Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 3 हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 3 हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 3 हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन

Bihar Board Class 10 History हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

हिंद चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Bihar Board Class 10 प्रश्न 1.
हिन्द-चीन क्षेत्र में कौन-से देश आते हैं ?
(क) चीन, वियतनाम, लाओस
(ख) हिन्द, चीन, वियतनाम, लाओस
(ग) कम्बोडिया, वियतनाम, लाओस
(घ) कम्बोडिया, वियतनाम, चीन, थाईलैण्ड
उत्तर-
(ग) कम्बोडिया, वियतनाम, लाओस

हिंद चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन का ऑब्जेक्टिव Bihar Board Class 10 प्रश्न 2.
अंकोरवाट का मन्दिर कहाँ स्थित है ?
(क) वियतनाम
(ख) थाईलैण्ड
(ग) लाओस
(घ) कम्बोडिया
उत्तर-
(घ) कम्बोडिया

Hind Chin Me Rashtravad Bihar Board Class 10 प्रश्न 3.
हिन्द-चीन पहुँचने वाले प्रथम व्यापारी कौन थे
(क) इंग्लैण्ड
(ख) फ्रांसीसी
(ग) पुर्तगाली
(घ) डच
उत्तर-
(ग) पुर्तगाली

हिंद चीन में राष्ट्रवाद के विकास का वर्णन करें Bihar Board Class 10 प्रश्न 4.
हिन्द चीन में बसने वाले फ्रांसीसी कहे जाते थे ?
(क) फ्रांसीसी
(ख) शासक वर्ग
(ग) कोलोन
(घ) जेनरल
उत्तर-
(ग) कोलोन

हिंद चीन क्षेत्र में कौन से देश आते हैं Bihar Board Class 10 प्रश्न 5.
नरोत्तम सिंहानुक कहाँ के शासक थे ?
(क) वियतनाम
(ख) लाओस
(ग) थाईलैण्ड
(घ) कम्बोडिया
उत्तर-
(घ) कम्बोडिया

Hind Chin Mein Francisi Prasar Ka Varnan Karen प्रश्न 6.
“द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम” किसने लिखा?
(क) हो-ची-मिन्ह
(ख) फान-वोई-चाऊ
(ग) कुआंग
(घ) त्रियु
उत्तर-
(ख) फान-वोई-चाऊ

Hind Chin Mein Rashtrawadi Aandolan Bihar Board प्रश्न 7.
मार्च 1946 में फ्रांस एवं वियतनाम के बीच होने वाला समझौता किस नाम से जाना जाता है ?
(क) जेनेवा समझौता
(ख) हनोई समझौता
(ग) पेरिस समझौता
(घ) धर्मनिरपेक्ष समझौता
उत्तर-
(ख) हनोई समझौता

हिन्द चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Bihar Board Class 10 प्रश्न 8.
किस प्रसिद्ध दार्शनिक ने एक अदालत लगाकर अमेरिका को वियतनाम युद्ध के लिए दोषी करार दिया?
(क) रसेल
(ख) होची मिन्ह
(ग) नरोत्तम सिंहानुक
(घ) रूसो
उत्तर-
(क) रसेल

इंडो चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 9.
हिन्दु-चीनी क्षेत्र में अंतिम युद्ध समाप्ति के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति थे-
(क) वाशिंगटन
(ख) निक्सन
(ग) जार्ज बुश
(घ) रुजवेल्ट
उत्तर-
(ख) निक्सन

Hind Chin Mein Basne Wale Francisi Kahe Jaate The Bihar Board प्रश्न 10.
होआ-होआ आन्दोलन किस प्रकृति का था?
(क) क्रांतिकारी
(ख) धार्मिक
(ग) साम्राज्यवादी समर्थक
(घ) क्रांतिकारी धार्मिक
उत्तर-
(घ) क्रांतिकारी धार्मिक

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें:

Hind Chin Me Rashtrawadi Andolan Bihar Board प्रश्न 1.
12वीं शताब्दी में राजा सूर्य वर्मा/द्वितीय ने………..का निर्माण करवाया था।
उत्तर-
अंकोरवाट मंदिर

प्रश्न 2.
……………समझौते ने पूरे वियतनाम को दो हिस्से में बाँट दिया और …………..रेखा को विभाजक रेखा माना गया।
उत्तर-
जेनेवा समझौता, 17वीं अक्षांश।

प्रश्न 3.
हो-ची-मिन्ह का दूसरा नाम…………..था।
उत्तर-
न्यूगन आई क्वोक

प्रश्न 4.
दिएन-विएन-पुके युद्ध में…………..बुरी तरह हार गए।
उत्तर-
फ्रांस

प्रश्न 5.
अनामी दल का संस्थापक……………. था।
उत्तर-
जोन्गुएन आइ

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
एकतरफा अनुबन्ध व्यवस्था क्या थी?
उत्तर-
एक तरह की बंधुआ मजदूरी थी। वहाँ मजदूरों को कोई अधिकार नहीं था, जबकि मालिक को असीमित अधिकार प्राप्त था।

प्रश्न 2.
बाओदायी कौन था ?
उत्तर-बाओदायी अन्नाम का शासक था।

प्रश्न 3.
हिन्द चीन का अर्थ क्या है ?
उत्तर-
दक्षिण-पूर्व एशिया में लगभग 3 लाख वर्ग कि. मी. फैला क्षेत्र जिसमें आज के वियतनाम लाओस और कम्बोडिया के क्षेत्र आते हैं।

प्रश्न 4.
जेनेवा समझौता कब और किनके बीच हुआ?
उत्तर-
1954 में लाओस एवं कम्बोडिया के बीच।

प्रश्न 5.
होआ-होआ आनदोलन की चर्चा करें।
उत्तर-
होआ-होआ एक बौद्धिक धार्मिक क्रान्तिकारी आन्दोलन था जो 1939 में शुरू हुआ था। जिसके नेता-हुइन्ह फू-सो था। इसके क्रान्तिकारी उग्रवादी घटनाओं को भी अंजाम देते थे जिसमें आत्मदाह तक भी शामिल होता था।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें।)

प्रश्न 1.
हिन्द चीन में फ्रांसीसी प्रसार का वर्णन करें।
उत्तर-
1498 ई. में वास्कोडिगामा भारत से जुड़ने की चाह में जब समुद्री मार्ग ढूँढने निकाला तो धीरे-धीरे स्पेन, डच, इंगलैंड एवं फ्रांसीसियों का आगमन इस क्षेत्र में व्यापारिक उद्देश्य से होने लगा। 17वीं शताब्दी में बहुत से फ्रांसीसी व्यापारी पादरी हिन्द चीन पहुँच गए। 1747 ई. के बाद ही फ्रांस अन्नाम में रुचि सेने लगा। 1787 ई. में कोचीन-चीन के शासक के साथ संधि का मौका मिला। 19वीं शताब्दी में अन्नाम, कोचीन-चीन में फ्रांसीसी पादरियों की बढ़ती गतिविधियों के विरुद्ध उग्र आन्दोलन हो रहे थे। फिर भी 1862 ई. में अन्नाम को सैन्यबल पर संधि के लिए बाध्य किया गया। उसके अगले वर्ष कम्बोडिया भी संरक्षण में ले लिया गया और 1783 में तोकिन में फ्रांसीसी सेना घुस गयी। इसी तरह 20वीं शताब्दी के आरंभ तक सम्पूर्ण हिन्द चीन फ्रांसीसियों की अधीनता में आ गया।

प्रश्न 2.
रासायनिक हथियारों एवं एजेन्ट ऑरेज का वर्णन करें।
उत्तर-
नापाम एक तरह का आर्गेनिक कम्पाउंड है जो अग्नि बमों में गैसोलिन के साथ मिलकर एक ऐसा मिश्रण तैयार करता था जो त्वचा से पिचक जाता और जलता रहता था। इसका व्यापक पैमाने पर वियतनाम में प्रयोग किया गया था। एजेन्ट आरेंज एक जहर था जिससे पेड़ों की पत्तियाँ तुरंत झुलस जाती थीं एवं पेड़ मर जाते थे। जंगलों को खत्म करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता। इसका नाम आरेंज पट्टियों वाले ड्रमो में रखे जाने के कारण पड़ा। अमेरिका ने इसका इस्तेमाल जंगलों के साथ खेतों और आबादी दोनों पर जमकर किया।

प्रश्न 3.
हो-ची-मिन्ह के संबंध में संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
हो-ची-मिन्ह (न्यूगन आई क्वोक) एक वियतनामी छात्र था जिसने 1917 में पेरिस में ही साम्यवादियों का एक गुट बनाया, बाद में हो-ची-मिन्ह शिक्षा प्राप्त करने मास्को गया और साम्यवाद से प्रेरित होकर 1925 में वियतनामी क्रांतिकारी दल का गठन किया, साथ ही कार्यकर्ताओं के सैनिक प्रशिक्षण की भी व्यवस्था कर ली। अंततः 1930 में वियतनाम के बिखरे राष्ट्रवादी गुटों को एकजुट कर वितनाम कांग सान देंग अर्थात् वियतनाम कम्युनिष्ट पार्टी की स्थापना की जो पूर्णतः उग्र विचारों पर चलने वाली पार्टी थी।

प्रश्न 4.
हो-ची-मिन्ह मार्ग क्या है बतावें?
उत्तर-
हो-ची मिन्ह 2 सितम्बर 1945 ई. को वियतनाम लोकतंत्रीय गणराज्य के सरकार के प्रधान बने और बाद में फ्रांसीसी सेना का प्रत्यक्ष मुकाबला न कर पाने की स्थिति में गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया। इस युद्ध के लिए मुरिल्ला सेनिक लाओस और कंबोडिया के रास्ते दक्षिणी वियतनाम पर धावा बोलते और पुन: उन्हीं जंगलों में छिप जाते थे। इसी रास्ते को हो-ची मिन्ह मार्ग कहा जाता है।

प्रश्न 5.
अमेरिका हिन्द चीन में कैसे घुसा, चर्चा करें।
उत्तर-
1945 ई. तक वियतमिन्ह के गुरिल्लों के हाथों में तोंकिन के प्रायः सारे क्षेत्र नियंत्रण में आ गए थे। अब जबकि द्वितीय विश्वयुद्ध की स्थितियाँ बदलने लगीं पर्ल हार्बर पर जापान के आक्रमण के साथ ही अमेरिका युद्ध में शामिल हो गया था। अमेरिका जो फ्रांस का समर्थन कर रहा था सीधे हिन्द चीन में उतरना चाह रहा था। साम्यवादियों के विरोध में उसने ऐसी घोषणा भी कर दी। हिन्द चीन में साम्यवादी प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका कृतसंकल्प था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
हिन्द चीन उपनिवेश स्थापना का उद्देश्य क्या था?
उत्तर-
फ्रांस द्वारा हिन्द चीन को अपना उपनिवेश बनाने का प्रारंभिक उद्देश्य तो डच एवं ब्रिटिश कंपनियों की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना था। भारत में फ्रांसीसी पिछड़ रहे थे। चीन में उनका व्यापारिक प्रतिद्वन्द्वी, मुख्य रूप से इंगलैड था। अतः सुरक्षात्मक आधार के रूप में उन्हें हिन्द चीनी क्षेत्र उचित लगा जहाँ खड़े होकर वे दोनों तरफ भारत एवं चीन की परिस्थितियों में संभल सकते थे। दूसरे, औद्योगिकीकरण के लिए कच्चे माल की आपूर्ति उपनिवेशों से होती थी एवं उत्पादित वस्तुओं के लिए बाजार भी उपलब्ध होता था। तीसरे, पिछड़े समाजों को समय बनाने का विकसित यूरोपीय राज्यों का स्वघोषित दायित्व था।

अमेरिका जो पूर्व में फ्रांस का समर्थन कर रहा था वह भी हिन्द चीन में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाह रहा था। साम्यवादियों के प्रभाव को इस क्षेत्र में रोकने के लिए अमेरिका कृत संकल्प था।

प्रश्न 2.
माई ली गाँव की घटना क्या थी? इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
दक्षिणी वियतनाम एक गाँव था जहाँ के लोगों को वियतकांग समर्थक मान अमेरिकी सेना ने पूरे गाँव को घेर कर पुरुषों को मार डाला, औरतों बच्चियों को बंधक बनाकर कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया फिर उन्हें भी मार कर पूरे गाँव में आग लगा दी। लाशों के बीच दबा एक बूढ़ा जिन्दा बच गया था जिसने इस घटना को उजागर किया था।

इस घटना के कारण अमेरिका की पूरे विश्व में किरकिरी होने लगी। अतः राष्ट्रपति निक्सन ने शांति के लिए पाँच सूत्री योजना की घोषणा की

  • हिन्द-चीन की सभी सेनाएँ युद्ध बंद कर यथास्थान पर रहें।
  • युद्ध विराम की देख-रेख अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक करेंगे।
  • इस दौरान कोई देश अपनी शक्ति बढ़ाने का प्रयत्न नहीं करेगा।
  • युद्ध विराम के दौरान सभी तरह की लड़ाइयाँ बंद रहेंगी सभी बमबारी से आतंक फैलने वाली घटनाओं तक।
  • युद्ध विराम का अन्तिम लक्ष्य समूचे हिन्द चीन में संघर्ष का अंत होना चाहिए।

प्रश्न 3.
राष्ट्रपति निक्सन के हिन्द चीन में शांति के संबंध में पाँचसूत्री योजना क्या थी? इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
माई ली गाँव की घटना के बाद विश्व में किरकिरी होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने निम्नलिखित पाँचसूत्री योजना की घोषणा की

  • हिन्द-चीन की सभी सेनाएँ युद्ध बंद कर यथा स्थान पर रहें।
  • युद्ध विराम की देख-रेख अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक करेंगे।
  • इस दौरान कोई देश अपनी शक्ति बढ़ाने का प्रयत्न नहीं करेगा।
  • युद्ध विराम के दौरान सभी तरह की लड़ाइयाँ बंद रहेंगी सभी बमबारी से आतंक फैलाने वाली घटनाओं तक।
  • युद्ध विराम का अन्तिम लक्ष्य समूचे हिन्द-चीन में संघर्ष का अन्त होना चाहिए।

परन्तु इस शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। अमेरिकी सेना पुनः बमबारी शुरू कर दी। लेकिन अमेरिका अब जान चुका था कि उसे अपनी सेनाएँ वापस बुलानी ही पड़ेंगी। निक्सन ने पुनः आठसूत्री योजना रखी। वियतनामियों ने इसे खारिज कर दिया। अब अमेरिका चीन को अपने पक्ष में करने में लग गया। वियतनामियों को चीनी धोखों का अंदेशा होने लगा। 24 अक्टूबर, 1972 को वियतकांग, उत्तरी वियतनाम, अमेरिका दक्षिणी वियतनाम में समझौता तय हो गया परन्तु दक्षिणी वियतनाम ने आपत्ति जताई और पुनः वार्ता के लिए कहा।

वियतकांग ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस बार इतने बम गिराए गए जिनकी कुल विध्वंसक शक्ति हिरोशिमा में प्रयुक्त परमाणु बम से ज्यादा ऑकी गई। हनोई भी इस बमबारी से ध्वस्त हो गया परन्तु वियतनामी डटे रहे। अंतत: 27 फरवरी, 1973 को पेरिस में वियतनाम युद्ध की समाप्ति के समझौते पर हस्ताक्षर हो गया। समझौते की मुख्य बातें थीं-युद्ध समाप्त के 60 दिनों के अंदर अमेरिकी सेना वापस हो जाएगी। उत्तर और दक्षिण वियतनाम परस्पर सलाह करने एकीकरण का मार्ग खोजेंगे। अमेरिका वियतनाम को असीमित आर्थिक सहायता देगा।

इस तरह से अमेरिका के साथ चला आ रहा युद्ध समाप्त हो गया एवं जनवरी 1975 में दोनों वियतनाम मिल गए।

इस प्रकार सात दशकों से ज्यादा चलने वाला यह अमेरिका-वियतनाम युद्ध समाप्त हो गया। इस युद्ध में 9855 करोड़ सैनिक मारे गए, लगभग 3 लाख सैनिक घायल हुए, दक्षिणी वियतनाम के 18000 सैनिक मारे गए। अमेरिका के 4800 हेलिकाप्टर एवं जेट नष्ट हो गए। ट्रको की गिनती नहीं।

इस सारे घटना के परिपेक्ष्य में धन जन की बर्बादी के अलावे अमेरिकी शाख को गहरा आघात लगा पूरे हिन्द चीन में वह बुरी तरह असफल रहा। अंततः उसे अपनी सेना हिन्द चीन से हटानी पड़ी और सभी देशों की संप्रभुता अखण्डता को स्वीकार करना पड़ा।

प्रश्न 4.
फ्रांसीसी शोषण के साथ-साथ उसके द्वारा किये गये सकारात्मक कार्यों की समीक्षा करों
उत्तर-
फ्रांसीसियों ने प्रारंभिक शोषण तो व्यापारिक नगरों एवं बंदरगाहों से शुरू किया। उसके बाद भीतरी ग्रामीण इलाको में किसानों का शोषण करना शुरू किया था। तो किन के जीवन का आधार लाल घाटी थी तो कम्बोडिया का मेकांग नदी का मैदानी क्षेत्र एवं कोचीन-चीन का मेकांग का डेल्टा क्षेत्र जबकि चीन से सटे राज्यों में खनिज संसाधन कोयला, टीन, जस्ता टंगस्टन, क्रोमियम आदि मिलते थे, पहाड़ी इलाकों में रबर की खेती होती थी तथा मैदानी क्षेत्र में धान की।

सर्वप्रथम फ्रांसीसियों ने शोषण के साथ-साथ कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नहरों का एवं जलनिकासी का समुचित प्रबंध किया और दलदली भूमि, जंगलों आदि में कृषि क्षेत्र को बढ़ाया जाने लगा। इन प्रयास का ही फल था कि 1931 ई. तक वियतनाम विश्व का तीसरा बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया। रबर बगानों, खानों, फार्मों में मजदूरों से एकतरफा अनुबंध व्यवस्था पर काम लिया जाता था। जमींदारी अपने विकृत रूप में आ चुकी थी। हालाँकि इसी दौरान पूरे उत्तर से दक्षिण हिन्द चीन तक संरचनात्मक विकास जोरों पर रहा एवं एक विशाल रेल नेटवर्क, सड़क जाल बिछ गया था। परन्तु किसानों, मजदूरों का जीवन स्तर गिरता जा रहा था, क्योंकि सारी व्यवस्था ही शोषण मूलक थी।

जहाँ तक शिक्षा का प्रश्न था अब तक परंपरागत स्थानीय भाषा अथवा चीनी भाषा में शिक्षा पा रहे लोगों को अब फ्रांसीसी भाषा में शिक्षा दी जाने लगी, परंतु इस क्षेत्र में बसने वाले , फ्रांसीसियों को शिक्षा के प्रसार के सकारात्मक प्रभावों का डर था। अत: आमलोगों को शिक्षा से दूर रखने का प्रयास किया जाने लगा और सकूल के अंतिम साल की परीक्षा में अधिकतर स्थानीय बच्चों को फेल कर दिया जाता था। स्थानीय जनता एवं कोलोनी की सामाजिक स्थिति में आसमान जमीन का अन्तर था और 1920 के दशक तक आते-आते छात्र-छात्राएँ राजनीतिक पार्टियाँ बनाने लगे थे। दनोई विश्वविद्यालय का बंद किया जाना फ्रांसीसी शोषण की पराकष्ठा थी।

प्रश्न 5.
हिन्द चीन के राष्ट्रवाद के विकास का वर्णन करें।
उत्तर-
हिन्द चीन में फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के छिट-फुट विद्रोह का सामना तो प्रारंभिक दिनों से ही झेलना पड़ रहा था। परन्तु 20वीं शताब्दी के शुरू में यह और मुखर होने लगा। वहाँ राष्ट्रवाद का विकास निम्न प्रकार से हुआ

  • 1930 ई. में फान-बोई-चाऊ ने ‘दुईतान होई’ नामक एक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की जिसके नेता कुआंग थे। फान-बोई-चाऊ ने ‘द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम’ लिखकर हलचल पैदा कर दी।
  • 1905 में जापान द्वारा रूस को हटाया जाना हिन्द चीनियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।
  • रूसो एवं माण्टेस्क्यू जैसे फ्रांसीसी विचारों के विचार उन्हें उद्वेलित कर रहे थे।
  • राष्ट्रवादी नेता फान-चू-त्रिन्ह ने राष्ट्रवादी आन्दोलन के स्वतंत्रीय स्वरूप को गणतंत्रवादी बनाने का प्रयास किया।
  • जापान में शिक्षा प्राप्त करने गए छात्रों ने फान-चू-त्रिन्ह के विचारों से प्रभावित होकर वियतनाम कुवान फुक होई नामक संगठन की स्थापना की।
  • प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुई ज्यादतियों के कारण 1914 में ही देशभक्तों ने एक “वियतनामी राष्ट्रवादी दल” नामक संगठन बनाया जिसका पहला अधिवेशन कैण्टन में हुआ।
  • 1917 में हो-ची-मिन्ह नामक एक वियतनामी छात्र ने पेरिस में ही साम्यवादियों का एक गुट बनाया।
  • 1925 में हो-ची मिन्ह ने साम्यवाद से प्रेरित होकर ‘वियतनामी क्रान्तिकारी दल’ बनाया।
  • 1930 में वियतनाम के बिखरे राष्ट्रवादी गुटों को एकजुट कर ‘वियतनामकांग सान इंग’ की स्थापना की।
  • 1930 के दशक की विश्वव्यापी मंदी ने भी राष्ट्रवाद के विकास में योगदान दिया। क्योंकि हिन्द-चीन में बेरोजगारी बढ़ती जा रही थी। इस स्थिति से परेशान किसान भी साम्यवाद को अपना . रहे थे और राष्ट्रवादी आन्दोलन जोर पकड़ता जा रहा था।

Bihar Board Class 10 History हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जेनेवा समझौता कब और किसके बीच हुआ था?
उत्तर-
जेनेवा समझौता फ्रांस और वियतनाम के बीच 1954 में हुआ था।

प्रश्न 2.
वियतनाम में स्कॉलर्स रिवोल्ट क्यों हुआ?
उत्तर-
वियतनाम में ईसाई मिशनरियों के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने के लिए 1868 में ईसाईयत के विरुद्ध स्कॉलर्स रिवोल्ट हुआ।

प्रश्न 3.
पाथेट लाओ की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर-
पाथेट लाओ जो एक सैन्य संगठन था। इसकी स्थापना का कारण लाओस में साम्यवादी शासन व्यवस्था की स्थापना करना था।

प्रश्न 4.
1970 में जकार्ता सम्मेलन क्यों बुलाया गया ?
उत्तर-
अमेरिका ने कंबोडिया से अपनी सेना की वापसी की घोषणा की लेकिन दक्षिण वियतनाम कंबोडिया से अपनी सेना हटने को तैयार नहीं हुआ। इस गंभीर स्थिति के समाधान के लिए मई 1970 में जकार्ता सम्मेलन (ग्यारह एशियाई देशों का सम्मेलन) बुलाया गया।

प्रश्न 5.
वियतनाम में रहनेवाले फ्रांसीसियों को क्या कहा जाता था?
उत्तर-
20वीं शताब्दी के आरंभ तक संपूर्ण हिंद-चीन फ्रांस की अधीनता में आ गए थे। फ्रांसीसी आकर वियतनाम में बसने लगे। वियतनाम में रहनेवाले फ्रांसीसियों को कोलोन’ कहा जाता था।

प्रश्न 6.
वियतनाम में टोंकिन फ्री स्कूल क्यों स्थापित किए गए?
उत्तर-
पश्चिमी ढंग की शिक्षा देने के उद्देश्य से 1907 में वियतनाम में टोंकिन फ्री स्कूल खोला गया था। इस शिक्षा में विज्ञान, स्वच्छता तथा फ्रांसीसी भाषा की कक्षाएं भी शामिल थीं जो शाम को लगती थीं तथा इनके लिए अलग से फीस ली जाती थी। स्कूल में वियतनामियों को आधुनिक बनाने पर बल दिया गया।

प्रश्न 7.
“पूरब की ओर चलो’ आंदोलन का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर-
इस आंदोलन का उद्देश्य वियतनाम में फ्रांसीसी सत्ता को समाप्त कर फ्रांसीसियों को वियतनाम से बाहर निकालना था। साथ ही साथ वियतनामी उसके स्थान पर गयेन राजवंश की पुनर्स्थापना करना चाहते थे।

प्रश्न 8.
हुईन्ह फू सो कौन थे?
उत्तर-
होआ हाओ आंदोलन के संस्थापक हुईन्ह फू सो थे। वह गरीबों की मदद करता था। व्यर्थ खर्च के खिलाफ उनके उपदेशों का लोगों के ऊपर काफी प्रभाव पड़ा था।

प्रश्न 9.
इंडो-चाइना यूनियन की स्थापना कब और किसके साथ मिलकर हुई थी?
उत्तर-
इंडो-चाइना यूनियन की स्थापना 1887 में की गई थी। इंडो-चाइना यूनियन की स्थापना कोचिन-चाइना, अन्नाम, तोंकिन, कंबोडिया और बाद में लाओस को मिलाकर बनाया गया था।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वियतनाम में राष्ट्रवाद के उदय के कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर-
वियतनाम में राष्ट्रवाद के विकास में विभिन्न तत्वों का योगदान था जिनमें औपनिवेशिक शोषणकारी नीति तथा स्थानीय आंदोलनों ने काफी बढ़ावा दिया। 20वीं शताब्दी के शुरूआत में यह विरोध और मुखर होने लगा। वियतनामी राष्ट्रवाद के विकास में फा-बोई-चाऊ ने “द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम” लिखकर राष्ट्रवादियों के बीच हलचल पैदा कर दी। वियतनामी राष्ट्रवाद के विकास के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे

  • 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी।
  • औपनिवेशिक सरकार की शोषणकारी नीति।।
  • किसानों पर बढ़ता बोझा
  • गरीबी तथा बेरोजगारी की समस्या तथा
  • उग्र (रैडिकल) आंदोलनों का प्रभाव।

प्रश्न 2.
होआ-होआ आंदोलन के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
होआ-होआ आंदोलन वियतनाम में चलाया गया जो उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन था। 1939 में होआ-हाओ आंदोलन आरंभ हुआ। इसका केन्द्र मेकांग डेल्टा था। इस आंदोलन की उत्पत्ति फ्रांसीसी उपनिवेशवादी विरोधी विचारों से हुई थी। इस आंदोलन का प्रणेता हुइन्ह फू सो था। वह जनकल्याण संबंधी कार्य करता था और समाजसुधारक भी था। उसने फिजूलखर्ची, शराबखोरी और बाल कन्याओं की बिक्री की प्रथा का विरोध किया। समाज में उसका व्यापक प्रभाव था। हुइन्ह फूसो के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सरकार ने कठोर दमनात्मक कारवाई कर होआ-हाओ आंदोलन को दबा दिया। लेकिन यह आंदोलन राष्ट्रवाद की मुख्य धारा से जुड़ गया।

प्रश्न 3.
फ्रांसीसियों ने मेकांग डेल्टा में नहरे क्यों बनवाई ? इनका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर-
फ्रांसीसियों ने कृषि के विस्तार के लिए मेकांग डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा के लिए नहरें बनवाई। सिंचाई की समुचित व्यवस्था उपलब्ध होने से धान की खेती और उत्पादन में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई। एक अनुमान के अनुसार 1873 में जहाँ 2,74,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती थी। वह 1930 में बढ़कर 22 लाख हेक्टेयर हो गया। क्षेत्र विस्तार के अतिरिक्त उत्पादन भी बढ़ा। 1931 तक वियतनाम विश्व का तीसरा चावल निर्यातक देश बन गया।

प्रश्न 4.
वियतनाम मुक्ति एसोशिएशन की स्थापना क्यों की गई?
उत्तर-
1911 की चीनी क्रांति से वियतनामियों को काफी प्रेरणा मिली थी। चीनी क्रांति के परिणामस्वरूप चीन में मंजू राजवंश का शासन समाप्त हुआ तथा चीनी गणतंत्र की स्थापना की गयी। चीन की घटनाओं से प्रेरित होकर वियतनामी विद्यार्थियों ने वियतनाम मुक्ति एसोशिएसन नामक संस्था की स्थापना की। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य राजशाही की पुनर्स्थापना न होकर लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना के लिए प्रयास करना था।

प्रश्न 5.
एकतरफा अनुबंध व्यवस्था पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
वियतनाम में एकतरफा अनुबंध व्यवस्था के अंतर्गत बागानों में मजदूरों से काम करवाया जाता था। इस व्यवस्था में मजदूरों को एक एकरारनामा के अंतर्गत को बागान मालिक और मजदूरों के बीच होता था, काम करना पड़ता था। एकरारनामा में मजदूरों को कोई अधिकार नहीं दिया गया। सारे अधिकार मालिकों के पास थे। काम पूरा नहीं होने पर मजदूरों को मालिक दंडित कर सकते थे, उन्हें जेल भिजवा सकते थे। वस्तुतः बागान मजदूरों की स्थिति गुलामों के समान थी। ग्रामीण क्षेत्रों में सामंती व्यवस्था के प्रचलन के कारण किसानों और मजदूरों की स्थिति दयनीय थी।

प्रश्न 6.
बाओदायी के विषय में क्या जानते हैं ?
उत्तर-
बाओदायी वियतनाम के प्राचीन राजवंश का सम्राट था। जापानियों ने हिन्द-चीन से वापस लौटते समय अन्नाम का शासन ओदायी को सौंप दिया। लेकिन बाओगई साम्यवादियों का सामना करने में असमर्थ था इसलिए उसने अन्नाम के सम्राट का पद त्याग दिया। वियतनाम के आजादी के बाद फ्रांसीसी बाओरायी को अपने प्रभाव में लेकर वियतनाम पर अप्रत्यक्ष शासन करते रहे।

प्रश्न 7.
वियतनाम का विभाजन क्यों और कैसे हुआ?
उत्तर-
वियतनाम और फ्रांस के युद्ध में फ्रांसीसियों की बुरी तरह पराजय हुई। अमेरिका ने हिन्द-चीन में हस्तक्षेप करने का निश्चय किया जिससे स्थिति विस्फोटक हो गई तथा तृतीय विश्वयुद्ध का खतरा उत्पन्न हो गया। ब्रिटेन, फ्रांस युद्ध नहीं चाहते थे तथा समझौता की नीति अपनाई। इसके लिए जेनेवा में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। 1954 के जेनेवा समझौता के द्वारा इंडो-चीन के लाओस और कम्बोडिया स्वतंत्र कर दिए गए। दोनों राज्यों में वैध राजतंत्र एवं संसदीय व्यवस्था लागू की गई।

वियतनाम का विभाजन अस्थाई रूप से दो भागों में कर दिया गया-(i) उत्तरी वियतनाम (ii) दक्षिणी वियतनाम। दोनों राज्यों की विभाजक, रेखा सत्रहवीं समानांतर बनाई गई। उत्तरी वियतनाम में हो ची मिन्ह की कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता दी गई। दक्षिणी वियतनाम में बाओदाई की सरकार बनी रही। यह व्यवस्था भी की गई कि 1956 में पूरे वियतनाम के लिए चुनाव करवाए जाएंगे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फान बोई चाऊ और फान चू मिन्ह का परिचय दें। उनके विचारों में आप क्या समानता और अंतर देखते हैं ?
उत्तर-
फान बोर्ड चाऊ- (1867-1940) फान बोई चाऊ वियतनाम के महान राष्ट्रवादी थे। उनपर कन्फ्यूशियसवाद का गहरा प्रभाव था। वे वियतनामी परंपराओं के नष्ट होने से दुखी थे। फ्रांसीसी सत्ता के वे विरोधी थे और इसे समाप्त करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने आंदोलन चलाया। आंदोलन चलाने के उद्देश्य से 1903 में उन्होंने एक दल का गठन किया जिसका नाम रेवोल्यूशनरी सोसाइटी अथवा दुईतान होई था। इस दल का अध्यक्ष न्यूगेन राजवंश के कुआंग दे को बनाया गया। फान बोर्ड चाऊ की गणना देश के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता के रूप में की जाने लगी। फान बोर्ड चाऊ के ऊपर चीन के सुधारक लियोग किचाओ का भी गहरा प्रभाव था। 1905 में उन्होंने लियांग किचाओ से भेंट की और उनके सलाह पर उन्होंने ‘द हिस्ट्री ऑफ द लॉस ऑफ वियतनाम” नामक पुस्तक लिखी।

फान चूत्रिन्ह (1871-1926)- फान चू त्रिन्ह वियतनाम के दूसरे विख्यात राष्ट्रवादी थे। इनके और फान बोई चाऊ के विचारों में भिन्न थी। वे राजतंत्रात्मक व्यवस्था के विरोधी थे। वियतनाम की स्वतंत्रता के लिए वे राजा की सहायता नहीं लेना चाहते थे बल्कि इसे उखाड़ फेंकना चाहते थे। उनकी आस्था गणतंत्रात्मक व्यवस्था में थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वह देश में लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा चाहते थे। वे पश्चिमी जगत की लोकतंत्रात्मक व्यवस्था विशेषतः फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों से प्रभावित थे।

फान बोई चाऊ और फान चू मिन्ह के विचारों में सबसे बड़ी समानता यह थी कि दोनों ही वियतनाम की स्वतंत्रता चाहते थे। लेकिन दोनों में विरोधाभास या भिन्नता यह थी कि फान बोई चाऊ जहाँ वियतनाम की स्वतंत्रता के लिए राजशाही का समर्थन और सहयोग लेने के पक्षधर थे, वहीं फान च मिन्ह राजतंत्रात्मक व्यवस्था के विरोधी थे तथा वियतनाम की स्वतंत्रता के लिए राजा की सहायता नहीं लेना चाहते थे बल्कि इसे उखाड़ फेंकना चाहते थे।

प्रश्न 2.
वियतनाम के स्वतंत्रता संग्राम में हो ची मिन्ह के योगदान का मूल्यांकन करें?
उत्तर-
वियतनामी स्वतंत्रता के मसीहा हो ची मिन्ह थे। उनका मूल नाम न्यूगेन आई क्लोक था। वे पेरिस और मास्को में शिक्षा ग्रहण की थी। शिक्षा पूरी करने के पश्चात उन्होंने अपना कुछ समय शिक्षक के रूप में व्यतीत किया। वे मार्क्सवादी विचारधारा से गहरे रूप से प्रभावित थे। उनका मानना था कि बिना संघर्ष के वियतनाम को आजादी नहीं प्राप्त हो सकती है। फ्रांस में रहते हुए 1917 में उन्होंने वियतनामी साम्यवादियों का एक गुट बनाया। लेनिन द्वारा कॉमिन्टन की स्थापना के बाद वे इसके सदस्य बन गए। इन्होंने लेनिन और अन्य कम्युनिस्ट नेताओं से मुलाकात की। यूरोप थाइलैंड और चीन में उन्होंने लंबा समय व्यतीत किया।

साम्यवाद से प्रेरित होकर 1975 में उन्होंने बोरादिन (रूस) में वियतनामी क्रांतिकारी दल का गठन किया। फरवरी 1930 में हो ची मिन्ह ने वियतनाम के विभिन्न समूहों के राष्ट्रवादियों को एकजुट किया। स्वतंत्रता संघर्ष प्रभावशाली ढंग से चलाने के लिए उन्होंने 1930 में वियतनामी कम्युनिस्ट पार्टी (वियतनाम कांग सान देंग) की स्थापना की। इस दल का नाम बाद में बदलकर इंडो चायनीज कम्यूनिष्ट पार्टी कर दिया गया। इसी दल के अधीन और हो ची मिन्ह के नेतृत्व में वियतनाम ने स्वतंत्रता प्राप्त की। 1943 में न्यूगेन आई क्लोक ने अपना नाम हो ची मिन्ह रख लिया।

हो चीन मिन्ह के नेतृत्व में एक नए संगठन लीग फार दी इंडिपेंडेंस आफ वियतनाम अथवा वियेतमिन्ह की स्थापना की गई। वियेतमिन्ह ने गुरिल्ला युद्ध का सहारा लेकर फ्रांसीसियों और जापानियों दोनों को परेशान कर दिया। 1945 तक वियेत चिन्ह ने लेनिन पर अधिकार कर लिया। 1944 में विश्वयुद्ध की परिस्थितियाँ बदलने लगी थी। फ्रांस पर से जर्मनी का प्रभुत्व समाप्त हो गया। जापान द्वारा पर्ल हार्बर पर आक्रमण के बाद अमेरिका विश्वयुद्ध में सम्मिलित हो गया।

उसने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए। इससे जापान की शक्ति कमजोर हो गई। अतः पोट्सड्म की घोषणा के बाद जापान ने आत्म समर्पण कर दिया और हिंद-चीन से अपनी सेना हटाने लगा। वापस लौटते हुए जापानियों ने अन्नाम का शासक प्राचीन राजवंश के सम्राट बाओदाई को सौंप दिया। बाओदाई साम्यवादियों का सामना करने में पूरी तरह असमर्थ था इसलिए उसने अन्नाम के समट का पदत्याग दिया। इससे वियतनामी गणराज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया। सित्मबर 1945 में वियतनाम लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना हुई तथा हो ची मिन्ह इस गणतंत्र के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

प्रश्न 3.
वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका की विवेचना करें।
उतर-
वियतनाम के राष्ट्रवादी आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी। युद्ध और शांति काल दोनों में उन लोगों ने पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग किया। स्वतंत्रता संग्राम में वे विभिन्न रूपों में भाग लेने लगी छापामार योद्धा के रूप में कुली के रूप में अथवा नर्स के रूप में समाज ने उनकी नई भूमिका को सराहा और इसका स्वागत किया। वियतनामी राष्ट्रवाद के विकास के साथ स्त्रियाँ बड़ी संख्या में आंदोलनों में भाग लेने लगी। स्त्रियों को राष्ट्रवादी धारा में आकृष्ट करने के लिए बीते वक्त की वैसी महिलाओं का गुण्मान किया जाने लगा जिन लोगों ने साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए राष्ट्रवादी आंदोलनों में भाग लिया था।

राष्ट्रवादी नेता फान बाई चाऊ ने 1913 में ट्रंग बहनो के जीवन पर एक नाटक लिखा। इस नाटक ने वियतनामी समाज पर गहरा प्रभाव डाला। ट्रंग बहनें वीरता और देशभक्ति की प्रतीक बन गई। उन्हें देश के लिए अपना प्राण उत्सर्ग करनेवाला बताया गया। चित्रों, उपन्यासों और नाटकों के द्वारा उनका गौरवगान किया गया। ट्रंग बदनों के समान त्रिय् अम् का भी महिमागान किया गया।

ट्रंग बहनों के समान त्रिय् अयू का गुणगान भी देश के लिए शहीद होनेवाली देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया। उसके चित्र बनाए गए. जिसमें उसे हथियारों से लैस एक जानवर की पीठ पर बैठे हुए दिखाया गया। इन स्त्रियों के महिमामंडल का वियतनामी औरतों पर गहरा प्रभाव पड़ा। इनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संस्था में स्त्रियाँ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने लगी। युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिकों के हताहत होने के बाद महिलाओं को भी सेना में शामिल होने को उत्प्रेरित किया गया।

वियतनामी संघर्ष में स्त्रियों ने न सिर्फ युद्ध में ही अपने देश की सेवा नहीं की बल्कि अन्य रूपों में भी अपने राष्ट्र के लिए काम किया। वे सेना में भरती हुई। सुरक्षात्मक व्यवस्था के निर्माण जैसे भूमिगत बंकर और सुरंगों के निर्माण में उन लोगों ने भाग लिया। हवाई पट्टियों का निर्माण किया। हो ची मिन्ह मार्ग द्वारा रसद की आपूर्ति एवं उस मार्ग की मरम्मत का काम किया। अस्पतालों में नसे के रूप में घायलों की सेवा सुश्रुसा की। युद्ध में भी अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। हजारों बमों को निष्क्रिय किया एवं अनेक हवाई जहाजों को मार गिराया। हो ची मिन्ह मार्ग की सुरक्षा एवं इसकी मरम्मत में अधिकांशतः युवतियों का ही योगदान था। उनके सहयोग से ही अंततः वियतनाम का एकीकरण संभव हो सका।

Bihar Board Class 10 History हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन Notes

  • हिन्द चीन-दक्षिण पूर्व एशिया में तत्कालीन समय में लगभग3 लाख (2.80 लाख) वर्ग कि. मी. में फैले उस प्रायद्विपीय क्षेत्र में है जिसमें वियतनाम, लाओस और कम्बोडिया के क्षेत्र आते हैं। इनकी उत्तर सीमा म्यानमार एवं चीन को छूती है तो दक्षिण में चीन सागर है और पश्चिम में म्यानमार के क्षेत्र पड़ते हैं।
  • हिन्द चीन में बसने वाले फ्रांसीसी कोलोन कहे जाते थे।
  • 1498 ई. में वास्कोडिगामा ने भारत से जुड़ने की चाह में जब समुद्री मार्ग ढूँढ निकाला तो पुर्तगाली ही पहले व्यापारी थे जो भारत के साथ-साथ दक्षिणी पूर्वी एशियायी देशों से जुड़े थे और 1510 ई. मेंमल्लका को व्यापारिक केन्द्र बना कर हिन्द चीन देशों के साथ व्यापार
    शुरू किया, उसके बाद स्पेन, डच, इंगलैण्ड, फ्रांसीसियों का आगमन हुआ।
  • फ्रांस द्वारा हिन्द चीन को अपना उपनिवेश बनाने का प्रारंभिक उद्देश्य तोडच एवं ब्रिटिश कम्पनियों की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना था।
  • हिन्द चीन में फ्रांसीसी प्रभुत्व की स्थापना के साथ ही शासन व्यवस्था पर ध्यान दिया गया।
  • हालाँकि कोचीन-चीन ही सीधे फ्रांसीसी प्रशासन में था बाकी के चार प्रांत तोकिन, अन्नाम, कम्बोडिया और लाओस में पुरातन राजवंश कायम रहे और वहाँरेजिडेन्टों की नियुक्ति होती थी।
  • 1945 ई. तक वियसतमिन्ह के गुरिल्लों के हाथों में तोंकिन के प्रायः सारे क्षेत्र नियंत्रण में आ गए थे। जबकि अब द्वितीय विश्वयुद्ध की स्थितियाँ बदलने लगीं।पर्ल हाबर पर जापान के आक्रमण के साथ ही अमेरिका युद्ध में शामिल हो गया।
  • 25 दिसम्बर, 1955 कोलाओस में चुनाव के बाद राष्ट्रीय सरकार का गठन हुआ और सुवन्न
    फूमा के नेतृत्व में सरकार बनी।
  • सन् 1954 ई० में स्वतंत्र राज्य बनने के बादकम्बोडिया में सांवैधानिक राजतंत्र को स्वीकार
    कर राजकुमार नरोत्तम सिंहानुक को शासक माना गया।
  • 18 मार्च, 1970 को कम्बोडियायी राष्ट्रीय संसद ने नरोत्तम सिंहानुक को सत्ता से हटा दिया और जनरल लोननोल के नेतृत्व में सरकार बनी।
  • कम्बोडिया का नया नाम कम्पुचिया है।
  • प्रसिद्ध दार्शनिकरसेल ने एक अदालत लगाकर अमेरिका को वियतनाम युद्ध के लिए दोषी करार दिया।
  • हो-ची-मिन्ह वियतनामी राष्ट्रीयता केजनक थे।
  • हो-ची-मिन्ह मार्ग हनोई से चलकरलाओस, कम्बोडिया सीमा क्षेत्र से होता हुआदक्षिणी वियतनाम तक जाता था।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन नेवियतनाम में शांति के लिए पाँच सूत्री योजना की घोषणा की।
  • माई-ली-गाँव दक्षिणी वियतनाम में है जहाँ अमेरिकी सेना ने काफी क्रूरतापूर्वक नरसंहार किया था।
  • वियतनाम में स्कॉलर्स रिवोल्ट (1868) तथा होआ होआ आंदोलन (1939) में हुआ।
  • 6 मार्च, 1946 कोहनोई समझौता वियतनाम एवं फ्रांस के बीच हुई।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 बालगोबिन भगत

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 3 Chapter 4 बालगोबिन भगत Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 बालगोबिन भगत

Bihar Board Class 8 Hindi बालगोबिन भगत Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
बालगोबिन भगत गृहस्थ थे। फिर भी उन्हें साधु क्यों कहा जाता था?
उत्तर:
बालगोबिन बेटा-पतोहु वाले. गृहस्थ थे लेकिन उनका आचरण साधु जैसा था । साधु आडम्बरों या अनुष्ठानों के पालन के निर्वाह से नहीं होता । यदि कोई जटाजुटे बढ़ा लें तो साधु नहीं हो सकता । वस्तुतः साधु वह है जो आचरण में शुद्धता रखता है। बालगोबिन भगत की दिनचर्या कर्त्तव्यनिष्ठता और आत्म ज्ञान उन्हें साधु.बना दिया था।

बालगोबिन भगत पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त की?
उत्तर:
भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर विलाप नहीं करते दिखे। बल्कि मग्न हो गीत गा रहे थे उनकी भावना का वह चरम-उत्कर्ष था । वो अपने पतोह से कहते थे–आनन्द मनाओ। एक आत्मा परमात्मा से मिल गया। उनकी भावना थी कि मृत्यु के बाद आत्मा-परमात्मा से मिल जाता है जो आनन्ददायक बात है। इस भावना को वे संगीत से तथा पतोह को यथार्थता का ज्ञान देकर भावना को व्यक्त कर रहे थे।

Bihar Board Solution Class 8 Hindi प्रश्न 3.
पुत्र-वधु द्वारा पुत्र की मुखाग्नि दिलवाना भगत के व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है ?
उत्तर:
विवाह के बाद पति पर पत्नी का सबसे अधिक अधिकार है। पत्नी का भी कर्त्तव्य सबसे अधिक पति के प्रति ही होता है। गृहस्थ आश्रम में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। अत: पतोहु को सबसे बड़ा अधिकारी मान उसी से मुखाग्नि दिलवाया। यह कार्य भगत के व्यक्तित्व की सच्चाई और महानता को दर्शाता है।

पाठ से आगे

बालगोबिन भगत के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
“धर्म का मर्म आचरण में है, अनुष्ठान में नहीं” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बालगोबिन भगत साधु थे लेकिन साधु जैसा वेश-भूषा नहीं था। आचरण की पवित्रता और दिनचर्या से वे साधु ही थे। गृहस्थ होकर भी साधु जैसा आचरण ही धर्म का मर्म है न कि साधु जैसा आडम्बर करके।

बाल गोविंद भगत के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
बालगोबिन भगत कबीर को “साहब” मानते थे। इसके क्या-क्या
कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
बालगोबिन कबीर-पंथी होंगे। वे कबीर के पद से अधिक प्रभावित होंगे। भगत जी आडम्बर से दूर रहकर मानव सेवा में विश्वास रखते होंगे। कबीर के आदर्श को बालगोबिन भगत मानते होंगे । इसीलिए वे कबीर को ही अपना “साहब” मानते थे।

Bihar Board Class 8 Hindi प्रश्न 3.
बालगोबिन भगत ने अपने पुत्र को मृत्यु पर भी शोक प्रकट नहीं । किया। उनके इस व्यवहार पर अपनी तर्कपर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए।
‘उत्तर:
बालगोबिन भगत अपने पुत्र के मृत्यु पर भी शोक प्रकट नहीं किया। उनका यह व्यवहार हमारे विचार से सत्य था। मृत्यु प्राणी को जन्म प्रदान करता है। फिर मृत्यु से शारीरिक कष्ट भी तो दूर होता है । अत: मृत्यु पर शोक करना अज्ञानता ही तो है। क्या मृत व्यक्ति के प्रति हजारों वर्ष तक शोक किया जाय तो वह लौट सकता है ? कदापि नहीं।

Class 8 Hindi Bihar Board प्रश्न 4.
अपने गाँव-जवार में उपस्थित किसी साध का रेखाचित्र अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।
उत्तर
हमारे गाँव में एक साधु रहते हैं। बिल्कल साधु रूप स्वभाव आचार-विचार सब में साधु।। सुना गया कि कुछ साल पूर्व सम्भवतः 40-50 वर्ष पूर्व हमारे गाँव में आकर एक मंदिर में डेरा डाला । लोग उन्हें साधु-बाबा कहकर सम्मान देते हैं। साधु बाबा को कभी हमने गुस्सा या नाखुश नहीं देखा। हँसते हुए सारी समस्याओं को निदान वे कर देते हैं। किसी के घर में कलह झगड़ा-झंझट बाल-युवा-वृद्ध सभी उठकर अपने-अपने काम में लग जाते हैं। किसी के बारे में जब साधु-बाबा को पता चलता है कि रोग से पीड़ित हो गया है तो साधु बाबा इलाज के लिए प्रबन्ध करते हैं और उन्हें अस्पताल ..’ तक, ले जाते हैं ।

उसका समुचित इलाज करवाते हैं। उनके माध्यम से जाने पर इलाज में डॉक्टर भी कोताही नहीं करते। पंचायत में भी उनकी भूमिका निर्णायक माना जाता है। इसे जो कहा . सबके लिए मान्य है । धन्य हैं साधु बाबा जिनके कारण हमारे गाँव के लोग बड़े खुश एवं सम्पन्न हैं। किसी को कोर्ट-कचहरी नहीं जाना पड़ता है।

बालगोबिन भगत Question Answer Bihar Board प्रश्न 5.
अपने परिवेश के आधार पर वर्षा-ऋतु का वर्णन करें।
उत्तर:
हपारे गाँव नदी के किनारे बसा है । गाँव के तीनों ओर झील हैं। – जब वर्षा ऋतु आता है तो हमारे गाँव के चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देता है। लोगों को बड़ी परेशानी होती है। गांव में साग-सब्जी की कमी हो जाती – है। सबसे अधिक जलावन की दिक्कत गाँव में होती है। का जब वर्षा ऋतु आती है तो लोग गाँव से बाहर धान रोपने के लिए निकल ‘ जाते हैं। गाँव से अधिक खेतों में लोग दिखाई पड़ते हैं। जब वर्षा होती रहती है तो गाँव थमा जैसा लगता है। अधिक वर्षा से गाँव वालों को बड़ी हानि . उठानी पड़ती है।

Bihar Board 8th Class Hindi Book प्रश्न 6.
अब सारा संसार निस्तब्धता में सोया है, बालगोबिन भगत का संगीत – जाग रहा है, जगा रहा है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे पाठ्यपुस्तक “किसलय भाग-3” के “बालगोबिन भगत” पाठ से संकलित है। इस पाठ के लेखक “रामवृक्ष बेनीपुरी” जी हैं। यह पाठ एक “रेखाचित्र” है। बालगोबिन की संगीत साधना गर्मी हो यो वर्षा सदैव चलता रहता था। . भादो की रात में भी चाहे वर्षा होती रहे या बिजली की करकराहट रहे । यहाँ “तक मेढ़क की टर्र-टर्र आवाज भी बालगोबिन के गीत को प्रभावित नहीं कर पाती। आधी रात में उनका गाना सबों को चौका देता। जब सारा संसार निस्तब्धता में सोया है। बालगोबिन भगत का संगीत जाग रहा है, जगा रहा

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions प्रश्न 7.
रूढ़ीवादिता से हमें किस प्रकार निपटना चाहिए ? किसी एक. रूढ़ीवादी परम्परा का उल्लेख करते हए बताइए कि आप किस प्रकार निपटेंगे?
उत्तर:
रूढ़ीवादिता हमारे समाज के लिए अभिशाप है। इससे निपटने के लिए हमें दृढ़ सकल्प होना चाहिए । हमारा समाज रूढ़ीवादिता से संक्रमित है जिसके कारण समाज के लोगों का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है। – उदाहरण में किसी के मरने पर खूब भोज करना हमारे विचार से उचित नहीं।

कोई गरीब का बाप मर जाता है तो गाँव के लोग उसे भोज करने को विवश कर देते हैं। परिणामस्वरूप निर्धन व्यक्ति कर्ज लेकर भोज करते हैं। … फिर वे महाजन के चंगुल से निकलने के लिए वर्षों दुःख झेलते हैं। क्या जरूरत है कर्ज लेकर भोज करने को। हम अपने गाँव में रूढ़ीवादिता से होने वाले नुकसान का ज्ञान कराकर – लोगों को रूढ़ीवादिता से दूर करने का प्रयास करेंगे।

इन्हें भी जानिए

1. योजक चिह्न
(क) माता-पिता, लड़का-लड़की, पाप-पुण्य जिन पदों के दोनों खंड प्रधान हो, वहाँ योजक यह लगाया जाता है।
(ख) ऊपर-नीता -पिता, पाप-पुण्य, भाई-बहन दो विपरीतार्थक शब्दों के बीच योजक चिह्न लगाया जाता है।
(ग) उल्टा-पुल्टा, अनाप-शनाप, रोटी-वोटी जब दो शब्दों में से एक सार्थक और दूसरा निरर्थक हो तो वहाँ योजक चिह्न का प्रयोग होता है।

इस पाठ में प्रयुक्त वैसे शब्दों का चयन कीजिए जो योजक चिह्न से जुड़े हों एवं उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

2. उद्धरण चिह्न का प्रयोग :
जहाँ किसी पुस्तक से कोई वाक्य ज्यों-का-त्यों उद्धृत किया जाय वहाँ ‘दुहरे उद्धरण चिह्न (” “) एवं जहाँ कोई विशेष एवं पुस्तक, समाचार पत्र, लेखक का उपनाम, शीर्षक इत्यादि उद्धृत किया जाय वहाँ इकहरे उद्धरण चिह्न
(‘ ‘) का प्रयोग होता है। जैसे
“जीवन विश्व की संपत्ति है।” – जयशंकर प्रसाद
‘कामायनी’ की कथा संक्षेप में लिखिए।
‘निराला’ पागल नहीं थे।
‘हिन्दुस्तान’ एक हिन्दी दैनिक पत्र है।

3. रेखाचित्र-जब किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, घटना, दृश्य आदि का इस प्रकार वर्णन किया जाय कि पाठक के मन पर उसका हू-ब-हू चित्र बन जाये तो उसे रेखाचित्र कहते हैं। यथा ‘बालगोबिन भगत’ पाठ का पहला अनुच्छेद । रेखाचित्र में किसी साधारण पात्र की असाधारण विशेषताओं को किया जाता

व्याकरण

किसलय हिंदी बुक बिहार क्लास 8 Solution Bihar Board प्रश्न 1.
इस पाठ में प्रयुक्त वैसे शब्दों का चयन कीजिए जो योजक चिह्न
से जुड़े हों एवं उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
लगौटी – मात्र – बालगोबिन भगत लगौटी – मात्र धारण करते थे।
साफ – सुथरा – मकान को साफ-सुथरा रखना चाहिए।
दो – टुक – वह हमेशा दो – टुक बात करता है।
कभी – कभी – बालगोबिन भगत गाते-गाते कभी – कभी नाच उठते थे।
सदा – सर्वदा – हमें सदा – सर्वदा पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
पानी भरे पानी – भरे खेत में वे काम करते दिखते थे।
स्वर – तरंग – बालगोबिन भगत के स्वर – तरंग लोगों को तुरन्त आकर्षित कर लेता था।.
टर्र – टर्र-मेढ़क की टर्र – टर्र वर्षा ऋतु में सुनाई पड़ता है।
डिमक-डिमक-बालगोबिन भगत की खंजरी डिमक-डिमक बज उठती । थी।
गाते – गाते वह गाते – गाते मस्ती में नाचने लगते थे।
बार – बार – भगत के सिर पर से कमली बार – बार खिसक जाता था।
प्रेम – मंडली – बालगोबिन के प्रेमी – मंडली उनके गायन में साथ देता था।
” धीरे – धीरे-धीरे-धीरे लोग वहाँ आ गये। गंगा – स्नान-गंगा-स्नान से पुण्य होता है।
संगीत – साधना – बालगोबिन भगत की संगीत – साधना निर्मल थी।

प्रश्न 2.
इस पाठ में आए दस क्रिया-विशेषण छाँटकर लिखिए।
उत्तर:

  1. दो-टुक बाल करना।
  2. चहक उठना ।
  3. खाम-खाह झगड़ा।
  4. चमक उठना ।
  5. बच्चे का उछलना।
  6. धीरे-धीरे स्वर ।
  7. खेलते बच्चे
  8. गंगा स्नान ।
  9. डिमक-डिमक बजना

गतिविधि

1. किसी खास प्रयोजन/खास मौसम घर गाए जाने वाले गीत को ढूंढ़िए एवं कक्ष में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

2. इस पाठ में आषाढ़, भादो, कातिक, फागुन एवं माघ विक्रम संवत कैलेंडर के मासों के नाम हैं। शेष बचे मासों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चैत, वैशाख, जेठ, सावन, आश्विन, अगहन, पूस ।

बालगोबिन भगत Summary in Hindi

रामवृक्ष बेनीपुरी रचित रेखाचित्र बालगोबिन भगत ……. रूप से भी – परिचित होंगे।

बालगोबिन भगत मँझौले कद, गोरे-पतले थे, उम्र 60 वर्ष के पके बाल-दाढ़ी, लेकिन साधुओं की तरह जटा नहीं। एक लंगोटी तथा सिर पर. कबीरपंथी टोपी, जाड़े के समय एक काली कम्बल ओढ़ लेते । ललाट पर सदैव रामानन्दी चंदन, गले में तुलसी-माला उनको वैष्णव होने का संकेत देता था। बालगोबिन एक गृहस्थ थे। बेटा-पतोहु सभी उनके घर में थे। कुछ खेती-बारी भी थी, जिसे वे परिश्रमपूर्वक किया करते थे।

वे कबीर को अपना आदर्श मानते थे, वही उनके मालिक (साहब) थे, क्योंकि खेत में उपजे सारे अन्न को माथे चढ़कर साहब के दबार (संगत) – में ले जाते । फिर प्रसाद मानकर उपयोग के अनुकूल अन्न लाया करते। वे गृहस्थ होकर भी महान साधु थे। क्योंकि वे किसी का कुछ नहीं छुते, यहाँ तक दुसरों के खेत में शौच तक नहीं करते। किसी से झगडा नहीं करते लेकिन दो टुक बात करने में संकोच नहीं करते।। – वे सदैव कबीर के दोहे या पद गाते दिखते थे। आषाढ़ में धान रोपते

समय भादों में अधरतिया, कार्तिक में प्रभाती और गर्मी के दिनों में संझा गीत से परिवेश मुखरित होते रहते थे। . उनके कुछ प्रेमी भी थे जो मंडली के रूप में बालगोबिन भगत के भजन में साथ देते थे। बालगोबिन भगत अपने प्रेमी मंडली के साथ इतना आनन्द विभोर हो जाते कि खंजडी बजाते हए वे नाच उठते थे।

बालगोबिन भगत की संगीत-साधना का चरम-उत्कर्ष तो उस दिन दिखाई पड़ा, जिस दिन उसका इकलौता बेटा मर गया । जिसे वे बहुत मानते थे। जिसका कारण था बेटा सुस्त एवं बोदा जैसा था। बेटा का मृत शरीर के पास वे धुन-लय में अपना गीत गा रहे थे। बीच-बीच में रोती विलाप करती . पतोहु के पास जाकर रोने के बदले उत्सव मनाने को कहते । वे बार-बार कहते

आत्मा परमात्मा से जा मिला है। इससे बड़ा आनन्द क्या हो सकता है। लोग उसे पागल मान रहे थे।

बेटा के श्राद्ध कर्म करने के बाद पतोहु के भाई को बुलाकर साथ कर दिया और आदेश देते हुए कहा, इसकी दूसरी शादी कर, देना । पतोहु जो अत्यन्त सुशील थी, रो-रोकर कहती रही- मैं चली जाऊंगी तो बुढ़ापे में आपको खाना कौन बनायेगा । बीमार पड़ने पर पानी कौन देगा। लेकिन बालगोबिन का निर्णय अटल था उसने कहा-“तू चली जा, नहीं तो मैं इस

पर वे चला जाऊँगा।” बेचारी चली जाती है। ‘बालगोबिन हर वर्ष 30 कोस पैदल चलकर गंगा स्नान जाते, लेकिन रास्ते ,

में कुछ नहीं खाते केवल पानी पी-पीकर वापस घर आकर ही खाते । इस बार जब वे लौटे तो सुस्त पड़ गये। बीमार पड़ गये, लेकिन स्नान-पूजा, संगीत-साधना, खेती-बारी कुछ भी नहीं छोड़ा। एक दिन लोगों ने शाम का संगीत सुना लेकिन प्रात:कालीन संगीत नहीं सुनकर बालगोबिन के पास जाते हैं तो देखा बालगोबिन का मृत शरीर पड़ा है।

Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : भूमि एवं लोग Chapter 2 भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच

Bihar Board Class 9 Geography भौतिक स्वरूप : संरचना एवं उच्चावच Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी चोटी भारत में स्थित नहीं है ?
(क) के’
(ख) कामेट
(ग) माउण्ट ऐवरेस्ट
(घ) नंदा देवी
उत्तर-
(ग) माउण्ट ऐवरेस्ट

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 2.
बिहार के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर हिमालय की कौन-सी श्रेणी है?
(क) महान हिमालय
(ख) शिवालिक
(ग) मध्य हिमालय
(घ) पूर्वी हिमालय
उत्तर-
(ख) शिवालिक

Bihar Board Class 9 Geography Chapter 2 प्रश्न 3.
हिमालय के निर्माण में कौन-सा सिद्धांत सर्वमान्य है ?
(क) महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
(ख) भूमंडलीय गतिशीलता सिद्धांत
(ग) प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग) प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 4.
सैडल चोटी की ऊँचाई है-
(क) 515 मी०
(ख) 460 मी०
(ग) 642 मी०
(घ) 730 मी०
उत्तर-
(ग) 642 मी०

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 5.
भारत का सबसे प्राचीन भूखण्ड है
(क) प्रायद्वीपीय पठार
(ख) विशाल मैदान
(ग) उत्तर का पर्वतीय भाग
(घ) तटीय भाग
उत्तर-
(क) प्रायद्वीपीय पठार

लघु उत्तरीय प्रश्न

कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2 Question And Answer प्रश्न 1.
हिमालय की तीन समान्तर श्रेणियों का नाम लिखें।
उत्तर-
हिमालय की समान्तर श्रेणियाँ हैं (i) वृहत हिमालय या हिमाद्रि। (ii) लघु हिमालय या मध्य हिमालय। (iii) बाहरी हिमालय या शिवलिक ।

Bihar Board Class 9 Geography Book Solution प्रश्न 2.
काराकोरम के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर का क्या नाम है ?
उत्तर-
गाडविन आस्टीन तथा गौरीनन्दा पर्वत के नाम से जाना जाता है।

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 3.
कौन-सा तटीय मैदान अपेक्षाकृत अधिक चौड़ा है ? ।
उत्तर-
पूर्वी, तटीय मैदान, पश्चिमी तटीय मैदान की अपेक्षाकृत अधिक चौड़ाई है। इसकी चौड़ाई 160 से 350 कि०मी० तक है।.

कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2 Notes प्रश्न 4.
तटीय मैदान में स्थित तीन झीलों के नाम लिखें।
उत्तर-
तटीय मैदान में स्थित झील हैं(i) चिल्का , (ii) पुलीकट, (iii) वेम्बानद।

Bihar Board Solution Class 9 प्रश्न 5.
पश्चिमी घाट पर्वत का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर-
इसे सहयाद्रि की पहाड़ियाँ भी कहते हैं।

Bihar Board Class 9 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 6.
मध्यं गंगा के मैदान की चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
मध्य गंगा के मैदान की विशेषताएँ

  • यह मैदान 1400 किलोमीटर लम्बा है।
  • इस मैदान की ढाल सामान्यतः उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है।
  • इसका विस्तार उत्तर भारत के राज्यों यथा-बिहार, उत्तर प्रदेश, तथा पश्चिम बंगाल तक है। .
  • इसका निर्माण जलोढ़ मिट्टी से हुआ है।

कक्षा 9 भूगोल अध्याय 2 प्रश्न उत्तर प्रश्न 7.
हिमालय और प्रायद्वीय पर्वतों के दो प्रमुख अंतर बताएँ।
उत्तर-
दोनों में अंतर इस प्रकार है :
Bihar Board Class 9 History Solution
Bihar Board Class 9th Geography Solution

Bihar Board Class 9th Geography Solution प्रश्न 8.
‘खादर’ तथा ‘बांगर’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
खादर : गंगा के मैदान में जहाँ नदियाँ नये कछारी भाग में जो निचले मैदान में है और जहाँ बाढ़ की जल प्रतिवर्ष पहुँचकर नयी मिट्टी की परत जमा कर देता है उसे ‘खादर’ कहते हैं।

बांगर : जहाँ नदियों द्वारा पुरानी मिट्टी के ऊँचे मैंदान बन गए हैं वहाँ नदियों के बाढ़ का जल नहीं पहुँच पाता है, उसे ‘बांगर’ कहते हैं।

प्रश्न 9.
पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में अन्तर बताएँ।।
उत्तर-
पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट में निम्नलिखित अंतर है|
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच - 3(i)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तर के विशाल मैदान की विशेषताओं को लिखें।
उत्तर-
उत्तर के विशाल मैदान की विशेषताएँ इस प्रकार हैं :
यह मैदान हिमालय पहाड़ के दक्षिण और दक्षिणी पठार के उत्तर तीन प्रमुख नदी प्रणालियों-गंगा, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों से बना है इसे सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान कहते हैं । इस मैदान का निर्माण जलोढ़ मिट्टी से हुआ है। . यह मैदान भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे अधिक उपजाऊ और घनी जनसंख्या वाला मैदान है। . यह मैदान 7 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला है। पश्चिम से पूर्व इसकी लम्बाई लगभग 2400 कि०मी० है और 150 से 500 कि०मी० चौड़ा है। यह मैदान समुद्रतल से 240 मीटर से अधि क ऊँचा नहीं है।

इस मैदान के चार उप-भाग हैं
(i) पंजाब का मैदान
(ii) राजस्थान का मैदान
(iii) गंगा का मैदान
(iv) ब्रह्मपुत्र का मैदान

(i) पंजाब का मैदान-सिन्धु और इसकी सहायक नदियों के द्वारा बना है। पंजाब और हरियाणा का भाग इसमें सम्मिलित है। इस मैदान में झेलम, चेनाव, रावी, व्यास तथा सतलुज नदियाँ बहती हैं। इसकी औसत ऊँचाई 150 से 300 मीटर तक है। इस मैदान को दोआब कहते हैं।

(ii) राजस्थान का मैदान-यह मैदान अरावली पर्वत के पश्चिम में है। यहाँ शुष्क प्रदेश की प्रमुख नदी लूनी है। इसमें संवार, डंगना, दिदवाना तथा कुचापन जैसे खारे पानी के झील है।

(iii) गंगा का मैदान-यह मैदान 1400 कि०मी० लम्बा है । इसका विस्तार उत्तर भारत के राज्यों यथा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के कुछ भाग तथा पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है । गंगा के मैदान की प्रमुख नदियाँ गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी तथा महानन्दा है ।

(iv) ब्रह्मपुत्र का मैदान-यह मैदान असम राज्य में सदिया के रनर पूरब से होकर धुवरी स्थान तक फैला है। यह लगभग 650 कि०मी० लम्बा है। इस मैदान में कई ‘भावर’ और ‘तराई’ हैं।

प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय पठार को विभाजित कर किसी एक की चर्चा विस्तार
से करें।
उत्तर-
प्रायद्वीपीय पठार की आकृति त्रिभुजकार है तथा प्राचीन गोंडावाना भूमि का अंश है। इसकी औसत ऊँचाई 600 से 900 मीटर है। इस पठारी भाग के दो प्रमुख भाग हैं- (क) मध्य उच्च भूमि तथा (ख) दक्कन का पठार।

(क) मध्य उच्च भूमि-मध्य उच्च भूमि का अधिकतर भाग मालवा का पठार कहलाता है। यह पठारी भाग पूरब में महादेव श्रृंखला तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली और मध्य में विंध्य श्रृंखला से घिरा हुआ है। इसके पश्चिम में राजस्थान का मरूस्थल है। यहाँ बहने वाली नदियों में चंबल, सिंध, बेतवा तथा केन हैं। यह भाग पश्चिम में चौड़ा और पूरब में संकीर्ण है । इसका पूर्वी विस्तार बुन्देलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है। इससे दूर पूर्व के विस्तार को मुख्यतः दामोदर और स्वर्णरेखा नदियों द्वारा अपवाहित, छोटा नागपुर का पठार कहा जाता है।

(ख) दक्कन का पठार – छोटानागपुर के पठार का विस्तार गया जिला के दक्षिणी सीमा तक है। इसी भाग में दामोदर, सोन तथा स्वर्णरेखा नदियाँ बहती हैं । इस पठारी भाग का मध्यवर्तीय भाग 1100 मीटर ऊँचा है जो ‘पातक्षेत्र’ कहलाता है। इसके पूरब में राँची का पठार है। इसमें हजारीबाग का पठार है जिसकी ऊँचाई 300 मीटर है। यहाँ पारसानाथ की पहाड़ी 1365 मीटर ऊँची है।

सतपुरा पर्वत के दक्षिण में तापी की घाटी है, इसमें नर्मदा और तापी ‘नदियाँ बहती हैं। अरावली की पहाड़ियाँ दक्षिण-पश्चिम में गुजरात से लेकर उत्तर-पूर्व में दिल्ली तक फैली हैं। अरावली की औसत ऊँचाई 300 से 920 मीटर तक है । लेकिन इसकी प्रसिद्ध चोटी माउन्ट आबू की गुरुशिखर 1722 मीटर ऊंची है।

प्रश्न 3.
हिमालय पर्वत श्रृंखला की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर-
भारत की उत्तरी सीमा पर फैली हिमालय पर्वत श्रेणी बनावट के दृष्टिकोण से मोड़दार पर्वत श्रृंखला है। इसकी चौड़ाई कश्मीर में 500 कि०मी० एवं अरुणाचल में मात्र 160 कि०मी० है। इसकी तीन समानान्तर श्रृंखलाएँ है : (i) हिमाद्रि (ii) मध्य हिमालय (iii) बाहरी हिमालय।।

  • हिमाद्रि सर्वोच्च श्रेणी है। सबसे उत्तरी श्रेणी भी यही है। यह भारत का सबसे ऊँचा और संसार की दूसरी सबसे ऊँचा शिखर है जिसकी ऊँचाई 8611 मी० है । इसे गाडविन आस्टीन के नाम से जाना जाता है।
  • मध्य हिमालय-यह हिमालय की सबसे अधिक कटी-छंटी श्रृंखला है। इसकी ऊँचाई 1800 मीटर से 4500 मीटर के बीच है।
  • बाहरी हिमालय-यह निचली श्रृंखला है। इसकी औसत ऊँचाई 900 से 15000 मीटर तक है तथा चौड़ाई 10 से 50 कि० मी. है।

इन श्रृंखलाओं की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  • हिमालय भारत का प्रहरी है जलवायविक दशाओं का नियंत्रक है।
  • मानसून पवनों के मार्ग में खड़ा होकर यह उनसे वर्षा करता है। हिमालय न होता तो उत्तरी विशाल मैदान अस्तित्व में न आता ।
  • हिमालय में कई हिम नदियाँ हैं जिनसे गंगा, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, यमुना, कोसी, सरयू, गंडक महानदी, सतलुज, व्यास, झेलम, रावी, चेनाव आदि प्रमुख हैं। नदियाँ सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं।
  • हिमालय पर कई पर्यटन स्थल भी हैं । यथा-कश्मीर की घाटी, शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग आदि ।
  • इस क्षेत्र में कुछ घास के मैदान भी है जिसे कश्मीर में मर्ग कहते हैं। जैसे-गुलमर्ग, खिलनमर्ग और सोनमर्ग।
  • यहाँ की सभी पर्वत श्रेणियाँ घने सदाबहार वनों से ढकी रहती हैं जिससे उपयोगी लकड़ियाँ प्राप्त होती हैं।
  • हिमालय पर हिन्दुओं के अनेक तीर्थ स्थल भी है यथा-केदारनाथ, अमरनाथ, केलास मानसरोवर झील आदि ।

ज्ञात करें

प्रश्न 1.
हिमालय में पायी जानेवाली प्रमुख हिमानियाँ एवं दरों के नाम
उत्तर-
हिमालय में पायी जानेवाली प्रमुख हिमानियाँ एवं दरें-

Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच - 3
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प्रश्न 2.
भारत के उन राज्यों के नाम बताएँ, जहाँ हिमालय के ऊँचे शिखर स्थित हैं।
उत्तर-
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच - 5

प्रश्न 3.
मसूरी, नैनीताल एवं रानीखेत की स्थिति बताएँ और राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर –
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच - 6

प्रश्न 4.
विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप माजोली किस नदी और किस राज्य में है?
उत्तर-
माजोली नदी द्वीप, ब्रह्मपुत्र नदी का द्वीप है जो असम राज्य में है।

प्रश्न 5.
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ स्थित है ?
उत्तर-
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बैरन द्वीप पर स्थित है।

मानचित्र कार्य

भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को दिखाएँ
(क) (i) पर्वत शिखर-के,
(ii) कंचनजंगा,
(iii) नंगापर्वत,
(iv) नन्दादेवी।

(ख) (i) पठार-छोटानागपुर,
(ii) बुंदेलखंड,
(iii) मालवा ।

(ग) (i) थार मरुस्थल,
(ii) गंगा-यमुना दोआब,
(iii) आरावली पर्वत ।

(घ) (i) पंजाब का मैदान,
(ii) ब्रह्मपुत्र का मैदान ।
उत्तर-
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 2 भौतिक स्वरूप संरचना एवं उच्चावच - 7

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 जन-जन का चेहरा एक

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Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 9 जन-जन का चेहरा एक

 

जन-जन का चेहरा एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

Jan Jan Ka Chehra Ek Bihar Board Class 12th प्रश्न 1.
निराला की तरह मुक्तिबोध कैसे कवि हैं?
(क) क्रांतिकारी
(ख) सामान्य
(ग) पलायनवादी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क)

जन जन का चेहरा एक कविता Bihar Board Class 12th प्रश्न 2.
भागवत : इतिहास और संस्कृति किस विषय से संबंधित है?
(क) इतिहास
(ख) समाजशास्त्र
(ग) ललित कला
(घ) पुरातत्व
उत्तर-
(क)

जन-जन का चेहरा एक कविता का भावार्थ Bihar Board Class 12th प्रश्न 3.
इनमें से मुक्तिबोध की कौन–सी रचना है?
(क) हार–जीत
(ख) जन–जन का चेहरा एक
(ग) अधिनायक
(घ) पद
उत्तर-
(ख)

जन जन का चेहरा एक Bihar Board Class 12th प्रश्न 4.
गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म कब हुआ था?
(क) 13 नवम्बर, 1917 ई.
(ख) 20 नवम्बर, 1917 ई.
(ग) 18 नवम्बर, 1930 ई.
(घ) 20 सितम्बर, 1927 ई.
उत्तर-
(क)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

Jan Jan Ka Chehra Ek Kavita Ka Saransh Bihar Board Class 12th प्रश्न 1.
कष्ट दुख संताप की चेहरों पर पड़ी……… का रूप एक।
उत्तर-
झुर्रियों

Jan Jan Ka Chehra Ek Kavita Bihar Board Class 12th प्रश्न 2.
जोश में यों ताकत से बाँधी हुई……… का एक लक्ष्य।
उत्तर-
मुट्ठियों

जन जन का चेहरा एक कविता का अर्थ Bihar Board Class 12th प्रश्न 3.
पृथ्वी के गोल चारों ओर से धरातल पर है……. का दल एक, एक पक्ष।
उत्तर-
जनता

Jan Jan Ka Chehra Ek Question Answer Bihar Board Class 12th प्रश्न 4.
जलता हुआ लाल कि भयानक……….. एक, उद्दीपित उसका विकराल सा इशारा एक।
उत्तर-
सितारा

प्रश्न 5.
एशिया की, यूरोप की, अमरीका की गलियों की……. एक।।
उत्तर-
धूप

प्रश्न 6.
चाहे जिस देश का प्रांत पर का हो जन–जन का……. एक।
उत्तर-
चेहरा

जन-जन का चेहरा एक अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ज्वाला कहाँ से उठती है?
उत्तर-
जनता से।

प्रश्न 2.
मुक्तिबोध की कविता का नाम है।
उत्तर-
जन–जन का चेहरा।।

प्रश्न 3.
मुक्तिबोध ने सितारा किसे कहा है?
उत्तर-
जनता को।

प्रश्न 4.
आज जनता किससे आतंकित है?
उत्तर-
पूँजीवादी व्यवस्था से।.

जन-जन का चेहरा एक पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
“जन–जन का चेहरा एक” से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
“जन–जन का चेहरा एक” कविता अपने में एक विशिष्ट एवं व्यापक अर्थ समेटे हुए हैं। कवि पीड़ित संघर्षशील जनता की एकरूपता तथा समान चिन्तनशीलता का वर्णन कर रहा है। कवि की संवेदना, विश्व के तमाम देशों में संघर्षरत जनता के प्रति मुखरित हो गई है, जो अपने मानवोचित अधिकारों के लिए कार्यरत हैं। एशिया, यूरोप, अमेरिका अथवा कोई भी अन्य महादेश या प्रदेश में निवास करनेवाले समस्त प्राणियों के शोषण तथा उत्पीड़न के प्रतिकार का स्वरूप एक जैसा है। उनमें एक अदृश्य एवं अप्रत्यक्ष एकता है।

में उनकी भाषा, संस्कृति एवं जीवन शैली भिन्न हो सकती है, किन्तु उन सभी के चेहरों में कोई अन्तर नहीं दिखता, अर्थात् उनके चेहरे पर हर्ष एवं विषाद, आशा तथा निराशा की प्रतिक्रिया, एक जैसी होती है। समस्याओं से जूझने (संघर्ष करने) का स्वरूप एवं पद्धति भी समान है।

कहने का तात्पर्य यह है कि यह जनता दुनिया के समस्त देशों में संघर्ष कर रही है अथवा इस प्रकार कहा जाए कि विश्व के समस्त देश, प्रान्त तथा नगर सभी स्थान के प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे एक समान हैं। उनकी मुखाकृति में किसी प्रकार की भिन्नता नहीं है। आशय स्पष्ट है विश्वबन्धुत्व एवं उत्पीडित जनता जो सतत् संघर्षरत है कवि उसी पीड़ा का वर्णन कर रहा है।

प्रश्न 2.
बँधी हुई मुट्ठियों का क्या लक्ष्य है?
उत्तर-
विश्व के तमाम देशों में संघर्षरत जनता की संकल्पशीलता ने उसकी मुट्ठियों को जोश में बाँध दिया है। कवि ऐसा अनुभव कर रहा है मानों समस्त जनता अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सम्पूर्ण ऊर्जा से लबरेज अपनी मुट्ठियों द्वारा संघर्षरत है। प्रायः देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति क्रोध की मनोदशा में रहता है, अथवा किसी कार्य को सम्पादित करने की दृढ़ता तथा प्रतिबद्धता का भाव जागृत होता है तो उसकी मुट्ठियाँ बँध जाती हैं। उसकी भुजाओं में नवीन स्फूर्ति का संचार होता है। यहाँ पर “बँधी हुई मुट्ठियों” का तात्पर्य कार्य के प्रति दृढ़ संकल्पनाशीलता तथा अधीरता (बेताबी) से है। जैसा इन पंक्तियों में वर्णित है, “जोश में यों ताकत में बँधी हुई मुट्ठियों का लक्ष्य एक।”

प्रश्न 3.
कवि ने सितारे को भयानक क्यों कहा है? सितारे का इशारा किस ओर है?
उत्तर-
कवि ने अपने विचार को प्रकट करने के लिए काफी हद तक प्रवृति का भी सहारा लिया है। कवि विश्व के जन–जन की पीड़ा, शोषण तथा अन्य समस्याओं का वर्णन करने के क्रम में अनेकों दृष्टान्तों का सहारा लेता है। इस क्रम में वह आकाश में भयानक सितारे की ओर इशारा करता है। वह सितारा जलता हुआ है और उसका रंग लाल है। प्रायः कोई वस्तु आग की ज्वाला में जलकर लाल हो जाती है। लाल रंग हिंसा, खून तथा प्रतिशोध का परिचायक है। इसके साथ ही यह उत्पीड़न, दमन, अशांति एवं निरंकुश पाशविकता की ओर भी संकेत करता है।

“जलता हुआ लाल कि भयानक सितारा एक उद्दीपित उसका विकराल से इशारा एक।”. उपरोक्त पंक्तियों में एक लाल तथा भयंकर सितारा द्वारा विकराल सा इशारा करने की कवि की कल्पना है। आकाश में एक लाल रंग का सितारा प्रायः दृष्टिगोचर होता है, “मंगल”। संभवतः कवि का संकेत उसी ओर हो, क्योंकि उस तारा की प्रकृति भी गर्म है। कवि ने जलता हुआ भयानक, सितारा जो लाल है–इस अभिव्यक्ति द्वारा सांकेतिक भाषा में उत्पीड़न, दमन एवं निरंकुश शोषकों द्वारा जन–जन के कष्टों का वर्णन किया है। इस प्रकार कवि विश्व की वर्तमान विकराल दानवी प्रकृति से संवेदनशील (द्रवित) हो गया प्रतीत होता है।

प्रश्न 4.
नदियों की वेदना का क्या कारण है?
उत्तर-
नदियों की वेगावती धारा में जिन्दगी की धारा के बहाव, कवि के अन्त:मन की वेदना को प्रतिबिम्बित करता है। कवि को उनके कल–कल करते प्रवाह में वेदना की अनुभूति होती है। गंगा, इरावती, नील, आमेजन नदियों की धारा मानव–मन की वेदना को प्रकट करती है, जो अपने मानवीय अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। कजनता को पीड़ा तथा संघर्ष को जनता से जोड़ते हुए बहती हुई नदियों में वेदना के गीत कवि को सुनाई पड़ते हैं।

प्रश्न 5.
अर्थ स्पष्ट करें :
(क) आशामयी लाल–लाल किरणों से अंधकार,
चीरत सा मित्र का स्वर्ग एक;
जन–जन का मित्र एक

(ख) एशिया के, यूरोप के, अमरिका के
भिन्न–भिन्न वास स्थान; भौगोलिक,
ऐतिहासिक बंधनों के बावजूद,
सभी ओर हिन्दुस्तान,
सभी ओर हिन्दुस्तान।
उत्तर-
(क) आशा से परिपूर्ण लाल–लाल किरणों से अंधकार को चीरता हुआ मित्र का एक स्वर्ग है। वह जन–जन का मित्र है। कवि के कहने का अर्थ यह है कि सूर्य को लाल किरणें अंधकार का नाश करते हुए मित्र के स्वर्ग के समान हैं। समस्त मानव–समुदाय का वह मित्र है।

विशेष अर्थ यह प्रतीत होता है कि विश्व के तमाम देशों में संघर्षरत जनता जो अपने अधिकारों की प्राप्ति, न्याय, शान्ति एवं बन्धुत्व के लिए प्रयत्नशील है, उसे आशा की मनोहारी किरणें स्वर्ग के आनन्द के समान दृष्टिगोचर हो रही हैं।।

(ख) भौगोलिक तथा ऐतिहासिक बन्धनों में बंधे रहने के बावजूद एशिया, यूरोप, अमरीका आदि जो विभिन्न स्थानों से अवस्थित हैं, केवल हिन्दुस्तान के ही शोहरत है। इसका आशय यह है कि एशिया, यूरोप, अमेरीका आदि विभिन्न महादेशों में भारत की गौरवशाली तथा बहुरंगी परंपरा की धूम है, सर्वत्र भारतवर्ष (हिन्दुस्तान) की सराहना है। भारत विश्वबन्धुत्व, मानवता, सौहार्द, करुणा, सच्चरित्रता आदि मानवोचित गुणों तथा संस्कारों की प्रणेता है। अतः सम्पूर्ण विश्व की जगह (निवासी) आशा तथा दृढ़ विश्वास के साथ इसकी ओर निहार रहे हैं।

प्रश्न 6.
“दानव दुरात्मा” से क्या अर्थ है?
उत्तर-
पूरे विश्व की स्थिति अत्यन्त भयावह, दारुण तथा अराजक हो गई है। दानव और दुरात्मा का अर्थ है–जो अमानवीय कृत्यों में संलग्न रहते हैं, जिनका आचरण पाशविक होता है उन्हें दानव कहा जाता है। जो दुष्ट प्रकृति के होते हैं तथा दुराचारी प्रवृत्ति के होते हैं उन्हें ‘दुरात्मा’ कहते हैं। वस्तुत: दोनों में कोई भेद नहीं है, एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। ये सर्वत्र पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
ज्वाला कहाँ से उठती है? कवि ने इसे “अतिक्रद्ध” क्यों कहा है?
उत्तर-
ज्वाला का उद्गम स्थान मस्तक तथा हृदय के अन्तर की ऊष्मा है। इसका अर्थ यह होता है कि जब मस्तिष्क में कोई कार्य–योजना बनती है तथा हृदय की गहराई में उसके प्रति तीव्र उत्कंठा की भावना निर्मित होती है। वह एक प्रज्जवलित ज्वाला का रूप धारण कर लेती है। “अतिक्रुद्ध” का अर्थ होता है अत्यन्त कुपित मुद्रा में। आक्रोश की अभिव्यक्ति कुछ इसी प्रकार होती है। अत्याचार, शोषण आदि के विरुद्ध संघर्ष का आह्वान हृदय की अतिक्रुद्ध ज्वाला की मन:स्थिति में होता है।

प्रश्न 8.
समूची दुनिया में जन–जन का युद्ध क्यों चल रहा है?
उत्तर-
सम्पूर्ण विश्व में जन–जन का युद्ध जन–मुक्ति के लिए चल रहा है। शोषक, खूनी चोर तथा अन्य अराजक तत्वों द्वारा सर्वत्र व्याप्त असन्तोष तथा आक्रोश की परिणति जन–जन के युद्ध अर्थात् जनता द्वारा छेड़े गए संघर्ष के रूप में हो रहा है।

प्रश्न 9.
कविता का केन्द्रीय विषय क्या है?
उत्तर-
कविता का केन्द्रीय विषय पीड़ित और संघर्षशील जनता है। वह शोषण, उत्पीड़न तथा अनाचार के विरुद्ध संघर्षरत है। अपने मानवोचित अधिकारों तथा दमन की दानवी क्रूरता के विरुद्ध यह उसका युद्ध का उद्घोष है। यह किसी एक देश की जनता नहीं है, दुनिया के तमाम देशों में संघर्षरत जन–समूह है जो अपने संघर्षपूर्ण प्रयास से न्याय, शान्ति, सुरक्षा, बन्धुत्व आदि की दिशा में प्रयासरत है। सम्पूर्ण विश्व की इस जनता (जन–जन) में अपूर्व एकता तथा एकरूपता है।

प्रश्न 10.
प्यार का इशारा और क्रोध का दुधारा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
गंगा, इरावती, नील, आमेजन आदि नदियाँ अपने अन्तर में समेटे हुए अपार जलराशि निरन्तर प्रवाहित हो रही है। उनमें वेग है, शक्ति है तथा अपनी जीव धारा के प्रति एक बेचैनी है। प्यार भी है, क्रोध भी है। प्यार एवं आक्रोश का अपूर्व संगम है। उनमें एक करूणाभरी ममता है तो अत्याचार, शोषण एवं पाशविकता के विरुद्ध दोधारी आक्रामकता भी है। प्यार का इशारा तथा क्रोध की दुधारा का तात्पर्य यही है।.

प्रश्न 11.
पृथ्वी के प्रसार को किन लोगों ने अपनी सेनाओं से गिरफ्तार कर रखा है?
उत्तर-
पृथ्वी के प्रसार को दुराचारियों तथा दानवी प्रकृति वाले लोगों ने अपनी सेनाओं द्वारा गिरफ्तार किया है। उन्होंने अपने काले कारनामों द्वारा प्रताड़ित किया है। उनके दुष्कर्मों तथा अनैतिक कृत्यों से पृथ्वी प्रताड़ित हुई है। इस मानवता के शत्रुओं ने पृथ्वी को गम्भीर यंत्रणा दी है।

जन-जन का चेहरा एक भाषा की बात

प्रश्न 1.
प्रस्तुत कविता के संदर्भ में मुक्तिबोध की काव्यभाषा की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
आधुनिक हिन्दी साहित्य में गजानन मुक्तिबोध जो एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में विख्यात है। इनकी काव्य प्रतिभा से समस्त हिन्दी जगत अवगत है। प्रस्तुत कविता में ‘जन–जन का चेहरा एक’ में कवि की भाषा अत्यन्त ही सहज सरल और प्रवाहमयी है। हिन्दी के सरल एवं ठेठ बहुप्रचलित शब्दों का प्रयोग कर कवि ने अपने उदार विचारों को प्रकट किया है। मुक्तिबोध की काव्य भाषा में ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ है जिनके द्वारा भावार्थ समझने में कठिनाई नहीं होती। काव्यभाषा के जिन–जिन गुणों की जरूरत होती है उनका समुचित निर्वहन मुक्तिबोध जी ने अपनी कविताओं में किया है।

मुक्तिबोध भारतीय लोक संस्कृति से पूर्णत: वाकिफ है। इसी कारण उन्होंने पूरे देश की समन्वय संस्कृति की रेशम के लिए अपनी कविता को नया स्वर दिया। इनकी कविताओं इतनी सहज संप्रेषणीनता है कि सभी लोगों को शीघ्र ही ग्राह्य हो जाती है। भाव पक्ष के वर्णन में कवि ने अत्यन्त ही सुगमता से काम लिया है। पूरे देश के इतिहास और संस्कृति की विशद व्याख्या इनकी कविताओं में हुई है। कवि शब्दों के चयन में अत्यन्त ही अपनी कुशलता का परिचय दिया है। वाक्य विन्यास भी सुबोध है। कविता में प्रवाह है। कहीं भी अवरोध नहीं मिलता।

भावाभिव्यक्ति में कवि की संवेदनशीलता और बौद्धिकता स्पष्ट दिखायी पड़ती है। अपने ज्ञान अनुभव और संवेदन के काव्य जगत में अपनी सृजनशीलता के द्वारा बहुमूल्य कृतियाँ मुक्तिबोध अंग्रेजी के प्रकांड विद्वानों में से थे। उनका अध्ययन क्षेत्र अत्यन्त क्षेत्र अत्यन्त ही व्यापक था। उन्होंने अपनी कविताओं को चिन्तन एवं बौद्धिक चेतना से पूरित किया है। राजनीतिक चेतना संपन्न. होने के कारण उनकी कविताओं में राजनीति, दर्शन, मानवीयता और राष्ट्रीयता की भी झलक साफ दिखायी पड़ती है। कवि अपनी बात को अत्यन्त ही सहजता से पाठकों तक पहुंचाने में सफल हुआ है।

मार्क्सवादी चेतना से संपन्न होकर कवि ने समस्याओं को अपनी कविता का विषय बनाया है। पूरे समाज के निर्माण विकास बौद्धिक–आत्मिक क्षमताओं में वृद्धि तथा मूल्यों के बचाव की प्रक्रिया का अनुसंधान किया है। अपनी प्रभावपूर्ण कल्पना शक्ति द्वारा काव्य रचना को कवि ने चेतनामयी आभा से आलोकित किया है। इस प्रकार मुक्तिबोध की कविताएँ अपनी भाषिक विशेषताओं से पाठक को नयी दिशा ग्रहण करने में सहायता करती है।

कथ्य और संप्रेषसीमता की दृष्टि से भी कविता सुगम और सरल है। इस कविता से कवि. की वैश्विक दृष्टि और सार्वभौम दिखायी पड़ती है। कवि वर्तमान परिवेश से विकल व्यक्ति है कवि का चिन्तन प्रवाह स्पष्ट रूप से कविता में साफ–सपाफ झलकता है। कवि जनता के मानवोचित’ अधिकारों के लिए संघर्षरत है। वह दुनिया के तमाम देशों में संघर्षरत और कर्मरत जनता के कल्याण के लिए चिन्तित हैं।

कवि अपने कर्म श्रम से न्याय, शान्ति, बन्धुत्व की दिशा में प्रयासरत है। कवि की दृष्टि अत्यन्त ही व्यापक है। उसकी संकल्प शक्ति सारे जग के श्रमिकों, मेहनतकश जन की संकल्प शक्ति है। वह अपनी कविताओं द्वारा उनमें प्रेरणा और उत्साह वर्द्धन क काम करना चाहता है। वह सारे जन को एकता के सूत्र में बांधना चाहता है। इस प्रकार भाव पक्ष और कला पक्ष दोनों दृष्टियों से कवि की कविता लोकहितकारी और चिन्तन धारा से युक्त है।

प्रश्न 2.
‘संताप’ और ‘संतोष’ का सन्धि–विच्छेद करें।
उत्तर-

  • संताप–सम् + ताप = संताप।
  • संतोष–सम् + तोष = संतोष।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों से विशेषण चनें-
गहरी काली छायाएँ पसारकर
खड़े हुए शत्रु का काल से पहाड़ पर
काला–काला दुर्ग एक
जन शोषक शत्रु एक।
उत्तर-
विशेषण–गहरी, काली, काले से, काला–काला, शोषक।

प्रश्न 4.
उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएं
उत्तर-

  • कष्ट – तत्सम्
  • संताप – तत्सम
  • भयानक – तत्सम
  • विकराल – तत्सम
  • इशारा – विदेशज
  • प्रसार – तत्सम
  • गिरफ्तार – विदेशज
  • शोषक – तत्सम
  • आशामयी – तत्सम
  • अंधकार – तत्सम
  • कन्हैया – तद्भव
  • मस्ती – विदेशज
  • खड्ग – तत्सम
  • सेहरा – विदेशज

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें
धूप, गली, दानव, हिये, ज्वाला।
उत्तर-

  • धूप–मरीची, प्रकाश, प्रभाकर।
  • गली–गलियारा, पंथ, रास्ता।
  • दानव–असुर, दानव, दैत्य, राक्षस।
  • हिय–हृदय, जिगर।
  • ज्वाला–अग्नि, आग।

जन–जन का चेहरा एक कवि परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध (1917–1964)

जीवन–परिचय–
नई कविता के प्रसिद्ध प्रयोगवादी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवम्बर, सन् 1917 ई. को मध्यप्रदेश राज्य में ग्वालियर जनपद में हुआ था। उनके पिता का नाम माधवराज मुक्तिबोध तथा माता का नाम पार्वतीबाई था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उज्जैन, विदिशा, अमझरा, सरदारपुर आदि स्थानों पर हुई। उन्होंने सन् 1931 में उज्जैन के माधव दॉलेज से ग्वालियर बोर्ड की मिडिल परीक्षा, सन् 1935 में माधव कालेज से इंटरमीडिएट, सन् 1938 में इंदौर के होल्कर कॉलेज से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने सन् 1953 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी में परास्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की।

श्री मुक्तिबोध ने 20 वर्ष की छोटी उम्र से नौकरी शुरू की। अनेक स्थानों पर नौकरी करते हुए सन् 1948 में नागपुर के प्रकाश तथा सूचना विभाग में पत्रकार के रूप में काम किया। उन्होंने सन् 1954–56 तक रेडियो के प्रादेशिक सूचना विभाग में काम किया। उन्होंने सन् 1956 में नागपुर से निकलने वाले पत्र ‘नया खून’ का संपादन किया। सन् 1958 से वे दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगाँव में प्राध्यापक पद पर कार्य करते रहे। उनकी मृत्यु 11 सितम्बर, सन् 1964 को हुई।

रचनाएँ–गजानन माधव मुक्तिबोध ने ‘तार सप्तक’ के कवि के रूप में अपनी रचनाओं के साथ साहित्य–सेवा की शुरुआत की। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं

कविता संग्रह–चाँ का मुँह टेढ़ा है, भूरी–भूरी खाक धूल।

काव्यगत विशेषताएँ–गजानन माधव मुक्तिबोध हिन्दी की नई कविता के प्रमुख कवि, चिन्तक आलोचक और कथाकार हैं। उनका उदय प्रयोगवाद के एक कवि के रूप में हुआ। वे अपनी प्रकृति और संवेदना से ही अथक सत्यान्वेषी, ज्ञान पिपासु तथा साहसी खोजी थे। उनका कवि–व्यक्तित्व बड़ा जटिल रहा है। ज्ञान और संवेदना से युगीन प्रभावों को ग्रहणकर प्रौढ़ मानसिक प्रतिक्रियाओं के कारण उनकी रचनाएँ अत्यन्त सशक्त हैं।

उन्होंने ज्यादातर लम्बी कविताएँ लिखी हैं, जिनमें सामयिक समाज के अन्तर्द्वन्द्वों तथा इससे उत्पन्न भय, आक्रोश, विद्रोह व संघर्ष भावना का सशक्त चित्रण मिलता है। उनकी कविताओं में सम्पूर्ण परिवेश के साथ स्वयं को बदलने की प्रक्रिया का चित्रण भी मिलता है। उनकी कविता आधुनिक जागरूक व्यक्ति के आत्मसंघर्ष की कविता है।

जन-जन का चेहरा एक कविता का सारांश

“जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता में यशस्वी कवि मुक्तिबोध ने अत्यन्त सशक्त एवं रोचक ढंग से विश्व की विभिन्न जातियों एवं संस्कृतियों के बीच एकरूपता दर्शाते हुए प्रभावोत्पादक मनोवैज्ञानिक संश्लेषण किया है। कवि के अनुसार संसार के प्रत्येक महादेश, प्रदेश तथा नगर के लोगों में एक सी प्रवृति पायी जाती है।

विद्वान कवि की दृष्टि में प्रकृति समान रूप से अपनी ऊर्जा प्रकाश एवं अन्य सुविधाएँ समस्त प्राणियों को वे चाहे जहाँ निवास करते हों, उनकी भाषा एवं संस्कृति जो भी हो, बिना भेदभाव किए प्रदान कर रही है। कवि की संवेदना प्रस्तुत कविता में स्पष्ट मुखरित होती है।

ऐसा प्रतीत होता है कि कवि शोषण तथा उत्पीड़न का शिकार जनता द्वारा अपने अधिकारों के संघर्ष का वर्णन कर रहा है। यह समस्त संसार में रहने वाली जनता (जन–जन) के शोषण के खिलाफ संघर्ष को रेखांकित करता है। इसलिए कवि उनके चेहरे की झुर्रियों को एक समान पाता है। कवि प्रकृति के माध्यम से उनके चेहरे की झुर्रियों की तुलना गलियों में फैली हुई धूप (जो सर्वत्र एक समान है) से करता है।

अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत जनता की बँधी हुई मुट्ठियों में दृढ़–संकल्प की अनुभूति कवि को हो रही है। गोलाकार पुरुषों के चतुर्दिक जन–समुदाय का एक दल है। आकाश में एक भयानक सितारा चमक रहा है और उसका रंग लाल है, लाल रंग हिंसा, हत्या तथा प्रतिरोध की ओर संकेत कर रहा है, जो दमन, अशान्ति एवं निरं श पाशविकता का प्रतीक है। सारा संसार इससे त्रस्त है। यह दानवीय कुकृत्यों की अन्तहीन गाथा है।

नदियों की तीव्र धारा में जनता (जन–जन) की जीवन–धारा का बहाव कवि के अर्न्तमन की वेदना के रूप में प्रकट हुआ है। जल का अविरल कल–कल करता प्रवाह वेदना के गीत जैसे प्रतीत होते हैं प्रकारान्तर में यह मानव मन की व्यथा–कथा जिसे इस सांकेतिक शैली में व्यक्त किया गया है।

जनता अनेक प्रकार के अत्याचार, अन्याय तथा अनाचार से प्रताड़ित हो रही है। मानवता के शत्रु जनशोषक दुर्जन लोग काली–काली छाया के समान अपना प्रसार कर रहे हैं, अपने कुकृत्यों तथा अत्याचारों का काला दुर्ग (किला) खड़ा कर रहे हैं।

गहरी काली छाया के समान दुर्जन लोग अनेक प्रकार के अनाचार तथा अत्याचार कर रहे हैं, उनके कुकृत्यों की काली छाया फैल रही है, ऐसा प्रतीत होता है कि मानवता के शत्रु इन दानवों द्वारा अनैतिक एवं अमानवीय कारनामों का काला दुर्ग काले पहाड़ पर अपनी काली छाया प्रसार कर रहा है। एक ओर जल शोषण शत्रु खड़ा है, दूसरी ओर आशा की उल्लासमयी लाल ज्योति से अंधकार का विनाश करते हुए स्वर्ग के समान मित्र का घर है।।

सम्पूर्ण विश्व में ज्ञान एवं चेतना की ज्योति में एकरूपता है। संसार का कण–कण उसके तीव्र प्रकाश से प्रकाशित है। उसके अन्तर से प्रस्फुटित क्रान्ति की ज्वाला अर्थात् प्रेरणा सर्वव्यापी तथा उसका रूप भी एक जेसा है। सत्य का उज्ज्वल प्रकाश जन–जन के हृदय से व्याप्त है तथा अभिवन साहस का संसार एक समान हो रहा है क्योंकि अंधकार को चीरता हुआ मित्र का स्वर्ग है।

प्रकाश की शुभ्र ज्योति का रूप एक है। वह सभी स्थान पर एक समान अपनी रोशनी बिखेरता हे। क्रांति से उत्पन्न ऊर्जा एवं शक्ति भी सर्वत्र एक समान परिलक्षित होती है। सत्य का दिव्य प्रकाश भी समान रूप से सबको लाभान्वित करता है। विश्व के असंख्य लोगों की भिन्न–भिन्न संस्कृतियों वाले विभिन्न महादेशों की भौगोलिक एवं ऐतिहासिक विशिष्टताओं के नापजूद, वे भारत वर्ष की जीवन शैली से प्रभावित हैं क्योंकि यहाँ विश्वबन्धुत्व भूमि है जहाँ कृष्ण की बाँसुरी बजी थी तथा कृष्ण ने गायें चराई थीं।

पूरे विश्व में दानव एवं दुरात्मा एकजुट हो गए हैं। दोनों की कार्य शैली एक है। शोषक, खूनी तथा चोर सभी का लक्ष्य एक ही है। इन तत्वों के विरुद्ध छेड़ा गया युद्ध की शैली भी एक है।

सभी जनता के समूह (जन–जन) के मस्तिष्क का चिन्तन तथा हृदय के अन्दर की प्रबलता में भी एकरूपता है। उनके हृदय की प्रबल ज्वाला की प्रखरता भी एक समान है। क्रांति का सृजन तथा विजय का देश के निवासी का सेहरा एक है। संसार के किसी नगर, प्रान्त तथा देश के निवासी का चेहरा एक है तथा वे एक ही लक्ष्य के लिए संघर्षरत हैं।

सारांश यह है कि संसार में अनेकों प्रकार के अनाचार, शोषण तथा दमन समान रूप से अनवरत जारी है। उसी प्रकार जनहित के अच्छे कार्य भी समान रूप से हो रहे हैं। सभी की आत्मा एक है। उनके हृदय का अन्तःस्थल एक है। इसीलिए कवि का कथन है

संग्राम का घोष एक,
जीवन संतोष एक।
क्रांति का निर्माण को, विजय का सेहरा एक
चाहे जिस देश, प्रांत, पुर का हो।
जन–जन का चेहरा एक।

कविता का भावार्थ’

चाहे जिस देश प्रान्त पुर का हो
जन–जन का चेहरा एक।
एशिया की, यूरोप की, अमरीका की
गलियों की धूप एक।
कष्ट–दुख संताप की,
चेहरों पर पड़ी हुई झुर्रियों का रूप एक!
जोश में यों ताकत से बंधी हुई
मुट्ठियों का एक लक्ष्य !

व्याख्या–प्रस्तुत व्याख्येय काव्यांश हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन एक चेहरा एक” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचनाकार आधुनिक हिन्दी काव्य–शैली के यशस्वी ‘कवि’ मुक्तिबोध हैं। इन पंक्तियों में विश्व के विभिन्न देशों में एकरूपता एवं समानता दर्शायी गई है। कोई व्यक्ति किसी भी देश या प्रान्त का निवासी हो–उसकी मातृभूमि, एशिया, यूरोप, अमेरिका अथवा कोई अन्य महादेश हो। उसकी भाषा, संस्कृति एवं जीवन शैली भिन्न हो सकती है या होती है किन्तु उन सभी के चेहरों में कोई अन्तर नहीं रहता अर्थात् सबमें समानता पायी जाती है।

पूरे विश्व के हर क्षेत्र–”राजपथ हो या गलियाँ”–सूर्य अपनी रश्मियाँ समान रूप से उन सभी स्थानों पर बिखेर रहा है। उनके कष्टों, अभावों तथा यातनाओं से पीड़ित उन समस्त (सभी देशों) प्राणियों के चेहरों पर विषाद की रेखाएँ झुर्रियों के रूप में एक समान है। अपने. लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कर्त्तव्य पालन हेतु जोश में उनकी मुट्ठियाँ एक ही समान बँधी हुई है। यह अपने उद्देश्य की प्राप्ति हेतु दृढ़ संकल्प का परिचायक है।।

इस प्रकार इन पंक्तियों में कवि की विश्वबन्धुत्व के प्रति संवेदनशीलता को स्पष्ट झलक मिलती है। कवि की भावुकता उपरोक्त पंक्तियों में मुखरित ही उठती है। ऐसा प्रतीत होता है कि कवि अपने कविता के माध्यम से विश्व में व्याप्त हिंसा, घृणा, मतभेद तथा विवाद का उन्मूलन चाहता है। तभी तो उसकी वाणी मुखरित हो जाती है, “चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो, जन–जन का चेहरा एक” है।

पृथ्वी के गोल चारों ओर के धरातल पर
है जनता का दल एक, एक पक्ष
जलता हुआ लाल कि भयानक सितारा एक,
उद्दीपित उसका विकराल सा इशारा एक।

व्याख्या–प्रस्तुत व्याख्येय पद्यांश हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से ली गई है। इसके रचयिता कवि श्रेष्ठ मुक्तिबोध हैं।

सूर्य की लालिमा तथा प्रकाश की किरणें सब पर समान रूप से बिखेरते हुए एक संकेत देती है। उसका यह संकेत अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार कवि का कहने का आशय यह है कि पृथ्वी पर निवास करने वाले विश्व के समस्त प्राणी समान हैं, उनकी भावनाएँ समान है तथा उनकी समस्याएँ भी समान हैं, उद्दीप्त सूर्य की लाल प्रकाश की ओर संकेत कर रहा है।

गंगा में, इरावती में, मिनाम में
अपार अकुलाती हुई,
नील नदी, आमेजन, मिसौरी में वेदना से गाती हुई,
बहती–बहाती हुई जिन्दगी की धारा एक
प्यार का इशारा एक, क्रोध का दुधारा एक।

व्याख्या–प्रस्तुत सारगर्भित पद्यांश हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसकी रचना लोकप्रिय कवि मुक्तिबोध की सशक्त लेखनी द्वारा की गई है तथा नदियों के तट पर निवास करने वाले जन–समुदाय को एक सदृश जीवन धारा का वर्णन है।

गंगा, इरावती, मिनाम, नील, आमेजन, मिसौरी आदि नदियाँ अपने अन्तर में समेटे हुए विशाल जलराशि के साथ निरन्तर प्रवाहित हो रही है। उनमें वेग है, शक्ति है तथा अपनी जीवन धारा के प्रति छपपटाहट है प्यार एवं क्रोध का अपूर्व संगम है। उनके प्रवाह में की वेगवती धारा में जीवन का वेदनापूर्ण संगीत है। वे निरंतर एक सारगर्भित संदेश प्रदान कर रही है।

इस प्रकार उपरोक्त पंक्तियों में कवि के कहने का आशय यह है कि विभिन्न देशों में प्रवाहित होनेवाली नदियों में समानता है, उनके जल में कोई मौलिक अंतर नहीं है। उनका वेग, प्रकृति एवं प्रवृत्ति में भी एकरूपता है। मानव जीवन को उन्हें एक अभिनव संदेश प्राप्त होता है। उनका निरंतर प्रवाह को अपने कर्त्तव्य–पथ पर आगे बढ़ने की सतत् प्रेरणा देता है, जीवन को संयमित होने का संकेत देता है। प्यार एवं क्रोध को सहज अभिव्यक्ति का संदेश भी इन नदियों द्वारा होता है। दोनों प्रवृत्तियाँ स्वाभाविक रूप से प्रत्येक व्यक्ति में अन्तर्निहित है। मानव जीवन पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है। नदियों के समान ही समस्त विश्व के जन–समुदाय की जीवन धारा भी एक समान है।

पृथ्वी का प्रसार
अपनी सेनाओं से किये हुए गिरफ्तार,
गहरी काली छायाएं पसारकर,
खड़े हुए शत्रु का काले से पहाड़ पर
काला–काला दुर्ग एक,
जन शोषक शत्रु एक।
आशामयी लाल–लाल किरणों से अंधकार
चीरता सा मित्र का स्वर्ग एक;
जन–जन का मित्र एक।

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता कवि ‘मुक्तिबोध’ हैं। विद्वान कवि ने विश्व में व्याप्त अराजकता, अनैतिकता तथा दमन का सशक्त चित्रण इन पंक्तियों में प्रस्तुत किया है।

इस संसार में दुर्जन लोग अनेक प्रकार के अनाचार कर रहे हैं। काली–काली छाया के समान सम्पूर्ण पृथ्वी पर इनका प्रसार हो रहा है। यह जनशोषक मानवता के शत्रु हैं, इन्होंने अमानवीय कार्यों तथा शोषण का किला खड़ा कर दिया है, अर्थात् धरती के ऊपर दूर–दूर तक अपना पैर पसार रहे हैं लेकिन आशा की लाल किरणें भी इस अन्धकार को चीरकर प्रकट हो रही हैं। प्रकृति की दृष्टि से सब बराबर हैं। वह सबकी सहायता, सबकी मित्र हैं।

इन पंक्तियों में कवि के कहने का आशय यह है कि पृथ्वी पर शक्तिशाली लोग अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं तथा उनके द्वारा दमन तथा आतंक की काली छाया फैल गई है। किन्तु आशा की प्रकाशवान किरणें नई प्रेरणा प्रदान कर रही है। इस प्रकार कवि ने सबके कल्याण की कामना की है। सम्पूर्ण विश्व को कवि सुखी एवं सम्पन्न देखना चाहता है।

विराट प्रकाश एक, क्रान्ति की ज्वाला एक,
धड़कते वक्षों में है सत्य की उजाला एक,
लाख–लाख पैरों की मोच में है वेदना का तार एक,
हिये में हिम्मत का सितारा एक।
चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो
जन–जन का चेहरा एक।

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से ली गई है। इसके हित शिल्पकार आधुनिक हिन्दी की नई शैली के प्रतिनिधि कवि मुक्तिबोध हैं। यह कविता उनकी दूर दृष्टि एवं सृजनशीलता की परिचायक है।

कविता का अर्थ है कि प्रकाश का रूप एक है वह सभी जगह एक प्रकार की ही क्षमता रखता है। क्रान्ति से अत्यन्त ऊर्जा एवं शक्ति का रूप भी सर्वत्र एक समान है। प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की धड़कन भी एक समान होती है। हृदय के अन्तःस्थल में सत्य का प्रकाश भी सबसे एक ही प्रकार का रहता है। विश्व भर के लाखों–लाख व्यक्तियों के पैरों में एक ही प्रकार की मोच अनुभव की जा रही है। उनमें परस्पर वेदना की अनुभूति में भी कोई अंतर नहीं है सबका हृदय पूर्ण रूपेण साहस से एक समान ओत–प्रोत है। व्यक्ति का देश, प्रान्त या नगर भिन्न होने से इसमें कोई अन्तर नहीं पड़ता। इसका कारण है कि सबका चेहरा एक समान है।

वस्तुतः कवि ने इन पंक्तियों में वैश्वीकरण की भावना को अभिव्यक्ति करते हुए कहा है सम्पूर्ण विश्व में ज्ञान एवं चेतना की ज्योति ने एकरूपता है तथा वह संसार के कण–कण को अपने तीव्र प्रकाश से प्रकाशित कर रही है। उसके द्वारा प्रस्फुटित क्रान्ति की ज्वाला अर्थात् प्रेरणा भी सर्वव्यापी तथा एक समान है। सत्य का उज्ज्वल प्रकाश प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की धड़कन बन गया है। अर्थात् सदाचरण की भावना जन–जन के हृदय में व्याप्त है। थकावट तथा वेदना से प्राप्त सबके हृदय में साहस एक समान है क्योंकि नगर, प्रान्त तथा देश भिन्न होते हुए भी प्रत्येक व्यक्ति का चेहरा एक जैसा है। इस प्रकार कवि “वसुधैव–कुटुम्बकम्” के उच्चादर्श से अभिप्रेरित है।

एशिया के, यूरोप के, अमरिका के
भिन्न–भिन्न वास–स्थान;
भौगोलिक, ऐतिहासिक बन्धनों के बावजूद,
सभी ओर हिन्दुस्तान, सभी ओर हिन्दुस्तान।
सभी ओर बहनें हैं, सभी ओर भाई हैं।
सभी ओर कन्हैया ने गायें चरायी हैं।
जिन्दगी की मस्ती की अकुलाती भोर एक
बंसी की धुन सभी ओर एक।

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” काव्य पाठ में संकलित हैं। यह सारगर्भित काव्यांश संवेदनशील कवि मुक्तिबोध की सरस लेखनी से निःसृत हुआ है। इस कविता में कवि ने अपनी अभूतपूर्व काव्य–रचना का परिचय देते हुए अपनी भारत–भूमि के गौरवशाली अतीत का वर्णन किया है।

प्रस्तुत पंक्तियाँ में कवि का कथन है कि भिन्न–भिन्न संस्कृतियों वाले एशिया, यूरोप तथा अमेरिका जैसे महादेश अपनी भौगोलिक तथा ऐतिहासिक विशिष्टताओं के बावजूद भारतवर्ष की जीवन–शैली से प्रभावित है। भारत की संस्कृति में भगवान कृष्ण की छवि अंकित है। प्रत्येक स्थान परं भाइयों तथा बहनों का सा प्रेम–भाव है। कृष्ण ने सभी स्थान पर कभी गायें चराई थीं। सभी ओर वह बंशी की धुन एक समान सुनाई देती है। जीवन की उमंग से भरपूर यह वातावरण है।

कवि के कहने का आशय यह है कि संसार के विभिन्न क्षेत्र अपने भौगोलिक तथा ऐतिहासिक बंधनों में बँधे होते हुए भी भारत की संस्कृति से प्रभावित हैं। भारत प्राचीन काल से ही विश्व का पथ–प्रदर्शन करता रहा है। भारत की महान परंपरा रही है। यहाँ सभी के साथ भाई–बहन जैसी स्नेह की धारा बहायी गयी है। आज भी कृष्ण के गाय चराने की स्मृति ताजी है। भारत की विश्वबन्धुत्व की भावना से सम्पूर्ण विश्व प्रभावित है।

दानव दुरात्मा एक,
मानव की आत्मा एक
शोषक और खूनी और चोर एक।
जन–जन के शीर्ष पर,
शोषण का खड्ग अति घोर एक।
दुनिया के हिस्सों में चारों ओर
जन–जन का युद्ध एक।

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से उद्धत है। इस काव्यांश के रचयिता सुप्रसिद्ध कवि मुक्तिबोध हैं। विद्वान कवि ने इन पंक्तियों में संसार की दारूण एवं अराजक स्थिति का चित्रण किया है।

इन पंक्तियों में कवि का कथन है कि आज पूरे विश्व में दानव और दुरात्मा एकजुट हो गए हैं दोनों ही एक हैं। सम्पूर्ण मानवता की आत्मा एक है। शोषण करनेवाले, खूनी तथा चोर भी एक हैं। प्रत्येक व्यक्ति के सिर पर चलने वाली खतरनाक तलवार भी एक प्रकार की है। संसार के सम्पूर्ण क्षेत्र में चारों ओर प्रत्येक व्यक्ति द्वारा छेड़ा गया युद्ध भी एक ही शैली में है।

इन पंक्तियों में.भावुक कवि मुखर हो गया है वह अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहता है कि सभी स्थान पर दानव तथा दुरात्मा आतंक मचाए हैं–दोनों में कोई अंतर नहीं है।

जने–समुदाय का शोषण, हत्या तथा चोरी करने वाले भी समान रूप से अपने कार्यों में लिप्त हैं। शोषण की क्रूर तलवार भी एक समान है अर्थात् समान रूप से हर व्यक्ति के सिर पर नाच रही है। सम्पूर्ण विश्व में युद्ध का वातावरण है तथा हर व्यक्ति एक प्रकार से ही युद्ध में लिप्त है। किन्तु कवि अनुभव करता है कि दुरात्मा पुण्यात्मा सज्जन एवं दुर्जन, सभी की आत्मा एक समान है, पवित्र एवं दोष रहित है।

मस्तक की महिमा
व अन्तर की उष्मा
से उठती है ज्वाला अति क्रुद्ध एक।
संग्राम का घोष एक,
जीवन–संतोष एक।
क्रान्ति का, निर्माण का, विजय का सेहरा एक,
चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो।
जन–जन का चेहरा एक !

व्याख्या–प्रस्तुत व्याख्येय सारगर्भित पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक दिगंत, भाग–2 के “जन–जन का चेहरा एक” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता यशस्वी कवि मुक्तिबोध हैं। कवि ने इस कविता में संसार की वर्तमान स्थिति तथा उसमें वास करने वाले लोगों की मानसिकता का वर्णन किया है। इन पंक्तियों में कवि की मान्यता है कि सभी के मस्तिष्क का समान महत्व है। हृदय के अन्दर से उठने वाली अत्यन्त तीव्र ज्वाला की प्रखरता भी एक समान होती है। युद्ध की घोषणा भी एक प्रकार की होती है। इसी प्रकार जीवन में संतोष की भावना में भी एकरूपता रहती है। क्रान्ति निर्माण तथा विजय के सेहरा का भी रूप एक है। संसार के किसी भी नगर, प्रान्त तथा देश के निवासी का चेहरा भी एक समान है।

कवि इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि संसार में अनेकों प्रकार के अत्याचार, शोषण तथा समान रूप से अनवरत जारी है। उसी प्रकार जनहित के अच्छे कार्य भी समान रूप से हो रहे हैं। किन्तु सभी का आत्मा एक है। सबके अन्दर हृदय एक समान है

इसीलिए कवि कहता है–“संग्राम का घोष एक, जीवन–संतोष एक”

अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति संघर्षरत है–वह चाहे निर्माण कार्य के लिए हो अथवा विनाश के लिए। क्रान्ति का आह्वान प्रत्येक मनुष्य के अन्दर में विद्यमान रहता है। निर्माण में भी उसकी अहम भूमिका होती है। अपने कार्यों के लिए समान रूप से अनेक मस्तक पर विजय का सेहरा बँधता है। प्रत्येक व्यक्ति वह चाहे जिस नगर, प्रान्त तथा देश–अर्थात् क्षेत्र का हो उसका चेहरा एक है। कवि को ऐसी आशा है कि अन्ततः मानवता की दानवता पर विजय होगी। वह इस दिशा में आश्वस्त दिखता है। कवि सारे विश्व के व्यक्तियों को समान रूप से देखता है। उसकी मान्यता है कि उनमें देश, काल की विभिन्नता रहते हुए भी मानसिकता एक है, बाहरी आचरण एक प्रकार का है।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 11 हँसते हुए मेरा अकेलापन

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 11 हँसते हुए मेरा अकेलापन

 

हँसते हुए मेरा अकेलापन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

Haste Hue Mera Akelapan Bihar Board Class 12th Hindi प्रश्न 1.
मलय जी का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) दिल्ली
(ख) अहमदाबाद
(ग) आजमगढ़
(घ) छत्तीसगढ़
उत्तर-
(ग)

Haste Hue Mera Akelapan Question Answer Bihar Board Class 12th Hindi प्रश्न 2.
मलयज जी की मृत्यु हुई थी।
(क) 32 साल की उम्र में
(ख) 35 साल की उम्र में
(ग) 45 साल की उम्र में
(घ) 36 साल की उम्र में
उत्तर-
(क)

Haste Hue Mera Akelapan Summary Bihar Board Class 12th Hindi प्रश्न 3.
मलयज के पिता का नाम था।
(क) गणपति देव
(ख) त्रिलोकी नाथ
(ग) प्रभा शंकर
(घ) नीलकंठ
उत्तर-
(ख)

Hanste Hue Mera Akelapan Ka Saransh Bihar Board Class 12th Hindi प्रश्न 4.
मलयज के माता का नाम था।
(क) मीरा
(ख) सीता
(ग) प्रभावती
(घ) सरस्वती
उत्तर-
(ख)

Haste Hue Mera Akelapan Ke Lekhak Bihar Board Class 12th Hindi प्रश्न 5.
हँसते हुए मेरा अकेलापन के लेखक हैं
(क) भरत जी श्रीवास्तव
(ख) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(ग) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(घ) मोहन राकेश
उत्तर-
(क)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
हँसते हुए मेरा अकेलापन डायरी एक ……….. रचना है।
उत्तर-
उत्कृष्ठ मलयज जी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से …….. एम. ए. किया।
उत्तर-
अंग्रेजी में।

प्रश्न 3.
मलयज जी की कविता और आलोचना से कम महत्त्वपूर्ण नहीं है इनकी ………।
उत्तर-
डायरियाँ

प्रश्न 4.
एक कलाकार के एिल निहायत जरूरी है कि उसमें ……… हो और वह खुद ठंडा हो।
उत्तर-
आग

प्रश्न 5.
मलयज जी की सर्वोत्कृष्ट डायरी ……… की है।
उत्तर-
3 मार्च, 1981 ई.

हँसते हुए मेरा अकेलापन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मलयज किस दौर के कवि हैं? .
उत्तर-
नई कविता के अन्तिम दौर के।

प्रश्न 2.
मलयज मन का कूड़ा किसे कहते हैं?
उत्तर-
डायरी को।

प्रश्न 3.
मलयज किस कर्म के बिना मानवीयता को अधूरी मानते हैं?
उत्तर-
रचनात्मक कर्म।

प्रश्न 4.
‘हँसते हुए मेरा अकेलापन’ किसकी कृति है?
उत्तर-
मलयज की।

प्रश्न 5.
मलयज का मूल नाम क्या था?
उत्तर-
भरत जी श्रीवास्तव।

प्रश्न 6.
“मैं संयत हूँ….पानी ठंडा’ किसके लिए कहा है?
उत्तर-
लेखक ने स्वयं अपने लिए।

हँसते हुए मेरा अकेलापन पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
डायरी क्या है?
उत्तर-
डायरी किसी साहित्यकार या व्यक्ति द्वारा लिखित उसके महत्वपूर्ण दैनिक अनुभवों का ब्योरा है जिसे वह बड़ी ही सच्चाई के साथ लिखता है। डायरी से जहाँ हमें लेखक के समय की उथल-पुथल का पता चलता है तो वहीं उसके निजी जीवन की कठिनाइयों का भी पता चलता है।

प्रश्न 2.
डायरी का लिखा जाना क्यों मुश्किल है?
उत्तर-
डायरी जीवन का दर्पण है। डायरी में शब्दों और अर्थों के बीच तटस्थता कम रहती है। डायरी में व्यक्ति अपने मन की बातों को कागज पर उतारता है। वह अपने यथार्थ को अपने ढंग से अपने समझने योग्य शब्दों में लिखता है। डायरी खुद के लिए लिखी जाती है, दूसरों के लिए नहीं। डायरी लिखने में अपने भाव के अनुसार शब्द नहीं मिल पाते हैं। यदि शब्दों का भंडार है भी तो उन शब्दों के लायक के भाव ही न होते हैं। डायरी में मुक्ताकाश भी होता है, तो सूक्ष्मता भी। शब्दार्थ और भावार्थ के आशिक मेल के कारण डायरी का लिखा जाना मुश्किल है।

प्रश्न 3.
किस तारीख की डायरी आपको सबसे प्रभावी लगी और क्यों?
उत्तर-
10 मई 1978 ई. की डायरी अतुलनीय है। यह डायरी मुझे बड़ी प्रभावी नजर आती है। इस डायरी में लेखक ने अपने यथार्थ के बारे में लिखा है। उन्होंने जीवन की सच्चाइयों से अपने को रूबरू बखूबी करवाया है। उन्होंने इस डायरी में स्पष्टतः यह दिखलाया है कि मनुष्य यथार्थ को जीता भी है, और इसका रचयिता भी वह स्वयं ही है। इसमें उन्होंने यह भी बताया है कि रचा हुआ यथार्थ भोगे हुए यथार्थ से बिल्कुल भिन्न है। हालांकि दोनों में एक तारतम्य भी है। इसमें उन्होंने संसार को यथार्थ के लेन-देन का एक नाम दिया है। वे संसार से जुड़ाव को रचनात्मक कर्म कहते हैं, जिसके ना होने पर मानवीयता ही अधूरी है। इस डायरी की एक मूल बात जो बड़ी गहराइयों को छूती है वह है रचे हुए यथार्थों का स्वतंत्र हो जाना।

प्रश्न 4.
डायरी के इन अंशों में मलयज की गहरी संवेदना घुली हुई है। इसे प्रमाणित करें।
उत्तर-
मलयज एक बेहद ही संवेनदनशील लेखक हैं। उनकी हर रचना चाहे कविता हो, आलोचमा हो या फिर डायरी उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है। डायरी के इन अंशों में मलयज अपनी संवेदनशीलता का बखूबी परिचय देते हैं। इन डायरी के अंशों में उनकी संवेदनशीलता जगह-जगह जाहिर हुई है। खेत की मेड़ पर बैठी कौवों की कतार को देखना हो या फिर अकेलापन। नेगी परिवार की मेहमानबाजी की बात हो या फिर स्कूल के दो अध्यापकों से परिचय। अपने द्वारा रचे गए यथार्थ हो या फिर भोगे गए दिन। डायरी में लिखने के लिए चयनित शब्द हों या फिर सुरक्षा की भावना उनकी संवेदनशीलता का परिचय देती है। सेब बेचनेवाली लड़की की आतुरता और उसकी ललक मलयज की संवेदनशील निगाहें ही देख पाती है। आम जीवन में होनेवाले डर और दुनिया में जिजीविषा मलयज की गहरी संवेदना की छाप छोड़ती है।

प्रश्न 5.
व्याख्या करें
(क) आदमी यथार्थ को जीता ही नहीं, यथार्थ को रचता भी है।
(ख) इस संसार से संपृक्ति एक रचनात्मक कर्म है इस कर्म के बिना मानवीयता अधूरी है।
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पंक्ति मलयज लिखित ‘हँसते हुए मेरा अकेलापन’ शीर्षक डायरी से ली गई है। प्रस्तत पंक्तियों में समर्थ लेखक मलयज के 10 मई 1978 की डायरी की है। जीवमात्र को जीने के लिए हमेशा संघर्ष करना पड़ता है। वह इन संघर्षों को जीता है। यदि संघर्ष ना रहे तो जीवन का कोई मोल ही न हो। मनुष्य इन यथार्थों के सहारे जीवन जीता है। वह इन यथार्थ का भोग भी करता है और भोग करने के दौरान इनकी सर्जना भी कर देता है। संघर्ष संघर्ष को जन्म देती है। कहा गया है गति ही जीवन है और जड़ता मृत्यु। इस प्रकार आदमी यथार्थ को जीता है।

भोगा हुआ यथार्थ दिया हुआ यथार्थ है। हर एक अपने यथार्थ की सर्जना करता है और उसका एक हिस्सा दूसरे को दे देता है। इस तरह यह क्रम चलता रहता है। इसलिए यथार्थ की रचना सामाजिक सत्य की सृष्टि के लिए एक नैतिक कर्म है।।

(ख) प्रस्तुत पंक्ति मलयज लिखित ‘हँसते हुए मेरा अकेलापन’ शीर्षक डायरी से ली गई है। प्रस्तुत पंक्ति के समर्थ लेखक मलयज के अनुसार मानव का संसार से जुड़ा होना निहायत जरूरी है। मानव संसार के अमानों का उपभोग करता है और उसकी सर्जना भी करता है। मानव अपने संसार का निर्माता स्वयं है। वह ही अपने संसार को जीता है और भोगता है। संसार में संक्ति ना होने पर कोई कर्म ही ना करे। कर्म करना जीवमात्र के अस्तित्व के लिए बहुत ही आवश्यक है। उसके होने की शर्त संसार को भोगने की प्रवृति ही है। भोगने की इच्छा कर्म का प्रधान कारक है। इस तरह संसार से संपृक्ति होने पर जीवमात्र रचनातमक कर्म की ओर उत्सुक होता है। इस कर्म के बिना मानवीयता अधूरी है क्योंकि इसके बिना उसका अस्तित्व ही संशयपूर्ण है। .. प्रश्न

प्रश्न 6.
‘धरती का क्षण’ से क्या आशय है?
उत्तर-
लेखक कविता के मूड में जब डायरी लिखते हैं तो शब्द और अर्थ के मध्य की दूरी अनिर्धारित हो जाती है। शब्द अर्थ में और अर्थ शब्द में बदलते चले जाते हैं, एक दूसरे को पकड़ते-छोड़ते हुए। शब्द और अर्थ का जब साथ नहीं होता तो वह आकाश होता है जिसमें रचनाएँ बिजली के फूल की तरह खिल उठती हैं किन्तु जब इनका साथ होता है तो वह धरती का क्षण होता है और उसमें रचनाएँ जड़ पा लेती हैं प्रस्फुटन का आदिप्रोत पा जाती हैं। अतः यह कहना उचित है कि शब्द और अर्थ दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

प्रश्न 7.
रचे हुए यथार्थ और भोगे हुए यथार्थ में क्या संबंध है?
‘उत्तर-
भोगा हुआ यथार्थ एक दिया हुआ यथार्थ है। हर आदमी अपना-अपना यथार्थ रचता है और उस रचे हुए यथार्थ का एक हिस्सा दूसरों को दे देता है। हर आदमी उस संसार को रचता है जिसमें वह जीता है और भोगता है। रचने और भोगने का रिश्ता एक द्वन्द्वात्मक रिश्ता है। एक के होने से ही दूसरे का होना है। दोनों की जड़ें एक-दूसरे में हैं और वहीं से वे अपना पोषण रस खींचते हैं। दोनों एक-दूसरे को बनाते तथा मिटाते हैं।

प्रश्न 8.
लेखक के अनुसार सुरक्षा कहाँ है? वह डायरी को किस रूप में देखना चाहता है?
उत्तर-
लेखक मलयज डायरी लेखन को सुरक्षित नहीं मानता है। लेखक इस बात से सहमत नहीं कि हम यथार्थ से बचने के लिए डायरी लिखें और अपने कर्तव्य का इतिश्री समझें। यह तो वास्तविकता से मुँह मोड़ना हुआ। यह पलायन है, कायरता है। हम यह नहीं कह सकते कि हम अपनी गलतियों, अपनी पराजय को डायरी लिखकर छिपा सकते हैं। यह एक छद्म आवरण की भाँति होगा, जिसे रोशनी की एक लकीर भी तोड़ सकता है।

लेखक के अनुसार सुरक्षा इन चुनौतियों को जीने में है। जीवन के खट्टे स्वादों से बचने के लिए हम अपनी जीभ काट लें यह कहाँ की चतुरता है, इससे तो हम मोटे स्वाद से भी वंचित हो जाएँगे। सुरक्षा कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करने में है, अपने को बचाने में नहीं। लेखक डायरी को मुसीबतों से बिना लड़े पलायन किए जाने के रूप में देखता है।

प्रश्न 9.
डायरी के इन अंशों से लेखक के जिस ‘मूड’ का अनुभव आपको होता है, उसका परिचय अपने शब्दों में दीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत डायरी हँसते हुए मेरा अकेलापन शीर्षक डायरी में लेखक के कई मूड हमें परिलक्षित होते दिखाई देते हैं। लेखक ने स्वयं डायरी लिखने के पूर्व कहा है-“डायरी लेखन मेरे लिये एक दहकता हुआ जंगल है, एक तटस्थ घोंसला नहीं…….। डायरी मेरे कर्म की साक्षी हो, मेरे संघर्ष की प्रवक्ता हो यही मेरी सुरक्षा है।

मलयज प्रकृति के प्रति अपनी भावना (मूड) डायरी के प्रथम अंश में ही प्रस्तुत करता है। पेड़ों की हरियाली के बीच अधसुखे पेड़ों का कटना बाहर निकलने पर सफेद रंग के कुहासे का सामना करना, ये सारी बातें स्पष्ट करती हैं कि एक कलाकार के लिये यह निहायत जरूरी है कि उसमें आग हो ‘और खुद………ठंढा’ हो।

मलयज कभी-कभी चित्रकार के मूड में दिखाई देते हैं। खेत और फसल की चर्चा करते हुए उन्होंने मानव जीवन के कई पहलुओं-बचपन, युवावस्था, बुढ़ापा का अकेलापन किया है जिस प्रकार फसल उगते बढ़ते हैं, फलते और पकते तथा बाद में उनकी कटाई की जाती है यही स्थिति. मनुष्य की भी है। लेखक यहाँ कवि हृदय के मूड में दिखाई देते हैं। लेखक का मूड जीवन की यथार्थ अनुभूति का भी अनुभव करने से नहीं चूकता।

उनका कहना है-रचा हुआ यथार्थ, भोगे हुए यथार्थ से अलग है। शीघ्र ही उनका मूड बदलता है और वे लिखते हैं, कि संसार में जुड़ाव एक रचनात्मक कर्म है। रचना और भोग को वे एक-दूसरे को पूरक मानते हैं। उनके अनुसार मन का डर बड़ा ही खतरनाक है। डरा व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता। अतः निर्भय होना ही मनुष्य की प्रगति का कारण बनता है। इस प्रकार लेखक ने अपने कई मूडों का प्रदर्शन इस डायरी के अंश में किया है, जिसका अनुभव पाठकों को सहज ही होता है।

प्रश्न 10.
अर्थ स्पष्ट करें-एक कलाकार के लिये निहायत जरूरी है कि उसमें ‘आग’ हो-और खुद ठंढा हो।
उत्तर-
लेखक मलयज ने अपनी डायरी में एक कलाकार की मनोदशा का चित्रण प्रस्तुत पंक्ति में की है। लेखक का कहना है कि एक कलाकार के लिए जरूरी है उसके दिल में आग हो। उसमें कुछ कर गुजरने की क्षमता हो। साथ ही, एक कलाकार दिमाग से शांत प्रकृति का होता है। एक कलाकार के लिए ठंढे दिमाग का व्यक्ति होना अनिवार्य है। एक कलाकार का सही चित्रण लेखक ने यहाँ किया है।

प्रश्न 11.
चित्रकारी की किताब में लेखक ने कौन सा रंग सिद्धान्त पढ़ा था?
उत्तर-
चित्रकारी की किताब में लेखक ने यह रंग सिद्धांत पढ़ा था कि शोख और भड़कीले रंग संवेदनाओं को बड़ी तेजी से उभारते हैं, उन्हें बड़ी तेजी से चरम बिन्दु की ओर ले जाते हैं और उतनी ही तेजी से उन्हें ढाल की ओर खींचते हैं।

प्रश्न 12.
11 जून 78 की डायरी से शब्द और अर्थ के संबंध पर क्या प्रकाश पड़ता है? अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
शब्द और उसके अर्थ किसी भी रचना के मापदण्ड हैं। यदि शब्द-अलग हों उनके भाव कुछ और तो यह लेखक का पांडित्य को दर्शाता है, परन्तु सामान्य पाठक लेखक की बात को नहीं समझ पाता है। डायरी में चूँकि लेखक अपने यथार्थ की बात लिखता है, इसलिए शब्दों और अर्थों में तटस्थता कम रहती है, इस कारण डायरी लिखना कठिन भी है। यदि अर्थ शब्द के साथ चलते हैं तब रचना सामान्य जन की होती है हालांकि उसका विस्तार सीमित होता है जो रचना की उत्पत्ति का आदि स्रोत है। यदि अर्थ और शब्द साथ-साथ नहीं चलते हैं तो रचना एक उन्मुक्त आकाश की भाँति हो जाती हैं, जिसमें पाठक उसे अपनी परिकल्पनाओं के अनुसार समझता है।

प्रश्न 13.
रचना और दस्तावेज में क्या फर्क है? लेखक दस्तावेज को रचना के लिए कैसे जरूरी बताता है?
उत्तर-
दस्तावेज रचना के लिए जरूरी कच्चा माल है। दस्तावेज वे तथ्य हैं जिनके आधार पर किसी रचना का जन्म होता है। वे सारी घटनाएँ, परिस्थितियों, हमारे जीवन का भोग-अनुभव दस्तावेज के घटक हैं और रचना के कारक, बिना दस्तावेज के रचना का हमारे जीवन से कोई सरोकार ही नहीं है, इसलिए रचना का कोई मोल नहीं है। इस तरह रचना के लिए दस्तावेज बहुत जरूरी है।

रचना हमारी सोच की एक क्षितिज प्रदान करती हैं। ये एक माध्यम हैं, उन परिस्थितियों से जूझने का। दस्तावेज परिस्थितियों, घटनाएँ या अनुभव होती हैं, इसलिए इन्हें केवल परिष्कृत दिमाग ही पहचान पाता है लेकिन जब यही रचना का रूप ले लेता है, तब यह जन के लिए हो जाता है।

प्रश्न 14.
लेखक अपने किस डर की बात करता है? इस डर की खासियत क्या है? अपने शब्दों में लायरी में दो तरह के डर का प्रयजनों को खोने का
उत्तर-
लेखक डायरी में दो तरह के डर की बात करता है–पहला डर है आर्थिक और दूसरा डर है सामाजिक प्रतीक्षा का डर। लेखक अपने प्रियजनों को खोने का डर आर्थिक तंगी की वजह से बताने के लिए बड़ी चतुराई से बीमारियों का सहारा लिया है। वह कहता है कि मने अपने प्रियजनों के बीमार हो जाने की बात सोचकर भय से काँप उठता है। इलाज की व्यवस्था का डर उसे भयानक तनाव में ला देता है। दूसरे डर में लेखक ने चतुरतापूर्वक समाज में बढ़ते अपराधों का जिक्र किया है। वह कहता है कि यदि कोई प्रियजन संभावित घड़ी तक नहीं हैं, तो मन अनजानी, अप्रिय आशंकाओं से घिर उठता है। इस डर की खासियत यह है कि मन की कमजोरी इस डर का कारक है। मन की कमजोरी ही सामाजिक और आर्थिक अपराधों की जड़ है।

हँसते हुए मेरा अकेलापन भाषा की बात

प्रश्न 1.
अर्थ की दृष्टि से निम्नलिखित वाक्यों की प्रकृति बताएँ
(क) मौसम एकदम से ठंढा हो गया है।
(ख) हवाओं में ये कैसी महक हैं।
(ग) आज की कोई चिट्ठी नहीं।
(घ) तबीयत किस कदर बेजार हो उठी है।
(ङ) सुरक्षा डायरी में भी नहीं।
(च) मेरे भीतर इन दिनों कितने शब्द भरे पड़े हैं या अर्थ?
उत्तर-
(क) विधिवाचक वाक्य
(ख) प्रश्नवाचक वाक्य
(ग) विस्मयादिबोध वाक्य
(घ) विधिवाचक वाक्य
(ङ) निषेधवाचक वाक्य
(च) विधिवाचक वाक्य

प्रश्न 2.
नीचे लिखे वाक्यों से सरल, मिश्र एवं संयुक्त वाक्यों को छाँटें
(क) हर आदमी उस संसार को रचता है जिसमें वह जीता है और भोगता है।
(ख) आदमी यथार्थ जीता ही नहीं, यथार्थ को रचता भी है।
(ग) सुबह से ही पेड़ काटे जा रहे हैं।
(घ) कल शाम से रोज इसी समय एक बहुत प्यारी-सी गंध हवा में उड़कर मेरे दरवाजे तक आती है।
उत्तर-
(क) संयुक्त वाक्य
(ख) मिश्र वाक्य
(ग) सरल वाक्य
(घ) संयुक्त वाक्य।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ
अस्फुट, मौसम, निहायत, गुलदान, संयत, रूदन, आग, मेड़, जर्द, महक, स्फूर्ति, गुंजाइश, चढ़ाई, सत्य, यथार्थ, रिश्ता, मुश्किल, घोंसला।
उत्तर-

  • अस्फुट – तद्भव
  • मौसम – विदेशज
  • निहायत – विदेशज
  • गुलदान – विदेशज
  • संयत – तत्सम
  • रूदन – तद्भव
  • आग – तद्भव
  • मेंड़ – देशज
  • जर्द – विदेशज
  • महक – विदेशज
  • स्फूर्ति – तद्भव Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 11 हँसते हुए मेरा अकेलापन
  • गुंजाइश – विदेशज
  • चढ़ाई – देशज
  • सत्य – तत्सम
  • सुरक्षा – तत्सम
  • रिश्ता – विदेशज
  • मुश्किल – विदेशज
  • घोंसला – तद्भव

हँसते हुए मेरा अकेलापन लेखक परिचय मलयज (भरतजी श्रीवास्तव) (1935-1982)

जीवन-परिचय-
‘नई कविता’ के अन्तिम दौर के प्रमुख कवि ‘मलयज’ का जन्म सन् 1935 में महुई, आजमगढ़, उत्तरप्रदेश में हुआ। इनका मूलनाम भरतजी श्रीवास्तव था। इनके पिता का नाम त्रिलोकीनाथ वर्मा तथा माता का नाम प्रभावती था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त की। फिर इन्होंने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. किया। अपने छात्र जीवन में ये क्षयरोग से ग्रस्त हो गए थे। इस कारण ऑपरेशन में इन्हें अपना एक गुर्दा खोना पड़ा तथा शेष जीवन भी दवाइयों के सहारे गुजारना पड़ा। ये स्वभाव से अंतर्मुखी, गंभीर, एकांतप्रिय तथा मितभाषी थे।

प्रायः अवसादग्रस्त रहने के बावजूद ये कठिन जिजीविषाधर्मी थे। ड्राइंग तथा स्केचिंग, संगीत, कला, प्रदर्शनी एवं सिनेमा में इनकी गहरी रुचि थी। इन्होंने कुछ दिनों तक के. पी. कॉलेज, इलाहाबाद में प्राध्यापन भी किया। वहीं सन् 1964 में कृषि मंत्रालय, भारत सरकार की अंग्रेजी पत्रिकाओं के संपादकीय विभाग में भी नौकरी की। शमशेर बहादुर सिंह और विजयदेव नारायण साही से इनके विशिष्ट संपर्क थे।

इन्होंने डायरी लेखन को जीवन जीने के जैसे अपना रखा था। ये 16 वर्ष की आयु से डायरी लेखन करने लगे थे तथा अपने जीवन के अन्तिम काल तक डायरी लेखन करते रहे। इनके डायरी लेखन में जहाँ निजी जीवन की स्थितियों का वर्णन है, तो वहीं उस समय की उथल-पुथल का भी चित्रण है। इस प्रतिभाशाली तथा संवेदनशील कवि-आलोचक का निधन 26 अप्रैल, सन् 1982 के दिन हुआ।

रचनाएँ-मलयज की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं
कविता-जख्म पर धूल (1971), अपने होने को अप्रकाशित करता हुआ (1980)।
आलोचना-कविता के साक्षात्कार (1979), संवाद और एकालाप (1984), रामचन्द्र शुक्ल (1987)।
सृर्जनात्मक गद्य-हँसते हुए मेरा अकेलापन (1982)।
डायरी-तीन खंड, संपादक : डॉ. नामवर सिंह संपादन-‘शमशेर’ पुस्तक का सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के साथ सह-संपादन।
साहित्यिक विशेषताएँ-सन् 1960 के आसपास मलयज का उदय एक कवि के रूप में हुआ। आरंभ में वे भाषा, संवेदना और रचना-शैली में नई कविता के परवर्ती रूपों के प्रभाव में थे। लेकिन बाद में होने वाले परिवर्तनों के कारण उनके लेखन में काफी बदलाव आया वहीं उनकी आलोचना का विकास हुआ जो हिन्दी साहित्य में आठवें दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हँसते हुए मेरा अकेलापन पाठ के सारांश

“हँसते हुए मेरा अकेलापन” शीर्षक डायरी मलयज की एक उत्कृष्ट रचना है। मलयज अत्यन्त आत्मसजग किस्म के बौद्धिक व्यक्ति थे। डायरी लिखना मलयज के लिए जीवन जीने ‘के कार्य जैसा था। ये डायरी मलयज के समय की उथल-पुथल और उनके निजी-जीवन की तकलीफों बेचैनियों के साथ एक गहरा रिश्ता बनाते हैं। इस डायरी में एक औसत भारतीय लेखक के परिवेश को हम उसकी समस्त जटिलताओं में देख सकते हैं।

हँसते हुए मेरा अकेलापन पाठ्य-पुस्तक

में प्रस्तुत डायरी के अंश की प्रथम डायरी में मलयज ने प्रकृति एवं मानव के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया है। मिलिट्री की छावनी में वृक्ष काटे जा रहे हैं। लेखक वृक्षों के एक गिरोह में उनकी एकात्मकता का संकेत देता है। वृक्षों का चित्रण करते हुए मलयज लिखते हैं-“वे जब बोलते हैं, तब एक भाषा में गाते हैं, तब एक भाषा में रोते हैं तब भी एक भाषा में……।” लेखक ने जाड़े के मौसम में घने कुहरों का सजीव चित्र अपनी डायरी में प्रस्तुत किया है। साथ ही, ऐसे ठंडे मौसम में भी कलाकार के हृदय में आग है लेकिन उसका दिमाग ठंढा है। डायरी में लिखा है-“एक कलाकार के लिए यह निहायत जरूरी है कि उसमें ‘आग’ हो और वह खुद ठंढा हो।”

दूसरे दिन की डायरी में लेखक ने मनुष्य के जीवन की तुलना खेती की फसलों से की है। मनुष्य का जीवन फसल के समान बढ़ता, पकता एवं कटता दिखायी देता है। तीसरे दिन की डायरी में लेखक ने चिट्ठी की उम्मीद में और चिट्ठी नहीं आने पर अपनी मनोदशा का वर्णन किया है। चिट्ठी नहीं आने पर एक अजीब-सी बेचैनी मन में आती है। चौथी डायरी में लेखक ने लेखक बलभंद्र ठाकुर नामक एक लेखक का चित्रण किया है और बताने का प्रयास किया है कि एक लेखक कितना सरल एवं मिलनसार होता है। अपनी रचनाओं पर लेखक को गर्व होता है, उसका सहज चित्र इस डायरी में प्रस्तुत है। कौसानी में कुछ दिनों तक लेखक का प्रवास बड़ा ही आनन्ददायक रहा। दो शिक्षकों का चित्रण उनके सहज एवं सामाजिक स्वभाव को दिखाया गया है। पाँचवीं डायरी में भी लेखक ने कौसानी के प्राकृतिक एवं शांत वातावरण का चित्रण किया है।

छठी डायरी में मलयज ने एक सेब बेचनेवाली किशोरी का चित्रण बड़ी ही कुशलतापूर्वक किया है। किशोरी इतनी भोली थी कि सेब बेचने में उसका भोलापन परिलक्षित होता है। सातवीं डायरी में मलयज यथार्थवादी दिखायी देते हैं। उनके अनुसार मनुष्य यथार्थ को रचता भी है और यथार्थ में जीता भी है। उनके अनुसार रचा हुआ यथार्थ भोगे हुए यथार्थ से अलग है। बाल-बच्चे रचे हुए यथार्थ हैं। वे सांसारिक वस्तुओं का भोग करते हैं। मलयज ने लिखा है-“हर आदमी उस संसार को रचता है जिसमें वह जीता है और भोगता है। आदमी के होने की शर्त यह रचता जाता, भोगा जाता संसार ही है।” उनके अनुसार रचने और भोगने का रिश्ता एक द्वन्द्वात्मक रिश्ता है।

आठवीं डायरी में लेखक ने शब्द एवं अर्थ के बीच निकटता का वर्णन किया है। लेखक का कहना है शब्द अधिक होने पर अर्थ कमने लगता है और अर्थ की अधिकता में शब्दों की कमी होने लगती है। अर्थात् शब्द अर्थ में और अर्थ शब्द में बदले चले जाते हैं। नवी डायरी में लेखक ने सुरक्षा पर अपना विचार व्यक्त किया है। व्यक्ति की सुरक्षा रोशनी में हो सकती है, अँधेरे में नहीं। अँधेरे में सिर्फ छिपा जा सकता है। सुरक्षा तो चुनौती को झेलने में ही है, बचाने में नहीं। अतः आक्रामक व्यक्ति ही अपनी सुरक्षा कर सकता है। बचाव करने में व्यक्ति असुरिक्षत होता है।

दसवीं डायरी में लेखक ने रचना और दस्तावेज में भेद एवं दोनों में पारस्परिक संबंध की चर्चा की है। लेखक के अनुसार दस्तावेज रचना का कच्चा माल है। दस्तावेज रचनारूपी करेंसी के वास्तविक मूल्य प्रदान करनेवाला मूलधन है। ग्यारहवीं डायरी में लेखक ने मन में पैदा होनेवाले डर का वर्णन किया है। लेखक अपने को भीतर से डरा हुआ व्यक्ति मानता है। मन का हर तनाव पैदा करता है, संशय पैदा करता है। किसी की प्रतीक्षा की घड़ी बीत जाने पर मन में डर पैदा होता है। डर कई प्रकार के होते हैं। मनुष्य जैसे-जैसे जीवनरूपी समस्याओं से घिरता जाता है, उसके मन में डर की मात्र भी बढ़ती जाती है।

अन्तिम डायरी में लेखक ने जीवन में तनाव के प्रभाव का वर्णन किया है। मनुष्य जीवन में संघर्षों का सामना करते समय तनाव से भरा रहता है।

इस प्रकार प्रस्तुत डायरी के अंश में मलयज ने अपने जीवन के संघर्षों एवं दुखों की ओर इशारा करते हुए मानव जीवन में पाये जानेवाली सहज समस्याओं का चित्रण बड़ी ही कुशलता से किया है। एक व्यक्ति को कितना खुला, ईमानदार और विचारशील होना चाहिए-इस भाव का सहज चित्रण लेखक ने अपनी डायरी में प्रस्तुत किया है। व्यक्ति के क्या दायित्व हैं और अपने दायित्वों के प्रति कैसा लगाव, कैसी सान्निध्यता होनी चाहिए ये सारे भाव प्रस्तुत डायरी में स्पष्ट रूप से चित्रित हैं।

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A. Warmer

Bihar Board Class 8 English Chapter 2 Question 1.
Why do we sleep ? Do all persons sleep for the same amour! of time ? Do you ever have dreams ? If yes, narrate the dreams which you like/dislike most. Why do you think we have dreams ?
Answer:
We sleep to freshen up our mind and body and to gain energy. No, all persons don’t sleep for the same amount of time. Yes, I have seen dreams for many times. 1 like dream of good things. I dislike ghost dreams. I think that we have dreams because we think of them in day time, someday or the other. Our unfulfilled desires come in our mind as dreams.

B. Let’s Comprehend

B. 1. Think and Tell

B. 1. 1. Answer the following questions orally

Bihar Board Class 8 English Book Solution Question 1.
For how long does an average adult sleep ?
Answer:
Seven hours and twenty minutes.

Bihar Board Solution Class 8 English Question 2.
What are the most common causes of sleep problems ?
Answer:
Worry and depression causes sleep problems.

Bihar Board Class 8 English Solution In Hindi Question 3.
Tell some of the factors which affect sleep. Also add some new things which are not mentioned in the passage.
Answer:
Noise light, heat, cold and fear or tension.

Bihar Board Class 8 English Solutions Question 4.
When do the bodily functions get slow ?
Answer:
In the middle of night.

B. 2. Think And Write

B. 2. 1. On the basis of reading the lesson, try to complete the data given

Bihar Board Class 8 English Solution Question 1.
Five stages in one phases: sleep cycle and two alternating
Bihar Board Class 8 English Book
Answer:
Stages I and 2 – Not in deep sleep. Stage 3 and 4 – Deep sleep.
Stage 5 – Your brain is active and you dream.
Phase 1 -Involves no dreaming, normally it occurs in the early part of the night.
Phase 2 – Involves dreaming; it occurs mostly in the later part of the night for varying periods of time. If we wake up during this phase, we will certainty remember our dreams.

B. 2. 2. Write the answers to the following questions in about 50 words

Class 8 Bihar Board English Solution Question 1.
Do all adults require the same amount of sleep ? Find out how much sleep people of different age group require.
Answer:
An average adult sleeps for seven hours and twenty minutes. About 8% of adults sleep for 5 hours and some sleep less than that. 4% of the adults need 10 hours or more sleep. So, all adults do not require the same amount of sleep. Children of 5 to 12 years need 10 to 11 hours sleep each night. Babies need to sleep for 14 to 18 hours. Elderly people need less sleep than they were young. They often take a nap during the day time.

Class 8 English Chapter 2 Bihar Board Question 2.
Why does the author not favor sleeping pills ? Pick out the line that shows that the author does not favor them.
Answer:
Sleeping pills make people addicted to them. It creates another problems than sleep. So, the author does not favor sleeping pills.
The line that shows that the author does not favor them, from the text is “It is better to avoid them if we can. It is much better to identify the problem and remove it.”

Bihar Board English Class 8 Question 3.
Have you ever felt sleep problems in your life ? Discuss in pairs and w rite down the possible causes of sleep problems.
Answer:
Rakes: Have you ever felt sleep problems in your life ?
Harish: Yes, once I was sick. 1 had severe headache. I could not sleep till mid night.
Manu: Wjhen I hear loud noise in my surroundings, I can not sleep.
Kanti: When its too hot or too cold, I feel uneasly in sleeping. I get to be awake for late night.
Pallavi : When I go to some new place, I can’t sleep for long in the new surrounding.

Class 8 Bihar Board English Book Question 4.
What are the consequences of regularly missing sleep for long periods of time ?
Answer:
The consequences.or the results of”regularly missing sleep for long periods of time are very bad. The affected person becomes abnormal.’ He begins to behave strangely. His ability to concentrate on things or studies and his judgement ’ability gets impaired.

C. Word Study

C. 1. There are six words connected with sleep. Find them out from the grid. You may use the dues below.

Bihar Board 8th Class English Book

  1. happening by turns, first one and then the other (para 3)
  2. old people (para 2)
  3. state of being sad or gloomy (para 8)
  4. weakened (para 7)
  5. abnormal (para 7)
  6. used to (para 5)

Note: Pick out only those words that have been used in the text.
Class 8 Bihar Board English Book

Answer:

  1. Cycle
  2. Elderly
  3. Worry
  4. Impaired
  5. De-ranged
  6. Addict.

C. 2. Read the following sentences carefully.

(a) The elderly need less sleep.
(b) When we sleep, the bodily functions slow down.
(c) You soon begin to-behave strangely.

In the above sentences words with ’-ly’ have different functions to perform. In sentence

(a) ’the elderly means the elderly people and it functions as a noun. In sentence

(b) the word ‘bodily’ is describing the “functions” which is a noun. Therefore, bodily is an adjective and that’s why in this case it comes before the noun. In sentence

(c) the word ‘strangely’ clearly qualifies the verb ‘behave’ and therefore it functions as an adverb. Notice that ‘y’ of ‘body’ is changed to ‘i’ in ‘bodily’.

Question 1.
Now, try to find out what different functions the ‘-ly’ words perform in the sentences given below:

  1. The easterly winds bring rain.
  2. He visit us rarely nowadays.
  3. The lion was vastly amused.
  4. This restaurant provides us homely meals.
  5. His monthly’Salary is very high.
  6. The student has solved this sum correctly.
  7. The children danced happily.
  8. He read the book thoroughly.

Answer:

  1. In sentence (a) ‘Easterly’ qualifies the whole sen-tence. Which wind brings rain ? The answer is ‘easterly’. So it functions as an adverb. So, ‘easterly’ is an adverb. .
  2. In sentence (b) the word ‘rarely’ qualifies the verb vis-its’ and therefore it functions as an adverb.
  3. ‘Vastly’ qualifies the adjective word ‘amused’ so it is an adverb.
  4. homely’ is describing ‘meals’ which is a noun. There-fore, homely is an adjective.
  5. ‘monthly’ describes the noun ‘salary’ so ‘monthly’ is an adjective.
  6. ‘correctly’ qualifies the verb ‘solved’ so it is an adverb.
  7. ‘happily’ qualifies the verb ‘danced’ so it is an adverb.
  8. ‘thoroughly’ qualifies the verb ‘read’ so it is an adverb.

Question 2.
Pick out words from the text to which ‘-ly’ can be added to form new words are
Answer:
The words from the text to which ‘-ly’v
Can be added to form new words are-.

  1. Sleep – sleeplessly.
  2. Need – Needily.
  3. Healthy – Healthily.
  4. Attention – Attentively.
  5. Necessary – Necessarily.
  6. Disorder-Disorderly. ,
  7. Average – Averagely.

D. Grammar

D. 1. Simple. Compound And Complex Sentences

Read the following sentences
(a) A lot of people have serious sleep problems,
(b) You lose the ability to concentrate and your judgement gets impaired.
(c) When we sleep, the bodily functions slow down.
Here in sentence (a) there is only one subject (a lot of people) and a finite verb (have); therefore, it is a simple sen-tence. On the other hand, the sentence (b) and (e) have more -than one subject and finite verb, so they are either compound or complex sentences.
In sentence (b) we see that the two simple sentences

  1. You lose the ability to concentrate and
  2. your judgement gets impaired are linked with ‘and’ a co-ordinating conjunction. And hence it is a compound sentence. Other coordinating conjunctions are : but, or.

A compound sentence has two or more independent clauses that are generally linked with co-ordinating conjunc-tion like ‘and’ ‘but’ ‘or’. The important thing to remember is that the two clauses that we join together should be either similar or contrasting.

Sentence (c) has one main clause ‘the bodily functions slow down’ and one subordinate clause ‘we sleep’. Therefore, it is a complex sentence, as both the clauses are joined with a subordinate conjunction ‘when’. Other subordinating conjunc-tions are :

(while, who, which, that, since, after, if, unless, however, as)

Read the text again and find one example of each type of sentence, in the compound and complex sentences, encircle the clauses and name them, e.g., independent clauses, subordinating clauses, co-ordinating clauses.
Answer:
(a) Simple sentence – Our brain needs sleep.
Subject – Our brain.
Finite verb – needs.

(b) Compound sentence-There are no rules about how much sleep is necessarys but an average adult sleeps for seven hours and twenty minutes. Two simple sentences in this example are:

  1. There are no rules about how much sleep is necessary,
  2. An average adult sleeps.for seven hours and twenty minutes,

Co-ordinating conjunction:- but.

(c) Complex Sentence – If you don’t get enough sleep, you can forget what you learnt.
Main clause.- You can forget what you learnt, Subordinate clause – You don’t get enough sleep. Subordinate – conjunction – If.

D. 1. 1. Read the following extract and identify the types of sentences simple, compound and complex.

The Rose Ringed Parakeet

One of the most beautiful birds is the rose-ringed para-keet. Parakeets are brilliant green. When perched on a tree they aie hardly visible as their colour mingles with the green of the leaves.

The male bird has a rose-pink and black collar round his neck. Both the male and female birds have large brilliant red hills.
These birds eat fruit and grain, and they cause much de-struction. A large part of the fruit goes waste as the birds leave it half eaten

The mother bird lays four to six alomost white egges usually febuary and april. she place them a hole in a tree or wall. both parents looks after eggs
Answer:
One of the most beautiful birds is the rose-ringed parakeet. (Simple sentene)
I Parakeets are brilliant green. (Simple sentence)
When perched on a tree they are hardly visible as their
colour mingles with the green of the leaves.
(Complex sentence) — These birds eat fruit and grain, and they cause much destruction, (Compound sentence)
half-eaten. (Cbmplexsentence)
The mother bird lays four to six almost white round eggs, usually between February and April. (Simple sentence) -Both parents look after the eggs. (Simple sentence)

E. Let’s Talk

Word in groups of four and talk about your sleeping habits. You can ask the answer the following questions

  1. How many hours of sleep do you take normally ?
  2. Do you fall alseep as soon as you go to bed ?
  3. Do you have any sort of sleep problems ? If yes, what are they ?
  4. When do you find it difficult to sleep ?
  5. What happens to you when you keep awake for a longer period of time ?
  6. ……………………………

Question 1.
Now one student from each group will share the views of the group with the rest of the class.
Answer:
Pranav : How many hours of sleep do you take nor-mally I t
Ranjit: Normally, I take eight hours sleep.
Pintu: Do you fall asleep as soon as you go to bed ?
Mohit: No, it takes some time for me to fall asleep.
Raju: Do you have any sort of sleep problems ?
If yes, what are they ?
Ragini:. I can’t sleep when the light is on. And when it is too hot or too cold then also it takes time for me, to sleep.
Renu: When do you find it difficult to sleep
Kanti: When there is loud noise around me, I find itdifficult to sleep.
Golu: What happens to you when you keep awake
for a longer period of time ?
Karan ; Tlhen, I feel disturbed for a jtong time in the following days. I become irritated.
Mini: And how do you feel having a sound sleep ?
Karan: Having sound sleep I feel fresh and happy for whole day.

F. Composition

Question 1.
Write a short paragraph in 100 words on ’The Importance of Sound Sleep”.

Before you get down to write your final paragraph you must jot down your points and organise your points in the correct sequence. Prepare a rough draft and check whether all the points that you had noted down have been included and are organised in their proper order. You must also, check the spellings of words, punctuation marks and capital letters.
Answer:
The Importance of Sound Sleep A sound mind rests in a sound body. And sound sleep gives us both. The person who enjoys sound sleep is a happy person on the earth. It helps us to become fresh and energetic.. Having a sound sleep we can concentrate on our studies betterly. A large part of the fruit goes waste as the birds leave it ‘”Then, we can get good mood tod get along well with our friends and our family members. Sound sleep Is a boon for us. It-is necessary for all of us.

G. Translation
Translate the first two paragraphs into Hindi or your mother tongue:
Hints : See ‘Hindi translation of the Chapter’.
Answer:
Nobody (pron) [नोबडी] = कोई (व्यक्ति) नहीं। Develop (v)[डेबलप] = विकसित होना । Healthy (adj) [हेल्दी] = स्वस्थ । Injuries (n) [इन्जूरीज] = चोट । Concentrate (v) [कन्सेन्ट्रेट] = ध्यान देना Rules (n) [रूल्स] = नियम | Necessary (adj)[नेसेसरी] = अनिवार्य । Average (adj) [एवरेज] = औसत | Elderly (n) [एल्डरली = उम्रदराज, बुजुर्ग | Nap (n) [नैप] = झपकी।

Stages (n) [स्टेजेज] = अवस्था। Cycle (n) [साइकल) = चक्र । Fall asleep (phr)[फॉल अस्लीप] = सो जाना । Breathing (v) [ब्रेदिंग] _ = सांस लेना । Motionless (adj) [मोशनलेस] = बिना हरकत के । Rap’ idly (adj) (रैपिडली] = तीव्रता से ।

Normal (adj) [नार्मल] = सामान्य । Made up of (phr) (मेड अप ऑफ] = बना हुआ। Alternating (adj) [ऑलटरनेटिंग] = क्रम से, एक के बाद दूसरा । Involve (v) [इनवॉल्व] = शामिल करना । Usually (adv)[युजुअली] = सामान्य रूप से। Occur (v) [ऑकर] = घटित होना । Varying (adj) [वेरिंग] = भिन्न। Period (n)[पीरिअड] = काल

Certainly (adv) [सर्टेनली] = निश्चित रूप से । Bodily (adj) [बौडिली] = शारीरिक, शरीर का। Function (n) [फंक्शन] = कार्य । Normally (adv) [नॉर्मली] = आम तौर पर। Enough (adv) [एनफ] = पर्याप्त । Attention (n) [अटेन्शन] = ध्यान । Idea (n) [आइडिया] = विचार | Decision (n) (डिसीजन] = निर्णय।

Difficulty (n) [डिफिकल्टी] = कठिनाई, परेशानी । Miss (v) [मिस| = खोना | Couple (n) [कपल] = जोड़ा | Irritable (adj) [इरिटेबल) = चिड़चिड़ा, परेशान । However (adv) [हॉवएवर] = किसी प्रकार से । Stay awake (phr) [स्टे अवेक] = जागे रहना । Strangely (adv) (स्ट्रेंजली] = विचित्रता से | Ability (n) [एबिलिटी] = योग्यता । Judge_ment (n) [जजमेन्ट] = निर्णय । Impair (v) [इम्पेअर) = कमजोर पड़ना। Deranged (adj) [डिटेन्ज्ड] = असामान्य । A lot of (phr) [अ लॉट ऑफ) = ढेर सारे । Serious (adj) [सीरिअस] = गंभीर। Number of (phr)[नंबर ऑफ] = ढेर सारे I Cause

(n) [कॉज] = कारण । Depression (n) [डिप्रेशन) = दबाव, एक मानसिक बीमारी; Common (adj) कॉमन] = आम | Environment (n)
एनविरोनमेन्ट = वातावरण । Affect (v) [अफेक्ट] = असर करना । Surroundings (n) |सराउन्डिंग्स] = आस-पास का वातावरण । Temporary (adj)|टेम्पररी = क्षणिक, अस्थायी । Sleeplessness (n)[स्लीपनेसनेस] = अनिद्रा, नींद न आना । Seek (v)|सीक] = ढूँढ़ना । Addicted (adj) एडिक्टेड लत लग जाना । Insomnia (n)|इनसॉमनिया = नींद न आने की बीमारी | Avoid (v) |एवोएडा – बचना ।Identify (v) [आइडेन्टिफाई) – पहचान करना।

Sleep Summary In English

Sleep is necessary for all of us. Our body enforced sleep to stay healthy and fight sickness. our body develops and cures the injuries during sleep. Our brain too freshen up while sleep-ing. Average adult sleep for seven hours and twenty minutes. Children of 5 to 12 years need 10 to 11 hours sleep. Babies need 14 to 18 hours sleep.

In the first part of night we fall asleep but deep sleep we get in later night. Then, we dream too. Good does of Sleep helps us to be active bodily and mentally. Sleeping pills are no remedy to insomnia or the disorder of sleepiness. Its better to identify the problem with affect our sleep and remove the problem. Then, we will have natural sleep.

Sleep Summary In Hindi

, सोना हम सबके लिए आवश्यक है। स्वस्थ बने रहने और बीमारियों से सामना करने के लिए हमारे शरीर के लिए नींद जरूरी हो जाता है। सोने के दौरान हमारा शरीर विकसित होता है और कई जख्म भी इस दरम्यान भर जाते हैं। सोने के दौरान हमारा मस्तिष्क भी ताजा हो जाता है। एक औसत वयस्क दिन में सात घंटे और बीस मिनट तक सोता है। 5 से 12 वर्ष के बच्चों को 10 से 11 घंटे के नींद की जरूरत महसूस होती है । शिशुओं को 14 से 18 घंटा साना जरूरी होता है।

रात के शुरुआती दौर में हम सो जाते हैं पर गहरी नींद हमें लगती है रात के आखिरी हिस्से में। तब, हमें सपने भी आते हैं। अच्छी नींद की खुराक लेने से हमारा शरीर और दिमाग दोनों चुस्त-दुरुस्त रहते हैं। नींद न आने की बीमारी या समस्या का उपचार नींद की गोलियाँ कदापि नहीं होती। बेहतर है कि हम नींद न आने की समस्या के कारणों की खोज कर उसे दूर करें। फिर हमें स्वतः नींद आने लगेगी।

Sleep Hindi Translation of The Chapter

Nobody (pron) [नोबडी] = कोई (व्यक्ति) नहीं। Develop (v)[डेबलप] = विकसित होना । Healthy (adj) [हेल्दी] = स्वस्थ । Injuries (n) [इन्जूरीज] = चोट | Concentrate (v) [कन्सेन्ट्रेट] = ध्यान देना Rules (n) [रूल्स] = नियम | Necessary (adj)[नेसेसरी] = अनिवार्य । Average (adj) [एवरेज] = औसत | Elderly (n) [एल्डरली = उम्रदराज, बुजुर्ग | Nap (n) [नैप] = झपकी।

Stages (n) [स्टेजेज] = अवस्था। Cycle (n) [साइकल) = चक्र । Fall asleep (phr)[फॉल अस्लीप] = सो जाना । Breathing (v) [ब्रेदिंग] _ = सांस लेना । Motionless (adj) [मोशनलेस] = बिना हरकत के । Rap’ idly (adj) (रैपिडली] = तीव्रता से ।

Normal (adj) [नार्मल] = सामान्य । Made up of (phr) (मेड अप ऑफ] = बना हुआ। Alternating (adj) [ऑलटरनेटिंग] = क्रम से, एक के बाद दूसरा । Involve (v) [इनवॉल्व] = शामिल करना । Usually (adv)[युजुअली] = सामान्य रूप से। Occur (v) [ऑकर] = घटित होना । Varying (adj) [वेरिंग] = भिन्न | Period (n)[पीरिअड] = काल

Certainly (adv) [सर्टेनली] = निश्चित रूप से । Bodily (adj) [बौडिली] = शारीरिक, शरीर का। Function (n) [फंक्शन] = कार्य । Normally (adv) [नॉर्मली] = आम तौर पर। Enough (adv) [एनफ] = पर्याप्त । Attention (n) [अटेन्शन] = ध्यान । Idea (n) [आइडिया] = विचार । Decision (n) (डिसीजन] = निर्णय।

Difficulty (n) [डिफिकल्टी] = कठिनाई, परेशानी । Miss (v) [मिस| = खोना । Couple (n) [कपल] = जोड़ा । Irritable (adj) [इरिटेबल) = चिड़चिड़ा, परेशान | However (adv) [हॉवएवर] = किसी प्रकार से । Stay awake (phr) [स्टे अवेक] = जागे रहना । Strangely (adv) (स्ट्रेंजली] = विचित्रता से | Ability (n) [एबिलिटी] = योग्यता । Judge_ment (n) [जजमेन्ट] = निर्णय । Impair (v) [इम्पेअर) = कमजोर पड़ना। Deranged (adj) [डिटेन्ज्ड] = असामान्य । A lot of (phr) [अ लॉट ऑफ) = ढेर सारे । Serious (adj) [सीरिअस] = गंभीर । Number of (phr)[नंबर ऑफ] = ढेर सारे I Cause

(n) [कॉज] = कारण । Depression (n) [डिप्रेशन) = दबाव, एक मानसिक बीमारी; Comimon (adj) कॉमन] = आम | Environment (n)
एनविरोनमेन्ट = वातावरण । Affect (v) [अफेक्ट] = असर करना । Surroundings (n) |सराउन्डिंग्स] = आस-पास का वातावरण । Temporary (adj)|टेम्पररी = क्षणिक, अस्थायी । Sleepnessness (n)[स्लीपनेसनेस] = अनिद्रा, नींद न आना । Seek (v)|सीक] = ढूँढ़ना । Addicted (adj) एडिक्टेड लत लग जाना । Insomnia (n)|इनसॉमनिया = नींद न आने की बीमारी | Avoid (v) |एवोएडा – बचना । Identify (v) [आइडेन्टिफाई) – पहचान करना।

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Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 बिहारी के दोहे

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 3 Chapter 6 बिहारी के दोहे Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 6 बिहारी के दोहे

Bihar Board Class 8 Hindi बिहारी के दोहे Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से

Bihari Ke Dohe Class 8 प्रश्न 1.
उन पदों को लिखिए जिनमें निम्न बातें कही गई हैं।

(क) बाह्याडंबर व्यर्थ है।
उत्तर:
जप माला छापै तिलक ………….. साँचे राँचै रामु ।।

(ख) नम्रता का पालन करने से ही मनुष्य श्रेष्ठ बनता है।
उत्तर:
नर की अरू नल नीर ……………. ऊँचो होय ।।

(ग) बिना गुण के कोई बड़ा नहीं होता।
उत्तर:
बड़े न हूजे गुनन ………………… गहनो गढ्यो न जाय ।।

(घ) सुख-दुःख समान रूप से स्वीकारना चाहिए।
उत्तर:
दीरघ साँस न लेहु ……………………….. दई सु कबुली ।।

बिहारी के दोहे कक्षा 8 प्रश्न 2.
दुर्जन का साथ रहने से अच्छी बुद्धि नहीं मिल सकती। इसकी उपमा में कवि ने क्या कहा है ?
उत्तर:
दुर्जन की संगति पाकर या सत्संगति के अभाव में मनुष्य को अच्छी बुद्धि नहीं मिल सकती है इसके लिए उपमा देते हुए कवि ने कहा है कि हींग को कपुर में डाल देने से उसमें कपुर की सुगन्ध नहीं आ सकती है।

पाठ से आगे

बिहारी के दोहे क्लास 8 प्रश्न 1.
गुण नाम से ज्यादा बड़ा होता है। कैसे?
उत्तर:
नाम से कोई गुणवान नहीं होता । जैसे-धतूरे को भी कनक कहा जाता है लेकिन उससे गहना नहीं बन सकता है।

Bihari Ke Dohe Class 8 In Hindi प्रश्न 2.
“कनक” शब्द का प्रयोग किन-किन अर्थों में किया गया है ?
उत्तर:
“कनक” शब्द का प्रयोग दो अर्थो में किया गया है। कनक = सोना और कनक = धतूरा ।

व्याकरण

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर:

  1. भव = संसार
  2. नर = मनुष्य
  3. बाधा = विघ्न, दुख।
  4. तन = शरीर
  5. नीर = जल
  6. कनक = सोना

Bihari Ke Dohe Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के आधुनिक/खड़ी बोली रूप लिखिए। मी
उत्तर:

  1. अरू = और
  2. जेतो = जितना
  3. तेतो = उतना
  4. हरौ = हरण करो
  5. वृथा = व्यर्थ
  6. गुनन = गुण
  7. बिनु = बिना

गतिविधि

बिहारी के दोहे क्लास 8 प्रश्न 1.
रीतिकालीन अन्य कवि की रचनाओं को भी पढ़िए और वर्ग में सुनाइए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

नीति और भक्ति के दोहे Class 8 Bihar Board प्रश्न 2.
पाठ से संबंधित अलंकारों का परिचय अपने शिक्षकों से प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बिहारी के दोहे Summary in Hindi

मेरी भव बाधा ……….. दुति होय ॥

अर्थ-इस दोहा में कवि बिहारी ने श्री राधा से प्रार्थना करते हैं कि राधा नागरि मेरी सांसारिक बाधा को दूर करें जिनके शरीर की छाया पड़ने से भगवान श्रीकृष्ण का श्यामला सौन्दर्य हरित वर्ण की आभा को प्राप्त कर लेता

जयमाला, छापै तिलक, सरै …………………………… साँचै राँचै राम्॥

अर्थ-इस दोहा में कवि ने सत्य की महत्ता बताते हुए कहते हैं। माला पर जप करने से या माथे पर तिलक लगा लेने से एक भी कार्य नहीं होता जिसके मन में खोट होता है उसके सारे कार्य बेकार हो जाते हैं जो सच्चा – व्यक्ति है उस पर ही राम भी प्रसन्न होते हैं।

बतरस-लालच लाल……………… दैन कहे नटि जाई॥

अर्थ – इस दोहा में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम को दिखाते हुए कवि ने कहा है श्री राधा भगवान श्रीकृष्ण से वार्तालाप रूपी आनन्द की प्राप्ति के लोभ में श्रीकृष्ण की मुरली छिपा देती है। श्रीकृष्ण को जब राधा पर शक होता है तो वह नहीं कहती है। जब श्रीकृष्ण राधा को शपत देते हैं तो वह हँसने लगती है और जब श्रीकृष्ण माँगते हैं तो राधा मुरली देने से मुकर जाती है।

जब जब वै सुधि कीजिए, तब-तब ……………… लागति नाँहि ॥

अर्थ – इस दोहा में कवि ने भक्त और भगवान की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा है कि भगवान जब भक्त की सधि लेकर कृपा करते हैं तो भक्त उनके कृपा पाकर अचेत हो जाता है जिससे भगवान की सुधि भक्त को समाप्त हो जाता है। जब भगवान भक्त को देखते हैं तो भक्त की आँख ही बंद हो जाती…

ना की अरू नल नीर ………………..तेतो ऊँचो होय ॥

अर्थ – इस दोहा में कवि बिहारी ने मनुष्य और नल के जल की तुलना उपमा अलंकार के माध्यम से देते हुए कहते हैं मनुष्य और नल के जल की एक गति है। मनुष्य जितना ही विनम्र होता जाता है उतना ही वह समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त करने जाता है। उसी प्रकार नल जितना नीचे रहता है उसके जल की स्थिति उतनी ही तीव्र होती है।

संगति-सुमति न पावही ……………………न होत सुगंध ॥

अर्थ-इस दोहा में बिहारी ने सत्संगति की ओर ध्यान दिलाने का प्रयास करते हुए कहा है कि मनुष्य अच्छे व्यक्तियों की संगति नहीं पाकर बुरे आचरण में लग जाता है । ऐसे लोगों को सुधारना मुश्किल हो जाता है। चाहे हम कितना ही प्रयास न कर लें । जैसे-हींग को कपुर में रख देने के बाद भी हींग में कपुर का सुगन्ध नहीं आ सकता है।

बड़े न हूजै गुनन बिनु, बिरद …………….. गहनो गढ़यो न जाय ।

अर्थ – इस दोहा में कवि ने गुणवान बनने को कहते हुए कहा है कि जिसके पास गुण नहीं है उसका गुण-गान कितना भी हम करें वह महानता को नहीं प्राप्त कर सकता है। जैसे-धतूरा को कनक की संज्ञा तो दे सकते हैं लेकिन उससे गहना नहीं बना सकते हैं।

दीरघ साँस न ………………………………. सु कबूलि॥

अर्थ – इस दोहा में कवि ने मनुष्य को सुख-दुःख में एक समान रहकर ईश्वर का स्मरण करने की सलाह देते हुए कहते हैं दुःख में आह भरते हुए लम्बी साँस मत लो और सुख में मालिक (ईश्वर) को भी मत भूलो । दु:ख के समय भगवान-भगवान क्यों करते हो जो भगवान ने दिया है चाहे सुख हो या दु:ख उसे समान रूप से स्वीकार करो।

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Poem 6 The Soldier

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Rainbow English Book Class 12 Solutions Poem 6 The Soldier

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Bihar Board Class 12 English The Soldier Text Book Questions and Answers

A. Work in small groups and discuss these questions

The Soldier Question Answer Bihar Board Class 12 English Question 1.
Kings and rulers build ‘memorials’ in the memory of their near and dear ones. How do common men remember their friends and relatives who have died?
Answer:
Common people keep the memory of their near and dear ones alive in their hearts. Sometimes they remember them by their photographs, letters or some Other thing closely related to them.

The Soldier Poem Questions And Answers Bihar Board Class 12 English Question 2.
You might have come across some lines of verse written on a grave or on a memorial. What is this called? What is its importance?
Answer:
This is called the epitaph. Its purpose is to perpetuate the memory of the dead person.

B. 1.1. Write T for true and F for false statements

(a) The speaker of the poem is a soldier.
(b) He is a French soldier.
(c) The soldier is very sad.
(d) He praises in England.
(e) He talks about his friends.
(f) It is a love poem.
(g) The poet is depicting the miseries of war.
(h) The poet expresses his indebtedness to England.
(i) The poem is a sonnet
Answer:
(a) T, (b) F, (c) F, (d) T, (e) T, (f) F, (g) F, (h) T, (i) T.

B.1.2. Answer the following questions briefly 

The Soldier Questions And Answers Bihar Board Class 12 English Question 1.
Is the speaker afraid of death?
Answer:
No, the speaker is not afraid of death. He would be given a comer of the foreign field.

The Solder In The Poem The Solder Is Bihar Board Class 12 English Question 2.
If at all he dies in the battle, how would he like to be remembered?
Answer:
If at all he dies in the battle, he would like to be remembered as an unforgettable soldier who never feared death. He would be given flowers of love and buried in some comer of land which is part of England.

The Soldier Brooke Analysis Bihar Board Class 12 English Question 3.
How can ‘some corner of a foreign field’ be “forever England?”
Answer:
His (poet’s) grave will be in some comer of a foreign land. In that way, it will be “forever England”.

The Soldier Poem Summary In Hindi Bihar Board Class 12 English Question 4.
“In that rich earth, a richer dust concealed”. What does ‘dost’ stand for?
Answer:
In this sentence of the poem ‘In that rich earth a richer dust concealed’ for the mortals remains of the poet, after his death in the war-field. Dust also stands for those persons who avoid war and wanted to live a peaceful life. They never quarreled for anything.

Soldier Questions And Answers Bihar Board Class 12 English Question 5.
What is meant by the phrase’A pulse in the eternal mind’?
Answer:
The phrase ‘A pulse in the eternal mind’ indicates a long-cherished desire. The poet wants to say that there must be a pulse in the eternal mind that works to avoid war.

Long Answer Questions 

The Soldier By Rupert Brooke Questions Bihar Board Class 12 English Question 1.
Do you think that the title of the poem is appropriate? Give reasons.
Answer:
The title of the poem is quite appropriate and meaningful. It revolves around the central theme of the poem which moves about a patriotic soldier who is airing (expressing) his keen desire of martyrdom.

The Soldier Brooke Exercises Bihar Board Class 12 English Question 2.
Discuss the main ideas contained in the first eight lines, i.e., octave.
Answer:
Poet is watching (observing) the death of a soldier which happens so often in a Warfield. Poet wants himself to be laid to rest in that foreign land where he attains martyrdom. This place is as much part of England as he himself is. Poet expresses his indebtedness to his motherland.

The Soldier Poem Bihar Board Class 12 English Question 3.
What do you understand by patriotism? Is this a patriotic poem? Discuss.
Answer:
Patriotism means love and emotions for the country. It is the spirit to do anything for the welfare and security of the country. It is, of course, an
important factor indicating deep feelings for the motherland. It is also a great human character and a topmost point of all virtues. This is really a patriotic poem. Poet expresses his immense love and firm devotion towards England.

Question 4.
Give in short the summary of the poem, “The Soldier” in your own words. [B.M. 2009 A]
Or, Write a short note on the poem, “The Soldier”. [B.M. 2009 A]
Answer:
“The Soldier” is a beautiful sonnet composed by Rupert Brooke, a war poet, In this sonnet the poet describes the bubbling sense of patriotism of a soldier who goes abroad to fight for his country. An English Soldier is fighting in a foreign country. Life is uncertain in the battlefield. The Soldier says that if he dies in a foreign country, he will be buried there. He feels that the piece of land where he will be buried will always be England i.e. his country. It will always be England because he was bom and brought up in this country. The soldier expresses his gratefulness to his country for everything he got there – the road’, the flowers, the English air, the English river and sun rays. He also expresses his obligation to his country for giving him noble thought, happy dreams and laughter learned from his friends.

The soldier, therefore, wishes to be remembered after his death as a patriotic over of his motherland, which is England where he was bom and brought up. Even in his death, he would feel peace in his heart and proud of his noble act, because he died for his country. Since the poet himself was a soldier he successfully expresses in vivid language the feeling of a soldier. Patriotism is a common feeling but it certainly intensified in times of war and foreign aggression, when a person strongly feels his link with the soil of his nation which has marvelously been expressed by Rupert Brooke.

Question 5.
How many times does the poet use ‘England’ in the poem? What does it show?
Answer:
In the poem, the poet has used England four times and English two times. It shows his great patriotic feeling, zeal and ultimate desire to sacrifice his life for his beloved country.

Question 6.
How can you show that you love your country’?
Answer:
I will be ready to sacrifice my life for the sake of my country, wherever required. I will maintain the honour of my motherland. I will also contribute to the prosperity of the country with the utmost enthusiasm.

Question 7.
What is a sonnet? Comment on the Language of the prescribed poem, Also mentions its rhyme scheme.
Answer:
A poem consisting of 14 lines is a “sonnet”. The first eight lilies are called octave and the last six lines are known as sestet. The octave establishes some issues and sestet resolves it. It is a concentrated expression of a single thought, feeling or situation, subjectivity, sincerity, melody, music, reflection, and spontaneity. These are some prominent characteristics and features of a sonnet. This poem, “The Soldier” is rhythmic. Its rhyme scheme is suitably and simultaneously arranged in a way pleasant to hear.

C. 3. Composition

Write a short essay in about 100 words on the following:
(a) Life of a soldier.
Answer:
A soldier’s life is full of hardship. He lives away from his home and family so that we may live in our home with our family. They give all sacrifice so that we and our country remain in peace and harmony. The lead a very tough life. They eat and drink almost anything they get in their way but it doesn’t want them because of the strong patriotic feeling they have for their nation. They maintain a highly disciplined life. They prove to be a source of inspiration. That is why they get great respect all over the world.

(b) War widows.
Answer:
There is no war that has given a permanent solution. It causes loss and destruction of life and property for both the country involved in the war. It is truly said that war is quaint and curious. An unavoidable scene and the fact of wars are the war widows. Both sides lose many of their soldiers whose wives become widows. Well, even their life is of great respect in society. However, practically they suffer a lot. The government promises a lot but does not do as much as they should. But we should really see that they are respected and all their needs are fulfilled.

D. Word Study :
D.2. Word-formation

Read the following line carefully :
A body of England’s, breathing English air, Mark the use of ‘England’ and ‘English’, in the line given above. Write adjectives showing nationality, against the names of the countries given below:
Pakistan, America, Japan, Nepal, Australia, Newzealand, West Indies, Korea, China, Iran
Answer:
Pakistan — Pakistani
America — American
Japan — Japanese
Nepal — Nepali
Australia — Australian
Newzealand — Newzealandian
West Indies — West Indian
Korea — Korean
China — Chinese
Iran — Irani

Ex. 1. Write the antonyms of the words given below:
die, foreign, roam, evil, eternal, gentleness, peace, heaven, aware, concealed
Answer:
die — birth
foreign — domestic
roam — still
evil — good
eternal — internal
gentleness — gentleful
peace — peaceless
heaven — hell
aware — ignore
concealed—revealed

E. Grammar 

Ex. 1. Read the following lines from the poem carefully:
(i) If I should die, think only of this me.
(ii) There shall be……………
Can, could, may, might, must, shall, should, will, would – these are modals. They have different meanings in different situations. In the first sentence given above, ‘should’ suggest a condition or probability. Similarly, shall in the second sentence suggests ‘future time’.

Fill in the blanks with suitable modals to complete the sentences:
(i) Amod………….. complete his homework in an hour, (ability)
(ii) Students………… remain in the discipline during the period, (compulsion)
(iii)…………………. you succeed in life, (wish)
(iv) It…………………… rain today, (possibility)
(v) What…………………. I do in this uncommon situation! (advice)
(vi) You……………….. to take proper care of your old parents, (moral duty)
(vii)If Chhabi had participated in the dance competition, she……………… has won the admiration of the audience, (a possibility that did not realise)
(viii) In evening……………… they go out for a walk, (habit)
(ix)…………… you, please, bring a cup of tea for me? (polite request)
(x) Safdar……………….. be in Delhi in the first week of January, (future time)
Answer:
(i) can (ii) must (iii) must (iv) may (v) should (vi) ought (vii) might (viii) used to (ix) will (x) will.

Comprehension Based Questions with Answers

1. Read the following extract or poetic piece and answer the question that follows [B.M.2009A]
If I should die, think only this of me;
That there’s some corner of a foreign field That is forever England. There shall be In that rich earth a richer dust concealed;
A dust whom Engla id bore, shaped, made aware,
Gave, once her flowers to love, her ways to roam,
A body of England’s breathing English air,
Washed by the river, blest by suns of home,

Question:
l. Where is the soldier fighting and to which country does he belong to?
2. Why does he remember his country?
3. What does the soldier fear?
4. What will happen to that part of the land where he would be buried?
5. What did England give to the soldier?
Answer:
1. He is fighting in a foreign country. He belongs to England. He is an English Soldier.
2. He remembers his country with fondness because he was bom and brought up there.
3. The soldier fears his death because life in battle-fields is always uncertain.
4. The part of a foreign land where he would be buried would become the part and parcel of England.
5. England bore and shaped his life. England gave him flowers to love, ways to roam, and the air to breathe.

Q. 2. Read the following extract or poetic piece and answer the question that follows: [B.M.2009A]
And think, this heart, all evil shed away,
A pulse in the eternal mind, no less
Gives, somewhere back the thoughts by England given;
Her sights and sounds; dreams happy as her day;
And laughter learned of friends; and gentleness,
In hearts at peace, under an English heaven.

Questions:
1. Name the poem and the poet?
2. What sort of the heart is, of the soldier?
3. What are the thoughts England has given?
4. What sights and sounds of England blessed him happy dreams?
5. What obligation he expresses to his country “England”?
Answer:
1. The name of the poem is “The Soldier” and the poet who wrote this poem
is Rupert Brooke.
2. The heart of the soldier is free from evils. He has a deep love for his motherland.
3. His country England has given him noble thoughts, patriotism for his nation, happy dreams. He learned laughter from his friends.
4. His country England has given him the pleasant sights and sounds such as the flowers, the English air, the English rivers and sunrays.
5. The soldier expresses his obligation to his country, as he was bom and brought up in his country and he got everything whatever he needed.

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Poem 6 The Soldier English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन

Bihar Board Class 11 History लेखन कला और शहरी जीवन Textbook Questions and Answers

 

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

लेखन कला और शहरी जीवन पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे?
उत्तर:
यह बात निःसंकोच कही जा सकती है कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे। इस बात के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं

  • प्राकृतिक उर्वरता उन्नत खेती का आधार बनी।
  • प्राकृतिक उर्वरता के कारण घास-भूमियाँ अस्तित्व में आईं जिससे पशुपालन करने को बल मिला।
  • खेती तथा पशुपालन से मनुष्य का जीवन स्थायी बना क्योंकि अब यह खाद्य-उत्पादक बन गया था। अब उसे भोजन की तलाश में स्थान-स्थान घूमने की जरूरत नहीं थी।
  • जीवन के स्थायी बनने पर कृषक समुदाय अस्तित्व में आए जो झोपड़ियाँ बनाकर साथ-साथ रहने लगे। इस प्रकार गाँव अस्तित्व में आए।
  • खाद्य उत्पादन बढ़ने पर वस्तु-विनिमय की प्रक्रिया आरंभ हो गई। परिणामस्वरूप गाँवों का आकार बढ़ने लगा।
  • नये-नये व्यवसाय भी आरंभ हो गए जो शहरीकरण के प्रतीक थे।

लेखन कला और शहरी जीवन Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारम्भ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन-कौन सी बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हई?

  1. अत्यंत उत्पादक खेती
  2. जल-परिवहन
  3. धातु और पत्थर की कमी
  4. श्रम विभाजन
  5. मुद्राओं का प्रयोग
  6. राजाओं के सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया।

उत्तर:
शहरीकरण के लिए आवश्यक दशाएँ –

  • अत्यंत उत्पादक खेती
  • जल परिवहन
  • श्रम विभाजन।

शहरों के विकास के फलस्वरूप विकसित दशाएँ –

  • धातु और पत्थर की कमी
  • मुद्राओं का प्रयोग
  • राजाओं की सैन्य शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बनाया।

प्रश्न 3.
यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे?
उत्तर:
खानाबदोश पशुचारक निम्नलिखित कारणों से शहरी जीवन के लिए खतरा थे –

1. ये लोग कई बार अपनी भेड़ – बकरियों को पानी पिलाने के लिए बोये हुए खेतों में से होते हए ले जाते थे। इससे खेती को क्षति पहुँचती थी और उत्पादन कम हो जाता था। कभी-कभी ये किसानों के गाँवों पर हमला कर देते थे और उनका माल लूट ले जाते थे। यह अव्यवस्था शहरी जीवन में बाधक थी।

2. दूसरी ओर कभी – कभी बस्तियों में रहने वाले लोग भी इनका रास्ता रोक देते थे और उन्हें अपने पशुओं को नदी या नहर तक नहीं ले जाने देते थे। इस प्रकार भी झगड़े होते थे। खानबदोश समुदायों के पशुओं के अतिचारण से बहुत सी उपजाऊ भूमि बंजर हो जाती थी।

प्रश्न 4.
आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे?
उत्तर:
कुछ पुराने मंदिर साधारण घरों से अलग किस्म के नहीं होते थे क्योंकि मंदिर भी किसी देवता का घर होता था। परंतु मंदिरों की बाहरी दीवारें विशेष अंतरालों के बाद भीतर और बाहर की ओर मुड़ी होती थी। यही मंदिरों की मुख्य विशेषता थी। सामान्य घरों की दीवारें ऐसी नहीं होती थीं।

प्रश्न 5.
शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन-सी नयी संस्थाएँ अस्तित्व में आई? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा के पहल पर निर्भर थीं ?
उत्तर:
शहरी जीवन आरंभ होने के बाद कई नई संस्थाएँ अस्तित्व में आईं। इनमें से मुख्य थीं –

  • मंदिर
  • विद्यालय
  • लिपिक अथवा पट्टिका लेखक
  • व्यापार केंद्र
  • स्थायी सेना
  • शिल्पकार
  • वस्तुविद्
  • मूर्तिकार इत्यादि। इन संस्थानों में से मंदिर, व्यापार और लेखन राजा के पहल पर निर्भर थे।

प्रश्न 6.
किन पुरानी कहानियों से हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक मिलती है?
उत्तर:
मेसोपोटामिया यूनानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है-दो नदियों के बीच का प्रदेश। इराक में दजला और फरात नाम की दो नदियाँ बहती हैं। इनके मध्य में स्थित घाटी को मेसोपोटामिया कहकर पुकारा जाता है। प्राचीन काल में यहाँ एक-एक करके तीन सभ्यताएँ फली-फूलीं। ये सभ्यताएँ थीं-सुमेरिया की सभ्यता, बेबीलोनिया की सभ्यता और असीरिया की सभ्यता। इन तीनों का सामूहिक नाम मेसोपोटामिया की सभ्यता है। इस सभ्यता के सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक जीवन का वर्णन इस प्रकार हैं –

1. सामाजिक जीवन-मेसोपोटामिया का समाज तीन वर्गों में बाँटा हुआ था। पहले दो वर्गों में उच्च लोग शामिल थे। इन वर्गों के लोग अच्छे मकानों में रहते थे, अच्छे वस्त्र पहनते थे और उन्हें अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। तीसरे वर्ग के लोग दास थे और वे झोपड़ियों में रहते थे। मेसोपोटामिया के समाज में स्त्रियों का निम्न स्थान था।

2. आर्थिक जीवन-मेसोपोटामिया के लोगों का आर्थिक जीवन भी काफी उन्नत था। वे लोग कृषि करते थे। कृषि उन्नत थी। उन्होंने सिंचाई के लिए नदियों पर बाँध बनाए थे। वे टीन, ताँबे तथा काँसे के प्रयोग से परिचित थे। वे अच्छे शिल्पी भी थे। उन्हें कपड़ा बुनना, भवन, आभूषण तथा अन्य अनेक चीजें बनानी आती थी। वे अपने पड़ोसी देशों के साथ व्यापार भी करते थे।

3. धार्मिक जीवन-मेसोपोटामिया के लोग धर्मपरायण भी थे। मंदिर ईटों से बनाए जाते थे तथा समय के साथ बड़े होते गए। एक प्रकार को. मीनार नुमा मंदिर “जिगुरात” नगर के पवित्र क्षेत्र में ऊँची पहाड़ी पर ईंटों से बनाए जाते थे। उनके प्रमुख देवता समय (सूर्य), सिन (चंद्रमा), अनु (आकाश देव), एकलिन (वायु देव) आदि थे। उनके देवताओं की संख्या हजारों में थी। बाबली लोगों का मुख्य देवता मरदुक और प्रमुख देवी इस्तर थी। असीरी लोगों के मुख्य देवता का नाम आसुर था। समाज में पुजारियों का बड़ा प्रभाव था।

Bihar Board Class 11 History लेखन कला और शहरी जीवन Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मेसोपोटामिया का क्या अर्थ है?
उत्तर:
मेसोपोटामिया यूनानी भाषा के दो शब्दों ‘मेसोस’ (Mesos) तथा ‘पोटैमोस’ (Potamos) से बना है। मेसोस का अर्थ है मध्य तथा पोटैमोस का अर्थ है नदी । इस प्रकार मेसोपोटामिया का अर्थ नदियों के मध्य स्थित प्रदेश है।

प्रश्न 2.
मेसोपोटामिया के दो स्थानों के नाम बताएँ जहाँ लंबे समय तक उत्खनन कार्य चला?
उत्तर:
उरूक तथा मारी। प्रश्न 3. मेसोपोटामिया के इतिहास के कौन-कौन से स्रोत उपलब्ध हैं? उत्तर:इमारतें, मूर्तियाँ, आभूषण, औजार, करें, मुद्राएँ, लिखित दस्तावेज आदि।

प्रश्न 4.
मेसोपोटोमिया के प्राचीनतम नगरों का निर्माण कब शुरू हुआ?
उत्तर:
कांस्य युग अर्थात लगभग 3000 ई.पू. में मेसोपोटामिया के प्राचीनतम् नगरों का निर्माण शुरू हुआ।

प्रश्न 5.
मेसोपोटामिया के लोग अपने लिए आवश्यक धातुएँ तथा अन्य पदार्थ कहाँ से मंगवाते थे। इसके बदले में वे क्या निर्यात करते थे?
उत्तर:
मेसोपोटामिया के लोग अपने लिए आवश्यक धातुएँ तथा अन्य पदार्थ तुर्की और ईरान अथवा खाड़ी पार के देशों से मंगवाते थे। इसके बदले में वे कपड़ा तथा कृषि उत्पाद, निर्यात करते थे।

प्रश्न 6.
मेसोपोटामिया के लोग लिखने के लिए कागज के रूप में किस चीज का प्रयोग करते थे?
उत्तर:
मिट्टी की पट्टिकाओं का

प्रश्न 7.
मेसोपोटामिया की सबसे पुरानी ज्ञात भाषा कौन-सी थी?
उत्तर:
सुमेरियन

प्रश्न 8.
मेसोपोटामिया में साक्षरता कम क्यों थी?
उत्तर:
मेसोपाटामिया की लिपि में चिह्नों की संख्या सैकड़ों में थी। इसके अतिरिक्त ये चिह्न बहुत ही जटिल थे। इसी कारण मेसोपोटामिया में साक्षरता दर कम थी।

प्रश्न 9.
मेसोपोटामिया की विचारधारा के अनुसार व्यापार और लेखन की व्यवस्था सर्वप्रथम किसने की?
उत्तर:
राजा एनमर्कर ने

प्रश्न 10.
मेसोपोटामिया के दो देवी-देवताओं का नाम बताओ।
उत्तर:
चन्द्र देवता उर तथा प्रेम एवं युद्ध की देवी इन्नाना।

प्रश्न 11.
मेसोपोटामिया के पुराने मंदिरों तथा घरों में एक अंतर बताइए।
उत्तर:
मंदिरों की बाहरी दीवारें एक विशेष अवधि के बाद भीतर की ओर तथा फिर बाहर की ओर मुड़ी होती थी। साधारण घरों की दीवारों में यह विशेषता नहीं थी।

प्रश्न 12.
मेसोपोटामिया में खेतों, मत्स्य क्षेत्रों तथा लोगों के पशुधन का स्वामी किसे माना जाता था?
उत्तर:
आराध्य देव को

प्रश्न 13.
मेसोपोटामिया के लोगों के धर्म की कोई दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:

  • मेसोपोटामिया के समुदायों का अपना-अपना इष्ट देव होता था।
  • लोग देवी देवताओं को अन्न, दही तथा मछली अर्पित करते थे।

प्रश्न 14.
शहरी जीवन की शुरूआत कहाँ से हुई थी ? यह प्रदेश किन दो नदियों के मध्य स्थित है?
उत्तर:
शहरी जीवन की शुरूआत मेसोपोटामिया से हुई। यह प्रदेश इराक गणराज्य की फरात तथा दजला नदियों के मध्य स्थित है।

प्रश्न 15.
मेसोपोटामिया की सभ्यता अपनी किन विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
अपनी संपन्नता, शहरी जीवन, विशाल एवं समृद्ध साहित्य, गणित तथा खगोलविद्या के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 16.
मेसोपोटामिया में पुरातत्वीय खोजों की शुरूआत कब हुई?
उत्तर:
1840 के दशक में हुई।

प्रश्न 17.
यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि बाईबल के प्रथम भाग ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ में मेसोपाटोमिया का कई संदों में उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 18.
शहर अथवा कस्बे किस प्रकार अस्तित्व में आते हैं?
उत्तर:
जब किसी अर्थव्यवस्था में खाद्य उत्पादन के अतिरिक्त अन्य आर्थिक गतिविधियाँ विकसित होने लगी हैं तब किसी एक स्थान पर जनसंख्या का घनत्व बढ़ जाता है फलस्वरूप कस्बे अस्तित्व में आते हैं।

प्रश्न 19.
वार्का शीर्ष नामक मूर्तिकला का प्रसिद्ध नमूना मेसोपोटामिया के किस नगर से मिला है? इसे किस चीज से बनाया जाता था ?
उत्तर:
वार्का शीर्ष नाम मूर्तिकला का प्रसिद्ध नमूना मेसोपोटामिया के उरूक नगर में मिला है। इसे सफेद संगमरमर को तराश कर बनाया गया था।

प्रश्न 20.
कांसा कौन-सी दो धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है?
उत्तर:
ताँबा तथा राँगा (टिन) धातुओं के मिश्रण से

प्रश्न 21.
लेखन या लिपि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
लेखन या लिपि से अभिप्राय उन ध्वनियों से है जो संकेतों या चिह्नों के रूप में लिखी जाती हैं।

प्रश्न 22.
मेसोपोटामिया के लोगों के लिपि कैसी थी?
उत्तर:
कोलाकार अथवा क्यूनीफार्।

प्रश्न 23.
एकल परिवार क्या होता है?
उत्तर:
एकल परिवार में एक पुरुष, उसकी पत्नी और उनके बच्चे शामिल होते थे।

प्रश्न 24.
इस तथ्य की पुष्टि किस बात से होती है कि मेसोपोटामिया (उर) के समाज में धन-दौलत का अधिकतर भाग एक छोटे से वर्ग में केन्द्रित था?
उत्तर:
अधिकतर बहुमूल्य वस्तुएँ राजाओं तथा रानियों की कब्रों तथा समाधियों में दबी हुई मिली हैं। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि मेसोपोटामिया के समाज में धन-दौलत का अधिकतर भाग एक छोटे-से वर्ग में केंद्रित था।

प्रश्न 25.
शहरी अर्थव्यवस्था के लिए कुम्हार के चाक का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
कुम्हार द्वारा चाक के प्रयोग से बर्तन बनाने के काम ने एक कार्यशाला का रूप ले लिया। अब एक जैसे कई बर्तन एक साथ बनाए जाने लगे।

प्रश्न 26.
बेबीलोनिया को उच्च संस्कृति का केंद्र क्यों माना जाता था?
उत्तर:
बेबीलोनिया को उच्च संस्कृति का केंद्र इसलिए माना जाता था क्योंकि यहाँ के कई नगर पट्टिकाओं के विशाल संग्रह के लिए विख्यात थे।

प्रश्न 27.
बेबीलोनिया को असीरियाई आधिपत्य से कब और किसने मुक्त कराया?
उत्तर:
दक्षिणी कछार के एक शूरवीर नैबोपोलास्सर ने 625 ई.पू. में मुक्त कराया।

प्रश्न 28.
स्वतंत्र बेबीलोन का अंतिम शासक कौन थे ? उसका एक कार्य बताओ।
उत्तर:
स्वतंत्र बेबीलोन का अंतम शासक नैबोनिडस था। उसने अक्कद के राजा सारगोन (Sargon) की खंडित मूर्ति की मरम्मत करवाई।

प्रश्न 29.
बेबीलोन नगर की कोई दो महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • बेबीलोन नगर का क्षेत्रफल 850 हैक्टेयर से अधिक था
  • इसमें बड़े-बड़े राजमहल और मंदिर स्थित थे।

प्रश्न 30.
हौज क्या होता है?
उत्तर:
हौज जमीन में ढका हुआ एक गड्ढा होता है। इसमें पानी तथा मल जाता है।

प्रश्न 31.
उर नगरों में शवों का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता था?
उत्तर:
शवों को भूमि के नीचे दफनाया जाता था। प्रश्न 32. मारी के राजाओं ने वहाँ किस देवता के लिए मंदिर बनवाया ? उत्तर:स्टेपी क्षेत्र के देवता डैगन (Dagan) के लिए।

प्रश्न 33.
मारी स्थित-जिमरीलिम का राजमहल बहुत ही विशाल था। कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • यह राजमहल 2.4 हैक्टेयर के क्षेत्र में फैला था।
  • इसमें 260 कक्ष बने हुए थे।

प्रश्न 34.
गिल्गेमिश महाकाव्य क्या है। यह किस बात के महत्व को दर्शाता है?
उत्तर:
गिल्गेमिश महाकाव्य 12 पट्टिकाओं परं लिखा एक महाकाव्य है। यह मेसोपोटामिया के नगरों के महत्त्व को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि मेसोपोटामिया के लोगों को अपने नगरों पर बहुत अधिक गर्व था।

प्रश्न 35.
असुरबनिपात कौन था? उसकी दो उपलब्धियाँ बताएँ।
उत्तर:
असुरबनिपाल असीरियाई अंतिम राजा था। उपलब्धियाँ –

  • उसने अपनी राजधानी निनवै में एक पुस्तकालय की स्थापना की।
  • उसने इतिहास, महाकाव्य, साहित्य, ज्योतिष आदि की पट्टिकाओं को इकट्ठा करवाया।

प्रश्न 36.
दक्षिणी मेसोपोटामिया में विकसित शहर कौन-कौन से तीन प्रकार के थे?
उत्तर:

  • मंदिरों के चारों ओर विकसित हुए शहर।
  • व्यापार केन्द्रों के रूप में विकसित हुए शहर।
  • शाही शहर।

प्रश्न 37.
क्यूनीफार्म शब्द कैसे बना है?
उत्तर:
क्यूनीफार्म शब्द लैटिन भाषा के दो शब्दों क्यनियस तथा फोर्मा से मिलकर बना है। क्यूनियस का अर्थ है बूंटी तथा फोर्मा का अर्थ है ‘आकार’।

प्रश्न 38.
आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे।
उत्तर:
क्योंकि मंदिर भी किसी देवता का घर ही होता है। इसीलिए पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे।

प्रश्न 39.
संसार को मेसोपोटामिया की सबसे बड़ी देन क्या है?
उत्तर:
उसकी कालगणना तथा गणित की विद्वतापूर्ण परंपरा।

प्रश्न 40.
मेसोपोटामिया के लोगों ने समय का विभाजन किस प्रकार किया हुआ था?
उत्तर:
उनका समय विभाजन चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित था। इसके अनुसार एक वर्ष को 12 महीनों, एक महीने को 4 हफ्तों, एक दिन को 24 घंटों तथा । घंटा को 60 मिनट में बाँटा गया था।

प्रश्न 41.
सुमेर के व्यापार की पहली घटना को किस व्यक्ति से जोड़ा जाता है?
उत्तर:
उरूक शहर के एक प्राचीन शासक एनमर्कर (Enmerkar) से।

प्रश्न 42.
2400 ई.पू. के बाद सुमेरियन भाषा का स्थान किस भाषा ने ले लिया?
उत्तर:
अक्कदी भाषा ने।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
शहरी अर्थव्यवस्था में एक सामाजिक संगठन होना क्यों जरूरी है?
उत्तर:
शहरी अर्थव्यवस्था में एक सामाजिक संगठन का होना भी जरूरी है। इसके निम्नलिखित कारण हैं –

  1. शहरी विनिर्माताओं के लिए ईंधन, धातु, विभिन्न प्रकार के पत्थर, लकड़ी आदि जरूरी चीजें भिन्न-भिन्न जगहों से आती हैं। इसके लिए संगठित व्यापार और भंडारण की आवश्यकता होती है।
  2. शहरों में अनाज और अन्य खाद्य-पदार्थ गाँवों से आते हैं। नगरो में उनके संग्रह तथा वितरण के लिए व्यवस्था करनी होती है।
  3. इसके अतिरिक्त और भी अनेक प्रकार के क्रियाकलापों में तालमेल बैठाना पड़ता है। उदाहरण के लिए मुद्रा काटने वालों को केवल पत्थर ही नहीं, उन्हें तराशने के लिए औजार तथा बर्तन भी चाहिए।
  4. शहरी अर्थव्यवस्था को अपना हिसाब-किताब भी लिखित में रखना होता है। ये सभी कार्य आदेश और आदेश पालन द्वारा पूरे होते हैं। यही निश्चित सामाजिक संगठन की विशेषता है।

प्रश्न 2.
शहरी जीवन में श्रम-विभाजन का क्या महत्व है?
अथवा
श्रम-विभाजन शहरी जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता है। उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
श्रम – विभाजन का अर्थ है – अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति एक-दूसरे के उत्पादन अथवा सेवाओं द्वारा करना। शहरी जीवन में श्रम-विभाजन का होना बहुत ही आवश्यक है। इसका कारण यह है कि शहरी अर्थव्यवस्था में खाद्य उत्पादन के अतिरिक्त व्यापार तथा तरह-तरह की सेवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परंतु नगर के लोग आत्मनिर्भर नहीं होते । वह गाँवों या नगर के अन्य लोगों द्वारा उत्पन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए उन पर आश्रित होते हैं। उनमें आपस में बराबर लेन-देन होता रहता है। उदाहरण के लिए एक पत्थर की मुद्रा बनाने वाले को पत्थर उकेरने के लिए काँसे के औजारों की आवश्यकता पड़ती है। वह स्वयं ऐसे औजार नहीं बना सकता।

वह यह भी नहीं जानता कि वह मुद्राओं के लिए आवश्यक रंगीन पत्थर कहाँ से प्राप्त करे। उसकी विशेषज्ञता तो केवल उकेरने तक ही सीमित होती है। वह व्यापार करना नहीं जानता। काँसे के औजार बनाने वाला भी ताँबा या राँगा (टिन) लाने के लिए स्वयं बाहर नहीं जाता। ये सभी कार्य एक-दूसरे की सहायता से ही पूरे होते हैं।

प्रश्न 3.
मेसोपोटामिया के दक्षिणी रेगिस्तानी भाग का क्या महत्व था?
उत्तर:
मेसोपोटामिया का दक्षिणी भाग रेगिस्तानी है। इस रेगिस्तान में फरात और दजला नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ पहाड़ों से निकलकर अपने साथ उपजाऊ बारीक मिट्टी लाती रही हैं। जब इन नदियों में बाढ़ आती है अथवा जब इनके पानी को सिंचाई के लिए खेतों में ले जाया जाता है तब इनके द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी खेतों में जमा हो जाती है। फरात नदी रेगिस्तान में प्रवेश करने के बाद कई धाराओं में बँट जाती है। कभी-कभी इन धाराओं में बढ़ आ जाती है। प्राचीन काल में ये धाराएँ सिंचाई की नहरों का काम देती थीं। इनसे आवश्यकता पड़ने पर गेहूँ, जौ और मटर या मसूर के खेतों की सिंचाई की जाती थी, इसलिए वर्षा की कमी के बावजूद सभी पुरानी व्यवस्थाओं में दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती सबसे अधिक उपज देती थी।

प्रश्न 4.
मेसोपोटामिया के आयात-निर्यात पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मेसोपोटामिया खाद्य-संसाधनों में अवश्य समृद्ध था, परंतु वहाँ खनिज संसाधनों का अभाव था। दक्षिण के अधिकांश भागों में औजार, मोहरें (मद्राएँ) और आभूषण बनाने के लिए पत्थर की कमी थी। इराकी खजूर और पोपलार के पेड़ों की लकड़ी गाड़ियाँ, गाड़ियों के लिए पहिए या नावें बनाने के लिए अच्छी नहीं थी। औजार, पात्र या गहने बनाने के लिए कोई धातु उपलब्ध नहीं थी। इसलिए प्राचीन काल में मेसोपोटामिया के निवासी संभवत: लकड़ी, ताँबा, राँगा, चाँदी, सोना, सीपी और विभिन्न प्रकार के पत्थर तुर्की तथा ईरान अथवा खाड़ी-पार के देशों से मंगवाते थे।

इन देशों के पास खनिज संसाधन की कोई कमी नहीं थी, परंतु वहाँ खेती करने की संभावना कम थी। अत: मेसोपोटामिया आने वाली वस्तुओं के बदले इन देशों को कपड़ा तथा कृषि उत्पाद भेजे जाते थे। वस्तुओं का नियमित रूप से आदान-प्रदान तभी संभव था जब इसके लिए कोई सामाजिक संगठन होता । दक्षिणी मेसोपाटामिया के लोगों ने ऐसे संगठन स्थापित करने की शु की।

प्रश्न 5.
बाईबल में उल्लखित जलप्लावन की कहानी क्या बताती है?
उत्तर:
बाईबल के अनुसार प्राचीन काल में पृथ्वी पर संपूर्ण जीवन को नष्ट करने वाला जलप्लावन हुआ था। इस महान् बाढ़ भी कहा जाता है। परंतु परमश्वर पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने नोआ (Naoh) नाम के एक व्यक्ति को चुना नोआ ने एक बहुत ही बड़ी नाव बनाई और उसमें सभी जीव-जंतुओं का एक-एक जोड़ा रख लिया। जलप्लावन होने पर नाव में रखे सभी जोड़े सुरक्षित बच गए, जबकि शेष सब कुछ नष्ट हो गया।

प्रश्न 6.
इराक भौगोलिक विविधता का देश है। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इराक वास्तव में भौगोलिक विविधता वाला देश है। इसके पूर्वोत्तर भाग में हरे-भरे, ऊँचे-नीचे मैदान हैं। ये मैदान धीरे-धीरे वृक्षाच्छादित पर्वत-श्रृंखला के रूप में फैलते जाते हैं। यहाँ स्वच्छ झरने तथा जंगली फूल भी उगाये जाते हैं। यहाँ अच्छी फसल के लिए पर्याप्त वर्षा हो जाती है। उत्तर में ऊँची भूमि है जहाँ ‘स्टेपी’ घास के मैदान हैं। यहाँ पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। सर्दियों की वर्षा के बाद भेड़-बकरियाँ यहाँ उगने वाली छोटी-छोटी झाड़ियों और घास से अपना भरण-पोषण करती हैं। पूर्व में दजला की सहायक नदियाँ परिवहन का अच्छा साधन हैं। देश का दक्षिणी भाग एक रेगिस्तान है।

प्रश्न 7.
2600 ई. पू. से इसवी सन् की पहली शताब्दी तक मेसोपोटामिया के लेखन और भाषा में क्या-क्या परिवर्तन आये?
उत्तर:
1. 2600 ई. पू. के आसपास मेसोपोटामिया में लिपि कीलाकार हो गई । लेखन की भाषा सुमेरियन थी। मेसोपोटामिया की कीलाकार लिपि का चिह किसी एक व्यंजन या स्वर को व्यक्त नहीं करता था, बल्कि यह किसी अक्षर समूह की ध्वनि का प्रतीक होता था। इसलिए मेसोपोटामिया के लिपिक को सैकड़ों चिह सीखने पड़ते थे, और उसे गीली पट्टी पर सूखने से पहले ही लिखना होता था । लेखन कार्य के लिए विशेष कुशलता की आवश्यकता भी होती थी।

2. अब लेखन का प्रयोग केवल हिसाब-किताब रखने के लिए नहीं, बल्कि शब्द-कोश बनाने, भूमि के हस्तांतरण को कानूनी मान्यता प्रदान करने, राजाओं के कार्यों का वर्णन करने तथा कानून में उन परिवर्तनों को उद्घोषित करने के लिए किय जाने लगा जो देश की आम जनता के लिए बनाए जाते थे।

3. 2400 ई. पू. के बाद सुमेरियन भाषा का स्थान धीरे-धीरे अक्कदी भाषा ने ले लिया । अक्कदी भाषा में कीलाकार लेखन कार्य ईसवी सन् की पहली शताब्दी तक अर्थात् 2000 से भी अधिक वर्षों तक चलता रहा।

प्रश्न 8.
दक्षिणी मेसोपोटामिया में कृषि कई बार संकटों से घिर जाती थी ? इसके लिए कौन-कौन से कारक उत्तरदायी थे?
उत्तर:
भूमि में प्राकृतिक उपजाऊपन होने के बावजूद दक्षिणी मेसोपोटामिया में कृषि कई बार संकटों से घिर जाती थी। इसके लिए प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित दोनों प्रकार के कारक उत्तरदायी थे

प्राकृतिक कारक –

  • फरात नदी का प्राकृतिक धाराओं में किसी वर्ष तो बहुत अधिक पानी बह आता था और फसलों को डुबा देता था।
  • कभी-कभी नदी की धाराएँ अपना रास्ता बदल लेती थीं, जिससे खेत सूखे रह जाते थे।

मानव निर्मित कारक –

  • फरात नदी की धाराओं के ऊपरी प्रदेश में रहने वाले लोग अपने पास की जलधारा से इतना अधिक पानी ले लेते थे कि धारा के नीचे की ओर बसे हुए गाँवों को पानी ही नहीं मिल पाता था।
  • धारा के ऊपरी भाग में रहने वाले लोग अपने हिस्से की सारणी में से गाद (मिट्टी) भी नहीं निकालते थे। परिणामस्वरूप धारा का बहाव रूक जाता था और नीचे वालों का पानी नहीं मिलता था।

प्रश्न 9.
शहरी अर्थव्यवस्था के लिए कुशल परिवहन व्यवस्था की क्या भूमिका होती है? मेसोपोटामिया का उदाहरण दें।
उत्तर:
कुशल परिवहन व्यवस्था शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अनाज या काठ कोयला भारवाही पशुओं की पीठ पर रखकर या बैलगाड़ी में डालकर शहरों में लाना ले जाना बहुत कठिन होता है। इसका कारण यह है कि इसमें बहुत अधिक समय लगता है और पशुओं के चारे आदि पर भी काफी खर्चा आता है। शहरी अर्थ-व्यवस्था इसका बोझ उठाने के लिए सक्षम नहीं होती। शहरी अर्थ-व्यवस्था के लिए परिवहन का सबसे सस्ता साधन जलमार्ग ही होता है। अनाज के बोरों से लदी हुई नावें की धारा की गति अथवा हवा के वेग से चलती हैं, जिस पर कोई खर्चा नहीं आता।

प्राचीन मेसोपोटामिया की नहरें तथा प्राकृतिक जलधाराएँ छोटी बड़ी बस्तियों के बीच माल के परिवहन का अच्छा मार्ग थीं। फरात नदी उन दिनों व्यापार के लिए ‘विश्व-मार्ग’ के रूप में जानी जाती थी। इस परिवहन व्यवस्था ने मेसोपोटामिया के शहरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 10.
उरूक नगर में होने वाली तकनीकी प्रगति के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर:
शासक के आदेश से साधारण लोग पत्थर खोदने, धातु-खनिज लाने, मिट्टी से ईंटें बना कर मंदिर में लगाने तथा सुदूर देशों से मंदिर के लिए तरह-तरह का सामान लाने जैसे कामों में जुटे रहते थे।

इसके परिणामस्वरूप 3000 ई. प. के आसपास उरूक नगर में खूब तकनीकी प्रगति हुई।

  1. अनेक शिल्पों में काँसे के औजारों का प्रयोग होने लगा।
  2. वस्तुविदों ने ईंटों के स्तंभ बनाना सीख लिया क्योंकि अच्छी लकड़ी न मिल पाने के . कारण बड़े-बड़े कमरों की छतों के बोझ को संभालने के लिए मजबूत शहतीर नहीं बनाए जा सकते थे।
  3. सैकड़ों लोगों को चिकनी मिट्टी के शंकु (कोन) बनाने और पकाने के काम में लगाया गया था। शंकु को भिन्न-भिन्न रंगों में रंगकर मंदिरों की दीवारों में लगाया जाता था। इससे दीवारों पर विभिन्न रंग निखर उठते थे।
  4. मूर्तिकला के क्षेत्र में भी अत्यधिक उन्नति हुई। मूर्तियाँ मुख्यतः आयातित पत्थरों से बनाई जाती थीं।
  5. प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक युगांतकारी परिवर्तन आया। वह था-कुम्हार के चाक के निर्माण से। कुम्हार की कार्यशाला में एक साथ बड़े पैमाने पर दर्जनों एक जैसे बर्तन बनाए जाने लगे।

प्रश्न 11.
मेसोपोटामिया में मुद्राओं के निर्माण और उनके महत्व का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मेसोपोटामिया में 1000 ई. पू. के अंत तक पत्थर की बेलनाकार मुद्राएँ बनाई जाने लगी थीं। इनके बीजों-बीच एक छेद होता था। इस छेद में एक तीली लगाकर मुद्रा को गीली मिट्टी पर घुमाया जाता था। इस प्रकार उनसे लगातार चित्र बनाया जाता था। मुद्राएँ अत्यंत कुशल कारीगरों द्वारा उकेरी जाती थीं। कभी-कभी उनमें ऐसे लेख होते थे जैसे-स्वामी का नाम. उसके. इष्ट देव का नाम और उसकी अपनी पदीय स्थिति आदि।

मोहर को किसी कपड़े की गठरी या बर्तन के मुँह को चिकनी मिट्टी से लीप-पांतकर उस पर घुमाया जा सकता था। इस प्रकार उसमें अंकित लिखावट मिट्टी की सतह पर छप जाती थी। मोहर लगी गठरी या बर्तन में रखी वस्तुओं को सुरक्षित रखा जा सकता था। जब इस मोहर को मिट्टी से बनी किसी पट्टिका पर लिखे पत्र पर घुमाया जाता था तो वह मोहर उस पत्र की प्रामाणिकता की प्रतीक बन जाती थी।

प्रश्न 12.
मारी नगर में पशुचारकों पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
2000 ई. पू. के बाद मारी नगर शाही राजधानी के रूप में खूब फला-फूला। यह फरात नदी की उर्ध्वधारा पर स्थित है। इसके ऊपरी क्षेत्र में खेती और पशुपालन साथ-साथ चलते थे। फिर भी इस प्रवेश का अधिकांश भाग पेड़-बकरी चराने के लिए ही काम में लाया जाता था।

पशुचारकों को जब अनाज, धातु के औजारों आदि की जरूरत पड़ती थी तो वे अपने पशुओं, पनीर, चमड़ा तथा मांस आदि के बदले में चीजें प्राप्त करते थे। बाड़े में रखे जाने वाले पशुओं के गोबर से बनी खाद भी किसानों के लिए बहुत उपयोगी होती थी। फिर भी किसानों तथा गड़ेरियों के बीच कई बार झगड़े हो जाते थे।

प्रश्न 13.
मेसोपोटामिया का समाज और संस्कृति विभिन्न समुदायों के लोगों एवं संस्कृतियों का मिश्रण थी। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मेसोपोटामिया के समृद्ध कृषि प्रदेश में खानाबदोश समुदायों के झंड के झंड पश्चिमी मरूस्थल से आते रहते थे। ये गड़ेरिये गर्मियों में अपने साथ अपनी भेड़-बकरियाँ ले आते थे। वे फसल काटने वाले मजदूरों अथवा भाड़े के सैनिकों के रूप में आते थे और समृद्ध होकर यहीं बस जाते थे। उनमें से कुछ ने तो यहाँ अपना शासन स्थापित करने की शक्ति भी प्राप्त कर ली थी। ये लोग अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई, आर्मीनियन जाति के थे।

मारी के राजा एमोराईट समुदाय के थे। उनकी पोशाक वहाँ के मूल निवासियों से भिन्न होती थी। उन्होंने मेसोपोटामिया के देवी-देवताओं को सम्मान देने के साथ-साथ मारी नगर में स्टेपी क्षेत्र के देवता डैगन के लिए एक मंदिर भी बनवाया । इस प्रकार मेसोपोटामिया का समाज और संस्कृति भिन्न-भिन्न समुदायों के लोगों और संस्कृतियों का मिश्रण थी जिसने वहाँ की सभ्यता में जीवन-शक्ति उत्पन्न की।

प्रश्न 14.
जिमरीलिम के मारी स्थित राजमहल का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मारी का राजमहल 2.4 हेक्टेयर के क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत विशाल भवन था। इसमें 260 कक्ष बने हुए थे। वहाँ के शाही परिवार का निवास स्थान होने के साथ-साथ प्रशासन तथा कीमती धातुओं, आभूषण बनाने का मुख्य केंद्र भी था। अपने समय में यह इतना अधिक प्रसिद्ध था कि उसे देखने के लिए उत्तरी सीरिया का एक छोटा राजा आया था। राजा के भोजन की मेज पर प्रतिदिन भारी मात्रा में खाद्य पदार्थ रोटी, मांस, मछली, फल, मदिरा और बीयर शामिल होता था।

वह संभवतः अपने साथियों के साथ बड़े आँगन में बै भोजन करता था। राजमहल का केवल एक ही प्रवेश द्वारा था जो उत्तर की ओर स्थित था। महल में विशाल खुले प्रांगण सुन्दर पत्थरों से जड़े हुए थे। राजा विदेशी अतिथियों और अपने प्रमुख लोगों से उस कमरे में मिलता था जहाँ भित्ति चित्र बने हुए थे।

प्रश्न 15.
मेसोपोटामिया में लेखन कला का विकास कैसे हुआ?
उत्तर:
बोली जाने वाली ध्वनियों को लिखने के लिए जो संकेत या चिह्न निश्चित किए जाते हैं उसे लिपि कहा जाता है। मेसोपोटामिया के लोगों के पास भी अपनी लिपि थी। उन्होंने तब लिखना आरंभ किया जब समाज को अपने लेन-देन का स्थायी हिसाब रखने की जरूरत पड़ी क्योंकि शहरी जीवन में लेन-देन अलग-अलग समय पर होते थे और करने वाले कई लोग होते थे। सौदा भी कई प्रकार के माल का होता था।

मेसोपोटामिया के लोग मिट्टी की पट्टिकाओं पर लिखते थे। मेसोपोटामियों में जो पहली पट्टिकाएँ (Tablets) मिली हैं वे लगभग 3200 ई. पू. की है। उनमें चित्र जैसे चिह्न और संख्याएँ दी गई हैं। वहाँ बैलों, मछलियों और रोटियों आदि की लगभग 5000 सूचियाँ मिली हैं। ये सूचियाँ संभवतः वहाँ के दक्षिणी शहर उरुक के मंदिरों में आने वाली तथा वहाँ से बाहर जाने वाली चीजों की है।

प्रश्न 16.
मेसोपोटामिया के लोग लेखन कार्य किस प्रकार करते थे?
उत्तर:
मेसोपोटामिया के लोग अपना हिसाब-किताब रखने के लिए मिट्टी की पट्टिकाओं पर लिखा करते थे। पट्टिका तैयार करने के लिए लिपिक चिकनी मिट्टी को गीला करके गूंध लेते थे। फिर उसे थापकर एक ऐसी पट्टी का रूप देते थे जिसे वह आसानी से अपने एक हाथ में पकड़ सके। वह उसकी सतहों को चिकना बना कर सरकंडे को तीली की तीखी नोक से उसकी नम चिकनी सतह पर कौलाकार चिह्न (cuneiform) बना देता था।

लिखने के बाद पट्टिका को धूप में सुखाया जाता था। सूखने पर पट्टिका पक्की हो जाती थी और मिट्टी के बर्तनों जैसी मजबूत हो जाती थी। उस पर कोई नया चिह या अक्षर नहीं लिखा जा सकता था। इस प्रकार प्रत्येक सौदे के लिए चाहे वह कितना ही छोटा हो, एक अलग पट्टिका की जरूरत होती थी। जब उस पर लिखा हुआ कोई हिसाब गैर-जरूरी हो जाता था तो उस पट्टिका को फेंक दिया जाता था।

प्रश्न 17.
मारी नगर व्यापार तथा समृद्धि की दृष्टि से अद्वितीय था। उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
मारी नगर एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल था। जहाँ से होकर लकड़ी, ताँबा, राँगा, तेल, मदिरा और अन्य सामान नावों द्वारा फरात नदी के मार्ग से दक्षिण और तुर्की, सीरिया तथा लेबनान के उच्च प्रदेशों के बीच लाया तथा ले जाया जाता था। मारी नगर की समृद्धि का आधार यही व्यापार था। दक्षिणी नगरों में घिसाई-पिसाई के पत्थर चक्कियाँ, लकड़ी, शराब तथा तेल ले जाने वाले जलपोत मारी में रूका करते थे।

मारी के अधिकारी लदे हुए सामान की जाँच करते थे और उसमें लदे माल के मूल्य का लगभग 10 प्रतिशत प्रभार वसूल करते थे जो विशेष किस्म की लौकाओं में आता था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ पट्टिकाओं में साइप्रस के द्वीप ‘अलाशिया’ से आने वाले ताँबे का उल्लेख मिला हैं । यह द्वीप उन दिनों ताँबे तथा टिन , के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। इस प्रकार मारी नगर व्यापार तथा समृद्धि की दृष्टि से अद्वितीय था।

प्रश्न 18.
बेबीलोन नगर की मुख्य विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:
331 ई. पू. में सिंकदर से पराजित ह्येने तक बेबीलोन विश्व का एक प्रमुख नगर बना रहा। इस नगर की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

  • इसका क्षेत्रफल 850 हैक्टेयर से अधिक था।
  • इसकी चहारदीवारी तिहरी थी।

प्रश्न 19.
गिल्गेमिश का महाकाव्य किस बात पर प्रकाश डालता है। इसमें वर्णित घटना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मेसोपोटामिया के लोगों को अपने नगरों पर बहुत अधिक गर्व था। गिल्गेमिश का महाकाव्य इसी बात पर प्रकाश डालता है। यह काव्य 12 पट्टिकाओं पर लिखा गया था। ऐसा कहा जाता कि गिल्गेमिश ने एनमर्कर के कुछ समय पश्चात् उरुक नगर पर शासन किया था। वह एक महान् योद्धा था। उसने दूर-दूर तक के प्रदेशों को अपने अधीन कर लिया था। परंतु उसे उस समय गहरा आघात पहुंचा जब उसका एक वीर मित्र अचानक मर गया । दु:खी होकर वह अमरत्व की खोज में निकल पड़ा। उसने संसार भर का चक्कर लगाया। परंतु उसे अपने साहसिक कार्य में सफलता नहीं मिली।

हारकर वह अपने नगर उरूक लौट आया। एक दिन जब अपने आपको सांत्वना देने के लिए शहर की चहारदीवारी के पास चहलकदमी कर रहा था तो उसकी नजर उन पकी ईंटों पर पड़ी जिनसे दीवार की नींव डाली गई थी। वह भावविभोर हो उठा । यहाँ पर ही महाकाव्य की लंबी साहस भरी कथा का अंत हो जाता है। इस प्रकार गिल्गेमिश को अपने नगर में ही सांत्वना मिलती है जिसे उसकी प्रजा ने बनाया था।

प्रश्न 20.
विश्व को मेसोपोटामिया की क्या देन है?
उत्तर:
विश्व को मेसोपोटामिया की सबसे बड़ी देन उसकी कालगणना और गणिक की विद्वतापूर्ण परंपरा है।

  1. 1800 ई. पू. के आसपास की कुछ पट्टिकाएं मिली हैं। इनमें गुणा और भाग की तालिकाएँ, वर्ग तथा वर्गमूल और चक्रवृद्धि ब्याज को सारणियाँ दी गई हैं।
  2. उनमें 2 का वर्गमूल का जो मान दिया गया है वह 2 के वर्गमूल के वास्तविक मान से थोड़ा सा ही भिन्न है।
  3. पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा के अनुसार एक वर्ष का 12 महीनों में विभाजन, एक महीने का 4 हफ्तों में विभाजन, दिन का 24 घंटों में और एक घंटे का 60 मिनट में विभाजन, यह सब कुछ मेसोपोटामिया से ही हमें मिला है।
  4. मेसोपोटामिया के लोग सूर्य और चंद्र ग्रहण घटित होने का भी हिसाब रखते थे।
  5. वे रात के समय आकाश में तारों और-तारामंडल की स्थिति पर बराबर नजर रखते ये और उनका लेखा-जोखा रखते थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1
मेसोपोटामिया में राजा के पद का विकास किस प्रकार हुआ ? राजा ने अपना प्रभाव और नियंत्रण बढ़ाने के लिए क्या-क्या पग उठाए?
उत्तर:
मेसोपोटामिया के तत्कालीन गाँवों में भूमि और पानी के लिए बार-बार झगड़े हुआ करते थे। जब किसी क्षेत्र में दो समुदायों के बीच लंबे समय तक लड़ाई चलती थी तो जीतने वाले मुखिया अपने साथियों एवं अनुयायियों के बीच लूट का माल बाँटकर उन्हें खुश कर देते थे और हारे हुए समूहों के लोगों को बंदी बनाकर अपने साथ ले जाते थे। वे उन्हें अपने चौकीदार या नौकर बना लेते थे। इस प्रकार वे अपना प्रभाव और अनुयायियों की संख्या बढ़ा लेते थे। परंतु युद्ध में विजयी होने वाले ये नेता स्थायी रूप से समुदाय के मुखिया नहीं बने रहते थे। समुदाय का नेतृत्व बदलता रहता था। यही मुखिया आगे चलकर राजा कहलाए।

राजा ने अपना प्रभाव और नियंत्रण बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए –

1. राजा के प्रभाव और नियंत्रण में वृद्धि – समुदाय के कल्याण पर अधिक ध्यान देना आरंभ कर दिया । फलस्वरूप नयी-नयी संस्थाएँ और परिपाटियाँ स्थापित हो गई।

2. मंदिरों की शोभा बढ़ाना – विजेता मुखियाओं ने देवताओं को भी बहुमूल्य भेटें अर्पित करनी आरंभ कर दिया। इससे समुदाय के मंदिरों की सुदरंता बढ़ी। उन्होंने लोगों को उत्कृष्ट पत्थर और धातुएँ लाने के लिए दूर-दूर भेजा ताकि मंदिर की शोभा को और अधिक बढ़ाया जा सके। मंदिर की धन-संपदा तथा मंदिरों में आने-जाने वाली वस्तुओं का हिसाब-किताब भी रखा जाने लगा। इस व्यवस्था ने राजा को ऊँचा स्थान दिलाया और समुदाय पर उसका पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।

3. समुदाय की सुरक्षा – प्रभावशाली राजाओं ने ग्रामीणों को अपने पास बसने के लिए भी प्रोत्साहित किया। आसपास अथवा साथ-साथ रहने से लोग स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करने लगे।

4. काम के बदले अनाज-युद्धबंदियों और स्थानीय लोगों के लिए मंदिर तथा शासक का काम करना अनिवार्य था। उन्हें इस काम के बदले अनाज दिया जाता था। सैकड़ों ऐसी राशन-सूचियाँ मिली हैं जिनमें काम करने वाले लोगों के नामों के आगे उन्हें दिए जाने वाले अनाज, कपड़े और तेल आदि की मात्रा लिखी गई है।

प्रश्न 2.
मेसोपोटामिया के लोगों ने कला, शिल्प तथा ज्ञान में जो सफलताएँ प्राप्त की उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. कला तथा शिल्प – मेसोपोटामिया के लोगों ने कला के क्षेत्र में काफी उन्नति की हुई थी। वे बड़ी सुंदर मूर्तियाँ बनाते थे और इनसे अपने मंदिरों को सुशोभित करते थे। इसके अतिरिक्त वे सोने-चाँदी के बर्तन तथा आभूषण बनाने में भी बड़े निपुण थे। मेसोपोटामिया के लोग लकड़ी की सुंदर पच्चीकारी वाला फर्नीचर बनाते थे। उनकी मिट्टी तथा ताँबे के बर्तन बनाने की कला भी काफी उन्नत थी।।

2. ज्ञान के क्षेत्र में सफलताएँ – ज्ञान के क्षेत्र में मेसोपोटामिया के लोगों की सफलताओं का वर्णन इस प्रकार है –

  • मेसोपोटामिया के लोगों ने अंकगणित तथा रेखागणित में बहुत उन्नति कर ली थी। उन्होंने 1, 10 और 60 के लिए विशेष चिह्न बनाए हुए थे।
  • उन्होंने एक घंटे को 60 मिनट और 1 मिनट को 60 सेकेंड में बाँटा हुआ था।
  • रेखागणित में उन्होंने पाइथागोरस के सिद्धांत को जान लिया था।
  • खगोल विद्या अथवा ज्योतिषशास्त्र में भी उनका ज्ञान काफी अधिक था। वे सूर्य निकलने तथा अस्त होने का ठीक समय बता सकते थे। उन्हें सूर्य तथा चंद्र ग्रहण का भी ज्ञान था।
  • उन्होंने चंद्रमा पर आधारित एक पंचांग का आविष्कार किया था।

प्रश्न 3.
दक्षिणी मेसोपोटामिया के शहरीकरण की जानकारी देते हुए वहाँ मंदिरों के निर्माण एवं उनके बढ़ते हुए महत्व पर प्रकाश डालिए।
उतर:
शहरीकरण की शुरूआत-दक्षिणी मेसोपोटामिया में 5000 ई. पू. से बस्तियों का विकास होने लगा था । इन बस्तियों में से कुछ ने प्राचीन शहरों का रूप ले लिया। ये शहर तीन प्रकार के थे –

  • वे शहर जो मंदिरों के चारों और विकसित हुए
  • वे शहर जो व्यापार के केंद्रों के रूप में विकसित हुए तथा
  • शेष शाही शहर

1. मंदिरों का निर्माण और उनका बढ़ता हुआ महत्व – मेसोपोटामिया के दक्षिणी भाग में – बाहर से आकर बसने वाले लोगों ने अपने गाँवों में कुछ चुने हुए स्थानों पर मंदिर बनाने या उनका पुनर्निर्माण करने का काम शुरू किया। सबसे पहला ज्ञात मंदिर एक छोटा सा देवालय था जो कच्ची ईंटों का बना हुआ था। मंदिर विभिन्न प्रकार के देवी-देवताओं के निवास स्थान थे। साधारण घरों की दीवारों में यह विशेषता नहीं पाई जाती थी। ‘उर’ चंद्र देवता था और इन्नाना प्रेम व युद्ध की देवी थी। – मंदिर का स्वरूप-मंदिर ईंटों से बनाए जाते थे। समय के साथ इनका आकार बढ़ता गया, क्योंकि उनके खुले आँगन के चारों ओर कई कमरे बने होते थे। कुछ प्रारंभिक मंदिर साधारण घरों जैसे ही होते थे। परंतु मंदिरों की बाहरी दीवारें कुछ विशेष अंतरालों के बाद भीतर और बाहर ही ओर मुड़ी हुई होती थीं। साधारण घरों की दीवारों में यह विशेषता नहीं पाई जाती थी।

देवता पूजा का केंद्र-बिंदु होता था। लोग देवी-देवताओं को अन्न, दही, मछली अर्पित करते थे। आराध्य देव सैद्धांतिक रूप से खेतों, मत्स्य क्षेत्रों और स्थानीय लोगों के पशुधन का स्वामी जाता था।

2. मंदिरों के बढ़ते क्रियाकलाप – समय बीतने पर मंदिर ने अपने क्रियाकलाप बढ़ा लिए।

  • अब उपज को उत्पादित वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया मंदिरों में की जाने लगी।
  • यह व्यापारियों को नियुक्त करने लगा।
  • यह अन्न, हल जोतने वाले पशुओं, रोटी, जौ की शराब, मछली आदि के आवंटन और वितरण का लिखित अभिलेख रखने लगा।
  • यह परिवार से ऊपरी स्तर के उत्पादन का केंद्र बन गया । इस प्रकार इसने मुख्य शहरी संस्था का रूप ले लिया।

प्रश्न 4.
मेसोपोटामिया के उर नगर की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
उर नगर उन नगरों में से एक था जहाँ सबसे पहले खुदाई की गई थी। वहाँ साधारण घरों की खुदाई 1930 के दशक में सुव्यवस्थित ढंग से की गई। इस नगर की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थी –
1. टेढ़ी-मेढ़ी तथा संकरी गलियाँ – नगर में टेढ़ी-मेढ़ी तथा संकरी गलियाँ पाई गई हैं। इससे यह पता चलता है कि वहाँ के अनेक घरों तक पहिए वाली गाड़ी नहीं पहुंच सकती थी। अनाज के बोरे और ईंधन के गट्टे संभवत: गधों पर लादकर घरों तक लाए जाते थे। पतली व घुमावदार गलियों तथा घरों के भू-खंडों का एक जैसा आकार न होने से यह निष्कर्ष निकलता है कि नगर नियोजन की पद्धति का अभाव था।

2. जल निकासी – जल-निकासी की नालियाँ और मिट्टी की नलिकाएँ उर नगर के घर के भीतरी आँगन में पाई गई हैं। इससे यह पता चलता है कि घरों की छतों का ढलान भीत की ओर होता था और वर्षा का पानी निकास नालियों के माध्यम से भीतरी आँगन में बने हु हौज में ले जाया जाता था। यह संभवत इसलिए किया गया होगा कि तेज वर्षा आने पर छ के बाहर की कच्ची गलियाँ बुरी तरह कीचड़ से न भर जायें।

3. घरों की सफाई – लोग अपने घरों की सफाई के बाद सारा कूड़ा-कचरा गलियों में डा. देते थे। यह आने-जाने वाले लोगों के पैरों के नीचे आता रहता था। बाहर कूड़ा डालते रह से गलियों की सतहें ऊँची उठ जाती थौं । अतः कुछ समय बाद घरों की दहलीजों को भी ऊँ उठाना पड़ता था ताकि वर्षा के बाद गली का कीचड़ बह कर घरों के भीतरी न आ जाए।

4. खिड़कियों का अभाव – कमरों में खिड़कियों नहीं होती थीं। प्रकाश आँगन में खुल. वाले दरवाजों से होकर कमरे में आता था। इससे घरों के परिवारों में गोपनीयता भी बरहती थी।

5. घरों के बारे में अंधविश्वास – घरों के बार में कई तरह के अंधविश्वास प्रचलित है, जो पट्टिकाओं पर लिखे मिले हैं। इनमें से कुछ ये हैं –

  • यदि घर की दहलीज ऊँची हुई हो, तो वह धन-दौलत लाती है।
  • यदि सामने का दरवाजा किसी दूसरे के घर की ओर न खुले तो सौभाग्य लाता है।
  • यदि घर का लकड़ी का मुख्य दरवाजा बाहर की ओर खुले तो पत्नी अपने पति के लिए यंत्रणा का कारण बनती है।
  • शवों का दफन – उर में नगरवासियों के लिए एक कब्रिस्तान था, जिसमें शासकों तथा जन-साधारण की समाधियाँ पाई गई हैं। परंतु कुछ लोग घरों के फर्शों के नीचे भी दफनाए जाते थे।

प्रश्न 5.
मेसोपोटामिया के नगरों की सामाजिक व्यवस्था से सम्बन्धित निम्नलिखित बातों की जानकारी दीजिए
(क) उच्च वर्ग की स्थिति
(ख) परिवार का स्वरूप
(ग) विवाह-प्रणाली।
उत्तर:
(क) उच्च वर्ग की स्थिति-मेसोपोटामिया के नगरों की सामाजिक व्यवस्था में एक उच्च या संभ्रांत वर्ग का प्रादुर्भाव हो चुका था। धन-दौलत का अधिकतर भाग समाज के इसी वर्ग में केंद्रित था। इस बात की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि बहुमूल्य वस्तुएँ विशाल उर में राजा रानियों की कुछ कब्रों या समाधियों में उनके साथ दफनाई गई मिली हैं। इन वस्तुओं में आभूषण, सोने के पात्र, सफेद सीपियाँ और लाजवर्द जड़े हुए लकड़ी के वाद्य यंत्र, सोने के सजावटी खंजर आदि शामिल हैं।

(ख) परिवार का स्वरूप-विवहा, उत्तराधिकार आदि के मामलों से संबंधित कानूनी दस्तावेजों से पता चलता है कि मेसोपोटामिया के समाज में एकल परिवार को आदर्श माना जाता था। फिर भी विवाहित पुत्र और उसका परिवार अपने माता-पिता के साथ ही रहा करता था। पिता परिवार का मुखिया होता था।

(ग) विवाह प्रणाली-विवाह करने की इच्छा के बारे में घोषणा की जाती थी। वधू के माता-पिता उसके विवाह के लिए अपनी सहमति देते थे। उसके बाद वर पक्ष के लोग वधू को कुछ उपहार देते थे। विवाह की रस्म पूरी हो जाने पर दोनों पक्ष उपहारों का आदान-प्रदान करते थे। वे एक साथ बैठकर भोजन करते थे और मंदिर में जाकर भेंट चढ़ाते। जब नव वधू को उसकी सास लेने आती थी, तब वधू को उसके पिता द्वारा उसके उत्तराधिकार का हिस्सा दे दिया जाता था। परंतु पिता का घर, पशुधन, खेत आदि उसके पुत्रों को ही मिलते थे।

प्रश्न 6.
मेसोपोटामिया के भूगोल की विशेषताएँ बताइए।।
उत्तर:
मेसोपोटामिया के भूगोल को समझने के लिए आज के इराक की भौगोलिक विशेषताओं को जान लेना चाहिए । इराक एक भौगोलिक विविधता वाला देश है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1. इसके पूर्वोत्तर भाग में हरे-भरे, ऊँचे-नीचे मैदान हैं। ये मैदान धीरे-धीरे वृक्षाच्छादित पर्वत श्रृंखला के रूप में फैलते जाते हैं साथ ही यहाँ स्वच्छ झरने तथा जंगली फूल भी पाये जाते हैं।
यहाँ अच्छी फसल के लिए पर्याप्त वर्षा हो जाती है।

2. उत्तर में ऊँची भूमि है जहाँ ‘स्टेपी’ घास के मैदान हैं। इस प्रदेश में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। सर्दियों की वर्षा के बाद भेड़-बकरियाँ यहाँ उगने वाली छोटी-छोटी झाड़ियों और घास से अपना भरण-पोषण करती हैं।
पूर्व में दजला की सहायक नदियाँ परिवहन का अच्छा साधन हैं।

3. देश का दक्षिणी भाग एक रेगिस्तान है। इस रेगिस्तान में फरात और दजला नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ पहाड़ों से निकलकर अपने साथ उपजाऊ बारीक मिट्टी लाती रही हैं। जब इन नदियों में बाद आती है अथवा जब इनके पानी को सिंचाई के लिए खेतों में लाया जाता है तब इनके द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी खेतों में जमा हो जाती है।

4. फरात नदी रेगिस्तान में प्रवेश करने के बाद कई धाराओं में बंट जाती है। कभी-कभी इन धाराओं में बाढ़ आ जाती है। प्राचीन काल में ये धाराएं सिंचाई की नहरों का काम देती थीं। ‘ इनसे आवश्यकता पड़ने पर गेहूँ, जौ और मटर या मसूर के खेतों की सिंचाई की जाती थी। इसलिए वर्षा की कमी के बावजूद दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती प्राचीन विश्व में सबसे अधिक उपज देने वाली थी।

5. खेती के अतिरिक्त स्टेपी घास के मैदानों, पूर्वोत्तरी मैदानों और पहाड़ों की ढालों पर भेड़-बकरियाँ पाली जाती थीं। इनसे भारी मात्रा में मांस, दूध और ऊन प्राप्त होता था। यहाँ की नदियों में मछलियों की भरमार थी। गर्मियों में खजूर के पेड़ खूब फल देते थे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मेसोपोटामिया के उर देवता थे ………………………
(क) सूर्य
(ख) चंद्र
(ग) जल
(घ) पवन
उत्तर:
(ख) चंद्र

प्रश्न 2.
मेसोपोटामिया की देवी इन्नाना का संबंध था ………………………….
(क) प्रेम और युद्ध
(ख) करुणा
(ग) अहिंसा
(घ) विद्या एवं धन
उत्तर:
(क) प्रेम और युद्ध

प्रश्न 3.
असुरबनिपाल कहाँ का शासक था?
(क) असीरिया
(ख) क्रीट
(ग) रोम
(घ) चीन
उत्तर:
(क) असीरिया

प्रश्न 4.
बेबीलोनिया के किस शासक ने अपनी पुत्री को महिला पुरोहित के रूप में प्रतिष्ठित किया?
(क) असुरबनीपाल
(ख) नैवोपोलासार
(ग) नैबोनिडस
(घ) गिल्गेमिश
उत्तर:
(ग) नैबोनिडस

प्रश्न 5.
मेसोपोटामिया किन दो नदियों के बीच स्थित है?
(क) हाबुर और दजला नदी
(ख) बालिख और फरात नदी
(ग) दजला और फरात नदी
(घ) हाबुर और बालिख नदी
उत्तर:
(ग) दजला और फरात नदी

प्रश्न 6.
मेसोपोटामिया के लिपि किस प्रकार की थी?
(क) चित्रलिपि
(ख) कीलाक्षर लिपी
(ग) ज्यामितीय लिपी
(ब) काजी लिपि
उत्तर:
(ख) कीलाक्षर लिपी

प्रश्न 7.
मेसोपोटामिया में परिवार किस प्रकार के थे?
(क) एकल परिवार
(ख) संयुक्त परिवार
(ग) सामुदायिक परिवार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) एकल परिवार

प्रश्न 8.
मेसोपोटामिया के किस भाग में सबसे पहले नगरों एवं लेखन प्रणाली का प्रादुर्भाव हुआ?
(क) उत्तर के स्टेपी घास के मैदान में
(ख) दक्षिणी रेगिस्तानी भाग में
(ग) पूर्व के दजला की घाटी में
(घ) पश्चिमी भाग में
उत्तर:
(ख) दक्षिणी रेगिस्तानी भाग में

प्रश्न 9.
गिलगेमिश महाकाव्य का संबंध किस प्राचीन सभ्यता से है?
(क) मिस्र
(खं) मेसोपोटामिया
(ग) ईरान
(घ) यूनान
उत्तर:
(खं) मेसोपोटामिया

प्रश्न 10.
मेसोपोटामिया के लोग लिखने के लिये किस चीज का प्रयोग करते थे?
(क) ताम्र पत्रों का
(ख) कागज का
(ग) मिट्टी की पट्टिकाओं का
(घ) ताड़पत्रों का
उत्तर:
(ग) मिट्टी की पट्टिकाओं का

प्रश्न 11.
मेसोपोटामिया शब्द की उत्पत्ति हुई ………………………..
(क) यूनानी भाषा से
(ख) लैटिन भाषा से
(ग) यूनानी तथा लैटिन भाषा से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) यूनानी भाषा से

प्रश्न 12.
मेसोपोटामिया फरात तथा दजला नदियों के बीच का हिस्सा है ………………………..
(क) ईरान का
(ख) इराक का
(ग) सीरिया का
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) इराक का

प्रश्न 13.
मेसोपोटामिया की सभ्यता जानी जाती है ……………………….
(क) समृद्धि तथा शहरी जीवन के लिए
(ख) विशाल तथा समृद्ध साहित्य के लिए
(ग) गणित तथा खगोल विद्या के लिए
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 14.
बेबीलोन मेसोपोटामिया का महत्वपूर्ण शहर बन गया ………………………..
(क) 5000 ई.पू. के बाद
(ख) 2000 ई.पू. के बाद
(ग) 100 ईस्वी में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) 2000 ई.पू. के बाद

प्रश्न 15.
1400 ई.पू. अरामाइक भाषा मिलती-जुलती थी ………………………
(क) सुमेरी भाषा से
(ख) अक्कदी भाषा से
(ग) हिब्रु भाषा से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) हिब्रु भाषा से

प्रश्न 16.
मेसोपोटामिया में पुरातत्वीय खोजों का प्रारंभ हुआ।
(क) 1840 के दशक में
(ख) 1000 ई.पू. में
(ग) 5000 ई.पू. में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) 1840 के दशक में

प्रश्न 17.
मेसोपोटामिया में खेती शुरू हुई …………………….
(क) 5000 से 4000 ई.पू.
(ख) 10,000 से 9,000 ई.पू.
(ग) 7000 से 6000 ई.पू.
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) 7000 से 6000 ई.पू.

प्रश्न 18.
मेसोपोटामिया के प्राचीनतम नगरों का निर्माण काँस्य युग अर्थात् ……………………….
(क) लगभग 3000 ई.पू. हुआ
(ख) लगभग 2000 ई.पू. में हुआ
(ग) लगभग 1000 ई.पू. में हुआ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) लगभग 3000 ई.पू. हुआ

प्रश्न 19.
यूरोप के लोगों के लिए मेसोपोटामिया महत्वपूर्ण था क्योंकि बाइबिल के प्रथम भाग ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ में इसका उल्लेख किया गया है। ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ की किस पुस्तक में शिमार अर्थात् सुमेर के विषय में कहा गया है?
(क) ओरिजिन ऑफ स्पीसीज
(ख) बुक ऑफ जेनेसिस
(ग) ऑन द डिगनिटी ऑफ मैन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) बुक ऑफ जेनेसिस

प्रश्न 20.
श्रम विभाजन तथा विशेषीकरण विशेषताएँ हैं ………………………
(क) ग्रामीण जीवन की
(ख) प्राचीन काल की
(ग) शहरी जीवन की
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ग) शहरी जीवन की

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 9 The Earth

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Bihar Board Class 12 English The Earth Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 12 English Book Objective Type Questions and Answers

1. Benjy was a…………..
(a) an evil-minded person
(b) a simple-minded person
(c) an insane person
(d) a short-tempered man
Answer:
(d) a short-tempered man

2. Benjy left school at the age of…..
(a) Ten years
(b) Sixteen years
(c) Twenty years
(d) Fourteen years
Answer:
(b) Sixteen years

3. Johnson had in his possession.
(a) a house
(b) a big farm
(c) a poultry farm
(d) a plough, a cart, tools, a bony brown mare
Answer:
(d) a plough, a cart, tools, a bony brown mare

4. When Benjy was 21, his father handed him
(a) a land
(b) a factory
(c) passbook
(d) a big house
Answer:
(c) passbook

5. For many years Benjy’s father had been
(a) a local preacher
(b) a school teacher
(c) a lawyer
(d) a village-doctor
Answer:
(a) a local preacher

Bihar Board Class 12 English Book Very Short Type Questions and Answers

The Earth Question Answer Class 12 Bihar Board Question 1.
What did Johnson do on the doctor’s advice?
Answer:
Johnson engaged Benjy in keeping hen for poultry farming.

The Earth Class 12 English Bihar Board Question 2.
What was Benjy’s performance in keeping hens?
Answer:
At first, Benjy kept ten or a dozen hens and soon he became a prominent poultry owner.

Class 12 English Chapter 9 Question Answer Bihar Board Question 3.
What did Johnson do with the money from the eggs?
Answer:
Johnson opened an account in the bank and put the money in it.

The Earth Question Answer Bihar Board Question 4.
What did Johnson do with the pass-book?
Answer:
When Benjy was twenty-one years old his father and mother got the passbook from the bank and handed over to him.

Bihar Board Rainbow English Book Class 12 Pdf Download Question 5.
What was the difference between Beny’s hen and his parents Land?
Answer:
There was only one difference between Benjy’s hens and his parent’s land. The hens belonged to Benjy, but the land had never belonged to his parents.

Bihar Board Class 12 English Book Textual Questions and Answers

A. Work in small groups and discuss the following
Bihar Board Class 12 English Book Solution Question 1.
How is your family important to you?
Answer:
My family is most important to me. I owe my very existence to my family. It feeds me, clothes me, sends me to school. It gives me love and protection. It cares for me.

Bihar Board English Book Question 2.
What are the responsibilities of the parents towards their children?
Answer:
Parents look after their children. They meet all their basic needs as best they can. They protect them from diseases, heat, and cold. They try to make them good and noble, and able to support themselves.

Question 3.
What are the responsibilities of the children towards their parents?
Answer:
Children should obey their parents and help them in their daily lives. When the children grow up and parents grow old, they should take care of them in every possible way.

B. 1.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied
(a) A simple-minded person is………….. and………….
(b) Johnson was more interested in…………
(c) Johnson’s possessions included………….
(d) Benjy’s simplicity second gradually to have become………..
Answer:
(a) insane, imbecile, not right in the head
(b) his son
(c) the four-acre plot, a plow, a two-wheeled cart, tools, and a bony mare
(d) a kind of cunningness.

B. 1.2. Read the following sentences and write ‘T’ for true and ‘F’ for false statements
(i) Johnson was a hard-working man.
(ii) Johnson was interested in preaching.
(iii) Johnson had an insane son.
(iv) Benjy hated his hens.
Answer:
(i) F, (ii) T, (iii) F, (iv) F

B.1.3. Answer the following questions briefly
Question. 1.
Who is a tenant farmer?
Answer:
A tenant farmer is a farmer who rents a farm for a certain period.

Question 2.
What did the doctor advise Benjy’s parents to ensure his mental growth?
Answer:
The doctor advised Beny’s parents to give him something to do, some occupation, which would help his development.

Question 3.
What did Benjy understand about a hen?
Answer:
Benjy understood that a hen existed for the purpose of laying eggs.

Question 4.
What did Benjy understand about the business of hens?
Answer:
Benjy understood about the business of hens that eggs could be sold to callers and money could be kept in a basin.

B.2.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied
(a) Benjy left school at the age of………..
(b) By then Benjy had……….. hens.
(c) Benjy knew about segregating breeds of hens through…………..
(d) Johnson believed that the earth designed and created by God would……….
(e) When Benjy was 21, his father handed him………..
Answer:
(a) fourteen, (b) forty on fifty, (c) a paper, (d) take care of itself, (e) the passbook

B.2.2. Answer the following questions briefly
Question 1.
What silent belief did Benjy’s parents cherish about their lands?
Answer:
Benjy’s parents cherished a silent belief that the land would one day outgrow its poverty by itself.

Question 2.
Why had their land not yielded much?
Answer:
The land had not yielded much because they did not work hard. They had put more value on faith than hard work.

Question 3.
How did Benjy’s parents feel when he silently put the passbook in his pocket?
Answer:
Their feelings were hurt. They felt a mixture of disappointment, fear, pride, and pain.

Question 4.
What had Benjy’s parents expected when they handed him the passbook?
Answer:
They expected Benjy to thank them for the gift, and a word of willingness that they should share The money they had helped to save.

Question 5.
What did Benjy want to do with the money?
Answer:
With the money, Benjy wanted to buy a piece of laid next to theirs.

B.3.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied
(a) The only difference between Benjy’s hens and his parents land was that
(b) Benjy wanted to buy his parents’ land to
(c) It was possible to gauge Benjy’s progress by
(d) Benjy’s parents did not like Florence because
Answer:
(a) the hens belonged to Benjy but the land had never belonged to his parents
(b) put up more incubator houses on it
(c) the new chicken houses covering his father’s former land, and by the fact that he now employed people to help him
(d) she had ugly legs and a mouth that would not keep shut.

B.3.2. Answer the following questions briefly
Question 1.
Who had Johnson rented their land from?
Answer:
Johnson had rented their land from Sanders.

Question 2.
What information did Sanders give them that made them happy? Ans. Sanders told them that their son Benjy was buying their land.

Question 3.
Who was Florence?
Answer:
Florence was one of Benjy’s employees.

Question 4.
Why did Benjy want to marry Florence?
Answer:
Benjy wanted to marry her because he hoped she would help him with the hens.

B.4.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied
(a) When Benjy asked his parents to vacate the front bedroom, they
(b) Benjy asked parents to go somewhere else because of him.
(c) Benjy’s parents did not speak when their son drove them down into the town because
Answer:
(a) vacated it and moved into the back
(b) had bought the house and he wanted it
(c) they believed that he was not right in his head.

B. 4.2. Read the following sentences and write ‘T’ for true and ‘F’ for false statements
(i) With the arrival of Florence as Benjy’s wife, the house was filled with happiness.
(ii) Benjy and his wife lived in one part of the house and his parents in the other.
(iii) Benjy paid utmost attention to his aging parents.
Answer:
(i) F, (ii) T, (iii) F.

C. 1. Bihar Board Class 12 English Book Long Answer Questions

Q. 1. Did Benjy treat his parents justly? What would you do if you were Benjy?
Answer:
No, Benjy treated his parents most heartlessly and unjustly. They made every sacrifice for him. They gave him hens, built coops on their land, and helped him save as much money as they had never had. But Benjy was never grateful to them. They forgave him because they had always believed he was not right in his mind. But at the end, Benjy drove them out of the house and left them to look after themselves. He showed no emotions and no affection. He never for a moment thought how the old parents would live. If I were Benjy, I would treat my parents with respect. I would have been thankful to them for their love, care and help. I would have never driven them out of the house. If there was not enough accommodation in the house. I would have added two or three more rooms to it. But I would have never made them leave the house where they had lived for the last forty years.

Question 2.
On how many occasions were Benjy’s parents disappointed with Benjy’s behavior? Describe each occasion briefly in your own words.
Answer:
The parents were disappointed with Beny’s behavior at least on five different occasions. At first, the parents were disappointed with Benjy’s behavior when they gave him the passbook. They had saved a lot of money for him. They expected Benjy to say a word of gratitude, and willingness to share the money with them. But Benjy opened the passbook, looked at the balance, and put it in his pocket, The parents were hurt by this kind of behavior. Secondly, they were disappointed when Benjy was going to buy their land from Sanders. They asked Benjy what he was going to do with the land. Benjy simply told them that he was going to put more incubator houses on it.

His parents have hurt once again because they expected him to say something different. Perhaps some plan for them to use it. They were once again disappointed when he decided to marry Florence. They asked him where he would live and without a moment’s hesitation, he said he would live here. He asked them to vacate the front bedroom because he wanted it. They were no’ only disappointed, but even frightened of Benjy when he told them to leave the house. For the last time, they were disappointed when Benjy drove them into the town and said, “You’ll be better by yourselves in lodgings.” His words were without emotion. The parents were stupefied with grief.

Question 3.
‘Looks are deceptive.’ How does this apply to Benjy?
Answer:
As a child, Benjy looked not only innocent but simple-minded. He had large loose limbs, thick soft fair hair on his face and blue eyes. All-day long there was a smile on his face. His parents believed that he was not like other children. In their opinion, he lacked normal intelligence. His brain needed proper development. But in fact, Benjy proved to be the most cunning person. He was selfish and cruel. He had no love for his parents. He did not feel grateful. The climax was reached when he drove out his parents who had sacrificed every think for him. Indeed his simple and innocent looks were deceptive. They hid his cunningness behind them.

Question 4.
What is the role of Florence in this story? How did she affect Benjy’s life?
Answer:
Florence was one of Benjy’s employees. She helped him in cleaning the chicken houses. She was not good looking. She had thick short legs and hanging lips. Benjy fell in love with her. So far he had been interested only in hens. This was a turning point in his life. Beny decided to marry her despite his parents’ disapproval. He wanted her because she could help him with the hens. After Florence moved in as Benjy’s wife, there was an uneasiness in the house. Her relations with Benjy’s mother were sour. They did not like each other.

Benjy’s mother felt she was taking him away from her. There were quarrels. At first, Beny’s parents had to vacate their bedroom for Benjy and Florence. Later they lived in separate portions of the house. Finally, Benjy told his parents, rather in a rage, to leave the house and move to lodgings in the town. It was the final break between their relations. Florence must have played her role in this breaking up. But Benjy too was a heartless person. Florence was also like him. They joined together to drive out the old parents.

Question. 5
Johnson himself was responsible for his tragedy or troubles. Do you agree with this? Give reasons.
Answer:
Johnson and his wife loved Benjy to a fault. From the beginning, they had believed that Benjy was a simple-minded and simple-hearted child. They took the doctor’s advice and helped Benjy to keep hens. They saved every penny for Benjy. They kept it in the bank. When Benjy was 21, they gave the passbook to him. He accepted it without showing any gratitude.

He was selfish. But Johnson and his wife always forgave him because they believed that Benjy was not in his right mind. At last, Benjy drove them out of the house. Johnson was at fault. Firstly, he was lazy and never tried to get a better yield from his land. Secondly, he saved no money for a rainy day. Thirdly, he never learned any lesson from Benjy selfish behavior. Had he been a little wiser, he would not have suffered in his old age.

Question 6.
How is a simple-minded man defined in the story? Do you agree with this definition?
Answer:
In the story, Benjy is described as a simple-minded person. He had large loose limbs and fair hair on his face. He had blue eyes and had a smile on his face. His parents believed that he was simple-minded and simple-hearted only because he looked different from others. I don’t agree with this definition because Benjy was not an idiot. He was not insane or imbecile. When he went to school he learned reading and writing and counting like other children. Of course, he was selfish and did not like to play with other children. He paid all his attention to his hens. He built a profitable business. When his parents told him that they were saving money for him, he understood everything. In fact, to consider a person simple headed just by his looks is erroneous. A simple-headed person can never be selfish.

Questions 7.
Sketch the character of Johnson.
Answer:
Johnson was a tenant farmer. He had a four-acre plot, a plough, a mare, a cart, and tools. But he loved talking more than working on his farm. He was also a local preacher and on Sundays, he liked to talk to village congregations. He would even stand at the back-door, over his field gate, in the road outside the house to talk to people. He believed that God, who has created this earth, would also take care of it. He had a faith that somehow the land would recover from its poverty. He was content with what little he got out of the land. Johnson loved his only son Benjy. He believed Benjy was simple-headed. He helped Benjy. He made several sacrifices for him. He was time and again disappointed by Benjy’s selfish behavior. But he never learned his lesson. He always forgave him, thinking that Benjy was not in his right mind. In the end, Johnson suffered because of his foolish faith and laziness. Though he arouses our sympathy, we also feel he got what he deserved.

Question 8.
Sketch the character of Benjy.
Answer:
Benjy is the central figure in die story. As a child, he had thick fair hair on his face. He would smile all day long. His father believed he was simple-headed. But there was a kind of cunningness behind his innocent-looking blue eyes. His selfishness and cunningness came to light as he grew older. Benjy’s only interest was in his hens. He knew that hens were useful because they lay eggs that could be sold for money. So he learned more and more about hens. He built separate coops for them. He sold eggs in the town.

Later he made his hen-houses as modem as he could. He bought land and expanded his business. He was a shrewd businessman who employed several people and supplied thousands of eggs every day. Benjy had no emotions. Affection, kindness, and gratitude were unknown to him. His parents gave him a file passbook. He simply looked at the amount. His old parents had no place in his scheme of things. He had no compunction when he told them to move to the town and live in lodgings. Benjy fell in love with Florence. There were hardly any emotions involved. He did not care for intelligence or beauty. He married her only because he felt she could help him in his business.

C. 2. Group Discussion.

1. Your expectations of your parents/guardians.
Answer:

  • I expect that my parents should give me good food good clothes and good education. If I fall sick or ill, they should look after me and get the best treatment for me.
  • I expect that they should give me freedom and do not ask me ‘where I have been
  • They should know that I am almost an adult now. They should give me sufficient pocket money.
  • They should not hinder me from going on trips and excursions with my friends.
  • They do not object to my friendship with any boy or girl.
  • They should let me have a mobile phone and do not interface in my personal life.

2. Causes and effects of communication gap.
Answer:
Hints:

  • Human beings are endowed with the faculty of speech.
  • Speech is meant for communication. But sometimes there is a communication gap.
  • The other person does not rightly understand us.
  • Sometimes it is due to prejudice or preconceived notions.
  • Remarks or messages are wrongly interpreted.
  • This leads to breaking up of friendships.
  • This may lead to bitter hostilities.

C.3. Composition

1. Write a short essay in about 150 words on ‘an ideal family’.
Answer:
Love and sacrifice are the basis of an ideal family. It an ideal family all members love one another and are willing to make and sacrifice for one another. In India, a joint family used to be and still is, an ideal family. There are young and old, men. and women. They live together. The income of the family is pooled. Each one gets according to his/her needs. The children are looked after by all the daughters-in-law. Old women and men are respected. Their experience is of great help to the younger members. In turn, there is no problem with looking after the old. The senior members are served by grandsons and granddaughters. The family traditions are duly maintained. Guests are entertained. Members share many of their things and avoid duplicacy. Thus they live economically and happily.

2. Write a paragraph in about 100 words on the ‘duties of children towards their parents’
Answer:
Parents do their best to bring up children. In turn, children are expected to do their duties towards their parents. All religions, and all societies expect this. Especially when parents grew old and weak, they need the help of their children. So the children should take care of them. The first and foremost need of the old parents is love and company. They often feel lonely and depressed. So the children and grandchildren should find time to spend with them. They should never let them feel ignored and unwanted. Then they should be given food that they like and can digest. If they are unwell, they should be given medical aid immediately. They should be given clean clothes to wear. Parents do not expect much. If they get love and care they are happy. ‘

D. WORD STUDY
D.1. Dictionary Use

Ex. Correct the spelling of the following words
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 9 The Earth 3

Ex. 2. Lookup a dictionary and write two meanings of the following words—the one in which it is used in the lesson and the other which is more common.
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 9 The Earth 2

D. 2. Word-formation

Make nouns from the following verbs Ans. suggest

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 9 The Earth 1

D. 3. Word-meaning 

Ex. 1. Find from the lesson words the meanings of which have been given in Column-A. The last part of each word is given in Column-B

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 9 The Earth

D. 4. Phrases

Ex. 1. Read the lesson carefully and find out the sentences in which the following phrases have been used. Then use these phrases in sentences of your own.
Answer:
grow up: Helen Keller was deaf and blind but she grew up into a great writer.
come from: These fine mangoes come from our garden, cut off: Floods have cut off many villages from the rest of the state, by the time: By the time she returned home, the children had gone to sleep.
take care of: Parents take care of their children.
for a long time: For a long time people waited for help, but no help came.
look at: I looked at the painting with admiration.

E. Grammar

Find at least ten conjunctions which have been used in the story and use them in sentences of your own:
Answer:
after: She came home after the sun had set. until: He did not go until he learned the secret,
because: We walked home because there was no bus. if: We shall not go out if it rains, as if: He behaved as if he were insane.
although: Although he had wealth, he did not help his brother, as: As I am ill, I cannot take part in games.
so that: He married Florence so that she could help him with the hens.
as well as: She was ugly as well as stupid.
but: He looked simple-minded but he was very shrewd.

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Chapter 9 The Earth English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 तोड़ती पत्थर

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 तोड़ती पत्थर (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

 

तोड़ती पत्थर पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

Todti Patthar Poem Questions And Answers Bihar Board Class 11th प्रश्न 1.
पत्थर तोड़नेवाली स्त्री का परिचय कवि ने किस तरह किया है?
उत्तर-
तोड़ती पत्थर वाली मजदूरिन एक साँवली कसे बदन वाली युवती है। वह चिलचिलाती गर्मी की धूप में हथौड़े से इलाहाबाद की सड़क के किनार एक छायाहीन वृक्ष के नीच पत्थर तोड़ रही है। उसके माथे से पसीने की बूंदे दुलक रही हैं। मजदूरिन अपने श्रम-साध्य काम में पूर्ण तन्मयता से व्यस्त है।

Todti Patthar Question Answers Bihar Board Class 11th प्रश्न 2.
श्याम तन, भर बंधा यौवन,
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन’
निराला ने पत्थर तोड़ने वाली स्त्री का ऐसा अंकन क्यों किया है? आपके विचार से ऐसा लिखने की क्या सार्थकता है?
उत्तर-
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ ने अपनी ‘तोड़ती पत्थर’ शीर्षक कविता में एक मजदूरनी के रूप एवं कार्य का चित्रण किया है, जो साँवली और जवान है तथा आँखे नीचे झुकाए पूर्ण तन्मयता एवं निष्ठा से अपने कार्य में व्यस्त है।

कवि ने उक्त पत्थर वाली स्त्री के विषय में इस प्रकार चित्र इसलिए प्रस्तुत किया है कि पत्थर तोड़ने जैसे कठिन र्का को सम्पादित करने के लिए सुगठित स्वस्थ शरीर को होना नितान्त आवश्यक है तथा सुगठित शरीर ही श्रमसाध्य कार्य हेतु सक्षम होता है। साथ ही तीक्ष्ण धूप में शरीर का साँवला होना स्वाभाविक है। कवि ने कार्य में उसकी पूर्ण तन्मयता का भी सुन्दर चित्रण किया है। मेरे विचार से ऐसा लिखना सर्वथा उचित है।

Todti Patthar Hindi Poem Question Answers Bihar Board Class 11th प्रश्न 3.
स्त्री अपने गुरू हथौड़े से किस पर प्रहार कर रही है।
उत्तर-
स्त्री (मजदूरिन) अपने बड़े हथौड़े से समाज की आर्थिक विषमता पर प्रहार कर रही है। वह धूप की झुलसाने वाली भीषण गर्मी के कष्टदायक परिवेश मे पत्थर तोड़ने का कार्य कर रही है। उसके सामने ही अमीरों को सुख-सुविधा प्रदान करने वाली विशाल अट्टालिकाएँ खड़ी हैं जो उसकी गरीबी पर व्यंग्य करती प्रतीत होती हैं। एक ओर उस स्त्री के मार्मिक तथा कठोर संघर्ष की व्यथा-कथा है, दूसरी ओर अमीरों की विशाल अट्टालिकाओं एवं सुखसुविधाओं का चित्रण है।

इस प्रकार प्रस्तुत पंक्ति देश की आर्थिक विषमता का सजीव चित्रण है। इसके साथ ही इस विषमता पर एक चुभता व्यंग्य भी है।

Torti Pathar Question Answer Bihar Board Class 11th प्रश्न 4.
कवि को अपनी ओर देखते हुए देखकर स्त्री सामने खड़े भवन की ओर देखने लगती है, ऐसा क्यों?
उत्तर-
कवि को अपनी ओर देखते हुए देखकर स्त्री सामने खड़े भवन की ओर देखने लगती है। वह पत्थर तोड़ना बंद कर देती है। वह सामने खड़े विशाल भवन की ओर देखने लगती है। ऐसा कर वह समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता की ओर संकेत करती है। कवि उसके भाव को समझ जाता है।

प्रश्न 5.
‘छिन्नतार’ का क्या अर्थ है? कविता के संदर्भ में स्पष्ट करें।
उत्तर-
कविवर सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ने ‘तोड़ती पत्थर’ शीर्षक कविता में पत्थर तोड़ने वाली गरीब मजदूरनी की मार्मिक एवं दारुण स्थिति का यथार्थ वर्णन प्रस्तुत किया है। कवि पत्थर तोड़ती मजदूरनी को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि से देखता है। वह भी कवि को एक क्षण के लिए देखती है। वह सामने के भव्य भवन को भी देख लेती है और फिर अपने कार्य में लग जाती है। उसकी विवशता ऐसी है मानों कोई व्यक्ति मार खाकर भी न रोए। वह चाहकर भी अपनी व्यथा और विवशता कवि की हृदय-वीणा के तार को छिन्न-भिन्न कर देती है।

प्रश्न 6.
‘देखकर कोई नहीं
देखा मुझे उस दृष्टि से
जो मार खा रोई नहीं,
इन पंक्तियों का मर्म उद्घाटित करें।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ महाप्राण “निराला’ रचित ‘तोड़ती पत्थर’ कविता से उद्धत हैं। इन पंक्तियों में कवि ने शोषण और दमन पर पलती व्यवस्था के अन्याय और वंचनापूर्ण व्यूहों में पिसती हुई पत्थर तोड़ने वाली गरीब मजदूरनी का मार्मिक स्थिति को वर्णन किया है। कवि पत्थर तोड़ती मजदूरनी पर सहानुभूति पूर्ण नजर डालता है। वह भी एक क्षणिक दृष्टि से कवि की ओर देखकर अपने काम में इस प्रकार मग्न हो जाती है जैसे उसने कवि को देखा ही नहीं।

वह सामने विशाल अट्टालिका पर भी नजर डालकर समाज में व्याप्त अमीरी-गरीबी की खाई से भी कवि को रू-बरू कराती है। उसकी नजरों में संघर्षपूर्ण दीन-हीन जीवन का अक्स सहज ही दृष्टि गोचर होता है। उसकी विवशता ऐसी है मानो कोई मार खाकर भी न रोए। सामाजिक विषमता का दंश मूक होकर सहने को गरीब मजदूरनी अभिशप्त है।

प्रश्न 7.
सजा सहज सितार सुनी मैंने वह नही जो थी सुनी झंकार’ यहाँ किस सितार की ओर संकेत है? इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ कविवर ‘निराला’ रचित ‘तोड़ती पत्थर’ कविता की हैं। कवि इलाहाबाद के जनपथ पर भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ती मजदूरनी को देखता है। वह भी विवश दृष्टि से कवि को एक क्षण के लिए चुपचाप देख लेती है। फिर, अपने कार्य में लग जाती है। वह कुछ बोलती नहीं, फिर भी कवि उसके हृदय सितार से झंकृत वेदना की मार्मिकता को समझ ही लेता है।

कवि मजदूरनी के हृदय सितार से झंकृत वेदना जो सामाजिक विषमता की कहानी कहती हुई प्रतीत होती है, को दर्शाना चाहता है। कवि सहज अपने हृदय के वीणा के तारों से उस शोषण की प्रतिमूर्ति मजदूरनी के हृदय के तारों से जोड़कर उसके दारूण-व्यथा की अनुभूति कर लेता है।

प्रश्न 8.
एक क्षण के बाद वह काँपी सुधार, [Board Model 2009(A)]
दुलक माथे से गिरे सीकर,
लीन होते कर्म में फिर ज्यों, कहा
‘मैं तोड़ती पत्थर।’
इन पंक्तियां की सप्रसंग व्याख्या करें।
उत्तर-
प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हिन्दी के मुक्तछंद के प्रथम प्रयोक्ता, छायावाद के उन्नायक कवि शिरोमणि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला रचित ‘तोड़ती पत्थर’ शीर्षक कविता से उद्धत हैं। इस कविता में कवि ने शोषण और दमन पर पलती व्यवस्था के अन्याय और वंचनापूर्ण व्यूहों में पिसती ‘ मानवता का मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया है।

कवि इलाहाबाद के जनपथ पर भीषण गर्मी में पत्थर तोड़ती मजदूरनी को देखता है। वह बिना छायावाले एक पेड़ के नीचे पत्थर तोड़ने का कार्य कर रही थी। उसके सामने वृक्षों के समूह और विशाल अट्टालिकाएँ और प्राचीर थे। तेज और तीखी धूप से धरती रूई की तरह जल रही थी। कवि पत्थर तोड़ती मजदूरनी को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि से देखता है। वह भी कवि पर एक नजर डालकर सामने के भव्य भावना को भी देख लेती है। वह मजदूरनी एक क्षण के लिए सिहर उठती है। उसके माथे से पसीने की बूंदे गिर पड़ती हैं। वह फिर अपने कार्य में चुपचाप लग जाती है और मौन होकर भी यह बता देती है कि वह पत्थर तोड़ रही है।

प्रश्न 9.
कविता की अंतिम पंक्ति है- ‘मौ तोड़ती पत्थर’ उससे पूर्व तीन बार ‘वह तोड़ती पत्थर’ का प्रयोग हुआ है। इस अंतिम पंक्ति का वैशिष्ट्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
कवि शिरामणि निराला ने अपनी बहुचर्चित कविता ‘तोड़ती पत्थर’ में एक गरीब मजदूरनी की विवश वेदना और व्यथा का चित्रण किया है। कवि ने इलाहाबाद के जनपथ पर गर्मी की झुलसती लू और धूप में वह मजदूरनी हथौड़े पत्थर से तोड़ती रहती है। कवि उसे सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि से देखता है। वह मजदूरनी कवि को एक क्षण के लिए देखकर भी नहीं देखती और पसीने से लथपथ होकर पत्थर तोड़ती रहती है।

गरीब मजदूरनी अंतिम पंक्ति में मौन होकर भी यह बता देती है कि वह पत्थर तोड़ रही है। उसने परोक्ष रूप से हमारी शोषणपूर्ण तथा घोर विषम अर्थव्यवस्था पर व्यंग की करारी चोट भी की है और हमें यह संदेश दिया है कि इस आर्थिक विषमताजन्य स्थिति और परिस्थिति को समाप्त करने की दिशा में सही सोच का परिचय दें। सही सोच से ही समतामूलक अर्थव्यवस्था पर आधारित समाज प्रगति के सोपान पर निरन्तर अग्रसर हो सकता है। मजदूरनी की वे सांकेतिक वैचारिक बिन्दु सचमुच बिन्दु सचमुच सराहनीय है।

प्रश्न 10.
कविता का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
‘तोड़ती पत्थर’ कविवर निराला रचित एक यथार्थवादी कविता है। इस कविता में कवि ने एक गरीब मजदूरिन की विवशता और कठोर श्रम-साधना का बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है। कवि एक दिन इलाहाबाद के एक राजपथ पर एक पेड़ के नीचे एक दीन-हीन संघर्षरत मजदूरिन को पत्थर तोड़ते देखता है। वह जिस पेड़ के नीचे बैठी है वह छायादार नहीं है। गर्मी के ताप-भरे दिन है। चढ़ती धूप काफी तेज है। दिन का स्वरूप गर्मी से तमतमाया लगता है। लू की झुलसानेवाली लपटे काफी गर्म हैं। भीषण गर्मी में जमीन रूई की तरह जल रही है।

इस कष्टदायक परिवेश में वह बेचारी पत्थर तोड़ने का श्रमसाध्य कार्य कर रही है। वह मजदूरिन श्यामवर्ण युवती है। वह चुपचाप नतनयन हो पत्थर तोड़ने का कार्य कर रही है। उसके सामने ही अमीरों को सुख-सुविधा प्रदान करनेवाली विशाल अट्टालिकाएँ खड़ी हैं जो उसकी गरीबी पर व्यंग्य करती प्रतीत होती हैं। कवि उस मजदूरिन को सहानुभूति भरी दृष्टि से देखता है। वह मजदूरिन भी एक क्षण के लिए उस सहज मूक दृष्टि से देख लेती है। .

कवि को लगता है कि उसने देखकर भी उसे न देखा हो। कवि उसके टूटे दिल की वीणा की झंकार को सुन लेता है। वह क्षण भर के लिए कांप-सी उठती है। श्रम-लथ उस मजदूरिन के माथे से पसीने की बूंद टपक पड़ती हैं। पसीने की वे बूंदे उसे कठोर श्रम और संघर्ष साधना का परिचय देती है और यह बताती है कि उस गरीब मजदूरिन का यह संघर्ष कितना मार्मिक और कितना कठोर है। संपूर्ण कतिवा हमारे देश की आर्थिक विषमता पर एक चूमता हुआ व्यंग्य है।

तोड़ती पत्थर भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें पथ, पेड़, दिवा, भू, पत्थर, गर्द, सुधार
उत्तर-
पथ-मार्ग, पेड़-वृक्ष, दिवा-दिन भू-पृथ्वी, पत्थर-शिला, गदै-मैला, सुधार-सुरम्य।

प्रश्न 2.
‘देखा मुझे उस दृष्टि से यहाँ ‘दृष्टि’ संज्ञा है या विशेषण।
उत्तर-
संज्ञा।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों से विशेष्य, विशेषण अलग करे श्याम तन, नत नयन, गम हथौड़ा, सहज सितार
उत्तर-

  • विशेष्य – विशेषण
  • तन – श्याम
  • नयन – नत
  • हथौड़ा – गुरू
  • सितार – सहज

प्रश्न 4.
कविता से सर्वनाम पदों को चुनकर लिखें।
उत्तर-
जिन पदों का संज्ञा के स्थान पर होता है उन्हें सर्वनाम कहते हैं। ‘तोड़ती पत्थर’ शीर्षक कविता में निम्नलिखित सर्वनाम आये हैं- वह, उसे, मैंने, जिसके, कोई, मुझे, उस और जो।

प्रश्न 5.
‘एक क्षण के बाद वह कॉपी सुधर’ यहाँ सुघर क्या है?
उत्तर-
यहाँ इस पंक्ति में प्रयुक्त सुधर, जिसका अर्थ सुगठित, चतुर, होशियार, सुन्दर, संडोल आदि है। यहाँ प्रयुक्त सुघर शब्द, पत्थर तोड़ती स्त्री के ‘विशेषण’ के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न 6.
कविता से अनुप्रास, रूपक और उपमा और अलंकारों के उदाहरण चुनकर लिखें।
उत्तर-

  • तोड़ती पत्थर – अनुप्रास
  • श्याम तन – रूपक, उपमा (दोनो)
  • तरु मालिका अट्टालिका प्राकार – अनुप्रास
  • लू-रूई ज्यों – उपमा
  • सजा सहज सितार – अनुप्रास

प्रश्न 7.
कविता एक प्रगीत है। गीत और प्रगीत में क्या अन्तर है?
उत्तर-
शास्त्रीय दृष्टिकोण से गेय पद गीत कहलाते हैं। इनमें शब्द-योजना संगीत के स्वर विधान के अनुरूप होती है। गीतों में मसृण भावों की अभिव्यक्ति होती है। आधुनिक काल में निरालाजी की कृपा से छंदबन्ध टूटने के बाद गीत लिखने का प्रचलन बढ़ गया किन्तु गेयता शून्य हो गयी। प्रगीत गीत की अपेक्षा कुछ विशिष्टता लिये होता है। इसमें किसी समस्या को, विचार को, सशक्त ढंग से संकेतो के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

गीत और प्रगीत दोनों में तुक का आग्रह होता है। क्योंकि बिना तुक के गेयता संभव नहीं है। गीत जहाँ हृदय को राहत पहुँचाते हैं। प्रगीत हृदय को उद्वेलित करते हैं। मनकों मथ डालते हैं।

गीतों और प्रगीतों के कलेवर की लम्बाई वर्णित विषय की गम्भीरता पर निर्भर है।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

तोड़ती पत्थर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तोड़ती पत्थर में प्रकृति या ग्रीष्म का रूप बतायें।
उत्तर-
‘तोड़ती पत्थर’ कविता में प्रकृति वर्णन की दृष्टि से ग्रीष्म का वर्णन है। मजदूरनी पत्थर तोड़ती है। धीरे-धीरे दोपहरी हो आती है। प्रचण्ड धूप के कारण दिन का रूप क्रोध में तमतमाये व्यक्ति के समान अनुभव होता है। झुलसाने वाली लू चलने लगती है। धरती रूई की तरह जलती प्रतीत होती है। हवा की झोंकों के कारण उड़ने वाली धूप आग की चिनगारी की तरह तप्त हो जाती है। ऐसी दोपहरी में भी बेचारी मजदूरनी पत्थर तोड़ती रहती है।

प्रश्न 2.
तोड़ती पत्थर शीर्षक कविता में किस बात का चित्रण हुआ है?
उत्तर-
प्रस्तुत कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित प्रगतिवादी कविता है। इस कविता के द्वारा कवि ने शोषित वर्ग का मर्मस्पर्शी चित्रण प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही साथ आर्थिक वर्ग-वैषम्य का भी हृदयग्राही चित्र खींचा है। समाज की अर्थव्यवस्था के आधार पर दो वर्ग हुए हैं-शोषित और शोषक। यहाँ दोनों वर्गों का बड़ा सजीव चित्र निराला ने खींचा है। निराला ने निरीह शोषित वर्ग के प्रति अपनी सारी सहानुभूति उड़ेल दी है। मजदूरिन को प्रचंड गर्मी में पत्थर तोड़ते देख कवि मौन नहीं रह पाता। वह अपनी सारी करुणा और संवेदना प्रस्तुत कविता में प्रकट कर देता है।

तोड़ती पत्थर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निराला जी ने पत्थर तोड़ने वाली को कहाँ देखा था?
उत्तर-
इलाहाबाद के किसी पथ पर।

प्रश्न 2.
मजदूरनी की शारीरिक बनावट कैसी थी?

प्रश्न 3.
मजदूरनी को कवि ने कब देखा था?
उत्तर-
निराला जी मजदूरनी को ग्रीष्म ऋतु की दोपहर में (झुलसाने वाली लू के समय) देखा था।

प्रश्न 4.
मजदूरनी पत्थर तोड़ने का काम क्यों करती थी।
उत्तर-
पेट की भूख मिटाने के लिए मजदूरनी पत्थर तोड़ने का काम कर रही थी।

प्रश्न 5.
मजदूरनी जहाँ पत्थर तोड़ रही थी वहा कवि ने और क्या देखा?
उत्तर-
कविता ने वहाँ एक विशाल भवन को देखा। इस समय कवि ने देश की खराब आर्थिक स्थिति का अनुभव किया। वह देश की जनता की निर्धनता की प्रति बहुत चिंतित हुआ।

प्रश्न 6.
तोड़ती पत्थर शीर्षक कविता में किस बात की अभिव्यक्ति हुयी है?
उत्तर-
तोड़ती पत्थर शीर्षक कविता में प्रगतिवादी चेतना को अभिव्यक्ति हुयी है।

प्रश्न 7.
तोड़ती पत्थर शीर्षक कविता में वर्णित मजदूरिन पत्थर कहाँ तोड़ती है?
उत्तर-
कविता में वर्णित मजदूरिन इलाहाबाद की सड़क पर पत्थर तोड़ती है।

प्रश्न 8.
मजदूरिन के जीवन यथार्थ के चित्रण के माध्यम से कविता में किस बात पर प्रकाश डाला गया है?
उत्तर-
तोड़ती पत्थर शीर्षक कविता में मजदूरिन के जीवन यथार्थ के चित्रण के माध्यम से अर्थजन्य सामाजिक विषमता और आर्थिक बदहाली पर प्रकाश डाला गया है।

तोड़ती पत्थर वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

प्रश्न 1.
तोड़ती पत्थर के कवि हैं?
(क) त्रिलोच
(ख) दिनकर
(ग) सुमित्रानन्दन पंत
(घ) निराला
उत्तर-
(घ)

प्रश्न 2.
‘निराला’ का जन्म कब हुआ था?
(क) 1897 ई.
(ख) 1890 ई.
(ग) 1880 ई.
(घ) 1885 ई.
उत्तर-
(क)

प्रश्न 3.
‘निराला’ का जन्मस्थान था?
(क) बंगाल
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) मध्यप्रदेश
(घ) दिल्ली
उत्तर-
(क)

प्रश्न 4.
‘निराला के पिता का नाम था
(क) रामानुज त्रिपाठी
(ख) केदारनाथ त्रिपाठी
(ग) पं० रामसहाय त्रिपाठी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(घ)

प्रश्न 5.
‘निराला’ की विशेष अभिरुचि थी
(क) संगीत में
(ख) कुश्ती में
(ग) सितारवादक में
(घ) तबला बादन में
उत्तर-
(क और ख)

प्रश्न 6.
“निराला’ की पहली कविता है?
(क) जूही की कली
(ख) तोड़ती पत्थर
(ग) सड़क पर मौत
(घ) कोई नहीं
उत्तर-
(क)

प्रश्न 7.
पत्थर तोड़ती मजदूरनी को कवि ने कहाँ देखा था?
(क) इलाहाबाद के पथ पर
(ख) इलाजाबाद की अट्टालिकाओं में
(ग) इलाहाबाद की सड़कों पर
(घ) इलाहाबाद की गलियों में
उत्तर-
(क)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

प्रश्न 1.
निराला रचनावली ………….. दिल्ली से आठ खंडों में प्रकाशित है।
उत्तर-
राजकमल प्रकाशन।

प्रश्न 2.
कवि निराल की तोड़ती पत्थर एक गरीब मजदूरनी की …………. का दर्पण है।
उत्तर-
व्यथा-कथा

प्रश्न 3.
मजदूरीन अपने ……………. काम में पूर्णतन्मयता से व्यस्त है।
उत्तर-
श्रम-साध्य।

प्रश्न 4.
कवि ने तोड़ती पत्थर में मजदूरीन का सुन्दर …………….. प्रस्तुत किया है।
उत्तर-
चित्रण।

प्रश्न 5.
तोड़ती पत्थर में …………… का सजीव चित्रण है।
उत्तर-
आर्थिक विषमता।

प्रश्न 6.
निराला मुख्यतः ……………. के कवि हैं।
उत्तर-
छायावाद।

प्रश्न 7.
निराला ने शोषकों के अत्याचार को ……………….. किया है।
उत्तर-
उजागर।

प्रश्न 8.
तोड़ती पत्थर में मजदूरिन की ……………… का वर्णन किया गया है।
उत्तर-
मार्मिक स्थिति।

प्रश्न 9.
सामाजिक विषमता का दंश मूक होकर रहने को गरीब मजदूरिन ……………. है।
उत्तर-
अभिशप्त।

तोड़ती पत्थर कवि परिचय – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ (1897-1961)

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म 1899 ई. में बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल राज्य में हुआ था। इनके पिता पं. रामसहाय त्रिपाठी महिषादल राज्य के कर्मचारी थे। तीन वर्ष की आयु में ही निराला जी की माता का देहांत हो गया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बंगाल में हुई। बंगाल में रहते हुए ही उन्होंने संस्कृत, बंगला, संगीत और दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन किया। 14 वर्ष की आयु में उनका विवाह मनोहरा देवी से हुआ, किंतु उनका पारिवारिक जीवन सुखमय नहीं रहा।

1918 ई. में उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया और उसके बाद पिता, चाचा और चचेरे भाई भी एक-एक करके उन्हें छोड़कर इस दुनिया से चल बसे। उनकी प्रिय पुत्री सरोज की मृत्यु ने तो उनके हृदय के टुकड़े-टुकड़े कर डाले। इस प्रकार निराला जीवन-भर क्रूर परिस्थितियों से संघर्ष करते रहे। 15 अक्टूबर, 1961 ई. को इनका स्वर्गवास हो गया – रचनाएँ-निराला का रचना संसार बहुत विस्तृत है। उन्होंने गद्य और पद्य दोनों ही विधओं में लिखा है। उनकी रचनाएँ निराला रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित हैं। निराला अपनी कुछ कविताओं के कारण बहुत प्रसिद्धि प्राप्त कवि हो गए हैं।

‘राम की शक्ति पूजा’ और ‘तुलसीदास’ उनकी प्रबंधात्मक कविताएँ हैं, जिनका साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘सरोज-स्मृति’ हिन्दी की अकेली कविता है जो किसी पिता ने अपनी पुत्री की मृत्यु पर लिखी है। निराला की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं-अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, नए पत्ते, बेला, अर्चना, आराधना, गीतगुंज। इन ग्रन्थों में अनेक ऐसी कविताएँ हैं जो निराला को जन कवि बना देती हैं। जिनकी लोगों ने अपने कंठ में स्थान दिया है। यथा-जूही की कली, तोड़ती पत्थर, कुकुरमुत्ता, भिक्षुक, मै अकेला, बादल-राग आदि।

भाषा-शैली-काव्य की पुरानी परम्पराओं को त्याग कर काव्य-शिल्प के स्तर पर भी विद्राही। तेवर अपनाते हुए निराला जी ने काव्य-शैली को नई दिशा प्रदान की। उनके.काव्य में भाषा का कसाव, शब्दों की मितव्ययिता एवं अर्थ की प्रधानता है। संस्कृतनिष्ठ तत्सम शब्दों के साथ ही संधि-सामसयुक्त शब्दों का भी प्रयोग निराला जी ने किया है।

काव्यगत विशेषताएँ-निराला छायावाद के महत्त्वपूर्ण चार कवियों में से एक हैं। उनकी छायावादी कविताओं में प्रेम, प्रकृति-चित्रण तथा रहस्यवाद जैसी प्रवृत्तियों को मिलती हैं। बाद में निराला प्रगतिवाद की ओर झुक गए थे ! प्रगतिवादी विचारधारा के अनुसार उन्होंने शोषकों के विरोध और शोषितों के पक्ष में अनेक कविताएँ लिखी हैं, जिनमें, ‘विधवा’, “भिक्षुक’ और ‘तोड़ती पत्थर’ जैसी कविताओं में शोषितों के प्रति सहानुभूति है, तो ‘जागो फिर एक बार’ जैसी कविताओं में कवि दबे-कुचलों को जगाने का आह्मन करता है-

जागो फिर एक बार।
सिंह की गोद से
दीनता रे शिशु कौन?
मौन भी क्या रहती वह
रहते प्राण? रे अंजान।
एक मेषमाता ही
रहती है निर्निमेष
दुर्बल वह

इन पंक्तियों से कवि राष्ट्रीयता को भी अभिव्यक्त करता है। ‘तोड़ती पत्थर’ कविता के पत्थर तोड़ने वाली की कार्य करने की परिस्थिति को देखकर किसका हृदय-द्रवीभूत नहीं हो जाएगा।

निराला की प्रकृति संबंधी कविताएँ भी प्रकृति के मनोरम रूप प्रस्तुत करती हैं। उनकी ‘संध्या-सुंदरी’ कविता प्रकृति के मनोहर रूप प्रस्तुत करती है। बादल राग में भी प्रकृति का स्वाभाविक वर्णन करता है।

‘खुला आसमान’ कविता में प्रकृति की बहुत सरल भाषा में ऐसा वर्णन है, मानो दृश्यावली की रील चल रही हो।

सब मिलाकर निराला भारतीय संस्कृति के गायक हैं, किंतु वे रूढ़ियों के विरोधी हैं और समय के साथ चलने में विश्वास रखते हैं।

तोड़ती पत्थर कविता का सारांश

मार्क्सवादी चेतना का संस्पर्श लिये प्रगतिवाद की प्रतिनिधि रचना है “वह तोड़ती पत्थर”, जिसके रचनाकार हैं सचमुच के भावुक कवि महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला’।

कविता ‘वह’ से आरम्भ होती है और ‘मै’ से समाप्त होती है पर से स्व की यात्रा ही यह रचना है। जिस देश में “नारी की पूजा होती है वहाँ बसते हैं देव” जैसी महत् भावना कभी वास्तविकता थी। उसी देश में एक गरीब मजदूर स्त्री जेठ मास की चिलचिलाती धूप में बिना किसी छाया के पत्थर तोड़ रही है। यह दृश्य भले ही कवि को इलाहाबाद (प्रयाग) के पथ पर कहीं देखने को मिला किन्तु आज देश का हर कोना इस मामले में इलाहाबाद ही है। अमीरी गरीबी के बीच बड़ी चौड़ी अपाट्य खायी है।

इसे कवि ने पत्थर तोड़ती कर्मरत वयस्क नारी के माध्यम से व्यक्त किया है। नियति विरुद्ध है। वरन् नारी के कोमल हाथों में भारी हथौड़ा क्यों होता जो बार-बार उठता है और गिरकर पत्थर को चकनाचूर करता है। उसके ठीक सामने पेड़ों की कतार है, ऊँचे-ऊँचे भवन हैं, बड़ी-बड़ी दीवारी है अर्थात् सुख-वैभव वहाँ संरक्षित है, यह साँवली भरे बदन वाली युवती आँखें नीची किये अपने इसी पत्थर तोड़ने के प्रिय कर्म में मनोयोग से लगी है।

देखते-देखते दोपहर हुई। सूर्य प्रचंडती हुए। देह को झुलसा देने वाली लू चलने लगी धूल के बवंडर उठे धरती रूई की तरह जल रही है। किन्तु इस विषम परिस्थिति में भी उसका पत्थर तोड़ना जारी रहा। जब उसने देखा कि मैं (कवि) उसे देख रहा हूँ तो उसने पहले सामने मानचुम्बी भवन को देखा फिर एक अजब दृष्टि से जिसमें, व्यंग्य, निराश, कटाक्ष, आक्रोश, नियतिवाद, जैसे भाव एक साथ समाजित थे, मुझे देखा। मुझे ऐसा लगता जैसे किसी को मार पड़ी हो किन्तु किसी विवशतावश वह रो नहीं पाया हो, वह भाव आँखों से व्यक्त हो रहा था।

इसके बाद कवि जाग्रत स्वप्नावस्था में चला गया। उसने देखा कि एक सितार साधा जा चुका है और उसके तारों से एक अनसुनी झंकार निकल रही है। स्वप्न टूटा, एक क्षण के लिए मरत स्त्री काँप गयी। गर्मी की अतिशयता से माथे से पसीने की बुन्दें दुलक पड़ी। उसे अपनी पति स्वीकार है, वह पुनः कर्म में लीन हो गयी। कवि को सुनाई पड़ा जैसे उसने कहा हो-मैं तोड़ती पत्थर। वास्तव में इस कविता में कवि ने सड़क के किनारे पत्थर तोड़ने वाली एक गरीब जिदरिन का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया है।

तोड़ती पत्थर कठिन शब्दों का अर्थ

पथ-रास्ता। श्याम तन-साँवला शरीर। नत नयन-झुकी आँखें। कर्म-रत-मन-काम में लीन मन। गुरू-बड़ा। तरु मालिका-पेड़ों की पंक्ति। अट्टालिका-ऊँचा बहुमंजिला भवन। . प्रकार-चहारदीवारी, परकोटा। दिवा-दिन। भू-धरती। गर्द-धूल। चिनगी-चिनगारी। सुघर-सुगठित। सीकर-पसीना। छिन्नतार-टूटी निरंतरता।

तोड़ती पत्थर काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. श्याम तन ……………. कर्म-रत मन।
व्याख्या-
निराला रचित कविता ‘तोड़ती पत्थर’ से गृहीत प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने उस पत्थर तोड़नेवाली मजदूरनी के रूप-रंग का वर्णन किया है जिसे उसने इलाहाबाद के पथ पर देखा था। कवि के अनुसार उसका शरीर साँवला है। वह युवती है। उसका शरीर भरा हुआ तथा बँधा हुआ है अर्थात् वह गठीले शरीर वाली है और शरीर मांसल है। अर्थात् उसमें यौवन अपनी पूर्णता में विकसित है। वह आँख नीचे किये अपने काम में तल्लीन है।

प्रिय कर्मरत मन कहकर कवि यह बताना चाहता है कि उसने मजदूरी को अपनी जीविका का अनिवार्य माध्यम मान लिया है। उसका मन अपने काम में लगता है। अर्थात् वह मन लगाकर प्रेम से काम कर रही है। पत्थर तोड़ने का कार्य उसके लिए न तो बेगारी है और न अनिच्छा से थोपा हुआ कार्य। इस कथन से उसकी कर्मप्रियता और कर्मनिष्ठा दोनों व्यक्त हो रही है।

समग्रतः वह मजदूरनी भरे हुए यौवन वाली साँवली युवती है और वह मन लगाकर तल्लीन होकर काम कर रही है। कदाचित् इसी तत्लीनता के कारण वह धूप के कड़ेपन का अनुभव नही कर पा रही है।

2. गुरू हथोड़ा हाथ ………….. अट्टालिका, प्राकार।
व्याख्या-
‘तोड़ती पत्थर’ महाकवि निराला रचित एक प्रगतिवादी कविता है। इस कविता के व्याख्येय पंक्तियों में कवि ने प्रतीक के सहारे प्रगतिवाद की मूल चेतना “सर्वहारा बनाम पूँजीपति” के संघर्ष को व्यजित किया है।

इलाहाबाद के पथ पर कवि ने जिस मजदूरनी को पत्थर तोड़ते देखा है वह पूरी तल्लीनता . के साथ लगातार पत्थर पर भारी हथौड़े से प्रहार कर रही है। सामने वृक्ष-समूह की माला से घिरी हुई एक अट्टालिका यानी हवेली है। वह हवेली प्रकार अर्थात् चहारदीवारी से घिरी है। कवि को अनुभव होता है कि मजदूरनी पत्थर पर नहीं सामने वाले भव्य भवन पर हथौड़े से प्रहार कर रही है।

हम जानते हैं कि हँसिया हथौड़ा मार्क्सवादी पार्टी का चिह्न है। पार्टी मार्क्स के सिद्धातों पर चलती है। मार्क्स के अनुसार समाज में दो ही वर्ग है।
(i) शोषित या सर्वहारा जिसमें किसान-मजदूर आते हैं।
(ii) पूँजीपति, जिनके पास सम्पत्ति है, ऊँचे महल है और सुख-सुविधा के समान है।

सर्वहारा को संगठित कर पूँजीपतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उनका खात्मा और किसान -मजदूर राज की स्थानापना का मार्क्स का दर्शन है।

उपर्युक्त पंक्तियों में हथौड़ा मजदूर का प्रतीक है और चहारदीवारी से घिरी वृक्ष-समूहों : शीतल छाया में खड़ा विशाल भवन पूँजीपति का प्रतीक है। मजदूरनी मानों पत्थर पर हथोड़, चलाकर इसकी चोट का प्रभाव महल की दीवारों पर अंकित करना चाहती है।

3. दिवा का तमतमाया रूप ……………………. वह तोड़ती पत्थर।
व्याख्या-
‘तोड़ती पत्थर’ कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में निराला जी ने पत्थर तोड़ने वाली के कार्य-परिवेश का वर्णन किया है। इसी के अन्तर्गत मौसम का उल्लेख है। मौसम ग्रीष्म का है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता जाता है गर्मी बढ़ती जाती है। कवि कल्पना करता है कि इस अत्यधिक गर्मी के माध्यम से मानो दिन का क्रोधित तमतमाया हुआ रूप व्यक्त हो रहा है।

दिन के तमतमाने का मतलब है अत्यधिक गर्मी। इसके परिणामस्वरूप लू चलने लगी है जो तन को झुलसा रही है। धरती इस तरह जल रही है मानो रूई जल रही हो। हवा के थपेड़ो के कारण चारो तरफ गर्द-गुब्बार का साम्राज्य है। तप्त हवा के कारण यह धूल शरीर से लगती है तब लगता है कि आग की चिनगारी उड़ कर शरीर में लग रही है।

ऐसे विषम और गर्म मौसम में भी बेचारी मजदूरनी छायाविहीन स्थान पर पत्थर तोड़ रही है और दोपहरी के प्रचण्ड ताप में झुलस कर भी काम कर रही है। इन पंक्तियों में ‘रूई ज्यों . जलती’ उपमा अलंकार है और पूरे कथन में उत्प्रेक्षा अलंकार की ध्वनि है।

4. देखते देखा मुझे ……………. मार खा रोई नहीं।
व्याख्या-
निराला रचित ‘तोड़ती पत्थर’ कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि पत्थर तोड़ने वाली मजदूरनी के साथ आत्मीय सम्बन्ध स्थापना की चेष्टा करता है। इससे कविता तटस्थ वर्णन के क्षेत्र में निकालकर आत्मीयता की परिधि में आ जाती है।

कवि को अपनी ओर देखते देखकर वह मजदूरनी भी उसकी ओर मुखाबित होती है। फिर वह एक बार उस विशाल भवन की ओर देखती है। मगर वहाँ उसे जोड़ने वाला कोई तार नहीं दिखता। अर्थात् वहाँ उसकी ओर किसी भी दृष्टि से देखने वाला कोई नहीं है। अतः प्रहार से तार छिन्न हो जाता है, टूट जाता है। कवि ‘छिन्नतार’ शब्द के प्रयोग द्वारा यह कहना चाहता है कि एक मजदूर और एक महल वाले के बीच जोड़ने वाला कोई तार नहीं होता।

लिहाजा अट्टालिका की ओर से दृष्टि घुमाकर मजदूरनी कवि की ओर देखती है। उसकी दृष्टि में वेदना है जो मार खाकर भी न रोने वाले बच्चे की आँखों में होती है। ऐसी दृष्टि बेहद करुण होती है। यहाँ कवि की दृष्टिमें सहानुभूति है तो मजदूरनी की दृष्टि में विवशता भरी करुणा जो किसी की सहानुभूति पाकर उमड़ पड़ती है।

5. सजा सहज सितार ………………. मैं तोड़ती पत्थर।
व्याख्या-
‘तोड़ती पत्थर’ कविता की प्रस्तुत पंक्तियों में निराला जी ने अपनी भावना और मजदूरनी की यथार्थ स्थिति को मिला दिया है। मजदूरनी जिस “मार खा रोई नहीं” दृष्टि से कवि को देखती है उससे कवि से हृदय रूपी सितार के तार बज उठते हैं। उसमें वे करुणापूर्ण ममत्व की रागिनी झंकृत होने लगती है। ‘सजा सहज सितार’ के द्वारा कवि हृदय में मजदूरनी के प्रति सहानुभूति उत्पन्न होने की बात कहना चाहता है। उसे वेदना की ऐसी अनुभूति पहले कभी नहीं हुई थी। इसीलिए वह कहता है-“सुनी मैने वह नहीं जो थी सुनी झंकार।”

इसके बाद कवि पुनः यथार्थ के बाह्य जगत में लौट आता है। वह देखता है कि एक क्षण के बाद मजदूरनी के शरीर में कम्पन हुआ और उसके माथे पर झलक आयी पसीने की बूंदे लुढ़क पड़ती हैं। वह पुनः कर्म में लीन हो गयी। मानो कह रही हो-मैं तोड़ती पत्थर। इन क्तयों से स्पष्ट है कि मजदूरनी की कातर दृष्टि तथा मौसम की कठोर स्थिति की विषमता ने कवि के मन को उदवेलित किया। उसकी भावना के तार करुण से झंकृत हुए और उसी की परिणति इस कविता की रचना के रूप में हुई। ये पंक्तियाँ इस कविता को प्रेरणा– भूमि समझने की कुंजी ज्ञात होती है।