Bihar Board Class 7 Social Science History Solutions Chapter 2 नये राज्य एवं राजाओं का उदय

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 2 Chapter 2 नये राज्य एवं राजाओं का उदय Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science History Solutions Chapter 2 नये राज्य एवं राजाओं का उदय

Bihar Board Class 7 Social Science नये राज्य एवं राजाओं का उदय Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 7 History Book Solution प्रश्न 1.
पृथ्वीराज किस राज्य का राजा था ?
उत्तर-
पृथ्वीराज ‘दिल्ली’ तथा ‘अजमेर’ राज्य का राजा था।

Bihar Board Class 7 Social Science Solution प्रश्न 2.
उस समय इसके समकालीन और कौन राजा थे?
उत्तर-
उस समय इसके समकालीन महत्त्वपूर्ण राजा ‘जयचन्द’ था । भारत के दो गद्दारों में पहला जयचन्द और दूसरा मीरजाफर था।

Bihar Board Class 7 History Solution In Hindi प्रश्न 3.
उस समय हमारे देश की राजनीतिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर-
उस समय हमारे देश की राजनीतिक स्थिति द्वेष भावना से ग्रस्त थी । एक राजा दूसरे राजा को सदैव नीचा दिखाने की फिराक में रहा करते थे।

Bihar Board Class 7 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 4.
उपाधि का क्या अर्थ होता है?
उत्तर-
नाम के पहले या बाद में लगने वाला प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले उपनाम ‘उपाधि’ कहलाती है । जैसे : सामंतों को दी जाने वाली उपाधि राय, राणा, रावत आदि । पराजित राजा विजयी राजा की अधीनता में उसे उपाधि से अलंकृत करता था ।

Bihar Board Solution Class 7 Social Science प्रश्न 5.
इन तीनों के पतन के क्या कारण हो सकते हैं? चर्चा करें।
उत्तर-
इन तीनों से तात्पर्य उन तीन शासकों से है जिन्हें इतिहासकारो ने ‘त्रिपक्ष’ या ‘त्रिपक्षीय’ कहा है । ये थे मध्य एवं पश्चिम भारत के ‘गुर्जर-प्रतिहार’, दक्कन के राष्ट्रकूट और बंगाल के पाल । इन तीनों के पतन के कारण थे कि बिना अपनी आर्थिक तथा सामरिक शक्ति का आकलन किये इन तीनों ने ‘कन्नौज’ पर अधिकार के लिये युद्ध जारी रखा और बहुत दिनों तक लड़ते रहे । अन्ततः परिणाम हुआ कि आर्थिक और सामरिक रूप से तीनों समान रूप से खोखले हो गए । यही कारण था कि इन तीनों का पतन हो गया।

Bihar Board Class 7 Geography Book Solution प्रश्न 6.
सोमनाथ मंदिर के बारे में विशेष रूप से वर्ग में चर्चा करें।
उत्तर-
सोमनाथ का प्रसिद्ध मन्दिर गुजरात राज्य में अवस्थित है। मध्यकाल के अनेक भारतीय मंदिरों में यह भी एक ऐसा मन्दिर था जो धनध। न्य से पूर्ण था । महमूद गजनवी ने जब भारत के मंदिरों को लूटा तो उनमें सोमनाथ को उसने विशेष रूप से लूटा । मन्दिर का सारा धन तो उसने लूट ही लिया मन्दिर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया । 15 अगस्त, 1947 को भारत : के स्वतंत्र होने तक वह वैसे ही खण्डहर के रूप में पड़ा रहा । धन्य कहिए। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को जिन्होंने सरकारी खर्च पर उसकी मरम्मत करा दी ।

वे तो चाहते थे कि जितने भारतीय मन्दिरों को आक्रमणकारियों ने. तोड़कर उसका रूप बिगाड़ दिया था, सबको उनके पहले के रूप में कर . दिया जाय । लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने को महान धर्मनिरपेक्ष दिखाने के लिये ऐसा नहीं करने दिया । फिर दूसरी बात थी कि सोमनाथ मंदिर

की मरम्मती के थोड़े ही महीने के अन्दर सरदार पटेल को सन्दहात्मक मृत्यु हो गई।

Bihar Board 7th Class Social Science Solution प्रश्न 7.
आपके विचार से महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण के क्या उद्देश्य हो सकते हैं ?
उत्तर-
हर शासक के आक्रमण का यही उद्देश्य होता है, अपने राज्य का विस्तार करना या पड़ोसी राज्य से अपनी अधीनता स्वीकार कराना, लेकिन हम देखते हैं कि इन दोनों उद्देश्यों से परे गजनवी का उद्देश्य लूट-पाट मचाना था। कुछ अमीरों को तो उसने लूटा ही, खासतौर पर मंदिरों को खूब लूटा ।

उस काल के प्रसिद्ध और धन-दौलत से सम्पन्न मंदिरों में प्रमुख थे-मथुरा, वृन्दावन, थानेश्वर, कन्नौज और सोमनाथ के मंदिर । इन मंदिरों को गजनवी ने जी भरकर लूटा और इसे ध्वस्त तक कर दिया ।

Bihar Board Class 7 Civics Solution प्रश्न 8.
राजेन्द्र चोल अपनी सेना को गंगा नदी तक क्यों ले गया ?
उत्तर-
राजेन्द्र चोल एक महत्त्वाकांक्षी विजेता था, जिसने अपने राज्य को श्रीलंका सहित जावा-सुमात्रा तक फैला रखा था। गंगा नदी तक सेना ले जाने के दिखावे का तात्पर्य था कि वह गंगाजल लेने जा रहा है, लेकिन वास्तविक उद्देश्य था गंगा तट तक अपने राज्य का विस्तार करना और विजय प्राप्त करना जो उसने कर दिखाया । उसने गंगाजल लेकर अपनी राजधानी को ले गया और उसका नाम रखा ‘गंगई-कोण्ड-चोलपुरम’ रख दिया । उसकी राजधानी नगर इसी नाम से प्रसिद्ध हो गया ।।

Class 7 History Chapter 2 Questions And Answers Bihar Board प्रश्न 9.
आज की नागरिक सेवा से चोलकालीन नागरिक सेवा की तुलना करें।
उत्तर-
आज की नागरिक सेवा और चोलकालीन नागरिक सेवा लगभग मिलती-जुलती-सी है। जैसे आज राज्यपालों या राष्ट्रपति के निजी सचिव होते हैं, वैसे ही चोल राजा के भी निजी सचिव होते थे । आज के प्रधान सचिवों की तरह चोल राज्य में भी प्रधान सचिव होते थे । आज के किरानियों की तरह चोल शासन काल में प्रधान और निम्न कर्मचारी हुआ करते थे । इस प्रकार हम देखते हैं कि आज की नागरिक सेवा और चोलकालीन नागरिक सेवा लगभग समान थी।

Bihar Board Class 7th Social Science Solution प्रश्न 10.
क्या आपके विद्यालय या गाँव में चोलकालीन ग्राम स्वशासन की तरह कोई समिति कार्य करती है । यदि हाँ तो कैसे ?
उत्तर-
हाँ, होती है । स्कूल की समिति में एकराजकीय पदाधिकारी के -साथ ग्राम पंचायत के मुखिया तथा गाँव के कुछ संभ्रात पढ़े-लिखे लोग स्कूल समिति में रहते हैं और स्कूल के संचालन की देख-रेख करते हैं।

गाँव में वैसी समिति ग्राम पंचायतें हैं । ग्राम पंचायत के मुखिया और सरपंच सहित अनेक सदस्य निर्वाचित किये जाते हैं । मुखिया प्रशासनिक और नागरिक सेवा का काम देखता है तथा सरपंच दो ग्रामीणों के बीच के झगड़े को सुलझाता है।

Bihar Board Class 7 History  प्रश्न 11.
भारत के वैसे मंदिरों का पता लगाय, जहा आज भा भक्ता द्वारा बहुमूल्य उपहार चढ़ाये जाते हैं । उपहार चढ़ाने के पीछे लोगों की क्या मंशा रहती है ?
उत्तर-
भारत के सभी मन्दिरों में कुछ-न-कुछ चढ़ावा तो चढ़ता ही है, लेकिन सर्वाधिक मूल्यवान चढ़ावा तिरुपति मन्दिर तथा सिरडी के साईं बाबा मंदिर में चढ़ता है। पटना के महावीर मंदिर में भी चढ़ावा चढ़ता है। लेकिन उतना नहीं, जितना उपर्युक्त दोनों मंदिरों में चढ़ता है । पटना के महावीर मंदिर की आय से पटना में ही एक कैंसर अस्पताल चलाया जा रहा है।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

आइए फिर से याद करें :

Class 7 Atit Se Vartman Solution Bihar Board प्रश 1.
जोड़े बनाइए:

  1. सोमनाथ – गुर्जर प्रतिहार
  2. सेनवंश – लोगों द्वारा चयनित शासक
  3. गोपाल – त्रिपक्षीय संघर्ष
  4. कन्नौज – गुजरात
  5. मध्य- भारत – बिहार

उत्तर-

  1. सोमनाथ – गुजरात
  2. सेनवंश – बिहार
  3. गोपाल – लोगों द्वारा चयनित शासक
  4. कन्नौज – त्रिपक्षीय संघर्ष
  5. मध्य भारत – गुर्जर प्रतिहार

Class 7 History Chapter 2 Solutions Bihar Board प्रश्न 2.
दक्षिण के प्रमुख राज्य कौन-कौन थे? उत्तर-दक्षिण के प्रमुख राज्य निम्नलिखित थे :

  1. चोल
  2. चेर
  3. पाण्ड्य
  4. राष्ट्रकूट त!
  5. चालुक्य।

Bihar Board Class 7 Hamari Duniya Solution प्रश्न 3.
उस समय के राजा कौन-कौन-सी उपाधियाँ धारण करते थे ?
उत्तर-
उस समय के राजा अनेक और बड़ी-बड़ी उपाधियाँ धारण करते थे, जो उनके द्वारा विजित राजा उनकी अधीनता स्वीकार करते हुए देते थे ।

जैसे : महाराजाधिराज, परमभट्टारक, परमेश्वर त्रिभुवन-चक्रवर्तिन आदि।

Bihar Board Class 7 Civics Book Solution प्रश्न 4.
बिहार और बंगाल में किन वंशों का शासन था?
उत्तर-
बिहार और बंगाल में क्रमश सेन तथा पाल वंशों का शासन था।

Class 7 Social Science Bihar Board प्रश्न 5.
तमिल क्षेत्र में किस तरह की सिंचाई व्यवस्था का विकास हुआ?
उत्तर-
सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था हेतु डेल्टाई क्षेत्र में तट बनाए गए और पानी को खेतों तक पहुँचाने के लिए नहरें खोदी गई । सिंचाई के लिये कुंओं की संख्या बढ़ाई गई । वर्षा का पानी बर्बाद न हो, इसलिए उस पानी को एकत्र करने के लिए बड़े-बड़े सरोवर बनाए गए। ये सभी काम योजनाबद्ध तरीके से किए गए। राज कर्मचारियों के साथ स्थानीय किसानों का सहयोग भी लिया गया ।

Class 7 History Chapter 2 Bihar Board प्रश्न 6.
कन्नौज शहर तीन शक्तियों के संघर्ष का केन्द्र बिन्दु क्यों बना ?
उत्तर-
कन्नौज उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध नगर था, जो कभी हर्षवर्द्धन की राजधानी रह चुका था । इसं नगर पर अधिकार का तात्पर्य था कि वह शासक गंगा-यमुना दोआब के उपजाऊ मैदान पर अधिकार कर लेता तो राजस्व का एक बड़ा जरिया बनता । यहाँ से तीनों में से किन्हीं दो पर बेहतर ढंग से नियंत्रण रखा जा सकता था ।

कन्नौज गंगा के किनारे अवस्थित था, अत: वहाँ से अधिक व्यापारिक कर वसूले जाने की आशा थी । इन्हीं कारणों से कन्नौज गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल ये तीनों का केन्द्र बिन्दु बन गया। ये तीनों शक्तियाँ लड़ते-लड़ते पस्त हो गई और तीनों के राज्य समाप्त हो गए।

प्रश्न 7.
महमूद गजनवी अपनी विजय अभियानों में क्यों सफल रहा?
उत्तर-
महमूद गजनवी अपनी विजय अभियानों में ही लूट अभियानों को अपनाया । उसने जब भी आक्रमण किया तो मंदिरों के साथ बड़े-बड़े नगरों को लूटा । उसने कभी भी भारत में अपने स्थायी शासन की बात नहीं सोची । इन लूट अभियानों में सदैव सफल होते रहने का एकमात्र कारण था कि यहाँ के राजाओं-शासकों में मेल नहीं था । राजपूत यद्यपि शक्तिशाली थे लेकिन उन्होंने आपस में ही लड़ते रहने को अपनी शान समझी । एक राज्य लूटता रहता तो अन्य सभी देखते रहते और अन्दर ही अन्दर प्रसन्न भी होते रहते । उनको इतनी समझ नहीं थी कि यह स्थिति कभी उन पर भी आ सकती है।

और यही हुआ और इसी से महमूद गजनवी अपने अभियानों में सफल होता रहा ।

प्रश्न 8.
सामंतवाद का उदय किस प्रकार हुआ ?
उत्तर-
7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच भारत में सामंतवाद का उदय हुआ। उस समय की पुस्तकों तथा अन्य अभिलेखों में सामंत को अनेक नाम दिले गये हैं । जैसे : सामंत, राय, ठाकुर, राणा, रावत इत्यादि । उस समय के राजा जब किसी अन्य राजा को युद्ध में हराता था तो उसके राज्य को अपने राज्य में मिला लेता था । लेकिन लगभग 1000 ई० के आसपास युद्ध में हारे हुए राजा को उस स्थिति में उसके राज्य वापस मिल जाते थे जब बह विजयी राजा की अधीनता मान लेता था ।

बदले में उसे कुछ शर्ते भी माननी पड़ती थीं । पराजित राजा को यह स्वीकार करना पड़ता था कि विजयी राजा उसका स्वामी है और वह विजयी राजा के चरणों में रहने वाला दास है । पराजित राजा विजयी राजा का ‘सामंत’ कहलाता था। इसी प्रकार सामंतवाद का उदय हुआ।

प्रश्न 9.
तत्कालीन राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था आज की प्रशासनिक व्यवस्था से कैसे भिन्न थी ?
उत्तर-
तत्कालीन राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था आज की प्रशासनिक व्यवस्था से बहुत अर्थों में भिन्न थी । आज प्रजातांत्रिक व्यवस्था है जबकि उस समय राजतंत्र था । उस समय के अधिकारी राजा की मर्जी से नियुक्त होते थे जबकि आज प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है।

तत्कालीन केन्द्रीय शासन से सम्बद्ध अनेक पदाधिकारियों का उल्लेख मिलता है । विदेश विभाग के प्रधान को ‘संधि-विग्रहक’ कहा जाता था,

जबकि आज केन्द्रीय सरकार में खासतौर में एक विदेश विभाग है, जिसकी देख-रेख प्रधान सचिव के हाथ में होता है । इसके ऊपर एक विदेश मंत्री होता है। आज के राजस्व विभाग को वित्त मंत्री के अधीन रखा गया है। इस विभाग में भी मुख्य सचिव के नीचे अधिकारियों, कर्मचारियों का एक समूह काम करता है। ‘आयकर’ विभाग राजस्व विभाग का ही एक अंग है। भाण्डारिक जैसा अधिकारी आज नहीं हुआ करते।

उस समय ‘भांडारिक’ इसलिए हुआ करते थे क्योंकि कर अनाज के रूप में भी वसूला जाता है । उस समय महादण्डनायक होता था जो पुलिस विभाग का प्रधान होता था। लेकिन आज दण्ड देने के लिए न्यायापालिका अलग है। और पुलिस विभाग अलग है। आज पुलिस का काम दोषियों को पकड़ना मात्र है। दंड न्यायपालिकाएं दिया करती हैं। इस प्रकार देखते हैं कि तत्कालीन राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था आज की प्रशासनिक व्यवस्था से कई अर्थों में भिन्न थी।

प्रश्न 10.
क्या आज भी हमारे समाज में सामंतवादी व्यवस्था के लक्षण दिखाई देते हैं?
उत्तर-
आज दिखाने के लिये तो सामंती व्यवस्था हमारे समाज में नहीं है, लेकिन मध्यकालीन सामंती व्यवस्था से भी अधिक कर सामंतों-सा राजनीतिक बाहुबलियों का उदय हो गया है । ये कुछ न होकर सबकुछ है । सभी बाहुबली किसी-न-किसी राजनीतिक दल के किसी दबंग नेता से जुड़ा है। कुछ बाहुबली तो खास-खास राजनीतिक दलों के किसी-न-किसी पद पर आसीन होकर अपने ओहदे का धौंस दिखाकर जनता का भय दोहन करते हैं।

प्रश्न 11.
मध्यकाल के मंदिर अपने धन-दौलत के लिए काफी प्रसिद्ध थे । भव्यता के दृष्टिकोण से आप अपने पास के मंदिर से तुलना करें।
उत्तर-
धन-दौलत की दृष्टि से आज तिरुपति मंदिर तथा सिरडी का साई राम मंदिर से हम कर सकते हैं । हमारे आस-पास के मंदिरों से यदि तुलना करें तो पटने का महावीर मंदिर किसी भी दृष्टि से भव्यता और धन-धान्य से किसी प्रकार कम नहीं है । आधुनिक काल में निर्मित इस मंदिर में आधुनिकता के पुट है । दान-दक्षिणा में यहाँ भी भारी चढ़ावा चढ़ता है। मंदिर अपनी आय से अनेक समाज सेवा-संस्थान चलाता है ।

प्रश्न 12.
भारत के मानचित्र पर प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंश द्वारा शासित क्षेत्रों को दिखाएँ । वर्तमान समय में भारत के किस भाग में अवस्थित है ?
उत्तर-
Bihar Board Class 7 Social Science History Solutions Chapter 2 नये राज्य एवं राजाओं का उदय 1

Bihar Board Class 7 Social Science नये राज्य एवं राजाओं का उदय Notes

पाठ का सार संक्षेप 

अरब, जो व्यापारिक दृष्टि से गाँव बसाकर रहने लगे थे, आगे चलकर उस क्षेत्र पर अपना राज्य स्थापित कर लिया । इसी समय उत्तर एवं मध्य भारत में राजपूतों का उदय हुआ । इनका उदय गुप्तवंशीय साम्राज्य के पतन के बाद 7वीं से 12वीं सदी के बीच हुआ । परिणाम हुआ कि उत्तर और दक्षिण दोनों ओर के भारतीय क्षेत्रों पर छोटे-छोटे राज्यों का उदय हो गया । हर्षवर्द्धन ने उन छोटे राज्यों को मिलाकर एक बड़ा राज्य बनाने का असफल प्रयास किया ।

आंध्र, सिंध, विदर्भ और कलिंग के राजा नागभट्ट प्रथम के आगे उसी समय हार चुके थे, जब वे राजकुमार थे। उन्होंने कन्नौज के राजा चक्रयुद्ध को भी हरा दिया ।’ उन्होंने वंग, अनंत, मालवा के राजाओं को पराजित किया । कहीं-कहीं शासक प्रजा द्वारा भी नियुक्त किये गए । बंगाल का राजा गोपाल ऐसा ही नियुक्त शासक था । इसने पाल वंश की नींव रखी । कश्मीर में एक महिला शासक भी थों जिनका नाम दिद्दा था, मंत्रियों और सेना की मदद से शासिका बनी थीं ।

व्यापारियों के संगठन के साथ सत्ता में साझेदारी करता था। भू-राजस्व उपज. का तीसरे भाग से लेकर छठे भाग तक वसूला जाता था ।

निम्न वर्गीय लोगों में राज्य पर संकट के समय कुछ करने की भावना नहीं थी । इस काल में परम्परागत चार वर्णों-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र के अलावा अनेक नई जातियों और उपजातियों का प्रादुर्भाव हो गया । अब वर्ण-व्यवस्था जन्मना से हटकर कर्मणा हो गई थी।

महमूद गजनवी की मृत्यु के बाद भी तुर्क और अफगानों का आक्रमण जारी रहा और अंततः वे भारत में स्थायी साम्राज्य की स्थापना में सफल रहे । इस जीत का हीरो मुहम्मद गौरी (गौरी) था । अनेक बार हारने के बाद अंततः वह 1192 में पृथ्वीराज को हराकर दिल्ली तक पहुंच गया और दिल्ली सल्तनत की स्थापना कर लौट गया । तब से दिल्ली में सुल्तानों का शासन आरंभ हुआ ।

उन दिनों दक्षिण भारत में भी अनेक छोटे-छोटे राज्य थे । प्रमुख राज्य राष्ट्रकूट तथा चालुक्य थे । फिर सुदूर दक्षिण में चोल, चेल और चालुक्य और पाण्ड्य प्रमुख थे।

अंत में चोल राजाओं ने तंजौर के आसपास के क्षेत्र तमिलनाडु से अपना शासन प्रारम्भ किया। धीरे-धीरे पल्लव वंश के शासक आदि को हटाकर उन्होंने अपने को दक्षिण भारत में एक मजबूत साम्राज्य का राजा बना लिया। तंजौर भी इसी के अधीन था । चोल वंश का सबसे प्रसिद्ध राजा राजराज प्रथम और उसका पुत्र राजेन्द्र चोल था। हालाँकि इस राज्य का संस्थापक विजयालय था जिसकी मृत्यु 871 में हो गई । राजेन्द्र चोल एक महत्वाकांक्षी शासक था, जिसने श्रीलंका से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तक अपने राज्य का विस्तार कर लिया । चोल राज्य अब राष्ट्र कहा जाने लगा । प्रशासन की सुविा के लिये सम्पूर्ण राज्य अनेक इकाइयों में बँटा था, जिन्हें मंडलम कहा जाता था ।

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 3 बंधुत्व, जाति तथा वर्ग : आरंभिक समाज

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 3 बंधुत्व, जाति तथा वर्ग : आरंभिक समाज Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 3 बंधुत्व, जाति तथा वर्ग : आरंभिक समाज

Bihar Board Class 12 History बंधुत्व, जाति तथा वर्ग : आरंभिक समाज Textbook Questions and Answers

उत्तर दीजिए (लगभग 100-150 शब्दों में)

बंधुत्व, जाति तथा वर्ग के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
स्पष्ट कीजिए कि विशिष्ट परिवारों में पितृवंशिकता क्यों महत्त्वूपर्ण रही होगी?
उत्तर:

  1. विशिष्ट परिवारों में पितृवंशिकता का महत्त्व-() विशिष्ट परिवारों की पितृवंशिकता में पिता की मृत्यु के पश्चात् संसाधनों पर पुत्र का अधिकार हो जाता है और वह इच्छानुसार उनका उपभोग करता है।
  2. अधिकांश राजवंशों ने पितृवंशिकता प्रणाली का अनुसरण किया। इसमें कभी-कभी परिवर्तन भी होता था। कभी-कभी पुत्र के न होने पर एक भाई दूसरे भाई का उत्तराधिकारी हो जाता था तो कभी बंधु-बांधव गद्दी पर अपना अधिकार जमा लेते थे। कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में स्त्रियों जैसे-प्रभावती गुप्त (चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री) सत्ता का उपयोग करती थीं।
  3. पितृवंशिकता की परम्परा प्राचीन काल से थी। ऋग्वेद जैसे कर्मकांडीय ग्रंथों में लिखे गए मंत्रों से भी यह बात स्पष्ट होती है।
  4. इस परम्परा के कारण उत्तराधिकार के लिए संघर्ष नहीं होता था जैसे-मुगल वंश में गद्दी के लिए अनेक संघर्ष हुए।

बंधुत्व जाति तथा वर्ग Bihar Board प्रश्न 2.
क्या आरंभिक राज्यों में शासक निश्चित रूप से क्षत्रिय ही होते थे? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
शास्त्रों के अनुसार केवल क्षत्रिय ही राजा हो सकते थे परंतु अनेक बार ऐसा नहीं हुआ और राजवंशों की उत्पत्ति अन्य वर्गों से हुई है। मौर्य वंश ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की परंतु उनकी उत्पत्ति के विषय में विवाद है। बाद के बौद्ध ग्रंथ उन्हें क्षत्रिय बताते हैं जबकि ब्राह्मणीय ग्रंथ उन्हें निम्न कुल का मानते हैं। मौर्यों के उत्तराधिकारी शुंग और कण्व ब्राह्मण थे।

गुप्त राजवंश को लेकर भी विवाद है। मध्य एशिया से आने वाले शकों को म्लेच्छ, बर्बर अथवा अन्य देशीय कहा गया है। सातवाहन कुल का संबंध भी ब्राह्मणों से था। इस प्रकार कई राजवंश क्षत्रिय वर्ग से संबंधित नहीं थे। वस्तुतः राजनीतिक सत्ता का उपयोग ऐसा प्रत्येक व्यक्ति कर सकता था जो समर्थन और संसाधन जुटा सके।

बंधुत्व जाति तथा वर्ग आरंभिक समाज Notes Bihar Board प्रश्न 3.
द्रोण, हिडिम्बा और मातंग की कथाओं में धर्म के मानदण्डों की तुलना कीजिए व उनके अंतर को भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
द्रोण:
गुरु द्रोणाचार्य क्षत्रिय राजकुमारों को युद्ध विद्या सिखाते थे। जब निषाद वर्ग के एकलव्य ने उन्हें अपना गुरु बनाना चाहा तो उन्होंने इंकार कर दिया। वह उनकी मूर्ति स्थापित करके धनुर्विद्या का अभ्यास करता रहा और उनके शिष्यों से आगे निकल गया। द्रोण को यह असह्य था और उन्होंने एकलव्य की विद्या नष्ट करने के लिए उसके दायें हाथ का अंगूठा दान में मांग लिया। वस्तुतः एकलव्य ने धर्म के मानदण्डों का उल्लंघन करके धनुर्विद्या ग्रहण करने का प्रयास किया।

हिडिम्बा:
हिडिम्बा राक्षस पुत्री थी। वह द्वितीय पांडव एवं बलशाली भीम पर मोहित हो गयी। पांडवों के इंकार करने पर भी वह जिद्द पर अड़ी रही। अंत में भीम से उसकी शादी हो गयी। यह कार्य भी धर्म के मानदण्डों के प्रतिकूल था। एक क्षत्रिय राजकुमार अपने से निम्न जाति से विवाह नहीं कर सकता था।

मातंग:
चाण्डाल भी अपने को समाज का अंग समझते थे। इसकी पुष्टि मातंग की कथा से होती है। मातंग बोधिसत्व (पूर्व जन्म में बुद्ध) का नाम था। उन्होंने चाण्डाल के रूप में जन्म लिया। उनका विवाह व्यापारी पुत्री दिथ्य मांगलिक नामक कन्या से हुआ और मांडव्य नामक पुत्र का जन्म हुआ। एक बार भिखारी के रूप में मातंग ने मांडव्य से उसके दरवाजे पर भोजन माँगा परंतु उसने उसकी अपेक्षा की।

बाद में उसकी माँ दिथ्थ ने इसके लिए उनसे माफी माँगी। यहाँ भी हमें धर्म के मानदण्डों का उल्लंघन स्पष्ट नजर आता है। वस्तुतः ऐसे मानदण्ड खोखले थे और समाज में वेष भावना की सृष्टि करते थे।

Bihar Board 12th History Book Pdf प्रश्न 4.
किन मायनों में सामाजिक अनुबंध की बौद्ध अवधारणा समाज के उस ब्राह्मणीय दृष्टिकोण से भिन्न थी जो ‘पुरुषसूक्त’ पर आधारित था।
उत्तर:
बौद्धों ने समाज में फैली विषमताओं के संदर्भ में एक अलग अवधारणा प्रस्तुत की। इस धर्म के अनुयायियों ने समाज में फैले अंतर्विरोधों को दूर करने के सक्षम उपायों पर भी अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

सुत्तपिटक नामक ग्रंथ के अनुसार यद्यपि मनुष्य और वनस्पति अविकसित थी परंतु सर्वत्र शांति का माहौल था। मनुष्य प्राकृति से उतना ही ग्रहण करते थे जितना एक समय भोजन की आवश्यकता होती है। आगे चलकर मनुष्य लालची हो गया और उसमें हिंसक भाव पनपने लगे। इस स्थिति पर नियंत्रण लगाने के लिए ही राजा का चयन किया जाने लगा।

Bihar Board Class 12 History Book प्रश्न 5.
निम्नलिखित अवतरण महाभारत से है जिसमें पांडव युधिष्ठिर दूत संजय को संबोधित कर रहे हैं:
संजय धृतराष्ट्र गृह के सभी ब्राह्मणों और मुख्य पुरोहित को मेरा विनीत अभिवादन दीजिएगा। मैं गुरु द्रोण के सामने नतमस्तक होता हूँ ……. मैं कृपाचार्य के चरण स्पर्श करता हूँ ……. (आर) कुरुवंश के प्रधान भीष्म के। मैं वृद्ध राजा (धृतराष्ट्र) को नमन करता हूँ।

मैं उनके पुत्र दुर्योधन और उनके अनुजों के स्वास्थ्य के बारे में पूछता हूँ तथा उनको शुभकामनाएँ देता हूँ ……. मैं उन सब युवा कुरु योद्धाओं का अभिनंदन करता हूँ जो हमारे भाई, पुत्र और पात्र हैं ……. सर्वोपरि मैं उन महामति विदुर को (जिनका जन्म दासी से हुआ है) नमस्कार करता हूँ जो हमारे पिता और माता के सदृश हैं ……. मैं उन सभी वृद्धा स्त्रियों को प्रणाम करता हूँ जो हमारी माताओं के रूप में जानी जाती हैं।

जो हमारी पलियाँ हैं उनसे यह कहिएगा कि, “मैं आशा करता हूँ कि वे सुरक्षित हैं” …… मेरी ओर से उन कुलवधुओं का जो उत्तम परिवारों में जन्मी हैं और बच्चों की माताएँ हैं, अभिनंदन कीजिएगा तथा हमारी पुत्रियों का आलिंगन कीजिएगा …….. सुंदर, सुंगधित, सुवेशित गणिकाओं को शुभकामनायें दीजिएगा। दासियों और उनकी संतानों तथा वृद्ध, विकलांग और असहाय जनों को भी मेरी ओर से नमस्कार कीजिएगा …….

इस सूची को बनाने के आधारों की पहचान कीजिए-उग्र, लिंग, भेद व बंधुत्व के सन्दर्भ में क्या कोई अन्य आधार भी हैं? प्रत्येक श्रेणी के लिए स्पष्ट कीजिए कि सूची में उन्हें एक विशेष स्थान पर क्यों रखा गया है?

उत्तर:

  1. उस: इस सूची में विभिन्न उम्र के लोग यथा-वृद्ध-वृद्धा, युवक-युवतियाँ, वर-वधुएँ, पुत्र-पुत्रियाँ शामिल हैं।
  2. लिंग: इस सूची में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग दोनों हैं जैसे-वृद्ध-वृद्धा, युवक-युवतियाँ, धर-वधुएँ, पुत्र-पुत्रियाँ आदि।
  3. भेद: इस सूची में विभिन्न प्रकार के रिश्ते और संबंध हैं। जैसे-पितामह (भीष्म), गुरु (द्रोण और कृपाचार्य), पिता (धृतराष्ट्र), माताएँ, पलियाँ, कुलवधुएँ, दास, बाप्तियाँ, गणिकायें।
  4. बंधुत्व: युधिष्ठिर के भाई तथा दुर्योधन के भाई। यहाँ अन्य आधार भी हो सकते हैं जैसे बांधव और सेवक आदि का व्यवहार आदि। रिश्तों के आधार पर इन्हें एक स्थान पर रख गया है।

निम्नलिखित पर एक लघु निबंध लिखिए। (लगभग 500 शब्दों में)

Bihar Board Class 12 History Syllabus प्रश्न 6.
भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध इतिहासकार मौरिस विंटरविट्ज ने महाभारत के बारे में लिखा था कि: “चूँकि महाभारत सम्पूर्ण साहित्य का प्रतिनिधित्व करता है ….. बहुत सारी और अनेक प्रकार की चीजें इसमें निहित हैं …… (वह) भारतीयों की आत्मा की अगाध गहराई को एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।” चर्चा कीजिए।
उत्तर:
महाभारत का महत्त्व:
1. सम्पूर्ण साहित्य का प्रतिनिधित्व:
महाभारत सम्पूर्ण साहित्य का प्रतिनिधित्व करता है। इतिहासकार महाभारत की विषय-वस्तु को दो मुख्य शीर्षकों-आख्यान तथा उपदेशात्मक में विभाजित करते हैं आख्यान में कहानियों का संग्रह है और उपदेशात्मक भाग में सामाजिक आचार-विचार के मापदण्ड हैं।

लेकिन यह विभाजन स्पष्ट नहीं है। अधिकांश इतिहासकारों का विचार है कि महाभारत के वस्तुतः एक भाग में नाटकीय कथानक था जिसमें उपदेशात्मक अंश बाद में जोड़े गये। आरम्भिक संस्कृत परम्परा में महाभारत को इतिहास की श्रेणी में रखा गया है। महाभारत का स्वरूप काव्यात्मक होने मात्र से इसको इतिहास न मानना एक भारी भूल हो जाएगी।

2. ऐतिहासिक ग्रंथ:
ऋषि वेदव्यास ने युद्ध आरम्भ होने से पहले ही इसका इतिहास लिखने का मन बना लिया था। युद्ध के दौरान वेदव्यास इसकी प्रत्येक प्रकार की विस्तृत जानकारी लिखते रहे।

यदि यह केवल एक उपन्यास होता तो वेदव्यास जैसे महान् विद्वान इस युद्ध की इतनी छोटी-छोटी तथा अनावश्यक घटना का वर्णन क्यों करते। महाभारत में अनेक राजवंशों और शासकों का वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें राजा, उसकी पत्नी, उसकी संतान और उसके संबंधियों का वर्णन भी है।

3. धर्म और अर्धम का प्रतिरूप:
महाभारत में कौरव-पाण्डवों का युद्ध केवल धर्म तथा अधर्म के युद्ध का रूपक मात्र है। युधिष्ठिर धर्म के प्रतीक हैं और दुर्योधन अधर्म का प्रतिरूप है। इस धर्म और अधर्म के युद्ध में कृष्ण ईश्वर स्वरूप हैं और धर्म का साथ देते हैं।

4. अन्य महत्त्व:
महाभारत तथा भागवत पुराण जैसे अन्य धार्मिक ग्रंथ उस समय के नक्षत्रों तथा उपग्रहों की स्थिति के बारे में एकदम सही जानकारी देते हैं।

12th History Book Bihar Board प्रश्न 7.
क्या यह संभव है कि महाभारत का एक ही रचयिता था? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
साहित्यिक परम्परा में वेदव्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है परंतु महाभारत के लेखक को लेकर विद्वानों में विवाद है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि संभवतः मूल कथा के रचयिता भाट सारथी (सूत) युद्ध क्षेत्र में जाते थे और उनकी विजय और उपलब्धियों के विषय में कवितायें लिखते थे।

पाँचवीं शताब्दी सा०यु०पू० से ब्राह्मणों ने इस कथा परम्परा पर अपना अधिकार कर लिया और इसे लिखने लगे। लगभग 200 सा०यु०पू० से 200 सा०यु० के मध्य तक इस ग्रंथ के रचना काल का दूसरा चरण दिखाई देता है।

200-400 ई० के मध्य मनुस्मृति से मिलते-जुलते अनेक उपदेशात्मक प्रकरण महाभारत में जोड़े गये। शुरू में यह ग्रंथ 10,000 श्लोकों का था परंतु जोड़ते-जोड़ते एक लाख श्लोकों का हो गया। इससे ज्ञात होता है कि महाभारत का एक ही रचयिता नहीं था।

Bihar Board Solution Class 12th History प्रश्न 8.
आरम्भिक समाज में स्त्री-पुरुष के संबंधों की विषमतायें कितनी महत्त्वपूर्ण रही होंगी? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
आरम्भिक समाज के स्त्री पुरुष के संबंधों की विषमताओं का महत्त्व –
1. प्राचीन भारत में स्त्री-पुरुष के संबंधों में विषमता रही है परंतु कहीं न कहीं उसका महत्त्व अवश्य है। उदाहरण के लिए-स्त्रियों को विवाह के पश्चात् अपने पिता का गोत्र छोड़कर अपने पति का गोत्र अपनाना पड़ता था क्योंकि उस समय पुरुषों का अधिक महत्त्व था।

2. आरम्भिक समाज में पुरुषों द्वारा स्त्री के अस्तित्त्व और सम्मान का ध्यान नहीं रखा जाता था। महाभारत की द्यूतक्रीड़ा में युधिष्ठिर स्वर्ण, हस्ति, रथ, दास, सेना, कोष, राज्य तथा अपनी प्रजा की संपत्ति, अनुजों और मए गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट टू (उच्च माध्यमिक) इतिहास, फिर स्वयं को दाँव पर लगाकर हार गये। इसके बाद उन्होंने पाण्डवों की सहपत्नी द्रोपदी को भी दाँव पर लगाया और उसे भी हार गये। क्या इससे स्त्री-पुरुष संबंध मधुर बन सकता है।

3. इस घटना पर द्रोपदी ने भरी सभा में प्रश्न उठाया कि क्या स्त्री को दाँव पर लगाना उचित है? इसे अनुचित नहीं माना गया क्योंकि पत्नी पर पति का नियंत्रण सदैव रहता है। आज की नारी इस नियंत्रण को स्वीकार नहीं कर सकती। युधिष्ठिर हारने के बाद दास बन गये थे। अतः एक दास किसी अन्य को दाँव पर लगाने का अधिकार नहीं रखता था।

4. आरम्भिक समाज में स्त्रियों को सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक क्षेत्रों में समान दर्जा नहीं मिला था। उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था तथा उनको पारिवारिक संपत्ति का कोई भाग नहीं दिया जाता था।

5. वैदिक काल में स्त्रियों का सम्मान किया जाता था। स्त्रियों को अपना वर चुनने का अधिकार था जो स्वयंवर प्रथा द्वारा होता था। उत्तर वैदिक काल में उनसे सारे अधिकार छीन लिए गए।

6. विवाह के समय मिले उपहारों पर स्त्रियों का स्वामित्व माना जाता था और इसे स्त्रीधन की संज्ञा दी जाती थी। इस संपत्ति को उनकी संतान विरासत के रूप में प्राप्त कर सकती थी। इस पर उसके पति का कोई अधिकार नहीं होता था किन्तु मनुस्मृति स्त्रियों को पति की आज्ञा के विरुद्ध पारिवारिक संपत्ति रखने अथवा अपने बहुमूल्य धन का गुप्त संचय करने के अधिकार से भी वंचित करती थी।

7. उच्च वर्ग की महिलायें यथा-वाकाटक रानी प्रभावती गुप्त संसाधनों पर अपना नियंत्रण रखती थी। इस प्रकार स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक हैसियत की भिन्नता उनके नियंत्रण में भिन्नता की वजह से थी।

Bihar Board Class 12 History Book Solution प्रश्न 9.
उन साक्ष्यों की चर्चा कीजिए जो यह दर्शाते हैं कि बंधुत्व और विवाह संबंधी ब्राह्मणीय नियमों का सर्वत्र अनुसरण नहीं होता था।
उत्तर:
1. परिवार एक बड़े समूह का हिस्सा होते हैं जिन्हें हम संबंधी कहते हैं। संबंधियों को ‘जाति समूह’ भी कहा जा सकता है। परिवार के संबंधों को स्वाभाविक और रक्त संबंध माना जाता है। कुछ समाजों में भाई-बहन (चचेरे, मौसेरे) से खून का रिश्ता स्वीकार किया जाता है परंतु अन्य समाज इसे स्वीकार नहीं करते हैं।

2. पितृवंशिकता में पुत्र पिता की मृत्यु के पश्चात् उनके संसाधनों का उत्तराधिकारी बनता है। राजवंश पितृवंशिकता व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। पुत्र के न होने की दशा में एक भाई दूसरे का उत्तराधिकारी हो जाता था।

3. कभी-कभी बंधु-बांधव भी गद्दी के उत्तराधिकारी हो जाते थे। कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में स्त्रियाँ भी उत्तराधिकारी बन जाती थी जैसे-चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती गुप्त।

4. प्रतिष्ठित परिवार अपनी कन्याओं और स्त्रियों के जीवन पर विशेष ध्यान देते थे। आगे चलकर कन्यादान पिता का महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य मान लिया गया। नगरीकरण के साथ विचारों का आदान-प्रदान तेज हो गया। इसके फलस्वरूप आरम्भिक आस्था और विश्वासों को मान्यता मिलनी कम हो गयी तथा लोगों ने स्वयंवर प्रथा को अपना लिया।

5. धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र में विवाह के आठ प्रकार मान्य हैं। इनमें से प्रथम चार ‘उत्तम’ माने जाते थे और शेष को निंदित माना गया। सम्भवतः ये विवाह पद्धतियाँ उन लोगों में प्रचलित थीं जो ब्राह्मणीय नियमों को नहीं मानते थे।

6. ब्राह्मणीय नियमों के अनुसार स्त्रियों का गोत्र पति का गोत्र माना जाता था। सातवाहन वंश में इस प्रथा को नहीं माना गया और पत्नियों ने अपने पिता के गोत्र को जारी रखा।

मानचित्र कार्य

Class 12 History Notes Bihar Board प्रश्न 10.
इस अध्याय के मानचित्र की अध्याय 2 के मानचित्र 1 से तुलना कीजिए। कुरु-पांचाल क्षेत्र के पास स्थित महाजनपदों और नगरों की सूची बनाइए।
उत्तर:

  1. इस अध्याय के मानचित्र में विभिन्न महाजनपदों और नगरों को खुला दिखाया है जबकि अध्याय 2 के मानचित्र में ऐसा नहीं है।
  2. कुरु-पंचाल क्षेत्र के पास स्थित महाजनपद-शूरसेन, मत्स्य, वत्स, चेदि और अवन्ति हैं।
  3. कुरु-पांचाल क्षेत्र के पास स्थित नगर विराट, मथुरा, कौशाम्बी, उज्जयिनी, इन्द्रप्रस्थ और अहिच्छत्र हैं।

परियोजना कार्य (कोई एक)

बंधुत्व जाति तथा वर्ग Pdf Bihar Board प्रश्न 11.
अन्य भाषाओं में महाभारत की पुनर्व्याख्या के बारे में जानिए। इस अध्याय में वर्णित महाभारत के किन्हीं दो प्रसंगों का इन भिन्न भाषा वाले ग्रंथों में किस तरह निरूपण हुआ है उनकी चर्चा कीजिए। जो भी समानता और विभिन्नता आप इन वृत्तान्त में देखते हैं उन्हें स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 12.
कल्पना कीजिए कि आप एक लेखक हैं और एकलव्य की कथा को अपने दृष्टिकोण से लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 12 History बंधुत्व, जाति तथा वर्ग : आरंभिक समाज Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
इतिहासकार साहित्यिक परम्पराओं का अनुसरण क्यों करते हैं?
उत्तर:

  1. कुछ ग्रंथ सामाजिक व्यवहार के मानदण्ड निर्धारित करते थे।
  2. अन्य ग्रंथ समाज का चित्रण करते थे।
  3. ये ग्रंथ कभी-कभी समाज में विद्यमान विभिन्न रिवाजों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करते थे।

प्रश्न 2.
महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण कब और किसके नेतृत्व में शुरू हुआ?
उत्तर:
1919 में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान वी० एस० सुकथांकर के नेतृत्व में।

प्रश्न 3.
महाभारत को विशाल महाकाव्य क्यों कहते हैं?
उत्तर:

  1. महाभारत वर्तमान स्वरूप में एक लाख से अधिक श्लोकों का है और इसमें विभिन्न सामाजिक श्रेणियों और परिस्थितियों का लेखा-जोखा है।
  2. इस ग्रंथ की रचना लगभग सा०यु०पू० 500 से आगे 1000 वर्ष तक होती रही।

प्रश्न 4.
महाभारत के प्रेषण में अनेक प्रभेद क्यों सामने आते हैं?
उत्तर:

  1. प्रभावशाली परंपराओं और लचीले स्थानीय विचार और आचरण के बीच संवाद कायम करके सामाजिक इतिहास लेखन के कारण तथा।
  2. इन संवादों में द्वन्द्व और मतैक्य दोनों की समालोचना रहने के कारण।

प्रश्न 5.
अंतर्विवाह और बहिर्विवाह में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गोत्र के भीतर होने वाले और गोत्र से बाहर या अन्य गोत्र के साथ स्थापित किए जाने वाल विवाह-संबंध।

प्रश्न 6.
वंश क्या है?
उत्तर:
किसी भी परिवार का पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकास-क्रम।

प्रश्न 7.
इतिहासकार परिवार और बंधुता संबंधी विचारों का विश्लेषण क्यों करते हैं?
उत्तर:
समाज की मूल इकाई परिवार होने से उनको धारणा का समय-विशेष में कार्यान्वयन समझने के लिए अथवा सामाजिक इतिहास लेखन के लिए।

प्रश्न 8.
पितृवंशिकता और मातृवंशिकता में क्या अंतर है?
उत्तर:
क्रमश: पिता के पुत्र फिर पौत्र, प्रपौत्र आदि और माता से जुड़ी हुई वंश परंपरा।

प्रश्न 9.
ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में वर्गों की उत्पत्ति के क्या उल्लेख हैं?
उत्तर:

  1. जगत के सभी तत्त्व जिनमें चारों वर्ण शामिल हैं आदि मानव के शरीर से उपजे थे।
  2. ब्राह्मण उसका मुँह था, उसकी भुजाओं से क्षत्रिय बना, वैश्य उसकी जंधा थी। उसके पैर से शूद्र की उत्पत्ति हुई।

प्रश्न 10.
द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा क्यों मांगा?
उत्तर:
अर्जुन की प्रतिष्ठा तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर को बनाए रखने के लिए।

प्रश्न 11.
मंदसौर अभिलेख में वर्णित रेशम के बुनकरों की सामाजिक स्थिति क्या थी?
उत्तर:

  1. ये लाट (गुजरात) प्रदेश के निवासी थे लेकिन कालान्तर में यहाँ से मंदसौर चले गये।
  2. उन्होंने तत्कालीन लाट शासक के अत्याचारों से तंग आकर मंदसौर के जनप्रिय शासक की शरण पाने के लिए यह देशांतर किया था।

प्रश्न 12.
बहुपत्नी प्रथा एवं बहुपति प्रथा में क्या अंतर है?
उत्तर:
क्रमशः एक पुरुष की अनेक पलियाँ होना और एक स्त्री के अनेक पति होना।

प्रश्न 13.
आचार-संहितायें क्यों तैयार की गई?
उत्तर:
विविध जन-समुदाय के साथ विचारों का आदान-प्रदान होने की दशा में अपनी-अपनी विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के लिए।

प्रश्न 14.
गोत्र क्या है? इसके क्या नियम थे?
उत्तर:

  1. ऋषियों की वंश-परंपरा।
  2. विवाह पश्चात् स्त्रियों के गोत्र की पहचान पति के गोत्र से होना और अन्तर्विवाह की मान्यता का न रहना। एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे।

प्रश्न 15.
दो साक्ष्य बताइए जिसमें व्यक्ति का नाम माँ से शुरू होता था।
उत्तर:

  1. सातवाहन राजाओं के नाम यथा-गौतमीपुत्र शातकर्णी।
  2. बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित आचार्यों और शिष्यों को पीढ़ियों की सूची।

प्रश्न 16.
वर्ण व्यवस्था के नियमों का पालन करवाने के लिए ब्राह्मणों ने क्या नीतियाँ अपनायीं?
उत्तर:

  1. वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति का दैवी सिद्धांत प्रतिपादित किया।
  2. इस व्यवस्था के नियमों का अनुपालन कराने का शासकों को निर्देश।
  3. प्रतिष्ठा के जन्म पर आधारित होने की जन जागरूकता उत्पन्न करना।

प्रश्न 17.
600 सा०यु०पू० से 600 सायु० के दौरान हुए आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तनों ने समकालीन समाज पर क्या प्रभाव डाला?
उत्तर:

  1. शिल्प विशेषज्ञों के एक विशिष्ट सामाजिक समूह का उदय हुआ।
  2. सम्पत्ति के असमान वितरण से सामाजिक विषमताएँ बढ़ गयीं।
  3. वन क्षेत्रों में कृषि व्यवसाय का विस्तार होने से वहाँ रहने वाले लोगों की जीवन शैली में बदलाव आया।

प्रश्न 18.
महाभारत की मूल कथा का संबंध किससे है?
उत्तर:

  1. महाभारत की मूल का संबंध कौरव तथा पाण्डव नामक दो रक्त-संबंध परिवारों के बीच युद्ध से है।
  2. महाभारत के कुछ भाग विभिन्न सामाजिक समुदायों के आचार व्यवहार के मानदण्ड तय करते हैं क्योंकि इस ग्रंथ के मुख्य पात्र इन्हीं मानदण्डों का अनुसरण करते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 19.
मनुस्मृति क्या थी? इसका संकलन कब हुआ?
उत्तर:

  1. मनुस्मृति धर्मशास्त्रों तथा धर्मसूत्रों में सबसे बड़ा ग्रंथ था।
  2. इसका संकलन लगभग 200 सा०यु०पू० से 200 सा०यु० के बीच हुआ।

प्रश्न 20.
बाघ सदृश पति किसको और किसने कहा?
उत्तर:
नरभक्षी राक्षस की बहन हिडिम्बा ने पाडव भीम को।

प्रश्न 21.
मनुमृति में चाण्डालों के क्या कर्त्तव्य बताये ये हैं?
उत्तर:

  1. गाँव की सीमा से बाहर निवास करें।
  2. उच्छिष्ट बर्तनों का इस्तेमाल करें।
  3. मृतकों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनें।
  4. गाँव और नगरों का भ्रमण रात को न करें।

प्रश्न 22.
आरंभिक समाज में पैतृक संपत्ति का बंटवारा किस प्रकार होता था?
उत्तर:
ज्येष्ठ पुत्र को विरासत का विशेष हिस्सा और अन्य पुत्रों में समान वितरण।

प्रश्न 23.
आरंभिक समाज में स्त्री और पुरुष किस प्रकार संपत्ति अर्जित कर सकते थे?
उत्तर:

  1. मनुस्मृति के अनुसार पुरुष सात प्रकार से धन अर्जित कर सकते थे। विरासत, खोज, खरीद, विजय, निवेश, कार्य तथा भेंट के द्वारा।
  2. स्त्रियों के लिए संपत्ति अर्जन के छः तरीके थे। वैवाहिक अग्नि के सामने तथा वधुगमन के समय मिली भेंट, स्नेह के प्रतीक के रूप में तथा भ्राता, माता और पिता द्वारा दिए गये उपहार आदि।

प्रश्न 24.
महाकाव्य काल में सांपत्तिक अधिकार के मुख्य आधार क्या हैं?
उत्तर:

  1. इसके मुख्य आधार-लिंग तथा वर्ण थे। लिंग के आधार पर पिता की सम्पत्ति पर केवल उसके पुत्रों का अधिकार होता था।
  2. वर्ण व्यवस्था में तीनों उच्च वर्गों की सेवा करके ही शूद्र धन अर्जित कर सकते थे जबकि अन्य वर्ण एक से अधिक कार्यों से धन अर्जित कर सकते थे।

प्रश्न 25.
वर्ण और जात में क्या अन्तर है?
उत्तर:

  1. चार वर्ण-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के आपसी मेल से जातियों का जन्म हुआ।
  2. वर्गों का विभाजन कार्य के आधार पर किया गया जबकि जातियाँ जन्म पर आधारित थीं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
बीसवीं शताब्दी में किए गए महाभारत संकलन के विभिन्न सोपानों का वर्णन कीजिए। अथवा, महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने के लिए क्या-क्या कार्य किये गये?
उत्तर:
बीसवीं शताब्दी में किए गए महाभारत संकलन के विभिन्न सोपान –

  1. 1919 में प्रसिद्ध विद्वान वी० एस० सुकथांकर के नेतृत्व में एक अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी परियोजना की शुरूआत हुई। अनेक विद्वानों ने मिलकर महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर लिया।
  2. आरम्भ में देश के विभिन्न भागों से विभिन्न लिपियों में लिखी गई महाभारत की संस्कृत पांडुलिपियों को एकत्रित किया गया।
  3. पांडुलिपियों में पाए जाने वाले उन श्लोकों को चुना गया जो लगभग सभी पांडुलिपियों में पाये गये।
  4. उनका प्रकाशन 13,000 पृष्ठों में अनेक खंडों में किया गया।
  5. संस्कृत के पाठों में समानता ढूंढने का प्रयास किया गया।
  6. महाभारत के प्रेषण में अनेक क्षेत्रीय प्रभेदों का विवरण भी रखा गया।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारतीय इतिहास में उपनिषदों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
उपनिषद्:
उपनिषद् वैदिक साहित्य का अंतिम रूप है, इसलिए इन्हें वेदान्त भी कहते हैं। उपनिषद् का अर्थ है-ब्रह्म-ज्ञान के सिद्धांत। इनमें आत्मा और परमात्मा के स्वरूप का परिचय कराया गया है। इनमें कर्म, माया और मोक्ष के सिद्धांतों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

उपनिषदों में यज्ञों तथा कर्मकाण्ड की अपेक्षा जीवन की पवित्रता, सदाचार और अच्छे कर्मों पर बल दिया गया है। मुण्डकोपनिषद् में साफ लिखा है “यज्ञ रूपी नौकाएँ कमजोर हैं । संसार सागर से तरने के लिए इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता”।

उपनिषद् संख्या 108 में हैं लेकिन इनमें 11 उपनिषद् ही महत्त्वपूर्ण एवं प्रसिद्ध हैं। उपनिषद् ज्ञान के सर्वोत्तम भण्डार हैं। ये इतने लोकप्रिय हो चुके हैं कि संसार की कई भाषाओं में इनके अनुवाद हो चुके हैं। जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने उपनिषदों की प्रशंसा करते हुए लिखा है – “उपनिषद् संसार के साहित्य में सदा महत्त्वपूर्ण स्थान रखेंगे तथा प्रत्येक काल और प्रत्येक जाति में वे मनुष्य-मात्र की मानसिक उन्नति के प्रतीक रहेंगे।”

प्रश्न 3.
पितृवंशिक व्यवस्था की विशेषतायें बताइए।
उत्तर:
पितृवंशिक व्यवस्था की विशेषतायें:

  1. महाभारत युद्ध के पश्चात् पितृवंशिक उत्तराधिकार की घोषणा की गई। यद्यपि पितृवंशिकता महाकाव्य की रचना से पूर्व भी थी। परंतु महाभारत की मुख्य कथावस्तु ने इस आदर्श को सुदृढ़ किया।
  2. पितृवंशिकता में पुत्र पिता की मृत्यु के पश्चात् उनके संसाधनों का उत्तराधिकारी हो जाता था।
  3. अधिकांश राजवंश सा०यु०पू० छठी शताब्दी से पितृवंशिकता प्रणाली का अनुसरण करते थे।
  4. कभी-कभी पुत्र के न होने पर भाई एक-दूसरे का उत्तराधिकारी बन जाता था। यही नहीं बंधु-बांधव भी गद्दी पर आसीन हो जाते थे। स्त्रियाँ गद्दी पर बैठ जाती थीं।
  5. राजवंशों में पितृवंशिकता के प्रति झुकाव ऋग्वैदिक काल से था।

प्रश्न 4.
कौरव-पांडवों के मध्य युद्ध के क्या कारण थे?
उत्तर:
कौरव-पांडवों के मध्य युद्ध के कारण:

  1. धृतराष्ट्र कौरव और पांडु उनके छोटे भ्राता थे। धृतराष्ट्र के अंधे होने के कारण पांडु को हस्तिनापुर का राजा बनाया गया। अक्षम धृतराष्ट्र के अंतर्मन में द्वेष का प्रस्फुलन इसी घटना से हुआ।
  2. पांडु की असामयिक मृत्यु के पश्चात् धृतराष्ट्र राजा बने लेकिन वे दुर्योधन को युवराज पद दिलाने की उत्कंठा रखते थे।
  3. हस्तिनापुर के नागरिकों पांडवों के प्रति अधिक लगाव था क्योंकि वे कौरव राजकुमारों से अधिक योग्य और सदाचारी थे। यह देखकर कौरवों को ईर्ष्या होने लगी।
  4. कौरवों ने पांडवों के विरुद्ध अनेक प्रकार के षड्यंत्र रचे जिससे पांडव दु:खी और व्यथित हो गये।
  5. अंततः कौरवों ने पांडवों को राज्य में हिस्सा देने से भी इंकार कर दिया।

प्रश्न 5.
सातवाहनों की वैवाहिक प्रथा में विविधता थी, विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सातवाहनों की वैवाहिक प्रथा:

  1. कुछ सातवाहन शासक बहुपत्नी प्रथा को मानने वाले थे जिसमें उनकी एक से अधिक पत्नियाँ होती थीं।
  2. सातवाहन शासकों से विवाह करने वाली रानियों के नाम गौतम तथा वशिष्ठ गोत्रों उद्भूत थे जो उनके पिता के गोत्र थे। इससे स्पष्ट होता है कि विवाह के बाद भी उन्होंने पिता के गोत्र को कायम रखा था। यह मनुस्मृति की नहीं बल्कि ब्राह्मणीय व्यवस्था थी।
  3. कुछ रानियाँ एक ही गोत्र से थीं। यह उदाहरण अंतर्विवाह ‘पद्धति अर्थात् बंधुओं के बीच विवाह संबंध मान्य रहने की स्थिति को दर्शाता है।
  4. इसमें बांधवों (ममेरे, चचेरे आदि भाई-बहन) के बीच विवाह संबंधों की वजह से एक सुसंगठित समुदाय बनने की पूर्वधारणा निहित थी।

प्रश्न 6.
उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मणों के महत्त्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
उत्तर वैदिक काल में ब्राह्मणों का महत्त्व:

  1. यज्ञों के प्रसार के कारण ब्राह्मणों को महत्त्व बढ़ गया था। वे अपने और अपने यजमानों के लिए पूजा-पाठ और यज्ञ कराते थे।
  2. वे अपने राजाओं की विजय एवं सफलता के लिए भी अनुष्ठान करते थे।
  3. अपने सम्मान के लिए ब्राह्मणों को क्षत्रियों से युद्ध करना पड़ता था।
  4. ज्ञान, विद्वता और कर्मकाण्डों के बढ़ते हुए महत्त्व के कारण क्षत्रिय भी ब्राह्मणों को विशेष आदर देते थे। आगे चलकर इन्हें पृथ्वी का देवता (भूसुर) समझा जाने लगा था।
  5. वस्तुतः ब्राह्मणों ने अपनी स्थिति सर्वोच्च बनाने के लिए कालान्तर में क्षत्रियों से तालमेल स्थापित कर लिया। उन्होंने क्षत्रियों को शासन का अधिकार और स्वयं को उनका परामर्शदाता (पुरोहित) कहा।

प्रश्न 7.
जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध अवश्यंभावी हो गया तो गांधारी ने दुर्योधन से क्या विनती की?
उत्तर:
गांधारी की दुर्योधन से विनती:

  1. गांधारी ने दुर्योधन को युद्ध से हटने की सलाह दी।
  2. अपने पिता, माता और शुभेच्छुओं का सम्मान करते हुए शांति-संधि करने का सुझाव दिया।
  3. राज्य की रक्षा के लिए विवेकपूर्ण इन्द्रिय निग्रही बनने की सीख दी।
  4. एक अच्छे राजा का वर्चस्व स्थापित करने के लिए लालच और क्रोध को त्यागने की सलाह दी।
  5. अर्थ और धर्म की प्राप्ति के लिए युद्ध के परित्याग को ही एकमात्र साधन बताया।
  6. युद्ध में सफल होने की झूठी महत्त्वाकांक्षा को त्यागने के लिए बल दिया।

प्रश्न 8.
चारों वर्गों के लिए आदर्श जीविका से जुड़े नियमों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चारों वर्षों के लिए आदर्श “जीविका के नियम:

  1. ब्राह्मण: ब्राह्मणों का कार्य अध्ययन, वेदों की शिक्षा, यज्ञ करना और करवाना था तथा उनका काम दान देना और लेना था।
  2. क्षत्रिय: क्षत्रियों का काम युद्ध करना, लोगों को सुरक्षा-प्रदान करना न्याय करना, वेद-पढ़ना, यज्ञ करवाना और दान-दक्षिणा देना था।
  3. वैश्य: क्षत्रियों के अंतिम तीन कार्य वैश्यों के लिए भी थे साथ ही उनसे कृषि, गौ पालन और व्यापार का कार्य भी अपेक्षित था।
  4. शूद्र: शूद्रों के लिए मात्र एक ही जीविका-तीनों वर्गों की सेवा थी।

प्रश्न 9.
प्राचीन भारत में सम्पत्ति की दृष्टि से स्त्री की स्थिति स्पष्ट करें। अथवा, प्राचीन काल में संपत्ति के अधिकार प्राप्त करने के कारण पुरुष और महिलाओं के मध्य सामाजिक भेद-भावों को तीक्ष्णता कैसे प्राप्त हुई?
उत्तर:
प्राचीन भारत में संपत्ति की दृष्टि से स्त्री की स्थिति –

  1. मनुस्मृति में पुत्रों को पैतृक संपत्ति का हकदार बताया गया है परंतु स्त्रियों की हिस्सेदारी का कोई उल्लेख नहीं है।
  2. विवाह के समय मिले उपहारों पर स्त्रियों का स्वामित्व माना जाता था और इसे स्त्रीधन को संज्ञा दी जाती थी।
  3. स्त्रीधन को उनकी संतान विरासत के रूप में प्राप्त कर सकती थी परंतु इस पर उनके पति का कोई अधिकार नहीं होता था।
  4. मनुस्मृति स्त्रियों को पति की आज्ञा के विरुद्ध पारिवारिक संपत्ति रखे अथवा स्वयं अपने बहुमूल्य धन के गुप्त संचय के विरुद्ध भी चेतावनी देती है।
  5. वाकाटक रानो प्रभावती गुप्त सम्पत्ति पर अधिकार रखती थी। वस्तुत: सम्पत्ति पर स्त्री का अधिकार उसकी माली हालत या सामाजिक प्रभाव पर निर्भर था।

प्रश्न 10.
जाति-प्रथा से आप क्या समझते हैं? जाति-प्रथा के दोष बताइए।
उत्तर:
जाति-प्रथा का अर्थः शाम शास्त्री ने अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘जाति की उत्पत्ति’ में जाति-प्रथा की परिभाषा इन शब्दों में दी है, “विवाह और भोजन जैसे कार्यों में कुछ लोगों के आपस में संगठित हो जाने को जाति-प्रथा कहते हैं।”

प्राचीन काल में सामाजिक विषयों के लिए हिन्दू समाज केवल चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) में बँटा हुआ था। इन्हीं वर्गों को बाद में जातियाँ कहा जाने लगा। आरम्भ में जाति-पाँति का विचार केवल व्यवसायों को दृष्टि से ही किया जाता था और व्यक्ति एक जाति से दूसरी जाति में सुगमता से दाखिल हो जाता था परंतु धीरे-धीरे जाति-प्रथा जन्म से मानी जाने लगी और एक जाति से दूसरी जाति में जाना असम्भव हो गया। इस प्रकार चार मुख्य वर्ण बढ़ते-बढ़ते अब कोई 3,000 जातियों तक पहुँच चुके हैं।

जाति-प्रथा के दोष :

1. ईर्ष्या और द्वेष का कारण:
दिन-प्रतिदिन जातियों की संख्या बढ़ने और जाति-प्रथा दृढ़ होने का यह परिणाम हुआ कि भिन्न-भिन्न जातियों में परस्पर ईर्ष्या और द्वेष बढ़ने लगा। किसी विदेशी आक्रमणकारी का मुकाबला करने के लिए भी ये जातियाँ संगठित नहीं हुई। इस प्रकार देश आक्रमणकारियों से पद्दलित होने लगा।

2. व्यक्तिगत उन्नति में बाधक:
नीची जाति में उत्पन्न होने वाले विद्वान लोग किसी आदरणीय स्थान को प्राप्त न कर पाते थे। जाति-प्रथा वस्तुतः व्यक्तिगत उन्नति के मार्ग में बाधा सिद्ध हुई।

3. अन्तर्जातीय विवाह के मार्ग में बाधक:
जाति-प्रथा की कठोरता ने हिन्दुओं में विवाह के क्षेत्र को बहुत ही संकुचित कर रखा है। इसके परिणामस्वरूप कुछ लोग अविवाहित रह जाते हैं। वे किसी अन्य धर्म को अपना लेते हैं या अपने ही समाज में ब्यभिचार फैलाते हैं।

4. धार्मिक उन्नति में बाधक:
जाति प्रणाली में असमानता के कारण हिन्दू धर्म में आने वाली अन्य जातियों को बराबरी का दर्जा नहीं दिया जा सका। इस प्रकार अन्य धर्मावलम्बी हिन्दू धर्म के साथ सामजस्य नहीं बना पाए।

5. अस्पृश्यता को जन्म देना:
ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य आदि तीनों उच्च वर्ण के लोग शूद्रों को घृणा की दृष्टि से देखने लगे और उन्हें अछूत समझने लगे। उन्हें कुँओं से पानी भरने और मंदिरों में पूजा करने से भी रोक दिया। परिणाम यह हुआ कि शूद्र अन्य धर्म ग्रहण करने। लगे क्योंकि वहाँ उन्हें विभेद की दृष्टि से नहीं देखा जाता था।

प्रश्न 11.
वणिक कौन थे?
उत्तर:
वणिक:

  1. भारतीय अभिलेख और संस्कृत ग्रंथों में वणिक शब्द का प्रयोग व्यापारियों के लिए किया गया है।
  2. यद्यपि शास्त्रों में व्यापार को वैश्यों का कार्य बताया गया है परंतु कई साक्ष्य इसके विरुद्ध जाते हैं।
  3. शूद्रक के नाटक ‘मृच्छकटिकम् (चौथी शताब्दी ई.) में नायक चारुदत्त को ब्राह्मण वणिक बताया गया है।
  4. पाँचवीं शताब्दी सा०यु० के एक अभिलेख में उन दो भाइयों को क्षत्रिय वणिक कहा गया है जिन्होंने एक मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक अनुदान दिया था।

प्रश्न 12.
श्रेणियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
श्रेणियाँ (Guilds):

  1. एक ही जीविका अथवा व्यवसाय से जुड़ी जातियों को कभी-कभी श्रेणियों से संगठित किया जाता था।
  2. कई ऐसे अभिलेख मिले हैं। जिनमें जातियों को श्रेणियों के नाम दिए गए। उदाहरण के लिए मंदसोर अभिलेख में एक जुलाहों की श्रेणी का वर्णन किया गया है जोकि गुजरात लाट (Lata) नगर में था।
  3. कई जातियाँ परिवार सहित एक स्थान को छोड़कर दूसरे ऐसे स्थान पर बसने लगी जहाँ उन्हें व्यवसाय के लिए अधिक सुविधायें प्राप्त हो सकती थीं।
  4. अभिलेखों से ज्ञात होता है कि किसी व्यक्ति को अपने शिल्प में निपुणता के आधार पर श्रेणी विशेष का सदस्य बनाया जाता था।
  5. कई बार भिन्न-भिन्न व्यवसाय के लोगों को भी एक ही श्रेणी का सदस्य बना लिया जाता था।
  6. श्रेणी के सदस्य अपना सारा धन एकत्र करके किसी कार्य में लगा सकते थे। कई श्रेणियों अपने ईष्टदेव सूर्य के मंदिर स्थापित करने के लिए दान भी देती थीं।

प्रश्न 13.
गोत्र की उत्पत्ति कैसे हुई? सातवाहन वंश में इसका उल्लंघन किस प्रकार किया गया।
उत्तर:
गोत्र की उत्पत्ति:

  1. 1000 सा०यु०पू० के पश्चात् ब्राह्मणों ने लोगों को गोत्रों में विभाजित किया। प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था। उस गोत्र के सदस्य उस ऋषि के वंशज माने जाते थे।
  2. गोत्रों के लिए दो महत्त्वपूर्ण नियम थे। प्रथम विवाह के पश्चात् स्त्रियों को उनके पिता के स्थान पर अपने पति के गोत्र को स्वीकार करना पड़ता था। द्वितीय-एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे।
  3. सातवाहन वंश में गोत्र के नियमों का अपवाद मिलता है। सातवाहन राजाओं से विवाह करने वाली रानियों के नामों के विश्लेषण से पता चलता है कि उनके नाम गौतम तथा वशिष्ठ गोत्रों से लिए गए थे जो उनके पिता के गोत्र थे।
  4. इससे ज्ञात होता है कि इन रानियों ने विवाह के बाद भी अपने पति-कुल के गोत्र को ग्रहण करने के बजाय अपने पिता के गोत्र को बनाये रखा।
  5. कुछ सातवाहन शासकों की रानियों ने पति के गोत्र को अपना लिया।

प्रश्न 14.
“सांची और अन्य स्थानों की वास्तुकता को समझने के लिए बौद्ध धर्म ग्रन्थों का अध्ययन आवश्यक है।” उपर्युक्त कथन की सोदाहरण तर्कसंगत समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
वास्तुकला को समझने के लिए बौद्ध ग्रंथों के अध्ययन का महत्त्व:
सांची के स्तूप के तोरण द्वारा पर एक दृश्य अंकित है जिसमें फूस की झोपड़ी और पेड़ों वाले ग्रामीण दृश्य हैं। वस्तुतः वेसान्तर जातक में इससे सम्बन्धित कहानी दी गई है। इस कहानी में दानी राजकुमार अपना सबकुछ एक ब्राह्मण को सौंपकर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जंगल में चला जाता है। बौद्ध से ज्ञात होता है बुद्ध द्वारा सारनाथ में दिए गए पहले उपदेश का प्रतीक चक्र था।

शालमंजिका की मूर्ति के बारे में बौद्ध ग्रंथों से ही जानकारी मिल पाती है। इससे पता चलता है जो लोग बौद्ध धर्म में आए उन्होंने इससे पहले दूसरे विश्वासों, प्रथाओं और धारणाओं से बौद्ध धर्म को समृद्ध किया। सांची के तोरणद्वारों की मूर्तियों में पाए गए कई प्रतीक या चिह्न इन्हीं परम्पराओं से उत्कीर्ण किए गएं।

प्रश्न 15.
भगवद्गीता के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
भगवदगीता:
1. महाभारत का सर्वाधिक उपदेशात्मक अंश ‘भगवद्गीता’ है। इसका शाब्दिक अर्थ-भगवान का गीता या युद्ध भूमि में, कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है।

2. इसकी मूलभाषा संस्कृत है परंतु आज इसका विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इस ग्रंथ में कुल 18 अध्याय है।

3. सारथी के रूप में भगवान कृष्ण अर्जुन के साथ रथ पर सवार थे। कौरवों और पांडवों की सेनायें युद्ध करने के लिए आमने-सामने खड़ी थी। अर्जुन ने कौरवों की सेना में अपने सगे-सम्बन्धियों को देखकर युद्ध करने से इंकार कर दिया ऐसे अवसर पर श्री कृष्ण ने अर्जुन को आसक्ति रहित होकर युद्ध करने का जो उपदेश दिया वही भगवद् गीता के नाम से प्रसिद्ध है।

4. यह ग्रंथ बताता है कि मनुष्य के अपने कर्म फल की चिंता किए बिना (निष्काम कर्म) करना चाहिए।

प्रश्न 16.
साहित्यिक परम्पराओं का अध्ययन करते समय इतिहासकारों को कौन-कौन सी बातों को ध्यान में रखना चाहिए। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
साहित्यिक परम्पराओं का अध्ययन करते समय ध्यान देने योग्य बातें:

  1. ग्रंथों की भाषा पालि, प्राकृत, तमिल जैसी आम लोगों की भाषा अथवा संस्कृत जैसी पुरोहितों या किसी विशेष वर्ग की भाषा है।
  2. ग्रंथ के लेखक की समग्र जानकारी प्राप्त करना चाहिए। उसके दृष्टिकोण तथा विचारों को भलीभाँति समझने की आवश्यकता है।
  3. ग्रंथ के संभावित संकलन या रचनाकाल की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और उसकी रचना भूमि का विश्लेषण करना चाहिए।
  4. ग्रंथ की रचना का स्थान भी ज्ञात करना चाहिए।
  5. यह ध्यान रखा जाए कि ग्रंथ मंत्रों या कथा के रूप में हैं।
  6. ग्रंथ के प्रयोज्य विषय और व्यक्ति की समग्र जानकारी प्राप्त की जाए।

प्रश्न 17.
महाभारत प्राचीनकाल से सामाजिक मूल्यों के अध्ययन का एक अच्छा साधन हैं। उचित तर्क देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
महाभारत प्राचीनकाल के सामाजिक मूल्यों के अध्ययन का स्रोत:

  1. उस काल में पितूंवशिकता प्रणाली पर आधारित राजवंश थे। पैतृक सम्पत्ति पर पुत्रों का अधिकार होता था और पुत्र-जन्म को महत्त्व दिया जाता था, क्योंकि उन्हें ही वंश चलाने वाला माना जाता था।
  2. स्त्रियों का विशेष आदर नहीं था। उनका विवाह गोत्र से बाहर कर दिया जाता था। कन्यादान पिता का महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य माना जाता था।
  3. महाभारत स्वजनों के मध्य युद्ध का एक अद्भुत उदाहरण है परंतु इस युद्ध में सभी वर्गों के लोग लिप्त हो गये थे।
  4. यह ग्रंथ विभिन्न सामाजिक समूहों के आपसी संबंधों पर प्रकाश डालता है। उदाहरण के लिए-हिडिम्बा का भीम से विवाह।
  5. उच्च परिवारों में बहुपति प्रथा प्रचलित थी। उदाहरण के लिए-द्रोपदी के पाँच पति थे।
  6. स्त्रियाँ पुरुष की सम्पत्ति समझी जाती थी इसीलिए युधिष्ठर ने अंत में द्रोपदी को द्यूतक्रीड़ा के समय दाँव पर लगा दिया था।

प्रश्न 18.
निषाद और इसके समान जातियों की भारतीय समाज में क्या स्थिति थी?
उत्तर:
निषाद और इसके समान जातियों की भारतीय समाज में स्थिति:

  1. निषाद और कुछ अन्य जातियाँ ब्राह्मणीय विचारों से अप्रभावित थीं।
  2. संस्कृत साहित्य में ऐसे समुदायों को प्रायः असभ्य और पशुवत बताया गया है।
  3. शिकार करके और कंदमूल एकत्र करके जीवन निर्वाह करने वाली जातियों को तुच्छ समझा जाता था। निषाद (शिकारी) वर्ग इसका उदाहरण है।
  4. यायावर पशुपालकों के समुदाय को भी संदेह की दृष्टि से देखा जाता था, क्योंकि उन्हें स्थायी कृषक समुदायों के साँचे में आसानी से नहीं ढाला जा सकता था।
  5. कभी-कभी इन लोगों को म्लेच्छ कहा जाता था परंतु उन्हें घृणा की दृष्टि से देखा जाता था।

प्रश्न 19.
“प्राचीन काल में ब्राह्मणीय ग्रंथों के नियमों का सभी जगह पालन नहीं होता था।” पाँच प्रमाण देकर इसकी पुष्टि कीजिए।
उत्तर:

  1. ब्राह्मण ग्रंथों के अनुसार केवल क्षेत्रिय ही शासक हो सकते थे परंतु कई शासक परिवार ब्राह्मण या वैश्य भी थे। उदाहरणार्थ-पुष्यमित्र शुग।
  2. जाति से बाहर भी विवाह होते थे जबकि ब्राह्मणीय ग्रंथों में इसकी अनुमति नहीं थी।
  3. ब्राह्मणों को धनी दर्शाया जाता था परंतु सुदामा जैसे अति निर्धन ब्राह्मणों का उल्लेख भी है।
  4. स्त्रियों से अपेक्षा की जाती थी कि वे विवाह के पश्चात् अपने गोत्र का त्याग कर देंगी और अपने पति का गोत्र अपना लेंगी। परंतु सातवाहन रानियों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपने पिता के गोत्र को बनाये रखा।
  5. कई ऐसे वर्ग थे जिनका पेशा वर्ण व्यवस्था से मेल नहीं खाता था; जैसे निषाद या घुम्मकड़ पशुपालक।

प्रश्न 20.
सातवाहन कालीन वास्तुकला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सातवाहन कालीन वास्तुकला:
सातवाहन शासकों को गुफायें, विहार, चैत्य और स्तूप बनवाने का बड़ा शौक था। दक्षिण में अधिकाँश गुफाओं का निर्माण इसी काल में हुआ। उड़ीसा, नासिक, कार्ले, भुज आदि की गुफायें, विहार, चैत्य और स्तूप अपनी निर्माण-शैली और अलंकरण के कारण वास्तुकला के सुन्दर नमूने हैं।

चैत्य एक बड़ा हॉल होता था, जिसमें अनेक खम्भे होते थे। विहार में एक केन्द्रीय हॉल होता था जिसके सामने के बरामदे में द्वार से प्रवेश होता था। कार्ले का चैत्य बहुत प्रसिद्ध है।

यह 40 मीटर लम्बा, 15 मीटर चौड़ा और 15 मीटर ऊँचा है। इसके दोनों ओर 15-15 खम्भों की पंक्तियाँ हैं। प्रत्येक खम्भा वर्गाकार सीढ़ीदार कुर्सी पर स्थित है। प्रत्येक खम्भे के शिखर पर हाथी, घोड़े और सवार बनाये गए हैं। छतों पर भी सुन्दर चित्रकारी की गई है। भिक्षुओं के निवास हेतु विहार बनाए गए थे।

सबसे महत्त्वपूर्ण स्मारक स्तूप हैं। सबसे प्रसिद्ध स्तूप अमरावती और नागार्जुनकोंडा के हैं। स्तूप एक बड़ी इमारत होती थी जिसे बुद्ध के किसी अवशेष पर बनाया जाता था। अमरावती स्तूप का गुम्बद आधार के आर-पार 162 फुट है और इसकी ऊँचाई 100 फुट है। नागार्जुनकोंडा में स्तूपों के अतिरिक्त ईंटों के बने प्राचीन हिन्दू मंदिर भी हैं। इन दोनों स्तूपों में मूर्तियों की भरमार है।

इस काल में अनेक मूर्तियों का भी निर्माण किया गया। अधिकांश मूर्तियाँ महात्मा बुद्ध के जीवन की अनेक घटनाओं का चित्रण करती हैं। अमरावती के स्तूप में बुद्ध के चरण की पूजा का अनुपम दृश्य है। नागार्जुनकोंडा में महात्मा बुद्ध का उपदेश, शांति और गम्भीरता को प्रकट करता है।

प्रश्न 21.
मातंग कौन था?
उत्तर:
मातंग:

  1. मातंग बोधिसत्व थे जिन्होंने एक चांडाल के घर जन्म लिया था। उनका विवाह एक व्यापारी की पुत्री दिथ्थ से हुआ था।
  2. उनके यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम माडव्य कुमार था। मांडव्य बड़ा होने पर तीन वेदों का ज्ञाता बना।
  3. वह प्रतिदिन 16 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराता था।
  4. एक दिन जब उसका पिता (मातंग) फटे-पुराने कपड़ों में उसके द्वार पर आया। उसने भोजन माँगा लेकिन मांडव्य कुमार ने उसे पतित कहकर भोजन नहीं दिया।
  5. इस घटना का पता जब उसकी माँ दिथ्थ को चला तो मातंग से माफी मांगने के लिए वह स्वयं वहाँ आई और पत्नी धर्म का निर्वाह किया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वैदिकोत्तर काल की वर्ण व्यवस्था का वर्णन करें। उस व्यवस्था में शद्रों का क्या स्थान था?
उत्तर:
वैदिकोत्तर काल की वर्ण व्यवस्था:
इस काल में जाति-प्रथा और दृढ़ हो गई। जन्म के आधार पर जातियाँ निश्चित होने लगीं। जैन और बौद्ध धर्म ने जाति-प्रथा का बड़ा विरोध किया परंतु तत्कालीन समाज में जाति-प्रथा प्रचलित थी। उस समय समाज चार वर्गों में बंटा हुआ थाः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। अब धर्मसूत्रों ने प्रत्येक वर्ण के कर्मों को निर्धारित कर दिया था।

दीवानी एवं फौजदारी कानून का आधार भी अब वर्ण-व्यवस्था ही बन गई थी। जो व्यक्ति जितने ऊँचे वर्ण से सम्बन्धित होता था। उससे उतने अधिक ऊँचे नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती थी। धीरे-धीरे शूद्रों पर अनेक निर्योग्यतायें थोप दी गई। इन्हें विभिन्न कानूनों तथा धार्मिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया और सबसे निचले स्थान पर फेक दिया गया।

परंतु धीरे-धीरे जैन और बौद्ध धर्म के प्रचार के कारण ब्राह्मणों का प्रभुत्व कम हुआ और क्षत्रियों को प्रधानता प्राप्त हुई। वैश्य लोग बड़े धनी होने लगे परंतु शूद्रों की दशा और भी शोचनीय होती गई। बौद्ध साहित्य में-चाण्डालों का भी उल्लेख है। नगर-सीमा से बाहर निवास करने वाले इन चाण्डालों के स्पर्श-मात्र से अन्य लोग डरते थे। समाज में दास भी थे । वे गृह-कार्य करते थे परंतु उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार नहीं किया जाता था।

जैन और बौद्ध धर्म के प्रभाव के कारण ब्राह्मण धर्म की आश्रम-प्रणाली काफी शिथिल हो गई थी ! सन्यास और ताप के स्थान पर शुद्ध तथा पवित्र जीवन और आचरण पर अधिक बल दिया जाने लगा। इस काल में भी संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी।

यद्यपि समाज में स्त्रियों का सम्मान था, परंतु वैदिक काल की अपेक्षा उनकी दशा अब गिर चुकी थी। महात्मा बुद्ध ने भी संघ में स्त्रियों का प्रवेश निषिद्ध किया था। इतना अवश्य है कि स्त्रियों के साथ आदर का व्यवहार किया जाता था। उन्हें उचित शिक्षा देने का प्रबंध किया जाता था। समाज में पर्दा-प्रथा नहीं थी। स्त्रियों को धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भाग लेने की स्वतंत्रता थी। वे मेलों और उत्सवों में शामिल होती थीं।

उत्तर-पश्चिमी भारत में सती-प्रथा प्रचलित हो चुकी थी। समाज में वेश्यायें भी होती थी। आम्रपाली इस युग की वैशाली की प्रसिद्ध वेश्या (नगरवधू) थी। साधारण व्यक्ति एक ही स्त्री से विवाह करते थे, परंतु राजपरिवारों और धनिकों में बहुविवाह प्रथा भी प्रचलित थी। बाल विवाह प्रथा नहीं थी। लड़के-लड़कियों के विवाह माता पिता द्वारा निश्चित किये जाते थे। राजकुमारियों के विवाह स्वयंवर प्रथा से होते थे।

प्रश्न 2.
आरम्भिक समाज के आर्थिक एवं धार्मिक जीवन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. आरम्भिक समाज का आर्थिक जीवन:

(I) कृषि:
लोग ग्रामों में रहते थे और उनका मुख्य धंधा खेती था। कपास, गेहूँ, चावल तथा सब्जियों की उपज अधिक होती थी। अधिक वर्षा और सूखा-ये किसान के दो सबसे बड़े शत्रु थे। खेती के ढंगों में अब थोड़ी-सी उन्नति हो चुकी थी और सिंचाई अब छोटे-छोटे नालों द्वारा भी की जाती थी। हल अब पहले से बड़ा और भारी बनाया जाने लगा। कई बार हल खींचने के लिए 12 बैल जोते जाते थे। खाद के लिए गोबर का प्रयोग भी होने लगा।

(II) पशुपालन:
खेती-बाड़ी के पश्चात् पशुपालन लोगों का दूसरा बड़ा धंधा था।

(III) व्यापार:
व्यापार लोगों का एक अन्य मुख्य व्यवसाय था। अब व्यापारियों कई संघों में संगठित हो गए। ये संघ व्यापारियों के हितों की हर प्रकार से रक्षा करने में सक्रिय रहते थे। कई नए सिक्के-निष्क, शतमान और कर्षमाण आदि प्रचलित हो चुके थे।

(IV) नगरों का उदय:
ऋग्वैदिक काल में लोग प्राय: छोटे-छोटे गाँवों में रहते थे और वहीं अनेक प्रकार के काम-धन्धे करके अपना निर्वाह करते थे। अब अयोध्या हस्तिनापुर, मथुरा तथा इन्द्रप्रस्थ जैसे कई नगरों की स्थापना हो चुकी थी।

2. धार्मिक जीवन (Religious Life):

(I) नए देवताओं का उदय:
ऋग्वैदिक काल के इन्द्र, वरुण, सूर्य, पृथ्वी तथा अग्नि जैसे प्राकृतिक देवताओं के स्थान पर अब ब्रह्मण, विष्णु, शिव, गणेश, पार्वती, राम और कृष्ण जैसे नए देवताओं की पूजा आरंभ हो चुकी थी।

(II) धर्म में पेंचीदगी का समावेश:
अब धर्म वैदिक काल की भांति सरल नहीं रहा। उसमें दिन-प्रतिदिन नए-नए रीति-रिवाज और संस्कार प्रवेश करते जा रहे थे। बलिदान की ओर लोगों का झुकाव बहुत बढ़ गया था। इस प्रकार धर्म इतना पेंचीदा हो गया था कि जन-साधारण के लिए उसको समझ पाना बहुत कठिन हो रहा था।

(III) जादू टोने में विश्वास:
लोग अपने शत्रुओं को नष्ट करने तथा बीमारी को दूर करने के लिए जाद्-टोने का आश्रय लेने लगे थे।

(IV) मुक्ति, माया, पुनर्जन्म और कर्म सिद्धांत में विश्वास:
लोगों को यह ज्ञान हो चुका था कि संसार एक मायाजाल है, इसलिए इससे निकलकर उन्हें मुक्ति की ओर अग्रसर होना चाहिए। अगला जन्म अच्छा मिलने के लिए सत्कर्म करने की जानकारी भी लोगों को हो चुकी थी।

प्रश्न 3.
अस्पृश्य कौन लोग थे? इनके क्या कर्त्तव्य थे?
उत्तर:
अस्पृश्य लोग:
भारतीय समाज में ब्राह्मणों ने कुछ लोगों को सामाजिक व्यवस्था से अलग रखा था। इन्हें ‘अस्पृश्य’ घोषित कर सामाजिक विषमता को और अधिक बढ़ावा दिया। ब्राह्मणों का यह निर्देश था कि अनुष्ठान संपन्न करने वाले लोग अस्पृश्यों के यहाँ भोजन न करें।

अनुष्ठान न करने वाले और शवों की अंत्येष्टि तथा मृत जानवरों को छूने वालों को ‘चाण्डाल’ कहा जाता था। उन्हें वर्ण व्यवस्था वाले समाज में सबसे निम्न कोटि में रखा जाता था। उच्च वर्ग के लोग चाण्डालों को स्पर्श करना तो दूर कि उन्हें देखना भी अशुभ समझते थे।

चांडालों के कर्तव्य:
मनुस्मृति में चांडालों के कर्तव्य निम्नवत् दिए गए हैं –

  • उन्हें गाँव से बाहर रहना पड़ेगा।
  • उन्हें जल्लाद के रूप में कार्य करना होगा।
  • उन्हें उन मुर्दो की अन्त्येष्टि करनी होगी जिनका कोई सगा-सम्बन्धी न हो।
  • वे उच्छिष्ट बर्तनों में भोजन करेंगे और मृत लोगों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनेंगे।
  • वे गाँव और नगरों में रात को स्वछंदता से नहीं घूमेंगे।
  • रास्ते में चलते समय उन्हें डंडा बजाते हुए चलना होगा ताकि आवाज सुनकर लोग मार्ग छोड़ दें।

चांडालों का वर्णन अन्यत्र भी मिलता है। पाँचवीं शताब्दी के चीनी यात्री फाह्यान ने लिखा है कि लोग चांडालों को घृणा की दृष्टि से देखते हैं तथा जब कभी वे नगर में प्रवेश करते हैं तो लाठी को भूमि पर टकराते हुए आगे बढ़ते हैं ताकि लोगों को उनके आने का पता चल जाए। 7 वीं शताब्दी में भारत यात्रा करने वाले वेनसांग ने लिखा है कि जल्लाद तथा चमड़ा रंगने वालों को नगर के बाहर रहना पड़ता था।

ब्राह्मण ग्रंथों में भी चांडालों के जीवन की दुर्दशा का वर्णन है। पाली ग्रंथ मलेगा जातक के अनुसार पिछले जीवन में गौतम बुद्ध एक चाण्डाल के पुत्र मतंग थे। अनेक कठिनाइयों का सामना करने के पश्चात् उन्होंने एक व्यापारी की पुत्री दिथ्थ से विवाह किया। उनका एक पुत्र माण्डव कुमार था। जैसे ही वह बड़ा हुआ, उसने वेदों का अध्ययन किया तथा प्रतिदिन 16 हजार ब्राह्मणों को भोजन करवाने लगा। इस पुत्र ने भी एक बार मतंग का अपमान किया था।

प्रश्न 4.
महाभारत की ऐतिहासिक प्रामाणिकता पर एक टिपण्णी लिखिए।
उत्तर:
महाभारत की ऐतिहासिक प्रामाणिकता:
महाभारत प्राचीन भारत का एक महाकाव्य और संस्कृत का प्रसिद्ध ग्रंथ है, परंतु इसकी ऐतिहासिकता को लेकर लोगों में विवाद है। कुछ विद्वानों का कहना है कि यह कृत्रिम महाकाव्य है और लेखन प्रणाली को नया रूप देने के लिए दो परिवारों की लड़ाई को कथा-वस्तु बनाया गया है।

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि महाभारत केवल एक उपन्यास है। इस उपन्यास को वेदव्यास ने लिखा है। कुछ लोगों का विचार है कि इतिहास में महाभारत जैसी कोई घटना नहीं हुई और यह केवल मिथ्या कहानी है। ऐसे तर्क रहने पर भी भारतीय परम्परा तथा महान् विद्वानों का दृढ़ विश्वास है कि महाभारत अनेक महत्त्वपूर्ण घटनायें का एक वृहत् इतिहास है।

तिथि:

  • प्रसिद्ध इतिहासकार पारजीटर ने परम्परागत इतिहास (Traditional History) के आधार पर महाभारत युद्ध की तिथि 950 सा०यु०पू० निर्धारित की है।
  • डॉ० नीरद राय ने अपने शोध ग्रंथ में कौशाम्बी के स्तरीकरण के आधार पर महाभारत की तिथि 1100 सा०यु०पू० बताई है।
  • पाँचवीं शताब्दी में प्राचीन भारत के एक महान् गणितज्ञ तथा खगोलशास्त्री ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘आर्यभट्ट’ में खगोल शास्त्र के सिद्धांतों का आधार लेकर महाभारत का अध्ययन किया। महाभारत में वर्णित ग्रह स्थिति के अनुसार आर्यभट्ट ने इसकी अनुमानित तिथि 3100 सा०यु०पू० निर्धारित की है।

ऐतिहासिकता:
सौभाग्यवश कई वैदिक और पौराणिक रचनाएँ ज्योतिष के आधार पर यह प्रमाणित करती है कि महाभारत एक वास्तविक घटना है। डॉ० प्रशान्त गोखले का कहना है कि महाभारत केवल एक कहानी नहीं बल्कि प्राचीनकाल में घटित घटनाओं का विवरण है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कई प्रमाण दिये हैं जो निम्नलिखित हैं:

1. ऋषि वेदव्यास ने इस युद्ध के आरंभ होने से पूर्व ही इतिहास लिखने का मन बना लिया था। युद्ध के दौरान उन्होंने इसकी प्रत्येक प्रकार की विस्तृत जानकारी लिपिबद्ध की। यदि यह केवल एक उपन्यास होता तो वेदव्यास जैसा महान् विद्वान इस युद्ध की इतनी छोटी-छोटी तथा अनावश्यक घटनाओं का वर्णन क्यों करता।

2. काव्यात्मक स्वरूप होने के कारण मात्र से महाभारत को इतिहास न मानना एक भारी भूल है। उल्लेखनीय है कि प्राचीन काल में सभी साहित्यिक रचनाएँ पद्य या काव्यात्मक ‘स्वरूप की थी।

3. महाभारत में कई स्थानों पर लिखा है कि इतिहास का एकमात्र अर्थ है-“यह ऐसा हुआ” प्राचीन काल की घटनाओं तथा कुछ समय पूर्व बीती घटनाओं को अलग-अलग करने के लिए आर्यों ने पुराण तथा इतिहास शब्दों का प्रयोग किया परंतु इन दोनों शब्दों का यह अर्थ है कि यह ऐतिहासिक घटनायें भिन्न-भिन्न समय पर घटित हुई।

4. उस काल में राजाओं की वंशावलियों की क्रमवार जानकारी लिखी जाती थी। एक चीनी यात्री के विवरण से इसकी पुष्टि होती है। महाभारत एक ऐसे युद्ध की गाथा है जो कि वास्तव में हुआ और इसमें राजाओं की वंशावलियों का पूर्ण वर्णन है।

5. भारत के अघपर्व तथा भीष्मपर्व खण्डों में लिखा है कि यह एक इतिहास है। यदि इसके लेखक की भावना एक उपन्यास या कविता लिखने की होती तो वह इसको महाकाव्य या कथा का नाम न देता।

6. महाभारत तथा भागवत् जैसे अन्य धार्मिक ग्रंथों में उस समय के नक्षत्रों तथा उपग्रहों की स्थिति के बारे में ठीक-ठीक जानकारी दी गयी है। एक उपन्यास में खगोलशास्त्र का प्रयोग करके नक्षत्रों की स्थिति की जानकारी कदापि नहीं दी जा सकती है।

7. महाभारत में बहुत से वंशों तथा उसके शासकों का वर्णन है । राजा भरत से लेकर राजा मांडु तक 50 से अधिक राजाओं के इतिहास का वर्णन है। इसके अतिरिक्त राजा, उसकी पत्नी, उसकी संतान, उसके संबंधियों आदि का विस्तारपूर्वक वर्णन है। यदि यह केवल एक उपन्यास होता तो कहानी का निर्माण करने के लिए केवल 4-5 राजाओं का नाम देना पर्याप्त था तथा उसमें विस्तृत वृत्तांत देने की आवश्यकता न रहती।

8. महाभारत में द्वारिका का वर्णन है जिसके अवशेष समुद्र में मिले हैं। ऐसा माना जाता है कि द्वारिका नगर 2000-3000 सा०यु०पू० समुद्र में डूब गया था।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में महाकाव्य कौन नहीं है?
(अ) महाभारत
(ब) रामायण
(स) मालविकाग्निनियम्
(द) हर्षचरितम्
उत्तर:
(द) हर्षचरितम्

प्रश्न 2.
महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण कितने वर्षों में तैयार हुआ?
(अ) 37
(ब) 36
(स) 35
(द) 34
उत्तर:
(अ) 37

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा कथन परिवार से मेल नहीं खाता है?
(अ) परिवार एक समूह का हिस्सा होता है
(ब) संबंधी परिवार जुड़े होते हैं
(स) पारिवारिक रिश्ते कृत्रिम होते हैं
(द) पारिवारिक रिश्ते रक्त संबद्ध माने जाते हैं
उत्तर:
(स) पारिवारिक रिश्ते कृत्रिम होते हैं

प्रश्न 4.
गोत्र के अन्दर विवाह करना कौन-सा विवाह है?
(अ) अंतर्विवाह
(ब) बहिर्विवाह
(स) ब्रह्म विवाह
(द) राक्षस विवाह
उत्तर:
(अ) अंतर्विवाह

प्रश्न 5.
क्या ब्राह्मणों का सार्वभौमिक प्रभाव था?
(अ) हाँ
(ब) नहीं
(स) हाँ, नहीं-दोनों
(द) उनकी कोई गणना नहीं थी
उत्तर:
(ब) नहीं

प्रश्न 6.
सातवाहन राजाओं और रानियों की आकृतियाँ कहाँ उत्कीर्ण हैं?
(अ) राजमहलों में
(ब) मंदिरों में
(स) गुफा की दीवारों पर
(द) स्तम्भ अभिलेखों पर
उत्तर:
(स) गुफा की दीवारों पर

प्रश्न 7.
माताओं के महत्त्व का ज्ञान कहाँ से होता है?
(अ) सातवाहन राजाओं की मूर्तियों से
(ब) सातवाहन राजाओं के गुफा चित्रों से
(स) सातवाहन शासकों के सिक्कों से
(द) सातवाहन अभिलेखों से
उत्तर:
(द) सातवाहन अभिलेखों से

प्रश्न 8.
द्रोण अद्वितीय तीरंदाज किसको बनाना चाहते थे?
(अ) अर्जुन को
(ब) एकलव्य को
(स) नकुल को
(द) सहदेव को
उत्तर:
(अ) अर्जुन को

प्रश्न 9.
श्रेणी की क्या विशेषता थी?
(अ) सभी जातियाँ एक व्यवसाय से जुड़ी थी
(ब) सभी जातियाँ अलग-अलग व्यवसायों से जुड़ी थीं
(स) कुछ जातियों का समूह था
(द) कुछ लोगों का समूह था
उत्तर:
(अ) सभी जातियाँ एक व्यवसाय से जुड़ी थी

प्रश्न 10.
सातवीं शताब्दी में कौन-सा चीनी यात्री भारत आया था?
(अ) मेगस्थनीज
(ब) फाह्यान
(स) श्वैन-त्सांग
(द) अल्बेरुनी
उत्तर:
(स) श्वैन-त्सांग

प्रश्न 11.
समालोचनात्मक संस्करण में कितने पृष्ठ हैं?
(अ) 13000
(ब) 15000
(स) 16000
(द) 12000
उत्तर:
(अ) 13000

प्रश्न 12.
मातृवंशिकता का क्या अर्थ है?
(अ) जहाँ वंश परम्परा पिता से जुड़ी होती है
(ब) जहाँ वंश परम्परा माँ से जुड़ी होती है।
(स) जहाँ वंश परम्परा मौसी से जुड़ी होती है
(द) जहाँ वंश परम्परा दादी से जुड़ी होती है।
उत्तर:
(ब) जहाँ वंश परम्परा माँ से जुड़ी होती है।

प्रश्न 13.
प्रभावती गुप्त क्यों प्रसिद्ध थी?
(अ) वह एक युद्धप्रिय महिला थी
(ब) वह एक दानी महिला थी
(स) उसने सत्ता का उपभोग किया
(द) वह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की पुत्री थी
उत्तर:
(स) उसने सत्ता का उपभोग किया

प्रश्न 14.
बहिर्विवाह से क्या तात्पर्य है?
(अ) यह अन्तर्जातीय विवाह था
(ब) इसमें एक वास्तविक विवाह और कई अन्य विवाह विलासिता के लिए किए जाते थे
(स) एक स्त्री के कई पति होते थे
(द) यह गोत्र से बाहर विवाह करने की पद्धति थी
उत्तर:
(द) यह गोत्र से बाहर विवाह करने की पद्धति थी

प्रश्न 15.
निम्नलिखित में क्या सही है?
(अ) केवल क्षत्रिय राजा हो सकते थे
(ब) ऐसा आवश्यक नहीं था
(स) केवल ब्राह्मण राजा हो सकते थे
(द) निम्न कुल के राजा हो सकते थे
उत्तर:
(अ) केवल क्षत्रिय राजा हो सकते थे

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 2 Song of Myself

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 2 Song of Myself

Song Of Myself Objective Question Bihar Board 12th Question 1.
Who is the poet of ‘Song of Myself ?
(A) W.H. Auden
(B) John Keats
(C) Walt Whitman
(D) T.S. Eliot
Answer:
(C) Walt Whitman

Song Of Myself Objective Question Answer Bihar Board 12th Question 2.
Walt Whitman was born in-
(A) 1820
(B) 1819
(C) 1815
(D) 1820
Answer:
(B) 1819

Song Of Myself Ka Objective Question Bihar Board 12th Question 3.
Walt Whitman died in-
(A) 1872
(B) 1862
(C) 1892
(D) 1870
Answer:
(C) 1892

Song Of Myself Objective Bihar Board 12th Question 4.
What does the poet observe in summer ?
(A) sunny days
(B) Girls playing
(C) Spike of grass
(D) Yellow flowers
Answer:
(C) Spike of grass

Song Of Myself Multiple Choice Questions Bihar Board 12th Question 5.
Who is the speaker in this poem ?
(A) A boy
(B) A girl
(C) The poet himself
(D) An old man
Answer:
(C) The poet himself

Song Of Myself Ka Objective Bihar Board 12th Question 6.
The poet enjoys himself and sings for-
(A) Public
(B) Beloved
(C) Children
(D) Self
Answer:
(D) Self

Song Of Myself Question Answer Bihar Board 12th Question 7.
What does the poet discard ?
(A) Mankind
(B) Nature’s beauty
(C) Beloved
(D) State
Answer:
(B) Nature’s beauty

12th English Objective Questions And Answers Pdf 2020 Question 8.
‘Leaves of Grass’ a collection of poetry, known.for its free rhythms is written by-
(A) W.H. Auden
(B) Walt Whitman
(C) T.S. Eliot
(D) John Keats
Answer:
(B) Walt Whitman

Bihar Board 12th English Objective Question Question 9.
How many times the word ‘you’ has been used in ‘Song of Myself’ (‘I Celebrate Myself)?
(A) twice
(B) ones
(C) thrice
(D) None of these
Answer:
(A) twice

Questions And Answers Song Bihar Board 12th Question 10.
The word, ‘schools’stands for. in ‘Song of Myself (‘I Celebrate Myself).
(A) academy
(B) systems of thought
(C) teaching institutes
(D) None of these
Answer:
(B) systems of thought

12th English Objective Questions And Answers Pdf Question 11.
Who has composed the poem ‘Song of Myself?
(A) Walt Whitman
(B) Tennyson
(C) Emerson
(D) None of these
Answer:
(A) Walt Whitman

Song Of Myself Lyrics Bihar Board 12th Question 12.
Whitman was ………… poet.
(A) an Indian
(B) an American
(C) a British
(D) None of these
Answer:
(B) an American

12th English Objective Question Answer Bihar Board Question 13.
Whitman was born in—
(A) 1817
(B) 1818
(C) 1819
(D) 1820
Answer:
(C) 1819

English Class 12 Objective Questions Bihar Board Question 14.
Whitman died in—
(A) 1889
(B) 1890
(C) 1891
(D) 1892
Answer:
(D) 1892

Class 12 English Objective Question Bihar Board Question 15.
‘Song of Myself is—
(A) a lyric
(B) an epic
(C) a sonnet
(D) None of these
Answer:
(A) a lyric

The Song Of India Multiple Choice Questions Bihar Board 12th Question 16.
The opening section of’Song of Myself is entitled has—
(A) ‘Grass’
(B) ‘I Celebrated Myself
(C) ‘Animal’
(D) None of these
Answer:
(B) ‘I Celebrated Myself

Poem On Myself In English Bihar Board 12th Question 17.
Who is the speaker in ‘Song of Myself (‘I Celebrate Myself)?
(A) Emerson
(B) Robert Frost
(C) Walt Whitman
(D) None of these
Answer:
(C) Walt Whitman

Question 18.
According to ‘Song of Myself (‘I Celebrate Myself) the speaker is a great lover of—
(A) arts
(B) science
(C) commerce
(D) Nature
Answer:
(D) Nature

Question 19.
Walt Whitman has written the poem—
(A) An Epitaph
(B) The Soldier
(C) Song of Myself
(D) Fire-Hymn
Answer:
(C) Song of Myself

Question 20.
Walt Whitman is years old.
(A) 34
(B) 35
(C) 36
(D) 37
Answer:
(B) 35

Question 21.
‘Hoping to cease not till death’ is a line from ………….. [2018A, I.A]
(A) Sweetest Love I Do Not Goe
(B) Song of Myself
(C) The Soldier
(D) Fire-Hymn
Answer:
(D) Fire-Hymn

Question 22.
’I celebrate myself and sing myself is written by –
(A) Walt Whitman
(B) W.H. Auden
(C) J. Keats
(D) W.B. Yeats
Answer:
(A) Walt Whitman

Question 23.
I in the first line of the poem ‘Song of Myself is the poet—
(A) John Keats
(B) Kamala Das
(C) John Donne
(D) Walt Whitman
Answer:
(D) Walt Whitman

Question 24.
In the Poem ‘Song of Myself the poet for himself.
(A) laughs
(B) cries
(C) sings
(D) None of these
Answer:
(C) sings

Question 25.
‘And what I assume you shall assume’ is taken from the poem—
(A) Song of Myself
(B) An Epitaph
(C) The Soldier
(D) Fire-Hymn
Answer:
(A) Song of Myself

Question 26.
‘I harbour for good or bad’ is written by —
(A) John Keats
(B) John Donne
(C) Walt Whitman
(D) D.H. Lawrence
Answer:
(C) Walt Whitman

Question 27.
Who is the poet of ‘Song of Myself ?
(A) W.H. Auden
(B) John Keats
(C) Walt Whitman
(D) T.S. Eliot
Answer:
(C) Walt Whitman

Question 28.
Who is the speaker in this poem ?
(A) a boy
(B) a girl
(C) the poet himself
(D) grass
Answer:
(C) the poet himself

Question 29.
Walt Whitman was born in
(A) 1820
(B) 1819
(C) 1816
(D) 1822
Answer:
(B) 1819

Question 30.
What does the poet discard ?
(A) king
(B) nature’s beauty
(C) beloved
(D) statue
Answer:
(B) nature’s beauty

Question 31.
‘Leaves of Grass’ a collection of poetry, known for its free rhythms is written by
(A) John Keats
(B) Walt Whitman
(C) T.S. Eliot
(D) W.H. Auden
Answer:
(B) Walt Whitman

Question 32.
The poet observes in summer
(A) sunny grass
(B) bird playing
(C) spike of grass
(D) yellow flowers
Answer:
(C) spike of grass

Question 33.
The poet enjoys himself and sings for
(A) public
(B) beloved
(C) children
(D) himself
Answer:
(D) himself

Question 34.
Walt Whitman died in
(A) 1872
(B) 1882
(C) 1892
(D) 1890
Answer:
(C) 1892

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 भारतीय चित्रपट

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 गद्य खण्ड Chapter 5 भारतीय चित्रपट Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 5 भारतीय चित्रपट

Bihar Board Class 9 Hindi भारतीय चित्रपट Text Book Questions and Answers

 

Bihar Board 9th Class Hindi Book Solution प्रश्न 1.
उन्नीसवीं और बीसवीं शती ने दुनिया को कई करिश्मे दिखाए। लेखक ने किस करिश्मे का वर्णन विस्तार से किया है?
उत्तर-
लेखक ने उनसवीं और बीसवीं शती के करिश्मे में गैस की रोशनी, बिजली का चमत्कार, टेलीग्राम, टेलीनकोण, जादू, रेल, मोटर इत्यादि करिश्मे के विषय में विस्तार से वर्णन किया है।

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
भारतीय चित्रपट में मूक से सवाक् फिल्मों तक के इतिहास को रेखांकित करते हुए दादा साहब फालके का महत्व बताइए।
उत्तर-
सबसे पहले 6 जुलाई, 1896 ई. में बम्बई में पहलीबार सिनेमा दिखाया गया। 1984 में पहली बार बम्बई की जनता को रूपहले पर्दे पर कछ भारतीय दश्य देखने को मिले। उस समय सावे दादा ने ल्युमीयेर ब्रदर्स के प्रोजेक्टर, फोटो डेवलप करने की मशीन या मशीनें खरीदकर भारत में इस धंधे का एक तरह से राष्ट्रीयकरण कर लिया था। सावे दादाने सर आर० पी० पराजपे पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बढ़ाई। इसी तरह लोकमान्य तिलक, गोखले आदि पर भी फिल्म बनाई। लेकिन दादा साहब फालके द्वारा बनाई गई फीचर फिल्म हरिश्चंद्र से पहले की एक फिल्म बनी थी उसका नाम ‘भक्त पुंडलीक’ था। इतिहास ने दादा साहब फालके को ही भारतीय फिल्म उद्योग का जनक माना सावे दादा को नहीं। भारत सरकार ने भी फिल्म के सर्वोच्च पुरस्कार को दादा साहब फालके पुरस्कार कहके ही इतिहास की बंदना की है।

Bihar Board Solution Class 9 Hindi प्रश्न 3.
सावे दादा कौन थे? भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को पाठ के माध्यम से समझाइए।
उत्तर-
सावे दादा भारतीय फिल्म को शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने शालिनी स्टूडियो की स्थापना की थी। मझोले कद के गोरे चिट्टे, दुबली-पतली कायावाले सावे दादा को देखकर कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि ये ही भारतीय फिल्म व्यवसाय के आदि पुरुष है। उन्होंने भारतीय ल्यमायर ब्रदसे के प्रोजेक्टर, फोटो डेवलप करने की मशीन या मशीनें खरीदकर भारतीय फिल्म का एक तरह से राष्ट्रीकरण कर लिया था। वे इंगलैंड जाकर एक कैमरा भी लाए थे और शायद इंगलैंड और फ्रांस के सिनेमा से ग्राफी कला विशेषज्ञों से भेंट करके उन्होंने भारत में इस उद्योग को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की थीं।

Class 9 Hindi Bihar Board प्रश्न 4.
लेखक ने सावे दादा की तुलना में दादा साहब फालके को क्यों भारतीय सिनेमा का जनक माना? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
सावे दा ने भी बहुत सी डक्यूमेंटरी फिल्म बनाई और उस समय के नेताओं जैसे गोखले तिलक पर भी फिल्में बनाई लेकिन दादा साहब फाल्के ने एक फीचर फिल्म बनाई जिसका नाम ‘हरिश्चन्द्र’ था और उससे भी पहले उन्होंने एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम ‘भक्त पुंडलीक था। इसी तुलना के आधार पर सावे दादा की तुलना में दादा साहब फाल्के को ही भारतीय सिनमा का जनक माना गया और भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च शिखर सम्मान पुरस्कार दादा साहब फाल्के के नाम पर रखा गया है।

Class 9th Hindi Bihar Board प्रश्न 5.
भारतीय सिनेमा के विकास में पश्चिमी तकनीक के महत्व को रेखांकित कीजिए।
उत्तर-
भारतीय सिनेमा के विकास में पश्चिमी तकनीकी का महत्वपूर्ण स्थान है। फ्रांस के ल्युमीयेर ब्रदर्स के एजेंट उन्नसवीं सदी के इस तिलस्म को दिखाने के लिए भारत में लाये थे। अमेरीका में भी यह दिखाया जा रहा था। आज की सिनेमा की तरह उस समय के सिनेमा में छोटी-छोटी तस्वीरें थीं। किसी समुद्र में स्नान के दृश्य दिखाए गए और किसी में कारखाने से छूटते हुए मजदूरों का दृश्य, हल्की फुल्की झांकियां देखने को मिलती थी।

भारतीय सिनेमा का इतिहास Pdf Bihar Board प्रश्न 6.
अपने शुरुआती दिनों में सिनेमा आज की तरह किसी कहानी पर आधारित नहीं होती थी, क्यों?
उत्तर-
पश्चिमी तकनीक पर आधारित सिनेमा किसी कहानी पर आधारित नहीं होती थी। उस समय छोटे-छाटे चित्र, हल्की-फुल्की झाँकियाँ दिखाई जाती थी क्योंकि उस समय पूर्ण रूप से फिल्म तकनीक का विकास नहीं हो पाया था।

Class 9 Hindi पाठ 5 Question Answer Bihar Board प्रश्न 7.
भारत में पहली बार सिनेमा कब और कहाँ दिखाया गया?
उत्तर-
1897 ई० में पहली बार मुंबई की जनता को रूपहले पर्दे पर कुछ भारतीय दृश्य दिखाया गया।

Bihar Board Class 9 Hindi Book Pdf प्रश्न 8.
सिनेमा दिखलाने के लिए अखबारों में क्या विज्ञापन निकला? इस विज्ञापन का बम्बई की जनता पर क्या असर हुआ था?
उत्तर-
सिनेमा दिखलाने के लिए अखबार में विज्ञापन निकाला कि जिंदा तिलस्मात् देखिए फोटुएँ आपको चलती-फिरती टोड़तो दिखलाई पड़ेगा। टिकट एक रुपिया इस विज्ञापन ने बंबई में तहलका मचा दिया।

Bihar Board Class 9th Hindi प्रश्न 9.
1897 में पहली बार बम्बई की जनता को रुपहले पर्दे पर कुछ भारतीय दृश्य देखने को मिले। उन दृश्यों को लिखें।
उत्तर-
1897 में जो कुछ दृश्य देखने को मिले। उनमें बंबई की नारली पूर्णिमा यानी रक्षा बंधन का त्योहार, दिल्ली के लाल किले और अशोक की लाट वगैरह के चंद दृश्यों की झलक के साथ-साथ लखनऊ में इमामबाड़ों भी रूपहले पर्दे पर चमके।

Bihar Board 9th Class Hindi Book Pdf प्रश्न 10.
कलकत्ते में स्टार थियेटर की स्थापना किसने की? ।
उत्तर-
मिस्टर स्टीवेंसन नामक एक अंग्रेज सज्जन ने स्टार थियेटर की स्थापना की।

9th Class Hindi Book Bihar Board प्रश्न 11.
भारत में फिल्म उद्योग किस तरह स्थापित हुआ? इसकी स्थापना में किन-किन व्यक्तियों ने योगदान दिया।
उत्तर-
भारतीय फिल्म उद्योग की स्थापना बहत ही तिलसस्माई ढंग से ही। इसकी स्थापना में सावे दादा, दादा फाल्के, मिस्टर स्टीवेंशन इत्यादि व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Class 9 Bihar Board Hindi Solution प्रश्न 12.
पहली फीचर फिल्म कौन थी?
उत्तर-
पहली फीचर फिल्म भक्त पुंडलीक’ थी।

बिहार बोर्ड ९थ क्लास बुक Hindi Bihar Board प्रश्न 13.
भारत की पहली बॉक्स-ऑफिस हिट फिल्म किसे कहा जाता है?
उत्तर-
‘लंकादहन’ पहली बॉक्स आफिस हीट फिल्म थी।

प्रश्न 14.
जे. एफ० मादन का भारतीय फिल्म में योगदान रेखांकित करें।
उत्तर-
जे. एफ० मादन ने 1917 में एलफिंस्टन बाइस्कोप कंपनी नामक फिल्म संस्था बनाई और दादा साहब फाल्के की तरह वे भी फीचर फिल्म बनाने लगे।

प्रश्न 15.
शुरुआती दौर की फिल्म को लोग क्या कहते थे?
उत्तर-
शुरुआती दौर की फिल्म को लोग जादुई तिलस्म कहते थे।

प्रश्न 16.
‘राजा हरिश्चन्द्र फिल्म’ में स्त्रियों का पार्ट भी पुरुषों ने ही किया था। क्यों?
उत्तर-
श्री फिरोज रंगूनवाला ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि दादा साहब फालके ने पहले तो वेश्या वर्ग की कुछ स्त्रियों को अपनी फिल्म में काम करने के लिए राजी कर लिया था लेकिन बाद में कैमरा के सामने आने पर वे शरमा गई। कुछ एक को तो उनके संरक्षक दलाल ही भगाकर ले गए और इस प्रकार राजा हरिश्चन्द्र की रानी मास्टर साडंके को ही बनना पड़ा।

नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखें।

1. उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दियों ने दुनिया को ऐसे-ऐसे करिश्मे दिखलाए कि लोग बस दाँतों तले उँगली दबा-दबा के ही रह गए। आँखें अचम्भे से फट-फट पड़ीं। गपोड़ियों की गप्पों का बाजार ठप पड़ गया, क्योंकि वे लोग जो झूठे बयान करते थे, वह देर-सबेर साइंस का । करिश्मा बनकर सच साबित हो जाता था। गैस की रोशनी, बिजली का चमत्कार, टेलीग्राम, टेलीफोन के जादू, रेल, मोटर वगैरह-वगैरह जो पहले किसी ने देखे सने तक न थे, जिंदगी की असलियत बनकर हमारे सामने आ गए थे। सिनेमा का आविष्कार भी उन्नीसवीं सदी के बीतते न बीतते जादू बनकर जमाने के लिए सिर पर चढ़कर बोलने लगा। 6 टी. जुलाई 1896 का दिन हिंदुस्तान और खासकर बंबई के लिए एक अनोखा दिन था जब पहली बार भारत में सिनेमा दिखलाया गया।
(क) लेखक और पाठ के नाम लिखें।
(ख) उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दियों के करिश्मों का क्या प्रभाव पड़ा?
(ग) विज्ञान के कौन-कौन से आविष्कार हमारे सामने असलियत बनकर आए?
(घ) कौन-सा दिन हिंदुस्तान खासकर बंबई के लिए एक अनोखा दिन था और क्यों?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) लेखक-अमृतलाल नागर, पाठ-भारतीय चित्रपटः मूक फिल्मों से सवाक् फिल्मों तक।

(ख) उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दियों में जो करिश्में दिखाई पड़े वे वैज्ञानिक आविष्कारों के रूप में थे। वे सभी वैज्ञानिक आविष्कार काफी आश्चर्यजनक और विस्मयपूर्ण थे। उन्हें देखकर और उनके प्रभाव को पाकर सभी लोग दाँतों तले ऊँगली दबाने लगे।

(ग) उस समय विज्ञान के कई आश्चर्यजनक आविष्कार हुए जिनमें गैस की रोशनी, बिजली, टेलीग्राम, टेलीफोन, रेलगाड़ी, मोटरगाड़ी आदि के आविष्कार प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सारे आविष्कार मानव जीवन में बिलकुल असलियत के रूप में प्रकट हुए और मानव जीवन पर इनका अद्वितीय प्रभाव पड़ा।

(घ) 6 जुलाई 1896 का दिन हिंदुस्तान खासकर बंबई के लिए एक अनोखा दिन था। इस अनोखेपन का एकमात्र कारण यह था कि उस दिन सिनेमा के आविष्कार के फलस्वरूप बंबई शहर में पहली बार सिनेमा दिखलाया गया। यह घटना सचमुच अतिशय आश्चर्यजनक और महत्त्वपूर्ण थी।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने 19वीं और 20वीं सदी में हुए वैज्ञानिक आविष्कारों की विलक्षणता की चर्चा की है। लेखक ने बताया है कि उन दोनों सदियों में गैस, बिजली, रेल, मोटर, टेलीफोन आदि वैज्ञानिक उपकरणों के आविष्कार ने जगत को चमत्कृत कर दिया। इन आविष्कारों में सिनेमा के आविष्कार ने तो और जादू का काम किया। जब 6 जुलाई 1896 के दिन बंबई में पहली बार सिनेमा दिखाया गया तो यह तिथि एक ऐतिहासिक तिथि के रूप में मान्य हो गई।

2. भारत में इस काम को शुरू करनेवाले पहले व्यक्ति एक सावे दादा थे।
दुर्भाग्यवश उनका असली नाम मैं भूल गया हूँ। मैं 1941 में जब स्वर्गीय मास्टर विनायक की एक फिल्म ‘संगम’ लिखने के लिए कोल्हापुर गया था तब शालिनी स्टूडियोज में उनके दर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मुझे मिला था। मॅझोले कद के गोरे-चिट्टे, दुबली-पतली कायावाले सावे दादा को देखकर कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ये अपने जमाने के बहुत बड़े कैमरामैन और भारतीय फिल्म व्यवसाय के आदिपुरुष रहे होंगे। मुझे तो अब याद नहीं कि सावे दादा कोल्हापुर ही के निवासी थे या बंबई, पुणे के, पर बंबइया मार्का हिंदी वे मजे में बोल लेते थे। उन्होंने ल्यूमीयेर ब्रदर्स के प्रोटेक्टर, फोटो डेवलप करने की मशीन या मशीनें खरीद कर भारत में इस धंधे का एक तरह से राष्ट्रीयकरण कर लिया था।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) लेखक, किनका असली नाम भूल रहा था? लेखक को उनके प्रथम दर्शन कब और किस संदर्भ में हुए थे।
(ग) लेखक द्वारा चर्चित व्यक्ति के कायिक स्वरूप का चित्रांकन करें।
(घ) वह व्यक्ति किस धंधे से किस रूप में जुड़ा हुआ था?
(ङ) उसकी कार्यगत उपलब्धि की संक्षिप्त चर्चा करें।
उत्तर-
(क) पाठ-भारतीय चित्रपट : मूक फिल्मों से सवाक् फिल्तों तक, लेखक-अमृतलाल नागर।

(ख) लेखक भारत में सिनेमा के काम को शुरू करनेवाले प्रथम व्यक्ति सावे दादा के मूल माम को भूल रहा था। लेखक को उनके प्रथम दर्शन का सुयोग तब मिला था, जब वह (लेखक) 1941 में स्वर्गीय मास्टर विनायक की एक फिल्म ‘संगम’ लिखने के लिए कोल्हापुर गया हुआ था। वहीं शालिनी स्टूडियोज में उसे उनके दर्शन हुए।

(ग) लेखक द्वारा चर्चित व्यक्ति सावे दादा थे। वे मॅझोले कद के एक गोरे-चिट्टे और दुबली-पतली कायावाले व्यक्ति थे। उनकी यह कायिक बनलट अति सामान्य और सरल थी जिसमें उनके व्यक्तित्व की विलक्षणता का कोई चिन्ह नहीं था, कोई खास पहचान का आधार नहीं था।

(घ) वह व्यक्ति, अर्थात् सावे दादा अपने जमाने के बहुत बड़े कैमरामैन थे और भारतीय फिल्म व्यवसाय के आदिपुरूष के रूप में भी मान्य थे। वे बंबइया मार्का हिंदी मजे में बोल लेते थे। उन्होंने ल्युमीयेर ब्रदर्स के प्रोजेक्टर, फोटो को डेवलप करने की मशीन खरीदी थी और भारत में इस कार्य, अर्थात् धंधे को एक राष्ट्रीय रूप दे डाला था।

(ङ) सावे दादा की भारतीय फिल्म जगत में बड़ी विलक्षण उपलब्धि थी। वे एक विशिष्ट कैमरामैन थे। उन्होंने पहली बार एक सुचर्चित और विलक्षण कैमरामैन के रूप में मशीन के द्वारा फोटो को डेवलप करने का कार्य काफी कुशलता के साथ किया था। इसके लिए उन्होंने ल्यूमीयेर ब्रदर्स के प्रोजेक्ट खरीद लिए थे और इस कार्य को आश्चर्यजनक स्वरूप दिया था।

3. मुझे यह भी याद पड़ता है कि भारतीय फिल्म उद्योग के जनक माने जाने वाले दादा साहब फाल्के द्वारा बनाई गई फीचर फिल्म ‘हरिश्चंद्र’ से पहले भी एक फीचर फिल्म बनी थी उसका नाम शायद “भक्त पुंडलीक” था। दुर्भाग्यवश मैं उसके निर्माता का नाम भूल चुका हूँ। (इनका नाम था दादा साहब तोरणे-संपादक) हो सकता है वह फिल्म दादा साहब फाल्के ने ही बनाई हो। जो भी हो, इतिहास ने दादा साहब फाल्के को ही भारतीय फिल्म उद्योग का जनक माना, सावे दादा को नहीं। इसका कारण शायद यह भी हो सकता है कि दादा साहब फाल्के ने केवल एक ही नहीं, वरन् कई फीचर फिल्में एक के बाद एक बनाई और इस प्रकार उन्होंने ही इस उद्योग की नींव जमाई। सावे दादा ने छोटी-मोटी डाक्यूमेंट्री फिल्में तो बहुत बनाईं और समय को देखते हुए पैसा भी अच्छा ही कमाया और यदि पहली  फीचर फिल्म ‘भक्त पुंडलीक’ उन्हीं की बनाई सिद्ध हो तो भी उनकी अपेक्षा दादा साहब फाल्के को ही भारतीय फिल्मों का जनक मानना, मेरी समझ में उचित है। भारत सरकार ने भी फिल्म के सर्वोच्च पुरस्कार को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ कहके ही इतिहास की रचना की है।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) लेखक के अनुसार भारतीय फिल्म उद्योग के जनक कौन माने जाते हैं और क्यों?
(ग) भारतीय फिल्म उद्योग के जनक माने जानेवाले किस व्यक्ति के रूप में किस दूसरे व्यक्ति का भी नाम आता है? क्या वह उचित है?
(घ) भारत सरकार द्वारा घोषित सर्वोच्च फिल्म पुरस्कार का नाम क्या है और उसका यह नामकरण क्यों किया गया है?
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-भारतीय चित्रपट : मूक फिल्मों से सवाक् फिल्मों तक, लेखक-अमृतलाल नागर।

(ख) लेखक के अनुसार भारतीय फिल्म उद्योग के जनक दादा साहब फाल्के माने जाते हैं। इसका कारण यह था कि दादा साहब फाल्के ने ही भारत में फिल्म उद्योग की नींच डाली थी और इस क्रम में उन्होंने एक नहीं अनेक फीचर फिल्में और डाक्यूमेंट्री फिल्में बनाई थी और इस फिल्म उद्योग को एक मजबूत आधार दिया था।

(ग) भारतीय फिल्म उद्योग के जनक के रूप में एक दूसरे व्यक्ति दादा साहब तोरणे-संपादक का नाम आता है, जिन्होंने लेखक के कथनानुसार शायद दादा साहब फाल्के के पूर्व ही ‘भक्त पुंडलीक’ नामक एक फीचर फिल्म बनाई थी, लेकिन यह बात निश्चयात्मक रूप से नहीं कही जा सकती है। इसीलिए ‘दादा साहब तोरणे-संपादक को निश्चयात्मक रूप से भारतीय फिल्म उद्योग का जनक नहीं माना जा सकता है।

(घ) भारत सरकार द्वारा घोषित सर्वोच्च फिल्म पुरस्कार का नाम

साहब फाल्के पुरस्कार है। इसका यह नामकरण भारतीय फिल्म उद्योग के जनक दादा साहब के नाम पर किया गया है।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने भारतीय फिल्म उद्योग के जनक के रूप में दादा साहब फाल्के की भूमिका और उनकी उपलब्धियों की चर्चा की है। दादा साहब फाल्के ही ऐसे विशिष्ट व्यक्ति थे जिन्होंने सर्वप्रथम भारतीय फिल्म जगत को कई फीचर तथा डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाकर दी और इस उद्योग को एक मजबूत आधार दिया। इसीलिए, भारत सरकार ने इनके नाम पर ही सर्वोच्च फिल्म पुरस्कार की घोषणा की।

4. 1940 में मेरे मित्र किशोर साहू की पहली फिल्म ‘बहुरानी’ का उद्घाटन दादा साहब फाल्के के कर-कमलों द्वारा ही संपन्न हुआ था। बहूरानी के अर्थपति मेरे दूसरे मित्र स्वर्गीय द्वारका दास डागा थे। वे बड़े पढ़े-लिखे सुरुचिपूर्ण, साहित्यिक व्यक्ति थे। उन्हीं के कारण ‘बहुरानी’ के निर्माण-काल में फिल्मी दुनिया से मेरा संबंध जुड़ा। दादा साहब फाल्के से मुझे दो-तीन बार भेंट करने के सुअवसर प्राप्त हुए थे। वे बड़े दबंग, जोश में आकर बड़े झपाटे से बोलने लगते थे। वे स्वयं को बात-बात में महत्त्व देने से तो न चूकते थे, परंतु उनमें अच्छाई यह थी कि वे नई पीढ़ी के महत्त्व को एकदम नकारते न थे।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) किशोर साहू कौन थे? उनके द्वारा बनाई पहली फिल्म कौन थी और उसका उद्घाटन किसने किया था? ।
(ग) स्वर्गीय द्वारिकादास डागा कौन थे? उनकी चारित्रिक विशेषता क्या थी?
(घ) लेखक के अनुसार दादा साहेब फाल्के से भेंट होने पर उनकी कौन-सी चारित्रिक विशेषता प्रकट होती थी?
(ङ) दादा साहेब फाल्के की किसी एक खास स्वाभाविक विशेषता का उल्लेख करें।
उत्तर-
(क) पाठ-भारतीय चित्रपट : मूक फिल्मों से सवाक् फिल्मों तक, लेखक-अमृतलाल नागर।

(ख) किशोर साहू लेखक के मित्र थे, उनके द्वारा बनाई पहली फिल्म ‘बहूरानी’ थी जिसका उद्घाटन दादा साहब फाल्के ने किया था। यह फिल्म 1940 में बनी थी।

(ग) स्वर्गीय द्वारिकादास डागा लेखक के दूसरे मित्र थे। ये ‘बहूरानी’ फिल्म के अर्थपति थे। डागाजी की चारित्रिक विशेषता यह थी कि वे पढ़े-लिखे, सुरुचिपूर्ण इंसान और साहित्यिक व्यक्ति थे।

(घ) लेखक की मुलाकात दादा साहब से दो-तीन बार हुई जिसमें उनकी चारित्रिक विशेषता इस रूप में प्रकट हुई। वे दबंग और जोशीले स्वभाव के व्यक्ति थे। बातचीत में स्वयं को बहुत महत्त्व देते थे।

(ङ) दादा साहेब की खास स्वाभाविक विशेषता यह थी कि वे बातचीत के क्रम में अपने महत्त्व को तरजीह देते थे, किंतु नई पीढ़ी की महत्ता को भी स्वीकारते थे।

5. बंबई की तरह ही कलकत्ते में एक व्यवसायी जे. एफ० मादन जिन्होंने मादन थियेटर नामक सुप्रसिद्ध संस्था की स्थापना भी की थी। 1917 में एलफिंस्टन बाइस्कोप कंपनी नामक फिल्म संस्था चलाई और दादा साहब फाल्के की तरह ही वे भी फीचर फिल्में बनाने लगे। इस तरह 1913 से 1920 तक फिल्मों में क्रमशः पौराणिक कथानक ही अधिकतर हमारे सामने पेश हुए। तीसरे दशक की सबसे महान फिल्मी हस्ती बाबूराव पेंटर थे। साँवला रंग, दुबला-पतला शरीर, आँखों पर चश्मा, लंबी दाढ़ीयुक्त श्री बाबूराव पेंटर का व्यक्तित्व बहुत ही सौम्य और शालीन था। आज के सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक श्री व्ही शांताराम, स्वर्गीय बाबूराव पेंढारकर, भालाजी पेंढारकर तथा स्वर्गीय मास्टर विनायक आदि अनेक जानी-मानी फिल्मी हस्तियों के वे गुरु थे।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) जे. एफ० मादन कौन थे? फिल्म उद्योग के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों की संक्षिप्त चर्चा करें।
(ग) तीसरे दशक की सबसे महान भारतीय फिल्मी हस्ती के रूप में किनका नाम लिया जाता है? उनके व्यक्तित्व की क्या विशेषताएँ थीं?
(घ) उस समय की किन्हीं चार फिल्मी हस्तियों के नाम लिखें। (ङ) अपने समय के सुप्रसिद्ध फिल्म-निर्माता-निर्देशक के नाम लिखें
और उनकी एक विशिष्ट उपलब्धि की चर्चा करें।
उत्तर-
(क) पाठ-भारतीय चित्रपट : मूक फिल्मों से सवाक् फिल्मों तक, लेखक-अमृतलाल नागर।

(ख) जे. एफ० मादन कलकत्ते के एक पारसी व्यवसायी थे। उन्होंने मादन थियेटर नामक एक सुप्रसिद्ध संस्था की स्थापना की थी। उनके द्वारा 1917 में एलफिस्टन बाइस्कोप नामक एक कंपनी चलाई गई थी और दादा साहब फाल्के की तरह उन्होंने कई फीचर फिल्में बनाई थीं।

(ग) तीसरे दशक की सबसे महान फिल्मी हस्ती के रूप में बाबूराम पेंटर का नाम लिया जा सकता है। वे साँवले रंग के, दुबले-पतले शरीर वाले व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व बहुत ही सौम्य और शालीन था।

(घ) ऐसे चार व्यक्ति है जिनके नाम उस समय की फिल्मी हस्तियों में लिए जा सकते हैं-श्री व्ही शांताराम, बाबूराव पेंढारकर, भालजी पेंढारकर और मास्टर विनायक।

(ङ) अपने समय के सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक के रूप में श्री व्ही शांताराम का नाम लिया जाता है। इनकी अति विशिष्ट उपलब्धि यह रही है कि इन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग के क्षेत्र में काफी ख्याति तथा महत्त्वपूर्ण निर्माता और निर्देशक दोनों रूपों में बड़ी अच्छी ख्याति अर्जित की थी।

Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : भूमि एवं लोग Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी

Bihar Board Class 9 Geography प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन कक्षा 9 Bihar Board प्रश्न 1.
भारत में जीव संरक्षण अधिनियम कब लागू हुआ?
(क) 1982
(ख) 1972
(ग) 1992
(घ) 1985
उत्तर-
(ख) 1972

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 2.
भरतपुर पक्षी बिहार कहाँ स्थित है ? ।
(क) असम
(ख) गुजरात
(ग) राजस्थान
(घ) पटना
उत्तर-
(ग) राजस्थान

Class 9 Geography Chapter 5 प्रश्न 3.
भारत में कितने प्रकार की वनस्पति प्रजातियाँ पायी जाती हैं ?
(क) 89000
(ख) 90000
(ग) 95000
(घ) 85000
उत्तर-
(क) 89000

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

1. भारत में तापमान चूँकि सर्वत्र पर्याप्त है अतः ………………. की मात्रा वनस्पति के प्रकार को यहाँ निर्धारित करती है।
2. धरातल पर एक विशिष्ट प्रकार की वनस्पति या प्राणी जीवन वाले परिस्थिति तंत्र को …………………. कहते हैं।
3. मनुष्य भी पारिस्थितिक तंत्र का एक …………………… अंग है।
4. घड़ियाल मगरमच्छ की एक प्रजाति विश्व में केवल ………… देश.में पायी जाती है।
5. देश में जीवन मंडल निचय (आरक्षित क्षेत्र) की कुल संख्या …………………… है जिसमें …………….. को विश्व के जीवमंडल निचों में सम्मिलित किया गया है।
उत्तर-
1. तापमान,
2. जीवोम,
3. अभिन्न,
4. भारत,
5.14, 4 ।

भौगोलिक कारण बताएँ

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 1.
हिमालय के दक्षिणी ढलान पर उत्तरी ढलान की अपेक्षा सघन वन पाए जाते हैं।
उत्तर-
इसके कारण निम्नलिखित हैं-

  • हिमालय पर्वत के दक्षिण ढालों पर ज्यादा सघन वनस्पति होने का कारण है वर्षा । इसमें सदाबहार तथा पर्णपाती वन मिलते हैं 1000 मीटर से 2000 मीटर तक की ऊचाई पर ।
  • दक्षिण ढालों पर सूर्य की किरणें अधिक समय तक पड़ती है जो वृक्षों के लिए अत्यन्त उपयोगी है।
  • दक्षिण ढाल उपजाऊ मृदा वाले हैं। इसके विपरीत उत्तरी ढलान पर उपर्युक्त सुविधाओं के अभाव में घने वन नहीं मिलते हैं।

Bihar Board Solution Class 9 Social Science प्रश्न 2.
उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन में धरातल लता क्यों वितानों से ढंका हुआ है।
उत्तर-
उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन में सदाबहार जंगल मिलते हैं। जिन क्षेत्रों में 200 सें० मी० से अधिक वर्षा होती है । इस क्षेत्र में अधिक वर्षा ओर ऊँचे तापमान के कारण वृक्ष काफी अधिक बढ़ते हैं। वन काफी सघन होते हैं। इसके कारण सूर्य प्रकाश धरातल पर नहीं पहुंच पाता अत्यधिक वर्षा के कारण यहाँ विभिन्न प्रकार की लताएँ वृक्षों से लिपटी रहती हैं तथा धरातल विभिन्न प्रकार की झाड़ियों से आच्छादित रहता है।

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 3.
जैव विविधता में भारत बहुत धनी है।
उत्तर-
वनस्पति विविधता की तरह भारत में वन्य पशुओं में भी विविधता देखी जा सकती है। यहाँ 89,000 प्रजातियों के अन्य वन्य प्राणी मिलते हैं। हाथी जैसे बड़े पशु से लेकर भालू, सिंह, बाघ, सियार और-स्थलचर, घड़ियाल केवल भारत में ही मिलते हैं। यहाँ मछलियों की ।

कोई 2500 प्रजातियाँ और पक्षियों में मोर, हंस, बत्तख, मैंना, तोता, कबूतर, सारस और बगुले मुख्य रूप से मिलते हैं। विश्व की कुल वन्य प्राणी प्रजातियों का 13% भारत में पाई जाती है। भारत में विश्व के 5% से 8% तक के स्तनधारी जानवर उभयचरी और रेंगने वाले जीव पाए जाते हैं।

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 4.
झाड़ी एवं कँटीले वन में पौधों की पत्तियाँ रोएँदार मोमी, गूदेदार एवं छोटी होती हैं।
उत्तर-
जहाँ वर्षा 50 सें मी० से कम होती है वहाँ अनेक प्रकार के कैंटीले वन तथा झाड़ियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार की वनस्पति उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पाई जाती है। इसके अंतर्गत गुजरात, राजस्थान, हरियाणा के आर्द्रशुष्क क्षेत्र, उत्तर-प्रदेश का पश्चिम क्षेत्र, मध्यप्रदेश का उत्तर-पश्चिम क्षेत्र आदि सम्मिलित हैं। इनके अंतर्गत-खजूर, यूफोर्बिया, एकेसिया (बबूल) तथा नागफनी (कैक्टस) प्रजातियाँ आती हैं। इन वनस्पतियों के लिए पानी की मांग सबसे महत्वपूर्ण है। अत इसे प्राप्त करने के लिए इनकी जड़े अत्यन्त गहरी होती हैं। पानी को अधिक से अधिक बचा कर रखा जा सके इसलिए इनके तने मोटे होते हैं। पत्तियाँ मोटी, रोएँदार या गूदेदार होती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 1.
सिमलीपाल जीवमंडल निचय कहाँ है ?
उत्तर-
सिमलीपाल जीवमंडल निचय उड़ीसा राज्य में है।

प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी Bihar Board प्रश्न 2.
बिहार किस प्रकार के वनस्पति प्रदेश में आता है ?
उत्तर-
बिहार उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन प्रदेश में आता है।

Geography Chapter 5 Class 9 प्रश्न 3.
हाथी किस वनस्पति प्रदेश में पाया जाता है ?
उत्तर-
हाथी उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन प्रदेश में पाया जाता है।

Bihar Board Class 9 Geography Book Solution प्रश्न 4.
भारत में पाए जाने वाले कुछ संकटग्रस्त वनस्पति एवम् प्राणियों के नाम बताएँ।
उत्तर-
विश्व संरक्षण संघ ने लाल सूची के अंतर्गत 352 पादपों के को शामिल किया गया है जिनमें 52 पादप संकट ग्रस्त है और 49 किसमें तो नष्ट होने के कगार पर है। प्राणियों में-बाघ और सिंह संकट ग्रस्त हैं।

प्रश्न 5.
बिहार में किस वन्य प्राणी को सुरक्षित रखने के लिये वाल्मिकी नगर में प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।
उत्तर-
हाथी को सुरक्षित रखने के लिए प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर-
पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) शब्द का प्रयोग सबसे पहले ए० जी० टांसले (A.G. Tansley) नामक वैज्ञानिक ने सन् 1935 में किया। – परिभाषा-“पारिस्थितिक तंत्र पारिस्थितिकी की वह आधारभूत इकाई है जिसमें जैविक और अजैविक वातावरण एक दूसरे पर अपना प्रभाव डालते हुए पारस्परिक अनुक्रिया से ऊर्जा एवं रासायनिक पदार्थों के निरंतर प्रभाव तंत्र की कार्यात्मक गतिशीलता बनाए रखते हैं।” -ई0 पी0 ओडम किसी भी स्थान पर पौधा या जीव अकेला नहीं पाया जाता है बल्कि ये दोनों साथ-साथ एवं समूहों में पाए जाते हैं और दोनों एक दूसरे पर आश्रित रहते हैं। जब किसी खास जगह की वनस्पति बदल जाती है तो वहाँ के रहने वाले जीव जंतुओं को प्रभावित करती हैं और उनकी संख्या तथा किस्म बदल जाती है। किसी भी जगह के पेड़-पौधे तथा जीव-जन्तु अपने भौतिक वातावरण से अंतर्संबंधित तथा एक दूसरे से भी संबंधित होते हैं। अतः ये दोनों मिलकर एक परिस्थितिक तंत्र का निर्माण करते हैं। मनुष्य भी इस पारिस्थितिक तंत्र का एक अभिन्न अंग है।

प्रश्न 2.
भारत में पादपों तथा जीवों का वितरण किन कारकों द्वारा प्रभावित होता है?
उत्तर-
भारत में वनस्पति तथा जीवों के वितरण के अग्रलिखित कारण हैं-

भारत के वर्षा वितरण तथा वनस्पति-वितरण एवं जीवों में गहरा संबंध है । धरातल का स्वरूप, वर्षा की मात्रा वृक्षों की जाति के आधार पर भारतीय वन एवं जीव निर्भर हैं।

(i) चिरहरितवन-जिन स्थानों में 200 सें. मी० से अधिक वर्षा होती है वहाँ चिररहित वन मिलते हैं। इनमें महोगनी, आबनूस, रोजवुड, बेंत, बाँस, झाउ, ताड़, सिनकोथ और रबर हैं।

स्थान-पूर्वी एवं पश्चिमीघाट, अंडमान द्वीप, हिमालय की तरई, उत्तर प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर मिजोरम तथा त्रिपुरा है।

पाये जानेवाले जीव-बंदर, लंगूर, एक सींगवाला मेंडा तथा हाथी मिलते हैं। विभिन्न प्रकार के पक्षी तथा रेंगनेवाले जीव मिलते हैं।

(ii) पर्णपाती वन-जहाँ 70 से 200 सें० मी० वर्षा होती है।
क्षेत्र-हिमालय की तराई, प्रायद्वीपीय पठार, छोटानागपुर, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा है।
वनस्पति-सागवान, सखुआ, शीशम, चंदन, आम, महुआ, आँवला, त्रिफला आदि।
जीव जन्तु-इन वनों में, वन के अनुरूप जीव मिलते हैं। जैस-सिंह, मोर, जंगली सूअर, हिरण और हाथी हैं।

(iii) शुष्क वन-जहाँ वर्षा 50 सें० मी० से 70 सें. मी. तक होती?
क्षेत्र-राजस्थान, पंजाब, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र गुजरात ।
वृक्ष एवं पौधे-कीकर, बबूल, खैर, झाऊ, नागफनी जीव-वनों के अनुरूप इस पर आधारित जन्तुओं में राजस्थान में ऊँट, जंगली गधं मिलते

(iv) पर्वतीय वन-पर्वतों की ऊँचाई पर वर्षा के अनुरूप 1500 मीटर की ऊँचाई तक वन मिलते हैं। जैसे-कोणधारी वन, अल्पाइन वनस्पति, देवदार, स्यूस, फर, चीड़ तथा ओक मिलते हैं।
क्षेत्र-पूर्वी एवं पश्चिमी हिमालय हैं।
जीव-वन पशुओं में तेंदुआ, बाघ, रीछ, घनेवालों वाली बकरियाँ ।

(v) ज्वारीय वन-मुख्यतः भारत के पूर्वी तट पर हैं। जहाँ दलदल है।
क्षेत्र-गंगा, गोदावरी, कृष्णा कावेरी आदि नदियों के डेल्टाई भाग में ।
वनस्पति-गैंग्रोव तथा सुन्दरी नामक पेड़ होते हैं।
जीव-सुन्दरवन डेल्टा में रॉयल बंगाल टाइगर, घड़ियाल, साँप, कछुआ आदि मिलते हैं।

प्रश्न 3.
वनस्पति जगत् एवं प्राणी जगत् हमारे अस्तित्व के लिये क्यों आवश्यक हैं ?
उत्तर-
वनस्पति जगत एवं प्राणी जगत हमारे अस्तित्व के लिए अत्यन्त आवश्यक है । मानव जीवन के लिए इनकी अनेक उपयोगिताएँ

वनस्पति जगत ही वातावरण की गुणवत्ता निर्धारित करते हैं जैसे-कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को संतुलित करना, वर्षा को आकर्षित करना., मिट्टी अपरदन रोकना, पत्तियों की खाद द्वारा मिट्टी का उर्वरता को बढ़ाना आदि । इसके साथ-साथ ये हमें अनेक प्रकार के वन उत्पाद भी उपलब्ध कराते है, जैसे-कीमती इमारती लकड़िया, जलावन, पशुओं के लिए चारा, कल कारखानों के लिए लाह, जड़ी-बूटियाँ, कत्था, शहद तथा विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों के लिए निवास स्थान और चिड़ियों को निवास स्थान प्रदान करते हैं।

इसी तरह प्राणी जगत भी हमारे अस्तित्व के लिए अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिक तंत्र के सफल संचालन में योगदान देती हैं। सभ्यता के विकास में विभिन्न प्राणियों का सहयोग है। मनुष्य अपने आहार एवं कृषि कार्य के लिए विभिन्न प्राणियों पर आश्रित हैं। जैसे-दूध, मांस, ऊन, चमड़ा आदि के लिए पशुओं पर आश्रित हैं।

मानचित्र कौशल

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित को प्रदर्शित करें
(क) भारत के वनस्पति प्रदेश तथा
(ख) भारत के चौदह जीव मंडल।
उत्तर-
(क) भारत के वनस्पति प्रदेश
Bihar Board Class 9 Geography Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य प्राणी - 1

(ख) भारत के चौदह जैव मंडल निचय (आरक्षित क्षेत्र)

  1. सुन्दरवन
  2. मन्नार की खाड़ी
  3. नीलगिरि
  4. नंदादेवी
  5. नोकरेक
  6. ग्रेट निकोबार
  7. मानस
  8. सिमलीपाल
  9. दिहांग दिबांग
  10. डिबू साइक वोच
  11. पंचगढी
  12. कान्हा
  13. कच्छ का रन
  14. कंचन जंघा।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्तिः

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solutions Amrita Bhag 3 Chapter 2 संघे शक्तिः Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 2 संघे शक्तिः

Bihar Board Class 8 Sanskrit संघे शक्तिः Text Book Questions and Answers

अस्ति गङ्गायाः रमणीये तीरे पुष्कलनामको ग्रामः । तत्र बहुधनसम्पन्न: हरिहरो नाम कृषिकः । कृषिकर्मणा तेन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता । ग्रामे तत्परिसरे च तेन महती प्रतिष्ठा सम्प्राप्ता । तस्य चत्वारः पुत्राः अभवन्। पितुः कार्ये सहायतां नाकुर्वन्, प्रत्युत परस्परं नित्यं कलहायन्ते । एकः कथयति-त्वामेव पिता अधिकं मन्यते । त्वमेव तस्य विपुलां सम्पत्ति प्राप्यसि । अपरः वदति-त्वम् अतीव अलसः । कदापि किमपि हितकरम् उपयोगि कार्य न करोषि । तृतीयः तथैव विद्याध्ययनस्य निन्दा करोति, चतुर्थः विद्याध्ययनाय पितुः धनयाचना करोति तदा तृतीयः पितरं वारयति । एवमेव किमपि समाश्रित्य चतुर्ष भ्रातष कलहः प्रवर्तते स्म । अनेन ‘बुद्धिमान् पिता सततं चिन्तितस्तिष्ठति ।

अर्थ – गंगा के रमणीय तीर पर पुष्कल नामक गाँव है । वहाँ बहुत धन सम्पन्न हरिहर नामक किसान था। उसने खेती से खूब सम्पत्ति अर्जित की। गाँव और उसके चारों ओर के गाँवों में उसकी खूब प्रतिष्ठा थी। उसके चार पुत्र हुए। वे सब पिता के काम में सहायता नहीं करते थे । बल्कि चारों परस्पर : झगड़ते रहते थे। एक कहता था-तुझे ही पिता अधिक मानते हैं। तुम ही उनके विपुल धन (सब धन) को प्राप्त करोगे । दूसरा कहता था-तुम बहुत आलसी हो । कभी कुछ भी हितकर उपयोगी कार्य नहीं करते हो । तीसरा उसी. प्रकार विद्याध्ययन की निन्दा करता था। चौथा पढ़ाई के लिए पिता से पैसा माँगता था तो तीसरा पिता को मना करता था। इस प्रकार किसी भी कारण को लेकर चारों भाईयों में झगड़ा होता रहता था। इससे बुद्धिमान पिता सदैव चिन्तित रहा करता था।

वृद्धः पिता स्वपुत्रान् कृषिकर्मणः संचालनाय भूयो भूयः प्रेरयति किन्तु सर्वेऽपि अलसा: न शृण्वन्ति । एकदा स वार्धक्यजनितेन रोगेण ग्रस्तः शय्यासीनो जातः। स कलहायमानेषु पुत्रेषु संघबद्धतायाः महत्त्वस्य बोधनाय उपायमचिन्तयत्। सर्वानपि पुत्रानाहूय स एकस्मै सुबद्धं दण्डचतुष्टयं दत्वा प्राह-त्वमेनं भञ्जय । स कथमपि भक्तुं नाशक्नोत् । तदा अपरः पुत्रः तथैव आदिष्टः ।

अर्थ-बूढ़ा बाप अपने पुत्रों को खेती के लिए बार-बार प्रेरित करता था। किन्तु सभी आलसी नहीं सुनते (समझते) थे। एक बार वह बुढ़ापा रोग से ग्रस्त होकर बिछावन पकड़ लिया। वह झगड़ते हुए पुत्रों में एकता का महत्व समझाने का उपाय सोचा । सभी पुत्रों को बुलाकर चार डण्डा जो एक जगह कसकर बँधा था उठाकर एक पुत्र को देकर बोला–तुम इसको तोड़ दो। वह किसी भी प्रकार से तोड़ नहीं सका। इसके बाद दूसरे पुत्र को उसी प्रकार आदेश दिया।

सोपि तद् दण्डचतुष्टयं भक्तुं न समर्थो जातः। इयमेव दशा अपरयोरपि पुत्रयोरभवत् । तदा वृद्धः पिता दण्डचतुष्टयं निर्बध्य एकैकं. दण्डम् एकैकस्मै पुत्राय दत्तवान् । किञ्च तं दण्डं बोटयितुं पुन: आदिष्टवान् । सर्वे पुत्राः स्व-स्व हस्तस्थं दण्डं भक्तुं समर्थाः जाताः । तदा पिता कथितवान्-पुत्रा ! एवमेव बुध्यध्वम् । यदि यूयं पृथक्-पृथक् तिष्ठथ, तदा कश्चित् शत्रुः युष्मान् एकैकान् विनाशयिष्यति । यदि पुनः यूयं सर्वे मिलित्वा सुबद्धाः तिष्ठथ, तदा कोऽपि बाह्यजनः युष्मान् विनाशयितुं न समर्थः । अयमुपदेश:-संहतिः श्रेयसी पुंसाम् ।

अर्थ – वह भी बँधे चारों डण्डों को तोड़ नहीं सका। यही दशा अन्य दो पुत्रों की भी हुई। इसके बाद बूढा बाप ने चारों डण्डों को खोलकर एक-एक डण्डा एक-एक पुत्रों को दिया। उसके बाद उस डण्डे को फिर से तोड़ने का आदेश दिया। सभी पुत्र अपने-अपने हाथ का डण्डा को तोड़ने में सफल हो गये । तब पिता ने कहा-पुत्रो ! ऐसा ही तुमलोग समझो । यदि तुम सब अलग-अलग रहोगे तो कोई भी शत्र तम सबको एक-एक कर विनाश

कर सकता है। फिर यदि तुम लोग सभी मिलकर एकता में बंधे रहोगे तो कोई – भी बाहरी लोग तुम सबों का विनाश करने में समर्थ नहीं हो सकता है । यही उपदेश है कि.-मनुष्य के लिए सबसे अच्छी एकता है।

तस्माद् दिवसात् प्रभृति सर्वेऽपि चत्वारः पुत्राः स्व-स्व दुष्टविचारन् त्यक्त्वा परस्पर मेलनेन गृहेऽवर्तन्त पितुश्च सेवया तम् अरोगं कृतवन्तः ।
अर्थ – उसी दिन से सभी चारों पुत्र अपने-अपने बुरे विचारों को त्याग कर परस्पर मेल से घर में रहने लगे और पिता की सेवा करके उसे नीरोग कर दिया।

शब्दार्थ

रमणीये = सुन्दर (सप्तमी विभक्ति) । ग्रामः = गाँव । तत्र = वहाँ । बहुधनसम्पन्नः = बहुत सम्पत्ति से युक्त, धनी । कृषिकः = किसान । प्रभूता = बहुत, पर्याप्त । सम्पत्तिः = धन । अर्जिता = कमायी गयी। परिसरे = प्रांगण में/आस-पास । महती = बहुत, बड़ी । सम्प्राप्ता = प्राप्त हुई । चत्वारः = चार । अभवन् = हुए । अकुर्वन् = किये । प्रत्युत = अपितु, बल्कि । परस्परम् = आपस में । कलहायन्ते = लड़ते हैं। अपरम् = दूसरे को । कथयति = कहता है। त्वाम् = तुम्हें । एव = ही । मन्यते = मानता है। विपुलाम् = बहुत । प्रापयसि = पाओगे । अतीव = बहुत । अलसः = आलसी। किमपि = कुछ भी। हितकरम् = भला । करोषि = करते हो । तथैव = वैसे ही । धनयाचनाम् = धन की मांग । तदा = तब । पितरम् = पिता को । वारयति = रोकता है, मना करता है। एवम् = इस प्रकार । समाश्रित्य = आश्रय लेकर ।

कलहः = लड़ाई । प्रवर्तते स्म = होती थी। सततम् + लगातार । तिष्ठति = रहता है । कृषिकर्मणः = खेती के काम के । संचालनाय = करने के लिए । भूयो भूयः = बार-बार । प्रेरयति = प्रेरित करता है। शृण्वन्ति = सुनते हैं। एकदा = एक बार । वार्धक्यजनितेन = बुढ़ापे से उत्पन्न । शय्यासीनः = बिछावन पर लेटा हुआ। जातः = हुआ । संघबद्धतायाः = मिलकर रहने के । बोधनाय = समझने के लिए। अचिन्तयत् = सोचा, विचार किया। आहूय = बुलाकर । सुबद्धम् = अच्छी तरह बंधा : हुआ। दण्डचतुष्टयम् = चार दण्डों को (दण्डम् = डण्डा)। दत्वा = देकर । प्राह = कहा । एनम् = इसको, इसे । भञ्जय = तोड़ो। भक्तम् = तोड़ने के लिए/में । नाशक्नोत् = (न + अशक्नोत्) समर्थ नहीं हुआ । तदा = तब । आदिष्टः = आदेश दिया । निर्बध्य = बन्धनरहित करके, खोलकर । एकैकम् = एक-एक को । दत्तवान् = दिया। त्रोटयितुम् = तोड़ने के लिए। किञ्च = तदनन्तर । पुनः = फिर । आदिष्टवान् = आदेश दिया । हस्तस्थम्

संचालनाय = करने के लिए । भूयो भूयः = बार-बार । प्रेरयति = प्रेरित करता है। शृण्वन्ति = सुनते हैं। एकदा = एक बार । वार्धक्यजनितेन = बुढ़ापे से उत्पन्न । शय्यासीनः = बिछावन पर लेटा हुआ । जातः = हुआ। संघबद्धतायाः = मिलकर रहने के । बोधनाय = समझने के लिए । अचिन्तयत् = सोचा, विचार किया। आहूय = बुलाकर । सुबद्धम् = अच्छी तरह बंधा हुआ। दण्डचतुष्टयम् = चार दण्डों को (दण्डम् = डण्डा) । दत्वा = देकर । प्राह = कहा । एनम् = इसको, इसे । भञ्जय = तोड़ो । भङ्क्तुम् = तोड़ने के लिए/में । नाशक्नोत् = (न + अशक्नोत्) समर्थ नहीं हुआ । तदा = तब । आदिष्टः = आदेश दिया । निर्बध्य = बन्धनरहित करके, खोलकर । एकैकम् = एक-एक को । दत्तवान् = दिया । त्रोटयितुम् = तोड़ने के लिए। . किञ्च = तदनन्तर । पुनः = फिर । आदिष्टवान् = आदेश दिया । हस्तस्थम् = हाथ में स्थित, हाथ में रहने वाले । बुध्यध्वम् = तुमलोग समझो । तिष्ठथ = रहते हो । कश्चित् = कोई । एकैकान् = एक-एक को । विनाशयिष्यति = नष्ट कर देगा। मिलित्वा = मिलकर । बाह्यजनः = बाहरी मनुष्य । विनाशयितुम् = नष्ट करने के लिए में । संहतिः = एकता । श्रेयसी = अधिक अच्छी । पुंसाम् = मनुष्यों का/की/के । प्रभृति = से लेकर इत्यादि । सर्वे = सभी । त्यक्त्वा = छोड़कर । परस्परम् = आपस में । मेलनेन = मेल-मिलाप से । अवर्तन्त = थे, रहते थे। अरोगम् = रोगरहित । कृतवन्तः = किये।

व्याकरणम् 

सन्धिविच्छेद

  1. सम्पत्तिरर्जिता = सम्पत्तिः + अर्जिता (विसर्ग-सन्धिः)
  2. त्वामेव = त्वाम् + एव ।
  3. त्वमेव = त्वम् + एव
  4. किमपि = किम् + अपि
  5. कदापि = कदा + अपि (दीर्घ – सन्धिः)
  6. तथैव = तथा + एव (वृद्धि – सन्धिः )
  7. विद्याध्ययनस्य = विद्या + अध्ययनस्य (दीर्घ-सन्धिः)
  8. एवमेव = एवम् + एव
  9. चिन्तितस्तिष्ठति = चिन्तितः + तिष्ठति (विसर्ग-सन्धिः)
  10. सर्वेपि = सर्वे + अपि (पूर्वरूप एकादेश)
  11. कथमपि = कथम् + अपि
  12. सोपि = सः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  13. इयमेव = इयम् + एव
  14. अपरयोरपि = अपरयोः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  15. पुत्रयोरभवत् = पुत्रयोः + अभवत् (विसर्ग-सन्धिः )
  16. एकैकम् = एक + एकम् (वृद्धि-सन्धिः )
  17. किञ्च = किम् + च (व्यञ्जन-सन्धिः )
  18. कश्चित् = कः + चित् (विसर्ग-सन्धिः )
  19. कोऽपि . = कः + अपि (विसर्ग-सन्धिः )
  20. अयमुपदेशः = अयम् + उपदेशः
  21. गृहेऽवर्तन्त = गृहे + अवर्तन्त (पूर्वरूप-सन्धिः ) ।
  22. पितुश्च = पितुः + च (विसर्ग-सन्धिः )

प्रकृति-प्रत्यय-विभाग

Class 8 Chapter 2 Sanskrit Bihar Board

अभ्यास

मौखिक

Bihar Board Class 8 Sanskrit Solution प्रश्न 1.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् उच्चारणं कुरुत (निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण करो):
उत्तरम्:
कृषिकर्मणा, सम्पत्तिरर्जिता, समाश्रित्य, चिन्तितस्तिष्ठति, शृण्वन्ति, दण्डचतुष्टयम्, एकैकस्मै, सर्वेपि, गृहेऽवर्तन्त

Bihar Board Solution Class 8 Sanskrit प्रश्न 2.
‘संघे शक्तिः भवति’-इति विषयम् आश्रित्य संस्कृतभाषायां द्वे वाक्ये वदत।
उत्तरम्:

  1. एकतां ऋते सफलतां न मिलति ।
  2. संघे शक्तिः कलियुगे।

Bihar Board Class 8 Sanskrit Book Solution प्रश्न 3.
निम्नलिखितानां शब्दानाम् अर्थं वदत् : तथैव, विपुलाम्, कदापि, एवमेव, सततम्, एकदा, कथमपि, तदा, किञ्च।
उत्तरम्:
तथैव = उसी प्रकार । विपुलाम् = बहुत । कदापि = कभी भी। एवमेव = इसी प्रकार ही। सततम् = सदैव । एकदा = एक बार । कथमपि = कोई भी। तदा = तब । किञ्च = इसके बाद ।।

लिखित

Bihar Board 8th Class Sanskrit Solution प्रश्न 4.
वाक्यनिर्माणं कुरुत :

पितरम्, ग्रामः, कृषिकः, करोषि, एकदा, पिता, त्यक्त्वा ।
उत्तरम्:

  1. पितरम् = सः पितरम् प्रति अपश्यत् ।
  2. ग्रामः = पुष्कलो नामः एकः ग्रामः अस्ति।
  3. कृषिकः = तत्र हरिहर: नाम कृषिक: वसति ।
  4. करोषि = त्वं किम् करोषि ।
  5. एकदा = एकदा सः अत्र आगच्छत् ।
  6. पिता = पिता पुत्रेण सह गच्छति ।।
  7. त्यक्त्वा = जनाः धनं त्यक्त्वा न सुखी भवेत।

Class 8 Sanskrit Bihar Board प्रश्न 5.
सन्धिविच्छेदं कुरुत :
तथैव, चिन्तितस्तिष्ठति, सर्वेऽपि, सोपि, सम्पत्तिरर्जिता।
उत्तरम्:
तथैव = तथा. + एव ।
चिन्तितास्तष्ठति = चिन्तितः + तिष्ठति ।
सर्वेपि = सर्वे + अपि ।
सोपि = स: + अपि ।
सम्पत्तिरर्जिता = सम्पत्तिः + अर्जिता।

Sanskrit Class 8 Bihar Board प्रश्न 6.
मञ्जूषातः शब्दं चित्वा रिक्त स्थानानि पूरयत् :

(संहतिः, गङ्गयाः, चत्वारः, ग्रामे, शृण्वन्ति, कृषिकः)
उत्तरम्:

  1. अस्ति गङ्गायाः तीरे पुष्कल नामको ग्रामः ।
  2. तत्र बहुधनसम्पन्नः हरिहरो नाम कृषिकः ।
  3. ग्रामे तेन महती प्रतिष्ठा सम्प्राप्ता ।
  4. तस्य चत्वारः पुत्राः अभवन् ।
  5. सर्वेऽपि अलसा: न शृण्वन्ति ।।
  6. संहतिः श्रेयसी पुंसाम् ।

Bihar Board Class 8th Sanskrit प्रश्न 7.
प्रकृति-प्रत्यय-विभागं कुरुत :
दत्वा, जातः, समाश्रित्य, आहूय, आदिष्टः।
उत्तरम्:

Sanskrit Chapter 2 Class 8 Bihar Board

Sanskrit Class 8 Chapter 2 Bihar Board प्रश्न 8.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं पूर्णवाक्येन लिखत

(क) पुष्कलनामको ग्रामः कुत्र अस्ति ?
उत्तरम्:
पुष्कलो नामको ग्राम: गंगायाः तीरे अस्ति ।

(ख) कृषिकर्मणा केन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता?
उत्तरम्:
कृषिकर्मणा हरिहरेन प्रभूता सम्पत्तिरर्जिता ।

(ग) हरिहरस्य कति पुत्राः आसन् ?
उत्तरम्:
हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसन् ।

(घ) के अति अलसा: आसन् ?
उत्तरम्:
चत्वारो पुत्राः अलसाः आसन् ।

(च) सर्वे पुत्राः सेवया कम् अरोगं कृतवन्तः ?
उत्तरम्:
सर्वे पुत्राः सेवया पितरं अरोगं कृतवन्तः ।

Sanskrit Class 8 Chapter 2 Hindi Translation Bihar Board प्रश्न 9.
सुमेलनं कुरुत: अ

Class 8 Sanskrit Chapter Number 2 Bihar Board
उत्तरम्:
(क) – (6)
(ख) – (1)
(ग) – (5)
(घ) – (3)
(ङ) – (4)
(च) – (2)

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Bihar Board प्रश्न 10.
उदाहरणानुसारम् अव्ययपदानि चिनुत 

यथा – सः अद्य पाटलिपुत्रं गच्छति । अद्य

प्रश्नोत्तरं :

  1. त्वम् अत्र किं करोषि ? अत्र
  2. सः कदा गृहं गमिष्यति ? कदा
  3. शीला करीना वा चित्रं द्रक्ष्यति ? वा
  4. असत्यं मा वद ।… मा
  5. शकीलेन साकं सः अगच्छत् । साकं

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 2 प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 11.
अधोलिखितानां निर्देशानुसारं रूपाणि लिखत

यथा-मातृ – (द्वितीया-एकवचने) – मातरम्

  1. पुत्र – (सप्तमी एकवचने) – पुत्रे
  2. फल – (षष्ठी बहुवचने) – फलानाम् ।
  3. नदी – (चतुर्थी द्विवचने) – नदीभ्यां।
  4. लता – (सप्तमौ बहुवचने) – लतासु ।
  5. युष्मद् – (पंचमी द्विवचने) – युवाभ्याम् ।

Chapter 2 Sanskrit Class 8 Bihar Board प्रश्न 12.
अधोलिखित-वाक्यानि घटनाक्रमानुसारं लिखत

  1. तत्र हरिहरो नाम कृषिकः वर्तते ।
  2. एकदा हरिहरः रोगग्रस्तः अभवत् ।
  3. गङ्गायाः तीरे पुष्कलो नामको ग्रामः अस्ति।
  4. हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसान् ।
  5. सर्वे पुत्राः अतीव अलसां: आसन् ।
  6. हरिहरः पुत्रान् आहूय अवदत् ।
  7. सर्वे पुत्राः दुष्ट विचारान् अत्यजन् ।

उत्तरम्:

  1. गङ्गायाः तीरे पुष्कलो नामको ग्रामः अस्ति ।
  2. तत्र हरिहरो नाम कृषिकः वर्तते ।
  3. हरिहरस्य चत्वारः पुत्राः आसन् ।
  4. सर्वे पुत्राः अतीव अलसाः आसन् ।
  5. एकदा हरिहरः रोगग्रस्तः अभवत् ।
  6. हरिहरः पुत्रान् आहूय अवदत् ।
  7. सर्वे पुत्राः दुष्ट विचारान् अत्यजन् ।

Class 8 Chapter 2 Sanskrit Bihar Board प्रश्न 13.
मञ्जूषायाः उचितानि पदानि योजयित्वा वाक्य निर्माणं कुरुत

  1. सः – गच्छतः
  2. त्वम् – गच्छामि
  3. अहम् – गच्छन्ति
  4. ते – गच्छसि
  5. वयम् – गृहम्
  6. तौ – गच्छति
  7. आवाम – गच्छाम

गच्छावः

  1. प्रश्नोत्तरम्
  2. स: गच्छति ।
  3. त्वम् गच्छसि।
  4. अहम् गच्छामि।
  5. ते गच्छन्ति ।
  6. वयम् गृहम् गच्छामः।
  7. यूयम् गच्छथ।
  8. तौ गच्छतः।
  9. आवाम् गच्छावः।

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 8 बचपन के दिन

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 2 Chapter 8 बचपन के दिन Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 8 बचपन के दिन

Bihar Board Class 7 Hindi बचपन के दिन Text Book Questions and Answers

पाठ से –

Bihar Board Class 7 Hindi प्रश्न 1.
बहुविकल्पीय प्रश्न –
(अ) भूतपूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म हुआ था।
(क) बिहार में,
(ख) उड़ीसा में,
(ग) तमिलनाडु में,
(घ) कर्नाटक में।
उत्तर:
(ग) तमिलनाडु में।
(ब) रामानन्द के पिता थे

(क) सरकारी सेवक, (ख) मंदिर के पुजारी, (ग) किसान, (घ) व्यवसायी।
उत्तर:
(ख) मंदिर के पुजारी ।

(स) अब्दुल कलाम के बचपन में कितने पक्के मित्र थे।
(क) दो, (ख) तीन, (ग) चार, (घ) पाँच।
उत्तर:
(ख) तीन ।

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को शिक्षा ग्रहण करने में किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर:
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब को जिन-जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा उसमें प्रमुख थे—(i) धर्मवाद (सम्प्रदायवाद), (ii) सम्प्रदायवादी शिक्षक।

Hindi Class 7 Bihar Board Solution प्रश्न 3.
नये शिक्षक के द्वारा डॉ अब्दुल कलाम को उनके मित्र रामानन्द से अलग हटाकर बैठने को कहा गया। शिक्षक के इस व्यवहार पर अपनी राय तर्क सहित दीजिए।
उत्तर:
हमारे राय से शिक्षक का व्यवहार उचित नहीं था। क्योंकि इस प्रकार के व्यवहार वाले शिक्षक स्कूल में बच्चों के बीच साम्प्रदायिकता जातिवाद का विष बोते हैं। विद्यालय में सभी बच्चे बराबर हैं वे छात्र हैं, न कोई छात्र हिन्दू होता है और न मुसलमान न कोई सिख-ईसाई। सभी विद्यार्थी होते हैं। इस प्रकार के उच्च सोच रखने वाले ही शिक्षक योग्य शिक्षक होते हैं।

Bihar Board Class 7 Hindi Book Pdf प्रश्न 4.
रामानन्द के पिता ने दोनों दोस्तों के प्रति भेद-भाव का व्यवहार करने वाले शिक्षक.से क्या कहा और ऐसा उन्होंने क्यों कहा?.
उत्तर:
रामानन्द के पिता ने दोनों दोस्तों के प्रति भेद-भाव का व्यवहार करने वाले शिक्षक से कहा-“उन्हें निर्दोष बच्चों के दिमाग में इस प्रकार की सामाजिक असमानता एवं सांप्रदायिकता का विष नहीं घोलना चाहिए।”

ऐसा उन्होंने इसलिए कहा कि योग्य शिक्षक बच्चों में भेद-भाव उत्पन्न नहीं करते । शिक्षकों को जाति, धर्म, सम्प्रदाय, गरीब-अमीर, ऊंच-नीच आदि भेद-भाव से सदैव अलग रहना चाहिए।

पाठ से आगे –

Bihar Board Solution Class 7 Hindi प्रश्न 1.
डॉ. अब्दुल कलाम के विज्ञान शिक्षक की पत्नी की सोच में क्या परिवर्तन हुआ, इस परिवर्तन के क्या कारण रहे होंगे?
उत्तर:
कलाम साहब के विज्ञान शिक्षक की पत्नी की सोच में परिवर्तन . हुआ। क्योंकि विज्ञान शिक्षक की पत्नी ने कलाम साहब को अपने रसोई में खिलाने से इन्कार कर गई थी। लेकिन बाद में पुनः उन्होंने कलाम को बुलाकर अपने रसोई में अपने हाथ से परोस कर खिलाईं थी । इस परिवर्तन का कारण निम्नलिखित रहे होंगे –

1. विज्ञान शिक्षक अपने श्रीमती जी को साम्प्रदायिक भावनाओं से समाज बँटता है, का ज्ञान दिये होंगे । अर्थात् “मानव को मानव समझो” इत्यादि का पाठ पढ़ाये होंगे।
अथवा
कलाम के विचार-भावनाओं से प्रभावित हुई होगी।
अथवा
दरवाजे पर आये हुए को निराश नहीं करना चाहिए, इत्यादि ।

व्याकरण –

Class 7 Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
वाक्य बनाइए –
गली, पाठशाला, शिक्षक, इच्छा, तीव्र।
उत्तर:
गली – यह गली दूर तक जाती है।
पाठशाला – राम की पाठशाला सुन्दर है।
शिक्षक – शिक्षक संस्कृत पढ़ाते हैं।
इच्छा – मानव को इच्छा मंजिल तक पहुँचाती है।
तीव्र – तीव्र धारवाली चाकू दो।

Class 7 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
पर्यायवाची शब्द लिखिएधनी, घर, व्यक्ति, दिन, पत्ली।
उत्तर:
धनी-धनवान, सम्पन्न, सम्पत्तिवान ।
घर – गृह, आवास, भवन, निवास ।
व्यक्ति – आदमी, पुरुष, जन ।
दिन – दिवा, वार, दिवस।
पत्नी – भार्या, अर्धांगिणी, सहगामिनी।

बचपन के दिन Summary in Hindi

सारांश – प्रस्तुत पाठ “बचपन के दिन” भारत के राष्ट्रपति मिसाइल पुरुष ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने अपने बचपन की कुछ बातें बतायी हैं जिसमें तत्कालीन भारतीय समाज की कुछ विशेषताएँ तो कुछ कमजोरियां सामने आई हैं।

कलाम साहब का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम् कस्बे में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जैनुलाबदीन और माता का नाम आशियम्मा थी। उनके माता पिता साधारण पढ़े-लिखे आदमी थे।

बचपन में कलाम साहब के तीन पक्के दोस्त थे–रामानन्द शास्त्री, अरविंदन और शिव प्रकाशन कलाम साहब टोपी पहनकर जनेऊधारी रामानन्द शास्त्री के साथ आगे बेंच पर बैठते थे। एक दिन एक नये शिक्षक आये। हिन्दू के साथ मुसलमान को बैठना उनको अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कलाम को उठाकर पीछे की बेंच पर बैठा दिया। रामानन्द काफी उदास हो रहा था। छुट्टी के बाद रामानन्द घर जाकर यह कहानी अपने पिता लक्ष्मण शास्त्री जी (जो रामेश्वरम् मंदिर के मुख्य पुजारी थे) से कहा। वे उसी समय नयें शिक्षक महोदय को बुलवाकर कहा-बच्चों के बीच साम्प्रदायिकता और असमानता का विष नहीं घोलना चाहिए शिक्षक महोदय में बदलाव आ गये।

कलाम साहब के प्राथमिक पाठशाला में विज्ञान के शिक्षक शिवं सुब्रह्मण्यम् अय्यर महोदय कट्टर ब्राह्मण होकर भी रूढ़िवादिता से अलग थेउनका विशेष समय कलाम के साथ बीतता था। वे कलाम से कहते थे”कलाम, मैं तुम्हें ऐसा बनाना चाहता हूँ कि तुम बड़े शहरी लोगों के बीच उच्च शिक्षित व्यक्ति के रूप में पहचाने जाओ।”

एक दिन उन्होंने अपने घर खाने पर कलाम साहब को बुलाया। उनकी पत्नी इस बात से परेशान थी कि-एक मुसलमान को भोजन पर आमंत्रित किया गया है। उन्होंने मुझे बाहर ही खाना खिला दिया। पुन: एक सप्ताह के बाद अय्यर साहब ने दोबारा कलाम को खाने पर बलाया तो कलाम साहब की हिचकिचाहट देख अय्यर साहब ने कहा-“इसमें परेशान होने की जरूरत : नहीं है। एक बार जब तुम व्यवस्था बदल डालने का फैसला कर लेते हो तो ऐसी समस्याएँ सामने आती ही हैं।

अगले सप्ताह जब रात्रि भोज में कलाम साहब अय्यर महोदय के घर पहुँचे तो उनकी पत्नी ने रसोईघर में ले जाकर अपने हाथों से रसोई परोस कर खाना खिलाई।

जब कलाम साहब की उम्र 15 साल की थी उनका नामांकन रामनाथपुरम् के श्वार्ट्ज हाई स्कूल में हुआ था। वहाँ एक शिक्षक आया दुरै सोलोमन बड़े स्नेही और खुले दिमाग वाले थे। वे,सदैव छात्रों का उत्साह बढ़ाया करते थे तथा कहा करते थे—“जीवन में सफल होने और परिणाम प्राप्त करने के लिए तुम्हें तीन शक्तिशाली ताकतों को समझना चाहिए. इच्छा, आस्था और उम्मीदें ।” उन्होंने ही कलाम साहब को सिखाया कि जो भी चीज चाहते हो उसके लिए तीव्र कामना होनी चाहिए फिर वह चीज अवश्य मिल जाता है। ‘वे ही कहा करते थे.”निष्ठा एवं विश्वास से तुम अपनी नियति को बदल सकते हो।”

Bihar Board Class 10 Political Science Solutions Chapter 5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Political Science राजनीति विज्ञान : लोकतांत्रिक राजनीति भाग 2 Chapter 5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Political Science Solutions Chapter 5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ

Bihar Board Class 10 Political Science लोकतंत्र की चुनौतियाँ Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनें।.

Loktantra Ki Chunotiya Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
लोकतंत्र की सफलता निभी करती है
(क) नागरिकों की उदासीनता पर
(ख) नागरिकों की गैर-कानूनी कार्रवाई पर
(ग) नागरिकों की विवेकपूर्ण सहभागिता पर
(घ) नागरिकों द्वारा अपनी जाति के हितों की रक्षा पर
उत्तर-
(ग) नागरिकों की विवेकपूर्ण सहभागिता पर

लोकतंत्र की चुनौतियां Class 10 Notes Bihar Board प्रश्न 2.
15वीं लोकसभा चुनाव से पूर्व लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी थी-
(क) 10 प्रतिशत
(ख) 15 प्रतिशत
(ग) 33 प्रतिशत
(घ) 50 प्रतिशत
उत्तर-
(क) 10 प्रतिशत

आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है कैसे Bihar Board प्रश्न 3.
‘लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है’ यह कथन है
(क) अरस्तू का
(ख) अब्राहम लिंकन का
(ग) रूसो का
(घ) ग्रीन का
उत्तर-
(ख) अब्राहम लिंकन का

Aatankwad Loktantra Ki Chunauti Hai Kaise Bihar Board प्रश्न 4.
नए विश्व सर्वेक्षण के आधार पर भारतवर्ष में मतदाताओं की संख्या है लगभग
(क) 90 करोड़
(ख) 71 करोड़
(ग) 75 करोड़
(घ) 95 करोड़
उत्तर-
(ख) 71 करोड़

लोकतंत्र की चुनौतियां Class 10 Bihar Board प्रश्न 5.
क्षेत्रवाद की भावना का एक परिणाम है-
(क) अपने क्षेत्र से लगाव
(ख) राष्ट्रहित
(ग) राष्ट्रीय एकता
(घ) अलगाववाद
उत्तर-
(घ) अलगाववाद

II. रिक्त स्थानों की पर्ति करें।

Bihar Board Solution Class 10 Social Science प्रश्न 1.
भारतीय लोकतंत्र ……………… लोकतंत्र है। (प्रतिनिध्यात्मक/एकात्मक)
उत्तर-
प्रतिनिध्यात्मक

Bihar Board Class 10 Geography Solutions प्रश्न 2.
न्यायपालिका में…………..”के प्रति निष्ठा होनी चाहिए।
उत्तर-
सत्य

लोकतंत्र के मार्ग की बाधाओं का उल्लेख करें Bihar Board प्रश्न 3.
भारतीय राजनीति में महिलाओं को……….प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गई है।
उत्तर-
33 प्रतिशत 1

Bihar Board Class 10 Social Science Solution प्रश्न 4.
वर्तमान में नेपाल की शासन-प्रणाली…………… है।
उत्तर-
लोकतंत्रात्मक

Loktantra Ki Chunotiya Bihar Board प्रश्न 5.
15वीं लोकसभा चुनाव में यू. पी. ए. द्वारा…………..”सीटों पर विजय प्राप्त की गई।
उत्तर-
265

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Loktantra Ki Chunautiyan Bihar Board प्रश्न 1.
लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है। कैसे ?
उत्तर-
लोकतंत्र शासन का वह रूप है जिसके शासन की सम्पूर्ण शक्ति जनता में निहित रहती है। दूसरे शब्दों में, लोकतंत्र उस शासन व्यवस्था को कहते हैं जहाँ जनता शासन-कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेती है। शासन जनता की इच्छाओं तथा आकांक्षाओं के अनुरूप संचालित होता है। अतः लोकतंत्र जनता द्वारा संचालित, जनता का एवं जनता के लिए शासन है।

Social Science Class 10th Bihar Board प्रश्न 2.
केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच आपसी टकराव से लोकतंत्र कैसे प्रभावित होता है?
उत्तर-
केन्द्र और राज्यों के बीच आपसी टकराव से आतंकवाद से लड़ने और जनकल्याणकारी योजनाओं (शिक्षा, जाति भेदभाव, लिंग भेद, नारी शोषण, बाल मजदूरी एवं सामाजिक कुरीतियों) इत्यादि के सुचारु क्रियान्वयन में बाधा पहुंचती है, जबकि कोई भी अपेक्षित लक्ष्य हासिल करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर सामंजस्य एवं तालमेल आवश्यक है।

Bihar Board Class 10 History Book Solution प्रश्न 3.
परिवारवाद क्या है ?
उत्तर-
परिवारवाद ऐसी मानसिकता है जिससे राजनीति भी प्रभावित हुई है। इसके अन्तर्गत राजनीतिक दल के सुप्रीमों या अध्यक्ष चुनाव में अपने ही परिवार के ज्यादा-से-ज्यादा सदस्यों को टिकट देते हैं। अत: परिवारवाद राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करती है।

Bihar Board Class 10th Geography Solution प्रश्न 4.
आर्थिक अपराध का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर-
वैसा अपसमजो आर्थिक कारणों के लिए होती है जैसे बैंक डकैती, क्लर्क, अफसर द्वारा घूस लेना, सरकारी खजाने का दुरुपयोग करना एवं सरकारी सम्पत्ति को हड़पना इत्यादि।

Bihar Board Class 10 History Chapter 1 प्रश्न 5.
सूचना का अधिकार कानून लोकतंत्र का रखवाला है, कैसे?
उत्तर-
सूचना का अधिकार कानून द्वारा लोगों को जानकार बनाने और सरकार के काम-काज एवं उसकी नीति जानने का अधिकार जनता को दिया गया है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर रोक लगाता है। सूचना का अधिकार होने से लोग सरकार की प्रत्येक नीति एवं कार्य के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। अतः सूचना का अधिकार कानून लोकतंत्र का रखवाला है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 10 History Notes Pdf प्रश्न 1.
लोकतंत्र से क्या समझते हैं ?
उत्तर-
लोकतंत्र या प्रजातंत्र आंग्ल भाषा के डिमोक्रेसी शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। “डिमोक्रेसी’ शब्द दो यूनानी शब्दों के योग से बना है, ‘डेमोस’ और ‘क्रेशिया’, जिसका अर्थ है ‘जनता’ और ‘शासन’। इस प्रकार व्युत्पति की दृष्टि से लोकतंत्र का अर्थ है-जनता का शासन।
अतः लोकतंत्र शासन का वह रूप है जिसमें शासन की सम्पूर्ण शक्ति जनता में निहित रहती है। दूसरे शब्दों में, लोकतंत्र उस शासन व्यवस्था को कहते हैं, जहाँ जनता शासन-कार्यों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेती है। शासन जनता की इच्छाओं तथा आकांक्षाओं के अनुरूप संचालित होता है। अब्राहम लिंकन के शब्दों में “लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन है।’ डायसी के अनुसार”, “लोकतंत्र शासन का वह रूप है जिसमें शासक वर्ग सारे राष्ट्र की जनता का एक बड़ा अंश है।” सीले के विचारानुसार, “लोकतंत्र वह शासन है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का भाग हो।” स्पष्ट है कि लोकतंत्र में शासन को जनता द्वारा निश्चित किया जाता है। आधुनिक समय में लोकतंत्र केवल शासन का रूप नहीं है, अपितु जीवन-दर्शन है।

Bihar Board Class 10 History Notes प्रश्न 2.
गठबंधन की राजनीति कैसे लोकतंत्र को प्रभावित करती है?
उत्तर-
स्पष्ट बहुमत नहीं आने पर सरकार बनाने के लिए छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों का आपस में गठबंधन करना, वैसे उम्मीदवारों को भी चुन लिया जाना, दो दागी प्रवृत्ति या आपराधिक पृष्ठभूमि के होते हैं, लोकतंत्र के लिए एक अलग ही चुनौती है। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपनी आकांक्षाओं और लाभों की संभावनाओं के मद्देनजर ही गठबंधन करने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे प्रशासन पर सरकार की पकड़ ढीली हो जाती है।

गठबंधन में राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि सरकार के कार्यक्रमों, कार्यों एवं नीतियों में हस्तक्षेप करते हैं जिससे सरकार को कल्याणकारी कामों में मुश्किल आती है जिससे काम-काज सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो जाता है। लोकतांत्रिक तरीके से काम-काज नहीं हो पाता अतः मठबंधन की राजनीति लोकतंत्र को प्रभावित करती है।

Bihar Board Class 10 Sst Solution प्रश्न 3.
नेपाल में किस तरह की शासन व्यवस्था है ? लोकतंत्र की स्थापना में वहाँ क्या-क्या बाधाएँ हैं?
उत्तर-
नेपाल में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है। प्रयोग सफलता एवं असफलता के बीच फंस गया है। लोकतंत्र की स्थापना में वहाँ सख्त राजनीतिक दल का अभाव, योग्य एवं कर्मठ राष्ट्रीय नेता का अभाव एवं राष्ट्रशाही के प्रति जनता की स्थायी भक्ति इत्यादि बाधाएं लोकतंत्र की बहाली के मुद्दे हैं।

प्रश्न 4.
क्या शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है ?
उत्तर-
अशिक्षा दुर्गुणों की जननी है। लोकतंत्र की सफलता के लिए शिक्षित नागरिक का होना अत्यन्त आवश्यक है। शिक्षित नागरिक ही अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सही जानकारी रख सकते हैं और उनका सही उपयोग कर सकते हैं। लोकतंत्र का सफल परिचालन विभिन्न कार्यक्षेत्रों में नागरिक की सक्रिय सहभागिता पर ही निर्भर है। यह सहभागिता तभी प्रभावी हो सकती है जब नागरिक शिक्षित हों, उनमें उचित और अनुचित का विभेद कर सकने का विवेक हो, उन्हें अपने अधिकारों एवं दायित्वों का ज्ञान हो। यह विवेक, ज्ञान, शिक्षा के बिना सम्भव नहीं है। अशिक्षित व्यक्ति और पशु में कोई अधिक अन्तर नहीं होता।

वह अच्छे और बुरे की सही पहचान नहीं कर पाता। वह रूढ़ियों, अन्धविश्वासों और पाखण्ड की दुनिया से ऊपर उठकर आधुनिक वैज्ञानिक युग को समझ भी नहीं सकता। विज्ञान ने मानव-प्रगति के लिए जो विविध साधन खोज निकाले हैं, कृषि के वैज्ञानिक विधियों का समावेश किया है, मानव स्वास्थ्य पर नवीन प्रयोग किए हैं इन सबका लाभ भला अशिक्षित व्यक्ति क्या उठा सकता है ? अतएव अशिक्षित नागरिकों का लोकतंत्र लोकतंत्र का माखौल ही होगा। वास्तव में लोकतंत्र की ईमारत शिक्षा रूपी नींव पर ही खड़ा हो सकती है। अतः लोकतंत्र की सफलता के लिए शिक्षित नागरिकों का होना अत्यन्त आवश्यक है। अतः हम कह सकते हैं कि शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है।

प्रश्न 5.
आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है। कैसे?
उत्तर-
किसी स्थापित व्यवस्था का विनाश कर अव्यवस्था तथा आतंक फैलाना आतंकवाद है। आतंकवाद के जन्म के मूल कारणों में धार्मिक कट्टरता या आर्थिक विषमता होती है। हिंसा किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए अच्छी नहीं होती है। लोकतंत्र में हिंसा या आतंक होने से राजनीतिक अस्थिरता एवं असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे लोकतांत्रिक काम-काज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अतः आतंकवाद लोकतंत्र के लिए चुनौती होता जा रहा है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्तमान भारतीय राजनीति में लोकतंत्र की कौन-कौन-सी चुनौतियाँ हैं ? विवेचना करें।
उत्तर-
भारतीय प्रजातंत्र के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं जो निम्नलिखित हैं

  • शिक्षा का अभाव- भारत में शिक्षा की कमी है, ज्यादा लोग अशिक्षित हैं। फलस्वरूप जनता प्रजातंत्र का महत्व नहीं समझती हैं उसे अपने अधिकारों और कर्तव्यों की सही जानकारी नहीं होने के कारण सरकार के कामों में दिलचस्पी नहीं ले पाती।
  • सामाजिक असमानता- प्रजातंत्र की सफलता के लिए सामाजिक समानता जरूरी है। हमारे देश में जाति, धर्म, ऊँच-नीच का भेदभाव बहुत अधिक है। समाज के लोगों में सहयोग का अभाव है। समाज के सभी लोग अपनी भलाई पर विशेष ध्यान देते हैं।
  • आर्थिक असमानता- भारत में आर्थिक असमानता बड़े पैमाने पर है। कुछ लोग ही अमीर हैं, अधिकतर लोग गरीब हैं।
  • मतदान का दुरुपयोग भारतीय प्रजातंत्र में भारतीय जनता मतदान के महत्व को नहीं समझ पाती, अत: अपने मतदान का दुरुपयोग करती है। बूथ छापामारी या असामाजिक तत्वों के उपद्रव के कारण लोग अपना मतदान ठीक से नहीं कर पाते।
  • अव्यवस्थित राजनीतिक दल राजनीतिक दल प्रजातंत्र का प्राण होता है। राजनीतिक ग का नहीं होना भारतीय प्रजातंत्र के लिए दुर्भाग्य की बात है। छोटे-छोटे ‘राजनीतिक दल भारतीय प्रजातंत्र के लिए गंभीर समस्या हैं।

प्रश्न 2.
बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र के विकास में कहाँ तक सहायक है?
उत्तर-
लोकतंत्र की सफलता के लिए महिलाओं का राजनीति में भागीदारी लोकतंत्र के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण है। देश की आधी आबादी महिलाओं की है। इसलिए महिलाओं ने आजादी ‘ के समय बढ़-चढ़कर भाग लिया था। उस समय की महत्वपूर्ण नारी नेता सरोजनी नायडू, अरुणा आसिफ अली, विजय लक्ष्मी पण्डित इत्यादि ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

हमारे राज्य बिहार में स्वतंत्रता के समय महिलाएं अंग्रेजों के सामने डटी रहीं। इस प्रदेश में महिलाएं राजनीति के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं। जिसका ज्वलंत उदाहरण वर्तमान में -15वीं लोकसभा के अध्यक्ष मीरा कुमार हैं। इससे पूर्व बिहार में राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री पद को सुशोभित किया है। महिला आरक्षण के लिए महिलाओं ने बिहार में आंदोलन किया है जिससे यह पता चलता है कि राजनीति की समझ महिलाओं में पैदा हुई है। बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी इस बात को लेकर और बढ़ी है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित होने के लिए राज्य सभा में गया तो महिलाओं ने इस पर खुशी जाहिर की।

किसी भी देश के विकास के लिए महिलाओं को शिक्षित होना और सशक्त होना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि महिलाओं की संख्या देश की आबादी की आधी है। बिहार की लगभग सभी पार्टियों ने चुनाव में लड़ने के लिए महिलाओं को टिकट दी है जिससे यह पता चलता है कि लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में महिलाएँ राजनीति के क्षेत्र में अपना योगदान अच्छी तरह से दे सकती हैं। अतः बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बहुत ही महत्वपूर्ण होगी।

बिहार की महिलाएं राष्ट्र की प्रगति के लिए पुरुषों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। खेतीबारी से लेकर वायुयान उड़ाने और अंतरिक्ष तक जा रही है। इसके बावजूद वे दोयम दर्जे की शिकार हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए सरकार ने नई पंचायती राजव्यवस्था में आरक्षण का प्रावधान किया है। गाँवों में आज महिलाएं पंच और सरपंच चुनी जा रही हैं। अतः हम कहते हैं कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी से बिहार राज्य का निरन्तर विकास होगा और लोकतंत्र की जड़ बिहार में और मजबूत होगी।

प्रश्न 3.
परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है ?
उत्तर-
बिहार में परिवारवाद और जातिवाद लोकतंत्र को कई मायने में प्रभावित कर रहा है। हाल के दशकों में यहाँ पर परम्परा बनी कि जिस जनप्रतिनिधि के निधन या इस्तीफे के कारण कोई सीट खाली हुई उसके ही परिवार के किसी व्यक्ति को चुनाव का टिकट दे दिया जाये। यह बिहार के लोकतंत्र के साथ-साथ भारतीय लोकतंत्र को भी प्रभावित करता है। जातिवाद के आधार पर बिहार का जाति के आधार पर बंटवारा यहाँ के लोकतंत्र को एक खतरा है।

बिहार की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में हम कह सकते हैं कि जातिवाद और परिवारवाद लोकतंत्र को कमजोर बनाता है। चुनाव के समय परिवारवाद और जातिवाद के आधार पर टिकटों का बँटवारा होता है जिससे योग्य प्रतिनिधि या उम्मीदवार नहीं आ पाते हैं। जातीय समीकरण बनाने के चक्कर में कभी-कभी अयोग्य उम्मीदवार का चयन हो जाता है जो लोकतंत्र के लिए काफी घातक है। उसी तरह परिवारवाद लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। उदाहरण के लिए 2009 में सम्पन्न बिहार विधान सभा के उपचुनाव के दौरान जनता दल यू. ने परिवार को तरजीह नहीं दिया जिससे पार्टियों में आंतरिक कलह उत्पन्न हो गया और लोकतंत्र को उससे काफी नुकसान पहुंचा।

प्रश्न 4.
क्या चुने हुए शासक लोकतंत्र में अपनी मर्जी से सब कुछ कर सकते हैं ?
उत्तर-
लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से संसद या विधानसभा में भेजती है। चुने हुए प्रतिनिधि जनता की समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और उन समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार से मांग करते हैं। प्रतिनिधि अपनी मर्जी से सब कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि लोकतंत्र में जनता सर्वमान्य होती है। यदि शासक अपनी मर्जी का काम करते हैं तो जनता उसके विरुद्ध आंदोलन करती है जिससे शासक को खतरा होने लगता है कि ‘ वे सरकार से बाहर हो सकते हैं या जनता भविष्य में उसे नकार न दें। यह भय शासक को अपनी मर्जी से काम करने से बचाता है। परन्तु हाल के वर्षों में यह देखने में आया है कि शासक वर्ग अपनी मनमानी करते हैं जिससे लोकतंत्र को खतरा होने लगता है। वास्तव में लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है साथ ही ताकतबर होती है। वह चाहे तो शासक को अपनी मर्जी का काम करने से रोक सकती है।

प्रश्न 5.
न्यायपालिका की भूमिका लोकतंत्र की चुनौती है कैसे? इसके सुधार के उपाय क्या हैं?
उत्तर-
भारतीय लोकतंत्र प्रतिनिध्यात्मक लोकतंत्र है। इसमें शासन का संचालन जन-प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। भारतीय लोकतंत्र के तीन अंग हैं-कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका। लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका लोकतंत्र के लिए चुनौती बनती जा रही है। वह अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर कार्यपालिका एवं विधायिका को प्रभावित करती है जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जब विधायिका कानून पारित करती है तो न्यायपालिका उस कानून को व्यावहारिक-सौर पर उसमें फेर-बदल के लिए विधायिका पर दबाव डालने की कोशिश करती है जिससे टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है।

न्यायपालिका को विधायिका द्वारा बनाये गये कानून पर मनन करना चाहिए जिससे तीनों अंग कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सामंजस्य बनाकर लोकतंत्र को मजबूत कर सकते हैं।

प्रश्न 6.
आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
किसी स्थापित व्यवस्था का विनाश कर अव्यवस्था तथा आतंक फैलाना आतंकवाद है। आतंकवाद के जन्म के मूल कारणों में धार्मिक कट्टरता या आर्थिक विषमता होती है। हिंसा किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए अच्छी नहीं होती है। लोकतंत्र में हिंसा या आतंक उत्पन्न हो जाता है जिससे लोकतांत्रिक काम-काज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अतः आतंकवाद लोकतंत्र के लिए चुनौती होता जा रहा है।

आतंकवाद पूरे विश्व में एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है। जिसका समाधान विश्व स्तर पर भी हो रहा है। फिर भी आतंकवाद दुनिया के लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था में चुनौती है। यह चुनौती लोकतंत्र के लिए घातक बनता जा रहा है।

Bihar Board Class 10 History लोकतंत्र की चुनौतियाँ Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
महिला आरक्षण बिल विधेयक में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण की बात ‘कही गई है?
(क) 22 प्रतिशत
(ख) 33 प्रतिशत
(ग) 10 प्रतिशत
(घ) 44 प्रतिशत
उत्तर-
(ख) 33 प्रतिशत

प्रश्न 2.
एनक्रुमा कहाँ के राष्ट्रपति चुने गए थे?
(क) पोलैण्ड
(ख) मैक्सिको
(ग) चीन
(घ) घाना
उत्तर-
(घ) घाना

प्रश्न 3.
इनमें कौन लोकतंत्र की चुनौती का उदाहरण नहीं है ?
(क) दक्षिण अफ्रीका में गोरे अल्पसंख्यकों को दी गई रियायतें वापस लेने का दबाव
(ख) सऊदी अरब में महिलाओं को सार्वजनिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं
(ग) भारत में अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा
(घ) श्रीलंका में सरकार और तमिलों के बीच तनाव
उत्तर-
(क) दक्षिण अफ्रीका में गोरे अल्पसंख्यकों को दी गई रियायतें वापस लेने का दबाव

प्रश्न 4.
लोकतंत्र की सफलता के लिए एक आवश्यक शर्त क्या हैं ?
(क) शिक्षा का अभाव
(ख) बेरोजगारी
(ग) लोकतंत्र में आस्था
(घ) मतदान का दुरुपयोग
उत्तर-
(ग) लोकतंत्र में आस्था

प्रश्न 5.
लोकतंत्र के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा क्या है ?
(क) लोकतंत्र में आस्था
(ख) अशिक्षा
(ग) सामाजिक समानता
(घ) राजनीतिक जागृति
उत्तर-
(ख) अशिक्षा

प्रश्न 6.
स्विट्जरलैंड में महिलाओं को मताधिकार किस वर्ष प्राप्त हुआ?
(क) 1848 में
(ख) 1871 में
(ग) 1971 में
(घ) 1991 में
उत्तर-
(ग) 1971 में

प्रश्न 7.
भारतीय लोकतंत्र की कमजोरियों को दूर करने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपाय क्या है ?
(क) आर्थिक असमानता
(ख) मीडिया पर नियंत्रण
(ग) सुधारात्मक कान्नों का निर्माण
(घ) बूथ छापामारी
उत्तर-
(ग) सुधारात्मक कान्नों का निर्माण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्षेत्रवाद क्या है ?
उत्तर-
यह पक्षपात से उत्पन्न ऐसी सोच है, जो किसी क्षेत्र विशेष की जनता से यह भावना उत्पन्न करती है कि उसका क्षेत्र ही सर्वश्रेष्ठ है और बाकी सब साधारण। इसके कारण सामाजिक विषमताएं पैदा हो जाती है जो किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

प्रश्न 2.
विधि का शासन क्या है ?
उत्तर-
विधि के शासन से तात्पर्य यह है कि लोकतंत्र में सरकार संविधान द्वारा निर्दिष्ट अधिकारों के अनुसार ही जनता पर शासन करे। इस सिद्धांत के अनुसार सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया गया। पहले राजतंत्रात्मक व्यवस्था में राजा ही समस्त शक्तियों का स्रोत होता था लेकिन लोकतंत्र में सरकार मनमानी नहीं कर सकती है।

प्रश्न 3.
बूथ-छापामारी से क्या समझते हैं ?
उत्तर-
चुनावी दंगल में बूथ छापामारी वह दाँव है जिसे कोई उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार को हराने के लिए लगाता है। जिस उम्मीदवार के पास तरकत है, जिसका बोलवाला है उसके समर्थक , बूथों पर छापामारी करके सारे मत अपने पक्ष में डलवाने में समर्थ हो जाते हैं।

प्रश्न 4.
व्यक्ति की गरिमा का उल्लेख संविधान के किस भाग में है।
उत्तर-
व्यक्ति की गरिमा का उल्लेख संविधान की प्रस्तावना में है।

प्रश्न 5.
लोकतंत्र से जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा क्या है ?
उत्तर-
लोकतंत्र से जनता की अनेक अपेक्षाएँ हैं लेकिन जो सबसे बड़ी अपेक्षा है वह है जनता को लोकतांत्रिक व्यवस्था में आर्थिक समस्याओं से जूझना नहीं पड़े। आर्थिक स्वतंत्रता ही लोकतंत्र का आधार है। भूखे व्यक्ति के लिए लोकतंत्र का कोई महत्व नहीं रह जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के समक्ष उपस्थित तीन चुनौतियों का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के समक्ष उपस्थित तीन चुनौतियां निम्नलिखित हैं

  • मौलिक आधार बनाने की चुनौती- अनेक देश आज भी राजशाही, तानाशाही और फौजी शासन के अधीन है जहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को अपनाने का प्रयास चल रहा है। ऐसे देशों में लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के लिए तैयार कराने के लिए मौलिक आधार बनाना आवश्यक है जिससे लोकतांत्रिक सरकार का गठन किया जा सके।
  • विस्तार की चुनौती- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के सामने दूसरी चुनौती इसके विस्तार की है। केंद्र, इकाइयों, स्थानीय निकायों, पंचायतों, प्रशासनिक इकाइयों की सभी संस्थाओं को लोकतांत्रिक बनाने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं सत्ता में भागीदारी को भी विस्तृत बनाना है।
  • सशक्त बनाने की चुनौती-लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे सशक्त बनाने की है। जनता की प्रतिनिधि संस्थाओं और उसके सदस्यों का जनता के प्रति जो व्यवहार – है, उसे मजबूत करने की चुनौती बहुत नहीं है।

प्रश्न 2.
लोकतांत्रिक सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह होता है कि इसमें अपनी कमजोरियों को सुधारने की क्षमता है। लोकतांत्रिक शासन की चुनौतियों को लोकतांत्रिक सुधार द्वारा डटकर सामना किया जा सकता है। प्रत्येक लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था की अपनी अलग-अलग कमजोरियाँ होती हैं और उसमें अलग-अलग लोकतांत्रिक सुधारों की भी आवश्यकता है। लोकतांत्रिक सुधार के द्वारा लोकतंत्र की चुनौतियों या कमजोरियों को दूर किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
लोकतंत्र से जनता की अपेक्षाओं का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर-
लोकतंत्र को शासन का सर्वश्रेष्ठ रूप माना जाता है। यह जनता का जनता के लिए और जनता द्वारा शासनं ही। स्वाभाविक है कि इससे जनता की अपेक्षाएँ भी अधिक होगी। लोकतंत्र से जनता की अपेक्षा यह है कि प्रत्येक व्यक्ति से समान व्यवहार हो। समानता को लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा कहा जाता है। लोकतंत्र से जनता को जो सबसे बड़ी अपेक्षा है वह यह है कि उसे आर्थिक समस्याओं से जुझना नहीं पड़े। लोकतंत्र से जनता की एक अपेक्षा यह भी है कि इस शासन व्यवस्था में उनका जीवन सुरक्षित हो। लोकतंत्र में घृणा, स्वार्थ, द्वेष, ईर्ष्या, जैसी बुराइयों के पनपने से नैतिकता समाप्त हो जाती है। लोकतंत्र से जनता की तक अपेक्षा यह भी है कि उसकी शासन व्यवस्था में उसकी गरिमा का भी संवर्धन हो।

प्रश्न 4.
बिहार में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं.?
उत्तर-
बिहार भी भारतीय लोकतंत्र का एक अंग है। बिहार में लोकतांत्रिक व्यवस्था प्राचीनकाल में ही विद्यमान थी। बिहार के ही वैशाली जिले में लिच्छवियों का गणतंत्र था। लिच्छवियों की शासन प्रणाली गणतांत्रिक पद्धति पर आधारित थी। राज्य की शक्ति जनता में निहित थी। अत: यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बिहार में लोकतंत्र की जड़ें काफी गहरी थी। भारत की तरह बिहार में भी लोकतंत्र सफलता के मार्ग पर अग्रसर है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण चुनौतियों का वर्णन करें।
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के समक्ष विभिन्न तरह की चुनौतियाँ हैं जो निम्नलिखित हैं

i. मौलिक आधार बनाने की चनौती यह सही है कि इक्कीसवीं सदी लोकतंत्र की शताब्दी है। परंतु अभी भी विश्व के अनेक देश राजशाही, तानाशाही और फौजी शासन . के अधीन है। वे उनके शासन से मुक्ति चाहते हैं और लोकतंत्र को अपनाना चाहते हैं। इसके लिए बहुत से देशों में प्रयास तेजी से चल रहे हैं। ऐसे देशों में लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के लिए तैयार कराने के लिए मौलिक आधार बनाना आवश्यक है। मौलिक आधार बनाकर ही वहाँ लोकतांत्रिक सरकार का गठन किया जा सकता है।

ii. विस्तार की चुनौती-जहाँ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना हो चुकी है और जहाँ मौलिक आधारों को बनाया गया है उसे सर्वत्र लागू करना है। इसका मतलब है कि लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के सामने विस्तार की चुनौती है। केंद्र, इकाइयों,स्थानीय निकायों, पंचायतों, प्रशासनिक इकाइयों की सभी संस्थाओं को लोकतांत्रिक  बनाने की आवश्यकता है। इतना ही सत्ता में भागीदारी को भी विस्तृत बनाना है। इसमें . . वंश, लिंग, जाति, धर्म, संप्रदाय भाषा, स्थान आदि के आधार पर किसी को वंचित नहीं करना है। आधुनिक युग में विकसित अथवा विकासशील दोनों प्रकार की लोकतांत्रिक
शासन-व्यवस्थाओं के लिए यह चुनौती एकसमान है।

iii. सशक्त बनाने की चुनौती- लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे सशक्त बनाने की है। यह चुनौती प्रत्येक लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के सामने किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है। जनता की प्रतिनिधि संस्थाओं और उसके सदस्यों का जनता के प्रति जो व्यवहार है, उसे मजबूत करने की चुनौती बहुत बड़ी है। लोकतांत्रिक शासन की जितनी संस्थाएं हैं, उसकी कार्य पद्धति में सुधार लाना आवश्यक है। ऐसा करने पर ही संस्थाएँ भी सशक्त बनेंगी और लोकतंत्र भी।

प्रश्न 2.
लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था की कमजोरियों को दूर करने के उपायों का वर्णन करें।
उत्तर-
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसमें अपनी कमजोरियों को सुधारने की क्षमता है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की कमजोरियों को दूर करने के उपाय निम्नलिखित हैं- शिक्षा का प्रसार शिक्षा का प्रमार कर लोकतंत्र के कमजोरियों को दूर किया जा सकता है। लोकतंत्र के विकास में मार्ग में अशिक्षा सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा 1986 में ही नई शिक्षा नीति की घोषणा कर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाया जा रहा है।

ii. बेरोजगारों को रोजगार – बेरोजगारी की समस्या भी लोकतंत्र की एक कमजोरी है। अब बेरोजगारी दूर करने के काफी प्रयास किए जा रहे हैं। लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। पंचवर्षीय योजनाओं में बेरोजगारी की समस्या के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

iii. पंचायती राज-सतत जागरूकता ही लोकतंत्र को सफलता के मार्ग पर ले जा सकती ‘ है। पंचायती राज की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है। ग्राम पंचायतें लोकतंत्र के मुख्य आधार है। ग्राम पंचायतों के कामों में भाग लेने से सामान्य लोगों में भी लोकतंत्र के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है।

iv. सुधारात्मक कानूनों का निर्माण- लोकतंत्रात्मक सुधार में सुधारात्मक कानूनों के निर्माण की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार कानून बनाते समय इस बात पर विशेष ध्यान रखती है कि राजनीति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े तथा वैसे कानूनों का निर्माण हो जिससे जनता के स्वतंत्रता के अधिकार में वृद्धि हो।

v. आंदोलन हित समूहों और मीडिया की स्वतंत्रता- लोकतांत्रिक सुधार के लिए। लोकतांत्रिक आंदोलनों और संघर्षों, विभिन्न हित समूहों और मीडिया की स्वतंत्रता अवश्य सुनिश्चित की जानी चाहिए।

vi. निष्पक्ष निर्वाचन पद्धति- देश में निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए एक निष्पक्ष निर्वाचन आयोग का गठन किया गया है। निष्पक्ष चुनाव पर ही लोकतंत्र का भविष्य निर्भर है। भारत सहित अन्य लोकतांत्रिक देश इन्हीं उपायों से अपनी कमजोरियों को दूर कर सकते हैं लोकतंत्र की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

प्रश्न 3.
भारत लोकतंत्र जनता की उन्नति, सुरक्षा और गरिमा के संवर्द्धन में कहाँ तक सहायक है?
उत्तर-
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अपनी उन्नति की आकांक्षा रखती है और साथ-साथअपनी सुरक्षा एवं गरिमा को बनाए रखने की भी अपेक्षा रखती है। लोकतंत्र कहां तक इसमें सहायक है-

i. निम्नलिखित तर्कों के द्वारा इसको स्पष्ट किया जा सकता है जनता की उन्नति भारतीय लोकतंत्र का उद्देश्य अपने नागरिकों का अधिकतम कल्याण है। इसे कल्याणकारी स्वरूप प्रदान किया गया है। भारतीय लोकत्र को समाजवादी स्वरूप देने के उद्देश्य से ही भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदक तत्व के अंतर्गत अनेक प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य नागरिकों की ‘अधिकतम उन्नति है। ये प्रावधान हैं

राज्य के सभी नागरिकों की जीविका के साधन प्राप्त करने का समान अधिकार है। पुरुषों और स्त्रियों को समान कार्यों के लिए समान वेतन मिले।

ii. जनता की सुरक्षा-भारतीय लोकतंत्र जनता को सुरक्षा प्रदान करने में भी सफल नहीं हो पा रही है। भारत की जनता आतंकवाद, नक्सलवाद, अपहरण, हत्या, अपराध जैसी घटनाओं से त्रस्त है। स्वाभाविक है कि जबतक नागरिकों को जीवन ही सुरक्षित नहीं रहेगा तबतक वे उन्नति के पक्ष पर अग्रसर कैसे हो सकेंगे। भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी-बड़ी चुनौती सुरक्षा की है। ऐसा नहीं है कि भारतीय लोकतंत्र इस चुनौती को नजरअंदाज कर रहा है। सुरक्षा नहीं तो विकास नहीं’ के कथन से भारतीय लोकतंत्र पूर्णरूपेण अवगत है और भारत को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करने के लिए सतत प्रयत्नशील है।

iii. व्यक्ति की गरिमा व्यक्ति की गरिमा के संवर्द्धन के लिए भी भारतीय लोकतंत्र सजग है। जातिवाद, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद, लैंगिक विभेद अमीर-गरीब का विभेद, ऊँच-नीच का भेदभाव व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले तत्व हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ही इसे स्पष्ट कर दिया गया है कि व्यक्ति की गरिमा को बनाए रखा जाएगा। संविधान ने जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता और अन्य ऐसे भेदभाव का निषेध
कर दिया है जिससे समाज में रहनेवाले विभिन्न वर्ग के लोगों में दुर्भावना नहीं पनप सको स्पष्ट है कि भारतीय लोकतंत्र के मार्ग में अनेक बाधाओं के रहते हुए भी जनता की उन्नति, सुरक्षा और गरिमा के संवर्द्धन में यह बहुत हद तक सहायक है।

प्रश्न 4.
लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं पर एक निबंध लिखें।
उत्तर-
लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं को हम निम्नांकित शीर्षकों के अंतर्गत रख सकते हैं-

  • लोकतंत्र जनता का शासन है। यह शासन का वह स्वरूप है जिसमें जनता को ही शासकों के चयन का अधिकार प्राप्त है।
  • जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को ही लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के लिए निर्णय लेने का अधिकार है।
  • निर्वाचन के माध्यम से जनता को शासकों को बदलने तथा अपनी पसंद व्यक्त करने का बिना किसी भेदभाव के पर्याप्त अवसर और विकल्प प्राप्त होना चाहिए।
  • विकल्प के प्रयोग के बाद जिस सरकार का गठन किया जाए उसे संविधान में निश्चित किए गए मौलिक नियमों के अनुरूप कार्य करना चाहिए। साथ ही नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • नागरिकों को मताधिकार निर्वाचन में खड़े होने का अधिकार जैसे राजनीतिक अधिकार के अलावा कुछ आर्थिक अधिकार भी दिए जाने चाहिए। जीविका का साधन प्राप्त करने, काम पाने का अधिकार, उचित पारिश्रमिक पाने का अधिकार जैसे आर्थिक अधिकार जब तक नागरिकों को नहीं मिलेंगे तबतक राजनीतिक अधिकार निरर्थक सिद्ध होंगे।
  • सत्ता में भागीदारी का अवसर सबों को बिना भेदभाव के मिलना चाहिए। सत्ता में जितना अधिक भागीदारी बढ़ेगी, लोकतंत्र उतना ही सशक्त बनेगा।
  • लोकतंत्र को बहुमत की तानाशाही से दूर रखा जाना चाहिए। अल्पसंख्यकों के हितों पर ध्यान देना आज को लोकतंत्र की पुकार है।
  • लोकतंत्र को सामाजिक भेदभाव से भी दूर रखा जाना चाहिए। इसको जातिवाद, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद जैस भयंकर रोगों से मुक्त किया जाना चाहिए।

Bihar Board Class 10 History लोकतंत्र की चुनौतियाँ Notes

  • नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 71 करोड़मतदाता है।
  • दुनिया के एक चौथाई हिस्से में अभी भी लोकतांत्रिक व्यवस्थानहीं है।
  • भारतीय लोकतंत्र प्रतिनिधियात्मक लोकतंत्र है। इसका संचालन जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है।
  • भारतीय लोकतंत्र के तीन अंग हैं. विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका।
  • किसी भी लोकतंत्र की सफलता में स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की भूमका सर्वमान्य सत्य है।
  • अमेरिका तथा ब्रिटेन में लोकतांत्रिक व्यवस्थाकी सफलता बहुत हद तक उनकी न्यायपालिका की सफलता है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।
  • ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों म राष्ट्राध्यक्ष रबर स्टाम्पकी तरह होते हैं।
  • नेपाल में 240 साले पुराने राजशाही को समाप्त कर लोकतांत्रिक देशबनाया गया।
  • अमेरिकी संविधान निर्माताओं में से एक अलेक्जेंडर हैमिलटन ने कहा था कि, “कार्यपालिका में ऊर्जा होनी चाहिए तो विधायिका मेंदूरदर्शिता जबकि न्यायपालिका में सत्य के प्रति निष्ठा और संयम होना चाहिए।”
  • पंद्रहवें लोकसभा चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) द्वारा लोकसभा की 543 सीटों में से 265 सीटों पर विजय प्राप्त की। कांग्रेस पार्टी को 202 सीटें ही प्राप्त हो सकी।
  • ब्रिटेन की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी की संख्या 19.3 प्रतिशत अमेरिका में 163 प्रतिशत, इटलीमें 16.01 प्रतिशत, आयरलैंड में 14.2 प्रतिशत तथा फ्रांसमें 13.9 है।
  • 15वीं लोकसभा चुनाव के बाद महिलाओं की भागीदारी 10 प्रतिशतसे अधिक हो गई है।
  • राजनीतिक भ्रष्टाचार और अपराध, अफसरशाही, लूटतंत्र, आर्थिक पिछड़ापन, शिक्षा का अभाव, प्राकृतिक आपदा नारियों की दयनीय स्थिति, पंचायतों और प्रखंडों में फैला भ्रष्टाचार यें सभी बिहार में स्थापित लोकतंत्र की चुनौतियां हैं।
  • सूचना का अधिकार का कानूनलोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण है।
  • लोकतांत्रिक सुधार मुख्यतः राजतिक दल ही करते हैं। अतः राजनीतिक सुधारों का जोर – मुख्यतः लोकतांत्रिक कामकाजपर ज्यादा मजबूत बनाने पर होना चाहिए।

Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 पिता का पत्र पुत्र के नाम

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 7 पिता का पत्र पुत्र के नाम Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 7 पिता का पत्र पुत्र के नाम

Bihar Board Class 6 Hindi पिता का पत्र पुत्र के नाम Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से –

Pita Ka Patra Putra Ke Naam Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 1.
गाँधीजी ने पत्र के माध्यम से अपने पुत्र को क्या-क्या शिक्षाएँ दी हैं ?
उत्तर:
गाँधीजी ने पत्र के माध्यम से अपने पुत्र को शिक्षाएँ दी कि अपने आहार पर पूर्ण ध्यान देना चाहिए। किताबी ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण और कर्त्तव्य बोध अनिवार्य है। अपने कर्तव्य का पालन भी करना चाहिए । बारह वर्षों के बाद बच्चों को अपनी जिम्मेवारी और कर्त्तव्य का भान हो जाना चाहिए । मनुष्य के लिए आत्मा और परमात्मा के साथ स्वयं का ज्ञान तथा अक्षर-ज्ञान अनिवार्य है। अमीरी और गरीबी की तुलना में गरीबी में जीना सुखद है। गणित और संस्कृत विषय पर अधिक ध्यान देना चाहिए। अपने कार्य को नियत समय में करना चाहिए। कुछ समय भजन प्रार्थना में भी देना चाहिए। खर्च का हिसाब रखना चाहिए इत्यादि ।

पिता का पत्र पुत्र के नाम Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 2.
गाँधीजी ने असली शिक्षा किसे माना है ? उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गाँधीजी ने असली शिक्षा चरित्र-निर्माण और कर्त्तव्य का बोध करना है।

वस्तुतः किताबी ज्ञान ही भात्र ज्ञान नहीं बल्कि चरित्र-निर्माण और कर्तव्य का भान होना है। वास्तविक शिक्षा मनुष्य को समय का दुरुपयोग से बचाता है तथा समाज में सभ्य मनुष्य के रूप में प्रकाशित करता है। चरित्रहीन विद्वान कभी भी सम्मान के योग्य नहीं होते तथा कर्तव्य ज्ञान के बिना संसार सागर से पार करना मुश्किल है।

Pita Ka Patra Putri Ke Naam Question Answer प्रश्न 3.
गाँधीजी के पत्र के माध्यम से किन तीन बातों को महत्वपूर्ण माना गया है?
उत्तर:
गाँधीजी के पत्र के माध्यम से निम्नलिखित बातों को महत्वपूर्ण माना गया है।

  1. अपने आहार पर पूर्ण ध्यान देना।
  2. अपने जिम्मेवारी को हर्षपूर्वक संभालना।
  3. शब्द ज्ञान के अतिरिक्त आत्मा स्वयं एवं ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करना ।
  4. गरीबी में जीना अमीरी में जीने से सुखद है।
  5. कृषि कार्य भी करना चाहिए।
  6. गणित-संस्कृत और संगीत विषयों में अधिक अभिरुचि रखना।
  7. खर्च का हिसाब सही ढंग से रखना।
  8. अपना कार्य नियमपूर्वक और नियत समय पर करना ।
  9. ईश्वर की प्रार्थना एवं भजन करना।

Pita Ka Putra Ko Patra Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 4.
“बा” उपनाम से किन्हें जाना जाता है?
उत्तर:
गाँधीजी की पत्नी कस्तुरबा गाँधी “बा” उपनाम से जानी जाती थी।

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solution प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के चार-चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प के सामने (✓) सही का निशान लगाइए –

(क) गाँधीजी ने अपने जिस पुत्र को पत्र लिखा उसका नाम था –
(i) देवदास गाँधी
(ii) मणिलाल गाँधी
(iii) मोहनदास
(iv) रामदास गाँधी
उत्तर:
(ii) मणिलाल गाँधी

(ख) गाँधीजी ने यह पत्र-कहाँ से लिखा था?
(i) पटना जेल से
(ii) लखनऊ जेल से
(iii) तिहार जेल से
(iv) प्रिटोरिया जेल से
उत्तर:
(iv) प्रिटोरिया जेल से

(ग) गाँधीजी मे यह पत्र कब लिखा.?
(i) 25 मार्च, 1919
(ii) 25 मार्च, 1900
(iii) 25 मार्च, 1909
(iv) 25 मार्च, 1929
उत्तर:
(iii) 25 मार्च, 1909

पाठ से आगे –

Bihar Board Class 6 Hindi Solution प्रश्न 1.
आप अपने पिताजी को गाँव/शहर की जीवन शैली के सम्बन्ध में एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
पूज्य पिताजी !
सादर प्रणाम ।
मैं कुशलपूर्वक हूँ आशा करता हूँ कि आप भी सपरिवार कुशल होंगे।

मैं अभी कुछ दिनों से बम्बई शहर में हूँ। शहर के लोगों की जीवन शैली मुझे पसंद नहीं आ रही है। यहाँ के लोगों की जीवन शैली आकर्षक तो खूब है लेकिन पारस्परिक प्रेम और स्नेह से लोग वंचित है। केवल अपने को संभालकर किसी भी देश की जनता सम्पन्न राष्ट्र की कल्पना नहीं सोच सकता है। यहाँ के लोग स्वास्थ्य पर ध्यान बिल्कुल नहीं देते । कार्य की अधिकता तो अच्छी बात है लेकिन कार्य को नियत समय पर ही करना स्वास्थ्य के लिए उत्तम है जो यहाँ के लोगों में अभाव है। । यहाँ के लोग अमोद-प्रमोद प्रिय हैं जो जीवन के कुछ ही वर्ष के लिए अनिवार्य है। प्रायः विद्यार्थी जीवन में सुख-सुविधा और आजादी जीवन को परेशानी में डाल देती है। लेकिन यहाँ की छात्र जीवन भी अमोद-प्रमोद युक्त दिखलाई पड़ते हैं जो जीवन-निर्माण में जटिलता लाता है।

यहाँ के अमीर और गरीब लोगों की जीवन-शैली में अत्यन्त फर्क दिखता है जबकि ग्राम्य जीवन-शैली में फर्क कम दिखता है।

आप मेरे पत्र को पढ़कर शहरी जीवन-शैली पर विशेष रूप से विचार कर अपनी राय पत्र के द्वारा भेजेंगे।

माताजी को प्रणाम तथा छोटे को स्नेह भरा आशीर्वाद ।

आपका पुत्र
मुकेश कुमार

Pita Ka Patra Putra Ke Naam Question Answer प्रश्न 2.
आप अपने गांव के किसान के बारे में लिखिए।
उत्तर:
हमारे गाँव मंझौल में प्रायः हरेक वर्ग के किसान हैं। सभी किसानों में प्रायः एकता देखी जाती है। हरेक किसान एक-दूसरे के पूरक दिखाई पड़ते हैं। हमारे गाँव के किसान अत्यन्त परिश्रमी हैं। जबकि हमारे गाँव की भूमि अधिक उपजाऊ नहीं है। कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि भी किसानों को प्रभावित करती है लेकिन इसके बावजूद हमारे गाँव के किसान अपनी कर्मठता के कारण उन्नत किसान कहलाते हैं। वहाँ के अन्य गाँवों की अपेक्षा हमारे गाँव के किसान अधिक सम्पन्न दिखाई पड़ते हैं।

ये किसान नियमित रूप से उठते हैं जिसके कारण गोपालन का काफी समय उनको प्राप्त हो जाता है। हमारे यहाँ के किसान गोपालन में भी बहुत आगे हैं। विशेषतः किसान पढ़े-लिखे हैं जिसके कारण कृषि का सम्यक् ज्ञान उन्हें प्राप्त होते रहता है।

Mahatma Gandhi Wikipedia In Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
क्या हमें पत्र लिखना चाहिए? हाँ तो क्यों ? नहीं तो क्यों ?
उत्तर:
हमें पत्र लिखना चाहिए। पत्र सम्बन्ध स्थापित करने का मूर्त उपाय है। इससे लेखन कला की सम्पन्नता के साथ-साथ अपने भाव को व्यापक रूप से प्रकट करने का अवसर मिलता है। पत्र लेखन में पैसे की भी बचत है।

व्याकरण –

Mahatma Gandhi Letter In Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
पत्र, शिक्षा, आश्रम, जिम्मेवारी, महत्वपूर्ण, गरीबी, आनन्द, जेल, चेष्टा, सुख।
उत्तर:
पत्र = पत्र लिखना चाहिए।
शिक्षा = शिक्षा के बिना मनुष्य पशु समान होता है।
आश्रम = आश्रम में मुनि लोग रहते थे।
जिम्मेवारी = अपनी जिम्मेवारी आप संभालो।
महत्वपूर्ण = महत्वपूर्ण कार्य में उसे बुला लूँगा।
गरीबी = गरीबी में मनुष्य को संयमित रहना चाहिए।
आनन्द = आनन्दपूर्वक अपना कार्य करना चाहिए।
जेल = जेल से छूटकर मैं पढूँगा।
चेष्टा = वह चेष्टापूर्वक कार्य करता है।
सुख = सुख मिलने पर सब सोते हैं।

Bhiksha Patra In Hindi Class 5 Question Answer प्रश्न 2.
नीचे लिखे संज्ञाओं के साथ पूर्वक प्रत्यय लगाकर क्रिया-विशेषण बनाइए और उनका अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
धैर्य, शांति, संतोष, प्रेम, श्रम।
उत्तर:
धैर्य = धैर्यपूर्वक कार्य करना चाहिए।
शांति = शांतिपूर्वक बैठना चाहिए।
संतोष = संतोषपूर्वक रहना चाहिए।
प्रेम = प्रेमपूर्वक यहाँ रहो।
श्रम = श्रमपूर्वक काम से सफलता मिलेगी।

Bihar Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 3.
नीचे कुछ भाववाचक संज्ञाएँ दी गयी हैं। इससे विशेषण बनाकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
महत्व, निश्चय, उपयोग, सहानुभूति, मानब ।
उत्तर:
महत्व = महत्वपूर्ण कार्य करना चाहिए।
निश्चय = निश्चयपूर्वक कहता है।
उपयोग = उपयोगी वस्तु दान दो।
सहानुभूति = सहानुभूतिपूर्वक निवास करो।
मानव = मानवीय गुणों को धारण करना चाहिए।

पिता का पत्र पुत्र के नाम Summary in Hindi

पाठ का सार – संक्षेप

पत्र मणिलाल गाँधी के नाम लिखा गया। पत्र 25 मार्च, 1909 ई० को प्रिटोरिया जेल से लिखा गया।

पत्र लिखने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी हैं।
प्रिय पुत्र,
प्रतिमास एक पत्र लिखने और प्राप्त करने का अधिकार मुझे प्राप्त है। मिस्टर रीच, मिस्टर पोलक (दोनों मित्र) और तुम्हारा ख्याल बारी-बारी से आया। लेकिन तुम्हें पत्र लिखना पसंद किया क्योंकि तुम्हारा ही ध्यान मुझे बराबर रहता था।

मैं पूर्ण शांति में हूँ। आशा है ‘बा’ अच्छी होगी। मुझे मालूम है कि तुम्हारा अनेक पत्र आये लेकिन मुझे नहीं दिये गये फिर भी डिप्टी गवर्नर की उदारता से मालूम हुआ कि-“बा” का स्वास्थ्य सुधर रहा है। तुम सब “बा” के साथ सबेरे दूध के साथ साबूदाना बराबर लेते रहना। मुझे आशा है कि तुम अपनी जिम्मेवारी आनन्द से निभाते होगे । जेल में मैंने खूब पढ़ा। इससे मैं यह समझता हूँ कि केवल अक्षर-ज्ञान ही शिक्षा नहीं बल्कि सच्ची । शिक्षा चरित्र निर्माण और कर्तव्यबोध है। मुझे आशा है कि तुम भी सच्ची शिक्षा प्राप्त कर रहे होगे । बीमार माँ की सेवा के साथ रामदास और देवदास पर भी ध्यान दे रहे होगे। ब्रह्मचर्य और संन्यास आश्रम में कोई अन्तर नहीं। बारह वर्षों के बाद बच्चों में जिम्मेवारी और कर्त्तव्य का भान होना चाहिए तथा उन्हें अपने आचार और विचार में सत्य-अहिंसा के प्रयोग की चेष्टा करनी चाहिए । अक्षर ज्ञान के साथ-साथ संसार में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं। अपनी आत्मा, अपने आप एवं ईश्वर का सच्चा ज्ञान प्राप्त करना । इतना याद रखना कि अब हमें गरीबी में रहना है क्योंकि गरीबी में जीना अधिक सुखद है। तुम कृषि-कार्य पर भी पूरा ध्यान दना तथा कृषि, उपकरणां को भी साफ-सुथरा रखना।

अक्षर ज्ञान में गणित और संस्कृत पर पूरा ध्यान देना । भविष्य में संस्कृत बहुत उपयोगी सिद्ध हागा। संगीत में भी रुचि रखना। हिन्दी, गुजराती और अंग्रेजी भजनों और कविताओं का संग्रह तैयार करना जो अंत में मूल्यवान प्रतीत होगा। काम की अधिकता से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। शांतचित्त से सद्गुणों को प्राप्त करने की चेष्टा करते रहना । आशा है कि तुम खर्च के पैसे का हिसाब ठीक से रखते होगे तथा यह भी आशा है कि तुम रोज शाम में . नियमपूर्वक प्रार्थना करते होगे। सूर्योदय से पूर्व उठकर भी प्रार्थना करना । प्रयत्नपूर्वक नियत समय में प्रार्थना करना चाहिए । यह नियमितता तुम्हें जीवन में सहायक सिद्ध होगी। पत्र को पढ़कर तथा अच्छी तरह समझकर जवाब देना।

तुम्हारा पिता
मोहन दास

Bihar Board 12th Hindi 100 Marks Objective Answers गद्य Chapter 4 अर्द्धनारीश्वर

Bihar Board 12th Hindi Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Hindi 100 Marks Objective Answers गद्य Chapter 4 अर्द्धनारीश्वर

Ardhnarishwar Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
‘संस्कृति के चार अध्याय’ किसकी कृति है ?
(A) गुलाब दास
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) आचार्य सीताराम चतुर्वेदी
(D) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
उत्तर:
(D) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

अर्धनारीश्वर का किस विधा से संबंध है Answer Bihar Board प्रश्न 2.
कौन-सी कृति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की लिखी हुई है
(A) शुद्ध कविता की खोज
(B) पुनर्नवा
(C) स्मृति की रेखाएँ
(D) कविता के नए प्रतिमान
उत्तर:
(A) शुद्ध कविता की खोज

अर्धनारीश्वर रामधारी सिंह दिनकर Bihar Board प्रश्न 3.
कौन-सी कृति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की लिखी हुई नहीं है ?
(A) वट पीपल
(B) उर्वशी
(C) काव्य की भूमिका
(D) साकेत
उत्तर:
(D) साकेत

Ardhnarishwar Ka Question Answer Bihar Board प्रश्न 4.
‘दिनकर’ को किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ?
(A) अर्धनारीश्वर
(B) उर्वशी
(C) हुँकार
(D) कुरुक्षेत्र
उत्तर:
(B) उर्वशी

अर्धनारीश्वर का किस विधा से संबंध Bihar Board प्रश्न 5.
‘दिनकर’ का जन्म कब हुआ था?
(A) 23 सितम्बर, 1908 को
(B) 22 दिसम्बर, 1912 को
(C) 28 सितम्बर, 1911 को
(D) 25 सितम्बर, 1913 को
उत्तर:
(A) 23 सितम्बर, 1908 को

Ardhnarishwar Ramdhari Singh Dinkar Bihar Board प्रश्न 6.
‘दिनकर’ किस युग के कवि हैं ?
(A) भारतेन्दु युग
(B) छायावाद युग
(C) छायावादोत्तर युग
(D) नव्यकाव्यांदोलन
उत्तर:
(C) छायावादोत्तर युग

प्रश्न 7.
युग रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है
(A) अर्द्धनारीश्वर’
(B) ‘रोज’
(C)’ओ सदानीरा’
(D) जूठन’
उत्तर:
(A) अर्द्धनारीश्वर’

प्रश्न 8.
‘अर्द्धनारीश्वर’ (अर्द्धनारीश्वर) शीर्षक निबंध के निबंधकार कौन हैं ?
(A) रामचंद्र शुक्ल
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(D) जगदीशचन्द्र माथुर
उत्तर:
(C) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

प्रश्न 9.
कौन-सी कृति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखी गई है?
(A) ‘राधा’
(B) ‘हारे को हरिनाम’
(C)’साकेत’
(D) उर्मिला’
उत्तर:
(B) ‘हारे को हरिनाम’

प्रश्न 10.
कौन-सी कृति रामधारी सिंह “दिनकर’ की नहीं है ?
(A)’उर्वशी’
(B) नीलकुसुम’
(C) परशुराम की प्रतीक्षा’
(D) ‘प्रियप्रवास’
उत्तर:
(D) ‘प्रियप्रवास’

प्रश्न 11.
‘दिनकर’ किस युग के कवि हैं ?
(A) छायावादी युग के
(B) छायावादोत्तर युग के
(C) द्विवेदी युग के
(D) भारतेन्दु युग के
उत्तर:
(B) छायावादोत्तर युग के

प्रश्न 12.
‘अर्द्धनारीश्वर’ किसका कल्पित रूप है?
(A) शंकर और पार्वती का
(B) राधा और कृष्ण का
(C) राम और सीता का
(D) विष्णु और लक्ष्मी का
उत्तर:
(A) शंकर और पार्वती का

प्रश्न 13.
‘दिनकर’ को किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था ?
(A) ‘संस्कृति के चार अध्याय’ पर
(B) ‘मिट्टी की ओर’ पर
(C) नीलकुसुम’ पर
(D) ‘उर्वशी पर
उत्तर:
(D) ‘उर्वशी पर

प्रश्न 13.
‘दिनकर’ को किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था?
(A) संस्कृति के चार अध्याय’ पर
(B) ‘मिट्टी की ओर’ पर
(C)’नीलकुसुम’ पर
(D) ‘उर्वशी पर
उत्तर:
(D) ‘उर्वशी पर

प्रश्न 14.
युद्ध और शांति की समस्या पर लिखी गई काव्यकति है
(A) नील कुसुम
(B) कुरुक्षेत्र
(C) द्वंद्वगीत
(D) रश्मिरथी
उत्तर:
(B) कुरुक्षेत्र

प्रश्न 15.
अर्धनारीश्वर कल्पित रूप है
(A) शिव और पार्वती का
(B) राम और सीता का
(C) राधा और कृष्ण का
(D) विष्णु और लक्ष्मी का
उत्तर:
(A) शिव और पार्वती का

प्रश्न 16.
गांधारी थी
(A) दुर्योधन की माँ
(B) कृष्ण की माँ
(C) अर्जुन की माँ
(D) बलराम की माँ
उत्तर:
(A) दुर्योधन की माँ

प्रश्न 17.
प्रेमचंद थे
(A) गीतकार
(B) कथाकार
(C) फिल्मकार
(D) संगीतकार
उत्तर:
(B) कथाकार

प्रश्न 18.
‘अर्धनारीश्वर’ पाठ के लेखक कौन है? या, ‘अर्धनारीश्वर’ किसकी रचना है?
(A) नामवर सिंह
(B) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) रामचन्द्र शुक्ल
उत्तर:
(B) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

प्रश्न 19.
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना कौन-सी है?
(A) उसने कहा था
(B) जूठन
(C) तिरिछ
(D) अर्धनारीश्वर
उत्तर:
(D) अर्धनारीश्वर

प्रश्न 20.
दिनकर जी का जन्म बिहार के किस जिले में हुआ था?
(A) समस्तीपुर
(B) बेगूसराय
(C) पटना
(D) भोजपुर
उत्तर:
(B) बेगूसराय

प्रश्न 21.
अर्धनारीश्वर में किस गुण का समन्वय है?
(A) नारी के
(B) पुरुष के
(C) नारी और पुरुष दोनों के
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(C) नारी और पुरुष दोनों के

प्रश्न 22.
दिनकर जी की पहली काव्य पुस्तक कौन-सी है?
(A) कुरुक्षेत्र
(B) हुंकार
(C) रसवंती
(D) प्रणभंग
उत्तर:
(D) प्रणभंग

प्रश्न 23.
दिनकर जी की पहली कविता किस पत्रिका में प्रकाशित हुई?
(A) छात्र सहोदर
(B) छात्र पत्रिका
(C) छात्र मित्र
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) छात्र सहोदर

प्रश्न 24.
दिनकर जी की पहली कविता कब प्रकाशित हुई?
(A) 1920 में
(B) 1925 में
(C) 1930 में
(D) 1935 में
उत्तर:
(B) 1925 में

प्रश्न 25.
दिनकर जी के अनुसार यदि पति विचार है तो पत्नी क्या है?
(A) बुद्धि
(B) समझ
(C) भावना
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(C) भावना

प्रश्न 26.
बुद्ध और महावीर ने नारियों को कौन-सा अधिकार दिया?
(A) संन्यास लेने का
(B) भिक्षुणी होने का
(C) पति के त्याग का
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) भिक्षुणी होने का

प्रश्न 27.
‘पुरूष जब नारी के गुण लेता है तब वह देवता बन जाता है; किन्तु नारी जब नर के गुण सीखती है तब वह राक्षस हो जाती है।” यह किसका कथन है?
(A) दिनकर जी का
(B) रवीन्द्रनाथ का
(C) प्रेमचन्द का
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रेमचन्द का

प्रश्न 28.
‘अर्धनारीश्वर’ का किस विद्या से संबंध है?
(A) निबंध
(B) कहानी
(C) एकांकी
(D) व्यंग्य
Ans.
(C) एकांकी

प्रश्न 29.
किसने अपने जीवन के अन्तिम दिनों में नारीत्व की साधना की थी?
(A) गाँधी जी ने
(B) रवीन्द्रनाथ ने
(C) दिनकर जी ने
(D) उदयप्रकाश ने
उत्तर:
(A) गाँधी जी ने

प्रश्न 30.
अर्द्धनारीश्वर शंकर और पार्वती का किस प्रकार का रूप है?
(A) यथार्थ
(B) कल्पित
(C) आदर्श
(D) वास्तविक
उत्तर:
(B) कल्पित

प्रश्न 31.
प्रेमचन्द के अनुसार नारी जब पुरुष के गुण सीखती है तब वह क्या हो जाती है?
(A) आकर्षक
(B) साहसी
(C) कोमल
(D) राक्षसी
उत्तर:
(D) राक्षसी

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में कौन-सी रचना दिनकर जी की नहीं है?
(A) उर्वशी ।
(B) रश्मिरथी
(C) जूठन
(D) कुरुक्षेत्र
उत्तर:
(C) जूठन

प्रश्न 33.
निम्नलिखित में कौन-सी रचना दिनकर जी की है?
(A) सदियों का संताप
(B) परशुराम की प्रतीक्षा
(C) दरियाई घोड़ा
(D) रसातल यात्रा
उत्तर:
(B) परशुराम की प्रतीक्षा

प्रश्न 34.
‘दिनकर’ को किस कृति पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ?
(A) अर्धनारीश्वर
(B) उर्वशी
(C) हुँकार
(D) कुरुक्षेत्र
उत्तर:
(B) उर्वशी

प्रश्न 35.
युद्ध और शांति की समस्या पर लिखी गई काव्यकृति है
(A) नील कुसुम
(B) कुरूक्षेत्र
(C) द्वद्वगीत ।
(D) रश्मिरथी
उत्तर:
(B) कुरूक्षेत्र

प्रश्न 36.
अर्धनारीश्वर कल्पित रूप है
(A) शिव और पार्वती का
(B) राम और सीता का
(C) राधा और कृष्णा का
(D) विष्णु और लक्ष्मी का
उत्तर:
(A) शिव और पार्वती का

प्रश्न 37.
गांधारी थी..
(A) दुर्योधन की माँ
(B) कृष्ण की माँ
(C) अर्जुन की माँ
(D) बलराम की माँ
उत्तर:
(A) दुर्योधन की माँ

प्रश्न 38.
प्रेमचंद थे
(A) गीतकार
(B) कथाकार
(C) फिल्मकार
(D) संगीतकार
उत्तर:
(B) कथाकार

प्रश्न 39.
‘दिनकर’ का जन्म कब हुआ था?
(A) 23 सितम्बर, 1908 को
(B) 22 दिसम्बर, 1912 को
(C) 28 सितम्बर, 1911 को
(D) 25 सितम्बर, 1913 को
उत्तर:
(A) 23 सितम्बर, 1908 को

प्रश्न 40.
‘दिनकर’ किस युग के कवि है?
(A) भारतेंदु युग
(B) छायावादी युग
(C) छायावादोत्तर युग
(D) नव्यकाव्यांदोलन युग
उत्तर:
(C) छायावादोत्तर युग

प्रश्न 41.
‘संस्कृति के चार अध्याय’ किसकी कृति है?
(A) गुलाब दास
(B) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(C) आचार्य सीताराम चतुर्वेदी
(D) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
उत्तर:
(D) रामधारी सिंह ‘दिनकर’

प्रश्न 42.
कौन-सी कृति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की लिखी हुई है?
(A) शुद्ध कविता की खोज
(B) पुनर्नवा
(C) स्मृति की रेखाएँ
(D) कविता के नए प्रतिमान
उत्तर:
(A) शुद्ध कविता की खोज

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 माँ

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 2 Chapter 3 माँ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 3 माँ

Bihar Board Class 10 Hindi माँ Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

मां कहानी का सारांश प्रस्तुत करें Bihar Board प्रश्न 1.
मंगु के प्रति मां और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में जो फर्क है उसे अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
मंगु जन्म से पागल और गूंगी बालिका थी। माँ के लिए कोई कैसी-भी संतान हो उसकी वात्सल्यता फूट ही पड़ती है। मंगु की देख-रेख करनेवाली माँ को अपनी पुत्री एवं ईश्वर से कोई शिकायत नहीं है। ममता की प्रतिमूर्ति माँ स्वयं अपना सुख को भूलकर-पुत्री के लिए समर्पित हो जाती है। उसकी नींद उड़ गई है। रात-दिन अपनी असहाय बच्ची के लिए सोचती रहती है। मंगु के अलावा माँ के लिए तीन संतानें थीं। वे भी अपनी माँ के व्यवहार से अनमने-सा दुःखी रहते हैं।

माँ को ऐसी बात नहीं कि मंगू के अतिरिक्त अन्य संतानों से लगाव नहीं है परन्तु परिस्थिति ऐसी है कि मंगू के बिना उसका जीवन अधूरा है। दो बेटे के साथ-साथ घर में उनकी बहुएँ और पोते-पोतियाँ भी है। एक अन्य पुत्री जो ससुराल चली गई है। छुट्टियों में जब भी पोते-पोतियाँ आते हैं तो आशा लगाते हैं कि उन्हें दादी माँ का भरपूर प्यार मिलेगा किन्तु माँ का समग्र मातृत्व मंगु पर निछावर हो गया है। मातृत्व के स्नेह में खिंची बहुएँ माँ जी के प्रति अन्याय कर बैठती हैं। माँ के अतिरिक्त परिवार के अन्य सदस्य मंगु को पागलखाना में भर्ती कराकर निश्चित हो जाना चाहते हैं किन्तु माँ बराबर इनका विरोध करती रहती हैं।

माँ जी अस्पताल को गौशाला समझती थीं। इसलिए माँ जी घर में ही डॉक्टरों को बुलाकर इलाज कराती है। लोगों के बहुत कहने-सुनने के बाद वह मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर लौटती तो है किन्तु वह भी मंगु की तरह व्यवहार करने लगती है।

मां कहानी ईश्वर पेटलीकर Bihar Board प्रश्न 2.
माँ मंगु को अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती? विचार करें?
उत्तर-
माँ अस्पताल की व्यवस्था से मन-ही-मन काँप जाती थी। वह लोगों को अस्पताल के लिए गौशालाओं की उपमा देती थीं। मंगु विस्तर पर पाखाना-पेशाब कर देती थी। खिलाने पर ही खाती थी। माँ जी को आत्मविश्वास था कि अस्पताल में डॉक्टर नर्स आदि सभी अपना कोरम पूरा करेंगे। बिस्तर भींगने पर कौन उसके कपड़े और विस्तर बदलेंगे। माँ जी के मन में इन्हीं तरह के विविध प्रश्न उठा करते थे। इन्हीं कारणों से वह मंगु को अस्पताल में भर्ती नहीं कराना चाहती थी।

माँ कहानी का सारांश Bihar Board प्रश्न 3.
क्सम के पागलपन में सुधार देख मंग के प्रति माँ परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
कुसुम एक पढ़ने-लिखने वाली लड़की है। उसकी माँ चल बसी है। अचानक वह भी पागल की तरह आचरण करने लगती है। उसे भी टट्टी-पेशाब का ध्यान नहीं रहता है। कुसुम को अस्पतालों में भर्ती की बात सुनकर माँ जी को लगा कि यदि उसकी माँ जीवित होती तो अस्पताल में भर्ती न करने देती। कुसुम अस्पताल में भर्ती कर दी जाती है। डाक्टर, नर्स आदि की देख-रेख में कुसुम धीरे-धीरे ठीक होने लगती है। कुसुम ठीक होने पर घर आती है। सभी उससे मिलने के लिए जाती है। माँ जी उससे विशेष रूप से मिलती है।

कुसुम की बातों से माँ जी का हृदय बदल जाता है। उन्हें भी अस्पताल के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई। गाँव के लोगों ने माँ जी को समझाने लगा कि एक बार अस्पताल में भर्ती कराकर तो देख लें। यदि ठीक नहीं हुई तो मंगु को वापस बुला लेंगी। अंत में माँ जी ने भर्ती कराने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने बड़े पुत्र के पास पत्र भेजा। पत्र लिखते ही बड़ा पुत्र आ गया और माँ जी के साथ मंगू को लेकर अस्पताल गया। अस्पताल में भर्ती कराकर माँ जी लौट आती हैं।

मां की कहानी Bihar Board प्रश्न 4.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।
उत्तर-
किसी भी कहानी का शीर्षक धुरी होता है जिसके इर्द-गिर्द कहानी घूमती रहती है। किसी भी कहानी के शीर्षक की सफलता औचित्य एवं मुख्य विचार, लघुता, भाव-व्यंजना आदि पर निर्झर है।

आलोच्य कहानी का शीर्षक इस कहानी के मृत्यु कृत्तित्वछाया छितराया हुआ है। समग्र मातृत्व का बोझ सहनेवाली माँ जी इस कहानी का मुख्य पात्र है। जन्म से पागल और गूंगी लड़की की संवा तन-मन से करती है। जन्मदात्री होने का वह अक्षरशः पालन करती है। माँ को अपनी पुत्री और ईश्वर से कोई शिकायत नहीं है। ममता की पूर्तिमूर्ति माँ स्वयं अपना सूख को भूलकर पुत्री के लिए समर्पित हो गई है। घर में बेटी-बेटे-बहू, पोता-पोतियों के साथ उसका संबंध बुरा नहीं है फिर वे माँ जी से खुश नहीं रहते हैं। वे समझते हैं कि माँ जी पागल बेटी के लिए स्वयं पागल हो गई हैं।

पढ़ने-लिखने वाली कुसुम भी जब पागल की तरह आचरण करने लगती है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाता है तो मन-ही-मन दुःखी हो जाती है। वे सोचती हैं कि मातृहीन कुसुम आज विवश हो गई है। यदि उसकी माँ होती तो शायद अस्पताल में भर्ती नहीं कराने देती है। कुसुम के ठीक होने एवं गाँव के लोगों के कहने-सुनने माँ जी की अंतत: मंगू को अस्पताल में भर्ती करा देती हो किन्तु स्वयं पागल हो जाती है। एक माँ ही अपनी संतान को समझ सकती है। संतान कैसी भी हो किन्तु उसकी ममता में कहीं कोई कमी नहीं आती है। वस्तुतः इन दृष्टान्तों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सार्थक और समीचीन है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 5.
मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है, उस अस्पताल के कर्मचारी व्यवहार कुशल हैं या संवेदनशील? विचार करें।
उत्तर-
मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है उस अस्पताल के कर्मचारी संवेदनशील हैं। अस्पताल कर्मियों का काम मरीजों के साथ अच्छे से व्यवहार करना और सेवा करना है। किन्तु इस अस्पताल के कर्मी व्यवहार कुशल ही नहीं संवेदनशील भी हैं। अस्पताल में अनेक मरीज आते हैं। उन्हें परिजनों से क्या प्रयोजन ? मंगु उनका मरीज अवश्य है किन्तु माँ जी की वात्सलयता और ममत्व से वे प्रभावित हो जाते हैं। वे माँ जी को आश्वस्त कर घर भेजना चाहते हैं कि उनकी बंटी को कोई कष्ट नहीं होगा। माँ जी के रूदन को देखकर डॉक्टर, मेट्रन और परिचारिकाओं कं हृदय भर गये। वे मन-ही-मन सोचने लगे कि किसी पागल का ऐसा स्वजन अभी तक कोई नहीं आया है। एक अधेड़ परिचारिका उसे अपनी बेटी मानने लगती है। ऐसा व्यवहार कोई कर्मचारी नहीं संवेदनशील ही कर सकता है।

Class 10 Hindi Chapter 1 Bihar Board प्रश्न 6.
माँ का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर-
‘माँ’ कहानी की नायिका अपने घर की मुखिया और सहनशील नारी है। वह सब कुछ ‘ करती है और लोग यदि उसकी आलोचना भी करते हैं तो चुपचाप सुनती है, कुछ कहती नहीं। वह अथक सेविका है। अपनी पागल पुत्री की देखभाल बड़ी लगन से करती है, उसे अपने पास सुलाती, नहलाती-धुलाती, खिलाती और उसका मल मूत्र भी खुशी-खुशी साफ करती है। वह ऊबती नहीं अपितु उसकी जुदाई की आशंका से व्याकुल हो उठती है। वह अपने सभी बच्चों को बहुत प्यार करती है। माँ व्यवहार-कुशल भी है। वह अपनी बहुओं की अपने प्रति शिकायत से परिचित हैं, किंतु परिवार को विखंडित होने से बचाने के लिए कुछ नहीं कहती। उसका व्यवहार सभी लोगों से सौहार्द्रपूर्ण है। माँ अत्यन्त ममतामयी है। ममता के अतिरेक में ही, मंगु की जुदाई सहन नहीं कर पाती और पागल हो जाती है।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 7.
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर-
गुजराती साहित्य के धनी ईश्वर पेटलीकर एक लोकप्रिय कथाकार हैं। इनके कथा साहित्य में गुजरात का समय और समाज, नये-पुराने मूल्य, दर्शन और कला आदि रच-पचकर एक नई आस्वादकता के साथ उपस्थित होते हैं। प्रस्तुत कहानी में माँ की वात्सलयता और ममत्व का सजीवात्मक चित्रण किया गया है। जन्म से पागल और गूंगी बेटी को माँ जी ने जिस तरह पाल-पोस रही है वह अकथनीय है। अपना समस्त सुख भूलकर बेटी का सुख ही उसका अपना सुख है। ऐसी बातें सोचनेवाली कोई साधारण माँ नहीं होती हो। समग्र मातृत्व उड़लनेवाली माता निश्चय ही आदरणीया होती हैं। माँ जी को मंगु के अतिरिक्त बेटा-बेटी पोता-पोती और बहुएँ हैं। माँ जी को ऐसा नहीं है कि अन्य सदस्यों से लगाव नहीं है किन्तु वह तो मंगु समर्पिता हैं।

अन्य सदस्य माँ जी को दूसरे नजरों से देखते हैं फिर भी ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पागल की अस्पतालों में वह भर्ती नहीं कराना चाहती है। कुसुम के ठीक होने एवं लोगों के कहने-सुनने पर वह मंगु को अस्पताल में भर्ती कराने जाती है। अस्पताल कर्मियों की संवेदनशीलता वें प्रभावित हो जाती हैं। मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर लौट आती है। माँ जी को आँखों के सामने मंगु का प्रतिबिम्ब झलकने लगता है। रात्रि में उन्हें नींद नहीं आती है। माँ की सिसककियों से बेटे की आँखों में अश्रुधारा बहने लगी। माँ के प्रति बेटे के मन में विविध भाव उठने लगे। माँ को सोता समझकर बेटा भी अपनी पलकें गिरा लीं। माँ जी अचानक,मंगु की तरह आचरण करने लगती है। मंगु की सहकर्मियाँ आज स्वयं मंगु बन गई थीं। वस्तुतः इस कहानी में लेखक माँ की ममता का सजीवात्मक विश्लेषण किया है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 1.
‘माँ’ कहानी है ………………..
(क) राजस्थानी
(ख) गुजराती
(ग) तमिल
(घ) उड़िया
उत्तर-
(ख) गुजराती

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 10  प्रश्न 2.
‘माँ’ कहानी के रचनाकार हैं
(क) साँवर दइया
(ख) श्री निवास
(ग) ईश्वर पेटलीकर
(घ) सुजाता
उत्तर-
(ग) ईश्वर पेटलीकर

Bihar Board Class 10 Hindi Chapter 1 प्रश्न 3.
मंगु जन्म से ही …………. है।
(क) अंधी
(ख) बहरी
(ग) पागल
(घ) गूंगी
उत्तर-
(ग) पागल

Class 10th Hindi Chapter 1 Question Answer Bihar Board प्रश्न 4.
मां की ………….संतानें थीं।
(क) तीन
(ख) दो
(ग) पाँच
(घ) चार
उत्तर-
चार

प्रश्न 5.
मंग को अस्पताल ले जाते समय माँ …………..थीं।
(क) प्रसन्न
(ख) उदास
(ग) पागल
(घ) उद्विग्न
उत्तर-
(घ) उद्विग्न

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
‘माँ’ कहानी के रचयिता ……..है।
उत्तर-
ईश्वर पटलीकर

प्रश्न 2.
मंगु …………………… से ही पागल है।
उत्तर-
जन्म

3. ‘माँ’ …………… कहानी है।
उत्तर-
गुजराती

प्रश्न 4.
माँ की …………. संतानें हैं।
उत्तर-
चार

प्रश्न 5.
मंगु गूगी है पर ………….. नहीं है।
उत्तर-
बहरी

प्रश्न 6.
पराई ……. ही कान छेदती है।
उत्तर-
माँ

प्रश्न 7.
पुत्र का …………… भी भर आया था।
उत्तर-
हृदय

प्रश्न 8.
माँ को यह ………. असह्य हो गया।
उत्तर-
घाव

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मंगु कौन थी?
उत्तर-
मंगु जन्म से पागल और गूंगी लड़की थी।

प्रश्न 2.
मंगु की देख-रेख कौन और कैसे करता था? ।
उत्तर-
मंगु की देख-रेख उसकी माँ बड़े यत्न से करती थी। वह उसे अपने पास सुलाती, खाना खिलाती और मल-मूत्र साफ करती थी।

प्रश्न 3.
मंगु की माँ उसे अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती थी?
उत्तर-
मंगु की माँ सोचती थी कि अस्पताल में मंगु की देख-भाल ठीक से न होगी। इसलिए उसे भर्ती कराना नहीं चाहती थी।

प्रश्न 4.
अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद मंगु के भाई ने क्या प्रण किया ?
उत्तर-
अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद मंगु के भाई ने प्रण किया कि वह मंगु पालेगा। बहू मल-मूत्र न धोएगी तो वह स्वयं धोएगा।’

प्रश्न 5.
मंग को अस्पताल में भर्ती करा कर आने के बादं माँ की क्या दशा हई?
उत्तर-
मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद माँ रात भर सिसकती रही और सवेरे चीत्कार सुनकर परिवार एवं पड़ोस के लोग घबड़ाकर वहाँ आए तो सबने देखा कि मंगु की माँ खुद पागल हो गई।

प्रश्न 6.
ईश्वर पेटलीकर कौन हैं?
उत्तर-
ईश्वर पेटलीकर गुजराती के जाने-माने कथाकार हैं।

प्रश्न 7.
ईश्वर पेटलीकर के साहित्य की क्या विशेषता है ?
उत्तर-
ईश्वर पेटलीकर के साहित्य में गुजरात का समाज, उसके मूल्य, दर्शन आदि साकार होते हैं।

प्रश्न 8.
मंग की माँ उसे अस्पताल में भर्ती कराने को कैसे राजी हुई ?
उत्तर-
गाँव की लड़की कुसुम का पागलपन जब अस्पताल जाने से दूर हो गया तो मंगु की माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती कराने को राजी हुई।

प्रश्न 9.
मंगु को अस्पताल ले जाने के समय माँ की स्थिति कैसी थी?
उत्तर-
अस्पताल ले जाने के पूर्व की रात माँ को नींद नहीं आई। उसे लेकर घर से निकलने लगी तो लगा कि ब्रह्माण्ड का भार उसके ऊपर आ गया। आँखों से सावन-भादो शुरू हो गया।

माँ लेखक परिचय

ईश्वर पेटलीकर गुजराती के लोकप्रिय कथाकार हैं । इनके कथा साहित्य में गुजरात का समय और समाज, नये-पुराने मूल्य, दर्शन और कला आदि रच-पककर एक नई आस्वादकता के साथ उपस्थित होते हैं । ‘खून की सगाई’ इनकी प्रसिद्ध कहानी है और ‘काला पानी’ इनका लोकप्रिय उपन्यास है । साहित्य के अलावा श्री पेटलीकर सामाजिक-राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। इनकी दर्जनों पुस्तकें पुरस्कृत और बहुप्रशंसित हो चुकी हैं । यह कहानी गोपालदास नागर द्वारा संपादित एवं अनूदित कहानी संग्रह ‘माँ’ से साभार संकलित है।