Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 नागरी लिपि

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 5 नागरी लिपि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 नागरी लिपि

Bihar Board Class 10 Hindi नागरी लिपि Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

नागरी लिपि प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर-
करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं, इसलिए इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई है।

Nagari Lipi Ka Question Answer Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती हैं ?
उत्तर-
देवनागरी लिपि में नेपाल की नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाएँ मराठी भाषा की लिपि तथा संस्कृत एवं हिन्दी की लिपि देवनागरी है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।
उत्तर-
लेखक ने गुजराती और बंगला लिपि से देवनागरी का संबंध बताया है।

Class 10th Hindi Bihar Board प्रश्न 4.
नंदी नागरी किसे कहते हैं ? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है ?
उत्तर-
विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।

दक्षिण भारत में पोथियाँ लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था। दरअसल, दक्षिणभारत की यह नागरी लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं। पहले-पहल । विजयनगर के राजाओं के लेखों की लिपि को ही नंदिनागरी नाम दिया गया था।

ब्राह्मी लिपि की वर्णमाला Pdf Download Bihar Board प्रश्न 5.
नागरी लिपि में आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें।
उत्तर-
नागरी लिपि के आरंभिक लेख हमें दक्षिण भारत से ही मिले हैं। राजराजा व राजेन्द्र जैसे प्रतापी चोल राजाओं के सिक्कों पर नागरी अक्षर देखने को मिलते हैं। दक्षिण भारत में नागरी लिपि के लेख आठवीं सदी से मिलने लग जाते हैं और उत्तर भारत में नौवीं सदी से।

Class 10th Hindi Godhuli Question Answer प्रश्न 6.
ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
उत्तर-
मुप्त काल की ब्राह्मी लिपी तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या छोटे ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं और ये शिरोरेखाएँ उतनी ही लंबी रहती हैं जितनी कि अक्षरों की चौड़ाई होती है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 7.
उत्तर भारत के किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
उत्तर भारत के इस्लामी शासन की नींव डालनेवाली महमूद गजनवी के लाहौर के टकसाल में ढाले गए चाँदी के सिक्कों पर भी हम नागरी लिपि के शब्द देखते हैं। मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए थे।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 8.
नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं ? लेखक इस संबंध में क्या बताता है ?
उत्तर-
पादताडितकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या नागरी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा। देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा।

Bihar Board 10th Class Hindi Book Pdf प्रश्न 9.
नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है ? पटना से नागरी का क्या संबंध लेखक ने बताया है ?
उत्तर-
इतना ध्रुवसत्य है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् किसी बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादतादितकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र अर्थात् पटना को नगर नाम से पुकारते थे। अतः हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को नागर शैली कहते हैं। अतः नागर या नागरी शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। विद्वानों के अनुसार उत्तर भारत का यह बड़ा नगर निश्चित रूप से पटना ही होगा। चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम देव था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को देवनगर भी कहा जाता था देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया था।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions प्रश्न 10.
नागरी लिपि कब तक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर-
ईसा की 8वीं-11वीं सदियों में हम नागरी लिपि को पूरे देश में व्याप्त देखते हैं। उस समय यह एक सार्वदेशिक लिपि थी।

गोधूलि भाग 2 Class 10 Pdf Bihar Board प्रश्न 11.
नागरी लिपि के साथ-साथ किसका जन्म होता है ? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है ?
उत्तर-
नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिंदी साहित्य मिलने लग जाता है। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ, मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं।

Bihar Board 10th Hindi प्रश्न 12.
गुर्जर प्रतीहार कौन थे?
उत्तर-
अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतीहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी की पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन खड़ा किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार शासक हुए। मिहिर भोज (1840-81) ई. की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

Bihar Board Class 10th Hindi प्रश्न 13.
निबंध के आधार पर काल-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
निबंध के आधार पर कालक्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण इस प्रकार मिलते हैं – ग्यारहवीं सदी में राजेन्द्र जैसे प्रतापी चेर राजाओं के सिक्कों पर नागर अक्षर देखने को मिलते हैं। बारहवीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर ‘वीर केरलस्य’ जैसे शब्द नागरी लिपि में अकित हैं। दक्षिण से प्राप्त वरगुण का पलयम ताम्रपत्र भी नागरी लिपि में नौवीं सदी की है। एक हजार ई. के आसपास मालवा नगर में नागर लिपि का इस्तेमाल होता था।

विक्रमादित्य के समय पटना में देवनागरी का प्रयोग मिलता है। ईसा की आठवीं से ग्यारहवीं सदियों में नागरी लिपि पूरे भारत में व्याप्त थी। आठवीं सदी में दोहाकोश की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है, वह नागरी लिपि में है। पाँच सौ चौअन ई० में राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का दानपत्र नागरी लिपि में प्राप्त हुआ है। 850 ई. में जैन गणितज्ञ महावीराचार्य के गणित सार संग्रह की रचना मिलती है जो नागरी लिपि में है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा बनाएँ
उत्तर-
स्थिर = स्थिति
अतिरिक्त = अतिरिक्तता
स्मरणीय = स्मरण
दक्षिणी = दक्षिण
आसान = आसानी
पराक्रमी = पराक्रम
युगीन = युग

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पदों के समास विग्रह करें
उत्तर-
तमिल-मलयालम = तमिल और मलयालम द्वन्द्व
रामसीय = राम और सीता द्वन्द्व
विद्यानुराग = विद्या को अनुराग (तत्पुरूष)
शिरोरेखा = शिर पर रेखा (तत्पुरूष)
हस्तलिपि = हस्त की लिपि (तत्पुरूष)
दोहाकोश = दोहा का कोश (तत्पुरूष)
पहले-पहल = पहला पहला (अव्ययीभाव)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें –
उत्तर-
मंत = कथन, वचन।
सार्वदेशिक = पूरे देश की, संपूर्ण राष्ट्र।
अनुकरण = अनुगमन, नकल।
व्यवहार = आचार, संबंध।
शासक = राजा, बादशाह।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) प्रत्न – पुराना
प्रयत्न प्रयास
(ख) लिपि – लिखावट
लिप्ति – ढका हुआ
(ग) नागरी – एक लिपि
नागरिक – जनता
(घ) पट – वस्त्र
पट्ट – तख्ती (पट्टिका)

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. हिंदी तथा इसकी विविध बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं हमारे पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। मराठी में सिर्फ एक अतिरिक्त अक्षर है। हमने देखा है कि प्राचीन काल में संस्कृत व प्राकृत भाषाओं में यह ध्वनि थी और इसके लिए अनेक अभिलेखों में अक्षर मिलता है।
प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है ?
(ग) नेपाल में कौन-सी भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं?
(घ) मराठी भाषा की लिपि क्या है ?
(ङ) प्राचीन काल में किन भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी?
उत्तर-
(क)पाठ का नाम-नागरा लिापा
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख) हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।
(ग) नेपाल में नेपाली (खुसकुरा) एवं नेपाली भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।
(घ) मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है।
(ङ) प्राचीन काल में संस्कृत एवं प्राकृत भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी।

2. ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नंदिनागरी कहा है। विजयनगर के राजाओं के लेख कन्नड़-तेलगु और नागरी लिपि में मिलते हैं। जानकारी मिलती है कि विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में ही पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था। यह वैदिक साहित्य निश्चय ही नागरी लिपि में लिखा गया होगा। विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को क्या कहा है?
(ग) विजयनगर के लेख किस लिपि में मिलते हैं ?
(घ) किसके शासन काल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया?
(ङ) नागरी लिपि का नंदिनागरी नामू क्यों पड़ा?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख)विजय नगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नदिनागरी कहा है।
(ग) विजय नगर के लेख नागरी लिपि में मिलते हैं।
(घ) विजय नगर के राजाओं के शासनकाल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था।
(ङ) विद्वानों का मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगरे (आधुनिक नांदेड) की लिपि होने के कारण इसका नाम नंदिनागरी पड़ा।

3. अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भात में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा तिदुर्ग का सामागंड दानपत्र (754 ई०) है। दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट शासन की नींव डाली थी। ये राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे और इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी; परंतु ये खानदेश-विदर्भ में बस गए थे। दंतिदुर्ग के बाद उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) राष्ट्रकूटों की गद्दी पर बैठा। इसी कृष्ण के शासनकाल में एलोरा (प्राचीन एलापुर, वेरूल) में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।

कृष्ण के कुछ लेख भी मिले हैं। नौवीं सदी में अमोघवर्ष एक प्रख्यात राष्ट्रकूट राजा हुआ। इसी अमोघवर्ष ने राष्ट्रकूट की नई राजधानी मान्यखेट (मालखेड) की नींव डाली। अमोघवर्ष के शासनकाल में ही जैन गणितज्ञ महावीराचार्य (850 ई.) ने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की थी।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) अनेक विद्वान नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किसे मानते हैं और वह किस काल का है ?
(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव किसने डाली थी?
(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलत: कहाँ के रहनेवाले थे ?
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा क्या थी ?
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर कौन बैठा?
(छ) किसके शासनकाल में एलोरा में कैलाश मन्दिर बनाया गया ?
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने किसके शासन काल में और कौन-से ग्रंथ की रचना की?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम नागरी लिपि
लेखक का नाम गुणाकर मुले।
(ख) अनेक विद्वान का मत है कि दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का सामागंड दानपत्र 745 ई. है।
(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव दंतिदुर्ग ने डाली थी।
(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे।
(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा कन्नड़ थी।
(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की-गद्दी पर उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) बैठा।
(छ) कृष्ण (प्रथम) के शासनकाल में एलोरा में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।
(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने अमोघवर्ष के शासन काल में ‘गणितसार-संग्रह’ नामक ग्रंथ की रचना की?

4. महमूद गजनवी के बाद के मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने भी अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए हैं। बादशाह अकबर ने ऐसा सिक्का चलाया था जिस पर राम-सीता की आकृति है और नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।

उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियाबाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखण्ड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागरी लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।

प्रश्न
(क) महमूद गजनवी के बाद किन-किन शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाएं थे ?
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्के पर कौन-सी आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में कौन-सा शब्द अंकित है
(ग) उत्तर भारत में किन-किन शासकों के लेख नागरी लिपि में हैं ?
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
(क) महमूद गजनवी के बाद मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह आदि शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द अंकित करवाये थे।
(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्कों पर राम-सीता की आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में ‘रामसीय’ शब्द अंकित है।
(ग) उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, बुंदेलखंड के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचुरि शासकों के लेख नागरी लिपि में है।
(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।

5. गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आड़ी लकीरें या ठोस तिकोन हैं। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के शिरों पर पूरी लकीरें बन जाती हैं और ये शिरोरेखाएं उतनी ही लम्बी रहती हैं जितनी कि अक्षरों की – चौड़ाई होती हैं। हाँ, कुछ लेखों के अक्षरों के शिरों पर अब भी कहीं-कहीं तिकोन दिखाई देते हैं। दूसरी स्पष्ट विशेषता यह है कि प्राचीन नागरी के अक्षर आधुनिक नागरी से मिलते-जुलते हैं और इन्हें आसानी से थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) ब्राह्मी लिपि और सिद्धम लिपि की शिरसंस्थाएँ कै
(ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि में क्या साम्य है?
उत्तर-
(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।
(ख) गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि तथा बाद की सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी, आडी लकीरें या ठोस तिकोन हैं। : (ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरें होती हैं और ये उतनी ही रहती हैं जितनी कि अक्षरों की चौड़ाई।
(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि के अक्षर बहुत-कुछ मिलते हैं जिन्हें थोड़े-से अभ्यास से पढ़ा जा सकता है।

6. इतना निश्चित है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या ‘नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है।

असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’, का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कह जाता होगा। देवनागरी’ की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ। हम सप्रमाण नहीं बता सकते कि यह देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया।

प्रश्न
(क) पाठ और लेख का नामोल्लेख करें।
(ख) नागरी शब्द किससे संबंधित है ?
(ग) ‘देवनागरी’ नाम के संबंध में लेखक का क्या अनुमान है ?
उत्तर-
(क) पाठ- नागरी लिपिालेखक- गुणाकर मुले।
(ख) नागरी शब्द किसी नगर से संबंधित है।
(ग) लेखक का अनुमान है कि यह ‘नगर’ पटना ही होगा। उसके अनुमान का आधार यह है कि चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था। इसलिए गुप्तों की राजधानी को ‘देवनगर’ कहा जाता होगा। ‘देवनगर’ की लिपि होने के कारण इसका नाम ‘देवनागरी’ पड़ा। किन्तु लेखक का यह सुनिश्चित मत नहीं है।

7. नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिन्दी का साहित्य मिलने लग जाता है। हिन्दी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं) के ‘दोहाकोश’ की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है वह दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्तलिपियाँ मिली हैं। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ-मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं। इस समय से इन भाषाओं के लेख मिलने लगते हैं।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य कब से मिलता है?
(ग) हिन्दी के आदिकवि कौन थे और उनकी कौन-सी पुस्तक किस लिपि में उपलब्ध है?
(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में किनका जन्म इस काल में हुआ?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपिा लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य आठवीं-नौवीं सदी से मिलता है।
(ग) हिन्दी के आदिकवि आठवीं सदी के सरहपाद थे। उनकी पुस्तक ‘दोहाकोश’ है जो दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है।
(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में मराठी, बंगला आदि का जन्म भी आठवीं-नौवीं सदी में होने लगा था।

8. ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में प्राचीन मराठी भाषा के लेख मिलने लग जाते हैं। अक्ष (कुलाबां जिला) से शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख (1012 ई०) मिला है, जो संस्कृत, मराठी भाषाओं में है और इसकी लिपि नागरी है। परन्तु दिवे आगर (रत्नागिरि जिला) ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठी का आद्यलेख माना जाता है। नागरी लिपि में लिखा गया यह ताम्रपट 1060 ई. का है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) नागरी लिपि के लेख कबसे मिलने लगते हैं?
(ग) गद्यांश का सारांश प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) नागरी लिपि के लेख ग्यारहवीं सदी से मिलने लगते हैं।
(ग) ग्यारहवीं सदी से नागरी लिपि में मराठी भाषा के लेख मिलने लगते हैं। शिलाहार शासक केशिदेव (प्रथम) का एक शिलालेख 1012 ई का मिला है जो है तो संस्कृत मराठी में लेकिन इसकी लिपि नागरी है। दिवे-आगर में प्राप्त ताम्रपट पूर्णतः मराठी में है। इसे मराठा का आधलेख माना जाता है। यह ताम्रपट 1060 ई. का है।

9. उत्तर भारत में पहले-पहल गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। अनेक विद्वानों का मत है कि ये गुर्जर-प्रतीहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन खड़ा किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार हुए। मिहिर भोज (840-81 ई.) की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

प्रश्न-
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) उत्तर भारत में सर्वप्रथम नागरी के लेख किनके शासन-काल में मिलते हैं ?
(ग) किस गुर्जर-प्रतीहार की प्रशस्ति नागरी लिपि में है ?
उत्तर-
(क) पाठ-नागरी लिपि। लेखक-गुणाकर मुले।
(ख) उत्तर भारत में पहले-पहले गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। ईसा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती में और तत्पश्चात् कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था।
(ग) गुर्जर-प्रतीहार राजा मिहिर भोज (840-81 ई०) ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि में है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें –

प्रश्न 1.
गुणाकर मूले किस निबंध के रचयिता हैं ?
(क) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(ख) नागरी लिपि
(ग) परंपरा का मूल्यांकन
(घ). आविन्यों
उत्तर-
(ख) नागरी लिपि

प्रश्न 2.
देवनागरी लिपि में मुद्रण के टाइप कब बने ?
(क) दो सदी पहले
(ख) दो दशक पहले
(ग) बीसवीं सदी में
(घ) 11वीं सदी में
उत्तर-
(क) दो सदी पहले

प्रश्न 3.
नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
(क) पन्द्रहवीं सदी में
(ख) ईसा पूर्व काल में
(ग) 8वीं-11वीं सदी में
(घ) कभी नहीं
उत्तर-
(ग) 8वीं-11वीं सदी में

प्रश्न 4.
पहले दक्षिण भारत की नागरी लिपि क्या कहलाती थी?
(क) नंदिनागरी
(ख) कोंकणी
(ग) ब्राह्मी
(घ) सिद्धम
उत्तर-
(घ) सिद्धम

प्रश्न 5.
हिन्दी के आदिकवि का नाम क्या था?
(क) विद्यापति
(ख) सरहपाद
(ग) कबीर
(घ) दैतिदुर्ग
उत्तर-
(ख) सरहपाद

रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
हिन्दी तथा इसकी विविध बोलियाँ………..लिपि में लिखी जाती हैं।
उत्तर-
देवनागरी

प्रश्न 2.
अकबर के एक सिक्के में देवनागरी में……..अंकित है।
उत्तर-
रामसीय

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम…………..था।
उत्तर-
देव

प्रश्न 4.
विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को…………….कहा है।
उत्तर-नंदिनागरी

प्रश्न 5.
नागरी के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के…………………से ही मिलते हैं।
उत्तर-
दक्कन प्रदेश

प्रश्न 6.
बेलग्रोल में………….का भव्य पुतला खड़ा है।
उत्तर-
गोमटेश्वर

प्रश्न 7.
परमार शासक भोज अपने…………………..के लिए प्रसिद्ध हैं।
उत्तर-
विद्यानुसग

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में पोधियाँ कुछ समय पहले तक किस लिपि में लिखी जाती थीं?
उत्तर-
दक्षिण भारत में कुछ समय पहले तक पोथियाँ नागरी लिपि में लिखी जाती थीं।

प्रश्न 2.
पुरन काल की लिपि क्या थी?
उत्तर-
गुप्त काल की लिपि ब्राह्मी लिपि थी।

प्रश्न 3.
बादशाह अकबर के सिक्कों पर कौन सी आकृति तथा कौन सा शब्द अंकित था ?
उत्तर-
बादशाह अकबर के सिक्कों पर “राम-सीता” की आकृति और नागरी लिपि में रामसीय शब्द अंकित था।

प्रश्न 4.
राष्ट्रकूट शासक मूलतः कहाँ के रहने वाले थे तथा इनकी मातृभाषा क्या थी?
उत्तर-
राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्नाटक के रहनेवाले थे तथा इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी।

प्रश्न 5.
नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता क्या है ?
उत्तर-
नागरी लिपि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस रूप में लिखी जाती है उसी रूप में बोली भी जाती है।

प्रश्न 6.
किन-किन शासकों के लेख नंदिनागरी लिपि में हैं?
उत्तर-
कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख देवनागरी लिपि में हैं।

प्रश्न 7.
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर-
उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम देवनागरी लिपि के नाम से जानते हैं।

प्रश्न 8.
महावीराचार्य कौन थे?
उत्तर-
महावीराचार्य अन्निछवर्ष के जमाने के गणितज्ञ थे जिन्होंने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की।

प्रश्न 9.
देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर-
करीब दो सदी पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं। इस प्रकार ही देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता आयी है।

प्रश्न 10.
देवनागरी लिपि में कौन-कौन-सी भाषाएं लिखी जाती हैं ?
उत्तर-
देवनागरी लिपि में मुख्यतः नेपाली, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी भाषाएं लिखी जाती हैं।

प्रश्न 11.
लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?
उत्तर-
लेखक ने गुजराती, बंगला और ब्राह्मी लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।

प्रश्न 12.
नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहाँ प्राप्त हुए हैं ? उनके विवरण दें।
उत्तर-
विद्वानों के अनुसार नागरी लिपि के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के नीचे के दक्कन प्रदेश से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 13.
उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं ?
उत्तर-
विद्वानों का विचार है कि उत्तर भारत में मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि गुर्जर प्रतिहार राजाओं के अभिलेख में पहले-पहल नागरी लिपि के मेख प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 14.
नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
उत्तर-
ईसा की आठवीं-ग्यारहवीं सदियों में नागरी लिपि पूरे देश में व्याप्त थी। अतः उस समय यह एक सार्वदेशिक, लिपि थी।

नागरी लिपि लेखक परिचय

गुणाकर मुलेका जन्म 1935 ई० में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक गाँव में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्रामीण परिवेश में हुई । शिक्षा की भाषा मराठी थी। उन्होंने मिडिल स्तर तक मराठी पढ़ाई भी । फिर वे वर्धा चले गये और वहाँ उन्होंने दो वर्षों तक नौकरी की, साथ ही अंग्रेजी व हिंदी का अध्ययन किया । फिर इलाहाबाद आकर उन्होंने गणित विषय में मैट्रिक से लेकर एम० ए० तक की पढ़ाई की । सन् 2009 में मुले जी का निधन हो गया ।

गुणाकर मुले के अध्ययन एवं कार्य का क्षेत्र बड़ा ही व्यापक है । उन्होंने गणित, खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरालिपिशास्त्र और प्राचीन भारत का इतिहास व संस्कृति जैसे विषयों पर खूब लिखा है। पिछले पच्चीस वर्षों में मुख्यतः इन्हीं विषयों से संबंधि तं उनके 2500 से अधिक लेखों तथा तीस पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। उनकी प्रमुख कृतियों के नाम हैं – ‘अक्षरों की कहानी’, ‘भारत : इतिहास और संस्कृति’, ‘प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक’, ‘आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक’, ‘मैंडलीफ’, ‘महान वैज्ञानिक’, ‘सौर मंडल’, ‘सूर्य’; ‘नक्षत्र-लोक’, ‘भारतीय लिपियों की कहानी’, ‘अंतरिक्ष-यात्रा’, ‘ब्रह्मांड परिचय’, ‘भारतीय विज्ञान की कहानी आदि । गुणाकर मुले की एक पुस्तक है ‘अक्षर कथा’ । इस पुस्तक में उन्होंने संसार की प्रायः सभी प्रमुख पुरालिपियों की विस्तृत जानकारी दी है।

प्रस्तुत निबंध गुणाकर मुले की पुस्तक भारतीय लिपियों की कहानी’ से लिया गया है । इसमें हिंदी की अपनी लिपि नागरी या देवनामरी के ऐतिहासिक विकास की रूपरेखा स्पष्ट की गयी है। यहाँ हमारी लिपि की प्राचीनता, व्यापकता और शाखा विस्तार का प्रवाहपूर्ण शैली में प्रामाणिक आख्यान प्रस्तुत किया गया है। तकनीकी बारीकियों और विवरणों से बचते हुए लेखक ने निबंध को बोझिल नहीं होने दिया है तथा सादगी और सहजता के साथ जरूरी ऐतिहासिक जानकारियाँ देते हुए लिपि के बारे में हमारे भीतर आगे की जिज्ञासाएँ जगाने की कोशिश की है।

नागरी लिपि Summary in Hindi

पाठ का सारांश

जिस लिपि में यह लेख छपा है, उसे नागरी या देवनागरी लिपि कहते हैं। करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगीं इसलिए इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई है।

हिन्दी तथा इसकी विविध बोलियाँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। हमारे, पड़ोसी देश नेपाल की नेपाली व नेवारी भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं। मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी लिपि के बारे में एक और महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि संसार में जहाँ भी संस्कृत-प्राकृत की पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, वे प्रायः देवनागरी लिपि में ही छपती हैं।

गुजराती लिपि देवनागरी से अधिक भिन्न नहीं है। बंगला लिपि प्राचीन नागरी लिपि की पुत्री नहीं, तो बहन अवश्य है। हाँ, दक्षिण भारत की लिपियाँ वर्तमान नागरी से काफी भिन्न दिखाई देती हैं। लेकिन यह तथ्य हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए कि आज कुछ भिन्न-सी दिखाई देनेवाली – दक्षिण भारत की ये लिपियाँ (तमिल-मलयालम और तेलुगु-कन्नड़) भी नागरी की तरह प्राचीन ब्राह्मी से ही विकसित हुई हैं।

दक्षिण भारत में पोथियाँ लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था। दक्षिण भारत की यह नागरी लिपि नंदिनागरी कहलाती थी। कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि : के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख नदिनागरी लिपि में हैं।

बारहवीं सदी में केरल के शासकों ने सिक्कों पर ‘वीरकेरलस्य जैसे शब्द नागरी लिपि में अंकित हैं। श्रीलंका के पराक्रमबाहु, विजयबाहु (बारहवीं सदी) आदि शासकों के सिक्कों पर भी नागरी अक्षर देखने को मिलते हैं।

उत्तर भारत के महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह, अकबर आदि शासकों ने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए थे। उत्तर भारत में मेवाड़ के गुहिल, सांभर-अजमेर के चौहान, कन्नौज के गाहड़वाल, काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी, आबू के परमार, जेजाकभुक्ति (बुंदेलखण्ड) के चंदेल तथा त्रिपुरा के कलचूरि शासकों के लेख नागरी लिपि में ही हैं। उत्तर भारत की इस नागरी लिपि को हम देवनागरी के नाम से जानते हैं।

नागरी नाम की उत्पत्ति तथा इसके अर्थ के बारे में विद्वानों में बड़ा मतभेद है। एक मत के अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले-पहल इस लिपि का इस्तेमाल किया, इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा।

‘पादताडितंकम्’ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर या नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है। असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना हो। चंद्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’ का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था। इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा। देवनगर की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ।

कर्णाटक प्रदेश का श्रवणबेलगोल स्थान जैनों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। इस स्थान से विविध भाषाओं और लिपियों के अनेक लेख मिले हैं। एक अन्य नागरी लेख में लिखा है चावुण्डराजे करविय ले। ये लेख दक्षिणी शैली की नागरी लिपि में हैं।

देवगिरि के यादव राजाओं के नागरी लिपि में बहुत सारे लेख मिलते हैं। कल्याण के पश्चिमी चालुक्य नरेशों के लेख भी नागरी लिपि में हैं। उड़ीसा (कलिंग प्रदेश) में ब्राह्मी को एक विशेष शैली, कलिंग लिपि का आस्तित्व था, परंतु गंगवंश के कुछ शासकों के लेख नागरी लिपि में भी मिलते हैं।

उत्तर भारत में पहले-पहल गुर्जर-प्रतीहार राजाओं के लेखों में नागरी लिपि देखने को मिलती है। मिहिर भोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतीहार शासक हुए। मिहिर भोज 1840-81 ई की ग्वालियर प्रशस्ति नागरी लिपि (संस्कृत भाषा) में है।

शब्दार्थ

लिपि : ध्वनियों के लिखित चिह्न
नागरी : नगर की, शहर की
अनुकरण : नकल
ब्राह्मी : एक प्राचीन भारतीय लिपि जिससे नागरी आदि लिपियों का विकास हुआ
पाथियाँ : पुस्तकें, ग्रंथ
टकसाल : जहाँ सिक्के ढलते हैं
रामसीय : राम-सीता
अस्तित्व : पहचान, सत्ता
हस्तलिपि : हाथ की लिखावट
आद्यलेख : अत्यंत प्राचीन प्रारंभिक लेख
विद्यानुराग : विद्या से प्रेम

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 11 प्यारे नन्हें बेटे को

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 11 प्यारे नन्हें बेटे को

 

प्यारे नन्हें बेटे को वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

प्यारे नन्हे बेटे को कविता का सारांश लिखिए Bihar Board प्रश्न 1.
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म कब हुआ था?
(क) 1 जनवरी, 1937 ई..
(ख) 2 फरवरी, 1938 ई.
(ग) 10 मार्च, 1935 ई.
(घ) 5 मार्च, 1932 ई.
उत्तर-
(क)

Class 12 Hindi Vitan Chapter 1 Summary Bihar Board प्रश्न 2.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ किसकी लिखी हुई कविता है?
(क) भूषण
(ख) तुलसीदास
(ग) जायसी
(घ) विनोद कुमार शुक्ल
उत्तर-
(घ)

प्यारी पत्नी पर कविता Bihar Board Class 12 Hindi प्रश्न 3.
रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार विनोद कुमार शुक्ल को किस सन् में मिला?
(क) 1992 ई. में
(ख) 1985 ई. में
(ग) 1980 ई. में
(घ) 1990 ई. में
उत्तर-
(क)

Biharboard Inter Result Class 12 Hindi प्रश्न 4.
विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब मिला?
(क) 1999 ई. में
(ख) 1985 ई. में
(ग) 1995 ई. में
(घ) 1990 ई. में
उत्तर-
(क)

Saransh Meaning In Hindi Bihar Board प्रश्न 5.
“प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा किसका प्रतीक है?
(क) बन्दूक का
(ख) मशीन का
(ग) कर्म का
(घ) धर्म का
उत्तर-
(ग)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठा।
“मैं…….. हो गया’
उत्तर-
दादा से बड़ा

प्रश्न 2.
प्यारी बिटिया से पूछंगा बतलाओ आस–पास………….. है।
उत्तर-
कहाँ–कहाँ लोहा

प्रश्न 3.
चिमटा, करकुल, सिगड़ी, समसी, दरवाजे की साँकल, कब्जे खीला दरवाजे में………… वह बोलेगी झटपट,
उत्तर-
धंसा हुआ

प्रश्न 4.
रुककर वह फिर याद करेगी एक तार लोहे का लंबा लकड़ी के……….. पर
उत्तर-
दो खंबों पर

प्रश्न 5.
तना बंधा हुआ बाहर सूख रही जिस पर भव्या की गीली चड्डी।… फिर…….. साइकिल पूरी।
उत्तर-
एक सैफ्टी पिन

प्यारे नन्हें बेटे को अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विनोद कुमार शुक्ल की कविता का नाम है।
उत्तर-
प्यारे नन्हें बेटा को।

प्रश्न 2.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा किसका प्रतीक मान है?
उत्तर-
कर्म को।

प्रश्न 3.
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता किस शैली में लिखी गई है?
उत्तर-
वार्तालाप शैली में।

प्रश्न 4.
विनोद कुमार शुक्ल किस विश्वविद्यालय में एसोशिएट प्रोफेसर रहे हैं?
उत्तर-
इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय।

प्रश्न 5.
विनोद कुमार शुक्ल निराला सृजनपीठ में जून 1994 से जून 1996 तक किस पद पर रहे?
उत्तर-
अतिथि साहित्यकार के पद पर।

प्यारे नन्हें बेटे को पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
‘बिटिया’ से क्या सवाल किया गया है?
उत्तर-
बिटिया से उसके पिता द्वारा सवाल किया गया है कि बतलाओ, आसपास लोहा कहाँ है।

प्रश्न 2.
“बिटिया’ कहाँ–कहाँ लोहा पहचान पाती है?
उत्तर-
बिटिया अपने आसपास उपस्थित लोहे को पहचान पाती है। उसके आसपास चिमटा, करछुल, अँगीठी, सँड़सी, दरवाजे की साँकल, कच्चे उसमें लगी कीलें आदि हैं, जिनमें वह लोहे को पहचानती है।

प्रश्न 3.
कवि लोहे की पहचान किस रूप में करते हैं? यही पहचान उनकी पत्नी किस रूप में कराती है?
उत्तर-
कवि लोहे की पहचान अपने आसपास की वस्तुओं के माध्यम से कराते हैं। उनके आसपास फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली आदि वस्तुएँ हैं, जिनके द्वारा वो लोहे की पहचान कराते हैं।

है यही पहचान उनकी पत्नी अपने आसपास उपलब्ध वस्तुओं से कराती हैं। वह अपने आसपास उपलब्ध बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू के माध्यम से लोहे की पहचान कराती है।

प्रश्न 4.
लोहा क्या है? इसकी खोज क्यों की जा रही है?
उत्तर-
पाठ में वर्णित भिलाई बलाडिला, छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है। यह स्थान लोहे की खदानों के लिए प्रसिद्ध है। इस आधार पर कह सकते हैं कि लोहा एक धातु है जो अपनी मजबूती, बहुउपयोगिता और सर्वव्यापकता के लिए प्रसिद्ध है। यह हमारी जिन्दगी और संबंधों में घुल–मिल गया है। यह हम मनुष्यों का आधार है, इसलिए इसकी खोज की जा रही है।

एक अन्य अर्थ में लोहा प्रतीक के रूप में है जो कर्म का प्रतीक है।

प्रश्न 5.
“इस घटना से उस घटना तक”–यहाँ किन घटनाओं की चर्चा है?
उत्तर-
“प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता में “इस घटना से उस घटना तक” उक्ति का प्रयोग दो बार किया गया है।

पिता अपनी नन्हीं बिटिया से पूछता है कि आसपास लोहा कहाँ–कहाँ है। पुनः वह उसे लोहा के विषय में जानकारी देता है, उसकी माँ भी उसे समझाती है। फिर वह सपरिवार लोहा को ढूँढ़ने का विचार करता है। अत: बेटी को सिखलाने से लेकर ढूँढ़ने का अन्तराल–”इस घटना से उस घटना तक” है। यह सब वह कल्पना के संसार में कर रहा है। पुनः जब उसकी बिटिया बड़ी हो जाती है, तो वह उसके विवाह के विषय में, उसके लिए एक प्यारा सा दूल्हा के लिए सोचता है। यहाँ पर पुनः कवि–”इस घटना से उस घटना तक” उक्ति को पुनरोक्ति करता है।

प्रश्न 6.
अर्थ स्पष्ट करें
कि हर वो आदमी
जो मेहनतकश
लोहा है
हर वो औरत
दबी सतायी
बोझ उठाने वाली, लोहा।
उत्तर-
हर व्यक्ति जो मेहनतकश है, वह लोहा है। वैसी हरेक औरत जो दबी तथा सतायी हुई है, लोहा है।

उपरोक्त पंक्तियों का विशेषताएँ यह है कि प्रत्येक व्यक्ति जो श्रम–साध्य कार्य करता है, कठोर परिश्रम जिसके जीवन का लक्ष्य है वह लोहे के समान शक्तिशाली तथा उर्जावन होता है। उसी प्रकार बोझ उठाने वाली दमन तथा शोषण की शिकार महिला भी लोहे के समान शक्ति तथा ऊर्जा से सम्पन्न होती है।

प्रश्न 7.
कविता में लोहे की पहचान अपने आसपास में की गई है। बिटिया, कवि और उनकी पत्नी जिन रूपों में इसकी पहचान करते हैं, ये आपके मन में क्या प्रभाव उत्पन्न करते? बताइए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में लोहे की पहचान अपने आस–पास में की गई है। अर्थात् अपने आसपास बिखरी वस्तुओं में ही लोहे को पड़ताल की गयी है। पहचान की परिधि में जो वस्तुएँ आई हैं वह तीन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। लड़की द्वारा पहचान की गई वस्तुएँ पारिवारिक उपयोग की है। जैसे–चिमटा, कलछुल आदि। कवि द्वारा जिन वस्तुओं का चयन किया गया है उनका व्यवहार अधिकतर पुरुषों द्वारा किया जाता है तथा उनका उपयोग सामाजिक तथा राष्ट्रीय हित में किया जाता है, जैसे–फाबड़ा, कुदाली आदि। कवि की पत्नी ने उन वस्तुओं की ओर संकेत किया है जिसका व्यवहार प्रायः महिलाओं द्वारा किया जाता है तथा जिसे. वे घर से बाहर धनोपार्जन अथवा पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति हेतु करती है जैसे–पानी की बाल्टी, हँसिया, चाकू आदि।

इस प्रकार कवि, उनकी पत्नी तथा बिटिया द्वारा तीन विविध रूपों में लोहे की पहचान की गई है। ये तीनों रूप पारिवारिक, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय मूल्यों तथा आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही मेहनतकश पुरुषों तथा दबी, सतायी मेहनती महिलाओं के प्रयासों को भी निरूपित करता है।

प्रश्न 8.
मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी बोझ उठाने वाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है?
उत्तर-
लोहा कठोर धातु है। यह शक्ति का प्रतीक भी है। इससे निर्मित असंख्य सामग्रियाँ, मनुष्य के दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। लोहा राष्ट्र की जीवनधारा है। धरती के गर्भ में दबे लोहे को अनेक यातनाएँ सहनी होती हैं। बाहर आकर भी उसे कठिन संघर्ष का सामना करना पड़ता है। कवि मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी, बोझ उठानेवाली औरत के जीवन में लोहा के संघर्षमय जीवन की झलक पाता है। उसे एक अपूर्व साम्य का बोध होता है। लोहे के समान मेहनतकश आदमी और दबी–सतायी, बोझ उठानेवाली औरत का जीवन भी कठोर एवं संघर्षमय है। लोहे के समान ही वे अपने कठोर श्रम तथा संघर्षमय जीवन द्वारा सृजन तथा मिर्माण का कार्य कर रहे हैं तथा विविध रूपों में ढाल रहे हैं।

प्रश्न 9.
यह कविता एक आत्मीय संसार की सृष्टि करती है पर यह संसार बाह्य निरपेक्ष नहीं है। इसमें दृष्टि और संवेदना, जिजीविषा और आत्मविश्वास सम्मिलित है। इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
यह कविता एक परिवार के इर्द–गिर्द घूमती है। इसमें उस परिवार के सदस्यों के जीवन के यथार्थ को चित्रित किया गया है।

परिवार का मुखिया बिटिया का पिता लोहा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपनी बेटी से पूछ रहा है कि उसके आस–पास लोहा कहाँ–कहाँ है। लड़की प्रत्युत्तर में अपने बाल सुलभ भोलापन के बीच चिमटा, कलछुल, सड़सी आदि का नाम लेती है। पुनः वह उसे सिखलाते हुए स्वयं फावड़ा, कुदाली आदि वस्तुओं के नाम से परिचित कराते हुए बतलाता है कि उन वस्तुओं में भी लोहा है। माँ द्वारा भी बिटिया को इसी आशय की जानकारी दी जाती है। कुछ अन्य वस्तुओं के विषय में वह समझाती है जिसमें लोहा है। इस प्रकार यह कविता एक आत्मीय संसार की सृष्टि करती है।

किन्तु यह वहीं तक सीमित नहीं है। यह आत्मीय संसार वाह्य निरपेक्ष नहीं है, बाहरी समस्याओं से जुड़ा हुआ है। वाह्य–संसार की घटनाओं का इसपर पूरा प्रभाव पड़ता है। लोहे की खोज के माध्यम से कवि ने जीवनमूल्यों के यथार्थ को रेखांकित किया है। इसमें दृष्टि, संवेदना जिजीविषा और आत्म विश्वास का अपूर्व संगम है। संसार में संघर्षरत पुरुषों तथा महिलाओं की संवेदना यहाँ मूर्त हो उठी है। जिजीविषा एवं आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति भी युक्तियुक्त ढंग से हुई है। लोहा कदम–कदम पर और एक गृहस्थी में सर्वव्याप्त है। ठोस होकर भी यह हमारी जिन्दगी और संबंधों में घुला–मिला हुआ और प्रवाहित है।.

प्रश्न 10.
बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है, ऐसा क्यों?
उत्तर-
इस कविता में बिटिया को उसके पिता लोहा के विषय में सिखलाते हैं, वे उसकी बुद्धि का परीक्षा लेते हुए उससे पूछते हैं कि उसके आसपास लोहा कहाँ–कहाँ है। नन्हीं बिटिया आत्मविश्वास के साथ उनके प्रश्नों का उत्तर सहज भाव से देती है। पुनः माँ उससे वही प्रश्न पूछते हुए लोहे के विषय में समझाती है तथा कुछ अन्य जानकारी देती है।

इस प्रसंग में पिता उसे सिखलाते हैं जबकि माँ उसे इस विषय में समझाती है। दोनों की भूमिका में स्पष्ट अन्तर है इसका कारण यह है कि यह प्रायः देखा जाता है कि पिता द्वारा अपने बच्चों को सिखलाया जाता है, किसी कार्य को करने की सीख दी जाती है, अभ्यास कराया जाता है। माँ द्वारा उन्हें स्नेह भाव से किसी कार्य के लिए समझाया जाता है।

प्यारे नन्हें बेटे को भाषा की बात

प्रश्न 1.
इस कविता की भाषा पर आलोचनात्मक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
‘प्यारे नन्हें बेटे को’ नामक इस कविता की शुरुआत मध्यमवर्गीय व्यक्ति और उसकी नन्हीं सी बिटिया की कौतूहलपूर्ण बातों से होती है। इसमें दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले शब्दों का भरपूर प्रयोग हुआ है। कविता में कुछ शब्द तो नितांत घिसे–पिटे रूप में प्रयुक्त है। भाषा इतनी सहज, सरल तथा बोधगम्य है कि आम आदमी या सामान्य शिक्षित भी इसे आसानी से समझ सकता है। ऐसी भाषा में भी एक ताजगी है एक चमक है। कविता की भाषा की एक अन्य खूबी उसकी मौलिकता है।

कविता में तत्सम, तद्भव शब्दों के साथ अंग्रेजी भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। इससे कविता की स्वाभाविकता अप्रभावित रही है। कविता के अंत में साधारण सी धातु लोहा प्रतीक अर्थ ग्रहण कर लेती है, जिसे सामान्य शिक्षित के लिए समझना सरल नहीं है। इन सबसे ऊपर कविता की भाषा सहज, बोधगम्य तथा भावाभिव्यक्ति में सक्षम है।

प्रश्न 2.
व्युत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ–औरत, लड़की, बेटा, बिटिया, आदमी, लोहा, कंधा, छत्ते, दूल्हा, बाल्टी, कुआँ, पिन, साइकिल, दादा।
उत्तर-

  • शब्द – प्रकृति
  • औरत – विदेशज
  • लड़की – तद्भव
  • लोहा – तद्भव
  • बेटा – तद्भव
  • बिटिया – तद्भव
  • आदमी – तद्भव
  • कंधा – तद्भव
  • बाल्टी – तद्भव
  • कुआँ – तद्भव
  • पिन – विदेशज
  • साइकिल – विदेशज
  • दादा – देशज

प्रश्न 3.
नीचे दिए शब्दों से वाक्य बनाएँ कंधा, दादा, बिटिया, लोहा, गला, घंटी, बैलगाड़ी, घटना, बोझ।
उत्तर-

  • शब्द – वाक्य प्रयोग
  • कंधा – पिताजी की असमय मृत्यु से घर की जिम्मेदारी किशोर के कंधों पर आ पड़ी।
  • दादा – हमें वृद्ध दादा जी के सुख–दुख का ध्यान रखना चाहिए।
  • बिटिया – नन्हीं बिटिया की तोतली बातें सुनकर पिताजी प्रसन्न हो उठे।
  • लोहा – लोहा ऐसी धातु है जिसके अभाव में विकास की कल्पना करना भी कठिन है।
  • गला – उसने साहूकार का कर्ज चुकता कर किसी तरह गला छुड़ाया।
  • घंटी – बैलों के गले में बँधी घंटी की आवाज मधुर लग रही थी।
  • बैलगाड़ी – प्राचीन समय में बैलगाड़ी यातायात का प्रमुख साधन थी।
  • घटना – देखो, इस घटना का जिक्र किसी के सामने न करना।
  • अभी – इन नाजुक कंधों पर इतना बोझ मत डालो।

प्यारे नन्हें बेटे को कवि परिचय विनोद कुमार शुक्ल (1937)

जीवन–परिचय–हिन्दी साहित्य की दोनों विधाओं में अपना अप्रतिम अवदान करनेवाले विनोद कुश्मार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी, 1937 ई. को राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनका निवासस्थान रायपुर, छत्तीसगढ़ में है। वे इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर तथा निराला सृजनपीठ में जून 1994 से जून 1996 तक अतिथि सलाहकार रहे। उनके अप्रतिम साहित्य अवदान के लिए उन्हें रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार (1992), दयावती मोदी कवि.. शेखर सम्मान (1997) तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999) द्वारा विभूषित किया गया।

रचनाएँ–विनोद कुमार शुक्ल का पहला कविता संग्रह ‘लगभग जयहिन्द’ पहचान सीरीज के अन्तर्गत 1971 में प्रकाशित हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं–

कविता संग्रह–वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह (1981), सबकुछ होना बचा रहेगा (1992), अतिरिक्त नहीं (2001)।

उपन्यास–नौकर की कमीज, खिलेगा तो देखेंगे, दीवार में एक खिड़की रहती थी। कहानी संग्रह–पेड़ पर कमरा, महाविद्यालय।

विशेष–इनके उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद तथा ‘पेड़ पर कमरा’ कहानी संग्रह का इतालवी भाषा में अनुवाद। ‘नौकर की कमीज’ उपन्यास पर मणि कौल द्वारा फिल्म का निर्माण भी किया गया।

काव्यगत विशेषताएं–विनोद कुमार शुक्ल ने सातवें–आठवें दशक में अपनी साहित्यिक यात्रा शुरू की। कुछ समय उनकी एक–दो कहानियाँ आई, जिन्होंने अपनी विशिष्टताओं के कारण लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। अपनी रचनाओं में वे अत्यन्त मौलिक, न्यारे और अद्वितीय थे। उनकी इस खूबी की जड़ें संवेदना तथा अनुभूति में थी और यह भीतर से पैदा हुई खासियत थी। उनकी यह अद्वितीय मौलिकता अधिक स्फुट, विपुल और बहुमुखी होकर उनकी कविता, कहानियों तथा उपन्यासों में उजागर होती आई है। उनकी कविता मामूली बातचीत की मद्धिम लय और लहजे में शुरू ही नहीं खत्म भी होती है। उनके समूचे साहित्य में आम आदमी की दिनचर्या में सामान्य रूप से व्यवहृत तथा एक हद तक घिसे–पिटे शब्दों का प्रयोग हुआ है।

प्यारे नन्हें बेटे को कविता का सारांश

“प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता का नायक भिलाई, छत्तीसगढ़ का रहनेवाला है। अपने प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठाए अपनी नन्हीं बिटिया से जो घर के भीतर बैठी हुई है पूछता है कि “बतलाओ आसपास कहाँ–कहाँ लोहा है।” वह अनुमान करता है कि उसकी नन्हीं बिटिया उसके प्रश्न का उत्तर अवश्य देगी। वह बतलाएगी कि चिमटा, कलछुल, कड़ाही तथा जंजीर में लोहा है। वह यह भी कहेगी कि दरवाजे के साँकल (कुंडी) कब्जे, सिटकिनी तथा दरवाजे में धंसे हुए पेंच (स्क्रू) के अन्दर भी लोहा है। उक्त बातें वह पूछने पर तत्काली कहेगी। उसे यह भी याद आएगा कि लकड़ी के दो खम्भों पर बँधा हुआ तार भी लोहे से निर्मित है जिस पर उसके बड़े भाई की गीली चड्डी है। वह यह कहना भी नहीं भूलेगी कि साइकिल और सेफ्टीपिन में भी लोहा है।

उस दुबली–पतली किन्तु चतुर (बुद्धिमती) नन्हीं बिटिया को कवि शीघ्रातिशीघ्र बतला देना चाहता है कि इसके अतिरिक्त अन्य किन–किन सामग्रियों में लोहा है जिससे उसे इसकी पूरी जानकारी मिल जाए।

कवि उसे समझाना चाहता है कि फाबड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसुला, खुरपी, बैलगाड़ी के चक्कों का पट्टा तथा बैलों के गले में काँसे की घंटी के अन्दर की गोली में लोहा है। कवि की पत्नी उसे विस्तार से बतलाएगी कि बाल्टी, कुएँ में लगी लोहे की घिरनी, हँसियाँ और चाकू में भी लोहा है। भिलाई के लोहे की खानों में जगह–जगह लोहे के टीले हैं?

इस प्रकार कवि का विचार है कि वह समस्त परिवार के साथ मिलकर तथा सोच विचार कर लोहा की खोज करेगा। सम्पूर्ण घटनाक्रम को तह तक जाकर वह पता लगा पाएगा कि हर मेहनतकश आदमी लोहा है।

कवि यह मानता है कि प्रत्येक दबी–सतायी, बोझ उठाने वाली औरत लोहा है। लोहा कदम–कदम पर और हर एक गृहस्थी में सर्वव्याप्त है।

कवि इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि हर मेहनतकश व्यक्ति लोहा है तथा हर दबी कुचली, सतायी हुई तथा बोझ उठाने वाली औरत लोहा है। कवि का कहना है

कि हर वो आदमी
जो मेहनतकश लोहा है
हर वो औरत
दबी सतायी बोझ उठानेवाली, लोहा।

कविता का भावार्थ

1. प्यारी बिटिया से पूछंगा
“बतलाओ आसपास
कहाँ–कहाँ लोहा है”
चिमटा, करकुल, सिगड़ी
समसी, दरवाजे की साँकल, कब्जे
खीला दरवाजे में फंसा हुआ’
वह बोलेगी झटपट।

व्याख्या–प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धत है। इसके रचनाकार यशस्वी कवि विनोद कुमार शुक्ल हैं। इन पंक्तियों में उत्कृष्ट कल्पनाशीलता का दर्शन होता है। इसके साथ जीवन का यथार्थ भी है। कवि अपनी बिटिया से कुछ पूछना चाहता है। उसे पूर्ण विश्वास है कि वह उसका उत्तर अवश्य देगी।

कवि अपनी बिटिया से पूछता है कि लोहा कहाँ–कहाँ पर है। वह तत्काल उसका उत्तर देगी। वह कहेगी कि लोहा चिमटा, कलछुल, कड़ाही तय संड्सी में है। वह यह भी कहेगी कि लोहा दरवाजे की सॉकल (कुंडी), कब्जे तथा पेंच में भी है। वह कवि के प्रश्न का उत्तर तत्काल दे देगी।

उपरोक्त काव्यांश में कवि के कहने का आशय यह है कि वह अपनी बिटिया को लोहा के महत्व के बारे में सिखलाना (शिक्षा देना) चाहता है क्योंकि उसकी दृष्टि में लोहा मानव जीवन की एक अमूल्य निधि है। वह उसकी उपयोगिता से भलीभाँति परिचित है।

2. इसी तरह
घर भर मिलकर
धीरे–धीरे सोच सोचकर
एक साथ ढूँढेंगे
कहा–कहाँ लोहा है–

व्याख्या–प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक दिगंत, भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता विद्वान कवि विनोद कुमार शुक्ल हैं। इन पंक्तियों में कवि लोहे की खोज सपरिवार करना चाहता है। कवि का कथन है कि लोहा की खोज वह एक साथ मिलकर धीरे–धीरे करेगा। घर के सभी सदस्यों के साथ वह यह कार्य करेगा। इन पंक्तियों में लोहा खोजने हेतु उसकी उत्कंठा स्पष्ट झलकती है।

3. “हर बो औरत
दबी सतायी
बोझ उठानेवाली लोहा !
जल्दी–जल्दी मेरे कंधे से
ऊँचा हो लड़का
लड़की का हो दूल्हा, प्यारा

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य–पुस्तक दिगंत भाग–2 के “प्यारे नन्हें बेटे को” शीर्षक कविता से उद्धत है। इसके रचयिता विनोद कमार शुक्ल हैं। लेखक ने इन पंक्तियों में मेहनतकश, दबी–दबायी बोझा ढोने वाली औरत के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है तथा उसके सुन्दर भविष्य की कामना की है।

इन पंक्तियों में कवि का कहना है कि प्रत्येक वह औरत जो दबी, दबी तथा बोझा उठाने वाली है, अर्थात् परिश्रमी है, कठिन कार्यों में लगी हुई है, वह लोहा है। बिटिया का बाप प्यारे नन्हें बेटे को कंधे पर बैठा कर यह कल्पना कर रहा है–कुछ दिनों के बाद उससे भी अधिक ऊँचा और लम्बा हो जाएगा। बिटिया के लिए प्यारा दुल्हा मिल जाएगा।

कवि का कहने का आशय यह है कि हरेक औरत जो दबी–कुचली तथा बोझा ढोनेवाली है, कठिन परिश्रम करती है वह लोहा के समान कठोर, उपयोगी तथा सबको प्रिय होती है। कविता में बिटिया का पिता कल्पना करता है कि कुछ दिनों बाद उसका नन्हा बेटा बड़ा हो जाएगा उससे अधिक ऊँचा और लम्बा हो जाएगा। वह (नन्हा बेटा) अपने पिता से भी अधिक ऊँचे पद पर होगा।

उसकी प्यारी बिटिया भी सयानी हो जाएगी तथा उसके लिए योग्य तथा सुन्दर दूल्हा मिल जाएगा। वह मधुर कल्पना में निमग्न है।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है

Bihar Board Class 10 Hindi अति सूधो सनेह को मारग है Text Book Questions and Answers

कविता के साथ

अति सूधो सनेह को मारग है व्याख्या Bihar Board प्रश्न 1.
कवि प्रेममार्ग को अति सूधों क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?
उत्तर-
क्रवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं मधुर बताए हैं। ये कहते हैं कि प्रेम मार्ग पर चलना सरल है। इस पर चलने के लिए बहुत अधिक छल-कपट की आवश्यकता नहीं है। प्रेम पथ पर अग्रसर होने के लिए अत्यधिक सोच-विचार नहीं करना पड़ता और न ही किसी बुद्धि बल की आवश्यकता होती है। इसमें भक्त की भावना प्रधान होती है। प्रेम की भावना से आसानी से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम में सर्वस्व देने की बात होती है लेने की अपेक्षा लेश मात्र भी नहीं होता। यह मार्ग टेढ़ापन से मुक्त है। प्रेम में प्रेमी बेझिझक निःसंकोच भाव से सरलता से; सहजता से प्रेम करने वाले से एकाकार कर लेता है। इसमें दो मिलकर एक हो जाते हैं। दो भिन्न अस्तित्व नहीं बल्कि एक पहचान स्थापित हो जाती है।

अति सूधो सनेह को मारग Bihar Board प्रश्न 2.
‘मन लेह पै देह छटाँक नहीं’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
मन’ माप-तौल की दृष्टि से अधिक वजन का सूचक जबकि ‘छटाँक’ बहुत ही अल्पता का सूचक है। कवि कहते हैं कि प्रेमी में देने की भावना होती है लेने की नहीं। प्रेम में प्रेमी अपने इष्ट को सर्वस्व न्योछावर करके अपने को धन्य मानते हैं। इसमें संपूर्ण समर्पण की भावना उजागर किया गया है। प्रेम में बदले में लेने की आशा बिल्कुल नहीं होती।

मीर मुंशी ने किस कवि का वध किया था Bihar Board प्रश्न 3.
द्वितीय छंद किसे संबोधित हैं और क्यों?
उत्तर-
द्वितीय छंद बादल को संबोधित है। इसमें मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति है। मेघं का वर्णन इसलिए किया गया है कि मेघ विरह-वेदना में अश्रुधारा प्रवाहित करने का जीवंत उदाहरण है। प्रेमी अपनी प्रेमाश्रुओं की अविरल धारा के माध्यम से प्रेम प्रकट करता है। इसमें निश्छलता एवं स्वार्थहीनता होता है। बादल भी उदारतावश दूसरे के परोपकार के लिए अमृत रूपी जल वर्षा करता है। प्रेमी के हृदय रूपी सागर में प्रेम रूपी अथाह जल होता है जिसे इष्ट के निकट पहुँचाने की आवश्यकता है। बादल को कहा जा रहा है कि तुम परोपकारी हो। जिस प्रकार सागर के जल को अपने माध्यम से जीवनदायनी जल के रूप में वर्षा करते हो उसी प्रकार मेरे प्रेमाश्रुओं को भी मेरी इष्ट के लिए, उसके जीवन के लिए प्रेम सुधा रस के रूप में बरसाओ। विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को मेघ के माध्यम से अत्यंत कलात्मक । रूप में अभिव्यक्त किया गया है।

अति सुधु स्नेह को मारग Bihar Board प्रश्न 4.
परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
परहित के लिए ही देह, बादल धारण करता है। बादल जल की वर्षा करके सभी प्राणियों को जीवन देता है। प्राणियों में सुख-चैन स्थापित करता है। उसकी वर्षा उसके विरह के आँसू के प्रतीक स्वरूप हैं। उसके विरह के आँसू, अमृत की वर्षा कर जीवनदाता हो जाता है। बादल शरीर धारण करके सागर के जल को अमृत बनाकर दूसरे के लिए एक-एक बूंद समर्पित कर देता है। अपने लिए कुछ भी नहीं रखता। वह सर्वस्व न्योछावर कर देता है। बदले में कुछ । भी नहीं लेता है। निःस्वार्थ भाव से वर्षा करता है। उसका देह केवल परोपकार के लिए निर्मित हुआ है।

अति सूधो सनेह को मारग है का अर्थ Bihar Board प्रश्न 5.
कवि कहाँ अपने आसुओं को पहुंचाना चाहता है और क्यों ?
उत्तर-
कवि अपने प्रेयसी सुजान के लिए विरह-वेदना को प्रकट करते हुए बादल से अपने प्रेमाश्रुओं को पहुंचाने के लिए कहता है। वह अपने आँसुओं को सुजान के आँगन में पहुंचाना चाहता  है। क्योंकि वह उसकी याद में व्यथित है और अपनी व्यथा की आँसुओं से प्रेयसी को भिगो देना चाहता है। वह उसके निकट आँसुओं को पहुंचाकर अपने प्रेम की आस्था को शाश्वत रखना चाहता है।

अति सूधो सनेह को मारग है की व्याख्या Bihar Board प्रश्न 6.
व्याख्या करें:
(क) यहाँ एक ते दूसरौ ऑक नहीं
(ख) कछु मेरियो पीर हिएं परसौ
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य पुस्तक के कवि घनानंद द्वारा रचित ‘अति सधो सनेह को मारग है” पाठ से उद्धृत है। इसके माध्यम से कवि प्रेमी और प्रेयसी का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो की पहचान अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि दोनों मिलकर एक रूप में स्थित हो जाते हैं। प्रेमी निश्चल भाव से सर्वस्व समर्पण की भावना रखता है और तुलनात्मक अपेक्षा नहीं करता है। मात्र देता है, बदले में कुछ लेने की आशा नहीं करता है।
प्रस्तुत पंक्ति में कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करते हैं कि हे सुजान सुनो! – यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दूसरा चिह्न नहीं है। मेरे हृदय में मात्र तुम्हारा ही चित्र अंकित है।

(ख) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य के पाठ्य-पुस्तक से कवि घनानंद-रचित “मो अॅसवानिहिं लै बरसौ” पाठ से उद्धृत है। प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि परोपकारी बादल से निवेदन किये हैं कि मेरे हृदय की पीड़ा को भी कभी स्पर्श किया जाय और मेरे हार्दिक विरह-वेदना को प्रकट करने वाली आंसुओं को अपने माध्यम से मेरे प्रेयसी सुजान के आँगन तक वर्षा के रूप में पहुंचाया जाय।

प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कहते हैं कि हे घन ! तुम जीवनदायक हो, परोपकारी हो, दूसरे के हित के लिए देह धारण करने वाले हो। सागर के जल को अमृत में परिवर्तित करके वर्षा के रूप , में कल्याण करते हो। कभी मेरे लिए भी कुछ करो। मेरे लिए इतना जरूर करो कि मेरे हृदय को स्पर्श करो। मेरे दुःख दर्द को समझो, जानो और मेरे ऊपर दया की दृष्टि रखते हुए अपने परोपकारी स्वभाववश मेरे हृदय की व्यथा को अपने माध्यम से सुजान तक पहुँचा दो। मेरे प्रेमाश्रुओं को लेकर । सुजान की आँगन में प्रेम की वर्षा कर दो।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 7.
कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
अति सूधो सनेह को मारग है’ सवैया में कवि घनानंद स्नेह के मार्ग की प्रस्तावना करते हुए कहते हैं कि प्रेम का रास्ता अत्यंत सरल और सीधा है वह रास्ता कहीं भी टेढ़ा-मेढ़ा नहीं है और न उसपर चलने में चतुराई की जरूरत है। इस रास्ते पर वही चलते हैं जिन्हें न अभिमान होता है न किसी प्रकार की झिझक ऐसे ही लोग निस्संकोच प्रेम-पथ पर चलते हैं।

घनानंद कहते हैं कि प्यारे, यहाँ एक ही की जगह है दूसरे की नहीं। पता नहीं, प्रेम करनेवाले कैसा पाठ पढ़ते हैं कि ‘मन’ लेते हैं लेकिन छटाँक नहीं देते। ‘मन’ में श्लेष अलंकार है जिससे भाव की महनता और भाषा का सौंदर्य दुगुना हो गया है।

‘मो अँसुवानिहिं लै बरसौ’ सवैया में कवि घनानंद मेघ के माध्यम से अपने अंतर की वेदना को व्यक्त करते हुए कहते हैं-बादलों ने परहित के लिए ही शरीर धारण किया है। वे अपने आँसुओं की वर्षा एक समान सभी पर करते हैं। पुनः घनानंद बादलों से कहते हैं-तुम तो जीवनदायक हो, कुछ मेरे हृदय की भी सुध ली, कभी मुझ पर भी विश्वास कर मेरे आँगन में अपने रस की वर्षा करो।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्द कविता में संज्ञा अथवा विशेषण के रूप में प्रयुक्त है। इनके प्रकार बताएँ-
सूधो, मारग, नेकु, बॉक, कपटी, निसांक, पाटी, जथरथ, जीवनदायक, पीर, हियें, बिसासी
उत्तर-
सूधो – गुणवाचक विशेषण
मारग – जातिवाचक संज्ञा
नेक – गुणवाचक विशेषण
बॉक – भाववाचक संज्ञा
कपटी – गुणवाचक विशेषण
निसॉक – गुणवाचक विशेषण
पाटी – भाववाचक संज्ञा जथारथ
जथरथ – भाववाचक संज्ञा
जीवनदायक – गुणवाचक विशेषण
पीर – भाववाचक संज्ञा
हियें – जातिवाचक संज्ञा
बिसासी – गुणवाचक विशेषण

प्रश्न 2.
कविता में प्रयुक्त अव्यय पदों का चयन करें और उनका अर्थ भी बताएं।
उत्तर-
अति – बहुत
जहाँ – स्थान विशेष
नहीं – न
तति – छोड़कर
यहाँ – स्थानविशेष
नेक – तनिक भी

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के कारक स्पष्ट करें-
सनेह को पारग प्यारे सुजान, मेरियो पीर, हिये, आँसुवानिहि
उत्तर-
सनेह को मार्ग – संबंध कारक
प्यारे सुजान – संबंध कारक
मारया पीर – अधिकारण कारक
हियें – अधिकरण कारक
आँसुवानिहि – करण कारक
मों – कर्म कारक

काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. अति सूधो सनेह को मारग है जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।
तहाँ साँचे चलें तजि आपनपौ झझक कपटी जे निसाँक नहीं।
‘घनआनंद’ प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक ते दूसरौ आँक नहीं।
तुम कौन धौं याटी पढ़े हौ कहौ मन लेह पै देह छटाँक नहीं।

प्रश्न
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता- अति सूधो सनेह को मारग है।
कवि- घनानंद।।

(ख) रीति काल के महान प्रेमी कवि घनानंद यहाँ प्रथम छंद में प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की प्रस्तावना करता है। प्रेम की विशेषताओं को तथा प्रेममार्ग की प्रवीणता को लाक्षणिक एवं मूर्तिमत्ता के स्वरूप का वर्णन किया है।

(ग) सरलार्थ- प्रस्तुत सवैया में रीतिकालीन काव्य धारा के प्रमुख कवि घनानंद प्रेम की पीड़ा एवं प्रेम की भावना को सरल और स्वाभाविक मार्ग का विवेचन करते हैं। कवि कहते हैं कि प्रेम मार्ग अमृत के समान अति पवित्र है। इस प्रेम, रूपी मार्ग में चतुराई और टेढ़ापन अर्थात् कपटशीलता का कोई स्थान नहीं है। इस प्रेमरूपी मार्ग में जो प्रेमी होते हैं वह अनायास ही सत्य के रास्ते पर चलते हैं तथा उनके अंदर के अहंकार समाप्त हो जाते हैं। यह प्रेम रूपी मार्ग इतना पवित्र है कि इस पर चलने वाले प्रेमी के हृदय में लेशमात्र भी झिझक, कपट और शंका नहीं रहती है। घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे सुजान, सुनो ! यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दूसरा चिह्न नहीं है। तुम क्या कोई प्रेम रूपी पुस्तक पढ़े हो? तो कहो, क्योंकि प्रेम रूपी पुस्तक पढ़ने से यही सीख मिलती है कि प्रेम दिया जाता है और उसे देने के बदले एक छटाँक भी कुछ नहीं लिया जाता है।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत छंद में रीति मुक्त धारा के प्रसिद्ध कवि घनानंद प्रेम के मार्ग को अमृत के समान पवित्र बतलाया है। इसमें निष्कपट, निश्छल और अहंकार रहित प्रेम का स्वाभाविक वर्णन किया है। एक प्रेमी ही प्रेम की पवित्रता को समझ सकता है।

(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) यह कविता सवैया छंद में रचित है।
(ii) श्रृंगार इसकी परिपक्वता के कारण माधुर्य गुण की झलक प्रशंसनीय है।
(iii) यहाँ स्वाभाविक प्रेम के वर्णन के कारण मनोवैज्ञानिकता का अच्छा दर्शन होता है।
(iv) प्रेम का वर्णन में जो भाव और भाषा होना चाहिए उसका कलात्मक रूप व्यक्त हुआ है।
(v) सवैया छन्द के कारण कविता सम्पूर्ण संगीतमयता का रूप धारण कर ली है।
(vi) अलंकार योजना की दृष्टि से रूपक और अलंकार की छटा प्रशंसनीय है।

2. परकाजहि देह को धारि फिरौ परजन्य जथारथ द्वै दरसौ।
निधि-नरी सुधा की समान करौ सबही बिधि सज्जनता सरसौ।।
‘घनआनंद’ जीवनदायक हासै कळू पेरियौ पीर हिएँ परसौ।
कबहूँ वा बिसासी सुजान के आँगन मौ अँसुवानिहिं लै बरसौ॥

प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखिए।
(ग) पद का सरलार्थ लिखिए।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क)कविता- मो अँसुवानिहिं लै बरसौ।
कवि-घनानंद।

(ख) प्रसंग- प्रस्तुत सवैये छंद में रीति कालीन काव्य धारा के प्रख्यात कवि घनानंद मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यन्त कलात्मक रूप में अभिव्यक्त करते हैं। बादल की उदारता को अपने प्रेम की पीड़ा में सहयोग देने के लिए संबोधनात्मक शैली में वर्णन करते हैं।

(ग) सरलार्थ- प्रस्तुत छंद में कवि बादल को संबोधित करते हुए कहता है कि हे बादल! मेरे आँसूरूपी प्रेम के जल को बरसाओ। हे बादल तुम इतने उदारवादी हो कि तुम्हारा जीवन हमेशा दूसरों के हित के लिए समर्पित रहता है। दूसरों के लिए ही जल बरसाते हो। अपने जीवन के भंडार को अमृत के समान पवित्र करो ओर सभी प्रकार से सज्जनता के गुणों को प्रकट करो। तुम्हारी दृष्टि के जल में मेरे विरह वेदना के आँसू दिखाई पड़े। घनानंद कवि कहते हैं कि हे जीवनदायक तुम प्रेम रूपी बादल बनकर आँसू रूपी वियोग रस को बरसो जिससे मेरी प्रेम वेदना समाप्त होगी। पुनः अपनी प्रेयषी सुजान की ओर संकेत करते हुए अपने विरह वेदना को कलात्मक रूप में व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हे बादल तुम मेरे बहुत विश्वासी हो इसलिए मेरे सुजान के आँगन में जाकर मेरे आँसू रूपी जल को निश्चित रूप से बरसाओ।

(घ) भाव सौंदर्य- इस अंश में कवि घनानंद प्रेम के पीर मालूम पड़ते हैं। इसी कारण के लिए बादल को सम्बोधित करते हैं और बादल को उदार कहते हैं।
(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) इसमें सवैया, छंद पूर्ण लाक्षणिकता के साथ व्यक्त हुआ है।
(ii) वियोग का सच्चा वर्णन ब्रजभाषा की कोमलता और सरलतापूर्ण सार्थक है।
(iii) यहाँ कहीं-कहीं तत्सम और तद्भव शब्दों के प्रयोग से कविता का भाव सटीक हो गया है।
(iv) सम्पूर्ण कविता संबोधनात्मक शैली में है।
(v) वियोग का सार्थक वर्णन के कारण प्रसाद गुण इस पद में विद्यमान है।
(vi) अलंकार योजना की दृष्टि से रूपक और अनुप्रास भाव को सार्थक करने में सहायक है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
‘अति सूधो सनेह को मारग’ शीर्षक सबैया किसकी रचना है ?
(क) रसखान
(ख) घनानंद
(ग) गुरु नानक
(घ) मतिराम
उत्तर-
(ख) घनानंद

प्रश्न 2.
घनानंद किस सबैया के रचयिता हैं?
(क) मो अँसुवनिहिं लै बरसौ
(ख) मानुष हों तो
(ग) करील के कुंजन ऊपर वारौं
(घ) भूषण
उत्तर-
(क) मो अँसुवनिहिं लै बरसौ

प्रश्न 3.
घनानंद किस काल के कवि थे?
(क) भक्ति काल
(ख) आदि काल
(ग) रीति काल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर-
(ग) रीति काल

प्रश्न 4.
घनानंद किस भाषा के कवि थे ?
(क) अवधी
(ख) खड़ी बोली
(ग) ब्रज भाषा
(घ) मैथिली
उत्तर-
(ग) ब्रज भाषा

प्रश्न 5.
‘सुजान सागर किसकी कृति है?
(क) रसखान
(ख) प्रेमधन
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) घनानंद
उत्तर-
(घ) घनानंद

प्रश्न 6.
‘घनानंद’ किस बादशाह के ‘मीर मंशी’ थे?
(क) जहाँगीर
(ख) शाहजहाँ
(ग) मुहम्मदशाह रंगीले
(घ) औरंगजेब
उत्तर-
(ग) मुहम्मदशाह रंगीले

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
घनानंद के सवैये और ……. बहुत प्रसिद्ध हैं।
उत्तर-
धनाक्षरी

प्रश्न 2.
घनानंद रीतिकाल के …………. कवि थे।
उत्तर-
उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छन्द

प्रश्न 3.
प्रेम का मार्ग अत्यन्त ……….. है।
उत्तर-
सरल

प्रश्न 4.
‘नरकाजहि देह को धारि’ का अर्थ दूसरों के लिए ……..धारण करता है।
उत्तर-
शरीर

प्रश्न 5. घनानंद प्रेम की ……….. के गायक थे।
उत्तर-
पीर

प्रश्न 6.
घनानंद का जन्म सन् ……. के आस-पास हुआ था।
उत्तर-
1689

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1.
किस कवि को साक्षात् रसमूर्ति कहा जाता है ?
उत्तर-
घनानंद को साक्षात् रसमर्ति कहा जाता है।

प्रश्न 2.
घनानंद काव्य-रचना के अतिरिक्त किस कला में प्रवीण थे?
उत्तर-
घनानंद काव्य-रचना के अतिरिक्त गायन-कला में प्रवीण थे।

प्रश्न 3.
घनानंद किस मुगल बादशाह के मीर मुंशी थे?
उत्तर-
घनानंद मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीले के मीर मुंशी थे।

प्रश्न 4.
घनानंद की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर-
धनानंद को नादिरशाह के सैनिकों ने मार डाला।

प्रश्न 5.
घनानंद की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति कौन-सी है?
उत्तर-
घनानंद की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृति है-‘सुजान सागर’

प्रश्न 6.
घनानंद की भाँति रीति मुक्तधारा के और कौन-कौन कवि हैं ?
उत्तर-
घनानंद की तरह रीति मुक्तधारा के अन्य कवि हैं-रसखान एवं भूषण आदि।

प्रश्न 7.
कवि सुजान कहकर किसे सम्बोधित करता है ?
उत्तर-
कहते हैं कवि घनानंद का ‘सुजान’ नामक नर्तकी से स्नेह था। अत: यह सम्बोधन उसे ही प्रतीत होता है।

व्याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
अति सुधौ सनेह को मारग है, जहाँ नेक सयानप बॉक नहीं।
तहाँ साँचे चलें तजि आपनपौ झझुकै कपटी जे निसॉक नहीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक “अति सुधो सनेह को मारग है” काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान और धनानंद के बीज के प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ हैं। कवि करता है कि अति सरलता स्नेह का मार्ग है। पंथ है। यहां जरा-सी भी ठगई या चतुराई नहीं है, टेढ़ापन नहीं है। ओछी होशियारी नहीं है। यहाँ सत्य मार्ग पर चलना पड़ता है। यहाँ अपनों का भी त्याग करना पड़ता है। बिना शंका के यहाँ चलना पड़ता है। कहने का मूल भाव यह है कि प्रेम का, स्नेह का मार्ग छल छद्म मुक्त होता है। यहाँ बनावटीपन, सयानापन, टेढ़ापन, अहंकार या चतुराई नहीं रहती। यहाँ तो प्यार, प्रेम, अंतरंगता दिखायी पड़ती है, इस प्रकार स्नेह का मार्ग सदा से ही सरलता कर रहा है। निष्कपटता और सहजता का रहा है।

प्रश्न 2.
धन आनंद प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक तें दूसरी आँक नहीं।
तुम कौन धौं पाटी पढ़े हो कहौ मनलेह पैदेह छटाँक नहीं।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “अति सुधो सनेह को मारग है” नामक काव्य पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान घनानंद के बीच के प्रेम प्रसंग है। कवि कहता है कि ऐ सुजान ! सुनो हमारे दिल में तो सिवा किसी दूसरे का स्थान ही नहीं है। केवल तुम ही तन-मन में बसी हुयी हो। लेकिन मैं तो तुम्हारी चतुरायी पर आश्चर्यचकित हूँ। तुमने कैसा पाठ पढ़ा है कि लेने को तो मन भर लेती हो और देने के वक्त छटांक का भी त्याग नहीं करती हो। इन पंक्तियों में , द्विअर्थ छिपा हुआ है। मन का ऐंद्रिय मन से भी संबंध है और मन से वजन वाले मन से भी है। इन पंक्तियों में सुजान की चतुराई और घनानंद की सरलता, सहजता का वर्णन मिलता है। सुजान के रूप-लावण्य पर कवि रीझ कर अपना सर्वस्व लुटा देता है, किन्तु सुजान की थाह नहीं मिलती अर्थात् उसके मन की गहरायी नहीं ज्ञात हो जाती है। यहाँ लौकिक प्रेम के साथ अलौकिक प्रेम का भी वर्णन किया गया है।

प्रश्न 3.
परकाजहि देह को धरि फिरौ पराजन्य जयारथ है दरसौ।
निधि-नीर सुधा की समान करौ सबही विधि सजनता सरसौ॥
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “मौ असुवानिहिं लै बरसौ” काव्य पाठ से ली गाया से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग सुजान और घनानंद के बीच के प्रेम-प्रसंग से है।
कवि कहता है कि बादल परहित के लिए ही जल से वाष्प-वाष्प से बादल का रूप धरकर इधर-उधर फिरता है। इसमें उसकी यथार्थता झलकती है। जैसे सागर या नदियाँ अपने सुधारूपी जल से लोक, कल्याण के लिए बहती रहती है। इसमें सब तरह से सज्जनता ही दिखायी पड़ती है। सज्जनों का भी काम परहित करना ही है। इन पंक्तियों में घनानंदजी ने अपने जीवन के प्रेम-प्रसंग को प्रकृति के लोककल्याण रूपों से तुलना करते हुए उसके उपकार का वर्णन किया है। प्रकृति का रूप ही लोकहितकारी है ठीक उसी प्रकार सज्जन का भी जीवन होता है।

प्रश्न 4.
‘घनआनंद’ जीवनदायक हो कछु मेरियो पीर हिएँ परसौ।
कबहुँ वा बिसासी सजान के आँगन मो अॅसुवानिहि लै वरसौ॥
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के मौ अँसुवानिहिं ले बरसौ’ नामक काव्य पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों के प्रसंग सुजान और घनानंद के प्रेम-प्रसंग में दिए गए उदाहरणों से है। कवि कहता है कि हे सुजान! तुम जीवनदायिनी शक्ति हो, कुछ मेरे हृदय की पीड़ा का भी स्पर्श करो। मेरी भी संवेदना को जानो, समझो। मेरे अन्तर्मन में तुम्हारे लिए जो प्रेम है, चाह है, भूख है, उसे भी तुम यथार्थ रूप में जानो। इन पंक्तियों में सुजान के प्रति अनन्य प्रेम-भावना प्रकट की गयी है। घनावेद जो सुजान के लिए अपनी सुध-बुध खो चुके हैं और सुजान को विश्वास ही नहीं होता।
कवि कहता है कि कभी भी उस विश्वासी सुजान के आँगन में मेरे आँसू बरसने लगेंगे और अपने अन्तर्मन की व्यथा को प्रकट करने लगेंगे।

अति सूधो सनेह को मारग है कवि परिचय

रीतियुगीन काव्य में घनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि हैं । इनका जन्म 1689 ई० के आस-पास हुआ और 1739 ई० में वे नादिरशाह के सैनिकों द्वारा मारे गये । ये तत्कालीन मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीले के यहां मीरमुंशी का काम करते थे। ये अच्छे गायक और श्रेष्ठ कवि थे । किवदंती है कि सुजान नामक नर्तकी को वे प्यार करते थे । विराग होने पर ये वृंदावन चले गये और वैष्णव होकर काव्य रचना करने लगे । सन् 1939 में जब नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया तब उसके सिपाहियों ने मथुरा और वृंदावन पर भी धावा बोला । बादशाह का मीरमुंशी जानकर घनानंद को भी उन्होंने पकड़ा और इनसे जर, जर, जर (तीन बार सोना, सोना, सोना) माँगा । घनानंद ने तीन मुट्ठी धूल उन्हें यह कहते हुए दी, ‘रज, रज, रज’ (धूल, धूल, धूल) । इस पर क्रुद्ध होकर सिपाहियों ने इनका वध कर दिया।

घनानंद ‘प्रेम की पीर’ के कवि हैं। उनकी कविताओं में प्रेम की पीड़ा, मस्ती और वियोग सबकुछ है । आचार्य शुक्ल के अनुसार, “प्रेम मार्ग का ऐसा प्रवीण और धीर पथिक तथा जबाँदानी का ऐसा दावा रखने वाला ब्रजभाषा का दूसरा कवि नहीं हुआ है।” वियोग में सच्चा प्रेमी जो वेदना सहता है, उसके चित्त में जो विभिन्न तरंगे उठती हैं, उनका चित्रण घनानंद ने किया है। घनानंद वियोग दशा का चित्रण करते समय अलंकारों, रूढ़ियों का सहारा लेने नहीं दौड़ते, वे बाह्य चेष्टाओं पर भी कम ध्यान देते हैं । वे वेदना के ताप से मनोविकारों या वस्तुओं का नया आयाम, अर्थात् पहले न देखा गया उनका कोई नया रूप-पक्ष देख लेते हैं। इसे ही ध्यान में रखकर शुक्ल जी ने इन्हें ‘लाक्षणिक मूर्तिमत्ता और प्रयोग वैचित्र्य’ का ऐसा कवि कहा जैसे कवि उनके पौने दो सौ वर्ष बाद छायावाद काल में प्रकट हुए।

घनानंद की भाषा परिष्कृत और शुद्ध ब्रजभाषा है । इनके सवैया और घनाक्षरी अत्यंत प्रसिद्ध हैं । घनानंद के प्रमुख ग्रंथ हैं – ‘सुजानसागर’, ‘विरहलीला’, ‘रसकेलि बल्ली’ आदि।

रीतिकाल के शास्त्रीय युग में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद पथ पर चलने वाले महान प्रेमी कवि घनानंद के दो सवैये यहाँ प्रस्तुत हैं । ये छंद उनकी रचनावली ‘घनआनंद’ से लिए गए हैं। प्रथम छंद में कवि जहाँ प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की प्रस्तावना करता है, वहीं द्वितीय छंद में मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यंत कलात्मक रूप में अभिव्यक्ति देता है । घनानंद के इन छंदों से भाषा और अभिव्यक्ति कौशल पर उनके असाधारण अधिकार को भी अभिव्यक्ति होती है ।

अति सूधो सनेह को मारग है Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

रीतियुगीन काव्य में धनानंद रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि हैं। इनकी कविताओं में प्रेम की पीड़ा, मस्ती और वियोग सबकुछ है। वियोग में सच्चा प्रेमी जो वेदन सहता है, उसके चित्त में जो विभिन्न तरंगे उठती हैं, उनका चित्रण धनानंद ने किया है। धनानंद ने वियोग दशा का चित्रण करते समय ‘अलंकारों रूढ़ियों का सहारा न लेकर मनोविकारों या वस्तुओं का नया आयाम दिया है। वस्तुतः धनानंद ‘प्रेम की पीर’ के कवि हैं।

रीतिकाल के शास्त्रीय युग में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद पथ पर चलने वाले महान प्रेमी कवि धनानंद के दो सवैये पस्तुत पद में है। प्रथम छंद में कवि जहाँ प्रेम के सीधे सरल और निश्चय मार्ग की प्रस्तावना करता है। प्रेम एक ऐसा अमृतमय मार्ग है जहाँ चातुर्य की टेढ़ी-मेढ़ी रूपरेखा नहीं है। इसमें छल उपर श्लेष-मात्र भी नहीं है। मन के मनभावों को अनायास प्रदर्शित करने में सहजभाव उत्पन्न हो जाता है।

दूसरे पद में मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से विरह-वेदना से भरे अपने हृदय की पीड़ा को अत्यन्त कलात्मक रूप में अभिव्यक्ति देता है। बादल अपने लिए नहीं दूसरों के लिए शरीर धारण करता है। कवि का विरह-चित्त मिलन के उत्कौठत है। जल से परिपूर्ण बादल अपनी वेदन के साथ एक नया भाव जोड़ देता है। जीवन की अनुभूति प्रेम की सहभागिता में है। गगन की सार्थकता में घाटधन्न से है।

शब्दार्थ

नेकु : तनिक भी
सयानप : चतुराई
बाँक : टेढ़ापन
आपन पौ : अहंकार, अभिमान
झझक : झिझकते हैं ।
निसांक : शंकामुक्त
आक : अंक, चिह्न
परजन्य : बादल
सुधा : अमृत
सरसी : रस बरसाओ
परसौ : स्पर्श करो
बिमासी : विश्वासी
मन : माप-तौल का एक पैमाना
छटाँक : माप-तौल का एक छोटा पैमाना

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 1 वन्दना

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Amrita Bhag 2 Chapter 1 वन्दना Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 1 वन्दना

Bihar Board Class 7 Sanskrit वन्दना Text Book Questions and Answers

अभ्यासः

मौखिकः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Solution प्रश्न (1)
उच्चैः वदत –

प्रश्न (क)

  • नमामि – नमाव: – नमामः
  • वदामि – वदाव: – वदामः
  • स्मरामि – स्मराव: – स्मरामः

Sanskrit Vandana Class 7 Bihar Board प्रश्न (ख)

  • पालकाय पालकाभ्याम् पालकेभ्यः
  • विनाशाय विनाशाभ्याम् विनाशेभ्यः
  • विशालाय विशालाभ्याम् विशालेभ्यः

नोट :- छात्र स्वयं ऊँचे स्वर में बोलने का अभ्यास करें।

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Vandana Bihar Board प्रश्न (2)
श्लोकान् सस्वरं गायत।
नोट :- छात्र श्लोकों को गाएँ ।

लिखितः

Bihar Board Class 7 Sanskrit Book Solution प्रश्न (3)
श्लोकांशान् लिखत –

(क) प्रसादे यस्य ……….. विपत्तिः ……….. तथा ।
…………. विशालाय ……………. परमात्मने ।।

(ख) नमामि देवं ……………….तत्कार्यजगत्स्व रूपम् ।
…………………. तद् वाचक-शब्दवृन्दम्
महेश्वरं ………….. |
उत्तराणि –
(क) प्रसादे यस्य सम्पत्तिः विपत्तिः कोपेन तथा ।
नमस्तस्मै विशालाय शिवाय परमात्मने ॥

(ख) नमामि देवं जगदीशरूपं स्मरामि रम्यं च जगत्स्वरूपम्
वदामि तद् वाचक-शब्दवृन्दम् महेश्वरं देवगणरगम्यम् ॥

Bihar Board Class 7 Sanskrit प्रश्न (4)
उत्तराणि लिखत –

  1. शिवस्य प्रसादात् किम् मिलति ?
  2. कस्य कोपने विपत्तिः लभ्यते ?
  3. जगत् कीदृशम् अस्ति ?
  4. संसारस्य विनाशं कः करोति ?
  5. प्राणिनां पालनं कः करोति ?

उत्तराणि-

  1. शिवस्य प्रसादात् सम्पत्तिः मिलति ।
  2. शिवस्य कोपेन विपत्तिः लभ्यते ।
  3. जगत् रम्यं अस्ति ।
  4. संसारस्य विनाशं विश्वरूपः परमात्मा करोति । ।
  5. प्राणिनां पालनं परमात्मा करोति ।

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Vandana Bihar Board प्रश्न (5)
सुमेलितं कुरुत –

  1. सुखम् – (i) सम्पत्तिः
  2. सत्यम् – (ii) ग्रहणम्
  3. विपत्तिः – (iii) कोपनम्
  4. जन्म – (iv) दुःखम्
  5. प्रसाद: – (v) मिथ्या
  6. दानम् – (vi) विनाशः

उत्तर-

  1.  – (iv)
  2. – (v)
  3. – (i)
  4. – (vi)
  5. – (iii)
  6. – (ii)

Class 7 Sanskrit Vandana Bihar Board प्रश्न (6)
रिक्तस्थानानि पूरयत –

  1. शिवाय ……….. नमः / नमानि
  2. ………………….. नमः ।। गणेशं / गणेशाय
  3. …………. नमः । सरस्वतीं । सरस्वत्यै
  4. जगदीशं नमामि / नमः
  5. मातरं ……………………। नमः / नमामि
  6. ………………. स्मरामि । कृष्णं । कृष्णाय
  7. ……….. नमः | तस्मात् / तस्मै

उत्तराणि –

  1. नमः
  2. गणेशाय
  3. सरस्वत्यै
  4. नमामि
  5. नमामि
  6. कृष्णं
  7. तस्मै ।

Bihar Board Solution Class 7 Sanskrit प्रश्न (7)
सन्धिविच्छेदं कुरुत –

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Bihar Board

Class 7 Sanskrit Bihar Board प्रश्न (8)
वाक्यानि रचयत –

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Meaning Bihar Board

कक्षा 7 संस्कृत पाठ 1 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न (9)
पाठभिन्नं श्लोकमेकं स्वस्मरणेन लिखत –
उत्तराणि –

  1. त्वमेव माता च पिता त्वमेव
  2. त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
  3. त्वमेव विद्याद्रविणं त्वमेव
  4. त्वमेव सर्वं मम देव देव ।

Class 7 Sanskrit Chapter 1 Bihar Board प्रश्न (10)
संस्कृते अनुवादं कुरुत ।

  1. वह पिता को प्रणाम करता है ।
  2. वे दोनों धन प्राप्त करते हैं ।
  3. वे सब सत्य बोलते हैं ।
  4. तुम वेद पढ़ते हो।
  5. देवता को (देवाय) नमस्कार है ।
  6. तुम दोनों विद्यालय जाते हो ।
  7. तुमलोग कार्य करते हो ।

उत्तराणि-

  1. सः पितरं प्रणमति ।
  2. तौ धनं प्राप्नुवन्तः ।
  3. ते सत्यं वदन्ति ।
  4. त्वं वेदं पठसि ।
  5. देवाय: नमः ।
  6. युवा विद्यालयं गच्छतः ।
  7. यूयं कार्यं कुरूथ ।

Bihar Board Class 7 Sanskrit वन्दना Summary

[प्रस्तुत पाठ में संसार के सृष्टिकर्ता परमात्मा की वन्दना विभिन्न पौराणिक श्लोकों में की गयी है । ज्ञान का आरंभ परम प्रभु की स्तुति से ही हो यह इस पाठ का लक्ष्य है । परमात्मा जगत् के सभी कार्यों के संचालक तथा बिना माँगे सब-कुछ देने वाले हैं। इसलिए सबका कर्त्तव्य है कि उनकी वन्दना गान सहित करें ।]

नमस्ते विश्वरूपाय …………….. विश्ववन्द्याय बन्धवे ॥1॥

शब्दार्थ – नमस्ते (नमः + ते) = नमस्कार । विश्वरूपाय – विश्वरूप (समस्त संसार ही जिसका रूप है वैसा) के लिए । प्राणिनाम् = प्राणियों के। की । पालकाय – पालन करने वाले के लिए । ते (तुभ्यम्) = आपके लिए। जन्म-स्थिति-विनाशाय = रचना, विद्यमानता तथा नाश के लिए। विश्ववन्द्याय – संसार के द्वारा वन्दनीय के लिए । बन्धवे – मित्र / संबंधी के लिए।

सरलार्थ-समस्त संसार ही जिसका रूप है, प्राणियों के पालन करनेवाले, जन्म, विद्यमानता तथा विनाश करने वाले, संसार के द्वारा वन्दनीय आपके (परमपिता परमेश्वर) लिए नमस्कार हैं।

प्रसादे यस्य सम्पत्तिः ……………… शिवाय परमात्मने ॥2॥

शब्दार्थ-प्रसादे – कृपा होने पर । यस्य = जिसका । सम्पत्तिः – धन । विपत्तिः – संकट । कोपने = क्रोध करने पर/ में । तथा – और, उस प्रकार से । नमस्तस्मै (नम: तस्मै) = उसको । उनको नमस्कार है । विशालाय – बड़े / विशाल को/ के लिए । शिवाय = शिव के लिए / मङ्गल के लिए। परमात्मने = परमात्मा के लिए ।

सरलार्थ – जिसकी कृपा से सम्पत्ति और क्रोध से विपत्ति आती है. उस विशाल परमात्मा शिव के लिए नमस्कार है।

ज्ञानं धनं सुखं सत्यं……………… मानवस्तं नमाम्यहम् ॥3॥

शब्दार्थ-ज्ञानम् = ज्ञान, जानकारी । सत्यम् = सत्य, सच । तपः तपस्या । दानम् – दान । अयाचितम् – न माँगा गया, बिना माँगे । लभते – प्राप्त करता है । मानवस्तम् (मानवः तम्) – मानव / मनुष्य, (तम्-) उसको । नमाम्यहम् (नमामि अहम्) = नमस्कार करता हूँ, (अहम्-) मैं । नमामि = नमस्कार करता हूँ। सरलार्थ-जिनकी कृपा से मनुष्य को ज्ञान, धन, सुख, सत्य, तप और दान बिना मांगे ही मिल जाता है उनको, (परमात्मा को) में प्रणाम करता हूँ।

नमामि देवं जगदीशरूपं ………महेश्वरं देवगणैरगम्यम् ॥4॥

शब्दार्थ-देवम् = देवता को । जगदीशरूपम् (जगत्-ईशरूपम्) – संसार के स्वामी रूप वाले (को) । स्मरामि – याद / स्मरण करता हूँ। जगत्स्वरूपम् – जगत् (की रचना) के रूप वाले । वदामि – कहता / बोलता हूँ । तद् .वाचक-शब्दवृन्दम् = उस (देव) के बोधक शब्दसमूह को। महेश्वरम् – महान् ईश्वर को । दैवगणैरगम्यम् (दैवगणै अगम्यम्) – देवसमूहों के द्वारा न प्राप्त करने योग्य ।।

सरलार्थ-संसार के स्वामी रूप वाले, जगत् के रूप वाले सुन्दर देवता को प्रणाम करता हूँ। उस (देव) के बोधक शब्द समूह महान ईश्वर को जो देवगणों के द्वारा नहीं प्राप्त करने योग्य हैं, कहता हूँ।

व्याकरणम् ।

सन्धि-विच्छेदः

  1. नमत = नमः + ते (विसर्ग सन्धि)
  2. नमस्तस्मै = नमः + तस्मै (विसर्ग सन्धि)
  3. मानवस्तम् = मानवः + तम् (विसर्ग सन्धि)
  4. नमाम्यहम् = नमामि + अहम् (यण् सन्धि)
  5. जगदीशः = जगत् + ईशः (व्यञ्जन सन्धि)
  6. देवगणैरगम्यम् = देवगणैः + अगम्यम् (विसर्ग सन्धि)

प्रकृति-प्रत्यय-विभागः

Sanskrit Class 7 Chapter 1 Hindi Translation Bihar Board

Bihar Board Class 9 Political Science Solutions Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Political Science राजनीति विज्ञान : लोकतांत्रिक राजनीति भाग 1 Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Political Science Solutions Chapter 1 लोकतन्त्र का क्रमिक विकास

Bihar Board Class 9 Political Science लोकतन्त्र का क्रमिक विकास Text Book Questions and Answers

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

लोकतंत्र का क्रमिक विकास Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किससे लोकतंत्र के विस्तार में मदद नहीं मिलती
(क) आपसी मतभेद
(ख) देश की आंतरिक कलह
(ग) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण
(घ) आर्थिक नीति
उत्तर-
(ग) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण

Bihar Board Class 9 Civics Solution प्रश्न 2.
चिली में जनतंत्र की बहाली कब हुई ?
(क) 2001 ई. में
(ख) 2004 ई. में
(ग) 2005 ई० में
(घ) 2006 ई० में
उत्तर-
(ख) 2004 ई. में

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 3.
मिशेल वेशले किस देश की महिला राष्ट्रपति हैं ?
(क) भारत की
(ख) चिली की
(ग) पोलैंड की
(घ) चीन की
उत्तर-
(ख) चिली की

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 4.
‘मेरे देश के मेहनतकश मजदूरों’-इनमें से किनका नारा था ?
(क) मिशेल वैशले का
(ख) सल्वाडोर अपोंदे का
(ग) जनरलं अगस्तोका
(घ) पिनोशे का
उत्तर-
(ख) सल्वाडोर अपोंदे का

Bihar Board Class 9 Political Science प्रश्न 5.
चिली में सैनिक तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति कौन बने ?
(क) जनरल आगस्तो पिनोशे
(ख) अलबर्टो वेशले
(ग) मिशेल वैशले
(घ) आयेंदे
उत्तर-
(क) जनरल आगस्तो पिनोशे

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 6.
20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पोलैण्ड पर किस पार्टी का शासन था?
(क) पिपुल्स पार्टी
(ख) पोलिश यूनाइटेड वर्क्स
(ग) ग्डांस्क संधि
(घ) सोलिडेरिटी पार्टी
उत्तर-
(ख) पोलिश यूनाइटेड वर्क्स

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 7.
सन् 1980 ई० में पोलैंड में मजदूरों के हड़ताल के नेता कौन थे ?
(क) जारूजेल्स्की
(ख) लेक वालेशा
(ग) फ्रांसिस जॉन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख) लेक वालेशा

Bihar Board Class 9 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 8.
पहली बार किस साम्यवादी शासन वाले देश में स्वतंत्र मजदूर संगठन बनाने की मान्यता प्रदान की गयी?
(क) चिली में
(ख) पाकिस्तान में
(ग) पोलैंड में
(घ) नेपाल में
उत्तर-
(ग) पोलैंड में

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 9.
पोलैंड में लोकतंत्रात्मक गणराज्य का प्रथम राष्ट्रपति कौन बना?
(क) ला-वेला
(ख) जारूजेल्स्की
(ग) लेक वालेशा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग) लेक वालेशा

Bihar Board Class 9 History  प्रश्न 10.
लोकतंत्र में लोगों को इनमें से कौन-सा अधिकार प्राप्त है ? ।
(क) शासकों का चुनाव कराना।
(ख) शासकों पर प्रतिबंध नहीं लगाना
(ग) जनता का चुप-चाप बैठे रहना
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
उत्तर-
(क) शासकों का चुनाव कराना।

Loktantrik Rajniti Class 9 In Hindi Solutions Chapter 1 प्रश्न 11.
प्राचीन लिच्छवी गणराज्य में केन्द्रीय समिति में कितने सदस्य थे ?
(क) 1707
(ख) 700
(ग) 900
(घ) 800
उत्तर-
(क) 1707

Bihar Board Solution Class 9 प्रश्न 12.
ब्रिटेन में गौरवपूर्ण क्रान्ति कब हुई थी?
(क) 1600 ई. में
(ख) 1700 ई. में
(ग) 1680 ई. में
(घ) 1688 ई. में
उत्तर-
(क) 1600 ई. में

Class 9 Loktantrik Rajniti Chapter 1 Question Answer प्रश्न 13.
किस वर्ष अमेरिका में लोकतांत्रिक संविधान लागू हुआ?
(क) 1704 ई. में
(ख) 1800 ई. में
(ग) 1789 ई. में
(घ) 1688 ई. में
उत्तर-
(ग) 1789 ई. में

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 14.
घाना पहले निम्नलिखित में से किसका उपनिवेश था ?
(क) जर्मनी का
(ख) फ्रांस का
(ग) ब्रिटेन का
(घ) जापान का
उत्तर-
(ग) ब्रिटेन का

Bihar Board Class 9 Economics Solution प्रश्न 15.
1991 ई० में किसका विघटन हुआ?
(क) भारत का
(ख) चीन का
(ग) जापान का
(घ) सोवियत संघ का
उत्तर-
(ग) जापान का

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 16.
सोवियत संघ में कितने गणराज्य हैं ?
(क) 10
(ख) 15
(ग) 20
(घ) 25
उत्तर-
(ख) 15

Bihar Board Class 9 History Chapter 1 प्रश्न 17.
किस वर्ष नेपाल का पहला संविधान बना?
(क) 1948 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1952 ई. में
(घ) 1960 ई. में
उत्तर-
(ग) 1952 ई. में

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 18.
किस वर्ष नेपाल का संविधान लागू हुआ?
(क) 1948 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1959 ई. में
(घ) 1960 ई. में
उत्तर-
(ख) 1950 ई. में

Bihar Board Class 9th Economics Solution प्रश्न 19.
नेपाल नरेश ज्ञानेन्द्र ने कब निर्वाचित सरकार को पदच्युत कर दिया था?
(क) जनवरी 2005 ई. में
(ख) फरवरी 2005 ई. में
(ग) मार्च 2006 ई. में
(घ) फरवरी 2006 ई. में
उत्तर-
(क) जनवरी 2005 ई. में

Bihar Board Class 9 History Solution प्रश्न 20.
नेपाल में संविधान सभा का चुनाव कब सम्पन्न हुआ ?
(क) जून 2008 ई० में
(ख) मार्च 2008 ई० में
(ग) मई 2008 ई० में
(घ) अगस्त 2008 ई० में
उत्तर-
(क) जून 2008 ई० में

Bihar Board Class 9 Social Science प्रश्न 21.
नेपाल में प्रथम गणतंत्र के प्रथम प्रधानमंत्री कौन बने?
(क) डॉ. रामवर्द्धन यादव
(ख) प्रचंड
(ग) जी. पी. कोईराला
(घ) वीरेन्द्र
उत्तर-
(ख) प्रचंड

प्रश्न 22.
नेपाल में उग्र राजनीतिक दल को क्या कहा जाता है ?
(क) नक्सलवार्दी
(ख) मार्क्सवादी
(ग) जनवादी
(घ) माओवादी कम्युनिष्ट पाटी
उत्तर-
(ग) जनवादी

प्रश्न 23.
किस वर्ष म्यांमार औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ?
(क) 1947 ई. में
(ख) 1910 ई. में
(ग) 1948 ई. में
(घ) 1950 ई. में
उत्तर-
(ग) 1948 ई. में

प्रश्न 24.
वर्तमान समय में म्यांमार में किस प्रकार की शासन व्यवस्था है ?
(क) राजतंत्र
(ख) प्रजातंत्र
(ग) लोकतंत्र
(घ) फौजी सरकार
उत्तर-
(क) राजतंत्र

प्रश्न 25.
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई ?
(क) 1945 ई. में
(ख) 1950 ई. में
(ग) 1951 ई. में
(घ) 1939 ई में
उत्तर-
(क) 1945 ई. में

प्रश्न 26.
वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्यों की संख्या है ?
(क) 200 देश
(ख) 192 देश
(ग) 190 देश
(घ) 145 देश
उत्तर-
(ख) 192 देश

प्रश्न 27.
सुरक्षा परिषद् में सदस्यों की कितनी संख्या है ?
(क) 10
(ख) 11
(ग) 15
(घ) 20
उत्तर-
(क) 10

प्रश्न 28.
सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्यों की संख्या कितनी है ?
(क) 5
(ख) 6
(ग) 8
(घ) 10
उत्तर-
(क)

प्रश्न 29.
सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्यों में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और निम्नलिखित में से कौन हैं ?
(क) भारत
(ख) चीन
(ग) जापान
(घ) पाकिस्तान
उत्तर-
(ख) चीन

प्रश्न 30.
वर्तमान समय में किस शासन व्यवस्था को विश्व में सबसे लोकप्रिय एवं सर्वोत्तम माना जाता है ?
(क) राजतंत्र
(ख) तानाशाह
(ग) लोकतंत्र
(घ) सैनिकतंत्र
उत्तर-
(ग) लोकतंत्र

प्रश्न 31.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कौन होते हैं ?
(क) महासचिव
(ख) न्यायाधीश
(ग) एक प्रभारी
(घ) महालेखापाल
उत्तर-
(ख) न्यायाधीश

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

प्रश्न 1.
……………… नामक व्यक्ति ने चिली में सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की।
उत्तर-
आयेंदे

प्रश्न 2.
चिली के पूर्व वायुसेना प्रमुख …………….. की हत्या 1975 ई. में कर दी गई।
उत्तर-
अलबर्टी वेशले

प्रश्न 3.
लेनिन जहाज कारखाना, पोलैंड के शहर ………………… में स्थित था।
उत्तर-
ग्डांस्क

प्रश्न 4.
लेनिन जहाज कारखाने के मजदूरों ने हड़ताल कर दी थी उसका कारण था एक क्रेन चालक ………………. को गलत ढंग से नौकरी से – निकाला जाना।
उत्तर-
महिला

प्रश्न 5.
लेनिन जहाज कारखाना के मजदूरों ने सरकार से एक समझौता किया वह समझौता ……………….कहलायी।
उत्तर-
ग्डांस्क सन्धि

प्रश्न 6.
लेनिन जहाज कारखाना के मजदूर संगठन का नाम …………….. रखा गया।
उत्तर-
सोलिडेरिटी.

प्रश्न 7.
1980 ई० के दशक में पोलैंड की साम्यवादी सरकार ………………… थी।
उत्तर-
अलोकतांत्रिक

प्रश्न 8.
पोलैंड की साम्यवादी सरकार का नेतृत्व निरंकुश शासक जनरल ……………….. कर रहा था।
उत्तर-
जारूजेल्स्की

प्रश्न 9.
घाना पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था और इसका नाम ……………… था।
उत्तर-
गोल्डकोस्ट

प्रश्न 10.
जारूजेल्स्की ……….. के साम्यवादी नेता थे।
उत्तर-
पोलैंड

प्रश्न 11.
घाना को ………………. आजादी मिली।
उत्तर-
1957 ई. में

प्रश्न 12.
वर्तमान समय में चिली एक ……………… देश है।
उत्तर-
लोकतंत्र

प्रश्न 13.
चिली के वर्तमान राष्ट्रपति ……………… हैं।
उत्तर-
मिशेल मेशले

प्रश्न 14.
घाना में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना पहली बार …….. के नेतृत्व में हुई।
उत्तर-
लामे एन क्रूमा

प्रश्न 15.
लेनिन जहाज कारखाना में लेक वालेशा एक ………………. था।
उत्तर-
इलेक्ट शियन

प्रश्न 16.
नेपाल के अंतिम नरेश ……………… थे ।
उत्तर-
ज्ञानेन्द्र

प्रश्न 17.
1990 ई० में नेपाल में जन आन्दोलन के परिणामस्वरूप …………………….. लोकतंत्र की शुरूआत हुई।
उत्तर-
बहुदलीय

प्रश्न 18.
………………… की मृत्यु के बाद 1990 ई. के दशक में पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना हुई।
उत्तर-
जियाउल हक

प्रश्न 19.
म्यांमार पहले…………….कहा जाता था।
उत्तर-
बर्मा

प्रश्न 20.
म्यांमार में ……………………के संघर्ष को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली
उत्तर-
आंग सान सूची

प्रश्न 21.
संयुक्त राष्ट्रसंघ के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव ………….. वर्षों के लिए होता है।
उत्तर-
दो

प्रश्न 22.
भारत में नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार ……………….में मिला।
उत्तर-
1950

प्रश्न 23.
सन् ………………. ई. में फ्रांस की क्रान्ति हुई।
उत्तर-
1789

प्रश्न 24.
चिली में अभी ………………… की स्थापना है।
उत्तर-
लोकतंत्र

प्रश्न 25.
लोकतंत्र में लोगों को संगठन बनाने का …………………. होता है।
उत्तर-
अधिकार

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एशिया के तीन गैरलोकतांत्रिक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर-
बर्मा (म्यांमार), भूटान, चीन ।

प्रश्न 2.
चिली सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना किसने की?
उत्तर-
सेल्वाडोर आयेंदे ने ।

प्रश्न 3.
सेल्वाडोर आयेंदे कौन था ?
उत्तर-
चिली देश का राष्ट्रपति ।

प्रश्न 4.
आयेंदे की सरकार का कब तख्ता पलट हुआ था ?
उत्तर-
11 सितम्बर, 1973 ई. को।

प्रश्न 5.
1980 ई० में पोलैंड में जो व्यक्ति हड़ताल में शामिल हुआ, उसका नाम था ?
उत्तर-
लेक वालेशा।

प्रश्न 6.
घाना के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति कौन हुए ?
उत्तर-
लामे एन क्रूमा ।

प्रश्न 7.
अमरिकी स्वतंत्रता संग्राम किस देश के विरुद्ध लड़ा गया था ?
उत्तर-
ब्रिटेन के विरुद्ध ।

प्रश्न 8.
म्यांमार के उस नेता का नाम बताइए जो लोकतंत्र के लिए लड़ती रहीं तथा नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त किया ?
उत्तर-
आंग सान सूची।

प्रश्न 9.
20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में पोलैंड में किस प्रकार का शासन था ? . . .
उत्तर-
साम्यवादी ।

प्रश्न 10.
घाना में एनक्रूमा सरकार का तख्तापलट फिर कब हुआ? ‘
उत्तर-
घाना में सेना ने 1966 ई. में तख्ता पलट दिया और लोकतंत्र समाप्त हो गया।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रपति आयेंदे ने निर्वाचित होने के बाद कौन से कार्य किये?
उत्तर-
राष्ट्रपति आयेंदे ने अनेक सुधारवादी कार्यक्रम चलाये । उसने मजदूरों की दशा में सुधार, शिक्षा-प्रणाली में सुधार के अनेक प्रयास किये । बच्चों के लिए निःशुल्क दूध बाँटना, भूमिहीन किसानों को जमीन बाँटना आदि । उस समय चिली की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी । अतः आयेंदे ने मजदूरों के अधिक से अधिक कल्याण की बात सोचते थे तथा कानून बनाए । उनके इस सुधार कार्यक्रम से अमीर लोग राष्ट्रपति आयेंदे से नाखुश थे।

प्रश्न 2.
1980 ई० में पोलैंड में कौन शासन करता था ?
उत्तर-
1980 ई० में पोलैंड में साम्यवादी दल का शासन था। इस दल का नाम था पोलिश यूनाइटेड वर्क्स पार्टी । यह एक दलीय व्यवस्था थी। सभी शासकीय ताकत इसी दल के हाथों में थी। सरकार का पूरी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण था । अन्य साम्यवादी देशों की तरह पोलैंड में किसी अन्य राजनीतिक दल को राजनीति में भाग लेने का अधिकार नहीं था।

प्रश्न 3.
भारत में लोकतांत्रिक विकास किस तरह से हो रहा है ?
उत्तर-
1947 ई० में भारत स्वतंत्र हुआ। 1950 में भारत का अपना लोकतंत्र लागू हुआ। उस समय से आज तक भारत में लोकतंत्र का क्रमिक विकास हो रहा है । स्वतंत्र भारत में सब कुछ अपना है । नागरिकों को वयस्क मताधिकार से लेकर सभी लोकतंत्रात्मक अधिकार प्राप्त हैं।

प्रश्न 4.
नक्शे में पोलैंड को ढूँढें तथा यह बतावें कि 1980 के दशक में यूरोप के किन-किन देशों में साम्यवादी शासन था ?
उत्तर-
छात्र पोलैंड स्वयं ढूढ़े ] नक्शे के अनुसार 1980 के दशक में पूर्वी यूरोप के माल्दोवा, जार्जिया, बेलारूस, यूक्रेन, अजरबैजान तथा आर्मीनिया जैसे देशों में साम्यवादी शासन था।

प्रश्न 5.
उन देशों का नाम लिखें जहाँ वर्तमान में साम्यवादी शासन है।
उत्तर-
वर्तमान समय में म्यांमार, भूटान, चीन, अफगानिस्तान, यमन, लीबिया, सउदी अरब तथा अंगोला जैसे देश में साम्यवादी शासन है।

प्रश्न 6.
पोलैंड में मजदूर संघ इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया ?
उत्तर-
पोलैंड में मजदूर संघ इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि किसी साम्यवादी शासन वाले देश में पहली बार एक स्वतंत्र मजदूर संघ का गठन हुआ। सरकार ने भी इस संघ की मान्यता दे दी थी।

प्रश्न 7.
अधिकांश देशों में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में काफी देर से : मताधिकार क्यों मिला? भारत में ऐसा क्यों नहीं हुआ? ।
उत्तर-
अधिकांश देशों में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में काफी देर से मताधिकार इसलिए मिला क्योंकि महिलाओं को पुरुषों के समान नहीं माना जाता था । भातरीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी बढ़-चढे कर भाग लिया था। इसी दौरान भारत में सकारात्मक लोकतांत्रिक मूल्यों ने जन्म लिया था। उन मूल्यों में महिलाएँ समान समझी जाती थीं। अतः भारत में पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी मताधिकार मिल गया।

प्रश्न 8.
किसी को जीवन भर के लिए राष्ट्रपति चुनने को क्या आप उचित मानते हैं ?
उत्तर-
किसी को जीवन भर के लिए राष्ट्रपति चुनने की विधि को उचित नहीं माना जा सकता क्योंकि ऐसा होने पर राष्ट्रपति निरंकुश तथा तानाशाह हो सकता है। घाना में राष्ट्रपति लामे एनक्रूमा अपने आपको आजीवन राष्ट्रपति के रूप में चुनवा लिया था । यद्यपि वह लोकतंत्र का
राष्ट्रपति था परंतु उसकी तानाशाही से तंग हो सेना ने 1966 ई. में एनक्रूमा सरकार का तख्ता पलट दिया था।

प्रश्न 9.
चिली में पिनोशे शासन और पोलैंड की साम्यवादी शासन में तुलना करें।
उत्तर–
चिली में पिनोशे शासन और पोलैंड की साम्यवादी शासन में निम्नलिखित अंतर था

  • चिली में सैनिक शासन था जबकि पोलैंड में एक पार्टी का शासन था।
  • पोलैंड की साम्यवादी सरकार यह दावा कर रही थी कि वह पोलैंड के मजदूर वर्ग की ओर से शासन चला रही है और चिली के शासक का ऐसा कोई दावा नहीं था।
  • पोलैंड का शासन किसी विशेष मजदूर संगठन के अधिनायकवाद का उदाहरण था । चिली का शासन सैनिक अधिनायकवाद था।

प्रश्न 10.
चिली और पोलैंड दोनों की शासन व्यवस्था में कौन-सी समानताएँ थीं ?
उत्तर-
चिली और पोलैंड दोनों में असमानता के बावजूद भी कुछ निम्नलिखित समानताएँ थीं

  • दोनों देशों में शासकों का चुनाव जनता अपनी इच्छा से नहीं कर सकती थी।
  • दोनों ही देशों में जनता को सरकार के समक्ष अपने विचार व्यक्त करने, संगठन बनाने, विरोध करने तथा राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की वास्तविक स्वतंत्रता नहीं थी।
  • दोनों ही देशों की जनता को खुलकर अपने विचारों को । अभिव्यक्त करने की आजादी नहीं थी। अतः स्पष्ट है कि दोनों की शासन व्यवस्थाओं में समानताएँ थीं।

प्रश्न 11.
लिच्छवी गणतंत्र की प्रशासनिक व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर-
ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी में बुद्धकाल में कई गणराज्यों में लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था थी। उनमें से लिच्छवी गणराज्य भी था । इस गणराज्य की कई प्रशासनिक विशेषताएँ थीं।

  • इस गणराज्य में शासन का प्रधान एक निर्वाचित पदाधिकारी होता था जिसे राजा कहा जाता था ।
  • राज्य की वास्तविक शक्ति एक केन्द्रीय समिति के पास होती थी। जिसमें जनता के प्रतिनिधि होते थे। ये सभी प्रतिनिधि भी राजा कहलाते थे।
  • लिच्छवी गणराज्य में केन्द्रीय समिति में 1707 राज प्रतिनिधि थे । प्रत्येक राजा के अधीन एक उप राजा, सेनापति तथा भंगरिक आदि पदाधिकारी होते थे।
  • सभी प्रकार के निर्णय बहुमत से होता था।
    स्पष्ट है बुद्धकालीन गणराज्यों में शासकों का चुनाव होता था।

प्रश्न 12.
वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र से क्या तात्पर्य है.? क्या कोई वैश्विक सरकार होनी चाहिए?
उत्तर-
विश्व में लगातार बिगड़ रही शांति व्यवस्था की स्थापना के लिए एक विश्व सरकार होनी चाहिए। भारत की एक सरकार है, ब्रिटेन की एक सरकार है अन्य देशों में भी सरकारे हैं पर विश्व की कोई एक सरकार नहीं है जिसके द्वारा निर्मित कानून दुनिया भर के लोगों पर लागू हो। अतः विश्व स्तर पर लोकतंत्रात्मक सरकार का आना ही वैश्विक लोकतंत्र हुआ। विशाल विश्व में एक प्रशासन संभव नहीं है, फिर भी द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना एक तरह से वैश्विक स्तर पर लोकतंत्रात्मक कदम ही है।

प्रश्न 13.
वीटो क्या है ? यह अधिकार किन-किन देशों को प्राप्त है ?
उत्तर-
वीटो विशेषाधिकार है। जब सुरक्षा परिषद् के किसी भी फैसले के खिलाफ इसके स्थायी सदस्य इस अधिकार का प्रयोग करते हैं तो सुरक्षा परिषद् उसकी मर्जी के खिलाफ फैसला नहीं कर सकती अर्थात् पूर्व का निर्णय लागू नहीं होता। यह अधिकार स्थायी सदस्यों को प्राप्त है । स्थायी सदस्य हैं-अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ।

प्रश्न 14.
लोकतांत्रिक सरकार में और तानाशाही सरकार में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक सरकार में जनता द्वारा चने गए प्रतिनिधि शासन में भाग लेते हैं। लोकतांत्रिक सरकार में लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अवसर की समानता, मौलिक अधिकार, वयस्क मताधिकार जैसे लोकतांत्रिक सिद्धान्तों की प्रधानता दी जाती है। . परन्तु, तानाशाही शासन व्यवस्था में शासक की निरंकुशता प्रबल रही है। जनता के अधिकारों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। तानाशाही अपने विरोधियों को कुचल कर रख देता है। तानाशाही शासन में मानवता कराहती है।

प्रश्न 15.
ग्डांस्क संधि क्या थी?
उत्तर-
साम्यवादी पोलैंड में 14 अगस्त, 1980 ई. को लेनिन जहाज कारखाना के एक क्रेन चालक महिला को गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया । अतः उसके समर्थन में अन्य कर्मचारी भी हड़ताल पर चले गये । उनकी माँगें थीं-

  • देश में स्वतंत्र मजदूर संघ को मान्यता मिले
  • राजनैतिक बंदियों को रिहा किया जाय तथा
  • प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए।

इस तरह इस आन्दोलन की लोकप्रियता के समक्ष सरकार को झुकना पड़ा । लेक वालेशा के नेतृत्व में मजदूरों ने सरकार के साथ 21 सूत्री समझौता किया। यह समझौता ‘ग्डांस्क संधि’ कहलायी।

प्रश्न 16.
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में लोकतंत्र के अनुभव पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना एवं पतन की प्रक्रिया चलती रही है । जनरल जिया उल हक की मृत्यु 1990 के दशक में हुई। तब पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना हुई, लेकिन वह स्थायी नहीं रह सकी । 1999 ई. में जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाजशरीफ की तख्तापलट करते हुए सैनिक शासन की स्थापना की। परन्तु हाल में पाकिस्तान में हालात परिवर्तित हुए, और वहाँ की जनता ने लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया। अन्त में जन-आन्दोलन के समक्ष सैनिक शासन को झुकना पड़ा और पाकिस्तान में चुनाव कराने पड़े। 2008 ई. के चुनाव के बाद पाकिस्तान पिपुल्स पार्टी की गठबंधन सरकार सत्ता में आयी। परवेज मुशर्रफ को गद्दी से हटना पड़ा । आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति हुए और युसुफ रजा गिलानी प्रधानमंत्री बने । इस घटना क्रम के अंतर्गत पाकिस्तान की लोकप्रिय नेत्रि बंजीर भुट्टो को अपनी प्राण गवानी पड़ी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतंत्र के विस्तार के विभिन्न चरणों का वर्णन करें।
उत्तर-
भारत में ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी में बुद्धकाल में गंगाघाटी के कई गणराज्यों में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के प्रमाण मिले हैं । जैसेकपिलवस्तु, वैशाली में लिच्छवी, मिथिला, विदेह आदि ।

परन्त आधनिक लोकतंत्र की कहानी कम-से-कम दो सदी पहले शुरू हुई। 1779 ई. के जन विद्रोह ने फ्रांस में टिकाऊ लोकतंत्र की स्थापना नहीं की थी। 19वीं सदी तक फ्रांस में बार-बार लोकतंत्र को उखाड़ फेंका गया और पुनः स्थापित किया गया। लेकिन फ्रांसीसी क्रान्ति ने पूरे यूरोप में जगह-जगह पर लोकतंत्र के लिए संघर्षों की प्रेरणा दी।

ब्रिटेन में लोकतंत्र के तरफ कदम की शुरूआत फ्रांसीसी क्रान्ति से काफी पहले हो चुकी थी। लेकिन यहाँ प्रगति की रफ्तार काफी कम थी। 18वीं-19वीं सदी में हुए राजनैतिक घटनाक्रमों ने राजशाही और सामंत वर्ग की शक्ति में कमी कर दी । फ्रांसीसी क्रान्ति के आस-पास ही उत्तर अमेरिका में स्थित ब्रिटिश उपनिवेशों ने 1776 ई. में खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया। अगले कुछ ही वर्षों में इन उपनिवेशों ने साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका का गठन किया। अमेरिका में 1789 ई. में एक लोकतांत्रिक संविधान लागू किया गया जो आजतक चला आ रहा है। 19वीं सदी में लोकतंत्र के लिए होनेवाले संघर्ष अक्सर राजनैतिक समानता, आजादी और न्याय जैसे मूल्यों को लेकर ही होते थे। तब एक मुख्य माँग हुआ करती थी कि सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त हो।

प्रश्न 2.
19वीं शताब्दी में लोकतंत्र की स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर-
19वीं शताब्दी में लोकतंत्र के लिए संघर्ष हुआ। इसमें प्रगति भी हुई। यह संघर्ष नागरिकों के राजनैतिक समानता, लोगों की स्वतंत्रता तथा न्यायिक निष्पक्षता जैसे मूल्यों के प्राप्ति तक ही सीमित रहा । अभी तक सार्वभौम वयस्क मताधिकार जनता को प्राप्त नहीं थे।

1900 ई. तक न्यूजीलैण्ड को छोड़कर किसी भी देश में जनता को सार्वजनिक वयस्क मताधिकार प्राप्त नहीं था । न्यूजीलैण्ड में 1893 ई. में ही जनता को सार्वजनिक वयस्क मताधिकार प्राप्त हो गया। कुछ देशों में मताधिकार उन्हीं को प्राप्त था जिसके पास निजी संपत्ति थी । अमेरिका में आम महिलाओं के साथ अश्वेत पुरुषों को भी मताधिकार मिला । इस तरह 19वीं शदी में लोकतंत्र की स्थापना हेतु संघर्ष की जरूरत थी। अतः वे लोग चाहे वह महिला हो अथवा पुरुष, चाहे वह गरीब हो या अमीर और चाहे श्वेत हो या अश्वेत, मताधिकार प्राप्ति हेतु संघर्ष करने लगे। इस तरह अब तक इतना तो अवश्य हो चुका था कि यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में आधुनिक लोकतंत्र की स्थापना का प्रारम्भिक चरण पूरा हो चुका था। इन देशों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मर्जी से सरकार का चयन किया ।

प्रश्न 3.
एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देशों में उपनिवेशवाद का अंत कैसे हुआ?
उत्तर-
एशिया और अफ्रीका के अधिकांश देश यूरोपीय उपनिवेश थे। इन उपनिवेशों के नागरिकों को कोई राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं था । अतः इन देशों की जनता ने अपने-अपने देशों में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करना शुरू किया । यूरोपीय देश इन औपनिवेशिक देशों का आर्थिक शोषण कर रहे थे। जनता का संघर्ष आरम्भ हआ तो औपनिवेशिक शासकों ने इसे दबाने का प्रयास किया। संघर्ष के विस्तार देखते हुए औपनिवेशिक शासकों को जनता के समक्ष झुकना पड़ा तथा सीमित अधिकार वाली सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त हुए। परन्तु जनता इससे संतुष्ट नहीं थी। अत: संपूर्ण राजनैतिक अधिकारों की माँग होने लगी। अंत में औपनिवेशिक शासकों को इन देशों को स्वतंत्र करना पड़ा। इसी तरह हमारा देश भारत 1947 ई. में स्वतंत्र हुआ और यहाँ लोकतंत्र की स्थापना हुई।

पश्चिमी अफ्रीका में घाना एक देश है; जहाँ लोकतांत्रिक शासन का प्रयोग बहुत अधिक सफल नहीं रहा । घाना पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था और इसका नाम गोल्डकोस्ट था । राजनैतिक अधिकारों हेतु यहाँ संघर्ष का आरम्भ हुआ। एक सुनार का पुत्र एवं शिक्षक ‘लामे एनक्रमा’ इस संघर्ष का नेता था । इनके नेतृत्व में घाना 1957 ई० में स्वतंत्र हुआ। आजादी के बाद एनक्रमा घाना के प्रधानमंत्री एवं फिर राष्ट्रपति चुने गए । इस तरह पश्चिमी अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना का प्रथम सफल प्रयास हुआ । घिर-घिरे यहाँ उपनिवेशवाद का अंत हुआ । सेना ने 1966 ई. में लोकतंत्र का खात्मा कर पुनः सैनिक शासन कायम कर दिया ।

प्रश्न 4.
चिली में लोकतंत्र की वापसी कैसे संभव हुई ?
उत्तर-
दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के चिली देश के राष्ट्रपति सल्वाडोर आयेंदे थे । चिली के चर्च, जमींदार वर्ग, अमीर लोग इनके खिलाफ थे, क्योंकि आयेंदे मजदूरों की दशा में सुधार, शिक्षा प्रणाली में सुधार तथा भूमिहीन किसानों को जमीन बाँटने जैसी लोकतांत्रिक नीतियों पर अमल कर रहे थे। 11 सितम्बर, 1973 को जनरल आगस्तो पिनोशे को आयेंदै का तख्ता पलट कर दिया और आगस्तो पिनोशे देश के राष्टपति बन बैठे। पिनोशे की सरकार ने आयेंदे के समर्थकों और लोकतंत्र की माँग करने वालों का दमन किया, कई लोगों को लापता कर दिया गया। 17 वर्षों तक उसका निरंकुश एवं क्रुर शासन चलता रहा । पिनोशे का सैनिक शासन 1988 ई. में तब समाप्त हुआ जब उन्होंने चिली में जनमत संग्रह कराने का फैसला किया । जनता ने भारी मतों से पिनोशे को ठुकरा दिया और चिली में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हुई।

अब तक चिली में चार बार चुनाव हो चुके हैं। जनवरी 2006 ई. में राष्ट्रपति के चुनाव में चिली के पूर्व वायु सेना प्रमुख अलबर्टी वेशेल, जिनकी हत्या 1973 ई. में हुए विद्रोह के दौरान कर दी गयी थी; की पुत्री मिशेल वैशले विजयी रहीं। आज भी राष्ट्रपति के पद पर मिशेल वैशले कायम हैं। इस प्रकार चिली के लोगों ने देश में लोकतंत्र की स्थापना कर दी।

प्रश्न 5.
संयुक्त राष्ट्र के कितने अंग होते हैं ? वर्णन करें।
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित अंग हैं

  • महासभा-संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य राष्ट्र इसके सदस्य हैं।
  • सुरक्षा परिषद-अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस तथा चीन इसके स्थायी सदस्य हैं। सुरक्षा परिषद् में 10 अस्थायी सदस्य हैं। इस प्रकार कुल 15 सदस्य हैं । 10 अस्थाई सदस्यों का निर्वाचन हर दो वर्ष पर होता
  • आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्-इस परिषद् में कुल 54 सदस्य हैं। जो देशों के बीच आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में सहयोग स्थापना को प्रोत्साहित करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय-इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं; जिनका काम होता है अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाना । इसके लिए संयुक्त राष्ट्र का एक अपना न्यायालय है।
  • न्यास परिषद्-इसका एक न्यास परिषद् भी है।
  • सचिवालय-संयुक्त राष्ट्र का अपना सचिवालय है जो अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित है । संयुक्त राष्ट्र के महासचिव सचिवालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होते हैं । बान-की-मून वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 6 आ रही रवि के सवारी

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 6 आ रही रवि के सवारी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 6 आ रही रवि के सवारी

Bihar Board Class 9 Hindi आ रही रवि के सवारी Text Book Questions and Answers

आ रही रवि की सवारी के प्रश्न उत्तर Class 6 Bihar Board प्रश्न 1.
‘आ रही रवि की सवारी’ कविता का केंद्रीय भाव क्या है? .
उत्तर-
‘आ रही रवि की सवारी’ कविता हमारी पाठ्य पुस्तक से संकलित की गई है। इस कविता के रचनाकार महाकवि हरिबंशराय बच्चन’ जी हैं।

उपरोक्त काव्य पंक्तियों में ‘बच्चन’ जी ने आशावादी भावनाओं को प्रकट करते हुए जीवन में उसके महत्व के प्रति सबका ध्यान आकृष्ट किया है। बच्चन जी की पहली पत्नी के असामयिक मृत्यु के कारण जीवन में निराशा छा गई थी। कवि बच्चन चिंताओं से घिरकर निष्क्रिय बन गए थे। किन्तु कुछ अंतराल के बाद कवि के जीवन में भोर की पहली किरण प्रकट हुई और क्षितिज पर नए सूरज का प्रतिबिंब दिखाई पड़ा। कहने का मूल भाव यह है कि कवि के जीवन में निराशा की जगह आशा की किरणें फूटी एवं नव उत्साह के साथ कवित काव्य सृजन की ओर उन्मुख हुआ। काव्य-सृजन ही नहीं जीवन-सृजन की ओर भी आशा के साथ नए पथ का पथिक बनकर यात्रा का शुभारंभ किया। आ रही रवि की सवारी में विंब प्रयोग भी है, प्रतीकात्मक प्रयोग भी है। सूर्य की सवारी आ रही है-इस पंक्ति का आशय यह हुआ कि प्राची दिशा में सूरज अपनी आभा युक्त किरणों के साथ पृथ्वी पर सवारी के साथ आ रहा है। यानि कवि के जीवन में नयी चेतना, ऊर्जा, उत्साह का स्पंदन हो रहा है। ‘आ रही रवि की सवारी’ का प्रतीक प्रयोग केवल कवि के जीवन में नयी चेतना और नवजागरण के स्फुरण से संबंधित नहीं है। बल्कि राष्ट्र में स्वाधीनता संग्राम एवं राष्ट्र के नवनिर्माण से भी है। प्रकारान्तर से यह कविता केवल कवि के व्यक्तिगत जीवन से न जुड़कर राष्ट्रीय जनजीवन की आजादी और नवनिर्माण से भी जुड़ी हुई है। इस प्रकार इस कविता का मूल केन्द्रीय भाव राष्ट्रीयता से है; स्वाधीनता . से है और जन जीवन के नवनिर्माण से है।

Aa Rahi Ravi Ki Sawari Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
कवि ने किन-किन प्राकृतिक वस्तुओं का मानवीकरण किया है?
उत्तर-
कवि ने ‘आ रही रवि की सवारी ‘कविता में ‘रवि’ का मानवीकरण किया है। बादलों का भी सही मानवीकरण का स्वरूप प्रदान कर कविता में नयी जान फूंक दी है। विहग, तारों, रात का राजा यानि चाँद आदि का प्राकृतिक वस्तुओं का कवि ने मानवीकरण कर कविता में नए-सौंदर्य की अभिवृद्धि की है।
नव किरण, कलि-कुसम का भी इस कविता में मानवीकरण किया गया है।

आ रही रवि की सवारी प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
‘आ रही रवि की सवारी’ कविता में चित्रित सवारी का वर्णन करें।
उत्तर-
आ रही रवि की सवारी’ काव्य-कृति में कवि ने प्राकृतिक वस्तुओं से सुसज्जित सवारी का चित्रण करते हुए सूर्य यानि रवि के आगमन का अपने शब्दों में वर्णन किया है। कलियों एवं फूलों से सुसज्जित एवं सुवासित पथ का निर्माण कवि ने किया है। बादल स्वर्णमयी पोशाक पहनकर अनुचर बनकर भागवानी कर रहे हैं, रवि के आने का संकेत कर रहे हैं। सूर्य का रथ नव किरणों से युक्त यानि नवकिरण रूपी रथ पर नया सूरज सवारी कर धरा पर अवतरित हो रहा है।
पंक्षी-गण बंदी और चारणों की भाँति कीर्ति-गायन कर रहे हैं।

सूर्य के आगमन से तारों रूपी फौज आसमान यानि मैदान को छोड़कर भाग चुकी है। कवि के हृदय में विजय का भाव जागरित होता है कि, इस दृश्य पर वह उछले; कूदे, इसकी वंदना करे किन्तु कुछ पल ठिठककर वह पुनः सोचता है कि चंद्रमा जो रात का राजा है, राह में भिखारी के रूप में दृष्टिगत होता है यानि रवि प्रकाश के आगे वह निस्तेज है, प्रभाहीन है। इस प्रकार रवि की सवारी धरा पर अवतरित हो रही है।

प्रस्तुत कविता में प्रतीकात्मक प्रयोगों द्वारा कवि ने अपने मनोभावों के साथ राष्ट्रीय समस्याओं की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया है। प्रतीकों का प्रयोग बड़ा ही सटीक ढंग से किया गया है। मानवीकरण द्वारा यथार्थ का चित्रण करने में कवि सफल हुआ है। इस प्रकार प्रकृति चित्रण के साथ मानवीय जीवन एवं राष्ट्रीय जीवन के पुनर्निर्माण एवं आजादी के प्रति संकेत-भाव भी इस कविता का मूल उद्देश्य है।

Aa Rahi Ravi Ki Sawari Poem Questions And Answers In Hindi प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए
चाहता उछलूँ विजय कह
पर ठिठकता देखकर यह
रात का राजा खड़ा है राह में बनकर भिखारी!
उत्तर-
उपरोक्त पक्तियों में महाकवि बच्चन ने प्रकृति के स्वरूप का चित्रण करते हुए अपने हृदय के उदगारों को भी प्रकट किया है। इन पंक्तियों में कवि ने ‘विजयोल्लास’ भाव का चित्रण करते हुए हृदय की प्रसन्नता को प्रकट किया है। कवि की हार्दिक इच्छा है कि ‘रवि की जो सवारी आ रही है। उसके प्रति विजय भाव प्रकट करते हुए उछलूँ, कहूँ और वंदना करूँ, खुशियाँ प्रकट करूँ। इन पंक्तियों में आजादी के प्रथम प्रहर पर कवि को खुशी का ठिकाना नहीं है। वह इस आजादी को प्राप्ति पर हर्षातिरेक से गद्गद् है कि इसी के साथ वह ठिठककर सोचता है . . कि यह आजादी तो मिली है किन्तु चंद्रमा पो रात का राजा राह में भिखारी के रूप में खड़ा है यानि इन पंक्तियों में प्रतीकात्मक प्रयोग है। यह आजादी अभी अधूरी है जबतक राष्ट्रीय जीवन में स्वाधीनता के साथ-सा नवनिर्माण का भी सूर्य परिलक्षित न हो।
उपरोक्त पंक्तियों का संबंध कवि के व्यक्तिगत जीवन से भी है क्योंकि पहली पत्नी के असामयिक मृत्यु के बाद कवि के जीवन में निराशा, कुंठा का
साम्राज्य छा गया था किन्तु धीरे-धीरे यह निराशा रूपी कुहरा छंटा और कवि कं __जीवन में नयी आशा की किरणें फूटी और सृजन कर्म का नय अध्याय का सूत्रपात हुआ।
ठीक दसरा अर्थ भी इस पंक्तियों के साथ जटा हआ है, जो राष्टीय समस्याओं एवं राष्ट्रीय जन-जीवन से भी जडां हआ है। इस प्रकार कवि की पंक्तियों में .व्यक्तिगत जीवन के चित्रण के साथ सामाजिकता और राष्ट्रीयता का भी चित्रण है।

आ रही रवि की सवारी का प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 5.
रवि की सवारी निकलने के पश्चात् प्रकृति उसका स्वागत किस प्रकार से करती है?
उत्तर-
महाकवि बच्चन ने अपनी कविता में प्रकृति चित्रण का अनोखा स्वरूप गढ़ा है। जब रवि को सवारी निकल रही है उसका सजीव चित्रण करते हुए – कवि कहता है कि नए किरणों के रथ पर सूर्य सवारी कर आ रहा है। कलियों एवं फूलों से राह सजा हुआ और सुवासित है। बादल स्वर्ण वस्त्रों में मुसज्जित होकर अनुचर बने हुए हैं। बंदी और चारण के रूप में पक्षीगणः कीर्ति- गायन यानि बंदना कर रहे हैं, अभ्यर्थना कर रहे हैं।

आ रही रवि की सवारी कविता का प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 6.
रात का राजा भिखारी कैसे बन गया?
उत्तर-
‘रात का राजा’ का अभिप्राय यहाँ चंद्रमा से है! चंद्रमा का अपना – प्रकाश तो नहीं होता है। वह सूर्य-प्रकाश से ही आलोकित होता है।
जब सूर्योदय हो रहा है, रजनी सिमटकर विदा ले रही है। तारों का समूह आकाश से ओझल हो रहा है तब चंद्रमा भी जो सूर्य-प्रकाश से आलोकित है, अब सूर्य प्रकाश के अभाव में निस्तेज पड़ गया है, प्रभाहीन हो गया है। उसकी दशा भिखारी की तरह हो गयी है। यहाँ कवि ने प्रतीकात्मक प्रयोगों द्वारा प्रकृति का अद्भुत मानवीकरण प्रस्तुत किया है। इन पंक्तियों में चित्रण की बारीकी है। यथार्थ का सटीक चित्रण है। प्रकारान्तर से कवि के प्रभाहीन, स्त्री-विहीन जीवन से यह प्रसंग जुड़ा हुआ है। साथ ही राष्ट्रीय नव जागरण, स्वाधीनता एवं नव-निर्माण का भी । सूक्ष्म भाव इन पंक्तियों में छिपा हुआ है। इस प्रकार गुलामी युक्त भारतीय जन जीवन का भी चित्रण है। कवि के व्यक्तिगत जीवन का भी प्रसंग जुड़ा है। इस प्रकार प्रकृति के माध्यम से कवि ने जीवन–प्रसंगों के यथार्थ का सटीक चित्रण किया है।

आ रही रवि की सवारी Bihar Board प्रश्न 7.
इस कविता में ‘रवि को राजा’ के रूप में चित्रित किया गया है। अपने शब्दों में यह चित्र पुनः स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
अपनी कविता में महाकवि ‘बच्चन’ ने ‘रवि को राजा’ के रूप में चित्रित किया है। यहाँ ‘रवि को राजा’ का भाव दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। प्रकृति के रूपों के माध्यम से कवि ने अपने व्यक्तिगत जीवन के यथार्थ-चित्रण के साथ भारत रूपी सूर्य के भी भाग्योदय का चित्रण किया है। कहने का आशय है कि इन कविता में दो भाव छिपे हुए हैं-एक का संबंध कवि-जीवन से एवं दूसरा का संबंध राष्ट्रीय जीवन से है।
पहली पत्नी की मृत्यु के बाद कवि के जीवन में गहरी निराशा और अवसाद का साम्राज्य छा जाता है और कवि व्यथित, पीड़ित होकर कुछ दिनों तक निष्क्रियता की गोद में सो जाता है।

कुछ दिनों के बाद कवि के जीवन में नए सूरज का आगमन होता है, नयी किरणें स्वागत करती हैं। प्रकृति प्रसन्नता की वर्षा करती हैं और कवि नवोल्लास के साथ नयी काव्य रचना की ओर प्रवृत्त हो जाता है। यहाँ रवि को राजा का भाव कवि के जीवन से भी है। कवि आज आशा की किरणों के बीच संभावनाओं के सूरज के साथ दिखाई पड़ता है यानि स्वयं सूर्य सदृश नयी आशा, नए जोश, नए सृजन के साथ जीवन-पथ पर अग्रसर होता है। कहने का भाव यह है कि कवि खुद रवि रूपी राजा है। आज का सूर्य है। दूसरा कविता का भाव यह है कि भारत रूपी सूर्य का भाग्य अब चमक रहा है क्योंकि स्वाधीनता रूपी किरणें अपनी आभा से सारे राष्ट को जगमग-जगमग कर रही है। राष्ट्रीय जीवन में स्वाधीनता एवं नवनिर्माण का भी प्रतीकात्मक प्रयोग सर्य के रूप में हआ है। यानि भारत अब आजाद मल्क के रूप में अन्तरराष्ट्रीय क्षितिज पर उभरा है और नवनिर्माण का सूर्य अपनी नयी किरणों के साथ इस धारा को आलोकित कर रहा है।

आ रही रवि की सवारी कविता का भावार्थ Bihar Board प्रश्न 8.
कवि क्या देखकर ठिठक जाता है और क्यों?
उत्तर-
उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि आजादी प्राप्ति पर तो खुशियाँ व्यक्त करता है, विजय गान करना चाहता है, उछलना, कूदना चाहता है; किन्तु वह अचानक ठिठक जाता है। ऐसा क्यों कवि करता है? यहाँ एक गढ प्रभाव है। रात का राजा यानि चंद्रमा जो निस्तेज पड़ा है, प्रभाहीन है, दीन-हीन है, दरिद्र के रूप में चित्रित है-स्वयं कवि के जीवन से भी यह प्रसंग जुड़ा हुआ है दूसरा राष्ट्रीय नवनिर्माण से भी संबंधित है। पूरा जन जीवन निस्तेज प्रभाशून्य, बेबसी और लाचारी में जीने के लिए अभिशप्त है। जबतक उनके जीवन में नवनिर्माण की किरणें अपनी आभा नहीं बिखर देती तबतक यह प्रसन्नता, यह आजादी यह विजय-गान अधूरा रहेगा। ठीक उसी प्रकार कवि का जीवन भी पत्नी के अभाव में अधूरा है। निराशामय है। कष्टप्रद है। भिखारी के समान है। कवि की पंक्तियों का प्रयोग द्वि-अर्थक है। इनमें मानवीय जीवन की सटीक चित्रण तो हुआ ही है मानवीकरण में भी कवि को सफलता मिली है।

आ रही रवि की सवारी का भावार्थ Bihar Board प्रश्न 9.
सूर्योदय के समय आकाश का रंग कैसा होता है-पाठ के आधार पर बताएँ।
उत्तर-
प्रात:कालीन बेला में पूरब दिशा में जब सूर्य क्षितिज पर दिखाई पड़ता है उस समय आकाश का रंग लालिमा-युक्त रूप में दृष्टिगत होता है।

सूर्य की किरणें अपनी आभा से पूरे बादलों को स्वर्णमयी स्वरूप प्रदान करती है। प्रतीत होता है कि आकाश के ये बादल स्वर्णमयी पोशाक पहनकर अनुचर का कार्य कर रहे हैं। सूर्य की नयी किरणें रथ का रूप धारण कर उसमें सूर्य को बिठाकर – धरती पर उतर रही है। धरा की कलियाँ और फूल सूर्य की अगवानी में पथ को सजाकर सुवासित रूप प्रदान कर रहे हैं।
इस प्रकार प्रात:कालीन बेला में सूर्योदय के समय प्राची दिशा में आकाश का रंग लालिमा युक्त, मनोहारी एवं सुखद होता है।

आ रही रवि की सवारी का सारांश Bihar Board प्रश्न 10.
‘चाहता उछलूँ विजय. कह’ में कवि की कौन-सी आकांक्षा व्यक्त होती है?
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों में महाकवि बच्चन ने अपने मन के भावोद्गार को प्रकट किया है। नयी चेतना से संपन्न कवि अब अपनी काव्य-सृजन द्वारा हृदय में छिपे हए उत्साह और उमंग को प्रकट करते हुए नए सूरज की वंदना करना चाहता है। कवि कहता है कि मेरी इच्छा होती है कि उछलँ, कुदूं और इस नयी सुबह का विजय गान करूँ। जीवन में जो नए उत्साह और नयी आशा की किरणें प्रस्फुटित हो रही हैं, उससे कवि अतिशय प्रसन्न है। कवि के जीवन में जो नया परिवर्तन हुआ है। निराश की बदली छंट गयी है। निष्क्रियता का साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया है। सक्रिय जीवन के साथ कवि सृजन-कर्म की ओर प्रवृत्त हो गया है। इस प्रकार कवि के जीवन में नए सूरज का आगमन हुआ है। नयी किरणों से सुसज्जित रथ पर सवारी किए हुए प्रकृति द्वारा अभिनदित सूरज की प्रभा से आलोकित जीवन और जगत को देखकर कवि अतिशय प्रसन्न है। इसी प्रसन्नता को वह व्यक्त करना चाहता है।

विजय-गान करना चाहता है।
दूसरा अर्थ भी काव्य पंक्तियों में सन्निहित है। राष्ट्रीय जनजीवन में भी स्वाधीनता रूपी सूर्य का आगमन हुआ है। सारा जन-जीवन पुनर्निर्माण में लगा हुआ है। इस कारण भी कवि का हृदय अत्यंत पुलकित है। दोनों अर्थ अपनी सार्थकता के कारण ध्यातव्य हैं। इस प्रकार कवि के भीतर जो उछाह है, उमंग है वह अवर्णनीय है।

आ रही रवि की सवारी कविता की व्याख्या Bihar Board प्रश्न 11.
‘राह में खड़ा भिखारी’ किसे कहा गया है?
उत्तर-
उपरोक्त काव्य पंक्तियों में ‘राह में खड़ा भिखारी’ प्रतीकात्मक प्रयोग है। प्रकृति के माध्यम से कवि बहुत बड़ी बात कहना चाहता है।
‘राह में खड़ा भिखारी’ का आशय चंद्रमा से है। चंद्रमा जिस प्रकार सूर्य-प्रभा से श्रीहीन होकर दीनता, हीनता को प्राप्त हो गया है। वह निस्तेज पड़ गया है। उसकी सारी प्रभा समाप्त हो चुकी है। एक दीन-हीन भिखारी सदृश उसकी स्थिति हो गयी है। ठीक उसी प्रकार भारतीय राष्ट्रीय जन-जीवन की भी स्थिति है। यहाँ की जनता श्री संपन्नता से हीन होकर गुलामी की जंजीर में युगों-युगों से आबद्ध है; पीड़ित है,
शोषित है। कवि का ध्यान उधर भी गया है और कवि ने प्रकारान्तर से राष्ट्रीय समस्याओं, विसंगतियों का भी चित्रण किया है।

तीसरी बात भी इस कविता में दृष्टिगत होती है। कवि प्रथम पत्नी के असामयिक देहावसान से भी पीड़ित है, दुःखित है। उसका भी जीवन श्रीहीन है। अभावग्रस्त है। पत्नी-बिछोह से पीड़ित है। हो सकता है आगे चलकर उसके जीवन में ऐसा मोड़ आया हो जिसके कारण जीवन-क्रम का चक्र बदल गया है और नयी चेतना से संपन्न होकर पुनः नए सृजन में प्रवृत्त हुआ हो। इस प्रकार उपरोक्त पंक्तियों में ये सारे भाव परोक्ष रूप से छिपे हुए हैं जिन्हें समझने एवं चिंतन करने के लिए संवेदनशीन होना अत्यावश्यक है।

Aa Rahi Ravi Ki Sawari Poem Explanation In Hindi Bihar Board प्रश्न 12.
‘छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी’ का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
हरिबंश राय बच्चन हिन्दी साहित्य के चर्चित कवि हैं। इनकी . कविताओं में सरलता, सहजता एवं बोधगम्यता मिलती है। संवेदनशील एवं आत्म-विश्लेषणवाली कविताओं द्वारा कवि ने व्यक्त-वेदना, राष्ट्र चेतना और जीवन-दर्शन के स्वर को बुलंद किया है।

उपरोक्त काव्य पंक्तियों में कवि ने अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया है। कविता का भाव-पक्ष बड़ा ही प्रबल एवं प्रभावोत्पादक है। कवि कहता है कि सूर्य . की जब सवारी आ रही है तब तारों की फौज यानि तारों का समूह आकाश रूपी । मैदान को छोड़कर भाग रहा है। यहाँ कवि.ने रूपक अलंकार का प्रयोग करते हुए – युद्ध के दृश्य का चित्रण किया है। इस पंक्तियों में भय का दर्शन होता है। सूर्य के आगमन का समाचार सुनकर तारों की फौज पलायन कर जाती है, मैदान छोड़ देती है। भाव पक्ष और कला पक्ष दोनों दृष्टियों से कविता प्रभावकारी है। चित्रण में स्पष्टता और सफलता प्राप्त है। अलंकार एवं रस प्रयोग में भी कवि को सफलता मिली है। शब्द चयन में एवं प्रयोग में भी कवि स्वयं को सिद्धहस्त सिद्ध किया है। तारों-की फौज सारी यहाँ दुष्टांत अलंकार के रूप में भी प्रयुक्त हुआ है। इस प्रकार इस प्रयोग में कवि ने स्थायी भाव का प्रयोग करते हुए उत्साहवर्द्धक दृश्यों का चित्रण किया है। इन काव्य पंक्तियों में सूर्य के शौर्य का चित्रण हुआ है। प्रसाद गुण की व्याख्या की गई है।

नीचे लिखे पद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. नव किरण का रथ सजा है
कलि-कुसुम से पथ सजा है,
बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी
आ रही रवि की सवारी
विहगबंदी और चारण,
गा रहे हैं कीर्तिगायन,
छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी
आ रही रवि की सवारी
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) यहाँ किस राजा की सवारी का किस रूप में वर्णन किया गया
(ग) ‘नव किरण का रथ सजा है’ कथन का अर्थ स्पष्ट करें।
(घ) इस पद्यांश में पथ के अनुचरों की, और बंदी चारणों की उपमा किससे किस रूप में दी गई है?
(ङ) ‘छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी’ कथन का अर्थ स्पष्ट करें।
(च) रवि-राजा की सवारी के आगमन का चित्र अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।
उत्तर-
(क) कवि-हरिवंश राय बच्चन’, कविता-आ रही रवि की सवारी

(ख) यहाँ रवि-राजा की सवारी का वर्णन किया गया है। वह सवारी सूर्य की नई किरणों के रथ पर निकल रही है। प्रातः काल खिली कलियाँ और कुसुम उसके आगमन के सजे पथ हैं। छिटपुट छाए बादलों के रंगीन रूप, स्वर्ण पोशाकधारी अनुचर के रूप हैं। कलरव करते पक्षी यशोगान करते बंदी और चारण

(ग) ‘नव किरण का रथ सजा है’ का अर्थ इस रूप में स्पष्ट है-जब राजा की सवारी निकलती है तब उसके लिए रथ को सजाकर-सँवारकर तैयार किया जाता है। इस पर राजा को बैठाकर सवारी निकाली जाती है। यहाँ राजा के रूप में सूर्य को प्रस्तुत किया गया है और कवि ने सूर्य की निकल रही किरणों को रथ के रूप में चर्चित किया है। रवि राजा की निकल रही सवारी में नव किरणों से सजे रथ के स्वरूप को कवि ने इस रूप में प्रस्तुत किया है।

(घ) इस पद्यांश में पथ की उपमा कलि-कुसुम से, अनुचरों की उपमा बादलों से और बंदी-चाणों की उपमा पक्षी-वृंद से दी गई है। सूर्य राजा की निकल रही सवारी के लिए पथ के रूप में कलि-कुसुम, अनुचरों के रूप में बादलों के खंड और बंदी चारणों के रूप में पक्षी-वृंद लग हुए हैं।

(ङ) इस कथन का मतलब यह है कि सूर्य राजा को प्रकट होते देख दुश्मन रूपी चमकते तारों की पूरी फौज आकाश में देखते-देखते भाग खड़ी होती है।

(च) सूर्य राजा की सवारी आ रही है। वह सवारी रवि की नवकिरणों से सजे रथ पर निकली है। उस रथ का पथ कलियों-फूलों से सजा हुआ है। बादल अनुचर के रूप में उसमें शामिल हैं जो स्वर्णवर्णी पोशाक पहने हुए हैं। उस समय पक्षियों का कलरव-गान बंदियों और चारणों के यशोगान के रूप में गूंज रहा है। रवि की निकली सवारी के स्वरूप का वर्णन कवि ने इसी रूप में किया है।

2. चाहता, उछलूँ विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह
रात का राजा खड़ा है राह में बनकर भिखारी
आ रही रवि की सवारी
(क) कवि और कविता के नाम लिखिए।
(ख) ‘चाहता, उछा विजय कह’ कथन में कवि की क्या आकांक्षा व्यक्त हुई है?
(ग) कवि क्या देखकर ठिठक जाता है और क्यों?
(घ) यहाँ रात का राजा किसे कहा गया है और क्यों?
(ङ) राह में कौन भिखारी बनकर खड़ा है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि-हरिवंश राय बच्चन’, कविता-आ रही रवि की सवारी

(ख) रवि की सवारी तामझाम के साथ निकल रही है। उसके आगमन से उल्लास का प्रकाश सर्वत्र छा जाता है। रात्रि के अंधकार में टिमटिमाते तारों की फौज रवि राजा की सवारी को निकलते देख राजा के डर से भाग खड़ी होती हैं। कवि के मन में भी आनंद और आशा की नई किरण फूटी है और वहाँ से निराशा का अंधकार तिरोहित हो गया है। कवि इस हर्षातिरेक की मनः स्थिति में अंधकार पर प्रकाश की विजय को देख आनंद और उमंग में उछलना चाहता है।

(ग) इस आनंद की मन:स्थिति में कवि उत्साह और अमंग में उछलकर अपना हर्ष व्यक्त ही करना चाहता है कि सामने रात के राजा चंद्रमा को श्रीहीन, हतप्रभ और भिखारी के रूप में उपस्थित देखकर, वह ठिठक जाता है, अर्थात् आश्चर्यचकित हो जाता है।

(घ) यहाँ रात का राजा चंद्रमा को कहा गया है। जब आकाश में सूर्य डूबता है तो संध्या आती है और फिर रात्रि का अंधकार सब जगह पसर जाता है। उस स्थिति में निर्मल, शुभ्र तथा उज्ज्वल प्रकाश में चमकता चाँद आसमान में अपने तेज और दीप्ति में रात के राजा के रूप में अपना परिचय देता है। रातभर रात के उस राजा का तेज, आलोक और प्रकाश सबको एक राजा के रूप में हतप्रभ कराता रहता है। इसीलिए, कवि उसे रात का राजा कहता है।

(ङ) उषा-वेला में प्रकाश-पथ पर रात का राजा चंद्रमा भिखारी के रूप में खड़ा दिखाई देता है। कवि उसे इसलिए भिखारी कहता है कि उस समय वह बेचारा अपना सारा तेज, दीप्ति, आलोक और ज्योति की चमक खोकर दीन हीन व्यक्ति के रूप में उस पथ पर खड़ा दिखाई देता हैं उसके पास अपना प्रकाश, निजी संपत्ति और विभूति के रूप में कुछ बच तो नहीं रहा है! वह तो सूर्य के प्रकाश से ही रात भर राजा के रूप में चमकता-दमकता रहता है। लगता है कि उस समय वह भिखारी के रूप में प्रकाश की भीख माँगने के लिए खड़ा है।

Bihar Board Class 7 English Book Solutions Chapter 3 Aladdin found the Wonderful Lamp

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Bihar Board Class 7 English Aladdin found the Wonderful Lamp Text Book Questions and Answers

A. Warmer

Aladdin Found The Wonderful Lamp Bihar Board Question 1.
Interact and then answer the following questions. Have you ever seen someone do magic ? What did he/she do ? Did you like it ?
Answer:
Yes, I have seen someone doing magic. He. was a magician. He could make anything out of anything. He once made a rat from his handkerchief. The next time, he turned a man into a cloth of black colour and again turned him into a man. Later, I knew it was all his tricks.

B. Let’s Comprehend.

B. 1. Think and Tell.

Bihar Board Class 7 English Book Solution Question 1.
What did Aladdin do all the day ?
Answer:
All the day Alladdin played in the street with other boys.

Bihar Board Class 7 English Solution In Hindi Question 2.
Why was Aladdin happy ?
Answer:
His uncle who was a wizard bought him beautiful clothes. This made him happy.

Bihar Board Class 7 English Solutions Question 3.
When did the genie appear ?
Answer:
Fearing the dark, Aladdin rubbed both his hands. The genie appeared then only.

B. 2. Think and Write.

1. Write ‘T’ or ‘F’ for false statement.

  1. Aladdin lived with his father. [ ]
  2. The wizard was Aladdin’s uncle. [ ]
  3. The wizard was from China. [ ]
  4. Aladdin was lazy and did not work. [ ]
  5. The wizard bought Aladdin a watch. [ ]

Answer:

  1. False
  2. False
  3.  False
  4. True
  5. False

B. 2. 2. Tick (✓) the most appropriate answer to each of the following questions

Class 7 English Bihar Board Question 1.
Why did the wizard make a fire ?
(a) because it was cold.
(b) because he was tired.
(c) because he wanted to cast a spell.
(d) because he wanted to cook food.
Answer:
(c) because he wanted to cast a spell.

Bihar Board Class 7 English Book Pdf Question 2.
What did the wizard want Aladdin to get from under the stone ?
(a) stone
(b) jewels
(c) a ring
(d) a lamp
Answer:
(d) a lamp

B. 2. 3. Answer the following questions in not more than 50 words.

Bihar Board Class 7 English Book Question 1.
The wizard casts a spell twice in the story. What happens each time ?
Answer:
When the wizard casted his spell the first time, the. ground shook .and a lot of noise and smoke arose. All at a once, a hole got opened in the ground. The second time, when r the wizard casted his magic spell, the big stone shut Aladdin in the holes under the ground.

Bihar Board Class 7 English Solution Question 2.
Why did the wizard get angry with Aladdin ?
Answer:
The wizard was eagerly waiting for the lamp. He saw Aladdin coming up the steps. He asked the lamp. But, Aladdin could not pull out the lamp from under his shirt as it was covered with the jewels. On this, the wizard got angry with Aladdin. He did not want to help Aladdin but only to get his lamp. As his wish was not fulfilling, he got anygr.

Bihar Board Solution Class 7 English Question 3.
How was Aladdin able to come out of the big hole?
Answer:
The wicked wizard had shut Aladdin down the earth with the big stone. Aladdin became very afraid of the dark. Being alone in the dark, he cried and rubbed his hands to-gether. On rubbing the wizard’s ring, a genie appeared. The genie helped Aladdin to come out of the’big hole.

Bihar Board Class 7th English Solution Question 4.
The wizard had told Aladdin that he was his uncle but this was not true. Why do you think the wizard lied to Aladdin and his mother?
Answer:
The wizard had told a lie to Aladdin that he was his uncle. In fact, he wanted to come nearer to Aladdin and win his trust. The wizard lied to Aladdin and his mother because he wanted wonderful lamp from under the ground. And he wanted to use Aladdin for his purpose.

C. Word Study

C. 1. Look at the following sentences:

Suddenly the earth opened. Aladdin was outside in the sun again. He was happy and ran home quickly to his mother. The word ‘suddenly’ is made by adding ‘ly’ to the word ‘sudden’. The same happens in ‘quickly’ where ‘ly’ is added to ‘quick’, ‘ly’ is called a suffix as it is added at the end of a word.

Bihar Board Class 7 English Question 1.
Can you think of more words which are formed in such a way ?
Answer:

  1. happily
  2. sadly
  3. quietly
  4. bravely
  5. secretly
  6. lordly
  7. knowingly
  8. cowardly
  9. manly
  10. openly
  11. safely
  12. genuinely
  13. constantly
  14. mainly.

Bihar Board Class 7 English Book Solutions Chapter 3 Aladdin found the Wonderful Lamp 1

C. 2. Look at the following sentences:

Aladdin And The Magic Lamp Question Answer Bihar Board Question 1.
Then they went for a long walk. They walked along a stony path. Here, ‘y’ has been added-to the noun ‘stone’ to make it an adjective ‘stony’ meaning full of stones. Can you think of more words where meaning changes similarly due to addition of y?
Answer:

  1. greedy
  2. stormy
  3. needy
  4. nody
  5. moody
  6. bony
  7. crunchy
  8. creamy
  9. cony
  10. salty
  11. faulty
  12. homy
  13. dreamy
  14. hairy
  15. cloudy
  16. sunny.

Bihar Board Class 7 English Book Solutions Chapter 3 Aladdin found the Wonderful Lamp 2

D. Grammar

Using ‘Shall’ for promise

Look at the Following sentences :
I shall buy you some beautiful clothes.
Here ‘shall’ is used for making promise. Now rewrite the sentences given below, substituting ‘promise’ in the sentences. Also make other necessary changes in the sentence. The first one is done for you.

  1. He has promised to help me. = He shall help me.
  2. He promises to help me.
  3. She has promised to reconsider the matter.
  4. They have promised to invite the Chief Minister.
  5. The headmaster promises to improve sports facilities

Answer:

  1. He shall help me.
  2. He shall be helping me.
  3. She shall reconsider the matter;
  4. They shall invite the Chief Minister.
  5. The headmaster shall be improving sports facilities.

E. Let’s Talk 

Tell this story of your friend.
Tell the story yourself.
(You may take help of the “summary”)

F. Composition

Bihar Board 7th Class English Book Solution Question 1.
Let us assume that the story of Aladdin has not ended vet .
Continue the story to your liking and give it a different end in about five sentences.
Answer:
Aladdin told his mother about the magical ring and about the genie. His mother was surprised. She demanded for the genie. Alladin once again rubbed the ring on his fingers. In no time, the genie appeared and said, “What do you want, my master ?” This time, Alladin demanded a palace. The genie turned his house into a palace. Now, they lived happily.

Class 7 Bihar Board English Solution Question 2.
If you were given a ring which could grant you any wish, what would you wish for ?
Answer:
If I were given such a ring I would wish that every one in this world be happy and rich. I would also wish that there would be no differences in the world. Peace would exist every where.

G. Translation

Translate into Hindi:

Class 7 English Book Bihar Board Question 1.
Long, long ago in Arabia, there lived a boy whose name was Aladdin. He lived in a small house with his mother. They were very poor. But Aladdin was lazy. He did not work at all. Everyday he played in the street with other boys.
Answer:
 बहुत समय पहले, अरब देश में अलाद्दीन नामक एक लड़का रहता था। वह एक छोटे घर में अपनी माँ के साथ रहता था। वे बहुत गरीब थे। लेकिन अलाद्दीन बहुत आलसी था । वह बिल्कुल काम नहीं करता था। प्रतिदिन वह अन्य बच्चों के साथ सड़क पर खेलता रहता था।

H. Activity

Alladin Aladdin And His Wonder Lamp Bihar Board Question 1.
Draw the picture of a lamp and name its part.
Answer:
Do the picture drawing yourself.

Aladdin found the Wonderful Lamp Summary in English

Long ago in Arabia, a poor boy named Aladdin lived in a small house with his mother. They were very poor. Aladdin was lazy. All the day in the street he used to play with other boys of his mullah. One day, a wizard met Aladdin. He told him that he was his uncle and he lived in Africa. Aladdin took him to home. Next day, the wizard took him to the market and bought him some beautiful clothes. After that, he took him to the bottom of a hill. With his magic special he opened a hole in the ground. He asked Aladdin to bring a lamp from under the hole. He gave him a ring to guard him. When Aladdin went under the ground, he saw there beautiful scenes.

A beautiful garden and trees landed with colorful jewels pleased his eyes. Aladdin took the lamp from a wall. He put it inside his shirt. After that, he picked many jewels from the trees and put them also in his shirt and also in his pockets. Then, he went to the steps, when he climbed the steps, the wizard demanded for the lamp. Aladdin couldn’t take it out as it was under the jewels.

The wizard got angry. He castes his spell and Aladdin was shut in the hole. Aladdin got frightened in dark. He rubbed his hands. Then a genie appeared from the wizard’s ring. The genie told Aladdin that he was the slave of the magical ring. The genie asked Aladdin to ask or demand anything from him. And, with the Kind help of the genie Aladdin came back to the ground. He, then rushed to meet his mother and was soon back to home.

Aladdin found the Wonderful Lamp Summary in Hindi

हिन्दी में सारांश अरब देश की बात है। बहुत समय पहले वहाँ अलाद्दीन नामक एक गरीब लड़का अपनी माँ के साथ एक छोटे से घर में रहता था। अलाद्दीन बहुत ही आलसी था। दिन भर वह अपने दोस्तों के साथ सड़क पर खेलता रहता था। एक दिन एक जादूगर ने उसको ध्यान से देखा । वह अलाउद्दीन से बोला कि वह अफ्रीका से आया है और उसका चाचा लगता है। खश होकर अलाद्दीन उसे अपने घर ले आया। अगले दिन जादुगर अलाद्दीन को बाजार ले गया और उसको कुछ अच्छे कपड़े खरीदकर दे दिया। तब वह उसे एक पहाड़ी के नीचे ले आया। जादू से उसने जमीन में एक बड़ा गड्ढा कर दिया। तब उस जादूगर ने अलादीन को एक अंगूठी दी। उसने कहा कि यह अंगूठी उसकी रक्षा करेगी। फिर उसने अलादीन को कहा कि सीढ़ियों के सहारे गड्ढे में उतरे और जमीन के नीचे से खोजकर के वह उसे एक लैम्प लाकर जल्दी से दे।

उन सीढ़ियों के सहारे अलाद्दीन गड्ढे में नीचे उतरा । उसने वहाँ बहुत ही सुन्दर दृश्य देखा । उसने वहाँ एक बड़ा ही खुबसूरत बगीचा देखा जिसके पेड़ों पर रल-जवाहरात लटक रहे थे जो कि आकार में बेहद बड़े थे और चमक रहे थे, जगमग कर रहे थे। उन्हें देख उस लड़के का मन ललचा गया। पहले तो उसने लैम्प ढूँढ अपनी कमीज में रख लिया। फिर उसने ढेर सारे जवाहरात तोड़ लिये। उन्हें भी वह अपनी कमीज में लैम्प के ऊपर डालता गया। उन जवाहरातों से वह लैम्प दब गया जिससे कि जब जादूगर ने उससे वह लैम्प माँगा तो सहसा वह लैम्प निकाल नहीं पाया । जिममे कि जादूगर

क्रोधित होकर उसे उसी गड्ढे में एक बड़े पत्थर को जादू से गड्ढे के मुँह पर रखकर बंद कर दिया। अँधेरे से डरकर अलाद्दीन ने अपने हाथ मले तो रगड़ खा अँगूठी से एक जिन्न निकला जो उसका हर आदेश मानने को तैयार था। अलाद्दीन ने उससे माँगा कि वह उसे उस गड्ढे के बाहर निकाल दे। , यह तो जिन्न के लिए मामूली काम था। उसने फौरन अलाद्दीन को जमीन पर ऊपर ला दिया और झटपट वह लड़का अपनी माँ के पास दौड़ भागा।

Aladdin found the Wonderful Lamp Hindi Translation of The Chapter

अरब देश में बहुत समय पहले अलाद्दीन नामक एक लड़का रहा करता । था। वह अपनी माँ के साथ एक बहुत ही छोटे से घर में रहा करता था। वे लोग बहत गरीब थे। अलाद्दीन आलसी था। दिन भर वह सड़क पर दूसरे लड़कों के साथ खेलता ही रहता था।

एक दिन एक आदमी सड़क के पास आकर अलाद्दीन को ध्यापूर्वक देखने लगा जो कि अन्य बच्चों के साथ मग्न होकर खेल रहा था।

“तम कौन हो?” उस व्यक्ति ने पूछा । “मैं अलादीन हूँ।” उस लड़के ने जवाब दिया । “मैं तुम्हारा चाचा हूँ।” उस व्यक्ति ने कहा जबकि यह बात सच नहीं थी । वह व्यक्ति अलादीन का चाचा नहीं बल्कि एक बदमाश जादूगर था। .

अलाद्दीन उस जादुगर को अपने घर ले आया। उसने अपनी माँ से कहा-“देखो माँ, ये मेरे चाचा हैं। यह अफ्रीका से आये हैं।” अलाद्दीन की माँ रात का भोजन कहीं से ढूँढ़कर ले आयी और सबने रात का भोजन प्रेम । से खाया। , “अलाद्दीन मैं तुमको कुछ सुन्दर कपड़े खरीद दूँगा।” जादूगर बोला।

अलादीन और उसकी माँ को यह बात सुनकर बड़ी खुशी हुई। दूसरे दिन वह दुष्ट जादूगर अलाद्दीन को बाजार ले गया। जहाँ उसने अलाद्दीन को कुछ सुंदर कपड़े खरीद दिया जिससे कि अलाद्दीन अत्यंत हर्षित हो गया । फिर वे दोनों एक लंबी सैर पर निकल चले। वे एक पथरीले रास्ते पर चल रहे थे। अलाद्दीन बहुत थक गया था। कुछ समय के बाद वे एक पहाड़ के नीचे पहुँचे।  “हम यहाँ पर रूकेंगे।” उस जादुगर ने अलाद्दीन से कहां।

“कुछ लकड़ियाँ खोजकर यहाँ पर लाओ और उनमें आग लगा दो।” जादूगर के कहने पर अलाद्दीन ढेर सारी लकड़ियाँ ढूँढकर ले आया और फिर .. वहाँ एक बड़ी आग सुलगा दी जादुगर ने।

तब उस जादूगर ने उस अग्नि में कुछ पदार्थ फेंक दिया और कुछ मंत्रों का उच्चारण किया। तभी वहाँ की जमीन हिलने लगी और बड़ी जोर की आवाजें उभरने लगीं और बहुत-सारा धुआँ आसमान की ओर ऊपर को उठने लगा।

इस नजारे को देखकर अलाद्दीन अत्यंत भयभीत हो गया। अचानक वहाँ जमीन में एक गड्ढा खुल गया । उस गड्ढे में एक बड़ा पत्थर था। वह जादूगर अलाउद्दीन से बोला “देखो, उस पत्थर के नीचे एक लैम्प मिलेगा तुम्हें । नीचे जाकर उस लैम्प को खोजकर ले आओ। मेरी यह अँगूठी ले लो, यह तुम्हारी रक्षा करेगी।

जादूगर की अंगूठी को लेकर अलाद्दीन गड्ढे के नीचे सीढ़ियों के सहारे उतरने लगा। वह एक सुंदर से बगीचे में पहुँचा । उस बगीचे में बहुत सारे पेड़ थे। उन पेड़ों पर बहुत से जवाहरात लटके हुए थे। वे कई रंगों के थेलाल, नीले, हरे, पीले और सफेद रंगों के बड़े आकार के वे जवाहरात जगमगा रहे थे। वहाँ, एक दीवाल पर एक लैम्प लटका हुआ था। अलाद्दीन ने वहाँ एक सीढ़ी देखा। उस सीढ़ी के सहारे वह दीवाल पर चढ़ा और उस लैम्प को नीचे उतार लिया। उस लैम्प को उसने अपनी कमीज के अंदर डाल लिया। फिर उसने बगीचे में स्थित पेड़ों पर से ढेर सारे जवाहरात तोड़ लिया। उन

जवाहरातों में से कुछ को तो उसने अपनी जेबों में भर लिया । फिर उसने कई जवाहरातों को अपनी कमीज के अंदर डाल लिया । वे जवाहरात लैम्प के ऊपर . पड़े थे और लैम्प उन जवाहरातों के नीचे दबा पड़ा था।

अलाद्दीन जल्दी से जादूगर की ओर बढ़ चला । वे जवाहरात बड़े ही भारी थे जिस कारण अलाद्दीन को सीढ़ियों पर चढ़ने में दिक्कत हो रही थी। जादूगर ने जल्दी से उस लैम्प को माँगा। चूँकि लैम्प जवाहरातों से दबा पड़ा था । इसलिए अलाद्दीन लैम्प को निकाल नहीं पाया।

जादूगर बड़ा क्रोधित हुआ क्योंकि उसे उस लैम्प को लेने की हड़बड़ी थी। वह अलाद्दीन की बिल्कुल भी मदद नहीं करना चाहता था। उसे मंत्र पढ़कर जादू किया और अलाद्दीन को उसी गड्ढे में बंद कर दिया । वहाँ, अँधेरे में अलाद्दीन को बहुत डर लग रहा था। डर के मारे वह मदद के लिए चिल्लाया लेकिन किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी । डरकर उसने अपने दोनों हाथों को रगड़ा । इससे उसकी अंगुली में जो जादूगर की अंगूठी थी वह भी रगड़ा गयी और उसमें से एक बदसूरत बड़ा-सा और बड़ा ही जिन्न प्रकट हो गया।

“कौन हो तुम?” अलाद्दीन चीख पड़ा । “यह अंगूठी जादुई है।” वह जिन्न बोला। “मैं इस अंगूठी का गुलाम हैं। बोलो, तुम्हें क्या चाहिए?” जिन्न ने कहा। “मैं यहाँ से बाहर निकलना चाहता हूँ।” अलाद्दीन बोला। “ठीक है।” जिन्न ने कहा। वह गड्ढा खुल गया और अलाद्दीन फिर से बाहर सूरज तले धूप में खड़ा । था। वह बहुत खुश था। दौड़ते हुए अलाद्दीन अपनी माँ के पास चला गया। अब वह प्रसन्न था।

Aladdin found the Wonderful Lamp Glossary

Wizard [विजर्ड] = जादूगर | Magic [मैजिक] = जादू । Fetched (फेच्ड) = जाकर लाया । Supper [सपर] = रात का भोजन | Stony [स्टोनी] = पथरीला, पत्थरों से भरा हुआ। Casta spell [कास्ट अ स्पेल) = जादू डालना। Sparkle [स्पार्कल] = चमकना, जगमगाना | Slave |स्लेव] = गुलाम | Genie (जिनी] = जिन्न । Long ago [लौंग अगो] = बहुत पहले। Lived [लिव्ड} = रहता था । Lazy [लेजी] = आलसी | Atall [एट ऑल] . = बिल्कुल भी। Everyday [एवरीडे] = प्रतिदिन । Watch [वॉच] = गौर से देखना, निरीक्षण करना । Wicked [विकेड] = दुष्ट । Pleased |प्लीज्ड) = खुश हुए Next [नेक्स्ट] = अगला |

Path [पाथ] = रास्ता | Bottom (बॉटम] = नीचे, तल | Collected [कलेक्टेड] = जमा किया । Ground [ग्राउन्ड] = जमीन । Shook [शुक] = हिलाया। A lot of [ए लॉट ऑफ = ढेर सारा, बहुत । Smoke [स्मोक] धुआँ । Frightened [फ्राइटेन्ड] = भयभीत, डरा हुआ। Suddenly [सडनली] = अचानक I Steps (स्टेप्स] = सीढ़ियाँ | Covered |कवर्ड) = ढंका हुआ। Wonderful वन्डरफुल] = अद्भुत, आश्चर्यजनक, विस्मयकारी । Sparkle [स्पार्कल) = जगमगाना, चमकना । Sun

[सन] = धूप | Hang |हैंग] = लटकाना । Hurried [हरीड] = जल्दी किया/चला। Reach [रीच] = पहुँचना ! Rub [रब] = रगड़ना । Ugly [अगली] = बदसुरत, कुरूपं । Magical [मैजिकल] = जादुई | All right [ऑल राइट] = ठीक, बहुत अच्छा । Quickly [क्विकली] = जल्दी से । Outside [आउटसाइड] = बाहर की ओर ।

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Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन

Bihar Board Class 7 Science पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन Text Book Questions and Answers

अभ्यास

Bihar Board Class 7 Science Solution In Hindi प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों में रिक्त स्थानों को भरिए
(क) ……… गैस सुलगती हुई दिया-सलाई के जलने में मदद देती
(ख) ……….. परिवर्तन में नए पदार्थ का निर्माण होता है।
(ग) खाने के सोडे का रासायनिक नाम ………… है ?
(घ) जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो यह ……….. के बनने के कारण दुधिया हो जाता है।
उत्तर:
(क) ऑक्सीजन
(ख) रसायनिक परिवर्तन
(ग) सांडियम बाइकाबॉनेट
(घ) कैल्शियम कार्बोनेट ।

Bihar Board Class 7 Science Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रक्रिया के अंतर्गत होने वाले परिवर्तन को भौतिक अथवा रासायनिक परिवर्तन के रूप में वर्गीकृत कीजिए।
(क) चॉक को चॉक-चूर्ण में बदलना ।
(ख) मोम का पिघलना ।
(ग) भोजन का पाचन ।
(घ) प्रकाश संश्लेषण ।
(च) ऐलुमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पत्तल पत्र (फाइल) बनाना ।
(छ) जल में शक्कर का घुलना।
(ज) कोयले का जलना।
(झ) रवाकरण द्वारा शुद्ध पदार्थ प्राप्त करना।
उत्तर:
(क) भौतिक परिवर्तन
(ख) भौतिक परिवर्तन
(ग) रासायनिक परिवर्तन
(घ) रासायनिक परिवर्तन
(च) भौतिक परिवर्तन
(छ) भौतिक परिवर्तन
(ज) रासायनिक परिवर्तन ।

पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन Bihar Board प्रश्न 3.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य । यदि कथन असत्य हो तो, उसे सही करके लिखिए।
(क) लकड़ी के लट्टे को टुकड़े में काटना एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ख) पत्तियों से खाद का बनना एक भौतिक परिवर्तन है।
(ग) जस्ता लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती
(घ) मैग्नीशियम के फीते को मोमबती की लौह ने पास ले जाने पर यह चमकदार श्वेत प्रकाश के साथ जलने लगती है।
(च) मैग्नीशियम ऑक्साइड के जलीय विलयन अम्लीय होता है।
उत्तर:
(क) असत्य
(ख) असत्य
(ग) सत्य
(घ) सत्य
(च) असत्य।

Bihar Board Class 7 Science Book प्रश्न 4.
‘क्या होता है जब –
उत्तर:
(क) सिरका में इनो डालते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य पदार्थ प्राप्त होते हैं।
(ख) नीला थोथा के विलयन में ब्लेड डाला। नीला थोला में ब्लंड या आयरन डालने पर आयरन सल्फेट का हग चिन्नयन और कॉपर का भूरा अवक्षेप प्राप्त होता है।
(ग) लोहे कं तावा को नमी युक्त वायु में रावते हैं । लाह को नगी युमा वायु में रखते हैं तो लौह ऑक्साइड बनना है जिसे जंग कहते हैं।
(घ) पाटाशियम परमैगनेट का गर्म करनं हैं तो ऑक्सीजन गंस और अन्य पदार्थ बनते हैं।

Bihar Board Class 7 Science प्रश्न 5.
भौतिक परिवर्तन एवं रासायनिक परिवर्तन में अन्तर बतावें । प्रत्येक के लिए एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
भौतिक परिवर्तन में पदार्थों के भौतिक गुण रंग, आकार और अवस्था में परिवर्तन हाता है। नये पदार्थ नहीं बनत, उत्क्रमणीय परिवतन हाते हैं।
जैसे – स्वर बैंड का खीचना ।

रासायनिक परिवर्तन में दो या दो से अधिक पदार्थ आपस में अभिक्रिया कर नये पदार्थ की रचना करना है। जैसे—हाइड्रोजन गैस ऑक्सीजन गैस के साथ मिलकर जल का निर्माण करते हैं।

Class 7 Science Bihar Board प्रश्न 6.
जंग लगने के लिए आवश्यक कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जलवाष्प होना आवश्यक है।

Bihar Board Class 7 Science Book Solutions प्रश्न 7.
जंग लगने से कैसे रोका जाता है ?
उत्तर:
जंग लगने से बचाने के लिए पदार्थ पर पेंट ग्रीज की परत या क्रोमियम अथवा जस्ता का लेप चढ़ाया जाता है।

Bihar Board 7th Class Science Book प्रश्न 8.
कार्बन डाइऑक्साइड गैस कैसे उत्पन्न होता है? किसी तीन विधियों का वर्णन करें तथा इनके गुणों को बताएँ।
उत्तर:
जीव-जन्तु के श्वसन प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न होता है। जब चारकोल को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड बनता है। कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनता है। खाने वाले सोडा को नींबू के रस के साथ अभिक्रिया कराई जाती है तो CO2 गैस बनता है।

‘यह हवा से भारी है, पौधों को श्वसन क्रिया में, चूने जल को दुधिया बनाने में तथा चूना पत्थर बनाने में होता है।

Bihar Board Class 7th Science Solution प्रश्न 9.
रवाकरण से क्या समझते हैं। कॉपर सल्फेट का रवा कैसे प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
किसी विलयन से पदार्थ के शुद्ध और बड़ी आकार के रवा प्राप्त करने की विधि को रवाकरण कहते हैं। जैसे—समुद्र के जल का वाष्पण के फलस्वरूप नमक का रवा प्राप्त होता है।

एक बीकर में जल लेते हैं उसमें एक दो बूंद तनु सल्फ्युरिक अम्ल डालते हैं और फिर गर्म करते हैं। जब जल उबलना शुरू हो जाए तो उसमें कॉपर सल्फेट के चूर्ण डालते हैं और चलाते हैं जब तक कॉपर सल्फेट घुले थोड़ा-थोड़ा चूर्ण डालते हैं। घुलना बंद होने पर, फिल्टर पेपर से छान लेते हैं। ठंडा होने के थोड़ी बाद कॉपर सल्फेट के रवा प्राप्त होता है।

Bihar Board Solution Class 7 Science प्रश्न 10.
ऑक्सीजन गैस बनाने की विधि का वर्णन करें तथा इसके गुणों का वर्णन करें।
उत्तर:
एक जार, पुदीने के हरे पौधे और जलती हुयी मोमबती लेते हैं। जलती हुई मोमबत्ती और पुदीने के पौधे को एक साथ जार से ढंक देते हैं। थोड़ी देर बाद जार को हटाते हैं तो मोमबत्ती जलती रहती है। अकेले जलती मोमबत्ती के जार से ढंकने पर वह बुझ जाती है। अतः स्पष्ट है कि मोमबती के जलने से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड गैस को पदीने के हरी पत्तियाँ शद्ध करती हैं और ऑक्सीजन गैस प्रदान करती है जो लौ को जलने में रसायन प्रदान करती है। अतः हम पाते हैं कि पौधे ऑक्सीजन गैस प्रदान करते हैं। प्रयोगशाला में पोटैशियम परमैंगनेट को गर्म करने पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होता है।

एक शीशी या परखनली लेते हैं उसमें पोटैशियम परमैग्नेट के टुकड़े लेते हैं। एक निकास नली लगाकर कॉर्क से बंद कर देते हैं। निकास नली का संबंध उल्टे भरे हुए शीशी से रहता है जैसा कि चित्र में दिखलाया गया है।

अब पोटैशियम परमैंग्नेट वाले शीशी को गर्म करते हैं। ऑक्सीजन गैस बनती है और निकास नली होते हुए उल्टे शीशी में बुलबुले के रूप में ऊपर जमा होती है।

Class 7 Bihar Board Science Solution
Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन 2

यह जीव-जन्तुओं की श्वसन क्रिया, ईंधन को जलाने में सहायक होता।

Class 7 Bihar Board Science Solution प्रश्न 11.
यूरिया के रवे कैसे प्राप्त किया जाता है, वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरिया के लवणों को गर्म करते हैं तबतक गर्म करते हैं जब तक चिपचिपा न हो जाए। अब बालु के छोटे-छोटे कण डालते हैं। थोड़ी देर ठंडा होने के लिए छोड़ देते हैं तो हम पाते हैं कि उजले-उजले दाने बन जाते हैं। अतः यूरिया का रवाकरण प्राप्त हो जाता है।

Bihar Board 7th Class Science Solution प्रश्न 12.
समझाइए कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अपेक्षा समुद्र तटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में जंग अधिक क्यों लगती है ?
उत्तर:
रेगिस्तानी क्षेत्रों में गर्मी अधिक पड़ती है। हवा शुष्क होती है। शुष्क हवा के साथ लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया धीमी होती है। जबकि समुद्र तटीय क्षेत्रों में, हवा में नमी रहती हैं और लोहा नमी युक्त हवा के साथ तेजी से अभिक्रिया करता है और आयरन ऑक्साइड बनाता है। अर्थात् जंग लगता है।

Bihar Board Class 7 Science Chapter 1 प्रश्न 13.
आप कैसे दिखाएंगे कि दही का जमा एक रासायनिक आभक्रिया
उत्तर:
दही बैक्टीरिया के कारण जमता है जब दूध में बैक्टीरिया जाती है तो वह जम जाता है। दूध अपना गुण खो देता है। दही से पुनः दूध की प्राप्ति नहीं करते हैं। दही को कुछ दिनों तक छोड़ देते हैं तो उससे गैस निकलती है। गैस निकलना रंग में परिवर्तन होना सूचित करता है कि दही का जमना एक रासायनिक अभिक्रिया है।

Bihar Board Class 7 Science पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन Notes

पदार्थों में परिवर्तन होता है। जैसे दूध से दही बनना। दूध का फटना और खट्टा होना । लोहा में जंग लगना । कुछ ऐसे परिवर्तन होते हैं नया पदार्थ बनते हैं। विलयन में रंग परिवर्तन होता है। परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं। भौतिक परिवर्तन और रसायनिक परिवर्तन । भौतिक परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनत, रंग, गंध और अवस्था में परिवर्तन होता है। ये परिवर्तन उत्क्रमणीय हो सकता है । रसायनिक परिवर्तन में नए पदार्थ बनता है। दो या दो से अधिक आपस में अभिक्रिया के बाद नया पदार्थ अर्थात् परिवर्तन होता है एसे परिवर्तन को रसायनिक अभिक्रिया कहते हैं। परिवर्तन को अभिक्रिया के रूप में व्यक्त करते हैं। जब कॉपर सल्फेट के विलयन को लोहा के साथ प्रतिक्रिया करायी जाती है तो आयरन सल्फेट का विलयन और कॉपर का अवक्षेप प्राप्त होता है। इसे अभिक्रिया के रूप में इस प्रकार लिखते हैं।

Bihar Board Class 7 Science Book Solution

CusO4 और Fe को प्रतिकारक या अभिकारक कहते हैं।

FeSO4 और Cu को प्रतिफल अभिकारक और प्रतिफल के बीच → चिह्न द्वारा अलग करते हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड गैस का सूत्र CO2 है। 1630 ई. में जॉन हैल्मॉन्ट ने इस गैस की खोज की। इन्होंने एक बंद बर्तन में चारकोल को जलाया जब चारकोल जलकर राख हो गया और राख का द्रव्यमान मालूम किया तो पाया किं चारकोल के द्रव्यमान से कम है। द्रव्यमान में कभी एक अदृश्य पदार्थ के रूप में जिसका नाम ‘गैस’ दिया।

जोसेफ ब्लैक (1756) में कार्बन डाइऑक्साइड के गुणों का अध्ययन किया। जब चूना पत्थर को गर्म किया तो गैस निकलती हैं इस गैस को फिक्सड-एयर कहा। यह हवा से भारी है। यह गैस ज्वलन अथवा जीवन में मदद नहीं करता। जब चूना जल में CO2 डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित किया जाता है तो चूना जल दुधिया हो जाता है यह गैस जीवों के श्वसन क्रिया और सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वन के द्वारा बनती है।

ऑक्सीजन गैस का सूत्र O2 है। इसकी खोज जोसेफ पिस्टले ने की थी। जलती हुई मोमबती को ढंककर रख दिया, थोड़ी देर बाद बझ गई। जीवों के साथ प्रयोग किया तो जीव की मृत्यु हो गई।

प्रिस्टले ने जार में पुदीने की हरी टहनी रखकर मोमबती को जलाया तो पाया कि मोमबती नहीं बुझती है। इसका निष्कर्ष निकाला कि मोमबती के जलने से जो ऑक्सीजन खत्म हो गई थी, पुदीने ने उसे शुद्ध कर दिया। पुदीने की टहनी कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण किया और ऑक्सीजन पैदा किया । प्रयोगशाला में पोटैशियम परमैंगनेट को गर्म करने पर ऑक्सीजन गैस बनता है। हाइड्रोजन को हवा (ऑक्सीजन) के साथ जलने पर जल बनता है।

जब दो विलयन को आपस में मिलाते हैं तो ठोस के रूप में नये पदार्थ प्राप्त होते हैं। इस ठोस पदार्थ को अवक्षेप कहते हैं और इस क्रिया को अवक्षेपण कहते हैं। जैसे कॉपर सल्फेट को चूना जल के साथ गर्म करते हैं तो कॉपर हाइड्रोक्साइड का उजला अवक्षेप और कैल्सियम सल्फेट का हल्का नीला अवक्षेप प्राप्त होता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन 4

और प्राप्त अवक्षेप को और गर्म करते हैं तो कॉपर ऑक्साइड का काला अवक्षेप प्राप्त होता है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 5 पदार्थ में रासायनिक परिवर्तन 5

राणयनिक परिवर्तन में नये पदार्थ के बनने के साथ कुछ और परिवर्तन होते हैं। जैसे-ऊष्मा, प्रकाश का अवशोषण या निष्कासन होता है। ध्वनि उत्पन्न होता है। रंग और गंध में परिवर्तन होता है। गैस बनती है।

लोहे में जंग लगना, इंधन का जलती, पटाखों का फटना, भोजन सामग्री का सइना, गलना, सब्जी के काटने के बाद रंग परिवर्तन होना, ये रासायनिक परिवर्तन हैं। लोहे में जंग लगने से बचाने के लिए लोहे पर पेंट, ग्रीज की परत चढ़ाकर या कामियम और जस्ता का लेप लगाकर लोहे में जंग लगने से बचाया जा सकता है। स्टेनलेस स्टील लाहे में कार्बन और क्रोमियम, निकल तथा मैग्नीज धातुओं को मिलाकर बनाया जाता है जिसमें जंग नहीं लगता है। इसे मिश्र धातु कहते हैं। जब समुद्र का पानी गड्ढे में एकत्रित होता है और उसका वाप्यण होता है तो छोटे-छोटे रवे प्राप्त होते हैं जिसे रवाकरण कहते हैं।

जल तीन अवस्था में पाया जाता है। टांस, द्रव और गैस ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 3 अस्माकं देश:

 

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solutions Amrita Bhag 3 Chapter 3 अस्माकं देश: Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 3 अस्माकं देश:

Bihar Board Class 8 Sanskrit 3 अस्माकं देश: Text Book Questions and Answers

उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।
वर्ष तद् भारतं प्राहुः भारती यत्र सन्नतिः ॥

अर्थ – जो समुद्र के उत्तर और हिमालय से दक्षिण का भू-भाग है वह देश भारत कहलाता है। यहाँ की संतान भारतीय कहलाते हैं।

अस्माकं देश: भारतवर्षमिति कथ्यते । प्राचीनकालात् अस्य देशस्य प्राकृतिकी समृद्धिः साहित्यिक योगदानं, सांस्कृतिक वैभवं च आश्चर्यकरं बभूव । अत्रैव वेदानाम् आविर्भावः सप्तसिन्धुप्रदेशे जातः, यत्र भौतिकम् आध्यात्मिकं च चिन्तनम् अद्भुतम् आसीत् । उत्तरभारते महाकाव्यानां पुराणानां शास्त्राणां च व्यापकता दक्षिणदेशभागमपि स्वप्रकाशे आनयत् ।

तत्रापि शिलप्पदिकारम्-प्रभृतयः ग्रन्थाः प्राचीनकालतः एव तमिलसाहित्यस्य गौरवं वर्धितवन्तः । सम्पूर्णस्य भारतस्य सांस्कृतिके एकत्वे पुराणानां . योदानम् अविस्मरणीयम् । इदानीं भारतस्य जने-जने धर्मस्थलानां तीर्थयात्रार्थ योऽभिनिवेशः दृश्यते स नूनं पुराणसाहित्यकृतम् । दक्षिणस्य निवासी बदरीकेदारयात्रां करोति, उत्तररस्य निवासी रामेश्वर कन्याकुमारीतीर्थं च गन्तुमिच्छति । एवमेव द्वारिकाकामाख्यादिषु स्थलेषु गच्छन्ति तीर्थयात्रिकाः

अर्थ – हमारा देश भारतवर्ष कहलाता है। प्राचीनकाल से ही इस देश की प्राकृतिक सम्पन्नता, साहित्यिक योगदान और सांस्कृतिक सम्पन्नता आश्चर्य पैदा करने वाला है। यहाँ ही वेदों की उत्पत्ति सात नदियों (सिन्धु, झेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज और सरस्वती) वाला प्रदेश में हुई ।

जहाँ की भौतिक और आध्यात्मिक चिन्तन अद्भुत था। उत्तर भारत में महाकाव्यों का, पुराणों का और शास्त्रों की व्यापकता दक्षिणदेश के भाग को भी अपने प्रकाश में लाया । वहाँ भी “शिलप्पदिकारम्” (तमिल भाषा का एक महाकाव्य का नाम है) आदि अनेक ग्रन्थ प्राचीनकाल से ही तमिल साहित्य के गौरव को बढ़ा रहा है। सम्पूर्ण भारत को सांस्कृतिक एकता प्रदान करने में पुराणों का योगदान नहीं भुलाने योग्य है। इस समय भारत के लोगों में धर्मस्थलों या तीर्थ यात्रा

के प्रति जो लगाव देखा जाता है वह निश्चित रूप से पुराण-साहित्यों की देन ‘ है। दक्षिण के निवासी बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा करते हैं तो उत्तर,

के निवासी रामेश्वरम् और कन्याकुमारी तीर्थ जाना चाहते हैं। उसी प्रकार द्वारिका, कामाख्या आदि स्थानों में तीर्थयात्री जाते हैं।

अस्य देशस्य नद्यः पुण्यतोयाः मन्यन्ते, पर्वताः पवित्राः कथ्यन्ते, वृक्षाः पूज्यन्ते । प्रकृति प्रति भारतीयानाम् आश्चर्यकरम् आकर्षणमासीत् । पूजनीयत्वात् प्रकृतेः प्रदूषणं पापं मन्यते स्म । अत एवं पर्यावरणस्य कापि समस्या अत्र नासीत् ।।

अर्थ – इस देश की नदियों को पवित्र जलवाली मानी जाती है। यहाँ के पर्वतों को पवित्र कहा जाता है। यहाँ के वृक्ष पूजे जाते हैं। प्रकृति के प्रति भारतीयों का आकर्षण आश्चर्य पैदा करने वाला था। पूजनीय होने के कारण प्रकृति को प्रदूषित करना पाप माना जाता था। इसीलिए पर्यावरण की कोई भी समस्या यहाँ नहीं थी। ..

अस्मिन् देशे विज्ञानस्यापि महती प्रतिष्ठा आसीत् । वास्तुशिल्पिन: ‘विशालानि मन्दिराणि निर्मान्ति स्म । भवनानि भव्यानि क्रियन्ते स्म ।

आकाशपिण्डानि ज्योतिर्विद्भिः अधीयन्ते स्म । अत्र चिकित्साशास्त्रमपि प्रगतिशीलम् । गणितशास्त्रे शून्यस्य कल्पना भारतेन कृता येन दशमलव-गणना प्रभारत, अन्यदेशेष्वपि गता।

अर्थ – इस देश में विज्ञान की भी बहुत बड़ी प्रतिष्ठा थी । वास्तु और शिल्पकार लोग बड़े-बड़े मंदिरों का निर्माण करते थे। सुन्दर-सुन्दर भवन बनाये जाते थे। आकाशीय ग्रहपिण्डों की ज्योतिषियों के द्वारा अध्ययन किये जाते थे। यहाँ के चिकित्सा शास्त्र भी प्रगतिशील थे। गणितशास्त्र में शून्य की कल्पना भारत के द्वारा ही किया गया जिससे दशमलव की गणना का प्रारम्भ हुआ और अन्य देशों में भी गया।

भारतस्य प्राचीन गौरवं मध्यकाले किञ्चित् तिरोहितं पराधीनतया किन्तु सम्प्रति शिक्षिताः सन्तः जनाः आधुनिके विज्ञानेऽपि प्रतिभां दर्शयन्ति। सी० वी० रमण-जगदीशचन्द्र बसु-मेघनाथसाहा-होमी जहांगीर भाभा-विक्रम साराभाई प्रभृतयः वैज्ञानिकाः आधुनिकभारतस्य गौरववर्धकाः । एवं महात्मा गाँधीसदृशः कर्मवीरः, रवीन्द्रनाथठाकुरसदृशः साहित्यकार: अरविन्दसदृशः दार्शनिकः, राधाकृष्णन्सदृशः शिक्षकः राजेन्द्रप्रसादसदृशः स्थितप्रज्ञः इत्यादयः वर्तमानभारतस्य गौरवरूपाः नेतारः सन्ति

अर्थ – भारत का प्राचीन गौरव मध्यकाल में पराधीन (गुलाम) होने के कारण कुछ लुप्त जैसा हो गया। किन्तु वर्तमान में कुछ शिक्षित लोग हैं जो . आधुनिक विज्ञान में भी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। सी० वी० रमण, ‘जगदीशचन्द्र बसु, मेघनाथ साह, होमी जहांगीर भाभा, विक्रम साराभाई इत्यादि

वैज्ञानिक लोग आधुनिक भारत के गौरव को बढ़ाने वाले हैं। उसी प्रकार महात्मा गाँधी जैसे कर्मवीर, रवीन्द्रनाथ ठाकुर जैसे साहित्यकार अरविन्द जैसे दार्शनिक, राधाकृष्णन जैसे शिक्षक, राजेन्द्र प्रसाद जैसे स्थिर बुद्धि वाले इत्यादि लोग वर्तमान भारत के प्रतिष्ठित नेता लोग हैं।

सम्प्रति देशस्य विकासः सार्वत्रिकः वर्तते । कृषिक्षेत्रे नवीनाः प्रयोगाः, संचारसाधनानि उत्कृष्टानि अन्तरिक्षक्षेत्रेऽपि विशिष्टं योगदानं स्वास्थ्यं प्रति जनजागरणं, चिकित्सासुविधानां वृद्धिः सर्वशिक्षाभियानम् इत्यादीनि उल्लेखनीयानि सन्ति । सर्वथापि देशः संसारस्य अग्रगण्येषु गणनीयो वर्तते।

अर्थ – आजकल देश का विकास सभी क्षेत्रों में हो रहा है। कृषि क्षेत्र में नये-नये प्रयोग, उत्तम संचार साधन अन्तरिक्ष क्षेत्र में भी विशिष्ट योगदान, स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरण, चिकित्सा सुविधाओं की वृद्धि, सर्वशिक्षा अभियान इत्यादि उल्लेखनीय हैं। सब प्रकार हमारे देश को संसार के अग्रगणियों में गिना जाएगा।

शब्दार्थ

उत्तरम् = उत्तर दिशा में । यत् = जो । समुद्रस्य = समुद्र का/के/की । हिमाद्रेः = हिमालय के । दक्षिणम् = दक्षिण दिशा में । वर्षम् = देश, वर्ष, वृष्टि । भारतम् = भारत (नामक देश)। प्राहुः = कहते हैं। भारती = भारतीय । यत्र = जहाँ । संततिः = संतान । अस्माकम् = हमारा, हमलोगों का । इति = ऐसा । कथ्यते = कहा जाता है। प्राचीनकालात् = प्राचीन काल से । अस्य = इसका । प्राकृतिकी = प्राकृतिक । समृद्धिः = सम्पन्नता । साहित्यिकम् = साहित्य सम्बन्धी । सांस्कृतिकम् = सांस्कृतिक, संस्कृति से सम्बन्धित । वैभवम् = समृद्धि, सम्पन्नता । आश्चर्यकरम् = आश्चर्य उत्पन्न करने वाला । बभूव = था/हुआ । अत्रैव (अत्र + एव) = यहीं । वेदानाम् = वेदों का । आविर्भावः = जन्म, उत्पत्ति । सप्तसिन्धुप्रदेशे = सप्तसैन्धव क्षेत्र में (सिन्ध. सेलम, चेनाब, रावी, व्यास, सतलज व घग्घर (सरस्वती) सात

नदियों वाला क्षेत्र) । जातः = हुआ। भौतिकम् = भौतिक, सांसारिक । आध्यात्मिकम् = आध्यात्मिक (आत्मा से सम्बन्धित)। चिन्तनम् = चिन्तन, मनन । अद्भुतम् = अद्भुत (जो आज से पहले न देखा गया हो)। उत्तरभारते = उत्तर भारत में । महाकाव्यानाम् = महाकाव्यों का । पुराणानाम् = पुराणों का । शास्त्राणाम् = शास्त्रों का । व्यापकता = विस्तार । दक्षिणम् = दक्षिण को । देशभागमपि (देशभागम् + अपि) = देश के भाग को भी। स्वप्रकाशे = अपने प्रकाश में । आनयत् = लाया । तत्रापि (तत्र + अपि) = वहीं। शिलप्पदिकारम् = शिलप्पदिकारम् (तमिल साहित्य का एक महाकाव्य) । प्रभृतयः = इत्यादि । प्राचीनकालतः = प्राचीन काल से । तमिलसाहित्यस्य = तमिल साहित्य का । गौरवम् = गौरव को । वर्धितवन्तः = बढ़ाये हुए हैं। सम्पूर्णस्य = सम्पूर्ण का, समस्त का । भारतस्य = भारत’

का । सांस्कृतिके = सांस्कृतिक में । एकत्वे = एकता में । अविस्मरणीयम् = नहीं भुलाये जाने योग्य (है) । इदानीम् = इस समय । जने-जने = जन-जन में, लोगों में । धर्मस्थलानाम् = धर्म स्थलों का/की/के । तीर्थयात्रार्थम् = तीर्थ यात्रा के लिए । योऽभिनिवेश: (यः + अभिनिवेशः) = जो लगाव । दृश्यते = देखा जाता है। नूनम् = निश्चित रूप से । पुराणसाहित्यकृतम् = पुराण-साहित्य के द्वारा किया गया । दक्षिणस्य निवासी = दक्षिण (भारत) के रहनेवाले । बदरीकेदारयात्राम् = बद्री (नाथ) और केदार (नाथ) की यात्रा (को) । करोति = करता है। उत्तरस्य = उत्तर का। रामेश्वरं कन्याकुमारी तीर्थं च = रामेश्वर और कन्याकुमारी तीर्थ (को) । गन्तुमिच्छति (गन्तुम् + इच्छति) = जाना चाहता है। एवमेव (एवम् + एव) = उसी प्रकार ।

द्वारिकाकामाख्यादिषु = द्वारिका, कामाख्या आदि में । स्थलेषु = स्थलों में/पर । तीर्थयात्रिकाः = तीर्थयात्री । नद्यः = नदियाँ । पुण्यतोयाः = पवित्र जलवाली । मन्यन्ते = माने जाते हैं, मानी जाती हैं । कथ्यन्ते = कहे जाते हैं। पूज्यन्ते = पूजे जाते हैं। प्रकृति प्रति = प्रकृति के प्रति । भारतीयानाम् = भारतीयों का । आकर्षणमासीत् ( आकर्षणम् + आमीत्) = आकर्षण था। पूजनीयत्वात् = पूज्य होने (के कारण) से । प्रकृतेः = प्रकृति का । प्रदूषणम् = प्रदूषण । मन्यते स्म = माना जाता था। अतएव = इसीलिए । पर्यावरणस्य = पर्यावरण की। कापि = कोई भी। अत्र = यहाँ । नासीत् (न + आसीत्) = नहीं था। अस्मिन् देशे = इस देश में। विज्ञानस्यापि (विज्ञानस्य + अपि) = विज्ञान का भी।

महती = बड़ी । प्रतिष्ठा = इज्जत, सम्मान । वास्तुशिल्पिनः = वास्तुकार-शिल्पकार (भवन का नक्शा बनानेकाले)। विशालानि मन्दिराणि = बड़े मन्दिरों को। निर्मान्ति स्म = बनाते थे। भवनानि = भवन, मकान । भव्यानि = भव्य, सुन्दर, आकर्षक । क्रियन्ते स्म = बनाये जाते थे। आकाशपिण्डानि = आकाशीय पिण्डों (ग्रह, उपग्रह, नक्षत्रादि) को । ज्योतिर्विद्भिः = ज्योतिषियों के द्वारा । अधीयन्ते स्म = अध्ययन किये जाते थे। चिकित्साशास्त्रमपि (चिकित्साशास्त्रम् + अपि) = चिकित्सा शास्त्र भी । प्रगतिशीलम् = प्रगतिशील, लगातार आगे बढ़नेवाला। गणितशास्त्रे = गणितशास्त्र में ।

शून्यस्य = शून्य की, (का, के) । भारतेन = भारत के द्वारा । कृता = किया गया । येन = जिससे । दशमलवगणना = दशमलव की गणना (गिनती)। प्रारभत = आरम्भ हुआ। अन्यदेशेष्वपि (अन्यदेशेषु + अपि) = दूसरे देशों में भी। गता = गयी। किञ्चित् = कुछ । तिरोहितम् = लुप्त, गायब । पराधीनतया = पराधीनता से, गुलामी से, दूसरे के अधीन रहने से । सम्प्रति = इस समय । शिक्षिताः = शिक्षित, पढ़े-लिखे लोग । सन्तः = होते हुए । आधुनिके = आधुनिक में, आज के समय में । विज्ञानेपि (विज्ञाने + अपि) = विज्ञान में भी। प्रतिभाम् = प्रतिभा को । दर्शयन्ति = दिखाते हैं । आधुनिकभारतस्य = आधुनिक भारत के। गौरववर्धकाः = गौरव, प्रतिष्ठा, सम्मान बढ़ानेवाले । सदृशः = (के) समान । स्थितप्रज्ञः = जिसने आत्मतत्त्व को जानकर स्थिरता प्राप्त कर ली है (समसुखदु:ख) । इत्यादय = इत्यादि।

वर्तमानभारतस्य = वर्तमान भारत के । गौरवरूपाः = गौरवरूप, प्रतिष्ठापूर्ण । नेतारः = नेता (बहुवचन)। सार्वत्रिकः = सभी क्षेत्रों वाला । कृषिक्षेत्रे = कृषि क्षेत्र में । नवीनाः प्रयोगाः = नये प्रयोग । संचारसाधनानि = संचार के साधन – (यथा-दूरभाष, वायुयान इत्यादि)। उत्कृष्टानि = उत्तम । अन्तरिक्षक्षेत्रेऽपि (अन्तरिक्षक्षेत्रे + अपि) = अन्तरिक्ष क्षेत्र में भी । विशिष्टम् = विशेष । स्वास्थ्यं प्रति = स्वास्थ्य के प्रति । जनजागरणम् = जन-जागरूकता । चिकित्सासुविधानां = चिकित्सा सुविधाओं को । वृद्धिः = बढ़ोत्तरी । सर्वशिक्षाभियानम् = विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उत्थान के लिए चलाया गया कार्यक्रम । इत्यादीनि = इत्यादि । उल्लेखनीयानि = उल्लेखनीय । सर्वथापि (सर्वथा + अपि) = सभी प्रकार से । अग्रगण्येषु = अग्रगण्यों में । गणनीयः = गणना-योग्य

व्याकरणम्

सन्धि-विच्छेद

हिमाद्रेश्चैव = हिमाद्रेः + च + एव (विसर्ग सन्धि, वृद्धि सन्धि)। अत्रैव = अत्र + एव (वृद्धि सन्धि)। योऽभिनिवेशः = यः + अभिनिवेशः । नासीत् = न + आसीत् (दीर्घ सन्धि) । अन्यदेशेष्वपि = अन्यदेशेषु + अपि (यण् सन्धि) । विज्ञानेऽपि = विज्ञाने + अपि (पूर्वरूप सन्धि) । अन्तरिक्षक्षेत्रेऽपि = अन्तरिक्षक्षेत्रे + अपि (पूर्वरूप सन्धि) । सर्वथापि = सर्वथा + अपि (दीर्घ सन्धि )।

प्रकृति-प्रत्यय-विभाग: प

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solution

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solution

अभ्यास

मौखिक

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solution प्रश्न 1.
अधोलिखितानां पदानाम् उच्चारणं कुरुत:
उत्तरम्:
हिमाद्रेश्च, प्राहुः, साहित्यिकम्, आविर्भावः, शिलप्पदिकारम् अविस्मरणीयम्, योऽभिनिवेशः, द्वारिकाकामाख्यादिषु, पुण्यतोयाः, वास्तुशिल्पिनः, ज्योतिर्विद्भिः, चिकित्साशास्त्रम्, अन्तरिक्षक्षेत्रेऽपि, अग्रगण्येषु ।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखितानां पदानाम् अर्थं वदत :
उत्तरम्:
अस्माकम् = हमारे । प्राचीनकालात् = प्राचीन काल से । समृद्धिः = उन्नति । वेदानाम् = वेदों का । आध्यात्मिकम् = आध्यात्मिक । वर्धितवन्तः = बढ़ा रहा है। अविस्मरणीयम् = नहीं भूलाने योग्य । इदानीम् = इस समय । अभिनिवेशः = लगाव (प्रेम) । गन्तुमिच्छति = जाना चाहता है। पुण्यतोयाः = पवित्र जल वाली । मन्यन्ते = मानी जाती हैं। पूजनीयत्वात् – पूजनीय होने के कारण। प्रदूषणम् = गन्दगी। आकाशपिण्डानि = आकाशीय पिण्डों को । ज्योतिर्विद्भिः = ज्योतिषियों के द्वारा । अन्यदेशेष्वपि = अन्य देशों में भी । तिरोहितम् = ह्रास । स्थितप्रज्ञः = स्थिर बुद्धि वाला (सुख-दु:ख में समान रहने वाला) । सार्वत्रिकः = सब प्रकार से। संचार साधनानि = संचार के साधन (दूरसंचार, यातायात के साधन)। जन जागरणम् = लोगों का जागरूक होना । सर्वशिक्षाभियानम् = सर्व शिक्षा अभियान । सर्वथापि = सभी प्रकार से । गणनीयः = गिनने योग्य।

Bihar Board Solution Class 8 Sanskrit प्रश्न 3.
भारतवर्षस्य विषये दश वाक्यानि स्व मातृभाषायां वदत् ।
(भारत देश पर दस वाक्य में अपनी मातृभाषा (हिन्दी) में लिखें।)
उत्तरम्:
हमारा भारत महान है। इस देश का इतिहास गौरवपूर्ण है। यहाँ हिन्दू-मुस्लिम, सिख ईसाई सभी लोग प्रेम से रहते हैं। यह कृषि-प्रधान देश है।

भारत की भाषा हिन्दा । यहाँ गंगा-यमुना आदि नदियाँ बहती हैं। भारत के उत्तर में हिमालय, दक्षिण में समुद्र, पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में बांग्लादेश है।

भारत में राम-कृष्ण-गाँधी जैसे अनेक महापुरुषं उत्पन्न हुए। भारत को आर्यावर्त, हिन्दुस्तान, इण्डिया इत्यादि नाम से भी लोग जानते हैं। भारत सभी क्षेत्रों में विकासशील है।

Bihar Board 8th Class Sanskrit Solution प्रश्न 4
अधोलिखिताना प्रश्नानाम् उत्तरम् एकपदेन लिखत

(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए।)
प्रश्नोत्तरम् :

(क) अस्माकं देशः किं?
उत्तरम्:
भारतः।

(ख) भारतवर्षम् हिमालयस्य (हिमाद्रेः) कस्यां दिशायां वर्तते ?
उत्तरम्:
दक्षिणे।

(ग) भारतस्य दक्षिण दिशायां कः सागरः वर्तते ?
उत्तरम्:
हिन्दमहासागरः।

(घ) वेदानां आविर्भावः कस्मिन् प्रदेशे जातः ?
उत्तरम्:
सप्तसिन्धु प्रदेशे।

(ङ) लप्पदिकारम्” इति कस्याः भाषायाः महाकाव्यम् ।
उत्तरम्:
तमिलभाषायाः।

(च) कस्मात कारणात् प्रकृते प्रदूषणं पापं मन्यते स्म ?
उत्तरम्:
पूजनीयत्वात् ।

(छ) आकाश पिण्डानि कैः अधीयन्ते स्म ?
उत्तरम्:
ज्योतिर्विद्भिः।

(ज) गणितशास्त्रे शून्यस्य कल्पना केन कृता?
उत्तरम्:
भारतेन ।

Sanskrit Class 8 Bihar Board प्रश्न 5.
मेलनं कुरुत
(क) वेदाः – (1) तमिल महाकाव्यम्।
(ख) भारतवर्षम् – (2) भारतवर्षे
(ग) शिलप्पदिकारम् – (3) ऋक्-यजुः साम-अथर्व
(घ) शून्यस्य कल्पना – (4) राष्ट्रम्
(ङ) सी. वी. रमणः – (5) दार्शनिकः
(च) श्री अरविन्दः – (6) वैज्ञानिकः
(छ) सर्वशिक्षाभियानम् – (7) स्थितप्रज्ञः
(ज) श्री राजेन्द्र प्रसादः – (8) शैक्षिकोत्थान कार्यक्रमः। :
उत्तरम्:
(क) (3)
(ख) (4)
(ग) (1)
(घ) (2)
(ङ) (6)
(च) (5)
(छ) (8)
(ज) (7)

Class 8 Sanskrit Bihar Board प्रश्न 6.
कोष्ठात् पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(क) भारतवर्ष हिमालयस्य …………. दिशायां वर्तते । (उत्तर, दक्षिण)
(ख) ………. निवासी प्रार्येण बदरीकेदारयात्रां करोति । (उत्तरस्य/दक्षिणस्य)
(ग) भारतस्य गौरवं …………. काले किञ्चित् तिरोहितम् (प्राचीने/मध्ये)
(घ) डॉ. होमी जहाँगीर भाभा एकः ………….. आसीत् (वैज्ञानिक:/राजनीतिज्ञः)
(ङ) सम्प्रति राष्ट्रस्य विकासः ……………….. | (सार्वत्रिक:/एकाङ्गिकः)
उत्तरम्:
(क) उत्तर ।
(ख) दक्षिणस्य ।
(ग) मध्ये ।
(घ) वैज्ञानिकः ।
(ङ) सार्वत्रिकः।

अस्माकं भारत देश कीदृशः अस्ति Bihar Board प्रश्न 7.
निम्नलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तर पूर्ण वाक्येन लिखत

(क) अस्माकं देशः किं कथ्यते ?
उत्तरम्:
अस्माकं देश: भारतवर्षम् कथ्यते ।

(ख) वेदानाम् आविर्भावः कस्मिन प्रदेशे जातः ?
उत्तरम्:
वेदानाम् आविर्भावः सप्तसैन्धुप्रदेशे जातः।

(ग) वेदेषु किम् अद्भुतम् आसीत ?
उत्तरम्:
वेदेषु भौतिकम् आध्यात्मिकं च चिन्तनम् अद्भुतम् आसीत् ।

(घ) का प्रति भारतीयानाम् आश्चर्यकरम् आकर्षणमासीत् ?
उत्तरम्:
प्रकृति प्रति भारतीयानाम् आश्चर्यकरम् आकर्षणमासीत् ।

(ङ) भारतवर्षे के विशालानि मन्दिराणि निर्मान्ति स्म ?
उत्तरम्:
वास्तुशिल्पिन: विशालानि मन्दिराणि निर्मान्ति स्म ।।

(च) गणितशास्त्रे शून्यस्य कल्पना केन कृता?
उत्तरम्:
गणितशास्त्रे शून्यस्य कल्पना भारतेन कृता ।

Class 8 Sanskrit Chapter 3 प्रश्न 8.
निम्नलिखितानां पदानां बहुवचनं लिखत

प्रश्न – उत्तरम्

  1. कथ्यते – कथ्यन्ते
  2. आसीत् – आसन्
  3. वर्धितवान् – वधितवन्तः
  4. करोति – कुर्वन्ति
  5. इच्छति – इच्छन्ति
  6. मन्यते – मन्यन्ते
  7. अधीयते – अधियन्ते
  8. गतः – गताः
  9. दर्शयति – दर्शयन्ति ।
  10. सदृशः – सदृशाः
  11. वर्तते – वर्तन्ते ।

अस्माकं देश इन संस्कृत Bihar Board प्रश्न 9.
संस्कृते अनुवादं कुरुत

(क) हमारा देश ‘भारतवर्ष’ कहा जाता है।
उत्तरम्:
अस्माकं देशः ‘भारतवर्षम्’ कथ्यते ।

(ख) यहीं (अत्रैव) सप्तसैन्धव क्षेत्र में वेदों की उत्पत्ति हुई।
उत्तरम्:
अत्रैव सप्तसिन्धु क्षेत्रे वेदानां, उत्पत्तिः अभवत् ।

(ग) दक्षिण के निवासी प्रायः बद्रीकेदारनाथ की यात्रा करते हैं।
उत्तरम्:
दक्षिणस्य निवासिनः प्रायः बद्री केदारनास्य यात्रां कुर्वन्ति ।

(घ) उत्तर के निवासी रामेश्वर और कन्या कुमारी की यात्रा पर जाना चाहते हैं।
उत्तरम्:
उत्तरस्य निवासिनः रामेश्वरं कन्याकुमारी च यात्रायाम् गन्तुम् इच्छन्ति ।

(ङ) इस देश के पर्वत पवित्र कहे जाते हैं।
उत्तरम्:
अस्य देशस्य पर्वताः पवित्राः कथ्यन्ते ।

(च) इस देश में वृक्ष पूजे जाते हैं।
उत्तरम्:
अस्मिन् देशे वृक्षाः पूज्यन्ते ।

Sanskrit Class 8 Chapter 3 Bihar Board प्रश्न 10.
पदानि योजयित्वा लिखत

प्रश्न – उत्तरम्

  1. भारतवर्षम् + इति – भारतवर्षमिति
  2. देशभागम् + अपि – देशभागमपि
  3. गन्तुम् + इच्छति – गन्तुमिच्छति
  4. आकर्षणम् + आसीत् – आकर्षणमासीत्
  5. चिकित्साशास्त्रम् + अपि चिकित्साशास्त्रमपि

अस्माकं भारत देश कीदृश अस्ति Class 6 Bihar Board प्रश्न 11.
भिन्न प्रकृतिकं पदं चिनुत

(क) कथ्यते, नीयते, मन्यते, अमन्यत, क्रियते ।
उत्तरम्:
अमन्यत ।

(ख) देशः, ग्रन्थः, तीर्थयात्रिकः, जनः, लता।
उत्तरम्:
लता।

(ग) उत्तरम, दक्षिणम्, भारतवर्षम्, वृक्षः, प्रदूषणम् ।
उत्तरम्:
वृक्षः।

(घ) कन्या, कुमारी, नदी, विज्ञानम्, समस्या ।
उत्तरम्:
विज्ञानम् ।

प्रश्न 12.
अधोलिखितपदेषु प्रकृति-प्रत्ययविभागं कुरुत
यथा

  1. पदानि – प्रकृति + प्रत्ययः
  2. कथयितुम – कथ् + तुमुन्

उत्तरम्:
(क) पठितुम् – पठ् + तुमुन्
(ख) गन्तुम् – गम् + तुमुन् ।
(ग) हसितुम् – हस् + तुमुन्
(घ) द्रष्टुम् – दृश् + तुमुन्
(ङ) कर्तुम् – कृ + … तुमुन्

प्रश्न 13.
विशेष्य-विशेषणानाम् उचितं मेलनं कुरुत

विशेष्य-पदानि – विशेषण-पदानि
(क) चिन्तनम् – (1) पवित्राः
(ख) नद्यः – (2) महती
(ग) पर्वताः – (3) नवीनाः
(घ) प्रतिष्ठा – (4) पुण्यतोयाः
(ङ) प्रयोगाः (5) अद्भुतम्
उत्तरम्:
(क) – (5)
(ख) – (4)
(ग) – (1)
(घ) – (2)
(ङ) – (3)

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Political Science Solutions Chapter 10 संविधान का राजनीतिक दर्शन

Bihar Board Class 11 Political Science संविधान का राजनीतिक दर्शन Textbook Questions and Answers

संविधान का राजनीतिक दर्शन के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
नीचे कुछ कानून दिए गए हैं। क्या इनका संबंध किसी मूल्य से है? यदि हाँ, तो वह अंतर्निहित मूल्य क्या है? कारण बताएँ।
(क) पुत्र और पुत्री दोनों का परिवार की संपत्ति में हिस्सा होगा।
(ख) अलग-अलग उपभोक्ता वस्तुओं के बिक्री-कर का सीमांकन अलग-अलग होगा।
(ग) किसी भी सरकारी विद्यालय में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जायगी।
(घ) ‘बेगार’ अथवा बंधुआ मजदूरी नहीं कराई जा सकती।
उत्तर:
(क) परिवार की नियुक्ति में पुत्री एवं पुत्र दोनों का बराबर हिस्सा होना सामाजिक मूल्य से सम्बन्धित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि संविधान में स्त्री और पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान किया गया है। यह एक लिंग-न्याय कहा जाएगा। सामाजिक न्याय का अर्थ है कि लिंग, जाति, नस्ल, धर्म अथवा क्षेत्र आदि के आधार पर कोई भेदभाव न हो। अतः पुत्री और पुत्र दोनों को समान हिस्सा दिया जाना सामाजिक न्याय के अन्तर्गत या लिंग न्याय की श्रेणी में रखा जायगा।
(ख) अलग-अलग उपभोक्ता वस्तुओं पर बिक्रीकर का सीमांकन अलग-अलग करना आर्थिक न्याय का उदाहरण है।
(ग) सरकारी स्कूलों में धार्मिक शिक्षा न दिया जाना, धर्म निरपेक्षता के मूल्य पर आधारित है।
(घ) किसी से बेगार न लेना और बन्धुआ मजदूरी का निषेध करना यह भी सामाजिक न्याय के मूल्य पर आधारित है। समाज में किसी भी वर्ग का शोषण नहीं किया जाना चाहिए।

संविधान का राजनीतिक दर्शन प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
नीचे कुछ विकल्प दिए जा रहे हैं। बताएँ कि इसमें किसका इस्तेमाल निम्नलिखित कथन को पूरा करने में नहीं किया जा सकता? लोकतांत्रिक देश को संविधान की जरूरत …..
(क) सरकार की शक्तियों पर अंकुश रखने के लिए होती है।
(ख) अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से सुरक्षा देने के लिए होती है।
(ग) औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए होती है।
(घ) यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि क्षणिक आवेग में दूरगामी के लक्ष्यों से कहीं विचलित न हो जाएँ।
(ङ) शांतिपूर्ण ढंग से सामाजिक बदलाव लाने के लिए होती है।
उत्तर:
इस वाक्य को पूरा करने में तीसरा विकल्प  –
(ग) का प्रयोग नहीं किया जा सकता अर्थात् औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए होती है, का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

संविधान का राजनीतिक दर्शन पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
संविधान सभा की बहसों को पढ़ने और समझने के बारे में नीचे कुछ कथन दिए गए हैं –

  1. इनमें से कौन-सा कथन इस बात की दलील है कि संविधान सभा की बहसें आज भी प्रासंगिक हैं? कौन-सा कथन यह तर्क प्रस्तुत करता है कि ये बहसें प्रासंगिक नहीं हैं?
  2. इनमें से किस पक्ष का आप समर्थन करेंगे और क्यों?

(क) आम जनता अपनी जीविका कमाने और जीवन की विभिन्न परेशानियों के निपटाने में व्यस्त होती हैं। आम जनता इन बहसों की कानूनी भाषा को नहीं समझ सकती।

(ख) आज की स्थितियाँ और चुनौतियाँ संविधान बनाने के वक्त की चुनौतियों और स्थितियों से अलग हैं। संविधान निर्माताओं के विचारों को पढ़ना और अपने नये जमाने में इस्तेमाल करना दरअसल अतीत को वर्तमान में खींच लाना है।

(ग) संसार और मौजूदा चुनौतियों को समझाने की हमारी दृष्टि पूर्णतया नहीं बदली है। संविधान सभा की बहसों से हमें यह समझने के तर्क मिल सकते हैं कि कुछ संवैधानिक व्यवहार क्यों महत्त्वपूर्ण हैं एक ऐसे समय में जब संवैधानिक व्यवहारों को चुनौती दी जा रही है, इन तर्कों को न जानना संवैधानिक-व्यवहारों को नष्ट कर सकता है।
उत्तर:
1.
(क) जब आम जनता अपने जीविकोपार्जन में व्यस्त रहती है तो यह कथन यह तर्क प्रस्तुत करता है कि ये बहसें प्रासंगिक नहीं हैं।
(ख) आज की स्थितियाँ और चुनौतियाँ संविधान बनाने के वक्त की चुनौतियों और स्थितियों से अलग हैं। यह तर्क भी प्रस्तुत करता है कि ये बहसें प्रासंगिक नहीं है।
(ग) यह कथन प्रस्तुत करता है कि बहसें प्रासंगिक हैं क्योंकि संसार और वर्तमान चुनौतियाँ पूर्णतया नहीं बदली हैं।

2.
(क) मैं इस बात से सहमत हूँ कि आम जनता अपनी जीविका कमाने में व्यस्त है।
(ख) मैं इस बात से सहमत हूँ क्योंकि आज की स्थितियाँ उस समय से अलग हैं। पिछले लगभग 56 वर्षों में 93 के लगभग संशोधन हो चुके हैं।
(ग) क्योंकि समस्त चुनौतियाँ और यह संसार पूर्णतया नहीं बदले अतः मैं इस बात से सहमत हूँ कि बहसें प्रासंगिक हैं।

संविधान का राजनीतिक दर्शन Class 11 प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रसंगों के आलोक में भारतीय संविधान और पश्चिमी अवधारणा में अंतर स्पष्ट करें –
(क) धर्मनिरपेक्षता की समझ
(ख) अनुच्छेद 370 और 371
(ग) सकारात्मक कार्य-योजना या अफरमेटिव एक्शन
(घ) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
उत्तर:
(क) धर्मनिरपेक्षता की समझ:
धर्म निरपेक्षता के मामले में भारतीय संविधान पश्चिमी अवधारणा से बिल्कुल भिन्न है। पश्चिमी अवधारणा में धर्म व्यक्ति की अपनी निजी धारणा है। राज्य उसमें किसी प्रकार का योगदान या हस्तक्षेप नहीं करता, परंतु भारतीय संविधान में सभी धर्मों को समान आदर दिया गया है।

(ख) अनुच्छेद 370 और 371:
अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य के सम्बन्ध में अस्थायी या संक्रमणकालीन व्यवस्था ही करता है। अनुच्छेद 371 उत्तर-पूर्व के राज्यों के लिए है। भारतीय संविधान और पाश्चात्य अवधारणा में यह अंतर है कि पाश्चात्य देशों में राज्यों के अपने अलग संविधान होते हैं परंतु भारतीय संविधान में राज्यों के अलग संविधान नहीं हैं, परंतु जम्मू और कश्मीर का 26 जनवरी, 1957 से अपना अलग संविधान भी है जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष उपबंध हैं।

371 (a) नागालैण्ड राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबंध हैं
371 (b) असम के, 371
(c) मणिपुर, 371
(d) आन्ध्र प्रदेश, 371
(e) आन्ध्र प्रदेश में केन्द्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के
371 (f) सिक्किम राज्य के सम्बन्ध में विशेष उपबंध हैं 371
(g) मिजोरम, 371
(h) अरुणाचल प्रदेश

1. गोवा के सम्बन्ध में विशेष उपबंध हैं। इन राज्यों को छोड़कर पाश्चात्य धारणा और भारतीय संविधान में अंतर है परंतु 370 और 371 अनुच्छेदों वाले राज्यों पर केन्द्र का सीधा-नियंत्रण अथांत् उन राज्यों की सहमति के आधार पर संसद के नियमों को लागू कराया जा सकता है। एक सीमा तक ये प्रदेश स्वायत्तता का उपयोग कर सकते हैं जैसा कि पाश्चात्य धारणा में तो राज्यों की स्वायत्तता होती ही है।

(ग) सकारात्मक कार्ययोजना:
भारतीय संविधान और पाश्चात्य धारणा में सकारात्मक कार्ययोजना के सम्बन्ध में बड़ा अंतर है जैसा कि अमेरिका के संविधान में जहाँ संविधान 18 वीं शताब्दी में लिखा गया था उस समय के मूल्य और प्रतिमान आज इक्कीसवीं सदी में लागू करना भद्दा होगा परंतु भारतीय संविधान में निर्माताओं ने सकारात्मक कार्ययोजना हमारे मूल्यों, आदशौँ तथा विचारधारा के साथ संविधान का निर्माण किया।

भारतीय राजनीतिक दर्शन उदारवाद, लोकतंत्र समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और संघात्मकता तथा अन्य सभी धारणाओं जो भारतीय संस्कृति को प्रकट करती है, वसुधैव कुटुम्बकम अर्थात् सबको एक समान मानते हुए अल्पसंख्यकों का आदर करते हुए एक राष्ट्रीय पहचान बनाए रखते हुए भारतीय संविधान में रखा गया है परंतु पाश्चात्य विचारधारा में ऐसा नहीं होता।

(घ) सार्वभौम वयस्क मताधिकार:
पाश्चात्य अवधारणा में स्त्रियों को मताधिकार अभी हाल में दिया गया है जबकि संविधान निर्माण के समय नहीं दिया गया था परंतु भारतीय संविधान में सार्वभौम वयस्क मताधिकार (सभी स्त्री, पुरुष व नपुंसक को) दिया गया है।

संविधान का राजनीतिक दर्शन Class 11 Question Answer Bihar Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित में धर्मनिरपेक्षता का कौन-सा सिद्धांत भारत के संविधान में अपनाया गया है?
(क) राज्य का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
(ख) राज्य का धर्म से नजदीकी रिश्ता है।
(ग) राज्य धर्मों के बीच भेदभाव कर सकता है।
(घ) राज्य धार्मिक समूहों के अधिकार को मान्यता देगा।
(ङ) राज्य को धर्म के मामलों में हस्तक्षेप करने की सीमित शक्ति होंगी।
उत्तर:
भारतीय संविधान में धर्म-निरपेक्षता के निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए गए हैं –
(क) राज्य का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
(ख) राज्य धार्मिक समूहों के अधिकार को मान्यता देगा।

संविधान का राजनीतिक दर्शन पाठ के प्रश्न उत्तर कक्षा 11 Bihar Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों को सुमेलित करें –
(क) विधवाओं के साथ किए जाने वाले बरताव की आलोचना की आजादी।
(ख) संविधान-सभा में फैसलों का स्वार्थ के आधार पर नहीं बल्कि तर्कबुद्धि के आधार पर लिया जाना।
(ग) व्यक्ति के जीवन से समुदाय के महत्त्व को स्वीकार करना।
(घ) अनुच्छेद 370 और 371
(ङ) महिलाओं और बच्चों को परिवार की संपत्ति में असमान

अधिकार:

  1. आधारभूत महत्त्व की उपलब्धि
  2. प्रक्रियागत उपलब्धि
  3. लैंगिक-न्याय की उपेक्षा
  4. उदारवादी व्यक्तिवाद
  5. धर्म-विशेष की जरूरतों के प्रति ध्यान देना

उत्तर:
(क) विधवाओं के साथ किए जाने वाले बरताव की आलोचना की आजादी।
(ख) संविधान सभा में फैसलों का स्वार्थ के आधार पर नहीं बल्कि तर्क बुद्धि के आधार पर लिया जाना
(ग) व्यक्ति के जीवन में समुदाय के महत्त्व को स्वीकार करना
(घ) अनुच्छेद 370 और 371
(ङ) महिलाओं और बच्चों के परिवार की संपत्ति में असमान

अधिकार:

  1. प्रक्रियागत उपलब्धि
  2. आधारभूत महत्त्व की उपलब्धि
  3. उदारवादी व्यक्तिवाद
  4. धर्म-विशेष की जरूरतों के प्रति ध्यान देना
  5. लैंगिक न्याय की उपेक्षा
  6. नीति

Samvidhan Ka Rajnitik Darshan Question Answer Bihar Board प्रश्न 7.
यह चर्चा एक कक्षा में चल रही थी। विभिन्न तर्कों को पढ़ें और बताएं कि आप इनमें किस से सहमत हैं और क्यों?

जयेश:
मैं अब भी मानता हूँ कि हमारा संविधान एक उधार का दस्तावेज है।

सबा:
क्या तुम यह कहना चाहते हो कि इसमें भारतीय कहने जैसा कुछ है ही नहीं? क्या मूल्यों और विचारों पर हम ‘भारतीय’ अथवा ‘पश्चिमी’ जैसा लेबल चिपका सकते हैं? महिलाओं और पुरुषों की समानता का ही मामला लो। इसमें पश्चिमी’ कहने जैसा क्या है? और, अगर ऐसा है भी तो क्या हम इसे सहज पश्चिमी. होने के कारण खारिज कर दें?

जयेश:
मेरे कहने का मतलब यह है कि अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ने के बाद क्या हमने उनकी संसदीय-शासन की व्यवस्था नहीं अपनाई?

नेहा:
तुम यह भूल जाते हो कि जब हम अंग्रेजों से लड़ रहे थे तो हम सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ थे। अब इस बात का, शासन की जो व्यवस्था हम चाहते थे उसको अपनाने से कोई लेना-देना नहीं, चाहे यह जहाँ से भी आई हो।
उत्तर:
इस चर्चा में जयेश का विचार; कि ‘हमारा संविधान केवल उधार का थैला है। यहाँ. पर आलोचना का विषय है कि भारतीय संविधान मौलिक नहीं है, बहुत से अनुच्छेद तो भारतीय शासन अधिनियम, 1935 से शब्दशः लिए गए हैं। बहुत से अनुच्छेद विदेशों के संविधानों से लिए गए हैं। इसमें अपना देशी कुछ भी नहीं है। इसमें हिन्दुकाल की सभा या समिति का कुछ भी वर्णन नहीं है। इसमें मध्यकालीन भारत का भी कुछ नहीं है परंतु सब का कहना है कि कोई मूल्य या आदर्श भारतीय या पाश्चात्य नहीं हुआ करते, मूल्य तो मूल्य हैं, आदर्श तो आदर्श होते हैं।

जब हम कहते हैं कि स्त्री और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए तो यह बात पाश्चात्य और भारतीय दोनों दृष्टिकोण से ही ठीक है। हमें कोई बात इस कारण से नकारनी नहीं चाहिए कि वह पाश्चात्य अवधारणा से ली गई है परंतु नेहा का कथन है कि हम ब्रिटिश के खिलाफ अपनी आजादी के लिए लड़े थे तो हम ब्रिटिश के विरुद्ध नहीं बल्कि औपनिवेशिक पीतियों के खिलाफ लड़े थे।

हमें कोई भी बात जो हमारे लिए उपयोगी है उसमें यह नहीं देखना कि यह कहाँ से ली गई है। इस प्रकार दूसरे देशों से ली गयी बातें गलत हों, यह कहना सही नहीं हो सकता वरन् मानव की अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप जो बात जिस देश के संविधान से ली जाए उसमें कुछ भी गलत नहीं है। इसके विपरीत यदि हम पुरातन भारतीय, राजनीतिक संस्थाओं को लेना चाहें तो आधुनिक युग में यह जरूरी नहीं कि वे फिट बैठ सकें।

आलोचक भारतीय संविधान की आलोचना करते हुए जिन विशेषणों का प्रयोग करते हैं, उनमें प्रमुख हैं ‘मौलिकता का अभाव’ ‘उधार का थैला’ और ‘भानुमति का पिटारा’ आदि। आलोचकों का कहना है कि संविधान में ‘भारतीयता का पुट’ नहीं है परंतु उपर्युक्त आलोचना न्यासंगत नहीं है। विशेष बात यह है कि विदेशी संविधानों से सोच-विचारकर ही ग्रहण किया गया है और जो कुछ ग्रहण किया गया है उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ढाल लिया गया है।

ग्रेनविल आस्टिन के अनुसार भारतीय संविधान के निर्माण में परिवर्तन के साथ चयन की कला को अपनाया गया है। इसे भारतीय संविधान का गुण कहा जा सकता है। वास्तव में संविधान के मौलिक विचारों पर किसी का स्वात्वाधिकार नहीं होता। संविधान निर्माताओं ने अन्य देशों के संविधानों और उनके व्यावहारिक अनुभवों से लाभ उठाकर कोई गलती नहीं की वरन् दूरदर्शिता का ही कार्य किया है।

Samvidhan Ki Raajnitik Darshan Question Answer Bihar Board प्रश्न 8.
ऐसा क्यों कहा जाता है कि भारतीय संविधान को बनाने की प्रक्रिया प्रतिनिधिमूलक नहीं थी? क्या इस कारण हमारा संविधान प्रतिनिध्यात्मक नहीं रह जाता? अपने उत्तर के कारण बताएँ।
उत्तर:
भारत के संविधान की एक आलोचना यह कहकर की जाती है कि यह प्रतिनिध्यात्मक नहीं है। भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया गया था जिसका गठन नवम्बर 1946 में किया गया था। इसके सदस्य प्रान्तीय विधानमण्डलों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे। संविधान सभा में 389 सदस्य थे जिनमें से 292 ब्रिटिश प्रान्तों से तथा 93 देशी रियासतों से थे। चार सदस्य चीफ कमिश्नर वाले क्षेत्रों से थे।

3 जून, 1947 के माउन्टबेटन योजना के तहत भारत का विभाजन हुआ और संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या घटकर 299 रह गई जिसमें 284 सदस्यों ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पर हस्ताक्षर किए यद्यपि कुछ संविधान विशेषज्ञ संविधान सभा को संप्रभु नहीं मानते थे क्योंकि यह ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित की गई थी। अगस्त, 1947 में भारत के आजाद होने के बाद इस संविधान सभा ने पूर्ण संप्रभु होकर कार्य किया। इस सभा के सदस्यों का चुनाव क्योंकि सार्वभौम वयस्क मताधिकार द्वारा नहीं हुआ था अतः कुछ विद्वान इसे प्रतिनिधि मूलक नहीं मानते परंतु यदि हम संविधान सभा के डिवेट (वाद-विवाद) का अध्ययन करें तो पता चलता है कि विभिन्न विचारों के आदान-प्रदान के बाद ही इसके प्रावधान बनाए गए।

कुछ लोगों का यह कथन भी ठीक नहीं प्रतीत होता कि संविधान सभा वास्तव में प्रतिनिधि संस्था नहीं थी इस कारण वह भारतीयों के लिए संविधान बनाने की अधिकारिणी नहीं थी। इसके अनुसार न तो सभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से हुआ और न ही जनमत संग्रह द्वारा ही संविधान को जनता द्वारा अनुसमर्थित कराया गया, इसलिए यह कहा जा सकता है कि संविधान को लोकप्रिय स्वीकृति प्राप्त नहीं थी परंतु इस आलोचना में भी कोई सार नहीं है। 1946 में जिन परिस्थितियों में संविधान सभा का निर्माण हुआ, उनमें वयस्क मताधिकार के आधार पर इस प्रकार की सभा का निर्माण सम्भव नहीं था।

यदि संविधान का गठन प्रत्यक्ष निर्वाचन के आधार पर होता अथवा यदि इस संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान के प्रारूप पर जनमत संग्रह करवाया जाता, तब भी संविधान का स्वरूप कम या अधिक रूप में ऐसा ही होता। इस विचार को बल देने वाला तथ्य यह है कि 1952 के प्रथम आम चुनाव जो नई सरकार के गठन के साथ-साथ संविधान के स्वरूप के आधार पर लड़े गए थे, में संविधान सभा के अधिकांश सदस्यों ने चुनाव – लड़ा और काफी अच्छे बहुमत से विजय प्राप्त की। इन सबके अतिरिक्त यह भी तथ्य है कि तत्कालीन भारत के सबसे प्रमुख संगठन ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ ने संविधान सभा को अधिकाधिक प्रतिनिधि स्वरूप प्रदान करने की प्रत्येक सम्भव और अधिकांश अंशों में सफल चेष्टा की थी।

संविधान का राजनीतिक दर्शन के प्रश्न उत्तर बताइए Bihar Board प्रश्न 9.
भारतीय संविधान की एक सीमा यह है कि इसमें लैंगिक-न्याय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। आप इस आरोप की पुष्टि में कौन-से प्रमाण देंगे? यदि आज आप संविधान लिख रहे होते, तो इस कमी को दूर करने के लिए उपाय के रूप में किन प्रावधानों की सिफारिश करते?
उत्तर:
भारतीय संविधान की कुछ सीमाएँ भी हैं। यह नहीं कहा जा सकता कि यह एक सम्पूर्ण तथा दोष रहित प्रलेख है। इनमें से एक सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लैंगिक न्याय विशेषतया परिवार की संपत्ति के अन्तर्गत ऐसा है। परिवार की संपत्ति में स्त्रियों और बच्चों को समान अधिकार नहीं दिए गए। बेटे और बेटी में अंतर किया जाता है। मूल सामाजिक-आर्थिक अधिकार राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों में शामिल किए गए हैं जबकि उन्हें मौलिक अधिकारों में शामिल किया जाना चाहिए था।

राज्य नीति निर्देशक तत्त्वों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। समान कार्य के लिए स्त्री तथा पुरुष दोनों को समान वेतन राज्य के द्वारा संरक्षित किया गया है। यह नीति निर्देशक तत्त्वों में शामिल किया गया है। यह भी मौलिक अधिकार का भाग होना चाहिए था क्योंकि राज्य पूरी तरह से तभी समान कार्य के लिए स्त्री-पुरुष दोनों को समान वेतन दिला सकता है। नीति निर्देशक तत्वों के लिए राज्य केवल प्रयास करेगा। हमारी संविधान की सीमाओं में से एक यह भी है कि आज तक स्त्रियों को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण संसद व राज्य विधानमंडल में नहीं दिलवाया जा सका।

हमारे संविधान की सीमाएँ मुख्यतः निम्नलिखित हैं –

  1. भारत का संविधान राष्ट्रीय एकता का केन्द्रीयकृत विचार रखता है।
  2. यह कुछ प्रमुख लैंगिक न्याय के विषयों विशेष तौर पर परिवार के अंदर व्याख्या किए हुए है।
  3. यह स्पष्ट नहीं हो सका कि क्योंकि एक निर्धन विकासशील देश में कुछ निश्चित मूल सामाजिक-आर्थिक अधिकार मूल अधिकारों की श्रेणी में न रखकर राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों में शामिल किया गया है।

संविधान का राजनीतिक दर्शन के पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 10.
क्या आप इस कथन से सहमत हैं-कि ‘एक गरीब और विकासशील देश में कुछ एक बुनियादी सामाजिक-आर्थिक अधिकार मौलिक अधिकारों की केन्द्रीय विशेषता के रूप में दर्ज करने के बजाए राज्य की नीति-निर्देशक तत्त्वों वाले खंड में क्यों रख दिए गए-यह स्पष्ट नहीं है। आपके जानते सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को नीति-निर्देशक तत्त्व वाले खंड में रखने के क्या कारण रहे होंगे?
उत्तर:
हमारे संविधान की एक विशेषता नीति निर्देशक तत्त्व हैं। विश्व के अन्य संविधानों में केवल आयरलैंड के संविधान को छोड़कर अन्य किसी देश के संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व नहीं हैं। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने संविधान में केवल. राज्य के संगठन की व्यवस्था एवं अधिकार पत्र का वर्णन नहीं किया है वरन् वह दिशा भी निश्चित किया है जिसकी ओर बढ़ने का प्रयत्न भविष्य में भारत राज्य को करना है।

संविधान निर्माताओं का लक्ष्य भारत में लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना था और इसलिए उन्होंने नीति निर्देशक तत्त्वों में से ऐसी बातों का समावेश किया, जिन्हें कार्य रूप में परिणत किए जाने पर एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना सम्भव हो सकती है। निर्देशक तत्त्व हमारे राज्य के सम्मुख कुछ आदर्श उपस्थित करते हैं जिनके द्वारा देश के नागरिकों का सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक उत्थान हो सकता है।

इन तत्त्वों की प्रकृति के सम्बन्ध में संविधान की 37 वीं धारा में कहा गया है कि “इस भाग में दिए गए उपबंधों को किसी भी न्यायालय द्वारा बाध्यता नहीं दी जा सकेगी, किन्तु फिर भी इसमें दिए हुए तत्त्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि निर्माण में इन तत्त्वों का प्रयोग करना राज्य का कर्तव्य होगा।” इस अनुच्छेद (37) से यह बात स्पष्ट है कि निर्देशक तत्त्व को मौलिक अधिकारों के समान वैधानिक शक्ति प्रदान नहीं की गयी है।

इसका अर्थ है कि निर्देशक तत्त्वों की क्रियान्विनी के लिए न्यायालय के द्वारा किसी भी प्रकार के आदेश जारी नहीं किए जा सकते हैं। वैधानिक महत्त्व प्राप्त न होने पर भी ये तत्त्व राज्य शासन के संचालन के आधारभूत सिद्धांत हैं और राज्य का यह नैतिक कर्तव्य है कि व्यवहार में सदैव ही इन तत्त्वों का पालन करे। यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि इतने महत्त्वपूर्ण एवं मौलिक अधिकारों से किसी भी प्रकार कम महत्त्व न रखते हुए भी इन निर्देशक तत्त्वों को राज्य सरकारों की कृपा पर क्या छोड़ा गया।

इसके नजर में यही कहा जा सकता है कि भारत उस समय पराधीनता के चंगुल से छुटा था। उसकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि इनका (निर्देश तत्त्वों का) पालन करने की बाध्यता होने से आर्थिक संकट उभर सकना था और उसके कारण समय-समय पर अनेक समस्यायें उठ सकती थीं। अत: राज्य को निर्देश दिया गया तथा नागरिकों को यह अधिकार भी नहीं दिया गया कि वे इन निर्देशक तत्त्वों को पूरा कराने के लिए राज्य के विरुद्ध न्यायालय में जा सकें। इसी कारण राज्य को इन नीति निर्देशक तत्त्वों को पूरा करने का प्रयास भर करने के लिए कहा गया ताकि अपनी सामर्थ्य के अनुकूल शासन इनको पूरा ६. 11 + रुचि ले सके।

Bihar Board Class 11 Political Science संविधान का राजनीतिक दर्शन Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

संविधान का राजनीतिक दर्शन प्रश्नोत्तरी Bihar Board प्रश्न 1.
‘संविध’ के दर्शन’ का क्या आशय है?
उत्तर:
‘संविधान, दर्शन’ से अभिप्राय है कि संविधान के अंतर्गत दिए गए कानूनों में यद्यपि नैतिक तत्त्वों का होना आवश्यक नहीं है किन्तु बहुत से कानून हमारे भीतर गहराई से बैठे मूल्यों से जुड़े रहते हैं। इन मूल्यों के आधार पर ही संविधान का निर्माण किया जाता है। संविधान के प्रति राजनीतिक-दर्शन का दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। हमारी राष्ट्रीय विचारधारा ही हमारे संविधान में प्रतीत होती है। समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व की भावना, राष्ट्रीय एकता और अखण्डता, समाजवाद और धर्म निरपेक्षता आदि आदर्शों का हमारे संविधान में समावेश है। यही हमारा राजनीतिक दर्शन है। हमारे सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों का प्रतीक हमारा संविधान होता है।

संविधान का राजनीतिक दर्शन पाठ के क्वेश्चन आंसर Bihar Board प्रश्न 2.
‘धर्म निरपेक्षता’ क्या अभिप्राय है? क्या भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है?
उत्तर:
भारतीय संविधान में भारत को एक ‘धर्मनिरपेक्ष राज्य’ घोषित किया गया है। राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है और न ही राज्य नागरिकों को कोई धर्म विशेष अपनाने की प्रेरणा देता है। राज्य न धर्मी है, न अधर्मी और न धर्म-विरोधी। नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता प्रदान की गई है और सब व्यक्तियों को अपनी इच्छानुसार अपने इष्ट-देव की पूजा करने का अधिकार है।

संविधान का राजनीतिक दर्शन पाठ 10 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
भारतीय संविधान की चार प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की अनेक विशेषताएँ हैं, जिनमें चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. भारतीय संविधान के अनुसार भारत एक संप्रभु समाजवादी लोकतंत्रात्मक गणराज्य है।
  2. भ तीय संविधान के द्वारा भारत को ‘धर्मनिरपेक्ष’ राज्य घोषित किया गया है।
  3. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्यों का वर्णन किया गया है।
  4. भारत के संविधान में संसदात्मक शासन प्रणाली को अपनाया गया है।

Samvidhan Ka Rajnitik Darshan Ke Question Answer Bihar Board प्रश्न 4.
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिए गए किन्हीं चार प्रमुख आदर्शों को बताइए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिए गए प्रमुख आदर्श निम्नलिखित हैं –

  1. न्याय: प्रत्येक भारतीय नागरिक को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय प्राप्त होगा।
  2. स्वतंत्रता: प्रत्येक भारतीय नागरिक को स्वतंत्रता प्राप्त होगी-सोचने की अभिव्यक्ति की, विश्वास की, उपासना की।
  3. समानता: भारत के प्रत्यके नागरिक को अवसर एवं प्रतिष्ठा को समानता प्रदान – की जायगी।
  4. बंधुत्व: समस्त भारतीय नागरिकों को उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का आश्वासन तथा राष्ट्र की एकता व अखंडता को बढ़ावा देने की भावना पैदा की जायगी।

संविधान का राजनीतिक दर्शन Class 11 Bihar Board प्रश्न 5.
भारत के संविधान की आलोचना के चार बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
भारत के संविधान की आलोचना के चार बिन्दु निम्नलिखित है –

  1. संविधान निर्मात्री सभा प्रभुत्व सम्पन्न संस्था नहीं थी।
  2. संविधान सभा के अधिकांश सदस्य समाज के उच्च वर्ग से थे।
  3. भारतीय संविधान एक विदेशी दस्तावेज है। एक उधार का थैला है। अनेक दूसरे देशों से संविधान की अनेक बातों को लिया गया है।
  4. संविधान सभा द्वारा निर्मित संविधान को लोकप्रिय अनुज्ञप्ति प्राप्त नहीं थी।

संविधान का राजनीतिक दर्शन पाठ Bihar Board प्रश्न 6.
संविधान की आवश्यकता और महत्त्व के क्या कारण हैं?
उत्तर:
ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं ने संविधान को अंगीकार करने की आवश्यकता अनुभव की। उन्होंने स्वयं को और आने वाली पीढ़ियों को संविधान से अनुशासित करने का फैसला किया। इसके निम्न कारण थे –

  1. संविधान एक ऐसा प्रारूप पैदा करता है, एक ऐसा ढाँचा खड़ा करता है जिसके अनुसार सरकार को कार्य करना होता है।
  2. यह सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग पर अंकुश लगाता है।
  3. यह सरकार के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
  4. यह नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान की अद्वितीय विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
भारत के संविधान की अद्वितीय विशेषताएँ –

  1. भारत का संविधान एकात्मक और संघात्मक दोनों का मिश्रण है।
  2. भारत के संविधान में यद्यपि शासन को अपनाया गया है, परंतु इसमें अध्यक्षात्मक शासन के भी कुछ तत्त्व पाये जाते हैं।
  3. भारत एक संघात्मक राज्य है परंतु यहाँ इकहरी नागरिकता है।
  4. भारत के संविधान में नागरिकों को मौलिक अधिकार एवं मूल स्वतंत्रताएँ प्रदान की गई हैं परंतु राष्ट्रीय हित में उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। आपातस्थिति में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा निलम्बित किया जा सकता है।
  5. भारत का संविधान भारतीय जनता द्वारा निर्मित है। एक संविधान सभा का निर्माण किया गया जो प्रान्तीय विधान सभाओं द्वारा परोक्ष रूप से निर्वाचित की गयी।
  6. देश की सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है।
  7. भारत को एक गणराज्य घोषित किया गया है।
  8. संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व दिए गए।
  9. संघीय तथा राज्य विधानमण्डलों के अधिनियमों और कार्यपालिका के क्रियाकलापों की न्यायिक समीक्षा की व्यवस्था है।

प्रश्न 2.
राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग पर विचार कीजिए।
उत्तर:
1. राज्यों द्वारा अधिक स्वायत्तता की माँग:
भारत में संघीय व्यवस्था है और संघ तथा राज्यों की शक्तियाँ व अधिकार क्षेत्र बंटे हुए हैं। 1967 तक इन सम्बन्धों के बारे में कोई विवाद खड़ा नहीं हुआ क्योंकि राज्यों की कांग्रेसी सरकारें केन्द्र की कांग्रेस सरकार के नियंत्रण में रहती थी और चुपचाप केन्द्र के आदेशों का पालन करती थी।

2. राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता की माँग का आरम्भ:
1967 के चुनाव में बहुत से राज्यों में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला और गैर-कांग्रेसी सरकारें भी अधिक दिन तक नहीं चल सकी। यह महसूस किया गया कि जब तक केन्द्र सरकार अधिक शक्तिशाली है वह किसी अन्य दल की सरकार को राज्य में सहन नहीं कर सकेगी।

इसलिए केन्द्र-राज्य सम्बन्धों पर पुनर्विचार और राज्यों की अधिक स्वायत्तता की माँग शुरू हुई। इसी संदर्भ में कुछ ऐसी माँगें उभर कर आई जो राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए खतरा बन सकती है। 1976 में तमिलनाडु में द्रमुक पार्टी सत्ता में आई तो उसने संघीय व्यवस्था के पुनरावलोकन के लिए उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश पी.वी. राजमन्नार की अध्यक्षता में एक, समिति का गठन किया। 1973 में पंजाब में अकाली दल ने इस संबंध में आनन्दपुर साहब प्रस्ताव पास किया।

1977 में भारत के साम्यवादी दल ने पश्चिम बंगाल की सरकार से केन्द्र-राज्य सम्बन्धों पर एक माँगपत्र पेश किया। 1983 में कर्नाटक सरकार ने इस विषय पर एक श्वेतपत्र जारी किया और आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और पांडिचेरी के मुख्यमंत्रियों ने बंगलौर सम्मेलन में उस पर विचार किया। इसी वर्ष श्रीनगर में 16 गैर कांग्रेसी दलों की बैठक हुई जिसमें इस विषय का 31 सूत्री प्रस्ताव पास किया गया। इन सभी बातों को देखते हुए 1985 में सरकारिया आयोग की नियुक्ति की गई। 1988 में इसकी रिपोर्ट आई। यह बात सत्य है कि केन्द्र को शक्तिशाली होना चाहिए परंतु राज्यों को स्वायत्तता मिलनी चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मूल कर्तव्यों से क्या अभिप्राय है? भारतीय नागरिकों के मूल कर्त्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1950 में लागू किए गए भारतीय संविधान में नागरिकों के केवल अधिकारों का ही उल्लेख किया गया था परंतु 42 वें संविधान संशोधन 1976 में संविधान के भाग 4 के बाद भाग 4 (क) जोड़ा गया जिसमें दस मूल कर्त्तव्यों की व्यवस्था की गई। सन् 2002 में अभिभावकों के लिए 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करने का कर्तव्य जोड़ा गया तो अब नागरिकों के निम्नलिखित 11 कर्त्तव्य हैं –

  1. संविधान का पालन तथा उसके आदर्शों, संस्थाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अर्थात् प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदशों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करे।
  2. राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों का हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे।
  3. वह भारत की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण बनाए रखे।
  4. देश की रक्षा करे और आह्वान पर राष्ट्र की सेवा करे।
  5. भारत के सभी भागों में समरसता और समान भाईचारे की भावना का विकास करे। ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों।
  6. हमारी समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझे और संरक्षण करे।
  7. प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे व हिंसा से दूर रहे।
  8. व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रगति और उपलब्धि की नवीन ऊँचाइयों को छू सके।
  9. प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव भी हैं, की रक्षा करे और उनका संवर्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
  10. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
  11. 86 वें संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 51 (क) में संशोधन करके खण्ड (न) के बाद खंण्ड (ट) जोड़ा गया जिसके अनुसार प्रारम्भिक शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने के उद्देश्य से अभिभावकों के लिए भी यह कर्तव्य निर्धारित किया गया कि 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करे।

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान में दिए गए राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों की समालोचना कीजिए। संवैधानिक दृष्टिकोण से उनका महत्त्व बताइए।
उत्तर:
भारत के संविधान में अनुच्छेद 38 से 51 तक राज्य के नीति निर्देशक तत्त्व दिए गए हैं। इनमें आर्थिक सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशक तत्त्व, सामाजिक हित सम्बन्धी निर्देशक तत्त्व, न्याय शिक्षा और प्रजातंत्र सम्बन्धी निर्देशक तत्त्व, सामाजिक स्मारकों की सुरक्षा सम्बन्धी तत्त्व तथा अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सम्बन्धी तत्त्व दिए गए हैं।

अनुच्छेद 38:
राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।

अनुच्छेद 39:
समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।

अनुच्छेद 40:
ग्राम पंचायतों का गठन।

अनुच्छेद 41:
कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।

अनुच्छेद 42:
काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपलब्ध।

अनुच्छेद 43:
कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी।

अनुच्छेद 44:
नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता।

अनुच्छेद 45:
बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध।

अनुच्छेद 46:
अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ सम्बन्धी हितों की अभिवृद्धि।

अनुच्छेद 47:
पोषाहार स्तर और जीवनस्तर को ऊँचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार का गठन।

अनुच्छेद 48:
कृषि और पशुपालन का संगठन।

अनुच्छेद 48:
(क) यवःण का संरक्षण।

अनुच्छेद 49:
राष्ट्रीय महत्त्व के स्मरकों का संरक्षण।

अनुच्छेद 50:
कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण

अनुच्छेद 51:
अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।

जिस समय संविधान का निर्माण हो रहा था तो निर्देशक तत्त्वों की बड़ी आलोचना हुई। अनेक विद्वानों ने इनकी आलोचना इस प्रकार से की –

  1. संविधान ने एक ओर तो राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों को देश के शासन में मूलभूत माना है, किन्तु साथ ही वे वैधानिक शक्ति प्राप्त या न्याय योग्य नहीं हैं अर्थात् न्यायालय इनको लागू नहीं करा सकते।
  2. निर्देशक तत्त्व काल्पनिक आदर्श हैं। इन्हें क्रियान्वित कराना बहुत दूर की बात है।
  3. एक सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य में इस प्रकार के आदेशों का कोई औचित्य नहीं।
  4. संवैधानिक विधिवेत्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि ये तत्त्व संवैधानिक द्वन्द्व और गतिरोध के कारण भी बन सकते हैं।
  5. नीति निर्देशक तत्त्व किसी निर्धारित या संगतिपूर्ण दर्शन पर आधारित नहीं हैं।

नीति निर्देशक तत्त्वों का महत्त्व-यद्यपि नीति निर्देशक तत्त्वों की आलोचना की गयी है परंतु इसका तात्पर्य यह नहीं कि ये महत्त्वहीन हैं। वास्तव में राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों का बड़ा महत्त्व है –

  1. नीति निर्देशक तत्त्वों के पीछे जनमत की शक्ति होती है। जनता के प्रति उत्तरदायी सरकार इन तत्त्वों की उपेक्षा नहीं कर सकती।
  2. यदि निर्देशक तत्त्वों को केवल नैतिक धारणाएँ ही मान लिया जाए तो इस रूप में भी इनका अपार महत्त्व है जैसे कि ब्रिटेन में मैगनाकार्टा, फ्रांस में मानवीय तथा मानसिक अधिकारों की घोषणा तथा अमरीकी संविधान की प्रस्तावना को कोई वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है, फिर भी इन देशों के इतिहास पर इनका प्रभाव पड़ा है।
  3. इसी प्रकार उचित रूप में यह आशा की जा सकती है कि ये निर्देशक तत्त्व भारतीय शासन की नीति” की निर्देशित और प्रभावित करेंगे।
  4. नीति निर्देशक तत्त्वों द्वारा जनता को शासन की सफलता और असफलता की जाँच करने का मापदण्ड भी प्रदान किया जाता है।
  5. नीति निर्देशक तत्त्व देश के सामाजिक व आर्थिक क्रांति के साधन भी हैं।
  6. एम. सी. सीतलबाड़ के शब्दों में “राज्य नीति के इन मूलभूत सिद्धांतों का वैधानिक दर्जा प्राप्त न होते हुए भी उनके द्वारा न्यायालयों के लिए उपयोगी प्रकाश स्तम्भ का कार्य किया जाता है।”
  7. निर्देशक तत्त्व इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण हैं कि इनमें गाँधीवाद के आदर्शों को स्थान दिया गया है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि वैधानिक शक्ति न होते हुए भी राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों का अपना महत्त्व और उपयोगिता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ‘मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता” घोषणा को कब स्वीकार किया गया?
(क) 10 दिसम्बर, 1950 को
(ख) 10 दिसम्बर, 1948 को
(ग) 10 दिसम्बर, 1947 को
(घ) 10 दिसम्बर, 1951
उत्तर:
(ख) 10 दिसम्बर, 1948 को

प्रश्न 2.
संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना कब हुई?
(क) 24 अक्टूबर, 1946 में
(ख) 24 अक्टूबर, 1945 में
(ग) 30 अक्टूबर, 1945 में
(घ) 30 अक्टूबर, 1948 में
उत्तर:
(ख) 24 अक्टूबर, 1945 में

प्रश्न 3.
राज्यपाल को वर्तमान में वेतन दिया जाता है –
(क) 80,000 रुपये प्रतिमाह
(ख) 90,000 रुपये प्रतिमाह
(ग) 1,100,00 रुपये प्रतिमाह
(घ) 85,000 रुपये प्रतिमाह
उत्तर:
(ग) 1,100,00 रुपये प्रतिमाह

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 10 India Through a Traveller’s Eyes

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Bihar Board Class 12 English India Through a Traveller’s Eyes Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 12 English Book Objective Type Questions and Answers

1. Pearl S. Buck visited India to see………….
(a) the Taj Mahal
(b) Fatehpur Sikri
(c) the young intellectuals and the peasants
(d) glories of empire in New Delhi.
Answer:
(c) the young intellectuals and the peasants

2. Kashmir was invaded
(a) by the Japanese invaders
(b) by the Chinese invaders
(c) by Russian invaders
(d) by white barbarian invaders
Answer:
(d) by white barbarian invaders

3. Colonisation had made the Indian
(a) enervated and exhausted
(b) energetic and happy
(c) Bold and Frank
(d) Fearless and independent
Answer:
(a) enervated and exhausted

4. The worst effect of colonisation was seen in the form of………..
(a) happiness
(b) distress
(c) unemployment
(d) freedom
Answer:
(c) unemployment

5. According to the writer, the main quality of a leader is………
(a) Selfishness
(b) Communalism
(c) dishonesty
(d) selflessness
Answer:
(d) selflessness

Bihar Board Class 12 English Book Very Short Type Questions and Answers

India Through A Traveller’s Eye Question Answer Bihar Board Questions 1.
What does the word colour remind the writer of?
Answer:
The very word colour reminds the writer of the variety of complexion in Indian life, as many as her own American human scene.

India Through A Traveller’s Eye Bihar Board Question 2.
What were the benefits of English rule?
Ans. The benefits of the English rule was an education in English and the knowledge of the west, which Indians acquired. They were well-versed talking in English fluently.

India Through A Traveller’s Eye Objective Question Answer Bihar Board Question 3.
Why were the intellectuals in India restless and embittered?
Answer:
The intellectuals in India were disappointed with the British rule because they were not happy to live a life of slavery. As such, they were restless and embittered.

Through The Eyes Of Travellers Questions Answers Bihar Board Question 4.
What was the ‘great lesson’ that India had to teach the west?
Answer:
The great lesson that India had to teach the west, was humanity. It is our culture and tradition as well.

India Through A Traveller’s Eye Meaning In Hindi Bihar Board Question. 5.
Where was the real indictment against the colonisation to be found?
Answer:
The real indictment against colonialism, however, was to be found in the villages in India. The British rule for all was the ills of India.

Bihar Board Class 12 English Book Textual Questions and Answers

B. 1.1. Read the following sentences and write ‘T’ for true and ‘F’ for false statements
(i) Pearl S. Buck had an Indian family doctor.
(ii) The Mongolian from Europe invaded Kashmir.
(iii) According to the writer, the Indians belonged to the Caucasian race.
(iv) The first woman President of the General Assembly of the United state was an Indian.
(v) The writer wanted to listen to four groups of people.
(vi) The young Indian intellectuals were disappointed with the English rule.
(vii) Indian were willing to fight in the Second World War at England’s command.
(viii) Indians believed in the mobility of means to achieve a noble end.
(ix) The worst effect of colonisation was seen in towns, in the form of unemployment.
(x) Indians under the British rule had a life span of just twenty-seven years.
Answer:
(i) T (ii) F (iii) T (iv) T (v) F (vi) T (vii) F (viii) T (ix) T (x) T.

B. 1.2. Answer the following questions briefly
India Through A Traveller’s Eye In Hindi Bihar Board Questions 1.
What does the word colour remind the writer of?
Answer:
The very word colour reminds me of the variety of complex in Indian life as many as our own American human scene.

India Through Traveller’s Eye Bihar Board Questions 2.
What were the benefits of English rule?
Answer:
They have availed the benefits the English gave and left the shortcomings of the west the pure and exquisitely enunciated English tongue of nen and women educated on both sides of the globe. English (100 Marks)

Bihar Board Rainbow English Book Class 12 Pdf Download Questions 3.
Why were the intellectuals in Indian restless and embittered?
Answer:
The intellectuals in India were disappointed with the British rule as much they were restless and embittered.

Indian Through A Traveller’s Eye Bihar Board Questions 4.
What was the great lesson that India had to teach the west?
Answer:
The great lesson, that India had to teach was humanity. It is our culture and it is our tradition as well.

Bihar Board English Book Questions 5.
Where was the real indictment against the colonisation to be found?
Answer:
The real indictment against colonialism, however, was seen in towns in the form of unemployments. The British rule for all was the ills of India.

India Through A Traveller’s Eye Summary Bihar Board Questions 6.
Why was the writer moved at the sight of the children of the Indian villages?
Answer:
The children of the Indian villages were lean, and them, weak and with huge sad dark eyes. The writer moved to see their poor condition and it tore at her heart.

B.2.1. Read the following sentences and write T for true and ‘F’ for false statements
(i) The Writer blames the English rule for all the ills of India.
(ii) Colonisation had made the Indian enervated and exhausted.
(iii) A long period of slavery made people quite dependent.
(iv) According to the writer, selflessness is the main quality of a leader.
(v) Very few people in villages had respect for age and experience.
(vi) The writer did not like the idea of eating with the right hand.
(vii) Indian is by nature religious.
(viii) The book ‘Come, My Beloved’ has an Indian background.
(ix) A Christian missionary believes that ‘God is the one’.
Answer:
(i) T (ii) T (iii) T (iv) T (v) F (vi) T (vii) T (viii) T (ix) T.

B.2.2. Answer the following questions briefly
12th English Book Answers Bihar Board Question 1.
Why was the land between Bombay and Madras famished?
Answer:
It is so because due to scarcity of water was no food and it was burning like a hot desert.

Bihar Board English Book Class 12 Pdf Download Question 2.
Why did the Indian always blame the British for their suffering?
Answer:
The Indian always blame the British for their suffering because it is an easy excuse to run away from their problems and realities.

Question 3.
Who was the real master of the house which Buck visited?
Answer:
The real master of the house which Buck visited was a younger brother.

Question 4.
Why did the writer not mind her host eating in the opposite comer of the room?
Answer:
It is so because he was able to understand that this reaction was due to their difference in culture.

Question 5.
What does she mean by saying’ Religion is ever-present in Indian life’?
Answer:
By saying so the writer means that is Indians life religion is a very important thing. All are very closely related to religion and it is present in all spheres of life.

Question 6.
What are her views on the Christian missionaries?
Answer:
The author says that for of all the people that I have known the missionary it, in his way, the most dedicated, the most single-hearted. He believes that God is the One the Father of mankind and that all men are brothers. At least the Christian says he so believes and so he preaches.

C. 1. Bihar Board Class 12 English Book Long Answer Questions

Question 1.
How does Pearl S. Buck describe Kashmir?
Answer:
In Kashmir where the white barbarian invaders from Europe long ago penetrated India, the people are often fair. Auburn-haired blue-eyed women are beauties there. A young India friend of mine has recently married a Kashmiri man who though his hair is dark, has eyes of clear green. The skin colour of the Kashmiri a lovely cream and the features are as classic as the Greek. But all the people of India must be reckoned as belonging to the Caucasian race, whatever the colour of the skin in the South, though it be as black as any African’s

Question 2.
How has India influenced the world in the post-independent era?
Answer:
The Indians make the third group between the South Africans and the black and white for that matter there was our Indian family doctor, and why should there have been an Indian doctor in a Chinese port or tend an American family and rumours of India. Persist, for they are memorable people, dramatic and passionate and finding dramatic lives. You see how India has a way of permeating human life and consider how India has managed, merely by maintaining her independence and yes by producing superior individuals to influence the world in these few short years of freedom, they have put to good use the benefits the English gave and left the knowledge of west.

Question 3.
Why had the Indian intellectuals decided not to support the British in the Second World War?
Answer:
The English, they declared had no real purpose to restore India to the people. I could believe it fresh as I was from China, where the period of people’s tutelage seemed endless and self-government further off every year. When you are ready for independence, conquerors have always said to their subjects, etcetera! But who is to decide when that moment comes, and how can people learn to govern themselves, expert, by doing it? So the intellectuals in India were Restless and embitter as, and I sat for hours watching their flashing dark eyes and hearting the endless flow of language the purest English into which they poured their feelings. The plants than was that when the second world war broke, in India world rebel immediately against England and compel her by this complication to set her free. They would not be forced, as they declared they had won the First World War, to fight at England’s command.

Question 4.
What lesson had India taught humanity by gaining independence?
Answer:
India has managed, merely by maintaining her independence and yes, by producing superior individuals, to influence the world in these few years of freedom, they have put to good use the benefits the English gave and left. The knowledge of west the pure and exquisitely enunciated English tongue of men and women educated on both sides of the globe-witness Nehru and with him a host of men learning how to govern, and the first women to be the President of the general assembly of the united nations a woman of India and the men in charge of the prisoner exchange in kore an Indian General, who won trust from all.

Question 5.
What was the psychological impact of colonisation on Indian people?
Answer:
I find that among the many impressions of India, absorbed while I live among them, and still clear in my mind, is their reverence for great men and women. Leadership in India can only be continued by those whom the followers consider being good that is capable of renunciation therefore, not self-seeking. This one quality for them contains all others A person able to renounce personal benefit for the sake of an idealistic and is by that very fact also honest, also high minded, therefore also Trustworthy. I felt that the people, even those who know themselves full of faults, searched for such persons.

Question 6.
Who, according to Buck, could be the real leaders of Indian people?
Answer:
The devotion was given by the people to Gandhi and finally even internationally is well known, but I found the same homage paid to a local person who in their measure were also leaders because of their selflessness. Thus I remember a certain Indian village where I had been invited to visit in the Home of a family of some modem education though not much, and some means, though not wealth, the house was mud-walled and the roof was made of thatch. Inside were several rooms however, the floors smooth and polished with the usual mixture of cow-dung and water.

Question 7.
What are some of the features of Indian family Life, as noticed by Buck?
Answer:
The maturing culture of organised human family life and produced philosophical religions had shaped his mind and soul, even though he could not read and write. And the children, the little children of the Indian villages, how they tore off my heart, thin, big believer, and all with huge sad dark eyes. I wondered that any Englishmen could look at them and not accuse himself. Three hundred years of English occupation and rule, and could there be children like this? Yes, and Millions of them! And the final indictment surely was that the life span in India was only twenty-seven years. Twenty-seven years! No wonder, then, that life was hastened, that a men married very young so that there could be children, as many as possible before he died.

Question 8.
Give a portrait of India seen through the writer’s eyes.
Answer:
In India through a Traveller’s Eyes, Pearl Buck gives her personal impression of India. On the basis of these impressions, a portrait of India flashes before our eyes. This portrait is of India of the nineteen-fifties. Thus it appears idyllic to us. Even for that period, the portrait is not very realistic. The writer is a fond lover of India and the Indian people. Thus she sees only bright sides of Indian life. In a sense this was inevitable. Mrs Buck saw only those things and people that her hosts showed her. The hosts naturally did not show her the seamy sides of Indian life. So this portrait of India formed through this writer’s eyes is very bright. The picture includes scenes of poverty, disease, starvation and overall economic backwardness of the country. Bui for all these ills the British rulers are blamed. The writer begins at a very bright note.

She speaks about India’s superior individuals who have influenced the course of modem history with their non-violent freedom movement as also by human-faced administration and reconstruction work after independence. She finds that Indian intellectuals have made excellent use of some of the good gifts including the English language that the British rule gave to India. The writer is charmed by quality calibre and self-confidence of the Indian intellectuals. She finds Indian Freedom Movement a rare thing in which the whole people including the intellectuals and the peasants fought hand in hand. And this Freedom Movement was far loftier than the American War of Independence. It was the triumph of a bloodless revolution. Here noble means was used to achieve noble ends. It has a great lesson for the world as it shows the futility and destructiveness of movement carried on by violence and blood-shed.

Mrs Buck gives an impressive picture of Indian village life. Here people live according to the great ideals of their tradition. Their conception of goodman is quite lofty. They think only those people good who practise self-renunciation rather than self-seeking. Such people sacrifice their personal good for the sake of noble ideals. Mahatma Gandhi is the supreme example of such great good man of Indian conception. But all through the country, such people are to be found and people flock to them and follow their wise advice in a village Mrs Buck finds a paralytic elderly man who for being such a liberated man is surrounded by people all through the day.

Despite his suffering, he lives in a cage-like enclosure where people may come unrestricted. All his life he has been a selfless Wiseman. Now he has become a saint for the people. In the same way, the writer is impressed by the cleanliness and clean habits of Indian Villagers. Even the paralytic man was spotlessly clean. In people’s home, she found homespun towels to cleanse the hands. The custom of taking food from green banana leaves through the right hand only also convinced Mrs Buck of the clean habits of the Indian people. Thus the portrait of India seen through Mrs Buck’s eyes is impressive though bit over-bright. It is not as realistic as E. M. Forester’s portrait of India But it has an idyllic charm that is very appealing.

Q. 9. What did Pearl Buck see in India? Or, What did Pearl Buck hear from the young intellectuals and the peasants in Indian villages?
Answer:
In India, Through a Traveller’s Eyes, Pearl Buck gives a moving and somewhat idyllic picture of India. In the authoress opinion, the Indian People as a whole are of the Caucasian race. True there are variations from the white-complexioned and green-eyed Kashmiris to black coloured people of the south. But qualitatively the Indian people have an innate dynamism. They are assimilative adjustable and pragmatic. The Indian ways of life and philosophy running all through the ages have made them so. They are unexpectedly found living decently and doing well in different parts of the world in different capacities. They may be alone as family doctors in the interiors of China or one-third of the whole population of a country as in South Africa. Then the Indians to Mrs Buck are “a memorable people.

Dramatic and passionate and fond of dramatic lives.” The influence of Indian ways of life is being pervasive within a few years of her independence. She has made a mark on the international scene through her superior individuals. Nehru turned out to be a great and noble leader. An Indian woman became the president of the General Assembly of the U. N. An Indian army general did exemplary impartial work in effecting an exchange of prisoners in Korea. The newly emerged independent India has been full of quiet confidence based on her unyielding idealism. Mrs Buck came to see the spirit of India as reflected in the young intellectuals of Indian cities and in the I peasants of Indian villages. She met the young intellectuals about the second world war period.

She found them seething with anger for their British rulers, who had bluffed India during the First World War and were likely to do the same after this war. So they wanted that India should be given freedom first and then she would decide in what way and from what side she would fight that war. But the savageries and aggressions of Nazism. Fascism and Japanese adventurism forced India to fight the war from the side of the Allies and not from the side of the Axis. India had enough wisdom to choose civilization rather than barbarism. And despite Churchill’s prediction of blood-baths the saner leaders of Britain gave India her freedom. There was no other option left to Britain because the Freedom Movement under the banner of Mahatma Gandhi.involved all sectors of the people indeed the whole nation and this people’s non-violent war proved more powerful than the bloody wars. mankind had seen so far.

And the message behind this Movement is of crucial significance. Mrs Buck thinks that the Americans have not fully understood this message though beside India’s “mighty triumph of a bloodless revolution our war of Independence shrinks in size and concept”. The great lesson of India’s Freedom ’ Movement has total relevance to the present world. It triumphantly states that » war and killing achieve nothing but loss and destruction. So noble non-violent means must be used to achieve noble ends. Coming to the pitiable condition of India as a result of British colonialism. Mrs Buck says that Indian intellectuals despite their immense abilities and calibres had been left, languishing. All top positions went to white Englishmen though they were second rate or even worse. So the country was in ferment because these highly educated competent and cultured people shaped the mood of the nation.

However, the worst effects of British Imperialism were most obvious in India’s miserable villages. The condition of the Indian peasants was worse than that of the Chinese peasants. This was very much like the condition of the Russian peasants before the Bolshevik Revolution. But Russian peasants were culturally much inferior to the Indian peasants. Indian peasants were very much like the Chinese in being “innately civilized” Indian culture has been maturing through the age and it has been stable because it is based on intact family life. Above all India’s pragmatic and philosophical religions have shaped the mind and soul of the Indian. So even the illiterate Indian peasant have been innately civilized. Under British rule, India was sucked white f people’s life-span was of 27 years only. Their children were deshaped diseased I and died too young.

The rickety big-bellied nad skeletonic babies with sunk dark eyes were the worst indictment of the British imperialism. The authoress is amazed that the English in some ways the finest people on Earth could be l so diabolically corrupted by colonialism. But imperialist do not work for the welfare of people. They rather sit on their back and demoralize them. People are made to tolerate the worst on one excuse or other. Coming to the shining bright culture of the Indian masses, Mrs Buck finds in them a reverence for great men and women intact. By great men and women, they mean people of sacrifice and renunciation. Gandhiji has been the most supreme example of such people dedicated to the service and welfare of people. Such people the authoress found in India’s villages. One such person was an elderly man crippled by paralysis. He lived in a cage-like compartment in the courtyard of the family.

He was always surrounded by people who came to be enlightened by his wisdom. This sacrificial mode of life was common in India even now. The old idyllic life continued in the villages. There was a caste system no doubt. There was also crankish behaviour of people in matters of religion and worship. But they were mostly harmless. The worst aspects of religion were there too including fanaticism. But by and large, the religious ways of life had not corrupted or poisoned the social life. Above all the spirit of self-sacrifice was very much present. Whereas others including the Christian made compromises with the idealism of their mission, the simple unsophisticated Indians stood firm in supporting their idealism and paid in full measure the price involved in their infiinching attachment to it. so whereas the Christian Missionaries had failed to effect brotherhood of man that Christ preached, the simple poor Indian masses by their sheer sacrifice had implemented their innate idealism in the practical life of their society to a great extent.

Question 10.
Who according to Pearl S. Buck is blame for India’s poverty and backwardness?
Answer:
Pearl S. Buck came to India in the period just before and after India’s independence. In that period India was what the British rulers had made her. She found India in a pitiable condition. The condition of the villages, in particular, was very deplorable. People suffered from poverty and starvation. The fertile land stretching from Bombay to Madras was dry and without crops due to lack of irrigation facilities. What to say of artesian wells there were not even shallow wells. The people themselves could have done something about it. But centuries of colonialism had taken all strength and vitality out of them. They were sunk in sloth and idleness.

They were full of excuses for not working and remaining helpless, spectators all the time. They blamed the Britishers for all the ills of their society. They thought that their British rulers had taken all the responsibilities to feed and clothe them. It they suffered and died of hunger and disease it was the fault of the foreign government. The people in themselves were not responsible for it. Such behaviour of the people showed that the colonialism of centuries had made them lose their heart and their spirit. So ultimately the British imperialists were responsible for this all-round degradation and backwardness of India and her people.

C. 3. Composition

Question 1.

You have a pen Friend in America who wants to know about India. Write a letter to your friend describing some of the values that govern Indian family life.

Answer:

Khazanchi Road Patna
July 5,200.

Dear Yuvraj
I hope my letter finds you in a happy and healthy mood. I know you are highly impressed by our Indian culture. We have a strong family bonding. It is our love, understanding and cooperation which strengthens our relationship

Yours, lovingly
Amithanshu

Question 2.
Write a paragraph in about 100 words in India’s contribution to world peace.
Answer:
India has taught the lesson of peace to the whole world. We are a peace-loving country and spread the same philosophy all over the world. We have always been a supporting hand to the U.N.O. in maintaining world peace. We have sent our army to restore peace and order in the different parts of the world. We have criticised the countries and their policies if it hampers the world peace. We are always ready to Help in all spheres the world for its harmony.

D. 2. Word-formation

Read the following sentence carefully:

India has always been part of the background of my life but I had never seen in whole and for myself until now.
In the sentence given above background’s of my life but I had never seen in whole and for myself until now.
In the sentence given above background’s made of back and ground, similarly, myself s made of my and self.
From compound words using the words given below:

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 10 India Through a Traveller’s Eyes 1

D. 3. Word-meaning

Ex. 1. Match the words given in Column A with their meanings given in Column B
Column A Column B
Bihar Board Class 12 English Book Solutions Chapter 10 India Through a Traveller’s Eyes
Answer:
1. (e), 2. (c), 3. (d), 4. (g), 5. (a), 6. (b), 7. (f)

D. 4. Phrases

Ex. 1. Read the lesson carefully and find out the sentences in which the following phrases have been used. Then use these phrases in sentences of your own.
further off   in spite of   live upon   search for   as long as   serve on   Putin
Answer:
further off — The doctor advised the patient to stop the medicine further off.
in spite of — In spite of heavy rain the match continued.
live upon — Deepak lives upon his own rules.
search for — They have made a deep search for the thief.
as long as — They worked as long as they could.
serve on — We should serve in our country.
put in — Manoj knows how to put in with different people.

E. Grammar

Ex. 1. Change the following sentences as directed
(i) The features of the Kashmiri are as classic as the Greek, (from positive to comparative)
(ii) My host said, “I was called to kill a dangerous snake, (from direct to indirect speech)
(iii) My life has been too crowded with travels and many people for me to put it all within the covers of one book. (Remove too)
(iv) What did I go to India to see? (from interrogative to assertive)
Answer:
(i) The features of the Kashmiri are not more classic than the Greek.
(ii) My host said that he had been called to kill a dangerous snake.
(iii) My life has been so crowded with travels and many people that it is impossible for me to put it all within the covers of one book.
(iv) I went to see India

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Chapter 10 India Through a Traveller’s Eyes English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.