Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 परिक्षेपण के माप

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
किसी बारम्बारता वितरण को समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है, टिप्पणी लिखें।
(‘A measure of dispersion is a good supplement to the central value in understanding a frequency distribution.’ Comment.)
उत्तर:
परिक्षेपण का माप केन्द्रीय माप का एक सम्पूरक (A measure of dispersion a good supplement to the central value):
परिक्षेपण का माप किसी बारम्बारता वितरण को समझने में केन्द्रीय माप का एक अच्छा सम्पूरक है। केन्द्रीय माप वितरण केवल पहले के बारे में बताता है। यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता। उदाहरण के लिये यदि 10 विद्यार्थियों के समूह के औसत अंक 60 हैं, तो इससे यह अनुमान अवश्य लगाया जा सकता है कि औसत रूप में विद्यार्थियों का स्तर कैसा है।

परन्तु इससे यह बिल्कुल पता नहीं चलता कि 10 विद्यार्थियों के अंकों में परस्पर कितना अन्तर है। सभी के अंक 60 हैं या कुछ एक के बहुत अधिक हैं और कुछ के बहुत कम है। इसी बात का स्पष्टीकरण एक और उदाहरण लेकर किया जा सकता है। नीचे राम, रहीम और मारिया के परिवारों की आय के आँकड़े दिये गये हैं। राम के परिवार में चार सदस्य हैं। रहीम के परिवार में 6 सदस्य हैं और मारिया के परिवार में 5 सदस्य हैं।
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तालिका से पता चलता है कि प्रत्येक परिवार की औसत आय 15000 रुपये (\(\frac { 60,000 }{ 4 } \), \(\frac{90,000}{5}\), \(\frac{75,000}{5}\)) है परन्तु व्यक्तिगत आय में बहुत भिन्नताएँ हैं। अतः यह स्पष्ट है कि औसत वितरण केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् मानों का प्रतिनिधि आकार इसे बेहतर ढंग से समझने के लिये हमें मानों के प्रसार की आवश्यकता है। राम के परिवार में आय की भिन्नता अपेक्षाकृत कम है।

रहीम के परिवार में आय की यह भिन्नता काफी अधिक है, जबकि मारिया के परिवार की यह भिन्नता अधिकतम है। केवल औसत का ज्ञान अपर्याप्त है। यदि आपको किसी अन्य मान की जानकारी हो, जो मान में वितरण की मात्रा को प्रदर्शित करता है, तो उस वितरण के बारे में आपका ज्ञान बढ़ जायेगा। उदाहरण के लिये प्रति व्यक्ति आय केवल औसत आय का प्रदर्शन करती है। परिक्षेपण की माप आपको आय की असमानताओं के बारे में बता सकती है। इस तरह से समाज के विभिन्न वर्गों में लोगों के सापेक्ष जीवनस्तर के बारे में आपको जानकारी में वृद्धि होगी।

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प्रश्न 2.
परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?
उत्तर:
प्रमाप विचलन परिक्षेपण का सबसे अच्छा माप है, क्योंकि इसमें अच्छे परिक्षेपण की लगभग सभी विशेषताएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं लेकिन कुछ केन्द्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इस बात से पूर्णतः सहमत हैं।

प्रश्न 4.
एक कस्बे में 25% लोग 45,000 रुपये से अधिक आय अर्जित करते हैं, जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिये।
उत्तर:
1. परिक्षेपण का सापेक्ष मान अर्थात् चतुर्थक विचलन –
= \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = \(\frac{45,000-18,000}{45,000+18,000}\) = \(\frac{27,000}{63,000}\) = 0.428

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प्रश्न 5.
एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूँ व चावल फसल की उपज निम्नवत् है –
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प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें –
(क) परास
(ख) चतुर्थक विचलन
(ग) माध्य से विचलन
(घ) माध्य विचलन
(ङ) मानक विचलन
(च) सिक फसल में अधिक विचरण है
(छ) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों की तुलना कीजिए
उत्तर:
गेहूँ की फसल –
(क) परास: 1 – S = 25 – 9 = 16
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q1 = 3\(\frac{(N+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इसी प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से विभाजित करें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें। उसे जोड़ें तथा योगफल को 10 से भाग दें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

चावल की फसल –
परास: 1 – S = 34 – 12 = 22
(ख) चतुर्थक विचलन: \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{2} \)
Q3 = 3\(\frac{(10+1)}{4}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{3×11}{4}\) = \(\frac{33}{4}\) = 8.25 वें मद का मूल्य
इस प्रकार Q1 का मूल्य ज्ञात करें और ऊपर दिए गए सूत्र का प्रयोग करके चतुर्थक विचलन ज्ञात करें।
(ग) पहले माध्य निकालें और प्रत्येक मद का माध्य से विचलन ज्ञात करके उनका योगफल निकालें। योगफल को 10 से भाग दें।
(घ) पहले माध्यिका का ज्ञात करें। प्रत्येक मद का माध्यिका से विचलन ज्ञात करें और उसका योगफल ज्ञात करें और योगफल को 10 से विभाजित करें।
(च) विद्यार्थी स्वयं करें।
(छ) विद्यार्थी स्वयं करें।

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प्रश्न 6.
पूर्ववर्ती प्रश्न में विचरण के सापेक्ष मापों का परिकलन कीजिए. और वह मान बताएँ, जो आपके विचार में सर्वधिक विश्वसनीय है।
उत्तर:
परास का कोण सापेक्ष माप है परास गुणांक। अतः हम परांस गुणांक की गणना करेंगे।

  1. गेहूँ का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{25-9}{25+9}\) = \(\frac{16}{36}\) = 0.44
  2. चावल का परास गुणांक = \(\frac{L-S}{L+S}\) = \(\frac{34-12}{34+12}\) = \(\frac{22}{43}\) = 0.47
    इसी प्रकार दोनों फसलों की उपजों के चतुर्थक विचलन गुणांक तथा विचरण गुणांक ज्ञात किए जाएंगे।

प्रश्न 7.
किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन X और Y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है, जो निम्नवत् है –
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किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिये?
(क) अधिक स्कोर बनाने वाले को या
(ख) अधिक भरोसेमन्द बल्लेबाज को।
उत्तर:
X बल्लेबाज का स्कोर (Score of X batsman):
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माध्य (AM) = \(\frac{Σx}{N}\) = \(\frac{350}{5}\) = 70
औसत स्कोर = 70 रन
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \)  = \(\frac{5750}{5}\) = 1150 रन (स्कोर)
प्रमाप विचलन का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) = \(\frac{33.91}{70}\) = 0.84
विचारण (variance) = \(\frac { Σ(X-\bar { X) } }{ N } \) = \(\frac { ΣX^{ 2 } }{ N } \) = \(\frac{5750}{5}\) रन
विचारण का गुणांक = \(\frac{σ}{x}\) × 100 = \(\frac{12.88}{62}\) × 100 = 20.77%

निष्कर्ष (Conclusion):

  1. x बल्लेबाज को चुना जाना चाहिए क्योंकि उसका औसत स्कोर (70 रन) y बल्लेबाज के औसत (62 रन) से अधिक है।
  2. y बल्लेबाज अधिक भरोसेमन्द (विश्वसनीय) है, क्योंकि उसका विचरण गुणांक (C.V = 20.70%) X बल्लेबाज का विचरण गुणांक (48.44%) से कम है।

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प्रश्न 8.
दो ब्राण्डों के बल्ब की गुणवत्ता जाँचने के लिये ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवनकाल को प्रत्येक ब्राण्ड के 100 बल्वों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है –
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(क) किस ब्राण्ड का जीवन काल अधिक है?
(ख) कौन-सा ब्राण्ड अधिक भरोसेमंद है?
उत्तर:
ब्राण्ड ‘क’ बल्ब
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of variation)
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विचरण गुणांक की गणना (Calculation of co-efficient of Variation)
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निष्कर्ष (Conclusion):

  1. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब का जीवन काल अधिक है क्योंकि बल्ब ‘ख’ का माध्य जीवन काल बल्ब ‘क’ बल्ब के माध्य जीवन काल से अधिक है।
  2. ‘ख’ ब्राण्ड बल्ब अधिक भरोसेमंद है क्योंकि इस बल्ब के इस ब्राण्ड का विचरण गुणांक ‘क’ ब्राण्ड के बल्ब के विचरण गुणांक से कम है।

प्रश्न 9.
एक कारखाने में 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रुपये है तथा मानक विचलन 40 रुपये था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रुपये की वृद्धि की गई, अब मजदूर की औसत मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आई?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में वृद्धि = 20 रुपये
मजदूरी में कुल बृद्धि = 50 × 20 – 1000
मजदूरी बृद्धि से पूर्व कुल मजदूरी का योगफल = 10,000 + 1,000 = 11,000 रुपये
नई औसत मजदूरी = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{11000}{50}\) = 220
अत: नई औसत मजदूरी = 220 रुपये
औसत मजदूरी में परिवर्तन होगा, परन्तु मानक विचलन में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। अब मजदूरी में समानता ज्ञात करने के लिए विचरणता गुणांक ज्ञात करेंगे। आरम्भ में –
C.V. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) = 100 = 20%
बाद में C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{40}{200}\) × 100 = 18.18%
अब मजदूरी में अधिक समानता आ गई है क्योंकि विचरण कम हो गया है।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती प्रश्न में यदि प्रत्येक मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाये, तो माध्य और मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि करने पर नया माध्य 200 रुपये (200 + 20) होगा।
मानक विचलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित वितरण के लिये माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन किजिये।
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उत्तर:
माध्य से माध्य विचलन और मानक विचनल की गणना (Calculation of mean and standard deviation):
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मध्यिका से विचलन की.गणना (Calculation mean deviation mean):
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माध्य विचलन = \(\frac{Σf|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.68
अत: माध्य विचलन = 19.68
माध्य विचलन = \(\frac{f|d|}{N}\) = \(\frac{998.4}{50}\) = 19.968

प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation);
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प्रश्न 12.
10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात किजिये।
उत्तर:
प्रमाप विचलन σ = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 3 } }{ N } -(X)^{ 2 } } \)
अथवा, σ2 = \(\sqrt { \frac { Σx^{ 2 } }{ N } } \) – (X)2 = \(\frac{1090}{10}\) – (10)2 = 109 – 100 = 9
अथ्वा, σ = \(\sqrt{9}\) = 3
अतः विचरण गुणाक = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac{3}{10}\) × 100 = 300

Bihar Board Class 11 Economics परिक्षेपण के माप Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक व्यक्तिगत श्रेणी में विचलन की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
माध्य विचलन (M.D.) = (Q.D.) = \(\frac{Σf(d)}{V}\)

प्रश्न 2.
माध्य विचलन प्रायः माध्यिका से ही नहीं लिए जाते हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्यिका से इसलिए लिये जाते हैं, क्योंकि माध्यिका से लिए गये विचलनों का योग न्यूनतम होता है।

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प्रश्न 3.
व्यक्तिगत श्रेणी में प्रमाण विचलन (Standard Deviation) की गणना का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
प्रमाण विचलन (σ) = \(\sqrt { \frac { Σ(X-X)^{ 2 } }{ N } } \)

प्रश्न 4.
प्रमाप विचलन सदैव किस माध्य से लिये जाते हैं?
उत्तर:
प्रमाप विचलन सदैव समान्तर माध्य से लिये जाते हैं, क्योंकि इससे लिए गए विचलनों के वर्गों का योग न्यूनतम होता है।

प्रश्न 5.
प्रसरण (Variance) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसरण (Variance):
(प्रमाण विचलन)2

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प्रश्न 6.
यदि किसी आवृत्ति बंटन का प्रसरण (Variance) 100 है, तो इसका प्रमाण विचलन क्या होगा?
उत्तर:
प्रमाप विचलन (σ) = \(\sqrt{100=10}\)

प्रश्न 7.
पाँच संख्याओं 1, 4, 5, 7 तथा 8 का प्रमाप विचलन 2, 4, 5 है। यदि प्रत्येक संख्या में 10 जोड़ दिया जाये, तो नया प्रमाप विचलन क्या होगा?
उत्तर:
नया प्रमाण विचलन (σ) = 2.45

प्रश्न 8.
यदि किसी श्रेणी का प्रमाप विचलन 5 है, तो उसका प्रसरण (Variance) कितना होगा?
उत्तर:
प्रसरण (Vriance) (5)2 = 25

प्रश्न 9.
विचरण गुणांक (Coefficient of Variation) क्या होता है?
उत्तर:
विचरण गूणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

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प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति वितरण का समान्तर माध्य 100 और प्रमाप विचलन 10 है, तो उसका विचरण गुणांक (Coefficlent of Variation) निकालें।
उत्तर:
विचरण गणांक (C.V.) = \(\frac{10}{100}\) × 100 = 10%

प्रश्न 11.
दो श्रेणियों A तथा B का विचरण गुणांक 20% तथा 10% है, कौन-सी श्रेणी सजातीय अथवा समरूप कहलायेगी?
उत्तर:
B श्रेणी समाजतीय अथवा समरूप कहलायेगी, क्योंकि इसका विचरण गुणांक अपेक्षाकृत कम है।

प्रश्न 12.
एक प्रसामान्य बंटन x + 36 के अन्तर्गत कितनी प्रतिशत मदें शामिल होती हैं?
उत्तर:
\(\bar { X } \) ± 3σ = 99.37% मदें।

प्रश्न 13.
परिक्षेपन की माप कौन-सी श्रेणी की माध्य कहलाती है?
उत्तर:
द्वितीय श्रेणी की।

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प्रश्न 14.
परिक्षेपण के तीन प्रचलित मापों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. प्रमाण विचलन

प्रश्न 15.
विस्तार (Range) किसे कहते हैं?
उत्तर:
विस्तार (R) अधिकतम मूल्य तथा न्यूनतम मूल्य में अन्तर है।
सूत्र के रूप में, R = H – L

प्रश्न 16.
किसी स्कूल में पाँच छात्र के मासिक खर्च क्रमश: 12 रु., 20 रु., 5 रु.,, 40 रु. और 62 रु. है, विस्तार (Range) ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विस्तार = 62 रु., – 12 रु. = 50 रु.

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या होता है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन कियी श्रेणी के तीसरे तथा पहले चतुर्थक के अन्तर का आधार है। सूत्र के रूप में,
Q.D = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 18.
कौन से परिक्षेपन के माप में विचलन चिह्नों (+ तथा -) की उपेक्षा की जाती है?
उत्तर:
माध्य विचलन।

प्रश्न 19.
माध्य विचलन (Mean Deviation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक समंकमाला के किसी माध्य (समान्तर माध्य, माध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गये विचलनों को जोड़ के समान्तर माध्य विचलन कहते हैं।

प्रश्न 20.
निम्न सूचनाओं के आधार पर विस्तार ज्ञात करें 20, 30, 40, 50 तथा 200
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 21.
यदि प्रश्न 33 में यदि दिये गये आँकड़ों में 200 हटा दिया जाये तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 50 – 20 = 30

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प्रश्न 22.
प्रश्न 33 में यदि 50 के स्थान पर यदि 150 कर दिया जाये, तब विस्तार क्या होगा?
उत्तर:
विस्तार = 200 – 20 = 180

प्रश्न 23.
खले सिरे वाले वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
खुले सिरे वितरण से अभिप्राय उस वितरण से है, जिसमें निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की उच्चतम सीमा या दोनों ही न दिये गये हों।

प्रश्न 24.
उदाहरण से बतायें कि विस्तार अधिकतम सीमा मूल्य से प्रभावित होता है।
उत्तर:
मान लो हम निम्न मूल्य लेते हैं।
10, 15, 20, 50
ऐसी अवस्था में विस्तार = 50 – 10 = 40
यदि अधिकतम सीमा का मूल्य 50 के स्थान पर 100 हो जाये, तो ऐसी अवस्था में विस्तार = 100 – 10 = 90 होगा।
इस प्रकार हम देखते हैं कि विस्तार उच्चतम सीमा के मूल्य से प्रभावित होता है।

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प्रश्न 25.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध अन्तर चतुर्थक विस्तार (Semi-inter-Quartile Range) है।

प्रश्न 26.
प्रमाप विचलन गुणांक का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रमाप विचलन गुणांक = \(\frac{σ}{X}\)

प्रश्न 27.
विचरण गुणांक की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विचरण गुणांक = \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 28.
निम्नलिखित सूचना के आधार पर विचरण गुणांक (C.V.) की गणना करें –

  1. प्रतिदिन प्रति व्यक्ति में मजदूरी के आधार पर विचरण = 9 रुपये
  2. औसत मजदूरी = 120
  3. मजदूरों की संख्या = 50

उत्तर:
C.F. = \(\frac{σ}{X}\) × 100 = \(\frac { \sqrt { 9 } }{ 20 } \) × 100 = \(\frac{3}{120}\) × 100 = 25%

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प्रश्न 29.
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विभिन्न विधियाँ लिखें।
उत्तर:
विच्छन श्रेणी से प्रमाप विचलन की गणना की विधियाँ हैं –

  1. वास्तविक माध्य विधि
  2. काल्पनिक माध्य विधि
  3. प्रत्यक्ष विधि तथा
  4. पद विचलन विधि

प्रश्न 30.
निरपेक्ष तथा सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
निरपेक्ष परिक्षेपण को उन्हीं इकाइयों में व्यक्त किया जाता है, जिनमें समंक होते हैं (जैसे रुपये, कि. ग्राम)। इसके विपरीत सापेक्ष परिक्षेपण प्रतिशत में या निरपेक्ष परिक्षेपण के गुणांक में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 31.
परिक्षेपण का बिन्दुरेखीय माप कौन-सा है?
उत्तर:
लॉरेंज वक्र।

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प्रश्न 32.
लॉरेंज वक्र किस आर्थिक समस्या के अध्ययन के लिए उपयुक्त है?
उत्तर:
किसी देश की आय तथा सम्पत्ति में असमानताओं की समस्या का अध्ययन करने के लिए लॉरेंज वक्र बहुत उपयुक्त है।

प्रश्न 33.
परिक्षेपण का कौन-सा माप दो श्रेणियों की तुलना के लिए अधिक उपयुक्त हैं?
उत्तर:
विचरण गुणांक।

प्रश्न 34.
विस्तार का प्रमुख दोष क्या है?
उत्तर:
यह केवल दो चरण मूल्यों पर आधारित है।

प्रश्न 35.
प्रमाप विचलन (Standard Deviation) क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से लिए गए विचलन के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है।

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प्रश्न 36.
निम्न श्रृंखला का विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 13
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{105-50}{105+50}\) = \(\frac{55}{155}\) = 0.354

प्रश्न 37.
यदि प्रमाप विचलन 9 है, तो प्रसरण का क्या मूल्य होगा?
उत्तर:
प्रसारण = σ2 = 9 × 9 = 81

प्रश्न 38.
विस्तार गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
विस्तार गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\)

प्रश्न 39.
प्रमाप विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
विचलन वर्ग माध्य मूल।

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प्रश्न 40.
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
चतुर्थक विचलन का दूसरा नाम अर्द्ध-अन्तर चतुर्थक (Semi-inter-quartile) है।

प्रश्न 41.
सर्वप्रथम प्रसारण शब्द का प्रयोग किसने किया था?
उत्तर:
आर. ए. फिशर ने।

प्रश्न 42.
अच्छे परिक्षेपण के माप की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अच्छा परिक्षेपण श्रृंखला के सभी मदों पर आधारित होता है।
  2. इसकी गणना सरल चाहिए।

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प्रश्न 43.
परिक्षेपण के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. श्रृंखला के गठन अथवा बनावट के विषय में जानकारी देना।
  2. माध्य से प्रभावीपन को जाँचना।

प्रश्न 44.
एक कार्यालय में 10 व्यक्तियों का मध्यमान वेतन 5400 रुपये है। उनमें से एक कर्मचारी का वेतन 6000 रुपये है। बताएं कि इस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है या ऋणात्मक।
उत्तर:
उस व्यक्ति के वेतन का विचलन धनात्मक है।

प्रश्न 45.
परिक्षेपण के कौन से माप मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।
उत्तर:
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन मूल्यों के विस्तार पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 46.
परिक्षेपण के कौन से माप मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं?
उत्तर:
माध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन मध्यमान से विचलन मूल्यों पर आधारित हैं।

प्रश्न 47.
परिक्षेपण के माप कितने प्रकार के हो सकते हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण माप दो प्रकार के हो सकते हैं –

  1. निरपेक्ष तथा
  2. सापेक्ष

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प्रश्न 48.
प्रमाप विचलन का एक मुख्य दोष क्या है?
उत्तर:
इसे समझना एवं ज्ञात करना अपेक्षाकृत कठिन है।

प्रश्न 49.
परिक्षेपण के विभिन्न मापों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. निरपेक्ष माप
  2. सापेक्ष माप

प्रश्न 50.
विस्तार का एक दोष लिखें।
उत्तर:
वे श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं हैं।

प्रश्न 51.
कौन-सी परिक्षेपण की माप 50 प्रतिशत मूल्य से सम्बन्धित है?
उत्तर:
अन्तर चतुर्थक विस्तार।

प्रश्न 52.
विचरण क्या है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन के वर्ग को विचरण कहते हैं। समीकरण में, प्रसारण = σ2

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प्रश्न 53.
विचरण गुणांक ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
C.V.= \(\frac{σ}{X}\) × 100

प्रश्न 54.
प्रमाप विचलन की एक बीजगणितीय विशेषता बताएँ।
उत्तर:
समान्तर माध्य से लिए गए विचलन वर्गों का योग सदैव न्यूनतम होता है।

प्रश्न 55.
सामूहिक प्रमाप विचलन ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 14

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निरपेक्ष और सापेक्ष परिक्षेपण में क्या अन्तर है?
उत्तर:
जब किसी समंकमाला के विस्तार, बिखराव या विचरण का माप निरपेक्ष रूप में उसकी इकाई द्वारा ज्ञात किया जाता है, तो उसे परिक्षेपण का निरपेक्ष माप कहते हैं और जब परिक्षेपण के निरपेक्ष माप को सम्बन्धित माध्य से भाग दे और इस प्रकार जो अनुपात या प्रतिशत प्राप्त होता है, परिक्षेपण का सापेक्ष माप कहते हैं।

प्रश्न 2.
परिक्षेपण के आदर्श माप के कोई तीन गुण बताओ।
उत्तर:

  1. आदर्श परिक्षेपन का माप स्पष्ट एवं सरल होता है।
  2. यह सभी मूल्यों पर आधारित होता है।
  3. निदर्शन में परिवर्तनों का परिक्षेपण के आदर्श माप पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

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प्रश्न 3.
माध्य विचलन (Mean Deviation) और प्रमाप विचलन (Standard Deviation) में अन्तर बताइये।
उत्तर:
1. माध्य विचलन में श्रेणी के मूल्यों में विचलन किसी भी सांख्यिकी माध्य (सामानान्तर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से निकाले जा सकते हैं, जबकि प्रमाप विचलनों में श्रेष्ठ के मूल्यों के विचलन सदैव सामानान्तर माध्य से लिये जाते हैं।

प्रश्न 4.
परिक्षेपण किसे कहते हैं? निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित मापों के नाम लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण से अभिप्राय समंकमाला में विभिन्न मूल्यों के विस्तार, दूरी तथा बिखराव से होता है। बऊले के अनुसार, “परिक्षेपण पदों के विचरण या अन्तर का माप है। परिक्षेपण की सहायता से मदों के केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचलन ज्ञात किये जाते है।” निरपेक्ष परिक्षेपण के चार प्रचलित माप –

  1. विस्तार
  2. चतुर्थक विचलन
  3. माध्य विचलन
  4. प्रमाप विचलन इत्यादि हैं

प्रश्न 5.
प्रमाप विचलन का क्या अर्थ है? इसको किस चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है?
उत्तर:
किसी श्रेणी के समानान्तर माध्य के विचलनों के वर्गों के समानान्तर माध्य का वर्गमूल प्रमाप विचलन कहलाता है। प्रमाप विचलन के माप के लिए ग्रीक वर्णमाला का अक्षर सिग्मा (Small Sigma) प्रयुक्त किया जाता है। सूत्र के रूप में  –
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X } )^{ 2 } }{ N } } \)

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प्रश्न 6.
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन क्या हैं? इसकी गणना का सूत्र दीजिए।
उत्तर:
विस्तार परिक्षेपण का सरल माप है। किसी श्रेणी के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अन्तर को विस्तार कहते हैं। इसकी गणना के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
विस्तार = R = L – S
चतुर्थक विचलन को अर्द्ध अन्तर चतुर्थ विस्तार भी कहते हैं। परिक्षेपण का यह माप शृंखला के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के मूल्यों पर आधारित है। इसकी गणना करने के लिये निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया हाता है।
चतर्थक विचलन Q.D. = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

प्रश्न 7.
मूल तथा पैमाने में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन, माध्य तथा विचरण पर क्या प्रभाव पड़ोगा?
उत्तर:
1. मूल में परिवर्तन करने पर प्रमाप विचलन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। परन्तु मूल में परिवर्तन आने पर माध्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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प्रश्न 8.
प्रमाप विचलन को विचलन का वर्गों के माध्य मूल भी क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
प्रमाप विचलन को विचलन के वर्गों का माध्य मूल भी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह माध्य के विचलनों के वर्गों के माध्य का मूल है। प्रमाप विचलन की गणना में हम पहले माध्य की गणना करते हैं फिर माध्य से मदों विचलन ज्ञात किया जाता फिर विचलनों का वर्ग निकालकर उसका योगफल निकाला जाता है। विचलन के वर्गों के जोड़ को मदों की संख्या से विभाजित किया जाता है और जो परिणाम आता है. उसका वर्गमूल ज्ञात किया हाता है प्रमाप विचलन का चिह्न है। सूत्र रूप में।
σ = \(\sqrt { \frac { Σ(X-\bar { X)N } }{ } } \)

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक विशेष वितरण में चतुर्थ विचलन 15 अंक है और चतुर्थ विचलन का गुणांक 0.6 है। Q1 तथा Q2 ज्ञात करें।
उत्तर:
माध्य विचलन (Q.D.) = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \) = 15 अंक
अथवा, Q3 – Q1 = 30
माध्य विचलन का गुणांक = \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6
\(\frac { 30 }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \) = 0.6; अथवा, Q3 + Q1 = \(\frac{30}{0.6}\)

  1. तथा
  2. को जोड़ने पर

∴ Q3 + Q1 = 50
Q3 – Q1 = 30
Q3 + Q1 = 50
2Q3 = 80
Q1 = 40 अंक
अब Q3 – Q1 = 30
अतः – Q1 = 30 – Q3
-Q1 = 30 – 40 = -10
Q1 = 10
Q1 = 10 अंक तथा Q3 = 30 अंक उत्तर।

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प्रश्न 2.
11 मनुष्यों की ऊँचाई 61, 64, 68, 67, 68, 66, 70, 65, 67 तथा 72 इंच है। विस्तार ज्ञात किजिए। यदि सबसे छोटे कद वाले व्यक्ति को हटा दिया जाये तब विस्तार में कितने प्रतिशत परिवर्तन होगा?
उत्तर:

  1. विस्तार = L – S = 72 – 61 = 11 इंच
  2. नया विस्तार (सबसे छोटे आदमी को हटाने के पश्चात् = 72 – 64 = 8 इंच
  3. विस्तार में परिवर्तन = 11 – 8 = 3 इंच विस्तार में प्रतिशत परिवर्तन = \(\frac{3}{11}\) × 100 = 27.2%

प्रश्न 3.
निम्न तालिका में 100 व्यक्तियों की ऊँचाई दी गई है। विस्तार विधि से परिक्षेपण ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 15
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 16
विस्तार = L – S = 170 – 161 = s
विस्तार का गुणांक = \(\frac{L-s}{L+s}\) = \(\frac{170-161}{170+161}\) = \(\frac{9}{331}\) = 0.3

प्रश्न 4.
सिद्ध किजिये कि माध्य विचलन सभी मानों पर आधरित होता है। अतः एक भी मान में परिवर्तन इस पर प्रभाव डालेगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनका माध्य विचलन ज्ञात करते हैं – 2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 17
माध्य \(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{15}{5}\) = 2.4
अब हम मान बदल देते हैं। 9 के स्थान पर 14 लेते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 18
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{35}{5}\) = 7
माध्य विचलन = \(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{16}{5}\) = 3.2
इस प्रकार हम देखते हैं कि मान के बदलने से माध्य विचलन में अंतर आ गया है। पहले माध्य विचलन 24 मान बदलने के बाद यह 3.2 हो गया है।

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प्रश्न 5.
सिद्ध करें कि यदि माध्य विचलन माध्य से परिकलित किया जाये, तो यह अधिक होगा और यदि इसे मध्यिका से परिकलित किया जाये तो यह निम्नतम होगा।
उत्तर:
प्रश्न में दिये गये कथन को सिद्ध करने के लिये हम निम्नलिखित मान लेते हैं और उनसे माध्य विचलन तथा मध्यिका से माध्य विचलन कि गणना करते हैं -2, 4, 7, 8, 9
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 19
\(\bar { X } \) = \(\frac{ΣX}{N}\) = \(\frac{30}{5}\) = 6
माध्य से माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{12}{5}\) = 2.4
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 20
माध्य = \(\frac{N+1}{2}\) वें मद का मूल्य = \(\frac{5+1}{2}\) = तीसरे मद का मूल्य = 7
माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\) = \(\frac{11}{5}\) = 2.2
माध्य से विचलन 2.4 है और माध्यिका से माध्य विचलन 2.2 है। अत: सिद्ध हुआ कि मध्यिका से माध्य विचलन से माध्य विचलन से कम होता है।

प्रश्न 6.
इंचों में मापा गया ऊँचाई का प्रमाप विचलन व्यक्ति के उसी समूह में फुटों में मापे गये ऊँचाई के प्रमाप विचलन से अधिक होगा।
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सत्य है। इसका कारण यह है प्रमाप विचलन निरपेक्ष माप है। यह माप कठिनाई उत्पन्न कर सकता है, जब माप की इकाइयाँ भिन्न-भिन्न होती हैं। माप इकाई जितनी कम होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही अधिक बढ़ता जायेगा और माप इकाई जितनी अधिक होती जायेगी, प्रमाप विचलन भी उतना ही कम होता जायेगा।

उदाहरण के लिये हम रुपयों के स्थान पर पैसों में आय की गणना करते हैं तो प्रमाप विचलन 100 गुणा बढ़ जायेगा। प्रमाप विचलन में बढ़ोत्तरी बारह गुना होगी। (1 फुट = 12 इंच) इसे हम उदाहरण द्वारा समझा सकते हैं। मान लो 5 वस्तुओं की ऊँचाई नीचे फुटों में दी गई है। इसका हम प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
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अब हम इन्हीं ऊँचाई को इंचों में लेकर प्रमाप विचलन ज्ञात करेंगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 22
इस तरह हम देखते हैं कि प्रमांप विचलन 12 गुण बढ़ गया है।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से निम्न चतुर्थक (Q1) तृतीय चतृर्थक (Q) की गणना करें –
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उत्तर:
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प्रश्न 8.
फार्मों में एक क्विंटल गेहूँ की उत्पादन लागत का वितरण (रुपयों) में निम्नलिखित हैं।
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(क) विचरण ज्ञात करें।

  • प्रत्यक्ष विधि से
  • पद – विचलन विधि से तथा परिणामों को समान्तर माध्य से और माध्य विचलन से तुलना करें।

(ख) विचरण गुणांक की गणना करें।

  • मूल्यों के प्रमाप विचलन से
  • समान्तर माध्य से, माध्य विचलन से तथा दोनों की तुलना करें। लागतों में विचरण से आप किस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं?

उत्तर:
प्रत्यक्ष विधि से विचरण की गणना –
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विचरण गुणांक की गणना –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 27

  1. विचरण गुणांक (प्रमाप विचलन से) = \(\frac{σ}{X}\) = \(\frac{12}{71}\) = 0.169 या 0.17 लगभग
  2. विचरण गुणांक (माध्य विचलन से) = \(\frac{MD}{X}\) = \(\frac{492/50}{50}\) = \(\frac{9.84}{71}\) = 0.138 = 0.04 लगभग

निष्कर्ष:
दो परिणामों में आपस में तुलना करने पर हम कह सकते हैं कि माध्य विचलन को तुलना में प्रमाप विचलन में विचरण गुणांक अधिक है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित विधियों से नीचे दी गई तालिका से प्रमाप विचलन ज्ञात करें। (Calculate standard deviation from the following table)

  1. वास्तविक माध्य विधि (Actual Mean Method)
  2. काल्पनिक माध्य विधि (Assumed Mean Method)
  3. 6 faasta farfa (Step Deviation Method)

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1. वास्तविक माध्य विधि द्वारा प्रमाप विचलन की गणना (Calculationofs.D.with the help of Actual Mean Method)
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2. कल्पित माध्य विधि से प्रमाप विचलन की गणना (Calculation of Standard Deviation by Assumed Mean Method)
हमने यहाँ कल्पित माध्य 40 लिया है।
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3. पद विचलन विधि से प्रमाप विचलन को गणना (Calculation of S.D.by step Deviation Method)
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प्रश्न 10.
लारेंज वक्र के निर्माण में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
लारेंज वक्र के निर्माण में निम्नलिखित चरण निहित हैं –

  1. वर्गों के मध्य बिन्दु परिकल्पित करें तथा उनका संचयी योग पता लगाएं।
  2. संचयी योग को प्रतिशत में बदलें।
  3. बारम्बारता को जोड़ें तथा संचयी बारम्बारता प्राप्त करें।
  4. संचयी बारम्बारता को प्रतिशत में बदलें।
  5. अब ग्राफ पेपर पर चर के संचयी प्रतिशत को y अक्ष पर तथा बारम्बारता के संचयी प्रतिशत को x अक्ष पर प्रदर्शित करें। इस तरह से प्रत्येक अक्ष पर 0 से 100 तक का मान होगा।
  6. निर्देशांक (0,0) को (100, 100) से जोड़ते हुए एक रेखा खींचे। इसे समवितरण रेखा कहा जाता है।
  7. चर के संचयी प्रतिशत को बारम्बारता के संगत संचयी प्रतिशत के साथ अभिलेखित करें। इन बिन्दुओं को मिलाकर एक वक्र प्राप्त करें। आगे लारेंज वक्र का ग्राफ दिया गया।

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प्रश्न 11.
नीचे एक कम्पनी के कर्मचारियों की मासिक आय दी गई है। इसकी सहायता से एक लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
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12. नीचे तालिका की सहायता से लारेंज वक्र बनायें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 37
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प्रश्न 13.
निम्न समंकमाला का प्रसारण (02) तथा इमाप विचलन प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधि द्वारा ज्ञात कीजिए। दोनों विधियों का प्रयोग कीजिए।
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उत्तर:
(क) प्रत्यक्ष विधि द्वारा (Direct Method) –
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प्रश्न 14.
परिक्षेपणं के वैकल्पिक मापों की तलनात्मक विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
परिक्षेपण के वैकल्पिक मापों की तुलनात्मक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. कठोरता से परिभाषित (Rigidiy defined):
परिक्षेपण के चारों प्रमाण-विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन तथा प्रमापे विचलन को कठोरता से परिभाषित किया जाता है।

2. गणना में सरल (Easyof calculation):
विस्तार की गणना सबसे अधिक सरलता से की जा सकती है। चतुर्थक विचलन की गणना करने के लिए उच्च चतुर्थक (Q3) तथा न्यूनतम (Q2) की गणना करनी पड़ती है। परन्तु इनकी गणना सरलता से की जा सकती है। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन की गणना के लिये थोड़ी अधिक विधिपूर्वक गणना करने की आवश्यकता होती है।

3. सरल व्याख्या (Simple interpretation):
परिक्षेपण के सभी मापों की सरलता से व्याख्या की जा सकती है और उन्हें सरलता से समझा जा सकता है। विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सामान्य रूप से परिक्षेपण को मापते हैं। माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मूल्य के विचलन के रूप में करते हैं। अत: माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन मूल्य के परिक्षेपण के बारे में अधिक अच्छी जानकारी देते हैं।

4. सभी मूल्यों पर आधारित (Based on all values):
विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सभी मूल्य पर निर्भर नहीं करते। इसके विपरीत माध्य विचलन तथा प्रमाण विचलन चरों के सभी मूल्यों के लेते हैं। विस्तार तो चरम (Extrement) मूल्यों से बहुत ही प्रभावित होती हैं।

5. बीजगणितीय व्यवहार (Algebrical treatment):
लगभग परिक्षेपण के सभी मापों से बीजगणितीय व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 15.
(क) व्यक्तिगत श्रेणी तथा खण्डित श्रेणी से माध्य विचलन की गणना कैसे की जाती है?
(ख) निम्नलिखित सारणी में माध्यिका तथा माध्य विचलन ज्ञात करें। (Calculate mean deviation from median and mean)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 42
उत्तर:
(क) व्यक्तिगत श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of mean Deviation from Individual Series):

  • वह माध्य ज्ञात करें, जिससे विचलन ज्ञात करना है।
  • माध्यिका/माध्य से (+) या (-) संकेतों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करें।
  • इन विचलनों का योग ΣD ज्ञात करें।
  • कुल योग ΣD को मदों की कुल संख्या से विभाजित करें। सूत्र के रूप में माध्य विचलन =\(\frac{ΣD}{N}\)
  • भजनफल माध्य विचलन होगा।

(ख) खण्डित-श्रेणी से माध्य विचलन की गणना (Calculation of Mean Deviation in Discrete Series):

  • दी हुई श्रेणी से माध्यिका ज्ञात करें।
  • के चिह्नों की अवहेलना करते हुए विलचन ज्ञात करना व Σf |D| ज्ञात करें।
  • विचलनों को इनकी आवृत्तियों से गुणा करके इनका योग (Σf |D|) ज्ञात करना।
  • अन्त में, प्राप्त योगफल को पदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन का मूल्य प्राप्त होगा।

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प्रश्न 16.
(क) अखण्डित श्रेणी से माध्य की गणना कैसे की जाती है? (How is mean deviation calculated in case of continuous series?)
(ख) नीचे 50 श्रमिकों की मजदूरी का वितरण दिया गया है। माध्य विचलन ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 45
उत्तर:
(क) अखण्डित श्रेणी के माध्य विचलन की गणना में निम्नलिखित चरण निहित है –

  • वर्गान्तर के मध्य बिन्दु ज्ञात करना। मान लो वर्गान्तर 0 – 10, 10 – 20, 20 – 30 आदि है, तो इनके मध्य बिन्दु 5, 15, 25 होंगे।
  • मध्य बिन्दुओं से माध्यिका या माध्य ज्ञात करें।
  • ± चिह्नों की अवहेलना करते हुए विचलन ज्ञात करना ΣD ज्ञात करना।
  • विचलनों को उनकी आवृत्तियों से गुणा करना फिर उनका योग निकालना को ΣfD से प्रकट करना।
  • अन्त में प्राप्त योग को मदों की संख्या से भाग करना। इस प्रकार माध्य विचलन ज्ञात हो जायेगा।

(ख) माध्य विचलन किसी भी माध्य द्वारा निकाला जा सकता है। यहाँ माध्यों का प्रयोग करके माध्य – विचलन की गणना की गई है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 46

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
परिक्षेपण के सापेक्ष मापक की इकाई –
(a) चर की इकाई होती है।
(b) कोई इकाई नहीं होती है।
(c) चर की इकाई का वर्ग होती है।
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) कोई इकाई नहीं होती है।

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प्रश्न 2.
मानक विचलन की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) चर की इकाई

प्रश्न 3.
विचरण मापक की इकाई होती है –
(a) चर की इकाई
(b) कोई नहीं
(c) चर की इकाई का वर्ग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चर की इकाई का वर्ग

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प्रश्न 4.
विस्तार से विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
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(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48

प्रश्न 5.
चतुर्थक विचरण गुणांक का सूत्र होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 48
(c) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)

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प्रश्न 6.
मध्यायका से विचरण गुणांक का सूत्र है –
(a) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ Q_{ 3 }+Q_{ 1 } } \)
(b) \(\frac { MD }{ \bar { x } } \)
(c) \(\frac{MD}{M}\)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac{MD}{M}\)

प्रश्न 7.
लघु विधि से मानक विचलन का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 50
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 49

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प्रश्न 8.
विचरण मापांक का सूत्र है –
(a)
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(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 6 परिक्षेपण के माप Part - 2 img 52

प्रश्न 9.
चतुर्थक विचलन होता है –
(a) \(\frac { Q_{ 4 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(b) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 2 } }{ 2 } \)
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) \(\frac { Q_{ 3 }-Q_{ 1 } }{ 2 } \)

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प्रश्न 10.
माध्य विचलन न्यूनतम होता है जब –
(a) मध्यिका से लिया जाता है।
(b) समान्तर माध्य से लिया जाता है।
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मध्यिका से लिया जाता है।

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एजटेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग जिन्हें टेनोका भी कहते हैं ने टेनोक्ट्टिलान, टेलाटेलोका नाम की दो राजधानियाँ बसायौं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवताओं और अन्य ईवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननी मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे। 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

मेसोपोटामिया की सभ्यता – मेसोपोटामिया की सभ्यता के अंतर्गत तीन सभ्यताओंसमेरिया, वेबीलोनिया और सीरिया की गणना की जाती है। तीनों सभ्यताओं का जन-जीवन लगभग समान था। समाज में उच्च, मध्य तथा निम्न तीन वर्ग थे। पहले दोनों वर्ग सुखी ऐश्वर्य का जीवन व्यतीत करते थे। निम्न वर्ग के लोग दु:खी थे। समाज में पुरुषों की अपेक्षा सियों का स्थान निम्न था। कृषि सिंचाई द्वारा की जाती थी। मेसोपोटामिया के लोग टीन, ताँबा काँसे से परिचित थे। वस्त्र उद्योग उनका प्रमुख व्यवसाय था। वे अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे।

मैसोपोटामिया के लोगों ने महान् उपलब्यिाँ प्राप्त की। उन्होंने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। उन्होंने चन्द्रमा के आधार पर एक पंचांग बनाया। इसकी सहायता से वे ऋतुओं तथा ग्रहण लगने का अनुमान लगाते थे। उन्होंने षट्दाशमिक प्रणाली की खोज भी की। इसके आधार पर उन्होंने। घंटे में 60 मिनट और 1 मिनट में 60 सैकेण्ड निश्चित किए। उन्होंने ही सबसे पहली ‘हम्बुराबी की विधि संहिता- नामक कानूनों की एक पुस्तक तैयार की। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुम्हार के चाक, शीशे के बर्तनों और भवन निर्माण की नवीन शैलियों का आविष्कार किया।

प्रश्न 2.
ऐसे कौन-से कारण थे जि+4 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचार।। को सहायता मिली?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौ-चालन में निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुँचाई –

  1. 1380 ई. में कुतबनुमा अर्थात् दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। इससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी मिल सकती थी।
  2. समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। बड़े-बड़े जहाजों का निर्माण होने लगा था, जो विशाल मात्रा में माल की ढुलाई कर सकते थे।
  3. ये जहाज आत्मरक्षा के अस्त्र-शस्त्रों से भी लैस होते थे, ताकि शत्रु के आक्रमण का सामना किया जा सके।
  4. पंद्रहवीं शताब्दी के दौरान यात्रा-वृत्तातों, सृष्टि-वर्णन तथा भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने लोगों के ज्ञान में वृद्धि की।
  5. उदाहरण के लिए मिस्रवासी टॉलेमी ने अपनी पुस्तक में विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति अक्षांश और देशांतर रेखाओं द्वारा समझायी थी।
  6. इसे पढ़ने से यूरोपवासियों को संसार के बारे में और अधिक जानकारी मिली। टॉलमी ने यह भी बताया था कि पृथ्वी गोल (Spherical) है।

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प्रश्न 3.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पंद्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया?
उत्तर:

  1. कुछ विशेष आर्थिक कारणों ने स्पेन के लोगों को महासागरी शूरवीर बनाया।
  2. स्पेन तथा पुर्तगाल के साहसी नाविक हर समय समुद्र में उतरने को तैयार रहते थे क्योंकि उन्होंने अटलांटिक महासागर की दूसरी ओर की भूमि को बहुत कम आँका था।
  3. स्पेन और पुर्तगाल के शासक नयी समुद्री खोजों के लिए धन जुटाने को तैयार रहते थे।

प्रश्न 4.
कौन-सी नई खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमेरिका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका से मक्का, कसावा, कुमाला, आलू आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं।

प्रश्न 5.
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राजील ले जाए गये सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करों।
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राजील ले जाए गए लड़के की यात्रा बहुत ही कष्टमय थी। उसे अन्य गुलामों के साथ जहाज में ढूंसा गया और बेड़ियों से जकड़ा गया । उसे कई दिनों तक भूखा-प्यासा भी रखा गया।

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प्रश्न 6.
दक्षिणी अमेरिका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया?
उत्तर:
यूरोप के देश विशेषकर स्पेन तथा पुर्तगाल सोना-चाँदी के लालची थे। उन्हें दक्षिणी अमेरिका में भारी मात्रा में सोना मिलने की आशा थी। इसलिए यूरोपवासी दक्षिणी अमेरिका के विभिन्न प्रदेशों में जा बसे। उन्होंने अपने सैन्य-बल तथा बारुद के प्रयोग द्वारा वहाँ अपना शासन स्थापित कर लिया। विरोध होने पर उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों को बुरी तरह कुचला। उन्होंने वहाँ के लोगों से नजराने वसूल किए। स्थानीय प्रधानों का प्रयोग उन्होंने नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए किया।

सोने-चांदी के विशाल भंडारों का पता चलने पर और अधिक यूरोपवासी वहाँ जा बसे। उन्होंने स्थानीय लोगों को दास बना लिया और उन्हें ‘खानों” में काम करने के लिए विवश किया। इस प्रकार दक्षिणी अमेरिका पूरी तरह यूरोपीय साम्राज्यवाद की जकड़ में आ गया।

Bihar Board Class 11 History संस्कृतियों का टकराव Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूमि उद्धार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भूमि उद्धार से अभिप्राय बंजर भूमि को आवासीय या कृषि योग्य भूमि में बदलने से है। कई बार विभिन्न जलस्रोत से जमीन लेकर भी भूमि उद्धार किया जाता है।

प्रश्न 2.
एजटेक लोगों के ‘चिनाम्पा’ क्या थे?
उत्तर:
चिनाम्या मैक्सिको झील में बने कृत्रिम द्वीप थे। एजटेक लोगों ने इन्हें सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और मिट्टी तथा पत्रों से ढंक कर बनाया था। ये द्वीप अत्यंत उपजाऊ थे।

प्रश्न 3.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की दो विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:

  • वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  • इनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशु-पालन से अपरिचित थे।

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प्रश्न 4.
माया लोगों की दो अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:

  • गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  • हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों की लिपि अंशत: चित्रात्मक तथा अंशत: ध्वन्यात्मक थी।

प्रश्न 5.
माया सभ्यता का विस्तार बताएँ।
उत्तर:
माया सभ्यता 300 ई० के बीच अपनी उन्नति की चरम सीमा पर थी। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग पर फैली हुई थी। इसमें ग्वातेमाला, मैक्सिको, हांडूरास तथा यूकातान के प्रदेश सम्मिलित थे।

प्रश्न 6.
अमेरिकी मूल सभ्यताओं के पतन के बारे में लिखें।
उत्तर:
1532 ई० में स्पेन की सेना ने फ्रांसिस्को पिजारों के नेतृत्व में इंका सभ्यता को नष्ट कर दिया। इस प्रकार विदेशी आक्रमणों के कारण 16वीं शताब्दी में अमेरिकी सभ्यताओं का पतन हो गया।

प्रश्न 7.
इंका सभ्यता के मुख्य केंद्र बताएँ।
उत्तर:
इंका सभ्यता का प्रमुख केंद्र टिंट्टीका की झील थी। इसके अन्य मुख्य केंद्र आधुनिक इक्वाडोर, पेरू तथा बोलीविया थे।

प्रश्न 8.
माया सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • कृषि इनका मुख्य व्यवसाय था। इनका मुख्य आहार मक्का था।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। उन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया।

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प्रश्न 9.
प्राचीन मिस्त्र तथा माया पंचांगों में दो असमानताएं बताएँ।
उत्तर:

  • मिस्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचागों में वर्ष 18 महीने का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की दो : गगनताएँ बताओ।
उत्तर:

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे। इसका कारण यह था कि ये दोनों सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

प्रश्न 11.
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों के बस जाने का क्या परिणाम निकाला?
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका की खोज और बाद में बाहरी लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ। इसी से दास-व्यापार आरंभ हुआ। इसके अंतर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से दास पकडकर या खरीदकर उन्हें उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खानों तथा बगानों में काम करने के लिए बेचने लगे।

प्रश्न 12.
हम अमेरिका के मूल निवासियों तथा यरोपवासियों के बीच हुई मुठभेड़ों के बारे में मूलनिवासियों के पक्ष को तो अधिक नहीं जानते पर यूरोपीय पक्ष को विस्तारपूर्वक जानते हैं। इसका क्या कारण है?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि अमेरिका की यात्राओं पर जाने वाले यूरोपवासी अपने साथ रोजनामचा (log-book) और डायरियाँ रखते थे। इनमें वे अपनी यात्राओं का दैनिक विवरण लिखते थे। हमें सरकारी अधिकारियों, एवं जेसुइट धर्मप्रचारकों के विवरणों से भी इसके बारे में जानकारी मिलती है। परंतु यूरोपवासियों ने अपनी अमेरिका की खोज तथा वहाँ के देशों का जो इतिहास लिखा है उनमें यूरोपीय बस्तियों के बारे में ही अधिक बताया गया है। स्थानीय लोगों के बारे में बहुत कम या न के बराबर ही लिखा गया है।

प्रश्न 13.
15वीं से 17वीं शताब्दी तक दक्षिणी तथा मध्य अमेरिका का भौगोलिक परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका घने जंगल और पहाड़ों से ढंका हुआ था। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेशों से होकर बहती थी। मध्य अमेरिका में, मैक्सिकों में समुद्र तट के आसपास के क्षेत्र और मैदानी प्रदेश घने बसे हुए थे, जबकि सघन वनों वाले क्षेत्रों में गाँव दूर-दूर स्थित थे।

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प्रश्न 14.
जीववादी (Animists) कौन होते हैं?
उत्तर:
जीववादी वे लोग होते हैं जो इस बात में विश्वास रखते हैं कि वैज्ञानिक जिन वस्तुओं को निर्जीव मानते हैं, उनमें भी जीवन या आत्मा हो सकती है।

प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे ? उनकी दो विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरोबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीपसमूहों तथा वृहत्तर ऐटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे।

विशेषताएं –

  • ये लोग लडने की बजाय बातचीत से झगडा निपटाना अधिक पसंद करते थे।
  • वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ों के खोखले तनों से अपनी डॉगियाँ बनाते थे।

प्रश्न 16.
दक्षिणी अमेरिका के तुपिनांबा लोगों को कृषि पर निर्भर क्यों नहीं होना पड़ा?
उत्तर:

तुपिनांवा लोगों के पास भेड़ काटने के कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके।
उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ा।

प्रश्न 17.
मध्य-अमेरिका में शहरीकृत सभ्यताओं के विकास में किन तत्वों ने सहायता पहुँचाई? इन शहरों की क्या मुख्य विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
मध्य अमेरिका में कुछ अत्यंत सुगठित राज्य थे । वहाँ मक्का का भरपूर उत्पादन होता था। जो एजटेक, माया और इंका जनसमुदायों की शहरीकृत सभ्यताओं का आधार बना। इन शहरों की मुख्य विशेषता इनकी भव्य वास्तुकला थी।

प्रश्न 18.
माया सभ्यता के लोगों के धर्म की कोई दो विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:

  • माया सभ्यता के लोग वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि, मक्का आदि देवताओं की पूजा करते थे।
  • माया लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अपने शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि का भी रिवाज था।

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प्रश्न 19.
कोलंबस को वापसी यात्रा अधिक कठिन क्यों थी?
उत्तर:
कोलंबस की वापसी यात्रा निम्नलिखित कारणों से अधिक कठिन थी –

  • उसके जहाजों को दीमक लग गई थी।
  • उसके साथी नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी।

प्रश्न 20.
कोलंबस कहाँ का निवासी था? वह ‘इंडीज’ कब पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस स्पेन का निवासी था। वह 12 अप्रैल, 1492 ई० को इंडीज पहुँचा।

प्रश्न 21.
कैपिटुलैसियोन (Capitulaciones) क्या थे?
उत्तर:
कैपिटुलैसियोन एक प्रकार के इकरारनामे थे। इन इकरारनामे द्वारा स्पेन का शासक नए जीते हुए प्रदेशों पर अपनी प्रभुसत्ता जमा लेता था। उन्हें जीतने वाले नेताओं को पुरस्कार के रूप में पदवियाँ और जीते गए देशों पर शासनाधिकार दिया जाता था।

प्रश्न 22.
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) क्या थी?
उत्तर:
रीकाँक्वेस्टा (पुनर्विजय) ईसाई राजाओं द्वारा आइबेरियन प्रायद्वीप पर प्राप्त की गई सैनिक विजय थी । इस विजय द्वारा इन राजाओं ने 1492 ई. में इस प्रायद्वीप को अरबों के नियंत्रण से मुक्त करा लिया था।

प्रश्न 23.
14वीं शताब्दी के बाद यूरोप, विशेषकर, इटली के लंबी दूरी के व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
14वीं शताब्दी के बाद के दशकों में यूरोप के लंबी दूरी के व्यापार में गिरावट आ गई। 1453 ई. में तुकों द्वारा कुस्तुनतुनिया (Constantinople) की विजय के बाद तो यह और भी कठिन हो गया। इटलीवासियों ने किसी प्रकार तुकों के साथ व्यापारिक संबंध तो बनाए रखा, पर उन्हें व्यापार पर अधिक कर देना पड़ता था।

प्रश्न 24.
सृष्टिशास्त्र (Cosmography) क्या था?
उत्तर:
सृष्टिशास्त्र विश्व का मानचित्र बनाने का विज्ञान था। इसमें स्वर्ग और पृथ्वी दोनों का वर्णन किया जाता था। परंतु इसे भूगोल और खगोल से अलग शास्त्र माना जाता था।

प्रश्न 25.
एजटेक तथा इंका संस्कृतियों की कुछ समानताएँ यूरोपीय संस्कृति से बहुत भिन्न थीं। इनका उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. एजटेक तथा इंका समाज श्रेणीबद्ध था परंतु वहाँ यूरोप की तरह संसाधनों का निजी स्वामित्व नहीं था।
  2. पुरोहितों और शमनों को समाज में ऊँचा स्थान प्राप्त था । यद्यपि भव्य मंदिर बनाए जाते थे, जिनमें सोने दा प्रयोग किया जाता था।
  3. फिर भी सोने, चाँदी को अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता था। तत्कालीन यूरोपीय समाज की स्थिति इससे बिलकुल विपरीत थी।

प्रश्न 26.
इंका लोगों ने उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति कैसे की?
उत्तर:
ईका सभ्यता का आधार कृषि था। परंतु भूमि अधिक उपजाऊ नहीं थी। इसलिए उन्होंने पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाए और जल-निकासी तथा सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित की। इस प्रकार इंका लोगों ने कम उपजाऊ भूमि की कमी की पूर्ति की।

प्रश्न 27.
एजटेक जाति ने कब और किस प्रकार सत्ता प्राप्त की? इनका राज्य विस्तार कितने क्षेत्र में था?
उत्तर:
एजेटक जाति ने 1220 ई० में टोलटेक शक्ति को समाप्त करके उनके राज्य पर अधिकार कर लिया। उनका राज्य विस्तार दो लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था।

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प्रश्न 28.
एजटेक सभ्यता की प्रमुख राजनीतिक उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
एजटेक एक युद्धप्रिय जाति थी। उन्होंने अपनी वीरता से एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 29.
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था पर नोट लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता के समय अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था कृषि पर आधारित थी। इसके अतिरिक्त कई लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने आदि का कार्य भी करते थे।

प्रश्न 30.
एजटेक लोगों के धर्म के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
एजटेक लोग सूर्य देवता और अन्न देवी की पूजा करते थे। उनमें मानव बलि का बहुत रिवाज था। उनके अधिकतर भव्य मंदिर युद्ध के देवताओं तथा सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि वे युद्धों को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

प्रश्न 31.
दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है। क्यों?
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका पर स्पेन तथा पर्तगाल का शासन था। स्पेनी तथा पुर्तगाली दोनों ही भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार की हैं। इसी कारण दक्षिणी अमेरिका को “लैटिन अमेरिका” भी कहा जाता है।

प्रश्न 32.
पोटोसी (Potasi) के ‘नरक का मुख’ किसने कहा था और क्यों?
उत्तर:
पोटोसी को एक संन्यासी डोमिनिगो डि सैंटो टॉमस ने ‘नरक का मुख’ कहा था। इसका कारण यह था कि वहाँ की खानों में काम करने वाले हजारों इंडियन हर साल मौत का शिकार हो जाते थे। वहाँ के खान मालिक लालची और निर्दयी थे जो इंडियन लोगों के साथ जानवरों जैसे व्यवहार करते थे।

प्रश्न 33.
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली वह प्रणाली होती है जिसमें उत्पादन तथा वितरण का स्वामित्व निजी हाथों में होता है। उत्पदन मुख्यतः मुनाफा कमाने के लिए पिया जाता है जिसमें खुली प्रतिस्पर्धा होती है।

प्रश्न 34.
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए यूरोपीय अभियानों के क्या तात्कालिक परिणाम निकले?
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए, इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए।

  1. जैसे मार काट के कारण मूल निवासियों की जनसंख्या कम हो गई।
  2. उनकी जीवन-शैली का विनाश हो गया।
  3. उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

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प्रश्न 35.
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले जेसुइट पादरियों को पसंद नहीं करते थे क्यों?
उत्तर:
यूरोपीय लोग ब्राजील आने वाले पादरियों को निम्नलिखित कारणों से पसंद नहीं करते थे –
1. ये पादरी वहाँ के मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे। वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और उन्हें यह सिखाते थे ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें उसका आनंद लेना चाहिए।

2. सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्म प्रचारक दास प्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

प्रश्न 36.
स्पेनियों की मैक्सिको विजय का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
स्पेनियों द्वारा मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने के दो वर्ष पश्चात् कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन-जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया । मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala) निकारगुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 37.
कोलंबस की विशेष उपलब्धि क्या रही?
उत्तर:
कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है।

प्रश्न 38.
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों का नामकरण किसके नाम पर हुआ?
उत्तर:
कोलंबस द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिंगों वेस्पुस्सी’ (AmerigoVespucci) के नाम पर किया गया जिसने उनके विस्तार को समझा और उन्हें ‘नयी दुनिया’ (New world) का नाम दिया। इन महाद्वीपों के लिए ‘अमेरिका’ (America) नाम का प्रयोग सर्वप्रथम एक जर्मन प्रकाशन द्वारा 1507 ई० में किया गया।

प्रश्न 39.
डोना मैरीना कौन थी?
उत्तर:
बर्नार्ड डियाज डेल कैस्टिलो (Bernard Diaz DelCastillo) ने अपने टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको में लिखा है कि टैबैस्को (Tabasco) के लोगों ने कोर्टस को डोना मैरीना नाम की एक सहायिका दी थी। वह तीन भाषाओं में प्रवीण थी और उसने कोर्टेस के लिए दुभाषिये का काम किया था। डियाज के विचार में वह एक राजकुमारी थी। परंतु मैक्सिकन लोग उसे ‘मालिंच’, अर्थात् विश्वासघातिनी कहते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिकी मूल संस्कृतियों के आर्थिक प्रबंध के बारे में बताएँ।
उत्तर:
अमेरिकी मूल संस्कृतियों से अभिप्राय माया, एजटेक तथा इंका सभ्यताओं से है।

  1. माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। मक्का उस समय की मुख्य उपज थी। कुछ लोग वस्त्र बनाने, कपड़ा रंगने तथा अन्य हस्तशिल्पों में लगे हुए थे।
  2. एजटेक लोगों के मुख्य उद्योग-धंधे, धातु-कर्म, बर्तन बनाना तथा सूती कपड़ा बुनना था। कुछ लोग कृषि करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू तथा शक्करकंद उगाते थे।
  3. इंका लोगों की आर्थिक अवस्था सोने तथा चाँदी से संबंधित थी। इन धातुओं से सजावट का सामान तथा अन्य वस्तुएँ बनाई जाती थीं। कुछ लोग व्यापार भी करते थे, जो वस्तुओं की अदला-बदली (वस्तु-विनिमय) द्वारा होता था।

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प्रश्न 2.
अमेरिका के आंरभिक लोगों तथा भौगोलिक विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका और निकटवर्ती द्वीप समूहों में हजारों वर्षों से अनेक जनसमुदाय रहते आए थे। एशिया तथा दक्षिणी सागर के द्वीपों (South Sea Island) से भी लोग वहाँ जाकर बसते थे। दक्षिणी अमेरिका घने जंगलों और पहाड़ों से ढका हुआ था। आज भी उसके अनेक भाग जंगलों से ढंके हुए हैं। संसार की सबसे बड़ी नदी अमेजन (Amazon) मीलों तक वहाँ के घने वन प्रदेश से होकर बहती है। मध्य अमेरिका में, गाँव दूर-दूर स्थित थे।

प्रश्न 3.
अरवाकी लुकायो समुदाय के लोग कहाँ रहते थे? उनकी तथा उनकी संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।।
उत्तर:
अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और बृहत्तर एंटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे। कैरिव (Caribs) नामक एक खूखार कबीले ने उन्हें लधु ऐंटिलीज (Lesser Antilles) प्रदेश से खदेड़ दिया था। दूसरी ओर खरावाक लोग लड़ने की बजाय बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे। वे कुशल नौका-निर्माता थे। वे पेड़ के खोखले तनों से अपनी डॉगियां बनाते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू, कंद-मूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति – अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो। वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animasts) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक सामज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्पूर्ण भूमिका निभाते थे।

प्रश्न 4.
यूरोपीय लोगों (स्पेनिश) की अरावाकों के प्रति क्या नीति थी? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भाँति वे सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले शीशे के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न हो जाते थे, क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अराबाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सी की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया । इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाकों और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 5.
तुपिनाँबा लोग कौन थे? यूरोपवासियों को उनसे ईर्ष्या क्यों होती थी?
उत्तर:
‘तुपिनांबा’ (Tupinamba) कहे जाने वाले लोग दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी समुद्र तट पर ओर ब्राजील नामक वृक्षों से बसे गाँवों में रहते थे। उनके पास पेड़ काटने का कुल्हाड़ा बनाने के लिए लोहा नहीं था। इसलिए वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया नहीं कर सके। परंतु उन्हें फल, सब्जियाँ और मछलियाँ आसानी से प्राप्त हो जाती थीं। इसलिए उन्हें खेती पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इनके जीवन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था। वहाँ न तो कोई राजा था, न सेना और नहीं कोई चर्च । अतः उनके संपर्क में आने वाले यूरोपवासी उनके इस स्वतंत्र विचरण को देखकर उनसे ईर्ष्या करने लगे।

प्रश्न 6.
एजटेक लोगों का समाज श्रेणीबद्ध था। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एजटेक समाज वास्तव में ही श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। रिवाज में योद्धा, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्रायः सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था। गरीब लोग कभी-कभी अपने बच्चों को गुलामों के रूप में बेंच देते थे। परंतु यह बिक्री प्रायः कुछ वर्षों के लिए ही रहती थी। गुलाम अपनी स्वतंत्रता फिर खरीद सकते थे।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 7.
एजटेक लोगों के आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (Reclamation) किया। उन्होंने सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर माक्सको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये । इन्हें चिनाम्पा (Chinampas) कहते थे।

2. इन अत्यंत उपजाऊ द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिट्लान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील के बाहर झाँकते दिखाई देते थे।

3. एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह था कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

4. साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियाँ, कुम्हड़ा, कद्, कसावा, आलू तथा अन्य कुछ फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतीहर लोग अभिजात की जमीनें जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था।

प्रश्न 8.
आदि अमेरिकी सभ्यताओं की मुख्य सामान्य विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
आदि अमेरिका सभ्यताओं में अनेक सामान्य विशेषताएँ थीं –

  1. वे लोग पत्थर की वास्तुकला में निपुण थे। उनके औजार पत्थर के ही बने हुए थे। धातुओं का प्रयोग केवल आभूषण बनाने में किया जाता था।
  2. वे खेती करते थे और उनका भोजन मक्का था।
  3. उनके विषय में एक रोचक बात यह है कि वे पशुपालन से अपरिचित थे।
  4. इन सभ्यताओं के लोगों ने बर्तन बनाने, बुनाई और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी निपुणता प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 9.
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी?
उत्तर:
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं –

  1. पंचांग – सौर पंचांग की भाँति माया वर्ष में भी 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिन को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे।
  2. गणित का ज्ञान – माया लोगों को गणित का भी अच्छा खासा ज्ञान था। वे शून्य के लिए एक विशेष प्रकार का चिह्न प्रयोग करते थे।
  3. हेरोग्लिफिक लिपि – माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।
  4. कलात्मक उपलब्धियाँ – माया लोग भवन-निर्माण कला, चित्रकला तथा मूर्ति कला में बड़े निपुण थे। उन्होंने भव्य पिरामिड, चौक, मंदिर तथा वेधशालाओं का निर्माण किया ।
  5. चाक पर बने बर्तन – माया लोगों ने चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया।

प्रश्न 10.
प्राचीन मिस्त्र और माया पंचांगों की तुलना करें।
उत्तर:
समानताएँ –

  • मिस्र और माया पंचांग दोनों ही सौर पंचांग थे अर्थात् वे दोनों ही सूर्य की गति पर आधारित थे।
  • दोनों पंचांगों में वर्ष 365 दिन का था।

असमानताएँ –

  • मिस्त्री लोगों के वर्ष में 12 महीने होते थे जबकि माया पंचांग में वर्ष 18 महीने. का था।
  • माया पंचांग में प्रत्येक महीना 20 दिन का था जबकि मिस्री पंचांग में प्रत्येक महीना 30 दिन का होता था।
  • माया सभ्यता के लोग वर्ष में शेष पाँच दिनों को अशुभ समझते थे जबकि मिस्त्री लोग शेष पाँच दिनों में उत्सव मनाया करते थे।

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प्रश्न 11.
इंका और एजटेक सभ्यताओं की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर:
इंका सभ्यता-इस सभ्यता की उपलब्धियां निम्नलिखित थीं –

  • कुशल प्रशासन – इंका साम्राज्य चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन, पुरुष शासन करता था।
  • उन्नत नगर – का साम्राज्य में नगरों की भरमार थी। उन नगरों में बहुत-से विशाल भवन होते थे। इनमें किले, मंदिर, महल आदि शामिल थे।
  • कला तथा दस्तकारी – इंकः सभ्यता में कलाएँ तथा दस्तकारियाँ की विकसित थीं।
  • धातुओं का योग – इंका सभ्यता के लोग सोने, चाँदी तथा ताँबे के आभूषण बनाते थे। वे अपने हथियार और औजार बनाने के लिए काँसे का प्रयोग करते थे।

एजटेक सभ्यता – इस सभ्यता की उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –

  • शक्तिशाली साम्राज्य – एजटेक लोगों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। वह साम्राज्य 38 प्रांतों में बँटा हुआ था।
  • पंचांग – एजटेक लोगों का अपना अलग पंचांग था। उनके पंचांग के अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • धातुओं का प्रयोग – उन्होंने नरम धातुओं को पिघलाना सीख लिया था।
  • धर्म – वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे जैसे-सूर्य देवता और अन्न देवी।

प्रश्न 12.
आदिम अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ किन मुख्य अर्थों में प्राचीन एशियाई और यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं?
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की भौतिक संस्कृतियाँ निम्नलिखित अर्थों में प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न हैं –
1. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों को कृषि के विषय में काफी ज्ञान था परंतु वे पशुपालन से अपरिचित थे। धार्मिक दृष्टि से उन लोगों में मक्का की कृषि का बड़ा महत्त्व था। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोगों ने कृषि तथा पशुपालन का कार्य एक साथ ही आरंभ किया।

2. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोगों ने धातु का प्रयोग केवल आभूषण बनाने के लिए ही आरंभ किया। फिर भी उन्होंने बर्तन निर्माण, बुनाई, पंख-मोजेक और मोती बनाने जैसे शिल्पों में बड़ी दक्षता प्राप्त कर ली थी। आदिम अमेरिकी सभ्यता की यह विशेषता प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं से भिन्न थी।

3. आदिम अमेरिकी सभ्यताओं के लोग हल तथा पहिये के प्रयोग से अपरिचित थे। परंतु प्राचीन एशियाई तथा यूरोपीय सभ्यताओं के लोग इन दोनों के प्रयोग के विषय में जानकारी रखते थे।

4. आदिम अमेरिकी लोगों ने बहुत लंबे समय तक पत्थर के औजारों का ही प्रयोग किया। यहाँ तक कि स्मारकों की वास्तुकला तथा महान् अमेरिकी सभ्यताओं की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियाँ भी केवल पत्थर के औजारों की सहायता से ही तैयार की गई। इस दृष्टि से प्राचीन एशिया तथा यूरोप की सभ्यताओं के लोग कहीं आगे थे। वे पत्थर के हथियारों को लगभग भूल चुके थे और लोहे के मजबूत हथियारों का प्रयोग करने लगे थे।

5. आदिम अमेरिकी लोगों की कोई लेखन प्रणाली नहीं थी। इसके विपरीत एशिया तथा यूरोप में विकसित सभ्यताओं की अपनी-अपनी लेखन प्रणालियाँ थीं।

प्रश्न 13.
इंका लोगों के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन का वर्णन करें।
उत्तर:
1. सामाजिक जीवन – इंका समाज में सम्राट् को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। उसे सूर्य का वंशज समझा जाता था। सम्राट् के पश्चात् समाज में दूसरा स्थान कुलीन तथा पुरोहितों का था। उनके पश्चात् साधारण लोगों की श्रेणी थी जिसमें दस्तकार तथा किसान सम्मिलित थे।

2. आर्थिक जीवन – इंका लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। वे मुख्य रूप से मक्का, आलू और शकरकंद उगाते थे। इंका सभ्यता में कला और शिल्प काफी उन्नत थे। इन शिल्पों में मिट्टी के बर्तन बनाना, कपड़े बुनना तथा लामा और अल्पाका से ऊन प्राप्त करना शामिल था। इसके अतिरिक्त इंका लोग काँसे के हथियार तथा औजार और सौने-चाँदी के आभूषण भी बनाते थे।

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प्रश्न 14.
अमेरिकी सभ्यताओं के विज्ञान की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिकी सभ्यताओं की वैज्ञानिक उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है –
1. पंचांग – लोगों ने अपना पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे। माया लोगों ने वर्ष को 18 महीनों में बाँटा । प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिनों को माया लोग दुर्भाग्यपूर्ण दिन मानते थे। एजटेक लोगों ने भी अपना पंचांग बनाया जो माया पंचांग जैसा ही था।

2. गणित का ज्ञान-माया लोगों को गणित का भी अच्छा ज्ञान था। वे शून्य के लिए विशेष प्रकार के चिह्न प्रयोग करते थे।

3. हेरोग्लिफिक लिपि-माया लोगों ने अपनी लिपि का आविष्कार किया। यह लिपि चित्र-चिह्नों और ध्वनियों का मिश्रण थी।

4. चिकित्सा विज्ञान-इंका सभ्यता में चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत था । लोग विभिन्न रोगों की चिकित्सा के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते थे। यहाँ से मानव खोपड़ियाँ तथा कंकाल मिले हैं। इनसे पता चलता है कि लोगों को चीर-फाड़ (शल्य-चिकित्सा) का भी ज्ञान था।

प्रश्न 15.
खोज यात्राओं और व्यापार के बीच के संबंध पर विचार-विमर्श करो। अमेरिका और अफ्रीका के लोगों पर खोज यात्रियों के कार्यों के तात्कालिक प्रभाव क्या थे?
उत्तर:
खोज यात्राओं तथा व्यापार के बीच बड़ा गहरा संबंध था। वास्वत में खोज यात्राओं का उद्देश्य नये देशों की खोज करना था और वहाँ उपनिवेश स्थापित करना था। केवल इतना ही नहीं, इन उपनिवेशों से अधिक-से-अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करना खोज यात्राओं का मुख्य उद्देश्य था। यही कारण था कि विभिन्न देशों के शासकों ने खोज यात्रियों की पूरी सहायता की। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका पर विजय प्राप्त करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहत-से देश अपनी स्वतंत्र खो बैठे। केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

प्रश्न 16.
वाणिज्य तथा व्यापार की वृद्धि के क्या परिणाम निकले ? (Imp.)
उत्तर:

  1. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप के लोग समृद्ध बने।
  2. यूरोप के देशों ने खोजे गए प्रदेशों में उपनिवेश बसाये जिनको मंडियों के रूप में प्रयुक्त किया।
  3. नवीन खोजों के कारण इटली का परंपरागत व्यापारिक महत्त्व कम हो गया। अब व्यापार के केंद्र वे देश बन गए जो अटलांटिक महासागर के समीप थे।
  4. व्यापार के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियाँ स्थापित हुई जिनमें शासक वर्ग के सदस्य भी शामिल थे।
  5. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप छ मध्यम वर्ग के सदस्यों की संख्या में जो वहाँ की राजनीति में महत्त्वपू’ भूमिका निभाने लगे।

प्रश्न 17.
अमेरिका में स्पेन के राज्य की स्थापना में किन तत्त्वों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
अमेरिका में स्पेनी साम्राज्य का विस्तार सैन्य-शक्ति के बल पर हुआ। इसमें बारूद तथा घोड़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय लोगों को या तो नजराना देना पड़ता था या फिर राज्य के लिए सोने-चाँदी की खानों में काम करना पड़ता था। अमेरिका को ‘खोज’ के बाद आरंभ में एक छोटी-सी बस्ती बसायी गई। इसमें रहने वाली स्पेनी लोग स्थानीय मजदूरों पर निगरानी रखते थे। स्थानीय प्रधानों को नए-नए प्रदेश तथा सोने के नए-नए स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था।

सोने की लालच के कारण गंभीर हिंसक घटनाएँ हुई, जिनका स्थानीय लोगों ने प्रतिरोध किया। स्पेनी विजेताओं के कठोर आलोचना कैथोलिक भिक्षु (friar) बार्टोलोम डि लास कैसास (Bartolome de las Casas) ने कहा है कि स्पेनी उपनिवेशकों को इन अभियानों के लिए अस्त्र-शस्त्र भी अभियानों में शामिल लोगों ने स्वयं मुहैया कराए थे। इसका कारण यह था कि उन्हें विजय के बाद होने वाली लूट में से एक बड़ा हिस्सा मिलने की आशा थी।

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प्रश्न 18.
कोर्टेस द्वारा मैक्सिको की विजय तथा टलैक्सकलानों के सफाये की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। 1519 ई. में, कोर्टेस क्यूबा से मैक्सिको आया था। जहाँ उसने टाटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटनैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मॉटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा। वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया।

उसे यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टेस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों न टलैक्सकलानों (Tlaxcalans) पर हमला बोल दिया। टलैक्सकलान भी खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया। फिर वे टेनोंटिटलैन (Tenochtitlan) की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 को वहाँ पहुँच गए।

प्रश्न 19.
स्पेनी सेनानायक कोर्टस तथा एजटेक शासक मोंटेजुमा के बीच भेंट का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्पेनी आक्रमणकारी 8 नवंबर, 1519 को टेनोक्किटलैन (एजटेक साम्राज्य की राजधानी) पहुँचे। यह नगर मेडिड से पाँच गुणा बड़ा था। वहाँ एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस का हार्दिक स्वागत किया । एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु टलैक्सलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोगों के मन में आशंका थी। हर आदमी भयभीत होकर काँप रहा था, मानो सारी दुनिया की आँते ही बाहर निकाली जा रही हों।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मुल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट् मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के प्रयास में, कोर्टेस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई पनिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिर में एजटेक और ईसाई, दोनों की प्रतिमाएं रखवा दी गईं।

प्रश्न 20.
कोर्टेस की अनुपस्थिति में स्पेनिश सैनिकों तथा एजटेक लोगों के संघर्ष का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्वारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटाना पड़ा था। स्पेनी शासक के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर मांगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडो ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 को कोर्टस वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जल मार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कम का सामना करना पड़ा। विवश होकर कोर्टस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोटेजुमा की रहस्मय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही टलैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस भयंकर रात को आँसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टेस को नए एजटेक शासक क्वेटेमोक (Cvatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस टलैक्सकलान में शरण लेनी पड़ी। अंततः उसने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ टेनोक्लिान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट् ने अपना जीवन त्याग देना ही ठीक समझा।

प्रश्न 21.
कोलंबस ने अपनी खोज यात्रा किस प्रकार आरंभ की?
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। उसने पश्चिम की ओर से यात्रा करते हए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोज। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ। उसने इस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजनाएँ प्रस्तुत की। परन्तु वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के अधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई. को जहाज द्वारा पालोस के पत्तन से अपने अभियान पर निकल पड़ा।

प्रश्न 22.
कोलंबस के बेड़े की जानकारी देते हुए यह बताइए कि वह गुआनाहानि द्वीप पर कैसे पहुँचा?
उत्तर:
कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (नाव) (Nao) तथा दो कैरेवल (Caravel) छोटे हलके जहाज पिंटा और ‘नीना’ शामिल थे। सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे थे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की माँग करने लगे।

अंतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई. को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा। परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह में गृआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। गआनाहानि में इस बड़े के नाविकों का अरावाक लोगों न स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को पाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

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प्रश्न 23.
वापसी यात्रा से पूर्व कोलंबस की कठिनाइयों तथा उसकी तीन अन्य यात्राओं की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटना में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापसी यात्रा अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। वापसी यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे। आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गई।

इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया। इन यात्राओं से यह पता चला कि नाविकों ने ‘इंडीज (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

प्रश्न 24.
नए देशों तथा मार्गों की खोज किन कारणों से की गई?
उत्तर:
नए देशों और मार्गों की खोज अनेक कारणों से की गई। यरोप के लोग एशिया में व्यापार से बहुत धन कमाते थे, परंतु जब प्रचलित भागों पर तुकों का अधिकार हो गया तो वे नवीन मार्ग खोजने के लिए विवश हो गए। कारपीनी और मार्कोपोलो आदि के यात्रा संबंधी वृत्तातों अथवा कहानियों ने यात्रा करने की इच्छा को बलवती किया। कम्पास के आविष्कार ने दूर-दूर समुद्रों में यात्रा करना सरल कर दिया। इन सब बातों से लोगों के मन में यह भावना आ गई कि उन्हें कठिन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्राणों की बाजी लगा देनी है।

प्रश्न 25.
15वीं और 16वीं शताब्दी के किन्हीं तीन नाविकों के नाम लिखें तथा उनकी खोजों पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
15वीं तथा 16वीं शताब्दी के तीन प्रसिद्ध नाविक कोलंबस, वास्कोडिगामा और मैगलेन थे। इनकी खोजों का वर्णन इस प्रकार है –

  1. कोलंबस – कोलंबस इटली का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह भारत का मार्ग ढूंढना चाहता था। अपनी यात्रा में पश्चिमी की ओर जाते हुए 1402 ई० में कोलंबस ने अमेरिका को खोज निकाला।
  2. वास्कोडिगामा – यह पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध नाविक था। वह आशा-अंतरीप से होता 1498 ई० में भारत आ पहुँचा । इस प्रकार उसने भारत पहुँचने के लिए समुद्री मार्ग की खोज की।
  3. मैगलेन – मैगलेन भी पुर्तगाल का ही रहने वाला था। 1519 ई० में उसने फिलीपाइन द्वीप तथा दक्षिण अमेरिका की खोज की।

प्रश्न 26.
नए मार्गों की खोजों से कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण परिणाम निकला? (V.Imp.)
उत्तर:
नए मागों का पता लगाने के बाद यूरोपीय लोगों ने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में व्यापार करना आरंभ कर दिया। अब वे धन, धरती और धर्म की वृद्धि सोंचने लगे। उन्होंने इन महाद्वीपों में अपने-अपने उपनिवेश बसाए। शीघ्र ही इन उपनिवेशों का धन यूरोपीय देशों में पहुँचने लगा। दासों का क्रय-विक्रय होने लगा। पादरियों ने इन उपनिवेशों में ईसाई धर्म का प्रचार शुरू किया जिसके फलस्वरूप यह धर्म विश्व का सबसे महान् धर्म बन गया । व्यापार और उपनिवेशों की स्थापना से ‘पूंजीवाद’ का उदय हुआ।

प्रश्न 27.
“16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजें आधुनिक युग को लाने में सहायक सिद्ध हुई।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
उत्तर:

  1. इन खोजों से पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  2. इन खोजों से नए-नए देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाए और इनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  3. नई खोजों से पुराने बंदरगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्बन, एंटवर्प आदि नए नगर व्यापार के केंद्र बन गए।
  4. भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गए।
  5. प्रत्येक यूरोपीय जाति ने अपने-अपने उपनिवेशों में अपने धर्म का प्रचार करने का प्रयत्न किया।
  6. 16वीं शताब्दी की भौगोलिक खोजों के ये महत्त्वपूर्ण परिणान आधुनिक युग के ही प्रतीक थे।

प्रश्न 28.
माया-संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
माया संस्कृति ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दियों के दौरान मैक्सिको में फली-फूली। मक्का की खेती उनकी सभ्यता का मुख्य आधार थी। उनके अनेक धार्मिक क्रिया-कलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े हुए थे। खेती करने के तरीके उन्नत और कुशलतापूर्ण थे, जिसके कारण खेतों में बहुत अधिक पैदावार होती थी। इससे शासक वर्ग, पुरोहितों और प्रधानों को एक उन्नत संस्कृति का विकास करने में सहायता मिली। माया लोगों ने वास्तुकला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त की। माया लोगों के पास अपनी एक चित्रात्मक लिपि थी। परंतु इस लिपि को अभी तक पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 29.
इंका संस्कृति के राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिकी देशज संस्कृतियों में से पेरू की क्वेचुआ (Qvechuas) या इंका संस्कृति सबसे विशाल थी। प्रथम इंका शासक मैंको कपाक (Manco Capac) ने बारहवीं शताब्दी में कुजको (Cuzco) में अपनी राजधानी स्थापित की थी। नौवें शासक के काल में राज्य का बहुत अधिक विस्तार शुरू हुआ। इस प्रकार इंका साम्राज्य इक्वेडोर से चिली तक लगभग 3000 मील में फैल गया। इंका साम्राज्य अत्यंत केंद्रीकृत था। राज्य की संपूर्ण शक्ति राजा में ही निहित थी।

वही सत्ता का उच्चतम स्रोत था। नए जीते गए कबीलों और जनजातियों को पूरी तरह इंका साम्राज्य में मिला लिया गया। सभी लोगों को प्रशासन की भाषा क्वेचुआ बोलनी पड़ती थी। प्रत्येक कबीला स्वतंत्र रूप से वरिष्ठों की एक सभा द्वारा शासित होता था। परंतु कुल मिलाकर पूरा कबीला अपने शासक के प्रति निष्ठावान था । स्थानीय-शासकों को उनसे सैनिक सहयोग के लिए पुरस्कृत किया जाता था। इस प्रकर इंका एक संघ के समान था जिस पर इंका लोगों का शासन था। एक अनुमान के अनुसार इस साम्राज्य में 10 लाख से भी अधिक लोग थे।

प्रश्न 30.
इंका लोगों की वास्तुकला पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इंका लोग उच्चकोटि कं भवन – निर्माता थे। उन्होंने इक्वेडोर से चिली तक पहाड़ों के बीच अनेक सड़कें बनाई। उनके किले शिलापट्टियों को इतनी बारीकी से तराश कर बनाए गए थे कि उन्हें जोड़ने के लिए गारे जैसी किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं होती थी। वे निकटवर्ती प्रदेशों में टूटकर गिरी हुई चट्टानों से पत्थरों को तराशने और ले जाने के लिए श्रम-प्रधान प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते थे।

इसके लिए अपेक्षा अधिक मजदूरों की जरूरत पड़ती हैं : राज मिस्त्री खंडों को सुंदर रूप देने के लिए शल्क पद्धति (फ्लेकिंग) का प्रयोग करते थे। पत्थर के कई टुकड़े 100 मैट्रिक टन से भी अधिक भारी होते थे। उनके पास इतने बड़े शिलाखंडों को ढोने के लिए पहियेदार गाड़ियाँ नहीं थीं। अतः यह काम मजदूरों को जुटाकर बड़ी सावधानी से करवाया जाता था।

प्रश्न 31.
समुद्री खोजों के पीछे वास्तविक प्रेरक तत्त्व क्या थे?
उत्तर:
समुद्री खोज यात्राओं के पीछे प्रेरक तत्त्व निम्नलिखित थे –

  1. नए स्थानों की खोज करके लोगों को दास बनाना और दास व्यापार से भारी मुनाफा कमाना।
  2. व्यापार वृद्धि तथा धन कमाने की प्रबल इच्छा का उत्पन्न होना।
  3. मसाले और सोना प्राप्त करके धन और यश कमाना।
  4. रोमांचकारी साहसिक यात्राएँ करके विदेशों में ईसाई धर्म का प्रचार करना।
  5. इस समय की प्रसिद्ध समुद्री यात्राएँ वास्कोडिगामा, कोलंबस और मैगलेन आदि ने की थी।

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प्रश्न 32.
शिक्षा के प्रति एजटेक लोगों की क्या नीति थी?
उत्तर:
शिक्षा के प्रति एजटेक लोग बहुत ही सजग थे। वे इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ। कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmecac) में भर्ती किए जाते थे। यहां उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्ने पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochacalli) में पढ़ते थे। उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अमेरिका की आदि सभ्यताओं की सामाजिक व्यवस्था व भवन-निर्माण कला की जानकारी दें।
उत्तर:
अमेरिका की आदि सभ्यताओं-माया, इंका तथा एजटेक-के सामाजिक प्रबंध तथा भवन-निर्माण कला की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है
1. सामाजिक प्रबंध –

  • माया सभ्यता के समाज में पुरोहितों को बहुत ही ऊँचा स्थान प्राप्त था।
  • इंका सभ्यता के समय अमेरिकी समाज बहुत बड़ा हो गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान राजा का था जिसे सूर्यवंशी समझा जाता था।
  • राजा के पश्चात् कुलीन वर्ग तथा पुरोहित वर्ग का स्थान आता था।
  • राज्य की सारी भूमि पर राजा का अधिकार होता था । वह परिवार के आकार के आधार पर भूमि किसानों में बाँट देता था। कुलीनों,
  • पुरोहितों तथा राज्य कर्मचारियों को सरकारी गोदामों से अनाज मिलता था, परंतु फसल खराब हो जाने की दशा में साधारण जनता को भी सरकारी गोदाम से अनाज दिया जाता था।
  • इंका समाज का जीवन बड़ा नियोजित था। पुरुष के विवाह के लिए 24 वर्ष तथा स्त्री के विवाह के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु निश्चित थी। पेड़-पौधों तथा पशुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता था।
  • इंका समाज के कानून बड़े कठोर थे। कानून तोड़ने वाले को जीवित जला दिया जाता था। झूठ बोलने वाले की जीभ पर कील गाढ़ दी जाती थी।
  • चोरों की पहचान के लिए उनके शरीर पर विशेष मोहर लगा दी जाती थी।
  • एजटेक समाज में सैनिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे। राज-कर्मचारी सम्मानित परिवारों से चुने जाते थे।

2. भवन निर्माण कला –
भवन-निर्माण कला में अमेरिका की आदि सभ्यताओं के लोगों ने बहुत उन्नति की। उनके महल, मंदिर तथा अन्य भवन इतने सुंदर थे कि आज भी यात्री उनकी प्रशंसा करते हैं। प्रायः भवन-निर्माण पिरामिड पर होता था। कुछ भवन 200 फुट ऊंचे थे। मैक्सिकों में सूर्य का पिरामिड 216 फुट ऊँचा है। यह वर्गाकार है जो 750 वर्ग फुट क्षेत्र है। भवनों को पत्थर की मूर्तियों तथा चित्रकारी से सजाया जाता था। कोपान में एक खगोलशाला थी।

इंका सभ्यता में शानदार भवन बनाए जाते थे। कुजको में सूर्य मंदिर इंका सभ्यता की भवन निर्माण कला का उच्चतम नमूना है। इसके अतिरिक्त किले, सड़क, पुल तथा महल बहुत ही सुंदर ढंग से बने थे। भवन बनाने के लिए पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़ों का प्रयोग किया जाता था। इन भवनों के कारण नगरों की सुंदरता बहुत बढ़ गई थी। एजटेक लोगों की राजधानी ‘टेनोक्टिटलांग’ अथवा ‘टेकोना का प्रासाद’ की गणना मध्य अमेरिका के अत्यंत सुंदर नगरों में की जाती थी। इंका की इंजीनियरिंग कला बहुत प्रसिद्ध थी। कुजको नगर में सड़कों की एक श्रृंखला साम्राज्य के सभी भागों को जोड़ती थौं । नगरों में सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं।

प्रश्न 2.
अमेरिका की मूल माया सभ्यता के लोगों के समाज, धर्म व विज्ञान के बारे में लिखें।
उत्तर:
माया सभ्यता अमेरिका की मूल सभ्यताओं में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। इस सभ्यता के समाज, धर्म तथा विज्ञान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –
1. समाज – माया सभ्यता का समाज पुरोहित प्रधान था। समाज में पुरोहित का बहुत ही आदर था। इस सभ्यता के नगर-राज्य चीचेन इटजा में शासन पर पुरोहितों का पूरा प्रभुत्व था। ये लोग राज्य में अपनी मनमानी कर सकते थे, परंतु स्थानीय प्रबंध में स्वशासन की व्यवस्था थी।

माया सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। माया लोगों की मुख्य फसल मक्का थी। कछ लोग वस्त्र बनाने, वस्रों को रंगने तथा कछ अन्य हस्त-शिल्पों में लगे हुए थे। लोगों का मुख्य भोजन मक्का, सेम, आलू, पपीता आदि थे। वे मिर्च का प्रयोग भी करते थे।

2. धर्म – माया सभ्यता के लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे। इनमें वन, वर्षा, उपजाऊ शक्ति, अग्नि तथा मक्का देवता सम्मिलित थे। अधिक वर्षा के लिए माया अपनी मूल्यवान वस्तुएँ पानी में फेंक देते थे। कई लोग देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए शरीर का भाग काट कर अर्पित कर देते थे। मानव बलि की भी प्रथा प्रचलित थी।

3. विज्ञान –

  • माया लोगों ने विज्ञान में काफी प्रगति की। उन्होंने एक कैलेंडर का आविष्कार किया। यह कैलेंडर उनकी खगोल विज्ञान में प्रगति का प्रतीक है।
  • इस कलेंडर के अनुसार वर्ष में 365 दिन तथा 18 महीने होते थे। प्रत्येक महीने में 20 दिन होते थे।
  • गणित के ई। में माया लोगों ने शून्य की जानक: दी।
  • कागज का प्रयोग तथा हेरोग्लिफिक लिपि उनकी अन्य मुख्य उपलब्धियाँ थीं। सच तो यह है कि माया सभ्यता अन्य अमेरिकी सभ्यताओं की तुलना में किसी भी दृष्टि में पीछे नहीं थी।

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प्रश्न 3.
एजटेक लोग कौन थे? उनकी सभ्यता एवं संस्कृति की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एजटेक लोग बारहवीं शताब्दी में उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। उन्होंने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया। पराजित लोगों से वे नजराना वसूल करने लगे।

समाज – एजटेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग में उच्च कुलों के लोग, पुरोहित तथा अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। अभिजातों की संख्या बहुत कम थी। वे सरकार तथा सेना में ऊँचे पदों पर आसीन थे। अभिजात लोग अपने में से एक को अपना नेता चुनते थे जो आजीवन शासक बना रहता था। राजा को पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि माना जाता था। समाज में योद्ध, पुरोहित तथा अभिजात वर्गों को सबसे अधिक सम्मान प्राप्त था।

व्यापारियों को भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। उन्हें प्राय: सरकारी राजदूतों तथा गुप्तचरों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों और विशिष्ट अध्यापकों को भी आदर की दृष्टि से देखा जाता था।

भूमि उद्धार तथा निर्माण कार्य-एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी। इसलिए उन्होंने भूमि उद्धार (reclamation) किया। उन्होंने सरकंडों की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर और उन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढंककर मैक्सिको झील में कृत्रिम द्वीप बनाये। इन्हें चिनाम्या (Chinampas) कहते थे। इन अति उपजाक द्वीपों के बीच नहरें बनाई गई जिन पर 1325 ई० में एजटेक राजधानी टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) का निर्माण किया गया। यहाँ के राजमहल और पिरामिड झील से बाहर झाँकते दिखाई देते थे। एजटेक लोगों के सर्वाधिक भव्य मंदिर युद्ध के देवता और सूर्य भगवान् को समर्पित थे। इसका कारण यह है कि एजटेक शासक युद्ध को बहुत अधिक महत्त्व देते थे।

साम्राज्य का ग्रामीण होना-साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। लोग मक्का, फलियां, कुम्हड़ा, कद्दू, कसावा, आलू तथा कुछ अन्य फसलें उगाते थे। भूमि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का न होकर पूरे कुल (Clan) के पास होता था। कुल सार्वजनिक निर्माण कार्य भी करवाता था। यूरोपीय खेतिहर लोग अभिजातों की जमीन जोतते थे। इसके बदले उन्हें फसल में से कुछ हिस्सा मिलता था। शिक्षा नीति-एजटेक लोग इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे कि उनके सभी बच्चे स्कूल अवश्य जाएँ।

कुलीन वर्ग के बच्चे कालमेकाक (Calmeacac) में भर्ती किए जाते थे। यहाँ उन्हें सैनिक अधिकारी तथा धार्मिक नेता बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अन्य सभी बच्चे पड़ोस के तेपोकल्ली स्कूल (Tepochcalli) में पढ़ते थे, जहाँ उन्हें इतिहास, पुराण-मिथकों, धर्म और उत्सवी गीतों की शिक्षा दी जाती थी। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता था और खेती तथा व्यापार करना सिखाया जाता था। परंतु लड़कियों को घरेलू काम-धंधों में कुशल बनाया जाता था। साम्राज्य का अंत-16वीं शताब्दी के आरंभ में एजटेक साम्राज्य में अस्थिरता के लक्षण दिखाई देने लगे। 1516 ई० में शक्तिशाली एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

प्रश्न 4.
कोटेंस के नेतृत्व में स्पेनवासियों को दक्षिणी अमेरिका की विजय पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कोटेंस और उसके सैनिकों ने (जिन्हें कॉक्विस्टोडोर Conquistadores, कहा जाता था) क्रूरता का प्रयोग करते हुए मैक्सिको को देखते ही देखते जीत लिया। कोर्टस 1519 ई० में क्यूबा से मैक्सिको आया था। वहाँ उसने टोंटानैक (Totonacs) समुदाय से मित्रता कर ली। टॉटानैक लोग एजटेक शासन से अलग होना चाहते थे। एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टेस से मिलने के लिए अपना एक अधिकारी भेजा।

वह स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता और उनके बारूद तथा घोड़ों के प्रयोग को देखकर घबरा गया। स्वयं मोंटेजुमा को भी यह पक्का विश्वास हो गया कि कोर्टस वास्तव में किसी निर्वासित देवता का अवतार है जो अपना बदला लेने के लिए फिर से प्रकट हुआ है। स्पेनी सैनिकों ने टूलैक्सकलानों पर हमला बोल दिया। लैक्सकलान खूखार लड़ाके थे। उन्होंने जबरदस्त प्रतिरोध के बाद अंततः समर्पण कर दिया। स्पेनी सैनिकों ने उन सबका क्रूरतापूर्वक सफाया कर दिया।

फिर वे टेनोस्टिटलैन की ओर बढ़े और 8 नवंबर, 1519 ई. को वहाँ पहुंच गए। स्पेनी आक्रमणकारी टेनोक्टिटलैन के दृश्य को देखकर हक्के-बक्के रह गए। यह स्पेन की राजधानी मैडिड से पाँच गुना बड़ा था और इसकी जनसंख्या स्पेन के सबसे बड़े शहर सेविली (Seville) से दो गुनी थी। कोटेंस की एजटेक शासक से भेंट-एजटेक शासक मोंटेजुमा ने कोर्टस का हार्दिक स्वागत किया। एजटेक लोग स्पेनियों को बड़े सम्मान के साथ शहर के बीचों-बीच ले गए, जहाँ मोंटेजुमा ने उन पर उपहारों की वर्षा कर दी। परंतु लैक्सकलान के हत्याकांड की जानकारी होने के कारण उसके अपने लोग भयभीत होकर काँप रहे थे।

एजटेक लोगों की चिंता निर्मूल नहीं थी। कोर्टेस ने बिना कोई कारण बताए सम्राट् को नजरबंद कर लिया और उसके नाम पर स्वयं शासन चलाने का प्रयास करने लगा। स्पेन के प्रति सम्राट मोंटेजुमा के समर्पण को औपचारिक बनाने के लिए, कोर्टस ने एजटेक मंदिरों में ईसाई प्रतिमाएं स्थापित करवाई। मोंटेजुमा ने एक समझौते का प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार मंदिरों में एजटेक और ईसाई प्रकार की प्रतिमाएँ रखवा दी गईं।

कोर्टेस का क्यूबा जाना और वापसी-इसी समय कोर्टेस को सब कुछ अपने सहायक ऐल्चारैडो (Alvarado) को सौंपकर क्यूबा लौटना पड़ा। स्पेनी शासन के अत्याचारों से तंग आकर और सोने के लिए उनकी निरंतर माँगों के दबाव के कारण, आम जनता ने विद्रोह कर दिया। ऐल्चारैडी ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव में कत्लेआम का आदेश दे दिया। 25 जून, 1520 ई० को कोर्टस जब वापस लौटा तो उसे घोर संकट का सामना करना पड़ा। पुल तोड़ दिए गए थे। जलमार्ग काट दिए गए थे और सड़कें बंद कर दी गई थीं। स्पेनियों को भोजन और पेयजल की घोर कमी का सामना करना पड़ा । विवश होकर कोर्टेस को वापस लौटना पड़ा।

इसी समय मोंटेजुमा की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। फिर भी एजटेकों की स्पेनियों के साथ लड़ाई जारी रही। लड़ाई में लगभग 600 अत्याचारी विजेता और उतने ही लैक्सकलान के लोग मारे गए। हत्याकांड की इस ‘भांकर रात’ को आंसूभरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। कोर्टस को नए एजटक शासक कवेटेमोक (Cuatemoc) के विरुद्ध अपनी रणनीति तैयार करने के लिए वापस लैंक्सकलान में शरण लेनी पड़ी।

उस समय एजटेक लोग यूरोपीय लोगों के साथ आए चेचक के प्रकोप से मर रहे थे। कोर्टस ने केवल 180 सैनिकों और 30 घोड़ों के साथ नोक्टिट्लान में प्रवेश किया। दूसरी ओर एजटेक भी अपनी आखिरी मुठभेड़ के लिए तैयार थे। अपशकुनों ने एजटेकों को बता दिया कि उनका अंत दूर नहीं है। इसे वास्तविक समझकर सम्राट ने अपना जीवन त्याग देना हो ठीक समझा। मैक्सिको पर विजय प्राप्त करने में दो वर्ष का समय लग गया। कोर्टस मैक्सिको में ‘न्यू स्पेन’ का कैप्टेन जनरल बन गया। उसे चार्ल्स पंचम द्वारा सम्मानों से विभूषित किया गया। मैक्सिको से स्पेनियों ने अपना नियंत्रण ग्वातेमाला (Guatemala), निकारागुआ (Nicaragua) और होंडुरास (Honduras) पर भी स्थापित कर लिया।

प्रश्न 5.
पिजारों कौन था? अमेरिका (इंका प्रदेश) में इसकी सफलताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पिजारो (Pizarro) एक गरीब और अनपढ़ स्पेनिश था। वह सेना में भर्ती होकर 1520 ई० में कैरीबियन द्वीपसमूह में आया था। उसने इंका राज्य के बारे में यह सुन रखा था कि वह चाँदी और सोने का देश (EI-dor-ado) है। उसने प्रशांत से वहाँ पहुँचने के लिए कई प्रयत्न किए। एक बार जब वह अपनी यात्रा से स्वदेश लौटा तो वह स्पेन के राजा से मिलने में सफल हो गया। इस मुलाकात के दौरान उसने राजा को इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए सोने के आकर्षक मर्तबान दिखाए।

राजा के मन में लोभ जाग उठा और उसने पिजारो को यह वचन दे दिया कि यदि वह इंका प्रदेश को जीत लेगा तो वह उसे वहाँ का गवर्नर बना देगा। पिजारो ने कोर्टस का तरीका अपनाने की योजना बनाई। परंतु वह यह देखकर क्षुब्ध हो गया कि इंका साम्राज्य की स्थिति भिन्न थी। पिजारो का इंका साम्राज्य में प्रवेश-1532 ई० में अताहुआल्पा (Atahualpa) ने एक गृहयुद्ध के बाद इंका साम्राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। तभी वहाँ पिजारो ने प्रवेश किया।

उसने जाल बिछाकर राजा को बंदी बना लिया। राजा ने अपने आप को मुक्त कराने के लिए एक कमरा भर सोना फिरौती में देने का प्रस्ताव रखा। परंतु पिजारो ने अपना वचन नहीं निभाया । उसने राजा का वध करवा दिया और उसके सैनिकों ने जी भरकर लूटमार मचाई। इसके बाद पिजारो ने इंका राज्य पर अधिकार कर लिया। विजेताओं की क्रूरता के कारण वहाँ 1534 ई० में विद्रोह भड़क उठा जो दो साल तक चलता रहा। परिणामस्वरूप हजारों लोगों की युद्ध तथा महामारियों के कारण मौत हो गई। अगले पांच साल में स्पनियों ने पोटोसी (आज का बोलीविया) में चाँदी के विशाल भंडारों का पता लगा लिया। इन खानों में काम करने के लिए उन्होंने इंका लोगों को दास बना लिया।

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प्रश्न 6.
पेड्रो अल्वारिस कैबाल ब्राजील कैसे पहुँचा? ब्राजील में पुर्तगालियों द्वारा इमारती लकड़ी के व्यापार का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
पुर्तगाल निवासी पेड्रो अल्वारिस कैब्राल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर भारत के लिए रवाना हुआ। तूफानी समुद्रों से बचने के लिए उसने पश्चिमी अफ्रीका का एक बड़ा चक्कर लगाया । वह यह देखकर हैरान रह गया कि वह वर्तमान ब्राजील के समुद्र तट पर जा पहुंचा है। दक्षिणी अमेरिकी का वह पूर्वी भाग उस क्षेत्र में आता था जिसे पोप ने पुर्तगाल को सौंप रखा था। इसलिए पुर्तगाली अनवादित रूप से इसे अपना प्रदेश मानते थे।

ब्राजील की महत्वपूर्ण संपदा-पुर्तगालवासी कैबाल (Pedro Alvares Cabral) 1500 ई० में जहाजों का एक बेड़ा लेकर रवाना हुआ क्योंकि वह भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए अधिक उत्सुक था तथा ब्राजील में सोना मिलने की कोई संभावना नहीं थी। परंतु ब्राजील का एक प्राकृतिक संसाधन इनके लिए और भी महत्त्वपूर्ण था, जिसका उन्होंने भरपूर लाभ उठाया। यह संपदा थी-इमारती लकड़ी। वहाँ के ब्राजीलवुड वृक्ष से एक सुंदर लाल रंजक (Dye) भी मिलता था।

ब्राजील के मूल निवासी लोहे के चाकू-छुनियों और आरियों के बदले में इन पेड़ों को काट कर इनके लढे जहाजों तक ले जाने के लिए भी तुरंत तैयार हो गए। वैसे भी एक हँसिए, चाकू या कंधे के बदले ढेरों मुर्गियाँ, बंदर, तोते, शहद, मोम, सूती धागा आदि वस्तुएँ देने को सदैव तैयार रहते थे। इमारती लकड़ी का व्यापार-इमारती लकड़ी के इस व्यापार के कारण पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारियों के बीच भयंकर लड़ाइयाँ हुई। इनमें अंततः पुर्तगालियों की जीत हुई।

1534 ई० में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील के तट को 14 आनुवांशिक कप्तानियों (Captaincies)” में बाँट दिया । इनके स्वामित्व उन पुर्तगालियों को सौंपे गये जो वहाँ स्थायी रूप से रहना चाहते थे। उन्हें स्थानीय लोगों को दास बनाने का अधिकार भी दे दिया गया । ब्राजील में बसने वाले बहुत-से पुर्तगाली भूतपूर्व सैनिक थे जिन्होंने भारत के गोवा क्षेत्र में लड़ाइयाँ लड़ी थीं । स्थानीय लोगों के प्रति उनका व्यापार अत्यंत क्रूर था।

प्रश्न 7.
1540 ई० से ब्राजील में पुर्तगालियों की गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील के बड़े-बड़े बागानों में गन्ना उगाना आरंभ कर दिया। गन्ना से चीनी बनाने के लिए मिलें भी लगाई। यह चीनी यूरोप के बाजारों में बेची जाती थी। बहुत ही गर्म और नम जलवायु में चीनी की मिलों में काम करने के लिए वे स्थानीय लोगों पर निर्भर थे- जब उन लोगों ने इस नीरस काम को करने से इन्कार कर दिया तो मिल मालिकों ने उनका अपहरण कर उन्हें दास बनाना आरंभ कर दिया। स्थानीय लोग दास बनाने वाले इन मिल मालिकों से बचने के लिए गाँव छोड़कर जंगलों की ओर भागने लगे। ज्यों-ज्यों समय बीतता गया, तटीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लगभग सभी गाँव उजह गए।

वहाँ अब यूरोपीय लोगों के सुनियोजित कस्बे बस गए। मिल मालिकों को दास लाने के लिए अब पश्चिमी अफ्रीका की ओर मुड़ना पड़ा। परंतु स्पेनी उपनिवेशों में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। वहाँ पहले से ही एजटेक और इंका साम्राज्यों के अधिकांश लोगों से खदानों और खेतों में काम कराया जाता था। इसलिए स्पेनिश लोगों को ‘औपचारिक रूप से उन्हें दास बनाने अथवा कहीं और से दास लाने की जरूरत नहीं पड़ी।

154980 में पुर्तगाली राजा के अधीन एक औचारिक सरकार स्थापित की गई और बहिया (Bahia) सैलवाडोर (Salvador) को उसकी राजधानी बनाया गया। इस समय तक जेसुइट पादरियों ने भी ब्राजील में आना शुरू कर दिया था। वहाँ बसे यूरोपीय लोग इन पादरियों को पसंद नहीं करते थे इसके कई कारण थे –

  • ये पादरी मूलनिवासियों के साथ दया का व्यवहार करने की सलाह देते थे।
  • वे निडरतापूर्वक जंगलों में जाकर उनके गाँवों में रहते थे और वह उन्हें यह सिखाते थे कि ईसाई धर्म एक आनंददायक धर्म है और उन्हें आनंद लेना चाहिए।
  • सबसे बड़ी बात यह थी कि ये धर्मप्रचार दास प्रा की कड़े शब्दों में निंदा करते थे।

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प्रश्न 8.
भौगोलिक खोजों से क्या अभिप्राय है? इसके क्या कारण थे?
उत्तर:
1490 ई० से 1523 ई. तक का 33 वर्ष का समय महान् भौगोलिक खोजों के लिए प्रसिद्ध है। इस काल में उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका की खोज की गई और इसे नई दुनिया का नाम दिया गया। अंध महासागर तथा प्रशांत महासागर को पार किया गया। अनेक नवीन भौगोनिक मार्ग ढूंढे गये। हिंद महासागर और चीनसागर में भी यूरोपीय जहाज चलने लगे। अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी तट के साथ पूर्व की ओर मार्ग ढूंढा गया। इस प्रकार संसार के मानचित्र का रूप बदलने लगा।

भौगोलिक खोजों के कारण-इन भौगोलिक खोजों के कई कारण थे। यूरोप निवासियों को एशिया और विशेष रूप से भारत की वस्तुओं में बड़ी रुचि थी। व्यापारी अपना माल थल मार्ग से रोम सागर तथा काला सागर तक लाया करते थे। वहाँ से आगे समुद्री मार्ग से माल यूरोप की मंडियों में पहुंचा दिया जाता था। 15वीं शताब्दी के मध्य में तुर्की तथा इसके आस-पास के देशों पर तुकों का अधिकार हो गया। फलस्वरूप यूरोप का एशियाई व्यापार बंद हो गया। परंतु यूरोप के लोग इस लाभदायक व्यापार को समाप्त नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नवीन मार्ग खोजने के प्रयल आरंभ किये। तब यह सारा व्यापार लगभग बंद हो गया।

1. इन्हीं दिनों यूरोपियन यात्री कारपीनी और मार्कोपोलो एशिया का चक्कर लगाकर आये थे। उन्होंने अपने यात्रा विवरणों में इन देशों के विषय में अनेक अद्भुत कहानियाँ लिखीं । इन रोमांचकारी कहानियों ने यूरोप निवासियों के दिलों में इन देशों की यात्रा करने की प्रबल इच्छा पैदा की।

2. विज्ञान के नये आविष्कारों ने भी उनकी कल्पना को उभारा। कोपरनिकस ने यह घोषणा की कि पृथ्वी गोल है, जिसका यह अर्थ लिया गया कि मनुष्य चाहे किसी दिशा में यात्रा करे वह अपने लक्ष्य पर वापस पहुंचेगा। कंपास के आविष्कार के कारण दूर-दूर तक समुद्रों में यात्रा करना सरल हो गया।

3. पुनर्जागरण की लहर ने भी बड़ा प्रभाव डाला। इसने लोगों के मन में कठिन लक्ष्य पर विजय प्राप्त करने की इच्छा पैदा कर दी। नये स्थापित राष्ट्रीय राज्यों ने इस प्रकार के वातावरण का लाभ उठाया तथा उनके राजाओं ने जी-जान से उन वीरों को प्रोत्साहित किया जो खोज कार्य में भाग लेना चाहते थे।

प्रश्न 9.
सोलहवीं शताब्दी की महत्त्वपूर्ण खोजों का वर्णन कीजिए। आधुनिक युग को लाने में वे किस प्रकार सहायक सिद्ध हुई?
उत्तर:
भौगोलिक खोजों का क्रम वैसे तो 15वीं शताब्दी में आरंभ हुआ था, परंतु 16वीं शताब्दी में इस दिशा में और भी महत्त्वपूर्ण खोज यात्राएँ हुई। 1492 ई० में बार्थेलाम्यू डियाज ने आशा अंतरीप की खोज की। उससे अमेरिका, न्यूफाउंडलैंड और लैब्रेडोर का पता चला। 1498 ई० में वास्कोडिगामा ने यूरोप से भारत पहुंचने का नया समुद्री मार्ग खोज निकाला। 16वीं शताब्दी के आरंभ में कोर्टिस नाविक मैक्सिको जा पहुंचा। उसने 1531 ई० में पिजारू की खोज की। परंतु इस शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक यात्रा मैगलेन नामक पुर्तगाली नाविक ने की।

वह अपने साथियों सहित अंध महासागर को पार करके दक्षिणी अमेरिका के तट तक और फिर जलडमरू के मार्ग से प्रशांत महासागर में पहुँचा। यहाँ से वह फिलिपाइन के द्वीपों में पहुंचा। यहाँ मैगलेन की मृत्यु हो गई। परंतु उसके 18 साधी एक जहाज में संसार का चक्कर काट कर स्वदेश लौट आये। इस प्रकार मनुष्य ने संसार के गिर्द अपना पहला चक्कर पूरा कर लिया।

आधुनिक युग लाने में भौगोलिक खोजों का योगदान –

  • इन खोजों से नयी समुद्री-मार्गों की खोज की गई। फलस्वरूप पूर्व तथा पश्चिम के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिला।
  • इन खोजों से नये-नये देशों का पता चला। यूरोपीय देशों ने इन नये प्रदेशों में अपने उपनिवेश बसाये और उनका खूब आर्थिक शोषण किया।
  • नई खोजों से पुराने बंदगाहों का महत्त्व कम हो गया। अब लंदन, लिस्वन आदि नये नगर व्यापार के केंद्र बन गये।
  • भौगोलिक खोजों के कारण स्थापित उपनिवेशों से यूरोपवासियों को सोने-चांदी के अनेक भंडार प्राप्त हुए। फलस्वरूप वे धनी हो गये।
  • प्रत्येक यूरोपीय जाति अपने-अपने देशों के उपनिवशों में जा बसी और वहाँ व्यापार करना आरंभ कर दिया।

व्यापारी वर्ग ने मध्यवर्ग को जन्म दिया। 16वीं शताब्दी के भौगोलिक खोजों से ये महत्त्वपूर्ण परिणाम आधुनिक युग के ही प्रतीक थे। नवीन खोजे गये उपनिवेशों के व्यापारिक दृष्टि से दो लाभ हुए। एक तो इन उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त किया जाता था। दूसरे, तैयार माल यहाँ महंगे दामों पर बेचा जाता था। उपनिवेशों का ये व्यापारिक मंडी के रूप में प्रयोग करते थे।

अमेरिका तथा अफ्रीका पर तत्कालीन प्रभाव-यूरोप निवासियों ने अमेरिका को विजय करके वहाँ की मूल सभ्यता को नष्ट कर दिया। उन्होंने अमेरिका के लोगों का आर्थिक शोषण भी किया। खोज यात्राओं के परिणामस्वरूप अफ्रीका के बहुत-से देश अपनी स्वतंत्रता खो बैठे । केवल इतना ही नहीं, इन खोजों के कारण दास-व्यापार भी आरंभ हुआ।

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प्रश्न 10.
कोलंबस कौन था? उसके द्वारा अमेरिका की खोज-यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस (1451-1506 ई०) इटली का एक नाविक था। उसमें साहसिक कार्य करने और नाम कमाने की तीव्र इच्छा थी। वह भविष्यवाणियों में विश्वास रखता था। इस आधार पर वह यह जानता था कि उसके भाग्य में पश्चिम की ओर से यात्रा करते हुए पूर्व (the Indies) की ओर का मार्ग खोजना लिखा है। वह कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) द्वारा लिखी गई पुस्तक इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत अधिक प्रेरित हुआ।

उसने उस संबंध में पुर्तगाल के राजा के सामने अपनी योजना प्रस्तुत की। वे मंजूर नहीं हुई। सौभाग्य से स्पेन के प्राधिकारियों ने उसकी एक साधारण सी योजना स्वीकार कर ली। उसे पूरा करने के लिए वह 3 अगस्त, 1492 ई० को जहाज द्वारा पालोस के पतन से अपने अभियान पर, निकल पड़ा। कोलंबस की यात्रा-कोलंबस का बेड़ा छोटा-सा था जिसमें सांता मारिया नाम की एक छोटी नाओ (Nao) तथा दो कैरवल (Caravel) छोटे हल्के जहाज हपंटा और ‘नौना’ शामिल थे।

सांता मारिया की कमान स्वयं कोलंबस के हाथों में थी। उसमें 40 कुशल नाविक सवार थे। उनका बेड़ा अनुकूल व्यापारिक हवाओं के सहारे आगे बढ़ता जा रहा था। परंतु रास्ता लंबा था। 33 दिनों तक बेड़ा आगे बढ़ता गया। फिर भी तट के दर्शन नहीं हुए। इसलिए उसके नाविक बेचैन हो उठे। उनमें कुछ तो तुरंत वापस चलने की मांग करने लगे। अतत: 12 अक्टूबर, 1492 ई० को उन्हें जमीन दिखाई दी। कोलंबस ने इसे भारत समझा परंतु वह स्थान बहामा द्वीप समूह का गुआनाहानि (Guanahani) द्वीप था। वहाँ के अरावाक लोगों ने इस बेड़े के नाविकों का स्वागत किया। उन्होंने नाविकों को खाने-पीने का सामान भी दिया। अत: कोलंबस उनकी इस उदारता से अत्यधिक प्रभावित हुआ।

कोलंबस ने गुआनाहानि में स्पेन का झंडा गाड़ दिया। उसने इस द्वीप का नया नाम सैन सैल्वाडोर (San, Salvador) रखा। वहाँ उसने एक सार्वजनिक उपासना कराई और स्थानीय लोगों से बिना पूछे ही अपने आपको वहाँ का वाइसराय घोषित कर दिया। उसने वहाँ के बड़े द्वीप समूह क्यूबानास्कैन (Cubanascan) और किस्केया (Kiskeya) तक जाने के लिए इन स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त किया।

कठिनाइयाँ और वापसी यात्रा – कोलंबस और उसके साथी सोना प्राप्त करना चाहते थे। परंतु उनका अभियान दुर्घटनाओं में फंस गया। उन्हें खूखार कैरिब (Carib) कबीलों का भी सामना करना पड़ा। अत: नाविक जल्दी से जल्दी घर लौटने के लिए अधीर हो उठे। वापस यात्रा और भी अधिक कठिन सिद्ध हुई क्योंकि जहाजों को दीमक लग गई थी। नाविक थक चुके थे और उन्हें घर की याद सताने लगी थी। इस संपूर्ण यात्रा में कुल 32 सप्ताह लगे।

आगे चलकर ऐसी तीन यात्राएँ और आयोजित की गईं। इन यात्राओं के दौरान कोलंबस ने बहामी और बृहत्तर एंटिलीज द्वीपों (Greater Antilles), दक्षिणी अमेरिका की मुख्य भूमि और उनके तटवर्ती प्रदेशों में अपना खोज कार्य पूरा किया । इन यात्राओं से ये पता चला कि स्पेनी नाविकों ने ‘इंडीज’ (Indies) नहीं बल्कि एक नया महाद्वीप खोज निकाला है।

कोलंबस की विशेष उपलब्धि यह रही थी कि उसने अनंत समुद्र की सीमाएँ खोज निकाली। उसने यह दिखा दिया कि यदि पाँच सप्ताह तक व्यापारिक हवाओं के साथ-साथ यात्रा की जाए तो पृथ्वी के गोले के दूसरी ओर पहुँचा जा सकता है। उसके द्वारा खोजे गए दो महाद्वीपों उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका का नामकरण फ्लोरेंस के एक भूगोलवेत्ता ‘अमेरिगो वेस्पुस्सी’ (Amerigo Vespucci) के नाम पर किया गया।

प्रश्न 11.
खोज यात्राओं ने उपनिवेशीकरण तथा दास व्यापार को किस प्रकार बढ़ावा दिया?
उत्तर:
पंद्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय समुद्री परियोजनाओं ने एक बात स्पष्ट कर दी कि एक महासागर से दूसरे महासागर तक यात्रा की जा सकती है। इससे पहले तक, इनमें से अधिकांश मार्ग यूरोप के लोगों के लिए अज्ञात थे। कुछ मार्गों को तो कोई भी नहीं जानता था। तब तक कोई भी जहाज कैरीबियन या अमेरिका महाद्वीपों के जल क्षेत्रों में नहीं पहुंचा था। दक्षिणी अटलांटिक तो पूरी तरह अछूता था। किसी भी जहाज ने उसके पार जाना तो दूर, उसके पानी में भी प्रवेश नहीं किया था। न ही कोई जहाज दक्षिणी अटलांटिक से प्रशांत महासागर या हिंद महासागर तक पहुँचा था।

15वीं शताब्दी के अंतिम और 16वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में ये सभी साहसिक कार्य सफलतापूर्वक किए गए। प्रारंभिक समुद्री यात्रियों के अतिरिक्त अन्य यूरोपवासियों के लिए भी अमेरिका की खोज के दीर्घकालीन परिणाम निकले। सोना-चाँदी की बाढ़ ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और औद्योगीकरण में वृद्धि की। 1560 से 1600 ई० तक सैकड़ों जहाज प्रति वर्ष दक्षिणी अमेरिका की खानों से चाँदी स्पेन में लाते रहे। परंतु स्पेन और चुर्तगाल को इसका अधिक लाभ नहीं मिला।

इसका कारण यह था कि उन्होंने अपने व्यापार या व्यापारी जहाजों के बेडे का विस्तार करने में इस धन को नहीं लगाया। उनकी बजाय इसका लाभ फ्रांस, बेल्यिजम, हालैंड आदि देशों ने उठाया। उनके व्यापारियों ने बड़ी-बड़ी संयुक्त पूंजी कंपनियां बनाई और अपने बड़े-बड़े व्यापारिक अभियान चलाए । उन्होंने उपनिवेश स्थापित करकं यूरोपवासियों को नयी दुनिया में पैदा होने वाली फसलों तंबाक, आलू, गन्ना, कैकाओं (Cacao) और रबड़ आदि से परिचित कराया।

इसके बाद ये फसलें भारत तथा अन्य देशों में ले जाई गई। उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के लिए इन अभियानों के अनेक तात्कालिक परिणाम हुए –

  • मार – काट के कारण मूल निवासियों को जनसंख्या कम हो गई।
  • उनकी जीवन – शैली का विनाश हो गया।
  • उन्हें दास बनाकर उनसे खानों, बगानों और कारखानों में काम कराया गया।

इन मुठभेड़ों की बर्बरता का एक स्पष्ट प्रमाण यह है कि हारे हुए लोगों को दास बना लिया जाता था। इसके साथ-साथ वहाँ उत्पादन की पूंजीवाद प्रणाली का प्रादुभाव हुआ। काम की परिस्थितियाँ भयावह थीं। परंतु स्पेनी मालिकों का मानना था कि उनके आर्थिक लाभ के लिए इस प्रकार का शोषण अत्यंत आवश्यक है।

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प्रश्न 12.
दास-व्यापार का वर्णन करते हुए यह बताइए कि दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क दिए गए?
उत्तर:
1601 ई० में, स्पेन के फिलिप द्वितीय ने सार्वजनिक रूप से बेगार की प्रथा पर रोक लगा दी। परंतु एक गुप्त आदेश द्वारा उसने इसे चालू रखने की व्यवस्था भी कर दी। 1609 ई० में एक काननू बनाया गया जिसके अंतर्गत ईसाई और गैर-ईसाई सभी प्रकार के स्थानीय लोगों को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी गई। इससे यूरोप से अमेरिका में आकर बसे लोग नाराज हो गए। उन्होंने दो साल के भीतर ही राजा को यह कानून हटाने और दास बचाने की प्रथा को चालू रखने के लिए मजबूर कर दिया।

दास व्यापार-अब नयी-नयी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गई। जंगलों को साफ करके प्राप्त की गई भूमि पर पशुपालन किया जाने लगा। 1700 ई० में सोने की खोज के बाद खानों का काम जोरों से चल पड़ा। इन कार्यों के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। यह भी स्पष्ट था कि स्थानीय लोग दास बनने का विरोध करेंगे। अब यही विकल्प बचा था कि दास अफ्रीका से मंगवाए जाएँ। 1550 ई० के दशक से 1880 ई० के दशक तब ब्राजील में 36 लाख से भी अधिक अफ्रीकी दासों का आयात किया गया। 1750 ई० में कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास हजार-हजार दास होते थे।

दास प्रथा को जारी रखने के पक्ष में तर्क-दास प्रथा के उन्मूलन के बारे में 1780 ई० – के दशक में हुए वाद-विवाद में कुछ लोगों ने यह तर्क दिया कि यूरोपवासियों के अफ्रीका में आने से पहले भी वहाँ दास प्रथा प्रचलित थी। यहाँ तक कि पंद्रहवीं शताब्दी में अफ्रीका में स्थापित किए जाने वाले राज्यों में भी अधिकांश मजदूर-वर्ग दासों का ही था। उन्होंने यह भी बताया था कि यूरोपीय व्यापारियों को युवा स्त्री-पुरुषों को दास बनाने में स्वयं अफ्रीकी लोग भी सहायता देते थे। बदले में यूरोपीय व्यापारी उन अफ्रीकावासियों को दक्षिणी अमेरिका से आयात किए गए खाद्यान्न देते थे। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में दक्षिणी अमेरिका के उपनिवशों में आकर बसे यूरोपीय लोगों ने स्पेन और पुर्तगाल के शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस प्रकार ये उपनिवेश स्वतंत्र देश बन गए।

प्रश्न 13.
माया सभ्यता का वर्णन करें।
उत्तर:
ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी के मध्य मैक्सिको में माया सभ्यता उन्नति की ओर अग्रसर थी। अमेरिका महादेश में आरंभिक सभ्यताओं में यह सभ्यता काफी विकसित थी। यह सभ्यता कृषि प्रधान थी। माया लोग मक्के उपजाया करते थे। उनके धार्मिक उत्सवों का संबंध मक्का बोने, उगाने तथा काटने से जुड़े थे। वे अधिशेष उत्पादन करते थे। माया समाज विभिन्न वर्गों में बँटा था।

शासक वर्ग प्रायः भोग विलास का जीवन जीते थे। पुरोहित वर्ग का समाज में विशेष महत्त्व था क्योंकि यह सभ्यता धर्म प्रधान थी। कृषक वर्ग बड़ी संख्या में थे और यही मुख्य कर-दाता वर्ग थे। माया लोगों ने वस्तु, कला, खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कुछ उपलब्धियाँ हासिल .. की थी। उनकी लिपि चित्रात्मक थी, जिस लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।

प्रश्न 14.
दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें। [B.M.2009]
उत्तर:
इतिहासकारों ने दक्षिणी अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के सम्बन्ध में काफी अनुसंधान किये हैं। दक्षिणी अमेरिका की संस्कृतियों के नगरे में जो जानकारी मिलती है इनमें से 12वीं शताब्दी में एजटेक लोगों की सभ्यता काफी महत्त्वपूर्ण थी। उनका समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात अपने में से एक सर्वोच्च नेता चुनते थे जो आजीवन शासक रहता था। समाज में व्यापारियों का भी स्थान काफी महत्त्वपूर्ण था। भूमि उपजाऊ नहीं थी। वे लोग मक्का, आलू और अन्य फसलें उपजाते थे।

दक्षिणी अमेरिका में ही माया सभ्यता के बारे में जानकारी मिलती है। माया सभ्यता के लोगों के समाज में भी पुरोहितों का काफी उच्च स्थान होता था। वे भी मुख्यतः मक्का का उत्पादन करते थे, जो उनके किलों से स्पष्ट होता है। उत्तरी अमेरिका में मिलने वाली सबसे पुरानी मानव कृति एक तीर की नोंक है जो लगभग 11000 वर्ष पहले की है। आरंभिक मूल के लोग नदी घाटी के क्षेत्र में रहा करते थे। वे मक्का एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियों उपजाते थे।

मांस, मछली भी खाया करते थे। शिकार उनके भोजन प्राप्त करने के तरीके में मुख्य होता था। वे कई भाषाएँ बोलते थे। किन्तु लिपि विकसित नहीं कर पाये थे। धीरे-धीरे उत्तरी अमेरिका में यूरोपियनों का आगमन और वर्चस्व बढ़ने लगा जिससे मूल निवासियों की संस्कृति कमजोर पड़ने लगी।

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प्रश्न 15.
अरावाकी लुकायो समुदाय की मुख्य विशेषताएँ बताइए। उनकी जीवन शैली का अंत किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
अरावाकी लुकायो समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों और वृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। कैरिब नामक एक बूंखार कबीले ने उन्हें लघु ऐटिलीज प्रदेश से खदेड़ दिया था। अरावाकी लोग खेती तथा शिकार करके और मछली पकड़कर अपना जीवन निर्वाह करते थे। वे मुख्य रूप से मक्का, मीठे आलू और कंदमूल और कसावा उगाते थे।

अरावाक संस्कृति-अरावाक संस्कृति की एक मुख्य विशेषता यह थी कि वे सब एक साथ मिलकर खाद्य उत्पादन करते थे, ताकि समुदाय के प्रत्येक सदस्य को भोजन प्राप्त हो । वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनमें बहुविवाह प्रथा प्रचलित थी। वे जीववादी (Animists) थे। अन्य कई समाजों की तरह अरावाक समाज में भी शमन लोग (Shamans) कष्ट निवारकों और इहलोक तथा परलोक के बीच मध्यस्थ के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

अरावाकी लोगों का यूरोपियों से संपर्क तथा उनके जीवन का अंत-अरावाक लोग सोने के आभूषण पहनते थे। परंतु यूरोपवासियों की भांति सोने को अधिक महत्त्व नहीं देते थे। यदि उन्हें कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके देता था तो भी वे प्रसन्न होते थे क्योंकि उन्हें शीशे का मनका अधिक सुंदर दिखाई देता था। वे बुनाई की कला में अत्यधिक कुशल थे। हैमक (Hammock) अर्थात् झूले का प्रयोग उनकी एक विशेषता थी जिसे यूरोपीय लोगों ने बहुत अधिक पसंद किया।

अरावाकों का व्यवहार बहुत ही उदारतापूर्ण होता था। वे सोने की तलाश के लिए स्पेनिश लोगों का साथ देने के लिए सदा तैयार रहते थे। परंतु आगे चलकर उनके प्रति स्पेन की नीति क्रूरतापूर्ण हो गई। अत: उन्होंने इसका विरोध किया। इसके लिए उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े। अत: स्पेनी लोगों के संपर्क में आने के बाद लगभग पच्चीस सालों के भीतर ही अरावाक और उनकी जीवन-शैली का लगभग अंत हो गया।

प्रश्न 16.
आदि अमेरिका की प्रमुख सभ्यताओं की मुख्य-मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदि अमेरिका में यों तो अनेक सभ्यताएँ फली-फूली परंतु इसमें से तीन सभ्यताएँ प्रमुख है-माया सभ्यता, एजटेक सभ्यता तथा इंका सभ्यता।
(क) माया सभ्यता – माया सभ्यता का उदय 1100 ई० के लगभग हुआ। यह मध्य अमेरिका के एक बड़े भाग में फैली हुई थी। फिर भी इन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण उपलिब्धियां प्राप्त की। माया सभ्यता की मुख्य विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –

  • ये लोग अनाज के खेतों के पास बस्तियों में रहते थे। उनके भोजन में मक्का, सेम, आल. पपीता, स्वकाश तथा मिर्च शामिल थे। वे सूती वस्रों का प्रयोग करते थे। वे चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग भी करते थे।
  • इनका मुख्य व्यवसाय कृषि था। भोजन के लिए अधिक-से-अधिक मक्का उगाने के उद्देश्य से ये अपने देवताओं को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते थे।
  • वे अनेक प्रकार के धार्मिक कृत्यों और कर्मकांडों में विश्वास रखते थे। उनका एक धार्मिक कृत्य रबड़ की गेंद का खेल था। उनके
  • अनेक देवता थे जिनमें अग्नि देवता और मक्का देवता मुख्य थे। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बलि चढ़ायी जाती थी।
  • उनकी लिपि चित्रात्मक थी। कहीं-कहीं स्वरों का प्रयोग भी होता था।
  • उन्होंने अनेक भव्य पिरामिड, चौक, वेधशालाएँ तथा मंदिर बनाए। वे मूर्तिकला और चित्रकला में भी बड़े निपुण थे।
  • इन्होंने सौर पंचांग का निर्माण किया जिसके अनुसार वर्ष में 365 दिन होते थे।
  • उन्होंने गणित के ज्ञान, हेराग्लिफिक लेखन और कागज के प्रयोग में भी निपुणता दिखायी।

(ख) एजटेक सभ्यता – 12वीं शताब्दी में माया सभ्यता के पतन के बाद अमेरिका में एजटेक लोगों ने सभ्यता की ज्योति जलाई। एजटेक लोग, जिन्हें टेनोका भी कहते हैं टेनोक्ट्टिलान, टलाटेलोको नाम की दो राजधानियाँ बसायीं। इन लोगों की सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थीं –

  • इनका साम्राज्य 2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। इसे 38 प्रांतों में बाँटा गया था। प्रत्येक प्रांत का शासन एक गवर्नर चलाता था।
  • वे कई देवी-देवताओं की पूजा करते थे। सूर्य देवता और अन्न देवी इनमें प्रमुख थे। वे अन्न देवी को देवताओं की जननो मानते थे।
  • इन लोगों ने धातुओं को पिघलाकर उनका प्रयोग करना सीख लिया था।
  • उन्होंने धार्मिक समारोहों से संबंधित एक पंचांग बनाया। इसके अनुसार वर्ष में 260 दिन होते थे।
  • 1521 ई० में एजटेक साम्राज्य का अंत हो गया।

(ग) इंका सभ्यता – इस सभ्यता के निर्माता इंका लोग थे। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दियों के बीच दक्षिण अमेरिका के एडियन क्षेत्र में अपनी सभ्यता को विकसित किया। इस सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ ये थी

  • इंका लोगों ने विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसमें अनेक बड़े नगर थे। कुज्को नगर इस साम्राज्य का मुख्य केंद्र था। सारा साम्राज्य
  • चार भागों में बँटा हुआ था। प्रत्येक भाग पर कोई कुलीन पुरुष शासन करता था।
  • उन्होंने नगरों में भव्य किलों, सड़कों और मंदिरों का निर्माण किया। वे सीढ़ीदार खेत बनाकर आलू, शकरकंद आदि की खेती करते थे।
  • अनाज को बड़े-बड़े सरकारी गोदामों में संकट के लिए सुरक्षित रखा जाता था।
  • कुछ लोगों ने मिट्टी के बर्तन बनाने, कपड़ा बनाने और लामा तथा अल्पाका से ऊन प्राप्त करने के व्यवसाय भी अपनाए हुए थे।
  • इंका लोग सोने, चाँदी और ताँबे को गलाकर उनके आभूषण बनाते थे।
  • अस्त्र-शस्त्र बनाने के लिए काँसा प्रयोग में लाया जाता था।
  • उन्होंने चिकित्सा तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में भी उन्नति की।
  • 16वीं शताब्दी के मध्य तक अमेरिका की आदि सभ्यताओं का अंत हो गया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
स्वाहिली क्या है?
(क) भाषा
(ख) तटबंध
(ग) राज्य
(घ) धर्म
उत्तर:
(क) भाषा

प्रश्न 2.
झूलते बाग किस सभ्यता की विशेषता थी?
(क) इंका
(ख) पेरू
(ग) हड़प्पा
(घ) आर्य
उत्तर:
(क) इंका

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प्रश्न 3.
कुश साम्राज्य का उदय कब हुआ?
(क) 1000 ई०पू०
(ख) 2000 ई०पू०
(ग) 3000 ई०पू०
(घ) 4000 ई०पू०
उत्तर:
(क) 1000 ई०पू०

प्रश्न 4.
ब्राजील का नाम किस पर पड़ा?
(क) पशुओं
(ख) मानव
(ग) भूमि
(घ) पेड़
उत्तर:
(घ) पेड़

प्रश्न 5.
दिशासूचक यंत्र का आविष्कार कब हुआ?
(क) 1380
(ख) 1370
(ग) 1360
(घ) 1350
उत्तर:
(क) 1380

प्रश्न 6.
तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया को कब जीता?
(क) 1653
(ख) 1553
(ग) 1453
(घ) 1353
उत्तर:
(ग) 1453

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प्रश्न 7.
पुर्तगाल के किस राजकुमार को ‘नाविक’ कहा जाता था?
(क) फ्रेडरिक
(ख) हेनरी
(ग) ड्यूक
(घ) विलियम
उत्तर:
(ख) हेनरी

प्रश्न 8.
1410 ई० में लिखी गई पुस्तक ‘इमगो मुंडी’ (डि एली द्वारा) किस विषय की है?
(क) भूगोल
(ख) इतिहास
(ग) जीव विज्ञान
(घ) रसायन विज्ञान
उत्तर:
(क) भूगोल

प्रश्न 9.
बाजामार क्या है?
(क) गहरा समुद्र
(ख) छिछला समुद्र
(ग) गहरी खाई
(घ) छिछली खाई
उत्तर:
(ख) छिछला समुद्र

प्रश्न 10.
कोलम्बस ने स्पेन का झंडा कहाँ गाड़ा था?
(क) क्यूबा
(ख) गुआनाहानि
(ग) किस्केया
(घ) इंडीज
उत्तर:
(ख) गुआनाहानि

प्रश्न 11.
इंडीज की खोज किसने की?
(क) मार्कोपोलो
(ख) वास्कोडिगामा
(ग) कोलम्बस
(घ) डिएले
उत्तर:
(ग) कोलम्बस

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प्रश्न 12.
जिगुरात क्या था?
(क) एक सीढ़ीदार मीनार
(ख) कब्रगाह
(ग) मंदिर
(घ) स्नानागार
उत्तर:
(क) एक सीढ़ीदार मीनार

प्रश्न 13.
सोने की खानों में कार्य करने हेतु दास कहाँ से आते थे?
(क) एशिया से
(ख) उत्तरी अमेरिका से
(ग) दक्षिणी अमेरिका से
(घ) अफ्रीका से
उत्तर:
(घ) अफ्रीका से

प्रश्न 14.
गोल्डरश संयुक्त राज्य अमेरिका के किस राज्य से संबंधित है?
(क) ओहियो
(ख) सैनफ्रासिको
(ग) न्यूयार्क
(घ) कैलिफोर्निया
उत्तर:
(घ) कैलिफोर्निया

प्रश्न 15.
तुर्कों के द्वारा कुस्तुंतुनिया का पतन कब हुआ?
(क) 1421 ई०
(ख) 1443 ई०
(ग) 1453 ई०
(घ) 1481 ई०
उत्तर:
(ग) 1453 ई०

प्रश्न 16.
दुनिया की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है?
(क) गंगा
(ख) नील
(ग) आमेजन
(घ) मिसीमिपी
उत्तर:
(ग) आमेजन

प्रश्न 17.
सूडानी सभ्यता का केन्द्र नहीं था ………………..
(क) डेन्यूब
(ख) घाना
(ग) माली
(घ) बोनू
उत्तर:
(क) डेन्यूब

प्रश्न 18.
माया पंचांग में प्रत्येक मास कितने दिन का होता था?
(क) 20 दिन
(ख) 24 दिन
(ग) 21 दिन
(घ) 22 दिन
उत्तर:
(क) 20 दिन

प्रश्न 19.
माया लोगों के पंचांग में वर्ष में कितने दिन होते थे?
(क) 365
(ख) 365.5
(ग) 367
(घ) 161
उत्तर:
(क) 365

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प्रश्न 20.
पिजारो ने इंका राज्य को जीता …………………
(क) 1532
(ख) 1533
(ग) 1534
(घ) 1535
उत्तर:
(क) 1532

प्रश्न 21.
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ……………….
(क) 1600
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1600

प्रश्न 22.
डच इंडिया कंपनी की स्थापना हुई ………………..
(क) 1602
(ख) 1603
(ग) 1604
(घ) 1605
उत्तर:
(क) 1602

प्रश्न 23.
कोलम्बस ने क्यूबा पर हक जमाया ………………..
(क) 1492
(ख) 1493
(ग) 1494
(घ) 1495
उत्तर:
(क) 1492

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 History 5 यायावर साम्राज्य Textbook Questions and Answers

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 5 यायावर साम्राज्य

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्वपूर्ण था?
उत्तर:
मंगोलों के लिए व्यापार निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण था –
1. स्टेपी प्रदेश की जलवायु कृषि के अनुकूल नहीं थी। मौसमों के अनुसार प्रायः अत्यधिक ठंडा और गरम होता था। भीषण लम्बी शीत ऋतु के बाद थोड़े समय के लिए शुष्क ग्रीष्म ऋतु आती थी। इसलिए वहाँ व्यापार के अलावा कृषि कार्य संभव नहीं थी।

2. पशुपालक और आखेट संग्राहक अर्थव्यवस्था में घनी आबादी का अस्तित्व संभव नहीं था। इसी कारण इन क्षेत्रों में कोई भी नगर नहीं बन सके। इसलिए उन्हें वस्तुएँ बेचने के लिए दूर जाना पड़ता था।

प्रश्न 2.
चंगेज खान ने यह क्यों अनुभव किया कि मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवश्यकता है?
उत्तर:
चंगेज खान को मंगोल कबीलों को नवीन सामाजिक और सैनिक इकाइयों में विभक्त करने की आवयश्कता महसूस हुई। वस्तुत: मंगोलों के विभिन्न निकायों में अविश्वसनीय रूप से अलग अलग प्रकार के लोगों का एक विशाल समूह शामिल था जिन्होंने उसकी सत्ता को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था। इसमें पराजित लोग भी शामिल थे। चंगेज खान उन विभिन्न जनजातीय समूहों की पहचान को क्रमबद्ध रूप से मिटाना चाहता था।

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प्रश्न 3.
‘यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिंतन किस तरह चंगेज खान की स्मृति के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करता है?
उत्तर:
अनेक इतिहासकारों ने यास को चंगेज खान की ‘विधि संहिता’ कहा है। वस्तुतः चंगेज खान ने 1206 ई. में कुरिलताई’ में घोषणा की थी। उसके उन जटिल विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है जो महान खान की स्मृति को बनाए रखने के लिए उसने उत्तराधिकारियों ने प्रयुक्त की थी।

अपने प्रारम्भिक स्वरूप में यह शब्द ‘यसाक’ लिखा जाता था जिसका अर्थ ‘नियम’ ‘आदेश’ या आज्ञा था। प्राप्त अल्प विवरण से ज्ञात होता है कि ‘यासक’ का संबंध प्रशासनिक विनियमों से है। 13वीं शताब्दी के मध्य तक किसी प्रकार से मंगोलों से सम्बद्ध शब्द ‘यासा’ का प्रयोग और अधिक सामान्य अर्थ में करना शुरू कर दिया।

प्रश्न 4.
यदि इतिहास नगरों में रहने वाले साहित्यकारों के लिखित विवरणों पर निर्भर करता है तो यायावर समाजों के बारे में हमेशा प्रतिकूल विचार ही रखे जायेंगे क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्या आप इसका कारण बताएंगे कि फारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियानों में मारे गए लोगों की इतनी बढ़ा-चढ़ाकर संख्या क्यों बताई है?
उत्तर:
यह सही है कि यदि इतिहास लिखित तथ्यों पर भरोसा रखता है जिसे नगरों में रहने वान साहित्यकारों ने तो यायावार समाजों के बारे में प्रतिकूल विचार ही रखे जाएँगे। वस्तुतः इन लेखकों ने यायावरों के जीवन संबंध में सूचनाएँ अत्यधिक दोषपूर्ण और पक्षापात रूप में प्रस्तुत की है।

फारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियान में मारे गये लोगों की इतनी बढ़ा संख्या चढ़ाकर निम्नलिखित कारण से बताई है –

  • इतिवृत्तकारों की सोच मंगोल के प्रति गलत थी। वे सदैव उनसे गलत कार्य विशेषरूप लूटमार और हत्या की ही आशा करते थे।
  • मारे गये लोगों की संख्या अनुमान पर आधारित है। इल्खन के फारसी इतिवृत्ताकार जुवेनी ने कहा कि मर्व में 1,300,000 लोगों का वध किया गया।
  • उसने इस संख्या का अनुमान इस प्रकार लगाया कि तेरह दिन तक 100,000 शव प्रतिदिन गिने जाते थे।

प्रश्न 5.
मंगोल और बेदोइन समाज की यायावरी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए, यह बताइए कि आपके विचार में किस तरह उनके ऐतिहासिक अनुभव एक दूसरे से भिन्न थे? इन भिन्नताओं से जुड़े कारणों को समझाने के लिए आप क्या स्पष्टीकरण देंगे?
उत्तर:
मंगोल और बेदोइन समाज घुम्मकड़ समाज था। जब तक किसी स्थान पर धन, विलास की वस्तुएँ और अन्य आवश्यकता की वस्तुएँ उपलब्ध रहती, रूके रहते थे और प्रयास, लूट और हत्या की द्वारा इन्हें प्राप्त करते थे। वस्तुत: स्टेपी-प्रदेशों में स्रोतों की कमी के कारण मंगोलों और मध्य एशिया के यायावरों को व्यापार और वस्तुओं के विनिमय के लिए इन अभ्रमणशील चीन बासियों के पास जाना पड़ता था। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी।

यायावर कबीले खेती के प्राप्त उत्पादों और लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे और घोड़े, फर और शिकार का विनिमय करते थे। उन्हें व्यापारिक क्रियाकलापों में काफी तनाव का सामना करना पड़ता था, क्योंकि दोनों पक्ष अधिक लाभ प्राप्त करने को होड़ में बेधड़क सैनिक कार्यवाही भी कर बैठते थे। कभी-कभी यायावर व्यापारिक शर्तो को नकार कर तत्काल लूटपाट करने लगते थे। उनकी इन प्रवृत्तियों के कारण सीमा युद्धों ने यायावर समाज को कमजोर बना दिया।

इससे कृषि कार्य में बाधा उत्पन्न हुई और नगर लूटे गये। दूसरी और यायावर, लूटपाटकर संघर्ष क्षेत्र से दूर भाग जाते थे जिससे उन्हें बहुत कम हानि होती थी। यायावरी समाज का यह कार्य ऐतिहासिक अनुभव से भिन्न नहीं है। इससे पूर्व प्राचीन काल में हुण भी यही कार्य करते थे।

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प्रश्न 6.
तेरहवीं शताब्दी के मध्य में मंगोलिया द्वारा निर्मित “पैक्स मंगोलिका” का निम्नलिखित विवरण उसके चरित्र को किस तरह उजागर करता है? फ्रेन्सिसकन मठवासी, रूबुक के विलियम को फ्रांस के सम्राट लुई IX ने राजदूत बनाकर महान खान के दरबार में भेजा। वह 1254 ई. में मोन्के की राजधानी कराकोरम पहुँचा और वहाँ वह लोरेन फ्रांस की एक महिला पेक्विटे के सम्पर्क में आया। जिसे हंगरी से लाया गया था। यह महिला राजकुमार की पलियों में से एक पत्नी की सेवा में नियुक्त थी जो लेक्टोरियन इसाई थी। वह दरबार में एक पारिशियन स्वर्णकार गुलौम बाउचर के संपर्क में आया, “जिसका भाई पेरिस के ‘ओल्ड पोल्ट’ में रहता था।” इस व्यक्ति को सर्वप्रथम रानी सोरधाक्तानी ने और उसके उपरांत मोन्के के छोटे भाई ने अपने पास नौकरी में रखा। रूबुक ने यह देखा कि विशाल दरबारी उत्सवों में सर्वप्रथम नेस्टोरिन को उनके चिट्ठों के साथ तथा इसके उपरांत मुसलमान, बौद्ध और ताओ पुजारिन को महान खान को आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया जाता था –
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य में मंगोलिया द्वारा निर्मित “पैक्स मंगोलिया” (मंगोल शांति) का उपरोक्त विवरण उसकी धर्म सहिष्णुता को दर्शाता है। मंगोल राजदरबार में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं था और विभिन्न देशों के निवासी राजदरबार में कार्य करते थे। जहाँ फ्रांस और हंगरी से सम्बद्ध थी, ईसाई थी। पर्सियन स्वर्णकार गुलौम बाउचर का भी देश अलग था। राजदरबार में शासक सभी धर्मों का आदर करता था, इसीलिए उसने ईसाई, इस्लाम, बौद्ध और ताओ धर्म के अनुयायियों को आशिर्वाद दिया। सहिष्णुता इस बात से भी झलकती है। विभिन्न धर्मों के साहित्यकार मंगोल शासकों के दरबार की शोभा बढ़ाते रहे।

Bihar Board Class 11 History यायावर साम्राज्य Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान कौन था? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
चंगेज खान का जन्म लगभग 1162 ई. में आधुनिक मंगोलिया में हुआ था । उसका प्रारंभिक नाम तेमुजिन था। उसका पिता येसुजेई कियात कबीले का मुखिया था।

प्रश्न 2.
अपने शत्रुओं को पराजित करने के बाद तेमुजिन को किस प्रकार सम्मानित किया गया?
उत्तर:
1206 ई. तक तेमुजिन ने अपने शत्रुओं को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया था। अतः मंगोल कबीले के सरदार ने उसे चंगेजखान, ‘समुद्री खान’ अथवा ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि प्रदान की। उसे मंगोलों का महानायक घोषित किया गया।

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प्रश्न 3.
चंगेज खान के चीन अभियान से पहले चीन कौन-कौन से तीन राज्यों में विभक्त था?
उत्तर:

  • उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में तिब्बती मूल के सी-सिआ लोगों का राज्य।
  • जरचेन लोगों का चिन राजवंश जिसका पेकिंग से उत्तरी चीन के क्षेत्र पर शासन था।
  • शुंग राजवंश जिसका दक्षिणी चीन पर अधिकार था।

प्रश्न 4.
चंगेज खान ने निशापुर को ध्वस्त करने का आदेश क्यों दिया?
उत्तर:
निशापुर के घेरे के दौरान एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दी गई थी। इसी कारण चंगेज खान ने निशापुर को ध्वस्त करने का आदेश दिया।

प्रश्न 5.
चंगेज खान द्वारा निशापुर को ध्वस्त कर देने के आदेश में क्या कहा गया था?
उत्तर:
इस आदेश में यह कहा गया था, “नगर का इस तरह विध्वंस किया जाए कि संपूर्ण नगर में हल चलाया जा सके। ऐसा संहार किया जाए कि बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।”

प्रश्न 6.
चंगेज खान सिंधु नदी से मंगोलिया असम मार्ग होकर वापस लौटना चाहता था परंतु उसे अपना विचार क्यों बदलना पड़ा?
उत्तर:
चंगेज खान को निम्नलिखित कारणों से अपना विचार बदलना पड़ा।

  • गर्मी बहुत अधिक थी।
  • प्राकृतिक आवास में कठिनाइयाँ थीं।
  • उसके शमन (पैगम्बर) ने कुछ अशुभ संकेत दिए थे।

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प्रश्न 7.
चंगेज खान की सैनिक सफलताओं में सहायक कोई दो कारक बताइए।
उत्तर:

  • मंगोलों तथा तुर्की की कुशल घुड़सवारी ने उसकी सेना को गति प्रदान की थी।
  • उनका घोड़े पर सवार होकर तीरंदाजी का कौशल अद्भुत था।

प्रश्न 8.
1260 के दशक के बाद मंगोल राजनीति में नई प्रवृत्तियों के उदय के क्या कारण थे?
उत्तर:

  • मंगोल हंगरी के स्टेपी क्षेत्र से पीछे हट गए थे।
  • मंगोल सेनाओं को मिस्र की सेनाओं ने पराजित कर दिया था।

प्रश्न 9.
मंगोल सेनाओं को मिस्र के हाथों पराजित क्यों होना पड़ा?
उत्तर:
मंगोल शासक चीन में अधिक रुचि लेने लगे थे। अतः उन्होंने अपनी सेनाओं को मंगोल साम्राज्य के मुख्य भागों की ओर भेज दिया । मिस में केवल एक छोटी सी सेना ही भेजी जा सकी। परिणामस्वरूप मंगोलों को पराजय का मुँह देखना पड़ा।

प्रश्न 10.
मंगोल (चंगेज खान की) सेना ने एक विशाल एवं संगठित सेना का रूप कैसे धारण किया?
उत्तर:
मंगोल जनजातियों के एकीकरण तथा विभिन्न लोगों के विरुद्ध अभियानों से चंगेज खान की सेना में अनेक नए सैनिक शामिल हो गए। ये सैनिक विविध जातियों से संबंध रखते थे। इस प्रकार मंगोल सेना ने एक विशाल एवं संगठित सेना का रूप धारण कर लिया।

प्रश्न 11.
‘बर्बर’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर:
‘बर्बर’ शब्द यूनानी भाषा के शब्द ‘बारबरोस’ शब्द से निकला है जिसका तात्पर्य गैर-यूनानी लोगों से है। यूनानियों को इनकी भाषा एक बेतरतीब शोर ‘बरबर’ के समान लगती थी।

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प्रश्न 12.
मोंके कौन था? उसने फ्रांस के शासक लुई नौवाँ को क्या चेतावनी दी थी?
उत्तर:
मोंके चंगेज खान का पोता था। उसने फ्रांस के शासक लुई नौवें को यह चेतावनी दी थी कि वह मंगोलों पर आक्रमण करने का साहस न करे।

प्रश्न 13.
चंगेज खान के पोते बाटू के 1236-1241 ई. के सैनिक अभियानों की दो सफलताएँ बताओ।
उत्तर:

  • बाटू ने रूस की भूमि को मास्को तक रौंद डाला।
  • वह पोलैंड तथा हंगरी पर विजय प्राप्त करके वियना तक जा पहुंचा।

प्रश्न 14.
मंगोल कौन थे?
उत्तर:
मंगोल विविध यायावर लोगों का जनसमुदाय था। ये लोग पूर्व के तातार, खितान तथा मंचू लोगों से संबंधित थे। ये पशुपालक तथा शिकार संग्रहक थे। पश्चिम में इनका संबंध तुर्क कबीलों से था। .

प्रश्न 15.
मंगोलों के समय में स्टेपी क्षेत्र में कोई नगर क्यों नहीं उभर पाया?
उत्तर:
मंगोलों ने कृषि को नहीं अपनाया। उनकी पशुपालक तथा शिकार संग्राहक अर्थव्यवस्थाएँ भी घनी आबादी वाले क्षेत्रों का भरण-पोषण करने में समर्थ नहीं थीं इसलिए स्टेपी क्षेत्र में कोई नगर नहीं उभर पाया।

प्रश्न 16.
धनी मंगोल परिवारों के अनेक अनुयायी होते थे। क्यों?
उत्तर:
धनी मंगोल परिवारों के पास अधिक संख्या में पशु तथा विशाल चारण भूमि होती थी। स्थानीय राजनीति में भी उनका अधिक दबदबा होता था। इसी कारण उनके अनेक अनुयायी होते थे।

प्रश्न 17.
मंगोल कबीलों को चरागाहों की खोज में क्यों भटकना पड़ता था?
उत्तर:
शीत ऋतु में मंगोल कबीलों द्वारा एकत्रित खाद्य सामग्री समाप्त हो जाती थी। वर्षा न होने पर घास के मैदान भी सूख जाते थे। इसलिए उन्हें चरागाहों की खोज में भटकना पड़ता था।

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प्रश्न 18.
उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि चंगेज खान द्वारा स्थापित राजनीतिक व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी थी।
उत्तर:

  • चंगेज खान द्वारा स्थापित राजनीतिक व्यवस्था उसकी मृत्यु के बाद भी जीवित रही।
  • यह व्यवस्था चीन, ईरान तथा पूर्वी यूरोप के देशों की उन्नत शस्त्रों से लैस विशाल सेनाओं का सामना करने में सक्षम थी।

प्रश्न 19.
मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
मंगोल स्टेपी क्षेत्र में रहते थे। इस क्षेत्र में संसाधनों की कमी थी। इसी कारण मंगोलों के लिए व्यापार महत्त्वपूर्ण था।

प्रश्न 20.
वाणिज्यिक क्रियाकलापों (व्यापार के मामलों) में मंगोलों को कभी-कभी तनाव का सामना क्यों करना पड़ता था?
उत्तर:
कभी – कभी व्यापार करने वाले दोनों पक्ष अधिक लाभ कमाने की होड़ में सैनिक कार्यवाही पर उतर आते थे। इसी कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी।

प्रश्न 21.
चीन के साथ मंगोलों के व्यापार की मुख्य मदें (वस्तुएँ) बताएँ।
उत्तर:
मंगोल चीन से कृषि उत्पाद तथा लोहे के उपकरण लाते थे। बदले में वे चीनी लोगों को शिकार किए गए पशु, घोड़े तथा फर देते थे।

प्रश्न 22.
‘चीन की महान् दीवार’ क्यों बनवाई गई?
उत्तर:
यायावर कबीले चीन पर बार-बार आक्रमण करते थे और नगरों को लूट लेते थे। उनके आक्रमणों से चीन की सुरक्षा के लिए महान दीवार बनाई गई।

प्रश्न 23.
क्या कारण था कि 13वीं शताब्दी में चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी स्टेपी के गिरोहों को भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे?
उत्तर:
स्टेपी के खानाबदोश गिरोहों ने चंगेज खान के अधीन नगरों को बुरी तरह लूटा था और उन्हें ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने अनेक नगरवासियों की निर्मम हत्याएं भी की थीं। इसी कारण चीन, ईरान तथा पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी स्टेपी के गिरोहों को भय और घृणा की दृष्टि से देखते थे।

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प्रश्न 24.
यास के बारे में परवर्ती मंगोलों का चिंतन किस तरह चंगेज खान की स्मृति के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंध को उजागर करता है?
उत्तर:
परवर्ती मंगोलों ने यास को चंगेज खान की विधि संहिता कह कर पुकारा । इसका अर्थ यह था कि वे स्वयं का विधान लागू करना चाहते थे। यही बात चंगेज खान की स्मृति (विधान) के साथ जुड़े हुए उनके तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करती है।

प्रश्न 25.
आज मंगोलिया में चंगेज खान का क्या स्थान दिया जाता है?
उत्तर:
आज मंगोलिया में चंगेज खान को महान् राष्ट्र नायक का स्थान दिया जाता है और उसका सार्वजनिक रूप से सम्मान किया जाता है। वह मंगोलों के लिए एक आराध्य व्यक्ति है।

प्रश्न 26.
चंगेज खान के वंशजों का पृथक्-पृथक् समूहों में बँट जाने का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
चंगेज खान के वंशजों के पृथक्-पृथक् समूहों में बँटने से उनकी अपने पुराने परिवार से जुड़ी स्मृतियाँ तथा परंपराएँ बदल गईं।

प्रश्न 27.
मंगोलों द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासक कभी-कभी खानों की नीति को भी प्रभावित करने में सफल हो जाते थे। इस संबंध में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • 1230 के दशक में चीनी मंत्री ये-लू-चुत्साई ने मंगोल शासक ओगोदेई की लूटमार करने की प्रवृत्ति को बदल दिया था।
  • गजनखान के लिए उसके वजीर रशीदुद्दीन ने एक भाषण लिखा था। इस भाषण द्वारा खान को किसानों को सताने की बजाय उनकी रक्षा करने की बात कही थी।

प्रश्न 28.
मंगोल द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भर्ती का क्या महत्त्व था?
उत्तर:

  • मंगोलों द्वारा विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भर्ती से दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में सहायता मिली।
  • इनके प्रशिक्षण से साम्राज्य के स्थानबद्ध लोगों की खानाबदोशों द्वारा होने वाली लूटमार में भी कमी आई।

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प्रश्न 29.
कुबकुर (qubcur) नामक कर क्या था?
उत्तर:
चंगेज खान ने एक हरकारा संचार प्रणाली आरंभ की थी। इसके लिए मंगोल यायावर अपने घोड़ों अथवा अन्य पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे इसे कुबकुर कर कहते थे।

प्रश्न 30.
विजित लोगों को अपने नये यायावर शासकों से कोई लगाव नहीं था। इसके लिए उत्तरदायी कोई चार कारण बताइए।
उत्तर:

  • नव विजित क्षेत्रों के अनेक नगर नष्ट कर दिये गए थे।
  • कृषि – भूमि को क्षति पहुंची थी।
  • व्यापार चौपट हो गया था।
  • दस्तकारियाँ अस्त-व्यस्त हो गई थीं।

प्रश्न 31.
यायावरों द्वारा नव विजित प्रदेशों में भारी पारिस्थितिक विनाश क्यों हुआ?
उत्तर:
यायावर आक्रमणों से अस्थिरता फैली। इस कारण ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों का मरम्मत कार्य नियमित रूप से न हो सका। परिणामस्वरूप मरुस्थल का विस्तार होने लगा जिससे भारी पारिस्थितिक विनाश हुआ।

प्रश्न 32.
मंगोलों के सैनिक अभियानों में विराम आने का व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मंगालों के सैनिक अभियानों में विराम आने के पश्चात् यूरोप और चीन के भू-भाग आपसी संपर्क में आए । फलस्वरूप दोनों भागों के व्यापारिक संबंध गहरे हो गए। मंगोलों की देखरेख में रेशम मार्ग का व्यापार अपने शिखर पर पहुंच गया।

प्रश्न 33.
अपने साम्राज्य में सुरक्षित यात्रा के लिए मंगोलों ने क्या व्यवस्था की हई थी? इसने मंगोल सत्त को किस प्रकार मजबूत बनाया ?
उत्तर:
मंगोल अपने साम्राज्य में सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को पास देते थे। इसके लिए व्यापारी (यात्री) टैक्स देते थे और मंगोल चंगेज खान तथा उनके उतराधिकारियों की सत्ता को समर्थन देते थे। इससे मंगोल सत्ता मजबूत बनी।

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प्रश्न 34.
चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को कौन-कौन से दो चरण में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर:
चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को निम्नलिखित दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है।

  • पहला चरण 1236 – 1242 तक का था। इस दौरान मंगोलों ने रूस के स्टेपी-क्षेत्र, बुलघार, कीव, पोलैंड तथा हंगरी में भारी सफलता प्राप्त की।
  • दूसरा चरण 1255 – 1300 तक रहा। इसमें मंगोलों ने समस्त चीन, ईरान, ईराक तथा सीरिया पर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 35.
चार उलुस (Ulus) का गठन कैसे हुआ?
उत्तर:
उलुस से अभिप्राय है साम्राज्य सीमा। अपनी नई व्यवस्था में चंगेज खान ने नव-विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इस प्रकार चार उलुस का गठन हुआ।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान की सेना विविध जातियों का मिश्रण थी। उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मंगोलों तथा अन्य यायावर समाजों में सभी स्वस्थ वयस्कों के लिए शस्त्र धारण करना अनिवार्य था। आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं लोगों से सशस्त्र सेना तैयार की जाती थी। विभिन्न मंगोल जनजातियों के एकीकरण और विभिन्न लोगों के विरुद्ध अभियानों से चंगेज खान की सेना में कई नए सदस्य शामिल हो गए। ये सैनिक विविध जातियों से संबंध रखते थे। इससे छोटी-सी मंगोल सेना एक विशाल संगठन में परिवर्तित हो गई।

इसमें मंगोल सत्ता को स्वेच्छता से स्वीकार करने वाले तुर्की मूल के उइगूर समुदाय के लोग भी सम्मिलित थे। इसके अतिरिक्त इसमें केराइट सम्मिलित थे, जिन्हें अपनी पुरानी शत्रुता के बावजूद महासंघ में शामिल कर लिया गया था।

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प्रश्न 2.
चंगेज द्वारा अपनाई गई संचार प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
चंगेज खान ने एक फुर्तीली संचार (हरकारा) पद्धति अपना रखी थी जिससे राज्य के दूर स्थित स्थानों में आपसी संपर्क बना रहता था। अपेक्षित दूरी पर सैनिक चौकियाँ बनाई गई थों। इन चौकियों में स्वस्थ एवं शक्तिशाली घोड़े तथा घुड़सवार तैनात रहते थे। ये घुड़सवार संदेशवाहक का काम करते थे। इस संचार पद्धति के संचालन के लिए मंगोल यायावर अपने घोड़ों अथवा पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे।

इसे ‘कुबकुर’ कर कहते थे। यायावर लोग यह कर अपनी इच्छा से प्रदान करते थे। इससे उन्हें अनेक लाभ प्राप्त होते थे। चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् इस हरकारा पद्धति (याम) में और भी सुधार लाये गये। इस पद्धति से महान् खानों को अपने विस्तृत साम्राज्य के सुदूर स्थानों में होने वाली घटनाओं पर निगरानी रखने में सहायता मिलती थी।

प्रश्न 3.
मंगोल वंश का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मंगोल वंश का संस्थापक चंगेज खान था। उसके अनेक बच्चे थे। परंतु उसके वंश को उसकी पटरानी बोरटे के गर्भ से पैदा हुए उसके चार पुत्रों ने आगे बढ़ाया। इनके नाम थे-जोची, चघताई, ओगोदाई तथा तोलोए। चंगेज खान का सबसे बड़ा पुत्र जोची था। उसके पास अपार शक्ति थी। परंतु उसके यहाँ कोई शरवीर पैदा नहीं हुआ। जोची के पुत्र बातू ने ओगोदेई के वंश को समर्थन देने से इंकार कर दिया। अतः शक्ति तोलोए परिवार के हाथों में आ गई। इस बात ने मोंके र कुबलई के लिए सत्ता के द्वार खोल दिए।

प्रश्न 4.
मंगोलों के सैन्य अभियानों में विराम आने का राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मंगोलों के सैन्य अभियानों में विराम आने के पश्चात् यूरोप और चीन के भू-भाग आपसी संपर्क में आए। मंगोल विजय (Pax Mongolica) के कारण आई शांति से दोनों भू-भागों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हुए। मंगोलों की देख-रेख में रेशम मार्ग (Silknoute) पर व्यापार अपने शिखर पर पहुँच गया। अब व्यापारिक मार्ग चीन में ही समाप्त नहीं हो जाते थे। अब व्यापार मार्ग उत्तर की ओर मंगोलिया तथा नए साम्राज्य के केंद्र कराकोरम तक पहुँच गए।

मंगोल शासन में मेल-जोल बनाए रखने के लिए संचार तथा व्यापारियों एवं यात्रियों के लिए यात्रा को सुलभ बनाना आवश्यक था। सुरक्षित यात्रा के लिएण्यात्रियों को पास जारी किए जाते थे। इन्हें फारसी में फैजा तथा मंगोल भाषा में जेरेज कहते थे। इस सुविधा के लिए व्यापारी ‘बाज’ नामक कर अदा करते थे। इसका तात्पर्य यह था कि वे मंगोल शासक की सत्ता को स्वीकार करते हैं।

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प्रश्न 5.
तेरहवीं शताब्दी में यायावरों तथा स्थायी समुदायों के बीच विरोध कम होने से कृषि को किस प्रकार बढ़ावा मिला? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य में यायावरों और स्थायी समुदायों के बीच विरोध कम होने लगा। इससे कृषि को बहुत बढ़ावा मिला। उदाहरण के लिए 1230 के दशक में जब मंगोलों ने उत्तरी चीन के चिन वंश के विरुद्ध युद्ध में सफलता प्राप्त की तब मंगोल नेताओं के एक क्रुद्ध वर्ग ने यह विचार रखा कि वहाँ के सभी कृषकों को मौत के घाट उतार दिया जाए और उनकी कृषि-भूमि को चरागाह में बदल दिया जाए।

परंतु 1270 के दशक में शुंग वंश की पराजय के बाद जब दक्षिण चीन को मंगोल साम्राज्य में मिला लिया गया, तब चंगेज खान का पोता कुलबई खान कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में सामने आया। इसी प्रकार 1290 के दशक में मंगोल शासक गजन खान ने अपने परिवार के सदस्यों तथा संनापतियों को आदेश दिया कि वे कृषकों को न लूटें। एक बार अपने भाषण के दौरान उसने कहा था कि कृषकों को परेशान करने से राज्य में स्थायित्व और समृद्धि नहीं आती।

प्रश्न 6.
मंगोल प्रशासन में विजित राज्यों के नागरिक प्रशासकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मंगोलों ने चंगेज खान के शासनकाल से ही विजित राज्यों से नागरिक प्रशासकों को अपने यहाँ भी करना आरंभ कर दिया था। इन्हें कभी-कभी एक स्थान से दूसरे पर भी भेज दिया जाता था। इस तरह इन्होंने दूरस्थ राज्यों को संगठित करने में भी सहायता की। इससे खानाबदोश द्वारा जनजीवन पर होने वाली स्थानबद्ध लूटमार में भी कमी आई। मंगो का इन प्रशासकों पर तब तक विश्वास बना रहता था, जब तक वे अपने स्वामियों के लिए कर एकत्रित करते रहते थे।

इनमें से कुछ प्रशासक काफी प्रभावशाली थे। कभी-कभी वे खानों की नीति को भी प्रभावित करने में सफल हो जाते थे। उदाहरण के लिए 1230 के दशक में चीनी मंत्री ये-लू-चुत्साई ने ओगोदेई की लूटने की प्रवृत्ति को बदल दिया था। जुवैनी परिवार ने भी ईरान में इसी तरह की भूमिका निभाई। इसी प्रकार गजन खान के लिए वह भाषण वजीर रशीदद्दीन ने तैयार किया था, जिसमें उसने कृषक-वर्ग को सताने की बजाय उनकी रक्षा करने की बात कती थी।

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प्रश्न 7.
13वीं शताब्दी में चंगेज खान के वंशजों का अलग-अलग वंश समूहों में विभाजन किस प्रकार हुआ? यह किस बात का संकेत था?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक भाइयों द्वारा पिता के धन का मिल-बाँटकर उपयोग करने का स्थान व्यक्तिगत राजवंश स्थापित करने की भावना ने ले लिया। प्रत्येक राजवंश का – अपने-अपने क्षेत्रीय राज्य (उलुस) पर स्वामित्व होता था। इसी के परिणामस्वरूप चंगेज खान के वंशजों के बीच महान् पर तथा उत्कृष्ट चरागाही भूमि पाने के लिए होड़ लगी रहती थी। फलस्वरूप उनका अलग-अलग वंशों में विभाजन हो गया।

  • चंगेज खान के वेशज चीन और ईरान दोनों पर शासन करने के लिए आगे आए। टोलुई के वंशजों ने युआन और इल-खानी वंशों की स्थापना की।
  • जोची ने ‘सुनहरा गिरोह’ का गठन किया और रूस में स्टेपी-क्षेत्रों पर शासन किया।

प्रश्न 8.
मंगोल परिसंघ किस प्रकृति के होते थे? अंटीला तथा चंगेज खान द्वारा बनाए गए परिसंघों में क्या समानता तथा क्या असमानता थी?
उत्तर:
मंगोल परिसंघ प्राय: बहुत छोटे और अल्पकालिक होते थे। चंगेज खान ने मंगोल और तुर्की कबीलों को मिलाकर एक परिसंघ बनाया। आकार में यह परिसंघ पाँचवीं शताब्दी के अंटीला द्वारा बनाए गए परिसंघ के बराबर ही था। परंतु अंटीला के बनाए परिसंघ के विपरीत चंगेज खान के परिसंघ की व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी सिद्ध हुयी। परिसंघ व्यवस्था इतनी सशक्त थी कि यह चीन, ईरान और पूर्वी यूरोपीय देशों की उन्नत शस्त्रों से लैस विशाल, सेनाओं का सामना करने में भी सक्षम थी।

यही कारण था कि मंगोल इन क्षेत्रों में नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे। उन्होंने जटिल कृषि-अर्थव्यवस्थाओं तथा स्थानबद्ध समाजों का भी बड़ी कुशलता से संचालन किया। एक बात और चंगेज खान द्वारा स्थापित परिसंघा उसकी मृत्यु के बाद भी जीवित रहा।

प्रश्न 9.
चंगेज खान के अधीन मंगोलों की सैनिक सफलताओं में किन कारकों ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
चंगेज खान के अधीन मंगोलों की सफलता में मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों ने सहायता पहुंचाई –

  • मंगोलों और तुकों के घुड़सवारी कौशल ने उन्की सेना को गति प्रदान की।
  • घोड़े पर सवार होकर मंगोल सैनिकों का तीरंदाजी का कौशल अद्भुत था। यह कौशल जंगलों में पशओं का शिकार करते समय प्राप्त किया था।
  • उनकी इस तीरदाजी ने उनकी सैनिक गति को और अधिक तेज कर दिया।
  • सैनिकों को अपने आसपास के भू-भागों तथा मौसम की जानकारी हो गई थी। इस बात ने सेना को अतिरिक्त क्षमता प्रदान की।
  • अत: उन्होंने प्रचंड शीत ऋतु में युद्ध अभियान प्रारंभ किए तथा शत्रु के नगरों एवं शिविरों में प्रवेश करने के लिए बर्फ से जमी हुई नदियों का राजमार्गों की तरह प्रयोग किया।
  • यायावर लोग यूं तो किलेबंद शिविरों तक पहुँचने में सक्षम नहीं थे; परंतु चंगेज खान। ने घेराबंदी की नीति अपनाकर इस कार्य को सरल बना दिया।
  • चंगेज खान के इंजीनियरों ने हलके चल-उपस्करों का निर्माण किया। ये उपस्कर शत्रु के लिए घातक सिद्ध हुए।

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प्रश्न 10.
मंगोल किम क्षेत्र के निवासी थे। इस क्षेत्र का परिदृश्य कैसा था?
उत्तर:
मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र के निवासी थे। यह प्रदेश आज के आधुनिक मंगोलिया राज्य का भू-भाग था। उस समय इस क्षेत्र का परिदृश्य आज जैसा ही मनोरम था। यह प्रदेश लहरदार मैदानों से घिरा था। इसके पश्चिमी भाग में अल्ताई पहाड़ों की बर्फीली चोटियाँ। थी, जबकि दक्षिणी भाग में गोबी का शुष्क मरुस्थल फैला था। इसके उत्तर और पश्चिम के। क्षेत्र का ओनोन एवं सेलेंगा नदियाँ और बर्फीली पहाड़ियों से निकले सैकड़ों झरने सींचते थे।

पशुपालन के लिए यहाँ पर हरी-भरी घास के मैदान थे। अनुकूल ऋतुओं में यहाँ प्रचुर मात्रा में। छोटे-मोटे शिकार उपलब्ध हो जाते थे। स्टेपी क्षेत्र में तापमान सारा साल लगभग एक समान रहता था। शीत ऋतु के कठोर और लंबे मौसम के बाद छोटी एवं शुष्क गर्मियों की अवधि आती थी। चारण क्षेत्र में साल की कुछ सीमित अवधियों में ही कृषि करना संभव था।

प्रश्न 11.
मंगोल कबीलों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  • मंगोल कबीले नृजातीय और भाषायी संबंधों के कारण आपस में जुड़े हुए थे। परंतु उपलब्ध आर्थिक संसाधनों के अभावों के कारण उनका समाज अनेक पितृपक्षीय वंशों में विभाजित था।
  • धनी-परिवार विशाल होते थे। उनके पास अधिक संख्या में पशु और चारण भूमि होती थी। स्थानीय राजनीति में भी उनका अधिक दबदबा होता था। इसलिए उनके अनेक अनुयायी होते थे।
  • समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक पदाओं जैसे कि भीषण शात-ऋतु के दौरान उनके द्वारा एकत्रित शिकार-सामग्रियाँ तथा अन्य
  • गद्य भंडार समाप्त हो जाते थे। वर्षा न होने पर घास के मैदान भी सूख जाते थे। इसलिए न्हें चरागाहों की खोज में भटकना पड़ता था।मंगोल कबीलों में आपसी संघर्ष में ता था। पशुधन प्राप्त करने के लिए वे लूटपाट भी करते थे।
  • प्रायः परिवारों के समूह आक्रमण रने अथवा अपनी रक्षा करने के लिए शक्तिशाली जों से मित्रता कर लेते थे और परिसंघ ना लेते थे।

प्रश्न 12.
मंगोल कौन-कौन थे? नके जन-जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
मंगोल विविध यायावरी लोर का जनसमुदाय था। ये लोग पूर्व में तातार, खितान र मंचू लोगों से संबंधित थे। पश्चि में इनका संबंध भाषागत समानता होने के कारण तुर्की बीलों से था। कुछ मंगोल पशुपालक और कुछ शिकार-संग्राहक थे। पशुपालक भेड़-बकरियाँ, आदि पशु पालते थे।

शिकारी – संग्राहक लोग, पशुपा क कबीलों के आवास क्षेत्र के उत्तर में साइबेरिया के वनों मंहले थे। वे पशुपालक लोगों की अपेक्षा अधिक गरीब थे। अपना जीवन-निर्वाह ग्रीष्म काल में गए जानवरों की खाल के पापार से करते थे। मंगोल तंबुओं और जर में निवास करते थे। मामयों में वे अपने पशुधन के ‘राथ शीतकालीन निवास स्थल से ग्रीष्मकालीन चारण-भूमि की ओर चले जाते थे।

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प्रश्न 13.
मंगोल साम्राज्य को चंगेज खान की क्या देन थी?
उत्तर:
देखने में ऐसा लगता है कि चंगेज खान एक हत्यारा और लुटेरा था जिसने नगरों को ध्वस्त किया और हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसलिए तेरहवीं शताब्दी में चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के अनेक नगरवासी चंगेज खान के लूटेरे गिराहों को भय तथा घृणा की दृष्टि से देखते थे। परंतु मंगोलों के लिए चंगेज खान अब तक का सबस महान् शासक था।

उसने मंगोलों को संगठित किया और लंबे समय से चली आ रही कबीलाई लड़ाईयों तथा चीनियों द्वारा शोषण से मुक्ति दिलवाई। उसने एक शानदार पारमहाद्वीपीय साम्राज्य स्थापित किया और व्यापार मार्गों और बाजारों को नया जीवन दिया। फलस्वरूप मंगोल सड बने।

प्रश्न 14.
विजित लोग अपने मंगोल शासकों को पसंद क्यों नहीं करते थे? इसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
विजित लोग अपने मंगोल शासकों को पसंद नहीं करते थे। इस कई कारण थे –

  • तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में हुए युद्धों में अनेक नगर नष्ट कर दिए गए थे।
  • कृषि भूमि को भारी हानि पहुंची थी।
  • व्यापार चौपट हो गया था तथा दस्तकारी अस्त-व्यस्त हो गई थी।
  • इन युद्धों में हजारों लोग मारे गए थे और इससे भी अधिक लोग दास बना लिए गए थे।
  • अत: संभ्रांत लोगों से लेकर कृषक-वर्ग तक सभी लोगों को भारी कष्टों का सामना करना पड़ा।

परिणाम – इससे राज्य में अस्थिरता के कारण ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों का मरम्मत कार्य नियमित रूप से न हो सका । नहरों की मरम्मत न होने से मरुस्थल का विस्तार होने लगा, जिससे भारी पारिस्थितिक विनाश हुआ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चार ‘उलुस’ का गठन किस प्रकार हुआ? इन ‘उलुस’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
चंगेज खन ने नव-विजित लोगों पर शासन करने का उत्तरदायित्व अपने चार पुत्रों को सौंप दिया। इससे चार ‘उलुस’ का गठन हुआ। उलुस से अभिप्राय साम्राज्य की सीमा से था। दूसरी ओर चंगेज खान अभी भी निरंतर विजयों और साम्राज्य को अधिक-से-अधिक बढ़ाने में व्यस्त था। इसलिए साम्राज्य की सीमाएं लगातार बदलती रहती थीं।

चार उलस –

  • चंगेज खान के सबसे बड़े पुत्र जोची को रूसी स्टेपी-क्षेत्र प्राप्त हुआ। परंतु इसकी दूरस्थ सीमा निश्चित नहीं थौं। इसका विस्तार सुदूर पश्चिम तक था।
  • उसके दूसरे पुत्र चघताई को तरान का स्टेपी-क्षेत्र तथा पामीर पर्वत का उत्तरी क्षेत्र मिला जो उसके भाई के प्रदेश के साथ लगता था। संभवतः जैसे-जैसे वह पश्चिम की ओर बढ़ता गया होगा, वैसे-वैसे उसका अधिकार क्षेत्र भी बढ़ता गया होगा।
  • चंगेज खान ने संकेत दिया था कि उसका तीसरा पुत्र ओगोदोई उसका उत्तराधिकारी होगा और उसे महान् खान की उपाधि दी जाएगी। ओगोदोई ने अपने राज्याभिषेक के बाद अपनी राजधानी कराकोरम में स्थापित की।
  • चंगेज खान के सबसे छोटे पुत्र तोलोए को अपनी पैतृक भूमि मंगोलिया प्राप्त हुई।
  • चंगेज खान का विचार था कि उसके पुत्र आपस में मिल कर साम्राज्य का शासन सम्भालेंगे। इसलिए उसने विभिन्न राजकुमारों के लिए
  • अलग-अलग सैन्य टुकड़ियाँ (तामा) निर्धारित कर दी। ये सैनिक टुकड़ियाँ प्रत्येक ‘उलुस’ में तैनात रहती थीं। राज्य में परिवार के सदस्यों की भागीदारी का आभास सरदारों की परिषद् में होता था।
  • इस परिषद् में परिवार या राज्य के भविष्य, अभियानों, लूट के माल के बँटवारे, चरागाह भूमि और उत्तराधिकारी आदि से संबंधित निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते थे।

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प्रश्न 2.
13वीं शताब्दी में मंगोल साम्राज्य की क्या स्थिति थी? इसमें यास की क्या भूमिका थी?
उत्तर:
तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक मंगोलों ने एक एकीकृत जनसमूह का रूप धारण कर लिया था। उन्होंने एक बहुत विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। उन्होंने अति जटिल शहरी समाजों पर शासन किया जिनके अपने-अपने इतिहास, संस्कृतियाँ और नियम थे। भले ही मंगोलों का अपने साम्राज्य पर राजनैतिक प्रभुत्व था, फिर भी संख्या की दृष्टि से वे अल्पसंख्यक ही थे। वे अपनी पहचान और विशिष्टता की रक्षा केवल उसी पवित्र नियम (यास) द्वारा कर सकते थे, जो उन्हें अपने पूर्वजों से प्राप्त हुआ था।

इस बात की पूरी संभावना है कि यास मंगोल जनजाति की ही प्रधागत परंपराओं का एक संकलन था। परंतु उसे चंगेज खान की विधि-संहिता कहकर मंगोलों ने स्वयं के विधान-निर्माता (कानून बनाने वाले) होने का ही दावा किया। इसका अर्थ था। इसका कारण यह था कि दोनों पक्ष अधिक लाभ प्राप्त करने की होड़ में एक-दूसरे के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही पर उतर आते थे।

चीन की अर्थव्यवस्था तथा राजनीति पर प्रभाव-जब मंगोल कबीलों के लोगों के साथ मिलकर व्यापार करते थे, तो वे चीनी लोगों को व्यापार में बेहतर शर्ते रखने के लिए विवश कर देते थे। कभी-कभी ये लोग व्यापारिक संबंधों की उपेक्षा करके लूटपाट भी करने लगते थे। मंगोलों का जीवन अस्त-व्यस्त होने पर स्थिति चीनियों के पक्ष में हो जाती थी। ऐसी स्थिति में चीनी लोग स्टेपी-क्षेत्र में अपने प्रभाव का प्रयोग बड़े आत्मविश्वास से करते थे।

इन सीमावर्ती झड़पों से चीन का स्थायी कमजोर पड़ने लगा। कृषि अव्यवस्थित हो गई और चीनी नगरों को लूट लिया गया। दूसरी ओर यायावर कबीले लूटमार करके दूर भाग जाते थे जिससे उन्हें बहुत कम क्षति पहुँचती थी। इसके विपरीत चीन को इन यायावरों से बहत अधिक क्षति पहुँची । अतः शताब्दी ई. पू. से इस किलेबंदियों का एकीकरण करके एक विशाल रक्षात्मक ढाँचा तैयार किया गया। यह ढाँचा ‘चीन की महान् दीवार’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
चंगेज खान के बाद मंगोलों की राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
1227 ई. में चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् मंगोल साम्राज्य को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है –
1. पहला चरण 1236 – 1242 तक था। इसके दौरान मंगोलों ने रूस के स्टेपी-क्षेत्र, बलवार, कीव, पोलैंड तथा हंगरी में भारी सफलता प्राप्त की।

2. दूसरा चरण 1255 – 1300 तक रहा। इसमें मंगोलों ने समस्त चीन, ईरान, ईराक तथा सीरिया पर विजय प्राप्त की। इन दोनों चरणों में मंगोल शासकों की राजनीतिक गतिविधियों का वर्णन इस प्रकार हैं

1230 ई. के बाद के दशकों में मंगोल सेनाओं को बहुत ही कम प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। परंतु 1260 के दशक के बाद पश्चिम के सैन्य अभियानों के आवेश को जारी न रखा जा सका तथा उसमें शिथिलता आ गयी। यद्यपि वियना और उससे आगे पश्चिमी यूरोप एवं मिय, मंगोल सेनाओं के अधिकार में ही रहे, तथापि उन्हें हंगरी के स्टेपी-क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा और मिस्र की सेनाओं के हाथों पराजय का मुंह देखना पड़ा इससे मंगोल राजनीति में नई प्रवृत्तियों का उदय हुआ। इस प्रवृत्ति के दो पहलू थे।

1. पहला था – मंगोल परिवार में उत्तराधिकर को लेकर आंतरिक राजनीति जिसमें जोची और ओगोदोई के उत्तराधिकारी ‘महान खान’ के राज्य पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए एकजुट हो गए। वे यूरोप में आभयान जारी रखने की अपेक्षा अपने राजनीतिक हितों की रक्षा करने में जुट गए।

2. दूसरी स्थिति तब उत्पन्न हुई जब चंगेज खान के वंश की तोलयिद शाखा के उत्तराधिकारियों ने जोची और ओगोदेई वंशों को कमजोर बना दिया। चंगेज खान के सबसे छोटे पुत्र तोलुई के एक वंशज मोंके के राज्याभिषेक के बाद तोलुइयों ने 1250 के दशक में ईरान के विरुद्ध शक्तिशाली अभियान किए। परंतु 1260 के दशक में तोलई के वंशज चीन विजय में रुचि लेने लगे। इसलिए सैनिकों तथा रसद-सामग्री को मंगोल साम्राज्य के मुख्य भागों की ओर भेज दिया गया।

परिणामस्वरूप मिस्र की सेना का सामना करने के लिए केवल एक छोटी-सी सैनिक टुकड़ी को ही भेजा जा सका जिसके कारण मंगोलों को पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस पराजय और तोलुई परिवार की चीन के प्रति निरंतर बढ़ती रुचि के कारण उनका पश्चिम की ओर विस्तार चलीं। परंतु चंगेज खान अपने अभियानों की प्रगति से पूरी तरह संतुष्ट था। इसलिए वह उस क्षेत्र के सैनिक मामले अपने अनुयायियों की देख-रेख में छोड़ 1216 में अपनी मातृभूमि मंगोलिया लौट आया।

रुक गया। इसी दौरान रूस और चीन की सीमा पर जोची और तोलूई वंशजों के अंदरूनी झगड़ों ने जोची वंशजों का उनके संभावित यूरोपीय अभियानों से ध्यान हटा दिया। पश्चिम में मंगोलों का विस्तार रुक जाने पर भी चीन में उनके अभियान में कोई बाधा न पड़ी। अत: उन्होंने चीन को एकीकृत किया।

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प्रश्न 6.
चंगेज खान कौन था? वह मंगोलों का महानायक कैसे बना?
उत्तर:
चंगेज खान का जन्म लगभग 1162 ई. में आधुनिक मंगोलिया में ओनोन नदी के निकट हुआ था। उसका प्रारंभिक नाम तेमुजिन था। उसके पिता का नाम येसूजेई (Yesugei) था जो कियात कबीले का मुखिया था। उसके पिता की अल्पायु में ही हत्या कर दी गई थी। अत: उसकी माता ओलुन-इकेले ने तेमुजिन और उसके सगे तथा सौतेले भाइयों का लालन-पालन बड़ी कठिनाई से किया। 1170 के दशक में तेमुजिन का अपहरण कर उसे दास बना लिया गया।

उसकी पत्नी बोरटे (Borte) का भी अपहरण कर लिया गया। अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए उसे लड़ाई लड़नी पड़ी। विपत्ति के इन वर्षों में भी वह अनेक मित्र बनाने में सफल रहा। नवयुवक बोघरचू उसका पहला मित्र था। उसने सदैव एक विश्वस्त साथी के रूप में तेमुजिन का साथ दिया। तेमुजिन का सगा भाई जमूका उसका एक अन्य विश्वसनीय मित्र था। तेजिन ने अपने पिता के वृद्ध भाई तुगरिल उर्फ ओंग खान के साथ पुराने रिश्तों को पुनः जीवित किया। वह कैराईट लोगों का शासक था।

चंगेज खान महानायक बनने की राह पर-तेमूजिन का साग भई जमूका बाद में उसका शत्रु बन गया। 1180 और 1190 के दशकों में तेमुजिन ने ऑग खान की सहायता से जमूका जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वनि यों को परास्त किया । जमूका को पराजित करने के बाद तेमुजिन का आत्म-विश्वास बढ़ गया। अब वह अपने शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध के लिए निकल पड़ा। इनमें से उसके पिता के हत्यारे शक्तिशाली तातार, कैराईट और स्वयं ऑग खान शामिल थे। 1206 में उसने शक्तिशाली जमूका और नेमन लोगों को निर्णायक रूप से पराजित कर दिया।

चंगेज खान महानायक घोषित-अपने शत्रुओं पर विजय पा लेने के पश्चात् तेमुजिन स्टेपी-क्षेत्र की राजनीति में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में उभरा । उसकी इस प्रतिष्ठा को मंगोल कबीले के सरदार अर्थात् कुरिलताई की एक सभा में मान्यता दी गई। इस सभा में उसे चंगेज खान ‘समुद्र खान’ अर्थात् ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि देकर मंगोलों का महानायक घोषित किया गया ।

प्रश्न 7.
कुरिलताई से मान्यता मिलने के पश्चात् चंगेज खान की सैनिक सफलताओं की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
1206 ई. में कुरिलताई से मान्यता मिलने से पूर्व चंगेज खान ने मंगोलों को एक सशक्त एवं अनुशासित सैन्य शक्ति के रूप में पुनर्गठित कर लिया था। अब वह चीन विजय प्राप्त करना चाहता था। चीन उस समय तीन राज्यों में विभक्त था। वे थे –

  • उत्तर – पश्चिम प्रांतों पर सी-सिआ (Hsi-Hsia) लोगों का शासन था।
  • चिन वंश जो पेकिंग से उत्तरी चीन का शासन चला रहा था।
  • दक्षिणी चीन पर शुंग वंश का आधिपत्य था।

चीन-विजय –

  • 1209 में सी-सिआ लोग मंगोल से परास्त हो गए।
  • 1213 ई. में चीन की महान् दीवार का अतिमण हो गया। इसके दो वर्ष बाद 1215 ई. में पेकिंग नगर को लूटा गया। वहाँ के चिन वंश के विरुद्ध 1234 तक मंगोलों की लंबी लड़ाइयाँ
  • 1218ई. में मंगोलों ने चीन के उत्तर:पश्चिम में स्थित तियेन-शान की पहाड़ियों को नियंत्रित करने वाली करा खिता (qarakhita) को
  • पराजित कर दिया। इस विजय से मंगोलों का साम्राज्य अमूदरिया, तुरान और ख्वारजम राज्यों तक फैला गया। ख्वारजम के सुल्तान
  • मोहम्मद को मंगोल दूतों का वध करने के कारण चंगेज खान की प्रचंड क्रोधाग्नि का सामना करना पड़ा।

अन्य अभियान – 1219.1221 ई. के अभियानों में बड़े-बड़े नगरों-ओट्रार, बुखारा, समरकंद, बल्ख, गुरगंज, पर्व, निशापुर और हेरात-ने मंगोल सेनाओं के सामने आत्म-समर्पण कर दिया। जिन नगरों ने मंगोलों का प्रतिरोध किया उनका विनाश कर दिया गया। निशापुर के घेरे के दौरान जब एक मंगोल राजकुमार की हत्या कर दी गई तो चंगेज खान ने यह आदेश दिया, “नगर का इस तरह विध्वंस किया जाए कि संपूर्ण नगर में हल चलाया जा सके, ऐसा संहार किया जाए कि नगर के बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।”

इसी बीच मंगोल सेनाएँ सुल्तान मोहम्मद का पीछा करते हुए अजरबैजान तक आ पहुंची। क्रीमिया में रूसी सेनाओं को हराने के बाद उन्होंने कैस्पियन सागर को घेर लिया। सेना की एक अन्य टुकड़ी ने सुल्तान के पुत्र जलालुद्दीन का अफगानिस्तान और सिंध तक पीछा किया। सिंधु नदी के तट पर पहुँच कर चंगेज खान ने उत्तरी भारत और असम मार्ग होते हुए वापिस मंगोलिया लौटने का विचार किया।

परंतु अत्यधिक गर्मी, प्राकृतिक आवास की कठिनाइयों तथा अपने पैगंबर द्वारा दिए गए अशुभ संकेतों ने उसे अपना विचार बदलने पर विवश कर दिया। अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में व्यतीत करने के बाद 1227 में चंगेज खान की मृत्यु हो गई। उसकी सैनिक सफलताएँ नि:संदेह विस्मित करने वाली थीं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चंगेज खान का जन्म कब हुआ था?
(क) 1062 में
(ख) 1162 में
(ग) 1150 में
(घ) 1170 में
उत्तर:
(ख) 1162 में

प्रश्न 2.
चंगेज खान की मृत्यु कब हुई?
(क) 1227 में
(ख) 1230 में
(ग) 1240 में
(घ) 1260 में
उत्तर:
(क) 1227 में

प्रश्न 3.
तेमुजिन किस मंगोल खान का मूल नाम था?
(क) चंगेज खाँ
(ख) बाटू खाँ
(ग) कुबलई खाँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) चंगेज खाँ

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प्रश्न 4.
किस मंगोल सेना नायक ने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम ग्रहण किया?
(क) चंगेज खाँ
(ख) चगताई खाँ
(ग) कुबलई खाँ
(घ) गजन खाँ
उत्तर:
(घ) गजन खाँ

प्रश्न 5.
अफीम युद्ध किन दो देशों के बीच हुआ?
(क) चीन एवं फ्रांस
(ख) जापान एवं रूस
(ग) चीन एवं जापान
(घ) चीन एवं ब्रिटेन
उत्तर:
(घ) चीन एवं ब्रिटेन

प्रश्न 6.
चीन में साम्यवादी पार्टी की स्थापना कब हुई?
(क) 1911
(ख) 1921
(ग) 1945
(घ) 1947
उत्तर:
(ख) 1921

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प्रश्न 7.
साम्यवादियों के द्वारा पराजित होकर च्यांग काई शेक भागकर कहाँ गया?
(क) ताईवान
(ख) शैन्सी
(ग) कैन्टन
(घ) फुन्ना
उत्तर:
(क) ताईवान

प्रश्न 8.
आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं …………………
(क) माओ-त्से-तुंग
(ख) डा. सनयात सेन
(ग) चियांग काई शेक
(घ) चाऊ एनलाई
उत्तर:
(ख) डा. सनयात सेन

प्रश्न 9.
यायावर का अर्थ है ………………….
(क) घुमक्कड़
(ख) आबारा
(ग) जनजाति
(घ) प्रजाति
उत्तर:
(क) घुमक्कड़

प्रश्न 10.
चंगेज खान का प्रारंभिक नाम था …………………
(क) तेमुजिन
(ख) सीसुजिन
(ग) च्यांग
(घ) सनयात् सेन
उत्तर:
(क) तेमुजिन

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प्रश्न 11.
रूस में मंगोलों का राज्य कितने वर्षों तक रहा?
(क) 300
(ख) 400
(ग) 200
(घ) 600
उत्तर:
(क) 300

प्रश्न 12.
ओगोदेई किसका पुत्र था?
(क) चंगेज खान
(ख) अरब खान
(ग) च्यांग सेन
(घ) गुयूक
उत्तर:
(क) चंगेज खान

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प्रश्न 13.
मंगोलिया गणराज्य कब बना?
(क) 1921 में
(ख) 1920 में
(ग) 1930 में
(घ) 1940 में
उत्तर:
(क) 1921 में

प्रश्न 14.
चीन में यूआन राजवंश का अंत कब हुआ?
(क) 1368 में
(ख) 1360 में
(ग) 1367 में
(घ) 1371 में
उत्तर:
(क) 1368 में

प्रश्न 15.
चंगेज खान का वंशज था …………………..
(क) तैमूर
(ख) अकबर
(ग) जहाँगीर
(घ) गजनवी
उत्तर:
(क) तैमूर

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Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Textbook Questions and Answers

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पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था (Positive Feedback Mechanism) को दर्शाने वाले आरेख को देखिए क्या आप उन निवेशों (Inputs) की सूची दे सकते हैं जो औजारों के निर्माण में सहायक हुई? औजारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला?

सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था –

किसी बॉक्स विशेष की ओर इंगित तीर के निशान उन प्रभावों को बताते हैं जिनकी वजह से कोई विशेषता विकसित हुई।
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उत्तर:
औजारों के निर्माण में सहायक निवेश –

  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि।
  • औजारों के इस्तेमाल के लिए और बच्चों व चीजों को ले जाने के लिए हाथों का मुक्त होना।
  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।

प्रक्रियाएँ जिनको औजारों के निर्माण से बल मिला –

  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।
  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि

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प्रश्न 2.
मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पाई जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ। (क) व्यवहार और (ख) शरीर रचना शीर्षकों के अंतर्गत दो अलग-अलग स्तंभ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अंतरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्वपूर्ण समझते हैं ?
उत्तर:
समानताएँ :
(क) व्यवहार और –
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(ख) शरीर रचना –
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असमानताएँ:
(क) व्यवहार और –
Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 1 समय की शुरुआत स
(ख) शरीर रचना –
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प्रश्न 3.
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए हैं। तर्कों पर चर्चा कीजिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है?
उत्तर:
मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न ‘देशों में रहने वाले होमो सैपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया। इस तर्क का आधार आज के मनुष्यों में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं। इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचारों के मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्त्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं-(क) संग्रहण, (ख) औजार बनाना, (ग) आग का प्रयोग।
उत्तर:
औजार बनाना।

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प्रश्न 5.
भाषा के प्रयोगों से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी ? इस पर चर्चा करिए । इन क्रियाकलापों के लिए विचार-संप्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?
उत्तर:
भाषा के प्रयोगों से शिकार करने तथा आश्रय बनाने में बहुत अधिक सुविधा मिली होगी जिसका वर्णन इस प्रकार है
(क) शिकार करने में –

  • लोग शिकार की योजना बना सकते थे।
  • वे शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा कर सकते थे।
  • वे विभिन्न क्षेत्रों में जानवरों के बहुतायत की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे जानवरों की प्रकृति एवं स्वभाव पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे शिकार के लिए औजारों में सुधार ला सकते थे।
  • वे मारे गए जानवर के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों के उपयोग पर चर्चा कर सकते थे।

(ख) आश्रय बनाने में –

  • लोग आश्रय बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों पर चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल के निकट उपलब्ध सुविधाओं पर विचारों का आदान-प्रदान कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के तरीकों तथा तकनीकों की जानकारी एक-दृशो को दे सकते थे। इन क्रिया-कलापों के लिए लाग भाषा के अतिरिक्त संकेतों तथा चित्रकारियों का प्रयोग कर सकते थे।

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प्रश्न 6.
अध्याय के अंत में दिए गए प्रत्येक कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइये कि इनका क्या महत्व है?
उत्तर:
1. होमिनॉइड और होमोनिड शाखा विभाजन (64 लाख वर्ष पूर्व) – लगभग 64 लाख वर्ष पूर्व होमिनॉइड उपसमूह में ‘होमिनिइड’ वर्ग का विकास हुआ। यह प्राणियों का पहले से अधिक विकसित रूप था। इनके मस्तिष्क का आकार होमिनॉइड से बड़ा था । होमिनॉइड चार पैरों के बल चलते थे। जबकि होमिनिड सीधे खड़े होकर दो पैरों के बल चलते थे। होमिनिड के हाथ भी विशेष प्रकार के थे। इनकी सहायता से वे औजार बना सकते थे और उनका प्रयोग कर सकते थे।

2. पत्थर के सबसे पहले औजार (26-25 लाख वर्ष पूर्व) – आज से लगभग 26-25 लाख वर्ष पूर्व मानव ने पत्थर के सबसे पहले औजार बनाये और उनका प्रयोग करना सीखा। भले ही ये सादे तथा खुरदरे थे, तो भी मानव हिंसक जानवरों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो गया। उसके लिए जानवरों का शिकार करके भोजन प्राप्त करना भी सरल हो गया ।

कालानुक्रम – 2

1. स्वर – तंत्र का विकास-मानव में स्वर तंत्र के विकास का विशेष महत्त्व है। इससे मानव को बोलने की शक्ति मिली और वह अपने मन के विचार बोल कर प्रकट करने लगा। इससे शिकार करने, औजार बनाने तथा अन्य क्रियाकलापों के लिए नये तरीकों तथा तकनीकों का विकास. भी हुआ।

2. चूल्हों के इस्तेमाल के बारे में सबसे पहला साक्ष्य – चूल्हों के इस्तेमाल का सबसे पहला साक्ष्य दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा से मिला है। यहाँ दो चूल्हे पाये गए हैं। ये आग के नियंत्रित प्रयोग को दर्शाते हैं। इससे पता चलता है कि मानव लगभग 25000 वर्ष पूर्व आग का नियत्रित प्रयोग करना सीख गया था। वह आग से गुफाओं में प्रकाश करता था, उष्णता प्राप्त करता था और भोजन पकाता था। वह आग का इस्तेमाल भाले की नोक बनाने तथा खतरनाक जानवरों को भगाने के लिए भी करता था।

Bihar Board Class 11 History समय की शुरुआत से Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रजाति या स्पीशीज क्या होती है?
उत्तर:
प्रजाति ऐसे जीवों का एक समूह होती है जो प्रजनन द्वारा नई संतान उत्पन्न कर सकते हैं। परंतु एक प्रजाति के जीव किसी अन्य प्रजाति के जीवों से प्रजनन करके संतान पैदा नहीं कर सकते।

प्रश्न 2.
आदि मानव के इतिहास की जानकारी में किन-किन खोजों ने सहायता पहुंचाई है?
उत्तर:
मानव के जीवाश्मों, पत्थर के औजारों तथा गुफाओं की चित्रकारियों की खोजों ने।

प्रश्न 3.
विलुप्त हो चुकी मानव प्रजातियों के जीवाश्मों का तिथि-निर्धारण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:

  • प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा तथा
  • उन परतों की परोक्ष तिथि-निर्धारण द्वारा जिनमें वे दबे हुए पाये जाते हैं।

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प्रश्न 4.
चार्ल्स डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम बताएँ । विकास के संबंध में डार्विन ने क्या तर्क दिया?
उत्तर:
डार्विन की मनुष्य की उत्पत्ति संबंधी पुस्तक का नाम ‘ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज’ है। उन्होंने तर्क दिया कि मानव का विकास बहुत समय पहले जानवरों से क्रमिक विकास के रूप में हुआ।

प्रश्न 5.
एशिया और अफ्रीका में प्राइमेट्स कब अस्तित्व में आये?
उत्तर:
लगभग 36 मिलियन (360 लाख) वर्ष पहले।

प्रश्न 6.
होमिनिड्ज (homonoids) का उदय अफ्रीका में हुआ था। इस संबंध में कौन-कौन से दो प्रमाण दिए जा सकते हैं?
उत्तर:

  1. यह अफ्रीकी वानरों का समूह है जिनका अफ्रीकी होमिनिडों से बहुत ही निकट का संबंध है।
  2. पूर्वी अफ्रीका में पाये गए आस्ट्रेलोपिथिकस वर्ग से संबंधित आरंभिक होमोनिड के जीवाश्म लगभग 56 लाख वर्ष पुराने हैं। इनके विपरीत अफ्रीका से बाहर पाये गए जीवाश्म 18 लाख वर्ष से अधिक पुराने नहीं हैं।

प्रश्न 7.
होमिनिड्ज की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. मस्तिष्क का बड़ा आकार
  2. सीधे खड़ा होना
  3. दो पावों पर चलना
  4. हाथ विशेष क्षमता युक्त जिससे वह औजार बना सकता था तथा उनका प्रयोग कर सकता था।

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प्रश्न 8.
होमोनिड्ज के दो महत्त्वपूर्ण वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस तथा
  2. होमो।

प्रश्न 9.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो में क्या अंतर है?
उत्तर:
होमो की तुलना में आस्ट्रेलोपिथिकस के दिमाग का आकार छोटा, बड़ा, भारी तथा दाँत भी ज्यादा बड़े होते हैं।

प्रश्न 10.
वैज्ञानिकों ने विभिन्न मानव प्रजातियों को उनका नाम देने के लिए किन दो भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है?
उत्तर:
यूनानी तथा लैटिन (लातिनी) भाषाओं में।

प्रश्न 11.
आस्ट्रेलोपिथिकस के कौन-से शारीरिक लक्षण उसे वृक्षों पर रहने के अनुकूल बनाते थे?
उत्तर:

  1. आगे के अवयवों का लंबा होना
  2. हाथों तथा पैरों की मुड़ी हुई हड्डियों तथा
  3. टखनों के घुमावदार जोड़।

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प्रश्न 12.
औजार बनाने तथा लंबी दूरी तक चलने से आस्ट्रेलोपिथिकस में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
उसमें कई मानवीय लक्षणों का विकास हुआ।

प्रश्न 13.
‘होमो’ शब्द का क्या अर्थ है ? होमो के अवशेषों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है?
उत्तर:’
होमो’ लातिनी (Latin) भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’ भले ही इसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। होमो को उनकी विशेषताओं के अनुसार तीन वर्गों में बांटा गया है-

  1. होमो हैबिलिस (औजार बनाने वाले)
  2. होमो एरेक्टस (सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले)
  3. होमो सेपियंस (चिंतनशील मनुष्य)।

प्रश्न 14.
कोई दो उदाहरण दीजिए जिनमें होमो के जीवाश्मों को उनकी प्राप्ति-स्थल के नाम पर नामित किया गया हो।
उत्तर:

  1. जर्मनी के शहर हाइडलबर्ग में पाए गए जीवाश्मों को होमोहाइडल बर्गेसिस (Homo heidel bergenisis) कहा गया है।
  2. निअंडर घाटी में पाए गए जीवाश्मों को होमो निअंडरथलैंसिस श्रेणी में रखा गया है।

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प्रश्न 15.
यूरोप में पाये जाने वाले सबसे पुराने ‘होमो’ जीवाश्म कौन-कौन से हैं। ये किस प्रजाति के हैं?
उत्तर:
यूरोप में मिले सबसे पुराने जीवाश्म होमो हाइडलबर्गसिस तथा होमो निअंडरथलैंसिस हैं। ये दोनों ही होमो सैपियंस प्रजाति के हैं।

प्रश्न 16.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से भोजन प्राप्त करता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन प्राप्त करता था-जैसे संग्रहण (Gatherings), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing)।

प्रश्न 17.
मस्तिष्क का आकार होमो के किस लक्षण को दर्शाता है?
उत्तर:
अधिक बुद्धिमत्ता तथा अधिक अच्छी स्मृति को।।

प्रश्न 18.
किस बात से संकेत मिलता है कि होमिनिड्ज पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया तथा यूरोप में पहुंचे?
उत्तर:
एशिया में पाए गए होमिनिड के जीवाश्म अफ्रीका में पाए गए जीवाश्मों की तुलना में बाद के हैं। इसलिए यह संभव है कि होमीनिड पूर्वी अफ्रीका के अन्य भागों से एशिया और यूरोप में पहुंचे।

प्रश्न 19.
आदिकालीन गुफाओं में पाये गए चूल्हे किस बात के द्योतक हैं?
उत्तर:
आग के नियंत्रित उपयोग के द्योतक हैं।

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प्रश्न 20.
मनुष्य की भांति वानर औजारों का निर्माण तथा उनका उपयोग क्यों नहीं कर पाते थे?
उत्तर:
स्मरण शक्ति तथा आवश्यक कौशल के अभाव के कारण।

प्रश्न 21.
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य कहाँ से मिला है? ये संभवतः किस प्रजाति ने बनाए थे?
उत्तर:
पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल किए जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथियोपिया और केन्या के पुरा स्थलों से मिला है। ये औजार संभवतः आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे।

प्रश्न 22.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में आदिकालीन चित्रकारियाँ पाई गई हैं? इन चित्रकारियों में किन-किन जानवरों के चित्र शामिल हैं ?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं में और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई हैं। ये 30,000 से 12,000 वर्ष पहले बनाई गई थीं। इनमें जंगली भैसों, घोड़ों, हिरणों, गेण्डों, शेरों, भालुओं तेंदुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

प्रश्न 23.
मानव विज्ञान से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विज्ञान वह विज्ञान है जो मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन करता है।

प्रश्न 24.
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन क्या है। वे किस जानवर का मांस नहीं खाते?
उत्तर:
अफ्रीका के हादजा जनसमूह का मुख्य भोजन जंगली साग-सब्जियाँ तथा पशुओं का मांस हैं। वे हाथी का मांस नहीं खाते।

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प्रश्न 25.
हादजा लोग जमीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते?
उत्तर:
इसका कारण यह है कि –

  1. वे जहाँ चाहे रह सकते हैं।
  2. पशुओं का शिकार कर सकते हैं।
  3. कंदमूल और शहद इकट्ठा कर सकते है और पानी ले सकते हैं।

प्रश्न 26.
हादजा लोगों के पास सूखा पड़ने पर भी भोजन की कमी क्यों नहीं होती?
उत्तर:
हादजा लोगों के इलाके में सूखे के मौसम में भी पर्याप्त मात्रा में खाने वाले कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल आदि मिलते हैं। इसीलिए उनके पास भोजन की कमी नहीं होती।

प्रश्न 27.
आज के शिकारी समाजों में पाई जाने वाली तीन भिन्नताएं बताएँ।
उत्तर:

  1. आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्व देते हैं।
  2. उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-छोटे हैं।
  3. उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है।

प्रश्न 28.
अंतिम हिमयुग का अंत होने के कोई दो परिणाम बताओ।
उत्तर:

  1. अपेक्षाकृत अधिक गर्म और नम मौसम की शुरूआत हुई।
  2. जंगली जौ और गेहूँ जैसे जंगली अनाज उगाने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हो गई।

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प्रश्न 29.
जीवाश्म किस प्रकार लाखों वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं?
उत्तर:
जीवाश्म प्राय: चट्टानों में दबे रहते हैं। फलस्वरूप वे लाखो वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 30.
विश्व के एक क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ आज से लगभग दस हजार साल पहले खेती और पशुचारण प्रारंभ हुआ?
उत्तर:
मध्य सागर के तट से लेकर ईरान में जागरोस (Zagros) पर्वतमाला तक फैला हुआ क्षेत्र जिसे फर्टाइल क्रीसेंट यानी उर्वर अर्धचंद्राकार क्षेत्र कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आरंभिक मानव-प्रतिरूप के दो पैरों पर चलने से क्या लाभ हुए ? दो पैरों पर चलने वाले मानव के प्रारंभिक प्रत्यक्ष प्रमाण कहाँ से मिले हैं?
उत्तर:
दो पैरों पर चलने से मानव कं हाथ कार्यमुक्त हो गये। अब वह हाथों का प्रयोग बच्चों को उठाने अथवा आवश्यक वस्तु को उठाने के लिए कर सकता था। हाथों के लगातार प्रयोग से मानव की खड़ा होकर चलने की कुशलता धीरे-धीरे बढ़ती गई। इसके अतिरिक्त उसके चलने में चौपायों की तुलना में कहीं कम ऊर्जा खर्च लगी, भले ही दौड़ने में उसे अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती थी। दो पैरों पर चलने वाले मानव-प्रतिरूप के प्रमाण हादर (Hadar) इथोपिया से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 2.
‘होमो’ का क्या अर्थ है ? इन्हें कौन-कौन सी प्रजातियों में बाँटा गया है?
उत्तर:
‘होमो’ लातिनी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है ‘आदमी’। वैज्ञानिकों ने होमो को कई प्रजातियों में बाँटा है और इन प्रजातियों को उनकी विशेषताओं के अनुसार अलग-अलग नाम दिए गए हैं। इस प्रकार जीवाश्मों को निम्नलिखित तीन प्रजातियों में बाँटा

  • होमो हैबिलिस औजार बनाने वाले
  • होमो एरेक्टस सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलने वाले
  • होमो सैपियंस-चिंतनशील मनुष्य

होमो हैबिलिस के जीवाश्म इथियोपिया में ओमो (Ome) और तंजानिया में ओल्डवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हुए हैं। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म अफ्रीका और एशिया महाद्वीपों में पाए गए हैं।

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प्रश्न 3.
आदिकालीन मानव के खुले स्थलों पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर:
आदिकालीन मानव के खुले स्थान पर आवास तथा जीवन-शैली के बारे में जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका है। उनके द्वारा निर्मित शिल्पकृतियों के फैलाव की जाँच करना। उदाहरण के लिए केन्या में किलोंबे (Kilomble) और ओलोर्जेसाइली (Olorgesaillie) के खनन स्थलों पर हजारों की संख्या में शल्क-उपकरण और हस्तकुठार मिले हैं। ये औजार 700,000 से 500,000 साल पुराने हैं। इतने अधिक औजार एक ही स्थान पर इकट्ठे होने का अर्थ है कि इन स्थानों पर आदि मानव लंबे समय तक रहा होगा या बार-बार आता होगा । वास्तव में जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन प्रचुर मात्रा से उपलब्ध थे, वहाँ लोग बार-बार आते रहते होंगे।

ऐसे क्षेत्रों में लोग शिल्पकृतियाँ सहित अपने क्रियाकलापों के चिह्न छोड़ जाते होंगे। जमा शिल्पकृतियों कुछ ही क्षेत्रों में मिलती है और वे क्षेत्र कुछ अलग से दिखाई पड़ते हैं। जिन स्थानों पर लोगों का आवागमन कम होता था वहाँ ऐसी शिल्पकृतियाँ कम मात्रा में मिलती हैं।

प्रश्न 4.
फ्रांस तथा स्पेन की किन गुफाओं में जानवरों की चित्रकारियाँ पाई गई हैं? ये चित्रकारियाँ क्यों की गई थी, इसके बारे में क्या बताया जाता है?
उत्तर:
फ्रांस में स्थित लैसकाक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) की गुफाओं। और स्पेन में स्थित आल्टामीरा की गुफा में जानवरों की अनेक चित्रकारियाँ पाई गई है। ये 3000 से 12,000 साल पहले बनाई गई थीं। इनमें गौरों (जंगली बैलों), घोड़ों, पहाड़ी बकरों (Abox), हिरनों, मेमनों, विशालकाय जानवरों, गैडों, शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्घों, उल्लुओं आदि के चित्र शामिल हैं।

बताया जाता है कि इन चित्रकारियाँ का संबंध धार्मिक क्रियाओं अथवा जादू-टोनों से है। संभवत: चित्रकारी के रूप में जादू-टोना करके मनुष्य अपने शिकार को सफल बनाने का प्रयास करता होगा। यह भी कहा जाता है कि शायद ये गुफाएँ संगम स्थल थीं। यहाँ लोगों के यहाँ छोटे-छोटे समूह आपस में मिलते थे और सामूहिक क्रियाकलाप संपन्न करते थे। संभव है कि वहाँ ये समूह मिलकर शिकार की योजना बनाते हों अथवा शिकार के तरीकों एवं तकनीकों पर एक-दूसरे से चर्चा करते हों। यह भी संभव है ये चित्रकारियाँ आगे आने वाली पीढ़ियों को इन तकनीकों की जानकारी देने के लिए की गई हों।

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प्रश्न 5.
यह किस आधार पर कहा जाता है कि मानव का निकास क्रमिक रूप से हुआ?
उत्तर:
वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव का विकास क्रमिक रूप से हुआ है। मानव की एक के बाद एक कई प्रजातियाँ उत्पन्न हुई और लुप्त हो गई । लाखों वर्षों की इस प्रक्रिया के बाद आधुनिक मानव का उद्भव हुआ। इसका साक्ष्य हमें मानव की उन प्रजातियों के अवशेषों से मिलता है जो अब लुप्त हो चुकी हैं। इनके शारीरिक लक्षण भिन्न-भिन्न थे। इनका काल निर्धारण प्रत्यक्ष रासायनिक विश्लेषण द्वारा अथवा उन परतों का परोक्ष रूप से काल का निर्धारण करके किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि ये प्रजातियाँ एक क्रम में अलग-अलग काल में जीवित रहीं। इनके शारीरिक लक्षण बदलते रहे और इस प्रकार आज का मानव अस्तित्व में आया ।

प्रश्न 6.
होमिनिड का विकास किससे हुआ है ? दोनों में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनिड का विकास होमिनॉइड से हुआ है। इन दोनों में निम्नलिखित अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड के दिमाग का आकार होमिनिइज की तुलना में छोटा होता है।
  2. वे चौपाये होते हैं और चारों पैरों के बल चलते हैं। इसके विपरीत होमिनिड् का शरीर सीधा होता है। वे दो पैरों पर चलते हैं।
  3. उनके हाथों में भी काफी अंतर पाया जाता है। होमिनिड के हाथों की रचना इस प्रकार होती है कि उन्हें औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7.
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदिमानव की जीवन शैली में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लगभग 35,000 वर्ष पहले तथा उसके बाद आदि मानव के जीवन शैली में निम्नलिखित परिवर्तन आए –

  1. फेंककर मारने वाले भालों तथा तीर-कमान जैसे नए औजार बनाए जाने लगे। इससे जानवरों को मारने के तरीकों में सुधार हुआ।
  2. मांस को साफ किया जाने लगा। उसमें से हड्डियाँ निकाल दी जाती थीं। फिर उसे सुखाकर, हल्का सेकते हुए सुरक्षित रख लिया जाता था। इस प्रकार सुरक्षित रखे मांस को बाद में खाया जा सकता था।
  3. समूरदार जानवरों को पकड़ा जाने लगा और उनके रोएँदार खाल का कपड़े की तरह प्रयोग किया जाने लगा।
  4. सिलने के लिए सुई का आविष्कार भी हुआ। सिले हुए कपड़ों का सबसे पहला साक्ष्य लगभग 21,000 वर्ष पुराना है।
  5. छेनी या रूखानी जैसे छोटे-छोटे औजारों के बनाने की तकनीक का आविष्कार हुआ । इन नुकीले ब्लेडों से हड्डी, सींग, हाथी दाँत या लकड़ी पर नक्काशी करना संभव हो गया।

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प्रश्न 8.
मानव उद्भव के प्रतिस्थापन मॉडल की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है।

दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक विभिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है । भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही यं भिन्नताएँ उत्पन्न की क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

प्रश्न 9.
आटिमानव दवारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदिमानव द्वारा पत्थर के औजार बनाने और उनका इस्तेमाल करने का सबसे प्राचीन साक्ष्य इथोपिया और केन्या के पुरास्थलों से मिला है। ये औजार संभवत: आस्ट्रेलोपिथिकस ने बनाए थे। वास्तव में मनुष्य के जीवन में औजारों का विशेष महत्त्व था। उसमें वानरों से हटकर कुछ ऐसी शारीरिक विशेषताएँ थीं जिन्होंने उसे औजार बनाने और उनका प्रयोग करने में सहायता दी। उसकी सबसे पहली विशेषता थी-हाथों का कुशलतापूर्व प्रयोग । इसके अतिरिक्त उसमें वानरों से अधिक स्मरण शक्ति और जटिल संगठनात्मक कौशल भी था।

प्रश्न 10.
प्राइमेट्स से क्या अभिप्राय है? इनकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
प्राइमेट्स स्तनधारियों के बहुत बड़े वर्ग का एक उपवर्ग है। इस वर्ग में वानर, लंगूर तथा मानव आदि शामिल हैं। इस वर्ग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. इनके शरीर पर बाल होते हैं।
  2. इनका गर्भकाल अपेक्षाकृत लंबा होता है।
  3. ये बच्चों को जन्म देते हैं।
  4. माताओं में बच्चों को दूध पिलाने के लिए ग्रंथियाँ होती हैं।
  5. इनके दाँत भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं।
  6. इनमें अपने शरीर का तापमान स्थिर रखने की क्षमता होती है।

प्रश्न 11.
होमिनॉइड तथा बंदर में क्या-क्या अंतर पाये जाते हैं?
उत्तर:
होमिनॉइड तथा बंदर में निम्नलिखित कई अंतर पाये जाते हैं –

  1. होमिनॉइड्ज का शरीर बंदर के शरीर से बड़ा होता है।
  2. उनको पूँछ नहीं होती।
  3. उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता है।
  4. होमिनॉइड के बच्चे बंदर के बच्चों की तुलना में लंबे समय तक उन पर निर्भर रहते हैं

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प्रश्न 12.
आस्ट्रेलोपिथिकस को यह नाम क्यों दिया गया?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस दो शब्दों के मेल से बना है-लैटिन शब्द ‘आस्ट्रल’ (austral) जिसका अर्थ होता है ‘दक्षिणी’ तथा यूनानी शब्द ‘पिथिकस’ (pithekos) जिसका अर्थ है वानर । यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि मानव के बन रहे प्रारंभिक प्रतिरूपों में वानर अवस्था के कई लक्षण पाये जाते थे। उदाहरण के लिए –

  • होमो की तुलना में उनके दिमाग का आकार छोटा था।
  • उनके पिछले दाँत बड़े थे।
  • उनके हाथों की दक्षता सीमित थी।
  • वे सीधे खड़े होकर बहुत कम चल पाते थे क्योंकि वे अभी भी अपना अधिकतर समय वृक्षों पर बिताते थे अतः उनके शारीरिक लक्षण वृक्षों पर रहने के अनुकूल थे।

प्रश्न 13.
क्या खानाबदोश पशुचारक शहरी जीवन के लिये खतरा थे?
उत्तर:
मेसोपोटामिया का मुख्य भूमि प्रदेश काफी उपजाऊ था। फलतः खानाबदोश पशुचारकों का झुंड यहाँ आता था। ये किसानों के बोये हुए खेतों में अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने ले जाते थे, जिससे फसल को नुकसान पहुँचता था। इसके अतिरिक्त ये पशुचारक किसानों के गाँवों को लूट लेते थे। इस प्रकार ये स्थानीय किसानों हेतु खतरा थे। इसके कारण शासकों को यह डर बना रहता था कि ये पशुचारक कहीं छापे अथवा हमलों की कोई योजना तो नहीं बना रहे।

प्रश्न 14.
उच्चरित अर्थात् बोली जाने वाली भाषा की उत्पत्ति कब हुई?
उत्तर:
ऐसा माना जाता है कि होमोहैबिलिस के मस्तिष्क में कुछ ऐसी विशेषताएँ थीं जिनके कारण उसके लिए बोलना संभव हुआ होगा। यह विकास संभवतः 20 लाख वर्ष पूर्व शुरू हुआ होगा। मस्तिष्क में हुए परिवर्तन के अतिरिक्त स्वर-तंत्र का विकास भी महत्त्वपूर्ण था। यह विकास लगभग 200,000 वर्ष पहले हुआ था। इसका संबंध विशेष रूप से आधुनिक मानव से रहा है। एक अन्य सुझाव यह है कि भाषा-कला के साथ-साथ लगभग 40,000-35000 वर्ष पहले विकसित हुई। बोली जाने वाली भाषा-कला के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, क्योंकि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं।

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प्रश्न 15.
संजाति वृत्त Ethnography) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संजाति वृत्त में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। इससे उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधनों, तकनीकों आदि का पता लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त समूहों में स्त्री-पुरुष की भूमिका, राजनीतिक संस्थाओं तथा सामाजिक रूढ़ियों की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही उनके कर्मकांडों तथा रीति-रिवाजों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 16.
हिमयुग कब आया? इससे मानव की प्रक्रिया में कैसे और क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
हिमयुग लगभग 25 लाख वर्ष पहले आया। पृथ्वी के बड़े-बड़े भाग बर्फ से ढंक गए । फलस्वरूप जलवायु तथा वनस्पति में बड़े-बड़े परिवर्तन देखने को मिले । तापमान और वर्षा में कमी आ गई जिसके कारण वन कम हो गए। इसके विपरीत घास के मैदानों का क्षेत्रफल बढ़ा गया। परिणामस्वरूप आस्ट्रलोपिथिकस के प्रारंभिक रूप धीरे-धीरे लुप्त हो गए, क्योंकि ये वनों में रहने के आदी थे। अब उनके स्थान पर उनकी प्रजातियाँ प्रकट हुईं जो सूखी परिस्थितियों में आराम से रह सकती थीं। प्रजातियों में जीनस होमो के सबसे पुराने प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रश्न 17.
पूर्व (आदिकालीन) मानव कुछ स्थलों को सोच समझकर शिकार के लिए चुनता था । क्यों ? उदाहरण देकर समझाओ।
उत्तर:
पूर्व मानव कुछ स्थलों को सोच समझ कर चुनता था। ऐसा एक स्थल चेक गणराज्य में दोलनी वेस्तोनाइस (Dolni Vestonice) था जो एक नदी के पास स्थित है। मानव ऐसे स्थल इसलिए चुनता था क्योंकि वह जानवरों की आवाजाही के बारे में जानता था। वह जल्दी से बड़ी संख्या में जानवरों को मारने के तरीकों से भी परिचित था । उदाहरण के लिए मानव ने जो स्थल चेक गणराज्य के नदी के पास चुना था, वहाँ पतझड़ और बसंत के मौसम में रैडियर तथा घोड़ों जैसे स्थान बदलने वाले जानवरों के झुंड के झुंड आते थे। इनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था।

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प्रश्न 18.
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच क्या शारीरिक अंतर थे? ये अंतर क्या दर्शाते हैं?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस तथा होमो के बीच निम्नलिखित शारीरिक अंतर थे –

  1. आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो के मस्तिष्क का आकार बड़ा था।
  2. होमो के जबड़े कम बाहर निकले हुए थे।
  3. होमो के दाँत अपेक्षाकृत छोटे थे।
  4. होमो के मस्तिष्क का बड़ा आकार उसके बुद्धिमान तथा उसकी बेहतर स्मृति को दर्शाता है।
  5. जबड़ों तथा दाँतों में हुआ परिवर्तन संभवतः उनके खान-पान की भिन्नता से संबंधित है।

प्रश्न 19.
भाषा का विकास किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसके पास भाषा है। भाषा के विकास के विषय में कई प्रकार के मत हैं –

  1. होमिनिड भाषा में अंगविक्षेप (हाव-भाव) या हाथों का संचालन (हिलाना) शामिल था।
  2. उच्चरित अथवा बोली जाने वाली भाषा से पहले गाने या गुनगुनाने जैसे मौखिक या अ-शाब्दिक संचार का प्रयोग होता था।
  3. मनुष्य की वाणी का प्रारंभ संभवतः आह्वान या बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसे कि नर-वानर करते हैं। प्रारंभिक अवस्था में मानव बोलने में बहुत ही कम ध्वनियों का प्रयोग करता होगा। यही ध्वनियाँ आगे चलकर भाषा के रूप में विकसित हो गई होगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से अपना भोजन जुटाता था?
उत्तर:
आदिकालीन मानव कई तरीकों से अपना भोजन जुटाता था जैसे संग्रहण (Gathering), शिकार (Hunting), अपमार्जन (Scavenging) और मछली पकड़ना (Fishing) –
1. संग्रहण – संग्रहण की क्रिया में पेड़ों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों, जैसे बीज, गुठलियाँ, बेर फल एवं कंदमूल को इकट्ठा करना शामिल था। संग्रहण के संबंध में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है क्योंकि इस बारे में प्रत्यक्ष साक्ष्य बहुत कम मिलते हैं। हमें हड्डयों के जीवाश्म तो बहुत मिल जाते हैं परंतु पौधे के जीवाश्म दुर्लभ ही हैं। पौधों से भोजन जुटाने के बारे में सूचना प्राप्त करने का एक मात्र तरीका दुर्घटनाओं या संयोगवश जले हुए पौधों के प्राप्त अवशेष हैं।

इस प्रक्रिया से कार्बनीकरण हो जाता है और जला हुआ जैविक पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है। फिर भी, अभी तक पुरातत्वविदों को अति पुराने जमाने के संबंध में कार्बनीकृत बीजों का साक्ष्य नहीं मिला है।

2. शिकार – शिकार संभवतः बाद में शुरू हुआ-लगभग 5 लाख साल पहले। स्तनपायी जानवरों के योजनाबद्ध शिकार और उनका वध करने का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य दो स्थलों से मिलता है। ये स्थल हैं दक्षिण इंग्लैण्ड में बाक्सग्रोव (Boxgrove) और जमनी में शोनिंजन (Schoningen).

3. अपमार्जन – अपमार्जन से तात्पर्य त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है ! अब मुख्य रूप से यह माना जाने लगा है कि आदिकालीन होमिनिड अपमार्जन के द्वारा उन जानवरों की लाशों सं मांस-मजा खुरच कर निकालने लग थ जो जानवर अपने आप मर जाते थे या अन्य हिंसक जानवरों द्वारा मार दिए जाते थे। यह भी इतना ही संभव है कि पूर्व होमिनीड छोटे स्तनपायी जानवरों-चूहे, छछूदर जैसे कृतकों (Rodents), पक्षियों (और उनके अंडों), सरीसृपों और यहाँ तक कि कीड़े-मकोड़े भी खा जाते थे।

4. मछली पकड़ना – मछली पकड़ना भी भोजन प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका इस बात की जानकारी अनेक खोज स्थलों से मछली की हड्डियाँ मिलने से होती है।

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प्रश्न 2.
क्या वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त जानकारी को सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है?
उत्तर:
वर्तमान शिकारी-संग्राहक समाजों की जानकारी के आधार पर आदिकालीन शिकारी-संग्राहक समाजों के अध्ययन के बारे में दो परस्पर विरोधी विचारधाराएँ चल रही हैं।
1. पहली विचारधारा – विद्वानों के एक वर्ग ने आज के शिकारी-संग्राहक समाजों से प्राप्त तथ्यों तथा आँकड़ों का सीधे अतीत के अवशेषों की व्याख्या करने के लिए उपयोग कर लिया है। उदाहरण के लिए कुछ पुरातत्वविदों का कहना है कि 20 लाख साल के होमिनिड स्थल जो तुर्काना झील के किनारे स्थित हैं, संभवतः आदिकालीन मानवों के शिविर या निवास स्थान थे। वे यहाँ सूखे के मौसम में आकर रहते थे। वर्तमान हादजा और फुग सैन समाज भी ऐसा ही करते हैं।

2. दूसरी विचारधारा – दूसरी ओर कुछ विद्वानों का मत है कि संजाति वृत्त संबंधी तथ्यों और आंकड़ों का उपयोग अतीत के समाजों को समझने के लिए नहीं किया जा सकता है। उनके अनुसार ये चीजों एक-दूसरे से बिल्कुल आर्थिक कियाकलापों में भी लगी हुई हैं। वे जंगलों में पाई जाने वाली छोटी-छोटी चीजों का विनिमय और व्यापार करते हैं। कुछ समाज पड़ोस के किसानों के खेतों में मजदूरी करते हैं। इसके अतिरिक्त जिन परिस्थितियों में रहते हैं। वे आरंभिक मानव की अवस्था से बहुत भिन्न हैं।

आज के शिकारी – संग्राहक समाजों की जीवन-शैली भी भिन्न-भिन्न है। कई बातों में तो परस्पर विरोधी तथ्य दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए आज के शिकारी समाज शिकार और संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं। उनके आकार भिन्न-भिन्न अर्थात् छोटे-बड़े होते हैं। उनकी गतिविधियों में भी अंतर पाया जाता है। भोजन प्राप्त करने में श्रम विभाजन को लेकर भी कोई आम सहमति नहीं है।

यह सच है कि आज भी अधिकतर स्त्रियाँ ही खाने पीने की सामग्री जुटाने का काम करती हैं और पुरुष शिकार करते हैं। परंतु ऐसे समाजों के भी उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियाँ और पुरुष दोनों ही शिकार और संग्रहण तथा औजार बनाने के काम करते हैं। संभवत: इसी बात से यह सुनिश्चित होता है कि आज के शिकारी-संग्राहक समाजों में स्त्री-पुरुष दोनों की भूमिका लगभग एक समान है। अतः वर्तमान स्थिति में अतीत के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना कठिन है।

प्रश्न 3.
आदि मानव के गुफाओं तथा खुले स्थानों पर आवास के बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
गुफाओं तथा खुले निवास क्षेत्र का प्रचलन 400,000 से 125,000 वर्ष पहले शुरू हो गया था। इसके साक्ष्य यूरोप के पुरास्थलों में मिलते हैं।
1. दक्षिण फ्रांस में स्थित लाजारेट गुफा की दीवार को 12×4 मीटर आकार के एक निवास स्थान से सटाकर बनाया गया है। इसके अंदर दो चूल्हों (Hearths) के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न प्रकार के खाद्य स्रोतों जैस फलों, वनस्पतियों, बीजों, काष्ठफला, पक्षियों के अण्डों और मीठे जल की मछलियों (ट्राउट, पर्च और कार्प) के साक्ष्य मिले हैं। दक्षिणी फ्रांस के समुद्रतट पर स्थित टेरा अमाटा (Terra Amata) एक अन्य पुरास्थल है। यहाँ घास-फूस और लकड़ी की छत वाली कच्ची झोपड़ियाँ बनाई जाती थीं। ये झोपड़ियाँ किसी विशेष मौसम में थोड़े समय के आवास के लिए बनाई जाती थी।

केन्या में चसीबांजा (Chesowanja) और दक्षिण अफ्रीका से स्वार्टक्रान्स (Swarkarns) में पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकायी गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के टुकड़े मिले हैं। ये 14 लाख से 10 लाख साल पुराने हैं। यह पता नहीं चल पाया कि ये चीजें प्राकृतिक रूप से झाड़ियों में लगी आग या ज्वालामुखी से उत्पन्न अग्नि से जलने का परिणाम हैं अथवा एक सुनियोजित ढंग से लगाई गई आग में पकाकर बनाई गई थीं।

दूसरी ओर, चूल्हे आग के नियंत्रित प्रयोग के प्रतीक हैं। इसके कई लाभ थे।

  • इनका प्रयोग गफाओं के अंदर प्रकाश और उष्णता प्राप्त करने के लिए किया जाता होगा।
  • इससे भोजन भी पकाया जा सकता था।
  • इसके अतिरिक्त लकड़ी को कठोर करने में भी आग का इस्तेमाल होता था जैसे कि भाले की नोंक बनाने में।
  • शल्क निकाल कर औजार बनाने में भी आग की उष्णता की सहायता ली जाती थी।
  • साथ ही इसका उपयोग खतरनाक जानवरों को भगाने में किया जाता था।

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प्रश्न 4.
आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ? इस संबंध में प्रचलित मतों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
आदि मानव के उद्भव स्थल के बारे में बहुत अधिक वाद-विवाद हुआ है। आज इस संबंध में दो मत प्रचलित हैं जो एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं। ये मत आगे दिए गए हैं
1. क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (Continuity Model) – मानव उद्भव के क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव का विकास भिन्न-भिन्न प्रदेशों में रहने वाले होमो सेपियंस से हुआ। उनके विकास की गति धीमी थी और अलग-अलग थी। इसलिए आधुनिक मानव संसार के भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग स्वरूप में दिखाई दिया । इस तर्क का आधार आज के मनुष्य में पाये जाने वाले विभिन्न लक्षण हैं।

इस मॉडल के समर्थकों का मानना है कि ये विभिन्नताएँ एक ही क्षेत्र में पहले से रहने वाले होमो एरेक्टस तथा होमो हाइलबर्गसिस समुदायों में पाई जाने वाली असमानताओं के कारण हैं। हमारे विचार में यह मॉडल पुरातात्त्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण नहीं देता। इसमें कहीं न कहीं कोई त्रुटि अवश्य है।

2. प्रतिस्थापन मॉडल (Replacement Model) – प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार मानव चाहे कहीं भी रहा हो, उसके सभी पुराने रूप बदल गए और उसका स्थान आधुनिक मानव ने ले लिया । हम देखते हैं कि आधुनिक मानव में सभी जगृह शारीरिक तथा उत्पत्तिमूलक समरूपता पाई जाती है। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि यह समानता इसलिए है, क्योंकि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे।

वहीं से वे अन्य स्थानों को गए। इस बात की पुष्टि इथोपिया के ओमो नामक स्थान पर मिले प्राचीन मानव जीवाश्मों से हो जाती है। दूसरी ओर आज के मनुष्यों में पाई जाने वाली शारीरिक भिन्नताएँ किसी स्थान विशेष पर निरंतर हजारों वर्षों तक स्थायी रूप से रहने के कारण है। भिन्न-भिन्न स्थानों की परिस्थितियों ने ही ये भिन्नताएँ उत्पन्न का क्योंकि मनुष्य स्थान विशेष की पथतियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव के उद्भव से संबंधित प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार कौन-सा मत सही है।
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ
(ख) अनेक क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों की उत्पत्ति हुई
(ग) मनुष्य का उद्भव यूरोप में हुआ
(घ) सभी क्षेत्रों में एक ही तरह के मनुष्यों को उत्पत्ति नहीं हुई
उत्तर:
(क) मनुष्य का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 2.
अपमार्जन का अर्थ है ………………………
(क) भोजन की तलाश करना
(ख) भोजन एकत्रित करना
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना
(घ) कंदमूल जमा करना
उत्तर:
(ग) त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करना

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प्रश्न 3.
गुफा चित्रकला का प्राचीनतम प्रमाण किस काल का मिला है?
(क) पुरापाषाण
(ख) मध्यपाषाण
(ग) नवपाषाण
(घ) हड़प्पा
उत्तर:
(ग) नवपाषाण

प्रश्न 4.
हमें प्रथम होमिनिड्स का साक्ष्य मिलता है ………………………..
(क) 50 मिलियन वर्ष पूर्व
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व
(ग) 10 मिलियन वर्ष पूर्व
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) 5.6 मिलियन वर्ष पूर्व

प्रश्न 5.
साक्ष्यों से ज्ञात होता है कि होमिनिड्स का उद्भव ……………………..
(क) एशिया में हुआ
(ख) यूरोप में हुआ
(ग) अफ्रीका में हुआ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) अफ्रीका में हुआ

प्रश्न 6.
जीवों का ऐसा समूह, जिसके नर और मादा मिल कर बच्चे पैदा कर सकते हैं और बाद में भी ये क्रम जारी रहता है, कहलाता है।
(क) प्राइमेट्स
(ख) स्पीशीज
(ग) होमोनिड
(घ) जीवाश्म
उत्तर:
(ख) स्पीशीज

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प्रश्न 7.
होमो लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ………………………..
(क) आदमी
(ख) स्त्री
(ग) वानर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) आदमी

प्रश्न 8.
होमिनिड समूह की विशेषताएँ हैं ……………………….
(क) मस्तिष्क का बड़ा आकार
(ख) दौ पैरों पर चलना
(ग) हाथ की विशेष आकृति
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
आस्ट्रोलोपिथिकस की उत्पत्ति हुई है ………………………
(क) लैटिन भाषा से
(ख) ग्रीक भाषा से
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) लैटिन तथा ग्रीक भाषाओं से

प्रश्न 10.
चार्ल्स डारविन की पुस्तक ‘ओरिजिन ऑफ स्पेसिज’ कब प्रकाशित हुई?
(क) 1852
(ख) 1856
(ग) 1857
(घ) 1859
उत्तर:
(घ) 1859

प्रश्न 11.
आधुनिक मानव का उद्भव लगभग कितने वर्ष पूर्व हुआ?
(क) 45000
(ख) 200000
(ग) 300000
(घ) 400000
उत्तर:
(क) 45000

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प्रश्न 12.
केन्या के किलोबे और ऑलार्जेसाइली स्थल से किस काल के हस्त कुठार मिलते हैं?
(क) पुरापाषाण काल
(ख) मध्यपाषाण काल
(ग) नवपाषाण काल
(घ) ताम्रपाषाण काल
उत्तर:
(क) पुरापाषाण काल

प्रश्न 13.
पत्थर के औजार संभवतः सबसे पहले किसने बनाए थे?
(क) रामापिथेकस
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस
(ग) निअंडर थाल
(घ) हीमोसैपियंस
उत्तर:
(ख) आस्ट्रेलीपिथिकस

प्रश्न 14.
लैसकॉक्स और शोवे की गुफा की चित्रकला कहाँ पायी गयी है?
(क) फ्रांस
(ख) नार्वे
(ग) डेनमार्क
(घ) रूस
उत्तर:
(क) फ्रांस

प्रश्न 15.
शहरी जीवन की शुरूआत सर्वप्रथम कहाँ हुई?
(क) मेसोपोटामिया
(ख) चीन
(ग) यूनान
(घ) रोम
उत्तर:
(क) मेसोपोटामिया

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प्रश्न 16.
वार्का शीर्ष कहाँ मिला है?
(क) उरुक
(ख) यमन
(ग) जॉर्डन
(घ) तुर्की
उत्तर:
(क) उरुक

प्रश्न 17.
ओल्डुबई गोर्ज रिफ्ट घाटी, जहाँ आदिकालीन मानव के इतिहास के चिह्न पाये गये हैं कहाँ स्थित हैं?
(क) द. अमेरिका
(ख) पूर्वी अफ्रीका
(ग) इंडोनेशिया
(घ) मध्य यूरोप
उत्तर:
(ख) पूर्वी अफ्रीका

प्रश्न 18.
यूरोप में मिले सबसे पुराने होमो जीवाश्म किसके हैं?
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस
(ख) रामापिथेकेस
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस
(घ) क्रोमैतानम्
उत्तर:
(क) होमोहाइडेलवर्गेसीस

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प्रश्न 19.
योजनाबद्ध तरीके से जानवरों का शिकार का सबसे पुराना स्पष्ट साक्ष्य कहाँ से मिलता …………………………
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)
(ख) शोमिंजन
(ग) सोजन घाटी (पाकिस्तान)
(घ) बलन घाटी
उत्तर:
(क) बॉक्सग्रोव (इंगलैंड)

प्रश्न 20.
दफनाने की परंपरा का प्राचीनत्तम साक्ष्य लगभग कितने लाख वर्ष पहले का मिला है?
(क) 5 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 4 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 2 लाख वर्ष पूर्व
उत्तर:
(ग) 3 लाख वर्ष पूर्व

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
दंड-आरेख –
उत्तर:
एक विमीय आरेख है।

प्रश्न 2.
आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किए गए आँकड़ों द्वारा हम आलेखी रूप में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –
उत्तर:
मध्यिका

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प्रश्न 3.
तोरणों के द्वारा आलेखी रूप में निम्न की स्थिति जानी जा सकती है –
उत्तर:
माध्यिका

प्रश्न 4.
अंकगणितीय रेखाचित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है
उत्तर:
दीर्घकालिक प्रवृत्ति

प्रश्न 5.
दंड-आरेख के दंडों की चौड़ाई का एक समान होना जरूरी नहीं है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 6.
आयत चित्र में आयतों की चौड़ाई अवश्य एक समान होनी चाहिए।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 7.
आयत चित्र की रचना केवल आँकड़ों के सतत वर्गीकरण के लिए की जा सकती है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 8.
आयत चित्र एवं स्तंभ आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए एक जैसी: विधियाँ है।
उत्तर:
सही

प्रश्न 9.
आयत चित्र की मदद से बारंबारता वितरण के बहुलक को आलेखी रूप में राज्य जा सकता है।
उत्तर:
सही

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प्रश्न 10.
तोरणों में बारम्बारता वितरण की माध्यिका को नहीं जाना जा सकता है।
उत्तर:
गलत

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख प्रभावी होता है?
(क) वर्ष विशेष की मासिक वर्षा
(ख) धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन
(ग) एक कारखाने में लागत घटक
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 1

प्रश्न 12.
मान लीजिए आप भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या में वृद्धि तथा भारत में शहरीकरण के निम्न स्तर पर बल देना चाहते हैं, जैसा कि उदाहरण 4.2 में दिखाया गया है, तो आप उसका सारणीयन कैसे करेंगे? उत्तर:
भारत में शहरी गैर-कामगारों की संख्या –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 2

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प्रश्न 13.
यदि किसी बारम्बारता सारणी में समान वर्ग अन्तरालों की तुलना में वर्ग अंतराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?
उत्तर:
आवृत्ति तालिका में वर्गान्तर समान भी हो सकते हैं और असमान भी। दोनों प्रकार के वर्गान्तर से आयत चित्र बनाने के विधि कुछ भिन्न है। जब सभी वर्गान्तर समान हैं तो सभी आयतों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु आयतों की ऊँचाई वर्गों की आवृत्तियों पर निर्भर करती है। जितनी आवृत्तियाँ अधिक होंगी आयतों की ऊँचाई भी उतनी ही अधिक होगी। इसके अतिरिक्त वर्गान्तर समान होने पर आवृत्तियों में कोई फेरबदल नहीं हो जाती, आवृत्तियों को मौलिक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इसके विपरीत जब वर्गान्तर समान नहीं होते तो वर्गान्तरों की ऊँचाई करने के लिए आवृत्तियों का संशोधन किया जाता है। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और वर्ग 20-40 का वर्गान्तर 20 है जो न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है। अतः वर्ग की संशोधित आवृत्ति 20 के स्थान पर 10 (20 ÷ 2) होगी। मान लो 40-70 वर्गान्तर की आवृत्तियाँ 15 हैं। यह वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का तीन गुना है। अतः इसकी संशोधित आवृत्ति 5(15 ÷ 2) होगी।

प्रश्न 14.
भारतीय चीनी उद्योग संघ ने बताया कि दिसम्बर 2001 से पहले 15 दिन चीनी का उत्पादन लगभग 3,87,000 टन था जबकि पिछले वर्ष 2000 में उन्हीं 15 दिनों का उत्पादन 3,78,000 टन था।
दिसम्बर 2001 के पहले 15 दिनों में आन्तरिक उपभोग के लिये 2,83,000 टन चीनी खरीदी गई और निर्यात के लिए 41,000 टन जबकि पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 1,54,000 टन चीनी आन्तरिक उपभोग के लिए ली गई थी।

  1. आँकड़ों को तालिका में प्रस्तुत करें।
  2. यदि अपने इन आँकड़ों को आरेख में प्रदर्शित करना है तो आप किस प्रकार का आरेख प्रयोग करेंगे और क्यों?
  3. इन आँकड़ों को आरेख में प्रकट करें।

उत्तर:
1. भारत में चीनी उत्पादन (Production of Sugar in India):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 3

2. यदि हमें इनको आँकड़ों में प्रदर्शित करना है तो बहु दंड आरेख में प्रदर्शित करेंगे, क्योंकि यह आरेख दो या दो से अधिक तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए सबसे अधिक उपयोगी है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 4

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प्रश्न 15.
निम्नलिखित तालिका अनुमानित क्षेत्रीय वास्तविक वृद्धि दरों को प्रतिशत में प्रदर्शित करती है। इन आँकड़ों को बहु समय श्रृंखला ग्राफ में प्रदर्शित करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 5
उपर्युक्त आंकड़ों को बहु काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 6

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सारणीयन के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. आँकड़ों को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना।
  2. आँकड़ों का सरलीकरण करना।

प्रश्न 2.
वर्गीकरण तथा सारणीयन में कोई एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
वर्गीकरण सांख्यिकी विश्लेषण की एक विधि है जब कि सारणीयन समंकों को प्रस्तुत करने की एक विधि है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 3.
सारणी के कोई पाँच प्रमुख अंग लिखें।
उत्तर:

  1. सारणीयन संख्या
  2. शीर्षक
  3. शीर्ष टिप्पणी
  4. उप-शीर्षक व पक्तिशीर्षक
  5. सारणी का मुख्य भाग
  6. सारणी का मुख्य भाग

प्रश्न 4.
यदि सारणी में एक निश्चित संख्या को महत्त्व दिया जाना है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
विशेष महत्त्व वाले समंकों को मोटे अंकों में लिखा जाना चाहिए।

प्रश्न 5.
सरल सारणी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सरल सारणी वह सारणी है जो सांख्यिकीय आंकड़ों की किसी एक विशेषता अथवा गुण को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 6.
जटिल सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जटिल सारणी उस सारणी को कहते हैं जो कि एक से अधिक विशेषताओं को दर्शाती है।

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प्रश्न 7.
स्तंभों के शीर्षक को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
स्तंभों के शीर्षक को उप-शीर्षक कहते हैं।

प्रश्न 8.
आरेखीय प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन वह विधि है जिसके द्वारा आंकड़ों को आरेखों (दंड आरेख, आयत चित्र, वृत्तीय आरेख) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

प्रश्न 9.
आरेखों की कोई दो सीमाएं लिखो।
उत्तर:

  1. आरेख अनुमानों पर आधारित होते हैं
  2. ये विस्तृत जानकारी नहीं देते।

प्रश्न 10.
आरेखों के कोई दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. गोखों द्वारा आंकड़ों की प्रस्तुति मिनची होती है।
  2. इनका व्यापक प्रयोग होता है।

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प्रश्न 11.
सरल दंड आरेख पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सरल दंड आरेखों में मूल्यों को दंडों की ऊंचाई द्वारा दिखाया जाता है। दण्डों की पीटाई तथा उनके बीच की दूरी एक समान रखी जाती है। ये आरेख जनसंख्या, उत्पादन तथा भौगोलिक आँकड़ों को प्रदर्शित करने में उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 12.
सूचना के स्रोत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सूचना के स्रोत से अभिप्राय उस स्रोत से है जिससे आँकड़े लिए गए हैं।

प्रश्न 13.
बहुभुजी सारणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो गुणों से अधिक विशेषताओं के आधार पर निर्मित की गई सारणी को बहुभुजी सारणी कहते हैं।

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प्रश्न 14.
एक अच्छी सांख्यिकीय सारणी की कोई तीन विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. यह सरल तथा संक्षिप्त होनी चाहिए
  2. स्पष्ट तथा देखने में आकर्षक होनी चाहिए
  3. विश्वसनीय होनी चाहिए।

प्रश्न 15.
सारणीयन में प्रयोग किया जाने वाला वर्गीकरण कितने प्रकार का होता हैं?
उत्तर:
चार प्रकार का –

  1. परिमाणात्मक
  2. गुणात्मक
  3. समय संबंधी तथा
  4. स्थान संबंधी।

प्रश्न 16.
परिमाणात्मक या मात्रात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिमाणात्मक वर्गीरण उस वर्गीकरण को कहते हैं, जिसमें वर्गीकरण का आधार ‘परिमाणात्मक विशेषताएं हैं। दूसरे शब्दों में इन विशेषताओं को मात्रा में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए आयु, ऊँचाई, उत्पादन, आय आदि मात्रात्मक विशेषताएं हैं।

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प्रश्न 17.
सारणी का मुख्य भाग कौन-सा है?
उत्तर:
सारणी का मुख्य भाग कलेवर (Body) है।

प्रश्न 18.
आँकड़ों को दर्शाने के लिए. मुख्य आरेख निम्नलिखित हैं –
उत्तर:

  1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagram)। जैसे-दंडभुज।
  2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagram)।
  3. गणितीय रेखा आरेख (Arithmatic Line graph)।

प्रश्न 19.
सांख्यिकीय सारणी क्या है?
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी एक संयंत्र है जिसमें आँकड़ों को पंक्तियों और स्तम्भों में . व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

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प्रश्न 20.
सारणीयन किसे कहते हैं?
उत्तर:
सांख्यिकीय आंकड़ों को सारणी के रूप में अर्थात् पंक्तियों तथा स्तंभों के रूप में प्रकट करने को सारणीयंन कहते हैं।

प्रश्न 21.
आयत चित्र का अर्थ बताएँ।
उत्तर:
यह वह चित्र है जो अखंडित श्रृंखलाओं से जुड़ी हुई आयातों (adjacent rectangles) द्वारा प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 22.
यदि सभी वर्ग अंतराल (Class Intervals) समान हैं तो आयत चित्र की चौड़ाई समान होगी या असमान?
उत्तर:
समान होगी।

प्रश्न 23.
आवृत्ति बहुभुज कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
आवृत्ति बहुभुज को आयत चित्र के सिरे के मध्य बिन्दुओं को जोड़कर बनाया जाता है।

प्रश्न 24.
श्रम पर खर्च कुल खर्चे का 30% है। इसकी कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = 30 × 3.6 = 108°

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प्रश्न 25.
102 मजदूरों में मुख्य मजदूर 31 हैं। मुख्य मजदूरों की कोण की डिग्री बताएँ।
उत्तर:
कोण की डिग्री = \(\frac{31}{102}\) × 360 = 1090

प्रश्न 26.
दो तोरण (Ogive) से कम और ‘से अधिक’ एक दूसरे को M बिन्दु पर काटते हैं। माध्यिका (Meidan) निकालने के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर:
माध्यिका निकालने के लिए M बिन्दु से आधार रेखा पर लंब डालना चाहिए। आधार बिन्दु आधार रेखा को जिस बिन्दु पर काटेगा, वह बिन्दु माध्यिका प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को प्रस्तुत करने के लिए किस प्रकार का आरेख अधिक प्रभावशली है?

  1. वर्ष विशेष की मासिक वर्षा।
  2. धर्म के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या का संघटन।
  3. एक कारखाने में लागत-घटक।

उत्तर:

  1. काल श्रेणी आरेख।
  2. सरल दण्ड आरेख तथा
  3. वृत्त आरेख।

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प्रश्न 28.
जब वर्गान्तर असमान हैं तो आयत चित्र की ऊँचाई कैसे निर्धारित की जाती है?
उत्तर:
सबसे कम वर्गान्तर से वर्गान्तर जितना अधिक होगा, आयत की ऊँचाई के लिए उस वर्गान्तर की आवृत्ति उसी अनुपात से कम कर दी जाती है। मान लो एक वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर का दोगुना है तो ऐसी अवस्था में उसके आयत की ऊँचाई कर दी जाएगी। अर्थात् उसकी आवृत्तियाँ 6 हैं तो वह 3(6 ÷ 2) होंगी।

प्रश्न 29.
संचयी आवृत्ति के कितने रूप हो सकते हैं?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति के दो रूप हो सकते हैं –
से कम’ तथा ‘से अधिक’। ‘से कम’ ओजाइन नीचे से ऊपर दाईं ओर उठती है और ‘से अधिक’ ओजाइब ऊपर से नीचे की ओर दाईं ओर ढालू होती है।

प्रश्न 30.
आयत चित्र बनाने के लिए समावेशी पर आधारित श्रृंखला को अपवर्ती वर्ग पर आधारित श्रृंखला में क्यों परिवर्तित करते हैं?
उत्तर:
समावेशी वर्ग पर आधारित शृंखला में अंतर होता है और आवृत्ति चित्र बनाने के लिये निरंतरता चाहिए। अतः निरन्तरता प्राप्त करने के लिए हम समावेशी वर्ग पर आधारित श्रृंखला को अपवर्जी वर्ग पर आधारित श्रृंखला में परिवर्तित करते हैं।

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प्रश्न 31.
ओजाइब का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
ओजाइब का दूसरा नाम संचयी आवृत्ति वक्र या तोरण है।

प्रश्न 32.
दोनों ओजाइब की विशेष विशेषता क्या है?
उत्तर”
दोनों ओजाइब जिस बिन्दु पर एक दूसरे को काटते हैं उस बिन्दु से हमें माध्यिका प्राप्त होती है।

प्रश्न 33.
सरल दंड आरेख द्वारा कितने चरों को प्रदर्शित किया जा सकता है?
उत्तर:
सरल दंड आरेख द्वारा केवल एक ही चर को प्रदर्शित किया जा सकता है।

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प्रश्न 34.
किस प्रकार के दंड आरेख का हमें प्रयोग करना होगा, यदि हमें विभिन्न वर्षों के एक से अधिक चरों के मूल को प्रदर्शित करना हो तो?
उत्तर:
बहुदंड आरेख को।

प्रश्न 35.
हमें एक देश के आयात तथा निर्यात के मूल्यों को दंड आरेख द्वारा प्रदर्शित करना है। इसके लिये हम किस प्रकार के दंड आरेख का प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
बहुदंड आरेख का।

प्रश्न 36.
एक उदाहरण दीजिए जहाँ सरल दंड आरेख का प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
जब विभिन्न जनगणना वर्षों में एक ही राज्य की जनसंख्या प्रदर्शित करनी हो।

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प्रश्न 37.
सरल दंड आरेख तथा बहुदंड आरेख में एक अंतर बताएँ।
उत्तर:
सरल दंड आरेख में एक ही चर के मूल्यों को विभिन्न वर्षों में व्यक्त किया जाता है। जबकि बहु दंड आरेख में एक से अधिक चर के मूल्यों को प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 38.
समय कालिक श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
समय कालिक श्रृंखला वह श्रृंखला है जहाँ किसी चर का मूल्य समयानुसार दिया हो, जैसे-विभिन्न वर्षों के कृषि उत्पादन के आँकड़े।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आंकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के आरेखीय प्रस्तुतीकरण के लाभ (Avantages of diagrammatic presentation of data)

  1. आरेख आँकड़ों को प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली साधन हैं, क्योंकि आरेख रोचक तथा आकर्षक होते हैं।
  2. आरेख आँकड़ों को सरल तथा बोधगम्य बनाते हैं।
  3. ये समंकों के तुलनात्मक अध्ययन में सहायक होते हैं।
  4. इनका प्रयोग उत्पादन, व्यापार, वाणिज्य, परिवहन आदि के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है।

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प्रश्न 2.
दंड आरेख की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
विशेषताएँ (Features) –

  1. दंड आरेख एकपक्षीय (One Dimensional) होते हैं।
  2. दंड क्षैतिज (Horizontal) तथा शीर्ष (Vertical) दोनों रूप में हो सकते हैं।
  3. दंड आरेखों को आकर्षक बनाने के लिए सभी दंडों में रंग भर दिया जाता है।
  4. दंड आरेख कई प्रकार के होते हैं-जैसे सरल दंड आरेख, बहु दंड आरेख, घटक दंड आरेख, प्रतिशत घटक दंड आरेख आदि।

प्रश्न 3.
परिमाणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 7

प्रश्न 4.
गुणात्मक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 8

प्रश्न 5.
समयानुसार या कालिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
1995-2000 में एक चाय की दुकान की वार्षिक बिक्री –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 9

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प्रश्न 6.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख बनाने की विधि (Method of constructing a piediagram) –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत रूप में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में दिया गया है तो यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को.3.6 से गुणा करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त बनाया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।
  6. वृक्त आरेख के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरा जाता है।

प्रश्न 7.
तिशत घटक दंड आरेख तथा घटक दंड आरेख में अंतर बताएँ।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 10

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प्रश्न 8.
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निहित चरण लिखें।
उत्तर:
प्रतिशत घटक दंड आरेख बनाने की विधि में निम्नलिखित चरण होते हैं –

  1. इन्हें बनाने के लिए पहले सभी समय (वर्षों आदि) से सम्बन्धित जोड़ को 100 मान लिया जाता है।
  2. दूसरे, सभी विभागों को प्रतिशत रूप में बदल दिया जाता है।
  3. चौथे, अलग-अलग समय (वर्षों) के अलग-अलग दंड बनाए जाते हैं, जिनकी ऊँचाई समान अथवा 100 होती है। फिर बाद में संचयी प्रतिशत के बराबर विभिन्न विभागों को काट दिया जाता है और उनमें अलग-अलग रंग भर दिया जाता है।

प्रश्न 9.
वृत्त आरेख बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
वृत्त आरेख की विधि के चरण इस प्रकार हैं –

  1. प्रत्येक दिए गए मूल्य को कुल मूल्य के प्रतिशत में परिवर्तित किया जाता है। यदि मूल्य पहले से ही प्रतिशत में हो तब यह चरण छोड़ दिया जाता है।
  2. प्रतिशत मूल्य को 3.6 से गुण करके उस मूल्य का कोण ज्ञात किया जाता है।
  3. पेंसिल और परकार की सहायता से एक उचित वृत्त का निर्माण किया जाता है।
  4. वृत्त में प्रत्येक मद का कोण बनाया जाता है।
  5. वृत्त आरेख. के प्रत्येक खंड में अलग-अलग रंग भरे जाते हैं।

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प्रश्न 10.
सामान्य प्रयोग में लाए जाने वाले आरेखों के विभिन्न रूप लिखें।
उत्तर:
सामान्य प्रयोग में लाए जानेवाले आरेखों के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं –
1. ज्यामितीय आरेख (Geometric diagrams):

  • दंड आरेख
  • बहुदंड आरेख
  • वृत्तीय आरेख

2. आवृत्ति आरेख (Frequency diagrams):

  • आयत चित्र
  • आवृत्ति बहुभुज
  • आवृत्ति वक्र तथा
  • तोरण

3. गणितीय समय ग्राफ (Arithmetic Time Graph):
काल श्रेणी आरेख।

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प्रश्न 11.
सामान्य उद्देश्य सारणी तथा विशेष उद्देश्य सारणी में अंतर बताएँ।
उत्तर:
सामान्य उद्देश्य सारणी का कोई महत्त्व नहीं होता। ये सामान्यतः प्रकाशित प्रतिवेदनों (Report) के पीछे दी जाती है। विभिन्न व्यक्ति इसका प्रयोग अपने ढंग से करते हैं। इसके विपरीत विशेष उद्देश्य सारणी किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई गई होती है। यह प्रायः संक्षिप्त होती है।

प्रश्न 12.
स्थानिक वर्गीकरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 11

प्रश्न 13.
घटक दण्ड आरेख का प्रयोग कब किया जाता है? इस आरेख को बनाने की विधि लिखें।
उत्तर:
जब तथ्यों के जोड़ और उसके विभिन्न विभागों (जैसे-कॉलेज के विद्यार्थियों और उसके विभिन्न घटकों की संख्या जैसे लड़के तथा लड़कियों आदि) का प्रदर्शन करना हो तो घटक दण्ड आरेख का प्रयोग किया जाता है।

बनाने की विधि (Method of preparing):
पहले समय अथवा स्थान के आधार पर, तथ्यों के जोड़ के आधार दंड बनाए जाते हैं। बाद में प्रत्येक खंड के विभिन्न भागों में अलग-अलग रंग भरा जाता है परंतु एक वस्तु से संबंधित सभी दंडों के भागों में एक ही रंग भरा जाता है।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण से हम एक आयत चित्र बनाना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए हम वर्गान्तर में क्या परिवर्तन करेंगे?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 12
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 13

प्रश्न 15.
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) का क्या अभिप्राय है? एकल, द्वि तथा बहु जनसंख्या समझाएँ।
उत्तर:
सांख्यिकी में जनसंख्या (समग्र) से अभिप्राय अनुसंधान क्षेत्र की सभी इकाइयों से होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी पाठशाला में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्तर का अध्ययन करना चाहते हैं तो पाठशाला के सभी विद्यार्थी सांख्यिकी की दृष्टि से ‘जनसंख्या’ कहलाते हैं। जनसंख्या को समग्र भी कहते हैं। रोसन्दर (Rosander) के अनुसार, “समग्र विचाराधीन विषय इकाइयों का योग होता है।”

एकल समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित केवल एक चर। जैसे जनसंख्या केवल आय। द्वि-समग्र से अभिप्राय है समग्र से सम्बन्धित दो चर। उदाहरण के लिए एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन। बहु जनसंख्या से अभिप्राय समग्र के विषय से सम्बन्धित बहुत सारी जानकारी के आँकड़े। उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपभोग की सभी मदों का व्यय।

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प्रश्न 16.
अविछिन्न तथा खंडित (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाइएँ।
उत्तर:
अविछिन्न तथा विछिन्न चरों में अंतर (Difference between Continuous Series):
एक चर को विभिन्न चर उस समय कहा जाता है जब वह विस्तार में कोई भी मूल्य ले सकता है। उसका मूल्य 1, 2, 3 भी हो सकता है और = \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\), \(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊंचाई व भार तथा उनकी आय को अविछिन्न चर कहा जा सकता है तो इसे विछिन्न चर कहेंगे जैसे पूर्ण संख्या (whole number) को विछिन्न चर कहते हैं। जैसे-एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

प्रश्न 17.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण निरंतर का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना। चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आँकड़ों का आयत आरेख बनाएँ तथा बहुलक ज्ञात करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 14
उत्तर:
आँकड़ों का आवृत्ति आरेख बनाने से पहले हम संशोधित वर्ग बनाएँगे।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 15
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 16

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प्रश्न 2.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पर ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 17
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 18
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 19

प्रश्न 3.
नीचे दी गई आवृत्ति वितरण के आधार पेर ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वक्र बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 20
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 21
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प्रश्न 4.
नीचे दी गई सूचना के आधार पर आरेखीय विधि द्वारा माध्यिका का निर्धारण करें। (Calculate median graphically with the help of following date)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 23
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 24
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित सूचना को एक वृत्त आरेख में दिखाएँ –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 26
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण part - 2 img 27
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प्रश्न 6.
एक सारणी के मख्य भागों का वर्णन करें।
उत्तर:
एक सारणी के मुख्य भाग (Main parts ofa Table):
एक सांख्यिकी सारणी के मुख्य भाग इस प्रकार हैं –
1. सारणी की संख्या (Table Number):
सारणी को सबसे पहले एक संख्या (सारणी संख्या) अर्थात 1, 2, 3 …. आदि की जानी चाहिए। एक अध्ययन में तालिकाएं जिस क्रम में बनाई जाती हैं उसी के अनुसार उनकी संख्या दी जानी चाहिए। सारणी संख्या से उन्हें ढूँढ़ने में सहायता मिलती है तथा उनका उल्लेख सरलता से किया जा सकता है।

2. शीर्षक (Title):
प्रत्येक सारणी में संख्या के बाद सबसे ऊपर उसका शीर्षक दिया जाना चाहिए। शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखा जाना चाहिए ताकि तुरंत ही ध्यान आकर्षित कर सके। शीर्षक सरल, स्पष्ट और छोटा होना चाहिए। शीर्षक इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पढ़ते ही ज्ञात हो जाए कि –

  • आँकड़े किस समस्या (What) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस समय (When) से संबंधित हैं।
  • ऑकड़े किस स्थान (Where) से संबंधित हैं।
  • आँकड़ों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है। एक अच्छा शीर्षक छोटा, परंतु पूर्ण होता है।

3. शीर्ष टिप्पणी (Head Note):
यदि शीर्षक से पूरी सूचना प्रकट नहीं होती तो उसके तुरंत नीचे शीर्ष टिप्पणी (Head Note) दी जाती है। इसमें एक अतिरिक्त सूचना दी जाती है जो शीर्षक में नहीं दी जा सकी। उदाहरण के लिए शीर्षक टिप्पणी में यह बताया जाता है कि आँकड़े किस इकाई में व्यक्त किए गए हैं। उन्हें कोष्ठक (Brackets) में लिखा जाना चाहिए।

4. पंक्ति शीर्षक (Stubs):
सारणी की पंक्तियों (Rows) के शीर्षक को पंक्ति शीर्षक कहा जाता है। इसके द्वारा सरल भाषा में ज्ञात होता है कि पंक्तियों द्वारा क्या दिखाया जा रहा है।

5. उपशीर्षक (Caption):
सारणी के स्तंभों (Columns) के शीर्षक को उपशीर्षक कहा जाता है। इसके शीर्षक से यह ज्ञात होता है कि कॉलम मद की किस विशेषता को बता रहे हैं।

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प्रश्न 7.
अंतर बताएँ।

  1. दंड आरेख तथा (Bar diagram)
  2. आयत चित्र (Histogram)

उत्तर:
दंड आरेख तथा आयत चित्र में अंतर (Difference between bar diagram and histogram):
दंड ओरख वह आरेख है जिसमें आँकड़ों को दंडों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। दंडों की ऊँचाई चरों के मूल्यों पर निर्भर करती है जबकि इनकी चौड़ाई केवल आरेख को आकर्षक बनाने के लिए ली जाती है। दंडों के बीच दूरी समान होती है।

ये सामान्यतः व्यक्तिगत मूल्यों, कालश्रेणियों, भौगोलिक श्रेणियों को प्रदर्शित करने में प्रयोग में लाई जाती हैं। इसके विपरीत आयत चित्र आवृत्ति वितरण को प्रस्तुत करता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को आवृत्तियों के समीपवर्ती (Adjacent) आयतों में प्रकट किया जाता है। इसमें वर्ग अन्तरालों को X अक्ष पर लेते हैं तथा आवृत्तियों को Y अक्ष पर लेते हैं।
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प्रश्न 8.
आरेखों द्वारा सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आरेखों के लाभ (Advantages of Diagrams):
यह सर्वविदित है कि जैसे-जैसे समंकों का जमघट अधिक होता जाता है, उन्हें समझने में असुविधा होती है तथा समय लगता है। जनसाधारण अंकों में रुचि नहीं रखते हैं। यदि हम अपनी बातों को अंकों के द्वारा समझने की बजाय किसी अन्य सरल साधन द्वारा समझाने का प्रयत्न करें, जहाँ अंकों का कम-से-कम प्रयोग किया गया हो, तो हमारी बात जनसाधारण के लिए सरल, समझने तथा याद करने के योग्य हो जाती है। आरेखों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –

1. सरल (Simple):
आरेखों की सहायता से जटिल आँकड़ों को सरल तथा सुबोध बनाया जा सकता है।

2. समझने में सुगमता (Easy to understand):
आरेखों को समझने के लिए विशेष शिक्षा या ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती।

3. समय व श्रम की बचत (Saving of time and labour):
आरेखों की सहायता से आँकड़ों को समझने में बहुत कम समय लगता है।

4. अधिक समय तक स्मरणीय (Memorable for a long time):
अंकों को कुछ समय बाद भूल जाना स्वाभाविक है, लेकिन आरेखों द्वारा आँकड़ों की एक ऐसी छाप मस्तिष्क पर पड़ जाती है कि आँकड़े बहुत दिनों तक याद रहते हैं।

5. आरेख आकर्षक होते हैं (Diagrams are attractive):
अंकों की अपेक्षा रेखाचित्र अधिक आकर्षक होते हैं। इसलिए मेलों, प्रदर्शनियों आदि में जनता को प्रभावित करने के आरेखों का प्रयोग अधिक उपयोगी होता है।

6. तुलना में सहायक (Easy to comprison):
रेखाचित्रों की सहायता से सांख्यिकी सामग्री में तुलना बहुत सरल हो जाती है। उदाहरणार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के पिछले वर्ष और इस वर्ष के परीक्षा परिणामों की तुलना रेखाचित्रों द्वारा बड़े सुचारु रूप से की जा सकती है।

7. सूचना प्रसार में सहायक (Publicity):
रेखाचित्रों द्वारा सूचना प्रसार आसानी से किया जा सकता है।

8. सृजनात्मक मनोरंजन (Creative entertainment):
रेखाचित्र सूचना प्रदान करने के साथ-साथ मनोरंजन भी करते हैं। अंकों को देखने से जहाँ आँखें तिलमिला जाती हैं, वहाँ आरेखों को देखने से रुचि बढ़ती है और मनोरंजन भी हो जाता है।

9. सार्वभौमिक उपयोगिता (Universal Utility):
विभिन्न लाभों के कारण अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकी रेखाचित्रों का बहुत प्रयोग होता है। व्यापार, वाणिज्य तथा विज्ञापन के क्षेत्र में से बहुत उपयोगी और महत्त्वपूर्ण होते हैं। इस प्रकार रेखाचित्रों की उपयोगिता सार्वभौमिक है। ये सभी क्षेत्रों में नवजीवन प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 9.
सारणीयन के लाभ लिखें।
उत्तर:
सारणीयन के लाभ (Advantages of tabulation):

1. समझने में सरलता (Easy to understand):
सारणी से आंकड़ों को सरलता से समझा जा सकता है, क्योंकि सारणी आंकड़ों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है।

2. संक्षिप्त (Simple):
सारणी द्वारा अव्यवस्थित आंकड़ें कम-से-कम स्थान में इस प्रकार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं कि उनसे अधिक-से-अधिक सूचना प्राप्त हो सके।

3. तुलना में सुविधा (Convenient in comparision):
सारणी द्वारा आंकड़ों को विभिन्न वर्गों में प्रस्तुत किया जाता है। अतः उनकी तुलना करना सुविधाजनक हो जाता है।

4. प्रस्तुतीकरण में सहायक (Helpful Presentation):
सारणी की सहायता से ही आँकड़ों को आरेखों तथा रेखा-आरेखों द्वारा आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कराना संभव हो जाता है।

5. विश्लेषण में सहायक (Helpful in Analysis):
सारणी द्वारा आँकड़ों के विश्लेषण में सहायता मिलती है। आँकड़ों को सारणी के रूप में व्यवस्थित करके ही माध्य (Mean), उपकिरण (Dispersion) आदि ज्ञात किए जाते हैं।

6. आँकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं (Clarifies the Chief Charactetistic of Data):
सारणी द्वारा आकड़ों की मुख्य विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं। आँकड़ों को याद रखना भी सरल हो जाता है।

7. बचत (Economic):
सारणी द्वारा आँकड़ों को कम स्थान में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप समय तथा कागज की बचत होती है। आवश्यक आँकड़ों को आसानी से ज्ञान किया जा सकता है।

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प्रश्न 10.
आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण में विवरणात्मक तथा सारणीयन विधियों की तुलना करें।
उत्तर:
आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण कई विधियों से किया जा सकता है। उनमें दो विधियाँ विवरणात्मक विधि तथा सारणीयन विधि है। विवरणात्मक विधि से आँकड़ों का विवरण दिया जाता है जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2002 के अनुसार भारत में 2000-2001 में खाद्यान्नों का उत्पादन 2000 मिलियन टेन था। जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमशः 85.5, 69.0 और 45.5 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42.75%, 34.50% और 22.75% था।

सारणीयन विधि में ऊपर दिए आँकड़ों को एक सारणी में प्रस्तुत किया जाता है ताकि आंकड़ों को सरलता से समझे जा सके। ऊपर दिए गए तथ्यों को सारणी में निम्न प्रकार प्रस्तुत कर सकते है –
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 11.
निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए। (Write short notes on)
(अ) विवतर्मुखी वर्ग
(ब) असमान वर्गान्तर
(स) संचयी आवृत्ति वितरण।
उत्तर:
(अ) विवतर्मुखी वर्ग-विवतर्मुखी वर्ग वह है जिसमें या तो निम्नतम वर्ग की निम्न सीमा या उच्चतम वर्ग की ऊपरी सीमा को छोड़ा है। इस प्रकार के वर्गों का प्रयोग बहुत कम होता है, क्योंकि विवतर्मुखी वर्ग का मध्य मूल्य नहीं ज्ञात कर सकते। उदाहरणार्थ – 10 से कम, 10-20, 20-30, 30-40, 40 और अधिक।

(ब) असमान वर्गान्तर-असमान वर्गान्तर से अभिप्राय ऐसी अखंडित श्रृंखला से है जिसमें वर्गों के बीच का अंतर एक समान नहीं होता। हम ऐसे वर्गों की आवृत्ति की तुलना नहीं कर सकते। आवृत्तियों की तुलना करने के लिए हम वर्गान्तरों को समान मानकर आवृत्तियों की पुनर्गणना द्वारा प्रत्येक वर्ग की आवृत्तियाँ ज्ञात करके तुलना करते हैं।

(स) संचयी आवृत्ति वितरण-जब विभिन्न मूल्यों की आवृत्तियों को क्रमशः जोड़कर रखा जाता है तो उसे संचयी आवृत्ति वितरण कहते हैं। स्पष्ट है कि अंतिम वर्ग की संचयी आवृत्ति सब वर्गों की आवृत्तियों का योगफल होता है। संचयी आवृत्ति वितरण को दो रूपों में व्यक्त किया जाता है –

  • से कम (Less than type)
  • से अधिक (More than type)।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 12.
संचयी आवृत्ति वितरण किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
संचयी आवृत्ति वितरण (Cumulative frequency distribution):
संचयी आवृत्ति वितरण उस आवृत्ति वितरण को कहते हैं, जिसमें आवृत्तियों को सरल विधि से वर्गानुसार अलग-अलग न लिखकर संचयी रूप में लिखा जाता है। इस प्रकार के आवृत्ति वितरण के अन्तर्गत केवल एक सीमा (निचली, ऊपरी) दी जाती है। यदि वर्ग समूह में निचली सीमा के आधार पर संचयी आवृत्ति दी गई है तो ‘से कम’ शब्दों का प्रयोग लिख कर किया जाता है। दोनों पर की गई संचयी आवृत्तियों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं।
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संचयी आवृत्ति वितरण का महत्त्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाता है:

  1. संचयी आवृत्ति वितरण की सहायता से हम किसी दिए गए चर से कम या अधिक मूल्य ज्ञात कर सकते हैं।
  2. विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है।
  3. किसी वर्गान्तर विशेष में सम्मिलित मदों की संख्या भी ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 13.
आयत बहुभुज बनाने के लिए असमान वर्गान्तर पर आवृत्तियों का संशोधन क्यों किया जाता है? आवृत्तियों को संशोधित करने की विधि लिखो।
उत्तर:
बड़े वर्गान्तर को न्यूनतम वर्गान्तर के बराबर लाने के लिए आवृत्तियों में संशोधन किया जाता हैं। मान लो न्यूनतम वर्गान्तर 10 है और उच्च वर्ग (40 – 70) में वर्गान्तर 30 है और उसकी आवृत्ति 15 है। अत: 40 – 70 वर्ग के तीन वर्ग 40 – 50, 50 – 60 तथा 60 – 70 बनते हैं और उनकी आवृत्तियाँ 15 तीन वर्गों में बँट जाती हैं और प्रत्येक वर्ग की आवृत्ति 5(5 + 5 + 5) होती है। आवृत्तियों में संशोधन करने के लिए न्यूनतम वर्गान्तर लेते हैं। कोई वर्गान्तर न्यूनतम वर्गान्तर किया जाता है –
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 14.
निम्नलिखित आँकड़ों को एक आयत चित्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक आयत चित्र बनाइए।
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उत्तर:
प्रश्न में वर्गान्तर समावेशी विधि (Inclusive method) द्वारा दिए गए हैं। अतः इनमें पहले संशोधन करना आवश्यक होगा ताकि समीपवर्ती आयतें बन जाएँ।
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प्रश्न 16.
भारत सरकार को पिछली तीन वर्षों के दौरान करों से प्राप्त आगम के बारे में निम्न जानकारी उपलब्ध है –
वर्ष 1997 – 98 में सरकार को कर-आगम के रूप में कुल 77,693 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई। इसमें से 11,165 करोड़ रुपए प्रत्यक्ष करों तथा 66,528 करोड़ रुपए परोक्ष करों के रूप में प्राप्त हुए। वर्ष 1998-99 में यह राशि क्रमशः 89,303 करोड़ रुपए, 13,397 करोड़ रुपए तथा 75,906 करोड़ रुपए थी। 1999-2000 में कुल राशि। 1.02,896 करोड़ रुपए तथा प्रत्यक्ष तथा परोक्ष करों का योगदान क्रमशः 15,338 करोड़ रुपए तथा 87,558 करोड़ रुपए था।
उत्तर:
भारत सरकार को करों से प्राप्त आगम
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प्रश्न 17.
भारत में चीनी निर्यात से आय के आँकड़े नीचे दिए गए हैं। इन्हें निरपेक्ष कालिक आरेख में प्रस्तुत कीजिए –
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उत्तर:
X अक्ष पर वर्ष और Y अक्ष पर आय (करोड़ रुपए में) प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक वर्ष के सामने आय के चिह्नों को लगाइए, फिर चिह्नों को छूती हुई रेखा बनाइए। इस आरेख को निरपेक्ष कालिक आरेख कहते हैं, जैसा कि नीचे आरेख में दिखलाया गया है।
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प्रश्न 18.
द्विवीय आरेख (Two dimentional) किसे कहते हैं? नीचे दो परिवारों के आय-व्यय सम्बन्धी आँकड़ें दिए गए हैं। उन्हें द्विवीम आरेख द्वारा निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष रूप में दिखाएँ।
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उत्तर:
द्वितीय आरेख उस रेखाचित्र को कहते हैं जिसमें लम्बाई के साथ-साथ चौड़ाई को भी दिखाया जाता है। चौड़ाई कुल मूल्यों के अनुपात में होती है। इन्हें निरपेक्ष (Absolute) तथा सापेक्ष (Relative) दो रूपों में दिखाया जा सकता है। निरपेक्ष में दिए गए मूल्यों को आरेख में प्रदर्शित करते हैं जबकि सापेक्ष द्विविम आरेख के मूल्यों को प्रतिशत में बदलकर प्रतिशत खंड़ों में काटकर लिखते हैं।

सापेक्ष द्विविम आरेख (Relative Two Dimensional):
तुलनात्मक अध्ययन के लिए मूल्यों को प्रतिशत में बदल लेते है। इस प्रकार ऊँचाई समान हो जाती है और चौड़ाई कुल व्यय के अनुपात में रखी जाती है।
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निरपेक्ष द्विविम आरेख (Absolute Two Dimensional):
आय का अनुपात 500:1000 = 1:2
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Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 4 आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

प्रश्न 19.
भारत में 1951, 1961, 1971, 1981 और 1991 तथा 2001 की जनगणना में कुल जनसंख्या क्रमशः 361, 38, 439, 23, 548, 16, 683.3, 843.9 तथा 1020 मिलियन थी। कुल जनसंख्या में पुरुषों की संख्या क्रमश: 185.68, 226.29, 284.05, 353.9, 441.8 तथा 530 मिलियन थी तथा स्त्रियों की संख्या क्रमशः 175.70, 212.94, 264.11, 329, 4, 402.1 तथा 490 मिलियन थी। इन आँकड़ों को उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या (Population of India) दस लाख में।
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प्रश्न 20.
भारत में 2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन 172.25 मिलियन टन था, जिसमें चावल, गेहूँ और अन्य फसलों का उत्पादन क्रमश: 70, 76, 53.99 और 45.0 मिलियन टन था। कुल उत्पादन में इनका प्रतिशत योगदान क्रमशः 42, 0, 32.0 तथा 26.0 था। दी गई सूचना को एक उपयुक्त सारणी में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
2004 – 2005 में खाद्यान्नों का उत्पादन
(Production of Food-grain during 2004 – 2005):
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित विवरण को एक तालिका में प्रदर्शित करें भारत की जनगणना 2001 के अनुसार भारत की जनसंख्या बढ़कर 102 करोड़ हो गई, जिसमें 49 करोड़ महिलाएँ हैं और 53 करोड़ पुरुष हैं। 74 करोड़ लोग ग्रामीण भारत में रहते हैं और केवल 28 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं। सम्पूर्ण भारत में 62 करोड़ लोग काम करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और 47 करोड़ लोग काम करने वाले हैं। शहरी जनसंख्या में 19 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी नहीं हैं और 9 करोड़ काम करने वाले कर्मचारी हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 74 करोड़ लोगों में 31 करोड़ काम पर लगे हुए हैं। इस सूचना को एक तालिका द्वारा दिखाएँ।
उत्तर:
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वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
समंकों को खानों एवं पंक्तियों में व्यवस्थित करने को कहते हैं –
(a) वर्गीकरण
(b) सारणीयन
(c) चित्रमय प्रदर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणीयन

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प्रश्न 2.
एक अच्छी सारणी की विशेषता है –
(a) सुन्दर
(b) स्वर्य परिचायक
(c) संक्षिप्त
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 3.
निम्न में कौन अधिक प्रभावशाली होती/होता है –
(a) सारणी
(b) त्रिमय प्रदर्शन
(c) वर्गीकरण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रिमय प्रदर्शन

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प्रश्न 4.
दो या अधिक चरों के मूल्यों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है –
(a) दण्ड चित्र
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र
(c) अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बहुगुणी दण्ड चित्र

प्रश्न 5.
चित्रमय प्रदर्शन की उपयोगिता है –
(a) सार्वभौमिक
(b) राष्ट्रीय
(c) स्थानीय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सार्वभौमिक

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प्रश्न 6.
सारणी स्रोत लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सारणी के नीचे

प्रश्न 7.
सारणी शीर्षक को प्रायः लिखा जाता है –
(a) कलेवर में
(b) सारणी के ऊपर
(c) सारणी के नीचे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सारणी के ऊपर

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प्रश्न 8.
चित्रमय प्रदर्शन का सबसे सरल रूप है –
(a) सरल दण्ड चित्र
(b) वृत्त चित्र
(c) चित्र व लेख
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सरल दण्ड चित्र

प्रश्न 9.
कालिक चित्र में आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) यथातथ्य रूप में
(b) प्रतिशत में
(c) अनुपात में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्रतिशत में

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प्रश्न 10.
आवृत्ति वितरण आयत चित्र बनाए जाते हैं –
(a) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(b) अखण्डित श्रृंखला में
(c) खण्डित श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अखण्डित श्रृंखला में

प्रश्न 11.
आवृत्ति आयत चित्र में आवृत्तियों का दर्शाया जाता है –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

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प्रश्न 12.
आवृत्ति आयत चित्र में वर्गान्तराल दर्शाए जाते हैं –
(a) x – अक्ष पर
(b) y – अक्ष पर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) y – अक्ष पर

प्रश्न 13.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय ध्यान रखा जाता है –
(a) उपयुक्त शीर्षक
(b) पैमाना
(c) कृत्रिम आधार रेखा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

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प्रश्न 14.
आवृत्ति आयत चित्र बनाते समय x – अक्ष पर दर्शाते हैं –
(a) वर्ग अंतराल
(b) आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वर्ग अंतराल

प्रश्न 15.
आवृत्ति वक्र के अंदर क्षेत्र समानुपाती है –
(a) आवृत्तियों के
(b) वर्ग अंतरालों के
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्तियों के

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प्रश्न 16.
काल श्रेणी आरेख के x-अक्ष पर दर्शाया जाता है –
(a) चर मूल्य
(b) समय
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समय

प्रश्न 17.
समावेशी श्रृंखला से आयत चित्र बनाने के लिए इस श्रृंखला को दिलाते हैं –
(a) अपवर्जी श्रृंखला में
(b) खंडित श्रृंखला में
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अपवर्जी श्रृंखला में

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प्रश्न 18.
‘से अधिक’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ऋणात्मक

प्रश्न 19.
‘से कम’ आवृत्ति वक्र का ढाल होता है –
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) x – अक्ष के समांतर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) धनात्मक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?

1. एक वर्ग मध्य-बिन्दु बराबर है –
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के।
(ख) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के।
(ग) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्नं वर्ग सीमा के अनुपात के।
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के औसत के

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2. दो चरों के बारम्बारता वितरण को इस नाम से जानते हैं –
(क) एक विचर वितरण
(ख) द्वितर वितरण
(ग) बहुचर वितरण
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) द्वितर वितरण

3. वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन आधारित होता है –
(क) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर
(ख) उच्च वर्ग सीमाओं पर
(ग) निम्न वर्ग सीमाओं पर
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर
उत्तर:
(घ) वर्ग के मध्य-बिन्दुओं पर

4. अपवर्जी विधि के अंतर्गत –
(क) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते हैं।
(ख) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
(ग) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।
(घ) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित करते हैं।
उत्तर:
(ग) किसी वर्ग की उच्च सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित नहीं करते।

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5. परास का अर्थ है –
(क) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ख) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच का अंतर
(ग) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का औसत
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात
उत्तर:
(घ) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात।

प्रश्न 2.
वस्तुओं के वर्गीकरण का क्या कोई लाभ हो सकता है। अपने जीवन से उदाहरण लेकर समझाएँ।
उत्तर:
वस्तुओं के वर्गीकरण से कई लाभ होते हैं। इस बात को मैं अपने जीवन से उदाहरण देकर समझाता हूँ। पिछले वर्ष मैं दसवीं कक्षा का विद्यार्थी था। मैं पढ़ाई में तो होशियार था, परंतु अन्य बातों में बहुत ही लापरवाह था। मेरा पढ़ने का एक अलग कमरा था। कमरे में मेरी किताबें तथा कापियाँ इधर-उधर बिखरी थीं। पेन, पेंसिलें तथा अन्य पाठ्य-सामग्री इधर-उधर बिखरी रहती थीं, विज्ञान की कुछ पुस्तकें अलमारी में होती थीं और कुछ इधर-उधर पड़ी रहती थीं। अन्य विषय की पुस्तकों तथा अभ्यास पुस्तिकाओं का भी यही हाल था। पुस्तकें जल्द फट जाती थीं।

कापियों तथा किताबों को तलाश करने में काफी समय लगता था और परेशानी भी बहुत होती थी। कई बार किताबें ढूँढते-ढूँढ़ते इतना समय बरबाद हो जाता था कि पढ़ने का मन भी नहीं करता था। एक बार मेरे घर मेरा एक मित्र आया। वह पढ़ाई में कमजोर था। वह कुछ सवाल समझने मेरे घर पर आया। जब वह मेरे अध्ययन-कक्ष में आया तो हैरान हो गया। उसने मुझे बताया कि तुम्हारा अध्ययन तो कबाड़ बना हुआ है। उसने मेरी पुस्तकों तथा अध्ययन-सामग्री का वर्गीकरण किया। उनको उचित स्थान पर रखा। तब से मेरी आदत वस्तुओं को अपने स्थान पर रखने की बन गई, अब मुझे किसी विषय की कोई पुस्तक पढ़नी हो तो वह पुस्तक बड़ी सरलता से मिल जाती है तथा समय नष्ट नहीं होता। पुस्तक तलाश करने में कोई।

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प्रश्न 3.
चर क्या है? सतत तथा विविक्त चरों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
चर (Variable):
चर वह संख्या है जिसका मान परिवर्तित होता रहा है (A Variable is one that takes Chaniging Values) जैसे:
पिछले दस वर्षों में भारत में खाद्यान्न का उत्पादन, किसी स्थान का विभिन्न समयों पर तापमान, पाशा फेंकने पर पाया गया अंक, सिक्का उछालने पर प्राप्त परिणाम इत्यादि। परिवर्तन के आधार पर चरों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है –
(क) सतत (Continuous)
(ख) विविक्त (Discrete)

सतत चर (Continuous Variables):
सतत चर का कोई भी संख्यात्मक मान हो सकता है। यह पूर्णांक मान (0, 1, 2, 3, 4, …..) भिन्नात्मक मान (1/2, 3/4, 911) तथा वे मान जो यथातय भिन्न नहीं हैं (\(\sqrt{2}\), \(\sqrt{3}\), \(\sqrt{17}\) इत्यादि) हो सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए एक छात्र का कद 80-160 सेमी. तक बढ़ता है, तो उसके कद के मान इसके बीच आने वाले सभी मान हो सके हैं, जैसे-90 सेमी. 102.34 सेमी 156.49 सेमी. आदि। इस तरह ऊँचाई चर एक सतत चर है। सतत चर के अन्य उदाहरण भार, समय दूरी उपज आदि हैं।

विविक्त चर:
विविक्त चर केवल निश्चित मान लेते हैं। किन्हीं दो मानों के बीच एक अंतराल होता है। जैसे-पाशा फेंकने पर आया हुआ अंक। यह अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6 में से कोई भी एक हो सकता है। नतीजा 1 और 2 के बीच नहीं हो सकता, इसी तरह किसी कक्षा में छात्रों की संख्या एक विविक्त चर है। यह संख्या केवल पूर्णांक ही हो सकती है। उदाहरणस्वरूप, छात्रों की संख्या 30 और 31 के बीच 30.5 (माना) नहीं हो सकती। आधा छात्र निरर्थक होगा।

इसका मतलब यह कतई नहीं है कि विविक्त चर भिन्नांक मान नहीं ले सकते। माना कि ‘X’ एक चर है जिसके मान \(\frac{1}{4}\), \(\frac{1}{8}\), \(\frac{1}{16}\), \(\frac{1}{32}\) हैं। यह एक विविक्त चर है, क्योंकि X के मान इन भिन्नों में से हो सकते हैं, तथापि ये दो सन्निकट भिन्नों के बीच नहीं, हो सकते। विविक्त चरों के कुछ उदाहरण हैं – सड़क पर किसी समय वाहनों की संख्या, पासे पर आने वाली संख्या, दो सिक्के उछालने पर आए हुए सरों (Heads) की संख्या इत्यादि।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयोग किए गए ‘समावेशी’ तथा ‘अपवर्जी’ विधियों को समझाएँ।
उत्तर:
आँकड़ों को दो विधियों से वर्गीकृत किया जा सकता है –

  1. समावेशी विधि
  2. अपवर्जी विधि।

1. समावेशी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग के सभी मद ऊपरी सीमा सहित वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें एक वर्ग की ऊपरी सीमा पर अगले वर्ग की निचली सीमा नहीं बनाती। यह विधि निम्न तालिका से स्पष्ट हो जाएगी।
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2. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि के अनुसार वर्ग की अपनी सीमा छोड़ा कर वर्ग के सी मद वर्ग में शामिल होते हैं। इसमें वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होगी। जैसे-0-10 तक 10-20 में क्रमश: 10 और 20 शामिल वर्गों में तालिका है और पहले वर्ग की उच्च सीमा 10 दूसरे वर्ग की निम्न सीमा है। यह बात निम्न तालिका से और भी स्पष्ट हो जाएगी।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 2

ऊपरी दी गई जानकारी के आधार पर चाहे हम 0 से 30 तक अंकों के लिए 5 के वर्गान्तर के आधार पर 0 से आरंभ होकर शृंखला बनानी है तो दोनों विधियों के अनुसार निम्न प्रकार से अखंडित आवृत्ति होगा।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में 50 गृहस्थों द्वारा भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय को रुपए में दर्शाया गया है।
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  1. भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का विस्तार बताएँ।
  2. विस्तार को उचित वर्गान्तर की संख्या से विभाजित करें और लाभ का आवृत्ति वितरण ज्ञात करें।
  3. उन परिवारों की संख्या बताएँ जिनकी मासिक व्यय –

(क) 2,000 रुपए से कम हो
(ख) 3,000 रुपए से अधिक हो
(ग) 1,500 रुपए से 2,500 रुपए के बीच में हो
उत्तर:
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(क) 2,000 रुपए से कम मासिक खर्चे वाले परिवार = 19 + 14 = 33
(ख) 3,000 रुपए से अधिक मासिक खर्चे वाले परिवार = 2 + 1 + 2 + 1 = 6
(ग) 1,500 – 2,500 के बीच मासिक खर्च वाले परिवार = 14 + 6 = 20 परिवार

प्रश्न 6.
एक शहर में 45 परिवारों का घरेलू उपकरण के प्रयोग की संख्या के बारे में सर्वेक्षण किया गया। उनके द्वारा नीचे दिये उत्तरों के आधार पर आवृत्ति विन्यास तैयार करें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 7

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

प्रश्न 7.
वर्गीकृत आँकड़ों में सूचनाओं की हानि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अंकों को वर्गीकृत करने से आँकड़े सरलता से समझे जा सकते हैं। परंतु आँकड़ों को वर्गीकृत करने से आँकड़ों की विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती। एक बार आँकड़ों के समूहों में वर्गीकृत करने से व्यक्तिगत मदों का या अन्य सांख्यिकी का महत्त्व गणना में कम हो जाता है। मान लो हमारे पास 6 मद दिए गए हैं – 25, 25, 20, 22, 21 तथा 28। जब इन मदों को 20-30 आवृत्ति वितरण में वर्गीकृत करते हैं तो हमें केवल इस बात का ज्ञान होता है कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में 6 आवृत्तियाँ या मदें हैं।

परंतु इस बात का ज्ञान नहीं होता कि 20 – 30 आवृत्ति वितरण में कौन-कौन से मूल्य वाली मदें हैं। यह मान लिया जाता है कि इस वर्ग में जितनी भी मदें हैं, उनका मूल्य वर्गान्तर का मद मूल्य (यहाँ पर 25) मान लिया जाता है। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी गणना वर्गान्तर के मध्य मूल्य के आधार पर की जाती है न कि मदों के वास्तविक मूल्यों के आधार पर। इस तरह आँकड़ों के वर्गीकरण से मदों के वास्तविक मूल्य का पता नहीं चलता। इसे सूचनाओं की हानि कहते हैं।

प्रश्न 8.
क्या आप सहमत हैं कि वर्गीकृत आँकड़े मूले शुद्ध आँकड़ों से अच्छे हैं?
उत्तर:
शुद्ध या मूल आँकड़े अवर्गीकृत होते हैं। वे प्रायः इतने अधिक और बोझिल होते हैं कि उनको सँभालना भी कठिन हो जाता है। उन आँकड़ों से कोई निष्कर्ष निकालना बहुत ही कठिन कार्य है। यह बात निम्नलिखित 100 विद्यार्थियों के प्राप्तांक के लिए गए आँकड़ों से स्पष्ट होता है।
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अब यदि आप से पूछा जाए कि आप तालिका देखकर बताएं कि गणित में सबसे अधिक कितने अंक हैं। तब आपको पहले 100 विद्यार्थियों के अंकों को बढ़ते या घटते क्रम में लिखना होगा। यह सब बहुत ही कठिन कार्य है। यह काम और अधिक कठिन बन जाएगा जब 100 विद्यार्थियों के स्थान पर आपको 1000 विद्यार्थियों के प्राप्तांक दिए गए हों। जब हम इन्हीं अंकों को वर्गीकृत करते हैं तो सूचनाएँ सरलता से मिल जाएँगी। नीचे इन्हीं आँकड़ों का वर्गीकरण दिखाया गया है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 9

ऊपरी दी गई तालिका से हम बिना किसी कठिनाई के निष्कर्ष निकाल सकते हैं और तुलना कर सकते हैं। इस तालिका से हमें पता चलता है कि 6 विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके प्राप्तांक 70 80 के बीच में है। 90 से 100 के बीच अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 4 है। इस प्रकार हम देखते हैं कि वर्गीकृत आँकड़े शुद्ध या अवर्गीकृत आँकड़ों से श्रेष्ठ हैं।

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प्रश्न 9.
एकल-विचार तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
एकल चर तथा द्विचर आवृत्ति वितरण में अंतर (Differences betweena univarite and bivariate frequency distribution):
एक चर के आवृत्ति वितरण को एकल चर आवृत्ति वितरण (Univariate Distribution) कहते हैं। इसके विपरीत दो चरों के आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Freuency Distribution) कहते हैं। नीचे दोनों पद के आवृत्ति वितरण के उदाहरण दिए गए हैं।
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द्विचर आवृत्ति वितरण (Bivariate Frequency Distribution):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 11

इस तालिका से पता चलता है कि कुल 20 कंपनियाँ हैं। इनका विज्ञापन पर व्यय तथा उनके द्वारा विक्रय की मात्रा दी गई है। अर्थात् यहाँ दो चर हैं –

  1. विज्ञापन पर व्यय तथा
  2. विक्रय। विक्रय के मूल्य को विभिन्न स्तंभों में दिखाया गया है तथा विज्ञापन के व्यय को विभिन्न पंक्तियों में दिखाया गया है। तालिका से हमें पता चलता है कि तीन फर्म ऐसी हैं, जिनका विक्रय 135 – 145 लाख के बीच में है और उनका विज्ञापन पर व्यय 64-66 हजार रुपयों के बीच में है।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित तालिका की सहायता से 7 तक के वर्ग अंतराल में समावेशी विधि के अनुसार आवृत्ति वितरण बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 12
उत्तर:
आवृत्ति वितरण (Frequency Distribution):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 13

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संगठन Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
खुले सिरे वाले वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
खुले सिर वाले वर्ग होते हैं जिसमें या तो निम्न सिरा या ऊपरी सिर परिभाषित नहीं होता।

प्रश्न 2.
वर्ग का मध्य बिन्दु क्या है?
उत्तर:
उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा का औसत मूल्य का मध्य बिन्दु कहते हैं।

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पश्न 3.
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
दो चरों वाली आवृत्ति वितरण को द्विचर आवृत्ति वितरण कहते हैं।

प्रश्न 4.
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी गणना किस पर आधारित होती है?
उत्तर:
वर्गीकृत आँकड़ों की सांख्यिकी की गणना वर्ग के मध्य बिंदुओं पर आधारित होती है।

प्रश्न 5.
निम्न तालिका में से भारत की जनसंख्या का विस्तार बताइए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 14
उत्तर:
भारत की जनसंख्या का विस्तार = 102 – 35.7 = 67 करोड़।

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प्रश्न 6.
उत्पादन की दृष्टि से देशों के नाम बढ़ते हुए क्रम में लिखें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 15
उत्तर:
बढ़ते हुए क्रम में।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 16

प्रश्न 7.
निम्नलिखित की प्रकृति क्या है – “गुणात्मक या मात्रात्मक (परिणामात्मक)?

  1. राष्ट्रीयता
  2. साक्षरता
  3. धर्म
  4. लिंग
  5. वैवाहिक स्थिति आदि

उत्तर:
राष्ट्रीयता, साक्षरता, धर्म, लिंग, वैवाहिक, आदि की प्रकृति गुणात्मक है।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें आँकड़ों को उनकी विशेषताओं के आधार पर वर्गों में विभाजित किया जाता है।

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प्रश्न 9.
वर्गीकरण को कोई एक उद्देश्य लिखें।
उत्तर:
आँकड़ों के विशाल समूह को उनकी विशेषताओं के आधार पर संक्षिप्त करना ताकि उनकी समानताएँ व असमानताएँ स्पष्ट हो सकें।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत श्रेणी का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्तिगत श्रेणी वह श्रेणी है जिसमें प्रत्येक मद का माप अलग दिया जाता है।

प्रश्न 11.
अपवर्जी श्रेणी क्या है?
उत्तर:
अपवर्जी श्रेणी वह श्रेणी है जिसके अंतर्गत वर्ग की ऊपरी सीमाओं को छोड़कर अन्य सभी समान मदों को वर्ग समूह में सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 12.
20-30 वर्ग समूह का मध्यमूल निकालें।
उत्तर:
25

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित आँकड़ों के बढ़ते क्रम में क्रमबद्ध कीजिए। 18, 30, 15, 20, 10, 25, 19 तथा 28
उत्तर:
10, 15, 18, 19, 20, 25, 28 तथा 30

प्रश्न 14.
वर्ग अंतराल किसे कहते हैं?
उत्तर:
उच्च और निम्न वर्ग-सीमा के अंतर को वर्ग-अंतराल कहते हैं।

प्रश्न 15.
आवृत्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब किसी श्रेणी में मद का मूल्य बार-बार आता है तो हम उसे आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 16.
वर्ग सीमाएँ कितनी होती हैं?
उत्तर:
वर्ग सीमाएँ दो होती हैं।

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प्रश्न 17.
निम्न सीमा किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक वर्ग की पहली संख्या को निचली सीमा कहते हैं। जैसे 5-10 में 5 निम्न सीमा है।

प्रश्न 18.
प्रवेश पत्रिका के दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. प्रवेश पत्रिका से किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि को सरलता से ज्ञात किया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः भी किया जाता है।

प्रश्न 19.
शुद्ध आँकड़ों तथा व्यक्तिगत श्रृंखला में क्या अंतर है?
उत्तर:
शुद्ध आँकड़े मूल रूप में व्यक्त किए जाते हैं जबकि व्यक्तिगत श्रृंखला में मूल आँकड़ों को किसी क्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है।

प्रश्न 20.
विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब व्यक्तिगत आँकड़ों को बढ़ते हुए क्रम में या घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो उसे विन्यास कहते हैं।

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प्रश्न 21.
यदि समान अंतराल आवृत्ति वितरण में आँकड़े एक या दो वर्गों में केन्द्रित हैं तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
उस अवस्था में हम असमान अंतराल आवृत्ति का निर्माण करेंगे।

प्रश्न 22.
एकल संतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
वजन, समय तथा दूरी एकल सतत चरों के तीन उदाहरण हैं।

प्रश्न 23.
तीन ऐसे गुणों के नाम लिखो जो प्रकृति में परिणामात्मक हैं।
उत्तर:

  1. ऊँचाई
  2. आयु तथा
  3. आय

प्रश्न 24.
सतत चरों के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
छात्रों की ऊँचाई, विभिन्न वर्षों में भारत में चावल का उत्पादन, भार।

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प्रश्न 25.
एक आवृत्ति वितरण में साधारणतया कितने वर्ग होने चाहिए।
उत्तर:
एक आवृत्ति वितरण में कम-से-कम 5 और अधिक-से-अधिक 15 वर्ग होने चाहिए।

प्रश्न 26.
समावेशी विधि में किन वर्ग सीमाओं को शामिल किया जाता है।
उत्तर:
समावेशी विधि में वर्ग की दोनों सीमाओं-उच्च सीमा तथा निम्न सीमा को शामिल किया जाता है।

प्रश्न 27.
तुम्हारे छोटे भाई की पुस्तकें हमेशा अव्यवस्थित पड़ी रहती हैं? इससे उसे क्या परेशानी होती हैं?
उत्तर:
उसे पुस्तकों को तलाश करने में काफी समय गँवाना पडता है।

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प्रश्न 28.
वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
समान गुण वाले आँकड़ों की वर्गों और समूहों में व्यवस्थित करने की क्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 29.
आवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी मूल्य की बारम्बारता या पुनः को आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 30.
संख्यात्मक (परिणात्मक) वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण को संख्यात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

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प्रश्न 31.
गुणात्मक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
गुणों के आधार पर आँकड़ों के वर्गीकरण को गुणात्मक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 32.
भौगोलिक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
क्षेत्र के आधार पर वर्गीकरण को भौगोलिक वर्गीकरण कहते हैं।

प्रश्न 33.
समयानुसार आँकड़ों के वर्गीकरण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
काल-श्रेणी।

प्रश्न 34.
शुद्ध आँकड़ों को शुद्ध आँकड़ें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
मौलिक आँकड़ों को शुद्ध आँकड़े कहते हैं।

प्रश्न 35.
नीचे एक श्रृंखला दी गई हैं। इस श्रृंखला का नाम बताएँ – 19, 12, 15, 18, 20, 25, 20.
उत्तर:
यह व्यक्तिगत श्रृंखला है।

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प्रश्न 36.
वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
क्योंकि शुद्ध एवं अव्यवस्थित आँकड़ों का निर्वाचन एक जटिल क्रिया है।

प्रश्न 37.
क्रमबद्ध आँकड़ों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
इसका अभिप्राय आँकड़ों को एक क्रम (घटते या बढ़ते) में प्रस्तुत करना है।

प्रश्न 38.
संतत श्रृंखला किसे कहते हैं?
उत्तर:
संतत (अविच्छन) श्रृंखला उस श्रृंखला को कहते हैं जिसमें एक से दूसरे जुड़े हुए वर्गों की एक आवृत्ति व्यक्त की जाती है।

प्रश्न 39.
समायोजित वर्गचिह्न निकालने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
समायोजित वर्गचिह्न = (समायोजित उच्च सीमा + समायोजित निम्न सीमा) ÷ 2।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सतत तथा विविक्त (विछिन्न) चरों में अंतर बताएँ। उदाहरण देकर समझाएँ।
उत्तर:
सतत तथा विविक्त चरों में अंतर (Differences between Continuous Series and Discrete Series):
एक चर को संतत चर उस समय कहा जाता है जब वह \(\frac{1}{2}\), \(\frac{1}{3}\), \(\frac{3}{4}\),\(\frac{7}{8}\) अथवा \(\sqrt{2}\) या 1 – 414 …..। उदाहरण के लिए वस्तुओं की कीमतों, व्यक्तियों की ऊँचाई, भारत तथा उनकी आय को सतत चर कहा जा सकता है। इसके विपरीत यदि चर केवल एक विशेष मूल्य को ले सकता है तो इसे विविक्त चर कहेंगे जैसे-पूर्ण संख्या (Whole number) को विविक्त चर कहते हैं। एक श्रेणी में विद्यार्थियों की संख्या आदि।

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प्रश्न 2.
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
एक आदर्श वर्गीकरण के आवश्यक तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. वर्गीकरण का आकार उचित होना चाहिए।
  2. वर्गीकरण सरल होना चाहिए।
  3. उसमें निरन्तरता का गुण होना चाहिए।
  4. वह शुद्ध होना चाहिए।
  5. वह उद्देश्य के अनुकूल होना चाहिए।
  6. वह लोचदार होना चाहिए।
  7. उसमें व्यापकता का गुण होना चाहिए।
  8. उसमें सजातीयता का गुण होना चाहिए।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के वर्गीकरण के अपवर्जी विधि तथा समावेशी विधि समझाइए।
उत्तर:
अंकों का वर्गीकरण दो विधियों से कर सकते हैं –

  1. अपवर्जी विधि
  2. समावेशी विधि

1. अपवर्जी विधि (Exclusive Method):
इस विधि में वर्गान्तर की उच्च सीमा वाला मद उस वर्गान्तर में शामिल न होकर अगले वर्गान्तर में शामिल होगा। वर्गान्तर 0-10, 10-20, 20-30 किसी विशेष मद का मूल्य 10 है तो वह 0-10 में शामिल न होकर 10-20 वर्गान्तर में माना जाएगा।

2. समावेशी विधि (Inclusive Method):
जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि समंकमाला में आए हुए उच्च सीमा मूल्य उसी में शामिल होंगे, अगले में नहीं। वर्गान्तर 10 19, 20-29, 30-39 में। यदि कोई मूल्य 19 आता है तो वह 10-19 वाले वर्गान्तर में शामिल करना चाहिए, अगले में नहीं।

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प्रश्न 4.
एकल, द्वि तथा बहु चर वितरण को समझाइए।
उत्तर:

  1. एकल चर वितरण (Univariate Distribution): एकल चर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें केवल एक चर होता है, जैसे-जनसंख्या की केवल आय।
  2. द्विचर वितरण (Bivariate Distribution): द्विचर वितरण उस वितरण को कहते हैं, जिसमें दो चर होते हैं। जैसे एक कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई तथा वजन।
  3. बहुचर वितरण (Multivariate Distribution): बहुचर वितरण उस वितरण को। कहते हैं जिसमें दो से अधिक चर होते हैं-उदाहरण के लिए सभी परिवारों के उपयोग की सभी मदों का व्यय।

प्रश्न 5.
चर (Variables) और गुणधर्म (Attributes) में उदाहरण सहित अंतर बताएँ।
उत्तर:
साधारण भाषा में चर से अभिप्राय किसी ऐसी विशेषता से है जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में बदलते हैं। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई और उनका वजन बदलते रहते हैं। इसी तरह एक व्यक्ति की योग्यता, वस्तुओं की कीमतों आदि चर हैं, परंतु सांख्यिकी में चर से अभिप्राय उस परिवर्तनशील चर से है जिसे संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए व्यक्तियों की ऊँचाई व वजन चर हैं, क्योंकि उन्हें संख्यात्मक रूप में मापा जा सकता है।

इसी तरह से व्यक्ति की आय, उपभोग के विभिन्न मदों पर पारिवारिक खर्चे, परिवार का आकार, फर्म का उत्पादन आदि चर के उदाहरण हैं। इसके विपरीत कला के प्रति रुचि और बुद्धिमता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है, परंतु इनको उसी तरह से संख्यात्मक रूप में नहीं मापा जा सकता जिस तरह व्यक्ति की आय या ऊँचाई को। इनको हम गुण-धर्म कहेंगे न कि चर।

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प्रश्न 6.
बारम्बारता सारणी तथा बारम्बारता वितरण में अंतर बताएँ।
उत्तर:
बारम्बारता सारणी में सभी मदों को व्यक्तिगत रूप से व्यक्त किया जाता है जबकि आवृत्ति वितरण में एक विशेष वर्ग की बारम्बारता को दर्शाया जाता है। यह सब नीचे की तालिकाओं से स्पष्ट है –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 17
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 18

प्रश्न 7.
वर्गान्तर के आधार पर निर्णय कैसे किया जाता है?
उत्तर:
वर्गान्तर के आधार का निर्धारण (Determination of the size of class intervals):
वर्गात्तर की संख्या निकालने के लिए हम विस्तार को वर्गों की संख्या से विभाजित करेंगे।
सूत्र में h = \(\frac{R}{N}\)
यहाँ h = वर्गान्तर का आकार
R = विस्तार
N = वर्गों की संख्या मान लें विस्तार 70 है और वर्गों की संख्या 10 है तो वर्गान्तर का आधार = 70 ÷ 10 = 7 होगा।

प्रश्न 8.
वर्गीकरण की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
वर्गीकरण की विशेषतायें (Characteristics of Classfication):
आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है, जैसे – 0 – 5, 5 – 10, 10 – 15, 15 – 20 आदि।

  1. समानता तथा सजातीयता के आधार पर तथ्यों को विभाजित करना।
  2. वर्गीकरण इस ढंग से विभाजित किया जाता है कि इकाई की विभिन्नता में उनकी एकता स्पष्ट हों।
  3. वर्गीकरण समय, गुण, मात्रा, क्षेत्र आदि के आधार पर किया जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक उदाहरण की सहायता से सिद्ध करें कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।
उत्तर:
यह सिद्ध करने के लिए कि विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल है, नीचे एक आवृत्ति विवरण तालिका बनाते हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 19
विस्तार = 100 – 0 = 100
सभी वर्गान्तर का जोड़ = 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 + 10 = 100 (वर्गान्तर का जोड़)
अत: विस्तार सभी वर्गान्तरों का योगफल होता है।

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प्रश्न 2.
नीचे एक कंपनी के 550 कर्मचारियों की आय की आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। तालिका वर्गान्तर की समायोजन की विधि लिखकर समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 20
उत्तर:
वर्गान्तर में समायोजन (Adjustment in Class intervals):
दी गई तालिका से हमें पता चलता है कि दूसरे वर्ग में ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा में निरंतर नहीं है। उदाहरण के लिए पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है और दूसरे वर्ग की निचली सीमा 900 है। इन दोनों में 1 का अंतर (Gap) है। इन दोनों वर्गों को अखंडित बनाए रखने के लिए हमें वर्गान्तर में समायोजन करना पड़ता है। समायोजन के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है।

  1. दूसरे वर्ग की नीचे वाली सीमा तथा पहले वर्ग की ऊपरी सीमा का अंतर निकाला जाता है। तालिका में दूसरे वर्ग की नीचे की सीमा 900 है और पहले वर्ग की ऊपरी सीमा 899 है। इन दोनों में अंतर 1 (900-899) है।
  2. प्राप्त अंतर को दो से विभाजित करें अर्थात् 1 को 2 से विभाजित करें। ऐसा करने से उत्तर 0.5 आता है।
  3. 0.5 को सभी वर्गों की निम्न सीमा से घटा दें। जैसे 800, 900, 1000, 1100, 1200 तथा 1300 में से 0.5 घटाने पर क्रमश: 799.5, 899.5, 999.5, 1099.5 1299.5 तथा 1399.5 आता है।
  4. 0.5 को सभी वर्गों की उच्च सीमा से जोड़ दें। जैसे – 899, 999, 1099, 1199, 1299 तथा 1399 में 0.5 जोड़ने पर क्रमश: 899.5 999.5, 1199.5 तथा 1399.5 आता है।
  5. समायोजन करने के पश्चात् आवृत्ति वितरण तालिका में यह नए वर्ग लिख लें। इसके बाद समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालें। समायोजित वर्ग के मध्य बिन्दु निकालने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करें –
    Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 21

अतः पहले वर्ग का मध्य-बिन्दु 849.5 (\(\frac{799.5+899.5}{2}\)) इसी प्रकार सभी समायोजित वर्गों के समायोजित मध्य – बिंन्दु ज्ञात करेंगे।

समायोजित आवृत्ति वितरण तालिका (Adjusted Frequency Distribution Table)
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प्रश्न 3.
एक काल्पनिक द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका का निर्माण करें।
उत्तर:
द्विचर आवृत्ति वितरण तालिका (Bivariate Frequency Distribution Table):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 23

संख्यात्मक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित आवृत्ति वितरण को ‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण में बदलें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 24
उत्तर:
‘से कम’ संचयी आवृत्ति वितरण।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित ‘से कम’ संचयी आवृत्ति माला को सामान्य समंक-माला में बदलें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 27

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से बताएँ कि 149 सेमी, से कम लम्बाई के कितने विद्यार्थी हैं?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 28
उत्तर:
149 सेमी. से कम लम्बाई वाले विद्यार्थियों की संख्या = 1 + 7 + 7 + 13 = 25

प्रश्न 4.
एक देश के निर्यात के आँकड़े नीचे सारणी में दिए गए हैं। इन्हें आवृत्ति वक्र काल-श्रेणी आरेख द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 30

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प्रश्न 5.
नीचे दी गई साधारण आवृत्ति वितरण को ‘से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण बनाएँ।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 31
उत्तर:
से अधिक’ संचयी आवृत्ति वितरण।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 32

प्रश्न 6.
निम्न संचयी आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलें।
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उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 34

प्रश्न 7.
नीचे असमान वर्गान्तर में आवृत्ति वितरण तालिका दी गई है। इसकी सहायता से समान वर्गान्तर आवृत्ति वितरण तालिका तैयार करें।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 35
उत्तर:
दी हुई तालिका से पता चलता है कि वर्गान्तर में 5 और 10 अंतर है। अतः हम समान वर्गान्तर की तालिका बनने के लिए 5 या 10 का अंतर ले सकते हैं। परंतु यदि हम 5 के अंतर का वर्गान्तर लेंगे तो वर्गान्तरों की संख्या 20 हो जाएगी जो कि बहुत अधिक होगी। अतः हम 10 का अंतर लेकर वर्गान्तर लेंगे।
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित तालिका को आवृत्ति वक्र द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 37
उत्तर:
तालिका में दिए गए आँकड़ों को नीचे बारम्बारता वक्र में दिखाया गया है। तालिका में मध्य-बिन्दु को x – अक्ष पर तथा आवृत्तियाँ को y – अक्ष पर दर्शाया गया है।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 38

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों 10 के वर्ग-अंतराल में अपवर्जी विधि के अनुसार सतत श्रृंखला में प्रस्तुत कीजिए।
22, 25, 38, 40, 30, 50, 45, 55, 58, 60, 65, 42, 52, 23, 35, 45, 45, 55, 58, 47 तथा 37।
उत्तर:
सतत (अविच्छन) श्रृंखला (Continuous Series):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 39

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प्रश्न 10.
एक गरीब में 30 परिवारों का सामान्य दैनिक खर्च (रुपयों) में इस प्रकार है।
11, 12, 14, 16, 16, 17, 18, 18, 20, 20, 20, 21, 21, 22, 22, 23, 23, 24, 25, 25, 26, 27, 28, 31, 32, 32, 26, 26, 38।
इन आँकड़ों का निम्नलिखित वर्गों के आधार पर एक बारम्बारता सारणी बनाएँ। 10 – 14, 15 – 19, 20 – 24, 25 – 29, 30 – 34, तथा 35 – 39।
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 40

प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ।
(अपवर्जी तथा समावेशी विधि के अनुसार।)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 41
उत्तर:
अपवर्जी विधि के अनुसार –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 42
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 आँकड़ों का संगठन part - 2 img 43

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक वर्ग की निचली और ऊपरी सीमा का अंतर कहलाता है –
(a) आवृत्ति वितरण
(b) वर्ग-आवृत्ति
(c) वर्ग-अंतरल
(d) वर्ग-सीमा
उत्तर:
(c) वर्ग-अंतरल

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

प्रश्न 2.
10, 5, 7, 7, 8, 9, 10, 15 आँकड़े किस प्रकार के आँकड़े हैं?
(a) विविक्त श्रृंखला
(b) सतत श्रृंखला
(c) व्यक्तिगत श्रृंखला
(d) शुद्ध आँकड़े
उत्तर:
(d) शुद्ध आँकड़े

प्रश्न 3.
वर्गीकरण का तात्पर्य है वस्तुओं को –
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना
(b) सजाना एवं सँवारना
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उपयुक्त क्रम. से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना

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प्रश्न 4.
आँकड़े को व्यवस्थित करते हैं –
(a) समयानुसार
(b) स्थानानुसार
(c) दोनों के अनुसार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) दोनों के अनुसार

प्रश्न 5.
चर पद का तात्पर्य ऐसी विशेषताओं से है जो –
(a) अपरिवर्तनशील होती हैं
(b) परिवर्तनशील होती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) परिवर्तनशील होती हैं

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी में चर पद का प्रयोग तभी किया जाता है जब ये विशेषताएँ –
(a) शब्दों में व्यक्त की जा सकें
(b) संख्याओं में मापी जा सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) संख्याओं में मापी जा सके

प्रश्न 7.
हम व्यक्तियों का वर्गीकरण उनके गुणों की –
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं
(b) संख्याओं के आधार पर कर सकते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोटियों के आधार पर कर सकते हैं

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प्रश्न 8.
कोई चर तब संतत कहा जाता है जब यह किसी दिए परास के अंतर्गत –
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके
(b) कोई भी मूल्य धारण न कर सके
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कोई भी मूल्य धारण कर सके

प्रश्न 9.
असंतत या विविक्त चर धारण करते हैं –
(a) कोई भी मूल्य
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशेष मूल्य (पूर्णांक)

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 3 आँकड़ों का संगठन

प्रश्न 10.
सामान्य भाषा में समष्टि पद का अर्थ है किसी क्षेत्र में रहने वाले –
(a) विशिष्ट व्यक्तियों की संख्या
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी व्यक्तियों की संख्या (कुल)

प्रश्न 11.
आवृत्ति वितरण में परास का अर्थ है –
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य
(b) उच्चतम मूल्य + न्यूनतम मूल्य
(c) (a) और (b) दोन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उच्चतम मूल्य – न्यूनतम मूल्य

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प्रश्न 12.
किसी विशेष वर्ग में मूल्यों की संख्या उस वर्ग की कहलाती है –
(a) आवृत्ति
(b) संचयो आवृत्ति
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आवृत्ति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

Bihar Board Class 11 Geography मृदा Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में कौन-सी मृदा सबसे विस्तृत उपजाऊ है ………………………..
(क) जलोढ़
(ख) काली मृदा
(ग) लेटेराइट
(घ) वन मृदा
उत्तर:
(क) जलोढ़

प्रश्न 2.
किस मृदा को रेगुड़ मृदा भी कहते हैं ………………………
(क) नमकीन
(ख) काली
(ग) शुष्क
(ख) लेटेराइट
उत्तर:
(ग) शुष्क

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प्रश्न 3.
मृदा की ऊपरी तह के उड़ जाने का मुख्य कारण ………………………..
(क) पवन अपरदन
(ख) अपक्षातान
(ग) जल अपरदन
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ग) जल अपरदन

प्रश्न 4.
कृषिकृत भूमि में जल सिंचित क्षेत्र में खाई वन का क्या कारक है …………………………
(क) जिप्सम
(ख) अति-जल सिंचाई
(ग) अति पशुचारण
(घ) उर्वरक
उत्तर:
(ख) अति-जल सिंचाई

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मृदा क्या है?
उत्तर:
मृदा भू-पर्पटी की सबसे महत्त्वपूर्ण परत है। यह एक मूल्यवान संसाधन है। ‘मृदा शैल, मलवा और जैव सामग्री का सम्मिश्रण होती है जो पृथ्वी की सतह पर विकसित होते हैं। मृदा का विकास हजारों वर्ष में होता है।

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
मृदा निर्माण के प्रमुख उत्तरदायी कारक हैं-उच्चावच, जनक सामग्री, जलवायु, वनस्पति तथा अन्य जीव रूप और समय । इनके अतिरिक्त मानवीय क्रियाएँ भी पर्याप्त सीमा तक इसे प्रभावित करती है। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस, जल तथा वायु होते हैं।

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प्रश्न 3.
मृदा परिच्छदिका के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
क’ संस्तर सबसे ऊपरी खण्ड होता है, जहाँ पौधों की वृद्धि के लिए अनिवार्य जैव पदार्थों का खनिज पदार्थ, पोषक तत्त्वों तथा जल से संयोग होता है । ‘ख’ संस्तर, ‘क’ संस्तर तथा ‘ग’ सस्तर के बीच संक्रमण खण्ड होता है जिसे नीचे व ऊपर दोनों से पदार्थ प्राप्त होते हैं। इसमें कुछ जैव पदार्थ होते हैं । तथापि खनिज पदार्थ का अपक्षय स्पष्ट नजर आता है। ‘ग’ संस्तर की रचना ढीली सामग्री से होती है। यह परत मृदा निर्माण की प्रक्रिया में प्रथम अवस्था होती है और अंततः ऊपर की दो परतें इसी से बनती हैं।

प्रश्न 4.
मृदा अवकर्षण क्या होता है?
उत्तर:
मृदा अवकर्षण को मृदा की उर्वरता के हास के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसमें मृदा का पोषण स्तर गिर जाता है और अपरदन तथा दुरुपयोग के कारण मृदा की गहराई कम हो जाती है। भारत में मृदा संसाधनों के क्षय का मुख्य कारक मृदा अवकर्षण हैं। मृदा अवकर्षण की दर भू-आकृति, पवनों की गति तथा वर्षा की मात्रा के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है।

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प्रश्न 5.
खादर और बांगर में क्या अंतर है?
उत्तर:
खादर प्रतिवर्ष बाढ़ों के द्वारा निक्षेपित होने वाला नया जलोढ़क है, जो महीन गाद होने के कारण मृदा की उर्वरता बढ़ा देता है। बांगर पुराना जलोढ़क होता है जिसका जमाव दाइकृत मैदानों से दूर होता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
काली मृदा किन्हें कहते हैं ? इनके निर्माण तथा विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
काली मृदा दक्कन के पठार के अधिकतर भाग पर पाई जाती हैं। इसमें महाराष्ट्र के कुछ भाग, गुजरात, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के कुछ भाग शामिल हैं। गोदावरी और कृष्णा नदियों के ऊपरी भागों और दक्कन के पठार के उत्तरी-पश्चिमी भाग में गहरी काली मृदा पाई जाती है। इन्हें ‘रेगूर’ तथा ‘कपास वाली काली मिट्टी’ भी कहा जाता है। आमतौर पर काली मृदाएँ, मृण्मय, गहरी और अपारगम्य होती हैं। ये मृदाएँ गीली होने पर फूल जाती हैं और चिपचिपी हो जाती हैं। सूखने पर ये सिकुड़ जाती हैं। इस प्रकार शुष्क ऋतु में इन मृदाओं में चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं। इस समय ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे इनमें ‘स्वतः जुताई’ हो गई हो । नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की इस विशेषता के कारण काली मृदा में एक लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इसके कारण फसलों को, विशेष रूप से वर्षाधीन फसलों को, शुष्क ऋतु में भी नमी मिलती रहती है और वे फलती-फूलती रहती हैं।

रासायनिक दृष्टि से काली मृदाओं में चूने, लौह, मैग्नीशिया तथा ऐलुमिना के तत्त्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें पोटाश की मात्रा भी पाई जाती है। लेकिन इनमें फॉसफोरस, नाइट्रोजन और जैव पदार्थों की कमी होती है। इस मृदा का रंग गाढ़े काले और स्लेटी रंग के बीच की विभिन्न आभाओं का होता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा संरक्षण क्या होता है? मृदा संरक्षण के कुछ उपाय सुझाएँ।
उत्तर:
मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मिट्टी के अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की निम्नीकृत दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन मूल रूप से दोषपूर्ण पद्धतियों द्वारा बढ़ता है। किसी भी तर्कसंगत समाधान के अंतर्गत पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल प्रवणता वाली भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी भी हो जाए तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और स्थानांतरी कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है, जिससे विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें नियमित और नियंत्रित करना चाहिए । समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेत बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन आदि उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 3.
आप यह कैसे जानेंगे कि कोई मृदा उर्वर है या नहीं ? प्राकृतिक रूप से निर्धारित उर्वरता और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महीन कणों वाली लाल और पीली मृदाएँ सामान्यतः उर्वर होती हैं। इसके विपरित मोटे कणों वाली उच्च भूमियों की मृदाएँ अनुर्वर होती हैं। इनमें सामान्यतः नाइट्रोजन, फॉसफोरस और ह्यूमस की कमी होती है। जलोढ़क मृदाओं में महीन गाद होती है जो मुदा की उर्वरता को बढ़ा देती हैं। इस प्रकार की मृदा में कैल्सियम संग्रथन अर्थात् कंकड़ पाए जाते हैं। काली मृदाओं में नमी के धीमे अवशोषण और नमी के क्षय की विशेषता के कारण लम्बी अवधि तक नमी बनी रहती है। इस कारण शुष्क ऋतु में भी फसलें फलती-फूलती रहती हैं। लैटेराइट मृदाओं में लोहे के ऑक्साइड और अल्यूमीनियम के यौगिक तथा पोटाश अधिक मात्रा में होते हैं। ह्यूमस की मात्रा कम होती है। इन मृदाओं में जैव पदार्थ, नाइट्रोजन, फॉस्फेट और कैल्सियम की कमी होती है।

शुष्क मृदाओं में ह्यूमस और जैव पदार्थ कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए ये मृदाएँ अनुर्वर हैं। लवण मृदाएँ ऊसर मृदाएँ भी कहलाती हैं। लवण मृदाओं में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है। अतः ये अनुर्वर होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की वनस्पति नहीं उगती। इनमें लवण की मात्रा अधिक होती है। पीटमय मृदाएँ उर्वर होती हैं। इस प्रकार की मृदा में ह्युमस और जैव तत्त्व पर्याप्त मात्रा में माजूद होते हैं। वन मृदाएँ अम्लीय और कम ह्यूमस वाली होती हैं। घाटियों में ये दुमटी और पांशु होती हैं तथा ऊपरी ढालों पर ये मोटे कणों वाली होती हैं। निचली घाटियों में पाई जाने वाली मृदाएँ उर्वर होती हैं। मृदा के घटक खनिज कण, ह्यूमस जल तथा वायु होते हैं। इनमें से प्रत्येक की वास्तविक मात्रा मृदा की उर्वरता को बढ़ाती है। लवण मृदा की उर्वरता को नष्ट कर देता है। रासायनिक उर्वरक भी मृदा के लिए हानिकारक है। लवणीय मृदा में जिप्सम डालने से मृदा की उर्वरता बढ़ी जाती है।

प्राकृतिक रूप से मृदा की उर्वरता पोषक तत्त्वों की विद्यमानता पर निर्भर करती हैं। मृदा में फॉस्फोरस, पोटैशियम, गंधक, मैग्नीशियम, नाइट्रोजन, बोरॉन ये सभी तत्त्व भिन्न-भिन्न मात्रा में होते हैं। मृदा की उत्पादकता कई भौतिक गुणों पर निर्भर करती है।
जब मृदा में विभिन्न तत्त्वों की कमी हो जाती है तो मानव निर्मित रसायन जैसे पोटाश, फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, गंधक, मैग्नीशियम, बोरान आदि उचित मात्रा में मिलाकर मृदा की उर्वरता को बढ़ाया जाता है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
अपने क्षेत्र से मृदा के विभिन्न नमूने एकत्रित कीजिए तथा मृदा के प्रकारों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
मृदा के नमूने स्वयं या अपने अध्यापक की सहायता से एकत्रित करें और मदा के प्रकारों पर एक रिपोट इस अध्याय को पढ़कर आप भली-भाँति तैयार कर सकते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
भारत के रेखा मानचित्र पर मृदा के निम्नलिखित प्रकारों से ढके क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए

  • लाल मृदा
  • लैटेराइट मृदा
  • जलोढ़ मृदा।

उत्तर:
चित्र 6.1 देखें इसमें भारत के मानचित्र पर उपर्युक्त पूछी गई सभी मृदाओं का विवरण दिया गया है।

Bihar Board Class 11 Geography मृदा Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
उत्तरी भारत में पाई जाने वाली जलोढ़ मिट्टी की दो मुख्य किस्में लिखें।
उत्तर:
खादर तथा बागर मिट्टी।

प्रश्न 2.
भारतीय मैदानों के विशाल क्षेत्रों में पाई जाने वाली मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

प्रश्न 3.
खादर तथा बांगर मिट्टी के दो स्थानीय नाम लिखें।
उत्तर:
खादर मिट्टी-बैठ, बांगर मिट्टी-धाया।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 4.
तीन क्षेत्रों के नाम बतायें जहाँ पर खादर मिट्टी पाई जाती है।
उत्तर:
सतलुज बेसिन, गंगा का मैदान, यमुना बेसिन।

प्रश्न 5.
जलोढ़ मिट्टी में उत्पादित होने वाली दो खाद्य पदार्थों के नाम लिखें।
उत्तर:
गेहूँ, चावल।

प्रश्न 6.
पश्चिम बंगाल की जलोढ़ मिट्टी सबसे अधिक किस फसल के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
पटसन के लिए।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 7.
मृदा महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर:
यह सभी जीवित वस्तुओं के लिए भोजन उत्पादन करती है।

प्रश्न 8.
मिट्टी में पाये जाने वाले मुख्य आवश्यक तत्त्व लिखें।
उत्तर:
सिलिका, चीका तथा ह्यूमस।

प्रश्न 9.
मिट्टी में चीका का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह जल को सोख लेती है।

प्रश्न 10.
मृदा की तीन परतों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. A – स्तर
  2. B – स्तर
  3. c – स्तर

प्रश्न 11.
मृदा की परिभाषा दें।
उत्तर:
यह असंगठित पदार्थों की पतली परत होती है।

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प्रश्न 12.
उन तत्त्वों के नाम बतायें जिन पर मृदा की बनावट निर्भर करती है?
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. धरातल
  3. जलवायु

प्रश्न 13.
भारत में मृदा के तीन व्यापक प्रादेशिक भागों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीप की मिट्टियाँ
  2. उत्तरी मैदान की मिट्टियाँ
  3. हिमालय की मिट्टियाँ

प्रश्न 14.
बनावट के आधार पर मृदा की तीन किस्में लिखें।
उत्तर:

  1. रेतीली मिट्टियाँ
  2. चीका मिट्टी
  3. दोमट मिट्टी

प्रश्न 15.
भारत में पाई जाने वाली अधिकतर व्यापक मिट्टी का नाम लिखें।
उत्तर:
जलोढ़ मिट्टी।

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प्रश्न 16.
लैटेराइट मिट्टी की दो किस्में लिखें।
उत्तर:
उच्च मैदान लैटेराइट मिट्टी तथा निम्न मैदान लैटेराइट मिट्टी।

प्रश्न 17.
उन तीन राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर लैटेराइट मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा उड़ीसा।

प्रश्न 18.
लैटेराइट मिट्टी किस फसल के लिए सबसे अधिक उपयोगी है?
उत्तर:
बागानी फसल लगाने के लिए।

प्रश्न 19.
मरुस्थलीय मिट्टी किस प्रदेश में पाई जाती है?
उत्तर:
शुष्क मरुस्थल।

प्रश्न 20.
भारत के किस क्षेत्र में मरुस्थलीय मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
थार मरुस्थल (राजस्थान का सिंध)।

प्रश्न 21.
मरुस्थलीय मिट्टी में उपज का क्या कारण है.?
उत्तर:
सिंचाई।

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प्रश्न 22.
रेतीले मरुस्थल में पाई जाने वाली मिट्टी के दो प्रकार लिखें।
उत्तर:
तेजाबी तथा नमकीन।

प्रश्न 23.
मदा किसे कहते हैं?
उत्तर:
मिट्टी भूतल की ऊपरी सतह का आवरण है। भू-पृष्ठ पर मिलने वाले असंगठित पदार्थ ऊपरी परत को मृदा कहते हैं।

प्रश्न 24.
दक्कन पठार के छोर पर कौन-सी मिट्टी मिलती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 25.
कौन-सी मृदा प्रायद्वीपीय भारत में पाई जाती है?
उत्तर:
लाल मिट्टी।

प्रश्न 26.
उन दो राज्यों के नाम बतायें जहाँ पर लाल मिट्टी अधिकतर पाई जाती है।
उत्तर:
तमिलनाडु तथा छत्तीसगढ़।

प्रश्न 27.
उन तीन रंगों के नाम बतायें जिनसे लाल मिट्टी का निर्माण होता है।
उत्तर:
भूरा, चाकलेट तथा पीला।

प्रश्न 28.
रेगुड़ मिट्टी का रंग बताओ।
उत्तर:
काला।

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प्रश्न 29.
उन दो राज्यों के नाम लिखें जहाँ पर काली मिट्टी पाई जाती है?
उत्तर:
महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश।

प्रश्न 30.
काली मिट्टी के दो अन्य नाम लिखें।
उत्तर:
कपास मिट्टी तथा रेगुड़ मिट्टी।

प्रश्न 31.
काली मिट्टी का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
दक्कन ट्रैप के ज्वालामुखी चट्टानों के लावा द्वारा।

प्रश्न 32.
एक फसल का नाम लिखें जिसके लिये काली मिट्टी बहुत उपयोगी है।
उत्तर:
कपास।

प्रश्न 33.
किस प्रकार की जलवायु में लेटेराइट मिट्टी का निर्माण होता है?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय मानसून जलवायु।

प्रश्न 34.
मृदा के तीन संस्तरों के नामों का उल्लेख कीजिए। उत्तर:A स्तर, B स्तर, C स्तर

प्रश्न 35.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं?
उत्तर:
भू-तल की ऊपरी सतह के उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बहना मृदा अपरदन कहलाता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 36.
बीहड़ किसे कहते हैं?
उत्तर:
अवनालिका अपरदन द्वारा बने गड्ढों को बीहड़ कहते हैं।

प्रश्न 37.
मृदा कैसे बनती है?
उत्तर:
मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मृदा का निर्माण होता है। इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश मिलने से मृदा का विकास होता है।

प्रश्न 38.
मृदा निर्माण के प्रमुख कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. मूल पदार्थ
  2. उच्चावच
  3. जलवायु
  4. प्राकृतिक वनस्पति

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा का मूल पदार्थ क्या है?
उत्तर:
आधार चट्टानों के रासायनिक तथा यांत्रिक अपक्षरण से प्राप्त होने वाले पदार्थों को मृदा का मूल पदार्थ कहा जाता है। इन सभी पदार्थों से मृदा का निर्माण होता है। मृदा का रंग, उपजाऊपन आदि मूल पदार्थों पर निर्भर करता है। लावा चट्टानों से बनने वाली मृदा का रंग काला होता है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण के छः तत्त्वों के नाम बताइए जो मृदा जनन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु, चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है। धरातल तथा भूमि की ढाल भी मृदा जनन पर प्रभाव डालते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 3.
जलोढ़ मृदा की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
जलोढ़ मृदा की विशेषताएं –

  1. इसका निक्षेपण मुख्यतः नदी द्वारा होता है।
  2. इसका विस्तार नदी बेसिन तथा मैदानों तक सीमित होता है।
  3. यह अत्यधिक उपजाऊ मृदा होती है।
  4. इसमें बारीक कणों वाली मृदा पाई जाती है।
  5. इसमें काफी मात्रा में पोटाश पाया जाता है, परंतु फॉस्फोरस की कमी होती है।
  6. यह मृदा बहुत गहरी होती है।

प्रश्न 4.
भारत में उपलब्ध मिट्टी के प्रकारों में प्रादेशिक विभिन्यता के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत की मिट्टियों में पाई जाने वाली प्रादेशिक विभिन्नता निम्नलिखित घटकों पर निर्भर करती है –

  1. शैल-समूह,
  2. उच्चावच के धरातलीय लक्षण
  3. ढाल का रूप
  4. जलवायु तथा प्राकृतिक वनस्पति
  5. पशु तथा कीड़े-मकोड़े।

प्रश्न 5.
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में क्या अंतर है?
उत्तर:
पठारों तथा मैदानों की मिट्टी में मुख्य अंतर मूल पदार्थों में पाया जाता है। पठारों में आधार चट्टानें कठोर होती हैं। इसकी मिट्टी में मूल पदार्थों की प्राप्ति इन चट्टानों से होती है। यह मिट्टी मोटे कणों वाली तथा कम उपजाऊ होती है। मैदानों में मिट्टी का निर्माण नदियों के निक्षेपण कार्य से होता है। मैदानों में प्रायः जलोढ़ मिट्री मिलती है। नदी में प्रत्येक बाढ़ के कारण महीन सिल्ट (Silt) तथा मृतिका (clay) का निक्षेप होता रहता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 6.
चट्टानों में जंग लगने से कौन-सी मिट्टी का निर्माण होता है? भारत में इस मिट्टी के तीन प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
इस क्रिया से लाल मिट्टी का निर्माण होता है –
1. विस्तार (Extent) – भारत की सब मिट्टियों में से लाल मिट्टी विस्तार सबसे अधिक है। यह मिट्टी लगभग 8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाती है। दक्षिण में तमिलनाडु कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, छोटा नागपुर तथा प्रायद्वीप पठार के बाहरी भागों में लाल मिट्टी का विस्तार मिलता है।

2. विशेषताएँ (Characteristics) – इस मिट्टी का निर्माण प्रायद्वीप के आधारभूत आग्नेय चट्टानों, ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों की टूट-फूट से हुआ है। इस मिट्टी का रंग लौहयुक्त चट्टानों में ऑक्सीकरण (Oxidiation) की क्रिया से लाल हो जाता है।

वर्षा के कारण ह्यूमस नष्ट हो जाता है तथा आयरन ऑक्साइड ऊपरी सतह पर आ जाती है। इस मिट्टी में लोहा और एल्यूमीनियम की अधिकता होती है, परंतु नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी होती है। यह मिट्टी कम गहरी तथा कम उपजाऊ होती है। इस मिट्टी में ज्वार, बाजरा, कपास, दालें, तम्बाकू की कृषि होती है।

प्रश्न 7.
मृदा क्या है? इसका निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
भू-पृष्ठ (Crust) पर मिलने वाले असंगठित पदार्थों की ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। इस परत की मोटाई कुछ सेमी से लेकर कई मीटर तक हो सकती है। इसमें कई तत्त्व जैसे मिट्टी के बारीक कण, ह्यूमस, खनिज तथा जीवाणु मिले होते हैं। इन तत्त्वों के कारण इसमें कई परतें होती हैं। मृदा का निर्माण आधार चट्टानों के मूल पदार्थों तथा वनस्पति के सहयोग से होता है। किसी प्रदेश में यांत्रिक तथा रासायनिक ऋतु अपक्षय द्वारा मूल चट्टानों के टूटने पर मिट्टी का निर्माण आरम्भ होता है।

इसमें वनस्पति के गले-सड़े अंश के मिलने से कोई भौतिक तथा रासायनिक कारकों के सहयोग से मृदा का पूर्ण विकास होता है। इस प्रकार मृदा की परिभाषा है, “Soil is the end product of the physical, chemical, biological and cultural fctors which act and react together.”

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 8.
मृदा जनन की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर:
मृदा जनन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा विशेष प्राकृतिक परिस्थितियों में मृदा का निर्माण होता है। वातावरण के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक तत्त्वों के योग से इस प्रक्रिया द्वारा मृदा का निर्माण होता है। विभिन्न प्रकार की जलवायु चट्टानों, जीव-जन्तुओं तथा वनस्पति के क्षेत्र से प्राप्त पदार्थों के इकट्ठा होने से मृदा का निर्माण होता है।

प्रश्न 9.
दक्षिणी पठार में पाई जाने वाली मृदा का लाल रंग क्यों है ?
उत्तर:
दक्षिणी पठार के बाह्य प्रदेशों में लाल मिट्टी का अधिकतर विस्तार है। इस मिट्टी का मूल पदार्थ पठारी प्रदेश के पुराने क्रिस्टलीय तथा रूपान्तरित चट्टानों से प्राप्त होता है। इनमें ग्रेनाइट, नाईस तथा शिल्ट की चट्टानों का विस्तार है। इन चट्टानों में लोहा तथा मैग्नीशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है। उष्ण कटिबंधीय जलवायु जलीकरण की क्रिया के कारण आयरन-ऑक्साइड द्वारा इस मिट्टी का रंग लाल हो जाता है।

प्रश्न 10.
वनस्पति जाति और वनस्पति में क्या अंतर है?
उत्तर:
वनस्पति जाति और वनस्पति में अंतर –
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प्रश्न 11.
वनस्पति और वन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
वनस्पति और वन में अंतर –
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प्रश्न 12.
समोच्च रेखा बंधन किसे कहते हैं? मृदा को विनाश से बचाने के लिए इसका किस प्रकार प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर:
समोच्च रेखा बंधन (Contour Bunding) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई-की रेखा के साथ-साथ सीढ़ीदार खेत बनाए जाते हैं ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके। ऐसे प्रदेश में खड़ी ढाल वाले खेतों में समान ऊँचाई की रेखा के साथ बाँध या ढाल बनाई जाती है। ऐसे बाँध को समोच्च रेखा बंधन कहते हैं। इससे वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन से बचाया जा सकता है। इससे वर्षा के जल को नियंत्रित करके बहते हुए पानी द्वारा मृदा अपरदन को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 13.
मृदा की उर्वरा शक्ति को विकसित करने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए?
उत्तर:
मृदा की उर्वरा शक्ति का विकास करने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए –

  1. मृदा अपरदन को रोकने का उपाय होना चाहिए।
  2. मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए उर्वरकों और खादों का प्रयोग करना चाहिए।
  3. फसलों के हरे-फेर की प्रणाली का प्रयोग करना चाहिए।
  4. कृषि की वैज्ञानिक विधियों को अपनाना चाहिए।
  5. मिट्टी के उपजाऊ तत्त्वों का संरक्षण करके रासायनिक तत्त्वों को मिलाना चाहिए।

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प्रश्न 14.
किसी प्रदेश के आर्थिक विकास में मृदा की विशेषता किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है? इसकी व्याख्या करने के लिए दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
मृदा मानव के लिए बहुत मूल्यवान प्राकृतिक सम्पदा है। मिट्टी पर बहुत-सी मानवीय क्रियाएँ आधारित हैं। मिट्टी पर कृषि, पशुपालन तथा वनस्पति जीवन निर्भर करता है। किसी प्रदेश का आर्थिक विकास मिट्टी की उर्वरी शक्ति पर निर्भर करता है। कई देशों की कृषि अर्थव्यवस्था मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर निर्भर करती है। संसार के प्रत्येक भाग में जनसंख्या का एक बड़ा भाग भोजन की पूर्ति के लिए मिट्टी पर निर्भर करता है।

अनुपजाऊ क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व तथा लोगों का जीवन-स्तर दोनों ही निम्न होते हैं। उदाहरण के लिए पश्चिमी बंगाल के डेल्टाई प्रदेश तथा केरल तट जलोढ़ मिट्टी से बने उपजाऊ क्षेत्र हैं। यहाँ उन्नत कृषि का विकास हुआ है। यह प्रदेश भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है। दूसरी ओर तेलंगाना में मोटे कणों वाली मिट्टी मिलती है तथा राजस्थान के शुष्क प्रदेश में रेतीली मिट्टी कृषि के अनुकूल नहीं है। इन प्रदेशों में विरल जनसंख्या। पाई जाती है।

प्रश्न 15.
मुदा की उर्वरता समाप्ति के तीन कारण बताइए।
उत्तर:
मृदा एक मूल्यावान प्राकृतिक संसाधन है। अधिक गहरी तथा उपजाऊ मिट्टी वाले प्रदेशों में कृषि का अधिक विकास होता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के हास के निम्नलिखित कारण हैं

  1. कृषि भूमि पर निरंतर कृषि करते रहने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। मृदा को उर्वरा शक्ति प्राप्त करने का पूरा समय नहीं मिलता।
  2. दोषपूर्ण कृषि पद्धतियों के कारण मृदा की उर्वरा शक्ति समाप्त होने लगती है। स्थानान्तरी कृषि के कारण मृदा के उपजाऊ तत्त्वों का नाश होने लगती है। प्रतिवर्ष एक ही
  3. फसल बोने से मृदा में विशिष्ट प्रकार के खनिज कम होने लगते हैं।
  4. वायु तथा जल अपरदन से मृदा की उर्वरता समाप्त होती रहती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मृदा अपरदन किसे कहते हैं ? इसके क्या कारण हैं ? मानव ने मृदा अपरदन से बचाव के कौन-कौन से तरीके अपनाए हैं?
उत्तर:
मृदा अपरदन (Soil Erosion) – भूतल की ऊपरी सतह से उपजाऊ मिट्टी का उड़ जाना या बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है। भूतल की मिट्टी धीरे-धीरे अपना स्थान छोड़ती रहती है जिससे यह कृषि के अयोग्य हो जाती है।

मृदा अपरदन के प्रकार (Types of Soil Erosion) – मृदा अपरदन तीन प्रकार से होता है-:

  • धरातलीय कटाव (Sheet Erosion)
  • नालीदार कटाव (Guly Erosion)
  • वायु द्वारा कटाव (Wind Erosion)

मृदा अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) –

  • मूसलाधार वर्षा (Torrential Rain) – सर्वती प्रदेशों की तीव्र ढलानों पर मूसलधार वर्षा का जल मिट्टी की परत बहा कर ले जाता है। इससे यमुना घाटी में उत्खात भूमि की रचना
  • वनों की कटाई (Deforestation) – वनों के अन्धाधुन्ध कटाव से मृदा अपरदन बढ़ जाता है। जैसे-पंजाब में शिवालिक पहाड़ियों पर तथा मैदानी भाग में चो (Chos) द्वारा मृदा अपरदन एक गम्भीर समस्या है।
  • स्थानान्तरी कृषि (Shifting Agriculture) – वनों को जलाकर कृषि के लिए प्राप्त करने की प्रथा से झुमिंग (Jhumming) से उत्तर:पूर्वी भारत में मृदा अपरदन होता है।
  • नर्म मिट्टी (Soft Soils) – कई प्रदेशों में नर्म मिट्टी के कारण मिट्टी की परत जाती है।
  • अनियंत्रित पशु चारण (Uncontrolled Cattle Grazing) – पर्वतीय ढलानों पर चरागाहों में अनियंत्रित पशुचारण से मिट्टी के कण ढीले होकर बह जाते हैं।
  • धूल भरी आंधियाँ (Dust Strons) – मरुस्थलों के निकटवर्ती प्रदेश में तेज धूल भरी आधियों के कारण मिट्टी परत का अपरदन होता है।

मृदा अपरदन रोकने के उपाय (Methods to Check Soil Erosion) – मिट्टी के उपजाऊपन को कायम रखने के लिए मिट्टी का संरक्षण आवश्यक है। मृदा अपरदन रोकने के लिए कई प्रकार का परत अपरदन होता है।

  • वृक्षारोपण (Afforestation) – पर्वतीय ढलानों पर मिट्टी को संगठित रखने के लिए वृक्ष लगाए जाते हैं। नदियों के ऊपरी भागों में वन क्षेत्रों का विस्तार करके मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। इसी प्रकार राजस्थान मरुस्थल की सीमाओं पर वन लगाकर वायु द्वारा अपरदन रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।
  • नियंत्रित पशुचारण (Controlled Grazing) – ढलानों पर चरागाहों में बे-रोक-टोक पशुचारण को रोका जाए ताकि घास को फिर से उगने और बढ़ने का समय मिल सके।
  • सीढ़ीनुमा कृषि (Terraced Agriculture) – पर्वतीय ढलानों पर सम ऊँचाई की रेखा के साथ सीढ़ीदार खेत बनाकर वर्षा के जल को रोक कर मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • बाँध बनाना (River Dams) – नदियों के ऊपरी भागों पर बाँध बनाकर बाढ़ नियंत्रण द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।
  • अन्य उपाय – भूमि को पवन दिशा के समकोण पर जोतना चाहिए जिससे पवन द्वारा मिट्टी कटाव कम हो सके। स्थानान्तरी कृषि को रोका जाए। वायु की गति को कम करने के
  • लिए वृक्ष लगा कर वायु रोक (Wind Break) – क्षेत्र बनाना चाहिए। फसलों के हेर-फेर तथा भूमि को परती छोड़ देने से मृदा अपरदन कम किया जा सकता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 6 मृदा

प्रश्न 2.
मृदा निर्माण के मुख्य घटकों के प्रभाव का वर्णन करों।
उत्तर:
मृदा निर्माण कई भौतिक तथा रासायनिक तत्त्वों पर निर्भर करता है। इन तत्त्वों के कारण मृदा प्रकारों के वितरण में भिन्नता पाई जाती है। ये तत्त्व स्वतंत्र रूप से अलग से नहीं बल्कि एक दूसरे के सहयोग से काम करते हैं।
1. मूल पदार्थ – मृदा निर्माण करने वाले पदार्थ की प्राप्ति आधार चट्टानों से होती है। प्रायः पठारों की मिट्टी का सम्बन्ध आधार चट्टानों से होता है। मैदानी भागों में मृदा निर्माण का मूल पदार्थ नदियों द्वारा जमा किए जाते हैं। नदियों में बाढ़ के कारण प्रत्येक वर्ष मिट्टी की नई परत बिछ जाती है।

2. उचावच – किसी प्रदेश का उच्चावच तथा ढाल मृदा निर्माण पर कई प्रकार से प्रभाव डालता है। मैदानी भागों में गहरी मिट्टी मिलती है जबकि खड़ी ढाल वाले प्रदेशों में कम गहरी मिट्टी का आवरण होता है। पठारों पर भी मिट्टी की परत कम गहरी होती है। तेज ढाल वाले क्षेत्रों में अपरदन के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बह जाती है। इस प्रकार किसी प्रदेश के धरातल तथा ढाल के अनुसार जल प्रवाह की मात्रा मृदा निर्माण को प्रभावित करती है।

3. जलवायु – वर्षा, तापमान तथा पवनें किसी प्रदेश में मृदा निर्माण पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। जलवायु के अनुसार सूक्ष्म जीव तथा प्राकृतिक वनस्पति भी मृदा पर प्रभाव डालते हैं। शुष्क प्रदेशों में वायु मिट्टी के ऊपी परत को उड़ा ले जाती है। अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में मिट्टी कटाव अधिक होता है।

4. प्राकृतिक वनस्पति – किसी प्रदेश में मिट्टी का विकास प्राकृतिक वनस्पति की वृद्धि के साथ ही आरम्भ होता है। वनस्पति के गले-सड़े अंश के कारण मिट्टी में हमस की मात्रा बढ़ जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसी कारण घास के मैदानों में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण होता है। भारत के विभिन्न प्रदेशों में मृदा तथा वनस्पति के प्रकारों में गहरा सम्बन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में मृदा संरक्षण पर एक निबंध लिखें।
उत्तर:
मृदा संरक्षण-यदि मृदा अपरदन और मृदाक्षय मानव द्वारा किया जाता है, तो स्पष्टतः मानवों द्वारा ही इसे रोका भी जा सकता है। मृदा संरक्षण एक विधि है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखी जाती है, मृदा अपरदन और क्षय को रोका जाता है और मिट्टी की अपक्षरित दशाओं को सुधारा जाता है। मृदा अपरदन वास्तव में मनुष्यकृत समस्या है।

1. किसी भी तर्कसंगत समाधान में पहला काम ढालों की कृषि योग्य खुली भूमि पर खेती को रोकना है। 15 से 25 प्रतिशत ढाल वाली भूमि का उपयोग कृपि के लिए नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी भूमि पर खेती करना जरूरी हो जाए, तो इस पर सावधानी से सीढ़ीदार खेत बना लेना चाहिए।

2. भारत के विभिन्न भागों में, अति चराई और झूम कृषि ने भूमि के प्राकृतिक आवरण को दुष्प्रभावित किया है। इस कारण विस्तृत क्षेत्र अपरदन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामवासियों को इनके दुष्परिणामों से अवगत करवा कर इन्हें (अति चराई और झूम कृषि) नियमित और नियंत्रित करना चाहिए।

3. समोच्च रेखा के अनुसार मेड़बंदी, समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेती बनाना, नियमित वानिकी, नियंत्रित चराई, वरणात्मक खरतपवार नाशन, आवरण फसलें उगाना, मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन, उपचार के कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनका उपयोग मृदा अपरदन को कम करने के लिए प्रायः किया जाता है।

4. वनालिका अपरदन को रोकने तथा उनके बनने पर नियंत्रण के प्रयत्न किए जाने चाहिए । अंगुल्याकार अवनलिकाओं को सीढ़ीदार खेत बनाकर खत्म किया जा सकता है। अवनलिकाओं के शीर्ष की ओर के विकास को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इस कार्य को अवनलिकाओं को बंद करके. सीढीदार खेत बनाकर या आवरण वनस्पति का रोपण करके किया जा सकता है।

5. मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि योग्य भूमि पर बालू के टीलों के प्रसार को वनों की रक्षक मेखला बनाकर रोकना चाहिए। कृषि के अयोग्य भूमि को चराई के लिए चरागाहों में बदल देना चाहिए। बालू के टीलों को स्थिर करने के उपाय भी अपनाए जाने चाहिए।
मृदा संरक्षण के कुछ महत्वपूर्ण और सुविज्ञात उपाय नीचे दिए गए हैं

वैज्ञानिक भूमि उपयोग अर्थात् भूमि का केवल उसी उद्देश्य के लिए उपयोग, जिसके लिए यह सबसे अधिक उपयुक्त है। वैज्ञानिक शस्यावर्तन। समाच्चरेखीय जुताई और मेड़बंदी। वनरोपण, विशेष रूप से नदी द्रोणियों के ऊपरी भागों में। आर्द्र-प्रदेशों में अवनालिका अपरदन और मरुस्थलीय और अर्द्ध-मरुस्थलीय प्रदेशों में । पवन-अपरदन रोकने के लिए अवरोधों का निर्माण। जैव खादों का अधिकाधिक उपयोग । बाढ़ सिंचाई के स्थान पर सिंचाई की फुहारा और टपकन विधियों का उपयोग।

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प्रश्न 4.
विश्व की मिट्टियों के मुख्य प्रकार बताइये और इनमें से किसी एक के विवरण एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में पायी जाने वाली मिट्टियों को छः प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।

  • जलोढ़ या कॉप मिट्टी
  • काली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • पर्वतीय मिट्टी

जलोढ़ एवं काँप मिट्टी (Alluvial Soil) – जलोढ़ एवं काँप मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाये गये अवसाद के निक्षेप से हुआ है। यह मिट्टी भारत के विस्तृत मैदानी भाग एवं प्रायद्वीपीय पठार के तटीय मैदानों में मिलती है। यह लगभग 15 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। उत्तर भारत के मैदान में इसका क्षेत्रफल लगभग 9 लाख वर्ग किमी. है। कृषि की दृष्टि से यह मिट्टी सबसे अधिक उपजाऊ तथा महत्त्वपूर्ण है। इस मिट्टी पर भारत की लगभग आधी आबादी की जीविका निर्भर है।

जलोढ़ मिट्रियों को नवीनता एवं प्राचीनता के आधार पर दो भागों में विभक्त किया जाता है – (1) बांगर (2) खादर

  • बांगर – यह पुराना जलोढ़ मिट्टी है जो अपेक्षाकृत ऊँचे भावों में पाया जाता है। इन मिट्टियों तक बाढ़ का पानी नहीं पाता है। यह खादर की अपेक्षा कम उपजाऊ मिट्टी होती है।
  • खादर – नवीन जलोढ मिट्रियाँ हैं जो नदी के बाढ मैदान, दियारा तथा डेल्टा क्षेत्रों में पायी जाती है। इसके कण प्राय: महीन होते हैं और इनमें जल धारण की शक्ति बांगूर मिट्टी से अधिक होती है तथा बांगर से इसकी उपजाऊपन ज्यादा है।

प्रश्न 5.
भारत की मिट्टियों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनकी विशेषताएँ एवं वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की मिट्टियों की उत्पत्ति, रंग, संघटन और स्थिति के आधार पर भारतीय मृदाओं को निम्नलिखित आठ वर्गों में विभाजित किया गया है –

  • जलोढ़ मृदा
  • काली मिट्टी
  • लाल एवं पीली मिट्टी
  • लैटेराइट मिट्टी
  • मरुस्थलीय मिट्टी
  • क्षारीय मिट्टी
  • पीटमय और जैव मृदायें तथा
  • वन मृदायें।

1. जलोढ़ मृदा – यह सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी हैं, जिनमें अनेक फसलें उपजायी जाती हैं। इसका मिट्टी का वितरण गंगा के संपूर्ण मैदानी भागों में पायी जाती है। प्रायद्वीपीय भारत में ये पूर्वी तट के नदियों के डेल्टाओं और कुछ नहीं घाटियों में पायी जाती है। इस मिट्टी का विस्तार भारत के 22% क्षेत्रफल पर पायी जाती है।

2. काली मिट्टी – इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाता है। काली मिट्टी देश के कुल क्षेत्रफल के 30% मात्रा पर पाई जाती है। इन्हें रेगुड़ भी कहते हैं। काली मिट्टी महाराष्ट्र पश्चिमी मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में विकसित है।

3. लाल एवं पिली मिट्टी – यह मिट्टी अपेक्षाकृत बलई और लाल-पीले रंग ही होती है। महीन कणों वाली मृदायें सामान्यतः उपजाऊ होती हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक आंध्रप्रदेश और उड़ीसा के अधिकांश भूमि पर लाल बलुई मृदायें पायी जाती हैं।

4. लैटेराइट मिट्टी – उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में लैटेराइट मिट्टी पायी जाती है जहाँ ऋतुनिष्ठ भारी वर्षा होती है। यह फसलों की कृषि हेतु उपजाऊ मिट्टी है। तमिलनाडु, कर्नाटक, के रण्य, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और असम के पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ है।

5. मरुस्थलीय मृदायें – इस मिट्टी का रंग लाल से लेकर किशमिशी तक होता है। यह सामान्यतः बलुई एवं क्षारीय होती है। पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीय मृदायें विशेष रूप में विकसित हुई हैं।

6. वन मृदाएँ – यह मिट्टी प्रर्याप्त वर्षा वाले वन क्षेत्रों में निर्मित होती हैं। मृदाओं का निर्माण पर्वतीय वातावरण में होती हैं। निचली घाटियों में पायी जाने वाली मृदायें उपजाऊ होती हैं और इनमें प्रायः चावल एवं गेहूँ की खेती होती है।

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प्रश्न 6.
भारत में काली मिट्टी का क्षेत्र एवं उसकी विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
काली मिट्टी का निर्माण ज्वालामुखी लावा के अनावृत्तिकरण से होती है। महाराष्ट्र एवं गुजरात के अधिकांश भाग, पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा आंध्रप्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ भागों में मिलती हैं। इस मिट्टी का विस्तार 5.5 लाख वर्ग किमी. में भारत में है। इसका विस्तार लावा क्षेत्र तक ही नहीं बल्कि नदियों ने इसे ले जाकर अपनी घाटियों में भी जमा करते रहते हैं। काली मिट्टी को विशेषता-यह मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है। कपास की उपज हेतु तो यह मिट्टी विश्वविख्यात इतनी हुई कि इसे कपासी मिट्टी भी कहा जाने लगा। इस मिट्टी में नमी रखने की शक्ति प्रचूर मात्रा में है। यद्यपि इस क्षेत्र में वर्षा कम होती है फिर भी इस मिट्टी से कपास के पौधों को पर्याप्त नमी प्राप्त हो जाती है और सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
इनमें से भारत के किस राज्य में बाढ़ अधिक आती है?
(क) बिहार
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) असम
(घ) उत्तर प्रदेश
उत्तर:
(ग) असम

प्रश्न 2.
उत्तरांचल के किस जिले में मालपा भूस्खलन आपदा घटित हुई थी?
(क) बागेश्वर
(ख) चंपावत
(ग) अल्मोड़ा
(घ) पिथौरागढ़
उत्तर:
(घ) पिथौरागढ़

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प्रश्न 3.
इनमें से कौन-से राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
(क) असम
(ख) पश्चिम बंगाल
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु
उत्तर:
(घ) तमिलनाडु

प्रश्न 4.
इनमें से किस नदी में मजौली नदीय द्वीप स्थित है?
(क) गंगा
(ख) ब्रह्मपुत्र
(ग) गोदावरी
(घ) सिंधु
उत्तर:
(ख) ब्रह्मपुत्र

प्रश्न 5.
बर्फानी तूफान किस तरह की प्राकृतिक आपदा है?
(क) वायुमंडलीय
(ख) जलीय
(ग) भौमिकी
(घ) जीवमंडलीय
उत्तर:
(क) वायुमंडलीय

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन से भारतीय क्षेत्रों में भूकंप के आने की संभावना सर्वाधिक होती है?
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य
(ख) दक्कन का पठार
(ग) कोरोमण्डल तट
(घ) गंगा का मैदान
उत्तर:
(क) उत्तर:पूर्वी राज्य

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के लगभग 30 शब्दों में उत्तर दें

प्रश्न 1.
संकट किस दशा में आपदा बन जाती है?
उत्तर:
प्राकृतिक संकट या मानव निर्मित संकट द्वारा जब धन-जन दोनों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है तब वह संकट आपदा बन जाती है।

प्रश्न 2.
हिमालय और भारत के उत्तर:पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
उत्तर:
इंडियन प्लेट प्रतिवर्ष उत्तर:पूर्व दिशा में एक सेंटीमीटर खिसक रही है। लेकिन उत्तर में स्थित यूरेशियन प्लेट इसके लिए अवरोध पैदा करती है। परिणाम स्वरूप इन प्लेटों के किनारे लॉक हो जाते हैं। ऊर्जा संग्रह से तनाव बढ़ता है प्लेटों के लॉक टूट जाते हैं और भूकंप आ जाता है।

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प्रश्न 3.
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियों अनुकूल हैं ?
उत्तर:
उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कम दबाव वाले उग्र मौसम तंत्र जो 30° उत्तर तथा 30° दक्षिण अक्षांशों के बीच पाए जाते हैं। तीव्र कोरियोलिस बल, क्षोभ मण्डल में अस्थिरता, तथा मजबूत ऊर्ध्वाधर वायु फान (wedge) की अनुपस्थिति आदि स्थितियाँ अनुकूल हैं।

प्रश्न 4.
पूर्वी भारत की बाढ़, पश्चिमी भारत की बाढ से अलग कैसे होती है?
उत्तर:
पूर्वी भारत की बाढ़ अंधाधुंध वन कटाव तथा प्राकृतिक अपवाह तंत्रों के अवरुद्ध होने तथा बाढ़कृत मैदानों पर मानव बसाव के कारण आती है जबकि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब आदि में मानसूनी वर्षा तथा मानवीय क्रियाकलापों के द्वारा बाढ़ आती है।

प्रश्न 5.
पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं?
उत्तर:
पश्चिमी और मध्य भारत में कम वर्षा होती है जिसके कारण भतल पर जल की कमी हो जाती है। कम वर्षा, अत्यधिक वाष्पीकरण और जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक , प्रयोग से सूखे की स्थिति पैदा होती है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दे

प्रश्न 1.
भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें और इस आपदा के निवारण के कुछ उपाय बताएँ।
उत्तर:
ज्यादा अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी । घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र, जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते हैं। हिमालय क्षेत्र के सारे राज्य और उत्तर:पूर्वी भाग (असम को छोड़कर) इस क्षेत्र में शामिल हैं।

पार हिमालय के कम वृष्टिवाले क्षेत्र लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में स्थिति, अरावली पहाड़ियों में कम वर्षा वाला क्षेत्र, पश्चिमी व पूर्वी घाट के व दक्कन पठार के वृष्टिछाया क्षेत्र ऐसे इलाके हैं. जहाँ कभी-कभी भूस्खलन होता है। इसके अतिरिक्त झारखण्ड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और केरल में खादानों और भूमि धंसने से भूस्खलन होता रहता है।

राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल (दार्जलिंग जिले को छोड़कर), असम (कार्बी अनलोंग को छोड़कर) और दक्षिण प्रान्तों के तटीय क्षेत्र भूस्खलन युक्त हैं। भूस्खलन आपदा के निवारण के कुछ उपाय-भूस्खलन से निपटने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग उपाय होने चाहिए। अधिक भू-स्खलन संभावी क्षेत्रों में सड़क और बड़े बाँध बनाने जैसे निर्माण कार्य तथा विकास कार्य पर प्रतिबंध होना चाहिए।

इन क्षेत्रों में कृषि नदी घाटी तथा कम ढाल वाले क्षेत्रों तक सीमित होनी चाहिए तथा बडी विकास परियोजनाओं पर नियंत्रण होना चाहिए। सकारात्मक कार्य जैसे-वृहत् स्तर पर वनीकरण को बढ़ावा और जल बहाव को कम करने के लिए बाँध का निर्माण भू-स्खलन के उपायों के पूरक हैं। स्थानांतरी कृषि वाले उत्तर:पूर्वी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जानी चाहिए।

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प्रश्न 2.
सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा भेद्यता क्षेत्रों में विभाजित करें और इसके निवारण के उपाय बताएँ।
उत्तर:
अधिक अस्थिर हिमालय की युवा पर्वत श्रृंखलाएँ, अंडमान और निकोबार, पश्चिमी घाट और नीलगिरी में अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, भूकंप प्रभावी क्षेत्र और अत्यधिक मानव क्रियाकलापों वाले क्षेत्र जिसमें सड़क और बाँध निर्माण इत्यादि आते हैं, अत्यधिक भूस्खलन सुभेद्यता क्षेत्रों में रखे जाते है। सखा एक जटिल परिघटना है जिसमें कई प्रकार के मौसम विज्ञान संबंधी तथा अन्य तत्त्व, जैसे-वृष्टि, वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, भौम जल, मृदा में नमी, जल भंडारण व भरण, कृषि पद्धतियाँ, विशेषतः उगाई जाने वाली फसलें, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियाँ पारिस्थितिकी शामिल हैं।

भारत में सूखाग्रस्त क्षेत्र-भारतीय जलवायु तंत्र में सूखा और बाढ़ महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। कुछ अनुमानों के अनुसार भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 19 प्रतिशत भाग और जनसंख्या का 12 प्रतिशत हिस्सा हर वर्ष सुखे से प्रभावित होता है। देश का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र सखे से प्रभावित हो सकता है 5 करोड़ लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। सूखे की तीव्रता के आधार पर भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है

अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान का अधिकतर भाग, विशेषकर अरावली के पश्चिम में स्थित मरुस्थल और गुजरात का कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा प्रभावित है। इसमें राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिले भी शामिल हैं, जहाँ 90 मिलीलीटर से कम वार्षिक
औसत वर्षा होती है। अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-इसमें राजस्थान के पूर्वी भाग, मध्य प्रदेश के अधिकतर भाग, महाराष्ट्र के पूर्वी भाग, आंध्र प्रदेश के अंदरुनी भाग, कर्नाटक का पठार, तमिलनाडु का उत्तरी भाग, झारखंड का दक्षिणी भाग और उड़ीसा का आंतरिक भाग शामिल है।

मध्य सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान के उत्तरी भाग, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी जिले, गुजरात के बचे हुए जिले, कोंकणं को छोड़कर महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु में कोयंबटूर पठार और आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं। निवारण के उपाय-सूखे की स्थिति में तात्कालिक सहायता से सुरक्षित पेयजल वितरण, दवाइयाँ, पशुओं के लिए चारे और जल की उपलब्धता तथा लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुँचना शामिल है।

दीर्घकालिक योजनाओं में विभिन्न कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे- भूमिगत जल के भण्डारण का पता लगाना, जल अधिक्य क्षेत्रों में अल्पजल क्षेत्रों में पानी पहुँचना, नदियों को जोड़ना और बाँध व जलाशयों का निर्माण इत्यादि। द्रोणियों की पहचान तथा भूमिगत जः भंडारण की संभावना का पता लगाने के लिए सुदूर संवेदन और उपग्रहों से प्राप्त चित्रों का प्रयोग करना। सूखा प्रतिरोधी फैसलों के बारे में प्रचार-प्रसार। वर्षा जल संलवन (Rain water harvesting) सूखे का प्रभाव कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 3.
किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?
उत्तर:
तकनीकी विकास ने मानव को, पर्यावरण को प्रभावित करने की बहुत क्षमता प्रद कर दी है। परिणमतः मनुष्य ने आपदा के खतरे वाले क्षेत्रों में गहन क्रियाकलाप शुरू कर दि है और इस प्रकार आपदाओं की सुभेद्यता को बढ़ा दिया है। अधिकांश नदियों में, बाढ़-मैद में भू-उपयोग तथा भूमि की कीमतों के कारण क्या तटों पर बड़े नगरों एवं बंदरगाहों, जैसेतथा चेन्नई आदि के विकास ने इन क्षेत्रों को चक्रवातों, प्रभंजनों तथा सुनामी आदि के लिए बना दिया है।

देश की आर्थिक उन्नति के लिए औद्योगिक और परमाणु विकास कभी-कभी आपदा का कारण बन जाता है। किसी जहरीली गैस का रिसाव (उदाहरण भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत, हजारों अपंग एवं बीमार), बाँध जलाशयों का निर्माण कार्य, आग तथा विस्फोट आदि हजारों लोगों की जान ले सकते हैं और लोगों को प्रभावित कर सकते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए विषयों पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें –

  1. मालपा भूस्खलन
  2. सुनामी
  3. उड़ीसा चक्रवात और गुजरात चक्रवात
  4. नदियों को आपस में जोड़ना
  5. टिहरी बाँध या सरदार सरोवर बाँध
  6. भुज/लातूर भूकंप
  7. डेल्टा या नदीय द्वीप में जीवन
  8. छत वर्षा जल संचयन का मॉडल तैयार करें।

उत्तर:
इस अध्याय को ध्यान से पढ़ें और अपने अध्यापक की मदद से या किसी अन्य पाठ्य-पुस्तक या अपने कक्षा की पाठ्य-पुस्तक से जानकारियाँ इकट्ठी करके इस परियोजना की रिपोर्ट तैयार करें। लगभग सभी जानकारियाँ आपको पाठ्य-पस्तक में ही मिल जायेंगी।

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भूकम्पमापक यंत्र को क्या कहते हैं?
उत्तर:
सिस्मोग्राफ।

प्रश्न 2.
भूकंप की तीव्रता किस पैमाने पर मापी जाती है?
उत्तर:
रिक्टर पैमाने पर।

प्रश्न 3.
लाटूर भूकंप (महाराष्ट्र) का क्या कारण था?
उत्तर:
भारतीय प्लेट का उत्तर की और खिसकना।

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प्रश्न 4.
भूकंप किस सिद्धांत से सम्बन्धित है?
उत्तर:
प्लेट टेक्टानिक।

प्रश्न 5.
भारत में प्रभाव डालने वाले प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखें।
उत्तर:
बाढ़, सूखा, भूकंप तथा भू-स्खलन।

प्रश्न 6.
प्राकृतिक आपदाओं का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
आकस्मिक भूगर्भिक हलचलें।

प्रश्न 7.
वर्तमान समय में भारत में आये विनाशकारी भूचाल का नाम लिखें।
उत्तर:
भुज, गुजरात-26 जनवरी, 2001

प्रश्न 8.
विभिन्न भूकंपीय तरंगों के नाम लिखें।
उत्तर:
P-Waves, S-Waves, L-Waves.

प्रश्न 9.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कोई जलभृत भाग किसी ढलान से अचानक नीचे गिरती हैं।

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प्रश्न 10.
तीन प्रदेशों के नाम लिखो जो चक्रवातों से प्रभावित हैं।
उत्तर:
उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु।

प्रश्न 11.
प्राकृतिक आपदायें किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के धरातल पर आन्तरिक हलचलों द्वारा अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। इनसे मानव पर हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। इन्हें प्राकृतिक आपदायें कहते हैं।

प्रश्न 12.
कुछ सामान्य आपदाओं के नाम बताएँ।।
उत्तर:
सामान्य आपादाएँ इस प्रकार हैं-ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप, सागरकम्प, सूखा, बाढ़, चक्रवात, मृदा अपरदन, अपवाहन, पंकप्रवाह, हिमधाव।

प्रश्न 13.
संकट किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रेजी भाषा में प्राकृतिक आपदाओं को प्राकृतिक संकट भी कहा जाता है। फ्रेंच भाषा में डेस (Des) का अर्थ बुरा (Bad) तथा (Aster) का अर्थ सितारे (Stars) से है। मानवीय जीवन और अर्थव्यवस्था को भारी हानि पहुँचाने वाली प्राकृतिक आपदाओं को संकट और महाविपत्ति कहते हैं।

प्रश्न 14.
भूकंप का परिणाम क्या होता है?
उत्तर:
भूकंप की शक्ति को रिक्टर पैमाने पर मापा जात है जिसे परिमाण कहते हैं। यह भूकंप द्वारा विकसित भूकंपीय ऊर्जा की माप होती है।

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प्रश्न 15.
भूकंप की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूकंप द्वारा होने वाली हानि की माप को तीव्रता कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारत के अधिक तथा अत्यधिक भूकंपनीय खतरे वाले क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भूकंप की दृष्टि से भारत के अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्रों के नाम हैं-हिमालय पर्वत, उत्तरपूर्वी भारत, कच्छ रत्नागिरी के आस-पास का पश्चिमी तटीय तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह। अधिक खतरे वाले क्षेत्र हैं-गंगा का मैदान, पश्चिमी राजस्थान ।

प्रश्न 17.
रिक्टर पैमाने पर कितने विभाग होते हैं?
उत्तर:
1-9 तक।

प्रश्न 18.
कोएना भूकंप का क्या कारण था?
उत्तर:
कोएना जलाशय में अत्यधिक जलदाब।

प्रश्न 19.
सूखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्षा की कमी के कारण खाद्यान्नों की कमी होना।

प्रश्न 20.
भारत में सूखे का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
अनिश्चित वर्षा।

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प्रश्न 21.
भारत में कितना क्षेत्रफल भाग बाढ़ों तथा सूखे से प्रभावित है?
उत्तर:
सूखे से 10% भाग तथा बाढ़ों से 12% भाग।

प्रश्न 22.
भारत में बाढ़ों का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
भारी मानसून वर्षा तथा चक्रवात।

प्रश्न 23.
दक्षिणी प्रायद्वीप में बाढ़ कम आती हैं। क्यों?
उत्तर:
मौसमी नदियों के कारण।

प्रश्न 24.
भारत के बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गंगा बेसिन, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल
  2. आसाम में ब्रह्मपुत्र घाटी
  3. उड़ीसा प्रदेश।

प्रश्न 25.
भू-स्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आधार शैलों का भारी मात्रा में तेजी से खिसकना भू-स्खलन कहलाता है। तीव्र पर्वतीय ढलानों पर भूकंप के कारण अचानक शैलें खिसक जाती हैं।

प्रश्न 26.
आपदा प्रबंधन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आपदाओं को सुरक्षा के उपाय, तैयारी तथा प्रभाव को कम करने की क्रिया को आपदा प्रबंधन कहते हैं। इसमें राहत कार्यों की व्यवस्था भी शमिल की जाती है।

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प्रश्न 27.
चक्रवात की उत्पत्ति के लिए आधारभूत आवश्यकताएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव क्षेत्र के चारों और तापमान की क्षतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है।

प्रश्न 28.
चक्रवात की गति और सामान्य अवधि कितनी होती है?
उत्तर:
चक्रवात की गति 150 km प्रति घंटा तथा अवधि एक सप्ताह तक होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि का वर्णन करो।
उत्तर:
विश्व में प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं से एक लाख व्यक्तियों की जानें जाती हैं तथा 20.000 करोड़ रुपये की सम्पत्ति की हानि होती है। यह मानवीय विकास के लिए रुकावट है। U.N.O. के अनुसार 1990-99 के दशक को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का दशक घोषित किया गया। प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त विश्व के प्रमुख 10 देशों में से भारत एक देश है।

प्रति वर्ष 6 करोड़ लोग इनसे प्रभावित होते हैं। विश्व की 50% प्राकृतिक आपदाएँ भारत में अनुभव की जाती हैं। फिर भी भारत में इन आपदाओं से सुरक्षा के लिए एक व्यापक प्रबंध किया गया है जिसमें भूकंपीय स्टेशन, चक्रवात, बाढ़, रडार, जल प्रवाह के बारे में सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं तथ सुरक्षा के प्रबंध किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रमुख प्राकृतिक आपदाएं कौन-सी हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक आपदाएँ वे भूगर्मिक हलचलें हैं जो अचानक ही भू-तल पर परिवर्तन लाकर जन, धन व सम्पत्ति की हानि करती हैं। सूखा, बाढ़, चक्रवात, भू-स्खलन, भूकंप विभिन्न प्रकार की मुख्य प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

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प्रश्न 3.
भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों पर नोट लिखें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात खाड़ी बंगाल तथा अरब सागर में उत्पन्न होते हैं। चक्रवात पवनों का एक भंवर होता है जो मूसलाधार वर्षा प्रदान करता है। ये प्रायः अक्टूबर-नवम्बर के महीनों में चलते हैं। इनकी दिशा परिवर्तनशील होती है। ये प्रायः पश्चिम की ओर तथा उत्तर:पश्चिम, उत्तर पूर्व की ओर चलते हैं। इनका प्रभाव तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, उड़ीसा के तटों पर होता है।

प्रभाव (Effects) –

  • ये चक्रवात मूसलाधार वर्षा, तेज़ पवनें तथा घने मेघ लाते हैं। औसत रूप से 50 सेमी वर्षा एक दिन में होती है।
  • ये चक्रवात जन-धन की हानि व्यापक रूप से करते हैं।
  • खाड़ी बंगाल में निम्न वायु दाब केन्द्र बनने से ये चक्रवात उत्पन्न करते हैं।
  • ये चक्रवात एक दिन में पूर्वी तट से गुजर कर प्रायद्वीप को पार करके पश्चिमी तट पर पहुँच जाते हैं।
  • गोदावरी, कृष्ण, कावेरी डेल्टाओं में भारी हानि होती है।
  • सुन्दरवन डेल्टा तथा बंग्ला देश में भी भारी हानि होती है।

प्रश्न 4.
भू-स्खलन से क्या अभिप्राय है ? इनके प्रभाव बताओ।
उत्तर:
भू-स्खलन (Landslides) – भूमि के किसी भाग के अचानक फिसल कर पहाडी से नीचे गिर जाने की क्रिया को भू-स्खलन कहते हैं। कई बार भूमिगत जल चट्टानों में भर कर उनका भार बढ़ा देता है। यह जल मूल चट्टानी ढलान के साथ नीचे फिसल जाती हैं। इनके कई प्रकार होते हैं।

  • स्लम्प (Slumps) – जब चट्टानें थोडी दुरी से गिरती हैं।
  • रॉक स्लाइड (Rockslide) – जब चट्टानें अधिक दूरी से अधिक भाग में गिरती हैं।
  • रॉक फाल (Rockfall) – जब किसी मूल से चट्टानें ट कर गिरती हैं।

कारण (Causes) –

  • जब वर्षा का जल या पिघलती हिम एक स्नेहक (Lubricant) के रूप में कार्य करता है।
  • तीव्र ढलान के कारण।
  • भूकंप के कारण।
  • किसी सहारे के हट जाने पर।
  • भ्रंशन या खदानों के कारण।
  • ज्वालामुखी विस्फोट के कारण।

प्रभाव (Effects) –

  • भवन, सड़कें, पुल आदि का नष्ट होना।
  • चट्टानों के नीचे दबकर लोगों की मृत्यु हो जाना।
  • सड़क मार्गों का अवरुद्ध हो जाना।
  • नदियों के मार्ग अवरुद्ध होने से बाढ़ आना।
  • 1957 में कश्मीर में भू-स्खलन से राष्ट्रीय मार्ग बंद हो गया था।
  • गत वर्ष में टेहरी-गढ़वाल में बादल फटने से भूस्खलन हुआ।

प्रश्न 5.
शुष्कता और सूखा में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
शुष्कता और सूखा में अंतर –
Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ 1

प्रश्न 6.
आपदाएँ एवं संकट में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
आपदाएँ एवं संकट में अंतर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के सूखाग्रस्त इलाकों का वर्णन करते हुए सूखे के अर्थव्यवस्था पर होनेवाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में सूखे का सर्वाधिक प्रभाव राजस्थान और इसके निकटवर्ती हरियाणा एवं मध्यप्रदेश के क्षेत्र, गुजरात का अधिकांश भाग, मध्यवर्ती महाराष्ट्र, पूर्वी व मध्यवर्ती कर्नाटक, पश्चिमी व मध्य तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में पड़ता है। इसके अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी कभी-कभी सूखा पड़ जाता है। इन क्षेत्रों में 100 cm.से भी कम वर्षा होती है और पर्याप्त सिंचाई की उपलब्धता भी नहीं है।

यद्यपि देश के किसी भी भाग में वर्षा कम होने पर सखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अनुमानतः भारत का 19% क्षेत्र तथा देश का 12% जनसंख्या प्रतिवर्ष सूखे की चपेट में रहती है। सूखे का अर्थव्यवस्था पर भयानक परिणाम होते हैं। जब फसलें नष्ट होती है तो अन्न की कमी हो जाती है और अकाल पड़ जाता है। पशुओं के लिए चारा कम हो जाता है तो ऋण अकाल पड़ जाता है। जल की कमी की अवस्था को जल अकाल कहा जाता है। जब तीनों परिस्थितियाँ एक साथ उत्पन्न हो जाती है।

तो त्रि-अकाल कहलाती है जो सबसे भयंकर होती है। भीषण अकाल पड़ने पर भारी संख्या में स्त्री, पुरुष तथा बच्चे एवं जीव-जन्तुओं को भोजन के अभाव में मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। सूखाग्रस्त क्षेत्रों से मानव प्रवास तथा पश पलायन एवं सामान्य सी घटना बन जाती है। जलाभाव में लोग दुषित जल पीने को बाध्य होते हैं। जिस कारण पेयजल संबंधी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती हैं।

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प्रश्न 2.
भूकंप की परिभाषा दें। भारत में भूकंप क्षेत्रों का वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
भूकंप (Earthquake) – पृथ्वी के किसी भाग के अचानक हिलने को भकप कहते हैं। इस हलचल से भूपृष्ठ पर झटके (Tremors) अनुभव किए जाते हैं। भूकंपीय तरंगें सभी दिशाओं में लहरों की भान्ति आगे बढ़ती हैं। ये तरंगें उद्रम (Focus) से आरंभ होती हैं। ये तरंगें तीन प्रकार की होती हैं-P-Waves,S-Waves, L-Waves.

भूकंप के कारण (Causes of Earthquake) – भूकंप के सामान्य कारण ज्वालामुखी विस्फोट, भू-हलचलें, चट्टानों का लचीलापन तथा स्थानीय कारण है। भारत में सामान्य रूप से भारतीय प्लेट तथा यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। ये एक दूसरे के नीचे घुसने का यत्न करती हैं। हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में इनका सम्बन्ध वलन एवं भ्रंशन क्रिया से है। दक्षिणी भारत एक स्थिर भूखण्ड है तथा भूकंप बहुत कम होते हैं। भूकंपों की तीव्रता रिक्टर पैमाने से मापी जाती है जिसका माप 1 से 9 तक होता है। अधिक तीव्र भूकंप भारत के निम्नलिखित क्षेत्रों में अनुभव किए जाते हैं

1. हिमालयाई क्षेत्र (Himalayan Zone) – क्षेत्र में क्रियाशील भूकंप जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल तथा उत्तर:पूर्वी राज्यों में आते हैं जिनसे बहुत हानि होती है। यह भूकंप भारतीय प्लेट तथा यूरेशियम प्लेट के आपसी टकराव के कारण उत्पन्न होते हैं। भारतीय प्लेट प्रति वर्ष 5 सेमी. की गति से उत्तर तथा उत्तर:पूर्व की ओर बढ़ रही है। यहाँ 1905 में कांगड़ा में, 1828 में कश्मीर में, 1936 में क्वेटा में तथा 1950 में असम में भयानक भूकंप अनुभव किए गए।

2. सिन्धु-गंगा प्रदेश (Indo – Gangetion Zone) – इस क्षेत्र में सामान्य तीव्रता के भूकंप, अनुभव किए जाते हैं। इनकी तीव्रता 6 से 6.5 तक होती है। परंतु इन सधन बसे क्षेत्रों में बहुत हानि होती है।

3. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Zone) – यह एक स्थिर क्षेत्र है परंतु फिर भी यहाँ भूकंप अनुभव किए जाते हैं। 1967 में कोयना, 1993 में लातूर, 2001 में भुज के भूकंप बहुत विनाशकारी थे। कोयना भूकंप कोयला डैम के जलाशम में जल के अत्यधिक दबाव के कारण आया परंतु भूकंप भारतीय प्लेट की उत्तर की ओर गति के कारण आए हैं।

4. अन्य भूकंपीय क्षेत्र (Other Sesonic Zones) –

  • बिहार-नेपाल क्षेत्र
  • उत्तर-पश्चिमी हिमालय
  • गुजरात क्षेत्र
  • कोयना क्षेत्र

भारत के प्रमुख विनाशकारी भूकंप –
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भूकंप के परिणाम – केवल बसे हुए क्षेत्रों के आने वाला भूकंप ही आपदा या संकट बनता है। भूकंप का प्रभाव सदैव विध्वंसक होता है। भूकंप के कारण प्राकृतिक पर्यावरण में कई तरह से परिवर्तन हो जाते हैं। भूकंपीय तरंगों से धरातल में दरारें पड़ जाती हैं जिनसे कभी-कभी पानी के फब्बारे छूटने लगते हैं। इसके साथ बड़ी भारी मात्रा में रेत बाहर आ जाता है तथा इससे रेत के बांध बन जाते हैं। क्षेत्र के अपवाह तंत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं। नदियों के मार्ग बदल जाने से बाढ आ जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भू-स्खलन हो जाते हैं तथा इनके साथ भारी मात्रा में चढ़ानी मलबा नीचे आ जाता है। इससे वहतक्षरण होता है। हिमानियाँ फट जाती हैं तथा इनके हिमधाव सुदूर स्थित स्थानों पर बिखर जाते हैं।

नए जल प्रपातों और सरिताओं की उत्पत्ति भी हो जाती है। भूकम्पीय आपदाओं से मनुष्य निर्मित भवन बच नहीं पाते हैं। सड़कें, रेलमार्ग, पुल और टेलीफोन की लाइनें टूट जाती हैं। गगनचुम्बी भवनों और सघन जनसंख्या वाले कस्बों और नगरों पर भूकंपों का सबसे बुरा असर होता है।

सनामी लहरें (Tsunami Tadial Waves) – समुद्री तल पर भूकंप उत्पन्न होने से 30 मीटर तक ऊँची ज्वारीय लहरें (सुनामी) उत्पन्न होती हैं। 26 दिसम्बर, 2004 को हिन्द महासागर में इण्डोनेशिया के निकट उत्पन्न भूकंप के कारण भयंकर सुनामी लहरें उत्पन्न हुई । इनका प्रभाव इण्डोनेशिया, थाईलैण्ड, म्यानमार, भारत तथा श्रीलंका के तटों पर अनुभव किया गया । इन भयंकर लहरों के कारण इन क्षेत्रों में लगभग 2 लाख लोगों की जाने गई तथा करोडों रुपयों की सम्पत्ति की हानि हुई है। यह पृथ्वी के इतिहास में सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा थी।

भूकंप के प्रभाव को कम करना-भूकंप के प्रभाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसकी निरंतर खोज-खबर रखना तथा लोगों को इसके आने की सम्भावना की सूचना देना । इससे आशंकित क्षेत्रों से लोगों को हटाया जा सकता है। भूकंप से अत्यधिक खतरे वाले क्षेत्र में भूकम्परोधी भवन बनाने की आवश्यकता है। भूकंप की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को भूकम्परोधी भवन और मकान बनाने की सलाह दी जा सकती है।

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प्रश्न 3.
आपदा प्रबंधन पर एक लेख लिखें।
उत्तर:
आपदा प्रबंधन (Disaster Management) – आपदा प्रबंधन में निवारक और संरक्षी उपाय, तैयारी तथा मानवों पर आपदा के प्रभाव को कम करने की व्यवस्था तथा आपदा प्रवण क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक पक्ष शामिल किए जाते हैं। आपदा प्रबंध की सम्पूर्ण प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है। प्रभाव चरण, पुनर्वास और पुननिर्माण चरण तथा समन्वित दीर्घकालीन विकास और तैयारी चरण ।

प्रभाव चरण के तीन अंग हैं –

  • आपदा की भविष्यवाणी करना
  • आपदा के प्रेरक कारकों की बारीकी से खोजबीन तथा
  • आपदा आने के बाद प्रबंधन के कार्य

जलग्रहण क्षेत्र में हुई वर्षा का अध्ययन करके बाढ़ की भविष्यवाणी की जा सकती है। उपग्रहों के द्वारा चक्रवातों के मार्ग, गति आदि की खोज-खबर ली जा सकती है। इस प्रकार प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पूर्व चेतावनी तथा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के प्रयत्ल शुरू किए जा सकते हैं। आपदा के लिए जिम्मेदार कारकों की बारीकी से की गई खोजबीन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने, भोजन, वस्त्र और पेय जल की आपूर्ति के लिए कार्यदल नियुक्त किए जा सकते हैं।

आपदाएँ मृत्यु और विनाश के चिह्न छोड़ जाती हैं। प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा और अन्य विभिन्न प्रकार की सहायता की जरूरत होती है। दीर्घकालीन विकास के चरण के अन्तर्गत विविध प्रकार के निवारक और सुरक्षात्मक उपायों की योजना बना लेनी चाहिए।

ससार के लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यूनेस्को ने 1990-2000 के दौरान प्राकृतिक आपदा राहत दशक मनाया था। संसार के अन्य देशों के साथ भारत ने भी दशक के दौरान अक्टूबर में विश्व आपदा राहत दिवस मनाया था। इस अवसर पर भूकंप, बाढ़ और चक्रवात प्रवण क्षेत्रों के लोगों के लिए भारत सरकार ने जो करणीय और अकरणीय कर्म प्रचारित किए थे, वे बहुत उपयोगी हैं।

प्रश्न 4.
भूकंप आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
तत्काल कार्यवाही घर के अंदर-बाहर मत भागिए, अपने परिवार को दरवाजों और मेजों के नीचे. पलंगों पर लेटे व्यक्ति को पलगों के नीचे ले आइऐ, खिडकियों और चिमनियों से दूर रहिए। घर के बाहर-भवनों, ऊँची दीवारों, बिजली के झूलते तारे से दूर रहिए। क्षतिग्रस्त भवनों में दुबारा मत जाइए। वाहन चलाते समय-अगर कार या बस में यात्रा करते समय भूकंप के झटके महसस होने लगें तो ड्राइवर को वाहन रोकने के लिए कहिए। वाहन में ही बैठे रहिए।

तत्काल करने योग्य कार्य-घर में सभी आग बुझा दीजिए तथा हीटर बंद कर दीजिए। यदि घर क्षतिग्रस्त हो गया है, तो बिजली, गैस और पानी बंद कर दीजिए। यदि घर में लगभग आग को तत्काल न बुझाया जा सके, तो तुरंत घर छोड़ दीजिए। गैस जलाने के बाद यदि गैस के रिसाव का पता चले तो घर से निकल जाइए संभव हो तो रेगुलेटर बंद कर दें। पालतू और घरेलू जीव-जन्तुओं (कुत्ता-बिल्ली और गोपशु) को बंधन से मुक्त कर दीजिए।

प्रश्न 5.
भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का वर्णन करो। बाढ़ों के कारणों का उल्लेख करते हुए इनसे होने वाली क्षति का वर्णन करो। बाढ़ नियंत्रण के उपाए बताओ।
उत्तर:
बाढ़ समस्या (Flood Problem) – सूखे की भान्ति बाद भी एक प्राकृतिक विपदा है। प्रत्येक वर्ष भारत के किसी-न-किसी भाग में बाढ़ों द्वारा विस्तृत क्षेत्रों से धन-जन की हानि होती है। कई बार देश के एक भाग में भयानक सूखे की स्थिति तो दूसरे भाग में बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इससे समस्या अधिक गम्भीर हो जाती है। भारत में बाढ़ एक मौसमी समस्या है जब मानसून की अनियमित वर्षा से नदियों में बाढ़ आ जाती है। जब नदी के किनारों के ऊपर से पानी बह कर समीपवर्ती क्षेत्रों में दूर-दूर तक फैल जाता है तो इसे बाढ़ का नाम दिया जाता है।

भारत ‘नदियों का देश’ है जहाँ अनेक छोटी-बडी नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ वर्षा ऋतु में भरपूर बहती हैं, परंतु शुष्क ऋतु में इनमें बहुत कम जल होता है। निरंतर भारी वर्षा के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। वर्षा की तीव्रता तथा वर्षाकाल की अवधि अधिक होने से बाढ़ों को सहायता मिलती है। मानसून के पूर्व आरम्भ या देर तक समाप्त होने से बाढ़ उत्पन्न होती है।

ब्रह्मपुत्र नदी में मई-जून मास में बाढ़ साधारण बात है। उत्तरी भारत की नदियों में वर्षा ऋतु में बाढ़ आती हैं। नर्मदा नदी में अचानक बाढ़ (Flash floods) आती हैं। तटीय भागों में चक्रवातों के कारण मई तथा अक्टूबर मास में भयानक बाढ़ आती हैं । सन् 1990 में मई मास में आन्ध्र प्रदेश में खाड़ी बंगाल के चक्रवात से भारी क्षति हुई जिसमें लगभग 1000 व्यक्ति मर गए।

बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र (Flood Affected Areas) – भारत में मैदानी भाग में नदी घाटियों में अधिक बाढ़ें आती हैं। देश का लगभग 1/8 भाग बाढ़ों से प्रभावित रहता है। 60 प्रतिशत बाढ़ अधिक वर्षा के कारण उत्पन्न होती हैं। असम, बिहार, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्य स्थायी रूप से बाढ़ ग्रस्त रहते हैं। इन प्रदेशों में अधिक वर्षा तथा बड़ी-बड़ी नदियों के कारण बाढ़ समस्या गम्भीर है। एक अनुमान के अनुसार देश में 78 लाख हेक्टेयर भूमि पर प्रति वर्ष बाढ़ आती हैं। नदी घाटियों के अनुसार बाढ़ क्षेत्रों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है

1. हिमालय क्षेत्र की नदियाँ (The Rivers of the Himalayas) – इस भाग में गंगा तथा ब्रह्मपुत्र दो प्रमुख नदियाँ हैं जिनमें प्रत्येक वर्ष बाढ़ें आती हैं। गंगा घाटी में यमुना, घाघरा, गंडक तथा कोसी जैसी सहायक नदियाँ शामिल हैं। इन नदियों में जल की मात्रा अधिक होती है। इनकी ढलान तीव्र होती है तथा इन नदियों के मार्ग में परिवर्तन होता रहता है। उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विस्तृत क्षेत्रों में बाढों से भारी क्षति पहुँचती हैं। देश में बाढ़ों से कुल क्षति का 33% भाग उत्तर प्रदेश में तथा 27% भाग बिहार में होता है। कोसी नदी को बाढों के कारण ‘शोक की नदी” (River of Sorrow) कहा जाता है।

ब्रह्मपुत्र नदी असम, मेघालय तथा बंगलादेश में बाढों से हानि पहुँचती है। ब्रह्मपुत्र घाटी भारत में सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहाँ अधिक वर्षा तथा रेत व मिट्टी के जमाव से बाढ़ उत्पन्न होती हैं। भूकंप के आने के कारण नदियाँ अपना मार्ग बदल लेती हैं तथा बाढ़ की समस्या अधिक गम्भीर हो जाती हैं। दामोदर घाटी में दामोदर नदी के कारण भयंकर बाढ़ें आती रही हैं। इस नदी को “बंगाल का शोक” भी कहा जाता था परंतु दामोदर घाटी योजना के पूरा होने के बाद भी बाढ़ समस्या कम हो गई हैं

2. उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India) – इस भाग में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं। यहाँ झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास तथा रावी नदियों के कारण बाढ़ें उत्पन्न होती हैं। बरसाती नदियों में भी बाढ़ें आती हैं।

3. मध्य भारत (Central India) – इस भाग में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश तथा उड़ीसा शामिल हैं। यहाँ ताप्ती, नर्मदा तथा चम्बल नदियों में कभी-कभी बाढ़ें आती हैं। यहाँ अधिक वर्षा के कारण बाढ़ उत्पन्न होती हैं।

4. प्रायद्वीपीय क्षेत्र (Peninsular Region) – इस क्षेत्र में महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा काबेरी, नदियों में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के कारण बाढ आती हैं। कई बार ज्वार-भाटा के कारण डेल्टाई क्षेत्रों में रेत और मिट्टी के जमाव से भी बाढ़ आती हैं।

बाढ़ों के कारण (Causes of Floods) – भारत एक उष्ण कटिबंधीय मानसूनी देश है। यहाँ मानसूनी वर्षा के अधिक होने से बाढ़ की समस्या गम्भीर हो जाती है। बाढ निम्नलिखित कारणों से आती है –

1. भारी वर्षा (Heavy Rain) – किसी भाग में एक दिन में निरंतर वर्षा की मात्रा 15 सेमी. से अधिक होने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

2. चक्रवात (Cyclones) – भारत के पूर्वी तट पर खाडी बंगाल के तीव्र गति के चक्रवातों से भयानक बाढ़ आती हैं। जैसे-मई, 1990 में आन्ध्र प्रदेश में चक्रवातों द्वारा निरंतर वर्षा से नदी क्षेत्रों में बाढ़ उत्पन्न होने से भारी हानि हुई।

3. वनों की कटाई (Deforestation) – नदियों के ऊपरी भागों में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से अचानक बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं। शिवालिक की पहाड़ियों, असम, मेघालय तथा छोटा नागपुर के पठार में वृक्षों की कटाई के कारण बाढ़ की समस्या गम्भीर है।

4. नदी तल का ऊँचा उठना (Rising of the River Bed) – रेत तथा बजरी जमाव से नदी तल ऊँचा उठ जाता है जिससे समीपवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का जल फैल जाता है।

5. अपर्याप्त जल प्रवाह (Inadequate Drainage) – कई निम्न क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रबंध न होने से बाढ़ उत्पन्न हो जाती हैं।

बाढ़ से क्षति (Damage due to Floods) – बाढ़ से कृषि क्षेत्र में फसलों की हानि होती है। मकानों, संचार साधनों तथा रेलों, सड़कों को क्षति पहुँचती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में कई बीमारियाँ फैल जाती हैं। देश में लगभग 2 करोड़ हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र है जिसमें से 25 लाख हेक्टेयर भूमि में फसलें नष्ट हो जाती हैं। प्रतिवर्ष औसत रूप से 1 करोड़ जनसंख्या पर बाढ़ से क्षति का प्रभाव पड़ता है। लगभग 30 हजार पशुओं की हानि होती है।

एक अनुमान है कि औसत रूप से प्रति वर्ष 505 व्यक्तियों की बाढ़ के कारण मृत्यु हो जाती है। इस प्रकार देश में लगभग 1500 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचती है। सन् 1990 में देश में कुल क्षति 41.25 करोड़ रुपए की थी तथा 50 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ग्रस्त 162 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। 28 करोड़ रुपये की फसलें नष्ट हुई। 862 जानें गई तथा 1,22,498 पशु नष्ट हो गये।

बाढ़ से रोकथाम (Flood Control) – भारत में प्राचीन समय से ही बाढ़ की रोकथाम के लिए उपाय किए जाते हैं। प्रायः नदियों के साथ-साथ तटबंध बनाकर बाढ़ नियंत्रण किया जाता था । सन् 1954 में राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण योजना शुरू की गई। इस योजना के अधीन बाढ़ नियंत्रण के लिए कई उपाय किए गए।

1. नदियों के जल सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे किए गए।

2. नदियों के साथ तटबंध बनाये गए। देश में लगभग 15.467 किमी लम्बे तटबंधों का निर्माण किया गया।

3. निम्न क्षेत्रों में लगभग 30,199 किमी लम्बी जल प्रवाह नलिकायें बनाई गई हैं। 762 नगरों तथा 4,700 गाँवों को बाढ़ों से सुरक्षित किया गया है।

4. कई नदियों पर जलाशय बना कर बाढ़ों पर नियंत्रण किया गया है। जैसे-दामोदर घाटी बहुमुखी योजना तथा भाखडा नांगल योजना। देश में बाढ़ों का पूर्व अनुमान लगाने के लिए (Flood Foredacasting) 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

5. नदियों के ऊपरी भागों में वन रोपण किया गया है। सातवीं पंचवर्षीय योजना के अन्त तक 2710 करोड़ रुपए बाढ़ नियंत्रण पर व्यय किए गए जबकि आठवीं योजना पर 9470 करोड रुपये के व्यय का अनुमान है।

6. केरल तट पर सागरीय प्रभाव से बचाव के लिए 42 किमी लम्बी समद्री दीवारों का निर्माण किया गया तथा कर्नाटक तट पर 73 किमी लम्बी समुद्री दीवारें बनाई गई।

7. देश में बाढ़ के पूर्व निर्माण संगठन (Flood Fore-casting Organisation) की स्थापना की गई है। इसके अधीन 157 केन्द्र स्थापित किए गए हैं जिनकी संख्या इस शताब्दी के अन्त तक 300 हो जायगी।

8. महानदी घाटी में हीराकुड बाँध, दामोदर घाटी में कई बाँध, सतलुज नदी पर भाखड़ा डैम, व्यास नदी पर पौंग डैम तथा ताप्ती नदी पर डकई बाँध बनाकर बाढ़ों की रोकथाम की गई है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

प्रश्न 6.
सूखा क्या है? भारत में इसके कारणों एवं प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
जब जल तथा नमी की उपलब्धता कुछ देर के लिये सामान्य से काफी कम होती हे तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। High Powered Committce on Disaster Management के अनुसार कृषि, पशुधन, उद्योग अथवा मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं से कम जल उपलब्ध होने की सूखा कहा जाता है।

सूखे का मुख्य कारण-भारत में वर्षा का अपर्याप्त होना तथा असमान वितरण के कारण मुख्य रूप से सूखा होता है। पश्चिमी और मध्य भारत को मौनसूनी वर्षा की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। यही नहीं यहाँ वर्षा केवल अनिश्चित ही नहीं अपर्याप्त भी है। वर्षा की कमी जल विज्ञान संबंधी और कृषीय सूखे को प्रेरित करती है।

भारत के कुल क्षेत्रफल के 19% भाग को सूखे की मार झेलनी पड़ती है। इस क्षेत्र में देश की 12% जनसंख्या रहती है। भारत के कुछ राज्यों में सूखा एक स्थायी लक्षण है। देश का लगभग 30% क्षेत्र सूखा प्रदेश है।

सूखे का प्रभाव – सूखे के कारण खाद्यान्नों जल और चारे की कमी हो जाती है, इन्हें क्रमश: अकाल, जलकाल और तिनकोण कहते हैं। कभी-कभी तीनों की कमी एक साथ हो जाती है तब इसे त्रिकाल कहते हैं।

  • सूखे के बाद होनेवाले अकाल के कारण मानवों एवं पशुधन का भारी मात्रा में पलायन आरंभ हो जाता है।
  • सन् 1987 में भारत के आंध्रप्रदेश, गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश आदि 12 राज्यों में भयंकर सूखा पड़ा था।
  • सन् 2002 में मानसूनी वर्षा के न होने से भारत के मध्यवर्ती पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में भयंकर सूख पड़ा।

प्रश्न 7.
चक्रवात आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनते रहिए। बचाव के लिए पर्याप्त समय दीजिए चक्रवात कुछ घंटों में मार्ग की दिशा, गति तथा तीव्रता बदल सकता है। अतः नवीनतम सूचना के लिए रेडियो को निरंतर चलाए रखिए। यदि आपके क्षेत्र के लिए तूफानी पवनों या प्रबल झंडा की भविष्यवाणी की गई हो तो खुले तख्ते, नालीदार, टीन, खाली डिब्बे या ऐसी ही अन्य वस्तुएँ, जो पवन के साथ उड़कर खतरा बन सके, बांध दीजिए या स्टोर में रख दीजिए।

खिड़कियों को टूटने से बचाने के लिए उन्हें बंद रखिए। निकट के सुरक्षित स्थान में चले जाइए या किसी अधिकार प्राप्त सरकारी संस्था के आदेश पर क्षेत्र को छोड़ दीजिए। जब तूफान आ ही जाए, तो घर के अंदर रहिए। अपने घर के सबसे मजबूत भाग में शरण लीजिए।

रेडियो सुनिए और निर्देशों का पालन कीजिए। यदि छत उड़ने लगे, तो मकान के सुरक्षित भाग की खिड़की को खोल दीजिए। यदि आप खले में फंस गए हैं, तो शरण खोजिए। तूफान के दौरान पवनों के शान्त होने पर घर से बाहर या पुलिन (beach) पर मत जाइए। चक्रवातों के साथ प्रायः या झील में ऊँची-ऊंची लहरें उठती हैं।

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प्रश्न 8.
बाढ़ आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर:
अग्रिम सूचना और सलाह के लिए रेडियो सुनिए। बिजली के सभी उपकरण बंद कर दीजिए। घर के सभी कीमती सामान और कपडे बाढ के पानी की पहुँच से दूर रखिए। ऐसा तभी कीजिए जब बाढ की चेतावनी मिली हो या आपको आशंका हो कि बाढ़ का पानी आपके घर में घुस जायगा। वाहनों, फार्म के पशुओं तथा आसानी से उठाई जा सकने वाली वस्तुओं को निकट की ऊँची – भूमि पर पहुँचा दीजिए। खतरनाक प्रदूषण को रोकिए।

सभी कीटनाशकों को पानी की पहुँच से दूर रखिए। यदि आपको घर छोड़ना पड़े तो बिजली और गैस बंद कर दीजिए। घर छोड़ने की मजबूरी में सभी बाहरी खिड़कियों और दरवाजों पर ताले लगा दीजिए। यदि आप बच सकते हैं, तो बाढ़ के पानी में पैदल या कार में बैठकर प्रवेश मत कीजिए। अपने आप बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के इधर-उधर मत घूमिए ।

प्रश्न 9.
भारत के प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर:
प्राकृतिक आपदा, महाविनाशकारी, अप्रत्याशित और अनियंत्रणीय परिघटना है। ये आपदायें –

  • जैव
  • भू-वैज्ञानिक
  • भूकंपीय
  • जल विज्ञान या मौसमी दशाएँ या प्राकृतिक पर्यावरण की प्रतिक्रियाएँ होती है?

भूकंप, चक्रवाती तूफान, आकस्मिक बाढ़, बादलों का फटना, सूखा आदि प्राकृतिक आपदायें कही जाती हैं। चक्रवात-600 किमी. या इससे अधिक व्यास तफानों में सबसे विनाशक या भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सर्वाधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के विषय में कोई भी सर्वमान्य सिद्धांत नहीं बना है। जब कमजोर रूप से विकसित कम उबाव के क्षेत्र में चारों ओर तापमान की क्षतीज प्रवणता बहुत कम होती है तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है।

अधिकांशतः चक्रवातीय क्षति, तेज पवनों, मुसलाधार वर्षा और समुद्र में उठने वाली ऊँची तूफानों ज्वारीय लहरों के द्वारा होती है। पवनों की तुलना में चक्रवातीय वर्षा के कारण आई बाढ अधिक विनाशकारी होती है। वर्तमान संयम में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने से तथा प्रर्याप्त और सामूहिक कार्यवाही से चक्रवात में मरने वालों की संख्या में कमी आयी है।

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प्रश्न 10.
चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवातों द्वारा क्षति का वर्णन करें।
उत्तर:
चक्रवात (Cyclones) – 600 किमी या इससे अधिक व्यास वाले चक्रवात, पृथ्वी के वायुमंडलीय तूफानों में सबसे अधिक विनाशक और भयंकर होते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप संसार में चक्रवातों द्वारा सबसे अधिक दुष्प्रभावित क्षेत्र हैं। संसार में अपने वाले चक्रवातों में से 6 प्रतिशत यहीं आते हैं।

उत्पत्ति – जब कमजोर रूप से विकसित कम दबाव के क्षेत्र के चारों ओर तापमान की क्षैतिज प्रवणता बहुत अधिक होती है, तब उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन सकता है। चक्रवात ऊष्मा का इंजिन है तथा इसे सागरीय तल से ऊष्मा मिलती है। संघनन के बाद मुक्त ऊष्मा, चक्रवात के लिए गतिज ऊर्जा (kinetic energy) में बदल जाती हैं।

चक्रवात की उत्पत्ति की निम्नलिखित अवस्थाएँ हैं –

  • महासागरीय तल का तापमान 26° से अधिक।
  • बंद समदाब रेखाओं का आविर्भाव।
  • निम्न वायु दाब, 1,000 मि.बा. से कम होना।
  • चक्रीय गति के क्षेत्रफल, प्रारम्भ से इसके अर्धव्यास 30 से 50 किमी फिर क्रमश: 100200 किमी और 1,000 किमी तक भी बढ़ जाते हैं।
  • ऊर्ध्वाधर रूप में पवन की गति का प्रारम्भ में 6 किमी की ऊँचाई तक बढ़ना तथा इसके बाद और भी ऊँचा उठाना।

चक्रवातों द्वारा क्षति-प्रभंजन की गति वाली पवनों, प्रभंजन की लहरों तथा मूसलाधार वर्षा से उत्पन्न बाढ़ों के कारण ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवातों का विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। अधिकतर तूफान अत्यन्त तेज पवनों और तूफानी लहरों के द्वारा भारी क्षति पहुँचाते हैं । पर्वतीय क्षेत्रों में ढाल पर अत्यन्त तीव्रता से बहने वाला वर्षा जल अपने सामने आने वाली हर वस्तु को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान करता है।

तूफानी लहरों की तीव्रता, पवन की गति, दाब प्रवणता, समुद्र की तली की स्थलाकृतियाँ तथा तटरेखा की बनावट पर निर्भर करती है। अनेक क्षेत्रों में चक्रवातों की चेतावनी व्यवस्था के बावजूद, ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात धन-जन को अपार क्षति पहुँचाते हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

Set – 1

प्रश्न संख्या 1 से 2 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ख’ किसे इंगित करता है?
(a) गल्क स्ट्रीय धारा
(b) विषुवतीय धारा
(c) ब्राजील धारा
(d) ओयाशियो धारा
उत्तर:
(b) विषुवतीय धारा

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प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘ग’ किसे इंगित करता है?
(a) 200 सेमी. से अधिक वर्षा वाला क्षेत्र
(b) 100 से 200 सेमी. वर्षा वाला क्षेत्र
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 25 सेमी. कम वर्षा वाला क्षेत्र

Set – 2

प्रश्न संख्या 1 से 4 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘B निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) ब्राजील धारा
(b) क्यूरोशिने धारा
(c) विषुवतीय धारा
(d) कैलिफोर्निया धारा
उत्तर:
(d) कैलिफोर्निया धारा

प्रश्न 2.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकन प्लेट
(b) यूरेशियम प्लेट
(c) दक्षिण अमेरिकन प्लेट
(d) अरेबियन प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकन प्लेट

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प्रश्न 3.
विश्व के दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) रॉकी पर्वत
(b) अरावली पर्वत
(c) अल्पस पर्वत
(d) हिमालय पर्वत
उत्तर:
(a) रॉकी पर्वत

Set – 3

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र
(b) तप्त स्थल
(c) छिछले भूकंप केन्द्र
(d) ज्वालामुखी उद्गार
उत्तर:
(a) गंभीर भूकंप केन्द्र

प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) भूकंपों का देश
(b) बागों का देश
(c) समुद्री धारा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बागों का देश

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प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ निम्न में से किससे संबंधित है?
(a) अफ्रीकी प्लेट
(b) अरेबियन प्लेट
(c) इंडो-आस्ट्रेलियम प्लेट
(d) नजका प्लेट
उत्तर:
(a) अफ्रीकी प्लेट

Set – 4

प्रश्न संख्या 1 से 3 तक में मानचित्र को ध्यान से देखें तथा नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चिह्नित करें।
Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1.
दिए गए मानचित्र में ‘B’ किससे संबंधित है?
(a) गर्म जलधारा
(b) ठण्डी जलधारा
(c) व्यापारिक पवनें
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ठण्डी जलधारा

Bihar Board Class 11 Geography Solutions मानचित्र संबंधी प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 2.
दिए गए मानचित्र में ‘C’ किससे संबंधित है?
(a) सर्वाधिक वर्षा वाला लेग
(b) कम वर्षा वाला तेज
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) मध्यम वर्षा वाला तेज

प्रश्न 3.
दिए गए मानचित्र में ‘A’ किस हवा की दिशा को दिखाया गया है?
(a) द.प. मानसून
(b) उत्तरी-पूर्वी मानसून
(c) जेट प्रवाह
(d) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(a) द.प. मानसून

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक वनस्पति Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रोजेक्ट टाईगर का उद्देश्य क्या था ……………………..
(क) शेरों का शिकार करना
(ख) अवैध शिकार को रोककर शेरों की सुरक्षा
(ग) शेरों को चिड़ियाघरों में रखना
(घ) शेरों पर चित्र बनाना
उत्तर:
(ख) अवैध शिकार को रोककर शेरों की सुरक्षा

प्रश्न 2.
नन्दा देवी जीव आरक्षण क्षेत्र किस राज्य में है ………………………
(क) बिहार
(ख) उत्तरांचल
(ग) उत्तरप्रदेश
(घ) उड़ीसा
उत्तर:
(ख) उत्तरांचल

प्रश्न 3.
संदल किस प्रकार के वन की लकड़ी है?
(क) सदाबहार
(ख) डेल्टय वन
(ग) पतझड़ीय
(घ) कंटीले वन
उत्तर:
(ग) पतझड़ीय

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 4.
IUCN द्वारा कितने जीव आरक्षण स्थल मान्यता प्राप्त हैं ……………………..
(क) 1
(ख) 2
(ग) 3
(घ) 4
उत्तर:
(घ) 4

प्रश्न 5.
वन नीति के अधीन वन क्षेत्र का लक्ष्य कितना था ……………………….
(क) 33%
(ख) 55%
(ग) 44%
(घ) 22%
उत्तर:
(क) 33%

प्रश्न 6.
चंदन वन किस प्रकार का वन है …………………….
(क) सदाबहार
(ख) डेल्टाई
(ग) पर्णपाती
(घ) काँटेदार
उत्तर:
(ग) पर्णपाती

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति क्या है ? जलवायु की किन परिस्थितियों में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति से अभिप्राय उस पौधा समुदाय से है, जो लम्बे समय तक बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के उगता है और इसकी विभिन्न प्रजातियाँ वहाँ पाई जाने वाली मिट्टी और जलवायु में यथासंभव स्वयं को ढाल लेती हैं। उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उष्ण और आई प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22° सेल्सियस से अधिक रहता है।

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प्रश्न 2.
जलवायु की कौन-सी परिस्थितियाँ सदाबहार वन उगने के लिए अनुकूल हैं ?
उत्तर:
सदाबहार वन ऊष्ण और आई प्रदेशों में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200, सेंटीमीटर से अधिक होती है और औसत वार्षिक तापमान 22-20° सेल्सियस से अधिक रहता है।

प्रश्न 3.
सामाजिक वानिकी से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सामाजिक वानिकी का अर्थ है पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद के उद्देश्य से वनों का प्रबंध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनरोपण। राष्ट्रीय कृषि आयोग (1976-79) ने सामाजिक वानिकी को तीन वर्गों में बाँटा है-शहरी वानिकी, ग्रामीण वानिकी और फार्म वानिकी।

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प्रश्न 4.
जीव मंडल निचय को पारिभाषित करें। वन क्षेत्र और वन आवरण में क्या अंतर है?
उत्तर:
जीव मंडल निचय (आरक्षित क्षेत्र) विशेष प्रकार के भौतिक और तटीय पारिस्थितिक तंत्र हैं, जिन्हें यूनेस्को (UNESCO) के मानव और जीव मंडल प्रोग्राम (MAB) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है। जीव मंडल निचय के तीन मुख्य उद्देश्य हैं –

  • जीव विविधता और पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण
  • पर्यावरण और विकास का मेल-जोल
  • अनुसंधान और देख-रेख के लिए अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।

वन क्षेत्र राजस्व विभाग के अनुसार अधिसूचित क्षेत्र है, चाहे वहाँ वृक्ष हों या न हों, जबकि वन आवरण प्राकृतिक वनस्पति का झुरमुट है और वास्तविक रूप में वनों से ढंका है। वन क्षेत्र राज्यों के राजस्व विभाग से प्राप्त होता है जबकि वन आवरण की पहचान वायु चित्रों और
उपग्रहों से प्राप्त चित्रों से की जाती है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दें।

प्रश्न 1.
वन संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
वन संरक्षण नीति के अंतर्गत निम्न कदम उठाए गए हैं – सामाजिक वानिकी – सामाजिक वानिको का अर्थ पर्यावरणीय, सामाजिक व ग्रामीण विकास में मदद के उद्देश्य से वनों का प्रबंध और सुरक्षा तथा ऊसर भूमि पर वनरोपण । सामाजिक वानिकी को तीन वर्गों में बाँटा गया है-शहरी वानिकी, ग्रामीण वानिकी और फार्म वानिकी।

सार्वजनिक भूमि जैसे – पार्क, सड़कों, हरित पट्टी, औद्योगिक व व्यापारिक स्थलों पर वृक्ष लगाना और उसका प्रबंध इत्यादि से शहरी वानिकी को बढ़ावा दिया जाता है। कृषि वानिकी का अर्थ कृषि योग्य तथा बंजर भूमि पर पेड़ और फसलें एक साथ लगाना । फार्म वानिकी के अंतर्गत किसान अपने खेतों में व्यापारिक महत्त्व वाले या दूसरे पेड़ लगाते है। वन विभाग इसके लिए छोटे और मध्यम किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराता है। इस प्रकार की योजना के अंतर्गत कई प्रकार की भूमि जैसे-खेतों की मेड़, चरागाह, घास स्थल, घर के पास पड़ी खाली जमीन और पशुओं के बाड़ों में भी पेड़ लगाए जाते हैं।

कृषि वानिकी का उद्देश्य वानिकी और खेती एक साथ करना है, जिससे खाद्यान्न, चारा, ईंधन, इमारती लकड़ी और फलों का उत्पादन एक साथ किया जाय। समुदायिक वानिकी सार्वजनिक भूमि जैसे-गाँव-चरागाह, मंदिर-भूमि, सड़कों के दोनों ओर, नहर किनारे, रेल पट्टी के साथ पटरी और विद्यालयों में पेड़ लगाना है। इस योजना का एक उद्देश्य भूमिविहीन लोगों को वानिकीकरण से जोड़ना तथा इससे उन्हें लाभ पहुंचाना है जो केवल भूस्वामियों को ही प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 2.
वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
वन और वन्य प्राणी संरक्षण का दायरा काफी बढ़ा है और इसमें मानव कल्याण की . असीम संभावनाएँ निहित हैं। यद्यपि इस लक्ष्य को तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब हर व्यक्ति इसका महत्त्व समझे और अपना योगदान दे।

वन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में हमें बहुत अधिक आर्थिक व सामाजिक लाभ पहुंचाते हैं। अतः वनों के संरक्षण की मानवीय विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। वनों और जनजाति समुदायों में घनिष्ठ सम्बन्ध है और इनमें से एक का विकास दूसरे के बिना असंभव है। वनों के विषय में इनके प्राचीन व्यावहारिक ज्ञान को वन विकास में प्रयोग किया जा सकता है। जनजातियों को वनों से गौण उत्पाद संग्रह करने वाले न समझकर, उन्हें वन संरक्षण में भागीदार बनाया जाना चाहिए।

हमें पर्यावरण संतुलन बनाए रखना चाहिए तथा पारिस्थितिक असंतुलित क्षेत्रों में वन लगाना चाहिए। देश की प्राकृतिक धरोहर जैव-विविधता तथा आनुवांशिक पूल का संरक्षण करना चाहिए। मृदा अपरदन तथा मरुस्थलीयकरण को रोकने का प्रयास करना चाहिए तथा बाढ़ व सूखे पर नियंत्रण पाने की कोशिश करते रहनी चाहिए । वनों की उत्पादकता बढ़ाकर वनों पर निर्भर ग्रामीण जनजातियों को इमारती लकड़ी, ईंधन, चारा और भोजन उपलब्ध करवाना चाहिए और लकड़ी के स्थान पर हमें अन्य वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। पेड़ लगाने को बढ़ावा देने के लिए, पेड़ों की कटाई रोकने के लिए जन-आंदोलन चलाना चाहिए तथा हमें वन्य प्राणियों का शिकार नहीं करना चाहिए। दुर्लभ प्राणियों और पौधों को संरक्षित रखने के लिए उनकी संख्या में बढ़ोतरी के लिए प्रयास करना चाहिए।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित को पहचान कर चिह्नित करें।

  1. मैंग्रोव वन वाले क्षेत्र।
  2. नंदा देवी, सुंदर वन, मन्नार की खाड़ी और नीलगिरी, जीवमंडल निचय।
  3. भारतीय वन सर्वेक्षण मुख्यालय की स्थिति का पता लगाएं और रेखांकित करें।

उत्तर:
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Bihar Board Class 11 Geography प्राकृतिक वनस्पति Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के दो राज्य बतायें जहाँ देवदार के वृक्ष मिलते हैं।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 2.
काँटेदार वन के दो पड़ों के नाम बतायें।
उत्तर:
खैर तथा खजूरी।

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प्रश्न 3.
बबूल के वृक्ष से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
गोंद तथा रंगने वाले पदार्थ।

प्रश्न 4.
ज्वारीय वन में गुंझलदार जड़ों का क्या कार्य है?
उत्तर:
यह कीचड़ में वृक्षों का संरक्षण करती हैं।

प्रश्न 5.
भारत का वन अनुसंधान केन्द्र कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
देहरादून में।

प्रश्न 6.
ज्वारीय वन में पाये जाने वाले दो पेड़ों के नाम लिखें।
उत्तर:
सुन्दरी, गुर्जन।

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प्रश्न 7.
वैज्ञानिक नियम पर वनों के अन्तर्गत कुल कितना क्षेत्र होना चाहिए।
उत्तर:
33%

प्रश्न 8.
कोणधारी वन के तीन वृक्षों के नाम लिखें।
उत्तर:
पाइन, देवदार, सिल्वर फर्र।

प्रश्न 9.
3500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर किस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है?
उत्तर:
एल्पाइन चरागाह।

प्रश्न 10.
उन दो राज्यों के नाम लिखें जहाँ देवदार पाये जाते हैं।
उत्तर:
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 11.
मयरो बोलान वृक्ष का उपयोग बताएं।
उत्तर:
रंगने वाले पदार्थ प्रदान करना।

प्रश्न 12.
ज्वारीय वातावरण में कौन-से वन मिलते हैं?
उत्तर:
मैंग्रोव वन।

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प्रश्न 13.
भारत में आर्थिक पक्ष से कौन-सा वनस्पति क्षेत्र महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
पतझड़ीय वन।

प्रश्न 14.
भारत का कुल कितना भौगोलिक क्षेत्र वनों के अंतर्गत है?
उत्तर:
22%

प्रश्न 15.
भारत का कुल कितना क्षेत्र (हेक्टेयर में) वनों के अन्तर्गत है?
उत्तर:
750 लाख हेक्टेयर।

प्रश्न 16.
लकड़ी के दो प्रयोग लिखें।
उत्तर:

  1. इमारत निर्माण के लिये।
  2. ईंधन के लिए लकड़ी।

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प्रश्न 17.
लकड़ी का एक औद्योगिक प्रयोग लिखें।
उत्तर:
खेलों का सामान बनाना, रेयॉन उद्योग।

प्रश्न 18.
बाँस तथा वन के घास के दो उपयोग लिखो।
उत्तर:

  1. कागज बनाने के लिए
  2. कृत्रिम रेशा।

प्रश्न 19.
वनों से प्राप्त तीन उत्पादों के नाम लिखें।
उत्तर:
रबड़, गोंद तथा चमड़ा रंगने वाले पदार्थ।

प्रश्न 20.
उन दो भौगोलिक तत्त्वों के नाम लिखो जो वनों की वृद्धि को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:

  1. वर्षा की मात्रा
  2. ऊँचाई।

प्रश्न 21.
उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा तथा तापमान बताओ।
उत्तर:

  1. 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा
  2. 25°-27°C

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प्रश्न 22.
पतझड़ीय मानसून वनों के लिए आवश्यक वार्षिक वर्षा तथा तापमान बताओ।
उत्तर:
150-200 सेंटीमीटर।

प्रश्न 23.
उस राज्य का नाम बताओ जहाँ उष्ण कटिबंधीय सदाबहार बन पाये जाते हैं।
उत्तर:
केरल।

प्रश्न 24.
भारत के प्रदेश के नाम बताओ जहाँ काँटे तथा झाड़ियों के बन पाये जाते हैं?
उत्तर:
थार मरुस्थल।

प्रश्न 25.
हिन्द महासागर में द्वीपों के समूह बताएँ जहाँ उष्ण कटिबंधीय बन पाये जाते हैं।
उत्तर:
अण्डमान-निकोबार द्वीप।

प्रश्न 26.
उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों में पाये जाने वाले तीन महत्वपूर्ण पेड़ों के नाम लिखो।
उत्तर:
रोजवुड, अर्जुन, आबनूस।

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प्रश्न 27.
मानसून वनों को पतझड़ीय वन क्यों कहते हैं?
उत्तर:
क्योंकि ये गर्मियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं।

प्रश्न 28.
उन तीन राज्यों के नाम बताएँ जहाँ मानसून वन पाये जाते हैं।
उत्तर:
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा झारखण्ड।

प्रश्न 29.
मध्य प्रदेश के एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक वृक्ष का नाम बताएँ।
उत्तर:
सागवान।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
नम उष्ण कटिबंधीय सदाबहार एवं अर्द्ध-सदाबहार बनों की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। ये भी बताइए कि ये मुख्यतः किन प्रदेशों में पाए जाते हैं?
उत्तर:
नम उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन-ये वन उष्ण कटिबंधीय वनों के समान सदाबहार घने वन होते हैं। ऊष्ण-आई जलवायु के कारण ये वन तेजी से बढ़ते हैं तथा अधिक ऊँचे होते हैं। भारत में पाए जाने वाले ये वन कुछ खुले तथा दूर-दूर पाए जाते हैं। इन वनों में कठोर लकड़ी के वृक्ष मिलते हैं जिनके शिखर पर छाता जैसा आकार बन जाता है। भारत में ये वन पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में (केरल तथा कर्नाटक) पाए जाते हैं। ये वन शिलांग पठार के पर्वतीय प्रदेश में पाए जाते हैं। महोगनी, खजूर, बांस मुख्य वृक्ष हैं। अर्द्ध-सदाबहार वन-ये वन पश्चिमी घाट तथा उत्तर:पूर्वी भारत में कम वर्षा के क्षेत्रों में मिलते हैं। ये मानसूनी पतझड़ीय वन हैं।

प्रश्न 2.
भारत में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार बन कहाँ पाए जाते हैं ? ऐसे बनों की वनस्पति भूमध्यरेखीय वनों से किस प्रकार समान हैं तथा किस प्रकार से असमान हैं?
उत्तर:
भारत में उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शिलांग पठार, असम प्रदेश तथा पश्चिमी घाट पर पाए जाते हैं। ये वन भूमध्यरेखीय वनों से मिलते-जुलते हैं क्योंकि ये कठोर लकड़ी के वन हैं तथा ये अधिक आई क्षेत्रों में मिलते हैं जहाँ 200 सेमी. से अधिक वार्षिक वर्षा होती है। ये वन भूमध्यरेखीय वनों की भान्ति घने नहीं हैं, परंतु ये वन अधिक खुले-खुले मिलते हैं तथा इनका उपयोग आसान हो जाता है।

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प्रश्न 3.
सामाजिक वानिकी पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सामाजिक वानिकी (Social Forestryi):
1. 1976 के राष्ट्रीय कृषि आयोग ने पहले – पहल ‘सामाजिक वानिकी’ शब्दावली का प्रयोग किया था। इसका अर्थ है-ग्रामीण जनसंख्या के लिए जलावन, छोटी इमारती लकड़ी और छोटे-छोटे वन उत्पादों की आपूर्ति करना ।

2. अनेक राज्य सरकारों ने सामाजिक वानिकी के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। अधिकतर राज्यों में वन विभागों के अन्तर्गत सामाजिक वानिकी के अलग से प्रकोष्ठ बनाए गए हैं। सामाजिक वानिकी के मुख्य रूप से तीन अंग हैंकृषि वानिकी-किसानों को अपनी भूमि पर वृक्षरोपण के लिए प्रोत्साहित करना; वन – भूखण्ड (वुडलाट्स) – वन विभागों द्वारा लोगों की जरूरतों को पूर करने के लिए सड़कों के किनारे, नहर के तटों, तथा ऐसी अन्य सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण सामुदायिक वन-भूखण्ड-लोगों द्वारा स्वयं बराबर की हिस्सेदारी के आधार पर भूमि पर वृक्षारोपण।

3. सामाजिक वानिकी योजनाएँ असफल हो गईं, क्योंकि इसमें उन निर्धन महिलाओं को शामिल नहीं किया गया, जिन्हें इससे अधिकतर फायदा होना था। यह योजना पुरुषोन्मुख हो गई। यही नहीं, यह कार्यक्रम लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कार्यक्रम के स्थान पर किसानों का धनोपार्जन कार्यक्रम बन गया ।

4. सामाजिक वानिकी कार्यक्रम के द्वारा उत्पादित लकड़ी ग्रामीण भारत के गरीबों को न मिलकर, नगरों और कारखानों में पहुंचने लगी है। इससे गाँवों में रोजगार के अवसर घटे हैं और अन्य उत्पादन करने वाली भूमि पर पेड़ लग गए है। इससे अनिवासी भू-स्वामित्व को बढ़ावा मिला है।

प्रश्न 4.
कौन-सी वनस्पति जाति बंगाल का आतंक मानी जाती है और क्यों?
उत्तर:
कुछ विदेशज वनस्पति जाति के कारण कई प्रदेशों में समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं। भारत में वनस्पति का 40% भाग विदेशज है। ये पौधे चीनी-तिब्बती, अफ्रीका तथा इण्डो-मलेशियाई क्षेत्र से लाए गए हैं। जलहायसिंथ पौधा भारत में बाग के सजावट के पौधे के रूप में लाया गया था। इस पौधे के फैल जाने के कारण पश्चिमी बंगाल में जलमार्गों, नदियों, तलाबों तथा नालों कं मुंह बड़े पैमाने पर बंद हो गए हैं। इस पौधे के हानिकारक प्रभावों के कारण इसे “बंगाल का आतंक” (Terror of Bengal) भी कहा जाता है।

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प्रश्न 5.
“हमारी अधिकांश प्राकृतिक वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है।” इस कथन की व्याख्या करो।
उत्तर:
यह कथन काफी हद तक सही है कि भारत में अधिकांश ‘प्रकृतिक’ वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है। इस देश में मानवीय निवास के कारण प्राकृतिक वनस्पति का अधिकतर भाग नष्ट हो गया है या परिवर्तित हो गया है। अधिकांश वनस्पति अपनी कोटि तथा गुणों के उच्च स्तर के अनुसार नहीं हैं। केवल हिमालय प्रदेश के कुछ अगम्य क्षेत्रों में एवं थार मरुस्थल के कुछ भागों को छोड़ कर अन्य प्रदेशों में प्राकृतिक वनस्पति वस्तुतः प्राकृतिक नहीं है। इन प्रदेशों की वनस्पति स्थानिक जलवायु तथा मिट्टी के अनुसार पनपती है तथा इसे प्राकृतिक कहा जा सकता है।

प्रश्न 6.
भारत में मुख्य वनस्पतियों के प्रकार को प्रभावित करने वाले भौगोलिक घटकों के नाम बताइए तथा उनके एक-दूसरे पर पड़ने वाले प्रभाव का परीक्षण कीजिए।
उत्तर:
भारत में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। वनस्पति की प्रकार, सघनता आदि वातावरण में कई तत्वों पर निर्भर है। भारत में वनस्पति विभाजन के अनुसार उष्ण कटिबंधीय सदाबहार एवं मानसूनी वन, शीतोष्ण वन, घास के मैदान आदि वनस्पति को निम्नलिखित भौगोलिक घटक प्रभावित करते हैं –

  • वर्षा की मात्रा
  • धूप
  • ताप की मात्रा
  • मिट्टी की प्रकृति

ये जलवायुविक घटक अन्य स्थानिक तत्त्वों के साथ मिल कर एक-दूसरे पर विशेष प्रभाव डालते हैं। अधिक वर्षा तथा उच्च तापमान के कारण असम तथा पश्चिमी घाट पर ऊष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनस्पति पाई जाती है। परंतु मरुस्थलीय क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण कांटेदार झाड़ियाँ पाई जाती हैं। कई भागों में मौसमी वर्षा के कारण पतझड़ीय वनस्पति पाई जाती है। उष्ण जलवायु के कारण अधिकतर चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष पाए जाते हैं परंतु हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में कम तापमान के कारण कोणधारी वन तथा अल्पला घास पाई जाती है। स्थानीय मिट्टी के प्रभाव से नदी के डेल्टाई क्षेत्रों में ज्वारीय वन या मैंगरोव पाई जाती है। इसी प्रकार बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में बबूल के वृक्ष मिलते हैं।

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प्रश्न 7.
“हिमालय क्षेत्रों में ऊँचाई के क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाईन वनस्पति प्रदेशों तक का अनुक्रम पाया जाता है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत में दक्षिणी ढलानों से लेकर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति मिलती है। ऊंचाई के क्रम के अनुसार वर्षा तथा ताप की मात्रा में अंतर पडता है। इस अंतर के प्रभाव से वनस्पति में एक क्रमिक अंतर पाया जाता है। धरातल के अनुसार तथा ऊँचाई के साथ-साथ वनों के प्रकार में भिन्नता आ जाती है। इस क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति तक का विस्तार पाया जाता है।

1. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन – हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर 1200 मीटर की ऊँचाई तक उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं। यहाँ वर्षा की मात्रा अधिक होती है। यहाँ सदाबहार घने वानों में साल के उपयोगी वृक्ष पाए जाते हैं।

2. शीत उष्ण कटिबंधीय वन – 2000 मीटर की ऊंचाई पर नम शीत उष्ण प्रकार के घने वन पाए जाते हैं। इनमें ओक, चेस्टनट और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं।

3. शंकुधारी वन – दो हजार से अधिक ऊंचाई पर शंकुधार वृक्षों का विस्तार मिलता है। यहाँ कम वर्षा तथा अधिक शीत के कारण वनस्पति में अंतर पाया जाता है। स्परूस, देवदार, चिनार और अखरोट के वृक्ष पाए जाते हैं। हिम रेखा के निकट पहुंचने पर बर्च, जूनीपर आदि वृक्ष पाए जाते हैं।

4. अल्पाइन चरागाहें – 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई के कई भागों में छोटी-छोटी घास के कारण चरागाहें पाई जाती हैं। पश्चिमी हिमालय में गुजरों जैसी जन-जातियाँ मौसमी पशुचरण हेतु इन चरागाहों का उपयाग करते हैं।

प्रश्न 8.
प्राकृतिक वनस्पति को परिभाषित कीजिए । जलवायु की उन परिस्थितियों का वर्णन कीजिए, जिसमें उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं।
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति उन वनस्पतियों को कहा जाता है जो मानव के प्रत्यक्ष या परोक्ष सहायता के बिना पृथ्वी पर उगते हैं और अपने आकार संरचना तथा अपनी जरूरतों को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुसार ढाल लेते हैं। निम्न परिस्थितियों में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं –

  • जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 20 cm से अधिक हो
  • जहाँ सापेक्ष आर्द्रता 70% से अधिक हो।

अर्थात् जहाँ अधिक वर्षा हो, उच्च आर्द्रता हो तथा उच्च तापमान हो वहीं उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन उंगते हैं।

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प्रश्न 9.
भारत में वनों के क्षेत्र के कम होने के क्या कारण है?
उत्तर:
किसी प्रदेश के कुल क्षेत्र के कम-से-कम 1/3 भाग में वनों का विस्तार होना चाहिए ताकि उस प्रदेश में पारिस्थितिक स्वास्थ्य कायम रखा जा सके। भारत में कई कारणों से बन सम्पत्ति का कम विस्तार है –

  • वनों के विशाल क्षेत्र की कटाई
  • स्थानान्तरित कृषि की प्रथा
  • अत्यधिक मृदा अपरदन
  • चारागाहों की अत्यधिक चराई
  • लकड़ी एवं ईंधन के लिए वृक्षों की कटाई
  • मानवीय हस्तक्षेप

प्रश्न 10.
वन सम्पदा के संरक्षण के लिए क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं?
उत्तर:
जनसंख्या के अत्यधिक दबाव तथा पशुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण वन सम्पदा का संरक्षण आवश्यक है। वन संरक्षण कृषि एवं चराई के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता के कारण आवश्यक है। इसके लिए वनवर्द्धन के उत्तम तरीकों को अपनाया जा रहा है। तेजी से उगने वाले पौधों की जातियों को लगाया जा रहा है। घास के मैदानों का पुनर्विकास किया जा रहा है। वन क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

प्रश्न 11.
भारत में विभिन्न प्रकार के घासों का वर्णन करो।
उत्तर:
घासें-बारहमासी घासों की 60 प्रजातियाँ हैं। इनसे मिलकर ही हमारा पारितंत्र बना है, जो हमारे पशुधन के जीवन का आधार है। वास्तविक चारागाह और घास भूमियाँ लगभग 12.04 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तीर्ण हैं। चराई के लिए अन्य भूमि, वृक्ष-फसलों और उद्यानों, बंजर भूमि तथा परती भूमि के रूप में हैं। जिनका क्षेत्रफल क्रमशः 37 लाख हेक्टेयर, 15 लाख हेक्टेयर और 23.3 लाख हेक्टेयर है।

वनों के अपकर्ष (डिग्रेडेशन) और विनाश के परिणामस्वरूप ही चरागाह और घासभूमियाँ विकसित हुई हैं। कालांतर में चारागाह सवाना में बदल जाते हैं। हिमालय की अधिक ऊँचाइयों वाले उप-अल्पाइन और अल्पाइन क्षेत्रों में वास्तविक चारागाह पाए जाते हैं। भारत में घास के तीन पृथक् आवरण हैं। ऊष्ण कटिबंधीय-यह मैदानों में पाया जाता है। उपोष्ण कटिबंधीय घास भूमियाँ मुख्य रूप से हिमालय की पर्वत में ही पाई जाती हैं।

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प्रश्न 12.
वन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वनों का संरक्षण-मनुष्यों और पशुओं की बढ़ती हुई संख्या का प्राकृतिक वनस्पति पर दुष्प्रभाव पड़ा है। जो क्षेत्र कभी वनों से ढंके थे, आज अर्द्ध-मरुस्थल बन गए हैं। राजस्थान में भी कभी वन थे। पारिस्थितिक संतुलन के लिए वन अनिवार्य हैं। मानव का अस्तित्व और विकास पारिस्थितिक संतुलन पर निर्भर है। संतुलित पारितंत्र और स्वस्थ पर्यावरण के लिए भारत के कम-से-कम एक तिहाई भाग पर वन होना चाहिए । दुर्भाग्य से हमारे देश के एक चौथाई भाग पर भी बन नहीं है। इसलिए वन संसाधनों की संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक नीति की आवश्यकता है।

प्रश्न 13.
भारत की वन नीति के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
सन् 1988 में नई राष्ट्रीय वन नीति, वनों के क्षेत्रफल में हो रही कमी को रोकने के लिए बनाई गई थी।

  1. इस नीति के अनुसार देश के 33 प्रतिशत भू-भाग को वनों के अन्तर्गत लाना था। संसार के कुल भू-भाग का 27 प्रतिशत तथा भारत का लगभग 19 प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है।
  2. वन नीति में आगे कहा गया है कि पर्यावरण की स्थिरता कायम रखने का प्रयत्न किया जायगा तथा जहाँ पारितंत्र का संतुलन बिगड़ गया है, वहाँ पुनः बनारोपण किया जायगा।
  3. आनुवांशिक संसाधनों की जैव विविधता को देश की प्राकृतिक विरासत कहा जाता है। इस विरासत का संरक्षण, वन नीति का अन्य उद्देय है।
  4. इस नीति में मृदा-अपरदन, मरुभूमि के विस्तार तथा सूखे पर नियंत्रण का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
  5. इस नीति में जलाशयों में गाद के जमाव को रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण का भी प्रावधान है।
  6. इस नीति के और भी उद्देश्य हैं जैसे-अपरदित और अनुत्पादक भूमि पर सामाजिक वानिकी और वनरोपण द्वारा वनावरण में अभिवृद्धि, वनों की उत्पादकता बढ़ाना, ग्रामीण और जन-जातीय जनसंख्या के लिए इमारती लकड़ी, जलावन, चारा और भोजन जुटाना
  7. यही नहीं इस नीति में महिलाओं को शामिल करके, व्यापक जनान्दोलन द्वारा वर्तमान वनों पर दबाव कम करने के लिए भी बल दिया गया है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में वास्तविक वनावरण का वितरण बताएँ।
उत्तर:
वनक्षेत्र की भांति बनावरण में भी बहुत अंतर है। जम्मू और कश्मीर में वास्तविक वनावरण एक प्रतिशत है, जबकि अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह की 92 प्रतिशत भूमि पर वास्तविक बनावरण है। परिशिष्ट 1 में दी गई सारणी से स्पष्ट है कि 9 ऐसे राज्य हैं जहाँ कुल क्षेत्रफल के एक तिहाई भाग से अधिक पर वनावरण है। एक तिहाई वनारण पारितंत्र का संतुलन बनाए रखने के लिए मानक आवश्यकता है। चार ऐसे राज्य हैं जहाँ वन का प्रतिशत आदर्श स्थिति जैसा ही है। अन्य राज्यों में वनों की स्थिति असंतोषजनक या संकटपूर्ण है। ध्यान देने योग्य बातम यह है कि तीन नवीन राज्यों, उत्तरांचल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में प्रत्येक के कुल क्षेत्रफल के 40 प्रतिशत भाग पर वन हैं। इन राज्यों के पृथक् आँकड़े न मिलने के कारण इन्हें इनके पूर्व राज्यों में ही सम्मिलित किया गया है।

वास्तविक वनावरण के प्रतिशत के आधार पर भारत के राज्यों को चार प्रदेशों में विभाजित किया गया है –

  • अधिक वनावरण वाले प्रदेश
  • मध्यम वनावरण वाले प्रदेश
  • कम वनावरण वाले प्रदेश
  • बहुत कम वनावरण वाले प्रदेश

1. अधिक बनावरण वाले प्रदेश – इस प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक वनावरण वाले राज्य सम्मिलित हैं। असम के अलावा सभी पूर्वी राज्य इस वर्ग में सम्मिलित हैं। जलवायु की अनुकूल दशाएँ मुख्य रूप से वर्षा और तापमान अधिक वनावरण में होने का मुख्य कारण हैं। इस प्रदेश में भी वनावरण भिन्नताएँ पाई जाती हैं। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह और मिजोरम, नागालैण्ड तथा अरुणाचल प्रदेश के राज्यों में कुल भौगोलिक क्षेत्र के 80 प्रतिशत भाग पर वन पाए जाते हैं। मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम और दादर और नागर हवेली में वनों का प्रतिशत 40 और 80 के बीच हैं।

2. मध्य बनावरण वाले प्रदेश – इसमें मध्य प्रदेश, उड़ीसा, गोवा, केरल, असम और हिमाचल प्रदेश सम्मिलित हैं। गोवा में वास्तविक वन क्षेत्र 33.79 प्रतिशत है, जो कि इस प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके बाद असम और उड़ीसा का स्थान है। अन्य राज्यों में कुल क्षेत्र के 30 प्रतिशत भाग पर वन हैं।

3. कम वनावरण वाले प्रदेश – यह प्रदेश लगातार नहीं है। इसमें दो उप-प्रदेश हैं: एक प्रायद्वीप भारत में स्थित है। इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। दूसरा उप-प्रदेश उत्तरी भारत में है। इसमें उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य शामिल हैं।

4. बहुत कम वनावरण वाले प्रदेश – भारत के उत्तर:पश्चिमी भाग को इस वर्ग में रखा जात है। इस वर्ग में शामिल राज्य हैं-राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात । इसमें चंडीगढ़ और दिल्ली दो केन्द्र शासित प्रदेश भी हैं। इनके अलावा पंश्चिम बंगाल का राज्य भी इसी वर्ग में हैं। भौतिक और मानवीय कारणों से इस प्रदेश में बहुत कम वन है।

प्रश्न 2.
भारत में प्राकृतिक वनस्पति किस प्रकार वर्षा के वार्षिक वितरण पर आश्रित हैं ? अपने उत्तर को उचित उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में प्राकृतिक वनस्पति वर्षा के वार्षिक वितरण पर आश्रित है जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 cm से अधिक होती है वहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन उगते हैं। रबड़, महोगिनी, एबीनी, नारियल, बाँस, बेत एवं आदनवुड के वृक्ष मुख्य रूप से उगते हैं। ये वन अंडमान निकोबार, असम, मेघालय, नागालैंड, नागपुर, मेजोरम, त्रिपुरा एवं पश्चिम बंगाल में पाये जाते हैं।

वार्षिक वर्षा जहाँ 70 से 200 cm होती है वहाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती बन उगते हैं। इन वनों का विस्तार तोता के मध्य एवं निचली घाटी, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में है। प्रमुख वृक्ष साल, चंदन, सागवान, शीशम, आम आदि हैं। वार्षिक वर्षा 50 cm से कम जिन क्षेत्रों में है वहाँ उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन पाये जाते हैं। बबूल, कीकर, बेर, खजूर, खैर, नीम, खेजड़ी, पलास आदि के वृक्ष मुख्य रूप से राजस्थान, द.पू. में पंजाब, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में आते हैं। शुष्क जलवायु के कारण इनके पत्ते छोटे खाल मोटी तथा जड़ें खरी होती हैं। इस प्रकार जहाँ अधिक वर्षा होती है वहाँ लंबे-लंबे वृक्ष उगते हैं जो आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति

प्रश्न 3.
भारत के विभिन्न प्रकार के वनों के भौगोलिक वितरण तथा आर्थिक महत्त्व वर्णन करों।
उत्तर:
भारत की वन सम्पदा (Forrest Wealth of India) – प्राचीन समय में भारत के एक बड़े भाग पर वनों का विस्तार था, परंतु अब बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण वन क्षेत्र घटता जा रहा है। इस समय देश में 747 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों पर वनों का विस्तार है जो कि देश के कुल क्षेत्रफल का 22.7% भाग है। भारत में प्रति व्यक्ति वन क्षेत्र लगभग 0.1 हेक्टेयर है जो कि बहुत कम है। भौगोलिक दृष्टि से मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वन क्षेत्र हैं।

भारतीय वनों का वर्गीकरण-भारत में वनों का वितरण वर्षा, तापमान तथा ऊँचाई के अनुसार है। भारत में निम्नलिखित प्रकार के वन पाए जाते हैं –
1. उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी से अधिक तथा औसत तापमान 24°C है। इन वनों का विस्तार निम्नलिखित प्रदेशों में है

  • पश्चिमी घाट तथा पश्चिमी तटीय मैदान
  • अण्डमान द्वीप समूह
  • उत्तर-पूर्व में हिमालय पर्वत की ढलानों पर।

अधिक वर्षा तथा ऊँचे तापमान के कारण ये वन बहुत घने होते हैं। ये सदाबहार वन हैं। तथा भूमध्य रेखीय वनों की भांति कठोर लकड़ी के वन हैं। वृक्षों की ऊँचाई 30 से 60 मीटर तक है। इन वनों में रबड़, महोगनी, आबनुस लौह-काष्ठ, ताड़ तथा चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। इन वृक्षों की लकड़ी फर्नीचर, रेल के स्लीपर, जलपोत निर्माण, नावें बनाने में प्रयोग की जाती हैं।

2. पतझड़ीय मानसूनी बन (Monsoon Deciduous Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 100 सेमी से 200 सेमी तक होती है। इसलिए इन्हें पतझड़ीय वन कहते हैं। ये वन निम्नलिखित प्रदेशों में मिलते हैं –

  • तराई प्रदेश
  • डेल्टाई प्रदेश
  • पश्चिमी घाट की पूर्वी ढलान
  • प्रायद्वीप का पूर्वी भाग – मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु। ये वन अधिक घने नहीं होते। इनमें वृक्ष कम ऊँचे होते हैं। ये वृक्ष लगभग 30 मीटर तक ऊँचे होते हैं। इन वृक्षों को सुगमतापूर्वक काटा जा सकता है। कई भागों में कृषि के लिए इन वनों को साफ कर दिया गया है।

आर्थिक महत्त्व (Economical Importance) – इन वनों में साल, सागौन, चन्दन, रोजवुड, आम, महुआ आदि वृक्ष पाए जाते हैं। साल वृक्ष की लकड़ी रेल के स्लीपर तथा डिब्बे बनाने के काम में आती है। सागौन की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इसका प्रयोग इमारती लकड़ी तथा फर्नीचर में किया जाता है। इन वृक्षों पर लाख, बीड़ी, चमड़ा रंगने तथा कागज बनाने के उद्योग आधारित है।

3. शुष्क वन (Dry Forests) – ये वन उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 50 सेमी से 100 सेमी तक होती है। ये वन निम्नलिखित क्षेत्रों में मिलते हैं –

  • पूर्वी राजस्थान
  • दक्षिणी हरियाणा
  • दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश
  • कर्नाटक पठार

ये वृक्ष वर्षा की कमी के कारण अधिक ऊँचे नहीं होते। इन वृक्षों की जड़ें लम्बी तथा वाष्पीकरण को रोकते हैं।

आर्थिक महत्त्व (Economic Importance) – इन वनों में शीशम, बबूल, कीकर, हल्दू आदि वृक्ष पाए जाते हैं। ये कठोर तथा टिकाऊ लकड़ी के वृक्ष होते हैं। इनका उपयोग कृषि यंत्र, फर्नीचर, लकड़ी का कोयला, बैलगाड़ियाँ बनाने में किया जाता है।

4. डेल्टाई वन (Deltaic Forests) – ये वन डेल्टाई क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन्हें ज्वारीय वन (Tidal Forests) भी कहते हैं। मैनग्रोव वृक्ष के कारण इन्हें मैनग्रोव वन (Mangrove Forests) भी कहते हैं। ये वन निम्नलिखित डेल्टाई क्षेत्रों में मिलते हैं

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुन्दर वन)
  • महानदी, कृष्णा, गोदावरी डेल्टा
  • दक्षिणी-पूर्वी तटीय क्षेत्र।

ये वन प्रायः दलदली होते हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुन्दरी नामक वृक्ष मिलने के कारण इसे ‘सुन्दर वन’ कहते है।

आर्थिक महत्त्व (Economic Importance) – इन वनों में नारियल, मैनग्रोव, ताड़, सुन्दरी आदि वृक्ष मिलते हैं। ये वन आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनका प्रयोग ईंधन, इमारती लकड़ी, नावें बनाने तथा माचिस उद्योग में किया जाता है।

5. पर्वतीय वन (Mountain Forests) – ये वन हिमालय प्रदेश की दक्षिणी ढलानों पर कश्मीर से लेकर असम तक पाए जाते हैं। पूर्वी हिमालय में वर्षा की मात्रा अधिक है। वहाँ सदाबहार तथा चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों की अधिकता के कारण कोणधारी वन पाए जाते हैं। इस प्रकार पूर्वी हिमालय तथा पश्चिमी हिमालय के वनों में काफी अंतर मिलता है। हिमालय प्रदेश में दक्षिणी ढलानों से लेकर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति मिलती है । ऊँचाई के क्रमानुसार वर्षा तथा ताप की मात्रा में भी अंतर पड़ता है। धरातल के अनुसार तथा ऊँचाई के साथ-साथ वनों के प्रकार में भिन्नता आ जाती है। इस क्रम के अनुसार उष्ण कटिबंधीय से लेकर अल्पाइन वनस्पति तक का विस्तार पाया जाता है।

(a) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन – हिमालय पर्वत की दक्षिणी ढलानों पर 1200 मीटर की ऊँचाई तक उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं। वहाँ वर्षा की मात्रा अधिक होती है। वहाँ सदाबहार घने वनों में साल के उपयोगी वक्ष पाए जाते हैं।

(b) शीत उष्ण कटिबंधीय वन – 2000 मीटर की ऊंचाई पर नम शीत उष्ण प्रकार के घने वन पाए जाते हैं। इनमें ओक, चेस्टनट और चीड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। चीड़ के वृक्ष से बिरोजा तथा तारपीन का तेल प्राप्त किया जाता है । इसकी हल्की लकड़ी होती है जिससे चाय की पेटियाँ बनाई जाती हैं।

(c) शंकुधारी वन – दो हजार से अधिक ऊँचाई पर शंकुधारी वृक्षों का विस्तार मिलता है। यहाँ कम वर्षा तथा अधिक शीत के कारण वनस्पति में अंतर पाया जाता है। यहाँ स्परुस, देवदार, चिनार और अखरोट के वृक्ष पाए जाते हैं। हिम रेखा के निकट पहुँचने पर बर्च, जूनीपद आदि वृक्ष पाए जाते हैं। देवदार की लकड़ी रेल के स्लीपर, पुला डिब्बे बनाने में प्रयोग की जाती है। सिवरफर का प्रयोग कागज की लुग्दी, पैकिंग का सामान तथा दियासलाई बनाने में किया जाता है।

(d) अल्पाइन चरागाहें – 3000 मीटर से अधिक ऊँचाई के कई भागों में छोटी-छोटी घास के कारण चरागाहें पाई जाती हैं। पश्चिमी हिमालय में गुजरों जैसी जन-जातियाँ मौसमी पशु चारण द्वारा इन चरागहों का उपयोग करते हैं।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संग्रह Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के कम-से-कम चार उपर्युक्त बहुविकल्पीय वाक्यों की रचना करें –

  1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?
  2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?
  3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?
  4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?
  5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

उत्तर:

1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?

  • कीमत
  • कपड़ा
  • डिजाइन
  • फिटिंग

2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?

  • चार
  • दो
  • तीन
  • एक बार

3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?

  • हिन्दुस्तान
  • नवभारत टाइम्स
  • दैनिक जागरण
  • पंजाब केसरी

4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?

  • न्यायोचित है
  • न्यायोचित नहीं है
  • (a) व (b) दोनों विकल्प गलत हैं
  • सभी विकल्प सही हैं

5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

  • 2,000 रुपये से 5,000 रुपये तक
  • 5,000 से 10,000 रुपये तक
  • 10,000 रुपये से 15,000 रुपये तक
  • 15,000 रुपये तक

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प्रश्न 2.
पाँच द्विमार्गी प्रश्नों की रचना करें (हाँ/नहीं) के साथ।
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प्रश्न 3.
सही विकल्प को चिह्नित करें –

(क) आँकड़ों के अनेक स्रोत होते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ख) आँकड़ा-संग्रह के लिए टेलीफोन सर्वेक्षण सर्वाधिक उपयुक्त विधि है, विशेष रूप से जहाँ पर जनता निरक्षर हो और दूर-दराज के काफी बड़े क्षेत्रों में फैली हो (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ग) सर्वेक्षक/शोधकर्ता द्वारा संग्रह किए गए आँकड़े द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

(घ) प्रतिदर्श के अयादृच्छिक चयन में पूर्वाग्रह (अभिनति) की संभावना रहती है (सही/गलत)।
उत्तर:
सही

(ङ) अप्रतिचयन त्रुटियों को बड़ा प्रतिदर्श अपनाकर कम किया जा सकता है (सही/गलत)।
उत्तर:
गलत

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या आपको इन प्रश्नों में कोई समस्या दिख रही है? यदि हाँ, तो कैसे?
(क) आप अपने सबसे नजदीक के बाजार से कितनी दूर रहते हैं?
(ख) यदि हमारे कूड़े में प्लास्टिक थैलियों की मात्रा 5 प्रतिशत है तो क्या इन्हें निषेधित किया जाना चाहिए?
(ग) क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध नहीं करेंगे?
(घ) क्या आप रासायनिक उर्वरक के उपयोग के पक्ष में हैं?
(ङ) (अ) क्या आप अपने खेतों में उर्वरक इस्तेमाल करते हैं?
(ब) आपके खेत में प्रति हेक्टेयर कितनी उपज होती है?
उत्तर:
(क) मैं अपने सबसे नजदीक के बाजार से 6 किमी. दूर रहता हूँ।

(ख) पर्यावरण के हिसाब से प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग हानिकारक है। प्लास्टिक अविघटनीय पदार्थ है, इसलिए यह भू-प्रदूषण पैदा करता है। प्लास्टिक थैलियाँ नालियों एवं पाइपों में पानी के बहाव को अवरुद्ध करती हैं।

(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध अवश्य होना चाहिए, क्योंकि इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमत भी बढ़ जायेगी।

(घ) फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही होना चाहिए। उर्वरकों के अधिक प्रयोग से भू एवं जल प्रदूषण होता है।

(ङ)
(अ) हाँ, मैं विवेकपूर्ण तरीके से अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करता हूँ।
(ब) 50 क्विंटल प्रति हेक्टेअर।

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प्रश्न 5.
आप बच्चों के बीच शाकाहारी आटा नूडल की लोकप्रियता का अनुसंधान करना चाहते हैं। इस उद्देश्य से सूचना-संग्रह करने के लिए एक उपयुक्त प्रश्नावली बनाएँ।
उत्तर:
प्रश्नावली –

  1. क्या आप शाकाहारी आटा नूडल का इस्तेमाल करते हैं?
  2. क्या आपको इसका स्वाद दूसरों से अच्छा लगता है?
  3. आप एक दिन में कितनी बार इसका प्रयोग करते हैं?
  4. प्रतिदिन इस पर आप कितना खर्च करते हैं?
  5. आप इसे किसलिए पसंद करते हैं?
  6. क्या आपको अपने स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर दिखाई पड़ता है?
  7. क्या आप इसके स्थान पर कुछ और प्रयोग करना चाहेंगे?

प्रश्न 6.
200 फार्म वाले एक गाँव में फसलें उत्पादन के स्वरूप पर एक अध्ययन आयोजित किया गया। इनमें से 50 फार्मों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 50 प्रतिशत पर केवल गेहूँ उगाए जाते हैं। यहाँ पर समष्टि और प्रतिदर्श को पहचान कर बताएँ।
उत्तर:
समष्टि 200 खेत हैं और प्रतिदर्श 50 खेत हैं।

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प्रश्न 7.
प्रतिदर्श, समष्टि तथा चर के दो-दो उदाहरण।
उत्तर:
(क) प्रतिदर्श (Sample):

  • एक विद्यालय में 2,000 विद्यार्थी हैं। इनमें से 100 विद्यार्थियों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 100 विद्यार्थी ही प्रतिदर्श हैं।
  • एक गाँव में 30 खेत हैं। उनमें से 3 खेतों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया है। 5 खेत प्रतिदर्श के उदाहरण हैं।

(ख) समष्टि (Population):

  • एक पाठशाला में 100 विद्यार्थी पढ़ते हैं। 100 समग्र का उदाहरण है।
  • एक गाँव में 100 परिवार हैं। उसका सर्वेक्षण किया गया। 100 परिवार समग्र हैं।

(ग) चर (Variable):

  • कक्षा XI के विद्यार्थियों की ऊँचाई
  • जुलाई के महीने में दिल्ली में हुई प्रतिदिन वर्षा।

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प्रश्न 8.
इनमें से कौन सी विधि द्वारा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं और क्यों?
(क) गणना (जनगणना)
(ख) प्रतिदर्श
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च बहुत कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अत: उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छा तालमेल हो सकता है।

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन-सी त्रुटियाँ अधिक गंभीर हैं?
(क) प्रतिचयन त्रुटियाँ
(ख) अप्रतिचयन त्रुटियाँ।
उत्तर:
अप्रतिचयन त्रुटियाँ प्रतिचयन त्रुटियों से अधिक गंभीर हैं, क्योंकि प्रतिचयन त्रुटियों के बड़े प्रतिदर्श लेकर कम किया जा सकता है। परंतु अप्रतिचयन त्रुटियों को कम नहीं किया जा सकता। चाहे हम कितना भी बड़ा छोटा प्रतिदर्श क्यों न लें।

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प्रश्न 10.
मान लीजिए आपकी कक्षा में 10 छात्र हैं। इनमें से आपको तीन को चुनना है तो इसमें कितने प्रतिदर्श संभव हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का आकार (N) = 10
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प्रश्न 11.
अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 को चुनने के लिए लाटरी विधि का उपयोग कैसे करेंगे? चर्चा करें?
उत्तर:
लाटरी द्वारा 10 में 3 छात्रों का चुनाव करना (Selecting 3 students out of 10 students by lottery):

  1. एक जैसी आकार तथा आकृति वाली 10 पर्चियाँ बनाएँगे।
  2. इन पर्चियों पर छात्रों के नाम लिखेंगे। एक पर्ची पर एक नाम लिखा जाएगा।

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प्रश्न 12.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
लाटरी विधि द्वारा हमेशा यादृच्छिक प्रतिचयन ही प्राप्त होता है। इस विधि में प्रत्येक इकाई को शामिल किया जाता है। अतः प्रत्येक इकाई के चुनाव की समान संभावना रहती है। इस विधि में सभी प्रतिभागियों के पर्चियों पर नाम लिखें जाते हैं और उन पर्चियों को एक डिब्बे में डालकर, अच्छी तरह हिलाकर, किसी निष्पक्ष व्यक्ति से उतनी पर्चियाँ एक-एक करके निकलवायी जाती हैं जितने प्रत्याशियों का चुनाव करना होता है, अथवा लोगों को नम्बर वाले टिकट प्रदान किए जाते हैं। टिकटों को बक्से में डालकर, मशीन में हिलाकर, निश्चित संख्या में टिकट निकालकर चयन किया जाता है।

प्रश्न 13.
यादृच्छिक संख्या सारणी का उपयोग करते हुए, अपनी कक्षा के 10 छात्रों में से 3 छात्रों के चयन के लिए यादृच्छिक प्रतिदर्श की चयन प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
10 विद्यार्थियों को 01, 02, 03, 04, 05, 06, 07, 08, 09, 10 अंक प्रदान करते हैं। इन संख्याओं में से किसी एक संख्या का दैव आधार पर चयन कर लिया जाता है। अगली दो क्रमागत संख्याओं का और चुनाव करके 3 छात्रों का चयन कर लिया जाता है। माना दैव आधार पर चुनाव की गई संख्या 3 है, तो चयनित छात्रों की संख्याएँ होगी 3, 4 व 5।

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प्रश्न 14.
क्या सर्वेक्षणों की अपेक्षा प्रतिदर्श बेहतर परिणाम देते हैं? अपने उत्तर की कारण सहित व्याख्या करें।
उत्तर:
गणना विधि की तुलना में प्रतिचयन विधि द्वारा आँकड़े एकत्र करने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. गणना विधि की तुलना में इस विधि से सर्वेक्षण करने में खर्च कम होता है।
  2. आँकड़े संकलित करने, सारणीबद्ध करने, गणना. एवं विश्लेषण करने में इस विधि में श्रम एवं समय काफी कम लगता है।
  3. गणना सम्बन्धी त्रुटियों की संभावना घट जाती है।
  4. इस विधि में गणनाकारों एवं पर्यवेक्षकों के छोटे समूह को प्रशिक्षित करना पड़ता है। अतः उनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है और विभिन्न स्तरों पर काम करने वालों में अच्छी तालमेल हो सकती है।

Bihar Board Class 11 Economics आँकड़ों का संग्रह Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संपूर्ण सर्वेक्षण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
संपूर्ण सर्वेक्षण में समष्टि की प्रत्येक इकाई से संबंधित सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं।

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प्रश्न 2.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में संगणना सर्वेक्षण की अपेक्षा कौन-कौन सा गुण पाया जाता है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समय, धन तथा श्रम की बचत होती है।

प्रश्न 3.
क्या लाटरी विधि सदैव एक यादृच्छिक प्रतिदर्श देती है? बताएँ।
उत्तर:
इसमें संदेह नहीं कि लाटरी सबसे अधिक प्रचलित और सरल विधि है और यादृच्छिक प्रतिदर्श का एक रूप है। परंतु लाटरी विधि हमें हमेशा यादृच्छिक प्रतिदर्श नहीं देती, क्योंकि यह विधि संयोग (Chance) पर निर्भर करती है।

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प्रश्न 4.
सामान्य विकल्प प्रश्न किसे कहते हैं?
उत्तर:
सामान्य विकल्प प्रश्न उन प्रश्नों को कहते हैं, जिनके उत्तर ‘प्राय’ हाँ या नहीं सही या गलत के रूप में दिए जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
बहु-विकल्प प्रश्नों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
बहु-विकल्प प्रश्नों से अभिप्राय उन प्रश्नों से है जिनके कई संभव उत्तर हो सकते हैं। ये उत्तर प्रश्नावली में ही छिपे होते हैं।

प्रश्न 6.
आँकड़ों की शुद्धता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों की शुद्धता से अभिप्रायः तथ्य या घटना का यथार्थ वर्णन करने वाले आँकड़ों से है।

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प्रश्न 7.
सांख्यिकी आँकड़ों के पूर्ण शुद्ध न होने के दो कारण बताएँ।
उत्तर:
अनुसंधानकर्ता की अपूर्णता, माप, यंत्रों एवं उपकरणों की अपूर्णता।

प्रश्न 8.
अभिनत त्रुटियों के उत्पन्न होने के दो कारण लिखें।
उत्तर:
सूचनाओं की संकलन विधि का दोषपपूर्ण होना तथा आंकड़ों के व्यवस्थितीकरण का दोषपूर्ण होना।

प्रश्न 9.
आवृत्तियों का विन्यास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आवृत्तियों के विन्यास से अभिप्राय प्रत्येक वर्ग में आने वाली पदों की गणना करके उसकी आवृत्तियों को लिखना है।

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प्रश्न 10.
प्रवेश-पत्रिका के कोई दो लाभ लिखें?
उत्तर:
प्रवेश पत्रिका से –

  1. किसी भी वर्गांतर में लिखी गई अशुद्धि का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
  2. वर्गांतर का निर्माण पुनः किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
अनुरोध-पत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुरोध-पत्र से अभिप्राय उस पत्र से है जिसके द्वारा अनुसंधानकर्ता अपना परिचय और अनुसंधान के उद्देश्य का विवरण सूचक को देता है।

प्रश्न 12.
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि क्या है?
उत्तर:
व्यवस्थित प्रतिचयन विधि वह विधि है जिसके अंतर्गत समग्र की सभी इकाइयों को किसी एक आधार (संख्यात्मक, भौगोलिक या अक्षरात्मक द्वारा क्रमबद्ध किया जाता है।

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प्रश्न 13.
प्रतिचयन अतंराल की गणना का सूत्र लिखें।
उत्तर:
प्रतिचयन अंतराल = समष्टि का आकार

प्रश्न 14.
प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
ये वे आँकड़े होते हैं, जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने उद्देश्यों के अनुकूल सबसे पहले संकलित करता है या गणकों द्वारा संकलित करवाता है।

प्रश्न 15.
द्वितीयक आँकड़े क्या होते हैं?
उत्तर:
यदि किसी दूसरी संस्था द्वारा प्राथमिक तौर पर प्राप्त आँकड़ों को संगृहीत एवं संशोधित (संवीक्षित एवं सारणीकृत) किया जाता है तो इन आँकड़ों को दूसरी संस्था के लिए द्वितीयक आँकड़े कहते हैं।

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प्रश्न 16.
प्रश्नावली किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रश्नावली प्रश्नों की वह सूची है, जिसकी आवश्यकता जानकारी स्वयं-सूचकों द्वारा प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 17.
द्वितीयक आँकड़े संकलित करते समय कौन सी तीन सावधानियां बरतनी चाहिए?
उत्तर:

  1. विश्वसनीयता
  2. अनुकूलता
  3. पर्याप्तता

प्रश्न 18.
एक प्रश्नावली में प्रश्नों की कितनी संख्या होनी चाहिए?
उत्तर:
एक उचित संख्या जो उत्तरदाइओं को हतोत्साहित नहीं करे।

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प्रश्न 19.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Sample Survey) क्या है?
उत्तर:
प्रतिदर्श सर्वेक्षण में समष्टि में से कुछ चुनी हुई प्रतिनिधि इकाइयों के विषय में आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं।

प्रश्न 20.
प्रतिचयन की प्रचलित विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. यादृच्छिक प्रतिचयन
  2. स्तरित प्रतिचयन
  3. बहु-स्तरीय प्रतिचयन
  4. गुच्छा प्रतिचयन

प्रश्न 21.
यादृच्छिक प्रतिचयन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन में समष्टि में से इकाइयाँ इस प्रकार छाँटी जाती हैं, ताकि प्रत्येक इकाई के प्रतिदर्श में सम्मिलित होने की बराबर संभावना हो।

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प्रश्न 22.
समष्टि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अनुसंधान क्षेत्र की संपूर्ण इकाइयों को समष्टि कहते हैं।

प्रश्न 23.
प्रतिदर्श से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रतिदर्श समष्टि की इकाइयों का वह भाग है जो पूर्ण समष्टि के अध्ययन हेतु चुना जाता है।

प्रश्न 24.
प्रतिदर्श सर्वेक्षण किस प्रकार के अनुसंधान के लिए अधिक उपयुक्त है?
उत्तर:

  1. अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत हो
  2. समष्टि अनन्त हो
  3. समष्टि की किसी इकाई को परखने से उसका विनाश हो जाए

प्रश्न 25.
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्त्रत कौन-से हैं?
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –

  1. माप की त्रुटियाँ
  2. गणितीय त्रुटियाँ
  3. प्रश्नों का गणक या सूचक द्वारा सही समझ न पाना
  4. रिकॉर्ड करने में त्रुटियाँ

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प्रश्न 26.
जनगणना 2001 के प्रकाशन से हमें तालिका के रूप में जो जिलेवार जन्म तथा मृत्युदर के आँकड़े प्राप्त हुए हैं क्या आप उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहेंगे या द्वितीयक आँकड़ें?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़े।

प्रश्न 27.
अप्रतिचयन त्रुटियाँ क्यों उत्पन्न होती हैं? एक कारण लिखें?
उत्तर:
सूचकों की लापरवाही या भूल से।

प्रश्न 28.
प्रतिदर्श अभिनीति क्या हैं?
उत्तर:
ये वे त्रुटियाँ जो गणकों के पक्षपाती (पूर्वाग्रहित) व्यवहार के कारण पैदा होती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मापन अशुद्धि तथा दर्ज (लेखन) गलतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
मापन अशुद्धियाँ (Measurement Errors):
मापन अशुद्धियों से अभिप्राय उन अशुद्धियों से है जो माप के कारण पैदा होती हैं। ये अशुद्धियाँ मापन यंत्र के दोषपूर्ण होने से उत्पन्न होती है या माप को निकटतम इकाई तक लाने में हो सकती हैं।

लेखन (दर्ज) गलतियाँ (Recording Mistakes):
सूचनाओ को गलत कॉलम में लिखने से अधूरी सूचना दर्ज करने से या गंदा लेख (अस्पष्ट लेख) के कारण उत्पन्न गलतियों को दर्ज गलतियाँ कहते हैं। मान लें गणक 13 के स्थान पर प्रश्नावली में 31 लिख देता है। इस प्रकार की गलती दर्ज गलती कहलाएगी।

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प्रश्न 2.
आँकड़ों के संकलन की प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान विधियों में तीन अंतर बताएँ।
उत्तर:
प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान में अंतर।
(Differences Between Direct Personal Investigation and Indirect Oral Investigation)
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प्रश्न 3.
अनुसंधानकर्ता, गणक तथा सूचक को परिभाषित कीजिए?
उत्तर:

  1. अनुसंधानकर्ता (Investigator): अनुसंधानकर्ता उस विशेष व्यक्ति को कहते हैं, जो अनुसंधान कार्यों को अपनाता है।
  2. गणक (Enumerator): गणक उस व्यक्ति विशेष को कहते हैं जो अनुसंधान” को तथ्यों को प्राप्त करने में सहायता करता है।
  3. सूचक (Respondent): सूचना देने वाले व्यक्ति को सूचक कहते हैं।

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प्रश्न 4.
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –
उत्तर:
आँकड़ों के संकलन में संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिदर्श (प्रतिचयन) विधि में निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. मितव्ययी (Economical): इस विधि के द्वारा एक बड़े समूह के छोटे से भाग का अध्ययन किया जाता है। अत: समय व धन की बचत होती है।
  2. वैज्ञानिक (Scientific): यह विधि वैज्ञानिक भी है, क्योंकि बड़े समूह में से एक अन्य प्रतिदर्श लेकर परिणामों की शुद्धता की जाँच की जा सकती है।
  3. विश्वसनीय (Reliable): यदि प्रतिदर्श प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा ध्यानपूर्वक लिया गया हो तो प्राप्त निष्कर्ष भी शुद्ध रहते हैं।
  4. सरल (Simple): यह विधि बहुत सरल है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।

प्रश्न 5.
यादृच्छिक प्रतिचयन को परिभाषित करें। यह मनमाने निदर्शन से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
यादृच्छिक प्रतिचयन (Random Sampling):
यादृच्छिक प्रतिचयन को प्रतिनिधि प्रतिचयन भी कहते हैं। यह प्रतिचयन की वह विधि है, जिसके अंतर्गत समष्टि की प्रत्येक इकाई की प्रतिचयन की तरह किसी प्रकार का पक्षपात नहीं होता। उदाहरण के लिए, यदि हमने 1,200 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल में 60 का प्रतिदर्श चुनने हैं तो इस विधि के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिदर्श में चुनने जाने की संभावना समान है। इस प्रकार इकाइयों का चुनाव पक्षपात या व्यक्तिगत पूर्वाग्रह से प्रभावित नहीं होता। इसमें अनुसंधानकर्ता की अपनी मर्जी नहीं चलती। इस विधि के अंतर्गत लाटरी विधि अथवा होल घुमाकर प्रतिदर्श चुना जाता है।

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प्रश्न 6.
प्राथमिक आँकड़ों को एकत्रित करने की प्रश्नावली विधि समझाइए।
उत्तर:
प्रश्नावली विधि में आँकड़ों का एकत्रीकरण प्रश्नावलियों की सहायता से किया जाता है। अनुसंधान के लिए जिन-जिन बातों के संबंध में आँकड़े एकत्रित करने होते हैं, उनके लिए कुछ प्रश्नों की एक सूची (प्रश्नावली) बना ली जाती है। प्रश्नावली में दिए प्रश्नों के उत्तर के आधार पर संबंधित आँकड़ों का एकत्रीकरण किया जाता है। प्रश्नावली विधि के मुख्य रूप है –

  1. डाक द्वारा प्रश्नावली भेजना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता प्रश्नावली को डाक द्वारा सूचना देने वालों के पास भेज देता है। वे उसे भरकर निश्चित तिथि तक लौटा देते हैं।
  2. प्रगणकों द्वारा प्रश्नावली भरना-इस विधि में अनुसंधानकर्ता कुछ प्रणगकों को नियुक्त करता है, जो घर-घर जाकर सूचकों से पूछाताछ करके स्वयं प्रश्नावलियाँ भरते हैं।

प्रश्न 7.
एक अच्छी प्रश्नावली में कौन-कौन से गुणों का होना आवश्यक है?
उत्तर:
एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

  1. प्रश्न संक्षिप्त तथा स्पष्ट होने चाहिए।
  2. प्रश्नों की संख्या उचित होनी चाहिए।
  3. प्रश्न सरल तथा समझने में आसान हों।
  4. प्रश्न ऐसे हो जिनका उत्तर हाँ या नहीं में दिया जा सके।
  5. उत्तर एक-दूसरे से मेल खाते हों।
  6. कुछ विशेष प्रकार के प्रश्न, जैसे चरित्र से संबंधित नहीं पूछे जाने चाहिए।
  7. प्रश्नावली का पूर्व परीक्षण एवं संशोधन आवश्यक है।

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प्रश्न 8.
द्वितीयक आँकड़ों (Secondary Data) के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत निम्न हैं –

  1. सरकार प्रशासन जैसे: (Statistical Abstract of India (Annual); Reserve bank of India Bulletin, Census of India आदि।
  2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन जैसे: The U.N. Statistical Year Book, Annual Report of I.M.F.आदि।
  3. अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन जैसे: नगरपालिकाओं, जिला समितियों, पंचायतों आदि द्वारा प्रकाशित जन्म-मरण स्वास्थ्य, शिक्षा इत्यादि।
  4. समितियों व आयागों की रिपोर्ट, जैसे-वित्त आयोग, एकाधिकार कमीशन इत्यादि।
  5. व्यापारिक संस्थाओं व परिषदों के प्रकाशित रिपोर्ट जैसे: Hindustan Lever LTD., General Insurance Co. इत्यादि।
  6. पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री, जैसे: Economic Times (Daily), Business Today (Weekly) आदि।
  7. अनुसंधान संस्थाओं के प्रकाशन।
  8. वेबसाइट (इंटरनेट)।

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प्रश्न 9.
द्वितीयक आँकड़ों के प्रयोग में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं? किन्हीं तीन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. उद्देश्य व क्षेत्र (Purpose & Scope):
सर्वप्रथम यह देख लेना चाहिए कि प्राथमिक रूप से जब प्रस्तुत आँकड़े एकत्रित किए गए थे, जो अनुसंधान के उद्देश्य के क्षेत्र वही थे, जिनके लिए उनका अब द्वितीयक आँकड़ों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

2. शुद्धता की मात्रा (Degree of Accuracy):
इस बात पर भी विचार करना आवश्यक है कि प्रस्तुत आँकड़ों में शुद्धता का स्तर क्या रखा गया था और उसे प्राप्त करने में कितनी सफलता हुई।

3. font partahaf at great (Ability of Last investigation):
यह भी देखना चाहिए कि द्वितीयक आँकड़े पहले किस अनुसंधानकर्ता द्वारा प्राथमिक रूप से कि विधि द्वारा एकत्र किए गए थे। यदि इन प्रश्नों का उत्तर संतोषजनक प्राप्त होता है तो इन आँकड़ों का प्रयोग किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा सूचकों को प्रश्नावली भेजने के क्या गुण तथा दोष हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण (Advantages of Direct Interview):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण निम्नलिखित हैं –

  1. सूचना अधिक स्पष्ट होती है।
  2. इस विधि के द्वारा संकलित आँकड़े अधिक शुद्ध तथा विश्वसनीय होते हैं।
  3. सूचना देने वाले को प्रश्न पूछने का उद्देश्य बताकर उसे विश्वास में लिया जा सकता है।
  4. व्यक्तिगत साक्षात्कार लचीला है। अनुसंधानकर्ता अपने प्रश्नों में आवश्यकतानुसार फेर-बदल कर सकता है।
  5. सीमित क्षेत्र में व्यक्तिगत साक्षात्कार बहुत ही उपयोगी है।

दोष (Demerits):
व्यक्तिगत साक्षात्कार के मुख्य दोष निम्नलिखित हैं –

  1. इस विधि में व्यक्तिगत पक्षपात की संभावना रहती है।
  2. इस विधि में अधिक समय और धन खर्च होता है।
  3. यह एक जटिल विधि है।
  4. इस विधि में प्रशिक्षित, कुशल और निष्पक्ष अनुसंधानकर्ता की आवश्यकता होती है। यदि अनुसंधानकर्ता कुशल, प्रशिक्षित तथा निष्पक्ष नहीं हैं तो परिणाम भ्रामक हो सकते हैं।

सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने के गुण (Advantages of Malting Questionnaries to Respondents):
सूचकों को डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने में निम्नलिखित गुण हैं –

  1. यह विधि वहाँ उपयुक्त है जहाँ सूचना एकत्रित करने का क्षेत्र विस्तृत है।
  2. इस विधि के अंतर्गत सूचनाएँ नियमित रूप से प्राप्त होती हैं।
  3. यह मितव्ययी प्रणाली है।
  4. इसमें पक्षपात की संभावना नहीं होती।

दोष-इस प्रणाली के निम्नलिखित दोष हैं –

  1. सूचक उत्तर गलत खानों में भर सकता है।
  2. सूचक को प्रश्न ठीक तरह से समझ न आए और उसे गलतफहमी हो जाए।
  3. उत्तरों की सत्यता का पता लगाना कठिन हो जाता है।
  4. हो सकता है कि प्रश्नावली वापस न आए।

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प्रश्न 2.
प्राथमिक तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर बताएँ। द्वितीयक आँकड़ों के कम-से-कम तीन स्रोत लिखें।
उत्तर:
प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में अंतर –
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आँकड़ों के तीन स्रोत (Three Sources of Secondary Data):

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. अंतराष्ट्रीय प्रकाशन
  3. वेबसाइट

प्रश्न 3.
क्षेत्र सर्वे की योजना में कौन-से मुख्य चरण हैं।
उत्तर:
इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं –

1. प्रश्नावली तैयार करना (Preparation of the Questionnaire):
प्रश्नावली अनुसंधानकर्ता से संबंधित प्रश्नों की एक सूची होती है। इसे अनुसंधान तैयार करता है। प्रायः इसे टाइप करवाया जाता है। या छपवाया जाता है। प्रश्नों के साथ-साथ ही उत्तर देने के लिए खाली स्थान छोड़ दिया जाता है।

इसके साथ एक अनुरोध-पत्र भी भेजा जाता है, जिसमें सूचकों को विश्वास दिलाया जाता है। कि उनके द्वारा भेजी सूचना नितांत गुप्त रखी जाएँगी। डाक व्यय आदि पहले ही चुकाया (प्रीपेड) होता है। प्रश्नावली को लौटाने की तारीख व उसके उद्देश्य साफ-साफ लिख दिए जाने चाहिए।

प्रश्नावलियाँ बनाने की शते-ये शर्ते निम्नलिखित हैं –

  • प्रश्न संख्या सीमित हो।
  • प्रश्न उद्देश्य के अनुकूल हो।
  • प्रश्नों की पुरावृत्ति न हों।
  • प्रश्न एक-दूसरे के पूरक हों।
  • प्रश्नों की भाषा सरल तथा स्पष्ट हो।
  • सूचनाएँ गोपनीय रखी जानी चाहिए।
  • सूचकों को शिष्टाचार के शब्दों से संबोधित किया जाएँ।

2. पूछताछ का तरीका (Mode of Enquiry):
आँकड़ों का संकलन डाक द्वारा हो सकता है या साक्षात्कार (mode of Enquiry Interview) के माध्यम से। पहली विधि काफी प्रमाणित है। इस विधि के अंतर्गत सूचकों को एक प्रश्नावली भेजी जाती है। उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे निश्चित तिथि तक प्रश्नावली भरकर भेजें। यह विधि वहाँ अधिक उपर्युक्त है जहाँ अनुसंधान का क्षेत्र विस्तृत है। इसके अतिरिक्त यह विधि मितव्ययी है और इससे हमें विश्वसनीय आँकड़े प्राप्त होते हैं, परंतु यह विधि शिक्षित वर्ग तक सीमित है। सूचक प्राय: प्रश्नावली भरकर भेजने में रुचि नहीं लेते।

सूचना संकलन करने की दूसरी विधि साक्षात्कार (Interview) है। इस विधि के अंतर्गत गणक अनुसूची (प्रश्नावली) लेकर स्वयं सूचक के पास जाता है। गणक सूचक को पहले सारी बातें समझा देता है और फिर उनसे सूचना एकत्रित करता है। यह विधि उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होती है जहाँ सूचक अशिक्षित हो। जटिल व कठिन प्रश्नों के उत्तर सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं: परंतु यह विधि बहुत महँगी है। गणक पक्षपाती भी हो सकते है और यदि गुणक कुशल नहीं है तो प्राप्त सूचना गलत भी हो सकती है।

3. गणकों को प्रशिक्षण देना (Training for Enumerators):
गणकों को प्रशिक्षण देना बहुत ही आवश्यक है, ताकि वे प्रश्नों को अच्छी तरह स्वयं समझ सकें और सूचकों को समझ सकें।

4. छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण (Pilot Surveys):
यदि अनुसंधान विस्तृत क्षेत्र का करना है तो यह अच्छा होगा कि विस्तृत क्षेत्र का अनुसंधान करने से पूर्व छोटे पैमाने पर सर्वेक्षण कर लिया जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जाए। ऐसा करने से प्रश्नों की उपयुक्तता के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी और बड़े पैमाने पर होने वाली सर्वेक्षण की लागत का पता चल जाएगा।

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प्रश्न 4.
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र में सर्वेक्षण से आप किस प्रकार की त्रुटियों (विभ्रमों) की आशा करते हैं?
उत्तर:
जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण से हम निम्नलिखित प्रकार की त्रुटियों की आशा करते हैं –

1. माप की गलतियाँ या त्रुटियाँ (Errors of measurement):
सर्वेक्षण में माप की गलती हो सकती है। दूसरे शब्दों में जब हम किसी व्यक्ति की आयु या आय के विषय में पूछते हैं तो वह अपनी आयु (विशेषतः अशिक्षित व्यक्ति) अनुमान से बताएँगे और कहेंगे लिख लो 30-35 वर्ष। आय के विषय में बताएँगे कि उनकी मासिक आय 2000-3000 रुपए है। इस प्रकार अनुमानित आयु या माप की गलतियाँ कहलाती हैं।

2. प्रश्नावली के कुछ प्रश्नों का गलत समझना या गलत अर्थ (Misunderstanding and misinterpreting some questions of the questionnaire):
जनगणना विधि में बहुत ही गुणकों की नियुक्ति की जाती है और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाता है, परंतु सारे गणक एक जैसी कुशलता वाले नहीं होते, और कुछ लापरवाह भी होते हैं। अतः वे प्रश्नावली के कई प्रश्नों को गलत समझते हैं या उनका गलत अर्थ लगाते हैं। ऐसी अवस्था में विभ्रम उत्पन्न हो सकती है। कई बार सूचक को भी प्रश्न ठीक ढंग से समझ नहीं आता है और वह गलत उत्तर देकर जान बचाता है।

3. लेखन त्रुटि (Recording mistakes):
कई बार गणक सूचक की सूचनाओं के लेखन में गलती कर बैठता है। उदाहरण के लिए, वह 31 के स्थान पर 13 लिख सकता है। कई बार लेख इतना गंदा होता है कि वह पढ़ा नहीं जाता और तालिका बनाने वाला लिखित उत्तरों को कंप्यूटर की फाइल में गलत बढ़ा देता है।

4. उत्तर न मिलने से त्रुटि (Errors of non-responses):
ये गलतियाँ या त्रुटियाँ उस समय उत्पन्न होती हैं, जब सूचक प्रश्नावली को भरने से इंकार करता है या गणक के बार-बार उससे मिलने जाने पर भी वह उपलब्ध नहीं होता।

5. गणितीय विभ्रम या त्रुटियाँ (Arithmetic errors):
कई प्रश्नों में थोड़ी-सी गणित या गणितीय गणना की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी अवस्था में गणना करने में गलती हो सकती है। उदाहरण के लिए, प्रश्नावली में एक प्रश्न है, ‘गत माह भोजन पर कुल कितना खर्च हुआ? ऐसी अवस्था में परिवार के मुखिया को गेहूँ, चावल, नमक, चीनी, दूध आदि पर होने वाले खर्चों को जोड़ना पड़ेगा। उससे जोड़ लगाने में गलती हो सकती है। मदों और उनकी कीमतों को याद करने में उसे गलती हो सकती है। ऐसी गलतियों को गणितीय गलतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 5.
प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियों में अंतर बताइए।
उत्तर:
प्रतिचयन और प्रतिचयन में अंतर
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प्रश्न 6.
एक व्यक्ति ने एक प्रश्नावली तैयार करने के लिए निम्न प्रश्न बनाए हैं। ये प्रश्न दोषपूर्ण हैं। उनके स्थान पर अच्छे प्रश्न बनाएँ।

  1. आप एक महीने में पुस्तकों पर कितने रुपए खर्च करते हैं?
  2. आप अच्छा लगने के लिए अपनी आय का कितना प्रतिशत कपड़ों पर खर्च करते हैं?
  3. क्या आप नहीं सोचते कि धूम्रपान निषेध होना चाहिए।
  4. क्या आप कॉलेज के पश्चात् नौकरी करेंगी या गृहिणी बनेंगी?
  5. आपको इस उच्च कोटि की चाय की सुगंध कैसी लगी?

उत्तर:
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प्रश्न 7.
एक आदर्श प्रश्नावली में क्या-क्या विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर:
एक आदर्श प्रश्नावली में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –

  1. सीमितता (Limitations): अच्छी प्रश्नावली वही मानी जाती है जो गागर में सागर भरे अर्थात् प्रश्न केवल विषयानुकूल ही हों।
  2. सरल व स्पष्ट (Simple and clear): प्रश्नावली में प्रश्न सीमित के साथ सरल व स्पष्ट भाषा में हों।
  3. उचित क्रम (Systematic order): प्रश्न आपस में जुड़े होने चाहिए और क्रम से होने चाहिए। ऐसा न हो कि बच्चों की संख्या पूछने के बाद, फिर यह पूछे कि आप शादीशुदा हैं? यह निरर्थक एवं हास्यास्पद प्रश्न होगा।
  4. उचित व सम्मानजनक प्रश्न (Proper and respectable questions): प्रश्न सम्मनजनक होने चाहिए जिससे कि सूचक के स्वाभिमान को ठेस न लगे। यह पूछना कि आप जुआ खेलते हैं, उचित नहीं है।
  5. प्रश्नों के प्रकार (Kinds of questions):
    • (क) वैकल्पिक प्रश्न (Alternative question): ये वे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हाँ या ना, गलत या सही दिशा में दिया जा सकता है।
    • (ख) बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple-alternative questions): ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर कई हो सकते हैं, जैसे-आपने स्कूल क्यों खोला है? धन कमाने को, यश कमाने को या गरीब बच्चों की सहायता के लिएं? आदि।
    • (ग) विशिष्ट प्रश्न (Specific question): ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि कोई विशिष्ट जानकारी प्राप्त करनी हो, जैसे-किसी की मासिक आय।
    • (घ) खुले प्रश्न (Open questions): ये ऐसे प्रश्न तब करने चाहिए जबकि सूचक इनका उत्तर मनमर्जी से दे। जैसे-नशाबंदी, दहेज प्रथा पर रोक।
  6. निर्देश (Direction): प्रश्नावली में यह भी ठीक-ठीक लिखा होना चाहिए कि प्रश्नावली को भेजने की अंतिम तारीख क्या है तथा उत्तर कैसे हों।
  7. प्रश्न के नीचे की टिप्पणी (Footnot after the questions): प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों में से किसी प्रश्न का अधिक विश्लेषण चाहिए तो ऐसे प्रश्नों के नीचे टिप्पणी अवश्य लिख देनी चाहिए।
  8. प्रश्नावली की पूर्व जाँच (Pre-checking of questionnaire): प्रश्नावली को सूचकों तक भेजने से पहले पूर्ण रूप से जाँच कर लेनी चाहिए। कोई किसी तरह की कमी न हो।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
यदि हम किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या का अध्ययन करना चाहते हैं तो हमें –
(a) रुपयों की आवश्यकता होती है
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की जरूरत होती है

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प्रश्न 2.
क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा संग्रहीत आँकड़े कहलाते हैं –
(a) प्राथमिक आंकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्राथमिक आंकड़े

प्रश्न 3.
प्राथमिक आँकड़े अन्वेशणकर्ता द्वारा
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं
(b) स्वयं एकत्र नहीं करवाये जाते हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं

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प्रश्न 4.
जो आँकड़े अन्वेषणकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र एवं संशोधित नहीं किए जाते, कहलाते हैं –
(a) मौलिक आँकड़े
(b) द्वितीयक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) द्वितीयक आँकड़े

प्रश्न 5.
सभी प्रकाशित आँकड़े कहलाते हैं –
(a) द्वितीयक आँकड़े
(b) प्राथमिक आँकड़े
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्राथमिक आँकड़े

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प्रश्न 6.
जो वास्तविक आँकड़े एकत्र करने क्षेत्र में जाता है, उसे कहते हैं –
(a) गणनाकार
(b) पर्यवेक्षक
(c) अन्वेषक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) गणनाकार

प्रश्न 7.
उत्तरदाता प्रश्नावली के प्रश्नों का उत्तर देकर –
(a) वास्तविक आँकड़े प्रदान नहीं करता है
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है

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प्रश्न 8.
जनगणना विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

प्रश्न 9.
प्रतिदर्शी विधि में दिए गए क्षेत्र की –
(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

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प्रश्न 10.
क्षेत्रीय कार्य की योजना में आँकड़ों के संग्रह के लिए अपनाई जाती है –
(a) गणना विधि
(b) प्रतिदर्श विधि
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों