Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 4 कपड़े तरह-तरह के : रेशे तरह-तरह के

Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 4 कपड़े तरह-तरह के : रेशे तरह-तरह के Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 4 कपड़े तरह-तरह के : रेशे तरह-तरह के

Bihar Board Class 8 Science कपड़े तरह-तरह के : रेशे तरह-तरह के Text Book Questions and Answers

अभ्यास

Bihar Board 8th Class Science प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. संश्लेषित रेशे …………. अथवा ……….. रेशे भी कहलाते हैं।
  2. सूती वस्त्र जलने पर …………. के जलने जैसी गंध आती है जबकि नाइलॉन से उबलती हुई ………….. के समान गंध निकलती है।
  3. सूती और नाइलॉन के वस्त्र को फाड़ने पर ………… वस्त्र आसानी से फटते हैं।
  4. ………… रेशा सेलुलोज के रासायनिक क्रियाओं द्वारा प्राप्त किए जाते हैं।

उत्तर-

  1. कृत्रिम, मानव निर्मित
  2. कागज, फली
  3. सूती
  4. रेयॉन।

Bihar Board Class 8 Science Solution In Hindi प्रश्न 2.
मिलान कीजिए

Bihar Board 8 Class Science Solution

उत्तर-

  1. (ग)
  2. (घ)
  3. (ख)
  4. (क)

Class 8 Science Bihar Board प्रश्न 3.
कुछ रेशे संश्लेषित क्यों कहलाते हैं ?
उत्तर-
कपड़ा मानव सभ्यता के विकास की देन है। कपडा मानव सभ्यता और संस्कृति के सूचक है। प्राचीन काल से ही मानव तन ढंकने का प्रयल करता रहा है। इस काम के लिए उसने आदिम युग में घास-फूस, पेड़-पौधे, पत्ते-छाल तथा मृत पशुओं की खाल आदि का प्रयोग किया। परंतु जिज्ञासु मानव इतने से कब संतुष्ट होने वाला था। मानव की जिज्ञासा तथा तीव्र बुद्धि ने वस्त्रों की उत्पत्ति के साधन एवं वस्त्रों के निर्माण कला को यहाँ तक पहुंचा दिया।

पौधों तथा जन्तुओं से प्राप्त होने वाले रेशों से बने कपड़े के गुण जैसे जल्दी गंदा होना, धोने से सिलवट पड़ने, रख-रखाव में परेशानी तथा इसकी सीमित उत्पादन ने तथा विज्ञान के विकास ने एक नए रेशे के आविष्कार में मुख्य भूमिका अदा किए। आज रासायनिक संश्लेषण प्रक्रिया के द्वारा रेशों का निर्माण होने लगा है। इस प्रकार के रेशा को संश्लेषित रेशा कहते हैं। जैसे-नायलॉन, रेयॉन, टेरिलीन, टेरीकॉट इत्यादि ।

इस प्रकार रेशों को दो तरह से प्राप्त किया जाता है। एक पेड-पौधों तथा जानवरों से तो दूसरा मानव निर्मित यानी संश्लेषित रेशा, यही कारण है कि कुछ रेशों को संश्लेषित रेशा कहा जाता है।

Bihar Board Class 8 Science Solution प्रश्न 4.
नाइलॉन रेशों से निर्मित दो वस्तुओं के नाम बताइए जो नाइलॉन रेशे की प्रबलता दर्शाती है।
उत्तर-
ऐसे तो नाइलॉन से बहुत सारी वस्तुएँ बनती हैं। परन्तु इसकी प्रबलता को दर्शाने वाले दो प्रमुख वस्तुएँ – पैराशुट, चट्टानों या पहाड़ों पर चढ़ने हेतु रस्से।

Bihar Board Class 8th Science Solution प्रश्न 5.
रसोई घर में संश्लेषित वस्त्र पहनने की सलाह नहीं दी जाती है। क्यों ?
उत्तर-
संश्लेषित वस्त्र काफी हल्के होते हैं जिसके कारण थोड़ी-सी शारीरिक हलचल या हवा से इधर से उधर हो जाते हैं। जिसके कारण आग के. चपेट में आ जाते हैं। इतना ही नहीं, यह आग को भी बहुत जल्दी पकड़ लेता है और साथ ही इसमें आग बहुत जल्दी-जल्दी आगे बढ़ता चला जाता है। परिणामस्वरूप किसी दुर्घटना होने की संभावना प्रबल होती है इसलिए रसोईघर में संश्लेषित वस्त्र पहनने की सलाह नहीं दी जाती है।

Bihar Board Class 8 Science Book Solutions प्रश्न 6.
रेयॉन को “नकली रेशम” क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-
सबसे पहले प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए कृत्रिम रूप से रेशा का निर्माण किया गया। रेयॉन उन्हीं में से एक है।

रेयॉन, लकड़ी के लुग्दी द्वारा कृत्रिम रेशा प्राप्त किया गया । जिसका गुण रेशम के समान होता है। यही कारण है कि रेयॉन को कृत्रिम या नकली रेशम कहा जाता है।

Bihar Board Class 8 Science प्रश्न 7.
संश्लेषित वस्त्र गर्मी के मौसम में आरामदेह नहीं होते हैं क्यों ?
उत्तर-
संश्लेषित वस्त्र में जलग्रहण करने की क्षमता बहुत कम होती है तथा ऊष्मा का सुचालक होता है यानि धूप या प्रकाश को ग्रहण कर काफी गर्मी महसूस होता है। साथ ही पसीना को भी नहीं सोंख पाता है। इन्हीं कारणों से ये गर्मी में आरामदायक नहीं होते हैं।

Bihar Board Class 8 Science Solution In Hindi Pdf Download प्रश्न 8.
एक्रिलिक के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर-
एक्रिलिक के दो उपयोग

  1. स्वेटर बनाने में।
  2. कम्बल बनाने में।

Bihar Board Class 8 Science Book Pdf प्रश्न 9.
रेशा का नाम बताइए जो-

  1. जलने पर जलते हुए कागज का गंध देता हो।
  2. जलने पर जलते हुए बाल का गंध देता हो।
  3. जलने पर उबलती हई फली का गंध देता हो।

उत्तर-

  1. वह रेशा जो जलने पर जलते हुए कागज का गंध देता हो वह सूती कहलाता है।
  2. वह रेशा जो जलने पर जलते हुए बाल का गंध देता है वह रेशम कहलाता है।
  3. वह रेशा जो जलने पर उबलती हुई फली का गंध देता हो वह नाइलॉन कहलाता है।

Class 8 Bihar Board Science Solution प्रश्न 10.
संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण वास्तव में वनों के संरक्षण में सहायक रहा है। टिप्पणी दीजिए।
उत्तर-
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक रेशों के निर्माण में पेड़ों का भरपूर उपयोग हुआ। आधुनिक काल में रेयॉन बनाने में लकड़ी का लुगदी का प्रयोग किया जाता रहा परन्तु रेयॉन के बाद नायलॉन, पॉलिस्टर टेरीकॉट एक्रिलिक में लकड़ी का उपयोग नहीं हुआ और आज सम्पूर्ण आवश्यकता की पूर्ति सिर्फ वस्त्र के रूप में ही नहीं बल्कि जरूरत की अन्य सामग्री जैसे कुर्सी, टेबुल आदि भी कृत्रिम रेशों से बनाए जाने लगे । इस प्रकार संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण वनों के संरक्षण में सहायक रहा।

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

Bihar Board Class 12 History एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर Textbook Questions and Answers

उत्तर दीजिए (लगभग 100-150 शब्दों में)

Bihar Board Solution Class 12th History प्रश्न 1.
पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों को अध्ययन में कौन-सी पद्धतियों का प्रयोग किया गया है? आपके अनुसार यह पद्धतियाँ विरुपाक्ष मंदिर के पुरोहितों द्वारा प्रदान की गई जानकारी की किस प्रकार पुरक रही?
उत्तर:
पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों के अध्ययन की पद्धतियाँ एवं विरुपाक्ष मंदिर के पुरोहितों द्वारा प्रदान की गई जानकारी का यूरक: विजयनगर का विनाश होने के लगभग दो सौ वर्ष पश्चात् भी विजयनगर की स्मृति बनी रही। हम्पी की खोज में एक अभियन्ता (Engineer) एवं पुरातत्वविद् कर्नल कॉलिन मैकेन्जी का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। उसने 1800 ई० में इस स्थान का सर्वप्रथम सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया।

उसे विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुजारियों से इसके बारे में आरंभिक जानकारी मिली। इसके आधार पर 1856 ई० से छायाचित्रकारों ने शोधकर्ताओं के अध्ययन कार्य को सुगम बनाने के लिए यहाँ के भवनों के चित्र संकलित करने आरंभ किये। 1836 ई० से विद्वानों ने विभिन्न मंदिरों से अनेक अभिलेख एकत्र करने शुरू कर दिए। विजयनगर साम्राज्य के इतिहास का पुनर्निर्माण करने के लिए इन स्रोतों की विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों तथा तेलुगु कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे गये साहित्य से तुलना की गई।

विजयनगर शासकों ने वर्षा जल संचयन Bihar Board Class 12 प्रश्न 2.
विजयनगर की जल आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा किया जाता था?
उत्तर:
विजयनगर की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के उपाय –

  1. विजयनगर का क्षेत्र एक शुष्क क्षेत्र है। इसकी जल आवश्यकता तुंगभद्रा नदी पूरी करती है। यह नदी एक प्राकृतिक कुंड का निर्माण करती है।
  2. नदी के आस-पास करधनी के रूप में ग्रेनाइट पत्थर की पहाड़ियाँ हैं जिनका पानी जल धाराओं के रूप में नदी में गिरता है।
  3. सभी धाराओं के साथ एक हौज बनाया गया है। हौज के जल का प्रयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है।
  4. इन हौजों में प्रसिद्ध हौज 15 वीं शताब्दी में निर्मित कमलपुरम् जलाशय है। इसके जल का प्रयोग पीने और सिंचाई दोनों कार्यों के लिये किया जाता है।
  5. जल का प्रमुख स्रोत हिरिया नहर था। इस नहर में तुंगभद्रा पर बने बांध से पानी लाया जाता था और घाटी स्थित कृषि भूमि को सिंचाई में प्रयोग किया जाता था।

विजयनगर में सेना प्रमुख को क्या कहा जाता था Bihar Board Class 12 प्रश्न 3.
शहर के किलेबंद क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने के आपके विचार में क्या फायदे और नुकसान थे?
उत्तर:
शहर के क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने के फायदे और नुकसान –
1. विजयनगर के शासकों ने शहर के किलेबंद क्षेत्र के भीतर ही कृषि क्षेत्र को रखा था। इसकी पुष्टि फारस यात्री अब्दुर्रज्जाक और पुरातत्त्वविदों ने की है। इसका फायदा यह था कि आक्रमणकारियों को खाद्य सामग्री से वंचित करने और समर्पण के लिए बाध्य करने में होता था। आक्रमणकारियों द्वारा किले को कई महीनों और यहाँ तक कि वर्षों तक घेरा जा सकता था। ऐसी परिस्थितियों में प्राथमिक जरूरत को पूरा करने के लिए किलेबंद क्षेत्रों के भीतर ही खेती की व्यवस्था और अन्नागारों का निर्माण किया जाता था।

2. इस व्यवस्था का नुकसान यह था कि शासकों को कृषि क्षेत्र विस्तृत होने के कारण किले की ऊँची प्राचीर तैयार कराने में बहुत अधिक खर्च आता था । पर्याप्त साधनों और धन की आवश्यकता होती थी।

प्रश्न 4.
आपके विचार में महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठानों का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठान:
महानवमी डिब्बा शहर की सबसे ऊँची संरचना थी। इसका आधार 11000 वर्ग फीट है। मंच के आधार पर सुन्दर आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं। इस ढाँचे का सम्बन्ध 10 दिन चलने वाले हिंदू त्यौहार दशहरा (उत्तर भारत), दुर्गापूजा (बंगाल) तथा नवरात्रि या महानवमी (दक्षिण भारत) के साथ था। इस अवसर पर शासक अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करता था। इसके अलावा अन्य धर्मानुष्ठानों में मूर्ति पूजा राज्य के अश्व की पूजा, भैंसों और अन्य जानवरों की बलि शामिल है। इस अवसर पर विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरस्कार और उपहार दिए जाते थे। राजा सेना का निरीक्षण भी करता था। इन सबके बावजूद महानवमी डिब्बा के विषय में स्पष्ट जानकारी अभी तक प्राप्त नहीं हो पाई है।

प्रश्न 5.
यह विरुपाक्ष मंदिर के एक अन्य स्तंभ का रेखाचित्र है। क्या आप कोई पुष्प-विषयक रूपांकन देखते हैं? किन जानवरों को दिखाया गया है? आपके विचार में उन्हें क्यों चित्रित किया गया है? मानव आकृतियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. स्तंभ पर अश्व के नीचे पुष्प विषयक रूपांकन दिखाई देता है। शायद अश्व के महत्त्व को दर्शाने के लिए ऐसा किया गया है।
  2. स्तम्भ पर अश्व मोर को दिखाया गया है। अश्व विजय का प्रतीक होता है और मोर राष्ट्रीय पक्षी है।
  3. इसमें तीन मानव आकृतियाँ हैं। सबसे ऊपर स्त्री की आकृति है जिसके एक हाथ में पुष्प है। उसके नीचे दूसरी आकृति धनुष लिये हुए हैं और उसका एक पैर शिवलिंग पर है। तीसरी आकृति बड़े पेट वाले किसी पुरुष की है। उसके बांये हाथ में गदा जैसा कोई युद्धास्त्र है।

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर img 4

निम्नलिखित पर एक लघु निबंध लिखिए। (लगभग 250 से 300 शब्दों में)

प्रश्न 6.
“शाही केन्द्र” शब्द शहर के जिस भाग के लिए प्रयोग किए गए हैं, क्या वे उस भाग का सही वर्णन करते हैं?
उत्तर:
“शाही केन्द्र” या “राजकीय केन्द्र” आबादी के दक्षिण:
पश्चिम में स्थित था। इसमें 60 से अधिक मंदिर बने थे। स्पष्ट है कि “शाही केन्द्र” शब्द शहर के जिस भाग के लिए प्रयोग किये गये हैं, वे उस भाग का सही वर्णन नहीं करते हैं। इन देव स्थलों में प्रतिष्ठित देवी-देवताओं से संबंद्ध जनता को यहाँ के शासक प्रसन्न रखकर अपनी सत्ता को स्थापित करने तथा वैधता प्रदान करने का प्रयास कर रहे थे।

इतना अवश्य है कि:
शाही केन्द्र में 30 संरचनायें ऐसी हैं जिनकी पहचान महलों के रूप में की गई है। ये अपेक्षाकृत विशाल संरचनाये हैं जो धार्मिक कार्यों से सम्बद्ध नहीं थी। मंदिरों और संरचनाओं से ये ढाँचे इस अर्थ में भिन्न थे कि मंदिर पूरी तरह धर्म-गाथाओं एवं चित्रों से निर्मित थे जबकि महल जैसे भवनों की अधिरचना विलासी वस्तुओं से तैयार की गई थी। कुछ भवनों का नामकरण उनके आकार और कार्य के आधार पर किया गया है।

उदाहरण के लिए राजा का भवन’ आंतरिक क्षेत्र में बहुत विशाल है। इसके मुख्य भाग सभा मण्डप और महानवमी डिब्बा है। सभा-मण्डप के उपयोग के विषय में इतिहासकार स्पष्ट नहीं है। महानवमी डिब्बा का सम्बन्ध 10 दिन चलने वाले हिंदू त्यौहार दशहरा (उत्तर भारत), दुर्गापूजा (बंगाल) या नवरात्रि या महानवमी (दक्षिण भारत) से था। इस अवसर पर शासक अपनी शक्ति, वैभव का प्रदर्शन करते थे। इसमें कुछ अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते थे। इस अवसर पर राजा नायकों की सेना का निरीक्षण करता था। इसके अलावा इस क्षेत्र में एक लोट्स (कमल) महल था। मैकेंजी के अनुसार यह परिषदीय-सदन था। इसके आस-पास भी कई मंदिर थे।

प्रश्न 7.
कमल महल और हाथियों के अस्तबल जैसे भवनों का स्थापत्य हमें उनके बनवाने वाले शासकों के विषय में क्या बताता है?
उत्तर:
शाही केन्द्र के सर्वाधिक आकर्षक भवनों में एक लोट्स (कमल) महल है जिसका यह नामकरण 19 वीं शताब्दी में अंग्रेज यात्रियों ने किया था। यह नाम रोमांचकारी है परंतु इतिहासकार इस संबंध में यह निश्चय नहीं कर पाये हैं कि इस भवन का किस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता था। मैकेन्जी का सुझाव है कि यह भवन परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। कमल महल के निकट ही हाथियों का अस्तबल था। ये अस्तबल समस्तरी थे। इससे ज्ञात होता है कि विजयनगर के शासक हाथियों के शौकीन थे। हाथियों का प्रयोग सेना के अलावा अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता था। अस्तबल में अनेक विशाल कक्ष या हाल थे। स्पष्ट है कि हाथियों की संख्या भी पर्याप्त थी।

प्रश्न 8.
स्थापत्य की कौन-कौन सी परम्पराओं ने विजयनगर में वास्तुविदों को प्रेरित किया? उन्होंने इन परम्पराओं में किस प्रकार बदलाव किये?
उत्तर:
वियजनगर के वास्तुविदों को प्रभावित करने वाली स्थापत्य परम्परायें और इनमें –
बदलाव:
विजयनगर में स्थापत्य कला का विकास 1336 ई० से 1365 ई० के बीच विजयनगर के सम्राटों ने किया। यह साम्राज्य दक्षिण भारत के एक बड़े भाग तक विस्तृत था। वास्तुविदों को यहाँ के मंदिर, भवन, महल और दुर्ग जैसी संरचनाओं ने बहुत प्रभावित किया। विजयनगर और इसके आस-पास के भवनों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की मान्यता मिली है। नये मंदिरों के निर्माण के अतिरिक्त वियजनगर के शासकों ने पूरे दक्षिण भारत के पुराने मंदिरों में भी कुछ परिवर्तन किये। इनमें से कुछ भवन विजयनगर साम्राज्य की स्थापना से पहले के हैं।

शहरी केन्द्र में व्यापारियों के भवन हैं। यहाँ मंदिर और मकबरे भी मिले हैं। शाही केन्द्र में दो प्रमुख संरचनायें-सभामंडल और महानवमी डिब्बा है। ये दोनों संरचनायें धार्मिक कार्यों के लिए बनायी गई थीं। इसके अलावा लोट्स महल के आस-पास अनेक मंदिर हैं। इसी में हजार राम मंदिर है। मंदिरों के गोपुरम् और मण्डप अत्यंत आकर्षक हैं। ये ढाँचा विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मंदिर में देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 9.
अध्याय के विभिन्न विवरणों से आप विजयनगर के सामान्य लोगों के जीवन की क्या छवि पाते हैं?
उत्तर:
वियजनगर के सामान्य लोगों के जीवन की छवि:
अध्याय के विभिन्न विवरणों से सामान्य लोगों के जीवन की निम्नलिखित झाँकी दिखाई पड़ती है –
1. बरबोसा के विवरण से ज्ञात होता है कि सामान्य लोगों का जीवन बहुत अच्छा नहीं था। उसके अनुसार सामान्य लोगों के कच्चे आवास थे परंतु बहुत मजबूत बनाए गए थे।

2. क्षेत्र सर्वेक्षण से ज्ञात होता है कि यहाँ विभिन्न सम्प्रदायों और समुदायों के पूजा स्थल और छोटे मंदिर भी हैं।

3. सामान्य लोग जल संरक्षण के प्रति विशेष रहते थे। इसके लिए कुँए, वर्षा के पानी वाले जलाशय और मंदिर के जलाशय की व्यवस्था थी।

4. शहरों में व्यापार बहुत समृद्ध था और वहाँ की बाजार मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों से परिपूर्ण थी। इससे लगता है कि शहर की जनता समृद्ध थी और विदेशों से महँगे सामान मँगाती थी।

5. सामान्य लोगों की जीविका का प्रमुख साधन कृषि थी। विजयनगर की कृषि अच्छी थी और विभिन्न प्रकार के अनाजों, सब्जियों और फलों की खेती की जाती थी।

6. विजयनगर के लोग अत्यधिक धार्मिक थे-इसका अनुमान सभी स्थलों से मंदिरों के अवशेष मिलने से लगाया जा सकता है। ये लोग विशेष रूप से पम्पादेवी और विरुपाक्ष की पूजा करते थे। (vii) लोग भोजन में चावल, गेहूँ, मकई, जौ, सेम, मूंग, दालें, फल, सब्जी और यहाँ तक कि मांस का भी प्रयोग करते थे। नूनिज के अनुसार, “बाजार में “भेड़, बकरी का मांस, सूअर, मृगमांस, तीतर मांस, खरगोश, कबूतर, बटेर और सभी प्रकार के पक्षी, चूहे, बिल्लियों और छिपकलियों का मांस बिकता था।”

मानचित्र कार्य

प्रश्न 10.
विश्व के सीमारेखा पर इटली, पुर्तगाल, ईरान तथा रूस को सन्निकता से अंकित कीजिए। उन मार्गों को पहचानिए जिनका प्रयोग इटली का निकोलो दे कॉन्ती (व्यापारी), अब्दुर रज्जाक (राजदूत), अफानासी निकितिन (रूसी व्यापारी), दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा फर्नावो नूनिज (पुर्तगाली नागरिक) ने विजयनगर पहुँचने के लिए किया था।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 7 एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर img 2

परियोजना कार्य (कोई एक)

प्रश्न 11.
भारतीय उपमहाद्वीप के किसी एक ऐसे प्रमुख शहर के विषय में और जानकारी हासिल कीजिए जो लगभग चौदहवीं-सत्रहवीं शताब्दियों में फला-फूला। शहर के स्थापत्य का वर्णन कीजिए। क्या कोई ऐसे लक्षण हैं जो इनके राजनीतिक केन्द्र होने की ओर संकेत करें? क्या ऐसे भवन हैं जो आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण हों? कौन-से ऐसे लक्षण हैं जो शहरी भाग को आस-पास के क्षेत्रों से विभाजित करते हैं?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 12.
अपने आस-पास किसी धार्मिक भवन को देखिए। रेखाचित्र के माध्यम से छत, स्तम्भों, मेहराबों, यदि हों, तो गलियारों, रास्तों, सभागारों, प्रवेश द्वारों, जल आपूर्ति आदि का वर्णन कीजिए। इन सभी की तुलना निरुपाक्ष मंदिर के अभिलक्षणों से कीजिए। वर्णन कीजिए कि भवन का प्रत्येक भाग किस प्रयोग में लाया जाता था। इसके इतिहास के विषय में पता कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 12 History एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
महमूद खाँ कौन था?
उत्तर:
यह बहमनी शासक मुहम्मदशाह तृतीय का प्रधानमंत्री था। इसने बहमनी राज्य को शक्तिशाली बनाने में बहुत अधिक सहयोग दिया। उसने कोंकण, संगमेश्वर, उड़ीसा और विजयनगर के शासकों को हराया। उसने सेना को संगठित किया और किसानों की सहायता की। वह विद्वानों और कलाकारों का आदर करता था। उसका बहुत दुःखद अंत हुआ।

प्रश्न 2.
विजयनगर राज्य की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर:
विजयनगर राज्य की स्थापना दो भाइयों-हरिहर और बुक्का ने की। मुहम्मद तुगलक के शासन काल में दक्षिण भारत में विद्रोह भारत में विद्रोह का लाभ उठाकर उन्होंने 1336 ई० में इसको स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया था।

प्रश्न 3.
बहमनी राज्य की स्थापना कब और किसने की?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना अलाउद्दीन बहमन शाह ने 1247 ई० में की। यह मुस्लिम राज्य था।

प्रश्न 4.
पुर्तगालियों के आगमन से पूर्व भारत के अन्य देशों के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वास्को-डि-गामा 1498 ई० में कालीकट बन्दरगाह पर पहुँचने वाला पहला पुर्तगाली मल्लाह था। वास्को-डि-गामा से पहले भारत के मिश्र, अरब, ईरान, ईराक, सीरिया आदि देशों के साथ बड़े घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध थे। भारत के गर्म मसाले, जड़ी-बूटियाँ आदि अरब व्यापारियों के माध्यम से दोनों स्थल और जल मार्गों से यूरोप के जेनोवा, वेनिस आदि बन्दरगाहों तक पहुँच जाते थे और उधर से भारत में घोड़े और ऐश्वर्य की सामग्री लाई जाती थी।

प्रश्न 5.
तालीकोट का युद्ध कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:

  1. 23 जनवरी, 1565 को।
  2. राक्षसी और तगड़ी ग्रामों के मध्य।

प्रश्न 6.
विजयनगर का नाम हम्पी कैसे पड़ा?
उत्तर:
इस नाम का आविर्भाव यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था।

प्रश्न 7.
विजयनगर के शासकों को उत्तरी सीमा पर किन राज्यों से संघर्ष करना पड़ा और क्यों?
उत्तर:
विजयनगर के शासकों को अपने समकालीन राजाओं-दक्कन के सुल्तान तथा उड़ीसा के गजपति शासक से संघर्ष करना पड़ा। वे लाभकारी विदेशी व्यापार तथा कृषि क्षेत्र पर कब्जा करना चाहते थे।

प्रश्न 8.
नायकर कौन थे?
उत्तर:
नायकर व्यवस्था विजयनगर राज्य में थी। नायकर वस्तुत: भू – सामन्त थे। अधीनस्थ सेना के रख-रखाव के लिए राजा इनहें वेतन के बदले में एक विशेष भूखण्ड देता था।

प्रश्न 9.
अमर नायक प्रणाली क्या थी? इसकी क्या विशेषता थी?
उत्तर:

  1. यह विजयनगर साम्राज्य को प्रमुख राजनीतिक प्रणाली थी। अमर नायक सैनिक कमांडर थे इन्हें विजयनगर के शासक प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र सौंपते थे।
  2. यह प्रणाली दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से मिलती-जुलती थी।

प्रश्न 10.
भारत में पुर्तगालियों को एक दृढ़ शक्ति बनाने में अलवुकर्क की क्या भूमिका रही?
उत्तर:
पुर्तगाली बस्तियों का वायसराय अलबुकर्क 1509 से 1515 ई० तक भारत में रहा। उसने बीजापुर के सुल्तान से 1510 ई० में गोआ छीन लिया और उसे भारत में पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बनाया। एशिया और अफ्रीका के महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर किलों का निर्माण करके उसने पूर्वी व्यापार पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

प्रश्न 11.
क्या तुर्कों तथा पुर्तगालियों के मध्य का संघर्ष अपरिहार्य था? भारत के व्यापार पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
तुर्कों और पुर्तगालियों के मध्य का संघर्ष अपरिहार्य था क्योंकि हिन्द महासागर पर दोनों में से केवल एक का प्रभुत्व स्थापित हो सकता था। बिना आपसी संघर्ष के इस बात का निश्चय नहीं हो सकता था कि पूर्वी देशों के साथ व्यापार पर किसका प्रभुत्व स्थापित हो। तुर्को और पुर्तगालियों में समुद्री मार्गों पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अनेक झड़पें हुईं। तुर्कों को अन्ततः पराजय का मुँह देखना पड़ा। भारत पर इस संघर्ष का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। भारतीय नाविक जो पहले अन्य देशों से स्वतंत्र रूप से व्यापार कर लेते थे वह समाप्त हो गया। अब उनके जहाज डुबो दिए जाते थे और उन्हें मार दिया जाता था।

प्रश्न 12.
विजयनगर के तीन राजवंश कौन-से थे?
उत्तर:

  1. संगम वंश: 1336 से 1485 ई० तक।
  2. सुलव वंश: 1485 से 1503 ई० तक।
  3. तुलुव वंश: 1503 से 1565 ई० तक।

प्रश्न 13.
बरबोसा ने सामान्य लोगों के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:

  1. लोगों के आवास छप्पर के हैं परंतु फिर भी मजबूत है।
  2. कई खुले स्थानों वाली लम्बी गलियों में बाजारें लगाई जाती है।

प्रश्न 14.
हजार राम मंदिर क्यों प्रसिद्ध था?
उत्तर:

  1. यह मंदिर शाही केन्द्र में स्थित था। इसमें केवल राजा और उनके परिवार के लोग पूजा करते थे।
  2. देवस्थल की मूर्तियाँ नष्ट हो गयी हैं परंतु दीवारों पर अकेरी गई मूर्तियाँ सुरक्षित हैं। उल्लेखनीय है कि आंतरिक दीवारों पर रामायण के दृश्य अंकित हैं।

प्रश्न 15.
आप कमलपुरम् जलाशय के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर:

  1. विजयनगर एक शुष्क क्षेत्र था। जल संरक्षण के लिए यहाँ हौज या जलाशय बनाये जाते थे। इनमें सबसे प्रसिद्ध ‘कमलपुरम् जलाशय’ था।
  2. इस जलाशय से सिंचाई होती थी और इसका. जल एक नहर के द्वारा राजकीय केन्द्र तक ले जाया जाता था।

प्रश्न 16.
दक्षिण के राज्यों में संघर्ष का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर:

  1. दक्षिण के शासक अपने राज्य का विस्तार करना चाहते थे।
  2. वे अपने राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए दूसरे राज्यों पर आक्रमण करते थे।

प्रश्न 17.
विजयनगर और बहमनी राज्य के पतन के दो कारण बताइये।
उत्तर:

  1. दोनों राज्य अपने विस्तार के लिए एक-दूसरे से युद्ध करते रहते थे।
  2. दोनों राज्य रायचूर, दोआब पर अधिकार करने के लिए लालायित थे।

प्रश्न 18.
विजयनगर के शासकों में कृष्णदेवराय को महानतम् शासक क्यों माना जाता है।
उत्तर:

  1. वह एक महान् योद्धा था और उसने विजयनगर की सेनाओं को अभूतपूर्व शक्तिशाली बनाया।
  2. उसने वियजनगर के पास एक नया शहर बसाया तथा वहाँ एक भव्य तालाब का निर्माण करवाया।

प्रश्न 19.
उन विदेशी यात्रियों का उल्लेख कीजिए जिन्होंने विजयनगर शहर की यात्रा की?
उत्तर:

  1. निकोलो-दे-कान्ती-यह इतालवी व्यापारी था।
  2. अब्दुर रज्जाक-यह फारस के राजा का राजदूत था।
  3. अफानासी निकितिन-यह रूस का व्यापारी था। इन सभी ने 15वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
  4. 16वीं शताब्दी से दुआते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा पुर्तगाल के फनीबो नूलिज ने भी भारत की यात्रा की।

प्रश्न 20.
विजयनगर की इंडो-इस्लामिक शैली की क्या विशेषता है?
उत्तर:

  1. इतिहासकारों ने किलेबंद बस्ती में जाने वाले प्रवेश द्वार पर बनी मेहराब तथा द्वार के ऊपर बनी गुंबद की स्थापत्य शैली को इंडो-इस्लामिक शैली नाम दिया है।
  2. यह शैली विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य कला का मिश्रित रूप है।

प्रश्न 21.
विजयनगर शहर की दुर्गीकरण या किलेबंदी प्रणाली का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एक दुर्ग द्वारा शहर के खेतों को घेरा गया था।
  2. नगरीय केन्द्र को भी सुदृढ़ दीवारों से घेरा गया था।
  3. शासकीय केन्द्र को घेरा गया था और महत्त्वपूर्ण ईमारतों के प्रत्येक समूह की घेराबंदी ऊँची दीवारों से की गई थी।

प्रश्न 22.
राय गोपुरम् क्यों बनाये जाते थे?
उत्तर:

  1. यह स्थापत्य कला का एक नवीन तत्त्व था। इसको राजकीय प्रवेश द्वारा कहा जाता था। ये प्रायः केन्द्रीय देवालयों की मीनारों से भी कई गुना अधिक ऊँचे थे।
  2. ये लम्बी दूरी से ही मंदिर होने का संकेत देते थे। गोपुरम शासकों की शक्ति का प्रतीक था क्योंकि इनके निर्माण में पर्याप्त साधन, तकनीक तथा कौशल का प्रयोग होता था।

प्रश्न 23.
विजयनगर पर कौन-कौन से राजवंशों ने शासन किया?
उत्तर:

  1. संगम वंश
  2. सुलुवा वंश
  3. तलुवा वंश
  4. अराविदु वंश।

प्रश्न 24.
कॉलिन मैकेंजी कौन था? उसकी मुख्य उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:

  1. कॉलिन मैकेंजी एक अभियंता एवं पुराविद् थे। वह ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे।
  2. उन्होंने विजयनगर (हंपी) का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया था। इस नगर के विषय में उसकी जानकारी विरुपाक्ष मंदिर तथा पंपा देवी के पूजास्थल के पुरोहितों के साथ किए गए साक्षात्कार से संगृहीत की गई थी।

प्रश्न 25.
विजयनगर के मंदिरों के दो मुख्य अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. मंदिरों में विशाल संरचनायें बनाई जाने लगीं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण गोपुरम् अथवा राजकीय प्रवेश द्वार था।
  2. दूसरा अभिलक्षण मंडल तथा गलियारों के निर्माण का था। ये गलियारे मंदिर परिसर में स्थित देवस्थलों के चारों ओर बने थे।

प्रश्न 26.
विजयनगर के ‘महानवमी डिब्बा’ की मुख्य विशेषतायें क्या हैं?
उत्तर:

  1. महानवमी डिब्बा’ एक विशालकाय मंच है जो शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित है। यह लकड़ी से निर्मित एक विशाल ढाँचा था।
  2. मंच के आधार पर उभारदार नक्काशी की गई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कृष्णदेवराय तृतीय को विजयनगर के शासकों में महान् शासक क्यों समझा जाता है? तीन प्रमाण दीजिए।
उत्तर:
कृष्णदेवराय तृतीय का मूल्यांकन –
1. महान विजेता:
वह एक महान् सैनिक और सेनापति था। उसने अपने सभी विरोधियों और विद्रोहियों का दमन करके बीदर, बीजापुर और उड़ीसा राज्यों को जीत लिया।

2. कुशल प्रशासक:
उन्होंने अपने राज्य संगठित करके प्रजा को न्याय प्रदान किया। भूमि सम्बन्धी और व्यापार सम्बन्धी सुधार भी कृष्णदेवराय तृतीय द्वारा किए गए।

3. कला और साहित्य का संरक्षक:
उन्होंने अपने साम्राज्य में संस्कृत और तेलगू को बढ़ावा दिया। कला के क्षेत्र में गोपुर टावर का निर्माण करवाया। उन्होंने प्रसिद्ध कृष्णस्वामी का मंदिर और नागतापुर नगर का निर्माण करवाया। उनकी महानता की प्रशंसा करते हुए डॉ. ईश्वरी प्रसाद ने लिखा है-“दक्षिण के हिन्दू और मुसलमान राजाओं में एक भी ऐसा नहीं था जिसकी तुलना कृष्णदेवराय से की जा सके।”

प्रश्न 2.
विजयनगर राज्य की स्थापना कैसे हुई?
उत्तर:
विजयनगर राज्य की स्थापना-विजयनगर राज्य की स्थापना संगम वंशी के दो भाईयों-हरिहर और बुक्काराय ने की। ये वारंगल के राजा प्रताप रुद्रदेव के यहाँ नौकरी करते थे। उस समय उत्तरी भारत पर मुहम्मद तुगलक राज करता था। जब मुसलमानों ने दक्षिणी भारत को जीत लिया तो इन दोनों भाइयों को बंदी बनाकर दिल्ली लाया गया। दक्षिण भारत के विद्रोह का दमन करने के लिए सुल्तान मुहम्मद तुगलक ने हरिहर और बुक्काराय को रायचूर दोआब का सामन्त बनाकर भेजा।

उनके गुरु माधव विद्यारण्य ने उन्हें हिन्दू जनता की रक्षा के लिए स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने गुरु के नाम पर तुंगभद्रा नदी के किनारे 1336 ई० में विद्यानगर अथवा विजयनगर की नींव रखी जो बाद में एक विशाल साम्राज्य बन गया। सीवेल के अनुसार, “यह एक ऐसी महत्त्वपूर्ण घटना थी जिसने दक्षिण भारत के इतिहास को बदल दिया।” यह राज्य मुसलमानों के अत्याचारों से पीड़ित हिन्दुओं की शरणस्थली बन गया।

प्रश्न 3.
विजयनगर साम्राज्य के पतन के तीन कारण बताइये। अथवा, “तालीकोट का युद्ध विजयनगर राज्य के पतन का तत्कालीन कारण था, परंतु अन्य भी कारण थे।” तीन कारण दीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारण –
1. अयोग्य शासक:
कृष्णदेवराय तृतीय के शासन काल तक विजयनगर साम्राज्य मजबूत बना रहा परंतु उनके उत्तराधिकारी अपने सामन्तों और मंत्रियों के हाथों की कठपुतली बन गये।

2. सैनिक कमजोरी:
विजयनगर का सैनिक संगठन सामन्ती ढंग का था। सामन्त विश्वासघाती और अवसरवादी थे। विजयनगर की सेना में अश्वसेना का अभाव था।

3. दक्षिण के झगड़ों में हस्तक्षेप और तालीकोट का युद्ध:
सदाशिवराय जैसे शासक दक्षिण के अन्य राज्यों पर आक्रमण करते थे। कालांतर में बीजापुर, गोलकुंडा और अहमदनगर राज्यों के मुसलमान सुल्तानों ने एक साथ मिलकर 1665 ई० के तालीकोट युद्ध में विजयनगर को बुरी तरह पराजित कर दिया और उसका पतन आरम्भ हो गया।

प्रश्न 4.
कॉलिन मैकेन्जी कौन थे?
उत्तर:

  1. कॉलिन मैकेन्जी एक अभियंता, सर्वेक्षक तथा मानचित्रकार थे जिनका जन्म 1754 ई० में हुआ था।
  2. 1815 ई० में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उन्हें भारत का प्रथम सर्वेयर जनरल बनाया और 1821 ई० में अपनी मृत्यु तक इस पद पर कार्य करते रहे।
  3. भारत के अतोत को समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए उन्होंने स्थानीय परम्पराओं का संकलन किया तथा ऐतिहासिक स्थलों का सर्वेक्षण आरम्भ किया।
  4. भारत के कई संस्थानों, कानूनों तथा रीतिरिवाजों के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देना जैसे कार्य उनके सर्वेक्षण में सम्मिलित थे।

प्रश्न 5.
विजयनगर साम्राज्य के व्यापार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य का व्यापार:

  1. विजयनगर के शासकों को युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अरब तथा मध्य एशिया के घोड़ों की आवश्यकता थी। उन्होंने इन देशों से घोड़ों का आयात किया।
  2. व्यापारियों के स्थानीय समूह यथा-कुदिरई चेट्टी या घोड़ों के व्यापारी भी इसमें रुचि लेते थे।
  3. 1498 ई० से पुर्तगाली व्यापारी भी भारत आकर इसके पश्चिमी तट पर बस गये। अपनी बेहतर सामरिक तकनीक एवं बंदूकों के प्रयोग से वे राजनीति में महत्त्वपूर्ण हो गये।
  4. विजयनगर मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों की एक बहुत बड़ो बाजार था। यहाँ की जनता महँगी वस्तुओं का आयात करती थी। उन्नत व्यापार ने राज्य की राजस्व आय को बढ़ाया।

प्रश्न 6.
विजयनगर की आर्थिक दशा का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की आर्थिक दशा:
आर्थिक दृष्टि से विजयनगर एक सम्पन्न राज्य था ! कृषि और व्यापार उन्नत थे। यहाँ आन्तरिक एवं बाह्य दोनों व्यापार होते थे। स्थल तथा जल दोनों मार्गों से व्यापार होता था। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः चीन, बर्मा, अरब, फारस तथा पुर्तगाल आदि देशों के साथ होता था। इन देशों को कपड़ा, चावल, लोहा, शोरा तथा मसाले आदि का मिर्यात किया जाता था। विदेशों से उत्तम नस्ल के घोड़े, हाथी, तांबा, मूंगा, पारा, रेशम आदि मँगवाए जाते थे। राज्य में अनेक उत्तम बंदरगाह थे।

पुर्तगाली यात्री डोमिंगोस पईज ने विजयनगर की आर्थिक समृद्धि का वर्णन करते हुए लिखा है, “राजा के पास भारी कोष, अनेक सैनिक तथा हाथी है। इस नगर में तुम्हें प्रत्येक राष्ट्र और जाति के लोग मिलेंगे, क्योंकि यहाँ व्यापार अधिक होता है और हीरे आदि बहुमूल्य पत्थर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। संसार में यह सबसे अधिक सम्पन्न नगर है और यहाँ चावल, गेहूँ आदि खाद्यान्नों के भंडार भरे हैं।” ईरानी यात्री अब्दुल रज्जाक विजयनगर की प्रशंसा में लिखते हैं, “देश इतना अच्छा बसा हुआ है कि संक्षेप में उसका चित्र प्रस्तुत करा पाना असंभव है। देश के सभी उच्च और निम्न लोग तथा कारीगर. भी कानों, कण्ठों, बाजुओं, कलाइयों तथा अंगुलियों में जवाहरात तथा सोने के आभूषण पहने हुए हैं।”

प्रश्न 7.
विजयनगर की सामाजिक दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की सामाजिक दशा:
विजयनगर का समाज एक सुसंगठित समाज था। समाज में स्त्रियों का बड़ा सम्मान था। वे राज्य के राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में सक्रिय भाग लेती थीं। उन्हें आक्रामक तथा रक्षात्मक युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता था। वे कुश्ती, संगीत, नृत्य, कला तथा ललित-कलाओं की विधाओं में भी दक्ष थीं। स्त्री अंगरक्षक भी नियुक्त किए जाते थे। राज्य में अनेक अच्छी कवियित्री तथा नाटककार थीं। बाल-विवाह, धनी व्यक्तियों में बहु-विवाह, दहेज-प्रथा और सती-प्रथा जैसी कुरीतियाँ भी समाज में व्याप्त थीं। समाज में ब्राह्मणों का बड़ा सम्मान था। वे धनी थे। उन्हें राज्य में निःशुल्क भूमियाँ प्राप्त थीं; वे राज्य के उच्च पदों पर नियुक्त थे। वे माँस नहीं खाते थे। शेष जातियों के लोग मांसाहारी थे। यज्ञों में पशु-बलि दी जाती थी, किन्तु गो-मांस का पूर्णतः निषेध था।

जाति-प्रथा का खण्डन करते हुए प्रो. नीलकंठ ने लिखा है:
“गाँवों और कस्बों में प्रत्येक जाति के लोग अलग-अलग मुहल्लों में निवास करते थे। वे अपने विशेष रीति-रिवाजों का पालन करते थे। छोटी जातियों के लोगों को विशेष परिश्रम करना पड़ता था। उनकी दशा दासों जैसी थी और वे गाँव से दूर झोंपड़ियों में रहते थे।” इसके ठीक विपरीत, राज-परिवार के लोगों का जीवन बड़ा सुखी था। उन्हें अच्छा भोजन, कपड़ा और रहने के लिए भव्य भवन मिलता था।

प्रश्न 8.
अमर नायक के कार्य बताइए।
उत्तर
अमर नायक के कार्य –

  1. अमर नायक सैनिक कमांडर थे जिन्हें राय शासक प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र सौंपते थे।
  2. वे किसानों, शिल्पकर्मियों तथा व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर वसूल करते थे।
  3. वे राजस्व का कुछ भाग व्यक्तिगत उपयोग तथा घोड़ों और हाथियों के निर्धारित दल के रख-रखाव के लिए अपने पास रख लेते थे।
  4. ये दल विजयनगर के शासकों की सैन्य शक्ति थे। इनकी सहायता से उन्होंने दक्षिणी प्रायद्वीप में साम्राज्य विस्तार किया।
  5. अमर नायक राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजा करते थे और अपनी स्वामीभक्ति प्रकट करने के लिए राजकीय दरबार में उपहारों के साथ स्वयं उपस्थित होते थे।

प्रश्न 9.
विजयनगर में कला और साहित्य की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर में कला तथा साहित्य की दशा:
विजयनगर राज्य साहित्य तथा कला की दृष्टि से, अपने समकालीन राज्यों से कहीं आगे था। विजयनगर राज्य के नरेशों के शासन-काल में संस्कृत, तेलुगू, तमिल तथा कन्नड़ भाषाओं का साहित्य संमृद्ध हुआ। सायण तथा भाई माधव विद्यारण्य ने वेदों की टीकाएँ लिखीं। कृष्णदेवराय स्वयं उच्चकोटि का विद्वान् था और उसके अनेक साहित्यकारों तथा कलाकारों को अपने दरबार में संरक्षण प्रदान किया था।

संगीत, नृत्य-कला, नाटक, व्याकरण, दर्शन, वास्तुकला तथा धर्म आदि सभी विषयों पर इस काल में उच्चकोटि का साहित्य रचा गया। विजयनगर साम्राज्य में वास्तुकला को बहुत प्रोत्साहन मिला। विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने अनेक सुन्दर मंदिरों का निर्माण कराया। उदाहरण के लिए – विट्टल स्वामी का मंदिर तथा हजार स्तम्भों वाला मंदिर हिन्दू स्थापत्य कला के ज्वलत उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
विजयनगर की किलेबंदी कैसी थी? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर की किलेबंदी –

  1. फारस-के राजदूत अब्दुल रज्जाक के अनुसार किले की सात पंक्तियाँ थीं। इनसे न केवल शहर अपितु कृषि में प्रयुक्त आसपास के क्षेत्र तथा जंगलों को भी घेरा गया था।
  2. सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर बनी पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी। यह विशाल राजगिरी संरचना हाथी की सूंड जैसी मुड़ावदार थी।
  3. पत्थरों को जोड़ने के लिए गारे या किसी अन्य वस्तु का प्रयोग नहीं किया गया था। पत्थर के टुकड़े फानाकार थे, जिसके कारण वे अपने स्थान पर टिके रहते थे।
  4. दीवारों के अंदर का भाग मिट्टी और मलवे के मिश्रण से बना हुआ था। वर्गाकार तथा आयतकार बाहर की ओर निकले हुए थे।
  5. पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के भीतर जूते हुए खेत, आवास और बगीचे थे।

प्रश्न 11.
कृष्णदेवराय द्वारा बनाये गये जलाशय के विषय में पेस ने क्या लिखा है? अथवा, विजयनगर राज्य के जलाशयों या हौजों का निर्माण किस प्रकार होता था?
उत्तर:
कृष्णदेवराय द्वारा बनाये गये जलाशय के विषय में पेस के विवरण –

  1. उसके अनुसार राजा ने दो पहाड़ियों के मुख विबर पर एक जलाशय का निर्माण करवाया। इन दोनों पहाड़ियों का पानी इसमें गिरता था।
  2. इस जलाशय में एक झील से भी पानी आता था जो लगभग 15 किमी. की दूरी पर थी। यह जल पाइपों की सहायता से यहाँ लाया जाता था।
  3. जलाशय में तीन विशाल स्तम्भ बने थे जिन पर सुन्दर चित्र उकेरे गये हैं।
  4. इस जलाशय से खेतों और बगीचों की सिंचाई के लिए पानी जाता था।
  5. इस जलाशय को बनाने के लिए कृष्णदेवराय ने एक पूरी पहाड़ी को तुड़वा दिया था।
  6. जलाशय में 15000 – 20000 लोगों ने कार्य किया। पेस ने इनकी तुलना चीटियों के झुंड से की है।

प्रश्न 12.
विरुपाक्ष मंदिर के सभागारों एवं मंदिर परिसर में बनी रथ गलियों की विशेषतायें बताइए।
उत्तर:
विरुपाक्ष मंदिर के सभागार की विशेषताएँ –

  1. मंदिर के सभागारों का प्रयोग भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए होता था। कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ रखी जाती थी और संगीत, नृत्य जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।
  2. अन्य सभागारों का प्रयोग देवी देवताओं के विवाह के उत्सव पर खुशी मनाने के लिए होता था।
  3. कुछ अन्य सभागारों में देवी-देवताओं को झूला झुलाया जाता था। इन अवसरों पर विशेष मूर्तियों का प्रयोग होता था। ये केन्द्रीय देवालयों में स्थापित छोटी मूर्तियों से भिन्न होती थीं।

रथ गलियों की विशेषतायें:
मंदिर परिसरों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता रथ गलियाँ हैं। ये मंदिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में आगे बढ़ती हैं। इन गलियों का फर्श पत्थर के टुकड़ों से बनाया गया था। इसके दोनों ओर स्तम्भ वाले मंडप थे। इन मंडपों में व्यापारी अपनी दुकानें लगाया करते थे।

प्रश्न 13.
विरुपाक्ष मंदिर पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
विरुपाक्ष मंदिर:

  • विरुपाक्ष विजयनगर साम्राज्य के संरक्षक देवता थे। इस मंदिर का निर्माण कई शताब्दियों में हुआ।
  • कुछ इतिहासकारों का कहना है कि सबसे प्राचीन मंदिर 9-10 सदियों का था। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के पश्चात् इसका विस्तार किया गया।
  • मुख्य मंदिर के सामने मण्डप है जिसका निर्माण यहाँ के प्रसिद्ध सम्राट कृष्णदेवराय ने करवाया था। मण्डप को उत्कीर्ण स्तम्भों से सजाया गया है।
  • पूर्व में एक विशाल गोपुरम् था। इसके निर्माण का श्रेय भी कृष्णदेवराय को जाता है।
  • मंदिर के सभागारों का प्रयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता था। कुछ में देवताओं की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित रहती थी। संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी इन्हीं सभागारों में होता था। अन्य सभागारों का प्रयोग पंपादेवी और विरुपाक्ष के विवाह अवसर पर आनंद मनाने और कुछ अन्य का प्रयोग देवी-देवताओं को झूला-झुलाने के लिए होता था।

प्रश्न 14.
विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य के मध्य संघर्ष के कौन-कौन से कारण थे?
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य के मध्य संघर्ष के कारण –

  1. कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच का क्षेत्र (दोआब) बहुत उपजाऊ था। इसको बह्मनी शासक हथियाना चाहते थे।
  2. कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र में कई बन्दरगाह थे। इन बन्दरगाहों से भारत का व्यापार श्रीलंका, इण्डोनेशिया, मलाया, जावा, बर्मा आदि देशों से होता था।
  3. युद्धों में विजयश्री का सेहरा अपने सिर पर बाँधना किसको अच्छा नहीं लगता । स्वयं को श्रेष्ठ शक्ति दर्शाने की होड़ में दोनों राज्यों के बीच संघर्ष होना स्वाभाविक था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विजयनगर साम्राज्य के शासन प्रबंध की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य का शासन प्रबंध : विजयनगर राज्य दक्षिण का एक हिन्दू राज्य था। यह राज्य मुहम्मद तुगलक का समकालीन था। उत्तम शासन प्रबंध के कारण ही विजयनगर राज्य बहमनी राज्य के कई आक्रमण झेलता हुआ लगभग 30 वर्ष तक अस्तित्व में बना रहा।
1. केन्द्रीय शासन (Central administration):
राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी था। वह सभी महत्त्वपूर्ण विषयों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखता था। राजा को महत्त्वपूर्ण विषयों पर सलाह देने के लिए परिषद् भी थी, लेकिन उसकी इच्छा पर निर्भर था कि वह परिषद् की सलाह को माने या न माने।

2. प्रान्तीय शासन (Provincial administration):
प्रशासनिक सुविधा के लिए पूरे साम्राज्य को लगभग 200 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रांतों को प्रांतपति के अधीन रखा जाता था। प्रांतपति को केन्द्र नियुक्त करता था। आंतरिक शक्ति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रांतपति सेना रखा करते थे। प्रांतों को जिलों में तथा जिलों को गाँवों में बाँटा गया था। जिले को नाड्डू अथवा कोटम कहा जाता था। गाँवों की देख-रेख पंचायतें करती थीं। पंचायतों का अध्यक्ष ‘अपंगर’ कहलाता था। यह पद पैतृक होता था। पंचायतों के मुख्य काम थे-कर लेना, झगड़ों का निपटारा करना और प्रांतपति को अपने क्षेत्र के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी देना।

3. सेना (Army):
विजयनगर के शासकों का अपने पड़ोसी शासकों के साथ झगड़ा होता रहता था। अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए विजयनगर के शासकों ने एक सुसंगठित सैन्य-प्रबंध किया। कई युद्धों में परास्त होने के बावजूद भी विजयनगर के शासकों ने तोपखाने और घुड़सवार सेना में सुधार करने की ओर ध्यान न दिया। केन्द्र को सैनिक सहायता पाने के लिए प्रांतों पर निर्भर रहना पड़ता था। करों की वसूली निर्दयतापूर्वक होती थी लेकिन करों से प्राप्त आय लोकहित में लगा दी जाती थी। जन साधारण को सभी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध थीं।

4. न्याय व्यवस्था (Judicial System):
न्यास सम्बन्धी सर्वोच्च शक्ति राजा के हाथों में थी। न्याय व्यवस्था बड़ी कठोर थी। अपराधियों को बेहिचक कड़े से कड़े दण्ड दिए जाते थे। कई बार अपराधियों को आर्थिक दण्ड भी दिया जाता था। उनकी सम्पत्ति भी सरकार जब्त कर लेती थी। नृशंस अपराधियों को प्राण दण्ड भी दिया जाता था। वस्तुओं में मिलावट करने वालों, चोरी करने वालों तथा देशद्रोहियों को हाथी के पाँव तले रौंदवा दिया जाता था। कड़े दण्ड विधान के कारण देश में शांति और सुव्यवस्था थी।

प्रश्न 2.
क्या यह मानना न्यायसंगत होगा कि कृष्णदेवराय विजयनगर शासकों में महानतम था? अपने उत्तर के मत में तर्क दीजिए।
उत्तर:
कृष्णदेवराय (1509-1530):
तलुव वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेवराय था। उसको विजयनगर राज्य का सबसे महान् शासक कहा जाता है। वह बड़ा वीर सैनिक और चतुर योद्धा था। उसने पहले अपने राज्य को सुव्यवस्थित किया और विद्रोहियों की शक्ति को कुचल डाला। उसने मैसूर पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया। उसने उड़ीसा पर आक्रमण किया और उस राज्य से वे सभी प्रान्त छीन लिए, जो उड़ीसा के शासकों ने कभी विजयनगर के शासकों से छीने थे। यद्यपि गोलकुण्डा और बीदर के सुल्तानों ने उड़ीसा के शासक प्रतापरुद्र का ही साथ दिया, तथापि कृष्णदेव ने उन सबको पराजित किया। इस प्रकार विजयनगर राज्य शीघ्र ही बहुत प्रसिद्ध हो गया।

अब विजयनगर के शासक ने बहमनी राज्य की ओर ध्यान दिया और उससे कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच के दोआब को फिर से छीन लिया। उसकी अंतिम सैनिक सफलता बीजापुर के शासक के विरुद्ध थी, जिसने छीने हुए दोआब को बापस लेने का प्रयत्न किया था परंतु इसमें सफलता कृष्णदेव को ही मिली। कृष्णदेव की सैनिक सफलताओं की प्रशंसा इन शब्दों में की गई है – “वह विजयनगर के सबसे प्रसिद्ध तथा शक्तिशाली शासकों में से एक था। उसने दक्षिण के मुसलमानों से बराबरी से टक्कर ली और अपने से पूर्व शासकों की पराजय का बदला लिया।”

कृष्णदेव केवल एक विजयी शासक ही नहीं था वरन् कला और शिक्षा का भी बड़ा प्रेमी था। वह स्वयं विष्णु का पुजारी था, परंतु फिर भी उसका व्यवहार अन्य धर्म वालों से अच्छा था। सबके साथ न्याय किया जाता था। निर्धनों की राजकोष से सहायता की जाती थी। विदेशियों के साथ भी उसका व्यवहार बहुत अच्छा था। वह उनका आदर करता था और उनके दुःख निवारण का भी प्रयत्न करता था। उसके शासन काल में कई सुन्दर मंदिर बनवाए गये और ब्राह्मणों को विशेष स्थान दिया गया। कृष्णदेव की इतनी महान् सफलताओं के कारण ही यह कहा गया है कि “दक्षिण के हिन्दू तथा मुसलमान शासकों में ऐसा कोई शासक नहीं जो कृष्णदेवराय का मुकाबला कर सके।”

प्रश्न 3.
तालीकोट के युद्ध (1565 ई.) पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
तालीकोट का युद्ध (1565 ई.):
यह युद्ध (विजयनगर तथा बहमनी) साम्राज्य के बीच सन् 1565 ई. में हुआ।

कारण:
दक्षिण के सुल्तानों ने विजयनगर के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बना लिया। बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा तथा बीदर की सेनाएँ इस मोर्च में शामिल हो गईं। इस मोर्च के सदस्यों ने आपस में वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित कर लिए। अब वे विजयनगर पर आक्रमण करने का बहाना तलाश करने के लिए अपने पुराने किलों तथा प्रदेशों की माँग करने लगे। विजयनगर के सामने एक विकट समस्या उत्पन्न हो गई। उसने उनकी मांगों को ठुकरा दिया। फलतः एक मोर्चे में बद्ध सभी मुस्लिम राज्यों ने मिलकर जनवरी, 1565 को विजयनगर के विरुद्ध युद्ध आरंभ कर दिया।

घटनाएँ:
23 जनवरी 1565 ई. को तालीकोट के युद्धक्षेत्र में मुस्लिम मोचे की सेनाओं ने विजयनगर पर एक भयंकर आक्रमण किया। इस युद्ध में विजयनगर को करारी हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री रामराय ने वीरतापूर्वक युद्ध किया, किन्तु वह पकड़ा गया और अहमदनगर के सुल्तान ने उसका वध कर दिया। विजेताओं को लूट में घोड़ों एवं गुलामों के अलावा जवाहरात, तम्बू, हथियार तथा नकदी के रूप में अपार धन मिला। इसके पश्चात् विजयी सैनिक विजयनगर शहर पहुँचे और अत्यन्त निर्दयतापूर्वक उन्होंने उसका विनाश किया। सेवेल के अनुसार, “संसार के इतिहास में कभी भी इतने वैभवशाली नगर का ऐसा सहसा सर्वनाश नहीं किया गया, जैसाकि विजयनगर का।”

परिणाम:
यद्यपि तालीकोट के युद्ध ने विजयनगर साम्राज्य को पंगु बनाकर रख दिया, किन्तु वह उसके अस्तित्व को नहीं मिटा सका। दिजय के उपरांत उपर्युक्त चारों सुल्तानों में आपसी ईर्ष्या की ज्वाला पुनः प्रज्वलित हो गई। इसके फलस्वरूप वे विजयनगर का अन्त करने के लिए एकजुट होकर कार्य न कर सके। उनकी ईर्ष्या के कारण विजयनगर अपनी खोई हुई भूमि तथा शक्ति को पुनः प्राप्त करने में समर्थ हो सका।

प्रश्न 4.
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विजयनगर साम्राज्य के पतन के कारण –
1. निरंकुश और स्वेच्छाचारी शासक:
विजयनगर के शासक निरंकुश और स्वेच्छाचारी थे। राज्य की समस्त शक्तियाँ उनके हाथों में थीं। प्रजा की शासन में विशेष रुचि न रही और संकट के समय राजाओं को पूरा सहयोग नहीं मिला।

2. सैनिक दुर्बलता:
विजयनगर का सैनिक संगठन सामन्ती ढंग का था। सामन्तों के सैनिक राज-भक्त कम होते थे। वे अपने स्वामी के हित का अधिक ध्यान रखते थे। विजयनगर के सैनिक मुसलमान सैनिकों की तरह रण-कुशल भी नहीं थे। मुसलमान शासक घुड़सवार सेना को अधिक महत्त्व देते थे जबकि विजयनगर के हिन्दू राजा हाथियों पर अधिक भरोसा रखते थे। मुसलमानों के पास अच्छा तोपखाना था, जिससे हाथी उनके सामने टिक नहीं पाते थे।

3. गृह-युद्ध:
विजयनगर के शासकों में राजगद्दी पाने के लिए कई गृह-युद्ध हुए। 1486 ई० में संगम वंश के विरुपाक्ष को उसके सेनापति नरसिंह सुलुव ने मारकर अपने वंश की नींव डाली। लेकिन 15 वर्ष के बाद ही सुलुव वंश के शासक को अन्य सरदार नरस नायक ने मार दिया और तुलुव वंश की नींव रखी। इस तरह बार-बार राजवंशों के परिवर्तन से राज्य की बहुत हानि हुई।

4. दक्षिण के सुल्तानों के आपसी झगड़ों में हस्तक्षेप:
विजयनगर के सम्राट’सदाशिव राय का मंत्री रामराजा दक्षिण के सुल्तानों के आपसी झगड़ों में हस्तक्षेप करता था, जिससे बीजापुर, गोलकुण्डा और अहमदनगर जैसी दक्षिण के राज्यों ने विजयनगर के विरुद्ध एक शक्तिशाली संघ बना लिया। दक्षिण के मुसलमान सुल्तानों ने 23 जनवरी, 1565 ई० को तालीकोट के युद्ध में विजयनगर की सेना को बुरी तरह पराजित कर दिया। इस युद्ध में विजयनगर राज्य को भारी हानि उठानी पड़ी और उसका पतन आरंभ हो गया।

5. प्रान्तीय शासकों का शक्तिशाली होना:
विजयनगर राज्य में प्रान्तों के अधिकारियों को बहुत स्वतंत्रता मिली हुई थी। वे एक प्रकार से छोटे राजा के समान थे। उनके पास अपना एक अलग कोष होता था और शक्तिशाली सेना भी होती थी। दुर्बल शासकों के शासन-काल में वे प्रायः विद्रोह कर देते थे। इससे केन्द्रीय सरकार की एकता को बहुत धक्का लगा और अन्त में विजयनगर साम्राज्य का पतन हो गया।

6. कृष्णदेवराय के बाद सत्ता का अयोग्य शासकों के हाथ में जाना:
कृष्णदेवराय एक योग्य शासक था। उसने विजयनगर राज्य को बहुत उन्नत किया। उसके उत्तराधिकारी अयोग्य निकले और अपने सामन्तों और मंत्रियों के हाथों की कठपुतली बने रहे। ऐसे दुर्बल शासकों के कारण विजयनगर राज्य का पतन अवश्यंभावी था।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विजयनगर क्या था?
(अ) शहर
(ब) राजधानी
(स) साम्राज्य
(द) शहर, राजधानी और साम्राज्य तीनों
उत्तर:
(द) शहर, राजधानी और साम्राज्य तीनों

प्रश्न 2.
विजयनगर किस दोआब क्षेत्र में स्थित था?
(अ) गंगा-यमुना
(ब) गंगा-घाघरा
(स) कृष्ण-तुंगभद्रा
(द) गंगा-गोदावरी
उत्तर:
(स) कृष्ण-तुंगभद्रा

प्रश्न 3.
विजयनगर के लोट्स महल का नामकरण किसने किया।
(अ) एक अंग्रेज यात्री
(ब) एक फ्रांसीसी यात्री
(स) एक अरब यात्री
(द) एक चीनी यात्री
उत्तर:
(अ) एक अंग्रेज यात्री

प्रश्न 4.
हजार राम मंदिर किस राज्य में था?
(अ) बहमनी
(ब) विजयनगर
(स) मैसूर
(द) कर्नाटक
उत्तर:
(ब) विजयनगर

प्रश्न 5.
पम्पा देवी किससे विवाह करना चाहती थी?
(अ) ब्रह्मा
(ब) विष्णु
(स) विरुपाक्ष
(द) इन्द्र
उत्तर:
(स) विरुपाक्ष

प्रश्न 6.
विट्ठल देवता किस देवता के रूप में थे?
(अ) ब्रह्मा
(ब) विरुपाक्ष
(स) इन्द्र
(द) विष्णु
उत्तर:
(द) विष्णु

प्रश्न 7.
हम्पी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विरासत होने की मान्यता कब मिली?
(अ) 1971
(ब) 1973
(स) 1975
(द) 1976
उत्तर:
(द) 1976

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में विजयनगर स्थल पर कार्य किसने नहीं किया?
(अ) कनिंघम्
(ब) जान एम. फ्रिट्ज
(स) जार्ज मिशेल
(द) एम. एम. नागराज राव
उत्तर:
(अ) कनिंघम्

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में किस वंश ने विजयनगर में शासन नहीं किया?
(अ) चोल वंश
(ब) होयसल वंश
(स) संगम वंश
(द) गुप्तवंश
उत्तर:
(द) गुप्तवंश

प्रश्न 10.
कुदिरई चेट्टी कौन थे?
(अ) स्थानीय व्यापारी
(ब) किसान
(स) स्वर्णकार
(द) कुम्हार
उत्तर:
(अ) स्थानीय व्यापारी

प्रश्न 11.
राक्षसी-तांगड़ी युद्ध (तालीकोटा युद्ध) का नेतृत्व किसने किया था?
(अ) कृष्णदेवराय
(ब) रामराय
(स) शिवाजी
(द) महादजी सिंधिया
उत्तर:
(ब) रामराय

प्रश्न 12.
1542 ई. में विजयनगर पर किस वंश का शासन था?
(अ) संगम वंश
(ब) सुलुव वंश
(स) तुलुव वंश
(द) अराविदु वंश
उत्तर:
(द) अराविदु वंश

प्रश्न 13.
विजयनगर में सेना प्रमुख को क्या कहा जाता था?
(अ) नायक
(ब) अमर नायक
(स) सेनापति
(द) सेना प्रधान
उत्तर:
(अ) नायक

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में फारस का राजदूत कौन था?
(अ) निकोलो-दे कॉन्ती
(ब) अब्दुर रज्जाक
(स) अफानसी निकितिन
(द) दुआर्ते बरबोसा
उत्तर:
(ब) अब्दुर रज्जाक

प्रश्न 15.
विजयनगर के शासक
(अ) धर्म निरपेक्ष थे
(ब) धार्मिक थे
(स) साम्प्रदायिक थे
(द) अधार्मिक थे
उत्तर:
(ब) धार्मिक थे

प्रश्न 16.
महानवमी का पर्व कहाँ मनाया जाता है?
(अ) उत्तर भारत में
(ब) प्रायद्वीपीय भारत
(स) पूर्वी भारत
(द) पश्चिम भारत
उत्तर:
(ब) प्रायद्वीपीय भारत

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 16 बूढ़ी पृथ्वी का दुख

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 2 Chapter 16 बूढ़ी पृथ्वी का दुख Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 16 बूढ़ी पृथ्वी का दुख

Bihar Board Class 7 Hindi बूढ़ी पृथ्वी का दुख Text Book Questions and Answers

पाठ से –

बूढ़ी पृथ्वी का दुख कविता का भावार्थ Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रश्न “क” और “ख” के अर्थ ऊपर दिये गये हैं।

Budhi Prithvi Ka Dukh Bihar Board प्रश्न 2.
नदियों के रोने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
पर्यावरण बिगड़ने से नदियाँ सृख रही हैं । नदियाँ कूड़े-कर्कट से पट रही हैं उनके पानी गंदे हो रहे हैं। इस प्रकार नदियों में जल की कमी तथा . नदियों का गन्दा होना ही नदियों के रोने का तात्पर्य है।

पाठ से आगे –

Budhi Prithvi Ka Dukh Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
पृथ्वी को बूढ़ी क्यों कहा गया है ?
उत्तर:
पर्यावरण में दिन-प्रतिदिन दोष बढ़ रहे हैं जो पृथ्वी के विनाश का सूचना दे रहा है। अर्थात् पृथ्वी विनाश के कग़ाड़ पर बैठी है। इसलिए क्षीण आयु पृथ्वी को बूढी पृथ्वी कहा गया है ।

बूढ़ी पृथ्वी का दुख कविता का अर्थ Bihar Board प्रश्न 2.
पेड़ का कटकर गिरना एवं पेड़ का टूटकर गिरना में क्या अंतर है?
उत्तर:
जब किसी पेड़ को कुल्हाड़ी या आड़ी से काटा जाता है तो वह गिर जाता है जिसे कटकर गिरना कहते हैं । लेकिन जब पेड़ पर अधिक फल लग जाते हैं अथवा आँधी, तूफान के झोंके में पेड़ टूटकर गिरते हैं जिसे टूटकर गिरना कहा जाता है।

बूढ़ी पृथ्वी का दुख कविता में Bihar Board प्रश्न 3.
पृथ्वी को प्रदूषण से बचाने हेतु आप क्या कर सकते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी को प्रदूषण से बचाने के लिए हमें पेड़ों की संख्या वृक्षारोपण कर बढ़ानी होगी। पेड़ को रक्षित रखना होगा । नदियों की सफाई पर ध्यान देना होगा। पहाड़ों को टूटने से बचाना होगा। कल-कारखाने से निकलने वाली प्रदूषित गैस से बचने का उपाय करना होगा।

बूढ़ी पृथ्वी का दुख Summary in Hindi

सरलार्थ – इस कविता में कवयित्री ने दिन-प्रतिदिन दूषित हो रहे पर्यावरण के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

क्या तुमने कभी सुना है,
सपनों में चमकती कुल्हाड़ियों के भय से
पेड़ों की चीत्कार?
अर्थ – क्या तुमने तेज कुल्हाडी के भय से चिल्लाते हए पेड का चीत्कार सुना है?

कुल्हाड़ियों के वार सहते
किसी पेड़ की हिलती टहनियों में
दिखाई पड़े हैं तुम्हें
बचाव के लिए पुकारते हजारों-हजार हाथ?
अर्थ – जिस समय पेड़ काटे जाते हैं। पेड़ कुल्हाड़ियों का वार सहता जाता है। उसकी टहनियाँ हिल जाती लेकिन पेड़ कभी अपने बचाव में हाथ उठाते (प्रतीकार करते) नहीं दिखते हैं। क्या तुमने पेड़ के दर्द को सुनने की कोशिश की है?

क्या होती है, तुम्हारे भीतर धमस
कटकर गिरता है जब कोई पेड़ धरती पर?
अर्थ – जब कोई पेड़ कटकर पृथ्वी पर गिरती है उस समय तुम्हारे हृदय में कभी धमस (कम्पन्न). हुआ है ?

सुना है कभी
रात के सन्नाटे में अँधेरे से मुंह ढाँप
किस कदर रोती हैं नदियाँ ?
अर्थ – आज दूपित पर्यावरण के दुष्प्रभाव से नदियाँ जो अंधकार भय के भविष्य के लिए मुख झाँपकर रो रही है। उसके क्रदन को रात के सन्नाटे में __ कभी तुमने सुनने का प्रयास किया है ?

इस घाट पर अपने कपड़े और मवेशियाँ धोते
सोचा है कभी कि उस घाट
पी रहा होगा कोई प्यासा पानी
या कोई स्त्री चढ़ा रही होगी किसी देवता को अर्घ्य ?
अर्थ – जिस घाट पर तुम कपड़े और मवेशियों को धो रहे हो उसके बारे में कभी तुमने सोचा है कि—घाट पर कोई प्यासा पानी पीता है तथा कोई स्त्री देवता को अर्घ्य भी देती है।

कभी महसूस किया कि किस कदर दहलता है
मौन समाधि लिए बैठा पहाड़ का सीना
विस्फोट से टूटकर जब छिटकता दूर तक कोई पत्थर?
अर्थ – आज बम विस्फोट के द्वारा पहाड़ तोड़ा जा रहा है क्या कभी तुमने महसूस किया है कि मौन साधक के रूप में शांत चित्त बैठा पहाड़ का दिल किस प्रकार दहलता होगा।

सुनाई पड़ी है कभी भरी दुपहरिया में
हथौड़ों की चोट से टूटकर बिखरते पत्थरों के चीख ?
अर्थ – टूटे हुए पत्थर भी हथौड़े से पत्थरों को टुकड़े-टुकड़े किये जा रहे हैं (उससे भी पर्यावरण में दोप उत्पन्न हो रहे हैं) क्या कभी तुमने उस पत्थर की पुकार को सुनने की कोशिश की है?

खून की उल्टियाँ करते
देखा है कभी हवा को, अपने घर के पिछवाड़े ?
अर्थ – दूपित हवा से लोग परेशान हैं मानो वह खून की उल्टी कर रहे हों। इस पर कभी तुमने अपने घर के इर्द-गिर्द अनुभव किया है ?

थोड़ा-सा वक्त चुराकर बतियाया है कभी
कभी शिकायत न करने वाली
गुमसुम बूढ़ी पृथ्वी से उसका दुख ?
अर्थ – पर्यावरण में दोप के कारण विनाश के कगार पर बैठी चुपचाप सहने वाली बूढ़ी पृथ्वी के दुःख के बारे में जानने का प्रयास तुमने किया है ?

अगर नहीं, तो क्षमा करना ।
मुझे तुम्हारे आदमी होने पर सन्देह है।
अर्थ – अगर तुमने पयावरण में उत्पन्न दोषों तथा पर बढ़ती समस्या के प्रति संवेदनशील नहीं हुए तो कवयित्री कहती क्षमा करना मुझ तो तुम्हारे आदमी होने पर भी संदेह है।

अर्थात् मानव यदि हो तो मानव पर आने वाले खतरा का समझने की कोशिश करो और यावरण का बचाओ।

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 8 How Free is the Press

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Bihar Board Class 12 English How Free is the Press Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 12 English Book Objective Type Questions and Answers

1. Press under ordinary condition is free,…………..
(a) No-where
(b) Everywhere
(c) in some places
(d) Britain
Answer:
(d) Britain

2. The editorial policy of a popular daily is controlled by
(a) pubic opinion
(b) interest of advertisers
(c) the interest of the government
(d) the interest of the leaders
Answer:
(b) interest of advertisers

3. A big circulation does not spell bankruptcy if the paper has to depend on its revenue…………
(a) on its sales
(b) on its editorial
(c) on its advertisements
(d) on the government
Answer:
(c) on its advertisements

4. The proprietor of the newspaper has………….
(a) the interest of the people
(b) national interest
(c) social interest
(d) personal interest
Answer:
(d) personal interest

Bihar Board Class 12 English Book Very Short Type Questions & Their Answer

How Free Is The Press Question Answer Bihar Board Question 1.
What does “the freedom of the press” means?
Answer:
Freedom of the press means freedom in a very restricted and technical sense-such as freedom from direction or censorship by the government.

How Free Is The Press Bihar Board Class 12 Question 2.
What role British Press plays under ordinary conditions?
Answer:
Under ordinary condition British Press is free to attack the policy and political character of ministers, interfere and raise the voice against scandals, and other democratic measures.

How Free Is The Press In Hindi Bihar Board Class 12 Question 3.
What effect brings freedom to the nation?
Answer:
Freedom secure and sustain “the central doctrine of democracy”— that the state is not the master but the servant of people.

How Free Is The Press Hindi Bihar Board Class 12 Question 4.
What are the sources of a newspaper’s revenue?
Answer:
The sources of a newapaper’s revenue is (i) The advertisement (ii) The wealth of the man or the company that owns the newspaper.

Freedom Of The Press Questions And Answers Bihar Board Question 5.
What is the role of decent journalists?
Answer:
The role of decent journalists maintain a high standard of “duty, balance and reputation.”

Bihar Board Rainbow English Book Class 12 Pdf Download Question 6.
What does Dorothy L. S Ayers discuss in her essay?
Answer:
Dorothy L. Sayer’s discussies the freedom of press.

Bihar Board Class 12 English Book Textual Questions and Their Answer

B. 1.1. Read the following sentences and write T’ for true and ‘F’ for false statements
(i) Press is free everywhere.
(ii) There is no internal censorship on the press.
(iii) Proprietors have their personal interrests as well.
(iv) Advertisers contribute to the revenue of the newspapers.
Answer:
(i) F, (ii) F, (iii) T, (iv) T.

B. 1.2. Answer the following questions briefly
Bihar Board English Book Class 12 Question 1.
What do free ‘people’ take for granted?
Answer:
Free people take it for granted that without a free press there can be no freedom.

Bihar Board Class 12 English Book Solution Question 2.
Are there restrictions on Press in time of war?
Answer:
Yes, there are restrictions on Press during the time of war. In fact all liberties are restricted in time of war.

Bihar Board 12th English Notes Pdf Question 3.
What do you mean by the term ‘free press’?
Answer:
By free press we mean that the press is free from direction and censorship by the government.

Class 12th English Book Bihar Board Question 4.
Who is the master the state or the people?
Answer:
The people are the masters. The state is the servant of the people.

Bihar Board English Book Class 12 Pdf Download Question 5.
What does the unofficial censorship seek to do?
Answer:
The unofficial censorship does not so much seek to express public opinion as to manufacture it.

Bihar Board Solution Class 12th English Question 6.
Name two sources of revenue newspapers usually survive on.
Answer:
The two chief sources of revenue of a newspaper are
(i) advertisers.
(ii) the wealth of the company or the man that owns the newspaper.

B.2.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied
(a) Accurate reporting has given place to reporting which is at best slipshod and at worst tendentious because it is assumed that
(b) Sensational headlines, false emphasis and supposition of context are some of the ways to
(c) is the special accomplishment of the Press interviwer.
(d) The date in the newspaper report had to be changed to
Answer:
(a) public has not the wit to distinguish between truth and falsehood, secondly public does not care if a statement is false provided it is titillating. Both mean that public can be made to believe anything,
(b) distort both fact and opinion,
(c) Garbling,
(d) conceal the fact that the news was already ‘cold’.

B.2.3. Answer the following questions briefly
English Book For Class 12 Bihar Board Question 1.
What are the two basic assumptions about the public?
Answer:
The two basic assumptions about the public are : (a) that they have not the intelligence to distinguish truth from falsehood and (b) that they don’t care at all that a statement is false provided it is titillating.

12th English Book Writer Name Bihar Board Question 2.
What is suppression of context?
Answer:
Suppression of context is choosing only apart from the whole so that the meanings are distorted and give a different impression than what was actually intended.

Question 3.
Name two things that make the reports unreliable reading.
Answer:
The interviewer’s playful habit of making statements himself and attributing them to the interviwer makes the reports unreliable reading.

B.3.1. Read the following sentences and write ‘T’ for true and ‘F’ for false statement
(i) The author was very fond of gardening and keeping cats.
(ii) The author had delivered 20,000 words in the space of an hour and a quarter.
(iii) To misrepresent a man’s attitude and opinion is no offence.
(iv) To get misleading statements corrected is very easy.
(v) Any public person is subtly made to feel that if he offends the press he will suffer for it.
(vi) The press can make or break reputation.
Answer:
(i) F, (ii) F, (iii) T, (iv) F, (v) T, (vi) T.

B. 3.2. Answer the following questions briefly
Question 1.
Why do books rarely criticise the Press?
Answer:
A book rarely dares to criticise the Press because the press can either ignore the book all together, or publish sneering comments in its gossip column about it.

Question 2.
How do the newspapers greet the slightest efforts to hinder the irresponsible dissemination of nonsense?
Answer:
The slightest effort to hinder the irresponsible dissemination of nonsense is greeted by a concerted howl: This is a threat to the freedom of the press.’

Question 3.
Name the seven charges the author makes against die Press.
Answer:
The seven charges the author has made against the press are
(i) False Emphasis, (ii) Garbling, (iii) Inaccuracy, (iv) Reversal of facts,
(v) Random Invention, (vi) Miracle Mongering, (vii) Flat Suppression

C. l. Bihar Board Class 12 English Book Long Answer Questions

Question 1.
The editorial policy of a popular daily is controlled by two chief factors. Which are they? Explain.
Answer:
The.editorial policy of a popular daily is controlled by two factors, namely, the vested interests of its advertisers and the personal whims and ambitions of the man, or company that owns it. All newspapers get their revenue from their advertisers. To justify their rates of advertisements they have to have a large circulation. If they do so, they will have to sell their copies at a lower rate. No popular daily can meet its expenses by the sale of copies.

Major part of their revenue comes from advertisements so the daily has either to subserve the interest of the advertisers, or lose their revenue and go bankrupt. So no newspaper can support any policy, however good in national interest if it goes against the vested interest of its advertisers. Secondly, the editorial policy is determined by a wealthy man or company that own the paper. It is decided by the interests and ambitions of that man or company, who have sufficient means to carry on without any support from advertisers.

Question 2.
What is garbling? How does Sayers illustrate this form of distortion?
Answer:
Garbling, according to Miss Sayers, is a special accomplishement of the press interviwer’s distorting what the interviewee said. He is in the playful habit of making statements himself and attributing them to the interviwee. Miss Sayers illustrates this with an accident concerning herself. During the production of her latest play, the press interviwer had asked her about her future plans. She had replied that she never made plans.

Though novels paid better than plays, she preferred writing plays. She had added that if she got another commission for the Canterbury Festival, she would surely write it. Her reply duly appeared in the press. But it was garbled. It said, ‘Miss Sayers said that she would write no more plays, except on commission.’ Such playful distortion by the press interviwers makes the reported interviwes unreliable. One should not believe that public men have said all that appears in the press.

Question 3.
Describe in your own words the instances of deliberate miracle* mongering.
Answer:
Miss Sayers has given an interesting instance of deliberates miracle- mongering by the press. The miracle was attributed to her. Miss Sayers made a public search. It comprised of 8000 words. The full text of her speech was in the hands of the reporter. But it was reported that she delivered about 20,000 words in the space of an hour and a quarter. This was impossible. It would have been a miracle if any person could deliver 20,000 words in such a short space of time. But the press indulges in such miracle-mongerings.

Question 4.
How are letters of protest treated by the newspapers? Describe in your own words.
Answer:
If a speaker’s words are misquoted in the newspaper, he/she may write a letter of protest. But it is almost impossible to have the impression created to be corrected. In many cases letters of protest are ignored. Sometimes they print the whole letter, with the editor’s comments. No apology is offered. The comments simply assert that the actual words were printed. But the speaker must not expect to monopolise the whole of paper’s valuable space. The editors adopt another strategy too. They write a private letter in reply regretting the mistake. But such a letter does not remove the false impression formed on the readers. Rarely a newspaper prints an apology. Miss Sayers recalls old times when the editors had high moral courage to print an apology. But it is no longer the practice.

Question 5.
Have you ever written a letter of protest to any newspaper? What was the fate of this letter?
Answer:
No, I do not ever written a letter of protest to any newspaper, flat suppression letters of protest man be written these may be (a) England, (b) printed in full or in part, accompained by an editorial comment to the effect that the words reported were actually said, and that the speaker must not expect to monoponse are paper’s valuable space (c) answered privately by the editora manoeuvefe that does nothing to correct the false impression left in the public mind only occasionally and usually form a provincial paper, does one receive full apology and correction let me quote honoris cause, a not written to me from an editor of the loder school.

Question 6.
‘He that is unfaithful in little is unfaithful also in much.’ How does Dorothy L. Sayers cite trivial personal examples to prove that the newspapers misrepresent in various ways? Do you agree with her?
Answer:
Miss Sayers gives a few instances to prove that the newspapers misrepresented even trivial incidents. I don’t say that Miss Sayers is wrong in her judgement. But her views represent only one side of the coin. Press, no doubt, is a powerful organ. In our young democracy we have begun to feel the power of the press. The press brings to light many ills and cases of corruption, misuse of power, mistakes, etc in high places. If there was no press people would never learn about them. Despite some shortcomings, press is the watchdog of democracy. Of course, press needs to develop a code of high conduct for itself. As it claims to be the servant of the people, it ought to be a good servant.

Question 7.
What is the author’s attitude to the freedom of Press? Do you agree with her?
Answer:
The author is of the opinion that the press is very powerful and uses its freedom with impunity. Even the ministers are scared of the press because the press can make or mark reputation. The press is in most and even trivial, matters careless. It misquotes facts that look true. Press can give a colour to reports so as to form public opinion the way it likes. In the author’s opinion there is no way to control the irresponsible behaviour of the press. Any effort to correct the press is greeted with a howl: “There is a threat to the freedom of the press.’ Every newspaper has its editorial policy. This policy is determined by some vested interests, which may not subserve public good.

The press lets people know only what it wants them to know. It is assumed that people can be made to believe anything. Press has several ways in which it can distort and suppress facts. It presents facts in a way that it creates an impression on public mind as intended by the press. People have no way to get at the truth. Their only source of information is the press. Even if some of the readers can find out that the reports in the press are inaccurate, or misrepresented, there is no way to have them corrected. In fact, press can make and mar reputation and mould and manufacture public opinion.

Question 8.
‘Indeed, we may say that die heaviest restriction upon the freedom of public opinion is not the official censorship of the Press, but the unofficial censorship by a Press which exists not so much to express opinion as to manufacture it.’ How does the writer view the relationship between the press and the public opinion? Explain.
Answer:
The writer is of the view that in a free country, and especial, in times of peace, press is free and most powerful organ to influenced public opinion. The press is supposed to reflect public opinion, and force the governments to make or change their policies accordingly. But the author believes that the press does not so much reflect public opinion, as it manufactures it. Once when she was away, her house was broken into. The thief was disturbed by the newsboy. But the newspaper reported the incident after a few days. They changed the date of the incident so that the report did not look cold. They also said that the burglar ran away because she had returned home in time.

In fact, all the details about the incident were incorrect. She also speaks of another incident. She received a summons from the court for unshaded lights. She explained that her servant had carefully drawn the curtains but unfortunately there was a defect in the curtains. She did not find fault with her servant. But the newspapers reported that she had told the court that her servant had forgotten to draw the curtain. Naturally, it must have distressed her servant. She tells about these trivial incidents just to emphasise her point that if the press can misrepresent such minor incidents it cannot be expected to report important matters faithfully.

C. 3. Composition

1. Write a letter to the Editor of an English daily highlighting the poor sanitation in your locality.

Answer:

305, Sector 21 ’ J. P. Colony,
Gopalganj 27th June 20
The Editor
Bihar Times
Patna

Sir,
Subject: Poor Sanitation
Through the columns of your esteemed paper, I would like to draw the attention of civic authorities to the poor sanitation in our sector.
The worst menace is caused by stray cows. In fact, the cows belong to the milkmen who live across the road. Every morning they drive the cows into our sector. They roam about in large numbers all over the sector. Since people are religious minded, they offer cows chapatis, vegetables, etc. In turn, the cows litter the lanes with cow dung. They are seen incumbent on the streets. In addition to insanitation, they cause traffic hazards. The problem is years old. But the civic authorities seem to have no will to tackle it. Secondly, the roads are pocked with potholes. Just after two light showers, the roads are full of puddles. The drainage system is chocked, and no action has been taken to clear it. The rainy season has already set in. This poor sanitation is sure to cause epidemics if measures are not taken promptly.

Yours faithfully,
Ashish

2. Write a summary of the lesson is about 150 words.
Answer:
No doubt freedom of the press is essential to safeguard the freedom of the people. The press must be free from any control or censorship by the government. But no newspaper can be entirely free. Since newspapers depend on advertisers for their revenue, they can support no policy that is against their vested interests. But there is unofficial censorship that the press itself imposes on public opinion. It does not so much reflect public opinion as it manufactures it. There are several ways like false emphasis, garbling, inaccuracy, a reversal of facts, random invention, miracle-mongering, and flat suppression with which the press distorts facts to give a different or false impression to the readers. Press has the power to make or mar companies and public men. It is the tyranny of the press and there is no machinery to check it. The slightest effort to correct its irresponsible reporting is greeted by a concerted cry: This is a threat to the freedom of the press.

D. WORD STUDY
D. 1. Dictionary Use

Ex. 1. Correct the spelling of the following words:
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 8 How Free is the Press 3

Ex. 2. Lookup a dictionary and write two meanings of the following words—the one in which it is used in the lesson and the other which is more common.
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 8 How Free is the Press 1Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 8 How Free is the Press 2

D. 2. Word-formation

Make as many words as possible from the words given below
Answer:
resolve — resolved, resolvable, resolvability, resolving
allude — alluded, alluding, allusion, allusive
invoke — invoked, invoking, invocation, invocable
restrict — restricted, restricting, restriction, restrictable, restrictive
renew — renewed, renewal, renewing, renewable.

D. 3. Word-meaning

Ex. 1. Find from the lesson words the meanings of which have been given in Column-A. The last part of each word is given in Column-B
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 8 How Free is the Press

Ex. 2. Fill in the blanks with suitable options given in the brackets
(a) We all become very………………… by the news reporting. (excited, exciting)
(b) I do not…………… the incident (recollect, recollects)
(c) You may………………. between the two English dailies. (chose, choose)
(d) Unfavorable season crop………. (effect, affects)
(e) The press should not be…………. (monopolized, monopolize)
The report was ………… (distorting, distorted)
Answer:
(a) excited, (b) recollect, (c) choose, (d) affects, (e) monopolised, (f) distorted

D. 4. Phrases

Ex. 1. Read the lesson carefully and find out the sentences in which the following phrases have been used. Then use these phrases in sentences of your own.
at such time, so far on occasion, placed upon, keep up, driven off, to bear upon creeping into, make of.
Answer:
at such time: At such time as this, when terrorism is on the increase, we must be united against all disruptive forces.
so far: So far as India is concerned, her position on Kashmir is crystal clear.
On occasion: She is very sensible. But on occasion, she behaves most stupidly.
placed upon: Heavy responsibility was placed upon her young shoulders after her husband’s death.
keep up: You have achieved a high position. Keep it up with hard work, driven off: After my meeting with my uncle, all fears were driven off my. mind.
to bear upon: The rising global temperature will heavily bear upon on our climate.
creeping into: Western lifestyle is creeping into our society, make of: I don’t know what they will make of your remarks.

E. Grammar

Write ten more sentences on this sentence, based on this structure:
If+(S+were) + S+would/should + V1
Answer:
1. If she were rich, she would buy a big car.
2. If I were the editor, I would apologize.
3. If you were strong, you would overpower him.
4. If they were honest, they would return the money.
5. If I were you, I should help them.
6. If he were wise, he would solve this problem.
7. If you were cautious, you would not risk it.
8. If she were beautiful, she would marry a prince.
9. If you were present, you would know better.
10. If they were mad, they would not behave like this.

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Chapter 8 How Free is the Press English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 10 My Grandmother’s House

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 10 My Grandmother’s House

My Grandmother House Objective Questions Bihar Board 12th Question 1.
My Grandmother’s House is written by –
(A) D.H. Lawrence
(B) Kamala Das
(C) Keki N. Daruwala
(D) Walt Whitman
Answer:
(B) Kamala Das

My Grandmother House Objective Question Bihar Board 12th Question 2.
Kamala Das was born on-
(A) April 31, 1933
(B) April 31, 1934
(C) April 31, 1943
(D) April 31, 1984
Answer:
(B) April 31, 1934

My Grandmother’s House Bihar Board 12th Question 3.
What moved freely in the silent house ?
(A) Lizards
(B) Snakes
(C) Cockroaches
(D) Dogs
Answer:
(B) Snakes

My Grandmother House Question Answer Bihar Board 12th Question 4.
Who’s death the speaker says-
(A) Her husband
(B) Her grandmother
(C) Her grandfather
(D) Her brother
Answer:
(B) Her grandmother

My Grandmother’s House By Kamala Das Bihar Board 12th Question 5.
Kamala Das, poet and short story writer, has earned a respectable place in both English and-
(A) Hindi
(B) Telugu
(C) Malayalam
(D) Urdu
Answer:
(C) Malayalam

My Grandmother Poem Questions And Answers Bihar Board 12th Question 6.
Autobiography of Kamla Das was published in-
(A) 1976
(B) 1966
(C) 1986
(D) 1996
Answer:
(A) 1976

My Grandmother Poem Bihar Board 12th Question 7.
The speaker where once was loved, the house belonged to her-
(A) Father
(B) Husband
(C) Friend
(D) Grandmother
Answer:
(D) Grandmother

Grandmother Poem In Hindi Bihar Board 12th Question 8.
Kamala Das was born in …………….
(A) 1933
(B) 1934
(C) 1935
(D) 1936
Answer:
(B) 1934

Grandmother Board Bihar Board 12th Question 9.
Which figure of speech has been used in ‘My Grandmother’s House’?
(A) metaphor
(B) personification
(C) epic simile
(D) simile
Answer:
(D) simile

Question 10.
The speaker of ‘My Grandmother’s House’ is proud of—
(A) her parent’s house
(B) her grandmother’s house
(C) her uncle’s house
(D) None of these
Answer:
(B) her grandmother’s house

Question 11.
When did the speaker of ‘My Grandmother’s House’ live with her grandmother?
(A) during her childhood
(B) during her adolescence
(C) during her youth
(D) None of these
Answer:
(A) during her childhood

Question 12.
‘My Grandmother’s House’ published in —
(A) 1963
(B) 1964
(C) 1965
(D) 1966
Answer:
(C) 1965

Question 13.
‘My Grandmother’s House’ is —
(A) a sonnet
(B) an ode
(C) a ballad
(D) a lyric
Answer:
(D) a lyric

Question 14.
During her childhood the speaker of ‘My Grandmother’s House’ lived with her —
(A) grandmother
(B) aunt
(C) mother
(D) None of house
Answer:
(A) grandmother

Question 15.
‘My Grandmother’s House’ published in —
(A) ‘Descendants’
(B) ‘Summer in Calcutta’
(C) The Old Playhouse and Other Poems
(D) None of these
Answer:
(B) ‘Summer in Calcutta’

Question 16.
Who was composed the poem. ‘Mv Grandmother’s House’?
(A) Kamala Das
(B) A.K. Ramanujan
(C) Sarojini Naidu
(D) None of these
Answer:
(A) Kamala Das

Question 17.
Who is the speaker in ‘My Grandmother’s House’?
(A) Torn Dutta
(B) Kamala Das
(C) S.K. Kumar
(D) None of these
Answer:
(B) Kamala Das

Question 18.
Kamala Das has written the poem —
(A) Snake
(B) Fire-Hymn
(C) My Grandmother’s House
(D) The Soldier
Answer:
(C) My Grandmother’s House

Question 19.
Kamala Das is an ………….. Poetess.
(A) American
(B) Indian
(C) African
(D) Russian
Answer:
(B) Indian

Question 20.
Kamala Das is talking about her …………. who is dead now.
(A) father
(B) mother
(C) grand father
(D) grand mother
Answer:
(D) grand mother

Question 21.
Kamala Das remembers the happy days spent in the sweet company of her—
(A) grand mother
(B) grand father
(C) father
(D) mother
Answer:
(A) grand mother

Question 22.
She noticed a ……………….. behind the door of the bedroom.
(A) ox
(B) cow
(C) dog
(D) cat
Answer:
(D) cat

Question 23.
The house went into silence due to the death of the …………..
(A) woman
(B) man
(C) girl
(D) boy
Answer:
(A) woman

Question 24.
‘My Grand mother’s House’ is an ………….. poem by Kamala Das.
(A) biographical
(B) auto biographical
(C) bibliographical
(D) None of these
Answer:
(B) auto biographical

Question 25.
The poetess in ‘The Grand Mother’s House’ begs at …. doors. [2018A, I.A.]
(A) friend’s
(B) family’s
(C) stranger’s
(D) enemy’s
Answer:
(C) stranger’s

Question 26.
‘There is a house now far away where once I received love’ ……………… is from the poem—
(A) Song of Myself
(B) Ode to Autumn
(C) My Grand mother’s House
(D) Snake
Answer:
(C) My Grand mother’s House

Question 27.
‘Behind my bedroom’s door like a brooding’ is written by—
(A) Rupert Brooke
(B) Kamala Das
(C) Keki N. Daruwalla
(D) T.S. Eliot
Answer:
(B) Kamala Das

Question 28.
My Grandmother’s House is written by-
(A) D. H. Lawrence
(B) Kamala Das
(C) Keki N. Daruwala
(D) Walt Whitman
Answer:
(B) Kamala Das

Question 29.
Kamala Das was born on-
(A) April 31,1933
(B) April 31, 1934
(C) April 31,1935
(D) April 31, 1936
Answer:
(B) April 31, 1934

Question 30.
What moved freely in the silent house ?
(A) Dogs
(B) Snakes
(C) Cockroaches
(D) Lizard
Answer:
(B) Snakes

Question 31.
Autobiography of Kamala Das was published in-
(A) 1996
(B) 1966
(C) 1986
(D) 1976
Answer:
(D) 1976

Question 32.
Who’s death the speaker says-
(A) Her son
(B) Her grandmother
(C) Her grandfather
(D) Her brother
Answer:
(B) Her grandmother

Question 33.
The speaker where once was loved, the house belonged to her-
(A) Father
(B) Husband
(C) son
(D) Grandmother
Answer:
(A) Father

Question 34.
Kamala Das, poet and short story writer, has earned a respectable place in both English and-
(A) Hindi
(B) Malyalam
(C) Telugu
(D) Urdu
Answer:
(B) Malyalam

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका

Bihar Board Class 10 Hindi प्रेम अयनि श्री राधिका Text Book Questions and Answers

कविता के साथ

प्रेम अयनि श्री राधिका Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
कवि ने माली-मालिन किन्हें और क्यों कहा है ?
उत्तर-
कवि ने माली-मालिन कृष्ण और राधा को कहा है। क्योंकि कवि राधा-कृष्ण के प्रेममय युग को प्रेम भरे नेत्र से देखा है। यहाँ प्रेम को वाटिका मानते हैं और उस प्रेम-वाटिका के माली-मालिन कृष्ण-राधा को मानते हैं। वाटिका का विकास माली-मालिन की कृपा पर निर्भर है। अत: कवि के प्रेम वाटिका को पुष्पित पल्लवित कृष्ण और राधा के दर्शन ही कर सकते हैं।

Prem Ayani Shri Radhika Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
द्वितीय दोहे का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रस्तुत दोहे में सवैया छन्द में भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग अत्यन्त मार्मिक है। सम्पूर्ण छन्द में ब्रजभाषा की सरलता, सहजता और मोहकता देखी जा रही है। कहीं-कहीं तद्भव और तत्सम के सामासिक रूप भी मिल रहे हैं। कविता में संगीतमयता की धारा फूट पड़ी है। अलंकार योजना से दृष्टांत अलंकार के साथ अनुप्रास एवं रूपक का समागम प्रशंसनीय है। माधुर्यगुण के साथ वैराग्य रस का मनोभावन चित्रण हुआ है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है? कवि का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर-
कवि कृष्ण और राधा के प्रेम में मनमुग्ध हो गये हैं। उनके मनमोहक छवि को देखकर मन पूर्णतः उस युगल में रम जाता है। इन्हें लगता है कि इस देह से मन रूपी मणि को कृष्ण ने चुरा लिये हैं। चित्त राधा-कृष्ण के युगल जोड़ी में लग चुका है। अब लगता है कि यह शरीर मन एवं चित्त रहित हो गया है। इसलिए चित्त हरने वाले कृष्ण को चोर कहा गया है। उनकी मोहनी मूरत मन को इस प्रकार चुराती है कि कवि अपनी सुध खो बैठते हैं। केवल कृष्ण ही स्मृति पटल पर अंकित रहते हैं और कुछ भी दिखाई नहीं देता है।

प्रेम अयनि श्री राधिका काव्य का भावार्थ Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 4.
सवैये में कवि की कैसी आकांक्षा प्रकट होती है? भावार्थ बताते हुए स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रेम-रसिक कवि रसखान द्वारा रचित सवैये में कवि की आकांक्षा प्रकट हुई है। इसके माध्यम से कवि कहते हैं कि कृष्ण लीला की छवि के सामने अन्यान्य दृश्य बेकार हैं। कवि कृष्ण की लकुटी और कामरिया पर तीनों लोकों का राज न्योछावर करने देने की इच्छा प्रकट करते हैं। नन्द की गाय चराने की कृष्ण लीला का स्मरण करते हुए कहते हैं कि उनके चराने में आठों सिद्धियों और नवों निधियों का सुख भुला जाना स्वाभाविक है। ब्रज के वनों के ऊपर करोड़ों इन्द्र के धाम को न्योछावर कर देने की आकांक्षा कवि प्रकट करते हैं।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 5.
व्याख्या करें :
(क) मन पावन चितचोर, पलक ओट नहिं करि सकौं।
(ख) रसखानि कबौं इन आँखिन सौ ब्रज के बनबाम तझम निहारौं।
उत्तर-
(क) प्रस्तुत दोहे में कवि राधिका के माध्यम से श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित हो जाना चाहता है। जिस दिन से श्रीकृष्ण से आँखें चार हुई उसी दिन से सुध-बुध समाप्त हो गई। पवित्र चित्त को चुराने वाले श्रीकृष्ण से पलक हटाने के बाद भी अनायास उस मुख-छवि को देखने के लिए विवश हो जाती है। वस्तुत: यहाँ कवि बताना चाहता है कि प्रेमिका अपने प्रियतम को सदा अपने आँखों में बसाना चाहती है।

(ख)प्रस्तुत पंक्ति कृष्ण भक्त कवि रसखान द्वारा रचित हिंदी पाठ्य-पुस्तक के “करील में कुंजन ऊपर वारों” पाठ से उद्धत है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि ब्रज पर अपना जीवन सर्वस्थ न्योछावर कर देने की भावमयी विदग्धता मुखरित करते हैं। कवि इसमें ब्रज की बागीचा एवं तालाब की महत्ता को उजागर करते हुए निरंतर उसकी शोभा देखते रहने की आकांक्षा प्रकट करते हैं।

प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति के माध्यम से कवि कहते हैं कि ब्रज की बागीचा एवं तालाब अति सुशोभित एवं अनुपम हैं। इन आँखों से उसकी शोभा देखते बनती है। कवि कहते हैं कि ब्रज के वनों के ऊपर, अति रमनीय, सुशोभित मनोहारी मधुवन के ऊपर इन्द्रलोक को भी न्योछावर कर दूँ तो कम है। ब्रज के मनमोहक तालाब एवं बाग की शोभा देखते हुए कवि की आँखें नहीं थकती, इसकी शोभा निरंतर निहारते रहने की भावना को कवि ने इस पंक्ति के द्वारा बड़े ही सहजशैली में अभिव्यक्त किया है। कवि को कृष्ण-लीला स्थल के कण-कण से प्रेम है। कृष्ण की सभी
चीजें उन्हें मनोहारी लगती हैं।

Bihar Board Hindi Book Class 10 प्रश्न 6.
‘प्रेम-अयनि श्री राधिका’ पाठ का भाव/सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
प्रेम-अयनि श्री राधिका’ में कृष्ण और राधा के प्रेममय रूप पर मुग्ध रसखान कहते हैं कि राधा प्रेम का खजाना है और श्रीकृष्ण अर्थात् नंदलाल साक्षात् प्रेम-स्वरूप। ये दोनों ही ‘ प्रेम-वाटिका के माली और मालिन है जिनसे प्रेम-वाटिका खिली-खिली है। मोहन की छवि ऐसी है कि उसे देखकर कवि की दशा धनुष से छूटे तीर के तहत हो गई है। जैसे धनुष से छूटा हुआ तीर वापस नहीं होता, वैसे ही कवि का मत एक बार कृष्ण की ओर जाकर पुनः अन्यत्र नहीं जाता। कवि का मन माणिक, चित्तचोर श्रीकृष्ण चुरा कर ले गए। अब बिना मन के वह फंदे में फंस गया है। वस्तुत: जिस दिन से प्रिय नन्द किशोर की छवि देख ली है, यह चोर मन बराबर उनकी ओर ही लगा हुआ है।

‘करील के कुंजन ऊपर वारौं’ सवैया में कवि रसखान की श्रीकृष्ण पर मुग्धता और उनकी एक-एक वस्तु पर ब्रजभूमि पर अपना सर्वस्व क्या तीनों लोक न्योछावर करने की भावमयी उत्कंठा एवं उद्विग्नता के दर्शन होते हैं। रसखान कहते हैं-श्रीकृष्ण जिस लकुटी से गाय चराने जाते हैं
और जो कम्बल ले जाते हैं, अगर मुझे मिल जाए तो मैं तीनों लोको का राज्य छोड़कर उन्हें ही लेकर रम जाऊँ। अगर ये हासिल न हों, केवल नंद बाबा की गौएँ ही चराने को मिल जाएँ तो आठों सिद्धियों और नौ निधियाँ छोड़ दूँ। कवि का श्रीकृष्ण और उनकी त्यागी वस्तुएँ ही प्यारी नहीं हैं वे उनकी क्रीडाभूमि व्रज पर भी मुग्ध है। कहते हैं और-“तो और संयोगवश मुझे ब्रज के जंगल और बाग और वहाँ के घाट तथा करील के कुंज जहाँ वे लीला करते थे, उनके ही दर्शन हो जाएँ तो सैकड़ों इन्द्रलोक उन पर न्योछावर कर दूं।” रसखान की यह अन्यतम समर्पण-भावना और विदग्धता भक्ति-काव्य की अमूल्य निधियों में है।

भाषा की बात

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf प्रश्न 1.
समास-निर्देश करते हुए निम्नलिखित पदों के विग्रह करें –
प्रेम-अनि, प्रेमबरन, नंदनंद, प्रेमवाटिक, माली मालिन, साखानि, ‘चिनचोर, मनमानिक, बेमन, नवोनिधि, आठहुँसिद्धि, बमबाग, लिहपुर
उत्तर-
प्रेमआयनि – प्रेम की आयनि – तत्पुरुष समास
प्रेम-बरन – प्रेम का वरन – तत्पुरुष समास
नंदनंद – नंद का है जो नंद – कर्मधारय समास
प्रेमवाटिका – प्रेम की वाटिका – तत्पुरुष समास
माली-मालिन – माली और मालिन – द्वन्द्व समास
रसखानि – रस की खान – तत्पुरुष समास
चित्तचोर – चित्त है चोर जिसका अर्थात कृष्ण – बहुव्रीहि समास
मनमानिक – मन है जो मानिक – कर्मधारय समास
बेमन – बिना मन का – अव्ययीभाव समास
नवोनिधि – नौ निधियों का समूह – द्विगु समास
आठसिद्धि – आठों सिद्धियों का समूह – द्विगु समास
बनबाग – बन और बाग – द्वन्द्व समास
तिहपुर – तीनों लोकों का समूह – द्विगु समास

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution In Hindi Pdf Download प्रश्न 2.
निम्नलिखित के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखें –
राधिका, नंदनंद, नैन, सर, आँख, कंज, कलधौत
उत्तर-
राधिका – कमला, श्री, प्रेम, अयनि।
नदनंद – कृष्ण, नंदसुत, नंदतनय।
नैन – आँख, लोचन, विलोचन।
सर – वाण, सरासर, तीर।
आँख – नयन, अश्नि, नेत्रा
कुंग – बाग, वाटिका, उपवन।

Class 10th Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
कविता से क्रियारूपों का चयन करते हुए उनके मूल रूप को स्पष्ट करें।
उत्तर-
विद्यार्थी शिक्षक के सहयोग से स्वयं करें।

काव्यांशों पर आधारित आई-नसंबंधी प्रश्नोत्तर

1. प्रेम अवनि श्री साधिका, क-बान नैदलंदा
केन-बाटिका के दोऊ, माली मनिला
मोहन छवि स्लखन लखि अब तुम अपने नाहित
अंचे आवत धनुष से बटे सर से जाहिक
में मन मानिक लै मयको चितचोर नंदनंदा
आब बेबन का कसरी फेर के कंदा
प्रीतम नन्दकिशोर, जादिन ते नैनति लम्बी
मन पावन चितचोर, पालक ओट नहिं करि सको

प्रश्न
(क) कविता एवं कवि का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि- रसखाना कविता प्रेम अयनि श्री राधिका।

(ख) प्रस्तुत कविता में हिंदी काव्य धारा के सुप्रसिद्ध कवि रसखान श्री कृष्ण भक्ति में अपनी तल्लीनता का मार्मिक वर्णन किया है। श्री कृष्ण भक्ति में कवि आनंद विभोर होकर राधा-कृष्ण के युगल रूप को अपनी भक्ति भावना का आधार बताया है। राधा-कृष्ण की सुंदरता समस्त रसिक हृदय को आकर्षित करती है।

(ग) सरलाई प्रस्तुत कविता में राधा-श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति भावना की मार्मिकता को तथा राधा-कृष्ण के युगल सौंदर्य रूप का वर्णन करते हुए रसखान कहते हैं कि श्री राधिका प्रेम का खजाना है और श्री कृष्ण प्रेम के रंग हैं तथा प्रेम वाटिका का श्री कृष्ण और राधा दोनों माली और मालिन है। कवि रसखान श्री कृष्ण के मोहनी-सूरत को देख-देख कर उनके प्रति आकर्षित हो रहे हैं। प्रयत्न करने पर भी उनका नेत्र श्री कृष्ण की ओर ही बार-बार आकर्षित हो जाता है। जैसे धनुष से छूटा हुआ वाण वापस नहीं आ सकता है उसी प्रकार उनका हृदय से निकला हुआ प्रेम श्री कृष्ण भक्ति की ओर ही आकर्षित है। रसखान कहते हैं कि जो मेरे पास मनरूपी रत्न था उसे तो नन्दलाल ने ही चुरा लिया। अब तो मैं बेमन हो गया हूँ। मैं श्री कृष्ण के प्रेम फंदे में फसकर छटपटा रहा हूँ। जबतक मेरे पवित्र मन को चुराने वाले उस चित्तचोर कृष्ण के आने की राह में अपनी पलक को यहाँ से नहीं हटाऊँगा।

(घ) भाव सौंदर्य प्रस्तुत कविता में रसखान कवि राधा-कृष्ण के प्रेममय युगल रूप पर रीझ गये हैं। राधा-कृष्ण की सुंदरता में अपने आप को समर्पित कर देना चाहते हैं। उन दोनों के प्रति अपनी भक्ति भावना की मार्मिकता को स्पष्ट रूप से रखते हैं।

(ङ) काव्य-सौंदर्भ – (i) यहाँ भाव के अनुसार भाषा का वर्णन है।
(ii) ब्रजभाषा की प्राथमिकता होते हुए भी ब्रजभाषा का देशज रूप तो कहीं-कहीं तत्सम रूप भी दिखाई पड़ते हैं।
(iii) यह कविता दोहे छंद में ली गई है। इसलिए भाषा सरस, सहज और प्रवाहमय हो गई है।
(iv) यहाँ शृंगार रस के साथ माधुर्यगुण की छटा देखने को मिलती है।
(v) राधा-कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन भावमयी है।
(vi) अलंकार की योजना से अनुप्राण की छटा एवं रूपक की आवृत्ति कविता के भाव में सहायक है।

2. या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूंपुर की तजिडारौं।
आठहुँ सिद्धि नवोनिधि को सुख नंद की गाइ चराइ बिसा ।।
रसखानि कबौं इन आँखिन सौं ब्रज के बनबाग तड़ाग निहारौं।
कोटिक रौ कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।

Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न
(क) कविता एवं कार का नाम लिखें।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता- करील के कुंजन ऊपर वारौं।
कवि – रसखान।
(ख) प्रस्तुत कविता में भक्ति भावना के रसिक कवि रसखान श्री कृष्ण के भक्ति के प्रति अपने आप को तो समर्पित कर देना ही चाहते हैं, साथ ही जीवन के संपूर्ण सुख-सुविधाओं को कृष्ण और उनके ब्रज पर न्योछावर कर देना चाहते हैं।

(ग) प्रस्तुत सवैया में कवि रसखान का हृदय, कृष्ण और ब्रज की सुन्दरता पर समर्पित है। अत: कवि अपनी आकांक्षा प्रकट करते हुये कहते हैं कि ब्रज के बगीचे के ऊपर अपनी सारी सुख-सुविधायें न्योछावर कर देना चाहता हूँ। लाठी और कंबल धारण कर उस नंदलाल के रूप सौंदर्य पर तीनों लोक के राज तथा सुख-सुविधा को मैं समर्पित कर देना चाहता हूँ। यहाँ तक कि आठों सिद्धियों और नवा सिधि के द्वारा जो सुख मुझे प्राप्त है उन सभी सुखों के नन्द की गाय चराने वाले श्री कृष्ण की भक्ति भावना में भुला देना चाहता हूँ। पुनः रसखान कहते हैं कि ब्रज के इन सुन्दर बगीचों एवं सुन्दर तालाबों को जैसे लगता है कि मैं अपने दोनों आँखों से हमेशा देखता रहूँ। ब्रज के सभी चीजों में श्री कृष्ण के सभी रूपों में आनंद की अनुभूति होती है। करोड़ों इंद्र के भवन-रूपी सुख-सुविधा को ब्रज के बगीचों पर जहाँ श्री कृष्ण मधुर बाँसुरी बजाते हैं
और गायें चराते हैं उसपर न्योछावर कर देना चाहता हूँ।

(घ) भाव सौंदर्य प्रस्तुत सवैया में कवि के रसिक मन कृष्ण और उनके ब्रज-पर अपना जीवन सर्वस्व न्योछावर कर देने की भावमयी विदग्धता मुखरित है। इसमें कवि अपनी संपूर्ण सुख-सुविधा को ब्रज के बगीचे एवं श्री कृष्ण की भक्ति भावना पर समर्पित कर अपने जीवन को सार्थक बनाता है।

(ङ) काव्य सौंदर्य- (i) यहाँ सवैया, छंद में भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग अत्यंत मार्मिक है।
(ii) संपूर्ण छंद में ब्रजभाषा की सरलता, सहजता और मोहकता देखी जा रही है।
(iii) कहीं-कहीं तद्भव के और तत्सम के सामासिक रचना भी मिल रहे हैं।
(iv) कविता में संगीतमयता की धारा फूट पड़ी है।
(v) अलंकार योजना से दृष्टांत अलंकार के साथ अनुप्रास एवं रूपक का समागम प्रशंसनीय है।
(vi) माधुर्यगुण के साथ वैराग रस का मनोभावन चित्रण हुआ है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें –

Bihar Board Class 10th Hindi प्रश्न 1.
रसखान किस काल के कवि थे?
(क) रीति काल
(ख) आदि काल
(ग) मध्य काल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर-
1558

10th Class Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
रसखान दिल्ली के बाद कहाँ चले गए ?
(क) बनारस
(ख) ब्रजभूमि
(ग) महरौली
(घ) हस्तिनापुर
उत्तर-
(ख) ब्रजभूमि

Class 10 Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
रसखान की भक्ति कैसी थी?
(क) सगुण
(ख) निर्गुण
(ग) नौगुण
(घ) सहस्रगुण
उत्तर-
(क) सगुण

प्रश्न 4.
रसखान ने प्रेम-अयनि’ किसे कहा है?
(क) कृष्ण
(ख) सरस्वती
(ग) राधा
(घ) यशोदा
उत्तर-
(ग) राधा

प्रश्न 5.
रसखान के चित्तचोर’ कौन हैं ?
(क) इन्द
(ख) श्रीकृष्ण
(ग) कामदेव
(घ) कंचन
उत्तर-
(ख) श्रीकृष्ण

प्रश्न 6.
रसखान ब्रज के वन-बागों पर क्या न्योछावर करने को तैयार हैं ?
(क) सैकड़ों स्वर्ण महल
(ख) सैकड़ों इन्द्रलोक
(ग) तीनों लोक
(घ) स्वर्गलोक
उत्तर-
(ग) तीनों लोक

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

प्रश्न 1.
रसखान, का जन्म सन् ………….. में हुआ था।
‘उत्तर-
1558

प्रश्न 2.
कृष्ण-भक्त कवियों में ………….अग्रणी हैं।
उत्तर-
रसखान

प्रश्न 3.
रसखान ने कवित्त, सबैया और ……….. छन्द में रचना की।
उत्तर-
दोहा

प्रश्न 4.
सुजन रसखान के अलवा रसखान की अन्य क्रुति है …………..
उतर-
प्रेमवाटिका

प्रश्न 5.
रसखान ने …………….. की दीक्षा ली थी।
उत्तर-
पुष्टि माग

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रसखान किस भक्ति-धारा के कवि थे?
उत्तर-
रसखान सगुण भक्ति-धारा के कवि थे।

प्रश्न 2.
रसखान ने किस भाषा में काव्य-रचना की है ?
उत्तर-
रसखान ने ब्रजभाषा में अपनी काव्य-रचना की है।

प्रश्न 3.
दिल्ली के अतिरिक्त रसखान कहाँ रहे?
उत्तर-
दिल्ली छोड़ने के बाद रसखान ने ब्रजभूमि में अपना जीवन व्यतीत किया।

व्याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
प्रेम बाटिका के दोऊ, माली-मालिन
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के प्रेम-अयनि श्री राधिका काव्य-पाठ से ली  गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग राधा-कृष्ण के प्रेम-प्रसंग से संबंधित है।

कवि कहता है कि राधिकाजी प्रेमरूपी मार्ग हैं और श्रीकृष्णजी यानी नंद बाबा के नंद प्रेम रंग के प्रतिरूप हैं। दोनों की महिमा अपार है। कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं तो राधा उसका आधार है। प्रेमरूपी वाटिका के दोनों माली और मालिन हैं। दोनों की अपनी-अपनी विशेषता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। एक-दूसरे के अभाव में पूर्णता नहीं हो सकती। प्रेम का साकार या पूर्ण रूप राधा-कृष्ण की जोड़ी है।

प्रश्न 2.
मोहन छवि स्सखानि लखि अब दग अपने नाहि।
अंचे आवत धनुस से छूटे सर से जाहिं।।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक के “प्रेम-अयनि श्री राधिका” काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इस कविता का प्रसंग कृष्ण की छवि और रसखान की भक्ति से जुड़ा हुआ है।
कवि रसखान कहते हैं कि कृष्ण की मनोहारी छवि को निरख कर, देखकर आंखें वश में नहीं हैं। जैसे धनुष के खिंचते ही तीर सिर के ऊपर से गुजर जाता है और वह तीर वश में नहीं . रहता ठीक उसी प्रकार कृष्ण की छवि निहारकर आँखिया अब वश में नहीं रहती। कृष्ण के रूप-सौंदर्य में आँखें ऐसी खो गयी हैं कि सुध-बुध का ख्याल ही नहीं रहता। इसमें कृष्ण के प्रति रसखान की अगाध प्रेम-भक्ति और आस्था का ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रश्न 3.
मो मन मानिक लै गयो चितै चोर नंदनंदा
अब बेमन मैं का करू परी फेर के फंदा
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘प्रेम-अयनि श्री राधिका’ काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इस कविता का प्रसंग श्रीकृष्ण के चित्तचोर छवि से है। रसखान कृष्ण के रूप का वर्णन करते हुए कहते हैं कि मेरे मन के माणिक्य को, धन को, नंदबाबा के लाल कृष्ण ने चुरा लिया है। वे चित्त को वश में करनेवाले यानी चुरानेवाले हैं। अब मेरा मन तो उनके वश में हो गया है। मैं बेमन का हो गया हूँ। मुझे कुछ भी नहीं सूझता कि अब क्या करूँ। मैं कृष्ण के फेरे के फंदे में फंसकर लाचार हो गया हूँ। मेरा वश अवश हो गया है।
इन पंक्तियों में कृष्ण भक्ति की प्रगाढ़ता, तन्मयता, एकात्मकता एवं गहरी आस्था का सम्यक् चित्रण हुआ है।

प्रश्न 4.
प्रीतमविशोरचलिते नैनति लाग्यो
मन पवन चित्तोर, पलक ओट नहिं करि सकी।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “प्रेम-अयनि श्री राधिका” काव्य-पाठ से ली गयी हैं।
इस कविता का प्रसंग श्रीकृष्ण के पवित्र-प्रेम के प्रति गहरी आस्था से है।
कवि रसखान कहते हैं कि परम प्रिय नंदकिशोर से जिस दिन से आँखें लड़ी हैं या लगी – हैं। उनके पवित्र मन ने चित्त को चुरा लिया है। उनकी छवि को पलकों की ओट से दूर नहीं किया जा सकता। कहने को भाव यह है कि कृष्ण के प्रति रसखान की गहरी आस्था है, विश्वास है, भरोसा है, प्रेम की भूख है। जबसे आँखों ने नंदकिशोर का दर्शन किया है तबसे मन का चैन छिन गया है। आँखें अपलक उनके दर्शन के लिए लालायित रहती है। इन पंक्तियों में कृष्ण के प्रति गहरी प्रेम-भक्ति को दर्शाया गया है।

प्रश्न 5.
या लकुटी अख कामरिया पर राज तिहूँघुर की तजिडारौ!
आठहूँ सिद्धि नवोनिधि को सुख नन्द की गाइ चराइ बिसारौं।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के करील के कुंजन ऊपर वारौं” काव्य पाठ से ली गयी हैं। इस कविता का प्रसंग श्री कृष्ण के विराट व्यक्तित्व के साथ नंदलाला की मोहक मनोहारी छवि की तुलनात्मक विवेचन से है।

रसखान कवि कहते हैं कि जो स्वयं तीनों लोकों का मालिक है, वह उसे त्याग कर एक छोटी-सी लकुटी और कंबल लेकर चरवाहा बना हुआ है। जिसकी सुख-सुविधा के लिये आठों सिद्धियाँ और नवनिधियाँ सदैव तत्पर रहती हैं, वह वैसे सुख का त्याग कर नंद की गायों को चराने में भूला हुआ है। यहाँ कृष्ण की लोक छवि की तुलना विराट लोकोत्तर छवि से की गयी है। कृष्ण स्वयं में सृष्टि के सृजक हैं, वे स्वयं सृष्टिकर्ता हैं। कितना अद्भुत है यह प्रसंग। कृष्ण अपने विराट व्यक्तित्व को भुलाकर सरल, सहज और मनमोहक छवि के साथ लोक-लीला में रमें हुये हैं। वे लोकोत्तर सुख-सुविधाओं को तजकर लोक जगत के बीच सहज भाव से बाल-लीलायें कर रहे हैं।

सारा संसार जिनके सहारे है वही व्यक्ति साधारण रूप में नंद के घर रहता है, उसकी गाय चराता है। रास-लीला किया करता है। स्वयं को उसने इतना भुला दिया है कि उसके अपने विराट व्यक्तित्व का अभाव ही नहीं होता। यहाँ कृष्ण के लोक कल्याणकारी मानवीय रूप का सफल चित्रण हुआ है। जिसमें गूढार्थ भी है, रहस्य भी है, साथ ही सहजता और सरलता भी है। यह कृष्ण के चरित्र की विशेषता है।

प्रश्न 6.
रसखानी कबौ इन ऑखिन सौं ब्रज के क्नबाग तड़ाग निहारौ।
कोटिक रौ कलधौत के घाम करील के कुंजन ऊपर वारौ।।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘करील के कुंजन ऊपर वारौं’ काव्य पाठ से ली गयी हैं। इन काव्य प्रसंग ब्रज भूमि की महिमा से जुड़ा हुआ है।
कवि ब्रज भूमि की महिमा का गुणगान करते हुये काव्य रचना करता है। कवि कहता है कि रसखान नानक कवि यानी स्वयं कब अपने आंखियों से ब्रज भूमि का दर्शन करेगा और स्वयं को धन्य-धन्य समझेगा। रसखान के मन के भीतर एक व्यग्रता है, अकूलता है, तड़प है, बेचैनी है, ब्रजभूमि के सौंदर्य को देखने की परखने की उस भूमि के बागों, वनों, तालाबों के दर्शन करने की।

इस प्रकार महाकवि रसखान ब्रजभूमि राधा-कृष्ण मय मानते हुये उसके प्रति आघात, आस्था और श्रद्धा रखते हैं। साथ ही उसकी पवित्रता, श्रेष्यठता और सौंदर्य के प्रति एक निर्मल भाव रखते हैं। करोड़ों-करोड़ इन्द्र के धाम ब्रज भूमि के कोटों की बगीचों पर न्योछावर है। ब्रज भूमि राधा-कृष्ण की लीला स्थली है, क्रीड़ा-क्षेत्र है, परमधाम है, सिद्ध लीला धान है।

प्रेम अयनि श्री राधिका किवि परिचय

रसखान के जीवन के संबंध में सही सूचनाएँ प्राप्त नहीं होती, परंतु इनके ग्रंथ ‘प्रेमवाटिका’ (1610 ई०) में यह संकेत मिलता है कि ये दिल्ली के पठान राजवंश में उत्पन्न हुए थे और इनका रचनाकाल जहाँगीर का राज्यकाल था । जब दिल्ली पर मुगलों का आधिपत्य हुआ और पठान वंश पराजित हुआ, तब ये दिल्ली से भाग खड़े हुए और ब्रजभूमि में आकर कृष्णभक्ति में तल्लीन हो गए । इनकी रचना से पता चलता है कि वैष्णव धर्म के बड़े गहन संस्कार इनमें थे । यह भी अनुमान किया जाता है कि ये पहले रसिक प्रेमी रहे होंगे, बाद में अलौकिक प्रेम की ओर आकृष्ट होकर भक्त हो गए । ‘दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता’ से यह पता चलता है कि गोस्वामी विट्ठलनाथ ने इन्हें ‘पुष्टिमार्ग’ में दीक्षा दी । इनके दो ग्रंथ मिलते हैं – ‘प्रेमवाटिका और सुजान रसखान’ । प्रमवाटिका में प्रेम-निरूपण संबंधी रचनाएँ हैं और ‘सुजान रसखान’ में कृष्ण की भक्ति संबंधी रचनाएँ ।

रसखान ने कृष्ण का लीलागान पदों में नहीं, सवैयों में किया है । रसखान सवैया छंद में सिद्ध थे। जितने सरस, सहज, प्रवाहमय सवैये रसखान के हैं, उतने शायद ही किसी अन्य हिंदी कवि के हों । रसखान का कोई सवैया ऐसा नहीं मिलता जो उच्च स्तर का न हो । उनके सवैयों की मार्मिकता का आधार दृश्यों और बायांतर स्थितियों की योजना में है । वहीं रसखान के संवैयों के ध्वनि प्रवाह भी अपूर्व माधुरी में है। ब्रजभाषा का ऐसा सहज प्रवाह अन्यत्र दुर्लभ है । रसखान सूफियों का हृदय लेकर कृष्ण की लीला पर काव्य रचते हैं । उनमें उल्लास, मादकता और उत्कटता तीनों का संयोग है । इनकी रचनाओं से मुग्ध होकर भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने कहा था -“इन मुसलमान हरिजनन पै, कोटिन हिन्दू क्यारिखें ।

सम्प्रदायमुक्त कृष्ण भक्त कवि रसखान हिंदी के लोकप्रिय जातीय कवि हैं । यहाँ ‘रसखान रचनावली’ से कुछ छन्द संकलित हैं – दोहे, सोरठा और सवैया । दोहे और सोरठा में राधा-कृष्ण के प्रेममय युगल रूप पर कवि के रसिक हृदय की रीझ व्यक्त होती है और सवैया में कृष्ण और उनके ब्रज पर अपना जीवन सर्वस्व न्योछावर कर देने की भावमयी विदगता मुखरित है।

प्रेम अयनि श्री राधिका Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

हिन्दी साहित्य में कुछ ऐसे मुस्लिम कवि हैं जो हिन्दी के उत्थान में अपूर्व योगदान दिये हैं। उन कवियों में रसखान का नाम की आदर के साथ लिया जाता है। रसखान सवैया छंद के प्रसिद्ध कवि थे। जितने सरस प्रहज, प्रवाहमय सवैये रसखान है, उतने शायद ही किसी अन्य हिन्दी कवि के हों। इनके सवैयो की मार्मिकता का आधार दृश्यों और वाह्ययांतर स्थितियों की योजना में है। रसखान सूफियों का हृदय लेकर कृष्ण की लीला पर काव्य रचते हैं। उनमें उल्लास, मादकता और उत्कटता का मणिकांचन संयोग है।

प्रस्तुत दोहे और सवैया में कवि कृष्ण के प्रति अटूट निष्ठा को व्यक्त किया है। राधा-कृष्ण के प्रेममय युगलरूप पर कवि के रसिक हृदय की रीझ व्यक्त होती है। पहले पद में कवि प्रेमरूपी वाटिका में प्रेमी और प्रेमिका का मिलन और उसके अंतर्मन में उठने वाले भावों को सजीवात्मक चित्रण किया है। माली और मालिन का रूपक देकर कृष्ण एवं राधा के प्रेमप्रवाह को तारतम्य बना दिया है। प्रेम का खजाना संजोने वाली राधा श्रीकृष्ण के रूपों पर वशीभूत है। एकबार मोहन का रूप देखने के बाद अन्य रूप की आसक्ति नहीं होती है। प्रेमिका चाहकर भी प्रेमी से अलग नहीं हो सकती है।

दूसरे पद में कवि श्रीकृष्ण के सन्निध्य में रहने के लिए सांसारिक वैभव की बात कौन कहें तीनों लोक की सुःख को त्याग देना चाहता है। ब्रज के कण-कण में श्रीकृष्ण का वास है। अतः वह ब्रज पर सर्वस्व अर्पण कर देना चाहता है।

शब्दार्थ

अयनि : गृह, खजाना
बरन : वर्ण, रंग
दग : आँख
अँचे : खिंचे
सर : वाण
मानिक : (माणिक्य) रत्न विशेष
चित : देखकर
लकुटी : छोटी लाठी
कामरिया : कंबल, कंबली
तिहूँपुर : तीनों लोक
बिसारौं : विस्मृत कर दूँ, भुला दूँ
तड़ाग : तालाब
कोटिक : करोड़ों
कलधौत : इन्द
वारौं : न्योछावर कर दूं
कुंजन : बगीचा (कुंज का बहुवचन)

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 नागरी लिपि

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 5 नागरी लिपि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 नागरी लिपि

Bihar Board Class 10 Hindi नागरी लिपि Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

नागरी लिपि प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर-
करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं, इसलिए इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई है।

Nagari Lipi Ka Question Answer Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं ?
उत्तर-
देवनागरी लिपि में नेपाल की नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाएँ मराठी भाषा की लिपि तथा संस्कृत एवं हिन्दी की लिपि देवनागरी है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।
उत्तर-
लेखक ने गुजराती और बंगला लिपि से देवनागरी का संबंध बताया है।

Class 10th Hindi Bihar Board प्रश्न 4.
नंदी नागरी किसे कहते हैं ? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है ?
उत्तर-
विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।

दक्षिण भारत में पोथियाँ लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था। दरअसल, दक्षिणभारत की यह नागरी लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं। पहले-पहल । विजयनगर के राजाओं के लेखों की लिपि को ही नंदिनागरी नाम दिया गया था।

ब्राह्मी लिपि की वर्णमाला Pdf Download Bihar Board प्रश्न 5.
नागरी लिपि में आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें।
उत्तर-
नागरी लिपि के आरंभिक लेख हमें दक्षिण भारत से ही मिले हैं। राजराजा व राजेन्द्र जैसे प्रतापी चोल राजाओं के सिक्कों पर नागरी अक्षर देखने को मिलते हैं। दक्षिण भारत में नागरी लिपि के लेख आठवीं सदी से मिलने लग जाते हैं और उत्तर भारत में नौवीं सदी से।

Class 10th Hindi Godhuli Question Answer प्रश्न 6.
ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
उत्तर-
मुप्त काल की ब्राह्मी लिपी तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या छोटे ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं और ये शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी रहती हैं जितनी कि अक्षरों की चौड़ाई होती है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 7.
उत्तर भारत के किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
उत्तर भारत के इस्लामी शासन की नींव डालनेवाली महमूद गजनवी के लाहौर के टकसाल में ढाले गए चाँदी के सिक्कों पर भी हम नागरी लिपि के शब्द देखते हैं। मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए थे।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 8.
नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं ? लेखक इस संबंध में क्या बताता है ?
उत्तर-
पादताडितकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या नागरी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा। देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा।

Bihar Board 10th Class Hindi Book Pdf प्रश्न 9.
नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है ? पटना से नागरी का क्या संबंध लेखक ने बताया है ?
उत्तर-
इतना ध्रुवसत्य है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् किसी बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादतादितकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र अर्थात् पटना को नगर नाम से पुकारते थे। अतः हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को नागर शैली कहते हैं। अतः नागर या नागरी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। विद्वानों के अनुसार उत्तर भारत का यह बड़ा नगर निश्चित रूप से पटना ही होगा। चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम देव था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को देवनगर भी कहा जाता था देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया था।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions प्रश्न 10.
नागरी लिपि कब तक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर-
ईसा की 8वीं-11वीं सदियों में हम नागरी लिपि को पूरे देश में व्याप्त देखते हैं। उस समय यह एक सार्वदेशिक लिपि थी।

गोधूलि भाग 2 Class 10 Pdf Bihar Board प्रश्न 11.
नागरी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है ? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है ?
उत्तर-
नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिंदी साहित्य मिलने लग जाता है। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ, मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं।

Bihar Board 10th Hindi प्रश्न 12.
गुर्जर प्रतीहार कौन थे?
उत्तर-
अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतीहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी की पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन खड़ा किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार शासक हुए। मिहिर भोज (1840-81) ई. की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

Bihar Board Class 10th Hindi प्रश्न 13.
निबंध के आधार पर काल-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
निबंध के आधार पर कालक्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण इस प्रकार मिलते हैं – ग्यारहवीं सदी में राजेन्द्र जैसे प्रतापी चेर राजाओं के सिक्कों पर नागर अक्षर देखने को मिलते हैं। बारहवीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर ‘वीर केरलस्य’ जैसे शब्द नागरी लिपि में अकित हैं। दक्षिण से प्राप्त वरगुण का पलयम ताम्रपत्र भी नागरी लिपि में नौवीं सदी की है। एक हजार ई. के आसपास मालवा नगर में नागर लिपि का इस्तेमाल होता था।

विक्रमादित्य के समय पटना में देवनागरी का प्रयोग मिलता है। ईसा की आठवीं से ग्यारहवीं सदियों में नागरी लिपि पूरे भारत में व्याप्त थी। आठवीं सदी में दोहाकोश की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है, वह नागरी लिपि में है। पाँच सौ चौअन ई० में राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का दानपत्र नागरी लिपि में प्राप्त हुआ है। 850 ई. में जैन गणितज्ञ महावीराचार्य के गणित सार संग्रह की रचना मिलती है जो नागरी लिपि में है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा बनाएँ
उत्तर-
स्थिर = स्थिति
अतिरिक्त = अतिरिक्तता
स्मरणीय = स्मरण
दक्षिणी = दक्षिण
आसान = आसानी
पराक्रमी = पराक्रम
युगीन = युग

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पदों के समास विग्रह करें
उत्तर-
तमिल-मलयालम = तमिल और मलयालम द्वन्द्व
रामसीय = राम और सीता द्वन्द्व
विद्यानुराग = विद्या को अनुराग (तत्पुरूष)
शिरोरेखा = शिर पर रेखा (तत्पुरूष)
हस्तलिपि = हस्त की लिपि (तत्पुरूष)
दोहाकोश = दोहा का कोश (तत्पुरूष)
पहले-पहल = पहला पहला (अव्ययीभाव)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें –
उत्तर-
मंत = कथन, वचन।
सार्वदेशिक = पूरे देश की, संपूर्ण राष्ट्र।
अनुकरण = अनुगमन, नकल।
व्यवहार = आचार, संबंध।
शासक = राजा, बादशाह।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) प्रत्न – पुराना
प्रयत्न प्रयास
(ख) लिपि – लिखावट
लिप्ति – ढका हुआ
(ग) नागरी – एक लिपि
नागरिक – जनता
(घ) पट – वस्त्र
पट्ट – तख्ती (पट्टिका)

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. हिंदी तथा इसकी विविध बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं हमारे पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। मराठी में सिर्फ एक अतिरिक्त अक्षर है। हमने देखा है कि प्राचीन काल में संस्कृत व प्राकृत भाषाओं में यह ध्वनि थी और इसके लिए अनेक अभिलेखों में अक्षर मिलता है।
प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है ?
(ग) नेपाल में कौन-सी भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं?
(घ) मराठी भाषा की लिपि क्या है ?
(ङ) प्राचीन काल में किन भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी?
उत्तर-
(क)पाठ का नाम-नागरा लिापा
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख) हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।
(ग) नेपाल में नेपाली (खुसकुरा) एवं नेपाली भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।
(घ) मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है।
(ङ) प्राचीन काल में संस्कृत एवं प्राकृत भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी।

2. ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नंदिनागरी कहा है। विजयनगर के राजाओं के लेख कन्नड़-तेलगु और नागरी लिपि में मिलते हैं। जानकारी मिलती है कि विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में ही पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था। यह वैदिक साहित्य निश्चय ही नागरी लिपि में लिखा गया होगा। विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को क्या कहा है?
(ग) विजयनगर के लेख किस लिपि में मिलते हैं ?
(घ) किसके शासन काल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया?
(ङ) नागरी लिपि का नंदिनागरी नामू क्यों पड़ा?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख)विजय नगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नदिनागरी कहा है।
(ग) विजय नगर के लेख नागरी लिपि में मिलते हैं।
(घ) विजय नगर के राजाओं के शासनकाल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था।
(ङ) विद्वानों का मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगरे (आधुनिक नांदेड) की लिपि होने के कारण इसका नाम नंदिनागरी पड़ा।

3. अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भात में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा तिदुर्ग का सामागंड दानपत्र (754 ई०) है। दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट शासन की नींव डाली थी। ये राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे और इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी; परंतु ये खानदेश-विदर्भ में बस गए थे। दंतिदुर्ग के बाद उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) राष्ट्रकूटों की गद्दी पर बैठा। इसी कृष्ण के शासनकाल में एलोरा (प्राचीन एलापुर, वेरूल) में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।

कृष्ण के कुछ लेख भी मिले हैं। नौवीं सदी में अमोघवर्ष एक प्रख्यात राष्ट्रकूट राजा हुआ। इसी अमोघवर्ष ने राष्ट्रकूट की नई राजधानी मान्यखेट (मालखेड) की नींव डाली। अमोघवर्ष के शासनकाल में ही जैन गणितज्ञ महावीराचार्य (850 ई.) ने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की थी।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) अनेक विद्वान नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किसे मानते हैं और वह किस काल का है ?
(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव किसने डाली थी?
(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलत: कहाँ के रहनेवाले थे ?
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा क्या थी ?
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर कौन बैठा?
(छ) किसके शासनकाल में एलोरा में कैलाश मन्दिर बनाया गया ?
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने किसके शासन काल में और कौन-से ग्रंथ की रचना की?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख) अनेक विद्वान का मत है कि दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का सामागंड दानपत्र 745 ई. है।
(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव दंतिदुर्ग ने डाली थी।
(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे।
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा कन्नड़ थी।
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की-गद्दी पर उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) बैठा।
(छ) कृष्ण (प्रथम) के शासनकाल में एलोरा में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने अमोघवर्ष के शासन काल में ‘गणितसार-संग्रह’ नामक ग्रंथ की रचना की?

4. महमूद गजनवी के बाद के मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए हैं। बादशाह अकबर ने ऐसा सिक्का चलाया था जिस पर राम-सीता की आकृति है और नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।

उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियाबाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखण्ड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागरी लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।

प्रश्न
(क) महमूद गजनवी के बाद किन-किन शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाएं थे ?
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्के पर कौन-सी आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में कौन-सा शब्द अंकित है
(ग) उत्तर भारत में किन-किन शासकों के लेख नागरी लिपि में हैं ?
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
(क) महमूद गजनवी के बाद मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द अंकित करवाये थे।
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्कों पर राम-सीता की आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।
(ग) उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, बुंदेलखंड के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में है।
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।

5. गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के शिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं और ये शिरोरेखाएं उतनी ही लम्बी रहती हैं जितनी कि अक्षरों की – चौड़ाई होती हैं। हाँ, कुछ लेखों के अक्षरों के शिरों पर अब भी कहीं-कहीं तिकोन दिखाई देते हैं। दूसरी स्पष्ट विशेषता यह है कि प्राचीन नागरी के अक्षर आधुनिक नागरी से मिलते-जुलते हैं और इन्हें आसानी से थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) ब्राह्मी लिपि और सिद्धम लिपि की शिरसंस्थाएँ कै
(ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि में क्या साम्य है?
उत्तर-
(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।
(ख) गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी, आडी लकीरें या ठोस तिकोन हैं। : (ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें होती हैं और ये उतनी ही रहती हैं जितनी कि अक्षरों की चौड़ाई।
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि के अक्षर बहुत-कुछ मिलते हैं जिन्हें थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।

6. इतना निश्चित है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या ‘नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है।

असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’, का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कह जाता होगा। देवनागरी’ की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ। हम सप्रमाण नहीं बता सकते कि यह देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया।

प्रश्न
(क) पाठ और लेख का नामोल्लेख करें।
(ख) नागरी शब्द किससे संबंधित है ?
(ग) ‘देवनागरी’ नाम के संबंध में लेखक का क्या अनुमान है ?
उत्तर-
(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।
(ख) नागरी शब्द किसी नगर से संबंधित है।
(ग) लेखक का अनुमान है कि यह ‘नगर’ पटना ही होगा। उसके अनुमान का आधार यह है कि चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था। इसलिए गुप्तों की राजधानी को ‘देवनगर’ कहा जाता होगा। ‘देवनगर’ की लिपि होने के कारण इसका नाम ‘देवनागरी’ पड़ा। किन्तु लेखक का यह सुनिश्चित मत नहीं है।

7. नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिन्दी का साहित्य मिलने लग जाता है। हिन्दी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं) के ‘दोहाकोश’ की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है वह दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्तलिपियाँ मिली हैं। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ-मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं। इस समय से इन भाषाओं के लेख मिलने लगते हैं।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य कब से मिलता है?
(ग) हिन्दी के आदिकवि कौन थे और उनकी कौन-सी पुस्तक किस लिपि में उपलब्ध है?
(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में किनका जन्म इस काल में हुआ?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपिा लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य आठवीं-नौवीं सदी से मिलता है।
(ग) हिन्दी के आदिकवि आठवीं सदी के सरहपाद थे। उनकी पुस्तक ‘दोहाकोश’ है जो दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है।
(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में मराठी, बंगला आदि का जन्म भी आठवीं-नौवीं सदी में होने लगा था।

8. ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में प्राचीन मराठी भाषा के लेख मिलने लग जाते हैं। अक्ष (कुलाबां जिला) से शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख (1012 ई०) मिला है, जो संस्कृत, मराठी भाषाओं में है और इसकी लिपि नागरी है। परन्तु दिवे आगर (रत्नागिरि जिला) ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठी का आद्यलेख माना जाता है। नागरी लिपि में लिखा गया यह ताम्रपट 1060 ई. का है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) नागरी लिपि के लेख कबसे मिलने लगते हैं?
(ग) गद्यांश का सारांश प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) नागरी लिपि के लेख ग्यारहवीं सदी से मिलने लगते हैं।
(ग) ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में मराठी भाषा के लेख मिलने लगते हैं। शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख 1012 ई का मिला है जो है तो संस्कृत मराठी में लेकिन इसकी लिपि नागरी है। दिवे-आगर में प्राप्त ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठा का आधलेख माना जाता है। यह ताम्रपट 1060 ई. का है।

9. उत्तर भारत में पहले-पहल गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतीहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन खड़ा किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार हुए। मिहिर भोज (840-81 ई.) की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

प्रश्न-
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) उत्तर भारत में सर्वप्रथम नागरी के लेख किनके शासन-काल में मिलते हैं ?
(ग) किस गुर्जर-प्रतीहार की प्रशस्ति नागरी लिपि में है ?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) उत्तर भारत में पहले-पहले गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती में और तत्पश्चात् कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था।
(ग) गुर्जर-प्रतीहार राजा मिहिर भोज (840-81 ई०) ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि में है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें –

प्रश्न 1.
गुणाकर मूले किस निबंध के रचयिता हैं ?
(क) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(ख) नागरी लिपि
(ग) परंपरा का मूल्यांकन
(घ). आविन्यों
उत्तर-
(ख) नागरी लिपि

प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में मुद्रण के टाइप कब बने ?
(क) दो सदी पहले
(ख) दो दशक पहले
(ग) बीसवीं सदी में
(घ) 11वीं सदी में
उत्तर-
(क) दो सदी पहले

प्रश्न 3.
नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
(क) पन्द्रहवीं सदी में
(ख) ईसा पूर्व काल में
(ग) 8वीं-11वीं सदी में
(घ) कभी नहीं
उत्तर-
(ग) 8वीं-11वीं सदी में

प्रश्न 4.
पहले दक्षिण भारत की नागरी लिपि क्या कहलाती थी?
(क) नंदिनागरी
(ख) कोंकणी
(ग) ब्राह्मी
(घ) सिद्धम
उत्तर-
(घ) सिद्धम

प्रश्न 5.
हिन्दी के आदिकवि का नाम क्या था?
(क) विद्यापति
(ख) सरहपाद
(ग) कबीर
(घ) दैतिदुर्ग
उत्तर-
(ख) सरहपाद

रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
हिन्दी तथा इसकी विविध बोलियाँ………..लिपि में लिखी जाती हैं।
उत्तर-
देवनागरी

प्रश्न 2.
अकबर के एक सिक्के में देवनागरी में……..अंकित है।
उत्तर-
रामसीय

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम…………..था।
उत्तर-
देव

प्रश्न 4.
विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को…………….कहा है।
उत्तर-नंदिनागरी

प्रश्न 5.
नागरी के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के…………………से ही मिलते हैं।
उत्तर-
दक्कन प्रदेश

प्रश्न 6.
बेलग्रोल में………….का भव्य पुतला खड़ा है।
उत्तर-
गोमटेश्वर

प्रश्न 7.
परमार शासक भोज अपने…………………..के लिए प्रसिद्ध हैं।
उत्तर-
विद्यानुसग

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में पोधियाँ कुछ समय पहले तक किस लिपि में लिखी जाती थीं?
उत्तर-
दक्षिण भारत में कुछ समय पहले तक पोथियाँ नागरी लिपि में लिखी जाती थीं।

प्रश्न 2.
पुरन काल की लिपि क्या थी?
उत्तर-
गुप्त काल की लिपि ब्राह्मी लिपि थी।

प्रश्न 3.
बादशाह अकबर के सिक्कों पर कौन सी आकृति तथा कौन सा शब्द अंकित था ?
उत्तर-
बादशाह अकबर के सिक्कों पर “राम-सीता” की आकृति और नागरी लिपि में रामसीय शब्द अंकित था।

प्रश्न 4.
राष्ट्रकूट शासक मूलतः कहाँ के रहने वाले थे तथा इनकी मातृभाषा क्या थी?
उत्तर-
राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहनेवाले थे तथा इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी।

प्रश्न 5.
नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उत्तर-
नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस रूप में लिखी जाती है उसी रूप में बोली भी जाती है।

प्रश्न 6.
किन-किन शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं?
उत्तर-
कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख देवनागरी लिपि में हैं।

प्रश्न 7.
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।

प्रश्न 8.
महावीराचार्य कौन थे?
उत्तर-
महावीराचार्य अन्निछवर्ष के जमाने के गणितज्ञ थे जिन्होंने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की।

प्रश्न 9.
देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर-
करीब दो सदी पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं। इस प्रकार ही देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता आयी है।

प्रश्न 10.
देवनागरी लिपि में कौन-कौन-सी भाषाएं लिखी जाती हैं ?
उत्तर-
देवनागरी लिपि में मुख्यतः नेपाली, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी भाषाएं लिखी जाती हैं।

प्रश्न 11.
लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?
उत्तर-
लेखक ने गुजराती, बंगला और ब्राह्मी लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।

प्रश्न 12.
नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें।
उत्तर-
विद्वानों के अनुसार नागरी लिपि के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के नीचे के दक्कन प्रदेश से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 13.
उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
विद्वानों का विचार है कि उत्तर भारत में मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि गुर्जर प्रतिहार राजाओं के अभिलेख में पहले-पहल नागरी लिपि के मेख प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 14.
नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर-
ईसा की आठवीं-ग्यारहवीं सदियों में नागरी लिपि पूरे देश में व्याप्त थी। अतः उस समय यह एक सार्वदेशिक, लिपि थी।

नागरी लिपि लेखक परिचय

गुणाकर मुलेका जन्म 1935 ई० में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक गाँव में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई । शिक्षा की भाषा मराठी थी। उन्होंने मिडिल स्तर तक मराठी पढ़ाई भी । फिर वे वर्धा चले गये और वहाँ उन्होंने दो वर्षों तक नौकरी की, साथ ही अंग्रेजी व हिंदी का अध्ययन किया । फिर इलाहाबाद आकर उन्होंने गणित विषय में मैट्रिक से लेकर एम० ए० तक की पढ़ाई की । सन् 2009 में मुले जी का निधन हो गया ।

गुणाकर मुले के अध्ययन एवं कार्य का क्षेत्र बड़ा ही व्यापक है । उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरालिपिशास्त्र और प्राचीन भारत का इतिहास व संस्कृति जैसे विषयों पर खूब लिखा है। पिछले पच्चीस वर्षों में मुख्यतः इन्हीं विषयों से संबंधि तं उनके 2500 से अधिक लेखों तथा तीस पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। उनकी प्रमुख कृतियों के नाम हैं – ‘अक्षरों की कहानी’, ‘भारत : इतिहास और संस्कृति’, ‘प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक’, ‘आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक’, ‘मैंडलीफ’, ‘महान वैज्ञानिक’, ‘सौर मंडल’, ‘सूर्य’; ‘नक्षत्र-लोक’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’, ‘अंतरिक्ष-यात्रा’, ‘ब्रह्मांड परिचय’, ‘भारतीय विज्ञान की कहानी आदि । गुणाकर मुले की एक पुस्तक है ‘अक्षर कथा’ । इस पुस्तक में उन्होंने संसार की प्रायः सभी प्रमुख पुरालिपियों की विस्तृत जानकारी दी है।

प्रस्तुत निबंध गुणाकर मुले की पुस्तक भारतीय लिपियों की कहानी’ से लिया गया है । इसमें हिंदी की अपनी लिपि नागरी या देवनामरी के ऐतिहासिक विकास की रूपरेखा स्पष्ट की गयी है। यहाँ हमारी लिपि की प्राचीनता, व्यापकता और शाखा विस्तार का प्रवाहपूर्ण शैली में प्रामाणिक आख्यान प्रस्तुत किया गया है। तकनीकी बारीकियों और विवरणों से बचते हुए लेखक ने निबंध को बोझिल नहीं होने दिया है तथा सादगी और सहजता के साथ जरूरी ऐतिहासिक जानकारियाँ देते हुए लिपि के बारे में हमारे भीतर आगे की जिज्ञासाएँ जगाने की कोशिश की है।

नागरी लिपि Summary in Hindi

पाठ का सारांश

जिस लिपि में यह लेख छपा है, उसे नागरी या देवनागरी लिपि कहते हैं। करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं इसलिए इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई है।

हिन्दी तथा इसकी विविध बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। हमारे, पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली व नेवारी भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी लिपि के बारे में एक और महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि संसार में जहाँ भी संस्कृत-प्राकृत की पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, वे प्रायः देवनागरी लिपि में ही छपती हैं।

गुजराती लिपि देवनागरी से अधिक भिन्न नहीं है। बंगला लिपि प्राचीन नागरी लिपि की पुत्री नहीं, तो बहन अवश्य है। हाँ, दक्षिण भारत की लिपियाँ वर्तमान नागरी से काफी भिन्न दिखाई देती हैं। लेकिन यह तथ्य हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए कि आज कुछ भिन्न-सी दिखाई देनेवाली – दक्षिण भारत की ये लिपियाँ (तमिल-मलयालम और तेलुगु-कन्नड़) भी नागरी की तरह प्राचीन ब्राह्मी से ही विकसित हुई हैं।

दक्षिण भारत में पोथियाँ लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था। दक्षिण भारत की यह नागरी लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि : के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख नदिनागरी लिपि में हैं।

बारहवीं सदी में केरल के शासकों ने सिक्कों पर ‘वीरकेरलस्य जैसे शब्द नागरी लिपि में अंकित हैं। श्रीलंका के पराक्रमबाहु, विजयबाहु (बारहवीं सदी) आदि शासकों के सिक्कों पर भी नागरी अक्षर देखने को मिलते हैं।

उत्तर भारत के महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए थे। उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखण्ड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचूरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागरी लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।

नागरी नाम की उत्पत्ति तथा इसके अर्थ के बारे में विद्वानों में बड़ा मतभेद है। एक मत के अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले-पहल इस लिपि का इस्तेमाल किया, इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा।

‘पादताडितंकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर या नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा। देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ।

कर्णाटक प्रदेश का श्रवणबेलगोल स्थान जैनों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इस स्थान से विविध भाषाओं और लिपियों के अनेक लेख मिले हैं। एक अन्य नागरी लेख में लिखा है चावुण्डराजे करविय ले। ये लेख दक्षिणी शैली की नागरी लिपि में हैं।

देवगिरि के यादव राजाओं के नागरी लिपि में बहुत सारे लेख मिलते हैं। कल्याण के पश्चिमी चालुक्य नरेशों के लेख भी नागरी लिपि में हैं। उड़ीसा (कलिंग प्रदेश) में ब्राह्मी को एक विशेष शैली, कलिंग लिपि का आस्तित्व था, परंतु गंगवंश के कुछ शासकों के लेख नागरी लिपि में भी मिलते हैं।

उत्तर भारत में पहले-पहल गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार शासक हुए। मिहिर भोज 1840-81 ई की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

शब्दार्थ

लिपि : ध्वनियों के लिखित चिह्न
नागरी : नगर की, शहर की
अनुकरण : नकल
ब्राह्मी : एक प्राचीन भारतीय लिपि जिससे नागरी आदि लिपियों का विकास हुआ
पाथियाँ : पुस्तकें, ग्रंथ
टकसाल : जहाँ सिक्के ढलते हैं
रामसीय : राम-सीता
अस्तित्व : पहचान, सत्ता
हस्तलिपि : हाथ की लिखावट
आद्यलेख : अत्यंत प्राचीन प्रारंभिक लेख
विद्यानुराग : विद्या से प्रेम

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 11 प्यारे नन्हें बेटे को

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Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 11 प्यारे नन्हें बेटे को

 

प्यारे नन्हें बेटे को वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

प्यारे नन्हे बेटे को कविता का सारांश लिखिए Bihar Board प्रश्न 1.
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म कब हुआ था?
(क) 1 जनवरी, 1937 ई..
(ख) 2 फरवरी, 1938 ई.
(ग) 10 मार्च, 1935 ई.
(घ) 5 मार्च, 1932 ई.
उत्तर-
(क)

Class 12 Hindi Vitan Chapter 1 Summary Bihar Board प्रश्न 2.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ किसकी लिखी हुई कविता है?
(क) भूषण
(ख) तुलसीदास
(ग) जायसी
(घ) विनोद कुमार शुक्ल
उत्तर-
(घ)

प्यारी पत्नी पर कविता Bihar Board Class 12 Hindi प्रश्न 3.
रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार विनोद कुमार शुक्ल को किस सन् में मिला?
(क) 1992 ई. में
(ख) 1985 ई. में
(ग) 1980 ई. में
(घ) 1990 ई. में
उत्तर-
(क)

Biharboard Inter Result Class 12 Hindi प्रश्न 4.
विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब मिला?
(क) 1999 ई. में
(ख) 1985 ई. में
(ग) 1995 ई. में
(घ) 1990 ई. में
उत्तर-
(क)

Saransh Meaning In Hindi Bihar Board प्रश्न 5.
“प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा किसका प्रतीक है?
(क) बन्दूक का
(ख) मशीन का
(ग) कर्म का
(घ) धर्म का
उत्तर-
(ग)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठा।
“मैं…….. हो गया’
उत्तर-
दादा से बड़ा

प्रश्न 2.
प्यारी बिटिया से पूछंगा बतलाओ आस–पास………….. है।
उत्तर-
कहाँ–कहाँ लोहा

प्रश्न 3.
चिमटा, करकुल, सिगड़ी, समसी, दरवाजे की साँकल, कब्जे खीला दरवाजे में………… वह बोलेगी झटपट,
उत्तर-
धंसा हुआ

प्रश्न 4.
रुककर वह फिर याद करेगी एक तार लोहे का लंबा लकड़ी के……….. पर
उत्तर-
दो खंबों पर

प्रश्न 5.
तना बंधा हुआ बाहर सूख रही जिस पर भव्या की गीली चड्डी।… फिर…….. साइकिल पूरी।
उत्तर-
एक सैफ्टी पिन

प्यारे नन्हें बेटे को अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विनोद कुमार शुक्ल की कविता का नाम है।
उत्तर-
प्यारे नन्हें बेटा को।

प्रश्न 2.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा किसका प्रतीक मान है?
उत्तर-
कर्म को।

प्रश्न 3.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता किस शैली में लिखी गई है?
उत्तर-
वार्तालाप शैली में।

प्रश्न 4.
विनोद कुमार शुक्ल किस विश्वविद्यालय में एसोशिएट प्रोफेसर रहे हैं?
उत्तर-
इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय।

प्रश्न 5.
विनोद कुमार शुक्ल निराला सृजनपीठ में जून 1994 से जून 1996 तक किस पद पर रहे?
उत्तर-
अतिथि साहित्यकार के पद पर।

प्यारे नन्हें बेटे को पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
‘बिटिया’ से क्या सवाल किया गया है?
उत्तर-
बिटिया से उसके पिता द्वारा सवाल किया गया है कि बतलाओ, आसपास लोहा कहाँ है।

प्रश्न 2.
“बिटिया’ कहाँ–कहाँ लोहा पहचान पाती है?
उत्तर-
बिटिया अपने आसपास उपस्थित लोहे को पहचान पाती है। उसके आसपास चिमटा, करछुल, अँगीठी, सँड़सी, दरवाजे की साँकल, कच्चे उसमें लगी कीलें आदि हैं, जिनमें वह लोहे को पहचानती है।

प्रश्न 3.
कवि लोहे की पहचान किस रूप में करते हैं? यही पहचान उनकी पत्नी किस रूप में कराती है?
उत्तर-
कवि लोहे की पहचान अपने आसपास की वस्तुओं के माध्यम से कराते हैं। उनके आसपास फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली आदि वस्तुएँ हैं, जिनके द्वारा वो लोहे की पहचान कराते हैं।

है यही पहचान उनकी पत्नी अपने आसपास उपलब्ध वस्तुओं से कराती हैं। वह अपने आसपास उपलब्ध बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू के माध्यम से लोहे की पहचान कराती है।

प्रश्न 4.
लोहा क्या है? इसकी खोज क्यों की जा रही है?
उत्तर-
पाठ में वर्णित भिलाई बलाडिला, छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है। यह स्थान लोहे की खदानों के लिए प्रसिद्ध है। इस आधार पर कह सकते हैं कि लोहा एक धातु है जो अपनी मजबूती, बहुउपयोगिता और सर्वव्यापकता के लिए प्रसिद्ध है। यह हमारी जिन्दगी और संबंधों में घुल–मिल गया है। यह हम मनुष्यों का आधार है, इसलिए इसकी खोज की जा रही है।

एक अन्य अर्थ में लोहा प्रतीक के रूप में है जो कर्म का प्रतीक है।

प्रश्न 5.
“इस घटना से उस घटना तक”–यहाँ किन घटनाओं की चर्चा है?
उत्तर-
“प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता में “इस घटना से उस घटना तक” उक्ति का प्रयोग दो बार किया गया है।

पिता अपनी नन्हीं बिटिया से पूछता है कि आसपास लोहा कहाँ–कहाँ है। पुनः वह उसे लोहा के विषय में जानकारी देता है, उसकी माँ भी उसे समझाती है। फिर वह सपरिवार लोहा को ढूँढ़ने का विचार करता है। अत: बेटी को सिखलाने से लेकर ढूँढ़ने का अन्तराल–”इस घटना से उस घटना तक” है। यह सब वह कल्पना के संसार में कर रहा है। पुनः जब उसकी बिटिया बड़ी हो जाती है, तो वह उसके विवाह के विषय में, उसके लिए एक प्यारा सा दूल्हा के लिए सोचता है। यहाँ पर पुनः कवि–”इस घटना से उस घटना तक” उक्ति को पुनरोक्ति करता है।

प्रश्न 6.
अर्थ स्पष्ट करें
कि हर वो आदमी
जो मेहनतकश
लोहा है
हर वो औरत
दबी सतायी
बोझ उठाने वाली, लोहा।
उत्तर-
हर व्यक्ति जो मेहनतकश है, वह लोहा है। वैसी हरेक औरत जो दबी तथा सतायी हुई है, लोहा है।

उपरोक्त पंक्तियों का विशेषताएँ यह है कि प्रत्येक व्यक्ति जो श्रम–साध्य कार्य करता है, कठोर परिश्रम जिसके जीवन का लक्ष्य है वह लोहे के समान शक्तिशाली तथा उर्जावन होता है। उसी प्रकार बोझ उठाने वाली दमन तथा शोषण की शिकार महिला भी लोहे के समान शक्ति तथा ऊर्जा से सम्पन्न होती है।

प्रश्न 7.
कविता में लोहे की पहचान अपने आसपास में की गई है। बिटिया, कवि और उनकी पत्नी जिन रूपों में इसकी पहचान करते हैं, ये आपके मन में क्या प्रभाव उत्पन्न करते? बताइए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में लोहे की पहचान अपने आस–पास में की गई है। अर्थात् अपने आसपास बिखरी वस्तुओं में ही लोहे को पड़ताल की गयी है। पहचान की परिधि में जो वस्तुएँ आई हैं वह तीन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। लड़की द्वारा पहचान की गई वस्तुएँ पारिवारिक उपयोग की है। जैसे–चिमटा, कलछुल आदि। कवि द्वारा जिन वस्तुओं का चयन किया गया है उनका व्यवहार अधिकतर पुरुषों द्वारा किया जाता है तथा उनका उपयोग सामाजिक तथा राष्ट्रीय हित में किया जाता है, जैसे–फाबड़ा, कुदाली आदि। कवि की पत्नी ने उन वस्तुओं की ओर संकेत किया है जिसका व्यवहार प्रायः महिलाओं द्वारा किया जाता है तथा जिसे. वे घर से बाहर धनोपार्जन अथवा पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति हेतु करती है जैसे–पानी की बाल्टी, हँसिया, चाकू आदि।

इस प्रकार कवि, उनकी पत्नी तथा बिटिया द्वारा तीन विविध रूपों में लोहे की पहचान की गई है। ये तीनों रूप पारिवारिक, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय मूल्यों तथा आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही मेहनतकश पुरुषों तथा दबी, सतायी मेहनती महिलाओं के प्रयासों को भी निरूपित करता है।

प्रश्न 8.
मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी बोझ उठाने वाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है?
उत्तर-
लोहा कठोर धातु है। यह शक्ति का प्रतीक भी है। इससे निर्मित असंख्य सामग्रियाँ, मनुष्य के दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। लोहा राष्ट्र की जीवनधारा है। धरती के गर्भ में दबे लोहे को अनेक यातनाएँ सहनी होती हैं। बाहर आकर भी उसे कठिन संघर्ष का सामना करना पड़ता है। कवि मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी, बोझ उठानेवाली औरत के जीवन में लोहा के संघर्षमय जीवन की झलक पाता है। उसे एक अपूर्व साम्य का बोध होता है। लोहे के समान मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी, बोझ उठानेवाली औरत का जीवन भी कठोर एवं संघर्षमय है। लोहे के समान ही वे अपने कठोर श्रम तथा संघर्षमय जीवन द्वारा सृजन तथा मिर्माण का कार्य कर रहे हैं तथा विविध रूपों में ढाल रहे हैं।

प्रश्न 9.
यह कविता एक आत्मीय संसार की सृष्टि करती है पर यह संसार बाह्य निरपेक्ष नहीं है। इसमें दृष्टि और संवेदना, जिजीविषा और आत्मविश्वास सम्मिलित है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
यह कविता एक परिवार के इर्द–गिर्द घूमती है। इसमें उस परिवार के सदस्यों के जीवन के यथार्थ को चित्रित किया गया है।

परिवार का मुखिया बिटिया का पिता लोहा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपनी बेटी से पूछ रहा है कि उसके आस–पास लोहा कहाँ–कहाँ है। लड़की प्रत्युत्तर में अपने बाल सुलभ भोलापन के बीच चिमटा, कलछुल, सड़सी आदि का नाम लेती है। पुनः वह उसे सिखलाते हुए स्वयं फावड़ा, कुदाली आदि वस्तुओं के नाम से परिचित कराते हुए बतलाता है कि उन वस्तुओं में भी लोहा है। माँ द्वारा भी बिटिया को इसी आशय की जानकारी दी जाती है। कुछ अन्य वस्तुओं के विषय में वह समझाती है जिसमें लोहा है। इस प्रकार यह कविता एक आत्मीय संसार की सृष्टि करती है।

किन्तु यह वहीं तक सीमित नहीं है। यह आत्मीय संसार वाह्य निरपेक्ष नहीं है, बाहरी समस्याओं से जुड़ा हुआ है। वाह्य–संसार की घटनाओं का इसपर पूरा प्रभाव पड़ता है। लोहे की खोज के माध्यम से कवि ने जीवनमूल्यों के यथार्थ को रेखांकित किया है। इसमें दृष्टि, संवेदना जिजीविषा और आत्म विश्वास का अपूर्व संगम है। संसार में संघर्षरत पुरुषों तथा महिलाओं की संवेदना यहाँ मूर्त हो उठी है। जिजीविषा एवं आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति भी युक्तियुक्त ढंग से हुई है। लोहा कदम–कदम पर और एक गृहस्थी में सर्वव्याप्त है। ठोस होकर भी यह हमारी जिन्दगी और संबंधों में घुला–मिला हुआ और प्रवाहित है।.

प्रश्न 10.
बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है, ऐसा क्यों?
उत्तर-
इस कविता में बिटिया को उसके पिता लोहा के विषय में सिखलाते हैं, वे उसकी बुद्धि का परीक्षा लेते हुए उससे पूछते हैं कि उसके आसपास लोहा कहाँ–कहाँ है। नन्हीं बिटिया आत्मविश्वास के साथ उनके प्रश्नों का उत्तर सहज भाव से देती है। पुनः माँ उससे वही प्रश्न पूछते हुए लोहे के विषय में समझाती है तथा कुछ अन्य जानकारी देती है।

इस प्रसंग में पिता उसे सिखलाते हैं जबकि माँ उसे इस विषय में समझाती है। दोनों की भूमिका में स्पष्ट अन्तर है इसका कारण यह है कि यह प्रायः देखा जाता है कि पिता द्वारा अपने बच्चों को सिखलाया जाता है, किसी कार्य को करने की सीख दी जाती है, अभ्यास कराया जाता है। माँ द्वारा उन्हें स्नेह भाव से किसी कार्य के लिए समझाया जाता है।

प्यारे नन्हें बेटे को भाषा की बात

प्रश्न 1.
इस कविता की भाषा पर आलोचनात्मक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ नामक इस कविता की शुरुआत मध्यमवर्गीय व्यक्ति और उसकी नन्हीं सी बिटिया की कौतूहलपूर्ण बातों से होती है। इसमें दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले शब्दों का भरपूर प्रयोग हुआ है। कविता में कुछ शब्द तो नितांत घिसे–पिटे रूप में प्रयुक्त है। भाषा इतनी सहज, सरल तथा बोधगम्य है कि आम आदमी या सामान्य शिक्षित भी इसे आसानी से समझ सकता है। ऐसी भाषा में भी एक ताजगी है एक चमक है। कविता की भाषा की एक अन्य खूबी उसकी मौलिकता है।

कविता में तत्सम, तद्भव शब्दों के साथ अंग्रेजी भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। इससे कविता की स्वाभाविकता अप्रभावित रही है। कविता के अंत में साधारण सी धातु लोहा प्रतीक अर्थ ग्रहण कर लेती है, जिसे सामान्य शिक्षित के लिए समझना सरल नहीं है। इन सबसे ऊपर कविता की भाषा सहज, बोधगम्य तथा भावाभिव्यक्ति में सक्षम है।

प्रश्न 2.
व्युत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ–औरत, लड़की, बेटा, बिटिया, आदमी, लोहा, कंधा, छत्ते, दूल्हा, बाल्टी, कुआँ, पिन, साइकिल, दादा।
उत्तर-

  • शब्द – प्रकृति
  • औरत – विदेशज
  • लड़की – तद्भव
  • लोहा – तद्भव
  • बेटा – तद्भव
  • बिटिया – तद्भव
  • आदमी – तद्भव
  • कंधा – तद्भव
  • बाल्टी – तद्भव
  • कुआँ – तद्भव
  • पिन – विदेशज
  • साइकिल – विदेशज
  • दादा – देशज

प्रश्न 3.
नीचे दिए शब्दों से वाक्य बनाएँ कंधा, दादा, बिटिया, लोहा, गला, घंटी, बैलगाड़ी, घटना, बोझ।
उत्तर-

  • शब्द – वाक्य प्रयोग
  • कंधा – पिताजी की असमय मृत्यु से घर की जिम्मेदारी किशोर के कंधों पर आ पड़ी।
  • दादा – हमें वृद्ध दादा जी के सुख–दुख का ध्यान रखना चाहिए।
  • बिटिया – नन्हीं बिटिया की तोतली बातें सुनकर पिताजी प्रसन्न हो उठे।
  • लोहा – लोहा ऐसी धातु है जिसके अभाव में विकास की कल्पना करना भी कठिन है।
  • गला – उसने साहूकार का कर्ज चुकता कर किसी तरह गला छुड़ाया।
  • घंटी – बैलों के गले में बँधी घंटी की आवाज मधुर लग रही थी।
  • बैलगाड़ी – प्राचीन समय में बैलगाड़ी यातायात का प्रमुख साधन थी।
  • घटना – देखो, इस घटना का जिक्र किसी के सामने न करना।
  • अभी – इन नाजुक कंधों पर इतना बोझ मत डालो।

प्यारे नन्हें बेटे को कवि परिचय विनोद कुमार शुक्ल (1937)

जीवन–परिचय–हिन्दी साहित्य की दोनों विधाओं में अपना अप्रतिम अवदान करनेवाले विनोद कुश्मार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी, 1937 ई. को राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनका निवासस्थान रायपुर, छत्तीसगढ़ में है। वे इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर तथा निराला सृजनपीठ में जून 1994 से जून 1996 तक अतिथि सलाहकार रहे। उनके अप्रतिम साहित्य अवदान के लिए उन्हें रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार (1992), दयावती मोदी कवि.. शेखर सम्मान (1997) तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999) द्वारा विभूषित किया गया।

रचनाएँ–विनोद कुमार शुक्ल का पहला कविता संग्रह ‘लगभग जयहिन्द’ पहचान सीरीज के अन्तर्गत 1971 में प्रकाशित हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं–

कविता संग्रह–वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह (1981), सबकुछ होना बचा रहेगा (1992), अतिरिक्त नहीं (2001)।

उपन्यास–नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी। कहानी संग्रह–पेड़ पर कमरा, महाविद्यालय।

विशेष–इनके उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद तथा ‘पेड़ पर कमरा’ कहानी संग्रह का इतालवी भाषा में अनुवाद। ‘नौकर की कमीज’ उपन्यास पर मणि कौल द्वारा फिल्म का निर्माण भी किया गया।

काव्यगत विशेषताएं–विनोद कुमार शुक्ल ने सातवें–आठवें दशक में अपनी साहित्यिक यात्रा शुरू की। कुछ समय उनकी एक–दो कहानियाँ आई, जिन्होंने अपनी विशिष्टताओं के कारण लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। अपनी रचनाओं में वे अत्यन्त मौलिक, न्यारे और अद्वितीय थे। उनकी इस खूबी की जड़ें संवेदना तथा अनुभूति में थी और यह भीतर से पैदा हुई खासियत थी। उनकी यह अद्वितीय मौलिकता अधिक स्फुट, विपुल और बहुमुखी होकर उनकी कविता, कहानियों तथा उपन्यासों में उजागर होती आई है। उनकी कविता मामूली बातचीत की मद्धिम लय और लहजे में शुरू ही नहीं खत्म भी होती है। उनके समूचे साहित्य में आम आदमी की दिनचर्या में सामान्य रूप से व्यवहृत तथा एक हद तक घिसे–पिटे शब्दों का प्रयोग हुआ है।

प्यारे नन्हें बेटे को कविता का सारांश

“प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता का नायक भिलाई, छत्तीसगढ़ का रहनेवाला है। अपने प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठाए अपनी नन्हीं बिटिया से जो घर के भीतर बैठी हुई है पूछता है कि “बतलाओ आसपास कहाँ–कहाँ लोहा है।” वह अनुमान करता है कि उसकी नन्हीं बिटिया उसके प्रश्न का उत्तर अवश्य देगी। वह बतलाएगी कि चिमटा, कलछुल, कड़ाही तथा जंजीर में लोहा है। वह यह भी कहेगी कि दरवाजे के साँकल (कुंडी) कब्जे, सिटकिनी तथा दरवाजे में धंसे हुए पेंच (स्क्रू) के अन्दर भी लोहा है। उक्त बातें वह पूछने पर तत्काली कहेगी। उसे यह भी याद आएगा कि लकड़ी के दो खम्भों पर बँधा हुआ तार भी लोहे से निर्मित है जिस पर उसके बड़े भाई की गीली चड्डी है। वह यह कहना भी नहीं भूलेगी कि साइकिल और सेफ्टीपिन में भी लोहा है।

उस दुबली–पतली किन्तु चतुर (बुद्धिमती) नन्हीं बिटिया को कवि शीघ्रातिशीघ्र बतला देना चाहता है कि इसके अतिरिक्त अन्य किन–किन सामग्रियों में लोहा है जिससे उसे इसकी पूरी जानकारी मिल जाए।

कवि उसे समझाना चाहता है कि फाबड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसुला, खुरपी, बैलगाड़ी के चक्कों का पट्टा तथा बैलों के गले में काँसे की घंटी के अन्दर की गोली में लोहा है। कवि की पत्नी उसे विस्तार से बतलाएगी कि बाल्टी, कुएँ में लगी लोहे की घिरनी, हँसियाँ और चाकू में भी लोहा है। भिलाई के लोहे की खानों में जगह–जगह लोहे के टीले हैं?

इस प्रकार कवि का विचार है कि वह समस्त परिवार के साथ मिलकर तथा सोच विचार कर लोहा की खोज करेगा। सम्पूर्ण घटनाक्रम को तह तक जाकर वह पता लगा पाएगा कि हर मेहनतकश आदमी लोहा है।

कवि यह मानता है कि प्रत्येक दबी–सतायी, बोझ उठाने वाली औरत लोहा है। लोहा कदम–कदम पर और हर एक गृहस्थी में सर्वव्याप्त है।

कवि इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि हर मेहनतकश व्यक्ति लोहा है तथा हर दबी कुचली, सतायी हुई तथा बोझ उठाने वाली औरत लोहा है। कवि का कहना है

कि हर वो आदमी
जो मेहनतकश लोहा है
हर वो औरत
दबी सतायी बोझ उठानेवाली, लोहा।

कविता का भावार्थ

1. प्यारी बिटिया से पूछंगा
“बतलाओ आसपास
कहाँ–कहाँ लोहा है”
चिमटा, करकुल, सिगड़ी
समसी, दरवाजे की साँकल, कब्जे
खीला दरवाजे में फंसा हुआ’
वह बोलेगी झटपट।

व्याख्या–प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धत है। इसके रचनाकार यशस्वी कवि विनोद कुमार शुक्ल हैं। इन पंक्तियों में उत्कृष्ट कल्पनाशीलता का दर्शन होता है। इसके साथ जीवन का यथार्थ भी है। कवि अपनी बिटिया से कुछ पूछना चाहता है। उसे पूर्ण विश्वास है कि वह उसका उत्तर अवश्य देगी।

कवि अपनी बिटिया से पूछता है कि लोहा कहाँ–कहाँ पर है। वह तत्काल उसका उत्तर देगी। वह कहेगी कि लोहा चिमटा, कलछुल, कड़ाही तय संड्सी में है। वह यह भी कहेगी कि लोहा दरवाजे की सॉकल (कुंडी), कब्जे तथा पेंच में भी है। वह कवि के प्रश्न का उत्तर तत्काल दे देगी।

उपरोक्त काव्यांश में कवि के कहने का आशय यह है कि वह अपनी बिटिया को लोहा के महत्व के बारे में सिखलाना (शिक्षा देना) चाहता है क्योंकि उसकी दृष्टि में लोहा मानव जीवन की एक अमूल्य निधि है। वह उसकी उपयोगिता से भलीभाँति परिचित है।

2. इसी तरह
घर भर मिलकर
धीरे–धीरे सोच सोचकर
एक साथ ढूँढेंगे
कहा–कहाँ लोहा है–

व्याख्या–प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता विद्वान कवि विनोद कुमार शुक्ल हैं। इन पंक्तियों में कवि लोहे की खोज सपरिवार करना चाहता है। कवि का कथन है कि लोहा की खोज वह एक साथ मिलकर धीरे–धीरे करेगा। घर के सभी सदस्यों के साथ वह यह कार्य करेगा। इन पंक्तियों में लोहा खोजने हेतु उसकी उत्कंठा स्पष्ट झलकती है।

3. “हर बो औरत
दबी सतायी
बोझ उठानेवाली लोहा !
जल्दी–जल्दी मेरे कंधे से
ऊँचा हो लड़का
लड़की का हो दूल्हा, प्यारा

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धत है। इसके रचयिता विनोद कमार शुक्ल हैं। लेखक ने इन पंक्तियों में मेहनतकश, दबी–दबायी बोझा ढोने वाली औरत के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है तथा उसके सुन्दर भविष्य की कामना की है।

इन पंक्तियों में कवि का कहना है कि प्रत्येक वह औरत जो दबी, दबी तथा बोझा उठाने वाली है, अर्थात् परिश्रमी है, कठिन कार्यों में लगी हुई है, वह लोहा है। बिटिया का बाप प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठा कर यह कल्पना कर रहा है–कुछ दिनों के बाद उससे भी अधिक ऊँचा और लम्बा हो जाएगा। बिटिया के लिए प्यारा दुल्हा मिल जाएगा।

कवि का कहने का आशय यह है कि हरेक औरत जो दबी–कुचली तथा बोझा ढोनेवाली है, कठिन परिश्रम करती है वह लोहा के समान कठोर, उपयोगी तथा सबको प्रिय होती है। कविता में बिटिया का पिता कल्पना करता है कि कुछ दिनों बाद उसका नन्हा बेटा बड़ा हो जाएगा उससे अधिक ऊँचा और लम्बा हो जाएगा। वह (नन्हा बेटा) अपने पिता से भी अधिक ऊँचे पद पर होगा।

उसकी प्यारी बिटिया भी सयानी हो जाएगी तथा उसके लिए योग्य तथा सुन्दर दूल्हा मिल जाएगा। वह मधुर कल्पना में निमग्न है।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है

Bihar Board Class 10 Hindi अति सूधो सनेह को मारग है Text Book Questions and Answers

कविता के साथ

अति सूधो सनेह को मारग है व्याख्या Bihar Board प्रश्न 1.
कवि प्रेममार्ग को अति सूधों क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?
उत्तर-
क्रवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं मधुर बताए हैं। ये कहते हैं कि प्रेम मार्ग पर चलना सरल है। इस पर चलने के लिए बहुत अधिक छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। प्रेम पथ पर अग्रसर होने के लिए अत्यधिक सोच-विचार नहीं करना पड़ता और न ही किसी बुद्धि बल की आवश्यकता होती है। इसमें भक्त की भावना प्रधान होती है। प्रेम की भावना से आसानी से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम में सर्वस्व देने की बात होती है लेने की अपेक्षा लेश मात्र भी नहीं होता। यह मार्ग टेढ़ापन से मुक्त है। प्रेम में प्रेमी बेझिझक निःसंकोच भाव से सरलता से; सहजता से प्रेम करने वाले से एकाकार कर लेता है। इसमें दो मिलकर एक हो जाते हैं। दो भिन्न अस्तित्व नहीं बल्कि एक पहचान स्थापित हो जाती है।

अति सूधो सनेह को मारग Bihar Board प्रश्न 2.
‘मन लेह पै देह छटाँक नहीं’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
मन’ माप-तौल की दृष्टि से अधिक वजन का सूचक जबकि ‘छटाँक’ बहुत ही अल्पता का सूचक है। कवि कहते हैं कि प्रेमी में देने की भावना होती है लेने की नहीं। प्रेम में प्रेमी अपने इष्ट को सर्वस्व न्योछावर करके अपने को धन्य मानते हैं। इसमें संपूर्ण समर्पण की भावना उजागर किया गया है। प्रेम में बदले में लेने की आशा बिल्कुल नहीं होती।

मीर मुंशी ने किस कवि का वध किया था Bihar Board प्रश्न 3.
द्वितीय छंद किसे संबोधित हैं और क्यों?
उत्तर-
द्वितीय छंद बादल को संबोधित है। इसमें मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति है। मेघं का वर्णन इसलिए किया गया है कि मेघ विरह-वेदना में अश्रुधारा प्रवाहित करने का जीवंत उदाहरण है। प्रेमी अपनी प्रेमाश्रुओं की अविरल धारा के माध्यम से प्रेम प्रकट करता है। इसमें निश्छलता एवं स्वार्थहीनता होता है। बादल भी उदारतावश दूसरे के परोपकार के लिए अमृत रूपी जल वर्षा करता है। प्रेमी के हृदय रूपी सागर में प्रेम रूपी अथाह जल होता है जिसे इष्ट के निकट पहुँचाने की आवश्यकता है। बादल को कहा जा रहा है कि तुम परोपकारी हो। जिस प्रकार सागर के जल को अपने माध्यम से जीवनदायनी जल के रूप में वर्षा करते हो उसी प्रकार मेरे प्रेमाश्रुओं को भी मेरी इष्ट के लिए, उसके जीवन के लिए प्रेम सुधा रस के रूप में बरसाओ। विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को मेघ के माध्यम से अत्यंत कलात्मक । रूप में अभिव्यक्त किया गया है।

अति सुधु स्नेह को मारग Bihar Board प्रश्न 4.
परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
परहित के लिए ही देह, बादल धारण करता है। बादल जल की वर्षा करके सभी प्राणियों को जीवन देता है। प्राणियों में सुख-चैन स्थापित करता है। उसकी वर्षा उसके विरह के आँसू के प्रतीक स्वरूप हैं। उसके विरह के आँसू, अमृत की वर्षा कर जीवनदाता हो जाता है। बादल शरीर धारण करके सागर के जल को अमृत बनाकर दूसरे के लिए एक-एक बूंद समर्पित कर देता है। अपने लिए कुछ भी नहीं रखता। वह सर्वस्व न्योछावर कर देता है। बदले में कुछ । भी नहीं लेता है। निःस्वार्थ भाव से वर्षा करता है। उसका देह केवल परोपकार के लिए निर्मित हुआ है।

अति सूधो सनेह को मारग है का अर्थ Bihar Board प्रश्न 5.
कवि कहाँ अपने आसुओं को पहुंचाना चाहता है और क्यों ?
उत्तर-
कवि अपने प्रेयसी सुजान के लिए विरह-वेदना को प्रकट करते हुए बादल से अपने प्रेमाश्रुओं को पहुंचाने के लिए कहता है। वह अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में पहुंचाना चाहता  है। क्योंकि वह उसकी याद में व्यथित है और अपनी व्यथा की आँसुओं से प्रेयसी को भिगो देना चाहता है। वह उसके निकट आँसुओं को पहुंचाकर अपने प्रेम की आस्था को शाश्वत रखना चाहता है।

अति सूधो सनेह को मारग है की व्याख्या Bihar Board प्रश्न 6.
व्याख्या करें:
(क) यहाँ एक ते दूसरौ ऑक नहीं
(ख) कछु मेरियो पीर हिएं परसौ
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य पुस्तक के कवि घनानंद द्वारा रचित ‘अति सधो सनेह को मारग है” पाठ से उद्धृत है। इसके माध्यम से कवि प्रेमी और प्रेयसी का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो की पहचान अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि दोनों मिलकर एक रूप में स्थित हो जाते हैं। प्रेमी निश्चल भाव से सर्वस्व समर्पण की भावना रखता है और तुलनात्मक अपेक्षा नहीं करता है। मात्र देता है, बदले में कुछ लेने की आशा नहीं करता है।
प्रस्तुत पंक्ति में कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करते हैं कि हे सुजान सुनो! – यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दूसरा चिह्न नहीं है। मेरे हृदय में मात्र तुम्हारा ही चित्र अंकित है।

(ख) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य के पाठ्य-पुस्तक से कवि घनानंद-रचित “मो अॅसवानिहिं लै बरसौ” पाठ से उद्धृत है। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि परोपकारी बादल से निवेदन किये हैं कि मेरे हृदय की पीड़ा को भी कभी स्पर्श किया जाय और मेरे हार्दिक विरह-वेदना को प्रकट करने वाली आंसुओं को अपने माध्यम से मेरे प्रेयसी सुजान के आँगन तक वर्षा के रूप में पहुंचाया जाय।

प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कहते हैं कि हे घन ! तुम जीवनदायक हो, परोपकारी हो, दूसरे के हित के लिए देह धारण करने वाले हो। सागर के जल को अमृत में परिवर्तित करके वर्षा के रूप , में कल्याण करते हो। कभी मेरे लिए भी कुछ करो। मेरे लिए इतना जरूर करो कि मेरे हृदय को स्पर्श करो। मेरे दुःख दर्द को समझो, जानो और मेरे ऊपर दया की दृष्टि रखते हुए अपने परोपकारी स्वभाववश मेरे हृदय की व्यथा को अपने माध्यम से सुजान तक पहुँचा दो। मेरे प्रेमाश्रुओं को लेकर । सुजान की आँगन में प्रेम की वर्षा कर दो।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 7.
कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
अति सूधो सनेह को मारग है’ सवैया में कवि घनानंद स्नेह के मार्ग की प्रस्तावना करते हुए कहते हैं कि प्रेम का रास्ता अत्यंत सरल और सीधा है वह रास्ता कहीं भी टेढ़ा-मेढ़ा नहीं है और न उसपर चलने में चतुराई की जरूरत है। इस रास्ते पर वही चलते हैं जिन्हें न अभिमान होता है न किसी प्रकार की झिझक ऐसे ही लोग निस्संकोच प्रेम-पथ पर चलते हैं।

घनानंद कहते हैं कि प्यारे, यहाँ एक ही की जगह है दूसरे की नहीं। पता नहीं, प्रेम करनेवाले कैसा पाठ पढ़ते हैं कि ‘मन’ लेते हैं लेकिन छटाँक नहीं देते। ‘मन’ में श्लेष अलंकार है जिससे भाव की महनता और भाषा का सौंदर्य दुगुना हो गया है।

‘मो अँसुवानिहिं लै बरसौ’ सवैया में कवि घनानंद मेघ के माध्यम से अपने अंतर की वेदना को व्यक्त करते हुए कहते हैं-बादलों ने परहित के लिए ही शरीर धारण किया है। वे अपने आँसुओं की वर्षा एक समान सभी पर करते हैं। पुनः घनानंद बादलों से कहते हैं-तुम तो जीवनदायक हो, कुछ मेरे हृदय की भी सुध ली, कभी मुझ पर भी विश्वास कर मेरे आँगन में अपने रस की वर्षा करो।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्द कविता में संज्ञा अथवा विशेषण के रूप में प्रयुक्त है। इनके प्रकार बताएँ-
सूधो, मारग, नेकु, बॉक, कपटी, निसांक, पाटी, जथरथ, जीवनदायक, पीर, हियें, बिसासी
उत्तर-
सूधो – गुणवाचक विशेषण
मारग – जातिवाचक संज्ञा
नेक – गुणवाचक विशेषण
बॉक – भाववाचक संज्ञा
कपटी – गुणवाचक विशेषण
निसॉक – गुणवाचक विशेषण
पाटी – भाववाचक संज्ञा जथारथ
जथरथ – भाववाचक संज्ञा
जीवनदायक – गुणवाचक विशेषण
पीर – भाववाचक संज्ञा
हियें – जातिवाचक संज्ञा
बिसासी – गुणवाचक विशेषण

प्रश्न 2.
कविता में प्रयुक्त अव्यय पदों का चयन करें और उनका अर्थ भी बताएं।
उत्तर-
अति – बहुत
जहाँ – स्थान विशेष
नहीं – न
तति – छोड़कर
यहाँ – स्थानविशेष
नेक – तनिक भी

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के कारक स्पष्ट करें-
सनेह को पारग प्यारे सुजान, मेरियो पीर, हिये, आँसुवानिहि
उत्तर-
सनेह को मार्ग – संबंध कारक
प्यारे सुजान – संबंध कारक
मारया पीर – अधिकारण कारक
हियें – अधिकरण कारक
आँसुवानिहि – करण कारक
मों – कर्म कारक

काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. अति सूधो सनेह को मारग है जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलें तजि आपनपौ झझक कपटी जे निसाँक नहीं।
‘घनआनंद’ प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक ते दूसरौ आँक नहीं।
तुम कौन धौं याटी पढ़े हौ कहौ मन लेह पै देह छटाँक नहीं।

प्रश्न
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता- अति सूधो सनेह को मारग है।
कवि- घनानंद।।

(ख) रीति काल के महान प्रेमी कवि घनानंद यहाँ प्रथम छंद में प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की प्रस्तावना करता है। प्रेम की विशेषताओं को तथा प्रेममार्ग की प्रवीणता को लाक्षणिक एवं मूर्तिमत्ता के स्वरूप का वर्णन किया है।

(ग) सरलार्थ- प्रस्तुत सवैया में रीतिकालीन काव्य धारा के प्रमुख कवि घनानंद प्रेम की पीड़ा एवं प्रेम की भावना को सरल और स्वाभाविक मार्ग का विवेचन करते हैं। कवि कहते हैं कि प्रेम मार्ग अमृत के समान अति पवित्र है। इस प्रेम, रूपी मार्ग में चतुराई और टेढ़ापन अर्थात् कपटशीलता का कोई स्थान नहीं है। इस प्रेमरूपी मार्ग में जो प्रेमी होते हैं वह अनायास ही सत्य के रास्ते पर चलते हैं तथा उनके अंदर के अहंकार समाप्त हो जाते हैं। यह प्रेम रूपी मार्ग इतना पवित्र है कि इस पर चलने वाले प्रेमी के हृदय में लेशमात्र भी झिझक, कपट और शंका नहीं रहती है। घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे सुजान, सुनो ! यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दूसरा चिह्न नहीं है। तुम क्या कोई प्रेम रूपी पुस्तक पढ़े हो? तो कहो, क्योंकि प्रेम रूपी पुस्तक पढ़ने से यही सीख मिलती है कि प्रेम दिया जाता है और उसे देने के बदले एक छटाँक भी कुछ नहीं लिया जाता है।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत छंद में रीति मुक्त धारा के प्रसिद्ध कवि घनानंद प्रेम के मार्ग को अमृत के समान पवित्र बतलाया है। इसमें निष्कपट, निश्छल और अहंकार रहित प्रेम का स्वाभाविक वर्णन किया है। एक प्रेमी ही प्रेम की पवित्रता को समझ सकता है।

(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) यह कविता सवैया छंद में रचित है।
(ii) श्रृंगार इसकी परिपक्वता के कारण माधुर्य गुण की झलक प्रशंसनीय है।
(iii) यहाँ स्वाभाविक प्रेम के वर्णन के कारण मनोवैज्ञानिकता का अच्छा दर्शन होता है।
(iv) प्रेम का वर्णन में जो भाव और भाषा होना चाहिए उसका कलात्मक रूप व्यक्त हुआ है।
(v) सवैया छन्द के कारण कविता सम्पूर्ण संगीतमयता का रूप धारण कर ली है।
(vi) अलंकार योजना की दृष्टि से रूपक और अलंकार की छटा प्रशंसनीय है।

2. परकाजहि देह को धारि फिरौ परजन्य जथारथ द्वै दरसौ।
निधि-नरी सुधा की समान करौ सबही बिधि सज्जनता सरसौ।।
‘घनआनंद’ जीवनदायक हासै कळू पेरियौ पीर हिएँ परसौ।
कबहूँ वा बिसासी सुजान के आँगन मौ अँसुवानिहिं लै बरसौ॥

प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखिए।
(ग) पद का सरलार्थ लिखिए।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क)कविता- मो अँसुवानिहिं लै बरसौ।
कवि-घनानंद।

(ख) प्रसंग- प्रस्तुत सवैये छंद में रीति कालीन काव्य धारा के प्रख्यात कवि घनानंद मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यन्त कलात्मक रूप में अभिव्यक्त करते हैं। बादल की उदारता को अपने प्रेम की पीड़ा में सहयोग देने के लिए संबोधनात्मक शैली में वर्णन करते हैं।

(ग) सरलार्थ- प्रस्तुत छंद में कवि बादल को संबोधित करते हुए कहता है कि हे बादल! मेरे आँसूरूपी प्रेम के जल को बरसाओ। हे बादल तुम इतने उदारवादी हो कि तुम्हारा जीवन हमेशा दूसरों के हित के लिए समर्पित रहता है। दूसरों के लिए ही जल बरसाते हो। अपने जीवन के भंडार को अमृत के समान पवित्र करो ओर सभी प्रकार से सज्जनता के गुणों को प्रकट करो। तुम्हारी दृष्टि के जल में मेरे विरह वेदना के आँसू दिखाई पड़े। घनानंद कवि कहते हैं कि हे जीवनदायक तुम प्रेम रूपी बादल बनकर आँसू रूपी वियोग रस को बरसो जिससे मेरी प्रेम वेदना समाप्त होगी। पुनः अपनी प्रेयषी सुजान की ओर संकेत करते हुए अपने विरह वेदना को कलात्मक रूप में व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हे बादल तुम मेरे बहुत विश्वासी हो इसलिए मेरे सुजान के आँगन में जाकर मेरे आँसू रूपी जल को निश्चित रूप से बरसाओ।

(घ) भाव सौंदर्य- इस अंश में कवि घनानंद प्रेम के पीर मालूम पड़ते हैं। इसी कारण के लिए बादल को सम्बोधित करते हैं और बादल को उदार कहते हैं।
(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) इसमें सवैया, छंद पूर्ण लाक्षणिकता के साथ व्यक्त हुआ है।
(ii) वियोग का सच्चा वर्णन ब्रजभाषा की कोमलता और सरलतापूर्ण सार्थक है।
(iii) यहाँ कहीं-कहीं तत्सम और तद्भव शब्दों के प्रयोग से कविता का भाव सटीक हो गया है।
(iv) सम्पूर्ण कविता संबोधनात्मक शैली में है।
(v) वियोग का सार्थक वर्णन के कारण प्रसाद गुण इस पद में विद्यमान है।
(vi) अलंकार योजना की दृष्टि से रूपक और अनुप्रास भाव को सार्थक करने में सहायक है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
‘अति सूधो सनेह को मारग’ शीर्षक सबैया किसकी रचना है ?
(क) रसखान
(ख) घनानंद
(ग) गुरु नानक
(घ) मतिराम
उत्तर-
(ख) घनानंद

प्रश्न 2.
घनानंद किस सबैया के रचयिता हैं?
(क) मो अँसुवनिहिं लै बरसौ
(ख) मानुष हों तो
(ग) करील के कुंजन ऊपर वारौं
(घ) भूषण
उत्तर-
(क) मो अँसुवनिहिं लै बरसौ

प्रश्न 3.
घनानंद किस काल के कवि थे?
(क) भक्ति काल
(ख) आदि काल
(ग) रीति काल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर-
(ग) रीति काल

प्रश्न 4.
घनानंद किस भाषा के कवि थे ?
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रज भाषा
(घ) मैथिली
उत्तर-
(ग) ब्रज भाषा

प्रश्न 5.
‘सुजान सागर किसकी कृति है?
(क) रसखान
(ख) प्रेमधन
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) घनानंद
उत्तर-
(घ) घनानंद

प्रश्न 6.
‘घनानंद’ किस बादशाह के ‘मीर मंशी’ थे?
(क) जहाँगीर
(ख) शाहजहाँ
(ग) मुहम्मदशाह रंगीले
(घ) औरंगजेब
उत्तर-
(ग) मुहम्मदशाह रंगीले

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
घनानंद के सवैये और ……. बहुत प्रसिद्ध हैं।
उत्तर-
धनाक्षरी

प्रश्न 2.
घनानंद रीतिकाल के …………. कवि थे।
उत्तर-
उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छन्द

प्रश्न 3.
प्रेम का मार्ग अत्यन्त ……….. है।
उत्तर-
सरल

प्रश्न 4.
‘नरकाजहि देह को धारि’ का अर्थ दूसरों के लिए ……..धारण करता है।
उत्तर-
शरीर

प्रश्न 5. घनानंद प्रेम की ……….. के गायक थे।
उत्तर-
पीर

प्रश्न 6.
घनानंद का जन्म सन् ……. के आस-पास हुआ था।
उत्तर-
1689

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1.
किस कवि को साक्षात् रसमूर्ति कहा जाता है ?
उत्तर-
घनानंद को साक्षात् रसमर्ति कहा जाता है।

प्रश्न 2.
घनानंद काव्य-रचना के अतिरिक्त किस कला में प्रवीण थे?
उत्तर-
घनानंद काव्य-रचना के अतिरिक्त गायन-कला में प्रवीण थे।

प्रश्न 3.
घनानंद किस मुगल बादशाह के मीर मुंशी थे?
उत्तर-
घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीले के मीर मुंशी थे।

प्रश्न 4.
घनानंद की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर-
धनानंद को नादिरशाह के सैनिकों ने मार डाला।

प्रश्न 5.
घनानंद की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति कौन-सी है?
उत्तर-
घनानंद की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति है-‘सुजान सागर’

प्रश्न 6.
घनानंद की भाँति रीति मुक्तधारा के और कौन-कौन कवि हैं ?
उत्तर-
घनानंद की तरह रीति मुक्तधारा के अन्य कवि हैं-रसखान एवं भूषण आदि।

प्रश्न 7.
कवि सुजान कहकर किसे सम्बोधित करता है ?
उत्तर-
कहते हैं कवि घनानंद का ‘सुजान’ नामक नर्तकी से स्नेह था। अत: यह सम्बोधन उसे ही प्रतीत होता है।

व्याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
अति सुधौ सनेह को मारग है, जहाँ नेक सयानप बॉक नहीं।
तहाँ साँचे चलें तजि आपनपौ झझुकै कपटी जे निसॉक नहीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक “अति सुधो सनेह को मारग है” काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान और धनानंद के बीज के प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ हैं। कवि करता है कि अति सरलता स्नेह का मार्ग है। पंथ है। यहां जरा-सी भी ठगई या चतुराई नहीं है, टेढ़ापन नहीं है। ओछी होशियारी नहीं है। यहाँ सत्य मार्ग पर चलना पड़ता है। यहाँ अपनों का भी त्याग करना पड़ता है। बिना शंका के यहाँ चलना पड़ता है। कहने का मूल भाव यह है कि प्रेम का, स्नेह का मार्ग छल छद्म मुक्त होता है। यहाँ बनावटीपन, सयानापन, टेढ़ापन, अहंकार या चतुराई नहीं रहती। यहाँ तो प्यार, प्रेम, अंतरंगता दिखायी पड़ती है, इस प्रकार स्नेह का मार्ग सदा से ही सरलता कर रहा है। निष्कपटता और सहजता का रहा है।

प्रश्न 2.
धन आनंद प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक तें दूसरी आँक नहीं।
तुम कौन धौं पाटी पढ़े हो कहौ मनलेह पैदेह छटाँक नहीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “अति सुधो सनेह को मारग है” नामक काव्य पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान घनानंद के बीच के प्रेम प्रसंग है। कवि कहता है कि ऐ सुजान ! सुनो हमारे दिल में तो सिवा किसी दूसरे का स्थान ही नहीं है। केवल तुम ही तन-मन में बसी हुयी हो। लेकिन मैं तो तुम्हारी चतुरायी पर आश्चर्यचकित हूँ। तुमने कैसा पाठ पढ़ा है कि लेने को तो मन भर लेती हो और देने के वक्त छटांक का भी त्याग नहीं करती हो। इन पंक्तियों में , द्विअर्थ छिपा हुआ है। मन का ऐंद्रिय मन से भी संबंध है और मन से वजन वाले मन से भी है। इन पंक्तियों में सुजान की चतुराई और घनानंद की सरलता, सहजता का वर्णन मिलता है। सुजान के रूप-लावण्य पर कवि रीझ कर अपना सर्वस्व लुटा देता है, किन्तु सुजान की थाह नहीं मिलती अर्थात् उसके मन की गहरायी नहीं ज्ञात हो जाती है। यहाँ लौकिक प्रेम के साथ अलौकिक प्रेम का भी वर्णन किया गया है।

प्रश्न 3.
परकाजहि देह को धरि फिरौ पराजन्य जयारथ है दरसौ।
निधि-नीर सुधा की समान करौ सबही विधि सजनता सरसौ॥
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “मौ असुवानिहिं लै बरसौ” काव्य पाठ से ली गाया से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान और घनानंद के बीच के प्रेम-प्रसंग से है।
कवि कहता है कि बादल परहित के लिए ही जल से वाष्प-वाष्प से बादल का रूप धरकर इधर-उधर फिरता है। इसमें उसकी यथार्थता झलकती है। जैसे सागर या नदियाँ अपने सुधारूपी जल से लोक, कल्याण के लिए बहती रहती है। इसमें सब तरह से सज्जनता ही दिखायी पड़ती है। सज्जनों का भी काम परहित करना ही है। इन पंक्तियों में घनानंदजी ने अपने जीवन के प्रेम-प्रसंग को प्रकृति के लोककल्याण रूपों से तुलना करते हुए उसके उपकार का वर्णन किया है। प्रकृति का रूप ही लोकहितकारी है ठीक उसी प्रकार सज्जन का भी जीवन होता है।

प्रश्न 4.
‘घनआनंद’ जीवनदायक हो कछु मेरियो पीर हिएँ परसौ।
कबहुँ वा बिसासी सजान के आँगन मो अॅसुवानिहि लै वरसौ॥
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के मौ अँसुवानिहिं ले बरसौ’ नामक काव्य पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों के प्रसंग सुजान और घनानंद के प्रेम-प्रसंग में दिए गए उदाहरणों से है। कवि कहता है कि हे सुजान! तुम जीवनदायिनी शक्ति हो, कुछ मेरे हृदय की पीड़ा का भी स्पर्श करो। मेरी भी संवेदना को जानो, समझो। मेरे अन्तर्मन में तुम्हारे लिए जो प्रेम है, चाह है, भूख है, उसे भी तुम यथार्थ रूप में जानो। इन पंक्तियों में सुजान के प्रति अनन्य प्रेम-भावना प्रकट की गयी है। घनावेद जो सुजान के लिए अपनी सुध-बुध खो चुके हैं और सुजान को विश्वास ही नहीं होता।
कवि कहता है कि कभी भी उस विश्वासी सुजान के आँगन में मेरे आँसू बरसने लगेंगे और अपने अन्तर्मन की व्यथा को प्रकट करने लगेंगे।

अति सूधो सनेह को मारग है कवि परिचय

रीतियुगीन काव्य में घनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि हैं । इनका जन्म 1689 ई० के आस-पास हुआ और 1739 ई० में वे नादिरशाह के सैनिकों द्वारा मारे गये । ये तत्कालीन मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीले के यहां मीरमुंशी का काम करते थे। ये अच्छे गायक और श्रेष्ठ कवि थे । किवदंती है कि सुजान नामक नर्तकी को वे प्यार करते थे । विराग होने पर ये वृंदावन चले गये और वैष्णव होकर काव्य रचना करने लगे । सन् 1939 में जब नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया तब उसके सिपाहियों ने मथुरा और वृंदावन पर भी धावा बोला । बादशाह का मीरमुंशी जानकर घनानंद को भी उन्होंने पकड़ा और इनसे जर, जर, जर (तीन बार सोना, सोना, सोना) माँगा । घनानंद ने तीन मुट्ठी धूल उन्हें यह कहते हुए दी, ‘रज, रज, रज’ (धूल, धूल, धूल) । इस पर क्रुद्ध होकर सिपाहियों ने इनका वध कर दिया।

घनानंद ‘प्रेम की पीर’ के कवि हैं। उनकी कविताओं में प्रेम की पीड़ा, मस्ती और वियोग सबकुछ है । आचार्य शुक्ल के अनुसार, “प्रेम मार्ग का ऐसा प्रवीण और धीर पथिक तथा जबाँदानी का ऐसा दावा रखने वाला ब्रजभाषा का दूसरा कवि नहीं हुआ है।” वियोग में सच्चा प्रेमी जो वेदना सहता है, उसके चित्त में जो विभिन्न तरंगे उठती हैं, उनका चित्रण घनानंद ने किया है। घनानंद वियोग दशा का चित्रण करते समय अलंकारों, रूढ़ियों का सहारा लेने नहीं दौड़ते, वे बाह्य चेष्टाओं पर भी कम ध्यान देते हैं । वे वेदना के ताप से मनोविकारों या वस्तुओं का नया आयाम, अर्थात् पहले न देखा गया उनका कोई नया रूप-पक्ष देख लेते हैं। इसे ही ध्यान में रखकर शुक्ल जी ने इन्हें ‘लाक्षणिक मूर्तिमत्ता और प्रयोग वैचित्र्य’ का ऐसा कवि कहा जैसे कवि उनके पौने दो सौ वर्ष बाद छायावाद काल में प्रकट हुए।

घनानंद की भाषा परिष्कृत और शुद्ध ब्रजभाषा है । इनके सवैया और घनाक्षरी अत्यंत प्रसिद्ध हैं । घनानंद के प्रमुख ग्रंथ हैं – ‘सुजानसागर’, ‘विरहलीला’, ‘रसकेलि बल्ली’ आदि।

रीतिकाल के शास्त्रीय युग में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद पथ पर चलने वाले महान प्रेमी कवि घनानंद के दो सवैये यहाँ प्रस्तुत हैं । ये छंद उनकी रचनावली ‘घनआनंद’ से लिए गए हैं। प्रथम छंद में कवि जहाँ प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की प्रस्तावना करता है, वहीं द्वितीय छंद में मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यंत कलात्मक रूप में अभिव्यक्ति देता है । घनानंद के इन छंदों से भाषा और अभिव्यक्ति कौशल पर उनके असाधारण अधिकार को भी अभिव्यक्ति होती है ।

अति सूधो सनेह को मारग है Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

रीतियुगीन काव्य में धनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि हैं। इनकी कविताओं में प्रेम की पीड़ा, मस्ती और वियोग सबकुछ है। वियोग में सच्चा प्रेमी जो वेदन सहता है, उसके चित्त में जो विभिन्न तरंगे उठती हैं, उनका चित्रण धनानंद ने किया है। धनानंद ने वियोग दशा का चित्रण करते समय ‘अलंकारों रूढ़ियों का सहारा न लेकर मनोविकारों या वस्तुओं का नया आयाम दिया है। वस्तुतः धनानंद ‘प्रेम की पीर’ के कवि हैं।

रीतिकाल के शास्त्रीय युग में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद पथ पर चलने वाले महान प्रेमी कवि धनानंद के दो सवैये पस्तुत पद में है। प्रथम छंद में कवि जहाँ प्रेम के सीधे सरल और निश्चय मार्ग की प्रस्तावना करता है। प्रेम एक ऐसा अमृतमय मार्ग है जहाँ चातुर्य की टेढ़ी-मेढ़ी रूपरेखा नहीं है। इसमें छल उपर श्लेष-मात्र भी नहीं है। मन के मनभावों को अनायास प्रदर्शित करने में सहजभाव उत्पन्न हो जाता है।

दूसरे पद में मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यन्त कलात्मक रूप में अभिव्यक्ति देता है। बादल अपने लिए नहीं दूसरों के लिए शरीर धारण करता है। कवि का विरह-चित्त मिलन के उत्कौठत है। जल से परिपूर्ण बादल अपनी वेदन के साथ एक नया भाव जोड़ देता है। जीवन की अनुभूति प्रेम की सहभागिता में है। गगन की सार्थकता में घाटधन्न से है।

शब्दार्थ

नेकु : तनिक भी
सयानप : चतुराई
बाँक : टेढ़ापन
आपन पौ : अहंकार, अभिमान
झझक : झिझकते हैं ।
निसांक : शंकामुक्त
आक : अंक, चिह्न
परजन्य : बादल
सुधा : अमृत
सरसी : रस बरसाओ
परसौ : स्पर्श करो
बिमासी : विश्वासी
मन : माप-तौल का एक पैमाना
छटाँक : माप-तौल का एक छोटा पैमाना

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 1 वन्दना

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 1 वन्दना Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 1 वन्दना

Bihar Board Class 7 Sanskrit वन्दना Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solution प्रश्न (1)
उच्चैः वदत –

प्रश्न (क)

  • नमामि – नमाव: – नमामः
  • वदामि – वदाव: – वदामः
  • स्मरामि – स्मराव: – स्मरामः

Sanskrit Vandana Class 7 Bihar Board प्रश्न (ख)

  • पालकाय पालकाभ्याम् पालकेभ्यः
  • विनाशाय विनाशाभ्याम् विनाशेभ्यः
  • विशालाय विशालाभ्याम् विशालेभ्यः

नोट :- छात्र स्वयं ऊँचे स्वर में बोलने का अभ्यास करें।

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Vandana Bihar Board प्रश्न (2)
श्लोकान् सस्वरं गायत।
नोट :- छात्र श्लोकों को गाएँ ।

लिखितः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Book Solution प्रश्न (3)
श्लोकांशान् लिखत –

(क) प्रसादे यस्य ……….. विपत्तिः ……….. तथा ।
…………. विशालाय ……………. परमात्मने ।।

(ख) नमामि देवं ……………….तत्कार्यजगत्स्व रूपम् ।
…………………. तद् वाचक-शब्दवृन्दम्
महेश्वरं ………….. |
उत्तराणि –
(क) प्रसादे यस्य सम्पत्तिः विपत्तिः कोपेन तथा ।
नमस्तस्मै विशालाय शिवाय परमात्मने ॥

(ख) नमामि देवं जगदीशरूपं स्मरामि रम्यं च जगत्स्वरूपम्
वदामि तद् वाचक-शब्दवृन्दम् महेश्वरं देवगणरगम्यम् ॥

Bihar Board Class 7 Sanskrit प्रश्न (4)
उत्तराणि लिखत –

  1. शिवस्य प्रसादात् किम् मिलति ?
  2. कस्य कोपने विपत्तिः लभ्यते ?
  3. जगत् कीदृशम् अस्ति ?
  4. संसारस्य विनाशं कः करोति ?
  5. प्राणिनां पालनं कः करोति ?

उत्तराणि-

  1. शिवस्य प्रसादात् सम्पत्तिः मिलति ।
  2. शिवस्य कोपेन विपत्तिः लभ्यते ।
  3. जगत् रम्यं अस्ति ।
  4. संसारस्य विनाशं विश्वरूपः परमात्मा करोति । ।
  5. प्राणिनां पालनं परमात्मा करोति ।

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Vandana Bihar Board प्रश्न (5)
सुमेलितं कुरुत –

  1. सुखम् – (i) सम्पत्तिः
  2. सत्यम् – (ii) ग्रहणम्
  3. विपत्तिः – (iii) कोपनम्
  4. जन्म – (iv) दुःखम्
  5. प्रसाद: – (v) मिथ्या
  6. दानम् – (vi) विनाशः

उत्तर-

  1.  – (iv)
  2. – (v)
  3. – (i)
  4. – (vi)
  5. – (iii)
  6. – (ii)

Class 7 Sanskrit Vandana Bihar Board प्रश्न (6)
रिक्तस्थानानि पूरयत –

  1. शिवाय ……….. नमः / नमानि
  2. ………………….. नमः ।। गणेशं / गणेशाय
  3. …………. नमः । सरस्वतीं । सरस्वत्यै
  4. जगदीशं नमामि / नमः
  5. मातरं ……………………। नमः / नमामि
  6. ………………. स्मरामि । कृष्णं । कृष्णाय
  7. ……….. नमः | तस्मात् / तस्मै

उत्तराणि –

  1. नमः
  2. गणेशाय
  3. सरस्वत्यै
  4. नमामि
  5. नमामि
  6. कृष्णं
  7. तस्मै ।

Bihar Board Solution Class 7 Sanskrit प्रश्न (7)
सन्धिविच्छेदं कुरुत –

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Bihar Board

Class 7 Sanskrit Bihar Board प्रश्न (8)
वाक्यानि रचयत –

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Meaning Bihar Board

कक्षा 7 संस्कृत पाठ 1 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न (9)
पाठभिन्नं श्लोकमेकं स्वस्मरणेन लिखत –
उत्तराणि –

  1. त्वमेव माता च पिता त्वमेव
  2. त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
  3. त्वमेव विद्याद्रविणं त्वमेव
  4. त्वमेव सर्वं मम देव देव ।

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Bihar Board प्रश्न (10)
संस्कृते अनुवादं कुरुत ।

  1. वह पिता को प्रणाम करता है ।
  2. वे दोनों धन प्राप्त करते हैं ।
  3. वे सब सत्य बोलते हैं ।
  4. तुम वेद पढ़ते हो।
  5. देवता को (देवाय) नमस्कार है ।
  6. तुम दोनों विद्यालय जाते हो ।
  7. तुमलोग कार्य करते हो ।

उत्तराणि-

  1. सः पितरं प्रणमति ।
  2. तौ धनं प्राप्नुवन्तः ।
  3. ते सत्यं वदन्ति ।
  4. त्वं वेदं पठसि ।
  5. देवाय: नमः ।
  6. युवा विद्यालयं गच्छतः ।
  7. यूयं कार्यं कुरूथ ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit वन्दना Summary

[प्रस्तुत पाठ में संसार के सृष्टिकर्ता परमात्मा की वन्दना विभिन्न पौराणिक श्लोकों में की गयी है । ज्ञान का आरंभ परम प्रभु की स्तुति से ही हो यह इस पाठ का लक्ष्य है । परमात्मा जगत् के सभी कार्यों के संचालक तथा बिना माँगे सब-कुछ देने वाले हैं। इसलिए सबका कर्त्तव्य है कि उनकी वन्दना गान सहित करें ।]

नमस्ते विश्वरूपाय …………….. विश्ववन्द्याय बन्धवे ॥1॥

शब्दार्थ – नमस्ते (नमः + ते) = नमस्कार । विश्वरूपाय – विश्वरूप (समस्त संसार ही जिसका रूप है वैसा) के लिए । प्राणिनाम् = प्राणियों के। की । पालकाय – पालन करने वाले के लिए । ते (तुभ्यम्) = आपके लिए। जन्म-स्थिति-विनाशाय = रचना, विद्यमानता तथा नाश के लिए। विश्ववन्द्याय – संसार के द्वारा वन्दनीय के लिए । बन्धवे – मित्र / संबंधी के लिए।

सरलार्थ-समस्त संसार ही जिसका रूप है, प्राणियों के पालन करनेवाले, जन्म, विद्यमानता तथा विनाश करने वाले, संसार के द्वारा वन्दनीय आपके (परमपिता परमेश्वर) लिए नमस्कार हैं।

प्रसादे यस्य सम्पत्तिः ……………… शिवाय परमात्मने ॥2॥

शब्दार्थ-प्रसादे – कृपा होने पर । यस्य = जिसका । सम्पत्तिः – धन । विपत्तिः – संकट । कोपने = क्रोध करने पर/ में । तथा – और, उस प्रकार से । नमस्तस्मै (नम: तस्मै) = उसको । उनको नमस्कार है । विशालाय – बड़े / विशाल को/ के लिए । शिवाय = शिव के लिए / मङ्गल के लिए। परमात्मने = परमात्मा के लिए ।

सरलार्थ – जिसकी कृपा से सम्पत्ति और क्रोध से विपत्ति आती है. उस विशाल परमात्मा शिव के लिए नमस्कार है।

ज्ञानं धनं सुखं सत्यं……………… मानवस्तं नमाम्यहम् ॥3॥

शब्दार्थ-ज्ञानम् = ज्ञान, जानकारी । सत्यम् = सत्य, सच । तपः तपस्या । दानम् – दान । अयाचितम् – न माँगा गया, बिना माँगे । लभते – प्राप्त करता है । मानवस्तम् (मानवः तम्) – मानव / मनुष्य, (तम्-) उसको । नमाम्यहम् (नमामि अहम्) = नमस्कार करता हूँ, (अहम्-) मैं । नमामि = नमस्कार करता हूँ। सरलार्थ-जिनकी कृपा से मनुष्य को ज्ञान, धन, सुख, सत्य, तप और दान बिना मांगे ही मिल जाता है उनको, (परमात्मा को) में प्रणाम करता हूँ।

नमामि देवं जगदीशरूपं ………महेश्वरं देवगणैरगम्यम् ॥4॥

शब्दार्थ-देवम् = देवता को । जगदीशरूपम् (जगत्-ईशरूपम्) – संसार के स्वामी रूप वाले (को) । स्मरामि – याद / स्मरण करता हूँ। जगत्स्वरूपम् – जगत् (की रचना) के रूप वाले । वदामि – कहता / बोलता हूँ । तद् .वाचक-शब्दवृन्दम् = उस (देव) के बोधक शब्दसमूह को। महेश्वरम् – महान् ईश्वर को । दैवगणैरगम्यम् (दैवगणै अगम्यम्) – देवसमूहों के द्वारा न प्राप्त करने योग्य ।।

सरलार्थ-संसार के स्वामी रूप वाले, जगत् के रूप वाले सुन्दर देवता को प्रणाम करता हूँ। उस (देव) के बोधक शब्द समूह महान ईश्वर को जो देवगणों के द्वारा नहीं प्राप्त करने योग्य हैं, कहता हूँ।

व्याकरणम् ।

सन्धि-विच्छेदः

  1. नमत = नमः + ते (विसर्ग सन्धि)
  2. नमस्तस्मै = नमः + तस्मै (विसर्ग सन्धि)
  3. मानवस्तम् = मानवः + तम् (विसर्ग सन्धि)
  4. नमाम्यहम् = नमामि + अहम् (यण् सन्धि)
  5. जगदीशः = जगत् + ईशः (व्यञ्जन सन्धि)
  6. देवगणैरगम्यम् = देवगणैः + अगम्यम् (विसर्ग सन्धि)

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Hindi Translation Bihar Board

Bihar Board Class 9 Political Science Solutions Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Political Science राजनीति विज्ञान : लोकतांत्रिक राजनीति भाग 1 Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Political Science Solutions Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board Class 9 Political Science लोकतन्त्र का क्रमिक विकास Text Book Questions and Answers

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

लोकतंत्र का क्रमिक विकास Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किससे लोकतंत्र के विस्तार में मदद नहीं मिलती
(क) आपसी मतभेद
(ख) देश की आंतरिक कलह
(ग) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण
(घ) आर्थिक नीति
उत्तर-
(ग) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण

Bihar Board Class 9 Civics Solution प्रश्न 2.
चिली में जनतंत्र की बहाली कब हुई ?
(क) 2001 ई. में
(ख) 2004 ई. में
(ग) 2005 ई० में
(घ) 2006 ई० में
उत्तर-
(ख) 2004 ई. में

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 3.
मिशेल वेशले किस देश की महिला राष्ट्रपति हैं ?
(क) भारत की
(ख) चिली की
(ग) पोलैंड की
(घ) चीन की
उत्तर-
(ख) चिली की

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 4.
‘मेरे देश के मेहनतकश मजदूरों’-इनमें से किनका नारा था ?
(क) मिशेल वैशले का
(ख) सल्वाडोर अपोंदे का
(ग) जनरलं अगस्तोका
(घ) पिनोशे का
उत्तर-
(ख) सल्वाडोर अपोंदे का

Bihar Board Class 9 Political Science प्रश्न 5.
चिली में सैनिक तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति कौन बने ?
(क) जनरल आगस्तो पिनोशे
(ख) अलबर्टो वेशले
(ग) मिशेल वैशले
(घ) आयेंदे
उत्तर-
(क) जनरल आगस्तो पिनोशे

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 6.
20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पोलैण्ड पर किस पार्टी का शासन था?
(क) पिपुल्स पार्टी
(ख) पोलिश यूनाइटेड वर्क्स
(ग) ग्डांस्क संधि
(घ) सोलिडेरिटी पार्टी
उत्तर-
(ख) पोलिश यूनाइटेड वर्क्स

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 7.
सन् 1980 ई० में पोलैंड में मजदूरों के हड़ताल के नेता कौन थे ?
(क) जारूजेल्स्की
(ख) लेक वालेशा
(ग) फ्रांसिस जॉन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख) लेक वालेशा

Bihar Board Class 9 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 8.
पहली बार किस साम्यवादी शासन वाले देश में स्वतंत्र मजदूर संगठन बनाने की मान्यता प्रदान की गयी?
(क) चिली में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) पोलैंड में
(घ) नेपाल में
उत्तर-
(ग) पोलैंड में

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 9.
पोलैंड में लोकतंत्रात्मक गणराज्य का प्रथम राष्ट्रपति कौन बना?
(क) ला-वेला
(ख) जारूजेल्स्की
(ग) लेक वालेशा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग) लेक वालेशा

Bihar Board Class 9 History  प्रश्न 10.
लोकतंत्र में लोगों को इनमें से कौन-सा अधिकार प्राप्त है ? ।
(क) शासकों का चुनाव कराना।
(ख) शासकों पर प्रतिबंध नहीं लगाना
(ग) जनता का चुप-चाप बैठे रहना
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
उत्तर-
(क) शासकों का चुनाव कराना।

Loktantrik Rajniti Class 9 In Hindi Solutions Chapter 1 प्रश्न 11.
प्राचीन लिच्छवी गणराज्य में केन्द्रीय समिति में कितने सदस्य थे ?
(क) 1707
(ख) 700
(ग) 900
(घ) 800
उत्तर-
(क) 1707

Bihar Board Solution Class 9 प्रश्न 12.
ब्रिटेन में गौरवपूर्ण क्रान्ति कब हुई थी?
(क) 1600 ई. में
(ख) 1700 ई. में
(ग) 1680 ई. में
(घ) 1688 ई. में
उत्तर-
(क) 1600 ई. में

Class 9 Loktantrik Rajniti Chapter 1 Question Answer प्रश्न 13.
किस वर्ष अमेरिका में लोकतांत्रिक संविधान लागू हुआ?
(क) 1704 ई. में
(ख) 1800 ई. में
(ग) 1789 ई. में
(घ) 1688 ई. में
उत्तर-
(ग) 1789 ई. में

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 14.
घाना पहले निम्नलिखित में से किसका उपनिवेश था ?
(क) जर्मनी का
(ख) फ्रांस का
(ग) ब्रिटेन का
(घ) जापान का
उत्तर-
(ग) ब्रिटेन का

Bihar Board Class 9 Economics Solution प्रश्न 15.
1991 ई० में किसका विघटन हुआ?
(क) भारत का
(ख) चीन का
(ग) जापान का
(घ) सोवियत संघ का
उत्तर-
(ग) जापान का

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 16.
सोवियत संघ में कितने गणराज्य हैं ?
(क) 10
(ख) 15
(ग) 20
(घ) 25
उत्तर-
(ख) 15

Bihar Board Class 9 History Chapter 1 प्रश्न 17.
किस वर्ष नेपाल का पहला संविधान बना?
(क) 1948 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1952 ई. में
(घ) 1960 ई. में
उत्तर-
(ग) 1952 ई. में

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 18.
किस वर्ष नेपाल का संविधान लागू हुआ?
(क) 1948 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1959 ई. में
(घ) 1960 ई. में
उत्तर-
(ख) 1950 ई. में

Bihar Board Class 9th Economics Solution प्रश्न 19.
नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र ने कब निर्वाचित सरकार को पदच्युत कर दिया था?
(क) जनवरी 2005 ई. में
(ख) फरवरी 2005 ई. में
(ग) मार्च 2006 ई. में
(घ) फरवरी 2006 ई. में
उत्तर-
(क) जनवरी 2005 ई. में

Bihar Board Class 9 History Solution प्रश्न 20.
नेपाल में संविधान सभा का चुनाव कब सम्पन्न हुआ ?
(क) जून 2008 ई० में
(ख) मार्च 2008 ई० में
(ग) मई 2008 ई० में
(घ) अगस्त 2008 ई० में
उत्तर-
(क) जून 2008 ई० में

Bihar Board Class 9 Social Science प्रश्न 21.
नेपाल में प्रथम गणतंत्र के प्रथम प्रधानमंत्री कौन बने?
(क) डॉ. रामवर्द्धन यादव
(ख) प्रचंड
(ग) जी. पी. कोईराला
(घ) वीरेन्द्र
उत्तर-
(ख) प्रचंड

प्रश्न 22.
नेपाल में उग्र राजनीतिक दल को क्या कहा जाता है ?
(क) नक्सलवार्दी
(ख) मार्क्सवादी
(ग) जनवादी
(घ) माओवादी कम्युनिष्ट पाटी
उत्तर-
(ग) जनवादी

प्रश्न 23.
किस वर्ष म्यांमार औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ?
(क) 1947 ई. में
(ख) 1910 ई. में
(ग) 1948 ई. में
(घ) 1950 ई. में
उत्तर-
(ग) 1948 ई. में

प्रश्न 24.
वर्तमान समय में म्यांमार में किस प्रकार की शासन व्यवस्था है ?
(क) राजतंत्र
(ख) प्रजातंत्र
(ग) लोकतंत्र
(घ) फौजी सरकार
उत्तर-
(क) राजतंत्र

प्रश्न 25.
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई ?
(क) 1945 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1951 ई. में
(घ) 1939 ई में
उत्तर-
(क) 1945 ई. में

प्रश्न 26.
वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों की संख्या है ?
(क) 200 देश
(ख) 192 देश
(ग) 190 देश
(घ) 145 देश
उत्तर-
(ख) 192 देश

प्रश्न 27.
सुरक्षा परिषद् में सदस्यों की कितनी संख्या है ?
(क) 10
(ख) 11
(ग) 15
(घ) 20
उत्तर-
(क) 10

प्रश्न 28.
सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्यों की संख्या कितनी है ?
(क) 5
(ख) 6
(ग) 8
(घ) 10
उत्तर-
(क)

प्रश्न 29.
सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्यों में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और निम्नलिखित में से कौन हैं ?
(क) भारत
(ख) चीन
(ग) जापान
(घ) पाकिस्तान
उत्तर-
(ख) चीन

प्रश्न 30.
वर्तमान समय में किस शासन व्यवस्था को विश्व में सबसे लोकप्रिय एवं सर्वोत्तम माना जाता है ?
(क) राजतंत्र
(ख) तानाशाह
(ग) लोकतंत्र
(घ) सैनिकतंत्र
उत्तर-
(ग) लोकतंत्र

प्रश्न 31.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कौन होते हैं ?
(क) महासचिव
(ख) न्यायाधीश
(ग) एक प्रभारी
(घ) महालेखापाल
उत्तर-
(ख) न्यायाधीश

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

प्रश्न 1.
……………… नामक व्यक्ति ने चिली में सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की।
उत्तर-
आयेंदे

प्रश्न 2.
चिली के पूर्व वायुसेना प्रमुख …………….. की हत्या 1975 ई. में कर दी गई।
उत्तर-
अलबर्टी वेशले

प्रश्न 3.
लेनिन जहाज कारखाना, पोलैंड के शहर ………………… में स्थित था।
उत्तर-
ग्डांस्क

प्रश्न 4.
लेनिन जहाज कारखाने के मजदूरों ने हड़ताल कर दी थी उसका कारण था एक क्रेन चालक ………………. को गलत ढंग से नौकरी से – निकाला जाना।
उत्तर-
महिला

प्रश्न 5.
लेनिन जहाज कारखाना के मजदूरों ने सरकार से एक समझौता किया वह समझौता ……………….कहलायी।
उत्तर-
ग्डांस्क सन्धि

प्रश्न 6.
लेनिन जहाज कारखाना के मजदूर संगठन का नाम …………….. रखा गया।
उत्तर-
सोलिडेरिटी.

प्रश्न 7.
1980 ई० के दशक में पोलैंड की साम्यवादी सरकार ………………… थी।
उत्तर-
अलोकतांत्रिक

प्रश्न 8.
पोलैंड की साम्यवादी सरकार का नेतृत्व निरंकुश शासक जनरल ……………….. कर रहा था।
उत्तर-
जारूजेल्स्की

प्रश्न 9.
घाना पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था और इसका नाम ……………… था।
उत्तर-
गोल्डकोस्ट

प्रश्न 10.
जारूजेल्स्की ……….. के साम्यवादी नेता थे।
उत्तर-
पोलैंड

प्रश्न 11.
घाना को ………………. आजादी मिली।
उत्तर-
1957 ई. में

प्रश्न 12.
वर्तमान समय में चिली एक ……………… देश है।
उत्तर-
लोकतंत्र

प्रश्न 13.
चिली के वर्तमान राष्ट्रपति ……………… हैं।
उत्तर-
मिशेल मेशले

प्रश्न 14.
घाना में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना पहली बार …….. के नेतृत्व में हुई।
उत्तर-
लामे एन क्रूमा

प्रश्न 15.
लेनिन जहाज कारखाना में लेक वालेशा एक ………………. था।
उत्तर-
इलेक्ट शियन

प्रश्न 16.
नेपाल के अंतिम नरेश ……………… थे ।
उत्तर-
ज्ञानेन्द्र

प्रश्न 17.
1990 ई० में नेपाल में जन आन्दोलन के परिणामस्वरूप …………………….. लोकतंत्र की शुरूआत हुई।
उत्तर-
बहुदलीय

प्रश्न 18.
………………… की मृत्यु के बाद 1990 ई. के दशक में पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना हुई।
उत्तर-
जियाउल हक

प्रश्न 19.
म्यांमार पहले…………….कहा जाता था।
उत्तर-
बर्मा

प्रश्न 20.
म्यांमार में ……………………के संघर्ष को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली
उत्तर-
आंग सान सूची

प्रश्न 21.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव ………….. वर्षों के लिए होता है।
उत्तर-
दो

प्रश्न 22.
भारत में नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ……………….में मिला।
उत्तर-
1950

प्रश्न 23.
सन् ………………. ई. में फ्रांस की क्रान्ति हुई।
उत्तर-
1789

प्रश्न 24.
चिली में अभी ………………… की स्थापना है।
उत्तर-
लोकतंत्र

प्रश्न 25.
लोकतंत्र में लोगों को संगठन बनाने का …………………. होता है।
उत्तर-
अधिकार

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एशिया के तीन गैरलोकतांत्रिक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर-
बर्मा (म्यांमार), भूटान, चीन ।

प्रश्न 2.
चिली सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना किसने की?
उत्तर-
सेल्वाडोर आयेंदे ने ।

प्रश्न 3.
सेल्वाडोर आयेंदे कौन था ?
उत्तर-
चिली देश का राष्ट्रपति ।

प्रश्न 4.
आयेंदे की सरकार का कब तख्ता पलट हुआ था ?
उत्तर-
11 सितम्बर, 1973 ई. को।

प्रश्न 5.
1980 ई० में पोलैंड में जो व्यक्ति हड़ताल में शामिल हुआ, उसका नाम था ?
उत्तर-
लेक वालेशा।

प्रश्न 6.
घाना के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति कौन हुए ?
उत्तर-
लामे एन क्रूमा ।

प्रश्न 7.
अमरिकी स्वतंत्रता संग्राम किस देश के विरुद्ध लड़ा गया था ?
उत्तर-
ब्रिटेन के विरुद्ध ।

प्रश्न 8.
म्यांमार के उस नेता का नाम बताइए जो लोकतंत्र के लिए लड़ती रहीं तथा नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया ?
उत्तर-
आंग सान सूची।

प्रश्न 9.
20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पोलैंड में किस प्रकार का शासन था ? . . .
उत्तर-
साम्यवादी ।

प्रश्न 10.
घाना में एनक्रूमा सरकार का तख्तापलट फिर कब हुआ? ‘
उत्तर-
घाना में सेना ने 1966 ई. में तख्ता पलट दिया और लोकतंत्र समाप्त हो गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रपति आयेंदे ने निर्वाचित होने के बाद कौन से कार्य किये?
उत्तर-
राष्ट्रपति आयेंदे ने अनेक सुधारवादी कार्यक्रम चलाये । उसने मजदूरों की दशा में सुधार, शिक्षा-प्रणाली में सुधार के अनेक प्रयास किये । बच्चों के लिए निःशुल्क दूध बाँटना, भूमिहीन किसानों को जमीन बाँटना आदि । उस समय चिली की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी । अतः आयेंदे ने मजदूरों के अधिक से अधिक कल्याण की बात सोचते थे तथा कानून बनाए । उनके इस सुधार कार्यक्रम से अमीर लोग राष्ट्रपति आयेंदे से नाखुश थे।

प्रश्न 2.
1980 ई० में पोलैंड में कौन शासन करता था ?
उत्तर-
1980 ई० में पोलैंड में साम्यवादी दल का शासन था। इस दल का नाम था पोलिश यूनाइटेड वर्क्स पार्टी । यह एक दलीय व्यवस्था थी। सभी शासकीय ताकत इसी दल के हाथों में थी। सरकार का पूरी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण था । अन्य साम्यवादी देशों की तरह पोलैंड में किसी अन्य राजनीतिक दल को राजनीति में भाग लेने का अधिकार नहीं था।

प्रश्न 3.
भारत में लोकतांत्रिक विकास किस तरह से हो रहा है ?
उत्तर-
1947 ई० में भारत स्वतंत्र हुआ। 1950 में भारत का अपना लोकतंत्र लागू हुआ। उस समय से आज तक भारत में लोकतंत्र का क्रमिक विकास हो रहा है । स्वतंत्र भारत में सब कुछ अपना है । नागरिकों को वयस्क मताधिकार से लेकर सभी लोकतंत्रात्मक अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 4.
नक्शे में पोलैंड को ढूँढें तथा यह बतावें कि 1980 के दशक में यूरोप के किन-किन देशों में साम्यवादी शासन था ?
उत्तर-
छात्र पोलैंड स्वयं ढूढ़े ] नक्शे के अनुसार 1980 के दशक में पूर्वी यूरोप के माल्दोवा, जार्जिया, बेलारूस, यूक्रेन, अजरबैजान तथा आर्मीनिया जैसे देशों में साम्यवादी शासन था।

प्रश्न 5.
उन देशों का नाम लिखें जहाँ वर्तमान में साम्यवादी शासन है।
उत्तर-
वर्तमान समय में म्यांमार, भूटान, चीन, अफगानिस्तान, यमन, लीबिया, सउदी अरब तथा अंगोला जैसे देश में साम्यवादी शासन है।

प्रश्न 6.
पोलैंड में मजदूर संघ इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया ?
उत्तर-
पोलैंड में मजदूर संघ इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि किसी साम्यवादी शासन वाले देश में पहली बार एक स्वतंत्र मजदूर संघ का गठन हुआ। सरकार ने भी इस संघ की मान्यता दे दी थी।

प्रश्न 7.
अधिकांश देशों में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में काफी देर से : मताधिकार क्यों मिला? भारत में ऐसा क्यों नहीं हुआ? ।
उत्तर-
अधिकांश देशों में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में काफी देर से मताधिकार इसलिए मिला क्योंकि महिलाओं को पुरुषों के समान नहीं माना जाता था । भातरीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी बढ़-चढे कर भाग लिया था। इसी दौरान भारत में सकारात्मक लोकतांत्रिक मूल्यों ने जन्म लिया था। उन मूल्यों में महिलाएँ समान समझी जाती थीं। अतः भारत में पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी मताधिकार मिल गया।

प्रश्न 8.
किसी को जीवन भर के लिए राष्ट्रपति चुनने को क्या आप उचित मानते हैं ?
उत्तर-
किसी को जीवन भर के लिए राष्ट्रपति चुनने की विधि को उचित नहीं माना जा सकता क्योंकि ऐसा होने पर राष्ट्रपति निरंकुश तथा तानाशाह हो सकता है। घाना में राष्ट्रपति लामे एनक्रूमा अपने आपको आजीवन राष्ट्रपति के रूप में चुनवा लिया था । यद्यपि वह लोकतंत्र का
राष्ट्रपति था परंतु उसकी तानाशाही से तंग हो सेना ने 1966 ई. में एनक्रूमा सरकार का तख्ता पलट दिया था।

प्रश्न 9.
चिली में पिनोशे शासन और पोलैंड की साम्यवादी शासन में तुलना करें।
उत्तर–
चिली में पिनोशे शासन और पोलैंड की साम्यवादी शासन में निम्नलिखित अंतर था

  • चिली में सैनिक शासन था जबकि पोलैंड में एक पार्टी का शासन था।
  • पोलैंड की साम्यवादी सरकार यह दावा कर रही थी कि वह पोलैंड के मजदूर वर्ग की ओर से शासन चला रही है और चिली के शासक का ऐसा कोई दावा नहीं था।
  • पोलैंड का शासन किसी विशेष मजदूर संगठन के अधिनायकवाद का उदाहरण था । चिली का शासन सैनिक अधिनायकवाद था।

प्रश्न 10.
चिली और पोलैंड दोनों की शासन व्यवस्था में कौन-सी समानताएँ थीं ?
उत्तर-
चिली और पोलैंड दोनों में असमानता के बावजूद भी कुछ निम्नलिखित समानताएँ थीं

  • दोनों देशों में शासकों का चुनाव जनता अपनी इच्छा से नहीं कर सकती थी।
  • दोनों ही देशों में जनता को सरकार के समक्ष अपने विचार व्यक्त करने, संगठन बनाने, विरोध करने तथा राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की वास्तविक स्वतंत्रता नहीं थी।
  • दोनों ही देशों की जनता को खुलकर अपने विचारों को । अभिव्यक्त करने की आजादी नहीं थी। अतः स्पष्ट है कि दोनों की शासन व्यवस्थाओं में समानताएँ थीं।

प्रश्न 11.
लिच्छवी गणतंत्र की प्रशासनिक व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर-
ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी में बुद्धकाल में कई गणराज्यों में लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था थी। उनमें से लिच्छवी गणराज्य भी था । इस गणराज्य की कई प्रशासनिक विशेषताएँ थीं।

  • इस गणराज्य में शासन का प्रधान एक निर्वाचित पदाधिकारी होता था जिसे राजा कहा जाता था ।
  • राज्य की वास्तविक शक्ति एक केन्द्रीय समिति के पास होती थी। जिसमें जनता के प्रतिनिधि होते थे। ये सभी प्रतिनिधि भी राजा कहलाते थे।
  • लिच्छवी गणराज्य में केन्द्रीय समिति में 1707 राज प्रतिनिधि थे । प्रत्येक राजा के अधीन एक उप राजा, सेनापति तथा भंगरिक आदि पदाधिकारी होते थे।
  • सभी प्रकार के निर्णय बहुमत से होता था।
    स्पष्ट है बुद्धकालीन गणराज्यों में शासकों का चुनाव होता था।

प्रश्न 12.
वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र से क्या तात्पर्य है.? क्या कोई वैश्विक सरकार होनी चाहिए?
उत्तर-
विश्व में लगातार बिगड़ रही शांति व्यवस्था की स्थापना के लिए एक विश्व सरकार होनी चाहिए। भारत की एक सरकार है, ब्रिटेन की एक सरकार है अन्य देशों में भी सरकारे हैं पर विश्व की कोई एक सरकार नहीं है जिसके द्वारा निर्मित कानून दुनिया भर के लोगों पर लागू हो। अतः विश्व स्तर पर लोकतंत्रात्मक सरकार का आना ही वैश्विक लोकतंत्र हुआ। विशाल विश्व में एक प्रशासन संभव नहीं है, फिर भी द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना एक तरह से वैश्विक स्तर पर लोकतंत्रात्मक कदम ही है।

प्रश्न 13.
वीटो क्या है ? यह अधिकार किन-किन देशों को प्राप्त है ?
उत्तर-
वीटो विशेषाधिकार है। जब सुरक्षा परिषद् के किसी भी फैसले के खिलाफ इसके स्थायी सदस्य इस अधिकार का प्रयोग करते हैं तो सुरक्षा परिषद् उसकी मर्जी के खिलाफ फैसला नहीं कर सकती अर्थात् पूर्व का निर्णय लागू नहीं होता। यह अधिकार स्थायी सदस्यों को प्राप्त है । स्थायी सदस्य हैं-अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ।

प्रश्न 14.
लोकतांत्रिक सरकार में और तानाशाही सरकार में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक सरकार में जनता द्वारा चने गए प्रतिनिधि शासन में भाग लेते हैं। लोकतांत्रिक सरकार में लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अवसर की समानता, मौलिक अधिकार, वयस्क मताधिकार जैसे लोकतांत्रिक सिद्धान्तों की प्रधानता दी जाती है। . परन्तु, तानाशाही शासन व्यवस्था में शासक की निरंकुशता प्रबल रही है। जनता के अधिकारों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। तानाशाही अपने विरोधियों को कुचल कर रख देता है। तानाशाही शासन में मानवता कराहती है।

प्रश्न 15.
ग्डांस्क संधि क्या थी?
उत्तर-
साम्यवादी पोलैंड में 14 अगस्त, 1980 ई. को लेनिन जहाज कारखाना के एक क्रेन चालक महिला को गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया । अतः उसके समर्थन में अन्य कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गये । उनकी माँगें थीं-

  • देश में स्वतंत्र मजदूर संघ को मान्यता मिले
  • राजनैतिक बंदियों को रिहा किया जाय तथा
  • प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए।

इस तरह इस आन्दोलन की लोकप्रियता के समक्ष सरकार को झुकना पड़ा । लेक वालेशा के नेतृत्व में मजदूरों ने सरकार के साथ 21 सूत्री समझौता किया। यह समझौता ‘ग्डांस्क संधि’ कहलायी।

प्रश्न 16.
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में लोकतंत्र के अनुभव पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना एवं पतन की प्रक्रिया चलती रही है । जनरल जिया उल हक की मृत्यु 1990 के दशक में हुई। तब पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना हुई, लेकिन वह स्थायी नहीं रह सकी । 1999 ई. में जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाजशरीफ की तख्तापलट करते हुए सैनिक शासन की स्थापना की। परन्तु हाल में पाकिस्तान में हालात परिवर्तित हुए, और वहाँ की जनता ने लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया। अन्त में जन-आन्दोलन के समक्ष सैनिक शासन को झुकना पड़ा और पाकिस्तान में चुनाव कराने पड़े। 2008 ई. के चुनाव के बाद पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी की गठबंधन सरकार सत्ता में आयी। परवेज मुशर्रफ को गद्दी से हटना पड़ा । आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति हुए और युसुफ रजा गिलानी प्रधानमंत्री बने । इस घटना क्रम के अंतर्गत पाकिस्तान की लोकप्रिय नेत्रि बंजीर भुट्टो को अपनी प्राण गवानी पड़ी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतंत्र के विस्तार के विभिन्न चरणों का वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी में बुद्धकाल में गंगाघाटी के कई गणराज्यों में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के प्रमाण मिले हैं । जैसेकपिलवस्तु, वैशाली में लिच्छवी, मिथिला, विदेह आदि ।

परन्त आधनिक लोकतंत्र की कहानी कम-से-कम दो सदी पहले शुरू हुई। 1779 ई. के जन विद्रोह ने फ्रांस में टिकाऊ लोकतंत्र की स्थापना नहीं की थी। 19वीं सदी तक फ्रांस में बार-बार लोकतंत्र को उखाड़ फेंका गया और पुनः स्थापित किया गया। लेकिन फ्रांसीसी क्रान्ति ने पूरे यूरोप में जगह-जगह पर लोकतंत्र के लिए संघर्षों की प्रेरणा दी।

ब्रिटेन में लोकतंत्र के तरफ कदम की शुरूआत फ्रांसीसी क्रान्ति से काफी पहले हो चुकी थी। लेकिन यहाँ प्रगति की रफ्तार काफी कम थी। 18वीं-19वीं सदी में हुए राजनैतिक घटनाक्रमों ने राजशाही और सामंत वर्ग की शक्ति में कमी कर दी । फ्रांसीसी क्रान्ति के आस-पास ही उत्तर अमेरिका में स्थित ब्रिटिश उपनिवेशों ने 1776 ई. में खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया। अगले कुछ ही वर्षों में इन उपनिवेशों ने साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका का गठन किया। अमेरिका में 1789 ई. में एक लोकतांत्रिक संविधान लागू किया गया जो आजतक चला आ रहा है। 19वीं सदी में लोकतंत्र के लिए होनेवाले संघर्ष अक्सर राजनैतिक समानता, आजादी और न्याय जैसे मूल्यों को लेकर ही होते थे। तब एक मुख्य माँग हुआ करती थी कि सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त हो।

प्रश्न 2.
19वीं शताब्दी में लोकतंत्र की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर-
19वीं शताब्दी में लोकतंत्र के लिए संघर्ष हुआ। इसमें प्रगति भी हुई। यह संघर्ष नागरिकों के राजनैतिक समानता, लोगों की स्वतंत्रता तथा न्यायिक निष्पक्षता जैसे मूल्यों के प्राप्ति तक ही सीमित रहा । अभी तक सार्वभौम वयस्क मताधिकार जनता को प्राप्त नहीं थे।

1900 ई. तक न्यूजीलैण्ड को छोड़कर किसी भी देश में जनता को सार्वजनिक वयस्क मताधिकार प्राप्त नहीं था । न्यूजीलैण्ड में 1893 ई. में ही जनता को सार्वजनिक वयस्क मताधिकार प्राप्त हो गया। कुछ देशों में मताधिकार उन्हीं को प्राप्त था जिसके पास निजी संपत्ति थी । अमेरिका में आम महिलाओं के साथ अश्वेत पुरुषों को भी मताधिकार मिला । इस तरह 19वीं शदी में लोकतंत्र की स्थापना हेतु संघर्ष की जरूरत थी। अतः वे लोग चाहे वह महिला हो अथवा पुरुष, चाहे वह गरीब हो या अमीर और चाहे श्वेत हो या अश्वेत, मताधिकार प्राप्ति हेतु संघर्ष करने लगे। इस तरह अब तक इतना तो अवश्य हो चुका था कि यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में आधुनिक लोकतंत्र की स्थापना का प्रारम्भिक चरण पूरा हो चुका था। इन देशों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मर्जी से सरकार का चयन किया ।

प्रश्न 3.
एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देशों में उपनिवेशवाद का अंत कैसे हुआ?
उत्तर-
एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देश यूरोपीय उपनिवेश थे। इन उपनिवेशों के नागरिकों को कोई राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं था । अतः इन देशों की जनता ने अपने-अपने देशों में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करना शुरू किया । यूरोपीय देश इन औपनिवेशिक देशों का आर्थिक शोषण कर रहे थे। जनता का संघर्ष आरम्भ हआ तो औपनिवेशिक शासकों ने इसे दबाने का प्रयास किया। संघर्ष के विस्तार देखते हुए औपनिवेशिक शासकों को जनता के समक्ष झुकना पड़ा तथा सीमित अधिकार वाली सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त हुए। परन्तु जनता इससे संतुष्ट नहीं थी। अत: संपूर्ण राजनैतिक अधिकारों की माँग होने लगी। अंत में औपनिवेशिक शासकों को इन देशों को स्वतंत्र करना पड़ा। इसी तरह हमारा देश भारत 1947 ई. में स्वतंत्र हुआ और यहाँ लोकतंत्र की स्थापना हुई।

पश्चिमी अफ्रीका में घाना एक देश है; जहाँ लोकतांत्रिक शासन का प्रयोग बहुत अधिक सफल नहीं रहा । घाना पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था और इसका नाम गोल्डकोस्ट था । राजनैतिक अधिकारों हेतु यहाँ संघर्ष का आरम्भ हुआ। एक सुनार का पुत्र एवं शिक्षक ‘लामे एनक्रमा’ इस संघर्ष का नेता था । इनके नेतृत्व में घाना 1957 ई० में स्वतंत्र हुआ। आजादी के बाद एनक्रमा घाना के प्रधानमंत्री एवं फिर राष्ट्रपति चुने गए । इस तरह पश्चिमी अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना का प्रथम सफल प्रयास हुआ । घिर-घिरे यहाँ उपनिवेशवाद का अंत हुआ । सेना ने 1966 ई. में लोकतंत्र का खात्मा कर पुनः सैनिक शासन कायम कर दिया ।

प्रश्न 4.
चिली में लोकतंत्र की वापसी कैसे संभव हुई ?
उत्तर-
दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के चिली देश के राष्ट्रपति सल्वाडोर आयेंदे थे । चिली के चर्च, जमींदार वर्ग, अमीर लोग इनके खिलाफ थे, क्योंकि आयेंदे मजदूरों की दशा में सुधार, शिक्षा प्रणाली में सुधार तथा भूमिहीन किसानों को जमीन बाँटने जैसी लोकतांत्रिक नीतियों पर अमल कर रहे थे। 11 सितम्बर, 1973 को जनरल आगस्तो पिनोशे को आयेंदै का तख्ता पलट कर दिया और आगस्तो पिनोशे देश के राष्टपति बन बैठे। पिनोशे की सरकार ने आयेंदे के समर्थकों और लोकतंत्र की माँग करने वालों का दमन किया, कई लोगों को लापता कर दिया गया। 17 वर्षों तक उसका निरंकुश एवं क्रुर शासन चलता रहा । पिनोशे का सैनिक शासन 1988 ई. में तब समाप्त हुआ जब उन्होंने चिली में जनमत संग्रह कराने का फैसला किया । जनता ने भारी मतों से पिनोशे को ठुकरा दिया और चिली में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई।

अब तक चिली में चार बार चुनाव हो चुके हैं। जनवरी 2006 ई. में राष्ट्रपति के चुनाव में चिली के पूर्व वायु सेना प्रमुख अलबर्टी वेशेल, जिनकी हत्या 1973 ई. में हुए विद्रोह के दौरान कर दी गयी थी; की पुत्री मिशेल वैशले विजयी रहीं। आज भी राष्ट्रपति के पद पर मिशेल वैशले कायम हैं। इस प्रकार चिली के लोगों ने देश में लोकतंत्र की स्थापना कर दी।

प्रश्न 5.
संयुक्त राष्ट्र के कितने अंग होते हैं ? वर्णन करें।
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित अंग हैं

  • महासभा-संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य राष्ट्र इसके सदस्य हैं।
  • सुरक्षा परिषद-अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस तथा चीन इसके स्थायी सदस्य हैं। सुरक्षा परिषद् में 10 अस्थायी सदस्य हैं। इस प्रकार कुल 15 सदस्य हैं । 10 अस्थाई सदस्यों का निर्वाचन हर दो वर्ष पर होता
  • आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्-इस परिषद् में कुल 54 सदस्य हैं। जो देशों के बीच आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में सहयोग स्थापना को प्रोत्साहित करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय-इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं; जिनका काम होता है अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाना । इसके लिए संयुक्त राष्ट्र का एक अपना न्यायालय है।
  • न्यास परिषद्-इसका एक न्यास परिषद् भी है।
  • सचिवालय-संयुक्त राष्ट्र का अपना सचिवालय है जो अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित है । संयुक्त राष्ट्र के महासचिव सचिवालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होते हैं । बान-की-मून वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं।