Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5

प्रश्न 1.
आकृति में, केन्द्र O वाले एक वृत्त पर तीन बिन्दु A, B और C इस प्रकार है कि ∠BOC = 30° तथा ∠AOB = 60 है। यदि चाप ABC के अतिरिक्त वृत्त पर D एक बिन्दु है, तो ∠ADC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 1
उत्तर:
चित्रानुसार, ∠AOC = ∠AOB + ∠BOC
= 60° + 30° = 90°
हम जानते हैं कि केन्द्र पर बना कोण शेष परिधि पर भने कोण का दो गुना होता है।
∠ADC = \(\frac{1}{2}\) ∠AOC = \(\frac{1}{2}\) × 90° = 45°.

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प्रश्न 2.
किसी वृत्त को एक जीवा वृत्त की त्रिज्या के बराबर है। जीवा द्वारा लघु चाप के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण ज्ञात कीजिए तथा दीर्घचाप के किसी बिन्दु पर भी अंतरित कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∆OAB में,
AB = OA = OB त्रिज्या (दिया है)
∴ ∆AOB एक समबाहु त्रिभुज है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 2
अत: इस त्रिभुज का प्रत्येक अन्त:कोण -600
∴ ∠AOB = 60°
∠ACB = \(\frac{1}{2}\) ∠AOR = \(\frac{1}{2}\) + (60°) = 30°
अत: चक्रीव चतुर्भुज ACHD में,
∠ACB + ∠ADB = 180°
⇒ ∠ADB = 180° – 30° = 150°
अत: दौर्ष चाप द्वारा अंतरित कोण = 30°
तथा लघु चाप द्वारा अंतरित कोण = 150°.

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प्रश्न 3.
पाट्य-पुस्तक में दी गई आकृति में ∠PQR = 100° है, जहाँ P, Q तथा R, केन्द्र O वाले एक वृत्त पर स्थित बिन्दु हैं। ∠OPR ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दोपचाप पर कोई बिन्दुमानकर चक्रीय चतुर्भुज PQRS की रचना की।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 3
∠POR + ∠PSR = 180°
⇒ ∠PSR = 180° – 100° = 80°
हम जानते हैं कि केन्द्र पर बना कोन शेष परिधि पर बने कोण का दो गुना झेता है।
∴ ∠POR = 2∠PSR = 2(80°) = 160°
∆POR में, OP = OR
∠OPR + ∠ORP + ∠POR = 180°
2∠ORP + 160° = 180°
∠OPR = 10°.

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प्रश्न 4.
आकृति में, ∠ABC = 69° और ∠ACB = 31° हो, तो ∠BDC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 4
उत्तर:
∆ABC में,
∠BAC + ∠ABC + ∠ACB = 180°
⇒ ∠BAC + 69° + 31° = 180°
∠BAC = 180° – 100° = 80°
∠BDC = ∠BDC = 80°
(एक ही जूतखंड के कोष)

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प्रश्न 5.
आकृति में, एक वृत्त पर A, B, C और D चार बिन्द AC और BD एक बिन्द E पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि ∠BEC = 130° तथा ∠ECD = 20° है। ∠BAC ज्ञात कीजिए।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 5
उत्तर:
∆CDE में,
∠CDE + ∠ECD = ∠CED
⇒ ∠CDE + 20° = 130°
⇒ ∠CDE = 110°
अतः ∠BAC = ∠CDE = 110°.
(एक ही वृत्तखंड के कोण)

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प्रश्न 6.
ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जिसके विकर्ण एक बिन्दु E पर प्रतिच्छेद करते हैं। बदि ∠DBC = 70° और ∠BAC = 30° हो, तो ∠BCD ज्ञात कीजिए।
पुनः यदि AB = BC हो, तो ∠ECD ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
बोवा CD के लिए,
∠CBD = ∠CAD (समान वृत्तखंट के कोण)
∠CAD = 70°
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 6
∠BAD = ∠BAC + ∠CAD
30° + 70° = 100°
तथा ∠BCD + ∠BAD = 180°
∠BCD + 100° = 180°
∠BCD = 80°.
त्रिभुज ABC में,
AB = BC
∴ ∠BCA = ∠CAB
⇒ ∠BCA = 30°
तथा ∠BCD = 80°
⇒ ∠BCA + ∠ACD = 80°
30° + ∠ACD = 80°
⇒ ∠ACD = 50°
⇒ ∠ECD = 50°.

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प्रश्न 7.
यदि एक चक्रीय चतुर्भुज के विकर्ण उसके शीषों से जाने वाले वृत्त के व्यास हों, तो सिद्ध कीजिए कि वह एक आयत है।
उत्तर:
माना ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है जिसके विकर्ण BD तथा AC है जो परस्पर O पर प्रतिचोद करते हैं।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 7
∠BAD = \(\frac{1}{2}\) ∠BOD = \(\frac{180°}{2}\) = 90°
∠BCD + ∠BAD = 180°
∠BCD = 90°
∠ADC = \(\frac{1}{2}\) ∠AOC = (180°) = 90°
∠ADC + ∠ABC = 180°
90° + ∠ABC = 180°
⇒ ∠ABC = 90°
∵ चक्रीय चतुर्भुज का प्रत्येक अन्त:कोण 90° है।
अतः यह एक आयत है।

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प्रश्न 8.
यदि एक समलंब को असमांतर भुजाएँ बराबर हों, तो सिद्ध कीजिए कि वह चक्रीय है।
उत्तर:
माना ARCD एक समलंब है नहीं
AB || CD तथा BC = AD
AM ⊥ CD तथा BN ⊥ CD लाँचा।
∆AMD तथा ∆BNC में,
AD = BC
∠AMD = ∠ENC (रचना, प्रत्येक 90° से)
AM = BN
∴ ∆AMO ≅ ∆BNC (SAS सर्वागसमता से)
∴ ∠ADC = ∠BCD ……. (1)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 8
∠BAD तथा ∠ADC, AD से परावान भुजाएं हैं।
∠BAD + ∠ADC = 180°
∠BAD + ∠BCD = 180° ……. (2) समी (1) से समी]
सिद्ध करता है कि विपरीत कोण सपूरक हैं।
अत: ABCD एक चक्रीव चतुर्भुज है।

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प्रश्न 9.
दो वृत्त दो बिन्दुओं B और C पर प्रतिच्छेद करते है। B से जाने वाले दो रेखाखण्ड ABD और PBQ वृत्तों को A, D और P, Q पर क्रमश: AL प्रतिच्छेद करते हुए खींचे गए है (देखिए आकति) सिद्ध कीजिए कि ∠ACP = ∠QCD
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 9
उत्तर:
हम जानते हैं कि एक ही वृत्तण्ड पर बने कोण बराबर होते हैं।
∴ ∠ACP = ∠ABP ……. (1)
ब ∠QCD = ∠QBD ……. (2)
नषा ∠ABP = ∠QBD ……. (3)
अब, समी. (1), (2) तथा (3) से,
∠ACP = ∠QCD.

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प्रश्न 10.
यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाओं को व्यास मानकर वृत्त खींचे जाएं, तो सिद्ध कीजिए कि इन वृत्तों का प्रतिच्छेद बिन्दु तीसरी भुजा पर स्थित है।
उत्तर:
∆ABC, AB तथा AC को न्यास मानकर वृत्त खींचा सपा दोनों वृत्त परस्पर A तथा D पर प्रतिकोद करते हैं। AD को मिलाया।
माना दोनों वृत्त D पर प्रतिको करते हैं तथा D, BC पर स्थित नहीं है।
∠ADB = 90°
∠ADC = 90°
∠BDC = ∠ADB + ∠ADC.
= 90°+ 90° = 180°
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 10
अत: BDC एक सीधी रेखा है तथा हमारी अभिधारणा | गलत है।
अत: D तीसरी भुजा BC पर स्थित है।

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प्रश्न 11.
उभयनिष्ठ कर्ण AC वाले दो समकोण त्रिभुज ABC और ADC है। सिद्ध कीजिए कि
∠CAD = ∠CED है।
उत्तर:
दिया है : उभयनिष्ठ कर्ण AC को व्यास मानकर बनाये गये मृत में दो ∆ABC तथा ∆ADC है।
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 11
∴ ∠ADC = ∠ABC = 90°
स्पष्ट रूप से,
∠CAD = ∠CBD.(एक ही खण्ड में स्थित कोण समान होते हैं।)

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प्रश्न 12.
सिद्ध कीजिए कि चक्रीय समांतर चतुर्भुज आग्रत होता है।
उत्तर:
माना ABCD एक चक्रीय समांतर गार्भुज है।
∠A + ∠C = 180° ……. (1)
Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.5 Q 12
हम जानते हैं कि समान्तर चतुर्भुज के विपरीत कोग समान होते हैं।
∴ ∠A = ∠C तथा ∠B = ∠D
समी. (1) से, ∠A = ∠C = 180°
⇒ ∠A + ∠A = 180°
⇒ 2∠A = 180°
⇒ ∠A = 90°
इसी प्रकार ABCD का प्रत्येक कोष = 90°
अत: ABCD एक आयत है।

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Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 9 बिहार दर्शन-1 Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-1 Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
खाली जगहों को भरें –

  1. पितृपक्ष का मेला ………… पक्ष में लगता है।
  2. महाबोधि मंदिर के निकट ………… सरोवर है।
  3. पावापुरी में ………… मंदिर है।
  4. महावीर ने ……….. महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
  5. नालंदा विश्वविद्यालय …….का अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र था।

उत्तर-

  1. कृष्णपक्ष
  2. मुचलिंद
  3. जलमंदिर
  4. शरीर त्यागकर
  5. ज्ञान-विज्ञान ।

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प्रश्न 2.
सही मिलान करें –

  1. मुचलिंद सरोवर – नवादा जिला
  2. रानी अहिल्याबाई – राजगीर की पहाड़ी
  3. शांति स्तूप – विष्णुपद मंदिर
  4. ककोलत नलप्रपात – बोध गया

उत्तर-

  1. मुचलिंद सरोवर – बोधगया
  2. रानी अहिल्याबाई – विष्णुपद मंदिर
  3. शांति स्तूप – राजगीर की पहाड़ी
  4. ककोलत जल प्रपात – नवादा जिला

प्रश्न 3.
सही विकल्प पर (✓) का चिह्न लगाएँ।

प्रश्न (i)
गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?
(क) पावापुरी
(ख) वैशाली
(ग) बोध गया
उत्तर-
(ग) बोध गया

प्रश्न (ii)
गया में अवस्थित विष्णुपद मंदिर किसने बनवाया था ?
(क) रानी अहिल्याबाई
(ख) अजातशत्रु
(ग) अशोक
उत्तर-
(क) रानी अहिल्याबाई

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प्रश्न (iii)
बिहार में गर्म जलकुंड कहाँ अवस्थित है ?
(क) पावापुरी
(ख) राजगीर
(ग) गया
उत्तर-
(ख) राजगीर

प्रश्न (iv)
ककोलत प्रसिद्ध है
(क) ठंडे जल के लिए
(ख) गर्म जल के लिए
(ग) मंदिरों के लिए
उत्तर-
(क) ठंडे जल के लिए

प्रश्न (v)
जरासंध का अखाड़ा अवस्थित है
(क) राजगीर में
(ख) नालंदा में
(ग) बोध गया में
उत्तर-
(क) राजगीर में

प्रश्न 4.
बताइये –

प्रश्न (क)
बोध गया क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर-
बोधगया में ही महाबोधि मंदिर है। यह मंदिर विश्व के धरोहरों में जाना जाता है। इसी मंदिर में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा है। बोधिवृक्ष इसी वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बद्ध कहलाने लगे। इन्हीं सभी जगहों पर भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया।

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प्रश्न (ख)
अपने स्कूल से आप राजगीर जाएँगे तो रास्ते में आपको क्या-क्या नजर आएगा?
उत्तर-
अपने स्कूल से राजगीर जाएँगे तो रास्ते में हमें सर्वप्रथम महाबोधि मंदिर के दर्शन होंगे और रास्ते में बोधिवृक्ष जहाँ वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे थे।

फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपदं’ मंदिर है। राजगीर के गर्म जलकुंड है। मनियारमठ और जरासंध का अखाड़ा, शांति नजर आएंगे।

प्रश्न (ग)
विष्णुपद मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ? इसमें किस तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है?
उत्तर-
विष्णपद मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया था। यह काले पत्थरों से बनवाया गया है। यहाँ भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं।

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प्रश्न (घ)
राजगीर में गर्म जल कुंड हैं क्यों?
उत्तर-
राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता रहता है। इसलिए राजगीर में गर्म जलकुंड हैं। राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पाव धोने से सभी की थकावट मिट जाती है।

प्रश्न (ङ)
जलमंदिर क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
जलमंदिर पावापुरी में स्थित है। यह तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर हैं। हमलोगों ने भगवान महावीर के दर्शन भी किये हैं। तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप में मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए जलोदर अपना खास योगदान के द्वारा ही जलोदर मनमोहक और आकर्षित लगता है। इसी वजह से जलमंदिर दुनिया में सुप्रसिद्ध है।

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-1 Notes

पाठ का सारांश

बिहार दर्शन में बिहार के ऐतिहासिक स्थलों के बारे में हमें जानकारी मिलती है। इसकी जानकारी के लिए मध्य विद्यालय में पढ़ने वाली रेशमा अपने वर्ग शिक्षक और छात्रों के साथ बोध गया, राजगीर, नालंदा और पावापुरी के ऐतिहासिक स्थलों को देखने जा रहे हैं। शिक्षक ने बच्चों को अपने साथ कलम, डायरी, पानी की बोतलों को रखकर सुबह 6 बजे सब कोई चलें।

‘बस के द्वारा सबसे पहले ‘बोध गया’ पहँच गये। सबसे पहले बच्चों ने महाबोधि मंदिर देखे । इस मंदिर को विश्व धरोहरों में ध्यानरत बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन के बाद सभी ने मंदिर के पीछे स्थित बोधिवृक्ष को देखा । इसी वृक्ष के नीचे गौतम को ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे गौतम बुद्ध कहलाने लगे। बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर कई बौद्ध भिक्षु भगवान बुद्ध की आराधना कर रहे थे। इस मंदिर के बगल में स्थित मुचालिद सरोवर में मछलियों को दाना खिलाये ।

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सरोवर में बहुत सारी मछलियाँ थीं। इतने सारे मछलियों को देखकर मन आनन्द से भर गया। मंदिर के ईद-गिर्द कई देशों ने भगवान बुद्ध की मंदिरें भी हैं। – इसके आगे फल्गू नदी के तट पर गया में स्थित ‘विष्णुपद’ मंदिर देखने के लिये गये । यहाँ भगवान विष्णु जी के पदचिह्न हैं।

इसी मंदिर को काले पत्थरों से रानी अहिल्याबाई ने बनवाया था। वहाँ के पुजारियों ने बताया कि प्रतिवर्ष आश्विन महीने के कृष्णपक्ष में यहाँ पितृपक्ष का मेला पन्द्रह दिनों के लिए लगता है। देश के कोने-कोने से आकर लोग पूर्वजों के मोक्ष प्राप्ति हेतु पिंडदाम करते हैं। विष्णुपद से सभी बच्चे राजगीर के गर्म जलकुंड में हाथ-पांव धोने से सभी की थकावट दूर हो गई। राजगीर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इन पहाड़ियों में गंधक है। इसलिए यहाँ से गर्म पानी का स्राव होता है। सभी ने मनियारमठ, जरासंध का अखाड़ा भी देखा और शांति स्तूप देखने पहाड़ी पर चले गये।

यह शांति स्तूप पहाड़ी पर स्थित सफेद गुम्बदाकार स्तूप है जिसकी चारों दिशाओं में बुद्ध की चार प्रतिमाएँ अलग-अलग मुद्राओं में दिखाई पड़ती हैं। पहाड़ी पर जाने के लिए रज्जूमार्ग से पहुँचे । पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित शांति स्तूप अद्भुत दृश्य प्रदान करता है। यहाँ से चारों ओर पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं। यहीं मगध के राजा अजातशत्रु और बुद्ध के बारे में शिक्षक ने बताया ।

राजगीर से आगे नालंदा पहुँचे । नालंदा में 5वीं सदी में स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर अवशेष रूप में दिखाई दिया। यही विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान के अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र के रूप में विख्यात था।

यहाँ नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा होती है। देश-विदेश से लगभग 10 हजार छात्र यहाँ रहकर अध्ययन करते थे। बच्चों ने पुस्तकालय, छात्रावास को देखा।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 9 बिहार दर्शन-1

यहीं पर एक संग्रहालय में कई दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ और मतियाँ भी देखीं। यहीं से सब पावापुरी स्थित जलमंदिर देखने गये। तालाब के बीचों-बीच स्थित जलमंदिर में भगवान महावीर के दर्शन किये । तालाब में मछलियों और कमल के फूल प्राकृतिक रूप से मंदिर की शोभा देखने लायक थी। यही वह जगह है जहाँ भगवान महावीर ने शरीर त्यागकर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। इस प्रकार हमलोगों ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और पावापुरी के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। एक मनोरम प्राकृतिक स्थलों को देखकर मन आनन्दित हो गया । इसके आगे नवादा जिला के ककोलत जलप्रपात अपने ठंडे जल के लिए प्रसिद्ध है।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

BSEB Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण InText Questions and Answers

अनुच्छेद 5.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
क्या डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं? तुलना करके पता कीजिए।
उत्तर:
हाँ, डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तंभ में भी पाए जाते हैं।
उदाहरणार्थः
Li, Na, K डॉबेराइनर के त्रिक हैं जो न्यूलैंड्स के अष्टक के ‘रे’ स्तंभ में उपस्थित हैं।

प्रश्न 2.
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
1. उस समय ज्ञात सभी तत्त्वों का वर्गीकरण डॉबेराइनर के त्रिक के आधार पर नहीं हो सका।
2. डॉबेराइनर केवल तीन तत्त्वों के त्रिक को उस समय पहचान सके। यही कारण है कि डॉबेराइनर के त्रिक को मान्यता प्राप्त नहीं हुई।

प्रश्न 3.
न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धांत की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:

  1. यह नियम केवल Ca तक के परमाणु भार वाले तत्त्वों को वर्गीकृत कर पाता है। इसके बाद आठवाँ तत्त्व प्रथम तत्त्व से समानता प्रदर्शित नहीं करता है।
  2. न्यूलैंड्स ने माना कि केवल 56 तत्त्व ही सम्भव हैं, अन्य तत्त्वों का आविष्कार नहीं हो सकता।
  3. न्यूलैंड्स के अष्टक में कुछ ऐसे भी तत्त्व हैं जिनके गुणों में समानता नहीं पाई जाती है।

अनुच्छेद 5.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी का उपयोग कर निम्नलिखित तत्त्वों के ऑक्साइड के सूत्र का अनुमान कीजिए: K, C, Al, Si, Ba
3TR
K = K2O; C=CO2 ; Al= Al2O3; Si = SiO2; Ba = BaO

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 2.
गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन-कौन से तत्त्वों का पता चला है जिसके लिए मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-:
1. स्कैंडियम तथा
2. जर्मेनियम।

प्रश्न 3.
मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन-सा मापदंड अपनाया?
उत्तर:

  1. उन्होंने तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाया।
  2. उन्होंने समान गुण वाले तत्त्वों को एक समूह में रखने का प्रयास किया।
  3. उन्होंने तत्त्वों के हाइड्राइडों एवं ऑक्साइडों के अणु-सूत्रों को एक आधारभूत गुण मानकर तत्त्वों का वर्गीकरण किया।

प्रश्न 4.
आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
उत्तर:
अक्रिय या उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में रखा गया; क्योंकि –

  1. ये गैसें बहुत ही अक्रियाशील होती हैं एवं इनकी खोज बहुत बाद में हुई।
  2. इन गैसों को एक नये समूह में बिना आवर्त सारणी को छेड़-छाड़ किए हुए रखा गया।

अनुच्छेद 5.3 पर आधारित

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया?
उत्तर:

  1. आधुनिक आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का प्रथम समूह में तर्कसंगत स्थान है; क्योंकि हाइड्रोजन विद्युत धनात्मक होती है।
  2. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु संख्या के क्रम में रखा गया है इसलिए किसी तत्त्व के समस्थानिकों को तत्त्व के साथ उसी स्थान पर आवर्त सारणी में रखा गया है।
  3. भारी एवं हल्के तत्त्वों का क्रम भी आधुनिक आवर्त सारणी में सही है जो मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में नहीं था।
  4. अक्रिय गैसों का स्थान भी तर्कसंगत 18वें समूह में है।

प्रश्न 2.
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रियाशीलता दिखाने वाले दो तत्त्वों के नाम लिखिए? आपके चयन का क्या आधार है?
उत्तर:
कैल्सियम (Ca) एवं बेरियम (Ba); क्योंकि –

  1. ये दोनों तत्त्व मैग्नीशियम समूह के हैं।
  2. इन दोनों तत्त्वों में मैग्नीशियम की तरह 2 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 3.
निम्न के नाम बताइए –
(a) तीन तत्त्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्त्वों जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(c) तीन तत्त्वों जिनका बाहरी कोश पूर्ण हो।
उत्तर:
(a) Li, Na, K (लीथियम, सोडियम, पोटैशियम)
(b) Mg, Ca (मैग्नीशियम, कैल्सियम)
(c) हीलियम (He), निऑन (Ne), आर्गन (Ar)।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 4.
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम, ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्त्वों के परमाणुओं में कोई समानता
(b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है जबकि निऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यंत कम है। इनके परमाणुओं में कोई समानता है?
उत्तर:
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम धातुओं की बाह्यतम कक्षा में केवल एक इलेक्ट्रॉन है।
(b) इन दोनों तत्त्वों की बाह्यतम कक्षा इलेक्ट्रॉनों से पूर्णतः भरी है।

प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त सारणी में पहले दस तत्त्वों में कौन सी धातुएँ हैं?
उत्तर:
केवल लीथियम, बेरीलियम एवं बोरॉन धातुएँ हैं।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्त्व में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण की विशेषता है? Ga Ge As Se Be
उत्तर:
Be में अधिकतम धात्विक लक्षण है; क्योंकि शेष अन्य तत्त्व आवर्त सारणी में दाईं ओर रखे गए हैं। आवर्त सारणी में बाईं तरफ वाले तत्त्व धातु एवं दाईं तरफ वाले तत्त्व अधातु होते हैं।

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर, प्रवृत्तियों के बारे में कौन- सा कथन असत्य है?
(a) तत्त्वों की धात्विक प्रकति घटती है।
(b) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।
(d) इनके ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
उत्तर:
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।

प्रश्न 2.
तत्त्व X, XCl2 सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्त्व संभवतः किस समूह के अंतर्गत होगा?
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
उत्तर:
(b) Mg

प्रश्न 3.
किस तत्त्व में
(a) दो कोश हैं तथा दोनों इलेक्ट्रॉनों से पूरित हैं?
(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है?
(c) कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं?
(d) कुल दो कोश हैं तथा संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन हैं?
(e) दूसरे कोश में पहले कोश से दोगुने इलेक्ट्रॉन हैं?
उत्तर:
(a) निऑन (Ne) → (2, 8)
(b) मैग्नीशियम (Mg) → (2, 8, 2)
(c) सिलिकॉन (Si) → (2, 8, 4)
(d) बोरॉन (B) → (2, 3)
(e) कार्बन (C) → (2, 4)

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प्रश्न 4.
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन के स्तंभ के सभी तत्त्वों के कौन-से गुणधर्म समान
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तंभ के सभी तत्त्वों के कौन-से गुणधर्म समान हैं?
उत्तर:
(a) ये सभी धातुएँ हैं और इनके गुणधर्म निम्नवत् हैं –

  1. ये सभी विद्युत के सुचालक होते हैं।
  2. ये दोनों आघातवर्ध्य होते हैं।

(b) ये सभी अधातुएँ हैं और इनके गुणधर्म निम्नवत् हैं –

  1. ये सभी विद्युत के अचालक होते हैं।
  2. ये सभी भंगुर होते हैं।

प्रश्न 5.
एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) इस तत्त्व की परमाणु संख्या क्या है?
(b) निम्न में किस तत्त्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु संख्या कोष्ठक में दी गई है)
N(7) F(9) Ar(18)
उत्तर:
(a) परमाणु संख्या = 17
(b) F (9) के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में तीन तत्त्व A, B तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है –
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अब बताइए कि
(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम?
(c) C का साइज़ B से बड़ा होगा या छोटा? ।
(d) तत्त्व A, किस प्रकार के आयन, धनायन या ऋणायन बनाएगा?
उत्तर:
(a) अधातु।
(b) C कम अभिक्रियाशील है।
(c) C का आकार B से छोटा होगा।
(d) A ऋणायन बनाएगा।

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प्रश्न 7.
नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्त्व हैं। इन दोनों तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन सा तत्त्व अधिक ऋण विद्युत होगा और क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्त्व होगा, क्योंकि फॉस्फोरस एवं नाइट्रोजन दोनों अधातुएँ हैं। फॉस्फोरस समूह में नाइट्रोजन से नीचे आता है। अतः नाइट्रोजन की विद्युत-ऋणात्मकता फॉस्फोरस से ज्यादा होगी। समूह में ऊपर से नीचे आने पर तत्त्व की विद्युत-ऋणात्मकता घटती है। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
नाइट्रोजन-2, 5
फॉस्फोरस-2, 8, 5

प्रश्न 8.
तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्व की स्थिति से क्या संबंध है? (2016)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तत्त्वों की आवर्त सारणी में स्थिति से सम्बन्धित होता है। बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस तत्त्व की समूह संख्या को सूचित करती है तथा बाह्यतम कोश संख्या उस तत्त्व की आवर्त को सूचित करती है।

प्रश्न 9.
आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु संख्या 20 ) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु संख्या वाले तत्त्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं?
उत्तर:
परमाणु संख्या 19 एवं 21 वाले तत्त्वों के भौतिक गुण कैल्सियम के समान होते हैं तथा परमाणु संख्या 12 एवं 38 वाले तत्त्वों के रासायनिक गुण कैल्सियम के समान होते हैं।

प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में तत्त्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर:

  1. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है एवं आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।
  2. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों का कोई स्थान नहीं था किन्तु आधुनिक आवर्त सारणी में अक्रिय गैसों को 18वें समूह में रखा गया है।
  3. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में 8 समूह हैं जबकि आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह है।
  4. आधुनिक आवर्त सारणी में मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के सारे दोषों को हटा दिया गया है।

Bihar Board Class 10 Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्ती वर्गीकरण का आधार है – (2012)
(a) परमाणु भार
(b) परमाणु क्रमांक
(c) संयोजकता
(d) रासायनिक क्रियाशीलता
उत्तर:
(b) परमाणु क्रमांक

प्रश्न 2.
तृतीय आवर्त का तत्त्व है -(2011)
(a) 11Na
(b) 38Sr
(c) 5B
(d) 19K
उत्तर:
(a) 11Na

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प्रश्न 3.
Li विकर्ण सम्बन्ध दर्शाता है – (2013, 14, 17)
(a) Na के साथ
(b) K के साथ
(c) Al के साथ
(d) Mg के साथ
उत्तर:
(d) Mg के साथ।

प्रश्न 4.
निरूपक (प्रारूपिक) तत्त्व है – (2015, 17)
(a) Na
(b) K
(c) Sc
(d) He
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में क्षारीय धातु है – (2015)
(a) Na
(b) Be
(c) Al
(d) Zn
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 6.
किस तत्त्व का ऑक्साइड उभयधर्मी है?
(a) C का
(b) Na का
(c) Mg का
(d) Sn का
उत्तर:
(d) Sn का

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प्रश्न 7.
उभयधर्मी ऑक्साइड है – (2014)
(a) Na2O
(b) MgO
(c) Al2O3
(d) P2O5
उत्तर:
(c) Al2O3

प्रश्न 8.
एक तत्त्व M के कार्बोनेट का सूत्र MCO3 है। इसमें क्लोराइड का सूत्र होगा (2017)
(a) MCl2
(b) MCl3
(c) MCl
(d) M2Cl
उत्तर:
(a) MCl2

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अम्लीय ऑक्साइड है – (2014, 15)
(a) Al2O3
(b) K2 O
(c) MgO
(d) P2 O5
उत्तर:
(d) P2O5

प्रश्न 10.
तत्त्व जो क्षारीय ऑक्साइड बनाता है, का परमाणु क्रमांक है – (2016)
(a) 18
(b) 17
(c) 14
(d) 19
उत्तर:
(d) 19

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प्रश्न 11.
एक तत्त्व के ऑक्साइड का सूत्र MO है। उसके नाइट्रेट का सूत्र होगा (2013)
(a) MNO3
(b) M(NO3)2
(c) M2NO3
(d) M3(NO2)2
उत्तर:
(b) M(NO3)2

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्त्व अधिक विद्युत धनी है? (2009, 16)
(a) Na
(b) K
(c) Mg
(d) F
उत्तर:
(b) K

प्रश्न 13.
निम्न तत्त्व में किसकी विद्युत ऋणात्मकता सबसे कम है? (2015)
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
उत्तर:
(a) Na

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्त्व है? (2016, 18)
(a) I
(b) Na
(c) Br
(d) Mg
उत्तर:
(c) Br

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प्रश्न 15.
मुद्रा धातु है – (2013, 14)
(a) Zn
(b) Sn
(c) Pb
(d) Cu
उत्तर:
(d) Cu

प्रश्न 16.
यूरेनियम है – (2016)
(a) क्षार धातु
(b) अधातु
(c) स्थायी तत्त्व
(d) अन्तः संक्रमण धातु
उत्तर:
(d) अन्त: संक्रमण धातु

प्रश्न 17.
कौन-सा युग्म उपधातु है?
(a) Sn, As
(b) As, Sb
(c) Ge, Sn
(d) Ge, As
उत्तर:
(b) As, Sb

प्रश्न 18.
एक तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p63s23p5 है। आवर्त-सारणी में इसका स्थान होगा (2009)
(a) आवर्त-3, वर्ग VA
(b) आवर्त-5, वर्ग IIIA
(c) आवर्त-3, वर्ग VIIA
(d) आवर्त-2, वर्ग VIIA
उत्तर:
(c) आवर्त-3, वर्ग VIIA

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त नियम लिखिए। (2009, 11, 13, 15, 16, 17)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 2.
मेन्डेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में क्या मौलिक अन्तर है?
उत्तर:
मेन्डेलीफ का आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु भारों पर आधारित है, जबकि आधुनिक आवर्त नियम तत्त्वों के परमाणु क्रमांकों पर आधारित है।

प्रश्न 3.
क्षारीय मृदा तत्त्व क्या होते हैं ? या क्षारीय मृदा तत्त्व पर टिप्पणी लिखिए। (2009)
उत्तर:
II A समूह के तत्त्वों को क्षारीय मृदा तत्त्व कहते हैं; क्योंकि इस समूह के तत्त्वों के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं तथा मृदा के समान अगलनीय होते हैं।

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प्रश्न 4.
किसी एक क्षारीय ऑक्साइड तथा उदासीन ऑक्साइड का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
क्षारीय ऑक्साइड-MgO, उदासीन ऑक्साइड-COl

प्रश्न 5.
किस वर्ग के ऑक्साइड प्रबल क्षारीय एवं किस वर्ग के प्रबल अम्लीय होते हैं? (2013)
उत्तर:
IA वर्ग के ऑक्साइड प्रबल क्षारीय तथा VII A वर्ग के ऑक्साइड प्रबल अम्लीय होते हैं।

प्रश्न 6.
ns2p3 सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्त्वों का आधुनिक आवर्त-सारणी में समूह निर्धारित कीजिए और इनके एक ऑक्सी-अम्ल का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में इनका समूह VA होगा तथा इनके ऑक्सी-अम्ल का सूत्र HMO, होगा, जहाँ M, VA समूह का कोई तत्त्व है।

प्रश्न 7.
आवर्त-सारणी के किस ब्लॉक में नाइट्रोजन को रखा गया है? कारण देते हुए समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन को आवर्त-सारणी के p-ब्लॉक में रखा गया है; क्योंकि नाइट्रोजन में अन्तिम इलेक्ट्रॉन p-ऑर्बिटल में भरते हैं।

प्रश्न 8.
परमाणु क्रमांक 16 वाले तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, आवर्तसारणी में स्थान एवं इसके हाइड्राइड का सूत्र लिखिए। (2009)
उत्तर:
इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 6 है। चूंकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में तीन आवर्त हैं तथा अन्तिम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः यह तृतीय आवर्त के षष्ठम समूह में स्थित है। इसके हाइड्राइड का सूत्र H2S है।

प्रश्न 9.
परमाणु क्रमांक 19 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखकर तत्त्व का आवर्त एवं वर्ग संख्या तथा संयोजकता बताइए। (2015)
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 19 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न होगा 2, 8, 8, 1 चूँकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 4 आवर्त शामिल हैं तथा अन्तिम कक्षा में 1 इलेक्ट्रॉन है। अत: यह चतुर्थ आवर्त व प्रथम वर्ग का तत्त्व है। इसकी संयोजकता 1 होगी।

प्रश्न 10.
VA समूह के दो उपधातुओं का आवर्त में स्थान एवं नाम लिखिए।
उत्तर:
VA समूह के दो उपधातु आर्सेनिक व बिस्मथ हैं, जिनका आवर्त-सारणी में आवर्त क्रमशः चौथा व पाँचवाँ है।

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प्रश्न 11.
आवर्त-सारणी के VII A समूह के चार तत्त्वों के नाम व संकेत लिखिए।
उत्तर:
फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I)।

प्रश्न 12.
11Na तथा 12Mg में किस तत्त्व का आयनन विभव मान अधिक होगा ? कारण दीजिए। (2009)
उत्तर:
Mg का आयनन विभव मान अधिक होगा क्योंकि आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है और परमाणु का आकार कम होने लगता है जिससे परमाणु के आयनीकरण में अधिक ऊर्जा प्रयुक्त होती है जिससे आयनन विभव का मान बढ़ जाता है।

प्रश्न 13.
आवर्त-सारणी में एक ही आवर्त में परमाणु के आकार किस प्रकार परिवर्तित होते हैं व क्यों ?
उत्तर:
आवर्त-सारणी में एक ही आवर्त में परमाणु का आकार बायीं से दायीं ओर क्रमिक रूप से घटता है क्योंकि परमाणु की एक ही कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से उन पर नाभिक का आकर्षण बल बढ़ता जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
डोबेराइनर के त्रिक सिद्धान्त पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2016)
उत्तर:
जर्मन प्रोफेसर डोबेराइनर ने सन् 1829 ई० में समान गुण-धर्म वाले तीन-तीन तत्त्वों के समूह बनाये। उन्होंने कहा – “यदि समान गुण वाले तत्त्वों को एक ही समूह में बढ़ते परमाणु भार के क्रम में रखा जाये तो पहले तथा तीसरे तत्त्व के परमाणु भारों का माध्य बीच के तत्त्व के परमाणु भार के बराबर होता है।” जैसे –
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प्रश्न 2.
न्यूलैण्ड का अष्टक नियम क्या है ? स्पष्ट कीजिए (2010, 16)
उत्तर:
न्यूलैण्ड ने सन् 1863 ई० में एक अष्टक नियम की स्थापना की। इस नियम के अनुसार – “यदि तत्त्वों को बढ़ते परमाणु भारों के क्रम में लिखा जाये तो हर आठवाँ तत्त्व अपने से पहले तत्त्व के समान गुणों वाला होगा।” यह नियम संगीत के अष्टक नियम से समानता रखता है। जैसे कि संगीत में आठवीं ध्वनि पहली ध्वनि के समान होती है, उसी प्रकार की समानता तत्त्वों में पायी जाती है।
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Li, Na और K के गुणों में समानता पायी जाती है; क्योंकि ये एक-दूसरे से आठवें तत्त्व हैं। इसी प्रकार Be, Mg और Ca; B, AI; C, Si; N, P; O, S और F, Cl के गुणों में समानताएँ पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
मेन्डेलीफ का आवर्त नियम क्या है? इसकी व्याख्या कीजिए। (2011, 13, 17)
उत्तर:
इस नियम के अनुसार, तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाण भारों के आवर्ती फलन होते हैं, अर्थात् तत्त्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते क्रम में रखने पर समान गुणों वाले तत्त्व एक नियमित अन्तराल के बाद आते हैं।

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प्रश्न 4.
विकर्ण सम्बन्ध पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2014, 17) या विकर्ण सम्बन्ध क्या है ? विकर्ण सम्बन्ध को प्रदर्शित करने वाले दो तत्त्वों का उल्लेख कीजिए। (2009, 15)
उत्तर:
आवर्त सारणी में दूसरे आवर्त के तत्त्व अगले समूह तथा तीसरे आवर्तके तत्त्वों के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करते हैं। चूँकि ये तत्त्व विकर्ण पर स्थित होते हैं; अतः इनके इस सम्बन्ध को विकर्ण सम्बन्ध कहते हैं –
उदाहरणार्थ:
दूसरे आवर्त के पहले समूह का तत्त्व लीथियम तीसरे आवर्त के द्वितीय समूह के तत्त्व मैग्नीशियम के साथ गुणों में समानता प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 5.
प्रारूपिक तत्त्व क्या हैं? इनकी विशेषताएँ लिखिए। (2009)
या प्रारूपिक तत्त्वों के मुख्य लक्षण लिखिए। इनके दो उदाहरण दीजिए।
या प्रारूपिक या निरूपक तत्त्व पर टिप्पणी लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
आवर्त-सारणी के तीसरे आवर्त के सभी तत्त्व प्रारूपिक तत्त्व कहलाते हैं। ये तत्त्व अपने-अपने समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन तत्त्वों के गुण इनके समूह की संयोजकता व विद्युत रासायनिक लक्षणों को प्रकट करते हैं। ये तत्त्व अपने समूह के A तथा B उपवर्गों के मध्य सेतु का कार्य करते हैं। ये तत्त्व किसी एक उपसमूह के तत्त्व से अधिक समानता रखते हैं। I, II और III वर्ग के प्रारूपिक तत्त्व ‘A’ उपवर्ग के तत्त्वों के गुणों से अधिक समानता रखते हैं, जबकि V, VI व VII वर्ग के प्रारूपिक तत्त्व इन वर्गों के ‘B’ उपवर्गों के तत्त्वों के गुणों से अधिक समानता रखते हैं। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि Na, Mg, AI, Si, P, S व Cl आदि प्रारूपिक तत्त्व हैं।
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प्रश्न 6.
दीर्घाकार आवर्त-सारणी द्वारा मेन्डेलीफ की संशोधित आवर्त-सारणी के दोषों को किस प्रकार दूर किया गया है? (2012)
उत्तर:
दीर्घाकार आवर्त सारणी द्वारा मेन्डेलीफ की आधुनिक संशोधित सारणी के बहुत से दोष दूर हो गये हैं।
उदाहरणार्थ:

  1. मेन्डेलीफ की आवर्त-सरणी में असमान गुणों वाले तत्त्वों को एक ही स्थान पर रखा गया था। उदाहरणार्थ: मेन्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में H, Li, Na, K, Rb, Cs तथा Fr को IA समूह में व Cu, Ag तथा Au को IB समूह में एक साथ एक ही ऊर्ध्वाधर कॉलम में रखा गया था, जबकि इनके गुणों में बहुत कम समानता होती है। दीर्घाकार आवर्त-सारणी में इन तत्त्वों को अलग-अलग स्थानों पर क्रमशः IA व IB उपवर्गों में रखा गया है।
  2. मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी में संक्रमण तत्त्वों को अलग-अलग स्थान पर रखा गया था। परन्तु दीर्घाकार आवर्त-सारणी में संक्रमण तत्त्व सारणी के मध्य में एक साथ रखे गये हैं।
  3. इस सारणी में प्रबल धात्वीय तत्त्वों को संक्रमण तत्त्वों के बायीं ओर तथा प्रबल अधात्वीय तत्त्वों को संक्रमण तत्त्वों के दायीं ओर रखा गया है।
  4. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर सभी लैन्थेनाइड व ऐक्टिनाइड तत्त्वों को आवर्त-सारणी के नीचे दो क्षैतिज पंक्तियों में रखा जाना उचित है। चूँकि इन दोनों श्रेणियों के तत्त्वों के इलेक्ट्रानिक विन्यासों में समानता है, अत: उन्हें एक स्थान पर एक साथ रखे जाना उचित है।

प्रश्न 7.
आवर्त-सारणी के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए कि Na2O, MgO, Al2O3, SiO2 में सबसे अधिक बेसिक (क्षारीय) गुण वाला ऑक्साइड कौन-सा है?
या निम्नलिखित में से किस तत्त्व का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा और क्यों? Na, Mg, A1 एवं si
उत्तर:
दिये गये सभी ऑक्साइड तृतीय आवर्त के (क्रमशः बायें से दायें चलने पर) तत्त्वों के ऑक्साइड हैं। चूँकि आवर्त में बायें से दायें चलने पर ऑक्साइडों का क्षारीय गुण घटता है। अत: Na2O सबसे अधिक बेसिक (क्षारीय) गुण वाला ऑक्साइड है।

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प्रश्न 8.
एक तत्त्व M आवर्त सारणी के दूसरे समूह में है। उसके ऑक्साइड एवं क्लोराइड का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
तत्त्व M दूसरे समूह में है। अत: इसकी संयोजकता 2 होगी तथा इसके ऑक्साइड व क्लोराइड के सूत्र क्रमश: MO व MCl2 होंगे।

प्रश्न 9.
1. निम्न तत्त्वों को विद्युत ऋणात्मकता के बढ़ते क्रम में लिखिए
16S,15P,17Cl
2. निम्न में से किस तत्त्व का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा?
Na, Mg, Al, Si
उत्तर:
1. क्योंकि किसी आवर्त में बायें से दायें चलने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती जाती है। अत: दी गयी तत्त्वों की विद्युत ऋणात्मकता का बढ़ता हुआ क्रम निम्न प्रकार होगा
15P< 16S < 17Cl
2. Na का ऑक्साइड प्रबल क्षारीय होगा।

प्रश्न 10.
तत्त्व Mg आवर्त सारणी के द्वितीय समूह में है। यदि Mg का तुल्यांकी भार 12 है, तो तत्त्व का परमाणु भार ज्ञात करें। (2014)
हल:
चूँकि Mg आवर्त सारणी के द्वितीय समूह में है। अतः इसकी संयोजकता 2 होगी। परमाणु भार = संयोजकता x तुल्यांकी भार = 2 x 12 = 24

प्रश्न 11. 17Cl35 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए तथा आवर्त-सारणी में इसका स्थान भी लिखिए। या परमाणु क्रमांक 17 वाले तत्त्व का आवर्त सारणी में वर्ग तथा आवर्त लिखिए। (2013, 14, 15, 16, 17)
उत्तर:
17Cl35 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 7 चूँकि इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में 3 कोश सम्मिलित हैं तथा इसके अन्तिम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः 17Cl35 आवर्त-सारणी में तृतीय आवर्त के सप्तम A समूह में स्थित है।

प्रश्न 12.
परमाणु संख्या 36 वाले तत्त्व का नाम लिखिए तथा आवर्त सारणी में इसका आवर्त बताइए। (2016)
उत्तर:
परमाणु संख्या 36 वाले तत्त्व का नाम क्रिप्टॉन है तथा यह आवर्त सारणी के चतुर्थ आवर्त का तत्त्व है।

प्रश्न 13.
आवर्त तथा वर्ग में परमाणु त्रिज्या का परिवर्तन किस प्रकार होता है? समझाइए। (2013, 15)
उत्तर:
आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है। नाभिक में आवेश बढ़ने से यह इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक बल से खींचता है जिससे परमाणु का आकार घटता जाता है। वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर परमाणु आकार बढ़ता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में एक कोश बढ़ जाता है।

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प्रश्न 14.
संक्रमण तत्त्वों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2014, 18)
या संक्रमण तत्त्व किसे कहते हैं? दीर्घाकार आवर्त-सारणी में उनका स्थान लिखिए।
या संक्रमण तत्त्व क्या हैं? इनके मुख्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
मेन्डेलीफ ने केवल आठवें समूह के तत्त्वों को संक्रमण तत्त्व माना, परन्तु अब दीर्घाकार आवर्त सारणी में इस शब्द का प्रयोग उन सब तत्त्वों के लिए किया जाता है जो प्रारूपिक तत्त्वों से भिन्न होते हैं। इस प्रकार सभी B उपवर्गों तथा VIII समूह के तत्त्व संक्रमण तत्त्व हैं। संक्रमण तत्त्वों के निम्नलिखित अभिलाक्षणिक गुण होते हैं –

  1. ये रंगीन आयन बनाते हैं।
  2. ये उत्प्रेरक की तरह कार्य करते हैं।
  3. ये परिवर्ती (variable) संयोजकता प्रदर्शित करते हैं।
  4. ये संकीर्ण लवण बनाते हैं।
  5. इन तत्त्वों में समचुम्बकीयता पायी जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी के गुण तथा दोषों का उल्लेख कीजिए। (2011, 12, 13)
मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी (मूल) के लाभों का वर्णन कीजिए। (2017)
या मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के किन्हीं भी दो दोषों को लिखिए। (2017)
उत्तर:
मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के लाभ/गुण या उपयोगिताएँ इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –
1. तत्त्वों के गुणों के अध्ययन में सुविधा मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी से तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन सरल हो गया। चूँकि समान गुणों वाले तत्त्वों को एक ही समूह में रखा गया है, अत: किसी समूह के किसी एक तत्त्व के अध्ययन से उस समूह के अन्य तत्त्वों के गुणों का पर्याप्त सीमा तक ज्ञान हो जाता है।

2. तत्त्वों का सही परमाणु भार ज्ञात करने में सहायता सन् 1869 से पहले बेरीलियम का परमाणु भार 13.5 माना जाता था। बेरीलियम के गुण मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के द्वितीय समूह के तत्त्व के गुणों के समान हैं। अत: मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में बेरीलियम द्वितीय समूह में स्थित होना चाहिए।

इस स्थिति में बेरीलियम का परमाणु भार लीथियम के परमाणु भार 7 तथा बोरॉन के परमाणु भार 11 के मध्य होना चाहिए। इससे मेन्डेलीफ ने निष्कर्ष निकाला कि बेरीलियम का परमाणु भार 13.5 नहीं है बल्कि 9.4 है। इसके बाद प्रयोगात्मक परीक्षणों द्वारा यह सिद्ध हो गया कि बेरीलियम का परमाणु भार लगभग 9 है। इसी प्रकार मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी से कुछ अन्य तत्त्वों के सही परमाणु भार ज्ञात करने में सहायता मिली।

Bihar Board Class 10 Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

3. नये तत्त्वों की खोज में सहायता मेन्डेलीफ की आवर्त-सारणी में कुछ स्थान रिक्त छोड़ दिये गये। ये रिक्त स्थान उन तत्त्वों से सम्बन्धित थे जिनकी खोज तब तक नहीं हुई थी। इन अज्ञात तत्त्वों के गुणों तथा परमाणु भारों की भविष्यवाणी कर दी गई थी। नये तत्त्वों की खोज के साथ-साथ इन रिक्त स्थानों की पूर्ति होती चली गयी तथा उनके गुण तथा परमाणु भार पहले की तत्त्वों का आवर्त वर्गीकरण 99 गयी भविष्यवाणी के अनुरूप थे जिससे इनकी खोज की पुष्टि हुई। स्कैण्डियम (Sc, परमाणु भार = 44.9), गैलियम (Ga, परमाणु भार = 69.7) तथा जर्मेनियम (Ge, परमाणु भार = 72.6) इसके उदाहरण हैं। इस प्रकार मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी से नये तत्त्वों की खोज तथा अनुसन्धान में सहायता मिली।

मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी के दोष इसके प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं –
1. अधिक परमाणु भार वाले तत्त्वों का कम परमाणु भार वाले तत्त्वों से पहले रखे जाना मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में सभी तत्त्वों के परमाणु भारों के प्रयोगों द्वारा स्थापित मानों को रखने पर यह पाया गया कि कहीं-कहीं परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में परिवर्तन हो जाता है।
उदाहरणार्थ:
(i) मेन्डेलीफ ने टेल्यूरियम (Te) का परमाणु भार 125 तथा आयोडीन (I) का परमाणु भार 127 मानकर टेल्यूरियम को आयोडीन से पहले रखा। प्रयोगों द्वारा यह स्थापित हो गया कि टेल्यूरियम का परमाणु भार 127.6 है तथा आयोडीन का परमाणु भार 126.9 है। अत: ये दो तत्त्व मेन्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में न होकर घटते हुए क्रम में हैं।

(ii) मेन्डेलीफ ने कोबाल्ट (Co) का परमाणु भार 59 माना तथा निकिल (Ni) का परमाणु भार 59 ही मानकर कोबाल्ट को निकिल से पहले रखा। प्रयोगों द्वारा स्थापित कोबाल्ट तथा निकिल के परमाणु भार क्रमश: 58.933 तथा 58.71 हैं। अतः ये दो तत्त्व भी मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में न होकर घटते हुए क्रम में हैं। मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में इस प्रकार के परिवर्तन मेन्डेलीफ के मूल आवर्त नियम के विपरीत हैं।

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2. अनेक नये तत्त्वों के लिए उचित स्थान का अभाव अनेक नये तत्त्वों की खोज के बाद उनको मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में उचित स्थान नहीं मिल पाया; या तो उन्हें परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में रखा जा सकता था; या उन्हें समान गुणों वाले तत्त्वों के समूह में रखा जा सकता था लेकिन ऐसा स्थान नहीं दिया जा सकता था कि परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम के साथ-साथ वे समान गुणों वाले तत्त्वों के समूह में भी हों। उदाहरणार्थ अक्रिय गैसें, दुर्लभ-मृदा तत्त्व आदि।

3. समस्थानिकों तथा समभारिकों का स्थान समस्थानिकों तथा समभारिकों की खोज के बाद यह स्पष्ट हो गया कि तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं होता है। समस्थानिकों के परमाणु भार भिन्न होते हैं, परन्तु उनके गुण समान होते हैं। समभारिकों के परमाणु भार समान होते हैं, परन्तु उनके गुण भिन्न होते हैं। अतः मेन्डेलीफ की मूल आवर्त-सारणी में समस्थानिकों तथा समभारिकों को कोई स्थान नहीं दिया जा सकता है।

4. तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु क्रमांक है परमाणु संरचना व रेडियोऐक्टिवता की खोज के बाद यह स्थापित हो गया कि तत्त्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं वरन् परमाणु क्रमांक है; अतः तत्त्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में रख कर उनको वर्गीकृत करने का कोई औचित्य (justification) नहीं है।

प्रश्न 2
मेन्डेलीफ की आधुनिक संशोधित आवर्त-सारणी में आवर्तों के सामान्य लक्षण लिखिए।
या आवर्त-सारणी में आवर्तों के चार मुख्य लक्षण लिखिए। (2011, 16)
या आवर्त-सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर निम्नलिखित गुणों में क्या परिवर्तन होता है ?

  1. विद्युत धनात्मक गुण
  2. धात्विक गुण
  3. ऑक्साइडों का क्षारीय गुण
  4. आयनन विभव। (2009, 15)

या आवर्त-सारणी के द्वितीय/तृतीय आवर्त में निम्नलिखित गुणों में किस प्रकार परिवर्तन होता है ? समझाइए।

  1. धात्विक गुण
  2. हाइड्रोजन से सम्बन्धित संयोजकता। (2009, 13)

या किसी आवर्त के दो गुण लिखिए। (2011)
उत्तर:
मेन्डेलीफ ने आवर्त-सारणी में सात क्षैतिज (Horizontal) खाने बनाये, जिन्हें उन्होंने आवर्त कहा। उन्होंने प्रथम तीन आवर्तों को लघु आवर्त कहा, क्योंकि इनमें कम तत्त्व होते हैं। शेष आवर्तों को दीर्घ आवर्त कहा, क्योंकि इनमें अधिक तत्त्व होते हैं। इनके सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं
1. संयोजकता में क्रमिक परिवर्तन लघु आवों में बाईं से दाईं ओर बढ़ने पर तत्त्वों की हाइड्रोजन के प्रति संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है, तत्पश्चात् 4 से 1 तक घटती है। इन्हीं तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता 1 से 7 तक बढ़ती है; जैसे
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2. धात्विक गुण प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर धात्विक गुण घटता है तथा अधात्विक गुण बढ़ता जाता है; जैसे तृतीय आवर्त में,
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3. धन विद्युती गुण प्रत्येक आवर्त में बायें से दायें चलने पर तत्त्वों की धन विधुती प्रकृति क्रमश: घटती जाती है तथा ऋण विद्युती प्रकृति बढ़ती जाती है; जैसे-तृतीय आवर्त में,
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4. आयनन विभव लघु आवर्त में तत्त्वों का आयनन विभव (परमाणु से आयन बनने में लगने वाली ऊर्जा) बायीं से दायीं ओर बढ़ता जाता है।
5. घनत्व, क्वथनांक तथा गलनांक गुण यह आवर्त में बायीं से दायीं ओर बढ़ते हैं। आवर्त के मध्य में अधिकतम होकर पुनः घटते हैं।
6. ऑक्साइडों की अम्लीयता/क्षारीयता आवर्त में बायें से दायें चलने पर तत्त्वों के ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है तथा अम्लीय प्रकृति बढ़ती जाती है; जैसे तृतीय आवर्त के ऑक्साइडों में,
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प्रश्न 3.
आवर्त-सारणी में वर्गों के चार मुख्य लक्षण बताइए। (2016)
या मेन्डेलीफ की आधुनिक आवर्त सारणी में समूहों के सामान्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
संशोधित मेन्डेलीफ आवर्त-सारणी में I से लेकर VIII समूह तथा उसके उपरान्त 0 (शून्य) समूह है। इस प्रकार इस सारणी में 9 खड़े खाने या समूह हैं। एक ही समूह के तत्त्वों के गुणों में समानताएँ पायी जाती हैं। I समूह से VII समूह तक प्रत्येक समूह में कुछ तत्त्व बायीं ओर को (sub group ‘A’ में) तथा कुछ तत्त्व दायीं ओर को (sub group ‘B’ में) रखे गये हैं। प्रत्येक समूह के बायीं ओर के तत्त्वों के गुणों में परस्पर समानता पायी जाती है तथा दायीं ओर के तत्त्वों के गुणों में परस्पर समानता पायी जाती है।

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1. संयोजकता प्रत्येक समूह के सभी तत्त्वों की संयोजकता एक ही होती है। किसी वर्ग की संख्या उस वर्ग के तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता बताती है। जैसे-शून्य समूह के सभी तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता शून्य है, प्रथम समूह के सभी तत्त्वों की संयोजकता 1 है, द्वितीय समूह की 2, तृतीय समूह की 3, चतुर्थ की 4, पंचम की 5, छठे की 6 तथा सातवें समूह के सभी तत्त्वों की ऑक्सीजन के प्रति संयोजकता 7 है।

2. एक वर्ग के किसी उपवर्ग के सभी तत्त्वों के गुण धर्म समान होते हैं, परन्तु उसी वर्ग के दूसरे उपवर्ग के तत्त्वों से भिन्न होते हैं। उदाहरणार्थ – Li, Na, K, Rb, Cs आदि उपवर्ग I-A के तत्त्व हैं। इनके गुणधर्म लगभग समान हैं, परन्तु इनके गुणधर्म उपवर्ग I-B के तत्त्वों Cu, Ag, Au के गुणधर्मों से भिन्न होते हैं।

3. प्रत्येक समूह के गुणों में आधारभूत समानताएँ पायी जाती हैं, परन्तु समूह में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर तत्त्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन पाया जाता है।

4. प्रत्येक समूह में किसी तत्त्व के परमाणु भार से उसके नीचे वाले तत्त्व का परमाणु भार अधिक होता है।

5. प्रत्येक समूह के तत्त्वों में ऊपर से नीचे की ओर चलने पर तत्त्वों की आयनिक त्रिज्या में वृद्धि होती जाती है, जिससे धन विद्युती प्रकृति तथा धात्विकता में क्रमिक वृद्धि होती जाती है। धात्विकता में क्रमिक वृद्धि के कारण क्षार बनाने की प्रकृति में भी वृद्धि होती जाती है। आयनिक त्रिज्या में वृद्धि के साथ आयनिक विभव तथा विद्युत ऋणीयता तथा गलनांक में ह्रास
होता जाता है।

प्रश्न 4.
दीर्घाकार आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।(2011, 12, 13, 14, 16, 18)
या दीर्घाकार आवर्त-सारणी के चार गुण लिखिए। (2018)
उत्तर:
दीर्घ आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ –

  1. यह सारणी तत्त्वों के अधिक मौलिक गुण (परमाणु क्रमांक) पर आधारित है।
  2. इसमें तत्त्वों की स्थिति का सीधा सम्बन्ध उसके परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से है; अतः यह एक अति आदर्श प्रबन्ध है।
  3. इससे तत्त्वों के रासायनिक गुणों में समानता, भिन्नता तथा अन्य क्रमिक परिवर्तनों का स्वयं ही आभास हो जाता है।
  4. इस आवर्त सारणी को याद करना सरल है।
  5. इसमें उप-समूहों को बिल्कुल ही पृथक् कर दिया गया है तथा उप-समूहों के अन्तर्गत सभी तत्त्व परस्पर समानता दर्शाते हैं।
  6. इस सारणी में आगे और भी विभाजन किये गये हैं; जैसे सक्रिय तत्त्व, संक्रमण तत्त्व, विरल मृदा धातु (लैन्थेनाइड) व रेडियो-ऐक्टिव धातु (ऐक्टिनाइड), उपधातु आदि।
  7. जैसे कि मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में अनेक अनुमान गलत निकाले गये, इस सारणी में ऐसा कोई गलत अनुमान नहीं निकलता।
  8. संक्रमण तत्त्वों का शब्दार्थ यहाँ अति स्पष्ट रूप से प्रकट होता है तथा साथ-ही-साथ इनका सारणी में स्थान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के परिप्रेक्ष्य में सराहनीय है।
  9. विरल मृदा धातुओं (लैन्थेनाइड, 58-71) तथा रेडियोऐक्टिव धातुओं (ऐक्टिनाइड, 90-103) की सारणी में पृथक् स्थिति इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है जिससे इनके रासायनिक गुणों की समानता प्रदर्शित होती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Science प्रकाश Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) किसी भी वस्तु को देखने के लिए आवश्यक है –
(i) प्रकाश
(ii) अंधेरा
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv). इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) प्रकाश

(ख) प्रकाश गमन करता है –
(i) सीधी रेखा में
(ii) टेढ़ी रेखा में
(iii) उल्टी रेखा में
(iv) उपर्युक्त सभी में
उत्तर:
(i) सीधी रेखा में

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(ग) प्रकाश स्रोत से पहला दर्पण पर पड़नेवाली किरण कहलाती है –
(i) परावर्तन किरण
(ii) आपतित किरण
(iii) सीधी रेखा
(iv) उल्टी रेखा
उत्तर:
(ii) आपतित किरण

(घ) जब किसी अपारदर्शी वस्तु को प्रकाश में रखते हैं तो वस्तु के दूसरी ओर प्रकाश नहीं जा पाता फलतः वस्तु अपनी तरह की आकृति बनाती है, इसे कहते हैं –
(i) प्रकाश
(ii) छाया
(iii) प्रतिछाया
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ii) छाया

(ङ) छया दिखाई दे सकती है –
(i) दीवार पर
(ii) परदे पर
(iii) जमीन पर
(iv) उपर्युक्त सभी में
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी में

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

(क) लकड़ी का टुकड़ा …………….. है (पारदर्शी/अपारदर्शी/ पारभासी)
(ख) काँच का टुकड़ा ……………. है। (पारदर्शी/अपारदर्शी/ पारभासी)
(ग) दर्पण में …………….. बनता है। (बिम्ब/प्रतिबिम्ब)
(घ) प्रकाश ……………. रेखा में गमन करती है। (सीधी/ टेढ़ी)
(ङ) किसी वस्तु को देखते हैं…………….. के कारण (परावर्तन/पारदर्शिता)
उत्तर:
(क) अपारदर्शी
(ख) पारदर्शी
(ग) प्रतिबिम्ब
(घ) सीधी
(ङ) परावर्तन

प्रश्न 3.
पारदर्शी, अपारदर्शी तथा पारभासी वस्तुओं के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
पारदर्शी वस्तु – शीशा (ग्लास), जल, हवा।
अपारदर्शी वस्तु – पुस्तक, लकड़ी, पत्थर।
पारभासी वस्तु – घीसा हुआ शीशा, तेल लगा कागज, तेला

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प्रश्न 4.
क्या अंधेरे कमरे में दर्पण के सामने अपना प्रतिबिम्ब देख सकते हैं? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर:
किसी वस्तु के दृश्य होने या उनका प्रतिबिम्ब के बनने के लिए तीन तत्व का होना आवश्यक होता है-प्रकाश, परावर्तक सतह तथा बिम्ब। यहाँ दो तत्व उपस्थित हैं-दर्पण तथा बिम्ब। लेकिन प्रकाश उपस्थित नहीं है। इसलिए हम अपना प्रतिबिम्ब दर्पण में नहीं देख सकते हैं। क्योंकि प्रकाश की किरणों के परावर्तन के कारण ही प्रतिबिम्ब बनता है।

प्रश्न 5.
छाया देखकर किन-किन वस्तुओं को पहचान सकते हैं? सूची बनाएँ।
उत्तर:
वृक्ष, पत्थर, ईंट, मानव, जानवर, घर आदि।

प्रश्न 6.
कैसे बताएंगे कि प्रकाश सीधी रेखा में चलती है? अपने साथियों के बीच प्रयोग करके दिखाएँ।
उत्तर:
चार पोस्टकार्ड को समान ऊँचाई तथा समान आकार का छिद्र कर लेते हैं। अब एक जलती मोमबती लेते हैं। चारों को सजा लेते हैं कुछ बीच में कुछ दूरी छोड़ते हुए पोस्टकार्ड के पीछे एक पर्दा लगा लेते हैं तथा सबसे आगे मोमबत्ती जलाकर रखते हैं। अब प्रयोग का अवलोकन करते हैं। तो पता चलता है कि पर्दा पर छिद्र के आकार के बराबर प्रकाशित होता है।

अब एक पोस्टकार्ड में पहले से अलग छिद्र कर इसे पोस्टकार्डों के बीच में डलते हैं। फिर अवलोकन करते हैं तो पता चलता है कि पर्दा पर की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं। यानि पर्दा का जो क्षेत्र पहले प्रकाशित था अब कोई भी क्षेत्र प्रकाशित नहीं होता है।

इस प्रकार यह साबित होता है कि बीच में कार्ड डालने से सीधी रेखा में छिद्र न रहकर ऊपर-नीचे हो गया जिसमें प्रकाश गमन नहीं कर पाया। अत: हम कह सकते हैं। “प्रकाश सभी रेखा में गमन करता है।”

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Bihar Board Class 6 Science प्रकाश Notes

अध्ययन सामग्री :

प्रकाश हमारे दैनिक जीवन में अति महत्वपूर्ण है। सूर्य के प्रकाश पर ही जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधे अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आश्रित रहते हैं। पौधे प्रकाश के माध्यम से अपना भोजन बनाते हैं और उसी पेड़-पौधे से प्राप्त उत्पाद जीव-जन्तु अपने भोजन के लिए प्रयोग करते हैं। सूर्य के प्रकाश से जल वाष्पित होते हैं। पुनः वर्षा के रूप में जमीन पर आते हैं ‘ और हमारी धरती को हरा-भरा बनाती है।

प्रकाश के माध्यम से किसी को हम देख पाते हैं। यदि प्रकाश नहीं होता तो सभी वस्तु अदृश्य होती और आज हम यहाँ तक नहीं पहुँच पाते।

प्रकाश ऊर्जा का वह रूप होता है जो हमें देखने की अनुभूति प्रदान करता है। प्रकाश की किरणें जब किसी वस्तु पर आपतित होती हैं और उससे परावर्तित होकर हमारे आँख तक पहुँचती है, तब उस वस्तु का प्रतिबिंब हमारी आँख में बनता है। प्रकाश हमेशा सीधी रेखा में गमन करता है। प्रकाश से कुछ वस्तु आर-पार हो जाता है। कुछ वस्तु से पार नहीं कर पाती है और कुछ वस्तु से होकर अंशतः पार करता है।

यानि वे वस्तुएँ जिनसे होकर प्रकाश की किरणे पार हो जाती हैं तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ साफ दिखायी पड़ती हों उसे पारदर्शी वस्तु कहते हैं। जैसे- शीशा, पानी आदि।

वे वस्तुएँ जिनसे होकरे प्रकाश की किरणें पार नहीं होती हों तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ बिल्कुल दिखाई नहीं पड़ती हों उसे अपारदर्शी वस्तु कहते हैं। जैसे —- लकड़ी, पुस्तक, दीवार, पत्थर आदि।

वे वस्तुएँ जिनसे होकर प्रकाश की किरणें आंशिक रूप से पार होती हों तथा दूसरी ओर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई पड़ती हों उसे पारभासी वस्तु कहते हैं। जैसे- घीसा हुआ शीशा, तेल लगा हुआ कागज आदि।

प्रकाश के गुण –

  • यह ऊर्जा का एक रूप होता है।
  • यह निर्वात में भी गमन करती है।
  • यह हमेशा सीधी रेखा में गमन करती है।
  • यह हमें देखने की अनुभूति प्रदान करती है।
  • यह एक तरंग के रूप में गमन करती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश

प्रकाश की चाल (निर्वात में) 3 × 108 मी0/सं0 होती है।

प्रकाश का परावर्तन –

प्रकाश के चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश स्रोत से पहला दर्पण पर पड़ने वाली किरण आपतित किरण कहलाती है। और दूसरे दर्पण से वापस आने वाली किरण को परावर्तित किरण कहते हैं। सतह पर लम्ब को अभिलम्ब कहते हैं। अभिलम्ब तथा आपतित किरण के बीच बने कोण को आपतन कोण कहते हैं। अभिलम्ब तथा परावर्तित किरण के बीच बने कोण का परावर्तन कोण कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 13 प्रकाश 1

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परावर्तन के नियम –

परावर्तन के दो नियम हैं –
1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक ही समतल में होते हैं।
2. आपतन कोण परावर्त्तन कोण के बराबर होता है।

जब प्रकाश की किरणों के रास्ते में कोई अपारदर्शी वस्तु आ जाती है, तो प्रकाश की किरणें आगे नहीं जा पाती हैं। वस्तु के आगे परदा रहने पर परदे के प्रकाशित भाग के बीच कुछ भाग ऐसा होता है, जो काला दिखता है, इस भाग को छाया कहते हैं। छाया की लम्बाई तथा आकार (क) प्रकाश के उद्गम (ख) अपारदर्शी वस्तु के आकार तथा (ग) प्रकाश के उद्गम तथा वस्तु के बीच की दूरी पर निर्भर करता है।

जब प्रकाश का उद्गम बिन्दुवत हो तो उससे बनने वाली छाया में एक जैसा अंधकार रहता है। जब प्रकाश के उद्गम का विस्तार रूकावट की अपेक्षा बड़ा हो, तो छाया के मध्य भाग में प्रकाश एकदम नहीं पहुँचने के कारण पूर्ण अंधकार में रहता है, यह प्रच्छाया कहलाता है और जिस भाग में अंशतः प्रकाश-पहुँचता है। उसे उपछाया कहते हैं। इस प्रकार प्रकाश का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति Text Book Questions and Answers, Notes.

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अभ्यास और प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
सही उत्तर चुनिए –

(क) एस. आई. मात्रक में लम्बाई का मात्रक हैं –
(i) मिलीमीटर
(ii) सेंटीमीटर
(iii) मीटर
(iv) किलोमीटर
उत्तर:
(iii) मीटर

(ख) आप अपने घर से विद्यालय जाने में एक किलोमीटर की दूरी तय करते हैं । इस एक किलोमीटर में कितने मीटर होते हैं ?
(i) 100
(ii) 1000
(iii) 10000
(iv) 100000
उत्तर:
(iii) 10000

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

(ग) गतिशील वस्तु का उदाहरण नहीं है –
(i) उड़ती चिड़ियाँ
(ii) चींटी की गति
(iii) घड़ी
(iv) घड़ी की सूई
उत्तर:
(iii) घड़ी

(घ) आवर्ती गति का उदाहरण है –
(i) झूला झुलते बच्चे को गति
(ii) लालक की गति
(iii) बजते तबलों के पृष्ठ की गति
(iv) इनमें से सभी
उत्तर:
(iv) इनमें से सभी

(ङ) एक निश्चित समय में एक विस्तु जितनी दूरी तय करती है, वह उस वस्तु की कहलाती है –
(i) चाल
(ii) दुरो
(iii) गति
(iv) इनमें से काई नहीं
उत्तर:
(iii) गति

प्रश्न 2.
खाली स्थान भरें –
(क) 1 सेमी – ………… मिमी 1 मिमी …………….. समी
(ख) 1 मी = …………… सेमी 1 सेमी ……………… मी
(ग) 1 मी – ……………….. मिमी 1 मिमी – ………… मी
(घ) 1 किमी ………………. मी 1 मी = ……………. किमी
(ङ) झूले पर किसी बच्चे की गति ……………….. होती है।
(च) सिलाई मशीन की सुई की गति …………… होती है।
उत्तर:
(क) 10.1/2
(ख) 100, 1/100
(ग) 1000, 1/1000
(घ) 1000, 1/1000
(ङ) आवृति गति
(च) आवृति गति।

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प्रश्न 3.
पग अथवा कदम का उपयोग लम्बाई के मानक मात्र के रूप में क्यों नहीं किया जाता?
उत्तर:
कदम का उपयोग लम्बाई के मानक मात्र के रूप में उपयोग नहीं किया जाता है क्योंकि अलग-अलग व्यक्तियों के कदमों की लम्बाई अलग-अलग होती है। जबकि मानक मात्रक स्थिति स्थान के अनुसार नहीं बदलती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को लम्बाई के बढ़ते परिमाणों में व्यवस्थित कीजिए –
1 मीटर, 1 सेंटीमीटर, 1 किलोमीटर, 1 मिलीमीटर,
उत्तर:
1 मिलीमीटर – 1 सेंटीमीटर- 1 मीटर – 1 किलोमीटर

प्रश्न 5.
विभिन्न प्रकार की गतियाँ कौन-कौन-सी हैं? अपने दैनिक जीवन में से उनके दो-दो उदाहरण लिखिए –
उत्तर:
किसी वस्तु का अपने चारों तरफ स्थित वस्तुओं की तुलना में स्थान परिवर्तित होता है तो उसे उस वस्तु का गति कहते है।

गति के अनेक प्रकार होते हैं –
जैसे – सरल रेखीय गति, वर्तुल गति, आवृति गति, घूर्णन गति आदि। – सरल रेखीय गति-जब कोई वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश गति कर रही हो तो इस प्रकार की गति को सरल रेखीय गति कहते हैं। जैसे – सड़क पर दौडती गाड़ी, सेना के जवान की चाल आदि।

वर्तुल गति – वैसी गति जिसमें किसी वस्तु की किसी नियत विन्दु से दूरी समान रहती है।
जैसे -कोलइ का बैल का गति, बिजली पंखा की गति।

आवर्ती गति-ऐसी गति जो एक निश्चित अन्तराल के पश्चात् दोहराती है, उसे आवर्ती गति कहते हैं।
जैसे-झूला की गति, सितार की डोरियों की गति आदि।

प्रश्न 6.
सीमा के घर तथा उसके स्कूल के बीच की दूरी 1600 मीटर है। इस दूरी को किलोमीटर में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं,
1000 मीटर = 1 किलोमीटर
∴ 1 मीटर = 1/1000 किलोमीटर
∴ 1600 मीटर = 1/1000 × 1600 किलोमीटर :
अत: 1600 मीटर = 1.6 किलोमीटर।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

प्रश्न 7.
किसी चलती हुई साइकिल के पहिये तथा चलते हुए छत के पंखे की गतियों में समानताएँ तथा असमानताएँ लिखिये।
उत्तर:
चलती हु साइकिल के पहिये में दो तरह की गतियाँ पायी जाती हैं। रेखीय गति तथा वर्तुल गति। जबकि छत के पंखे की गति में सिर्फ वर्तुल गति होती है। दोनों में समानताएँ यह हैं कि दोनों में वर्तुल गति है परन्तु साइकिल एक स्थान से दूसरे स्थान तक रेखीय गति के कारण जाती है। यही असमानताएँ हैं।

प्रश्न 8.
रोज काम में आने वाली वस्तुओं में से ऐसी दो वस्तुओं के नाम लिखिये जिनकी लम्बाई लगभग –
(क) एक मीटर हो ।
(ख) एक सेंटीमीटर हो
(ग) एक मिलीमीटर हो
उत्तर:
(क) एक मीटर – कपड़ा मापने वाला फीता तथा कपड़ा मापने वाला
(ख) एक सेंटीमीटर – पेंसिल की लिखावट को मिटाने वाला रबर, कटर (छिलनेवाला)
(ग) एक मिलीमीटर – पंसिल की नोंक, कलम की नोंक।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

Bihar Board Class 6 Science दूरी, मापन एवं गति Notes

अध्ययन सामग्री :

हमारे दैनिक जीवन में लगभग प्रत्येक काम में दूरी एवं गति संबंधी अवध रणाएँ प्रयोग में आती है। जैसे कबड्डी के मैदान के छोर से दूसरे छोर की दूरी मापना। गिल्ली-डंडे के खेल में गुच्चक से गिल्ली की दूरी नापना, बाजार में कपड़े को नापना, गाँव से शहर की दूरी मापना, स्कूल में बच्चों की लम्बाई मापना आदि। यहाँ हम पाते हैं कि अलग-अलग देशों में मापने की इकाई यानि ‘पैमाना अलग-अलग है जिसके कारण व्यापार में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। तब पूरे संसार में एक ही पैमाना को चुना गया। इसके साथ ही अलग-अलग पैमाने भी प्रचलित हैं। जैसे वजन की माप किलोग्राम या ग्राम या पौंड में भी होती है। लम्बाई की माप फुट या मीटर या सेंटीमीटर में भी होती है।

दुनिया के कोने-कोने से नाप-तौल के मुद्दे पर झगड़े होते रहते थे। कहीं – खेत की लम्बाई को लेकर, कहीं रस्सी की लम्बाई को लेकर और कहीं किसी और नाप को लेकर। अंत में लोगों ने तय किया कि एक निश्चित दूरी का पैमाना – बना लिया जाय। उसको छोटे-छोटे बराबर हिस्सों में बांट लिया गया। इस पैमाने के बराबर लम्बाई के ही लकड़ी तथा धातु के और पैमाने बना लिए गए। यानि एक निश्चित लम्बाई या दूरी को मानक इकाई या पैमाना कहते हैं।

फ्रांस नामक देश में तय किया गया कि विशेष धातु की एक छड़ की लम्बाई को “एक मीटर” माना गया। एक मीटर के सौ बराबर हिस्से किए गए। प्रत्येक भाग को सेंटीमीटर कहा गया। प्रत्येक एक सेंटीमीटर को पुनः दस भागों में बांटा गया जिसे मिलीमीटर कहा गया।

आपके ज्यामिति बॉक्स के पैमाने पर लिखे अंक सेंटीमीटर (सेमी) की नाप है। हर एक सेंटीमीटर दस बराबर भागों में बंटा है। सेंटीमीटर का दसवाँ भाग मिलीमीटर (मिमी) कहलाता है।

किसी पैमाने से कम से कम नापी जा सकने वाली दूरी को उस पैमाना की अल्पत्तम नाप कहते हैं।

“किलो” का अर्थ होता है एक हजार।

जैसे 1 किलोग्राम का मतलब होता है 1000 ग्राम । इसी तरह ।
किलोमीटर का मतलब 1000 मीटर होता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

1 गज = 3 फीट। 200 गज = 1 फलांग।
1 फुट = 12 इंच। 8 फलांग = 1 मील।
1 इंच = 2.54 सेमी
1 किलोमीटर = 10 हेक्टोमीटर
1 हेक्टोमीटर = 10 डेकामीटर
1 डंकामीटर – 10 मीटर
1 मीटर = 10 डेसीमीटर
1 डेसीमीटर = 10 सेंटीमीटर
1 सेंटी मीटर = 10 मिलीमीटर

अब हम अपने चारों तरफ फैली वस्तुओं की स्थिति के बारे में जानना चाहेंगे। यदि किसी वस्तु की स्थिति या स्थान उसके चारों तरफ विद्यमान वस्तु की तुलना में समय के बदलते रहता हो, तो उसे गतिशील वस्तु कहते हैं। दूसरी तरफ यदि किसी वस्तु की स्थिति चारों तरफ उपस्थित वस्तुओं की तुलना में नहीं बदलता हो तो उस स्थिति को विराम कहते हैं।

जैस –
विराम में वस्तु – गतिशील वस्तु
घर – उड़ती चिड़िया
मेज – घड़ी में सेकेंड की सुई।
कुर्सी – दौड़ता हुआ लड़का

वस्तु द्वारा किसी समय अन्तराल में तय किए गए मार्ग की सम्पूर्ण लम्बाई को दूरी कहते हैं। यह एक अदिश राशि है। यह सदैव धनात्मक होती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

वस्तु की अंतिम स्थिति तथा प्रारंभिक स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। विस्थापन का मान धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य कुछ भी हो सकता है।

प्रत्येक गतिमान वस्तुओं की गति अलग-अलग होती है। कोई वस्तु सीधी रेखा के अनुकूल दौड़ती है तो कोई वृत्तीय पथ पर गतिमान है। इसके अलावे भी अनेक प्रकार की गति होती है।

सीधी सड़क पर किसी वाहन की गति, सेना के मार्च-पास्ट की गति, गिरते पत्थर की गति आदि ऐसी गति है जो सरल रेखा के अनुदिश है। अत: इस प्रकार की गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।

धागा में बाँधा पत्थर की गति, पंखा, घड़ी सुई की गति आदि में वस्तु वृत्तीय पथ के अनुदिश गतिमान है तथा एक निश्चित विन्दु से, इस वस्तु की दूरी समान रहती है। अतः इस प्रकार की गति को वर्तुल गति कहते हैं।

लोलक की गति, झुला की गति, सितार की डोरियों की गति आदि में वस्तु एक निश्चित समयान्तराल के पश्चात् दोहराती है। अत: इस प्रकार की गति का आवर्ती गति कहते हैं जिसकी चर्चा हमलोग अगली कक्षा में करेंगे।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 12 दूरी, मापन एवं गति

इस प्रकार इस अध्याय में हमने देखा कि समय के साथ स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं। स्थिति में हुए परिवर्तन को हम दूरी-मापन द्वारा ज्ञात करते हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 8 हमारा राज्य बिहार

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 8 हमारा राज्य बिहार Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 8 हमारा राज्य बिहार

Bihar Board Class 6 Social Science हमारा राज्य बिहार Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
सही विकल्पों पर (✓) का निशान लगाएँ

प्रश्न (i)
रबी फसलों के लिए मशहूर ताल क्षेत्र अवस्थित है
(क) तराई क्षेत्र
(ख) पटना से पूरब
(ग) पटना से पश्चिम
(घ) शाहाबाद में
उत्तर-
(ख) पटना से पूरब

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 8 हमारा राज्य बिहार

प्रश्न (ii)
सोमेश्वर पहाड़ियाँ हैं
(क) तराई क्षेत्र में
(ख) राजगीर में
(ग) कैमूर में
(घ) मंदार हिल में
उत्तर-
(ख) राजगीर में

प्रश्न (iii)
सरैसा क्षेत्र में शामिल जिले हैं
(क) सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल
(ख) सुपौल, सहरसा, अररिया
(ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर
(घ) जहानाबाद, गया, पटना
उत्तर-
(ग) वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर

प्रश्न (iv)
गन्ना उत्पादक जिले हैं
(क) किशनगंज, अररिया, जोगबनी
(ख) पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर
(ग) गया, नवादा, बिहार
(घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी
उत्तर-
(घ) गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी

प्रश्न 2.
प्रश्नों के उत्तर लिखें-

प्रश्न (क)
बिहार की चौहद्दी लिखें।
उत्तर-
बिहार के उत्तर दिशा में नेपाल देश, पूरब में पश्चिम बंगाल. दक्षिण में झारखंड तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य है।

प्रश्न (ख)
ताल क्षेत्र की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर-
ताल क्षेत्र में किसी का भी घर नहीं होता है। ताल क्षेत्र में हम रबी की फसल ही कंवल बोते हैं। खरीफ की फसल तो बोते ही नहीं हैं। बरसात में नदियों का पानी का बड़ा हिस्सा पूरे इलाके में दूर-दूर तक फैल जाता है और एक बड़ा ताल-सा दृश्य दिखाई देता है। उसे ही ताल क्षेत्र कहते हैं।

अक्टूबर के महीने में जब सारा पानी धरती सोख लेती है और जमीन दलदली होती है तब हम इनमें दलहन और रबी की फसलों को बो देते हैं। इनमें चना, मसूर, सरसों, तीसी, गेहूँ होता है। मिट्टी दलदली होने के कारण

रबी की जबरदस्त फसल होती है। ताल क्षेत्र में दुधारू पशओं के लिए पर्याप्त भूसा मिलता है। यह पशुओं के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।

रबी की फसल अच्छी होने के कारण ही यहाँ दाल छाँटने वाली कई मिलें भी हैं। ताल क्षेत्र में दलहन की फसल अत्यधिक मात्रा में होती है जिससे यहाँ खेती की पैदावार काफी अच्छी होती है।

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प्रश्न (ग)
सरैसा क्षेत्र में कौन-कौन से जिले आते हैं और उनका क्या महत्व है?
उत्तर-
उत्तर बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के कुछ-कुछ प्रखंडों में तम्बाकू उपजाया जाता है।

इस इलाके को संयुक्त रूप से सरैसा क्षेत्र कहा जाता है । यह किसी खास क्षेत्र न होकर पूरे इलाके का ही नाम है। इस इलाके का तम्बाकू देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। वहाँ के किसानों की खेती-बाड़ी का अर्थ खेतों

को साफ करके तम्बाकू के पौधों को लगाना उसके पत्तों को सुखाना और उन्हें व्यापारियों के हाथों में बेचना है । इस इलाके के किसान बड़ी मेहनत से तम्बाकू के पौधे को उगाते हैं। यहाँ की मिट्टी भी चूनायुक्त होती है। तंबाकू के पौधे धीरे-धीरे बड़े होकर फैलते हैं। बाद में इसे सखाते हैं। धीरे-धीरे और पत्ते को लपेटकर रखते हैं। चूँकि सरैसा इलाके के तम्बाक काफी कड़कदार होते हैं। इसलिए तम्बाकू बेचने वाले सरैसा के नाम का इस्तेमाल तम्बाकू को प्रभावशाली बनाने के लिए करते हैं।

प्रश्न (घ)
बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में हैं । क्यों ?
उत्तर-
बिहार की ज्यादातर चीनी मिलें उत्तर बिहार में ही हैं। क्योंकि उत्तर बिहार में नेपाल की पहाड़ियों से पानी बहकर आता है और मिट्टी में चूने का अंश चला आता है। यह मिट्टी ईख की खेती के लिए उपयुक्त है

और यहाँ भारी मात्रा में ईख की खेती की जाती है। उत्पादन होने से उसकी पैदावार भी अच्छी होती है। एक बड़े किसान अकेले सौ सवा सौ ट्रैक्टर गन्ने बेचते हैं और किसानों के गन्ने खरीदने के लिए मिलें तैयार रहती हैं और उन्हें नकद पैसा भी देती है। इसलिए यहाँ के किसान गन्ना उपजाना पसंद करते हैं। किसान भी गन्ने के फसल एक ही खेत में बार-बार लगातार उपजाते हैं जिससे यहाँ उसकी खरीद-बिक्री भी ज्यादा मात्रा में होती है। चीनी मिलें उन गन्नों से रस निकालकर चीनी बनाई जाती है। ‘पाना जाता ह

प्रश्न (च)
बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरतें क्या होती होगी?
उत्तर-
बाढ़ का पानी उतरते ही गाँवों एवं घरों की प्राथमिक जरूरत अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए कि बाढ़ का पानी इनकी मवेशियों को बहा न ले जाएँ। बरसात के दिनों में वे लोग बाढ़ से बचने के लिए तटबंधों और स्परों पर रहने चले जाते हैं। उसकी प्राथमिक जरूरत अपने और अपने मवेशियों को सुरक्षित जगहों तक पहुँचाना जिससे अपने मवेशियों की जान बचा सकें इसलिए वे फुस और प्लास्टिक के कामचलाऊ छत और दीवार बनाकर रहते हैं।

घरों को छोड़कर तटबंध पर जाने से पहले खेतों में मनीजर के बीज छींट देते हैं। बाद में बाढ़ का पानी उतरने पर मनीजर के पौधे डंठल के रूप में तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार वह अपने-आपको तैयार करते हैं जिससे वह अपना बचाव कर सकें।

प्रश्न (छ)
बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को किस प्रकार की कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं?
उत्तर-
बरसात में उत्तर बिहार के लोगों को वर्ष में लगभग 3-4 महीने दोहरी जिंदगी जीते हैं। प

  • बाढ़ का पानी बढ़ने से परेशान लोगों को अपने घरों को छोड़कर तटबंधों और स्परों पर रहने के लिए जाना पड़ता है।
  • सबसे पहले अपने मवेशियों को बचाने के लिए उसे ऊँचे स्थानों पर रखकर सुरक्षित करना पड़ता है जिससे वह बाढ़ के पानी में बहकर कहीं चले न जाएँ।
  • गाँव से पानी उतरते ही लोग वापस गाँव में आते हैं और फिर आठ महीनों के लिए फिर से गृहस्थी जमाते हैं। फिर अगले साल पुनः चार महीने बाढ़ की विभीषिका झेलने को तैयार रहना पड़ता है।
  • बरसात के मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है।
  • बरसात में किसानों, गरीब मजदूरों पर अन्न, जल और आवास की
    समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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प्रश्न (ज)
बाढ़ से बचाव का क्या समाधान है?
उत्तर-
बाढ़ से बचाव का निम्न समाधानों को अपनाकर बाढ़ से बचाव किया जा सकता है

  • बाढ़ से बचने के लिए हमें अपने घरों को छोड़कर किसी दूसरे स्थान पर सुरक्षित पहुँचना चाहिए ।
  • अपने मवेशियों को किसी ऊँचे स्थानों पर ले जाकर रखना चाहिए।
  • अपनी जरूरतों की चीजों को पहले से ही अपने पास उपलब्ध करा लेना चाहिए। जिससे सही समय पर उसका उपयोग कर सकें।
  • बाढ़ की समस्या का सामना हमलोगों को एक साथ मिल-जुलकर करना चाहिए।
  • बाढ़ से बचने के लिए हमलोगों को भूमि अपरदन की क्रिया को रोकना चाहिए।
  • बड़े-बड़े नदियों के जल को मजबूत बाँध बनाकर उसकी दिशाओं को बदलकर उससे बचाव किया जा सकता है।
  • बरसात के पानी से बचने के लिए नावों की व्यवस्था भी रखनी चाहिए जिससे पानी बढ़ने पर हम उन.नावों के द्वारा दूसरे गाँवों की ओर पलायन कर सकें।

Bihar Board Class 6 Social Science हमारा राज्य बिहार Notes

पाठ का सारांश

बिहार पूर्वी भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है जो परब से पश्चिम तक 483 किलोमीटर लम्बा तथा उत्तर से दक्षिण तक 345 किलोमीटर चौड़ा है। हमारे आस-पास के घरों में खेलने या किसी काम से आते-जाते हैं। ऐसे घर हमारे पड़ोसी कहलाते हैं । ठीक उसी प्रकार राज्यों से सटे दूसरे राज्य भी होते हैं जो पड़ोसी राज्य कहलाते हैं। जैसे–हमारे पड़ोसी एक-दूसरे के काम आते या एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं ठीक वैसे ही हमारे पडोसी राज्य भी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। बिहार के उत्तर दिशा में नेपाल देश, पूरब में पश्चिम बंगाल, दक्षिण में झारखण्ड तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य है। सडक और रेल लाइनें अपने राज्य को पड़ोसी राज्यों और देशों से जोड़ती हैं।

इतने बड़े राज्य को प्रशासनिक सुविधा के लिए 9 प्रमंडलों और 38 जिलों में बांटा गया है।

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एक प्रमंडल में कई जिले होते हैं और जिलों में अनमंडल होते हैं। इन अनुमंडलों में कई प्रखंड होते हैं। ऐसे प्रखंडों की संख्या 534 है। ये प्रखंड कई पंचायतों से मिलकर बने होते हैं।

बिहार के पूर्व में गर्म और आर्द्र जलवायु एवं पश्चिम में गर्म एवं शुष्क जलवायु मिलती है। यहाँ की जलवायु मानसूनी है। यहाँ मुख्यतः तीन ऋतुएँ होती हैं-ग्रीष्म, वर्ण, शीत । हमें कैसे पता चलता है कि गर्मी आ गई है?

रेशमा ने बताया कि जब हाट-बजारों, घरों यात्राओं में ककड़ी, खीरा, तरबूज, कुल्फी, लस्सी, शरबत, पंखा कलर, घडे-सुराही की मांग बढ़ जाए तब समझिये कि गरमी का मौसम आ गया। । होली के बाद से गर्मी पड़ने लगती है। जून तक पड़ती है। इस दौरान धूल भरी तेज हवाएँ एवं आँधियाँ चलतो हैं जिसे ‘ल’ कहते हैं। कभी-कभी हल्की वर्षा भी हो जाती है। औसत तापमान 30° सेन्टीग्रड रहता है। जबकि गरमी में तापमान 400 सेन्टीग्रेड से अधिक हो जाता है।

वर्षा ऋतु जून तीसरे सप्ताह से शुरू हो जाता है जिससे अक्टूबर तक बारिश होती है। बरसात का पानी खेतो, नालों, गहों में भर जाता है। नदियों में उफान आता है। किसान खरीफ फसल बोने लगते हैं। दक्षिण बिहार में किसान धान के बिचड़े तैयार करके रोपते हैं। इन दिनों कुदाल, खेती, ट्रैक्टर, बैल, भैंस, प्लास्टिक के जूते छाता आदि का उपयोग बढ़ जाता है।

इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी खेती के कामों में पर्याप्त रोजगार मिल जाता है। नेपाल में पहाड़ी से तेजी से गिरने के बाद नदियाँ अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी एवं कंकड़-पत्थर लाती हैं जो नदियों के तल में जमा हो जाते हैं। इसके कारण नदियों का पानी आस-पास के इलाकों में बाढ़ की शक्ल में फैल जाता है।

रोहित ने बताया कि – अपने राज्य में भी तो खूब बाढ़ आती है। गुरुजी ने कहा-बाढ़ का मूल स्रोत गंडक, बागमती, कमला, करेह, महानंदा. कोसी

आदि नदियाँ हैं। जिनका उद्गम नेपाल से होता है। सुपौल से दक्षिण सहरसा जिले तक लगभग 110 किलोमीटर तक का पूर्वी बांध और मधुबनी से दक्षिण खगड़िया तक 90 किलोमीटर तक लोग वर्ष में लगभग 3-4 महीने दोहरी जिंदगी जीते हैं।

बरसात के दिनों में लोग बाढ़ की समस्याओं से बचने के लिए तटबंधों और स्परों पर रहने चले आते हैं। वे फ़स और प्लास्टिक के कामचलाऊ छत और दीवार बनाकर रहते हैं। सबसे पहले अपने मवेशियों को ऊँचे स्थानों पर

रखकर सुरक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए कि बाढ़ का पानी इनके मवेशियों को बहाकर ले न जाएँ। इस प्रकार बाढ़ से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर बचाव करते हैं।

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बरसात पूरे राज्य में समान रूप से होती नहीं है। कहीं बाढ़ आती है तो कहीं खेतों में पूरा पानी नहीं रुकता है। इस प्रकार बरसात के दिनों में अलग-अलग हिस्सों में जनजीवन पर भी असर पड़ता है। पटना से पूर्व का एक बड़ा हिस्सा फतुहा से बड़हिया मोकामा तक टाल

या टाल क्षेत्र कहलाता है। यह ताल क्षेत्र में ही खरीफ की फसल बोयी जाती – है। अक्टूबर में सारा पानी धरती सोख लेती है और जमीन दलदली होती है तब हम इनमें दलहन और रबी की फसलें बो देते हैं। ‘मिट्टी दलदली होने के कारण रबी की फसल जबरदस्त होती है। पटना के निकट दियारा एवं जल्ला क्षेत्र में सब्जियों का उत्पादन भी होता है।

जाड़े के मौसम “दूर्गा पूजा से सरस्वती पूजा” तक चलता है। इन दिनों तापमान कम हो जाता है। दिसम्बर-जनवरी महीने में शीतलहर चलती है। शीतलहरी में तापमान 5°-10° सेंटीग्रेड तक चल जाता है। प्रायः दोपहर तक कोहरा बना रहता है। . अपने बिहार राज्य में धान की खेती प्रमुख है। धान से ही चावल प्राप्त होता है। यही हमारा प्रमुख खाद्यान्न है । फिर गेहूँ, मक्का, दलहन और तेलहन

की भी खेती होती है। ये सभी फसल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में किसान उपयोग में लाते हैं। लेकिन वैशाली, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जिलों में तम्बाकू, छपरा, सिवान, गोपालगंज एवं चम्पारण क्षेत्र में गन्ना तथा पूर्णियाँ, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिलों में जूट की खेती होती है। इन फसलों को कारखानों में ले जाया जाता है। तम्बाकू से सिगरेट और बीड़ी, गन्ना से चीनी, गुड़ एवं जूट से पाट के सामान बनाये जाते हैं। बिहार में मात्र 6.4% भूभाग पर वन है-उत्तर-पश्चिम में हिमालय की तराई में सोमेश्वर की पहाड़ियों में जंगल मिलते हैं।

बिहार में समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के कुछ प्रखंडों में । तम्बाकू उपजाया जाता है। इस इलाके को संयुक्त रूप से सरैसा क्षेत्र कहा जाता है। इस इलाके का तम्बाकू देश के अन्य राज्यों में भी भेजा जाता है। किसान

बड़ी मेहनत से तम्बाक को उगाते हैं। यहाँ की मिट्टी भी चूनायुक्त होती है। तम्बाकू धीरे-धीरे बड़े होकर फैलते हैं। उसे बाद में सुखाकर तैयार करते हैं।

सरसा इलाके के तम्बाकू काफी कड़कदार होते हैं। इसलिए तम्बाकू बंचने वाले सरसा के नाम का इस्तेमाल तम्बाकू को प्रभावशाली बनाने के लिए किया करते हैं। बिहार के उत्तर-पश्चिम में स्थित गोपालगंज या पश्चिमी चम्पारण में गुड़ – और चीनी का उत्पादन होता है।

नेपाल की पहाड़ियों का पानी बहकर आता है और मिटटी में चने का अंश चला आता है। यह मिट्टी ईख की खेती के लिए उपयुक्त है और यहाँ खेती की फसल भी अच्छी होती है और वे चीनी मिलों में गन्ने को बेच देते हैं और गन्नों के रस से गढ़ और चीनी बनाई जाती है और छोटे किसान गन्नों की पेराई खलिहानों में ही करके तैयार रस से गुड़ बना लेते हैं जिसकी बिक्री सहज ढंग से हो जाती है। चीनी से चॉकलेट भी बनाई जाती है। पश्चिमी चम्पारण जिला के बाल्मीकिनगर अभ्यारण्य में जंगली जानवरों की संख्या अधिक है। यहाँ जंगली सूअर, भालू और हिरण भी बहुलता से मिलते हैं।

बाल्मीकिनगर अभ्यारण्य के अतिरिक्त रोहतास जिले का कैमूर अभ्यारण्य, नालन्दा जिले का राजगीर अभ्यारण्य अवस्थित भीम बाँध अभ्यारण्य और – इसके पहाड़ियों के बीच गंगा और सोन नदी के दियारे में उगी लम्बी घासों के बीच भील गायों को भी देखा जाता है।
पटना नगर में स्थित संजय गाँधी जैविक उद्यान भी जंगली जानवरों को नजदीक से देखने का एक आकर्षक जगह है। जाड़े के दिनों में पटना क दानापुर सैनिक छावनी के निकट गंगा तट पर साईवेरियन क्रेन (प्रवासी पक्षी) भारी संख्या में प्रतिवर्ष आते हैं।

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बिहार की कुल जनसंख्या 8 करोड़ से अधिक थी। बिहार से अधिक लोग सिर्फ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में रहते हैं। 2011 में जनगणना हुई है। यहाँ अधिकतर लोग गाँवों में रहते हैं लेकिन कई बड़े नगर भी हैं बिहार की राजधानी पटना सबसे बड़ा नगर है। इस नगर में करीब 20 लाख लोग रहते हैं। बिहार की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।

इसका प्रभाव है कि वनों को काटकर लगातार खत बनाया जा रहा है। खेती करने से भी मिटटी की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि एक ही खेत में लगातार कई प्रकार की फसलें उपजाई जाती हैं जिससे भूमि की उर्वराशक्ति नष्ट हो जाती है।

शहरों की वृद्धि से परिवहन साधनों में भी वृद्धि होती है। इन कारणों से प्रदूषण भी फैल रहा है। बिहार की जनसंख्या वृद्धि को रोकना आवश्यक है। सभी लोग चाहते हैं कि स्वस्थ रहें। इसके लिए हमलोगों को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से

Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था (Positive Feedback Mechanism) को दर्शाने वाले आरेख को देखिए क्या आप उन निवेशों (Inputs) की सूची दे सकते हैं जो औजारों के निर्माण में सहायक हुई? औजारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला?

सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था –

किसी बॉक्स विशेष की ओर इंगित तीर के निशान उन प्रभावों को बताते हैं जिनकी वजह से कोई विशेषता विकसित हुई।
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उत्तर:
औजारों के निर्माण में सहायक निवेश –

  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि।
  • औजारों के इस्तेमाल के लिए और बच्चों व चीजों को ले जाने के लिए हाथों का मुक्त होना।
  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।

प्रक्रियाएँ जिनको औजारों के निर्माण से बल मिला –

  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।
  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि

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प्रश्न 2.
मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पाई जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ। (क) व्यवहार और (ख) शरीर रचना शीर्षकों के अंतर्गत दो अलग-अलग स्तंभ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अंतरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्वपूर्ण समझते हैं ?
उत्तर:
समानताएँ :
(क) व्यवहार और –
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(ख) शरीर रचना –
Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से 2Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से

असमानताएँ:
(क) व्यवहार और –
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(ख) शरीर रचना –
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प्रश्न 3.
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए हैं। तर्कों पर चर्चा कीजिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है?
उत्तर:
मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न ‘देशों में रहने वाले होमो सैपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया। इस तर्क का आधार आज के मनुष्यों में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं। इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचारों के मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्त्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं-(क) संग्रहण, (ख) औजार बनाना, (ग) आग का प्रयोग।
उत्तर:
औजार बनाना।

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प्रश्न 5.
भाषा के प्रयोगों से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी ? इस पर चर्चा करिए । इन क्रियाकलापों के लिए विचार-संप्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?
उत्तर:
भाषा के प्रयोगों से शिकार करने तथा आश्रय बनाने में बहुत अधिक सुविधा मिली होगी जिसका वर्णन इस प्रकार है
(क) शिकार करने में –

  • लोग शिकार की योजना बना सकते थे।
  • वे शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा कर सकते थे।
  • वे विभिन्न क्षेत्रों में जानवरों के बहुतायत की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे जानवरों की प्रकृति एवं स्वभाव पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे शिकार के लिए औजारों में सुधार ला सकते थे।
  • वे मारे गए जानवर के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों के उपयोग पर चर्चा कर सकते थे।

(ख) आश्रय बनाने में –

  • लोग आश्रय बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों पर चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल के निकट उपलब्ध सुविधाओं पर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के तरीकों तथा तकनीकों की जानकारी एक-दृशो को दे सकते थे। इन क्रिया-कलापों के लिए लाग भाषा के अतिरिक्त संकेतों तथा चित्रकारियों का प्रयोग कर सकते थे।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 6.
अध्याय के अंत में दिए गए प्रत्येक कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइये कि इनका क्या महत्व है?
उत्तर:
1. होमिनॉइड और होमोनिड शाखा विभाजन (64 लाख वर्ष पूर्व) – लगभग 64 लाख वर्ष पूर्व होमिनॉइड उपसमूह में ‘होमिनिइड’ वर्ग का विकास हुआ। यह प्राणियों का पहले से अधिक विकसित रूप था। इनके मस्तिष्क का आकार होमिनॉइड से बड़ा था । होमिनॉइड चार पैरों के बल चलते थे। जबकि होमिनिड सीधे खड़े होकर दो पैरों के बल चलते थे। होमिनिड के हाथ भी विशेष प्रकार के थे। इनकी सहायता से वे औजार बना सकते थे और उनका प्रयोग कर सकते थे।

2. पत्थर के सबसे पहले औजार (26-25 लाख वर्ष पूर्व) – आज से लगभग 26-25 लाख वर्ष पूर्व मानव ने पत्थर के सबसे पहले औजार बनाये और उनका प्रयोग करना सीखा। भले ही ये सादे तथा खुरदरे थे, तो भी मानव हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो गया। उसके लिए जानवरों का शिकार करके भोजन प्राप्त करना भी सरल हो गया ।

कालानुक्रम – 2

1. स्वर – तंत्र का विकास-मानव में स्वर तंत्र के विकास का विशेष महत्त्व है। इससे मानव को बोलने की शक्ति मिली और वह अपने मन के विचार बोल कर प्रकट करने लगा। इससे शिकार करने, औजार बनाने तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए नये तरीकों तथा तकनीकों का विकास. भी हुआ।

2. चूल्हों के इस्तेमाल के बारे में सबसे पहला साक्ष्य – चूल्हों के इस्तेमाल का सबसे पहला साक्ष्य दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा से मिला है। यहाँ दो चूल्हे पाये गए हैं। ये आग के नियंत्रित प्रयोग को दर्शाते हैं। इससे पता चलता है कि मानव लगभग 25000 वर्ष पूर्व आग का नियत्रित प्रयोग करना सीख गया था। वह आग से गुफाओं में प्रकाश करता था, उष्णता प्राप्त करता था और भोजन पकाता था। वह आग का इस्तेमाल भाले की नोक बनाने तथा खतरनाक जानवरों को भगाने के लिए भी करता था।

Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रजाति या स्पीशीज क्या होती है?
उत्तर:
प्रजाति ऐसे जीवों का एक समूह होती है जो प्रजनन द्वारा नई संतान उत्पन्न कर सकते हैं। परंतु एक प्रजाति के जीव किसी अन्य प्रजाति के जीवों से प्रजनन करके संतान पैदा नहीं कर सकते।

प्रश्न 2.
आदि मानव के इतिहास की जानकारी में किन-किन खोजों ने सहायता पहुंचाई है?
उत्तर:
मानव के जीवाश्मों, पत्थर के औजारों तथा गुफाओं की चित्रकारियों की खोजों ने।

प्रश्न 3.
विलुप्त हो चुकी मानव प्रजातियों के जीवाश्मों का तिथि-निर्धारण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:

  • प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा तथा
  • उन परतों की परोक्ष तिथि-निर्धारण द्वारा जिनमें वे दबे हुए पाये जाते हैं।

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प्रश्न 4.
चार्ल्स डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम बताएँ । विकास के संबंध में डार्विन ने क्या तर्क दिया?
उत्तर:
डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम ‘ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज’ है। उन्होंने तर्क दिया कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से क्रमिक विकास के रूप में हुआ।

प्रश्न 5.
एशिया और अफ्रीका में प्राइमेट्स कब अस्तित्व में आये?
उत्तर:
लगभग 36 मिलियन (360 लाख) वर्ष पहले।

प्रश्न 6.
होमिनिड्ज (homonoids) का उदय अफ्रीका में हुआ था। इस संबंध में कौन-कौन से दो प्रमाण दिए जा सकते हैं?
उत्तर:

  1. यह अफ्रीकी वानरों का समूह है जिनका अफ्रीकी होमिनिडों से बहुत ही निकट का संबंध है।
  2. पूर्वी अफ्रीका में पाये गए आस्ट्रेलोपिथिकस वर्ग से संबंधित आरंभिक होमोनिड के जीवाश्म लगभग 56 लाख वर्ष पुराने हैं। इनके विपरीत अफ्रीका से बाहर पाये गए जीवाश्म 18 लाख वर्ष से अधिक पुराने नहीं हैं।

प्रश्न 7.
होमिनिड्ज की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. मस्तिष्क का बड़ा आकार
  2. सीधे खड़ा होना
  3. दो पावों पर चलना
  4. हाथ विशेष क्षमता युक्त जिससे वह औजार बना सकता था तथा उनका प्रयोग कर सकता था।

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प्रश्न 8.
होमोनिड्ज के दो महत्त्वपूर्ण वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस तथा
  2. होमो।

प्रश्न 9.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो में क्या अंतर है?
उत्तर:
होमो की तुलना में आस्ट्रेलोपिथिकस के दिमाग का आकार छोटा, बड़ा, भारी तथा दाँत भी ज्यादा बड़े होते हैं।

प्रश्न 10.
वैज्ञानिकों ने विभिन्न मानव प्रजातियों को उनका नाम देने के लिए किन दो भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है?
उत्तर:
यूनानी तथा लैटिन (लातिनी) भाषाओं में।

प्रश्न 11.
आस्ट्रेलोपिथिकस के कौन-से शारीरिक लक्षण उसे वृक्षों पर रहने के अनुकूल बनाते थे?
उत्तर:

  1. आगे के अवयवों का लंबा होना
  2. हाथों तथा पैरों की मुड़ी हुई हड्डियों तथा
  3. टखनों के घुमावदार जोड़।

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प्रश्न 12.
औजार बनाने तथा लंबी दूरी तक चलने से आस्ट्रेलोपिथिकस में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
उसमें कई मानवीय लक्षणों का विकास हुआ।

प्रश्न 13.
‘होमो’ शब्द का क्या अर्थ है ? होमो के अवशेषों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:’
होमो’ लातिनी (Latin) भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’ भले ही इसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। होमो को उनकी विशेषताओं के अनुसार तीन वर्गों में बांटा गया है-

  1. होमो हैबिलिस (औजार बनाने वाले)
  2. होमो एरेक्टस (सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले)
  3. होमो सेपियंस (चिंतनशील मनुष्य)।

प्रश्न 14.
कोई दो उदाहरण दीजिए जिनमें होमो के जीवाश्मों को उनकी प्राप्ति-स्थल के नाम पर नामित किया गया हो।
उत्तर:

  1. जर्मनी के शहर हाइडलबर्ग में पाए गए जीवाश्मों को होमोहाइडल बर्गेसिस (Homo heidel bergenisis) कहा गया है।
  2. निअंडर घाटी में पाए गए जीवाश्मों को होमो निअंडरथलैंसिस श्रेणी में रखा गया है।

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प्रश्न 15.
यूरोप में पाये जाने वाले सबसे पुराने ‘होमो’ जीवाश्म कौन-कौन से हैं। ये किस प्रजाति के हैं?
उत्तर:
यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्म होमो हाइडलबर्गसिस तथा होमो निअंडरथलैंसिस हैं। ये दोनों ही होमो सैपियंस प्रजाति के हैं।

प्रश्न 16.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से भोजन प्राप्त करता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन प्राप्त करता था-जैसे संग्रहण (Gatherings), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing)।

प्रश्न 17.
मस्तिष्क का आकार होमो के किस लक्षण को दर्शाता है?
उत्तर:
अधिक बुद्धिमत्ता तथा अधिक अच्छी स्मृति को।।

प्रश्न 18.
किस बात से संकेत मिलता है कि होमिनिड्ज पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया तथा यूरोप में पहुंचे?
उत्तर:
एशिया में पाए गए होमिनिड के जीवाश्म अफ्रीका में पाए गए जीवाश्मों की तुलना में बाद के हैं। इसलिए यह संभव है कि होमीनिड पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया और यूरोप में पहुंचे।

प्रश्न 19.
आदिकालीन गुफाओं में पाये गए चूल्हे किस बात के द्योतक हैं?
उत्तर:
आग के नियंत्रित उपयोग के द्योतक हैं।

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प्रश्न 20.
मनुष्य की भांति वानर औजारों का निर्माण तथा उनका उपयोग क्यों नहीं कर पाते थे?
उत्तर:
स्मरण शक्ति तथा आवश्यक कौशल के अभाव के कारण।

प्रश्न 21.
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य कहाँ से मिला है? ये संभवतः किस प्रजाति ने बनाए थे?
उत्तर:
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल किए जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथियोपिया और केन्या के पुरा स्थलों से मिला है। ये औजार संभवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे।

प्रश्न 22.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में आदिकालीन चित्रकारियाँ पाई गई हैं? इन चित्रकारियों में किन-किन जानवरों के चित्र शामिल हैं ?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। ये 30,000 से 12,000 वर्ष पहले बनाई गई थीं। इनमें जंगली भैसों, घोड़ों, हिरणों, गेण्डों, शेरों, भालुओं तेंदुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

प्रश्न 23.
मानव विज्ञान से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विज्ञान वह विज्ञान है जो मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन करता है।

प्रश्न 24.
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन क्या है। वे किस जानवर का मांस नहीं खाते?
उत्तर:
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन जंगली साग-सब्जियाँ तथा पशुओं का मांस हैं। वे हाथी का मांस नहीं खाते।

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प्रश्न 25.
हादजा लोग जमीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि –

  1. वे जहाँ चाहे रह सकते हैं।
  2. पशुओं का शिकार कर सकते हैं।
  3. कंदमूल और शहद इकट्ठा कर सकते है और पानी ले सकते हैं।

प्रश्न 26.
हादजा लोगों के पास सूखा पड़ने पर भी भोजन की कमी क्यों नहीं होती?
उत्तर:
हादजा लोगों के इलाके में सूखे के मौसम में भी पर्याप्त मात्रा में खाने वाले कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि मिलते हैं। इसीलिए उनके पास भोजन की कमी नहीं होती।

प्रश्न 27.
आज के शिकारी समाजों में पाई जाने वाली तीन भिन्नताएं बताएँ।
उत्तर:

  1. आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्व देते हैं।
  2. उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-छोटे हैं।
  3. उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है।

प्रश्न 28.
अंतिम हिमयुग का अंत होने के कोई दो परिणाम बताओ।
उत्तर:

  1. अपेक्षाकृत अधिक गर्म और नम मौसम की शुरूआत हुई।
  2. जंगली जौ और गेहूँ जैसे जंगली अनाज उगाने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हो गई।

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प्रश्न 29.
जीवाश्म किस प्रकार लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं?
उत्तर:
जीवाश्म प्राय: चट्टानों में दबे रहते हैं। फलस्वरूप वे लाखो वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 30.
विश्व के एक क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ आज से लगभग दस हजार साल पहले खेती और पशुचारण प्रारंभ हुआ?
उत्तर:
मध्य सागर के तट से लेकर ईरान में जागरोस (Zagros) पर्वतमाला तक फैला हुआ क्षेत्र जिसे फर्टाइल क्रीसेंट यानी उर्वर अर्धचंद्राकार क्षेत्र कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आरंभिक मानव-प्रतिरूप के दो पैरों पर चलने से क्या लाभ हुए ? दो पैरों पर चलने वाले मानव के प्रारंभिक प्रत्यक्ष प्रमाण कहाँ से मिले हैं?
उत्तर:
दो पैरों पर चलने से मानव कं हाथ कार्यमुक्त हो गये। अब वह हाथों का प्रयोग बच्चों को उठाने अथवा आवश्यक वस्तु को उठाने के लिए कर सकता था। हाथों के लगातार प्रयोग से मानव की खड़ा होकर चलने की कुशलता धीरे-धीरे बढ़ती गई। इसके अतिरिक्त उसके चलने में चौपायों की तुलना में कहीं कम ऊर्जा खर्च लगी, भले ही दौड़ने में उसे अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती थी। दो पैरों पर चलने वाले मानव-प्रतिरूप के प्रमाण हादर (Hadar) इथोपिया से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 2.
‘होमो’ का क्या अर्थ है ? इन्हें कौन-कौन सी प्रजातियों में बाँटा गया है?
उत्तर:
‘होमो’ लातिनी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’। वैज्ञानिकों ने होमो को कई प्रजातियों में बाँटा है और इन प्रजातियों को उनकी विशेषताओं के अनुसार अलग-अलग नाम दिए गए हैं। इस प्रकार जीवाश्मों को निम्नलिखित तीन प्रजातियों में बाँटा

  • होमो हैबिलिस औजार बनाने वाले
  • होमो एरेक्टस सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले
  • होमो सैपियंस-चिंतनशील मनुष्य

होमो हैबिलिस के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो (Ome) और तंजानिया में ओल्डवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हुए हैं। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका और एशिया महाद्वीपों में पाए गए हैं।

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प्रश्न 3.
आदिकालीन मानव के खुले स्थलों पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर:
आदिकालीन मानव के खुले स्थान पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है। उनके द्वारा निर्मित शिल्पकृतियों के फैलाव की जाँच करना। उदाहरण के लिए केन्या में किलोंबे (Kilomble) और ओलोर्जेसाइली (Olorgesaillie) के खनन स्थलों पर हजारों की संख्या में शल्क-उपकरण और हस्तकुठार मिले हैं। ये औजार 700,000 से 500,000 साल पुराने हैं। इतने अधिक औजार एक ही स्थान पर इकट्ठे होने का अर्थ है कि इन स्थानों पर आदि मानव लंबे समय तक रहा होगा या बार-बार आता होगा । वास्तव में जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन प्रचुर मात्रा से उपलब्ध थे, वहाँ लोग बार-बार आते रहते होंगे।

ऐसे क्षेत्रों में लोग शिल्पकृतियाँ सहित अपने क्रियाकलापों के चिह्न छोड़ जाते होंगे। जमा शिल्पकृतियों कुछ ही क्षेत्रों में मिलती है और वे क्षेत्र कुछ अलग से दिखाई पड़ते हैं। जिन स्थानों पर लोगों का आवागमन कम होता था वहाँ ऐसी शिल्पकृतियाँ कम मात्रा में मिलती हैं।

प्रश्न 4.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं? ये चित्रकारियाँ क्यों की गई थी, इसके बारे में क्या बताया जाता है?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकाक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं। और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई है। ये 3000 से 12,000 साल पहले बनाई गई थीं। इनमें गौरों (जंगली बैलों), घोड़ों, पहाड़ी बकरों (Abox), हिरनों, मेमनों, विशालकाय जानवरों, गैडों, शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्घों, उल्लुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

बताया जाता है कि इन चित्रकारियाँ का संबंध धार्मिक क्रियाओं अथवा जादू-टोनों से है। संभवत: चित्रकारी के रूप में जादू-टोना करके मनुष्य अपने शिकार को सफल बनाने का प्रयास करता होगा। यह भी कहा जाता है कि शायद ये गुफाएँ संगम स्थल थीं। यहाँ लोगों के यहाँ छोटे-छोटे समूह आपस में मिलते थे और सामूहिक क्रियाकलाप संपन्न करते थे। संभव है कि वहाँ ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते हों अथवा शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा करते हों। यह भी संभव है ये चित्रकारियाँ आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों।

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प्रश्न 5.
यह किस आधार पर कहा जाता है कि मानव का निकास क्रमिक रूप से हुआ?
उत्तर:
वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। मानव की एक के बाद एक कई प्रजातियाँ उत्पन्न हुई और लुप्त हो गई । लाखों वर्षों की इस प्रक्रिया के बाद आधुनिक मानव का उद्भव हुआ। इसका साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों के अवशेषों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। इनके शारीरिक लक्षण भिन्न-भिन्न थे। इनका काल निर्धारण प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का परोक्ष रूप से काल का निर्धारण करके किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि ये प्रजातियाँ एक क्रम में अलग-अलग काल में जीवित रहीं। इनके शारीरिक लक्षण बदलते रहे और इस प्रकार आज का मानव अस्तित्व में आया ।

प्रश्न 6.
होमिनिड का विकास किससे हुआ है ? दोनों में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनिड का विकास होमिनॉइड से हुआ है। इन दोनों में निम्नलिखित अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड के दिमाग का आकार होमिनिइज की तुलना में छोटा होता है।
  2. वे चौपाये होते हैं और चारों पैरों के बल चलते हैं। इसके विपरीत होमिनिड् का शरीर सीधा होता है। वे दो पैरों पर चलते हैं।
  3. उनके हाथों में भी काफी अंतर पाया जाता है। होमिनिड के हाथों की रचना इस प्रकार होती है कि उन्हें औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7.
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदिमानव की जीवन शैली में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदि मानव के जीवन शैली में निम्नलिखित परिवर्तन आए –

  1. फेंककर मारने वाले भालों तथा तीर-कमान जैसे नए औजार बनाए जाने लगे। इससे जानवरों को मारने के तरीकों में सुधार हुआ।
  2. मांस को साफ किया जाने लगा। उसमें से हड्डियाँ निकाल दी जाती थीं। फिर उसे सुखाकर, हल्का सेकते हुए सुरक्षित रख लिया जाता था। इस प्रकार सुरक्षित रखे मांस को बाद में खाया जा सकता था।
  3. समूरदार जानवरों को पकड़ा जाने लगा और उनके रोएँदार खाल का कपड़े की तरह प्रयोग किया जाने लगा।
  4. सिलने के लिए सुई का आविष्कार भी हुआ। सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य लगभग 21,000 वर्ष पुराना है।
  5. छेनी या रूखानी जैसे छोटे-छोटे औजारों के बनाने की तकनीक का आविष्कार हुआ । इन नुकीले ब्लेडों से हड्डी, सींग, हाथी दाँत या लकड़ी पर नक्काशी करना संभव हो गया।

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प्रश्न 8.
मानव उद्भव के प्रतिस्थापन मॉडल की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है।

दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक विभिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है । भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही यं भिन्नताएँ उत्पन्न की क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

प्रश्न 9.
आटिमानव दवारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदिमानव द्वारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथोपिया और केन्या के पुरास्थलों से मिला है। ये औजार संभवत: आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे। वास्तव में मनुष्य के जीवन में औजारों का विशेष महत्त्व था। उसमें वानरों से हटकर कुछ ऐसी शारीरिक विशेषताएँ थीं जिन्होंने उसे औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता दी। उसकी सबसे पहली विशेषता थी-हाथों का कुशलतापूर्व प्रयोग । इसके अतिरिक्त उसमें वानरों से अधिक स्मरण शक्ति और जटिल संगठनात्मक कौशल भी था।

प्रश्न 10.
प्राइमेट्स से क्या अभिप्राय है? इनकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राइमेट्स स्तनधारियों के बहुत बड़े वर्ग का एक उपवर्ग है। इस वर्ग में वानर, लंगूर तथा मानव आदि शामिल हैं। इस वर्ग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. इनके शरीर पर बाल होते हैं।
  2. इनका गर्भकाल अपेक्षाकृत लंबा होता है।
  3. ये बच्चों को जन्म देते हैं।
  4. माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रंथियाँ होती हैं।
  5. इनके दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।
  6. इनमें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने की क्षमता होती है।

प्रश्न 11.
होमिनॉइड तथा बंदर में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनॉइड तथा बंदर में निम्नलिखित कई अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड्ज का शरीर बंदर के शरीर से बड़ा होता है।
  2. उनको पूँछ नहीं होती।
  3. उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता है।
  4. होमिनॉइड के बच्चे बंदर के बच्चों की तुलना में लंबे समय तक उन पर निर्भर रहते हैं

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प्रश्न 12.
आस्ट्रेलोपिथिकस को यह नाम क्यों दिया गया?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस दो शब्दों के मेल से बना है-लैटिन शब्द ‘आस्ट्रल’ (austral) जिसका अर्थ होता है ‘दक्षिणी’ तथा यूनानी शब्द ‘पिथिकस’ (pithekos) जिसका अर्थ है वानर । यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि मानव के बन रहे प्रारंभिक प्रतिरूपों में वानर अवस्था के कई लक्षण पाये जाते थे। उदाहरण के लिए –

  • होमो की तुलना में उनके दिमाग का आकार छोटा था।
  • उनके पिछले दाँत बड़े थे।
  • उनके हाथों की दक्षता सीमित थी।
  • वे सीधे खड़े होकर बहुत कम चल पाते थे क्योंकि वे अभी भी अपना अधिकतर समय वृक्षों पर बिताते थे अतः उनके शारीरिक लक्षण वृक्षों पर रहने के अनुकूल थे।

प्रश्न 13.
क्या खानाबदोश पशुचारक शहरी जीवन के लिये खतरा थे?
उत्तर:
मेसोपोटामिया का मुख्य भूमि प्रदेश काफी उपजाऊ था। फलतः खानाबदोश पशुचारकों का झुंड यहाँ आता था। ये किसानों के बोये हुए खेतों में अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने ले जाते थे, जिससे फसल को नुकसान पहुँचता था। इसके अतिरिक्त ये पशुचारक किसानों के गाँवों को लूट लेते थे। इस प्रकार ये स्थानीय किसानों हेतु खतरा थे। इसके कारण शासकों को यह डर बना रहता था कि ये पशुचारक कहीं छापे अथवा हमलों की कोई योजना तो नहीं बना रहे।

प्रश्न 14.
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर:
ऐसा माना जाता है कि होमोहैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना संभव हुआ होगा। यह विकास संभवतः 20 लाख वर्ष पूर्व शुरू हुआ होगा। मस्तिष्क में हुए परिवर्तन के अतिरिक्त स्वर-तंत्र का विकास भी महत्त्वपूर्ण था। यह विकास लगभग 200,000 वर्ष पहले हुआ था। इसका संबंध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है। एक अन्य सुझाव यह है कि भाषा-कला के साथ-साथ लगभग 40,000-35000 वर्ष पहले विकसित हुई। बोली जाने वाली भाषा-कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, क्योंकि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

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प्रश्न 15.
संजाति वृत्त Ethnography) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संजाति वृत्त में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। इससे उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधनों, तकनीकों आदि का पता लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त समूहों में स्त्री-पुरुष की भूमिका, राजनीतिक संस्थाओं तथा सामाजिक रूढ़ियों की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही उनके कर्मकांडों तथा रीति-रिवाजों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 16.
हिमयुग कब आया? इससे मानव की प्रक्रिया में कैसे और क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
हिमयुग लगभग 25 लाख वर्ष पहले आया। पृथ्वी के बड़े-बड़े भाग बर्फ से ढंक गए । फलस्वरूप जलवायु तथा वनस्पति में बड़े-बड़े परिवर्तन देखने को मिले । तापमान और वर्षा में कमी आ गई जिसके कारण वन कम हो गए। इसके विपरीत घास के मैदानों का क्षेत्रफल बढ़ा गया। परिणामस्वरूप आस्ट्रलोपिथिकस के प्रारंभिक रूप धीरे-धीरे लुप्त हो गए, क्योंकि ये वनों में रहने के आदी थे। अब उनके स्थान पर उनकी प्रजातियाँ प्रकट हुईं जो सूखी परिस्थितियों में आराम से रह सकती थीं। प्रजातियों में जीनस होमो के सबसे पुराने प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रश्न 17.
पूर्व (आदिकालीन) मानव कुछ स्थलों को सोच समझकर शिकार के लिए चुनता था । क्यों ? उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर:
पूर्व मानव कुछ स्थलों को सोच समझ कर चुनता था। ऐसा एक स्थल चेक गणराज्य में दोलनी वेस्तोनाइस (Dolni Vestonice) था जो एक नदी के पास स्थित है। मानव ऐसे स्थल इसलिए चुनता था क्योंकि वह जानवरों की आवाजाही के बारे में जानता था। वह जल्दी से बड़ी संख्या में जानवरों को मारने के तरीकों से भी परिचित था । उदाहरण के लिए मानव ने जो स्थल चेक गणराज्य के नदी के पास चुना था, वहाँ पतझड़ और बसंत के मौसम में रैडियर तथा घोड़ों जैसे स्थान बदलने वाले जानवरों के झुंड के झुंड आते थे। इनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था।

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प्रश्न 18.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच क्या शारीरिक अंतर थे? ये अंतर क्या दर्शाते हैं?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच निम्नलिखित शारीरिक अंतर थे –

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो के मस्तिष्क का आकार बड़ा था।
  2. होमो के जबड़े कम बाहर निकले हुए थे।
  3. होमो के दाँत अपेक्षाकृत छोटे थे।
  4. होमो के मस्तिष्क का बड़ा आकार उसके बुद्धिमान तथा उसकी बेहतर स्मृति को दर्शाता है।
  5. जबड़ों तथा दाँतों में हुआ परिवर्तन संभवतः उनके खान-पान की भिन्नता से संबंधित है।

प्रश्न 19.
भाषा का विकास किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है। भाषा के विकास के विषय में कई प्रकार के मत हैं –

  1. होमिनिड भाषा में अंगविक्षेप (हाव-भाव) या हाथों का संचालन (हिलाना) शामिल था।
  2. उच्चरित अथवा बोली जाने वाली भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अ-शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
  3. मनुष्य की वाणी का प्रारंभ संभवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसे कि नर-वानर करते हैं। प्रारंभिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत ही कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। यही ध्वनियाँ आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से अपना भोजन जुटाता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन जुटाता था जैसे संग्रहण (Gathering), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing) –
1. संग्रहण – संग्रहण की क्रिया में पेड़ों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों, जैसे बीज, गुठलियाँ, बेर फल एवं कंदमूल को इकट्ठा करना शामिल था। संग्रहण के संबंध में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि इस बारे में प्रत्यक्ष साक्ष्य बहुत कम मिलते हैं। हमें हड्डयों के जीवाश्म तो बहुत मिल जाते हैं परंतु पौधे के जीवाश्म दुर्लभ ही हैं। पौधों से भोजन जुटाने के बारे में सूचना प्राप्त करने का एक मात्र तरीका दुर्घटनाओं या संयोगवश जले हुए पौधों के प्राप्त अवशेष हैं।

इस प्रक्रिया से कार्बनीकरण हो जाता है और जला हुआ जैविक पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। फिर भी, अभी तक पुरातत्वविदों को अति पुराने जमाने के संबंध में कार्बनीकृत बीजों का साक्ष्य नहीं मिला है।

2. शिकार – शिकार संभवतः बाद में शुरू हुआ-लगभग 5 लाख साल पहले। स्तनपायी जानवरों के योजनाबद्ध शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य दो स्थलों से मिलता है। ये स्थल हैं दक्षिण इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव (Boxgrove) और जमनी में शोनिंजन (Schoningen).

3. अपमार्जन – अपमार्जन से तात्पर्य त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है ! अब मुख्य रूप से यह माना जाने लगा है कि आदिकालीन होमिनिड अपमार्जन के द्वारा उन जानवरों की लाशों सं मांस-मजा खुरच कर निकालने लग थ जो जानवर अपने आप मर जाते थे या अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। यह भी इतना ही संभव है कि पूर्व होमिनीड छोटे स्तनपायी जानवरों-चूहे, छछूदर जैसे कृतकों (Rodents), पक्षियों (और उनके अंडों), सरीसृपों और यहाँ तक कि कीड़े-मकोड़े भी खा जाते थे।

4. मछली पकड़ना – मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका इस बात की जानकारी अनेक खोज स्थलों से मछली की हड्डियाँ मिलने से होती है।

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प्रश्न 2.
क्या वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त जानकारी को सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है?
उत्तर:
वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों की जानकारी के आधार पर आदिकालीन शिकारी-संग्राहक समाजों के अध्ययन के बारे में दो परस्पर विरोधी विचारधाराएँ चल रही हैं।
1. पहली विचारधारा – विद्वानों के एक वर्ग ने आज के शिकारी-संग्राहक समाजों से प्राप्त तथ्यों तथा आँकड़ों का सीधे अतीत के अवशेषों की व्याख्या करने के लिए उपयोग कर लिया है। उदाहरण के लिए कुछ पुरातत्वविदों का कहना है कि 20 लाख साल के होमिनिड स्थल जो तुर्काना झील के किनारे स्थित हैं, संभवतः आदिकालीन मानवों के शिविर या निवास स्थान थे। वे यहाँ सूखे के मौसम में आकर रहते थे। वर्तमान हादजा और फुग सैन समाज भी ऐसा ही करते हैं।

2. दूसरी विचारधारा – दूसरी ओर कुछ विद्वानों का मत है कि संजाति वृत्त संबंधी तथ्यों और आंकड़ों का उपयोग अतीत के समाजों को समझने के लिए नहीं किया जा सकता है। उनके अनुसार ये चीजों एक-दूसरे से बिल्कुल आर्थिक कियाकलापों में भी लगी हुई हैं। वे जंगलों में पाई जाने वाली छोटी-छोटी चीजों का विनिमय और व्यापार करते हैं। कुछ समाज पड़ोस के किसानों के खेतों में मजदूरी करते हैं। इसके अतिरिक्त जिन परिस्थितियों में रहते हैं। वे आरंभिक मानव की अवस्था से बहुत भिन्न हैं।

आज के शिकारी – संग्राहक समाजों की जीवन-शैली भी भिन्न-भिन्न है। कई बातों में तो परस्पर विरोधी तथ्य दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं। उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-बड़े होते हैं। उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है। भोजन प्राप्त करने में श्रम विभाजन को लेकर भी कोई आम सहमति नहीं है।

यह सच है कि आज भी अधिकतर स्त्रियाँ ही खाने पीने की सामग्री जुटाने का काम करती हैं और पुरुष शिकार करते हैं। परंतु ऐसे समाजों के भी उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियाँ और पुरुष दोनों ही शिकार और संग्रहण तथा औजार बनाने के काम करते हैं। संभवत: इसी बात से यह सुनिश्चित होता है कि आज के शिकारी-संग्राहक समाजों में स्त्री-पुरुष दोनों की भूमिका लगभग एक समान है। अतः वर्तमान स्थिति में अतीत के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना कठिन है।

प्रश्न 3.
आदि मानव के गुफाओं तथा खुले स्थानों पर आवास के बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्र का प्रचलन 400,000 से 125,000 वर्ष पहले शुरू हो गया था। इसके साक्ष्य यूरोप के पुरास्थलों में मिलते हैं।
1. दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा की दीवार को 12×4 मीटर आकार के एक निवास स्थान से सटाकर बनाया गया है। इसके अंदर दो चूल्हों (Hearths) के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न प्रकार के खाद्य स्रोतों जैस फलों, वनस्पतियों, बीजों, काष्ठफला, पक्षियों के अण्डों और मीठे जल की मछलियों (ट्राउट, पर्च और कार्प) के साक्ष्य मिले हैं। दक्षिणी फ्रांस के समुद्रतट पर स्थित टेरा अमाटा (Terra Amata) एक अन्य पुरास्थल है। यहाँ घास-फूस और लकड़ी की छत वाली कच्ची झोपड़ियाँ बनाई जाती थीं। ये झोपड़ियाँ किसी विशेष मौसम में थोड़े समय के आवास के लिए बनाई जाती थी।

केन्या में चसीबांजा (Chesowanja) और दक्षिण अफ्रीका से स्वार्टक्रान्स (Swarkarns) में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकायी गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े मिले हैं। ये 14 लाख से 10 लाख साल पुराने हैं। यह पता नहीं चल पाया कि ये चीजें प्राकृतिक रूप से झाड़ियों में लगी आग या ज्वालामुखी से उत्पन्न अग्नि से जलने का परिणाम हैं अथवा एक सुनियोजित ढंग से लगाई गई आग में पकाकर बनाई गई थीं।

दूसरी ओर, चूल्हे आग के नियंत्रित प्रयोग के प्रतीक हैं। इसके कई लाभ थे।

  • इनका प्रयोग गफाओं के अंदर प्रकाश और उष्णता प्राप्त करने के लिए किया जाता होगा।
  • इससे भोजन भी पकाया जा सकता था।
  • इसके अतिरिक्त लकड़ी को कठोर करने में भी आग का इस्तेमाल होता था जैसे कि भाले की नोंक बनाने में।
  • शल्क निकाल कर औजार बनाने में भी आग की उष्णता की सहायता ली जाती थी।
  • साथ ही इसका उपयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में किया जाता था।

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प्रश्न 4.
आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ? इस संबंध में प्रचलित मतों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदि मानव के उद्भव स्थल के बारे में बहुत अधिक वाद-विवाद हुआ है। आज इस संबंध में दो मत प्रचलित हैं जो एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। ये मत आगे दिए गए हैं
1. क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (Continuity Model) – मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले होमो सेपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया । इस तर्क का आधार आज के मनुष्य में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं।

इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचार में यह मॉडल पुरातात्त्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

2. प्रतिस्थापन मॉडल (Replacement Model) – प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगृह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे।

वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है। दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक भिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरंतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है। भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही ये भिन्नताएँ उत्पन्न का क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की पथतियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव के उद्भव से संबंधित प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार कौन-सा मत सही है।
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ
(ख) अनेक क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों की उत्पत्ति हुई
(ग) मनुष्य का उद्भव यूरोप में हुआ
(घ) सभी क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों को उत्पत्ति नहीं हुई
उत्तर:
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 2.
अपमार्जन का अर्थ है ………………………
(क) भोजन की तलाश करना
(ख) भोजन एकत्रित करना
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना
(घ) कंदमूल जमा करना
उत्तर:
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना

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प्रश्न 3.
गुफा चित्रकला का प्राचीनतम प्रमाण किस काल का मिला है?
(क) पुरापाषाण
(ख) मध्यपाषाण
(ग) नवपाषाण
(घ) हड़प्पा
उत्तर:
(ग) नवपाषाण

प्रश्न 4.
हमें प्रथम होमिनिड्स का साक्ष्य मिलता है ………………………..
(क) 50 मिलियन वर्ष पूर्व
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व
(ग) 10 मिलियन वर्ष पूर्व
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व

प्रश्न 5.
साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि होमिनिड्स का उद्भव ……………………..
(क) एशिया में हुआ
(ख) यूरोप में हुआ
(ग) अफ्रीका में हुआ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 6.
जीवों का ऐसा समूह, जिसके नर और मादा मिल कर बच्चे पैदा कर सकते हैं और बाद में भी ये क्रम जारी रहता है, कहलाता है।
(क) प्राइमेट्स
(ख) स्पीशीज
(ग) होमोनिड
(घ) जीवाश्म
उत्तर:
(ख) स्पीशीज

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प्रश्न 7.
होमो लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ………………………..
(क) आदमी
(ख) स्त्री
(ग) वानर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) आदमी

प्रश्न 8.
होमिनिड समूह की विशेषताएँ हैं ……………………….
(क) मस्तिष्क का बड़ा आकार
(ख) दौ पैरों पर चलना
(ग) हाथ की विशेष आकृति
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
आस्ट्रोलोपिथिकस की उत्पत्ति हुई है ………………………
(क) लैटिन भाषा से
(ख) ग्रीक भाषा से
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से

प्रश्न 10.
चार्ल्स डारविन की पुस्तक ‘ओरिजिन ऑफ स्पेसिज’ कब प्रकाशित हुई?
(क) 1852
(ख) 1856
(ग) 1857
(घ) 1859
उत्तर:
(घ) 1859

प्रश्न 11.
आधुनिक मानव का उद्भव लगभग कितने वर्ष पूर्व हुआ?
(क) 45000
(ख) 200000
(ग) 300000
(घ) 400000
उत्तर:
(क) 45000

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प्रश्न 12.
केन्या के किलोबे और ऑलार्जेसाइली स्थल से किस काल के हस्त कुठार मिलते हैं?
(क) पुरापाषाण काल
(ख) मध्यपाषाण काल
(ग) नवपाषाण काल
(घ) ताम्रपाषाण काल
उत्तर:
(क) पुरापाषाण काल

प्रश्न 13.
पत्थर के औजार संभवतः सबसे पहले किसने बनाए थे?
(क) रामापिथेकस
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस
(ग) निअंडर थाल
(घ) हीमोसैपियंस
उत्तर:
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस

प्रश्न 14.
लैसकॉक्स और शोवे की गुफा की चित्रकला कहाँ पायी गयी है?
(क) फ्रांस
(ख) नार्वे
(ग) डेनमार्क
(घ) रूस
उत्तर:
(क) फ्रांस

प्रश्न 15.
शहरी जीवन की शुरूआत सर्वप्रथम कहाँ हुई?
(क) मेसोपोटामिया
(ख) चीन
(ग) यूनान
(घ) रोम
उत्तर:
(क) मेसोपोटामिया

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प्रश्न 16.
वार्का शीर्ष कहाँ मिला है?
(क) उरुक
(ख) यमन
(ग) जॉर्डन
(घ) तुर्की
उत्तर:
(क) उरुक

प्रश्न 17.
ओल्डुबई गोर्ज रिफ्ट घाटी, जहाँ आदिकालीन मानव के इतिहास के चिह्न पाये गये हैं कहाँ स्थित हैं?
(क) द. अमेरिका
(ख) पूर्वी अफ्रीका
(ग) इंडोनेशिया
(घ) मध्य यूरोप
उत्तर:
(ख) पूर्वी अफ्रीका

प्रश्न 18.
यूरोप में मिले सबसे पुराने होमो जीवाश्म किसके हैं?
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस
(ख) रामापिथेकेस
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस
(घ) क्रोमैतानम्
उत्तर:
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस

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प्रश्न 19.
योजनाबद्ध तरीके से जानवरों का शिकार का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य कहाँ से मिलता …………………………
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)
(ख) शोमिंजन
(ग) सोजन घाटी (पाकिस्तान)
(घ) बलन घाटी
उत्तर:
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)

प्रश्न 20.
दफनाने की परंपरा का प्राचीनत्तम साक्ष्य लगभग कितने लाख वर्ष पहले का मिला है?
(क) 5 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 4 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 2 लाख वर्ष पूर्व
उत्तर:
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.4 Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.4

Bihar Board Class 9 Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.4

प्रश्न 1.
5 cm तथा 3 cm त्रिज्या वाले दो वृत्त दो विन्दुओं पर प्रतिच्छेद करते हैं तथा मके केन्द्रों के बीच की दूरी 4 cm है। उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना 5 cm तथा 3 cm की त्रिज्याओं वाले वृत्त के केन्द्र O तथा O’ है जिनकी उभयनिष्ठ जीला PQ है।
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∴ OP = 5cm. O’P = 3cm तथा OO’ = 4 cm.
∆OO’P एक समकोण त्रिभुव है।[∵ OP² = PO’² – OO’²]
हम जानते है कि किसी चूत के केन्द्र से डाला गया लम्ब उसकी जीवा को समद्विभाजित करता है।
नकि उभयनिष्ठ जीवा PQ छोटे वृत्त के केन्द्र O से होकर जाती है, इसलिए PQ खेटे वृत्त का व्यास है।
अत: जीवा PQ को सम्याई = खेटे वृत्त का व्यास D
⇒ PQ = 2 × O’P
∴ PQ = 2 × 3 = 6 cm.

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प्रश्न 2.
यदि एक वृत्त की दो समान जीयाएँ वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सिद्ध कीजिए कि एक जीवा के खण्ड दूसरी जीवा के संगत खण्डों के बराबर है।
उत्तर:
दिया गया है : PQ तथा RS वृत्त की दो समान जीवाएँ जो एक-दूसरे को T पर प्रतिच्छेद करती है।
सिद्ध करना है:
(i) PT = RT
(ii) TQ = TS
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रचना : OV ⊥ PT तथा OU ⊥ RT खाँची
उपपत्ति: ∆OVT तथा ∆OUT में,
OV = OU
(बराबर जीवाएँ जो केन्द्र से समान दूरी पर होंगी)
राया ∠OVT = ∠OUT
∴ OT = OT (उभयनिष्ठ)
∆OVT ≅ ∆OUT (SAS सांगसम गुणधर्म से)
∴ VT = UT …….. (1)
हम जानते हैं. PQ = RS …….. (2)
\(\frac{1}{2}\) PQ = \(\frac{1}{2}\) RS
⇒ PV = RU ……. (3)
समी- (1) व (3) को जोड़ने पर,
PV + VT = RU + UT
⇒ PT = RT
सगी. (2) में से (4) को घटाने पर,
PQ – PT = RS – RT
⇒ QT – ST …….. (5)
अत: समी. (4) तथा (5) से सिद्ध है कि संगत खण्ड बराबर होंगे।

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प्रश्न 3.
बदि एक वृत्त की दो समान जीवाएं वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सिद्ध कीजिए कि प्रतिच्छेद विन्दु को केन्द्र से मिलाने वाली रेखा जीवाओं से बराबर कोण बनाती हैं।
उत्तर:
दिया गया है : PQ तथा RS दो समान जीवाजे एक दूसरे को T पर प्रतिच्छेद करती है।
सिद्ध करना है! ∠OTV = ∠OTU
रचना : OV ⊥ PQ तथा OU ⊥ RS खाँची।
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उपपत्ति: ∆OVT तथा ∆OUT में,
OV = OU
(समान जीवा केन्द्र से समान दूरी पर होंगी)
∠OVT = ∠OUT
OT = OT (उभयनिष्ठ)
∴ ∆OVT ≅ ∆OUT (SAS सर्वांगसमता से)
∴ ∠OTV = ∠OTU
(सवांगसम त्रिभुज के संगत भाग)

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प्रश्न 4.
यदि एक रेखा दो संकेन्द्री वृत्तों (एक ही केन्द्र वाले वृत्त) को, जिनका केन्द्र O है. A, B, C और D पर प्रतिच्छेद करे, तो सिद्ध कीजिए AB = CD(पाठ्य-पुस्तक में आकृति देखिए।)
उत्तर:
रचना : OM ⊥ AD खींची।
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हम देख सकते हैं कि BC छेटे वृत्त तथा AD बड़े वृत की जीजा है। केन्द्र से डाला गया लम्ब जीया को समद्विभाजित करती है।
∴ BM = MC …… (1)
तथा AM = MD …….. (2)
समी. (2) में से (1) को घटाने पर,
AM – BM = MD – MC
⇒ AB = CD

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प्रश्न 5.
एक पार्क में बने 5 m त्रिज्या वाले बन पर खड़ी तीन लड़कियाँ रेशमा, सलमा एवं मनदीप खेल रही है। रेशमा एक गेंद को सलमा के पास, सलमा मनदीप के पास तथा मनदीप रेशमा के पास फेंकती है। यदि रेशमा तथा सलमा के बीच और सलमा तथा मनदीप के बीच की प्रत्येक दूरी 6 m झे, तो रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी क्या है?
उत्तर:
O तथा OB लन्ध क्रमश: RS तथा SM पर खींचे।
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AR = AS = \(\frac{6}{2}\) = 3m
OR = OS = OM = 5 m
(वृत्त की त्रिज्याएँ)
समकोण ∆OAR में,
OA² + AR² = OR²
OA² + (3)² = (5)²
OA = 4 m
ORSM एक पतंग की तरह होगी।
(OR = OM तथा RS = MS)
हम जानते हैं कि पतंग के विकर्ण लम्ब तथा उभयनिष्ठ विकर्ण अन्य विकर्ण से दोनों समबाहु त्रिभुज का समद्विभाजित होता है।
∴ ∠RCS = 90° तपा RC = CM
∆ORS का क्षेत्रफल = \(\frac{6}{2}\) × OA × RS
\(\frac{6}{2}\) × RC × OS = \(\frac{6}{2}\) × 4 × 6
= RC × 5 = 24
RC = 4.8
RM = 2RC = 2(4.8) = 9.6
अत: रेशमा तथा मनदीप के बीच की दूरी = 9.6 m.

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प्रश्न 6.
20 m त्रिज्या का एक गोल पार्क (वृत्ताकार) एक कालोनी में स्थित है। तीन लड़के अंकुर, सैय्यद तथा डेविड इसकी परिसीमा पर बराबर दूरी पर बैठेहैं और प्रत्येक के हाथ में एक खिलौना टेलीफोन आपस में बात करने के लिए है। प्रत्येक फोन की डोरी की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
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दिया है : AS = SD = DA
∴ ∆ASD एक समबाहु त्रिभुज है।
OA = 20 m
AB, ∆ASD की माध्यिका AK है तथा केन्द्र O, AB को 2 : 1 में विभाजित करता है।
उत्तर:
⇒ \(\frac{OA}{OB}\) = \(\frac{2}{1}\)
⇒ \(\frac{20}{OB}\) = \(\frac{2}{1}\)
⇒ OB = 10 m
∴ AB = OA + OB
= (20 + 10) = 30 m
समकोण ∆ABD में, AD² = AB² + BD²
⇒ AD² = (30)² + (\(\frac{AD}{2}\))²
⇒ AD² = 900 + \(\frac{1}{4}\) AD²
⇒ AD² – \(\frac{1}{4}\) AD² = 900
⇒ \(\frac{3}{4}\) AD² = 900
⇒ AD² = 1200
⇒ AD = 20√3 m
अत: प्रत्येक फोन की डोरी की लम्बाई = 20√3 m.

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Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 7 मानचित्र अध्ययन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन

Bihar Board Class 6 Social Science मानचित्र अध्ययन Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
सही विकल्पों पर (✓) का निशान लगाएँ –

प्रश्न 1.
जमीन पर के बड़े भाग को कागज पर दिखाने के लिए प्रयोग करते हैं
(क) छोटे मापक का
(ख) बड़े मापक का
(ग) दोनों मापक का
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(क) छोटे मापक का।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 2.
जिस मानचित्र में पर्वत, पठार, मैदान इत्यादि को दर्शाते हैं उसे कहते हैं
(क) थिमैटिक मानचित्र
(ख) भौतिक मानचित्र
(ग) राजनैतिक मानचित्र
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर-
(ख) भौतिक मानचित्र ।

प्रश्न 3.
मानचित्र में मैदान को दिखाते हैं
(क) काले रंग से
(ख) नीले रंग से
(ग) हरे रंग से
(घ) लाल रंग से
उत्तर-
(ग) हरे रंग से।

प्रश्न 4.
मानचित्र में दक्षिण दिशा होती है
(क) दायीं ओर
(ख) बायीं ओर
(ग) ऊपर की ओर
(घ) नीचे की ओर
उत्तर-
(घ) नीचे की ओर।

प्रश्न 5.
मानचित्र निर्माण में ध्यान रखना चाहिए
(क) संकेतों का
(ख) दिशाओं का
(ग) मापक का
(घ) उपर्युक्त सभी का
उत्तर-
(घ) उपर्युक्त सभी का।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 2.
बताइए-

प्रश्न 1.
चित्र एवं मानचित्र में क्या अंतर है?
उत्तर-
चित्रों में आमतौर पर चीजें वैसी ही बनाई जाती हैं। जैसी वह दिखती हैं परन्तु मानचित्र में चीजों को चिह्न या संकेत के रूप में दिखाई जाती चित्र आमतौर पर ऐसे बनाये जाते हैं जैसे कोई उस जगह किनारे खड़े होकर देखता हो और वह उसी प्रकार दिखाई भी देता है लेकिन मानचित्र हमेशा ऐसा बनाया जाता है जैसे उस जगह को ऊपर या आसमान से देख रहे हैं। चित्र में मापक (स्केल) का उपयोग नहीं होता परन्तु मानचित्र में मापक (स्केल) का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार चित्र और मानचित्र में यही आधारभूत अंतर पाया जाता है।

प्रश्न 2.
अगर आपको विश्व का मानचित्र बनाना हो तो किन-किन बातों का ध्यान रखना होगा?
उत्तर-
मानचित्र बनाना हो तो निम्न बातों को ध्यान में रखकर बना सकते

  • नक्शे में अगर कोई दुरी | सेमी. है तो वह वास्तविक रूप में कमरे में 1 मीटर के बराबर होगा।
  • 1 सेमी = 1 मीटर जिससे पता किया जा सकता है कि नक्शे में जो दूरी है वह वास्तव में कितनी दूरी के बराबर है। इस प्रकार हम मानचित्र को छोटा, बड़ा कर सकते हैं। जितना बड़ा मानचित्र बनाना होता है पैमाने का निर्धारण भी उसी प्रकार करते हैं।

मानचित्र में दिशा सूचक रेखा बनाई जाती है।

जैसे-
Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन 1

  • मानचित्र से हमें बहुत अधिक जानकारी प्राप्त होती है। मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है – जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि ।
  • नक्शे में रंगों एवं चिह्नों की सहायता से हमें वहाँ की जानकारी प्राप्त करने में सहायता होती है। जैसे – जलाशय-नीला रंग।
    पर्वत – भूरा रंग, पठार-पीला रंग, मैदान-हरा रंग।

इस प्रकार हम उपर्युक्त इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विश्व का मानचित्र बना सकते हैं।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन

प्रश्न 3.
मानचित्र में इस्तेमाल किये गये रंग किसके प्रतीक हैं?
उत्तर-
मानचित्र में जलाशय-नीले रंग का प्रतीक है।

पर्वत – भूरा रंग का प्रतीक है। पठार – पीला रंग और मैदान – हरा रंग का प्रतीक है।

प्रश्न 4.
मानचित्र के कितने प्रकार हैं ?
उत्तर-
मानचित्र के निम्न प्रकार के होते हैं

  • पर्वत, पठारों, मैदानों, नदियों, महासागरों आदि को दर्शाते हैं।
  • गाँव, शहर, राज्य, देश एवं विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र कहलाते हैं। ।
  • इन मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है। जैसे-जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वर्षा मानचित्र, उद्योग मानचित्र आदि ।

प्रश्न 5.
मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण कैसे करते हैं ? .
उत्तर-
मानचित्र में दिशाओं का निर्धारण दिशा सूचक रेखा के द्वारा किया जाता है। मानचित्र में उत्तर दिशा जो ऊपर की ओर है उसे उत्तर दिशा सूचक रेखा के माध्यम से दिखाई जाती है। जैसे-उत्तर की ओर चिह्न को दर्शाया जाता है।

पाठ के महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित नक्शो के लिए उपयुक्त रंगों के साथ मिलाएँ-
Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 7 मानचित्र अध्ययन 2
उत्तर-

  • जलाशय – नीला रंग
  • पर्वत – भूरा रंग
  • पठार – पीला रंग
  • मैदान – हरा रंग

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित नामों को चित्रों के द्वारा दर्शाएँ ।
(क) रेलवे लाइन
(ख) पक्की सड़क
(ग) कच्ची सड़क
(घ) राज्य
(ङ) अंतर्राष्ट्रीय सीमा
(च) जिला।
उत्तर-
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Bihar Board Class 6 Social Science मानचित्र अध्ययन Notes

पाठ का सारांश

कक्षा में आते ही रमेश ने गुरुजी से पूछा-गुरुजी, कल मैंने पिताजी केऑफिस में एक कैलेण्डर देखा तो उसमें कोई चित्र नहीं था बल्कि उस पर आडी-तिरछी रेखाएँ खींची हई थीं और उसमें कई रंग भरे हुए थे। क्या ऐसा भी कैलेण्डर होता है । गुरुजी ने बताया कि जिसे आप चित्र समझ रहे हैं वास्तव में वह मानचित्र है। उन्होंने श्यामपट्ट पर चित्र बनाया और बच्चों को समझाया ।

मानचित्र में चीजों को चिह्न या संकेत के रूप में दिखाया जाता है । चित्र । अमातौर पर ऐसे बनाये जाते हैं जैसे कोई उस जगह को उसके किनारे खड़े होकर देख रहा हो लेकिन मानचित्र हमेशा ऐसा बनाया जाता है। जैसे उस जगह को ऊपर या आसमान से देख रहे हों।

चित्र में स्केल का उपयोग नहीं होता है परंतु मानचित्र में स्केल का उपयोग किया जाता है चित्र और मानचित्र में यही आधारभूत अंतर हैं।

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नक्शा में जिस दिशा में जो चीज थी उसे वहाँ पर दर्शाया जाता है। मानचित्र बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बातें हैं।।

  1. संकेतों का उपयोग।
  2. मानक उपयोग
  3. दिशाओं का निर्धारण ।

सबसे पहले उन चीजों की सूची बनाते हैं जो इस कमरे में हैं। उसे उस जगह से हम हटा नहीं सकते हैं। मानचित्र में सभी चीजों को संकेत के रूप में दिखाया जाता है। इतने बड़े कमरे का मानचित्र बनाने के लिए पहले हमें इस कमरे की माप लेनी पड़ती है तभी हम छोटा मानचित्र बना सकते हैं। इसके लिए उन्होंने बच्चों को लम्बाई, चौड़ाई मापकर बताया। कमरे की लम्बाई 6 मीटर और चौड़ाई 3 मीटर स्केल थी।

उन्होंने बच्चों से पूछा- अगर हम इतना लंबा नक्शा बनाएँ तो हमें बड़ा कागज लेना पड़ेगा। इस प्रकार राज्य, जिला एवं देश का नक्शा बनाने के लिए कितने कागजों की जरूरत पड़ेगी।

गुरुजी ने बच्चों को बताया कि जब हमें जमीन पर ही कम दूरी को मानचित्र में दिखाते हैं तो वह स्केल में दिखाते हैं परंतु जब जमीन की अधिक दूरी दिखाना होता है तो छोटे स्केल का सहारा लेते हैं। जैसे – अगर हम भारत का मानचित्र बनाएँगे तो कागज पर दर्शाने के लिए हमें छोटे स्केल का सहारा लेना पड़ता नहीं तो हमारे कागज में भारत या विश्व का मानचित्र नहीं समा सकता है।

हम जमीन पर की छोटी-छोटी विशेषताओं को भी आसानी से दिखा या समझ सकते हैं, इसलिए अगर हम स्कूल का मानचित्र बनायें तो बड़े मापक का सहारा लेना पड़ता, जैसे – 1 से.मी. = 1 मी। परंतु अगर देश का मानचित्र बनाना हो तो यह 1 से मी० = 1000 किलोमीटर रखना पड़ेगा। गुरुजी ने बच्चों को समझाया कि पहले आप लोगों ने दीवार को मीटर स्केल से मापा और नक्शा बनाने के लिए | सेमी. को एक मीटर स्केल के बराबर माना जाता है।

1 सेमी = 1 मीटर

अर्थात् नक्शे में अगर कोई दूरी 1 सेमी० है तो वास्तविक | मीटर है। इसी प्रकार हर मानचित्र में एक मापक दिया होता है जिससे पता किया जा सकता है कि नक्शे में जो दूरी है वह वास्तव में कितनी दूरी के बराबर है। इस प्रकार हम मानचित्र को छोटा-बड़ा कर सकते हैं और किसी स्कूल या घर का नक्शा तैयार कर सकते हैं।

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मानचित्र में जो चीजें जहाँ-जहाँ थीं वहीं पर बनाये और दर्शायें । मानचित्र में दिशा सूचक रेखा बनाई जाती है

जैसे –
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मानचित्र से हमें बहुत अधिक जानकारी प्राप्त होती है। ये कई प्रकार के होते हैं।

  • इसमें हम पर्वतों, पठारों, मैदानों, नदियों, महासागरों आदि को दर्शाते हैं।
  • गाँव, शहर, राज्य, देश एवं विश्व के विभिन्न देशों तथा उनकी सीमाओं को दर्शाने वाले मानचित्र, राजनीतिक मानचित्र कहलाते हैं।
  • इन मानचित्रों में दी गई सूचनाओं के आधार पर उनका नामकरण किया जाता है।

जैसे – जलवायु मानचित्र, वनस्पति मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, वषां मानचित्र उद्योग मानचित्र आदि ।

इस प्रकार नक्शे में रंगों एवं चिह्नों (प्रतीकों) की सहायता से हम वहाँ की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए इसमें एकरूपता रखी गई है

जैसे-

  • जलाशय – नीला रंग
  • पर्वत – भूरा रंग
  • पठार – पीला रंग
  • मैदान – हरा रंग

हम किसी भी देश एवं विश्व का मानचित्र भी पैमाने को घटा-बढ़ाकर बना सकते हैं। जितना बड़ा मानचित्र बनाना होता है हम पैमाने का निर्धारण उसी के अनुसार कर सकते हैं। इसी तरह हम अपने गाँव/मुहल्ले का भी मानचित्र बनाकर उसमें इन प्रतीकों के द्वारा अंकित कर सकते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 11 सजीवों में अनुकूलन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 11 सजीवों में अनुकूलन Text Book Questions and Answers, Notes.

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Bihar Board Class 6 Science सजीवों में अनुकूलन Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सजीवों के वास-स्थान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सजीव-जगत में असंख्य छोटे-बड़े जीव-जन्तु एवं पौधे पाए जाते हैं, जिन्हें अपने परिवेश में रहने के लिए कुछ विशिष्ट संरचनाएँ होती हैं। ऐसी विशिष्ट संरचनाओं एवं स्वभाव की स्थिति को अनुकूलन कहते हैं। एक सजीव जिस परिवेश में रहता है। जहाँ से उसे भोजन, वायु, शरण-स्थल एवं अन्य आवश्यकताएँ पूरी होती हैं उसे वास-स्थल कहते हैं। जमीन पर पाए जाने वाले सजीवों के वास-स्थल स्थलीय वास-स्थान तथा जल में पाए जाने वाले सजीवों के स्थान को जलीय वास-स्थान कहते

प्रश्न 2.
ऊँट रेगिस्तान में जीवन-यापन के लिए किस प्रकार अनुकूलित है?
उत्तर:
ऊँट के पैर नीचे रखते ही फैल जाते हैं इसके साथ वह गत्तेदार होता है जिसके कारण रेत में धंसने से बच जाते हैं और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान चले जाते हैं। ऊँट के पलकों में लम्बे बाल और घनी भौहें उन्हें . रेत और मिट्टी से बचा लेती हैं। उसके छोटे-छोटे कान में भी आसानी से रेत नहीं जा पाते हैं। ऊँट अपनी नाक को मर्जी के अनुसार खोल या बन्द कर लेता है। ऊँट अपने कूबड़ में भोजन चर्बी के रूप में जमा रखता है। जो बुरे वक्त में काम आता है। पानी पिए बिना भी वह कई दिनों रह लेता है। इसके अलावा ऊँट के पैर लम्बे होते हैं जिससे उसका शरीर रेत की गरमी से दूर रहता है। साथ ही वे बहुत कम पेशाब करते हैं। उसे पसीना भी नहीं आता। इन्हीं सब बातों के कारण वे रेगिस्तान में जीवन-यापन के लिए अनुकूलित है।

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प्रश्न 3.
मछली जल में अपने को किस प्रकार अनुकूलित करती है?
उत्तर:
मछलियों का शरीर धारारेखीय होता है। इनका शरीर चिकने शल्कों से ढका रहता है। शल्क, इनके शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा इनकी विशिष्ट आकृति जल में गति करने में सहायक होती है। मछली के पक्ष्म एवं पूँछ चपटे होते हैं जो उसे जल के अंदर दिशा परिवर्तन एवं संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावे मछली गिल से पानी में घुले ऑक्सीजन को अलग कर अपने श्वसन प्रक्रिया को पूरी करती है। इस प्रकार मछली अपने को जल में रहने के लिए अनुकूलित करती है।

प्रश्न 4.
पर्वतीय पौधे किस प्रकार अनुकूलित हैं?
उत्तर:
पर्वतीय क्षेत्र में सामान्यत: बहुत ठंड होती है तथा सर्दियों में तो हिमपात भी होता है। पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्ष शंक्वाकार (कीप जैसा) होता है तथा इसकी शाखाएँ तिरछी होती हैं। इससे वर्षा का जल एवं हिम आसानी से नीचे की ओर खिसक जाता है। इस प्रकार पर्वतीय पौधे अनुकूलित रहते हैं।

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(क) स्थल पर पाए जाने वाले पौधों एवं जंतुओं के वास-स्थान को. …………… आवास कहते हैं।
(ख) वे वास स्थान जिनमें जल में रहने वाले पौधे एवं जंतु रहते हैं …………… आवास कहलाते हैं।
(ग) याक का शरीर लंबे ………….. से ढका होता है।
(घ) मछली का शरीर ………….. होता है जिससे वह जल में आसानी से तैर सकती है।
(ङ) जलीय पौधों का तना …………….. खोखला एवं ………….. होता है।
उत्तर:
(क) स्थलीय वास
(ख) जलीय
(ग) बालों
(घ) नौकाकार
(ङ) लम्बा, हल्का

प्रश्न 6.
मिलान कीजिए –
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 11 सजीवों में अनुकूलन 1
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उत्तर:
(क) – ख
(ख) – क
(ग) – ङ
(घ) – घ
(ङ) – ग

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प्रश्न 7.
सही विकल्प चुनें –

(क) ऊँट निम्न परिवेश में पाया जाने वाला जन्तु है –
(1) जलीय
(2) पर्वतीय
(3) मरुस्थलीय
(4) कोई नहीं
उत्तर:
(3) मरुस्थलीय

(ख) धारारेखीय शरीर होता है –
(1) घोड़े का ।
(2) भालू का
(3) मछली का
(4) मेंढक का
उत्तर:
(3) मछली का

(ग) हमें श्वास लेने में कठिनाई होती है –
(1) मैदानी क्षेत्र में
(2) जलीय क्षेत्र में
(3) पर्वतीय क्षेत्र में
(4) रेगिस्तानी क्षेत्र में।
उत्तर:
(3) पर्वतीय क्षेत्र में

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(घ) घास स्थल अथवा वनों का शक्तिशली जन्तु है –
(1) हिरण
(2) शेर
(3) घोड़ा
(4) ऊँट
उत्तर:
(2) शेर

(ङ) जलकुंभी पाया जाता है –
(1) जंगल में
(2) पर्वतों पर
(3) जल में
(4) बर्फ में।
उत्तर:
(3) जल में

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Bihar Board Class 6 Science सजीवों में अनुकूलन Notes

अध्ययन सामग्री :

जैसा कि हम पहले अध्याय में पढ़ चुके हैं कि पर्यावरण में उपस्थित सभी पदार्थों को दो भागों में बाँटा गया है। सजीव और निर्जीव के इस अध्याय में हमें जानना है। “सजीवों में अनुकूलन”। सजीव-जगत में अनेक छोटे-बड़े – जीव-जन्तु एवं पौधे रहते हैं। सभी जीव के अलग-अलग वास-स्थल होते हैं। शारीरिक संरचना खान-पान भी प्रत्येक जीव-जन्तुओं एवं पौधों का अलग होता है। कोई जीव-जन्तु एवं पौधे स्थलीय होते हैं तो कोई जलीय। स्थलीय जीव एवं पौधों में भी कुछ मरुस्थलीय तो कुछ पर्वत्तीय होते हैं। अलग-अलग क्षेत्र में रहने के कारण ही प्रत्येक जीव को पर्यावरण से लड़ने की क्षमता अलग-अलग होती है। जैसे मछली पानी में जिन्दा रहती है। परन्तु पानी के बाहर मर जाती है। यानि कहने का तात्पर्य यह है कि अलग-अलग क्षेत्र में जीव वहाँ रहने के लिए अपने को अनुकूलित कर लेते हैं।

पृथ्वी पर असंख्य जीव- जन्तु एवं पौधं पाए जाते हैं, जिन्हे अपने परिवेश में रहने के लिए कुछ विशिष्ट संरचनाएँ होती हैं। ऐसी विशिष्ट संरचनाओं एवं स्वभाव की स्थिति को अनुकूलन कहते हैं। एक सजीव जिस परिवेश (या जगह) में रहता है। जहाँ से उसे भोजन, वायु, शरण-स्थल एवं अन्य आवश्यकताएँ पूरी होती हैं। वह उसका वास-स्थल कहलाता है।

जमीन पर पाए जाने वाले सजीवों के वास-स्थल स्थलीय वास-स्थान तथा जल में पाए जाने वाले सजीवों के स्थान को जलीय वास स्थान कहते हैं। सजीव जगत के जीव अपने पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करके ही जीवित रहता है। यह सामंजस्य दो प्रकार का होता है।- (क) अल्पावधि में विकसित होने वाला सामंजस्य। (ख) लंबी अवधि में विकसित होने वाला अनुकूलन।

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अपने परिवेश में होने वाले परिवत्तनों के साथ सामंजस्य स्थापित करने . के लिए कुछ जीवों में अल्प अवधि परिवर्तन हो सकते हैं। जब हम अचानक. पर्वतीय क्षेत्र में चले जाते हैं तो श्वास लेने में तथा शारीरिक श्रम करने में कठिनाई होती है। फिर धीरे-धीरे हम वहाँ के परिवेश में अनुकूलित हो जाते हैं। इस प्रकार के अस्थायी अनुकूलन को पर्यानुकुलन कहते हैं। दूसरी तरफ पर्वतीय क्षेत्र में जन्म लोगों के फेफड़ों की क्षमता अधिक होती है। यह आनुवांशिक अनुकूलन कहलाता है। जो जीव परिवेश के अनुसार अपने को ढाल नहीं पाते हैं। वे जीव मर जाते हैं। यही कारण है कि सभी जीव या पौधे सभी क्षेत्रों में नहीं पाए जाते हैं।

मरुस्थल में दिन में तेज गर्मी पड़ती है तथा रातें अधिक ठंडी होती हैं। पानी की कमी होती है। अतः यहाँ वैसे पौधे ही उगते जिसे कम पानी का जरूरत होती है। जैसे-गागफनी बबूल, ग्वारपाठा, केकट्स आदि। रेगिस्तान में पाए जाने वाले छोटे जीव अधिक ताप से बचने के लिए गहरे बिलों में चले जाते हैं तथा रात को भोजन के लिए बाहर आते हैं। ऊँट रेत में आसानी चल लेते हैं। क्योंकि इसके पैर गत्तेदार होते हैं। पैर लम्बे-लम्बे होते जिससे गर्मी कम लगती है उसे चलने में। ऊँट की पलकों में लम्बे बाल और घनी भौहें उन्हें रेत और मिट्टी से बचा होती है। उसके छोटे-छोटे कान में भी आसानी से रेत नहीं जा पाते हैं। नाक को अपनी मर्जी से वह खोल और बन्द कर लेते हैं। ऊँट अपने कूबड़ में भोजन चर्बी के रूप में जमा रखता है। ऊँट को रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है। उसे पसीना भी नहीं आता है। अतः वह कई दिनों तक बिना पानी के रह जाता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में सामान्यतः बहुत ठंड होती है और सर्दियों में हिमपात भी होता है। यहाँ के वृक्ष शंक्वाकार होते हैं तथा इसकी शाखाएँ तिरछी होती हैं। कुछ वृक्षों की पत्तियाँ-सूई के समान होती हैं। इससे वर्षा का जल एवं हिम आसानी से नीचे की ओर खिसक जाता है। यहाँ पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं की त्वचा मोटी या फर से ठकी रहती है जिसे वह ठंड से बच पाते हैं। पहाड़ी बकरी के मजबूत खुर होते हैं जिससे ढालदार चट्टानों पर दौड़ने के लिए अनुकूलित होते हैं। वहाँ पाए जाने वाले जन्तुओं में याक, पहाड़ी बकरी, पहाड़ी तेंदुए, भालू आदि हैं।

शेर, हिरण आदि जन्तुओं के रंग, नाखुन, बाल, दाँत, आँख, आदि. की संरचना इस प्रकार होती है जिसके कारण उस परिवेश में वह अनुकूलित होते

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जलीय वास-स्थल में भी विभिन्न प्रकार के पौधे तथा जीव-जन्तु निवास करते हैं। जल की सतह पर रहने वाले जीव तथा पौधे की संरचना अलग होती है। जल के मध्य तथा तलछट्टी में रहने वाले पौधे तथा जीवों की संरचना ‘अलग होती है। मछली का शरीर धारारेखीय होता है। इनका शरीर चिकने शल्कों से ढका रहता है। शल्क इनके शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है तथा इसकी विशिष्ट आकृति जल में गति करने में सहायक होते हैं। मछली गिल से पानी में घुले ऑक्सीजन को अलग कर श्वास लेती है। इस प्रकार मछली, अपने को जल में रहने के लिए अनुकूलित करती है।

अन्ततः कहा जा सकता है कि अलग-अलग क्षेत्र में रहने वाले जीवों और पौधों की संरचना अलग-अलग होती है जिसके कारण वह उस क्षेत्र सं सामंजस्य स्थापित कर अपना जीवन-निर्वाह करते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 12 कुछ सवाल

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 12 कुछ सवाल Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 12 कुछ सवाल

Bihar Board Class 9 Hindi कुछ सवाल Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
समुद्र के खारेपन तथा नदियों के मीठेपन की इंगित कर कवि ने प्रकृति के किस सत्य से परिचित कराना चाहता है?
उत्तर-
उपरोक्त पंक्तियों में समुद्र के खारेपन और नदियों के मीठेपन की ओर इशारा करते हुए कवि ने प्रकृति की विशेषताओं एवं उसके विविध रूप-गुणों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। नदियों का उद्गम स्थल भी प्रकृति ही है और समुद्र का भी रूप प्रकृति द्वारा ही प्रदत्त है। मीठापन और खारापन के माध्यम से प्रकृति के दोनों रूपों का दर्शन हमें कवि की कविता में होता है। सृजन और संहार के बीच ही प्रकृति का संतुलन कायम है। यही प्रकृति का सत्य है। एक तरफ सृजन रूप दृष्टिगत होता है तो दूसरी तरफ विनाश रूप भी। प्रकृति का यह निजी गुण है। उसकी अपनी खास विशेषता है। यह प्रकृति का सत्य स्वरूप है।

प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के जीवन के यथार्थ सत्य को भी उद्घाटित किया गया है। मानव जीवन भी सुख-दुख के बीच पलता-बढ़ता और शून्य में विलीन हो जाता है। मानव जीवन प्रकृति की तरह ही है। दोनों में साम्यता है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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प्रश्न 2.
कवि अपने सवालों के माध्यम से प्रकृति में होने वाली दो असमान घटनाओं-विध्वंस और निर्माण को साथ दिखलाता है। पठित-कविता से कुछ उदाहरण देकर इसे अपने शब्दों में समझाइए।
उत्तर-
1. ऋतुओं को कैसे मालूम पड़ता है कि अब पोल के बदलने का वक्त आ गया इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के परिवर्तल के रूपों को दर्शाया है। ही अपने आवरण में परिवर्तन लाकर स्वरूप बदल लेती है। इन पंक्तियों में प्रकृति के परिवर्तन और गतिमय जीवन पर प्रकाश डाला गया है। जड़ और चेतन के स्वरूप में जो बदलाव आता है उसके पीछे प्रकृति का हाथ है।

2. जाड़े इतने सुस्त-रफ्तार क्यों होते हैं
और दूसर कटाई की घास इतमी चंचल उड्डीयमान?

इन पंक्तियों में भी प्रकृति के परिवर्तित रूप का दर्शन होता है। एक तरफ जाड़े की ऋतु में जीव-जंतुओं की गति में शिथिलता आ जाती है जबकि दूसरी ओर घास जो निर्जीव पदार्थ है उसके स्वरूप में जल्दी-जल्दी बदलाव दिखता है। यह भी तो प्रकृति के सृजन रूप ही है। एक तरफ घास कटाई होती है और वह पुनः जल्दी-जल्दी बढ़कर अपनी वृद्धि का दर्शन कराता है। उसमें चंचलता का दिग्दर्शन होता है यह प्रकृति की ही विशेषता तो है।

3. कैसे जानती हैं जड़ें
कि उन्हें उजाले की ओर चढ़नी ही है?
और फिर बयार का स्वागत
‘ऐसे रंगों और फूलों से करना?

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इन पंक्तियों में भी सृजन-संहार प्रकृति के दोनों रूपों का दर्शन होता है। जो जड़ पदार्थ है उनमें भी गतिमयता आ जाती है और लगता है कि उन्हें भी उजाले की ओर चढ़ना है यानि विकसित होना है। बयार भी तो नए रूप रंग में दस्तक दे रही है क्योंकि रंगों और फूलों से सजी-धजी धरती बयारों के स्वागत में प्रतीक्षारत है। यहाँ प्रकृति के आंतरिक सौंदर्य की व्याख्या की गयी है।

4. क्या हमेशा वही वसंत होता है,
वही किरदार फिर दुहराता हुआ?

इन पंक्तियों में भी वसंत के भिन्न-भिन्न रूपों की चर्चा है। भूतकालीन वसंत अब लौट नहीं सकता। वर्तमान का वसंत न भूत वाला बन सकता है न भविष्य के समान हो सकता है। ठीक भविष्य का भी वसंत अपने रूप-रंग में दृष्टिगत होगा? यही प्रकृति की विभिन्नता और विशेषता है।

इस प्रकार सृजन और संहार के बीच प्रकृति संतुलन रखते हुए अपनी निजी विशेषताओं को आंतरिक और वाह्य रूपों में सौंदर्य और परिवर्तन के द्वारा नित नयापन का दर्शन करती है।

प्रश्न 3.
इस कविता को पढ़कर आपको क्या संदेश मिला?
उत्तर-
‘कुछ सवाल’ पाब्लो नेरुदा की चर्चित कविता है। इस कविता में कवि ने कुछ प्रकृति संबंधी सवाल उठाए हैं जिनका जबाब भी उसी सवाल में निहित है। इस प्रकार यह कविता प्रकृति के विविध रूपों, गुणों एवं विशेषताओं से युक्त कविता है। इस कविता में प्रकृति के साथ-साथ मानवीय संबंधों पर भी सम्यक प्रकाश डाला गया है। प्रकृति और मनुष्य के बीच रूपों, गुणों एवं कर्म के आधार पर जो संबंध स्थापित हुए है उसकी भी चर्चा कवि ने की है।

इस कविता के द्वारा प्रकृति में होनेवाली दो असमान घटनाओं-विध्वंस और निर्माण को साथ-साथ दिखाते हुए मनुष्य की अदम्य जिजीविषा में विश्वास की झलक भी कवि कराता है। कवि को पक्का विश्वास है कि अंततः जड़ों को उजाले की ओर ही चढ़ना है। बयार का स्वागत अनेक रंगों और फूलों से करना है। यहाँ प्रकृति की बाह्य और आंतरिक सौंदर्य का दर्शन होता है। इस कविता द्वारा प्रकृति की विविधता का दर्शन होता है। इस कविता द्वारा प्रकृति के परिवत्तनशील रूपों की झलक देखने को मिली है। ‘कुछ सवाल’ नामक कविता अपने आप में पूर्ण कविता है जो सवाल तो उठाती ही है जवाब के रूप में स्वयं में छिपे समाधान का भी बिंब उभारती है।

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कवि ने ‘कुछ सवाल’ शीर्षक कविता के द्वारा प्रकृति और मनुष्य के बीच के संबंधों को भी दर्शाता है। वह जड़-चेतन के स्वरूपों गुणों की चर्चा करते हुए किसी परम सत्ता की ओर भी ध्यान आकृष्ट करता है। जिस प्रकार प्रकृति किसी न किसी परम सत्ता का प्रत्यक्ष चाहे परोक्ष हाथ है।

दूसरी ओर मनुष्य भी तो प्रकृति का ही एक अंग है। यह चेतनस्वरूप है। इसके बीच भी कई प्रकार के परिवर्तन विद्यमान हैं। मनुष्य चेतना संपन्न प्राणी है अतः इसके भीतर अदम्य जिजीविषा पलती रहती है। वह इसी जिजीविषा के बल पर विकास के पथ पर कदम बढ़ाता है। प्रकृति में विविधता, विशेषताएँ हैं तो मनुष्य में भी अदम्य उत्साह, उमंग विद्यमान है।

सजन और संहार के दोनों रूपों का सम्यक् चित्रण करते हुए कवि ने प्रकृति की इन असमान घटनाओं से हमें परिचित कराया है।
दूसरी ओर मनुष्य के भीतर पल रही अदम्य जिजीविषा के प्रबल विश्वास को भी रेखांकित किया है।

जड़ों को उजाले की ओर चढ़ना है यानि स्वयं को विकसित रूप में लाना है। बयार और रंग-फूल भी तो प्रकृति वाह्य और आंतरिक सौंदर्य हैं। इनका भी ज्ञान इस कविता द्वारा होता है।

प्रश्न 4.
कवि ने प्रकृति को शक्ति कहा है-“ऋतुओं को कैसे मालूम पड़ता है कि अब पोल के बदलने का वक्त आ गया है।” इस पंक्ति में प्रकृति के किस प्रकार के बदलाव को कवि ने प्रकट करना चाहा है?
उत्तर-
‘कुछ सवाल’ नामक कविता में कवि ने प्रकृति में जो बदलाव या परिवर्तन होता है, उसका सबसे पहले ज्ञान ऋतुओं को हो जाता है। इन पंक्तियों में प्रकृति के वाह्य रूप में जो परिवर्तन दिखाई पड़ता है उसकी गंध सबसे पहले ऋतुओं को होती है क्योंकि वसंत ऋतु में पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं के जीवन में एक नया उमंग, आनंद दृष्टिगत होता है। सारे पेड़ों के पुरातन पत्ते झड़ जाते हैं और नयी-नयी कोंपलें निकलने लगती हैं। इस प्रकार मौसम के बदलते ही प्रकृति का निजी रूप भी बदल जाता है।

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ठीक दूसरी ओर जब ग्रीष्म का महीना आता है तब पेड-पौधे शष्कता का रूप-दर्शन कराते हैं। पशु-पक्षी भी तीखी धूप में बेचैनी का अनुभव करते हैं। मौसम के अनुसार बदलते आवरण या बाह्य रूप-सज्जन के रंग में परिवर्तन होने से भी हमें प्रकृति के बदलाव का ज्ञान हो जाता है।

उपरोक्त वर्णन तो प्रकृति के सामान्य बदलाव का हुआ लेकिन कवि प्रकृति के विशिष्ट बदलाव की यहाँ चर्चा करता है। मौसम के अनुसार प्रकृति के बाह्य और आंतरिक रूपों में मौसम के अनुसार रूप परिवर्तन तो दिखाई पड़ता ही है लेकिन प्रकृति अपने रूप में जो विशिष्ट परिवर्तन करती है वह है सृजन और संहार का रूप। प्रकृति का अकाट्य नियम है कि वह पुरातन को नवीन साँचे में ढालकर नूतन-आवरण में प्रस्तुत करती है। कहने का मूल आशय है कि जब प्रकृति का रूप पुरातन को प्राप्त कर लेता है, निष्क्रियता को प्राप्त कर लेता है तब प्रकृति नए सृजन द्वारा नया स्वरूप गढ़ती है। यही पुरातन सत्य है।

प्रकृति के इस मूल रूप में बदलाव की ओर कवि ने ध्यान आकृष्ट किया है। प्रकृति का यह कर्म निरंतर अबाध गति से चलता रहता है। सृजन और संहार के बीच संतुलन ही प्रकृति का न्यायसंगत न्याय कहा जा सकता है।

एक तरफ विध्वंस के द्वारा जीर्ण-शीर्ण रूप का विनाश हो जाता है और नए निर्माण में प्रकृति संलग्न हो जाती है।
ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी अपनी अदम्य जिजीविषा में विश्वास रखते हुए विकास पथ पर अग्रसर होता है। मनुष्य की यही जिजीविषा जीने और कुछ करने के लिए विवश करती है और प्रकृति के साथ मनुष्य का जीवन-मरण सनातन रूप से जड़ा रहता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 12 कुछ सवाल

प्रश्न 5.
‘कुछ सवाल’ शीर्षक कहाँ तक सार्थक है? तर्कपूर्ण उत्तर दें:
उत्तर-
‘कुछ सवाल’ नामक कविता के रचयिता महाकवि पाब्लो नेरुदा हैं। नेरुदा ने अपनी उपरोक्त कविता में अपने मौलिक विचारों को मूर्त रूप देते हुए प्रकृति विषयक गंभीर बातों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है।

‘कुछ सवाल’ शीर्षक एक ऐसा कौतुहलबर्द्धक शीर्षक है जिसके पढ़ने से मनुष्य के मस्तिष्क में हलचल पैदा हो जाती है। कवि की यह बौद्धिकता से पूर्ण एवं रहस्यात्मकता से युक्त कविता भी है। कवि ने सूक्ष्म भाव से प्रकृति के रहस्यों को उद्घाटित करने का प्रयत्न किया है। बौद्धिकता से युक्त कविता की इतनी सघन बनावट है कि इसके परत-दर-परत को उघाड़ने एवं उसमें निहित सूक्ष्म भावों के अर्थ समझने में दिमागी कसरत करनी पड़ती है।

नेरुदा विश्वविख्यात कवि हैं। वे एक प्रख्यात चिंतक भी थे। अतः उक्त कविता में कवि के वैचारिक धरातल की व्यापकता का भी दर्शन होता है।

भावों की अभिव्यक्ति में भी कवि को सफलता मिलती है। सरल और सहज शब्दों द्वारा कविता का सृजन करते हुए कवि ने प्रकृति के गूढ़ भाव को चित्रित करने में सफलता पाई है। कवि ने प्रकृति के रहस्यों की परत-दर-परत को खोलते हुए कहा है कि एक तरफ नदियों में मीठा पानी और दूसरी ओर समुद्र का पानी खारा क्यों? इसी प्रश्न में उत्तर भी छिपा हुआ है। कवि के कहने का आशय है कि प्रकृति के दो रूप हैं, सृजन और संहार। इन्हीं के बीच प्रकृति संतुलन रखने का काम करती है।

ऋतुओं को भी प्रकृति के बदलते मौसम की जानकारी सबसे पहले होती है। प्रकृति मौसम के अनुकूल आवरण परिवर्तन कर स्थूल रूप में दृष्टिगत होती है।

जाड़े के मौसम में भी चेतन रूप में शिथिलता को दर्शन होता है जबकि जड़ता में गतिमयता दिखाई पड़ती है।
कवि जड़ों की बात करता है कि उन्हें पता है कि उजाले की ओर चढ़ना ही उनकी नियति है। यानि जड़ में गति का जब संचार होगा तो उसकी वृद्धि होगी ही।
और फिर बयार का स्वागत भी रंगों एवं फूलों द्वारा होता है जो प्रकृति का शाश्वत निर्भय है।

वसंत भी सर्वदा एक समान नहीं होता? उसका भी रूप परिवर्तन समयानुकूल होता रहा है और उनमें समानता नहीं मिलती। भूत, वर्तमान और भविष्य के वसंत में शुरू से भिन्नता रही है और आगे भी रहेगा। उपरोक्त बिन्दुओं पर चिंतन करने पर यह बात साफ दृष्टिगत होती है कि “कुछ सवाल” शीर्षक नाम से जो कविता रची गयी है वह सार्थक है। विवेचना और विश्लेषण के आधार पर यह सिद्ध हो जाता है कि कुछ सवाल शीर्षक सार्थक शीर्षक है।

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प्रश्न 6.
क्या वसंत हर व्यक्ति या परिवेश या परिस्थिति के लिए एक जैसा होता है? तर्क सहित उत्तर दें:
उत्तर-
कवि ने अपनी कविता में वसंत के स्वरूप की चर्चा सूक्ष्म रूप में प्रस्तुत किया है।
कवि ने अपनी कविता में-“क्या हमेशा वही वसंत होता है” द्वारा प्रश्न उठाता है कि क्या हमेशा वसंत एक रूप में हर मनुष्य के जीवन में होता है?

क्या सबके जीवन में वसंत की भूमिका समान होती है। कवि के विचार भिन्न हैं। कवि कहता है कि हर मनुष्य के जीवन में अलग-अलग वसंत अलग-अलग रूपों में आता है। कहने का भाव यह है कि वसंत की भूमिका विभिन्नता लिए रहती है। भूत में जो वसंत था, जिस रूप में था वह वर्तमान के वसंत से मेल नहीं खाएगा। ठीक उसी प्रकार वर्तमान का वसंत भी भविष्य के वसंत से भिन्न होगा। कभी भी कहीं भी किसी भी परिस्थिति या परिवेश में वसंत का रूप विभिन्नता लिए आता है। यही उसकी विशेषता है अतः वसंत के रूप, रंग गुण में परिवेश एवं परिस्थिति के अनुकूल भिन्नता दिखाई पड़ती है। कवि के कथनानुसार वसंत मानव जीवन में अलग अलग रूपों में दिखाई पड़ता है।

भाव स्पष्ट करें:

प्रश्न 7.
(क) कैसे जानती हैं जड़ें कि उन्हें उजाले की ओर चढ़ना ही
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘कुछ सवाल’ काव्य पाठ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता महाकवि पाब्लो नेरुदा जी हैं। नेरुदा जी विश्वविख्यात कवि और विचारक के रूप में जाने जाते हैं।
इसी कारण नेरुदा की कविताएँ बौद्धिकता से पूर्ण हैं साथ ही रहस्यमयी भी। नेरुदा ने अपनी कविताओं में प्रकृति के गूढ़ रूपों के रहस्य का उद्घाटन किया है।

कवि कहता है कि जो जड चीजें हैं वे कैसे जानती हैं कि उन्हें उजाले की र चढना ही है। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के गूढ़ कर्म की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। कवि कहता है कि सृष्टि का सृजन करना ही प्रकृति का सनातन नियम है। साथ ही सृजन में ही संहार की क्रिया में छिपी रहती है।

प्रकृति हमें दो रूपों में दिखाई पड़ती है-एक रूप जड़ है और दूसरा रूप चेतनमय। इन्हीं दोनों के बीच सष्टि और संस्कति का क्रम चलता रहता है और प्रकति अपने रूप परिवर्तन द्वारा हमारे समक्ष प्रकट होती है।

प्रकृति का शाश्वत नियम है कि यह गतिमय रूप में है। प्रकृति का रूप वह जड़ हो चाहे चेतन अपने गतिमय होती रहती है क्रिया के बीच संचालित प्रकृति का यही गतिमय होना ही जड़ को उजाले की ओर चढना ही है कि ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। कहने का भाव यह है कि जड़ें भी गतिमय रूप में वृद्धि की ओर बढ़ती हैं। उनके रूप में भी परिवर्तन दृष्टिगत होता है। जड़ गति के कारण अपने वृद्धि को पूर्णता का रूप देने में सक्षम होती है।

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जड़ पदार्थों में गतिमयता के कारण जीवन संचार के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, उसे कवि ने अपनी कविताओं के द्वारा व्यक्त किया है। जड़ भी चेतन की तरह स्वरूप धारण कर लेते हैं। उनमें भी ऊर्जा और गति आ जाती है।

जड़ों को उजाले की ओर चढ़ाना है कि जानकारी प्रकृति की आंतरिक क्रियाओं के द्वारा हो जाती है। ये ही आंतरिक क्रियाएँ ऊर्जा और गति से संचालित होती है। ऊर्जा और गति प्रकृति के मौलिक रूप हैं जिसकी ओर कवि ने हमारा ध्यान आकृष्ट किया है।
भाव स्पष्ट करें:

प्रश्न 7.
(ख) क्या हमेशा वही वसंत होता है, वही किरदार फिर दुहराता हुआ?
उत्तर-
‘कुछ सवाल’ नामक कविता महाकवि पाब्लो नेरुदा द्वारा रचित है जिसमें प्रकृति के गूढ़ रहस्यों को उद्घाटित में किया गया है।

कवि कहता है कि हर मनुष्य के जीवन में वसंत का आगमन समान रूप नहीं होता। हर मनुष्य के जीवन में वसंत का रूप अलग-अलग होता है। वसंत अपनी भूमिका परिवेश और परिस्थिति के अनुकूल हर मनुष्य के जीवन में अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत करता है। वसंत के आगमन में भी भिन्नता है। भूतकाल में जो वसंत था वह वर्तमान काल के वसंत से भिन्न था। ठीक उसी प्रकार वर्तमान काल के वसंत का रूप भी भविष्य काल के वसंत से भिन्न रहेगा। भविष्य में भी वसंत का रूप अलग ढंग से होगा। अतः हर मनुष्य के जीवन में वसंत अपनी भूमिका भिन्न-भिन्न रूपों में निभाता है।

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कवि ने अत्यंत ही साफ और सटीक शब्दों में वसंत के किरदार रूप की व्याख्या की है।
अतः वसंत का रूप मानव जीवन में हर मनुष्य के लिए अलग-अलग रूप । में उपस्थित होता है।