ध निश्चित है।
  6. r का अधिक मूल्य इस बात का संकेत देता है कि दो चरों x तथा Y में दृढ़ रैखीय सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी ऊँचा कहा जायेगा जब यह +1 अथवा -1 के समीप होगा।
  7. r का कम मूल्य इस बात को इंगित करता है कि दो चरों X तथा Y में कमजोर रेखीय. सम्बन्ध है। इसका मूल्य तभी नीचा कहा जायेगा जब वह शून्य के समीप होगा।
  8. सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य -1 तथा +1 के बीच में होता है। दूसरे शब्दों में 1 ≤ r ≤ 1 यदि किसी प्रश्न में r का मूल्य इस सीमा के बाहर आता है, इसका तात्पर्य यह है कि की गणना करने में कोई त्रुटि हुई है।
  9. मूल में परिवर्तन से या पैमाने के परिवर्तन से के मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं रहता। मान लो दो चर X तथा Y दिये गये हैं। इन दो चरों को निम्न प्रकार परिभाषित करें -rxy = ruy

A तथा B क्रमश: X और Y के काल्पनिक औसत (A.M.) हैं। B तथा D कॉमन फैक्टर (Common factors) हैं।

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प्रश्न 3.
विक्षेप चित्र से क्या अभिप्राय है? इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
विक्षेप चित्र (Scatter Diagram):
विक्षेप चित्र दो चरों के बीच सहसम्बन्ध मापने की एक विधि है। इस विधि के द्वारा सहसम्बन्ध की दिशा के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जाता है। विक्षेप चित्र बनाने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण निहित है –

  1. स्वतंत्र चरों को X अक्ष पर लिया जाता है।
  2. आश्रित चरों को Y अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है।
  3. बिन्दु अंकित समंक से एक मूल्य स्वतंत्र चर कर लिया जाता है तथा एक मूल्य आश्रित चर। इन मूल्यों की सहायता से ग्राफ पेपर पर एक बिन्दु अंकित किया जाता है।
  4. श्रेणी में जितने जोड़े होते हैं, उतने ही बिन्दु अकित किये जाते हैं।
  5. बिन्दु जितने एक दूसरे के पास होंगे, सहसम्बन्ध को डिग्री उतनी ही अधिक होगी और बिन्दु जितने अधिक बिखरे होंगे, सहसम्बन्धों की डिग्री उतनी ही कम होगी। बिन्दुओं की दिशा को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है।

विक्षेप चित्र में प्रदर्शित बिन्दुओं की प्रवृत्ति यदि एक निश्चित दिशा में जाने की हो तो दोनों चरों में सहसम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी।

यदि बिन्दुओं को छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा। यदि बिन्दु सारे चित्र में फैले हुए हैं तो सहसम्बन्ध की अनुपस्थिति होगी। यदि बिन्दुओं की छूती हुई सरल रेखा का झुकाव नीचे से ऊपर दाहिनी ओर हो तो चरों में धनात्मक सम्बन्ध होगा।
इसके विपरीत यदि रेखा का झुकाव ऊपर से नीचे दाहिनी ओर है तो चरों में ऋणात्मक सम्बन्ध होगा।

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प्रश्न 4.
कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध गुणांक की प्रत्यक्ष विधि से गणना करने की प्रक्रिया में कौन-कौन से चरण निहित हैं?
उत्तर:

  1. सबसे पहले X और Y श्रेणी का माध्य मूल्य ज्ञात करें।
  2. फिर X श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी के समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को x से प्रकट करें।
  3. इसके बाद Y श्रेणी के मूल्यों का उसी श्रेणी से समांतर माध्य से विचलन लें और विचलनों को Y से प्रकट करें।
  4. अब इन विचलनों का वर्ग लें।
  5. X तथा Y का गुणनफल लें और गुणनफल को XY से प्रकट करें।
  6. सहसम्बन्ध गुणांक करने के लिये निम्न सूत्र का प्रयोग करें:

r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }.Σy^{ 2 } } } \)
r = \(\frac { Σxy }{ N\sigma x\times \sigma y } \)
x = X – \(\bar { X } \) y = Y – \(\bar { Y } \)
σx = x श्रेणी का प्रमाप विचलन
σy = y श्रेणी का प्रमाप विचलन
N = मदों की संख्या

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प्रश्न 5.
पद विचलन विधि से r ज्ञात कीजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 17
उत्तर:
माना A = 100, h = 10, B = 1700 तथा k = 100
पद विचलन विधि से की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 18

प्रश्न 6.
वास्तविक समान्तर माध्य से कार्ल पियरसन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 19
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 20
सहसम्बन्ध निम्न धनात्मक है।

प्रश्न 7.
दो श्रृंखलाएँ हैं। प्रत्येक के 50 पद हैं। उनका प्रमाप विचलन क्रमश: 4.5 और 3.5 है। दोनों श्रृंखलाओं के वास्तविक माध्य से विचलनों का गुणनफल 420 है।x और Y सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया है N = 50
σx = 4.5 σy = 33.5
Σdxdy = 420
r = \(\frac{Σdxdy}{Nσx×σy}\) = \(\frac{420}{50×4.5×3.5}\) = \(\frac{420×10×10}{50×45×35}\) = 533

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प्रश्न 8.
X और Y के बीच में निम्नलिखित समंकों से सह-सम्बन्ध गुणांक ज्ञात करें –

  1. X श्रेणी का समांतर माध्य = 15
  2. Y श्रेणी का समांतर माध्य = 28
  3. X श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 144
  4. Y श्रेणी के समांतर माध्य से विचलनों के वर्गों का योग = 225
  5. X व Y श्रेणियों के समांतर माध्य से विचलनों के गुणनफल का योग = 20
  6. मदों की संख्या

उत्तर:
दिया हुआ है –
\(\bar { X } \) = 15 \(\bar { Y } \) = 28
Σx2 = 144 Σy2 = 225
r = \(\frac { Σxy }{ \sqrt { Σx^{ 2 }\times y^{ 2 } } } \) = \(\frac { 20 }{ \sqrt { 144\times 225 } } \) = \(\frac{20}{12×15}\)
= \(\frac{20}{80}\) = \(\frac{1}{9}\) = 0.111

प्रश्न 9.
निम्न समंकों से कार्ल पियरसन का सहसम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 21
उत्तर:
कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 22

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प्रश्न 10.
वास्तविक समांतर माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध के गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 24
सहसम्बन्ध पूर्णतया ऋणात्मक है।

प्रश्न 11.
कल्पित माध्य से कार्ल पियसरन के सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 25
उत्तर:
कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 26
x का कल्पित माध्य = 85
y का कल्पित माध्य = 80
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 27

प्रश्न 12.
A तथा B में कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 28
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 29

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प्रश्न 13.
A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 30
उत्तर:
यहाँ पर A तथा B के कोटि क्रम दिये गये हैं। अतः हम सीधे ही कोटि क्रम का अंतर निकालेंगे और सूत्र की सहायता से A तथा B के बीच कोटि सहसम्बन्ध की गणना करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 31

प्रश्न 14.
5 विद्यार्थियों को गणित तथा अर्थशास्त्र में योग्यता के अनुसार दर्जा (Rank) दिया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 32
स्पीयरमैन का कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 33
r = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N(N^{ 2 }-1) } \) = 1 – \(\frac{6×0}{6(36-1)}\) = 1

प्रश्न 15.
दो जजों द्वारा 5 व्यक्तियों को सौंदर्य में निम्नलिखित कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध ज्ञात करें।
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 34

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प्रश्न 16.
A तथा C द्वारा 5 व्यक्तियों को निम्न कोटियाँ दी गई हैं। कोटि सहसम्बन्ध की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 35
उत्तर:
कोटि सहसम्बन्ध की गणना
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 36

प्रश्न 17.
यदि D2 = 39.50 और N = 10 हो तो R का मूल्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 37

प्रश्न 18.
निम्नलिखित आँकड़ों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 38
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 39
(नोट : कोटि बढ़ते हुए क्रम से दी गई है अर्थात् सबसे छोटे मूल्य को एक तथा सबसे बड़े मूल्य को दस।)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 40

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प्रश्न 19.
नीचे 5 विद्यार्थियों के द्वारा अर्थशास्त्र और सांख्यिकी में प्राप्त अंक प्रतिशत में दिये गये हैं। कोटि सहसम्बन्य ज्ञात करें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 41

प्रश्न 20.
नीचे दिये समंकों से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 42
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 43

प्रश्न 21.
कोटि सहसम्बन्ध गुणांक की गणना करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 44
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 45

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि चरों में का मूल्य -1 है तो यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) पूर्ण ऋणात्मक

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प्रश्न 2.
यदि चरों में r का मूल्य +1 है को यह सहसंबंध है –
(a) पूर्ण ऋणात्मक
(b) पूर्ण धनात्मक
(c) सहसंबंध का अभाव
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूर्ण धनात्मक

प्रश्न 3.
दो चरों के बीच सहसम्बन्ध शून्य है तो इसका अर्थ है –
(a) उच्च सहसंबंध
(b) सहसंबंध का अभाव
(c) निम्न सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सहसंबंध का अभाव

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प्रश्न 4.
rk = 1 – \(\frac { 6ΣD^{ 2 } }{ N^{ 3 }-N } \) सूत्र है –
(a) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक का
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का

प्रश्न 5.
सहसंबंध को गणितीय विधि से प्रतिपादन करने का श्रेय जाता है –
(a) मार्शल को
(b) बाउले को
(c) कार्ल पियरसन को
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) कार्ल पियरसन को

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प्रश्न 6.
यदि दो चर एक-दूसरे के प्रति एक दिशा में या विपरीत दिशा में परिवर्तित होते हैं तो इसे कहा जाता है –
(a) केंद्रीय प्रवृत्ति की माप
(b) परिक्षेपण की माप
(c) सहसंबंध
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सहसंबंध

प्रश्न 7.
यदि एक चर के बढ़ने पर दूसरे चर में भी बढ़ोतरी होती है तो उनमें सहसंबंध होगा –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शून्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

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प्रश्न 8.
कार्ल पियरसन विधि से सहसंबंध गुणांक ज्ञात करने का सूत्र है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 46
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 48
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 7 सहसंबंध Part - 2 img 47

प्रश्न 9.
यदि कोटि सहसंबंध में किसी चर की पुनरावृत्ति होती है तो प्रत्येक मूल्य कोटि प्रदान करते हैं –
(a) अलग-अलग क्रमागत आधार पर
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है

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प्रश्न 10.
कोटि सहसंबंध (rk) तथा गुणन आघूर्ण सहसंबंध में संबंध होता है –
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(b) rk > गुणन आघूर्ण सहसंबंध
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटि सहसंबंध rk = गुणन आघूर्ण सहसंबंध

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम कृषक एवं पशुपालक Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न (क)
सबसे पहले किस जानवर को आदमी ने पालतू बनाया ?
(i) कुत्ता
(ii) बंदर
(iii) गाय
(iv) बकरी
उत्तर-
(i) कुत्ता

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

प्रश्न (ख)
गेहूँ का प्राचीन साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुआ है ?
(i) मेहरगढ़
(ii) महागढ़
(iii) हल्लूर
(iv) पैयमपल्ली
उत्तर-
(i) मेहरगढ़

प्रश्न 2.
निम्नलिखित का सुमेल करें :

  1. चिरांद – आधुनिक उत्तरप्रदेश
  2. मेहरगढ़ – आधुनिक बिहार
  3. बुर्जहोम – आधुनिक पाकिस्तान
  4. कोल्डिहवा – आधुनिक काश्मीर

उत्तर-

  1. चिरांद – आधुनिक बिहार (छपरा)
  2. मेहरगढ़ – आधुनिक पाकिस्तान
  3. बुर्जहोम – आधुनिक काश्मीर
  4. कोल्डिहवा – आधुनिक उत्तरप्रदेश

आइए करके देखें 

प्रश्न (i)
खेती की शुरुआत कैसे हुई ?
उत्तर-
मानव जब भोजन की खोज के लिए इधर-उधर एक स्थान – से दूसरे स्थान तक जाते रहते थे। इसी क्रम में मानव को पौधों के फल पकने का ज्ञान हुआ। उनके बीज से सदृश पौधे को उगते देखा होगा, इसी प्रकार गेहूँ, जौ और मटर के पौधे से प्राप्त अनाज और उसके गिर जाने सदृश्य पौधे की उत्पत्ति होते देखा और धीरे-धीरे बीजों का गह कर फसलों को नियमित रूप से उपजाने लगा।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 4 प्रथम कृषक एवं पशुपालक

प्रश्न (ii)
मानव जीवन में खेती के बाद क्या परिवर्तन आया?
उत्तर-
खेती की शुरुआत ने मानव-जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। खाद्य संग्राहक से खाद्य उत्पादक बन गया। एक निश्चित जगह पर समूहों में रहने लगा। गाँव का विकास हुआ। सहयोग की भावना का जन्म हुआ। नाते-रिश्तेदारी पर आधारित जन जातीय समुदाय का उदय हुआ। रहने के लिए छप्पड़ वाली झोपड़ियाँ बनने लगीं। कपड़े पहनने लगे।

प्रश्न (iii)
नवपाषाण युग के औजारों की क्या विशेषता थी ?
उत्तर-
पुरापाषाण युग की औजारों की अपेक्षा नवपाषाणयुग की औजारों के आकार छोटे, दृढ़, पहले से ज्यादा धारदार एवं चमकदार थे।

Bihar Board Class 6 Social Science प्रथम कृषक एवं पशुपालक Notes

पाठ का सारांश

  • सबसे पहले कुत्ता, सुअर, भेड़-बकरी और मवेशी को पालतू बनाया गया।
  • पालतू जानवर उसे कहते हैं जिसे मनुष्य अपने लाभ के लिए अपने पास रखता है और उसका उपयोग करता है।
  • पशु पालन के माध्यम से भी भोजन की समस्या का समाधान हुआ।
  • कृषि एवं पशुपालन से मानव जीवन में प्रथम क्रांति हुई।
  • प्रारंभिक मानव अपने भोजन का उत्पादन स्वयं नहीं करते थे ।
  • कृषि से कृषकों के बीच सहयोग की भावना पनपी और स्थायी रूप से एक जगह रहने लगे एवं लोगों के बीच आपसी संबंध कायम हुए।
  • नव पाषाण युग में मानव के खाने, रहने आदि के अंदाज में मूलभूत परिवर्तन हुए इसलिए इसे ‘क्रांतिकाल’ कहा जाता है ।
  • नवं पाषाण युग में ग्राम आधारित सामाजिक संगठन का विकास हुआ।
  • लगभग 12,000 वर्ष पहले दुनिया की जलवायु में परिवर्तन आया और शिकारी संग्रहकर्ता के लिए प्रकृति ने भोजन के अनेक अवसर उपलब्ध कराए ।
  • जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप जनसंख्या में वृद्धि होने लगी।
  • शिकारी संग्रहकर्ता अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए फसलों को बोना शुरू किया।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास InText Questions and Answers

अनुच्छेद 9.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण – A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण – B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता
है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?
उत्तर:
लक्षण-B पहले उत्पन्न हुआ होगा; क्योंकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनुकूलनता के कारण लक्षण का प्रतिशत बढ़ता जाता है।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज़ का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?
उत्तर:
किसी प्रजाति में वातावरणीय कारकों के प्रभाव से उत्पन्न विभिन्नताएँ उसे विपरीत परिस्थितियों में जीवित रखने में सहायक होती हैं। विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार हैं।

अनुच्छेद 9.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
मेण्डल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
या शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के बीच एकसंकर संकरण का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
मेण्डल ने दो विकल्पी मटर के पौधे चुने जैसे लंबे जो कि लंबे मटर के पौधे ही पैदा करते थे तथा बौने जो कि बौने मटर के पौधे ही उत्पन्न करते थे। मेण्डल ने इन दोनों पौधों का संकरण कराया, तो प्रथम संतति पीढ़ी (F1 ) में सभी मटर के पौधे लंबे उगे। इसका अर्थ यह है कि लंबाई का लक्षण ही F1 पीढ़ी संतति में दिखाई दिया और बौनेपन का लक्षण प्रदर्शित नहीं हुआ। जब मेण्डल ने F1 पीढी के पौधों में स्वपरागण कराया तो F2 पीढी में दोनों लक्षण दिखे अर्थात् लंबे पौधे भी और बौने भी (3 : 1 अनुपात में)। इसका अर्थ हुआ कि लंबे होने का लक्षण प्रभावी और बौनेपन का लक्षण अप्रभावी है।
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यह इंगित करता है कि F1 पौधों द्वारा लंबाई एवं बौनेपन दोनों के विकल्पी लक्षणों की वंशानुगति हुई। F1 पीढ़ी में लंबाई वाला विकल्प अपने आपको व्यक्त कर पाया क्योंकि वह प्रभावी विकल्प है और बौनापन अप्रभावी विकल्प है।

प्रश्न 2.
मेण्डल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?
उत्तर:
मेण्डल ने दो विकल्पी जोड़ों गोल बीज वाले लंबे पौधों तथा झुर्शीदार बीज वाले बौने पौधों का संकरण कराया तो F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे एवं गोल बीज वाले थे। अतः लंबाई तथा गोल बीज प्रभावी लक्षण हैं।
F1 पीढ़ी के पौधों का स्वपरागण कराने पर चार प्रकार के पौधे पाए गए –
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F2 पीढ़ी की संतति:
में झुरींदार बीज वाले लंबे पौधे तथा गोल बीज वाले बौने पौधे नए संयोजन प्रदर्शित करते हैं, इससे सिद्ध होता है कि विभिन्न विकल्पी लक्षण स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं।

प्रश्न 3.
एक ‘A-रुधिर वर्ग’ वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘O’ है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग – ‘O’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षण-रुधिर वर्ग – ‘A’ अथवा ‘O’ प्रभावी लक्षण है? का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर:
यह सूचना पर्याप्त नहीं है। इसमें माता-पिता के इस लक्षण का जीनोम भी देना चाहिए। क्योंकि इस सूचना से यह नहीं पता चलता कि पिता में इस लक्षण के IA IA जीन हैं अथवा IA IO जीन हैं। पूर्वज्ञान के आधार पर हम कह सकते हैं कि IA IO लक्षण प्रभावी है और पिता में IA IO का जोड़ा होगा एवं माता में IA IO विकल्प होंगे तथा पुत्री में IO IO जीन का जोड़ा होगा।
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प्रश्न 4.
मानव में बच्चे का लिंग-निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर:
लिंग गुणसूत्र लिंग-निर्धारण का कार्य करते हैं –

  • महिलाओं में दोनों लिंग गुणसूत्र एक ही प्रकार युग्मक के होते हैं- X और X(XX)।
  • पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्र भिन्न-भिन्न होते हैं- X और Y(XY)।
  • पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु बराबर मात्रा में उत्पन्न करते हैं। एक प्रकार के शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है जबकि दूसरे प्रकार के शुक्राणु Y गुणसूत्र रखते हैं।
  • महिलाएँ एक ही प्रकार के अंडाणु उत्पन्न करती हैं जिसमें x गुणसूत्र होते हैं।
  • जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है तो (XX) युग्मनज लड़की में विकसित होता है।
  • जब Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है तो (XY) युग्मनज लड़के में विकसित होता है।
    Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

अनुच्छेद 9.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?
उत्तर:
एक विशेष लक्षण वाले वयष्टि जीवों की संख्या समष्टि में निम्नलिखित कारणों से बढ़ सकती है –
1. जनन के दौरान विभिन्नता का उद्भव जो कि पर्यावरण के अनुकूल हो और इस विभिन्नता का वंशागत होना। उदाहरण के लिए, लाल भंग की समष्टि में हरे रंग के भंगों का उत्पन्न होना। कौए हरे रंग के भंग हरी पत्तियों के बीच पहचान नहीं पाते और लाल रंग के भुंग को शिकार बनाते हैं। जिससे लाल रंग के भृग की संख्या समष्टि में कम होती जाती है और हरे रंग के भंग की संख्या समष्टि में बढ़ती जाती है। यह एक प्राकृतिक चयन था जो कि कौओं के द्वारा सम्पन्न हुआ।

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2. आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण। उदाहरण के लिए, भृग समष्टि में लाल भुंग नीले भंग की अपेक्षा संख्या में अधिक थे। परन्तु संयोग से एक हाथी ने उन झाड़ियों को कुचल डाला जिनमें भृग रहते थे। इसमें लाल रंग के भंग रौंद दिए गए पर कुछ नीले शृंग बच गए। धीरे-धीरे नीले रंग के भंगों की संख्या प्रजनन द्वारा बढ़ती जाती है जिससे समष्टि का रूप बदल जाता है। यह मात्र संयोग था कि एक दुर्घटना के कारण एक रंग की भृग समष्टि बच गई।

प्रश्न 2.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों?
उत्तर:
उपार्जित लक्षण का प्रभाव केवल कायिक ऊतकों पर पड़ता है परन्तु जनन कोशिकाओं के डी०एन०ए० पर नहीं पड़ता। अतः ये लक्षण वंशानुगत नहीं होते।

प्रश्न 3.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है?
उत्तर:
1. बाघों की संख्या में कमी दर्शाती है कि बाघ प्राकृतिक चयन में पिछड़ गए हैं। उनमें उत्तम परिवर्तन उत्पन्न नहीं हो रहे जो कि पर्यावरण के अनुकूल हों और जिसके कारण वे अपनी समष्टि का आकार बढ़ा सकें।

2. छोटी समष्टि पर दुर्घटनाओं का प्रभाव अधिक पड़ता है। छोटी समष्टि में दुर्घटनाएँ किसी जीन की आवृत्ति को भी प्रभावित कर सकती हैं चाहे उनका उत्तरजीविता हेतु कोई लाभ हो या न हो। प्राकृतिक चयन और दुर्घटनाओं के कारण बाघों की प्रजाति लुप्त भी हो सकती है।

अनुच्छेद 9.4 पर आधारित

प्रश्न 1.
वे कौन-से कारक हैं जो नयी स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं?
उत्तर:
निम्न कारक नयी स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं –

  1. प्राकृतिक चयन।
  2. जीन प्रवाह का न होना अथवा बहुत कम होना।
  3. आनुवंशिक विचलन।
  4. डी०एन०ए० में गुणसूत्रों की संख्या में परिवर्तन जिससे कि दो समष्टियों के सदस्यों की जनन कोशिकाएँ (युग्मक) संलयन न कर पाएँ।
  5. दो उप-समष्टियों का रूपेण अलग होना जिससे कि उनके सदस्य परस्पर लैंगिक प्रजनन न कर पाएँ।

प्रश्न 2.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ के पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर:
नई स्पीशीज़ का उद्भव तब होता है जबकि एक समष्टि की दो उप-समष्टियाँ परस्पर लैंगिक जनन न कर पाएँ। लैंगिक जनन में डी०एन०ए० में आनुवंशिक विचलन एवं प्राकृतिक वरण और भौगोलिक पृथक्करण के कारण एक उप-समष्टि दूसरी उप-समष्टि से भिन्न होती जाती है। अन्ततः एक नई स्पीशीज़ का उद्भव होता है। स्वपरागित स्पीशीज़ में अन्य जीवों से नए जीन समष्टि में नहीं आ पाते।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

अतः आने वाली पीढ़ियों में नए-नए संगठन नहीं हो पाते और अधिक विभिन्नताएँ उत्पन्न नहीं हो पातीं। ऐसे पौधों में विभिन्नता केवल तभी आती है जब डी०एन०ए० प्रतिकृति के समय त्रुटि के कारण डी०एन०ए० में परिवर्तन आ जाए जिसकी संभावना बहुत कम होती है। अतः भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज़ पौधों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता।

प्रश्न 3.
क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति उद्भव का प्रमुख कारक हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति-उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता। क्योंकि अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति में परस्पर बहुत कम अंतर होता है, समानताएँ बहुत अधिक होती हैं। जो थोड़ी-बहुत विविधता होती है वह DNA प्रतिकृति के समय न्यून त्रुटियों के कारण होती है। ये नई विभिन्नताएँ इतनी प्रमुख नहीं होती जिससे कि किसी नई जाति का उद्भव हो सके।

अनुच्छेद 9.5 पर आधारित

प्रश्न 1.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं?
उत्तर:
समजात अभिलक्षण से भिन्न दिखाई देने वाली विभिन्न स्पीशीज़ के बीच विकासीय सम्बन्ध की पहचान करने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, मेंढक, छिपकली, पक्षी तथा मनुष्य के अग्रपादों की आधारभूत संरचना एकसमान है। यद्यपि ये विभिन्न कशेरुकों में भिन्न-भिन्न कार्य करने के लिए रूपान्तरित हैं। ये समजात अंग समान पूर्वज की ओर इशारा करते हैं।
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प्रश्न 2.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
तितली और चमगादड़ के पंख समजात अंग नहीं होते। ये समरूप अंग हैं जो उड़ने का कार्य करते हैं। कारण तितली के पंखों की संरचना चमगादड़ के पंख से बिल्कुल भिन्न होती है। चमगादड़ के पंख में अग्रपाद की अंगुली की हड्डियाँ होती हैं जबकि तितली के पंख में हड्डियाँ नहीं होती।

प्रश्न 3.
जीवाश्म क्या हैं? वे जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं?
उत्तर:
लाखों अथवा हजारों साल पहले पाए जाने वाले जीवों के परिरक्षित कठोर अवशेष, चट्टानों पर पैरों के निशान, मिट्टी में बने मृत जीवों के साँचे आदि को जीवाश्म कहते हैं।

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जीवाश्म हमें जैव विकास के बारे में निम्नलिखित बातें दर्शाते हैं –
1. ऐसी कौन-सी स्पीशीज़ हैं जो कभी जीवित थीं परन्तु अब लुप्त हो गई हैं।
2. ऐसे जीवों के अवशेष जीवाश्म के रूप में मिले हैं जोकि एक वर्ग के जीवों का उनसे विकसित उच्च वर्ग के बीच की कड़ी के जीवों का स्वरूप बताते हैं।
उदाहरण के लिए, आर्कीऑप्टैरिक्स जीवाश्म में कुछ लक्षण सरीसृप के हैं तो अन्य लक्षण पक्षियों के। यह इंगित करता है कि पक्षी सरीसृप से विकसित हुए
3. जीवाश्म पृथ्वी के अंदर विभिन्न स्तर पर खुदाई करके निकाले जाते हैं। इससे पता चलता है कि पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले जीवाश्म गहरे स्तर पर पाए गए जीवाश्मों की अपेक्षा अधिक नए हैं।

अनुच्छेद 9.6 पर आधारित

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं?
उत्तर:
आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ (होमो सैपिएन्स) के सदस्य हैं।

1. यह बात उत्खनन, समय-निर्धारण, जीवाश्म अध्ययन तथा डी०एन०ए० अनुक्रम के निर्धारण द्वारा सिद्ध होती है। हम सभी का उद्भव अफ्रीका से हुआ। जहाँ से हमारे पूर्वज सारे संसार में फैले और उनमें धीरे-धीरे आकृति, आकार, रंग-रूप की विभिन्नता आती गई। परन्तु उनके डी०एन०ए० में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं हुआ जो उनको नई जाति-उद्भव का स्तर दे पाता।

2. किसी भी स्पीशीज़ के सदस्य किसी अन्य स्पीशीज के सदस्यों के साथ सफल लैंगिक प्रजनन नहीं कर पाते (गुणसूत्रों की संरचना तथा संख्या में भिन्नता के कारण)। परन्तु मानव आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न होते हुए भी परस्पर सफल लैंगिक प्रजनन कर सकते हैं। उनसे उत्पन्न संतति अपनी पीढी बनाए रख सकती है। वे परस्पर रक्त का अनुदान कर सकते हैं। अतः आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज़ के सदस्य हैं।

प्रश्न 2.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जीवाणु, मछली, मकड़ी तथा चिम्पैंजी में से चिम्पैंजी में शारीरिक अभिकल्प की जटिलता सबसे अधिक है। चिम्पैंजी का शारीरिक डिज़ाइन, विकसित शारीरिक अंग संस्थान, मस्तिष्क का जीवाणु, मकड़ी और मछली से अधिक विकसित होना तथा हाथों में अंगूठे का अँगुलियों के विपरीत होना जिससे वे चीजें पकड़ सकें आदि लक्षण उनको बाकी सभी से उत्तम बना देते हैं। हालाँकि विकास की दृष्टि से इसे अतिउत्तम नहीं माना जा सकता।

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क्योंकि सरलतम अभिकल्प वाले जीवाणु के समूह विभिन्न पर्यावरण में आज भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, जीवाणु आज भी विषम पर्यावरण; जैसे कि-उष्ण झरने, गहरे समुद्र के गर्म स्रोत तथा अन्टार्कटिका की बर्फ में भी पाए जाते हैं। दूसरे शब्दों में यह नहीं कहा जा सकता कि चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प अन्य से उत्तम है, वरन् वह जैव विकास शृंखला में उत्पन्न एक और स्पीशीज़ है।

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प्रश्न 1.
मेण्डल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परंतु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लंबे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी।
(a) TTWW
(b) TTww
(c) TtWW
(d) TtWw
उत्तर:
(c) TtWW

प्रश्न 2.
समजात अंगों का उदाहरण है –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते के अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू एवं घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टिकोण से हमारी किससे अधिक समानता है?
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंजी
(c) मकड़ी।
(d) जीवाणु
उत्तर:
(a) चीन के विद्यार्थी

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हलके रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हलके रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हलके रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी?
उत्तर:
इस विवरण के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आँखों के हलके रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी। क्योंकि जनक (माता-पिता) दोनों में ही आँखें हलके रंग की हैं। यह हो सकता है कि माता तथा पिता में जीन के दोनों विकल्प अप्रभावी हों। इसलिए आँखों के रंग का दूसरा विकल्प है ही नहीं। अतः सन्तान में हलके रंग की आँखें पाई गईं। अगर दूसरी संधारणा पर विचार करें कि आँखों का हलके रंग का लक्षण प्रभावी है तो इस अवस्था में कुछ बच्चों की आँखें गहरे रंग की होनी चाहिए। क्योंकि अप्रभावी लक्षण 4 में से 1 बच्चे (3 : 1 अनुपात में) में व्यक्त होना चाहिए।

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प्रश्न 5.
जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र किस प्रकार परस्पर संबंधित है?
उत्तर:
जैव-विकास के अध्ययन से पता चलता है कि पहले उत्पन्न जीवों का शरीर बाद में उत्पन्न जीवों के शरीर से सरलतम है। अर्थात् जीवों के शरीर में सरलता से जटिलता की तरफ विकास हुआ है। यही आधार वर्गीकरण का भी है। जीवों को उनके शरीर के डिज़ाइन के आधार पर ही विभिन्न वर्गों में रखा गया है। अत: जैव-विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन परस्पर संबंधित है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
समजात अंग उन अंगों को जो अलग-अलग स्पीशीज़ के जीवों में अलग-अलग कार्य करते हैं परन्तु आधारभूत संरचना में एकसमान हैं, समजात अंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षी के पंख तथा मनुष्य का हाथ दोनों ही रूपान्तरित अग्रपाद हैं। समरूप अंग ऐसे अंग जो अलग-अलग जीवों में एकसमान कार्य करते हैं परन्तु उनकी आधारभूत संरचना समान नहीं होती है, उन्हें समरूप अंग कहते हैं। उदाहरण के लिए, तितली के पंख और कबूतर के पंख दोनों ही उड़ने का कार्य करते हैं, परन्तु कबूतर के पंख में हड्डियाँ होती हैं, तितली के पंख में नहीं होती।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग कत्ता कुतिया ज्ञात करने के उद्देश्य से एक काली खाल (BB) x (bb) सफ़ेद खाल प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर:
इसके लिए एक शुद्ध काली खाल वाले कुत्ते (BB) तथा एक शुद्ध सफेद खाल वाली F1 संतान पिल्ले कुतिया (bb) का चयन किया जाता है। उनका समय पर संकरण कराएँ। यदि उनसे उत्पन्न सभी पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) काली खाल वाले हैं, तो (Bb) सभी काली खाल वाले काली खाल का लक्षण प्रभावी है।
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प्रश्न 8.
विकासीय संबंध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जीवाश्म पुराने जीवों के अवशेष अथवा चिह्न या साँचे होते हैं। जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि अमक जीव कब पाया जाता था, कब लुप्त हो गया, जीवों के विकास क्रम में पहले जीवों की संरचना कैसी थी और बाद में उसमें क्या-क्या परिवर्तन होते गए।

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है?
या स्टैनले मिलर के प्रयोग का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011, 12, 13, 17)
उत्तर:
वैज्ञानिक जे०बी०एस० हाल्डेन ने 1929 ई. में सुझाव दिया कि जीवों की सर्वप्रथम उत्पत्ति उन सरल अकार्बनिक अणुओं से ही हुई होगी जो पृथ्वी को उत्पत्ति के समय बने थे। स्टेनले मिलर तथा हेराल्ड सी० यूरे ने 1953 ई. में प्रयोग किए और प्रमाण दिए कि सरल अकार्बनिक अणुओं से कार्बनिक अणु उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने ऐसे वातावरण का निर्माण किया जो सम्भवतः प्राथमिक वातावरण के समान था।

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जिसमें अमोनिया, मीथेन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) गैसें तो थीं परन्तु स्वतन्त्र ऑक्सीजन नहीं थी। पात्र में जल भी था। इस सम्मिश्रण को 100°C से कुछ कम ताप पर रखा गया। गैसों के इस मिश्रण में कृत्रिम रूप से समय-समय पर चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं; जैसे किआकाश में तड़ित बिजली उत्पन्न होती है।
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इस प्रयोग में देखा गया कि 15% मीथेन का कार्बन उपयोग हुआ और सरले अकार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित हो गया। इन अकार्बनिक यौगिकों में विभिन्न, अमीनो अम्ल भी संश्लेषित हुए जो कि प्रोटीन के अणुओं के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। उपर्युक्त प्रमाण के आधार पर हम परिकल्पना कर सकते हैं कि शायद जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई है।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
अलैंगिक जनन में जनक एक ही होता है और उसी का डी०एन०ए० संतति में जाता है। अतः संतति में विभिन्नता तभी आती है जब डी०एन०ए० प्रतिकृति में त्रुटियाँ हों जो कि न्यून होती हैं। लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं जो कि डी०एन०ए० का एक-एक सेट संतति को प्रदान करते हैं। इससे संतति में भिन्न-भिन्न लक्षणों का समावेश होता है और अलैंगिक जनन से लैंगिक जनन में विविधता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

लैंगिक जनन से उत्पन्न विभिन्नताएँ जीन (डी०एन०ए०) में परिवर्तन के कारण होती हैं। अतः ये स्थिर होती हैं और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होती हैं। प्राकृतिक चयन के कारण वही विभिन्नताएँ प्रगति करती हैं जो कि पर्यावरण वरण के अनुकूल हों। अतः समय काल में मौजूदा पीढ़ी अपने पूर्वजों से इतनी भिन्न हो सकती हैं कि वे उनसे लैंगिक जनन न कर पाएँ और एक अन्य स्पीशीज़ के रूप में उभरकर आ जाएँ तथा जीवों के विकास में सहायक हों।

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प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर:
जैसा कि चित्र में दिखाया गया है कि मटर के गोल बीज वाले लंबे पौधों का यदि झुर्रादार बीज वाले बौने पौधों से संकरण कराया जाए तो F2 पीढी में P RRYy लंबे/बौने लक्षण तथा गोल/झुरींदार लक्षण स्वतन्त्र रूप से (गोल, हरे बीज) (झुरींदार, पीले बीज) वंशानुगत होते हैं।

यदि संतति पौधे को जनक पौधे से संपूर्ण जीनों का एक पूर्ण सेट प्राप्त होता है तो चित्र में दिया प्रयोग सफल नहीं हो सकता। क्योंकि दो लक्षण R तथा Y सेट में एक-दूसरे से संलग्न रहेंगे तथा स्वतन्त्र रूप में आहरित नहीं हो सकते। (गोल, पीले बीज) वास्तव में जीन सेट केवल एक डी०एन०ए० श्रृंखला के रूप में न होकर, डी०एन०ए० के अलग-अलग स्वतन्त्र अणु के रूप में होते हैं। इनमें से प्रत्येक एक गुणसूत्र का अनुपात निर्माण करता है।

इसलिए प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतिकृति होती है। जिनमें से एक उन्हें नर तथा दूसरी मादा जनक से प्राप्त होते हैं। प्रत्येक जनक कोशिका से गुणसूत्र के प्रत्येक जोड़े का केवल एक गुणसूत्र ही एक जनन कोशिका (युग्मक) में जाता है। जब दो युग्मकों का संलयन होता है, तो इनसे बने युग्मज में गुणसूत्रों की संख्या पुनः सामान्य हो जाती है। इस प्रकार लैंगिक जनन 556 बीज द्वारा संतति में जनक कोशिकाओं जैसी ही गुणसूत्रों की संख्या निश्चित बनी रहती है।
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प्रश्न 12.
“केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्यों एवं क्यों नहीं?
उत्तर:
इस कथन से हम सहमत हैं; क्योंकि जो विभिन्नताएँ एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी हैं, वे वर्तमान पर्यावरण के अनुकूल हैं और प्राकृतिक चयन प्रक्रम में वे अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। इसका अर्थ है कि समय के साथ-साथ इन विभिन्नताओं वाले जीव समष्टि में प्रमुख हो जाएँगे क्योंकि इनकी विभिन्नताएँ (लक्षण) परिवर्तित पर्यावरण में जीवित रह सकती हैं। ये जीव प्रकृति में सफल रहेंगे तथा अपनी संतति को सतत बनाए रख सकते हैं।

Bihar Board Class 10 Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता के प्रयोग के लिए मेण्डल ने निम्नलिखित में से कौन-से पौधों का उपयोग किया? (2016, 18)
(a) पपीता
(b) आलू
(c) मटर
(d) अंगूर
उत्तर:
(c) मटर

प्रश्न 2.
विपरीत लक्षणों के जोड़ों को कहते हैं – (2013)
(a) युग्मविकल्पी या एलिलोमॉर्फ
(b) निर्धारक
(c) समयुग्मजी
(d) समरूप
उत्तर:
(a) युग्मविकल्पी या एलिलोमॉर्फ

प्रश्न 3.
मटर में बीजों का गोल आकार तथा पीला रंग दोनों होते हैं –
(a) अप्रभावी
(b) अपूर्ण प्रभावी
(c) संकर
(d) प्रभावी
उत्तर:
(d) प्रभावी

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प्रश्न 4.
उद्यान मटर में अप्रभावी लक्षण है – (2015, 16)
(a) लम्बे तने
(b) झुर्रादार बीज
(c) गोल बीज
(d) फैली हुई फली
उत्तर”:
(b) झुरींदार बीज

प्रश्न 5.
एकसंकर संकरण के F2 पीढ़ी में शुद्ध तथा संकर लक्षणों वाले पौधों का अनुपात होगा
(a) 2 : 1
(b) 3 : 1
(c) 1 : 1
(d) 1 : 3
उत्तर:
(c) 1 : 1

प्रश्न 6.
एक संकर क्रॉस का जीन प्रारूप अनुपात होता है –
(a) 3 : 1
(b) 1 : 2 : 1
(c) 2 : 1 : 2
(d) 9 : 3 : 3 : 1
उत्तर:
(b) 1 : 2 : 1

प्रश्न 7.
मटर के लम्बे पौधों का क्रॉस बौने पौधों से कराने पर प्रथम पीढ़ी में लम्बे मटर के पौधे प्राप्त होते हैं, द्वितीय पीढ़ी में प्राप्त पौधे होंगे (2017)
(a) लम्बे तथा बौने दोनों
(b) लम्बे मटर के पौधे
(c) बौने मटर के पौधे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) लम्बे तथा बौने दोनों

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प्रश्न 8.
F2 पीढ़ी में 3 : 1 अनुपात प्राप्त होता है – (2015)
(a) एक संकर क्रॉस में
(b) द्विसंकर क्रॉस में
(c) (i) तथा (ii) दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) एक संकर क्रॉस में

प्रश्न 9.
पृथक्करण का नियम प्रस्तुत किया था – (2012, 14)
(a) चार्ल्स डार्विन ने
(b) ह्यूगो डी वीज ने
(c) जॉन ग्रेगर मेण्डल ने
(d) राबर्ट हुक ने
उत्तर:
(c) जॉन ग्रेगर मेण्डल ने।

प्रश्न 10.
गुणसूत्र किस पदार्थ के बने होते हैं? (2013)
(a) प्रोटीन
(b) आर०एन०ए०
(c) डी०एन०ए०
(d) डी०एन०ए० और प्रोटीन
उत्तर:
(d) डी०एन०ए० और प्रोटीन

प्रश्न 11.
मनुष्य में कौन-सा गुणसूत्र जोड़ा स्त्रीलिंग निर्धारण करता है?
(a) XY
(b) XX
(c) XXY
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) XX

प्रश्न 12.
सामान्य मनुष्य में गुणसूत्रों की संख्या है –
(a) 45
(b) 46
(c) 30
(d) 23
उत्तर:
(b) 46

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प्रश्न 13.
मनुष्य के शुक्राणु में ऑटोसोम की संख्या कितनी होती है? (2016)
(a) 22
(b) 24
(c) 42
(d) 44
उत्तर:
(d) 44

प्रश्न 14.
मनुष्य में लड़का पैदा होगा जब –
(a) माँ का पोषण गर्भावस्था में अधिक पौष्टिक हो
(b) पिता माँ से अधिक शक्तिशाली हो
(c) बच्चे में XY गुणसूत्र हों
(d) बच्चे में XX गुणसूत्र हों
उत्तर:
(c) बच्चे में XY गुणसूत्र हों

प्रश्न 15.
लक्षण, जिनके जीन्स x गुणसूत्रों पर होते हैं, कहलाते हैं। (2011)
(a) लिंग प्रभावित
(b) लिंग सहलग्न
(c) लिंग सीमित
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) लिंग सहलग्न

प्रश्न 16.
जीवन की उत्पत्ति हई – (2012)
(a) सागर में
(b) धरती पर
(c) वायुमण्डल में
(d) अंतरिक्ष में
उत्तर:
(a) सागर में

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता की खोज करने वाले वैज्ञानिक का पूरा नाम बताइये। या आनुवंशिकता के जनक का नाम बताइये।
या आनुवंशिकता के जन्मदाता कौन थे? (2012, 13)
उत्तर:
ग्रेगर जॉन मेण्डल।

प्रश्न 2.
मेण्डल ने आनुवंशिकता का प्रयोग किस पौधे पर किया था? उसका वैज्ञानिक नाम लिखिए। (2018)
उत्तर:
मटर। वैज्ञानिक नाम-पाइसम सटाइवम (Pisum satism)

प्रश्न 3.
मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को क्यों चुना? (2017)
उत्तर:
मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को चुना; क्योंकि –
1. मटर कम समय में ही उगने वाला पौधा है जिसे आसानी से उगाया जा सकता है तथा इसमें स्वपरागण के फलस्वरूप अनेक बीज बनाने की समान क्षमता है।
2. मटर में विभिन्न-विभिन्न लक्षणों वाली प्रजातियाँ सरलता से मिल जाती हैं तथा ये विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी सामान्य प्रजनन क्षमता रखती हैं।

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प्रश्न 4.
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षणों से आप क्या समझते हैं? (2017)
उत्तर:
एक लक्षण के दो कारकों में जो अपना प्रभाव प्रदर्शित करता है वह प्रभावी लक्षण कहलाता है जबकि दूसरा जो होते हुए भी अपने प्रभाव को प्रदर्शित नहीं कर पाता, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं।

प्रश्न 5.
लक्षणरूपी 9:3:3:1 मेण्डल के किस नियम का प्रतिपादन करता है?
उत्तर:
स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम का।

प्रश्न 6.
मनुष्य के नर तथा मादा गुणसूत्रों को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
नर गुणसूत्र = 22 + XY तथा मादा गुणसूत्र = 22 + XX गुणसूत्र।

प्रश्न 7.
यदि किसी जीव की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या 20 है, तो उसकी जनन कोशिकाओं में कितने गुणसूत्र होंगे?
उत्तर:
जनन कोशिका अर्थात् युग्मकों में n = 10 गुणसूत्र होंगे।

प्रश्न 8.
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में डी०एन०ए० कहाँ पाया जाता है? (2013)
उत्तर:
प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में डी०एन०ए० एक गुणसूत्र के रूप में कोशिकाद्रव्य में पड़ा रहता है।

प्रश्न 9.
आनुवंशिक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो रोग आनुवंशिक विशेषकों की त्रुटिपूर्ण संख्या. प्रभावी या अप्रभावी स्वरूप आदि के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशानुगत होते रहते हैं, उन्हें आनुवंशिक रोग कहते हैं।

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प्रश्न 10.
किस आनुवंशिक लक्षण के जीन्स x गुणसूत्रों पर पाये जाते हैं? (2011)
उत्तर:
वर्णान्धता।

प्रश्न 11.
यदि किसी व्यक्ति को हल्की चोट लगने पर भी रक्तस्राव नहीं रुकता तो उसे कौन-सा रोग हो सकता है?
उत्तर:
उसे हीमोफीलिया रोग है।

प्रश्न 12.
लिंग सहलग्नता से सम्बन्धित किन्हीं दो बीमारियों के नाम लिखिए। (2013, 15, 18)
उत्तर:
हीमोफीलिया तथा वर्णान्धता लिंग सहलग्न रोग हैं।

प्रश्न 13.
एक व्यक्ति हीमोफीलिया का रोगी है और उसकी पत्नि में हीमोफीलिया का एक जीन है। उस दंपत्ति के बच्चों में रोग से ग्रसित होने की संभावना क्या होगी? (2013)
उत्तर:
50%

प्रश्न 14.
यदि किसी बच्चे में 46 के स्थान पर 47 गुणसूत्र हों, तो उस बच्चे में किस प्रकार के रोग होने की सम्भावना है? या एक बच्चे में 47 गुणसूत्र हैं। उसे किस रोग की सम्भावना है?
उत्तर:
उसे मंगोली जड़ता रोग हो सकता है। इस प्रकार का दोष

प्रश्न 15.
मानव आनुवंशिकी विशेषकों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मनुष्य में जो लक्षण वंशानुगत होते हैं उन्हें मानव आनुवंशिकी विशेषक कहते हैं।

प्रश्न 16.
स्वत: जनन सिद्धान्त में विश्वास रखने वाले किसी एक वैज्ञानिक का नाम बताइये। या स्वतः जननवाद मत के प्रवर्तक का नाम लिखिये।
उत्तर:
स्वत: जनन सिद्धान्त में बैप्टिस्ट वॉन हेलमॉण्ट (1652) का विश्वास था।

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प्रश्न 17.
मिलर ने अपने प्रयोग में कौन-कौन सी गैसों का मिश्रण लिया?
उत्तर:
मिलर ने अपने प्रयोग में मेथेन (CH4) अमोनिया (NH3) हाइड्रोजन (H2) तथा जलवाष्प (H2O) गैसें लीं।

प्रश्न 18.
जीवन के उद्भव का आधुनिक ओपेरिन सिद्धान्त क्या है ? (2011, 13)
उत्तर:
रूस के प्रसिद्ध जीव-रसायनज्ञ ए० आई० ओपेरिन ने नवीनतम खोजों के आधार पर जीवन के उद्भव की जीव-रसायन परिकल्पना प्रस्तुत की। इस परिकल्पना के अनुसार आदिकालीन पृथ्वी पर केवल कार्बनिक यौगिक उपस्थित थे जो समुद्र के जल में घुले हुए थे। इन्हीं यौगिकों के संयोग से एक ऐसी रचना का निर्माण हुआ जिसमें जीवन के लक्षण विद्यमान थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिकता को परिभाषित कीजिए। इसकी खोज कब और किसने की? (2011, 17)
उत्तर:
कुछ ऐसे लक्षण सभी जीवों में होते हैं, जो उन्हें अपने जनकों से प्राप्त होते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं। इन लक्षणों को आनुवंशिक लक्षण कहते हैं। इन लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी या एक जीव से दूसरे जीव में जाना आनुवंशिकता (heredity) कहलाता है। आनुवंशिकता के कारण ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवों में समानता बनी रहती है।

इसी कारण मनुष्य की सन्तान मनुष्य, बन्दर की सन्तान बन्दर, गाय की सन्तान गाय तथा हाथी की सन्तान सदैव हाथी ही रहती है। विज्ञान की उस शाखा को जिसमें आनुवंशिक लक्षणों के माता-पिता से सन्तान में आने की रीतियों का अध्ययन करते हैं, आनुवंशिकी कहते हैं। इसकी खोज ग्रेगर जॉहन मेण्डल ने सन् 1866 में की।

प्रश्न 2.
मानव आनुवंशिकी से आप क्या समझते हैं? इसके जनक कौन थे? इसके क्या लाभ हैं? (2013)
उत्तर:
मानव आनुवंशिकी में मनुष्य के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाने वाले लक्षणों या गुणों का अध्ययन किया जाता है। मानव आनुवंशिकी के जनक गाल्टन थे। मानव आनुवंशिकी के लाभ (Advantages of Human Genetics) मानव आनुवंशिकी का अध्ययन मानव समाज के लिए अनेक प्रकार से लाभप्रद है। इसके द्वारा मानव संततियों में आने वाले रोगों के बारे में अध्ययन किया जाता है। इन रोगों के निदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर, मनुष्य इनकी चिकित्सा पहले से ही कर सकता है।

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सुजननिकी (eugenics) द्वारा अच्छे लक्षणों की वंशागति के लिए समाज के आनुवंशिकी स्तर का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद निषेधात्मक (negative) अथवा स्वीकारात्मक (positive) विधियाँ काम में लायी जाती हैं, अर्थात् निम्नकोटि के आनुवंशिकी लक्षणों की वंशागति से व्यक्तियों को रोका जाता है अथवा उच्च कोटि के लक्षणों वाले व्यक्तियों को वंशागति के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

दोनों प्रकार की सुजननिकी. के लिए विभिन्न प्रकार की विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं; जैसे-निषेधात्मक सुजननिकी के लिए वैवाहिक प्रतिबन्ध, बन्ध्यीकरण, सन्तति नियन्त्रण आदि के लिए गर्भपात इत्यादि; तथा स्वीकारात्मक सुजननिकी के लिए उत्कृष्ट चयन, उच्च आनुवंशिक लक्षणों का अधिकाधिक उपयोग, उच्चकोटि के लक्षणों वाले पुरुष का वीर्य संचित करना तथा कृत्रिम गर्भाधान के लिए उसका उपयोग करना आदि।

यूथेनिक्स (euthenics) द्वारा पहले से ही वंशानुगत गुणों को अच्छा वातावरण प्रदान कर उपचारित किया जा सकता है। वर्तमान समय में जीन की खोजों के आधार पर अच्छे जीन को खराब जीन के स्थान पर बदला जा सकता है। इसको जीन सर्जरी तथा जीन इन्जीनियरिंग या जीन अभियान्त्रिकी (genic surgery and genetic engineering) कहा जाता है। इस प्रकार हम मानव आनुवंशिकता का अध्ययन करके एक सुदृढ़ मानव समाज की कल्पना कर सकते हैं, जिसमें कोई भी मनुष्य बीमार, निम्नस्तरीय अथवा बुद्धिहीन उत्पन्न नहीं होगा।

प्रश्न 3.
आनुवंशिकी के गुणसूत्र सिद्धान्त का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
इस सिद्धान्त के अनुसार –

  1. सभी जीवों में प्रत्येक लक्षण के लिए कम-से-कम एक जोड़ी जीन या कारक अवश्य होते हैं।
  2. आनुवंशिक लक्षणों के जीन या आनुवंशिक कारक गुणसूत्रों पर पंक्तिबद्ध होते हैं और गुणसूत्रों के साथ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होते हैं।
  3. बहुकोशिकीय जीवों में जनन कोशिकाओं के माध्यम से विभिन्न पीढ़ियों में जैविक सम्बन्ध स्थापित रहता है। इसका अर्थ है कि आनुवंशिक लक्षणों के जीन जनन कोशिकाओं या युग्मकों द्वारा दूसरी पीढ़ी के जीवों में पहुँचते हैं।
  4. किसी जीव के लक्षणों में शुक्राणु व अण्डाणु दोनों ही का बराबर का योगदान होता है।
  5. युग्मक निर्माण के समय अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों के व्यवहार से प्रमाणित होता है कि जीन गुणसूत्रों पर होते हैं।
  6. जीवों की प्रत्येक कोशिका में गुणसूत्र जोड़ों में मिलते हैं किन्तु युग्मकों में प्रत्येक गुणसूत्र-युग्म में से केवल एक गुणसूत्र होता है।
  7. अगुणित शुक्राणु व अण्डाणु के संलयन से बना युग्मज द्विगुणित होता है जिससे पूर्ण जीव का विकास होता है।

प्रश्न 4.
एकसंकर तथा द्विसंकर क्रॉस से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देते हुए समझाइए। (2015, 17)
उत्तर:
एकसंकर संकरण Monohybrid cross विपरीत लक्षण वाले नर तथा मादा के मध्य जब केवल एक जोड़ा विपरीत लक्षणों के अध्ययन के लिए संकरण कराया जाता है तो इन विपरीत लक्षणों के संकरण को एकसंकर (गुण) संकरण कहते हैं; जैसे-लाल फूल वाले तथा सफेद फूल वाले पौधों के मध्य संकरण। द्विसंकर संकरण Dihybrid cross जब विपरीत लक्षणों वाले नर तथा मादा के मध्य दो जोड़ा विपरीत लक्षणों के अध्ययन के लिए संकरण कराया जाता है तो इसे द्विसंकर संकरण कहते हैं; जैसे-पीले-गोल बीज वाले और हरे-झुरींदार बीज वाले पौधों के मध्य संकरण।

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प्रश्न 5.
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण में अन्तर कीजिए। (2013)
उत्तर:
प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण में अन्तर –
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प्रश्न 6.
लक्षण प्रारूप तथा जीन प्रारूप में अन्तर कीजिए। (2011, 12, 16, 18)
या जीनोटाइप तथा फीनोटाइप में अन्तर कीजिए। (2013, 15, 18)
या फीनोटाइप एवं जीनोटाइप को स्पष्ट कीजिए। (2018)
उत्तर:
जीनोटाइप या जीन प्ररूपी आकारिक लक्षण में जीव चाहे जैसा हो उसमें पायी जाने वाली जीनी संरचना को जीन प्ररूपी या जीनोटाइप कहते हैं। फीनोटाइप या समलक्षणी जीन किसी भी प्रकार की हों यदि बाह्य रूप में समान लक्षण या उसका प्रभाव दिखायी दे रहा है तो उसे समलक्षणी या फीनोटाइप कहते हैं।

प्रश्न 7.
समयुग्मजी तथा विषमयुग्मजी में अन्तर कीजिए। (2011, 12, 16)
उत्तर:
समयुग्मजी तथा विषमयुग्मजी में अन्तर –
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प्रश्न 8.
एलिलोमॉर्फ एवं कारक को उदाहरण सहित समझाइए। (2011)
या एलील पर टिप्पणी लिखिए। (2012)
उत्तर:
एलील या एलिलोमॉर्फ विपरीत लक्षणों वाले युग्मों को एलील्स कहते हैं; जैसे – पौधों की लम्बाई के लिए लम्बा-बौना, बीज के लिए गोल-झुरींदार, पुष्प के लिए लाल-सफेद रंग इत्यादि। कारक जीवों में सभी लक्षण इकाइयों के रूप में होते हैं जिन्हें कारक कहते हैं। प्रत्येक इकाई लक्षण कारकों के एक युग्म से नियन्त्रित होता है। इनमें से एक कारक मातृक तथा दूसरा पैतृक होता है। युग्म के दोनों कारक विपरीत प्रभाव के हो सकते हैं, किन्तु उनमें से एक ही कारक अपना प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। दूसरा छिपा रहता है।

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प्रश्न 9.
शुद्ध एवं संकर जाति ( नस्ल) में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2013)
उत्तर:
शुद्ध एवं संकर जाति (नस्ल) में अन्तर –
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प्रश्न 10.
गुणसूत्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013)
या कायिक गुणसूत्र एवं लिंग गुणसूत्र में अन्तर कीजिए। (2013)
उत्तर:
‘गुणसूत्र’ शब्द का प्रयोग वाल्डेयर (Waldeyer) ने सन् 1888 में उन गहरी अभिरंजित छड़ सदृश रचनाओं के लिए किया था जो केन्द्रक में कोशिका विभाजन के समय दिखाई देती हैं। ये केन्द्रक में पाये जाने वाले न्यूक्लिओ-प्रोटीन जालक के संघनन से बनते हैं। गुणसूत्र या क्रोमोसोस का अर्थ है रंगीन कार्य।

गुणसूत्रों के कार्य

  • आनुवंशिकी में भूमिका गुणसूत्र पर जीन्स उपस्थित होते हैं, जीन्स आनुवंशिक लक्षणों के वाहक होते हैं।
  • जनक की इकाई गुणसूत्रों के प्रतिलिपिकरण से संतति गुणसूत्र बनते हैं जो संतति कोशिकाओं में पहुँचते हैं।

गुणसूत्रों के प्रकार:
1. कायिक गुणसूत्र या ऑटोसोम (Autosome) जो गुणसूत्र लिंग-लक्षणों को छोड़कर जीन के अन्य लक्षणों का निर्धारण करते हैं, कायिक गुणसूत्र कहलाते हैं। ये नर तथा मादा दोनों प्रकार के जीवों में समान होते हैं।

2. लिंग गुण सूत्र (Sex chromosomes) जो गुणसूत्र लिंग-निर्धारण करते हैं उन्हें लिंग गुणसूत्र या हेटरोसोम कहते हैं। ये नर तथा मादा में अलग-अलग होते हैं। ये प्राय: X तथा Y गुणसूत्र कहलाते हैं। मनुष्य में लिंग निर्धारण XY गुणसूत्र द्वारा होता है। मनुष्य में 22 जोड़ी कायिक या ऑटोसोम तथा एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र या हेटरोसोम होते हैं।

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प्रश्न 11.
जीन का क्या अर्थ है? जीन की प्रकृति संक्षेप में समझाइये। (2018)
या जीन क्या है? इसका सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया? इसकी उपयोगिता का उल्लेख कीजिए। (2014, 15)
उत्तर:
सभी जीवों में आनुवंशिक लक्षणों का नियन्त्रण एवं संचरण आनुवंशिक इकाइयों द्वारा होता है। मेण्डल ने इन इकाइयों को कारक (factor) कहा था तथा जोहनसन ने इनके लिए जीन शब्द का प्रयोग किया।
जीन की विशेषताएँ –

  1. जीन गुणसूत्र के क्रोमोनीमा पर माला के मोतियों के समान रैखिक क्रम में लगी रचनाएँ हैं जो आनुवंशिक लक्षणों का नियन्त्रण करती हैं।
  2. जीन संचरण की इकाई (unit of transmission) हैं जो जनक से सन्तानों में पहुँचती हैं।
  3. जीन उत्परिवर्तन की इकाई (unit of mutation) हैं जिनकी संरचना में परिवर्तन होता रहता है।
  4. जीन कार्यिकी की इकाई (physiological units) हैं। ये जीवों के विभिन्न लक्षणों का नियन्त्रण करती हैं।
  5. जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन या पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के संश्लेषण की सूचना होती है।

प्रश्न 12.
मनुष्य में लिंग सहलग्न गुण से क्या तात्पर्य है? वे किस प्रकार वंशागत होते हैं? (2013, 14)
या लिंग सहलग्न लक्षण को समझाइए। (2017)
या लिंग सहलग्न रोग क्या है? मानव के किन्हीं दो लिंग सहलग्न रोगों के नाम लिखिए। (2018)
उत्तर:
लिंग सहलग्न लक्षण तथा इनकी वंशागति:
प्राय: लिंग गुणसूत्रों पर जो लक्षणों के जीन्स होते हैं, उनका सम्बन्ध लैंगिक लक्षणों से होता है। ये जीन्स ही जन्तु में लैंगिक द्विरूपता के लिए जिम्मेदार होते हैं, फिर भी जन्तुओं की लैंगिकता अत्यन्त जटिल तथा व्यापक होती है और इसे बनाने के लिए अनेक अन्य जीन्स, जो सामान्य गुणसूत्रों पर होते हैं, भी प्रभावी होते हैं। दूसरी ओर लिंग गुणसूत्रों पर कुछ जीन्स लैंगिक लक्षणों के अतिरिक्त अन्य लक्षणों वाले अर्थात् कायिक या दैहिक लक्षणों वाले भी होते हैं। ये लिंग सहलग्न जीन्स कहलाते हैं, और लिंग सहलग्न लक्षण उत्पन्न करते हैं।

इनकी वंशागति लिंग सहलग्न वंशागति अथवा लिंग सहलग्नता (sex linkage) कहलाती है। मनुष्य में लगभग 120 प्रकार के लक्षणों की वंशागति ज्ञात है। मनुष्य में लिंग निर्धारित करने वाले गुणसूत्र; X तथा Y गुणसूत्र कहलाते हैं। यद्यपि इनकी संरचना में भिन्नता दिखायी देती है, फिर भी वर्तमान जानकारी के अनुसार इन गुणसूत्रों में कुछ भाग समजात होता है। ये भाग अर्द्धसूत्री विभाजन के समय सूत्रयुग्मन करते हैं, अन्यथा शेष भाग असमजात होता है।

उपर्युक्त आधार पर लिंग-सहलग्न लक्षण तीन प्रकार के हो सकते हैं –
1. X-सहलग्न लक्षण X गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर इनके लक्षणों के जीन्स स्थित होते हैं अर्थात् इनके एलील्स Y गुणसूत्र पर नहीं होते। वंशागति में ये लक्षण पुत्रों को केवल माता से तथा पुत्रियों को माता व पिता दोनों से प्राप्त हो सकते हैं। इन्हें डायेण्ड्रिक (diandric) लिंग सहलग्न लक्षण भी कहा जाता है; जैसे-वर्णान्धता (colour blindness), रतौंधी (night blindness) तथा हीमोफीलिया (haemophilia)।

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2. Y-सहलग्न लक्षण इसके जीन्स Y गुणसूत्रों के असमजात खण्डों पर स्थित होते हैं। इस प्रकार सहयोगी x गुणसूत्रों पर इनके एलील्स नहीं पाये जाते, अत: प्रत्येक संतति में पिता से केवल पुत्रों तक ही जाते हैं। इन्हें होलैण्ड्रिक लिंग सहलग्न गुण भी कहते हैं तथा इनकी वंशागति को होलैण्डिक वंशागति कहा जाता है; उदाहरणार्थ-बाह्य कर्ण पर बालों की उपस्थिति।

3. XY-सहलग्न लक्षण इनके जीन्स एलील्स के रूप में X एवं Y गुणसूत्रों के समजात खण्डों पर स्थित होते हैं, अतः इनकी वंशागति पुत्रों एवं पुत्रियों में सामान्य ऑटोसोमल लक्षणों की भाँति होती है। इन्हें अपूर्ण लिंग सहलग्न गुण भी कहा जाता है।

प्रश्न 13.
लिंग प्रभावित एवं लिंग सीमित लक्षणों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
लिग प्रभावित लक्षण मनुष्य में कुछ ऐसे लक्षण भी होते हैं जिनके जीन्स तो ऑटोसोम्स पर होते हैं, परन्तु इनका विकास व्यक्ति के लिंग से प्रभावित होता है अर्थात् पुरुष और स्त्री में जीनप्ररूप (genotype) समान होते हुए भी लक्षणप्ररूप (phenotype) भिन्न होता है। उदाहरण के लिए मनुष्य में गंजापन (baldness) काफी पाया जाता है। यह विकिरण, थाइरॉइड ग्रन्थि की अनियमितताओं आदि के कारण हो सकता है अथवा आनुवंशिक भी होता है।

आनुवंशिक गंजापन एक ऑटोसोमल एलीलोमॉर्फिक जीन जोड़ा (B, b) पर निर्भर करता है। समयुग्मकी प्रभावी जीनप्ररूप (BB) हो तो गंजापन पुरुषों और स्त्रियों दोनों में विकसित होता है, लेकिन विषमयुग्मकी जीनप्ररूप (Bb) होने पर यह स्त्रियों में नहीं, केवल पुरुषों में ही प्रदर्शित होता है क्योंकि इस जीनप्ररूप के प्रदर्शित होने के लिए नर हॉर्मोन्स का होना आवश्यक होता है। समयुग्मकी अप्रभावी जीनप्ररूप (bb) में गंजापन नहीं होता है।

लिंग सीमित लक्षण
कुछ ऑटोसोम्स पर कुछ ऐसे आनुवंशिक लक्षणों के जीन्स भी होते हैं जिनकी वंशागति सामान्य मेण्डेलियन नियमों के अनुसार ही होती है, किन्तु इनका विकास पीढ़ी-दर-पीढ़ी केवल एक ही लिंग के सदस्यों में होता है। इस प्रकार का प्रदर्शन इनमें विशेष हॉर्मोन्स (hormones) के बनने के कारण होता है। गाय, भैंस आदि में दुग्ध का स्रावण, भेड़ों की कुछ जातियों में केवल नर में सींगों का विकास, पुरुष में दाढ़ी आदि के लक्षण ऐसे ही होते हैं। इनको हम लिंग सीमित लक्षण कहते हैं।

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प्रश्न 14.
मनुष्य में वर्णान्धता की वंशागति को समझाइए। यदि वर्णान्ध पुरुष सामान्य स्त्री से विवाह करता है, तो उनसे उत्पन्न सन्तानों में वर्णान्धता की वंशागति स्पष्ट कीजिए। (2016)
उत्तर:
वर्णान्ध पुरुष के x-गुणसूत्र पर वर्णान्धता का जीन होता है। यह जीन पिता से पुत्री में और पुत्री से पुत्र में वंशागत होता है। सामान्य स्त्री एवं वर्णान्ध पुरुष की पुत्रियाँ वाहक होती हैं क्योंकि इनमें सामान्य X-गुण सूत्र माता से और वर्णान्ध जीन वाला गुणसूत्र पिता से मिलता है। वर्णान्ध व्यक्ति (XC Y) व सामान्य स्त्री (XX) की सभी सन्ताने सामान्य होती हैं क्योंकि सभी पुत्रों को माता से सामान्य X-गुणसूत्र मिलता है अत: वे सभी सामान्य होते हैं।

पुत्रियों को सामान्य X-गुणसूत्र माता से तथा दूसरा X गुणसूत्र पिता से प्राप्त होता है जिस पर वर्णान्धता का जीन होता है। इस जीन के अप्रभावी होने के कारण पुत्रियों में वर्णान्धता का लक्षण प्रकट नहीं हो पाता। ये केवल वाहक होती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेण्डल के आनुवंशिकता के नियमों की विवेचना कीजिए। (2018)
या मेण्डल के वंशागति के नियमों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। (2011, 12, 14, 18)
या मेण्डल के प्रभाविता नियम (प्रथम नियम ) से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए। (2012, 15)
या मेण्डल का प्रथम नियम लिखिए। इसको विस्तृत रूप से समझाइए। (2016)
या यदि शुद्ध लम्बा एवं शुद्ध बौना पौधों के मध्य संकरण हो, तो ई पीढ़ी में किस प्रकार के वंशज प्राप्त होंगे? (2011)
या मेण्डल के पृथक्करण नियम को उपयुक्त उदाहरण सहित समझाइए। (2013, 16, 17)
या मेण्डल द्वारा प्रतिपादित स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम उदाहरण देकर समझाइए। (2014)
उत्तर:
मेण्डल के आनुवंशिकता के नियम या मेण्डलवाद मेण्डल ने मटर के विभिन्न गुणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया और संकरण प्रयोगों से प्राप्त परिणामों के आधार पर वंशागति के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले। उनके बाद जब डी वीज, कार्ल कॉरेन्स तथा एरिक वॉन शैरमैक नामक तीन वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मेण्डल जैसे प्रयोग किये तथा उनसे मेण्डल के काम की पुष्टि हुई तब जाकर मेण्डल का सिद्धान्त प्रकाश में आ सका। मेण्डल के सैद्धान्तिक बिन्दुओं का ही तीनों वैज्ञानिकों ने नियमों के रूप में प्रतिपादन किया। इन्हें मेण्डल के आनुवंशिकता के नियम कहा गया।

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ये नियम निम्नलिखित हैं –
1. एकल लक्षण तथा प्रभाविता का नियम जीवों में सभी लक्षण इकाइयों के रूप में होते हैं। इन्हें कारक (जीन) कहते हैं। प्रत्येक इकाई लक्षण कारकों के एक युग्म से नियन्त्रित होता है। वास्तव में, इसमें से एक कारक मातृक तथा दूसरा पैतृक होता है। युग्म के दोनों कारक एक-दूसरे के विपरीत प्रभाव के हो सकते हैं, किन्तु उनमें से एक ही कारक अपना प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है, दूसरा छिपा रहता है। जब विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो उनकी सन्तानों में इन लक्षणों में से एक लक्षण ही परिलक्षित होता है और दूसरा दिखाई नहीं देता। पहले लक्षण को प्रभावी तथा दूसरे लक्षण को अप्रभावी कहते हैं।

उदाहरणार्थ:
जब शुद्ध समयुग्मजी (गुणसूत्रों में एक ही प्रकार के लक्षणों की उपस्थिति) लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) में विपरीत लक्षणों में से केवल एक लक्षण (लम्बापन), जो प्रभावी है, दिखाई देता है और अप्रभावी लक्षण (बौनापन) छिपा रहता है। (F1) पीढ़ी के सन्तान पौधे विषमयुग्मजी Tt होते हैं।
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2. लक्षणों के पृथक्करण का नियम जब F पीढ़ी के विषमयुग्मजी पौधों में स्वपरागण (self pollination) कराया जाता है, तो दूसरी पीढ़ी (F2) की सन्तानों में परस्पर विपरीत लक्षणों का एक निश्चित अनुपात में पृथक्करण हो जाता है। इसे लक्षणों के पृथक्करण का नियम कहते हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रथम पीढ़ी में साथ-साथ रहने पर भी लक्षणों का आपस में मिश्रण नहीं होता और युग्मक निर्माण के समय ये लक्षण अलग-अलग हो जाते हैं अर्थात् युग्मकों की शुद्धता बनी रहती है। इसलिए इस नियम को युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहते हैं।
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उदाहरणार्थ:
मटर के पौधे के संकरण के उपर्युक्त उदाहरण में द्वितीय पीढ़ी (F2 पीढ़ी) प्राप्त करने के लिए जब स्वपरागण कराया जाता है तो लम्बेपन तथा बौनेपन के लक्षण फिर से प्राप्त हो जाते हैं। अर्थात् लम्बेपन का कारक (T) तथा बौनेपन का कारक (t) शुद्ध रूप में फिर से मिलकर 3 : 1 के अनुपात में लम्बे तथा बौने पौधे उत्पन्न करते हैं। इनमें 25% शुद्ध लम्बे, 50% संकर लम्बे तथा 25% शुद्ध बौने पौधे होते हैं अर्थात् यह अनुपात 1:2 :1 का होता है।

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3. स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम जब दो लक्षणों के लिए दो जोड़ा विपरीत प्रभावों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो इन लक्षणों का पृथक्करण स्वतन्त्र रूप से होता है, अर्थात् एक लक्षण की वंशागति दूसरे को प्रभावित नहीं करती है।
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इस नियम को मेण्डल ने द्विसंकर क्रॉस से स्पष्ट किया। इसके लिए उन्होंने दो प्रकार के मटर के पौधों को चुना। एक प्रकार के पौधे के बीज का आकार गोल तथा रंग पीला था। दूसरे प्रकार के पौधे के बीज का आकार झुर्सदार तथा रंग हरा था। इन दो विपरीत प्रभावों के लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराने पर जो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) प्राप्त हुई उसमें सभी बीज गोल तथा पीले थे। इस पीढ़ी (F2) के स्वपरागण से उत्पन्न द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी (F1) में चार प्रकार के बीज प्राप्त हुए।
(क) गोल व पीले
(ख) गोल व हरे
(ग) झुरींदार व पीले
(घ) झुरींदार व हरे।

उपर्युक्त चार प्रकार के बीजों के प्राप्त होने से यह स्पष्ट होता है कि (F2) पीढ़ी की सन्तानों में दोनों लक्षण गोल आकार व पीला रंग तथा झुरींदार आकार व हरा रंग जो जनकों में एक साथ थे, संकरण से प्राप्त F1 पीढ़ी में अलग-अलग लक्षणों के प्रभाव से पृथक् हो गये तथा (F2) पीढ़ी में ये स्वतन्त्र रूप से संयुक्त होकर प्रकट हुए। इसी कारण झुर्रादार बीजों के साथ पीला रंग भी और गोल बीजों के साथ हरा रंग भी प्रकट हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि लक्षणों का पृथक्करण स्वतन्त्र रूप से होता है और एक लक्षण की वंशागति दूसरे को प्रभावित नहीं करती है। यहाँ बीज के आकार व रंग का F2 पीढ़ी में अनुपात= 9:3:3:1

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प्रश्न 2.
मेण्डल के स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम को द्विसंकरीय संकरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2014)
या मेण्डल के द्विसंकर संकरण से आप क्या समझते हैं? मटर के गोल एवं पीले बीजों का मटर के हरे व झुर्रादार बीजों के साथ संकरण किया। F1 पीढ़ी में या सभी मटर के बीज पीले व गोल थे।F2 पीढ़ी का फीनोटाइप का अनुपात ज्ञात कीजिए। (2014)
या द्विसंकर क्रॉस क्या होता है? इसको उदाहरण सहित समझाइए। (2015, 17)
या स्वतन्त्र अपव्यूहन से आप क्या समझते हैं? केवल रेखाचित्र द्वारा द्विसंकर क्रॉस समझाइए। (2017, 18)
उत्तर:
द्विसंकरीय संकरण –
जब दो युग्म विकल्पी लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराया जाता है तो उसे द्विसंकरीय या द्विसंकर संकरण (dihybrid cross) कहते हैं। एक उदाहरण में मटर के बीज के बीजावरण के रंग तथा उसके आकार के आधार पर अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन के लिए निम्न प्रकार के मटर के बीज लिए गये तथा संकरण कराया गया –
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इन दो युग्मविकल्पी लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराने पर जो प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) उत्पन्न हुई उसमें सभी बीज गोल तथा पीले थे। इस प्रथम सन्तानीय पीढ़ी (F1) से उत्पन्न द्वितीय सन्तानीय पीढ़ी (F2) में चार प्रकार के बीज प्राप्त हुए।

  • गोल-पीले
  • गोल-हरे
  • झुरींदार-पीले
  • झुरींदार-हरे।

इन चार प्रकार के बीजों में 9 : 3 : 3 : 1 का अनुपात था अर्थात् 16 बीजों में से 9 बीज गोल-पीले, 3 बीज गोल-हरे, 3 बीज झुरींदार-पीले तथा 1 बीज झुरींदार-हरा प्राप्त हुआ अर्थात् बीजावरण का पीला या हरा रंग बीज के गोल या झुरींदार आकार में से किसी के साथ भी जा सकता है। या यों कहें – “किसी लक्षण के कारक युग्म में से कारकों का चयन स्वतन्त्र होता है।”
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प्रश्न 3.
लिंग गुणसूत्र का क्या अर्थ है? मनुष्य में लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है? रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। (2012, 15)
लिंग गुणसूत्र पर टिप्पणी लिखिए। (2013)
लिंग निर्धारण को समझाइए। (2013)
लिंग गुणसूत्र से आप क्या समझते हैं? नर तथा मादा में लिंग गुणसूत्र का विन्यास लिखिए। (2014)
उत्तर:
लिंग गुणसूत्र मनुष्य की सभी कायिक तथा जनन कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 44 गुणसूत्रों के 22 समजात जोड़े होते हैं, जिन्हें ऑटोसोम्स (autosomes) कहते हैं। शेष एक जोड़ा गुणसूत्र लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। पुरुष तथा स्त्री में यह गुणसूत्रों का जोड़ा एक-दूसरे से भिन्न होता है। पुरुष में इस जोड़े (23वें जोड़े) के दोनों गुणसूत्र एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, जिनमें से एक छोटा तथा दूसरा बड़ा होता है। इस प्रकार ये हेटरोसोम्स (heterosomes) हैं। इनमें से बड़ा ‘X’ तथा छोटा ‘Y’ गुणसूत्र कहलाता है। स्त्री में दोनों लिंग गुणसूत्र भी समजात तथा ‘X’ प्रकार के होते हैं।

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इस प्रकार –
पुरुष की जनन कोशिका में 22 जोड़ा + XY = 46 गुणसूत्र तथा
स्त्री की जनन कोशिका में 22 जोड़ा + XX = 46 गुणसूत्र होते हैं अर्थात् मनुष्य में लड़के अथवा लड़की का होना इन्हीं लिंग गुणसूत्रों पर निर्भर करता है।

मनुष्य में लिंग निर्धारण:
संकेत – कृपया ‘पाठ के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर’ शीर्षक में पृष्ठ 174 पर प्रश्न 4 का उत्तर देखें।

प्रश्न 4.
विकास के आधुनिक संश्लेषणात्मक वाद को समझाइये। (2014)
या जीवन की उत्पत्ति की आधुनिक संकल्पना (ओपैरिन परिकल्पना) पर टिप्पणी दीजिए। (2013)
या जीवन के उद्भव की आधुनिक परिकल्पना का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति:
ओपैरिन की आधुनिक परिकल्पना जीवन की उत्पत्ति के विषय में यह आधुनिकतम मत (संश्लेषणात्मक वाद) है। इस मत को और अधिक स्पष्ट रूप से रूसी वैज्ञानिक ओपैरिन (A. I. Oparin, 1924) ने प्रस्तुत किया। पदार्थवाद (materialistic theory) के रूप में प्रचलित अपने मत को ओपैरिन ने सन् 1936 में ‘जीवन की उत्पत्ति’ (The Origin of Life) नामक पुस्तक द्वारा प्रकाशित किया। उपर्युक्त परिकल्पना के अनुसार आधुनिक पृथ्वी के निर्माण एवं

इस पर जीवन की उत्पत्ति की प्रक्रिया को निम्नलिखित आठ चरणों में विभाजित किया जा सकता है –
1. परमाणु अवस्था प्रारम्भिक चरण में पृथ्वी आग का गोला थी, जिसमें सभी तत्त्व परमाणु के रूप में उपस्थित थे जो अपने घनत्व के अनुसार व्यवस्थित थे। भारी परमाणु; जैसे लोहा, निकिल आदि केन्द्र में और हल्के परमाणु; जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन आदि बाहर की ओर थे।

2. अणु अवस्था द्वितीय चरण में पृथ्वी का तापक्रम अपेक्षाकृत कम हो जाने के कारण स्वतन्त्र परमाणुओं का परस्पर संयोग सम्भव हुआ, जिसके फलस्वरूप अणुओं (molecules) की उत्पत्ति हुई। आदि वायुमण्डल अपचायक (reducing) था तथा इसमें हाइड्रोजन के परमाणु लगभग 90% थे। आदि वायुमण्डल में जल, वाष्प, अमोनिया व मेथेन गैसें अस्तित्व में आयीं।

पृथ्वी का तापक्रम और ठण्डा होने पर जल-वाष्प ने बादलों एवं कोहरे का रूप लिया तथा पृथ्वी पर वर्षा के रूप में यह जल बरसने लगा; अतः धीरे-धीरे पृथ्वी की सतह पर झरनों, नदियों एवं समुद्रों की उत्पत्ति हुई। इन आदि स्रोतों के जल में आदि वायुमण्डल की गैसें; जैसे मेथेन (CH4) व अमोनिया (NH3) आदि घुल गयीं।

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3. कार्बनिक यौगिकों का निर्माण आदि भूमण्डल पर सघन ज्वालामुखी थे, जिनसे निरन्तर लावा निष्कासित होता रहता था। लावा के धातु तत्त्वों ने आदि वायुमण्डल की नाइट्रोजन व कार्बन से संयोग कर नाइट्राइड्स व कार्बाइड्स बनाये, जिनसे भूपटल (earth’s crust) का निर्माण सम्भव हुआ। आदि वायुमण्डल में सर्वप्रथम मेथेन बनी तथा तापमान और कम होने पर एथेन व प्रोपेन आदि बनीं।

इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणों, कॉस्मिक किरणों एवं ज्वालामुखी के तापक्रम आदि से प्राप्त ऊर्जा की उपस्थिति में उपर्युक्त अणुओं के संघनन एवं बहुलीकरण के फलस्वरूप जटिल कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हुआ। इनमें शर्करायें, वसीय अम्ल, पिरीमिडीन, प्यूरीन तथा अमीनो अम्ल आदि मुख्य रूप से थे।

4. जटिल कार्बनिक अणुओं का निर्माण उबलते हुए गर्म समुद्र में तीसरे चरण के बने कार्बनिक यौगिक परस्पर क्रिया करके तथा जुड़-जुड़ कर जटिल कार्बनिक यौगिक तथा उनके बहुलकों का निर्माण करते रहे। ये गर्म सूप में विभिन्न शर्कराओं से पॉलीसैकैराइड्स; जैसे स्टार्च (starch), सेल्युलोज (cellulose), ग्लिसरॉल (glycerol) आदि।

विभिन्न वसीय अम्लों व ग्लिसरॉल से वसायें तथा अमीनो अम्लों से विभिन्न जटिल पॉलीपेप्टाइड शृंखलायें तथा प्रोटीन्स (proteins), एन्जाइम्स आदि का निर्माण हुआ। विभिन्न क्षारकों; जैसे प्यूरीन्स व पिरिमिडीन्स ने शर्कराओं तथा फॉस्फेट्स के साथ मिलकर न्यूक्लियोटाइड्स (nucleotides) तथा बाद में इनकी पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से न्यूक्लियक अम्लों का निर्माण हुआ। हेल्डेन (Haldane, 1929) ने आदि समुद्र में इस उबलते कार्बनिक पदार्थों के जलीय मिश्रण को ‘कार्बनिक यौगिकों का एक गर्म, पतला सूप’ या पूर्वजीवी सूप’ (probiotic soup) कहा

5. कोलॉइड्स, कोएसरवेट्स एवं वैयक्तिकता आदि सागर के ‘पूर्वजीवी सूप’ के विभिन्न यौगिकों के अणुओं में परस्पर प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप कोलॉइडल कण बने, जिनसे अघुलनशील बूंदों के रूप में कोलॉइडलीय तन्त्रों का निर्माण हुआ। प्रोटीन की कोलॉइडलीय बूंदों के विद्युतावेशित होने के कारण इनकी सतह पर जल की नन्हीं-नन्हीं बूंदें चिपक जाती थीं। इन्हें फॉक्स (Fox, 1958) द्वारा प्रोटीनॉइड माइक्रोस्फीयर्स कहा गया। इसके विपरीत विद्युतावेशित कोलॉइडलीय बूंदों के परस्पर संयोग से अपेक्षाकृत बड़े व घने कोलॉइडलीय यन्त्र बने, इन्हें ओपैरिन ने कोएसरवेट्स कहा।

उन्होंने प्रयोगों द्वारा गोंद व जिलेटिन आदि से कृत्रिम कोएसरवेट्स बनाकर दिखाये। कोएसरवेट्स के धातु तत्त्वों अथवा प्रोटीन्स ने विकर अथवा कार्बनिक उत्प्रेरकों का कार्य किया। इस प्रकार इनमें प्रारम्भिक जैविक क्रियाओं का उदय हुआ। अपने चिपचिपेपन की सामर्थ्य के आधार पर कोएसरवेट्स एक निश्चित आकारीय वृद्धि के पश्चात् छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाते थे। इस प्रकार इनमें गुणन की क्रिया प्रारम्भ हुई।

इसी तारतम्य में इन कोलॉइडलीय तन्त्रों में स्वउत्प्रेरक तन्त्र, जीन्स, विषाणु एवं प्रारम्भिक जीवन की उत्पत्ति हुई क्योंकि अब तक न्यूक्लियक अम्ल तथा प्रोटीन के मिलने से न्यूक्लियोप्रोटीन का निर्माण हो चुका था। न्यूक्लियोप्रोटीन एक ओर तो वर्तमान जीन्स के समान कार्य करते अथवा दूसरी ओर गुणन करके विषाणुओं (viruses) के समान विषाणुओं को ‘प्रारम्भिक जीव’ माना गया है।

6. असीमकेन्द्रकीय कोशिका की उत्पत्ति न्यक्लियक अम्लों द्वारा अपने चारों ओर खाद्य पदार्थ एकत्र करके अथवा कोएसरवेट्स में उत्पत्ति द्वारा असीमकेन्द्रकीय कोशिकाओं (prokaryotic cells) का निर्माण हुआ, जीवाणु इसी प्रकार की कोशिकायें हैं जिनसे स्पष्ट केन्द्रक की कोशिकायें अर्थात् सुकेन्द्रकीय कोशिकायें (eukaryotic cells) बनी थीं।

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7. स्वपोषण की उत्पत्ति आदि सागर में उत्पन्न असीम केन्द्रकीय कोशिकायें परपोषी थीं। धीरे-धीरे ये कोशिकायें आदि सागर में उपलब्ध सरल अकार्बनिक पदार्थों से जटिल कार्बनिक पदार्थों का संश्लेषण करने लगीं। यह स्वपोषण की दिशा का प्रथम चरण था। इसके बाद कोशिकाओं में मैग्नीशियम पोरफाइरिन्स से वर्तमान पर्णहरित के समान उत्प्रेरक उत्पन्न हुए। वर्तमान जीवाणु-पर्णहरित इसका उदाहरण है।

इसकी सहायता से कोशिकायें सौर ऊर्जा से प्रकाश संश्लेषण करने लगीं। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के परिणामस्वरूप वायुमण्डल में ऑक्सीजन का मुक्त होना, आदि जीवों के उद्विकास क्रम में एक क्रान्तिकारी घटना थी। पृथ्वी से लगभग 24 किमी ऊँचाई पर ओजोन का एक स्तर बन गया जो सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर पहुँचने से रोकने लगा।

8. सुकेन्द्रीय कोशिकाओं की उत्पत्ति आदि भूमण्डल लगभग 2 अरब वर्ष पूर्व वायवीय अथवा ऑक्सी श्वसन के योग्य हो चुका था। इसके साथ ही आदि कोशिकाओं की रचना में क्रमिक विकास का क्रम प्रारम्भ हो गया। आदि सुकेन्द्रकीय कोशिकायें सामान्यत: दो प्रकार की थीं –

  • क्लोरोप्लास्ट विहीन जन्तु कोशिकायें तथा
  • क्लोरोप्लास्ट युक्त पादप कोशिकायें।

इन दोनों प्रकार की कोशिकाओं ने सम्मिलित रूप से प्रकृति में जैव सन्तुलन की स्थापना की। इन्हीं कोशिकाओं के क्रमिक विकास के फलस्वरूप जन्तुओं एवं पादपों की वर्तमान जातियों का विकास हुआ है।

प्रश्न 5.
डार्विन के प्राकृतिक वरणवाद को उदाहरण सहित समझाइए। (2015, 18)
या  जैव विकास के सम्बन्ध में डार्विन के प्राकृतिक वरण एवं योग्यतम की उत्तरजीविता के सिद्धान्त को समझाइए। चार्ल्स डार्विन के अनुसार जैव विकास या  के मुख्य कारकों का वर्णन कीजिए। प्राकृतिक वरणवाद सिद्धान्त किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया है ?
या  इसको उदाहरण देकर समझाइए। नई जातियों के उद्भव का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?
या  इसकी मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2011)
या डार्विन के प्राकृतिक वरणवाद के मुख्य चार बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए। (2018)
या  जीव जगत में जीवन संघर्ष होता है। यह किस वैज्ञानिक का मत है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैव विकास के सम्बन्ध में डार्विन का सिद्धान्त या डार्विनवाद चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin, 1809-1882) एक अंग्रेज जीव वैज्ञानिक थे। डार्विन ने समुद्री यात्राओं द्वारा विभिन्न देशों तथा द्वीपों के जीवों का अध्ययन किया और जीवों के विकास के सम्बन्ध में अपने सिद्धान्त को “प्राकृतिक वरण द्वारा जातियों का उद्भव”(Origin of Species by Natural Selection) नामक पुस्तक में प्रकाशित किया। डार्विन का सिद्धान्त प्राकृतिक वरणवाद या डार्विनवाद (theory of natural selection or Darwinism) के नाम से प्रचलित है।

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यह सिद्धान्त निम्नलिखित तथ्यों को आधार मानकर प्रतिपादित किया गया –
1. जीवों में सन्तानोत्पत्ति की प्रचुर क्षमता प्रत्येक जीव प्रजनन द्वारा अपनी सन्तान उत्पन्न करता है। जीवों में सन्तान उत्पन्न करने की बहुत अधिक क्षमता होती है। निम्न श्रेणी के जन्तुओं में तो प्रजनन क्षमता इतनी अधिक होती है कि अगर सभी सन्तानें जीवित रहें, तो पृथ्वी पर उनके सिवा और कोई जन्तु दिखाई भी न देगा, परन्तु ऐसा नहीं होता। जीवों की संख्या की वृद्धि इस प्रकार रेखागणितीय अनुपात में हो सकती है।

2. जीवन संघर्ष सभी जीवों को जीवित रहने के लिए स्थान, प्रकाश तथा भोजन चाहिए, परन्तु सीमित स्थान तथा भोजन के कारण यह सम्भव नहीं हो पाता। अत: पैदा होते ही प्रत्येक जीव को जीवित रहने की आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसको जीवन संघर्ष कहते हैं। इस जीवन संघर्ष के कारण ही रेखागणितीय अनुपात में बढ़ती जनसंख्या स्थिर रहती है। एक ही जाति के जीवों के मध्य होने वाला जीवन संघर्ष सबसे अधिक घातक होता है।

3. योग्यतम की उत्तरजीविता वही जीव जीवित रहता है, जो जीवन संघर्ष में वातावरण के अनुकूल होता है और आवश्यकतानुसार परिवर्तन करके स्वयं को और अधिक अनुकूल बना लेता है। अनुकूलन से वह सशक्त हो जाता है। संघर्ष में निर्बल जीव नष्ट हो जाते हैं अर्थात् योग्यतम ही जीवित रहता है। इस प्रकार प्रत्येक जाति के जीवों की संख्या लगभग स्थिर बनी रहती है।

4. प्राकृतिक वरण जीवित रहने के लिए जीवों में जो संघर्ष होता है, इसमें जो जीव प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल होते हैं, वे ही जीवित रहते हैं तथा अन्य नष्ट हो जाते हैं। अतः प्रकृति स्वयं ही श्रेष्ठ व अनुकूल जीवों का वरण करती है, जिसको प्राकृतिक वरण कहते हैं।

5. विभिन्नतायें प्रत्येक जाति के जीवों में विभिन्नतायें मिलती हैं। इन्हीं विभिन्नताओं के कारण कुछ जीव वातावरण के अनुकूल होते हैं। जो विभिन्नतायें उत्पन्न होती हैं, वे सन्तानों में वंशानुगत हो जाती हैं, जिससे सन्तान भी उस वातावरण के लिए अनुकूलित हो जाती है। यहाँ यह भी माना गया है कि विभिन्नतायें लाभदायक अथवा हानिकारक हो सकती हैं। लाभदायक अथवा उपयोगी विभिन्नतायें ही जीव को योग्य बनाने में सक्षम होती हैं तथा उस जीव को जीवित रहने में सहायता करती हैं।

6. नयी जातियों की उत्पत्ति जीवन संघर्ष में योग्य सिद्ध करने के लिए उत्पन्न विभिन्नतायें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशानुगत होती रहती हैं, साथ-ही-साथ सन्तान में भी स्वयं कुछ विशेष लक्षण तथा विभिन्नतायें उत्पन्न हो जाती हैं। कुछ पीढ़ियों के बाद लक्षणों तथा विभिन्नताओं की वंशागति इतनी अधिक हो जाती है कि सन्तानें अपने पूर्वजों से भिन्न हो जाती हैं और इस तरह नयी जातियों की उत्पत्ति हो जाती हैं।

प्रश्न 6.
लैमार्कवाद को समझाइए। लैमार्कवाद की आलोचनाओं पर प्रकाश डालिए। (2013, 15, 17)
या उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिद्धान्त क्या है? (2012)
उत्तर:
लैमार्कवाद जैव विकास के प्रचलित सिद्धान्तों में यह सबसे पुराना सिद्धान्त है। लैमार्क (1744-1829) एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक थे। इन्होंने 1809 ई० में जैव विकास के बारे में अपने सिद्धान्त को फिलोसॉफी जूलोजिक (Philosophie Zollogique) नामक पुस्तक में प्रकाशित कराया। उनका सिद्धान्त लैमार्कवाद (Lamarckism) के नाम से प्रचलित हुआ।

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इन्होंने मुख्यत: चार बातों पर प्रकाश डाला –
1. जीवों की आकार में वृद्धि की प्रवृत्ति जीवों में उनके शरीर अथवा विभिन्न अंगों के आकार में वृद्धि करते रहने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।

2. वातावरण का प्रभाव वातावरण के परिवर्तन के अनुसार जीव स्वयं को अनुकूल बनाने के लिए अपने शरीर की संरचना तथा आदतों में परिवर्तन कर लेता है। इस प्रकार के प्रभावों से उसके कुछ अंगों का उपयोग बढ़ सकता है, अन्य का अपेक्षाकृत कम हो जाता है। इस प्रकार उसके शरीर की रचना में परिवर्तन आ जाते हैं।

3. अंगों का उपयोग और अनुपयोग वातावरण में किसी अंग के उपयोग की अधिक आवश्यकता हो जाती है, तो वह अंग अधिकाधिक पुष्ट तथा विकसित हो जाता है। इसके विपरीत जो अंग कम प्रयोग में आता है, वह धीरे-धीरे क्षीण हो जाता है और अन्त में लुप्त हो जाता है या अवशेषी अंग (vestigeal organ) का रूप ले लेता है।

4. उपार्जित लक्षणों की वंशागति वातावरण के प्रभाव से शारीरिक अंगों के लगातार उपयोग या अनुपयोग से जो नये परिवर्तन उत्पन्न होते हैं, उन्हें उपार्जित लक्षण (acquired character) कहते हैं। ये लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँच जाते हैं। यदि उपार्जित लक्षणों की वंशागति का क्रम चलता रहे, तो सन्तानों में नये परिवर्तन स्थायी तथा नये लक्षण विकसित हो जायेंगे।

इस प्रकार बनने वाली सन्तति अपने पूर्वजों से पूर्णतया भिन्न हो जायेंगी और इस तरह नयी जाति का निर्माण हो जायेगा। अपने सिद्धान्त के समर्थन में लैमार्क ने जिराफ का उदाहरण दिया है। जिराफ दक्षिण अफ्रीका के रेगिस्तान में मिलते हैं। इनकी गर्दन तथा अगली टाँगें अधिक लम्बी होती हैं, जिनकी सहायता से ये ऊँचे वृक्षों की पत्तियाँ खाकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं। लैमार्क के अनुसार जिराफ के पूर्वज आकार में अपेक्षाकृत छोटे थे, उनकी गर्दन कम लम्बी तथा अगली टाँगें पिछली टाँगों के बराबर लम्बी थीं। ये ऐसे युग में रहते थे, जब अफ्रीका की जलवायु इतनी गर्म तथा रेगिस्तानी नहीं थी।

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वहाँ घास के मैदान थे जिनमें वे चरते रहते थे। धीरे-धीरे यहाँ की जलवायु शुष्क तथा रेगिस्तानी होने लगी। घास के मैदान लुप्त होते गये। अत: उन्हें गर्दन तथा अगली टाँगों को उचका-उचकाकर ऊँचे-ऊँचे वृक्षों की पत्तियाँ खाने के लिए विवश होना पड़ा। इस प्रकार गर्दन तथा अगली टाँगों के निरन्तर अधिक उपयोग करने के कारण दोनों ही अंगों की लम्बाई बढ़ती गयी।

यह उपार्जित लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में वंशागत होते रहे और अन्त में जिराफ की वर्तमान जाति के स्थायी लक्षण बन गये। एक अन्य उदाहरण में उन्होंने बताया कि सर्प का शरीर लम्बा होने के कारण उसे झाड़ियों आदि में घुसने में उसकी टाँगें असुविधाजनक थीं। इस प्रकार उसने टाँगों का उपयोग करना बन्द कर दिया। धीरे-धीरे उसकी टाँगें अनुपयुक्त होकर विलुप्त हो गईं और वर्तमान बिना टाँगों वाली सर्यों की जातियाँ विकसित हुईं।

लैमार्कवाद की आलोचना लैमार्कवाद के जैव विकास सम्बन्धी विचारों में अंगों के उपयोग-अनुपयोग की बात कही गई है, साथ ही इनसे उपार्जित लक्षणों को वंशानुगत लक्षण मान लिया गया है। वैज्ञानिकों ने अप्रमाणिकता के आधार पर इस विचार को पूर्णत: अस्वीकार कर दिया। इस आधार पर तो पहलवान का बच्चा पहलवान, अन्धे माता-पिता का बच्चा अन्धा होना चाहिए। एक लोहार के बराबर लोहा पीटते रहने से, उसके हाथ की पेशियाँ अत्यधिक मजबूत हो जाती हैं, किन्तु उसका यह लक्षण उसकी सन्तान में नहीं आता।

वीजमान (Wiesmann) नामक जर्मन वैज्ञानिक ने लैमार्कवाद का अत्यधिक विरोध किया। उन्होंने चूहों पर अनेक प्रयोग किये। एक प्रयोग में कई पीढ़ियों तक वे चूहों की पूँछ काटते रहे, किन्तु उन्हें अन्त तक एक भी पूँछ कटा चूहा प्राप्त नहीं हो सका। किसी भी सन्तति में चूहे की पूँछ उतनी ही लम्बी, मोटी तथा मजबूत मिली जितनी से उन्होंने अपने प्रयोग आरम्भ किये थे। लैमार्क के अनुसार तो अन्तिम पीढ़ी में प्राप्त चूहे बिना पूंछ वाले उत्पन्न होने चाहिए थे। वीजमान का मानना था कि अंगो में उपार्जित होने वाले लक्षण कायिक होते हैं तथा ये वंशानुगत नहीं होते, केवल जननद्रव्य में पहुँचने वाले लक्षणों की ही वंशानुगति होती है।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

प्रश्न 1.
एक पार्क चतुर्भुज ABCD के आकार का है, जिसमें ∠C = 90°, AB = 9m. BC = 12m, CD = 5 m और AD = 8 m है। इस पार्क का क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 1
∆BCD में,
पादपागोरस प्रमेय से,
BD² = BC² + CD²
⇒ BD² = (12)² + (5)²
⇒ BD² = 169
⇒ BD² = 13 m
∴ ∆BCD का.
= \(\frac {1}{2}\) × BC × CD
= \(\frac {1}{2}\) × 12 × 5 = 30 m²
∵ s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (9 + 8 + 13) = 15
∴ ∆ABD का हो = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {15 × 6 × 7 × 2}\)
= 6\(\sqrt {35}\) = 6 × 5.9 = 35.4 m²
[∵ \(\sqrt {35}\) = 5.9]
अत: पार्क का क्षेत्रफल
= ∆BCD का + ∆ABD का झे.
= 30 + 35.4
= 65.4 m²

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प्रश्न 2.
एक चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसमें AB = 3 cm, BC = 4 cm, CD = 4 cm, DA = 5 cm और AC = 5 है।
उत्तर:
पाइथागोरस प्रमेय से.
AC² = AB² + BC²
⇒ (5)² – (3)² + (4)²
⇒ 25 = 25
अत: ∆ABC एक समकोण त्रिभुज है।
⇒ ∆ABC का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × AB × BC
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × 4 = 6 cm²
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 2
अब ∆ADC में,
s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (5 + 4 + 5) = 7 cm
∴ ∆ADC का क्षे. = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {7 × 2 × 3 × 2}\)
= 2\(\sqrt {21}\) = 9.2 m²
[∵ \(\sqrt {21}\) = 4.6]
अत: चतुर्भुज का क्षे. = ABC का हो. + ∆ADC का के.
= 6 + 9.2 = 15.2 cm².

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प्रश्न 3.
राधा ने एक रंगीन कागज से एक हवाई जहाज का चित्र बनाया, जैसा कि आकृति 12.6 में दिखाया गया है। प्रयोग किए गए कागज का कुल क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
(i) भाग का क्षेत्रफल
यहाँ s = \(\frac {5+5+1}{2}\) = 5.5 cm
अतः क्षेत्रफल =\(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {5.5 × 0.5 × 0.5 × 4.5}\)
आत: क्षेत्रफल = 0.75\(\sqrt {11}\) = 0.75 × 3.31
= 2.4825 cm²

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(ii) भाग का क्षेत्रफल
लम्बाई × चौड़ाई = 6.5 × 1 = 6.5 cm².

(iii) भाग का क्षेत्रफल-
समलम्बचतुर्भुज का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × (समान्तर भुजाओं का योग) × लम्बवत् दूरी
= \(\frac {1}{2}\) (AB + DC) × AE
= \(\frac {1}{2}\) (1 + 2) × \(\sqrt {AD^2-DE^2}\)
= \(\frac {1}{2}\) (1 + 2) × \(\sqrt {1-25}\)
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × \(\frac {√3}{2}\) = \(\frac {3×1.732}{4}\) = 1.299 cm².
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iv तथा v भाग का क्षेत्रफल-
2(\(\frac {1}{2}\) × 1.5 × 6) = 9 cm²
कुल क्षेत्रफल = 2.4825 + 6.5 + 1.299 + 9 = 19.28 cm².

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प्रश्न 4.
एक त्रिभुज और एक समाजर चतुर्भज का एक ही आधार है और क्षेत्रफल भी एक ही है। यदि त्रिभुज की भुजाएँ 26 cm, 28 cm और 30 cm है तथा समान्तर चतुर्भुज 28 cm के आधार पर स्थित है, तो उसकी संगत ऊँचा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
नाना त्रिभुज की भुजाएँ a = 26 cm b = 28 cm तथा c = 30 cm
अब, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c) = \(\frac {1}{2}\) (26 + 28 + 30)
= 42 cm
अत: त्रिभुज का क्षेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {42 × 16 × 14 × 12}\)
= \(\sqrt {7 × 6 × 4 × 4 × 7 × 2 × 6 × 2}\)
= 336 cm²
त्रिभुज का क्षेत्रफल = समानार चतुर्भुज का क्षेत्रफल
336 = आधार × ऊंचाई
⇒ ऊँबाई = \(\frac {336}{28}\) = 12 cm.

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प्रश्न 5.
एक समचतुर्भुजाकार धाम के खेत में 18 गावों के चरने के लिए घास है। यदि इस समचतर्भज की प्रत्येक भजा 30 m है और बड़ा विकर्ण 48 m है, तो प्रत्येक गाय को चरने के लिए इस पास के खेत का कितना क्षेत्रफल प्राप्त होगा?
उत्तर:
घास समचतुभुजाकार है तो विकर्ग परस्पर समकोण पर समति भाजित करेंगे।
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तब, पाइथागोरस प्रमेय
की
OA² = AB² – OB²
OA = \(\sqrt {30^2-24^2}\)
= \(\sqrt {(30+24)(30-24)}\)
= \(\sqrt {54×6}\)
= 18 m
⇒ 18 गायों के चरने के लिए घास का क्षेत्रफल
= समचतुर्भुज का क्षेत्रफल
= 4 × ∆AOB का क्षेत्रफल
= 4 × \(\frac {1}{2}\) × 24 × 18 = 864 m²
अत: प्रत्येक गाय के चरने के लिए पास = \(\frac {864}{18}\) = 48 m².

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प्रश्न 6.
दो विभिन्न रंगों के कपड़ों के 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों को सीकर एक छाता बनाया गया है (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए) प्रत्येक टुकड़े के माप 20 cm, 50 cm और 50 cm हैं। छाने में प्रत्येक रंग का कितना कपड़ा लगा है?
उत्तर:
गाना a = 20 cm, b = 50 cm तथा c = 30 cm
राब, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c) = \(\frac {1}{2}\) (20 + 50 + 50) = 60 cm
अत: एक त्रिभुजाकार टुकड़े का गेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {60 × 40 × 10 × 10}\)
= 200√6 cm²
∴ 10 त्रिभुजाकार टुकड़ों से खाता बना है। अत: दोनों रंगों के समान अर्थात् 5 – 5 टुकड़े लगेंगे।
माना पहले पीले रंग के टुकड़े का क्षेत्रफल
= 5 × 200 √6 = 1000 √6 cm²
नषा दूसरे लाल रंग के टुकड़े का क्षेत्रफला
= s × 200 √6 = 1000 √6 cm².

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प्रश्न 7.
एक पतंग तीन भिन-भिन शेडों (Shades) के कागजों से बनी है। इन्हें पाठ्य पुस्तक में दी गई आकृति में I, II और III से दर्शाया गया है। पतंग का ऊपरी भाग 32 cm विकर्ण का एक वर्ग है और निचला भाग 6 cm, 6 cm और 8 cm भुजाओं का एक सपद्विबाहु त्रिभुज है। ज्ञात कीजिए कि प्रत्येक शेड का कितना कागज प्रयुक्त किया गया है।
उत्तर:
माना ABCD एक वर्ग है जिसकी भुजा a cm नया विकर्ण AC = BD = 32 cm
समकोण त्रिभुव ABC मैं,
AB² + BC² = AC²
⇒ a² + a² = (32)²
⇒ 2a² = 32 × 32
⇒ a² = \(\frac {32×32}{2}\) = 512
⇒ वर्ग का क्षेत्रफल = 512 cm²
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वर्ग का विकर्ण वर्ग को दो बराबर भागों । नघा में बोटना है।
∴ I भाग का क्षेत्रफल = II भाग का क्षेत्रफल
= \(\frac {1}{2}\) × 512 = 256 cm
अब, भाग III के लिए (s) = \(\frac {6+6+8}{2}\) = 10 cm
III भाग का क्षेत्रफल = \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {10 × 4 × 4 × 2}\)
= 8√5 = 8 × 2.236 = 17.88 cm²

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प्रश्न 8.
फर्श पर एक फूलों का डिजाइन 16 त्रिभुजाकार टाइलों से बनाया गया है, जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ9 cm, 28 cm और 35 cm हैं (पाठ्य पुस्तक में आकृति देखिए)। इन टाइलों को 50 पैसे प्रति cm² की दर से पालिश कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, त्रिभुजाकार को भुजाएँ 9 cm, 28 cm तथा 35 cm
माना a = 9 cm, b = 28 cm नया c = 35 cm
हम जानते हैं, s = \(\frac {1}{2}\) (a + b + c)
= \(\frac {1}{2}\) (9 + 28 + 35) = 36 cm
प्रत्येक टाइल का क्षेत्रफल
= \(\sqrt {s(s-a)(s-b)(s-c)}\)
= \(\sqrt {36 × 27 × 8 × 1}\)
= 36√6 cm² = 88.2 cm²
[∵ √6 = 2.45]
अत: 16 राइलों का क्षेत्रफल = 16 × 88.2 = 1411.2 cm²
∵ 50 पैसे प्रति cm’ की दर से पालिश कराने का व्यय
= (1411.2 × \(\frac {50}{100}\)) = Rs 705.60.

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प्रश्न 9.
एक खेत समलम्ब के आकार का है जिसकी समानर भुजाएँ 25 m और 10 m हैं। इसकी असमान्तर भुजाएँ 14 m और 13 m हैं। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं. AP = BQ
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2 7
⇒ AP² = BQ²
⇒ (13)² – (x)² = (14)² – (15 – x)²
⇒ 169 – x² = 196 – 225 – x² + 30
⇒ 30x = 198
⇒ x = 6.6 m
अतः AP = \(\sqrt {AD^2-DP^2}\)
= \(\sqrt {13^2-(6.6)^2}\) = 11.2 m
अत: खेत का क्षेत्रफल = \(\frac {1}{2}\) × (AB + DC) × AP
= \(\frac {1}{2}\) (25 + 10) × 11.2
= \(\frac {1}{2}\) × 35 × 11.2
= 196 m².

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Ex 12.2

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी बारम्बारता वितरण को समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है, टिप्पणी लिखें।
(‘A measure of dispersion is a good supplement to the central value in understanding a frequency distribution.’ Comment.)
उत्तर:
परिक्षेपण का माप केन्द्रीय माप का एक सम्पूरक (A measure of dispersion a good supplement to the central value):
परिक्षेपण का माप किसी बारम्बारता वितरण को समझने में केन्द्रीय माप का एक अच्छा सम्पूरक है। केन्द्रीय माप वितरण केवल पहले के बारे में बताता है। यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता। उदाहरण के लिये यदि 10 विद्यार्थियों के समूह के औसत अंक 60 हैं, तो इससे यह अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है कि औसत रूप में विद्यार्थियों का स्तर कैसा है।

परन्तु इससे यह बिल्कुल पता नहीं चलता कि 10 विद्यार्थियों के अंकों में परस्पर कितना अन्तर है। सभी के अंक 60 हैं या कुछ एक के बहुत अधिक हैं और कुछ के बहुत कम है। इसी बात का स्पष्टीकरण एक और उदाहरण लेकर किया जा सकता है। नीचे राम, रहीम और मारिया के परिवारों की आय के आँकड़े दिये गये हैं। राम के परिवार में चार सदस्य हैं। रहीम के परिवार में 6 सदस्य हैं और मारिया के परिवार में 5 सदस्य हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 1

तालिका से पता चलता है कि प्रत्येक परिवार की औसत आय 15000 रुपये (\(\frac { 60,000 }{ 4 } \), \(\frac{90,000}{5}\), \(\frac{75,000}{5}\)) है परन्तु व्यक्तिगत आय में बहुत भिन्नताएँ हैं। अतः यह स्पष्ट है कि औसत वितरण केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् मानों का प्रतिनिधि आकार इसे बेहतर ढंग से समझने के लिये हमें मानों के प्रसार की आवश्यकता है। राम के परिवार में आय की भिन्नता अपेक्षाकृत कम है।

रहीम के परिवार में आय की यह भिन्नता काफी अधिक है, जबकि मारिया के परिवार की यह भिन्नता अधिकतम है। केवल औसत का ज्ञान अपर्याप्त है। यदि आपको किसी अन्य मान की जानकारी हो, जो मान में वितरण की मात्रा को प्रदर्शित करता है, तो उस वितरण के बारे में आपका ज्ञान बढ़ जायेगा। उदाहरण के लिये प्रति व्यक्ति आय केवल औसत आय का प्रदर्शन करती है। परिक्षेपण की माप आपको आय की असमानताओं के बारे में बता सकती है। इस तरह से समाज के विभिन्न वर्गों में लोगों के सापेक्ष जीवनस्तर के बारे में आपको जानकारी में वृद्धि होगी।

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प्रश्न 2.
परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
उत्तर:
प्रमाप विचलन परिक्षेपण का सबसे अच्छा माप है, क्योंकि इसमें अच्छे परिक्षेपण की लगभग सभी विशेषताएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं लेकिन कुछ केन्द्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं।

प्रश्न 4.
एक कस्बे में 25% लोग 45,000 रुपये से अधिक आय अर्जित करते हैं, जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिये।
उत्तर:
1. परिक्षेपण का सापेक्ष मान अर्थात् चतुर्थक विचलन –
= \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = \(\frac{45,000-18,000}{45,000+18,000}\) = \(\frac{27,000}{63,000}\) = 0.428

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प्रश्न 5.
एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल फसल की उपज निम्नवत् है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 2
प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें –
(क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से विचलन
(घ) माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) सिक फसल में अधिक विचरण है
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों की तुलना कीजिए
उत्तर:
गेहूँ की फसल –
(क) परास: 1 – S = 25 – 9 = 16
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q1 = 3\(\frac{(N+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इसी प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से विभाजित करें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें। उसे जोड़ें तथा योगफल को 10 से भाग दें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

चावल की फसल –
परास: 1 – S = 34 – 12 = 22
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q3 = 3\(\frac{(10+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इस प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से भाग दें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें और उसका योगफल ज्ञात करें और योगफल को 10 से विभाजित करें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 6.
पूर्ववर्ती प्रश्न में विचरण के सापेक्ष मापों का परिकलन कीजिए. और वह मान बताएँ, जो आपके विचार में सर्वधिक विश्वसनीय है।
उत्तर:
परास का कोण सापेक्ष माप है परास गुणांक। अतः हम परांस गुणांक की गणना करेंगे।

  1. गेहूँ का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{25-9}{25+9}\) = \(\frac{16}{36}\) = 0.44
  2. चावल का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{34-12}{34+12}\) = \(\frac{22}{43}\) = 0.47
    इसी प्रकार दोनों फसलों की उपजों के चतुर्थक विचलन गुणांक तथा विचरण गुणांक ज्ञात किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन X और Y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है, जो निम्नवत् है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 3
किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिये?
(क) अधिक स्कोर बनाने वाले को या
(ख) अधिक भरोसेमन्द बल्लेबाज को।
उत्तर:
X बल्लेबाज का स्कोर (Score of X batsman):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 4
माध्य (AM) = \(\frac{Σx}{N}\) = \(\frac{350}{5}\) = 70
औसत स्कोर = 70 रन
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \)  = \(\frac{5750}{5}\) = 1150 रन (स्कोर)
प्रमाप विचलन का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) = \(\frac{33.91}{70}\) = 0.84
विचारण (variance) = \(\frac { Σ(X-\bar { X) } }{ N } \) = \(\frac { ΣX^{ 2 } }{ N } \) = \(\frac{5750}{5}\) रन
विचारण का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) × 100 = \(\frac{12.88}{62}\) × 100 = 20.77%

निष्कर्ष (Conclusion):

  1. x बल्लेबाज को चुना जाना चाहिए क्योंकि उसका औसत स्कोर (70 रन) y बल्लेबाज के औसत (62 रन) से अधिक है।
  2. y बल्लेबाज अधिक भरोसेमन्द (विश्वसनीय) है, क्योंकि उसका विचरण गुणांक (C.V = 20.70%) X बल्लेबाज का विचरण गुणांक (48.44%) से कम है।

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प्रश्न 8.
दो ब्राण्डों के बल्ब की गुणवत्ता जाँचने के लिये ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवनकाल को प्रत्येक ब्राण्ड के 100 बल्वों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 5
(क) किस ब्राण्ड का जीवन काल अधिक है?
(ख) कौन-सा ब्राण्ड अधिक भरोसेमंद है?
उत्तर:
ब्राण्ड ‘क’ बल्ब
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of variation)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 7
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 7a
विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of Variation)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 8

निष्कर्ष (Conclusion):

  1. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब का जीवन काल अधिक है क्योंकि बल्ब ‘ख’ का माध्य जीवन काल बल्ब ‘क’ बल्ब के माध्य जीवन काल से अधिक है।
  2. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब अधिक भरोसेमंद है क्योंकि इस बल्ब के इस ब्राण्ड का विचरण गुणांक ‘क’ ब्राण्ड के बल्ब के विचरण गुणांक से कम है।

प्रश्न 9.
एक कारखाने में 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रुपये है तथा मानक विचलन 40 रुपये था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रुपये की वृद्धि की गई, अब मजदूर की औसत मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आई?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में वृद्धि = 20 रुपये
मजदूरी में कुल बृद्धि = 50 × 20 – 1000
मजदूरी बृद्धि से पूर्व कुल मजदूरी का योगफल = 10,000 + 1,000 = 11,000 रुपये
नई औसत मजदूरी = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{11000}{50}\) = 220
अत: नई औसत मजदूरी = 220 रुपये
औसत मजदूरी में परिवर्तन होगा, परन्तु मानक विचलन में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। अब मजदूरी में समानता ज्ञात करने के लिए विचरणता गुणांक ज्ञात करेंगे। आरम्भ में –
C.V. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) = 100 = 20%
बाद में C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) × 100 = 18.18%
अब मजदूरी में अधिक समानता आ गई है क्योंकि विचरण कम हो गया है।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती प्रश्न में यदि प्रत्येक मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाये, तो माध्य और मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि करने पर नया माध्य 200 रुपये (200 + 20) होगा।
मानक विचलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित वितरण के लिये माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन किजिये।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 9
उत्तर:
माध्य से माध्य विचलन और मानक विचनल की गणना (Calculation of mean and standard deviation):
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मध्यिका से विचलन की.गणना (Calculation mean deviation mean):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 11
माध्य विचलन = \(\frac{Σf|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.68
अत: माध्य विचलन = 19.68
माध्य विचलन = \(\frac{f|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.968

प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation);
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 12

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प्रश्न 12.
10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात किजिये।
उत्तर:
प्रमाप विचलन σ = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 3 } }{ N } -(X)^{ 2 } } \)
अथवा, σ2 = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \) – (X)2 = \(\frac{1090}{10}\) – (10)2 = 109 – 100 = 9
अथ्वा, σ = \(\sqrt{9}\) = 3
अतः विचरण गुणाक = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{3}{10}\) × 100 = 300

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक व्यक्तिगत श्रेणी में विचलन की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
माध्य विचलन (M.D.) = (Q.D.) = \(\frac{Σf(d)}{V}\)

प्रश्न 2.
माध्य विचलन प्रायः माध्यिका से ही नहीं लिए जाते हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्यिका से इसलिए लिये जाते हैं, क्योंकि माध्यिका से लिए गये विचलनों का योग न्यूनतम होता है।

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प्रश्न 3.
व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाण विचलन (Standard Deviation) की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रमाण विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σ(X-X)^{ 2 } }{ N } } \)

प्रश्न 4.
प्रमाप विचलन सदैव किस माध्य से लिये जाते हैं?
उत्तर:
प्रमाप विचलन सदैव समान्तर माध्य से लिये जाते हैं, क्योंकि इससे लिए गए विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है।

प्रश्न 5.
प्रसरण (Variance) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसरण (Variance):
(प्रमाण विचलन)2

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प्रश्न 6.
यदि किसी आवृत्ति बंटन का प्रसरण (Variance) 100 है, तो इसका प्रमाण विचलन क्या होगा?
उत्तर:
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt{100=10}\)

प्रश्न 7.
पाँच संख्याओं 1, 4, 5, 7 तथा 8 का प्रमाप विचलन 2, 4, 5 है। यदि प्रत्येक संख्या में 10 जोड़ दिया जाये, तो नया प्रमाप विचलन क्या होगा?
उत्तर:
नया प्रमाण विचलन (σ) = 2.45

प्रश्न 8.
यदि किसी श्रेणी का प्रमाप विचलन 5 है, तो उसका प्रसरण (Variance) कितना होगा?
उत्तर:
प्रसरण (Vriance) (5)2 = 25

प्रश्न 9.
विचरण गुणांक (Coefficient of Variation) क्या होता है?
उत्तर:
विचरण गूणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

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प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य 100 और प्रमाप विचलन 10 है, तो उसका विचरण गुणांक (Coefficlent of Variation) निकालें।
उत्तर:
विचरण गणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

प्रश्न 11.
दो श्रेणियों A तथा B का विचरण गुणांक 20% तथा 10% है, कौन-सी श्रेणी सजातीय अथवा समरूप कहलायेगी?
उत्तर:
B श्रेणी समाजतीय अथवा समरूप कहलायेगी, क्योंकि इसका विचरण गुणांक अपेक्षाकृत कम है।

प्रश्न 12.
एक प्रसामान्य बंटन x + 36 के अन्तर्गत कितनी प्रतिशत मदें शामिल होती हैं?
उत्तर:
\(\bar { X } \) ± 3σ = 99.37% मदें।

प्रश्न 13.
परिक्षेपन की माप कौन-सी श्रेणी की माध्य कहलाती है?
उत्तर:
द्वितीय श्रेणी की।

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प्रश्न 14.
परिक्षेपण के तीन प्रचलित मापों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. प्रमाण विचलन

प्रश्न 15.
विस्तार (Range) किसे कहते हैं?
उत्तर:
विस्तार (R) अधिकतम मूल्य तथा न्यूनतम मूल्य में अन्तर है।
सूत्र के रूप में, R = H – L

प्रश्न 16.
किसी स्कूल में पाँच छात्र के मासिक खर्च क्रमश: 12 रु., 20 रु., 5 रु.,, 40 रु. और 62 रु. है, विस्तार (Range) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विस्तार = 62 रु., – 12 रु. = 50 रु.

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या होता है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन कियी श्रेणी के तीसरे तथा पहले चतुर्थक के अन्तर का आधार है। सूत्र के रूप में,
Q.D = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 18.
कौन से परिक्षेपन के माप में विचलन चिह्नों (+ तथा -) की उपेक्षा की जाती है?
उत्तर:
माध्य विचलन।

प्रश्न 19.
माध्य विचलन (Mean Deviation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक समंकमाला के किसी माध्य (समान्तर माध्य, माध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गये विचलनों को जोड़ के समान्तर माध्य विचलन कहते हैं।

प्रश्न 20.
निम्न सूचनाओं के आधार पर विस्तार ज्ञात करें 20, 30, 40, 50 तथा 200
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 21.
यदि प्रश्न 33 में यदि दिये गये आँकड़ों में 200 हटा दिया जाये तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 50 – 20 = 30

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प्रश्न 22.
प्रश्न 33 में यदि 50 के स्थान पर यदि 150 कर दिया जाये, तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 23.
खले सिरे वाले वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
खुले सिरे वितरण से अभिप्राय उस वितरण से है, जिसमें निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की उच्चतम सीमा या दोनों ही न दिये गये हों।

प्रश्न 24.
उदाहरण से बतायें कि विस्तार अधिकतम सीमा मूल्य से प्रभावित होता है।
उत्तर:
मान लो हम निम्न मूल्य लेते हैं।
10, 15, 20, 50
ऐसी अवस्था में विस्तार = 50 – 10 = 40
यदि अधिकतम सीमा का मूल्य 50 के स्थान पर 100 हो जाये, तो ऐसी अवस्था में विस्तार = 100 – 10 = 90 होगा।
इस प्रकार हम देखते हैं कि विस्तार उच्चतम सीमा के मूल्य से प्रभावित होता है।

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प्रश्न 25.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध अन्तर चतुर्थक विस्तार (Semi-inter-Quartile Range) है।

प्रश्न 26.
प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रमाप विचलन गुणांक = \(\frac{σ}{X}\)

प्रश्न 27.
विचरण गुणांक की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विचरण गुणांक = \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 28.
निम्नलिखित सूचना के आधार पर विचरण गुणांक (C.V.) की गणना करें –

  1. प्रतिदिन प्रति व्यक्ति में मजदूरी के आधार पर विचरण = 9 रुपये
  2. औसत मजदूरी = 120
  3. मजदूरों की संख्या = 50

उत्तर:
C.F. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac { \sqrt { 9 } }{ 20 } \) × 100 = \(\frac{3}{120}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 29.
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विभिन्न विधियाँ लिखें।
उत्तर:
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विधियाँ हैं –

  1. वास्तविक माध्य विधि
  2. काल्पनिक माध्य विधि
  3. प्रत्यक्ष विधि तथा
  4. पद विचलन विधि

प्रश्न 30.
निरपेक्ष तथा सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
निरपेक्ष परिक्षेपण को उन्हीं इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, जिनमें समंक होते हैं (जैसे रुपये, कि. ग्राम)। इसके विपरीत सापेक्ष परिक्षेपण प्रतिशत में या निरपेक्ष परिक्षेपण के गुणांक में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 31.
परिक्षेपण का बिन्दुरेखीय माप कौन-सा है?
उत्तर:
लॉरेंज वक्र।

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प्रश्न 32.
लॉरेंज वक्र किस आर्थिक समस्या के अध्ययन के लिए उपयुक्त है?
उत्तर:
किसी देश की आय तथा सम्पत्ति में असमानताओं की समस्या का अध्ययन करने के लिए लॉरेंज वक्र बहुत उपयुक्त है।

प्रश्न 33.
परिक्षेपण का कौन-सा माप दो श्रेणियों की तुलना के लिए अधिक उपयुक्त हैं?
उत्तर:
विचरण गुणांक।

प्रश्न 34.
विस्तार का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
यह केवल दो चरण मूल्यों पर आधारित है।

प्रश्न 35.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से लिए गए विचलन के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है।

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प्रश्न 36.
निम्न श्रृंखला का विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 13
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{105-50}{105+50}\) = \(\frac{55}{155}\) = 0.354

प्रश्न 37.
यदि प्रमाप विचलन 9 है, तो प्रसरण का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
प्रसारण = σ2 = 9 × 9 = 81

प्रश्न 38.
विस्तार गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\)

प्रश्न 39.
प्रमाप विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
विचलन वर्ग माध्य मूल।

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प्रश्न 40.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध-अन्तर चतुर्थक (Semi-inter-quartile) है।

प्रश्न 41.
सर्वप्रथम प्रसारण शब्द का प्रयोग किसने किया था?
उत्तर:
आर. ए. फिशर ने।

प्रश्न 42.
अच्छे परिक्षेपण के माप की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अच्छा परिक्षेपण श्रृंखला के सभी मदों पर आधारित होता है।
  2. इसकी गणना सरल चाहिए।

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प्रश्न 43.
परिक्षेपण के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. श्रृंखला के गठन अथवा बनावट के विषय में जानकारी देना।
  2. माध्य से प्रभावीपन को जाँचना।

प्रश्न 44.
एक कार्यालय में 10 व्यक्तियों का मध्यमान वेतन 5400 रुपये है। उनमें से एक कर्मचारी का वेतन 6000 रुपये है। बताएं कि इस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है या ऋणात्मक।
उत्तर:
उस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है।

प्रश्न 45.
परिक्षेपण के कौन से माप मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।
उत्तर:
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 46.
परिक्षेपण के कौन से माप मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं।

प्रश्न 47.
परिक्षेपण के माप कितने प्रकार के हो सकते हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण माप दो प्रकार के हो सकते हैं –

  1. निरपेक्ष तथा
  2. सापेक्ष

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प्रश्न 48.
प्रमाप विचलन का एक मुख्य दोष क्या है?
उत्तर:
इसे समझना एवं ज्ञात करना अपेक्षाकृत कठिन है।

प्रश्न 49.
परिक्षेपण के विभिन्न मापों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. निरपेक्ष माप
  2. सापेक्ष माप

प्रश्न 50.
विस्तार का एक दोष लिखें।
उत्तर:
वे श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं हैं।

प्रश्न 51.
कौन-सी परिक्षेपण की माप 50 प्रतिशत मूल्य से सम्बन्धित है?
उत्तर:
अन्तर चतुर्थक विस्तार।

प्रश्न 52.
विचरण क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन के वर्ग को विचरण कहते हैं। समीकरण में, प्रसारण = σ2

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प्रश्न 53.
विचरण गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 54.
प्रमाप विचलन की एक बीजगणितीय विशेषता बताएँ।
उत्तर:
समान्तर माध्य से लिए गए विचलन वर्गों का योग सदैव न्यूनतम होता है।

प्रश्न 55.
सामूहिक प्रमाप विचलन ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 14

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निरपेक्ष और सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जब किसी समंकमाला के विस्तार, बिखराव या विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उसकी इकाई द्वारा ज्ञात किया जाता है, तो उसे परिक्षेपण का निरपेक्ष माप कहते हैं और जब परिक्षेपण के निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग दे और इस प्रकार जो अनुपात या प्रतिशत प्राप्त होता है, परिक्षेपण का सापेक्ष माप कहते हैं।

प्रश्न 2.
परिक्षेपण के आदर्श माप के कोई तीन गुण बताओ।
उत्तर:

  1. आदर्श परिक्षेपन का माप स्पष्ट एवं सरल होता है।
  2. यह सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
  3. निदर्शन में परिवर्तनों का परिक्षेपण के आदर्श माप पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

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प्रश्न 3.
माध्य विचलन (Mean Deviation) और प्रमाप विचलन (Standard Deviation) में अन्तर बताइये।
उत्तर:
1. माध्य विचलन में श्रेणी के मूल्यों में विचलन किसी भी सांख्यिकी माध्य (सामानान्तर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से निकाले जा सकते हैं, जबकि प्रमाप विचलनों में श्रेष्ठ के मूल्यों के विचलन सदैव सामानान्तर माध्य से लिये जाते हैं।

प्रश्न 4.
परिक्षेपण किसे कहते हैं? निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित मापों के नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण से अभिप्राय समंकमाला में विभिन्न मूल्यों के विस्तार, दूरी तथा बिखराव से होता है। बऊले के अनुसार, “परिक्षेपण पदों के विचरण या अन्तर का माप है। परिक्षेपण की सहायता से मदों के केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचलन ज्ञात किये जाते है।” निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित माप –

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. माध्य विचलन
  4. प्रमाप विचलन इत्यादि हैं

प्रश्न 5.
प्रमाप विचलन का क्या अर्थ है? इसको किस चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है?
उत्तर:
किसी श्रेणी के समानान्तर माध्य के विचलनों के वर्गों के समानान्तर माध्य का वर्गमूल प्रमाप विचलन कहलाता है। प्रमाप विचलन के माप के लिए ग्रीक वर्णमाला का अक्षर सिग्मा (Small Sigma) प्रयुक्त किया जाता है। सूत्र के रूप में  –
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X } )^{ 2 } }{ N } } \)

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प्रश्न 6.
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन क्या हैं? इसकी गणना का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
विस्तार परिक्षेपण का सरल माप है। किसी श्रेणी के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अन्तर को विस्तार कहते हैं। इसकी गणना के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
विस्तार = R = L – S
चतुर्थक विचलन को अर्द्ध अन्तर चतुर्थ विस्तार भी कहते हैं। परिक्षेपण का यह माप शृंखला के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के मूल्यों पर आधारित है। इसकी गणना करने के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया हाता है।
चतर्थक विचलन Q.D. = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

प्रश्न 7.
मूल तथा पैमाने में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन, माध्य तथा विचरण पर क्या प्रभाव पड़ोगा?
उत्तर:
1. मूल में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। परन्तु मूल में परिवर्तन आने पर माध्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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प्रश्न 8.
प्रमाप विचलन को विचलन का वर्गों के माध्य मूल भी क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन को विचलन के वर्गों का माध्य मूल भी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह माध्य के विचलनों के वर्गों के माध्य का मूल है। प्रमाप विचलन की गणना में हम पहले माध्य की गणना करते हैं फिर माध्य से मदों विचलन ज्ञात किया जाता फिर विचलनों का वर्ग निकालकर उसका योगफल निकाला जाता है। विचलन के वर्गों के जोड़ को मदों की संख्या से विभाजित किया जाता है और जो परिणाम आता है. उसका वर्गमूल ज्ञात किया हाता है प्रमाप विचलन का चिह्न है। सूत्र रूप में।
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X)N } }{ } } \)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक विशेष वितरण में चतुर्थ विचलन 15 अंक है और चतुर्थ विचलन का गुणांक 0.6 है। Q1 तथा Q2 ज्ञात करें।
उत्तर:
माध्य विचलन (Q.D.) = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \) = 15 अंक
अथवा, Q3 – Q1 = 30
माध्य विचलन का गुणांक = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6
\(\frac { 30 }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6; अथवा, Q3 + Q1 = \(\frac{30}{0.6}\)

  1. तथा
  2. को जोड़ने पर

∴ Q3 + Q1 = 50
Q3 – Q1 = 30
Q3 + Q1 = 50
2Q3 = 80
Q1 = 40 अंक
अब Q3 – Q1 = 30
अतः – Q1 = 30 – Q3
-Q1 = 30 – 40 = -10
Q1 = 10
Q1 = 10 अंक तथा Q3 = 30 अंक उत्तर।

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प्रश्न 2.
11 मनुष्यों की ऊँचाई 61, 64, 68, 67, 68, 66, 70, 65, 67 तथा 72 इंच है। विस्तार ज्ञात किजिए। यदि सबसे छोटे कद वाले व्यक्ति को हटा दिया जाये तब विस्तार में कितने प्रतिशत परिवर्तन होगा?
उत्तर:

  1. विस्तार = L – S = 72 – 61 = 11 इंच
  2. नया विस्तार (सबसे छोटे आदमी को हटाने के पश्चात् = 72 – 64 = 8 इंच
  3. विस्तार में परिवर्तन = 11 – 8 = 3 इंच विस्तार में प्रतिशत परिवर्तन = \(\frac{3}{11}\) × 100 = 27.2%

प्रश्न 3.
निम्न तालिका में 100 व्यक्तियों की ऊँचाई दी गई है। विस्तार विधि से परिक्षेपण ज्ञात करें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 16
विस्तार = L – S = 170 – 161 = s
विस्तार का गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{170-161}{170+161}\) = \(\frac{9}{331}\) = 0.3

प्रश्न 4.
सिद्ध किजिये कि माध्य विचलन सभी मानों पर आधरित होता है। अतः एक भी मान में परिवर्तन इस पर प्रभाव डालेगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनका माध्य विचलन ज्ञात करते हैं – 2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 17
माध्य \(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{15}{5}\) = 2.4
अब हम मान बदल देते हैं। 9 के स्थान पर 14 लेते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 18
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{35}{5}\) = 7
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{16}{5}\) = 3.2
इस प्रकार हम देखते हैं कि मान के बदलने से माध्य विचलन में अंतर आ गया है। पहले माध्य विचलन 24 मान बदलने के बाद यह 3.2 हो गया है।

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प्रश्न 5.
सिद्ध करें कि यदि माध्य विचलन माध्य से परिकलित किया जाये, तो यह अधिक होगा और यदि इसे मध्यिका से परिकलित किया जाये तो यह निम्नतम होगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनसे माध्य विचलन तथा मध्यिका से माध्य विचलन कि गणना करते हैं -2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 19
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य से माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{12}{5}\) = 2.4
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 20
माध्य = \(\frac{N+1}{2}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{5+1}{2}\) = तीसरे मद का मूल्य = 7
माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{11}{5}\) = 2.2
माध्य से विचलन 2.4 है और माध्यिका से माध्य विचलन 2.2 है। अत: सिद्ध हुआ कि मध्यिका से माध्य विचलन से माध्य विचलन से कम होता है।

प्रश्न 6.
इंचों में मापा गया ऊँचाई का प्रमाप विचलन व्यक्ति के उसी समूह में फुटों में मापे गये ऊँचाई के प्रमाप विचलन से अधिक होगा।
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सत्य है। इसका कारण यह है प्रमाप विचलन निरपेक्ष माप है। यह माप कठिनाई उत्पन्न कर सकता है, जब माप की इकाइयाँ भिन्न-भिन्न होती हैं। माप इकाई जितनी कम होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही अधिक बढ़ता जायेगा और माप इकाई जितनी अधिक होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही कम होता जायेगा।

उदाहरण के लिये हम रुपयों के स्थान पर पैसों में आय की गणना करते हैं तो प्रमाप विचलन 100 गुणा बढ़ जायेगा। प्रमाप विचलन में बढ़ोत्तरी बारह गुना होगी। (1 फुट = 12 इंच) इसे हम उदाहरण द्वारा समझा सकते हैं। मान लो 5 वस्तुओं की ऊँचाई नीचे फुटों में दी गई है। इसका हम प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
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अब हम इन्हीं ऊँचाई को इंचों में लेकर प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
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इस तरह हम देखते हैं कि प्रमांप विचलन 12 गुण बढ़ गया है।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से निम्न चतुर्थक (Q1) तृतीय चतृर्थक (Q) की गणना करें –
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उत्तर:
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प्रश्न 8.
फार्मों में एक क्विंटल गेहूँ की उत्पादन लागत का वितरण (रुपयों) में निम्नलिखित हैं।
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(क) विचरण ज्ञात करें।

  • प्रत्यक्ष विधि से
  • पद – विचलन विधि से तथा परिणामों को समान्तर माध्य से और माध्य विचलन से तुलना करें।

(ख) विचरण गुणांक की गणना करें।

  • मूल्यों के प्रमाप विचलन से
  • समान्तर माध्य से, माध्य विचलन से तथा दोनों की तुलना करें। लागतों में विचरण से आप किस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं?

उत्तर:
प्रत्यक्ष विधि से विचरण की गणना –
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विचरण गुणांक की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 27

  1. विचरण गुणांक (प्रमाप विचलन से) = \(\frac{σ}{X}\) = \(\frac{12}{71}\) = 0.169 या 0.17 लगभग
  2. विचरण गुणांक (माध्य विचलन से) = \(\frac{MD}{X}\) = \(\frac{492/50}{50}\) = \(\frac{9.84}{71}\) = 0.138 = 0.04 लगभग

निष्कर्ष:
दो परिणामों में आपस में तुलना करने पर हम कह सकते हैं कि माध्य विचलन को तुलना में प्रमाप विचलन में विचरण गुणांक अधिक है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित विधियों से नीचे दी गई तालिका से प्रमाप विचलन ज्ञात करें। (Calculate standard deviation from the following table)

  1. वास्तविक माध्य विधि (Actual Mean Method)
  2. काल्पनिक माध्य विधि (Assumed Mean Method)
  3. 6 faasta farfa (Step Deviation Method)

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1. वास्तविक माध्य विधि द्वारा प्रमाप विचलन की गणना (Calculationofs.D.with the help of Actual Mean Method)
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2. कल्पित माध्य विधि से प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation by Assumed Mean Method)
हमने यहाँ कल्पित माध्य 40 लिया है।
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3. पद विचलन विधि से प्रमाप विचलन को गणना (Calculation of S.D.by step Deviation Method)
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प्रश्न 10.
लारेंज वक्र के निर्माण में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
लारेंज वक्र के निर्माण में निम्नलिखित चरण निहित हैं –

  1. वर्गों के मध्य बिन्दु परिकल्पित करें तथा उनका संचयी योग पता लगाएं।
  2. संचयी योग को प्रतिशत में बदलें।
  3. बारम्बारता को जोड़ें तथा संचयी बारम्बारता प्राप्त करें।
  4. संचयी बारम्बारता को प्रतिशत में बदलें।
  5. अब ग्राफ पेपर पर चर के संचयी प्रतिशत को y अक्ष पर तथा बारम्बारता के संचयी प्रतिशत को x अक्ष पर प्रदर्शित करें। इस तरह से प्रत्येक अक्ष पर 0 से 100 तक का मान होगा।
  6. निर्देशांक (0,0) को (100, 100) से जोड़ते हुए एक रेखा खींचे। इसे समवितरण रेखा कहा जाता है।
  7. चर के संचयी प्रतिशत को बारम्बारता के संगत संचयी प्रतिशत के साथ अभिलेखित करें। इन बिन्दुओं को मिलाकर एक वक्र प्राप्त करें। आगे लारेंज वक्र का ग्राफ दिया गया।

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प्रश्न 11.
नीचे एक कम्पनी के कर्मचारियों की मासिक आय दी गई है। इसकी सहायता से एक लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
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12. नीचे तालिका की सहायता से लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 37
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प्रश्न 13.
निम्न समंकमाला का प्रसारण (02) तथा इमाप विचलन प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा ज्ञात कीजिए। दोनों विधियों का प्रयोग कीजिए।
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उत्तर:
(क) प्रत्यक्ष विधि द्वारा (Direct Method) –
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प्रश्न 14.
परिक्षेपणं के वैकल्पिक मापों की तलनात्मक विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण के वैकल्पिक मापों की तुलनात्मक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. कठोरता से परिभाषित (Rigidiy defined):
परिक्षेपण के चारों प्रमाण-विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन तथा प्रमापे विचलन को कठोरता से परिभाषित किया जाता है।

2. गणना में सरल (Easyof calculation):
विस्तार की गणना सबसे अधिक सरलता से की जा सकती है। चतुर्थक विचलन की गणना करने के लिए उच्च चतुर्थक (Q3) तथा न्यूनतम (Q2) की गणना करनी पड़ती है। परन्तु इनकी गणना सरलता से की जा सकती है। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन की गणना के लिये थोड़ी अधिक विधिपूर्वक गणना करने की आवश्यकता होती है।

3. सरल व्याख्या (Simple interpretation):
परिक्षेपण के सभी मापों की सरलता से व्याख्या की जा सकती है और उन्हें सरलता से समझा जा सकता है। विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सामान्य रूप से परिक्षेपण को मापते हैं। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मूल्य के विचलन के रूप में करते हैं। अत: माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन मूल्य के परिक्षेपण के बारे में अधिक अच्छी जानकारी देते हैं।

4. सभी मूल्यों पर आधारित (Based on all values):
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सभी मूल्य पर निर्भर नहीं करते। इसके विपरीत माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन चरों के सभी मूल्यों के लेते हैं। विस्तार तो चरम (Extrement) मूल्यों से बहुत ही प्रभावित होती हैं।

5. बीजगणितीय व्यवहार (Algebrical treatment):
लगभग परिक्षेपण के सभी मापों से बीजगणितीय व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 15.
(क) व्यक्तिगत श्रेणी तथा खण्डित श्रेणी से माध्य विचलन की गणना कैसे की जाती है?
(ख) निम्नलिखित सारणी में माध्यिका तथा माध्य विचलन ज्ञात करें। (Calculate mean deviation from median and mean)
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उत्तर:
(क) व्यक्तिगत श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of mean Deviation from Individual Series):

  • वह माध्य ज्ञात करें, जिससे विचलन ज्ञात करना है।
  • माध्यिका/माध्य से (+) या (-) संकेतों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करें।
  • इन विचलनों का योग ΣD ज्ञात करें।
  • कुल योग ΣD को मदों की कुल संख्या से विभाजित करें। सूत्र के रूप में माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\)
  • भजनफल माध्य विचलन होगा।

(ख) खण्डित-श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of Mean Deviation in Discrete Series):

  • दी हुई श्रेणी से माध्यिका ज्ञात करें।
  • के चिह्नों की अवहेलना करते हुए विलचन ज्ञात करना व Σf |D| ज्ञात करें।
  • विचलनों को इनकी आवृत्तियों से गुणा करके इनका योग (Σf |D|) ज्ञात करना।
  • अन्त में, प्राप्त योगफल को पदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन का मूल्य प्राप्त होगा।

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प्रश्न 16.
(क) अखण्डित श्रेणी से माध्य की गणना कैसे की जाती है? (How is mean deviation calculated in case of continuous series?)
(ख) नीचे 50 श्रमिकों की मजदूरी का वितरण दिया गया है। माध्य विचलन ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 45
उत्तर:
(क) अखण्डित श्रेणी के माध्य विचलन की गणना में निम्नलिखित चरण निहित है –

  • वर्गान्तर के मध्य बिन्दु ज्ञात करना। मान लो वर्गान्तर 0 – 10, 10 – 20, 20 – 30 आदि है, तो इनके मध्य बिन्दु 5, 15, 25 होंगे।
  • मध्य बिन्दुओं से माध्यिका या माध्य ज्ञात करें।
  • ± चिह्नों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करना ΣD ज्ञात करना।
  • विचलनों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करना फिर उनका योग निकालना को ΣfD से प्रकट करना।
  • अन्त में प्राप्त योग को मदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन ज्ञात हो जायेगा।

(ख) माध्य विचलन किसी भी माध्य द्वारा निकाला जा सकता है। यहाँ माध्यों का प्रयोग करके माध्य – विचलन की गणना की गई है।
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
परिक्षेपण के सापेक्ष मापक की इकाई –
(a) चर की इकाई होती है।
(b) कोई इकाई नहीं होती है।
(c) चर की इकाई का वर्ग होती है।
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) कोई इकाई नहीं होती है।

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प्रश्न 2.
मानक विचलन की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) चर की इकाई

प्रश्न 3.
विचरण मापक की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चर की इकाई का वर्ग

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प्रश्न 4.
विस्तार से विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 47
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48

प्रश्न 5.
चतुर्थक विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)

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प्रश्न 6.
मध्यायका से विचरण गुणांक का सूत्र है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(c) \(\frac{MD}{M}\)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac{MD}{M}\)

प्रश्न 7.
लघु विधि से मानक विचलन का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 50
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 49

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प्रश्न 8.
विचरण मापांक का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52

प्रश्न 9.
चतुर्थक विचलन होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 4 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(b) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 10.
माध्य विचलन न्यूनतम होता है जब –
(a) मध्यिका से लिया जाता है।
(b) समान्तर माध्य से लिया जाता है।
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मध्यिका से लिया जाता है।

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Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science जीव जनन कैसे करते है InText Questions and Answers

अनुच्छेद 8.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
डी०एन०ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है?
उत्तर:
प्रजनन की मूल घटना है डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियाँ तैयार करना। इसके लिए कोशिकाएँ रासायनिक अभिक्रियाएँ करती हैं जिससे डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियाँ बन जाती हैं। इन प्रतिकृतियों को अलग होने के लिए एक अलग कोशिकीय संरचना की आवश्यकता होती है। डी०एन०ए० की दोनों प्रतिकृतियाँ अलग होकर दो कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। इस प्रकार प्रजनन में दो कोशिकाओं को बनाने के लिए डी०एन०ए० प्रतिकृति आवश्यक है।

प्रश्न 2.
जीवों में विभिन्नता स्पीशीज़ के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है, क्यों?
उत्तर:
जीवों में विभिन्नताओं की किसी जीव के अस्तित्व के लिए आवश्यकता नहीं है क्योंकि उसके जीवित रहने पर कुछ विभिन्नताओं का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। वह समानता के आधार पर अधिक अनुकूल होता है। लेकिन डी०एन०ए० की दोनों प्रतिकृतियाँ बिल्कुल समान नहीं होतीं उनमें कुछ-न-कुछ विभिन्नताएँ अवश्य होती हैं जो धीरे-धीरे गहरी होती जाती हैं। जनन में होने वाली ये विभिन्नताएँ अन्ततः नई स्पीशीज़ के विकास में योगदान देती हैं तथा जैव विकास का आधार बनती हैं। अतः विभिन्नताएँ स्पीशीज़ के उद्भव के लिए आवश्यक हैं लेकिन जीव के जीवित रहने के लिए इनकी कोई आवश्यकता नहीं है।

अनुच्छेद 8.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
द्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
द्विखंडन इस विधि द्वारा एककोशिकीय जीव दो भागों में विभक्त होता है और प्रत्येक भाग एक नए जीव में विकसित होता है; जैसे-अमीबा । बहुखंडन इस विधि में एककोशिकीय जीव अनेक भागों में विभक्त होता है तथा प्रत्येक भाग एक नए जीव में विकसित होता है; जैसे मलेरिया परजीवी (प्लैज़्मोडियम)।

प्रश्न 2.
बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है? उत्तर-बहुत-से सरल बहुकोशिकीय जीवों के वृन्त पर एक कैप्सूल जैसी संरचना होती है जिसे बीजाणुधानी कहते हैं। बीजाणुधानी में बहुत-से बीजाणु भरे होते हैं। ये बीजाणु बड़ी संख्या में होते हैं। इस प्रकार एक बीजाणुधानी से एक बड़ी संख्या में नए जीव उत्पन्न हो सकते हैं। इस प्रकार यह ऐसे जीवों के लिए लाभदायक होता है जिनमें जनन बीजाणु द्वारा होता है। जैसे – राइजोपस।

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प्रश्न 3.
क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नयी संतति उत्पन्न नहीं कर सकते?
उत्तर:
जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते; क्योंकि –

  1. ऐसे जीवों की संरचना अत्यन्त जटिल होती है।
  2. ऐसे जीवों में एक विशिष्ट कार्य करने के लिए विशिष्ट अंग/अंगों की आवश्यकता होती है।
  3. ऐसे जीवों में श्रम विभाजन होता है।
  4. पुनरुद्भवन विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा होता है। ऐसी कोशिकाएँ जटिल जीवों में नहीं होती।

प्रश्न 4.
कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
कायिक प्रवर्धन केवल ऐसे पौधों में ही संभव है जिनके जड, तना या पत्तियों में नए पौधों को उगाने की क्षमता होती है। कुछ पौधों में बीज नहीं होते, ऐसे पौधों को केवल कायिक प्रवर्धन द्वारा ही उगाया जा सकता है। कायिक प्रवर्धन बीजरहित पौधों को उगाना संभव बनाता है। केला, नारंगी, गुलाब, जासमीन व गन्ने में बीज बनने की क्षमता कम है या बिल्कुल नहीं है अतः ऐसे पौधे कायिक प्रवर्धन द्वारा ही उगाये जा सकते

प्रश्न 5.
डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?
उत्तर:
डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक है। यह जनन के लिए एक मूल घटना है। डी०एन०ए० की दो प्रतिकृतियों से ही जनक कोशिका की दो कोशिकाएँ बनती हैं। ये दोनों प्रतिकृतियाँ अलग होना आवश्यक हैं तभी जनन हो सकता है। इसके लिए एक अलग से कोशिकीय संरचना आवश्यक है। एक प्रतिकृति नई संरचना में तथा एक मूल कोशिका में रह जाती है। इस प्रकार दो प्रतिकृतियाँ दो नई कोशिकाएँ बनाने में सहायता करती हैं; और जनन होता है।

अनुच्छेद 8.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
परागण परागकणों के परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया को परागण क्रिया कहते हैं। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की दो कोशिकाओं में संलयन नहीं होता है। यह निषेचन से पहले की क्रिया है। निषेचन निषेचन में नर व मादा युग्मकों का संलयन होता है तथा युग्मनज बनता है। यह परागण के बाद की क्रिया है।

प्रश्न 2.
शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?
उत्तर:
नर जनन तंत्र में कुछ ग्रंथियाँ; जैसे-शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथियाँ होती हैं। इन ग्रंथियों के स्राव शुक्राणु के साथ मिलते हैं। इस प्रकार शुक्राणु एक द्रव में आ जाते हैं। यह द्रव शुक्राणुओं के स्थानांतरण को आसान बनाता है। यह द्रव शुक्राणुओं को पोषण भी प्रदान करता है।

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प्रश्न 3.
यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन से परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर:
यौवनारंभ के समय लड़कियों में निम्न परिवर्तन दिखाई देते है –

  1. स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है।
  2. स्तनाग्र की त्वचा का रंग गहरा होने लगता है।
  3. रजोधर्म प्रारम्भ होने लगता है।
  4. त्वचा तैलीय हो जाती है, चेहरे पर मुहासे निकलने लगते हैं।
  5. श्रोणिभाग चौड़ा तथा नितम्भ भारी हो जाते हैं।
  6. आवाज महीन एवं सुरीली हो जाती है।

प्रश्न 4.
माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?
उत्तर:
निषेचन के बाद युग्मनज बनता है जो धीरे-धीरे भ्रूण में विकसित होने लगता है। भ्रण गर्भाशय की भित्ति से चिपक जाता है। इस प्रक्रिया को इम्प्लांटेशन कहते हैं। भ्रूण माता के शरीर से अपना भोजन प्राप्त करता है। इसके लिए एक विशिष्ट ऊतक, जिसे प्लेसेंटा कहते हैं, होता है। यह एक तश्तरीनुमा संरचना है जो गर्भाशय की भित्ति में घुसा होता है। माता के गर्भाशय की भित्ति विलाई से बनी होती है जो गर्भाशय का क्षेत्रफल बढ़ाता है। इससे भ्रूण को अधिक ग्लूकोज व ऑक्सीजन मिलती है। इस प्रकार भ्रूण माता के शरीर से अपना पोषण प्राप्त करता है।

प्रश्न 5.
यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा करेगा?
उत्तर:
यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा नहीं करेगा।

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प्रश्न 1.
अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है –
(a) अमीबा में
(b) यीस्ट में
(c) प्लैज्मोडियम में
(d) लेस्मानिया में
उत्तर:
(b) यीस्ट में

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?
(a) अंडाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिका
(d) डिबवाहिनी
उत्तर:
(c) शुक्रवाहिका

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प्रश्न 3.
परागकोश में होते हैं।
(a) बाह्यदल
(b) अंडाशय
(c) अंडप
(d) परागकण
उत्तर:
(d) परागकण

प्रश्न 4.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. लैंगिक जनन से जनन संतति में विविधता आती है।
  2. जीन के नए युग्मक बनते हैं जिसके कारण आनुवंशिक विविधिता का विकास होता है।
  3. नए जीवों के विकास में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रश्न 5.
मानव में वृषण के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
नर में प्राथमिक जनन अंग अंडाकार आकृति का वृषण होता है। नर में एक जोड़ी वृषण उदर गुहा के बाहर छोटे अंडानुमा मांसल संरचना में रहते हैं जिसे वृषण कोष कहते हैं। वृषण में शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन की उत्पत्ति होती है। वृषण कोष शुक्राणु बनने के लिए उचित ताप प्रदान करता है।

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प्रश्न 6.
ऋतुस्राव क्यों होता है?
उत्तर:
यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता है तो वह एक दिन बाद नष्ट हो जाता है। गर्भाशय भी निषेचित अंडाणु को प्राप्त करने की तैयारी करता है। गर्भाशय की दीवार मोटी तथा स्पंजी हो जाती है। लेकिन निषेचन न होने पर ये धीरे-धीरे टूटती है और रुधिर व म्यूकस के रूप में योनि मार्ग से बाहर निकलती है। इस प्रक्रिया को रजोधर्म या ऋतुस्राव कहते हैं। अतः ऋतुस्राव निषेचन न होने की अवस्था में होता है।

प्रश्न 7.
पुष्प की अनुदैर्घ्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 8.
गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं? (2011, 13, 14, 16, 17)
या परिवार नियोजन की स्थायी विधियाँ कौन-कौन सी हैं? किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)
उत्तर:
गर्भनिरोधन के लिए बहुत-सी विधियों का विकास किया गया है जो निम्नवत् हैं –

  1. अवरोधिका विधियाँ इन विधियों में कंडोम, मध्यपट और गर्भाशय ग्रीवा आच्छद का उपयोग किया जाता है। ये मैथुन के दौरान मादा जननांग में शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकती हैं।
  2. रासायनिक विधियाँ इस प्रकार की विधि में स्त्री दो प्रकार – मुखीय गोलियाँ तथा योनि गोलियाँ प्रयोग करती है। ये गोलियाँ मुख्यतः हॉर्मोन्स से बनी होती हैं जो अंडाणु को डिम्बवाहिनी नलिका में उत्सर्जन से रोकती हैं।
  3. शल्य या स्थायी विधियाँ इस विधि में पुरुष शुक्रवाहिका तथा स्त्री की डिम्बवाहिनी नली के छोटे-से भाग को शल्यक्रिया द्वारा काट या बाँध दिया जाता है। इसे क्रमशः नर नसबंदी तथा स्त्री नसबंदी कहते हैं।

प्रश्न 9.
एक-कोशिक एवं बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?
उत्तर:
एक-कोशिक जीवों में केवल एक ही कोशिका होती है। उनमें जनन के लिए अलग से कोई ऊतक या अंग नहीं होता है। अत: उनमें जनन केवल द्विविखंडन या बहुविखंडन द्वारा ही हो सकता है। कुछ जीवों जैसे यीस्ट में मुकुलन द्वारा भी जनन होता है। बहुकोशिक जीवों का शरीर बहुत-सी कोशिकाओं से बना होता है। इनमें जनन के लिए अलग से ऊतक या जनन तंत्र होते हैं। अतः इनमें जनन लैंगिक व अलैंगिक दोनों प्रकार से होता है।

प्रश्न 10.
जनन किसी स्पीशीज़ की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
अपनी जनन क्षमता का उपयोग कर जीवों की समष्टि पारितंत्र में स्थान अथवा निकेत ग्रहण करते हैं। जनन के दौरान DNA प्रतिकृति का बनना जीव की शारीरिक संरचना एवं डिजाइन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है जो उसे विशिष्ट निकेत के योग्य बनाती है। अतः किसी प्रजाति (स्पीशीज़) की समष्टि के स्थायित्व का सम्बन्ध जनन से है।

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प्रश्न 11.
गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
जनन एक ऐसा प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी समष्टि की वृद्धि करते हैं। एक समष्टि में जन्मदर एवं मृत्युदर उसके आकार का निर्धारण करते हैं। जनसंख्या का विशाल आकार बहुत लोगों के लिए चिन्ता का विषय है। इसका मुख्य कारण यह है कि बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन-स्तर में सुधार लाना आसान कार्य नहीं है। अत: जनसंख्या की बढ़ती हुई संख्या पर नियन्त्रण रखना जरूरी है। इसलिए गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनानी चाहिए।

Bihar Board Class 10 Science जीव जनन कैसे करते है Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवों में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं – (2014)
(a) वर्धी (कायिक) जनन द्वारा
(b) अलैंगिक जनन द्वारा
(c) लैंगिक जनन द्वारा
(d) स्पोर (बीजाणु) निर्माण द्वारा
उत्तर:
(c) लैंगिक जनन द्वारा

प्रश्न 2.
मुकुलन (Budding) द्वारा अलिंगी जनन निम्नलिखित में से किस जन्तु में होता है? (2017)
(a) मेंढक
(b) अमीबा
(c) केंचुआ
(d) हाइड्रा
उत्तर:
(d) हाइड्रा

प्रश्न 3.
लघु बीजाणु पैदा होते हैं – (2010)
(a) पुमंग में
(b) जायांग में
(c) पुंकेसरों में
(d) परागकोष में
उत्तर:
(d) परागकोष में

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प्रश्न 4.
पुष्प में कितने भाग होते हैं? (2017)
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छः
उत्तर:
(b) चार

प्रश्न 5.
एक पुष्प के स्त्रीकेसर के मध्य भाग को कहते हैं (2014)
(a) वर्तिकाग्र
(b) वर्तिका
(c) अण्डाशय
(d) अण्ड (बीजाण्ड)
उत्तर:
(b) वर्तिका

प्रश्न 6.
परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक स्थानान्तरण कहलाता है। (2014)
(a) परागण
(b) अण्डोत्सर्ग
(c) निषेचन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) परागण

प्रश्न 7.
परागकण का जनन केन्द्रक नर युग्मक बनाता है – (2010)
(a) 4
(b) 2
(c) 3
(d) 1
उत्तर:
(b) 2

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प्रश्न 8.
कीट परागण होता है – (2010)
(a) मक्का में
(b) वैलिस्नेरिया में
(c) सैल्विया में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सैल्विया में

प्रश्न 9.
परागनली में नरयुग्मक की संख्या होती है – (2017)
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 8
उत्तर:
(b) 2

प्रश्न 10.
द्विनिषेचन विशेष लक्षण है – (2014)
या द्विनिषेचन पाया जाता है – (2015, 16)
(a) जन्तुओं का
(b) आवृतबीजी पादप का
(c) अनावृतबीजी पादप का
(d) शैवाल का
उत्तर:
(b) आवृतबीजी पादप का

प्रश्न 11.
द्विनिषेचन क्रिया में त्रिक संलयन के पश्चात् बनने वाले ऊतक का नाम है? (2011)
(a) इन्डोस्पर्म
(b) भ्रूण
(c) मूलांकुर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) इन्डोस्पर्म

प्रश्न 12.
पुष्पी पादपों में निषेचन होता है – (2009)
(a) बीजाण्ड में
(b) अण्डाशय में
(c) पराग नलिका में
(d) भ्रूणकोष में
उत्तर:
(d) भ्रूणकोष में

प्रश्न 13.
एन्जिओस्पर्स में निषेचनोपरान्त बीज कवच बनता है – (2012)
(a) द्वितीयक केन्द्रक से
(b) अध्यावरण से
(c) अण्डाशय भित्ति से
(d) भ्रूणपोष से
उत्तर:
(b) अध्यावरण से

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प्रश्न 14.
निषेचन के बाद पुष्प का कौन-सा भाग फल में बदल जाता है? (2013, 15, 18)
(a) पुंकेसर
(b) वर्तिका
(c) अण्डाशय
(d) बीजाण्ड
उत्तर:
(c) अण्डाशय

प्रश्न 15.
निषेचन के दौरान परागकण से निकलने वाली परागनलिका सामान्यतः किसके द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश करती है? (2016)
(a) अध्यावरण
(b) बीजाण्डकाय
(c) निभागी
(d) अण्डद्वार
उत्तर:
(d) अण्डद्वार

प्रश्न 16.
परिवार नियोजन की स्थायी विधि है – (2018)
(a) गर्भ निरोधक गोलियाँ
(b) निरोध का प्रयोग
(c) वैसेक्टॉमी
(d) गर्भ समापन (गर्भपात)
उत्तर:
(c) वैसेक्टॉमी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कायिक प्रवर्धन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
पौधे के किसी भी कायिक भाग से जब इसी अवस्था में जनन हो जाता है तो इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

प्रश्न 2.
पुमंग एवं जायांग में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2014, 17)
उत्तर:
पुमंग पुष्प के नर जननांग हैं जबकि जायांग पुष्प के मादा जननांग हैं।

प्रश्न 3.
आवृतबीजी बाह्यअण्डप के अनुदैर्घ्य काट का नामांकित चित्र बनाइए। (2013, 17)
उत्तर:
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प्रश्न 4.
फल तथा बीज निर्माण करने वाले पुष्प के भागों के नाम बताइए।
उत्तर:
फल अण्डाशय से तथा बीज बीजाण्ड से बनते हैं।

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प्रश्न 5.
परिवार नियोजन से आप क्या समझते हैं? छोटे परिवार के महत्त्व को समझाइए। (2017)
उत्तर:
परिवार कल्याण हेतु बच्चों की संख्या सीमित कर परिवार को नियोजित करने की प्रक्रिया को परिवार नियोजन कहते हैं। यदि परिवार में बच्चों की संख्या सीमित होगी तो वह परिवार अधिक सुखी जीवन तथा अच्छा रहन-सहन रख सकेगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बीजरहित पौधों में जनन क्रिया किस विधि द्वारा होती है? उदाहरण भी दीजिए। (2013)
या पौधों में कायिक प्रजनन की दो विधियों का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए। (2012, 16)
या कायिक जनन किसे कहते हैं? तने द्वारा इस विधि का एक उदाहरण दीजिए। (2014, 17)
या कायिक जनन किसे कहते हैं? पौधों में इस विधि से क्या लाभ है? (2015, 17)
या पादपों में, अलैंगिक जनन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
उत्तर:
बीजरहित पौधों में जनन क्रिया, कायिक जनन (अलैंगिक जनन) विधि द्वारा होती है। इसके अन्तर्गत पौधे के किसी कायिक अंग; जैसे-जड़, तना, पत्ती, कलिकाओं द्वारा नया पौधा तैयार हो जाता है। पौधों में कायिक जनन की दो प्रमुख विधियाँ कलम लगाना व दाब लगाना हैं।

1. कलम लगाना: (Cutting) इस विधि में तने के कलिका युक्त छोटे-छोटे टुकड़े काट लिए जाते हैं। इन टुकड़ों को कलम (cutting) कहते हैं। इनके निचले सिरों को उचित स्थान पर भूमि में दबा देते हैं, जिनसे कुछ दिनों के बाद जड़ें निकल आती हैं और उपस्थित कलिकाएँ वृद्धि करके नया पौधा बना लेती हैं। गुलाब, कैक्टस, अन्नास, गुड़हल आदि में हम कलम से ही
पौधे उगाते हैं। गन्ने में कलम को भूमि के अन्दर क्षैतिज अवस्था में दबा देते हैं।

2. दाब लगाना: (Layering) कुछ पौधों में हम पौधे की किसी शाखा को झुका कर नम मिट्टी में दबा देते हैं। कुछ समय बाद इससे जड़ें निकल आती हैं और उसके बाद नयी पौध बन जाती है। नयी पौध को इसके पैतृक पौधे से काटकर अलग कर देते हैं। यह वृद्धि करके पूर्ण पौधा बन जाता है। बेला, चमेली, कनेर आदि में यह विधि अपनायी जाती है।

कायिक जनन से लाभ –

  1. जिन पौधों में बीज नहीं बनते (जैसे – केला, अंगूर व अन्नास) इनमें कायिक जनन द्वारा नये पौधे उगाये जाते हैं।
  2. नये पौधे कम समय में उत्पन्न हो जाते हैं।
  3. नये पौधे मातृ पौधों के समान होते है। इनमें विभिन्नताएँ नहीं होती हैं।
  4. पौधों के विशेष ऐच्छिक लक्षणों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनाये रखा जा सकता है।

प्रश्न 2.
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर बताइए तथा एक-एक उदाहरण दीजिए। (2011, 16)
या परपरागण के महत्त्व का वर्णन कीजिए। (2015, 18)
या स्वपरागण के लिए आवश्यक अनुकूलन तथा इनके लाभ एवं हानियाँ बताइए। (2018)
उत्तर:
स्वपरागण व परपरागण में अन्तर क्र०सं० स्वपरागण –
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प्रश्न 3.
निषेचन क्या है? बाह्य एवं आंतरिक निषेचन में अन्तर बताइए। (2014, 17)
उत्तर:
युग्मकों (एक नर व एक मादा) के संलयन को निषेचन कहते हैं। जब निषेचन मादा जन्तु के शरीर के बाहर होता है तो इसे बाह्य निषेचन कहते हैं। इसके विपरीत यदि निषेचन मादा जन्तु के शरीर के अन्दर होता है तो इसे आन्तरिक निषेचन कहते हैं।

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प्रश्न 4.
पौधों तथा जंतुओं के अलैंगिक व लैंगिक जनन में अन्तर बताइए। (2014, 16, 18)
उत्तर:
अलैंगिक व लैंगिक जनन में अन्तर –
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प्रश्न 5.
एक मानव शुक्राणु का नामांकित चित्र बनाइए तथा उस कोशिका का उल्लेख कीजिए जिससे इसका निर्माण होता है। (2013, 17)
उत्तर:
शुक्राणु एक विशिष्ट, दीर्घित (elongated), पुच्छयुक्त कोशिका है जो पोषक तरल (वीर्य) में रहती है। यह नर युग्मक है, जिसका निर्माण शुक्राणु जन कोशिका के अर्द्धसूत्री विभाजन से होता है। वीर्य में सहस्रों की संख्या में शुक्राणु होते हैं।
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प्रश्न 6.
जनसंख्या विस्फोट क्या है ? जनसंख्या वृद्धि से होने वाली हानियाँ तथा बचाव का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2012)
या मानव जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्यायें (चार हानियाँ ) बताइये। (2012)
या जनसंख्या वृद्धि का मानव समाज पर दुष्प्रभाव पर संक्षिप्त निबन्ध लिखिए। (2014)
या जनसंख्या वृद्धि से होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए तथा इसकी वृद्धि को रोकने के उपाय बताइए। (2016)
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में जनसंख्या का उस स्थिति तक बढ़ जाना कि उस क्षेत्र में उपलब्ध खाद्य सामग्री व जल तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन उस जनसंख्या के लिए अपर्याप्त हो जाए जनसंख्या विस्फोट कहलाता है। इससे निम्नलिखित प्रमुख हानियाँ (समस्यायें) उत्पन्न होती हैं –

  1. अपर्याप्त भोजन, कुपोषण आदि के कारण बच्चों की मृत्यु दर बढ़ना तथा दुर्बल सन्तति उत्पन्न होना।
  2. अपर्याप्त आवासों के कारण गन्दे स्थानों पर रहना, जिससे अनेक बीमारियाँ फैलती हैं।
  3. अपर्याप्त वस्त्रों व साधनों के कारण विषम परिस्थितियों ( भीषण गर्मी व सर्दी) में अकाल मृत्यु।
  4.  अपर्याप्त रोजगार के अवसरों के कारण बेरोजगारी जो मानसिक तनाव व अपराधों को बढ़ावा देती है।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के निम्नलिखित बचाव हैं –

  1. शिक्षा की सुविधाओं का अत्यधिक विस्तार होना चाहिए।
  2. प्रति परिवार बच्चों की संख्या निर्धारित की जानी चाहिए।
  3. विवाह की आयु स्त्रियों के लिए कम से कम 21 वर्ष तथा पुरुषों के लिए 25 वर्ष की जानी चाहिए।
  4. गर्भपात को ऐच्छिक एवं सुविधापूर्ण बनाया जाना चाहिए।
  5. परिवार कल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना चाहिए।

प्रश्न 7.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कोई चार कारण लिखिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख चार कारण निम्नवत् हैं –

  1. जन्म दर का अत्यधिक तथा मृत्यु दर का कम होना।
  2. विवाह बन्धन, विवाह की आयु कम तथा वंश चलाने हेतु सन्तान, वह भी पुत्र की अनिवार्यता।
  3. अनेक प्रकार के अन्धविश्वास तथा अशिक्षा।
  4. सन्तति निरोध का अल्प-ज्ञान होना।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुष्प का नामांकित चित्र बनाइए। इसके विभिन्न चक्रों के कार्य बताइए। (2012)
उत्तर:
आवृतबीजी पौधों में नर तथा मादा जननांग पुष्पों में स्थित होते हैं। पुष्प को रूपान्तरित शाखा कहते हैं। इसमें निम्नलिखित चार चक्र (whorls) होते हैं –

  1. बाह्यदल: यह हरे रंग की पत्ती सदृश रचनाओं का चक्र है, जो पुष्प के भीतरी चक्रों की रक्षा करता है।
  2. दल: ये रंगीन होते हैं तथा परागण की क्रिया के लिए कीटों को आकर्षित करते हैं।
  3. पुमंग या एंड्रीशियम: नर जनन अंग इसकी प्रत्येक इकाई को पुंकेसर कहते हैं। पुंकेसर का अगला फूला हुआ भाग परागकोष होता है। परागकोष या एंथर के अन्दर नरयुग्मक या परागकण बनते हैं। परागकण में एकसूत्री नर केन्द्रक होता है।
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  4. जायांग या गाइनीशियम: मादा जनन अंग इसकी प्रत्येक इकाई को अण्डप या काल कहते हैं। काल का निचला फूला हुआ भाग अण्डाशय होता है जिसमें बीजाण्ड या ओव्यूल होता है। बीजाण्ड में मादा युग्मक या अण्ड बनता है। बीजाण्ड से बीज बनता है।

प्रश्न 2.
पुष्पी पौधों में परागण के उपरान्त निषेचन तथा बीज बनने तक जनन की प्रकियाओं को समझाइये।
या द्विनिषेचन या निषेचनोपरान्त पुष्प में होने वाले परिवर्तनों को समझाइए।
या फूलों वाले पौधों में निषेचन क्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए। परागण को परिभाषित कीजिए।
या परागण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए तथा इसके महत्त्व को समझाइए।
या पर-परागण किसे कहते हैं? पर-परागण की विभिन्न विधियों का केवल नाम लिखिए।
या निषेचन के बाद पुष्प के विभिन्न भागों में होने वाले परिवर्तनों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
या द्विनिषेचन पर टिप्पणी लिखिए। (2012, 13, 17)
या पर-परागण को परिभाषित कीजिए। इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
पौधों में परागण से बीज निर्माण तक की अवस्थाएँ लैंगिक जनन के सभी भाग पुष्प में होते हैं।
1. परागकण तथा परागण:
परागकोषों में परागकण बनने के बाद आवश्यक है कि परागकण के –
नर केन्द्रक मादा युग्मक (अण्ड) तक पहुँचे। पुष्प के परागकोष से परागकणों के उसी पुष्प अथवा दूसरे पौधों के किसी पुष्प के वर्तिकान पर पहुँचने की क्रिया को परागण (pollination) कहते हैं। जब एक पुष्प में परागकोषों से परागकण निकलकर उसी पुष्प के वर्तिकान पर गिर जाते हैं तथा अंकुरित हो जाते हैं तो वह क्रिया स्वपरागण (self pollination) तथा जब एक पुष्प से परागकण किसी दूसरे पुष्प (उसी जाति) के वर्तिकाग्र पर आते हैं तो इसे परपरागण (cross pollination) कहते हैं।

इस प्रकार, सभी एकलिंगी पुष्पों में परपरागण ही होता है, किन्तु द्विलिंगी पुष्पों में दोनों में से किसी भी प्रकार का परागण हो सकता है। इनमें परपरागण अधिक महत्त्वपूर्ण है। परपरागण में परागकणों को एक पुष्प से दूसरे पौधे पर उपस्थित पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचाना होता है। इसके लिए किसी-न-किसी साधन या कारक की आवश्यकता पड़ती है। परपरागण के इन कारकों को कर्मक (agents) भी कहते हैं, और ये सामान्यत: वायु, जल अथवा जन्तु (प्रायः कीट) होते हैं। इन्हीं कारकों के आधार पर परपरागण की विभिन्न विधियाँ कीट-परागण, वायु-परागण, जल-परागण आदि होती हैं।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

2. परागकण का अंकुरण:
परागण के द्वारा वर्तिकान पर आये हुए परागकण वर्तिकाग्र के तरल पदार्थ को अवशोषित कर फूल जाते हैं। उनका अन्त:कवच अंकुरण छिद्र (germ pore) से एक नलिका के रूप में बाहर निकलता है जिसे पराग नलिका (pollen tube) कहते हैं। इस समय परागकण का केन्द्रक, दो केन्द्रकों, वर्धी केन्द्रक तथा जनन केन्द्रक में विभाजित हो जाता है। वर्धी केन्द्रक नलिका में आ जाता है और नलिका केन्द्रक कहलाता है। जनन केन्द्रक दो बराबर भागों में विभाजित होकर दो अचल, नर युग्मक (male gametes) बनाता है, जो पराग नलिका में आ जाते हैं।

3. पराग नलिका का बढ़ना तथा भ्रूणकोष में पहुँचना:
पराग नलिका वर्तिकाग्र के ऊतक में होकर वर्तिका में पहुँचती है। यह दोनों नर युग्मकों तथा अपने सिरे पर उपस्थित नलिका केन्द्रक के साथ वर्तिका में नीचे की ओर बढ़ती ही रहती है। इस प्रकार पराग नलिका वर्तिका में से होती हई अण्डाशय में पहुँचती है और बीजाण्ड में प्रवेश कर नर युग्मकों को भ्रूणकोष (embryo sac) के जीवद्रव्य में मुक्त कर देती है [देखें चित्र (b)]
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4. निषेचन बीजाण्ड के भ्रूणकोष (embryo sac) में प्रवेश करने के बाद पराग नलिका का शीर्ष गल जाता है तथा इसमें उपस्थित नलिका केन्द्रक भी लुप्त हो जाता है। दोनों नर युग्मक अब भ्रूणकोष के जीवद्रव्य में मुक्त हो जाते हैं और इनमें से एक अण्ड-कोशिका में घुसकर उसके केन्द्रक के साथ संलयित (fuse) हो जाता है। इस प्रकार, मुख्य निषेचन क्रिया समाप्त हो जाती है। इसमें युग्मनज (zygote) का निर्माण होता है। यह युग्मनज आगे चलकर भ्रूण बनाता है।

दूसरा नर युग्मक, दोनों ध्रुवीय केन्द्रकों (या द्विगुणित केन्द्रक) के साथ संलयन करके एक त्रिगुणित केन्द्रक बनाता है जिसे प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक कहते हैं। इस क्रिया को त्रिक संलयन कहते हैं। प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक बार-बार विभाजित हो जाता है तथा इसके फलस्वरूप सभी केन्द्रकों के चारों ओर भित्तियाँ बन जाती हैं। इस प्रकार जो ऊतक बनता है उसे भ्रूणपोष कहते हैं। भ्रूणपोष में भोज्य-पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं। यह भ्रूण के परिवर्धन के समय उसे पोषण प्रदान करता है। दोहरा निषेचन होने के कारण ही, आवृतबीजियों में यह क्रिया द्विनिषेचन (double fertilization) कहलाती है।

5. निषेचन के पश्चात् बीज का निर्माण:
निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड के भीतर युग्मनज से भ्रूण का तथा त्रिगुणित केन्द्रक से भ्रूणपोष का निर्माण होता है। बीजाण्डों का आकार बढ़ जाता है। अध्यावरण सख्त होकर बीजावरण बनाते हैं। जिस स्थान पर बीजाण्ड बीजाण्डवृन्त से जुड़ता है, वहाँ एक चिह्न बन जाता है जो वृन्तक कहलाता है। भोज्य पदार्थ या तो बीजपत्र में, या भ्रूणपोष में एकत्र हो जाते हैं।

पानी की मात्रा धीरे-धीरे कम हो जाती है। कोमल बीजाण्ड अब कड़ी व शुष्क रचना में बदल जाता है। धीरे-धीरे बीजाण्ड के अन्दर की जैविक क्रियाएँ रुक जाती हैं तथा भ्रूण सुषुप्तावस्था में पहुँच जाता है। अत: बीजाण्ड बीजावरण से घिरे, भोजन संचित किये हुए तथा सुषुप्त भ्रूण को अपने अन्दर समेटे होते हैं, इस रचना को बीज कहते हैं।

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प्रश्न 3.
प्रजनन क्या है? नामांकित चित्र की सहायता से नर अथवा मादा मानव जनन तंत्र का वर्णन कीजिए। (2012, 14)
उत्तर:
जीवधारियों द्वारा लैंगिक क्रियाओं के फलस्वरूप अपने जैसी सन्तानों की उत्पत्ति करने की क्रिया को प्रजनन कहते हैं। पुरुष (नर ) जनन तन्त्र पुरुषों के जनन तन्त्र में एक जोड़ा वृषण (testes) तथा अन्य कई सहायक अंग होते हैं। ये निम्नलिखित हैं –

1. वृषण: (Testes) मनुष्य में लगभग 5 सेमी लम्बे तथा 2.5 सेमी मोटे, गुलाबी रंग के तथा अण्डाकार दो वृषण पाये जाते हैं। ये वृषण उदरगुहा के निकट दो छोटी-छोटी थैलियों जैसी रचनाओं, वृषण कोष (scrotal sacs) में स्थित होते हैं। वृषण कोष उदर गुहा से वंक्षण नाल (inguinal canal) द्वारा सम्बन्धित रहते हैं। वृषणों का उदरगुहा के बाहर वृषण कोषों में स्थित होने का यह लाभ है कि शुक्राणु उदरगुहा के अधिक ताप से बच जाते हैं तथा वृषण कोषों के कम ताप पर इनका परिपक्वन सहज हो जाता है।

प्रत्येक वृषण की संरचना एक पेशी से युक्त लचीले वृषण खोल (testicular capsule) के अन्दर संयोजी ऊतक से बने पिण्डकों से होती है। प्रत्येक पिण्डक में अत्यधिक कुण्डलित शुक्रजनन नलिकाएँ (seminiferous tubules) एक ढीले संयोजी ऊतक में निलम्बित होती हैं। इन नलिकाओं के अन्दर जनन एपिथीलियम कोशिकाओं से शुक्रजनन (spermatogenesis) के द्वारा शुक्राणुओं (sperms) का निर्माण होता है।

2. अधिवृषण या एपिडिडाइमिस: (Epididymis) प्रत्येक वृषण से चिपकी एक लम्बी, संकरी व चपटी संरचना होती है। यह लगभग 6 मीटर लम्बी व अत्यधिक कुण्डलित नली होती है जो वृषण की अपवाहक नलिकाओं के मिलने से बनती है। इसका निचला भाग लचीले तन्तुओं के बने गुबरनैकुलम (gubernaculum) नामक गुच्छे द्वारा वृषण कोष की पिछली भित्ति से जुड़ा रहता है। इसी प्रकार के लचीले तन्तु एपिडिडाइमिस के ऊपरी भाग को वंक्षण नाल में होकर उदरगुहा की पृष्ठ भित्ति से जोड़ते हैं। इन्हीं तन्तुओं के साथ वृषण से सम्बन्धित धमनी, शिरा, तन्त्रिका आदि भी वंक्षण नाल से होकर आती-जाती हैं। ये सभी संयोजी ऊतक के साथ मिलकर छड़ जैसे आकार का वृषण दण्ड (spermatic cord) बनाते हैं।

3. शुक्रवाहिनियाँ: (Vas deferens) अधिवृषण के निचले पश्च भाग से लगभग 45 सेमी लम्बी शुक्रवाहिनी (vas deferens) निकलती है। यह पहले वंक्षण नाल में होकर उदरगुहा में मूत्राशय के पृष्ठ तल पर स्थित अपनी ओर की मूत्रवाहिनी पर एक फन्दा (loop) बनाती है। बाद में यह नीचे मुड़कर पास में ही स्थित शुक्राशय की छोटी-सी नलिका से जुड़ जाती है।

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4. शुक्राशय: (Seminal vesicles) ये मूत्राशय के पीछे स्थित लगभग 5 सेमी लम्बी, वलित थैली के समान संरचनाएँ होती हैं। इनकी भित्तियाँ ग्रन्थिल होती हैं। इनमें एक हल्का पीला, क्षारीय, चिपचिपा तथा पोषक तरल स्रावित होता है। यही तरल वीर्य (semen) का अधिकांश (लगभग 60%) भाग बनाता है जिसमें शुक्राणु गति कर सकते हैं। शुक्राशय से निकलने वाली छोटी-सी नलिका शुक्रवाहिनी के साथ मिलकर स्खलन नलिका (ejaculatory duct) बनाती है जो मूत्रमार्ग (urethra) में खुलती है।
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5. शिश्न: (Penis) यह पेशीय मैथुनांग (copulatory organ) है। शिश्न की संरचना पेशियों एवं रुधिर कोटरों (blood sinuses) से होती है।

6. सहायक ग्रन्थियाँ: (Accessory glands) निम्नलिखित प्रमुख ग्रन्थियाँ जनन की किसी-न-किसी क्रिया में सहायता करने के लिए विशेष स्राव बनाती हैं।

(i) प्रोस्टेट ग्रन्थियाँ: (Prostate glands) एक जोड़ा, द्विपालित ग्रन्थियाँ मूत्राशय के मूत्रमार्ग में खुलने के स्थान से लगी रहती हैं। इससे विशेष गन्धयुक्त, पतला तथा दूधिया तरल स्रावित होता है। यह तरल वीर्य का लगभग 25% भाग बनाता है।

(ii) काउपर ग्रन्थियाँ: (Cowper’s glands) एक जोड़ा, फ्लास्क के आकार की ये ग्रन्थियाँ मूत्रमार्ग के शिश्न में प्रवेश के स्थान पर खुलती हैं। इनसे निकलने वाला स्राव श्लेष्मी तथा क्षारीय होता है। यह वीर्य के साथ मिलकर मार्ग को चिकना बनाता है तथा अम्लता को नष्ट करता है। वीर्य तथा उसके कार्य यह पुरुष के जननांगों के परिपक्वन के बाद बनने वाला एक सफेद तरल पदार्थ है।

इसी तरल पदार्थ में शुक्राणु, श्लेष्मक तथा नर जननांगों में उपस्थित सहायक ग्रन्थियों का स्राव होता है। यह शुक्राणुओं का पोषण करता है। यह एक तरल माध्यम का कार्य करता है जिससे शुक्राणु सुरक्षित स्थानान्तरित हो सकें। मनुष्य में शुक्राणु (Sperms in Man) शुक्राणु एक विशिष्ट, दीर्घित (elongated), पुच्छयुक्त कोशिका है जो पोषक तरल (वीर्य) में रहती है। यह नर युग्मक है। वीर्य में सहस्त्रों की संख्या में शुक्राणु होते हैं।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Bihar Board Class 11 History संस्कृतियों का टकराव Textbook Questions and Answers

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एजटेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग जिन्हें टेनोका भी कहते हैं ने टेनोक्ट्टिलान, टेलाटेलोका नाम की दो राजधानियाँ बसायौं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवताओं और अन्य ईवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननी मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे। 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

मेसोपोटामिया की सभ्यता – मेसोपोटामिया की सभ्यता के अंतर्गत तीन सभ्यताओंसमेरिया, वेबीलोनिया और सीरिया की गणना की जाती है। तीनों सभ्यताओं का जन-जीवन लगभग समान था। समाज में उच्च, मध्य तथा निम्न तीन वर्ग थे। पहले दोनों वर्ग सुखी ऐश्वर्य का जीवन व्यतीत करते थे। निम्न वर्ग के लोग दु:खी थे। समाज में पुरुषों की अपेक्षा सियों का स्थान निम्न था। कृषि सिंचाई द्वारा की जाती थी। मेसोपोटामिया के लोग टीन, ताँबा काँसे से परिचित थे। वस्त्र उद्योग उनका प्रमुख व्यवसाय था। वे अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

मैसोपोटामिया के लोगों ने महान् उपलब्यिाँ प्राप्त की। उन्होंने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। उन्होंने चन्द्रमा के आधार पर एक पंचांग बनाया। इसकी सहायता से वे ऋतुओं तथा ग्रहण लगने का अनुमान लगाते थे। उन्होंने षट्दाशमिक प्रणाली की खोज भी की। इसके आधार पर उन्होंने। घंटे में 60 मिनट और 1 मिनट में 60 सैकेण्ड निश्चित किए। उन्होंने ही सबसे पहली ‘हम्बुराबी की विधि संहिता- नामक कानूनों की एक पुस्तक तैयार की। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुम्हार के चाक, शीशे के बर्तनों और भवन निर्माण की नवीन शैलियों का आविष्कार किया।

प्रश्न 2.
ऐसे कौन-से कारण थे जि+4 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचार।। को सहायता मिली?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौ-चालन में निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुँचाई –

  1. 1380 ई. में कुतबनुमा अर्थात् दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। इससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिल सकती थी।
  2. समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण होने लगा था, जो विशाल मात्रा में माल की ढुलाई कर सकते थे।
  3. ये जहाज आत्मरक्षा के अस्त्र-शस्त्रों से भी लैस होते थे, ताकि शत्रु के आक्रमण का सामना किया जा सके।
  4. पंद्रहवीं शताब्दी के दौरान यात्रा-वृत्तातों, सृष्टि-वर्णन तथा भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने लोगों के ज्ञान में वृद्धि की।
  5. उदाहरण के लिए मिस्रवासी टॉलेमी ने अपनी पुस्तक में विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति अक्षांश और देशांतर रेखाओं द्वारा समझायी थी।
  6. इसे पढ़ने से यूरोपवासियों को संसार के बारे में और अधिक जानकारी मिली। टॉलमी ने यह भी बताया था कि पृथ्वी गोल (Spherical) है।

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प्रश्न 3.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पंद्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया?
उत्तर:

  1. कुछ विशेष आर्थिक कारणों ने स्पेन के लोगों को महासागरी शूरवीर बनाया।
  2. स्पेन तथा पुर्तगाल के साहसी नाविक हर समय समुद्र में उतरने को तैयार रहते थे क्योंकि उन्होंने अटलांटिक महासागर की दूसरी ओर की भूमि को बहुत कम आँका था।
  3. स्पेन और पुर्तगाल के शासक नयी समुद्री खोजों के लिए धन जुटाने को तैयार रहते थे।

प्रश्न 4.
कौन-सी नई खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमेरिका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका से मक्का, कसावा, कुमाला, आलू आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं।

प्रश्न 5.
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राजील ले जाए गये सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करों।
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए लड़के की यात्रा बहुत ही कष्टमय थी। उसे अन्य गुलामों के साथ जहाज में ढूंसा गया और बेड़ियों से जकड़ा गया । उसे कई दिनों तक भूखा-प्यासा भी रखा गया।

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प्रश्न 6.
दक्षिणी अमेरिका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया?
उत्तर:
यूरोप के देश विशेषकर स्पेन तथा पुर्तगाल सोना-चाँदी के लालची थे। उन्हें दक्षिणी अमेरिका में भारी मात्रा में सोना मिलने की आशा थी। इसलिए यूरोपवासी दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न प्रदेशों में जा बसे। उन्होंने अपने सैन्य-बल तथा बारुद के प्रयोग द्वारा वहाँ अपना शासन स्थापित कर लिया। विरोध होने पर उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों को बुरी तरह कुचला। उन्होंने वहाँ के लोगों से नजराने वसूल किए। स्थानीय प्रधानों का प्रयोग उन्होंने नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए किया।

सोने-चांदी के विशाल भंडारों का पता चलने पर और अधिक यूरोपवासी वहाँ जा बसे। उन्होंने स्थानीय लोगों को दास बना लिया और उन्हें ‘खानों” में काम करने के लिए विवश किया। इस प्रकार दक्षिणी अमेरिका पूरी तरह यूरोपीय साम्राज्यवाद की जकड़ में आ गया।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूमि उद्धार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भूमि उद्धार से अभिप्राय बंजर भूमि को आवासीय या कृषि योग्य भूमि में बदलने से है। कई बार विभिन्न जलस्रोत से जमीन लेकर भी भूमि उद्धार किया जाता है।

प्रश्न 2.
एजटेक लोगों के ‘चिनाम्पा’ क्या थे?
उत्तर:
चिनाम्या मैक्सिको झील में बने कृत्रिम द्वीप थे। एजटेक लोगों ने इन्हें सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और मिट्टी तथा पत्रों से ढंक कर बनाया था। ये द्वीप अत्यंत उपजाऊ थे।

प्रश्न 3.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की दो विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:

  • वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  • इनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशु-पालन से अपरिचित थे।

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प्रश्न 4.
माया लोगों की दो अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:

  • गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  • हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों की लिपि अंशत: चित्रात्मक तथा अंशत: ध्वन्यात्मक थी।

प्रश्न 5.
माया सभ्यता का विस्तार बताएँ।
उत्तर:
माया सभ्यता 300 ई० के बीच अपनी उन्नति की चरम सीमा पर थी। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग पर फैली हुई थी। इसमें ग्वातेमाला, मैक्सिको, हांडूरास तथा यूकातान के प्रदेश सम्मिलित थे।

प्रश्न 6.
अमेरिकी मूल सभ्यताओं के पतन के बारे में लिखें।
उत्तर:
1532 ई० में स्पेन की सेना ने फ्रांसिस्को पिजारों के नेतृत्व में इंका सभ्यता को नष्ट कर दिया। इस प्रकार विदेशी आक्रमणों के कारण 16वीं शताब्दी में अमेरिकी सभ्यताओं का पतन हो गया।

प्रश्न 7.
इंका सभ्यता के मुख्य केंद्र बताएँ।
उत्तर:
इंका सभ्यता का प्रमुख केंद्र टिंट्टीका की झील थी। इसके अन्य मुख्य केंद्र आधुनिक इक्वाडोर, पेरू तथा बोलीविया थे।

प्रश्न 8.
माया सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • कृषि इनका मुख्य व्यवसाय था। इनका मुख्य आहार मक्का था।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। उन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया।

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प्रश्न 9.
प्राचीन मिस्त्र तथा माया पंचांगों में दो असमानताएं बताएँ।
उत्तर:

  • मिस्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचागों में वर्ष 18 महीने का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की दो : गगनताएँ बताओ।
उत्तर:

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे। इसका कारण यह था कि ये दोनों सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

प्रश्न 11.
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों के बस जाने का क्या परिणाम निकाला?
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ। इसी से दास-व्यापार आरंभ हुआ। इसके अंतर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से दास पकडकर या खरीदकर उन्हें उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खानों तथा बगानों में काम करने के लिए बेचने लगे।

प्रश्न 12.
हम अमेरिका के मूल निवासियों तथा यरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के बारे में मूलनिवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते पर यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। इसका क्या कारण है?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि अमेरिका की यात्राओं पर जाने वाले यूरोपवासी अपने साथ रोजनामचा (log-book) और डायरियाँ रखते थे। इनमें वे अपनी यात्राओं का दैनिक विवरण लिखते थे। हमें सरकारी अधिकारियों, एवं जेसुइट धर्मप्रचारकों के विवरणों से भी इसके बारे में जानकारी मिलती है। परंतु यूरोपवासियों ने अपनी अमेरिका की खोज तथा वहाँ के देशों का जो इतिहास लिखा है उनमें यूरोपीय बस्तियों के बारे में ही अधिक बताया गया है। स्थानीय लोगों के बारे में बहुत कम या न के बराबर ही लिखा गया है।

प्रश्न 13.
15वीं से 17वीं शताब्दी तक दक्षिणी तथा मध्य अमेरिका का भौगोलिक परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका घने जंगल और पहाड़ों से ढंका हुआ था। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेशों से होकर बहती थी। मध्य अमेरिका में, मैक्सिकों में समुद्र तट के आसपास के क्षेत्र और मैदानी प्रदेश घने बसे हुए थे, जबकि सघन वनों वाले क्षेत्रों में गाँव दूर-दूर स्थित थे।

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प्रश्न 14.
जीववादी (Animists) कौन होते हैं?
उत्तर:
जीववादी वे लोग होते हैं जो इस बात में विश्वास रखते हैं कि वैज्ञानिक जिन वस्तुओं को निर्जीव मानते हैं, उनमें भी जीवन या आत्मा हो सकती है।

प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे ? उनकी दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरोबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीपसमूहों तथा वृहत्तर ऐटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे।

विशेषताएं –

  • ये लोग लडने की बजाय बातचीत से झगडा निपटाना अधिक पसंद करते थे।
  • वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ों के खोखले तनों से अपनी डॉगियाँ बनाते थे।

प्रश्न 16.
दक्षिणी अमेरिका के तुपिनांबा लोगों को कृषि पर निर्भर क्यों नहीं होना पड़ा?
उत्तर:

तुपिनांवा लोगों के पास भेड़ काटने के कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके।
उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा।

प्रश्न 17.
मध्य-अमेरिका में शहरीकृत सभ्यताओं के विकास में किन तत्वों ने सहायता पहुँचाई? इन शहरों की क्या मुख्य विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
मध्य अमेरिका में कुछ अत्यंत सुगठित राज्य थे । वहाँ मक्का का भरपूर उत्पादन होता था। जो एजटेक, माया और इंका जनसमुदायों की शहरीकृत सभ्यताओं का आधार बना। इन शहरों की मुख्य विशेषता इनकी भव्य वास्तुकला थी।

प्रश्न 18.
माया सभ्यता के लोगों के धर्म की कोई दो विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:

  • माया सभ्यता के लोग वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि, मक्का आदि देवताओं की पूजा करते थे।
  • माया लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अपने शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि का भी रिवाज था।

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प्रश्न 19.
कोलंबस को वापसी यात्रा अधिक कठिन क्यों थी?
उत्तर:
कोलंबस की वापसी यात्रा निम्नलिखित कारणों से अधिक कठिन थी –

  • उसके जहाजों को दीमक लग गई थी।
  • उसके साथी नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी।

प्रश्न 20.
कोलंबस कहाँ का निवासी था? वह ‘इंडीज’ कब पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस स्पेन का निवासी था। वह 12 अप्रैल, 1492 ई० को इंडीज पहुँचा।

प्रश्न 21.
कैपिटुलैसियोन (Capitulaciones) क्या थे?
उत्तर:
कैपिटुलैसियोन एक प्रकार के इकरारनामे थे। इन इकरारनामे द्वारा स्पेन का शासक नए जीते हुए प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता जमा लेता था। उन्हें जीतने वाले नेताओं को पुरस्कार के रूप में पदवियाँ और जीते गए देशों पर शासनाधिकार दिया जाता था।

प्रश्न 22.
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) क्या थी?
उत्तर:
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप पर प्राप्त की गई सैनिक विजय थी । इस विजय द्वारा इन राजाओं ने 1492 ई. में इस प्रायद्वीप को अरबों के नियंत्रण से मुक्त करा लिया था।

प्रश्न 23.
14वीं शताब्दी के बाद यूरोप, विशेषकर, इटली के लंबी दूरी के व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
14वीं शताब्दी के बाद के दशकों में यूरोप के लंबी दूरी के व्यापार में गिरावट आ गई। 1453 ई. में तुकों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) की विजय के बाद तो यह और भी कठिन हो गया। इटलीवासियों ने किसी प्रकार तुकों के साथ व्यापारिक संबंध तो बनाए रखा, पर उन्हें व्यापार पर अधिक कर देना पड़ता था।

प्रश्न 24.
सृष्टिशास्त्र (Cosmography) क्या था?
उत्तर:
सृष्टिशास्त्र विश्व का मानचित्र बनाने का विज्ञान था। इसमें स्वर्ग और पृथ्वी दोनों का वर्णन किया जाता था। परंतु इसे भूगोल और खगोल से अलग शास्त्र माना जाता था।

प्रश्न 25.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियों की कुछ समानताएँ यूरोपीय संस्कृति से बहुत भिन्न थीं। इनका उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एजटेक तथा इंका समाज श्रेणीबद्ध था परंतु वहाँ यूरोप की तरह संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।
  2. पुरोहितों और शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था । यद्यपि भव्य मंदिर बनाए जाते थे, जिनमें सोने दा प्रयोग किया जाता था।
  3. फिर भी सोने, चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता था। तत्कालीन यूरोपीय समाज की स्थिति इससे बिलकुल विपरीत थी।

प्रश्न 26.
इंका लोगों ने उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति कैसे की?
उत्तर:
ईका सभ्यता का आधार कृषि था। परंतु भूमि अधिक उपजाऊ नहीं थी। इसलिए उन्होंने पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल-निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित की। इस प्रकार इंका लोगों ने कम उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति की।

प्रश्न 27.
एजटेक जाति ने कब और किस प्रकार सत्ता प्राप्त की? इनका राज्य विस्तार कितने क्षेत्र में था?
उत्तर:
एजेटक जाति ने 1220 ई० में टोलटेक शक्ति को समाप्त करके उनके राज्य पर अधिकार कर लिया। उनका राज्य विस्तार दो लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था।

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प्रश्न 28.
एजटेक सभ्यता की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
एजटेक एक युद्धप्रिय जाति थी। उन्होंने अपनी वीरता से एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 29.
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था पर नोट लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था कृषि पर आधारित थी। इसके अतिरिक्त कई लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने आदि का कार्य भी करते थे।

प्रश्न 30.
एजटेक लोगों के धर्म के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
एजटेक लोग सूर्य देवता और अन्न देवी की पूजा करते थे। उनमें मानव बलि का बहुत रिवाज था। उनके अधिकतर भव्य मंदिर युद्ध के देवताओं तथा सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि वे युद्धों को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका पर स्पेन तथा पर्तगाल का शासन था। स्पेनी तथा पुर्तगाली दोनों ही भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार की हैं। इसी कारण दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पोटोसी (Potasi) के ‘नरक का मुख’ किसने कहा था और क्यों?
उत्तर:
पोटोसी को एक संन्यासी डोमिनिगो डि सैंटो टॉमस ने ‘नरक का मुख’ कहा था। इसका कारण यह था कि वहाँ की खानों में काम करने वाले हजारों इंडियन हर साल मौत का शिकार हो जाते थे। वहाँ के खान मालिक लालची और निर्दयी थे जो इंडियन लोगों के साथ जानवरों जैसे व्यवहार करते थे।

प्रश्न 33.
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली वह प्रणाली होती है जिसमें उत्पादन तथा वितरण का स्वामित्व निजी हाथों में होता है। उत्पदन मुख्यतः मुनाफा कमाने के लिए पिया जाता है जिसमें खुली प्रतिस्पर्धा होती है।

प्रश्न 34.
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए यूरोपीय अभियानों के क्या तात्कालिक परिणाम निकले?
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए, इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए।

  1. जैसे मार काट के कारण मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई।
  2. उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया।
  3. उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

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प्रश्न 35.
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले जेसुइट पादरियों को पसंद नहीं करते थे क्यों?
उत्तर:
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले पादरियों को निम्नलिखित कारणों से पसंद नहीं करते थे –
1. ये पादरी वहाँ के मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे। वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और उन्हें यह सिखाते थे ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें उसका आनंद लेना चाहिए।

2. सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्म प्रचारक दास प्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

प्रश्न 36.
स्पेनियों की मैक्सिको विजय का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
स्पेनियों द्वारा मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने के दो वर्ष पश्चात् कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन-जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया । मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala) निकारगुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 37.
कोलंबस की विशेष उपलब्धि क्या रही?
उत्तर:
कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 38.
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों का नामकरण किसके नाम पर हुआ?
उत्तर:
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिंगों वेस्पुस्सी’ (AmerigoVespucci) के नाम पर किया गया जिसने उनके विस्तार को समझा और उन्हें ‘नयी दुनिया’ (New world) का नाम दिया। इन महाद्वीपों के लिए ‘अमेरिका’ (America) नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशन द्वारा 1507 ई० में किया गया।

प्रश्न 39.
डोना मैरीना कौन थी?
उत्तर:
बर्नार्ड डियाज डेल कैस्टिलो (Bernard Diaz DelCastillo) ने अपने टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको में लिखा है कि टैबैस्को (Tabasco) के लोगों ने कोर्टस को डोना मैरीना नाम की एक सहायिका दी थी। वह तीन भाषाओं में प्रवीण थी और उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये का काम किया था। डियाज के विचार में वह एक राजकुमारी थी। परंतु मैक्सिकन लोग उसे ‘मालिंच’, अर्थात् विश्वासघातिनी कहते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिकी मूल संस्कृतियों के आर्थिक प्रबंध के बारे में बताएँ।
उत्तर:
अमेरिकी मूल संस्कृतियों से अभिप्राय माया, एजटेक तथा इंका सभ्यताओं से है।

  1. माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। मक्का उस समय की मुख्य उपज थी। कुछ लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने तथा अन्य हस्तशिल्पों में लगे हुए थे।
  2. एजटेक लोगों के मुख्य उद्योग-धंधे, धातु-कर्म, बर्तन बनाना तथा सूती कपड़ा बुनना था। कुछ लोग कृषि करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू तथा शक्करकंद उगाते थे।
  3. इंका लोगों की आर्थिक अवस्था सोने तथा चाँदी से संबंधित थी। इन धातुओं से सजावट का सामान तथा अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं। कुछ लोग व्यापार भी करते थे, जो वस्तुओं की अदला-बदली (वस्तु-विनिमय) द्वारा होता था।

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प्रश्न 2.
अमेरिका के आंरभिक लोगों तथा भौगोलिक विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका और निकटवर्ती द्वीप समूहों में हजारों वर्षों से अनेक जनसमुदाय रहते आए थे। एशिया तथा दक्षिणी सागर के द्वीपों (South Sea Island) से भी लोग वहाँ जाकर बसते थे। दक्षिणी अमेरिका घने जंगलों और पहाड़ों से ढका हुआ था। आज भी उसके अनेक भाग जंगलों से ढंके हुए हैं। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेश से होकर बहती है। मध्य अमेरिका में, गाँव दूर-दूर स्थित थे।

प्रश्न 3.
अरवाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे? उनकी तथा उनकी संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और बृहत्तर एंटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे। कैरिव (Caribs) नामक एक खूखार कबीले ने उन्हें लधु ऐंटिलीज (Lesser Antilles) प्रदेश से खदेड़ दिया था। दूसरी ओर खरावाक लोग लड़ने की बजाय बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे। वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ के खोखले तनों से अपनी डॉगियां बनाते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू, कंद-मूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति – अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animasts) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक सामज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्पूर्ण भूमिका निभाते थे।

प्रश्न 4.
यूरोपीय लोगों (स्पेनिश) की अरावाकों के प्रति क्या नीति थी? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भाँति वे सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले शीशे के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न हो जाते थे, क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अराबाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सी की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया । इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाकों और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 5.
तुपिनाँबा लोग कौन थे? यूरोपवासियों को उनसे ईर्ष्या क्यों होती थी?
उत्तर:
‘तुपिनांबा’ (Tupinamba) कहे जाने वाले लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्र तट पर ओर ब्राजील नामक वृक्षों से बसे गाँवों में रहते थे। उनके पास पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था। इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके। परंतु उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इनके जीवन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था। वहाँ न तो कोई राजा था, न सेना और नहीं कोई चर्च । अतः उनके संपर्क में आने वाले यूरोपवासी उनके इस स्वतंत्र विचरण को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगे।

प्रश्न 6.
एजटेक लोगों का समाज श्रेणीबद्ध था। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एजटेक समाज वास्तव में ही श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। रिवाज में योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को गुलामों के रूप में बेंच देते थे। परंतु यह बिक्री प्रायः कुछ वर्षों के लिए ही रहती थी। गुलाम अपनी स्वतंत्रता फिर खरीद सकते थे।

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प्रश्न 7.
एजटेक लोगों के आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (Reclamation) किया। उन्होंने सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर माक्सको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये । इन्हें चिनाम्पा (Chinampas) कहते थे।

2. इन अत्यंत उपजाऊ द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिट्लान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील के बाहर झाँकते दिखाई देते थे।

3. एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

4. साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्, कसावा, आलू तथा अन्य कुछ फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतीहर लोग अभिजात की जमीनें जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था।

प्रश्न 8.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की मुख्य सामान्य विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
आदि अमेरिका सभ्यताओं में अनेक सामान्य विशेषताएँ थीं –

  1. वे लोग पत्थर की वास्तुकला में निपुण थे। उनके औजार पत्थर के ही बने हुए थे। धातुओं का प्रयोग केवल आभूषण बनाने में किया जाता था।
  2. वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  3. उनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशुपालन से अपरिचित थे।
  4. इन सभ्यताओं के लोगों ने बर्तन बनाने, बुनाई और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी निपुणता प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 9.
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –

  1. पंचांग – सौर पंचांग की भाँति माया वर्ष में भी 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिन को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे।
  2. गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  3. हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।
  4. कलात्मक उपलब्धियाँ – माया लोग भवन-निर्माण कला, चित्रकला तथा मूर्ति कला में बड़े निपुण थे। उन्होंने भव्य पिरामिड, चौक, मंदिर तथा वेधशालाओं का निर्माण किया ।
  5. चाक पर बने बर्तन – माया लोगों ने चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की तुलना करें।
उत्तर:
समानताएँ –

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे अर्थात् वे दोनों ही सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

असमानताएँ –

  • मिस्त्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचांग में वर्ष 18 महीने. का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।
  • माया सभ्यता के लोग वर्ष में शेष पाँच दिनों को अशुभ समझते थे जबकि मिस्त्री लोग शेष पाँच दिनों में उत्सव मनाया करते थे।

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प्रश्न 11.
इंका और एजटेक सभ्यताओं की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर:
इंका सभ्यता-इस सभ्यता की उपलब्धियां निम्नलिखित थीं –

  • कुशल प्रशासन – इंका साम्राज्य चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन, पुरुष शासन करता था।
  • उन्नत नगर – का साम्राज्य में नगरों की भरमार थी। उन नगरों में बहुत-से विशाल भवन होते थे। इनमें किले, मंदिर, महल आदि शामिल थे।
  • कला तथा दस्तकारी – इंकः सभ्यता में कलाएँ तथा दस्तकारियाँ की विकसित थीं।
  • धातुओं का योग – इंका सभ्यता के लोग सोने, चाँदी तथा ताँबे के आभूषण बनाते थे। वे अपने हथियार और औजार बनाने के लिए काँसे का प्रयोग करते थे।

एजटेक सभ्यता – इस सभ्यता की उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –

  • शक्तिशाली साम्राज्य – एजटेक लोगों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। वह साम्राज्य 38 प्रांतों में बँटा हुआ था।
  • पंचांग – एजटेक लोगों का अपना अलग पंचांग था। उनके पंचांग के अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • धातुओं का प्रयोग – उन्होंने नरम धातुओं को पिघलाना सीख लिया था।
  • धर्म – वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे जैसे-सूर्य देवता और अन्न देवी।

प्रश्न 12.
आदिम अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ किन मुख्य अर्थों में प्राचीन एशियाई और यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं?
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ निम्नलिखित अर्थों में प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं –
1. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों को कृषि के विषय में काफी ज्ञान था परंतु वे पशुपालन से अपरिचित थे। धार्मिक दृष्टि से उन लोगों में मक्का की कृषि का बड़ा महत्त्व था। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोगों ने कृषि तथा पशुपालन का कार्य एक साथ ही आरंभ किया।

2. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों ने धातु का प्रयोग केवल आभूषण बनाने के लिए ही आरंभ किया। फिर भी उन्होंने बर्तन निर्माण, बुनाई, पंख-मोजेक और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी दक्षता प्राप्त कर ली थी। आदिम अमेरिकी सभ्यता की यह विशेषता प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न थी।

3. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोग हल तथा पहिये के प्रयोग से अपरिचित थे। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोग इन दोनों के प्रयोग के विषय में जानकारी रखते थे।

4. आदिम अमेरिकी लोगों ने बहुत लंबे समय तक पत्थर के औजारों का ही प्रयोग किया। यहाँ तक कि स्मारकों की वास्तुकला तथा महान् अमेरिकी सभ्यताओं की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ भी केवल पत्थर के औजारों की सहायता से ही तैयार की गई। इस दृष्टि से प्राचीन एशिया तथा यूरोप की सभ्यताओं के लोग कहीं आगे थे। वे पत्थर के हथियारों को लगभग भूल चुके थे और लोहे के मजबूत हथियारों का प्रयोग करने लगे थे।

5. आदिम अमेरिकी लोगों की कोई लेखन प्रणाली नहीं थी। इसके विपरीत एशिया तथा यूरोप में विकसित सभ्यताओं की अपनी-अपनी लेखन प्रणालियाँ थीं।

प्रश्न 13.
इंका लोगों के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन का वर्णन करें।
उत्तर:
1. सामाजिक जीवन – इंका समाज में सम्राट् को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। उसे सूर्य का वंशज समझा जाता था। सम्राट् के पश्चात् समाज में दूसरा स्थान कुलीन तथा पुरोहितों का था। उनके पश्चात् साधारण लोगों की श्रेणी थी जिसमें दस्तकार तथा किसान सम्मिलित थे।

2. आर्थिक जीवन – इंका लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू और शकरकंद उगाते थे। इंका सभ्यता में कला और शिल्प काफी उन्नत थे। इन शिल्पों में मिट्टी के बर्तन बनाना, कपड़े बुनना तथा लामा और अल्पाका से ऊन प्राप्त करना शामिल था। इसके अतिरिक्त इंका लोग काँसे के हथियार तथा औजार और सौने-चाँदी के आभूषण भी बनाते थे।

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प्रश्न 14.
अमेरिकी सभ्यताओं के विज्ञान की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –
1. पंचांग – लोगों ने अपना पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा । प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिनों को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे। एजटेक लोगों ने भी अपना पंचांग बनाया जो माया पंचांग जैसा ही था।

2. गणित का ज्ञान-माया लोगों को गणित का भी अच्छा ज्ञान था। वे शून्य के लिए विशेष प्रकार के चिह्न प्रयोग करते थे।

3. हेरोग्लिफिक लिपि-माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।

4. चिकित्सा विज्ञान-इंका सभ्यता में चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत था । लोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते थे। यहाँ से मानव खोपड़ियाँ तथा कंकाल मिले हैं। इनसे पता चलता है कि लोगों को चीर-फाड़ (शल्य-चिकित्सा) का भी ज्ञान था।

प्रश्न 15.
खोज यात्राओं और व्यापार के बीच के संबंध पर विचार-विमर्श करो। अमेरिका और अफ्रीका के लोगों पर खोज यात्रियों के कार्यों के तात्कालिक प्रभाव क्या थे?
उत्तर:
खोज यात्राओं तथा व्यापार के बीच बड़ा गहरा संबंध था। वास्वत में खोज यात्राओं का उद्देश्य नये देशों की खोज करना था और वहाँ उपनिवेश स्थापित करना था। केवल इतना ही नहीं, इन उपनिवेशों से अधिक-से-अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करना खोज यात्राओं का मुख्य उद्देश्य था। यही कारण था कि विभिन्न देशों के शासकों ने खोज यात्रियों की पूरी सहायता की। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका पर विजय प्राप्त करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहत-से देश अपनी स्वतंत्र खो बैठे। केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

प्रश्न 16.
वाणिज्य तथा व्यापार की वृद्धि के क्या परिणाम निकले ? (Imp.)
उत्तर:

  1. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप के लोग समृद्ध बने।
  2. यूरोप के देशों ने खोजे गए प्रदेशों में उपनिवेश बसाये जिनको मंडियों के रूप में प्रयुक्त किया।
  3. नवीन खोजों के कारण इटली का परंपरागत व्यापारिक महत्त्व कम हो गया। अब व्यापार के केंद्र वे देश बन गए जो अटलांटिक महासागर के समीप थे।
  4. व्यापार के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियाँ स्थापित हुई जिनमें शासक वर्ग के सदस्य भी शामिल थे।
  5. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप छ मध्यम वर्ग के सदस्यों की संख्या में जो वहाँ की राजनीति में महत्त्वपू’ भूमिका निभाने लगे।

प्रश्न 17.
अमेरिका में स्पेन के राज्य की स्थापना में किन तत्त्वों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार सैन्य-शक्ति के बल पर हुआ। इसमें बारूद तथा घोड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय लोगों को या तो नजराना देना पड़ता था या फिर राज्य के लिए सोने-चाँदी की खानों में काम करना पड़ता था। अमेरिका को ‘खोज’ के बाद आरंभ में एक छोटी-सी बस्ती बसायी गई। इसमें रहने वाली स्पेनी लोग स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। स्थानीय प्रधानों को नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था।

सोने की लालच के कारण गंभीर हिंसक घटनाएँ हुई, जिनका स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया। स्पेनी विजेताओं के कठोर आलोचना कैथोलिक भिक्षु (friar) बार्टोलोम डि लास कैसास (Bartolome de las Casas) ने कहा है कि स्पेनी उपनिवेशकों को इन अभियानों के लिए अस्त्र-शस्त्र भी अभियानों में शामिल लोगों ने स्वयं मुहैया कराए थे। इसका कारण यह था कि उन्हें विजय के बाद होने वाली लूट में से एक बड़ा हिस्सा मिलने की आशा थी।

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प्रश्न 18.
कोर्टेस द्वारा मैक्सिको की विजय तथा टलैक्सकलानों के सफाये की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। 1519 ई. में, कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था। जहाँ उसने टाटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटनैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मॉटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा। वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया।

उसे यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टेस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों न टलैक्सकलानों (Tlaxcalans) पर हमला बोल दिया। टलैक्सकलान भी खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया। फिर वे टेनोंटिटलैन (Tenochtitlan) की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 को वहाँ पहुँच गए।

प्रश्न 19.
स्पेनी सेनानायक कोर्टस तथा एजटेक शासक मोंटेजुमा के बीच भेंट का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्पेनी आक्रमणकारी 8 नवंबर, 1519 को टेनोक्किटलैन (एजटेक साम्राज्य की राजधानी) पहुँचे। यह नगर मेडिड से पाँच गुणा बड़ा था। वहाँ एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया । एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु टलैक्सलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोगों के मन में आशंका थी। हर आदमी भयभीत होकर काँप रहा था, मानो सारी दुनिया की आँते ही बाहर निकाली जा रही हों।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मुल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट् मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के प्रयास में, कोर्टेस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई पनिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिर में एजटेक और ईसाई, दोनों की प्रतिमाएं रखवा दी गईं।

प्रश्न 20.
कोर्टेस की अनुपस्थिति में स्पेनिश सैनिकों तथा एजटेक लोगों के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्वारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटाना पड़ा था। स्पेनी शासक के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर मांगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडो ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 को कोर्टस वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जल मार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कम का सामना करना पड़ा। विवश होकर कोर्टस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोटेजुमा की रहस्मय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही टलैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस भयंकर रात को आँसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टेस को नए एजटेक शासक क्वेटेमोक (Cvatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस टलैक्सकलान में शरण लेनी पड़ी। अंततः उसने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टेनोक्लिान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट् ने अपना जीवन त्याग देना ही ठीक समझा।

प्रश्न 21.
कोलंबस ने अपनी खोज यात्रा किस प्रकार आरंभ की?
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। उसने पश्चिम की ओर से यात्रा करते हए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोज। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ। उसने इस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजनाएँ प्रस्तुत की। परन्तु वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के अधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई. को जहाज द्वारा पालोस के पत्तन से अपने अभियान पर निकल पड़ा।

प्रश्न 22.
कोलंबस के बेड़े की जानकारी देते हुए यह बताइए कि वह गुआनाहानि द्वीप पर कैसे पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (नाव) (Nao) तथा दो कैरेवल (Caravel) छोटे हलके जहाज पिंटा और ‘नीना’ शामिल थे। सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे थे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की माँग करने लगे।

अंतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई. को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा। परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह में गृआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। गआनाहानि में इस बड़े के नाविकों का अरावाक लोगों न स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को पाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

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प्रश्न 23.
वापसी यात्रा से पूर्व कोलंबस की कठिनाइयों तथा उसकी तीन अन्य यात्राओं की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटना में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापसी यात्रा अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। वापसी यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे। आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गई।

इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। इन यात्राओं से यह पता चला कि नाविकों ने ‘इंडीज (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

प्रश्न 24.
नए देशों तथा मार्गों की खोज किन कारणों से की गई?
उत्तर:
नए देशों और मार्गों की खोज अनेक कारणों से की गई। यरोप के लोग एशिया में व्यापार से बहुत धन कमाते थे, परंतु जब प्रचलित भागों पर तुकों का अधिकार हो गया तो वे नवीन मार्ग खोजने के लिए विवश हो गए। कारपीनी और मार्कोपोलो आदि के यात्रा संबंधी वृत्तातों अथवा कहानियों ने यात्रा करने की इच्छा को बलवती किया। कम्पास के आविष्कार ने दूर-दूर समुद्रों में यात्रा करना सरल कर दिया। इन सब बातों से लोगों के मन में यह भावना आ गई कि उन्हें कठिन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्राणों की बाजी लगा देनी है।

प्रश्न 25.
15वीं और 16वीं शताब्दी के किन्हीं तीन नाविकों के नाम लिखें तथा उनकी खोजों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
15वीं तथा 16वीं शताब्दी के तीन प्रसिद्ध नाविक कोलंबस, वास्कोडिगामा और मैगलेन थे। इनकी खोजों का वर्णन इस प्रकार है –

  1. कोलंबस – कोलंबस इटली का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह भारत का मार्ग ढूंढना चाहता था। अपनी यात्रा में पश्चिमी की ओर जाते हुए 1402 ई० में कोलंबस ने अमेरिका को खोज निकाला।
  2. वास्कोडिगामा – यह पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह आशा-अंतरीप से होता 1498 ई० में भारत आ पहुँचा । इस प्रकार उसने भारत पहुँचने के लिए समुद्री मार्ग की खोज की।
  3. मैगलेन – मैगलेन भी पुर्तगाल का ही रहने वाला था। 1519 ई० में उसने फिलीपाइन द्वीप तथा दक्षिण अमेरिका की खोज की।

प्रश्न 26.
नए मार्गों की खोजों से कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण परिणाम निकला? (V.Imp.)
उत्तर:
नए मागों का पता लगाने के बाद यूरोपीय लोगों ने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में व्यापार करना आरंभ कर दिया। अब वे धन, धरती और धर्म की वृद्धि सोंचने लगे। उन्होंने इन महाद्वीपों में अपने-अपने उपनिवेश बसाए। शीघ्र ही इन उपनिवेशों का धन यूरोपीय देशों में पहुँचने लगा। दासों का क्रय-विक्रय होने लगा। पादरियों ने इन उपनिवेशों में ईसाई धर्म का प्रचार शुरू किया जिसके फलस्वरूप यह धर्म विश्व का सबसे महान् धर्म बन गया । व्यापार और उपनिवेशों की स्थापना से ‘पूंजीवाद’ का उदय हुआ।

प्रश्न 27.
“16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजें आधुनिक युग को लाने में सहायक सिद्ध हुई।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
उत्तर:

  1. इन खोजों से पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  2. इन खोजों से नए-नए देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाए और इनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  3. नई खोजों से पुराने बंदरगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्बन, एंटवर्प आदि नए नगर व्यापार के केंद्र बन गए।
  4. भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गए।
  5. प्रत्येक यूरोपीय जाति ने अपने-अपने उपनिवेशों में अपने धर्म का प्रचार करने का प्रयत्न किया।
  6. 16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजों के ये महत्त्वपूर्ण परिणान आधुनिक युग के ही प्रतीक थे।

प्रश्न 28.
माया-संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
माया संस्कृति ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दियों के दौरान मैक्सिको में फली-फूली। मक्का की खेती उनकी सभ्यता का मुख्य आधार थी। उनके अनेक धार्मिक क्रिया-कलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े हुए थे। खेती करने के तरीके उन्नत और कुशलतापूर्ण थे, जिसके कारण खेतों में बहुत अधिक पैदावार होती थी। इससे शासक वर्ग, पुरोहितों और प्रधानों को एक उन्नत संस्कृति का विकास करने में सहायता मिली। माया लोगों ने वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त की। माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी। परंतु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 29.
इंका संस्कृति के राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिकी देशज संस्कृतियों में से पेरू की क्वेचुआ (Qvechuas) या इंका संस्कृति सबसे विशाल थी। प्रथम इंका शासक मैंको कपाक (Manco Capac) ने बारहवीं शताब्दी में कुजको (Cuzco) में अपनी राजधानी स्थापित की थी। नौवें शासक के काल में राज्य का बहुत अधिक विस्तार शुरू हुआ। इस प्रकार इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक लगभग 3000 मील में फैल गया। इंका साम्राज्य अत्यंत केंद्रीकृत था। राज्य की संपूर्ण शक्ति राजा में ही निहित थी।

वही सत्ता का उच्चतम स्रोत था। नए जीते गए कबीलों और जनजातियों को पूरी तरह इंका साम्राज्य में मिला लिया गया। सभी लोगों को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी। प्रत्येक कबीला स्वतंत्र रूप से वरिष्ठों की एक सभा द्वारा शासित होता था। परंतु कुल मिलाकर पूरा कबीला अपने शासक के प्रति निष्ठावान था । स्थानीय-शासकों को उनसे सैनिक सहयोग के लिए पुरस्कृत किया जाता था। इस प्रकर इंका एक संघ के समान था जिस पर इंका लोगों का शासन था। एक अनुमान के अनुसार इस साम्राज्य में 10 लाख से भी अधिक लोग थे।

प्रश्न 30.
इंका लोगों की वास्तुकला पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इंका लोग उच्चकोटि कं भवन – निर्माता थे। उन्होंने इक्वेडोर से चिली तक पहाड़ों के बीच अनेक सड़कें बनाई। उनके किले शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए गए थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे जैसी किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती थी। वे निकटवर्ती प्रदेशों में टूटकर गिरी हुई चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते थे।

इसके लिए अपेक्षा अधिक मजदूरों की जरूरत पड़ती हैं : राज मिस्त्री खंडों को सुंदर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। पत्थर के कई टुकड़े 100 मैट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे। उनके पास इतने बड़े शिलाखंडों को ढोने के लिए पहियेदार गाड़ियाँ नहीं थीं। अतः यह काम मजदूरों को जुटाकर बड़ी सावधानी से करवाया जाता था।

प्रश्न 31.
समुद्री खोजों के पीछे वास्तविक प्रेरक तत्त्व क्या थे?
उत्तर:
समुद्री खोज यात्राओं के पीछे प्रेरक तत्त्व निम्नलिखित थे –

  1. नए स्थानों की खोज करके लोगों को दास बनाना और दास व्यापार से भारी मुनाफा कमाना।
  2. व्यापार वृद्धि तथा धन कमाने की प्रबल इच्छा का उत्पन्न होना।
  3. मसाले और सोना प्राप्त करके धन और यश कमाना।
  4. रोमांचकारी साहसिक यात्राएँ करके विदेशों में ईसाई धर्म का प्रचार करना।
  5. इस समय की प्रसिद्ध समुद्री यात्राएँ वास्कोडिगामा, कोलंबस और मैगलेन आदि ने की थी।

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प्रश्न 32.
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों की क्या नीति थी?
उत्तर:
शिक्षा के प्रति एजटेक लोग बहुत ही सजग थे। वे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmecac) में भर्ती किए जाते थे। यहां उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्ने पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochacalli) में पढ़ते थे। उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिका की आदि सभ्यताओं की सामाजिक व्यवस्था व भवन-निर्माण कला की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिका की आदि सभ्यताओं-माया, इंका तथा एजटेक-के सामाजिक प्रबंध तथा भवन-निर्माण कला की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है
1. सामाजिक प्रबंध –

  • माया सभ्यता के समाज में पुरोहितों को बहुत ही ऊँचा स्थान प्राप्त था।
  • इंका सभ्यता के समय अमेरिकी समाज बहुत बड़ा हो गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान राजा का था जिसे सूर्यवंशी समझा जाता था।
  • राजा के पश्चात् कुलीन वर्ग तथा पुरोहित वर्ग का स्थान आता था।
  • राज्य की सारी भूमि पर राजा का अधिकार होता था । वह परिवार के आकार के आधार पर भूमि किसानों में बाँट देता था। कुलीनों,
  • पुरोहितों तथा राज्य कर्मचारियों को सरकारी गोदामों से अनाज मिलता था, परंतु फसल खराब हो जाने की दशा में साधारण जनता को भी सरकारी गोदाम से अनाज दिया जाता था।
  • इंका समाज का जीवन बड़ा नियोजित था। पुरुष के विवाह के लिए 24 वर्ष तथा स्त्री के विवाह के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु निश्चित थी। पेड़-पौधों तथा पशुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता था।
  • इंका समाज के कानून बड़े कठोर थे। कानून तोड़ने वाले को जीवित जला दिया जाता था। झूठ बोलने वाले की जीभ पर कील गाढ़ दी जाती थी।
  • चोरों की पहचान के लिए उनके शरीर पर विशेष मोहर लगा दी जाती थी।
  • एजटेक समाज में सैनिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे। राज-कर्मचारी सम्मानित परिवारों से चुने जाते थे।

2. भवन निर्माण कला –
भवन-निर्माण कला में अमेरिका की आदि सभ्यताओं के लोगों ने बहुत उन्नति की। उनके महल, मंदिर तथा अन्य भवन इतने सुंदर थे कि आज भी यात्री उनकी प्रशंसा करते हैं। प्रायः भवन-निर्माण पिरामिड पर होता था। कुछ भवन 200 फुट ऊंचे थे। मैक्सिकों में सूर्य का पिरामिड 216 फुट ऊँचा है। यह वर्गाकार है जो 750 वर्ग फुट क्षेत्र है। भवनों को पत्थर की मूर्तियों तथा चित्रकारी से सजाया जाता था। कोपान में एक खगोलशाला थी।

इंका सभ्यता में शानदार भवन बनाए जाते थे। कुजको में सूर्य मंदिर इंका सभ्यता की भवन निर्माण कला का उच्चतम नमूना है। इसके अतिरिक्त किले, सड़क, पुल तथा महल बहुत ही सुंदर ढंग से बने थे। भवन बनाने के लिए पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों का प्रयोग किया जाता था। इन भवनों के कारण नगरों की सुंदरता बहुत बढ़ गई थी। एजटेक लोगों की राजधानी ‘टेनोक्टिटलांग’ अथवा ‘टेकोना का प्रासाद’ की गणना मध्य अमेरिका के अत्यंत सुंदर नगरों में की जाती थी। इंका की इंजीनियरिंग कला बहुत प्रसिद्ध थी। कुजको नगर में सड़कों की एक श्रृंखला साम्राज्य के सभी भागों को जोड़ती थौं । नगरों में सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं।

प्रश्न 2.
अमेरिका की मूल माया सभ्यता के लोगों के समाज, धर्म व विज्ञान के बारे में लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता अमेरिका की मूल सभ्यताओं में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इस सभ्यता के समाज, धर्म तथा विज्ञान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –
1. समाज – माया सभ्यता का समाज पुरोहित प्रधान था। समाज में पुरोहित का बहुत ही आदर था। इस सभ्यता के नगर-राज्य चीचेन इटजा में शासन पर पुरोहितों का पूरा प्रभुत्व था। ये लोग राज्य में अपनी मनमानी कर सकते थे, परंतु स्थानीय प्रबंध में स्वशासन की व्यवस्था थी।

माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। माया लोगों की मुख्य फसल मक्का थी। कछ लोग वस्त्र बनाने, वस्रों को रंगने तथा कछ अन्य हस्त-शिल्पों में लगे हुए थे। लोगों का मुख्य भोजन मक्का, सेम, आलू, पपीता आदि थे। वे मिर्च का प्रयोग भी करते थे।

2. धर्म – माया सभ्यता के लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे। इनमें वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि तथा मक्का देवता सम्मिलित थे। अधिक वर्षा के लिए माया अपनी मूल्यवान वस्तुएँ पानी में फेंक देते थे। कई लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि की भी प्रथा प्रचलित थी।

3. विज्ञान –

  • माया लोगों ने विज्ञान में काफी प्रगति की। उन्होंने एक कैलेंडर का आविष्कार किया। यह कैलेंडर उनकी खगोल विज्ञान में प्रगति का प्रतीक है।
  • इस कलेंडर के अनुसार वर्ष में 365 दिन तथा 18 महीने होते थे। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे।
  • गणित के ई। में माया लोगों ने शून्य की जानक: दी।
  • कागज का प्रयोग तथा हेरोग्लिफिक लिपि उनकी अन्य मुख्य उपलब्धियाँ थीं। सच तो यह है कि माया सभ्यता अन्य अमेरिकी सभ्यताओं की तुलना में किसी भी दृष्टि में पीछे नहीं थी।

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प्रश्न 3.
एजटेक लोग कौन थे? उनकी सभ्यता एवं संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एजटेक लोग बारहवीं शताब्दी में उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया। पराजित लोगों से वे नजराना वसूल करने लगे।

समाज – एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। अभिजातों की संख्या बहुत कम थी। वे सरकार तथा सेना में ऊँचे पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। समाज में योद्ध, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्राय: सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

भूमि उद्धार तथा निर्माण कार्य-एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (reclamation) किया। उन्होंने सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर मैक्सिको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये। इन्हें चिनाम्या (Chinampas) कहते थे। इन अति उपजाक द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील से बाहर झाँकते दिखाई देते थे। एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह है कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

साम्राज्य का ग्रामीण होना-साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियां, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू तथा कुछ अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतिहर लोग अभिजातों की जमीन जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था। शिक्षा नीति-एजटेक लोग इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ।

कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmeacac) में भर्ती किए जाते थे। यहाँ उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्चे पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochcalli) में पढ़ते थे, जहाँ उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था। साम्राज्य का अंत-16वीं शताब्दी के आरंभ में एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता के लक्षण दिखाई देने लगे। 1516 ई० में शक्तिशाली एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

प्रश्न 4.
कोटेंस के नेतृत्व में स्पेनवासियों को दक्षिणी अमेरिका की विजय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। कोर्टस 1519 ई० में क्यूबा से मैक्सिको आया था। वहाँ उसने टोंटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटानैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा।

वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया। स्वयं मोंटेजुमा को भी यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों ने टूलैक्सकलानों पर हमला बोल दिया। लैक्सकलान खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद अंततः समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया।

फिर वे टेनोस्टिटलैन की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 ई. को वहाँ पहुंच गए। स्पेनी आक्रमणकारी टेनोक्टिटलैन के दृश्य को देखकर हक्के-बक्के रह गए। यह स्पेन की राजधानी मैडिड से पाँच गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े शहर सेविली (Seville) से दो गुनी थी। कोटेंस की एजटेक शासक से भेंट-एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टस का हार्दिक स्वागत किया। एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों-बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु लैक्सकलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोग भयभीत होकर काँप रहे थे।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मूल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट् को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के लिए, कोर्टस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई प्रतिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिरों में एजटेक और ईसाई प्रकार की प्रतिमाएँ रखवा दी गईं।

कोर्टेस का क्यूबा जाना और वापसी-इसी समय कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्चारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटना पड़ा। स्पेनी शासन के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर माँगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडी ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 ई० को कोर्टस जब वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जलमार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कमी का सामना करना पड़ा । विवश होकर कोर्टेस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोंटेजुमा की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही लैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस ‘भांकर रात’ को आंसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टस को नए एजटक शासक कवेटेमोक (Cuatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस लैंक्सकलान में शरण लेनी पड़ी।

उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आए चेचक के प्रकोप से मर रहे थे। कोर्टस ने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ नोक्टिट्लान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट ने अपना जीवन त्याग देना हो ठीक समझा। मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया। मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala), निकारागुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 5.
पिजारों कौन था? अमेरिका (इंका प्रदेश) में इसकी सफलताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पिजारो (Pizarro) एक गरीब और अनपढ़ स्पेनिश था। वह सेना में भर्ती होकर 1520 ई० में कैरीबियन द्वीपसमूह में आया था। उसने इंका राज्य के बारे में यह सुन रखा था कि वह चाँदी और सोने का देश (EI-dor-ado) है। उसने प्रशांत से वहाँ पहुँचने के लिए कई प्रयत्न किए। एक बार जब वह अपनी यात्रा से स्वदेश लौटा तो वह स्पेन के राजा से मिलने में सफल हो गया। इस मुलाकात के दौरान उसने राजा को इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए सोने के आकर्षक मर्तबान दिखाए।

राजा के मन में लोभ जाग उठा और उसने पिजारो को यह वचन दे दिया कि यदि वह इंका प्रदेश को जीत लेगा तो वह उसे वहाँ का गवर्नर बना देगा। पिजारो ने कोर्टस का तरीका अपनाने की योजना बनाई। परंतु वह यह देखकर क्षुब्ध हो गया कि इंका साम्राज्य की स्थिति भिन्न थी। पिजारो का इंका साम्राज्य में प्रवेश-1532 ई० में अताहुआल्पा (Atahualpa) ने एक गृहयुद्ध के बाद इंका साम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। तभी वहाँ पिजारो ने प्रवेश किया।

उसने जाल बिछाकर राजा को बंदी बना लिया। राजा ने अपने आप को मुक्त कराने के लिए एक कमरा भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव रखा। परंतु पिजारो ने अपना वचन नहीं निभाया । उसने राजा का वध करवा दिया और उसके सैनिकों ने जी भरकर लूटमार मचाई। इसके बाद पिजारो ने इंका राज्य पर अधिकार कर लिया। विजेताओं की क्रूरता के कारण वहाँ 1534 ई० में विद्रोह भड़क उठा जो दो साल तक चलता रहा। परिणामस्वरूप हजारों लोगों की युद्ध तथा महामारियों के कारण मौत हो गई। अगले पांच साल में स्पनियों ने पोटोसी (आज का बोलीविया) में चाँदी के विशाल भंडारों का पता लगा लिया। इन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को दास बना लिया।

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प्रश्न 6.
पेड्रो अल्वारिस कैबाल ब्राजील कैसे पहुँचा? ब्राजील में पुर्तगालियों द्वारा इमारती लकड़ी के व्यापार का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर भारत के लिए रवाना हुआ। तूफानी समुद्रों से बचने के लिए उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक बड़ा चक्कर लगाया । वह यह देखकर हैरान रह गया कि वह वर्तमान ब्राजील के समुद्र तट पर जा पहुंचा है। दक्षिणी अमेरिकी का वह पूर्वी भाग उस क्षेत्र में आता था जिसे पोप ने पुर्तगाल को सौंप रखा था। इसलिए पुर्तगाली अनवादित रूप से इसे अपना प्रदेश मानते थे।

ब्राजील की महत्वपूर्ण संपदा-पुर्तगालवासी कैबाल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर रवाना हुआ क्योंकि वह भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अधिक उत्सुक था तथा ब्राजील में सोना मिलने की कोई संभावना नहीं थी। परंतु ब्राजील का एक प्राकृतिक संसाधन इनके लिए और भी महत्त्वपूर्ण था, जिसका उन्होंने भरपूर लाभ उठाया। यह संपदा थी-इमारती लकड़ी। वहाँ के ब्राजीलवुड वृक्ष से एक सुंदर लाल रंजक (Dye) भी मिलता था।

ब्राजील के मूल निवासी लोहे के चाकू-छुनियों और आरियों के बदले में इन पेड़ों को काट कर इनके लढे जहाजों तक ले जाने के लिए भी तुरंत तैयार हो गए। वैसे भी एक हँसिए, चाकू या कंधे के बदले ढेरों मुर्गियाँ, बंदर, तोते, शहद, मोम, सूती धागा आदि वस्तुएँ देने को सदैव तैयार रहते थे। इमारती लकड़ी का व्यापार-इमारती लकड़ी के इस व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुई। इनमें अंततः पुर्तगालियों की जीत हुई।

1534 ई० में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवांशिक कप्तानियों (Captaincies)” में बाँट दिया । इनके स्वामित्व उन पुर्तगालियों को सौंपे गये जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उन्हें स्थानीय लोगों को दास बनाने का अधिकार भी दे दिया गया । ब्राजील में बसने वाले बहुत-से पुर्तगाली भूतपूर्व सैनिक थे जिन्होंने भारत के गोवा क्षेत्र में लड़ाइयाँ लड़ी थीं । स्थानीय लोगों के प्रति उनका व्यापार अत्यंत क्रूर था।

प्रश्न 7.
1540 ई० से ब्राजील में पुर्तगालियों की गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील के बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना आरंभ कर दिया। गन्ना से चीनी बनाने के लिए मिलें भी लगाई। यह चीनी यूरोप के बाजारों में बेची जाती थी। बहुत ही गर्म और नम जलवायु में चीनी की मिलों में काम करने के लिए वे स्थानीय लोगों पर निर्भर थे- जब उन लोगों ने इस नीरस काम को करने से इन्कार कर दिया तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण कर उन्हें दास बनाना आरंभ कर दिया। स्थानीय लोग दास बनाने वाले इन मिल मालिकों से बचने के लिए गाँव छोड़कर जंगलों की ओर भागने लगे। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया, तटीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लगभग सभी गाँव उजह गए।

वहाँ अब यूरोपीय लोगों के सुनियोजित कस्बे बस गए। मिल मालिकों को दास लाने के लिए अब पश्चिमी अफ्रीका की ओर मुड़ना पड़ा। परंतु स्पेनी उपनिवेशों में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। वहाँ पहले से ही एजटेक और इंका साम्राज्यों के अधिकांश लोगों से खदानों और खेतों में काम कराया जाता था। इसलिए स्पेनिश लोगों को ‘औपचारिक रूप से उन्हें दास बनाने अथवा कहीं और से दास लाने की जरूरत नहीं पड़ी।

154980 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया (Bahia) सैलवाडोर (Salvador) को उसकी राजधानी बनाया गया। इस समय तक जेसुइट पादरियों ने भी ब्राजील में आना शुरू कर दिया था। वहाँ बसे यूरोपीय लोग इन पादरियों को पसंद नहीं करते थे इसके कई कारण थे –

  • ये पादरी मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे।
  • वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और वह उन्हें यह सिखाते थे कि ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें आनंद लेना चाहिए।
  • सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्मप्रचार दास प्रा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

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प्रश्न 8.
भौगोलिक खोजों से क्या अभिप्राय है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर:
1490 ई० से 1523 ई. तक का 33 वर्ष का समय महान् भौगोलिक खोजों के लिए प्रसिद्ध है। इस काल में उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खोज की गई और इसे नई दुनिया का नाम दिया गया। अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर को पार किया गया। अनेक नवीन भौगोनिक मार्ग ढूंढे गये। हिंद महासागर और चीनसागर में भी यूरोपीय जहाज चलने लगे। अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी तट के साथ पूर्व की ओर मार्ग ढूंढा गया। इस प्रकार संसार के मानचित्र का रूप बदलने लगा।

भौगोलिक खोजों के कारण-इन भौगोलिक खोजों के कई कारण थे। यूरोप निवासियों को एशिया और विशेष रूप से भारत की वस्तुओं में बड़ी रुचि थी। व्यापारी अपना माल थल मार्ग से रोम सागर तथा काला सागर तक लाया करते थे। वहाँ से आगे समुद्री मार्ग से माल यूरोप की मंडियों में पहुंचा दिया जाता था। 15वीं शताब्दी के मध्य में तुर्की तथा इसके आस-पास के देशों पर तुकों का अधिकार हो गया। फलस्वरूप यूरोप का एशियाई व्यापार बंद हो गया। परंतु यूरोप के लोग इस लाभदायक व्यापार को समाप्त नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नवीन मार्ग खोजने के प्रयल आरंभ किये। तब यह सारा व्यापार लगभग बंद हो गया।

1. इन्हीं दिनों यूरोपियन यात्री कारपीनी और मार्कोपोलो एशिया का चक्कर लगाकर आये थे। उन्होंने अपने यात्रा विवरणों में इन देशों के विषय में अनेक अद्भुत कहानियाँ लिखीं । इन रोमांचकारी कहानियों ने यूरोप निवासियों के दिलों में इन देशों की यात्रा करने की प्रबल इच्छा पैदा की।

2. विज्ञान के नये आविष्कारों ने भी उनकी कल्पना को उभारा। कोपरनिकस ने यह घोषणा की कि पृथ्वी गोल है, जिसका यह अर्थ लिया गया कि मनुष्य चाहे किसी दिशा में यात्रा करे वह अपने लक्ष्य पर वापस पहुंचेगा। कंपास के आविष्कार के कारण दूर-दूर तक समुद्रों में यात्रा करना सरल हो गया।

3. पुनर्जागरण की लहर ने भी बड़ा प्रभाव डाला। इसने लोगों के मन में कठिन लक्ष्य पर विजय प्राप्त करने की इच्छा पैदा कर दी। नये स्थापित राष्ट्रीय राज्यों ने इस प्रकार के वातावरण का लाभ उठाया तथा उनके राजाओं ने जी-जान से उन वीरों को प्रोत्साहित किया जो खोज कार्य में भाग लेना चाहते थे।

प्रश्न 9.
सोलहवीं शताब्दी की महत्त्वपूर्ण खोजों का वर्णन कीजिए। आधुनिक युग को लाने में वे किस प्रकार सहायक सिद्ध हुई?
उत्तर:
भौगोलिक खोजों का क्रम वैसे तो 15वीं शताब्दी में आरंभ हुआ था, परंतु 16वीं शताब्दी में इस दिशा में और भी महत्त्वपूर्ण खोज यात्राएँ हुई। 1492 ई० में बार्थेलाम्यू डियाज ने आशा अंतरीप की खोज की। उससे अमेरिका, न्यूफाउंडलैंड और लैब्रेडोर का पता चला। 1498 ई० में वास्कोडिगामा ने यूरोप से भारत पहुंचने का नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। 16वीं शताब्दी के आरंभ में कोर्टिस नाविक मैक्सिको जा पहुंचा। उसने 1531 ई० में पिजारू की खोज की। परंतु इस शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक यात्रा मैगलेन नामक पुर्तगाली नाविक ने की।

वह अपने साथियों सहित अंध महासागर को पार करके दक्षिणी अमेरिका के तट तक और फिर जलडमरू के मार्ग से प्रशांत महासागर में पहुँचा। यहाँ से वह फिलिपाइन के द्वीपों में पहुंचा। यहाँ मैगलेन की मृत्यु हो गई। परंतु उसके 18 साधी एक जहाज में संसार का चक्कर काट कर स्वदेश लौट आये। इस प्रकार मनुष्य ने संसार के गिर्द अपना पहला चक्कर पूरा कर लिया।

आधुनिक युग लाने में भौगोलिक खोजों का योगदान –

  • इन खोजों से नयी समुद्री-मार्गों की खोज की गई। फलस्वरूप पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  • इन खोजों से नये-नये देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन नये प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाये और उनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  • नई खोजों से पुराने बंदगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्वन आदि नये नगर व्यापार के केंद्र बन गये।
  • भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गये।
  • प्रत्येक यूरोपीय जाति अपने-अपने देशों के उपनिवशों में जा बसी और वहाँ व्यापार करना आरंभ कर दिया।

व्यापारी वर्ग ने मध्यवर्ग को जन्म दिया। 16वीं शताब्दी के भौगोलिक खोजों से ये महत्त्वपूर्ण परिणाम आधुनिक युग के ही प्रतीक थे। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हुए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका को विजय करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहुत-से देश अपनी स्वतंत्रता खो बैठे । केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

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प्रश्न 10.
कोलंबस कौन था? उसके द्वारा अमेरिका की खोज-यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) इटली का एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। इस आधार पर वह यह जानता था कि उसके भाग्य में पश्चिम की ओर से यात्रा करते हुए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोजना लिखा है। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ।

उसने उस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजना प्रस्तुत की। वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के प्राधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई० को जहाज द्वारा पालोस के पतन से अपने अभियान पर, निकल पड़ा। कोलंबस की यात्रा-कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (Nao) तथा दो कैरवल (Caravel) छोटे हल्के जहाज हपंटा और ‘नौना’ शामिल थे।

सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की मांग करने लगे। अतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई० को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह का गुआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। वहाँ के अरावाक लोगों ने इस बेड़े के नाविकों का स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को खाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

कोलंबस ने गुआनाहानि में स्पेन का झंडा गाड़ दिया। उसने इस द्वीप का नया नाम सैन सैल्वाडोर (San, Salvador) रखा। वहाँ उसने एक सार्वजनिक उपासना कराई और स्थानीय लोगों से बिना पूछे ही अपने आपको वहाँ का वाइसराय घोषित कर दिया। उसने वहाँ के बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन (Cubanascan) और किस्केया (Kiskeya) तक जाने के लिए इन स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

कठिनाइयाँ और वापसी यात्रा – कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटनाओं में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापस यात्रा और भी अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। इस संपूर्ण यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे।

आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं। इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया । इन यात्राओं से ये पता चला कि स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही थी कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। उसके द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ (Amerigo Vespucci) के नाम पर किया गया।

प्रश्न 11.
खोज यात्राओं ने उपनिवेशीकरण तथा दास व्यापार को किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर:
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय समुद्री परियोजनाओं ने एक बात स्पष्ट कर दी कि एक महासागर से दूसरे महासागर तक यात्रा की जा सकती है। इससे पहले तक, इनमें से अधिकांश मार्ग यूरोप के लोगों के लिए अज्ञात थे। कुछ मार्गों को तो कोई भी नहीं जानता था। तब तक कोई भी जहाज कैरीबियन या अमेरिका महाद्वीपों के जल क्षेत्रों में नहीं पहुंचा था। दक्षिणी अटलांटिक तो पूरी तरह अछूता था। किसी भी जहाज ने उसके पार जाना तो दूर, उसके पानी में भी प्रवेश नहीं किया था। न ही कोई जहाज दक्षिणी अटलांटिक से प्रशांत महासागर या हिंद महासागर तक पहुँचा था।

15वीं शताब्दी के अंतिम और 16वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में ये सभी साहसिक कार्य सफलतापूर्वक किए गए। प्रारंभिक समुद्री यात्रियों के अतिरिक्त अन्य यूरोपवासियों के लिए भी अमेरिका की खोज के दीर्घकालीन परिणाम निकले। सोना-चाँदी की बाढ़ ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण में वृद्धि की। 1560 से 1600 ई० तक सैकड़ों जहाज प्रति वर्ष दक्षिणी अमेरिका की खानों से चाँदी स्पेन में लाते रहे। परंतु स्पेन और चुर्तगाल को इसका अधिक लाभ नहीं मिला।

इसका कारण यह था कि उन्होंने अपने व्यापार या व्यापारी जहाजों के बेडे का विस्तार करने में इस धन को नहीं लगाया। उनकी बजाय इसका लाभ फ्रांस, बेल्यिजम, हालैंड आदि देशों ने उठाया। उनके व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूंजी कंपनियां बनाई और अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए । उन्होंने उपनिवेश स्थापित करकं यूरोपवासियों को नयी दुनिया में पैदा होने वाली फसलों तंबाक, आलू, गन्ना, कैकाओं (Cacao) और रबड़ आदि से परिचित कराया।

इसके बाद ये फसलें भारत तथा अन्य देशों में ले जाई गई। उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए –

  • मार – काट के कारण मूल निवासियों को जनसंख्या कम हो गई।
  • उनकी जीवन – शैली का विनाश हो गया।
  • उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

इन मुठभेड़ों की बर्बरता का एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि हारे हुए लोगों को दास बना लिया जाता था। इसके साथ-साथ वहाँ उत्पादन की पूंजीवाद प्रणाली का प्रादुभाव हुआ। काम की परिस्थितियाँ भयावह थीं। परंतु स्पेनी मालिकों का मानना था कि उनके आर्थिक लाभ के लिए इस प्रकार का शोषण अत्यंत आवश्यक है।

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प्रश्न 12.
दास-व्यापार का वर्णन करते हुए यह बताइए कि दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क दिए गए?
उत्तर:
1601 ई० में, स्पेन के फिलिप द्वितीय ने सार्वजनिक रूप से बेगार की प्रथा पर रोक लगा दी। परंतु एक गुप्त आदेश द्वारा उसने इसे चालू रखने की व्यवस्था भी कर दी। 1609 ई० में एक काननू बनाया गया जिसके अंतर्गत ईसाई और गैर-ईसाई सभी प्रकार के स्थानीय लोगों को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई। इससे यूरोप से अमेरिका में आकर बसे लोग नाराज हो गए। उन्होंने दो साल के भीतर ही राजा को यह कानून हटाने और दास बचाने की प्रथा को चालू रखने के लिए मजबूर कर दिया।

दास व्यापार-अब नयी-नयी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गई। जंगलों को साफ करके प्राप्त की गई भूमि पर पशुपालन किया जाने लगा। 1700 ई० में सोने की खोज के बाद खानों का काम जोरों से चल पड़ा। इन कार्यों के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। यह भी स्पष्ट था कि स्थानीय लोग दास बनने का विरोध करेंगे। अब यही विकल्प बचा था कि दास अफ्रीका से मंगवाए जाएँ। 1550 ई० के दशक से 1880 ई० के दशक तब ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी दासों का आयात किया गया। 1750 ई० में कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास हजार-हजार दास होते थे।

दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में तर्क-दास प्रथा के उन्मूलन के बारे में 1780 ई० – के दशक में हुए वाद-विवाद में कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि यूरोपवासियों के अफ्रीका में आने से पहले भी वहाँ दास प्रथा प्रचलित थी। यहाँ तक कि पंद्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका में स्थापित किए जाने वाले राज्यों में भी अधिकांश मजदूर-वर्ग दासों का ही था। उन्होंने यह भी बताया था कि यूरोपीय व्यापारियों को युवा स्त्री-पुरुषों को दास बनाने में स्वयं अफ्रीकी लोग भी सहायता देते थे। बदले में यूरोपीय व्यापारी उन अफ्रीकावासियों को दक्षिणी अमेरिका से आयात किए गए खाद्यान्न देते थे। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में दक्षिणी अमेरिका के उपनिवशों में आकर बसे यूरोपीय लोगों ने स्पेन और पुर्तगाल के शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस प्रकार ये उपनिवेश स्वतंत्र देश बन गए।

प्रश्न 13.
माया सभ्यता का वर्णन करें।
उत्तर:
ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य मैक्सिको में माया सभ्यता उन्नति की ओर अग्रसर थी। अमेरिका महादेश में आरंभिक सभ्यताओं में यह सभ्यता काफी विकसित थी। यह सभ्यता कृषि प्रधान थी। माया लोग मक्के उपजाया करते थे। उनके धार्मिक उत्सवों का संबंध मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े थे। वे अधिशेष उत्पादन करते थे। माया समाज विभिन्न वर्गों में बँटा था।

शासक वर्ग प्रायः भोग विलास का जीवन जीते थे। पुरोहित वर्ग का समाज में विशेष महत्त्व था क्योंकि यह सभ्यता धर्म प्रधान थी। कृषक वर्ग बड़ी संख्या में थे और यही मुख्य कर-दाता वर्ग थे। माया लोगों ने वस्तु, कला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कुछ उपलब्धियाँ हासिल .. की थी। उनकी लिपि चित्रात्मक थी, जिस लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 14.
दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। [B.M.2009]
उत्तर:
इतिहासकारों ने दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के सम्बन्ध में काफी अनुसंधान किये हैं। दक्षिणी अमेरिका की संस्कृतियों के नगरे में जो जानकारी मिलती है इनमें से 12वीं शताब्दी में एजटेक लोगों की सभ्यता काफी महत्त्वपूर्ण थी। उनका समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक रहता था। समाज में व्यापारियों का भी स्थान काफी महत्त्वपूर्ण था। भूमि उपजाऊ नहीं थी। वे लोग मक्का, आलू और अन्य फसलें उपजाते थे।

दक्षिणी अमेरिका में ही माया सभ्यता के बारे में जानकारी मिलती है। माया सभ्यता के लोगों के समाज में भी पुरोहितों का काफी उच्च स्थान होता था। वे भी मुख्यतः मक्का का उत्पादन करते थे, जो उनके किलों से स्पष्ट होता है। उत्तरी अमेरिका में मिलने वाली सबसे पुरानी मानव कृति एक तीर की नोंक है जो लगभग 11000 वर्ष पहले की है। आरंभिक मूल के लोग नदी घाटी के क्षेत्र में रहा करते थे। वे मक्का एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियों उपजाते थे।

मांस, मछली भी खाया करते थे। शिकार उनके भोजन प्राप्त करने के तरीके में मुख्य होता था। वे कई भाषाएँ बोलते थे। किन्तु लिपि विकसित नहीं कर पाये थे। धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिका में यूरोपियनों का आगमन और वर्चस्व बढ़ने लगा जिससे मूल निवासियों की संस्कृति कमजोर पड़ने लगी।

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प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय की मुख्य विशेषताएँ बताइए। उनकी जीवन शैली का अंत किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और वृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। कैरिब नामक एक बूंखार कबीले ने उन्हें लघु ऐटिलीज प्रदेश से खदेड़ दिया था। अरावाकी लोग खेती तथा शिकार करके और मछली पकड़कर अपना जीवन निर्वाह करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू और कंदमूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति-अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो । वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animists) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक समाज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

अरावाकी लोगों का यूरोपियों से संपर्क तथा उनके जीवन का अंत-अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भांति सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न होते थे क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अरावाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सोने की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदा तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया। इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: स्पेनी लोगों के संपर्क में आने के बाद लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाक और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 16.
आदि अमेरिका की प्रमुख सभ्यताओं की मुख्य-मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदि अमेरिका में यों तो अनेक सभ्यताएँ फली-फूली परंतु इसमें से तीन सभ्यताएँ प्रमुख है-माया सभ्यता, एजटेक सभ्यता तथा इंका सभ्यता।
(क) माया सभ्यता – माया सभ्यता का उदय 1100 ई० के लगभग हुआ। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग में फैली हुई थी। फिर भी इन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण उपलिब्धियां प्राप्त की। माया सभ्यता की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –

  • ये लोग अनाज के खेतों के पास बस्तियों में रहते थे। उनके भोजन में मक्का, सेम, आल. पपीता, स्वकाश तथा मिर्च शामिल थे। वे सूती वस्रों का प्रयोग करते थे। वे चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग भी करते थे।
  • इनका मुख्य व्यवसाय कृषि था। भोजन के लिए अधिक-से-अधिक मक्का उगाने के उद्देश्य से ये अपने देवताओं को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते थे।
  • वे अनेक प्रकार के धार्मिक कृत्यों और कर्मकांडों में विश्वास रखते थे। उनका एक धार्मिक कृत्य रबड़ की गेंद का खेल था। उनके
  • अनेक देवता थे जिनमें अग्नि देवता और मक्का देवता मुख्य थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि चढ़ायी जाती थी।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। कहीं-कहीं स्वरों का प्रयोग भी होता था।
  • उन्होंने अनेक भव्य पिरामिड, चौक, वेधशालाएँ तथा मंदिर बनाए। वे मूर्तिकला और चित्रकला में भी बड़े निपुण थे।
  • इन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया जिसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे।
  • उन्होंने गणित के ज्ञान, हेराग्लिफिक लेखन और कागज के प्रयोग में भी निपुणता दिखायी।

(ख) एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग, जिन्हें टेनोका भी कहते हैं टेनोक्ट्टिलान, टलाटेलोको नाम की दो राजधानियाँ बसायीं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं –

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवता और अन्न देवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननो मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

(ग) इंका सभ्यता – इस सभ्यता के निर्माता इंका लोग थे। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दियों के बीच दक्षिण अमेरिका के एडियन क्षेत्र में अपनी सभ्यता को विकसित किया। इस सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थी

  • इंका लोगों ने विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसमें अनेक बड़े नगर थे। कुज्को नगर इस साम्राज्य का मुख्य केंद्र था। सारा साम्राज्य
  • चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन पुरुष शासन करता था।
  • उन्होंने नगरों में भव्य किलों, सड़कों और मंदिरों का निर्माण किया। वे सीढ़ीदार खेत बनाकर आलू, शकरकंद आदि की खेती करते थे।
  • अनाज को बड़े-बड़े सरकारी गोदामों में संकट के लिए सुरक्षित रखा जाता था।
  • कुछ लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने, कपड़ा बनाने और लामा तथा अल्पाका से ऊन प्राप्त करने के व्यवसाय भी अपनाए हुए थे।
  • इंका लोग सोने, चाँदी और ताँबे को गलाकर उनके आभूषण बनाते थे।
  • अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए काँसा प्रयोग में लाया जाता था।
  • उन्होंने चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में भी उन्नति की।
  • 16वीं शताब्दी के मध्य तक अमेरिका की आदि सभ्यताओं का अंत हो गया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्वाहिली क्या है?
(क) भाषा
(ख) तटबंध
(ग) राज्य
(घ) धर्म
उत्तर:
(क) भाषा

प्रश्न 2.
झूलते बाग किस सभ्यता की विशेषता थी?
(क) इंका
(ख) पेरू
(ग) हड़प्पा
(घ) आर्य
उत्तर:
(क) इंका

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प्रश्न 3.
कुश साम्राज्य का उदय कब हुआ?
(क) 1000 ई०पू०
(ख) 2000 ई०पू०
(ग) 3000 ई०पू०
(घ) 4000 ई०पू०
उत्तर:
(क) 1000 ई०पू०

प्रश्न 4.
ब्राजील का नाम किस पर पड़ा?
(क) पशुओं
(ख) मानव
(ग) भूमि
(घ) पेड़
उत्तर:
(घ) पेड़

प्रश्न 5.
दिशासूचक यंत्र का आविष्कार कब हुआ?
(क) 1380
(ख) 1370
(ग) 1360
(घ) 1350
उत्तर:
(क) 1380

प्रश्न 6.
तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया को कब जीता?
(क) 1653
(ख) 1553
(ग) 1453
(घ) 1353
उत्तर:
(ग) 1453

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प्रश्न 7.
पुर्तगाल के किस राजकुमार को ‘नाविक’ कहा जाता था?
(क) फ्रेडरिक
(ख) हेनरी
(ग) ड्यूक
(घ) विलियम
उत्तर:
(ख) हेनरी

प्रश्न 8.
1410 ई० में लिखी गई पुस्तक ‘इमगो मुंडी’ (डि एली द्वारा) किस विषय की है?
(क) भूगोल
(ख) इतिहास
(ग) जीव विज्ञान
(घ) रसायन विज्ञान
उत्तर:
(क) भूगोल

प्रश्न 9.
बाजामार क्या है?
(क) गहरा समुद्र
(ख) छिछला समुद्र
(ग) गहरी खाई
(घ) छिछली खाई
उत्तर:
(ख) छिछला समुद्र

प्रश्न 10.
कोलम्बस ने स्पेन का झंडा कहाँ गाड़ा था?
(क) क्यूबा
(ख) गुआनाहानि
(ग) किस्केया
(घ) इंडीज
उत्तर:
(ख) गुआनाहानि

प्रश्न 11.
इंडीज की खोज किसने की?
(क) मार्कोपोलो
(ख) वास्कोडिगामा
(ग) कोलम्बस
(घ) डिएले
उत्तर:
(ग) कोलम्बस

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प्रश्न 12.
जिगुरात क्या था?
(क) एक सीढ़ीदार मीनार
(ख) कब्रगाह
(ग) मंदिर
(घ) स्नानागार
उत्तर:
(क) एक सीढ़ीदार मीनार

प्रश्न 13.
सोने की खानों में कार्य करने हेतु दास कहाँ से आते थे?
(क) एशिया से
(ख) उत्तरी अमेरिका से
(ग) दक्षिणी अमेरिका से
(घ) अफ्रीका से
उत्तर:
(घ) अफ्रीका से

प्रश्न 14.
गोल्डरश संयुक्त राज्य अमेरिका के किस राज्य से संबंधित है?
(क) ओहियो
(ख) सैनफ्रासिको
(ग) न्यूयार्क
(घ) कैलिफोर्निया
उत्तर:
(घ) कैलिफोर्निया

प्रश्न 15.
तुर्कों के द्वारा कुस्तुंतुनिया का पतन कब हुआ?
(क) 1421 ई०
(ख) 1443 ई०
(ग) 1453 ई०
(घ) 1481 ई०
उत्तर:
(ग) 1453 ई०

प्रश्न 16.
दुनिया की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?
(क) गंगा
(ख) नील
(ग) आमेजन
(घ) मिसीमिपी
उत्तर:
(ग) आमेजन

प्रश्न 17.
सूडानी सभ्यता का केन्द्र नहीं था ………………..
(क) डेन्यूब
(ख) घाना
(ग) माली
(घ) बोनू
उत्तर:
(क) डेन्यूब

प्रश्न 18.
माया पंचांग में प्रत्येक मास कितने दिन का होता था?
(क) 20 दिन
(ख) 24 दिन
(ग) 21 दिन
(घ) 22 दिन
उत्तर:
(क) 20 दिन

प्रश्न 19.
माया लोगों के पंचांग में वर्ष में कितने दिन होते थे?
(क) 365
(ख) 365.5
(ग) 367
(घ) 161
उत्तर:
(क) 365

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प्रश्न 20.
पिजारो ने इंका राज्य को जीता …………………
(क) 1532
(ख) 1533
(ग) 1534
(घ) 1535
उत्तर:
(क) 1532

प्रश्न 21.
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ……………….
(क) 1600
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1600

प्रश्न 22.
डच इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ………………..
(क) 1602
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1602

प्रश्न 23.
कोलम्बस ने क्यूबा पर हक जमाया ………………..
(क) 1492
(ख) 1493
(ग) 1494
(घ) 1495
उत्तर:
(क) 1492

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भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गम्भीरता और चुस्त शैली के लिए यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों (पदों) के प्रयोग में संयम से काम लें, ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से-थोड़े शब्दों में व्यक्त कर सके। ‘गागर में सागर भरना’ कहावत यहीं चरितार्थ होती है । समास, तद्धित और कृदन्त वाक्यांश या वाक्य एक शब्द या पद के रूप में संक्षिा किये जा सकते हैं। ऐसी हालत में मूल वाक्यांश या काव्य के शब्दों के अनुसार ही एक शब्द या पद का निर्माण होना चाहिए । दूसरी बात यह कि वाक्यांश को संक्षेप में सामासिक-पद का भी रूप दिया जाता है । कुछ ऐसे लाक्षणिक पद या शब्द भी हैं, जो अपने में पूरे एक वाक्य या वाक्यांश का अर्थ रखते हैं। निम्नलिखित वाक्यखण्डों के संक्षिप्त शब्दरूपों को याद रखना चाहिए, तभी हम थोड़े में अधिक-से-अधिक लिखने में समर्थ हो सकेंगे। अभ्यास के लिए कुछ उदाहरण यहाँ दिये जाते हैंवाक्यखण्ड
एक शब्द जिसके पाणि (हाथ) में चक्र है –

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मुहावरे-जब कोई पद या पदबंध अपना साधारण (कोशीय) अर्थ न देकर विशेष अर्थ देता है तो उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे “सिर हथेली पर रखना’ का सामान्य अर्थ सम्भव नहीं है क्योंकि कोई भी अपना सिर हथेली पर नहीं रखता। अतः इसका लाक्षणिक (रूढ़) अर्थ लिया जाता है-बड़े से बड़े बलिदान के लिए प्रस्तुत होना। मुहावरे मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति को अधिक चुस्त, सशक्त, आकर्षक और प्रभावी बनाते हैं।

लोकोक्ति-यह ‘लोक + उक्ति’ से बना है जिसका अर्थ है-जनसाधारण में प्रचलित कथन। लोकोक्तियों का निर्माण जीवन के अनुभवों के आधार पर होता है। अपने कथन की पुष्टि करने के लिए उदाहरण देने या अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लोकोक्तियों का प्रयोग किया जाता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

यहाँ यह बात ध्यान रखने की है कि मुहावरा वाक्य का अंग बनकर आता है किन्तु लोकोक्ति का स्वतंत्र प्रयोग होता है। दूसरे शब्दों में इस प्रकार भी कह सकते हैं कि मुहावरे का वाक्य-प्रयोग होता है, लोकोक्ति वाक्य के अंत में प्रयुक्त होती हैं।

मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर-बहुत-से लोग मुहावरे तथा लोकावित में कोई अंतर ही नहीं समझते। दोनों का अंतर निम्नलिखित बातों से स्पष्ट है-

क) लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जो भूतकाल का लोक-अनुभव लिए हुए होती है, जबकि मुहावरा अपने रूढ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है।
(ख) लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है, जबकि मुहावरा वाक्य का अंश होता है।
(ग) पूर्ण वाक्य होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र एवं अपने-आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है, जबकि मुहावरा किसी वाक्य का अंश बनकर आता है।
(घ) पूर्ण इकाई होने के कारण लोकोक्ति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता, जबकि मुहावरे में वाक्य के अनुसार परिवर्तन होता है।

मुहावरे

1. अँगूठा दिखाना (साफ इनकार कर देना)-जब मैंने मंदिर के लिए सेठ जी से दान माँगा तो उन्होंने अंगूठा दिखा दिया।
2. अपना उल्लू सीधा करना (स्वार्थ सिद्ध करना)-आजकल अधिकांश राजनेता गद्दी मिलते ही अपना उल्लू सीधा करने लगते हैं।
3. अगर-मगर करना (टाल-मटोल करना)-जब भी मैं अपने मित्र से पुस्तक वापस माँगता हूँ तो वह अगर-मगर करने लगता है।
4. अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना)-तुम्हारी अक्ल पर तो पत्थर पड़ गए हैं, बार-बार समझाने पर भी तुम नहीं मातने।
5. अपने पाँव आप कुल्हाड़ी मारना (स्वयं अपनी हानि करना)-दुष्ट से झगड़ा मोल लेकर मैंने अपने पाँव पाप कुल्हाड़ी मार ली।
6. अपनी खिचड़ी अलग पकाना (साथ मिलकर न रहना)-भारत के मुसलमान व राजपूत अपनी खिचड़ी अलग पकाते रहे, इसीलिए विदेशी लोग यहाँ शासन करने में सफल हो गए।
7. अक्ल का दुश्मन (मुर्ख)-हो तुम अक्ल के दुश्मन ही, जो थोड़ी-सी पैतृक-संपत्ति के लिए भाई के प्राण लेने की सोच रहे हो।
8. अंधेरे घर का उजाला (इकलौता पुत्र, जिस पर आशाएँ टिकी हों)-मोहन की मृत्यु उसके पिता से सही नहीं जाएगी। वह उनके अंधेरे घर का उजाला था।
9. अड़ियल टटू (हठी)-वत्सराज को समझाना बहुत कठिन है, वह अड़ियल टटू है।
10. अंधे की लकड़ी (एकमात्र सहारा)-सेठ जी के मरने के पश्चात् अब यह लड़का ही सेठानी जी के लिए अंधे की लकड़ी है।
11. अपने मुँह मियाँ मिठू बनना (अपनी प्रशंसा स्वयं करना)-आजकल के नेता अपने मुँह मिठू बनने में तनिक संकोच का अनुभव नहीं करते। 12. अपने पैरों पर खड़ा होना (आत्म-निर्भर रहना)-लालबहादुर शास्त्री ने बाल्यावस्था से ही अपने पैरों पर खड़ा होना सीख लिया था। ।
13. अपना ही राग अलापना (अपनी ही बात करते होना)–तुम सदैव अपना ही राग अलापते रहते हो, कभी दूसरों की भी सुन लिया करो।
14. अठखेलियाँ सूझना (मजाक करना)-मैं संकटों के जाल में फँसा हूँ और तुम्हें अठखेलियाँ सूझ रही हैं।
15. आँख दिखाना (गुस्से से देखना)-जो मुझे आँख दिखाएगा, मैं उसकी आँख फोड़ दूंगा।
16. आँखें खुलना (होश आना)-जब सभी कुछ जुए में लुट गया, तब कहीं, जाकर उसकी आँखें खुली।
17. आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना)-शिवाजी औरंगजेब की आँखों में धूल झोंककर उसके चंगुल से बच निकले।
18. आँखों का तारा (बहुत प्यारा)-श्याम अपनी माँ की आँखों का तारा है।
19. आँखें बंद करना (अनदेखा करना)-विदेशी शक्तियाँ देश को लूटे जा रही हैं, तो भी हमारे नेता आँखें बंद करके अपनी राजनीति का खेल खेल रहे हैं।
20. आँखें फेर लेना (प्रतिकूल होना, पहले-सा प्रेम न रखना)-जब सेमेरी नौकरी छूटी है, दोस्तों-मित्रों की तो क्या; घरवालों ने भी मुझसे आँगने फेर
ली हैं।
21. आँखें नीली-पीली करना (नाराज होना)-तुम व्यर्थ ही आँखें नीली-पीली कर रहे हो, मैंने कोई अपराध नहीं किया है।
22. आँखें चुरा लेना (अनदेखा करना)-ऋणी सदा ऋणदाता से आँखें चुराने का प्रयास करता है।
23. आँखों से गिरना (सम्मान नष्ट होना)–अपराधी व्यक्ति समाज की नहीं स्वयं अपनी आँखों से भी गिर जाता है।
24. आँखें बिछाना (बहुत आदर करना)- श्रद्धालु जन अपने नेता की राह में आँखें बिछाए बैठे हैं और नेताजी जनता को उल्लू बनाने के चक्कर में हैं।
25. आँसू पोंछना (सांत्वना देना)-कश्मीर से लाखों हिन्दूजन उजड़कर बर्बाद होने के बावजूद कोई भी नेता उनके आँसू तक पोंछने नहीं गया। 26. आँसू पीकर रह जाना (दुख को चुपचाप सहना)-अपने बंधु-बांधवों को इस प्रकार काल का ग्रास बनते देखकर आँसू पीकर रह जाने के अतिरिक्त उसके पास चारा भी क्या था ?
27. आँच न आने देना (तनिक भी कष्ट न होने देना)-तुम निर्भय होकर अपने कर्तव्य का पालन करो, मैं तुम पर आँच न आने दूंगा।
28. आसमान पर चढ़ना (बहुत अभिमान करना)-रमेश परीक्षा में प्रथम क्या आया, उसका दिमाग आसमान पर चढ़ गया है।
29. आकाश के तारे तोड़ना (असम्भव काम करना)-शादी से पहले जो प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए आकाश के तारे तोड़ने को तैयार था, वह अब उसे काटने दौड़ता है।
30. आकाश-पाताल का अन्तर (बहुत अन्तर)-महात्मा गाँधी और सुभाषचन्द्र बोस के स्वभाव में आकाश-पाताल का अन्तर था।
31. आकाश से बातें करना (बहुत ऊँचा होना)-कुतुबमीनार आकाश से बातें करती है।
32. आग बबूला होना (गुस्से से भर जाना)-इस समय आग बबूला होने बजाय शांति से इस समस्या का समाधान ढूँढने का प्रयत्न करो।
33. आकाश को छूना (बहुत ऊँचा होना)-दिल्ली की भव्य अट्टालिकाएँ आकाश को छूती-सी नजर आती हैं।

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34. आसमान सिर पर उठाना (बहुत शोर करना)-शिक्षक के वर्ग से प्रस्थान करते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठाना शुरू कर दिया।
35. आकाश-पाताल एक करना (बहुत परिश्रम करना)-परीक्षा का समय समीप आने पर छात्र आकाश-पाताल एक कर देते हैं।
36. आग में घी डालना (क्रोध को बढ़ाना)-वह पहले ही क्रोध से लाल हो रहा है, उसे छेड़कर तुम आग में घी डाल रहे हो।
37. आटे-दाल का भाव मालूम होना (कष्ट अनुभव होना)-पिता ने पुत्र से कहा कि जब अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा तब तुझे आटे-दाल का भाव मालूम होगा।
38. आपे से बाहर होना (बहुत क्रोधित होना)-बच्चे की साधारण-सी भूल पर आपे से बाहर होना उचित नहीं।
39. आगे-पीछे फिरना (चापलूसी करना)-अफसरों के आगे-पीछे फिर कर अपना काम निकालने में रामलाल बड़ा दक्ष है।
40. आस्तीन का साँप (धोखा देने वाला साथी)-सुभाष से सावधान रहना, वह आस्तीन का साँप है। तुम्हें मीठी-मीठी बातों में डस लेगा।
41. ओखली में सिर देना (जानबूझ कर विपत्ति में पड़ना)-मैंने उसे चलती बस में चढ़ने से खूब रोका परन्तु कोई ओखली में सिर देना ही चाहे तो मैं क्या कर सकता हूँ।
42. इधर-उधर की हाँकना (गप्पें मारना)-इधर-उधर की हाँकने से काम नहीं चलता, काम तो करने से ही होता है।
43. ईंट का जवाब पत्थर से देना (दुष्टता का उत्तर और अधिक दुष्टता से देना)-यदि पाकिस्तान ने पुनः हमारे देश पर आक्रमण करने का दुस्माहस किया ‘ तो हम ईंट का जवाब- पत्थर से देंगे।
44. ईद का चाँद (बहुत कम दिखाई देने वाला)-मित्र, आजकल तो तुम ईद के चाँद हो गए हो; कभी मिलते तक नहीं। ‘
45. ईंट से ईंट बजाना (समूल नष्ट-भ्रष्ट कर देना)-शिवाजी ने मुगलों की ईंट से ईंट बजाने की प्रतिज्ञा की थी।
46. ऊँगली उठाना (लाँछन लगाना)-सीता-सावित्री जैसी देवियों के चरित्र पर ऊँगली उठाना अनुचित है।
47. ऊँगली पर नाचना (वश में रखना)-आजकल की पलियाँ अपने पतियों को ऊँगली पर नचाती हैं।
48. उल्टी गंगा बहाना (विपरीत कार्य करना)-लोग प्रातः जल्दी उठकर पढ़ते हैं, तुम रात-भर पढ़कर प्रातः सोते हो; यह उल्टी गंगा बहाने की क्या सूझी?
49. एड़ी चोटी का जोर लगाना (बहुत प्रयत्न करना)-तुम एड़ी चोटी का जोर लगाकर भी परीक्षा में मुझसे अधिक अंक नहीं पा सकते।।
50. कंठ का हार होना (बहुत प्रिय होना)-राजा दशरथ कैकेयी को कंठ का हार समझते थे, परन्तु उसी ने उनकी पीठ में छरा घोंप दिया।
51. कंगाली में आटा गीला होना (अभाव में अधिक हानि होना)-उस दुखिया विधवा के घर पर चोरी होना तो कंगाली में आटा गीला होना है।
52. कमर कसना (तैयार होना)-कमर कस लो; पता नहीं, कब शत्रुओं से लोहा लेना पड़े।
53. कफन सिर पर बाँधना ( मरने के लिए तैयार होना)-वीर सिर पर कफन बाँधकर युद्ध की आग में कूद पड़ते हैं।
54. कठपुतली होना (पूर्णत: किसी के वश में होना)-प्राय: अच्छे-से-अच्छे पुरुष शादी के बाद पत्नी के हाथों की कठपुतली हो जाते हैं।
55. कलई खुलना (भेद खुल जाना)-यदि एक भी अपराधी हाथ में आ जाएगा तो मुम्बई बम-कांड की कलई खुल जाएगी।
56. कलेजे का टुकड़ा (बहुत प्रिय होना)-माँ बच्चे को अपने कलेजे का टुकड़ा मानती है, फिर भी बच्चे माँ का सम्मान नहीं करते।
57. कलेजा फटना (बहुत दुख होना)-पत्नी की मृत्यु का समाचार सुनकर । पति का कलेजा फट गया।
58. कलेजे पर साँप लोटना (ईर्ष्या से जलना)-जब से मेरे लड़के की नौकरी लगी है, तब से मोहन की माँ के कलेजे पर साँप लोटने लगा है।
59. कलेजा मुँह को आना (अत्यधिक व्याकुल होना)-लक्षमण तथा सीता सहित श्रीराम को वन में जाते देखकर अयोध्यावासियों का कलेजा मुँह को आ गय था।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

60. कलेजा ठंडा होना (संतोष होना)-जिस दिन तुमसे मैं अपनी पराजय का बदला ले लूँगा, उस दिन मेरा’ कलेजा ठंडा होगा।
61. कमर टूटना (निराश होना)-व्यापार में लाखों रुपये की हानि का समाचार पाकर सेठ घसीटामल की कमर टूट गई।
62. कान का कच्चा होना (बिना सोचे समझे बात पर विश्वास करना)-भई, घीसू की बात प्रमाणिक नहीं हो सकती।
63. काम आना (वीरगति प्राप्त करना)-गुरु गोविन्द सिंह के चारों पुत्र युद्ध में काम आ गए तो भी उनका उत्साह मंद नहीं हुआ।
64. कान पर जूं न रेंगना (बार-बार कहने पर भी असर न होना)-बार- बार पढ़ने के लिए कहने पर भी तुम्हारे कान पर जूं नहीं रेंगती।
65. कान भरना (चुगली करना)-किसी ने मेरे विरुद्ध मालिक के कान भर दिए, अत: मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है।
66. कानों-कान खबर न होना (बिल्कुल खबर न होना)-नेताजी सुभाषचन्द्र बोस घर छोड़कर चले गए परन्तु किसी को कानों-कान खबर न हुई।
67. काया पलट होना (बिल्कुल बदल जाना)-घर के वातावरण से निकलकर छात्रावास का नियमित जीवन जीने से छात्रों की काया पलट हो जाती है।
68. कोल्हू का बैल (लगातार काम में लगे रहना)-कोल्हू का बैत बनने पर भी मजदूर को पेट भर भोजन नहीं मिल पाता।
69. किताब का कीड़ा (हर समय पढ़ते रहना)-किताब का कीड़ा बनने से स्वास्थ्य नष्ट हो जाता है, तुम्हें थोड़ा खेलना भी चाहिए।
70. किरकिरा होना (मजा बिगड़ जाना)-तुम्हारे विवाह में अचानक मेरी तबियत बिगड़ जाने से सारा मजा किरकिरा हो गया।
71. खरी-खोटी सुनाना (बुरा-भला कहना)-खरी-खोटी सुनाने से क्या लाभ, शांति से समझौता कर लो।
72. खटाई में पड़ना (काम में अड़चन आना)-बिजली न होने के कारण कारखानों का उत्पादन-कार्य खटाई में पड़ गया है।
73. खाक में मिल जाना (नष्ट हो जाना)-हिन्दू जाति की गरिमा उसके असंगठित होने के कारण खाक में मिल गई।
74. खाला जी का घर (आसान काम)-एम.ए. की परीक्षा पास करना कोई खाला जी का घर नहीं है।
75. खून खौलना (जोश में आना)-निर्दोष को पिटते देखकर मेरा खून खौल उठा।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

76. खून का यूंट पीना (अपने क्रोध को भीतर ही भीतर सहना)-पुलिस के द्वारा अपमानित होने पर राम खून का चूंट पीकर रह गया।
77. खिल्ली उड़ाना (हँसी उड़ाना)-अपंग को देखकर खिल्ली उड़ाना भले लोगों का काम नहीं
78. गड़े मुर्दे उखाड़ना (पिछली बातें याद करना)-अगर गड़े मुर्दे उखाड़ोगे तो घर में शांति नहीं रह पाएगी।
79. गुलछर्रे उड़ाना (मौज उड़ाना)-वह अपने पिता के परिश्रम से अर्जित की हुई सम्पत्ति के बलबूते पर गुलछर्रे उड़ा रहा है।
80. गर्दन पर सवार होना (पीछा न छोड़ना)-जब तक उसका काम नहीं। कर दोगे, वह तुम्हारी गर्दन पर सवार रहेगा।
81. गले पड़ना (मुसीबतें पीछे पड़ना)-जब से यह दूरदर्शन की बीमारी हमारे गले पड़ी है, तब से बच्चे इसी से चिपके रहते हैं।
82. गागर में सागर भरना (बड़ी बात को थोड़े शब्दों में कहना)-बिहारी के संबंध में वह उक्ति पूर्णतया उचित है कि उन्होंने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
83. गाल बजाना (बढ़ा-चढ़ाकर अपनी प्रशंसा करना)-गाल बजाने के बजाय कुछ करके दिखाओ।
84. गिरगिट की तरह रंग बदलना (सिद्धान्तहीन होना)-आजकल के नेता इतने गिर चुके हैं कि वे नित्य गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
85. गुस्सा पीना (क्रोध को रोकना)-उस समय गुस्सा पीकर मैंने स्थिति को संभाल लिया अन्यथा झगड़ा बढ़ जाता।
86. गुदड़ी का लाल (निर्धन परिवार में जन्मा गुणी व्यक्ति)-‘जय जवान, जय किसान’ का उद्घोप करने वाले हमारे स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री वास्तव में गुदड़ी के लाल थे।
87. गुड़ गोबर का देना (बनी बात बिगाड़ देना)-लेट-लतीफ व्यक्ति महत्वपूर्ण कार्य का भी गुड़ गोबर कर देते हैं।
88. घड़ों पानी पड़ जाना (बहुत शर्मिंदा होना)-अपनी ईमानदारी की बातें करने वाले नेताजी को जब मैंने रिश्वत लेते हुए पकड़ा तो उन पर घड़ों पानी पड़ गया।
89. घर का चिराग (घर की आशा)-बच्चे ही घर का चिराग होते हैं।
90. घाव पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना)-वह अनुत्तीर्ण होने के कारण पहले से ही दुखी है, तुम जली-कटी सुनाकर उसके घाव पर नमक छिड़क रहे हो।
91. घाट-घाट का पानी पीना (अत्यन्त अनुभवी होना)-तुम क्या उसे अनाड़ी समझते हो ? उसने भी घाट-घाट का पानी पी रखा है। ।
92. घुटने टेकना (हार मान लेना)-महाराणा प्रताप ने जंगलों में भटकना स्वीकार किया, किन्तु शत्रु के सम्मुख घुटने टेकना स्वीकार नहीं किया।
94. घोड़े बेचकर सोना (निश्चित होना)-दिर-भर थकने के बाद मजदूर रात को घोड़े बेचकर सोते हैं।
95. चल बसना (मर जाना)-मेरे दादा जी कल चल बसे थे।

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96. चाँद पर थूकना (निर्दोष पर दोष लगाना)-अरे, उस संत-महात्मा पर व्यभिचार का आरोप लगाना चाँद पर थूकना है।
97. चादर से बाहर पैर पसारना (आमदनी से अधिक खर्च करना)-चादर से बाहर पैर पसारोगे तो कष्ट पाओगे।
98. चिराग तले अँधेरा (महत्वपूर्ण स्थान के समीप अपराध या दोष पनपना)-महात्मा जी के साथ रहकर भी चोरी करना वस्तुतः चिराग तले अँधेरा का होना है।
99. चिकना घड़ा (बेअसर)-अक्सर इकलौते लड़के लाड़-प्यार में बिगड़कर चिकने घड़े हो जाते हैं।
100. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (घबड़ा जाना)-जब चोर ने सामने से आते थानेदार को अपनी ओर लपकते देखा तो उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ गईं।
101. चैन की वंशी बजाना (आनन्द से रहना)-राम के राज्य में इतनी जन-सुविधाएँ थीं कि प्रजाजन चैन की वंशी बजाया करते थे।
102. छक्के छुड़ाना (हराना)-भारत ने युद्ध में पाक के छक्के छुड़ा दिए।
103. छठी का दूध याद आना (बहुत दुखी होना)-पुलिस ने चोर की ऐसी पिटाई की कि उसे छठी का दूध याद आ गया।
104. छाती पर साँप लोटना (जलना)-मझे प्रथम आया देखकर मेरी पडोसिन की छाती पर साँप लोट गया।
105. छाती से लगाना (बहुत प्यार करना)-सुदामा को देखते ही श्रीकृष्ण ने उसे छाती से लगा लिया।
106. छाती पर मूंग दलना (कष्ट पहुँचाना, सम्मुख अनुचित कार्य करना)-पिता ने नालायक पुत्र को घर से निकाल दिया, फिर भी वह उसी मुहल्ले में रहकर उनकी छाती पर मूंग दलता रहता है।
107. छिपा रुस्तम (देखने में साधारण, वास्तव में गुणी)-अरी संतोष ! तू तो छिपी रुस्तम निकली। तू इतना अच्छा गा लेती है, यह मैंने कभी सोचा भी न था।
108. छोटा मुँह बड़ी बात (अपनी सीमा से बढ़कर बोलना)-उस भ्रष्टाचारी लाला द्वारा आदर्शों पर दिया गया भाषण छोटा मुँह बड़ी बात है और कुछ नहीं।
109. जहर का यूंट पीना (अपमान सहन करना)-मेरे जीजा ने मुझ निरपराध को बुरी तरह पिटवाया परन्तु मैं अपनी बहन के हित में जहर की चूंट पीकर रह गया।
110. जान पर खेलना (जोखिम उठाना)-आजादी प्राप्त करने के लिए क्रांतिकारी वीर जान पर खेल जाते थे।
111. जूती चाटना (खुशामद करना)-अस्थायी नौकरी वालों को अपने उच्चाधिकारियों की जूतियाँ चाटनी पड़ती हैं, अन्यथा नौकरी से हाथ धो बैठने का खतरा रहता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

112. टका-सा जवाब देना (साफ इनकार करना)-मुसीबत पड़ने पर मैंने उससे थोड़ी-सी सहायता माँगी तो उसने टका-सा जवाब दे दिया।
113. टाँगे पसार कर सोना (निश्चित सोना)-परीक्षा देने के बाद छात्र टाँगे । पसार कर सोते हैं।
114. टाँग अड़ाना (व्यर्थ में दखल देना)-अपना काम करो, दूसरों के मामलों में क्यों टाँग अड़ाते हो ?
115. टालमटोल करना (बहाने बहाना)-कुछ लोगों का टालमटोल करने का स्वभाव बन जाता है।
116. टोपी उछालना (अपमानित करना)-बड़े बूढ़ों की टोपी उछालना भले लोगों का काम नहीं है।
117. ठोकरें खाना (धक्के खाना)-स्नातक होते हुए भी नौकरी के लिए ठोकरे खा रहा हूँ।
118. डींगें हाँकना (शेखियाँ जमाना)-उसे आता-जाता कुछ है नहीं, व्यर्थ में डींग हाँकता रहता है।
119. ढाक के तीन पात (कोई सुखद परिवर्तन न होना)-मैंने सोचा था कि अब जवानी में तुम्हारा स्वभाव कुछ मधुर हो गया होगा, किन्तु में देख रहा हूँ कि वही ढाक के तीन पात हैं।
120. तारे गिनना (व्यग्रता से प्रतीक्षा करना)-प्रेमी अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए दिन में तारे गिन रहा है और प्रेमिका को श्रृंगार से फुरसत नहीं।
121. तिल का ताड़ बनाना (छोटी-सी बात को बढ़ा देना)-बिना कारण माँ की तो तिल का ताड़ बनाने की आदत है।
122. तिल रखने की जगह न रहना (ज्यादा भीड़ होना)-शादी के अवसर पर घर-भर में इतने लोग इकट्ठे हो गए थे कि घर में तिल रखने की जगह नहीं रह गई थी।
123. तूती बोलना (बहुत प्रभाव होना)-स्वतंत्रता आंदोलन के समय सारे देश में महात्मा गाँधी की तूती बोलती थी।
124. थाली का बैंगन (सिद्धान्तहीन व्यक्ति)-उसे तुम अपनी पार्टी का । विश्वस्त कार्यकर्ता मत मानो, वह थाली का बैंगन है।
125. दाँतों तले अंगुली दबाना (आश्चर्यचकित होना)-भारतीय सैनिकों की वीरता के कारनामे सुनकर संसार दाँतों तले अंगुली दबाने लगा। 126. दाँत काटी रोटी होना (पक्की दोस्ती होना)-तुम मोहन और सोहन में फूट नहीं डाल सकते उनकी तो दाँत काटी रोटी है।
127. दाँत खट्टे करना ( हराना)-भारतीय सेना ने पाक सेना के दाँत खट्टे कर दिए।
128. दाल में कुछ काला (‘कुछ रहस्य होना)-दाल में कुछ काला है, तभी तो मरे समीप पहुँचते ही उन्होंने बातें करनी बंद कर दी।
129. दाल न गलना (सफल न होना)-अकबर ने अनेक चालें चलीं, परन्तु राणा प्रताप के सामने उसकी दाल न गल सकी।
130. दाहिना हाथ (बहुत बड़ा सहायक)-पंडित जवाहरलाल नेहरू । महात्मा गाँधी के दाहिने हाथ थे।
131. दिन फिरना (भाग्य पलटना)-मोहन, निराश होने की आवश्यकता नहीं है। दिन फिरते तनिक देर नहीं लगती।
132. दिन दुनी रात चौगुनी उन्नति करना ( अधिकाधिक उन्नति करना)-प्रत्येक माँ अपने बेटे को यही आशीर्वाद देती है कि बेटा दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करे।
133. दनिया से कच कर जाना (मर जाना)-संसार का प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि उसे इस दुनिया से कूच कर जाना है, फिर भी धन-संग्रह की लालसा समाप्त नहीं होती।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

134. दुम दबाकर भागना (डरकर भाग जाना)-पुलिस को आते देखकर चोर दुम दबाकर भाग गया।
135. दूध का दूध पानी का पानी (ठीक-ठीक न्याय करना)-सच्चा न्यायाधीश वही है, जो दूध का दूध पानी का पानी कर दे।
136. दूर के ढोल सुहावने लगना (पूरे परिचय के अभाव में कोई वस्तु आकर्षक लगना)-अपने देश को छोड़कर विदेशों में मत भागो। वहाँ भी कम कष्ट नहीं हैं। याद रखो, दुर के ढोल सुहावने गलते हैं।
137. दो नावों पर पैर रखना (एक साथ दो लक्ष्यों को प्राप्त करने की । चेष्ट करना)-दो नावों पर पैर रखने वाला कभी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाता है।
138. धज्जियाँ उड़ाना (खंड-खंड कर देना)-सरोजिनी नायडू ने अपने वक्तव्य से अंग्रेजी के थोथे तर्कों की धज्जियाँ उड़ा डालीं।
139. धरती पर पाँव न पड़ना (अभिमान से भरा होना)-जब से सुबोध मंत्री बना है, तब से उसके पाँव धरती पर नहीं पड़ते।
140. धाक जमाना (रौब जमाना)-सरदार पटेल ने अपने परिश्रम और दृढ़ चरित्र से ऐसी धाक जमा रखी थी कि अंग्रेज सरकार भी उनका लोहा मानती थी।
141. नमक हलाल होना (कृतज्ञ होना)-राम नमक हलाल नौकर है।
142. नमक-मिर्च लगाना (बढ़ा-चढ़ाकर)-आजकल समाचार-पत्रों में नमक-मिर्च लगी हुई बातें छपी होती हैं जिससे साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठने की संभावना बनी रहती है!
143. नानी याद आना (संकट में पड़ना)-भारत-पाक युद्ध में पाक सेना को नानी याद आ गई।
144. नाक में दम करना (बहुत तंग करना)-राणा प्रताप ने अकबर की नाम में दम कर दिया।
145. नाक रखना (मान रखना)-कठिन समय में सहायता कर उसने समाज में मेरी नाक रख ली।
146. नाकों चने चबाना (बहुत तंग करना)-शिवाजी ने मुगल-सेना को अनेक बार नाकों चने चबवाए।
147. नाक कटना (इज्जत जाना)-चोरी के अपराध में अदालत की ओर से दण्डित होने पर उसकी नाक कट गई।
148, नाक-भौं चढ़ाना (घृणा प्रकट करना)-जब भी बहू घर का कोई काम करती है सास नाक-भौं चढाकर उसकी टियाँ निकालना शरू कर देती है।
149. नाक पर मक्खी न बैठने देना (अपने पर आक्षेप न आने देना):- ‘अफसर लोग चाहे कितने ही आरोपों से घिरे हों, पर वे अपनी नाक पर
मक्खी नहीं बैठने देते।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

150. नाक रगड़ना (गिड़गिड़ाकर क्षमा माँगना)-मोहन थोड़ी देर पहले
अकड़ रहा था, अब नाक रगड़ रहा है।
151. नाक में नकेल डालना (अच्छी तरह नियंत्रण में रखना)-रामलाल की पत्नी उसकी नाक में नकेल डालकर रखती है, परन्तु वह उसकी तनिक चिंता नहीं करता।
152. निन्यानवे के फेर में पड़ना (धन-संग्रह की चिंता करना)-निन्यानवे के फेर में पड़कर मैंने अनेकानेक चिंताओं को मोल ले लिया तथा समाज में बनी अपनी प्रतिष्ठा को गँवा दिया।
153. नीचा दिखाना ( पराजित करना)-पाकिस्तान ने जब कभी हमारी सीमाओं का उल्लंघन कर हम पर आक्रमण किया, हमने सदैव उसे नीचा दिखाया।
154. नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना)-बिल्ली को देखते ही चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।
155. पहाड़ टूटना (बहुत भारी कष्ट आ पड़ना)-अरे, जरा-सी खरोंच आने पर तुम तो ऐसे रो रहे हो जैसे पहाड़ टूट गया हो।
156. पर निकलना (स्वच्छंद हो जाना)-कॉलेज-जीवन में जाते ही प्रत्येक बच्चे के पर निकल आते हैं।
157. पत्थर की लकीर (पक्की बात)-मैंने जो कुछ भी कहा है, उसे पत्थर की लकीर समझना।
158. पलकें बिछाना (प्रेमपूर्वक स्वागत करना)-नेहरू जी के सोनीपत आने पर नगरवासियों ने उनके स्वागत में पलकें बिछा दी।
159. पाँव उखड़ जाना (स्थिर न रहना, युद्ध में हार जाना)-शिवाजी की छापमार रणनीति से औरंगजेब की सेना के पाँव उखड़ जाते थे।
160. पाँचों ऊँगली घी में होना (बहुत लाभ होना)-जब से मेरा भाई उपमंत्री बना है, मेरी तो पाँचों ऊँगलियाँ घी में हैं।
161. पारा उतरना (क्रोध शांत होना)-मैं जानता हूँ कि माँ का पार तभी उतरेगा जब वह अपने एकाध बच्चे पर गरज-बरस लेंगी।
162. पानी-पानी होना (लज्जित होना)-पर्स खोलते हुए माँ के द्वारा देख लिए जाने पर पुत्र पानी-पानी हो गया।
163. पापड़ बेलना (कष्ट उठाना)-नौकरी पाने के लिए मैंने कितने ही पापड़ बेले परन्तु मुझे सफलता नहीं मिली।
164. पानी का बुलबुला (शीघ्र नष्ट हो जाने वाला)-साधु-संतों ने मानव-जीवन को पानी का बुलबुला बतलाकर उसकी वास्तविकता पर प्रकाश डाला है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

165. पीठ दिखाना (हार कर भागना)-भारतीय वीरों ने युद्ध में मरना सीखा है, पीठ दिखाना नहीं।
166. पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख लगना)-जब मैं निरन्तर तीन किलोमीटर की यात्रा तय करने के पश्चात घर पहुँचा, उस समय मेरे पेट में चूहे कूद रहे थे।
167. पैरों तले से जमीन निकल जाना (स्तब्ध रह जाना)-अपने भाई की हृदय-गति रूकने से मृत्यु हुई जानकर उसके पैरों तले से जमीन निकल गई।
168. प्राणों की बाजी लगाना (किसी कार्य के लिए प्राण देना)-अमर शहीद भगतसिंह ने देश की बलिवेदी पर हँसते-हँसते प्राणों की बाजी लगा दी।
169. फंक-फूंक कर कदम रखना (बड़ी सावधानी से काम करना)-व्यक्ति लाख फूंक-फूंक कर कदम रखे, परन्तु जो होनी में लिखा है; वह होकर रहता है।
170. फूटी आँख का सुहाना (जरा भी अच्छा न लगना)-जब से मुझे उसकी चुगली करने की आदत का पता चला है, वह मुझे आँख नहीं सुहाता।
171. फला न समाना (बहत खश होना)-परीक्षा में सफल होने का समाचार सुनकर कार फूला न समाया।
172. बगला भगत (धर्त आदमी)-यह साधु बगला भगत है।
173. बंदर घुड़की ( थोथी धमकी)-भारत चीन की बंदर घुड़कियों से डरने वाला नहां, सैनिक दृष्टि से अब हमारी पूर्ण तैयारी है।
174. बगलें झाँकना (निरुत्तर हो जाना)-जब मैंने रहस्य जानने के लिए उसमें घूमा-फिराकर प्रश्न पूछे, तो वह बगलें झाँकने लगा।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण मुहावरे

175. बहती गंगा में हाथ धोना (अवसर का लाभ उठाना)-1977 के चुनावों में सरकार के विरोध की ऐसी लहर थी कि उस बहती गंगा में जो भी हाथ धो गया, वह मंत्री या नेता बन गया।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

[जब तक अन्यश्चा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 1.
निम्न त्रिज्या वाले गोले का पृष्टीय क्षेत्रफल ज्ञास कीजिए।
(i) 10.5 cm
(ii) 5.6 cm
(iii) 14 cm
उत्तर:
(i) दिया है, गोले की प्रिग्या (r) = 10.5 cm
अतः गोले का पुष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 10.5 × 10.5
= 1386 cm².

(ii) दिया है, गोले की त्रिज्या (r) = 5.6 cm
अतः गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 5.6 × 5.6
= 394.24 cm².

(iii) दिया है, गोले की त्रिज्या (r) = 14 cm
अतः गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14
= 2464 cm².

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 2.
निम्न व्यास वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:
(i) 14 cm
(i) 21 cm
(iii) 3.5 cm
उत्तर:
(i) दिया है. व्यास = 14 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 7 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 = 616 cm²

(ii) दिया है. व्यास = 21 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 10.5 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 10.5 × 10.5 = 1386 cm²

(iii) दिया है. व्यास = 3.54 सेमी.
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 1.75 cm
अत: गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 4πr² = 4 × \(\frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 = 38.5 cm²

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प्रश्न 3.
10 cm त्रिज्या वाले एक अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए।)
उत्तर:
दिया है, त्रिज्या (r) = 10 m
अन: अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 3πr² = 3 × 3.14 × 10 × 10
= 942 cm²

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प्रश्न 4.
एक गोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर, आकी त्रिज्या 7 cm से 14 cm हो जाती है। इन दोनों स्थितियों में, गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना हवा भरने से पहले त्रिज्या r1 = 7 cm
तथा हवा भरने के बाद त्रिज्या r2 = 14 cm
पृष्टीय क्षेत्रफलों का अनुपात
= \(\frac{4πr_1^2}{4πr_2^2}\) = \(\frac{r_1^2}{r_2^2}\) = \(\frac{7×7}{14×14}\) = \(\frac{1}{4}\)
∴ दोनों स्थितियों का अनुपात 1 : 4.

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प्रश्न 5.
पीतल से बने एक अर्धगोलाकार कटोरे का आंतरिक व्यास 10.5 cm है। Rs 16 प्रति 100 cm² की दर से इसके आंतरिक पृष्ठ पर कलई का ज्यब ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, कटोरे का आंतरिक व्यास = 10.5 cm
∴ त्रिज्या = \(\frac {व्यास}{2}\) = 5.25 cm
अतः कटोरे का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr²
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 5.25 × 5.25 = 173.25 cm²
∵ 100 cm² पर कलई का व्यय = Rs 16
∴ 173.25 पर कलई का व्यय = \(\frac{16×173.25}{100}\)
= Rs 27.72

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प्रश्न 6.
उस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका पृष्टीय क्षेत्रफल 154 cm² है।
उत्तर:
माना गोले को विन्या = r cm
दिया है, पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154
∴ 4πr² = 154
⇒ 4 × \(\frac{22}{7}\) × r² = 154
⇒ r = \(\sqrt{\frac{154×7}{4×22}}\) + \(\sqrt{12.25}\) = 3.5 cm
अत: गोले की त्रिज्या 3.5 cm है।

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प्रश्न 7.
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। इन दोनों के पृष्टीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
मन पृथ्वी का व्यास = d1
अत: चन्द्रमा का व्यास = \(\frac{d_1}{4}\)
∴ पृथ्वी की त्रिय, r1 = \(\frac{d_1}{2}\) तथा चन्द्रमा की जिज्या, r2 = \(\frac{d_1}{2×4}\) = \(\frac{d_1}{8}\)
दोनों के पचीय क्षेत्रफलों का अनुपात
= \(\frac{4π(\frac{d_1}{8})^2}{4π(\frac{d_1}{2})^2}\) = \(\frac{\frac{d_1^2}{64}}{\frac{d_1^2}{4}}\) = \(\frac{1}{16}\)
अत: पृष्टीय क्षेत्रफलों में अनुपात = 1 : 16

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प्रश्न 8.
एक अर्द्धगोलाकार कटोरा 0.25 cm मोटी स्टील से बना है। इस कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या 5 cm है। कटोरे का बाहरी पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, गोले को आन्तरिक त्रिज्या r = 5 cm
स्टील की मोटाई = 0.25 cm
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4
⇒ बाहरी प्रिया = r + 0.25
= 5 + 0.25 = 5.25 cm
कटोरे का बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr²
= 2 × \(\frac{22}{7}\) + 5.25 × 5.25
= 173.25 cm².

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प्रश्न 9.
एक लंबवृत्तीय बेलन त्रिज्या वाले एक गोले को पूर्णतया पेरे हुए है (देखिए पाठ्य-पुस्तक में आकृति)। जात कीजिए-
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(iii) ऊपर (i) और (ii) में प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात।
उत्तर:
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
(ii) बेलन की ऊंचाई = 2r
बेलन का चक्र पृष्ठीय क्षेत्रफ = 2πr (2r) = 4πr².
(iii) क्षेत्रफलों का अनुपात = \(\frac{4πr^2}{4πr^2}\)
= 1 : 1.
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Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

[जब तक अन्यथा न कहा जाए π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।]

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प्रश्न 1.
एक शंकु के आधार का व्यास 10.5 cm है और इसकी तिर्यक ऊँचाई 10 cm है। इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है, शंकु को तिर्यक ऊँचाई (l) = 10 cm,
r = \(\frac {व्यास}{2}\) = 5.25 cm
अत: शंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) 5.25 × 10
= 165 cm².

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प्रश्न 2.
एक शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसकी तिर्यक ऊंचाई 21 m है और आधार का व्यास 24 m है।
उत्तर:
दिया है, तिर्यक ऊँचाई l = 21 m, आधार का व्यास = 24 m
अतः त्रिज्या r = \(\frac{22}{7}\) = 12 m
∴ पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr(r + l) = \(\frac{22}{7}\) × 12(12 + 21)
= 1244.57 m²

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प्रश्न 3,
एक शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 308 cm² है और इसकी तिर्यक ऊँचाई 14 cm है। ज्ञात कीजिए।
(i) आधार की प्रिज्या
(ii) शंकुका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
उत्तर:
दिया है तिर्यक ऊँचाई l = 14 cm
(i) माना आधार की त्रिज्या = r
पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl = 308
∴ \(\frac{22}{7}\) × r × 14 = 308 = r ⇒ 7 cm

(ii) शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr (r + l)
= \(\frac{22}{7}\) × 7(7 + 14) = 462 cm²

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प्रश्न 4.
शंकु के आकार का एक तंबू 10 m ऊँचा है और असके आधार की त्रिज्या 24 m है। ज्ञात कीजिए :
(i) तंबू को तिर्यक ऊंचाई
(ii) तंबू में लगे केनवास (canvas) की लागत, बदि 1 m² केनवास की लागत Rs 70 है।
उत्तर:
दिया है शंक्वाका तम्बू की ऊँचाई. h = 10 m तथा आधार की प्रिया r = 24 m
(i) माना तिर्यक ऊँचाई = l
∴ l² + h² + r² ⇒ l = \(\sqrt{10^2+24^2}\) = \(\sqrt{676}\) = 26 m

(ii) तंबू के लिए आवश्यक केनवास
= शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) × 24 × 26 = 1961.14 m²
∴ 1 m² केनवास की लागत = Rs 70
∴ 1961.14 m² केनवास को लागत
= 70 × 1961.14 = Rs 1,37,280

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प्रश्न 5.
8 m ऊंचाई और आपार की प्रिज्या 6 m वाले एक शंकु के आकार का तंबू बनाने में 3 m चौड़े तिरपाल की कितनी संबाई लगेगी? यह मान का बलिए कि इसकी सिलाई और कटाई में 20 cm तिरपाल अतिरिक्त लगेगा। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
दिया है, तम्बू की ऊँचाई, h = 8 m तथा आधार की त्रिज्या, r = 6 m
संयू की गिर्यक ऊँचाई (l)
= \(\sqrt{r^2+h^2}\) = \(\sqrt{6^2+8^2}\) = 10 m
तंन्यू के लिए आवश्यक तिरपाल का क्षेत्रफल
= तंबू का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl = 3.14 × 6 × 10 = 188.4 m
∴ तिरपाल को लम्बाई =
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= \(\frac{188.4}{3}\) = 62.8 m
सिलाई कटाई के लिए अतिरिका तिरपाल = 20 cm = 0.2 m.
आत: तिरपाल को कुल लम्बाई = (62.8 + 0.2) = 63 m.

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प्रश्न 6.
शंकु के आधार के एक गुंबज की तिर्यक ऊँचाई और आधार का व्यास क्रमश: 25 m और 14 m है। इसकी वक्र पृष्ठ पर Rs 210 प्रति 100 m² की दर से सफेदी कराने काव्यय ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है. शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) = 25 m
⇒ शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 7 m
अत: शंकु का चक्रपृष्तीय क्षेत्रफल = πrl
= \(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 = 550 m²
∴ प्रति 100 m² सफेदी कराने का व्यय = Rs 210
∴ 50 m² सफेदी कराने का व्यय = \(\frac {210×550}{100}\)
= Rs 1,155.

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प्रश्न 7.
एक जोकर की टोपी एक शंकु के आकार की है, जिसके आधार की त्रिज्या 7 cm और ऊँचाई 24 cm है। इसी प्रकार की 10 टोपियाँ बनाने के लिए आवश्यक गने का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है. r = 7 रोमी, h = 24 सेनी
माना शंकु की तिर्यक ऊँचाई = l
∴ l = \(\sqrt{r^2+h^2}\) = \(\sqrt{7^2+24^2}\) = \(\sqrt{625}\) = 25 cm
एक टोपी के लिए आवश्यक गता
= शंकु का वक्र वृष्टीय क्षेत्रफल
= πrl = \(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 = 550 m²
आत: 10 टोपी के लिए आवश्यक गता
= 10 × 550 = 5500 cm².

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प्रश्न 8.
किसी बस स्टाप को पुराने गत्ते से बने 50 खोखले शंकुओं द्वारा सड़क से अलग किया हुआ है। प्रत्येक शंकु के आधार का व्यास 40 cm है और ऊँचाई 1 m है। यदि इन शंकुओं की बाहरी पृष्ठों को पेंट करवाना है और पेंट की दर 12 प्रति m² है, तो इनको पेंट कराने में कितनी लागत आएंगी?
(π = 3.14 और \(\sqrt{1.04}\) = 1.02 का प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
दिवा है, शंकु की ऊँचाई (h) = 1 m, त्रिज्या (r) = \(\frac {व्यास}{2}\) = 0.2 m
माना शंकु की तिर्दक ऊँचाई = l
∴ l = \(\sqrt{h^2+r^2}\) = \(\sqrt{1^2+(0.2)^2}\) = \(\sqrt{1.04}\) = 1.02 cm
प्रत्येक शंकु का शाहरी पृष्ठ = πrl = 3.14 × 1.02 × 0.2 = 0.64 m²
अत: 50 संकुों के बाहरी पृष्ठ = 50 × 0.64 = 32.0. m²
1 m² को पेंट कराने का व्यय = Rs 12
∴ 32.03 m² को गैट कराने का व्यय = 12 × 32.03
= Rs 384.34

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