Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 2 कविता की परख

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Bihar Board Class 11th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 2 कविता की परख (रामचंद्र शुक्ल)

 

कविता की परख पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

Kavita Ki Parakh Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
कविता के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर-
लेखक के अनुसार कविता का उद्देश्य पाठक के हृदय को प्रभावित करना होता है। इससे उसके भीतर दया, प्रेम, करुणा, आनंद, आश्चर्य आदि मानवीय भावों का संचार होता है। जिस रचना में प्रभावोत्पादकता न हो, वह और चाहे कुछ भी हो, कविता नहीं हो सकती।

Kavita Ki Parakh Bihar Board प्रश्न 2.
कल्पना किसे कहते हैं? एक कवि के लिए कल्पना का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
जिस मानसिक शक्ति के सहारे कवि कविता में भावोदपीन हेतु तत्संबंधी रूप एवं व्यापार का योजना करते हैं तथा पाठक उसे अपने मन में ग्रहण करते हैं, उसे’ कल्पना कहते हैं। एक कवि के लिए कल्पना का अत्याधिक महत्त्व है। बिना कल्पना शक्ति के कोई व्यक्ति कवि नहीं हो सकता। क्योंकि कल्पना के बल पर ही कवि रूप व्यापारादि की चित्रवत् योजना करता है। इसके अभाव में कविता में प्रभावोत्पादकता नहीं आ सकती, जो कवि का लक्ष्य होता है। अतएव, एक कवि के लिए कल्पना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

Bihar Board Class 11th Hindi Book  प्रश्न 3.
उपमा क्या है? कविता में उपमा का प्रयोग क्यों किया जाता है। पाठ के आधार पर उत्तर दें।
उत्तर-
उपमा का अर्थ होता है-उप अर्थात समीप और मा अर्थात् मापन। तात्पर्य यह कि दो भिन्न पदार्थों में समता दिखाना ही उपमा है। यह समता रूप, गुण अथवा प्रभाव के आधार पर दिखायी जाती है। जैसे-मुख चाँद के समान सुंदन है; शिवाजी शेर की तरह वीर थे इत्यादि।

काव्यशास्त्र में ‘उपमा’ एक अर्थालंकार है, जो अलंकारों में शिरोल माना जाता है।

कविता में उपमा का प्रयोग वर्ण्य-विषय से संबंधित भावना को तीव्र करने के लिए किया जाता है। जैसे-मुख सौदर्य की भावना उत्पन्न करने के लिए मुख के साथ एक अन्य सुंदर पदार्थ चाँद को रख देने से सौंदर्य की भावना उदीप्त, जागृत एवं अत्यधिक तीव्र हो जाती है।

कविता की परख Bihar Board प्रश्न 4.
आँख के लिए मीन, खंजन और कमल की उपमाएँ दी जाती हैं। इनमें क्या-क्या समानताएँ हैं?
उत्तर-
आँख के लिए कवियों द्वारा प्राय: मीन, खंजन और कमल की उपमाएँ दी जाती हैं। इनमें परस्पर लघुता, सुंदरता, मोहकता, चंचलता, कोमलता, प्रभावोत्पादकता आदि की समानताएँ हैं।

Class 11 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 5.
‘मानों ऊँट की पीठ पर घंटा रखा है’-इस उक्ति के द्वारा लेखक ने क्या कहना चाहा है?
उत्तर-
‘कविता की परख’ शीर्षक निबंध में काव्यमर्मज्ञ आचार्य शुक्ल ने कविता में उपमा-नियोजन के औचित्य, महत्त्व तथा उसकी उपयुक्तता-अनुपयुक्ता पर बड़े सुविचारित रूप में प्रकाश डाला है। प्रश्नोद्धृत वाक्य इसी प्रसंग में उल्लिखित है।

लेखक के मतानुसार, उपमा की सार्थकता वर्ण्य-वस्तु के अनुरूप भावनाओं को तीव्रता प्रदान करने में है। इसके लिए कवियों को आकर-प्रकार की अपेक्षा प्रभाव-साम्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए। ऐसी उपमाएँ, जिनसे कवि-अभिप्रेत भावनाएँ उदीप्त एवं तीव्र नहीं होतीं, उपेक्षणीय हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘उठे हुए बादलों के ऊपर होते हुए पूर्ण चंद्रमा’ जैसे रमणीय दृश्य के लिए ‘मानो ऊँट की पीठ पर घंटा रखा है’ जैसे अनुचित उपमा का उदाहरण देकर इसकी व्यर्थता बताई है। अतः कवि को इस प्रकार की केवल कुतूहलवर्द्धक उपमा-योजना से बचते हुए वास्तव में भावनाओं की उद्दीप्ति में सहायक उपयुक्त उपमा देनी चाहिए।

कविता क्या है-निबंध का सारांश Bihar Board प्रश्न 6.
“जो जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता वचन मनतेउँ नहिं ओहू।। -इस उदाहरण के द्वारा लेखक ने क्या कहना चाहा है?
उत्तर-
हिन्दी के पृष्ठ समीक्षक आचार्य रामचंद्र शुक्ल का स्पष्ट मत है कि एक सच्चा कवि मानव-मन का पारखी होता है। उसे यह पूरा अनुभव रहा है कि स्थिति विशेष में मनुष्य कैसा कथन करता है। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने आदर्श कवि गोस्वामी तुलसीदास की उपर्युक्त चौपाई को उदाहृत किया है। यह वस्तुतः लक्ष्मण को शक्तिबाण लगने पर राम के शोकसंतप्त हृदय का सहज उद्गार है, जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करनी चाहिए। इसके विपरीत पितृ-वचन के परिप्रेक्ष्य में राम के चरित्र में दोषारोपण करना दरअसल अपीन हृदयहीनता और भावनाशून्यता प्रदर्शित करना है।

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf Download प्रश्न 7.
‘वाणी के द्वारा मनुष्य के हृदय के भावों की पूर्ण रूप से व्यंजना हो जाती है।’ इस कथन का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर-
उपयुक्त कथन हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘दिगंत, भाग-1 में संकलित ‘कविता की परख’ शीर्षक निबंध से उद्धृत है। इसके लेखक हिन्दी के महान् विद्वान आचार्य रामचंद्र शुक्ल हैं।

लेखक के उपर्युक्त कथन का आशय यह है कि वाणे ही वह साधन है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने हृदयगत भावों की पूर्णरूपेण व्यंजना करता है। वास्तव में वाणी की शक्ति के कारण मनुष्य अन्य प्राणियों से भिन्न और विशिष्ट है। जिन भावों अथवा विचारों की अभिव्यक्ति में अन्य साधनं, तथा यथा-संकेत, आगिकभाषा आदि असमर्थ रहते हैं, वे भी वाणी के माध्यम से सहजतापूर्वक पूरी स्पष्टता के साथ व्यक्त हो जाते हैं। कदाचित् इसी से कविगण अपनी कविताओं में प्रत्यक्ष-कथन के अतिरिक्त पात्र-कथन का प्रयोग करते हैं। इस रूप में पात्र विशेष के हृदय गतं भावों अथवा विचारों के प्रकटीकरण में पूर्णता और स्पष्टता आ जाती है।

कविता की परख भाषा की बात

Bihar Board 11th Hindi Book Pdf प्रश्न 1.
निम्नलिखति विशेष्यों के लिए उपयुक्त विशेषण दें:
उत्तर-
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Bihar Board Class 11 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
‘ता’ प्रत्यय से इस पाठ में कई शब्द हैं, जेसे-निपुणता, गंभीरता आदि। ऐसे शब्दों को चुनकर लिखें।
उत्तर-
‘ता’ प्रत्यय युक्त शब्दों के उदाहरण-सुन्दरता, कोमलता, मधुरता, उग्रता, कठोरता, भीषणता, वीरता, समानता, मनोहरता, प्रफुल्लता, स्वच्छता इत्यादि।

Bihar Board Class 11 Hindi Book प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों से ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँ
उत्तर-
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कविता क्या है निबंध का सारांश Bihar Board प्रश्न 4.
पाठ से द्वंद्व समास के उदाहरण चुनें।
उत्तर-
द्वंद्व समास-जिस समास में दोनों पद प्रधान रहते हैं, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। जैसे राधाकृष्ण, माता-पिता, भाई-बहन, वस्तु-व्यापर, बड़ा-छोटा, लोटा-डोरी, रात-दिन सर्दी-गमी, नून-तेल, राजा-रानी इत्यादि।

Class 11th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों से विशेषण बनाएँ :
उत्तर-
Class 11th Hindi Book Bihar Board

Bihar Board Hindi Book Class 11 Pdf प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखें:
उत्तर-
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बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 11  प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के संज्ञा रूप लिखें:
उत्तर-
बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 11

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

कविता की परख लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित निबंध ‘कविता की परख’ का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर-
‘कविता की परख’ हिन्दी साहित्य के आलोचक, इतिहासकार, निबंधकार और लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की आलोचनात्मक निबंध है। हिन्दी साहित्य चिंतक आचार्य शुक्ल ने कविता को परखने की बुनियादी शिक्षा देते हुए कहा है कि कविता वह साधना हे जिसके द्वारा शेष सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा और निर्वाह होता है।

कविता के द्वारा हम संसार के सुख-दु:ख, आनन्द और क्लेश आदि यथार्थ रूप से अनुभव करने में अभ्यस्त होते हैं जिससे हृदय की स्तब्धता हटती है और मनुष्यता आती है। कविता सृष्टि-सौन्दर्य का अनुभव कराती है और मनुष्य को सुन्दर वस्तुओं में अनुरक्त और कुत्सित वस्तुओं से विरक्त कराती है।

आचार्य शुक्ल का प्रस्तुत निबंध किताबों से उठकर हमारे जीवन में आश्रय और सहभागिता चाहता है। यह निबंध कविता के सम्बन्ध में लेखक के सारगर्भित ज्ञान का दुर्लभ ज्ञान का दुर्लभ उदाहरण है।

प्रश्न 2.
‘कविता की परख’ की कथावस्तु को संक्षेप में लिखें।
उत्तर-
हिन्दी साहित्य चिंतक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने कविता को परखने की बुनियादी शिक्षा देते हुए कहा है कि कविता वह साधना है जिसके द्वारा शेष सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा और निर्वाह होता है। कविता के द्वारा हम संसार के सुख-दुःख, आनन्द और क्लेश आदि का यथार्थ रूप से अनुभव करने में अभ्यस्त होते हैं जिससे हृदय की स्तब्ध ता हटती है और मनुष्यता आती है।

कविता-सृष्टि सौन्दर्य का अनुभव कराती है और मनुष्य को सुन्दर वस्तुओं के अनुरक्त और कुत्सित वस्तुओं से विरक्त कराती है। कविता वह साधना है जिसके भीतर प्रेम, हास्य सुख-दुःख, आनन्द और क्लेश आदि यथार्थ रूप में चित्रित होता है। जिस कविता में प्रेम, आनन्द, करुणा आदि भावों का समावेश न हो, वह कविता नहीं कहला सकती। कविता के लिए रूप और व्यापार हमारे मन में साक्षात करता है, जो योजना हम मन में धारण करते हैं, कल्पना कहलाती है। कल्पना शक्ति के बिना कविता अधूरी होती है। कविता में सौन्दर्य, शृंगार, दारूण दृश्य आदि भाव जगाना आवश्यक है। राम के वन-गमन का वर्णन अथवा श्रीकृष्ण के अंग-प्रत्यंग के वर्णन में करुणा और सौन्दर्य का भाव परिलक्षित होता है।

कविता के लिए कवि उपमा अलंकार का भी सहारा लिया करते हैं। जैसे-मुख को चन्द्रमा या कमल के समान, नेत्रों को मीन, खंजन, कमल आदि के समान प्रतापी या तेजस्वी की तुलना सूर्य के समान; कायर को श्रृगाल के समान, वीर और पराक्रमी की सिंह से तुलना करते हैं। वास्तव में इसका उद्देश्य वर्णित वस्तु की सुंदरता, कोमलता, मधुरता या उग्रता, कठोरता, भीषणता, वीरता, कायरता इत्यादि की भावना को तीव्र करना है न कि किसी वस्तु का परिज्ञान कराना। जैसे-जिसने हारमोनियम न देखा है। उसने कहना “वह सन्दूक के समान होता है।” ऐसी समानता उपमा के अन्तर्गत नहीं आती है। उपमा सुन्दर ओर सटीक हो इसके लिए यह आवश्यक है कि वर्णित वस्तु के सम्बन्ध में वही भावना अधिक परिमाण में हो। भद्दी उपमा से सौन्दर्य की भावना नही जगती। जैसे कोई कवि आँख की उपमा बादाम या आम की फाँक से करता है तो सौन्दर्य की भावना नहीं जगती, लेकिन ठीक इसके विलोम आँख की उपमा कमल-दल से करने पर मनोहरता, प्रफुल्लता, कोमलता आदि की भावना स्वतः परिलक्षित होती है।।

कविता, में प्रेम, शोक, करुण, आश्चर्य, भय, उत्साह इत्यादि भावों को कवि पात्रों के माध्यम से कहलवाते है ताकि भावों की पूर्ण रूप से व्यंजना हो सके। वाणी द्वारा मनुष्य के क्रोध आश्चर्य और उत्साह के भावों की कवियों को गहरी परख होती है।

कवि की निपुणता पात्र के मुख से भाव की व्यंजना कराने से ही परिलक्षित होता है। रामचरित मानस में भी राम लक्ष्मण दोनों क्रोध प्रकट करते हैं। राम संयम और गंभीरता के भाव जबकि लक्ष्मण अधीरता और उग्रता के साथ। उत्साह आदि भावों में यही बात समाहित है।

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का प्रस्तुत निबंध पुस्तकों से उठकर हमारे जीवन में आश्रय और सहभागिता चाहता है।

कविता की परख अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कविता की परख किस प्रकार निबंध है?
उत्तर-
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित कविता की परख विचारात्मक निबंध है।

प्रश्न 2.
कविता की परख में किन बातों का विवेचन हुआ है?
उत्तर-
कविता की परख नामक निबंध में इन बातों का विवेचन हुआ है-
(क) कविता का उद्देश्य
(ख) कल्पना का महत्त्व
(ग) भाव की अभिव्यक्ति संबंधी तत्व इत्यादि।

प्रश्न 3.
उपयुक्त उपमान का प्रयोग करना क्यों अनिवार्य होता है?
उत्तर-
उपयुक्त उपमान का प्रयोग करना विभिन्न करणों से अनिवार्य होता है-
(क) कविता के उद्देश्य की अनुरूपता को दर्शाना
(ख) कविता के प्रभाव की समानता को दर्शाना इत्यादि।

प्रश्न 4.
उपमा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
किसी व्यक्ति या वस्तु जिसका वर्णन करना हो उसकी सुन्दरता, कोमलता, मधुरता, उग्रता, कठोरता, वीरता तथा कायरता इत्यादि की भावना की तुलना उस वस्तु के समान कुछ अन्य वस्तुओं से करना ही उपमा कहलाता है।

प्रश्न 5.
कल्पना क्या है?
उत्तर-
आनन्द, करुण, हास्य, आश्चर्य तथा प्रेम इत्यादि अनेक भावों का संचार करने वाले रूप और व्यवहार का सजीव चित्रण काल्पनिक रूप से करना ही कल्पना कहलाता है।

प्रश्न 6.
कविता की परख नामक निबंध के लेखक कौन हैं?
उत्तर-
कविता की परख नामक निबंध के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुल्क है।

कविता की परख वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. सही उत्तर का सांकेतिक चिह्न (क, ख, ग, या घ) लिखें।

प्रश्न 1.
‘कविता का परख’ के लेखक हैं
(क) रामचन्द्र शुक्ल
(ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) सत्यजीत राय
(घ) कुमार गन्धर्व
उत्तर-
(क)

प्रश्न 2.
‘भ्रमरगीत सार’ किसकी रचना है?
(क) सत्यजीत राय
(ख) सूरदास
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) कृष्ण कुमार
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 3.
‘कविता की परख’ का सम्पादन किसने किया?
(क) हरिशंकर परसाई
(ख) नामवर सिंह
(ग) रामचन्द्र शुक्ल
(घ) इनमें से काई
उत्तर-
(ख)

प्रश्न 4.
कविता का उद्देश्य क्या होता है?
(क) हृदय पर प्रभाव डालना
(ख) मन को उद्विग्न करना
(ग) घृणा उत्पन्न करना
(घ) इनमें से कोई
उत्तर-
(क)

प्रश्न 5.
‘उपमा’ क्या है?
(क) जिससे उपमा दी जाय
(ख) एक प्रकार की मिठाई
(ग) दो भिन्न पदार्थों में सादृश्य की स्थापना
(घ) इसमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ग)

प्रश्न 6.
‘कविता की परख’ किसके लिए लिखा गया है?
(क) प्रेमियों के लिए
(ख) कवियों के लिए
(ग) हाई स्कूल के छात्र के लिए
(घ) काव्यालोचकों के लिए।
उत्तर-
(ग)

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
1……………. ने श्रीकृष्ण के अंग-प्रत्यंग का वर्णन किया।
2. किन्तु सुन्दर वस्तु को देखकर हम …………. हो जाते हैं
3. तुलसीदासजी की गीतावली में …………….. का सुन्दर वर्णन।
4. वाणी के द्वारा मनुष्य के हृदय के भावों की पूर्ण रूप से …………….. हो जाती है।
5.शोक के वेग में मनुष्य थोड़ी देर के लिए ……… और …………… भूल जाता है।
उत्तर-
1. सूरदासजी
2. प्रफुल्ल
3. चित्रकूट
4. व्यंजना
5. बुद्धि, विवेक।

कविता की परख लेखक परिचय रामचन्द्र शुक्ल (1884-1941)

पं. रामचंद्र शुक्ल का जन्म 1884 ई. को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिलान्तर्गत ‘अगोना’ नामक ग्राम में हुआ था। 1888 ई. में वे अपने पिता पं. चंद्रबली शुक्ल के साथ राठ जिला हमीरपुर गये तथा वहीं पर विद्याध्ययन प्रारंभ किया। सन् 1892 ई. में उनके पिता की नियुक्ति मिर्जापुर में सदर कानूनगो के रूप में हुई और वे पिता के साथ मिर्जापुर आ गये। 1901 ई. में लंदन मिशन स्कूल, मिर्जापुर में स्कूल फाइनल की परीक्षोत्तीर्णता के पश्चात् कायस्थ पाठशाला, प्रयाग में इंटर में उनका नामांकन हुआ, पर पढ़ाई अधूरी रही। फिर भी उन्होंने स्वाध्याय द्वारा प्रभूत ज्ञान अर्जित किया, जिसका उपयोग वे आगे चलकर अपने लेखन में जमकर कर सके।

आरंभ में शुक्लजी मिर्जापुर के मिशन स्कूल में ड्राइंग टीचर रहें। फिर 1908 ई. में ‘काशी नगरी प्रचारिणी सभा’ की परियोजना-‘हिन्दी शब्द सागर’ के सहायक संपादक बने। कुछ दिनों तक ‘नागरी प्रचारिणी पत्रिका’ का संपादन करने के बाद वे हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी में हिन्दी के अध्यापक हुए। 1937 ई. में वे वहाँ के हिन्दी विभागाध्यक्ष नियुक्त हुए तथा उसी पद पर रहते हुए सन् 1941 में उनकी मृत्यु हो गयी।

आचार्य शुक्ल का रचना-संसार अत्यंत विस्तृत एवं व्यापक है। हिन्दी का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिस पर उन्होंने न लिखा हो। उनकी प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं-मधुस्रोत (कविता संग्रह), गोस्वामी तुलसीदास, जायसी ग्रंथावली की भूमिका, भ्रमरगीतसार, रसमीमांसा, त्रिवेणी (पाठालोचन और आलोचना), हिन्दी साहित्य का इतिहास (साहित्येतिहास), श्रीराधाकृष्णदास की जीवनी (जीवनी), चिन्तामणि, भाग 1, 2 एवं 3 (निबंध-संग्रह) का विश्वप्रपंच (लबी भूमिका के साथ अनुवाद) कल्पना का आनंद, शशांक, बुद्धचरित (अनुवाद) इत्यादि।

इन रचनाओं के आधार पर शुक्लजी एक श्रेष्ठ एवं समर्थ साहित्यकार के रूप में स्थापित होते हैं। उनकी भाषा-शैली सजीव, प्रौढ़ एवं भावनात्मक है। संस्कृत की तत्सम शब्दावली के साथ-साथ अंग्रजी, अरबी, फारसी आदि के शब्दों के लोक-प्रचलित मुहावरों के प्रयोग से उनकी भाषा में विशेष प्रवाह और प्रभाव का संगम हुआ। वस्तुत: उनकी शैली में उनका समग्र व्यक्तित्व प्रतिविबित हुआ है।

स्पष्टतया आचार्य शुक्ल ने यद्यपि हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में, रचनाएँ की और उनमें अपनी विलक्षण प्रतिभा, मौलिक चिन्तन एवं नवीन उद्भावना शक्ति दिखायी है, तथापि उनका विशेष महत्त्व साहित्येतिहासकार, निबंधकार और आलोचक के रूप में है। वस्तुतः इन क्षेत्रों में उनका अवदान युगप्रवर्तक का है, अप्रतिम एवं अप्रतिस्पर्धी। अतएव देवीशंकर अवस्थी का यह कथन सर्वथा समीचीन है कि “साहित्यिक इतिहास लेखक के रूप में उनका स्थान हिन्दी में अत्यंत गौरवपूर्ण है, निबंधकार के रूप में वे किसी भी भाषा के लिए गर्व के विषय हो सकते हैं तथा समीक्षक के रूप में तो वे हिन्दी में अभी तक अप्रतिम हैं।”

कविता की परख पाठ का सारांश

हिन्दी के स्वनामधन्य समालोचक, सर्वश्रेष्ठ साहित्येतिहासकार एवं अप्रतिम निबधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल विरचित ‘कविता की परख’ एक उत्तम निबंध है। इसमें विद्वान लेखक के द्वारा कविता की परख अर्थात् पहचान अथवा जाँच से संबंधित प्रायः सभी प्रमुख साधनों की चर्चा अत्यंत परिष्कृत एवं परिमार्जित भाषा में की गई है। इस प्रकार यह एक विचारप्रधान निबंध है, जिससे कविता को देखने, समझने एवं परखने की एक नवीन दृष्टि विकसित होती है।

प्रस्तुत निबंध में लेखक ने सर्वप्रथम कविता के उद्देश्य पर प्रकाश डालत हुए यह स्थापना की है कि उनका उद्देश्य मनुष्य के हृदय पर प्रभाव डालना होता है, ताकि उसके भीतर दया, करुणा, प्रेम, आनंद, आश्चर्य, वीरता आदि मानवीय भावों का संचार हो सके। इसी आधार पर ज्ञान के अन्य विषयों से कविता की पृथक् सत्ता प्रमाणित होती है। इसी क्रम में लेखक ने कहा है कि प्रभाव पैदा करने के लिए कविगण विभिन्न भावों से संबंधित रूप और व्यापार की योजना करते है। ऐसा योजना के कल्पना-शक्ति के सहारे करते हैं। अतः काव्य में कल्पना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है।

कवि जिस प्रकार का भाव पाठक के मन में जगाना चाहते है, उसी के रूप और व्यापार का वर्णन करते हैं। इस क्रम कवि लोग उपमादि अलंकारों की सहायता लेते हैं। उपमा में दो भिन्न पदार्थों के बीच रूप, गुण अथवा प्रभाव की समानता दिखाई जाती है, किन्तु इसमें प्रभाव-साम्य ही उत्तम होताहै। इसी से कवि की निरीक्षण-क्षमता का पता चलता है। पुनः कवि लोग अपने काव्यों में प्रेम, शोक, घृणा, उत्साह इत्यादि विविध भावों को पात्रों के कथन के माध्यम से भी प्रकट करते हैं। इसके लिए लेखक के अनुसार कवि में पात्रगत एवं पिरस्थितिगत निपुणता आवश्यक है।

इस प्रकार इस विचार-प्रधान निबंध में आचार्य शुक्ल ने कविता को परखने के आधारभूत साधनों का विवेचन किया है। इस गंभीर विवेचन को भी उन्होंने उदाहरणों के द्वारा सरल एवं सुबोध बना दिया है। उसके द्वारा व्यक्त विचार प्रायः सर्वस्वीकार्य हैं और इसी से उनका महत्त्व कभी भी न्यून होने वाला नहीं है।

कविता की परख कठिन शब्दों का अर्थ

उत्साह-खुशी, उमंग। आर्द्र-भीगा हुआ। करुणा-दया, वेदना। रमणीय-सुंदर। व्यापार-क्रिया, गतिविधि। समक्ष-सामने। दारुण-असहनीय। विकराल-भयानक। आह्लादित-प्रसन्न। शृगाल-सियार। प्रतापी-प्रभावशाली, पराक्रमी। कांति-चमक। निपुणता-दक्षता। व्यंजना-व्यक्त या प्रकट करना। उग्र-उत्तेजित। खंजन-चंचल आँखों वाला विशिष्ट पक्षी। अधीरत-बेचैनी। कुतूहल-अचरज, विस्मय। परिज्ञान-विशिष्ट ज्ञान। दूषण-दोष, कलंक। बोध-समझ। परिमाण-मात्रा। प्रफुल्ल-प्रसन्न।

महत्त्वपूर्ण पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या

1. किसी सुंदर वस्तु को देखकर हम प्रफुल्ल हो जाते हैं, किसी अद्भूत वस्तु को देखकर आश्चर्यमग्न हो जाते हैं, किसी दुख के दारुण दृश्य को देखकर करुण से भर जाते हैं। यही बात कविता में होती है।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा कविता की परख से ली गयी है। इन पंक्तियों में लेखक ने यह बतलाया है कि जब हम किसी सुंदर वस्तु को देखकर प्रसन्न हो जाते हैं और किसी अद्भूत वस्तु को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते है तथा किसी दुख के दृश्य को देखकर करुणा से भर जाते हैं। ये सभी बाते कविता को पढ़ने में भी पाठक को आभास होती हैं। कविता में इन बातों का सुन्दर विवेचन किया जाता है।

2. वाणी के द्वारा मनुष्य के हृदय के भावों की पूर्ण रूप से व्यंजना हो सकती है।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्ति आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित कविता की परख नामक पाठ से ली गयी है.। इस पंक्ति में लेखक ने यह बतलाया है कि मनुष्य की बोली से उसके दिल के गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट भावों की जानकारी प्राप्त होती है। यही कारण है कि मनुष्य के मुँह से प्रेम करुणा में मधुर वचन निकलते है, जबकि क्रोध, शोक में अच्छे वचन नहीं निकलते हैं। कवि को मनुष्य की बोली का अनुभव पूर्ण रूप से रहता है। यही कारण है कि कवि जिस प्रकार की कविता की रचना करता है उसी से संबंधित शब्दों का सटीक प्रयोग करता है।

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कविता के साथ

स्वदेशी कविता का अर्थ Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 1.
कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
वस्तुत: किसी भी गद्य या पद्य का शीर्षक वह धुरी होता है जिसके चारों तरफ कहानी या भाव घूमते रहता है। रचनाकार शीर्षक देते समय उसके कथानक, कथावस्तु, कथ्य को ध्यान में रखकर ही देता है। प्रस्तुत कविता का शीर्षक ‘स्वदेशी’ अपने आप में उपयुक्त है। पराधीन भारत की दुर्दशा और लोगों की सोच को ध्यान में रखकर इस शीर्षक को रखा गया है। अंग्रेजी वस्तुओं को फैशन मानकर नये समाज की परिकल्पना करते हैं।

रहन-सहन खान-पान आदि सभी पाश्चात्य देशों का ही अनुकरण कर रहे हैं। स्वदेशी वस्तुओं को तुच्छ मानते हैं। हिन्दु, मुस्लमान, ईसाई आदि सभी विदेशी वस्तुओं पर ही भरोसा रखते हैं। उन्हें अपनी संस्कृति विरोधाभास लाती है। बाजार में विदेशी वस्तुएँ ही नजर आती है। भारतीय कहने-कहलाने पर अपने आप को हेय की दृष्टि से देखते हैं। सर्वत्र पाश्चात्य चीजों का ही बोल-बाला है। अतः इन दृष्टान्तों से स्पष्ट होता है। प्रस्तुत कविता का शीर्षक सार्थक और समीचीन है।

स्वदेशी कविता Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 2.
कवि को भारत में भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती?
उत्तर-
किसी देश के प्रति वहाँ के जनता की कितनी निष्ठा है, देशवासी को अपने देश की संस्कृति में कितनी आस्था है यह उसके रहन-सहन, बोल-चाल, खान-पान से पता चलता है। कवि को भारत में स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि यहाँ के लोग विदेशी रंग में रंगे हैं। खान-पान, बोल-चाल, हाट-बाजार अर्थात् सम्पूर्ण मानवीय क्रिया-कलाप में अंग्रेजीयत ही अंग्रेजीयत है। पाश्चात्य सभ्यता का बोल-बाला है। भारत का पहनावा, रहन-सहन, खान-पान कहीं दिखाई नहीं देता है। हिन्दू हों या मुसलमान, ग्रामीण हो या शहरी, व्यापार हो या राजनीति चतुर्दिक अंग्रेजीयत की जय-जयकार है। भारतीय भाषा, संस्कृति, सभ्यता धूमिल हो गई है। अतः कवि कहते हैं कि भारत में भारतीयता दिखाई नहीं पड़ती है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
कवि समाज के किए वर्ग की आलोचना करता है और क्यों?
उत्तर-
उत्तर भारत में एक ऐसा समाज स्थापित हो गया है जो अंग्रेजी बोलने में शान की बात समझता है। अंग्रेजी रहन-सहन, विदेशी ठाट-बाट, विदेशी बोलचाल को अपनाना विकास मानते हैं। हिन्दुस्तान की नाम लेने में संकोच करते हैं। हिन्दुस्तानी कहलाना हीनता की बात समझते ।। हैं। झूठी प्रशंसा करते हुए फूले नहीं समाते। अपनी मूल संस्कृति को भूलकर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर गौरवान्वित होना अपने देश में प्रचलित हो गया है। ऐसी प्रचलन को बढ़ावा देने वाले वर्ग की कवि आलोचना करते हैं क्योंकि यह देशहित की बात नहीं है। ऐसा वर्ग देश को पुनः अपरोक्ष रूप से विदेशी-दासता के बंधन में बाँधने को तत्पर हो रहा है।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 4.
कवि नगर, बाजार ओर अर्थव्यवस्था पर क्या टिप्पणी करता है?
उत्तर-
कवि के अनुसार आज नगर में स्वदेशी की झलक बिल्कुल नहीं दिखती। नगरीय व्यवस्था, नगर का रहन-सहन सब पाश्चात्य सभ्यता का अनुगामी हो गया है। बाजार में वस्तुएँ विदेशी दिखती हैं। विदेशी वस्तुओं को लोग चाहकर खरीदते हैं। इससे विदेशी कंपनियाँ लाभान्वित हो रही हैं। स्वदेशी वस्तुओं का बाजार-मूल्य कम हो गया है। ऐसी प्रथा से देश की आर्थिक स्थिति पर कुप्रभाव पड़ रहा है। चतुर्दिक विदेशीपन का होना हमारी कमजोरी उजागर कर रही है।

Class 10 Hindi Chapter 1 Bihar Board प्रश्न 5.
नेताओं के बारे में कवि की क्या राय है ?
उत्तर-
आज देश के नेता, देश के मार्गदर्शक भी स्वदेशी वेश-भूषा, बोल-चाल से परहेज करने लगे हैं। अपने देश की सभ्यता संस्कृति को बढ़ावा देने के बजाय पाश्चात्य सभ्यता से स्वयं प्रभावित दिखते हैं। कवि कहते हैं कि जिनसे धोती नहीं सँभलती अर्थात् अपने देश के वेश-भूषा को धारण करने में संकोच करते हों वे देश की व्यवस्था देखने में कितना सक्षम होंगे यह संदेह का विषय हो जाता है। जिस नेता में स्वदेशी भावना रची-बसी नहीं है, अपने देश की मिट्टी से दूर होते जा रहे हैं, उनसे देश सेवा की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। ऐसे नेताओं से देशहित की अपेक्षा करना ख्याली-पुलाव है।

Bihar Board 10th Hindi Book प्रश्न 6.
कवि ने डेफाली किसे कहा है और क्यों?
उत्तर-
जिन लोगों में दास-वृत्ति बढ़ रही है, जो लोग पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति की दासता के बंधन में बंधकर विदेशी रीति-रिवाज का बने हुए हैं उनको कवि डफाली की संज्ञा देते हैं क्योंकि व विदेश की पाश्चात्य संस्कृति की, विदेशी वस्तुओं की, अंग्रेजी की झूठी प्रशंसा में लगे हुए हैं। डफाली की तरह राग-अलाप रहे हैं, पाश्चात्य की, विदेशी एवं अंग्रेजी की गाथा गा रहे हैं।

स्वदेशी का अर्थ Bihar Board Class 10 Hindi प्रश्न 7.
व्याख्या करें
(क) मनुज भारती देखि कोउ, सकत नहीं पहिचान।
(ख) अंग्रेजी रूचि, गृह, सकल वस्तु देस विपरीत।
उत्तर-
(क) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य-पुस्तक के ‘स्वदेशी’ शीर्षक पद से उद्धत है। इसकी रचना देशभक्त कति बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ द्वारा की गई है। इसमें कवि ने देश-प्रेम की भाव को जगाने का प्रयास किया है। कवि ने स्वदेशी भावना को जगाने की आवश्यकता पर बल दिया है। पाश्चात्य रंग में रंग जाना कवि के विचार से दासता की निशानी है।

प्रस्तुत व्याख्येय में कवि ने कहा है कि आज भारतीय लोग अर्थात् भारत में निवास करने वाले मनुष्य इस तरह से अंग्रेजीयत को अपना लिये हैं कि वे पहचान में ही नहीं आते कि भारतीय हैं। आज भारतीय वेश-भूषा, भाषा-शैली, खान-पान सब त्याग दिया गया है और विदेशी संस्कृति को सहजता से अपना लिया गया है। मुसलमान, हिन्दु सभी अपना भारतीय पहचान छोड़कर अंग्रेजी की अहमियत देने लगे हैं। पाश्चात्य का अनुकरण करने में लोग गौरवान्वित हो रहे हैं।

(ख) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य पुस्तक के कवि ‘प्रेमघन’ जी द्वारा रचित ‘स्वदेशी’ पाठ से उद्धत है। इसमें कवि ने कहा है कि भारत के लोगों से स्वदेशी भावना लुप्त हो गई है। विदेशी भाषा, रीति-रिवाज से इतना स्नेह हो गया है कि भारतीय लोगों का रुझान स्वदेशी के प्रति बिल्कुल नहीं है। सभी ओर मात्र अंग्रेजी का बोलबाला है।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 8.
आपके मत से स्वदेशी की भावना किस दोहे में सबसे अधिक प्रभावशाली है ? स्पष्ट करें।
उत्तर-
मेरे विचार से दोहे संख्या 9 (नौ) में स्वदेशी की भावना सबसे अधिक प्रभावशाली है। स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति सभ्यता में जितनी अधिक सरलता, स्वाभाविकता एवं पवित्रता है उतनी विदेशी संस्कृति सभ्यता में नहीं है। आज ऐसा समय आ गया है कि यहाँ के लोगों से जब पवित्र भारतीय संस्कृति का प्रबंधन कार्य ही नहीं संभल रहा है तो जटिलता से भरी हुई विदेशी संस्कृति का निर्वाह कहाँ तक कर सकेंगे। अतः हर स्थिति में पूर्ण बौधिकता का परिचय देते हुए भारतीय संस्कृति, मूल वंश-भूषा का निर्वहन किया जाना चाहिए।

Bihar Board 10th Class Hindi Book Pdf प्रश्न 9.
स्वदेशी कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
प्रेमधन सर्वस्व’ से संकलित प्रस्तुत दोहा में प्रेमघन ने देश-दशा का उल्लेख करते हुए नव जागरण का शंख फूंका है। वे कहते हैं-
देश के सभी लोगों में विदेशी रीति, स्वभाव और लगाव दिखाई पड़ रहा है। भारतीयता तो अब भारत में दिखाई ही नहीं पड़ती। आज भारत के लोगों को देखकर पहचान करना कठिन है कि कौन हिन्दू है, कौन मुसलमान और कौन ईसाई।

विदेशी भाषा पढ़कर लोगों की बुद्धि विदेशी हो गई है। अब इन लोगों को विदेशी चाल-चलन भाने लगी है। लोग विदेशी ठाट-बाट से रहने लगे हैं अपना देश विदेश बन गया है। कहीं भी नाममात्र को भारतीयता दृष्टिगोचर नहीं होती।

अब तो हिन्दू लोग हिन्दी नहीं बोलते। वे अंग्रेजी का ही प्रयोग करते हैं, अंग्रेजी में ही भाषण देते हैं। वे अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करतं, अंग्रेजी कपड़े पहनते हैं। उनकी रीति और नीति भी अंग्रेजी जैसी है। घर और सारी चीजें देशी नहीं हैं। ये देश के विपरीत हैं।

सम्प्रति, हिन्दुस्तानी नाम से भी ये शर्मिंदा होते और सकुचाने लगते हैं। इन्हें हर भारतीय वस्तु से घृणा है। इनके उदाहरण हैं देश के नगर। सर्वत्र अंग्रेजी चाल-चलन है। बाजारों में देखिए अंग्रेजी माल भरा है।

देखिए, जो लोग अपनी ढीली-ढाली धोती नहीं सँभाल सकते, वे लोग देश को क्या सँभालेंगे? यह सोचना ही कल्पनालोक में विचरण करना है। चारों ओर चाकरी की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ये लोग झूठी प्रशंसा, खुशामद कर डफली अर्थात् ढिंढोर भी बन गए हैं।

प्रश्न 10.
‘स्वदेशी’ के दोहे राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत हैं। कैसे ? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर-
बदरी नारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ कृत ‘स्वदेशी’ के दोहे राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीयता के शनैः-शनैः होते विलोपन से व्याकुल मन के चीत्कार हैं। पराधीन काल में जब लोगों की वेश-भूषा, चाल-ढाल, को अंग्रेजीयत के रंग में रंगता दिखलाई पड़ता है तो उसे पीड़ा होती है। अब तो भारतीयों की पहचान मुश्किल हो रही है-‘मनुज भारतीय कोऊ सकत नहीं पहिचान, मुसलमान, हिन्दू किंधौं, के ये हैं ये क्रिस्ताना’
कवि यह देख भी दुखी होता है कि विदेशी विद्या ने देश के लोगों की सोच ही बदल दी है-

पढ़ि विद्या परदेश की बुद्धि विदेशी पाया
चाल चलन परदेस की, गई इन्हें अति भाय।।

लोगों में तो लगता है कि भारतीयता लेशमात्र को नहीं बची। लोग अंग्रेजी बोल रहे हैं, अंग्रेजी ढंग से रह रहे हैं। हिन्दुस्तानी नाम से ही लज्जा महसूस करते हैं और भारतीय वस्तुओं से घृणा करते हैं –

हिन्दुस्तानी नाम सुनि, अब ये सकुचित लजात।
भारतीय सब वस्तु ही, सों ये हाथ घिनात।

कवि की राष्ट्रीय भावना पर कहर चोट तब पड़ती है जब सभी वर्ग के लेकर आत्म-सम्मान छोड़कर चाकरी के लिए ललायित हो रहे हैं, अंग्रेज हाकिमों की इन प्रशंसा कर रहे हैं। सबसे बड़ी हताशा उसे अपने नेताओं की हालत पर हो रही है वे देश के नहीं, अपने कल्याण में लगे
हैं। स्वार्थपरता ने उन्हें इतना घेर लिया कि उनकी संतानों ही हाथ से निकल रही है। जब ये अपना घर ही नहीं सँभाल सकते तो देश क्या सँभालेंगे-

जिनसों सम्हल सकत नहिं तनकी धोती ढीली ढाली।
देस प्रबंध करिहिंगे यह, कैसी खाम ख्याली।

इस प्रकार हम देखते हैं कि ‘स्वदेशी’ के दोहों में देश की दशा के वक्त के माध्यम से कवि ने लोगों में राष्ट्रीय भावना भरने की चेष्टा की है। अतएव, दोहे निश्चित तौर पर राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत हैं। इनसे राष्ट्रभक्ति को प्रेरक मिलती है।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्दों से विशेषण बनाएँ-
रूचि, देस, नगर, प्रबंध, ख्याल, दासता, झूठ, प्रशंसा।
उत्तर-
रूचि – रूच
देरू – देसी
नगर – नागरिक
प्रबंध – प्रबंधित
ख्याल – ख्याली
दारूता – दारू
झूठ – झठा

प्रश्न 2.
निम्नांकित शब्दों का लिंग-निर्णय करते हुए वाक्य बनाएँ
चाल-चलना; खामख्याली, खुशामद, माल, वस्तु, वाहन, रीत, हाट, दारूवृति, बानका
उत्तर-
चाल-चलन – उसकी चाल-चलन ठीक नहीं है।
खामख्याली – खामख्याली, झूठी होती है।
खुशामद – खुशामद अच्छी चीज नहीं है।
माल – माल छूट गया।
वस्तु – वस्तु अच्छी है। वाहन
वाहन – वाहन नया है।
रीत – रीत उसकी रीत नई है।
हाट – शाम का हाट लग गया।
दारूवृति – उसकी दासवृत्ति अच्छी है।
बानक – उका बानक अच्छा है।

प्रश्न 3.
कविता से संज्ञा पदों का चुनाव करें और उनके प्रकार भी बताएं।
उत्तर-
वस्तु – जातिवाचक
नर – जातिवाचक
भारतीयता – भाववाचक
भारत – व्यक्तिवाचक संज्ञा
मनुज – जातिवाचक संज्ञा
भारती – व्यक्तिवाचक
चाल-चलन – भाववाचक
देश – जातिवाचक
विदेश – जातिवाचक
बरून – जातिवाचक
गृह – जातिवाचक
हिन्दुस्तानी – जातिवाचक
नगर – जातिवाचक
हाटन – जातिवाचक
धोनी – जातिवाचक
खुशामद – भाववाचक

काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

सवै बिदेसी वस्तु नर, गति रति रीत लखात।
भारतीयता कछु न अब, भारत म दरसात।।
मनुज भारती देखि कोउ, सकत नहीं पहिचान।
मुसलमान, हिंदू किधौं, के हैं ये क्रिस्तान।
पढ़ि विद्या परदेस की, बुद्धि विदेसी पाय।
चाल-चलन परदेस की, गई इन्हें अति भाय।।

प्रश्न
(क) कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखें।
(ग) पद का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कवि-बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन कविता- स्वदेशी।

(ख)प्रस्तुत दोहे में कवि भारत से भारतीयता का लोप होने की बात कहता है। वे आज के यथार्थ को उजागर करने का पूर्ण प्रयास किये हैं। वर्तमान समय में विदेशी विधा, रहन-सहन, चाल-चलन सब भारतीय लोगों पर हावी है। लोग विदेशी रंग में रंगकर अपनी असलियत भूल गये हैं। इन्हीं तथ्यों को इन दोहों के माध्यम से कवि उजागर करने का प्रयास करते हैं।

(ग) सरलाई कवि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की धूमिलता पर आक्षेपित स्वर में कहते हैं कि सभी जगह से भारतीयता समाप्त हो गई है। यहाँ के लोग विदेशी वस्तुओं पर रीझे हुए हैं। यहाँ तक कि विदेशी संस्कृति सभ्यता अपनाकर स्वदेशी संस्कृति सभ्यता को धूमिल कर दिये हैं। सभी जगह विदेशी स्वभाव, लगाव एवं नियम देखने को मिल रहे हैं। भारतीयता कुछ नहीं है, जो भारत में दर्शन हो। यहाँ तक कि यहाँ के लोग अपनी संस्कृति को देखकर भी पहचान नहीं रहे हैं। यहाँ के मुसलमान और हिन्दू किधर गए हैं। इसकी तो बात ही नहीं है। जैसे लगता है कि संपूर्ण देश अंग्रेजीमय हो गया है। विदेशी विद्या पढ़ कर बुद्धि भी विदेशी पा गये हैं। यहाँ तक की विदेशी चाल-चलन यहाँ के लोगों को बहुत आकर्षित कर रही है।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत कविता में भारतीय सभ्यता और संस्कृति की वर्तमान स्थिति कितनी बदतर हो गई है यह जग-जाहिर है। स्वदेशी वस्तु को अपनाना घृणा की बात और विदेशी वस्तु को अपनाना गर्व की बात समझ रहे है। हिन्दू और मुसलमान सभी अंग्रेजीमय वातावरण
को स्वीकार कर लिये हैं।

(ङ) काव्य-सौंदर्य-

  • प्रस्तुत कविता स्वदेशी में हिन्दी खड़ी बोली का व्यवहार स्पष्ट दिखाई पड़ता है।
  • यहाँ खड़ी बोली के साथ-साथ ब्रजभाषा की पुट एवं तत्सम्-तद्भव की झलक भाव की कोमलता में सहायक हुए हैं।
  • भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग सार्थक बन पड़ा है।
  • दोहे छंद के सभी लक्षण यहाँ उपस्थित हैं।
  • अलंकार की दृष्टि से अनुप्रास की प्राथमिकता देखी जा रही है। कहीं-कहीं पुनरुक्ति प्रकाश का अंश है।

2. ठटे बिदेसी ठाट सब, बन्यो देस बिदेस।
सपनेहूं जिनमें न कहुँ, भारतीयता लेस।।
बोलि सकत हिंदी नहीं, अब मिलित हिंदू लोग।
अंगरेजी भाखन करत, अंगरेजी उपभोग।
अंगरेजी बाहन, बसन, वेष रीति और नीति।
अंगरेजी रुचि, गृह, सकल, बस्तु देस विपरीत॥

प्रश्न
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखें।
(ख) पद का प्रसंग लिखें। ।
(ग) सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क)कविता- स्वदेशी।
कवि बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’।

(ख) प्रसंग-प्रस्तुत कविता में देश भक्ति की भावना ओत-प्रोत है। भारत में विदेशी सभ्यता और संस्कृति का जो पदार्पण हो गया है उसी पर कवि यथार्थ शैली में लिखकर लोगों को नव-जागरण की ओर ले जाना चाहते हैं।

गोमालाई प्रस्तुत कविता में कवि कहते हैं कि सभी जगह हमारे देश में विदेशी ठाट-बाट ही देखने को मिल रहे हैं। लगता है कि स्वप्न में भी लेश मात्र भारतीय सभ्यता नहीं है। यहाँ के हिंदू लोग भी हिन्दी बोलने में असमर्थ हो रहे हैं। हिन्दी बोलने में उन्हें तौहिनी महसूस होती है। अंग्रेजी बोलकर गौरवान्वित होते हैं और अंग्रेजी वस्तु का उपभोग करना प्रसन्नता की बात समझते हैं।
अंग्रेजी वाहन, वस्त्र, वेश-भूषा, नियम और नीति, रुचि और अभिलाषा, घर और वस्तु सभी अपनाकर अपने देश के विपरीत कार्य कर रहे हैं।

(घ) भाव-सौंदर्य प्रस्तुत अंश में विदेशी ठाट-बाट पर कटाक्ष करते हुए भारतीयता पर सवाल उठाया गया है। कवि की दृष्टि में आज भारत की सम्पूर्ण भारतीयता विदेशी संस्कृति सभ्यता में समाहृत हो गई है। यहाँ की रहन-सहन, खान-पान, वेश-भूषा ये सभी अंग्रेजीमय हो गये हैं।
(क) काव्य-मोदर्य

  • सम्पूर्ण कविता दोहे छंद में लिखी हुई है।
  • दोहे का सम्पूर्ण लक्षण उपस्थित होने के कारण कविता गेय हो गई है। खड़ी बोली के साथ-साथ ब्रजभाषा की प्राथमिकता है।
  • अलंकार की दृष्टि से अनुप्रास की प्राथमिकता है। प्रसाद गुण अपने पूर्ण वातावरण में उपस्थित है।

3. हिन्दुस्तानी नाम सुनि, अब ये सकुचि लजाता
भारतीय सब वस्तु ही, सों ये हाय धिनात॥
देस नगर बानक बनो, सब अंगरेजी चाल।
हाटन मैं देखहु भरा, बसे अंगरेजी माल।।
जिनसों सम्हल सकत नहिं तनकी, धोती ढीली-ढाली।
देस प्रबंध करिहिंगे वे यह, कैसी खाम खयाली॥
दास-वृत्ति की चाह चहूँ दिसि चारह बरन बढ़ाली।
करत खुशामद झूठ प्रशंसा मानहुँ बने डफाली।

प्रश
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद का प्रसंग लिखिए।
(ग) सरलार्थ लिखिए।
(घ) भव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क)कविता-स्वदेशी।
कवि-बदरीनारायण चौधरी प्रेमघन।
(ख) प्रसंग-प्रस्तुत कविता देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण है। इन दोहों में राष्ट्रीय स्वाधीनता की चेतनो को सहचर बनाया गया है। साथ ही नव-जागरण का स्वर मुखरित किया गया है। विदेशी वस्तु का भारत में स्वीकार एवं स्वदेशी वस्तु के तिरस्कार पर यथार्थ चित्रण किया गया है।

(ग) सरलार्थ-कवि कहते हैं कि भारत के लोग हिन्दुस्तानी शब्द से अपने आपको सम्बोधित करते हुए भी संकोच करते हैं। सभी भारतीय वस्तुओं का प्रयोग करते हुए घृणा करते हैं।

देश, नगर सभी जगह अंग्रेजी वेश-भूषा और चाल-ढाल देखी जा रही है। यहाँ के बाजारों ‘ में भी अंग्रेजी माल भरे पड़े है। जबकि यहाँ के लोग अपनी वेश-भूषा भी नहीं संभाल रहे हैं तो विदेशी प्रबंध को, जो पूर्ण जटिल हैं, उन्हें संभालने की यहाँ के लोग केवल कोरी कल्पना ही करते हैं। देखा जा रहा है कि यहाँ के लोगों में गुलामी के वातावरण में जीवन-यापन करने की आदत हो गई है। चारों ओर इसी का भाव मिल रहा है। खुशामद करना तथा झूठी प्रशंसा करना, झूठे राग की डफली बजाना यहाँ के लोगों की संस्कृति बन गई है।

(घ) भाव-सौंदर्य-कविता में पूर्ण रूप से लाक्षणिकतावादी स्वर मुखरित हुआ है। यहाँ विदेशी संस्कृति सभ्यता पर जमकर प्रहार किया गया है और विदेशी संस्कृति सभ्यता अपनाने वालों के प्रति भी कवि का एकमुख संदेश है।

(ङ)काव्य-सौंदर्य-

  • यहाँ दोहे छंद हैं। अलंकार का समायोजन स्पष्ट रूप में नहीं है।
  • देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत रहने के कारण प्रसाद गुण की प्राथमिकता है।
  • भाषीय व्याकरण की दृष्टि से विशेषण लिंग, संज्ञा कारक की उपस्थिति सम्यक् भाषा की अपेक्षा है। भाव के अनुसार भाषा का प्रयोग पूर्ण सार्थक है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें-

प्रश्न 1.
‘स्वदेशी’ किस कवि की रचना है?
(क) घनानंद
(ख) सुमित्रानंदन पंत
(ग) रामधानी सिंह ‘दिनकर’
(घ) प्रेमधन
उत्तर-
(घ) प्रेमधन

प्रश्न 2.
‘प्रेमधन’ किसका उपनाम है?
(क) सच्चिदानंद हीरा नंद वात्स्यायन
(ख) सूर्यकान्त त्रिपाठी
(ग) बदरी नारायण चौधरी
(घ) वीरेन डंगवाल ।
उत्तर-
(ग) बदरी नारायण चौधरी

प्रश्न 3.
प्रेमधन’ किस युग के कवि थे?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) भारतेन्दु युग
(घ) छायावादी युग
उत्तर-
(ग) भारतेन्दु युग

प्रश्न 4.
कवि ‘प्रेमधन’ के अनुसार भारत में आज कौन-सी वस्तु दिखाई नहीं पड़ती? /
(क) भारतीयता
(ख) कदाचारिता
(ग) पत्रकारिता
(घ) अंग्रेजी भाषाः
उत्तर-
(क) भारतीयता

प्रश्न 5.
आजकल भारत के लोग किस भाषा में बोलना पसन्द करते हैं ?
(क) हिन्दी
(ख) मातृभाषा
(ग) अंग्रेजी
(घ) फ्रेंच
उत्तर-
(ग) अंग्रेजी

प्रश्न 6.
इन दिनों भारत के बाजार किन वस्तुओं से भरे पड़े हैं ?
(क) चीनी .
(ख) पाकिस्तानी
(ग) विदेशी
(घ) अफगानी
उत्तर-
(ग) विदेशी

प्रश्न 7.
भारत के लोगों को अब क्या भाने लगा है ?
(क) विदेशी रहन-सहन
(ख) देसी घी
(ग) परदेशी
(घ) आतंक
उत्तर-
(क) विदेशी रहन-सहन

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.
अब ……. से भारतीयों को पहचानना कठिन है।
उत्तर-
कपड़ों

प्रश्न 2.
हिन्दुस्तानियों को अब ………..नाम नहीं रुचते।
उत्तर-
हिन्दुस्तानी

प्रश्न 3.
‘स्वदेशी’ कविता …………से संकलित है।
उत्तर-
प्रेमधन-सर्वस्व

प्रश्न 4.
आजकल अधिकांश भारतीयं ………… बोलना पसंद करते हैं।
उत्तर-
अंग्रेजी

प्रश्न 5.
‘भारत-सौभाग्य’ नाटक की रचना ………….. ने की है।
उत्तर-
प्रेमधन

प्रश्न 6.
अब सबकी चाह …………….. की है।
उत्तर-
नौकरी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘प्रेमघन’ के आदर्श-पुरुष कौन थे ?
उत्तर-
‘प्रेमघन’ के आदर्श-पुरूष भारतेन्दु हरिश्चन्द्र थे।

प्रश्न 2.
‘प्रेमघन’ का गा-लेखन कैसा था?
उत्तर-
प्रेमघन के गद्य-लेखन अत्यंत आलंकारिक थे।

प्रश्न 3.
किन-किन पत्रिकाओं का सम्पादन ‘प्रेमघन’ ने किया?
उत्तर-
‘कादंबिनी’ मासिक और ‘नागरी नीरद’ साप्ताहिक का सम्पादन प्रेमघन ने किया।

प्रश्न 4.
साहित्य-सम्मेलन के किस अधिवेशन का सभापतित्व ‘प्रेमघन’ ने किया?
उत्तर-
साहित्य-सम्मेलन के कलकत्ता अधिवेशन का सभापतित्व प्रेमघन ने किया।

प्रश्न 5.
‘स्वदेशी’ कविता में किस बात पर दुख व्यक्त किया गया है ?
उत्तर-
स्वदेशी कविता में भारत में भारतीयता की कमी पर दुख व्यक्त किया गया है।

याख्या खण्ड

प्रश्न 1.
सबै बिदेसी वस्तु नर, गति रति रीत लखात।
भारतीयता कछु न अब, भारत म दरसात।।
मनुज भारती देखि कोउ, सकत नहीं पहिचान।
मुसलमान, हिन्दु किधौं, के हैं ये क्रिस्तान।।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘स्वदेशी’ ‘काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों में कवि ने गुलाम भारत की दुर्दशा का बड़ा ही मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया है। कवि कहता है कि भारतीय लोगों की सूझ-बूझ को क्या कहा जाय-सभी विदेशी आकर्षण की ओर भागे जा रहे हैं। उनका अपना ‘स्व’ सुरक्षित नहीं दिखता।

भारतीय जन गी गति, रति, रीति सब कुछ बदल गयी है। वे सब कुछ विदेशी अपना लिये हैं। उनकी अपनी भारतीय विशेषताएँ अब नहीं दिखायी पड़तीं। भारतीयता अब भारत में नहीं रहीं न दिखायी ही पड़ रही हैं।
इन पंक्तियों के द्वारा कवि ने भारतीयता की जगह अंग्रेजियत में रंगों सभ्यता और संस्कृति को चित्रित किया है तथा अपनी भावनाओं को अपनी कविताओं के द्वारा प्रकट कर रहा है।

इन पंक्तियों के द्वारा कवि ने भारतीय लोगों की जाति धर्म के बारे में चिंता प्रकट की है। कवि कहता है कि भारतीय लोगों को देखकर पहचानना मुश्किल हो गया है। कौन हिन्दू है ? कौन मुसलमान है और कौन ईसाई है ? इन पंक्तियों में, बदलती जीवन-शैली और अपनी संस्कृति के प्रति आस्थाहीन होने पर भारतीय लोगों के बारे में कवि ने चिंता प्रकट किया है। वह भारतीय सभ्यता और संस्कृति के बदलते रूप को देखकर भयभीत है-आगे क्या होगा? इसी कारण उसने अपनी काव्य पंक्तियों द्वारा जाति-धर्म की परवाह नहीं करते हुए स्वच्छंद और अनुशासनहीन जीवन जीनेवालों का सही चित्र उकेरा है।

प्रश्न 2.
पढ़ि विद्या परदेसी की, बुद्धि विदेसी पाय।
चाल-चलन परदेसी की, गई इन्हैं अति भाय॥
ठटे बिदेसी ठाट सब बन्यो देस बिदेस।
सपनेहैं जिनमें न कहं, भारतीयता लेस॥
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के स्वदेशी’ काव्य पाठ से उद्धत्त की गयी हैं। इन पंक्तियों के द्वारा कवि कहना चाहता है कि भारतीय लोग विदेशी विद्या को पढ़ने की ओर उन्मुख है, विदेशी विद्या के अध्ययन के कारण इनकी बुद्धि-विचार भी विदेशी-सा हो गया है। दूसरे देश की चाल-चलन, वेश-भूषा, रीति-नीति, इन्हें बहुत अच्छी लग रही है। इनकी मति मारी गयी है।

कवि ने विदेशी ज्ञान प्राप्त करनेवाले भारतीय लोगों की मानसिकता का सही चित्रण किया है। कवि कहता है कि अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति इनका मोह नहीं रहा। ये अब विदेशी रहन-सहन में ढल गए हैं, यह खेद का विषय है। आधुनिकता की ओर उन्मुख भारतीय शिक्षित वर्ग की अदूरदर्शिता के प्रति कवि ने घोर निंदा प्रकट करते हुए अपनी मनोव्यथा को व्यक्त किया है।

इन पंक्तियों द्वारा कवि यह कहना चाहता है कि अपने ही देश में सारे ठाट-बाट ने विदेशी रूप धारण कर लिया है। सभी लोग अंग्रेजियत से प्रभावित रहन-सहन, सोच-विचार में ढल गए हैं। सबकी मानसिकता विकृत हो गयी है। किसी को भी अपनी निजता, इतिहास, अस्तित्व के प्रति गर्व नहीं, सभी-लोभी और महत्त्वाकांक्षी हो गये हैं।

प्रश्न 3.
बोलि सकत हिन्दी नहीं, अब मिलि हिंदू लोग।
अंगरेजी भाखन करत, अंगरेजी उपभोग।।
अंगरेजी बाहन, बसन, वेष रीति औ नीति।
अँगरेजी रूचि, गृह, सकल, वस्तु देस विपरीत।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘स्वदेशी’ काव्य पाठ से ली गयी हैं। इन पक्तियों के द्वारा कवि कहना चाहता है कि अब भारतीय लोगों को हिन्दी में बोलने, पढ़ने-लिखने में लज्जा का अनुभव होता है। हिन्दुओं के लिए यह अत्यन्त खेदजनक है। अंग्रेजी में ही बातचीत सभी लोग करते हैं और अंग्रेजी वस्तुओं का ही उपभोग भी करते हैं।

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने अंग्रेजी वाहन, वसन या वस्त्राभूषणादि के अपनाये जाने की घोर निन्दा और उसपर चिंता प्रकट किया है। हमारी अंग्रेजी के प्रति बढ़ती रुचि की ओर, गृह-साज-सज्जा की ओर, उक्त सारी वस्तुओं के प्रयोग की ओर कवि ने ध्यान आकृष्ट करते हुए दुःख प्रकट किया है। हमारी घटिया मनोवृत्ति से कवि व्यथित है। उसके भीतर कूट-कूटकर भारतीयता भरी हुई है। इसी कारण वह भारतीय जन की बदलती हुई जीवन शैली से दु:खी है।

प्रश्न 4.
हिन्दुस्तानी नाम सुनि, अब ये सकुचि लजात।
भारतीय सब वस्तु ही, सों ये हाय घिनात॥
देस नगर बानक बनो, सब अंगरेजी चाल।
हाटन मैं देखहु भरा, बसे अंगरेजी माल॥
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक के ‘स्वदेशी’ काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों के द्वारा कवि ने भारतीय जन चेतना के बदलते स्वरूप के प्रति खेद प्रकट किया है। कवि कहता है कि हिन्दुस्तानी नाम और उत्पादन को देखकर सभी लोग लेने से सकुचाते हैं और लजाते हैं। सारी भारतीय वस्तुओं से घृणा करते हैं। खेद की बात है कि सारी दुनिया के लोग अपने अस्तित्व और इतिहास की रक्षा करते हैं, सभ्यता और संस्कृति के पक्षधर हैं, जबकि हम अपने ही घर में, देश में अपने लोगों, अपनी वस्तुओं और अपनी भाषा एवं नाम से घृणा करते हैं। अंग्रेजियत को पसंद करते हैं। यह हमारे लिए काफी चिंतनीय है।

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहता है हम अपनी नागरी भाषा को भूल गए हैं। सभी लोग अंग्रेजी चाल-ढाल में ढलते जा रहे हैं। हाट-बाट में भी अंग्रेजी माल की भरमान है और देशी-माल की ओर लोगों की निगाह भी नहीं जाती। सभी लोग पाश्चात्य संस्कृति, पहनावा, खान-पान, उत्पादनों के उपभोग में रुचि ले रहे हैं। यह हमारे लिए शर्म की बात है। हम भारतीय हैं तो भारतीयता के प्रति सजग रहना चाहिए, लेकिन हम पथ-विमुख होकर जी रहे हैं।

स्वदेशी कवि परिचय

प्रेमघन जी भारतेन्दु युग के महत्त्वपूर्ण कवि थे । उनका जन्म 1855 ई० में मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ और निधन 1922 ई० में। वे काव्य और जीवन दोनों क्षेत्रों में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को अपना आदर्श मानते थे । वे निहायत कलात्मक एवं अलंकृत गद्य लिखते थे। उन्होंने भारत के विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया था। 1874 ई० में उन्होंने मिर्जापुर में ‘रसिक समाज’ की स्थापना की। उन्होंने ‘आनंद कादंबिनी’ मासिक पत्रिका तथा ‘नागरी नीरद’ नामक साप्ताहिक पत्र का संपादन किया । वे साहित्य सम्मेलन के कलकत्ता अधिवेशन के सभापति भी रहे । उनकी रचनाएँ ‘प्रेमघन सर्वस्व’ नाम से संग्रहीत हैं।

प्रेमघन जी निबंधकार, नाटककार, कवि एवं समीक्षक थे । ‘भारत सौभाग्य’, ‘प्रयाग रामागमन’ उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। उन्होंने ‘जीर्ण जनपद’ नामक एक काव्य लिखा जिसमें ग्रामीण जीवन का यथार्थवादी चित्रण है । प्रेमघन ने काव्य-रचना अधिकांशत: ब्रजभाषा और अवधी में की, किंतु युग के प्रभाव के कारण उनमें खड़ी बोलीं का व्यवहार और गद्योन्मुखता भी साफ दिखलाई पड़ती है । उनके काव्य में लोकोन्मुखता एवं यथार्थ-परायणता का आग्रह है । उन्होंने राष्ट्रीय स्वाधीनता की चेतना को अपना सहचर बनाया एवं साम्राज्यवाद तथा सामंतवाद का विरोध किया ।

‘प्रेमघन सर्वस्व’ से संकलित दोहों का यह गुच्छ ‘स्वदेशी’ शीर्षक के अंतर्गत यहाँ प्रस्तुत है। इन दोहों में नवजागरण का स्वर मुखरित है। दोहों की विषयवस्तु और उनका काव्य-वैभव इसके शीर्षक को सार्थकता प्रदान करते हैं । कवि की चिंता और उसकी स्वरभंगिमा आज कहीं
अधिक प्रासंगिक है।

स्वदेशी Summary in Hindi

पाठ का अर्थ

भारतेन्दु युग के प्रतिनिधि कवि प्रेमधन जी हिन्दी साहित्य के प्रखर कवि है। ये काव्य और जीवन दोनों क्षेत्रों में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को अपना आदर्श मानते थे। प्रेमधन जी निबंधकार नाटककार कवि एवं समीक्षक थे। इनकी काव्य रचना अधिकांशतः ब्रजभाषा और अवधी में है
युग के प्रभाव से खड़ी बोली का व्यवहार और गधोन्मुखता साफ झलकती है।

प्रस्तुत कविता में कवि राष्ट्रीय स्वाधीनता की चेतना को अपना सहचर बनाकर साम्राज्यवाद एवं सामंतवाद का विरोध किया है। लोगों की सोच उनके कुंठित मानसिकता का परिणाम है। आज विदेशियों वस्तुओं में लोगों की आसक्ति बढ़ गई है। भारतीयता का कहीं नामोनिशान नहीं दिखता है। हिन्दु, मुस्लमान, ईसाई आदि सभी पाश्चात्य संस्कृति को धड़ले से अपना रहे हैं। पठन-पाठन, खान-पान, पहनावा आदि सभी विदेशियों चीजों की तरफ आकर्षित हो गये हैं।

आज सर्वत्र अंग्रेजी का बोल-बाला है। पराधीन भारत की दुर्दशा बढ़ती जा रही है। हिन्दुस्तान के नाम लेने से कतराते हैं। बाजारों में अंग्रेजी वस्तुओं की भरमार है। स्वदेशी वस्तुओं को हेय की दृष्टि से देखते हैं। नौकरी पाने के लिए ठाकुर सुहाती करने में लगे हैं। वस्तुत: यहाँ कवि समस्त भारतवासियों को नवजागरण का पाठ पढ़ाना चाहता है। पराधीनता की बेड़ी को तोड़कर एक नया भारत की स्थापना करना चाहता है।

शब्दार्थ

गति : स्वभाव
रति : लगाव
रोत : पद्धति
मनुज भारती : भारतीय मनुष्य
क्रिस्तान : क्रिश्चियन, अंग्रेज
बसन : वस्त्र
बानक : बाना, वेशभूषा
खामखयाली : कोरी कल्पना
चारह बरन : चारों वर्गों में
डफाली : डफ बजानेवाला, बाजा बजानेवाला

Bihar Board Class 11 English Book Solutions Chapter 3 A Snake in the Grass

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Bihar Board Class 11 English A Snake in the Grass Textual Questions and Answers

A. Work in small groups and discuss these questions :

A Snake In The Grass Questions Answers Bihar Board Class 11 Question 1.
Have you ever seen a snake in your house/village ?
Answer:
Yes, I have seen a snake in our village

A Snake In The Grass Question Answers Bihar Board Class 11 Question 2.
What was your reaction when you saw it ?
Answer:
I was scared.

A Snake In The Grass Answers Bihar Board Class 11 Question 3.
How did other people of your family or village react to it ?
Answer:
Some of them stood still. Others said that it must be killed.

A Snake In The Grass Story Question Answer Bihar Board Class 11 Question 4.
Did you kill the snake ? Why ?
Answer:
I did not kill it But another mt n killed it. He said it was dangerous and might bite someone.

B. 1. Answer the following questions briefly :

A Snake In The Grass Story Question Answer Pdf Bihar Board Class 11 Question 1.
Why did the cyclist ring the bell ?
Answer:
The cyclist had seen a cobra getting into a bungalow. He rang the bell to warn the inmates to be careful.

Class 11 English Chapter 3 Question Answer Bihar Board Question 2.
Why did Dasa say, ‘There is no cobra’ ?
Answer:
Dasa said there was no snake because he did not like to be disturbed in his sleep. .

A Snake In The Grass Meaning Bihar Board Class 11 Question 3.
What happens when someone wakes you up and asks you to do something ?
Answer:
I feel irritated.

English Chapter 3 Class 11 Question Answers Bihar Board Question 4.
What fault did the people find with Dasa ?
Answer:
People said that Dasa was the laziest servant. He did not keep the surroundings tidy.

A Snake In The Grass Story Bihar Board Class 11 Question 5.
Do you find fault with the person who refuses to do what you want him to do ?
Answer:
Yes, I do.

Class 11 English Chapter 3 Bihar Board Question 6.
What was Dasa’s defence ?
Answer:
Dasa said he had been asking for a grasscutter for months but he did not get any. So he could not cut the grass.

A Snake Charmer’s Story Question Answer Bihar Board Question 7.
What does ‘with cynical air’ mean ?
Answer:
Here this means that Dasa was not convinced that there was a cobra in the grass.

A Snake In The Grass Text Book Questions And Answers Bihar Board Question 8.
Why did the college-boy quote statistics ?
Answer:
He wanted to give an authentic proof that the cobra was deadly and it could bite and kill.

A Snake In The Grass Meaning In Hindi Bihar Board Question 9.
What made the mother nearly scream ?
Answer:
The mother was terrified. She was afraid that the cobra was sure to bite someone of her family.

B. 2. Answer the fdllowingquestions briefly :

Question 1.
What made the old beggar happy ?
Answer:
The old beggar was happy because she considered the snake as God Subramanya. She said the householders were fortunate.

Question 2.
What did the beggar woman say ?
Answer:
She asked the householders not to kill the snake. She promised to c send a snake-charmer to catch it.

Question 3.
Why did the snake-charmer look helplessly about ?
Answer:
The snake-charmer looked helplessly about because there was no snake in sight. He said he could catch the snake only if they showed it to him.

Question 4.
Why did they cut down all the plants and grass in the garden ?
Answer:
They cut down all the grass and plans in the garden so that the cobra had no place to hide itself.

Question 5.
Cite instances from the lesson which show the old mother’s superstitious nature ?
Answer:
The mother agreed with the old beggar that the cobra was God Subramanya. She was repentent that she had forgotten all about the promised Abhishekam. She gave a coin to the beggar to get God’s blessings. She also wished she had put some milk in a pot for the Cobra as a religious duty.

Question 6.
Did Dasa, in your opinion, really catch the cobra ?
Answer:
I don’t think Dasa caught the cobra. He just pretended that the snake was in the pot. The cobra was seen coming out of a hole soon after Dasa had left with the pot.

Question 7.
What impression of Dasa do you get from this episode ?
Answer:
Dasa was an easy-going person. He shirked work. But he was quite clever at inventing stories and making excuses.

C. 1. Long Answer Questions :

Question 1.
The neighbours who assembled to hear of cobra talk about several things. Make a list of the issues they touch upon. What does the conversation suggest about the people’s reaction when danger strikes ?
Answer:
They talk about the laziness of Dasa.
They talk of scarcity of things during the war.
They talk about black-marketing.
The talk about the danger of snake-bite in the world.

The conversation suggests that when danger strikes, people like to blame someone. They think if Dasa had cut the grass, the cobra would not have come into the garden. Dasa tries to defend himself because he has not been given a grasscutter. Then the discussion shifts to war. They try to defend themselves by saying that they could not buy anything made of iron on account of war.

They then say how some people try to exploit the situation. The blame the merchants for indulging in black marketing and profiteering during scarcity of things. The college-boy gives statistics about number of deaths caused by snake-bite. He makes the danger appear really threatening. The conversation suggests that when danger strikes, people try to blame others. They look for scapegoats.

Question 2.
How do you react when your parents chide you for neglecting your duties?
Answer:
When my parents chide me for neglecting my duty, I feel very bad. I don’t confess that is way fault. Instead, I try to blame it on circumstances or some obstacles that hindered me from doing my duty. I try to blame someone or something.

Question 3.
Read carefully the following utterances of Dasa:
‘There is no cobra’.
‘Where is the snake ?’
‘I have caught him in this.’
‘Don’t call me an idler hereafter.’
What do these utterances tell about Dasa’s character ?
Answer:
These utterances of Dasa show that he was a leisurely man who would not be provoked into doing something. He refused to believe that there was a snake, and when no snake was found, he said triumphantly, “Where is the snake ?” Still he felt that the immates of the house were still afraid that the snake was there. So he thought of a clever plan. He pretended to have caught the snake in a pot. He won the admiration of all. He asserted that he was not an idler.

He proved that he was an intelligent man and could achieve singlehandedly what they all together could not do. His plan had almost succeeded. But the cobra was seen, and luckily it went out of the gate and disappeared. Dasa must have asserted that he had actually caught a snake, and there must have been a couple of them in the garden.

Question 4.
Does the story throw any light on how people faced with sudden danger behave ?
Answer:
It is quite natural to be frightened if any sudden danger falls unexpectedly. This was the situation with the people who were present there. They became panick. In the situation of turmoil they began to charge over the servant dasa. They even made allegations on one-another for their being responsible in inviting danger. They suggested a number of opinions in connection with the danger. The mother became frightened and began to cry in a loud voice. Dasa was not showing any reaction. Inmates with the help of the neighbours cut grass and creepers with sharp knifes and other weapons. They were jointly making effort to clean the compound where the cobra was hidden.

An old beggar woman appeared at the gate of the bungalow who asked for alms. On this the inmates told her to go away as they were busy in searching the cobra. .She advised them not to kill the cobra, as it was God Subramanya. The mother was convinced with the beggar woman’s advise. The beggar promised to send a snake charmer. A snake charmer came to the place but he showed his inability because the cobra disappeared. He told them to inform him when the cobra appeared. Finally the cobra was seen coming out of the hole of compound wall.

Thus the behaviour of the people to see the sudden danger has been traced.

Question 5.
Narrate in brief the people attempt to catch the cobra.
Answer:
Hearing the news of the cobra neighbours gathered on the gate of the bungalow. They began to think any way to catch the cobra. The members of the family were worried. They shook the body of the servant Dasa, who was sleeping in a shed. Feeling disturbed he was annoyed and told that there was no cobra in the compound. The mother of the family child him and told him to catch the cobra before the evening. Everybody began to chide him for his slackness. The neighbours aiso charged him for not keeping the compound clean. He defended himself by saying that he had been asking to buy a grass cutter for a long time.

The inmates and neighbours began to talk about the grass-cutter. They told that the price of grass cutter was very high due to war at that time. The inmates with the help of the neighbours cleaned the grass and bushes with sharp knife and other weapons. They youngest son was a college boy who presented a data of casuality due to snake-bite which was 30,000 every year that means one person in every twenty minutes. The land lady cried out of fear. Meanwhile Dasa appeared there with a sealed water-pot. He put the pot down and told them that he had caught the cobra in the water I pot.

He put the water pot down and narrated the strategy he had employed to catch it. The land lady thanked him for his brave work. He told her that he was I going to hand over the cobra to a snake-charmer who was living nearby. Then the land lady poured some milk in the pot. Dasa walked off with the water pot to hand over it to the snake-charmer. Five minutes after the deprrture of Dasa the youngest son was a cobra coming out a hole in the compound. The cobra moved under the gate and disappeared along a drain.

Thus the story flashes light on the truth how the people made attempt to catch cobra.

Question 6.
Narrate in brief what the snake charmer tells about catching a snake.
Answer:
Hearing the news of cobra people gathered in the compound of the bunglow. They were very much fearful and talking about the way how the cobra would come out. Suddenly a snake charmer appeared. All the people gathered around him they began to request him to catch the cobra. He narrated so many stories of his bravery how he had caught the snake in adventurous way. The people gathered there pointed out the direction where cobra had gone. But the snake charmer showed his inability to catch the snake because the snake had been disappeared. He advised them to inform him and when the cobra appeared. Then only it could be possible to catch the snake.

C. 2. Group Discussion :

Discuss the following in groups or pairs:

Question a.
Giving milk to snake is a religious duty. Do you agree ? Give reasons in favour of your argument
Answer:
Many people in India consider the cobra as a holy creature. It is associated with Lord Shiva. It is always garlanded around his neck. Some people consider it a pious duty to give milk to a cobra. But I think it is no religious duty. Those very people who worship the cobra are likely to be frightened when they come across one in their homes or in a jungle. Many will think of killing it. In our country and elsewhere snakes are killed at first sight, Of course, some of the snakes are poisonous and can kill a human in no time. Still, we can do a religious duty to them. No doubt we should protect ourselves from snake, but we should not kill them. They a:c part of our ecology and hold an important position in food-chain. They eat rats and frogs. Milk is not their natural food.

Question b.
For every danger or calamity we tend to find a scapegoat. Do you subscribe to this view ? Give examples from the life around you.
Answer:
Answer:
I fully subscribe to the view that for every trouble we tend to find a scapegoat. Whenever something goes wrong and harms us all, we are likely to blame someone weak and defenceless. There have been a number of railway accidents.In most cases it was ascribed to human failure. And the man who failed to do his duty was a poor signal man. In such a big whose failure causes accidents ? But someone has to be blamed to let other go scot-free. If it is not a human being, it is some natural or abstract thing. It may be darkness, sudden rains and storms, or God Himself who is the scapegoat. We are often heard to say, “It was bad luck that caused it,” or “it was an act of God”.

Few have the courage to say, “I am responsible for it.”

(c) Story telling is an effective way of teaching.
Answer:
From time immemorial people have been telling and listening stories. Stories are fascinating, entertaining and informative. Every culture has its own folktales that have come down from generation to generation. Our great teachers realised that teaching something becomes far easier through stories. That is why our purans are full of stories. We know how panchatantra came . into being. A king’s sons were so mischievous that no teacher could teach them. Then a great teacher, Vishnu Dutta, invented a new technique. He told them stories that contained great wisdom. Those stories are still read and enjoyed. One can seldom forget an interesting story and is sure to learn the wisdom contained in it. A good teacher makes his teaching more effective and more interesting by telling stories.

C. 3. Composition :

Question a.
Write an essay in not more than 200 words on how superstitions influences lives in our society.
Answer:
Superstitions Influence our Lives

No matter Which part of the world you tour, you will find the natives nurturing certain beliefs and superstitions and India is no exception in this case. Though the Indian society is fast progressing, there are many people who are still superstitious and have a strong faith in the local beliefs. While some of them are quite hilarious, few are really interesting, as many aspects of life are linked to them.

The standard viewpoint is that most of the Indian beliefs and values have sprung with an objective to protect from evil spirits, but some were based on scientific reasoning. With the passage of time, the reasoning part behind the origin of these cultural beliefs and superstitions got eroded. That is exactly why most of these beliefs appear unsubstantiated and false. However, in reality, there are many such beliefs in the Indians culture which are absolutely absurd and have no logic behind them.

Superstitions are deemed as pertinent in India because these, generally, hint at future occurrences and can be either good or bad. Thus, anything from the call of a bird to the falling of utensils is considered on omen in India.

Similarly, other auspicious signs could be cawing of a black crow in one’s house, as it forecast the arrival of guests. Seeing a peacock on a journey is also considered lucky, but hearing its shrill sound is bad. Indians feels happy if a sparrow builds a nest in new house because it signals good fortune. A very old belief is that if you kill a cat, you have to offer one in gold to a priest. This belief or superstition was concocted by the priests to protect the cats which are useful in killings the rats in people’s houses.

Indians often consult astrological charts to fix an auspicious time for things. Even the daily life of Indians is governed by beliefs and superstitions. For example, Monday is not an auspicious day for shaving and Thursday is a bad day for washing one’s hair.

Question b.
Write a paragraph in about 100 words on the art of snake-charming,
Answer:
Snake charming

Snake-charming is the practice of apparently hypnotising a snake by . simple playing an instrument. A typical performance may also include handling the snake or performing other seemingly dangerous acts, as well as other street performance staples, like juggling and sleight of hand. The practice ‘ is most common in India, though it is also prevalent in other Asian nations. Many snake-charmers live a wandering existence, visiting towns and villages on market days and during festival. With a few rare exceptions, however, they typically sit out of biting range, and his animal is sluggish and not inclined to attack anyway.

More drastic means of protection include removing the creature’s fangs or venom glands, or even sewing the snake’s mouth shut. The most popular species are house natives to the snake-charmer’s home region, typically various kinds of cobras, though vipers and other types are also used.

D. Word-Study :
D. 1. Dictionary Use :

Ex. 1. Correct the spelling of the following words:
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Answer:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Chapter 3 A Snake in the Grass 2

Ex. 2. Look up a dictionary and write two meanings of each of the following words—the one in which it is used in the lesson and the other which is more common:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Chapter 3 A Snake in the Grass 3
Answer:
Swear: (i) (Here) force to follow a certain course of action.
(ii) a Promise

Chant: (i) (Here) spoke in a sing-song way
(ii) to spell

Glare: (i) bright light
(ii) stare in an angry way

Cover: (i) to extend over
(ii) to overlay

Measure : (i) means to end
(ii) size, limit, unit of capacity

Repair: (i) (Here) to go
(ii) to mend

Knock: (i) to strike with a blow
(ii) collide with

Watch: (i) look at attentively
(ii) a small time-piece

D. 2. Word-formation :

Look at the following examples :

The inner walls brightened with the unobstructed glare.

The snake disappeared along the drain.

You see that in the first exammle prefix ‘un’ is added with ‘obstructed’ which is Past Participle but is used there as an Adjective. In the second example, prefix ‘dis’ is added to a verb. In both the cases we get the opposite meaning.

Ex. 1. Use un’—and ‘dis’ suitably before each of the following words and use them in sentences of your own. The first one is done for you.

liked – disliked – Naghaz disliked getting up early.
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Chapter 3 A Snake in the Grass 4

Answer:
obeyed – disobeyed – He disobeyed his parent.
crowned – uncrowned – The Prince remained uncrowned.
solved – dissolved – The Governor dissolved the assembly.
believed – disbelieved – She disbelieved the incident.
changed – unchanged – Our programme is still unchanged.
connected – disconnected – The wireman disconnected the line.
decided – undecided – The programme is still undecided.
announced – unannounced – The date of examination is unannounced
agreed – disagreed – They disagreed with us.
noticed – unnoticed – The snake remained unnoticed
qualified – unqualified – He was unqualified person.

D. 3. Word-meaning :

Ex. 1. Match the words given in Coiumn-A with their meanings given in Column-B:
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Answer:
Bihar Board Class 11 English Book Solutions Chapter 3 A Snake in the Grass 6

D. 4. Phrases :

Ex. 1. Read the lessons carefully and find out the sentences in which the following phrases have been used. Then use them in sentences of your own:
swear at – drop in – beat about the brush
ask for – send for – butt in
Answer:
Sentences from the lesson:
They swore at him and forced him to take an interest in the cobra.
Some neighbours dropped in.
I have been asking for a grass-cutter for months.
The fellow is beating about the bush, someone cried aptly.
At this point the college-boy of the house butted in with ……….

The moment you see it again, send for me.
Sentences with the use of the said phrases:

I swore at the worker and forced him to complete the work soon.
When I was ready to go out, some guests dropped in.
We have been asking for increment for months.
They were beating about the bush to find out the snake.
We were discussing the topic when the teacher butted in.
If you need any help, send for me.

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Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 9 रेल-यात्रा

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 1 गद्य खण्ड Chapter 9 रेल-यात्रा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi Solutions गद्य Chapter 9 रेल-यात्रा

Bihar Board Class 9 Hindi रेल-यात्रा Text Book Questions and Answers

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
मनुष्य की प्रगति और भारतीय रेल की प्रगति में लेखक क्या देखता है?
उत्तर-
मनुष्य की एवं देश की प्रगति राजनीतिक पार्टियों के रास्ते में रोड़े आते हैं रेल की प्रगति में जो समस्याएँ है उसे किसी डिब्बे में घूसे बिना उसकी गहराई को महसूस नहीं किया जा सकता।

Bihar Board Solution Class 9 Hindi प्रश्न 2.
“आप रेल की प्रगति देखना चाहते हैं तो किसी डिब्बे में घुस जाइए”-लेखक यह कहकर क्या दिखाना चाहता है?
उत्तर-
लेखक ने भारतीय रेल की प्रगति में स्वानुभव की बातें कहकर भारतीय रेल की प्रगति को देखने के लिए उत्साहित करता है।

बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 9  प्रश्न 3.
भारतीय रेलें हमें किस तरह का जीवन जीना सिखाती हैं?
उत्तर-
भारतीय रेलें हमें जीवन जीने की कला सिखाती है क्योंकि यदि हम आत्मबल से हीन हैं तो गाड़ी में चढ़ नहीं सकते, वेटिंग लिस्ट में पड़े रहेंगे। अगर हम में आत्मवल है तो जो चढ़ गया उसकी जगह, जो बैठ गया उसकी सीट, जो लेट गया उसकी बर्थ।

Class 9 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 4.
‘ईश्वर आपकी यात्रा सफल करें।’ इस कथन से लेखक पाठकों को भारतीय रेल की किस अव्यवस्था से परिचित कराना चाहता है?
उत्तर-
उपर्युक्त वाक्यों को कहकर लेखक यह कहना चाहता है कि अगर ईश्वर आपके साथ है टिकिट आपके साथ है पास में सामान कम और जे पैसा ज्यादा है, तो आप मंजिल तक पहुँच जायेंगे नहीं तो उसी स्टेशन पर वेटिंग लिस्ट में पड़े रहेंगे। लेखक ने भारतीय रेल की इस अव्यवस्था का बड़ा ही सुन्दर चित्रण किया है।

Bihar Board 9th Class Hindi Book Solution प्रश्न 5.
“जिसमें मनोबल है, आत्मबल, शारीरिक बल और दूसरे किस्म के बल हैं उसे यात्रा करने से कोई नहीं रोक सकता। वे जो शराफत और अनिर्णय के मारे होते हैं वे क्यू में खड़े रहते हैं, वेटिंग लिस्ट में पड़े रहते हैं। यहाँ पर लेखक ने भारतीय सामाजिक व्यवस्था के एक बहुत बड़े सत्य को उद्घाटित किया हैं “जिसकी लाठी उसकी भैंस’। इस पर अपने विचार संक्षेप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर-
लेखक ने सामाजिक परिवेश में आए बदलाव को बड़े ही सहज ढंग से रेखांकित कर व्यंग्य किया है कि जो कमजोर है उसे और हतोत्साहित किया जाता है। यहाँ शोषण की प्रवृति पर करारी चोट पहुँचाई गई है। जिसकी लाठी उसकी भैंस प्रवृति वाले लोग दूसरे को सारी सुविधाओं से भी वंचित कर स्वयं उसे हथिया लेते हैं। इसमें लेखक ने शोषक और शोषित की जो स्थिति है उस पर करारा व्यंग्य किया है:

व्याख्याएँ

Godhuli Hindi Book Class 9 Bihar Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट करें-
(क) “दुर्दशा तब भी थी, दुर्दशा आज भी है। ये रेलें, ये हवाई जहाज, यह सब विदेशी हैं। ये न हमारा चरित्र बदल सकती हैं और न भाग्या’ ।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शरद जोशी द्वारा लिखित, ‘रेल-यात्रा’ शीर्षक से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने बड़े ही रोचक ढंग से रेल-यात्रा में होने वाली दुर्दशा की व्याख्या की है।
लेखक दुर्दशा की चर्चा करते हुए वर्तमान व्यवस्था पर व्यंग्य करता है। वे कहते हैं कि रेल, हवाई जहाज, ये सब विदेशी है। इसमें तो हमारी दुर्दशा तो है ही, वर्तमान, समय से जब हम अपने देश में हैं, वहाँ भी मेरी ही दुर्दशा है। लेकिन मुख्य बात यह है कि हम इस दुर्दशा की स्थिति में भी प्रगति कर रहे हैं और हमने अपना इतिहास (सभ्यता और संस्कृति) नहीं छोड़ा है।

(ख) “भारतीय रेलें हमें सहिष्णु बनाती हैं। उत्तेजना के क्षणों में शांत रहना सिखाती हैं। मनुष्य की यही प्रगति है।”
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शरद जोशी द्वारा लिखित ‘रेल यात्रा’ शीर्षक से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने रेलयात्रा के माध्यम से व्यंग्यात्मक भाषा में समझाने की कोशिश किया है कि भारतीय रेलें हमें कैसी-कैसी मनोरम शिक्षा देती है जो तर्कशास्त्र का विषय-वस्तु है।

लेखक ने हमें रेल यात्रा के माध्यम से हमारे भीतर के भाव उत्पन्न होते हैं, उसे सहिष्णुता जो बड़े ही सुन्दर उदाहरण के साथ समझाने की कोशिश किया है। लेखक का कहना है कि जब कहीं गाड़ी रूक जाती है तो मन बेचैन हो जाता है, गाड़ी कहाँ रूकी, हमारी मातृभूमि का कौन-सा स्थान है, ऊपर वाले वर्थ पर बैठे हुए व्यक्तियों के सवालों का खामोशी से सहन करता हूँ, शांत-चित्त रहता हूँ। यह इस मनोवैज्ञानिक तथ्य से रेलयात्रा हमें सहिष्णु बनाती है।

(ग) ‘भारतीय रेलें हमें मृत्यु का दर्शन-समझाती हैं और अक्सर पटरी से उत्तरकर उसकी महत्ता का भी अनुभव करा देती हैं।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शरद जोशी द्वारा लिखित ‘रेलयात्रा’ शीर्षक निबंध से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने दार्शनिक तौर पर रेल यात्रा को मृत्यु का आभास करार देने वाली संज्ञा देकर व्यंग्यात्मक रूप से पाठक को समझाने का प्रयास किया है।
लेखक ने प्रस्तुत लेख में मृत्यु का दर्शन होने की बात पर समझाया है कि रेल में जो भीड़-भाड़ है, उसमें जो कठिनाई है उसके बारे में वह सोचता है कि अगर शरीर नहीं होता, केवल आत्मा होती, तो कितने सुख से यात्रा करती। सशरीर यात्रा । में तो पता ही नहीं चलता कि रेल में चढ़ने के बाद वह कहाँ उतरेगा? अस्पातल में या शमशान में? लेखक ने यहाँ बड़ी चतुराई से मृत्यु के दर्शन का दार्शनिक रूप प्रस्तुत किया है।

(घ) ‘कई बार मुझे लगता है भारतीय मनुष्य भारतीय रेलों से भी आगे है। आगे-आगे मनुष्य बढ़ रहा है, पीछे-पीछे रेल आ रही है।’
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ शरद जोशी द्वारा लिखित रेल यात्रा’ शीर्षक से उद्धृत हैं। इसमें लेखक ने रेल यात्रा में प्रगति की प्रतियोगिता दिखाकर बड़ा ही सुन्दर व्यंग्य किया है।
लेखक का कहना है कि भारतीय मनुष्य आगे बढ़ रहा है। उसे पायदान से लटके, डिब्बे की छत पर बैठे, भारतीय रेलों के साथ प्रगति करते देखकर लेखक अचरज में पड़ जाता है। अगर इसी तरह रेल पीछे आती रही, भारतीय मनुष्य के पास बढ़ते रहने के सिवा कोई रास्ता नहीं रहेगा। रेल चलती रहती है, मनुष्य सफर करते, लड़ते-झगड़ते रातभर जागते बढ़ते रहता है। रेल निशात् सर्वभूतानां। जो संयमी होते हैं, वे रात भर जागते हैं। भारतीय रेल की यही प्रगति है।
लेखक व्यंग्यात्मक शैली में कई सत्य को उद्घाटित करने की चेष्टा करता है। जो सर्वथा समीचीन है।

Class 9 Bihar Board Hindi Solution प्रश्न 7.
रेल-यात्रा के दौरान किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है? पठित पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर-
रेल-यात्रा के दौरान यात्रियों को तो पहले यदि आत्मबल नहीं है तो उसे गाड़ी में चढ़ने ही नहीं दिया जाता है। यदि चढ़ गये तो अपने खड़े तो सामान कहाँ रखें? यदि समान रखें तो अपने कहाँ रहें? उस रेल में चढ़ने के समय भीड़, धक्का-मुक्की, थुक्का-फजीहत, गाली-गलौज इत्यादि परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Bihar Board Class 9 Hindi Solutions प्रश्न 8.
लेखक अपने व्यंग्य में भारतीय रेल की अव्यवस्था का एक पूरा चित्र हमारे सामने प्रस्तुत करता है। पठित पाठ के आधार पर भारतीय रेल की कुछ अवस्थाओं का जिक्र करें।
उत्तर-
भारतीय रेल का समय पर न जाना-आना, टिकट कटाने में मुसीबत, चढ़ने की मुसीबत, सीट न मिलने की मुसीबत इन सारी चीजों को समुचित व्यवस्था नहीं होने को ही लेखक ने भारतीय रेल की अव्यवस्था कहा है।

गोधूलि भाग 1 Class 9 Solution Pdf Download प्रश्न 9.
“रेल विभाग के मंत्री कहते हैं कि भारतीय रेलें तेजी से प्रगति कर रही हैं। ठीक कहते हैं। रेलें हमेशा प्रगति करती हैं।’ इस व्यंग्य के माध्यम से लेखक भारतीय राजनीति व राजनेताओं का कौन-सा पक्ष दिखाना चाहता है। अपने शब्दों में बताइए।
उत्तर-
लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली में भारतीय रेल की प्रगति का बड़ा ही । सूक्ष्म विवेचना किया है।
लेखक का कहना है कि मंत्रीजी के अनुसार रेल प्रगति कर रही है। आप रेल की प्रगति देखना चाहते हैं तो डिब्बे में घुसकर देखिए। कितनी परेशानी है? देश की प्रगति के लिए राजनेता कितने उत्साहित होते हैं? मगर देखिए कोई खाते-खाते मर रहा है तो कोई खाने के लिए मर रहा है। यही प्रगति का खेल है जिसे लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली में दर्शाया है।

गोधूलि भाग 2 Class 9 Solution Bihar Board प्रश्न 10.
संपूर्ण पाठ में व्यंग्य के स्थल और वाक्य चुनिए और उनके व्यंग्यात्मक आशय स्पष्ट कीजिए।
(1) भारतीय रेल प्रगति कर रही है। लेखक का व्यंग्य है कि हाँ भारतीय रेल ‘ प्रगति कर रही है मगर आप रेल में घुसे तो आपको रेल की प्रगति स्वतः ज्ञात हो जाएगी।

(2) ईश्वर आपकी यात्रा सफल करें। लेखक ने इसमें इतना सुन्दर व्यंग्य किया है कि हम अपनी रेल यात्रा में ईश्वर को भी घसीट लेते हैं क्योंकि उसी के आप भीड़ में जगह बना लेते हैं। अगर ईश्वर आपके साथ है तो सारी सुविधाएँ आपको रेल में मिलेगी। संपूर्ण पाठ में वाक्य को व्यंग्य-पूर्ण अभिव्यक्ति मिली है।

Bihar Board Class 9 Hindi Book Pdf प्रश्न 11.
इस पाठ में व्यंग्य की दोहरी धार है-एक विभिन्न वस्तुओं और विषयों की ओर तो दूसरी अपनी अर्थात् भारतीय जनता की ओर। पाठ से उदाहरण देते हुए प्रमाणित कीजिए।
उत्तर-
पाठ में दोहरी धार है-जैसे मंत्री जी भाषण देते हैं कि रेल प्रगाति कर रही है। दूसरी धार है भारतीय जनता की ओर। इसलिए कि भारतीय रेल तो प्रगति कर रही है मगर उसमें जो अव्यवस्था है उसकी मार सीधे जनता-जनार्दन पर पड़ती है। भारतीय रेल की प्रगति का जितना वर्णन किया गया है उसमें लेखक ने व्यंग्य किया है कि आप भीतर जाइए और देखिए उस अव्यवस्था को, स्वतः पता चल जायगा। प्रगति की राह में कितने अवरोध हैं, कितनी मुसीबतें हैं।

प्रश्न 12.
भारतीय रेलें चिंतन के विकास में सहयोग देती हैं। कैसे? व्यंग्यकार की दृष्टि से विचार कीजिए।
उत्तर-
लेखक ने भारतीय रेल के विकास में चिंतन करने के लिए प्रेरित किया है व्यंग्य के आधार पर। चिंतन की दिशा में ध्यान देने से आदमी उस अवस्था में आता है कि अंतिम यात्रा में मनध्य खाली हाथ रहता है। सामान रखें तो बैठे कहाँ बैठे तो सामान कहाँ रखें, दोनों करेंगे तो दूसरा कहाँ बैठेगा ये सारी बातें चिंतन की मुद्रा में ला देता है और चिंतन की अन्तिम ऊँचाई पर पहुँचा कर दार्शनिक रूप प्रदान करता है।

प्रश्न 13.
टिकिट को लेखक ने ‘देह धरे को दंड’ क्यों कहा है?
उत्तर-
लेखक ने बड़े ही व्यंग्यपूर्ण ढंग से रेल यात्रा की असुविधा को उजागर किया है। लेखक ने कहा है कि लोकल ट्रेन में, भीड़ से दबे, कोने में सिमटे यात्री को जब अपनी देह भारी लगती है, वह सोचता है कि यह शरीर न होता, केवल आत्मा होती, तो कितने सुख से यात्रा करती। टिकट वगैरह का फेरा भी नहीं होता।

प्रश्न 14.
किस अर्थ में रेलें मनुष्य को मनुष्य के करीब लाती हैं?
उत्तर-
रेल पर चढ़ने के समय मुसीबत, फजीहत के बाद जब वह रेल में चढ़ जाता है, रेल पटरी पर चल पड़ती है और एक आदमी दूसरे के शरीर पर ऊँघ रहा होता है तो रेलें मनुष्य को मनुष्य के करीब लाती है।

प्रश्न 15.
“जब तक एक्सीडेंट न हो हमें जागते रहना है” लेखक ऐसा क्यों कहता है?
उत्तर-
लेखक रेल यात्रा के माध्यम से हमें जागृत रहने की सलाह देता है। रेल निशात् सर्व भूतानां। जो संयमी होते हैं, वे रात भर जागते है। रेल में सफर करते, दिन झगड़ते, रातभर जागते, बढ़ते रहने की सलाह देकर लेखक सचेत करता है कि जब तक कोई घटना (एक्सीडेंट) न हो, जागते रहना चाहिए।

नीचे लिखे गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें।

1. रेल विभाग के मंत्री कहते हैं कि भारतीय रेलें तेजी से प्रगति कर रही
हैं। ठीक कहते हैं। रेलें हमेशा प्रगति कराती हैं। वे मुंबई से प्रगति करती हुई दिल्ली तक चली जाती हैं और वहाँ से प्रगति करती हुई मुंबई तक
आ जाती हैं। अब यह दूसरी बात है कि वे बीच में कहीं भी रुक जाती हैं और लेट पहुँचती हैं। पर अब देखिए ना, प्रगति की राह में रोड़े कहाँ नहीं आते? राजनीतिक पार्टियों के रास्ते में आते हैं, देश के रास्ते में आते हैं, तो यह तो बिचारी रेल है। आप रेल की प्रगति देखना चाहते हैं, तो . किसी डिब्बे में घुस जाइए। बिना गहराई में घुसे आप सच्चाई को महसूस नहीं कर सकते।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) रेलमंत्री का भारतीय रेल के संबंध में क्या कथन है? उसकी प्रतिक्रिया में लेखक का क्या कथन है?
(ग) प्रगति की राह के संबंध में लेखक क्या कहता है?
(घ) लेखक के अनुसार हमें रेल की प्रगति देखने के लिए क्या करना चाहिए?
(ङ) इस गद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
(क) पाठ-रेल-यात्रा, लेखक-शरद जोशी

(ख) भारतीय रेल के संबंध में रेलमंत्री का कथन है कि यह रेल तेजी से प्रगति कर रही है। रेलमंत्री के इस कथन पर स्वीकृति की मोहर लगाते हुए लेखक का यह व्यंग्यपूर्ण कथन है कि रेलमंत्री ठीक ही कहते हैं कि भारतीय रेलें तेजी से प्रगति कर रही हैं। इस प्रगति का प्रमाण यह है कि भारतीय रेल प्रगति करती हुई दिल्ली तक चली जाती है और फिर वहाँ से प्रगति करती हुई वह मुम्बई आ जाती

(ग) प्रगति की राह के संबंध में लेखक का यह कथन है कि प्रगति पथ पर रोड़े कहाँ नहीं आते हैं? लेखक व्यंग्य के टोन (स्वर) में कहता है कि प्रगति पथ के इसी स्वरूप के कारण भारतीय रेल बीच में कहीं भी रूक जाती है और गंतव्य स्थान पर बिलंब से पहुँचती है। प्रगति पथ की यह बाधा देश हो चाहे राजनीतिक पार्टियाँ, हर के प्रगति पथ पर मुँह बाए खड़ी रहती है।

(घ) लेखक के अनुसार यदि हमें रेल की प्रगति की वास्तविकता से परिचय प्राप्त करना है, या उन्हें सही रूप में देखना है, तो इसके लिए हमें न तो रेलवे का बजट देखना है, न तो रेलमंत्री का भाषण सुनना है और न कोई रिपोर्ट देखनी है। उसके लिए लेखक की यह व्यंग्यपूर्ण सलाह है कि हमें रेल की प्रगति को देखने के लिए रेल के सवारी डिब्बे में बेधड़क घुस जाना चाहिए। वहाँ हमें रेल की सही प्रगति का सही नजारा देखने को मिल जाएगा।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने भारतीय रेल की तथाकथित प्रगति पर रेलमंत्री के कथन की आलोचना अपने व्यंग्यपूर्ण कथन के माध्यम से की है। लेखक का यह व्यंग्यूपर्ण कथन बड़ा सही और सटीक है कि भारतीय रेल किस रूप में सही प्रगति कर रही है। इसकी प्रगति का तो नजरिया यही है कि यह रेल रोज दिल्ली से प्रगति करती मुंबई पहुँचती है और मुंबई से प्रगति करती फिर दिल्ली पहुँच जाती है। उनकी प्रगति का सच्चा नमूना तो रेलयात्रियों से भरे रेल डिब्बे में घुसकर देखने से ही मिलता है।

2. हमारे यहाँ कहा जाता है-ईश्वर आपकी यात्रा सफल करें। आप पूछ सकते हैं कि इस छोटी-सी रोजमर्रा की बात में ईश्वर को क्यों घसीटा जाता है? पर जरा सोचिए, रेल की यात्रा में ईश्वर के सिवा आपका है कौन? एक वही तो है, जिसका नाम लेकर आप भीड़ में जगह बनाते हैं। भारतीय रेलों में तो यह आत्मा सो परमात्मा और परमात्मा सो आत्मा। अगर ईश्वर आपके साथ है, टिकट आपके हाथ है, पास में सामान कम और जेब में ज्यादा पैसा है, तो आप मंजिल तक पहुँच जाएँगे, फिर चाहे बर्थ मिले या न मिले। अरे, भारतीय रेलों को काम तो कर्म करना है। फल की चिंता वह नहीं करती। रेलों का काम एक जगह से दूसरी जगह जाना है। यात्री की जो दशा हो। जिंदा रहे या मुर्दा, भारतीय रेलों का काम उसे पहुँचा भर देना है।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) रेल-यात्रा करने के समय लोग क्या कहकर शुभकामना व्यक्त
करते हैं? इस कथन की सार्थकता पर प्रकाश डालें।
(ग) लेखक के अनुसार रेल-यात्रा में मंजिल तक पहुँचने में क्या शर्ते
(घ) भारतीय रेलों का क्या काम है?
(ङ) इस गद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
(क) पाठ-रेल-यात्रा, लेखक-शरद जोशी

(ख) रेल-यात्रा प्रारंभ करते समय लोग सुख-शांतिमय रेल-यात्रा की संपन्नता के लिए यही शुभ वाक्य कहते हैं-“ईश्वर आपकी यात्रा सफल करें।” लेखक का यह कथन शत-प्रतिशत सार्थक है। आज की रेल-यात्रा कितनी संकटमयी है और इसमें खतरे की कितनी आशंकाएँ बनी होती हैं, यह बात दीगर है। दूसरी ओर इन खतरों तथा मुसीबतों से बचाव के लिए रेल विभाग का प्रबंध कितना पुख्ता है यह भी सब कोई जानते हैं। ऐसी विषम स्थिति में यह सही रूप से कहा जा सकता है कि रेल की यात्रा में ईश्वर के सिवा और कोई रक्षक नहीं है।

(ग) रेल-यात्रा में मंजिल तक पहुँचने के लिए लेखक ने अपने इस व्यंग्यपूर्ण कथन के माध्यम से ये निम्नांकित शर्ते रखी हैं कि यदि ईश्वर आपके साथ हैं, टिकट आपके हाथ है, पास में सामान कम है और जेब में ज्यादा पैसा है तो आप बेधड़क मंजिल तक पहुँचे ही जाएँगे चाहे आपको बर्थ मिले या न मिले। भारतीय रेल तो बेचारी बहुत कर्मशील है। उसका काम ही यात्रियों को ढोकर मंजिल तक पहुँचाना।

(घ) भारतीय रेलें कर्मशील होती हैं उनका एकमात्र यही काम है यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाना। यह काम वे फल-प्राप्ति की किसी इच्छा या आसक्ति से प्रेरित होकर नहीं करतीं। इसलिए यात्री चाहे जिंदा हों या मुर्दा वे हर स्थिति में उन्हें मंजिल तक पहुँचा ही देती हैं।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने भारतीय रेलों की तथाकथित कर्मशीलता पर और उनकी कर्ममय जीवन-शैली पर व्यंग्य किया है। इसी व्यंग्यपूर्ण कथन के आलोक में लेखक का यह कहना है कि विविध यातनाओं से भरी रेल-यात्रा के क्रम में ईश्वर के सिवा यात्रियों का और कोई रक्षक नहीं है। रेल बेचारी तो हर स्थिति में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने के कर्म के निष्पादन के लिए कृतसंकल्प और तत्पर रहती है।

3. भारतीय रेलें चिंतन के विकास में बड़ा योगदान देती हैं। प्राचीन मनीषियों ने कहा है कि जीवन की अंतिम यात्रा में मनुष्य खाली हाथ रहता है। क्यों भैया? पृथ्वी से स्वर्ग तक या नरक तक भी रेलें चलती हैं। जानेवालों की भीड़ बहुत ज्यादा है। भारतीय रेलें भी हमें यही सिखाती हैं। सामान रख दोगे तो बैठोगे कहाँ? बैठ जाओगे तो सम्मान कहाँ रखोगे? दोनों कर दोगे तो दूसरा वहाँ बैठेगा? वो बैठ गया तो तुम कहाँ खड़े रहोगे? खड़े हो गए तो सामान कहाँ रहेगा? इसलिए असली यात्री वो, जो खाली हाथ? टिकट का वजन उठाना भी जिसे कबूल नहीं। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने ये स्थिति मरने के बाद बताई है। भारतीय रेलें चाहती हैं, वह जीते-जी आ जाए। चरम स्थिति, परम हलकी अवस्था, खाली हाथ, बिना बिस्तर मिल जा बेटा अनंत में, सारी रेलों को अंततः ऊपर जाना है।

(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) भारतीय रेलें प्राचीन मनुष्यों के किस चिंतन के विकास में योगदान दे रही हैं? क्यों और कैसे? ।
(ग) भारतीय रेलें हमें क्या सिखाती हैं?
(घ) प्राचीन ऋषि-मुनियों ने मरने के बाद की क्या स्थिति बताई है?
भारतीय रेलों का इसमें क्या साम्य है?
(ङ) इस गद्यांश का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) पाठ-रेलयात्रा, लेखक-शरद जोशी

(ख) भारतीय रेलें प्राचीन मनुष्यों के इस चिंतन के विकास में बड़ा योगदान कर रही हैं कि मनुष्य जीवन की अंतिम यात्रा में खाली हाथ जाता है। यह इस रूप में कि आज की भीड़ भरी रेल-यात्रा में जो मनुष्य जितना खाली हाथ रहता है, उसकी रेल-यात्रा उतनी ही सुखद होती है। ढेर सारे सामान के साथ रेल-यात्रा करनेवाला यात्री स्वयं तो कष्ट में पड़ता ही है साथ-ही-साथ वह दूसरे रेलयात्रियों की रेल-यात्रा को भी विपदा, झंझट और परेशानी की स्थिति में डाल देता है।

(ग) भारतीय रेलें हमें यही सिखाती हैं कि रेल में बहुत भीड़ होती है, इसलिए खाली हाथ यात्रा करो। सामान साथ रहेगा तो उस भीड़ में उसे रखोगे कहाँ और किसी प्रकार सामान रख दोगे तो फिर बैठोगे कहाँ और कैसे? इसलिए असली ___ या सही वही रेलयात्री है जो खाली हाथ यात्रा करता है टिकट का वजन उठाना भी उचित नहीं समझता और तब वह इस शिक्षा का अनुपालन कर दुर्लभ रेल-यात्रा में सुख का आनंद उठा सकता है।

(घ) प्राचीन ऋषि-मुनियों ने मरने के बाद की यह स्थिति बताई है कि आदमी मरने के बाद खाली हाथ ही परलोक की यात्रा करता है। भारतीय रेलें भी चाहती हैं कि रेलयात्री भी यात्रा के क्रम में बिलकुल खाली हाथ, बिना किसी सामान के साथ, परम हलकी अवस्था में रेल-यात्रा करें और चरम स्थिति के चरम सुख को प्राप्त करें। इस स्थिति में रेल-यात्रा करने के क्रम में वे अनंत की भी यात्रा कर सकते हैं जहाँ अंततोगत्वा रेलों को भी जाना है।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने भारतीय रेलों के कार्य को दार्शनिक चिंतन का व्यंग्यपूर्ण स्थान दिया है और इसकी गरिमा को अपने व्यंग्यपूर्ण कथन के परिवेश में प्रस्तुत किया है। भारतीय चिंतन इस दार्शनिक तथ्य पर आधारित है कि मानव खाली हाथ आता है और खाली हाथ जाता है। लेखक के अनुसार भारतीय रेल भी इस दार्शनिक चिंतन का अनुगमन करती है। इसीलिए तो भारतीय रेल से सफर करने के क्रम में ये बातें याद रखनी चाहिए कि हम खाली हाथ ही रेल-यात्रा करें तभी भीड़ भरी और संकटमयी यात्रा सुखद हो सकती है और रेल-यात्रा की यही शर्ते तो जीवन-यात्रा के क्रम में भी सही प्रमाणित होती हैं।

4. टिकट क्या है? देह धरे का दंड है। मुंबई की लोकल ट्रेन में भीड़ से दबे, कोने में सिमटे यात्री को जब अपनी देह भारी लगती है तब वह सोचता है कि यह शरीर न होता, केवल आत्मा होती, तो कितने सुख से यात्रा करती। भारतीय रेलें हमें मृत्यु का दर्शन समझाती हैं और अक्सर पटरी से उतरकर उसकी महत्ता का भी अनुभव करा देती हैं। कोई नहीं कह सकता कि रेल में चढ़ने के बाद वह कहाँ उतरेगा? अस्पताल में या श्मशान में। लोग रेलों की आलोचना करते हैं। अरे रेल चल रही है और आप उसमें जीवित बैठे हैं, यह अपने में कम उपलब्धि नहीं है।
(क) पाठ तथा लेखक के नाम लिखें।
(ख) भारतीय रेल टिकट को देह धरे का दंड कहा गया है। इसमें रेल-यात्रा का कौन-सा व्यंग्य छिपा है?
(ग) भारतीय रेल हमें मृत्यु का दर्शन समझाती हैं क्यों और कैसे?
(घ) लोगों की दृष्टि में रेल-यात्रा की उपलब्धियाँ क्या हैं जो
विचारणीय हैं? (ङ) इस गद्यांश का आशय लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ-रेलयात्रा, लेखक-शरद जोशी,

(ख) लेखक की दृष्टि में भारतीय रेल टिकट देह धरे का दंड है। इसका कारण यह है कि भारतीय रेल में खासकर मुंबई की लोकल ट्रेन में रेलयात्री भीड़ से इतने दबे होते हैं कि उस समय भीड़े के दबाव में उनकी अपनी देह भी बहुत भारी लगती है। उस घोर पीड़क स्थिति में यात्रा के क्रम में यह शरीर न होता और केवल आत्मा ही होती तो यात्रा बड़ी सुखद होती। रेलयात्रियों को उस समय रेल की टिकट भी भारी लगती है।

(ग) लेखक के अनुसार भारतीय रेल यात्रियों को मृत्यु का दर्शन समझाती है। जब तक रेलें पटरी पर चल रही हैं तब तक तो जीवन सुरक्षित है और रेलयात्री किसी तरह जीवित रहकर रेल की यात्रा करते रहते हैं लेकिन भारतीय रेल की यह भी तो खास विशेषता है कि वह प्रायः चलने के क्रम में पटरी से उतर भी जाती है। उस स्थिति में रेलयात्री मृत्यु का वरण कर मृत्यु का दर्शन भी समझ जाता है।

(घ) रेलों के संबंध में कुछ लोग बड़ी सकारात्मक आलोचना करते हैं। वे कहते हैं कि रेल चल रही है और रेलयात्री उसमें जीवित बैठे हैं। यह तो अपने-आप में बड़ी उपलब्धि है। यहाँ लेखक का व्यंग्य है कि रेल-यात्रा के क्रम में दुर्घटना में पड़कर मौत की घटना एक आम बात है। यह बात बिलकुल असामान्य-सी है कि रेल चले और रेलयात्री जीवित रहकर रेल-यात्रा करता रहे और अगर वह इस रूप में यात्रा करता है तो यह अपने-आप में बड़ी उपलब्धि है।

(ङ) इस गद्यांश में लेखक ने दुर्घटना-भरी भारतीय रेल की यात्रा-क्रिया पर बड़ा मीठा व्यंग्याघात किया है। भारतीय रेलों में यात्रा का भीड़ से भरी होना और उससे यात्रियों का हाल बेहाल होना, यह आम बात है। यात्रा की उस दु:खद स्थिति में भीड़ से दबे हुए यात्रियों के लिए अपना शरीर भी दंड रूप-सा लगता हैं उस स्थिति में रेल-टिकट को लेखक देह धरे का दंड कहता और मानता है। इसी क्रम में लेखक यह कहता है कि भारतीय रेल की यात्रा मृत्यु के संदेश की वाहिका होती है। रेलें चलती रहें और यात्री जीवितावस्था में उसमें बैठकर यात्रा करता रहे, यह बात सामान्य रूप से संभव नहीं है। यदि ऐसा होता है तो अपने-आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

5. भारतीय रेलें आगे बढ़ रही हैं। भारतीय मनुष्य आगे बढ़ रहा है। अपने भारतीय मनुष्य को भारतीय रेल के पीछे भागते देखा होगा। उसे पायदान से लटके, डिब्बे की छत पर बैठे, भारतीय रेलों के साथ प्रगति करते देखा होगा। कई बार मुझे लगता है कि भारतीय मनुष्य भारतीय रेलों से भी आगे हैं। आगे-आगे मनुष्य बढ़ रहा है, पीछे-पीछे रेल आ रही है। अगर इसी तरह रेल पीछे आती रही, तो भारतीय मनुष्य के पास सिवाये बढ़ते रहने के कोई रास्ता नहीं रहेगा। बढ़ते रहो-रेल में सफर करते, दिन-झगड़ते, रातभर जागते, बढ़ते रहो। रेल निशात सर्व भूतानां! जो संयमी होते हैं, वे रात-भर जागते हैं। भारतीय रेलों की यही प्रगति है, जब तक एक्सीडेंट न हो, हमें जागते रहना है।
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) भारतीय रेलों के साथ-साथ मनुष्य भी प्रगति कर रहा है, कैसे?
(ग) “कभी-कभी मनुष्य रेलों से भी आगे-आगे भांगता है।” स्पष्ट करें।
(घ) रेल निशात् सर्वभूतानां!’ कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) पाठ-रेलयात्रा, लेखक-शरद जोशी

(ख) लेखक का यह व्यंग्यपूर्ण कथन है। प्रगति का अर्थ है आगे बढ़ना। इस रूप में भारतीय रेल गतिशील है और एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर आगे बढ़ती रहती हैं। चूँकि मनुष्य भी यात्री के रूप में रेल-यात्रा में शामिल है, अतः वह भी भारतीय रेलों के साथ-साथ आगे बढ़ रहा है। इसी रूप में रेलें भी बढ़ रही है साथ-साथ मनुष्य भी आगे बढ़ रहा है।

(ग) लेखक को कई बार ऐसा लगता है कि भारतीय मनुष्य भारतीय रेलों से भी आगे है। अर्थात् जीवन-यात्रा में मानव रेल से आगे बढ़कर चल रहा है। इसका अभिप्राय यह है कि रेल-यात्रा के क्रम में जब दुर्घटनाएँ होती हैं तो मानव मृत्यु का वरण कर रेल से पहले ही गंतव्य स्थान मृत्युलोक पहुँच जाता है। दुर्घटनाओं में रेल तो मरती नहीं है। वह कुछ घायल होकर फिर ठीक-ठाक होकर गति पकड़ लेती है। तब तक उसका रेलयात्री अपनी जीवन-यात्रा में बहुत आगे निकल जाता है।

(घ) यह  कथन गीता के इस कथन से जुड़ा हुआ है कि प्राणियों के लिए जो रात्रि है उसमें योगी पुरुष जागता है (या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी)। लेखक का यहाँ यह व्यंग्य है कि रेल-यात्रा के क्रम में नींद पर विजय प्राप्त करनेवाले । जो संयमी यात्री होते हैं, वे रातभर यात्रा के क्रम में रेल की दुर्घटना के भय से जगे , रहते हैं, अर्थात जब तक दुर्घटना न हो जाए तब तक जागे रहो। यही रेलों की सही प्रगति है।

Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions Geography भूगोल : भारत : संसाधन एवं उपयोग Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science Geography Solutions Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन

Bihar Board Class 10 Geography वन एवं वन्य प्राणी संसाधन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

वन एवं वन्य प्राणी संसाधन Bihar Board Class 10 प्रश्न 1.
भारत में 2001 में कितने प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वन का विस्तार है?
(क) 25
(ख) 19.27
(ग).20
(घ) 20.60
उत्तर-
(ख) 19.27

वन एवं वन्य जीव संसाधन Class 10 Important Questions प्रश्न 2.
वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार भारत में वन का विस्तार है।
(क) 20.60% भौगोलिक क्षेत्र में
(ख) 20.55% भौगोलिक क्षेत्र में
(ग) 20% भौगोलिक क्षेत्र में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख) 20.55% भौगोलिक क्षेत्र में

वन एवं वन्य जीवों का महत्व Bihar Board Class 10 प्रश्न 3.
बिहार में कितने प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वन का फैलाव है ?
(क) 15
(ख) 20
(ग) 10
(घ) 5
उत्तर-
(घ) 5

वन एवं वन्य जीव संसाधन के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 4.
पूर्वोत्तर राज्यों के 188 आदिवासी जिलों में देश के कुल क्षेत्र का कितना प्रतिशत वन
(क) 75
(ख) 80.05
(ग) 90.03
(घ) 60.11
उत्तर-
(घ) 60.11

वन एवं वन्य जीव संसाधन Class 10 Bihar Board प्रश्न 5.
किस राज्य में वन का सबसे अधिक विस्तार है ?
(क) केरल
(ख) कर्नाटक
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) उत्तर प्रदेश
उत्तर-
(ग) मध्य प्रदेश

वन एवं वन्य जीव संसाधन Bihar Board Class 10 प्रश्न 6.
वन संरक्षण एवं प्रबंधन की दृष्टि से वनों को वर्गीकृत किया गया है
(क) 4 वर्गों में
(ख) 5 वर्गों में
(ग) 5 वर्गों में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(ख) 5 वर्गों में

वन्य जीव संरक्षण प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 7.
1951 से 1980 तक लगभग कितना वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र कृषि-भूमि में परिवर्तित हुआ?
(क) 30,000
(ख) 26,200
(ग) 25,200
(घ) 35,500
उत्तर-
(ख) 26,200

वन्य प्राणियों के नष्ट होने के तीन कारण Bihar Board Class 10 प्रश्न 8.
संविधान की धारा 21 का संबंध है
(क) वन्य जीवों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण
(ख) मृदा संरक्षण
(ग) जल संसाधन संरक्षण
(घ) खनिज सम्पदा संरक्षण
उत्तर-
(क) वन्य जीवों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण

वन एवं वन्य जीव Bihar Board Class 10 प्रश्न 9.
एक ए ओ की वानिकी रिपोर्ट के अनुसार 1948 में विश्व में कितने हेक्टेयर भूमि पर वन का विस्तार था।
(क) 6 अरब हेक्टेयर
(ख) 4 अरब हेक्टेयर
(ग) 8 अरब हेक्टेयर में
(घ) 5 अरब हेक्टेयर में
उत्तर-
(ख) 4 अरब हेक्टेयर

प्रश्न 10.
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण 1968 में कौन-सा कनवेंशन हुआ था?
(क) अफ्रीकी कनवेंशन
(ख) वेटलैंड्स कनवेंशन
(ग) विश्व आपदा कनवेंशन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क) अफ्रीकी कनवेंशन

प्रश्न 11.
इनमें कौन-सा जीव है जो केवल भारत ही में पाया जाता है ?
(क) घड़ियाल
(ख) डॉलफिन
(ग) ह्वेल
(घ) कछुआ
उत्तर-
(ख) डॉलफिन

प्रश्न 12.
भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
(क) कबूतर
(ख) हंस
(ग) मयूर
(घ) तोता
उत्तर-
(ग) मयूर

प्रश्न 13.
मैंग्रोव्स का सबसे अधिक विस्तार है
(क) अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह के तटीय भाग में
(ख) सुन्दरवन में
(ग) पश्चिमी तटीय प्रदेश में
(घ) पूर्वोत्तर राज्य में
उत्तर-
(ख) सुन्दरवन में

प्रश्न 14.
टेक्सोल का उपयोग होता है
(क) मलेरिया में
(ख) एड्स में
(ग) कैंसर में
(घ) टी.बी. के लिए
उत्तर-
(ग) कैंसर में

प्रश्न 15.
‘चरक’ का संबंध किस देश से था?
(क) म्यनमार से
(ख) श्रीलंका से
(ग) भारत से
(घ) नेपाल से
उत्तर-
(ग) भारत से

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बिहार में वन सम्पदा की वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बिहार विभाजन के बाद वन विस्तार में बिहार राज्य दयनीय हो गयी है, क्योंकि वर्तमान बिहार में अधिकतर भूमि कृषि योग्य है। मात्र 6764.14 हेक्टेयर में वन क्षेत्र बच गया है। यह भोगोलिक क्षेत्र का मात्र 7.1 प्रतिशत है। बिहार के 38 जिलों में से 17 जिलों से वन क्षेत्र समाप्त हो गया है। पश्चिमी चम्पारण, मुंगेर, बांका, जमुई, नवादा, नालन्दा, गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों के वनों की स्थिति कुछ बेहतर है, जिसका कुल क्षेत्रफल 3700 वर्ग किमी है। शेष में अवक्रमित वनक्षेत्र है, वन के नाम पर केवल झाड़-झरमूट बच गए हैं।

प्रश्न 2.
वन विनाश के मुख्य कारकों को लिखें।
उत्तर-
वन विनाश के मुख्य कारक निम्न हैं-

  • कृषिगत भूमि का फैलाव
  • नदी घाटी परियोजनाओं के विकास के कारण
  • पशुचारण एवं ईंधन के लिए लकड़ियों का उपयोग
  • पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार भारत के कई क्षेत्रों में वाणिज्य की दृष्टि से एकल वृक्षारोपण करने से पेड़ों की दूसरी जातियाँ नष्ट हो गयीं, जैसे सागवान के एकल रोपण से दक्षिण भारत में अन्य प्राकृतिक वन बर्बाद हो गए।
  • भोजन, सुरक्षा एवं आनन्द के लिए वन्य जीवों का शिकार भी वन विनाश का एक मुख्य कारक है।

प्रश्न 3.
वन के पर्यावरणीय महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वन एवं वन्य प्राणी मानव जीवन के प्रमुख हमसफर हैं। वन पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच जैसा है। यह केवल एक संसाधन ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण घटक है। यह जीवमंडल में सभी जीवों को संतुलित स्थिति में जीने के लिए अथवा संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान देता है क्योंकि सभी जीवों के लिए खाद्य ऊर्जा का प्रारंभिक स्रोत वनस्पति ही है।

प्रश्न 4.
वन्य-जीवों के ह्रास के चार प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
वन्य जीवों के हास के चार प्रमुख कारक निम्न हैं

  • प्राकृतिक आवासों का अतिक्रमण यातायात की सुविधाओं में वृद्धि आदि कारणों से – जीवों के प्राकृतिक आवासों का अतिक्रमण हो रहा है जिससे वन्य जीवों की सामान्य वृद्धि प्रजनन क्षमता में कमी आ गई।
  • प्रदूषण जनित समस्या प्रदूषण के कारण वन्य जीवों का जीवन-चक्र प्रभावित हो रहा है।
  • आर्थिक लाभ- अनेक वन्य जीवों एवं उसके उत्पाद का उपयोग आर्थिक लाभ के लिए हो रहा है जिससे उनका दोहन हो रहा है।
  • सह विलुप्तता-जब एक जाति विलुप्त होती है तब उसपर आधारित दूसरी जातियाँ भी विलुप्त होने लगती हैं।

प्रश्न 5.
वन और वन्य जीवों के संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
सहयोगी रीति-रिवाजों का वन और वन्य जीवों के संरक्षण में काफी महत्वपूर्ण योगदान है। ग्रामीण लोग कई धार्मिक अनुष्ठानों में 100 से अधिक पादप प्रजातियों का प्रयोग करते हैं और इन पौधों को अपने खेतों में भी उगाते हैं।
आदिवासियों को अपने क्षेत्र में पाये जाने वाले पेड़-पौधों तथा वन्य जीवों से भावनात्मक एवं आत्मीय लगाव होता है। वे प्रजननकाल में मादा वन पशुओं का शिकार नहीं करते हैं। वन संसाधनों का उपयोग चक्रीय पद्धति से करते हैं। वन के खास क्षेत्रों को सुरक्षित रख उसमें प्रवेश नहीं करते हैं।

प्रश्न 6.
चिपको आन्दोलन.क्या है ?
उत्तर-
उत्तर प्रदेश टेहरी-गढ़वाल पर्वतीय जिले में सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में अनपढ़ जनजातियों द्वारा 1972 में एक आन्दोलन शुरू हुआ, जिसे चिपको आन्दोलन कहा जाता है। इस आन्दोलन में स्थानीय लोग ठेकेदारों को हरे-भरे पौधों को काटते देख, उसे बचाने के लिए अपने आगोश में पौधों को घेर कर उसकी रक्षा करते हैं। इसे कई देशों में स्वीकारा गया।

प्रश्न 7.
कैंसर रोग के उपचार में वन का क्या योगदान है ?
उत्तर-
हिमालय यव (चीड़ के प्रकार का सदाबहार वृक्ष टेक्सस बेनकेटा एवं टी. ब्रव्ही फोलिया) एक औषधीय पौधा है जो हिमालय और अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में पाया जाता .. है। चीड़ की छाल, पत्तियों, टहनियों और जड़ों से टैक्सोल नामक रसायन निकाला जाता है। इससे कैंसर रोधी औषधि बनायी जाती है। यह विश्व में सबसे अधिक बिकने वाली कैंसर औषधि है।

प्रश्न 8.
दस लुप्त होने वाली पशु-पक्षियों का नाम लिखिए।
उत्तर-
एशियाई चीता, गुलाबी सिर वाला बत्तख, डोडो, गिद्ध (भारत), थाईलैंसीन (आस्ट्रेलिया), ‘स्टीलर्स सीकाउ (रूस), शेर की तीन प्रजातियाँ (बाली, जावन एवं कास्पियन) (अफ्रिका), कस्तुरी मृग, चीतल इत्यादि।

प्रश्न 9.
वन्य जीवों के हास में प्रदूषण जनित समस्या पर अपना विचार स्पष्ट करें।
उत्तर-
पराबैंगनी किरणें, अम्ल वर्षा और हरितगृह प्रभाव प्रमुख प्रदूषक हैं जिन्होंने वन्य जीवों को काफी प्रभावित किया है। इसके अलावे वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण के कारण वन एवं वन्य जीवों का जीवनचक्र गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। इससे इनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। फलस्वरूप धीरे-धीरे वन्य जीवन संकटग्रस्त होते जाता है।

प्रश्न 10.
भारत के दो प्रमुख जैवमंडल क्षेत्र का नाम क्षेत्रफल एवं प्रान्तों का नाम बतावें।
उत्तर-

  • नीलगिरि -5520
  • वर्ग किमी – तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक।
  • मानस-2,837 वर्ग किमी – असम।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वन एवं वन्य जीवों के महत्व का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर-
वन एवं वन्य जीव हमारी धरा पर अमूल्य धरोहर हैं। ये मानव जीवन के प्रमुख हमसफर हैं। वन पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच हैं।
वन एवं वन्य जीवों के महत्व निम्नलिखित हैं

(i) प्राकृतिक संतुलन-वन एवं वन्य जीव प्राकृतिक संतुलन कायम रखने में मदद करते हैं। जैसे-आवास एवं अन्य कार्यों के लिए जंगल काटे जाने से अनेक पारिस्थितिक समस्याएँ उत्पन्न हुईं जैसे मृदा अपरदन, अनावृष्टि, अतिवृष्टि इत्यादि का सामना करना पड़ा।

(ii) आर्थिक महत्व-वन एवं वन्य जीवों से अनेक ऐसे उत्पाद प्राप्त होते हैं जिनका आर्थिक महत्व बहुत अधिक होता है। जैसे—कीमती लकड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ, हाथी दाँत, चमड़ा इत्यादि।

(iii) वैज्ञानिक उपयोगिता-वन्य प्राणी पर किये गए प्रयोगों के जरिए शरीर रचना, कार्यिकीय तथा पारिस्थितिक तथ्यों का अपार ज्ञान प्राप्त हुआ है। नयी औषधियों के गुण अथवा नयी शल्य चिकित्सा प्रणाली की महत्ता की जाँच पहले मेढक खरमोश, बंदर भेड़ा इत्यादि वन्य प्राणियों पर ही किये जाते हैं।

(iv) सांस्कृतिक महत्व और धार्मिक लगाव-अनादिकाल से ही मनुष्य का वन्य जीवों से सांस्कृतिक एवं धार्मिक लगाव रहा है। मनुष्य पीपल, बरगद, तुलसी, आँवला इत्यादि की पूजा करता रहा है। हिन्दू धर्म में मत्स्य, नरसिंह, हनुमान इत्यादि को देवताओं का अवतार समझा जाता है। बाघ, गरुड़, चूहा, बैल इत्यादि को दुर्गा, विष्णु, गणेश, शिव इत्यादि देवताओं का वाहन समझा जाता है। पौराणिक कथाएँ एवं साहित्य वन्य जंतुओं के विवरण से भरे हुए हैं।

(v) क्रीड़ा तथा आनन्द अनुभव हमारे देश में वन्य जीवों की बहुलता है और वे क्रीडा तथा आनन्द अनुभूति के अपार स्रोत हैं। भिन्न-भिन्न पशुओं तथा पक्षियों की क्रीड़ाएं मनमोहक दृश्य उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 2.
वृक्षों के घनत्व के आधार पर वनों का वर्गीकरण कीजिए और सभी वर्गों का वर्णन विस्तार से कीजिए।
उत्तर-
वृक्षों के घनत्व के आधार पर वनों को पांच वर्गों में बाँटा गया है
1. अत्यंत सघन वन-भारत में इस प्रकार के वन विस्तार 54.6 लाख हेक्टेयर भूमि पर है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.66 प्रतिशत है, असाम और सिक्किम को छोड़कर समूचा पूर्वोत्तर – राज्य इस वर्ग में आते हैं। इन क्षेत्रों में वनों का घनत्व 75% से अधिक है।

2.सघन वन-इसके अन्तर्गत 73.60 लाख हेक्टेयर भूमि आती है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3% है। हिमालय, सिक्किम, मध्यप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र एवं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र । में इस प्रकार के वनों का विस्तार है। यहाँ वनों का घनत्व 621.99 प्रतिशत है।

3. खुले वन-2.59 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर इस प्रकार के वनों का विस्तार है। यह कुल भौगोलिक क्षेत्र का 7.12% है, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा के कुछ जिले एवं असम के 16 आदिवासी जिलों में इस प्रकार के वनों का विस्तार है, असाम आदिवासी जिलों में वृक्षों का घनत्व 23.89% है।।

4. झाड़ियाँ एवं अन्य वन-रराजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्र में इस प्रकार के वन पाये जाते हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार एवं प. बंगाल के मैदानी भागों में वृक्षों का घनत्व 10% से भी कम है इसलिए यह क्षेत्र इसी वर्ग में सम्मिलित है। इसके अन्तर्गत 2.459 करोड़ हेक्टेयर भूमि आती है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 8.66% है।

5. मैंग्रोव्स (तटीय वन)-विश्व के तटीय वन क्षेत्र (मैंग्रोव्स) का मात्र 5% 4,500 किमी. क्षेत्र ही भारत में है, जो समुद्र तटीय राज्यों में फैला है, जिसमें आधा क्षेत्र पश्चिम बंगाल का सुंदरवन है, इसके बाद गुजरात के अंडमान निकोबार द्वीप समूह आते हैं, कुल मिलाकर 12 राज्यों तथा केन्द्र प्रशासित प्रदेशों में मैंग्रोव्स वन है जिनमें आंध्रप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, , तमिलनाडु, प. बंगाल, अंडमान-निकोबार, पाण्डेिचरी, केरल एवं दमन-दीप शामिल हैं।

प्रश्न 3.
जैव विविधता क्या है ? यह मानव के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर-
जैव विविधता से तात्पर्य, विभिन्न जीव रूपों में पाई जानेवाली विविधता से है। यह शब्द किसी विशेष क्षेत्र में पाये जाने वाले विभिन्न जीव रूपों की ओर इंगित करता है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक पृथ्वी पर जीवों की करीब एक करोड़ प्रजातियां पाई जाती हैं।

ये हमारी धरा पर अमूल्य धरोहर हैं। वन्य जीव सदियों से हमारे सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इनसे हमें भोजन, वस्त्र के लिए रेशे, खालें, आवास आदि सामग्री एवं अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं। इनकी चहक और महक हमारे जीवन में स्फूर्ति प्रदान करते हैं। पारिस्थितिकी के लिए ये श्रृंगार के समान हैं। भारत में इन्हें सदैव आदरभाव एवं पूज्य समझा गया। मनीषियों के लिए प्रेरणा का स्रोत तो सैलानियों के लिए आकर्षण का विषय रहा है।

ये पर्यावरण संतुलन के लिए भी अति आवश्यक हैं तथा हमारी भावी पीढ़ियों के लिए भी ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 4.
विस्तारपूर्वक बताएं कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पति और प्राणीजगत के हास के कारक हैं।
उत्तर-
मानव जीवमण्डल का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य है जो न सिर्फ अन्य जैविक सदस्यों को प्रभावित करता है बल्कि पर्यावरण के अजैविक घटकों में भी अत्यधिक परिवर्तन लाता है। मानव अपनी बुद्धि और विवेक के कारण प्रकृति के दूसरे जीवों और अजैविक घटकों का प्रयोग. कर अपने जीवन को सुखमय और आरामदायक बनाता है। किन्तु जब मानव के क्रियाकलाप अनियंत्रित हो जाते हैं तो पर्यावरण के घटकों जैसे-वायु, जल तथा मृदा एवं दूसरे जीवों में अनावश्यक परिवर्तन आ जाता है जो वनस्पतियों एवं प्राणियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

मानव खेती के लिए कारखाने स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटता रहा है और अभी भी काट रहा है। शाकाहारी एवं मांसाहारी जानवरों का अंधाधुंध शिकार कर जीवों में असंतुलन पैदा कर दिया है और बहुत-से जन्तु लुप्त होने के कगार पर हैं जैसे—सिंह, बाघ, चीता, गैंडा, बारहसिंगा, कस्तुरी मृग आदि।

मानव के निम्नलिखित क्रियाकलाप वनस्पतियों एवं प्राणीजगत के हास के कारक हैं-

  • औद्योगिकीकरण में अनियोजित वृद्धि
  • जंगली जंतुओं का शिकार
  • आवासीय एवं कृषि योग्य भूमि का विस्तार
  • हानिकारक रसायनों का अनियोजित प्रयोग
  • आर्थिक लाभ प्राप्त करने हेतु जैव विविधताओं का अति दोहन
  • जनसंख्या में वृद्धि, इत्यादि।

प्रश्न 5.
भारतीय जैव मंडल क्षेत्र की चर्चा विस्तार से कीजिए।
उत्तर-
हमारा देश जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सर्वाधिक समृद्ध देशों में से एक है। इसकी गणना विश्व के 12 विशाल जैविक-विविधता वाले देशों में की जाती है। यहाँ विश्व की सारी जैव उपजातियों का आठ प्रतिशत संख्या (लगभग 16 लाख) पाई जाती है। इन्हीं जैव विविधताओं के संरक्षण हेतु यूनेस्को के सहयोग से भारत में 14 जैव मण्डल आरक्षित क्षेत्र की स्थापना की गई है जिनका विवरण निम्न है-
Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन - 1
Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन - 2

Bihar Board Class 10 Geography वन एवं वन्य प्राणी संसाधन Additional Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नांकित में कौन भारत को छोड़ अन्य देश में दुर्लभ हैं
(क) भालू और गीदड़
(ख) बाघ और सिंह
(ग) गधे और हाथी
(घ) हनुमान और हिरण
उत्तर-
(ख) बाघ और सिंह

प्रश्न 2.
इनमें कौन हमारे देश में प्रायः लुप्त हो चुका है ?
(क) चीता
(ख) हनुमान
(ग) गेंडा
(घ) तेंदुआ
उत्तर-
(क) चीता

प्रश्न 3.
इनमें कौन शाकाहारी नहीं है ?
(क) गेंडा
(ख) बारहसींगा
(ग) हिरण
(घ) भेड़िया
उत्तर-
(घ) भेड़िया

प्रश्न 4.
इनमें किस पेड़ की लकड़ी बहुत कड़ी होती है ?
(क) देवगार
(ख) हेमलॉक
(ग) सागवान
(घ) बलूत
उत्तर-
(क) देवगार

प्रश्न 5.
इनमें कौन वन और वन्य प्राणियों के विनाश का कारण नहीं बनता?
(क) कृषि-क्षेत्रों में अत्यधिक वृद्धि
(ख) बड़े पैमाने पर निकास कार्यों का होना।
(ग) व्यापार की वृद्धि
(घ) पशुचारण और लकड़ी कटाई
उत्तर-
(ग) व्यापार की वृद्धि

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत में सर्वप्रथम किस वर्ष वन-नीति बनायी गयी थी?
उत्तर-
भारत में सर्वप्रथम 1894 ई. में वन-नीति बनायी गयी थी। .

प्रश्न 2.
पर्यावरण की दृष्टि से लगभग कितना प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित रहना चाहिए?
उत्तर-
पर्यावरण की दृष्टि से लगभग 33.3% भू-भाग वनाच्छादित रहना चाहिए।

प्रश्न 3.
बाघों को बचाने के लिए लागू की गयी परियोजना का नाम क्या है ?
उत्तर-
बाघों को बचाने के लिए लागू की गयी परियोजना का नाम बाघ परियोजना है।

प्रश्न 4.
भारत के किस राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र हैं?
उत्तर-
भारत का मध्य प्रदेश 11.22% के साथ प्रथम स्थान पर है। यानी यहाँ सर्वाधिक वन क्षेत्र पाया जाता है।

प्रश्न 5.
राजस्थान और पंजाब प्रदेशों में किस प्रकार के वन पाये जाते हैं ?. .
उत्तर-
राजस्थान और पंजाब प्रदेशों में कंटीले वन मिलते हैं क्योंकि इन प्रदेशों में 70 सेमी. से भी कम वर्षा होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वन को अनुपम संसाधन क्यों कहा गया है ?
उत्तर-
वन एक नवीकरणीय राष्ट्रीय संपदा है। इस संसाधन की उपस्थिति से कई जीव-जन्तुओं को आश्रय मिलता है। वन के कारण तापमान में कमी एवं वर्षा की मात्रा बढ़ती है। भूमि कटाव को यह रोकता है, पशुओं के लिए इससे चारा मिल जाता है। मानव को ईंधन एवं अन्य कार्यों के लिए लकड़ियाँ, फल-फूल तथा कई कच्चे माल भी मिलते हैं। मानव जीवन के आर्थिक विकास एवं पर्यावरण की अनिवार्यता के कारण वन निश्चित रूप से अनुपम संसाधन है।

प्रश्न 2.
बड़े पैमाने पर वनों का ह्रास कब हुआ? इसके परिणामों का उल्लेख करें।
उत्तर-
औद्योगिक क्रांति के बाद बड़े पैमाने पर वनों का ह्रास हुआ। इसके निम्नलिखित दुष्परिणाम हुए हैं-

  • कई जीव-जन्तुओं की प्रजातियों का हास।
  • वन उत्पादों की कमी।
  • चारा एवं लकड़ी की कमी।
  • पारिस्थितिकी संकट।
  • कई वनस्पतियों का विलुप्तीकरण।
  • सूखा एवं दुर्भिक्ष में बढ़ोतरी।
  • कई जीव-जन्तुओं के आवासों में कमी।
  • कई जड़ी-बूटियों का खात्मा।

प्रश्न 3.
भारत में विभिन्न प्रकार के वन क्यों पाये जाते हैं ? उनके नाम लिखें।
उत्तर
विशाल अक्षांशीय-देशांतरीय विस्तार, उच्चावच की विभिन्नता, जलवायु की आंतरिक विषमताओं के सम्मिलित प्रभाव तथा. समुद्र की निकटता के कारण भारत में विभिन्न प्रकार के वन पाये जाते हैं। इनके नाम निम्न हैं –

  • सदाबहार वन
  • पतझड़ वन
  • शुष्क एवं कंटीले वन
  • पर्वतीय वन और
  • डेल्टा वन।

प्रश्न 4.
भारत में कौन वन कोणधारी पेटी के रूप में उगे हुए हैं ? उनके पाँच प्रमुख पेड़ों के नाम लिखें।
उत्तर-
भारत में पर्वतीय वन कोणधारी पेटी के रूप में उगे हुए हैं। जो 1,500-3,000 मी. की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलते हैं। अधिक ऊंचाई पर (हिमपातवाले क्षेत्रों में) कोणधारी वन उगते । हैं। इनकी नुकीली पत्तियों से बर्फ फिसलकर गिर जाती है। कठोर शीत, पाला और बर्फ का मुकाबला करने में पेड़ समर्थ होते हैं। इनके प्रमुख पेड़ों के नाम ये हैं

  • देवदार
  • पाइन
  • चीड़
  • बलूत
  • हेमलॉक
  • ओक
  • चिनार
  • चेस्टनर
  • वालनट
  • मेंपुल
  • मैग्नोलिया
  • स्यूस।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार के भारतीय वनों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें। इनमें किसे सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और क्यों ?
उत्तर-
धरातलीय स्वरूप, मिट्टी और जलवायु की दशाओं में विविधता के कारण भारत में विभिन्न प्रकार के वन पाये जाते हैं जो निम्न प्रकार के हैं

  1. चिरहरित वन या सदाबहार वन
  2. पर्णपाती वन या पतझड़ वन
  3. पर्वतीय वन या कोणधारी वन
  4. डेल्टाई वन. या ज्वारीय वन
  5. कंटीले वन या मरुस्थलीय वन

1. सदाबहार वन- भारत में सदाबहार वन सघन होते हैं। इन्हें काटना, वनों से बाहर निकालना और उपयोग में लाना कठिन होता है। इनकी लकड़ी कड़ी होती है। इनमें कई जाति के वृक्ष एक साथ मिलते हैं। अधिक वर्षा और दलदली भूमि के कारण यातायात में कठिनाई होती है। इसलिए लकड़ियों का सही उपयोग नहीं हो पाता है। इनमें एबॉनी और महोगनी मुख्य वृक्ष पाये जाते हैं।

2. पतझड़ वन-ये आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें सागवान और साल मुख्य वृक्ष पाये जाते हैं। अन्य वृक्षों में अंजन, चंदन, चिरौंजी, हरे-वहेड़ा, आँवला, शहतूत, बरगद, पीपल, कटहल, आम, जामुन, नीम, नारियल, बाँस मानसूनी वन के रूप में पाये जाते हैं। ये न तो अधिक घने होते हैं और न इनकी लकड़ी अधिक कठोर ही। इनकी लकड़ियाँ उपयोगी होती हैं।

3. कोणधारी वन-यह वन पर्वत के अधिक ऊंचाई पर पाए जाते हैं। इनमें देवदार, चीड़, हेमलॉक स्फुस जाति के पेड़ पाए जाते हैं। इनकी लकड़ियाँ मुलायम होती हैं। इन्हें काटना और उपयोग में लाना आसान होता है।

4. ज्वारीय वन तटीय भागों में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं। इनमें वृक्षों की बहुतायत रहती है। लकड़ियाँ जलावन और छोटी नाव बनाने के काम आती हैं। इनमें सुन्दरी वृक्ष, केवड़ा, मैंग्रोव, हिरिटिरा गरोन आदि मुख्य वृक्ष हैं, ताड़ और नारियल के पेड़ भी मिलते हैं।

5. मरुस्थलीय वन-यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं। इनमें बबूल एवं खजूर के पेड़ पाए जाते हैं। नागफनी और कैकटस जाति की झाड़ियाँ भी पायी जाती हैं।

प्रश्न 2.
भारत में वन संपदा की वृद्धि के उपायों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
भारत में वन संपदा की वृद्धि वनों के संरक्षण से हो सकती है। वन संपदा की वृद्धि के लिए विभिन्न उपाय किए जा सकते हैं जो निम्नलिखित हैं

  • काटे गये वृक्ष या क्षेत्र पर पुनः वृक्षारोपण करना चाहिए।
  • वनों से केवल परिपक्व वृक्षों को काटना चाहिए।
  • वनों में अग्निरक्षा पथ और अग्निरोधक पथ की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • वृक्षों को बीमारियों एवं कीटाणुओं से बचाव हेतु वायुयान द्वारा दवा छिड़काव की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • सामाजिक वानिकी, क्षतिपूर्ति वानिकी कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
  • अपार्टमेंट संस्कृति के लिए निश्चित क्षेत्र पर वृक्षारोपण की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • अवैध कटाई पर अंकुश लगाना चाहिए।
  • समाज में वृक्ष की महत्ता के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए।
  • जंगल क्षेत्र को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय-स्तर पर प्रयत्न करना चाहिए जिसके तहत पेड़ लगाओ अभियान को तेजी से लागू करना चाहिए।
  • वनों की वृद्धि के लिए लोगों में अधिक-से-अधिक पेड़ लगाने की प्रेरणा उत्पन्न करनी चाहिए। विशेष रूप से परती और बेकार पड़ी हुयी भूमि पर अधिक-से-अधिक पेड़ लगाना चाहिए।

प्रश्न 3.
वन्य प्राणियों के संरक्षण की आवश्यकता बताते हुए इनके संरक्षण के उपाय बताएँ।
उत्तर-
वन्य प्राणियों का संरक्षण करना बहुत आवश्यक है। क्योंकि इससे जानवरों और पक्षियों की रक्षा होती है। साथ ही पारितंत्र का संतुलन बना रहता है। वन्य प्राणियों से समाज को अनेक लाभ हैं। इसलिए इनका संरक्षण करना आवश्यक है। वन्य प्राणी देखने में सुन्दर होते हैं, जो मनोरंजन के साधन भी हैं, पर्यटक लोग इसे देखते हैं। वन्य प्राणी शिकार के लिए भी उपयुक्त हैं। साथ ही कृषि के लिए भी लाभदायक सिद्ध होते हैं। बहुत से छोटे जानवर जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं उसे मांसाहारी वन्य पक्षी खा जाते हैं जिससे समाज को लाभ मिलता है। वन्य ‘प्राणियों से बहुमूल्य पदार्थ भी प्राप्त होते हैं। इसलिए इनका संरक्षण करना आवश्यक है।

संकटापन्न प्राणियों के संरक्षण के विशेष उपाय किये जा रहे हैं। इस विषय में सामयिक गणना की जाती है जिससे उनकी नवीन स्थिति का पता किया जा सके। बाघ परियोजना एक सफल कार्यक्रम है। देश के विभिन्न भागों में 16 बाघ परियोजनाएं चल रही हैं। इसी प्रकार गैण्डा परियोजना आसाम में विकसित की गई है। भारतीय मैना राजस्थान और मालवा की दूसरी संकटापन्न प्रजाति की परियोजना है। यद्यपि शेर की भी संख्या घट रही है।

देश में जैव विभिन्नता के संरक्षण के लिए कदम उठाये जा रहे हैं। इस योजना के अन्तर्गत पहला जैव आरक्षित क्षेत्र नीलगिरि में स्थापित किया गया। इसके अन्तर्गत 5500 वर्ग किमी. क्षेत्र फैला है जो केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर है। इस प्रकार के 13 क्षेत्र हैं। देश में 63 राष्ट्रीय उद्यान, 358 वन्य जीव अभ्यारण्य, 35 चिड़ियाघर हैं जो 130000 वर्ग किमी. क्षेत्र को घेरे हैं। वन्य जीव संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि-

  • पक्षी और जानवरों की रक्षा होती है।
  • पारितंत्र संतुलन बना रहता है।

वन्य प्राणियों के संरक्षण क लिए विभिन्न उपाय किए जा सकते हैं जो निम्नलिखित हैं-

  •  शिकार पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
  • पशुओं के झुण्ड के प्रवेश पर रोक लगाना चाहिए।
  • अधिक राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभ्यारय स्थापित किए जाने चाहिए।
  • वन्य जीव और बंदी प्रजनन किया जाना चाहिए।
  • सेमिनार, कार्यशाला आदि का आयोजन किया जाना चाहिए।
  • पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान किये जाने चाहिए।
  • प्रजनन के लिए उचित दशाएं प्रदान किये जाने चाहिए।

Bihar Board Class 10 Geography Solutions Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन

Bihar Board Class 10 Geography वन एवं वन्य प्राणी संसाधन Notes

  • वन उस बड भूभाग को कहते हैं जो पेड़ पौधों एवं झाड़ियों द्वारा आच्छादित होते हैं।
  • F.A.O. (Food and Agriculture Organisation) की वानिकी रिपोर्ट के अनुसार 1948 में विश्व में 4 अरब हेक्टेयर वन क्षेत्र था जो 1963 में घटकर 3.8 अरब हेक्टेयर हो गया और 1990 में 3.4 अरब हेक्टेयर वनक्षेत्र बच गया। किन्तु 2005 में यह पुनः 3.952 अरब हेक्टेयर हो गया है।
  • 2005 तक F.S.I. के रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 67.71 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र है जो कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20.60 प्रतिशत है।
  • देश के कुल वनाच्छादित क्षेत्र का 25.11 प्रतिशत वन क्षेत्र पूर्वोत्तर के सात राज्यों में है।
  • देश में वनाच्छादित क्षेत्र के मामले में मध्यप्रदेश का स्थान प्रथम है जहाँ देश के कुल वनाच्छादित क्षेत्र का 11.22% वन है।
  • वन्य जीवों के संरक्षण के लिए यहाँ 58 राष्ट्रीय उद्यान, 448 अभ्यारण्य एवं 14 सुरक्षित जैव मंडल रिजर्व क्षेत्र हैं।
  • विश्व के 65 देशों में करीब 243 सुरक्षित जैव-मंडल क्षेत्र हैं।
  • वन को बचाने के लिए उत्तरांचल के टेहरी-गढ़वाल जिले में सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में 1972 ई. से चिपको आन्दोलन चलाया जा रहा है।
  • वन एक प्राकृतिक नवीकरणीय संसाधन है, क्योंकि नष्ट होने पर इसे पुनः उगाया जा सकता है और इसकी पूर्ति की जा सकती है।
  • वन हमारी राष्ट्रीय सम्पत्ति है और आर्थिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • वन उस बड़े भू-भाग को कहते हैं जो पेड़ एवं झाड़ियों द्वारा आच्छादित होते हैं।
  • FA.O.(Food and Agriculture Organisation) की वानिकी रिपोर्ट के अनुसार 1948 में विश्व में 4 अरब हेक्टेयर वन क्षेत्र था जो 1963 में घटकर 3.6 अरब हेक्टेयर हो गया और 1990 में 3.4 अरब हेक्टेयर वन क्षेत्र बच गया। किन्तु 2005 में यह पुन: 3.952 अरब हेक्टेयर हो गया है।
  • वन से मानव को कई लाभ हैं।
  • औद्योगिक क्रांति के बाद वनों का बड़े पैमाने पर ह्रास हुआ है।
  • वन से प्राप्त उत्पादों के दो वर्ग हैं-(क) मुख्य उत्पाद और (ख) गौण उत्पाद।
  • प्लाईवुड का निर्माण जर्मनी में शुरू हुआ।
  • भारत में वनस्पतियों की लगभग 47,000 उपजातियाँ पायी जाती हैं जिनमें 15,000 भारतीय मूल की हैं।
  • भारत में लगभग 6,77,088 वर्ग किलोमीटर भूमि पर वन का विस्तार है।
  • राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश की 33.3% भूमि पर वन का विस्तार होना आवश्यक है।
  • वन नीति के छह प्रमुख उद्देश्य हैं -(i) वन संपत्ति की सुरक्षा (ii) पर्यावरण को संतुलित बनाना (iii) भूमि-कटाव को रोकना (iv) बाढ़-नियंत्रण (v) मरुस्थल विस्तार को रोकना (vi) लकड़ियों की आपूर्ति बनाए रखना।
    प्रमुख उत्पाद वाले वनों में देवदार, शीशम, साल तथा चीड़ इत्यादि के पेड़ पाये जाते हैं।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 1 दही वाली मंगम्मा

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Varnika Bhag 2 Chapter 1 दही वाली मंगम्मा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions Varnika Chapter 1 दही वाली मंगम्मा

Bihar Board Class 10 Hindi दही वाली मंगम्मा Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

Dahi Wali Mangamma Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
मंगम्मा का अपनी बहू के साथ किस बात को लेकर विवाद था?
उत्तर-
मंगम्मा ने अपनी बहू नंजम्मा को पोते को लेकर डाँटा था। एक दिन अपने बेटे की किसी गलती पर उनकी माँ नंजम्मा उसे पीट रही थी। पहले तो कुछ देर मंगम्मा चुप रही किन्तु जब रहा न गया तो मंगम्मा ने बहू से कहाँ- “क्यों री राक्षसी इस छोटे से बच्चे को क्यों पीट रही है ?” बस बहू चढ़ बैठी। खूब सुनाई उसने। जब मंगम्मा ने कहा कि मैं तुम्हारे घरवाले की माँ हूँ तो बहू ने भी कहा-“मैं भी इसकी माँ हूँ। मुझे क्या अकल सिखाने चली है ?” बात बढ़ गई। जब मंगम्मा ने बेटे से शिकायत की तो उसने कहा वह अपने बेटे को मारती है तो तुम क्यों उस झगड़े में पड़ती हो? मंगम्मा ने कहा- ‘बीबी ने तुझ पर जादू फेरा है बस, उसी दोपहर बहू ने मंगम्मा के बर्तन भांडे अलग कर दिए।

दही वाली मंगम्मा Bihar Board प्रश्न 2.
रंगप्पा कौन था और वह मंगम्मा से क्या चाहता था
उत्तर-
रंगजा रंगप्पा के गाँव का आदमी था। बड़ी शौकीन तबीयत का। कभी-कभार जूआ भी खेलता था। जब उसे पता चला कि मंगम्मा बेटे से अलग रहने लगी है तो वह मंगम्मा के पीछे पड़ गया। एक दिन उससे हाल-चाल पूछा और बोला कि मुझे रुपयों की जरूरत है। दे दो लौटा दूँगा। मंगम्मा ने जब कहा कि पैसे कहाँ हैं तो बोला कि पैसे यहाँ-वहाँ गाड़कर रखने से क्या फायदा दूसरे दिन रंगप्पा ने अमराई के पीछे रोककर बाँह पकड़ ली और कहा- ‘जरा बैठो मंगम्मा, जल्दी क्या है ? दरअसल, रंगप्पा लालची और लम्पट दोनों ही था।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 3.
बहू ने सास को मनाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया ?
उत्तर-
बहू को जब पता चला कि रंगप्पा उसकी सास मंगम्मा के पीछे पड़ गया है तो उसके कान खड़े हो गए। कहीं सास के रुपये-पैसे रंगप्पा न ले ले, इस आशंका से वह बेचैन हो गई। तब उसने योजना बनाई और अपने बेटे से कहा कि जा दादी पास तुझे मिठाई देती है न? अगर मेरे पास आया तो पीढूंगी। बस, बच्चा मंगम्मा के पास आकर रहने लगा। मंगम्मा भी उसे चाहती ही थी। एक दिन पोता जिद कर बैठा कि मैं भी बैंगलर चलँग। मंगम्मा क्या करे? माथे पर टोकरा, बगल में बच्चा! मुसीबत हो गई। तब बेटे-बहू ने आकर कहा कि उस दिन गलती हो गई। यूँ कैसे चलेगा? मंगम्मा अब खुशी-खुशी बेटे-बहू के साथ रहने लगी। धीरे-धीरे बहू ने शहर में दही बेचने का धंधा भी अपने हाथ में ले लिया। उसकी मंशा पूरी हो गई।

Dahi Wali Mangamma Bihar Board प्रश्न 4.
इस कहानी का कथावाचक कौन है ? उसका परिचय दीजिए।
उत्तर-
इस कहानी का कथावाचक लेखक की माँ है। लेखक की माँ प्रस्तुत कहानी का द्वितीय केन्द्रीय चरित्र है। कहानी की कथावस्तु लेखक की माँ के द्वारा ताना-बाना बुना गया है। मंगम्मा जब दही बेचने के लिए आती है तो लेखक के घर आती है और बढ़िया दही कुछ-न-कुछ बेचकर जाती है। धीरे-धीरे मगम्मा और लेखक की माँ में घनिष्ठता बढ़ती चली गई।

मगम्मा अपने घर-गृहस्थी का सारा हाल सुनाती है और लेखक की माँ उसे कुछ-न-कुछ सुझाव देती है। सास और बहू के अन्तर्कलह से परिवार बिखर जाता है। बेटे को समस्त सुख अर्पित करनेवाला माँ बहू के आते ही बेटे से अलग हो जाती है। मगम्मा के अन्तर्व्यथा को सुनकर लेखक की माँ का मन भी बोझिल हो जाता है। ममता की मूर्तिमान रहनेवाली नारी दुर्गा क्यों बन जाती है। इसका ज्वलंत उदाहरण लेखक की माँ को देखना-सुनना पड़ता है। जब कोई एक दूसरे को पसंद नहीं करता तब छोटी बातें भी बड़ी हो जाती है। मंगम्मा की बातें सुनते-सुनते लेखक की माँ का हृदय द्रवित हो जाता है।

Dahi Wali Mangamma Ka Question Answer Bihar Board प्रश्न 5.
मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर-
मंगम्मा प्रस्तुत कहानी का प्रमुख केन्द्रीय चरित्र है। कहानी की कथावस्तु इसके इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। पति से विरक्त रहनेवाली मंगम्मा शायद कभी ऐसी नहीं सोची होगी कि उसका बेटा पत्नी के दबाव में आकर उसको छोड़ सकता है। पत्नी का शृंगार पति है। मंगम्मा और उसकी बहू इस तथ्य को भली-भाँति समझती है। मंगम्मा दही बेचकर अपना जीवन-यापन करती है। दही लेकर वह अपने गाँव से शहर जाती है। और उसे बेचकर जो आमदनी होती है। उसी में वह कुछ संचय करती है।

वह जानती है कि पैसा ही उसका अपना जमा पूँजी हो वह भोली-भाली और सहृदयता वाली नमी है। अपने पोते के प्रति उसका अधिक झुकाव हो वस्तुतः मानव मूलधन से कहीं अधिक ब्याज पर जोर देता है। वह अपना सतीत्व बचाये रखना चाहती है। रंगप्पा द्वारा बार-बार उसका पीछे करने पर भी अपने कर्मपथ से विचलित नहीं होती है। पात का अभाव उसे रूप खटकता है। किन्तु पति के प्रति श्लेष मन्त्र भी क्षोभ नहीं है। मंगम्मा सम्पूर्ण भारतीय नारीत्व का प्रतिनिधित्व करती है।

Class 10th Hindi Bihar Board प्रश्न 6.
मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर-
मंगम्मा कथा-नायिका मंगम्मा की बहू है। वह बहुत तेज-तर्रार है। अपने काम में किसी प्रकार की दखलंदाजी सहन नहीं करती। बेटे की किसी गलती पर जब उसे पीटती और मंगम्मा जब मना करती है तो उस पर चढ़ बैठती है। कहती है कि मैं बेटे की माँ हूँ-जैसे चाहूँगी रखुंगी। वह अपने पति पर भी काबू रखती है और तर्क से सबको हराती भी है। मंगम्मा जब मखमल का जाकिट पहनती है तो व्यंग्य भी करती है और लेन-देन की बात उठने पर मंगम्मा के लिए गहने-जेवर महिला को वापस ले लेने को भी कह देती है।

नंगम्मा तेज-तर्रार होने के साथ लोगों की कमजोरी जाननेवाली अत्यन्त चतुर भी है जब उसे मंगम्मा द्वारा रुपया-पैसा किसी और को दिए जाने की आशंका होती है तो अपने बेटे को मंगम्मा के पास रहने के लिए भेज देती है और मौका देखकर पति के साथ जाकर माफी माँग लेती है और अपने यहाँ ले आती है। इतना ही नहीं वह धीरे-धीरे मंगम्मा का दही बेचने का धंधा भी खुद शुरू कर देती है।
इस प्रकार नंजम्मा तेज-तर्रार, दूरदर्शी और व्यवहार कुशल नारी है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 7.
कहानी का सारांश प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कहानी कन्नड़ कहानियाँ (नेशल बुक ट्रस्ट, इंडिया) से सभार ली गयी है। इस कहानी का अनुवाद बी आर नारायण ने किया है। इस कहानी का प्रमुख केन्द्रीय चरित्र मंगम्मा और द्वितीय चरित्र लेखक की माँ है। मंगम्मा पति विरक्ता हो घर के अन्तर्कलह से दुःखी होकर वह जीवन-यापन करने के लिए दही बेचती है। वह गांव से शहर जाती है और दही बेचकर कुछ पैसे संचय करती है। संचय का सत्य है कि सास और बहू में स्वतंत्रता की होड़ लगी रहती है। माँ बेटे पर से अपना हक नहीं छोड़ती और बहू पति पर अधिकार जमाना चाहती है। पोते की पिटाई से क्षुब्ध मंगम्मा अपनी बहू को भला-बुरा कह देती है।

सास और बहू का विवाद घर में अन्तर्कलह को जन्म दे देता है। बहू-और-बेटे मंगम्मा को अलग रहने के लिए विवश कर देते हैं। दही बेचकर किसी तरह जीवन मापन करने वाली मंगम्मा कुछ पैसे इकट्ठा कर लेती है। जब बहू को यह ज्ञात हो जाता है कि उसकी सास रंगप्पा को कर्ज देनेवाली ही तो वह अपने को बेटे को ढाल बनाती है। वह बेटे को दादी के पास ही रहने के लिए उसकाती है। धीरे-धीरे सास और बहू में संबंध सुधरता जाता है। एक दिन मंगम्मा स्वयं बहू को लेकर दही बेचने के लिए जाती है।

लोगों से अपनी बहू का परिचय देती है और कहती है कि अब दही उसकी बहू ही बेचने के लिए आयेगी। वस्तुतः इस कहानी के द्वारा यह सीख दी गई है कि पानी में खड़े बच्चे का पाव खींचनेवाले मगरमच्छ जैसी दशा बहू की है और ऊपर से बाँह पकड़कर बचाने जैसी दशा माँ की होती है।

विस्तुनिष्ठ प्रश्व

I. सही विकल्प चुनें

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 1.
दही वाली मंगम्मा के रचयिता हैं
(क) सात कौड़ी होता
(ख) ईश्वर पेटलीकर
(ग) श्री निवास
(घ) प्रेमचन्द
उत्तर-
(ग) श्री निवास

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 10  प्रश्न 2.
श्री निवास साहित्यकार हैं………………
(क) गुजराती
(ख) कन्नड़
(ग) राजस्थानी
(घ) तमिल
उत्तर-
(ख) कन्नड़

दही वाली मंगम्मा हिंदी कहानी Bihar Board प्रश्न 3.
मंगम्मा बरसों से बारी में दिया करती थी…………….
(क) दूध
(ख) चावल
(ग) मछली
(घ) दही
उत्तर-
(घ) दही

Bihar Board Class 10th Hindi Solutions प्रश्न 4.
नंजमा पंगम्मा की…………”धी।।
(क) बेटी
(ख) माँ
(ग) पुत्र वधू
(घ) सास
उत्तर-
(ग) पुत्र वधू

प्रश्न 5.
श्री निवास का पूरा नाम है……………….
(क) साँवर दइया |
(ख) सुजाता
(ग) आरती वेंकटेश अटयंगर
(घ) सात कोड़ीहोता
उत्तर-
(ग) आरती वेंकटेश अटयंगर

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

प्रश्न 1.
जितना झगड़ा होता है उतनी …………. बढ़ती है।
उत्तर-
उमर

प्रश्न 2.
‘दही वाली मंगम्मा’ कहानी के रचयिता ………… हैं।
उत्तर-
श्री निवास

प्रश्न 3.
श्री निवास का पूरा नाम ………… है।
उत्तर-
भारती वेंकटेश अय्यंगर

प्रश्न 4.
श्री निवास …………… साहित्यकार हैं।
उत्तर-
कन्नड़

प्रश्न 5.
मंगम्मा बरसों से …………… में दही दिया करती थी।
उत्तर-
बारी

प्रश्न 6.
शादी के बाद ……….. अपना रहता है ?
उत्तर-
बंटा

प्रश्न 7.
जब कोई एक-दूसरे को पसंद नहीं करता तो छोटी ……. भी बड़ी हो जाती है।
उत्तर-
बात

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रंगप्पा कौन था और वह क्या चाहता था ?
उत्तर-
रंगप्पा मंगम्मा के गाँव का जुआड़ी था और मंगम्मा से रुपये चाहता था।

प्रश्न 2.
सास-बहू की लड़ाई में मंगम्मा के बेटे ने किसका साथ दिया ?
उत्तर-
सास-बहु की लड़ाई में मंगम्मा के बेटे ने अपनी पत्नी का साथ दिया।

प्रश्न 3.
मंगम्मा और उसकी बहू नंजम्मा में झगड़ा क्यों हुआ?
उत्तर-
मंगम्मा और उसकी बहू नंजम्मा में पोते की पिटाई को लेकर झगड़ा हुआ।

प्रश्न 4.
मंगम्मा की बहू नंजम्मा ने अपनी सास से क्यों समझौता कर लिया ?
उत्तर-
मंगम्मा की बहू नंजम्मा ने अपनी सास से इसलिए समझोता कर लिया कि कहीं सास दूसरे व्यक्ति को रुपये न दं ।

प्रश्न 5.
मंगम्मा कौन थी?
उत्तर-
मंगम्मा बारी में दही बेचने वाली थी।

दही वाली मंगम्मा लेखक परिचय

श्रीनिवास जी का पूरा नाम मास्ती वेंकटेश अय्यंगार है । उनका जन्म 6 जून 1891 ई० में कोलार, कर्नाटक में हुआ था । श्रीनिवास जी का देहावसान हो चुका है । वे कन्नड़ साहित्य के सर्वाधिक प्रतिष्ठित रचनाकारों में एक हैं। उन्होंने कविता, नाटक, आलोचना, जीवन-चरित्र आदि साहित्य की प्रायः सभी विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया। साहित्य अकादमी ने उनके कहानी संकलन ‘सण्णा कथेगुलु’ को सन् 1968 में पुरस्कृत किया । उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। यह कहानी ‘कन्नड़ कहानियाँ’ (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया) से साभार ली गयी है । इस कहानी का अनुवाद बी० आर० नारायण ने किया है।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 5 कवित्त

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 5 कवित्त

 

कवित्त वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

कवि भूषण कविता शिवाजी महाराज Bihar Board Class 12th प्रश्न 1.
भूषण की लिखी कविता कौन–सी है?
(क) पद
(ख) छप्पय
(ग) कवित्त
(घ) पुत्र–वियोग
उत्तर-
(ग)

Kavi Bhushan Shivaji Maharaj Kavita Bihar Board Class 12th प्रश्न 2.
शिवराज भूषण किसकी कृति है?
(क) भूषण
(ख) देव
(ग) बिहारी
(घ) मतिराम
उत्तर-
(क)

Kavi Bhushan Poems On Shivaji Maharaj Bihar Board Class 12th प्रश्न 3.
‘भूषण’ को यह उपनाम किस राजा ने दिया था?
(क) राजा जय सिंह ने
(ख) चित्रकूट के सोलंकी राजा रूद्रशाह ने
(ग) राजामधुकर शाह ने
(घ) राजा छत्रसाल ने
उत्तर-
(ख)

Kavi Bhushan Ne Kis Rajya Ki Prashansa Mein Kavita Likhi प्रश्न 4.
भूषण किस धारा के कवि है?
(क) रीतिमुक्त
(ख) रीति सिद्ध
(ग) रीतिबद्ध
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क)

Kavi Bhushan Poem On Shivaji Maharaj Bihar Board Class 12th प्रश्न 5.
शिवाजी की वीरता का बखान किस कृति में भूषण कवि ने किया है?
(क) भूषण हजारा
(ख) छत्रसाल–दशक
(ग) शिवा बावनी
(घ) भूषण उल्लास
उत्तर-
(ग)

Hindi Book Class 12 Bihar Board 100 Marks Pdf Bihar Board प्रश्न 6.
भूषण के दो नायक कौन–कौन हैं?
(क) छात्रपति शिवाजी और छत्रसाल
(ख) नंद और शकटार
(ग) चन्द्रगुप्त और चाणक्य
(घ) अशोक और कुणाल
उत्तर-
(क)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

12 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 1.
भूषण रीतिकाल के……… धारा के कवि हैं।
उत्तर-
रीतिमुक्त

12th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
भूषण जातीय स्वाभिमान, आत्मगौरव, शौर्य एवं……… के कवि हैं।
उत्तर-
पराक्रम

Bihar Board 12 Hindi Book प्रश्न 3.
भूषण एक रीतिबद्ध………….. कवि ही थे।
उत्तर-
आचार्य

प्रश्न 4.
इंद्र जिमि जंभ पर बाड़व ज्यौं अंभ पर,……….. संदर्भ पर रघुकुल राज है।
उत्तर-
रावन

प्रश्न 5.
पौन बारिबाह पर……….. रतिनाह पर, ज्यौं सहस्रबाहु पर राम द्विजराज हैं।
उत्तर-
संभु

प्रश्न 6.
तेज तम अंस पर कान्ह जिमि कंस पर,
यौं मलेच्छा………. बंस पर सेर सिवराज हैं।
उत्तर-
बंस

कवित्त अति लघु उत्तरीय प्रश्न।

प्रश्न 1.
महाकवि भूषण हिन्दी साहित्य के लिए किस काल के कवि थे?.
उत्तर-
रीतिकाल के।

प्रश्न 2.
भूषण ने मुख्यतः किस भाषा में रचना की?
उत्तर-
ब्रजभाषा में।

प्रश्न 3.
भूषण ने समुदाग्नि से किसकी तुलना की है?
उत्तर-
शिवाजी की।

प्रश्न 4.
छत्रसाल की तलवार ने कौन–सा रूप धारण कर रखा है?
उत्तर-
रौद्र रूप।

कवित्त पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
शिवाजी की तुलना भूषण ने किन–किन से की है?।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में महाकवि भूषण ने छत्रपति महाराज शिवाजी की तुलना इन्द्र, वाड़बाग्नि (समुद्र की आग), श्रीराम, पवन, शिव, परशुराम, जंगल की आग, शेर (चीता) प्रकाश अर्थात् सूर्य और कृष्ण से की है।

प्रश्न 2.
शिवाजी की तुलना भूषण ने मृगराज से क्यों की है?
उत्तर-
महाकवि भूषण ने अपने कवित्त में छत्रपति शिवाजीकी महिमा का गुणगान किया है। महाराज शिवाजी की तुलना कवि ने इन्द्र, समुद्र की आग, श्रीरामचन्द्रजी, पवन, शिव, परशुर.’ जंगल की आग, शेर (चीता), प्रकाश यानि सूर्य और कृष्ण से की है। छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व में उपरोक्त सभी देवताओं के गुण विराजमान थे। जैसे उपरोक्त सभी अंधकार, अराजकता, दंभ अत्याचार को दूर करने में सफल हैं, ठीक उसी प्रकार मृगराज अर्थात् शेर के रूप में महाराज शिवाजी मलेच्छ वंश के औरंगजेब से लोहा ले रहे हैं।

वे अत्याचार और शोषण–दमन के विरुद्ध लोकहित के लिए संघर्ष कर रहे हैं। छत्रपति का व्यक्तित्व एक प्रखर राष्ट्रवीर, राष्ट्रचिन्तक, सच्चे कर्मवीर के रूप में हमारे सामने दृष्टिगत होता है। जिस प्रकार इन्द्र द्वारा यम का, वाड़वाग्नि द्वारा जल का, और घमंडी रावण का दमन श्रीराम करते हैं ठीक उसी प्रकार शिवाजी का भी व्यक्तित्व है।

पवन जैसे बादलों को तितर–बितर कर देता है, शिव के वश में कामदेव हो जाते हैं, सहस्रार्जुन पर परशुराम की विजय होती है, दावाग्नि जंगल के वृक्षों की डालियों को जला देती है; जैसे चीता (शेर) मृग झुंडों पर धावा बोलता है ठीक हाथी पर सवार हमारे छत्रपति शिवाजी मृगराज की तरह सुशोभित हो रहे हैं। जिस प्रकार सूर्य प्रकाश से अंधकार का साम्राज्य विनष्ट हो जाता है, कृष्ण द्वारा कंस पराजित होता है, ठीक उसी तरह औरंगजेब पर हमारे छत्रपति भारी पड़ रहे हैं। हमारे इन देवताओं एवं प्रकृति के अन्य जीवों की तरह गुण संपन्न शिवाजी का व्यक्तित्व है। वे देशभक्ति और न्याय के प्रति अटूट आस्था रखनेवाले भूषण के महानायक हैं। उनके व्यक्तित्व और शीर्ष के आगे शत्रु फीके पड़ गए हैं।

महावीर शिवाजी भूषण के राष्ट्रनायक हैं। इनके व्यक्तित्व के सभी पक्षों को कवि ने अपनी कविताओं में उद्घाटित किया है। छत्रपति शिवाजी को उनकी धीरता, वीरता और न्यायोचित सद्गुणों के कारण ही मृगराज के रूप में चित्रित किया है।

प्रश्न 3.
छत्रसाल की तलवार कैसी है? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में महाराजा छत्रसाल की तलवार सूर्य की किरणों के समान प्रखर और प्रचण्ड है। उनकी तलवार की भयंकरता से शत्रु दल थर्रा उठते हैं।

उनकी तलवार युद्धभूमि में प्रलयकारी सूर्य की किरणों की तरह म्यान से निकलती है। वह विशाल हाथियों के झुण्ड को क्षणभर में काट–काटकर समाप्त कर देती हैं। हाथियों का झुण्ड गहन अंधकार की तरह प्रतीत होता है। जिस प्रकार सूर्य किरणों के समक्ष अंधकार का साम्राज्य समाप्त हो जाता है ठीक उसी प्रकार तलवार की तेज के आगे अंधकार रूपी हाथियों का समूह भी मृत्यु को प्राप्त करता है।

छत्रसाल की तलवार ऐसी नागिन की तरह है जो शत्रुओं के गले में लिपट जाते हैं और मुण्डों की भीड़ लगा देती है, लगता है कि रूद्रदेव को रिझाने के लिए ऐसा कर रही हैं।

महाकवि, भूषण छत्रसाल की वीरता से मुग्ध होकर कहते हैं कि हे बलिष्ठ और विशाल भुजा वाले महाराज छत्रसाल मैं आपकी तलवार का गुणगान कहाँ तक करूँ? आपकी तलवार शत्रु–योद्धाओं के कटक जाल को काट–काटकर रणचण्डी की तरह किलकारी भरती हुई काल को भोजन कराती है।

प्रश्न 4.
नीचे लिखे अवतरणों का अर्थ स्पष्ट करें
(क) लागति लपकि कंठ बैरिन के नागिनि सी,
रुदहि रिझावै दै दै मुंडन की माल को।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ भूषण की काव्यकृति छत्रसाल–दशक से संकलित की गयी कविताओं में से ली गयी है। इन पंक्तियों में महाकवि भूषण ने छत्रसाल की तलवार की प्रशंसा की है।

प्स छत्रसाल की तलवार नागिन के समान है। वह शत्रुओं के गर्दन से लपटकर जा मिलती है और देखते–देखते नरमुंडों की ढेर लगा देती है। मानों भगवान शिव को रिझा रही हो। इस प्रकार छत्रसाल की तलवार की महिमा गान कवि ने किया है। छत्रसाल की तलवार का कमाल प्रशंसा योग्य है। इन पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है। भयंकर रूप के चित्रण के कारण रौद्र रस का प्रयोग झलकता है।

(ख) प्रतिभट कटक कटीले केते काटि काटि,
कालिका सी किलकि कलेऊ देति काल को।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ भूषण कवि की कविता पुस्तक छत्रसाल–दशक द्वारा ली गयी है जो पाठ्यपुस्तक में संकलित है। इस अवतरण में वीर रस के प्रसिद्ध कवि भूषण ने महाराजा छत्रसाल की तलवार का गुणगान किया है। इनकी तलवार की क्या–क्या विशेषताएँ हैं, आगे देखिए।

इन पंक्तियों में कवि के कहने का भाव यह है कि छत्रसाल बुन्देला की तलवार इतने तेज धारवाली है कि पलभर में ही शत्रुओं को गाजर–मूली की तरह काट–काटकर समाप्त कर देती है। साथ ही काल को भोजन भी प्रदान करती है। यह तलवार साक्षात् कालिका माता के समान है। वैसा ही रौद्र रूप छत्रसाल की तलवार भी धारण कर लेती है।

यहाँ अनुप्रास और उपमा अलंकार की छटा निराली है।

प्रश्न 5.
भूषण रीतिकाल की किस धारा के कवि हैं, वे अन्य रीतिकालीन कवियों से कैसे विशिष्ट हैं?
उत्तर-
महाकवि भूषण रीतिकाल के एक प्रमुख कवि हैं, किन्तु इन्होंने रीति–निरूपण में शृंगारिक कविताओं का सृजन किया। उन्होंने अलंकारिकता का प्रयोग अपनी कविताओं में अत्यधिक किया है।

रीति काव्य के कवियों की प्रवृत्तियों के आधार पर दो भागों में बाँटा जा सकता है–
(i) मुख्य प्रवृत्तियाँ–
(क) रीति निपुंज तथा
(ख) शृंगारिकता।

(ii) गौण प्रवृत्तियाँ–
(क) राज प्रशस्ति (वीर काव्य)
(ख) भक्ति तथा
(ग) नीति।

(क) रीति–निरूपण के आधार पर रीति कवियों के दो वर्ग हैं–
(i) सर्वांग निरूपण तथा
(ii) विशिष्टांग निरूपक।

(i) सर्वांग निरूपण : काव्य के समस्त अंगों पर विवेचन किया है। इसके तीन भेद हैं–
(a) समस्त रसों के निरूपक,
(b) शृंगार रस निरूपक
(c) श्रृंगार रस के आलंबन नायक–नायिकाओं के भेदोपभेदों के निरूपक।

अलंकार निरूपक आचार्यों में मतिराम, भूषण, गोप, रघुनाथ, दलपति आदि और भी कुछ कवि आते हैं।

इस प्रकार भूषण श्रृंगार रस के आलंबन नायक–नायिकाओं के भेदोपभेदों के निरूपक रीति काव्य परंपरा के कवि हैं। अलंकार निरूपक रीति के रूप में भूषण को ख्याति प्राप्त है। महाकवि भूषण का आर्विभाव रीतिकाल में हुआ। उस समय की समस्त कविताओं का विषय था–नख–शिख वर्णन और नायिका भेद। अपने आश्रयदाताओं को प्रसन्न करना और वाहवाही लूटना उनकी कविता का उद्देश्य था। अतः तब कविता स्वाभाविक उद्गार के रूप में नहीं होती थी, वरन् धनोपार्जन के साधन के रूप में थी।

ऐसे ही समय में महाकवि भूषण का आविर्भाव हुआ। परन्तु उनका उद्देश्य कुछ और था। अतएव देश की करुण पुकार से उनका अंतर्मन गुंजरित हुआ। फलस्वरूप उनके काव्य में श्रृंगार की धारा प्रवाहित नहीं हुई वरन् वीर रस की धारा फूट पड़ी। ऐसी परिस्थिति में कहा जाएगा कि वे तत्कालीन काव्यधारा के विरुद्ध प्रतीत होते हैं। परन्तु उनकी महत्त सुरक्षित कही जाएगी। इसका एकमात्र कारण यही है कि उनकी कविता कवि–कीर्ति संबंधी एक अविचल सत्य का दृष्टांत है।

आविर्भाव के विचार से वे रीतिकाल में आते हैं। किन्तु विषय के दृष्टिकोण से उन्हें वीरगाथा–काल में ही मानना चाहिए। कुछ लोग उन्हें चाटुकार जाटों की श्रेणी में रखते हैं। किन्तु भूषण के प्रति यह धीर अन्याय होगा। इसका कारण यह है कि श्रृंगार प्रधानकाल में भी वीर रस की उद्भावना द्वारा जन जीवन में जागरण का मंत्र फूंकना उनके स्वतंत्र हृदय का परिचायक है। उनकी काव्य की रचना देश की नब्ज पहचान कर हुई है। निःसन्देह उनकी रचना युग–परिवर्तन का आह्वान करती है।।

भूषण कई राजाओं के यहाँ गए किन्तु कहीं भी उनका मन नहीं लगा। उनका मन यदि कहीं लगा तो एकमात्र छत्रपति शिवाजी के दरबार में ही। ऐसे तो छत्रसाल के यहाँ भी उन्हें सम्मान मिला था। उसी कारण में उन्होंने लिखा था–”शिवा को बखानों कि बखानों को छत्रसाल को।”

भूषण का काव्य वीर काव्य की परंपरा में आता है। यहाँ ओज की प्रधानता है। भूषण के काव्य के महानायक हैं–छत्रपति शिवाजी महाराज।

रीतिकालीन कवियों की तरह भूषण खुशामदी कविं नहीं बल्कि राष्ट्रीयता के प्रबल पक्षधर हैं। इनकी कविताओं में भारतीयता, हिन्दुत्व और लोक मंगल की कामना है। इसी कारण इन्हें हिन्दू राष्ट्र का जातीय कवि भी कहा जाता है।

इनकी तीन प्रमुख रचनाएँ हैं–

  • शिवराज भूषण,
  • शिव बावनी
  • छत्रसाल दशक।

भूषण की काव्य भाषा ब्रजभाषा है। इसे ब्रजभाषा नहीं कह सकते हैं। विभिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल–जोल से इसे खिचड़ी भाषा भी कह सकते हैं। शब्दों को तोड़–मरोड़ कर अत्यधिक प्रयोग किया है। जिसके कारण उनका स्वाभाविक रूप बिगड़ गया है। मित्र बन्धुओं ने इसलिए कहा है कि भूषण की भाषा सशक्त, भाव–प्रकाशन में प्रभावयुक्त और सुव्यवस्थित है। देशज, विदेशज, तद्भव और तत्सम रूपों का प्रयोग धड़ल्ले से किया है।

ये एक सफल कवि के रूप में हिन्दी जगत में समादृत है। इनकी कविताओं में लोकोक्तियों तथा मुहावरों का प्रयोग भी हआ है। ओज गुण संपन्न इनकी काव्य कृतियाँ हिन्दी की धरोहर है। भूषण की कविता में सुमेरु डोल रहा है। सागर मथा जा रहा है। भूषण और शिवाजी दोनों ही व्यक्ति नहीं है बल्कि भाव के क्षेत्र में जो कविवर भूषण है, वही रणक्षेत्र में शिवाजी का रूप धारण कर लेते हैं।

शिवराज भूषण में 105 अलंकारों का प्रयोग हुआ जिसमें 99 अक्कर, 4 शब्दालंकार तथा शेष दो चित्र ओर संकर नामक अलंकार है। विवेचन क्रम एवं लक्षणों को देखने से प्रतीत होता है कि ग्रन्थाकार जयदेव के चन्द्रलोक और मतिराम कालालितलाम का ही आश्रम लिया है।

आचार्य कर्म में भूषण को कुछ लोग भले ही असफल कवि के रूप में मानते हैं किन्तु कवि–कर्म में उतने ही सफल हुए हैं। विषय के अनुरूप ओजपूर्ण वाणी का प्रयोग इनमें सर्वत्र मिलता है। भूषण की दृष्टि व्यापक थी। पूरे राष्ट्र को एक इकाई के रूप में वे देखते थे। भूषण के काव्य में सुव्यक्त होनेवाली राष्ट्रीयता की यह चेतना रीतिकालीन साहित्य के उपलब्ध साक्ष्यों में सर्वत्र विद्यमान है।

प्रश्न 6.
आपके अनुसार दोनों छंदों में अधिक प्रभावी कौन है और क्यों?
उत्तर-
हमारे पाठ्य–पुस्तक दिगंत भाग–2 में संकलित के दोनों कवित्त छंदों में अधिक प्रभावकारी प्रथम छंद है। इसमें महाकवि भूषण ने राष्ट्रनायक छत्रपति शिवाजी के विरोचित गुणों का गुणगान किया है। कवि ने अपने कवित्त में छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व के गुणों की तुलना अनेक लोगों से करते हुए लोकमानस में उन्हें महिमा मंडित करने का काम किया है।

कवि ने कथन को प्रभावकारी बनाने के लिए अनुप्रास और उपमा अलंकार का प्रयोग कर अपनी कशलता का परिचय दिया है। वीर रस में रचित इस कवित्त में अनेक प्रसंगों की तुलना करते हुए शिवाजी के जीवन से तालमेल बैठाते हुए एक सच्चे राष्ट्रवीर के गुणों का बखान किया है। इन्द्र, राम, कृष्ण, परशुराम, शेर, कृष्ण, पवन आदि के गुण कर्म और गुण धर्म से शिवाजी के व्यक्तित्व की तुलना की गयी है। वीर शिवाजी शेरों के शेर हैं, जिन्होंने अपने अभियान में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

भाषा में ओजस्विता, शब्द प्रयोग में सूक्ष्मता कथन के प्रस्तुतीकरण की दक्षता भूषण के कवि गुण हैं। अनेक भाषाओं के ठेठ और तत्सम, तद्भव शब्दों का भी उन्होंने प्रयोग किया है।

कवित्त भाषा की बात।

प्रश्न 1.
प्रथम छंद में कौन सा रस है? उसका स्थाई भाव क्या है?
उत्तर-
प्रथम छंद में वीर रस है उसका स्थायी भाव उत्साह है।

प्रश्न 2.
प्रथम छंद का काव्य गुण क्या है?
उत्तर-
प्रथम छंद का काव्य गुण ओज गुण है।

प्रश्न 3.
द्वितीय छंद में किस रस की अभिव्यंजना हुई है? उस रस का स्थाई भाव क्या है?
उत्तर-
द्वितीय छंद में रौद्र रस की अभिव्यंजना हुई है.। रौद्र रस का स्थाई भाव क्रोध है।

प्रश्न 4.
प्रथम छंद में किन अलंकारों का प्रयोग हुआ है?
उत्तर-
प्रथम छंद में अनुप्रास, उत्प्रेक्षा अलंकारों का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 5.
‘लागति लपकि कंठ बैरिन के नागिनी सी’–इनमें कौन–सा अलंकार है?
उत्तर-
लागति लपकि कंत बैरिन के नागिनी सी’ में उपमा अलंकार है।

प्रश्न 6.
दूसरे छंद से अनुप्रास अलंकार के उदाहरण चुनें।.
उत्तर-
दूसरे छंद से अनुप्रास अलंकार के उदाहरण निम्नलिखित हैं–तम–तोम मैं, म्यान ते मयूखें, लागति लपकि, रुदहि रिझावै, मुंडन की माल, छितिपाल छत्रसाल, कटक कटीले केते काटि काटि, किलकि कलेऊ आदि।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें भानु, रुद्र, चीता, इन्द, तम, तेज, मृग, काल, कंठ, भट
उत्तर-

  • भानु–सूर्य, रवि, भास्कर, दिवाकर
  • रुद्र–शंकर, त्रिपुरारि, त्रिलोचन
  • चीता–बाघ
  • इन्द्र–सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, देवेश
  • तम–अंधकार, अँधेरा, तम, तिमिर
  • तेज–प्रताप, महिमा, शूरता
  • मृग–हिरण, तीव्रधावक
  • काल–समय, यमराज, शिव, मुहूर्त
  • कंठ–गला भट–योद्धा, रणवीर

प्रश्न 8.
‘महाबाहु’ में ‘महा’ उपसर्ग है, इस उपसर्ग से पाँच अन्य शब्द बनाएँ।
उत्तर-
महाबली, महान, महात्मा, महामना, महाराज, महाकाल, महाशय।।

प्रश्न 9.
‘छितिपाल’ में पाल प्रत्यय है, इस प्रत्यय से युक्त छह अन्य शब्द बनाएँ।
उत्तर-
द्वारपाल, राज्यपाल, रामपाल, सतपाल, जयपाल, धर्मपाल, गोपाल।

कवित्त कवि परिचय भूषण (1613–1715)

महान् कवि भूषण के जन्म–मृत्यु के बारे में विद्वानों में मतभेद है। उनका जन्म 1613 में तिकवाँपुर, कानपुर उत्तरप्रदेश माना जाता है। उनका वास्तविक नाम घनश्याम था। ‘भूषण’ उनकी उपाधि है जो चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्र ने उन्हें दी। ये कानपुर के पास तिकवाँपुर के रहनेवाले थे और जाति के कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। इनके पिता का नाम रत्नाकर त्रिपाठी था। भूषण को रीतिकाल के प्रसिद्ध कवियों–चिन्तामणि तथा मतिराम का भाई माना जाता है। किन्तु कई विद्वानों का इसमें संदेह है। भूषण कई राजदरबारों में गये, किन्तु उन्हें सबसे अधिक सन्तुष्टि शिवाजी के दरबार में मिली। इन्हें शिवाजी के पुत्र शाहूजी एवं पन्ना के बुदेला राजा छत्रसाल के दरबार में रहने का सौभाग्य मिला। सन् 1715 में उनका देहावसान हुआ।

भूषण की तीन प्रसिद्ध रचनाएँ हैं––शिवराज भूषण, शिवाबावनी तथा छत्रसाल दशक। इनमें “शिवराज भूषण’ उनकी कीर्ति का आधार है। भूषण की वाणी में ओज और वीरता के भाव व्यक्त हुए हैं। उन्होंने अपने आश्रयदाताओं–शिवाजी तथा छत्रसाल की प्रशंसा में बहुत सुन्दर कवित्त लिखे हैं। भूषण की भाषा ओजमयी है। उनके शब्द सैनिकों की भाँति दौड़ते–भागते प्रतीत होते हैं। शब्दों की ध्वनि को सुनकर ही लगता है कि हाथी–घोड़े दौड़ रहे हैं।

भूषण ने अपनी कविता में अलंकारों का बहुत सुन्दर प्रयोग किया है। अनुप्रास तो उनकी हर पंक्ति में बिखरा पड़ा है। रूपक, उपमा, यमक के उदाहरण भी देखते बनते हैं।

कविता का भावार्थ 1.
इन्द्र जिमि जंभ पर बाड़व ज्यों अंभ पर,
रावन संदभ पर रघुकुल राज है।
पौन बारिबाह पर संभु रतिनाह पर,
ज्यौं सहस्रबाहु पर सेर द्विवराज है।
दावा दुम–दंड पर चीता मृग–झुंड पर,
भूषण बितुंड पर जैसे मृगराज है।
तेज तम अंस पर कान्ह जिमि कंस पर,
ज्यों मलेच्छ बंस पर सेर सिवराज है।।

प्रसंग–प्रस्तुत कवित्त कवि भूषण द्वारा रचित है। इसमें शिवाजी वीरता का बखना किया गया है।

व्याख्या–शिवाजी के शौन का बखना करते हुए कवि भूषण कहते हैं कि शिवाजी का मलेच्छ वंश पर उसी प्रकार राज है जिस प्रकार इन्द्र का यम पर वाडवाग्नि अर्थात् समुद्र की अग्नि का पानी पर तथा राम का दंभ से भरे रावण पर है। अर्थात् शिवाजी को इन्द्र, समुद्राग्नि व राम के समान बताकर उनका शौर्य वर्णन किया गया है।

जिस प्रकार जंगी की आग का पेड़ों के झुंड पर तथा चीता मृगों के झुंड पर तथा हाथी. के ऊपर सिंह का राज है। उसी प्रकार छत्रपति शिवाजी दवाग्नि के समान विशाल, हाथी के समान बलशाली तथा चीते के समान शौर्यवान है।

जैसे उजाले का अंधेरे पर तथा कृष्ण का कंस पर राज है उसी प्रकार छत्रपति शिवाजी का मलेच्छ वंश पर राज है अर्थात् वे अत्यन्त बलशाली है।

बिशेष–

  • छत्रपति शिवाजी के शौर्य का विभिन्न उपमानों द्वारा वर्णन किया गया है।
  • ब्रजभाषा का सुन्दर प्रयोग द्रष्टव्य है।
  • विषयानुरूप शब्द चयन है।
  • ओज गुण विद्यमान है।।
  • रघुकुल राज, दावा द्रुम–दंड, तेज तम, ‘सेर सिवराज’ में अनुप्रास अलंकार है।

2. निकसत म्यान ते मयूबँ, प्रल–भानु कैसी,
फारै तम–तोम से गयंदन के जाल को।
लागति लपकि कंठ बैरिन के नागिनि सी,
रुदहि रिझावै दै दै मुंडन की माल को।।
लाल छितिपाल छत्रसाल महाबाहु बली,
कहाँ लौं बखान करौं तेरी करवाल को।
प्रतिभट कटक कटीले केते काटि काटि,
कालिका सी किलकि कलेऊ देति काल को।

प्रसंग–प्रस्तुत कवित्त कवि भूषण द्वारा रचित है। इसमें छत्रसाल की वीरता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या–कवि भूषण ने छत्रसाल की वीरता का वर्णन करते हुए कहा है कि युद्धभूमि में छत्रसाल की तलवार म्यान से इस प्रकार निकली जैसे प्रलय के सूर्य की तीखी (तेज) किरणें निकलती हैं। यह तलवार हाथी के ऊपर पड़ी हुई लोहे की जालियों को इस प्रकार काट रही है जैसे अंधेरे को चीर कर सूर्य निकल रहा है। उनकी तलवार रूपी नागिन शत्रुओं के गले में मृत्यु के समान लिपट रही है।

वह मृत्यु के देवता शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शत्रुओं के सिरों की माला को अर्पित कर रही है। अर्थात् युद्धभूमि में शत्रुओं के सिरों को धड़ से अलग कर रही है। राजा छितिपाल के शक्तिशाली पुत्र छत्रसाल की तलवार का वर्णन कहाँ तक करूँ अर्थात् यह अत्यन्त प्रलयंकारी है। वह शत्रुओं के समूह के समह नष्ट कर रही है। वह शत्रुओं को काटकर कालिका देवी को सुबह का नाश्ता प्रदान कर रही है। अर्थात् वह मृत्यु की देवी को प्रसन्न करने के लिए शत्रुओं का संहार कर रही है।

विशेष–

  • छत्रसाल के शौर्य का वर्णन किया गया है।
  • ब्रजभाषा का सुन्दर प्रयोग है।
  • विषयानुसार भाषा का चयन है।
  • पद्यांश में रौद्र रस तथा ओज गुण निहित है।
  • नागिन सी’, ‘कालिका सी किलिक में’ उपमा अलंकार पूरे पद्यांश में अनुप्रास अलंकार ‘काटि–काटि’ में पुनरुक्ति प्रकाश है।

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 2 जन्तुओं में पोषण

Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 2 जन्तुओं में पोषण Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Science Solutions Chapter 2 जन्तुओं में पोषण

Bihar Board Class 7 Science जन्तुओं में पोषण Text Book Questions and Answers

अभ्यास

जंतुओं में पोषण Class 7 Bihar Board प्रश्न 1.
खाली स्थानों को भरिए:
(a) मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि ……………….. है।
(b) मनुष्य में भोजन का पाचन ……………….. में शुरू होकर ……………….. में पूरा होता है।
(c) आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं ……………….. का प्राव होता है जो भोजन क्रिया करते हैं।
(d) मनुष्य में पोषण के मुख्य चरण ……………….. और ……………….. हैं।
(e) अमीबा अपने भोजन को ……………….. की सहायता से ग्रहण करता है।
उत्तर:
(a) यकृत
(b) मुख गुहिका, मलद्वार
(c) श्लेष्मा
(d) मुख गुहिका. ग्रास नली, आमाशय, छोटी आंत और बड़ी आँत ।

Bihar Board Class 7 Science Solution In Hindi प्रश्न 2.
सही विकल्प पर (✓) का चिह्न लगाइए –

(a) कुतरने में सहायता करने वाला दाँत –
(i) कृन्तक
(ii) रदनक
(iii) अग्रचर्वणक
(iv) चर्वणक
उत्तर:
(ii) रदनक

(b) लार, मंड (स्टार्च) को बदलता है –
(i) माल्टाज
(ii) ग्लूकोज
(iii) संलुलांज
(iv) लैक्टोज
उत्तर:
(ii) ग्लूकोज

(c) पित्त रस का स्राव होता है –
(i) यकृत
(ii) अग्न्याशय
(iii) आमाशय
(iv) छोटी आँत
उत्तर:
(i) यकृत

(d) वसा का पूर्णरूपेण पाचन होता है –
(i) आमाशय
(ii) अग्न्याशय
(ii) बड़ी आँत
(iv) छोटी आँत ।
उत्तर:
(iv) छोटी आँत ।

(e) जल का अवशोषण मुख्यतः होता है
(i) ग्रसिका
(ii) बड़ी आँत
(iii) छोटी आँत
(iv) आमाशय
उत्तर:
(ii) बड़ी आँत

Bihar Board Class 7 Science Solution प्रश्न 3.
सत्य और असत्य कथनों को चिह्नित कीजिए
(i) आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्राव होता है।
(i) पित्त रस में प्रोटीन का पाचन होता है।
(iii) प्रोटीन का पाचन मुख से आरंभ हो जाती है।
(iv) जुगाली करने वाले निगली हुई घास को पुनः अपने मुख में लाकर धीरे-धीरे चबाते हैं।
उत्तर:
(i) सत्य
(ii) असत्य
(iii) असत्य
(iv) सत्य
(v) असत्य ।

Jantuo Me Poshan Class 7 Bihar Board प्रश्न 4.
कॉलम A के कथनों का मिलान कॉलम B से कीजिए –
Science Class 7 Bihar Board
उत्तर:
(a) (iii)
(b) (iv)
(c) (v)
(d) (ii)
(e) (i)

जंतुओं में पोषण कक्षा 7 Bihar Board प्रश्न 5.
आहारनाल के किन भागों द्वारा ये कार्य होते हैं –

  1. ‘भोजन का चबाना
  2. जीवाणु नष्ट होना
  3. उपयोगी पदार्थों का अवशोषण
  4. मल का निकास।

उत्तर:

  1. मुख गुहिका
  2. आमाशय
  3. बडी आँत
  4. मलद्वार ।

Bihar Board Class 7 Science Book Solutions प्रश्न 6.
एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. मानव शरीर में पाया जानेवाला कठोरतम पदार्थ ।
  2. पचे भोजन का अवशोषण करने वाली अँगली जैसी संरचनाएँ।
  3. घास खाने वाले जन्तुओं में सेलुलोज पाचन का स्थान ।
  4. अमीबा में भोजन पाचन का स्थान ।
  5. भोजन के अवयवों से उपयोगी पदार्थ संश्लेषण की प्रक्रिया ।

उत्तर:

  1. इनेमल
  2. दीर्घराम या रसांगुल
  3. रूमेन
  4. खाद्यधानी
  5. जटिल पदार्थों का बनना ।

Bihar Board Solution Class 7 Science प्रश्न 7.
कारण बताइए
(a) मनुष्य में सेलुलोज का पाचन नहीं होता है।
(b) अमीबा के खाद्यधानी में भोजन का पाचन होता है।
(c) वायुनली तथा भोजन नली का संबंध ग्रसनी से है फिर भी भोजन वायुनली में नहीं जाता है।
उत्तर:
(a) मनुष्य में सेलुलोज का पालन नहीं होता क्योंकि मनुष्य के शरीर में रूमन नहीं होता है और जगाल करने की प्रक्रिया नहीं करता है। सेलुलोज का पाचन जीवाणुओं की सहायता से रूमेन में होता है । गाय, भैंस, बकरी घास चरने वाले जानवरों में रूमेन होता है और सेलुलोज जो एक प्रकार का कार्वोहाइड्रेट है, का पाचन होता है।

(b) भोजन को पकड़ने के लिए अमीबा अपने पादाभों को विकसित करता – है और चारों तरफ घेरकर विकसित पादाभ आपस में मिलकर एक हो जाते हैं और भोजन खाद्यधानी में बंद होकर कोशिका के अंदर नला जाता है जहाँ पाचक रसों का स्राव होता है और खाद्य पदार्थ सरल पदार्थों में बदल जाता है। इस प्रकार भोजन का पाचन होता है।

(c) वायुनली और भोजन नली का संबंध ग्रसनी से है। वायनली के ऊपर एक मांसल संरचना होती है जिसे इपीग्लोटिस कहते हैं। यह वाल्व की तरह – काम करती है। जब भोजन करते हैं तो वायुनली को ढंक लेती है और भोजन नली में चला जाता है। तेजी से खाने या बातें करने पर भोजन वायु नली में कुछ कण चले जाते हैं जिससे छींक का हिचकी आती है।

Bihar Board Class 7 Science Chapter 2 प्रश्न 8.
छोटी आंत में किन ग्रंथियों के स्राव आते हैं। पाचन में उनकी क्या भूमिका है?
उत्तर:
छोटी आंत में यकृत अग्न्याशय ग्रंथियाँ होती हैं यकृत आमाशय के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर स्थित है इससे पित्तरस स्रावित होती है। पित्तरस वसा का पाचन करती है। अग्न्याशय यह अमाशय के ठीक नीचे रहता है। इससे अग्न्याशिक रस निकलता है जो वसा, कार्बोहाइड्रेट और वसा को सरल रूप में परिवर्तित करती है। छोटी आंत की दीवारों से भी स्रावित आँत रस जो आंशिक रूप से पचे भोजन को पूर्ण रूप से पचा देता है।

Bihar Board Class 7th Science Solution प्रश्न 9.
अमीबा में पोषण की प्रक्रिया मानव से भिन्न है? क्यों?
उत्तर:
मानव बहुकोशिकीय जीव है जबकि अमीबा एक कोशिकीय जीव है। मानव में भोजन का पाचन कई चरणों में. जैसे मख गहिका में. ग्रासनली. अमाशय छोटी आँत, मलाशय और गुदा द्वार, पचित भोजन का रसगुलों द्वारा ग्रहण एवं मिलने की प्रक्रिया होती है। अवशोषित भोजन रुधिर वाहिकाओं की सहायता से शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचता है और जटिल पदार्थों का निर्माण होता है। अमीबा में भोजन ग्रहण पादाभ की सहातया से होता है और भोजन का पाचन खाद्यधानी में होता है। पाचक रसों का स्राव खाद्यधानी में ही होता है और सरल पदार्थों में बदलकर भोजन अवशोषित कर अमीबा की वृद्धि संख्या में मदद करता है।

Bihar Board Class 7 Science प्रश्न 10.
मनुष्य में पाये जाने वाले दाँत तथा उनके कार्यों को लिखें।
उत्तर:
मनुष्य में पाये जाने वाले मुख्य दाँत कृतक, रदनक, अग्रचवर्णक और चवर्णक।

  • कंतक – कृतक दाँते आगे की ओर चौड़ा होता है जो काटने के काम आता है।
  • रदनक – रदनक दाँत भोजन को फाड़ने का कार्य करता है।
  • अग्रचवर्णक – कटे हुए भोजन को पीसने और चबाने का कार्य करता है।
  • चवर्णक – ये भी भोजन को अच्छी तरह से चबाने और पीसने का कार्य करता है।

Bihar Board Class 7 Science Book प्रश्न 11.
मनुष्य के पाचनतंत्र का नामांकित चित्र बनाए
उत्तर:
Class 7 Bihar Board Science Solution

Bihar Board Class 7 Science जन्तुओं में पोषण Notes

पोषण सभी जन्तुओं की अनिवार्य आवश्यकता है। पोषण के लिए जीव पौधों पर निर्भर करते हैं। जीव को अपने स्वास्थ्य, वृद्धि और विकास के लिए पोषण की जरूरत होती है। जीव-जन्तुओं के पोषण में पोषण की अनिवार्यता भोजन अंतर्ग्रहण का तरीका और शरीर में उपयोग करना है। भिन्न-भिन्न जीव-जन्तुओं का भोजन और पोषण का तरीका भिन्न-भिन्न है। पोषण एक जटिल प्रक्रिया है। पोषण में भोजन का पाचन, भोजन ग्रहण, अवशोषण शरीर का विकास, वृद्धि और अंत में अपचित भोजन का निष्कासन होता है। स्वपोषी और विषमपोषी मुख्य दो वर्गों में जन्तुओं को बाँटा गया है। जीव-जन्तुओं की शारीरिक बनावट में अन्तर होता है । भोजन ग्रहण करने का तरीका अलग होता है, कुछ फूलों के रस चूसते हैं तो कोई कीड़े-मकोड़े को चुनकर तो कोई चबाकर तो कोई निगलकर अपना भोजन ग्रहण करते हैं।

Class 7 Science Bihar Board

मनुष्य भी जीव है। अन्य जीवों की तरह मनुष्य भी भोजन ग्रहण करता है, ग्रहित भोजन का पाचन, पचित भोजन का अवशोषण शारीरिक विकास और निष्कासन करता है। मनुष्य पाचन तंत्र निम्नलिखित प्रक्रियाओं के बाद होता है जो इस प्रकार है-सबसे पहले भोजन मुख गुहिका में जाता है जहाँ भोजन को दाँतों द्वारा काटकर चबाकर, लार ग्रंथी से निकले लार द्वारा गीला होकर ग्रास नली से होते हुए अमाशय में जाता है। अमाशय के आंतरिक भाग में पाचक रस, शलेष्मा तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सावित होता है ! श्लेष्मा आमाशय के आंतरिक स्तर को सुरक्षा प्रदन करता है। जीवाणुओं को नष्ट करने पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मदद करता है।

Bihar Board 7th Class Science Solution

पाचक रस भोजन के प्रोटीन भाग को अमीनो अम्ल में तोड़ देता है। जब भोजन का पाचन पूरा हो जाता है तो भोजन छोटी आँत में जाता है। छोटी आँत लगभग 6-7 मीटर लंबी नली है। इसमें यकृत (Liver) अग्न्याशय (Pancreas) और स्वयं की दीवारों से स्राव होता है। यकृत मानव की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो अमाशय के दाहिनी ओर है, पित्तरस को सावित करती है जहाँ वसा का पाचन होता है।

अमाशय के नीचे अग्न्याशय हल्के पीले रंग की ग्रंथि हैं इससे स्रावित द्रव प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और वसा को छोटे रूपों में बदल देती है। छोटी आंत से निकली स्रावित पचे हुए भोजन को पूर्णतः पचा देती है और छोटी आंत इस प्रकार छोटी आँत में भोजन कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज प्रोटीन अमीनो अम्ल और वसा, वसा अम्ल में परिणत हो जाता है और स्वांगीकरण की क्रिया होती है। जो भोजन नहीं पचता वह बड़ी आँत में जाता है। इसकी लम्बाई लगभग 1.5 मीटर होती है। यहाँ अपचित भोजन जल और कुछ लवणों का अवशोषण होता है और बचा पदार्थ मलाशय में और फिर गुदा द्वारा मल के रूप में बाहर निकलता है।

इसी प्रकार घास चरने वाली गाय, भैंस, बकरी का भी पाचन तंत्र होता है जो मानव से भिन्न होता है। घास में सेलुलोज अधिक पाया जाता है जो कार्बोहाइड्रेट है। घास खाने वाले पशु का आमाशय विशेष प्रकार का होता है। इसे चार भागों में बाँटा गया है। रूमेन प्रथम अमाशय जहाँ भोजन इकट्ठा होता है और भोजन का आंशिक पाचन होता है। ये जुगाल करते हैं और सेलुलोज का पाचन करते हैं। अमाशय के बाद भोजन छोटी और उसके बाद बड़ी आँत में जाता है। छोटी और बड़ी आँत के बीच अंधनाल होता है जहाँ जीवाणु होते हैं । जहाँ सेलुलोज का पाचन होता है। कुछ लवणों को अवशोषित कर अपचित पदार्थ मलाशय में जमा होता है और गुदा द्वारा समय-समय पर बाहर निकलता है।

अमीबा एक कोशिकीय प्राणी है। इसके कोशिका के चारों ओर कोशिका झिल्ली होती है। इसके अन्दर द्रव रहता है जिसे कोशिका द्रव कहते हैं। इसमें एक केन्द्रक’ और खाली स्थान जिसे धानियाँ कहते हैं, रहता है। अमीबा अपना लगातार आकार और स्थिति बदलता है। एक पादप जो भोजन पकड़ने में सहायता करता है।

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जब अमीबा के पास भोजन होता तो पादाभ की सहायता से इसे जकड़ लेता है और आपस में मिलकर एक हो जाता है और भोजन कोशिका के अन्दर चला जाता है। खाद्यधानी में पाचक रस निकलता है जो भोजन को सरल बना देता है और पचा भोजन अवशोषित करता है। अपचा पदार्थ कोशिका द्वारा बाहर हो जाता है। इसकी वृद्धि, विकास, संख्या में वृद्धि तेजी से होती है।

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन

Bihar Board Class 11 History मूल निवासियों का विस्थापन Textbook Questions and Answers

 

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

मूल निवासियों का विस्थापन के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 History प्रश्न 1.
दक्षिणी और उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों के बीच के फों (अन्तर) से सम्बन्धित किसी भी बिन्दु पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमेरिका के मूल निवासियों के विपरीत उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी बड़ी पैमाने पर खेती नहीं करते थे। वे अपने आवश्यकता से अधिक अत्पादन करते थे। इसलिए वे दक्षिणी अमेरिका की तरह राज्य और सम्राज्य स्थापित न कर सके।

मूल निवासियों का विस्थापन प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 History प्रश्न 2.
आप उन्नीसवीं सदी के संयुक्त राज्य अमेरिका में अंग्रेजी के उपयोग के अतिरिक्त अंग्रेजों के आर्थिक और सामाजिक जीवन की कौन-सी विशेषताएं देखते हैं?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों (मुख्यतः अंग्रेजों) के संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर बसने तथा अपना विस्तार करने के कारण राज्य में अंग्रेजी भाषा का प्रचलन काफी बढ़ गया। इसके अतिरिक्त वहाँ बसे अंग्रेजों के आर्थिक और सामाजिक जीवन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं –

1. जमीन के प्रति यूरोपीय लोगों का विचार मूल निवासियों से अलग था। ब्रिटेन और फ्रांस से आए कुछ प्रवासी ऐसे थे जो अपने पिता का बड़ा पुत्र न होने के कारण पिता की सम्पत्ति के उत्तराधिकारी नहीं बन सकते थे। अत: वे अमेरिका में भूमि के स्वामी बनना चाहते थे।

2. जर्मनी, स्वीडन और इटली जैसे देशों से ऐसे अप्रवासी आए जिनकी जमीनें बड़े किसानों के हाथों में चली गई थीं। वे ऐसी जमीन चाहते थे, जिसे वे अपना कह सकें।

3. पोलैंड से आए लोगों को प्रेयरी चरागाहों में काम करना अच्छा लगता था, जो उन्हें। अपने देश के स्टेपीज की याद दिलाती थी।

4. अमेरिका में बहुत कम कीमत पर बड़ी सम्पत्तियाँ खरीद पाना आसान था। अत: अंग्रजों ने बड़े-बड़े भूखंड खरीद लिए। उन्होंने जमीन की सफाई की और खेती का विकास किया। उन्होंने मुख्य रूप से कपास और धान जैसी पसलें उगाईं। इसका कारण यह था कि ये फसलें यूरोप में नहीं उगाई जा सकती थीं। इसीलिए वहाँ ऊंचे मुनाफे पर बेचा जा सकता था।

5. अपने विस्तृत खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए अन्होंने शिकार द्वारा उनका सफाया कर दिया। 1873 में कंटीले तारों की खोज के बाद खेत पूरी तरह सुरक्षित हो गए।

6. अंग्रेजों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी बस्तियों के विस्तार के लिए खरीदी गई जमीन से वहाँ के मूल निवासियों को हटा दिया। उनके साथ अपनी जमीनें बेच देने की संधियाँ की गई और उन्हें जमीन की बहुत कम कीमतें दी गई। ऐसे उदाहरण भी मिलते हैं कि अमेरिकियों (संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले अंग्रेज) ने धोखे से उनसे अधिक भूमि हथिया ली या पैसा देने के मामले में हेराफरी की।

7. उच्च उधिकारी भी मूल निवासियों की बेदखली को गलत नहीं मानते थे। जॉर्जिया इसका उदाहरण है। जॉर्जिया संयुक्त राज्य अमेरिका का एक राज्य है। यहाँ के अधिकारियों का तर्क था कि वहाँ के चिरोकी कबीले पर राज्य के कानून तो लागू होते हैं, परन्तु वे नागरिक अधिकारों का उपयोग भी कर सकते हैं।

मूल निवासियों का विस्थापन पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 11 History प्रश्न 3.
अमेरिकियों के लिए ‘फ्रंटियर’ के क्या मायने (अर्थ) थे?
उत्तर:
यूरोपियों द्वारा जीती गई भूमि तथा खरीदी गई भूमि के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका का विस्तार होता रहता था। इससे अमेरिका को पश्चिमी सीमा खिसकती रहती थी। इसके साथ मूल अमेरिकियों को भी पीछे हटना पड़ता था। वे राज्य की जिस सीमा तक पहुँच जाते थे उसे ‘टियर कहा जाता है।

प्रश्न 4.
इतिहास की किताबों में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को शासित क्यों नहीं किया गया था?
उत्तर:
यूरोपीय इतिहासकारों ने ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के प्रति भेदभाव की नीति अपनाई। उन्होंने अपनी पुस्तकों में केवल ऑस्ट्रेलिया में आकर बसे यूरोपीयों की ही उपलब्धियों का वर्णन किया और यह दिखाने का प्रयास किया कि वहाँ के मूल निवासियों की न तो कोई परम्परा है और न ही कोई इतिहास। इसी कारण इतिहास की पुस्तकों में उनकी उपेक्षा की गई।

प्रश्न 5.
लोगों की संस्कृति को समझाने में संग्रहालय की गैलरी में प्रदर्शित चीजें कितनी कामयाब रहती हैं? किसी संग्रहालय को देखने के अपने अनुभव के आधार पर सोदाहरण विचार करिए।
उत्तर:
लोगों की संस्कृति को समझने में संग्रहालय महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहाँ प्रदर्शित वस्तुओं के आधार पर मूली बिसरी अथवा उपेक्षित संस्कृतियों को भी फिर से जीवित किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया की आदि संस्कृतियाँ इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 6.
कैलिफोर्निया में चार लोगों के बीच 1880 में हुई किसी मुलाकात की कल्पना करिए । ये चार लोग हैं : एक अफ्रीकी गुलाम, एक चीनी मजदूर, गोल्ड रश के चक्कर में आया हुआ एक जर्मन और होपी कबीले का एक मूल निवासी। उनकी बातचीत का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कैलिफोर्निया उत्तर अमेरिका का एक प्रसिद्ध शहर है। यहाँ ये चारों मिलकर अपनी आवश्यक्ता पूरा करने के लिए बातचीत करते हैं। इसमें सबसे शक्तिशाली गोल्ड रश के चक्कर में आया हुआ जर्मन है। वह अफ्रीकी गुलाम को अपने पास रखना चाहता है। वह उससे अपने यहाँ रहने के लिए कहता है। वह चीनी मजदूर से अपने काम करने के लिए पृण है। चीनी मजदूर टूटी फूटी भाषा में जवाब देता है। जमन निवासी होपी कबीले के मूल निवासी को जमीन देने के लिए कहता है ताकि वह यहाँ अपना व्यापार जमा सके। चारों टूटी अंग्रेजी में बातचीत करते हैं।

Bihar Board Class 11 History मूल निवासियों का विस्थापन Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
चिरोकी कौन थे? उनके साथ क्या अन्याय हो रहा था?
उत्तर:
चिरोकी संयुक्त राज्य अमेरिका के एक राज्य जार्जिया के मूल निवासी थे। वहाँ के मूल निवासियों में चिरोकी ही ऐसे थे जिन्होंने अंग्रेजी सीखने और अंग्रेजों की जीवन-शैली समझने का सबसे अधिक प्रयास किया था। उन पर राज्य के कानून तो लागू होते थे, परन्तु उन्हें नागरिक अधिकारों से वंचित होना पड़ता था।

प्रश्न 2.
अमेरिका में मूल निवासियों से जमीनें प्राप्त करने वाले लोग किस आधार पर अपने आप को उचित ठहराते थे?
उत्तर:
मूल निवासियों से जमीनें प्राप्त करने वाले लोग इस आधार पर अपने आप को उचित ठहराते थे कि मूल निवासी जमीन का अधिकतम प्रयोग करना नहीं जानते । इसलिए वह उनके पास रहनी ही नहीं चाहिए। वे यह कह कर भी मूल निवासियों की आलोचना करते कि आलसी : हैं। इसलिए वे बाजार के लिए उत्पादन करने में अपने शिल्प-कौशल का प्रयोग नहीं करते हैं। अंग्रेजी सीखने और ढंग के कपड़े पहनने में भी उनकी कोई रुचि नहीं है।

प्रश्न 3.
उत्तरी अमेरिका के सन्दर्भ में ‘रिजर्वेशंस’ (आरक्षण) क्या थे?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों को छोटे-छोटे प्रदेशों में सीमित कर दिया गया था। यह प्रायः ऐसी जमीन होती थी, जिनके साथ उनका पहले से कोई नाता नहीं होता था। इन्हीं जमीनों को रिजर्वेशन अथवा आरक्षण. कहा जाता था।

प्रश्न 4.
अमेरिका के मूल निवासियों ने अपनी जमीनें संघर्ष करने के बाद ही छोड़ी थीं। इसके पक्ष में उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अमेरिका के मूल निवासियों ने वास्तव में अपनी जमीनों के लिए संघर्ष किया था। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जा सकता है कि संयुक्त राज्य की सेना को 1865 से 1890 ई. के बीच मूल निवासियों के विद्रोहों की एक पूरी श्रृंखला का दमन करना पड़ा था। इसी प्रकार 1869-1885 ई. के बीच कनाडा में मेटिसों (यूरोपीय मूल निवासियों के वंशज) के विद्रोह
हुए थे।

प्रश्न 5.
उत्तरी अमेरिका में 1840 के दशक में मानवशास्त्र विषय का आरम्भ क्यों हुआ?
उत्तर:
1840 के दशक में उत्तरी अमेरिका में मानवाशास्त्र विषय का आरम्भ स्थानीय ‘आदिम’ समुदायों तथा युरोप के ‘समुदायों के बीच अन्तर को जानने के लिए हुआ। कुछ मानवशास्वियों ने यह स्थापित किया कि जिस प्रकार यूरोप में ‘आदिम’ लोग नहीं पाये जाते, उसी : प्रकार अमेरिका के मूल निवासी भी नहीं रहेंगे।

प्रश्न 6.
‘गोल्ड रश’ को किस बात ने जन्म दिया? यह क्या था?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों को इस बात की आशा थी कि उत्तरी अमेरिका में धरती के नीचे सोना है। 1840 में संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलीफोर्निया में सोने के कुछ चिह्न मिले । इसने ‘गोल्ड रश’ को जन्म दिया। ‘गोल्ड रश’ उस आपाधापी का नाम है, जिसमें हजारों की संख्या में यूरोपीय लोग सोना पाने की आशा में अमेरिका जा पहुंचे।

प्रश्न 7.
अमेरिका महाद्वीप के लिए गोल्ड रश किस प्रकार वरदान सिद्ध हुआ?
उत्तर:
गोल्ड रश को देखते हुए पूरे महाद्वीप में रेलवे-लाइनों का निर्माण किया गया। इसके लिए हजारों चीनी श्रमिकों की नियुक्ति हुई। 1870 में संयुक्त राज्य अमेरिका में तथा 1885 में कनाडा में रेलवे का काम पूरा हो गया। स्कॉटलैंड से आने वाले अप्रवासी एंड्रिड कानेगी ने कहा था, “पुराने राष्ट्र घोंघे की चाल से सरकते हैं। नया गणराज्य किसी एक्सप्रेस की गति से दौड़

प्रश्न 8.
उत्तरी अमेरिका में उद्योगों के विकास के कौन-से दो मुख्य उद्देश्य थे?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका में उद्योगों के विकास के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

विकसित रेलवे के साज-समान बनाना, ताकि दूर-दूर के स्थानों को तीव्र परिवहन द्वारा जोड़ा जा सके।
ऐसे यन्त्रों का निर्माण करना, जिनसे बड़े पैमाने पर खेती की जा सके।

प्रश्न 9.
1934 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक युगान्तकारी कानून पारित हुआ। यह क्या था?
उत्तर:
यह कानून था 1934 का इंडियन रीऑर्गनाईजेशन एक्ट । इसके अनुसार रिजर्वेशंज में मूल निवासियों का जमीन खरीदने और ऋण लेने का अधिकार दिया गया।

प्रश्न 10.
मूल निवासियों ने किस दस्तावेज द्वारा तथा किस शर्त पर संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता स्वीकार की?
उत्तर:
मूल निवासियों ने 1954 में अपने द्वारा तैयार किए गए ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडियन राइट्स’ नामक दस्तावेज द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता स्वीकार की। उनकी शर्त यह थी कि उनके रिजर्वेशंज वापिस नहीं लिए जाएंगे और उनकी परम्पराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

प्रश्न 11.
ऑस्ट्रेलिया में ‘ऐबॉरिजिनीज’ नामक आदिम कब आने शुरू हुए ? वहाँ के मूल निवासियों का इस विषय में क्या कहना है?
उत्तर:
माना जाता है कि ऑस्ट्रेलिया में ‘ऐबॉरिजिनीज’ नामक आदिम मानव आज से लगभग 40,000 साल पहले आने शुरू हुए। परन्तु वहाँ के निवासी इसका विरोध करते हैं। उनकी परम्पराओं के अनुसार वे कहीं बाहर से नहीं आए थे, बल्कि आरम्भ से ही वहीं रह रहे थे।

प्रश्न 12.
ऑस्ट्रेलिया के टॉरस स्ट्रेट टापूवासियों की संक्षिप्त जानकारी दीजिए। इनके लिए ‘ऐबॉरिजिनीज’ शब्द का प्रयोग क्यों नहीं होता?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया के देसी लोगों का एक विशाल समूह उत्तर में रहता है। इन्हें टॉरस स्ट्रेट टापूवासी कहते हैं। 2005 ई. में वे ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या का 2.4 प्रतिशत भाग थे । इनके लिए ऐबॉरिजिनी शब्द प्रयोग नहीं होता क्योंकि यह माना जाता है कि वे कहीं और से आए हैं और एक अलग नस्ल के हैं।

प्रश्न 13.
ऑस्ट्रेलिया की अधिकतर जनसंख्या कहाँ बसी हुई है और क्यों?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या बहुत ही विरल है। वहाँ की अधिकतर जनसंख्या समुद्रतट के साथ-साथ बसी हुई है। इसका कारण यह है कि देश का भीतरी भाग शुष्क मरुभूमि है।

प्रश्न 14.
ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के व्यवहार के प्रति ब्रिटिशों का क्या दृष्टिकोण था?
उत्तर:
ब्रिटिश नाविक कैप्टन कुक और उसके चालक दलन के आरम्भिक ब्योरों में मूल निवासियों के व्यवहार को मैत्रीपूर्ण बताया गया है। परन्तु जब एक मूल निवासी ने हवाई में कुक की हत्या कर दी तो ब्रिटिशों का दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया । अब उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि वहाँ के मूल निवासी व्यवहार में हिंसक हैं।

प्रश्न 15.
‘सेटलर’ (आबादकर) शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:’
सेटलर’ शब्द से अभिप्राय किसी स्थान पर बाहर से आकर बसे लोगों से है। इस शब्द का प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में डचों के लिए, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, तथा ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश लोगों के लिए और अमेरिका में यूरोपीय लोगों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 16.
दक्षिण अफ्रीका तथा अमेरिका में यूरोप उपनिवेशों की राजभाषा कौन-सी थी?
उत्तर:
कनाडा को छोड़कर इन सभी उपनिवेशों की राजभाषा अंग्रेजी थी। कनाडा में अंग्रेजी के साथ-साथ फ्रांसीसी भी एक राजभाषा थी।

प्रश्न 17.
‘नेटिव’ (मूल निवासी) शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘नेटिव’ शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो अपने वर्तमान निवास स्थान पर ही पैदा हुआ हो । 20वीं शताब्दी के आरम्भिक वर्षों में यह शब्द यूरोपीय लोगों द्वारा अपने उपनिवेशों के मूल निवासियों के लिए किया जाता था।

प्रश्न 18.
‘अमेरिका की पूर्व संध्या’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अमेरिका की पूर्व संध्या’ से अभिप्राय उस समय से है जब यूरोपीय लोग अमेरिका में आए और उन्होंने इस महाद्वीप को अमेरिका का नाम दिया।

प्रश्न 19.
उत्तरी अमेरिका के आरम्भिक निवासियों की जीवन शैली की कोई तीन विशेषताएं बताएँ।
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका के आरम्भिक निवासी नदी घाटी के साथ-साथ बने गाँवों में समूह बना कर रहते थे।
वे मछली और मांस खाते थे और सब्जियाँ तथा मक्का उगाते थे।
वे प्रायः मांस की तलाश में लम्बी यात्राएँ करते थे। मूख्य रूप से उन्हें ‘बाइर्सन’ अर्थात् उन जंगली भैंसों की तलाश रहती थी, जो घास के मैदानों में घूमते रहते थे।

प्रश्न 20.
वेमपुम (Wampum) बेल्ट क्या थी?
उत्तर:
वेमपुम बेल्ट रंगीन सीपियों को आपस में सिलकर बनाई जाती थी। किसी समझौते के बाद अमरिका के स्थानीय कबीलों के बीच इसका आदान-प्रदान होता था।

प्रश्न 21.
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों की परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता बताइए।
उत्तर:
औपचारिक सम्बन्ध स्थपित करना, मित्रता करना, तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना।

प्रश्न 22.
यूरोपीय लोगों को उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों पर किस बात ने अपनी शर्ते थोपने में सक्षम बनाया?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी शराब से परिचित नहीं थे। परन्तु यूरोपियों ने उन्हें शराब देकर शराब पीने का आदी बना दिया। शराब उनकी कमजोरी बन गई। उनकी कमजोरी ने यूरोगय लोगों को उन पर अपनी शत थोने में सक्षम बनाया।

प्रश्न 23.
पश्चिमी यूरोप के लोगों को अमेरिका के मूल निवासी असभ्य क्यों प्रतीत हुए?
उत्तर:
अठारहवीं शताब्दी में पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म शहरीपन के आधार पर करते थे। इसी दृष्टि से उन्हें अमेरिका के मूल निवासी ‘असभ्य’ प्रतीत हुए।

प्रश्न 24.
विभिन्न उपहारों के आदान-प्रदान के प्रति उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों तथा यूरोपीयों के दृष्टिकोण में क्या अन्तर था?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी यूरोपीय लोगों के साथ जिन चीजों का आदान-प्रदान करते थे, वे उन्हें मैत्री में मिले उपहार मानते थे। दूसरी ओर अमीरी का सपना देखने वाले यूरोपीय लोगों के लिए मछली और रोएँदार खालें मुनाफा कमाने के लिए बेची जाने वाली वस्तुएँ था।

प्रश्न 25.
यूरोपीय लोगों ने अमेरिका में अपनी जमीनों पर मुख्य रूप से कौन-सी फसलें उगाईं और क्यों?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों ने अमेरिका में अपने खेतों पर धान और कपास आदि फसलें उगाई सका कारण यह था कि ये फसलें यूरोप में नहीं उगाई जा सकती थीं। इसीलिए यूरोप में इन्हें ऊँचे लाभ पर बेचा जा सकता था।

प्रश्न 26.
यूरोपीय बागान मालिक लोग दक्षिण अमेरिका में दासों से काम क्यों लेना चाहते थे? इस सम्बन्ध में उन्हें क्या समस्या आई?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों के लिए अमेरिका के दक्षिणी प्रदेश की जलवायु काफी गर्म थी। ऐसी – जलवायु में उनके लिए घर से बाहर.(खेतों पर अथवा बागानों में) काम कर पाना कठिन थी। इसलिए वे दासों से काम लेना चाहते थे।

प्रश्न 27.
अमेरिका में यूरोपीय लोगों को अफ्रीका से दास क्यों खरीदने पड़े ? क्या इन दासों को दासता से मुक्ति मिली?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों को अपने खेतों पर काम करने के लिए दासों की जरूरत थी। परन्तु दक्षिणी अमरिकी उपनिवेशों से दास बना कर लाए गए मल निवासी बहत बडी संख्या में मौत का शिकार हो गए थे। इसीलिए बागान मालिकों को अफ्रीका से दास खरीदने पड़े। समय बीतने पर दासों के व्यापार पर तो रोक लग गई। परन्तु अफ्रीकी दासों को दासता से मुक्ति न मिली। – वे और उनके बच्चे दास ही बने रहे।

प्रश्नी 28.
संयुक्त राज्य अमेरिका में दास प्रथा का अन्त किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी राज्यों का अर्थतन्त्र बागानों पर आधारित न होने के कारण दास प्रथा पर आधारित नहीं था। अत: वहाँ दास प्रथा को समाप्त करने के पक्ष में आवाज उठने लगी और उसे एक अमानवीय प्रथा बताया गया। 1861-65 में दास प्रथा के समर्थक तथा उसके विरोधी राज्यों के बीच युद्ध हुआ। इसमें दासता विरोधियों की जीत हुई और दास प्रथा समाप्त कर दी गई।

प्रश्न 29.
कनाडा की ब्रिटिश सरकार के सामने फ्रांसीसियों के सम्बन्ध में क्या समस्या थी? इसे किस प्रकार सुलझाया गया?
उत्तर:
कनाडा की ब्रिटिश सरकार के सामने एक समस्या थी, जो लम्बे समय तक हल नहीं हो पाई थी। 1763 में ब्रिटेन ने फ्रांस के साथ हुई लड़ाई में कनाडा को जीत लिया था। वहाँ बसे फ्रांसीसी लगातार स्वायत्त राजनीतिक दर्जे की माँग कर रहे थे। अन्ततः 1867 में कनाडा को स्वायत्त राज्यों के एक महासंघ के रूप में संगाठित करके इस समस्या को हल किया गया।

प्रश्न 30.
ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश आरम्भिक आबादकार कौन थे? उन्हें किस शर्त पर ऑस्ट्रेलिया में स्वतन्त्र जीवन जीने की अनुमति दी गई थी?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश आरम्भिक आबादकार ब्रिटिश कैदी थे जो इंग्लैंड से निर्वासित होकर आए थे। उनके कारावास की अवधि पूरी होने पर उन्हें इस शर्त पर ऑस्ट्रेलिया में ही स्वतन्त्र जीवन जीने की अनुमति दे दी गई कि वे ब्रिटेन वापस नहीं लौटेंगे। अपने जीवनयापन के लिए उन्होंने खेती के लिए ली गई जमीन से मूल निवासियों को निकाल बाहर किया।

प्रश्न 31.
ऑस्ट्रेलिया की गोरी सरकार ऑस्ट्रेलिया की भूमि को ‘टेरा न्यूलियस’ (terra nullius) क्यों कहती रहती है?
उत्तर:
टेरा न्यूलियस का अर्थ है-किसी को नहीं । सरकार का मानना था कि वहाँ की भूमि किसी को नहीं । ऐसा वहाँ पर यूरोपियों द्वारा किए भूमि अधिग्रहण को औपचारिक बनाने के लिए कहा जाता रहा है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका अपने वर्तमान क्षेत्रफल तक किस तरह पहुँचे?’
उत्तर:
कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका 18वीं शताब्दी के अन्त में अस्तित्व में आए थे। उस समय उनके पास अपने वर्तमान क्षेत्रफल का एक छोटा-सा ही भाग था। वर्तमान आकार तक पहुँचने के लिए अगले सौ सालों में उन्होंने अपने नियन्त्रण वाले प्रदेश में काफी वृद्धि की। संयुक्त राज्य अमेरिका ने विस्तृत क्षेत्रों की खरीद की। उसने दक्षिण में फ्रॉस (लइसियाना परचेज) और रूस (अलास्का) से जमीन खरीदी। उसने युद्ध में भी जमीन जीती।

दक्षिण संयुक्त राज्य अमेरिका का अधिकतर भाग मेक्सिको से ही जीता गया था । किसी ने यह बात नहीं सोची कि उन प्रदेशों में रहने बाने मूल निवासियों की भी राय ली जाए। संयक्त राज्य अमेरिका की पश्चिमी सीमा खिसकती रहती थी। जैसे-जैसे सीमा खिसकती, वहाँ के निवासियों को भी पीछे खिसकने के लिए बाध्य कर दिया जाता था। \

प्रश्न 2.
19वीं शताब्दी में अमेरिका के भूदृश्य में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन किजिए। ये परिवर्तन क्यों हुए?
उत्तर:
19वीं सदी में अमेरिका के भूदृश्य में अत्यधिक परिवर्तन आए।
कारण – जमीन के प्रति युरोपीय लोगों का रुख मूल निवासियों से अलग था। ब्रिटेन और फ्रांस से आए कुछ प्रवासी ऐसे थे जो अपने पिता का बड़ा पुत्र न होने के कारण पिता की सम्पत्ति के उत्तराधिकारी नहीं बन सकते थे। अत: वे अमेरिका में जमीन का स्वामी बनना चाहते थे। बाद में जर्मनी, स्वीडन और इटली जैसे देश में ऐसे अप्रवासी आ गए जिनकी जमीनें बड़े किसानों के हाथ में चली गई थीं वे ऐसी जमीन चाहते थे, जिसे अपना कह सकें। पोलैंड से आए लोगों को प्रयरी (prairie) चरागाहों में काम करना अच्छा लगता था, जो उन्हें अपने देश के स्टेपोज (घास के मैदानों) की याद दिलाती थीं। अमेरिका में बहुत कम मूल्य पर बड़ी सम्पत्तियाँ खरी: पाना आसान था।

परिवर्तन – यूरोपीय लोगों ने खरीदी गई जमीन की सफाई की और खेती का विकास किया। उन्होंने धान और कपास आदि फसलें उगाईं। ये फसलें युरोप में नहीं उगाई जा सकती थीं। इसीलिए युरोप में उन्हें ऊँचे लाभ पर बेचा जा सकता था। अपने विस्तृत खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए उन्होंने शिकार द्वारा उनका सफाया कर दिया। 1873 में कंटीले तारों की खोज के बाद खेत पूरी तरह सुरक्षित हो गए।

प्रश्न 3.
संयुक्त राज्य अमेरिका में दास प्रथा के प्रचलन तथा समाप्ति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी प्रदेश की जलवायु यूरोपीय लोगों के लिए काफी गर्म थी। इसलिए उनके लिए वहाँ घर से बाहर काम कर पाना कठिन था। अतः वे दासों से काम लेना चाहते थे। परन्तु दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों में दास बनाए गए मूल निवासी बहुत बड़ी संख्या में मौत का शिकार हो गए थे। इसीलिए बागान मालिकों ने अफ्रीका से दास खरीदे। समय बीतने पर दास प्रथा विरोधी समूहों के विरोध के कारण दासों के व्यापार पर रोक लग गई। परन्तु जो अफ्रीकी दास संयुक्त राज्य अमेरिका में थे, वे और उनके बच्चे दास ही बने रहे।

दास प्रथा की समाप्ति-संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी राज्यों का अर्थतन्त्र बागानों पर आधारित न होने के कारण दास-प्रथा पर आधारित नहीं था। अत: वहाँ दास प्रथा को समाप्त करने के पक्ष में आवाज उठने लगी और उसे एक अमानवीय प्रथा बनाया गया। 1861-65 में दास प्रथा के समर्थक तथा विरोधी राज्यों के बीच युद्ध हुआ। इसमें दासता के विरोधियों की जीत हुई और दास प्रथा समाप्त कर दी गई।

प्रश्न 4.
ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय लोगों के आगमन के प्रति वहाँ के मूल निवासियों की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया की खोज 1770 ई. में अंग्रेज नाविक कैप्टन कुक ने की थी। वहाँ के मूल निवासियों ने कुक तथा उसके चालक दल का स्वागत किया। इसलिए ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के साथ हुई भेंट को लेकर कैप्टन कुक और उसके चालक दल के आरम्भिक ब्योरे मूल निवासियों के मैत्रीपूर्ण व्यवहार से भरे पड़े हैं। परन्तु बाद में एक मूल निवासी ने हवाई में कक की हत्या कर दी। इस कारण ब्रिटिशों को उनके प्रति दृष्टिकोण पुरी तरह से बदल गया। अब उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि वहाँ के मुल निवासी व्यवहार में हिंसक हैं।

यूरोपीय लोगों के आगमन को सभी मूल निवासियों ने खतरा नहीं माना । इसका कारण यह था कि उनमें दूर की सोच की कमी थी। वे यह अनुमान नहीं लगा पाए कि 19वीं और 20वीं सदी के बीच कीटाणुओं के प्रभाव से अपनी जमीनें छिन जाने से तथा आबादकारों के साथ होने वाली लड़ाइयों में लगभग 90 प्रतिशत मूल निवासियों को अपने प्राण गवाने पडेंगे।

प्रश्न 5.
ऑस्ट्रेलिया में मानव निवास के इतिहास का वर्णन करते हुए वहाँ के मूल निवासियों के समुदायों की जानकारी दीजिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया में मानव निवास का इतिहास काफी लम्बा है। आरम्भिक मनुष्य या आदिमानव जिन्हें ‘ऐबॉरिजिनीज’ कहते हैं ऑस्टेलिया में लगभग 40,000 साल पहले आने शुरू हए थे। वे न्यूगिनी से आए थे जो ऑस्ट्रेलिया के साथ एक भूमि सेतु द्वारा जुड़ा हुआ था। इसके विपरीत मूल निवासियों की अपनी परम्पराओं के अनुसार वे ऑस्ट्रेलिया में बाहर से नहीं आये थे। बल्कि आरम्भ ही वहीं रह रहे थे।

मूल निवासियों के समुदाय – 18वीं सदी के अन्तिम चरण में ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासियों के लगभग 350 से 750 तक समूदाय रहते थे। इनमें से प्रत्येक समुदाय की अपनी भाषा थी। देसी लोगों का एक अन्य विशाल समूह उत्तर में रहता है। 2005 ई. में वे ऑस्ट्रेलिया की कुछ जनसंख्या का 2.4 प्रतिशत भाग थे। इन्हें टॉरस स्ट्रेट टापूवासी कहते हैं। इनके लिए ‘ऐबॉरिजिनी’ शब्द प्रयोग नहीं होता क्योंकि यह माना जाता है कि वे कहीं और से आए हैं और एक अलग नस्ल के हैं।

प्रश्न 6.
मानव अधिकारों ने ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को न्याय दिलाने का मार्ग किस सीमा तक प्रशस्त किया है?
उत्तर:
1973 के दशक से संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सियों की बैठकों में मानवाधिकारों पर बल दिया जाने लगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई जनता को यह आभास हुआ कि संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और न्यूजीलैंड के विपरित ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीय लोगों द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को औपचारिक बनाने के लिए मूल निवासियों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। सरकार सदा से ऑस्ट्रेलिया की जमीन को टेरा न्यूलियस (terra nullius) कहती आई थी। इसका अर्थ था, “जो किसी की नहीं है।” इसके अतिरिक्त वहाँ यूरोपवासियों द्वारा अपने आदिवासी रिश्तेदारों से जबरदस्ती छीने गए मिश्रित रक्त वाले बच्चों का भी एक लम्बा और यन्त्रणापूर्ण इतिहास था।

अन्ततः दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
इस बात को मान्यता देना कि मूल निवासियों का जमीन के साथ, जोकि उनके लिए पवित्र है, मजबूत ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा। अतः इसका आदर किया जाना चाहिए।
‘श्वेत’ तथा ‘अश्वेत’ लोगों को अलग-अलग रखने के प्रयास में बच्चों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।

प्रश्न 7.
उपनिवेशीकरण को प्रेरित करने वाला मुख्य कारक कौन-सा था? उपनिवेशीकरण की प्रकृति में पाई जाने वाली विविधताओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उपनिवेशीकरण को प्रेरित करने वाला प्रमुख कारक मुनाफा था। परन्तु उपनिवेशीकरण की प्रकृति में कुछ महत्त्वपूर्ण विविधताएँ थीं, जिसके निम्नलिखित उदाहरण है-
1. दक्षिण एशिया में व्यापारिक कम्पनियों ने अपनी राजनीतिक सत्ता स्थापित की। उन्होंने स्थानीय शासकों को हराकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। उन्होंने नयी प्रशासनिक व्यवस्था. स्थापित करने की बजाय पुरानी सुविकसित प्रशासकीय व्यवस्था को ही अपनाया और भस्वामियों से कर वसूला। बाद में उन्होंने अपने व्यापार को सुगम बनाने के लिए रेलवे का निर्माण किया, खानें खुदवाई और बड़े-बड़े बागान स्थापित किए।

2. दक्षिणी अफ्रीका को छोड़कर शेष पूरे अफ्रीका में युरोपीय लोग लम्बे समय तक समुद्र तटों पर ही व्यापार करते रहे। 19वीं सदी के आखिरी चरण में ही वे अफ्रीका के भीतरी भागों में जाने का साहस कर सके। बाद में कुछ यूरोपीय देशों ने अपने उपनिवेशों के रूप में अफ्रीका का बँटवारा करने का समझौता कर लिया।

प्रश्न 8.
उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के विस्तार, भूमध्य तथा संसाधनों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका महाद्वीप उत्तर ध्रुवीय वृत्त से लेकर कर्क रेखा तक फ्राला हुआ है। दूसरी ओर इसका विस्तार प्रशान्त महासागर से अटलांटिक महासागर तक है।पिचरीले, पर्वतों की श्रृंखला के पश्चिम में अरिजोना और नेवाडा की मरुभूमि है। थोड़ा और पश्चिम सिएरा नेवाडा पर्वत है। पूर्व में ग्रेट (विस्तृत) मैदानी प्रदेश, महान् (विस्तृत) झीलें, मिसीसिपी तथा ओहियो और अप्लेशियन पर्वतों की घाटियाँ हैं। दक्षिण दिशा में मेक्सिको है। कनाडा का 40 प्रतिशत प्रदेश वनों से ढंका है। कई क्षेत्रों में तेल, गैस और खनिज संसाधन पाए जाते हैं। इनके आधार पर संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में कई बड़े उद्योग स्थापित हैं। आजकल कनाडा में गेहूँ, मक्का और फल बड़े पैमाने पर पैदा किए जाते हैं।

प्रश्न 9.
यूरोपीय व्यापारी उत्तरी अमेरिका में सर्वप्रथम कब और कहाँ पहुँचे? वहाँ के स्थानीय लोगों के प्रति उनके व्यवहार तथा दृष्टिकोण की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
17वीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारी उत्तरी अमेरिका के उत्तरी तट पर पहुंचे। ये लोग मछली और रोएँदार खाल के व्यापार के लिए आए थे। इस काम में कुशल स्थानीय लोगों ने उनकी सहायता की। वे उनके मैत्रीपूर्ण व्यवहार से बहुत प्रसन्न हुए। स्थानीय उत्पादों के बदले में यूरोपीय लोग वहाँ के लोगों को कम्बल, लोहे के बर्तन, बंदुकें और शराब देते थे। इससे पहले वहाँ के लोग शराब से परिचित नहीं थे। शीघ्र ही वे इसकी आदत का शिकार हो गए।

यूरोपीय लोगों के लिए उनकी यह आदत अच्छी बात सिद्ध हुई। इसने उन्हें व्यापार के लिए अपनी शर्ते थोपने में सक्षम बनाया। यूरोपीय लोगों ने भी उन मूल निवासियों से तम्बाकू की आदत ग्रहण की। पश्चिमी यूरोप के लोग ‘सभ्य’ मनुष्य की पहचान साक्षरता, संगठित धर्म और शहरीपन के आधार पर करते थे। इस दृष्टि से उन्हें अमेरिका के मूल निवासी ‘असभ्य’ प्रतीत हुए।

प्रश्न 10.
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी यूरोपीय लोगों के व्यवहार को देखकर दुःखी क्यो होते थे?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासी यूरोपीय लोगों के साथ जिन चीजों का आदान-प्रदान करते थे, वे उन्हें मैत्री में मिले उपहार मानते थे। दूसरी ओर अमीरी का सपना देखने वाले युरोपीय लोगों के लिए मछली और रोएँदार खाल मुनाफा कमाने के लिए बेची जाने वाली वस्तुएँ थीं। इन बेची जाने वाली वस्तुओं के मूल्य इनकी पूर्ति के आधार पर हर साल बदलते रहते थे। मूल निवासी इस बात को समझ नहीं सकते थे, क्योंकि उन्हें सुदूर यूरोप में स्थित ‘बाजार’ का जरा भी बोध नहीं था।

उनके लिए तो यह सब पहेली की तरह था कि यूरोपीय व्यापारी उनकी चीजों के बदले में कभी तो बहुत सा सामान दे देते थे और कभी बहुत कम। वे यूरोपीय लोगों के लालच को देखकर भी दुःखी होते थे। प्रचुर मात्रा में रोएँदार खाल प्राप्त करने के लिए उन्होंने सैकड़ों कदबिलावों को मार डाला था। मूल निवासी इससे काफी विचलित थे। उन्हें डर था कि जानवर उनसे इस विध्वंस का बदला लेंगे।

प्रश्न 11.
यूरोपीय व्यापारियों के बाद यूरोपीय लोग अमेरिका बसने के लिए क्यों आये? उन्होंने वहाँ के वनों के प्रति क्या नीति अपनाई?
उत्तर:
व्यापारी के रूप में आने वाले यूरोपीय लोगों के पीछे-पीछे अमेरिका में ‘बसने’ के लिए भी यूरोपीय आए। इनमें से अधिकतर लोग धार्मिक उत्पीड़न के शिकार थे। इन लोगों में कैथेलिक प्रभुत्व वाले देशों में रहने वाले प्रोटेस्टेन्ट अथवा प्रोटेस्टेन्टवाद को राजधर्म का दर्जा देने वाले देशों के कैथोलिक सम्मिलित थे। जब तक उनके बसने के लिए वहाँ खाली जमीनें थीं, कोई समस्या नहीं आई। परन्तु धीरे-धीरे वे महाद्वीप के आन्तरिक भागों में मूल निवासियों के गाँवों की ओर बढ़ने लगे। उन्होंने अपने लोहे के औजारों द्वारा जंगलों को साफ किया, ताकि खेती की जा सके।

उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों तथा यूरोपीय लोगों का वहाँ के वनों के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण था। मूल निवासियों को वन ऐसे मार्ग जुटाते थे, जो यूरोपीय :गों की पहुंच से बाहर थे। दूसरी ओर यूरोपीय लोगों की कल्पना में जंगलों के स्थान पर मक्कं के खेत उभरते थे। . अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति जैफर्सन का सपना एक ऐसे देश का था, जो छोटे-छोटे खेतों वाले । यूरोपीय लोगों से आबाद था। मूल निवासी उसके इस दृष्टिकोण को समझने में असमर्थ थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
संयुक्त राज्य अमेरिका में मूल निवासियों के अधिकारों एवं हितों के लिए क्या किया गया? अब उनकी क्या स्थिति है?
उत्तर:
1920 के दशाक तक संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के मूल निवासियों की भलाई के लिए कुछ नहीं किया गया था। उन्हें न तो स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएँ प्राप्त थीं और न ही शिक्षा सम्बन्धी।

1934 का ‘इंडियन रिआर्गनाइजेशन एक्ट’-अन्ततः गोरे अमेरिकियों के मन में उन मूल निवासियों के प्रति सहानुभूति जागी, जिन्हें अपनी संस्कृति का पालन करने से रोका गया था और जिन्हें नागरिकता के लाभों से भी वंचित रखा गया था। इस बात ने संयुक्त राज्य अमेरिका में एक युगान्तकारी कानून को जन्म दिया। यह कानून था-1934 का इंडियन रीऑर्गनाईजेशन एक्ट। इसके अनुसार रिजर्वेशन्स में मूल निवासियों को जमीन खरीदने और ऋण लेने का अधिकार दिया गया।

1950 तथा 1960 के दशकों में सरकारी नीति-1950 और 1960 के दशकों में संयुक्त राज्य और कनाडा की सरकारों ने मूल निवासियों के लिए किए गए प्रावधनों को समाप्त करने पर विचार किया। उन्हें आशा थी कि इससे वे ‘मुख्य धारा में शमिल’ होंगे अर्थात् वे यूरोपीय संस्कृति को अपना लेंगे । परन्तु मूल निवासी ऐसा नहीं चाहते थे। 1954 में अनेक मूल निवासियों ने अपने द्वारा तैयार किए गए ‘डिक्लेरेशन आफ इंडियन राइट्स’ में इस शर्त के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता स्वीकार की कि उनके रिजर्वेशन्स वापस नहीं लिए जाएंगे और उनकी परम्पराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। कुछ ऐसी ही चीजें कनाडा में भी हुई।

1969 में सरकारी नीति-1969 में सरकार ने घोषणा की कि वह “आदिवासी अधिकारों को मान्यता नहीं देगी।” मूल निवासियों ने इसका डटकर विरोध किया। उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किए तथा धरने दिए। 1982 में एक संवैधानिक धारा के अनुसार मूल निवासियों के वर्तमान आदिवासी अधिकारों तथा समझौता-आधारित अधिकारों को स्वीकृति मिलने पर ही इस समस्या का समाधान हो सका । परन्तु इन अधिकारों की बारीकियों के बारे में अभी भी बहुत से निर्णय बाकी हैं। भले ही अब दोनों देश के मूल निवासियों कि संख्या 18वीं शताब्दी की तुलना में बहुत कम हो गई है तो भी उन्होंने अपने सांस्कृतिक अधिकारों की जबरदस्त दावेदारी की है।

प्रश्न 2.
ब्रिटेन ने ऑस्ट्रेलिया में किस प्रकार अपने कैदियों को स्थायी रूप से बसा दिया? यूरोपीय बस्ती के रूप में ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक विकास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश आम्भिक आबादकार इंगलैंड के कैदी थे जो वहाँ निर्वासित होकर आए थे। उनके कारावास की अवधि पूरी होने पर ब्रिटेन वापस न लौटने की शर्त पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया में ही स्वतन्त्र जीवन जीने की अनुमति दे दी गई। अपने जीवनयापन के लिए उन्होंने खेती के लिए ली गई जमीन से मूल निवासियों को निकाल बाहर किया।

ऑस्ट्रेलिया का आर्थिक विकास-यूरोपीय बस्ती के रूप में ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक विकास में अमेरिका जैसी विविधता नहीं थी। वहाँ एक लम्बे समय के बाद ही भेड़ों के विशाल फार्मों, खानों, मदिरा बनाने के लिए अंगूर के बागों और गेहूँ की खेती का विकास हो सका, जिसमें काफी श्रम लगा। ये ऑस्ट्रेलिया की सम्पन्नता का आधर बने। जब राज्यों को आपस में मिलाया गया और 1911 में ऑस्ट्रेलिया की एक नई राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया, तब इस राजधानी का नाम ‘चूलव्हीटगोल्ड’ (Woolwheat gold) रखने का सुझाव दिया गया था। परन्तु ‘अन्त में उसका नाम कैनबरा रखा गया जो एक स्थानीय शब्द कैमबरा (kamberra) से बना है जिसका अर्थ है ‘सभा-स्थल’।

ऑस्ट्रेलिया के कुछ मूल निवासियों को खेतों में काम पर लगाया गया था। वे दासों जैसी कठोर परिस्थितियों में काम करते थे। बाद में चीनी अप्रवासियों ने सस्ता श्रम जुटाया; जैसे कि कैलिफोर्निया में हुआ था। परन्तु गैर-गोरों पर बढ़ती हुई निर्भरता से उत्पन्न घबराहट के कारण चीनी अप्रवासियों को प्रतिबन्धित कर दिया गया। 1974 तक लोगों के मन में, यह भय घर कर गया था कि दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के ‘काले’ लोग बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलिया आ सकते हैं। अत: ‘गैर-गोरों’ को बाहर रखने के लिए सरकार ने एक विशेष नीति अपनाई।

प्रश्न 3.
‘दि ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस क्या थी? इसने ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृति तथा परम्पराओं को पुनर्जीवित करने में कैसे सहायता पहुँचाई?
उत्तर:
1963 में एक मानवशास्त्री डब्ल्यु. ई. एच. स्टैनर के एक व्याख्यान से लोगों में बिजली की तरंग सी दौड़ गई। व्याख्यान का शीर्षक था-‘दि ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस’ (महान् ऑस्ट्रेलियाई चुप्पी)। यह चुप्पी इतिहासकारों की मूल निवासियों के बारे में चुप्पी थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के इतिहास तथा संस्कृति के प्रति पूरी तरह चुप्पी साध ली थी। 1970 के दशक में उत्तरी अमेरिका की तरह यहाँ भी मूल निवासियों को एक नए रूप में समझने की चाहत उत्पन्न हो गई।

उन्हें विशिष्ट संस्कृतियों वाले समुदायों तथा प्रकृति एवं जलवायु को समझने में सहायक विशिष्ट पद्धतियों का रूप माना गया। अब उन्हें ऐसे समुदायों के रूप में समझा जाना था, जिनके पास अपनी कथाओं, कपड़ासाजी, चित्रकारी तथा हस्तशिल्प के कौशल का विशाल भंडार था। उनका यह भंडार सराहना; सम्मान तथा अभिलेखन के योग्य था। इन सबकी तह में एक जरूरी प्रश्न भी था। यह प्रश्न आगे चलकर हेनरी रेनॉल्डस ने अपनी प्रभावशाली पुस्तक, ‘व्हाइ वरंट वी टोल्ड?’ में सामने रखा । इस पुस्तक में ऑस्ट्रेलियाई इतिहास लेखन की उस प्रथा की भर्त्सना की गई थी, जिसमें वहाँ के इतिहास का आरम्भ कैप्टन कुक की खोज से माना जाता था।

ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृतियों का अध्ययन – तब से मूल निवासियों की संस्कृतियों का अध्ययन करने के लिए विश्वविद्यालयों में विशेष विभागों की स्थापना की गई है। आर्ट गैलरीज में देसी कलाओं की गैलरीज शामिल की गई हैं। संग्रहालयों में देसी संस्कृति को समझाने वाले कल्पनाशील तरीके से बनाए गए कमरों को स्थान दिया गया है। अब मूल निवासियों ने स्वयं भी अपने जीवन-इतिहास को लिखना आरम्भ कर दिया है। यह सब एक अद्भुत प्रयास है। यह प्रयास समय रहतें शुरू हो गया है। यदि मूल निवासियों की संस्कृतियों की अनदेखी होती रहती तो इस समय तक उनका बहुत कुछ भुला दिया गया होता।

1974 से ऑस्ट्रेलिया की राजकीय नीति बहुसंस्कृतिवादी रही है। इस नीति के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों की संस्कृतियों और यूरोप तथा एशिया के अप्रवासियों को संस्कृतियों को समान आदर दिया गया है। नयी दुनिया के देशों को यूरोपवासियों द्वारा दिए गए नाम।

‘अमेरिका’ – यह नाम पहली बार अमेरिगो वेसपुकी (1451-1512) का यात्रा-वृत्तांत छपने के बाद प्रयोग में आया।
‘कनाडा’ – कनाडा में निकला शब्द (1535 में खोजी जाक कार्टियर को मिली जानकारी के अनुसार, यूरों-इरोक्यूइम की भाषा में कनाटा का अर्थ था, ‘गाँव’).
‘ऑस्ट्रेलिया’ – महान् दक्षिणी महासागर में स्थित भूमि के लिए सोलहवीं सदी में प्रयुक्त नाम।
‘न्यूजीलैंड’ – हॉलैंड के तासमान द्वारा दिया गया नाम, जिसने सबसे पहले 1642 में इन टापुओं को देखा था। डच भाषा में ‘समुद्र’ को ‘जी’ कहते हैं।

प्रश्न 4.
उत्तरी अमेरिका में मानव के आगमन तथा उपनिवेशीकरण से पूर्व उनकी जीवन-शैली की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मानव का आगमन – उत्तरी अमेरिका के सबसे पहले निवासी 30,000 साल पहले बेरिंग स्टेट्स के आर-पार फैले भूमि-सेतु के मार्ग से एशिया से आए थे। लगभग 10,000 साल – पहले वे आगे दक्षिण की ओर बढ़े। अमेरिका में मिलने वाली सबसे पुरानी मानव कृति-एक तीर की नोक है, जो 11,000 साल पुरानी है। लगभग 5000 साल पहले जलवायु में स्थिरता आयी और उत्तरी अमेरिका की जनसंख्या बढ़ने लगी।

जीवन – शैली-यहाँ के लोग नदी घाटी के साथ-साथ बने गाँवों में समूह बनाकर रहते थे। वे मछली और मांस खाते थे और सब्जियाँ तथा मक्का उगाते थे। वे प्रायः मांस की तलाश में लम्बी यात्राएँ करते थे। मुख्य रूप से उन्हें ‘बाइसन’ अर्थात् उन जंगली भैंसों की तलाश रहती थी, जो घास के मैदानों में घूमते रहते थे। परन्तु वे उतने ही जानवर मारते थे, जितने उन्हें भोजन के लिए आवश्यक होते थे।

ये लोग लोभी नहीं थे। वे बड़े पैमाने पर खेती नहीं करते थे। न ही वे अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पादन करते थे। इसलिए वे केन्द्रीय तथा दक्षिणी अमेरिकी की तरह राज्य और साम्राज्य स्थापित न कर सके। उन्हें भूमि पर नियन्त्रण की कोई चिन्ता नहीं थी क्योंकि वे उससे मिलने वाले भोजन और आश्रय से ही सन्तुष्ट रहते थे। इसलिए भूमि को लेकर कबीलों के बीच बहुत कम ही झगड़े होते थे। औपचारिक सम्बन्ध स्थापित करना, मित्रता करना तथा उपहारों का आदान-प्रदान करना उनकी परम्परा थी।

उत्तरी अमेरिका में अनेक भाषाएँ बोली जाती थौं । लोगों का विश्वास था कि समय की गति चक्रीय है। प्रत्येक कबीले के पास अपनी उत्पत्ति और इतिहास के बारे में ब्योरे थे, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते थे। वे कुशल कारीगर थे और खूबसूरत कपड़े बुनते थे। उन्हें भूदृश्यों तथा जलवायु की भी पूरी जानकारी थी।

प्रश्न 5.
संयुक्त राज्य अमेरिका के मूल निवासियों की अपनी जमीनों से बेदखली की समस्या की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए। चिरोकी कबीले का विशेष रूप से उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में यूरोपियों ने अपनी बस्तियों के विस्तार के लिए खरीदी गई जमीन से वहाँ के मूल निवासियों को हटा दिया। उनके साथ अपनी जमीनें बेच देने की संधियाँ की गई और उन्हें जमीन की बहुत कम कीमतें दी गईं। ऐसे उदाहरण भी मिलते हैं कि अमेरिकियों ने धोखे से उनसे अधिक भूमि हथिया ली या फिर पैसा देने के मामले में हेराफेरी की।

चिरोकियों के प्रति अन्याय-उच्च अधिकारी भी मूल निवासियों की बेदखली को गलत नहीं मानते थे। जॉर्जिया इसका उदाहरण है। जॉर्जिया संयुक्त राज्य अमेरिका का एक राज्य है। यहाँ के अधिकारियों का तर्क था कि वहां के चिरोकी कबीले पर राज्य के कान तो लागू होते हैं, परन्तु वे नागरिक अधिकारों का उपभोग नहीं कर सकते।

1832 में संयुक्त राज्य के मुख्य न्यायाधीश, जॉन मार्शल ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि चिरोकी कबीला “एक विशिष्ट समुदाय” है और उसके स्वत्वाधिकार वाले क्षेत्र में जॉर्जिया का कानून लागू नहीं होता । वे कुछ मामलों में संप्रभुसत्ता सम्पन्न हैं। परन्तु संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति एंड्रिड जैकसन ने मुख्य न्यायाधीश की इस बात को मानने से इन्कार कर दिया और सेना के बल पर चिरोकियों को अपनी जमीन से मार भगाया। इनकी संख्या लगभग 15000 थी। उनमें से एक चौथाई अपने ‘आंसुओं की राह’ (Trail of Tears) के सफर में ही मर-खप गए। अर्थात् अपनी जमीन खो देने के दु:ख ने ही उनके प्राण ले लिए।

मूल निवासियों की जमीनें प्राप्त करने वाले लोग इस आधार पर अपने को उचित ठहराते थे कि मूल निवासी जमीन का अधिकतम प्रयोग करना नहीं जानते। इसलिए वह उनके पास रहनी ही नहीं चाहिए। वे यह कहकर भी मूल निवासियों की आलोचना करते थे कि वे आलसी हैं। इसलिए वे बाजार के लिए उत्पादन करने में अपने शिल्प-कौशल का प्रयोग नहीं करते हैं। अंग्रेजी सीखने और ‘ढंग के’ कपड़े पहनने में भी उनकी कोई रुचि नहीं है। कुल मिलाकर उनका कहना था कि वे ‘मर-खप जाने’ के ही अधिकारी हैं। खेती के लिए जमीन प्राप्त करने के लिए प्रेयरीज को साफ किया गया और जंगली भैंसों को मार डाला गया। एक फ्रांसीसी आगंतुक ने लिखा, “आदिम जानवरों के साथ-साथ आदिम मनुष्य भी लुप्त हो जाएगा।”

मूल निवासियों के रिजर्जेशंज – इसी बीच मूल निवासियों को पश्चिम की ओर खदेड़ दिया गया था। उन्हें ‘स्थायी रूप से अपनी भूमि तो दे दी गई थी, परन्तु उनकी जमीन में सीसा, सोना या तेल जैसे खनिज होने का पता चलने पर उन्हें वहाँ से भी खदेड़ दिया जाता था। प्रायः कई-कई समूहों को मूलतः किसी एक समूह के नियन्त्रण वाली जमीन में ही साझा करने के लिए बाध्य किया जाता था, जिससे उनके बीच झगड़े हो जाते थे।

मूल निवासी छोटे-छोटे प्रदेशों में ही सीमित कर दिए गए थे, जिन्हें ‘रिजर्वशंज’ (आरक्षण) कहा जाता था। ये प्रायः ऐसी जमीन होती थी, जिसके साथ उनका पहले से कोई नाता नहीं होता था। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अपनी जमीनें बिना : किसी संघर्ष के ही छोड़ दी हों। संयुक्त राज्य की सेना को 1865 से 1890 के बीच मूल निवासियों के विद्रोहों की एक लम्बी श्रृंखला का दमन करना पड़ा था । कनाडा में 1869 से 1885 के बीच मेटिसों (यूरोपीय मूल निवासियों के वंशज) के सशस्त्र विद्रोह हुए थे। परन्तु इन लड़ाईयों के बाद उन्होंने हार मान ली थी।

प्रश्न 6.
‘गोल्ड रश’ से क्या अभिप्राय है? इसने संयुक्त राज्य अमेरिका में रेलवे के निर्माण, उद्योगों के विकास तथा खेती के विस्तार में किस प्रकार सहायता पहुँचाई?
अथवा
गोल्ड रश की अमेरिका के आर्थिक तथा राजनीतिक विस्तार में क्या भूमिका रही?
उत्तर:
यूरोपीय लोगों को इस बात की आशा थी कि उत्तरी अमेरिका में धरती के नीचे सोना है। 1840 में संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलीफोर्निया में सोने के कुछ चिह्न मिले । इसने गोल्ड रश को जन्म दिया। गोल्ड रश उस आपाधापी का नाम है, जिसमें हजारों की संख्या में यूरोपीय लोग सोना पाने की आशा में अमेरिका जा पहुंचे।

रेलवे का निर्माण – गोल्ड रश को देखते हुए पूरे महाद्वीप में रेलवे-लाइनों का निर्माण किया गया। इसके लिए हजारों चीनी श्रमिकों की नियुक्ति की गई। संयुक्त राज्य अमेरिका में रेलवे का काम 1870 में और कनाडा की रेल्वे का काम 1885 में पूरा हुआ। स्कः सैंड से आने वाले एक अप्रवासी एंड्रिड कानेगी ने कहा था-“पुराने राष्ट्र घोंघे की चाल से सरकते हैं। नया गणराज्य किसी एक्सप्रेस की गति से दौड़ रहा है।

उद्योगों का विकास-गोल्ड रश ने केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में ही नहीं अपितु पूरे उत्तरी अमेरिका में उद्योगों के विकास में सहायता पहुँचाई । उत्तरी अमेरिका में उद्योगों के विकसित होने के दो मुख्य उद्देश्य थे।

विकसित रेलवे का साज-सामान बनाना, ताकि दूर-दूर के स्थानों को तीव्र परिवहन द्वारा जोड़ा जा सके।
ऐसे यन्त्रों का उत्पादन करना, जिनसे बड़े पैमाने पर खेती की जा सके।

संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा दोनों जगहों पर औद्योगिक नगरों का विकास हुआ और कारखानों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई।- 1860 में संयुक्त राज्य अमेरिका का अर्थतन्त्र अविकसित अवस्था में था। परन्तु 1890 तक यह संसार की अग्रणी औद्योगिक शक्ति बन चुका था।

खेती का विस्तार – बड़े पैमाने की खेती का भी विस्तार हुआ। बड़े-बड़े इलाके साफ किए गए और उन्हें खेतों में बदल दिया गया। 1890 तक जंगली भैंसों का लगभग पूरी तरह सफाया कर दिया गया। इस प्रकार शिकार वाली जीवनचर्या भी समाप्त हो गई। 1892 में संयुक्त राजनीतिक विस्तार राज्य अमेरिका का महाद्वीपीय विस्तार पूरा हो गया। तब तक प्रशान्त महासागर और अटलांटिक महासागर के बीच का क्षेत्र विभिन्न राज्यों में विभाजित किया जा चुका था।

अब कोई ‘फ्रॉटयर’ नहीं रहा था, जो कई दशकों तक यूरोपीय आबादकारों को पश्चिम की ओर खींचता रहा था। अब संयुक्त राज्य अमेरिका हवाई और फिलिपींस में अपने उपनिवेश बसा रहा था। इस प्रकार वह एक साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका था।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
कनाडाई राज्यों के महासंघ का निर्माण कब हुआ?
(क) 1667
(ख) 1767
(ग) 1867
(घ) 1967
उत्तर:
(ग) 1867

प्रश्न 2.
नश्तत्वशास्त्र का विकास कहाँ हुआ था?
(क) इंग्लैंड में
(ख) जर्मनी में
(ग) फ्रांस में
(घ) पोलैंड में
उत्तर:
(ग) फ्रांस में

प्रश्न 3.
जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स ने अमेरिकी फ्रन्टियर किस रूप में देखा है?
(क) पूँजीवादी यूरोपिया
(ख) समाजवादी यूरोपिया
(ग) जमाखोर
(घ) दानी
उत्तर:
(क) पूँजीवादी यूरोपिया

प्रश्न 4.
सिडनी कहाँ स्थित है?
(क) उत्तरी अमेरिका में
(ख) दक्षिण अमेरिका में
(ग) पुर्तगाल में
(घ) आस्ट्रेलिया में
उत्तर:
(घ) आस्ट्रेलिया में

प्रश्न 5.
आस्ट्रेलिया के मूल निवासी कहाँ से आये थे?
(क) न्यूगिनी
(ख) तस्मानिया
(ग) सिडनी
(घ) न्यु साउथवेल्स
उत्तर:
(क) न्यूगिनी

प्रश्न 6.
आस्ट्रेलिया को किस यूरोपीय देश ने अपना उपनिवेश बनाया?
(क) फ्रांस
(ख) पुर्तगाल
(ग) इंगलैंड
(घ) स्पेन
उत्तर:
(ग) इंगलैंड

प्रश्न 7.
उत्तरी अमेरिका के मूल निवासियों ने अपना इतिहास लिखना कब आरम्भ किया?
(क) 1840
(ख) 1860
(ग) 1740
(घ) 1960
उत्तर:
(ग) 1740

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में किसके लिए सेटलर शब्द का प्रयोग नहीं हुआ?
(क) डच
(ख) पुर्तगाली
(ग) ब्रिटिश
(घ) यूरोपीय
उत्तर:
(ख) पुर्तगाली

प्रश्न 9.
कनाडा का एक महत्त्वपूर्ण उद्योग क्या है?
(क) मत्स्य उद्योग
(ख) फर्न उद्योग
(ग) लौह उद्योग
(घ) टीन उद्योग
उत्तर:
(क) मत्स्य उद्योग

प्रश्न 10.
किसी स्थान का बाशिंदा कौन है?
(क) जहाँ उसे वोट देने का अधिकार हो
(ख) जहाँ से उसे जीविका मिले
(ग) जहाँ उसके माता पिता रहते हो
(घ) जहाँ वह पैदा हुआ हो
उत्तर:
(घ) जहाँ वह पैदा हुआ हो

प्रश्न 11.
चिरोकी उत्तरी अमेरिका एक्ट कब बना?
(क) हवाई जहाज
(ख) जीप
(ग) काक
(घ) बाल कटाई
उत्तर:
(ख) जीप

प्रश्न 12.
यूरोपीय उत्तरी अमेरिका से क्या खरीदना चाहते थे?
(क) गेहूँ
(ख) सुअर
(ग) मछली और रोएदार खाल
(घ) मक्खन
उत्तर:
(ग) मछली और रोएदार खाल

प्रश्न 13.
कनाडा इन्डियन्स एक्ट कब बना?
(क) 1691
(ख) 1791
(ग) 1876
(घ) 1991
उत्तर:
(ग) 1876

प्रश्न 14.
संयुक्त राज्य अमेरिका की कौन-सी सरहद (फ्रंटियर) खिसकती रहती थी?
(क) पूर्वी
(ख) पश्चिमी
(ग) उत्तरी
(घ) दक्षिणी
उत्तर:
(ख) पश्चिमी

प्रश्न 15.
प्रेयरी चरागाह कहाँ था?
(क) उत्तरी अमेरिका में
(ख) दक्षिणी अमेरिका में
(ग) आस्ट्रेलिया में
(घ) इंगलैंड में
उत्तर:
(क) उत्तरी अमेरिका में

प्रश्न 16.
उत्तरी अमेरिका के आबादकार (सेटलर) कहाँ से दास खरीदते थे?
(क) दक्षिणी अमेरिका से
(ख) अफ्रिका से
(ग) पुर्तगाल में
(घ) दक्षिणी एशिया से
उत्तर:
(ख) अफ्रिका से

Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 असली चित्र

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 2 असली चित्र Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 2 असली चित्र

Bihar Board Class 6 Hindi असली चित्र Text Book Questions and Answers

प्रश्न अभ्यास

पाठ से –

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
यह कहानी आपको कैसी लगी? इस संबंध में आप अपने तर्क (विचार) दें।
उत्तर:
यह कहानी रोचक तथा मनोरंजक है। इस कहानी की सबसे बडी विशेषता यह है कि पाठक की रुचि कहानी पढ़ने में आदि से अन्त तक बनी रहती है। तेनालीराम की बुद्धि के आगे सेठजी की चालाकी नहीं चली और उन्हें अन्त में अपनी हार माननी ही पड़ी।

असली चित्र का क्वेश्चन आंसर Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 2.
इसका कौन-सा पात्र अच्छा लगा और क्यों ?
उत्तर:
वैस तो इस कहानी में कुल चार ही पात्र हैं पर तेनालीराम की भूमिका सर्वोपरि है। तेनालीराम के कारण ही कहानी आगे बढ़ती है और उसका सुखदायी अन्त होता है अन्यथा कहानी का बीच में ही अन्त हो जाता और अन्त दुखदायी होता क्योंकि चित्रकार को अपने परिश्रम का फल नहीं मिलता।

असली चित्र Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 3.
तेनालीराम ने इस घटना की खबर राजा को दी तो क्या हुआ?
उत्तर:
इस घटना की खबर तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय को दी। राजा इसे सुनकर लोट-पोट हो गये। वे अपनी हँसी रोक नहीं पाये।

Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 4.
“एक कौड़ी-खर्च करने में उसकी जान निकलती थी।” इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
कंजूसों के लिये पैसा सब कुछ होता है। इस संबंध में एक कहावत है कि “चमड़ी जाय तो जाय पर दमडी बची रहे।” एक कौडी खर्च करने में उनकी जान निकल जाने की नौबत आ जाती है। राजा कृष्णदेव राय के राज्य में भी एक ऐसा ही धनी सेढ़ था जो पैसे को हाथ से निकलना सहन नहीं कर सकता था।

Bihar Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों को भरिए।
(क) कंजूस सेठ ने चित्रकार से ……………. देने का वादा किया।
(ख) यह कहानी राजा ……………. के राज्य की है।
(ग) चित्रकार ने …………. से सलाह ली।
(घ) एक दिन चित्रकार ……………. लेकर सेठ के पास पहुंचा।
(ङ) तेनालीराम राजा कृष्णदेव राय के दरबार में ………….. थे।
उत्तर:
(क) उसके चित्र के लिये सौ स्वर्ण मुद्राएँ
(ख) कृष्णदेव राय
(ग) तेनालीराम
(घ) तेनालीराम के कहे अनुसार आईना
(ङ) विदूषक ।

पाठ से आगे –

Bihar Board Class 6 Hindi Solution प्रश्न, 1.
चित्रकार की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर:
चित्रकार की जगह कोई भी दूसरा व्यक्ति होता तो निराश होकर बैठ जाता और दो-तीन प्रयास के बाद बनाये चित्र को कंजूस सेठ के घर छोड़कर आ जाता।

Asali Chitra Bihar Board Class 6 Hindi प्रश्न 2.
गप्प लगाने से नुकसान ज्यादा होता है या फायदा? पाँच वाक्यों में लिखिए।
उत्तर:
गप्प लगाने का आधार ज्यादातर झूठ होता है। झूठ के पाँव नहीं होते। झूठ अपने बल पर बहुत देर तक टिक नहीं पाता। अत: बराबर गप्प लगाने वाला व्यक्ति अपने मित्रों के सामने बहुत प्रभाव डालने में विफल हो जाता है क्योंकि सच्चाई प्रकट हो जाती है। गप्प लगाने से नुकसान ज्यादा होता है फायदा बिलकुल नहीं।

किसलय हिंदी बुक बिहार क्लास 6 Bihar Board प्रश्न 3.
बार-बार कंजूस सेठ द्वारा अपना चेहरा बदल लेने के बाद चित्रकार को सलाह किसने दी? दी गई सलाह का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर:
चित्रकार कंजूस सेठ की चालाकी से हतप्रभ हो गया था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। फिर वह तेनालीराम के पास गमा और अपनी समस्या बतायी। तेनालीराम ने ही चित्रकार को आईना लेकर जाने के लिये कहा जिसमें कंजूस सेठ को अपना सही चेहरा दिखाई दे । कंजूस सेठ का असली चेहरा स्वयं प्रकट हो गया और उसे अपनी हार मानने को मजबूर होना पड़ा । यह सलाह उस स्थिति में सबसे अच्छी थी और उसका सही प्रभाव पड़ा।

व्याकरण –

किसलय हिंदी बुक बिहार क्लास 6 Solution Bihar Board प्रश्न 1.
बॉक्स में दिए गए शब्दों को संज्ञा के विभिन्न भेदों में छाँटकर लिखिए।
कृष्णदेव राय, चित्रकार, तेनालीराम, पानी, आईना, लोग, कंजूसी, दूध, ईमानदारी, गाय, पढ़ना, वर्ग, चीनी, गाय, हिमालय, मेला।
उत्तर:

(क) जातिवाचक संज्ञा : चित्रकार, गाय, आईना
(ख) व्यक्तिवाचक संज्ञा : कृष्णदेव राय, तेनालीराम, हिमालय।
(ग) भाववाचक संज्ञा : कंजूसी, ईमानदारी
(घ) द्रव्यवाचक संज्ञा : पानी, दूध, चीनी।
(ङ) समूहवाचक संज्ञा : लोग, वर्ग, मेला पढ़ना क्रिया है, संज्ञा नहीं।

Bihar Board Class 6 Hindi Book प्रश्न 2.
इन मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करें
पानी-पानी होना, काम चाँदी होना, हँसते-हँसते लोट पोट होना, हिम्मत करना, भौंचक रह जाना ।
उत्तर:

  1. पानी-पानी होना : सच्चाई प्रकट होने पर रणधीर पानी-पानी हो गया।
  2. काम चाँदी होना : पैसा मिलते ही उसका काम चाँदी हो गया।
  3. हँसते-हँसते लोट-पोट होना : बच्चे की बात सुनते ही घर के सभी लोग हँसते-हँसते लोट-पोट हो गये।
  4. हिम्मत हारना ; बाधा आने पर भी मनुष्य को हिम्मत नहीं हारना चाहिये।
  5. भौचक रह जाना : परीक्षा में असफल हो जाने की सूचना पाकर वह भौंचक रह गया।

Bihar Board Class 6 Hindi Solution In Hindi प्रश्न 3.
इनके विपरीतार्थक शब्द लिखिएअपार, नया, निराशा, समझ, देर, सही।
उत्तर:
अपार – सीमित
निराशा – आशा
देर – शीघ्र
नया – पुराना
समझ – नासमझ
सही – गलत

Bihar Board Class Six Hindi प्रश्न 4.
निम्न शब्दों से वाक्य बनाइएचित्रकार, पत्रकार, कलाकार, सलाहकार, नाटककार ।
उत्तर:

  1. चित्रकार : भारत में अनेक अच्छे चित्रकार हैं।
  2. पत्रकार : पत्रकार बनकर आप यश कमा सकते हैं।
  3. कलाकार : अच्छे कलाकार का सभी सम्मान करते हैं।
  4. सलाहकार : सलाहकार बनना गौरव की बात है।
  5. सरकार सरकार का गठन शासन चलाने के लिये होता है।

कुछ करने को –

Class 6 Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
तेनालीराम की ही तरह बीरबल और गोनू झा के किस्से भी प्रचलित हैं। अपनी कक्षा में वैसे किस्से सुनाइए।
उत्तर:
उत्तर – [इनके प्रचलित किस्से, छात्र एकत्रित करें और अपने साथियों को कक्षा में सुनायें।]

बीरबल, अकबर के दरबार के नवरत्नों में एक थे। बीरबल की बद्धिमानी के किस्से उसके राज्य में अत्यन्त प्रचलित थे। अकबर और बीरबल के बीच होने वाले नोंक-झोंक की कहानियाँ भी लोगों के बीच कहे और सुने जाते थे। एक दिन अकबर ने बीरबल को हराने की सोची जब दरबार लगा था, महाराज ‘अकबर ने एक श्याम-पट (ब्लैकबोर्ड) पर खली से एक रेखा खींच दी और बीरबल को आदेश दिया कि इस रेखा को बिना काटे या छाँटे छोटी कर दो। पर यह कैसे सम्भव था? सब लोक चकित थे। आज तो बीरबल की खैरियत नहीं थी। इस बीच बीरबल उठे और अकबर द्वारा खींची रेखा के नीचे एक बड़ी रेखा खींच दी। अकबर द्वारा खींची रेखा छोटी हो गयी। दरबारी, बीरबल की बुद्धि की प्रशंसा करने लगे। अकबर अपने सिंहासन से उतरे और बीरबल को गले लगा लिया। इस किस्से से एक शिक्षा मिलती है। बिना मारे-काटे अपने दुश्मन को छोटा कर दो – उसे परास्त कर दो। अपने को उतना ताकतवर बना लो कि तुम्हारा दुश्मन तुम्हारे आगे नतमस्तक हो जाय।

है न, यह किस्सा मनोरंजक और शिक्षाप्रद भी। इस प्रकार के किस्से आप इकत्रित कर सकते हैं।

Bihar Board 6th Class Hindi प्रश्न 2.
अपने मित्रों के बीच इसी तरह की कोई रोचक कहानी सुनाइए और सुनिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Class 6 Chapter 2 Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
इस कहानी को एकांकी के रूप में कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

असली चित्र Summary in Hindi

पाठ का सार-संक्षेप

दक्षिण भारत में एक प्रसिद्ध राजा हो गये थे जिनका नाम कृष्णदेव राय था। उनके राज्य में एक सेठ रहता था जो कंजूस ही नहीं महाकंजूस था। वह अपार धन-दौलत का मालिक था पर खर्च करने के नाम पर उसकी जान निकल जाती थी।

एक बार सेठ के मित्रों ने सेठ से उसका चित्र बनवाने के राजी कर लिया। चित्रकार ने बड़े मनोयोग से सेठ जी का चित्र बनाया और उनके सामने उपस्थित किया। चित्रकार ने पारिश्रमिक के रूप में सेठ से सौ स्वर्ण मुद्राओं की मांग की । सेठ का कलेजा, स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर बैठ गया। पैसे नहीं देने पड़े, इस बात के लिये सेठ ने एक तरकीब सोची। सेठ स्वयं चेहरा बदलने में माहिर था- वह घर के अन्दर गया और अपना चेहरा बदल कर चित्रकार के सामने उपस्थित हुआ। उसने चित्रकार से कहा – तुम्हारे द्वास बनाया चित्र तो मेरे चेहरे से मेल ही नहीं खाता, फिर यह मेरे किस काम की? तुम स्वयं ही मिलाकर देख लो। चित्रकार सेठ का बदला हुआ चेहरा देखकर निराश हो गया और बनाये हुये चित्र को लेकर वापस चला गया।

दूसरे दिन चित्रकार पुन: एक नया चित्र बनाकर लाया जो पिछले दिन के चेहरे से एकदम मिलता था। लेकिन कमाल हो गया जब सेठ ने चित्रकार को आया देखकर पुनः अपना चेहरा बदल कर उपस्थित हुआ । चित्रकार सेठ का बदला हुआ चेहरा देखकर हतप्रभ हो गया। चित्रकार मारे शर्म के · पानी-पानी हो गया। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर उससे भूल कहाँ हो जाती है। उसने फिर से चित्र बनाने का फैसला किया।

अगले चित्र के साथ भी वही हश्र हुआ जो पहले दो चित्रों के साथ हुआ था। इसके बाद कई दिनों तक वह नया-नया चित्र बनाता रहा और बार-बार उसे सेठ के सामने लज्जित होने की नौबत आती रही।

चित्रकार अबतक सेठ की चाल अच्छी तरह समझ चुका था और उसकी कंजूसी को भी जान चुका था। वह सोचने लगा इस कंजूस सेठ से कैसे पार पाया जाये । गम्भीरतापूर्वक विचार करने के बाद उसने तेनालीराम से राय लेने की बात सोची। थोड़ी देर सोचने के बाद तेनालीराम ने चित्रकार को सलाह दी- कल तुम कंजूस के पास एक आईना लेकर जाना और उसे कहना कि इस बार वह उसका सही चित्र लेकर आया है। आप इस चित्र को अपने चेहरे से अच्छी तरह मिलाकर देख लें और फर्क पड़े तो उसे बतावें। तेनालीराम ने कहा – “इतना भर करो और तुम्हारा काम चाँदी।”.

कल के दिन चित्रकार ने तेनालीराम के कहे अनुसार किया और एक आईना लेकर कंजूस सेठ के पास पहुँचा । उसने सेठ से कहा- ” सेठजी आज आपका बिल्कुल सही चित्र बनाकर लाया हूँ। देख लें इसमें किसी प्रकार की – त्रुटि की गुंजाइश नहीं है। सेठ आईने को देखकर आगबबूला हो गया और बौखलाकर बोला – “अरे, यह चित्र कहाँ है ? यह तो आईना है ? चित्रकार ने तब सेठ से कहा- ” महाराज! आईना के सिवा आपकी असली सूरत और कौन बना सकता है? बस जल्दी से मेरे चित्रों की कीमत एक हजार स्वर्ण मुद्रायें निकालें।” सेठ का माथा चक्कर खा गया। वह समझ गया कि यह बुद्धि कंवल तेनालीराम की ही हो सकती है। बिना देर किये उसने एक हजार स्वर्ण मुद्रायें सौंप दीं।

अगले दिन तेनालीराम ने इस घटना की सूचना कृष्णदेव राय को दी। राजा भी इस घटना को सुनकर लोट-पोट हो गये।

Bihar Board Class 9 Economics Solutions Chapter 2 मानव एवं संसाधन

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions Economics अर्थशास्त्र : हमारी अर्थव्यवस्था भाग 1 Chapter 2 मानव एवं संसाधन Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science Economics Solutions Chapter 2 मानव एवं संसाधन

Bihar Board Class 9 Economics मानव एवं संसाधन Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

Bihar Board Class 9 Economics Solution प्रश्न 1.
मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ क्या हैं ?
(क) भोजन और वस्त्र
(ख) मकान
(ग) शिक्षा
(घ) उपयुक्त सभी
उत्तर-
(घ) उपयुक्त सभी

अर्थशास्त्र कक्षा 9 Chapter 2 Bihar Board प्रश्न 2.
निम्न में से कौन मानवीय पूँजी नहीं है ?
(क) स्वास्थ्य
(ख) प्रशिक्षण
(ग) अकुशलता
(घ) प्रबंधन
उत्तर-
(ग) अकुशलता

कक्षा 9 अर्थशास्त्र पाठ 2 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
प्रो0 अमर्त्य सेन ने प्राथमिक शिक्षा को मानव के लिए क्या बनाने पर जोर दिया है ?
(क) मूल अधिकार
(ख) मूल कर्त्तव्य
(ग) नीति-निर्देशक तत्व
(घ) अनावश्यक
उत्तर-
(क) मूल अधिकार

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 4.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की साक्षरता दर है ?
(क) 75.9 प्रतिशत
(ख) 60.3 प्रतिशत ।
(ग) 54.2 प्रतिशत
(घ) 64.5 प्रतिशत
उत्तर-
(ख) 60.3 प्रतिशत ।

अर्थशास्त्र पाठ 2 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 5.
जनगणना सन् 2001 ई0 के अनुसार मानव की औसत आयु निम्न में से क्या है?
(क) 65.4 वर्ष
(ख) 60.3 वर्ष
(ग) 63.8 वर्ष
(घ) 55.9 वर्ष
उत्तर-
(ग) 63.8 वर्ष

Bihar Board Class 9th Economics Solution प्रश्न 6.
बिहार राज्य के किस जिले की जनसंख्या सबसे अधिक है ?
(क) पटना
(ख) पूर्वी चम्पारण
(ग) मुजफ्फरपुर
(घ) मधुबनी
उत्तर-
(क) पटना

रिक्त स्थान की पूर्ति करें :

1. मानव पूँजी-निर्माण से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में …………. ………. होता है।
2. …………………. संसाधन उत्पादन का सक्रिय साधन है।
3. मानवीय संसाधन के विकास के लिए ………….. अनिवार्य है।
4. सन् 2001 ई० की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या …………………… करोड़ है।
5. सन् 2001 ई० की जनगणना के अनुसार सबसे कम साक्षरता वाला राज्य ……………………… है।
6: बिहार में सन् 2001 ई० के जनगणना के अनुसार साक्षरता दर ………………….. है।
उत्तर-
1. वृद्धि,
2. मानव,
3. शिक्षा,
4. 102.70,
5. बिहार,
6. 47 प्रतिशत ।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

संसाधन के रूप में लोग Class 9 Notes Bihar Board प्रश्न 1.
मानव संसाधन क्या है ?
उत्तर-
किसी देश या प्रदेश की जनसंख्या को ही मानव संसाधन कहते हैं।

Bihar Board Class 9th Social Science Solution प्रश्न 2.
हमें मानव संसाधन में निवेश की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?
उत्तर-
मानव की कुशलता और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए मानव संसाधन में निवेश की आवश्यकता होती है।

अर्थशास्त्र कक्षा 9 Chapter 2 Answers Bihar Board प्रश्न 3.
साक्षरता व शिक्षा में क्या अंतर है ?
उत्तर-
साक्षरता का अर्थ है मात्र अक्षर ज्ञान जबकि शिक्षा का अर्थ विशिष्ट ज्ञानार्जन है।

Class 9 Economics Chapter 2 Notes In Hindi प्रश्न 4.
भौतिक व मानव-पूँजी में दो अंतर बताएँ।
उत्तर-
(i) मानव पूँजी उत्पादन का सक्रिय साधन है जबकि भौतिक पूँजी उत्पादन का निष्क्रिय साधन है ।
(ii) मानव पूँजी अमूर्त होती है जिसे बाजार में बेचा नहीं जा सकता लेकिन भौतिक पूँजी मूर्त होती है जिसे बाजार में ले जाया जा सकता है।

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 5.
विश्व जनसंख्या की दृष्टि से भारत का क्या स्थान है ?
उत्तर-
भारत का दूसरा स्थान है।

Bihar Board Class 9 Geography Solutions प्रश्न 6.
जन्म-दर क्या है ?
उत्तर-
जन्म दर से तात्पर्य किसी एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के पीछे जन्म लेनेवाले बच्चों की संख्या से है।

Bihar Board Class 9th History Solution प्रश्न 7.
मृत्यु दर क्यो है ?
उत्तर-
मृत्युदर का अभिप्राय किसी एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या में मरनेवाले व्यक्तियों की संख्या से है।

Bihar Board Class 9 History Solution प्रश्न 8.
एक साक्षर व्यक्ति कौन है ?
उत्तर-
यदि कोई व्यक्ति किसी भाषा को समझने के साथ-साथ उस भाषा को लिखना-पढ़ना भी जानता हो तो वह व्यक्ति साक्षर है।

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 9.
प्रारम्भिक (प्राथमिक) शिक्षा क्या है ?
उत्तर-
प्राथमिक शिक्षा वह है जो युवावर्ग (6-14) आयुवर्ग को न्यूनतम और आधारभूत कौशल सिखाती है।

Bihar Board Class 9 Civics Solution प्रश्न 10.
पेशेवर शिक्षा क्या है ?
उत्तर-
किसी खास कार्य के लिए विशेष तकनीकि ज्ञान प्राप्त करना पेशेवर शिक्षा है। 11. संक्षिप्त रूप को पूरा रूप दें
(i) G.D.P (ii) U.G.C. (iii) N.C.E.R.T. (iv) S.C.E.R.T. (v) I.C.M.R.
उत्तर-
(i) G.D.P. : Gross Domestic Product (कुल गृह उत्पादन)
(ii) U.G.C. : University Grants Commission (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग)
(iii) N.C.E.R.T. : National Council of Educational Research and Training (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद)
(iv) S.C.E.R.T. : State Council of Educational Research and Training (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण
(v) I.C.M.R : Indian Council of Medical Research (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद)

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव तथा मानव संसाधन को परिभाषित करें।
उत्तर-
मानव-उत्पादन कार्य में साहस एक साधन है जो सक्रिय है यह साहस दिखाने वाला ही मानव है।
मानवसंसाधन-उत्पादन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मानव को ‘मानव संसाधन’ के रूप में जानते हैं।

प्रश्न 2.
मानव संसाधन उत्पादन को कैसे बढ़ाता है ?
उत्तर-
मानव संसाधन अपनी योग्यता और क्षमता से उत्पादन को बढ़ाता है और अर्थ-व्यवस्था के चतुर्मुखी विकास में इसका योगदान अधि क होता है।

प्रश्न 3.
किसी देश में मानव-पूँजी के दो प्रमुख स्रोत क्या हैं ?
उत्तर-
मानव पूँजी के स्रोतों में-भोजन और प्रशिक्षण

प्रश्न 4.
किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण देकर कुशल बनाना क्यों जरूरी है ?
उत्तर-
जब किसी खास काम के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है तो उसे तकनीकि ज्ञान से जोड़ते हैं । विश्व के बाजारों के बीच connent missing

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या के आकार को एक बार चार्ट (दंड ग्राफ) द्वारा ्पष्ट करें।
उत्तर-
दशकीय जनसंख्या वृद्धि को बार-चार्ट के द्वारा दिखाया जा सकता है-
Bihar Board Class 9 Economics Solutions Chapter 2 मानव एवं संसाधन - 1

प्रश्न 6.
बिहार के सबसे अधिक जनसंख्या-वृद्धि वाले 5 जिलों के नाम लिखें।
उत्तर-
(अवरोही क्रम में)
राज्य में सर्वाधिक जनसंख्या वाले 5 जिले –
(i) पटना – 47,09,851
(ii) पूर्वी चम्पारण – 39,33,636
(iii) मुजफ्फरपुर – 37,43,836
(iv) मधुबनी – 35.70.651
(v) गया – 34,64,983

प्रश्न 7.
बिहार के सबसे कम जनसंख्या वाले 5 जिलों के नाम लिखें।
उत्तर-
(आरोही क्रम में) राज्य में सबसे कम जनसंख्या वाले 5 जिले –
(i) शिवहर – 5,14,288
(ii) शेखपुरा – 5,25,137
(iii) लखीसराय – 8.01,173
(iv) मुंगेर – 11,35,499
(v) खगड़िया – 12,76,677

प्रश्न 8.
बिहार देश का सबसे कम साक्षर राज्य है, इसके मुख्य दो कारण लिखें।
उत्तर-
बिहार देश का सबसे कम साक्षर राज्य है, इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(i) अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में प्राथमिक नामांकन की दर बहुत कम है। देश में औसत नामांकन जहाँ 77% है वहीं बिहार में 52% ही है।
(ii) उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुँचते- पहुँचते बहुत से बच्चे स्कूल का त्याग कर देते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव संसाधन क्या है ? मानव संसाधन को मानव पूँजी के रूप में केसे परिवर्तित किया जाता है ?
उत्तर-
मानव संसाधन का अर्थ है देश की कार्यशील जनसंठ्या का कौशल और योग्यताएँ । जब व्यक्ति राष्ट्रीय उत्पादन के सृजन : अधिक योगदान करने की दृष्टि से योग्यताएँ एवं कौशल प्राप्त कर लत हैं तो वे संसाधन बन जाते हैं।
जब किसी भी व्यक्ति में शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के रूप में निवेश किया जाता है तो वह प्रशिक्षण, दक्षता एवं कौशल हासिल कर लेता है तो वह व्यक्ति राष्ट्र की संपत्ति बन जाता है। ऐसी स्थिति में वह संसाधन रूप में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण स्वरूप-छात्र रूपी मानव संसाधन को शिक्षा अभियंता, डॉक्टर, शिक्षक वकील आदि रूपों में परिवर्तित कर देती है, अर्थात मानव को पूँजी के रूप में परिवर्तित दिया जाता है । मानवीय पूँजी कुल राष्ट्रीय उत्पाद के निर्माण में सहायक होती है।

प्रश्न 2.
मानव पूँजी और भौतिक-पूँजी में क्या अंतर है ? इसे तालिका द्वारा स्पष्ट करें। क्या मानव पूँजी भौतिक पूँजी से श्रेष्ठ है ?
उत्तर-
भौतिक पूँजी (Physical Capital) :

  • भौतिक पूँजी उत्पादन का निष्क्रिय साधन है (Passive Resource).
  • भौतिक पूँजी मूर्त (Trangile) होती है जिसे बाजार में ले जाया जा सकता है।
  • भौतिक पूँजी को उसके मालिक से अलग किया जा सकता है।
  • यह देश के अन्दर पूर्णतः गतिशील है।
  • इसके लगातार प्रयोग से इसमें ह्रास होता है।
  • इसमें केवल निजी लाभ होता है ।

मानव पूँजी (Human Capital):

  • मानव पूँजी उत्पादन का सक्रिय साधन है (Active Re’source)
  • मानव पूँजी आमूर्त होती है (Intrangible) इसे बाजार में बेचा नहीं जा सकता । इसकी सेवा को खरीदा या बेचा जा सकता है।
  • मानव-पूँजी को इसके स्वामी से अलग नहीं किया जा सकता है।
  • यह पूर्णतः गतिशील नहीं, यह राष्ट्रीयता तथा संस्कृति से बाधित होती है।
  • मानव पूँजी उम्र बढ़ने के साथ इसमें हास हो सकता है लेकिन शिक्षा तथा स्वास्थ्य में लगातार निवेश से इसकी क्षतिपूर्ति होती है।
  • मानव पूँजी से स्वामी तथा समाज दोनों को लाभ होता है।

प्रश्न 3.
भारत में मानवीय-पूँजी निर्माण के विकास का परिचय दें।
उत्तर-
भारत की विकास योजनाओं का अंतिम उद्देश्य मानवीय पूँजी-निर्माण अथवा मानवीय साधनों का विकास करना है ताकि दीर्घकाल में आर्थिक सुधारों को सफल बनाया जा सके । देश में कुछ वर्षों में मानवीय साधनों के विकास में सराहनीय सफलता मिली है। जिसका पता नीचे दिए गए तालिका से लगता है।

Bihar Board Class 9 Economics Solutions Chapter 2 मानव एवं संसाधन - 2

इस तालिका से स्पष्ट है कि भारत में योजना काल में जीने की औसत आयु में वृद्धि हुई है । साक्षरता की दर भी बढ़ी है, जन्मदर, मृत्यु दर में कमी हुई है। प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। इस प्रकार आँकडे इस बात के सूचक हैं कि देश में मानवीय साधनों के विकास में सराहनीय प्रगति हुई है।

प्रश्न 4.
मानवीय साधनों के विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास की भूमिका की विवेचना करें।
उत्तर-
मानवीय साधनों के विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास की भूमिका कुछ इस प्रकार है
शिक्षा-मानव पूँजी निर्माण में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षा वह माध्यम है, जिससे व्यक्ति मानव पूँजी के रूप में समृद्धि पाता है। नोबेल पुरस्कार विजेता ‘प्रो० अमर्त्य सेन’ ने शिक्षा को मानव पूँजी के रूप में समृद्ध करने के लिए प्राथमिक शिक्षा को नागरिक का ‘मूल अधिकार’ बनाने पर जोर दिया है। विगत वर्षों के आर्थिक विकास के बाद भी भारत में शिक्षितों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि नहीं हो सकी है। . स्वास्थ्य-स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। अच्छा स्वास्थ्य ही उसकी महत्वपूर्ण पूँजी है और इसमें खर्च कर बढ़ोतरी करना मानव को एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में परिवर्तित कर देना है। अतः स्वास्थ्य पर व्यय मानव पूँजी के निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्रोत आवास-रहने को उचित घर होने से मानव अपनी कार्य कुशलता में वृद्धि कर पाता है।

प्रश्न 5.
भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या-नीति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
भारत में नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) के अन्तर्गत यह स्वीकार किया गया है कि ‘दीर्घकालीन विकास’ (Sustainable Development) तथा जनसंख्या में घनिष्ठ संबंध है। विकास की क्रिया को बनाये रखने के लिए जनसंख्या को नियंत्रित करना नितांत जरूरी है इसी उद्देश्य से 15 फरवरी, 2000 ई० को भारत सरकार के द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति’ की घोषणा की गयी। इस नीति में समान वितरण के साथ दीर्घकालीन विकास के लिए जनसंख्या स्थिरीकरण को मौलिक आवश्यकता माना गया है।

इस नीति के तत्कालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन उद्देश्य हैं। तत्कालीन उद्देश्य में गर्भ निरोधक की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है।

मध्यकालीन उद्देश्य में कुल प्रजनन दर को 2010 तक प्रतिस्थापना स्तर पर लाना है। दीर्घकालीन उद्देश्य में 2045 तक जनसंख्या को उस स्तर पर स्थिर बनाना है जो दीर्घकालीन विकास की जरूरतें सामाजिक विकास तथा पर्यावरण सुरक्षा के अनुरूप माना गया है । इसके अंतर्गत कुछ नीतियाँ अपनाई गयी है।