Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

Bihar Board Class 11 Biology जीव जगत Text Book Questions and Answers

प्रश्न 1.
जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं?
उत्तर:
विश्व में कई मिलियन पौधे तथा प्राणी हैं, जो आकृति, आकार तथा रंग आदि में भिन्न होते हैं। अब तक लगभग 1.7-1.8 मिलियन स्पीशीज ज्ञात हो सकी हैं। इसे हम जैविक विविधता (biological diversity) कहते हैं। विविधता का लैटिन भाषा में तात्पर्य प्रकार (variety) से है। अभी भी ऐसे अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पर पाए जाने वाले प्राणी तथा पौधे अज्ञात हैं।

जैसे-जैसे हम नए और पुराने क्षेत्रों में खोज करते हैं, नए-नए जीवों का पता लगता रहता है। जैविक विविधता जैव विकास (evolution) तथा अनुकूलनता का प्रमाण है। विश्व में पाए जाने वाले सभी जीवों का अध्ययन करना असम्भव है, इसीलिए वर्गीकरण की आवश्यकता पड़ती है। वर्गीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें दृश्य गुणों के आधार पर _सुविधाजनक वर्ग में जीवधारियों को वर्गीकृत किया जाता है।

वर्गीकरण के मानक समय और आवश्यकता के अनुरूप बदलते रहे हैं। वर्गीकरण के कारण ही एक वर्ग के किसी एक जीव का अध्ययन कर लेने से उस वर्ग के अन्य सभी जीवों के सामान्य लक्षणों का ज्ञान हो जाता है। वर्गीकरण से विकास क्रम का ज्ञान होता है। वर्गीकरण से ही ज्ञात होता है कि पहले जलीय जीवों का उद्भव हुआ और उनसे बाद में उभयचर तथा उनसे स्थलीय जीवों का विकास हुआ है। वर्गीकरण के फलस्वरूप जीवधारियों के विकासीय सम्बन्धों का ज्ञान होता है।

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प्रश्न 2.
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं?
उत्तर:
आदिकाल से ही मानव जीवों के विषय में अधिकाधिक जानने का प्रयत्न करता रहा है। आदिकाल में मनुष्य अपनी मूलभूत आवश्यकताओं; जैसे-भोजन, वस्त्र, आश्रय के आधार पर जीवों को वर्गीकृत करता था। मनुष्य ने जन्तुओं को घातक-अघातक, भक्ष्य-अभक्ष्य, लाभदायक-हानिकारक आदि अनेक प्रकार से वर्गीकृत किया। आयुर्वेद आचार्य चरक ने लगभग 200 प्रकार के जन्तुओं और 340 प्रकार के पौधों का उल्लेख उनके महत्त्व के आधार पर किया। अरस्तू ने पौधों को शाक (herb), झाड़ी (shrub) तथा वृक्ष (tree) में वर्गीकृत किया।

प्रारम्भ में जीवधारियों का कृत्रिम वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया; जैसे –

1. आकार व आकृति के आधार पर पौधों को शाक, झाड़ी तथा वृक्ष में वर्गीकृत किया गया।

2. जीवन-अवधि के आधार पर पौधों को एकवर्षी, द्विवर्षी तथा बहुवर्षी में वर्गीकृत किया गया।

3. आवास के आधार पर जीवों को जलीय, स्थलीय, वायवीय में वर्गीकृत किया गया। उपर्युक्त कृत्रिम वर्गीकरण से कोई स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं होती और न ही किसी वर्ग के सदस्यों के बीच प्राकृतिक सम्बन्धों का ज्ञान होता है; जैसे-कीट, पक्षी और चमगादड़ को पंखों के आधार पर उड़ने वाले प्राणियों के समूह में वर्गीकृत कर दिया गया, लेकिन इनमें परस्पर सम्बन्ध प्रदर्शित नहीं होता।

इसके पश्चात् जीवों का वर्गीकरण उनकी प्राकृतिक संरचना, कार्यिकी, स्वभाव, व्यवहार तथा परिवर्धन में समानताओं और विभिन्नताओं के आधार पर किया गया। इसे प्राकृतिक वर्गीकरण कहते हैं। आधुनिक वर्गीकरण जीरों के जातिवृत्त सम्बन्धों पर आधारित हैं; क्योंकि मनुष्य जैव विविधता और जीवधारियों के पारस्परिक सम्बन्धों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता है।

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प्रश्न 3.
जिन लोगों से आप प्रायः मिलते रहते हैं, आप उनको किस आधार पर वर्गीकृत करना पसन्द करेंगे? (संकेत-ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं, आर्थिक स्तर आदि)।
उत्तर:
जीवधारियों को उनकी समानता एवं भिन्नता के आधार पर विभिन्न समूहों एवं वर्गों में रखना ही वर्गिकी (systematics) है। जातिवृत्तीय सम्बन्धों के आधार पर जीवधारियों को वर्गीकृत किया जाता है। इसके लिए जीवधारी के लक्षणों का ज्ञात होना अति आवश्यक है। लक्षणों की समानता और भिन्नता के आधार पर किसी जीवधारी को पहचाना जा सकता है।

अगर व्यक्तियों को ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश, आर्थिक स्तर आदि के आधार पर वर्गीकृत करना पड़े तो प्रदेश के आधार पर उसे वर्गीकृत करना अधिक उपयुक्त होगा; क्योंकि प्रदेश के भौगोलिक वातावरण, वहाँ की भाषा का व्यक्ति-विशेष पर प्रभाव पड़ता है; ड्रेस तो प्रदेश की जलवायु के अनुसार बदल जाती है। एक ही स्थान पर रहने वाले व्यक्तियों का आर्थिक स्तर भी भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 4.
व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
व्यष्टि (Individual) तथा समष्टि (Population):
व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें जीवधारी के वैज्ञानिक नाम तथा उसकी विशेषताओं (characters) का ज्ञान होता है। जीवधारियों के आकार, रंग, आवास, कोशिकीय संगठन, शरीर क्रियात्मक तथा आकारिकीय लक्षणों के आधार पर जीवों की व्याख्या की जाती है।

व्यष्टि या जाति जीवधारियों के उस समूह को कहते हैं जो प्रकृति में परस्पर जनन करके प्रजनन योग्य सन्तान उत्पन्न करते हैं। एक ही जाति के सदस्य जब अलग-अलग भौगोलिक वातावरण में रहते हैं तो उनके रंग, रूप तथा आकार में भिन्नता आ जाती है, इस समूह को समष्टि या आबादी (Population) कहते हैं। समष्टि में जीवों की संख्या अस्थिर रहती है अर्थात् यह अधिक या कम हो सकती है।

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प्रश्न 5.
आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित है। इसमें से कौन-सा सही है? मेंजीफेरा इंडिका (Mangiferra indica) मेंजीफेरा इंडिका (Mangiferra indica)
उत्तर:
आम का वैज्ञानिक नाम मेंजीफेरा इंडिका (Mangifera indica) है।

प्रश्न 6.
टैक्सॉन की परिभाषा लिखिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
टैक्सॉन (Taxon):
वर्गीकरण में अनेक पदानुक्रम सोपान होते हैं, जिसका प्रत्येक संवर्ग एक सोपान को प्रदर्शित करता है। इसे वर्गिकी संवर्ग या टैक्सॉन (taxon) कहते हैं। वर्गीकरण अध्ययन में विभिन्न स्तर के वर्गक या टैक्सॉन निम्न हैं –
जाति (species), वंश (genus), कुल (family), गण (order), वर्ग (class), संघ (phylum), जगत (kingdom)

उदाहरण:
आलू, टमाटर, बैंगन अलग-अलग जातियाँ हैं किन्तु इन सभी को एक वंश सोलेनम के अन्तर्गत रखते हैं क्योंकि इनमें अनेक समानताएँ पाई जाती हैं। सोलेनम, पिटूनिआ, धतूरा अलग-अलग वंश है किन्तु इन सभी को जातिवृत्तीय सम्बन्धों के आधार पर एक ही कुल सोलेनेसी के अन्तर्गत रखते है।

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प्रश्न 7.
क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं?
(अ) जाति (स्पीशीज) → गण (आर्डर) → संघ (फाइलम) → जगत (किंगडम)
(ब) वंश (जीनस) → जाति → गण → जगत (स) जाति → वंश → गण → संघ
उत्तर:
सही वर्गिकी संवर्ग है –
(स) जाति → वंश → गण → संघ।

प्रश्न 8.
जाति शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिए। क्या आप अपने शिक्षक से उच्चकोटि के पौधों, प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं?
उत्तर:
जाति (Species):
जॉन रे (John Ray) ने सर्वप्रथम किसी एक प्रकार के जीवधारी के लिए जाति या स्पीशीज शब्द का प्रयोग किया। जाति वर्गीकरण की मूल इकाई है। पुरानी धारणा के अनुसार जाति एक स्थायी इकाई है, जिसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार जाति एक गतिशील तथा परिवर्तनशील इकाई है, जिसमें वातावरण के अनुसार परिवर्तन होते रहते हैं। ये परिवर्तन लाखों-करोड़ों वर्षों में एक नई जाति का निर्माण करते हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रकृति में जितनी भी जातियाँ हैं वे सभी आदिकाल में पाई जाने वाली जातियों से विकसित हुई हैं।

मेयर (1942) के अनुसार, “जाति जीवधारियों का वह समूह है जो परस्पर जनन करके प्रजनन योग्य सन्तानें उत्पन्न कर सकें।” एक जाति के सदस्यों को अन्य जाति के सदस्यों से आकारिकीय लक्षणों के आधार पर एक-दूसरे से पृथक कर सकते हैं। उच्च श्रेणी के पौधों, प्राणियों तथा बैक्टीरिया की जातियाँ आकारिकीय लक्षणों; जैसे – कोशिका संरचना, शारीरिक संगठन, पोषण प्राप्त करने की विधि, पर्यावरणीय जीवन-शैली तथा जातिवृत्तीय सम्बन्धों के आधार पर भिन्न होती है। पादप स्वपोषी एवं उत्पादक कहलाते हैं। प्राणी परपोषी एवं उपभोक्ता होते हैं। बैक्टीरिया प्रायः परपोषी एवं अपघटक होते हैं।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों को समझिए तथा परिभाषित कीजिए –

  1. संघ
  2. वर्ग
  3. कुल
  4. गण
  5. वंश।

उत्तर:
1. संघ:
यह विभिन्न सम्बन्धित वर्गों का समूह है जिसमें कुल गुण समान होते हैं। जैसे-पिसीज, एम्फीबिया, रेप्टीलिया, एवीज तथा मैमेलिया वर्ग के सदस्यों को संघ काटा में रखते हैं क्योंकि इन सभी में पृष्ठ रज्जु युक्त खोखला तन्त्रिका तन्त्र, ग्रसनीय गिल दरारें पायी जाती हैं।

2. वर्ग:
यह अनेक सम्बन्धित गणों का समूह है। जैसे – मैमेलिया वर्ग में सिटेसिया, काइरोप्टेरा, कार्नीवोरा तथा प्राइमेटा गण आते हैं। सिटेसिया में समुद्री स्तनी, काइरोप्टेरा में उड़ने वाले स्तनी, कार्नीवोरा में मांसाहारी स्तनी तथा प्राइमेटा में बुद्धिमान स्तनी आते हैं। इन सभी के शरीर पर बाल, बाह्य कर्ण तथा स्तनग्रन्थियाँ पाई जाती हैं।

3. कुल:
इसके अन्तर्गत सम्बन्धित वंश आते हैं। जैसे – सोलेनेसी कुल में सोलेनम, पिटूनिआ तथा धतूरा रखते हैं।

4. गण:
यह समान लक्षण वाले कुलों का समूह है। जैसे-कार्नीवोरा गण के अन्तर्गत फेलिडि तथा कैनसीडी कुलों को रखा गया है।

5. वंश:
बहुत सी जातियों के समूह को वंश कहते हैं। इनके कुछ लक्षण समान तथा अन्य लक्षण भिन्न होते हैं। जैसे-शेर, चीता तथा तेंदुआ अलग जातियाँ हैं किन्तु ये सभी एक ही वंश पेंथेरा के अन्तर्गत आते हैं।

Bihar Board Class 11 Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

प्रश्न 10.
जीव के वर्गीकरण तथा पहचान में कुंजी किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
वर्गीकरण तथा पहचान में जो लक्षण वर्गिकी में सहायक होते हैं उन्हें वर्गीकरण की कुंजी (key of classification) कहते हैं। यह अज्ञात जीवधारी की पहचान में सहायक होती है। यह तुलनात्मक लक्षणों पर आधारित होती है। वर्गीकरण संवर्ग के प्रत्येक टैक्सॉन (taxon); जैसे-जाति, वंश, कुल, गण, वर्ग, संघ के लिए अलग-अलग कुंजी (key) का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
पौधों तथा प्राणियों के उचित उदाहरण देते हुए वर्गिकी पदानुक्रम का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
वर्गिकी पदानुक्रम-वर्गीकरण में अनेक पदानुक्रम सोपान होते हैं, जिसका प्रत्येक संवर्ग एक सोपान को प्रदर्शित करता है। इसे वर्गिकी संवर्ग या टैक्सॉन (taxon) कहते हैं। इसमें विभिन्न टैक्सा उच्चतम से निम्नतम श्रेणी में निश्चित क्रम में व्यवस्थित होते हैं। वर्गीकरण की आधारभूत इकाई जाति है तथा उच्चतम इकाई जगत है। जीवों को विभिन्न टैक्सा में रखने के लिए मूलभूत आवश्यक व्यष्टि अथवा उस टैक्सा के गुणों का ज्ञान होना आवश्यक है। इसके द्वारा समान प्रकार के जीवों तथा अन्य प्रकार के जीवों में समानता तथा विभिन्नता को पहचानते हैं।

आरोही क्रम में पदानुक्रम वर्गिकी संवर्ग को निम्न प्रकार प्रदर्शित करते हैं –
जाति (species) → वंश (genus) → कुल (family) → गण (order) → वर्ग (class) → संघ (phylum) → जगत (kingdom)।

उदाहरण:
शेर (Panthera leo), चीता (Panthera tigris), तेंदुआ (Panthera pardus) अलग-अलग जाति के सदस्य हैं किन्तु ये सभी एक ही वंश (genus) पेंथेरा के अन्तर्गत आते हैं। बिल्ली का वंश फेलिस इनसे भिन्न है। लेकिन इन दोनों को ही एक ही कुल फेलिडि में रखते हैं।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 9 सुभाषितानि Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

Bihar Board Class 7 Sanskrit सुभाषितानि Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
उदाहरणानुसारेण भावबोधकं पद्यांशं वदत –

यथा- ऊँचे विचार वालों के लिए संसार ही परिवार है ।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।

  1. गँवार सलाह से कुपित हो जाता है।
  2. राजा गुप्तचरों से सब जान लेते हैं।
  3. बड़े-बड़े घराने झगड़कर बर्बाद हो जाते हैं ।
  4. समर्थ के लिए क्या असंभव है ?
  5. चुप रहना सबसे भला होता है।

उत्तराणि –
यथा – ऊँचे विचार वालों के लिए संसार ही परिवार है।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।

(i) गँवार सलाह से कुपित हो जाता है ।
उपदेशो हि मुर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये ।

(ii) राजा गुप्तचरों से सब जान लेते हैं ।
चारैः पश्यन्ति राजानः ।

(iii) बड़े-बड़े घराने झगड़कर बर्बाद हो जाते हैं ।
कलहान्तानि हाणि ।

(iv) समर्थ के लिए क्या असंभव है ?
कोऽतिभारः समर्थनाम् ।

(v) चुप रहना सबसे भला होता है ।
मोनः सवार्थसाधनम् ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

प्रश्न 2.
पाठस्य श्लोकद्वयं सस्वरं श्रावयन्त ।

नोट : छात्र अभ्यास कर दो श्लोक सुनावें ।

लिखितः

प्रश्न 3
रिक्तस्थानं पूरयत

(क) …………. हि मूर्खाणां …………. न शान्तये ।
पयःपानं …………………केवलं ………………..||

(ख) अयं …………… गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु ………………. ||
उत्तराणि –
(क) उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये ।
पय:पानं भुजंगानां केवलं विषवर्धनम् ॥

(ख) अयं निजः परावति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥

प्रश्न 4.
निम्नलिखितानां जन्तूनां नामानि मातृभाषायां लिखत :

  1. व्याघ्रः …………………… ।
  2. अजा ……………….. ।
  3. मृगः – ………………….. ।
  4. अश्वः ……………….. ।
  5. वृष: ……………………… |
  6. कूर्मः ……………. ।
  7. वृश्चिक: ………………… |
  8. घोटक: …………… ।
  9. मानः …………………….. |
  10. नकुल: …………….।
  11. हस्ती ……………………. |
  12. गर्दभः ………………. ।

उत्तराणि –

  1. व्याघ्रः – बाघ ।
  2. अजा – बकरी ।
  3. मृगः – हिरण |
  4. अश्वः – घोड़ा ।
  5. वृषः – बैल ।
  6. कूर्मः – कच्छुआ ।
  7. वृश्चिक: – बिच्छु ।
  8. घोटकः – घोड़ा ।
  9. मीन: – मछली ।
  10. नकुलः – नेवला ।
  11. हस्ती – हाथी ।
  12. गर्दभः – गदहा ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

प्रश्न 5.
समुचितविभक्तिप्रयोगेण रिक्तस्थानानि पूरयत

यथा – सः मुखेन खादति । (मुख)

  1. गंगा ……………………. निर्गच्छति । (हिमालय)
  2. ………………… राजधानी दिल्ली अस्ति । (भारत)
  3. वृक्षात् ……………………… पतन्ति । (पत्र)
  4. वयं ……………………. पश्यामः । (नेत्र)
  5. गच्छन्ति ……………..। (विद्यालय)

उत्तराणि-

  1. गंगा हिमालयात् निर्गच्छति ।
  2. भारतस्य राजधानी दिल्ली अस्ति ।
  3. वृक्षात् पत्राणि पतन्ति ।
  4. वयं नेत्राभ्याम् पश्यामः ।
  5. ता: विद्यालयं गच्छन्ति ।

प्रश्न 6.
वाक्यानि रचयत –

  1. यूयम् : …………..
  2. शने : …………..
  3. हसामः …………..
  4. साधवः …………..
  5. वनेपु : …………..

उत्तराणि –

  1. यूयम् – यूयम् अधुना पठथ ।
  2. शनै: – कच्छपः शनैः गच्छति ।
  3. हसामः – वयम् हसामः ।
  4. साधवः – साधवः परोपकारिणः भवन्ति ।
  5. वनेपु – वनेषु औषधयः मिलन्ति ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानं पूरयत

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि 1

प्रश्न 8.
स्वस्मरणेन द्वौ श्लोको लिखत ।
उत्तर-
(1) कोऽतिभार: समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम् ।
को विदेशः सुविद्यानां कः परः प्रियवादिनाम् ॥

(2) विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन ।
स्वदेशं पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ।।

प्रश्न 9.
श्लोकमेकं लिखित्वा तस्यार्थं हिन्दीभाषायां लिखत ।
उत्तर-
उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये ।
पयःपानं भुजंगानां केवलं विषवर्धनम् ॥ 2 ॥

सरलार्थ-मूखों को उपदेश देना उनके क्रोध को बढाने के लिए होता है न कि शान्ति के लिए । सर्प को दूध पिलाना उसके विष को बढ़ाना है।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

प्रश्न 10.
नीतिश्लोकानां संग्रहणं कुरुत ।
नोट : छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit सुभाषितानि Summary

[हमारे जीवन में स्मरण करने योग्य सुन्दर उक्तियों का बहुत उपयोग होता है। अपने वार्तालाप में किसी बात पर बल देने के लिए तथा भाषणों में उद्धरण के लिए इन उक्तियों का प्रयोग होता है । संस्कृत भाषा में कई ग्रन्थ हैं जहाँ ये सुन्दर उक्तियाँ मिलती हैं। इन्हें सभापित भी कहा जाता है । संस्कृत के प्राचीन कथाग्रन्थ पंचतन्त्र से लिए गये इस पाठ के श्लोकों में जीवन को दिशानिर्देश देने वाली बातें कही गयी हैं 1 इन श्लोकों को कण्ठाग्र करके जीवन का परिमार्जन हो सकता है।

विद्वत्वं च नृपत्वं ………… विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ॥ 1 ॥

शब्दार्थ-पूज्यते – पूजा जाता है । कदाचन कभी भी । स्वदेशे – अपने देश में । सर्वत्र = सभी जगह। सरलार्थ-विद्वान और राजा में तुलना कभी भी नहीं हो सकता (क्योंकि) राजा अपने देश में पूजा जाता है किन्तु विद्वान की पूजा सभी जगह होती है।

उपदेशो हि मूर्खाणां……………….केवलं विषवर्धनम् ॥ 2 ॥

शब्दार्थ-प्रकोपाय . क्रोध के लिए । शान्तये – शान्ति के लिए । पयःपानम् – दुग्धपान, दूध पीना । भुजंगानाम् = सौ के। का । की। विषवर्धनम् = जहर बढ़ाने वाला । सरलार्थ-मूखों को उपदेश देना उनके क्रोध को बढ़ाने के लिए होता है न कि शान्ति के लिए । सर्प को दूध पिलाना उसके विप को बढ़ाना है ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

कोऽतिभारः समर्थानां ………….. परः प्रियवादिनाम् ॥ 3 ॥

शब्दार्थ-अतिभार: # बड़ा भार, बड़ा बोझ । सुविद्यानाम् – सुन्दर विद्यावालों के लिए, विद्वानों के लिए । परः – दूसरा । प्रियवादिनाम् – प्रिय बोलने वालों के लिए । सरलार्थ-सामार्थ्यवान के लिए बड़ा बोझ (भार) क्या और व्यवसायियों के लिए दूरी क्या, विद्वानों के लिए विदेश क्या और प्रिय बोलने वालों के लिए दूसरा कौन ?

केवल व्यसनस्योक्तं …………… विषाद-परिवर्जनम् ॥ 4 ॥

शब्दार्थ-व्यसनस्य – बुरी आदत का, दुःख का । भेषजम् – दवा । नयपण्डितैः – नीति को जानने वालों द्वारा । सरलार्थ-बुरी आदत की दवा नीति को जानने वालों द्वारा केवल संभव है । उसे उखाड फेंकना का प्रयास करना दुख त्यागना है।

गन्धेन गावः पश्यन्ति ……….. चक्षुामितरे जनाः ॥5॥

शब्दार्थ-चारैः = गुप्तचरों द्वारा ! इतरे – अन्य, दूसरे । सरलार्थ-गन्ध से गाय देखती हैं, शास्त्र से पण्डित देखते हैं, दतों से राजा देखते हैं और दोनों आँखों से अन्य लोग देखते हैं।

आत्मनो मुखदोषेण …………….. मौनं सर्वार्थसाधनम् ॥ 6 ॥

शब्दार्थ-शुकः – तोता । सारिका – मैना । बकाः – बगुले । बध्यन्ते । – बाँधे जाते हैं। सरलार्थ-अपने मुख के दोष से तोता और मैना बाँधे जाते हैं लेकिन बगुले नहीं बाँधे जाते हैं । अतः मौन रहने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

अयं निजः परो वेति …………. वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ 7 ॥

शब्दार्थ-उच्छेदः – उखाड़ फेंकना । समारम्भः = प्रयास करना। सरलार्थ-यह अपना है और यह दुसरे का है ऐसी गिनती निम्न विचारवाले लोगों का है । व्यापक विचार वालों का तो पूरा विश्व ही परिवार

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि

कलहान्तानि हाणि ………… कुकर्मान्तं यशो नृणाम् ।। 8 ॥

शब्दार्थ-हाणि – भवन (बहुवचन) । कलहान्तानि – आपसी झगड़े से नष्ट होनेवाले। कुवाक्यान्तम् = खराब बोली से अन्त होनेवाला । कुराजान्तानि – बुरे राजा से नष्ट होने वाले। कुकर्मान्तम् = बुरे कर्म से नष्ट होने वाले । विषादः – दु:ख । परिवर्जनम् = त्याग, छोड़ना । सौहृदम् – दोस्ती । नृणाम् = मनुष्यों का/की/के । समर्थानाम् = शक्ति वालों का । सरलार्थ-आपसी झगड़े से बड़े-बड़े घराने बर्बाद हो जाते हैं, खराब बोली से मित्रता समाप्त हो जाता है, बरे राजा से देश नष्ट हो जाता है और बुरे कर्मों से लोगों का यश नष्ट हो जाता है

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेदः

  • कोऽतिभारः = कः + अतिभारः (विसर्ग सन्धि)
  • तस्योच्छदः = तस्य + उच्छेदः (गुण सन्धि)
  • बकास्तत्र = बकाः + तत्र (विसर्ग सन्धि)
  • सर्वार्थसाधनम् = सर्व + अर्थसाधनम् (दीर्घ सन्धि)

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 9 सुभाषितानि 2

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 14 बोधगया Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

Bihar Board Class 7 Sanskrit बोधगया Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत

  1. प्रसिद्धिम्
  2. श्रद्धाम्
  3. अश्वत्थवृक्षः
  4. सहस्राधिकाः
  5. निरञ्जना
  6. शुष्यति
  7. भ्रमणम् ।

नोट : उच्चारण छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानाम् अर्थ वदत –

  1. अवस्थितः
  2. अद्य
  3. ततः परम्
  4. उपविष्टस्य
  5. सम्पति
  6. अधुना

उत्तराणि –

  1. अवस्थितः – स्थित विद्यमान
  2. अद्य – आज
  3. ततः परम्- इसके बाद
  4. उपविष्टस्य-बैठे हुए का
  5. सम्प्रति-वर्तमान में
  6. अधुना-इस समय

लिखितः

प्रश्न 3.
निम्नलिखिताना प्रश्नानाम् उत्तरम् एकेन पदेन लिखत

  1. बोधगया कस्मिन् मण्डले अस्ति ?
  2. सिद्धार्थः कदा बोधि प्राप्तवान् ?
  3. कस्य छायायां बुद्धं तपस्यां कृतवान् ?
  4. मन्दिरे बुद्धस्य पाषाणमूर्तिः कस्मिन् आसने वर्तते ?
  5. बोधगयापार्वे का नदी प्रवहति ?

उत्तराणि

  1. गया मण्डले
  2. वैशाख-पूर्णिमायां
  3. अश्वत्थवृक्षस्य
  4. पद्मासने
  5. निरञ्जना

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प्रश्न 4.
कोष्ठात् उचितरूपं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत

  1. विहारराज्यस्य …………………….. मण्डले बोधगया अस्ति । (गया, नवादा)
  2. सिद्धार्थः …………. पूर्णिमायां बोधि प्राप्तवान् । (आषाढ, वैशाख)
  3. बोधगयायां प्राचीनः ……………. वृक्षः वर्तते । (वट, अश्वत्थ)
  4. बुद्धस्य पाषाणमूर्तिः ………….. आसने वर्तते । (पद्म, सिंह)
  5. मगधविश्वविद्यालयस्य मुख्यपरिसरः …………. वर्तते । (गयायाम्, बोधगयायाम्)

उत्तराणि-

  1. गया
  2. वैशाख
  3. अश्वत्थ
  4. पद्म
  5. बोध गयायाम् ।

प्रश्न 5.
निम्नलिखिताना शब्दानां प्रयोगेण संस्कृते वाक्यानि रचयत। ।

  1. बोधगया
  2. अद्य
  3. पाषाणमूर्तिः
  4. भक्तः
  5. प्रशासनम् ।

उत्तराणि

  1. बोधगया-बोधगया बिहार राज्ये अस्ति ।।
  2. अद्य – अद्य अहं विद्यालयं गमिष्यामि ।
  3. पाषाणमूर्ति: – मन्दिरे पाषाणमूर्ति वर्तते ।
  4. भक्तः – भक्तः भजनं करोति ।
  5. प्रशासनम् – प्रशासनं राज्यस्य विकासाय प्रयासं करोति ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

प्रश्न 6.
अर्थानुसारेण पदानि सुमेलयत

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया 1

उत्तराणि-
(क) – (ii)
(ख) – (i)
(ग) – (iv)
(घ) – (iii)
(ङ) – (vi)
(च) – (v)

प्रश्न 7.
रिक्तस्थानानि पूरयत –

एकवचनम् – द्विवचन – बहुवचन

(क) ग्रामः – ………………. – ……………..
(ख) उपासकः – उपासको – ……………….
(ग) धारयति – धारयत: – ……………….
(घ) करोति – ………………. – ……………….
उत्तराणि –
एकवचनम् – द्विवचन – बहुवचन

(क) ग्रामः – ग्रामौ – ग्रामाः
(ख) उपासकः – उपासको – उपासका:
(ग) धारयति – धारयत: – धारयन्ति
(घ) करोति – कुरुतः – कुर्वन्ति

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

प्रश्न 8.
अधोलिखितानां पदानां सन्धि सन्धिविच्छेदं वा कुरुत –

  1. तस्य + एव । = ……………………
  2. पद्म + आसने = ……………………
  3. सहस्राधिका: = ……………………
  4. करुणायुक्तश्च = ……………………
  5. तत्रैव = ……………………

उत्तराणि –

  1. तस्य + एव = तस्यैव
  2. पद्म + आसने = पद्मासने
  3. सहस्राधिकाः = सहस्र + अधिका:
  4. करुणायुक्तश्च = करुणायुक्तः + च
  5. तत्रैव = तंत्र + एव

प्रश्न 9.
सत्यम् अथ्रवा असत्यम् लिखत –

  1. बोधगया बिहारस्य गयामण्डले अस्ति ।
  2. राजकुमारः सिद्धार्थः आषाढपूर्णिमायां बोधि प्राप्तवान् ।
  3. अश्वत्थवृक्षस्य समीपमेव बुद्धस्य प्राचीनं महाबोधिमन्दिरं वर्तते ।
  4. बुद्धः वटवृक्षस्य छायायां तपस्यां कृतवान् ।
  5. बोधगयायां जलभन्दिरम् अस्ति ।

उत्तराणि –

  1. बोधगया बिहारस्य गयामण्डले अस्ति । (सत्यम)
  2. राजकुमारः सिद्धार्थः आषाढ़पूर्णिमायां बोधि प्राप्तवान् । (असत्यम्)
  3. अश्वत्थवृक्षस्य ममीपमेव बुद्धस्य प्राचीनं महाबोधिमन्दिरं वर्तते। (सत्यम्)
  4. बुद्धः वटवृक्षस्य छायायां तपस्यां कृतवान् ।। (असत्यम।)
  5. बोधगयायां जलमन्दिरम् अस्ति । (अस्म)

Bihar Board Class 7 Sanskrit बोधगया Summary

[बौद्धधर्म अन्तरराष्ट्रीय स्थिति के कारण महत्त्वपूर्ण है । इस धर्म के अनुयायी बोधगया को भगवान् बुद्ध को ज्ञानस्थली के कारण बहुत आदर की दृष्टि से देखते हैं तथा यहाँ की यात्रा को अपने जीवन का परम लक्ष्य मानते हैं । बोधगया में भगवान बुद्ध का प्राय: चौदह सौ वर्ष पुराना मन्दिर तथा बोधि वृक्ष वर्तमान है । प्रस्तुत पाठ में बोधगया के धार्मिक महत्त्व तथा वर्तमान परिवेश का संक्षिप्त परिचय है ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

बिहारराज्यस्य गयामण्डले …………………. तस्य दर्शनाय आयान्ति ।

शब्दार्थ-बिहारराज्यस्य = बिहार राज्य के । गयामण्डले = गया जिले में । अवस्थितः – स्थित । महतीम् = बड़ी (को) । बोधिम् – ज्ञान को । प्राप्तवान् – प्राप्त किया । ततः परम् = उसके बाद । धारयन्ति – धारण करते हैं/करती हैं । अश्वत्थवृक्षः – पीपल का पेड़ । तस्यैव (तस्य + एव) – उसका ही/उसी का । छायायाम् = छाया में । कृतवान् – किया । तस्मिन् – उसमें । पद्मासने = कमलासन / पद्मासन की अवस्था में । उपविष्टस्य – बैठे हुए का / की । पाषाणमूर्तिः – पत्थर की मूर्ति । सहस्राधिकाः – हजार से अधिक । दर्शनाय – दर्शन के, लिए । आयान्ति = आते हैं।

सरलार्थ-बिहार राज्य के गया जिला में स्थित बोधगया नामक गाँव आज बड़ी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है । यहीं राजकुमार सिद्धार्थ ने वैशाख पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्त किया । इसके पश्चात् वे भगवान् बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हो गए। बौद्धधर्म के सभी उपासक बोधगया के प्रति श्रद्धा धारण करते हैं। आज वहाँ पुराना पीपल का पेड़ है । उसी की छाया में बुद्ध ने तप किया । उस वृक्ष के समीप में ही बुद्ध का प्राचीन महाबोधि मंदिर है । मन्दिर में पद्मासन की अवस्था में बैठे हुए बुद्ध का पत्थर की मूर्ति है । प्रतिदिन हजारों से अधिक भक्तगण उनके दर्शन के लिए आते हैं।

तस्य मन्दिरस्य परिसरः ………………. परिसरस्य भ्रमणं कुर्याम ।

शब्दार्थ-परिसरः – आहाता, स्थान । करुणा – दया । सम्प्रति – इस – समय । निवासिभिः = निवासियों के द्वारा । कृतानि – बनाये गये । शोभन्ने = शोभते हैं । तत्रैव (तत्र + एव) वहीं । अधुना – आजकल । रमणीयम् .. – सुन्दर, मनमोहक । दर्शनीयम् – दर्शन योग्य । स्थलम् – जगह । स्वच्छता । – सफाई। वर्ष यावत् = सालों भर / पूरे साल । पर्यटकाः – यात्री । आत्मानम् = अपने आप को । मन्यन्ते – मानते हैं। समझते हैं । पार्वे – बगल में । प्रवहति – बहती है । शुष्यति = सूख जाती/ जाता है । विकासाय – विकास के लिए । विकास को। भ्रमणम् – घूमना / घूमने का कार्य । परिसरस्य – आहाते का । कुर्याम = (हम) करें ।

सरलार्थ – उस मन्दिर के आहाता शान्तिमय और दया युक्त है । बोधगया में इस समय विभिन्न देशों को निवासियों द्वारा बनाए गए बुद्ध मन्दिर शोभायमान है । जैसे म्यांमार (बर्मा) मन्दिर, थाईमन्दिर, तिब्बत मन्दिर, जापान मन्दिर आदि । वहीं ही मगध विश्वविद्यालय का मुख्य आहाता है । आजकल बोधगया मनमोहक और दर्शनीय स्थान है ।

पूरे आहाता की सफाई और परिवहन की व्यवस्था सुन्दर है । वर्ष भर पर्यटक बोधगया जाकर अपने को धन्य मानते हैं । यहाँ समीप में ही निरंजना नामक नदी बहती है । गर्मी में वह सूख जाती है । प्रशासन बोध गया के विकास के लिए निरन्तर प्रयत्न कर रहा है । हमलोग भी वहाँ जाकर आहाता का दर्शन करें ।

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेदः

  1. तस्यैव = तस्य + एव (वृद्धि सन्धि, स्वर सन्धि)
  2. पद्मासने = पद्म + आसने (दीर्घ सन्धि, स्वर सन्धि)
  3. करुणायुक्तश्च = करुणायुक्तः + च (विसर्ग सन्धि)
  4. सहस्राधिकाः = सहस्र + अधिकाः (दीर्घ सन्धि, स्वर सन्धि)

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया

प्रकृति – प्रत्यय-विभागः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 14 बोधगया 2

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

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देव शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 1

मुनि शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 2

पति शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 3

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

साधु शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 4

पितृ शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 5

लता शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 6

नदी शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 7

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

फल शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचनः

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 8

भवत् (आप) शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 9

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

राजन् शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 10

गुणिन् शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 11

विद्वस् शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 12

युष्मद् शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 13

अस्मद् शब्द

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 14

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

तत् शब्द (पुंल्लिग)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 15

यत् शब्द (पुल्लिग) :

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 16

किम् शब्द (पुल्लिग)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 17

इदम् शब्द (पुंल्लिग)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 18

एक शब्द (नित्य एकवचनान्त)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 19

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि

द्वि शब्द (नित्य द्विवचनान्त)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 20

त्रि शब्द (नित्य बहुवचनान्त)

विभक्तिः – एकवचन – द्विवचन – बहुवचन

Bihar Board Class 7 Sanskrit व्याकरण शब्दरूपाणि 21

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

Bihar Board Class 7 Sanskrit डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत –

  1. चतुर्दशे
  2. महारजातौ
  3. रत्नागिरिनगरस्य
  4. स्थितात्
  5. सेवायाम्
  6. अस्पृश्यानाम्
  7. महत्कार्गप
  8. अपजत
  9. इत्युपाधिम
  10. गृहीतवान् ।।

नोट: उच्चारणं छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानाम् अर्थ वदत –

  1. जातः
  2. तत्रैव
  3. गृहीत्वा
  4. कृतवान्
  5. लब्धता,
  6. तत्
  7. अत्यजत्
  8. मरणोत्तरम्
  9. विषमताम्
  10. तिष्ठन्ति

उत्तराणि-

  1. उत्पन्न
  2. हुए
  3. वहीं ही
  4. पाकर
  5. किया
  6. प्राप्त कर
  7. उसे
  8. छोड़ दिया
  9. मृत्यु के पश्चात्
  10. असमानता को रहते हैं।

लिखितः

प्रश्न 3.
कोष्ठात् शब्दं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –

  1. भीमरावस्य अम्बेदकरस्य जन्म …………. अभवत् । (उत्तरप्रदेशे/मध्यप्रदेशे)
  2. भीमरावः ………………… कॉलेजशिक्षक: नियुक्तः। (मुम्बईनगरे । बिहारप्रान्ते)
  3. ……………. निर्माणे तस्य महद् योगदानं वर्तते (अमेरिकीसंविधानस्य/भारतीयसंविधानस्य)
  4. सः ……………….. महान् पण्डितः आसीत् ।। (गणितविपस्य/विधिशास्त्रस्य)
  5. सः अस्पृश्याना………कार्यं कृतवान् (हिताय/नाशाय)

उत्तराणि-

  1. मध्यप्रदेशे
  2. मुम्बईनगरे
  3. भारतीयसंविधानस्य
  4. विधिशास्त्रस्य
  5. हिताय ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

प्रश्न 4.
निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरम् एकपदेन लिखत –

  1. कस्मिन् प्रदेशे अम्बेदकरस्यस जन्म अभवत् ?
  2. कस्मिन् वर्षे अम्बेदकरस्य जन्म अभवत् ?
  3. कस्मात् विश्वविद्यालयात् अम्बेदकरः डाक्टरोपाधि प्राप्तवान् ?
  4. भारतीयसंविधानस्य मुख्यनिर्माता कः आसीत् ?
  5. जीवनस्य अन्तिमकाले अम्बेदकरः कं धर्म गृहीतवान् ?
  6. अम्बेदकरस्य भास्वरं जीवनं कस्मिन् वर्षे समाप्तम् ?

उत्तराणि-

  1. मध्यप्रदेशे ।
  2. 1891 ई० ।
  3. कोलम्बिया विश्वविद्यालयात् ।
  4. भीमराव अम्बेदकर ।
  5. बौद्धधर्मम् ।
  6. 6 दिसम्बर 1956 ई० ।

प्रश्न 5.
वचनपरिवर्तनं कुरुत –

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकर
उत्तराणि

(क) गच्छामि – गच्छामः
(ख) खादन्ति – खादति
(ग) विस्मरन्ति – विस्मरति
(घ) आसन् – आसीत्
(ङ) अभवन् – अभवत्
(च) अस्मः – अस्मि
(छ) तिष्ठति – तिष्ठति

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

प्रश्न 6.
“सत्यम्’ ‘असत्यम्’ वा लिखत –

यथा- मध्यप्रदेशस्य महूनामके नगरे अम्बेदकरस्य जन्म अभवत् …… सत्यम् ।

  1. भीमरावः अम्बेदकरः ईसाई-धर्मं गृहीतवान् । (………..)
  2. सः दलितानाम् अस्पृश्यानां हिताय महत्कार्यं कृतवान् । (………………)
  3. सः भारतीयसंविधानस्य मुख्यनिर्माता आसीत् । । तिष्ठन्ति ।
  4. सः भारतस्य पञ्चमः विधिमन्त्री आसीत् । (………………)
  5. स: ‘भारतरत्नम्’ इति राष्ट्रीय सम्मान प्राप्तवान् । (………………)

उत्तराणि –

  1. भीमराव अम्बेदकरः ईसाई-धर्म गृहीतवान् । (असत्यम्)
  2. स: दलितानाम् अस्पृश्यानां हिताय महत्कार्यं कृतवान् । (सत्यम्)
  3. सः भारतीयसंविधानस्य मुख्यनिर्माता आसीत् । (सत्यम्)
  4. सः भारतस्य पञ्चमः विधिमन्त्री आसीत् । (असत्यम्)
  5. सः ‘भारतरत्नम्’ इति राष्ट्रीय सम्मान प्राप्तवान् । (सत्यम्)

प्रश्न 7.
पदे योजयत –

  1. गृहम् + अगच्छत् = …………………..
  2. इदम् + एव = …………………..
  3. मुनीनाम् + आश्रमः = …………………..
  4. फलम् + इव = …………………..
  5. वनम् + आगच्छत् = …………………..
  6. शीघ्रम् + एव = …………………..

उत्तराणि-

  1. गृहम् + अगच्छत् = गृहमगच्छत्
  2. इदम् + एव = इदमेव
  3. मुनीनाम् + आश्रमः = मुनीनामाश्रमः
  4. फलम् + इव: = फलमेव
  5. वनम् + आगच्छत् = वनमागच्छत्
  6. शीघ्रम् + एव = शीघ्रमेव

प्रश्न 8.
निम्नवाक्यानि घटनाक्रमेण संयोज्य लिखत

  1. अस्पृश्यतां दूरीकर्तुं महत्कार्यं कृतवान् ।
  2. अस्य प्रारम्भिकी शिक्षा रत्नागिरिनगरे संजाता ।
  3. भीमरावस्य जन्म 1891 ई० वर्षे अभवत् ।
  4. अस्य जीवनं 1956 ई०। वर्ष समाप्तम् ।
  5. अयं कोलम्बिया-विश्वविद्यालयात् डॉक्टरोपाधि लब्धवान् ।

उत्तराणि-

  1. भीमरावस्य जन्म 1891 ई० वर्षे अभवत् ।
  2. अस्य प्रारम्भिकी शिक्षा रत्नागिरिनगरे संजाता ।
  3. अयं कोलम्बिया-विश्वविद्यालयात् डॉक्टरोपाधिं लब्धवान् ।
  4. अस्य जीवनं 1956 ई० वर्षे समाप्तम् ।
  5. अस्पृश्यतां दूरीकर्तुं महत्कार्यं कृतवान् ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

प्रश्न 9.
सन्धिं कुरुत

  1. तत्र + एव
  2. इति + उपाधिम्
  3. कदा + अपि ।
  4. यदि + अपि
  5. नमः + ते
  6. वदामि + अहम्
  7. सरः + तीरे

उत्तराणि –

  1. तत्र + एव = तत्रैव
  2. इति + उपाधिम् = इत्युपाधिम्
  3. कदा + अपि = कदापि
  4. यदि + अपि = यद्यपि
  5. नमः + ते = नमस्ते
  6. वदामि + अहम् = वदाम्यहम्
  7. सरः + तीरे = सरस्तीरे

प्रश्न 10.
विभक्तिनिर्णयं कुरुत –

यथा – महाविद्यालये – सप्तमी विभक्तिः

  1. विधिशास्त्रस्य
  2. प्रतिभाम्
  3. तस्य
  4. हिताय
  5. स्थितात्
  6. बालकेन

उत्तराणि-

  1. विधिशास्त्रस्य – षष्ठी विभक्तिः
  2. प्रतिभाम् – द्वितीया विभक्तिः
  3. तस्य – षष्ठी विभक्तिः
  4. हिताय – चतुर्थी विभक्तिः
  5. स्थितात् – पंचमी विभक्तिः
  6. बालकेन – तृतीया विभक्तिः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

प्रश्न 11.
प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत –

(दृष्ट्वा, गृहीत्वा, गत्वा, लब्ध्वा, स्थित्वा)
उत्तराणि –
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Bihar Board Class 7 Sanskrit डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः Summary

[वर्तमान भारत के सामाजिक परिवर्तन में तथा भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर का अदभत योगदान है। अनेक विश्वविद्यालयों से इनका नाम जुड़ा हुआ है। स्वयं दलित वर्ग से सम्बद्ध होने पर भी सम्पूर्ण भारतीय समाज की समरसता पर इन्होंने बल दिया तथा शताब्दियों से सामाजिक सुविधाओं से वञ्चित एक बड़े वर्ग को इन्होंने अधि कार दिला कर समाज के सामान्य क्रियाकलाप से जोड़ा । इस पाठ में डॉ० अम्बेदकर का संक्षिप्त जीवन तथा भारतीय राजनीति में इनके योगदान का परिचय दिया गया है ।

मध्यप्रदेशस्य महूनामके ……………….. पर्यन्तम् अध्ययनं कृतवान् ।

शब्दार्थ-चतुर्दशे – चौदहवें में । जातः – उत्पन्न हुए । महारजाती – महार जाति में । जन्मतः – जन्म से । स्थितात् – स्थित, अवस्थित । उत्तीर्णः – सफल हुए । तत्रैव = वही । गृहीत्वा = ग्रहण कर, लेकर । पर्यन्तम् – तक । कृतवान् = किया ।

सरलार्थ – मध्य प्रदेश के महू नामक नगर में अप्रैल महीने के 14 तारीख 1891 ई० को बाबा साहेब भीमराव अम्बेदकर का जन्म हुआ था । महर जाति में उनका जन्म हुआ था । जन्म से ही भीमराव मेधावी थे । उनकी प्रारंभिक शिक्षा रत्नागिरीर नगर के मराठी विद्यालय और सतारा नगर के प्रशासनिक विद्यालय में हुई । इसके बाद मुम्बई नगर में स्थित एलफिस्टन विद्यालय से 1907 ई० में भीमराव प्रवेशिका परीक्षा पास किया । वहीं महाविद्यालय में छात्रवृत्ति प्राप्त कर बी० ए० तक अध्ययन किया ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

अल्पकालं बड़ौदा…………..इत्युपाधि स प्राप्तवान् ।

शब्दार्थ-अल्पकालम् – थोड़ा समय । सेवायाम् – सेवा में। स्थित्वा – रहकर । महाराजात् – महाराजा से । वृत्तिम् – आर्थिक सहायता । लब्ता – पाकर । प्राप्तवान् – प्राप्त किया । विदेशेषु = विदेशों में । अनेकत्र – अनेक स्थानों पर । स्वप्रतिभायाः = अपनी प्रतिभा का । शीघ्रमेव – (शीघ्रम् एव) शीघ्र ही । तुरन्त ही । अत्यजत् = त्याग दिया, छोड़ दिया ।

सरलार्थ-कुछ समय बड़ौदा महाराज की सेवा में रहकर वे महाराज से आर्थिक सहायता प्राप्त कर कोलम्बिया विश्व विद्यालय से डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। विदेशों में अनेक जगह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर भीमराव विख्यात हो गए । वे विधि शास्त्र के महान पण्डित (ज्ञाता) हुए । मुम्बई नगर में कॉलेज शिक्षक नियुक्त हुए किन्तु शीघ्र ही उस पद को त्याग दिए । लंदन नगर जाकर अर्थशास्त्र में डी० एस०-सी० की उपाधि प्राप्त की। .

भारतम् आगम्य दलितानाम् ……….दिसम्बर 1956 ई० वर्षे समाप्तम् ।

शब्दार्थ-आगम्य – आकर । दलितानाम – दलितों का । अस्पश्यानाम – अछूतों का । हिताय – भलाई के लिए । महत्कार्यम् – बड़े कार्य (को)। ग्रन्थरचनया – ग्रन्थ रचना के द्वारा । प्रतिभाम् = प्रतिभा / कुशलता को । प्रकाशितवान् – प्रकाशित किया । नेतृत्वम् – अगुआई (को) । अनेकान् – अनेक (बहुवचन) । पारयित्वा = लागू कर, पास करा कर । समरूपताम् – समान रूप (को । प्रकृटितवान् – प्रकट किया । गृहीतवान् – ग्रहण किया । तस्य – उसका । भास्वरम् – चमक से भरा हुआ, उत्कृष्ट । समाप्तम् । समाप्त हुआ ।

सरलार्थ – भारत आकर दलितों और अछूतों के हितार्थ महान कार्य किए। ग्रन्थ रचना के द्वारा अपनी प्रतिभा को प्रकाशित किया। सामाजिक कार्य में अगुआई की । भारतीय संविधान के निर्माण में उनका महान् योगदान है । अनेक अधिनियमों को पास कराकर उसने भारतीय समाज के समान रूप को प्रकट किया । जीवन के अन्तिम समय में उन्होंने अनेकों दलितों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया । उनका चमक से भरा हुआ जीवन 6 दिसम्बर 1956 ई० को समाप्त हो गया।

भारतीयसमाजस्य विषमतां ………… योगदानं कदापि न विस्मरति ।

शब्दार्थ-विषमताम् = अलगाव, असमानता । दृष्ट्वा – देखकर । अतीव – अत्यन्त । पीड़ितः = दुःखी । लब्धवान् – प्राप्त किया । वञ्चिताः – रहित । आरक्षणव्यवस्थाम् = आरक्षण की व्यवस्था को । मरणोत्तरम् – मृत्यु के बाद । कदापि कभी भी । अस्य = उसके । विस्मरति – भूलता है। सरलार्थ-भारतीय समाज की विषमता को देखकर भीमराव अत्यंत दुखी थे ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकरः

यद्यपि इन्होंने स्वयं सब कुछ प्राप्त किया किन्तु दलित लोग सदा उनके हृदय में रहते थे । अतः निरन्तर विधिसम्मत संघर्ष के द्वारा दलितों की भलाई के लिए आरक्षण की व्यवस्था संविधान में किया। वे भारत के प्रथम विधि मंत्री थे । उन्होंने मरणोपरान्त ‘भारतरत्न’ के राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया। भारतीय समाज इनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा ।

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेदः

  • तत्रैव = तत्र + एव (वृद्धि सन्धि)
  • इत्युपाधिम = इति + उपाधिम् (यण् सन्धि)
  • यद्यपि = यदि + अपि (यण सन्धि)
  • मरणोत्तरम् = मरण + उत्तरम् (गुण सन्धि)
  • कदापि = कदा + अपि (दीर्घ सन्धि)

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 11 डॉ. भीमरावः अम्बेदकर 3

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 14.1
पर्यावरणीय रसायन शास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरणीय रसायन शास्त्र, विज्ञान की वह शाखा है, जो पर्यावरण में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों से सम्बन्धित है। इसमें हमारे चारों ओर का वातावरण सम्मिलित होता है; जैसे-वायु, जल, मिट्टी, जंगल, सूर्य का प्रकाश आदि।

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

प्रश्न 14.2
क्षोभमण्डलीय प्रदूषण को लगभग 100 शब्दों में समझाइए।
उत्तर:
क्षोभमण्डलीय प्रदूषण वायुमण्डल का सबसे निचला क्षेत्र, जिसमें मनुष्य तथा अन्य प्राणि रहती हैं, क्षोभमण्डल कहलाता है। यह समुद्र-तल से 10 किमी की ऊँचाई तक होता है। क्षोभमण्डल धूलकणों से युक्त क्षेत्र होता है जिसमें वायु, अधिक जलवाष्प तथा बादल उपस्थित होते हैं। इस क्षेत्र में वायु का तीव्र प्रवाह एवं बादलों का निर्माण होता है। वस्तुतः वायु में उपस्थित अवांछनीय ठोस अथवा गैस कणों के कारण क्षोभमण्डलीय प्रदूषण होता है। क्षोभमण्डल में मुख्यतः निम्नलिखित गैसीय तथा कणिकीय प्रदूषक उपस्थित होते हैं –

(क) गैसीय वायुप्रदूषक:
ये सल्फर, नाइट्रोजन तथा कार्बन के ऑक्साइड, हाइड्रोजन, सल्फर, हाइड्रोकार्बन, ओजोन तथा अन्य ऑक्सीकारक हैं। जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम आदि) के दहन के परिणामस्वरूप सल्फर के ऑक्साइड (मुख्यत: सल्फर ऑक्साइड SO2) उत्पन्न होते हैं। SO2 की सूक्षम सान्द्रता मनुष्य में विभिन्न श्वसन-रोगों (जैसे-अस्थमा, श्वसनी शोथ, ऐम्फाइसीमा आदि) का कारण होती है। इसके कारण आँखों में जलन होती है तथा आँखें लाल हो जाती हैं। SO2 की उच्च सान्द्रता फूलों की कलियों में कड़ापन उत्पन्न करती है।

जिससे ये पौधों से शीघ्र गिर जाती है। यातायात तथा सघन स्थानों पर उत्पन्न तीक्ष्ण लाल धूम्र नाट्रोजन ऑक्साइड के कारण होता है। NO2 की अधिक सान्द्रता होने पर पौधों की पत्तियाँ गिर जाती हैं तथा प्रकाश-संश्लेषण की दर कम हो जाती है। कार्बन मोनोक्साइड भी एक प्राणघातक गैस है। इसके स्त्रोत मोटरवाहनों से निकला धुआँ तथा कोयला, ईंधन-लकड़ी, पेट्रोल का अपूर्ण दहन हैं इसकी 1300 ppn सान्द्रता आधे घण्टे में प्राणघातक हो जाती हैं। इसी प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड की वायुमण्डल में बढ़ी हुई मात्रा भूमण्डलीय तापवृद्धि के लिए उत्तरदायी होती है।

(ख) कणिकीय प्रदूषक:
कणिकीय पदार्थ वायु में निलम्बित सूक्ष्म ठोस कण अथवा द्रवीय बूंद होते हैं। यह मोटरवाहनों के उत्सर्जन, अग्नि के धूम्र, धूल कण तथा उद्योगों की राख होते हैं। वायुमण्डल में कणिकाएँ जीवित तथा अजीवित दोनो ‘प्रकार की हो सकती हैं। जीवित कणिकाओं में जीवाणु, कवक, फफूंद, शैवाल आदि सम्मिलित हैं।

हवा में पाए जाने वाले कुछ कवक मनुष्य में एनर्जी उत्पन्न करते हैं। ये पौधों के रोग भी उत्पन्न कर सकते हैं। कणिकीय प्रदूषकों का प्रभाव मुख्यतया उनके कणों के आकार पर निर्भर करता है। हवा में ले जाए जाने वाले कण; जैसे-धूल, धूम, कोहरा आदि मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। 5 माइक्रोम से बड़े कणिक प्रदूषक नासिका द्वार में जमा हो जाते हैं, जबकि लगभग 1.0 माइक्रोन के कण फेफड़ों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

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प्रश्न 14.3
कार्बन डाइ-ऑक्साइड की अपेक्षा कार्बन मोनोक्साइड अधिक खतरनाक क्यों है? समझाइए।
उत्तर:
कार्बन डाइ-ऑक्साइड की अपेक्षा कार्बन मोनोक्साइड अधिक खतरनाक है; क्योंकि यह श्वसित किए जाने पर हीमोग्लोबिन के साथ ऑक्सीजन की अपेक्षा अधिक प्रबलता से संयुक्त हो जाती है तथा कॉर्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जो ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन से लगभग 300 गुना अधिक स्थायी संकुल है।

जब रक्त में कोर्बोक्सीहीमोग्लोबिन की मात्रा 3.4% तक पहुँच जाती है, तब रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता काफी कम हो जाती है। ऑक्सीजन की इस न्यूनता से सिरदर्द, नेत्रदृष्टि की क्षीणत, तंत्रकीय आवेश में न्यूनतम हृदयवाहिका में तन्त्र अव्यवस्था आदि की विसंगतियाँ हो जाती हैं। कार्बन मोनोक्साइड की 1300 ppm सान्द्रता आधे घण्टे में प्राणघातक हो जाती है। दूसरी ओर, कार्बन डाइ-ऑक्साइड का हानिकारक प्रभाव केवल यह है कि इसकी वायुमण्डल में बढ़ी हुई मात्रा भूमण्डलीय तापवृद्धि के लिए उत्तरदायी होती है।

प्रश्न 14.4
ग्रीनहाउस-प्रभाव के लिए कौन-सी गैसें उत्तरदायी हैं? सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
ग्रीनहाउस-प्रभाव के लिए कार्बन डाइ-ऑक्साइड, मेथेन, ओजोन, क्लोरोफ्लोरो कार्बन यौगिक आदि उत्तरदायी हैं। ये गैसें वायुमण्डल में विकिरित सौर-ऊर्जा की कुछ मात्रा ग्रहण करके भूमण्डल का ताप बढ़ा देती हैं।

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प्रश्न 14.5
अम्लवर्षा मूर्तियों तथा स्मारकों को कैसे दुष्प्रभावित करती हैं?
उत्तर:
अम्लवर्षा में वायुमण्डल से पृथ्वी-सतह पर अम्ल निक्षेपित हो जाती है। अम्लीय प्रकृति के नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड वायुमण्डल में ठोस कणों के साथ हवा में बहकर या तो ठोस रूप में अथवा जल में द्रव रूप में कुहासे से या हिम की भाँति निक्षेपित होते हैं। नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड ऑक्सीकरण के पश्चात् जल के साथ अभिक्रिया कर अम्लवर्षा में प्रमुख योगदान देते हैं, क्योंकि प्रदूषित वायु में सामान्यतया कणिकीय द्रव्य उपस्थित होते हैं, जो ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित करते हैं।

2SO2 (g) + O2 (g) + 2H2O (l) → 2H2SO4 (aq)
4NO2 (g) + O2 (g) + 2H2O (l) → 4HNO3 (aq)

अम्लवर्षा पत्थर एवं धातुओं से बनी संरचनाओं; जैसेमूर्तियों तथा स्मारकों को नष्ट करती है। जोकि संगमरमर (CaCO3) से निम्नलिखित अभिक्रिया करती है –
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प्रश्न 14.6
धूम कुहरा क्या है? सामान्य धूम कुहरा प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
धूम कोहरा-‘धूम-कोहरा’ शब्द ‘धूम’ एवं “कोहरे’ से मिलकर बना है। अतः जब धूम, कोहरे के साथ मिल जाता है तब यह धूम-कोहरा कहलाता है। विश्व के अनेक शहरों में प्रदूषण इसका आम उदाहरण है। धूम कोहरे दो प्रकार के होते है –

1. सामान्य धूम कोहरा:
यह ठण्डी नम जलवायु में होता है तथा धूम, कोहरे एवं सल्फर डाइऑक्साइड का मिश्रण होता है। रासायनिक रूप से यह एक अपचायक मिश्रण है। अतः इसे ‘अपचायक धूम-कोहरा’ भी कहते हैं।

2. प्रकाश रासायनिक धूम कोहरा:
उष्ण, शुष्क एवं साफ धूपमयी जलवायु में होता है। यह स्वचालित वाहनों तथा कारखानों से निकलने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइडों तथा हाइड्रोकार्बनों पर सूर्यप्रकाश की क्रिया के कारण उत्पन्न होता है। प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे की रासायनिक प्रकृति ऑक्सीकारक है। चूंकि इसमें ऑक्सीकारक अभिकर्मकों की सान्द्रता उच्च रहती है; अतः इसे ‘ऑक्सीकारक धूम कोहरा’ कहते हैं।

प्रश्न 14.7
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के निर्माण के दौरान होने वाली अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के निर्माण के दौरान होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं –
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ओजोन एक जहरीली गैस है। NO2 तथा O3 दोनों ही प्रबल ऑक्सीकारक हैं। इस कारण प्रदूषित वायु में उपस्थित अदहित हाइड्रोकार्बनों के साथ अभिक्रिया करके कई रसायनों जैसे-फार्मेल्डिहाइड, एक्रोलीन एवं परॉक्सी ऐसीटिल नाइट्रेट (PAN) का निर्माण करते हैं।
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प्रश्न 14.8
प्रकाश रासायनिक धूम कुहरे के दुष्परिणाम क्या हैं? इन्हें कैसे नियन्त्रित किया जा सकता है?
उत्तर:
प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरे के दुष्परिणामप्रकाश रासायनिक धूम कोहरे के सामान्य घटक ओजोन, नाइट्रिक ऑक्साइड, सक्रोलीन, फॉर्मेल्डिहाइड एवं परॉक्सीऐसीटिल नाइट्रेट (PAN) हैं। प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरे के कारण गम्भीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं। ओजोन एवं नाइट्रिक ऑक्साइड नाक एवं गले में जलन पैदा करते हैं।

इनकी उच्च सान्द्रता से सरदर्द, छाती में दर्द, गले का शुष्क होना, खाँसी एवं श्वास अवरोध हो सकता है। प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरा रबर में दरार उत्पन्न करता है एवं पौधों पर हानिकारक प्रभाव डालता है। यह धातुओं, पत्थरों; भवन-निर्माण के पदार्थों एवं रंगी हुई सतहों (painted surfaces) का क्षय भी करता है।

प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरे के नियंत्रण के उपायप्रकाश रासायनिक धूम-कोहरे को नियन्त्रित या कम करने के लिए कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है। यदि हम प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरे के प्राथमिक पूर्वगामी; जैसे – NO2, एवं हाइड्रोकार्बन को नियन्त्रित कर लें, तो द्वितीयक पूर्वगामी; जैसेओजोन एवं PAN तथा प्रकाश रासायनिक धूम-कोहरा स्वतः ही कम हो जाएगा।

सामान्यतया स्वचालित वाहनों में उत्प्रेरित परिवर्तक उपयोग में लाए जाते हैं, जो वायुमण्डल में नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को रोकते हैं। कुछ पौधों (जैसे-पाइनस, जुनीठर्स, क्वेरकस, पायरस तथा विटिस), जो नाइट्रोजन ऑक्साइड का उपापचय कर सकते हैं, का रोपण इस सन्दर्भ में सहायक हो सकता है।

प्रश्न 14.9
क्षोभमण्डल पर ओजोन परत के क्षय में होने वाली अभिक्रिया कौन-सी है?
उत्तर:
ओजोन परत में अवक्षय का मुख्य कारण क्षोभमण्डल से क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) यौगिकों का उत्सर्जन है। CFC वायुमण्डल की अन्य गैसों से मिश्रित होकर सीधे समतापमण्डल में पहुँच जाते हैं। समतापमण्डल में ये शक्तिशाली विकिरणों द्वारा अपघटित होकर क्लोरीन मुक्त मूलक उत्सर्जित करते हैं।
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क्लोरीन मुक्त मूलक तब समतापमण्डलीय ओजोन से अभिक्रिया करके क्लोरीन मोनोक्साइड मूलक तथा आण्विक ऑक्सीजन बनाते हैं।
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क्लोरीन मोनोक्साइड मूलक परमाण्वीय ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके अधिक क्लोरीन मूलक उत्पन्न करता है।
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प्रश्न 14.10
ओजोन छिद्र से आप क्या समझते हैं? इसके परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
ओजोन-छिद्र:
सन् 1980 में वायुमण्डलीय वैज्ञानिकों ने अटार्कटिका पर कार्य करते हुए दक्षिणी ध्रुव के ऊपर ओजोन परत के क्षय जिसे सामान्य रूप से ‘ओजोन-छिद्र’ कहते हैं, के बारे में बताया। यह पाया गया कि ओजोन छिद्र के लिए परिस्थितियों का एक विशेष समूह उत्तरदायी था। गर्मियों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड परमाणुओं [अभिक्रिया (i)] एवं क्लोरीन परमाणुओं [अभिक्रिया (ii)] से अभिक्रिया करके क्लोरीन सिंक बनाते हैं, जो ओजोन-क्षय को अत्यधिक सीमा तक रोकता है।

जबकि सर्दी के मौसम में विशेष प्रकार के बादल, जिन्हें ‘ध्रुवीय समतापमण्डलीय बादल’ कहा जाता है, अंटार्कटिका के ऊपर बनते हैं। ये बादल एक प्रकार की सतह प्रदान करते हैं, जिस पर बना हुआ क्लोरीन नाइट्रेट [अभिक्रिया (i)] जलयोजित होकर हाइपोक्लोरस अम्ल बनाता है। [अभिक्रिया (iii)] अभिक्रिया में उत्पन्न हाइड्रोजन क्लोराइड से भी अभिक्रिया करके यह आण्विक क्लोरीन देता है।

ClO(g) + NO2 (g) → ClONO2 (g) … (i)
Cl (g) + CH4 (g) → CH3 (g) + HCl (g) … (ii)
ClONO2 (g) + H2O (g) → HOCl(g) + HNO3 (g) … (iii)
ClONO2 (g) + HCl(g) → Cl2 (g) + HNO3 (g) … (iv)

वसन्त में अंटार्कटिका पर जब सूर्य का प्रकाश लौटता है, तब । सूर्य की गर्मी बादलों को विखण्डित कर देती है एवं HOCl तथा Cl2 सूर्य के प्रकाश से अपघटित हो जाते हैं [अभिक्रिया तथा vi]
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इस प्रकार उत्पन्न क्लोरीन मूलक, ओजोन-क्षय के लिए श्रृंखला अभिक्रिया प्रारम्भ कर देते हैं। ओजोन छिद्र के परिणाम (Results of Ozone hole) ओजोन परत के साथ अधिकाधिक पराबैंगनी विकिरण क्षोभमण्डल में छनित होते हैं। पराबैंगनी विकिरण से त्वचा का जीर्णन, मोतियाबिन्द, सनबर्न, त्वचा-कैन्सर, कई पादपप्लवकों की मृत्यु, मत्स्य उत्पाद की क्षाति आदि होते हैं।

यह भी देखा गया है कि पौधों के प्रोटीन पराबैंगनी विकिरणों से आसानी से प्रभावित हो जाते हैं, जिससे कोशिकाओं का हानिकारक उत्परिवर्तन होता है। इससे पत्तियों के रंध्र से जल का वाष्पीकरण भी बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी की नमी कम हो जाती है। बढ़े हुए पराबैंगनी विकिरण रंगों एवं रेशों की भी हानि पहुँचाते हैं, जिससे रंग जल्दी हल्के हो जाते हैं।

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प्रश्न 14.11
जल-प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं? समझाइए।
उत्तर:
जल-प्रदूषण के मुख्य कारण:

1. रोगजनक:
सबसे अधिक गम्भीर जल-प्रदूषक रोगों के कारकों को ‘रोगजनक’ कहा जाता है। रोगजनकों में जीवाणु एवं अन्य जीव हैं, जो घरेलू सीवेज एवं पशु-अपशिष्ट द्वारा जल में प्रवेश करते हैं। मानव-अपशिष्ट एशरिकिआ कोली, स्ट्रेप्टोकॉकस फेकेलिस आदि जीवाणु होते है, जो जठरांत्र बीमारियों के कारण होते हैं।

2. कार्बनिक अपशिष्ट:
अन्य मुख्य जल-प्रदूषण कार्बनिक पदार्थ; जैसे-पत्तियाँ, घास, कूडा-करकट आदि हैं। ये जल को प्रदूषित करते हैं। जल में पादप-प्लवकों की अधिक बढ़ोत्तरी भी जल-प्रदूषण का एक कारण है।

प्रश्न 14.12
क्या आपने अपने क्षेत्र में जल-प्रदूषण देखा है? इसे नियन्त्रित करने के कौन-से उपाय हैं?
उत्तर:
हाँ, हमारे क्षेत्र में जल प्रदूषित है। जल के प्रदूषित होने की जाँच भी हम स्वयं ही कर सकते हैं। इसके लिए हम स्थानीय जल-स्त्रोतों का निरीक्षण कर सकते हैं। जैसे कि नदी, झील, हौद, तालाब आदि का पानी अप्रदूषित या आंशिक प्रदूषित या सामान्य प्रदूषित अथवा बुरी तरह प्रदूषित है। जल को देखकर या उसकी pH जाँचकर इसे देखा जा सकता है। निकट के शहरी या औद्योगिक स्थल, जहाँ से प्रदूषण उत्पन्न होता है, के नाम का प्रलेख करके इसकी सूचना सरकार द्वारा प्रदूषण-मापन के लिए गठित ‘प्रदूषण नियन्त्र बोर्ड’ कार्यालय को दी जा सकती है तथा समुचित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है।

हम इसे मीडिया को भी बता सकते हैं। जल प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए हमें नदी, तालाब, जलधारा या जलाशय में घेरलू अथवा औद्योगिक अपशिष्ट को सीधे नहीं डालना चाहिए। बगीचों में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट का प्रयोग करना चाहिए। डी०डी०टी०, मैलाथिऑन आदि कीटनाशी के प्रयोग से बचना चाहिए तथा यथासम्भव नीम की सूखी पत्तियों का प्रयोग कीटनाशी के रूप में करना चाहिए। घरेलू पानी टंकी में पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) के कुछ क्रिस्टल अथवा ब्लीचिंग पाउडर की थोड़ी मात्रा डालनी चाहिए।

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प्रश्न 14.13
आप अपने ‘जीव रसायनी ऑक्सीजन आवश्यकता’ (BOD) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
जल के एक नमूने के निश्चित आयतन में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ को विखण्डित करने के लिए जीवाणु द्वारा आवश्यक ऑक्सीजन को जैव – रासायनिक ऑक्सीजन माँग (BOD) कहा जाता है। अत: जल में BOD की मात्रा कार्बनिक पदार्थ को जैवीय रूप में विखण्डित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा होगी। स्वच्छ जल की BOD का मान 5ppm से कम होता है जबकि अत्यधिक प्रदूषित में यह 17 ppm या इससे अधिक होता है।

प्रश्न 14.14
क्या आपने आस-पास के क्षेत्र में भूमि-प्रदूषण देखा है? आप भूमि-प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्या प्रयास करेंगे?
उत्तर:
हाँ, हमने अपने आस-पास के क्षेत्र में भूमि-प्रदूषण देखा है।

भूमि प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
मृदा प्रदूषण की रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय है –

  1. फसलों पर विषैले कीटनाशकों का छिड़काव सावधानीपूर्व करना चाहिए।
  2. डी० डी० टी० का प्रयोग बहुत अधिक न करें।
  3. सिंचाई तथा उर्वरकों का प्रयोग करने के पूर्व मिट्टी और जल का परीक्षण करा लेना चाहिए।
  4. रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट तथा हरी खाद को वरीयता देनी चाहिए।
  5. खेतों में जल के निकास की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
  6. क्षारीय भूमि को वैज्ञानिक ढंग से शोधित किया जाना चाहिए। जिप्सम, सिंचाई तथा रासायनिक खादों का प्रयोग करके क्षारीय मिट्टी को उर्वर बनाया जा सकता है।
  7. मिट्टी के कटाव को रोकने के उपाय किए जाने चाहिए।
  8. खेतों के किनारे (मेंडों पर) तथा ढालू भूमि पर वृक्षारोपण किया जाना चाहिए।

प्रश्न 14.15
पीडकनाशी तथा शाकनाशी से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
पीडकनाशी (Pesticides):
पीडकनाशी मूल रूप से संश्लेषित रसायन होते हैं। इनका प्रयोग फसलों को हानिकारक कीटों तथा कई रोगों से बचाने हेतु किया जाता है। ऐल्ड्रीन, डाइऐल्ड्रीन, बी०एच०सी० आदि पीडकनाशी के कुछ उदाहरण हैं। ये कार्बनिक जीव-विष जल में अविलेय तथा अजैवनिम्नीकरणीय होते हैं। ये उच्च प्रभाव वाले जीव-विषय भोजन श्रृंखला द्वारा निम्नपोषी स्तर से उच्चपोषी स्तर तक स्थानान्तरित होते हैं। समय के साथ-साथ उच्च प्राणियों में जीव-विषों की सान्द्रता इस स्तर तक बढ़ जाती है कि उपापचयी तथा शरीर क्रियात्मक अव्यवस्था का कारण बन जाते हैं।

शाकनाशी (Herbicides):
वे रसायन जो खरपतवार (weeds) का नाश करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, शाकनाशी कहलाते हैं। सोडियम क्लोरेट (NaClO3) सोडियम आर्सिनेट (Na3AsO3) आदि शाकनाशी के उदाहरण हैं। अधिकांश शाकनाशी स्तनधारियों के लिए विषैले होते हैं, परन्तु ये कार्ब-क्लोराइड्स के समोन स्थायी नहीं होते तथा कुछ ही माह में अपघटित हो जाते हैं। मानव में जन्मजात कमियों का कारण कुछ शाकनाशी हैं। यह पाया गया है कि मक्का के खेत, जिनमें शाकनाशी का छिड़काव किया गया हो, कीटों के आक्रमण तथा पादप रोगों के प्रति उन खेतों से अधिक सुग्राही होते हैं, जिनकी निराई हाथों से की जाती है।

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प्रश्न 14.16
हरित रसायन से आप क्या समझते हैं? यह वातावरणीय प्रदूषण को रोकने में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
हरित रसायन यह सर्वविदित है कि हमारे देश ने 20वीं सदी के अन्त तक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग तथा कृषि की उन्नत विधियों का प्रयोग करके अच्छी किस्म के बीजों, सिंचाई आदि से खाद्यान्नों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है। परन्तु मृदा के अधिक शोषण एवं उर्वरकों तथा कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा, जल एवं वायु की गुणवत्ता घटी है। इस समस्या का समाधान विकास के प्रारम्भ हो चुके प्रक्रम को रोकना नहीं अपितु उन विधियों को खोजना है, जो वातावरण के असन्तुलन रोक सके। रसायन विज्ञान तथा अन्य विज्ञानों के उन सिद्धान्तों का ज्ञान, जिससे पर्यावरण के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके, ‘हरित रसायन’ कहलाता है।

हरित रसायन उत्पाद का वह प्रक्रम है, जो पर्यावरण में न्यूनतम प्रदूषण या असन्तुलन लाता है। इसके आधार पर यदि एक-प्रक्रम में उत्पन्न होने वाले सह-उत्पादों को यदि लाभदायक रूप से उपयोग नहीं किया गया है तो वे पर्यावरण प्रदूषण के कारक होते हैं। ऐसे प्रक्रम न सिर्फ पर्यावरणीय दृष्टि से हानिकारक हैं अपितु महँगे भी हैं।

विकास कार्यों के साथ-साथ वर्तमान ज्ञान का रासायनिक हानि को कम करने के लिए उपयोग में लाना ही हरित रसायन का आधार है। एक रासायनिक अभिक्रिया की सीमा, ताप, दाब उत्प्रेरक के उपयोग आदि भौतिक मापदण्ड पर निर्भर करती हैं। हरित रसायन के सिद्धान्तों के अनुसार यदि एक रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारक एक पर्यावरण अनुकूल माध्यम में पूर्णत: पर्यावरण अनुकूल उत्पादों में परिवर्तित हो जाए, तो पर्यावरण में कोई रासायनिक प्रदूषक नहीं होगा।

संश्लेषण के दौरान प्रारम्भिक पदार्थ का चयन करते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए, जिससे जब भी वह अन्तिम उत्पाद परिवर्तित हो तो अपविष्ट उत्पन्न ही न हो। यह संश्लेषण के दौरान अनुकूल परिस्थितियों को प्राप्त करके किया जाता है। जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा तथा कम वाष्पशीलता के कारण इसे संश्लेषित अभिक्रियाओं के माध्यम के रूप में प्रयुक्त किया जाना वांछित है। जल सस्ता अज्वलनशील तथा अकैंसरजन्य प्रभाव वाला माध्यम है। हरित रसायन के उपयोग से वातावरणीय प्रदूषण को रोकने में किए जाने वाले कुछ महत्त्वपूर्ण प्रयासों का वर्णन निम्नलिखित है –

1. कपड़ों की निर्जल धुलाई में-टेट्राक्लोरोएथीन [Cl2C = CCl2] का उपयोग प्रारम्भ में निर्जल धुलाई के लिए विलायक के रूप में किया जाता था। यह यौगिक भू-जल को प्रदूषित कर देता है। यह एक सम्भावित कैंसरजन्य भी है।

धुलाई की प्रक्रिया में, इस यौगिक का द्रव कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं उपयुक्त उपमार्जक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। हैलोजेनीकृत 1 लायक का द्रवित CO2 से प्रतिस्थापन भू-जल के लिए कम ह निकारक है। आजकल हाइड्रोजन परॉक्साइड का उपयोग लॉण्ड्री में कपड़ों के विरंजन के लिए किया जाता है, जिससे परिणाम तो अच्छे नि कलते ही हैं, जल का भी कम उपयोग होता है।

2. पेपर का विरंजन:
पूर्व में पेपर के विरंजन के लिए क्लोरीन गेस उपयोग में आती थी। आजकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन परॉक्साइड, जो विरंजन क्रिया की दर को बढ़ाता है, उपयोग में लाया जाता है।

3. रसायनों का संश्लेषण:
औद्योगिक स्तर पर एथीन का ऑक्सीकरण आयनिक उत्प्रेरकों एवं जलीय माध्यम की उपस्थिति में करवाया जाए, तो लगभग 90% ऐथेनॉल प्राप्त होता है –
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इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि हरित रसायन एक कम लागत उपागम है, जो कम पदार्थ, ऊर्जा-उपभोग एवं अपविष्ट जनन से सम्बन्धित है।

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प्रश्न 14.17
क्या होता, जब भू-वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसें नहीं होती? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जब भू-वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसें न होती तो पृथ्वी का ताप घट जाता है। इससे पौधे प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर पाते। इससे पौधों की अनुपस्थिति में मानव-जीवन सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 14.18
एक झील में अचानक असंख्य मृत मछलियाँ तैरती हई मिलीं। इसमें कोई विषाक्त पदार्थ नहीं था, परन्तु बहुतायत में पादप्लवक पाए गए। मछलियों के मरने का कारण बताइए।
उत्तर:
जल प्रदूषक कार्बनिक पदार्थ; जैसे-पत्तियाँ, घास, कूड़ा-करकट आदि हैं। इनकी उपस्थिति में पादपप्लवक विकसित हो जाते हैं। ये जल में घुलित ऑक्सीजन की अत्यधिक मात्रा का उपभोग कर लेते हैं जो जलीय जीवों; जैसे-मछली के जीवन हेतु अत्यन्त आवश्यक होती है। यदि जल में घुली ऑक्सीजन की सान्द्रता 6 पीपीएम से नीचे हो जाए, तो मछलियों का विकास रुक जाता है।

जल में ऑक्सीजन या तो वातावरण या कई जलीय पौधों द्वारा दिन में प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रम से पहुँचती है। रात में प्रकाश-संश्लेषण रुक जाता है परन्तु पौधे श्वसन करते हैं, जिससे जल में घुलित ऑक्सीजन कम हो जाती है। घुलित ऑक्सीजन सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा कार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण में भी उपयोग में ली जाती है। इस प्रकार पादपप्लवकों तथा अन्य कारणों से जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण मछलियाँ मृत पाई गईं।

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प्रश्न 14.19
घरेलू अपशिष्ट किस प्रकार खाद के रूप में काम आ सकते हैं?
उत्तर:
घरेलू अपशिष्ट में जैवनिम्नीकरण तथा अजैवनिम्नीकरण, दोनों घटकों का समावेश होता है। अपशिष्ट में से दोनों घटक को छाँटकर पृथक् कर लेते हैं। जैव अनिम्नीकरण पदार्थों जैसे – प्लास्टिक, काँच, धातु, छीलन आदि को पुनर्चक्रण के लिए भेज दिया जाता है। जैवनिम्नीकरण अपशिष्टों को खुले मैदानों में मिट्टी में दबा दिया जाता है। जैवनिम्नीकरण अपशिष्ट में कार्बनिक द्रव्य होते हैं, जो कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित हो जाते हैं।

प्रश्न 14.20
आपने अपने कृषि-क्षेत्र अथवा उद्यान में कम्पोस्ट खाद के लिए गड्डे बना रखे हैं। उत्तम कम्पोस्ट बनाने के लिए इस प्रक्रिया की व्याख्या दुर्गंध, मक्खियों तथा अपविष्टों के चक्रीकरण के सन्दर्भ में कीजिए।
उत्तर:
यदि अपशिष्ट को कम्पोस्ट में परिवर्तित न किया जाए तो वह नालियों में चला जाएगा। इसमें से कुछ मवेशियों द्वारा खा लिया जाता है। कम्पोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया दुर्गन्धपूर्ण होती है। इस पर मक्खियाँ उड़ती रहती हैं, परन्तु इसे दुर्गन्ध तथा मक्खियों से बचाने के लिए मिट्टी से ढक दिया जाता है। अपशिष्ट के कम्पोस्ट खाद में परिवर्तन के पश्चात् इस पर डाली गई मिट्टी को हटा दिया जाता है तथा कम्पोस्ट खाद प्राप्त कर ली जाती है। यह खाद पौधों के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है।

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन्स

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन्स Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन्स

Bihar Board Class 11 Chemistry हाइड्रोकार्बन्स Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 13.1
मेथेन के क्लोरीनीकरण के दौरान एथेन कैसे बनती है? आप इसे कैसे समझाएँगे?
उत्तर:
मेथेन का क्लोरीनीकरण मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा किया जाता है। मेथिल मूलक श्रृंखला समापन पद के योग एथेन में परिवर्तित हो जाता है।
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प्रश्न 13.2
निम्नलिखित यौगिकों के I. U. P. A. C नाम लिखिए –
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उत्तर:
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प्रश्न 13.3
निम्नलिखित योगकों, जिनमें द्विआबन्ध तथा त्रिआबन्ध की संख्या दर्शाई गई है, के सभी सम्भावित स्थिति समावयवों के संरचना सूत्र एवं I. U. P.A. C नाम दीजिए –
(क) C4H8 (एक त्रिआबन्ध)
(ख) C5H8 (एक त्रिआबन्ध)
उत्तर:
(क) C4H8 (एक द्विआबन्ध)
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(ख) C5H8 (एक त्रिआबन्ध)
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प्रश्न 13.4
निम्नलिखित यौगिको के ओजोनीअपघटन के पश्चात् बनने वाले उत्पादों के नाम लिखिए –

  1. पेन्ट-2-ईन
  2. 3, 4-डाइमेथिल-हेप्ट-3-ईन
  3. 2-एथिल ब्यूट-1-ईन
  4. 1-फेनिल ब्यूट-1-ईन

उत्तर:
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प्रश्न 13.5
एक ऐल्कीन ‘A’ के ओजोनी अपघटन से पेन्टेन-3-ओन तथा एथेनॉल का मिश्रण प्राप्त होता है। ‘A’ का I. U. P. A. C नाम तथा संरचना दीजिए।
उत्तर:
ऐल्कीन ‘A’ 3 – एथिल पेन्ट – 2 – ईन है। इसकी संरचना तथा होने वाली ओजोनी अपघटन अभिक्रिया निम्नलिखित है –
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प्रश्न 13.6
एक ऐल्केन A में तीन C – C आठ C – H सिग्मा आबन्ध तथा एक C – C पाई आबन्ध हैं। A ओजोनी अपघटन से दो अणु ऐल्डिहाइड, जिनका मोलर द्रव्यमान 44 है, देता है। A का आई०यू०पी०ए०सी० का नाम लिखिए।
उत्तर:
44 मोलर द्रव्यमान वाला ऐल्डिहाइड (ओजोन अपघटन का उत्पाद) CH3CHO है। चूँकि ऐल्कीन ‘A’ एक ही ऐल्डिाइड के दो अणु बनाता है, अत: ऐल्कीन का संरचना सूत्र निम्नवत् हैं –
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प्रश्न 13.7
एक ऐल्कीन, जिसके ओजोनी अपघटन से प्रोपेनल तथा पेन्टेन-3-ओन प्राप्त होते हैं, का संरचनात्मक सूत्र क्या है?
उत्तर:
ऐल्कीन का नाम 3-एथिल हेक्स-3-ईन है। जिसका संरचनात्मक सूत्र तथा ओजोनी अपघटन अभिक्रिया निम्नवत् है –
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प्रश्न 13.8
निम्नलिखित हाइड्रोकार्बनों के दहन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए –

  1. ब्यूटेन
  2. पेन्टीन
  3. हेक्साइन
  4. टॉलूईन

उत्तर:
1. ब्यूटेन:
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2. पेन्टीन:
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3. हेक्साइन:
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4. टॉलूईन:
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प्रश्न 13.9
हेक्स-2-ईन की समपक्ष (सिस) तथा विपक्ष (ट्रांस) संरचनाएँ बनाइए। इनमें से कौन-से समावयव का क्वथनांक उच्च होता है और क्यों?
उत्तर:
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समपक्ष (सिम)-हेक्स-2-ईन का क्वथनांक उच्च होता है; अतः इसमें उच्च द्विध्रुव-आघूर्ण होता है। अतः इसमें वान्डर-वाल्स आकर्षण बल अधिक होता है।

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प्रश्न 13.10
बेन्जीन में तीन द्वि-आबन्ध होते हैं, फिर भी यह अत्यधिक स्थायी है, क्यों?
उत्तर:
बेन्जीन विभिन्न अनुनादी संरचनाओं का संकर है। केकुले द्वारा दो मुख्य संरचनाएँ (क) तथा (ख) दी गईं। अनुनाद संरचना को षट्भुजीय संरचना में वृत्त या बिन्दु-वृत्त द्वारा (ग) में प्रदर्शित किया गया है।
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वृत्त, बेन्जी वलय के छह कार्बन परमाणु पर विस्थानीकृत (delocalised) छह इलेक्ट्रॉनों को दर्शाता है। अनुनाद के कारण द्विबन्धों को प्रदर्शित करने वाले इलेक्ट्रॉनों की कार्बन परमाणुओं के मध्य उपस्थिति निश्चित नहीं होती, जैसा कि साधारण ऐल्कीनों में होता है। ये एक बड़े क्षेत्र में वितरित रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप आवेश-घनत्व घटता है। इसके अतिरिक्त अनुनादी संकर की ऊर्जा भी घटती है। बेन्जीन की अनुनादी ऊर्जा, जो सम्मिलित संरचनाओं की ऊर्जा तथा अनुनादी संकर की ऊर्जा का अन्तर होती है, का मान 150kJmol-1 पाया गया है। यह दहन की ऊष्मा तथा हाइड्रोजनीकरण की ऊष्मा के उपलब्ध आँकड़ों से पुन: निश्चित होता है। अत: बेन्जीन तथा ऐरीन परिवार के अन्य सदस्य स्थायी यौगिकों की भाँति व्यवहार करते हैं तथा योगात्मक अभिक्रियाओं के स्थान पर प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं।

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प्रश्न 13.11
किसी निकाय द्वारा ऐरोमैटिकता प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक शर्ते क्या हैं?
उत्तर:
सामान्यतः एक यौगिक ऐरोमैटिक कहलाता है, जबकि वह निम्नलिखित शर्तों का पालन करता है –

  1. यौगिक आवश्यक रूप से चक्रीय होना चाहिए तथा वलय में एक या अधिक द्विबन्ध होने चाहिए।
  2. असंतृप्तता के विपरीत, जैसा कि आण्विक सूत्र से सिद्ध होता है, इन्हें संतृप्त यौगिकों की भाँति व्यवहार करना चाहिए अर्थात् इन्हें योगात्मक अभिक्रियाओं का विरोध करना चाहिए तथा इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में भाग लेना चाहिए।
  3. यौगिक अनुनाद प्रदर्शित करने में सक्षम होना चाहिए।
  4. ऐरोमैटिकता प्रदर्शित करने के लिए सबसे आवश्यक शर्त यह है कि यौगिक को हकल के नियम का अनुसरण करना चाहिए। इसके अनुसार यदि एक चक्रीय यौगिक के पास (4n + 2) π – इलेक्ट्रॉन हों तो वह ऐरोमैटिक यौगिक की भाँति व्यवहार करेगा। यहाँ n = 0, 1, 2, 3 ….. आदि हो सकते हैं।

प्रश्न 13.12
इनमें से कौन से निकाय ऐरोमैटिक नहीं हैं? कारण स्पष्ट कीजिए –
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उत्तर:

  1. इसमें (4n+2) π – इलेक्ट्रॉन हैं अर्थात् 6-2 इलेक्ट्रॉन हैं जो कि विस्थानीकृत नहीं हैं। अतः यह ऐरोमैटिक नहीं
  2. इसमें 4-1 इलेक्ट्रॉन हैं। जिससे हकल के नियम का पालन नहीं होता है। अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।
  3. इसमें 8-7 इलेक्ट्रॉन हैं जिससे हकल के नियम का पालन नहीं होता है। अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।

प्रश्न 13.13
बेन्जीन को निम्नलिखित में कैसे परिवर्तित करेंगे –

  1. P – नाइट्रोनोमोबेन्जीन
  2. m – नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन
  3. p – नाइट्रोटॉलूईन
  4. ऐसीटोफीनोन

उत्तर:
1. बेन्जीन से p – नाइट्रोनोमोबेन्जीन:
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2. बेन्जीन से p – नाइट्रोटॉलूईन:
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3. बेन्जीन से p – नाइट्रोबोमोबेन्जीन:
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4. बेन्जीन से ऐसीटोफीनोन:
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प्रश्न 13.14
ऐल्केन H3C – CH2 – C(CH3)2 – CH2 – CH(CH3)2 में 1,2° तथा 3°कार्बन परमाणुओं की पहचान कीजिए तथा प्रत्येक कार्बन से आबन्धित कुल हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या भी बताइए।
उत्तर:
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  1. एक हाइड्रोजन परमाणु से जुड़ा 3° कार्बन परमाणु होता
  2. दो हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा 2° कार्बन परमाणु होता है।
  3. तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा 1° कार्बन परमाणु होता है।

प्रश्न 13.15
क्वथनांक पर ऐल्केन की श्रृंखला के शाखन का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
ऐल्केनों के क्वथनांकों में आण्विक द्रव्यमान में वृद्धि के साथ नियत वृद्धि होती है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि आण्विक आकार अथवा अणु का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने के साथ-साथ उनमें अन्तराण्विक वान्डरवाल्स बल बढ़ते हैं। शाखित श्रृंखलाओं की संख्या के बढ़ने के साथ-साथ अणु की आकृति लगभग गोल हो जाती है, जिससे गोलाकार अणुओं में कम आपसी सम्पर्क स्थल दुर्बल अन्तराण्विक बल होते हैं।

इसलिए इनके क्वथनांक कम होते हैं। उदाहरणार्थ-पेन्टेन के तीन समावयव ऐल्केनों (पेन्टेन, 2 – मेथिल ब्यूटेन तथा 2, 2 – डाइमेथिल प्रोपेन) के क्वथनांकों को देखने से यह पता चलता है कि पेन्टेन में पाँच कार्बन परमणुओं की एक सतत श्रृंखला का उच्च क्वथनांक (309.1K) है, जबकि 2, 2 – डाइमेथिल प्रोपेन 282.5K पर उबलती है।

प्रश्न 13.16
प्रोपीन पर HBr के संकलन से 2 – ब्रोमोप्रोपेन बनता है, जबकि बेंजॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में यह अभिक्रिया 1 – ब्रोमोप्रोन देती है। क्रियाविधि की सहायता से इसका कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रथम स्थिति:
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इस स्थिति में क्रियाविधि निम्नानुसार दर्शाई जा सकती है –
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द्वितीय स्थिति –
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प्रश्न 13.17
1, 2 – डाइमेथिलबेन्जीन (o – जाइलीन) के ओजोनी अपघटन के फलस्वरूप निर्मित उत्पादों को लिखिए। यह परिणाम बेन्जीन की केकुले संरचना की पुष्टि किस प्रकार करता है?
उत्तर:
1, 2 डाइमेथिल बेन्जीन (o – जाइलीन) के ओजोनी अपघटन के फलस्वरूप ब्यूटेन – 2,3 – डाइऑन तथा एथेन डाइ-अल (ग्लाइआक्सिल) बनते हैं।
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ये सभी उत्पाद वलय में तभी सम्भव होते हैं यदि एकान्तर क्रम में तीन द्विबन्ध हों। ओजोनी अपघटन के उत्पाद केकुल संरचना की पुष्टि करते हैं।

प्रश्न 13.18
बेन्जीन, हैक्सेन तथा एथाइन को घटतें हुए अम्लीय व्यवहार के क्रम में व्यवस्थित कीजिए और इस व्यवहार का कारण बताइए।
उत्तर:
अम्लीय व्यवहार का घटता क्रम –
एथाइन > बेन्जीन > n – हेक्सेन
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एथाइन में, ‘C’ sp – संकरित है जो सर्वाधिक विद्युत-ऋणी होता है, यह इलेक्ट्रॉनों के साझे युग्म को अपनी ओर आकर्षित करता है तथा सरलतापूर्वक H+ मुक्त कर देता है। बेन्जीन में, प्रत्येक ‘C’ sp2 संकरित है अर्थात् कम विद्युत-ऋणी है, यह कम सरलता से H+ मुक्त करता है। हेक्सेन में, प्रत्येक ‘c sp3 संकरित है अर्थात् न्यूनतम विद्युत-ऋणी है, यह सरलता से H+ मुक्त नहीं करता। इसलिए सबसे कम अम्लीय व्यवहार दर्शाता है।

प्रश्न 13.19
बेम्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है?
उत्तर:
बेन्जीन में द्विआबन्ध व्यक्त करने वाले तीन π – इलेक्ट्रॉनों के युग्मों की उपस्थिति के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व उच्च होता है। यद्यपि इलेक्ट्रॉन-घनत्व अनुनाद के कारण बहुत अधिक विस्थानीकृत हो जाता है, परन्तु फिर भी इलेक्ट्रॉनस्नेही इस पर सरलता से आक्रमण करके इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं। यद्यपि बेन्जीन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन प्रदर्शित नहीं करता; क्योंकि नाभिकस्नेही कम इलेक्ट्रॉन घनत्व केन्द्र पर आक्रमण को प्राथमिकता देते हैं।

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प्रश्न 13.20
आप निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जीन में कैसे परिवर्तित करेंगे?

  1. एथाइन
  2. एथीन
  3. हेक्सेन

उत्तर:
1. एथाठन से बेन्जीन:
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2. एथीन से बेन्जीन:
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3. हेक्सेन से बेन्जीन:
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प्रश्न 13.21
उन सभी एल्कीनों की संरचनाएँ लिखिए, जो हाइड्रोजेनीकरण करने पर 2 – मेथिल ब्यूटेन देती हैं।
उत्तर:
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प्रश्न 13.22
निम्नलिखित यौगिकों को उनकी इलेक्ट्रॉनस्नेही (E+) के प्रति घटती आपेक्षिक क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(क) क्लोरोबेन्जीन, 2, 4 – डाइनाइट्रोक्लोरो-बेन्जीन, p – नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन
(ख) टॉलूईन, P – H3C – C6H4 – NO2, P-O2N – C6H4 – NO2
उत्तर:
इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन की ओर क्रियाशीलता का घटता क्रम निम्नवत् है –
(क) क्लोरोबेंजीन > p – नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन > 2,4 – डाइनाइट्रोक्लोरो बेन्जीन
(ख) टॉलूईन > p – नाइट्रोटॉलूईन > p – डाइनाइट्रो-बेन्जीन

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प्रश्न 13.23
बेन्जीन, m – डाइनाइट्रोबेंजीन तथा टालूईन में से किसका नाइटीकरण आसानी से होता है और क्यों?
उत्तर:
चूँकि – CH3 समूह इलेक्ट्रॉन विमुक्तन समूह होता है, अत: टालूईन का नाइट्रीकरण आसानी से हो जाता है। – CH3 समूह में +I प्रभाव होता है जो कि वलय को सक्रिय कर देता है।

प्रश्न 13.24
बेन्जीन के एथिलीकरण में निर्जल AlCl3 के स्थान पर कोई दूसरा लूईस अम्ल सुझाइए।
उत्तर:
निर्जल AlCl3 के स्थान पर फेरिक क्लोराइड अन्य लुईस अम्ल है, को प्रयोग कर सकते हैं। यह इलेक्ट्रॉन स्नेही (C2H5+) उत्पन्न करने में सहायक है।

प्रश्न 13.25
क्या कारण है कि वुर्ट्स अभिक्रिया से विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले विशद्ध ऐल्केन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं की जाती? एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वु अभिक्रिया से विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले विशुद्ध ऐल्केन बनाने के लिए दो भिन्न हैलोऐल्केनों की आवश्यकता होती है, इनमें से एक विषम संख्या तथा दूसरा सम संख्या कार्बन परमाणु होना चाहिए। उदाहरणार्थ-ब्रोमोएथेन तथा 1-ब्रोमोप्रोपेन अभिक्रिया के परिणामस्वरूप पेन्टेन देते हैं।
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परन्तु सहउत्पाद भी बनेंगे जबकि अभिक्रिया में भाग ले रहे सदस्य पृथक् रूप में भी अभिक्रिया करेंगे। उदाहरणार्थ-ब्रोमोएथेन, ब्यूटेन देता है तथा 1 – ब्रोमोप्रोपेन हेक्सेन देता है।
Bihar Board Class 11 Chemistry chapter 13 हाइड्रोकार्बन्स
अत: ब्यूटेन, पेन्टेन तथा हेक्सेन का मिश्रण प्राप्त होगा। इस मिश्रण से प्रत्येक घटक को पृथक् करना अत्यधिक कठिन कार्य होगा।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 13 परिहास-कथा Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

Bihar Board Class 7 Sanskrit परिहास-कथा Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत –

  1. प्रत्यग्रबुद्धिः
  2. मित्रयोर्मध्ये
  3. महिष्याः
  4. अनुबन्धः
  5. पूर्वार्धभागस्य
  6. पश्चाद्भागस्य
  7. अपरस्तु
  8. अपरार्धभागस्य
  9. वञ्चितः
  10. दोहनकालेऽपि
  11. दण्डप्रहारेण
  12. पादप्रहारेण
  13. ताडितवती
  14. पूर्वार्धस्वामी
  15. स्वधूर्ततायाः
  16. लज्जितश्च
  17. दुग्धग्रहणे

नोट: उच्चारण छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानां सन्धिविच्छेदं वदत –

  1. मित्रयोर्मध्ये
  2. वञ्चितोऽस्मि
  3. पूर्वार्धस्य
  4. लज्जितश्च
  5. अपरस्तु

उत्तराणि –

  1. मित्रयोर्मध्ये मित्रयो; + मध्ये
  2. वञ्चितोऽस्मि । वञ्चितः + अस्मि
  3. पूर्वार्धस्य पूर्व + अर्धस्य
  4. लज्जितश्च लज्जित: + च
  5. अपरस्तु अपरः + तु.

प्रश्न 3.
गोनू झा से संबंधित या उससे मिलती-जलती एक अन्य कथा सुनाएँ।
नोट : देखें योग्यता विस्तार के अन्तर्गत ।।

लिखितः

प्रश्न 4.
अधोलिखितानां पदानाम् अर्थ लिखत –

  1. एकदा
  2. महिप्याः
  3. अनुबन्धः
  4. पूर्वार्धभागस्य
  5. पश्चाद्भागस्य
  6. इत्थम्
  7. रोचते :

उत्तराणि-

  1. एकदा = एक समय
  2. महिप्याः = भैंस का
  3. अनुबन्धः = समझौता
  4. पूर्वार्धभागस्य = आगे के आधे हिस्से का
  5. पश्चाभागस्य = पीछे के हिस्से का
  6. इत्थम् = इस प्रकार
  7. रोचते = अच्छा लगता हैं ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

प्रश्न 5.
अधोलिखितानि पदानि अनमत्य सदशानि पदानि लिखत –

  1. दुग्धम
  2. वञ्चिताम
  3. महिष्याः
  4. वञ्चितोऽस्मि
  5. दण्डप्रहारेण

उत्तराणि-

  1. पेयम्
  2. वारिताम्
  3. वारितोऽस्मि
  4. लणडप्रहारेण ।

प्रश्न 6.
‘परिहास-कथा’ पाठ से मिलती-जुलता एक अन्य कहानी लिखें।
नोट : देखें योग्यता विस्तार के ‘अन्तर्गत ।

प्रश्न 7.
अधोलिखितानि अशद्धानि पदानि शुद्धानि कृत्वा लिखत

  1. महिस्या
  2. परामर्षम्
  3. पादप्रहारन
  4. भोजनादिणा
  5. पृष्टवान्

उत्तराणि-

  1. महिष्याः
  2. परामर्शम्
  3. पादप्रहारेण
  4. भोजनादिना
  5. पृष्ठवान् ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

प्रश्न 8.
निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत

  1. मित्रयोर्मध्ये कस्याः विपये अनुबन्धः अभवत् ?
  2. महिष्याः पूर्वाधभागस्य अधिकारी कः आसीत् ?
  3. सर्वदा कः वञ्चितः भवति स्म ?
  4. ‘परिहास-कथा’ इति पाठेन का शिक्षा मिलति ?

उत्तराणि-

  1. मित्रयोर्मध्ये महिष्याः विषये अनुबन्धः अभवत् ।
  2. महिष्याः पूर्वार्धभागस्य अधिकारी मित्रयोर्मध्ये एकः मूर्खः आसीत् ।
  3. सर्वदा पूर्वार्धभागस्याधिकारी वञ्चितः भवति स्म ।
  4. परिहास-कथा’ इति पाठेन विभाजनं निरर्थक न शोभते इति शिक्षा मिलति ।

प्रश्न 9.
मञ्जूषायाः उचित पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –

(चतुरः, महिष्याः, मूर्खः, महिषी, मूको (मूकः) )

  1. एकदा मित्रयोर्मध्ये एकस्याः ……………….. विषये अनुबन्धः अभवत् ।
  2. महिप्याः पश्चाद्भागस्य स्वामी ………………………… आसीत् ।
  3. महिण्याः पूर्वार्धभागस्य स्वामी ………………………… आसीत् ।
  4. दोहनकाले दादप्रहारेण ………………………… कुपिता जाता ।
  5. ना ………………………….. जातः ।

उत्तराणि-

  1. महिष्याः
  2. मूर्खः
  3. चतुरः
  4. महिषी
  5. मूको ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit परिहास-कथा Summary

[मिथिला में अपनी बौद्धिक क्षमता तथा परिहास-प्रियता के कारण गोन झा की बहुत ख्याति है । उस क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति इनकी कोई-न-कोई कथा सुनाता है जिसमें इनकी प्रत्यग्र बुद्धि की महत्ता मिलती है। प्रस्तुत पाठ में गोन झा की एक ऐसी कथा दी गयी है जिसमें एक भैंस के बँटवारे का वर्णन है।

एकदा मित्रयोर्मध्ये एकस्या: ……………….. अधिकारी एव वञ्चितः भवति स्म ।

शब्दार्थ – एकदा – एक बार । मित्रयोः = दो मित्रों के / में । मध्ये – बीच में । एकस्याः = एक की / का । के । महिष्याः – भैंस के । का । की । अनुबन्ध – समझौता । तेन – उसके अनुसार, उससे । तस्याः – उसका/ की । के । पूर्वार्धभागस्य – आगे के आधे हिस्से का । अपरः – दूसरा । पश्चाद्भागस्य – पीछे के हिस्से का । चतुरः – चालाक, होशियार । प्राप्नोति – प्राप्त करता / करती है । सेवते – सेवा करता / करती है । इत्थम् – इस तरह । वञ्चितः – ठगा गया ।।

सरलार्थ-एक बार दो मित्रों के बीच एक भैंस के विषय में समझौता हुआ । उसके अनुसार उनमें से एक उसके (भैंस को) आगे के आधे भाग का स्वामी बना और दूसरा पीछे के हिस्से का। दूसरा तो चालाक था । भैंस के आगे के आधे भाग में मुंह होता है । उसका स्वामी खाना आदि देकर सेवा करता था । पीछे भाग का स्वामी भैंस का दूध प्राप्त करता था। इस तरह आगे के आधे भाग का अधिकारी सदा ठगा जाता रहा ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 परिहास-कथा

स एकदा स्वमित्रं गोनू झा ……………….. स्वधूर्ततायाः फलं ज्ञात्वा लज्जितश्च।

शब्दार्थ – पृष्टवान् = पूछा । तस्मै = उसे, उसको । परामर्शम् = सलाह । दत्तवान् – दिया । ततः – तब । दोहनकाले – दुहने के समय । दण्डप्रहारेण – लाठी मार कर । कोपितवान् = गुस्सा कर दिया । भूत्वा – होकर । पादप्रहारेण – पैर चलाकर । ताडितवती = मारा । अकथयत् – कहा । भोः – अरे । किमिदम् (किम् + इदम्) – यह क्या । मे – मुझे, मझको । रोचते – अच्छा लगता है । तदेव (तत् + एव) = वही । अनेन – इससे । मूकः = चुप, मौन । जातः = हो गया ।

सरलार्थ – वह एक बार अपने मित्र गोनू झा से बोला-हे मित्र । मैं क्या करूं? हमेशा ठगा जाता हूँ । गोनू झा ने उसे उचित सलाह दिया । अत: उसने भैंस को भोजन से वंचित कर दिया । भैंस अधिक क्रोधित हो गयी । इसके पश्चात उसने दूहने के समय भी लाठी मारकर भैंस को क्रोधित कर दिया । अतः भैंस क्रोधित होकर दूहने के समय पैर चलाकर चतुर मित्र को मारा । उसने कहा- हे मित्र ! यह क्या कर रहा है ? मूर्ख आगे के आधे भाग का अधिकारी बोला- मैं भैंस के आगे के आधे भाग का अधिकारी हैं। जो मुझे अच्छा लगा मैं वही कर रहा हूँ। इससे तुम्हें क्या ? चालाक चुप हो गया । अपनी धूर्तता के फल को जानकर लज्जित भी हुआ।

ततः स पुनः महिषीविभाजनं …………………. शोभते इति उपदेशः ।

शब्दार्थ-कथयित्वा = कहकर । उभौ – दोनों । स्वीकृतवान् स्वीकार किया । उभयोः = दोनों का । सरलार्थ-इसके बाद भैंस बँटवारे को निरर्थक कहकर उस भैंस को भोजन देना और दूध लेना दोनों ने स्वीकार किया। इससे दोनों को लाभ हुआ। अतः निरर्थक बँटवारा शोभा नहीं देता, यही उपदेश है।

व्याकरणम्

  1. सन्धि-विच्छेदः मित्रयोर्मध्ये = मित्रयोः + मध्ये (विसर्ग सन्धि)
  2. अपरस्तु = अपर: + तु (विसर्ग सन्धि)
  3. वञ्चितोऽस्मि = वञ्चितः + अस्मि (विसर्ग सन्धि)
  4. दोहनकालेऽपि = दोहनकाल + अपि (पूर्वरूप सन्धि)
  5. पूर्वार्धस्य = पूर्व + अर्धस्य (दीर्घ सन्धि)
  6. लज्जितश्च = लज्जितः + च (विसर्ग सन्धि)

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

  1. ज्ञात्वा = ज्ञा + क्त्वा
  2. कुपिता = कुप् + क्त + टाप्
  3. वञ्चितः = वञ्च् + क्त
  4. भूत्वा = भू + क्त्वा
  5. जातः = जन् + क्त
  6. कथयित्वा = कथ् + णिच् + क्त्वा

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 10 दिनचर्या Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या

Bihar Board Class 7 Sanskrit दिनचर्या Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितपदानाम् उच्चारणं कुरुत –

  1. आहारः
  2. मानवजीवनम्पू
  3. र्वमेव
  4. बुद्धिकार्याणि
  5. स्वकीयम् मध्याह्ने
  6. ग्रहणीयम्व्य
  7. ञ्जनम्दी
  8. र्घजीवनम् ।

नोटः उच्चारणं छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखितपदानाम् अर्थं वदत –

(विहारः, उभयः, यथाकलाम्, सम्पूर्णम्, हितकरम्, दन्तानाम्, व्यञ्जनम्, अल्पहारः, नियतम् ।)
उत्तराणि-

  1. विहारः = घूमना
  2. उभयः = दोनों
  3. यथाकलाम = समय पर
  4. सम्पूर्णम् = पूरे
  5. हितकरम् = हितकारी
  6. दन्तानाम = दाँतों का
  7. व्यञ्जनम् = सब्जी
  8. अल्पाहारः = जलपान
  9. नियतम् = निश्चित ।

प्रश्न (3)
निम्नलिखितस्य पद्यस्य पाठं कुरुत –
युक्ताहारविहाराभ्यां नियतं दीर्घजीवनम् ।
मिथ्याहारविहाराभ्यामस्वास्थ्यं चाल्पजीवनम् ॥
उत्तराणि-
छात्र स्वयं करें ।

लिखितः

प्रश्न 4.
अधोलिखितानां प्रश्नानां उत्तरम् एकपदेन लिखत –

  1. केषां पालनेन मानवजीवन सुखमयं भवति ?
  2. सामान्यतः प्रात:काले कदा जागरणम् उचितम् ?
  3. स्नानादिनित्यकर्म कदा कर्त्तव्यम् ?
  4. रात्रौ यथासमयं किं करणीयम् ?
  5. प्रात:काले कीदृशः आहारः आवश्यकः ?

उत्तराणि-

  1. आहार-विहाराणाम्
  2. सूर्योदयात् पूर्वमेव
  3. प्रात:काले
  4. शयनम्
  5. जलपानम् ।

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प्रश्न 5.
दिनचर्या के अनुसार कार्य करने से क्या-क्या लाभ होते हैं?
उत्तराणि-
जीवन को अच्छी तरह चलाने और स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या का महत्त्व है। नियमपूर्वक जीवन-यापन करने वाले दीर्घायु होते हैं। आहार-विहार के नियम प्राचीन शास्त्रकारों ने बनाये हैं । उन पर चलने वाले व्यक्ति आजीवन अपने सामने आये हुए कार्यों को प्रसन्नतापूर्वक करते हैं । इसके विपरीत मिथ्या (अनुचित) आहार-विहार वाले सदा दु:खी रहते हैं । उनका कार्य उचित नहीं होता ।

प्रश्न 6.
कोष्ठात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –

  1. आहारः …………… इति वर्तते । (भोजनम् पेयम्)
  2. नियमानां पालनेन मानवजीवनं …….भवति । (सुखमयं, दु:खमयं)
  3. दिवसे यथाकालं …………..निर्धारितं कार्यं करणीयम् । (परकीयं, स्वकीय)
  4. अनेन शरीरं मनश्च …….. जायते । (स्वस्थं, अस्वस्थं)
  5. रात्रौ यथासमयं शनयम् ……… । (उचितम्, अनुचितम्)
  6. बहुभोजनं ……….जायते । (लाभकारक, हानिकारक)

उत्तराणि-

  1. भोजनम्
  2. सुखमयं
  3. स्वस्थं
  4. स्वस्थं
  5. उचितम्
  6. हानिकारकं ।

प्रश्न 7.
निम्नलिखितपदानां द्विवचनं लिखत –

एकवचनम् – द्विवचनम्

यथा-
अस्ति – स्तः ।

  1. भवति – …………..
  2. पठामि – …………..
  3. गायति – …………..
  4. खादामि – …………..
  5. पिबति – …………..
  6. फलम् – …………..
  7. गच्छसि – …………..

उत्तराणि-

  1. भवति । – भवतः ।
  2. पठामि – पठावः ।
  3. गायति – गायतः ।
  4. खादामि – खदामः ।
  5. पिबति – पिबतः ।
  6. फलम् – फले ।
  7. गच्छसि – गच्छथः ।

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प्रश्न 8.
सन्धिं कुरुत –

  1. हिम + आलयः = ……………….
  2. अल्प + आहारः = ……………….
  3. च + अपि = ……………….
  4. परम + अर्थः = ……….
  5. विद्या + आलयः = ……………….
  6. पूर्व + उत्तरम् = ……………….
  7. क्षुधा + अनुसारेण = ……………….
  8. युक्त + आहारः = ……………….

उत्तराणि

  1. हिम + आलयः = हिमालयः
  2. अल्प + आहारः अल्पाहारः
  3. च + अपि – चापि
  4. परम + अर्थ: = परमार्थ:
  5. विद्या + आलयः = विद्यालयः
  6. पूर्व + उत्तरम् = पूर्वोत्तरम
  7. क्षुधा + अनुसारेण + क्षुधानुसारेण
  8. युक्त + आहारः – युक्ताहारः

प्रश्न 9.
अधोलिखितान् शब्दान् अर्थान् लिखत –

  1. क्रियाकलापः
  2. बुद्धिकार्याणि
  3. ब्राह्ममुहूर्ते
  4. दव्याणि
  5. मध्याह्ने
  6. पादप्रक्षालनम्स्वा
  7. स्थ्यकरम्ई
  8. शवन्दनम
  9. चाल्पजीवनम्

उत्तराणि-

  1. क्रियाकलापः = गतिविधि
  2. बुद्धिकार्याणि = बुद्धि के द्वारा किए जाने वाले कार्य
  3. ब्राह्ममुहूर्ते = सूर्योदय से पूर्व के समय में
  4. दव्याणि = सामान
  5. मध्याह्न = दोपहर का समय
  6. पादप्रक्षालनम् = पैर धोना
  7. स्वास्थ्यकरम् = स्वास्थ्यकर
  8. ईशवन्दनम् = भगवान की स्मुति
  9. चाल्पजीवनम् = अल्पायु

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या

प्रश्न 10.
सुमेलनं कुरुत –

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या 1

उत्तराणि-
(क) – (v)
(ख) – (vi)
(ग) – (i)
(घ) – (ii)
(ङ) – (iii)
(च) – (iv)

प्रश्न 11.
‘सत्यम्’ ‘असत्यम्’ वा लिखत

  1. पौष्टिक: आहारः आवश्यकः वर्तते । ( ……… )
  2. रात्रौ यथासमयं शयनम् उचितम् । ( ……………. )
  3. बहुभोजनं लाभकारकं जायते । ( ……………. )
  4. प्रात:काले जलपानम् अल्पाहारः वा आवश्यकः भवति । (…………..)
  5. अल्पभोजनं स्वास्थ्यकरं भवति । ( …………… )
  6. प्रात:काले सूर्योदयात् पूर्वमेव जागरणम् उचितम् ।
  7. सायंकाले शयनं लाभकरं भवति । ( …………… )

उत्तराणि –

  1. पौष्टिकः आहारः आवश्यकः वर्तते । (सत्यम्)
  2. रात्री यथासमयं शयनम् उचितम् । (सत्यम्)
  3. बहुभोजनं लाभकारकं जायते । (असत्यम्)
  4. प्रात:काले जलपानम् अल्पाहारः वा आवश्यकः भवति । (सत्यम्)
  5. अल्पभोजनं स्वास्थ्यकरं भवति । (सत्यम्)
  6. प्रातःकाले सूर्योदयात् पूर्वमेव जागरणम् उचितम् । (सत्यम्)
  7. सायंकाले शयनं लाभकरं भवति – (असत्यम्)

Bihar Board Class 7 Sanskrit दिनचर्या Summary

[जीवन को अच्छी तरह चलाने और स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या का महत्त्व है। नियमपूर्वक जीवन-यापन करने वाले दीर्घाय होते हैं । आहार-विहार के नियम प्राचीन शास्त्रकारों ने बनाये हैं। उन पर चलने वाले व्यक्ति आजीवन अपने सामने आये हुए कार्यों को प्रसन्नतापूर्वक करते हैं । इसके विपरीत मिथ्या (अनुचित) आहार-विहार वाले सदा दुःखी रहते हैं । उनका कार्य उचित नहीं होता । इस पाठ में दिनचर्या के शाश्वत नियमों का वर्णन है।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या

अस्माकं जीवने आहारः ………… मानवस्य दिनचर्या निर्धारिता भवति ।

शब्दार्थ-आहार = भोजन । विहारः = घूमना, भोजनेतर कर्मसमूह । पक्षौ – हिस्से, पहलू, पक्ष । सर्वः = सभी । क्रियाकलापः – गतिविधि, कार्यसमूह । उभयोः – दोनों के । पालनेन = पालन से । सुखमयम् – सुखी । सरलार्थ-हमारे जीवन में भोजन और भ्रमण (भोजनेतर कर्म समूह) दो पहलू हैं । आहार भोजन है और विहार अन्य सभी क्रियाएँ । दोनों के नियम हैं। जिनका पालन करने से जीवन सुखमय होता है । इससे मनुष्य की दिनचर्या निर्धारित होती है।

सामान्यतः प्रातःकाले सूर्योदयात् …………. यथासमयं शयनम् उचितम्।

शब्दार्थ – सूर्योदयात् = सूर्योदय से । पूर्वमेव (पूर्वम् एव) – पहले ही । जागरणम् : जागना, उठना । प्रकृतेः – प्रकृति के । प्राणिनः – (सब) प्राणी । ब्राह्ममुहूर्ते – सूर्योदय से पूर्व के समय में । प्रकाशते – प्रकाशित होता है। बद्धिकार्याणि – बुद्धि के द्वारा किये जाने वाले काम । बहुमूल्यानि – ‘बेशकीमती । यथाकालम् = समयानुसार । स्वकीयम् = अपना, अपने (को)। करणीयम् – करना चाहिए । कार्यालयेषु = कार्यालयों में । स्व – स्व – अपने-अपने । आचरन्ति = आचरण करते हैं । शोभनम् – अच्छा । जायते – होता / होती है ।

सरलार्थ – साधारणतः प्रात:काल में सूर्योदय से पहले ही जगना उचित है। प्रकृति के सभी प्राणी ऐसा ही करते हैं। विद्वानों का कहना है कि सर्योदय से पहले ब्रह्मवेला में बुद्धि अधिक प्रकाशित होती है । अत: बुद्धि के द्वारा किए जाने वाले काम तब बेशकीमती होती हैं। प्रात:काल ही स्नानादि क्रिया करना चाहिए । उससे पूरे दिन शक्ति और स्फूर्ति विद्यमान रहते हैं ।

दिन में उचित समय पर निर्धारित कार्य करना चाहिए । छात्र अध्ययन करते हैं, गृहस्थ घर के कार्य करते हैं, कार्यालयों में सभी अपना-अपना कार्य करते हैं । इस प्रकार दिन का उपयोग होता है । संध्या समय में घूमना व बगीचे में जाना अच्छा है । इससे शरीर और मन स्वस्थ होता है । रात में निश्चित समय पर सोना उचित है।

प्रात:काले जलपानम् अल्पाहारः ……….. ईशवन्दनं च हितं भवति । आयुर्वेदः कथयति –

युक्ताहारविहाराभ्यां नियतं दीर्घजीवनम् ।
मिथ्याहारविहाराभ्यामस्वास्थ्यं चाल्पजीवनम् ॥

शब्दार्थ-अल्पाहारः नाश्ता, जलपान । मध्याहने – दोपहर में । क्षध नुसारेण (क्षुधा + अनुसारेण) = भूख के अनुसार । व्यञ्जनम् – सब्जी, तरकारी, उपकरण । ग्रहणीयम् – लेना चाहिए। अल्पभोजनम् – थोडा भोजन करना । बहुभोजनम् = बहुत भोजन करना । करणीयः – करना चाहिए । करने योग्य । सुलभम् = आसान । हितकरम् – उपयोगी, लाभप्रद । शयनात् – सोने से, शयन से । दन्तानाम् = दाँतों का । शोधनम् – साफ करना । पादप्रक्षालनम् – पैर धेना । ईशवन्दनम् = ईश्वर की प्रार्थना । नियतम् – निश्चित । युक्ताहारः – उचित खाना-पीना । मिथ्याहारः = अस्वास्थ्यकर भोजन ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या

सरलार्थ-सुबह में जलपान या अल्पाहार आवश्यक है। उसमें फल, पेय और शुद्ध पदार्थ जरूरी है । दोपहर में भूख के अनुसार अनाज और सब्जी होनी चाहिए । थोड़ा भोजन करना स्वास्थ्यकर होता है । अधिक भोजन करना हानिकारकर होता है । संध्या समय में दूध और फल खाना चाहिए । रात में आसान और थोड़ा भोजन हितकारी होता है । सोने से पहले दाँत साफ करना, पैर धोना, ईश्वर की प्रार्थना करना अच्छा होता है। आयुर्वेद में कहा गया है

उचित खाना-पीना निश्चित ही दीर्घ जीवनदायक होता है । अस्वास्थ्यकर भोजन और विहार से लोग बीमारी और अल्पाय होता है।

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेदः

  • पूर्वमेव = पूर्वम् + एव
  • अल्पाहारः = अल्प + आहारः
  • क्षुधानुसारेण = क्षुधा + अनुसारेण
  • स्फूर्तिः = स्फूर्तिश्च + च
  • चाल्पजीवनम् = च + अल्पजीवनम् ।

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 10 दिनचर्या 2

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम् Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

Bihar Board Class 7 Sanskrit वसुधैव कुटुम्बकम् Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत –

  1. अशान्तः
  2. मानवश्च
  3. द्वेषग्रस्तः
  4. स्वार्थसिद्धिः
  5. महत्त्वाकांक्षा
  6. शोषणाय
  7. वाञ्छन्ति
  8. कश्चित्उ
  9. त्कर्षम्दुः
  10. खकारणम्प्र
  11. सन्नः
  12. आनन्दमयश्च
  13. शस्त्रादीनम्दृ
  14. ष्ट्वा
  15. प्रमुदितः
  16. तथैव
  17. आत्मभावनाम्मि
  18. त्ररूपाः
  19. बन्ध रूपाश्च
  20. शत्रुभावना
  21. वैज्ञानिकस्य
  22. अल्पीकृतः
  23. एकस्मिन्प्र
  24. भावयति
  25. वैश्वीकरणम्वि
  26. श्वसमारोहेषु
  27. भवत्येकनीडम्शि
  28. क्षास्थले
  29. लक्षणमस्ति
  30. हितोपदेशः
  31. लघुचेतसाम्उ
  32. दारचरितानाम्व
  33. सुधैव, कुटुम्बकम् ।

नोटः उच्चारणं छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानाम् अर्थं वदत –

  1. अधुना
  2. द्वेषग्रस्तः
  3. स्वार्थसिद्धिः
  4. प्रेरयति
  5. वाञ्छन्ति
  6. शस्त्रम
  7. वस्तुतः
  8. परस्परम्द्वे
  9. षः
  10. वैश्वीकरणम्वि
  11. श्वबन्धुत्वम्ए
  12. कनीडाः
  13. लघुचेतसाम्उ
  14. दारचरितानाम्कु
  15. टुम्बकम् ।।

उत्तराणि-

  1. अधुना – आजकल
  2. द्वेषग्रस्तः = ईर्ष्या से युक्त
  3. स्वार्थसिद्धिः – अपने हित के सिद्धि
  4. प्रेरयति = प्रेरणा देता है
  5. वाञ्छन्ति = चाहते हैं
  6. शस्त्रम् = शस्त्र
  7. वस्तुतः = वास्तव में
  8. परस्परम् = आपस में
  9. द्वेषः = ईर्ष्या
  10. वैश्वीकरणम् = वैश्वीकरण
  11. विश्वबन्धुत्वम् = वैश्विक भाईचारा
  12. एकनीडा: = एक घोंसले में रहनेवाले
  13. लघुचेतसाम् = निम्न विचारवाले लोगों का
  14. उदारचरितानाम् = निम्न विचारवाले लोगों का
  15. कुटुम्बकम् = व्यापक विचारवालों का परिवार

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रश्न 3.
इमानि पदानि पठत –

  • भवति – भवतः – भवन्ति
  • भवसि – भवथः – भवथ
  • भवामि – भवाव: – भवामः

लिखितः

प्रश्न 4.
अधोलिखितानि पदानि लिखत –

  1. द्वेषग्रस्तः
  2. स्वार्थसिद्धिः
  3. महत्त्वाकांक्षा
  4. वाञ्छन्ति
  5. दुःखकारणम्
  6. भवत्येकनीडम्
  7. लघुचेतसाम्,
  8. उदारचरितानाम्
  9. कुटुम्बकम् ।

नोट : छात्र स्वयं लिखें ।

प्रश्न 5.
निम्नलिखितानां पदानां सन्धिं सन्धिविच्छेदंवा कुरुत –

  1. मानवश्च
  2. महत्त्व + आकांक्षा
  3. तथा + एव
  4. अद्यापि
  5. भवति+एकनीडम्
  6. हित+उपदेश
  7. वसुधा+एव

उत्तराणि –

  1. मानवश्च = मानव: + च
  2. महत्त्व + आकांक्षा = महत्वाकांक्षा
  3. तथा + एवं = तथैव
  4. अद्यापि = अद्य + अपि
  5. भवति + एकनीडम् = भवत्येकनीडम्
  6. हित+उपदेश = हितोपदेशः
  7. वसुधा + एव = वसुधैव

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रश्न 6.
कोष्ठात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –

  1. साम्प्रतं सम्पूर्ण संसारः …………………… वर्तते । (शान्त:, अशान्तः)
  2. अशान्तः मानवः ………… इव भवति । (देवः, दानवः)
  3. वयं परस्परं ………….. भवेम । (मित्ररूपाः , शत्रुरूपाः )
  4. अद्य वैज्ञानिकस्य विकासस्य परिणामः वर्तते यत् संसारः …………………….. । (अल्पीकृतः, दीर्घाकृतः)
  5. यदि मानवः देववत् भवेत् तदा संसारः शान्तः आनन्दमयः ………….. च भविष्यति । (अप्रसन्न:, प्रसन्न:)
  6. समारोहे, शिक्षास्थले कार्यस्थले वा सर्वे …………… भवन्ति । (बहुनीडाः, एकनीडाः)

उत्तराणि-

  1. अशान्तः
  2. दानवः
  3. मित्ररूपाः
  4. अल्पीकृत
  5. प्रसन्नः
  6. एकनीडाः ।

प्रश्न 7.
अधालिखितानां वाक्यानाम् अनुवादं हिन्दीभाषायां कुरुत –

  1. अधुना सम्पूर्णः संसारः अशान्तो वर्तते ।
  2. सर्वे स्वसुखं वाञ्छन्ति (इच्छन्ति) ।
  3. शान्तः मानवः देव इव भवति ।
  4. वयं परस्परं मित्ररूपाः भवेम ।
  5. अद्य विश्वबन्धुत्वं प्रभूतम् आवश्यकम् अस्ति ।
  6. अयं निजः परो वा इति गणना लघुचेतसाम् ।
  7. उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।

उत्तराणि-

  1. आज सम्पूर्ण संसार अशान्त है ।
  2. सभी अपना सुख चाहते हैं ।
  3. शान्त मनुष्य देवता के समान होते हैं ।
  4. हमलोग आपस मित्र की तरह रहें ।
  5. आज विश्वबन्धुता की अत्यधिक आवश्यकता है।
  6. यह अपना है और यह दूसरे का, ऐसा सोचना क्षुद्र बुद्धि वाले का है।
  7. उदार विचारवालों के लिए तो पृथ्वी ही परिवार है।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रश्न 8.
उदाहरणानुगुणं प्रथम-मध्यम-उत्तम-पुरुषरूपाणि लिखत –

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम् 1
उत्तराणि-
Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम् 2

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रश्न 9.
एकवचने परिवर्तयत

संसाराः – संसारः

सर्वे (पुं०) – ……………….
मित्ररूपाः – ……………….
समारोहेषु । – ……………….
समाजानाम् – ……………….
उदारचरितानाम् – ……………….
उत्तराणि –
Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम् 3

प्रश्न 10.
पाठानुसारं सत्कथनस्य पुरः ”✓” तथा असत्यकथनस्य पुरतः ”✗” इति चिह्नम् अङ्कयत –

  1. अधुना सम्पूर्णः संसारः शान्तो वर्तते । (✗)
  2. स्वार्थसिद्धिः कमपि शोषणाय प्रेरयति । (✓)
  3. शान्तः मानवः देवदत् भवति । (✓)
  4. अद्य विश्वबन्धुत्वं प्रभूतम् आवश्यकम् अस्ति। (✓)
  5. समारोहेषु जनाः बन्धुत्वं दर्शयन्ति । (✓)
  6. अयं निजः परो वेति गणना उदारचरितानाम् । (✗)
  7. दुष्टचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् । (✗)

प्रश्न 11.
संस्कृते अनुवादं कुरुत –

  1. आजकल सम्पूर्ण संसार अशांत है।
  2. सैनिक देश (देशं/ राष्ट्र) की रक्षा करते हैं । (रक्ष-रक्षा करना)
  3. छात्र बैग में (स्यूते) पुस्तक रखते हैं । (रक्ष – रखना)
  4. राधा भात (ओदन) पकाती है।
  5. बाघ । व्याघ्राः ) वन में रहते हैं ।
  6. तुम्हारी बहन (भगिनी) कहाँ पढ़ती है ?
  7. हिमालय से गंगा निकलती है (निःसरति/निर्गच्छति)।

उत्तराणि-

  1. अधुना सम्पूर्ण: संसारः अशान्तो वर्तते ।
  2. सैनिकाः देशं रक्षन्ति ।
  3. छात्राः स्यूते पुस्तकं रक्षन्ति ।
  4. राधा ओदनं पचति ।
  5. व्याघ्राः वने निवसन्ति ।
  6. तव भगिनी कुत्र पठति ?
  7. हिमालयात् गंगा नि:सरति ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit वसुधैव कुटुम्बकम् Summary

[आज विश्व अशान्ति के सागर में वर्तमान है । सर्वत्र असंतोष, महत्त्वाकांक्षा, ईर्ष्या, पक्षपात इत्यादि के कारण संघर्ष के बादल छाये हुए हैं। ऐसी स्थिति में प्राचीन भारत की ओर सभी की दृष्टि जाती है जहाँ सम्पूर्ण पृथ्वी को अपना परिवार समझा जाता था। भारत ने विभिन्न विदेशी जातियों का स्वागत किया तथा उन्हें भारतीय बनाया । विश्व को अशान्ति से मुक्त करने के लिए आज उसी उद्घोष की आवश्यकता है कि पूरी पृथ्वी परिवार के समान मान्य तथा पालनीय है। मानवता के इसी संदेश को प्रस्तुत पाठ में प्रकट किया गया है।

अधुना सम्पूर्णः संसारः अशान्तो ………………… तद् दुःखकारणम् ।

शब्दार्थ-अधुना = आजकल । अशान्तः – जो शान्त न हो, बेचैन । प्रति ” (की) ओर । द्वेषग्रस्त = ईर्ष्या से युक्त | महत्त्वाकांक्षा – ऊंची इच्छा । स्वार्थसिद्धिः – अपने हितों की सिद्धि । स्वस्य – अपने का । कामना – इच्छा । परस्य – दूसरे का । शोषणाय – शोषण के लिए / कष्ट देने के लिए। कमपि .. किसी को भी ।

प्रेरयति – प्रेरणा देता है । वाञ्छन्ति “चाहते/ चाहती हैं । कश्चित् = कोई 1 उत्कर्षम = ऊँचाई (को)। सरलार्थ-आजकल सम्पूर्ण संसार अशान्त है । देश देश के प्रति, समाज समाज के प्रति मनुष्य मनुष्य के प्रति द्वेष ग्रस्त है । इसका कारण भी है । स्वार्थ सिद्ध, सुख की इच्छा और ऊँची इच्छा दूसरे का शोषण करने के लिए प्रेरित करता है । सभी अपना सुख चाहते हैं, कोई दूसरे का सुख या उन्नति को नहीं सहन करते है। इससे अशांति होता है । यह दु:ख का कारण है।

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

अशान्तः मानवः राक्षसः इव भवति …………………….द्वषः शत्रुभावना च न भवेत् ।

शब्दार्थ- राक्षसः = दैत्य । सहते = सहन करता । करती है। शस्त्रादीनाम् = शस्त्र (पकड़कर चलाये जाने वाले हथियार) आदि का । दृष्ट्वा – देखकर । प्रमुदितः = प्रसन्न, आनन्दित, खुश । मन्यते – माना जाता है । एकरूपाः – समान, एक जैसा । सन्तानाः – संतान (बहुवचन) ।

आत्मभावनाम् = अपनी जैसी भावना (को) । धारयति – धारण करते हैं, रखते हैं । वस्तुतः – सचमुच । परस्परम् = आपस में । भवेम = (हम)हों। मोहः = लगाव । द्वेषः – ईर्ष्या, जलन । शत्रुभावना – दुष्टता की भावना । . सरलार्थ-अशान्त मनुष्य राक्षस के समान होता है । यदि वह देव तुल्य बन जाए तो संसार शान्त, प्रसन्न और आनन्दमय हो जाएगा । तब शस्त्रों की आवश्यकता नहीं होगी । एक दूसरे को देखकर खुशी होना चाहिए । जैसे अपने बान्धव और परिवार को मानते हैं वैसे ही दूसरे लोगों को भी बान्धव और परिवार मानना चाहिए । सभी एक-समान हैं, एक ईश्वर की संतान हैं, भिन्न । कैसे हैं ? जो सभी लोगों में अपनी जैसी भावना को धारण करता है, वह वास्तव में देवता है। हमारा लक्ष्य वही होना चाहिए जो हम सभी आपस में मित्रवत् और बन्धुवत रहें । तब मोह, द्वेष और शत्रुता की भावना नहीं होनी चाहिए ।

अद्य वैज्ञानिकस्य ……….न कुर्यात् । तथा च हितापदेश:

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ शब्दार्थ- अल्पीकृतः – छोटा हो गया (है) । एकस्मिन् = एक में । घटिता – घटी हुई । शीघ्रमेव (शीघ्रम एव) – जल्दी ही । प्रभावयति – प्रभावित करता है, असर डालता है । वैश्वीकरणस्य – वैश्वीकरण का (विश्व के देशों का आर्थिक, वैज्ञानिक आदि आधारों पर जड़ना – वैश्वीकरण) । प्रभावात् – प्रभाव से । उत्पादः – उत्पन्न वस्तु 1 विश्वबन्धुत्वम् = वैश्विक (संसार भर में) भाईचारा । प्रभूतम् = बहुत अधिक । भवत्येकनीडम् – एक घोसले का निवासी होता / होती है । कार्यस्थले – कार्य की जगह में /पर । एकनीडाः – एक घोसले में रहने वाले । स्वार्थः – अपना हित ।

नश्यति – नष्ट होता है, लुप्त या अदृश्य होता है । परमार्थः – सर्वोच्च लक्ष्य । वर्धते – बढ़ता है । स्वदेशः = अपना देश, राष्ट्र । परदेशः = दूसरे का देश । उदारस्य = उदार, बड़े दिल वाले का । लक्ष्णमस्ति (लक्षणम् अस्ति)लक्षण / पहचान / चिह्न है । कुर्यात् – करना चाहिए । अयम् – यह । निजः – अपना । परो ( परः) – पराया । वेति (वा इति) – अथवा ऐसा । गणना – गिनती । लघुचेतसाम् – तुच्छ । निम्न विचार वाले लोगों का । उदारचरितानाम् – व्यापक विचार वाला का की । वसुधैव (वसुधा एव) – धरती । पृथ्वी ही । कुटुम्बकम् = परिवार, संबंधी ।

सरलार्थ-आज वैज्ञानिक विकास का परिणाम है जो संसार छोटा हो गया है। आज एक देश में घटित घटना पूरे विश्व को प्रभावित करती है।” वैश्वीकरण के प्रभाव से एक उत्पाद शीघ्र सभी देशों में जाता है । अतः आज विश्वबन्धुत्व की बड़ी आवश्यकता है । उत्सवों और समारोहों में आपस में मिलते हुए लोग बन्धुत्व प्रदर्शित करते हैं ।

हमारे शास्त्रों में कहा गया हैजो विश्व एक घोंसले का निवासी होता है । जैसे एक घोंसला में पक्षियों का परिवार रहता है वैसे ही कहीं समारोह में शिक्षालयों में तथा कार्यशालाओं में सभी एक घोंसला में रहनेवाला होता है । जैसे वहाँ बन्धुता है वैसे ही सामान्य जीवन में भी देशों के, समाजों के और वर्गों के बीच एक घोंसलापन और बन्धुत्व होना चाहिए । वहाँ स्वार्थ पूर्णत: नष्ट हो जाता है और परमार्थ वृद्धि पाता है । अपना देश और दूसरे का देश परमार्थतः एक ही है । उदार लोगों का यही लक्षण है कि उसे अपना और पराये का विचार नहीं करना चाहिए। और हितोपदेश में कहा गया है यह अपना है यह दूसरों का है ऐसी गणना निम्न विचार वालों का है. व्यापक विचार वालों का तो पृथ्वी ही परिवार है।

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेदः

मानवश्च = मानवः + च (विसर्ग सन्धि)
महत्त्वाकांक्षा, = महत्त्व + आकांक्षा (दीर्घ सन्धि)
आनन्दमयश्च = आनन्दमय: + च (विसर्ग सन्धि)
तथैव = तथा + एव (वृद्धि सन्धि) ।
बन्धरूपाश्च = बन्धुरूपाः + च (विसर्ग सन्धि)
अद्यापि = अद्य + अपि (दीर्घ सन्धि)
भवत्येकनीडम् = भवति + एकनीडम् (यण् सन्धि)
जीवनेऽपि = जीवन + अपि (पूर्वरूप सन्धि)
हितोपदेशः = हित + उपदशः (गुण सन्धि)
वेति = वा + इति (गुण सन्धि)
वसुधैव = वसुधा + एव (वृद्धि सन्धि)

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम्

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 8 वसुधैव कुटुम्बकम् 4

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 12 अरण्यम्

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 12 अरण्यम् Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 12 अरण्यम्

Bihar Board Class 7 Sanskrit अरण्यम् Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत

  1. अरण्येषु
  2. ओषधयश्च
  3. प्राणरक्षायै
  4. क्षणमपि
  5. जीवनोपयोगिनाम्
  6. वध
  7. मानमस्ति
  8. वारयितुम्स्या
  9. त्-तर्हि
  10. प्रदूषणेन
  11. कर्त्तव्यम्

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प्रश्न 2.
संस्कृतभाषायां स्वनाम स्वजन्मस्थानं च वदत ।
उत्तराणि-
छात्र नाम और जन्म स्थान बोलें ।

प्रश्न 3.
अधोलिखितानां पदानां सन्धिविच्छेदं वदत –
ओषधयश्च, अत्यावश्यकम्, वायुञ्च, ततस्ततः, सोऽहम्
उत्तराणि –

  1. ओषधयश्च – ओषधयः + च ।
  2. अत्यावश्यकम् – अति + आवश्यकम् ।
  3. वायुञ्च = वायुम् + च ।
  4. ततस्ततः = ततः + ततः ।
  5. सोऽहम् = सः + अहम् ।

लिखितः

प्रश्न 4.
सुमेलनं कुरुत –

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उत्तराणि-
(क) – (v)
(ख) – (iv)
(ग) – (i)
(घ) – (ii)
(ङ) – (iii)

प्रश्न 5.
निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरम् पूर्णवाक्येन लिखत –

  1. वृक्षाणां समूहः किं भवति ?
  2. अरण्ये कीदृशाः वृक्षाः भवन्ति ?
  3. वनेभ्यः प्राप्तेभ्यः काष्ठेभ्यो जनाः केषां निर्माणं कुर्वन्ति ?
  4. वृक्षाः कं वायुं गृह्णन्ति ?
  5. वृक्षाः कं वायु मुञ्चन्ति ?
  6. कस्य प्रदूषणात् जनाः रुग्णाः भवन्ति ?
  7. कं विना वयं क्षणपि न जीवामः ?
  8. अरण्यं वर्षार्थं कान् आकर्षति ?
  9. केषां निरन्तरं कर्त्तनेन संसारस्य महती हानिः सञ्जाता?
  10. केषां संरक्षणं संवर्धनं च कर्त्तव्यम् ?

उत्तराणि –

  1. वृक्षाणां समूहः अरण्यं वनंवा भवति ।
  2. अरण्ये प्रकृति संभवाः वृक्षाः भवन्ति ।
  3. वनेभ्यः प्राप्तेभ्यः काष्ठेभ्यो जनाः उपस्कराणां निर्माणं कुर्वन्ति ।
  4. वृक्षाः दूषितं वायुं गृह्णन्ति ।
  5. वृक्षाः स्वच्छ वायु मुञ्चन्ति ।
  6. वायोः प्रदूषणात् जनाः रुग्णाः भवन्ति ।
  7. वायुं विना वयं क्षणमपि न जीवामः ।
  8. अरण्यं वर्षार्थ मेधान् आकर्षति ।
  9. वृक्षाणां निरन्तरं कर्त्तनेन संसारस्य महती हानिः सञ्जाता ।
  10. वृक्षाणाम् संरक्षणं संवर्धनं च कर्त्तव्यम् ।

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प्रश्न 6.
कोष्ठात उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पुरयत –

  1. व्याघ्राः, सिंहाः, भल्लूकाः शृगालप्रभृतयः पशवः …………….. एवसहजरूपेण निवसन्ति । (वने, ग्रामे)
  2. अरण्येषु विविधाः ………….भवन्ति । (भूपतयः, वनस्पतय:)
  3. वनेभ्यः विविधाः …………….. मिलन्ति । (ओषधयः, भवनानि)
  4. संसारे अधुना पर्यावरणप्रदूषणं निरन्तरं ………………. अस्ति । (वर्धमानम्, ह्रासमानम्)
  5. वायुप्रदूषणात् जनाः …………………. भवन्ति । (नीरोगाः, रुग्णा:)
  6. जीवनोपयोगिनां वस्तूनां मध्ये ……………….. प्रथम स्थानम् अस्ति । (वायोः, भोजनस्य)
  7. ………….. विना वयं क्षणम् अपि न जीवामः । (जलं, वायुं).
  8. वृक्षाः संसारे सततं वर्धमानाम् ………………………. वारयितुं क्षमाः । (उष्णता, शीतलतां)

उत्तराणि-

  1. वने
  2. वनस्पतयः
  3. ओषधयः
  4. वर्धमानम्
  5. रुग्णाः
  6. वायोः
  7. वायुं
  8. उष्णतां ।

प्रश्न 7.
अधोलिखितानां पदानां सन्धिं सन्धिविच्छेदं वा कुरुत –

  1. ओषधयः + च = ……………………
  2. अत्यावश्यकम् = ……………………
  3. वायुञ्च = ……………………
  4. सजाता = ……………………

उत्तराणि-

  1. ओषधयः + च = ओषधयश्च
  2. अत्यावश्यकम् = अति + आवश्यकम्
  3. वायुञ्च = वायुम् + च
  4. सजाता = सम् + जाता

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प्रश्न 8.
मेलनं कुरुत –

  1. अरण्यम् – 1. ऑक्सीजन
  2. प्राणवायुः – 2 वर्षणम्
  3. वृक्षकर्तनम – 3. उपस्करः
  4. कार्बनडाइऑक्साइड – 4. भूक्षरणम्
  5. काष्ठः – 5. वायुप्रदूषणम्

उत्तुराणि –

  1. – (2)
  2. – (1)
  3. – (4)
  4. – (5)
  5. – (3)

प्रश्न 9.
वनों के विनाश से क्या हानि होती है ?
उत्तराणि-
वन के विनाश से आजकल संसार में पर्यावरण प्रदूषण निरन्तर बढ़ रहे हैं । वायु प्रदूषण से लोग बीमार पड़ते हैं। जीवनोपयोगी वस्तुओं के बीच वायु का प्रथम स्थान है। वायु के बिना हम क्षणभर भी नहीं जीवित रह सकते हैं।

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प्रश्न 10.
वनों से क्या लाभ होते हैं ?
उत्तराणि-
पर्यावरण की शुद्धि के सबसे महत्त्वपूर्ण साधन वन है । वन जल, वायु, मिट्टी सबको शुद्ध करते हैं । उनमें अनेक पशु-पक्षी अपनी जीवन-चर्या का संचालन करते हैं । मानव की व्यापक उन्नति की दृष्टि से वनों का बहुत महत्त्व है । वन में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे होते हैं। उनसे फल प्राप्त होते हैं । वनों से विभिन्न प्रकार के औषधि प्राप्त होते हैं । वन से प्राप्त अनेक प्रकार की लकड़ियों से लोग लकड़ियों के सामान बनाते हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखितानां पदानाम् अर्थ लिखत –

  1. अरण्यम्
  2. प्रकृतिसंभवाः
  3. भल्लुकः
  4. वानरः
  5. उपस्करः
  6. रुग्णः
  7. वारयितुम्
  8. भूक्षरणम्
  9. संरक्षितः
  10. महती
  11. संवर्धनम्
  12. संरक्षणम् ।

उत्तराणि-

  1. अरण्यम् = वन
  2. प्रकृतिसंभवाः = प्राकृतिक रूप से उत्पन्न
  3. भल्लुकः = भालु
  4. वानरः = बन्दर
  5. उपस्करः = लकड़ी का समान
  6. रुग्णः = बीमार
  7. वारयितुम् = रोकने के लिए
  8. भूक्षरणम् = मिट्टी का कटान
  9. संरक्षितः = सुरक्षित
  10. महती = बड़ी
  11. संवर्धनम् = बढ़ाना
  12. संरक्षणम् = रक्षा ।

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प्रश्न 12.
संस्कृते अनुवादं कुरुत –

  1. वह प्रतिदिन विद्यालय जाता है।
  2. तुमलोग मन से (मनसा) पढ़ो (पठत)।
  3. विद्यालय के चारों ओर (परितः) वृक्ष हैं ।
  4. पेड़ से (वृक्षात्) पत्ते गिरते हैं। हे
  5. बालक ! यहाँ (अत्र) आओ ।
  6. दादाजी (पितामहः) कहानी (कथा) कहते हैं ।
  7. वे लोग सोहन के लिए वस्त्र लाते हैं।

उत्तराणि –

  1. सः प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छति ।
  2. यूयं मनसा पठथ ।
  3. विद्यालयं परितः वृक्षाः सन्ति ।
  4. वृक्षात् पत्राणि पतन्ति ।।
  5. है बालक ! अत्र आगच्छ ।
  6. पितामहः कथां कथयति ।
  7. ते सोहनाय वस्त्रं नयति ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit अरण्यम् Summary

[प्रस्तुत पाठ में पर्यावरण की शुद्धि के सबसे महत्त्वपूर्ण साधन वन का वर्णन है । वन जल, वायु, मिट्टी सबको शुद्ध करते हैं। अतः उनकी रक्षा आवश्यक है । उनमें अनेक पशु-पक्षी अपनी जीवन-चर्या का संचालन करते हैं। मानव की व्यापक उन्नति की दृष्टि से वनों का बहुत महत्त्व है । इसलिए वनों के प्रति छात्रों की अभिरुचि उत्पन्न करना इस पाठ का उद्देश्य है ।

वृक्षाणां समूहः अरण्यं वनं वा…….एव सहजरूपेण निवसन्ति।

शब्दार्थ-अरण्यम् – जंगल, वन । प्रकृतिसंभवाः – प्राकृतिक रूप से उत्पन्न । वन्याः = जंगली । प्राणिनः = जीव (बहुवचन) । निवसन्ति – रहते हैं । व्याघ्राः = बाघ (बहुवचन) । भल्लुकाः – भालू । वानराः – बन्दर । शृगानप्रभृतयः = सियार इत्यादि । पशवः – जानवर । सहजरूपेण .. स्वाभाविक रूप से । सरलार्थ-वृक्षों का समूह अरण्य या वन, होता है । वन में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न वृक्ष होते हैं । वहाँ वन्यप्राणी रहते हैं । बाघ, सिंह, भालू. बन्दर, शृगाल आदि पश् वन में स्वाभाविक रूप से रहते हैं।

अरण्येषु विविधाः वनस्पतयः …………… उपस्कराणां निर्माण कर्वन्ति ।

शब्दार्थ- वनस्पतयः – पेड़-पौधे । काष्ठेभ्यः ॥ लकड़ियों से । उपस्कराणाम् = लकड़ी के सामानों का । सरलार्थ-वन में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे होते हैं। उनसे फल प्राप्त होते हैं । वनों से विभिन्न प्रकार के औषधि प्राप्त होते हैं । वन से प्राप्त अनेक प्रकार की लकड़ियों से लोग लकड़ियों के सामान बनाते हैं।

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प्राणिनां प्राणरक्षायै वनम् ………….. वृक्षाः परोपकारिणः सन्ति ।

शब्दार्थ-धारयामः = धारण करते हैं. ग्रहण करते हैं । त्यजामः । (हम) छोड़ते हैं । इत्थम् – इस प्रकार । मिलन्ति – मिलते हैं। मुञ्चन्ति = छोड़ते हैं। सरलार्थ-जीवों की प्राण रक्षा के लिए वन जरूरी है । हमलोग ऑक्सीजन नामक प्राणवायु को ग्रहण करते हैं और कार्बन डाईऑक्साइड नामक दूषित वायु छोड़ते हैं । वृक्ष दूषित वायु को ग्रहण करते हैं और शुद्ध हवा छोड़ते हैं । इस प्रकार वृक्ष परोपकारी हैं –

अधुना संसारे पर्यावरणप्रदूषणं ……………………….. विना वयं क्षणमपि न जीवामः ।

शब्दार्थ-रुग्णाः = रोगी । नाशयितम = नष्ट करने के लिए। सततम – निरन्तर, हमेशा । वर्धमानाम् = बढ़ती हुई, बढ़ने वाली । उष्णताम – गमी को । सरलार्थ-आजकल संसार में पर्यावरण प्रदूषण निरन्तर बढ़ रहे हैं ! वाय प्रदूषण से लोग बीमार पड़ते हैं। जीवनोपयोगी वस्तुआ के बीच वाय का प्रथम स्थान है । वायु के बिना हम क्षण भी नहीं जीवित रह सकते हैं ।

वायुप्रदूषणं नाशयितुम् अरण्यम् …………………….. वन्यजीवाः संरक्षिताः तिष्ठन्ति ।

शब्दार्थ-वारयितुम् – रोकने के लिए । क्षमाः . समर्थ हैं। वर्षार्थम – वर्षा के लिए । आकर्षति = आकृष्ट करता है । भूक्षरणम् = मिट्टीका कटना, बह जाना । न्यूनतामुपयाति = (न्यूनताम् + उपयाति) कम होता है। संरक्षिताः – सुरक्षित । तिष्ठन्ति -‘ रहते हैं । सरलार्थ-वायु प्रदूषण नष्ट करने के लिए वन आवश्यक हैं। वृक्ष संसा में सतत् बढ़ने वाली गर्मी को रोकने में समर्थ हैं । इससे मिट्टी का कटना कम होता है । वन्य जीव संरक्षित रहते हैं।

इदानीं जनाः तात्कालिकलाभाय……. संरक्षणं संवर्धन च कर्त्तव्यम् ।

शब्दार्थ-इदानीम् = इस समय । छेदनम् = काटना । निरन्तरम् । लगातार । कर्त्तनेन = काटने से । महती = बहुत बड़ी । गहणन्ति – ग्रहण करते हैं, लेते हैं । न्यूनम् – कम । सञ्जाता – हुई। स्यात् – हो, रहे । तर्हि •तो, तब । भविष्यति = हो जाएगा । संवर्धनम् = बढ़ाना । संरक्षणम् = रक्षा । कर्तव्यम् – करना चाहिए । इयमेव + (इयम् + एव) यही (स्त्री०)। सरलार्थ-इस समय लोग तात्कालिक लाभ के लिए वृक्षों को काटते हैं। निरन्तर वृक्षों के कटने सेस विश्व की बड़ी हानि हो रही है। यही स्थिति रही तो सबों का जीवन प्रदूषण से कठिन हो जाएगा । अतः वृक्षों का संरक्षण और संवर्द्धन करना हमारा कर्तव्य है।

व्याकरणम् –

सन्धि-विच्छेदः

  1. ओषधयश्च = ओषधयः + च
  2. अत्यावश्यकम् = अति + आवश्यकम्
  3. वायुञ्च = वायुम् + च
  4. सजाता = सम् + जाता

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प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

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