Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन सही हैं अथवा गलत? इन्हें तदनुसार चिह्नित करें –
(क) सांख्यिकी केवल मात्रात्मक आँकड़ों का अध्ययन करती है।
(ख) साख्यिकी आर्थिक समस्याओं का समाधान करती है।
(ग) आँकड़ों के बिना अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का कोई उपयोग नहीं है।
उत्तर:
(ख) सही है शेष
(क) एवं
(ग) गलत हैं

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प्रश्न 2.
उन क्रिया-कलापों की सूची बनाएँ, जो जीवन के सामान्य कारोबार के अंग होते हैं? क्या ये आर्थिक क्रिया-कलाप हैं –
उत्तर:

  1. बैंक में नौकरी करना
  2. अध्यापक के द्वारा पाठशाला में पढ़ाना
  3. डॉक्टर के द्वारा रोगी का इलाज करना
  4. टैक्सी ड्राइवर
  5. भुगतान के बदले वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना
  6. विद्युत बोर्ड के द्वारा बिजली की आपूर्ति करना
  7. जल बोर्ड द्वारा पानी की आपूर्ति करना
  8. किसान के द्वारा खेत में हल चलाना
  9. लाभ कमाने के लिए दुकानदार के द्वारा वस्तुओं को बेचना

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प्रश्न 3.
सरकार और नीति-निर्माता आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त नीतियों के निर्माण के लिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं। दो उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
आर्थिक विकास के लिए सरकार तथा नीति-निर्देश बनाने वाले उचित नीतियाँ बनाते हैं। इन नीतियों के निर्माण के लिए वे सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते हैं।
यह तथ्य निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट है –

1. वर्तमान समय में विश्वभर में तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है। अतः सरकार को अब यह निर्णय लेना है कि सरकार विदेशों से कितनी मात्रा में तेल का आयात करे। इस बात का निर्णय लेने के पहले यह देखना पड़ेगा कि वर्ष 2010 में तेल का घरेलू उत्पादन कितना होगा और उस समय तेल की कितनी माँग होगी। बिना सांख्यिकी के सरकार इस मद में तथ्य नहीं जान पाएगी। अतः विदेशों से कितना तेल आयात करना है, इसका निर्णय नहीं लिया जा सकेगा, जब तक हमें तेल की वास्तविक मांग का पता नहीं चलेगा।

2. विकास का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सांख्यिकी का योगदान महत्त्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए; आँकड़ों के अभाव में हम इस बात का निर्णय नहीं ले सकते हैं कि हमारा खाद्यान्नों का उत्पादन कितना होना चाहिए। हम साधनों को देखते हुए कितनी अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।

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प्रश्न 4.
आपकी आवश्यकताएँ असीमित हैं तथा उनकी पूर्ति करने के लिए आपके पास संसाधन सीमित हैं। दो उदाहरणों द्वारा इसकी व्याख्या करें।
उत्तर:
अन्य व्यक्तियों की तरह मेरी भी आवश्यकताएँ असीमित हैं और उनकी संतुष्टि के लिए साधन सीमित हैं। इस बात की पुष्टि मैं निम्नलिखित दो उदाहरणों द्वारा करता हूँ –
1. मुझे 2,000 रुपए महीना जेब खर्च मिलता है और मेरी आवश्यकताएँ बहुत हैं-जैसे क्रिकेट का सामना खरीदना, सिनेमा देखना। 2,000 रुपए में मैं अपनी सारी आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। इन आवश्यकताओं के अतिरिक्त मुझे अपने मित्रों को उनके जन्मदिन पर उपहार भी देने पड़ते हैं। हर महीने मेरी कुछ आवश्यकताएं पूरी नहीं होती।

2. मैं संयुक्त परिवार में रहता हूँ। हम जिस भवन में रहते हैं वह कोई विशेष बड़ा नहीं है। घर में कोई ऐसा कमरा नहीं है, जिसमें अध्ययन कक्ष (study room) बना लूँ। उसी कक्ष में मेरा अलग बिस्तर है। पढ़ने-लिखने में मेरा अलग बिस्तर है। अपने क्रिकेट का सामान वहीं रखू। परंतु मैं ऐसा नहीं कर पाता, क्योंकि हमारे परिवार की आय सीमित है।

प्रश्न 5.
उन आवश्यकताओं का चुनाव आप कैसे करेंगे, जिनकी आप पूर्ति करना चाहेंगे?
उत्तर:
हम उस संतुष्ट की जानेवाली आवश्यकता का चयन करेंगे जो परमावश्यक होगी। आवश्यकताएं कई प्रकार की होती हैं –

  1. अनिवार्य आवश्यकता अर्थात् अस्तित्व बनाए रखने की आवश्यकता
  2. आरामदायक आवश्यकता तथा
  3. सुविधाजनक आवश्यकता। आवश्यकताओं की तीव्रता में भी अंतर होता है। हम सबसे पहले उस आवश्यकता की पूर्ति करेंगे, जिसमें सबसे अधिक तीव्रता होगी।

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प्रश्न 6.
आप अर्थशास्त्र का अध्ययन क्यों करना चाहते हैं? कारण बताइए?
उत्तर:
वर्तमान में हमारा देश गंभीर आर्थिक समस्याओं जैसे-महँगाई, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, बेरोजगारी, गरीबी आदि से जूझ रहा है। अर्थशास्त्र में इन समस्याओं के हल को खोजने का प्रयास किया जाता है। इसके अतिरिक्त अर्थशास्त्र शासन की आर्थिक नीतियों का भी निरंतर अध्ययन करता रहता है, जिससे देश की दशा और दिशा का ज्ञान होता है। इन सभी कारणों से हम अर्थशास्त्र का अध्ययन करना चाहते हैं।

प्रश्न 7.
“सांख्यिकीय विधियाँ सामान्य बुद्धि का स्थानापन्न नहीं होती।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
सांख्यिकी का क्षेत्र बहुत व्यापक है। आज ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में इसका प्रयोग किया जाता है। परंतु यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सांख्यिकी विधियों का प्रयोग बड़े ध्यान और सावधानी से किया जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे सांख्यिकी विधियाँ गलत परिणाम भी दे सकती हैं। इन्हें अज्ञानतावश प्रयोग करने से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इनका प्रयोग एक अंधे मनुष्य के समान नहीं करना चाहिए जो किसी बिजली के खंभे से प्रकाश प्राप्त करने के स्थान पर सहारे का कार्य लेता है। सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग केवल वही व्यक्ति कर सकते हैं जो समझदार तथा विशेषज्ञ हैं। यूल और केंडाल के शब्दों में-“अयोग्य व्यक्ति के हाथों में सांख्यिकीय रीतियाँ (विधियाँ) सबसे भयानक हथियार हैं।” इस बात का स्पष्टीकरण नीचे उदाहरणों से किया जा सकता है –

उदाहरण 1:
एक बार एक राज्य के किसी गाँव में एक भयानक बीमारी फैल गई। उस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए तात्कालिक कई कदम उठाए गए। उस गाँव में सहायता के तौर पर डॉक्टर तथा दवाइयाँ भेजी गईं। एक राजनेता जो दावा करता था कि वह अच्छा सांख्यिकीय निपुण है (उसका दावा झूठा था) उस गाँव में गया। वहाँ जाकर उसने आँकड़ों का संकलन किया और इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि जहाँ पर अधिक डॉक्टर हैं वहाँ पर अधिक मृत्यु हुई है। उसने कहा कि डॉक्टर मृत्यु के लिए दोषी हैं तथा उन्हें दंड मिलना चाहिए।

उदाहरण 2:
कहते हैं कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी तथा दो बच्चों के साथ दूसरे गाँव के लिए गया। रास्ते में एक नदी पड़ती थी। पिता को उस नदी की औसत गहराई मालूम थी। उसने अपनी तथा अपने परिवार के सदस्यों की औसत ऊँचाई की गणना की। उसके परिवार के सदस्यों। की औसत ऊँचाई नदी की औसत ऊँचाई से अधिक थी। अतः उसने सोचा कि वे नदी को सरलता से पार कर सकते हैं, परंतु नदी पार करते समय उसका छोटा बच्चा (जिसकी ऊँचाई नदी की, गहराई से कम थी) नदी में डूब गया। इसका कारण यह था कि उसने समांतर माध्य का प्रयोग सोच-समझकर नहीं किया था।

Bihar Board Class 11 Economics अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मार्शल ने अर्थशास्त्र को कैसे परिभाषित किया है?
उत्तर:
मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय में मानव क्रियाओं का अध्ययन है।

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प्रश्न 2.
जीवन के साधारण व्यवसाय से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जीवन के साधारण व्यवसाय से अभिप्राय मौद्रिक लाभ के लिए की गई क्रियाएँ जैसे-किसी कार्यालय में काम करना, टैक्सी चलाना, पाठशाला में पढ़ना इत्यादि।

प्रश्न 3.
ए. मार्शल कौन थे?
उत्तर:
ए. मार्शल आधुनिक अर्थशास्त्र के जन्मदाता में से एक थे।

प्रश्न 4.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
एक उपभोग को अपनी निश्चित आय से क्या खरीदना चाहिए, जबकि उसके पास क्रय की जाने वाली विभिन्न वस्तुओं की सूची है तथा उन वस्तुओं की उसे कीमत भी ज्ञात है। यही उपभोग की विषय-सामग्री है।

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प्रश्न 5.
उत्पादन से क्या अभिप्राय?
उत्तर:
वस्तुओं में उपयोगिता का सृजन करना या वस्तुओं की उपयोगिता में वृद्धि करना उत्पादन कहलाता है। साधारण शब्दों में वस्तुओं का निर्माण करना ‘उत्पादन’ है।

प्रश्न 6.
उत्पादन में हम क्या अध्ययन करते हैं?
उत्तर:
उत्पादन में हम इस बात का अध्ययन करते हैं कि उत्पादक बाजार के लिए किन वस्तुओं का उत्पादन करे, जब उसे लागत तथा की मतों का ज्ञान है।

प्रश्न 7.
वितरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन से प्राप्त होने वाली राष्ट्रीय आय को मजदूरी, लाभ तथा ब्याज के रूप. में बाँटने को वितरण कहते हैं।

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प्रश्न 8.
हमें दुर्लभता का सामना क्यों करना पड़ता है?
उत्तर:
हमें दुर्लभता का सामना इसलिए करना पड़ता हैं, क्योंकि इच्छाओं का पूर्ति करने के लिए जो वस्तुएँ हमें चाहिए, वे सीमित मात्रा में उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 9.
संसाधनों की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. आवश्यकताओं की संतुष्टि के संसाधन सीमित हैं।
  2. सीमित से साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं।

प्रश्न 10.
एक उदाहरण देकर स्पष्ट करें कि साधन के वैकल्पिक प्रयोग क्या होते हैं?
उत्तर:
भूमि एक साधन है। इसके वैकल्पिक प्रयोग हैं। भूमि पर भवन बनाया जा सकता है। इस पर रबर की खेती की जा सकती है अथवा इस पर गेहूँ की खेती भी की जा सकती है।

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प्रश्न 11.
उपभोग के अध्ययन की विषय-सामग्री क्या है?
उत्तर:
आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं का तथा सेवाओं का उपयोग ‘उपभोग’ कहलाता है। वस्तुओं के उपभोग करने से उनकी उपयोगिता नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है।

प्रश्न 12.
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने से हमारा क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने का उद्देश्य इन समस्याओं का सामना तथा उनके उत्पन्न होने के कारणों का वर्णन करना है।

प्रश्न 13.
अर्थशास्त्र में नीतियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
आर्थिक समस्याओं को सुलझाने में सहायता करने वाले उपायों को नीतियाँ कहते हैं।

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प्रश्न 14.
अंग्रेजी भाषा का (Statistics) शब्द लैटिन भाषा के किस शब्द से लिया गया है?
उत्तर:
Stat Status से।

प्रश्न 15.
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ है?
उत्तर:
बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ अंकों में व्यक्त तथ्यों से है जो व्यवस्थित रूप से एकत्रित किए गए हैं। दूसरे शब्दों में बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ समंक (आँकड़े) हैं।

प्रश्न 16.
समंकों से क्या अभिप्राय है।
उत्तर:
समंकों से अभिप्राय मात्रात्मक तथा गुणात्मक तथ्यों से है, जिनका अर्थशास्त्र में प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 17.
मात्रात्मक तथ्यों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मात्रात्मक तथ्यों से अभिप्राय उन तथ्यों से है जो अंकों से प्रकट किए जाते हैं। उदाहरण के लिए भारत में चावल का उत्पादन 1995-96 में 769.8 लाख टन था, जो बढ़कर 2004-05 में 853.1 लाख टन हो गया।

प्रश्न 18.
समंक या आँकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़े (समंक) उन आर्थिक घटनाओं को कहते हैं, जिन्हें अंकों में प्रकट किया जा सकता है, जैसे-जनसंख्या, कीमत-वृद्धि, उत्पादन आदि के आँकड़े।

प्रश्न 19.
आर्थिक समस्या क्या है?
उत्तर:
आर्थिक समस्या मूल रूप से चयन की समस्या है, जो साधनों की दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 20.
साधनों की मितव्ययिता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की मितव्ययिता से अभिप्राय साधनों का बुद्धिमत्ता से प्रयोग करना है।

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प्रश्न 21.
आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकता में
  2. सीमित साधनों
  3. साधनों का वैकल्पिक प्रयोग

प्रश्न 22.
सीमित साधन से क्या अभिप्राय है? अथवा, साधनों की दुर्लभता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों की दुर्लभता से अभिप्राय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधों का उनकी माँग से कम होना है।

प्रश्न 23.
हम दुर्लभता का सामना क्यों करते हैं?
उत्तर:
क्योंकि हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपलब्ध साधन सीमित हैं।

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प्रश्न 24.
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से अभिप्राय है-साधनों के विभिन्न प्रयोग। उदाहरण के लिए भूमि का प्रयोग खाद्य फसलों के लिए किया जा सकता है अथवा वाणिज्यिक फसलों के लिए या किसी अन्य उपयोग के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 25.
कोई दो उदाहरण दें जिससे पता चले कि सांख्यिकी का प्रयोग विभिन्न कारकों में संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है।
उत्तर:

  1. कीमत तथा मात्रा में संबंध।
  2. कीमत तथा पूर्ति में संबंध।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिक विश्वसनीय है?

  1. सन् 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ जितनहा 2001 ई. में।
  2. सन् 2000 ई. में गेहूँ का उत्पादन 100 मिलियन टन था, जबकि 2001 ई. में यह 121 मिलियन टन था।

उत्तर:
2. दूसरा कथन अधिक विश्वसनीय है।

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प्रश्न 27.
निम्नलिखित तथ्यों में से कौन-सा तथ्य अधिक विश्वसनीय है?

  1. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में 310 व्यक्ति मरे।
  2. अभी हाल के भूचाल में कश्मीर में सैकड़ों व्यक्ति मरे।

उत्तर:
पहला तथ्य अधिक विश्वसनीय है।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से आपको कौन से गुणात्मक समंक मिलेंगे –

  1. सुन्दरता
  2. समझदारी
  3. अर्जित आय
  4. एक विषय में प्राप्त अंक
  5. गाने की योग्यता
  6. सीखने की कला

उत्तर:

  1. सुंदरता
  2. समझदारी तथा गाने की योग्यता
  3. सीखने की कला

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प्रश्न 29.
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में क्या संबंध है? अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
वस्तु की कीमत और उसकी माँग में विपरीत संबंध है। कीमत तथा माँग विपरीत दिशाओं में चलती है। अन्य बातें पूर्ववत् रहने पर कीमत में वृद्धि होने से उसकी माँग में कमी आएगी।

प्रश्न 30.
हम सांख्यिकी का प्रयोग किन गंभीर आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण तथा उसके समाधान के लिए करते हैं?
उत्तर:

  1. कीमतों में वृद्धि
  2. जनसंख्या में वृद्धि
  3. बेरोजगारी
  4. निर्धनता आदि

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण लिखें।
उत्तर:

  1. असीमित आवश्यकताएँ (Unlimited Needs): मनुष्य की आवश्यकताएँ अनंत हैं। उनकी कोई गिनती नहीं। ये आवश्यकताएं बार-बार उत्पन्न होती है।
  2. सीमित साधन (Limited Sources): आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित (दुर्लभ) हैं। दूसरे शब्दों में आवश्यकताओं की पूर्ति के उपलब्ध साधन दुर्लभ हैं।
  3. सीमित साधनों का वैकल्पिक प्रयोग (Alternative Uses of Resources): आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए साधन न केवल सीमित हैं, अपितु उनका वैकल्पिक प्रयोग भी है। एक साधन को विभिन्न रूपों में उपयोग किए जा सकते हैं।

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प्रश्न 2.
एक कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 2,500 है। क्या इसे सांख्यिकीय कहा जाएगा? तर्कयुक्त उत्तर दें।
उत्तर:
इसे सांख्यिकी नहीं कहा जाएगा। इसका कारण यह है कि सांख्यिकी तथ्यों का एक समूह है। यह एक तथ्य नहीं है। सांख्यिकी केवल तथ्यों के समूह का अध्ययन करती है। और इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। विद्यार्थियों की संख्या एक तथ्य है। इससे हम कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। यदि हमें यह दिया हुआ हो कि पिछले वर्ष एक कॉलेज में 2,300 विद्यार्थी थे और इस वर्ष 2,500 विद्यार्थी हैं, तब इसे सांख्यिकी कहा जाएगा, क्योंकि यहाँ समक तथ्यों का समूह है तथा इनमें तुलना की जा सकती है।

प्रश्न 3.
सांख्यिकी के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर:
सांख्यिकी के दो कार्य (Two functions of statistics):
सांख्यिकी के कई कार्य हैं। उनमें से दो कार्य निम्नलिखित हैं –

1. जटिल तथ्यों को सरल तथा स्पष्ट बनाना (Presenting comple facts into simple and clear form):
सांख्यिकी साधारण तथा असाधारण सभी जटिल आर्थिक तथ्यों को संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। संक्षिप्त तथा स्पष्ट रूप से प्रकट किए गए तथ्य सरलता से समझे जा सकते हैं।

2. नीति निर्धारण में सहायता करना (Helpful in the furmulation of policies):
उचित नीतियाँ निर्धारित करने में सांख्यिकी आधारभूत सामग्री प्रदान करती है। बिना पूर्ण संकलित तथ्यों के कुशल नीति निर्धारण अत्यंत कठिन है। उदाहरण के लिए यह निर्णय करना है कि भारत 2007 में कितना पेट्रोल दूसरे देशों से आयात करेगा। इसके लिए हमें यह पता लगाना पड़ेगा कि उस वर्ष देश में कितना उत्पादन होगा। इस जानकारी के बिना हम पेट्रोल के आयात के विषय में नीति नहीं बना सकते।

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प्रश्न 4.
सांख्यिकी का बहुवचन तथा एकवचन रूप में अर्थ समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है – कवचन, बहुवचन –

  1. बहुवचन के रूप में अर्थ अंकों में व्यक्त की गई सूचना तथा अन्य आँकड़ों से होता है।
  2. जैसे-जनसंख्या के आँकड़े, रोजगार सम्बन्धी आँकड़े की की परिभाषा लिखिए।

प्रश्न 5.
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
उत्तर:
सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं –

  1. सांख्यिकी जटिल तथ्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करती है।
  2. सांख्यिकीय आंकड़ों को तुलनात्मक बनाती है, जिनसे लाभदायक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
  3. सांख्यिकी पूर्वानुमान तथा उचित नीतियों के निर्णय में सहायता करती है।
  4. सांख्यिकी से व्यक्ति के ज्ञान तथा अनुभव में वृद्धि होती है।
  5. सांख्यिकी में दो या दो से अधिक तथ्यों के संबंध में भी ज्ञात किया जा सकता है।

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प्रश्न 6.
सांख्यिकी की प्रमुख विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
सभी समंक सांख्यिकी नहीं कहला सकते हैं। जिनमें निम्नलिखित विशेषताएँ विद्यमान होती हैं –

  1. समंक तथ्यों के समूह होते हैं।
  2. समंक संख्याओं में व्यक्त किए जा सकते हैं।
  3. समंक अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. समंक का संकलन गणना या अनुमान विधि द्वारा किया जा सकता है।
  5. समंकों का संग्रहण किसी पूर्व निश्चित उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
  6. समंकों को सुव्यवस्थित ढंग से एकत्र किया जाना चाहिए।
  7. समंक एक-दूसरे से संबंधित रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 7.
सांख्यिकी अर्थशास्त्री तथा प्रशासक के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
1. अर्थशास्त्रियों के लिए उपयोगी (Useful for Economicst):
एक अर्थशास्त्री आर्थिक समूहों, जैसे-कुल राष्ट्रीय उत्पाद, उपभोग, बचत, निवेश और मुद्रा के मूल्य होने वाले परिवर्तनों के मापन के लिए समंकों पर निर्भर रहता है। आर्थिक सिद्धांतों का सत्यापन करने तथा परिकल्पनाओं की जाँच करने के लिए भी सांख्यिकीय विधियों का ही प्रयोग किया जाता है।

2. प्रशासक के लिए उपयोगी (Useful for Administrator):
एक सफल प्रशासक को उचित नीति निर्माण के लिए देश में बसने वाले लोगों की संख्या, देश की संपत्ति, आयात और निर्यात की मात्रा, औद्योगिक और कृषि उत्पादकता, श्रम स्थिति, मूल्य स्थिति आदि सभी संबंधित आँकड़ों का ज्ञान होना जरूरी है। ये सभी आँकड़े उसे सांख्यिकी से प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 8.
सांख्यिकी एक व्यापार के लिए किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर:
एक कुशल व्यापारी उपयुक्त आँकड़ों के आधर पर ही वस्तु की माँग का अनुमान लगाता है और क्रय-विक्रय व विज्ञापन नीतियाँ निर्धारित करता है। माँग का पूर्वानुमान लगाते समय ऋतुकालीन परिवर्तनों, व्यापार चक्रों, ग्राहकों की अभिरुचि, रीति-रिवाज, जीवन-स्तर आदि के यथेष्ट आँकड़ों को ध्यान में रखता है।

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प्रश्न 9.
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती।
  2. इनमें केवल संख्यात्मक इकाइयों का अध्ययन किया जाता है।
  3. इसमें गुणात्मक तथ्यों जैसे-वृद्धि, व्यवस्था इत्यादि का अध्ययन नहीं किया जाता है।
  4. सांख्यिकी नियम केवल औसत रूप में ही सत्य है।
  5. सांख्यिकीय का दुरुपयोग किया जाता है।

प्रश्न 10.
“झूठ तीन प्रकार के होते हैं-झूठ, सफेद झूठ और सांख्यिकी।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
सांख्यिकी को सबसे बड़ा झूठ का रूप का मानने का अभिप्राय है कि हम इसके द्वारा किसी भी सही चीज को झूठा सिद्ध कर सकते हैं। राजनीति तथा प्रशासन में सांख्यिकी का इस संदर्भ में बहुत उपयोग किया जाता है। आँकड़ों (सांख्यिकी) के आधार पर सत्ताधारी दल यह सिद्ध कर सकता है कि पंचवर्षीय योजनाओं से भारत में प्रत्येक क्षेत्र में आशातीत प्रगति हुई है जबकि विरोधी दलों के सदस्यों आँकड़ों से यह सिद्ध कर सकते हैं कि योजना काल में सामान्य व्यक्ति की स्थिति पहले से खराब हो गई है।

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प्रश्न 11.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकी विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में प्रमुख निम्नलिखित सांख्यिकीय विधियों का उपयोग होता है –

  1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data): सांख्यिकी की पहली विधि में किसी समस्या से संबंधित आँकड़ों को एकत्रित करते हैं।
  2. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Data): सांख्यिकी की दूसरी विधि का संबंध के प्रस्तुतीकरण से है।
  3. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data): सांख्यिकी की तीसरी विधि का संबंध आँकड़ों के विश्लेषण से है।
  4. आँकड़ों का निर्वाचन (Interpretation of Data): इस विधि में आँकड़ों के निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

प्रश्न 12.
सांख्यिकी को अंकों में प्रकट तथ्यों के समूह में परिभाषित किया जाता है। कुछ उदाहरण दें।
उत्तर:
सांख्यिकी तथ्यों का समूह है। किसी एक तथ्य से संबंधित आँकड़ों को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति विशेष की आय को सांख्यिकी नहीं कहा जा सकता है। इसका कारण यह है कि इसकी तुलना नहीं की जा सकती। इसके अतिरिक्त सांख्यिकी तथ्य संख्या में व्यक्त होना चाहिए। यदि तथ्यों को गुणात्मक रूप में प्रकट किया जाता है तो वह सांख्यिकी नहीं कहलाएगी। जैसे-सुन्दरता, ईमानदारी, स्वास्थ्य आदि। राजा ने 80% अंक प्राप्त किए और मोहन ने 90% तो यह संख्या में प्रकट किए तथ्यों का समूह सांख्यिकी कहलाएगा।

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प्रश्न 13.
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार सांख्यिकी की परिभाषा को लिखें।
उत्तर:
होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार समंक तथ्यों के उस समूह को कहते हैं, जो अनेक कारणों – से पर्याप्त सीमा तक प्रभावित होते हैं, जो अंकों में प्रकट किए जाते हैं, यथोचित शुद्धता के अनुसार जिनकी गणना अथवा अनुमान लगाया जाता है, जिन्हें किसी-न-किसी पूर्व-निश्चित उद्देश्य के लिए एक सुव्यस्थित विधि द्वारा एकत्र किया जाता है तथा जिन्हें तुलना के लिए एक-दूसरे के संबंध में रखा जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकीय विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकीय उपकरणों (विधियों) का प्रयोग (Statistical methods used in economic analysis):
सांख्यिकीय सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग होने वाले सांख्यिकीय उपकरण या विधियाँ निम्नलिखित हैं –

1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data):
आँकड़ों का संकलन एक सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत हम आँकड़ों के प्रकार-प्राथमिक व द्वितीयक तथा संकलन की विधियों, संगणना विधियों और न्यायादर्श विधि का अध्ययन करते हैं। आर्थिक विश्लेषण में सर्वप्रथम तथ्यों से संबंधित आँकड़ों का संकलन किया जाता है। सांख्यिकी आँकड़े आर्थिक अनुसंधान के आधार होते हैं।

2. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकी उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

3. आँकड़ों का व्यवस्थितीकरण (Organisation of Data):
आँकड़ों को व्यवस्थित करने की विधि एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है। इसके अंतर्गत आँकड़ों का वर्गीकरण तथा सारणीकरन का अध्ययन किया जाता है। इनका प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक होता है, तभी वे विश्लेषण के लिए उपयोगी बनते हैं।

4. आँकड़ों का विश्लेषण (Analysis of Data):
इस सांख्यिकी उपकरण का प्रयोग आर्थिक विश्लेषण में बहुत आवश्यक है। आँकड़ों के विश्लेषण की विभिन्न विधियाँ, केन्द्रीय प्रवृत्तियों की माप, सहसंबंध, सूचकांक आदि आर्थिक विश्लेषण में बहुत उपयोगी हैं।

5. आँकड़ों का निर्वचन (Interpretation of Data):
आँकड़ों के निर्वचन से अभिप्राय उन्हें अर्थ प्रदान करना है। आँकड़े अपने आप कुछ नहीं बोलते, इन्हें सही अर्थ प्रदान करना तथा इनसे सही अर्थ निकालना होता है। यह भी एक सांख्यिकीय उपकरण है, जिसका आर्थिक विश्लेषण में प्रयोग किया जाता है। यह एक कठिन कार्य है।

6. पूर्वानुमान (Forecasting):
पूर्वानुमान एक उपयोगी सांख्यिकीय उपकरण है जिसका आर्थिक विश्लेषण से संबंधित पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन पूर्वानुमानित आँकड़ों पर अनेक आर्थिक नीतियाँ आधारित होती हैं। उदाहरणार्थ, यह अनुमान लगाना कि दसवीं पचवर्षीय योजना के अंत तक जनसंख्या कितनी होगी और तदनुसार रोजगार आय, उत्पादकता आदि का पूर्वानुमान लगाय जा सकता है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

प्रश्न 2.
सांख्यिकी के प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर:
1, तथ्यों को स्पष्टता प्रदान करना (Facts are clearly presented):
सांख्यिकी का पहला कार्य है कि यह तथ्यों को आंकड़ों में प्रस्तुत करके उन्हें अधिक विश्वसनीय बना देता है। यह कहना कि वर्ष 2000 में इतना गेहूँ का उत्पादन नहीं हुआ था जितना कि 2001 में यदि इस बात को आँकड़ों में कहें कि वर्ष 2000 में गेहूँ का उत्पादन 1000 मिलियन टन था जबकि 2001 में यह 121 मिलियन टन था। दूसरा वाक्य बहुत अधिक विश्वसनीय है।

2. जटिल तथ्यों को सरल बनाना (Simplification of complex facts):
सांख्यिकी विधियाँ अनेक हैं, जैसे-माध्य, माध्यिका, अपरिकरण, जो कि जटिल तथ्यों को सरल बना देती हैं।

3. तथ्यों की तुलना को आसान करना (To make comparisn of facts easy):
विभिन्न प्रकार की सांख्यिकीय विधियाँ आँकड़ों को तुलनात्मक बनाती हैं। प्रतिशत दर और अनुपात इसमें सहायक हैं।

4. व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाना (To increase personal experience):
बाउले ने ठीक ही कहा है कि सांख्यिकी निस्संदेह व्यक्तिगत अनुभव को बढ़ाती है।

5. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in making reasonable policy):
उचित नीति निर्धारण में ये आँकड़े बुनियाद का काम करते हैं।

6. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना (Helpful in forecasting):
भूतकाल में एकत्रित आँकड़े आने वाले भविष्य का अनुमान लगाने में बड़े सहायक होते हैं।

7. तथ्यों के संबंधों का अध्ययन करना (To study relationship between the facts):
सांख्यिकी दो या अधिक तथ्यों के आपस के संबंधों का अध्ययन करती है।

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प्रश्न 3.
सांख्यिकी की सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. सांख्यिकी केवल समूह का अध्ययन करती है। व्यक्तिगत इकाइयों का इसमें अध्ययन नहीं किया जाता है।
  2. सांख्यिकी केवल संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है। इसमें किसी के गुण, बुराई, भलाई का अध्ययन नहीं किया जाता।
  3. सांख्यिकी के नियम इतने यथार्थ नहीं होते जितने भौतिक शास्त्र या रसायन शास्त्र के नियम होते हैं। सांख्यिकी के नियम अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. सांख्यिकी समस्या का सर्वश्रेष्ठ हल नहीं बता सकती है। किसी समस्या को हल करने की अनेक विधियाँ व विधान हैं। सांख्यिकी उनमें से एक है।
  5. सांख्यिकी का दुरुपयोग किया जा सकता है। सांख्यिकी का सबसे बड़ा दोष यह है कि कोई भी दक्ष प्राणी इसकी विधि का गलत प्रयोग करके अपने उपयोग के अनुरूप परिणाम निकाल सकता है। इसका दुरुपयोग भी कर सकता है।

प्रश्न 4.
सांख्यिकी का क्या महत्व (लाभ) है? अथवा, आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में सांख्यिकी की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
सांख्यिकी के अनेक कार्यों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सांख्यिकी का ज्ञान-विज्ञान की प्रत्येक शाखा में बहुत ही महत्त्व है।

1. सांख्यिकी व व्यापार (Statistics and business):
व्यापारी वर्ग अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करना चाहता है। अत: उसे उत्पाद, क्रय, विक्रय, कीमत निर्धारण में सांख्यिकी का सहारा लेना पड़ता है। अनुमान सांख्यिकी पर निर्भर करते हैं।

2. सांख्यिकी व अर्थशास्त्र (Statistics and economics):
अर्थशास्त्र का अंग सांख्यिकी है। अर्थशास्त्र की लगभग प्रत्येक समस्या सांख्यिकीय सहायता से हल होती है। देश में फैली गरीबी, बेकारी, आय, असमानता का समाधन सांख्यिकी से ही सुलभ है।

3. सांख्यिकी तथा बैंकर (Statistics and bankers):
सांख्यिकी के बिना पूर्व अनुमान गलत हो सकते हैं। वह जनता का विश्वास खो सकता है। ऐसी हालत में सांख्यिकी से ही सुलभ ज्ञान उनके लिए आवश्यक है।

4. सांख्यिकी तथा बीमा कंपनियाँ (Statistics and insurance companies):
बीमा कंपनियाँ व्यक्तियों के जीवन आदि का बीमा करती हैं। ये जीवन की प्रत्याशा के आधार पर बीमा-दर निश्चित करती हैं। किसी कंपनी के सारे काम संभवना सिद्धांत पर आधारित होते हैं और यह सिद्धांत सांख्यिकी का है।

5. सांख्यिकी व अनुसंधान (Statistics and research):
सांख्यिकी उपकरण विधियाँ अनुसंधानकर्ता के लिए विशेष लाभदायक है। सांख्यिकी उपकरणों की सहायता से अनुसंधानकर्ता अपनी खोज में तभी सफल होगा जब उसने आँकड़े एकत्रित किए हुए हों।

6. सांख्यिकी व सरकार (Statistics and Government):
वर्तमान समय में सरकार कल्याणकारी सरकार कहलाती है। वह अधिक-से-अधिक जनसुख की भावना से शासन करती है। यातायात, कृषि, व्यापार, आयत-निर्यात, डाक-तार आदि सभी क्षेत्र आँकड़ों पर निर्भर करते हैं। देश का वार्षिक बजट तो सांख्यिकी ही है।

7. सांख्यिकी व मानव कल्याण (Statistics and human welfare):
मानव कल्याण तभी हो सकता है जब है जब उसकी समस्याएँ (गरीबी, बेकारी) हल हुई हों। उनका हल सांख्यिकी के द्वारा हो सकता है।

8. सांख्यकी व पूर्व अनुमान (Statistics and forecasting):
सांख्यिकी का प्रयोग व्यापार, ऋतु-विज्ञान, सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण आदि के पूर्वानुमान लगाने के काम आता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार सांख्यिकी शब्द का प्रयोग यदि बहुवचन में हो तो इसका अर्थ है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

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प्रश्न 2.
रैन्डम हाउस डिक्शनरी सांख्यिकी का अर्थ बनाती है –
(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य
(b) अप्रायोगिक विज्ञान
(c) प्रायोगिक विज्ञान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अप्रायोगिक विज्ञान

प्रश्न 3.
सांख्यिकी आँकड़ों के विश्लेषण की विधियाँ हो सकती हैं –
(a) अविवरणात्मक या अप्रायिकतात्मक
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक

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प्रश्न 4.
इस पाठ्य पुस्तक की विषय-वस्तु है –
(a) विवरणात्मक विधियाँ
(b) प्रायिकतात्मक विधियाँ
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) विवरणात्मक विधियाँ

प्रश्न 5.
जिन चरों को संख्याओं द्वारा मापा जाता है, वे कहलाते हैं –
(a) मात्रात्मक आँकड़े
(b) गुणात्मक आँकड़े
(c) मात्रात्मक व गुणात्मक दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मात्रात्मक आँकड़े

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प्रश्न 6.
गुणात्मक आँकड़ों को दर्शाया जाता है –
(a) संख्याओं में
(b) कोटियों में
(c) संख्याओं व कोटियों दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) संख्याओं में

प्रश्न 7.
अर्थशास्त्री. सांख्यिकी का प्रयोग करते हैं –
(a) मौद्रिक नीति बनाने में
(b) राजकोषीय नीति बनाने में
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में

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प्रश्न 8.
सांख्यिकी की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है –
(a) प्रायोगिक विज्ञानों में
(b) अप्रायोगिक विज्ञानों में
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में

प्रश्न 9.
प्रयोगात्मक आँकड़े आविष्कारक –
(a) स्वयं तैयार करता है
(b) स्वयं या गणकों से एकत्र करवाता है
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वयं तैयार करता है

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प्रश्न 10.
सांख्यिकीय संबंधों में –
(a) शत प्रतिशत शुद्धता होती है
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था?
(क) गंडक
(ख) कोसी
(ग) सोन
(घ) दामोदर
उत्तर:
(घ) दामोदर

प्रश्न 2.
किस नदी का बेसिन भारत में सबसे बड़ा है?
(क) सिंधु
(ख) गंगा
(ग) ब्रह्मापुत्र
(घ) कृष्णा
उत्तर:
(ग) ब्रह्मापुत्र

प्रश्न 3.
कौन-सी नदी पंचनद में सम्मिलित नहीं है?
(क) रावी
(ख) सिंधु
(ग) चनाब
(घ) झेलम
उत्तर:
(ख) सिंधु

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प्रश्न 4.
कौन सी नदी दरार घाटी में बहती है ……………………..
(क) सोन
(ख) यमुना
(ग) नर्मदा
(घ) लूनी
उत्तर:
(ग) नर्मदा

प्रश्न 5.
अलकनन्दा तथा भागरथी नदी के संगम को क्या कहते हैं?
(क) विष्णु प्रयाग
(ख) कर्ण प्रयाग
(ग) रूद्र प्रयाग
(घ) देव प्रयाग
उत्तर:
(घ) देव प्रयाग

प्रश्न 6.
तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को किस नाम से जाना जाता है?
(क) सांगपो
(ख) अरुण
(ग) मूला
(घ) त्रिशूली
उत्तर:
(क) सांगपो

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन-सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी है?
(क) महानदी
(ख) गोदावरी
(ग) कृष्णा
(घ) कावेरी
उत्तर:
(ख) गोदावरी

प्रश्न 8.
किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
(क) कोशी
(ख) वागमती
(ग) गंडक
(घ) दामोदर
उत्तर:
(क) कोशी

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 10 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
निम्न में अंतर स्पष्ट करें –

  • नदी द्रोणी और जल-संभर
  • वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप
  • अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप
  • डेल्टा और ज्वारनदमुख ।

उत्तर:
1. नदी द्रोणी और जल – संभर-बड़ी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र को नदी-द्रोणी जबकि छोटी नदियों व नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को ‘जल-संभर’ कहा जाता है। नदी द्रोणी का आकार बड़ा होता है, जबकि जल-संभ का आकार छोटा होता है।

2. वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप – जो अपवाह प्रतिरूप पेड़ की शाखाओं के अनुरूप हो, से वृक्षाकार (Dendritic) प्रतिरूप कहा जाता है, जैसे उत्तरी मैदान की नदियाँ । जब मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समांतर बहती हों तथा सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर मिलती हों तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा (Trellis) अपवाह प्रतिरूप कहते हैं।

3. अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप – जब नदियाँ किसी पर्वत से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं, तो इसे अपकेंद्रीय प्रतिरूप कहा जाता है। जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील या गर्त में विसर्जित होती हैं, तो ऐसे अपवाह प्रतिरूप को अभिकेंद्रीय (Centripetal) प्रतिरूप कहा जाता है।

4. डेल्टा और ज्वारनदमुख – नदियों के मुहाने तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनाता है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश है, इसे डेल्टा कहा जाता है । जवारनदमुख की रचना नदी के तीव्र लम्बवत् कटाव से होती है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए 

प्रश्न 1.
भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?
उत्तर:
भारत की नदियाँ प्रतिवर्ष जल की विशाल मात्रा का वहन करती हैं, लेकिन समय व स्थान की दृष्टि से इसका वितरण समान नहीं है। वर्षा ऋतु में, अधिकांश जल बाढ़ में व्यर्थ हो जाता है और समुद्र में बह जाता है। इसी प्रकार, जब देश के एक भाग में बाढ़ होती है तो दूसरा भाग सूखाग्रस्त हाता है। यदि हम नदियों की द्रोणियों को आपस में जोड़ दें तो बाढ़ और सूखे की समस्या हल हो जायेगी। पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध होने के कारण पीने के पानी की समस्या भी हल हो जायेगी तथा हजारों, करोड़ों रुपये की बचत होगी और पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। किसानों की आर्थिक हालत सुधरेगी।

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प्रश्न 2.
प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखें।
उत्तर:

  1. प्रायद्वीपीय नदियाँ सुनिश्चित मार्ग पर चलती है
  2. ये नदियाँ विसर्प नहीं बनाती; और
  3. ये नदियाँ बारहमासी नहीं हैं।

(घ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों से अधिक में न दें 

प्रश्न 1.
उत्तर भारतीय नदियों की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर:
उत्तर भारतीय नदियों में हिमालय से निकलने वाली नदियाँ आती हैं। हिमालयी नदी तंत्र के अंतर्गत ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र, सिंधु नदी तंत्र तथा गंगा नदी तंत्र मुख्य हैं। प्रारम्भ में ये नदियाँ हिमालय के अक्ष के समानान्तर बहती हैं, फिर अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती हैं। इन नदियों के निरन्तर बहने के कारण इनके किनारे ऊँचे और ऊँचे होते गए। ये नदियाँ विशाल द्रोणियों का निर्माण करती हैं। ये सदानीरा नदियाँ हैं। अधिकतर प्रायद्वीपीय नदियाँ पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं तथा ये नदियाँ वर्षाधीन हैं। इसके अतिरिक्त ये तटीय नदियाँ होती हैं जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर में जाकर मिलती हैं। हिमालयी नदियाँ हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं जबकि प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी होती हैं। हिमालयी (उत्तर भारतीय नदियाँ) और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में मुख्य अंतर उनको जलवायु के कारण होता है।

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प्रश्न 2.
मान लीजिए आप हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वारा से सिलीगुड़ी तक यात्रा कर रहे हैं। इस मार्ग में आने वाली मुख्य नदियों के नाम बताएँ। इनमें से किसी एक नदी की विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
हिमालय के गिरिपद के साथ-साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा करने पर गंगा, यमुना, शारदा, सोन, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानदी आदि नदियाँ मार्ग में आती हैं। गंगा अपनी द्रोणी और सांस्कृति महत्त्व दोनों के दृष्टिकोणों से भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह भारत का सबसे बड़ा अपवाह तंत्र है, जिसमें उत्तर हिमालय से निकलने वाली बारहमासी व अनित्यवाही नदियाँ और दक्षिण में प्रायद्वीप से निकलने वाली अनित्यवाही नदियाँ शामिल हैं। यह भारत की सबसे पवित्र नदी है। इलाहाबाद के आगे यमुना इसमें आकार मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है।

इससे आगे उत्तर की ओर से गोमती, घाघरा, गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं। दक्षिण की ओर से सोन नदी आकार मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदरवन में विश्व के सबसे बड़े डेल्ट का निर्माण करती है। इसके किनारे पर हरिद्वारा, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, कोलकाता आदि महात्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। इसका अधिकांश जल सिंचाई के उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका जल अमृत के समान माना गया है।

Bihar Board Class 11 Geography अपवाह तंत्र Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य विभाजक का नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट।

प्रश्न 2.
एक ट्रांस हिमालयी नदी का नाम बताएँ जो सिन्धु नदी की सहायक नदी है।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 3.
गंगा की सहायक नदी का नाम बताओं जो दक्षिण से मिलती है?
उत्तर:
सोन नदी।

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प्रश्न 4.
सिन्धु नदी की कुल लम्बाई कितनी है?
उत्तर:
2880 किलोमीटर।

प्रश्न 5.
सिन्धुनदी का उदग्म बताएँ।
उत्तर:
मानसरोवर झील (तिब्बत)।

प्रश्न 6.
उत्तरी भारत तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मध्य जल विभाजन का नाम बताएँ।
उत्तर:
विंध्या-सतपुड़ा श्रेणी।

प्रश्न 7.
दरार घाटियों में बहने वाली दो नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा, ताप्ती।

प्रश्न 8.
सिन्धु नदी का कुल बेसिन क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
1,165,000 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 9.
भारत के दो जल-प्रवाह तन्त्र बताएँ।
उत्तर:
हिमालय नदियाँ तथ प्रायद्वीपीय नदियाँ।

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प्रश्न 10.
पूर्ववर्ती जल प्रवाह की एक नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सिन्धु।

प्रश्न 11.
प्राचीन समय में कौन-सी नदी पंजाब से असम की ओर बहती थी?
उत्तर:
सिन्ध-ब्रह्मा नदी।

प्रश्न 12.
झेलम नदी का स्रोत बताएँ।
उत्तर:
बुल्लर झील।

प्रश्न 13.
गंगा नदी द्वारा निर्मित डेल्टे का नाम लिखें।
उत्तर:
सुंदरवन।

प्रश्न 14.
किस नदी को तिब्बत में सांग-पो कहा जाता है?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्र।

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प्रश्न 15.
किस नदी को दक्षिण की गंगा कहते हैं?
उत्तर:
ब्रह्मपुत्री नदी।

प्रश्न 16.
जलबपुर के निकट नर्मदा नदी कौन-सा जल प्रवाह बनाती है?
उत्तर:
मार्बली रॉक।

प्रश्न 17.
प्राचीन समय में हरियाणा के शुष्क क्षेत्र में बहने वाली नदी का नाम लिखों।
उत्तर:
सरस्वती।

प्रश्न 18.
जोग जल प्रपात कहाँ पर स्थित है?
उत्तर:
शरबती नदी पर (कर्नाटक)।

प्रश्न 19.
भारतीय पठार की नदी का नाम लिखों जो अरब सागर की ओर बहती है।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती।

प्रश्न 20.
प्रायद्वीपीय भारत की एक नदी बताओं जो ज्वारनदमुख बनाती है।
उत्तर:
नर्मदा।

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प्रश्न 21.
प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
गोदावरी।

प्रश्न 22.
कृष्णा नदी का स्रोत कौन-सा है?
उत्तर:
महाबलेश्वर।

प्रश्न 23.
भारत में गंगा नदी का कुल कितना कितना बेसिन क्षेत्रफल है?
उत्तर:
8,61,404 वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 24.
बंग्लादेश में गंगा नदी को क्या नाम दिया गया है?
उत्तर:
पद्मा।

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प्रश्न 25.
उन नदियों के नाम लिखो जो हिमालय नदी तंत्र बनाती हैं।
उत्तर:
सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 26.
प्रायद्वीपीय भारत की बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी।

प्रश्न 27.
एक ट्रांस हिमालय नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
सतलुज।

प्रश्न 28.
खम्बात की खाड़ी में गिरने वाली नदी का नाम लिखें।
उत्तर:
माही।

प्रश्न 29.
अरावली से निकलने वाली नदी का नाम लिखो।
उत्तर:
साबरमती।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं । डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निरक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार है –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

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प्रश्न 2.
गंगा की दो शीर्ष नदियों (Head Streams) के नाम बताइए जो देव प्रयोग में मिलती हैं।
उत्तर:
गंगा नदी उत्तर प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र से निकलती है तथा दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है। देव प्रयाग में इससे दो शीर्ष नदियाँ–अलकनन्दा और भागीरथी आ कर मिलती हैं। इसके बाद इनका नाम गंगा पड़ता है।

प्रश्न 3.
प्रायद्वीप भारत की प्रमुख नदियों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीप की कुछ नदियां पूर्व की ओर बहती हुई खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। इनमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेनार महत्त्वपूर्ण नदियाँ हैं। कुछ नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती हैं। इसमें नर्मदा, ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं।

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प्रश्न 4.
गार्ज (महाखंड) क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पर्वतीय भागों में बहुत गहरे तथा तंग नदी मार्गों को गार्ज कहते हैं। इसे महाखंड भी कहा जाता है। इसके किनारे खड़ी ढाल वाले होते हैं तथा लगातार ऊपर उठते रहते हैं। इसका तल लगातार गहरा होता है। हिमालय पर्वत में ऐसे कई गार्ज मिलते हैं। जैसे – सिन्धु, सतलुज, गार्ज, ब्रह्मपुत्र (दिहांग) गार्ज।

प्रश्न 5.
हिमालय की नदियों के तीन प्रमुख नदी तन्त्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
हिमालय की नदियों का विकास एक लम्बे समय में हुआ है। हिमालय की नदियों को तीन मुख्य तन्त्रों (System) में बाँटा जाता है

  • सिन्धु तन्त्र (Indus System)
  • गंगा तन्त्र (Ganges System)
  • ब्रह्मपुत्र तन्त्र (Brahmaputra System)

प्रश्न 6.
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियाँ लूनी साबरमती तथा माही हैं। अधिकतर नदियाँ रेत में लुप्त हो जाती हैं।

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प्रश्न 7.
उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों को कितने वर्गों में बांटा जाता है?
उत्तर:
भारत का जल प्रवाह देश की भू-संरचना पर निर्भर करता है। इस आधार पर देश की नदियों को दो वर्गों में बांटा जाता है –

  • हिमालय की नदियाँ
  • प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रश्न 8.
पश्चिमी तट पर नदियाँ डल्टा क्यों नहीं बनाती हैं जबकि वे बड़ी मात्रा में तलछट बहा कर लाती हैं?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर नर्मदा औरर ताप्ती प्रमुख नदियाँ हैं। ये नदियाँ काफी मात्रा में तलछट बहा कर ले जाती हैं परन्तु ये डेल्टा नहीं बनाती। इस तट पर मैदान की चौड़ाई बहुत कम है। प्रदेश की तीव्र ढाल है। नदियाँ तेज गति से समुद्र में गिरती हैं। इसलिए तलछट का निक्षेप नहीं होता। संकरे मैदान के कारण नदियों के अन्तिम भाग की लम्बाई कम है जिससे डेल्टे का निर्माण नहीं होता।

प्रश्न 9.
गोदावरी को वृद्ध गंगा या दक्षिणी गंगा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गोदावरी नदी प्रायद्वीप की सबसे बड़ी नदी है। इसका एक विशाल अपवहन क्षेत्र है जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा तथा आन्ध प्रदेश में फैला हुआ है। विशाल आकार और विस्तार के कारण इसकी तुलना गंगा नदी से की जाती है। जिस प्रकार उत्तरी भारत में गंगा नदी का महत्त्व है। गंगा नदी की तरह इसकी भी अनेक सहायक नदियाँ हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

प्रश्न 10.
उस प्रायद्वीपीय नदी का नाम बताइए जिसकी सहायक नदियों का विकास नहीं हुआ है।
उत्तर:
नर्मदा नदी एक द्रोण-घाटी में बहती है। यह एक प्रायद्वीपीय नदी है। इसकी कोई सहायक नदी लम्बी नहीं है। कोई भी नदी 200 किमी से अधिक लम्बी नहीं है।’

प्रश्न 11.
पश्चिमी घाट से निकलने वाली प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:
पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय नदियों का जल विभाजक है जहाँ से कई नदियाँ निकल कर पूर्व की ओर बहती हैं। कावेरी नदी ब्रह्मगिरि माला से निकल कर खाड़ी बंगाल में गिरती हैं। कृष्णा नदी महाबलेश्वर से तथा गोदावरी नदी नासिक क्षेत्र से निकल कर पूर्व की ओर बहती है। कई छोटी-छोटी नदियाँ पश्चिमी घाट से निकल कर पश्चिमी तटीय मैदान में पश्चिम की ओर बहती हैं।

प्रश्न 12.
गंगा तन्त्र में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
गंगा का उदग्म प्रदेश उत्तर प्रदेश के हिमालय में है। गंगा के दाहिने किनारे की मुख्य सहायक नदियाँ यमुना तथा सोन जैसी बड़ी नदियाँ हैं। इसके अतिरिक्त टोन्स तथा पुनपुन जैसी छोटी नदियाँ भी गंगा में मिलती हैं। गंगा के बाएँ पर कई बड़ी नदियाँ इसकी सहायक नदियों के रूप में मिलती हैं । जैसे-राम गंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी तथा महानन्दा । ये सब नदियाँ मिल कर गंगा तन्त्र की रचना करती हैं।

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प्रश्न 13.
सिन्धु तन्त्र में बहने वाली नदियों के नाम लिखें।।
उत्तर:
हिमालय पर्वत के पश्चिम में बहने वाली नदियाँ सिन्धु तन्त्र की रचना करती हैं। सिन्धु तिब्बत में 5,180 मीटर की ऊंचाई पर मान सरोवर झील से निकल कर कश्मीर, पंजाब (पाकिस्तान) में बहती हुई अरब सागर में गिरती हैं। इनकी प्रमुख सहायक नदियाँ सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम हैं।

प्रश्न 14.
गंगा तथा महानदी के डेल्टा के मध्य कौन-सी नदियाँ बहती हैं ?
उत्तर:
गंगा नदी का डेल्टा पश्चिमी बंगाल में तथा महानदी का डेल्टा उड़ीसा राज्य में फैला हुआ है। इनके मध्य में बिहार, उड़ीसा मध्य प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल राज्यों के क्षेत्रों में स्वर्ण रेखा तथा ब्राह्मणी नदी का विस्तार है।

प्रश्न 15.
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर:
जल संभर तथा नदी द्रोणियों में थोड़ा सा अंतर है। एक अपवाह द्रोणी को दूसरे से अलग करनेवाली सीमा को ‘जल संभर’ कहते है। जबकि नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं। जल संभरों का क्षेत्रफल 1000 हेक्टेयर से कम होता है जबकि नदी द्रोणियों का क्षेत्रफल बड़ा होता।

प्रश्न 16. प्रायद्वीपीय
भारत की पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय भारत को पूर्व तथा पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों में अन्तर –
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प्रश्न 17.
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर बताएँ।
उत्तर:
पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अन्तर –
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में बाढ़ प्रवण क्षेत्र बताओं।
उत्तर:
बाढ़ प्रवण क्षेत्र- भारत में प्रतिवर्ष बाढ़ आती हैं। प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है। ऊँची बाढ़ों से फसलों, मकानों और सार्वजनिक सुविधाओं को – बहुत हानि होती है। अनेक लोग और पशु मर जाते हैं, परिवहन और संचार के साधन अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। इनमें सामान्य जन-जीवन भी गड़-बड़ हो जाता है। देश की उत्तरी विशाल मैदान तथा बड़ी नदियों के तटीय क्षेत्रों में गम्भीर बाढ़ के आने की आशंका बनी रहती है।

बिहार के मैदान, पश्चिम बंगाल के उत्तरी तथा दक्षिणी भाग, असम घाटी और कछार प्रायः आने वाली बाढ़ों के लिए कुख्यात हैं। कश्मीर घाटी, पंजाब के मैदान, उत्तर प्रदेश के मैदान, महानदी गोदावरी और कृष्णा के डेल्टा, कावेरी डेल्टा तथा नर्मदा और ताप्ती के निचले भागों में बाढ़ कभी-कभी ही आती है। बाढ़ आने के प्रमुख कारण ये हैं-भारी वर्षा, नदी घाटियों का मंद ढाल, नदी तल में गाद का भारी मात्रा में जमाव तथा जल ग्रहण क्षेत्रों में वनविहीन पहाड़ियाँ। कुछ क्षेत्रों में सड़कों रेलमार्गों और नहरों के निर्माण से जल के प्रवाह में बाधा पड़ती है। जिससे बाढ़ आ जाती है। तटीय क्षेत्रों में कुछ बाढ़े चक्रवातीय तूफानों के कारण भी आती हैं।

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प्रश्न 2.
भारत की नदियाँ किस तरह देश के लिए उपयोगी है?
उत्तर:
भारत की नदियाँ अनेक तरह से हमारे लिये तथा हमारे देश के लिये उपयोगी है। नदियों के किनारे ही मानव बसाव हुआ है और प्रमुख सभ्यता और उत्कृष्ट संस्कृतियाँ विकसित हुई हैं। नदियों से बड़ी मात्रा मे जल नगरों तथा गाँवों तक पहुँचाया जाता है। बहुत से उद्योग भी काफी हद तक जल की आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। हमारे जीवन में मीठे जल की अधिकांश आवश्यकताएँ नदियों से ही पूरी होती है।

भारतीय नदियों के जल का सर्वाधिक उपयोग सिंचाई में होती है। भारतीय नदियाँ प्रतिवर्ष 167753 करोड़ घन मीटर जल बहता है जिसका मात्र 33% अर्थात् 55,517 करोड़ घन मीटर जल ही सिंचाई के उपयोग में आ पाती है। भारतीय नदियों में जलशक्ति की बड़ी संभावनाएँ हैं । कुल नदी जल प्रवाह का 60% हिमालय में, 16% मध्यवर्ती भारत की नदियों में तथा शेष दक्कन के पठार की नदियों में नीहित है। इन नदियों से 60% कार्यक्षमता के आधार पर 4.1 करोड़ किलोवाट जलशक्ति उत्पादन किया जा सकता है।

देश के उत्तर तथा उत्तर पूर्व में क्रमशः गंगा और ब्रह्मपुत्र में, उड़ीसा में महानदी में, आंध्रप्रदेश के गोदावरी एवं कृष्णा गुजरात में नर्मदा एवं ताप्पी नदियों में देश के प्रमुख जलमार्ग हैं। देश के लगभग 10,600 कि०मी० लम्बे नाव्य जलमार्ग है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी प्रमुख नदियाँ हैं। गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और ताप्पी नदी केवल मुहानों के निकट ही नाव्य है। इस प्रकार भारत की नदियाँ देश के लिए पूर्णरूपेण उपयोगी हैं।

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प्रश्न 3.
नदी प्रवृत्तियों से क्या अभिप्राय है? हिमालयी प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना करें।
उत्तर:
नदी प्रवृत्तियाँ-किसी नदी में जल के ऋतुनिष्ठ प्रवाह के प्रतिरूप को इसकी प्रवृत्ति कहते हैं। हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के प्रवाह के प्रतिरूपों में अन्तर का मुख्य कारण जलवायु में अन्तर है। हिमालय नदियाँ सदानीरा हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ, हिम के पिघलने से और वर्षा के जल दोनों की ही आपूर्ति के प्रतिरूप पर निर्भर करती हैं। इनकी प्रवृत्तियाँ मानसूनी और हिमनदीय दोनों ही हैं। इसके विपरीत प्रायद्वीप नदियों की प्रवृत्तियाँ केवल मानसूनी हैं, क्योंकि इन पर केवल वर्षा का ही नियंत्रण है। प्रायद्वीप की विभिन्न नदियों की प्रवृत्तियाँ भी एक समान नहीं हैं, क्योंकि पठार के विभिन्न भागों की वर्षा के ऋतुनिष्ठ वितरण में अन्तर होता है।

गंगा नदी की प्रवृत्ति-जनवरी से लेकर जून तक गंगा में जल का न्यूनतम प्रवाह रहता है। अगस्त या सितम्बर में अधिकतम प्रवाह होता है। सितम्बर के बाद प्रवाह निरन्तर घटता जाता है। इस प्रकार गंगा नदी में एक विशिष्ट मानसूनी प्रवृत्ति है। गंगा की द्रोणी के पूर्वी और पश्चिमी भाग की नदी प्रवृत्तियों में असाधारण अन्तर पाए जाते हैं। मानसूनी वर्षा से पहले या ग्रीष्म ऋतु के पहले भाग में गंगा में पर्याप्त जल बहता है। इसका मुख्य कारण हिमालय पर बरफ का पिघलना है। गंगा की प्रवृत्ति की तुलना, हिमालय की ही अन्य नदी झेलम से की जा सकती है। झेलम में अधिकतम प्रवाह जून या मई में ही हो जाता है, क्योंकि इसका प्रवाह मुख्य रूप से हिमालय की बरफ से पिघलने पर निर्भर करता है। इन दोनों नदियों की प्रवृत्तियों में एक रोचक अन्तर है। इस अन्तर को इन नदियों के अधिकतम और न्यूनतम प्रवाह की भिन्नता के परास (range) में देखा जा सकता है। झेलम की तुलना में, गंगा में अन्तर अधिक सुस्पष्ट है।

प्रायद्वीपीय नदियाँ-प्रायद्वीप की दो नदियों की प्रवृत्तियों में हिमालयी नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना में काफी अन्तर है। नर्मदा में जल विसर्जन की मात्रा जनवरी से जलाई तक काफी कम रहती है लेकिन अगस्त में यह अचानक बढ़कर अधिकतम स्तर पर पहुँच जाती है। अगस्त में नर्मदा में जिस तेजी से जल की मात्रा बढ़ती है उसी तेजी से अक्तूबर में यह घट जाती है। गोदावरी में उस प्रवाह का स्तर मई तक नीचा रहता है। इसमें दो बार जल की अधिकतम मात्रा रहती है। एक बार मई मैं और दूसरी बार जुलाई-अगस्त में। अगस्त के बाद जल प्रवाह तेजी घटता है। जनवरी से लेकर मई तक के किसी भी महीने की तुलना में अक्टूबर और नवम्बर में जल प्रवाह की मात्रा अधिक होती है।

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प्रश्न 4.
भारत की तटीय नदियों का वर्णन करें।
उत्तर:
तटीय नदियाँ पश्चिम में अरब सागर की ओर तथा पूर्व में बंगाल के खाड़ी की ओर बहती हैं। पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ ये हैं-शतरंजी, भद्रा वैतरणा, काली नदी, बेड़ती शरावती, भारतपुझा, पेरियार तथा पंबा । शतरंजी अमरेली जिले के दलकहवा के निकट से, भद्रा राजकोट जिले में अनियाली गाँव के पास से तथा धांधर गुजरात के ही पंचमहल जिले के घंटार गाँव के निकट से निकलती हैं। धांधर 135 किमी लम्बी है तथा इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,770 वर्ग किमी है। वैतरणा का उदगम स्रोत महाराष्ट्र के नासिक जिले में 670 मी की ऊँचाई पर त्रियंबक की पहाड़ियों के दक्षिणी ढालों पर है।

172 किमी की यात्रा के बाद यह बलसाड़ के निकट अरब सागर में गिरती है। काली नदी कर्नाटक के बेलगाँव जिले में बीड़ी नामक गाँव के निकट से निकलती है औ कारवाड़ की खाड़ी में गिरती है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 5,179 वर्ग किमी है। 161 वर्गकिमी है। 161 किमी लम्बी बेड़ती नदी का उदगम स्रोत हुबली-धारवाड़ के आस-पास की पहाड़ियों में 701 मी की ऊँचाई पर है। शरावती का उदग्म स्थान कर्नाटक के शिमोगा जिले में है। इसी नदी पर प्रसिद्ध गरसोपा (जोग) जल-प्रपात है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 2,209 वर्ग किमी है। भारतपझा को पोन्नानी भी कहते हैं । यह केरल की सबसे लम्बी नदी है। यह अन्नामलाई की पहाड़ियों के पास से निकलती है। इसका अपवाह क्षेत्र 5.397 वर्ग किमी है। 177 किमी लम्बी पंबा नदी वेबनाद झील में गिरती है।

पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ-सुवर्ण रेखा, वैतरणी और ब्राह्मणी के अलावा पूर्व की ओर बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं-दंशधारा, पेन्नर, पलार और वैगाई। वंशधारा का उद्गम तो उड़ीसा के दक्षिणी भाग में है, लेकिन यह आन्ध्र प्रदेश में बहती है। पलार का जलग्रहण क्षेत्र 17,870 वर्ग किमी नदियाँ हैं । पोइनी और चेय्यार इसकी दो प्रमुख नदियाँ हैं। वैगाई केरल से निकलती हैं। यह पेरियार के अपवर्तित जल को लेकर अंत में पाक की खाड़ी में गिर जाती है। छोटी-छोटी तटीय नदियों की विशेषताएँ हैं-तीव्र ढाल, भारी मात्रा में गाद तथा प्रवाह में शीघ्र घट-बढ़। तटीय क्षेत्रों की कृषि की सिंचाई में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कुछ क्षेत्रीय और आर्थिक समूहों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सार्क, यूरोपियन संघ, एशियन, जी – 8, जी – 20 आदि क्षेत्रीय और आर्थिक समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
विभिन्न साधन कौन से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं?
उत्तर:
निम्नलिखित साधनों की सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं –
1980 ई. के दशक में पाकिस्तान भारत में आगे था, परंतु 1990 के दशक में पाकिस्तान की संवृद्धि दर से 3.6 की गिरावट आई। कुछ विद्वानों का मत है कि संवृद्धि दर में गिरावट के अग्रलिखित दो कारण थे –

  1. 1988 में आरम्भ की गई सुधार प्रक्रिया।
  2. पाकिस्तान में राजनैतिक अस्थिरता।

विकास की सामान्य प्रक्रिया के दौरान पाकिस्तान ने सबसे पहले रोजगार और कृषि उत्पाद से सम्बन्धित अपनी नीतियों को बदल कर उन्हें विनिर्माण और उसके बाद सेवाओं की ओर परिवर्तित कर दिया। पाकिस्तान में विनिर्माण में लगे श्रम बल का अनुपात 18% था। जब पाकिस्तान में सीधे सेवा क्षेत्रक पर जोर दिया जा रहा है। 1980 के दशक में पाकिस्तान में सेवा क्षेत्रक में 27% श्रम बल कार्यरत था। वर्ष 2000 में यह बढ़कर 37% हो गया।

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प्रश्न 7.
चीन में ‘एक संतान’ नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ क्या है?
उत्तर:
चीन में “एक संतान” नीति का महत्त्वपूर्ण निहितार्थ जनसंख्या में वृद्धि रोकना है।

प्रश्न 8.
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान के मुख्य जनांकिकीय संकेतक – 2000-2001:
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प्रश्न 9.
मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए। अथवा, पाकिस्तान तथा भारत के मुख्य मानव विकास के विभिन्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चीन, पाकिस्तान और भारत के मुख्य जनांकिकीय संकेत – 2003
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प्रश्न 10.
स्वतंत्रता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतंत्रता संकेतकों के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता संकेतक से अभिप्राय उन संकेतकों से है जो मनुष्य की सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता को इंगित करते हैं। मानव विकास के संकेतकों में इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता संकेतक के कुछ उदाहरण-नागरिक अधिकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा, न्यायपालिका का स्वतंत्रता को संरक्षण देने की संवैधानिक सीमा तथा विधि सम्मत शासन आदि।

प्रश्न 11.
उन विभिन्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि (तीव्र आर्थिक विकास हुआ) हुई।
उत्तर:
चीन में तीव्र आर्थिक विकास के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं –

  1. विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दिशा निर्देशों के बिना 1978 में आधारित संरचना सुधार लागू करना।
  2. चीन ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में आधारित संरचना का विकास किया, जिससे वहाँ सामाजिक एवं आय के सूचकों में सुधार हुआ।
  3. चीन ने कृषि क्षेत्र सुधार कार्यक्रम लागू किया, जिससे उसकी उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई।
  4. विकेन्द्रीयकृत नियोजन काफी लम्बे समय तक लागू रहा।
  5. व्यक्तिगत उत्पादक इकाइयों का आकार छोटा रखा गया। उपरोक्त सभी कारकों ने आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान प्रदान किया। चीन ने सभी सुधारात्मक उपाय पहले छोटे स्तर पर परखे, उसके बाद ही समष्टि स्तर पर उन्हें लागू किया।

प्रश्न 12.
भारत चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित विशेषताओं को तीन शीर्षकों के अन्तर्गत समूहित कीजिए –

  1. एक संतान का नियम
  2. निम्न प्रजनन दर
  3. नगरीयकरण का उच्च स्तर
  4. मिश्रित अर्थव्यवस्था
  5. अति उच्च प्रजनन दर
  6. भारी जनसंख्या
  7. जनसंख्या का अत्यधिक घनत्व
  8. विनिर्माण क्षेत्रक के कारण संवृद्धि, सेवा क्षेत्रक के कारण संवृद्धि

उत्तर:
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प्रश्न 13.
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण बताइए।
उत्तर:
पाकिस्तान में धीमी संवृद्धि तथा पुनः निर्धनता के कारण हैं –

  1. कृषि संवृद्धि और खाद्यपूर्ति, तकनीकी परिवर्तन का संस्थागत प्रक्रिया पर आधारित न होकर अच्छी फसल पर आधारित होना, तथा
  2. पाकिस्तान की विदेशी ऋणों पर निर्भरता की प्रवृत्ति।

प्रश्न 14.
कुछ विशेष मानव विकास संकेतकों के संदर्भ में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कुछ मानव विकास सूचकों की तुलना निम्नलिखित ढंग से है –

  1. कुछ मानव विकास सूचकों जैसे GDP, प्रति व्यक्ति आय आदि में चीन, भारत व पाकिस्तान से आगे है।
  2. निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. चीन में सबसे कम है। इसके बाद क्रमशः पाकिस्तान एवं भारत का स्थान है।
  3. शिशु मृत्यु दर, मातृ दर, पोषक तत्त्व न पाने वालों का प्रतिशत आदि चीन में सबसे कम है।
  4. स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता एवं पीने योग्य पानी प्राप्त करने वाली जनसंख्या का प्रतिशत चीन में, भारत व पाकिस्तान से अच्छा है।
  5. पाकिस्तान में निर्धनता रेखा से नीचे रहने वालों का प्र.श. भारत से कम है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पीने योग्य पानी की उपलब्धता के बारे में पाकिस्तान की स्थिति भारत से बेहतर है।

उपरोक्त तथ्यों से यह कहा जा सकता है कि चीन, भारत व पाकिस्तान से मानव विकास सूचकों के मामलों में आगे चल रहा है। यह भी सत्य है कि कई सूचकों के मामले में पाकिस्तान, भारत से अच्छी स्थिति में है। तीनों देशों के मानव विकास सूचक निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं –
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प्रश्न 15.
पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गई संवृद्धि दर की प्रवृत्तियों पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर:
पिछले दो दशकों में भारत व चीन में संवृद्धि की प्रवृत्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं। जैसे –

  1. दोनों देशों में कृषि क्षेत्र का GDP में योगदान घटा है।
  2. चीन ने. विनिर्माण क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि दर हासिल करके उसे बरकरार बनाए रखा, जबकि भारत में इस क्षेत्र की संवृद्धि में गिरावट आयी है।
  3. भारत ने 1990 के पाद सेवा क्षेत्र में संवृद्धि को आगे बढ़ाया है, जबकि चीन में सेवा क्षेत्र का योगदान घटा है।
  4. चीन में आर्थिक संवृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र का अहम योगदान रहा है। भारत में आर्थिक संवृद्धि के लिए सेवा क्षेत्र का योगदान ज्यादा है।
    विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि की प्रवृत्तियाँ 1990 – 2003
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Bihar Board Class 11 Economics भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि क्या है?
उत्तर:
चीन की दसवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2001-2006 ई. है।

प्रश्न 2.
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल लिखें।
उत्तर:
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल 2002-2007 ई है।

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प्रश्न 3.
किस दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान तीन देशों की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति आय समान थी?
उत्तर:
1980 ई. के दशक तक भारत, चीन और पाकिस्तान की संवृद्धि दर और प्रति व्यक्ति दर समान थी।

प्रश्न 4.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. कितना प्रतिशत बढ़ी है?
उत्तर:
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगभग तीन वर्षों (2002-2005) के दौरान जी. डी. पी. लगभग 8 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है।

प्रश्न 5.
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से कितने लोगों की जानें गई थीं?
उत्तर:
पाकिस्तान में 2005 ई. के विनाशकारी भूकंप से 75,000 लोगों की जानें गई थीं।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित किन देशों में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है?

  1. भारत
  2. चीन, और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
भारत और पाकिस्तान में सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है।

प्रश्न 7.
अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाई गई विकासात्मक प्रक्रियाओं को समझने की हमें क्यों कोशिश करनी चाहिए?
उत्तर:
क्योंकि ऐसा करने से हमें अपने पड़ोसी देशों की शक्तियों और कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी।

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प्रश्न 8.
भारत और पाकिस्तान को कब स्वतंत्रता मिली?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान को 1947 ई. में स्वतंत्रता मिली।

प्रश्न 9.
चीनी गणराज्य की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
चीनी गणराज्य की स्थापना 1949 ई. में हुई?

प्रश्न 10.
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा कब की गई थी?
उत्तर:
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा 1951-56 में की गई थी।

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प्रश्न 11.
चीन ने कब अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की?
उत्तर:
चीन ने 1953 ई. में अपनी प्रथम पंचवर्षीय योजना की घोषणा की।

प्रश्न 12.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया आरम्भ होने के बाद से विकासशील देश अपने आस-पास के देशों की विकास प्रक्रियाओं और नीतियों को समझने के लिए उत्सुक हैं। क्यों?
उत्तर:
क्योंकि उन्हें केवल विकसित देशों से ही नहीं अपितु अपने जैसे विकासशील देशों में भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा रहा है।

प्रश्न 13.
भारत में नगरीय क्षेत्रों में कितने प्रतिशत लोग रहते हैं?
उत्तर:
भारत में नगरीय क्षेत्रों में 28 प्रतिशत लोग रहते हैं।

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प्रश्न 14.
विद्वानों का मानना है कि भारत, चीन एवं पाकिस्तान सहित अनेक विकासशील देशों में पुत्र को वरीयता देना, एक सामान्य बात है। क्या आप इस बात को अपने परिवार या पड़ोस में देखते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम परिवार और अपने पड़ोस में यह बात देखते हैं।

प्रश्न 15.
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर कितना प्रतिशत थी?
उत्तर:
1990-2002/03 में भारत, चीन और पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में संवृद्धि दर क्रमशः 58%, 97% और 3.6% थी।

प्रश्न 16.
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण लिखों।
उत्तर:
राजनैतिक अस्थिरता, प्रेषणों और विदेशी सहायता पर बहुत ही अधिक निर्भरता और कृषि क्षेत्रक का अस्थिर निष्पादन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गिरावट के कारण हैं।

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प्रश्न 17.
माओ ने कब महान् सांस्कृतिक क्रांति शुरू की?
उत्तर:
माओ ने 1965 में महान् सहारा सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।

प्रश्न 18.
जी. एल. एफ. अभियान में कौन-कौन सी समस्याएँ आईं?
उत्तर:
जी. एल. एफ. अभियान में कई समस्याएँ आई जैसे-भयंकर सूखे का आना जिसने चीन में तबाही मचा दी और उसमें 30 मिलियन लोग मारे गए। चीन और रूस के बीच संघर्ष हुआ और इस संघर्ष में रूस ने अपने विशेषज्ञों को वापस बुला लिया जिन्हें उद्योगीकरण प्रक्रिया के दौरान सहायता करने भेजा गया था।

प्रश्न 19.
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में किन-किन क्षेत्रकों में सुधार किए गए?
उत्तर:
चीन में सुधार के प्रारम्भिक चरण में कृषि, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्रकों में सुधार किए गए।

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प्रश्न 20.
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का क्या अर्थ है?
उत्तर:
दोहरी कीमत निर्धारण पद्धति का अर्थ यह है कि कीमतों की निर्धारण दो प्रकार से किया जाता था। किसानों और औद्योगिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों के आधार पर आगातों और निर्गतों को निर्धारित मात्रा में खरीदेंगे और बचेंगे और शेष वस्तुएँ बाजार कीमतों पर खरीदी और बेची जाती थीं।

प्रश्न 21.
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए क्या किया गया?
उत्तर:
चीन में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित किए गए।

प्रश्न 22.
पाकिस्तान में किस प्रकार की अर्थव्यवस्था अपनाई गई है?
उत्तर:
पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है।

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प्रश्न 23.
निम्नलिखित देश में से किस देश की जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है?

  1. भारत
  2. चीन और
  3. पाकिस्तान

उत्तर:
2. चीन और

प्रश्न 24.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की अनुमानित जनसंख्या क्रमशः 1130.6, 1303.7 और 162.4 मिलियन थी।

प्रश्न 25.
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्या थी?
उत्तर:
2000-2001 में भारत, चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर क्रमशः 3.0, 1.8 तथा 5.1 थी।

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प्रश्न 26.
निम्नलिखित देशों में से किस देश में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि सबसे अधिक है और वह कितनी है?
उत्तर:
पाकिस्तान में जनसंख्या की वार्षिक संवृद्धि दर सबसे अधिक है। यह संवृद्धि दर 2.5 है।

प्रश्न 27.
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात किस लिंग (पुरुष महिला) के पक्ष में कम था?
उत्तर:
भारत, चीन और पाकिस्तान में 2000-2001 में लिंग अनुपात महिलाओं के पक्ष में कम था।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें –

  1. आयात प्रतिस्थापन
  2. आसियान
  3. जन्म के समय जीवन प्रत्यशा
  4. जी-8
  5. जी-20
  6. मातृत्व (प्रसव) मृत्यु दर
  7. मृत्यु दर
  8. यूरोपियन संघ
  9. सार्क

उत्तर:
1. आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution):
सरकार की आर्थिक विकास की ऐसी नीति जिसमें आयात की जा रही वस्तुओं का स्थान देश की स्वनिर्मित वस्तुएँ ले लेती हैं। इस नीति में आयात नियंत्रण, आयात शुल्क तथा अन्य नियंत्रणों को अपनाया जाता है। इस नीति के ध्येय की प्राप्ति के लिए आन्तरिक उद्योगों को आत्मनिर्भरता की प्राप्ति तथा रोजगार संवर्धन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

2. आसियान (Association of South East Asian Nations):
इसका पूरा नाम दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन है। थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपीन्स, बूनी, जेरुस्लम, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, वियतनाम आदिश इस संगठन के सदस्य हैं।

3. जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth):
जन्म के समय विद्यमान आयु-विशेष मृत्युदर के पैटर्न के जीवन पर स्थिर रहने पर उस नवजात शिशु की जीवित रहने की प्रत्याशा (वर्षों में) होती है।

4. जी-8 (G – 8):
यह आठ देशों का गुट है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, उत्तर आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी महासंघ इसके सदस्य हैं। यहाँ राज्याध्यक्षों और अन्तर्राष्ट्रीय अधिकारियों का वार्षिक आर्थिक, राजनैतिक शिखर सम्मेलन होता है। वहाँ अनेक बैठकें और नीतिगत अनुसंधान होते रहते हैं। गुट की अध्यक्षता की अवधि एक वर्ष है जो बारी-बारी से सदस्यों को प्रदान की जाती है। वर्ष 2006 का अध्यक्ष रूस है।

5. जी-20 (G – 20):
इस संगठन के सदस्य अर्जेंटीना, बोलिविया, ब्राजील, चिल्ली, चीन, क्यूबा, मिश्र, ग्वेटेमाला, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाईजीरिया, पाकिस्तान, पराग्वे, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, तंजानिया, वेनेजुएला तथा जिम्बाबे हैं। इसका उद्देश्य विश्व व्यापार संगठन में व्यापार और कृषि से जुड़े प्रश्नों पर ध्यान दिलवाना है।

6. मातृत्व मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate):
यह प्रसव काल में माताओं की मृत्यु और सजीव जन्मों का अनुपात है। अनुपात की गणना एक वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

7. मृत्यु दर (Mortality Rate):
यह शब्द मृत्यु दर पर आधारित है। इसे वर्ष भर में प्रति हजार जनसंख्या में हुई मृत्यु की संख्याओं द्वारा अभिव्यक्ति किया जाता है। यह रुग्णता दर से भिन्न है।

8. यूरोपियन संघ (European Union):
यह 25 स्वतंत्र देशों द्वारा गठित महासंघ है। इसके सदस्य देश हैं-आस्ट्रिया, बेल्जियम, साईप्रस, चेक गणराज्य, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लीबिया, लिथुआनिया, लक्सेवर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडेन, युनाइटेड किंगडम, माल्टा, पोलैंड, चेकोस्लोवाकिया और स्लोवोनिया। इस संगठन का उद्देश्य यूरोप महाद्वीप से राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।

9. सार्क (South Asia Asociation of Regional Corporation):
इसका पूरा नाम दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ है। यह आठ देशों का संघ है। ये देश हैं भारत, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान। सार्क दक्षिण एशियाई जनसमुदायों को मैत्री, विश्वास और सूझ-बूझ के आधार पर मिल-जुल कर कार्य करने का मंच प्रदान करता है। इसका ध्येय सदस्य देशों में आर्थिक तथा सामाजिक विकास का संवर्धन करना है।

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प्रश्न 2.
आजकल विभिन्न देशों में अपने पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने की जिज्ञासा क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
आजकल विभिन्न देशों में पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बारे में जानने एवं समझने की उत्सुकता बढ़ रही है क्योंकि इसके जरिए वे अपनी शक्तियों एवं कमजोरियों को जानने एवं समझने के साथ-साथ पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं की शक्तियों एवं कमजोरियों को भली-भाँति समझ सकते हैं। वे एक-दूसरे की आर्थिक नीतियों की तुलना कर सकते हैं एवं उन नीतियों के परिणामों को भी भली-भाँति जान सकते हैं। तुलना के माध्यम से राष्ट्र अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए सुरक्षात्मक एवं ठीक उपाय अपना सकते हैं।

प्रश्न 3.
चीन द्वारा ग्रेट लीप फोरवर्ड आंदोलन को वापिस लेना आवश्यक क्यों हो गया था? इसको किस कार्यक्रम द्वारा प्रतिस्थापित किया था?
उत्तर:
ग्रेट लीप फोरवर्ड कार्यक्रम वर्ष 1958 में चीन में आरम्भ किया गया था। इस कार्यक्रम का मकसद देश में बड़े पर औद्योगीकरण करना था। लेकिन इस कार्यक्रम को निम्नलिखित कई समस्याओं से गुजरना पड़ा –
1. एक भयंकर ‘सूखा काल’ का सामना करना पड़ा, जिसने 30 मिलियन लोगों की जान लेकर चीन में कोहराम मचा दिया था।

2. रूस के साथ मतभेद होने पर उसने चीन से अपने उन विशिष्ट लोगों को वापिस बुला लिया जो औद्योगीकरण करने के लिए मदद हेतु भेजे गए थे। उपरोक्त समस्याओं के मद्देनजर Great Leap Forward Campaign को हटाकर Great Proletarian Cultural Revolution. कार्यक्रम को लागू किया गया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत व्यवसायों के जानकार व्यक्तियों एवं छात्रों को देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया।

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प्रश्न 4.
पाकिस्तान में नए निवेश के लिए तैयार माहौल के लिए उत्तरदायी कारक बताइए।
उत्तर:
नए निवेश हेतु कई कारक उत्तरदायी थे। उनमें से कुछ निम्नांकित हैं –

  1. 1970 व 1980 के दशकों में ज्यादा जरूरी क्षेत्रों का विकेन्द्रीकरण कर दिया गया था।
  2. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया।
  3. पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।
  4. पाकिस्तान से ढेर सारे लोग मध्य एशिया की ओर प्रवास कर गए।
  5. पाकिस्तान सरकार ने निजी निवेशकों को प्रोत्साहन प्रदान किया।

प्रश्न 5.
चीन, भारत एवं पाकिस्तान की जनसंख्याओं के बारे में बताएँ।
उत्तर:
चीन, भारत एवं पाकिस्तान तीनों एशिया महाद्वीप के देश हैं। येद तीनों ही अर्थव्यवस्थाएँ विकासशील हैं। विश्वभर में चीन सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। पाकिस्तान की जनसंख्या का आकार छोटा है। इस दुनिया में रहने वाले छः व्यक्तियों में एक चीनी है तो दूसरा भारतीय है। पाकिस्तान की जनसंख्या, चीन अथवा भारत की जनसंख्या का आठवाँ भाग है। जनसंख्या आकार के आँकड़े नीचे लिखे गए हैं –
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प्रश्न 6.
भारत, चीन एवं पाकिस्तान में कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्य-बल की तुलना, उनके सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के साथ करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों की अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल का अनुपात उद्योग तथा सेवा क्षेत्रों की तुलना में ऊँचा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे कम एवं भारत में इस क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। भारत व पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र का उनके संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में अनुपात एक समान है। लेकिन चीन में कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान सबसे कम है। तीनों अर्थव्यवस्थाओं के कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं उनके सकल घरेलू उत्पादन में योगदान से संबंधित आँकड़े निम्न प्रकार से हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव img 7

प्रश्न 7.
भारत, चीन तथा पाकिस्तान के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबलों के प्रतिशत एवं उनका संबंधित सकल घरेलू उत्पाद में योगदान की तुलना करें।
उत्तर:
भारत, चीन एवं पाकिस्तान तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल का प्रतिशत इनके कृषि क्षेत्र में संलग्न कार्यबल के प्रतिशत से कम है। चीन के मामले में सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र का योगदान, सकल घरेलू उत्पाद में भारत एवं पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा है। पाकिस्तान में उद्योग क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की स.घ.उ. में योगदान की दर एक समान है। भारत में उद्योग क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान कृषि क्षेत्र में थोड़ा अधिक है। उक्त तीनों अर्थव्यवस्थाओं के उद्योग क्षेत्र में संलग्न कार्यबल एवं सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के आँकड़े निम्नलिखित तालिका में दर्शाए गए हैं –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 10 भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव img 8

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प्रश्न 8.
स्वातंत्र्य सूचक को क्या कहा जा सकता है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकों को पर्याप्त बनाने हेतु स्वातंत्र्य सूचकों का समावेशन अति आवश्यक है। इसे सामाजिक एवं राजनैतिक निर्णयों में भागीदारी का सूचक भी कहते हैं। स्वातंत्र्य सूचक इस बात का भी सूचक है कि संविधान वहाँ के लोगों को किस हद तक संरक्षण/सुरक्षा का अधिकार देता है। दूसरे शब्दों में, स्वातंत्र्य सूचक न्याय एवं कानून स्वतंत्रता की भी माप है। अतः स्वातंत्र्य सूचकों के.समावेशन के अभाव में मानव विकास सूचक अपूर्ण कहे जा सकते हैं अथवा इनकी उपयोगिता कम हो जाती है।

प्रश्न 9.
चीन में माओवादी विकास की अवधारणा के बारे में नए नेतृत्व के क्या विचार थे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
1978 तक चीन में आर्थिक विकास की स्थिति भारत की तुलना में बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी। नए नेतृत्व ने विचार किया कि आत्मनिर्भरता, विकेन्द्रीयकरण, विदेशी तकनीक की चमक आदि असफल रहे हैं। हालांकि चीन ने 1950 के दशक के मध्य में कृषि क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम लागू कर दिए थे, इसके बावजूद भी 1978 तक प्रति व्यक्ति आय का स्तर 1950 जितना ही रहा।

अत: नए नेतृत्व ने 1978 में संरचनात्मक आर्थिक सुधारों को लागू कर दिया। चीन में सुधार कार्यक्रमों का आरम्भ बिना किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के किया गया था। विश्व बैंक अथवा मुद्रा कोष के दिशा-निर्देशों के बिना ही स्वेच्छापूर्वक सुधार कार्यक्रम शुरू कर दिया गया। इस सुधार कार्यक्रम में विकेन्द्रीयकरण, आधुनीकरण, उदारीकरण एवं विदेशी निवेशकों के लिए प्रोत्साहन आदि शामिल थे।

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प्रश्न 10.
अगस्त 2004-2005 के लिए पाकिस्तान सरकार की कार्य निष्यादन क्षमता के बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
अगस्त 2004-2005 वर्ष के लिए पाकिस्तान सरकार के कार्य निष्पादन का ब्यौरा निम्न प्रकार से है –

  1. तीन सतत वर्षों के लिए पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद की बढ़ोतरी दर 8 प्र.श. हो गई थी।
  2. इस संकरात्मक परिवर्तन के लिए तीनों उत्पादक क्षेत्रों कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र का योगदान था।
  3. अर्थव्यवस्था को उच्च मुद्रा स्फीति एवं निजीकरण का सामना करना पड़ा।
  4. सरकार ने ऐसे कई सामाजिक कार्यों पर खर्च किया, जिनसे गरीबी दूर हो सकती थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चीन व पाकिस्तान के विकास अनुभवों से हमें क्या-क्या सीख मिलती है? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
चीन व पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं के विकास चुनाव से प्राप्त सीख का ब्यौरा निम्नवत है –
1. वर्ष 1978 तक चीन एवं पाकिस्तान में विकास का स्तर भारत जैसा ही था।

2. चीन में राजनैतिक स्वतंत्रता का अभाव पाया जाता है। आज भी मानवता से जुड़े मुद्दे वहाँ के लिए विचारणीय हैं। पिछले तीन दशकों में राजनैतिक दृष्टिकोण में बदलाव किए बिना चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था में ‘बाजार व्यवस्था’ का विकास किया है। उच्च आर्थिक संवृद्धि के साथ चीन ने निर्धनता उन्मूलन में सफलता हासिल कर ली है।

सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पादक इकाइयों का निजीकरण किए बिना भी चीन ने ऐसी बाजार व्यवस्था विकसित की है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक एवं आर्थिक विकास के अवसरों में बढ़ोतरी हुई है। वहाँ भू-स्वामित्व सामूहिक आधार पर है, लेकिन किसानों को खेती करने एवं चुकाने के उपरांत कृषि की पूरी आय को अपने पास रखने का अधिकार दे रखा है। चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग सामाजिक सुरक्षा के लिए आश्वस्त हैं। चीन में मानव विकास सूचक सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

3. भारत की भाँति पाकिस्तान में मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली है। वहाँ सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों का सहअस्तित्व कायम है। वहाँ की राजनीति में सेना का प्रभुत्व है। पाकिस्तान के निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम में अस्थायित्व देखने को मिलता है।

विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के दबाव में 1988 में संरचनात्मक सुधार कार्यक्रम पेश किए गए। इन सुधार कार्यक्रमों का मानव विकास सूचकों पर बुरा प्रभाव पड़ा। राजनैतिक अस्थिरता, विदेशों पर अधिक निर्भरता, कृषि क्षेत्र की लचर कार्य निष्पादन क्षमता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ज्यादा अच्छा नहीं कर पायी। हाल के कुछ वर्षों में वहाँ सकल घरेलू उत्पाद की उच्च वृद्धि दर से हालात अच्छे होने लगे हैं।

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प्रश्न 2.
आर्थिक एवं मानव विकास में किस प्रकार चीन, भारत एवं पाकिस्तान से आगे निकल गया? संक्षेप में बताइए।
उत्तर:

  1. शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्रों में आधारित संरचना का विकास, भू-सुधार, दीर्घकाल तक विकेन्द्रीयकृत नियोजन छोटे आकार की उत्पादन इकाइयों आदि कारकों ने चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अधिक अवसर प्रदान किए, जिससे वह भारत व पाकिस्तान से आगे निकल गया।
  2. आजादी प्राप्ति के आरम्भ से ही ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बड़े पैमाने पर किया गया। जबकि भारत व पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत अच्छा विकास नहीं किया गया।
  3. चीन में कृषि क्षेत्र में Commune व्यवस्था को लागू किया। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में आर्थिक समानता को बढ़ावा मिल गया।
  4. प्रत्येक सुधार कार्य पहले छोटे भाग पर करके परखा गया। इसके बाद इसको आगे बढ़ाया गया। भारत व पाकिस्तान में समष्टि आधार पर ही सुधार कार्यक्रम लागू किए गए।
  5. चीन की अर्थव्यवस्था में परंपरागत ढंग से उत्पादक क्षेत्रों में रूपान्तरण किया गया। कृषि क्षेत्र से उद्योग क्षेत्र, इसके बाद सेवा क्षेत्र का विकास किया गया लेकिन भारत ने प्रत्यक्ष रूप में कृषि क्षेत्र से सेवा क्षेत्र में छलांग लगा दी।
  6. राजनैतिक विचारधारा बदले बिना भी चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग किया।
  7. चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग अतिरिक्त आर्थिक एवं सामाजिक विकास के अवसर विकसित करने के लिए किया।
  8. चीन ने भारत व पाकिस्तान से काफी पहले संरचनात्मक सुधार कार्यक्रमों को लागू कर दिया था, वो भी किसी अन्तर्राष्ट्रीय दबाव के बिना व जबकि भारत व पाकिस्तान ने विश्व बैंक एवं मुद्रा कोष के आह्वान पर आर्थिक सुधार लागू किए हैं।
  9. उपरोक्त बातों के कारण चीन में आर्थिक एवं सामाजिक विकास सूचकों का स्तर भारत व पाकिस्तान से ज्यादा है।

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प्रश्न 3.
चीन में लाग किए गए आर्थिक सुधारों के चरणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
चीन की अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को विभिन्न चरणों में लागू किया गया है। सर्वप्रथम चीन के सुधार कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में लागू किए गए। इस क्षेत्र में Commune व्यवस्था लागू की गई। भू-आवंटन केवल प्रयोग के लिए किया गया। स्वामित्व के मामले में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। किसी को कर चुकाने के बाद कृषि क्षेत्र की पूरी आय को रखने की आजादी प्रदान की गई। इसके उपरांत सुधार कार्यक्रमों को उद्योग क्षेत्र में लागू किया गया।

स्थानीय सामूहिक स्वामित्व के आधार पर गाँवों एवं शहरों में औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करके उन्हें उत्पादन करने छूट प्रदान की गई और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को इन इकाइयों के साथ प्रतियोगिता करनी पड़ती। चीन में दोहरी कीमत प्रणाली अपनायी गई है। किसानों एवं औद्योगिक इकाइयों को आगतों की निश्चित मात्रा का क्रय एवं उत्पाद की निश्चित मात्रा का विक्रय सरकार द्वारा तय कीमत पर करना पड़ता है। शेष उत्पादन को बाजार की कीमतों पर बेचा जा सकता है। अधिक विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए गए हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पाकिस्तान स्वतंत्र देश बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1947 में

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प्रश्न 2.
चीन स्वतंत्र राष्ट्र बना –
(a) 1947 में
(b) 1949 में
(c) 1950 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1949 में

प्रश्न 3.
पाकिस्तान ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1956 में

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प्रश्न 4.
चीन ने प्रथम पंचवर्षीय योजना पेश की –
(a) 1951 में
(b) 1956 में
(c) 1953 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 1953 में

प्रश्न 5.
पाकिस्तान ने आर्थिक सुधार शुरू किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 6.
चीन ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1978 में

प्रश्न 7.
भारत ने आर्थिक सुधार घोषित किए –
(a) 1978 में
(b) 1991 में
(c) 1988 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

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प्रश्न 8.
किस देश की जनसंख्या सबसे ज्यादा है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

प्रश्न 9.
किस देश का भौगोलिक क्षेत्र सबसे अधिक है –
(a) पाकिस्तान
(b) चीन
(c) भारत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चीन

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प्रश्न 10.
वह सूचक कौन-सा है जिसको ध्यान में रखना आवश्यक है –
(a) स्वतंत्रता सूचक
(b) स्वास्थ्य सूचक
(c) शिक्षा सूचक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्वतंत्रता सूचक

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पर्यावरण को कैसे परिभाषित किया जा सकता है? अथवा, पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण को समस्त भूमण्डलीय विरासत और सभी संसाधनों की समग्रता के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमे वे सभी जैविक और अजैविक तत्त्व आते हैं जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 2.
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है तो क्या होता है?
उत्तर:
जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनः जन्म की दर बढ़ जाती है तो पर्यावरण जीव पोषण का अपना तीसरा ओर महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 3.
निम्न को नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें –
(क) वृक्ष
(ख) मछली
(ग) पैट्रोलियम
(घ) कायेला
(ङ) लौह अयस्क
(च) जल
उत्तर:
1. नवीकरणीय संसाधन:
वृक्ष, मछली, तथा जल नवीकरणीय संसाधन हैं

2. गैर नवीकरणीय संसाधन:
पेट्रोलियम, कोयला तथा लौह अयस्क गैर नवीकरणीय संसाधन हैं।

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प्रश्न 4.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए आजकल विश्व के सामने ……… और ……….. की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्याएँ हैं।
उत्तर:
आजकल विश्व के सामने तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानक की दो प्रमुख पर्यावरण की समस्यायें हैं।

प्रश्न 5.
निम्न कारक भारत में पर्यावरण संकट में योगदान करते हैं? ये कारक सरकार के समझ कौन-सी समस्याएँ पैदा करते हैं?

  1. बढ़ती जनसंख्या
  2. वायु प्रदूषण
  3. जल प्रदूषण
  4. सम्पन्न उपयोग मानक
  5. निरक्षरता
  6. औद्योगीकरण
  7. वन क्षेत्र में कमी
  8. अवैध वन कटाई
  9. वैश्विक उष्णता

उत्तर:

  1. बढ़ती जनसंख्या से आवास, स्वास्थ्य, शुद्ध वायु, शुद्ध जल आदि की प्राप्ति में कठिनाइयाँ आती हैं –
    सरकार के सामने बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है।
  2. वायु प्रदूषण से कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम के लिए काफी व्यय करना पड़ता है।
  3. जल प्रदूषण से भी कई प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं। जैसे-हैजा, पीलिया, टायफाइड। इससे सरकार को इन बीमारियों की रोकथाम काफी व्यय करना पड़ता है।
  4. औद्योगीकरण से शहरीकरण को बढ़ावा मिलता है। शहरों में गंदी बस्तियों का निर्माण होता है। कीमतों में वृद्धि होती है।
  5. अवैध वन कटाई से वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बाढ़ आने लगती है। झरने आदि सूख जाते हैं। जलवायु में ग्रीष्मता आ जाती है। वन्य जीव कम हो जाते हैं आदि। अन्य कारकों का दुष्परिणाम इसी प्रकार लिखा जा सकता है।

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प्रश्न 6.
पर्यावरण के क्या कार्य है?
उत्तर:
पर्यावरण के निम्नलिखित कार्य होते हैं –

  1. पर्यावरण नवीनीकरण और गैर-नवीनीकरणीय संसाधनों की पूर्ति करता है।
  2. यह अवशेष को समाहित करता है।
  3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है।
  4. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य।

प्रश्न 7.
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।
उत्तर:
भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी कारक –

  1. वन विनाश के फलस्वरूप वनस्पति की हानि
  2. अधारणीय जलाऊ लकड़ी और चारे के निष्कर्षण
  3. खेती-बाड़ी
  4. वन भूमि का अतिक्रमण
  5. वनों में आग और अत्यधिक चराई
  6. कृषि रसायन का अनुचित प्रयोग जैसे रासायनिक खाद और कीटनाशक

प्रश्न 8.
समझायें कि नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों का अवसर लागत उच्च क्यों होती है?
उत्तर:
अवसर लागत का अधिक होना (High Opportunity Cost):
जब पर्यावरण दूषित हो जाता है तो विकास के क्रम में नदियों और अन्य जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं और सूख जाते हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन जाती है। इसके साथ नवीनीकरण और गैर-नवीकरण संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक संसाधन लुप्त हो गए हैं और हम नए संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसन्धान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए मजबूर हैं।

वायु तथा जल की गुणवत्ता में कमी आई है। दूषित जल तथा वाय में साँस और जल संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति की ओर गम्भीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करना पड़ा। इस प्रकार हम देखते हैं कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत अधिक होती है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

प्रश्न 9.
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा रहे हैं –
1. ग्रामीण क्षेत्रों में एल.पी.जी., गोबर गैस:
गाँवों में सहायिकी द्वारा कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त गोबर संयंत्र आसन ऋण और सहायिकी देकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्च दाब प्राकृतिक गैस (CNG) के ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति प्रायः तीव्र होती है वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्तकी जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता।

4. फोटो सेल द्वारा सौर शक्ति:
भारत में सूर्य किरण के माध्यम से सौर ऊर्जा भारी मात्रा में उपलब्ध है। हम इसका प्रयोग विभिन्न तरीकों से करते हैं। इससे हम कपड़े, अनाज तथा अन्य कृषि उत्पाद सुखाते हैं। सर्दी कमें सूर्य किरण का उपयोग हम गरमाहट के लिए करते हैं। अब फोटो वोल्टिक सेलों की सहायता से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

5. लघु जलीय प्लांट:
लघु जलीय प्लांट पहाड़ी इलाकों में लगाकर बिजली पैदा की जा रही है जिसका प्रयोग स्तर पर किया जा रहा है। ये प्लांट (प्रखर प्लांट) पर्यावरण के लिए हितकर हैं।

6. पारम्परिक ज्ञान व व्यवहार:
पारम्परिक रूप से भारतीय पर्यावरण के निकट आ रहे हैं। वे पर्यावरण के एक अंग के रूप में रहे हैं न कि उसके नियंत्रक के रूप में। आजकल हम अपनी पारम्परिक प्रणालियों से दूर हो गए हैं जिससे हमारे पर्यावरण और हमारी ग्रामीण विरासत को भारी हानि पहुँची है। अब हम पारम्परिक ज्ञान की ओर ध्यान दें रहे हैं। आजकल सभी सौन्दर्य उत्पाद जैसे बालों के लिए तेल, टूथपेस्ट, शरीर के लिए लोशन चेहरे की क्रीम इत्यादि हर्बल उत्पाद न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं अपितु उनसे कोई हानि नहीं होती।

7. जैविक कंपोस्ट खाद:
पिछले पाँच दशकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में हमने जैविक कंपोस्ट खाद की अवहेलना की और पूरी तरह रासायनिक खाद का उपयोग करने लगे। इनसे हमें कई हानियाँ हुईं। भूतल जल प्रणाली दूषित हो गई। अतः अब जैविक कंपोस्ट खाद का प्रयोग किया जाने लगा है। देश के कुछ भागों में जानवर इसलिए पाले जा रहे हैं जिससे वे गोबर दे सकें।

8. जैविक कीट नियन्त्रण:
हरित क्रांति के पश्चात् अधिक उत्पादन के लिए देश में रासायनिक कीटनाशक का अधिक से अधिक प्रयोग होने लगा। इससे कई प्रतिकूल प्रभाव पड़े। भोज्य पदार्थ दूषित हो गए। दूध, माँस और मछलियाँ दूषित पाई गईं। मृदा जलाशय यहाँ तक की भूतल जल भी कीटनाशकों के कारण प्रदूषित हो गए।

इस चुनौती का सामना करने के लिए अब बेहतर नियन्त्रक विधियों को बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें एक उपाय पौधों के उत्पाद पर आधारित कीटनाशकों का उपयोग है। नीम के पेड़ इसमें काफी उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न जानवर और पक्षियों के बारे में जागरूकता बढ़ी है जो कीट नियन्त्रण में सहायक हैं।

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प्रश्न 10.
“भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है।” इस कथन के समर्थन में तर्क दें।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता (Excessive natural resources in India) इस विषय में कोई दो मत नहीं हैं कि प्रकृति भारत पर बहुत ही कृपालु है। प्रकृति ने भारत की गोद को प्राकृतिक संसाधनों से भर रखा है। भारत की भूमि उच्च गुणवत्ता वाली है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। यहाँ हरे-भरे वन हैं। यहाँ की मिट्टी काफी उपजाऊ है। यहाँ पर कई प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। देश में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% उपलब्ध है। हमारे देश के विभिन्न भागों में बॉक्साइट, ताँबा, हीरा, सीसा, भूरा कोयला, मैंगनीज जिंक, यूरेनियम इत्यादि भी मिलते हैं। हिन्द महासागर का विस्तृत क्षेत्र है। यहाँ पर पहाड़ों की श्रृंखलाएँ हैं।

प्रश्न 11.
क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर:
हाँ, पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है। इसका कारण यह है कि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं, में पर्यावरण संसाधनों की माँग पूर्ति से कम थी। प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीलर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दर से थी। इसलिए पर्यावरण उत्पन्न नहीं हुई थी परन्तु जनसंख्या विस्फोट और जनसंख्या की बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औद्योगिक क्रान्ति के आगमन से स्थिति बदल गई है। परिणामस्वरूप उत्पादन और उपभोग के लिए संसाधनों की माँग संसाधनों की पुनः सृजन की दर से बहुत अधिक हो गई है। यह प्रवृत्ति आज भी जारी है। अब हमारे सामने पर्यावरण संसाधनों और सेवाओं की माँग अधिक है परन्तु उनकी पूर्ति सीमित है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है।

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प्रश्न 12.
इनके दो उदाहरण दें –

  1. पर्यावरणीय संसाधनों का अति प्रयोग
  2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग

उत्तर:
1. पर्यावरणीय संसाधनों का अतिप्रयोग:
(क) कोयला
(ख) पेट्रोलियम

2. पर्यावरणीय संसाधनों का दुरुपयोग:
(क) जल
(ख) पेट्रोलियम

प्रश्न 13.
पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए। महत्त्वपूर्ण मुद्दों की व्याख्या कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागतें भी होती हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण चार आवश्यक क्रिया करता है –
1. यह संसाधनों की पूर्ति करता है, जिसमें नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधन सम्मिलित होते हैं। नवीकरण-योग्य संसाधन वे हैं जिनका उपयोग संसाधन की पूर्ति निरंतर बनी रहती है। नवीकरणीय संसाधनों के उदाहरणों में वनों में पेड़ और समुद्र में मछलियाँ हैं। दूसरी ओर, गैर-नवीकरण योग्य संसाधन वे हैं जो कि निष्कर्षण और उपयोग करने पर समाप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन।

2. यह अवशेष को समाहित कर लेता है।

3. यह जननिक और जैविक विविधता प्रदान करके जीवन का पोषण करता है, जैसे कि कोई सुन्दर दृश्य। पर्यावरण इन कार्यों को बिना किसी व्यवधान के तभी कर सकता है, जब तक कि ये कार्य उसको धारण क्षमता की सीमा में है।

4. इसका अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इनके पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है। जब ऐसा नहीं होता है तो पर्यावरण संकट उत्पन्न होता है। पूरे विश्व में आज यही स्थिति है।

विकासशील देशों में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है। अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं सृजित अवशेष पर्यावरण के प्रथम दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है।

अनेक संसाधन समाप्त हो गए हैं और सृजित अवशेष पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के बाहर हैं। अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है। इसके कारण ही आज हम पर्यावरण संकट की दहलीज पर खड़े हैं।

विकास के क्रम में नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषितं हुए हैं और सूख गए हैं इसने जल को एक आर्थिक वस्तु बना दिया है। इसके साथ ही नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों के गहन और विस्तृत निष्कर्षण से अनेक महत्त्वपूर्ण संसाधन विलुप्त हे गए हैं और हम नये संसाधनों की खोज में प्रौद्योगिकी व अनुसंधान पर विशाल राशि व्यय करने के लिए तत्पर हैं।

इसके साथ जुड़ी है पर्यावरण अपक्षय की गुणवत्ता की स्वास्थ्य लागत। जल और वायु में गुणवत्ता की गिरावट (भारत में 70 प्रतिशत जल प्रदूषित है) ये साँस और जल-संक्रामक रोगों की घटनाएँ बढ़ी हैं। परिणामस्वरूप व्यय भी बढ़ता जा रहा है। वैश्विक पर्यावरण मुद्दों जै, वैश्विक उष्णता और ओजोन क्षय ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिसके कारण सरकार को अधिक धन व्यय करन पड़ा। अत: यह स्पष्ट है कि नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों की अवसर लागत बहुत अधिक है।

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प्रश्न 14.
पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति माँग के उत्क्रमण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण के कई कार्य हैं। उनमें एक कार्य संसाधनों का उपभोग करती है। बढ़ती हुई जनसंख्या तथा विकसित देशों के समृद्ध उपभोग से संसाधनों की माँग में वृद्धि होती जाती है और बढ़ते-बढ़ते यह संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है। जब संसाधनों की माँग संसाधनों की आपूर्ति से अधिक हो जाती है तो ऐसी स्थिति को पर्यावरण की पूर्ति माँग अतिक्रम कहते हैं। पूर्ति माँग अतिक्रमण की स्थिति में पर्यावरण जीवन पोषण का अपना तीसरा और महत्त्वपूर्ण कार्य करने में असफल हो जाती है और इससे पर्यावरण संकट पैदा होता है। पूरे विश्व में आज भी यही स्थिति है।

प्रश्न 15.
वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।
उत्तर:
वर्तमान पर्यावरण संकट-पर्यावरण संकट का नवीन परिकल्पना है। विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट नहीं था। उस समय पर्यावरण संसाधनों की माँग और सेवाएँ उनकी पूर्ति से बहुत कम थी अर्थात् प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीतर था और संसाधन निष्कर्षण की दर इन संसाधनों के पुनः सृजन की दरे से कम थी।

अत: पर्यावरण संकट नहीं था, परन्तु आज विपरीत परिस्थिति हो गई है जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो गया है। वायु तथा जल प्रदूषित हो गए हैं। नदियाँ और अन्य जल स्रोत प्रदूषित और सूख गए हैं। जल एक आर्थिक वस्तु बन गई है। अवसर लागत में वृद्धि हो गई है। वायु प्रदूषण तथा ध्वनि के फलस्वरूप अनेक बीमारियों ने जन्म लिया है। लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

प्रश्न 16.
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो यह निर्धनता जनित है और दूसरे जीवन स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?
उत्तर:
भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभाव-भारत खनिज पदार्थों के मामलों में एक धनी देश है। यहाँ पर विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ प्रचुरता में पाए जाते हैं। यहाँ भूमि की गुणवत्ता उच्च है। यहाँ पर सैकड़ों नदियाँ और उपनदियाँ हैं। खेती के लिए काफी भूमि है परन्तु भारत में विकास गतिविधियों के फलस्वरूप तथा जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होने पर प्राकृतिक संसाधनों पर बदाव पड़ रहा है।

भारत में भूमि का अपक्षय विभिन्न मात्रा में हो रहा है। जनसंख्या और पशुधन का अधिक घनत्व और वानिकी, कृषि चराई, मानव बस्तियों और उद्योगों के प्रतिस्पर्धा उपभागों से देश के निश्चित भू-संसाधनों पर भारी प्रभाव पड़ा है। देश में प्रति व्यक्ति जंगल भूमि केवल 0.08 हेक्टेयर है जबकि आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह यह संख्या 0.47 हेक्टेयर होनी चाहिए।

भारत में शहरी इलाकों में वायु प्रदूषण बहुत अधिक है। भारत सकार के अनुसार प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलयिन टन पोषक तत्त्वों की हानि होती है। नदियाँ और उपनदियाँ शीघ्र सूख रही हैं और वर्षा की मात्रा भी अनियमित हो गई हैं। ऐसी बीमारियाँ और कीटाणु जो पहले नहीं थे, फसलों को हानि पहुँचा रहे हैं। यह कथन बिल्कुल सत्य है कि भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है-एक तो निर्धनता जनित है और दूसरे स्तर में सम्पन्नता का कारण भी है।

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प्रश्न 17.
धारणीय विकास क्या है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से होता है जिसमें वर्तमान जनसंख्यया की आपूर्ति तो होती है, किन्तु भावी पीढ़ी (Generation) के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों को पोषण होता है। धारणीय विकास की अवधारणा वर्तमान पीढ़ी तथा भावी दोनों के हितों की ओर ध्यान देती है।

धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करें तथा भावी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे। धारणीय विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि की जानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रयोग करना चाहिए। पर्यावरण को शुद्ध रखना चाहिए और अर्थव्यवस्था को प्रदूषण से बचना चाहिए।

प्रश्न 18.
अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।
उत्तर:
1. गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतो का प्रयोग-गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के अन्तर्गत हम गोबर गैस प्लांट का प्रयोग कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रायः लकड़ी उपले और अन्य जैविक पदार्थों का प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। इससे वन विनाश, हरित-क्षेत्र में कमी, मवेशियों केक गोबर का अपव्यय और वायु प्रदूषण जैसे अनेक प्रतिकूल प्रभाव होते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए कम कीमत पर तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके अतिरिक्त गोबर गैस संयंत्र आसान ऋण देकर उपलब्ध कराये जा रहे है। जहाँ एक तरल पेट्रोलियम गैस का संबंध है, यह एक स्वच्छ ईंधन है जो कि प्रदूषण को काफी हद तक कम करता है। इसमें ऊर्जा का अपव्यय भी न्यूनतम होता है। गोबर गैस संयंत्र को चलाने के लिए गोबर को संयत्र में डाला जाता है और उससे गैस का उत्पादन होता है, जिसका ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। जो बच जाता है, वह एक बहुत की अच्छा जैविक उर्वरक और मृदा अनुकूलक है।

2. शहरी क्षेत्रों में उच्चदाब प्राकृतिक गैस (CNG):
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में उच्चदाब प्रकृतिक गैस (CNG) को ईंधन के रूप में प्रयोग से वायु प्रदूषण बड़े पैमाने पर कम हुआ है और पिछले कुछ वर्षों से हवा स्वच्छ हुई है।

3. वायु शक्ति:
जिन क्षेत्रों में हवा की गति आमतौर पर तीव्र होती है, वहाँ पवन चक्की से बिजली प्राप्त की जा सकती है। ऊर्जा का यह स्रोत पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं डालता। हवा के साथ-साथ टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा होती है।

4. लघु जलीय प्लांट:
पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग सभी जगहों में झरने मिलते हैं। इन झरनों में से अधिकांश स्थायी होते हैं। मिनिहाइल प्लांट इन झरनों की ऊर्जा से छोटी टरबाइन चलाते हैं। टरबाइन से बिजली का उत्पादन होता है, जिसका प्रयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। इस प्रकार के पावर प्लांट पर्यावरण के लिए हितकर होते हैं, क्योंकि जहाँ वे लगाए जाते हैं वहाँ भू-उपयोग की प्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं करते। इसका यह भी अर्थ है कि ऐसे प्लांटों के उपयोग से बड़े-बड़े संचरण टावर (Tansmission tower) और तारों की इसमें जरूरत नहीं होती है और संचरण की हानि को रोका जा सकता है।

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प्रश्न 19.
धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।
उत्तर:
धारणीय विकास की परिभाषा देते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन में कहा गया है कि धारणीय विकास ऐसा है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता बिना पूरा करे। इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि हमें ऐसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकतायें तो पूरी हों परन्तु भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता चाहिए। वर्तमान भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के पास प्रचुर मात्रा में संसाधन होने चाहिए।

हमें ऐसे विकास की आवश्यकता है जो भावी पीढ़ियों को जीवन की संभावित औसत गुणवत्ता प्रदान करे जो कम से कम वर्तमान पीढ़ी के द्वारा उपभोग की गई सुविधाओं के बराबर हों। ब्रुटलैण्ड कमीशन ने भावी पीढ़ी को एक व्यवस्थित भूमण्डल प्रदान करें। दूसरे शब्दों में वर्तमान पीढ़ी की आगामी पीढ़ी द्वारा एक बेहतर पर्यावरण उत्तराधिकार के रूप में सौंपा जाना चाहिए। कम से कम हमें आगामी पीढ़ी के जीवन के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली परिसम्पत्तियों का भण्डार छोड़ना चाहिए जो कि हमें उत्तराधिकारी के रूप में प्राप्त हुआ है।

Bihar Board Class 11 Economics पर्यावरण और धारणीय विकास Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संसाधनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
संसाधनों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. नवीनीकरणीय योग्य संसाधन और
  2. गैर नवीकरणीय योग्य संसाधन

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प्रश्न 2.
नवीनीकरणीय योग्य संसाधन किन्हें कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
नवीकरणीय योग्य संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जिनका उपयोग संसाधन के क्षेत्र में समाप्त होने की आशंका के बिना किया जा सकता है अर्थात् संसाधनों की आपूर्ति निरन्तर बनी रहती है। जैसे-वन, जल, सूर्य का प्रकाश आदि।

प्रश्न 3.
गैर नवीकरणीय संसाधन किन्हें कहते हैं? उदारहण दें।
उत्तर:
गैर:
नवीकरणीय संसाधन उन संसाधनों को कहते हैं जो कि निष्कर्षण और उपभोग में समाप्त हो जाते हैं। जैसे-जैसे इन संसाधनों का प्रयोग किया जाता है, वैसे-वैसे इनके भण्डार कम होते जाते हैं। उदाहरण के लिए जीवाश्म ईंधन आदि।

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प्रश्न 4.
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण अध्ययन की विषय सामग्री जैविक और अजैविक घटकों के बीच अन्तः सम्बन्ध है।

प्रश्न 5.
जैविक और अजैविक तत्त्वों के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. जैविक तत्त्व: पक्षी, पशु तथा पौधे।
  2. अजैविक तत्त्व: हवा, पानी तथा पौधे।

प्रश्न 6.
पर्यावरण के कोई दो कार्य लिखें।
उत्तर:

  1. पर्यावरण संसाधनों की पूर्ति करता है जिसमें नवीकरणीय तथ गैर-नवीकरणीय। दोनों प्रकार के संसाधन होते हैं।
  2. यह सौंदर्य विषयक सेवाएँ प्रदान करता है।

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प्रश्न 7.
वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण के कारण होने वाली एक-एक बीमारी का नाम लिखें।
उत्तर:
वायु प्रदूषण से दमा की बीमारी तथा जल प्रदूषण से हैजा की बीमारी होती है।

प्रश्न 8.
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का अर्थ पर्यावरण की अपक्षय को सोखने की योग्यता से है।

प्रश्न 9.
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा से क्या अर्थ है?
उत्तर:
पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा का अर्थ है कि संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक नहीं है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के भीतर है।

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प्रश्न 10.
किस परिस्थिति में पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है?
उत्तर:
जब संसाधनों का निष्कर्षण इसके पुनः जन्म की दर से अधिक हो जाता है और उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की समावेशन क्षमता के बाहर होते हैं तो उस समय पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है।

प्रश्न 11.
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के किन कार्यों पर भारी दबाव डाला है?
उत्तर:
विकासशील देशों की तेजी से बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपयोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के निम्न दो कार्यों पर भारी दबाव डाला है –

  1. संसाधन पूर्ति तथा
  2. अपशिष्ट विसर्जन

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प्रश्न 12.
आर्थिक विकास का क्या मुख्य लक्ष्य है?
उत्तर:
आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं व समाजों के उत्पादन को बढ़ाना है।

प्रश्न 13.
विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट क्यों नहीं उत्पन्न हुआ?
उत्तर:
क्योंकि विकास की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पर्यावरण संसाधनों की माँग की पूर्ति से कम थी। अतः ऐसा संकट नहीं उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 14.
धारणीय विकास का लक्ष्य किस प्रकार के विकास का संवर्द्धन है?
उत्तर:
धारणीय विकास का लक्ष्य उस प्रकार के विकास कस संवर्द्धन है जो कि पर्यावरण समस्याओं को कम करे और भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं का पूरा करें।

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प्रश्न 15.
विश्व में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं। उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 16.
भारत में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
भारत में पर्यावरण पर दो प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं –

  1. पहला संकट तो निर्धनता जनित पर्यावरण क्षय का होना और
  2. दूसरा संकट सम्पन्नता तथा तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रक से हो रहे प्रदूषण का है।

प्रश्न 17.
धारणीय विकास कैस संभव हो पायोगा?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन, संरक्षण और परिस्थितिक पुनः जनन क्षमता को बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरीय संकटों के निवारण से धारणीय विकास संभव हो पाएगा।

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प्रश्न 18.
भारत में वनों की कटाई स्वीकार्य सीमा से कितने क्यूबिक मीटर अधिक होती है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष की कटाई स्वीकार्य सीमा से लगभग 15 मिलियन क्यूबिक मीटर अधिक होती है।

प्रश्न 19.
भारत में एक वर्ष में भूमि का क्षरण कितने प्रतिशत की दर से हो रहा है?
उत्तर:
भारत में एक वर्ष में भूमि क्षरण 5.3 मिलियन टन प्रतिशत की दर से हो रहा है।

प्रश्न 20.
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से तट पोषक तत्त्वों की कितनी क्षति होती है?
उत्तर:
भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्त्वों की क्षति होती है।

प्रश्न 21.
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः किन कारणों से होता है?
उत्तर:
भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः वाहनों उद्योगों के भारी जमाव और थर्मल पावर संयंत्रों के कारण होता है।

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प्रश्न 22.
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण क्यों है?
उत्तर:
वाहन उत्सर्जन चिन्ता का प्रमुख कारण इसिलए है क्योंकि यह धरातल पर वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत है और इसका प्रभाव साधारण जनता पर अधिकतम पड़ता है।

प्रश्न 23.
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का कितना प्रतिशत भण्डार उपलब्ध है?
उत्तर:
भारत में विश्व के समस्त लौह-अयस्क भण्डार का 20% भण्डार उपलब्ध है।

प्रश्न 24.
भारत में पाए जाने वाले कोई पाँच खनिज पदार्थ लिखें।
उत्तर:

  1. ताँबा
  2. लोहा
  3. सोना
  4. सीसा, और
  5. मैंगनीज

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रणबोर्ड के कार्य लिखें।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण के बोर्ड के कार्य (Functions of CPCB) केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के निम्नलिखित कार्य हैं –

  1. ये बोर्ड जल, वायु और भूमि प्रदूषण से सम्बन्धित सूचनाओं का संकलन और वितरण करते हैं।
  2. ये बोर्ड सरकारों को जल प्रदूषण के रोकथाम नियन्त्रण और कमी के लिए जल-धाराओं नदियों और कुओं की स्वच्छता के संवर्धन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।
  3. ये वायु की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं।
  4. ये देश में वायु-प्रदूषण के नियन्त्रण द्वारा भी सरकारों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास क्या है? उन तीन प्रकार की पूंजियों के नाम बताइए जिनका धारणीय विकास के अन्तर्गत संरक्षण किया जाता है?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से है जिससे वर्तमान जनसंख्या की आवश्यकताओं की आपूर्ति तो होती है भावी पीढ़ी के हितों पर किसी प्रकार का आघात नहीं पहुँचता अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का पोषण होता है। यह अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि भावी पीढ़ी के कल्याण में वही स्तर प्राप्त हो जो आज हमें प्राप्त है।

पूंजियों के प्रकार (Types of Capital):
धारणी विकास के अन्तर्गत तीन प्रकार की पूंजियों का संरक्षण किया जाता है –

  1. प्राकृतिक पूँजी (प्राकृतिक संसाधन, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी आदि)
  2. भौतिकी पूँजी (मशीनें, औजार, पूंजी उपकरण आदि) तथा
  3. मानवीय पूँजी (शिक्षा और तकनीकी प्रगति)

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

प्रश्न 3.
हमें भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण (Protection of the Interest of future generation):
स्थायी विकास की अवधारणा इस बात पर जोर देती है कि वर्तमान पीढ़ी के लोगों के हितों को आधात न पहुँचे अर्थात् भावी पीढ़ी के हितों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए।

भावी के पीढ़ी हितों के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि पिछले वर्षों में विकास के लाभों को तो बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया है, जबकि विकास की लागत (विशेषकर पर्यावरण हानि की लागतों के बारे में भी सोचना चाहिए। संरक्षण के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह दिया जाता है कि पिछली पीढ़ियों ने जिन अवसरों का लाभ उठाता है भावी पीढ़ियों को उसी प्रकार के अवसरों की गारंटी होनी चाहिए।

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प्रश्न 4.
प्राकृतिक संसाधनों में तेजी से बढ़ती हुई माँग के प्रभाव से कौन सी दो समस्याएँ उत्पन्न हुई है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों की तेज गति से बढ़ती माँग के प्रभाव में निम्नलिखित दो समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं –
1. Taichunie net Harri ant 319ra (Scarcity of renewable resources):
जब नवीकरण संसाधनों का उपभोग एक गति से अधिक तेज हो जाता है तो प्रकृति के द्वारा उस। तेज गति से ऐसे संसाधनों की नई आपूर्ति नहीं की जा सकती। परिणामस्वरूप नवीकरणीय योग्य संसाधनों का अभाव हो जाता है।

2. प्रदूषण (Pollution):
प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते प्रयोग से प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। अनेक उत्पादन क्रियाएँ जल, वायु एवं भूमि को प्रदूषित करती हैं। लाखों करोड़ों वर्षों से पर्यावरण यह सहन करता है क्योंकि जनसंख्या सीमित थी तथा प्रकृति पर धीमा ही आघात होता था परन्तु जनसंख्या के बढ़ने के साथ ही प्रदूषण की मात्रा तेज हो गई है। बढ़ता हुआ धुआँ, रसायन, अणु शक्ति का बढ़ता प्रयोग आदि अनेक कारणों से प्रकृति पर जो आघात हो रहा है वह प्रकृति की सहन शक्ति से परे है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
धारणीय विकास के आपका क्या अभिप्राय है? क्या यह वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या है या भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली संसाधनों की समाप्ति की?
उत्तर:
धारणीय विकास (Sustainable Development):
धारणीय विकास की अवधारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (UNCED) में किया गया। जिसने इसे इस प्रकार परिभाषित किया – “ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति क्षमता के समझौता किए बिना पूरा करें।” मानवीय विकास के फलस्वरूप प्राकृतिक साधनों का बहुत अधिक शोषण होता है। प्राकृतिक संसाधनों का निरन्तर क्षरण हो रहा है। कारखानों तथा यातयात के साधनों से धुआँ उठता है तथा हानिकारक पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जो जल तथा वायु प्रदूषण की समस्या पैदा करते हैं।

अतः यह कहा गया है कि धारणीय विकास आर्थिक विकास की वह प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरण को बिना हानि पहुँचाये वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों दोनों के जीवन गुणवत्ता को कायम रखना जिससे आर्थिक विकास के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली दीर्घकालीन शुद्ध लाभ वर्तमान तथा भावी पीढ़ी के लिए अधिकतम हों। धारणीय विकास की अवधारणा का सम्बन्ध प्राकृतिक साधनों के कुशलतम प्रयोग से है।

यह भावी पीढ़ी की जीवन गुणवत्ता की ओर भी ध्यान देती है। यह वातावरण को दूषित होने से बने का प्रयत्न करती है। यह प्रकृति साधनों तथा पर्यावरण को इस प्रकार प्रयोग करने का परमर्श देती है जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान में ही नहीं अपितु भवष्यि में भी आर्थिक विकास की दरे को कायम रखा जा सके। धारणीय विकास वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या तथा भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाले संसाधनों के निवेश दोनों की समस्या है।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ लिखें। (Write down the main feature of Sustainable Development)
उत्तर:
धारणी विकास की प्रमुख विशेषताएँ (Main feature of Sustainable Development):
धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. पर्यावरण का संरक्षण (Protection of Environment):
धारणीय विकास. पर्यावरण के संरक्षण पर जोर देता है। यह अवधारणा विकास की लागत विशेषकर पर्यावरण हानि की लागत की ओर ध्यान देती है।

2. वर्तमान भावी पीढ़ी की आवश्यकता पर ध्यान देना (Attention towards present and futuregeneration):
धारणीय विकास की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि भावी पीढ़ी को कल्याण के उसी स्तर को प्राप्त करने के अवसर मिलने चाहिए जो आज हमें प्राप्त है-दूसरे शब्दों में यह अवधारणा वर्तमान पीढ़ी और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने पर जोर देती है।

3. वितरणात्मक समानता (Distributive equality):
यह अवधारणा विभिन्न पीढ़ियों के बीच तथा एक पीढ़ी के विभिन्न वर्गों के बीच समानता पर जोर देती है। इस अवधारणा के अनुसार प्राकृतिक साधनों तथा पर्यावरण का इस प्रकार प्रयोग किए जाए जिसके फलस्वरूप केवल वर्तमान ही नहीं भविष्य में भी विकास की दरे को कायम (Maintain) रखा जा सके।

4. मानवीय पूंजी भौतिक पूंजी तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण (Preservation of human capital, physical capital and natural capital):
स्थायी विकस की अवधारणा इस बात पर भी जोर देती है कि मानवीय पूंजी, तथा प्राकृतिक पूंजी का संरक्षण करना चाहिए जिससे भावी पीढ़ियों को कम से कम उतना अवश्य मिल सके जितना वर्तमान पीढ़ी को विरासत में मिला है। इसके लिए संसाधनों का प्रबन्ध इस प्रकार करना चाहिए कि हम वर्तमान आवश्यकताओं की संतुष्टि के साथ-साथइन संसाधनों की गुणवत्ता को भी बढ़ा सकें।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जैविक घटक में शामिल किया जाता है –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव
(c) जीव एवं निर्जीव दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सभी जीव

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प्रश्न 2.
अजैविक घटक में शामिल करते हैं –
(a) सभी जीव
(b) सभी निर्जीव चीजें
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सभी निर्जीव चीजें

प्रश्न 3.
वायुमण्डल में कार्बन डाइआक्साइड की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 31 प्र.श.

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प्रश्न 4.
वायुमण्डल में मिथेन की सांद्रता बढ़ी है –
(a) 31 प्र.श.
(b) 149 प्र.श.
(c) 200 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 149 प्र.श.

प्रश्न 5.
पिछली सदी में वायुमंडल का औसत ताप बढ़ा है –
(a) 0.6°C
(b) 1.1°C
(c) 1.0°C
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 0.6°C

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प्रश्न 6.
ओजोन परत के क्षय से कौन सी किरण पृथ्वी पर पहुँच जाती है –
(a) अवरक्त
(b) दृश्य
(c) पराबैंगनी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पराबैंगनी

प्रश्न 7.
Montreal Protocol किसके प्रयोग पर पाबंदी लगाता है –
(a) कार्बोनेट यौगिक
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक
(c) कार्बन यौगिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक

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प्रश्न 8.
चिपको आन्दोलन का संबंध है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण

प्रश्न 9.
अप्पिको आन्दोलन संबंधित है –
(a) हिमालय में वनों का संरक्षण
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण
(c) गुजरात में वनों का संरक्षण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

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प्रश्न 10.
भारत दुनिया की कितनी प्र.श. आबादी का आश्रय है –
(a) 16 प्र.श.
(b) 20 प्र.श.
(c) 25 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 16 प्र.श.

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 2 संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय के किस भाग में करेवा मिलते हैं ……………………
(क) उत्तर:पूर्व
(ख) पूर्वी
(ग) हिमाचल-उत्तरांचल
(घ) कश्मीर हिमालय
उत्तर:
(घ) कश्मीर हिमालय

प्रश्न 2.
लोटक झील किस राज्य में स्थित है ……………………..
(क) केरल
(ख) मनीपुर
(ग) उत्तरांचल
(घ) राजस्थान
उत्तर:
(ख) मनीपुर

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प्रश्न 3.
अंडमान द्वीप तथा निकोबार द्वीप को कौन-सी रेखा पृथक् करती है ……………………
(क) 11° चैनल
(ख) 10 चैनल
(ग) खाड़ी मनार
(घ) अंडमान सागर
उत्तर:
(क) 11° चैनल

प्रश्न 4.
डोडावेटा चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ी शृखंला में स्थित है?
(क) नीलगिरी
(ख) का मम
(ग) अनामलाई
(घ) नलामलाई
उत्तर:
(क) नीलगिरी

प्रश्न 5.
हिमालय किस प्रकार का पर्वत है?
(क) ज्वालामुखी
(ख) मोड़दार
(ग) अविशष्ट
(घ) भ्रशारेथ
उत्तर:
(ख) मोड़दार

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन-से तटीय मैदान होकर जायेगा और क्यों?
उत्तर:
लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित है। यह केरल तट से 280 किलोमीटर ने 480 – किलोमीटर दूर स्थित है। अत: केरल तट से इसकी दूरी सबसे कम 280 किलोमीटर है। इसलिए केरल के तटीय मैदान से होकर हम लक्षद्वीप सकम मय में पहुँच जायेगें।

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प्रश्न 2.
भारत में ठण्डा मरुस्थल कहाँ स्थित है ? इस क्षेत्र की मख्य श्रेणियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
कश्मीर हिमालय का उत्तरी-पूर्वी भाग, जो वहत् हिमालय और कराकोरम श्रेणियों के बीच स्थित है, एक ठण्डा मरुस्थल है। कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत श्रेणियाँ हैं जैसे-कराकोरम, लद्दाख, जाकर और बाल ।

प्रश्न 3.
पश्चिमी तटीय मैदान पर कोई डेल्टा क्यों नहीं है?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान मध्य में संकीर्ण है लेकिन उत्तर और दक्षिण में चौड़े हो जाते हैं। इसलिए इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती ।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर:
भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं-एक बंगाल की खाड़ी और दूसरा अरब सागर हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप हैं। ये द्वीप 6° उत्तर से 14° उत्तर और 92° पूर्व से 94° पूर्व के बीच स्थित हैं। राँची और लबरीन्थ द्वीप, यहाँ के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीपों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार । बैरन आइलैंड नामक भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।

अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं। ये द्वीप 80° उत्तर से 12° उत्तर और 71° पूर्व से 74° पूर्व के बीच बिखरे हुए हैं। ये केरल तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है। पूरा द्वीप समूह प्रवाल निक्षेप से बना है। यहाँ 36 द्वीप हैं और इनमें से 11 पर मानव आवास हैं। मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किलोमीटर है। पूरा द्वीप समूह 11 डिग्री चैनल द्वारा दो भागों में बाँटा गया है, उत्तर में अमीनी द्वीप दक्षिण में कनानोरे द्वीप । इस द्वीप समूह पर तूफान निर्मित पुलिन है जिस पर आबद्ध गुटिकायें शिंगिल, गोलश्मिकाएँ तथा गोलाश्म पूर्वी समुद्र तट पर पाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
नदी घाटी मैदान में पाए जाने वाली महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ कौन-सी हैं? इनका विवरण दें।
उत्तर:
प्रायद्वीप भाग में बहने वाली नदी घाटियाँ उथली और उनकी प्रवणता कम होती है। पूर्व की ओर बहने वाली अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा निर्माण करती हैं। महानदी, गोदावरी और कृष्णा द्वारा निर्मित डेल्टा इसके उदारहण हैं। हिमालय और अन्य अतिरिक्त पर्वतमालाओं में तेज बहाव वाली नदियों से अपरदित ये पर्वत गॉर्ज V – आकार घाटियाँ, क्षिप्रिकाएँ व जल-प्रपात इत्यादि इसका प्रमाण हैं। इस क्षेत्र के जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है।

कश्मीर हिमालय में श्रीनगर का डल झील एक रोचक प्राकृतिक स्थल है। कश्मीर घाटी में झेलम नदी प्रौढ़ावस्था में निर्मित होने वाली विशिष्ट आकृति विसों का निर्माण करतीहै। प्रदेश के दक्षिणी भाग में अनुदैर्ध्य घाटियाँ पाई जाती हैं जिन्हें दून कहा जाता है। हिमाचल हिमालय के दो महत्त्वपूर्ण स्थालाकृतियाँ शिवालिक और दून हैं। दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय की पर्वत श्रेणियाँ उत्तर से दक्षिण दिशा में तेज बहती हुई गहरे गॉर्ज बनाने वाली नदियों द्वारा विच्छेदित होती हैं। कामेंग; सुबनसरी, दिहांग, दिबांग, लोहित और तीस्ता यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं, जो बहुत से जल-प्रपात बनाती हैं।

मणिपुर घाटी के मध्य एक झील स्थित है जिसे ‘लोक ताक’ झील कहा जाता है। उत्तरी भारत के मैदान में हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे सुंदर वनन का डेल्टा। प्रायद्वीपीय पठार में बहने वाली नदियाँ टार, ब्लॉक पर्वत, भ्रंश घाटियाँ पर्वत स्कंध नग्न चट्टान संरचना, टेकरी (hummocky) पहाड़ी, शृंखला और क्वार्ट्साइट भित्तियाँ आदि का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय पूर्वी-घाट अवतरित नहीं हैं और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा अपरदित हैं। यहाँ की कुछ श्रेणियाँ जावदी पहाड़ियाँ पालकोण्डा श्रेणी, नल्लामाला पहाड़ियाँ और महेंद्रगिरि पहाड़ियाँ हैं।

मरुस्थल में बहने वाली नदियाँ थोड़ी दूरी तय करने के बाद लुप्त हो जाती हैं या किसी झील में या प्लाया में मिल जाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती। पूर्वी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ लम्बे-चौड़ें डेल्टा बनाती है। इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का डेल्टा शामिल है।

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प्रश्न 3.
यदि आप बद्रीनाथ से संदर वन डेल्टा तक गंगा नदी के साथ-साथ चलते हैं तो आपके रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएंगी?
उत्तर:
गंगा, हिमालय पर्वत में गोमुख हिमनदी से निकलती है। इस स्थान पर इसे गंगोत्री कहते हैं। 290 कि० मी० पर्वतीय प्रदेश से निकल कर हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इलाहाबाद के बाद इसमें यमुना नदी आकर मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है। इससे आगे उत्तर की गोमती, घाघरा. गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं । दक्षिण की ओर सोन नदी आकर मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक . विशाल डेल्टा तक इसकी लम्बाई 2525 किलोमीटर है। इसके किनारे पर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, वारणसी, पटना, कोलकाता आदि महत्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। यमुना भी गंगा के समानान्तर बहती है।

(घ) परियोजना कार्य (Project Work)

प्रश्न 1.
एटलस की सहायता से पश्चिम से पूर्व की ओर स्थित हिमालय की चोटियों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर:
पश्चिमी हिमालय में काराकोरम, नंगा पर्वत तथा पूर्वी हिमालय मे नामचा बरूआ, कंचनजंगा, मकालू और ऐवरेस्ट आदि चोटियाँ पाई जाती हैं। (चित्र 2.2 एवं 2.4 देखें।)

प्रश्न 2.
आप अपने राज्य में पाई जाने वाली स्थालाकृतियों की पहचान करें और इन पर चलाए जा रहे मुख्य आर्थिक कार्यों का विश्लेषण करें।
उत्तर:
उत्तरी भारत का मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है। इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लगभग 3200 किलोमीटर है। इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है। जलोढ़ निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है। उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बाँट सकते हैं-भामर, तराई और जलोढ़ मैदान । जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बाँटा जाता है-खादर और बांगर । भामर 8 से 10 किमी चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपाद के समानांतर फैल हुई है।

उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-बड़े शैल और गोलाश्म जमा करा देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती है। तराई से दक्षिण में मैदान है जो नए जलोढ़ से बना होने के कारण बाँगर और खादर कहलाता है। जैसे-बालू-रोपिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधिकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। ‘उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे-सुन्दर वन डेल्टा। हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है। गंगा नदी द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदानों में गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई जाती है। [ आर्थिम कार्यों का विश्लेषण अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।]

Bihar Board Class 11 Geography संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अरब सागर कब अस्त्वि में आया?
उत्तर:
प्लायसीन युग में।

प्रश्न 2.
उस सागर का नाम बतायें जो हिमालय के किनारे पर स्थित था।
उत्तर:
टैथीज सागर।

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प्रश्न 3.
हिमालय किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
टर्शियरी युग में।

प्रश्न 4.
हिमालय के उत्तर में कौन-सा भू-खण्ड स्थित है?
उत्तर:
अंगारालैण्ड।

प्रश्न 5.
टशियरी युग में हिमालय के दक्षिण में स्थित भू-खण्ड का नाम बताएँ।
उत्तर:
गोंडवानालैण्ड।

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प्रश्न 6.
कश्मीर घाटी में पाई जाने वाली झील निक्षेप का नाम लिखो।
उत्तर:
करेवा।

प्रश्न 7.
दक्कन पठार की पश्चिमी सीमा का नाम बताएँ।
उत्तर:
अरावली।

प्रश्न 8.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप बताओ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 9.
चो के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र का नाम बताएँ।
उत्तर:
होशियारपुर (पंजाब)।

प्रश्न 10.
भारत में पाये जानेवाली दो रिफ्ट घाटियों के नाम लिखें।
उत्तर:
नर्मदा तथा ताप्ती घाटियां।

प्रश्न 11.
दक्कन पठार में निर्मित लावा की सतहें कैसे बनी?
उत्तर:
लावा बहने के कारण।

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प्रश्न 12.
अरावली पर्वत किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर:
विन्ध्य युग में।

प्रश्न 13.
भारत का प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण कब हुआ?
उत्तर:
पूर्व कैम्बरियन युग में।

प्रश्न 14.
दक्कन पठार के पूर्वी सीमाओं के नाम बताएँ।
उत्तर:
राजमहल की पहाड़ियाँ।

प्रश्न 15.
भारत का सबसे प्राचीन पठार कौन-सा है?
उत्तर:
दक्कन पठार।

प्रश्न 16.
वृहद् स्तर पर भारत के धरातल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 17.
पूर्वी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
900 मीटर।

प्रश्न 18.
अरब सागर में पाये जाने वाले मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर:
लक्षद्वीप समूह।

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प्रश्न 19.
प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ऊंची चोटी का नाम बताएँ।
उत्तर:
अनाईमुदी (2695 मीटर)।

प्रश्न 20.
पश्चिमी तटीय मैदान के दो विभागों के नाम लिखें।
उत्तर:
कोंकण तट, मालबार तट।

प्रश्न 21.
यदि आपको लक्षद्वीप तक यात्रा करनी है तो किस तटीय मैदान से गुजरेंगे?
उत्तर:
पश्चिमी तटीय मैदान।

प्रश्न 22.
भारत में शीत मरुस्थल कहाँ है?
उत्तर:
लाख में।

प्रश्न 23.
पश्चिमी तट पर डेल्टे क्यों नहीं हैं?
उत्तर:
तीव्र गति वाली छोटी नदियाँ तलछट का जमाव नहीं करतीं।

प्रश्न 24.
सिन्धु गार्ज तथा ब्रह्मपुत्र गार्ज के मध्य हिमालय का क्या विस्तार है?
उत्तर:
2400 किलोमीटर।

प्रश्न 25.
हिमालय में सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
3200 किलोमीटर

प्रश्न 26.
गंगा के मैदान में तलछट की अधिकतम ऊँचाई कितनी है?
उत्तर:
2000 मीटर।

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प्रश्न 27.
भारत के प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊंचाई बताएँ।
उत्तर:
600-900 मीटर

प्रश्न 28.
हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप का नाम बताएँ।
उत्तर:
जलोढ़ पंक।

प्रश्न 29.
पश्चिमी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी हैं?
उत्तर:
1600 मीटर।

प्रश्न 30.
भारत के उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ ग्रेनाइट तथा नीस घट्टानें पाई जाती है।
उत्तर:
कर्नाटक।

प्रश्न 31.
दक्कन पठार के एलान की दिशा बताओ।
उत्तर:
दक्षिण-पूर्व।

प्रश्न 32.
प्रायद्वीपीय भारत के पूर्व में पाये जाने वाले पठार का नाम बतायें।
उत्तर:
शिलांग पठार।

प्रश्न 33.
उस क्षेत्र का नाम बताएँ जहाँ बरखान पाये जाते हैं।
उत्तर:
जैसलमेर।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हिमालय पर्वत में मिलने वाले ऊँचे पर्वत शिखर तथा उनकी ऊँचाई बताओ।
उत्तर:
वृहत् हिमालय में संसार के 40 ऐसे पर्वत शिखर मिलते हैं जिनकी ऊँचाई 7000 मीटर से भी अधिक है। जैसे –

  1. एवरेस्ट (Everest) – 8848 मीटर
  2. कंचनजंगा (Kanchenjunga) – 8598 मीटर
  3. नंगा पर्वत (Nanga Parbat) – 8126 मीटर
  4. नंदा देवी (Nanda Devi) – 7817 मीटर
  5. नामचा बरवा (Namcha Barwa) – 7756 मीटर
  6. धौलागिरी (Dhaulagiri) – 8172 मीटर

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प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत को किन-किन श्रेणियों में बाँटा जाता है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत की कई श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ नामक घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। भौगोलिक दृष्टि से हिमालय पर्वत के केन्द्रीय अक्ष के समानान्तर तीन पर्वत श्रेणियाँ हैं

  • वृहत् हिमालय (Greater Himalayas)
  • लघु हिमालय (Lesser Himalayas)
  • उप-हिमालय (Sub-Himalayas)
  • या शिवालिक श्रेणी (Siwaliks)

उक्त पर्वत श्रेणियों को तीन अन्य नामों से भी पुकारा जाता है –

  • आन्तरिक हिमालय (Inner Himalayas)
  • मध्य हिमालय (Middle Himalayas)
  • बाह्य हिमालय (Outer Himalayas)

प्रश्न 3.
भारतीय पठार के प्रमुख भौतिक विभागों के नाम बताइए।
उत्तर:
प्रायद्वीपीय पठार की भौतिक स्थलाकृतियों में बहुत विविधता है। फिर भी इसे मोटे तौर पर निम्नलिखित भौतिक इकाइयों में बाँटा जा सकता है –

  1. दक्षिणी पठारी खंड
  2. दक्कन का लावा पठार
  3. मालवा का पठार
  4. अरावली पहाड़ियाँ
  5. नर्मदा तथा तापी की द्रोणियाँ
  6. महानदी, गोदावरी तथा कावेरी की नदी घाटियाँ
  7. संकरे तटीय मैदान

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प्रश्न 4.
वृहत् स्तर पर भारत को कितनी भू-आकृतियों इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत की तीन भू-आकृतियों विभागों के उच्चावच के लक्षणों का विकास एक लम्बे काल में हुआ है।

  1. उत्तर हिमालय पर्वतीय श्रृंखला।
  2. उत्तरी भारत का मैदान।
  3. प्रायद्वीपीय पठार।

प्रश्न 5.
दोआब से आप क्या समझते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप से पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नो नदियों के मध्य के मैदानी भाग को दोआब कहते हैं। नदियों द्वारा निक्षेप से पुरानी कांप मिट्टी के प्रदेश इन नदियों को एक दूसरे से अलग करते हैं। भारतीय उप-महाद्वीप में निम्नलिखित दोआब मिलते हैं

  1. गंगा-यमुना नदियों के मध्य दोआब।
  2. ब्यास-समलुज नदियों के मध्य जालन्धर दोआब।
  3. ब्यास रावी के मध्य बारी दोआब।
  4. रावी-चनाब के मध्य रचना दोआब।
  5. चनाब-झेलम के मध्य छाज दोआब।

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प्रश्न 6.
तराई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
हिमालय पर्वत के दामन में भाबर के मैदान के साथ-साथ का संकरा मैदान स्थित है। यह मैदान लगभग 30 किमी चौड़ा है। इस मैदान का अधिकतर भाग दलदली है क्योंकि भाबर प्रदेशों में लुप्त हुई निदयों का जल रिस-रिस कर इस प्रदेश को अत्यधिक आई कर देता है। इस प्रदेश में ऊँची घास तथा वन पाए जाते हैं। भाबर के दक्षिण में स्थित ये मैदान बारीक कंकड़ चिकनी मिट्टी से बना है। उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र में बड़े-बड़े फर्मा बनाकर कृषि की जा रही है।

प्रश्न 7.
भाबर क्या है? भाबर पट्टी के दो प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर:
बाह्य हिमालय की शिवालिक श्रेणियों के दक्षिण में इनके गिरिपद प्रदेश को भाबर का मैदान कहते हैं। पर्वतीय क्षेत्र में बहने वाली नदियों के मन्द बहाव के कारण यहाँ बजरी, कंकड़ का जमाव हो जाता है। इस क्षेत्र में पहुँच कर अनेक नदियाँ लुप्त हो जाती हैं। क्योंकि यह प्रदेश पारगम्य चट्टानों (Pervious Rocks) का बना हुआ है। भाबर का मैदान एक संकरी पट्टी के रूप में 8 से 16 किमी की चौड़ाई तक पाया जाता है।

प्रश्न 8.
डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जिसे डेल्टा कहते हैं। डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार हैं –

  • गंगा नदी का डेल्टा
  • महानदी का डेल्टा
  • कृष्णा नदी का डेल्टा
  • कावेरी नदी का डेल्टा

प्रश्न 9.
दून किसे कहते हैं? हिमालय पर्वत से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत की समानान्तर श्रेणियों के मध्य सपाट तलछठी वाली संरचनात्मक घाटियाँ मिलती हैं। इन घाटियों द्वारा पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे से अलग होती हैं। इन घाटियों को ‘दून’ (Doon) कहा जाता है। हिमालय पर्वत में इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं –

  • देहरादून (Dehra Dun)
  • कोथरीदून (KothriDun)
  • पाटलीदून (PatliDun)

कश्मीर घाटी को भी हिमालय पर्वत में एक दन की संज्ञा दी जाती है।

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प्रश्न 10.
भारत में भ्रंशन क्रिया (Faulting) के प्रमाण किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
उत्तर:
भू-पृष्ठीय भ्रंशन के प्रमाण सामान्य रूप से दक्षिणी पठार पर पाए जाते हैं। गोदावरी, महानदी तथा दामोदर घाटियों में भ्रशंन के प्रमाण पाए जाते हैं। नर्मदा तथा ताप्ती नदी घाटी दरार घाटियाँ हैं। भारत के पश्चिमी तट पर मालाबार तट तथा मेकरान तट के धरातल पर भ्रंशन क्रिया के प्रभाव देखे जा सकते हैं।

प्रश्न 11.
भांगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्राचीन जलोढ़ मिट्टी के बने ऊँचे मैदानी प्रदेशों को भांगर कहते हैं। इन उच्च प्रदेशों में नदियों की बाढ़ का जल पहुँच नहीं पाता। इस प्रदेश की मिट्टी में चीका मिट्टी रेत, तथा कंकड़ पाए जाते हैं। भारत के उत्तरी मैदान में नदियों द्वारा जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप से भांगर प्रदेश की रचना हुई है।

प्रश्न 12.
भारत के किसी एक भौतिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर:
भू-वैज्ञानिक संरचना तथा धरातलीय स्वरूप के आधार पर भारत को तीन भौतिक विभागों में वर्गीकृत किया जाता है –

  • दक्षिण का प्रायद्वीप पठार।
  • उत्तर की विशाल पर्वतमाला।
  • दोनों के बीच स्थित विस्तृत मैदान।

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प्रश्न 13.
हिमालय से निकलने वाली नदियां सततवाहिनी क्यों हैं?
उत्तर:

  1. हिमालय से निकलने वाली नदियों का उदगम् बर्फीले प्रदेशों में होते हैं।
  2. इन निकलने वाली नदियों में सालोभर जल प्रभावित होते हैं?
  3. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वर्षा द्वारा भी जल ग्रहण करती हैं। जैसे गंगा सिन्ध. ब्रह्मापुत्र प्रमुख सततवाहिन नदियाँ हैं, जिनके किनारे भारी मानव बसे हुए हैं और प्रमुखता
  4. से कृषि कार्य के साथ उद्योगों ने भी अपनी महत्त बनायी है।

प्रश्न 14.
बांगर तथा खादर प्रदेश में क्या अन्तर है?
उत्तर:
बांगर तथा खादर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 15.
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर –
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प्रश्न 16.
भारतीय पठार तथा हिमालय पर्वत के उच्चावच के लक्षणों में वैषम्य , बताइए।
उत्तर:
हिमालय पर्वत तथा भारतीय पठार की भू-आकृतियों की इकाइयों के भौतिक लक्षणों में काफी अन्तर पाए जाते हैं।
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प्रश्न 17.
“पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों की एक क्रमिक शृंखला पाई जाती है।”
उत्तर:
हिमालय पर्वत में कई पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती हैं। ये श्रेणियाँ एक-दूसरे से ‘दून’ या घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। पश्चिमी हिमालय में ये श्रेणियाँ स्पष्ट क्रम से दिखाई देती हैं। पंजाब के मैदानों के पश्चात पहली श्रेणी शिवालिक की पहाड़ियों के रूप में या बाह्य हिमालय के रूप में मिलती हैं। इसके पश्चात् सिन्धु नदी की सहायक नदियों की घाटियों हैं। दूसरी वेदी (stage) के रूप में पीर-पंजाल तथा धौलागार की घलु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाल तथा महान् हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी की लघु हिमालयी श्रेणियाँ मिलती हैं। पीर-पंजाली की जास्कर श्रेणी पाई जाती है। इससे आगे लद्दाख तथा काराकोरम की पर्वत श्रेणियाँ हैं जिसके मध्य सिन्धु घाटी मिलती है।

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प्रश्न 18.
पश्चिमी तट पर अच्छी बंदरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों है?
उत्तर:
पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  1. पश्चिमी तट अधिक कटा-फटा है जबकि पर्वी तट कम कटा-फटा है।
  2. पश्चिमी तट पर अधिक लैगून है जबकि पूर्वी तट पर कम है।
  3. यहाँ तीव्रगामी नदियाँ बहती है जबकि पूर्वी तट पर महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी, जैसी बड़ी नदी है जो डेल्टाओं का निर्माण करती है।
  4. यहाँ सँकड़ा मैदान है जबकि पूर्वी तट पर चौड़ा मैदान है। इसलिए पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहों तथा पूर्वी तट पर बड़े-बड़े डेल्टा है।

प्रश्न 19.
जलचक्र का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर:
सूर्य ताप से महासागरों के जल वाष्पित होकर वायुमंडल द्वारा उठा लिया जाता है। यह जल अंततोगत्वा संघनित होता है और भूपृष्ठ को वर्षा, ओले ओस, हिम अथवा बजरी के रूप में लौटा दिया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र में निम्नलिखित की स्थिति दिखाए –

  1. थार मरुस्थल
  2. तटीय मैदान
  3. कंचनजंगा
  4. नाथुला और काराकोरम
  5. शिवालक पर्वत श्रेणी
  6. मेघालय का पठार
  7. दक्कन ट्रैप
  8. विंध्व और सतुपड़ा की पर्वत श्रेणियाँ

उत्तर:
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प्रश्न 2.
“उप महाद्वीप के वर्तमान भू-आकृति विभाग एक लम्बे भूगर्भिक इतिहास के दौरे में विकसित हए हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप की तीनों भू-आकृतिक इकाइयां इतिहास के लम्बे उत्तार चढ़ा के दौरे में विकसित हुई हैं। इनके निर्माण के सम्बन्ध में अनेक प्रकार के भू-वैज्ञानिक प्रमाण दिए जाते हैं फिर भी अतीत अपना रहस्य छिपाए हुए है। इनकी रचना प्राचीन काल से लेकर कई युगों में क्रमिक रूप में हुई है।

1. प्रायद्वीपीय पठार – इस पठार की रचना कैम्ब्रियन पूर्व युग में हुई है। कुछ विद्वानों की धारणा है कि यह उत्खण्ड (HORST) है जिसका उत्थान समुद्र से हुआ है। इस पठारके पश्चिमी भाग में अरावली पर्वत का उत्थान दक्षिण में नाला मलाई पर्वतमाला का एक उत्थान विंध्य-महायुग में हुआ है। इस स्थिर भाग में एक लम्बे समय तक भू-गर्भिक हलचलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ भागों में धरातल पर भ्रंश पड़ने के कारण धसाव के प्रमाण मिलते हैं। हिमालय के निर्माण के पश्चात् पठार के उत्तर:पश्चिम भाग के धंसने के कारण अरब सागर का निर्माण प्लीओसीन युग में हुआ है।

इस पठार को विशाल गोंडवाना महाद्वीप का भाग माना जाता है। इसका कुछ भाग अब भी उत्तरी मैदान के नीचे छिपा हुआ है। हिमालय के उत्थान के समय पठार के उत्तर:पश्चिमी भाग में विस्तृत रूप से ज्वालामुखी उदगार हुए जिससे दक्कन लावा क्षेत्र (Deccan Trap) का निर्माण हुआ। पठार के पश्चिम भाग में निमज्जन से पश्चिमी घाट ऊपर उभरे। दूसरी ओर पूर्वी तट शान्त क्षेत्र रहे।

2. हिमालय पर्वत – यह एक युवा तथा नवीन मोड़दार पर्वत है। मध्यजीवी काल तक यह पर्वत एक भू-अभिनति द्वारा घिरा हुआ था। इसे ‘टैथीस सांगर’ कहते हैं । टर्शियरी युग में टैथीस सागर में जमा तलछटों में बलन पड़ने से हिमालय पर्वत तथा इसकी शृखंलाओं का निर्माण हुआ। उत्तरी भू-खण्ड अंगारालैण्ड की ओर से दक्षिण-भूखण्ड गोंडवाना लैण्ड की ओर दबाव पड़ा। दक्षिणी भू-खण्ड के उत्तर अभिमुखी दाबाव ने टथीस सागर में जमा तलछट को ऊँचा उठा दिया जिससे हिमालय पर्वत में वलनों का निर्माण हुआ। हिमालय पर्वत नूतन युग में तथा तीसरी अवस्था उत्तर अभिनूतन युग में हुई।

आधुनिक प्रमाणों के आधार पर ये पर्वत निर्माणकारी हलचले (Mountain Building) प्लेट-विवर्तनिकी (Plate tectonics) से सम्बन्धित हैं। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी तथा यूरेशिया प्लेट को नीचे से धक्का देने से हिमालय पर्वतमाला की उत्पत्ति हुई।

3. उत्तरी मैदान – भारत का उत्तरी मैदान हिमालय पर्वत तथा दक्षिण पठार के मध्यवर्ती क्षेत्र में फैला है। यह मैदान एक समद्री गर्त के भर जाने से बना है। इस गर्त में हिमालय पवर्त तथा दक्षिणी पठार से बहने वाली नदियाँ भारी मात्रा में मलवे का निक्षेप करती रही है। इस गर्त का निर्माण हिमालय से पर्वत के उत्थान के समय एक अग्रगामी गर्त (Fore-deep) के रूप में हुआ। इसका निर्माण प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर अभिमुख दबाव के कारण हिमालय पर्वत के समान हुआ । यह सम्पूर्ण क्षेत्र निक्षेप क्रिया द्वारा लगातार पूरी होता रहा है। यह क्रिया चतुर्थ महाकल्प तक जारी है। इस प्रकार लम्बी अवधि में भारत के वर्तमान भौगोलिक स्वरूप का विकास हुआ

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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

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Bihar Board Class 11 Geography भारत-स्थिति Text Book Questions and Answers

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(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के विस्तार के संबंध कौन-सा कथन सही है …………………….
(क) 8°41’N-35°5’N
(ख) 8°4’N-35°6’N
(ग) 8°41’N-37°5’N
(घ) 6°45″N-35°6’N
उत्तर:
(ग) 8°41’N-37°5’N

प्रश्न 2.
भारत के साथ किस देश की स्थल सीमा सबसे लम्बी है …………………….
(क) बंग्लादेश
(ख) पाकिस्तान
(ग) चीन
(घ) म्यांमार
उत्तर:
(ख) पाकिस्तान

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प्रश्न 3.
कौन-सा देश क्षेत्रफल में भारत से अधिक बड़ा है ………………………
(क) चीन
(ख) फ्रांस
(ग) मिस्र
(घ) ईरान
उत्तर:
(क) चीन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित याम्योत्तर में से कौन-सा भारत का मानक याम्योत्तर है?
(क) 69°30’E
(ख) 75°30’E
(ग) 82°30’E
(घ) 90° 30’E
उत्तर:
(ग) 82°30’E

प्रश्न 5.
यदि आप एक सीधी रेखा में राजस्थान से नागालैंड की यात्रा करें तो निम्नलिखित नदियों में से किसको आर-पार नहीं करेंगे?
(क) यमुना
(ख) सिंधु
(ग) ब्रह्मपुत्र
(घ) गंगा
उत्तर:
(ख) सिंधु

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प्रश्न 6.
क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में भारत का स्थान है।
(क) तीसरा
(ख) चौथा
(ग) पांचवाँ
(घ) सातवाँ
उत्तर:
(घ) सातवाँ

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
क्या भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है? यदि हाँ, तो आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर:
हाँ, भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है क्योंकि देशांतर रेखाओं के मानों से स्पष्ट होता है कि इनमें लगभग 30 डिग्री का अंतर है जो हमारे देश के सबसे पूर्वी व सबसे पश्चिमी भागों के समय में लगभग 2 घंटों का अंतर पैदा करता है। कुछ ऐसे देश हैं जिनमें अधिक पूर्व-पश्चिम विस्तार के कारण एक से अधिक मानक देशांतर रेखाएँ हैं। उदाहरण : संयुक्त राज्य अमेरिका में छह समय कटिबंध हैं।

हाँ, सूक्ष्म अवलोकन करने से पता चलता है कि प्रत्येक राज्य के जिलों की संख्या का उस राज्य के क्षेत्रफल से गहरा सम्बन्ध है। जिन राज्यों का क्षेत्रफल अधिक है उन राज्यों की संख्या अधिक है। जिन राज्यों का क्षेत्रफल कम है उन राज्यों के जिलों की संख्या कम है। उदाहरणतया मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण वहाँ पर जिलों की संख्या अधिक है। जबकि मेघालय, गोवा आदि का क्षेत्रफल कम होने के कारण उन राज्यों में जिलों की संख्या कम है।

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प्रश्न 2.
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान तथा जम्मू और कश्मीर में से कौन-सा राज्य सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला और कौन-सा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है ?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल राज्य सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है जबकि अरुणाचल प्रदेश सबसे कम घनत्व वाला राज्य है।

प्रश्न 3.
राज्य के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या के बीच संबंध को ढूँढ़िए।
उत्तर:
राज्यों के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या का संबंध –

  1. भौतिक कारकों जैसे भू – आकार, जलवायु तथा मृदा
  2. सामाजिक – आर्थिक कारक जैस राजनैतिक कारक, आर्थिक (प्राकृतिक) संसाधनों की उपलब्धताओं से है।

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प्रश्न 4.
तटीय सीमाओं से संलग्न राज्यों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, त्रिपुरा, पं० बंगाल।

प्रश्न 5.
पश्चिम से पूर्व की ओर स्थलीय सीमा वाले राज्यों का क्रम तैयार कीजिए।
उत्तर:
राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तरीसगढ़, बिहार, झारखंड ।

(ग) परिशिष्ट – II पर आधारित क्रियाकलाप (इस अभ्यास को समझने व विद्यार्थियों से करवाने में अध्यापक सहायता कर सकते हैं।)

प्रश्न 1.
उन केंद्र शासित क्षेत्रों की सूची बनाइए जिनकी स्थिति तटवर्ती है।
उत्तर:
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप दमन व दीव दादरा व नगर हवेली पांडिचेरी।

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रफल दिल्ली तथा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रफल और जनसंख्या में अंतर की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की जनसंख्या 13,850,507 है और इसका क्षेत्रफल 1,483 वर्ग किमी है। जबकि अंडमान व निकोबार केंद्र शासित प्रदेश की जनसंख्या 356,152 है और इसका क्षेत्रफल 8,243 वर्ग किमी है। अंडमान व निकोबार का क्षेत्रफल अधिक होते हुए भी वहाँ की जनसंख्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से काफी कम लगभग 30 गुणा कम है। ये अंतर आर्थिक, राजनैतिक तथा भौगोलिक कारणें से है।

प्रश्न 3.
एक ग्राफ पेपर पर दंड आरेख द्वारा केंद्र शासित क्षेत्रों के क्षेत्रफल व जनसंख्या को आलेखित कीजिए।
उत्तर:
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Bihar Board Class 11 Geography भारत-स्थिति Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कौन-सा महासागरीय मार्ग भारत को यूरोप से जोड़ता है?
उत्तर:
स्वेज नहर मार्ग।

प्रश्न 2.
भारत का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल) कौन-सा है?
उत्तर:
राजस्थान।

प्रश्न 3.
भारत का सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
गोआ।

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प्रश्न 4.
भारत में सबसे छोटे केन्द्र शासित प्रदेश का नाम लिखें।
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 5.
कौन-सा राज्य पांच राज्यों से घिरा हुआ है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 6.
भारत में कितने तटीय राज्य हैं?
उत्तर:
नौ राज्य तटीय राज्य हैं-गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोआ, केरल, तमिलनाडु, आंध प्रदेश, उड़ीसा तथा पश्चिमी बंगाल।

प्रश्न 7.
अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में कुल कितने द्वीप हैं?
उत्तर:
204

प्रश्न 8.
लक्षद्वीप में कुल कितने द्वीप हैं?
उत्तर:
36

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प्रश्न 9.
मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 10.
भारत की वास्तविक शक्ति क्या है?
उत्तर:
अनेकता में एकता।

प्रश्न 11.
भारत का कुल कितना क्षेत्रफल है?
उत्तर:
36,67,263 किलोमीटर।

प्रश्न 12.
भारत के किस राज्य से कर्क रेखा तथा प्रमाणिक रेखाएँ अधिक दूरी तय करती हैं?
उत्तर:
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 13.
कौन-सी स्ट्रीट भारत को श्रीलंका से अलग करती है?
उत्तर:
पार्क स्ट्रीट।

प्रश्न 14.
भारत की तट रेखा की कुल लम्बाई लिखो।
उत्तर:
75166.6 किलोमीटर।

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प्रश्न 15.
कर्क रेखा द्वारा भारत में निर्मित दो प्रदेशों के नाम लिखो।
उत्तर:
उष्ण कटिबन्ध तथा शीतोष्ण कटिबन्ध।

प्रश्न 16.
कौन-सी अक्षांश रेखा भारत के गुजरती है?
उत्तर:
कर्क रेखा (23\(\frac { 1 }{ 2 }\)°उत्तर)।

प्रश्न 17.
जनसंख्या के आधार पर भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा।

प्रश्न 18.
कौन-सी अक्षांश रेखाएं भारत की उत्तरी तथा दक्षिणी विस्तार बनाती हैं?
उत्तर:
37° उत्तर तथा 8° उत्तर।

प्रश्न 19.
भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी सिरे में कितना समय लगता है?
उत्तर:
2 घंटे।

प्रश्न 20.
उस राज्य का नाम बताए जिसकी सबसे लम्बी तट रेखा है?
उत्तर:
गुजरांत।

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प्रश्न 21.
अण्डमान तथा निकोबार द्वीपों का कैसे निर्माण हुआ है?
उत्तर:
जलमग्न पहाड़ियों के शिखरों के कारण।

प्रश्न 22.
‘हिन्द महासागर के पूर्वी तथा पश्चिमी भाग में सागरों के नाम लिखो।
उत्तर:
अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी।

प्रश्न 23.
हिन्द महासागर के साथ कौन-से महाद्वीप हैं?
उत्तर:
अफ्रीका, एशिया ऑस्ट्रेलिया, अण्टार्कटिका।

प्रश्न 24.
‘संसार की छत’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
पामीर को।

प्रश्न 25.
किसके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा?
उत्तर:
राजा दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम पर।

प्रश्न 26.
क्षेत्रफल के आधार पर भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
सातवां।

प्रश्न 27.
किस राज्य को Land of Dawn कहते हैं?
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश।

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प्रश्न 28.
भारत तथा चीन के मध्य सीमा का नाम लिखो।
उत्तर:
मैक्मोहन लाइन।

प्रश्न 29.
भारत में कर्क रेखा पर स्थित दो शहरों के नाम लिखो।
उत्तर:
अहमदाबाद तथा जबलपुर।

प्रश्न 30.
भारत के मध्य से कौन-सी अक्षांश रेखा गुजरती है?
उत्तर:
कर्क रेखा।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय उपमहाद्वीप के हिमालय पर्वत को पार करने वाले चार दरों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भारत के उत्तर में हिमालय एक पर्वतीय दीवार के रूप में आवागमन साधनों के लिए एक रूकावट है। फिर इस पर्वत को पार करने के लिए कई दरें लाभदायक हैं, जैसे –

  • सतलुज गार्ज से शिपकी ला दर्रा (भारत-तिब्बत सड़क मार्ग)
  • काराकोरम दर्रे से कश्मीर लेहमार्ग।
  • सिक्किम में नाथूला दर्रा।
  • सिक्किम में जैल्पला दर्रा (ल्हासा-कालिम्पोंग मार्ग)।

प्रश्न 2.
उत्तर:पश्चिम भारत में स्थित दरें तथा इनका महत्त्व बताएँ।
उत्तर:
विदेशी उत्तर:पश्चिम में स्थित खैबर और बोलन दरों से होकर ही भारत में प्रवेश कर सकते थे। खैबर, हिन्दुकुश पर्वत में सफेद कोह के निकट तथा बोलन, सुलेमान और किरथर पर्वत श्रेणियों के मध्य स्थित है। पहले तो मध्य और पश्चिम एशिया की जन-जातियों इन्हीं मार्गों द्वारा भारत में आई और बाद में सिकंदर, अफगानी तथा फारसी फौजों ने भी इन्हीं भागों का अनुसारण किया । व्यापार के लिए भारत पश्चिम एशिया, पूर्व-अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया से समुद्री मार्गों द्वारा जुड़ा था।

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प्रश्न 3.
क्षेत्रफल के आधार पर संसार के देशों में भारत की स्थिति क्या है?
उत्तर:
क्षेत्रफल के आधार पर भारत संसार में सातवां बड़ा देश है। भारत से अधिक क्षेत्रफल वाले छः देश रूस, ब्राजील कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया हैं। भारत का क्षेत्रफल रूस को छोड़ कर पूरे यूरोप के बराबर है। यह इंग्लैण्ड से 13 गुणा तथा जापान से 9 गुणा बड़ा है, परन्तु रूस भारत से 7 गुणा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका से तीन गुणा बड़ा है। भारत का पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर:दक्षिण विस्तार पृथ्वी की परिधि का लगभग 12 है।

प्रश्न 4.
उप-महाद्वीप किसे कहते हैं? इसकी व्याख्या दक्षिण एशिया की हिमालय पर्वत श्रेणी के दक्षिण स्थित देशों के सदर्भ में कीजिए।
उत्तर:
उप-महाद्वीप एक विशाल स्वतन्त्र भौगोलिक इकाई को कहा जाता है। यह स्थल खण्ड मुख्य महाद्वीप से स्पष्ट रूप से अलग होता है। इस विशालता के कारण इस भू-भाग में आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक स्वरूपों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भू’भाग की सीमाएँ विभिन्न स्थलाकृतियों द्वारा बनाई जाती हैं जो इसे सीमावर्ती प्रदेश से पृथक् करती हैं। भारत एक महान देश है।

इसे प्रायः भारतीय उप-महाद्वीप (Indian Sub-continent) कहा जाता है। हिमालय पर्वत की प्राकृतिक सीमा भारतीय उप-महाद्वीप को एक परिबद्ध चरित्र देकर विलगता प्रदान करती है। यह भौगोलिक इकाई इस भूखण्ड को एशिया महाद्वीप से अलग करती है। इसमें पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा मालदीप देश स्थित हैं। इन्हें सार्क (SAARC) देश भी कहते है।

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प्रश्न 5.
जब अरुणाचल में सूर्योदय हो चुका होता है सब सौराष्ट्र में रात होती है। कारण बताएँ। अथवा, भारत के सबसे पूर्वी भाग अरुणाचल प्रदेश और सबसे पश्चिमी भाग गुजरात के स्थानीय समय में दो घण्टे का अन्तर क्यों है? अथवा, भारत का देशान्तरीय विस्तार हमें किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
भारत पूर्व पश्चिम की ओर लगभग तीन हजार किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ है। इसका सबसे पश्चिमी सीमा बिन्दु सौराष्ट्र में हैं, जबकि पूर्वी सीमा बिन्दु अरुणाचल प्रदेश में है। इस प्रकार भारत का पूर्व-पश्चिम विस्तार 30° है । सूर्य को 1° देशान्तर पार करने के लिए 4 मिनट का समय लगता है। इसलिए 30° देशान्तर के लिए (30 x 4 = 120) मिनट या दो घण्टे का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश पूर्व में है।

यह भाग सूर्य के सामने अंत में आता है, इसलिए वहाँ सूर्योदय बाद में अर्थात् दो घण्टे देर से होता है तो सौराष्ट्र में रात होती हैं। इसलिए अरुणाचल प्रदेश में सूर्य उदय हो चुका होता है तो सौराष्ट्र में रात होती है। इसलिए अरुणाचल को ‘सूर्योदय का प्रदेश’ (Land of Dawn) भी कहते हैं। इस तथ्य से भारत की विशालता का ज्ञान होता है परन्तु आधुनिक जेट युग में दूरियाँ अपना महत्त्व खो चुकी हैं। आप श्रीनगर में नाश्ता करके दोपहर के खाने पर तिरुवनन्तपुरम पहुंच सकते हैं। जामनगरी और गुवाहाटी के मध्य की यात्रा उतना ही समय लेगी जितनी देर में आप एक भारतीय फिल्म देखते हैं।

प्रश्न 6.
भारत के दक्षिण में स्थित महासागर को ‘हिन्द महासागर’ क्यों कहा जाता है? हिन्द महासागर भारत को किन देशों से जोड़ता है?
उत्तर:
हिन्द महासागर सचमुच ‘हिन्द’ (भारत) का महासागर है। यह संसार में एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम के कारण है। भारत की तट रेखा हिन्द महासागर के अधिकतर भाग को घेरती है। इस क्षेत्र में भारत जैसे महत्त्वपूर्ण देश का प्रभाव है। प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में भारत ही सब से उन्नत देश था। इस महत्त्व के कारण ही इसे हिन्द महासागर कहा जाता है। हिन्द महासागर भारत को पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पश्चिमी एशिया, यूरोप तथा उत्तरीय अमेरिका से स्वेज मार्ग द्वारा जोड़ता है। पूर्व में यह चीन, जापान तथा इण्डोनेशिया से जुड़ा हुआ है।

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प्रश्न 7.
भारत के विस्तार का वर्णन करें। भारत के निकटवर्ती 6 पड़ोसी देश तथा तुलनात्मक रूप से कुछ दूर के 6 पड़ोसी देश बताएँ । भारतीय भूखण्ड का कौन-सा भाग इण्डोनेशिया के निकटतम है ?
उत्तर:
क्षेत्रफल के आधार पर भारत संसार का सातवां बड़ा देश है। इसका अक्षांशीय विस्तार 80-4° से 37°-6′ उत्तर तक है। इसका देशान्तरीय विस्तार 68°-7′ से 970-25′ पूर्वी तक है। भारत का उत्तर से दक्षिण दूरी 3214 किमी है। भारत की पश्चिम-पूर्व दूरी 2933 कि०मी० है। इन्दिरा प्वाईंट (निकोबार द्वीप) भारत का दक्षिण छोर है। भारत के छ: निकटवर्ती पड़ोसी देश पाकिस्तान, नेपाल म्यांमार, चीन, श्रीलंका तथा बांग्लादेश हैं। भारत के तुलनात्मक रूप से कुछ दूर के छ: पड़ोसी देश अफगानिस्तान, ईरान, रूस, मलेशिया, इण्डोनेशिया तथा थाईलैण्ड हैं। निकोबार द्वीप इण्डोनेशिया के निकट है।

प्रश्न 8.
मैक्मोहन रेखा किसे कहते हैं ? इसका क्या महत्त्व है? इसका निर्धारण किस सिद्धान्त पर किया गया है?
उत्तर:
मैक्मोहन रेखा भारत तथा चीन के मध्य सीमा रेखा है। यह सीमा रेखा हिमालय रेखा के साथ-साथ कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। इस सीमा के पार चीन के सिक्यांग तथा तिब्बत पठार स्थित हैं। इसके उत्तर:पूर्वी भाग में मयन्मार (बर्मा), चीन एवं भारत आपस में मिलते हैं। यह सीमा रेखा अधिकांशतः प्राकृतिक है तथा ऐतिहासिक रूप से निर्धारित है। हिमालय पर्वत हमारी उत्तरी सीमा का प्रहरी है। उच्च हिमालय के शिखर भारत तथा चीनको अलग-अलग करते हैं। ये शिखर एक जल विभाजक के रूस में फैल हुए है तथा चीन सीम रेखा को प्राकृतिक रूप देते हैं।

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प्रश्न 9.
उन राज्यों और संघीय प्रदेशों के नाम बताइए जिनकी सीमा बांग्लादेश से मिलती है। अथवा, भारत की स्थल सीमाओं का वर्णन करें। भारत के कौन-से राज्य सीमावर्ती देशों के साथ लगते हैं?
उत्तर:

  1. बांग्लादेश के साथ स्थल सीमा-भारत तथा बांग्लादेश के मध्य पूर्व में एक स्थलीय सीमा है। बांग्लादेश के पूर्व में असम, मेघालय, त्रिपुरा राज्य तथा मिजोरम प्रदेश की सीमाएँ हैं। बांग्लादेश के पश्चिम में पश्चिमी बंगाल राज्य की सीमा है।
  2. पाकिस्तान के साथ स्थल सीमा-भारत तथा पाकिस्तान के बीच कश्मीर से लेकर खाड़ी कच्छ तक एक स्थलीय सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान तथा गुजरात राज्यों की सीमाएँ मिलती हैं
  3. नेपाल के साथ स्थल सीमा-भारत के उत्तर में हिमालय पर्वतों में स्थित नेपाल देश है। इन देश के बीच यह एक प्राकृतिक सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तारंचल, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा सिक्कम राज्यों की सीमाएँ मिलती हैं।
  4. म्यंमार के साथ स्थल सीमा-हिमालय पर्वत की पूर्वी शाखाएँ भारत-वर्मा सीमा बनाती हैं। यह एक प्राकृतिक स्थलीय सीमा है। इस सीमा के साथ-साथ नागालैण्ड, मणिपुर राज्य, अरुणाचल और मिजोरम प्रदेश की सीमाएँ बनाते हैं।
  5. पामीर गांठ के शीर्ष के साथ देश-भारत की उत्तरी सीमा के शीर्ष (पामीर गांठ) पर पाँच देशों की सीमाएँ आपस में मिलती है। इस मिलन बिन्दु पर भारत, चीन, तजाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान की सीमाएँ मिलती हैं। पामीर गांठ को ‘संसार की छत’ (Roof of the world) कहते हैं।

प्रश्न 10.
भारत का प्रायद्वीपीय आकार किस प्रकार लाभदायक है? तीन उदारहण देकर स्पष्ट करें। अथवा, भारत की प्रायद्वीपीय स्थिति के तीन प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
भारतीय प्रायद्वीप त्रिभुजाकार है। इससे भारत के तीन पड़ोसी सागरों तक (बंगाल की खाड़, अरब सागर, हिन्द महासागर) पहुँचना बहुत सुगम है। इस आकार के कारण मालबार तट तथा कोरोमण्डल तट पर मत्स्य क्षेत्रों को विकास हुआ है। दोनों तटों पर कई प्राकृतिक बंदरगाहों जैसे-विशाखापट्टनम्, चेन्नई, कोचीन, मुम्बई आदि का विकास हुआ है जहाँ से अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग गुजरते हैं।

प्रश्न 11.
‘भारत न तो दानव है और न बौना’ इस कथन की व्याख्या कीजिए। अथवा, “भारत न तो संसार का सबसे बड़ा देश है और न ही सबसे छोटा।” उदाहरण सहित व्याख्या करो।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में सातवाँ स्थान है। भारत पृथ्वी के धरातल के लगभग 22% क्षेत्रफल में फैला हुआ है फिर भी कई देशों का आकार भारत से बड़ा है। रूस भारत से लगभग सात गुना बड़ा है। भारत इंग्लैंड से 13 गुना तथा जापान से नौ गुणा बड़ा है। इस प्रकार क्षेत्रफल के आधार पर भारत न बहुत बड़ा और न ही बहुत छोटा देश है । इसलिए यह कथन कि “भारत न तो दानव है और न ही बौना” (“India is neither againt nor a niomv.”)

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प्रश्न 12.
“भारत को हिन्द महासागर में सर्वाधिक केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है।” यह कथन कहाँ तक सही है ?
उत्तर:
हिन्द महासागर का विस्तार 40° पूर्व से 120° पूर्व देशान्त तक है। भारत का दक्षिणी सिरा कन्याकुमारी लगभग 80° पूर्वी देशान्त पर स्थित है। इस प्रकार भारत को हिन्द महासागर में केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है। भारतीय प्रायद्वीप अरब सागर तथा खाड़ी बंगाल के मध्य में स्थित है। हिन्द महासागर में किसी भी देश की तट रेखा भारतीय तट रेखा जितनी लम्बी नहीं है। सभी समुद्री मार्ग भारत के तट को छू कर गुजरते हैं। भारत पूर्व तथा पश्चिम दोनों दिशाओं में स्थित देशों के मध्य में स्थित है। इसलिए भारत को हिन्द महासागर में सर्वाधिक केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है। भारत हिन्द महासागर में है। अत: हिन्द महासागर वास्तव में “हिन्द महासागर” है।

प्रश्न 13.
भारत में वन जीवन अभ्यारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यान में अंतर बताएँ।
उत्तर:
वन्य जीवन अभ्यारण्य तथा राष्ट्रीय उद्यान में निम्नलिखित अंतर हैं जो सुक्ष्म हैं –
1. वन्यजीव अभ्यारण्य – भारत में कुल 482 वन्यजीव अभ्यारण्य हैं, जिसका कुल क्षे० 1,15,40,000 हेक्टेयर हैं। देश के प्रमुख वन्य जीव अभ्यारणों में चन्द्रप्रभा, दाचीगाम, पेरियार
आदि के नाम हैं। अभ्यारणों में मानवीय क्रियाकलापों की अनुमति होती हैं। अनुमति वगैर इनमें शिकार करना मना होता है, लेकिन चराई और गो-पशुओं का आना-जाना नियमित होता है।

2. राष्ट्रीय उद्यान – राष्ट्रीय उद्यान एक या अनेक परितंत्रों व्यापक वृहत क्षेत्र होता है ।यह क्षेत्र मानव के शक्ति और अधिग्रहण द्वारा भी अभी तक परिवर्तित नहीं हुआ है। विशिष्ट वैज्ञानिक शिक्षा और मनोरंजन हेतु इसके पेड़ पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियों भू-आकृतिक स्थलों और आवासों को संरक्षित किया गया है। राष्ट्रीय उद्यानों में शिकार और चारण पूर्णतया वर्जित होते हैं। भारत के कुल 40,60,600 हेक्टेयर भूमि में राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इनमें काजीरंगा, मानस, कान्हा दुधवा आदि प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।

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प्रश्न 14.
पूर्वी दुनिया में भारत के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पूर्वी दुनिया में भारत की स्थिति – भारत पश्चिमी एशिया तथा पूर्वी एशिया के मध्य में स्थित है। अफ्रिका, औद्योगिक दृष्टि से विकसित यूरोप तथा तेल-सम्पन्न पश्चिमी एशिया को दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों, चीन विकसित उद्योग वाले जापान, आस्ट्रेलिया तथा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पश्चिमी तट जोड़ने वाले महासागरीय जल-मार्ग भारत से होकर गुजरते हैं। दक्षिण-पूर्वी एशिया, पश्चिमी एशिया तथा अफ्रीका के पूर्वी तटवर्ती पड़ोसी देशों के साथ विदेशी सम्बधों में सागर की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। दक्षिण-पूर्वी एशिया में भारतीय और चीन संस्कृति का संगम हुआ है।

इन दोनों संस्कृतियों ने स्थानीय संस्कृति के साथ मिलकर एक नई मिली-जुली संस्कृति को जन्म दिया है, जो हिन्द चीन जैसे शब्दों में प्रतिबिंबित हुई है। इसके बाद इस्लाम, ईसाई धर्म और यूरोपवासियों के आवागमन से यह प्रदेश और समृद्ध हो गया। इससे यहाँ की संस्कृति में विविधता के नए रंग भर गए हैं जो आज दक्षिण-पूर्वी एशिया में झलकते हैं। जिन देशों में भारतीय संस्कृति की छाप आज भी स्पष्ट है उनमें लाओस, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, मलेशिया और इंडोनशिया उल्लेखनीय हैं। इन्डोनेशिया के द्वीपों के नाम जैसे सुमात्रा, जावा और बाली भारतीय प्रभाव के स्पष्ट उदाहरण हैं। थाईलैंड (पुराना नाम स्याम) और कंबोडिया की स्थिति भी समान ही है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
“भारत की सीमाएँ अधिकांशत : प्राकृतिक हैं और वे ऐतिहासिक रूप से निर्धारित हैं।” उदाहरण सहित स्पष्ट करो।
उत्तर:
भारतीय सभ्यता बहुत प्राचीन है। इसकी सीमाएँ ऐतिहासिक हैं तथा अधिकांशतः प्राकृतिक हैं।

  1. हिन्द माहासागर भारत की दक्षिणी सीमा बनाता है। समुद्र के पार हमारा निकटतम पड़ोसी देश श्रीलंका है जिसे पाक जलडमरू मध्य भारत से अलग करता है।
    इण्डोनेशिया निकोबार द्वीप के दक्षिण में अलग-अलग स्थित है।
  2. भारत की पूर्वी सीमा पर बंगाल की खाड़ी के पास बांग्लादेश, मलेशिया, मयन्मार, थाईलैण्ड, कम्बोडिया, वियतनाम तथा लाओस स्थित हैं। यह सीमा घने जंगलों तथा पूर्वांचल की पहाड़ियों द्वारा बनी हुई है।
  3. पश्चिम की ओर अरब सागर से परे ईराक, ईरान, अरब, मिस्र, सूडान, इथोपिया, केनिया आदि देश स्थित हैं।
  4. भारत की उत्तरी सीमा पर हिमालय पर्वत की एक अखण्ड दीवार के परे तिब्बत, चीन सिक्यिांग, बेसिन तजाकिस्तान तथा अफगानिस्तान स्थिति हैं। मैक्मोहन रेखा भारत तथा चीन के मध्य एक प्राकृतिक सीमा है।
  5. भारत की उत्तरी सीमा पर नेपाल तथा भूटान स्थित हैं।
  6. हमारी पश्चिमी सीमा पाकिस्तान से लगती है। यह देश ऐतिहासिक रूप से प्राचीन सभ्यता के समय से भारत का सहभागी रहा है। पाँच नदियों का देश (पंजाब) तथा राजस्थान मरूभूमि एवं सिंधु (पाकिस्तान) ऐतिहासिक रूप से समकालीन प्रदेश है।

इससे स्पष्ट है कि भारत की सीमाएँ अधिकांशत : प्राकृतिक है तथा तथा ऐतिहासिक रूप से निर्धारित हैं।

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प्रश्न 2.
क्या भारत को एक उप-महाद्वीप कहा जा सकता है?
उत्तर:
भारत : एक उप-महाद्वीप (India: ASub-Continent) – भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में सातवां स्थान है। भारत से अधिक क्षेत्रफल वाले छः देश रूस, ब्राजील, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया है : भारत पृथ्वी के धरातल के लगभग 2.2% क्षेत्रफल में फैला है फिर भी कई देशों का आकार भारत से बड़ा है। रूस भारत से लगभग सात गुना तथा संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग तीन गुना बड़ा है। इस प्रकार क्षेत्रफल के आधार पर भारत न बहुत बड़ा और न ही बहुत छोटा देश है। इसलिए यह कथन सही है कि भारत न तो “दानव है और न ही बौना” (India is neither aGaint nor a Pigmy.) उप-महाद्वीप एक विशाल स्वतन्त्र भौगोलिक इकाई को कहा जाता है। यह स्थल खण्ड मुख्य महाद्वीप से स्पष्ट रूप से अलग होता है। इस विशालता के कारण इस भू-भाग में आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक समरूपों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं।

भू-भाग की सीमाएँ विभिन्न स्थलाकृतियों द्वारा बनाई जाती है जो इसे सीमावर्ती प्रदेश से पृथक् करती हैं भारत एक महान् देश है। इसे प्रायः भारतीय उप-महाद्वीप (Indian Sub-continent) भी कहा जाता है। डॉo केंसी के अनुसार भारत को यूरोप की भांति एक महाद्वीप कहलाने का अधिकार है। प्रायः ये कथन विशाल क्षेत्रफल तथा जनसंख्या के आधार पर कहे जाते हैं । ग्लोब पर एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में एक विशाल स्थलखण्ड के रूप में भारतीय उप-महाद्वीप दिखाई देता है। इसे उप-महाद्वीप कहे जाने के कई कारण हैं –

1. प्राकतिक सीमाएँ – भारत की प्राकृतिक सीमाएं इसे एक बिलगता का स्वरूप प्रदान करती हैं। उत्तर में हिमालय पर्वत, दक्षिण में हिन्द महासागर, पूर्व में घने वन तथा पश्चिम में थार मरूस्थल इसे मुख्य महाद्वीप से पृथक् करके उप-महाद्वीप का स्वरूप प्रदान करते हैं।

2. परिबद्ध चरित्र – भारत चारों ओर से एशिया के मुख्य क्षेत्रों से घिरा है। इसे विशाल पर्वतों ने हजारों किलोमीटर तक अखंडता रूप से घेर कर परिबद्ध (Enclosed) चरित्र दे दिया है। इस पर्वतीय घेरे के कारण यह एशिया के अन्य क्षेत्रों से व्यावहारिक रूप से अलग-अलग है।

3. क्षेत्रफल तथा जनसंख्या – क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत संसार का सातवां बड़ा देश है। यह देश भू-मण्डल के एक बड़े भाग में फैला हुआ है। चीन को छोड़कर यह संसार के सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। यहाँ के लोगों की शारीरिक बनावट, रहन-सहन तथा संस्कृति संसार के दुसरे प्रदेशों से भिन्न है ।

4. विविधता में एकता – भारत विभिन्नताओं का देश है, फिर भी भारतीय सभ्यता में एक विशिष्ट एकरूपता विद्यमान है। इस आधार पर कई लेखकों ने इस भू-भाग को एक उप-महाद्वीप की संज्ञा दी है।

5. जलवायु – जलवायु के आधार पर सम्पूर्ण देश में उष्ण मानूसनी जलवायु पाई जाती है। इस भू-भाग पर मानसून पवनें स्वतन्त्र रूप में उत्पन्न होती हैं। मानसून पवनों का पूर्ण रूप इसी उप-महाद्वीप पर मिलता है। सम्पूर्ण देश में ऋतुओं का एक जैसा क्रम पाया जाता है। ये पवनें इसे एशिया महाद्वीप में पृथक् प्रकार की जलवायु प्रदान करके उप-महाद्वीप का स्वरूप प्रदान करने में सहायक हैं।

6. प्राकृतिक संसाधन – भारत में प्रकृतिक साधनों की प्रचुरता है। सारे देश की आर्थिकता कृषि पर आधारित है। ये साधन किसी महाद्वीप में मिलने वाले साधनों की तुलना में कम नहीं हैं। इन विशेषताओं के आधार पर भारत को एक उप-महाद्वीप कहना सही है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 आधारिक संरचना 

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 आधारिक संरचना  Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 8 आधारिक संरचना

Bihar Board Class 11 Economics आधारिक संरचना Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आधरिक संरचना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आधारिक संरचनाओं से अभिप्राय उन सुविधाओं, क्रियाओं और सेवा से है जो अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास में सहायक होती हैं। ये आधारिक संरचनायें औद्योगिक. तथा कृषि उत्पाद, घरेलू तथा विदेशी व्यापार में सहायक सेवायें प्रदान करती हैं। इन सेवाओं में सड़क रेलवे, बन्दरगाह, हवाई अड्डे, बाँध (Dams), पावर स्टेशन तेल तथा गैस की पाइपलान की सुविधायें, पाठशाला, कॉलेज स्वास्थ्य सेवायें, बैंक बीमा तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं की सेवायें शामिल हैं।

ये संरचनायें देश के विकास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं। इन संरचनाओं के विकसित होने से देश की अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र जैसे कृषि, उद्योग, व्यापार आदि का विकास संभव नहीं है। आधरिक सरंचनायें अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करती हैं।
आधारिक संरचनाएँ दो प्रकार की होती हैं –

  1. आर्थिक संरचनाएँ तथा
  2. सामाजिक संरचनाएँ। ऊर्जा, यातयात, संचार आदि आर्थिक संरचनाएं हैं जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास आदि सामाजिक आधारिक संरचनाएँ हैं।

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प्रश्न 2.
आधारिक संरचना को विभाजित करने वाले दो वर्गों की व्याख्या कीजिए? दोनों एक-दूसरे पर कैसे निर्भर करते हैं?
उत्तर:
आधारिक संरचनाओं का वर्गीकरण (Classification of infrastructures) आधारित संरचनायें दो श्रेणियों में वर्गीकृत हैं –
1. आर्थिक आधारिक संरचनाएँ (Economic Infrastructure):
आर्थिक आधारिक संरचना से अभिप्राय उस पूँजी स्टॉक से है. जो उत्पादन प्रणाली को प्रत्यक्ष सेवायें प्रदान करती है। जैसे-रेलवे, सड़क, टेलीफोन आदि।

2. सामाजिक आधारिक संरचनाएँ (Social Infrastructure):
सामाजिक आधारिक संरचना से अभिप्राय उस पूँजी स्टॉक से है जो उत्पादकों को अप्रत्यक्ष रूप से सेवायें प्रदान करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास आदि सामाजिक आधारिक संरचनायें हैं। आर्थिक आधारिक व सामाजिक आधारिक संरचनाओं का आपसी संबंध (Interrelaton between Economic and Social Infrastructure)-आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं का आपस में काफी संबंध है।

इसे निम्न तथ्यों से समझा जा सकता है –

1. एक-दूसरे की पूरक (Supplementary to each other) सामाजिक तथा आधारित संरचनायें एक दूसरे की पूरक हैं। एक शिक्षित तथा स्वस्थ्य व्यक्ति की ऊर्जा यातयात तथा संचार के साधनों का उचित उपयोग कर सकता है। यदि देश की जनसंख्या अशिक्षित तथा अस्वस्थ्य है तो वह आर्थिक आधारिक संरचनाओं का समुचित उपयोग नहीं कर सकती। इसी प्रकार शिक्षा तथा स्वास्थ्य का ऊँचा स्तर विकसित आर्थिक आधारिक संरचनाओं के अभाव में अधिक उपयोगी सिद्ध नहीं होगा। भारत में शिक्षित बेरोजगारी का मुख्य कारण आर्थिक आधारिक संरचनाओं का अभाव है।

2. एक दूसरे को विकसित करने में सहायक (Helpful in developing each other):
आर्थिक आधारिक संरचना सामाजिक आर्थिक संरचना को विकसित करती है। उदाहरण के लिये संचार और परिवहन की सुविधायें जितनी अधिक होंगी शिक्षा का उतना ही अधिक विस्तार हो सकेगा। सामाजिक आधारिक संरचना भी आर्थिक आधारिक संरचनाओं को विकसित करती हैं।

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प्रश्न 3.
आधारिक संरचना उत्पादन का संवर्द्धन कैसे करती है?
उत्तर:
आधारिक संरचना औद्योगिक व कृषि उत्पादन, घरेलू व विदेशी व्यापार और वाणिज्य के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग उपलब्ध कराती हैं। इन सेवाओं में सड़क, बन्दगाह, हवाई अड्डे, बाँध, बिजलीघर, तेल, और गैस पाइप लाइन, सुविधाएँ स्कूल-कॉलेज आदि आते हैं। इनमें से कुछ सुविधाओं का प्रत्यक्ष प्रभाव उत्पाद व्यवस्था की कार्य-प्रणाली पर पड़ता है।

जबकि कुछ अन्य अर्थव्यवस्था के सामाजिक क्षेत्रकों के निर्माण में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करते है। आधारिक संरचना ऐसी सहयोगी प्रणाली है जिस पर एक आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता कार्य प्रणाली पर निर्भर करती है। आधुनिक कृषि भी बीजों कीटनाशक दवाइयों और खाद के लिए बड़े पैमाने पर परिवहन के साधनों पर निर्भर करती है। इसके लिए यह आधुनिक सड़कों, रेल और जहाजी सुविधाओं का उपयोग करती है।

2001 की जनगणना के आंकड़े यह बताते हैं कि ग्रामीण भारत में केवल 56% परिवारों में बिजली की सुविधा है जबकि 43% परिवारों में आज भी मिट्टी के तेल का उपयोग होता है। ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 90% परिवार खाना बनाने में जैव ईंधन का प्रयोग करते हैं, केवल। 24% ग्रामीण परिवारों में लोगों को नल का पानी उपलब्ध है। लगभग 76% लोग कुँओं, टैंकों तालाबों, झरनों, नदियों, नहरों आदि जल स्रोतों के खुले स्रोतों से पानी पीते हैं।

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह पता चलता है कि वर्ष 1996 तक ग्रामीण इलाकों में केवल 6 प्रतिशत लोगों को सफाई की सुविधाएँ प्राप्त थीं। संरचनात्मक सुविधाएँ एक देश के आर्थिक विकास में उत्पादन के साधनों की उत्पादकता में वृद्धि करके और उसकी जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके अपना योगदान करती हैं। अपर्याप्त आधारिक संरचना से स्वास्थ्य पर अनेक प्रकार से बुरा असर पड़ सकता है।

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प्रश्न 4.
किसी देश के आर्थिक विकास में आधरिक संरचना योगदान करती है। क्या आप सहमत हैं?
उत्तर:
हाँ हम इस कथन से सहमत हैं।

प्रश्न 5.
भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की क्या स्थिति है?
उत्तर:
भारत ग्रामीण आधारिक संरचना की स्थिति शोचनीय है। हमारी बहुसंख्य आबादी. ग्रामीणों क्षेत्रों में निवास करती है। विश्व में अत्यधिक तकनीकी उन्नति की बावजूद ग्रामीण महिलाएँ अपनी ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु फसल का बचा-खुचा, गोबर और जलाऊ लकड़ी जैसे जैव ईंधन का आज भी उपयोग करती हैं। जल और अन्य आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विद्युत उन्हें दूर-दूर तक जाना पड़ता है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा का महत्त्व क्या है? ऊर्जा के व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक स्रोतों में अन्तर कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा का महत्त्व (Importance of Energy):
ऊर्जा का सबसे दृष्टिगोचर रूप बिजली है। किसी देश के आर्थिक विकास को निर्धारित करने वाली आधारिक संरचना में बिजली अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

ऊर्जा के व्यावसायिक और गैर:
व्यावसायिक स्रोतों में अन्तर (Difference between Commercial and Non-Commerical Sources of Energy):
ऊर्जा के व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक स्रोत होते हैं। व्यावसायिक स्रोतों में कोयला, पेट्रोल और बिजली आते हैं क्योंकि इन्हें खरीदा और बेचा जाता है।

भारत में उपयोग किए जाने वाले समस्त ऊर्जा स्रोतों में इसका भाग 50% से ऊपर है। ऊर्जा के गैर-व्यावसायिक स्रोतों में जलाऊ लकड़ी, कृषि का कूड़ा-कचरा (Waste) और गोबर आते हैं। ये गैर-व्यावसायिक है क्योंकि ये हमें प्रकृति या जंगलों से मिलते है। प्रायः ऊर्जा के व्यावसायिक स्रोत (पन-बिजली को छोड़कर) समाप्त हो जाते हैं, जबकि गैर-व्यावसायिक स्रोत पुनः नवीनीकरण किया जा सकता है।

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प्रश्न 7.
विद्युत उत्पादन के तीन बुनियादी स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर:
विद्युत उत्पादन के तीन आधारभूत साधन हैं –

  1. कोयला
  2. पानी
  3. आणविक (Nuclear)

प्रश्न 8.
संचारण और वितरण हानि से आप क्या समझते हैं? उन्हें कैस कम किया जा सकता है?
उत्तर:
संचारण हानि:
विद्युत वितरण का संचारण तारों द्वारा किया जाता है। एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने में जो ऊर्जा नष्ट होती है यह संचारण है। इसे आधुनिक तकनीक का प्रयोग का दूर कर सकते हैं।

वितरण हानि:
विद्युत की व्यवस्था अच्छी नहीं है। अनेक स्थानों पर विद्युत चोरी हो रही है। यह वितरण हानि है। इसे नवीन विद्युत का प्रयोग करके दूर कर सकते हैं।

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प्रश्न 9.
ऊर्जा के विभिन्न गैर-व्यवसायिक स्रोत कौन से हैं?
उत्तर:
जलाऊ लकड़ी, कृषि का कूड़ा-कचरा, सूखा गोबर आदि ऊर्जा के विभिन्न गैर-व्यवसायिक स्रोत हैं।

प्रश्न 10.
इस कथन को सही सिद्ध कीजिए कि ऊर्जा के पुनः नवीनीकृत स्रोतों के इस्तेमाल से ऊर्जा संकट दूर किया जा सकता है?
उत्तर:
निरन्तर विकास और जनसंख्या वृद्धि से भारत में ऊर्जा की माँग तीव्र हो रही है। वह माँग वर्तमान में उत्पन्न की जा रही ऊर्जा से बहुत अधिक है। ऊर्जा के पुनः नवीनीकरण स्रोतों से बिजली के अतिरिक्त पूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। पुनः नवीनीकृत ऊर्जा स्रोतों पर अधिक से अधिक निर्भरता से सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 11.
पिछले वर्षों के दौरान ऊर्जा के उपभोग प्रतिमानों में कैसे परिवर्तन आया है?
उत्तर:
ऊर्जा की उपभोग प्रवृत्ति में परिवर्तन (Changes in Consumption pattern of energy):

नीचे तालिका में विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न वर्षों में ऊर्जा के उपभोग को दर्शाया गया है –
विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा का उपभोग (प्रतिशत में) (Consumption of energy in various sectors-in Percentage):
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स्रोत:
नवीं पचवर्षीय योजना, अयोग, भारतीय सरकार नई दिल्ली।
(Source : Ninth Five Year Plan, Planning Commission, Government of India New Delhi)

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प्रश्न 12.
ऊर्जा के उपभोग और आर्थिक संवृद्धि की दरें कैसे परस्पर सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
ऊर्जा के उपभोग और आर्थिक संवृद्धि में सम्बन्ध (Relation between Consumption of Energy and Economic Growth):
ऊर्जा का सबसे दृष्टिगोचर रूप जिसे प्रायः आधुनिक सभ्यता की प्रगति का द्योतक माना जाता है, में बिजली आती है। किसी देश के आर्थिक विकास को निर्धारित करने वाली आधारित संरचना में बिजली अत्यंत महत्त्वपूर्ण – है। प्रायः बिजली की माँग की अभिवृद्धि दर सकल घरेलू उत्पाद दर से ऊँची होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष सकल घरेलू उत्पाद प्राप्त करने के लिए बिजली की पूर्ति में अभिवृद्धि का प्रतिवर्ष दर लगभग 12 प्रतिशत होना चाहिए।

प्रश्न 13.
भारत में विद्युत क्षेत्रक को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
उत्तर:
भारत में बिजली क्षेत्र को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है –

1. बिजली का अपर्याप्त उत्पादन (Indequate Generation of Electricity):
भारत में बिजली का उत्पादन अपर्याप्त है। सन् 2001 में बिजली का उत्पादन 49,960 किलोवाट घण्टे हुआ था जबकि बिजली माँग 50,227 करोड़ यूनिट थी। इसके अतिरिक्त भारत में हर वर्ष 1,00,000 मेगावाट बिजली अतिरिक्त चाहिए जबकि भारत केवल प्रतिवर्ष 20,000 मेगावाट बिजली अधिक पैदा करने में समर्थ है।

2. उत्पादन क्षमता का क्रम प्रयोग (Less Capacity Utilisation):
भारत में ताप बिजली घरों का उत्पादन क्षमता का कम प्रयोग हो पाता है।

3. बिजली बोर्ड के घाटे (Loss of Electricity Boards):
भारत में बिजली का उत्पादन तथा वितरण पर सरकार का लगभग एकाधिकार है। बिजली का वितरण राज्य के बिजली बोर्ड (SEBs) द्वारा किया जाता है। इस समय लगभग सभी बिजली बोर्ड घाटा उठा रहे हैं। उनके पास इतना धन भी नहीं है कि बिजली खरीदकर भुगतान कर सकें। बिजली बोडौँ को 500 बिलियन से अधिक घाटा हुआ है। इन बोडों के घाटे में कई कारण हैं –

  • बिजली की चोरी
  • बिजली के वितरण के दौरान बिजली की हानि
  • कृषि, सिंचाई तथा लघु उद्योगों को रियासतीदर पर बिजली की आपूर्ति करना आदि

4. साधारण जनता में असन्तोष (Public Unrest):
बिजली की अधिक दर तथा देश के विभिन्न भागों में बिजली की कटौती से साधारण जनता में भारी असन्तोष है।

5. कच्चे माल तथा कोयले की कमी (Shortage of raw material and coal supplies):
ताप विद्युत यन्त्र जो भारत में अधिकांश मात्रा में बिजली पैदा करते हैं, उन्हें कच्चे. माल तथा कोयले की कमी का सामना करना पड़ता है।

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प्रश्न 14.
भारत में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए किए गए सुधारों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
सुधार (Reforms):
भारत में ऊर्जा संकट को निपटने के लिए निम्नलिखित कार्य किए जा रहे हैं –

  1. विद्युत में आर्थिक एवं सार्वजनिक निवेश किया जा रहा है।
  2. बेहतर अनुसंधान तथा विकास के उपाय अपनाए जा रहे हैं।
  3. तकनीकी खोज की जा रही है।
  4. ऊर्जा के पुनः नवीनकृत स्रोत से बिजली की अतिरिक्त पूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
  5. व्यापक स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र को आगे लाया जा रहा है।

प्रश्न 15.
हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ (Main Features of the Health of Indians):
हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. भारत में विश्व की कुल जनसंख्या की लगभग 17% संख्या निवास करती है, लेकिन इस देश पर विश्व के कुल रोगियों का 20% बोझ है।
  2. भारत के जी.डी.बी. के आधे से अधिक हिस्से के अन्तर्गत अतिसार, मलेरिया और क्षय रोग जैसी संक्रामक बीमारियाँ आती हैं।
  3. प्रत्येक वर्ष 5 लाख बच्चे जल संक्रमित रोगों से मर जाते हैं।
  4. एड्स का खतरा भी छाया हुआ है।
  5. कुपोषण और टीके की दवा की अपर्याप्त पूर्ति के कारण प्रत्येक वर्ष 22 करोड़ बच्चे मौत का शिकार होते हैं।
  6. वर्तमानमें 20% से भी कम जनसंख्या जन-सुविधाओं का उपयोग करती है।
  7. भारत में  केवल 38% प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में डॉक्टरों की वाछित संख्या उपलब्ध है और केवल 30% प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में दवाइयों का पर्याप्त भंडार है।

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प्रश्न 16.
रोग वैश्विक मार (GBD) क्या है?
उत्तर:
रोगों का विश्वव्यापी भार एक संकेतक (Indicator) है जिसके द्वारा निपुण व्यक्ति इस बात का अनुमान लगाते हैं कि एक विशेष बीमारी से कितने लोग मरे और कितने लोग बीमारी के कारण अपंगता की अवस्था में कितने वर्ष तक जिये।

प्रश्न 17.
हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रमुख कमियाँ क्या हैं?
उत्तर:
हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रमुख कमियाँ –

  1. हाल के समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रक अपने कर्त्तव्य को निर्वाह में बहुत अधिक सफल नहीं हुआ है।
  2. भारत में स्वास्थ्य क्षेत्रक में निजी क्षेत्र ने बहुत प्रगति की है, परन्तु निजी क्षेत्र के चिकित्सालय निर्धन व्यक्तियों की पहुंच से बाहर हैं।
  3. चिकित्सा की भारतीय प्रणाली में शैक्षिक मानवीकरण या अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए किसी प्रकार की रूपरेखा बनाने हेतु कुछ नहीं किया गया।
  4. भारत में स्वास्थ्य में व्यय सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 3 प्रतिशत है। यह अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है।
  5. भारत में विश्व के कुल जनसंख्या की लगभगल 17% संख्या निवास करती है, लेकिन इस देश पर विश्व के कुल रोगों का 20% बोझ है।

प्रश्न 18.
महिलाओं का स्वास्थ्य गहरी चिन्ता का विषय क्यों बन गया है?
उत्तर:
भारत की जनसंख्या का लगभग आधा भाग महिलाओं का है। निम्नलिखित कारणों से उनका स्वास्थ्य गहरी चिन्ता का विषय बन गया है –

  1. भ्रूण हत्याओं की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।
  2. 1991 ई० की जनसंख्या के अनुसार शिशु लिंग का अनुपात 945 से 2001 में 927 हो गया है।
  3. 15 वर्ष से कम लगभग 3,00,000 लड़कियाँ न केवल विवाहित हैं, अपितु कम से कम एक बच्चे की माँ हैं।
  4. 15 से 49 आयु वर्ग के समूह में विवाहित महिलाओं में 50% से अधिक रक्ताभाव और रक्तहीन से ग्रसित हैं। यह बीमारी लौह न्यूनता के कारण होती है जिसके परिणामस्वरूप की संभावना बढ़ जाती है। रक्तहीन भारतीय महिलाओं की अवस्थ्यता और मौत का एक बड़ा कारण है।

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प्रश्न 19.
सार्वजनिक स्वास्थ्य का अर्थ बताएँ। राज्य द्वारा रोगों पर नियन्त्रण के लिए उठाए गए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बताएं।
उत्तर:
सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) सार्वजनिक स्वास्थ्य से अभिप्राय है कि नागरिकों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सरकार उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करें। सार्वजनिक अस्पतालों में डाक्टर, नर्स और अन्य अर्द्ध-चिकित्साकर्मी, बड़े अस्पताल में आवश्यक उपकरण और दवाइयों की व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है। कोई भी नागरिक चिकित्सा सुविधा, अरोग्यकारी और निवारक प्राप्ति से वंचित न रहे क्योंकि वह उसकी कीमत अदा नहीं कर सकता पर पूर्णतः प्रतिबंध है।

प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम-रोगों पर नियन्त्रण के राज्य में निम्नलिखित प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम आरम्भ आए हैं –

  1. गत वर्षों में भारत ने विभिन्न स्तरों पर एक व्यापाक स्वास्थ्य पर आधारिक संरचना और जनशक्ति को विकसित किया है।
  2. गाँव के स्तर पर सरकार ने अनेक प्रकार के अस्पतालों की व्यवस्था की है।
  3. स्वास्थ्य सेवाओं की संख्या में महत्त्वपूर्ण विस्तार हुआ है। इस विस्तार का वर्णन नीचे तालिका में किया गया है –

स्वास्थ्य संरचनात्मक: सेवाएँ: 1951-2000:
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प्रश्न 20.
भारतीय चिकित्सा की छह प्रणालियों की सूची बनाइए।
उत्तर:

  1. आयर्वेद
  2. योग
  3. यूनानी
  4. सिद्ध
  5. होम्योपैथी
  6. प्राकृतिक चिकित्सा

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प्रश्न 21.
हम स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रमों की प्रभावशीलता कैसे बढ़ा सकते हैं?
उत्तर:
स्वास्थ्य सुविधा कार्यक्रम की प्रभावशीलता निम्न ढंग से बढ़ाई जा सकती है –

  1. सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ विकेन्द्रित की जाएँ।
  2. स्वास्थ्य और सफाई के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाए।
  3. कार्यकुशल व्यवस्थायें प्रदान की जाये।
  4. सफाई के प्रति जागरूकता उत्पन्न करन के लिए दूरसंचार और प्रौद्योगिक क्षेत्रों की सहायता की जानी चाहिए।
  5. स्वास्थ्य सेवा सभी को समान रूप से पहुँचानी चाहिए।
  6. प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।

Bihar Board Class 11 Economics आधारिक संरचना Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आधारिक संरचनायें कितने प्रकार की होती हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
आधारिक संरचनायें दो प्रकार की होती हैं –

  1. सामाजिक, आधास्कि संरचनायें तथा
  2. आर्थिक आधारित संरचनायें

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प्रश्न 2.
आर्थिक संरचनाओं से अभिप्राय उस सहायक ढाँचे से है जो कि कृषि, औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्र को विभिन्न प्रकार से एक देश के आर्थिक विकास में योगदान देती हैं?
उत्तर:
आर्थिक संरचनाओं से अभिप्राय उस सहायक ढांचे से है जो कि कृषि, औद्योगिक। एवं व्यापार क्षेत्र को विभिन्न प्रकार की सेवायें प्रदान करता है।

प्रश्न 3.
आधारिक संरचनाओं से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आधारिक संरचनाओं से अभिप्राय उन सुविधाओं, क्रियाओं तथा संस्थाओं से है जो अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों के विकास और संचालन में सहायक हैं।

प्रश्न 4.
पंजाब तथा हरियाणा कृषि क्रियाओं में अधिक आगे क्यों हैं?
उत्तर:
पंजाब तथा हरियाणा कृषि क्रियाओं में अधिक आगे इसलिये हैं क्योंकि वहाँ पर सिंचाई की सुविधाएँ अच्छी है।

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प्रश्न 5.
बंगलौर शहर अन्य शहरों से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
बंगलौर शहर अन्य शहरों से भिन्न है। वहाँ पर विश्वभर की संचार सुविधायें हैं जिनके कारण वहाँ कई बहुराष्ट्रीय (Multinational) कम्पनियाँ कार्यरत हैं।

प्रश्न 6.
आधारिक संरचनाओं के विकास में निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान क्यों आवश्यक समझते हैं?
उत्तर:
क्योंकि आधारिक संरचनाओं में सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश अपर्याप्त है। अतः इन संरचनाओं के विकास में निजी क्षेत्र का योगदान आवश्यक है।

प्रश्न 7.
भारत में समय से पूर्व मृत्यु (Premature death) के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत में समय से पूर्व मृत्यु के कारण हैं –

  1. अशिक्षा
  2. अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही
  3. लड़कियों का कम उम्र में विवाहित होना तथा माँ बनाना
  4. अपौष्टिक भोजन
  5. गर्भपात
  6. बीमारियों का शिकार होना

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प्रश्न 8.
आधारिक संरचनाएँ किस प्रकार से एक देश के आर्थिक विकास में योगदान देती हैं?
उत्तर:
उत्पादन के कारकों की उत्पादकता में वृद्धि करके तथा लोगों की गुणवत्ता में सुधार लाकार आर्थिक संरचनायें एक देश के आर्थिक सुधार में योगदान देती हैं।

प्रश्न 9.
आर्थिक संरचनाओं में प्रमुखतः किन-किन को शामिल किया जाता है?
उत्तर:
आर्थिक संरचनाओं में प्रमुखतः

  1. परिवहन तथा संचार
  2. ऊर्जा एवं सिंचाई
  3. मौद्रिक एवं वित्तीय संस्थाओं को शामिल किया जाता है

प्रश्न 10.
सामाजिक आधारिक संरचना से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सामाजिक आधारिक संरचना से अभिप्राय उस पूँजी स्टॉक से है जो उत्पादकों को अप्रत्यक्ष रूप से सेवायें प्रदान करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवायें आदि सामाजिक आधारिक संरचनाओं के उदारहण हैं।

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प्रश्न 11.
ऊर्जा के गैर-वाणिज्यिक स्त्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
ईंधन, लकड़ी, पशु-शक्ति, गोबर आदि ऊर्जा के गैर-वाणिज्यिक स्रोत हैं।

प्रश्न 12.
ऊर्जा के परम्परागत वाणिज्यिक स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
ऊर्जा के परम्परागत वाणिज्यिक स्रोत कोयला, लिग्नाइट, कच्चा पेट्रोलियम, जल विद्युत हैं।

प्रश्न 13.
ऊर्जा के गैर-परम्परागत वाणिज्यिक स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
ऊर्जा के गैर-परम्परात वाणिज्यिक स्रोत बायो-ऊर्जा तथा वायु शक्ति हैं।

प्रश्न 14.
2001 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण भारत में कितने प्रतिशत परिवारों को रोशनी के लिये बिजली का कनेक्शन (Connection) मिला हुआ है?
उत्तर:
केवल 56% परिवारों को।

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प्रश्न 15.
विदेशी भारत में काफी संख्या में इलाज कराने आ रहे हैं। इसके क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
विदेशी भारत में काफी संख्या में इलाज कराने आ रहे हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  1. हम आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करते हैं।
  2. भारत के डॉक्टरा काफी विशेषज्ञ हैं।
  3. भारत में इलाज कराने का खर्च तुलनात्मक रूप से कम है।

प्रश्न 16.
किन्हीं तीन बड़ी संख्याओं के नाम लिखें जो न केवल गुणवत्तापूर्ण चित्किसा की शिक्षा देती हैं, अपितु अनुसंधान भी करती हैं तथा विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं।
उत्तर:

  1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Science New Delhi)
  2. पी. जी. आई (Post Graduate Insitute,Chandigrah Co.)
  3. अखिल भारतीय स्वच्छता एवं जन स्वास्थ्य संस्थान (All India Institute of Hygiene and Public Health, Kolkata)

प्रश्न 17.
बायो ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
बायो ऊर्जा उस ऊर्जा को कहते हैं जो सदैव पदार्थों या जैव सामग्री से प्राप्त होती है। यह दो प्रकार की होती है –

  1. बायोगैस, तथा
  2. बायोमास

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प्रश्न 18.
बायोगैस क्या है?
उत्तर:
बायोगैस ऊर्जा का वह स्रोत है जो गोबर गैस संयत्र (Plants) में डालकर उत्पन्न की जाती है। ये संयत्र गैस उत्पन्न करने के साथ-साथ गोबर को खाद में बदल देते हैं। बायोगैस का प्रयोग खाना पकाने, ताप उत्पन्न करने, प्रकाश तथा बिजली पैदा करने के काम में किया जा सकता है।

प्रश्न 19.
बायोमास क्या है?
उत्तर:
बायोमास ऊर्जा का वह स्रोत है जो पेड़-पौधे द्वारा ऊर्जा का उत्पादन करता है। बायोमास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन के लिये वृक्षारोपण को बढ़ावा देना जरूरी है ताकि गैस पर आधारित तकनीकी के द्वारा बिजली उत्पादन के लिये ईंधन और पशुओं के लिये चारा उत्पन्न हो सके।

प्रश्न 20.
भारत में बिजली उत्पादन एवं वितरण की तीन चुनौतियाँ कौन सी हैं?
उत्तर:
बिजली उत्पादन की तीन चुनौतियाँ (Three challenges of Power production and distribution in India):

  1. उत्पादन क्षमता का कम प्रयोग
  2. बिजली बोर्ड के घाटे तथा
  3. बिजली का उपर्याप्त उत्पादन

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प्रश्न 21.
परम्परागत रूप से भारत में आधारिक संरचनाओं के विकास की जिम्मेदारी किसकी रही है?
उत्तर:
परम्परागत रूप से भारत में आधारिक संरचनाओं के विकास की जिम्मेदारी सरकार की रही है।

प्रश्न 22.
अब आधारिक संरचनाओं में निजी क्षेत्र महत्त्वपूर्ण भूमिका क्यों निभा रहा है?
उत्तर:
क्योंकि आधारिक संरचनाओं में भारत का निवेश अपर्याप्त रहा है।

प्रश्न 23.
विद्युत उत्पादन के कोई तीन स्रोत लिखिए।
उत्तर:
विद्युत उत्पादन के तीन स्रोत हैं –

  1. सौर ऊर्जा
  2. पवन ऊर्जा, तथा
  3. ज्वार ऊर्जा

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में पिछले 50 वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारिक संरचना विस्तार पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारिक संरचना में विस्तार (Expansion in public Health Infrastructure):

  1. अस्पतालों तथा डिस्पेंन्सरी की संख्या में वृद्धि (Increase in the number of Hospital and Dispensaries): 1951 में अस्पतालों तथा डिस्पेन्सरी की संख्या 9300 थी जो बढ़कर 2000 में 43,300 हो गई।
  2. बिस्तरों में वृद्धि (Increase in beds): 1950 में अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 1.2 मिलियन थी जो कि बढ़कर 2000 में 7.2 मिलियन हो गई।
  3. नों की संख्या में वृद्धि (Increae in nurses): 1951-2000 की अवधि में नौं की संख्या 0.18 लाख से बढ़कर 8.7 लाख हो गई।
  4. एलोपैथिक डाक्टरों की संख्या में वृद्धि: 1951 में डाक्टरों की संख्या 0.62 लाख थी जो बढ़कर 2000 में 5 लाख हो गई।
  5. बीमारियों का उन्मूलन (Eradication of diseases): पिछले पचास वर्षों में चेचक आदि बीमारियों का पूर्णतया उल्मूलन किया जा चुका है। पोलियों आदि बीमारियों पर पूर्ण नियन्त्रण. करने का प्रयास जारी है।

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प्रश्न 2.
वर्तमान समय में स्वास्थ्य आधारिक संरचना में निजी क्षेत्र क्या भूमिका निभा रहे हैं?
उत्तर:
स्वास्थ्य आधारिक संरचनाओं में निजी क्षेत्र की भूमिका (Role of Private setor in the Public Infrastructure):
वर्तमान समय में स्वास्थ्य आधारिक संरचनाओं में निजी क्षेत्र बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

  1. भारत में जितने भी अस्पताल हैं उनमें 70% अस्पताल निजी क्षेत्र में है।
  2. कुल अस्पतालों में जितने बिस्तर हैं उनके 40% बिस्तरे निजी अस्पतालों में पाये जाते हैं।
  3. लगभग 40% डिस्पेंसरियाँ निजी क्षेत्र में पाई जाती हैं।
  4. निजी क्षेत्र डिस्पेंसरियाँ 80% बाह्य रोगियों तथा 46% डिस्पेंसरियों में दाखिल रोगियों का इलाज किया जाता है।
  5. निजी क्षेत्र चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण, चिकित्सा तकनीकी आदि में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रश्न 3.
भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य (Indian women’s health):
भारत की जनसंख्या में लगभग 50% महिलायें हैं। पुरुषों की तुलना में वे शिक्षा क्षेत्र, आर्थिक क्रियाओं में भागीदारी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की प्राप्ति में पीछे हैं। लिंग अनुपात में निरन्तर कमी आ रही है। 1951 मे लिंग

अनुपात 945 था जो कम होकर। 1991 में 927 हो गया। भारत में लगभग 15 वर्ष से कम आयु वाली 3,00,000 लड़कियों न केवल विवाहित हैं अपितु कम से कम एक बच्चे की। माँ हैं। 15-49 वर्ष की विवाहित स्त्रियों में कम-से-कम 50% स्त्रियाँ एनीमिया की शिकार हैं। गर्भपात के कारण भी काफी महिलायें मृत्यु का ग्रास बनती हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत में महिलाओं के लिये स्वास्थ्य सुविधायें अपर्याप्त हैं। उनके स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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प्रश्न 4.
निजी पूँजीपति किन कारणों से आधारिक संरचनाओं में निवेश करने की रुचि नहीं रखते?
उत्तर:
आधारिक संरचनाओं में निम्न कारणों से निजी पूंजीपति रुचि नहीं रखते –

  1. भारी एकमुश्त राशि की आवश्यकता होती है।
  2. सरकार इन पर नियन्त्रण बनाये रखती है।
  3. प्रतिफल कम और धीमे होते हैं।
  4. इस क्षेत्र द्वारा प्रदत्त सेवायें प्रमुख रूप से सार्वजनिक वस्तुओं के स्वरूप की होती हैं।

प्रश्न 5.
भारत की आधारिक संरचनाओं के सम्मुख क्या चुनौतियाँ हैं?
उत्तर:
चुनौतियाँ (Challenges):

  1. हमारी अर्थव्यवस्था की. आवश्यकताओं की तुलना में आधारिक संरचनायें अपर्याप्त हैं।
  2. आधारिक संरचना की उपलब्धियों के लाभ मुख्यतः समाज के उच्च व सम्पन्न वर्ग के लोगों को प्राप्त हुए हैं। कमजोर लोग इसके लाभों से वंचित रहे हैं।
  3. आधारिक संरचना का देश के बड़े शहरों व महानगरों में केन्द्रीयकरण हो गया है।

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प्रश्न 6.
भारतीय गाँवों में आधारिक संरचनाओं की सुविधाओं की क्या हालत है?
उत्तर:
भारतीय गाँवों में आधारिक संरचना की सुविधायें बहुत ही कम हैं। गाँव की महिलाएँ अब भी चूल्हा जलाने के लिये घास-फूस, गोबर तथा जलाने की लकड़ी का प्रयोग करती हैं। 2001 की जनगणना से हमें पता चलता है कि केवल 56% घरों को प्रकाश करने के लिये बिजली का कनेक्शन (Connection) मिला हुआ है और 43 प्रतिशत घर अब भी मिट्टी तेल का प्रयोग करते हैं। नलके का पानी केवल 24% लोगों को प्राप्त है।

प्रश्न 7.
ऊर्जा के व्यावसायिक तथ गैर-व्यावसायिक प्रयोग में क्या अन्तर है?
उत्तर:
ऊर्जा के व्यावसायिक प्रयोग से अभिप्राय है ऊर्जा का उत्पादक क्रियाओं जैसे उद्योगों, कृषि, रेलवे, व्यावसायिक क्रियाओं में प्रयोग किया जाता है। इसके विपरीतं ऊर्जा के गैर-व्यावसायिक प्रयोग से अभिप्राय है ऊर्जा का प्रयोग घरेलू कार्यों जैसे खाना बनाने, घरेलू यन्त्रों को चलाने, रोशनी आदि के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 8.
भारत में बिजली के मुख्य स्रोतों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
भारत में बिजली के मुख्य स्रोत (Main sources of Electricity in India) भारत में बिजली के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं –

  1. ताप शक्ति (Thermal power): यह कोयले द्वारा प्राप्त की जाती है।
  2. जल शक्ति (Hydro Electricity): यह नदी के पानी द्वारा प्राप्त की जाती है।
  3. अणु शक्ति (Atomic Power): इसका उत्पादन अणु पावर स्टेशन द्वारा किया जाता है। भारत में परमाणु ऊर्जा का पहला स्टेशन मुंबई के निकट तारापुर में स्थापित किया गया था।

प्रश्न 9.
ऊर्जा के परम्परागत तथा ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोतों में कोई तीन अंतर बतातें।
उत्तर:
ऊर्जा के परम्परागत स्रोत (Conventional sources of energy):

  1. इन स्रोतों का उपयोग मनुष्य बहुत पहले से कर रहा है।
  2. ये सभी स्रोत (जल विद्युत को छोड़कर) समाप्त होने वाले हैं।
  3. इन स्रोतों से ऊर्जा का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोत (Non-Conventional sources of energy):

  1. इसका उपयोग हाल ही शुरू हुआ है।
  2. ये सभी स्रोत समाप्त नहीं होने वाले हैं।
  3. इन स्रोतों से ऊर्जा का निर्माण छोटे पैमाने पर किया जा सकता है।

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प्रश्न 10.
बिजली बोर्डों के घाटे के कारण लिखें। इस घाटे को दूर करने के लिये सरकार क्या कर रही है?
उत्तर:
घाटे के कारण (Causes of Losses of Electricity Board):

  1. बिजली की चोरी।
  2. बिजली के वितरण के दौरान बिजली की हानि।
  3. कृषि, सिंचाई तथा लघु उद्योगों को रियायती दर पर या कम दर पर बिजली की आपूर्ति।
  4. बिजली बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार। बिजली बोर्ड के इस हानि को कम करने के लिये सरकार बिजली के वितरण तथा उत्पादन निजी क्षेत्र तथा विदेशी निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
परम्परागत तथा गैर-परम्परागत ऊर्जा के स्रोतों में क्या अंतर है?
उत्तर:
ऊर्जा के परंपरागत स्रोत (Conventional Sources of Energy):

  1. ये वे स्रोत हैं जिनका उपयोग मनुष्य बहुत पहले से कर रहा है।
  2. परम्परागत ऊर्जा के स्रोत हैं-कोयला, परमाणु ऊर्जा, खनिज-तेल या जल-विद्युत।
  3. ऊर्जा के सभी परंपरागत स्रोत (जल विद्युत को छोड़कर) समाप्त होने वाले हैं।
  4. ये प्रदूषण फैलाते हैं।
  5. ये खर्चीले हैं।
  6. इनसे ऊर्जा का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोत (Non-conventional Sources of Energy):

  1. ये वे स्रोत हैं जिनका उपयोग हाल ही में शुरू हुआ है।
  2. गैर-परम्परागत ऊर्जा के स्रोत हैं-पवन, सूर्य, ज्वारीय ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, गोबर गैस आदि।
  3. ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोत असमाप्त होने वाले हैं।
  4. ये प्रदूषण मुक्त हैं।
  5. ये कम खर्चीलें हैं।
  6. इनसे ऊर्जा का निर्माण स्थानीय (छोटे) पैमाने पर किया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा के मुख्य स्रोतों का वर्णन करें।
उत्तर:
इनका वर्णन निम्नलिखित ढंग से किया जा सकता है –
1. बायो ऊर्जा (Bio Energy):
बायो ऊर्जा वह ऊर्जा है जो जीव या जैव सामग्री (Organism of Organic Matter) से प्राप्त होती है।

2. बेहतर चूल्हे (Improved Chulhas):
दिसम्बर, 1983 ई० में राष्ट्रीय बेहतर चूल्हा कार्यक्रम शुरू किया गया। यह अनुमान है कि बेहतर चूल्हा प्रतिदिन 700 ग्राम तक लकड़ी की बचत करता है। देश में 1999 तक लगभग 300 लाख बेहतर चूल्हे प्रयोग में लाए गए हैं। इसे हर वर्ष 100 लाख टन से अधिक जलाऊ लकड़ी की बचत होने के साथ-साथ स्त्रियों की बेगार कम होगी, उनका स्वास्थ्य सुधरेगां व वनों के कटाव पर रोक लगेगी।

3. सौर ऊर्जा (Solar Energy):
सौर ऊर्जा से अभिप्राय ऊर्जा के उस स्रोत से है जो सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा का उत्पादन करता है।

4. शहरी कचरे से ऊर्जा (Energy fromUrban Wastes):
शहरी मैले व गन्दगी को भी ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा रहा है। दिल्ली में तिमारपुर के पास शहर के ठोस पदार्थों के रूप में कूड़े-कचरे से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए 3.75 मेगावाट क्षमता के बिजली संयत्र की स्थापना की गई है।

5. वायु या पवन ऊर्जा विकास कार्यक्रम (Wind Energy Development Programme):
इस कार्यक्रम के अन्तर्गत वायु का प्रयोग करके ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है। भारत में वायु ऊर्जा की क्षमता 20,000 मेगावाट आंकी गई है। अब तक केवल 1,025 मेगावाट क्षमता स्थापित की जा सकी है। वायु ऊर्जा मे जर्मनी, अमेरिका तथा डेनमार्क के बाद भारत का चौथा स्थान है।

6. ऊर्जा ग्राम (Urja Gram):
ऊर्जा ग्राम कार्यक्रम से अभिप्राय उस कार्यक्रम से है जिसके अन्तर्गत गांवों की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं को स्थानीय रूप से उपलब्ध उन साधनों के इस्तेमाल से पूरा किया जाता है जिनका हर बार नवीकरण (Renewari) किया जा सकता है।

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प्रश्न 3.
विकास में आधारिक संरचनाओं के महत्त्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था के विकास के लिये एक उपयुक्त एवं विकसित आधारिक संरचना का होना आवश्यक हैं, जैसा कि निम्नलिखित बातों से स्पष्ट है –

1. तीव्र आर्थिक विकास (Repid Economic Development):
आर्थिक आधारिक संरचना जितनी विकसित होगी, देश का आर्थिक विकास में उतनी ही तेजी से होता है। जहाँ एक ओर शिक्षण और शोध से नयी तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है, वहाँ दूसरी ओर कृषि और उद्योग क्षेत्र में इसका उपयोग करने के लिए ऊर्जा, सिंचाई यातयात, संचार व वित्तीय संस्थाओं का विद्यमान होना आवश्यक है।

2. श्रम की आपूर्ति (Supply of Labour):
श्रम की कुशलता में वृद्धि करने के लिए श्रम की गतिशीलता अति आवश्यक है। यह गतिशीलता परिवहन एवं संचार के साधने द्वारा ही प्रदान की जाती है।

3. वित्तं की उपलब्धता (Availability of Finance):
आर्थिक विकास के विभिन्न कार्यक्रमों को लागू करने के लिए वित्त की आवश्यकता होती है, जिसकी आपूर्ति मौद्रिक एवं वित्तीय संस्थाओं द्वारा ही प्रदान की जाती है।

4. संसाधनों का उपयोग (Utilisation of Resources):
भूमि पर खेती के लिए नहरों आदि के माध्यम से सिंचाई के साधनों का विकास जरूरी है। अनाज को मण्डी तक ले जाने के लिए यातायात के साधन जरूरी हैं। कृषि की विभिन्न आगतों को खरीदने के लिये वित्तीय ‘संस्थानों का विकास जरूरी है। इसी प्रकार, उद्योगों द्वारा यातायात के साधनों का विकास जरूरी है। मशीनों को चलाने के लिए ऊर्जा के साधनों का होना आवश्यक है।’

5. बजार का विस्तार (Extension of Market):
यातायात और संचार के साधन बाजार के आकार के विस्तार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संचार माध्यमों से वस्तुओं का व्यापक प्रचार किया जा सकता है तथा बाजार मूल्यों के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकती है। यातयात के कुशल साधनों की सहायता से शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं को भी सुदूर स्थित बाजारों तक ले जाया सकता है।

6. श्रम की कार्य-कुशलता में वृद्धि (Increase in Efficiency of labour):
शिक्षा, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य सेवाओं के कारण श्रम की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

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प्रश्न 4.
भारत में निम्नस्तरीय स्वास्थ्य के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत में निम्नस्तरीय स्वास्थ्य के कारण (Causes of Poor Health in India):
भारत में निम्न स्वास्थ्य स्तर के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

1. अस्वास्थ्यकारक परिस्थितियाँ (Unsanitary Conditions):
भारत का निर्धन वर्ग अस्वास्थ्यकर वातावरण में रहता हैं। वे उस वातावरण में रहते हैं जहाँ पर पीने के लिये सुरक्षित पानी नहीं मिलता, जहाँ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जहाँ पर मल-मूत्र के निकास का कोई प्रबन्ध नहीं है तथा जहाँ महामारियों ने अपना अड्डा बना लिया है।

2. आवास (Housing):
भारत में काफी जनसंख्या झुग्गियों तथा तंग बस्तियों में रहती हैं। निर्धनों के मकान प्राय: कच्चे होते हैं। उनमें वायु तथा प्रकाशन की कोई व्यवस्था नहीं होती। क छोटी कमरे में कई-कई लोग रहते हैं। इस तरह अधिकांश निर्धन अस्वास्थ्यकर घरों में रहते हैं।

3. पौष्टिकहीनता (Mainutrition):
भारत में खाद्यान्न का अभाव है। खाद्यान्न भी पौष्टिकहीन हैं। इनके फलस्वरूप अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्यायें उत्पन्न होती हैं। ये समस्यायें बच्चों के लिये विशेष रूप से गंभीर रूप धारण कर लेती हैं। माँ बनने वाली स्त्रियों में पौष्टिकहीनता अधिक पाई जाती है जो स्त्री तथा भावी सन्तान के लिये हानिकारक होती है। पौष्टिकहीनता की स्थिति में संक्रामक रोग शीघ्र फैलाते हैं।

4. ऊँची जन्म दर तथा जनसंख्या में तीव्र दर से वृद्धि (High birth rate and fast growth of population):
देश में जन्म दर बहुत ऊँची है जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा सकता है। लोग गंदी बस्तियों में जहाँ बहुत भीड़भाड़ होती है, रहते हैं। इन गंदी बस्तियों में महामारियाँ बहुत जल्दी फैलती हैं और लोग उनके शिकार बनते हैं। अतः ऊँची जन्म दर और तेज गति से बढ़ती जनसंख्या स्वास्थ्य को निम्न स्तर पर ले जाती है।

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प्रश्न 5.
आधारिक संरचना क्षेत्र के निजीकरण एवं व्यावसायीकरण की आवश्यकता किन कारणों से होती है?
उत्तर:
आवश्यकता (Need):
आधारिक संरचना क्षेत्र के निजीकरण एवं व्यावसायीकरण की आवश्यकता निम्न कारणों से होती है –

1. निवेश के लिये बड़ी राशि की आवश्यकता (Massive investment needs):
आधारिक संरचना क्षेत्र के विकास के लिये काफी मात्रा में निवेश करना पड़ता है। सरकारी खजाने में इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था नहीं की जा सकती।

2. सार्वजनिक क्षेत्र में प्रबंधकीय योग्यता का अभाव (Lock of managerial ability in public sector):
आधारिक संरचना क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिये यह आवश्यक है कि उपलब्ध संसाधनों को विधिवत् तरीकों से जुटाया जाय। उन संसाधनों का विभिन्न उपक्षेत्रों में आवंटन किया जाय, तथा उनके प्रभावी उपयोग के लिये उचित निगरानी सुनिश्चित की जाय। यह तभी हो सकता है जबकि प्रबन्धक कुशल, योग्य, दूरदर्शी ईमानदारी, नीतिवान, निष्ठावान, अनुभवी हों। इस प्रकार के प्रबन्धक की सार्वजनिक क्षेत्र में तो कल्पना भी नहीं की जा सकती। स होता है।

3. विश्वव्यापीकरण (Globalisation):
विश्वव्यापीकरण के कारण भी आधारिक संरचना क्षेत्र में निजीकरण की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है।

4. विश्व पूँजी बाजारों की नवीन गति (New Dynamics in World Capital):
पहले की तुलना में वर्तमान में पूंजी की राशि एक देश से दूसरे देश की ओर प्रवाहित हो रही है। इस पूंजी का एक बड़ा भाग आधारिक संरचना क्षेत्र की ओर भी प्रवाहित हो सकता है।

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प्रश्न 6.
आपका सामाजिक आधारिक संरचना से क्या तात्पर्य है तथा आप आर्थिक आधारिक संरचना से इसका अन्तर कैसे करेंगे?
उत्तर:
सामाजिक आधारिक संरचना से अभिप्राय उस आधारिक संरचना से है जो आर्थिक क्रियाओं का अप्रत्यक्ष रूप से तथा उत्पादन एवं वितरण प्रणाली को बाहर से अपना योगदान देती है। शिक्षा, प्रशिक्षण तथा शोध (Research), स्वास्थ्य, आवास आदि सामाजिक आधारिक संरचनायें हैं। सामाजिक आधारिक संरचना के फलस्वरूप लोगों की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। वे अधिक कुशलतापूर्वक उत्पादन कर पाते हैं।

सामाजिक आधारिक संरचनाओं तथा आर्थिक आधारिक संरचनाओं में अन्तर (Difference between social infrastructure and Economic Infrastructure):

सामाजिक आधारिक संरचनायें (Social Infrastructure):

  1. ये संरचनायें अर्थव्यस्था को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
  2. ये आर्थिक संरचनाओं के आधार हैं।
  3. इन संरचनाओं का उद्देश्य मानव तथा उसके वातावरण को सुधारना है।
  4. ये संरचनाओं प्रबन्धक, इंजीनियर आदि उपलब्ध कराती हैं।
  5. शिक्षा, प्रशिक्षण तथा शोध स्वास्थ्य आवास आदि सामाजिक संरचनाओं के घटक हैं।

आर्थिक आधारिक संरचनाएँ (Economic infrastructure):

  1. ये संरचनाएँ अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
  2. ये सामाजिक संरचनाओं को विकसित करती हैं।
  3. ये संरचनायें कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि लाने वाला वातावरण तैयार करती हैं।
  4. ये संरचनाएँ व्यापार तथा उद्योग की बाधाओं को दूर करती हैं।
  5. परिवहन, संचार ऊर्जा, मौद्रिक, तथा वित्तीय संस्थायें इन आर्थिक संरचनाओं के घटक हैं।

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प्रश्न 7.
जन स्वास्थ्य का अर्थ बताइए। बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए सकरार ने हाल के वर्षों में क्या उपाय किए हैं? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जन स्वास्थ्य का अर्थ (Meaning of Public Health):
जन स्वास्थ्य से अभिप्राय साधारण व्यक्तियों का पूर्ण रूप से भौतिक, मानसिक और सामाजिक रूप से ठीक होना है। रुग्ण्ता खराब स्वास्थ्य की स्थिति है। सार्वजनिक स्वास्थ्य कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे लोगों स्वच्छ वातावरण में रहें, पौष्टिक भोजन का सेवन करें, स्वच्छ पानी का प्रयोग करें। बच्चे बाल्यावस्था में न मरें, बच्चों के बीमार होने पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त हों। इसके अतिरिक्त बच्चों के खेलने तथा सीखने का सुअवसर प्रदान किया जाए न कि उन पर काम करने का दबाव डाला जाए।

वयस्कों को स्वास्थ रहने के लिए स्वच्छ वातावरण होना चाहिए, उन्हें पौष्टिक भोजन और हवादार आश्रय प्राप्त होना चाहिए। बीमार होने पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान होनी चाहिए। वयस्कों को काम करने का सुअवसर मिलना चाहिए ताकि वे अपना काम करें। भारत में जनन स्वास्थ्य की दिशा में कई उपाय अपनाए गए थे जिनके परिणामस्वरूप हमारे जीवन के स्तर में काफी सुधार हुआ है।

बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा हाल ही में अपनाए गए उपाय (Measures adopted by the Govt in the recentyears to control diseases):

सरकार ने हाल के वर्षों में बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए हैं –

  1. बच्चों को विभिन्न बीमारियों के लिए टीकाकरण करवाकर सुरक्षित रखा गया है। परिवार कल्याण विभाग सामूहिक कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस, पोलियो, अंधापन आदि से बचाने का प्रयास कर रही है।
  2. भारत सरकार ने चेचक का उन्मूलन कर दिया है।
  3. हैजे से मरनेवाले लोगों की संख्या कम करने के लिए प्रयत्न किए गए हैं। हैजे के रोगी की संख्या जो 10 हजार होती थी अब कम होकर एक हजार रह गयी।
  4. भारत सरकार ने राष्ट्रीय मलेरिया विरोधी कार्यक्रय भी आरंभ किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को मलेरिया, कालाजार, मष्तिष्क ज्वर तथा फाइलेरिया से रक्षा करना है।
  5. भारत सरकार ने राष्ट्रीय कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रम भी आरम्भ किया है। यह कार्यक्रम पाँच लाख लोगों की रक्षा करता है।
  6. इसके अतिरिक्त सरकार ने राष्ट्रीय तपेदिक नियन्त्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय घेघा नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंधापन निवारण कार्यक्रम भी आरंभ किए हैं।
  7. एस० टी० डी०; एच० आई० वी० संक्रमण तथा एड्स के निवारण तथा उपचार के लिए सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की स्थापना की है। यह संगठन मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है।
  8. पिछले 15 वर्षों में साफ पीने के पानी के क्षेत्र में भी काफी सुधार किया गया है।
  9. इसके अतिक्ति सरकार ने कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्वास्थ्य उपकेन्द्र और समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
शताब्दी के अन्त में भारत में साक्षर अनुपात था –
(a) 116
(b) 2/3
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 2/3

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प्रश्न 2.
वर्ष 2001 में भारत में साक्षरों की संख्या हो गई है –
(a) 57 करोड़
(b) 75 करोड़
(c) 50 करोड़
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 57 करोड़

प्रश्न 3.
भारतवर्ष में शिक्षा पर कुल व्यय सकल घरेलू उत्पाद का प्रतिशत है –
(a) 4 प्रतिशत
(b) 4 प्रतिशत से ज्यादा
(c) 4 प्रतिशत से कम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 4 प्रतिशत से कम

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प्रश्न 4.
हमारे देश में शिक्षा प्रणाली लागू है –
(a) 10 + 2 + 2
(b) 10 + 2 + 3
(c) 11 + 3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 10 + 2 + 3

प्रश्न 5.
भारत में वर्तमान जीवन प्रत्याशा है –
(a) 65 वर्ष
(b) 70 वर्ष
(c) 60 वर्ष
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 65 वर्ष

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प्रश्न 6.
भारत में स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर कुल योजना का खर्च होता है –
(a) 3 प्रतिशत
(b) 7 प्रतिशत
(c) 4.5 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 3 प्रतिशत

प्रश्न 7.
एड्स की रोकथाम का कार्यक्रम है –
(a) राष्ट्रीय स्तर का
(b) राज्य स्तर का
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) राष्ट्रीय स्तर का

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प्रश्न 8.
नौवीं योजना में शिक्षा पर व्यय का प्रतिशत है –
(a) 7 प्रतिशत
(b) 2.7 प्रतिशत
(c) 6 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 6 प्रतिशत

प्रश्न 9.
वर्ष 2000 में भारत में बच्चों की मृत्यु दर थी –
(a) 52
(b) 22
(c) 70
(d) 32
उत्तर:
(b) 22

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प्रश्न 10.
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् के द्वारा छठा अखिल भारतीय शैक्षिक सर्वेक्षण कराया गया था –
(a) 1986 में
(b) 1993 में
(c) 2000 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1993 में

प्रश्न 11.
राकेश मोहन समिति का संबंध है –
(a) भारतीय रेलवे
(b) भारतीय भू-परिवहन व्यवस्था
(c) भारतीय नौ परिवहन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) भारतीय रेलवे

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प्रश्न 12.
वर्ष 1991 में पूर्ण विद्युतीकृत राज्यों की संख्या थी –
(a) 8
(b) 13
(c) 22
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 13

प्रश्न 13.
भारत में अंतर्राष्ट्रीय सेवाएं प्रदान करती है –
(a) एयर इंडिया
(b) इंडियन एयर लाइन्स
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) एयर इंडिया

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प्रश्न 14.
भारत में अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्टों की संख्या है –
(a) 28
(b) 92
(c) 5
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 5

प्रश्न 15.
भारत में एयरपोर्ट प्राधिकरण के अंतर्गत एयरपोर्टों की संख्या है –
(a) 28
(b) 92
(c) 15
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 92

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

Bihar Board Class 11 Economics रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
श्रमिक किसे कहते हैं?
उत्तर:
श्रमिक उस व्यक्ति को कहते हैं जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न है और राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान कर रहा है।

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

प्रश्न 2.
श्रमिक जनसंख्या अनुपात की परिभाषा दें?
उत्तर:
श्रमिक जनसंख्या अनुपात से अभिप्राय एक निश्चित जनसंख्या में कितने व्यक्ति रोजगार परक हैं से है। श्रमिक जनसंख्या अनुपात की गणना करने के लिए हम देश के सभी श्रमिकों की संख्या को देश की जनसंख्या से भाग कर उसे 100 से गुणा करते हैं।

प्रश्न 3.
क्या ये भी श्रमिक हैं – एक भिखारी, एक चोर, एक तस्कर, एक जुआरी। क्यों?
उत्तर:
एक भिखारी, एक चोर, एक तस्कर तथा एक जुआरी श्रमिक नहीं हैं क्योंकि वे आर्थिक क्रियाओं में संलग्न नहीं हैं और वे राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान नहीं करते।

प्रश्न 4.
इस समूह में कौन असंगत लगता है
(क) नई की दुकान का मालिक
(ख) एक मोची
(ग) मदर डेयरी का कोषपाल
(घ) ट्यूशन पढ़ाने वाला शिक्षक
(ङ) परिवहन कंपनी का संचालक
(च) निर्माण मजदूर
उत्तर:
(ग) मदर डेयरी का कोषपाल असंगत है क्योंकि यह नौकरी कर रहा है। शेष सभी स्वरोजगारी हैं।

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प्रश्न 5.
नये उभरते रोजगार मुख्यतः ……….. क्षेत्र में ही मिल रहे हैं।
उत्तर:
नये उभरते रोजगार मुख्यत सेवा क्षेत्रक में ही मिल रहे हैं।

प्रश्न 6.
चार व्यक्तियों को मजदूरी पर काम देने वाले प्रतिष्ठान ………… को क्षेत्रक कहा जाता हैं।
उत्तर:
चार व्यक्तियों को मजदूरी पर काम देने वाले प्रतिष्ठान को अनौपचारिक क्षेत्रक कहा जाता है।

प्रश्न 7.
राज स्कूल जाता है। पर जब वह स्कूल में नहीं होता, तो प्रायः अपने खेत में काम करता दिखाई देता है। क्या आप उसे श्रमिक मानेंगे? क्यों?
उत्तर:
नहीं क्योंकि इसके योगदान से देश को लाभ नहीं प्राप्त हो रहा।

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प्रश्न 8.
शहरी महिलाओं की अपेक्षा अधिक ग्रामीण महिलाएँ काम करती दिखाई देती हैं। क्यों?
उत्तर:
क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में अधिक आय कमाने के सीमित साधन हैं। अतः अधिक आय कमाने के लिये और घर का खर्च चलाने के लिये पुरुषों के साथ महिलायें भी काम करती हैं।

प्रश्न 9.
मीना एक गृहिणी है। घर के कामों के साथ-साथ वह अपने पति के कपड़े की दुकान में भी हाथ बँटाती है। क्या उसे एक श्रमिक माना जा सकता है? क्यों?
उत्तर:
उसे श्रमिक माना जा सकता है क्योंकि वह आर्थिक क्रियाओं में भी संलग्न है और वे सभी व्यक्ति जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं, श्रमिक कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
यहाँ किसे असंगत माना जाएगा –
(क) किसी अन्य के अधीन रिक्शा चलाने वाला
(ख) राज मिस्त्री
(ग) किसी मैकेनिक की दुकान पर काम करने वाला श्रमिक
(घ) जूते पालिश करने वाला लड़का
उत्तर:
जूते पालिश करने वाला लड़का।

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प्रश्न 11.
निम्न सारणी में सन् 1972-73 में भारत के श्रम बल का वितरण दिखाया गया है। इसे ध्यान से पढ़कर श्रम बल के वितरण के स्वरूप के कारण बताइए। ध्यान रहे ये आँकड़े 30 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 1
उत्तर:
तालिका से पता चलता है कि आज से तीस वर्ष पहले भारत में श्रम बल का आकार 23.3 करोड़ आँका गया था क्योंकि देश के अधिकांश लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते थे, इसलिए ग्रामीण श्रम बल का अनुपात भी शहरी श्रम बल से कहीं अधिक है। ग्रामीण श्रम बल 19.4 करोड़ जबकि शहरी श्रम बल 39 करोड़, 23.3 करोड़ श्रमिकों में लगभग 83% श्रमिक ग्रामीण है।

भारत में श्रम शक्ति में पुरुषों की बहुलता है। श्रम बल में लगभग 64% पुरुष तथा .शेष महिलायें थी। ग्रामीण क्षेत्र में महिला श्रमिक शहरी क्षेत्र में महिला श्रमिकों से अधिक थी। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएँ खाना बनाने, पानी लाने, ईंधन बीनने के साथ-साथ खेतों में भी काम करती है। उन्हें नकद या अनाज के रूप में मजदूरी मिलती हैं।

प्रश्न 12.
इस सारणी में 1999-2000 ई. में भारत की जनसंख्या और श्रमिक जनानुपात दिखाया गया है। क्या आप भारत के (शहरी और सकल) श्रमबल का अनुमान लगा सकते हैं?
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 2
उत्तर:
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 3

प्रश्न 13.
शहरी क्षेत्रों में नियमित वेतन भोगी कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक क्यों होते हैं?
उत्तर:
शहरों में कार्यालय, अस्पताल, पाठशालायें तथा कारखाने गाँवों की अपेक्षा अधिक हैं। इन संस्थानों में नियमित वेतनभोगी काम करते हैं। इन संस्थाओं में नौकरी प्राप्त करने के लिये शिक्षित तथा निपुण होना आवश्यक है। गाँवों की अपेक्षा शहरों में अधिक प्रशिक्षित, योग्य तथा निपुण व्यक्ति रहते हैं, अतः गाँवों की अपेक्षा शहरों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारी अधिक हैं।

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प्रश्न 14.
नियमिति वेतनभोगी कर्मचारियों में महिलाएँ कम क्यों हैं?
उत्तर:
महिलाओं को घरेलू काम करने पड़ते हैं। अधिकांश महिलायें पुरुषों की अपेक्षा कम शिक्षित, कम योग्य और कम निपुण होती हैं। नियमित वेतनभोगी रोजगार के लिये निपुणता, साक्षरता का स्तर आदि उच्च होना चाहिये। अत: नियमित वेतनभोगी रोजगार में महिलायें कम पाई जाती हैं।

प्रश्न 15.
भारत में श्रमबल के क्षेत्रवार वितरण की हाल की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करें।
उत्तर:
निम्नलिखित तालिका की सहायता से हम भारत में कार्य शक्ति की क्षेत्रीय वितरण की नई प्रवृत्ति की विवेचना करेंगे –
भारत में कार्यशक्ति का क्षेत्रीय वितरण (प्रतिशत में) –
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ऊपरी की तालिका से हमें पता चलता है कि रोजगार कृषि क्षेत्र से गैर-कृषि क्षेत्र की और बढ़ रहा है। 1972-73 ई. में कार्यशक्ति का 74% भाग प्राथमिक (कृषि) क्षेत्र में संलग्न था। यह अनुपात 1999-2000 ई. में गिरकर. 60 प्रतिशत हो गया। द्वितीयक क्षेत्र तथा सेवा क्षेत्र (गैर-कृषि क्षेत्रों) में कार्यशक्ति का अनुपात बढ़ गया। द्वितीयक क्षेत्र में यह अनुपात 11% से बढ़कर 16% हो गया है जबकि सेवाक्षेत्र में यह 15% से बढ़कर 24% हो गया है।

महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक संख्या में काम में लगे हुए होते हैं। शहरी क्षेत्र में यह अंतर बहुत अधिक पाया जाता है। तालिका से हमें पता चलता है कि 39 मिलियन लोगों में से केवल 7 मिलियन (केवल 18%) महिलायें काम करती हैं, जबकि 32 मिलियन (82%) पुरुष काम पर लगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 194 मिलियन कर्मचारियों में से 69 मिलियन (अर्थात् 36%) महिलायें आर्थिक क्रियाओं में संलग्न हैं, जबकि 64% पुरुष काम पर लगे हुए हैं।

इसका, कारण यह है कि जब पुरुष अधिक आय कमाते हैं तब परिवार महिलाओं को काम करने के लिए हतोत्साहित करते हैं। शहरों में अधिक कमाने के अवसर अपेक्षाकृत अधिक होते हैं। शहरों में काम करने वाले पुरुषों की आय से उनके परिवार का गुजारा चल जाता है। अतः शहरों में कम महिलायें नौकरी करती हैं। इसके विपरीत गाँवों में कम आय से परिवार का पालन-पोषण ठीक प्रकार से नहीं होता। अतः घर का गुजारा चलाने के लिये पुरुषों के साथ महिलायें काम पर जाती हैं।

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प्रश्न 16.
1970 से अब तक विभिन्न उद्योगों में श्रमबल के वितरण में शायद ही कोई परिवर्तन आया। टिप्पणी करें।
उत्तर:
यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है कि भारत में 1970 की तुलना में कार्यशक्ति के क्षेत्रीय वितरण में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। 1970 में कार्य शक्ति का लगभग 74% भाग प्राथमिक क्षेत्र में संलग्न था जो घटकर 1999-2000 में लगभग 60% हो गया। द्वितीयक क्षेत्र में कार्यशक्ति का 11% भाग 1970 में संलग्न था जो बढ़कर 1999-2000 में लगभग 16% हो गया। इसी तरह सेवा क्षेत्र में कार्यशक्ति का अनुपात 15% से बढ़कर 24% हो गया है।

प्रश्न 17.
क्या आपको लगता है पिछले 50 वर्षों में भारत में रोजगार के सृजन में भी सकल घरेलू उत्पाद के अनुरूप वृद्धि हुई है? कैसे?
उत्तर:
1960-2000 ई. की अवधि में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में धनात्मक वृद्धि हुई और यह रोजगार वृद्धि से ऊँची थी। परंतु सकल घरेलू उत्पाद में हमेशा घटती-बढ़ती रही। इस समयावधि में रोजगार स्थिर रूप से 2 प्रतिशत बढ़ता रहा। 1990 ई. के पश्चात् भारत में रोजगार में संवृद्धि घटने लगी और रोजगार संवृद्धि के उस स्तर पर पहुँच गया जो कि नियोजन की प्रारंभिक अवस्था में था। इन्हीं वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद में सवृद्धि तथा रोजगार संवृद्धि में काफी अंतर आ गया।

इसका अभिप्राय यह हुआ कि भारतीय अर्थव्यवस्था रोजगार के सृजन के बिना भी अधिक वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन कर सकती है। विद्वान इस घटना को नौकरी के बिना संवृद्धि (Jobless growth) कहते हैं। रोजगार तथा सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि की प्रवृत्ति के कार्य शक्ति के विभिन्न वर्गों को काफी प्रभावित किया।

1972-73 में 74.3% लोग प्राथमिक क्षेत्र में थे। 1999-2000 में यह प्रतिशत घटकर 60.4 प्रतिशत हो गया। द्वितीयक क्षेत्र में कर्मचारियों का प्रतिशत 10.9% (1972-73) से बढ़कर 15.8% (1999-2000) हो गया। इसी प्रकार सेवा में कर्मचारियों का प्रतिशत 14.8% (1972 73) से बढ़कर 23.8% हो गया यह तथ्य निम्नलिखित तालिका से स्पष्ट है –
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रोजगार संवृद्धि तथा सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि की प्रवृत्ति ने रोजगार की प्रस्थिति (Status) पर भी प्रभाव डाला जिसे नीचे की तालिका में दर्शाया गया है।

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इस तालिका से हमें यह भी पता चलता है कि शहर में काम करने वाले लोगों की संख्या ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या से कम है। शहर में 23.3 करोड़ लोगों में से केवल 39 करोड़ लोग (लगभग 16.74) कार्य करते हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 233 करोड़ लोगों में से 194 करोड़ लोग (लगभग 83.26) काम करते हैं।

दूसरे शब्दों में ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत लोगों का केवल पाँचवाँ भाग शहरी क्षेत्र में कार्यरत है। इसका कारण यह है कि गाँवों में ऊँची आय के सीमित संसाधन हैं और पेट पालने के लिये परिवार के अधिकांश सदस्य कार्य करते हैं। प्रायः गाँव के लोग पाठशालाओं, कॉलेजों और अन्य प्रशिक्षित संस्थाओं में नहीं जाते और यदि जाते भी हैं तो वे किसी कारणवश बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं और काम पर लग जाते हैं। इसके विपरीत शहरी क्षेत्र में अधिकांश लोग विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययन करते हैं।

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प्रश्न 18.
क्या औपचारिक क्षेत्र में ही रोजगार सृजन आवश्यक है? अनौपचारिक में नहीं? कारण बताइए।
उत्तर:
अनौपचारिक क्षेत्र की अपेक्षा में कर्मचारियों को औपचारिक क्षेत्र में निम्नलिखित कारणों से रोजगार अर्जित करना आवश्यक है –

  1. अनौपचारिक क्षेत्र में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ मिलते हैं – जैसे मातृत्व लाभ, प्रोविडेन्ट. फण्ड, ग्रेच्यूटी (Gratuity), पेंशन आदि।
  2. औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की अपेक्षा अच्छा वेतन मिलता है।
  3. औपचारिक क्षेत्र पर श्रमिक कानून लागू होते हैं।
  4. औपचारिक क्षेत्र में ट्रेड यूनियन (Trade Unions) होती हैं जो कर्मचारियों के हित में मालिकों के साथ मजदूरी तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा उपायों के लिये सौदेबाजी करती है।
  5. औपचारिक क्षेत्र में कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित होती है।
  6. औपचारिक क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था की जाती है।
  7. औपचारिक क्षेत्र में कर्मचारियों की कार्यकुशलता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है।
  8. औपचारिक क्षेत्र में लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा रखा जाता है। गबन, हेराफेरी आदि की संभावना कम होती है।
  9. औपचारिक क्षेत्र से राज्य तथा केन्द्र सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है।
  10. औपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का जीवन स्तर ऊँचा होता है।

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प्रश्न 19.
विक्टर को दिन में केवल दो घंटे काम मिल पाता है। बाकी सारे समय वह काम की तलाश में रहता है। क्या वह बेरोजगार है? क्यों विक्टर जैसे लोग क्या काम करते होंगे?
उत्तर:
विक्टर प्रति दो घंटे का काम करता है अतः वह रोजगार है परंतु पूर्ण रोजगार नहीं। वह अल्परोजगार है। विक्टर जैसे लड़के निम्न प्रकार के कार्य कर रहे होंगे –

  1. धनी व्यक्तियों की कार, स्कूटर साफ कर रहे होंगे।
  2. सुबह हो घंटे समाचार पत्र बाँट रहे होंगे।
  3. दूध के डिपो पर काम कर रहे होंगे।
  4. दूध के डिपो से दूध लाकर गलियों में बेच रहे होंगे।
  5. कबाड़ी का काम कर रहे होंगे।
  6. धर्मार्थ औषधोलय में रोगियों की पर्ची बनाने का काम कर रहे होंगे।
  7. घरों से लंच बॉक्स इकट्ठे करके कार्यस्थल पर पहुँच रहे होंगे।

प्रश्न 20.
क्या आप गाँव में रह रहे हैं? यदि आपको ग्राम-पंचायत को सलाह देने को कहा जाए तो आप गाँव की उन्नति के लिए किस प्रकार के क्रियाकलाप का सुझाव देंगे, जिससे रोजगार सृजन हो।
उत्तर:
ग्राम पंचायत को ग्राम सुधार के लिये निम्नलिखित क्रियायें अपनाने के लिये कहूँगा। इन क्रियाओं से रोजगार का सृजन भी होगा –

  1. कच्ची सड़कें बनवाना।
  2. गाँव की सफाई करवाना।
  3. नलियों आदि की सफाई करवाना।
  4. कुँओं की सफाई करवाना।
  5. शाम को प्रौढ़ शिक्षा का प्रबंध करना।
  6. पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करना।
  7. गाँव में खेलकूद क्लब का निर्माण करना। क्लब के सदस्यों को क्रिकेट, हॉकी आदि के उपकरणों की व्यवस्था करना।
  8. तालाब बनवाना तथा उसकी नियमित रूप से सफाई करवाना।

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प्रश्न 21.
अनियत. दिहाड़ी मजदूर कौन होते हैं?
उत्तर:
अनियत दिहाड़ी मजदूर वे होते हैं जिन्हें किसी व्यक्ति या उद्यम से नियमित रूप से काम नहीं मिलता। ये मजदूर शहरों में निर्माण कार्य में लगे होते हैं। गाँव में ये अन्य लोगों के खेतों में काम करते हैं।

प्रश्न 22.
आपको यह कैसे पता चलेगा कि कोई व्यक्ति अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहा है?
उत्तर:
यह जानने के लिये कि एक कर्मचारी अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहा है या नहीं, हम यह पता लगाएँ कि जिस उद्यम में वह काम कर रहा है वहाँ पर कितने सवैतनिक कर्मचारी हैं। यदि कर्मचारियों की संख्या 10 से कम है तो वह कर्मचारी अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहा है।

Bihar Board Class 11 Economics रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विदेशों से शुद्ध आय कब ऋणात्मक होती है?
उत्तर:
विदेशों से शुद्ध साधन आय उस समय ऋणात्मक होती है जब निर्यात से प्राप्त राशि से आयात के भुगतान की राशि कम होती है।

प्रश्न 2.
सकल राष्ट्रीय उत्पाद क्या है?
उत्तर:
सकल राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पाद तथा विदेशों से शुद्ध आय का योगफल है।

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प्रश्न 3.
एक देश का सकल घरेलू उत्पाद 10,000 करोड़ रुपये और विदेशों से साधन आय 100 करोड़ है। उस देश का सकल राष्ट्रीय उत्पाद कितना होगा?
उत्तर:
सकल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद + विदेशों से शुद्ध आय = 10,000 + 100 = 10,000 करोड़ रुपये

प्रश्न 4.
सकल घरेलू उत्पाद क्या है?
उत्तर:
देश में एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का मौद्रिक मूल्य सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है।

प्रश्न 5.
विदेशी व्यापार में शुद्ध आय किसे कहते हैं?
उत्तर:
विदेशी व्यापार में शुद्ध आय से अभिप्राय विदेशी व्यापार द्वारा प्राप्ति तथा भुगतान के अंतर को व्यापार से शुद्ध आय कहते हैं। यह धनात्मक भी हो सकता है, ऋणात्मक भी और शून्य भी। इसे विदेशों का शुद्ध आय भी कहते हैं।

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प्रश्न 6.
विदेशों से शुद्ध साधन आय कब शून्य होती है?
उत्तर:
विदेशों से शुद्ध साधन आय तब शून्य होती है जब निर्यात से प्राप्त होने वाली आय आयात पर किये गये भुगतान की राशि के बराबर होती है।

प्रश्न 7.
विदेशों से शुद्ध आय कब धनात्मक होती है?
उत्तर:
विदेशों से शुद्ध आय उस समय धनात्मक होती है जब निर्यात से प्राप्त राशि आयात के भुगतान की राशि से अधिक होती है।

प्रश्न 8.
1999-2000 ई. में भारत में कितनी कार्यशक्ति थी?
उत्तर:
1999-2000 ई में भारत के पास 400 मिलियन कार्य बल था।

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प्रश्न 9.
कार्यरत जनसंख्या अनुपात से हमें किस बात का पता चलता है?
उत्तर:
कार्यरत जनसंख्या अनुपात से हमें पता चलता है कि 100 व्यक्तियों में कितने व्यक्ति रोजगार में हैं।

प्रश्न 10.
कार्यरत जनसंख्या अनुपात क्या है?
उत्तर:
कार्यरत जनसंख्या अनुपात एक संकेतक (Indication) है जिसका प्रयोग एक देश की रोजगार स्थिति की विवेचना के लिये किया जाता है।

प्रश्न 11.
‘क’ देश का कार्यरत अनुपात 50 है जबकि “ख’ देश का कार्यरत अनुपात 40 है। किस देश में अधिक लोग रोजगार में लगे हुए हैं?
उत्तर:
‘क’ देश में अधिक कर्मचारी रोजगार में लगे हुए हैं।

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प्रश्न 12.
एक देश की जनसंख्या 28.52 करोड़ है और उस देश में कार्यरत जनसंख्या अनुपात 33.7 है। बताइये कितने लोग कार्य पर लगे हुए हैं?
उत्तर:
कार्य पर लगे कर्मचारी = \(\frac{33.7}{100}\) = 9.61 करोड़

प्रश्न 13.
एक देश में 9.61 करोड़ लोग काम पर लगे हुए हैं और देश की कुल जनसंख्या, 28.52 करोड़ है। कार्यरत जनसंख्या का अनुपात बतायें।
उत्तर:
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प्रश्न 14.
किसी देश का सकल राष्ट्रीय उत्पाद तथा विदेशों से शुद्ध आय क्रमशः 10,100 करोड़ रुपये तथा 100 करोड़ रुपये है। उस देश का सकल घरेलू उत्पाद ज्ञात करें।
उत्तर:
सकल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल राष्ट्रीय उत्पाद – विदेशों से साधन आय
10,100 – 100 = 10,000 करोड़ रुपये।

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प्रश्न 15.
एक देश का सकल घरेलू उत्पाद 9,000 करोड़ रुपये है और उसकी विदेशों से शुद्ध आय (-) 10 करोड़ रुपये है। उस देश का सकल राष्ट्रीय उत्पाद क्या होगा?
उत्तर:
सकल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद + विदेशों से शुद्ध आय
= 9,000 + (-10) = 9,000 – 10
= 8990 करोड़ रुपये।

प्रश्न 16.
आर्थिक क्रियायें किसे कहते हैं?
उत्तर:
आर्थिक क्रियायें उन क्रियाओं को कहते हैं जो सकल राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देती हैं।

प्रश्न 17.
कर्मचारी किसे कहते हैं?
उत्तर:
कर्मचारी उन व्यक्तियों को कहते हैं जो आर्थिक क्रियायें करते हैं।

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प्रश्न 18.
रोजगार में किन व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाता है?
उत्तर:
रोजगार में उन व्यक्तियों को सम्मिलित किया जाता है जो आर्थिक क्रियाओं में संलग्न हैं।

प्रश्न 19.
महिलाएँ घरों में काम करती हैं, खाना बनाती हैं, पानी तथा जलाने की लकड़ियाँ लाती हैं। वे खेतों में भी काम करती हैं, खाना बनाती हैं, फिर भी उनको कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं रखा जाता क्यों?
उत्तर:
क्योंकि उनको उनके काम के बदले मुद्रा या खाद्यान्न के रूप में मजदूरी नहीं दी जाती है।

प्रश्न 20.
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में एक साल में कितने दिनों के लिये रोजगार की गारंटी है?
उत्तर:
एक वर्ष में 100 दिनों के लिये रोजगार की गारंटी है।

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प्रश्न 21.
ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2 फरवरी 2006 ई. को कितने जिलों में शुरू किया गया है?
उत्तर:
200 जिलों में।

प्रश्न 22.
क्या एक भिखारी कर्मचारी है?
उत्तर:
भिखारी कर्मचारी नहीं है क्योंकि भिक्षा माँगना आर्थिक क्रिया नहीं है और न ही भिक्षा से प्राप्त राशि से देश के विकास में कोई वृद्धि होती है।

प्रश्न 23.
एक देश में कार्यरत जनसंख्या अनुपात 33.7 है और उस देश में 9.61 करोड़ व्यक्ति काम पर लगे हुए हैं। उस देश की जनसंख्या ज्ञात करें।
उत्तर:
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प्रश्न 24.
अनिश्चित रोजगार पाने वाले व्यक्ति को चुनिये।

  1. रिक्शा स्वामी के अधीन काम करने वाला रिक्शा चालक।
  2. राज मिस्त्री।
  3. दुकान पर काम करने वाला मैकेनिक।
  4. जूते पालिश करने वाला लड़का।

उत्तर:
2. राज मिस्त्री।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन से कर्मचारी अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं?

  1. एक होटल में काम करने वाला व्यक्ति जिसने सात कर्मचारी नौकरी पर रखे हुए हैं और तीन कर्मचारी परिवार के सदस्य हैं।
  2. एक निजी पाठशाला जिसमें 20 वैतनिक अध्यापक हैं।
  3. एक पुलिस कांस्टेबल।
  4. सरकारी अस्पताल में नर्स।
  5. साइकिल-रिक्शा चलाने वाला।
  6. एक टेक्सटाइल दुकान का स्वामी।
  7. एक बस कंपनी का स्वामी जिसके पास 10 बसें हैं और 20 ड्राइवर, कंडक्टर तथा अन्य कर्मचारी हैं।
  8. एक वकील।

उत्तर:
निम्नलिखित कर्मचारी अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं –

  1. एक होटल में कार्य करने वाला व्यक्ति जिसमें सात वैतनिक कर्मचारी और तीन परिवार के सदस्य कार्य करते हैं।
  2. साइकिल रिक्शा चलाने वाला।
  3. एक टैक्सटाइल दुकान का स्वामी।

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प्रश्न 2.
राष्ट्रीय उत्पाद क्या है? ऐसी कोई पाँच क्रियाएँ बताइये लो राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देती हैं।
उत्तर:
एक राष्ट्र के द्वारा एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं। दूसरे शब्दों में एक वर्ष में एक देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्य को घरेलू उत्पाद कहते हैं। इस घरेलू उत्पाद में विदेशों से अर्जित शुद्ध आय को जोड़ने से राष्ट्रीय उत्पाद प्राप्त होता है। अध्यापक द्वारा स्कूल में पढ़ाना, नर्स द्वारा अस्पताल में रोगी की सेवा करना, एक कर्मचारी का बैंक में काम करना, एक श्रमिक का एक कारखाने में काम करना, एक दुकानदार द्वारा अपनी दुकान पर ग्राहकों को वस्तुएँ बेचना आदि क्रियायें राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान देती हैं।

प्रश्न 3.
भारत में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक काम करने वाले पाये जाते हैं, क्यों?
उत्तर:
प्रायः देखा गया है कि यदि पुरुष अधिक आय कमा रहे हैं तब परिवार महिला सदस्यों के नौकरी करने के लिये हतोत्साहित करते हैं। इसके अतिरिक्त भारत में कई ऐसे समुदाय हैं जो महिलाओं से नौकरी करवाने के घोर विरोधी हैं। उस समुदाय के लोग भूखे मर जायेंगे, परंतु महिलाओं के कमाई को हाथ नहीं लगायेंगे। इसके अतिरिक्त महिलायें पुरुषों की अपेक्षा कम शिक्षित होती है और नौकरी प्राप्त करने की उनमें योग्यता नहीं होती। इन सब कारणों से वे पुरुषों की अपेक्षा कम काम में लगी हुई हैं।

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प्रश्न 4.
स्वनियोजित, नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी तथा दैनिक मजदूरी वाले श्रमिकों के लिये क्रमशः
(a) (b) तथा
(c) लिखें

  1. एक सैलून (Saloon) का स्वामी।।
  2. चावल की मिल में काम करने वाला कर्मचारी जिसे दैनिक आधार पर भुगतान किया जाता है परंतु वह नियमित रूप से नौकरी में है।
  3. भारतीय स्टेट बैंक में कैशियर।
  4. राज्य सरकार के कार्यालय में दैनिक मजदूरी पर काम करने वाला टाइपिस्ट जिसे मासिक भुगतान दिया जाता है।
  5. एक जुलाहा।
  6. थोक सब्जी की दुकान पर माल लादने वाला कर्मचारी।
  7. ठंडे पेय पदार्थ की दुकान का स्वामी जो पेप्सी, कोका-कोला तथा मिरिण्डा बेचता है।
  8. एक निजी चिकित्सालय में 5 साल से निरंतर काम करने वाली नर्स जिसे महीने के महीने वेतन दिया जाता है।

उत्तर:
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प्रश्न 5.
आर्थिक क्रियाओं को कितनी औद्योगिक श्रेणियों में बाँट सकते हैं? इनमें से कौन-सी औद्योगिक श्रेणी प्राथमिक क्षेत्र में सम्मिलित की जाती हैं।
उत्तर:
आर्थिक क्रियाओं को निम्नलिखित औद्योगिक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. कृषि
  2. खनन तथा उत्खनन
  3. विनिर्माण
  4. विद्युत, गैस तथा पानी की आपूर्ति
  5. निर्माण
  6. व्यापार
  7. परिवहन व भण्डारण तथा
  8. सेवायें

प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, खनन और उत्खनन उद्योग शामिल किये जाते हैं।

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प्रश्न 6.
द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्र के उपक्षेत्र लिखें।
उत्तर:
द्वितीयक क्षेत्र के उपक्षेत्र:

  1. विनिर्माण
  2. विद्युत, गैस तथा जल आपूर्ति
  3. निर्माण

तृतीयक क्षेत्र के उपक्षेत्र –

  1. व्यापार
  2. परिवहन तथा भण्डारण
  3. सेवायें

प्रश्न 7.
निम्नलिखित उपक्षेत्र किन क्षेत्रों में शामिल किये जाते हैं?

  1. सेवायें
  2. कृषि
  3. निर्माण
  4. विनिर्माण तथा
  5. व्यापार

उत्तर:
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित क्षेत्रों के दो-दो उपक्षेत्र लिखें प्राथमिक क्षेत्र, द्वितीय क्षेत्र, तृतीयक क्षेत्र।
उत्तर:
1. प्राथमिक क्षेत्र –

  • कृषि
  • खनन तथ उत्खनन

2. द्वितीयक क्षेत्र –

  • निर्माण
  • विनिर्माण

3. तृतीयक क्षेत्र –

  • सेवा
  • व्यापार

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्न तालिका 1972-73 वर्ष के लिये भारत वर्ष में कार्यबल (Work Force) के वितरण को दर्शाती है। इसका विश्लेषण करें और इस प्रकार के कार्य बल के वितरण की प्रकृति का कारण बतायें। आप देखेंगे कि यह आँकड़े 35 वर्ष पहले भारत के हैं।
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उत्तर:
ऊपर की तालिका से हमें पता चलता है कि 1972-73 ई. में भारत में कार्य बल 233 मिलियन था जिसमें 157 मिलियन पुरुष हैं तथा 76 मिलियन महिलायें थी। महिलाओं की संख्या पुरुषों की संख्या से आधी थी। इसका कारण यह था कि भारत में अधिकांश शहरी महिलायें नौकरी नहीं करतीं। उनका अधिकांश समय घरेलू कार्य करने में व्यतीत होता है, इसके अतिरिक्त वे कार्यालयों तथा बैंकों में कार्य करने की योग्यता नहीं रखती।

इसके अतिरिक्त भारत में कुछ ऐसे समुदाय हैं जो अपनी लड़कियों या पत्नियों से नौकरी नहीं करवाते। कुछ लोग पाठशालाओं, कॉलेजों में जाते हैं, परंतु उनमें से अधिकांश विद्यार्थी किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं तथा कार्य शक्ति में शामिल हो जाते हैं। जहाँ तक महिलाओं के काम करने का प्रश्न है, उसके बारे में हम कह सकते हैं कि गाँव। में काम करने वाली महिलाओं का प्रतिशल शहर में काम करने वाली महिलाओं से अधिक है। इसका कारण प्रश्न एक (दीर्घ उत्तरीय) के उत्तर में दे दिया गया है।

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प्रश्न 2.
1972-73 की तुलना में भारत में कर्मचारियों की प्रास्थिति (Status) में बहुत अधिक परिवर्तन हुआ है। टिप्पणी करें।
उत्तर:
निम्नलिखित तालिका की सहायता से हम 1972-73 की तुलना में भारत में कर्मचारियों की प्रास्थिति (Status) में होने वाले परिवर्तन की विवेचना करेंगे।
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ऊपर दी गई तालिका से हमें पता चलता है कि कार्यशक्ति में स्वनियोजितों का प्रतिशत 1972-73 में 61.4 था जो घटकर 1999-2000 में 52.6 हो गया। जहाँ तक वेतनभोगी कर्मचारियों का संबंध है इनमें बहुत कम प्रतिशत परिवर्तन आया था। 1972-73 में कार्यशक्ति का 15.4% भाग नियमित वेतनभोगी रोजगार में था जबकि 1999-2000 में यह 14.6% हो गया। वेतनभोगी रोजगार में लगी कार्यशक्ति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया परंतु दैनिक मजदूरी श्रमिकों का प्रतिशत 23.2 (1972-73) से बढ़कर 1999-2000 में 32.8% हो गया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका भारत में 1993-94 की कार्यरत जनसंख्या अनुपात को दर्शाती है। तालिका का विश्लेषण करें।
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उत्तर:
तालिका से हमें पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्र में 100 में से 44.4 लोग आर्थिक क्रियाओं में संलग्न हैं जबकि शहरी क्षेत्र में 34.7% अर्थात् 100 में से 35 लोग काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शहरी क्षेत्र की अपेक्ष कार्यरत जनसंख्या दर के ऊंचा होने के निम्नलिखित कारण हैं –

  1. गाँवों में उच्च आय कमाने के साधन सीमित हैं। फलस्वरूप अपनी आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये परिवार के अधिकांश लोग काम करने जाते हैं।
  2. ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश जनसंख्या स्कूलों और कालेजों में नहीं जाती। जो बच्चे स्कूल जाते हैं, वे बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं और कार्य में लग जाते हैं। अतः ग्रामीण क्षेत्र में शहरी क्षेत्र की अपेक्षा अधिक लोग काम पर जाते हैं।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका 1972-73 तथा 1999-2000 वर्ष के लिए पुरुषों के रोजगार की प्रवृत्ति को दर्शाती है। विश्लेषण करें और इन परिवर्तनों के उचित कारण बतायें।
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उत्तर:
तालिका से हमें निम्नलिखित बातों का पता चलता है –

1. स्वनियोजित कर्मचारी:
1972-73 में 100 में से लगभग 61 लोग स्वनियोजित थे अर्थात् अपना काम-धन्धा स्वयं चलाते थे। वे स्वयं ही स्वामी थे और स्वयं ही कर्मचारी थे। वे अपनी सेवायें किसी को किराये पर नहीं देते थे। इनका
प्रतिशत अब कम होकर 51.3% हो गया है। इसका मुख्य कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि है। स्वनियोजित व्यक्तियों की संख्या तो बढ़ रही है परंतु वह उस दर से नहीं बढ़ रही है जिस दर से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।

2. नियमित वेतनभोगी कर्मचारी (Regular Salaried Employees):
नियमित वेतनभोगी कर्मचारी का 1972-73 में 18.7 प्रतिशत था। 1999-2000 में इनका प्रतिशत भी गिरकर 17.8 प्रतिशत हो गया। इसका मुख्य कारण जनसंख्या का तेजी से बढ़ना और रोजगार के अवसरों में बहुत ही धीमी गति से वृद्धि थी।

3. दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले कर्मचारी (Casual Wage labourers):
1972-73 में दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले कर्मचारी 19.7 प्रतिशत थे। इनका प्रतिशत बढ़कर 1999-2000 में 30.9 प्रतिशत हो गया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  • जनसंख्या का तीव्र गति से बढ़ाना।
  • स्वनियोजित कर्मचारियों के प्रतिशत में कमी आना।
  • नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों के प्रतिशत में कमी आना।
  • एक वकील।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आपकी स्थिति एक श्रमिक की है, यदि आपको 1 वर्ष की अवधि में –
(a) 183 दिन से कम काम मिलता है।
(b) 183 दिन से अधिक काम मिलता है।
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 183 दिन से अधिक काम मिलता है।

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प्रश्न 2.
श्रम बल भागीदारी दर का सूत्र है –
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 15
(b)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 16
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a)
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे img 15

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय प्रतिवर्ष सर्वेक्षण के आँकड़ों का आधार है –
(a) प्रतिचयन
(b) संगणना
(c)(a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्रतिचयन

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

प्रश्न 4.
अर्थव्यवस्था में 15 से कम तथा 60 से ऊपर की आयु वाले लोग कहलाते हैं –
(a) उत्पादक
(b) उपभोक्ता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) उपभोक्ता

प्रश्न 5.
विश्वव्यापी मंदी के समय इंग्लैंड तथा अमेरिका में बेरोजगारी दर हो गई थी –
(a) 20 प्रतिशत
(b) 40 प्रतिशत
(c) 30 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 20 प्रतिशत

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

प्रश्न 6.
आर्थिक मंदी के दौरान संभाव्य उत्पादन में कमी उत्पन्न हो गई थी –
(a) 20 प्रतिशत
(b) 40 प्रतिशत
(c) 30 प्रतिशत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 40 प्रतिशत

प्रश्न 7.
भारत में प्रच्छन्न बेरोजगारी पाई जाती है –
(a) कृषि में
(b) पारिवारिक व्यवसायों में
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

प्रश्न 8.
महिलाओं के कार्यों को –
(a) काम की श्रेणी में रखा जाता है
(b) काम की श्रेणी में नहीं रखा जाता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) काम की श्रेणी में रखा जाता है

प्रश्न 9.
भारत में 1999-00 में बेरोजगारी का आकार था –
(a) 0.39 करोड़
(b) 1.24 करोड़
(c) 0.80 करोड़
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 0.80 करोड़

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 7 रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे

प्रश्न 10.
भारत में 1999-00 में 1972-73 की तुलना में बेरोजगारी के आकार में बढ़ोतरी हुई –
(a) दो गुनी
(b) तीन गुनी
(c) चार गुनी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) दो गुनी

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

Bihar Board Class 11 Geography जैव विविधता एवं संरक्षण Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

(क) बहुवैकल्पिक प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जैव-विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्वपूर्ण है …………………
(क) जन्तु
(ख) पौधे
(ग) पौधे और प्राणी
(घ) सभी जीवधारी
उत्तर:
(घ) सभी जीवधारी

प्रश्न 2.
असुरक्षित प्रजातियाँ कौन-सी हैं ………………….
(क) जो दूसरों को असुरक्षा दें
(ख) बाध व शेर
(ग) जिनकी संख्या अत्याधिक हों
(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है
उत्तर:
(घ) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है

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प्रश्न 3.
राष्ट्रीय पार्क (National Parks) और अभ्यारण (Sanctuaries) किस उद्देश्य के लिए नाए गए हैं …………………
(क) मन जन
(ख) पालतू जीवों के लिए
(ग) शिकार के लिए
(घ) संरक्षण के लिए
उत्तर:
(घ) संरक्षण के लिए

प्रश्न 4.
जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं ………………..
(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(ख) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(ग) ध्रुवीय क्षेत्र
(घ) महासागरीय क्षेत्र
उत्तर:
(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 5.
निम्न में से किस देश में अर्थ सम्मेलन (Earth summit) हुआ था ………………..
(क) यू. के. (U.K.)
(ख) ब्राजील
(ग) मैक्सिको
(घ) चीन
उत्तर:
(ख) ब्राजील

प्रश्न 6.
प्रोजेक्ट टाईगर निम्नलिखित में से किस उद्देश्य से शुरू किया गया है।
(क) बाघ मारने के लिये
(ख) बाघ को शिकार से बचाने हेतु
(ग) बाघ को चिड़ियाघर में डालने हेतु
(घ) बाघ पर फिल्म बनाने हेतु
उत्तर:
(घ) बाघ पर फिल्म बनाने हेतु

प्रश्न 7.
प्रोजेक्ट एलिफेन्ट (Project Elephent) किस वर्ष लागू किया गया?
(क) 1992
(ख) 1993
(ग) 1994
(घ) 1995
उत्तर:
(क) 1992

प्रश्न 8.
होमो-सेपियन (Homo-Speiens) प्रजाति किस से संबंधित है?
(क) पौधे
(ख) शाकाहारी जीव
(ग) मांशहारी जीव
(घ) मानव
उत्तर:
(घ) मानव

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प्रश्न 9.
जैव विविधता का समृद्ध क्षेत्र है ……………….
(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(ख) ध्रुवीय क्षेत्र
(ग) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(घ) महासागरीय क्षेत्र
उत्तर:
(क) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 1.
जैव-विविधता क्या है?
उत्तर:
किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाये जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव-विविधता कहते हैं। इसका संबंध पौधों के प्रकार, प्राणियों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं से है उनकी आनुवंशिकी और उनके द्वारा निर्मित पारितंत्र से है। जैव-विविधता सजीव सम्पदा है। यह विकास के लाखों वर्षों के इतिहास का परिणाम है।

प्रश्न 2.
जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?
उत्तर:
जैव-विविधता को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है –

  1. आनुवांशिक विविधता (Genetic diversity)
  2. प्रजातीय विविधता (Species diversity) तथा
  3. पारितंत्रीय विविधता (Ecosysten diversity)

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 3.
हॉट-स्पॉट (Hot spots) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऐसे क्षेत्र’ जो अधिक संकट में हैं, उनमें संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने जैव-विविधता हॉट-स्पॉट (Hot spots) क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया है। हॉट-स्पॉट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाषित किये गए हैं।

प्रश्न 4.
मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्त्व का वर्णन संक्षेप में करें।
उत्तर:
जैव-विविधता ने मानव संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है और इसी प्रकार, मानव समुदायों ने भी आनुवंशिक, प्रजातीय व पारिस्थितिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है। जैव-विविधता के चार प्रमुख योगदान हैं-पारिस्थितिक (Ecological), आर्थिक (Economic), नैतिक (Ethical) और वैज्ञानिक (Scientific)।

प्रश्न 5.
विदेशज प्रजातियों (Exotic species) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वे प्रजातियाँ जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें ‘विदेशज प्रजातियाँ’ कहा जाता है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें
उत्तर:
पारितंत्र में विभिन्न प्रजातियाँ कोई न कोई क्रिया करती हैं। पारितत्र में कोई भी प्रजाति बिना कारण न तो विकसित हो सकती हैं और न ही बनी रह सकती हैं। अर्थात् प्रत्येक जीव अपनी जरूरत पूरा करने के साथ-साथ दूसरे जीवों के पनपने में भी सहायक होता है। जीव व प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं, कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न एवं विघटित करती हैं और पारितंत्र में जल या पोषक तत्त्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैस को स्थिर करती हैं और जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।

ये पारितंत्री क्रियायें मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। पारितंत्र में जितनी अधिक विविधता होगी प्रजातियों के प्रतिकल स्थितियों में भी रहने की सम्भावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अधिक होगी। प्रजातियों की क्षति से तंत्र के बने रहने की क्षमता भी कम हो जाएगी। अधिक आनुवंशिक विविधता वाली प्रजातियों की तरह अधिक जैव-विविधता वाले पारितंत्रों में पर्यावरण के बदलावों में सहन करने की अधिक सक्षमता होती है। दूसरे शब्दों में जिस पारितंत्र में जितनी प्रकार की प्रजातियाँ होंगी, वह पारितंत्र उतना ही अधिक स्थाई होगा।

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प्रश्न 2.
जैव-विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।
उत्तर:
पिछले कुछ दशकों से जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग अधिक होने लगा है। इससे संसार के विभिन्न भागों में प्रजातियों तथा उनके आवास स्थानों में तेजी से कमी हुई है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र जो विश्व के क्षेत्र का मात्र एक चौथाई (25%) भाग है, यहाँ संसार का तीन चौथाई (75%) जनसंख्या रहती है। अधिक जनसंख्या की जरूरत को पूरा करने के लिए संसाधनों का अत्यधिक दोहन और वनोन्मूलन अत्यधिक हुआ है। उष्ण कटिबंधीय वर्षा वाले वनों में पृथ्वी की लगभग 50% प्रजातियाँ पाई जाती हैं और प्राकृतिक आवासों का विनाश पूरे जैवमंडल के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ है।

प्राकृतिक आपदाएँ जैसे-भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी उद्गार, दावानल, सूखा आदि पृथ्वी पर पाई जाने वाली प्राणिजात और वनस्पतिजात को हानि पहुँचाते हैं और परिणामस्वरूप संबंधित प्रभावित प्रदेशों की जैव-विविधता में बदलाव आता है। कीटनाशक और अन्य प्रदूषक जैसे-हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) और विषैली भारी धातु संवेदनशील और कमजोर प्रजातियों को नष्ट कर देते हैं। विदेशज, प्रजातियों के आगमान से भी पारितंत्र को कई बार क्षति पहुँची है। शिकार के कारण भी कुछ प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर आ गई हैं।

विश्व संरक्षण कार्य योजना में जैव-विविधता संरक्षण के निम्न तरीके सुझाए गए हैं –

  • संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए।
  • प्रजातियों को विलुप्ति से बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
  • खाद्यान्नों की किस्में, चारे संबंधी पौधों की किस्में, इमारती पेड़ों, पशुधन, जन्तु व उनकी वन्य प्रजातियों की किस्मों को संरक्षित करनी चाहिए।
  • प्रत्येक देश को वन्य जीवों के आवास को रेखांकित कर उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।
  • प्रजातियों के पलने-बढ़ने तथा विकसित होने के स्थान सुरक्षित व संरक्षित हों।
  • वन्य जीवों व पौधों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप हो।

Bihar Board Class 11 जैव विविधता एवं संरक्षण Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पर्यावरण के प्रदूषण का किन तत्त्वों पर प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
वायु, जल, मृदा।

प्रश्न 2.
इस समय विश्व के कितने प्रतिशत ज्ञात पशु तथा पौधे विलोपन के कागार पर खड़े हैं?
उत्तर:
2% पशु तथा 8% पौधे।

प्रश्न 3.
जल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव का क्या कारण है?
उत्तर:
अम्लीय वर्षा, सिंचाई तथा उर्वरकों का प्रवाह।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 4.
भारत में धार्मिक अनुष्ठानों में कितने पौधों की प्रजातियाँ प्रयोग की जाती हैं?
उत्तर:
100 (सौ)।

प्रश्न 5.
‘प्रोजेक्ट टाइगर’ कब शुरू किया गया?
उत्तर:
1973 ई. में।

प्रश्न 6.
पृथ्वी शिखर कब और कहाँ हुआ?
उत्तर:
1992 में रीयो डी जेनेरो (ब्राजील) में।

प्रश्न 7.
वाइल्ड लाइफ एक्ट कब बनाया गया?
उत्तर:
सन् 1972 में।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 8.
जैव विविधता का आधार क्या है?
उत्तर:
अपक्षयण।

प्रश्न 9.
अधिक प्रजातीय विविधता वाले क्षेत्रों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
हॉट-स्पॉट (Hot-Spot)।

प्रश्न 10.
प्रजातियों की क्षति का क्या प्रभाव है?
उत्तर:
पारितंत्र की क्षमता का कम होना।

प्रश्न 11.
कृषि जैव विविधता क्या है?
उत्तर:
फसलों की विविधता।

प्रश्न 12.
मानव को भोजन प्रदान करने वाले दो साधन बताएँ।
उत्तर:
पौधे तथा जीव-जंतु।

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प्रश्न 13.
हरित क्रांति में किन तत्त्वों का योगदान है?
उत्तर:
बीजों की नयी किस्में, कीटनाशक दवाइयाँ तथा उर्वरक।

प्रश्न 14.
प्रजातीय विविधता किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी प्रजाति के शारीरिक लक्षणों को।

प्रश्न 15.
कुछ प्रजातियों के सामाप्त होने का क्या कारण है?
उत्तर:
बढ़ती जनसंख्या के लिए संसाधनों की अधिक मांग के कारण।

प्रश्न 16.
प्लीस्टोसिन युग कब था?
उत्तर:
लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 17.
अनाज के भंडार की वृद्धि का क्या कारण है?
उत्तर:
कृषि का यंत्रीकरण।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
प्रजातियों के संरक्षण के दो पहलू बताएँ।
उत्तर:

  1. मानव को पर्यावरण-मैत्री सम्बन्धी पद्धतियों का प्रयोग करना चाहिए।
  2. विकास के लिए सजत् पोषणीय गतिविधियाँ अपनाई जाए।
  3. स्थानीय समुदायों की इसमें भागीदारी हो।

प्रश्न 2.
महाविविधिता केन्द्र से क्या अभिप्राय है? विश्व के महत्त्वपूर्ण महाविविधता केन्द्र बताएँ।
उत्तर:
जिन देशों में उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में अधिक प्रजातीय विविधता पाई जाती हैं, उन्हें महाविविधिता केन्द्र कहते हैं। विश्व में 12 ऐसे देश हैं-मैक्सिको, कोलम्बिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राजील, जायरे, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेशिया, इण्डोनेशिया तथा आस्ट्रेलिया।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 3.
मानव के लिए पौधे किस प्रकार महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
पौधे मनुष्य को कई प्रकार की फसलें, प्रोटीन देते हैं यह जनसंख्या के पोषण के लिए एक प्राकृतिक साधन हैं।

प्रश्न 4.
जैविक विविधता का संरक्षण क्या है?
उत्तर:
जैविक विविधता का संरक्षण एक ऐसी योजना है जिसका लक्ष्य विकास की निरंतरता को बनाये रखना है। विभिन्न प्रजातियों को कायम रखने के लिए, विकसित करने तथा उनके जीवन कोष को बनाये रखना जो भविष्य में लाभदायक हो।

प्रश्न 5.
जैव विविधता का इतिहास बताएं। किस कटिबंध में जैव विविधता अधिक है?
उत्तर:
आज जो जैव विविधता हम देखते हैं, वह 25 से 35 अरब वर्षों के विकास का परिणाम है। मानव जीवन के प्रारम्भ होने से पहले, पृथ्वी पर जैव विविधता किसी भी अन्य काल से अधिक थी। मानव के आने से जैव विविधता में तेजी से कमी आने लगी, क्योंकि किसी एक या अन्य प्रजाति की आवश्यकता से अधिक उपभोग होने के कारण, वह लुप्त होने लगी।

अनुमान के अनुसार, संसार में कुल प्रजातियों की संख्या 20 लाख से 10 करोड़ तक, लेकिन एक करोड़ ही इसका सही अनुमान है। नयी प्रजातियों की खोज लगातार जारी है और उनमें से अधिकांश का वर्गीकरण भी नहीं हुआ है। (एक अनुमान के अनुसार दक्षिण अमेरिका की ताजे पानी की लगभग 40 प्रतिशत मछलियों का वर्गीकरण नहीं हुआ।) उष्ण कटिबंधीय वनों में जैव-विविधता की अधिकता है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए किस प्रकार अपक्षय पृथ्वी पर जैव विविधता हेतु उत्तरदायी है?
उत्तर:
पृथ्वी पर जैव विविधता मुख्यतः वनों पर आधारित होता है और वन अपक्षयी प्रवाह की गहराई पर आधारित है। अपक्षय प्रक्रिया शैलों को तोड़कर आवरण प्रस्तर एवं मृदा निर्माण हेतु मार्ग प्रशस्त करती हैं और अपरदन एवं वृहत संचालन में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है जो जैव विविधता हेतु उत्तरदायी होती है।

प्रश्न 7.
परितंत्र में प्रजातियों की भूमिका बताएँ।
उत्तर:

  1. जीव व प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण करती हैं।
  2. ये कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न करती हैं।
  3. ये जल व पोषण चक्र बनाने में सहायक है।
  4. वायुमण्डलीय गैसों को स्थिर करती हैं।

प्रश्न 8.
जैव विविधता के क्या कारण हैं?
उत्तर:
जैव विविधता का आधार अपक्षयण है। सौर ऊर्जा और जल ही अपक्षयण में विविधता और जैव विविधता का मुख्य कारण है । वे क्षेत्र जहाँ ऊर्जा व जल की उपलब्धता अधिक है, वहीं पर जैव विविधता भी व्यापक स्तर पर है।

प्रश्न 9.
जैव विविधता सतत् विकास का तंत्र है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
जैव विविधता सजीव सम्पदा है। यह विकास के लाखों वर्षों के ऐतिहासिक घटनाओं का परिणाम है। प्रजातियों के दृष्टिकोण से और अकेले जीवधारी के दृष्टिकोण से जैव-विविधता सतत् विकास का तंत्र है। पृथ्वी पर किसी प्रजाति की औसत आयु 10 से 40 लाख वर्ष होने का अनुमान है। ऐसा भी माना जाता है कि लगभग 99 प्रतिशत प्रजातियाँ जो कभी पृथ्वी पर रहती थीं, आज लुप्त हो चुकी हैं। पृथ्वी पर जैव विविधत एक जैसी नहीं है। जैव-विविधता उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में अधिक होती है। जैस-जैसे हम ध्रुवीय प्रदेशों की तरफ बढ़ते हैं, प्रजातियों की विविधता तो कम होती जाती है, लेकिन जीवधारियों की संख्या अधिक होती जाती है।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 10.
पौधों और जीवों को संरक्षण के आधार पर विभिन्न प्रजातियों में बांटें।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों व पर्यावरण संरक्षण को अन्तर्राष्ट्रीय संस्था (IUCN) ने संकटापन्न पौधों व जीवों की प्रजाजियों को उनके संरक्षण के उद्देश्य से तीन वर्गों में विभाजित किया है

1. संकटापन्न प्रजातियाँ (Endangered species) – इसमें वे सभी प्रजातियाँ सम्मिलित हैं, जिनके लुप्त हो जाने का खतरा है। अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) विश्व की सभी संकटापन्न प्रजातियों के बारे में (Redlist) रेड लिस्ट के नाम से सूचना प्रकाशित करता है।

2. कमजोर प्रजातियाँ (Vulnerable species) – इसमें वे प्रजातियाँ सम्मिलित हैं, जिन्हें यदि संरक्षित नहीं किया गया या उनके विलुप्त होने में सहयोगी कारक यदि जारी रहे तो निकट भविष्य में उनके विलुप्त होने का खतरा है। इनकी संख्या अत्यधिक कम होने के कारण, इनका जीवित रहना सुनिश्चित नहीं है।

3. दुर्लभ प्रजातियाँ (Rare species) – संसार में इन प्रजातियों की संख्या बहुत कम है। ये प्रजातियाँ कुछ ही स्थानों पर सीमित हैं या बड़े क्षेत्र में बिखरी हुई हैं।

प्रश्न 11.
जैव विविधता की हानि के चार कारण बताएँ।
उत्तर:

  1. प्राकृतिक आपदाएँ
  2. कीटनाशक
  3. विदेशज प्रजातियाँ
  4. अवैध शिकार

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
जैव विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करो। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।
उत्तर:
जैव विविधता की हानि (Loss of bodiversity) – पिछले कुछ दशकों से, जनसंख्या वृद्धि के कारण, प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग अधिक होने लगा है। इससे संसार के विभिन्न भागों में प्रजातियों तथा उनके आवास स्थानों में तेजी से कमी हुई है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र, जो विश्व के कुछ क्षेत्र का मात्र एक चौथाई भाग है, यहाँ संसार की तीन चौथाई जनसंख्या रहती है। अधिक जनसंख्या की जरूरत को पूरा करने के लिए संसाधनों का अत्यधिक दोहन और वनोन्मूलन अत्यधिक हुआ है। उष्णकटिबंधीय वर्षा वाले वनों में पृथ्वी की लगभग 50 प्रतिशत प्रजातियाँ पाई जाती हैं और प्राकृतिक आवासों का विनाश पूरे जैवमण्डल के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ है।

1. प्राकृतिक आपदाएँ – प्रकृतिक आपदाएँ जैसे भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी, उदार, दावानल, सूखा आदि पृथ्वी पर पाई जाने वाली प्राणिजात और वनस्पतिजात को क्षति पहुँचाते हैं और परिणामसवरूप सम्बन्धित प्रभावित प्रदेशों की जैव विविधता में बदलाव आता है।

2. कीटनाशक – कीटनाशक और अन्य, जैसे-हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) और विषैली भारी धातु (Toxic heavy metals) संवेदनशील और कमजोर प्रजातियों को नष्ट कर देते हैं।

3. विदेशज प्रजातियाँ – वे प्रजातियाँ, जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं, लेकिन उस तंत्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें ‘विदेशज प्रजातियाँ’ (Exotic species) कहा जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब विदेशज प्रजातियों के आगमन से पारितंत्र में प्राकृतिक या मूल जैव समुदाय को व्यापक नुकसान हुआ है।

4. अवैध शिकार – पिछले कुछ दशकों के दौरान, कुछ जन्तुओं जैसे-बाघ, चीता, हाथी, गैंडा, मगरपच्छ, मिंक और पक्षियों का, उनके सींग, सैंड व खालों के लिए निर्दयतापूर्वक अवैध शिकार किया जा रहा है। इसके फलस्वरूप कुछ प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर आ गई हैं।

जैव-विविधता का संरक्षण (Conservation of bodiverisity) – मानव के अस्तित्व के लिए जैव-विविधता अति आवश्यक है। जीवन का हर रूप एक-दूसरे पर इतना निर्भर है कि किसी एक प्रजाति पर संकट आने से दूसरों में असन्तुलन की स्थिति पैदा हो जाती है। यदि पौधों और प्राणियों की प्रजातियाँ संकटापन्न होती हैं, तो इससे पर्यावरण में गिरावट उत्पन्न होती है, और अन्ततोगत्वा मनुष्य का अपना अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।

आज यह अति अनिवार्य है कि मानव को पर्यावरण-मैत्री सम्बन्धी पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाए और विकास की ऐसी व्यावहारिक गतिविधियाँ अपनाई जाएँ, जो स्थायी (Sustaniable) हों। इस तथ्य के प्रति भी जागरूकता बढ़ रही है कि संरक्षण तभी संभव और दीर्घकालिक होगा, जब स्थानीय समुदायों व प्रत्येक व्यक्ति की इसमें भागीदारी होगी।

इसके लिए स्थानीय स्तर पर संस्थागत संरचनाओं का विकास आवश्यक है। केवल प्रजातियों का संरक्षण और आवास स्थान की सुरक्षा ही अहम समस्या नहीं है, बल्कि संरक्षण की प्रक्रिया को जारी रखना भी उतना ही जरूरी है। सन् 1992 में ब्राजील के रियो-डी-जेनेरो (Rio-de-Janeiro) में हुए जैव विविधता के सम्मेलन (Earth summit) में लिए गए संकल्पों का भारत अन्य 155 देशों सहित हस्ताक्षरी है। विश्व संरक्षण कार्य योजना में जैव-विविधता संरक्षण के निम्न तरीके सुझाए गए हैं –

  • संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए।
  • प्रजातियों को विलुप्ति से बचाने के लिए उचित योजनाएँ प्रबंधन अपेक्षित हैं।
  • खाद्यान्नों की किस्में, चारे सम्बन्धी पौधों की किस्में, इमारती पेड़, पशुधन, जन्तु व उनकी वन्य प्रजातियों की किस्मों को संरक्षित करना चाहिए।
  • प्रत्येक देश को वन्य जीवों के आवास को रेखांकित कर उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।
  • प्रजातियों के पलने-बढ़ने तथा विकसित होने के स्थान सुरक्षित व संरक्षित हों।
  • वन्य जीवों व पौधों का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप हो।

भारत सरकार ने प्राकृतिक सीमाओं के भीतर विभिन्न प्रकार की प्रजातियों को बचाने, संरक्षित करने और विस्तार करने के लिए, वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 (Wild life protection act, 1972), पास किया है, जिसके अन्तर्गत राष्ट्रीय पार्क (National parks), अभ्यारण्य (Sancuaries) स्थापित किये गए तथा जैव संरक्षित क्षेत्र (Biosphere reserves) घोषित किये गए। वे देश, जो उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है, उनमें संसार की सर्वाधिक प्रजातीय विविधता पाई जाती है। उन्हें ‘महा विविधता केन्द्र’ (Mega diversity centers) कहा जाता है। इन देशों की संख्या 12 है और उनके नाम हैं : मैक्सिको, कोलम्बिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राजील, जायरे, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेशिया, इण्डोनेशिया और आस्ट्रेलिया।

इन देशों में समृद्ध महा-विविधता के केन्द्र स्थित हैं। ऐसे क्षेत्र, जो अधिक संकट में हैं, उनमें संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने जैव विविधता हॉट-स्पॉट (Hotspots) क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया है। हॉट-स्पॉट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाषित किये गए हैं। पादप महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि ये ही किसी पारितंत्र की प्राथमिक उत्पादकता को निर्धारित करते हैं। यह भी देखा गया है कि ज्यादातर हॉट-स्पॉट रहने वाले भोजन, जलाने के लिए लकड़ी, कृषि भूमि और इमारती लकड़ी आदि के लिए वहाँ पाई जाने वाली प्रजाति समृद्ध पारितंत्रों पर ही निर्भर है।

उदाहरण के लिए मेडागास्कर में, जहाँ 85 प्रतिशत पौधे व प्राणी संसार में अन्यत्र कहीं भी नहीं पाए जाते वहाँ के रहने वाले संसार के सर्वाधिक गरीबों में से एक है और वे जीवित खेती के लिए. जंगलों को काटकर और (Slash and burn) पायी गयी कृषि भूमि पर निर्भर हैं। अन्य हॉट-स्पॉट, जो समृद्ध देशों में पाए जाते हैं, वहाँ कुछ अन्य प्रकार की समस्याएँ हैं। हवाई द्वीप जहाँ विशेष प्रकार की पादप व जन्तु प्रजातियाँ मिलती हैं, वह विदेशज प्रजातियों के आगमन और भूमि विकास के कारण असुरक्षित हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 2.
जैव विविधता का विभिन्न स्तरों पर वर्णन करें।
उत्तर:
जैव-विविधता को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है –

  • आनुवांशिक विविधता (Genetic diversity)
  • प्रजातीय विविधता (Species diversity) तथा
  • पारितंत्रीय fafquc (Ecosystem diversity)

1. आनुवांशिक जैव विविधता (Genetic biodiversity) – जीवन निर्माण के लिए जीन (Gene) एक मूलभूत इकाई है। किसी प्रजाति में जीन की विविधता ही आनुवांशिक जैव-विविधता है। समान भौतिक लक्षणों वाले जीवों के समूह को प्रजाति कहते हैं। मानव आनुवांशिक रूप से “हेमोसेपियन’ (Homosapiens) प्रजाति से सम्बन्धित है जिससे कद, रंग और अलग दिखावट जैसे शारीरिक लक्षणों में काफी भिन्नता है। इसका कारण आनुवांशिक विविधता है। विभिन्न प्रजातियों के विकास के फलने-फूलने के लिए आनुवंशिक विविधता अत्यधिक अनिवार्य है।

2. प्रजातीय विविधता (Species diversity) – यह प्रजातीयों की अनेकरूपता को बताती है। यह किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या से सम्बन्धित है। प्रजातियों की विविधता, उनकी समृद्धि, प्रकार तथा बहुलता से आँकी जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में प्रजातियों की संख्या अधिक होती है और कुछ में कम । जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता अधिक होती है, उन्हें विविधता के हॉट-स्पॉट (Hot spots) कहते हैं।

3. पारितंत्रीय विविधता (Ecosystem diversity) – आपने पिछले अध्याय में पारितंत्रों के प्रकारों में व्यापक भिन्नता और प्रत्येक प्रकार के पारितंत्रों में होने वाली पारितंत्रीय प्रक्रियाएँ तथा आवास स्थानों की भिन्नता ही पारितंत्रीय विविधता बनाते हैं। पारितंत्रीय विविधता का परिसीमन करना मुश्किल और जटिल है, क्योंकि समुदायों (प्रजातियों का समूह) और पारितंत्र की सीमाएँ निश्चित नहीं हैं।

Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 16 जैव विविधता एवं संरक्षण

प्रश्न 3.
प्रकृति को बनाए रखने में जैव विविधता की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर:
1. जैव विविधता का महत्व (Importance of biodiversity) – जैव विविधता ने मानव संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है और इसी प्रकार मानव समुदायों ने भी आनुवांशिक, प्रजातीय व पारिस्थितिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है। जैव विविधता के चार प्रमुख योगदान हैं –

  • पारिस्थितिक (Ecological)
  • आर्थिक (Economic)
  • नैतिक (Ethical)
  • वैज्ञानिक (Scientific)

2. जैव विविधता की पारिस्थितिकीय भूमिका (Ecologicalrole of biodiversity) – पारितंत्र में विभिन्न प्रजातियाँ कोई न कोई क्रिया करती हैं। पारितंत्र में कोई भी प्रजाति बिना कारणन तो विकसित हो सकती हैं और न ही बनी रह सकती हैं। अर्थात्, प्रत्येक जीव अपनी जरूरत पूरा करने के साथ-साथ दूसरे जीवों के पनपने में भी सहायक होता है।

  • जीव व प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं।
  • कार्बनिक पदार्थ उत्पन्न एवं विघटित करती हैं।
  • पारितंत्र में जल व पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती हैं।
  • इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमण्डलीय गैस को स्थिर करती हैं।
  • जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।

ये पारितंत्रीय क्रियाएँ मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। पारितंत्र में जितनी अधिक विविधता होगी प्रजातियों के प्रतिकूल स्थितियों में भी रहने की सम्भावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अधिक होगी । प्रजातियों की क्षति से तंत्र के बने रहने की क्षमता भी कम हो जाएगी। अधिक आनुवांशिक विविधता वाली प्रजातियों की तरह अधिक जैव-विविधता वाले पारितंत्र में पर्यावरण के बदलावों को सहन करने की अधिक सक्षमता होती है। दूसरे शब्दों में, जिस पारितंत्र में जितनी प्रकार की प्रजातियाँ होंगी, वह पारितंत्र उतना ही अधिक स्थायी होगा। .

3. जैव-विविधता की आर्थिक भूमिका (Ecological role of biodiversity) – सभी मनुष्यों के लिए दैनिक जीवन में विविधता एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। जैव विविधता का एक महत्त्वपूर्ण भाग ‘फसलों की विविधता’ (Crop diversity) है, जिसे कृषि जैव विविधता भी कहा जाता है। जैव विविधता को संसाधनों के उन भण्डारों के रूप में भी समझा जा सकता है, जिनकी उपयोगिता भोज्य पदार्थ, औषधियाँ और सौन्दर्य प्रसाधन आदि बनाने में है।

जैव संसाधनों की ये परिकल्पना जैव विविधता के विनाश के लिए उत्तरदायी हैं। साथ ही यह संसाधनों के विभाजन और बँटवारे को लेकर उत्पन्न नये मत्स्य और दवा संसाधन आदि हैं। कुछ ऐसे प्रमुख आर्थिक महत्त्व के उत्पाद हैं, जो मानव को जैव विविधता के फलस्वरूप उपलब्ध होते हैं।

4. जैव-विविधता की वैज्ञानिक भूमिका (Scientific role of biodiversity) – जैव विविधता इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक प्रजाति हमें यह संकेत दे सकती है कि जीवन का आरम्भ कैसे हुआ और यह भविष्य में कैसे विकसित होगा। जीवन कैसे चलता है और पारितंत्र, जिसमें हम भी एक प्रजाति हैं, उसे बनायें रखने में प्रत्येक प्रजाति की क्या भूमिका है, इन्हें हम जैव विविधता से समझ सकते हैं। हम सभी को यह तथ्य समझना चाहिए कि हम स्वयं जियें और दूसरी प्रजातियों को भी जीने दें।

5. जैव विविधता की नैतिक भूमिका (Ethical role of biodiversity) – यह समझना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हमारे साथ सभी प्रजातियों को जीवित रहने का अधिकार है। अत: कई प्रजातियों को स्वेच्छा से विलुप्त करना नैतिक रूप से गलत है। जैव विविधता का स्तर अन्य जीवित प्रजातियों के साथ हमारे सम्बन्ध का एक अच्छा पैमाना है। वास्तव में, जैव विविधता की अवधारणा कई मानव संस्कृतियों का अभिन्न अंग है।

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 ग्रामीण विकास

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 ग्रामीण विकास Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 6 ग्रामीण विकास

Bihar Board Class 11 Economics ग्रामीण विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
ग्रामीण विकास का क्या अर्थ है? ग्रामीण विकास से जुड़े मुख्य प्रश्नों को स्पष्ट करें।
उत्तर:
ग्रामीण विकास का अर्थ-ग्रामीण विकास मूलतः
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन घटकों के विकास पर ध्यान केन्द्रित करने पर बल देता है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास में पिछड़ गए हैं। ग्रामीण विकास से जुड़े मुख्य प्रश्न –

  1. साक्षरता और कौशल का विकास
  2. स्वास्थ्य
  3. उत्पादक संसाधनों का विकास
  4. आधारिक संरचना का विकास
  5. कृषि अनुसंधान का विस्तार और सूचना प्रसार की सुविधाएँ तथा
  6. निर्धनता निवारण और समाज के कमजोर वर्गों की जीवन दशाओं में महत्त्वपूर्ण सुधार के विशेष उपाय

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 6 ग्रामीण विकास

प्रश्न 2.
ग्रामीण विकास में साख के महत्त्व की चर्चा करें।
उत्तर:
ग्रामीण विकास में साख का महत्त्व (Importance of Credit in Rural Growth):
कृषि वित्त, कृषि विकास कार्यक्रमों का एक मुख्य आधार है क्योंकि पर्याप्त वित्त के अभाव में कृषि वित्त कार्यक्रमों की सफलता सम्भव नहीं। कृषकों को निम्नलिखित उत्पादक तथा अनुत्पादक कार्यों के लिए ऋणों की आवश्यकता होती है।

1. उत्पादक क्रियाएँ (Productive Activities):
कृषकों को बीज, खाद, कीटनाशक दवाइयों, कृषि यंत्र आदि क्रय करने के लिए, भूमि सुधार करना, सिंचाई की व्यवस्था करना आदि कार्यों के लिए ऋण की आवश्यकता होती है। इन ऋणों से देश में कृषि विकास को प्रोत्साहन मिला है।

2. अनुत्पादक क्रियाएँ (Unproductive Activities):
किसान को अपने पारिवारिक निर्वाह खर्च और शादी, मृत्यु तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ऋण का सहारा लेना पड़ता है।

प्रश्न 3.
गरीबों की ऋण आवश्यकताओं की पूर्ति करने में अति लघु साख व्यवस्था की भूमिका की व्याख्या करें।
उत्तर:
अति लघु साख व्यवस्था के अन्तर्गत प्रत्येक सदस्य को न्यूनतम अंशदान देना पड़ता है। न्यूनतम अंशदानों से एकत्रित राशि में से जरूरतमंद सदस्यों को ऋण दिया जाता है। उस ऋण की राशि छोटी-छोटी आसान किश्तों में लौटाई जाती है। ब्याज की दर भी उचित रखी जाती है। यह व्यवस्था सदस्यों में मितव्ययिता की भावना पैदा करती है। इसमें ऋण लेने वालों का शोषण नहीं होता। मार्च 2003 ई. के अन्त तक लगभग 7 लाख लोग ऋण प्रदान करने वाले सहायता समूह के रूप में देश के अनेक भागों में कार्य कर रहे हैं।

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प्रश्न 4.
सरकार द्वारा ग्रामीण बाजारों के विकास के लिए किए गए प्रयासों की व्याख्या करें।
उत्तर:
सरकार द्वारा ग्रामीण बाजारों में विकास के लिए कई प्रयास किए गए हैं। उनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं –

1. बाजार का नियमन (Regularising the Market):
व्यवस्थित एवं पारदर्शी विपणन की दशाओं का निर्माण करने के लिए बाजार का नियमन किया गया। इस नीति से कृषक और उपभोक्ता दोनों ही वर्ग लाभान्वित हुए हैं।

2. भौतिक आधारिक संरचनाओं का प्रावधान (Provision of Physical Infra structures):
सड़कों, रेलमार्गों, भण्डार गृहों, गोदामों, शीतगृहों और प्रसंस्करण इकाइयों के रूप में भौतिक संरचनाओं का प्रावधान किया गया है।

3. उचित मूल्य दिलवाना (Fair prices):
सरकार ने किसानों को सरकारी विपणन द्वारा अपने उत्पादों का उचित मूल्य सुलभ कराने की व्यवस्था की है।

4. नीति साधन:

  • 24 कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत सुनिश्चित की। गई है।
  • भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहू तथा चावलों के सुरक्षित भण्डार का रख-रखाव किया जाता है।
  • राशन की दुकान के माध्यम से चीनी तथा गेहूँ का वितरण।

प्रश्न 5.
आजीविका को धारणीय बनाने के लिए कृषि का विविधीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
विगत वर्षों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। भारत में परम्परागत कृषि पूरी तरह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर आधारित है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए आजीविका को धारणीय बनाने के लिए कृषि का विविधीकरण आवश्यक है।

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प्रश्न 6.
भारत में ग्रामीण विकास में ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
उत्तर:
भारत में ग्रामीण विकास में ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका का मूल्यांकन-बैंकिंग व्यवस्था के त्वरित विकास का ग्रामीण कृषि और गैर-कृषि उत्पादन, आय और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव रहा है। विशेष रूप से हरित क्रांति के बाद से किसानों को साख सेवायें और सुविधायें देने तथा उनकी उत्पादन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक प्रकार के ऋण देने में इन्हीं ने सहायता दी है। अब तो अकाल बीते युग की बात हो गई है।

हम खाद्य सुरक्षा की उस मंजिल पर पहुँच चुके हैं कि हमारे सुरक्षित भण्डार भी बहुत पर्याप्त माने जा रहे हैं किन्तु अभी भी हमारी बैंकिंग व्यवस्था उचित नहीं बन पाई है। इसका प्रमुख कारण है। औपचारिक साख संस्थाओं का चिरकालिक निम्न निष्पादन और किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर किश्तों का नहीं चुना पाना। कृषि ऋणों की वसूली नहीं हो पाने की समस्या बहुत गंभीर है। अनेक अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि लगभग 50 प्रतिशत व्यतिकामी इच्छित व्यतिकामी हैं। ये व्यक्ति ग्रामीण बैंक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं जिसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

अत: सुधारों के बाद से बैंकिंग क्षेत्र के प्रसार एवं उन्नति में कमी हुई है। स्थिति में सुधार लाने के लिए बैंकों को अपनी कार्य-प्रणाली में बदलाव लाने की आवश्यकता है ताकि वे केवल ऋणदाता और ऋण लेने के बीच एक सेतु का काम करें। उन्हें किसानों को बताना कि वे अपने वित्तीय स्रोतों का कुशलतम प्रयोग कर सकें।

प्रश्न 7.
कृषि विपणन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कृषि विपणन से अभिप्राय उस प्रक्रिया से है जिससे देश में उत्पादित कृषि पदार्थों का संग्रह, भण्डारण, प्रसंस्करण, परिवहन, बैंकिंग वर्गीकरण और वितरण आदि किया जाता है।

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प्रश्न 8.
कृषि विपणन प्रक्रिया की कुछ बाधाएँ बताएँ?
उत्तर:
कृषि विपणन प्रक्रिया में कुछ बाधाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. तौल में हेरा-फेरी होना।
  2. किसानों को बाजार में कृषि उत्पादों के प्रचलित भावों का पता न होना।
  3. माल रखने के लिए अच्छी भण्डारण सुविधाएँ न होना।
  4. कृषि उत्पादन का क्षतिग्रस्त होना।

प्रश्न 9.
कृषि विपणन के कुछ उपलब्ध वैकल्पिक माध्यमों की उदाहरण सहित चर्चा करें।
उत्तर:
यदि किसान स्वयं ही उपभोक्ता को अपना उत्पादन बेच सके तो उसे उपभोक्ता द्वारा चुकाई गई कीमत का अपेक्षाकृत अधिक अंश प्राप्त होगा। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कृषक बाजार इसी प्रकार से विकसित हो रहे हैं। इस प्रकार से विकसित हो रहे वैकल्पिक क्रय-विक्रय माध्यम के कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं –

  1. आंध्र प्रदेश की रायचूबाज फल मंडी।
  2. तमिलनाडु की उझावर मंडी।
  3. पुणे की हाड़पसार मंडी।

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प्रश्न 10.
स्वर्णिम क्रांति की व्याख्या करें।
उत्तर:
स्वर्णिम क्रांति:
1991-2003 ई. की अवधि को ‘स्वर्णिम क्रांति’ के आरम्भ का काल मानते हैं। इसी अवधि में बागवानी में सुनियोजित निवेश बहुत ही अधिक उत्पादक सिद्ध हुआ और इस क्षेत्र के एक धारणीय वैकल्पिक रोजगार का रूप धारण किया। भारत आम, केला, नारियल, काजू जैसे फलों और अनेक मसालों के उत्पादन में तो आज विश्व का अग्रणी देश माना जाता है। कुल मिलाकर फल, सब्जियों के उत्पादन में हमारा दूसरा स्थान है। बागवानी में लगे बहुत से कृषकों की आर्थिक दशा में काफी सुधार हुआ है। ये उद्योग अब अनेक वंचित लोगों के लिए भी आजीविका को बेहतर बनाने में सहायक हुए हैं।

प्रश्न 11.
सरकार द्वारा कृषि सुधार के लिए अपनाए गए धार उपायों की व्याख्या करें?
उत्तर:
कृषि विपणन के विभिन्न पहलुओं को सुधारने के लिए किए गए चार प्रमुख उपाय निम्न थे –
1. बाजार का नियमन:
पहला कदम व्यवस्थित एवं पारदर्शी विपणन की दिशाओं का निर्माण करने के लिए बाजार का नियमन करना था। इस नीति से कृषक और उपभोक्ता, दोनों ही वर्ग लाभान्वित हुए हैं। हालाँकि, लगभग 27,000 ग्रामीण क्षेत्रों में अनियत मंडियों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है, जिससे ग्राम्य क्षेत्रों को मंडियों की वास्तविक क्षमताओं का लाभ उठा पाना संभव हो सके।

2. भौतिक आधारित संरचनाओं का विकास:
दूसरा महत्त्वपूर्ण उपाय सड़कों, रेलमार्गों, भंडारगृहों, गोदामों, शीतगृहों और प्रसंस्करण इकाइयों के रूप में भौतिक आधारित संरचनाओं का प्रावधान किया जाना था। किन्तु, अभी तक वर्तमान आधारित सुविधाएं बढ़ती माँग को देखते हुए अपर्याप्त सिद्ध हुई हैं, जिनहें सुधारने की आवश्यकता है।

3. उत्पादों का उचित मूल्य:
तीसरे उपाय में सरकारी विपणन द्वारा किसानों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य सुलभ कराना है। गुजरात राज्य तथा देश के अन्य कई भागों में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों ने ग्रामीण अंचलों के सामाजिक तथा आर्थिक परिदृश्य का कायाकल्प कर दिया है। किन्तु, अभी भी कुछ स्थानों पर सहकारिता आंदोलन में कुछ कमियाँ दिखाई देती हैं। इनके कारण हैं-सभी कृषकों को सहकारिताओं में शामिल नहीं कर पाना, विपणन और प्रसंस्करण सहकारी समितियों के मध्य संबंध सूत्रों का न होना और अकुशल वित्तीय प्रबंधन।

4. नीतिगत साधनों की उपलब्धता:
चौथे उपाय के अन्तर्गत वे साधन हैं-जैसे –

  • कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत सुनिश्चित करना
  • भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूँ और चावल के सुरक्षित भंडार का रख-रखाव और
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन व्यवस्था) के माध्यम से खाद्यान्नों और चीनी का वितरण। इन साधनों का ध्येय क्रमशः किसानों को उपज के उचित दाम दिलाना तथा गरीबों को सहायिकी युक्त (Subsidised) कीमत पर वस्तुएँ उपलब्ध कराना है।
  • यद्यपि सरकार के इन सभी प्रयासों के बाद भी आज तक कृषि मंडियों पर निजी व्यापारियों (साहूकारों, ग्रामीण राजनीतिज्ञ सामंतों, बड़े व्यापारियों तथा और किसानों) का वर्चस्व बना हुआ है।
  • सरकारी संस्थाएँ और सहकारिताएँ सकल कृषि उत्पादन के मात्र 10 प्रतिशत अंश के आदान-प्रदान में सफल हो पा रही हैं-शेष सभी भी निजी व्यापारियों के हाथो में ही हैं।

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प्रश्न 12.
ग्रामीण विविधीकरण में गैर कृषि रोजगार का महत्त्व समझाइये?
उत्तर:
आज ग्रामीण क्षेत्रों को अनेक प्रकार के उत्पादक कार्यों की ओर उन्मुख कर वहाँ। एक नए उत्साह और स्फूर्ति का संचार करना आवश्यक हो गया है। यही ग्रामीण विविधीकरण है। ये कार्य हो सकते हैं-डेरी उद्योग, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, फल-सब्जी उत्पादन और ग्रामीण उत्पादन केन्द्रों व शहरी बाजारों (विदेशी निर्यात बाजारों सहित) के वोन संपर्क सूत्रों की रचना। इस प्रकार, कृषि उत्पादन में लगे निवेश पर अधिक प्रतिलाभ अर्जित करना संभव हो पाएगा। यही नहीं, आधारिक संरचना जैसे, साख एवं विपणन, कृषक-हित-नातियाँ तथा कृषक समुदायों एवं राज्य कृषि विभागों के मध्य निरंतर संवाद और समीक्षा इस क्षेत्र को पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने में सहायक हैं।

आज हम पर्यावरण और ग्रामीण विकास को दो अलग-अलग विषय मान कर व्यवहार नहीं कर सकते। नई पर्यावरण-मित्र प्रौद्योगिकी विकल्पों के अविष्कार या प्राप्ति की भी आवश्यकता है, जिससे विभिन्न परिस्थितियों का सामना होने पर भी हम धारणीय विकास की दिशा में अग्रसर हो पाएँ। इन विकल्पों में से प्रत्येक ग्राम्य समुदाय अपनी स्थानीय परिसिथतियों के अनुरूप चयन कर सकता है। अतः हमारा पहला काम तो सभी उपलब्ध विधियों में से सर्वश्रेष्ठ की पहचान कर उसे चुनना ही होगा। ताकि इसे ‘व्यावहारिक प्रशिक्षण’ प्रक्रिया को और गति प्रदान की जा सके।

प्रश्न 13.
विविधीकरण के स्रोत में से पशुपालन, मत्स्यपालन और बागवानी के महत्त्व पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
विविधीकरण के स्रोत (Source of Diversification):
विविधीकरण के कई स्रोत हैं। उनमें मुख्य पशुपालन, मत्स्यपालन और बागवानी हैं। इन तीनों स्रोतों के महत्त्व का नीचे वर्णन किया गया है।

1. पशुपालन (Animal Husbandary):
छोटे और सीमांत किसानों, कृषि मजदूरों और अन्य ग्रामीण निर्धनों की एक बड़ी संख्या लाभप्रद रोजगार प्राप्त करने के लिए पशुधन पर निर्भर है। पशुपालन देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह क्षेत्र ऊन, खालें और चमड़ों जैसे जन-उपयोग के अनेक उत्पादों की व्यवस्था करता है। छोटे व सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को बेहतर पशुधन उत्पादन के माध्यम से धारणीय रोजगार विकल्प का स्वरूप प्रदान किया जा सकता है। पशुपालन में गाय, भैंस, बत्तख, मुर्गियों आदि का पालन निहित है।

पशुपालन से परिवार की आय में स्थिरता आती है। साथ ही खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ईंधन, पोषण आदि की व्यवस्था भी परिवार की अन्य खाद्य उत्पादक कृषक गतिविधियों में अवरोध के बिना प्राप्त हो जाती है। आज का पशुपालन क्षेत्रक देश के 7 करोड़ छोटे व सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को आजीविका कमाने के वैकल्पिक साधन सुलभ करा रहा है।

2. मत्स्य पालन (Fishing):
मत्स्य उद्योग को देश की खाद्यान्न पूर्ति, पोषक तत्त्व, रोजगार के अवसर तथा निर्यात आय में वृद्धि करने की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस उद्योग में देश ने गौरवशाली वृद्धि की है। भारत में मत्स्य उत्पादन सकल घरेलू उत्पाद का 1.4. प्रतिशत है।

3. बागवानी (Gardening):
इसे उद्यान विज्ञान भी कहते हैं। बागवानी उद्योग के अंतर्गत फल, सब्जियाँ, रेशेदार फसलें, औषधीय तथा सुगन्धित पौधे, मसाले, चाय, कॉफी इत्यादि उत्पाद आते हैं। ये उत्पाद रोजगार के साथ-साथ भोजन और पोषण उपलब्ध कराने में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं। इनसे हमें विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। बागवानी में सुनियोजित निवेश बहुत ही उत्पादक सिद्ध हुआ और इस क्षेत्रक ने एक धारणीय वैकल्पिक रोजगार का रूप धारण कर लिया है।

बागवानी में लगे लगभग सभी कृषकों की आर्थिक दशा में काफी सुधार हुआ है। ये उद्योग अनेक वंचित वर्गों के लिए भी आजीविका को श्रेष्ठ बनाने में सहायक हो गए हैं। अनुमानतः इस समय देश की 19 प्रतिशत श्रम शक्ति को इस क्षेत्र से रोजगार मिल रहा है।

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प्रश्न 14.
‘सूचना प्रौद्योगिकी’ धारणीय विकास तथा खाद्य सुरक्षा की प्राप्ति में बड़ा महत्त्वपूर्ण योगदान करती है। टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
हम जानते हैं कि सूचना प्रौद्योगिकी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। अब 21 वीं सदी में देश में खाद्य सुरक्षा और धारणीय विकास में सूचना प्रौद्योगिकी के निर्णायक योगदान के विषय में सर्वसम्मति बन चुकी है। इस सम्मति का कारण है. कि, अब सूचनाओं और उपयुक्त सॉफ्टवेयर का. प्रयोग कर सरकार सहज ही खाद्य असुरक्षा की आशंका वाले क्षेत्रों का समय रहते पूर्वानुमान लगा सकती है। इस प्रकार समाज ऐसी विपत्तियों की संभावनाओं को कम या पूरी तरह से समाप्त करने में भी सफल हो सका है। कृषि क्षेत्र में तो इसे विशेष योगदान हो सकते हैं। इस प्रौद्योगिकी द्वारा उदीयमान तकनीकों, कीमतों, मौसम तथा विभिन्न फसलों के लिए मृदा की दशाओं की उपयुक्तता की जानकारी का प्रसारण किया जा सकता है।

सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी ने एक ज्ञान आधारित अर्थतंत्र का सूत्रपात कर दिया है-जो औद्योगिक क्रांति से हजार गुना अधिक शक्तिशाली है। स्वयं में सूचना प्रौद्योगिकी कुछ भी नहीं बदल सकी, किन्तु यह जानमानस में बसी सृजनात्मक संभाव्यता और उनके ज्ञान संचय के यंत्र के रूप में कार्य कर सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च स्तर पर रोजगार के अवसरों को उत्पन्न करने की संभाव्यता भी है। भारत के अनेक भागों में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग ग्रामीण विकास के लिए हो रहा है।

प्रश्न 15.
जैविक कृषि क्या है? यह धारणीय विकास को किस प्रकार बढ़ावा देती है?
उत्तर:
जैविक कृषि-जैविक कृषि खेती करने की वह पद्धति है जो पर्यावरणीय संतुलन को पुनः स्थापित करके उसका संरक्षण और संवर्धन करती है। जैविक कृषि तथा धारणीय विकास-रसायनिक आगतों से उत्पादित खाद्य की तुलना में जैविक विधि से उत्पादित भोज्य पदार्थों में पोषण तत्त्व अधिक होते हैं। अतः जैविक कृषि हमें अधिक स्वास्थ्यकर भोजन उपलब्ध कराती है। इसके अतिरिक्त जैविक कृषि में श्रम आगतों का प्रयोग परम्परागत कृषि की अपेक्षा अधिक होता है। अत: भारत जैसे देशों में यह अधिक आकर्षण होगा। इसके अतिरिक्त ये उत्पाद विषाक्त रसायनों से मुक्त तथा पर्यावरण की दृष्टि से धारणीय विधियों द्वारा उत्पादित होते हैं। इस तरह जैविक कृषि धारणीय विकास को बढ़ावा देती है।

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प्रश्न 16.
जैविक कृषि के लाभ और सीमाएँ स्पष्ट करें।
उत्तर:
जैविक कृषि के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. जैविक कृषि में प्रयोग किए जाने वाले आगत सस्ते होते हैं और इसी कारण इन पर निवेश से प्रतिफल अधिक होते हैं।
  2. जैविक कृषि उत्पादों की काफी माँग विश्व के अन्य देशों में है। अतः इनके निर्यात से भी काफी अच्छी आय हो सकती है।
  3. रासायनिक आगतों से उत्पादित खाद्य की तुलना में जैविक विधि से उत्पादित भोज्य पदार्थों में पोषण तत्त्व भी अधिक होते हैं। अत: जैविक कृषि हमें अधिक स्वास्थ्यकर भोजन उपलब्ध करवाती है।
  4. जैविक कृषि में श्रम आगतों का प्रयोग परम्परागत कृषि की अपेक्षा अधिक होता है। अतः भारत जैसे देश में यह अधिक आकर्षक होगी।

जैविक कृषि की सीमाएँ:
जैविक कृषि की मुख्य सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. जैविक कृषि संवर्धन के लिए उपयुक्त नीतियों का अभाव है।
  2. जैविक कृषि के उत्पादों के विपणन की समस्या है।
  3. प्रारंभिक वर्षों में जैविक कृषि की उत्पादकता रासायनिक कृषि से कम रहती है। अतः बहुत बड़े स्तर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए इसे अपनाना कठिन होगा।
  4. जैविक उत्पादों को रासायनिक उत्पादों की अपेक्षा शीघ्र खराब होने की भी संभावना रहती है।
  5. बे-मौसमी फसलों का जैविक. कृषि में उत्पादन बहुत सीमित होता है।

प्रश्न 17.
जैविक कृषि का प्रयोग करने वाले किसानों को आरम्भिक वर्ष में किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
उत्तर:
जैविक कृषि का प्रयोग करने वाले किसानों को आरम्भिक वर्ष में निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है –

  1. प्रारम्भिक वर्षों में जैविक कृषि की उत्पादकता रसायनिक कृषि से कम रहती है।
  2. जैविक उत्पादों के रासायनिक उत्पादों की अपेक्षा शीघ्र खराब होने की संभावना रहती है।
  3. बेमौसमी फसलों का जैविक कृषि उत्पादन बहुत सीमित होता है।

Bihar Board Class 11 Economics ग्रामीण विकास Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किन कारणों से ग्रामीण विकास में बाधाएँ आ रही हैं?
उत्तर:
अपर्याप्त आधारिक संरचना, उद्योग तथा सेवा क्षेत्रक में वैकल्पिक रोजगार के अवसरों के अभाव और अनियत रोजगार में वृद्धि आदि के कारण ग्रामीण विकास में बाधायें आ रही हैं।

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प्रश्न 2.
धारणीय विकास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
धारणीय विकास से अभिप्राय विकास की उस प्रक्रिया से है जो भावी पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरी करने की योग्यता के बिना कोई हानि पहुँचाये वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करती है।

प्रश्न 3.
कृषि साख से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कृषि साख से अभिप्राय है-कृषि के लिए खाद, बीज, ट्रैक्टर, हल आदि खरीदने, पारिवारिक खर्चे और शादी, मृत्यु तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कृषकों द्वारा ऋण लेना।

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प्रश्न 4.
कृषि साख के मुख्य साधन लिखें।
उत्तर:
कृषि साख के मुख्य साधन हैं –

  1. साहूकार
  2. सहकारी साख समितियाँ
  3. व्यावसायिक बैंक
  4. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  5. भूमि विकास बैंक

प्रश्न 5.
नाबार्ड का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
नाबार्ड का पूरा नाम राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agricultural and Rural Development) है।

प्रश्न 6.
नाबार्ड की स्थापना कब की गई थी?
उत्तर:
नाबार्ड की स्थापना 1982 ई. में की गई थी।

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प्रश्न 7.
एस. एच. जी. का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
एस. एच. जी. का पूरा नाम स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) है।

प्रश्न 8.
2003 ई. के अन्त तक कितने साख प्रदान करने वाले स्वयं सहायता समूह भारत में कितने भागों में काम कर रहे थे?
उत्तर:
लगभग 7 लाख।

प्रश्न 9.
हमारी ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था अभी तक उचित नहीं बन पाई है। इसके कारण लिखें।
उत्तर:
निम्न कारणों से हमारी ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था अभी तक उचित नहीं बन पाई है –

  1. औपचारिक साख संस्थाओं का चिरकालिक निम्न निष्पादन।
  2. किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर किश्तों को नहीं चुका पाना।

प्रश्न 10.
कृषि विपणन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कृषि विपणन वह प्रक्रिया है जिससे देश भर में उत्पादित कृषि पदार्थों का संग्रह, भण्डारण, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकिंग वर्गीकरण और वितरण आदि किया जाता है।

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प्रश्न 11.
कितने कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत सुनिश्चित की गई है?
उत्तर:
24 कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन कीमत सुनिश्चित की गई है।

प्रश्न 12.
भारतीय खाद्य निगम किन-किन खाद्यान्नों के सुरक्षित भण्डारण का रख-रखाव करता है?
उत्तर:
भारतीय खाद्य निगम गेहूँ और चावल के सुरक्षित भण्डारण का रख-रखाव करता है।

प्रश्न 13.
नीतिगत साधनों का क्या ध्येय है?
उत्तर:
नीतिगत साधनों का ध्येय किसानों को उचित दाम दिलाना तथा गरीबों को सस्ते कीमत पर वस्तुएँ उपलब्ध करवाना है।

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प्रश्न 14.
सरकार के अनेक प्रयत्नों के बाद भी आज तक कृषि मंडियों पर किन लोगों का वर्चस्व बना हुआ है?
उत्तर:
सरकार के अनेक प्रयत्नों के बाद भी आज तक कृषि मंडियों पर निजी व्यापारियों (साहूकारों, ग्रामीण राजनीतिज्ञ, सामंतों, बड़े व्यापारियों तथा अमीर किसानों) का वर्चस्व बना हुआ है।

प्रश्न 15.
सरकारी संस्थाएँ तथा सहकारिताएँ सकल कृषि उत्पादन के कितने प्रतिशत अंश के आदान-प्रदान में सफल हो पाई हैं?
उत्तर:
सरकारी संस्थाएँ तथा सहकारिताएँ सकल कृषि उत्पादन के मात्र 10 प्रतिशत अंश के आदान-प्रदान में सफल हो पाई हैं।

प्रश्न 16.
कृषि उत्पाद के वैकल्पिक क्रय-विक्रय माध्यम के कुछ उदाहरण दें।
उत्तर:
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अपनी मंडी, पुणे की हड़पसार मंडी, आन्ध्र प्रदेश की रायचूनाज.नामक फल-सब्जी मंडियों तथा तमिलनाडु की उझावर मंडी के कृषक बाजार कृषि उत्पाद वैकल्पिक क्रय-विक्रय माध्यम के कुछ उदाहरण हैं।

प्रश्न 17.
विविधीकरण के दो पहलू लिखें।
उत्तर:
विविधीकरण के दो पहलू हैं –

  1. फसलों के उत्पादन के विविधीकरण से सम्बन्धित
  2. श्रम शक्ति को खेती से हटाकर अन्य सम्बन्धित कार्यों तथा गैर-कृषि क्षेत्रक में लगाना

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प्रश्न 18.
विविधीकरण के लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. विविधीकरण द्वारा खेती के आधार पर आजीविका कमाने में जोखिम को कम करता है।
  2. यह ग्रामीण जन समुदाय को उत्पादक और वैकल्पिक धारणीय आजीविका का अवसर उपलब्ध करता है।

प्रश्न 19.
भारत का अधिक भाग कृषि में किस ऋतु की फसल से जुड़ा रहता है?
उत्तर:
भारत में अधिक भाग खरीफ की फसल से जुड़ा रहता है।

प्रश्न 20.
भारत की बढ़ती हुई श्रम-शक्ति के लिए अन्य गैर-कृषि कार्यों में वैकल्पिक रोजगार की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि कृषि क्षेत्र पर पहले से ही बहुत बोझ है।

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प्रश्न 21.
गैर कृषि अर्थतंत्र के गतिशील उपघटक लिखें।
उत्तर:
कृषि प्रसंस्करण उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, चर्म उद्योग, तथा पटसन उद्योग।

प्रश्न 22.
पशुपालन में कौन-कौन सी प्रजातियाँ हैं?
उत्तर:
पशुपालन में गाय, भैंस, बकरियाँ, मुर्गी-बत्तख आदि बहुतायत में पाई जाने वाली प्रजातियाँ हैं।

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प्रश्न 23.
पशुपालन के लाभ लिखें।
उत्तर:
लाभ:

  1. पशुपालन से परिवार की आय में स्थिरता आती है।
  2. इससे खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ईंधन, पोषण आदि की व्यवस्था भी परिवार की अन्य खाद्य उत्पादक (कृषि गतिविधियों में अवरोध के बिना) प्राप्त हो जाती है।

प्रश्न 24.
आज पशुपालन क्षेत्रक देश के कितने छोटे या सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को आजीविका कमाने का वैकल्पिक साधन सुलभ करा रहा है?
उत्तर:
आज पशुपालन क्षेत्र देश के 7 करोड़ छोटे व सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को आजीविका कमाने का वैकल्पिक साधन सुलभ करा रहा है।

प्रश्न 25.
पशुपालन में सबसे बड़ा अंश किसका है और कितना है?
उत्तर:
पशुपालन में सबसे बड़ा अंश मुर्गीपालन का है। यह अंश 42 प्रतिशत है।

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प्रश्न 26.
ऑप्रोशन फ्लड क्या है?
उत्तर:
ऑप्रेशन फ्लड विश्व का सबसे बड़ा एकीकृत डेयरी विकास कार्यक्रम है।

प्रश्न 27.
1960-2002 की अवधि में देश में दुग्ध उत्पादन कितना बढ़ा है?
उत्तर:
1960-2002 की अवधि में देश में दुग्ध उत्पादन चार गुणा से अधिक बढ़ा है।

प्रश्न 28.
ऑप्रेशन फ्लड का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
ऑप्रेशन फ्लड का मुख्य उद्देश्य डेयरी सहकारी समितियों को संगठित करके ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों और शहरी उपभोक्ताओं के बीच कड़ी स्थापित करना है।

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प्रश्न 29.
ऑप्रेशन फ्लड के अन्तर्गत क्या-क्या क्रियाएँ की जाती हैं?
उत्तर:
ऑप्रेशन फ्लड के अन्तर्गत सभी किसान अपना विक्रय योग्य दुग्ध एकत्रित करके उसकी गुणवत्ता के अनुसार प्रसंस्करण करते हैं और फिर उसे शहरी केन्द्रों में सहकारिता के माध्यम से बेचा जाता है।

प्रश्न 30.
आजकल देश के समस्त उद्योग का कितना प्रतिशत अंश अंतर्वर्ती क्षेत्रों से प्राप्त होता है?
उत्तर:
49 प्रतिशत।

प्रश्न 31.
आजकल देश के समस्त मत्स्य उत्पादन का कितना प्रतिशत अंश महासागरीय क्षेत्रों से प्राप्त हो रहा है?
उत्तर:
51 प्रतिशत।

प्रश्न 32.
मत्स्य उत्पादन सकल घरेलू उत्पाद का कितना प्रतिशत है?
उत्तर:
1.4 प्रतिशत।

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प्रश्न 33.
सागरीय उत्पादों में प्रमुख राग्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
सागरीय उत्पादों में प्रमुख राज्य केरल, गुजराज, महाराष्ट्र और तमिलनाडु हैं।

प्रश्न 34.
मछुआरों की मुख्य समस्याएँ लिखें।
उत्तर:
मछुआरों की प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं –

  1. सामाजिक, आर्थिक स्तर का नीचा होना
  2. निम्न रोजगार
  3. प्रति व्यक्ति निम्न आय
  4. अन्य कार्यों की ओर श्रम के प्रवाह का अभाव
  5. उच्च निरक्षरता दर तथा
  6. गंभीर ऋणग्रस्तता

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प्रश्न 35.
भारत में विभिन्न प्रकार के बागान उत्पाद लिखें।
उत्तर:
फल, सब्जियाँ, रेशेदार फसलें, औषधीय तथा सुगन्धित पौधे, मसाले, चाय कॉफी के उत्पादन में बगान उत्पादन का बहुत बड़ा योगदान है।

प्रश्न 36.
बागवानी का महत्त्व लिखें।
उत्तर:
बागवानी रोजगार का अवसर प्रदान करती है। यह भोजन और पोषण उपलब्ध कराने में योगदान देती है।

प्रश्न 37.
किस अवधि को स्वर्णिम क्रांति के आरम्भ का काल माना जाता है?
उत्तर:
1991-2003 ई. की अवधि को ‘स्वर्णिम क्रांति’ के आरम्भ का काल माना जाता है।

प्रश्न 38.
भारत किन फलों के उत्पादन में आजीविका का अग्रणी देश माना जाता है?
उत्तर:
भारत आम, केला, नारियल, काजू जैसे फलों के उत्पादन में आज विश्व का अग्रणी देश माना जाता है।

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प्रश्न 39.
फल, सब्जियों के उत्पादन में हमारा विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
फल, सब्जियों के उत्पादन में हमारा विश्व में दूसरा स्थान है।

प्रश्न 40.
बागवानी को बढ़ावा देने के लिए क्या-क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर:
बागवानी को बढ़ावा देने के लिए बिजली, शीतगृह व्यवस्था, विवणन माध्यमों का विकास, लघु स्तरीय प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और प्रौद्योगिकी की उन्नयन और प्रसार के लिए आधारिक संरचनाओं में निवेश किया जाना चाहिए।

प्रश्न 41.
ग्रामीण विकास क्या है?
उत्तर:
ग्रामीण विकास से अभिप्राय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन घटकों के विकास पर बल देना है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास में पिछड़ गए हैं।

प्रश्न 42.
ग्रामीण विकास के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए? (कोई दो बिन्दु लिखें)।
उत्तर:
ग्रामीण विकास के लिए हमें अनाजों, फलों, सब्जियों के उत्पादन में लगे कृषक समुदायों को उत्पादकता बढ़ाने में विशेष सहायता देनी होगी। गैर कृषि उत्पादक क्रियाकलापों जैसे खाद्य-प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक उपलब्ध करवाना होगा।

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प्रश्न 43.
1990 ई. के दशक में कृषि की संवृद्धि दर घटकर कितनी रह गई थी?
उत्तर:
1990 ई. के दशक में कृषि की संवृद्धि दर घटकर 2.3% रह गई थी।

प्रश्न 44.
1990 ई. के दशक में कृषि की संवृद्धि दर में कमी का कारण लिखें।
उत्तर:
1991 ई. के बाद सार्वजनिक निवेश में आई गिरावट के कारण 1990 ई. के दशक में कृषि की संवृद्धि दर में कमी आई।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति के लिए महात्मा गाँधी ने कौन-सा विचार दिया था?
उत्तर:
गाँधी के अनुसार केवल कुछ शहरी उद्योग केन्द्रों का विस्तार करना अर्थव्यवस्था की प्रगति नहीं है इसके लिए मुख्य रूप से गाँवों को विकसित करना होगा। आजादी प्राप्ति के वक्त भारत की तीन चौथाई से भी अधिक जनसंख्या गाँवों में रहती थी और आजीविका निर्वहन के लिए कृषि पर निर्भर थी। गाँधी ने गाँव व कृषि के महत्त्व को ध्यान में रखकर गाँव की आर्थिक संवृद्धि को ही अर्थव्यवस्था की कस्तविक संवृद्धि माना।

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प्रश्न 2.
भारत में कृषि क्षेत्र की संवृद्धि घटने के क्या कारण थे?
उत्तर:
भारत में कृषि क्षेत्र की संवृद्धि घटने के कारण –

  1. सार्वजनिक निवेश में गिरावट।
  2. अपर्याप्त आधारिक संरचना।
  3. विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों में वैकल्पिक अवसरों की कमी।
  4. रोजगार के मामले में अस्थायित्व बढ़ना।

प्रश्न 3.
ग्रामीण भारत के लिए जरूरी बातों की सूची बताएँ।
उत्तर:

  1. साख प्रणाली।
  2. विपणन/बाजार व्यवस्था।
  3. कृषि क्षेत्र में विविधता।
  4. धारणीय आर्थिक विकास।

प्रश्न 4.
निर्धन महिलाओं के बैंक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
1995 थ्रिफ्ट एण्ड क्रेडिट सोसायटी की स्थापना की गई थी। यह निर्धन महिलाओं की लघु बचतों को प्रोत्साहित करने की शुरूआत थी। इसका प्रमुख उद्देश्य लघु बचतों को बढ़ना था। इसे ‘कुटुम्ब श्री’ के नाम से भी जाना जाता है। यह निर्धनता उन्मूलन के लिए सामुदायिक आधार पर महिलाओं द्वारा संचालित कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम सर्वप्रथम केरल में आरम्भ किया गया था। थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट सोसायटी ने लगभग एक करोड़ रुपये की बचतों को एकत्रित किया। औपचारिक रूप से साख सृजन करने के लिए एशिया में थ्रिफ्ट एण्ड क्रेडिट सोसायटी सर्वाधिक हैं।

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प्रश्न 5.
हमारी ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की खामियाँ लिखिए।
उत्तर:

  1. हमारे ग्रामीण बैंकों द्वारा सृजन की गई साख निम्न स्तर पर है।
  2. किसानों द्वारा समय पर किस्त अदा न करना।
  3. व्यावसायिक एवं अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थाएँ लोगों को बचत करने एवं ऋण किस्तों को जमा कराने के लिए प्रोत्साहन न दे सकी।
  4. जानबूझ कर ऋण. की वापसी न करना।
  5. आर्थिक सुधारों से ग्रामीण बैंकिंग प्रणाली को धक्का लगा।

प्रश्न 6.
गाँव में बैंकिंग व्यवस्था के सुचारु रूप से संचालन हेतु उपाय सुझाइए।
उत्तर:

  1. बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं को अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए।
  2. किसानों एवं मजदूरों का प्रोत्साहित किया जाए ताकि वे औपचारिक साख का प्रयोग करने की आदत डालें।
  3. किसानों को अधिशेष आय बैंकों में जमा कराने एवं समय पर ऋण की किस्त चुकाने के लिए प्रेरित किया जाए।
  4. ग्रामीण लोगों को ज्यादा से ज्यादा ऋण किस्त समय पर चुकाने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाए।

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प्रश्न 7.
ग्रामीण बाजार को सुधारने के क्या उपाय हो सकते हैं?
उत्तर:
सरकारी हस्तक्षेप के साथ ग्रामीण बाजार व्यवस्था एक लम्बी यात्रा तय कर चुकी है। आर्थिक सुधार 1991 लागू होने के बाद ग्रामीण बाजार व्यवस्था को वैश्वीकरण के माध्यम से अनेक विकल्प प्राप्त हो गए हैं। आजकल बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कृषि क्षेत्र के लिए अच्छा काम कर रही हैं। इसलिए इस बाजार व्यवस्था को ठीक करने के लिए निम्नलिखित उपायों का अनुकरण करना चाहिए –

  1. माप-तौल उपकरण एवं बटे उपयुक्त होने चाहिए।
  2. गाँवों को नगरों एवं शहरों से जोड़ने के लिए पर्याप्त आधारिक संरचना का विकास किया जाना चाहिए।
  3. भण्डारण एवं शीत भण्डार की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  4. किसानों को जागरूक बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 8.
ग्रामीण विकास में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक सुधारों ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश के हरेक भाग एवं क्षेत्र में अपना कारोबार फैलाने के अवसर प्रदान कर दिए हैं। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ग्रामीण बाजार की ओर अग्रसित हो रही हैं। वे निम्न प्रकार से किसानों के हित में कार्य कर रही हैं:

  1. वे किसानों से अनुबंध कर रही हैं।
  2. वे वांछनीय गुणवत्ता वाले फल, सब्जियों, अनाजों आदि का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित कर रही हैं।
  3. वे किसानों को बीज एवं अन्य कृषि आगतों को उपलब्ध कराती हैं।
  4. वे कृषि फसलों के लिए पूर्व निर्धारित कीमत की पेशकश करती हैं।

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प्रश्न 9.
तमिलनाडु में कृषि क्षेत्र में महिलाओं’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
तमिलनाडु में कृषि क्षेत्र में महिलाओं को संक्षेप में TANWA भी कहते हैं। यह एक कार्य योजना है जिसके अन्तर्गत महिलाओं को कृषि क्षेत्र नई एवं विकसित कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की जाती है। यह कार्य योजना महिलाओं को कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने एवं परिवार की आय बढ़ाने के लिए प्रभावपूर्ण सहभागिता के लिए प्रेरित करती है।

प्रशिक्षित महिलाओं का समूह त्रिचनापल्ली में एक फार्म चलाता है। वे वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन करती हैं और एक अच्छी खासी आय अर्जित करती हैं। कुछ अन्य महिला समूह ‘सूक्ष्म बचत योजना, के माध्यम से साख सृजन के कार्य में संलग्न हैं। बचत द्वारा एकत्रित वित्त को लघु एवं कुटीर उद्योगों को साख प्रदान करते हेतु ऋण दिया जाता है। उदाहरण के लिए, मशरूम का उत्पादन, साबुन विनिर्माण, गुड़िया विनिर्माण आदि के विनिमय करके आय अर्जित करती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पशुपालन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पशुपालन वह व्यवस्था है जिसमें पालतू पशुओं का पोषण एवं देखभाल की जाती है। भारत में फसलों एवं पशुपालन की मिश्रित व्यवस्था पुराने समय से ही विद्यमान है। पशुपालन ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी क्रियाकलाप है। इससे लोगों की आय में स्थायित्व, भोजन, सुरक्षा, परिवहन, ईंधन एवं पोषण सभी प्राप्त होते हैं। पशुपालन से कृषि क्रियाओं में भी हस्तक्षेप नहीं होता है। 70 मिलियन से भी अधिक सीमांत किसान कृषि मजदूर, पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

इस क्षेत्र में महिलाओं की अच्छी खासी तादाद कार्यरत है। भारत में मवेशियों की संख्या बहुत अधिक है। पशुपालन में मत्स्य पालन की भागीदारी सर्वाधिक है। कई दशकों से भारतीय डेरी उद्योग अच्छा कार्य कर रहा है। 1960 2002 के मध्य के चार दशकों में दूध का उत्पादन चार गुना बढ़ गया है। डेरी उद्योग (Operation flood) 1966 के उपरांत फला-फूला है।

घनत्व के आधार पर किसान अपना दूध जमा करवाते हैं और सहकारिता के माध्यम से उसका विक्रय शहरों व नगरों में किया जाता है। इस व्यवस्था से दूध का उचित मूल्य एवं आय स्थायित्व प्राप्त होता है। दूध सहकारिता के क्षेत्र में गुजरात भारत का सबसे सफल राज्य है। इस क्षेत्र में विविधता लाने के लिए मांस, अण्डे, ऊन आदि का उत्पादन भी बढ़ रहा है।

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प्रश्न 2.
भारत में बागवानी का संक्षिप्त ब्यौरा दीजिए।
उत्तर:
बागवानी के लिए वातावरण, मिट्टी की बनावट एवं प्रकार की विविधता के कारण कई फायदे हैं। फल, सब्जियाँ, फूल, औषधीय पौधे, सजावटी पौधे, मसाले व पेड़ बागवानी के अन्तर्गत उगाए जाते हैं। इन फसलों का उत्पादन करने से रोजगार, आय एवं पोषण उन लोगों के प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त होता है जो बागवानी से जुड़े हुए हैं।

1991-2003 के दौरान इस क्षेत्र में किया गया निवेश अत्यधिक उत्पादक एवं स्थायी रोजगार का जरिया बन गया था। सुनहरी क्रांति के माध्यम से भारत आम, केला, नारियल, एवं विभिन्न किस्मों के मसालों के उत्पादन में विश्व नेता बनने की राह पर चल पड़ा था। दुनिया में भारत का फल एवं सब्जी उत्पादन में दूसरा स्थान है। फूल उत्पादन, नर्सरी देखभाल, उन्नत किस्म के बीजों का उत्पादन, टिशू कल्चर आदि क्रियाकलाप ऊँची आय एवं रोजगार प्रदान कर रहे हैं। भारत के कुल कार्य बल का 19 प्र.श. भाग इस कार्य में रोजगार प्राप्त कर रहा है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए –

  1. प्रत्येक गाँव-एक ज्ञान का केन्द्र।
  2. महाराष्ट्र में जैविक आधार पर सूत उत्पादन।

उत्तर:
1. प्रत्येक गाँव-एक ज्ञान का केन्द्र:
1995 में ‘जमशेद जी टाटा राष्ट्रीय वरचुअल एकेडेमी’ की स्थापना ग्रामीण विकास के लिए की गई थी। यह एकेडेमी एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउन्डेशन ने श्री रतन टाटा ट्रस्ट मुम्बई के समर्थन से स्थापित की थी। इस संस्थान ने गाँव की जानकारी रखने वाले लाखों लोगों को चिहित किया और उन्हें संस्थान का फैलो बनाकर नामांकन किया।

इस कार्यक्रम में न्यूनतम कीमत पर इनफो-किओस्क (INFO KIOSK) प्रदान किया जाता है और प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका मालिक अनेक सेवाएं प्रदान करके अच्छी खासी आय कमा लेता है। भारत सरकार इस कार्यक्रम को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। INFO KIOSK में P.C. के साथ इंटरनेट; वीडियो फोटो कैमरा लगा होता है।

2. महाराष्ट्र में जैविक आधार पर कपास (सूत) उत्पादन:
कपास के उत्पादन में कीटनाशक दवाइयों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। 1995 में किशन मेहता ने जैविक आधार पर कपास उत्पादन का विचार प्रदान किया या बिना कीटनाशक रसायनों के कपास का उत्पादन केन्द्रीय कपास अनुसंधान केन्द्र के निदेशक महोदय ने श्री महता के विचार का समर्थन किया।

130 किसानों को ‘इंटरनेशनल फैडरेशन ऑफ एग्रीकल्चर मूवमेन्टस स्टैण्डर्डस्’ के अनुसार जैविक आधार पर कपास उगाने के लिए मजबूर किया गया। दि जर्मन एक्रेडिटिड एजेंसी (AGRECO) ने उत्पाद की जाँच करके बताया कि उत्पादन उच्च गुणवत्ता वाला है। श्री मेहता के अनुसार जैविक कृषि पूरे भारत में छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए लाभदायक होगी।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कौन-सी फसल के लिए रासायनिक कीटनाशकों का सर्वाधिक प्रयोग होता है –
(a) कपास
(b) गेहूँ
(c) चावल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कपास

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प्रश्न 2.
सीमांत किसानों की जोत का औसत आकार है –
(a) 2 हेक्टेयर
(b) 5 हेक्टेयर
(c) 0.8 हेक्टेयर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 0.8 हेक्टेयर

प्रश्न 3.
जैविक कृषि उत्पादों का मूल्य सामान्य कृषि उत्पादों से लगभग ज्यादा होता है –
(a) 20-200 प्र.श.
(b) 10-100 प्र.श.
(c) 10-150 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 10-100 प्र.श.

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प्रश्न 4.
एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउन्डेशन स्थित है –
(a) दिल्ली
(b) मुम्बई
(c) चेन्नई
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चेन्नई

प्रश्न 5.
श्री रल टाटा ट्रस्ट स्थित है –
(a) पटना
(b) बंगलोोर
(c) बंगलौर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बंगलोोर

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प्रश्न 6.
ऑप्रेशन फ्लड का संबंध है –
(a) दूध उत्पादन
(b) चावल उत्पादन
(c) तेल उत्पादन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) दूध उत्पादन

प्रश्न 7.
ऑप्रेशन गोल्डन रेवोल्यूशन (सुनहरी क्रांति) संबंधित है –
(a) मत्स्य पालन
(b) डेरी फॉर्मिंग
(c) बागवानी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बागवानी

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प्रश्न 8.
मत्स्य पालन में कितने प्र.श. कार्य बल महिला वर्ग है –
(a) 60 प्र.श.
(b) 40 प्र.श.
(c) 50 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 60 प्र.श.

प्रश्न 9.
अन्तर्राष्ट्रीय मत्स्य बाजार में महिला कार्य बल का प्र.श. है –
(a) 60 प्र.श.
(b) 40 प्र.श.
(c) 50 प्र.श.
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 40 प्र.श.

Bihar Board Class 11th Economics Solutions Chapter 6 ग्रामीण विकास

प्रश्न 10.
भारत के सकल घरेलू उत्पादन में मत्स्य उद्योग का कितना योगदान है –
(a) 1.4 प्र.श
(b) 2 प्र.श.
(c) 1.1 प्र.श..
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1.4 प्र.श

प्रश्न 11.
भारत में लगभग मवेशियों की संख्या है –
(a) 287 मिलियन
(b) 90 मिलियन
(c) 170 मिलियन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 287 मिलियन

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प्रश्न 12.
गतिशील उपक्षेत्र में शामिल है –
(a) कृषि परिशोधन उद्योग
(b) बागवानी
(c) मत्स्य पालन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कृषि परिशोधन उद्योग

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 5 भारत में मानव पूँजी का निर्माण

Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 5 भारत में मानव पूँजी का निर्माण Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 5 भारत में मानव पूँजी का निर्माण

Bihar Board Class 11 Economics भारत में मानव पूँजी का निर्माण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मानव पूँजी के स्रोत लिखें।
उत्तर:
मानव पूँजी के स्रोत हैं –

  1. शिक्षा में निवेश
  2. स्वास्थ्य में निवेश
  3. कार्य पर प्रशिक्षण में निवेश
  4. देशांतर में निवेश, तथा
  5. सूचना में निवेश

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प्रश्न 2.
किसी देश की शैक्षिक उपलब्धियों के दो सूचक क्या होंगे?
उत्तर:
किसी देश की शैक्षिक उपलब्धियों के दो सूचक हैं –

  1. अपेक्षाकृत अधिक आय अर्जित करना तथा
  2. आर्थिक समृद्धि में अधिक योगदान

प्रश्न 3.
भारत में शैक्षिक उपलब्धियों के क्षेत्र में क्षेत्रीय विषमताएँ क्यों दिखाई दे रही हैं?
उत्तर:
शैक्षिक उपलब्धियों के क्षेत्र में क्षेत्रीय विषमताओं के अनेक कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं-भौगोलिक कारक, दूसरे क्षेत्रीय सरकारों की शिक्षा में अलग-अलग नीतियाँ है।

प्रश्न 4.
मानव पूँजी निर्माण और मानव विकास के भेद को स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव पूँजी की अवधारणा शिक्षा और स्वास्थ्य को श्रम की उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम मानती है। इसके विपरीत मानव विकास इस विचार पर आधारित है कि शिक्षा और स्वास्थ्य मानव कल्याण के अभिन्न अंग हैं, क्योंकि जब लोगों में पढ़ने-लिखने तथा सुदीर्घ स्वस्थ जीवन यापन की क्षमता आती है, तभी वह ऐसे अन्य कार्य चयन करने में सक्षम हो पाते हैं जिन्हें वे महत्त्वपूर्ण मानते हैं। मानव पूँजी मानव को किसी साध्य की प्राप्ति का साधन मानता है। यह साध्य उत्पादकता की वृद्धि है।

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प्रश्न 5.
मानव पूँजी की तुलना में मानव विकास किस प्रकार अधिक व्यापक है?
उत्तर:
मानव पूँजी तथा मानव विकास दोनों पारिभाषित शब्द मिलते-जुलते भले ही प्रतीत होते हैं परंतु मानव पूँजी की तुलना में मानव विकास अधिक व्यापक है। मानव पूँजी तो शिक्षा और स्वास्थ्य को श्रम उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम मानती है, जबकि मानव विकास शिक्षा और स्वास्थ्य को मानव कल्याण का अभिन्न अंग मानता है। मानव पूँजी मानव को किसी साध्य की प्राप्ति का साधन मानती है।

यह साध्य उत्पादकता में वृद्धि का है। मानव पूँजी विचार के अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया गया निवेश अनुत्पादक है, अगर उससे वस्तुओं तथा सेवाओं के निर्गत में वृद्धि न हो। इसके विपरीत मानव विकास के परिप्रेक्ष्य में मानव स्वयं साध्य भी है। भले ही शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर निवेश से श्रम की उत्पादकता में सुधार न हो किन्तु इसके माध्यम से मानव कल्याण का संवर्धन तो होना ही चाहिए।

प्रश्न 6.
मानव पूँजी निर्माण में किन कारकों का योगदान रहता है?
उत्तर:
मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा, स्वास्थ्य प्रशिक्षण आदि कारकों का योगदान रहता है।

प्रश्न 7.
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले दो सरकारी संगठनों के नाम बताइए।
उत्तर:
शिक्षा क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले दो सरकारी संगठन हैं –

  1. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् तथा
  2. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

स्वास्थ्य क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले दो सरकारी संगठन हैं –

  1. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् तथा
  2. राज्य स्तरों पर स्वास्थ्य मंत्रालय

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प्रश्न 8.
शिक्षा को किसी राष्ट्र के विकास का एक महत्त्वपूर्ण आगत माना जाता है। क्यों?
उत्तर:
शिक्षा को किसी राष्ट्र के विकास का एक महत्त्वपूर्ण आगत निम्नलिखित कारणों से माना जाता है –

  1. शिक्षा कार्यक्षेत्र में कुशलता को बढ़ाती है।
  2. शिक्षा श्रम एवं कौशल में वृद्धि लाती है।
  3. शिक्षा व्यक्ति को अधिक आय सृजन के योग्य बनाती है।
  4. शिक्षा लोगों को उच्चतम सामाजिक स्थिति और गौरव प्रदान करती है।
  5. शिक्षा किसी व्यक्ति को अपने जीवन में बेहतर विकल्पों का चयन कर पाने के योग्य बनाती है।
  6. शिक्षा श्रम शक्ति की उपलब्धता के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी को अपनाने में भी सहायक होती है।
  7. शिक्षा, विकास प्रक्रिया को तेज करती है।

प्रश्न 9.
पूँजी निर्माण के निम्नलिखित स्रोतों पर चर्चा कीजिए –

  1. स्वास्थ्य आधारित संरचना
  2. प्रवसन पर व्यय

उत्तर:
1. स्वास्थ्य आधारित संरचना:
स्वास्थ्य को किसी व्यक्ति के साथ-साथ देश के विकास के लिए एक महत्त्वपूर्ण आगत माना जाता है। स्वास्थ्य पर व्यय मानव पूंजी के निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। स्वास्थ्य व्यय के विभिन्न रूप हैं –

  • टीकाकरण
  • चिकित्सीय आयुर्विज्ञान (बीमारियों के क्रम में उसकी चिकित्सा)
  • सामाजिक आयुर्विज्ञान (स्वास्थ्य सम्बन्धी साक्षरता या ज्ञान का प्रसार)
  • स्वच्छ पेय जल का प्रावधान आदि

स्वास्थ्य तथा पोषण से मनुष्य की शारीरिक शक्तियों का विकास होता है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध केवल रोग निवारण से नहीं अपितु इससे कहीं अधिक है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध शारीरिक एवं मानसिक सुख एवं कल्याण में है। एक स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से पूर्णतया कार्य करने योग्य होता है। एक स्वस्थ रोगी पुरुष की अपेक्षा अच्छा काम कर सकता है। एक रोगी कार्यकर्ता जिसके पास चिकित्सा सुविधायें नहीं हैं, कई दिन काम पर नहीं आ सकता और परिणामस्वरूप उत्पादन में कमी आयेगी। अतः स्वास्थ्य मानव पूँजी का एक आवश्यक साधन है।

2. प्रवजन पर व्यय (Expenditure on Migration):
प्रवजन से अभिप्राय नौकरी की तलाश में या अधिक आय प्राप्त करने के लिए अथवा व्यावसायिक अवसर अधिक होने के कारण एक स्थान (देश) से दूसरे स्थान (देश) जाना। यह प्रवजन आन्तरिक भी हो सकता है और बाह्य भी। देश के एक भाग से देश के दूसरे भाग में नौकरी आदि की तलाश आदि के लिए जाने को आन्तरिक प्रवजन कहते हैं। भारत में गाँवों नौकरी प्राप्त करने के लिए काफी संख्या में लोग निरंतर शहरों में आ रहे हैं।

विदेशी प्रवजन उसे कहते हैं जब एक देश के लोग (भारतीय) नौकरी प्राप्त करने के लिए दूसरे देश जाते हैं। इन दोनों प्रकार के प्रवजन में परिवहन व्यय आता है। जिस देश में भारतीय जाते हैं, वहाँ पर रहने की लागत अधिक होती है। अपरिचित, सामाजिक तथा सांस्कृतिक ढाँचे में रहने के कारण मानसिक लागत आती है परंतु विदेशों में बढ़ी हुई आय इन लागतों से अधिक होती है। अतः प्रवजन पर व्यय भी मानव पूँजी निर्माण का एक स्रोत है।

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प्रश्न 10.
मानव संसाधनों को प्रभावी प्रयोग के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता का निरूपण करें।
उत्तर:
जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता-मानव संसाधनों का अपने प्रयोग करने के लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ता है परंतु शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर आने वाले व्यय की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। सूचनाओं से हमें पता चलता है कि कौन-कौन सी शैक्षणिक संस्थायें हमें निपुणता प्रदान करती हैं जिससे हमें नौकरी मिल सके और निपुणता को प्राप्त करने के लिए हमें कितना व्यय करना पड़ेगा। मानव पूंजी में निवेश करने तथा प्राप्त मानव पूँजी स्टॉक को कुशलतापूर्वक प्रयोग करने के बारे में निर्णय लेने के लिए सूचनाएँ आवश्यक हैं।

प्रश्न 11.
मानव पूंजी में निवेश आर्थिक संवृद्धि में किस प्रकार सहायक होता है?
उत्तर:
मानव पूँजी में निवेश (शिक्षा तथा स्वास्थ्य आदि के रूप में) आर्थिक संवृद्धि लाता है। शिक्षा व्यक्ति के श्रम-कौशल में वृद्धि करती है। उसकी अर्जन शक्ति में वृद्धि करती है। आर्थिक शक्ति में वृद्धि होने से उसकी आय में वृद्धि होती है। उसकी आय में वृद्धि होने से देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है। जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक संवृद्धि होती है। शिक्षित व्यक्ति का राष्ट्रीय आय में योगदान अशिक्षित व्यक्ति की अपेक्षा अधिक होता है।

इस प्रकार एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक बिना बाधा के श्रम की पूर्ति कर सकता है। स्वास्थ्य और पोषण से मनुष्य की शारीरिक क्षमताओं का विकास होता है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध केवल रोग निवारण से नहीं अपितु इससे अधिक है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध शारीरिक एवं मानसिक सुख और कल्याण से है। स्वास्थ्य व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से पूर्णतया काम करने योग्य होता है।

वह रोगी पुरुष की अपेक्षा अच्छा काम कर सकता है और अधिक आय का अर्जन कर सकता है। प्रशिक्षण से भी श्रमिक की कार्यकुशलता तथा उत्पादकता में वृद्धि होती है। प्रवजन तथा सूचना प्राप्त करने पर भी मनुष्य अधिक आय का अर्जन कर सकता है। परिणामस्वरूप आर्थिक संवृद्धि होती है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि मानव पूँजी में निवेश आर्थिक संवृद्धि में सहायक होता है।

इस बात की पुष्टि निम्न सारणी में की गई है –
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रकों में विकास के चुने हुए सूचक –
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प्रश्न 12.
विश्व भर में औसत शैक्षिक स्तर में सुधार के साथ-साथ विषमताओं में कमी की प्रवृत्ति पाई गई है। टिप्पणी करें।
उत्तर:
यह पूर्णतया सत्य है कि विश्व स्तर पर औसत शैक्षिक स्तर में सुधार आ रहा है। शिक्षा स्तर में सुधार आने के साथ विषमताओं में भी कमी की प्रवृत्ति होती जा रही है।

प्रश्न 13.
किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की भूमिका का विश्लेषण करें।
उत्तर:
राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की भूमिका (Role of education in the economic development of a nation):
राष्ट्र के आर्थिक विकास में शिक्षा की बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षित व्यक्ति आर्थिक विकास की आधारशिला है। शिक्षित व्यक्ति आर्थिक संरचनाओं का समुचित उपयोग कर सकता है। शिक्षा व्यक्तियों की क्षमता का विस्तार करती है। शिक्षा से देश के सभी क्षेत्रों में प्राकृतिक तथा मानव संसाधनों का समुचित प्रयोग करने में सहायता मिलती है। शिक्षा मनुष्य को विवेकशील और तर्कशील बनाती है तथा उसकी सामान्य सूझ-बूझ को विकसित करती है।

शिक्षा से मनुष्य का दृष्टिकोण वैज्ञानिक और औचित्यपूर्ण बनता है जो नई चीजों को समझने और अपनाने में बहुत सहायक होता है। शिक्षा में निवेश मानव पूँजी का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है। शिक्षा अर्जन शक्ति में वृद्धि लाती है। शिक्षित व्यक्ति का समाज में आदर-मान होता है। वह देश पर भार नहीं अपितु देश के आर्थिक विकास में योगदान देने वाला होता है।

प्रश्न 14.
समझाइए कि शिक्षा में निवेश आर्थिक संवृद्धि को किस तरह प्रभावित करता है?
उत्तर:
शिक्षा में निवेश करने से मनुष्य की अर्जन क्षमता में वृद्धि होती है। शिक्षित व्यक्ति विवेकशील तथा तर्कशील होता है। वह अशिक्षित व्यक्ति से अधिक आय कमाता है तथा राष्ट्रीय आय में अशिक्षित व्यक्ति से अधिक योगदान देता है। आर्थिक संवृद्धि देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि से है। शिक्षित व्यक्ति प्राकृतिक संसाधनों का उचित शोषण करके उत्पादन में वृद्धि करने में सहायक होता है।

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प्रश्न 15.
किसी व्यक्ति के लिए कार्य के दौरान प्रशिक्षण क्यों आवश्यक होता है?
उत्तर:
काम पर लगे हुए कर्मचारियों की कुशलता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए तथा . उत्पादन के नवीनतम उत्पादन विधि से परिचित कराने के लिए उन्हें प्रशिक्षण देना आवश्यक होता है।

प्रश्न 16.
मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि में सम्बन्ध-मानव पूँजी और आर्थिक संवृद्धि के बीच काफी घनिष्ठ सम्बन्ध है । ये दोनों एक-दूसरे को सहारा देते हैं। शिक्षित व्यक्ति का श्रम कौशल अशिक्षित की अपेक्षा अधिक होता है। इसी कारण वह अपेक्षाकृत अधिक आय अर्जित कर पाता है। आर्थिक संवृद्धि का अर्थ देश की वास्तविक आर्थिक आय में वृद्धि से होता है तो फिर स्वाभाविक ही है कि किसी शिक्षित व्यक्ति का योगदान अशिक्षित व्यक्ति की तुलना में कहीं अधिक होगा।

एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक समय तक बिना बाधा के श्रम की पूर्ति कर सकता है। मानव पूँजी तथा आर्थिक संवृद्धि के बीच कारण प्रभाव सम्बन्ध का स्पष्ट निरुपण कठिन होता है, परंतु निम्न सारणी में देख सकते हैं कि वे दोनों क्षेत्र में साथ-साथ संवृद्ध हुए हैं। संभवतः प्रत्येक क्षेत्र की संवृद्धि से दूसरे क्षेत्र की संवृद्धि को संहारा दिया है।

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प्रश्न 17.
भारत में स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहन की आवश्यकता पर चर्चा करें।
उत्तर:
भारत में स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता निम्न कारणों से है –

  1. स्त्री शिक्षा नारी को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करती है।
  2. स्त्री शिक्षा नारी के सामाजिक स्तर में सुधार लाती है।
  3. स्त्री शिक्षा प्रजनन दर पर अनुकूल प्रभाव डालती है।
  4. इससे बच्चों तथा स्त्रियों के स्वास्थ्य देखभाल पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
  5. स्त्री शिक्षा से साक्षरता दर में वृद्धि होगी।

कहा जाता है कि ‘यदि तुम एक व्यक्ति को पढ़ाते हो तो केवल एक व्यक्ति को पढ़ाते हो। इसके विपरीत ‘यदि तुम एक लड़की को पढ़ाते हो तो तुम एक परिवार का पढ़ाते हो।’

प्रश्न 18.
शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों में सरकार के विविध प्रकार के हस्तक्षेपों के पक्ष में तक दीजिए।
उत्तर:
संतुलित अहार की उपलब्धता, बेहतर आवास सुविधाएँ, स्वच्छ एवं प्रदूषण रहित पर्यावरण, बीमारियों पर नियंत्रण से भारत के लोग स्वस्थ हो सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य से मानवीय संसाधनों की उत्पादकता में वृद्धि होती है। सामान्यतः एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। एक स्वस्थ व्यक्ति, अस्वस्थ की तुलना में ज्यादा कुशल हो सकता है।

शिक्षा के उचित प्रबंध से ज्यादा लोग प्राकृतिक संसाधनों के बारे में ज्यादा जान सकते हैं एवं उनका ज्यादा उपयोग कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर निवेश मानव पूँजी के अच्छे स्रोत हैं। इस निवेश से उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है। अतः इन क्षेत्रों पर सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक है।
सरकार निम्न प्रकार से शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर नियंत्रण कर सकती है:

  1. निजी क्षेत्र की एकाधिकारात्मक प्रवृत्ति को रोकने के लिए।
  2. निजी क्षेत्र द्वारा लोगों के शोषण को रोकने के लिए।
  3. गरीबी रेखा से नीचे निवास करने वाले लोगों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु।
  4. सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु।

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प्रश्न 19.
भारत में मानव पूँजी निर्माण की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?
उत्तर:
भारत में मानव पूँजी निर्माण की मुख्य समस्याएँ –

  1. शिक्षा के सभी स्तरों पर (प्राथमिक शिक्षा, उच्चतर शिक्षा तथा तृतीयक शैक्षिक संस्थायें) व्यय बहुत कम है। अत: शिक्षा के स्तरों पर व्यय में वृद्धि करनी चाहिए।
  2. राज्यों में होने वाले प्रति व्यक्ति शिक्षा व्यय में काफी अंतर है। जहाँ लक्षद्वीप में इसका उच्च स्तर 3,440 रुपये है, वहीं बिहार में यह मात्र 386 रुपये है। इस प्रकार की विषमताओं के कारण ही विभिन्न राज्यों में शिक्षा के अवसरों और शैक्षिक उपलब्धियों के स्तर में बहुत भारी अंतर हो जाता है।
  3. शिक्षा व्यय बहुत ही अपर्याप्त है।

प्रश्न 20.
क्या आपके विचार में सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में लिए जाने वाले शुल्कों की संरचना निर्धारित करनी चाहिए। यदि हाँ, तो क्यों?
उत्तर:
सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों के लिए जाने वाले शुल्कों की संरचना निर्धारित करनी चाहिए। वर्तमान में प्रत्येक संस्थान का शुल्क अलग-अलग है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के लोग अधिक शुल्क वाले संस्थानों का लाभ नहीं उठा पाते। शुल्क निर्धारण से यह असमानता समाप्त हो जाएगी और प्रत्येक नागरिक को इसका लाभ मिलेगा।

Bihar Board Class 11 Economics भारत में मानव पूँजी का निर्माण Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संस्थाओं का पूरा नाम लिखें –

  1. NCERT
  2. UGC
  3. AICTE

उत्तर:

  1. NCERT का पूरा नाम: National Council of Educational Research and Training.
  2. UGC का पूरा नाम: University Grants Commission
  3. AICTE का पूरा नाम: All India Council for Technical Education.

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प्रश्न 2.
भारत में सेवा क्षेत्र का कौन नियमन करते हैं?
उत्तर:
भारत में –

  1. संघ तथा राज्य स्तर पर स्वास्थ्य मंत्रालय
  2. स्वास्थ्य विभाग तथा
  3. विभिन्न संस्थायें सेवा क्षेत्र का नियमन करती हैं

प्रश्न 3.
शहरीकरण के प्रभाव लिखें।
उत्तर:
प्रभाव (Effect):

  1. शहरों में बढ़ती भीड़
  2. आधारिक संरचना एवं सार्वजनिक सेवाओं की ओर कमी
  3. शहरी जीवन गुणात्मक दृष्टि से निरंतर बिगड़ रहा है
  4. शहरी बेरोजगारी में वृद्धि

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प्रश्न 4.
‘पुट्टा निष्कासन’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अकुशल तथा अर्द्धकुशल श्रमिकों का काम की तलाश में विकसित देशों में जाना तथा वहाँ स्थायी रूप से निवास करने की प्रक्रिया को ‘पुट्ठा निष्कासन’ कहते हैं।

प्रश्न 5.
‘मस्तिष्क मिष्कासन’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
उच्च शिक्षित तथा तकनीकी योग्यता से लैस व्यक्तियों का विकसित देशों में काम की तलाश में जाना तथा वहीं पर स्थायी रूप से रहना ‘मस्तिष्क निष्कासन’ कहलाता है।

प्रश्न 6.
कंपनियाँ पूँजीगत वस्तुओं में निवेश क्यों करती हैं?
उत्तर:
भविष्य में अपनी आय बढ़ाने के लिये कंपनियाँ पूँजीगत वस्तुओं में निवेश करती हैं।

प्रश्न 7.
भारत में शिक्षा क्षेत्र की कौन-सी संस्थाएँ नियमन करती हैं?
उत्तर:
भारत में शिक्षा क्षेत्र का निम्नलिखित संस्थायें नियमन (Regulate) करती हैं –

  1. केन्द्र तथा राज्य स्तर पर शिक्षा मंत्रालय
  2. शिक्षा विभाग तथा
  3. अन्य संगठन जैसे एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT), यू.जी.सी. (UGC), तथा ए.आई.सी. टी.ई. (AICTE)

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प्रश्न 8.
शिक्षा के महत्त्व को दर्शाने वाले कोई तीन बिन्दु लिखें।
उत्तर:

  1. शिक्षा मनुष्य को विवेकशील और तर्कशील बनाती है।
  2. शिक्षा से मनुष्य की सामान्य सूझ-बूझ विकसित होती है।
  3. शिक्षा से मनुष्य का दृष्टिकोण वैज्ञानिक बनता है।

प्रश्न 9.
प्रवसन या देशांतर से क्या अभिप्राय है? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
प्रवसन या प्रवास से अभिप्राय है लोगों का देश के अंतर एक स्थान से दूसरे स्थान तथा एक देश से दूसरे देश में बसना। यह दो प्रकार का होता है –

  1. आन्तरिक प्रवास तथा
  2. अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास

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प्रश्न 10.
संविधान के कौन से संशोधन ने 6-14 वर्ष समूह के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया?
उत्तर:
संविधान के 86वें संशोधन में 6-14 समूह के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है।

प्रश्न 11.
वर्तमान सरकार ने आगामी वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद का कितना प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने का मन बनाया है?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत।

प्रश्न 12.
2004-2005 ई. के केंद्रीय बजट में भारत सरकार ने शिक्षा कर (Educationcess) से कितनी राशि आय के रूप में प्राप्त करने का अनुमान लगाया है और यह राशि किस मद पर खर्च की जानी थी?
उत्तर:
2004-2005 के केंद्रीय बजट में भारत सरकार ने शिक्षा कर से 4000-5000 करोड़ की राशि आय के रूप में प्राप्त करने का अनुमान लगाया और यह राशि प्रारम्भिक शिक्षा मद पर खर्च की जानी थी।

प्रश्न 13.
सकल घरेलू उत्पाद शिक्षा व्यय का प्रतिशत क्या दर्शाया है?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद शिक्षा व्यय का प्रतिशत यह दर्शाता है कि हमारे देश में हमारी आय का कितना प्रतिशत भाग शिक्षा के विकास पर खर्च किया जा रहा है।

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प्रश्न 14.
1952-2000 ई. की समयावधि में सकल घरेलू उत्पाद का कितना प्रतिशत शिक्षा व्यय बढ़ गया?
उत्तर:
1952-2000 ई. को समयावधि में सकल घरेलू उत्पाद का शिक्षा व्यय का प्रतिशत 0-64 से बढ़कर 4.2 हो गया।

प्रश्न 15.
शिक्षा पर कुल व्यय का बड़ा भाग किस प्रकार की शिक्षा (प्राथमिक, उच्च, उच्चतम) पर खर्च किया जाता है?
उत्तर:
प्राथमिक शिक्षा पर।

प्रश्न 16.
आन्तरिक प्रवजन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आन्तरिक प्रवास से अभिप्राय है देश के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर बसना।

प्रश्न 17.
हमारे देश में स्कूल स्तर पर शिक्षा क्रम को बीच में अधुरा छोड़ने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक है। इसके दो दुष्प्रभाव लिखें।
उत्तर:

  1. इससे बाल श्रम को बढ़ावा मिलता है।
  2. मानव पूँजी को हानि होती है।

प्रश्न 18.
भारत में 1990 ई. में पुरुषों की प्रौढ़ शिक्षा दर कितनी थी और 2000 ई. में यह कितनी हो गई?
उत्तर:
भारत में 1990 ई. में पुरुषों (15 से ऊपर) की प्रौढ़ शिक्षा दर पुरुषों की 61.9 प्रतिशत थी जो कि बढ़कर 2000 ई. में 68.4 हो गई।

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प्रश्न 19.
एक देश की शिक्षा में उपलब्धि किन-किन रूपों द्वारा मापी जा सकती है?
उत्तर:

  1. प्रौढ़ साक्षरता स्तर
  2. प्राथमिक शिक्षा की पूरी पढ़ाई, तथा
  3. युवा साक्षरता दर

प्रश्न 20.
भारत सरकार ने शिक्षा प्रसार के लिये कई कदम उठाये हैं। उनमें से कोई दो उपाय लिखें।
उत्तर:

  1. उच्च शिक्षा के लिए काफी धनराशि की व्यवस्था तथा
  2. उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिये ऋण कार्यक्रम बनाये गये हैं

प्रश्न 21.
2004-05 ई. के केन्द्रीय बजट में भारत सरकार ने सभी संघीय करों पर कितना प्रतिशत शिक्षा शुल्क लगाया है और इससे कितनी राशि प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है?
उत्तर:
दो प्रतिशत 1 अनुमान लगाया गया है कि शिक्षा शुल्क से 4000-5000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

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प्रश्न 22.
मानव संसाधनों से और अधिक मानव पूंजी उत्पन्न करने के लिये हमें क्या करना चाहिए?
उत्तर:
मानव संसाधन से और अधिक मानव पूंजी उत्पन्न करने के लिये हमें मानव पूँजी में निवेश करना चाहिए।

प्रश्न 23.
कौन व्यक्ति अच्छा कार्य कर सकता है एक रोगी पुरुष या एक स्वस्थ व्यक्ति?
उत्तर:
एक स्वस्थ व्यक्ति।

प्रश्न 24.
काम से अनुपस्थित रहने पर उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ता है दूसरे शब्दों में उत्पादन में हानि होती है।

प्रश्न 25.
निरोधात्मक दवाइयों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
निरोधात्मक दवाइयों से अभिप्राय उन दवाइयों से है जिनके सेवन से रोग पर रोक लगती है। जैसे-टीकाकरण।

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प्रश्न 26.
रोगहर दवाइयों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
रोगहर दवाइयों से अभिप्राय उन दवाइयों से है जो रोग का निवारण करने के लिये रोगी को दी जाती है।

प्रश्न 27.
सामाजिक दवाइयों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सामाजिक दवाइयों से अभिप्राय है-स्वास्थ्य साक्षरता का प्रसार करना।

प्रश्न 28.
केरल की साक्षरता दर बताइए।
उत्तर:
केरल की साक्षरता दर लगभग शत-प्रतिशत है।

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प्रश्न 29.
भौतिक पूँजी और मानवीय पूँजी में एक अंतर लिखें।
उत्तर:
भौतिक पूँजी दृश्य है और यह अन्य वस्तुओं की तरह बाजार में सरलता से बेची जा सकती है, परंतु मानवीय पूँजी अदृश्य है। इसे बाजार में नहीं बेचा जा सकता केवल इसकी सेवाओं को ही बेचा जा सकता है।

प्रश्न 30.
किस प्रकार की पूँजी (भौतिक पूँजी या मानवीय पूँजी) को अपने स्वामी से पृथक किया जा सकता है?
उत्तर:
भौतिक पूँजी को अपने स्वामी से पृथक किया जा सकता है।

प्रश्न 31.
विभिन्न देशों में कौन सी पूँजी (भौतिक पूँजी या मानवीय पूँजी) पूर्णतः गतिशील है?
उत्तर:
भौतिक पूँजी।

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प्रश्न 32.
शिक्षा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
शिक्षा से अभिप्राय है-दिमाग, ज्ञान का भण्डारण करना और इसके बारे में बातें तथा वाद-विवाद द्वारा इसका सम्प्रेषण करना।

प्रश्न 33.
क्या मनुष्य केवल शिक्षा से सहारे जीवित रह सकता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 34.
मनुष्य शिक्षा पर खर्च क्यों करता है?
उत्तर:
मनुष्य शिक्षा पर खर्च इसलिये करता है क्योंकि शिक्षा उसे अधिक अर्जन करने के लिये समर्थ बनाती है और समाज में उसका सामाजिक स्तर ऊपर उठाती है।

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प्रश्न 35.
अर्थशास्त्रियों ने एक राष्ट्र में शैक्षणिक अवसरों के विस्तार पर क्यों बल दिया है?
उत्तर:
क्योंकि शिक्षित समाज निरक्षर समाज की अपेक्षा विकास की अच्छी सुविधायें प्रदान करता है।

प्रश्न 36.
स्वास्थ्य में निवेश से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
स्वास्थ्य में निवेश से अभिप्राय है-निरोधात्मक दवाइयों, रोगहर तथा सामाजिक दवाइयों, शुद्ध पेयजल तथा सफाई की व्यवस्था पर होने वाले व्यय।

प्रश्न 37.
स्वास्थ्य में निवेश क्यों किया जाता है?
उत्तर:
श्रमिकों को स्वस्थ रखने और उनको दीर्घ काल के लिये काम करने के योग्य बनाने के लिये स्वास्थ्य में निवेश किया जाता है।

प्रश्न 38.
स्वास्थ्य पर निवेश (व्यय) को मानव पूँजी निर्माण का स्रोत क्यों माना जाता है।
उत्तर:
क्योंकि स्वास्थ्य पर व्यय स्वस्थ श्रम शक्ति की पूर्ति में वृद्धि करता है।

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प्रश्न 39.
प्रशिक्षण का क्या अर्थ है?
उत्तर:
प्रशिक्षण का अर्थ है किसी विशिष्ट काम को करने के लिये कुशलता और ज्ञान देना। इससे काम की कुशलता बढ़ती है।

प्रश्न 40.
प्रशिक्षण से संगठन को होने वाले कोई दो लाभ लिखें।
उत्तर:

  1. प्रशिक्षण से उत्पादन में वृद्धि होती है।
  2. प्रशिक्षण से प्रचालन में मितव्ययिता आती है।

प्रश्न 41.
कार्य-स्थल पर प्रशिक्षण (On the job training) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कार्यस्थल पर प्रशिक्षण से अभिप्राय है, कार्यरत श्रमिकों को पर्यवेक्षक द्वारा कार्यस्थल पर ही प्रशिक्षण देना। दूसरे शब्दों में प्रशिक्षण की इस पद्धति के अन्तर्गत श्रमिक काम को वास्तविक परिवेश में सीखता है। यह पद्धति प्रचालन कर्मचारियों की सबसे प्रभावी पद्धति है।

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प्रश्न 42.
कार्यस्थल पर प्रशिक्षण व्यय किस प्रकार मानव पूँजी निर्माण का एक स्रोत है?
उत्तर:
क्योंकि प्रशिक्षित श्रमिकों से उत्पादकता में वृद्धि हो जाती है और इस बढ़ी हुई उत्पादकता से होने वाले लाभ प्रशिक्षण पर होने वाले व्यय से अधिक होते हैं।

प्रश्न 43.
स्वस्थ रहने से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
स्वस्थ रहने से मनुष्य की कार्यकुशलता तथा उत्पादकता में वृद्धि होती है। एक स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से पूर्णतया कार्य करने योग्य होता है।

प्रश्न 44.
मानव पूँजी निर्माण किसे कहते हैं?
उत्तर:
मानव संसाधनों में निवेश की क्रिया को मानव पूँजी निर्माण कहते हैं।

प्रश्न 45.
शिक्षा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
शिक्षा से अभिप्राय ज्ञान प्राप्त करना, ज्ञान को पुस्तकों में लिखना, ज्ञान का वार्तालाप, संगीत तथा वाद विवाद द्वारा प्रसारण करना।

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प्रश्न 46.
लोग शिक्षा पर पैसा क्यों खर्च करते हैं? एक कारण लिखें।
उत्तर:
लोग शिक्षा पर पैसा इसलिये खर्च करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात की आशा होती है कि शिक्षा से उनमें निपुणता आ जायेगी और वे अपेक्षाकृत अधिक धन कमा सकेंगे।

प्रश्न 47.
शिक्षा से हम अधिक धन कमा सकते हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षा से हमें और भी कई लाभ प्राप्त होते हैं। कोई ऐसा लाभ बतायें।
उत्तर:
शिक्षा से समाज में हमारी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

प्रश्न 48.
एक देश में मानव संसाधनों के दो प्रमुख स्रोत लिखें।
उत्तर:

  1. शिक्षा तथा
  2. स्वास्थ्य

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प्रश्न 49.
मानव संसाधनों के विकास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव संसाधनों के विकास का अभिप्राय है लोगों का जीवन अच्छा और सुरक्षित हो तथा मानसिक और भौतिक प्रतिभाओं का पूर्ण विकास हो।

प्रश्न 50.
मानव संसाधनों के विकास के लिये क्या आवश्यक है?
उत्तर:
मानव संसाधनों के विकास के लिये भोजन, पोषण, शिक्षा, प्रशिक्षण, जल-आपूर्ति आदि में सुधार आवश्यक है।

प्रश्न 51.
मानव संसाधनों से और अधिक मानव पूँजी उत्पन्न करने के लिये हमें किसमें निवेश करने की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
मानव संसाधनों से और अधिक मानव पूँजी उत्पन्न करने के लिये हमें मानव पूँजी में निवेश करने की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 52.
शिक्षा मानव को किसमें परिवर्तित करती है?
उत्तर:
शिक्षा मानव को मानव पूँजी में परिवर्तित करती है।

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प्रश्न 53.
लक्षद्वीप तथा बिहार में प्रति व्यक्ति शिक्षा व्यय कितना है?
उत्तर:
लक्षद्वीप तथा बिहार में प्रति व्यक्ति शिक्षा व्यय क्रमशः 3440 रुपये तथा 386 रुपये है।

प्रश्न 54.
शिक्षा आयोग 1964-66 ई. ने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का कितना प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की थी?
उत्तर:
शिक्षा आयोग 1964-66 ई. ने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 6 प्रतिशत खर्च करने की सिफारिश की थी।

प्रश्न 55.
‘मानवीय पूँजी आर्थिक संवृद्धि लाती है’ यह सिद्ध करने के लिये अनुभव सिद्ध प्रमाण (Empirical Evidence) क्यों अस्पष्ट है? कारण लिखें।
उत्तर:
मापने के समस्याओं के कारण अनुभव सिद्ध प्रमाण अस्पष्ट है। उदाहरण के लिये स्कूल में बिताये गये वर्ष, अध्यापक-शिष्य अनुपात तथा नामांकन दर (Enrolmentation) शिक्षा की गुणवत्ता को नहीं दर्शा सकते। इसी प्रकार मुद्रा जीवन प्रत्याशा और मृत्यु दर एक देश के लोगों के वास्तविक स्वास्थ्य स्तर को नहीं दर्शा सकते।

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प्रश्न 56.
तृतीय स्तरीय शिक्षा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
तृतीय स्तरीय शिक्षा से अभिप्राय कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा तकनीकी शिक्षा के स्तर से है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मानव विकास हेतु शिक्षा क्यों अनिवार्य है?
उत्तर:
निम्न कारणों से शिक्षा मानव विकास के लिये अनिवार्य है –

  1. शिक्षा से मनुष्य का स्र्वांगीण विकास होता है।
  2. शिक्षा से मनुष्य निपुण कार्यकर्ता बन जाता है तथा अशिक्षित कार्यकर्ता से अधिक वेतन लेता है।
  3. शिक्षा से मनुष्य का सामाजिक स्तर बढ़ जाता है और उसकी समाज में प्रतिष्ठा होती है।
  4. शिक्षा प्राप्त करने से मनुष्य शराब पीना, जुआ खेलना आदि बुरी आदतों से बच जाता है।
  5. शिक्षा व्यक्ति को एक अच्छा नागरिक बनाने में सहायता करती है।

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प्रश्न 2.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में कौन-कौन सी गतिविधियाँ आती हैं?
उत्तर:
स्वास्थ्य के क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ आती हैं –

  1. जनसंख्या दवाइयों पर नियंत्रण
  2. नशीली दवाइयों पर नियंत्रण
  3. खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकना
  4. स्वास्थ्य हेतु मुख्य संक्रामक तथा गैर-संक्रामक रोगों का पूरी तरह से प्रतिरक्षण तथा निवारण

प्रश्न 3.
भौतिक तथा मानवीय पूँजी में अंतर बतावें।
उत्तर:
भौतिक तथा मानवीय पूँजी में अंतर –
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 5 भारत में मानव पूँजी का निर्माण img 2

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
विश्व में भारत का मानव विकास सूचकांक क्या है?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) विभिन्न देशों के लिए मानव विकास सूचकांकों का संकलन करता है। इसके लिए विश्वसनीय आँकड़े सुलभता से प्राप्त हो जाते हैं। विभिन्न मानव विकास रिपोर्ट में उपलब्ध राष्ट्रों में भारत की स्थिति नीचे दी गई सारणी से स्पष्ट है –
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प्रश्न 2.
मानव पूँजी और मानव विकास में अंतर बतावें।
उत्तर:
मानव पूँजी और मानव विकास में अंतर (Difference between Human Capital and Human Development):
Bihar Board Class 11 Economics Chapter - 5 भारत में मानव पूँजी का निर्माण img 4

प्रश्न 3.
मानवीय पूँजी के विभिन्न स्रोत कौन-कौन से हैं? समझाइये।
उत्तर:
मानवीय पूँजी के विभिन्न स्रोत इस प्रकार हैं –

1. शिक्षा में निवेश (Investment in education):
शिक्षा में निवेश मानवीय पूँजी का एक स्रोत माना जाता है। शिक्षा मनुष्य को विवेकशील तथा तर्कशील बनाती है तथा उसकी सामान्य सूझ को विकसित करती है। शिक्षा से मनुष्य का दृष्टिकोण वैज्ञानिक और औचित्यपूर्ण बनता है जो नई चीजों को समझने और अपनाने में सहायक होता है। शिक्षा से अर्जन-क्षमता बढ़ती है। इससे समाज में सामाजिक स्तर ऊँचा होता है और लोगों को शिक्षित होने का गौरव प्राप्त होता है।

2. स्वास्थ्य में निवेश (Investment in Health):
शिक्षा और प्रशिक्षण से मनुष्य की मानसिक प्रतिभाओं का विकास होता है परंतु स्वास्थ्य और पोषण से मनुष्य की शारीरिक क्षमताओं का विकास होता है। स्वास्थ्य का संबंध केवल रोग निवारण से नहीं, अपितु इससे कहीं अधिक है। स्वास्थ्य का संबंध शारीरिक एवं मानसिक सुख एवं कल्याण से है। एक स्वस्थ व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से पूर्णतया कार्य करने योग्य होता है।

हम जानते हैं कि एक स्वस्थ मनुष्य रोगी पुरुष की अपेक्षा अच्छा काम कर सकता है। एक रोगी कार्यकर्ता जिसके पास चिकित्सा सुविधाएँ नहीं हैं कई दिन काम पर नहीं आ सकता परिणामस्वरूप उत्पादन में कमी आयेगी। यदि वह कार्यकर्ता या सरकार उसकी बीमारी को ठीक करने पर व्यय करती है तब वह शीघ्र ही कार्य करने योग्य हो जायेगा।

अतः स्वास्थ्य मानव पूंजी निर्माण का एक आवश्यक साधन है। स्वास्थ्य व्यय के मुख्य घटक हैं-टीकाकरण, रोग ठीक करने वाली दवाइयाँ, शुद्ध जल की व्यवस्था और वे सब प्रकार के व्यय जो श्रमिकों को स्वस्थ रखने के लिये तथा लंबे समय तक काम करने के योग्य बनाने के लिए किये जाते हैं। स्वास्थ्य व्यय, स्वस्थ श्रम शक्ति की पूर्ति को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ाते हैं। अत: स्वास्थ्य पर व्यय (निवेश) मानव पूंजी निर्माण का एक साधन है।

3. कार्य प्रशिक्षण पर व्यय (Expenditure on the job traning to labourers):
कार्य स्थल पर प्रशिक्षण में अभिप्राय श्रमिकों को उसके आसन्न पर्यवेक्षक द्वारा कार्यस्थल पर ही प्रशिक्षण देना है। दूसरे शब्दों में प्रशिक्षण की इस विधि के अन्तर्गत श्रमिक काम को वास्तविक परिवेश में सीखता है। यह प्रशिक्षिण दो प्रकार से दिया जा सकता है –

  1. अपने कारखने में ही तथा
  2. कारखाने से परे अन्य स्थानों पर। दोनों ही स्थितियों में कर्मचारी का मालिक ही व्यय करता है। बाद में मालिक इस व्यय को कर्मचारी की उत्पादकता से होने वाले अतिरिक्त लाभ से पूरा कर लेता है।

4. प्रवजन पर व्यय (Expenditure on Migration):
प्रवजन से अभिप्राय नौकरी की तलाश में, अधिक आय को प्राप्त करने के लिए या व्यावसायिक अवसर अधिक होने के कारण एक स्थान (देश) से दूसरे स्थान (देश) जाना । यह देशान्तरण आन्तरिक भी हो सकता है और विदेशी भी। देश के एक भाग से देश के दूसरे भाग में नौकरी की तलाश आदि के लिये जाने को आन्तरिक देशांतर कहते हैं। भारत में गाँव से लोग नौकरी प्राप्त करने के लिये काफी संख्या में निरंतर आ रहे हैं।

विदेशी प्रवसन उस देशांतर को कहते हैं जब एक देश के लोग (भारतीय) नौकरी प्राप्त करने के लिये दूसरे देश में जाते हैं। इन दोनों प्रकार के देशांतर में परिवहन व्यय आता है। जिस देश में भारतीय जाते हैं, वहाँ पर रहने की लागत अधिक होती है। अपरिचित सामाजिक तथा सांस्कृतिक ढाँचे में रहने के कारण मानसिक लागत आती है। परंतु विदेशों में बढ़ी हुई आय इन लागतों से अधिक होती है। अतः प्रवजन (migration) पर व्यय भी मानव पूँजी निर्माण का एक स्रोत (source) है।

5. सूचना प्राप्त करने पर व्यय (Expenditure incurred on getting education):
जिस प्रकार लोग शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं उसी प्रकार के श्रम बाजार तथा अन्य बाजारों के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिये भी व्यय करते हैं। सूचनाओं से हमें पता चलता है कि विभिन्न नौकरियों पर क्या-क्या वेतन मिलता है। इससे हमें यह भी पता चलता है कि. कौन-सी शैक्षणिक संस्थायें हमें निपुणता प्रदान करती हैं जिससे हमें नौकरी मिल सके और उस निपुणता को प्राप्त करने में हमें कितना व्यय करना पड़ेगा।

मानव पूंजी में निवेश करने तथा प्राप्त मानव पूँजी स्टॉक का कुशलतापूर्वक प्रयोग करने के बारे में निर्णय लेने के लिये ये सूचनायें आवयश्क हैं। अतः श्रम बाजार तथा अन्य बाजार के बारे में सूचना लेने के लिये किये गये खर्चे भी मानव पूँजी निर्माण का एक स्रोत हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
शताब्दी के अन्त में भारत में साक्षर अनुपात था –
(a) 1/6
(b) 2/3
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 2/3

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प्रश्न 2.
वर्ष 2001 में भारत में साक्षरों की संख्या हो गई है –
(a) 57 करोड़
(b) 75 करोड़
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 57 करोड़

प्रश्न 3.
भारतवर्ष में शिक्षा पर कुल व्यय सकल घरेलू उत्पाद का प्रतिशत है –
(a) 4 प्रतिशत
(b) 4 प्रतिशत से ज्यादा
(c) 4 प्रतिशत से कम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 4 प्रतिशत से कम

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प्रश्न 4.
हमारे देश में शिक्षा प्रणाली लागू है –
(a) 10 + 2 + 2
(b) 10 + 2 + 3
(c) 11 + 3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 10 + 2 + 3

प्रश्न 5.
भारत में वर्तमान जीवन प्रत्याशा है –
(a) 65 वर्ष
(b) 70 वर्ष
(c) 60 वर्ष
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 65 वर्ष

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प्रश्न 6.
ग्रामीण क्षेत्र में जिला स्तर पर स्वास्थ्य की देखभाल करता है –
(a) स्वास्थ्य उपकेन्द्र
(b) स्वास्थ्य केन्द्र
(c) सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र

प्रश्न 7.
ओरल पोलियो टीका दिया जाता है –
(a) पोलियो
(b) डिफथेरिया
(c) अधापन रोकथाम के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) पोलियो

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प्रश्न 8.
वर्ष 1994 भारत में प्लेग फैला था –
(a) दिल्ली में
(b) सूरत में
(c) भोपाल में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सूरत में

प्रश्न 9.
भारत में चेचक उन्मूलन का वर्ष है –
(a) 1967
(b) 1977
(c) 1987
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1977

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प्रश्न 10.
1991 में भारत में आवासों की कुल कमी है –
(a) 38 लाख
(b) 31 लाख
(c) 8 लाख
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 38 लाख