Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 1 दहन और ज्वाला : चीजों का जलना

Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 1 दहन और ज्वाला : चीजों का जलना Text Book Questions and Answers.

BSEB Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 1 दहन और ज्वाला : चीजों का जलना

Bihar Board Class 8 Science दहन और ज्वाला : चीजों का जलना Text Book Questions and Answers

अभ्यास

Bihar Board Class 8 Science Chapter 1 प्रश्न 1.
आग लगने पर उसे कई बार पानी डालकर बुझाते हैं। पानी डालने से आग कैसे बुझ जाती है?
उत्तर-
आमतौर पर लगी आग को बुझाने के लिए हम पानी का प्रयोग करते हैं। जल ज्वलनशील पदार्थ को ठंडा करता है। ऐसा करने से आग का फैलाव बंद हो जाता है। इस प्रक्रिया में जो जलवाष्प बनती है। वह बाहरी वायु की आपूर्ति बंद कर देती है और आग बुझ जाती है।

दहन और ज्वाला चीजों का जलना Bihar Board प्रश्न 2.
मोमबत्ती की ज्वाला जब स्थिर हो तो काँच के प्लेट ले जाने पर काला वलय क्यों बनता है?
उत्तर-
मोम एक ईंधन है, यानि ऊर्जा का एक रूप है जो हाइड्रोजन तथा कार्बन से मिलकर बनी होती है। हाइड्रोजन सुनहली ज्वाला के साथ जलकर जलवाष्प बनाता है। यह कार्बन को भी जलाता है और दोनों ज्वाला के साथ जलते हैं । लौ के इस दूसरे हिस्से में मोम के जलने से बना कार्बन मौजूद होता है जिसके कारण काँच के प्लेट ले जाने पर काला वलय बनता है।

Bihar Board Class 8 Science Solution प्रश्न 3.
अगर किसी दुर्घटना में कोई व्यक्ति आग की चपेट में आ जाए तो उसे बचाने के लिए कम्बल में लपेट दिया जाता है। ऐसा क्यों?
उत्तर-
कोई व्यक्ति आग की चपेट में आ जाए तो उसे बचाने के लिए कम्बल में लपेट दिया जाता है क्योंकि, साधरणतया जलना एक रासायनिक प्रतिक्रिया है जिसमें तीन चीजों की आवश्यकता होती है।

  1. ज्वलनशील पदार्थ का होना ।
  2. ज्वलन ताप तक पहुँचने का उपाय ।
  3. हवा की जरूरत ।

वायु दहन के लिए आवश्यक होता है क्योंकि हवा में उपस्थित ऑक्सीजन दहनशील नहीं होते हैं परन्तु दहन के पोषक होते हैं। यानी जलने में मदद करता है। कम्बल में लपेट देने से शरीर का हवा से सम्पर्क खत्म हो जाता है। परिणामस्वरूप बिना हवा के आग बुझ जाती है।

Science बुक बिहार क्लास 8 Solution Bihar Board प्रश्न 4.
कभी-कभी जंगलों में अपने-आप आग लग जाती है। ऐसा कैसे होता होगा?
उत्तर
कभी-कभी जंगलों में अपने-आप आग लग जाती है। गर्मियों के मौसम में बहुत अधिक गर्मी पड़ने पर कुछ स्थानों में सूखी घास आग पकड़ लेती है जिससे .पूरा जंगल. ही आग की लपेट में आ जाता है जिसे दावानल कहते हैं। गर्मी या पेड़ और पेड़ के बीच घर्षण से उसका तापमान बढ़ जाता है और धीरे-धीरे वह तापमान पर पहुँच जाता है। जहाँ पदार्थ जलना शुरू कर देता है। इस प्रकार जंगलों में स्वतः आग लग जाती है।

दहन और ज्वाला कक्षा 8 Bihar Board प्रश्न 5.
गोलू ने आधा पेट्रोल तथा आधा पानी लेकर एक मिश्रण बनाया। उसने एक कपड़े को इस मिश्रपा में भिंगों दिया इसके बाद एक माचिस की तीली से इसे जलाया। आग लगी पर कपड़ा नहीं जला। ऐसा कैसे हुआ होगा?
उत्तर-
वह तापमान जिस पर पहुँचने के बाद कोई कोई पदार्थ जलना शुरू कर देता है, उस पदार्थ का ज्वलन ताप कहलाता है। पेट्रोल का ज्वलन ताप पानी के ज्वलन ताप से कम होता है जिसके कारण पेट्रोल पहले आग पकड़ लेता है और पानी से भींगी तौलिया ज्वलन ताप तक नहीं पहुँच पाते हैं जिसके कारण वह जलने से बच जाता है।

दहन और ज्वाला कक्षा 8 Notes Bihar Board प्रश्न 6.
माचिस को जलाने के लिए उसे माचिस की डिब्बी से रगड़ा जाता है। ऐसा क्यों?
उत्तर-
चूँकि लाल फॉस्फोरस अपने आप आग नहीं पकड़ता बल्कि रगड़ने पर ही जलता है। अपने घरों में जो माचिस की डिब्बी आप देखते हैं उसमें तीलियों पर लगा रसायन पोटैशियम क्लोरेट होता है। डिब्बी पर लाल फॉस्फोरस और सल्फर लगा होता है। माचिस की तीलियाँ डिब्बी पर रगडने से आसानी से जल उठती है।

Bihar Board Class 8 Science Solution In Hindi प्रश्न 7.
ज्चाला के तीनों क्षेत्र दिखाइए।
उत्तर-
मोमबत्ती की ज्वाला के तीन क्षेत्र होते हैं

  1. बाहरी भाग
  2. मध्य भाग
  3. आन्तरिक भाग।

बाहरी भाग नीला तथा अदीप्त होता है। यहाँ पूर्ण दहन होता है। क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन ज्यादा उपलब्ध होते हैं। यह सबसे गर्म होता है।

मध्य भाग पीला, चमकीला और दीप्त क्षेत्र होते हैं। इस भाग में पूर्ण दहन नहीं होता है क्योंकि ऑक्सीजन यहाँ भी कम मिल पाता है।

आन्तरिक क्षेत्र बत्ती के एकदम नजदीक होता है। यह काला रंग का होता है क्योंकि कार्बन के कुछ कण बच जाते हैं। यह सबसे कम गर्म क्षेत्र होते

Dahan Aur Jwala Class 8 Question Answer Bihar Board

Dahan Aur Jwala Class 8 Bihar Board प्रश्न 8.
घर में आग से होने वाली असावधानियों से बचने के लिए आप, क्या-क्या करते हैं ? इसकी चर्चा आप अपने दोस्तों से कीजिए।
उत्तर-
घर में आग से होनेवाली असावधानियों से बचने के लिए उपाय

  1. अति ज्वलनशील पदार्थ को सुरक्षित या आग से दूर रखना।
  2. जहाँ-तहाँ आग को ले जाने से बचना।
  3. सिगरेट, बीड़ी आदि को सुरक्षित जगह पर सेवन करने के लिए प्रेरित करना।
  4. गर्मी के दिनों में बहुत सुबह तथा रात में खाना बनाने के लिए चुल्हा जलाने के लिए प्रेरित करना।
  5. आग को तेज हवाओं से दूर रखना।
  6. विस्फोटक पदार्थ को ठीक ढंग से चलाना ।
  7. पार्टी, विवाह आदि के अवसर पर विशेष सावधानी बरतना ।

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 7 साइकिल की सवारी

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 2 Chapter 7 साइकिल की सवारी Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 7 साइकिल की सवारी

Bihar Board Class 7 Hindi साइकिल की सवारी Text Book Questions and Answers

पाठ से –

Cycle Ki Sawari Summary In Hindi Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
साइकिल चलाने के बारे में लेखक की क्या धारणा थी? – क्या यह धारणा सही थी? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
साइकिल चलाने के बारे में लेखक की धारणा थी कि हम सब कुछ कर सकते हैं, मगर साइकिल नहीं चला सकते हैं, क्योंकि ये विद्या हमारे प्रारब्ध में नहीं लिखी गई है।

यह लेखक की धारणा गलत थी क्योंकि साइकिल चलाना लेखक सीख सकते थे। हाँ, यह बात सत्य है कि उम्र पर विद्या सीखना आसान है लेकिन अधिक उम्र में कोई विद्या सीखना आसान नहीं तो मुश्किल भी नहीं। प्रयत्न और नियमित होकर अधिक उम्र में भी लेखक साइकिल सीख सकते थे। अगर दुर्घटना के बाद भी लेखक नियमित साइकिल की सवारी करते तो थोड़े ही दिनों में अच्छे चालक बन सकते थे।

साइकिल की सवारी के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 7 प्रश्न 2.
लेखक ने साइकिल सीखने के लिए कौन-कौन-सी तैयारियाँ की?
उत्तर:
लेखक ने साइकिल सीखने के लिए कपडे बनवाये । उस्ताद ठीक किए । साइकिल माँगकर लाया । जेबक के दो डब्बे खरीदकर लाये । इत्यादि ।

Saikil Ki Sawari Question Answer Bihar Board Class 7 प्रश्न 3.
लेखक के झूठ का पोल कैसे खुल गई?
उत्तर:
लेखक ने जब झूठ बोलकर दुर्घटना का दोष तिवारी जी पर मढ़ने – लगे तो पोल खुल गई क्योंकि जिस ताँगा से लेखक दुर्घटनाग्रस्त हुए थे उस ताँगा पर उनकी पत्नी ही बैठी थी।

Cycle Ki Sawari Question Answer Bihar Board Class 7 प्रश्न 4.
किसने किससे कहा –
(क) “कितने दिन में सिखा देगा।”
उत्तर:
लेखक ने तिवारी जी से कहा।

(ख) “नहीं सिखाया तो फीस लौटा देंगे।”
उत्तर:
उस्ताद ने लेखक से कहा।

(ग) “मुझे तो आशा नहीं कि आपसे यह बेल मत्थे चढ़ सके।”
उत्तर:
लेखक की पत्नी ने लेखक से कही।

(घ) “हम शहर के पास नहीं सीखेंगे। लारेंस बाग में जो मैदान है वहाँ सीखेंगे।”
उत्तर:
लेखक ने उस्ताद से कहा।

पाठ से आगे –

साइकिल की सवारी प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
बिल्ली के रास्ता काटने एवं बच्चे के छींकने पर लेखक का गुस्सा आया । क्या लेखक का गुस्सा करना उचित था। अपना विचार लिखिए।
उत्तर:
बिल्ली के रास्ता काटने एवं बच्चे के छींकने पर लेखक को गुस्सा आना उचित नहीं था। हमारे विचार से बिल्ली के रास्ता काटने या किसी के छींकने से यात्रा में विच आता है। यह धारणा गलत है। मनुष्य यदि इंढ संकल्प हो तो रास्ते के सारे विघ्न बाधाएँ स्वयं समाप्त हो जाते हैं। विघ्न तो उसे रोकता है जिसे अपनी सफलता पर संदेह हो। लेखक को तो पूर्व से ही यह धारणा थी कि-हम साइकिल नहीं चला सकते हैं।

Cycle Ki Sawari Question Answer Class 7 Bihar Board प्रश्न 2.
किसी काम को सम्पन्न करने में आपको किससे किस प्रकार की मदद की अपेक्षा रहती है?
उत्तर:
किसी काम को सम्पन्न करने में हमें अपने मित्रों से मदद की अपेक्षा रहती है। अपने भाइयों, बहनों और अन्य परिवार वालों के साथ-साथ समाज के हरेक व्यक्ति से मदद की अपेक्षा रहती है। माता-पिता बड़े-बुजुर्गों से निर्देशन की अपेक्षा । भाई-बहनों से श्रम बाँटने की अपेक्षा । मित्रों से सहयोग की अपेक्षा।

व्याकरण –

Cycle Ki Sawari Ke Question Answer Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग कीजिए –

(क) मैदान में डटे रहना।
उत्तर:
लेखक मैदान में डटे रहने का निर्णय लिया।

(ख) मैदान मार लेना।
उत्तर:
किसी भी विद्या को सीखने में नियमित ढंग से कार्य करने वाले मैदान मार लेते हैं।

(ग) हाथ-पाँव फूलना।
उत्तर:
लेखक के झूठ का पोल खुलते ही, लेखक के हाँथ-पाँव फूल गये।

(घ) दाँत पीसना
उत्तर:
लड़के के छींक सुनकर लेखक दाँत पीसकर रह गये ।

Cycle Ki Sawari By Sudarshan Question Answer Bihar Board Class 7 प्रश्न 2.
उदाहरण के अनुसार दो वाक्यों को एक वाक्य में बदलिए-

(क) श्रीमती जी ने बच्चे को सुलाया। हमारी तरफ देखा।
उत्तर:
श्रीमती जी ने बच्चे को सुलाकर हमारी तरफ देखा।

(ख) उसी समय मशीन मँगवाया। उन कपड़ों की मरम्मत शुरू कर दी।
उत्तर:
उसी समय मशीन मँगाकर उन कपड़ों की मरम्मत शुरू कर दी।

(ग) उस्ताद ने हमें तसल्ली दी। चले गये।
उत्तर:
उस्ताद ने हमें तसल्ली देकर चले गये।

(घ) साइकिल का हैण्डल पकड़ा। चलने लगे।
उत्तर:
साइकिल का हैण्डल पकड़कर चलने लगे।

कुछ करने को –

Cycle Ki Sawari Question Answer In Hindi Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
साइकिल में अनेक पार्ट-पुर्जे होते हैं । इन पार्ट-पुों के नाम की सूची बनाइए।
उत्तर:
साइकिल के पार्ट पुर्जी के नाम हैं –
हैण्डल, घंटी, ब्रेक, सीट, पैडिल, चक्का, टायर, ट्यूब, गोली, धुरी, ब्रेक सुल, साइकिल बॉडी इत्यादि ।

Cycle Ki Sawari Question Answer Class 7 Bihar Board प्रश्न 2.
“हड़बड़ में गड़बड़” पर कोई किस्सा अपनी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
“हड़बड़ में गड़बड़”।

“हड़बड़ में गड़बड़” हो जाता है। एक आदमी बड़ा ही सीधा-सादा भोला था। 50 वर्ष की उम्र में उसे साइकिल सीखने की धुन सवार हुई । भला क्यों न धुन सवार हो । उसके सभी मित्र साइकिल चलाना जानते थे। यहाँ तक उसके छोटे बच्चे जो मात्र 10 साल का था, साइकिल फरटि मार चलाता था। वह आदमी अपने मित्र से साइकिल सीखाने को कहता है। मित्र ने एक आदमी दिया जो 15 दिनों में साइकिल सीखाने की गारंटी देकर दो रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अग्रिम फीस भी ले लिया।

दूसरे दिन उस्ताद के आत ही वह आदमी झटपट पैजामा और कमीज उल्टे पहनकर चल पड़ा। रास्ता में जो भी देखे उस आदमी को देखकर मुस्कुरा देता। आदमी को लगता था कि हमारे उमर को देखकर लोग हँस रहे हैं। वह गुस्सा में आ गया । दाँत पीसकर बेचारा रह गया । कर भी क्या सकता था। एक रहे तब तो डाँट दे । यहाँ तो जो नजर आये सब उस आदमी को देखकर हँस रहा था। अंततः वह आदमी साइकिल पटक उस्ताद से कहामैं साइकिल सीखने योग्य नहीं हूँ। यह कहकर घर लौट आया। पत्नी पूछीक्यों जी, शीघ्र साइकिल सीखकर आ गये ? वह आदमी कहा क्या सिखु लोग हमको देखकर हँस रहे थे कि इतने उम्र में साइकिल सीखने चला है। पत्नी को समझते देर नहीं लगी। वह बोल पड़ी-“हड़बड़ में गड़बड़” हुआ है। लोग आपको देख नहीं हँस रहे थे बल्कि आपने जो उल्टा पैजामा-कुर्ता पहन रखा है इसलिए मुस्कुरा रहे होंगे।

साइकिल की सवारी Summary in Hindi

सारांश – प्रस्तुत लेख हास्यपूर्ण संस्मरण लेख है। इस लेख के माध्यम से लेखक ने बताया है कि समय पर किया हुआ काम या ज्ञान ही अच्छा होता है। असमय पर काम करने या ज्ञान प्राप्त करने में बाधाएँ तो आती ही हैं, कार्य में सफलता मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

लेखक साइकिल चलाना नहीं जानता है जबकि उसके पुत्र जानते हैं। छोटे-छोटे मूर्ख से मूर्ख लोगों को साइकिल चलाते देख लेखक को लगता है कि इस युग में हम ही एक ऐसे लोग हैं जिसको साइकिल चलाना नहीं आता । पुनः वह साइकिल की सवारी करना आसान मानकर साइकिल सीखने का निर्णय लेता है। तैयारी शुरू हुई फटे-पुराने कपड़े निकाले गये क्योंकि साइकिल सीखने के क्रम में एकाध बार लोग गिरते ही हैं। कपड़े फटेंगे, गंदे होंगे। पुराने कपड़े पहनकर ही काम चलाना ठीक है। पत्नी के द्वारा लेखक समझाये भी गये। लेकिन लेखक ने अपने सोच को पूरा करके दिखाने में ही अपनी सार्थकता समझी। बेचारी पति के जिद्द के सामने झुक गई और लेखक के फटे-पुराने कपड़े को ठीक कर दी।

पुनः इस विद्या को सीखाने के लिए उस्ताद खोजा गया। 20 रुपये अग्रिम लेकर उस्ताद साइकिल सिखाने को तैयार हुए। निर्णय हुआ कि लोगों की नजर से बचने के लिए शहर के बाहर लारेंस बाग के मैदान में सीखेंगे।

अब तो लेखक की नींद भी हराम हो गई यदि नींद में आवे तो स्वप्न के संसार में भ्रमण करने लगते ।

साइकिल मंगनी हुआ, चोट लगने पर लगाने के लिए जेबक भी खरीद लिए गये । इस प्रकार पूरी तैयारी के साथ जब लेखक घर से साइकिल सिखने के लिए उस्ताद के साथ निकलते हैं तो बिल्ली रास्ता काट दिया। एक लड़का छिंक भी दिया। लेखक दाँत पीस कर रह गये। गुस्सा तो आया लेकिन क्या करते । पुनः हरि का नाम लेकर आगे बढ़े तो लेखक को लगा कि सभी लोग मेरी तरफ देख-देख मुस्कुरा रहे हैं। गौर किया तो पता चला कि पाजामा और अचकन दोनों उन्होंने उल्टा पहन रखा है। इसी से लोग हंस रहे हैं। अब लेखक घर लौट जाना ही उचित समझकर उस्ताद से माफी मांगकर लौट गये। इस प्रकार पहला दिन मुफ्त में गया।

दूसरे दिन लेखक पुनः अपने उस्ताद के साथ निकल पड़े। रास्ते में उस्ताद ने कहा, जरा साइकिल पकड़े रहिए, हम थोड़ा लस्सी पी लेते हैं। जब उस्ताद लस्सी पी रहे थे तो लेखक पहले तो साइकिल को ऊपर-नीचे निहारा, पुनः थोड़ा आगे बढ़ाने का यत्न किया तो ऐसा लगा कि साइकिल लेखक के सीने पर चढ़ा जाता है अंतत: लेखक को साइकिल छोड़ना पड़ा। साइकिल लेखक के पाँव पर गिरा तथा पाँव साइकिल में फंस गया । उस्ताद दौड़े, अन्य लोगों की सहायता से लेखक उठे उनके पैर में अधिक चोट आ गई । लेखक लंगड़ाते हुए दूसरे दिन भी आधे रास्ते से लौट आये । साइकिल के कुछ पाट-पूर्जे भी टूट गये थे। पुन: साइकिल मिस्त्री के यहाँ भेजकर ठीक करवाया गया। आठ नौ दिनों में लेखक साइकिल चढ़ना सीख तो गये । लेकिन स्वयं नहीं चढ़ पाते । कोई पकड़ता तो चढ़कर चला पाते थे। इतने में ही लेखक पूरा आनंदित थे। थोड़े ही समय में साइकिल ट्रेनिंग सेंटर खोलकर तीन-चार सौ मासिक कमाने का स्वप्न देखने लगते हैं।

एक दिन उस्ताद ने लेखक को साइकिल पर चढ़ाकर कह दिया किअब तुम सीख गये। अब लेखक साइकिल चलाते हुए फूले नहीं समान रहे थे। लेकिन दशा यह थी कि सौ गज की दूरी पर ही आदमी को देख चिल्लाना शुरू कर देते, बगल-बगल । यदि कोई गाड़ी नजर आती तो दूर से ही देखकर प्राण छुटने लगते । गाड़ी निकल जाती थी तब लेखक को जान में जान आती। सहसा साइकिल पर सवार लेखक को तिवारी जी आते दिखाई पड़े। जोर से कहा, तिवारी जी ! बगल हो जाओ नहीं तो साइकिल चढ़ा दूंगा । तिवारी जी मुस्कुराते हुए कहा-जरा एक बात तो सुनते जाओ । लेखक ने एक बार हैण्डल देखा फिर तिवारी जी को फिर जवाब दिया, इस समय कोई बात सुन सकता है। देखते नहीं हो, साइकिल पर सवार हैं।

तिवारी जी लेखक से जरूरी बात सुन लेने के लिए उतरने के लिए कहते रह गये। लेकिन लेखक आगे बढ़ गये।

सामने तोता देख लेखक जोर से बाईं तरफ भाई, अभी नये चलाने वाले हैं, कहकर ताँगे वाले को तो बाएँ तरफ कर दिया। लेकिन घोड़ा एकाएक भड़क गया और लेखक की साइकिल ताँगे की बीचों-बीच घुस गयी । लेखक बेहोश हो जाते हैं। जब होश आया तो. अपने को घर में पाया। उनके शरीर पर कितनी ही पट्टियाँ बँधी थीं।

लेखक को होश में देखकर पत्नी बोली—क्यों ? अब क्या हाल है ? मैं कहती न थी, साइकिल चलाना न सीखो । उस समय किसी का सुनते ही न थे।

लेखक ने सोचकर तिवारी जी पर इलजाम लगाना चाहते हैं। पत्नी ने कहा, मुझे चकमा मत दो, उस ताँगे पर मैं ही बच्चों के साथ घूमने निकली थी कि सैर भी होगा और तुम्हें साइकिल चलाते भी देख लेंगे। लेखक उत्तर नहीं दे सके। बाद में उन्होंने कभी साइकिल को छुआ तक नहीं।

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 नाचकेता

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 2 Chapter 2 नाचकेता Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 2 नाचकेता

Bihar Board Class 7 Hindi नाचकेता Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
नचिकेता कौन था?
उत्तर:
नचिकेता महर्षि बाजश्रवा का एकलौता पुत्र था।

Bihar Board Class 7 Hindi प्रश्न 2.
नचिकेता क्यों दुःखी हुआ ? उसने अपने पिताजी से क्या कहा?
उत्तर:
नचिकेता पिताजी को लोभवश बूढ़ी गाय दान देते देखकर दुःखी हुआ। उसने पिताजी से कहा “पिताश्री आपने तो इस महायज्ञ में अपना सर्वस्व दान में देने का निश्चय किया था। लेकिन आपने अपने प्रियवस्तु को नहीं देकर बूढ़ी और दूध नहीं देने वाली गाय क्यों दान कर रहे हैं।

Bihar Board Class 7 Hindi Solution In Hindi प्रश्न 3.
नचिकेता यमपुरी किसलिए गया ?
उत्तर:
पिता की आज्ञा पालन करने हेतु नचिकेता यमपुरी गया। क्योंकि उसके पिता बाजश्रवा ने यज्ञ के दान में यमराज को नचिकेता का दान बोल दिया था।

Hindi Class 7 Bihar Board Solution प्रश्न 4.
नचिकेता को यमपुरी के मुख्य द्वार पर क्यों रूकना पड़ा?
उत्तर:
यमपुरी से यमराज बाहर गये थे। अत: उनके आने की प्रतीक्षा में नचिकेता को मुख्य द्वार पर ही रूकना पड़ा।

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions प्रश्न 5.
नचिकेता ने पहला वरदान क्या माँगा?
उत्तर:
नचिकेता ने पहला वरदान में पिता के क्रोध को शांत होने का वरदान माँगा।

Bihar Board Solution Class 7 Hindi प्रश्न 6.
नचिकेता ने दूसरा और तीसरा वर क्या माँगा ?
उत्तर:
नचिकेता ने दूसरा वरदान में अभय देने वाली विद्या माँगा तथा तीसरा वरदान में आत्मा के रहस्य बताने को कहा।

Bihar Board Class 7 Hindi Book Pdf प्रश्न 7.
किसने , किससे कहा?
(क) “मृत्यु के मुख में पहुंचकर कोई नहीं लौटा वत्स !”
उत्तर:
बाजश्रवा ने नचिकेता से कहा।

(ख) “छोटा मुँह और बड़ी बात करता है। यज़ की मुझे चिन्ता होनी चाहिए, तुझे नहीं।”
उत्तर:
बाजश्रवा ने नचिकेता से कहा।

(ग) “आप तो यमपुरी जाने की आज्ञा पहले ही दे चुके हैं। अब कुछ भी कहना मेरे लिए निरर्थक है।”
उत्तर:
नचिकेता ने पिता बाजश्रवा से कहा।

पाठ से आगे –

Bihar Board 7th Class Hindi Book प्रश्न 1.
महर्षि बाजश्रवा अगर गायों को ब्राह्मण को दान में दे देते तो क्या होता?
उत्तर:
महर्षि बाजश्रवा अगर बूढ़ी दूध नहीं देने वाली गायों का दान ब्राह्मण को दे देते तो उनका यज्ञ सफल नहीं होता।

Class 7 Hindi Bihar Board प्रश्न 2.
यज्ञ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यज्ञ का तात्पर्य होता है किसी कार्य के लिए विहित विधिवत् यज्ञ देवता का पूजन और हवन करना ।
जैसे – पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने ‘पत्रेष्टि यज्ञ’ करवाया।

किसलय हिंदी बुक बिहार क्लास 7 Bihar Board प्रश्न 3.
अगर आपको तीन वर माँगने के लिए कहा जाय तो आप क्या माँगेंगे?
उत्तर:
अगर हमें तीन वर माँगने के लिए कहा जाय तो मैं निम्नलिखित वरदान माँगूगा।
(क) सद् विद्या प्रदान करें
(स) सदैव नीरोग रहें ।
(ग) अपने कर्तव्य पथ पर बढ़ते रहें।

Class 7 Bihar Board Hindi Solution प्रश्न 4.
नचिकेता “साधु-प्रवृत्ति” का था। साधु-प्रवृत्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
“साधु-प्रवृत्ति” का अर्थ होता है-सरल-स्वभाव वाला।

व्याकरण –

Hindi Class 7 Bihar Board प्रश्न 1.
इनके पर्यायवाची शब्द बताइए-
उत्तर:
(क) पुत्र-वत्स, बेटा, तनय ।
(ख) पिता-बाप, जनक, तात्, जन्मदाता ।
(ग) यमराज–पितृपति, यमपति, दक्षिण दिगपति ।
(घ) गाय-गो, धेनु, कपिला ।
(ङ) साधु-सज्जन, सरल।।

प्रश्न 2.
इनके विपरीतार्थक शब्द बताइए
उत्तर:
(क) सत्य–असत्य ।
(ख) धर्म-अधर्म ।
(ग) सहिष्णुअसहिष्णु ।
(घ) इच्छा -अनिच्छ।।
(ङ) सम्पन्न-विपन्न ।

प्रश्न 3.
देखिये, समझिए और लिखिए
उत्तर:
पितृभक्त = पितृ + भक्त ।
सहनशक्ति = सहन + शक्ति ।
मुखमंडल = मुख + मंडल ।
गौशाला = गो + शाला ।
महायज्ञ = महा + यज्ञ ।
ब्रह्मवाक्य = ब्रह्म + वाक्य ।
कर्मनिष्ठ = कर्म + निष्ठ।
आत्मज्ञानी = आत्म. + ज्ञानी।

प्रश्न 4.
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखिए –
(क) जो पिता की भक्ति करता हो।
उत्तर:
पितृभक्त ।

(ख) जो सब कुछ जानता हो।
उत्तर:
सर्वज्ञ।

(ग) जिसने आत्मा का रहस्य जान लिया हो।
उत्तर:
आत्मज्ञानी।

(घ) जिसने दृढ़ निश्चय कर लिया हो।
उत्तर:
दृढनिश्चयी।

(ङ) जो सहनशील हो।
उत्तर:
सहिष्णु।

नाचकेता Summary in Hindi

कहानी का सारांश – हजारों वर्ष पूर्व महर्षि बाजश्रवा हुए। उनके एकमात्र पुत्र नचिकेता था। नचिकेता पितृभक्त, दृढनिश्चयी, आत्मज्ञानी, सत्यनिष्ठ धार्मिक और साधु (सज्जन) बालक था। एक बार पिता को सर्वमेघ यज्ञ की दक्षिणा में बूढ़ी गायों को दान में देते देखकर नचिकेता समझ जाता है कि-पिताश्री के मन में लालच आ गई है जबकि यज्ञ के पूर्व उन्होंने प्रिय सभी वस्तुओं को दान में देने की बात नचिकेता से बताई थी। अपने पिता को संकल्पहीन होते देख नचिकेता को अपने पिता के द्वारा किए गये सर्वमेघ यज्ञ की सफलता पर संदेह हो गया। उसने पहले अपने पिता को अपने संकल्प का ज्ञान कराते हुए कहा-पिता जी, आपने तो प्रिय वस्तु ही दान देने की बात बताई है। फिर बूढ़ी और दूध नहीं देने वाली गाएँ ही क्यों दान में दे रहे हैं। पहले बाजश्रवा मुस्कुराए लेकिन बार-बार नचिकेता के द्वारा कर्तव्यबोध की बात सुनकर गुस्सा में आ गये। पिता को क्रोधित देखकर भी नचिकेता निडरपूर्वक प्रश्न किया—पिताजी ! आपकी सबसे प्रिय वस्तु मैं हूँ, आप मुझे किसको दान में दे रहे हैं?

बाजश्रवा और भी अधिक क्रोध में आकर कह दिया, तुम्हें “यमराज को दूंगा।” नचिकेता पिता से आज्ञा माँगकर यमराज के पास जब जाने की बात कही तो अपनी भूल पर पछतावा होने लगा तथा नचिकेता को समझाने का प्रयास किया । नचिकेता जानता था कि जब तक प्रिय वस्तु के प्रति पिता की आसक्ति रहेगी तब तक सर्वमेघ यज्ञ पूरा नहीं होगा। दृढनिश्चयी नचिकेता पिता से आज्ञा माँग यमपुरी जाता है। द्वार पर उसे रोक दिया जाता है क्योंकियमराज अपने पुरी से बाहर गये हुए थे। तीन दिनों तक यमपुरी के द्वार पर नचिकेता भूखा-प्यासा बैठा रहा। यमराज आये तथा द्वार पर ऋषि पुत्र को पड़ा देख परिचय तथा आने का कारण पूछा ।

नचिकेता ने कहा कि मेरे पिताजी – ने सर्वमेप यज्ञ किया जिसके दक्षिणा में पिताजी ने मुझे आपको दान में दिया है। आपके सेवा में उन्होंने मुझे आपके पास भेजा है। नचिकेता के उत्तर सुनकर यमराज ने आश्चर्यपूर्ण शब्दों में कहा-नचिकेता यमपुरी आते तुझे डर .. नहीं लगा। नचिकेता ने सरल ढंग से उत्तर देते हुए कहा देव । भय कैसा? मेरी दृष्टि में मृत्यु ही सबसे बड़ा वरदान है, जब मनुष्य का शरीर साथ देना छोड़ देता है, तब मृत्यु ही उसे कष्टों से मुक्ति दिलाती है। इसलिए मुक्तिदात्री यमपुरी को मैं भय का कारण नहीं मानता । मैंने तो सदैव इसे वरदान रूप में स्वीकारा हूँ।

नचिकेता के उत्तर से यमराज प्रसन्न हो उसका अतिथि सत्कार किया तथा तीन वरदान मांगने को कहा।

नचिकेता ने कहा देव ! मैं तो दक्षिणास्वरूप आपके पास भेजा गया हूँ, आपसे वरदान कैसे माँग सकता हूँ।

यमराज ने कहा-बालक कोई बात नहीं, तुम्हारी पितृभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से मैं प्रसन्न हूँ, नि:संकोच होकर वरदान माँगो ।

नचिकेता ने पहला वरदान में अपने पिता का क्रोध शांत होने की माँग की।

दूसरे वरदान में, ऐसी विद्या मुझे दें जिससे भय उत्पन्न नहीं हो। तीसरे वरदान में, आत्मा के रहस्य बताने को कहा।

यमराज ने दो वरदान तो आसानी से दे दिये लेकिन तीसरा वरदान आत्मा का रहस्य बताने में आनाकानी करना चाहे । लेकिन नचिकेता को दृढ़ निश्चयी देखकर आत्मा का रहस्य भी यमराज को बताना पड़ा।

इस प्रकार तीनों वरदान पाकर नचिकेता पृथ्वी पर आकर अपने पिता का क्रोध शांत पाया तथा बाजश्रवा को सर्वमेघ यज्ञ का सुफल भी प्राप्त हुआ।

बाजश्रवा पुत्र को पाकर बहुत प्रसन्न हुए। नचिकेता आत्मज्ञानी, पितृभक्त दृढ़निश्चयी और कर्त्तव्य-परायण बालक का उदाहरण बनकर सदैव अमर रहेगा।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 5 मै नीर भरी दुःख की बदली

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 पद्य खण्ड Chapter 5 मै नीर भरी दुःख की बदली Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions पद्य Chapter 5 मै नीर भरी दुःख की बदली

Bihar Board Class 9 Hindi मै नीर भरी दुःख की बदली Text Book Questions and Answers

मैं नीर भरी दुख की बदली व्याख्या Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 1.
महादेवी अपने को ‘नीर भरी दुख की बदली’ क्यों कहती हैं?
उत्तर-
महादेवी वर्मा का जीवन सदैव वेदनामय रहा है। उनकी वेदना में ही विश्व की वेदना सन्निहित है। विश्व के जन जीवन की पीड़ा यातना, कष्ट, दुख आदि का संबंध महादेवी जी की व्यक्तिगत पीड़ा से है। कवयित्री ने अपने काव्य प्रतिभा द्वारा अपनी असहय वेदना और पीड़ा को मूर्त रूप दिया है। महादेवी जी की पीडा वेदना सार्वजनीन पीडा है वेदना है। इसी कारण वे अपने व्यक्तिगत जीवन की पीड़ा को नीर से भरी हुई बदली से तुलना करते हुए अन्तर्मन की भावना को व्यक्त किया है। ‘बदली’ यहाँ प्रतीक प्रयोग है। बदली जिस प्रकार जल कण के घनीभूत होने से अपने यथार्थ रूप को पाती है ठीक उसी प्रकार महादेवी जी का भी जीवन घनीभूत पीड़ाओं से व्यथित है। यह पीड़ा लौकिक भी है और अलौकिक भी। महादेवी रहस्यवादी कवियित्री हैं, इसी कारण उनपर भारतीय संतों एवं दार्शनिकों का भी प्रभाव है। इसी से प्रभावित होकर प्रकृति को माध्यम बनाकर महादेवी जी अपने हृदय के संवेदनशील उद्गारों को शब्द-बद्ध किया है।

उन्होंने प्रकृति के माध्यम से विभिन्न रूपों द्वारा अपने मन की घनीभूत वेदना को मूर्त रूप में चित्रण किया है। यह महादेवी जी की सांसारिक पीड़ा तो है ही, आध्यात्मिक पीड़ा भी है। महादेवी जी अंत:करण से ब्रह्म के प्रति भी समर्पित भाव से अपनी मुक्ति के लिए काव्य-सृजन द्वारा निवेदन प्रस्तुत करती हैं।

महादेवी जी ने अपनी प्रेम साधना की सफलता के लिए प्रकृति के व्यापक क्षेत्र को चुना। महादेवी जी के काव्य और जीवन में वेदनाधिक्य है। महादेवी जी अपने व्यथित हृदय की पीड़ा को सुनाने के लिए प्रकृति को ही सहृदय और उपयुक्त पात्र माना है।

मैं नीर भरी दुख की बदली कविता की व्याख्या Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 2.
निम्नांकित पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें:
(क) मैं क्षितिज-भृकुटी पर घिर धूमिल,
चिंता का. भार बनी अविरल,
रज-कण पर जल-कण हो बरसी,
नव-जीवन अंकुर बन निकली।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ महादेवी वर्मा द्वारा रचित ‘यामा’ काव्य कृति से संकलित की गई हैं। ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ काव्य पाठ का शीर्षक है। उपरोक्त पंक्तियों में महादेवी जी ने प्रकृति के माध्यम से जीवन की वेदना, पीड़ा एवं नए जीवन के अंकुरण की कामना व्यक्त की है। कवयित्री का कहना है कि क्षितिज के भृकुटी पर जो धूमिल घिरा हुआ है वह अविरल चिंता रूपी भार से व्यथित है। यानि चिंता की रेखाएँ सदैव उभरी हुई दिखाई पड़ती हैं। इस क्षितिज-भृकुटी की चिंता की समानता महादेवी जी की मन-मस्तिष्क की चिंता से की गई है। इसमें चिंता के अविरल और व्यापक रूप का वर्णन किया गया है।

महादेवी जी के हृदय रूपी क्षितिज में अनेक विषाद घिरे हुए हैं और कवयित्री के मानस पटल पर चिंता की रेखाएँ उभर आई हैं। जिस प्रकार, धूल के कण पर जल की वारिश होते ही उसमें छिपा बीज (जीवन) नव अंकुर रूप लेकर प्रगट हो जाता है। यहाँ कवयित्री के कहने का भाव यह है कि विषाद युक्त इस संसार में जब प्रकृति की कृपा होती है तब रजकण में छिपे हुए बीज भी नवजीवन को प्राप्त होते हैं। ये पंक्तियाँ रहस्यवादी भाव को अपने में समेटे हुए है। इस नश्वर संसार में सुख-दुख के बीच सारा जन-जीवन पीड़ित है। चिंताओं के मार से व्यथित है। लेकिन कवयित्री की दृष्टि में प्रकृति ही संतुलन रखने में समर्थ है। उपरोक्त पंक्तियों में अविरल चिंता खुद महादेवी जी का है। महादेवी जी कहती हैं कि मैं इस संसार में सदैव भार बनी रहीं। लेकिन प्रकृति ने ही इस वेदना को नए जीवन के नवांकुर के रूप में परिवर्तित कर सुखद क्षण प्रदान किया।

यहाँ प्रकृति के गुणों का भी चर्चा हुई है। जड़-चेतन, विश्व-वेदना, व्यक्तिगत वेदना, विश्व की चिंता ये सारी बातें महादेवी की जीवन वेदना से संपृक्त हैं। इस प्रकार महादेवी ने नवांकुर की सुखद कामना की है। विषाद युक्त वेदना से पीड़ित इस नश्वर संसार में प्रकृति का ही सहारा है। उसी का संबल है। इस प्रकार ब्रह्म और जीव के अटूट संबंधों को व्याख्यायित करते हुए महादेवी जी ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा, वेदना, चिंता को सार्वजनीन स्वरूप प्रदान करते हुए कविता को विस्तृत भाव भूमि प्रदान की है।
नव सृजन की परिकलपना भी कवयित्री के मन में है।

(ख) सुधि मेरे आगम की जग में
सुख की सिरहन हो अंत खिली!
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ काव्य पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवयित्री ने अपने विषय में कहते हुए भावोद्गार को प्रकट किया कि इस जग में मेरे आने की याद में सुख की अनुभूति हुई है। लेकिन उस सुख में भी एक सिहरन थी क्योंकि महादेवी जी कन्या रूप में अवतरित हुई थीं। इन पंक्तियों में महादेवी जी ने अपने बारे में लिखा है कि उनके जन्म लेने पर जग में सुख की चर्चा तो हुई लेकिन उसमें भीतर ही भीतर एक विषाद भाव भी छिपा हुआ था।

इन पंक्तियों के द्वारा अपने होने के प्रति यानि स्वयं के अस्तित्व पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कवयित्री ने जग के सुख-दुख की भी परिकल्पना की है। इन पंक्तियों में महादेवी जी की स्मृति तो जग खुशी-खुशी याद रखा किंतु अन्त:करण में यह सिहरन सुख का होते हुए कष्टप्रद था। रहस्यवादी भावनाओं के माध्यम से राग, सुख, सिहरन, जीवन, आगम और अंत पर महादेवी जी ने प्रकाश डाला है। इस भौतिक जगत में जीवन की गति यही है। सुख में भी दुख की छाया परिव्याप्त है। इस प्रकार आंतरिक मन में एक भय है, सिहरन है उसके अंत का कामना कवयित्री करती हैं। प्रकारान्तर से प्रकृति द्वारा जीवन और जगत के बीच हर्ष-विषाद का सूक्ष्म चित्रण करते हुए कवयित्री ने अपने व्यक्तिगत पीड़ा को भी व्यक्त किया है।

मैं नीर भरी दुःख की बदली कविता का सारांश Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 3.
‘क्रंदन में आहत विश्व हँसा’ से कवयित्री का क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में महादेवी जी ने विश्व वेदना की ओर सबका ध्यान आकृष्ट किया है। इस विश्व में सभी जन आहत हैं। वे रो रहे हैं, तड़प रहे हैं लेकिन इस तडपन या रुदन में भी हँसी छिपी हई है। कहने का अर्थ यह है कि यह विश्व जनजीवन के करुण क्रंदन से परिव्याप्त है। इससे निजात पाने के लिए प्रकृति ही संबल है। यहाँ कवयित्री ने स्वयं अपने हृदय में परिव्याप्त विकल वेदना को समग्र विश्व की वेदना का रूप देकर चित्रित किया है।

महादेवी जी का सारा जीवन वेदनाधिक्य से भरा हुआ है। जड़-चेतन की महत्ता की ओर भी कवयित्री ने हमारा ध्यान खींचा है। जिस प्रकार दीपक जलते हैं और विश्व को आलोकित करते हैं किन्त दीपक का स्वयं का जलना कितना चिंतनीय हैं इस पीड़ा को तो दीपक ही जान सकता है। इस प्रकार महादेवी जी की पीड़ा सर्वव्यापी है। विश्वजनीन है। उनकी व्यक्तिगत वेदना जन वेदना का रूप धारण करते हुए समग्र विश्व की वेदना का स्वरूप ले लेती है। क्रंदन में भी एक आनंद है, पीड़ा भी है लेकिन उस पीड़ा में जीनेवाले को जिस यथार्थ का दर्शन होता है वह दूसरा क्या जाने? इस प्रकार महादेवी की परिकल्पना विराट है। वह विराट सत्ता के साथ स्वयं को जोड़ते हुए अपनी पीड़ा को भी विराट स्वरूप प्रदान करती हैं। इस प्रकार महादेवी जी ने उक्त पंक्तियों में क्रंदन से आहत विश्व का चित्रण करते हुए उसमें छिपे हुए सूक्ष्म भाव तत्व की ओर हमारा ध्यान खींचा है।

मैं नीर भरी दुख की बदली कविता का सारांश Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 4.
कवयित्री किसे मलिन नहीं करने की बात करती है?
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ महाकवि महादेवी द्वारा रचित काव्य पाठ ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ से ली गई हैं।
इन पंक्तियों में कवयित्री ने अपने पवित्र मन के भाव को व्यक्त किया है। उन्होंने स्वयं के बारे में कहा है कि मैं जिस पथ पर चली, उसे मलिन नहीं होने दिया। यानि यहाँ कवयित्री की आंतरिक भावना से जुड़ा हुई ये पंक्तियाँ हैं। कवयित्री की यह इच्छा है, आकांक्षा है कि वह जिस राह पर चले वह स्वच्छ पर सुंदर हो। वह पथ भी चिन्ह रहित हो।

कहने का भाव यह है कि अपने को ब्रह्म से जोड़ने की लालसा ही कवयित्री की आंतरिक आकांक्षा है। वही एक पथ है जो मलिन नहीं है वह राग, द्वेष, रूप-रंग, गंधहीन है। ईश्वर की आराधना, पूजा में ही प्रकृति का जुड़ाव है। महादेवी जी प्रकृति प्रेमी कवयित्री हैं। इसी कारण उन्होंने अपनी इन पंक्तियों के माध्यम से इस भौतिक जगत को बुराइयों से स्वयं को मुक्त रखते हुए सत्कर्मों की ओर ध्यान खींचा है। इसमें महादेवी जी की निर्मल हृदय का भावोद्गार है जो अत्यंत ही सराहनीय और – वंदनीय है। कवयित्री को भौतिक आशा-आकांक्षा अपने पाश में बाँधने में असमर्थ है वह चिरंतन सत्य मार्ग का अनुसरण करना चाहती है।

इन पंक्तियों में लौकिक एवं अलौकिक दोनों जगत की चर्चा है। निर्मलता, स्वच्छता और राग-द्वेष रहित जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की गई है। इस प्रकार महादेवी जी के चिंतन का धरातल ऊँचा और पवित्र है। उसमें सांसारिकता का लेशमात्र भी जगह नहीं है। इसमें निर्मल साधना एवं कर्मनिष्ठता पर चिंतन किया गया है।

मैं नीर भरी दुःख की बदली कविता का भावार्थ Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 5.
सप्रसंग व्याख्या करें:
“विस्तृत नभ का कोई कोना
मेरा न कभी अपना होना
परिचय इतना इतिहास यही।
उमड़ी कल थी मिट आज चली।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाट्य पुस्तक महादेवी वर्मा द्वारा रचित ‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ काव्य पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग स्वयं महादेवी जी के जीवन से जुड़ा हुआ है।

उपरोक्त पंक्तियों में महादेवी जी ने अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय देते हुए लिखा है कि इस विस्तृत जग में मेरा कोई नहीं है। मेरा इतिहास यही है कि मैं कल थी और आज नहीं हूँ। इन पंक्तियों में कवयित्री ने भौतिक जगत की नश्वरता पर ध्यान आकृष्ट किया है। उनका कहना है कि इस नश्वर संसार के किसी भी कोने में मेरा अपना कोई नहीं है। मेरा अस्तित्व कल था लेकिन आज नहीं है। कहने का सूक्ष्म भाव यह है कि मानव इस धराधाम पर आकर अपनी यशस्वी कृर्तियों के बल पर ही अमर बन सकता है। इतिहास रच सकता है। इन पंक्तियों में भौतिक और आध्यात्मिक जगत का यथार्थता का चित्रण करते हुए महादेवी जी ने अपना मंतव्य प्रकट किया है। इस प्रकार कर्म की ही प्रधानता है। नाम की नहीं।

इन पंक्तियों में महादेवी जी ने जीवन के यथार्थ पर प्रकाश डाला है। इस नश्वर जगत में सुर्कीर्तियों का ही इतिहास रहा है। नाम का नहीं। यह जगत कर्म प्रधान है। नाम प्रधान नहीं। इतिहास भी उसी को याद करता है जो कर्मवीर होते हैं।

मैं नीर भरी दुःख की बदली की व्याख्या Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 6.
‘नयनों में दीपक से जलते में ‘दीपक’ का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक से महादेवी वर्मा द्वारा रचित ‘मैं नीर भरी दुख की बदली, काव्य-पाठ से ली गई हैं। इन पंक्तियों में ‘दीपक’ का प्रयोग स्वयं महादेवी जी के लिए हुआ है। जिस प्रकार दीपक सदैव जलता रहता है लेकिन दीपक के जलने की पीड़ा से वेदना से दुनिया वाकिफ नहीं होती और उसी तरह महादेवी जी की वेदना है, पीड़ा है। महादेवी जी जीवन भर दीपक की तरह जलती रही लेकिन उस भाव को दुनिया ने नहीं पकड़ा।

नयनों में दीपक से जलते यहाँ प्रतीक प्रयोग है महादेवी के नयनों में ही दीपक जल रहा है। कहने का भाव यह है कि अपने प्रियतम की प्रेम साधना में महादेवी जी की आँखों में अनवरत आशा का दीप जल रहा है। उसकी उन्हें प्रतीक्षा है उसके लिए तड़पन है, बेचैनी है पीड़ा है। इस प्रकार महादेवी जी की प्रेम-साधना को दीपक के सदृश चित्रित किया गया है। यहाँ दीपक का जलना, नयनों के दीपक से जलने के साथ तुलना की गई है। आँखों में भी मिलने की लालसा है। जलने की अनवरत क्रिया चल रही है। इस प्रकार तुलनात्मक चित्रण द्वारा कवियित्री अपने भावों को मूर्त रूप देने में सफल रही है। इसमें वेदना, आशा, मिलन की आकांक्षा का संकेत मिलता है। महादेवी जी की ये पंक्तियाँ रहस्यवादी है। इसमें प्रभु मिलन के लिए पीड़ा है, बेचैनी है। व्यग्रता है। यही कारण है कि नयनों में दीपक की भाँति ही दीपक जल रहा है। उसे प्रभु के आगमन एवं मिलन की उत्कट प्रतीक्षा है। इन पंक्तियों में सूक्ष्म भाव निहित है।

मैं नीर भरी दुःख की बदली का सारांश Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 7.
कविता के अनुसार कवियित्री अपना परिचय किस रूप में दे रही हैं?
उत्तर-
‘मैं नीर भरी दुख की बदली ‘काव्य में महादेवी जी ने अपने पूरे जीवन की वेदना, पीड़ा को अभिव्यक्ति देकर एक नयी भावभूमि की स्थापना की है। महादेवी जी का जीवन मेघ से भरी हुई बदली के समान है। जिस प्रकार जल-कण से संघन होकर बादल वेदना से जम गया है ठीक उसी प्रकार महादेवी जी का भी जीवन है। उसके सिहरन है तो कभी निष्क्रियता भी झलकता है। महादेवी ने अपने जीवन की तुलना बादल से प्रतीक रूप में की है। वह कहती है कि बादल को देखकर मन प्रसन्न हो उठता है। मिलकर रोने से मन हल्का हो जाता है। ठीक उसी प्रकार आँख में जलते दीपक के समान पलकों से आँसू भरने के बूंद के रूप में निकलता है।

मेरे पग ऐसे चल रहे हैं जैसे मन में संगीत की लहरें उठ रहीं हों और श्वास में मधुरता का अहसास हो।
आकाश की नवरंगी घटाओं में ऐसा लगता है जैसे छाया में मलय बयार की खुशबू आ रही है।

कवियित्री का मानना है कि कन्या के जन्म होते ही हमेशा से जग की मुख पर चिंता की रेखाएँ उभर आती हैं। अर्थात् कन्या का जन्म लेना ही चिंता का विषय रहता है।

धूल के कण पर जल की बारिश होते ही उसमें छिपा बीज (जीवन) नया रूप धारण कर धरा पर अवतरित हो जाता है। ठीक उसी प्रकार महादेवी जी का भी जीवन है।

कवियित्री की कल्पना या आकांक्षा यह है कि वह जिस पथ पर चल रही हैं वह सुंदर और स्वच्छ हो, मलिन नहीं हो। वह पथ चिन्ह रहित भी हो।
अंत में कवियित्री कहती है कि इस विस्तृत जग में मेरा कोई नहीं है। मेरा इतिहास यही है कि मैं कल थी और आज नहीं हूँ। इन पंक्तियों में कवियित्री ने जीवन को दार्शनिक स्वरूप देते हुए तुलनात्मक पक्षों पर चिंतन किया है। यह जगत नश्वर और विषाद से भरा हुआ है। इस संसार में अमर रहने के लिए यशकामी होना होगा। यानि सुकर्म ही इतिहास में स्थान सुरक्षित रखेगा।

यह कविता रहस्यवादी भावों से भरी हुई है जिसमें महादेवी के व्यक्तिगत वेदना, पीड़ा का चित्रण तो है ही साथ ही विश्व के विराट स्वरूप की नश्वरता, क्षणभंगुरता की ओर भी ध्यान खींचा गया है।

Mai Nir Bhari Dukh Ki Badli Summary In Hindi Bihar Board प्रश्न 8.
‘मेरा न कभी अपना होना’ से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
उपरोक्त पंक्तियों में महादेवी जी ने इस लौकिक जगत की नश्वरता के बारे में ध्यान आकष्ट करते हए अपने व्यक्तिगत जीवन पर भी प्रकाश डाला है। महादेवी जी सरल एवं निष्कपट भाव से कहती हैं कि इस विस्तत संसार में मेरा अपना कोई नहीं है। इस विराट जगत के किसी भी कोना में मेरा कुछ नही है और न मेरा अपना कोई है। कहने का सूक्ष्म भाव यह है कि यह संसार नश्वर है। माया बंधन से यक्त है। कोई भी किसी का नहीं है। सबको एक न एक दिन मर जाना है। यह जीवन नश्वर है अतः इसके लिए सबसे सरल मार्ग है-सुकर्म और सुपथगामी बनना। इसमें रहस्यवादी भाव भरा हआ है। महादेवी जी ने अपने जीवन की नश्वरता और क्षणभंगरता की ओर सबका ध्यान आकष्ट किया है। महादेवी जी ने अपने व्यक्तिगत जीवन-कर्म को विश्व के जीवन-धर्म से जोड़कर अपनी कविताओं में वर्णन किया है।

Main Neer Bhari Dukh Ki Badli Summary In Hindi Bihar Board प्रश्न 9.
कवियित्री ने अपने जीवन में आँसू को अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण साधन माना है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य पाठ में महादेवी जी ने अपनी भावनाओं को प्रबल रूप में प्रस्तुत करने के लिए आँसू को आधार बनाया है। आँसू महत्वपूर्ण साधन इसीलिए माना गया है क्योंकि आँसू जब बहता है तब यह साफ दृष्टिगत होता है कि भीतर कोई न कोई घनीभूत पीड़ा है वेदना है।

अपनी कविता में महादेवी जी ने क्रंदन में आहत विश्व हँमा, पलकों में निर्झरिणी मचली द्वारा आँस की महत्ता को प्रतिष्ठा दी है। जब व्यक्ति अत्यधिक । पीड़ित होता है। असह्य कप्ट से पीड़ित होता है तो उसकं आँखों सं बरबस आँसू बह चलते हैं आँसू व्यक्ति की आंतरिक पीड़ा को प्रकट करने में महत्वपूर्ण साधन है। इस प्रकार रज-कण पर जल-कणा हो बरसी में भी हृदय की वेदना को आँसू रूप में व्यक्त करते हुए कविता के सृजन में सफलता प्राप्त की है।

मैं नीर भरी दुख की बदली का भावार्थ Bihar Board Class 9 Hindi प्रश्न 10.
इस कविता में ‘दख’ और ‘आँसू’ कहाँ-कहाँ, किन-किन रूपों में आते हैं? उनकी सार्थकता क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत काव्य-पाठ में कवयित्री ने दु:ख और ‘आँसू’ के लिए कई काव्य पंक्तियों की रचना की हैं। उन्होंन ‘आँसू’ को कई रूपों में व्याख्यायित किया है। ‘स्पंदन में चिर निस्पंद’ में दुख की व्याख्या की है। ‘क्रदन में आहत विश्व’ पंक्ति में अपनी मनोव्यथा के साथ चिर विश्व व्यथा को वर्णन करते हुए ‘आँसू’ एवं दुख के विश्वजनीन रूप को प्रकट किया है। कवियित्री की व्यक्तिगत पीड़ा साव की पीड़ा है, वेदना है। ठीक उसी प्रकार कवियित्री के आँसू सकल जगत के आँसू हैं, उनका रूप विश्वव्यापी है।।

नयनों में दीपक से जलते पंक्तियों में जलन एवं तड़पन के साथ पिघलते आँसू के ज्वालामय रूप का चित्र खींचा गया है। इसमें हृदय की जलन भी है, तड़पन भी है। उसी जलन की पीड़ा से पीड़ित मन जब विकल-व्यथित हो जाता है तब पलकों से आँसू की नदी बहने लगते है।
इस प्रकार कवयित्री ने अपनी कविता में स्पंदन में चिर निस्पंद जीवन की वेदना, विवशता, दुख की व्याख्या की है। क्रंदन में विश्व की विराटता का दर्शन कराया है। सारा विश्व चित्कार कर रहा है। आहत है, शोक संतप्त है। विरल व्यथित है। नयनों में दीपक जलने का अर्थ घनीभूत पीड़ा हृदय में अवस्थित है जो नयनों में जलन के रूप में दीपक की तरह चित्रित किया गया है। पलकों में उमड़े आँसू के सैलाव ने नदी का रूप धारण कर लिए है।

रज-कण पर जल-कण हो बरसी यानि बारिश के रूप में आँसू को चित्रित किया गया है। इस प्रकार कवयित्री का दुख विश्वव्यापी रूप को अख्तियार कर लिया है। कवयित्री का इस नश्वर संसार में आना भी सिहरन यानि चिंता का कारण बन गया है। परिचय इतना इतिहास यही उमड़ा कल था मिट आज चली यानि अस्तित्व के मिटने का गम भी दुख का चित्रित रूप है। इस संसार में अपना कोई नहीं होना यानि अकेलापन भी दुख का ही चित्रित रूप है। इस प्रकार आँसू और दुःख को कई रूपों में चित्रित करते हुए कवयित्री ने अपने हृदयोद्गार को प्रकट किया है।

नीचे लिख्ने पद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखें।

1. मेरा पग-पग संगीत भरा,
श्वासों से स्वप्न-पराग झरा,
नभ के नव रंग बुनते दुकूल,
छाया में मलय-बयार पली! :
मैं क्षितिज-भृकुटी पर घिर धूमिल,
चिंता का भार बनी अविरल,
रज-कण पर जल-कण हो बरसी,
नव जीवन-अंकुर बन निकली!
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) ‘मेरा पग-पग संगीत भरा’ से कवयित्री का क्या अर्थ है?
(ग) ‘श्वासों से स्वप्न-पराग झरा’ का अर्थ स्पष्ट करें।
(घ) “मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल’ से कवयित्री क्या कहना चाहती है?
(ङ) ‘नवजीवन अंकुर बन निकली’का तात्पर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि-महादेवी वर्मा, कविमा-मैं नीर-भरी दुःख की बदली

(ख) इस कथन से कवयित्री के कहने का आशय यह है कि जिस प्रकार जल से भरी बदली रह-रहकर मंद स्वर में गरजकर अपने सजग संगीत का परिचय देती है उसी तरह कवयित्री के जीवन का क्षण-क्षण भी प्रियतम के रहस्मय प्रेम के संगीत से भरा हुआ है।

(ग) यहाँ महादेवी वर्मा यह कहना चाहती है कि उसकी हर साँस से सपनों का पराग झरता रहता है, अर्थात् उसकी साँसों में सुखद कल्पनाओं और प्रेम की सुगंध विद्यमान रहती है। इस सुखद कल्पना और प्रेम के कारण महादेवी वर्मा का संपूर्ण जीवन सुगंध से, अर्थात् प्रेममय मधुर अनुभूति से भरा हुआ है।

(घ) कवयित्री अपनी तुलना नीर-भरी बदली से करती है। नीर-भरी बदली का जन्म क्षितिज के तल पर धुंधली लकीर के रूप में सर्वप्रथम होता है। उसका भी जन्म इस संसार के एक कोने में एक लघु अस्तित्व के रूप में हुआ है। नीर-भरी बदली धूलकणों पर बरसकर वहाँ नवांकुरों के रूप में नवजीवन का संचार करती है। उसी तरह जब महादेवी वर्मा की वेदना आँसुओं के रूप में बरस पड़ती है तब फिर से उसके नए जीवन में नई चेतना का नव संसार बस जाता है।

(ङ) इस प्रश्न के उत्तर के लिए ऊपर लिखित प्रश्नोत्तर ‘घ’ के अंतिम खंड को पढ़ें।

2. पथ को न मलिन करता आना,
पद-चिन्ह दे जाता जाना,
सुधि मेरे आगम की जग में,
सुख की सिहरन को अंत खिली!
विस्तृत नभ को कोई कोना,
मेरा न कभी अपना होना,
परिचय इतना इतिहास यही,
उमड़ी कल थी मिट आज चली!
(क) कवि और कविता के नाम लिखें।
(ख) “पथ को न मलिन करता आना’, पद-चिन्ह दे जाता जाना’ पद्य-पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट करें।
(ग) कवयित्री ने इस पद्यांश में संसार से अपना कैसा संबंध बताया है? स्पष्ट करें।
(घ) कवयित्री के जीवन का परिचय और इतिहास क्या है?
(ङ) ‘उमड़ी कल थी मिट आज चली’ प्रध-पंक्ति में जीवन के किस
सत्य और दर्शन की व्याख्या की गई है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवयित्री-महादेवी वर्मा कविता-मैं नीर भरी दुख की बदली ।

(ख) कवयित्री अपनी तुलना नीर-भरी बदली से करती है। बदली कुछ देर के लिए आकाश में छाती है और फिर बरसकर अस्तित्वविहीन हो जाती है। वहाँ आकाश में उसके आने और फिर उसके वहाँ से चले जाने के इस आवागमन का कोई चिन्ह नहीं रह जाता है जिससे कि आकाश का पथ मलिन या गंदा हो जाए। इसी तरह महादेवी वर्मा के इस जीवन-तल पर जन्म और मृत्यु के रूप में आवागमन से उनके जीवन-पथ पर कोई अस्तित्व चिन्ह उसे गंदा करने के लिए नहीं रह जाता है

(ग) कवयित्री के अनुसार उसका इस संसार से एकदम वैसा ही अस्थायी संबंध है जिस प्रकार नीर-भरी बदली का आकाश से अस्थायी संबंध रहता है।
कवयित्री केवल अपने जीवनकाल तक ही अस्थायी रूप से इस संसार से जुड़ी हुई है। जन्म के रूप में आना और फिर मौत के रूप में चला जाना-इसी जन्म और मरण के बीच की लघु अवधि कवयित्री के संसार से अस्थायी संबंध की अस्थायी अवधि है।

(घ) कवयित्री के जीवन का परिचय और जीवन का इतिहास यही है कि उसने इस संसार में जन्म लिया और कुछ वर्षों के बाद यहाँ समय बिताकर यहाँ ये उसे चला जाना है। उसके जन्म और मरण के बीच की अवधि ही उसके जीवन का परिचय और इतिहास है।

(ङ) इस कथन के माध्यम से कवयित्री जीवन के इस शाश्वत सत्य और दर्शन का उद्घाटन करती है कि मानव का इस धरती से अस्थायी संबंधी है। यहाँ जो जन्मा है, उसे अवश्य ही मौत का वरण करना है। हमारा जीवन स्थायी और शाश्वत नहीं है जैसे नीर-भरी बदली का आकाश से स्थायी संबंध नहीं है। जो घटा घिरी उसे फिर अस्तित्वविहीन हो ही जाना है।

Bihar Board Class 7 English Book Solutions Chapter 2 Krishna and Sudama

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Bihar Board Class 7 English Krishna and Sudama Text Book Questions and Answers

A. Warmer

Work in small groups and discuss the following:

Krishna And Sudama Class 7 Question 1.
Do you have a friend ? Why do you like him/her ? Discuss in group self.
Answer:
Yes, I have a friend. His name is Prakash. I like him for his good nature. He is kind. He always co-operates with me and others. In time of needs, he stands by me. He is friendly and kind to one and all.

B. Let’s Comprehened

B. 1. Think and Tell.

Bihar Board Class 7 English Book Solution Question 1.
What did Sudama give Krishna as a gift ?
Answer:
Sudama gave parched rice to Krishna as a gift.

Bihar Board Class 7 English Solution In Hindi Question 2.
How did Krishna feel: when he took the gift from Sudama?
Answer:
Krishna felt great delight when he took the gift from Sudama.

Bihar Board Solution Class 7 English Question 3.
Why was Sudama amazed to see a palace in place of his hut?
Answer:
Sudama didn’t ask help from Krishna so he was amazed to see a palace in place of his hut.

B. 2. Think and Write.

B. 2. 1. Tick out (✓) the right answer:

Bihar Board Class 7 English Solutions Question 1.
The story of Krishna and Sudama has been taken from:
(a) The Ramayana
(b) The Mahabharata
(c) The Vedas
(d) The Quran
Answer:
(b) The Mahabharata

Bihar Board Class 7 English Solution Question 2.
Krishna and Sudama were:
(a) enemies
(b) friends
(c) relatives
(d) none of these
Answer:
(b) friends

Class 7 Bihar Board English Solution Question 3.
What did Sudama’s wife send to Krishna as a gift?
(a) fried rice
(b) parched rice
(c) beaten-rice
(d) none of these
Answer:
(b) parched rice

Bihar Board Class 7 English Book Pdf Question 4.
Sudama did not want to present the parched rice to Krishna because of:
(a) shyness
(b) hesitation
(c) both of them
(d) none of these
Answer:
(b) hesitation

B. 2. 2. Answer the following questions in two or three sentence.

Krishna And Sudama Question Answer Question 1.
Why did Sudama’s wife send him to Krishna ?
Answer:
Sudama was very poor. His wife and children had to go to bed without meals very often. Unable to bear the pitiable condition, Sudama’s wife send him to Krishna to ask help from him so that their condition may improve.

Class 7 English Bihar Board Question 2.
How did the guards at Krishna’palace treat Sudama ?
Answer:
When Sudama reached at Krishna’s palace, he asked the royal guards to let him meet his friend Krishna. The royal guards paid no attention to him. They couldn’t believe that . the person in rags would be the friend of their king.

Krishna Sudama Question Answer Question 3.
What did Krishna do when he heart Sudama’s name?
Answer:
When the royal guards said to Krishna Sudama’s name he became very pleased. He rushed to the royal gate to great his childhood friend. He requested Sudama to come in the palace.

B. 2. 3. Answer the following questions in not mure than 50 words:

Krishna Sudama Question And Answer Question 1.
Why did Sudama not tell Krishna the purpose of his visit?
Answer:
SudamaTei ashamed and hesitant to tell Krishna the purpose of his visit. The fact was that he hadn’t come to ask help from his friend at his own will. His wife had put pressure on him to do so. But his self-respect didn’t allow him to tell Krishna the purpose of his visit.

Bihar Board 7th Class English Book Solution Question 2.
In what way did Krishna help his friend ?
Answer:
Krishna understood his friend’s purpose of coming with out being told to him. When Sudama was at his palace, he ordered his officers to build a palace in place of his old hut. He also let Sudama’s family have good clothes. This way, Krishna helped his friend without being told to him.

Bihar Board Class 7 English Book Question 3.
Why did Krishna understand Sudama’s need ?
Answer:
Sudama was hesitant to tell, Krishna about his needs. But, Krsihna understood about his needs without being told to him. The gift of the parched rice send by Sudama’s wife to Krishna explained all about Sudama’s pitiable condition. And also, the ragged clothes of Sudama were sufficient to describe the poor condition of his friend. Thus, Krsihna understood Sudama’s need without being told or unspoken.

C. Word Study

C. 1. Fill in the blanks with the suitable words from the box.

(requested, cared, brought, present, no, friend, welcome)

  1. Sudama ……… a little parched rice with him.
  2. Sometimes Sudama’s family had ………. food to eat.
  3. You always tell us that Krishna is your ……….?
  4. He ran to the gate to………. Sudama.
  5. Krishna himself ………. a lot for his friend’s needs.
  6. Krishna ………. Sudama to come in.
  7. He wanted to give it as a ……… to Krishna.

Answer:

  1. brought
  2. no
  3. friend
  4. welcome
  5. cared
  6. requested
  7. present.

C. 2. Match the following words given under Column’A’with Column’B’

Question 1.
Krishna And Sudama Class 7

Answer:

Bihar Board Class 7 English Book Solution

C. 3. Look at the word ‘friendship’. Can you make more words ending with ‘ship.’ Write at least five words.
Answer:
Worship, membership, companionship, relationship, warship.

D. Grammar

use of ‘had to

Look at the sentence given below:
His wife and children had to go to bed without meals very often.

In the sentence given above ‘had to shows compulsion caused by external forces. Note that ‘had to’ is always followed by verb in the first form. Now look at another sentence :

She had to cook her own food.
In this sentence, she is left with no option but cook for herself.

D. 1. Rewrite the following sentences, substituting ‘compelled to with ‘had to’. The first is done for you.

Question 1.
I was compelled to go.
Answer:
I had to go.

Question 2.
They were compelled to study medicine.
Answer:
She had to study medicine.

Question 3.
They were compelled to beg sorry.
Answer:
They had to beg sorry.

Question 4.
I was compelled to eat.
Answer:
I had to eat.

Question 5.
He was compelled to walk on foot.
Answer:
He had to walk on foot.

E. Let’s Talk

Question 1.
Discuss the following in groups or pairs :
Answer:
Discuss yourself.

F. Composition 

F. 1. Write a paragraph on the topic you have just discussed (E) in not more than 100 words.

Question 1.
Write a paragraph on the topic you have just discussed

Answer:
A Friend in need is a Friend indeed :
We make many friends in our life. But in real sense, all of them can’t be our friends. When a problem arises in our life or to say when we are in the times of need, then we see that many of those so-called friends turn their back to us and don’t help us. The one who stands still in times of need and gives his support and help is our real friend. Only such a person can be respected as our friend our true friend. So, a friend in need is a friend indeed.

F. 2. Arrange the following sentences in a proper order to make a meaningful passage.

  1. Listening to his wife’s words Sudama left for Dwarika.
  2. Sudama was treated well at Krishna’s palace.
  3. Krishna liked the gift of Sudama.
  4. He and his wife relished the parched rice.
  5. Sudama did not speak why he had gone to his friend’s palace.
  6. Sudama was very poor.
  7. He was a Brahmin.
  8. Krishna was his friend.
  9. Krishna showed his friendship by removing his friend’s poverty in the shape of building a palace in place of his hut.
  10. Later he became the king of Dwarika.

Answer:

  1. Listening to his wife’s words Sudama left for Dwarika.
  2. Sudama was treated well at Krishna’s palace.
  3. Krishna liked the gift of Sudama.
  4. He and his wife relished the parched rice.
  5. Sudama did not speak why he had gone to his friend’s palace.
  6. Sudama was very poor.
  7. He was a Brahmin.
  8. Krishna was his friend.
  9. Krishna showed his friendship by removing his friend’s poverty in the shape of building a palace in place of his hut.
  10. Later he became the king of Dwarika.

G. Translation ( अनुवाद) 

Question 1.
Translate the following sentences into your mother tongue :

  1. The story of friendship between Krishna and Sudama is very popular.
  2. Krishna was a rich man while Sidama was a poor Brahmin.
  3. Still both were great friends.
  4. They were always seen together.
  5. After some years Krishna became the king of Dwarika.
  6. But, Sudama remained as poor as ever.
  7. His wife and children had often to go without food.

Answer:

  1. कृष्ण और सुदामा को मित्रता की कहानी अत्यंत लोकप्रिय
  2. कृष्ण एक अमीर व्यक्ति था जबकि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण था।
  3. फिर भी दोनों महान् मित्र थे।
  4. वे हमेशा साथ-साथ देखे जाते थे।
  5. कुछ वर्षों के बाद कृष्ण द्वारिका के राजा बन गये।
  6. लेकिन सुदामा हमेशा की तरह गरीब ही बना रहा।
  7. उसकी पत्नी और बच्चों को अक्सर भूखा ही रह जाना

H. Activity

Question 1.
Borrow some story books from the library of your
school. If you find a story based on friendship other than Krishna and Sudama, narrate it to your classmaies.
Answer:
Do yourself.

Krishna and Sudama Summary in English

The story of friendship between Krishna and Sudama is very popular. They were great friends. They studied together. Krishna was rich and Sudama was poor. Later, he became the king of Dwarika. Sudama remained poor and his family had to go to bed very often without meals. His wife told him to visit and ask help from his friend king Krishna.

Krishna welcomed his childhood friend very warmly. Krishna and his wife ate the parched rice pleasingly sent from Sudama’s wife as a gift to them. Hesitant Sudama didn’t ask help from his friend Krishna. He returned back to his home as poor he was. Sudama found a palace in place of his hut and his family in good clothes. He felt thankful to his friend Krishna for his kind help.

Krishna and Sudama Summary in Hindi

कृष्ण और सुदामा के बीच की दोस्ती की कहानी बहुत लोकप्रिय है। वे अत्यंत ही घनिष्ठ मित्र थे। वे साथ-साथ पढ़ते थे। कृष्ण अमीर थे जबकि सुदामा गरीब । बाद में कृष्ण द्वारिका के राजा बन गये पर सुदामा की गरीबी बरकरार रही। एक दिन अपनी पत्नी के काफी आग्रह करने पर सुदामा कृष्ण से मिलने उनके महल को चल दिये।

कृष्ण अपने बालसखा को देख अति प्रसन्न हुए। उन्होंने बड़ी गर्मजोशी से सुदामा का स्वागत किया। कृष्ण और उनकी पत्नी ने सुदामा की पत्नी द्वारा भेंटस्वरूप भेजे गये भुने हुए चावल को आनन्दपूर्वक खाया। सुदामा ने संकोचवश कृष्ण से मदद नहीं माँगी और गरीबी की ही को हालत में अपने घर लौट गये। जब उन्होंने अपनी झोंपड़ी की जगह एक महल देखा और अपनी पत्नी बच्चों को अच्छे कपड़ों में देखा तो उन्हें घोर आश्चर्य हुआ। वह अपने मित्र के प्रति कृतज्ञ हो गये। उन्हें पता था कि जब वे द्वारिका में थे तो कृष्ण ने उनकी मदद कर दी।

Hindi Translation of The Chapter

 कृष्ण और सुदामा की मित्रता की कहानी जनश्रुति में अत्यंत लोकप्रिय है। कृष्ण और सुदामा साथ-साथ पढ़ते थे कृष्ण जहाँ अमीर ये वहीं सुदामा गरीब था। फिर भी दोनों के बीच में दोस्ती का गहरा रिश्ता था। वे हमेशा साथ-साथ देखे जाते थे।

वक्त बीतता गया । कृष्ण द्वारिका का राजा बन बैठा लेकिन सुदामा गरीब ही बना रहा । सुदामा की पत्नी और बच्चों को अक्सर ही बिना खाये या आधा पेट खाकर ही सो जाना पड़ता था। उनके स्वर में दरिद्रता का साम्राज्य बना हुआ था। सुदामा की पत्नी से गरीबी सही नहीं जा रही थी। एक दिन सुदामा की पत्नी ने अपने पति से कहा-“तुम्हारे मुँह से हमेशा ही सुनती हूँ, द्वारिका का राजा कृष्ण तुम्हारा दोस्त है । क्यों नहीं तुम उसके पास चले जाते हो और अपने दोस्त से मदद करने को क्यों नहीं कहते हो?”

जैसे ही कृष्ण ने सुदामा का नाम युना, वह भागा-भागा महल के द्वार पर चला आया। उसने अपने बचपन के मित्र को गले से लगा लिया और महल के अंदर प्रेम से ले गया। शाही रक्षकों व अन्य लोगों को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो पा रहा था कि उनमा गजा एक फटे-पुराने कपड़ों वाले आदमी को गले से लगा रहा था।

कृष्ण की भेंट देने के लिए सुदामा -अपने पति को, एक पोटली में कुछ भुने हुए चावल दिये थे। लेकिन भेंट क्या एक राजा के लिए उचित होगा? यह सोचकर सुदामा वह भेंट कृष्ण को देने में सकुचा रहा था। इसलिए वह उन भुने हुए चावलों की पोटली को छुपाने लगा.। लेकिन कृष्ण ने सुदामा को वह पोटली छुपाते हुए देख लिया। उसने सुदामा से वह पोटली छीन लिया और उसे खोलकर अपनी रानी के साथ उसे बड़े आनन्दपूर्वक खाया।

महल में सुदामा को बढ़िया से स्वागत हुआ। उसके स्वागत-सत्कार में किसी प्रकार की भी कमी नहीं हुई। उसे खाने को उत्तम व स्वादिष्ट भोजन दिये गये और पहनने के लिए सुन्दर कपड़े । कृष्ण स्वर सुदामा की आवभगत ‘ में लगा रहा। सुदामा खुश हो गया। यह कृष्ण को अपनी गरीबी और घर की बुरी स्थिति के बारे में बताना चाहता था, किन्तु उसके स्वाभिमान ने उसे ऐसा नहीं करने दिया। आखिरकार सुदामा जैसी गरीबी की स्थिति में था, वैसी ही गरीबी में अपने घर को लौट चला । जब वह अपने घर के पास पहुँचा तो उसे अपनी झोपड़ी की जगह पर एक बड़ा महल खड़ा देख घोर आश्चर्य हुआ।

एक आदमी से सुदामा ने उस नये भवन के बारे में पूछताछ की। उस आदमी ने उसे बताया कि यह सुदामा का महल था तो सुनकर सुदामा को अचरज हुआ। सुदामा को अपने महल के सामने खड़ा देख उसकी पत्नी भागी हुई बाहर आयी और अपने पति को महल के अंदर ले गयी। अपनी पत्नी और बच्चों को नये और सन्दर वस्त्रों में देख सुदामा को अत्यंत हर्ष हुआ। शीघ्र ही, सुदामा ने यह समझ लिया कि जब वह द्वारिका में था,बीच कृष्ण ने उसकी यह मदद कर दी। अपने दोस्त कृष्ण के प्रति सुदामा.

Krishna and Sudama Glossary 

Palace [पैलेस] = राजमहल । Parched rice [पार्ल्ड राइस] = भुना हुआ चावल I Present [प्रजेन्ट] = उपहार | Amazed [अमेज्ड) = चकित । Hut [हट) = कुटिया, झोपड़ी । Cared [केयर्ड] = ध्यान रखते थे। Arrival [अराइवल]= आगमन । A lot [अ लॉट]= बहुत ज्यादा । In front of [इन फ्रेंन्ट ऑफ] = सामने । Realised [रिलाइज्ड] = महसूस किया। Bear [बीयर] = बर्दाश्त करना । Pitiable [पिटीअबल] = दयनीय । Moved [मूव्ड] = विवश किया। Royal guards [रॉयल गार्डस] = शाही रक्षक । As soon as [एज सून एज] = ज्योंहि Hugged [हण्ड] = गले लगाया। Ashamed of [अशेम्ड ऑफ] = शर्मिन्दा होना ।

Grabbed [ग्रैन्ड] = झपट लिया। Untied [अनटाइड] = खोला। Prevented [प्रिवेन्टेड] = रोका। Astonished[एशटॉनिश्ड] = चकित | While[वाइल] = जबकि । Friendship[फ्रेण्डशिप] = मित्रता | Very [वेरी] = बहुत | Popular [पॉप्यूलर] = लोकप्रिय । Studied [स्टडीड] = पढ़ते थे। Together [टुगेदर] = साथ-साथ । Still [स्टील] = फिर भी। Great [ग्रेट] = महान् | Always [ऑलवेज] = हमेशा | Seen [सीन] = देखा जाना । Passed [पास्ड्) = गुजरता गया। Became (बीकेम] = बन गया। Remained [रिमेन्ड] = बना रहा । Meals [मील्स] = भोजन | Very often [वेरी ऑफन] = अक्सर । Unable[अनअबल] = असमर्थ । Condition [कन्डीशन] = अवस्था । Meet [मीट]= मिलना  Help [हेल्प] = सहायता करना । Repeated [रीपीटेड] = दुहराई | Request [रिक्वेस्ट] = निवेदन, प्रार्थना । To be moved [टू बी मूव्ड] = दया से प्रेरित होना । Eventually [इवेन्चुअली] = अन्ततः, अन्त में

Decided [डिसाइडेड] = निश्चय किया । Visit [विजिट] = भेंट करना | Reached[रीच्ड] = पहुंचा। Told [टोल्ड] = कहा। Royal रॉयल] = राजसी, राजकीय। Wanted [वान्टेड] = चाहता था। Attention [अटैन्शन] = ध्यान । Rags [रैग्स] = चिथड़े, फटे-पुराने कपड़े। Allow [अलाऊ] = आज्ञा देना। At last [एट लास्ट] = अन्त में | Inform [इनफॉर्म] = सूचना देना । Rush [रश] = दौड़ना, भागना । Childhood [चाइल्डहुड] = बचपन | Hesitant [हेजिटेन्ट] = संकोची।

Wondered [वन्डर्ड) = आश्चर्य किया। Ate [एट] = खाया। Delight [डिलाइट] = प्रसन्नता, आनन्द । Warm [वाम] = गर्मजोशी-1 Self-respect [सेल्फ-रेस्पेक्ट] = स्वाभिमान | Finally [फाइनलि] = आखिरकार | All this [ऑल दिस] = यह सब । Thankful[बैंकफुल] 3 उपकारी, कृतज्ञ | Unspoken [अनस्पोकर = अकथित, जो न कहा गया हो। About [अबाउट] = के बारे में।

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B.1.1. Write ‘T’ or ‘F’. “T” for True and “F” for False 

1. People easily get convinced by Jim.
2. He uses a paper route to convince people.
3. He gives suggestions on ecology free of cost.
4. Mr. William was at his house.
5. People listened to Jim gladly, for he was an eco-friendly boy.
Answers:
1. F
2. T
3. T
4. T
5. T

B.2. Answer the following questions Very briefly 

Me And The Ecology Bit Question Answer Bihar Board Question 1.
What happens when the narrator calls Mr. Greene, “Mrs. Greene”?
Answer:
When the narrator calls her Mrs. Greene then she pretends that she . had no change to pay him.

Me And The Ecology Bit In Hindi Bihar Board Question 2.
What does the narrator do on Saturdays and Sundays?
Answer:
The narrator collects garbage and other dirty materials causing pollution from several houses on Saturdays and Sundays to save ecology.

Panorama Class 10 Solutions Bihar Board Question 3.
Which animal messes up with Ms. Greene’s yard?
Answer:
The dog digs up Ms. Greene’s garden and messes up her yard.

Me And The Ecology Bit Meaning In Hindi Bihar Board Question 4.
Why does the narrator ask Ms. Greene to save paper and aluminum cans?
Answer:
The narrator asks Ms. Greene to save paper and aluminum, can, So that they may be remade for their use in the future.

Me And The Ecology Bit Summary In Hindi Bihar Board Question 5.
Did the narrator succeed in getting Ms. Greene to do something about ecology?
Answer:
The narrator tried hard in getting Ms. Greene to do something about ecology and got tired. But he could not succeed in his efforts.

Panorama English Book Class 10 Solutions In Hindi Bihar Board Question 6.
What is a compost pit?
Answer:
The compost pit is the storage of leaves, garbage, and stuff together collected in a pit to prepare manure.

Panorama Part 2 Class 10 Solutions Bihar Board Question 7.
What does Mr. William mean by noise pollution?
Answer:
By nose pollution, Mr. William means to say that bad smelling of the compost or garbage creates it (nose pollution).

Class 10 English Book Bihar Board Question 8.
Why is burning of leaves bad to air?
Answer:
Burning of leaves is bad to air because it pollutes the air generating smoke.

B.3.1. Complete the following sentences on the basis of the unit you have just studied :

1. It very………………… works this ecology bit.
2. Women use too many…………………….things.
3. No body’s willing to do anything about …………………….
4. The narrator drives his………………………… round and round his
backyard all summer………………………………. and all winter.
Answer:
1. boring, 2. electric, 3. ecology, 4. motorbike, his snowmobile.

B. 3.2. Answer the following questions very briefly :

Bihar Board Class 10th English Solution Question 1.
How many blocks away was the post-office from Mr. Johnson’s house?
Ans. The post office was only two blocks away from Mr. Johnson’s house.

Bihar Board Class 10 English Book Solution Question 2.
What form of electricity did the narrator use?
Answer:
The narrator used T. V. in the form of electricity.

Ecology Bit Meaning In Hindi Bihar Board Question 3.
Why did Mr. Johnson think that the narrator did not follow the principles of walking?
Answer:
Mr. Johnson thought that the narrator did not follow the principle of walking because he (narrator) had jumped over grass and a little tree, resulting in its destruction.

Bihar Board 10th English Book Question 4.
Did the narrator enjoy talking about ecology?
Answer:
The narrator enjoyed talking about ecology, but nobody was ready to follow it.

C. 1. Long Answer Questions :

Class 10 English Chapter 2 Bihar Board Question 1.
“Nobody’s willing to do anything about ecology”. Do you agree with the statement
Answer:
Preaching about ecology is easy, but difficult to practice. Everybody is in favor of it but nobody is prepared to do anything about it This is a fact that people do not co-operate and show unwillingness in this direction. Many persons, like Jim, undertake the work of ecology but nobody comes forward to join hands in such a mission. One can start this job from his own house. He must keep his surroundings clean and free from pollution. But nobody does it. In my locality, there is a heap of garbage and filth scattered throughout the road. Street dogs are found loitering and playing with the wastes spreading it in the street. Polythene bags and packets are found everywhere. Nobody cares about that. There is a proverb, “Example is better than precept”. People talk a lot against it but do nothing to remove this evil. Thus, I agree that nobody is willing to do anything about ecology.

Class 10 English Chapter 2 Question Answers Bihar Board Question 2.
“But anyhow, on Saturday when I collect, I put in good work on ecology.” This is the narrator’s way of preserving ecology. How are you contributing to ecological preservation in your surroundings?
Answer:
In my locality, people are not conscious of preserving ecology. There is a bulk of garbage and waste scattered throughout the surrounding. Polythene bags and plastic packets are found floating on the road. I do not like such things because they generate pollution. I want to work for the preservation of ecology because I know its importance.
1 used to work hard for making the environment free from pollution. As such I have taken up the following steps

  • I go to the people of my locality to make them conscious to save ecology.
  • I also tell them not to pollute water and the environment by their dirty habits.
  • every Sunday 1 undertake the work of cleaning my surroundings.
  • To achieve my objective I make the drains clean and clear the water logging throughout my locality.
  • I ani working towards growing plants on both sides of the road.

Several other measures are also taken for the welfare of the people and the preservation of ecology.

Panorama English Book Answers Pdf Bihar Board Question 3.
“I get tired of trying to get Ms. Greene to do something about ecology”. Explain in detail the meeting between Jim and Ms. Greene and throw light on the outcome of the meeting.
Answer:
Jim, a young boy has undertaken the work of going around and telling people to save ecology. He visits the house of Ms. Greene in connection with the fulfillment of his mission. Seeing him she immediately questions, “Why does he throw- gum wrappers on her Lawn”. She further directs him to pick up those wrappers and put it in one of the plastic bags kept on the lawn for the very purpose. She accuses him also to get his dog untied, causing damage to her garden. Meanwhile, he sees that she is piling newspapers beside her garbage bags. He advises her to save those papers and also aluminum cans, so that new paper and aluminum. could be made. She does not seem to be satisfied with his suggestion. Jim gets tired of trying to get Ms. Greene to do something about ecology. So he immediately left her house. It shows the reluctancy of Ms. Greene in abiding by the rules of ecology preservation. Their conversations come to an end with no result. The outcome of the meeting is the example of how people do not attach importance to ecology preservation, as Ms. Greene does.

Panorama English Book Class 10 Pdf Bihar Board Question 4.
“Sure it is hard to get people to work for ecology”. Do you agree with this statement? What is ecology? What measures have you and your school taken to preserve it?
Answer:
Really, to get people ready to work for ecology is hard. Preaching about ecology is easy but difficult to abide by the rules of ecology preservation. Ecology means keeping the environment pollution-free. It is possible only. When the surrounding is free from darkness and pollution of land, water, and air. Ecology is a branch of biology that deals with the habits of living-being and relationship between the environment and the living things, I have taken up the work to save ecology in my neighborhood on Sundays or whenever I get time. I go to the people o make them conscious of preserving geology. The Headmaster of my school takes a keen interest in the preservation of ecology. There is an arrangement of environmental studies in school. The surroundings of the school are kept clean. The classrooms, the toilets, the garden and other places of the school building are kept free from dirt. The school peons and the gardener take much care towards cleanliness and do not allow garbages and -wastes in the school premises and its surroundings.

Bihar Board Solution Class 10 English  Question 5.
“Women use too many electric things”. What prompts the narrator to say so? How does the use of modern appliances affect ecology?
Answer:
Women have to discharge their responsibilities for their household affairs. Their role is just like the captain and the players of a team. They have varieties of work to perform. In course of discharging their duties, they have to take the help of several electrical tools and appliances, such as the electric mixer, the grinder, the washing machine, electric iron, the toaster, tailoring (sewing) machine, fruit juicer, electric heater, electric oven, refrigerator, etc. As the narrator observes his mother using the electric mixer, It prompts him to say so. Modem appliances affect ecology in many ways. Their function generates air, water, and soil pollution. The polluted water and the wastes come out from the washeries of factories and mills roll down to the river, forming water and soil pollution. The smoke and dust coming from the chimneys and other sources of the heavy plant, small factories and even from the residential houses pollute the environment.

Bihar Board Class 10 English Book Solution Pdf Download Question 6.
Do you think that Jim is a real ecology friendly boy ? Give your opinion.
Answer:
Jim is a real ecology friendly boy, but often he deviates from personally acting upon it. As an example, he advises Johnson not to go to the post office in his car, but as per Johnson’s remark, he drives his motorbike around and rounds his backyard in summer and snowmobile in winter. Again when he advises his mother to save electricity, his mother remarks, “so who watches T.V. twenty-seven hours a day?” These ironic remarks show his deviation. His young age is also a reason for his deviation. Still, it is a fact that he has undertaken the work of going around and telling people to preserve the environment and to save ecology. In spite of the fact that he can spare little time out of his homework even then, he has fixed Saturday and sometime Sunday even for visiting people to fulfill his mission. In my opinion, he is an ecology friendly boy in real sense. His ecology friendly behavior is admirable. Though he does not get co-operation and assistance from the people in his work he continues to go ahead to achieve his objective.

Question 7.
Does Jim understand why his advice is being questioned? Explain.
Answer:
Jim is well aware of the fact that his advice is being questioned, never he goes to meet people and narrates them the importance of serving ecology they do not respond properly. The reason behind their such an attitude is their negligence towards saving ecology. They do not like to work in this direction, because they do not attach any importance for preserving the environment. When he suggests something relating to it, they themselves immediately put some questions to him. It is but the human nature-that when they do not agree with other’s advice, they will find out some mistakes in it. So, they make prevention and create confusion. Therefore Jim very well understands why his advice is being questioned.

Question 8.
What happened to the tree referred to by Mr. Johnson?
Answer:
Mr. Johnson referred to the destruction of a tree by Jim. He accuses Jim of this. According to him jumping over the tree every day, making a short cut path through Ms. Greene’s house had resulted in its ruin. The tree does not exist now owing to its premature death.

Question 9.
Is Jim aware of all of the aspects, and does he always practice ecology measures ? Give arguments in favor of your answer.
Answer:
Jim is a real ecology friendly boy. He is quite aware of all the aspects of saving ecology. He has undertaken the work of preserving the environment. His ecology friendly attitude is admirable. He always practices all possible ecology measures. He talks about the importance of preserving the environment with the people, He does not get proper co-operation and assistance from the people in his work. But he is not disheartened and continues to go ahead on his mission. He also collects the dirty garbage and other wastes from certain places and carries them to the places specially made for the purpose. Though he finds it difficult to get people to work for ecology, it does not stop his work and fulfill his objective. Thus, really he is aware of all aspects and always practice ecology measures.

Question 10.
A hero or heroine does not always arrive on a galloping horse to save the day. Sometimes the hero or heroine merely demonstrates the potential for action, rather than a completed task. What potential does Jim have as the hero in this story?
Answer:
Jim as a hero of this story is mare a messenger. I think he is just like a hero of tragedy in conflict. His message is agreed by all but there is a conflict of feelings models of thoughts, desires, will, and purposes. There is a conflict of persons with one another or with circumstances or with themselves. Again, it may be taken for granted that a tragedy is a story of unhappiness or sufferings and excites such feelings as pity and fear. Thus the hero Jim does the work in these circumstances.

C.2. Group Discussion

Discuss the following in groups or pairs.
1. Environmental degradation leads to ecological imbalance.
Answer:
The problem of environmental pollution is related to an increase in industrial activity which is regarded as an inevitable and sure sign of economic progress. Along with such industrial advancement comes the pollution of water and air. There is a realisation on his part that what he considers progress is serious’ disturbing the ecological balance and leading to the breakdown of the ‘ supporting system on the earth.

2. Modern appliances adversely affect the environment.
Answer:
Modem appliances are used in abundance in every house of a town. People use house appliances such as electric mixer, washing machine, refrigerator, air cooler, heater, T. V. and computer. All these devices emit or charge water and air. They pollute air and Waterloo. Thus they have an adverse effect on the environment. So it is clear that pollution and environmental degradation are dangerous for human health.

C. 3. Composition

1. Prepare a speech in about 100 words to be delivered in the morning assembly of the school on ‘how students can become ecology friendly’.
Answer:

16th April 2011 9 a.m.
Morning assembly
Our revered principal and teachers and my colleagues.

I have the pleasure to inform you in this morning assembly that I have thought, we can become ecology friendly in our schoolhouse or a house away from our own house. The school must have a pleasant atmosphere. Gardens, trees, and flowers help the students to relax. In fact, some lessons on ecology’ Should be given in the open air. So that students must become ecology friends. I request our principal and teachers to turn us to become ecology friend

Sujit
Class-X

2. Write a letter to your friend, telling him the measures your school has taken to preserve ecology in the locality.

Station Road, Patna
10th April 2011

Dear Amresh

Hope this letter of mine finds you in the best of mood and spirit. Through this letter, I am going to inform you that our school has taken a task to go to the nearby locality to preach the people about ecology. By turn, students of; different classes take part and go door to door to work for ecology. We are doing something going around telling people what they should do. We tell them that support for ecology has also come from several religious leaders. We tell them that the economy and ecology stem from the same meaning house. The economy is the management of the house, ecology is the study of the house. The house is the earth. Many civilized men and women learn to understand their house. We are trying our best. Success must come at last.

Your loving friend
Shashi

D. Word Study 

D.1. Dictionary use
Ex. 1. Correct the spelling of the following words.
ekology, composte, garbedge, stufe, polusion, Imings.
Answer:
Ecology, compost, garbage, stuff, pollution, innings.

Ex. 2. Match the words in Column A with their meanings in Column B.
A                                            B
compost                           the science that deals with the relation between the living things and environment,
garbage                           an act of polluting
pollution                          to feign
pretend                            filth
ecology                            manure
Answer:
Compost………..manure.
garbage…………filth ‘
pollution………..an act of polluting
pretend………….to feign
ecology…………..the science that deals with the relation between living things and the environment.

Comprehensive Based Questions with Answers

Read the following extracts carefully and answer the questions that follow each

1. Sure it is hard to get people to work for ecology. Everybody is in favor of it but nobody wants to do anything about it. At least I’m doing something, going around telling people what they should do. But all I get is a lot of backtalk.
2. I have this paper route. My father had one when he was a kid, so he made me get one last year. Between it and my homework, I hardly have time for playing ball and stuff, some days I get. in Only a few innings.
3. But anyhow, on Saturdays when I collect, I put in good work for ecology. Like last Saturday morning. It was a good collecting day. It had just turned spring and a lot of people were outside.
4. I went to Mr. Williams’s house. As usual, he tried to pretend he’s not home. But I see him burning leaves in the backyard, so he’s stuck. He pays me, and I tell him. “You shouldn’t bum those leaves. It’s bad for air, bad ecology. You should make a compost pile as we do. Put in the leaves, garbage, and stuff. Good for the garden.”
5. He doesn’t agree or hang his head in shame. He say’s” That compost pile is your job at home, Jim, isn’t it”
6. “Yes,” I say proudly, which would shock the idea I hate working with compost. Which I do.
Questions:
(i) What is hard for the author?
(ii) Why has the author not time for playing when he was a kid?
(iii) What was Mr. William doing when the author went there?
(iv) What did the author advise Mr. William to do?
(v) Who is the writer of this extract?
(vi) What, according to the narrator, is hard?
(vii) What does he do on Saturdays?
(Viii) What does he do on Saturdays?
(ix) Which word in the passage means ‘the science that deals with the relationship between living things and the ‘environment’?
Answers:
(i) It is hard work to get people to work for ecology.
(ii) He had to do heavy homework. So he hardly had time for play¬ing ball.
(iii) The author saw him burning leaves in the backyard.
(iv) The author advised him to pile the leaves to get compost.
(v) Joan Lexau is the writer of this extract.
(vi) According to the narrator, it is hard to get people to work for ecology.
(vii) The narrator works for ecology by telling people what they should do.
(viii) On Saturdays, he collects garbage from the nearby houses.
(ix) The word ‘ecology’ means ‘the science that deals with the relationship between living things and the environment.

7. Mr. Williams says “Well don’t you take a little more trouble with it, but enough dirt on top of each layer? Then we wouldn’t have this noise pollution.”
8. “Huh?” I say “You mean noise pollution.” No,” he says. “I mean you. compost smells up the whole street.”
9. My feelings are hurt, but that doesn’t stop me from trying again. I go to collect it from Ms. Greene. I have to call her Ms. Greene because if I call her ‘Mrs’, she says she doesn’t have a chance to pay me.
10. She is putting her garbage out for the weekly pick up on Monday. She goes away on weekends; so on Saturdays and Sundays, we have to look at the big plastic garbage bags on her lawn. But I don’t say anything about it. I just look at the garbage.
11. She says to me, “Go pick up that gum wrapper you threw on my lawn. Put it in one of the plastic bags. Didn’t anybody teach you not to litter?
12.1 hold my temper and pick up my gum wrapper and put it in a bag. Then she says, And there’s a law in this town about keeping dogs on a leash. So why is yours always all over the place? That dog digs up my garden and messes up my yard, and last weekend Mr. Williams saw it tear open one of my garbage bags.
13. “Well,” I say, but I can’t think of anything to go with it. Then I see she is piling newspapers next to her garbage bags.
Questions:
(i) What is putting her?
(ii) What does she say to the author?
(Hi) What did the author do?
(iv) What does the dog do?
(v) Name the lesson from which this extract has been taken.
(vi) Who is the lady referred to here?
(vii) What is she doing?
(viii) What does she ask the narrator to do?
(ix) Which word in the passage means ‘fifth’?
Answers:
(i) She is putting the garbage out for the weekly pick up on Monday.
(ii) She told the author to go pick up that gum wrapper he had thrown in her lawn and put it one of the plastic bags. She further asked if anybody did not teach him not to litter them.
(iii) The author picked up his gum wrapper and put it in a bag.
(iv) The dog digs up and messes up her garden.
(v) This extract has been taken from the lesson and the Ecology Bit’.
(vi) The lady referred to here is Ms. Greene.
(vii) She is putting her garbage out for the weekly pick-up on Monday
(viii) She asks the narrator to pick up the gum wrapper he had thrown on her lawn and put it in one of the plastic bags.
(ix) The word ‘garbage’ means, Tilth

14. “Listen, Ms. Greene,” I say, “save those papers for the school pickup, and they can be made into new paper. Save aluminum cans, too.”
15. “Like the last school pick up?” she asks “When you said you’d come and pick them up, but you never showed up? It’s easier to throw them away a few at a time than have a big mess like that.”
16.1 get tired of trying to get Ms. Greene to do something about ecol¬ogy. I go to Mr Johnson’s house. He makes a run for his car, but I can run faster than he can.
17. “Just trying to get to the post office before it closes,” he says, huffing and puffing.
18. “You got time,” I say. “You even got time to walk. It’s only two blocks. You shouldn’t take your car when you don’t need to. The walk would be good exercise and save on gas. And not pollute. That’s ecology.”
19. “They sure are,” I say. “We had a lot about trees and ecology in school. They make the air better and stuff like that.”
20. “See that tree over there?” he says, pointing to where there isn’t any tree.
21. “1 don’t see any tree,” I tell him.
Questions:
(i) What did the author say to Mrs. Greene?
(ii) Why did the author get tired?
(iii) Was any tree there?
(iv) Pick out the word from the passage which means: ‘the material’.
(v) Dis the narrator succeeds in gel ting Ms. Greene do something about ecology? ‘
(vi) Where did he go after his visit to Ms. Greene’s house?
(vii) Who was going to the post office?
(viii) What did the narrator tell Mr. Johnson about ecology?
(ix) When does the phrase ‘huffing and puffing * mean?
Answers:
(i) The author told Mrs. Greene to save those papers for the school picks up so that they could be made into newspapers.
(ii) The author got tired of trying to get Mrs. Greene to do something about ecology.
(iii) No, there was not any tree.
(iv) The word is “stuff.”
(v) No, the narrator did not succeed in getting Ms. Greene do something about ecology.
(vi) He went to Mr. Johnson’s house after his visit to Ms. Greene’s house.
(vii) Mr. Johnson was going to the post office.
(viii) The narrator told Mr. Johnson that the post office was nearby and he should not use his car. he reminded him that the walk to the post office would be good exercise and help ecology.
(ix) The phrase ‘huffing and puffing’ means ‘breathing heavily because one is exhausted’.

22. “Of course not,” he says, “And no grass either. Because you made a path there taking a shortcut from Mrs. Greene’s. There was a little tree just starting to get bigger there until you killed it by trying to jump over it every day. Remember?”
23. “Oh,” I say.
24. “And talking about not driving when you can walk. You drive your motorbike round and round your backyard all summer. And your snowmobile all winter. Isn’t that wasting power and making noise pollution too?”
25. But it’s fun,” I say.
26. “Well, I enjoy taking the car to the post office,” he says, “But now you’ve made me too late.” He goes in the house looking very mad.
27. Then I remember he hasn’t paid me. But I decided to wait until next Saturday. At least I made him not pollute with his car for once.
28. 1 don’t talk to the rest of my route about ecology. It’s a very boring work, this ecology bit.
29. But when I get home, I see my mother using the electric mixer.
30. “You should do that with your old egg beater,” I point out to her. “Save on electricity. Women use too many electric things.”
31. She says in a very’ cold voice, “So who watches TV twenty-seven hours a day around here? Or is that some other kind of electricity?”
32. See what I mean? Nobody’s willing to do anything about ecology. Except me. And nobody listens to me.
Questions:
(i) Who says,” of course not?’
(ii) Who enjoys taking the car to the post office?
(Hi) What did the author find when he reached home?
(iv) What remarks did the author’s mother have?
(v) Who is the author of this extract?
(vi) Who is‘him’ in the first line here?
(vii) How did the narrator try to feed him?
(viii) What happened on the third day?
(ix) Which word in the passage means ‘very bright’?
Answers:
(i) Mr. Johnson said, “of course.”
(ii) Mr. Johnson enjoys taking the car to the post office.
(iii) When the author reached home he found his mother using the electric mixer.
(iv) The author’s mother told him ironically that he watched. T.V. twenty-seven hours a day.
(v) Mahadevi Verma is the author of this extract.
(vi) ‘Him’ in the first line here refers to a tiny baby squirrel.
(vii) The narrator tried to feed him by putting a thin cotton wool wick, dipped in milk to his mouth:
(viii) On the third day, he became so much better and assured that he would hold the narrator’s finger with his two tiny claws and gaze all around.
(ix) The word ‘refulgent’ means ‘very bright’.

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Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 – 1200 ई

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 – 1200 ई Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 – 1200 ई

Bihar Board Class 11 History इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 – 1200 ई Textbook Questions and Answers

 

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

इस्लाम का उदय और विस्तार प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 1.
सातवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में बेदुहनों के जीवन की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
सातवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में बेदुइने खजूर आदि खाद्य पदार्थों तथा अपने ऊँटों के लिए चारे की तलाश में घूमते रहते थे। ये प्रायः मरुस्थल के सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे क्षेत्रों की ओर जाते रहते थे।

इस्लाम का उदय और विस्तार के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 2.
‘अब्बासी क्रांति’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
उमय्यदों के विरुद्ध ‘दावा’ नामक एक सुसंगठित आंदोलन हुआ। फलस्वरूप उनका पतन हो गया। सन् 1750 में उनके स्थान पर मक्काई मूल के अन्य परिवार, अब्बसिदों को स्थापित कर दिया गया। वस्तुतः अब्बासिदों ने उमय्यद शासन की जमकर आलोचना की और पैगम्बर द्वारा स्थापित मूल इस्लाम को फिर से बहाल करने का वायदा किया। इस क्रांति से राजवंश में परिवर्तन के साथ राजनीतिक ढाँचे और इस्लाम की ढाँचे में भारी परिवर्तन हुए।

इस्लाम का उदय और विस्तार पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 3.
अरबों, इरानियों व तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों की बहुसंस्कृतियों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • अरब साम्राज्यों में मुस्लिम, ईसाई तथा यहूदी संस्कृतियों के लोग रहते थे।
  • ईरानी साम्राज्यों में मुस्लिम तथा एशियाई संस्कृतियों का विकास हुआ।
  • तुर्की साम्राज्य में मिस्री, ईरानी, सीरियाई तथा भारतीय संस्कृतियों का विकास हुआ।

इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 से 1200 ईसवी Bihar Board Class 11 प्रश्न 4.
यूरोप व एशिया पर धर्मयूद्धों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
क्रूसेड या धर्मयुद्ध का यूरोप और एशिया पर गहरा प्रभाव पड़ा जो निम्नलिखित है –

  • मुस्लिम राज्यों ने अपने ईसाई प्रजाजनों के प्रति कठोर व्यवहार अपनाया। विशेष रूप से यह स्थिति लड़ाड़ियों में देखी गयी।
  • फलस्वरूप ईसाइयों ने अपने आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा का प्रबन्ध किया।
  • मुस्लिम सत्ता की बहाली के बाद भी पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापार में इटली के व्यापारिक समुदायों (पीसा, जेनेवा और वीनस का अधिक प्रभाव था)।

Islam Ka Uday Aur Vistar In Hindi Class 11 Bihar Board प्रश्न 5.
रोमन साम्राज्य के वास्तुकलात्मक रूपों से इस्लामी वास्तुकलात्मक रूप कैसे भिन्न थे?
उत्तर:
रोमन वास्तुकला-रोम के निवासी कुशल निर्माता थे। उन्होंने वास्तुकला में डाट और गुंबद बनाकर दो महत्वपूर्ण सुधर किए। उनके भवन दो-तीन मंजिलों वाले होते थे। इनमें डाटों को एक के ऊपर बनाया जाता था। उनकी डार्ट गोल होती थीं। ये डाटें नगर के द्वारों, पुलों, बड़े भवनों तथा विजय स्मारक बनाने में प्रयोग की जाती थीं । डाटों का प्रयोग कोलेजियम बनाने में किया गया। यहाँ ग्लेडिएटरों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं। ये डाटें नहर बनाने में भी काम में लाई जाती थीं।

इस्लामी वास्तुकला-इस्लामी वास्तुकला पर ईरानी कला का प्रभाव था। परंतु अरब निवासियों ने अलंकरण के मौलिक नमूने निकाल लिए । उनके भवनों में गोल गुबंद, छोटी मीनारें, घोड़ों के खुर के आकार के महराब तथा मरोड़दार स्तंभ होते थे। इस्लामी वास्तुकला की विशेषताएँ अरबों की मस्जिदों, पुस्तकलयों, महलों, चिकित्सालयों और विद्यालयों में देखी जा सकती हैं।

इस्लाम का उदय और विस्तार के प्रश्न-उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 6.
रास्ते पर पड़ने वाले नगरों का उल्लेख करते हुए समरकंद से दमिश्क तक की यात्रा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समरंकद इस्लामी राज्य के उत्तर:पूर्व में स्थित था, जबकि दमिश्क (सीरिया) मध्य में स्थित था। समरकंद से दमिश्क जोन के लिए यात्री को मर्व, निशापुर समारा आदि नगरों से गुजरना पड़ता था।

Bihar Board Class 11 History इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 – 1200 ई Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

इस्लाम का उदय और विस्तार प्रश्न-उत्तर Bihar Board Class 11 प्रश्न 1.
‘कुरान’ शब्द किससे बना है?
उत्तर:
‘कुरान’ शब्द ‘इकरा’ से बना है जिसका अर्थ हैं-पाठ करो। ‘इकरा’ शब्द सबसे पहले महादृव जिवरील ने पुकारा था। वह पैगम्बर मोहम्द के लिए संदेश लाया करते थे।

इस्लाम के उदय और विस्तार की विवेचना कीजिए Bihar Board Class 11 प्रश्न 2.
मक्का शहर क्यों विख्यात था?
उत्तर:

  • मक्का शहर अपनी पवित्र स्थान ‘काबा’ के लिए विख्यात था।
  • यह यमना और सोरिया के बीच व्यापार-मार्गी एक चौराहे पर स्थित था। इसलिए भी इसे महत्त्वपूर्ण माना जाता था।

Islam Ka Uday Aur Vistar Question Answer Bihar Board Class 11 प्रश्न 3.
पैगंबर मुहम्मद ने अपने आपको खुदा का संदेशवाहक कब घोषित किया? उन्होंने लोगों को कौन-सी दो बातें बनाई?
उत्तर:
पैगंबर मुहम्मद ने लगभग 612 ई० में अपने आपको खुदा का संदेशावाहक घोषित किया। उन्होंने लोगों को निम्नलिखित दो बातें बताई –

  • केवल अल्लाह की ही पूजा की जानी चाहिए।
  • उन्हें एक ऐसे समाज की स्थापना करनी है जिसमें अल्लाह के बंदे सामान्य धार्मिक विश्वासों द्वारा आपस में जुड़े हो।

इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 1200 Bihar Board Class 11 प्रश्न 4.
पैगंबर मुहम्मद के धर्म-सिद्धांत को स्वीकार करने वाले लोग क्या कहलाए? उन्हें किन दो बातों का आश्वासन दिया जाता था?
उत्तर:
पैगंबर मुहम्मद के धर्म-सिद्धांत को स्वीकार करने वाले लोग मुसलमान कहलाए। उन्हें कयामत के दिन मुक्ति और धरती पर रहते हुए समाज के संसाधनों में हिस्सा देने का आवश्वासन दिया जाता था।

प्रश्न 5.
मक्का में मुसलमानों को किन लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा और क्यों?
उत्तर:
मुसलकानों को समृद्ध लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें अपने देवी-देवताओं का ठुकराया जाना बुरा लगा था। इसके अतिरिक्त वे नए धर्म को मक्का की प्रतिष्ठा और समृद्धि के लिए खतरा मानते थे।

प्रश्न 6.
‘हिजरा’ से क्या अभिप्राय है? इस्लाम के इतिहास में इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
मक्का में समृद्ध लोगों के विरोध के कारण 522 ई० में पैगंबर मुहम्मद की अपने अनुयायियों के साथ मक्का छोड़कर मदीना जाना पड़ा । मुहम्मद साहिब की इस यात्रा को हिजरा कहते है। वह जिस वर्ष मदीना पहुँचे उसी वर्ष से हिजरी सन् (मुस्लिम कैलेंडर) की शुरुआत हुई।

प्रश्न 7.
किसी धर्म के जीवित रहने के लिए क्या शर्ते होती हैं?
उत्तर:
किसी धर्म का जीवित रहना उस पर विश्वास करने वाले लोगों के जीवित रहने पर निर्भर करता है। इस लोगों को आंतरिक रूप से मजबूत बनाना था उन्हें बाहरी खतरों से बचाना भी आवश्यक होता हैं। इसके लिए राज्य और सरकार जैसी संस्थाओं की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 8.
खिलाफत की संस्था का का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर:
632 ई० में मुहम्मद साहिब के देहांत के बाद उनका कोई वैध उत्तराधिकारी नहीं रहा था। उत्तराधिकार का कोई निश्चित नियम भी नहीं था। इस्लामी राजसत्ता उम्मा को सौंप दी गई। इस प्रकार खिलाफत की संस्था का निर्माण हुआ ।

प्रश्न 9.
इस्लामी क्षेत्रों में 600-1200 ई० के इतिहास के कोई चार स्रोत बताइए।
उत्तर:

  • इतिवृत
  • पैगंबर के कथनों के अभिलेख
  • कुरान की टीकाएँ
  • जीवन चरित्र

प्रश्न 10.
पैगंबर मुहम्मद कौन थे?
उत्तर:
पैगंबर एक सौदागर थे जिनका संबंध मक्का (अरब) में रहने वाले कुरैशा कबीले से था। उन्होंने इस्लाम धर्म की स्थापना की थी।

प्रश्न 11.
अरब कबीले के संगठन की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
अरब कबील वंशों से बना होता था अथवा बड़े परिवार का एक समूह होता था। प्रत्येक कबीले का नेतृत्व एक शेख द्वारा किया जाता था जिसका चुनाव मुख्यतः व्यक्तिगत साहस, बुद्धिमता तथा उदारता के आवास पर किया जाता था।

प्रश्न 12.
खलीफाओं ने नये शहरों की स्थापना किस उद्देश्य से की? उनके द्वारा स्थापित चार फौजी शहरों के नाम बताइए।
उत्तर:
खलीफाओं ने नये शहरों की स्थापना मुख्य रूप से उन अरब सैनिकों को बसाने के लिए की जो स्थानीय प्रशासन की रीढ़ थे। उनके द्वारा स्थापित चार फौजी शहर थे-(i) इराक में कुफा तथा बसरा और मिस्र में फुस्तात तथा काहिरा।

प्रश्न 13.
इस्लाम धर्म का मूल क्या है?
उत्तर:
एक ही ईश्वर अर्थात् अल्लाह की पूजा करना।

प्रश्न 14.
‘काबा’ क्या था।
उत्तर:
‘काबा’ मक्का में स्थित एक घनाकार ढाँचा था। यह मक्का का मुख्य पवित्र स्थल था। मक्का के बाहर के कबीले भी काबा का पवित्र मानते थे और हर वर्ष यहाँ की धार्मिक यात्रा (हज) करते थे।

प्रश्न 15.
उमर-खय्याम कौन था?
उत्तर:
उमर खय्याम एक कवि, गणितज्ञ तथा खगोलशास्त्री था। उसने रूबाई को लोकप्रिय बनाया।

प्रश्न 16.
अब्बासी कौन थे? उन्होंने अपने सत्ता प्राप्ति के प्रयास को किस प्रकार वैध ठहराया?
उत्तर:
अब्बासी मुहम्मद के चाचा अब्बास के वंशज थे। उन्होंने विभिन्न अरब समूहों को यह आवश्वासन दिया कि पैगंबर के परिवार का कोई मसीहा उन्हें उमय्यद वंश के दमनकारी शासन से मुक्ति दिलवाएगा। इसी आवश्वासन द्वारा ही उन्होंने अपने सत्ता प्राप्ति के प्रयास का वैध ठहराया।

प्रश्न 17.
अब्बासी ने उमय्यन वंश की किन दो परम्पराओं को बनाए रखा?
उत्तर:

  • उन्होंने सरकार और साम्राज्य के केंद्रीय स्वरूप को बनाए रखा।
  • उन्होंने उमय्यदों की शाही वास्तुकला तथा राजदरबार के व्यापक समारोहों की परंपरा को भी जारी रखा।

प्रश्न 18.
नौवीं शताब्दी में अब्बासी राज्य के कमजोर हो जाने के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  • दूर के प्रांतों पर बगदाद का नियंत्रण कम हो गया था।
  • सेना तथा नौकरशाही में अरब समर्थक तथा ईरान समर्थक गुटों के बीच झगड़ा हो गया था।

प्रश्न 19.
बगदाद के बुवाही शासकों के दो कार्य बताएँ।
उत्तर:

  • बुवाही शासकों ने विभिन्न उपाधियाँ धारण की इनमें से एक उपाधि ‘शहंशाह’ की थी।
  • उन्होंने शिया प्रशासकों, कवियों तथा विद्वानों को आश्रय प्रदान किया।

प्रश्न 20.
फातिमी कौन थे? वे स्वयं को इस्लाम का एकमात्र न्यायसंगत शासक क्यों मानते थे?
उत्तर:
फातिमी का संबंध शिया संप्रदाय के एक उपसंप्रदाय इस्लामी से था। उनका दावा था कि वे पैगंबर की बेटी फातिमा के वंशज है। इसलिए वे इस्लाम के एकमात्र न्याय-संगत शासक हैं।

प्रश्न 21.
उपय्यद वंश के अब्द-अल मलिक द्वारा अरब-इस्लामी पहचान के विकास के लिए किए गए कोई दो कार्य बताएँ।
उत्तर:

  • अब्द-अल-मलिक ने इस्लामिक सिक्के चलाए जिन पर अरबी भाषा में लिखा गया।
  • उसने जेरूसलम में ‘डीम ऑफ रॉक’ बनवाकर भी अरब-इस्लामी पहचान के विकास में योगदान दिया।

प्रश्न 22.
तुर्क कौन थे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
तर्क लोग तुर्किस्तान के मध्य एशियाई घास के मैदानों के खानाबदेश कबाइली थे। वे कशल सवार तथा योद्धा थे। वे गुलामों तथा सैनिकों के रूप में अब्बासी ससानी तथा बवाही शासकों के अधीन कार्य करने लगे। अपनी सैनिक योग्यता तथा वफदारी के बल पर उन्नति करके वें उच्च पदों पर पहुंच गए।

प्रश्न 23.
खिलाफत संस्था के दो मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:
खिलाफत संस्था के दो मुख्य उद्देश्य थे –

  • उम्मा के कबीलों पर नियंत्रण बनाए रखना।
  • राज्य के लिए संसाधन जुटाना।

प्रश्न 24.
बाइजेंटाइन तथा ससानी साम्राज्यों के विरुद्ध अरबों की सफलता में योग देने वाले कारक कौन-कौन से थे ?
उत्तर:

  • अरबों की सामरिक नीति।
  • अरबों का धार्मिक जोश
  • विरोधियों की कमजोरियाँ।

प्रश्न 25.
तीसरे खलीफा उथमान की हत्या क्यों की गई?
उत्तर:
खलीफा उथमान एक कुरैश था। सत्ता पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए उसने प्रशासन में कुरैश कबीले के लोगों को ही भर दिया इसलिए अन्य कबीले उसके विरुद्ध हो गए। और उसकी हत्या कर दी गई।

प्रश्न 26.
चौथे खलीफा ने कौन-कौन से दो युद्ध लड़े और उनका क्या परिणाम निकला?
उत्तर:

  • अली ने पहला युद्ध मुहम्मद की पत्नी आयशा की सेना के विरुद्ध लड़ा। इसे ऊँट की लड़ाई’ कहा जाता है। इस युद्ध में आयशा पराजित हुई।
  • अली का दूसरा युद्ध उत्तरी मेसोपोटामिया में सिफ्फिन में हुआ था। यह संधि के रूप में समाप्त हुआ था।

प्रश्न 27.
इस्लाम का दो मुख्य संप्रदायों में विभाजन क्यों हुआ? ये संप्रदाय कौन-कौन से थे?
उत्तर:
खलीफा अली ने अपने शासनकाल में मक्का के अभिजात वर्ग का प्रतिनिधित्व करने पाले लोगों के विरुद्ध दो युद्ध लड़े। इससे मुसलमानों के बीच में दरार पड़ गई और इस्लाम दो संप्रदायों में विभाजित हो गया। ये संप्रदाय थे-सुन्नी और शिया।

प्रश्न 28.
खलीफा अली की हत्या कहाँ और किसने किया?
उत्तर:
खलीफा अली की हत्या एक खरजी ने कुफा की एक मस्जिद में की।

प्रश्न 29.
उमय्यद वंश की स्थापना कब और किसने की? यह वंश कब तक चलता रहा?
उत्तर:
उमय्यद वंश की स्थापना 661 ई. में मुआविया ने की। यह वंश 750 ई. तक चलता रहा।

प्रश्न 30.
जेरूसलम में डोम ऑफ रॉक किसने बनाया? इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जेरूसलम में डोम ऑफ रॉक अब्द अल-मलिक ने बनवाया । यह इस्लामी वास्तुकला का पहला बड़ा नमूना है। इसका एक रहस्यमय महत्त्व भी है। वह यह कि यह स्मारक पैगंबर मुहम्मद की स्वर्ग की ओर रात्रि यात्रा से जुड़ा है।

प्रश्न 31.
चौथी शताब्दी में किन दो कारणों से लाल सागर मार्ग का महत्व बढ़ा?
उत्तर:

  • काहिरा का व्यापार शक्ति के रूप में उभरना।
  • इटली के व्यापारिक शहरों से पूर्वी वस्तुओं की बढ़ती हुई माँग।

प्रश्न 32.
समरकंद में कागज के निर्माण में किस घटना ने सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
751 ई. में समरकंद के मुस्लिम प्रशासक ने 20,000 चीनी आक्रमणकारियों को बंदी बना लिया। इनमें से कुछ आक्रमणकारी कागज बनाने में बहुत निपुण थे और इसी घटना ने समरकंद में कागज के निर्माण में सहायता पहुँचाई।

प्रश्न 33.
वाणिज्यिक पत्रों के उपयोग से व्यापारियों को क्या लाभ पहुँचा?
उत्तर:

  • वाणिज्यिक पत्रों के उपयोग से व्यापारियों को हर स्थान पर नकद धन ले जाने से मुक्ति मिल गई।
  • इससे उनकी यात्राएँ अधिक सुरक्षित हो गई।

प्रश्न 34.
औपचारिक व्यापार प्रबंध ‘मुजार्बा’ क्या था?
उत्तर:
इस व्यापार प्रबंध में निष्क्रिय साझेदार कारोबार के लिए अपनी पूँजी देश-विदेश में जाने वाले सक्रिय साझेदारों को सौंप देते थे। वे लाभ या हानि को किए गए निर्णय के अनुसार आपस में बाँट लेते थे।

प्रश्न 35.
इस्लाम में धन कमाने से जुड़े ब्याज संबंधी निषेध नियम बताएँ। लोग इसका अनुचित लाभ कैसे उठाते थे?
उत्तर:
इस्लाम के अनुसार ब्याज की कमाई खाना मना है। परंतु लोग एक विशेष प्रकार के सिक्कों में उधार लेकर उधार को अन्य प्रकार के सिक्कों में चुकाते थे। वे मुद्रा विनिमय पर भी कमीशन खाते थे। ये बातें ब्याज का ही रूप थीं।

प्रश्न 36.
अरब जगत् में 8वीं तथा 9वीं शताब्दी में कानून की चार शाखाएँ कौन-सी थीं? इनमें से कौन-सी शाखा सबसे अधिक रूढ़िवादी थी?
उत्तर:
8वीं तथा 9वीं शताब्दी में अरब जगत् में कानून की चार शाखाएँ थीं-मलिकी, हनफी, शफीई और इनबली। इनमें से इनबली सबसे अधिक रूढ़िवादी थी।

प्रश्न 37.
सूफी मत के दो सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:

  • संसार का त्याग करना।
  • केवल खुदा पर ही भरोसा।

प्रश्न 38.
सूफी मत के सर्वेश्वरवाद का क्या अर्थ हैं।
उत्तर:
सूफी मत का सर्वेश्वरवाद ईश्वर तथा उसकी सृष्टि से एक होने का विचार है। इससे अभिप्राय यह है कि मनुष्य की आत्मा को परमात्मा से मिलाना चाहिए।

प्रश्न 39.
इनसिना (980-1037) कौन था?
उत्तर:
इनसिना एक चिकित्सक तथा दार्शनिक था। वह इस बात पर विश्वास नहीं रखता था कि कयामत के दिन व्यक्ति फिर से जिंदा हो जाता है।

प्रश्न 40.
सलजुक तुर्कों की पहली राजधानी निशापुर का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
निशापुर शिक्षा का एक महत्वपूर्ण फारसी-इस्लामी केंद्र था। इसके अतिरिक्त यह उमर खय्याम का जन्म स्थान था।

प्रश्न 41.
तुगरिल बेग कौन था?
उत्तर:
तुगरिल बेग एक सलजुक तुर्क था। अपने भाई के साथ 1037 ई. में खुरासान को जीत लिया और निशापुर को अपनी पहली राजधानी बनाया। 1055 ई. में उन्होंने बगदाद पर भी अधिकार कर लिया।

प्रश्न 42.
धर्म-युद्ध क्या थे?
उत्तर:
पश्चिमी यूरोप के ईसाइयों ने मुसलमानों से अपने धर्म स्थल मुक्त कराने के लिए उनके साथ अनेक युद्ध किए। इन युद्धों को धर्म-युद्ध का नाम दिया गया है।

प्रश्न 43.
प्रथम धर्म-युद्ध की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
प्रथम धर्म – युद्ध (1098-1099) में फ्रांस तथा इटली के सैनिकों ने एंटीओक तथा जेरूसलतम पर अधिकार कर लिया। इस विजय के लिए उन्होंने मुसलमानों तथा यहूदियों की निर्मम हत्या कौं।

प्रश्न 44.
मध्यकाल में इस्लामी समाज का ईसाइयों के प्रति क्या दृष्टिकोण था?
उत्तर:
मध्यकाल में इस्लामी समाज ईसाइयों को पुस्तक वाले लोग कहते थे, क्योंकि उनके पास अपना धर्म ग्रंथ ‘इंजील’ (न्यू टेस्टामेंट) होता था। वे मुस्लिम राज्यों में आने वाले ईसाइयों को रक्षा प्रदान करते थे।

प्रश्न 45.
धर्म-युद्धों ने ईसाई-मुस्लिम संबंध पर क्या प्रभाव डाला? अथवा, यूरोप व एशिया पर धर्म-युद्धों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:

  • मुस्लिम राज्यों ने अपनी ईसाई प्रजा के प्रति कठोर नीति अपनानी आरंभ कर दी।
  • पूर्व तथा पश्चिम के बीच होने वाले व्यापार में इटली के व्यापारिक समुदायों का प्रभाव बढ़ गया।

प्रश्न 46.
फ्रैंक कौन थे? उनका अपने अधीन किए गए मुसलमानों के प्रति कैसा व्यवहार था?
उत्तर:
फ्रैंक धर्म-युद्धों में विजय पाने वाले पश्चिमी देशों के नागरिक थे। इनमें से कुछ सीरिया तथा फिलिस्तीन में बस गए थे। ये लोग मुसलमानों के प्रति सहनशील थे।

प्रश्न 47.
खलीफाओं ने धर्मांतरण के कारण राजस्व में आई कमी को पूरा करने के लिए क्या दो कदम उठाए?
उत्तर:

  • उन्होंने धर्म-परिवर्तन को निरुत्साहित किया।
  • बाद में उन्होंने कर लगाने की एक समान नीति अपनाई।

प्रश्न 48.
रूबाई क्या होती है?
उत्तर:
रूबाई चार पंक्तियों वाला छंद होता है। इसमें पहली दो पंक्तियाँ भूमिका बाँधती हैं। तीसरी पंक्ति बढ़िया तरीके से सधी होती है। चौथी पंक्ति मुख्य बात को प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 49.
उमय्यद शासकों द्वारा बनवाए गए मरुस्थलीय महल किस काम आते थे?
उत्तर:
ये महल विलासपूर्ण निवास स्थानों के काम आते थे। इसके अतिरिक्त इनका प्रयोग शिकार तथा मनोरंजन के लिए विश्राम स्थलों के रूप में किया जाता था।

प्रश्न 50.
किसी मस्जिद के बड़े कमरे की दो महत्वपूर्ण विशेषताएं कौन-कौन सी होती हैं?
उत्तर:

  • दीवार में एक मेहराब जो मक्का की दिशा का संकेत देती है।
  • एक मंच जहाँ से शुक्रवार को दोपहर की नवाज के समय प्रवचन दिए जाते हैं।

प्रश्न 51.
महमूद गजनबी के दरबारी कवि फिरदौसी द्वारा रचित ‘शाहनामा’ की दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
फिरदौसी द्वारा रचित शाहनामा इस्लामी साहित्य की एक श्रेष्ठ कृति मानी जती है।

  • इस पुस्तक में 50,000 पद हैं।
  • यह पुस्तक परंपराओं तथा आख्यानों का संग्रह है। इनमें से सबसे लोकप्रिय आख्यान रूस्तम को है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
950 से 1200 ई. के बीच इस्लामी समाज की एकजुटता में किन तत्वों का योगदान था?
उत्तर:
सन् 950 से 1200 के बीच इस्लामी समाज सामान्य आर्थिक और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के कारण एकजुट बना रहा।

  • इस एकता को बनाए रखने के लिए राज्य को समाज से अलग माना गया।
  • उच्च इस्लामी संस्कृति की भाषा के रूप में फारसी का विकास किया गया।
  • इस एकता के निर्माण में बौद्धिक परंपराओं के बीच संवाद की परपिक्वता का भी योगदान था।

विद्वान, कलाकार और व्यापारी इस्लामी दुनिया के भीतर स्वतंत्र रूप से आते जाते रहते थे। इस प्रकार इस्लामी समाज के बीच विचारों तथा तौर-तरीकों का आदान-प्रदान होता रहता था। परिणामस्वरूप मुसलमानों की जनसंख्या जो उमय्यद काल और प्रारंभिक अब्बासी काल में 10 प्रतिशत से भी कम थी, आगे चलकर बहुत अधिक बढ़ गई। इस्लाम ने एक अलग धर्म और सांस्कृतिक प्रणाली का रूप ले लिया।

प्रश्न 2.
सलजुक तुर्क कौन थे? उन्होंने तुर्की सत्ता की स्थापना तथा विस्तार किस प्रकार किया?
उत्तर:
सलजुक तुर्क सुदूर-पूर्व के गैर-मुस्लिम थे। ग्यारहवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में उन्होंने तूरान में समानियों तथा काराखानियों के सैनिकों के रूप में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने दो भाइयों तुगरिल और छागरी बेग के नेतृत्व में एक शक्तिशाली समूह का रूप धारण कर लिया। गजनी के महमूद की मृत्यु के बाद फैली अव्यवस्था का लाभ उठा कर सलजुकों ने 1037 में खुरासान को जीत लिया। उन्होंने निशापुर को अपनी पहली राजधानी बनाया।

इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान पश्चिमी फारस की ओर लगाया। 1055 में उन्होंने बगदाद को पुनः सुन्नी शासन के अधीन कर दिया । प्रसन्न होकर खलीफा अल-कायम ने तुगरिल बेग को सुलतान की उपाधि प्रदान की। सलजुक भाइयों ने परिवार द्वारा शासन चलाने की कबाइली धारणा के अनुसार मिल कर शासन चलाया। तुगरिल बेग के बाद उसका भतीजा अल्प अरसलन उसका उत्तराधिकारी बना। अल्प अरसलन’ के शासनकाल में सलजुक साम्राज्य का विस्तार अनातोलिया (आधुनिक तुर्की) तक हो गया।

प्रश्न 3.
चौथै खलीफा अली के शासनकाल पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
खलीफा अली ने (656-61) मक्का के अभिजात तंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों के विरुद्ध दो युद्ध लड़े। फलस्वरूप मुसलमानों में दरार और अधिक गहरी हो गई। अली के समर्थकों और शत्रुओं ने बाद में इस्लाम के दो मुख्य संप्रदाय शिया और सुन्नी बना लिए। अली ने अपने आपकों गुफा में स्थापित कर लिया। उसने मुहम्मद की पत्नी, आयशा के नेतृत्व वाली सेना को ‘ऊँट की लड़ाई’ (657) में पराजित कर दिया।

परंतु, वह उथमान के नातेदार और सीरिया के गवर्नर मुआविया के गुट का दमन न कर सका। उसके साथ अली का युद्ध सिफिन (उत्तरी मेसोपोटामिया) में हुआ था। यह संधि के रूप में समाप्त हुआ। इस युद्ध ने उसके अनुयायियों को दो धड़ों में बाँट दिया, कुछ उसके वफादार बने रहे, जबकि अन्य लोगों ने उसका साथ छोड़ दिया, उसका साथ छोड़ने वाले लोग खरजी कहलाने लगे। इसके शीघ्र, बाद एक खरजी ने गुफा की एक मस्जिद में अली की हत्या कर दी।

प्रश्न 4.
उमय्यद वंश की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई? पहले उमय्यद शासक मुआविया के शासनकाल पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
बड़े-बड़े क्षेत्रों पर विजय प्राप्त होने से मदीना में स्थापित खिलाफत नष्ट हो गई और उसका स्थान राजतंत्र ने ले लिया। 661 ई. में मुआविया ने स्वयं को अलग खलीफा घोषित कर दिया और उमय्यद वंश की स्थापना की। उमय्यदों ने ऐसे अनेक राजनीतिक कदम उठाए जिनसे उम्मा के भीतर उनका नेतृत्व सुदृढ़ हो गया।

पहले उमय्यद खलीफा मुआविया ने दमिश्क को अपनी राजधानी बना लिया। उसने बाइजेंटाइन साम्राज्य की राजदरबारी परंपराओं तथा प्रशासनिक संस्थाओं को अपनाया। उसने वंशगत उत्तराधिकार की परंपरा भी प्रारम्भ की और प्रमुख मुसलमानों को इस बात पर राजी कर लिया कि उसके बाद वे उसके पुत्र को उसका उत्तराधिकारी स्वीकार करें। उसके बाद आने वाले खलीफाओं ने भी ये नवीन परिवर्तन अपना लिए। फलस्वरूप उमय्यद 90 वर्ष तक सत्ता में बना रहा।

सिद्धांत नहीं था। अतः इस्लामी राजसत्ता उम्मा को सौंप दी गई। इससे नयी प्रक्रियाओं के लिए अवसर उत्पन्न हुए, परंतु इससे मुसलमानों में गहरे मतभदे भी पैदा हो गए। सबसे बड़ा नव-परिवर्तन यह हुआ कि खिलाफत की संस्था का निर्माण हुआ। इसमें समुदाय का नेता ‘अमीर अल-मोमिनिनि; पैगंबर का प्रतिनिधि बन गया। वह खलीफा कहलाया। पहले चार खलीफाओं (632-661) ने पैगबर के साथ अपने गहरे नजदीकी संबंधों के आधार पर अपनी शक्तियों का औचित्य स्थापित किया। उन्होंने पैगंबर द्वारा दिए दिशा-निर्देशों के अनुसार उनके कार्य को आगे बढ़ाया। खिलाफत के दो प्रमुख उद्देश्य थे

  • उम्मा का कबीलों पर नियंत्रण स्थापित करना।
  • राज्य के लिए संसाधन जुटाना।

प्रश्न 5.
आरंभिक खलीफाओं के अधीन अरब साम्राज्य के प्रशासनिक ढाँचे की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
खलीफाओं ने जीते गए सभी प्रांतों में नया प्रशासनिक ढाँचा लागू किया। इसके अंतर्गत प्रांतों के अध्यक्ष गवर्नर (अमीर) और कबीलों के मुखिया (अशरफ) थे। केंद्रीय सत्ता में राजस्व के दो मुख्य स्रोत थे-मुसलमानों द्वारा अदा किए जाने वाले कर तथा धावों से मिलने वाली लूट में से प्राप्त हिस्सा। खलीफा के सैनिक रेगिस्तान के किनारों पर बसे शहरों कुफा और बसरा में शिविरों में रहते थे ताकि वे अपने प्राकृतिक आवास स्थलों के निकट और खलीफा की ‘कमान के अंतर्गत बने रहें।

शासक वर्ग और सैनिकों को लूट में हिस्सा मिलता था और मासिक राशियाँ (अत्तता) प्राप्त होती थीं। गैर मुस्लिम लोग ‘स्वराज और जजिया’ नामक कर देते थे। इससे उनका संपत्ति का तथा धार्मिक कार्यों को संपन्न करने का अधिकार बना रहता था। यहूदी तथा ईसाई लोगों को राज्य के संरक्षित लोग घोषित किया गया था। उन्हें अपने सामुदायिक कार्य करने के लिए बहुत अधिक स्वायत्तता प्राप्त थी।

प्रश्न 6.
तीसरे खलीफा उथमान की हत्या के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं?
उत्तर:
अरब कबीलों ने अपना राजनीतिक विस्तार और एकीकरण का कार्य सरलता से कर लिया था। राजक्षेत्र के विस्तार से राज्य के संसाधनों और प्रशासनिक पदों के वितरण पर झगडे उत्पन्न हो गए। ये झगड़े उम्मा की एकता के लिए खतरा बन गए। वास्तव में प्रारंभिक इस्लामी राज्य के शासन में मक्का के कुरैश लोगों का ही बोलबाला था। तीसरा खलीफा उथमान (64456) भी एक कुरैश था।

उसने सत्ता पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए प्रशासन में अपने ही आदमी भर दिए। परिणामस्वरूप अन्य कबीलों में रोष फैल गया। इराक और मिस्र में पहले ही शासन का विरोध हो रहा था, अब मदीना में भी विरोध उत्पन्न हो जाने से उथमान की हत्या कर दी गई। उथमान की मृत्यु के बाद अली को चौथा खलीफा नियुक्त किया गया।

प्रश्न 7.
मध्यकालीन इस्लामी जगत में इस्लाम के धार्मिक विद्वानों ने कुरान की टीका लिखने तथा शरीआ तैयार करने की ओर ध्यान क्यों दिया।
उत्तर:
इस्लाम के धार्मिक विद्वानों (उलमा) के लिए करान से प्राप्त (इल्म) और पैगंबर का आदर्श व्यवहार (सुन्ना) ईश्वर की इच्छा को जानने तथा संसार का मार्गदर्शन करने का एकमात्र तरीका था। अत: मध्यकाल में उलेमा अपना समय कुरान पर टीका (तफसीर) लिखने और मुहम्मद की प्रामाणिक उक्तियों और कार्यों को लेखबद्ध (हदीथ) करने में लगाते थे। कुछ उलमा ने कर्मकांडों (इबादत) द्वारा ईश्वर के साथ और सामाजिक कार्यों (मुआमलात) द्वारा अन्य लोगों के साथ मुसलमानों के संबंधों को नियंत्रित करने के लिए कानून अथवा शरीआ तैयार करने का काम किया।

इस्लामी कानून तैयार करने के लिए विधिवेत्ताओं ने तर्क और अनुमान (कियास) का प्रयोग भी किया क्योंकि कुरान एवं हदीथ में प्रत्येक बात प्रत्यक्ष नहीं थी। स्रोतों के अर्थ-निर्णय और विधिशास्त्र के तरीकों के बारे में मतभेदों के कारण आठवीं और नौवीं शताब्दी में कानून की चार शाखाएँ (मजहब) बन गई। ये थीं-मलिकी, हनफी, शफीई और इनबली । शरीओ न सुन्नी समाज का सभी संभव कानूनी मुद्दों के बारे में मार्गदर्शन किया।

प्रश्न 8.
मध्यकालीन व्यापार-व्यवस्था में साख-पत्रों इंडियों (वाणिज्यिक पत्रों) का क्या महत्त्व था?
उत्तर:
मध्यकालीन आर्थिक जीवन में मुस्लिम जगत् का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने अदायगी और व्यापार व्यवस्था के बढ़िया तरीकों का विकास किया। व्यापारियों तथा साहूकारों द्वारा धन को एक जगह से दूसरी जगह और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए साख-पत्रों और हुडियों (बिल ऑफ एक्सेंचज) धन का इस्तेमाल किया जाता था। वाणिज्यिक पत्रों के व्यापक उपयोग से व्यापारियों को हर स्थान पर अपने साथ ले जाने से मुक्ति मिल गई । इससे उनकी यात्राएँ भी अधिक सुरक्षित हो गई । खलीफा भी वेतन देने अथवा कवियों और चरणों को इनाम देने के लिए साख पत्रों
का प्रयोग करते थे।

प्रश्न 9.
अरब साम्राज्य में कृषि की समृद्धि के लिए क्या-क्या पग उठाए गए?
उत्तर:
अरब साम्राज्य में राजनीतिक स्थिरता के आने के साथ-साथ कृषि में समृद्धि आई। इसके लिए कई कदम उठाए गए।

  • नील घाटी सहित कई क्षेत्रों में सिंचाई प्रणाली का विकास किया गया। इसके लिए बाँध बनाए गए तथा नहरें एवं कुएँ खोदे गए।
  • अपनी भूमि पर पहली बार खेती करने वाले लोगों को कर में छूट दी गई । खेती योग्य भूमि का विस्तार किया गया। इन सब कार्यों के परिणामस्वरूप उत्पादकता में वृद्धि हुई।
  • कुछ नयी फसलें भी उगाई जाने लगी। इनमें कपास, संतरा, केला, तरबूज, पालक, बैगन आदि की फसलें शामिल थीं। इनमें से कुछ फसलों का यूरोप को निर्यात भी किया गया ।

प्रश्न 10.
तुर्क कौन थे? गजनी में तुर्की सत्ता किस प्रकार स्थापित हुई और मजबूत बनी?
उत्तर:
तुर्क लोग तुर्किस्तान के मध्य एशियाई घास के मैदानों के खानाबदोश कबाइली थे। उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया था। वे कुशल घुड़सवार एवं योद्धा थे। वे गुलामों तथा सैनिका के रूप में अब्बासी, ससानी तथा बुवाही शासकों के अधीन कार्य करने लगे अपनी वफादारी तथा। सैनिक योग्यताओं के बल पर उन्नति करके उच्च पदों पर पहुंच गए।

961 ई. में अल्पकालीन नामक तुर्क ने गजनी सल्तनत की स्थापना की। इसे गजनी के महमूद (998-1030) ने मजबूत किया। बुवाहियों की तरह गजनवी भी एक सैनिक वंश था। उनके पास तुकों और भारतीयों जैसी पेशेवर सेना थी। परंतु उनकी सत्ता एवं शक्ति का केंद्र खुरासान और अफगानिस्तान में था।

अब्बासी खलीफे सत्ता वैधता के स्रोत थे। एक दास का पुत्र होने के कारण महमूद खलीफा से सुलतान की उपाधि प्राप्त करना चाहता था। दूसरी ओर खलीफा भी शिया सत्ता के मुकाबले गजनवी को सुन्नी सत्ता का समर्थन देने के लिए तैयार हो गया । अतः अब्बासी खलीफे गजनी में तुर्की सत्ता की वैधता के स्रोत बन गए।

प्रश्न 11.
अरबों द्वारा विजित क्षेत्रों में कृषि-भूमि का स्वामित्व की दृष्टि से वितरण कैसा था?
उत्तर:
अरबों द्वारा नए जीते हुए क्षेत्रों में लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था। इस्लामी राज्य ने इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया। कृषि भूमि के स्वामी छोटे बड़े किसान थे। कहीं-कहीं भूमि पर राज्य का स्वामित्व था। ईरान में जमीन बड़ी-बड़ी इकाइयों में बंटी हुई थी जिस पर किसान खेती करते थे। ससानी और इस्लामी कालों में भूमि के स्वामी राज्य की ओर से कर एकत्र करते थे। उन प्रदेशों में पशुचारण की अवस्था से स्थिर कृषि की अवस्था तक पहुँच गए थे। भूमि गाँव की साझी संपत्ति थी। इस्लामी विजय के बाद मालिकों द्वारा छोड़ी गई भू-संपदाओं को राज्य ने अपने हाथ में ले लिया था। इसे साम्राज्य के विशिष्ट वर्ग के मुसलमानों को दे दिया गया था-विशेष रूप से खलीफा के परिवार के सदस्यों को।

प्रश्न 12.
अरब साम्राज्य में भू-राजस्व की क्या व्यवस्था थी?
उत्तर:
अरब साम्राज्य में कृषि भूमि का सर्वोपरि नियंत्रण राज्य के हाथों में था। वह अपनी अधिकांश आय भू-राजस्व से प्राप्त करता था। अरबों द्वारा जीती गई भमि पर. जो अब भी उन मालिकों के हाथों में थी, खराज नामक करा लगता था। यह कर खेती की स्थिति के अनुसार उत्पादन के आधे भाग से लेकर पांचवें हिस्से के बराबर होता था। उस भूमि पर जिसके स्वामी मुसलमान थे अथवा जिस पर उनके द्वारा खेती की जाती थी उपज के दसवें भाग के बराबर कर वसूल किया जाता था।

अत: कई गैर-मुसलमान कम कर देने के उद्देश्य से मुसलमान बनने लगे। इससे राज्य की आय कम हो गई। इस समस्या से निपटने के लिए खलीफाओं ने पहले तो धर्म-परिवर्तन को निरुत्साहित किया और बाद में कर वसूलने की एक समान, नीति अपनाई। 10वीं शताब्दी से प्रशासनिक अधिकारियों को उनका वेतन राजस्व में से दिया जाने लगा। इसे इक्ता कहा जाता था जिसका अर्थ है-भू-राजस्व का भाग।

प्रश्न 13.
गजनी साम्राज्य में फारसी साहित्य के विकास की जानकारी दीजिए। अथवा, फारसी साहित्य में फिरदौसी का क्या योगदान रहा?
उत्तर:
ग्यारहवीं शताब्दी के प्रारंभ में गजनी फारसी साहित्य का एक कॅन्द्र बन गया था। कवि स्वाभाविक रूप से शाही दरबार की चमक-दमक से आकर्षित होते थे। शासकों ने भी अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कलाकारों और विद्वानों को संरक्षण देना आरंभ कर दिया था। महमूद गजनवी के काल में अनेक कवियों ने काव्य-संग्रहों (दीवानों) और महाकाव्यों (मथनवी) की रचना की। सबसे अधिक प्रसिद्ध कवि फिरदौ था। उसने ‘शाहनामा’ नामक काम, थ की रचना की थी।

इसे पूरा करने से उसे 30 वर्ष लगे थे। इस पुस्तक में 50,000 पद हैं और यह इस्लामी साहित्य की एक श्रेष्ठ कृति मानी जाती है। शाहनामा परंपराओं और आख्यानों का संग्रह है। इनमें सबसे लोकप्रिय आख्यान रूस्तम का है। पुस्तक में प्रारंभ से लेकर अरबों की विजय तक ईरान का चित्रण काव्यात्मक शैली में किया गया है।

प्रश्न 14.
इस्लामी जगत में नई फारसी का विकास कब हुआ? इस भाषा ने काव्य के विकास में क्या योगदान दिया?
उत्तर:
नई फारसी का विकास अरबों की ईरान विजय के पश्चात् ईरानी भाषा पहलवी का एक अन्य रूप था। इसमें अरबी भाषा के शब्दों की भरमार थी। खुरासान और तुरान सल्तनतों की स्थापना से नई फारसी सांस्कृतिक ऊंचाइयों पर पहुंच गई। ससानी राजदरबार में कवि रुदकी को नई फारसी कविता का जनक माना जाता है। इस कविता में गजल और रुबाई जैसे नए रूप शामिल थे।

रुबाई चार पंक्तियों वाला छंद होता है। इसमें पहली दो पंक्तियाँ भूमिका बाँधती हैं। तीसरी पंक्ति बढ़िया तरीके से सधी होती है और चौथी पंक्ति मुख्य बात को प्रस्तुत करती है। इसका प्रयोग प्रियतम अथवा प्रेयसी के सौंदर्य का बखान करने, संरक्षण की प्रशंसा करने अथवा दार्शनिक के विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए किया जा सकता है। रुबाई उमर खय्याम (1048-1131) के हाथों अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गई।

प्रश्न 15.
मध्यकालीन इस्लामी समाज में भाषा के विकास की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लामी समाज में बढ़िया भाषा और रचनात्मक कल्पना को व्यक्ति का सराहनीय गुण माना जाता था। ये गुण किसी भी व्यक्ति की विचार-अभिव्यक्ति को ‘अदब’ के स्तर तक ऊँचा उठा देते थे। अदब रूपी अभिव्यक्तियों में पद्य (कविता) और गद्य (बिखरे हुए शब्द) शामिल थे। इस्लाम-पूर्व काल की सबसे अधिक लोकप्रिय पद्य रचना संबोधन गीत (कसीदा) थी। इस विधा का विकास अब्बासी काल के कवियों ने अपने आश्रयदाताओं की उपलब्धियों का गुणगान करने के लिए किया।

फारस मूल के कवियों ने अरबी कविता का पुनः आविष्कार किया और उसमें नई जान फूंकी। फारसी मूल के एक कवि अबुनवास ने इस्लाम में वर्जित होने के बावजूद आनंद मनाने के लिए शराब और पुरुष-प्रेम जैसे विषयों पर उत्कृष्ट कविताओं की रचना की। अबुनवास के बाद के कवियों ने अपने अनुराग के पात्र को पुरुष के रूप में संबोधित किया, भले ही वह स्त्री हो। इसी परंपरा का अनुसरण करते हुए सूफियों ने रहस्थवादी प्रेम की मदिरा द्वारा उत्पन्न मस्ती का गुणगान किया।

प्रश्न 16.
प्रारंभिक इस्लाम के इतिहास के स्रोतों के रूप में कुरान के उपयोग ने क्या समस्याएँ उत्पन्न की हैं?
उत्तर:
प्रारंभिक इस्लाम के इतिहास के लिए स्रोत के रूप में कुरान के उपयोग ने मुख्य रूप से दो समस्याएँ प्रस्तुत की हैं। पहली यह कि यह एक धर्मग्रंथ है और एक ऐसा मूल-पाठ है जिसमें धार्मिक सत्ता निहित है। मुसलमानों का मानना है कि खुदा की वाणी (कलाम अल्लाह) होने के कारण कुरान के एक-एक शब्द को समझा जाना चाहिए।

परंतु बुद्धिवादी धर्म विज्ञानी रूढ़िवादी नहीं थे। उन्होनें कुरान की व्याख्या अधिक उदारता से की। 833 ई. में अब्बासी खलीफा अल-मामून ने यह मत लागू किया कि कुरान खुदा की वाणी न होकर उसकी अपनी रचना है। दूसरी समस्या यह है कि कुरानं प्रायः रूपकों में बात करता है। ओल्ड टेस्टामेंट के विपरीत यह घटनाओं का कंवल उल्लेख करता है, उनका वर्णन नहीं करता। अतः कुरान को पढ़ने-समझने के लिए कई हदीथ लिखे गए।

प्रश्न 17.
सूफी कौन थे और उनके धार्मिक विश्वास क्या थे?
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लाम के उदार धार्मिक विचारों वाले लोगों के एक समूह को सूफी कहा जाता है। –
धार्मिक विश्वास – सूफी लोग तपश्चर्या (रहबनिया) और रहस्यवाद द्वारा खुदा के बारे में गुढ ज्ञान प्राप्त करना चाहते थे। समाज जितना अधिक पदार्थों और सुखों की ओर झकता था, सूफी लोग उतना ही अधिक संसार का त्याग (जुहद) करना चाहते थे। वे केवल खुदा पर भरोस (तवक्कुल) करना चाहते थे। आठवीं और नौवीं शताब्दी में तपश्चर्या एवं वैराग्य की इन प्रवृत्तियं ने सर्वेश्वरवाद एवं प्रेम के विचारों द्वारा रहस्यवाद (तसव्वुफ) का रूप धारण कर लिया।

सर्वेश्वरवाद ईश्वर और उसकी सृष्टि के एक हो जाने का विचार है। इससे अभिप्राय यह है कि मनुष्य की आत्मा को परमात्मा के साथ मिलना चाहिए। यह ईश्वर से मिलने के साथ गहरे प्रेम (इश्क) द्वारा हो सकता है। सूफी लोग आनंद की अवस्था में पहुँचने तथा प्रेम को उद्दीप्त करने के लिए संगीत (समा) का सहारा लेते थे। सूफीवाद का द्वार सभी के लिए खुला है, चाहे वह किसी भी धर्म, पद अथवा लिंग का हो। सूफीवाद ने अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त की और अपनी उदारता से रूढ़िवादी इस्लाम के सामने चुनौती पेश की।

प्रश्न 18.
विज्ञान संबंधी नये विषयों के अध्ययन का इस्लाम जगत् के बौद्धिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
अथवा
इनसिना कौन था? उसकी सबसे प्रभावशाली पुस्तक का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
नये विषयों के अध्ययन ने आलोचनात्मक दृष्टिकोणों को बढ़ावा दिया। इसका इस्लाम के बौद्धिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। वैज्ञानिक प्रवृत्ति वाले धार्मिक विद्वानों ने इस्लामी विश्वासों की रक्षा के लिए यूनानी तर्क एवं विवेचना (कलाम) का प्रयोग किया। दार्शनिक (फलसिका) ने व्यापक प्रश्न किए और उनके उत्तर प्रस्तुत किए। उदाहरण के लिए एक वैज्ञानिक एंव चिकित्सक इनसिना इस बात को नहीं मानता था कि कयामत के दिन व्यक्ति फिर से जिंदा हो जाता है।

उसके चिकित्सा संबंधी लेख व्यापक रूप से पढ़े जाते थे। उसकी सबसे प्रभावशाली पुस्तक ‘चिकित्सा के सिद्धांत’ (अल-कानून फिल तिब) है। यह दस लाख शब्दों वाली पांडुलिपि है। इनमें उस समय के औषधिशास्त्रियों द्वारा बेची जाने वाली 760 औषधियों का उल्लेख है। पुस्तक में इनसिना के किए गए प्रयोगों तथा अनुभवों की जानकारी भी दी गई है। इस पुस्तक में आहार-विज्ञान के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। यह बताया गया है कि जलवायु और पर्यावरण का स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त कुछ रोगों के संक्रामक स्वरूप की जानकारी दी गई है।

प्रश्न 19.
इस्लामी धार्मिक कला में प्राणियों के चित्रण की मनाही से कला के किन दो – रूपों को बढ़ावा मिला?
उत्तर:
इस्लाम धर्म में प्राणियों के चित्रण की मनाही थी। इससे कला के जिन दो रूपों को बढ़ावा मिला, वे थे-खुशनवीसी अर्थात् सुंदर लिखने की कला और अरबेस्क अर्थात् ज्यामितीय तथा वनस्पति कं डिजाइनों संबंधी कला। इमारतों को मनाने के लिए प्रायः धार्मिक उद्धरणों का छोटे-बड़े शिलालख में उपयोग किया जाता था। कुरान की आठवीं तथा नौवौं शताब्दियों की पांडुलिपियों में खुशनवीसी की कला को सुरक्षित रखा गया है।

‘किताब अल-अघानी’ (गीत पुस्तक) ‘कलिका व दिमना’ और ‘हरिरी की मकामात’ आदि साहित्यिक कृतियों को लघुचित्रों से सजाया गया था। इसके अतिरिक्त पुस्तक के सौंदर्य को बढ़ाने के लिए चित्रावली की अनेक किस्मे आरंभ की गई। इमारतों और पुस्तकों के चित्रण में पौधों तथा फूलों के नमूनों का उपयोग किया जाता था।

प्रश्न 20.
अब्बासी शासन की क्या विशेषताएँ रहीं? क्या अब्बासी शासक राजतंत्र को समाप्त कर सके?
उत्तर:
अब्बासी शासन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

  • अब्बासी शासन के अंतर्गत अरबों के प्रभाव में गिरावट आई। इसके विपरीत ईरानी संस्कृति का महत्त्व बढ़ गया।
  • अब्बासियों ने अपनी राजधानी बगदाद में स्थापित की।
  • प्रशासन में इराक और खुरासान की धार्मिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सेना तथा नौकरशाही का गैर-कबीलाई आधार पर पुनर्गठन किया गया।
  • अब्बासी शासकों ने खिलाफत की धार्मिक स्थिति तथा कार्यों को मजबूत बनाया और इस्लामी संस्थाओं एवं विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया।
  • अब्बासी शासक और राजतंत्र-अब्बासी शासकों के अधीन सरकार और साम्राज्य का केंद्रीय स्वरूप बना रहा, क्योंकि समय की यही माँग थी।
  • उन्होंने उमय्यदों की शाही वास्तुकला और राजदरबार के व्यापक समारोहों की परंपरा को भी बनाये रखा। इस प्रकार राजतंत्र को समाप्त करने वाले अब्बासी शासकों को फिर से राजतंत्र स्थापित करने लिए विवश होना पड़ा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
खलीफाओं के अधीन इस्लामी सत्ता का विस्तार किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
पैगंबर मुहम्मद के देहांत के बाद बहुत-से कबीले इस्लामी राज्य से टूटकर अलग हो गए। कुछ कबीलों ने तो उम्मा की तरह अपने अलग समाजों की स्थापना करने के लिए स्वयं के पैगंबर बना लिए।

  • पहले खलीफा अबूबकर ने अनेक अभियानों द्वारा इन विद्रोहों का दमन किया।
  • दूसरे खलीफा उमर ने उम्मा की सत्ता के विस्तार की नीति अपनाई।

खलीफा जानता था कि उम्मा को व्यापार और करों से होने वाली थोड़ी-सी आय के बल पर नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए बहुत बड़ी धनराशि की जरूरत होगी। इसलिए खलीफा और उसके सेनापतियों ने पश्चिम में बाइजेंटाइन साम्राज्य तथा पूर्व में ससानी साम्राज्य प्रदेशों को जीतने के लिए अपने कबीलों को सक्रिय किया। बाइजेंटाइन और ससानी दोनों साम्राज्यों के पास विशाल संसाधन थे। बाईजेंटाइन साम्राज्य ईसाई मत को बढ़ावा देता था और ससानी साम्राज्य ईरान के प्राचीन धर्म, जरतुश्त धर्म को संरक्षण प्रदान करता था।

अरबों के समय से साम्राज्य धार्मिक संघर्षों तथा अभिजात वर्गों के विद्रोहों के कारण कमजोर हो गए थे। परिणामस्वरूप युद्धों और संधियों द्वारा उन्हें अपने अधीन लाना आसान हो गया। अरबों के तीन सफल अभियानों (637-642) में सीरिया, इराक और मिन पर मदीना का नियंत्रण स्थापित हो गया। अरबों की सफलता में सामरिक नाति, धार्मिक जोश और विरोधियों में गंगदान दिया।

तीसरे खलीफा उथमान ने अपना नियंत्रण मध्य एशिया तक बढ़ाने के लिए और अभियान चलाए। इस प्रकार पैगंबर मुहम्मद को मृत्यु के केवल एक दशक के अंदर, अरब-इस्लामी राज्य ने नील और ऑक्सस के बीच के विशाल क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया। ये प्रदेश आज तक मुस्लिम शासन के अंतर्गत हैं।

प्रश्न 2.
अरब साम्राज्य में खिलाफत का विघटन किस प्रकार हुआ? बुवाही शासकों ने खिलाफत के विघटन के बाद भी खलीफा के पद को प्रतीकात्मक रूप से क्यों बनाए रखा?
उत्तर:
नौवीं शताब्दी में अब्बासी राज्य कमजोर होता गया। इसके दो मुख्य कारण थे –

  • दूर क प्रांतों पर बगदाद का नियंत्रण कम हो गया था।
  • सेना और नौकरशाही में अरब-समर्थक और ईरान-समर्थक गुट के बीच झगड़ा हो गया था।

गृह युद्ध तथा नये राजवंश का उदय-810 में खलीफा हारून अल-रशीद के पुत्रों अमीन और मामुन के समर्थकों के बीच गृह युद्ध छिड़ गया। इससे प्रशासन में गुटबंदी और अधिक बढ़ गई तथा तुर्की गुलाम अधिकारियों (मामलुक) का एक नया शक्ति गुट बन गया। दूसरी ओर शियाओं ने एक बार फिर सुन्नी रूढ़िवादिता के साथ सत्ता के लिए संघर्ष आरंभ कर दिया। फलस्वरूप अनेक छोटे राजवंश उत्पन्न हो गए। इनमें खुरासान और ट्रांसोक्सियाना वाले प्रदेश के ताहिरी एवं ससानी वंश और मिन तथा सीरिया में तुलुनी वंश शामिल थे। शीघ्र ही अब्बासियों की सत्ता मध्य ईराक और पश्चिमी ईरान तक सीमित रह गई।

बुवाहियों द्वारा अब्बासी सत्ता का अंत-945 में ईरान के कैस्पियन क्षेत्र के बुवाही नामक शिया वंश ने बगदाद पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार अब्बासियों के शासन का पूरी तरह अंत हो गया। बुवाही शासकों ने विभिन्न उपाधियाँ धारण कीं। इनमें एक प्राचीन ईरानी उपाधि ‘शहंशाह’ अर्थात् राजाओं का राजा भी शामिल थी। उन्होंने स्वयं खलीफा की पदवी धारण नहीं की, बल्कि अब्बासी खलीफा को अपनी सुन्नी प्रजा का प्रतीकात्मक मुखिया का स्थान दिया। इस प्रकार खिलाफत का विघटन हो गया, भले ही खलीफा का पद प्रतीकात्मक रूप से बना रहा।

बुवाही शासकों की खलीफा के पद के प्रति नीति-बुवाही शासकों द्वारा खलीफा के पद को प्रतीकात्मक रूप को बनाए रखने का निर्णय बहुत से चतुराईपूर्ण था। इसका कारण यह था कि ‘फातिमी’ नामक एक अन्य शिया राजवंश इस्लामी जगत पर शासन करने की योजना बना रहा था। फातिमी का संबंध शिया संप्रदाय के एक उप-संप्रदाय इस्माइली से था। उनका दावा था कि वे पैगंबर की बेटी फातिमा के वंशज हैं। इसलिए वे इस्लाम के एकमात्र न्यायसंगत शासक हैं। 969 ई. में उन्होंने मिस्र को जीत लिया और फातिमी खिलाफत की स्थापना की। उन्होंने मिस्र की पुरानी राजधानी फुस्तात की बजाय काहिरा को अपनी राजधानी बनाया।

प्रश्न 3.
धर्म युद्ध किस-किस के बीच हुए? इनके लिए कौन-कौन सी परिस्थितियाँ उत्तरदायी थी?
उत्तर:
धर्म युद्ध यूरोप के ईसाइयों तथा अरबों के बीच हुए। इनके लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं –
1. ईसाइयों के लिए फिलिस्तीन ‘पवित्र भूमि’ थी। इसका कारण था कि उनके अधिकतर धार्मिक स्थल यही स्थित थे। यहाँ स्थित जेरूसलतम को ईसा के क्रूसीकरण तथा पुनः जीवित होने का स्थान माना जाता थ। इस स्थान को 638 ई. में अरबों ने जीत लिया था। इसलिए यरोपीय ईसाइयों तथा मुस्लिम जगत के बीच शत्रुता थी।

2. ग्यारहवीं शताब्दी में पश्चिमी यूरोप के सामाजिक तथा आर्थिक संगठनों में भी परिवर्तन हो गया था। इससे ईसाई जगत् और इस्लामी जगत् के बीच शत्रुता और अधिक बढ़ गई।

3. पादरी और योद्धा वर्ग राजनीतिक स्थिरता के लिए प्रयत्नशील थे।

4. ईश्वरीय शांति आंदोलन ने सामंती राज्यों के बीच सैनिक मुठभेड़ की संभावनाओं को समाप्त कर दिया था। अब सामंती समाज की आक्रमणकारी प्रवृत्तियों का रुख ‘ईश्वर के शत्रुओं’ अर्थात् अरबों की ओर हो गया था। इससे एक ऐसा वातावरण तैयार हुआ जिसमें विधर्मियों के विरुद्ध लड़ाई न केवल उचित अपितु प्रशंसनीय मानी जाने लगी।

5. 1092 में बगदाद के सलजुक सुलतान मलिक शाह की मृत्यु के पश्चात् उसके साम्राज्य का विघटन हो गया। इससे बाइजेंटाइन सम्राट् एलेक्सियस प्रथम को एशिया माइनर और उत्तरी सीरिया को फिर से हथियाने का अवसर मिल गया। 1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने बाइजेंटाइन सम्राट् के साथ मिलकर पवित्रभूमि (होली लैंड) को मुक्त कराने के लिए ईश्वर के नाम पर युद्ध का आह्वान किया।

अतः 1095 और 1291 के बीच पश्चिमी यूरोप के ईसाइयों ने पूर्वी भूमध्य सागर के तटवर्ती मैदानों में मुस्लिम शहरों के विरुद्ध युद्धों की योजना बनाई। परिणामस्वरूप लगातार अनेक युद्ध लड़े गए । इन युद्धों को बाद में ‘धर्मयुद्ध’ का नाम दिया गया।

प्रश्न 4.
प्रथम तीन धर्मयुद्धों की जानकारी दीजिए और उनके प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
धर्मयुद्ध 1095 से 1291 ई. में ईसाइयों तथा मुसलमानों के बीच हुए। इन युद्धों तथा उनके प्रभावों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –
1. प्रथम युद्ध – धर्मयुद्ध (1098-1099) में फ्रांस और इटली के सैनिकों ने सीरिया में एंटीओक तथा जेरूसलम पर अधिकार कर लिया। जेरूसलम में मुसलमानों और यहूदियों की निर्मम हत्याएँ की गई। शीघ्र ही उन्होंने सीरिया-फिलिस्तीन के क्षेत्र में धर्मयुद्ध द्वारा जीते गए चार राज्य स्थापित कर लिए। इन क्षेत्रों को सामूहिक रूप से ‘आउटरैमर’ कहा जाता था। बाद के धर्मयुद्ध इसकी रक्षा और विस्तार के लिए लड़े गए।

2. दूसरा धर्मयुद्ध – आउटरैमर प्रदेश कुछ समय तक सुरक्षित रहा। परंतु 1144 में तुर्को ने एडेस्सा पर अधिकार कर लिया। अत: पोप में ईसाई लाडों से एक अन्य धर्मयुद्ध (11451149) के लिए अपील की। एक जर्मन आर फ्रांसीसी सेना ने दमिश्क पर अधिकार करने का प्रयास किया। परंतु उसे पराजय का मुँह देखना पड़ा। इसके बाद ‘आउटरैमर’ की शक्ति धीरे-धीरे क्षीण होता गई और ईसाईयों में धर्मयुद्ध का जोश अब समाप्त हो गया। अब ईसाई शासकों ने विलासिता से जीना और नए-नए प्रदेशों के लिए लड़ाई करना शुरू कर दिया।

इस बीच सलाह अल-दीन ने एक मिनी-सीरियाई साम्राज्य स्थापित किया और ईसाइयों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। 1187 में ईसाई पराजित हुए। जेरूसलम पर फिर से मुसलमानों का अधिकार हो गया। परंतु ईसाई लोगों के साथ सलाह अल-दीन ने दयापूर्ण व्यवहार किया और द चर्च ऑफ दि होली सेपलकरे की अभिरक्षा का काम ईसाईयों को सौंप दिया । फिर भी बहुत-से गिरजाघरों को मस्जिदों में बदल दिया गया। इस प्रकार जेरुसलम एक बार फिर मुस्लिम शहर बन गया।

3. तीसरा धर्मयुद्ध – जेरूसलम के छिन जाने से 1189 ने तीसरे धर्मयुद्ध को जन्म दिया परंतु धर्मयुद्ध करने वाले फिलिस्तीन में कुछ तटवर्ती शहरों तथा ईसाई तीर्थ-यात्रियों के लिए जेरूसलम में स्वतंत्र प्रवेश के अतिरिक्त कुछ प्राप्त नहीं कर सके। अंतत: 1291 में मिस्र के मामलूक शासकों ने धर्मयुद्ध करने वाले सभी ईसाईयों को समूचे फिलिस्तीन से बाहर निकाल दिया।

प्रभाव – इन युद्धों ने ईसाई-मुस्लिम संबंधों के दो पहलुओं पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।

  • प्रथम मुस्लिम राज्यों ने अपनी ईसाई प्रजा के प्रति कठोर नीति अपनानी आरंभ कर दी।
  • दूसरे, पूर्व और पश्चिम के बीच व्यापार में इटली के व्यापारिक समुदायों का प्रभाव बढ़ गया।

प्रश्न 5.
मध्यकालीन इस्लामी जगत् में शहरीकरण की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मध्यकालीन इस्लामी जगत् में शहरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई। परिणामस्वरूप इस्लामी सभ्यता फली फूली। अनेक नए शहरों की स्थापना की गई। इनका उद्देश्य मुख्य रूप से अरब सैनिकों (जुड) को बसाना था। इस श्रेणी के फौजी शहरों में इराक में कूफा और बसरा, मिस्र में फुस्तात तथा काहिरा थे। इन शहरों के अतिरिक्त बगदाद, दमिश्क, इस्फहान और समरकंद जैसे कुछ पुराने शहर थे। इन शहरों को भी नया जीवन मिला। बगदाद की जनसंख्या में तो बड़ी तेजी से वृद्धि हुई।

शहरों के विकास एवं विस्तार के लिए खाद्यान्नों और चीनी के उत्पादन में वृद्धि की गई। उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन भी बढ़ाया गया। इससे शहरों के आकार और जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई। फलस्वरूप संपूर्ण क्षेत्र में शहरों का एक विशाल जाल विकसित हो गया। एक शहर दूसरे शहर से जुड़ गया और उनमें परस्पर संपर्क एवं कारोबार बढ़ गया।

दो भवन – समूह-शहर के केंद्र में दो भवन-समूह होते थे, जहाँ से सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति का संचालन होता था।

मस्जिद – एक भवन-समूह मस्जिद (मस्जिद अल-जामी) होती थी। इसमें सामूहिक नमाज पढ़ी जाती थी। यह इतनी बड़ी होती थी कि दूर से दिखाई देती थी।

केंद्रीय मंडी – दूसरा भवन-समूह केंद्रीय मंडी (सुक्र) था। इसमें दुकानों की कतारें, व्यापारियों के आवास (फंदुक) और शर्राफ का कार्यालय होता था। इसके अतिरिक्त इस भाग में शहर के प्रशासकों और विद्वानों एवं व्यापारियों (तुज्जर) के घर होते थे जो केंद्र के निकट बने होत थे। सामान्य नागरिकों और सैनिकों के आवास शहर के बाहरी घेरे में होते थे। मंडी की प्रत्येक इकाई की अपनी मस्जिद, अथवा सिनेगोग (यहूदी प्रार्थनाघर), छोटी मंडी, सार्वजनिक स्नानघर (हमाम) तथा एक महत्वपूर्ण सभा-स्थल होता था।

शहर के बाहरी इलाकों में शहरी गरीबों के मकान, हरी सब्जियों और फलों के बाजार, काफिलों के ठिकानों, चमड़ा साफ करने या रंगने की दुकानें और कसाई की दुकानें होती थीं। शहर की चारदीवारी के बाहर कब्रिस्तान और सराय होते थे। सराय में लोग उस समय आराम कर सकते थे जब शहर के दरवाजे बंद कर दिये जाते थे। शहरों के नक्शे-परिदृश्य, राजनीतिक परंपराओं और ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर अलग-अलग होते थे।

प्रश्न 6.
मध्यकालीन इस्लामी जगत् में वास्तुकला के विकास का विवरण दीजिए।
उत्तर:
(a) दसवीं शताब्दी तक इस्लामी जगत् ने एक ऐगा रूप धारण कर लिया जिसने अपनी वास्तुकला द्वारा अपनी स्पष्ट पहचान बना ली थी। इस काल में अरब जगत् में अनेक मस्जिद, महल तथा मकबरे बनाए गए। इनकी विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है –

1. मस्जिद – इस दुनिया की सबसे बड़ी बाहरी धार्मिक प्रतीक इमारत मस्जिद थी। स्पेन से लेकर मध्य एशिया तक फैली मस्जिदों, इबादतगाहों और मकबरे का मूल रूप एक जैसा ही था। इनकी मुख्य विशेषताएँ थीं-मेहराबें, गुबंद, मीनार और खुले सहन (प्रांगण)। ये इमारतें मुसलमानों की धार्मिक तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं को पूरा करती थीं। इस्लाम की पहली शताब्दी में मस्जिद ने एक विशेष वास्तुशिल्प का रूप धारण कर लिया था।

2. मस्जिद में एक खुला प्रांगण होता था। इस प्रांगण में एक फव्वारा अथवा जलाशय बनाया जाता था। यह प्रांगण एक बड़े कमरे की ओर खुलता था जिसमें प्रार्थना करने वाले लोगों तथा प्रार्थना (नमाज) का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति (इमाम) के लिए पर्याप्त स्थान होता था।

3. बड़े कमरे की दो विशेषताएँ थीं – दीवार में एक मेहराब जो मक्का (काबा) की दिशा का संकेत देती थी तथा एक मंच जहाँ से शुक्रवार को दोपहर की नमाज के समय प्रवचन दिए जाते थे। इमारत में एक मीनार जुड़ी होती थी। इसका प्रयोग नियत समय पर नमाज के लिए लोगों को बुलाने के लिए किया जाता था। मीनार नए धर्म के अस्तित्व का प्रतीक थी। शहरों और गाँवों में लोग समय का अनुमान पाँच दैनिक नमाजों की सहायता से लगाते थे। मस्जिद की ये विशेषताएँ आज भी विद्यमान हैं।

4. मस्जिद के केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर बनी इमारतों के निर्माण का स्वरूप न केवल मकबरों में बल्कि सरायों, अस्पतालों और महलों में भी पाया जाता था।

(b) महल –
1. उमय्यदों ने नखलिस्तानों में ‘मरुस्थली महल’ बनाए । इनमे फिलिस्तीन में खिरवत अलफजर और जोर्डन में कुसाईर अमरा शामिल थे। ये महल विलासपूर्ण निवास स्थान और शिकार एवं मनोरंजन के लिए विश्राम स्थल का काम देते थे। महलों को चित्रों, प्रतिमाओं और भव्य पच्चीकारी से सजाया जाता था।

2. अब्बासियों ने समरा में बागों और बहते हुए पानी के बीच एक नया शाही शहर बनाया। इसका उल्लेख खलीफा हारून-अल-रशीद से जुड़ी कहानियों और आख्यानों में मिलता है।

3. अब्बासियों ने बगदाद में तथा फातिमियों ने काहिरा में भी महल बनवाए। परंतु ये महल लुप्त हो गए हैं।

प्रश्न 7.
इस्लाम धर्म की स्थापना कब हुई? इसका अरब समाज पर क्या प्रभाव पड़ा? अथवा, इस्लाम धर्म के धार्मिक विश्वास क्या थे?
उत्तर:
इस्लाम धर्म की स्थापना लगभग 612 ई. में पैगंबर मुहम्मद ने की। इस वर्ष में उन्होंने स्वयं को खुदा का संदेशवाहक (रसूल) घोषित किया। उन्होंने एक नये धर्म सिद्धात का प्रचार किया। इस सिद्धांत को स्वीकार करने वाले लोग मुसलमान अथवा मुस्लिम कहलाए। ये सभी लोग एक ऐसे समाज का अंग थे जिसे उम्मा कहा जाता है।

इस्लाम धर्म के धार्मिक विश्वास-इस्लाम धर्म के धार्मिक विश्वास उनकी पवित्र पुस्तक ‘कुरान शरीफ’ में दिये गए हैं। इनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है –

  1. केवल अल्लाह की ही पूजा की जानी चाहिए।
  2. मनुष्य को कयामत के दिन (मृत्यु के समय) अपने कर्मों का फल अवश्य मिलेगा।
  3. प्रत्येक मुसलमान को इन पाँच सिद्धांत का पालन करना चाहिए –
    (i) अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है और मुहम्मद उसका पैगंबर है।
    (ii) उसे प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़नी चाहिए।
    (iii) उसे निर्धनों को दान देना चाहिए।
    (iv) उसे रमजान के महीने में रोजे रखने चाहिए।
    (v) उसे जीवन में एक बार मक्का की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।
  4. किसी मुसलमान को मूर्ति-पूजा नहीं करनी चाहिए।
  5. उसे ब्याज की कमाई नहीं खानी चाहिए और चोरी नहीं करनी चाहिए।
  6. उसे विवाह और तलाक के निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए।
  7. उसे मनुष्य मात्र की समानता में विश्वास रखना चाहिए।
  8. उसे उदार तथा सद्गुणों से परिपूर्ण होना चाहिए।
  9. उसे कुरान को पवित्र ग्रंथ मानना चाहिए।

प्रश्न 8.
पैगंबर मुहम्मद के अधीन इस्लामी राज्य तथा समाज के मुख्य पहलुओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पैगंबर मुहम्मद ने मदीना में एक राजनैतिक व्यवस्था की स्थापना की थी जिसने उनके अनुयायियों को सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने शहर में चल रही कलह को भी सुलझाया। उम्मा को एक बड़े समुदायों के रूप में बदला गया, ताकि मदीना के बहुदेववादियों और यहदियों को पैगंबर मुहम्मद के राजनैतिक नेतृत्व के अधीन लाया जा सके। पैगंबर ने कर्मकांडों (उपवास आदि) तथा नैतिक सिद्धांत में वृद्धि की और उन्हें परिष्कृत किया। इस प्रकार उन्होंने धर्म को अपने अनुयायियों के लिए मजबूत बनाया।

इस्लामी राज्य का विस्तार-आरंभ में मुस्लिम कृषि एवं व्यापार से प्राप्त होने वाले राजस्व तथा खैरात-कर (जकात) पर जीवित रहा। इसके अतिरिक्त मुसलमान मक्का के काफिलों और निकट के नखलिस्तानों पर छापे भी मारते थे। कुछ समय बाद मक्का पर मुसलमानों का अधिकार हो गया। इसके फलस्वरूप एक धार्मिक प्रचारक तथा राजनैतिक नेता के रूप में पैगंबर मुहम्मद की प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैल गई। पैगंबर मुहम्मद की उपलब्धियों से प्रभावित होकर, बहुत-से कबीलों, मुख्य रूप से बहुओं ने अपना धर्म बदलकर इस्लाम को अपना लिया और मुस्लिम समाज में शामिल हो गए।

इस प्रकार पैगंबर मुहम्मद द्वारा बनाए गए गठजोड़ का प्रसार समूचे अरब देश में हो गया । मदीना उभरते हुए इस्लामी राज्य की प्रशासनिक राजधानी बना और मक्का उसका धार्मिक केंद्र बन गया । काबा से बुतों को हटा दिया गया था। मुस्लिमों के लिए यह जरूरी था कि वे काबा की ओर मुंह करके प्रार्थना करें। मुहम्मद साहिब थोड़े ही समय में अरब प्रदेश के बहुत बड़े भाग को एक नए धर्म, समुदाय एवं राज्य के अंतर्गत लाने में सफल रहे। उनके द्वारा स्थापित इस्लामी राज्य व्यवस्था काफी लंबे समय तक अरब कबीलों और कलों का राज्य संघ बनी रही।

प्रश्न 9.
‘अब्बासी क्रांति’ से क्या अभिप्राय है? उमय्यद वंश के पतन तथा अब्बसी वंश की स्थापना के संदर्भ में इसकी जानकारी दीजिए।
उत्तर:
उमय्यद वंश को मुस्लिम राजनैतिक व्यवस्था के केंद्रीयकरण के लिए भारी मूल्य चूकाना पड़ा। ‘दवा’ नामक एक सुनियोजित आंदोलन के उमय्यद वंश को उखाड़ फेंका। 750 में उमय्यद वंश का स्थान अब्बासी वंश ने ले लिया। इसे अब्बासी क्रांति का नाम दिया जाता है अब्बासियों ने उमय्यद शासन को दुष्ट बताया और यह दावा किया कि वे पैगबर मुहम्मद के मूल इस्लाम की फिर से स्थापना करेंगे।

अब्बासी विद्रोह तथा उमय्यद का पतन-अब्बासियों का विद्रोह पूर्वी ईरान में स्थित खुरासान में प्रारंभ हुआ। यहाँ पर अरब-ईरानियों की मिली-जुली संस्कृति थी। यहाँ पर अरब सैनिक मुख्यतः इराक से आए थे। उन्हें सीरियाई लोगों का प्रभुत्व पसंद नहीं था। खुरासान के अरब नागरिक भी उमय्यद शासन में घृणा करते थे। इसका कारण यह कि उमय्यदों ने करों में छूट देने और विशेषाधिकार देने के जो वायदे किए थे, वे पूरे नहीं किए थे।

दूसरी ओर वहाँ के ईरानी मुसलमानों को जातीय चेतना से ग्रस्त अरबों के तिरस्कार का शिकार होना पड़ा था। अत: उमय्यदों को बाहर निकालने के वे किसी भी अभियान में शामिल होने के लिए तैयार थे। अब्बासी क्रांति की सफलता-अब्बासी पैगंबर के चाचा अब्बास के वंशज थे।

उन्होंने विभिन्न अरब समूहों को यह आश्वासन दिया कि पैगंबर के परिवार का कोई मसीहा (महदी) उन्हें उमय्यदों के दमनकारी शासन से मुक्त कराएगा। इस प्रकार उन्होंने सत्ता प्राप्त करने के अपने प्रयास को वैध ठहराया। उसकी सेना का नेतृत्व एक ईरानी दास अबू मुस्लिम ने किया। उसने अंतिम उमय्यद खलीफा मारवान को ‘जब’ नदी पर हुई लड़ाई में हराया। इस प्रकार उमय्यद वंश का अंत हो गया और अब्बासी क्रांति सफल रही।

प्रश्न 10.
मध्यकालीन मुस्लिम साम्राज्य के व्यापार एवं वाणिज्य की जानकारी देते हुए यह बताइए कि इसका मुद्रा के प्रसार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मध्यकालीन मुस्लिम साम्राज्य का विस्तार हिंद महासागर और भूमध्यसागर के व्यापारियों क्षेत्रों के बीच था। पाँच शताब्दियों तक चीन, भारत और यूरोप के समुद्री व्यापार पर अरब तथा ईरानी व्यापारियों का एकाधिकार रहा। व्यापार मार्ग-व्यापार दो मुख्य मार्गों लाल सागर और फारस की खाड़ी से होता था। लंबी दूरी के व्यापार के लिए मसालों, कपड़े, चीनी मिट्टी की चीजों तथा बारूद को भारत और चीन से लाल सागर (अदन और ऐधाब तक) तथा फारस की खाड़ी के पत्तनों (सिराफ और बसरा) तक जहाजों द्वारा लाया जाता था।

यहाँ से माल को ऊँटों के काफिलों द्वारा बगदाद दमिश्क और लेप्पो के भंडारगृहों तक स्थानीय खपत अथवा आगे भेजने के लिए भेजा जाता था। हज की यात्रा के समय मक्का के रास्ते से गुजरने वाले काफिलों का आकार बड़ा हो जाता था। व्यापारिक मार्गों के भूमध्य सागर के सिरे पर सिकंदरिया के पत्तन से यूरोप को किए जाने वाला निर्यात यहूदी व्यापारियों के हाथ में था। उनमें से कुछ भारत के साथ सीधे व्यापार करते थे। चौथी शताब्दी में व्यापार एवं शक्ति के केंद्र के रूप में काहिरा के उभरने तथा इटली के व्यापारिक शहरों में पूर्वी सिरे पर माल की बढ़ती हुई माँग के कारण लाल सागर के मार्ग का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ गया।

पूर्वी सिरे पर ईरानी व्यापारी मध्य एशियाई और चीनी वस्तुएँ लाने के लिए बगदाद से बुखारा तथा समरकंद (तूरान) होते हुए रेशम मार्ग से चीन जाते थे। तूरान भी वाणिज्यिक तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी था। यह तंत्र फर और स्लाब गुलामों के व्यापार के लिए उत्तर में रूस और स्केंडीनेविया तक फैला हुआ था। यहाँ के बाजारों में खलीफाओं और सुल्तानों के दरबार के लिए दास-दासियाँ खरीदी जाती थीं।

मुद्रा का प्रसार-राजकोषीय प्रणाली और बाजार के लेन-देन से इस्लामी देशों में धन के महत्त्व में वृद्धि के फलस्वरूप मुद्रा का प्रसार बढ़ गया। सोने, चाँदी और ताँबे (फुलस) के सिक्के बड़ी संख्या में बनाए जाने लगे। वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य चुकाने के लिए इन्हें प्राय: सर्राफों द्वारा सीलबंद थैलों में भेजा जाता था। सोना अफ्रीका (सूदान) से और चाँदी मध्य एशिया से आती थी।

बहुमूल्य धातुएँ और सिक्के पूर्वी व्यापार की वस्तुओं के बदले यूरोप से भी आते थे। धन की बढ़ती हुई माँग से लोगों के सचित भंडारों और बेकार संपत्ति का भी उपयोग होने लगा। उधार का कारोबार भी मुद्राओं के साथ जुड़ गया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पैगम्बर मुहम्मद ने प्रथम सार्वजनिक उपदेश कब दिये?
(क) 610
(ख) 612
(ग) 622
(घ) 627
उत्तर:
(ख) 612

प्रश्न 2.
उम्मयद खिलाफत वंश की स्थापना किसने की?
(क) मुआविया
(ख) याजीद
(ग) उस्मान
(घ) वालीद
उत्तर:
(क) मुआविया

प्रश्न 3.
मुस्लिम कानून के किस शाखा को सर्वाधिक रूढ़िवादी माना गया है?
(क) मलिकी
(ख) हनफी
(ग) शफीई
(घ) हनबली
उत्तर:
(घ) हनबली

प्रश्न 4.
किस सूफी संत ने फना के सिद्धांत दिये?
(क) वयाजिद विस्तामी
(ख) रबिया
(ग) बहाउद्दीन जकारिया
(घ) सलीम चिश्ती
उत्तर:
(क) वयाजिद विस्तामी

प्रश्न 5.
मुरुज अल-धाहाब की रचना किसने की?
(क) मसूदी
(ख) ताबरी
(ग) अलबेरूनी
(घ) बालाधुरी
उत्तर:
(क) मसूदी

प्रश्न 6.
इरान में इल-खानी राज्य की स्थापना किसने की?
(क) कुबलई खाँ
(ख) हजनू खाँ
(ग) मौके खान
(घ) चगताई खाँ
उत्तर:
(ख) हजनू खाँ

प्रश्न 7.
1095 से 1291 तक के धर्मयुद्ध (क्रुसेड) किन दो संप्रदायों के मध्य हुए?
(क) ईसाई एवं यहूदी
(ख) यहूदी एवं अरब
(ग) ईसाई एवं मुसलमान
(घ) मुसलमान एवं मंगाले
उत्तर:
(ग) ईसाई एवं मुसलमान

प्रश्न 8.
समानी वंश का संबंध किस देश से था?
(क) इरान
(ख) तुर्की
(ग) रूस
(घ) इटली
उत्तर:
(क) इरान

प्रश्न 9.
‘डोम ऑफ द रॉक’ नामक मस्जिद कहाँ पर स्थित है?
(क) बसरा
(ख) दमिश्क
(ग) जेरूसलम
(घ) समरकंद
उत्तर:
(ग) जेरूसलम

प्रश्न 10.
अब्बासी क्रांति कब हुई?
(क) 712 ई.
(ख) 750 ई.
(ग) 786 ई.
(घ) 802 ई.
उत्तर:
(ख) 750 ई.

प्रश्न 11.
पैगम्बर का प्रतिनिधि क्या कहलाता था?
(क) ताजा
(ख) उम्मा
(ग) अमीर
(घ) खलीफा
उत्तर:
(घ) खलीफा

प्रश्न 12.
दास प्रजनन क्या है?
(क) गुलामों की संख्या बढ़ाने की प्रथा
(ख) वेतनभोगी दासों की श्रेणी
(ग) दासता से स्वतंत्र होने की प्रथा
(घ) अभिजात्य वर्ग द्वारा दासों की स्त्रियों
उत्तर:
(क) गुलामों की संख्या बढ़ाने की प्रथा

प्रश्न 13.
मुसलमानों का प्रथम खलीफा कौन था?
(क) उमर
(ख) अब्बासी
(ग) अबू बकर
(घ) अक्त-महदी
उत्तर:
(ग) अबू बकर

प्रश्न 14.
मामलूक किसे कहा जाता था?
(क) खलीफा
(ख) तुर्क शासक
(ग) तुर्की गुलाम अधिकारी
(घ) ईरानी मुसलमान
उत्तर:
(ग) तुर्की गुलाम अधिकारी

प्रश्न 15.
शर्लमेन कौन था?
(क) फ्रांस का शासक
(ख) इंगलैंड का शासक
(ग) इटली का शासक
(घ) स्पेन का शासक
उत्तर:
(क) फ्रांस का शासक

प्रश्न 16.
इस्लाम के संस्थापक पैगम्बर मुहम्मद साहब का जन्म कब हुआ था?
(क) 570 ई.
(ख) 622 ई.
(ग) 612 ई.
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) 570 ई.

प्रश्न 17.
पैगम्बर मुहम्मद साहब का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
(क) मदीना
(ख) मक्का
(ग) बगदाद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) मक्का

प्रश्न 18.
पैगम्बर मुहम्मद साहब को ‘सत्य के दिव्य दर्शन’ किस आयु में हुए थे?
(क) 30 वर्ष की आयु में
(ख) 35 वर्ष की आयु में
(ग) 40 वर्ष की आयु में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) 40 वर्ष की आयु में

प्रश्न 19.
मक्का से मदीना को पैगम्बर साहब का प्रस्थान क्या कहलाता है?
(क) हिजरा
(ख) आवागमन
(ग) तीर्थयात्रा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) हिजरा

प्रश्न 20.
मुस्लिम पंचांग का प्रथम वर्ष माना जाता है …………………..
(क) सन् 612 ई.
(ख) सन् 570 ई.
(ग) सन् 622 ई.
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) सन् 622 ई.

प्रश्न 21.
मुसलमानों का पवित्र धर्म ग्रंथ कहलाता है ………………….
(क) कुरान
(ख) उपदेश
(ग) (क) एवं (ख) दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) कुरान

प्रश्न 22.
पैमगम्बर मुहम्मद साहब की मृत्यु हुई ………………….
(क) 620 ई.
(ख) 632 ई.
(ग) 640 ई.
(घ) 650 ई.
उत्तर:
(ख) 632 ई.

प्रश्न 23.
इस्लामिक कॉलेज (अल-अजहर) कहाँ स्थित था?
(क) मक्का में
(ख) मदीना में
(ग) काहिरा में
(घ) बसरा में
उत्तर:
(ग) काहिरा में

प्रश्न 24.
पहले खलीफा कौन थे?
(क) अबू बकर
(ख) उथमान
(ग) अली
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) अबू बकर

प्रश्न 25.
द्वितीय खलीफा कौन थे?
(क) अली
(ख) उमर
(ग) खलीफा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) उमर

प्रश्न 26.
तीसरे खलीफा कौन थे?
(क) उथमान
(ख) उम्मयद
(ग) अब्बसिद
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) उथमान

प्रश्न 27.
चौथे खलीफा कौन थे?
(क) अमीर
(ख) अली
(ग) अशरफ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) अली

प्रश्न 28.
657 ई. की प्रसिद्ध ऊँट की लड़ाई में अली ने किसे परास्त किया?
(क) उस्मान
(ख) मुआविया
(ग) आयशा
(घ) याजीद
उत्तर:
(ग) आयशा

प्रश्न 29.
जजिया किनसे लिया जाता था?
(क) हिन्दू
(ख) गैरमुसलमान
(ग) मुसलमान
(घ) यहूदी
उत्तर:
(ख) गैरमुसलमान

प्रश्न 30.
प्रसिद्ध सूफी महिला संत रबिया कहाँ की रहने वाली थी?
(क) दमिश्क
(ख) मक्का
(ग) वसरा
(घ) इस्तांबुल
उत्तर:
(ग) वसरा

प्रश्न 31.
नई फारसी कविता का जनक किसे कहा जाता है?
(क) अबुनुनास
(ख) उमर खैय्याम
(ग) फिरदौसी
(घ) रूदकी
उत्तर:
(घ) रूदकी

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions पद्य Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा

Bihar Board Class 10 Hindi राम बिनु बिरथे जगि जनमा Text Book Questions and Answers

कविता के माथ

राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा Bihar Board प्रश्न 1.
कवि किसके बिना जगत् में यह जन्म व्यर्थ मानता है ?
उत्तर-
कवि राम-नाम के बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है। राम-नाम के बिना व्यतीत होने वाला जीवन केवल विष का भोग करता है।

Ram Nam Binu Birthe Jagi Janma Bihar Board प्रश्न 2.
वाणी कब विष के समान हो जाती है ?
उत्तर-
जब वाणी वाह्य आडंबर से सम्पन्न होकर राम-नाम को त्याग देती है तब वह विष हो जाती है। राम-नाम के अतिरिक्त उच्चरित ध्वनि काम-क्रोध, मद सेवन आदि से परिपूर्ण होती है।

Ram Naam Binu Birthe Jagi Janma Bihar Board प्रश्न 3.
नाम-कीर्तन के आगे कवि किन कर्मों की व्यर्थता सिद्ध करता है?
उत्तर-
पुस्तक पाठ, व्याकरण के ज्ञान की बखान, दंड कमण्डल धारण करना, सिखा बढ़ाना, . तीर्थ- भ्रमण, जटा बढ़ाना, तन में भस्म लगाना, वस्त्रहीन होकर नग्न रूप में घूमना इत्यादि कर्म ईश्वर प्राप्ति के साधन माने जाते हैं। लेकिन कवि कहते हैं कि भगवत् नाम-कीर्तन के आगे ये सब कर्म व्यर्थ हैं।

राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा का अर्थ प्रश्न 4.
प्रथम पद के आधार पर बताएं कि कवि ने अपने युग में धर्म-साधना के कैसे-कैसे रूप देखे थे?
उत्तर-
प्रथम पद में कवि ने धर्म साधना के अनेक लोक प्रचलित रूप की चर्चा करते हैं। सिखा बढ़ाना, ग्रंथों का पाठ करना, व्याकरण वाचना इत्यादि धर्म साधना माने जाते हैं। इसी तरह तन में भस्म रमाकर साधु वेश धारण करना, तीर्थ करना, डंड कमण्डल धारी होना, वस्त्र त्याग करके नग्न रूप में घूमना भी कवि के युग में धर्म-साधना के रूप रहे हैं। पद में इन्हीं रूपों का बखान कवि ने दिये हैं।

Bihar Board Class 10th Hindi Solutions प्रश्न 5.
हरिरस से कवि का अभिप्राय क्या है?
उत्तर-
कवि राम नाम की महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि भगवान के नाम से बढ़कर ___ अन्य कोई धर्म साधना नहीं है। भगवत् कीर्तन से प्राप्त परमानंद को हरि रस कहा गया है। भगवान्
के नाम कीर्तन, नाम स्मरण में डूब जाना, हरि कीर्तन में रम जाना और कीर्तन में उत्साह, परमानंद की अनुभूति करना ही हरि रस है। इसी रस पान से जीव धन्य हो सकता है।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 6.
कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ?
उत्तर-
जो प्राणी सांसारिक विषयों की आसक्ति से रहित है, जो मान-अपमान से परे है, हर्ष-शोक दोनों से जो दूर है, उन प्राणियों में ही ब्रह्म का निवास बताया गया है। काम, क्रोध, लोभ, मोह जिसे नहीं छूते वैसे प्राणियों में निश्चित ही ब्रह्म का निवास है।

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 10 प्रश्न 7.
गुरु की कृष्ण से किस युक्ति की पहचान हो पाती है ?
उत्तर-
कवि कहते हैं कि ब्रह्म से साक्षात्कार करने हेतु लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, निंदा आदि से दूर होना आवश्यक है। ब्रह्म के सानिध्य प्राप्ति के लिए सांसारिक विषयों से रहित होना अत्यन्त जरूरी है। जो प्राणी माया, मोह, काम, क्रोध लोभ, हर्ष-शोक से रहित है उसमें ब्रह्म का अंश विद्यमान हो जाता है। वह ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है। ब्रह्म प्राप्ति की यही युक्ति की पहचान गुरु कृपा से ही हो पाती है। गुरु बिना ब्रह्म को पाने की युक्ति का ज्ञान नहीं मिल सकता। अर्थात् ब्रह्म को पाने के लिए गुरु का कृपा पात्र होना परमावश्यक है।

गोधूलि भाग 1 Class 10 Pdf प्रश्न 8.
व्याख्या करें :
(क) राम नाम बिनु अरुझि मरै ।
(ख) कंचन माटी जाने ।
(ग) हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।
(घ) नानक लीन भयो गोविंद सो, ज्यों पानी संग पानी।
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के महान संत कवि गुरुनानक . के द्वारा लिखित “राम नाम बिनु निर्गुण जग जनमा” शीर्षक से उद्धृत है। गुरुनानक निर्गुण, निराकार ईश्वर के उपासक तथा हिंदी की निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं। यहाँ राम नाम की महत्ता पर प्रकाश डालते हैं।

प्रस्तुत व्याख्य पंक्ति में निर्गुणवादी विचारधारा के कवि गुरुनानक राम-नाम की गरिमा मानवीय जीवन में कितनी है इसका उजागर सच्चे हृदय से किये हैं। कवि कहते हैं कि राम-नाम का अध्ययन, संध्या वंदन तीर्थाटन रंगीन वस्त्र धारण यहाँ तक की जरा जूट बढ़ाकर इधर-उधर घूमना ये सभी भक्ति-भाव के बाह्याडम्बर है। इससे जीवन सार्थक कभी भी नहीं हो सकता है। राम-नाम की सत्ता को स्वीकार नहीं करते हैं तब तक मानवीय मूल चेतना का उजागर नहीं हो सकता है। राम-नाम के बिना बहुत-से सांसारिक कार्यों में उलझकर व्यक्ति जीवन लीला समाप्त कर लेता है।

(ख) प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के “जो नर दुःख में दुख नहीं माने” शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत पद्यांश में निर्गुण निराकार ईश्वर के उपासक गुरुनानक सुख-दुख में एक समान उदासीन रहते हुए लोभ और मोह से दूर रहने की सलाह देते हैं।

प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कवि ब्रह्म को पाने के लिए सुख-दुःख से परे होना परमावश्यक बताते हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्म को वही प्राप्त कर सकता है जो लोक मोह ईर्ष्या-द्वेष, काम-क्रोध से परे हो। जो व्यक्ति सोना को अर्थात् धन को मिट्टी के समान समझकर परब्रह्म की सच्चे हृदय से उपासना करता है वह ब्रह्ममय हो जाता है। जो प्राणि सांसारिक विषयों में आसक्ति नहीं रखता है। उस प्राणि में ब्रह्म निवास करता है।

(म) प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य-पुस्तक हिंदी साहित्य के संत कवि गुरुनानक द्वारा रचित “जो नर दःख में दःख नहीं माने” शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत पंक्ति में संत गुरुनानक उपदेश देते हैं कि ब्रह्म के उपासक प्राणि को हर्ष-शोक, सुख-दुख, निंदा-प्रशंसा, मान-अपमान से परे होना चाहिए। इन संबके पृथक रहने वाले प्राणियों में ब्रह्म का निवास स्थान होता है।

प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहते हैं ब्रह्म निर्गुण एवं निराकार है। वैराग्य भाव रखकर ही हम उसे पा सकते हैं। झूठी मान, बड़ाई या निंदा शिकायत की उलझन मनुष्य को ब्रह्म से दूर ले जाता है। ब्रह्म को पाने के लिए, सच्ची मुक्ति के लिए हर्ष-शोक, मान-अपमान से दूर रहकर, उदासीन रहते हुए ब्रह्म की उपासना करना चाहिए।

(घ) प्रस्तुत प हमार्य पाठ्य पुस्तक हिंदी साहित्य के महान संत कवि गुरुनानक के द्वारा रचित “जो नर दु:खं में द:ख नहीं माने” पाठ से उद्धृत है। इसमें कवि ब्रह्म की सत्ता की महत्ता को बताते हैं। मनुष्य जन्म का अंतिम लक्ष्य ब्रह्म को पाना बताते हुए कहते हैं कि सांसारिक व्यक्ति से दूर रहकर मनुष्य को ब्रह्ममय होने की साधना करनी चाहिए। गुरु कृपा से ईश्वर की प्राप्ति । संभव है।

प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं। इस मानवीय जीवन में ब्रह्म को . पानी की सच्ची युक्ति, यथार्थ उपाय करना आवश्यक है। पर ब्रह्म को पाना प्राणि का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। जिस प्रकार पानी के साथ पानी मिलकर एकसमान हो जाता है उसी प्रकार जीव जब ब्रह्म के सानिध्य में जाता है तब ब्रह्ममय हो जाता है। जीवात्मा एवं परमात्मा में जब मिलन होता है तब जीवात्मा भी परमात्मा बन जाता है। दोनों का भेद मिट जाता है। कवि कहते हैं कि यह जीव ब्रह्म का ही अंश है। जब हम विषयों की आसक्ति से दूर रहकर गुरु की प्रेरणा से ब्रह्म को पाने की साधना करते हैं तब ब्रह्म का साक्षात्कार होता है और ऐसा होने से जीव ब्रह्ममय हो जाता है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 9.
आधुनिक जीवन में उपासना के प्रचलित रूपों को देखते हुए नानक के इन पदों . की क्या प्रासंगिकता है ? अपने शब्दों में विचार करें।
उत्तर-
आधुनिक जीवन में उपासना के विभिन्न स्वरूप दिखाई पड़ते हैं। ईश्वरीय उपासना में लोग तीर्थाटन करते हैं, जटा-बढ़ाकर, भस्म रमाकर साधु वेश धारण करते हैं। गंगा स्नान दान पुण्य करते हैं। मंदिर मस्जिद जाकर परमात्मा की पुकार करते हैं। साथ ही आज धर्म के नाम पर विभेद भी किया जाता है। धर्म को प्रतिष्ठा प्राप्ति के साधन मानकर धार्मिक बाह्याडम्बर अपनाया जा रहा है। बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन किये जाते हैं जिसमें अत्यधिक धन का व्यय भी किया जाता है। फिर भी लोगों को सुख-शांति नहीं मिलती है। आज लोग भटकाव के पथ पर अग्रसर है। समयाभाव में ईश्वर के सानिध्य में जाने हेतु कठिनतम उपासना के मार्ग को अपनाने में लगे अभिरुचि नहीं रख रहे हैं। इसलिए धार्मिक क्षेत्र में भटकाव आ गया है। हम कह सकते हैं कि नानक के पद में वर्णित राम-नाम की महिमा आधुनिक जीवन में सप्रासंगिक है। हरि-कीर्तन सरल मार्ग है जिसमें न अत्यधिक धन की आवश्यकता है नहीं कोई बाह्माडम्बर की। आज भगवत् नाम रूपी रस का पान किया जाये तो जीवन में उल्लास, शांति, परमानन्द, सुख, ईश्वरीय अनुभूति को प्राप्त किया जा सकता है। हरि रस पान से जीवन को धन्य बनाया जा सकता है। नानक के उपदेश को अपनाकर यथार्थ से युक्त होकर हम जीवन में ब्रह्म का साक्षात्कार आज भी कर सकते हैं।

भाषा की बात

Class 10 Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
पद में प्रयुक्त निम्नांकित शब्दों के मानक आधुनिक रूप लिखें –
बिरथे, बिखु, निहफलु, मटि, संधिआ, करम, गुरसबद, तीरथभगवनु, महीअल,
सरब, माटी, अस्तुति, नियारो, जुगति, पिछानी
उत्तर-
राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा Bihar Board

Bihar Board 10th Hindi Book प्रश्न 2.
दोनों पदों में प्रयुक्त सर्वनामों को चिहित करें और उनके भेद बताएं।
उत्तर-
कहाँ – प्रश्नवाचक सर्वनाम
कोई – अनिश्चयवाचक सर्वनाम
तें – पुरूषवाचक सर्वनाम
यह – निश्चयवाचक सर्वनाम
सो – संबंधवाचक सर्वनाम

Bihar Board Class 10th Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के वाक्य-प्रयोग करते हुए लिंग-निर्णय करें –
जम, मुक्ति, धोती, जल, भस्म, कंचन, जुमति, स्तुति
उत्तर-
जग – जग बड़ा है।
मुक्ति – उसे मुक्ति मिल गई।
धोती – धोती नई है। जल गंदा है।
भस्म – लग गया।
जुगति – उसकी जुगटी अनूठी है।
स्तुति – ईश्वर की स्तुति करनी चाहिए।

Class 10th Hindi Chapter 1 Question Answer Bihar Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित विशेषणों का स्वतंत्रत वाक्य प्रयोग करें
व्यर्थ, निष्फल, नग्न, सर्व, न्यारा, सकल
उत्तर-
व्यर्थ – राम नाम के बिना जीवन व्यर्थ है।
निष्फल – प्रयोग निष्फल हो गया।
नग्न – वह नग्न बैठा है।
सर्व – सर्व नष्ट हो गया।
न्यारा – संसार न्यारा है।
सकल – आतंकवाद पर सकल विश्व एक हों।

काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

1. राम नाम बिनु बिरथे जबह जनमा।
– बिखु खावै बिखु बोलै बिनु नावै निहफलु मटि भ्रमना॥
पुस्तक पाठ व्याकरण बखारौं संधिआ करम निकाल करै।
बिनु गुरसबद मुकति कहा प्राणी राम नाम बिनु अरुझि मरै॥
ठंड कमंडल सिखा सूत धोती तीरथ गवनु अति भ्रमनु करे।
समनाम बिनु सांति न आवै जपि हरिहरि नाम सुपारि घरै।
जटा मुकुट तन भसम लगायी वसन छोड़ि तन नगन भया।
जेते जी अजंत जल थल महोअल जत्र तत्र तू सरब जीआ॥
गुरु परसादि राखिले जन कोउ हरिरस नामक झोलि पीआ।

प्रश्न
(क) कविता और कवि का नाम लिखें।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौन्दर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि- गुरुनानक
कविता- राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा।
(ख) प्रस्तुत कविता में संत कवि गुरुनानक बाहरी वेश-भूषा, पूजा-पाठ, तीर्थ स्नान और कर्मकाण्ड के स्थान पर सरल सच्चे हृदय से राम नाम की भक्ति करने पर बल दिया है।
(ग) नानक कहते हैं कि राम नाम के बिना इस संसार में जन्म लेना व्यर्थ है। बिना राम की भक्ति के भोजन, बोली, भ्रमण बुद्धि ये सभी विष बन जाते हैं, कार्य भी निष्फल हो जाते हैं। पुस्तक पढ़ना, शब्द-ज्ञान के लिये व्याकरण का अध्ययन करना यहाँ तक कि संध्या उपासना करना ये सभी राम की भक्ति के बिना निरर्थक होते हैं।

कवि गुरु की महिमा का बखान करते हुये कहते हैं कि बिना गुरु की कृपा के मुक्ति नहीं मिल सकती है। साथ ही राम नाम की भक्ति के बिना इंस सांसारिक मोह-माया से मानव उलझकर मर जाता है। दण्ड, कमंडल, सिखा बजाकर, जनेऊ धारण कर, रंगीन धोती पहनकर तथा इधर-उधर तीर्थों में भटककर मनुष्य अपना समय व्यर्थ बर्बाद करता है। ये सभी तो बाह्याडम्बर हैं। इन आडम्बरों से ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती है, राम नाम के बिना शांति नहीं मिल सकती है। अतः राम-नाम जपने से ही मनुष्य इस संसार-रूपी भव सागर से पार उतरकर मोक्ष प्राप्ति कर सकता है। पुनः नानक कहते हैं कि हे मानव जटारूपी मुकुट पहन कर शरीर में भस्म लगाकर वस्त्रहीन होकर तथा नंगे बदन होकर भ्रमण करने से ईश्वरीय भक्ति प्राप्त नहीं किया जा सकता है। नानक कहते हैं कि जिस प्राणी पर गुरु की कृपा होती है चाहे वह जल में रहता हो, धरती पर रहता हो या सभी जगह रहता हो, उसी प्राणी को ईश्वर की भक्ति रूपी रस. पीने के लिये मिलता है अर्थात् ईश्वर भक्ति की अलौकिक आनंद की अनुभूति उसी प्राणी को प्राप्त होती है।

(घ) इस कविता में निर्गुणवादी विचारधारा प्रकट हुयी है। इसमें कवि बाहरी वेश-भूषा, तीर्थाटन कर्मकाण्ड के विरोध करते हुये सच्चे हृदय से भक्ति-भावना पर प्रकाश डालते हैं। कवि का मानना है कि परमात्मा की भक्ति बाह्य दिखाने से नहीं हो सकती है। परमात्मा की भक्ति रूपी सरस का अलौकिक पान करने के लिये सच्चे हृदय और ज्ञान की आवश्यकता है।
(A) (i) यहाँ निर्गुण निराकार ईश्वर की सत्ता को स्वीकार किया गया है।
(ii) भाषा की दृष्टि से पंजाबी मिश्रित ब्रजभाषा का प्रयोग लाक्षणिक और व्यञ्जना रूप में किया गया है।
(iii) भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग अनायास ही भक्ति भावना की ओर अग्रसर होना पड़ता है।
(iv) कहीं-कहीं तत्सम शब्दों का भी प्रयोग प्रशंसनीय है। भाषा में सरलता और सुबोधता के कारण प्रसाद गुण की अपेक्षा है।
(v) अलंकार की दृष्टि से अनुप्रास उपमा और दृष्टांत मनोभावन है।

2. जो नर दुख में दुख नहिं माने।
सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जाने।
नहिं निंदा नहिं अस्तुति जाके, लोभ मोह अभिमाना
हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।
आसा मनसा सकल तयागि कै जय तें रहै निरासा।
काम क्रोध जेहि परसे नाहिन तेहिं घट ब्रह्म निकासा
गुरु किरपा जेहि नर पै कीन्हीं तिन्ह यह जुगति पिलानी
नानक लीन भयो गोबिंद सो ज्यों पानी सँग पानी

प्रश्न
(क) कविता और कवि का नाम लिखें।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कबि-गुरुनानका .
– कविता-जो नर दुख में दुख नहीं माने।
(ख) निर्गण निराकार ईश्वर के उपासक गरुनानक ने प्रस्तुत कविता में सुख-दुख में एक समान उदासीन रहते हुए मानसिक दुर्गुणों से ऊपर उठकर अंत:करण की निर्मलता हासिल करने पर जोर दिया है। संत कवि गुरु की कृपा प्राप्त कर गोविंद से एकाकार होने की प्रेरणा देता है।
(ग) प्रस्तुत कविता में ईश्वर की निर्गुणवादी सत्ता को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य दुःख को दुःख नहीं समझता है अर्थात् दुःखमय जीवन में भी समान रूप.में रहता है उसी का जीवन सार्थक होता है। जिसके जीवन में सुख, प्यार, भय नहीं आता है अर्थात् इस परिस्थिति में भी तटस्थ रहकर मानसिक दुर्गुणों को दूर करता है, लोभ से रहित सोने को भी माटी के समान समझता है वही प्रभु की कृपा प्राप्त कर सकता है। जो मनुष्य न किसी की निंदा करता है, न किसी की स्तुति करता है लोभ, मोह, अभिमान से दूर रहता है, न सुख में प्रसन्नता जाहिर करता है और . न संकट में शोक उपस्थित करता है तथा मान अपमान से रहित होता है वही ईश्वर भक्ति के सुख को प्राप्त कर सकता है। जो मनुष्य आशा निराशा, बढ़ी-चढ़ी कामनाओं से दूर रहता है, जिस काम और क्रोध विचलित नहीं करता है उसी के हृदय में ब्रह्म का निवास होता है। गुरुनानक कहते हैं कि जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है वही व्यक्ति ईश्वर को पहचान सकता है। यहाँ तक कि ईश्वर के उपासक गुरुनानक भी अपने गुरु के कृपा से ही गोविंद की भक्ति में उसी तरह मिल गये हैं जिस तरह पानी के संग पानी मिल जाता है।

(घ) भाव सौंदर्य-प्रस्तुत कविता का भाव यह है कि जो मनुष्य सुख-दुख में एक समान रहता है, आशा-निराशा से दूर रहता है। निंदा प्रशंसा में भी समान स्थिति में रहता है वही व्यक्ति गुरु की कृपा होती है वही व्यक्ति ईश्वर का आनंद लेता है क्योंकि गुरु कृपा के बिना ईश्वर की पहचान नहीं हो सकता है।

(ङ) काव्य सौंदर्य-
(i) यहाँ भाव के अनुसार ही भाषा का प्रयोग है।
(ii) ईश्वर भक्ति और गुरु भक्ति का सामंजस्य स्थापित हुआ है।
(ii) पंजाबी मिश्रित ब्रजभाषा का प्रयोग सफल कवि का प्रतीक है।
(iv) भाषा में संगीतमयता, सरलता और मोहकता आ गई है।

विस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
राय नाम बिनु बिरथे जगि जनश्या’ किस कवि की रचना है ?
(क) गुरु नानक
(ख) गुरु अर्जुनदेव
(ग) रसखान
(घ) प्रेमधन
उत्तर-
(क) गुरु नानक

प्रश्न 2.
गुरु नानक की रचना है
(क) अति सूधो सलेट को मारता है
(ख) मो अंसुवा निहि लै बरसौ
(ग) जो नर दुख में दुख नहिं मानें
(घ) स्वदेश
उत्तर-
(ग) जो नर दुख में दुख नहिं मानें

प्रश्न 3.
गुरु नानक के अनुसार किसके बिना जन्म व्यर्थ है ?
(क) सम्पत्ति
(ख) इष्ट मित्र
(ग) पत्नी
(घ) राम नाम
उत्तर-
(घ) राम नाम

प्रश्न 4.
ब्रह्म का निवास कहाँ होता है ?
(क) समुद्र में
(ख) काम-क्रोधहीन व्यक्ति में
(ग) स्वर्ग में
(घ) आकाश में
उत्तर-
(ख) काम-क्रोधहीन व्यक्ति में

प्रश्न 5.
गुरु कृपा की महत्ता का वर्णन किस कवि ने किया है ?
(क) घनानंद
(ख) रसखान
(ग) गुरु नानक
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर-
(ग) गुरु नानक

प्रश्न 6.
गुरु नानक किस भक्ति धारा के कवि हैं ?
(क) सगुण भक्ति धारा ।
(ख) निर्गुण भक्ति धारा
(ग) सिख भक्ति धारा
(घ) किसी भी धारा के नहीं
उत्तर-
(ख) निर्गुण भक्ति धारा

II. रिक्त स्थानों की मूर्ति करें

प्रश्न 1.
गुरु नानक का जन्म सन् …………. में हुआ था।
उत्तर-
1469

प्रश्न 2.
…….. गुरु नानक के पिता थे।
उत्तर-
कालूचंद खत्री

प्रश्न 3.
गुरु नानक ने ………….की स्थापना की।
उत्तर-
सिख पंथ

प्रश्न 4.
गुरु नानक ने पंजाबी के साथ …. में कविताएं की।
उत्तर-
हिन्दी

प्रश्न 5.
सामाजिक विद्रोह गुरु नानक की कविताओं का …….नहीं है।
उत्तर-
विषय

प्रश्न 6.
गुरु नानक की कविताओं में …………. की महत्ता निर्विवाद है।
उत्तर-
सहज प्रेम

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुरु नानक का जन्म कहाँ हुआ था? .
उत्तर-
गुरु नानक का जन्म तलवंडी नामक गाँव जिला-लाहौर में हुआ था जो फिलहाल पाकिस्तान में है। उस स्थान को अब नानकाना साहब कहते हैं।

प्रश्न 2.
गुरु नानक किस युग के कवि थे?
उत्तर-
गुरु नानक मध्य युग के संत कवि थे।

प्रश्न 3.
‘गुरु ग्रंथ साहिब’ किनका पवित्र ग्रंथ है ?
उत्तर-
गुरु ग्रंथ साहिब’ सिखों का पवित्र ग्रंथ है। इसमें गुरु नानक एवं कुछ अन्य संतों की । रचनाएँ संकलित हैं।

प्रश्न 4.
कवि किससे बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है?
उत्तर-
कवि राम नाम के बिना जगत् में यह जन्म व्यर्थ मानता है।

प्रश्न 5.
वाणी कब विष के समान हो जाती है ?
उत्तर-
जिस वाणी से राम नाम का उच्चारण नहीं होता है अर्थात् भगवत् नाम के बिना वाणी विष के समान हो जाती है।

व्याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा।
बिखु खावै बिखु बोलै बिनु नावै निहफलुमटि भ्रमना।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित काव्य-पाठ ‘राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों द्वारा कवि मनुष्य जाति को संदेश देते हुये कहता है कि इस संसार में राम के नाम के बिना जन्म व्यर्थ है, इस जन्म का सार्थक मोल नहीं। मनुष्य का लक्षण बन गया है—विष पान करना, विष भाषण करना और बिना नाम के बेकार बनकर मतिभ्रम की तरह जिधर-तिधर भटकना इन पंक्तियों में राम नाम की महिमा का गुणगान है।

प्रश्न 2.
पुस्तक पाठ व्याकरण बरवाण संधिआकरम निकाल कर,
बिनु गुरसबद मुकति कहा प्राणी राम नाम बिनु अरूझि.भ.
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा” काव्य पाठ से ली गयी हैं, इन काव्य-पंक्तियों का प्रसंग मानव जीवन से जुड़ा हुआ है। कवि कहता है कि व्याकरण की किताब संधि-कर्म की जिस प्रकार व्याख्या करती है ठीक वैसा ही गुरु का काम है, राम नाम की महिमा का ज्ञान बिना गुरु के असंभव है। गुरु द्वारा ही शब्द-ज्ञान मिलता है। बिना ज्ञान के मुक्ति असंभव है, बिना ज्ञान के राम नाम की महिमा से हम दूर रह जाते हैं, अनभिज्ञ रह जाते हैं, इस प्रकार व्याकरण और गुरु दोनों का कार्य-व्यापार समान है, जिस प्रकार व्याकरण संधि-कर्म की व्याख्या कर हमें पाठ ज्ञान कराता है, ठीक उसी प्रकार सिद्ध गुरु द्वारा ही राम – नाम के महत्व का ज्ञान प्राप्त हो सकता है। इस मायावी संसार से बिना गुरु शब्द के मुक्ति असंभव है।

प्रश्न 3.
डंड कमंडल सिखा सूत धोती तीरथ गवन अति भ्रमनु करें।
राम नाम बिनु सांति न आवै जपि हरि हरि नाम सु पारित परै।।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ नामक काव्य पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग मानव जीवन में व्याप्त पाखंड है।

कवि कहता है कि मनुष्य बाहरी आडम्बरों के फेरे में पड़कर भटक रहा है। उसे सत्य का ज्ञान ही नहीं। वह डंड, कमंडल, शिखा, सूत, धोती, तीरथ आदि के साथ सारा जीवन भरमता रहता है। यानी भटकता रहता है। वह सत्य मार्ग से दूर चला जाता है।

राम नाम के बिना शांति कैसे मिले ? बिना हरिनाम के स्मरण के इस भवसागर से मुक्ति । मिल सकती है क्या? यहाँ सांसारिक आडंबरों के बीच जी रहे मानव की मूर्खता के विषय में कवि ध्यान दिलाता है। वह बताता है कि इस मायावी संसार से मुक्ति तभी मिलेगी जब हम सही रूप में, सच्चे मन से हरि स्मरण करेंगे। यहाँ गूढ भाव यह है कि मानव जीवन सत्य पर आधारित होना चाहिए। मनुष्य को पाखंड से दूर रहकर निर्मल मन और भाव से प्रभु-पूजा करनी चाहिए।

प्रश्न 4.
जटा मुकुट तन भसम लगाई, वसन छोड़ि तन नगन भया।
जेते जीअ जंत जल-थल महीअल जत्र तत्र तू सरब जीआ
गुरु परस्पदी राखिले जन कोउ हरिरस नानक झोलि पीआ।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के रामनाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ काव्य पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संबंध मनुष्य के जीवन में व्याप्त अनेक तरह की विसंगतियों से है।

कवि कहता है कि मनुष्य जटा बढ़ा लेता है तन में राख पोत लेता है और मुकुट धारण कर लेता है। सारे वस्त्रों का परित्याग कर आधुनिक युग में नग्न रहने लगा है। जिस प्रकार इस जल-थल पर जंतु जीते हैं ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी सर्वत्र जीता है, विचरण करता है। लेकिन अंत में गुरु नानक जी कहते हैं कि ऐ मनुष्यों-गुरु का प्रसाद-ग्रहण कर लो। गुरु नानक ने तो हरि रस की झोलि यानी रस, शर्बत पी ही लिया है।

इन पंक्तियों में कवि के कहने का भाव यह है कि बिना ईश्वर के साथ लगातार संबंध बनाये, आस्था रखे, इस जीवन का कल्याण नहीं, मोक्ष की प्राप्ति असंभव है। आडंबर में जीने पर मुक्ति पाना असंभव है। आडंबर से दूर रहकर निर्मल भाव से ईश्वर की साधना कर ही हम मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
जो नर दुख में दुख नहिं माने।
सुख सनेह अरू भय नहिं जाके, कंचन माटी जान।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “जो नर दुख में दुख नहिं मान” नामक काव्य-पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग मानव-जीवन में आए दुख से है।
कवि कहता है कि वही मनुष्य सही मनुष्य है जो अपने जीवन में आए दुःख में नहीं घबराए, उसे दुःख नहीं माने बल्कि धैर्य के साथ उसका सामना करे। वही मनुष्य सच्चा मानव है जो निर्लिप्त भाव से जीवन जीये। सुख, स्नेह और भय तीनों स्थितियों में जो विकाररहित और निर्भय होकर रहे, जो सोना को भी माटी समझे, वही सच्चा इन्सान है। वहीं ईश्वर के निकट है। वह मायावी जगत से दूर है। ऐसे मनुष्य से ही इस धरा का कल्याण संभव है। इन पंक्तियों में गुरु नानक ने भौतिक दुनिया की मोह-माया से मुक्त होकर जीनेवाले नर की प्रशंसा की है।

प्रश्न 6.
नहिं निंदा नहिं अस्तुति जाके, लोभ मोह अभिमाना। :
हरष सोक तें रहै नियारो, नाहि मान अपमाना।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के. “जो नर दुख में दुख नहिं मानै” नामक काव्य-पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग मनुष्य के सद्विचारों से जुड़ा हुआ है।
कवि कहता है कि जो मनुष्य निंदा और स्तुति के बीच समभाव से जीता है, जो लोभ, मोह, अभिमान से मुक्त है। हर्ष और शोक के निकट रहकर भी जो अशोक के रूप में जीए। जिसे मान-अपमान की चिंता नहीं हो, वह सच्चा मानव है, महामानव है। इन काव्य पंक्तियों में गुरु नानक ने महामानव के लक्षणों की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने इस मायावी लोक में निर्लिप्त भाव से जीनेवाले कर्मवीरों की प्रशंसा की है। उनके गुणों को बताया है।

प्रश्न 7.
आसा मनसा सकल त्यागिकै जग तें रहै निरास
काम क्रोध जेहि परसे चाहिन हि घट ब्रा निवासा।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “जो नर दुख में दुख नहिं मानै” काव्य-पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग मनुष्य के सात्विक जीवन से जुड़ा हुआ है।

कवि कहता है कि वही मनुष्य महामानव है, जो मानसिक विकारों से दूर रहे, जिसने आकांक्षाओं पर विजय प्राप्त कर लिया हो, जिसने सन्मार्ग ग्रहण कर लिया है, इस जग से जिसे कोई मोह-माया नहीं, जो आशा और निराशा के बीच महाप्रज्ञ के रूप में जीये वही लोकोत्तर महामानव है। काम-क्रोध जिसे स्पर्श नहीं कर सका हो उसी के घर में, कंठ में ब्रह्म निवास करता है। कहने का गूढ़ भाव यह है कि सांसारिकता से जो मुक्त होकर जीवन जीता है वही ब्रह्म के निकट है, ईश्वर के निकट है, उसी का जीवन सार्थक है।

प्रश्न 8.
युरु किरपा जेति नर मै कोही मिन्ह यह ति पिलानी
नानक लीन भयो गोविन्द सो न्यों पानि सवानी।।
व्याखया-
प्रस्तुत काव्य पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के “जो नर दुख में दुख नहिं मान” नामक काव्य-पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का प्रसंग गुरु-कृपा के महत्त्व से जुड़ा हुआ है।
कवि कहता है कि जिस मनुष्य पर गुरु-कृपा हो जाती है, उन्हें जुगाति की क्या जरूरत है। उसे किसी प्रकार के उपाय करने, यत्न करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

गुरु नानक परं गुरु की कृपा का ही प्रभाव है कि वे गोविन्द यानी ईश्वर का साक्षात्कार प्राप्त कर सके। जिस प्रकार पानी में पानी को मिलाने पर कोई विकार नहीं दिखता बल्कि दोनों एकात्म रूप में दिखते हैं। दोनों पानी एक समान ही दिखते हैं ठीक उसी प्रकार आत्मा-परमात्मा का भी मिलन होता है। दोनों में रूप या रंग का अंतर नहीं होता है। दोनों मिलकर एकाकार, एक रंग, एक रूप को प्राप्त कर लेते हैं।
इन काव्य पंक्तियों में गुरु महिमा, ईश्वर भक्ति और आत्मा-परमात्मा के रूपाकार पर सूक्ष्म प्रकाश डाला गया है।

राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै कवि परिचय

गुरु नानक का जन्म 1469 ई० में तलबंडी ग्राम, जिला लाहौर में हुआ था । इनका जन्म स्थान ‘नानकाना साहब’ कहलाता है जो अब पाकिस्तान में है । इनके पिता का नाम कालूचंद खत्री, माँ का नाम तृप्ता और पत्नी का नाम सुलक्षणी था। इनके पिता ने इन्हें व्यवसाय में लगाने का बहुत उद्यम किया, किन्तु इनका मन भक्ति की ओर अधिकाधिक झुकता गया । इन्होंने हिन्दू-मुसलमान दोनों की समान धार्मिक उपासना पर बल दिया । वर्णाश्रम व्यवस्था और कर्मकांड का विरोध करके निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का प्रचार किया । गुरुनानक ने व्यापक देशाटन किया और मक्का-मदीना तक की यात्रा की । मुगल सम्राट बाबर से भी इनकी भेंट हुई थी । गुरु नानक ने ‘सिख धर्म का प्रवर्तन किया । गुरुनानक ने पंजाबी के साथ हिंदी में भी कविताएँ की । इनकी – हिंदी में ब्रजभाषा और खड़ी बोली दोनों का मेल है। इनके भक्ति और विनय के पद बहुत मार्मिक हैं । इनके दोहों में जीवन के अनुभव उसी प्रकार गुंथे हैं जैसे कबीर की रचनाओं में, लेकिन इन्होंने उलटबाँसी शैली नहीं अपनाई । इनके उपदेशों के अंतर्गत गुरु की महत्ता, संसार की क्षणभंगुरता, ब्रह्म की सर्वशक्तिमत्ता, नाम जप की महिमा, ईश्वर की सर्वव्यापकता आदि बातें मिलती हैं । इनकी रचनाओं का संग्रह सिखों के पाँचवें गुरु अर्जुनदेव ने सन् 1604 ई० में किया जो ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ । गुरु नानक की रचनाएँ हैं – “जपुजी’, ‘आसादीवार’, ‘रहिरास’ और सोहिला । कहते हैं कि सन् 1539. में इन्होंने ‘वाह गुरु’ कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए ।

निर्गुण निराकार ईश्वर के उपासक गुरुनानक हिंदी की निर्गुण भक्तिधारा के एक प्रमुख कवि हैं। पंजाबी मिश्रित ब्रजभाषा में रचित इनके पद सरल सच्चे हृदय की भक्तिभावना में डूबे उद्गार हैं । इन पदों में कबीर की तरह प्रखर सामाजिक विद्रोह-भावना भले ही न दिखाई पड़ती हो, किन्तु धर्म-उपासना के कर्मकांडमूलक सांप्रदायिक स्वरूप की आलोचना तथा सामाजिक भेदभाव के स्थान पर प्रेम के आधार पर सहज सद्भाव की प्रतिष्ठा दिखलाई पड़ती है । नानक के पद वास्तव में प्रेम एवं भक्ति के प्रभावशाली मधुर गीत हैं । यहाँ नानक के ऐसे दो महत्त्वपूर्ण पद प्रस्तुत हैं । प्रथम पद बाहरी वेश-भूषा, पूजा-पाठ और कर्मकांड के स्थान पर सरल सच्चे हृदय से राम-नाम के कीर्तन पर बल देता है, क्योंकि नाम-कीर्तन ही सच्ची स्थायी शांति देकर व्यक्ति को इस दुखमय जीवन के पार पहुंचा पाता है। द्वितीय पद में सुख-दुख में एक समान उदासीन रहते
हुए मानसिक दुर्गुणों से ऊपर उठकर अंत:करण की निर्मलता हासिल करने पर जोर दिया गया . है । संत कवि गुरु की कृपा प्राप्त कर इस पद में गोविंद से एकाकार होने की प्रेरणा देता है ।

राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

निर्गुण निराकार ब्रह्म के उपासक गुरूनानक निर्गुणभक्ति धारा के प्रखर कवि हैं। पंजाबी समिश्रित ब्रजभाषा इनकी रचना का मूलाधार है। कबीर की तरह इनकी रचनाएँ भले ही न हो फिर भी धर्म-उपासना, कर्मकाण्ड आदि के स्थान पर प्रेम की पीर की अनुभूति स्पष्ट झलकती है।

पहले पद में कवि ने बाहरी वेश-भूषा, पूजा-पाठ और कर्मकाण्ड के स्थान पर सरल हृदय से राम नाम के कीर्तन पर बल दिया है। वस्तुतः कवि दशरथ पुत्र राम की स्तुति न कर परम ब्रह्म उस सत्य की उपासना करने पर बल दिया है जो अगोचर और निराकम है। नाम कीर्तन ही. इस भवसागर से मुक्ति दिलाता है। जिसने जन्म लेकर राम की कीर्तन नहीं किया उसका जीवन निरर्थक है। उस खान-पान, रहन-सहन आदि सभी विष से परिपूर्ण होता है। संध्या, जप-पाठ आदि करने से मुक्ति नहीं मिलती है। जटा बढ़ाकर भस्म लगाने, तीर्थाटन करने से आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति नहीं होती है। गुरू कृपा और राम-नाम ही जीवन की सार्थकता है।

दूसरे पद में कवि ने सुख-दुख में एक समान उदासीन रहते हुए मानसिक दुर्गुणों से ऊपर उठकर अतः करण की निर्भरता हासिल करने पर जोर दिया है। ईर्ष्या, लोभ, मोह आदि से परिपूर्ण मानव के पास ईश्वर फटकता तक नहीं है। जिस प्रकार पानी-पानी के साथ मिलकर अपना स्वरूप उसी में अर्पण कर देता है उसी प्रकार गुरूं की कृपाकर मनुष्य ईश्वर रूपी स्वरूप से प्राप्त कर लेता है।

शब्दार्थ

बिर : व्यर्थ ही
जगि : संसार में
बिखु : विष
नावै : नाम
निहफतु : निष्फल
मटि : मति, बुद्धि
संधिआ : संध्या, संध्याकालीन उपासना
गुरसबद : गुरु का उपदेश
अरुझि : उलझकर
डंड : दंड (साधु लोग जिसे वैराग्य के चिह्न के रूप में धारण करते हैं)
सिखा : चोटी
सुत : जनेऊ
जीअ : जीव
जंत : जंतु, प्राणी ।
महीअल : महीतल, धरती पर
कंचन : सोना
अस्तुति : स्तुति, प्रार्थना
नियारो : न्यारा, अलग, पृथक
परसे : स्पर्श
घट : घड़ा (प्रतीकार्थ – देह, शरीर)
जुगति : युक्ति, उपाय
पिछानी : पहचानी

Bihar Board Class 10 English Book Solutions Chapter 3 Gillu

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B.1. Answer the following questions briefly

Gillu Class 10 Question Answer Bihar Board Question 1.
How did ‘Gillu’ sustain wounds?
Answer:
Gillu had sustained wounds by two crows, to make him a easy prey for-them poking their beaks on his tiny body.

Gillu Class 10th Bihar Board Question 2.
Who started calling the tiny baby squirrel as Gillu?
Answer:
The poetess started calling tiny baby squirrel as ‘Gillu’.

Gillu Question Answer Bihar Board Class 10 English Question 3.
Which ointment was applied on the wounds of the tiny baby squirrel?
Answer:
Pencillin ointment was applied on the wounds of the tiny baby squirrel.

Panorama English Book Class 10 Solutions Bihar Board Question 4.
What does the transformation from the common to the proper noun imply? What difference does a name make?
Answer:
Transformation from the common to the proper noun suggests the identity of a person or thing. It means the condition or character as to who a person or what a thing is. We can recognize a man by his name and easily find him out among other persons. When a person, place or thing is named it becomes a proper noun and it denotes a particular person, place or thing.

10th Hindi Gillu Lesson Questions And Answers Bihar Board Question 5.
What did the writer do with the wonded squirrel?
Ans. The writer wiped the blood of the squirrel and applied pencillin ointment over it and tried to feed him.

B. 2. Answer the following questions briefly 

Gillu Lesson Notes Class 10 Bihar Board Question 1.
How would Gillu inform that he was hungry?
Answer:
When Gillu become hungry, he would inform the narrator by twittering and produced a sound of “chik-chik” after receving some Biscuits or Kaju.

Bihar Board Class 10 English Book Solution Pdf Download Question 2.
What prompted the narrator to set Gillu free?
Answer:
Seeing Gillu sitting near the window and affectionately peering at the world. Outside made the narrator realise that it was necessary to set Gillu free.

English Book Class 10 Bihar Board Question 3.
What is the life span of squirrels?
Answer:
Squarrle have a life span of barely 2 years.

Bihar Board Class 10 English Book Solution Question 4.
What was the favourite food of Gillu?
Answer:
The favourite food of Gillu was Kaju.

Panorama English Book Answers Pdf Bihar Board Class 10 Question 5.
When was his swing taken off?
Answer:
His (Gillu) Swing was taken off after his death.

Gillu Summary In English Bihar Board Class 10 Question 6.
Where did the writer see two crows?
Answer:
The writer saw two crows at the flower-pots in the verandah of her house.

Gillu Question Answers Bihar Board Class 10 English Question 7.
What were the crows doing?
Answer:
The crows were playfully pushing sharply their beaks at the flowerpots. . ‘

Question 8.
Why was the tiny baby squirrel motionless?
Answer:
The tiny baby squirrel had sustained two wounds due to the violent and sudden attack by two crows. It had made him motionless.

Question 9.
How did the writer manage to pour water in the mouth of the motionless tiny baby squirrel?
Answer:
The writer could manage to pour water in the mouth of the motionless tiny baby squirrel after several hours of taking care and vigorous efforts for the same.’

C. 1. Long Answer Questions:

Question 1.
What did the narrator do with the wounded squirrel?
Answer:
The narrator gently lifted the squirrel up from the ground and brought it to her room and wiped the flood from his wound try by using cotton wool and applied pencillin ointment. The narrator tried to feed the squirrel by somehow putting a thin cotton wool wick, to dip in milk in his mouth but the squirrel was unable to open his mouth and drips of milk only slid down from both sides but after few hours the narrator tended to manage to pour one drop of water in his mouth. But on the 3rd day, he becomes much better and assured that he would use his two tiny claws to hold her finger and gaze all around with his blue glass beads like eyes and in 3-4 months, the squirrel astonished everyone with his smooth fur, hushy tail and naughty, refiuegent eyes.

Question 2.
How did the narrator make the tiny baby squirrel hale and hearty?
Answer:
When the poetess (the story writer) found the tiny baby squirrel, lying wounded on the flower-pot in her verandah, first, she Washed the blood from his wounds with cotton wool and applied pencillin ointment over it. A light-weight flower-basket was used as a nest to reside him. It was fitted on the window. He was given all sorts of delicious and nutrient food mostly kaju and biscuits as his meal. The story writer gave him full affection. He even dared to eat in her plate. She had immense intimacy with him. When she did sit to write down, he used to attract her attention by his naughty acts. She was highly pleased with his funny behavior and loving him like her son. Thus the reason behind Gillu’s being hale and hearty was his utmost care, ruitrious food and the affection of the story-writer.

Question 3.
Gillu took little food during the indisposition of the story-writer. What does this suggests?
Answer:
The story-writer had saved his life. She had given all possible comforts and pleasure of life to him. She had an extraordinary affection for him. He even dared to eat in her plate: He was provided with Kaju, biscuits and all sorts of nuitrient and delicious food to eat. Gillu became very’ familiar to her. When she would sit down to work he used to attract her attention by his naughty acts sitting closer to her feet. Sometimes the story-writer, out of joke used to hold Gifu and put his tiny figure in a long envelope.

All these facts suggest that Gillu was so much influenced by her compassionate fealings for him that during her indisposition he used to become aggrieved. He wanted to share her illness. He did not like anything during the period of her indisposition. So, he was taking little food at that time. It also suggests that all the animals and birds have a compassionate feeling. So even the tiny baby squirrel, Gillu had naturally such feeling and excessive attachment as well as love for the story writer.

Question 4.
Do you have any pet animal? How does it show concern for you?
Answer:
Yes, I have got a parrot as my pet bird. I have kept it in a cage. It has got deep intimacy with me and my other family members. Even if I get him out of the cage it does not fly away and comes closer to me. It could touch my feet by its beak showing its love. A few months back, when I was sitting on the hanging chair in my garden, suddenly. I saw a little baby parrot lying on the ground. Perhaps it had fallen from the mango tree. I quickly went there and found it injured. The blood was coming of its little body. I nicely lifted him up and brought it in my room. Washing the blood from its body. I applied some ointment over the wounds. I could manage to pour a few drops of water in its mouth. It became alright within a couple of months.

During day time I arranged its cage in the garden. In the evening, it is shifted in my room. It is very fond of taking bread etc. It would inform me by twittering “chik-chik” when hungry. Whenever I return from my school and open my room, it will express its pleasure by twittering “chik-chik”. During the period of my indisposition it becomes sad and expresses its concern by, twitering in a peculiar manner. If it (parrot) would be kept out of its cage, it will come to me and sit beside me to show its concern relating to my indisposition. I have also great love and attachment with him.

Question 5.
What did the narrator feel at the death of Gillu? Describe her feelings in your own words.
Answer:
Gillu spent two years with the story-writer living in a flower-basket hung on the window as his nest. She was very much perturbed by his death because he was so much closely associated with her. Whenever she was present in her room he would sit near her feet or remain on the table leaning the wall, for hours and watch her activities with his eyes. She had also never dreamt of his being separated. But after two years of his association with her, he took his last breath.

The story-writer witnessed his departure from this world from her own f eyes. She was highly aggrieved by his death. It shocked her much. Gillu was buried under the Sonjuhi creeper because he loved the creaper most and because of her satisfaction. It is her believe that some day she will find him flowering and blossoming in the outward form of a tiny yellow. Juhi flower. Thus it is observed that she was so much aggrieved, as if she had lost her own son. Which was really genuine and but natural.

Question 6.
In what condition did the narrator find Gillu? What did she do with him? What would you do in a similar situation?
Answer:
One morning when the writer entered the verandah from her room, she saw.two crows were pushing sharply their beaks in a funny manner at the flowerpots as if engaged in the game of hide and seek. All of a sudden she saw a tiny baby squirrel lying hidden in the middle of the wall and the flower pot, who must have fallen down from a nest. The tiny baby squirrel sustained two wounds due to the violent attack by the pair of crows.

She gently lifted him up and brought in her room. She first wiped the blood from the wounds and then applied penicillin ointment. Then she tried to feed him milk with the help of a thin cotton-piece. He became alright in thrte-four months. He was named Gillu. She arranged a flower basket, which was hung on the window to be used as his nest. It had become his new residence. She took his all care.

He was provided Kaju, biscuits etc as his meal. He became very familiar to her. Whenever the writer was doing something in her room he used to sit near her feet. Gillu died in about two years. The writer was greatly aggrieved by his death. His body was buried under the Sonjuhi creeper. She was so much loving him that she believed to find him flowering and bloosoming in the outward form of a yellow “Juhi” flower in the next spring season. Thus the writer had given him her motherly affection and care as if he was his son. I shall also express the same gesture of love as the writer had shown with Gillu. I have got very much compassionate feeling for all living beings. There is a pet puppy in my house to whom, I am loving most.

C. 2. Group discussion

Discuss the following in group or pair

(a) Animals/birds can be a good companion of men.
Answer:
I have a pet dog. I call it Ticky. It is my playmate. I have in it a loving and faithful companion. If accompanies me when I go out for a walk. It begins to wag its tail when it sees me on the door. When I leave home for school in the morning. I love it and it loves me too. It licks my feet. I like to play with it. I throw a ball. It runs after it and brings it back holding it in its mouth. It answers to its name. It is very intelligent. It carries my message to my friend. It runs after cats and barks at strangers. It plays with small children and seems to like their company. At times I go on hunting, It goes with me. It helps me track the game. It is a rare animal. It responds to my love. Its special qualities are loyalty, sagacity, and watchfulness. Its fidelity is unquestionable.

(b) Discuss with your friends what you notice in the picture given below:
Answer:
The picture is belongs to the ruins of Nalanda University. Once Nalanda was the renowned ancient university in the world of knowledge. Nalanda is the symbol of the most glorious period of our history. Nalanda had 10,000 students and 1,500 teachers. 100 lecturers were delivered every day at Nalanda. It had made a study of five compulsory subjects grammar, Logic, medical science and handicraft. Its teachers could pay individual attention to the education and training of their students.

C.3. Composition

a. Write a Paragraph in about 100 words on ‘Relation between men and birds”
Answer:
(a) There ace a number of birds around us but the cuckoo, the parrot and the crow are the most common birds known to one and all. There is close relationship between men and birds. The cuckoo comes in spring along with budding flowers and new leaves. It seems to love spring. It sings. It has no sorrow in its song. Its song thrills everyone. Every poet has described it as an a-song bird.
We tame parrots. The parrot is a source of great amusement as an imitator. People make it say funny things and it provides fun to the listeners. Its presence in the house is considered a good omen which saves the family from ill-luck and bad influence.

b. Write a letter to the editor of a newspaper, drawing his attention to the gradual extinction of certain birds in the locality. Also suggest some measures to be taken to preserve birds.
Answer:

Frazer Road
Patna,
June 10, 2012.

To.
The Editor.
The Hindustan times
Patna.

Dear Sir,
I shall feel much obliged if you kindly allow me the use of some of the valuable space in the columns of your esteemed paper to draw the attention of the government to the urgent need to stop cruelty against birds in our locality. Some crazy young boys are killing mainas and crows in my neighborhood locality. Birds are necessary for maintaining an ecological balance. They are also aids of beauty. We all know they are very important for human life.

So I hope, the authorities need to take immediate steps in this direction.

Yours faithfully
Narayan Singh.

D. Word Study

D. 1. Dictionary use:
Ex. 1. Correct the spelling of the following words
Sudenly, pencilin, biscuit, faverite, squirel, exeption, spoted, invelop, pillo
Answer:
suddenly, penicillin, biscuit, favourite, squirrel, exception, spotted, envelope, pillow, belief.

Ex. 2. Transcript the following words in phonetic alphabet as given in the dictionary:
He, Be, Seek, Beek, Room, Hook, My, By, Gap, Have
Answer:
Words — Phonetic
He – hi
Be – fi
Seek – sik
Beek – bih
Room – r m
Hook – hk
my – mai
By – fai
Gap – gaep
Have -haev

D, 2. Word Formation

Read carefully the following sentences taken from the lesson
(a) I gently lifted him up and brought him to my room.
(b) All were pleasantly astonished at his antics.
In the first sentence the word ‘gently’ is an Adverb which is derived from the Word (Adjective) ‘gentle’. The new word has been made by adding the suffix’- ly’ to it. Similarly, in the second sentence ‘pleasantly’ is an Adverb which is derived from the Adjective ‘pleasant’ by adding the suffix ‘-ly’ to it.

Ex. 1. Now make Adverbs from the following Adjectives by adding the suffix -‘ly’ to them
glad, nice, accurate, love, accident, sudden, swift, affectionate total time, bad, sad, beautiful, prompt, intelligent, perfect. profound, polite, dear. home,

Answer:
Adjectives — Adverbs
Glad — gladly
Nice — nicely
Accurate — accurately
Love — lovely
Accident — accidently
Sudden — suddenly
Swift — swiftly
Affectionate — affectionately
Total — totally
Time — timely
Bad — badly
Sad — sadly
Beautiful — beautifully
Prompt  — promptly
Intelligent — intelligently
Perfect — perfectly
Profound — profoundly
Polite — politely
Dear — dearly
Home — homely

D. 4. Phrases

Ex.1. Read the lesson carefully and find out the sentences in which the following phrases have been used. Then use these phrases in sentences of your own.
Unexpectedly, hide and seek, wiping blood, glass-beads like eyes, breakneck speed, the wire-mesh opening, during the course, as well as.
Answer:
unexpectedly:- unexpectedly, one morning when I entered the playground. I saw a man lying on the grass.
Hide and seek:- It seems clouds were playing hide and seek in the sky.
Wiping blood:- After wiping the blood of the injured man the nurse applied some ointment.
Glass beads Like yes:- The squirrel has glass beads like eyes.
Breakneck speed:- Seeing a dog the cat ran away at breakneck speed.
The wire mesh opening:- I found another squirrel at the wire-meshed opening of the window.
During the course:- During the course of my illness, lots of my friends visited me.
As well as:- He as well as I am living together.

D. 3. Word-Meaning

Ex. 1. Find out from the lesson the words, the meanings of which have been given in column A. The last few letters of each word have been given in column B.

A                             B
Sudden attack    …….ault
eager and cheerful readiness …..rity
lasting forever   …….nal
queer and typical behavior ……tics
lying on the ground   ….rate.

Answer:
A                         B
Sudden attack — assault
eager and cheerful readiness — alocrity
lasting for ever — eternal .
queer and typical behaviour — antics
Lying on the ground — prostrate

Ex.2. Fill in the blanks with words given below:
Verandah, basket, twittering, swing. free, remarked.
1. When I entered the…………..from the room.
2. I hung a lightweight flower…………………
3. He would inform me by…………………..
4. It was necessary to set him……..
5. Gilluwas an…………………….
6. His…………..was taken off the hook.
7. I saw two crows……….poking their heads at the flowerpots.
8. Everyone………that he would not survive.
Answer:
1. verandah, 2. basket, 3. twittering, 4. free, 5. exception, 6. swing, 7. playfully, 8. remarked

E. Grammar

E. 1. Read carefully the sentences given below
1. When I entered the verandah from the room, I saw two crows playfully poking their beaks at the flowerspot.
2. I used to hold Gillu and I put his tiny body in a long envelope. You see that sentence No. 1 consists of two clauses or simple sentences. These two sentences are combined by using a Relative pronoun ‘when’. Similarly, sentence 2 also consists of two sentences combined by the conjunction ‘and’. There are many ways to combine two or more than two sentences into one. Such a process in Grammar is called ‘synthesis’ or ‘combination’.
Following is the list of some conjunctions or sentence connectors:

And but or either or Neither-nor since
because though as besides as long therefore
hence having seeing so now being
when whenever wherever despite as soon as no sooner

Ex.1. Now combine the following sentences into one sentence
1. She came, she took her lunch:
2. He got first class. He laboured hard.
3. Sheela was suffering from fever. She could not attend school.
4. The teacher entered the class. He started teaching.
Answer:
1. She came and took her lunch.
2. He laboured so hard that he got first class.
3. Sheela could not attend her school because she was suffering from fever.
4. As soon as the teacher entered the class he started teaching.

G. Translation

Translate the following sentences into Hindi/your mother tongue.
1. As if they engaged in the game of hide and seek
2. Everyone remarked that he would not survive.
3. He would venture close to my feet.
4. He devised a novel way of doing it.
5. I got up to catch him.
6. I made a small opening.
7. He stepped in.
8. I would reach the dining-room.
9. Everyone would offer him Kaju.
10. I discovered it was full of Kaju.
Answer:
1. मानों वे लुका-छिपी का खेल खेल रहे थे।
2. हर व्यक्ति यही कहता कि वह नहीं बचेगा।
3. वह मेरे पैर के पास आने का साहस करता।
4. उसने यह (उक्त कार्य) करने के लिए एक नया अनोखा ढंग अख्तियार किया।
5. मैं उसको पकड़ने के लिए उठती। 6. मैंने एक छोटा सा स्थान खोल रखा थी।
7. वह अन्दर आया ।
8. मैं भोजन गृह में पहुँचती थी।
9. हर कोई उसे काजू देता था।
10. मैंने पाया कि वह (स्थान) काजू से भरा हुआ था।

Comprehension Based Questions With Answers

Read the following extracts carefully and answer the questions that follow each
1. Unexpectedly, one morning, when I entered the verandah from the room, I saw two crows playfully poking their beaks at the flowerpots, as if engaged in the game of hide and seek. Suddenly, my assiduous critique of this mythical talc :he crow was intercepted by my gaze that fell on this tiny being, lying hicu . in the gap at the junction of the pot with the wall. Moving closer, I saw that it was a tiny baby squirrel that must have accidentally fallen down from a nest and was now being considered by the crows to be an easy prey. Having sustained two wounds due to the assault by the pair of crows was enough for this tiny being and he was now motionless, clinging to the pot.

Everyone remarked that as he would not survive after having been so assaulted by the crows, he be left alone. But, my mind refused to accede to their views, and therefore, I gently lifted him up and brought him to my room, and after wiping the blood from his wounds with cotton wool, applied Penicillin ointment.

Questions:
(i) What did the authoress find in the morning?
(ii) Who had assaulted the baby squirrel?
(iii) How did the authoress serve the injured squirrel?
(iv) Find the word from the passage which means push sharply’.
Answers:
(i) The authoress found an injured baby squirrel in the morning.
(ii) A pair of crows had assaulted the baby squirrel.
(iii) The authoress brought him to her room and after wiping the blood from his wounds with cotton wool, applied Penicillin ointment.
(v) The word is poking.

2. I tried to feed him by somehow putting a thin cotton wool wick, dipped in milk to his mouth, but he was unable to open his mouth and the drops of milk only slid down from both sides. Only after several hours of tending could I manage to pour one drop of water in his mouth. But, on the third day he became so much better and assured that he would use his two tiny claws to hold my finger and gaze all around with his blue, glass-beads-like eyes. And in three-four months, he astonished everyone with his smooth fur, bushy tail and naughty, refulgent eyes.

A transformation from common to proper noun followed and we started calling him, Gillu! I hung a light-weight flower basket lined with cotton wool on the window with the help of a wire. For two years, this was Gillu’s abode. All were pleasantly astonished at his antics and intellect.
Questions:
(i) Name the title and the writer of this passage.
(ii) How did the writer try to feed the squirrel?
(iii) When eh she get succeed in feeding him?
(iv) When did she call him with a new name?
(v) What the name was given to the squirrel?
(vi) How long did the squirrel live with the writer and how?
Answers:
(i) The title of the story is Gillu and its writer is Mrs. Mahadevi Verma.
(ii) She tried to feed the squirrel by somehow putting a thin cotton wool wick, dipped in milk to his mouth, but he was unable to open his mouth and the drop of milk rollfed down.
(iii) After several hours of tending could she managed to pour one drop of water in his month.
(iv) When authoress made Gillu’s new abode, she called him with a new name.
(v) He was named Gillu.
(vi) Gillu lived for two years with the writer with all his antics and intellect. .

3. When I would sit down to write, he would be seized by such an acute desire to attract my attention that he devised a novel way of doing it. He would venture close to my feet, whiz swiftly up the curtains and descend with the same breakneck speed. This sequence would continue till the time I got up to catch him. On some occasions, I used to hold Gillu and put his tiny body in a long envelope. Sometimes, he would continue to stand on the table leaning against the wall in such an amazing condition for hours, and watch my activities with his radiant eyes.

Questions:
(i) Who has written this extract?
(ii) What does the narrator describe in this passage?
(iii) What would Gillu do to attract the narrator’s attention?
(iv) Who would watch the activities of the narrator?
(v) Which word in the passage means ‘come down?
Answers:
(i) Mahadevi Verma has written this extract.
(ii) The narrator describes the antics and intelligence of Gillu, her pet squirrel.
(iii) In order to attract the narrator’s attention, Gillu would whiz swiftly up the curtains and descend at the same speed.
(iv) Gillu would watch the activities of the narrator with his shining eyes.
(v) The word ‘descend’ means ‘come down’.

4. I have several pet animals and birds and all of them are quite fond of me. I don’t remember any of them daring to eat from my plate.

Given was an exception. The moment I would reach the dining-room, he would emerge from the window, cross over the courtyard wall and the verandah, reach the table and would want to sit in my plate. With great difficulty, I taught him to sit close to my plate. His favorite food, where he would dexter¬ously eat each grain of rice. His favorite food was Kaju and when not avail¬able for several days, he would refuse other food items and threw them down from the swing.

Around that time, being injured in a motor car accident, I had to spend some days in the hospital. Those days, whenever my room was opened, Gillu would rush down from his swing, but on seeing somebody else, he would, with the same alacrity, scuttle back to sit in his nest. Everyone would offer him Kajjj, but when I cleaned up his swing on my return from the hospital, I discovered it was full of Kaju, which only showed how little he was eating his favorite food those days! During the course of my indisposition, he would sit near my head on my pi How and gently stroke my forehead and hair, and his moving away was like the going away of a nurse or attendant!

Questions:
(i) Why was Gillu an exception for the writer?
(ii) Describe how did Gillu share with the authoress at dinner?
(iii) What did Gillu do when the writer was in ill health?
(iv) What did the writer discover?
Answers:
(i) Though the writer had several pet animals and birds. All of them were quite fond of her, but none of them was daring to eat from her plate. So Gillu was an exception. He won her heart.
(ii) The moment the authoress would remain in the dining room, he would emerge from the window cross over the courtyard wall and the verandah reach the table and would want to sit in her plate, but she taught him to sit close to her plate.
(iii) When the writer was in ill health he would sit near her head on her pillow and gently’stroke her forehead and hair, and his mov¬ing away was like the going away of a nurse or attendant.
(iv) During the period the authoress was in hospital Gillu did not eat more Kaju. She found in her room, there was full of Kaju but he did not eat them all.

5. When I used to work during summer afternoons, Gillu would abstain from going outside or sitting in his swing. To keep himself close to me and also to tackle the summer heat, he had discovered a totally new method. He would lie prostrate on the surahi kept near me and thus remain both close to me as well as be cool!

Squirrels have a life span of barely two years; as such, Gillu’s lease of life finally came to an end. For the whole day, he neither ate nor ventured out. In the night, even with the pain of going away, he came to my bed from the swing, and clutched the same finger with his icy claws, which he had clung to, in his near death-like state during his natal days. The claws were getting so cold that I switched on the heater and tried to give him some warmth. But, as the first ray of the morning touched him, he departed.

His swing was taken off the hook and the opening made in the wire- mesh window was closed.
Gillu w’as put to eternal rest under the Sonjuhi creeper-both, because he oved this creeper most and also because of the satisfaction. I derive from my belief that some spring day I will find him flowering and blossoming in the guise of a tiny yellow Juhi flower!

Questions:
(i) How did Gillu make himself cool in summer?
(ii) How long does Squirrel live?
(iii) Describe the end of Gillu?
(iv) How would the authoress find him again?
Answers:
(i) During summer afternoons when the authoress used to work, Guilu would abstain from going outside or sitting in his swing. To keep himself cool and close to her he would lie prostrate on the surahi kept near her and thus remain both close to her as well as be cool.
(ii) It.is said that Squirrels have a life span of barely two years.
(iii) Gillu’s lease of life finally came to an end. For the whole day, he neither ate nor ventured out. In the night, even with the pain of going away, he came to her bed from the swing and clutched the same finger with his icy claws. They were getting cold, but in the very morning he died.
(iv) The authoress put the dead body of Gillu to eternal rest under the Sonjuhi creeper for both the reasons, (i) because he loved that creeper most and (ii) because of her satisfaction. She believed that some spring day she would find him flowering and blossoming in the guise of a tiny yellow Juhi flower.

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Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 1 जल और जंगल

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 1 जल और जंगल Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 1 जल और जंगल

Bihar Board Class 7 Science जल और जंगल Text Book Questions and Answers

अभ्यास

जल और जंगल वर्ग 7 Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन सत्य है अथवा असत्य
(क) वर्षा जल का चरम स्रोत है।
(ख) नदियों का जल खेतों में सिंचाई का एकमात्र साधन है।
(ग) जल की कमी की समस्या का सामना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी करते हैं।
उत्तर:
(क) सत्य
(ख) असत्य
(ग) असत्य।

Bihar Board Class 7 Science Solution In Hindi प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(क) भौमजल प्राप्त करने के लिए …………. प्रथा …………. का उपयोग होता है।
(ख) जल की तीन अवस्थाएँ …………. …………. …………. जल और वाष्य
(ग) भूमि की जल धारण करने वाली परत …………. कहलाती है।
उत्तर:
(क) नलकूप, कुंआ
(ख) बर्फ, जल, वाय,
(ग) भौम जल-स्तर।

Bihar Board Class 7 Science Solution प्रश्न 3.
समझाइए कि भौमजल की पुनः पूर्ति किस प्रकार होती है?
उत्तर:
जब वर्षा होती हैं तो वर्षा का पानी पृथ्वी पर गिरती है, जल पृथ्वी पर बने गड्ढों, तालाबों, नदियों में जमा होता है और धीरे-धीरे रिसकर पृथ्वी के नीचे गड्ढों में जमा होता है । भूमि के अन्दर जल के रिसाव को अन्त:स्पंदन कहते हैं। अन्त:स्यंदन की क्रिया धीरे-धीरे होती है। खेतों का पानी का रिसाव भी जमीन के अन्दर होता है। इस प्रकार की प्रक्रिया के कारण भीमजल की पुनः परिपूर्ति होती है।

Bihar Board Class 7 Science Chapter 1 प्रश्न 4.
भीम-जल स्तर के नीचे गिरने के लिए उत्तरदायी कारकों को समझाइए।
उत्तर:
ये बात सच है कि आज के दिनों में भौम जल-स्तर नीचे गिर गया है और गिरता चला जा रहा है। इसका मुख्य कारण वनों की कटाई होना, वनों की कटाई होने से वर्षा कम होती है और भौमजल को पुनः परिपूर्ति नहीं हो पाती। दूसरा कारण औद्योगिकीकरण जिसके कारण कल-कारखानों में भूमि जल का उपयोग अधिक होना, साथ ही साथ वायुमण्डल प्रदूषित सड़कों का निर्माण अधिकाधिक हाना जिसस जल का रिसाव पृथ्वा क अन्दर रुक जाता है। सिचाई के लिए भौमजल का प्रयोग होना, जल की वर्षादि जिससे ज्यादा जलवाष्य बन जाते है। तालाबों को खेत में बदलना जिसके कारण पानी का जमाव न हो पाता है। ये सब कारण से भीमजल का स्तर नीचे गिर रहा है।

Bihar Board Class 7 Science प्रश्न 5.
कम-से-कम जल का उपयोग करते हुए बगीचे लगाने तथा रख-रखाव के लिए क्या कदम उठाएंगे?
उत्तर:
बगीचं लगाने के लिए जल का कम उपयोग तभी संभव है जब पाइप द्वारा पेड़ की जड़ों में पानी दे ताकि पानी बर्बाद न हो। पेड़ों के चारों और मिट्टी का बाँध बना दें ताकि पानी जड़ को प्राप्त हो और जल का रिसाव पृथ्वी के अन्दर हो। पानी इधर-उधर बहकर बर्बाद न हो।

Bihar Board Class 7th Science Solution प्रश्न 6.
ऐसे सात उत्पादों के नाम बताएं जो हम वनों से प्राप्त करते हैं।
उत्तर:
वनों से हमें इमारती लकड़ी, फल, ऑक्सीजन, गोंद, लाह, शहद, भीमजल, विभिन्न प्रकार के जन्तु ।

Bihar Board Solution Class 7 Science प्रश्न 7.
वनों में कुछ भी व्यर्थ नहीं होता है, क्यों समझाइए।
उत्तर:
वनों में घास जो छोटे-छोटे जोवों का भोजन है। घोड़े, जेवरा, हाथी आदि जानवरों के लिए वनस्पति भोजन है। सुखी पत्तियाँ सड़कर मस बनाने में सहायता करते हैं। मृत जीव जन्तु भी अपघटित होकर ह्यूमस में परिवर्तित हो जाते हैं। ये पौधों के पोषण में सहायक होते हैं। वनों के पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। लकड़ियाँ मानव के उपयोगी हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वनों की हरेक चीजें चाहे वह सुखी पत्तियाँ ही क्यों न हों उपयोगी हैं। जीव-जन्तु और वनस्पति एक-दूसरे पर निर्भर है।

Bihar Board Class 7 Science Book Solutions प्रश्न 8.
अपघटक किसे कहते हैं ? ये वन एवं जीवों की वृद्धि में किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर:
छोटे-छोटे जीव जिन्हें खुली आँखों से नहीं देख सकते हैं, जिन्हें हम माइक्रोस्कोप की सहायता से देखते हैं। ये सूक्ष्मजीव कहलाते हैं जिसे अपघटक कहते हैं। ये मृत जीव-जन्तुओं को अपघटित कर ह्यूमस में परिवर्तित कर देती है और ये पौधों के पोषण में सहायक होती है। नये नये पादपों का जन्म होता है जो शाकाहारी जन्तुओं के लिए भोजन होता है। मांसाहारी जीव को लाभ होता है। अतः जीवों की वृद्धि में सहायक होता है।

Bihar Board 7th Class Science Solution प्रश्न 9.
ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखने में वन के योगदान को समझाइए।
उत्तर:
कार्बन डाइऑक्साइड, वातावरण से पेड़-पौधे ग्रहण करते हैं। अपना भोजन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अपना भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन गैस छोड़ते हैं जो वातावरण में चला जाता है और फिर जीव-जन्तु श्वसन क्रिया के फलस्वरूप ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित होता है ये क्रिया लगातार चलती रहती है और वातावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड संतुलित रहते हैं।

Bihar Board Class 7 Science Book प्रश्न 10.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(क) कीट मधुमक्खियाँ और पक्षी, पुष्पी पादपों की ………… सहायता करते हैं।
(ख) वन शुद्ध करते हैं …………. और …………. को।
(ग) वन में क्षमवान पत्तियों और जन्तु ……… को समृद्ध करते हैं।
(घ) सुक्ष्मजीवों द्वारा मृत पादपों पर क्रिया से ……….. बनता है।
उत्तर:
(क) वृद्धि
(ख) जल और वायु
(ग) पौधों
(घ) ह्यूमस ।

Bihar Board Class 7 Science जल और जंगल Notes

जल ही जीवन है। बिना जल के जीवन संभव नहीं है। प्राय: गर्मी के दिनों में अत्यधिक जल की कमी आ जाती है। पृथ्वी के तीन भाग जल से घिरा है फिर भी जल की कमी है। पृथ्वी पर जल है लेकिन खारा जल है। मृदु जल की कमी है। माना कि 20 लीटर कुल जल पृथ्वी पर है तो उसमें 500 ml. जल ही मृदु जल है। जल की तीन अवस्थाएँ होती हैं। भूमिगत जल (नदियों, तालाबों और झरनों के जल) और वाष्य । जल चक्र के द्वारा जल का संतुलन रहता है फिर भी मृदु जल की कमी होती है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या, उद्योगों का तेजी से बढ़ना, सिंचाई के साथ ही साथ कुप्रबंधन जल की कमी के कारण हैं। भौमजल अर्थात् भूमिगत जल कुआँ, नलकूपों और बोरिंग से प्राप्त करते हैं। भौम जल-स्तर सभी जगह समान नहीं है। कहीं कम गहराई तो कहीं ज्यादा गहराई पर जल प्राप्त होता है।

भौमजल, वर्षा, जल, नदियों, तालाबों का जल मिट्टी से रिसकर भूमि के नीचे गड्ढों, दरारों में एकत्रित होता है। भौमजल पूर्ति का सबसे प्रमुख प्रक्रिया वर्षा जल का रिसना । जनसंख्या की वृद्धि के कारण नगरों का विकास, औद्योगिकीकरण वन का कटाव के कारण भौमजल का स्तर गिर गया है। नलकूपों से सिंचाई, पम्पसेटों से सिंचाई के कारण भी भौमजल का जलस्तर कम हुआ है। वनों की कटाई के कारण वर्षा का कम होना भीमजल का जलस्तर कम हुआ है।

हमारे देश के कई भागों में घन-घोर जंगल है जहाँ भिन्न-भिन्न प्रकार के पेड़ और पशु-पक्षी रहते हैं। वनों तथा उसमें पाये जाने वालों जानवरों की रक्षा सरकार करती है। जंगलों को कटाई पर आज रोक लगी हुई है। हिमालय के पहाड़ों पर चीड़ और देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं। बिहार के चम्पारण क्षेत्र में साल और सागवान के पेड़ पाये जाते हैं। वनों के पशु पेड़ों पर निर्भर रहते हैं। पौधे स्वपोषी होते जवकि पशु परपोषी और मृतपोषी होते हैं। जैसे-घास को कीट, कीट को ओढ़क, मेढ़क को सांप, सांप को गरुड़ इस तरह खाद्य श्रृंखला बनती है। अर्थात् वनों के विभिन्न घटक एक दूसरे पर निर्भर है। वन मृदा को अपरदन से बचाती है।

मिट्टी की सबसे ऊपरी परत ह्यूमस होता है। सूखी पत्तियाँ घास-फूस सड़कर मिट्टी को ह्यूमस बनाती है। छोटे-छोटे जीव जिन्हें हम खुली आँखों से नहीं देख सकते हैं जिन्हें हम माइक्रोस्कोप की सहायता से देखते हैं, ऐसे जीव को सूक्ष्मजीव कहते हैं। मृत जीव-जन्तु अपघटित होकर हामस में परिवर्तित हो जाते हैं। ये पौधों के पोषण में सहायक होते हैं।

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पौधे पृथ्वी से जल अवशोषित करते हैं और जलवाष्प के रूप में जल बाहर निकालते हैं। पेड़-पौधे भूअपरदन को रोकता है और भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है। वन हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। इसकी रक्षा करनी चाहिए।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 छप्पय

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 4 छप्पय

 

छप्पय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

प्रश्न 1.
नाभादास का जन्म कब हुआ था?
(क) 1570 ई. (अनुमानित)
(ख) 1560 ई.
(ग) 1575 ई.
(घ) 1565 ई.
उत्तर-
(क)

प्रश्न 2.
नाभादास किसके शिष्य थे?
(क) रामानंद
(ख) तुलसीदास
(ग) महादास
(घ) अग्रदास
उत्तर-
(घ)

प्रश्न 3.
कबीरदास किस शाखा के कवि हैं?
(क) सगुण शाखा
(ख) सर्वगुण शाखा
(ग) निर्गुण शाखा
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 4.
नाभादास जी कि समाज के विद्वान हैं?
(क) दलित वर्ग
(ख) वैश्य वर्ग
(ग) आदिवासी
(घ) संथाल वर्ग
उत्तर-
(क)

प्रश्न 5.
नाभादास जी कैसे संत थे?
(क) विरक्त जीवन जीते हुए
(ख) पारिवारिक जीवन जीते हुए
(ग) मंदिर में रहते हुए
(घ) व्यापारी बनकर रहते हुए
उत्तर-
(क)

प्रश्न 6.
‘भक्तमाल’ किस प्रकार की रचना है?
(क) भक्त चरित्रों की माला
(ख) जीवनी
(ग) नाटक
(घ) संस्मरण
उत्तर-
(क)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
नाभादास सगुणोपारूक…….. कवि थे।
उत्तर-
रामभक्त

प्रश्न 2.
संपूर्ण भक्तमाल’…….. छंद में निबद्ध हैं।
उत्तर-
छप्पय

प्रश्न 3.
छप्पय एक छंद है जो……….. पंक्तियों का गेय पद होता है।
उत्तर-
छः

प्रश्न 4.
नाभादास गोस्वामी तुलसीदास के……. थे।
उत्तर-
समकालीन

प्रश्न 5.
नाभादास जी स्वामी रामानंद की ही शिष्य………. में शिक्षित थे।
उत्तर-
परंपरा

प्रश्न 6.
………. विमुख जे धर्म सो सब अधर्म करि गाए।
उत्तर-
भगति योग यज्ञ व्रतदान भजन बिदु तुच्छ दिखाए।

छप्पय अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘भक्तमाल’ किसकी रचना है?
उत्तर-
नाभादास की।

प्रश्न 2.
नाभादास किसके समकालीन थे?
उत्तर-
तुलसीदास के।

प्रश्न 3.
नाभादास किसके शिष्य थे?
उत्तर-
अग्रदास के।

प्रश्न 4.
नाभादास के अनुसार किसकी कविता को सुनकर कवि सिर झुका लेते हैं?
उत्तर-
सूरदास की।

प्रश्न 5.
नाभादास किस धारा के कवि थे?
उत्तर-
सगुणोपासक रामभक्त धारा।

छप्पय पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
नाभादास ने छप्पय में कबीर की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है? उनकी क्रम सूची बनाइए।
उत्तर-
नाभादास ने कबीर की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है

  • कबीर की मति अति गंभीर और अंत:करा भक्तिरस से सरस था।
  • वे जाति–पाँति एवं वर्णाश्रम का खंडन करते थे।।
  • कबीर ने केवल भगवद्भक्ति को ही श्रेष्ठ माना है।
  • भगवद्भक्ति के अतिरिक्त जितने धर्म हैं, उन सबको कबीर ने अधर्म कहा है।.
  • सच्चे हृदय से सप्रेम भजन के बिना तप, योग, यज्ञ, दान, व्रत सभी को कबीर ने तुच्छ बताया।
  • कबीर ने हिन्दू, मुसलमान दोनों को प्रमाण तथा सिद्धान्त की बातें सुनाई हैं।

प्रश्न 2.
‘मुख देखी नाहीं भनी’ का क्या अर्थ है? कबीर पर यह कैसे लागू होता है?
उत्तर-
कबीरदास सिद्धान्त की बात करते हैं। वे कहते हैं कि मुख को देखकर हिन्दू–मुसलमान होने का अनुमान नहीं लगाया जाता। वहीं उनके हित की बात बताते हैं कि भक्ति के द्वारा ही भवसागर से पार उतरा जा सकता है। वे सभी को भगवद्भक्ति का उपदेश देते हैं।

प्रश्न 3.
सूर के काव्य की किन विशेषताओं का उल्लेख कवि ने किया है?
उत्तर-
कवि ने सूर के काव्य की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है

  • सूर के कवित्त को सुनकर सभी प्रशंसापूर्वक अपना सिर हिलाते हैं।
  • सूर की कविता में बड़ी भारी नवीन युक्तियाँ, चमत्कार, चातुर्य, अनूठे अनुप्रास और वर्णों के यथार्थ की उपस्थिति है।
  • कवित्त के प्रारंभ से अन्त तक सुन्दर प्रवाह दर्शनीय है।
  • तुकों का अद्भुत अर्थ दिखाता है।
  • सूरदास ने प्रभु (कृष्ण) का जन्म, कर्म, गुण, रूप सब दिव्य दृष्टि से देखकर अपनी रसना से उसे प्रकाशित किया।

प्रश्न 4.
अर्थ स्पष्ट करें
(क) सूर कवित्त सुनि कौन कवि, जो नहिं शिरचालन करै।
(ख) भगति विमुख जे धर्म सो सब अधर्म करि गाए।
उत्तर-
कवि कहता है कि ऐसा कवि कौन है जो सूरदास जी का कवित्त सुनकर प्रशंसापूर्वक अप… सीस न हिलाये।

(ख) कबीर का कहना है कि भक्ति के विमुख जितने भी धर्म हैं उन सबको अधर्म कहा जाना चाहिए। अर्थात् प्रभुभक्ति या भगवद्भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त सब व्यर्थ है।

प्रश्न 5.
‘पक्षपात नहीं वचन सबहि के हित की भाषी।’, इस पंक्ति में कबीर के किस गुण का परिचय दिया गया है?
उत्तर-
पक्षपात नहीं वचन सबहि के हित की भाषी’ से दर्शाया गया है कि कबीर हिन्दू, मुसलमान, आर्य, अनार्य में कोई भेद नहीं रखते हैं अपितु सबके हित की बात करते हैं। वे सिद्धान्तवादी हैं और सिद्धान्तों को लेकर आगे बढ़ते हैं।

प्रश्न 6.
कविता में तुक का क्या महत्त्व है? इन छप्पयों के संदर्भ में स्पष्ट करें।
उत्तर-
कविता में ‘तुक’ का अर्थ अन्तिम वर्गों की आवृत्ति है। कविता के चरणों के अंत में वर्णों का आवृत्ति को ‘तुक’ कहते हैं। साधारणतः पाँच मात्राओं की ‘तुक’ उत्तम मानी गयी है।

संस्कृत छंदों में ‘तुक’ का महत्व नहीं था, किन्तु हिन्दी में तुक ही छन्द का प्राण है।

“छप्पय’–यह मात्रिक विषम और संयुक्त छंद है। इस छंद के छह चरण होते हैं इसलिए इसे ‘छप्पय’ कहते हैं।

प्रथम चार चरण रोला के और शेष दो चरण उल्लाला के प्रथम–द्वितीय और तृतीय–चतुर्थ के योग होते हैं। छप्पय में उल्लाला के सम–विषम (प्रथम–द्वितीय और तृतीय–चतुर्थ) चरणों का यह योग 15 + 13 = 28 मात्राओं वाला ही अधिक प्रचलित है। जैसे–

भक्ति विमुख जो धर्म सु सब अधरमकरि गायो।
योग, यज्ञ, व्रत, दान, भजन बिनु, तुच्छ दिखाओ।

प्रश्न 7.
‘कबीर कानि राखी नहीं’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
कबीरदास महान क्रांतिकारी कवि थे। उन्होंने सदैव पाखंड का विरोध किया। भारतीय षड्दर्शन और वर्णाश्रम को ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। वर्णाश्रम व्यवस्था का पोषक धर्म षडदर्शन। भारत के प्रसिद्ध छः दर्शन हिन्दुओं के लिए अनिवार्य थे। इनकी ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कबीर ने षड्दर्शन को बुराइयों की तीखी आलोचना की और उनके विचारों की और तनिक भी ध्यान नहीं दिया यानी कानों से सुनकर ग्रहण नहीं किया बल्कि उसके पाखंड की धज्जी–धज्जी उड़ा दी। कबीर ने जनमानस को भी षड्दर्शन द्वारा पोषित. वर्णाश्रम की बुराइयों की ओर सबका ध्यान किया और उसके विचारों को मानने का प्रबल विरोधी किया।

प्रश्न 8.
कबीर ने भक्ति को कितना महत्व दिया?
उत्तर-
कबीर ने अपनी सबदी, साख और रमैनी द्वारा धर्म की सटीक व्याख्या प्रस्तुत की। लोक जगत में परिव्याप्त पाखंड व्याभिचार, मूर्तिपूजा और जाति–पाति. छुआछूत का प्रबल विरोध किया। उन्होंने योग, यज्ञ, व्रत, दान और भजन की नदी या उसके समक्ष उपस्थित किया।

कबीर ने भक्ति में पाखंडवादी विचारों की जमकर खिल्लियाँ उड़ायी और मानव–मानव के बीच समन्वयवादी संस्कृति की स्थापना की। लोगों के बीच भक्ति के सही स्वरूप की व्याख्या की। भक्ति की पवित्र धारा को बहाने उसे अनवरत गतिमय रहने में कबीर ने अपने प्रखर विचारों से उसे बल दिया। उन्होंने विधर्मियों की आलोचना की। भक्ति विमुख लोगों द्वारा भक्ति की परिभाषा गढ़ने की तीव्र आलोचना की। भक्ति के सत्य स्वरूप का उन्होंने उद्घाटन किया और जन–जन के बीच एकता, भाईचारा प्रेम की अजस्र गंगा बहायी। वे निर्गुण विचारधारा के तेजस्वी कवि थे। उन्होंने ईश्वर के निर्गुण स्वरूप का चित्रण किया उसकी सही व्याख्या की। सत्य स्वरूप का सबको दर्शन कराया।

छप्पय भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में विपरीतार्थक शब्द लिखें तुच्छ, हित, पक्षपात, गुण, उक्ति
उत्तर-

  • शब्द – विपरीतार्थक
  • तुच्छ – महान्
  • हित – अहित
  • पक्षपात – विरोध, तटस्थता
  • गुण – अवगुण
  • उक्ति – अनुक्ति

प्रश्न 2.
वाक्य प्रयोग द्वारा इन शब्दों का लिंग निर्णय करें। वचन, मुख्य, यज्ञ, अर्थ, कवि, बुद्धि।।
उत्तर-
वचन (स्त्री.)–हमें सदा सत्य वचन बोलनी चाहिए।।
मुख्य (पु.)–यह दुकान के मुख्य कार्यकर्ता है।
यज्ञ (पु.)–अब यज्ञ में पशुवलि नहीं दिया जाता।
अर्थ (पु.)–कविताओं का अर्थ सरल तथा सहज है।
कवि (पु.)–सूरदास एक अच्छे कवि हैं।
बुद्धि (स्त्री.)–उसकी बुद्धि कुशाग्र है।

प्रश्न 3.
विमल में ‘वि’ उपसर्ग है। इस उपसर्ग से पांच अन्य शब्द बनाएँ
उत्तर-
विमल, विमुक्त, विनाश, विशाल, विदग्ध, विहित।

प्रश्न 4.
पठित छप्पय से अनुप्रास अलंकार के उदाहरण चुनें
उत्तर-
अनुप्रास, अस्थिति अति, अर्थ–अद्भूत, दिवि–दृष्टि, हृदय–हरि, कौन कवि, ये प्रथम छप्पय के अनुप्रास अलंकार में प्रयुक्त हैं। अतः ये अनुप्रास अलंकार हैं।

प्रश्न 5.
रसना (जिह्व) का पर्यायवाची शब्द लिखें।
उत्तर-
रसना–जीभ, जबान, जुबान, रसाला, रसिका, स्वादेन्द्रिय आदि।

छप्पय कवि परिचय नाभादास (1570–1600)

नाभादास का जन्म संभवत: 1570 ई. में दक्षिण भारत में हुआ था। इनके पिता बचपन में ही चल बसे और इलाके में अकाल पड़ गया, जिस कारण वे अपनी माताजी के साथ राजस्थान में रहने आ गये। दुर्भाग्यवश कुछ समय पश्चात् इन्हें माता का विछोह भी सहना पड़ा। तत्पश्चात् ये भगवान की भक्ति में लीन रहने लगे गये और अपने गुरु और प्रतिपालक की देखरेख में स्वाध्याय और सत्संग के माध्यम से ज्ञानार्जन करने लग गये।

कवि नाभादास स्वामी रामानंद शिष्य परंपरा के स्वामी अग्रदासजी के शिष्य थे और वे वैष्णवों के निश्चित सम्प्रदाय में दीक्षित थे जबकि अधिकांशतः विद्वानों के अनुसार कवि जन्म से दलित वर्ग के रहनेवाले थे किन्तु अपने गुण, कर्म, स्वभाव और ज्ञान से एक विरक्त जीवन जीने वाले सगुणोपासक रामभक्त थे। कवि नाभादास का अविचलं भगवद् भक्ति भक्त–चरित्र और भक्तों की स्मृतियाँ ही अनुभव सर्वस्व है। इनकी मुख्य रचनाएँ भक्तमाल, अष्टयाम (ब्रजभाषा गद्य) (‘रामचरित’ की दोहा शैली में), रामचरित संबंधी प्रकीर्ण पदों का संग्रह है।

कवि नाभादास गोस्वामी तुलसीदासजी के समकालीन सगुणोपासक रामभक्त कवि थे जिनमें मर्यादा के स्थान पर माधुर्यता अधिक मिलती है। इनकी सोच और मान्यताओं में किसी प्रकार की संकीर्णता नहीं बल्कि ये पक्षपात, दुराग्रह, कट्टरता से मुक्त एक भावुक, सहृदय विवेक–सम्पन्न सच्चे भक्त कवि हैं। लेखक ने अपनी अभिरुचि, ज्ञान, विवेक, भाव–प्रसार आदि के द्वारा प्रतिभा का प्रकर्ष उपस्थित किया है।

कवि की रचना ‘छप्पय’ ‘कबीर’ और ‘सूर’ पर लिखे गये छः पंक्तियों वाले गेय पद्य हैं। कवि द्वारा रचित ‘छप्पय’ भक्तभाल में संकलित 316 छप्पयों और 200 भक्तों का चरित्र वर्णित ग्रन्थ है, में उद्धृत हैं। ‘छप्पय’ एक छंद है जो छः पक्तियों का गेय पद होता है। जो नाभादास की तलस्पर्शिणी अंतदृष्टि, मर्मग्राहणी प्रज्ञा और सारग्रही चिन्तनशैली के विशेष प्रमाण हैं।

छप्पय कविता का सारांश

‘छप्पय’ शीर्षक पद कबीरदास एवं सूरदास पर लिखे गये छप्पय ‘भक्तमाल’ से संकलित है। छप्पय एक छंद है जो छः पंक्तियों का गेय पद होता है। ये छप्पय नाभादास की अन्तर्दृष्टि, मर्मग्राहणी प्रज्ञा, सारग्राही चिन्तन और विदग्ध भाषा–शैली के नमूने हैं।

प्रस्तुत छप्पय में वैष्णव भक्ति के नितांत भिन्न दो शाखाओं के इन महान भक्त कवियों पर लिखे गये छंद हैं। इन कवियों से सम्बन्धित अबतक के संपूर्ण अध्ययन–विवेचन के सार–सूत्र इन छंदों से कैसे पूर्वकथित हैं यह देखना विस्मयकारी और प्रीतिकर है। ऐसा प्रतीत है कि आगे की शतियों में इन कविता पर अध्ययन विवेचन की रूपरेखा जैसे तय कर दी गई हो।

पाठ के प्रथम छप्पय में नाभादास ने आलोचनात्मक शैली में कबीर के प्रति अपने भाव व्यक्त किये हैं।

कवि के अनुसार कबीर ने भक्ति विमुख तथाकथित धर्मों की धज्जी उड़ा दी है। उन्होंने वास्तविक धर्म को स्पष्ट करते हुए योग, यज्ञ, व्रत, दान और भजन के महत्व का बार–बार प्रतिपादन किया है। उन्होंने अपनी सबदी साखियों और रमैनी में क्या हिन्दू और क्या तुर्क सबके प्रति आदर भाव व्यक्त किया है। कबीर के वचनों में पक्षपात नहीं है। उनमें लोक मंगल की भावना है। कबीर मुँह देखी बात नहीं करते। उन्होंने वर्णाश्रम के पोषक षट दर्शनों की दुर्बलताओं को तार–तार करके दिखा दिया है।

छप्पय में कवि नाभादास ने सूरदासजी की कृष्ण की भक्तिभाव प्रकट किये हैं। कवि का कहना है कि सूर की कविता सुनकर कौन ऐसा कवि है जो उसके साथ हामी नहीं भरे। सूर की कविता में श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन है। उनके जन्म से लेकर स्वर्गधाम तक की लीलाओं का मुक्त गुणगान किया गया है। उनकः कविता में क्या नहीं है? गुण–माधुरी और रूप–माधुरी सब कुछ भरी हुई है। सूर की दृष्टि दिव्य थी। वही दिव्यता उनकी कविताओं में भी प्रतिम्बित है। गोप–गोपियों के संवाद के अद्भुत प्रीति का निर्वाह दिखायी पड़ता है। शिल्प की दृष्टि से उक्त वैचित्र्य, वर्ण्य–वैचित्र्य और अनुप्र.सों की अनुपम छटा सर्वत्र दिखायी पड़ता है।

पदों का भावार्थ।

कबीर 1.
भगति विमुख जे धर्म सो सब अधर्म करि गाए।
योग यज्ञ व्रत दान भजन बिनु तुच्छ दिखाए॥
हिंदू तुरक प्रमान रमैनी सबदी साखी।
पक्षपात नहिं वचन सबहिके हितकी भाषी॥
आरूढ़ दशा है जगत पै, मुख देखी नाहीं भनी।
कबीर कानि राखी नहीं, वर्णाश्रम षट दर्शनी।

प्रसंग–प्रस्तुत छप्पय ‘नाभादास’ द्वारा रचित ‘भक्तमाल’ से अवतरित है.। यह नाभादास की सहृदय आलोचनात्मक प्रतिभा का विशेष प्रमाण है। कवि कबीर से संबंधित अब तक के सम्पूर्ण अध्ययन तथा विवेचन का सार–सूत्र इस छंद में वर्णित है जो अत्यन्त विस्मयकारी व प्रीतिकर है।

व्याख्या–कबीर जी की मति अति गंभीर तथा अन्त:करण भक्ति रस से परिपूर्ण था। भाव भजन में पूर्ण कबीर जाति–पाँति वर्णाश्रम आदि साधारण धर्मों का आदर नहीं करते थे। नाभादास कहते हैं कि कबीर जी ने चार वर्ण, चार आश्रम, छ: दर्शन किसी की आनि कानि नहीं रखी। केवल श्री भक्ति (भागवत धर्म) को ही दृढ़ किया। वहीं ‘भक्ति के विमुख’ जितने धर्म हैं, उन सबको ‘अधर्म’ ही कहा है।

उन्होंने सच्चे हृदय से सप्रेम भजन (भक्ति, भाव, बंदगी) के बिना तप, योग, यज्ञ, दान, व्रत आदि को तुच्छ बताया। कबीर ने आर्य, अनार्यादि हिन्दू मुसलमान आदि को प्रमाण तथा सिद्धान्त की बात सुनाई। भाव यह है कि कबीर जाति–पाँति के भेदभाव से ऊपर उठकर केवल शुद्ध अन्त:करण से की गई भक्ति को ही श्रेष्ठ मानते हैं।

सूरदास 2.
उक्ति चौज अनुप्रास वर्ण अस्थिति अतिभारी।
वचन प्रीति निर्वही अर्थ अद्भुत तुकधारी॥
प्रतिबिम्बित दिवि दृष्टि हृदय हरि लीला भासी।
जन्म कर्म गुन रूप सबहि रसना परकासी।।
विमल बुद्धि हो तासुकी, जो यह गुन श्रवननि धरै।
सूर कवित सुनि कौन कवि, जो नहिं शिरचालन करै।

प्रसंग–प्रस्तुत छप्पय ‘नाभादास’ द्वारा रचित ‘भक्तमाल’ से उद्धृत है। इसमें सूरदास के पदों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या–सूरदास की कविता में बड़ी भारी नवीन युक्तियाँ, चमत्कार, चातुर्य, बड़े अनूठे अनुप्रास और वर्गों के यथार्थ की अस्थिति है। वे कवित्त के आदि में जिस प्रकार का वचन तथा प्रेम उठाते हैं उसका अंत तक निर्वाह करते हैं। कविता के तुकों का अद्भुत अर्थ दिखाई देता है। उनके हृदय में प्रभु ने दिव्य दृष्टि दी जिसमें सम्पूर्ण हरिलीला का प्रतिबिम्ब भासित हुआ।

उन्होंने प्रभु का जन्म, कर्म, गुण, रूप आदि दिव्य दृष्टि से देखकर अपनी रसना (जीभ) वचन से प्रकाशित किया। जो कोई भी सूरदास कथित भगवद् गुणगान को अपने श्रवण में धारण करता है उसकी बुद्धि विमल गुण युक्त हो जाती है। आगे नाभादास जी कहते हैं कि ऐसा कौन सा कवि है जो सूरदास जी का कवित्त सुनकर प्रशंसापूर्वक अपना शीश न हिलाए।