BSEB Bihar Board 12th Entrepreneurship Important Questions Short Answer Type Part 3 are the best resource for students which helps in revision.

Bihar Board 12th Entrepreneurship Important Questions Short Answer Type Part 3 in Hindi

प्रश्न 1.
सतत् विकास से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
व्यवसाय, उपक्रमों और उद्योग-धंधों की प्रगति को निरंतर बनाए रखना ही सतत् विकास कहलाता है। संसाधनों का पूर्ण उपयोग करके सतत् विकास की गति को बनाए रखा जाता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था का समुचित विकास होता है।

प्रश्न 2.
उदारीकरण क्या है ?
उत्तर:
उदारीकरण एक ऐसी नीति है जिसके अनुसार साहसी कोई भी उद्योग-धंधे स्थापित कर सकता है। कोई उत्पाद बना सकता है और लाभ कमा सकता है। इस संबंध में सरकार उदार बनी रहती है और अपना हस्तक्षेप नहीं करती है।

प्रश्न 3.
निजीकरण क्या है ?
उत्तर:
जब निजी क्षेत्र में उपक्रमों और उद्योगों को लगाया जाता है और उत्पादन-कार्य किया जाता है तो इसे निजीकरण कहा जाता है। इसमें कोई भी उद्यमिता या उद्योगपति अपना निजी उद्योग लगा सकता है। ऐसे उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं होते हैं बल्कि निजी क्षेत्र में रहते हैं।

प्रश्न 4.
वैश्वीकरण क्या है ?
उत्तर:
वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके अनुसार विश्व स्तर पर विभिन्न देशों का आपस में व्यापारिक और औद्योगिक संबंध बना रहता है। इसमें विश्वस्तर पर विभिन्न देश एक-दूसरे से निकट बने रहते हैं। इसमें विदेशी व्यापार अधिक होता है। विभिन्न देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंध स्थापित रहता है।

प्रश्न 5.
विविधीकरण का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
विविधीकरण का अर्थ है विभिन्न प्रकार के नए उत्पाद बनाना। उदाहरण के लिए टाटा समुदाय मुख्य रूप से लोहा एवं इस्पात उद्योग, रसायन, चाय, खाद, शक्ति, कपड़ा और ट्रक इत्यादि के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन इस समुदाय ने अब नए क्षेत्रों में भी कदम रखा है, जैसे मोटरकार, कम्प्यूटर, गृह-निर्माण, वित्त और बीमा इत्यादि।

प्रश्न 6.
संगठन क्या है ?
उत्तर:
संगठन (Organisation) शब्द की उत्पत्ति ‘Organism’ से हुई है जिसका अर्थ शरीर के ऐसे टुकड़ों से है जो आपस में इस प्रकार संबंधित हैं कि एक पूर्ण इकाई के रूप में कार्य करते हैं। उदाहरणार्थ, मानव शरीर की रचना शरीर के विभिन्न अंगों (हाथ, पैर, मुँह, नाक, आँख, मस्तिष्क आदि) से हुई है। इन अंगों के निश्चित कार्य है। जैसे–हाथों का कार्य काम करना, मुँह का खाना, पेट का पचाना, आँखों का देखना, नाक का सूंघना, कान का सुनना।

ये सभी क्रियाएँ पारस्परिक रूप से एक-दूसरे अंग की क्रियाओं पर आश्रित रहती हैं। किन्तु इन विभिन्न अवयवों के अलावा मानव शरीर के मस्तिष्क में एक केन्द्रीय विभाग भी होता है, जो समस्त अंगों, की क्रियाओं को नियंत्रित करता है। इस प्रकार विभिन्न विभागों में प्रभावपूर्ण समन्वय स्थापित करने की कला को ही संगठन कहा जाता है।

प्रश्न 7.
प्रबन्ध के महत्त्व के क्या कारण हैं ?
अथवा, प्रबन्ध क्यों महत्त्वपूर्ण है ?
उत्तर:
प्रबन्ध प्रत्येक संगठन के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्रियाकलाप है। निम्नलिखित कारणों से यह महत्त्वपूर्ण है-

  1. सामूहिक लक्ष्यों की प्राप्ति में यह सहायक है।
  2. यह क्षमता में वृद्धि करता है।
  3. यह गतिशील संगठन का निर्माण करता है।
  4. यह व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होता है।
  5. यह समाज के विकास में सहायक होता है।

प्रश्न 8.
स्कन्ध विनिमय बाजार के क्या कार्य हैं ?
अथवा, स्कन्ध विनिमय बाजार के कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तर:
स्कन्ध विनिमय बाजार के निम्नलिखित कार्य हैं-

  1. प्रतिभूतियों में लेन-देन हेतु विपणन सुविधाएँ प्रदान करना।
  2. पूँजी बाजार में तरलता एवं गतिशीलता प्रदान करना।
  3. प्रतिभूतियों का उचित मूल्यांकन करना।
  4. व्यवहारों की सुरक्षा एवं उनमें समता प्रदान करना।
  5. पूँजी निर्माण में सहायता।
  6. बचतों को गतिशीलता प्रदान करना।
  7. मध्यस्थ के रूप में कार्य करना।
  8. सूचीयन द्वारा प्रतिभूतियों को सुदृढ़ता प्रदान करना।

प्रश्न 9.
विपणन मिश्रण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
विपणन मिश्रण उत्पादन, इसके वितरण के तरीके को बढ़ाना और इसका मूल्य निर्धारण के मिश्रण को कहा जाता है। यह कुछ ऐसे सोचे-समझे उपकरणों का समूह है जिनसे एक लक्षित मण्डी की आवश्यकताएँ पूरी की जाती हैं।

प्रश्न 10.
वित्तीय नियोजन के दो मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर:
वित्त किसी भी व्यवसाय का जीवन-रक्त है। इसके बिना किसी व्यवसाय का संचालन नहीं हो सकता है। किसी भी व्यवसाय के वित्त का नियोजन ही वित्तीय नियोजन कहलाता है। इसके दो मुख्य उद्देश्य निम्नवत् हैं-

1. लाभों को अधिकतम करना- इसका मुख्य उद्देश्य व्यवसाय के लाभों को अधिकतम करना होता है। लाभों के अधिकतम होने के व्यवसाय का जीवन काल लम्बे समय तक बना रहता है। इससे व्यवसाय के स्वामियों को लाभ होता है। साथ-ही-साथ उसके एजेंटों को भी लाभ होता है।

2. जोखिमों को कम-से-कम करना- जोखिमों को कम करना भी इसका उद्देश्य है। जोखिम कम होने से व्यवसाय के स्वामी को व्यवसाय के संचालन में सुविधा होगी। साथ ही व्यवसाय का भी विकास होगा।

प्रश्न 11.
अवसर लागत तथा संयुक्त लागत क्या है ?
उत्तर:
अवसर लागत- अवसर लागत ऐसी लागत है जो किसी अन्य स्थान पर व्यय करने से भी प्राप्त हो सकती है। उदाहरण के लिए, अपनी इमारत (Building) को व्यवसाय में उपयोग कर लिया जाए तो किराया जो प्राप्त हो सकता था, यह अवसर लागत है। इस प्रकार की लागत को तभी ध्यान में रखा जाता है जब किसी परियोजना की लाभदायकता निकाली जाती है।

संयक्त लागत जब कभी सामग्री से दो या अधिक उत्पाद बनते हों, ऐसी लागत को सभी उत्पादों में बाँट देने को संयुक्त लागत कहा जाता है। उदाहरण के लिए, मिट्टी का तेल, ईंधन, गैस आदि कच्चे तेल से निकाले जाते हों तो संयुक्त लागत उस बिंदु तक होती है जहाँ से वे अलग अलग होती है। सामान्य लागत (common cost) और संयुक्त लागते (joint cost) एक-दूसरे के . साथ अदलती–बदलती रहती हैं।

प्रश्न 12.
नियंत्रण की प्रक्रिया में सम्मिलित विभिन्न कदमों को बताएं।
उत्तर:
नियंत्रण की प्रक्रिया में निम्नलिखित कदम शामिल होते हैं-

  1. प्रमापों का निर्धारण करना।
  2. वास्तविक निष्पादन का मापन करना।
  3. वास्तविक निष्पादन की तुलना प्रमापों से करना और विचलन का पता लगाना।
  4. आवश्यकतानुसार उचित सुधारात्मक कार्यवाही करना।

प्रश्न 13.
अवसर कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर:
सामान्य तौर पर अवसर दो तरह के होते हैं-
(i) पर्यावरण में विद्यमान अवसर (Existing Opportunities in the Environment)- कुछ अवसर ऐसे होते हैं जो पहले से ही मौजूद होते हैं; जैसे-कागज, कपड़ा, जूता आदि का कारखाना स्थापित करके इसी पुरातनता में कुछ नवीनता लाना। यहाँ साहसी को कुछ नयापन (Something -new) लाने का प्रयास करते रहना है। इसी में वह ऐसे अवसर ढूँढता है कि विद्यमान किस कमी को कैसे दूर करके कुछ नई चीज बाजार में पेश की जाय ?

(ii) निर्मित अवसर (Created Opportunities)- ऐसे अवसर पहले से मौजूद नहीं होते बल्कि ये उपभोक्ताओं की रुचि, फैशन, तकनीकी परिवर्तन, परिस्थिति के अनुसार नित्य नये-नये रूप में जन्म लेते रहते हैं। जैसे-सूचना तकनीक में विकास के चलते टेलीविजन, कम्प्यूटर, सॉफ्टवेयर आदि के क्षेत्र में नये-नये उपकरणों का कारोबार, बायोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में विकास के चलते नई बीमारियों की जाँच उपकरण, दवाओं आदि की आवश्यकतायें आदि नये-नये अवसर निर्मित करती हैं।

प्रश्न 14.
उद्यमिता के लिए बाजार मूल्यांकन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
वस्तुत: बाजार में उन वस्तुओं को प्रस्तुत किया जाता है जिनकी माँग ग्राहक करते है। किन्तु यह निर्धारित करना कि ग्राहक क्या चाहते हैं, एक जटिल काम है। बाजार में विविध प्रकार के ग्राहक होते हैं। उनकी पृष्ठमा शिक्षा, आय, चाहत, पसन्द आदि के सम्बन्ध में अलग-अलग होती है। ये विजातीय प्राक. उपक्रम के निकट एवं दूरस्थ में होते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनकी माँगें भी भिन्न भिन्न होती हैं।

किसी भी उत्पादक के लिए असंभव नहीं तो कठिन अवश्य है कि इन विविध प्रकार के ग्राहकों के लिए विविध कोटि की वस्तुओं का उत्पादन करें। अतः एक उद्यमी को यह तय कर लेना चाहिए कि किस कोटि के ग्राहकों के लिए वह वस्तुओं का उत्पादन करना च.: इस बात का निर्धारण कर लेने के बाद सम्बन्धित समूह के ग्राहकों की माँग का अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए उद्यमिता के लिए बाजार मूल्यांकन आवश्यक है।

प्रश्न 15.
पैकेजिंग के चार कार्य बताइए।
उत्तर:
अधिकांश व्यक्ति उत्पाद सुरक्षा को ही पैकेजिंग का एकमात्र कार्य समझते हैं। वास्तव में ऐसा सोचना उचित नहीं है। बाटा इण्डिया अपने पैकेज से तीन कार्यों की अपेक्षा करता है- (i) उत्पाद सुरक्षा (Product Protection), (ii) उत्पाद की मूल्य वृद्धि (Increase in the Value of the Product) एवं (iii) उत्पाद का विज्ञापन (Product Advertisement)।

प्रश्न 16.
पर्यावरण के प्रति उद्यमी का दायित्व बताइए।
उत्तर:
उद्यमी वातावरण के सभी घटकों के प्रति उत्तरदायी है। यह नागरिक समुदाय, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, विनियोजकों, प्रतिस्पर्धी संस्थाओं, राजनीतिक या सरकारी व्यवस्था, अर्थव्यवस्था (राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय) आदि सभी वातावरण के घटकों के प्रति उत्तरदायी है। दूसरे शब्दों में, सभी उद्यमशील क्रियाओं के निर्णयों में इनके हितों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

प्रश्न 17.
सम-विच्छेद बिन्दु क्या है ?
उत्तर:
उद्यमी जो व्यवसाय में नया प्रविष्ट होता है, उसे तुरन्त लाभ नहीं होने लगता बल्कि कुछ दिनों तक उसे ‘न लाभ न हानि’ की नीति पर भी व्यवसाय चलाना पड़ता है। इसी नीति से सम्बन्धित आगणन (calculation) सम-विच्छेद विश्लेषण’ होता है जिसकी जानकारी रखना एक उद्यमी के लिये आवश्यक होता है।

बिक्री का वह बिन्दु जहाँ व्यवसाय को न लाभ न हानि, ‘सम-विच्छेद बिन्दु’ कहलाती है। यहाँ विक्रय मूल्य कुल लागत के बराबर होता है। कुल लागत में स्थायी (Fixed) तथा परिवर्तनशील (Variable) दोनों शामिल होते हैं। उद्यमी कोई भी बिक्री करते समय इस बिन्दु का ध्यान रखता . है क्योंकि इस बिन्दु से अधिक बिक्री लाभ प्रदान करेगी और इससे नीचे की बिक्री से हानि होगी।

प्रश्न 18.
उत्पाद मिश्रण क्या है ?
उत्तर:
उत्पाद से आशय किसी भौतिक वस्तु अथवा सेवा से है जिससे क्रेता की आवश्यकताओं की संतुष्टि होती है। यह विपणन व्यूहरचना है जिसमें उत्पाद के अंगों का विवेचन एवं निर्णयन होता है। फिलिप कोटलर (Philip Kotler) के अनुसार, “उत्पाद क्रेता को संतुष्टियाँ अवकाश प्रदान करने की क्षमता वाले भौतिक सेवा एवं चिह्नात्मक विवरण का पुलिन्दा है।”

प्रत्येक व्यावसायिक फर्म उत्पाद विक्रय का कार्य करती है, भले ही कोई दिखाई दे या नहीं। उदाहरण के लिए, एक लॉण्डी जो कि धोने की सेवा का विक्रय करती है, उसी प्रकार उत्पाद में है जिस प्रकार एक फुटकर विक्रेता उन धुलाई वह लॉण्ड्री कर रही है। कोई भी उत्पाद का विक्रय करती है, वास्तव में, उस उत्पाद के सेवाओं का भी विक्रय करती है। एक उपभोक्ता इसलिए करता हैं क्योंकि उसको उस उत्पाद से एवं भौतिक संतोष प्राप्त होते हैं। अतः एक विक्रेता वास्तव में किसी उत्पाद का विपणन नहीं करता बल्कि उसके माध्यम से इन भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक संतोषों , का विपणन करता है।

प्रश्न 19.
नवप्रवर्तन क्या है ?
उत्तर:
नवप्रवर्तन का आशय है-

  • विद्यमान स्थिति का विश्लेषण
  • उपलब्ध संसाधनों का नया संयोजन
  • सृजनात्मक विचार एवं चतुराई
  • नई वस्तु व सेवाएँ प्रदान करनः।
  • उत्पादन की नई विधि का उपयाग करना।
  • उत्पादों के लिये नये बाजार खोलना।
  • कच्चे माल की पूर्ति के. नये स्रोत को प्राप्त करना।
  • औद्योगिक क्रियाओं का पुनर्गठन।

प्रश्न 20.
एक उद्यमी को अपने पदार्थों के विपणन हेतु क्यों उचित ध्यान देना चाहिए?
उत्तर:
विपणन आधुनिक व्यवसाय का एक आवश्यक कार्य है। इसमें विस्तृत प्रतिस्पर्धा, अत्यधिक विविधीकरण तथा अन्तर्राष्ट्रीय वितरण है।

विपणन पर उचित ध्यान देने की आवश्यकता निम्न लाभों के कारण है-

  • यह उपभोक्ताओं की संतुष्टि हेतु संसाधनों का उपयोग करने में व्यावसायिक इकाई को मदद करता है।
  • उपभोक्ता क्या चाहता है, उसके अनुसार उत्पादन करने में यह सहायता प्रदान करता है और लाभदायकता में वृद्धि करता है।
  • यह इकाई के दीर्घकालीन विकास, ख्याति, उत्कर्ष तथा जीवित रहने के लिए पथ प्रदर्शन करता है।
  • यह उत्पादन के विविधीकरण, जोखिम को न्यूनतम करने, उत्पाद-विशिष्टीकरण तथा ग्राहक समर्थन के अवसरों को प्रदान करता है।

प्रश्न 21.
कोष-प्रवाह विवरण व आय विवरण के एक अन्तर बताएँ।
उत्तर:
कोष-प्रवाह विवरण एक विशेष लेखांकन अवधि में चालू वर्ष व गत वर्ष के स्थिति विवरणों की तुलना करके शुद्ध कार्यशील पूँजी में होने वाले परिवर्तन की व्याख्या करता है जबकि आय विवरण एक अवधि विशेष की क्रियाओं का परिणाम प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 22.
गैस्-चालू सम्पत्तियाँ क्या होती हैं ? इनके उदाहरण दें।
उत्तर:
ऐसी-सम्पत्तियाँ जो व्यापार चलाने के उद्देश्य से खरीदी जाती है, बेचने के लिए नहीं, गैर चालू सम्पत्तियाँ कहलाती है। जैसे-ख्याति, भूमि, मशीनरी आदि।

प्रश्न 23.
पर्यावरण के सूक्ष्म परीक्षण के किन्हीं तीन उद्देश्यों को बताएं।
उत्तर:
पर्यावरण सूक्ष्म परीक्षण के तीन मुख्य उद्देश्य हैं-

  • उन्नत वित्तीय निष्पादन हेतु संसाधनों का प्रभावपूर्ण उपयोग प्राप्त करना।
  • उपभोक्ता के व्यवहार, बाजार प्रतिस्पर्धा, सरकार की नीति इत्यादि में निरन्तर होने वाले परिवर्तनों पर पैनी निगाह रखना।
  • उभरती समस्याओं तथा संवृद्धि को सुरक्षित रखने की दिशा में रणनीति विकसित करना।
  • व्यवसाय के क्षेत्रों एवं अवसरों की पहचान करना।
  • प्रबन्धकीय निर्णयों को दिशा-निर्देश देना।
  • भविष्य की घटनाओं का पूर्वानुमान करना तथा तद्नुसार समायोजन करना।

प्रश्न 24.
एक उपक्रम को सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक किन्हीं तीन तलरचनात्मक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) सुविधाओं को बताएँ।
उत्तर:
बिना अनुकूल तलरचना (आधारभूत ढाँचा) के कोई भी उपक्रम सही ढंग से संचालित नहीं हो सकता है। यह व्यावसायिक कुशलता के लिए आवश्यक है।

आधारभूत ढाँचागत (तलरचनात्मक) सुविधाएँ उपक्रम को सहायता करने के लिए आवश्यक है। ये सुविधाएँ हैं-

  • उपयुक्त आकार एवं भूमि की स्थिति
  • संसाधनों के आगमन व बहिर्गमन के लिए परिवहन का पर्याप्त साधन
  • उचित संयंत्र एवं मशीनरी
  • निर्बाध रूप से विधुत की आपूर्ति
  • जल की उचित उपलब्धता
  • प्रशिक्षित एवं निपुण कारीगरों को प्राप्त करने के अवसर।

प्रश्न 25.
कोष प्रवाह विवरण क्या है ?
उत्तर:
कोष प्रवाह विवरण दर्शाता है-

  • एक विशेष अवधि में रोकड़ अन्तर्वाह एवं रोकड़ बहिर्वाह को
  • व्यवसाय द्वारा मुख्य स्रोतों को जिनसे कोष प्राप्त किये गये हैं और व्यवसाय में इन कोषों के प्रयोग की।
  • एक दी हुई अवधि में व्यवसाय की कार्यशील पूँजी में कमी या वृद्धि।
  • व्यवसाय की वित्तीय स्थिति में परिवर्तन के कारण।
  • संसाधनों की गति तथा वित्तीय परिणामों पर उसके शुद्ध प्रभाव।
  • व्यवसाय में कोषों को उगाहने एवं उपयोग के तरीके।
  • व्यवसाय की वित्तीय स्थिति की प्रमुख प्रवृति जिसका और विश्लेषण होना. आवश्यक है।
  • अधिक लाभप्रद तरीके जिनका प्रयोग लाभांश के निर्णय, निवेश निर्णय तथा वित्तीय निर्णयों में किया जा सकता है।

प्रश्न 26.
वित्त की व्यवसाय को क्या आवश्यकता है ?
उत्तर:
आधुनिक समय में वित्त की आवश्यकता व्यवसाय के लिए ठीक उसी प्रकार से है जिस प्रकार मनुष्य के जीवन के लिए रक्त की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार बिना रक्त के शरीर काम नहीं कर सकता है। उसी प्रकार बिना वित्त के व्यावसायिक क्रियाओं को चलाना कठिन होता है। अतः व्यवसाय के कार्यों को निरंतर गति से चलाने के लिए वित्त या पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 27.
व्यावसायिक सम्वृद्धि के मुख्य सूचक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
सम्वृद्धि प्रबंधन उद्यमी का मुख्य दायित्व है। व्यावसायिक संस्था में वित्तीय स्वस्थता और अनुकूल लाभ का होना आवश्यक है। व्यवसाय द्वारा प्राप्त विकास. या सम्वृद्धि स्तर निम्नलिखित घटकों द्वारा प्रदर्शित होती है-

  • लाभ का अधिकोष या बचत जिससे आगे की निवेश जरूरतें पूरी हो सकें।
  • परिसम्पत्तियों व जायदादों का मूल्य जो शोधान क्षमता एवं मजबूत स्थिति को प्रस्तुत करता है।
  • तकनीकी सुधार जिसमें उत्पादन के गुण एवं मात्रा में वृद्धि होती है।
  • चतुर एवं प्रशिक्षित कर्मचारी।
  • संगठनात्मक कार्यकुशलता।
  • बिक्री की बढ़ती मात्रा।

ये तत्व बाह्य कारकों से भी प्रभावित होते हैं। अतः ये सदैव बदलते रहते हैं। वे परिवर्तनशील हैं। इसलिए सम्वृद्धि स्थिर (Static) नहीं होती।

प्रश्न 28.
एक सफल उद्यमी के क्या गुण हैं ?
उत्तर:
एक सफल उद्यमी के निम्न लक्षण या गुण हैं-

  • व्यावसायिक अवसर बाजार या उत्पादक को मान्यता देने की योग्यता ( Talent)
  • वित्तीय एवं गैर वित्तीय संसाधानों को संग्रह करने या जुटाने की क्षमता (Ability)
  • विचारों को व्यावहारिक रूप (कार्यरूप) देने के प्रति उत्साह ( Zeal)
  • कार्य के प्रति समर्पण (Dedication)
  • विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य प्राप्त करने की इच्छा ( Desire)
  • उपभोक्ताओं की वास्तविक आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को चिह्नित करने की क्षमता एवं उन्हें प्रभावशाली ढंग से पूरा करने के लिए पद्धतियाँ
  • जोखिम एवं चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए तत्पर रहना
  • शीघ्रता से और सही निर्णय लेने की तत्परता
  • दूर दृष्टि के लिए चतुराई, सम्वृद्धि के लिए पूर्वानुमान एवं भावी नियोजन।

प्रश्न 29.
एक उद्यमी की क्या मुख्य विशेषताएँ (लक्षण) हैं ?
उत्तर:
एक उद्यमी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • भविष्य की अनिश्चितताओं की जोखित को उठाने की क्षमता।
  • लाभदायक अवसर के रूप में किसी नये उत्पाद के नवप्रवर्तन की क्षमता।
  • विद्यमान वातावरण के अनुरूप वस्तु और सेवाओं का निर्माण करना।
  • वांछित फल प्राप्त करने के लिए संगठन करने की क्षमता।
  • एक उच्च प्रतिस्पर्धात्मक बाजार की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता।

प्रश्न 30.
‘आदेश की एकता’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
यह सिद्धांत प्रबंध का महत्वपूर्ण सिद्धांत है जिसका संबंध आदर्श प्राप्त करने वालों से है। “एक व्यक्ति दो स्वामियों की एक साथ सेवा नहीं कर सकता” की कहावत को प्रबंध पर लागू किया गया है तथा कार्य-कुशलता के लिए कर्मचारी को एक ही उच्चाधिकारी से आदेश मिलना चाहिए। संस्था के सफल संचालन एवं कार्य के कुशल संपादन के लिए यह आवश्यक है कि कर्मचारी विशेष को अधिकारी विशेष से ही आदेश प्राप्त हो। इस प्रकार एक व्यक्ति जो एक से अधिक व्यक्तियों से आदेश प्राप्त करता है। आवश्यक रूप से अकुशल, अनुशासनहीन, भ्रमपूर्ण तथा अनुत्तरदायी होता है।

प्रश्न 31.
एक नये व्यावसायिक उपक्रम का चुनाव करते समय किन-किन घटकों या कारकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए ?
उत्तर:
नये व्यावसायिक उपक्रम के चुनाव के संबंधा में निम्न घटकों या कारकों पर ध्यान दिया जाना चाहिए-

  • परियोजना लागत को पूरा करने के लिए आवश्यक निवेश का आकार।
  • इकाई का स्थान जिससे प्रबंधन में सुविधा हो सके।
  • प्रस्तावित वस्तु और सेवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी स्तर।
  • कच्चे माल की आपूर्ति के स्रोत।
  • श्रम शक्ति की उपलब्धता, उपकरण के गुण जो उत्पादन प्रक्रिया को मदद करते हैं।
  • बाजार में प्रतिस्पर्धा की स्थिति।

प्रश्न 32.
प्रबंध के मुख्य कार्य क्या हैं ?
उत्तर:
व्यावसायिक संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए व्यवसाय के साधनों के कुशल नियोजन, संगठन, निर्देशन एवं समन्वय ही प्रंबध है। प्रबंध के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं-
1. नियोजन-पहले से ही निर्णय करना कि क्या करना है, क्यों करना है, कहाँ करना है, कैसे करना है तथा किस व्यक्ति द्वारा करना है, इन सभी बातों पर ध्यान देते हुए प्रबंध के उक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करना होता है, उद्देश्य एवं नीतियाँ भी निर्धारित करनी होती हैं। इसी को नियोजन कहा जाता है।

2. संगठन-संगठन का आशय योजना द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करने वाले तंत्रों से है अतः संगठन कर्तव्यों को निर्धारित करता है। यह संबंध, उत्तरदायित्व तथा अधिकार निर्धारित करता है।

3. नियुक्तियाँ-प्रबंध के इस कार्य के अन्तर्गत आवश्यक पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति करना और उनको आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है।

4. निर्देशन-प्रबंध का एक महत्वपूर्ण कार्य निर्देशन है। अतः दूसरे व्यक्तियों से कार्य कराने के लिए यह आवश्यक है कि उनके कार्यों को निर्धारित उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जाए।

5. नियंत्रण कार्य सही ढंग से निष्पादित हो रहा है या नहीं इसके लिए नियंत्रण की आवश्यकता होती है। कार्य निष्पादन का मूल्यांकन, कार्य के स्तर में सुधार के लिए उपाय करना इस कार्य के प्रमुख अंश हैं।

प्रश्न 33.
बाजार अवलोकन क्या है ?
उत्तर:
विभिन्न उत्पाद सम्बन्धी ज्ञान बाजार सर्वेक्षण से प्राप्त हो सकता है। संकलित सूचनाओं के आधार पर विभिन्न उत्पादों की भावी माँग एवं पूर्ति का विश्लेषण किया जा सकता है। भावी अनुमानित माँग की जानकारी के बाद संभावित परिवर्तन, कीमत, फैशन, आय-स्तर, प्रतिस्पर्धा, तकनीक इत्यादि के सम्बन्ध में आवश्यक प्रावधान किये जा सकते हैं। उत्पादों की भावी माँग के सम्बन्ध में अनुभवी विक्रेताओं, विज्ञापन एजेंसियों, वाणिज्य परामर्शदाताओं आदि की राय ली जा सकती है। इस प्रकार संकलित सूचनाओं के आधार पर एक भावी प्रवर्तक एक ऐसे उत्पाद का चुनाव कर सकता है जिसकी भावी माँग अधिक हो और अन्ततः लाभप्रद हो।

प्रश्न 34.
उपभोक्ता सर्वेक्षण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
किसी व्यवसाय की सफलता भावी उपभोक्ताओं के ऊपर निर्भर करती है। उपभोक्ता सर्वेक्षण के माध्यम से उनकी रुचि, फैशन, पसन्द, गैर-पसन्द, वे कब खरीदेंगे, कहाँ खरीदेंगे, कितनी कीमत पर खरीदेंगे सम्बन्धी सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं। इस प्रकार, कोई ऐसा उत्पाद बाजार में प्रस्तुत किया जाना चाहिए जो ग्राहकों (उपभोक्ताओं) की चाहत के अनुकूल हो। उस उद्देश्य की पूर्ति हेतु उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया जानने के लिए स्वाद-परीक्षण की तकनीक अपनायी जानी चाहिए।

इससे उत्पाद की कमियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है और जिन्हें उत्पाद को बाजार में प्रस्तुत करने के पूर्व समाप्त किया जा सकता है। प्रारम्भ में किसी कम्पनी को एक या दो उत्पादों को ही बाजार में प्रस्तुत करना चाहिए तथा उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया जानने के बाद ही उत्पादों की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए अन्यथा कम्पनी को भारी क्षति हो सकती है।

प्रश्न 35.
विपणन वातावरण की परिभाषा लिखें।
उत्तर:
विपणन वातावरण की परिभाषाएँ (Definitions of Marketing Environment) विपणन वातावरण की मुख्य परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. कोटलर एवं आर्मस्ट्राँग के अनुसार, “किसी कम्पनी के विपणन वातावरण का सामंजस्य उन समस्त बाह्य घटकों एवं शक्तियों से है जिनका सम्बन्ध विपणन प्रबन्ध की क्षमता को वांछित उपभोक्ताओं के साथ विकसित करने से होता है।”
  2. क्रेवेन्स एवं अन्य के अनुसार, “विपणन वातावरण, जिसमें विपणन प्रबन्ध के बाह्य कार्यों का निष्पादन किया जाता है जो अनियंत्रित निर्णय लेने से सम्बन्धित एवं बदलाव तथा सुधारात्मक प्रकृति के होते हैं।”

प्रश्न 36.
नेटवर्क तकनीक क्या है ?
उत्तर:
नेटवर्क तकनीकें पारम्परिक दण्ड-चार्ट की तुलना में अधिक परिस्कृत हैं। यह एक तकनीक है जो परियोजना क्रियाओं, घटनाओं एवं उनके बीच सम्बन्ध को नेटवर्क डायग्राम के माध्यम से प्रस्तुत करती है। नेटवर्क तकनीक जटिलता परियोजनाओं को शुरू से अंत तक, तैयार करने के रूप में जाना जा सकता है, हालाँकि यह कार्य कागज के टुकड़े पर डायग्राम के आधार पर किया जाता है। यह तकनीक शिक्षाप्रद एवं प्रकटित दोनों हो सकती है। यह शिक्षाप्रद है क्योंकि इससे यह पता चलता है कि दूसरे क्रियात्मक विभाग के कार्य कैसे पूरे किये जाते हैं। यह प्रकटित भी है क्योंकि यह परियोजना की रूप-रेखा को भी स्पष्ट करती है।

प्रश्न 37.
स्थिर पूँजी क्या है ?
उत्तर:
स्थिर पूँजी उस पूँजी का प्रतिनिधित्व करती है जिसकी आवश्यकता दीर्घकालीन उत्पादन सुविधाओं को प्राप्त करने हेतु होती है। इसके अन्तर्गत भूमि, भवन, मशीन, फर्नीचर आदि के क्रय पर विनियोग की राशि शामिल की जाती है।

ह्वीलर के अनुसार, “स्थिर पूँजी स्थिर एवं दीर्घकालीन सम्पत्तियों में विनियोजित होती है। स्थिर पूँजी की राशि उत्पादक द्वारा स्थिर सम्पत्तियों के प्रयोग के अनुसार आनुपातिक दर से बदलती है।’

प्रश्न 38.
कोषों के कौन-कौन स्रोत हैं, बतायें।
उत्तर:
कोषों के निम्न स्रोत हैं-

  • संचालन से कोष (Funds from Operations)
  • अंश पूँजी का निर्गमन (Issue of Share Capital)
  • ऋणपत्रों का निर्गमन (Issue of Debentures)
  • ऋण लिया जाना (Raising of Loans)
  • स्थायी सम्पत्तियों की बिक्री (Sale of Fixed Assets)
  • प्राप्त लाभांश (Dividend Received)
  • कार्यशील पूँजी में शुद्ध कमी (Net Decrease in Working Capital)।

प्रश्न 39.
खंड सम-विच्छेद विश्लेषण की परिभाषा दें।
उत्तर:

  • चार्ल्स टी० हॉनग्रेन के अनुसार, “खंड-सम बिन्दु विक्रय मात्रा का वह बिन्दु है जिस पर कुल आगम और कुल व्यय बराबर हों, इसे शून्य लाभ एवं शून्य हानि का बिन्दु भी कहते हैं।”
  • केलर तथा फरेरा के शब्दों में, “किसी फर्म अथवा इकाई का खंड-सम बिन्दु विक्रय आय का वह स्तर है जो कि इसकी स्थिर तथा परिवर्तनशील लागतों के योग के बराबर हो।”
  • जी० आर० क्राउनिंगशिल्ड के अनुसार, “खंड-सम बिन्दु वह बिन्दु होता है जिस पर विक्रय आगम वस्तु को उत्पादित करने तथा विक्रय की लागत के बराबर हो और न तो कोई लाभ हो और न हानि हो।”

प्रश्न 40.
बुनियादी ढाँचे के महत्त्व को लिखें।
उत्तर:
बुनियादी ढाँचा उत्पादकता वृद्धिकर एवं सुविधाओं के प्रसारण द्वारा जीवन शैली को प्रभावित करते हुए आर्थिक विकास में योगदान करता है। ये सेवाएँ उत्पादन के विकास को कई प्रकार से प्रभावित करती हैं-

  • बुनियादी सुविधाएँ उत्पादन का अन्तरंग अंग (Intermediate input) हैं तथा इनकी लागतों में कमी करके उत्पादन की लाभदायकता को बढ़ाती हैं। साथ ही उत्पाद, आय एवं रोजगार के उच्च स्तरों को जन्म देती हैं।
  • बुनियादी सेवाएँ अन्य घटकों जैसे श्रम एवं पूँजी की उत्पादकता बढ़ाती हैं। इसलिए बुनियादी ढाँचे को उत्पादन का नि:शुल्क घटक भी कहा जाता है क्योंकि इसकी उपलब्धता दूसरे घटकों को उच्चतर प्रत्याय प्रदान करती है।

प्रश्न 41.
प्रबन्ध का अर्थ क्या है ?
अथवा, प्रबन्ध की परिभाषा लिखें।
उत्तर:
‘प्रबन्ध’ शब्द को कई अर्थों में प्रयोग किया गया है। कभी-कभी एक संगठन में कार्यरत “प्रबन्धकीय कर्मिकों के समूह” का प्रबन्ध करने के लिए किया जाता है। अन्य समयों में प्रबन्ध का तात्पर्य नियोजन, संगठन, कार्मिकता, निर्देशन, समन्वयन एवं नियंत्रण प्रक्रिया के रूप में लिया जाता है। ‘ संबोधन के आधार पर प्रबन्ध की कुछ एक परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-
1. मेरी पार्कर फॉलेट्टज (Mary Parker Follett) के अनुसार, “प्रबन्ध अन्य व्यक्तियों से काम लेने की कला है।”

2. फ्रेड्रिक विन्सेला टेयलर (Frederick Winston Taylor) के अनुसार, “प्रबंन्ध सर्वप्रथम यह ज्ञात करना कि आप व्यक्तियों से क्या (कार्य) करवाना चाहते हैं तथा पुनः यह निश्चित करना कि वे इसे किस प्रकार सस्ते एवं श्रेष्ठतम तरीके से करें।”

इन परिभाषाओं के अवलोकन के पश्चात्, प्रबन्ध को अन्यों द्वारा कार्य सम्पन्न कराने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। अन्य शब्दों में, यह विभिन्न कार्यों के निष्पादन तथा नियोजन, संगठन, समन्वयन, नेतृत्व एवं व्यावसायिक परिचालनों को इस प्रकार सम्पन्न करने की प्रक्रिया है ताकि व्यावसायिक फर्म के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। इसके अन्तर्गत वे सभी क्रियाएँ सम्मिलित हैं जो व्यावसायिक नियोजन से लेकर इसके वास्तविक संपादन तक व्यापक हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *