Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग ‘ने’ का क्रिया पर प्रभाव

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग ‘ने’ का क्रिया पर प्रभाव Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग ‘ने’ का क्रिया पर प्रभाव

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग ‘ने’ का क्रिया पर प्रभाव Questions and Answers

‘ने’ एक परसर्ग है। इसे विभक्ति भी कहते हैं इसके प्रयोग से क्रिया में विकार आता है। इस विकार को समझने से पूर्व क्रिया के स्वरूप, भेद तथा प्रयोग को जानना आवश्यक है।

क्रिया
(अकर्मक, सकर्मक, द्विकर्मक एवं प्रेरणार्थक क्रिया)

जिस शब्द से किसी काम का करना या होना प्रकट हो, उसे क्रिया कहते हैं; जैसे–खाना, पीना, उठना, बैठना, होना आदि।

उदाहरण-

  1. पक्षी आकाश में उड़ रहे हैं।
  2. महेश आँगन में घूमता है।
  3. सुरेश रात को दूध अवश्य पीता है।
  4. बर्फ पिघल रही है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

उपर्युक्त वाक्यों में उड़ रहे हैं, घूमता है, पीता है, पिघल रही है-शब्दों से होने अथवा करने की प्रक्रिया का बोध होता है। अतः ये क्रिया पद हैं।
क्रिया पदबंध की रचना दो प्रकार के अंशों से मिलकर होती है। एक अंश तो वह है जो उस क्रिया पदबंध को मुख्य अर्थ प्रदान करता है। इसे मुख्य क्रिय कहा जाता है तथा मुख्य क्रिया के अलावा जो भी अंश शेष रह जाता है, वह स.. सहायक क्रिया का अंश होता है।

  1. लड़कियाँ गाना गा चुकी हैं।
  2. वह हँस रहा है।
  3. अब आप जा सकते हैं।
    मुख्य क्रिया-गा, हँस, जा।।
    सहायक क्रिया-चुकी हैं, रहा है, सकते हैं।

क्रिया के भेद

कर्म के अनुसार या रचना की दृष्टि से क्रिया के दो भेद हैं-

  1. सकर्मक और
  2. अकर्मक।

1. सकर्मक क्रिया-जिस क्रिया के साथ कर्म रहता है अथवा उसके रहने की संभावना रहती है, उसे ‘सकर्मक क्रिया’ कहते हैं। सकर्मक क्रिया का करनेवाला कर्ता ही होता है, परन्तु उसके कार्य का फल कर्म पर पड़ता है। .
‘राम पुस्तक पढ़ता है’-यहाँ ‘पढ़ना’ क्रिया सकर्मक है, क्योंकि उसका एक कर्म है। पुस्तक पढ़ने वाला ‘राम’ है, परन्तु उसकी क्रिया ‘पढ़ना’ का फल ‘पुस्तक’ पर पड़ता है। ‘वह पीता है यहाँ ‘पीना’ क्रिया सकर्मक है, क्योंकि उसके साथ किसी कर्म का प्रयोग न रहने पर भी कम्र की संभावना हैं ‘पीता है’ के पहले कर्म के रूप में ‘जल’ या ‘दूध’ शब्द रखा जा सकता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

सकर्मक क्रिया के तीन भेद हैं-
(क) पूर्ण एककर्मक कियाएँ-यह वास्तव में सकर्मक क्रिया ही है। इसमें एक कर्म की आवश्यकता होती है।
जैसे-राम ने रावण को मारा।
यहाँ ‘मारा’ क्रिया कर्म (रावण को) के बिना अधूरी है। तथा इस कर्म के समावेश से अर्थ भी पूरा हो गया है।
कुछ उदाहरण–सोहन पुस्तक पढ़ रहा है।
राम आम खाएगा।

(ख) पूर्ण द्विकर्मक क्रियाएँ-ऐसी क्रियाओं में दो कर्म होते हैं। जैसे
गोपी ने गीता को पुस्तक दी।
रमेश ने गोपाल को गाड़ी बेची।
प्रायः देना, लेना, बताना आदि प्रेरणार्थक क्रियाएँ इसी कोटि के हैं।

(ग) अपूर्ण ‘सकर्मक क्रियाएँ-वैसी क्रियाओं हैं जिसमें कर्म होता है फिर भी कर्म के किसी पूरक शब्द की आवश्यकता बनी रहती है। अन्यथा अर्थ अपूर्ण हो जाता है! मानना, समझना, बनना, चुनना आदि ऐसी ही क्रियाएँ हैं। जैसे-मैं रमेश को मुर्ख समझता हूँ, इस वाक्य में ‘रमेश को’ कर्म हैं परन्तु कर्म अकेले अपूर्ण अर्थ देता है।

अत: ‘मूर्ख’ पुरक के आने पर अर्थ स्पष्ट हो जाता है।
जैसे-जनता ने श्री प्रकाश को अपना प्रतिनिधि चुना।

2. अकर्मक क्रिया-जिस क्रिया के साथ कर्म न रहे अर्थात जिसकी क्रिया का फल कर्त्ता पर ही पड़े, उसे ‘अकर्मक क्रिया’ कहते हैं।
‘राम हँसता है’-इस वाक्य में ‘हँसना’ क्रिया अकर्मक है, क्योंकि यहाँ न तो हँसना का कोई कर्म है और न उसकी सम्भावना ही है। ‘हँसना’ क्रिया का फल भी ‘राम’ पर ही पड़ता है।

अकर्मक क्रिया तीन प्रकार की होती है-
(क) स्थित्यर्धक पूर्ण अकर्मक क्रिया-यह क्रिया बिना कर्म के पूर्ण अर्थ .. देती है और कर्ता की स्थिर दशा का बोध कराती है। जैसे
बच्चा सो रहा है। (सोने की दशा)
राधा रो रही है। (रोने की दशा) ।
परमात्मा है। (अस्तित्व की दशा)

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

(ख) गत्यर्थक (पूर्ण) अकर्मक क्रियाएँ-ये क्रियाएँ भी अकर्मक होती हैं। इनमें कर्म की आवश्यकता नहीं पड़ती। ये पूर्ण अकर्मक होती है, क्योंकि इनमें किसी पूरक की आवश्यकता नहीं होती। इन क्रियाओं में कर्ता गतिशील रहता है। जैसे-उड़ना, घूमना, तैरना, उठना, गिरना, जाना, आना, दौड़ना आदि।

उदाहरण-

  1. रवि दिल्ली जा रहा है।
  2. लड़का सड़क पर दौड़ रहा है।

(ग) अपूर्ण अकर्मक क्रिया-जिन क्रियाओं के प्रयोग के समय अर्थ की पूर्णता के लिए कर्ता से सम्बन्ध रखने वाले किसी शब्द-विशेषण की जरूरत पड़ती है, उन्हें अपूर्ण अकर्मक क्रियाएँ कहते हैं। ‘होना’ इस कोटि की सबसे प्रमुख क्रिया है। बनना, निकलना आदि प्रकार की अन्य क्रियाएँ हैं।

यथा-मैं हूँ।
वह बहुत है।
महात्मा गाँधी थे।
उपर्युक्त अपूर्ण वाक्यों में पूरक के प्रयोग की आवश्यकता है। यथा-
मैं बीमार हूँ।
वह बहुत तेज है।
महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता थे।
यहाँ बीमार का सम्बन्ध वाक्य के कर्ता में से है।
“तेज’ का सम्बन्ध वाक्य के कर्ता वह से है।
“राष्ट्रपिता” का सम्बन्ध वाक्य के कर्ता महात्मा गाँधी से है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

अकर्मक-सकर्मक में परिवर्तन (अंतरण)
क्रियाओं का अकर्मक होना या सकर्मक होना प्रयोग पर निर्भर करता हैं, न कि उनके. धातु रूप पर। यही कारण है कि कभी-कभी अकर्मक क्रियाएँ सकर्मक रूप में प्रयुक्त होती हैं और कभी सकर्मक क्रियाएँ अकर्मक रूप में प्रयुक्त होती हैं। जैसे
पढ़ना (सकर्मक)-मोहन कितना पढ़ रहा है।
पढ़ना (अकर्मक)-श्याम आठवीं में पढ़ रहा है।
खेलना (सकर्मक)-बच्चे हॉकी खेलते हैं।
खेलना (अकर्मक)-बच्चे रोज खेलते हैं।
“हँसना’, ‘लड़ना’ आदि कुछ अकर्मक क्रियाएँ सजातीय कर्म आने पर सकर्मक रूप में प्रयुक्त होती हैं। जैसे-

शेरशाह ने अनेक लड़ाइयाँ लड़ीं।
वह मस्तानी चाल चल रहा था।

ऐंठना, खुजलाना आदि क्रियाओं के दोनों रूप मिलते हैं। जैसे-
धूप में रस्सी ऐंठती है। (अकर्मक)
नौकर रस्सी ऐंठ रहा है। (सकर्मक)

प्रेरणार्थक क्रिया

जब कर्ता स्वयं क्रिया नहीं करता, बल्कि एक प्रेरक की सहायता से क्रिया कराता है या दो प्ररेकों की सहायता से क्रिया संपन्न करवाता है तो उस वाक्य-रचना को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। हिन्दी में प्रेरणार्थक वाक्यों के दो भेद हैं

1. प्रथम प्रेरणार्थक-जब कर्त्ता क्रिया तो करता है किन्तु उसके साथ एक ‘प्रेरक कर्ता’ भी होता है जो क्रिया-निष्पादन का प्रेरक या व्यवस्थापक बनकर उपस्थित रहता है, तब उसे प्रथम प्रेरणार्थक वाक्य कहते हैं।
उदाहरणतया-
माँ लड़के को दवाई पिलाती है।
यहाँ ‘माँ’ लड़के (कर्ता) को दवाई पिलाने का कार्य करा रही है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

2. द्वितीय प्रेरणार्थक-जब कर्ता को क्रिया कराने के लिए ‘प्रथम प्रेरक’ . किसी दूसरे प्रेरक’ की सहायता लेकर क्रिया निष्पादन करवाता है, तब उसे द्वितीय प्रेरणार्थक रचना कहते है।।

उदाहरणतया-माँ ने सोहन द्वारा अशोक को दवाई पिलवाई।
यहाँ माँ ‘प्रथम प्रेरक’ है तथा ‘सोहन’ द्वितीय प्ररेक है। ये दोनों मिलकर ‘अशोक’ कर्ता को दवाई पिलाने का कार्य संपन्न कर रहे हैं।

नीचे की रूपावली से बात स्पष्ट हो जाएगी
कर्ता-कर्म-क्रिया-अशोक रोटी खाता है।।
प्रथम प्रेरक-कर्ता-कर्म-क्रिया-माँ अशोक को रोटी खिलाती है।
प्रथम प्रेरक-द्वितीय प्रेरक-कर्ता-कर्म-क्रिया-माँ मनोहर द्वारा अशोक को रोटी खिलवाती है।

इस प्रकार क्रिया के रूपों में ‘खाता-खिलवाती’ परिवर्तन हुआ। हिन्दी में प्रेरणार्थक धातुओं की रचना-प्रक्रिया इस प्रकार है –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 1

संयुक्त क्रिया

जो क्रिया दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनती है, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे-घनश्याम रो चुका, किशोर रोने लगा, वह घर पहुँच गया। इन वाक्यों में ‘रो चुका’, ‘रोने लगा’ और ‘पहुँच गया’ संयुक्त क्रियाएँ हैं। विधि और आज्ञा को छोड़कर सभी क्रियापद दो या अधिक क्रियाओं के योग से बनते हैं, किन्तु संयुक्त क्रियाएँ इनसे भिन्न हैं; क्योंकि जहाँ एक ओर साधारण क्रियापद ‘हो, रो, सो, खा’ इत्यादि धातुओं से बनते हैं, वहाँ दूसरी ओर संयुक्त क्रियाएँ ‘होना, आना, जाना, रहना, रखना, उठाना, लेना, पाना, पड़ना, डालना, सकना, चुकना, लगना, करना, भेजना, चाहना’ इत्यादि क्रियाओं के योग से बनती हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

इसके अतिरिक्त सकर्मक तथा अकर्मक दोनों प्रकार की संयुक्त क्रियाएँ बनती हैं। जैसे-
अकर्मक क्रिया से-लेट जाना, गिर पड़ना।
सकर्मक क्रिया से-बेच लेना, काम करना, बुला लेना, मार देना।
संयुक्त क्रिया की एक विशेषता यह है कि उसकी पहली क्रिया प्रायः प्रधान होती है और दूसरी उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न करती है। जैसे-मैं पढ़ सकता हूँ। वह लिखता है।

भेद-संयुक्त क्रियाएँ जिन-जिन क्रियाओं के योग से बनती हैं वे चार प्रकार की होती हैं
(क) मुख्य क्रिया
(ख) सहायक क्रिया
(ग) संयोजी क्रिया
(घ) रंजक क्रिया।

(क) मुख्य क्रिया-संयुक्त क्रियाओं में एक क्रिया मुख्य होती है। उपर्युक्त वाक्य में लिख मुख्य क्रिया है।
(ख) सहायक क्रिया-काल का बोध कराने वाली क्रिया को सहायक क्रिया कहते हैं। उपर्युक्त वाक्यों में ‘है’ सहायक क्रिया है।
(ग) संयोजी क्रियाएँ-संयोजी क्रियाएँ मुख्य क्रिया के पक्ष, उसकी वृत्ति तथा वाच्य की सूचना देती हैं। यथा-

(i) पक्ष का उद्घाटन करने वाले उदाहरण –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 2

(ख) संयोजी क्रियाएँ कर्त्ता की इच्छा, अनिच्छा, विवशता या सार्थकता आदि वृत्तियों को भी प्रकट करती हैं। जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 3
(ग) संयोजी क्रियाएँ वाक्य के वाच्य का भी बोध कराती हैं। जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 4

(घ) अनुमति देने में भी हिन्दी में संयोजी क्रिया ‘दे’ का प्रयोग किया जाता है। जैसे-उसे चुपचाप खेलने दो-अनुज्ञाद्योतक ने + दें।

(घ) रंजक क्रियाएँ-रंजक क्रियाएँ मुख्य क्रिया के अर्थ को रंजित करती . हैं अर्थात् विशिष्ट अर्थछवि देती हैं। सामान्यतः ये आठ हैं-आना, जाना, उठना, बैठना, लेना, देना, पड़ना, डालना। नीचे इनके उदाहरण दिए जा रहे हैं –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 5
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

संयुक्त क्रियाओं के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें –
1. कहीं-कहीं संयुक्त क्रिया के दोनों पदों का क्रम तथा रूप बदलने पर उनके अर्थ में परिवर्तन आ जाता है। उदाहरणतया –
(क.) मोहन ने उसे मार दिया। (जान से मार दिया)
(ख) मोहन ने उसे दे मारा। (अचानक चोट कर दी)

2. निषेधात्मक वाक्यों में मुख्य क्रिया के साथ रंजक क्रिया का प्रयोग नहीं होता। यथा –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव - 6

3. संयुक्त क्रिया में ‘सकना’ और ‘चुकना’ जैसी क्रियाएँ रंजक क्रिया के रूप में प्रयुक्त होती हैं। वास्तव में ये रंजक क्रियाएँ नहीं हैं और न ही इनका स्वतंत्र अर्थ
होता है, किन्तु वे मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर क्रिया के सामर्थ्य, पूर्णता आदि का बोध कराती हैं। जैसे –

(क) रमेश यह काम कर सकता है। (सामर्थ्य का भाव)
(ख) शीला मुंबई जा चुकी है। (पूर्णता का भाव)

समापिका और असमापिका क्रियाएँ-वे क्रियाएँ जो वाक्य को समाप्त करती हैं। ये प्रायः अन्त में रहती हैं। उदाहरणतया –

  1. रीता खाना पका रही है।
  2. गोपाल बाग में टहल रही है।
  3. गुरु का सम्मान करो।
  4. लड़का सड़क पर दौड़ता है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

उपर्युक्त वाक्यों में मोटे काले शब्द समापिका क्रियाओं के उदाहरण हैं। ये क्रियाएँ वाक्यों की समाप्ति कर रही है।
असमापिका क्रियाएँ-वे क्रियाएँ जो वाक्य की समाप्ति नहीं करतीं, बल्कि अन्यत्र प्रयुक्त होती है। इन्हें क्रिया का कृदन्ती रूप भी कहते हैं। जैसे-
(i) नदी में तैरती हुई नौका कितनी अच्छी लग रही है।
(ii) आलमारी पर पड़े गुलदस्ते को उठा लाओ।

असमापिका क्रियाओं का विवेचन तीन दृष्टियों से किया जाता है-
(क) रचना की दृष्टि से
(ख) बने शब्दभेद की दृष्टि से
(ग) प्रयोग की दृष्टि से।

(क) रचना की दृष्टि से-कृदंती रूपों या असमापिका क्रियाओं की रचना चार प्रकार के प्रत्ययों से होती है –

  1. अपूर्ण कृदंत-ता, ते, ती, जैसे-बहता तिनका, बहते पत्ते, बहती नदी।
  2. पूर्ण कृदंत-आ, ई, ए, जैसे-बैठा लड़का, बैठे लोग, बैठी लड़की।
  3. क्रियार्थक कृदंत-ना, नी, ने, जैसे-लिखना है, लिखनी है, लिखने हैं।
  4. पूर्वकालिक कृदंत-कर, जैसे-खाकर, नहाकर।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

(ख) शब्द-भेद की दृष्टि से-कृदंती शब्द या तो संज्ञा होते हैं या विशेषण और क्रिया विशेषण, जैसे –
1. संज्ञा-ना : दोपहर में खाना/पीना/सोना मेरा नित्य कर्म है।
ने : सीता आने वाली है।

2. विशेषण-ता/ते/ती : बहता पानी शुद्ध होता है।
खिलती कलियों को मत तोड़ी।
आ/ई/ए : भागा हुआ चोर पकड़ा गया।
सोयी हुई बच्ची अचानक उठ गयी।
गिरे हुए फूल मत उठाओ।

3. क्रिया विशेषण-ते ही/ते ते/ कर/ए, ऐ
वह गिरते ही मर गया।
वह खाते-खाते मर गया।
वह खाकर जाएगा।
वह चलते-चलते थक गया।

(ग) प्रयोग की दृष्टि से-इस दृष्टिकोण से कृदन्त निम्नलिखित छः प्रकार . के होते हैं
1. क्रियार्थक कृदंत-इनका प्रयोग भाववाचक संज्ञा के रूप में होता है। जैसे-लिखना, पढ़ना, खेलना आदि। उदाहरण –
उसे नित्य टहलना चाहिए।
छात्रों को पढ़ना चाहिए।

2. कर्तृवाचक कृदंत-इस कृदंत से कर्तृवाचक संज्ञा बनती है।
जैसे- धातु + ने + वाला/वाले।
भाग + ने + वाला = भागने वाला।
वाक्य-प्रयोग-लिखने वाले से पूछ।
जाने वालों को रोको।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

3. वर्तमानकालिक कृदंत-ये कृदन्त वर्तमान काल में हो रही किसी क्रियात्मक विशेषता का ज्ञान कराते हैं। ये विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं। जैसे-बहुत हुआ पानी . वाक्य-प्रयोग-बहता हुआ जल स्वच्छ होता है।

4. भूतकालिक कृदंत-ये कृदंत भी विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं। परन्तु ये भूतकाल में सम्पन्न किसी किया का बोध कराते हैं। जैसे–पका हुआ फल।
वाक्य-प्रयोग-पका हुआ फल मीठा होता है।

5. तात्कालिक कृदंत-इन कृदंतों की समाप्ति पर तुरन्त मुख्य क्रिया सम्पन्न हो जाती है। इनका रूप धातु + ते ही’ से निर्मित होता है। जैसे-‘आते ही’, ‘कहते ही’ आदि

वाक्य-प्रयोग-वे जाते ही कहने लगे।
पत्र पढ़ते ही वह रो पड़ा।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण परसर्ग 'ने' का क्रिया पर प्रभाव

6. पूर्वकालिक कृदंत-मुख्य क्रिया से पूर्व की गई क्रिया का बोध ‘पूर्वकालिक कृदंत क्रिया’ से होता है। इसका निर्माण-‘धातु + कर’ से होता है। जैसे-सो + कर, पढ़ + कर, लिख + कर आदि।।
वाक्य प्रयोग-मोहन खाकर स्कूल गया।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 1 Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे? Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

Bihar Board Class 6 Social Science क्या, कब, कहाँ और कैसे? Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न (क)
मिट्टी के बर्तन की प्राचीनता का निर्धारण किस विधि से करते हैं ?
(i) कार्बन – 14 पद्धति
(ii) ताप संदीप्ति विधि
(ii) पोटैशियम -आर्गन विधि
(iv) बी0 सी0 विधि
उत्तर-
(iv) बी0 सी0 विधि

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

प्रश्न (खा)
उत्तर भारत को दक्षिण भारत से कौन पर्वत अलग करती है ?
(i) हिमालय पर्वत
(ii) विन्ध्य पर्वत
(ii) पूर्वी घाट
(iv)पश्चिमी घाट
उत्तर-
(ii) विन्ध्य पर्वत

प्रश्न (ग)
चावल का प्राचीन प्रमाण कहाँ से मिला है?
(i) कोलडिहवा
(ii) ब्रह्मगिरि
(iii) मेहागढ़
(iv) बुर्जहोम
उत्तर-
(i) कोलडिहवा

प्रश्न 2.
खाली स्थान भरें

  1. ……….. क्षेत्र के अधीन विशाल साम्राज्य की स्थापना हुई।
  2. भौगौलिक दृष्टिकोण से भारत को ………. विभाजित किया जा सकता है।
  3. ………… ने कुम्हरार नामक स्थान की खुदाई करवाई।
  4. आधुनिक काल का प्रारंम्भ …………..से हुआ।
  5. महापाषाणी संस्कृति का निर्माण……….भारत के लोगों ने किया।

उत्तर-

  1. दक्षिण क्षेत्र के अधीन विशाल साम्राज्य की स्थापना हुई।
  2. भौगौलिक दृष्टिकोण से भारत को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है।
  3. डॉo स्पूनर ने कुम्हरार नामक स्थान की खुदाई करवाई।
  4. आधुनिक काल का प्रारंम्भ 18वीं शताब्दी से हुआ।
  5. महापाषाणी संस्कृति का निर्माण 3000 वर्ष पूर्व भारत के लोगों ने किया।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

प्रश्न 3.
निम्नलिखित का सुमेल करें

  1. खासी – अनाज का प्रमाण
  2. अफ्रीका – दक्षिण भारत
  3. मगध – महादेश
  4. मेगालिथ – प्रथम बड़ा साम्राज्य
  5. चोपानीमांडो – जनजाति

उत्तर-

  1. खासी – जनजाति
  2. अफ्रीका – महादेश
  3. मगध – प्रथम बड़ा साम्राज्य
  4. मेगालिथ – दक्षिण भारत
  5. चोपानीमांडो – अनाज का प्रमाण

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

आइए चर्चा करें

प्रश्न 1.
इतिहास के अध्ययन से हमें क्या जानकारी प्राप्त होती है ?
उत्तर-
इतिहास, प्रागैतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल के अतीत को बतलाता है। भारत अथवा विश्व के अतीत. सभ्यता और संस्कृति के बारे में बताता है। मनुष्य ने प्राचीन संसाधनों की खोज किस प्रकार की। अपनी समस्याओं का निदान किस प्रकार किया? देश. विदेश के शासकों का जीवन-शैली तथा कार्य क्या थे?

प्रश्न 2.
पुरातत्त्व किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वैसी वस्तुएँ जिनके माध्यम से अतीत की जानकारी प्राप्त होती है। जैसे – पत्थर, ईट से बनी इमारतों के अवशेष, औजार, हथियार, बर्तन, आभूषण, मूर्तियाँ, चित्र और सिक्के हैं।

प्रश्न 3.
इतिहास के अध्ययन से अपने अतीत के बारे में क्या-क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर-
हमारा अतीत यानि भारतवर्ष का अतीत बहुत पुराना है। अतीत की जानकारी हमें इतिहास से प्राप्त होती है । इतिहास उत्खनन से प्राप्त अवशेषों को संग्रह कर पुरातत्त्ववेत्ता क्रमबद्ध रूप से इतिहास का संकलन करते हैं । प्रागैतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल इतिहास के दो भाग हैं ।

इतिहास हमें बताता है कि भारत में सभ्यता और संस्कृति कब और कैसे, कहाँ विकसित हुई । मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों की खोज कैसे की, किस प्रकार गाँव, नगर और राज्यों की स्थापना हुई। अपनी समस्याओं के निदान के लिए नये-नये आविष्कार किस प्रकार किये । वर्तमान का बदलाव अतीत की ही देन है।

प्रश्न 4.
अतीत की जानकारी जिन-जिन स्रोतों के माध्यम से हो सकती है, उसकी एक सूची बनायें।
उत्तर-
पत्थर, ईंट से बनी इमारतों के अवशेष, औजार, हथियार, बर्तन आभूषण, मूर्तियाँ, चित्र और सिक्के।

प्रश्न 5.
देश का नाम भारत और इण्डिया कैसे हुआ ?
उत्तर-
इण्डिया शब्द इण्डस से निकला है। संस्कृत में सिंधु कहते हैं। लगभग 2500 वर्ष पूर्व उत्तर-पश्चिम की ओर से आने वाले इरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस कहा। इसे इंडोस भी कहते थे और नदी के पूर्व स्थित प्रदेश को इण्डिया कहते थे। भारत नाम भरत नामक मानव समूह के नाम पर पड़ा। यह भी धारणा है कि राजा दुष्यंत एवं रानी शकुन्तला के पुत्र का नाम भरत था जो काफी बुद्धिमान और शक्तिशाली था। इसी के नाम पर देश का नाम भारत पडा।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

प्रश्न 6.
काल निर्धारण के कार्बन-14 पद्धति को बतायें ।
उत्तर-
C14 (कार्बन-14) पद्धति द्वारा प्राप्त प्राचीन अवशेषों का सही उम्र का अंदाजा लगाते हैं। इस पद्धति में सभी जीवित जीवों एवं पेड-पौध गों में c14 की निश्चित मात्रा रहती है और जब जीव की मृत्यु हो जाती है तो 14 का हास होता है और C 14 स्थिर रहता है और तुलना कर सही-सही उम्र का पता लगाते हैं। 5730 वर्ष में किसी जीव में पाये जाने वाले C14 की मात्रा आधी रह जाती है।

आओ करके देखें 

प्रश्न 1.
पुरातत्त्वविदों द्वारा उत्खनन में प्राप्त वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें ।

Bihar Board Class 6 Social Science History Solutions Chapter 2 क्या, कब, कहाँ और कैसे?

प्रश्न 2.
भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को दिखाए ।
(i) नर्मदा नदी
(ii) गंगा नदी
(iii) विंध्य पर्वत
(iv) सतपुडा पहाड़ियाँ ।
उत्तर-
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 6 Social Science क्या, कब, कहाँ और कैसे? Notes

पाठ का सारांश

  • सिक्कों आ अध्ययन मुद्राशास्त्र कहलाता है।
  • डा० स्पूनर ने पटना के कुम्हरार नामक स्थान में खुदाई द्वारा ‘ चन्द्रगुप्त के राजमहल के स्तंभ खोज निकाले हैं।
  • पूरे विश्व में एक मानक के रूप में तिथि की गणना ईसा मसीह के जन्म तिथि से की जाती है ।
  • भौगोलिक दृष्टिकोण से भारत को मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जा सकता है-उत्तर के पर्वतीय प्रदेश, उत्तर का मैदान,
  • दक्षिण का पठार और सूदूर दक्षिण के मैदान ।
  • दुष्यन्त पुत्र भरत के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा है।
  • ईरानियों और यूनानियों ने सिन्धु नदी को हिंदोस अथवा इंडोस और इस नदी के पूर्व स्थित प्रदेश को ‘इण्डिया’ कहा ।
  • इतिहास के माध्यम से हम अपने अतीत के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।
  • शिकारियों, पशुपालकों, कृषकों, शासकों, व्यापारियों, वैज्ञानिकों आदि के जीवन के बारे में इतिहास से हमें पता चलता है ।
  • मानव जीवन के इतिहास को तीन काल खंडों में विभाजित किया गया है-
    1. प्राचीन काल
    2. मध्य काल
    3. आधुनिक काल ।
  • प्राचीनकाल के अध्ययन का समय मानव जाति के विकास से लेकर 8 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक माना जाता है ।
  • वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से लगभग 18वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक के काल को माना जाता है।
  • आधुनिक काल का प्रारंभ 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से होता है।
  • भारत में आधुनिक शिक्षा स्वास्थ्य, संचार तथा शासन की नवीन प्रणाली का विकास 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ था।
  • भारत को 1947 ई० में आजादी मिली।
  • अतीत की जानकारी हमें पुरातात्विक अवशेषों, महाकाव्यों, अभिलेखों आदि से मिलती है।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य Questions and Answers

क्रिया के जिस रूपांतर से यह जाना जाए कि वाक्य में क्रिया द्वारा किए गए। विधान का प्रधान विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव है, उसे ‘वाच्य’ कहते हैं। वाच्य के भेद
वाच्य के तीन भेद हैं.
(1) कर्तृवाच्य, (2) कर्मवाच्य, (3) भाववाच्य।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य

1. कर्तृवाच्य-वाक्य में जहाँ कर्ता प्रधान हो और क्रिया कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हो, उसे ‘कर्तृवाच्य’ कहते हैं। जैसे
लड़का दौड़ता है। लड़के दौड़ते हैं।

इन वाक्यों में कर्ता के बारे में कुछ बताया गया है। अत: ये वाम्य कर्तृवाच्य के हैं। कर्तृवाच्य की क्रिया सकर्मक और अकर्मक दोनों हो सकती हैं। जैसे-
अशोक पत्र लिखता है। (सकर्मक कर्तृवाच्य)
अशोक हँसता है। (अकर्मक कर्तृवाच्य)

2. कर्मवाच्य-जिस वाक्य में क्रिया कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के लिंग . और वचन के अनुसार हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं। जैसे
हम से सुन्दर चित्र देखे गए। मोहन से गीत गाया नहीं जाता है।
कर्मवाच्य के वाक्यों में वाक्य का कर्ता कर्म ही होता है। वाक्य में या तो कर्त्ता का कथन होता ही नहीं,यदि होता भी है तो महत्व नहीं दिया जाता है।
कर्मवाच्य का प्रयोग अनेक रूपों में किया जाता है-

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य

1. जब क्रिया का कर्ता अज्ञात हो। जैसे-
काम किया गया होगा।
गाना गाया गया होगा।
2. जब कर्ता को प्रकट करने की कोई आवश्यकता न हो। जैसे
कवि-सम्मेलन में कविता पढ़ी जाएगी।
दीपावली की छुट्टी की जाएगी।
3. जब वाक्य की भाषा कानूनी हो। जैसे
ग्रीष्मावकाश घोषित किया जाएगा।
4. जब अधिकार या गर्व या दर्प प्रकट करना हो। जैसे
इस गम्भीर मामले की पूरी छानबीन की जाए।

3. भाववाच्य-जिस वाक्य में क्रिया न तो कर्ता के अनुसार हो और न कर्म के अनुसार, उसे ‘भाववाच्य’ कहते हैं। इसमें क्रिया सदा एकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष में रहती है। जैसे-
तुमसे आगे बढ़ा क्यों नहीं जाता ? मुझसे बैठा नहीं जाता।

कुछ अन्य उदाहरण-

(क) अब मुझसे चला नहीं जाता।
(ख) सीता से वन में चला नहीं जाता।
(ग) लड़कियों से खेला नहीं जाता।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वाच्य

उपर्युक्त उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि

  1. भाववाच्य में प्राय: अशक्तता प्रकट करने के लिए ही क्रिया प्रयुक्त होती है।
  2. क्रिया में एक से अधिक पद होते हैं।
  3. मुख्य क्रिया अकर्मक होती है। इस प्रकार का प्रयोग ‘भावे प्रयोग’ कहलाता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

Bihar Board Class 6 Science वायु Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) श्वसन के लिए आवश्यक होती है –
(i) जल
(ii) वायु
(iii) आग
(iv) खली जगह
उत्तर:
(ii) वायु

(ख) पर्वतारोही ऊँचे पर्वतों पर चढ़ते समय किस गैस सिलेंडर को अपने साथ ले जाते हैं –
(i) नाइट्रोजन
(ii) ऑक्सीजन
(iii) कार्बनडाइऑक्साइड
(iv) आर्गन
उत्तर:
(ii) ऑक्सीजन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

(ग) वायु एक मिश्रण है –
(i) गैसों का
(ii) जलवाष्य का
(iii) धुल-कणों का
(iv) उपर्युक्त सभी का
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी का

(घ) मोमबत्ती का जलना वायु में उपस्थित किस गैस के कारण संभव है –
(i) कार्बन डाइऑक्साइड
(ii) नाइट्रोजन
(iii) आर्गन
(iv) ऑक्सीजन
उत्तर:
(iv) ऑक्सीजन

(ङ) चूना जल में फूंकने पर इसका दुधिया रंग में बदलना किस गैस के कारण होता है?
(i) ऑक्सीजन
(ii) नाइट्रोजन
(iii) कार्बनडाइऑक्साइड
(iv) क्लोरीन
उत्तर:
(iii) कार्बनडाइऑक्साइड

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

(क) पृथ्वी के चारों तरफ घिरी हुई वायु की परत को ……… कहते हैं।
(ख) गोताखोर जब भी समुद्र की गहराई तक जाते हैं तब ……… गैस का सिलेंडर ले जाते हैं।
(ग) वायु में नाइट्रोजन की मात्रा …….. प्रतिशत होती है।
(घ) पौधे श्वसन में ……….गैस लेते हैं।
(ङ) जो जीव पानी में रहते हैं वे श्वसन के लिए पानी में घुली हुई …………..का उपयोग करते हैं ।
उत्तर:
(क) वायुमंडल
(ख) ऑक्सीजन
(ग) 78 .
(घ) कार्बनडाइऑक्साइड
(ङ) ऑक्सीजन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

प्रश्न 3.
वायु मिश्रण है, कैसे?
उत्तर:
वायु एक मिश्रण है। क्योंकि इसमें जलवाष्प, धूलकण, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड एवं अन्य गैसों की मिलावट होती है।

वायु में जलवाष्प विद्यमान होता है। इसके लिए गिलास में बर्फ के कुछ टुकड़े डालकर ढक देने के बाद हम पाते हैं कि गिलास के बाहरी सतह पर जल की बूंदें दिखाई देती हैं। जब वायु किसी ठंडे पृष्ठ से संपर्क में आती है तो इसमें उपस्थित जलवाष्प ठंडी होकर संघनित हो जाता है तथा जल की बूंदें ठंडे पृष्ठ पर दिखाई देती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वाय में जलवाष्प उपस्थित . होते हैं। ठीक इसी प्रकार अन्य क्रिया-कलाप से साबित हो चुका है कि वायु में 78% नाइट्रोजन 21% ऑक्सीजन, शेष 1% कार्बन डाइऑक्साइड,कुछ अन्य गैसें,, जलवाष्प तथा धूलकण होते हैं। इस प्रकार वायु एक मिश्रण है।

प्रश्न 4.
कौन-सी गैस श्वसन के लिए आवश्यक है?.
उत्तर:
ऑक्सीजन गैस श्वसन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 5.
उन क्रिया-कलापों की सूची बनाइए, जो वायु की उपस्थिति के कारण संभव है।
उत्तर:
(क) वृक्ष के पत्ते का हिलना।
(ख) किसी भी चीज का जलना।
(ग) सजीव जगत के जीव-जन्तुओं के श्वसन प्रक्रिया।
(घ) गाड़ी के पहिया के अन्दर ट्यूब को हवा से भरना।
(ङ) वायुमंडल दबाव के कारण शरीर में खून का दौड़ना आदि।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

प्रश्न 6.
पौधे वायुमंडल में गैसों का संतुलन बनाने में सहायक होते हैं, कैसे?
उत्तर:
पौधे, वायुमंडल में उपस्थित कार्बन-डाइऑक्साइड को अपने श्वसन में उपयोग करते हैं तथा इसके अलावे प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाशसंश्लेषण क्रिया के द्वारा अपने भोजन बनाने के काम में कार्बन-डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं तथा ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। इस वायुमंडल में कार्बन-डाइऑक्साइड की मात्रा की कमी होती हैं तथा ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि होती है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है और हमारे वायुमंडल का संतुलन बना रहता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

Bihar Board Class 6 Science वायु Notes

अध्ययन-सामग्री :

सजीव जगत के जीव-जन्तुओं तथा पौधों को जीवित रहने के लिए श्वसन क्रिया आवश्यक होती है। श्वसन के लिए वायु की आवश्यकता होती है। इतना ही नहीं जन्म से लेकर मृत्यु तक वायु की जरूरत होती है। वायु के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। वायु से अनेक गतिविधियाँ हमारे चारों तरफ संचालित होती हैं। जैसे- पत्ते का हिलना, पतंग का उड़ना, घिरनी का नाचना, आग का जलना, पानी से बुलबुले का बाहर आना आदि।

पृथ्वी वायु की एक पतली परत से घिरी हुई है। इस परत का विस्तार पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर तक है जिसे वायुमंडल कहते हैं। वायु स्थान घेरती है। वाय हमारे चारों ओर उपस्थित है। वाय का कोई रंग नहीं होता। वायु पारदर्शी होता है। वाय अनेक गैसों का मिश्रण होता है जिसमें प्रत्येक गैस की अपनी गुणवता होता है और अलग-अलग रूपों में हम सजीव जगत के जीव-जन्तुओं एवं पौधों के काम आती है। जहाँ ऑक्सीजन मानव के श्वसन – के लिए आवश्यक है। वहीं कार्बनडाइ ऑक्साइड पौधों के श्वसन के लिए आवश्यक होते हैं। नाइट्रोजन मानव एवं पेड़-पौधों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में आवश्यक तत्व माने जाते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 17 वायु

वायु की संरचना

  • नाइट्रोजन – 78%
  • ऑक्सीजन – 21%
  • कार्बन-डाइऑक्साइड एवं अन्य – 1%

वायु की संरचना में नाइट्रोजन सर्वप्रमुख अवयव है। इसके बाद ऑक्सीजन प्रमुख अवयव है। शेष सभी अवयव वाय में नगण्य मात्रा में रहते हैं। नाइटोजन की मात्रा वायु का लगभग 4/5वाँ भाग होती है। नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों गैसें मिलकर वायु का 99% भाग बनाती है।

इस प्रकार वायु में कुछ गैसें, जल-वाष्प तथा धूल के कण विद्यमान होते हैं। वायु की संरचना में स्थानीय भिन्नता हो सकती है।

वायु में ऑक्सीजन का स्थान अतिमहत्वपूर्ण है। सामान्यतः सभी जीव ऑक्सीजन को अपने श्वसन क्रिया को पूरा करने के लिए लेते हैं। पौधे भी श्वसन में ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं। मछली पानी में घुले ऑक्सीजन को श्वास के रूप में अवशोषित करते हैं। ऑक्सीजन मानव शरीर में अनेक क्रिया में मदद करती है। जैसे- खून का बनना। किसी भी वस्तु को जलने में ऑक्सीजन मदद करती है। ऑक्सीजन खुद जलती नहीं है बल्कि जलने में मदद करती है। यानि ऑक्सीजन दहनशील नहीं होती है। परन्त दहन के पोषक होते हैं।

वर्तमान में विज्ञान के प्रचार एवं प्रसार के कारण वायु प्रदूषित हो रही है जिसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियाँ हैं। यानि वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है जिसके कारण वायु की संरचना असंतुलित होती जा रही है। बहुत हद तक पेड़-पौधे इस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हैं। परन्तु वनों की कटाई, बढ़ती अबादी, बढ़ते उद्योग-धंधे बढ़ती मोटर-गाड़ियों की तादाद, आदि गतिविधियों ने वायु संतुलन को असंतुलित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यदि यही रफ्तार से प्रदूषण होता रहा और समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब प्रदूषण अपनी आगोश में मानव-जीवन की लीला को समाप्त कर देगी।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

Bihar Board Class 6 Science जल Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
(क) जल को वाष्प में बदलने की क्रिया को ………… कहते हैं।
(ख) जलवाष्प को जल में बदलने की क्रिया को ………….. कहते हैं।
(ग) एक वर्ष या इससे अधिक समय तक वर्षा न होने से उस क्षेत्र में ………. होने की सम्भावना होगी।
(घ) अत्यधिक वर्षा से ……….. आती है।
उत्तर:
क – वाष्पन
ख – संघनन
ग – अकाल तथा भूखमरी
(घ) बाढ़।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से प्रत्येक का सम्बन्ध क्या वाष्पन अथवा संघनन से है?

(क) गीले कपड़ों पर इस्त्री करने प भाप का ऊपर उठना।
उत्तर:
वाप्पन।

(ख) सर्दियों में प्रातःकाल कोहरे का दिखना।
उत्तर:
संघनन

(ग) गीले कपड़े से पोंछने के पाद श्याम पट्ट कुछ समय बाद सूख जाता है।
उत्तर:
वाष्पना

(घ) गर्म छड़ पर जल छिड़कने से भाप का ऊपर उठना।
उत्तर:
वाष्पन।

प्रश्न 3.
बादल कैसे बनते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी का 2/3 भाग जल से घिरा है जिसमें कहीं तालाब तो कहीं नदी तो कहीं विशलकाय समुद्र तथा महासागर जल से भरा पड़ा है। ये जलाशय के जल सूर्य की गर्मी के करण वाष्प में बदल जाते हैं और यही वाष्प काफी ऊँचाई पर पहुंचकर संघनित होकर बादल बन जाते हैं। दूसरी तरफ पेड़-पौधे जमीन से जल को खींचकर पत्तियों के माध्यम से वाष्पोत्सर्जित करते हैं और ये जल-कणिकाएँ ऊपर जाकर ठंड पाकर आपस में संघनित होकर बादल का निर्माण करते हैं यानि वाष्पन तथा वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया के उपरांत जल – कणिकाएँ ऊपर जाकर संघनित होकर बादल का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 4.
गाँव में जल का संग्रहण कैसे करेंगे?
उत्तर:
वर्षा के जल को एकत्र करना तथा भंडारण करने के बाद उपयोग में लाना, जल की उपलब्धता में वृद्धि करना आदि को जल संग्रहण का आयाम कहते हैं।

गाँव में प्रायः घर मिट्टी तथा कच्चे गाड़ों पर या ईटों का बना होता है। जिसपर खपड़ा या छत रहता है। खपरैल के मकान में ओहाढ़ी के द्वारा जल को एक जगह पर गिराते हैं। फिर नाली के द्वार एक बड़े गड्ढों में जमा कर लेते हैं। दूसरी तरफ छत वाले मकान से नाली के माध्यम से गड्ढों में जल को जमा करते हैं। और अपनी आवश्यकता अनुसार इस जल का प्रयोग पीने से लेकर सिंचाई तक करते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

प्रश्न 5.
वर्षा के दिनों में कपड़े जल्दी क्यों नहीं सूखते हैं?
उत्तर:
वर्षा के दिनों में हवा में आर्द्रता या नमी की मात्रा बहुत अधिक रहती है। यदि हवा चलती भी है तो उसमें उपस्थित जलवाष्प कपड़े फिर से सोख लेती है। यानि वायुमंडल में उपस्थित नमी के कारण वर्षा-ऋतु में कपड़े जल्दी नहीं सूख पाते हैं।

Bihar Board Class 6 Science जल Notes

अध्ययन सामग्री:

“जल ही जीवन है” किसी ने ठीक ही कहा है। हम आप सोच सकते हैं यदि जल नहीं होता तो क्या होता। और यदि जल की मात्रा अधिक (बाढ़) हो जाए तो क्या तबाही होती है। इस अध्याय में जल हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है इसके साथ-साथ हमारे पर्यावरण में इसकी कमी से बचने के लिए हमें क्या कदम उठाने होंगे तथा इसकी कमी यानी घटता जल-स्तर के कारणों पर विशेष चर्चा होगी।

“पंच तत्व मिल बना शरीरा” में एक तत्व जल है। एक तरफ वायु जहाँ हमें जीवन जीने के लिए होती है तो वहीं जल मानव, जीव-जन्त, पेड़-पौधे आदि को जीवन के हर पल-पल में काम आता है। हमारे शरीर में 70% जल है। सोकर उठने के बाद शौच करते हैं, मुँह धोते हैं, दाँत की सफाई, स्नान, भोजन आदि में जल का प्रयोग होता. है।

जल का स्रोत–जल हमें प्राप्त कहाँ से होता है ? भूमि के अन्दर मिलने वाले जल को भूमिगत जल कहते हैं। भूमि के अन्दर वर्षा के जल का कुछ भाग रिस-रिसकर जमा होता रहता है जो भूमि के अन्दर विशाल जल-राशि का निर्माण कर देता है। यही जल कुँआ से चापाकल तथा बोरिंग से होते हुए घर के नलों में आता है। यह जल मुख्य रूप से पेयजल होता है तथा इस जल की मात्रा भूमि के अन्दर सीमित है। इसके अलावे नदी, झील, समुद्र जल के मुख्य स्रोत हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

जब जल को गर्म करते हैं तो गर्मी पाकर जलवाष्पं में बदल जाता है, इस क्रिया को वाष्पन कहते हैं। यही वाष्प पुनः ठंडा होकर जल में बदल जाता हैं तो इस क्रिया को संघनन कहते हैं। सूर्य के प्रकाश की गर्मी पाकर नदी, तालाबों, झरनों, समुद्र आदि जलाशयों के जल वाष्पित हो जाते हैं और काफी ऊँचाई पर वाष्प के इकट्ठा होने से वाष्प के छोटे-छोटे बन्द एक-दूसरे के समीप आकर बादल का रूप ले लेते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं, वाष्प के छोटे-छोटे बुन्द संघनित होकर बादल का निर्माण करते हैं। जल कणिकाएँ आपस में मिलकर बड़े आकार का जल-बूंद बनाती हैं। अपने वजन के कारण वे जमीन पर गिरने लगती हैं जिसे हम वर्षा कहते हैं।

प्रकृति में जल से वाष्प बनना, वाष्प से बादल बनना तथा वर्षा के रूप में जल का जमीन पर आना तथा इस क्रिया को दुहराते रहना ही जल चक्र कहलाता है। कभी-कभी जल की बूंदें बादल में तैरते रहते हैं और काफी ठंडी होकर छोटे-छोटे गोले बनाता है। जब इसका आकार बड़ा हो जाता है तो यह वर्षा की बूंदों के साथ जमीन पर गिरने लगता है। बर्फ के इन टुकड़ों को ओला कहते हैं।

जलाशयों तथा महासागरों के अलावा पेड़-पौधे की पत्तियों से जलवाष्प के रूप में निकलती रहती है। पत्तियों से निकलने वाली वाप्प की क्रिया को वाष्योत्सर्जन कहते हैं।

अत्यधिक वर्षा होने से तथा ऊँचे पर्वतों पर जमें बर्फ के पिघलने से नदियों में जल का स्तर बढ़ जाता है और यह बढ़ते-बढ़ते बड़े क्षेत्र में फैल जाता है। यह खेतों, वनों, गाँवों को जलमग्न कर देता है जिसे हम बाढ़ कहते हैं। बाढ़ से हमारे देश में फसलें; सम्पदा तथा मानव जीवन की काफी क्षति होती है।

कभी-कभी वाष्पन तथा वाष्पोत्सर्जन की सामान्य प्रक्रिया के बावजूद महासागरों के ऊपर बने बादल जिस स्थान पर आकर बरसना चाहिए, वहाँ हवा के विपरीत दिशा में चलने के कारण वर्षा नहीं होती है। वर्षा के नहीं होने से उस क्षेत्र में सभी जलाशय सूख जाते हैं। जमीन तथा मिट्टी सूख जाती है। वर्षा न होने की स्थिति में कुंआ का जल सूखने, चापाकल में पानी न आने तथा बोरिंग से पानी का नहीं आना आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जिसे सुखाड़ कहते हैं। सुखाड़ के कारण फसल नष्ट हो जाते हैं जिसका अनेक कुप्रभाव हमारे सजीव जगत पर पड़ता है। परिणामस्वरूप अकाल तथा भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

वर्तमान में इसी समस्याओं से हम संसार के लोग जुझ रहे हैं या आने वाली पीढ़ी को जुझना पड़ेगा। अत: हम और आप मिलकर जल-संग्रह करने का प्रयास करें।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 16 जल

जल के घटते जल-स्तर रोकने के लिए विभिन्न कदम उढ़ाना आवश्यक है –

(क) अनावश्यक रूप से पानी को नहीं बहाना चाहिए।
(ख) ज्यादा से ज्यादा पानी स्नान और कपड़ा धोने में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
(ग) वर्षा के पानी को संग्रह करना चाहिए।
(घ) अधिक-से-अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
(ङ) वन-की कटाई पर रोक लगाना चाहिए।
(च) जलाशयों को साफ-सुथरा रखना चाहिए।
(छ) वायुमंडल तथा पृथ्वी के तापमान को बढ़ने से रोकने के उपाय करना चाहिए।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल Questions and Answers

काल का अर्थ है ‘समय’। अत: क्रिया के जिस रूप से उसके होने के समय का बोध होता है, उसे ‘काल’ कहते हैं। काल के तीन भेद हैं-(1) वर्तमान काल, (2) भूतकाल, (3) भविष्यत् काल।।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(1) वर्तमान काल-जिस ‘क्रिया’ का वर्तमान समय में होने का बोध हो, उसे ‘वर्तमानकाल’ क्रिया कहा जाता है।
मूल रूप से उपस्थित समय को ‘वर्तमान काल’ कहा जाता है। जैसे-वह खा रहा है। मैं रामायण पढ़ता हूँ, आदि।
वर्तमान काल के तीन भेद हैं-

(i) सामान्य वर्तमान
(ii) तात्कालिक वर्तमान
(iii) संदिग्ध वर्तमान।

(i) सामान्य वर्तमान-‘क्रिया’ का वह रूप, जिससे कार्य का ‘वर्तमान काल’ में होना समझा जाता है, उसे सामान्य वर्तमान कहा जाता है। जैसेवह पटना जाता है। वह सोता है। विपिन पढ़ता है। दमन गाता है, आदि।

(ii) तात्कालिक वर्तमान-जिस ‘क्रिया’ से यह पता चलता है कि काम ‘वर्तमान काल’ में लगातार चल रहा है, काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उसे तात्कालिक वर्तमान कहते हैं। काम की अपूर्णता के कारण इसे अपूर्ण वर्तमान भी कहा जाता है। जैसे–राम घर जा रहा है। विपिन पढ़ रहा हैं। गायक गा रहा हैं

(iii) संदिग्ध वर्तमान-जिस ‘क्रिया’ से उसके ‘वर्तमान काल’ में होने में संदेह हो, उसे संदिग्ध वर्तमान कहा जाता है। जैसे-विपिन पटना जाता होगा। संतोष पढ़ता होगा, आदि।

(2) भूतकाल-जिस ‘क्रिया’ से काम के समाप्त होने का बोध हो, उसे ‘भूतकाल’ की क्रिया कहते हैं।
इससे ‘बीत गये समय’ का बोध होता है। जैसे-1914 में प्रथम विश्वयुद्ध हुआ था। विपिन ने संतोष को पढ़ाया था, आदि
भूतकाल के छः भेद हैं(i) सामान्य भूत, (ii) आसन्न भूत (iii) पूर्ण भूत (iv) अपूर्ण भूत, (v) संदिग्ध भूत (vi) हेतुहेतुमद्भूत। –

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(i) सामान्य भूत-जिससे ‘क्रिया’ के समाप्त हो जाने का बोध होता है उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं। इससे ‘क्रिया’ का विशेष समय का बोध नहीं होता है। यह ‘भूतकाल’ का साधारण रूप होता है। जैसे-विपिन शहर गया। संतोष ने खाया। वह आया। मैं सोया आदि।

(ii) आसन्न भूत-जिस ‘क्रिया’ से यह जान पड़े कि काम अभी तुरंत खत्म हुआ है, उसे आसन्न भूतकाल की क्रिया कहते हैं। जैसे-रंजन भागलपुर से आया – है। विपिन खेत देखने गया है। वह स्कूल से लौटा है, आदि।

(iii) पूर्ण भूत-क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूत कहते हैं, जिससे क्रिया की समाप्ति के समय का स्पष्ट बोध होता है कि क्रिया को समाप्त हुए काफी समय बीता है। जैसे-उसने मुरारी को मारा था; वह आया था।

(iv) अपूर्ण भूत-इससे यह ज्ञात होता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, किन्तु उसकी समाप्ति का पता नहीं चलता। जैसे-सुरेश गाना गा रहा था; गीता सो रही थी।

(v) संदिग्ध भूत-इसमें यह सन्देह बना रहता है कि भूतकाल में कार्य पूरा हुआ या नहीं। जैसे-तुमने गाया होगा; तू गया होगा।

(vi) हेतुहेतुमद्भूत-इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सकी। जैसे-मैं आता; तू जाता; वह खाता।

(3) भविष्यत् काल-भविष्य में होनेवाली क्रिया को भविष्यत्काल की क्रिया कहते हैं, जैसे-वह कल घर जाएगा। भविष्यत्काल के तीन भेद हैं.

(i) सामान्य भविष्यत्-इससे यह प्रकट होता है कि क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी। जैसे मैं पढूंगा; वह जाएगा।

(ii) सम्भाव्य भविष्यत्-जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना करता है। जैसे-सम्भव है, रमेश कल आए।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण काल

(iii) हेतुहेतुमद्भविष्यत्-इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर करता है। जैसे-वह आये तो मैं जाऊँ; वह कमाये तो खाये।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन Questions and Answers

परिभाषा : संज्ञा के जिस कथन से यह मालूम होता है कि वह एक व्यक्ति या वस्तु के विषय में या एक से अधिक के विषय में कहता है, उसे वचन कहते हैं।
जैसे-
(क) घोड़ा हिनहिनाता है ।
(ख) घोड़े हिनहिनाते हैं।

पहले वाक्य से मालूम होता है कि ‘केवल’ एक घोड़ा है। दूसरे वाक्य से मालूम होता है कि घोड़े एक से अधिक हैं। . इसलिए संज्ञा के वचन दो प्रकार हैं–(i) एकवचन और (i) बहुवचन ।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

1. एकवचन : जो एक व्यक्ति या वस्तु के विषय में कहता है, उसे एकवचन कहते हैं।
2. बहुवचन : जो एक से अधिक अर्थात्, बहुत व्यक्तियों या वस्तुओं के विषय में कहता है, उसे बहुवचन कहते हैं । जैसे-
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 1
ईकारांत और ऊकारांत संज्ञाओं के बहुवचन रूप में दीर्घ मात्रा हस्व हो जाती है।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 2

वचन द्वारा संज्ञाओं का रूपान्तर पुंलिंग संज्ञाएँ

1. अकारांत संज्ञा-बालक, घर, फल आदि ।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 3

2. संस्कृत की आकारांत संज्ञा-भ्राता, पिता, राजा आदि ।
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन - 4

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

3. हिन्दी में आकारांत संज्ञा-लड़का, घोड़ा, कपड़ा आदि ।
एक लड़का पढ़ता है ।चार लड़के पढ़ते हैं।
एक लड़के ने कहा। दो लड़कों ने कहा ।

स्त्रीलिंग संज्ञाएँ

1. अकारान्त संज्ञा-गाय, पुस्तक, बात, सड़क आदि ।
पुस्तक पढ़ी जाती है। – यहाँ पुस्तकें मिलती हैं ।

2. आकारान्त संज्ञा-माता, लता, बालिका आदि ।
एक माता आयी। – दो माताएँ आयीं ।
एक बालिक ने कहा। – दो बालिकाओं ने कहा ।

अभ्यास-प्रश्न

1. नीचे के रिक्त स्थानों में कोष्ठक में दिये गये शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर लिखो।
(क) दो ………………… आती हैं। (लड़की, लड़कियाँ)
(ख) बैलगाड़ी है। (आयी, आयी)
(ग) …………………. घोड़े तेज होते हैं। (काला, काले)
(घ) राम …………… दो भाई आये हैं। . (का, के)

2. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करें
(क) इस वर्ग में तीन लड़की है।
(ख) दो दासी तीसरे दासी से लड़ती हैं।
(ग) दो डाकू ने तीन धोड़ा लूटे।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण वचन

3. उद्देश्य शब्दों के वचन बदलकर वाक्य बनाओ
(क) एक घोड़ा दौड़ता है।
(ख) राम के पास किताब नहीं है ।
(ख) माता बच्चों को प्यार करती है।
(घ) एक काला कुत्ता दौड़ता है।
(ग) डाकुओं ने दो घोड़े लूट।
(च) दासियाँ सो रही हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 9 Hindi Book Solutions Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग Questions and Answers

प्रश्न 1.
लिंग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उस चिह्न को लिंग कहते हैं जो पुरुष जाति और स्त्री जाति का भेद । प्रकट करता है, जैसे –
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 1
(क) समूह में जितनी संज्ञाएँ हैं उनसे पुरुष जाति का बोध होता है, इसलिए उन्हें पुंलिंग कहते हैं।
(ख) समूह में जितनी संज्ञाएँ हैं उनसे स्त्री जाति का बोध होता है, इसलिए उन्हें स्त्रीलिंग कहते हैं।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 2.
सोदाहरण लिंग-भेद बताएँ।
उत्तर-
हिन्दी में केवल दो लिंग हैं-(1) पुलिंग और (2) स्त्रीलिंग।
(1) पुलिंग (Masculine)-पुरुषजाति की संज्ञाओं की पुलिंग कहते हैं; जैसे-राजा, धोबी, गदहा, पहाड़, नदी, बालक ।
(2) स्त्रीलिंग (Feminine)-स्त्री जाति की संज्ञाओं को स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे-रानी, धोबिन, गदही, पहाड़ी, नदी, बालिका ।

प्रश्न 3.
पुंलिंग से स्त्रीलिंग बनाने की रीति :
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 2
Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग - 3
उत्तर-
(घ)

प्रश्न 4.
‘जेठ’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ?
(क) जेठिन
(ख) जेठराइन
(ग) जेठरानी
(घ) जेठानी’
उत्तर-
(ख) जेठराइन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 5.
‘कवि’ शब्द का स्त्रीलिंग शब्द क्या है ?
(क) कवियत्री
(ख) कवयित्री
(ग) कवियानी
(घ) कवायाइन
उत्तर-
(ग) कवियानी

प्रश्न 6.
‘नायक’ शब्द का स्त्रीलिंग शब्द क्या है ?
(क) नायका
(ख) नायीका
(ग) नायिका
(घ) नायिकी
उत्तर-
(क) नायका

प्रश्न 7.
‘चौधरी’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ?
(क) चौधरानी
(ख) चौधराइन
(ग) चौधरिन
(घ) चौधरीन
उत्तर-
(ख) चौधराइन

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 8.
‘ठाकुर’ शब्द का स्त्रीलिंग में कैसा रूप होगा?
(क) ठकुराइन
(ख) ठाकुराइन
(ग) ठाकुरिन
(घ) ठाकुरीन
उत्तर-
(ग) ठाकुरिन

प्रश्न 9.
‘श्रीमान’ शब्द का स्त्रीलिंग में कैसा रूप होगा?
(क) श्रीमानी
(ख) श्रीमानां
(ग) श्रीमती
(घ) श्रीमति
उत्तर-
(घ) श्रीमति

प्रश्न 10.
‘देवर’ शब्द का स्त्रीलिंग क्या है?
(क) देवराइन्
(ख) देवरिन
(ग) देवरीन
(घ) रेवरानी
उत्तर-
(घ) रेवरानी

प्रश्न 11.
‘अभिनेता’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप क्या है ? .
(क) अभिनेता
(ख) अभिनेत्री
(ग) अभिनेतृ
(घ) अभिनेताइन
उत्तर-
(ख) अभिनेत्री

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

प्रश्न 12.
‘सम्राट’ शब्द का स्त्रीलिंग रूप लिखें।
उत्तर-
सम्राज्ञी।

प्रश्न 13.
गत बीस वर्षों के लिंग सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
उत्तर-
1. अग्नि-(पुं०) : अग्नि प्रज्वलित हो उठा।
2. अनाज-(पुं०) : आजकल अनाज महँगा है।
3. बुढ़ापा-(पुं०) : बुढ़ापा धीरे-धीरे आता है।
4. घी-(पुं०) : मक्खन से घी तैयार होता है।
5. चना-(पुं०) : चना पुष्टिकारक होता है।
6. गेहूँ-(पुं०) : गेहूँ खेत में पैदा होता है।
7. जी-(पुं०) : जी मचलता है।
8. मोती-(पुं०) : वहाँ मोती मिलता है।
9. सोना-(पुं०) : कर्नाटक में सोना मिलता है ।
10. गूं-(स्त्री०) : जूं रेंग रही है।
11. दाल-(स्त्री०) : दाल गल गयी है।
12. जेब-(स्त्री०) : उसकी जब फटी है।
13. चमक-(स्त्री०) : बिजली की चमक तेज है।
14. चाल-(स्त्री०) : उसकी चाल अच्छी है।
15. खटमल-(पुं०) : खटमल काटता है। ..
16. संसद-(स्त्री०) : ग्रीष्मकालीन संसद् फिर बैठ रही है।
17. शरबत-(पुं०) : शरबत काफी मीठा बना है।
18. बूंद-(स्त्री०) : अमृत की एक बूंद भी पर्याप्त है।
19. जहाज-(पुं०) : जहाज चला जा रहा था ।
20. चुनाव-(पुं०) : पाँचवाँ चुनाव होनेवाला है।
21. गीत-(पुं०) : उसका गीत पसन्द आया।
22. गन्ध-(स्त्री०) : गुलाब की गन्ध अच्छी है।
23. किताब-(स्त्री०) : उसकी किताब पुरानी है।
24. तकिया-(स्त्री०) : यह तकिया बड़ी अच्छी मुलायम है।
25. ताला-(पुं०) : उसकी जबान पर ताला लगा था।
26. दाँत-(पुं०) : उसके दाँत में दर्द है।
27. तोप-(स्त्री०) : किले को लक्ष्य कर तोप दागी गयी।
28. आत्मा-(स्त्री०) : उसकी आत्मा प्रसन्न थी।
29. कपूर-(पुं०) : कपूर हवा में उड़ गया।
30. कमीज-(स्त्री०), : उसकी कमीज फट गयी ।
31. कबूतर-(पुं०) : कबूतर छटपटा रहा है।
32. मशाल-(स्त्री०) : क्रान्ति में मशाल जलती रहेगी।
33. कलम-(स्त्री०) : मेरी कलम काली है।।
34. कमर-(स्त्री०) : उसकी कमर टूट गयी।
35. कमल-(पुं०) : तालाब में कमल खिला है।
36. केसर-(पुं०) : कश्मीर का केसर नामी है ।।
37. करुणा-(स्त्री०) : गरीबों को देखकर करुणा आ जाती है।
38. कोयल-(पुं०) : डालों पर कोयल कूक रही थी।
39. कुशल-(पुं०) : आपका कुशल तो है ?
40. कीमत-(स्त्री०) : इस कलम की कीमत क्या है ?
41. कोशिश-(स्त्री०) : सफलता पाने की कोशिश करनी चाहिए।
कायापलट-(स्त्री०) : देखते-देखते शहर की कायापलट हो गयी।
43. कीचड़-(पुं०) : रास्ते पर कीचड़ फैला है।
44. आह-(स्त्री०) : गरीबों की आह व्यर्थ नहीं जाती।
45. आँसू-(पुं०) : आँसू टपक पड़े।
46. आमद-(स्त्री०) : उनकी आमद से खुशी हुई।
47. अरहर-(स्त्री०) : बाजार में अरहर महँगी है।
48. खेत-(पुं०) : धान के खेत लहरा रहे हैं।
49. खीर-(स्त्री०) : खीर मीठी है।
50. खोज-(स्त्री०) : चोर की खोज जारी है।
51. ईख-(स्त्री०) : इस बार ईख अच्छी हुई।
ईंट-(स्त्री०) : नींव की ईंटों का बड़ा महत्व होता है।
53. उड़ान-(स्त्री०) : वायुयान ने उड़ान भरी।
54. घास-(स्त्री०) : घास हरी है।
55. चील-(स्त्री०) : आसमान में चील उड़ रही है।
56. चिराग-(पुं०) : चिराग जल रहा है।
57. चूल्हा-(पुं०) : उसने चूल्हा जलाया।
58. चीलर-(पुं०) : कपड़ों में चीलर पड़ गया है।
59. चोंच-(स्त्री०) : कौए की चोंच लम्बी है।
60. चुंगी-(स्त्री०) : हर विदेशी माल पर चुंगी लगती है।
61. माँग-(स्त्री०) : श्रमिकों की माँग पूरी नहीं होनी चहिए।
62. मुहर-(स्त्री०) : उसकी आँखों में सच्चाई की मुहर है।
63. दर्द-(पुं०) : इस गीत में कवि के दिल का दर्द उतर आया ।
64. देह-(स्त्री०) : बीमारी के कारण उसकी देह कमजोर है।
65. दीमक-(स्त्री०) : किताब में दीमक लग गयी।
66. चश्मा-(पुं०) : उसका चश्मा खो गया।
67. परदा-(पुं०) : आँखों पर पड़ा अज्ञान का परदा हट गया ।
68. पहिया-(पुं०) : गाड़ी का पहिया टूट गया।
69. पिंजड़ा-(पुं०) : तोते का पिंजड़ा खाली है।
70. पुकार-(स्त्री०) : न्याय की पुकार आज कोई नहीं सुनता ।
71. पुल-(पुं०) : पटना में गंगा नदी पर पुल बन रहा है।
72. प्रशंसा-(स्त्री०) : अच्छे लड़के की प्रशंसा सभी करते हैं।
73. खाट-(स्त्री०) : खाट टूट गयी ।
74. खड़ाऊँ-(स्त्री०) : मेरी खड़ाऊँ कहाँ है ?
75. खबर-(स्त्री०) : आज की नयी खबर क्या है ?
76. खरीद-(स्त्री०) : जरूरी सामानों की खरीद हो गयी।
77. ओस-((स्त्री०) : रात भर ओस गिरती रही ।
78. आँचल-(पुं०) : माँ ने आँचल पसारा ।
79. ऋतु-((स्त्री०) : सुहावनी ऋतु आ गयी ।
80. चाँदी-((स्त्री०) : चाँदी भी महँगी हो गयी।
81. वेतन-(पुं०) : कर्मचारियों का वेतन बढ़ना चाहिए।
82. हथेली-(स्त्री०) : उसकी हथेली में मेंहदी लगी है।
83. चुटकुला-(पुं०) : श्याम ने एक प्यारा चुटकुला सुनाया।
84. छत-((स्त्री०) : मकान की छत टूट गयी ।
85. झंझट-((स्त्री०) : झंझट बढ़ती ही जाती है।
86. झील-((स्त्री०) : झील सुन्दर लगती है।
87. टीस-((स्त्री०) : उसके कलेजे में टीस उठने लगी।
88. जीभ-((स्त्री०) : उसकी जीभ कट गयी।
89. जोश-(पुं०) : भारतीय जवानों के जोश का क्या कहना ।
90. जाँच-((स्त्री०) : इस मामले की जाँच हो रही है।
91. जोंक-((स्त्री०) : उस बच्चे के पेट से जोंक निकली ।
92. जलन-((स्त्री०) : इस ज्वाला में बड़ी जलन है।
93. जमघट-((स्त्री०), : लोगों की जमघट लगी हुई है ।
94. डाक-((स्त्री०) : आज की डाक में तीन चिट्ठियाँ आयीं।
95. ढेर-(पुं०) : यह अनाज का ढेर है।
96. ढोल-(पुं०) : दूर का ढोल सुहावन होता है।
97. होश-(पुं०) : तिजोरी टूटी देख सेठजी के हाश उड़ गये।
98. हाल-(पुं०) : अपना हाल तो कहें ! ठीक तो हैं ?
99. हीरा-(पुं०) : मुकुट में हीरा जड़ा था।
100. हार-(स्त्री०) : इस बार उसकी हार निश्चित है।
101. हाट-(०) : यहाँ हाट काफी जमकर लगता है।
102. हठ-(पुं०) : तुम्हारा हठ बेकार है।
103. हवा-(स्त्री०) : मन्द हवा बह रही है।
104. हाहाकार-(पुं०) : चारों ओर पानी के लिए हाहाकार मचा है।
105. हालत-(स्त्री०) : उनकी हालत गम्भीर है ।
106. हड़ताल-(स्त्री०) : महाविद्यालय में हड़ताल चल रही है।
107. तारा-(पुं०) : आसमान में तारे चमक रहे हैं।
108. तलवार-(स्त्री०) : राणा की तलवार अचूक वार करती थी।
109. तलाक-(पुं०) : उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया।
110. थकान-(स्त्री०) : उनकी धकान दूर नहीं हुई थी।
111. दूकान-(स्त्री०) : एक नयी दूकान खुली है।
112. देर-(स्त्री०) : कथा-साहित्य को प्रेमचन्द की देन अमर रहेगी।
113. देर-(स्त्री०) : थोड़ी देर में वह आ रहा है ।
114. दूब-(स्त्री०) : हरी दूब बड़ी प्यारी लगती है।
115. दीपक-(पुं०) : दीपक जल रहा है।
116. दोपहर-(स्त्री०) : दोपहर हो चली, नहाओ ।
117. दर्शन-(पुं०) : बहुत दिनों बाद उनके दर्शन हुए ।
118. दराद-(स्त्री०) : नये बने पुल में दरार पड़ गयी ।
119. दम्पति-(पुं०) : दम्पति सानन्द बिहर कर रहे हैं ।
120. नीयत-(स्त्री०) : उसकी नीयत साफ है ।
121. नीम-(स्त्री०) : नीम कड़वी होती है ।
122. नस-(स्त्री०) : उसकी नस कट गयी ।
123. नींद-(स्त्री०) : उसे नींद आ गयी है।
124. नाच-(पुं०) : वहाँ नाच हो रहा है।
125. नाक-(स्त्री०) : उसकी नाक कट गयी।
126. निकास-(पुं०) : इस मकान का निकास किधर है।
127. धन-(पुं०) : गरीव का धन ईमान ही है।
128. धूल-(स्त्री०) : पथ की धूल उड़ रही है।
129. धूप-(स्त्री०) : धूप कड़ी है।
130. धातु-(स्त्री०) : धातु चिकनी है।
131. धनिया-(पं०) : धानिया महँगा है।
132. पीठ-(स्त्री०) : उसकी पीठ दुख रही है ।
133. पलंग-(पुं०) : मेरा पलंग टूट गया।
134. परिवार-(पुं०) : उनका परिवार छोटा है।
135. पराजय-(स्त्री०) : युद्ध में उसकी पराजय हो गयी।
136. पतझड़-(स्त्री०) : हेमन्त में पतझड़ आरम्भ हो जाती है।
137. फूट-(स्त्री०) : जनता पार्टी में फूट पड़ गयी है ।
138. पाठशाला-(स्त्री०) : पाठशाला खुल गयी।
139. पहचान-(स्त्री०) : आज असली और नकली की पहचान कठिन है।
140. पुलिस-(स्त्री०) : वहाँ पुलिस तैयार कर दी गयी है।
141. पुकार-(स्त्री०) : गरीबों की पुकार कौन. सुननेवाला है ?
142. पूछ-(स्त्री०) : सभी जगह धनियों की पूछ होती है। .
143. पलक-(स्त्री०) : मेरी पलक खुली थी।
144. प्यास-(स्त्री०) : मुझे प्यास लगी है।
145. पंछी-(पुं०) : पंछी आसमान में उड़ रहे हैं।
146. प्राण-(पुं०) : अपने बच्चों के लिए माँ के प्राण निकले थे।
147. पीतल-(पुं०) : पीतल चमकता है।
148. बोझ-(पुं०) : बुढ़ापे का बोझ ढोना कठिन है।
149. बचपन-(पुं०) : अपना बचपन बीत चुका है।
150. बाँह-(स्त्री०) : उनकी बाँह दुख रही है।
151. बात-(स्त्री०) : बात बढ़ती ही गयी ।
152. बर्फ-(स्त्री०) : जाड़ें में पर्वत पर बर्फ जम जाती है।
153. बाढ़-(स्त्री०) : नदी के इलाकों में बाढ़ आ गयी है।
154. भात-(पुं०) : इस चावल का भत अच्छा होता है ।
155. भूख-(स्त्री०) : हमलोगो की भूख बढ़ती जा रही है !
156. भेंट-(स्त्री०) : उन्होंने मेरी भेंट स्वीकार कर ली।
157. भीड़-(स्त्री०) : वहाँ लोगों को भीड़ लगी थी।
158. भूत-(पुं०) : मार के डर से भूत भी लागता है।
159. भरमार-(स्त्री०) : समाज में बेकारों की भरमार है।
160. यश-(पुं०) : उन्हें अपने अच्छे कार्यों का यश मिला।
161. राह-(स्त्री०) : किसीकी राह में टाँग अड़ाना बुरा है।
162. रात-(स्त्री०) : रात किसी तरह कट गयी।
163. राख-(स्त्री०) : चिता की राख उड़ रही थी।
164. रहन-सहन-(पुं०) : उनका रहन-सहन बड़ा सुन्दर है।
165. रास्ता-(पुं०) : वे अपना रास्ता भूल गये थे।
166. मोह-(पुं०) : धन का मोह सभी को होता है ।
167. [गा-(पुं०) : मूँगा समुद्र से निकाला जाता है।
168. मूंछ-(स्त्री०) : उन्होंने अपनी मूंछ मुड़वा ली थी।
169. माया-(स्त्री०) : ईश्वर की माया अपरम्पार है।
170. मटर-(पुं०) : इ बार मटर अच्छा हुआ है।
171. महल-(पुं०) : राजा का आलीशान महल खड़ा था।
172. मेड़-(स्त्री०) : यह मेड़ मेरे खेत की है।
173. माला-(स्त्री०) : वे फूलों की गाला लेकर आये थे।
174. मिठास-(स्त्री०) : इस गन्ने की मिठास का क्या कहना ।
175. मिलावट-(स्त्री०) : आजकल हर चीज में मिलावट होती है।
176. लाज-(स्त्री०) : राजू को बोलने में लाज लग रही है।
177. लाश-(स्त्री०) : लावारिश लाश पड़ी थी।
178. लात-(स्त्री०) : उसने उसे एक लात लगायी।
179. लू-(स्त्री०) : तेज लू चल रही है।
180. लगान-(पुं०) : इस खेत का लगान अधिक है।
181. लूट-(स्त्री०) : उनकी फसल की लूट हो गयी।
182. लीक-(स्त्री०) : गाड़ी के पहिये की लीक साफ नजर आती हैं।
183. विजय-(स्त्री०) : अन्धकार पर प्रकाश की विजय हुई।
184. विनय-(स्त्री०) : मेरी विनय सुनी आपने !
185. वायु-(स्त्री०) : वायु मंद-मंद वह रही है ।
186. बिल-(पुं०) : चूहे ने दीवाल में तीन बिल बनाए हैं।
187. बुलबुल-(स्त्री०) : डाल पर बैठ बुलबुल गा रही थी।
188. वेदना-(स्त्री०) : उसकी वेदना अधिक थी।
189. सौगात-(स्त्री०) : वे प्रेम की सौगात लेकर आये हैं।
190. शरीर-(पुं०) : उसका शरीर स्वस्थ है ।
191. शराब-(स्त्री०) : शराब नहीं पीनी चाहिये ।
192. शरण-(स्त्री०) : मैं परमात्मा की शरण चाहता हूँ।
193. शंका-(स्त्री०) : तुम्हें तो हर बात की शंका ही होती है।
194. सोन-(पुं०) : सोन गंगा में मिलता है ।
195. सामर्थ्य-(स्त्री०) : यह काम मेरी सामर्थ्य से बाहर है ।
196. सूत-(पुं०) : सूत टूट गया ।
197. सन्तान-(स्त्री०) : हम सभी एक ईश्वर की सन्तान है।
198. समाज-(पुं०) : महान् रचनाओं से समाज अवश्य प्रभावित होता है ।
199. सड़क-(स्त्री०) : सड़क चौड़ी है।
200. सफर-(पुं०) : रेल का सफर सुहाना होता है ।
201. साख-(स्त्री०) : बाजार में उनकी साख जम चुकी है।
202. सुझाव-(स्त्री०) : आपका सुझाव अच्छा है !
203. समझ-(स्त्री०) : आपकी समझ की दाद देता हूँ।
204. साँस-(स्त्री०) : वे गहरी साँस ले रहे थे।
205. सबूत-(पुं०) : तुम्हारे जबाव का सबूत क्या है।
206. सुलह-(स्त्री०) : दोनों गुटों में सुलह हो गयी।
207. सरकार-(स्त्री०) : हमारी सरकार निकम्मी है।
208. सिन्धु-(पुं०) : सामने अगाध सिन्धु लहरा रहा था ।
209. सूझ-(स्त्री०) : आपकी सूझ बड़ी अच्छी है।
210. सुबह-(स्त्री०) : सुबह हो चली थी।
211. मौसम-(पुं०) : आज का मौसम अच्छा है।
212. अनल-(पुं०) : यज्ञ कुण्ड में अनल धधक रहा।
213. आचरण-(पुं०) : आपका आचरण अच्छा है।
214. उपेक्षा-(स्त्री०) : काम की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए ।
215. आग-(पुं०) : एक घर में आग लग गयी ।
216. दही-(पुं०) : स्त्रलिंग. अपने दही को खटा नहीं कहती ।
217. विछावन-(पुं०) : वह विछावन गंदा है।
218. झाडू-(पुं०) : झाडू टूट गया ।
219. शाम-(स्त्री०) : शाम हो गयी।
220. मैल-(स्त्री०) : तुम्हारे हाथ में मैल लग गयी है।
221. रास-(स्त्री०, पु०) : घोड़े की रास ढीली हो गयी। राधा कृष्ण के रास पसद करती थी।
222. शशि-(पुं०) : पूर्णिमा का शशि उदय हुआ।
223. गन्ना-(पुं०) : खेत में गन्ने लगे हुए थे।
224. छाप-(स्त्री०) : ललाट पर रामानन्दी छाप थी।
225. नस-(स्त्री०) : मैं उसकी नस-नस पहचानता हूँ।
226. वयार-(स्त्री०) : चैती वयार बह रही थी।

Bihar Board Class 9 Hindi व्याकरण लिंग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science चुम्बक Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –
(क) जो वस्तु चुम्बक की ओर खिंचती है ……………….. कहलाता है।
(ख) चुम्बक के जिन स्थानों पर ‘लोहे का बुरादा सबसे अधिक चिपकता है, चुम्बक का ……………कहलाता है।
(ग) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुम्बक सदा …………… की दिशा में ही रूकता है।
(घ) जब दो समान ध्रुव आमने-सामने रहते हैं तब ………… होता है।
(ङ) जब दो असमान ध्रुव आमने-सामने होते हैं तब ……….. होता है।
उत्तर:
(क) चुम्बकीय पदार्थ
(ख) ध्रुव
(ग) उत्तर-दक्षिण
(घ) विकर्षण
(ङ) आकार्षणः

प्रश्न 2.
मिलान कीजिए –
(1) मैग्नेटाइट – (क) उत्तरी एवं दक्षिणी
(2) लोहा, निकिल, कोबाल्ट – (ख) अचुम्बकीय पदार्थ
(3) दो ध्रुव – (ग) यूनान का चरवाहा
(4) लकड़ी – (घ) चुम्बकीय पदार्थ
(5) मेग्नस – (ङ) प्राकृतिक चुम्बक
उत्तर:
(1) – (ङ)
(2) – (घ)
(3) – (क)
(4) – (ख)
(5) – (ग)

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

प्रश्न 3.
निम्न वाक्यों में जो सही हो उनके सामने (सही) का चिह्न एवं गलत कथन के सामने (गलत) का चिह्न लगायें।
(क) प्लास्टिक एक चुम्बकीय पदार्थ है।
(ख) कृत्रिम चुम्बक का आविष्कार यूनान में हुआ था।
(ग) जो वस्तु चुम्बक की ओर आकर्पित होती है। चुम्बकीय वस्तु कहलाती है।
(घ) चुम्बक के दो ध्रुव होते हैं।
उत्तर:
(क) गलत
(ख). सही
(ग) सही
(घ) सही

प्रश्न 4.
चुम्बक के किन्हीं दो गुणों को लिखिए।
उत्तर:
चुम्बक के दो प्रमुख गुण –
(क) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ चुम्बक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में रूकता है।
(ख) चुम्बक, चुम्बकीय पदार्थ को अपनी ओर आकर्षित करता है।

प्रश्न 5.
छड़ चुम्बक के ध्रुव कहाँ स्थित होते हैं ?
उत्तर:
छड़ चुम्बक को प्रयोग में लाने के बाद पाया गया कि इसके दोनों सिराओं पर आकर्षण शक्ति सबसे ज्यादा होती है जिसे ध्रुव कहते हैं यानि छड़ चुम्बक के ध्रुव दोनों सिराओं पर स्थित होते हैं।
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक 1

प्रश्न 6.
आप लोहे की पत्ती को चुम्बक कैसे बनायेंगे?
उत्तर:
एक लोहा की पत्ती तथा एक चुम्बक लेंगे। चुम्बक को लोहे की पत्ती पर कुछ देर तक रगड़ते रहेंगे। कुछ देर के बाद पत्ती जब हटाते हैं तो उसमें चुम्बकीय गुण आ जाते हैं। इस प्रकार चुम्बक से रगड़ कर लोहे की पत्ती को चुम्बक बनाया जा सकता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

प्रश्न 7.
दिशा सूचक में कंपास का किस प्रकार प्रयोग होता है?
उत्तर:
घड़ी के केश या डायल की तरह का होता हैं जिसमें चारों दिशा अंकित रहते हैं। उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम। उसके ठीक केन्द्र पर एक कील होता है। जिस पर चुम्बक का बना हुआ सूई लगा होता है। जिसके एक तरफ लाल रंग चढ़ा होता है। यह सूई किसी भी दिशा में घूमने के लिए स्वतंत्र होता है। जब इसको हिला-डुला कर छोड़ देते हैं तो यह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में आकर रूक जाती है। इससे दिशा का निर्धारण हो जाता है। इसलिए इसे “दिक् सूचक सूई” या चुम्बक दिक्सूचक यंत्र कहते हैं।

प्रश्न 8.
नीचे लिखी चीजों में से कौन-सी एक छड़ चुंबक के दोनों ध्रुवों की ओर आकर्षित होगी ? हरेक का कारण भी बताइए ।
(क) किसी दूसरे छड़ चुम्बक का उत्तर ध्रुव
(ख) किसी दूसरे छड़ चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव
(ग) लोहे का टुकड़ा
(घ) लकड़ी का गुटका
उत्तर:
लोहे का टुकड़ा क्योंकि उसमें कोई ध्रुव नहीं होता है ।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

Bihar Board Class 6 Science चुम्बक Notes

अध्ययन सामग्री :

आज से लगभग 2500 वर्ष पहले यूनान में क्रीट नामक द्वीप पर एक बूढ़ा चरवाहा मेगनस रहता था। उसकी छड़ी के निचले हिस्से में लोहा लगा हुआ था। एक भेड़-बकरी चराने के क्रम में उसकी छड़ी के निचले हिस्से में (लोहे की भाँति देखने) कोई पदार्थ चिपक गया जिसमें लोहे को आकर्षित करने के प्राकृतिक गुण में हैं। उस वस्तु (पत्थर) का नाम “लोडस्टोन” है जो लोहे का ही एक रूप है, पर इसमें प्राकृतिक रूप से ही चुम्बकीय गुण होते हैं। आगे चलकर महान वैज्ञानिक विलियम गिलर्बट ने अनेक प्रयोग कर चुम्बक के अनेके गुणों का विवरण किया। ईसा के जन्म के लगभग 600 वर्ष पूर्व से ज्ञात है कि “मैगनेटाइट” नामक खनिज पदार्थ के टुकड़ों में लोहे के पदार्थों को आकर्षित करने का गुण है। ऐसे पदार्थों को चुम्बक कहा गया।

प्रकृति में मिलने के कारण इसे प्राकृतिक चुम्बक कहते हैं। रासायनिक रूप से यह लोहे का ऑक्साइड (Fe2O4) होता है। इसकी कोई निश्चित आकृति नहीं होती है। कुछ पदार्थों को कृत्रिम विधियों द्वारा चुम्बक बनाया जा सकता है। जैसे लोहा, इस्पात, कोबाल्ट आदि इन्हें कृत्रिम चुम्बक कहते हैं। ये विभिन्न आकृति की होती है, जैसे – छड़-चुम्बक, घोड़ा-नाल चुम्बक, चुम्बकीय सूई आदि।

चुम्बक में लोहे, इस्पात आदि धातुओं को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता होती है। यदि किसी चुम्बक को लौह बुरादों के पास लाया जाय, तो बुरादा चुम्बक में चिपक जाता है। चिपके हए बरादे को मात्रा, चुम्बक के दोनों सिरों पर सबसे अधिक एवं मध्य में सबसे कम होती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि चुम्बक की आकर्षण शक्ति उसके दोनों किनारों पर सबसे अधिक एवं मध्य में सबसे कम होती है। चुम्बक के किनारे के दोनों सिरों को नुम्बक के ध्रुव कहते हैं।

यदि किसी चुम्बक को धागे से बाँधकर मुक्त रूप से लटका दिया जाय, तो स्थिर होने पर उसका एक ध्रुव उत्तर की ओर और दूसरा ध्रुव दक्षिण की ओर हो जाता है। उत्तर दिशा सूचित करने वाले ध्रुव को चुम्बक का उत्तरी ध्रुव N तथा दक्षिण दिशा सूचति करने वाले ध्रुव को चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव S कहते हैं। दंड चुम्बक के दोनों ध्रुवों से होकर गुजरने वाली काल्पनिक सरल रेखा को उस चुम्बक का चुम्बकीय अक्ष कहते हैं। दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी को चुम्बकीय लम्बाई कहते हैं।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

दो चुम्बकों के असमान ध्रुव एक-दूसरे को आकर्पित करते हैं तथा दो समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्पित करते हैं। किसी चुम्बक को बीच से तोड़ देने पर इसके ध्रुव अलग-अलग नहीं होते, बल्कि टूटे हुए भाग पुनः चुम्बक बन जाते हैं तथा प्रत्येक भाग में उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न हो जाते हैं। अतः एक अकेले चुम्बकीय ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता है। – चुम्बक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव होता है, उसे चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।

चुम्बकीय क्षेत्र में बल रेखाएँ वे काल्पनिक रेखाएँ हैं, जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को अविरल प्रदर्शन करती है।

चुम्बकीय बल रेखाओं के गुण –

  • चुम्बकीय बल रेखाएँ सदैव चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं तथा वक्र बनाती हुई दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती हैं और चुम्बक के अन्दर से होती हुई पुनः उत्तरी ध्रुव पर वापस आती हैं।
  • दो बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती।
  • चुम्बकीय क्षेत्र जहाँ प्रबल होती है, वहाँ बल रेखाएँ पास-पास होती हैं।
  • एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ परस्पर समान्तर एवं बराबर-बराबर दूरियों पर होती हैं।

चुम्बक के आकर्षण के आधार पर सभी पदार्थों को दो भागों में विभाजित किया गया है।
(क) चुम्बकीय पदार्थ।
(ख) अचुम्बकीय पदार्थ।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 15 चुम्बक

वे सभी पदार्थ जो चुम्बक के द्वारा आकर्षित हो जाते हैं उसे चुम्बकीय पदार्थ कहते हैं जैसे- लोहा, स्टील, निकेल आदि।

वे सभी पदार्थ जो चुम्बक के द्वारा आकर्षित नहीं होते हैं उसे अचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। जैसे- कागज, लकड़ी, पत्थर, अल्युमिनियम आदि।

चुम्बक का प्रयोग मोटर, पंखा, टेलीविजन, दिशा सूचक यंत्र आदि में किया जाता है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

Bihar Board Class 6 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 1 Chapter 10 बिहार दर्शन-2 Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-2 Text Book Questions and Answers

अभ्यास

प्रश्न 1.
खाली जगहों को भरें

  1. तख्त श्री हरमंदिर …………. में स्थित है।
  2. शेरशाह का मकबरा ………….. कोणीय है।
  3. ग्रैंडकोर्ड रेलवे ………… को जोड़ती है।
  4. गोलघर का निर्माण …………. में करवाया।
  5. दीदारगंज में ………… की मूर्ति मिली।

उत्तर-

  1. पटना सिटी
  2. अष्ट
  3. दिल्ली-हावड़ा
  4. जान गॉलस्टिन ने 1776 ई
  5. यक्षिणी।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

प्रश्न 2.
सही मिलान करें –

  1. लंगर – नि:शुल्क भोजन
  2. पटना संग्रहालय – सासाराम
  3. गोलघर – राजेन्द्र कक्ष
  4. रोहतास – अनाज का भंडारण

उत्तर-

  1. लंगर – नि:शुल्क भोजन
  2. पटना संग्रहालय – राजेन्द्र कक्ष
  3. गोलघर – अनाज का भंडारण
  4. रोहतास – सासाराम

प्रश्न 3.
सही कथनों में सही (✓) का चिह्न लगाएँ एवं गलत कथन में गलत (✗) का चिह्न लगाएँ

  1. शेरशाह को हराकर हुमायूँ ने भारत की गद्दी पर कब्जा किया। – (✗)
  2. पटना का गोलघर कैप्टन जान गॉलस्टीन ने बनवाया था। – (✓)
  3. पत्थर की मूर्ति “यक्षिणी” पटना के दीदारगंज में मिली थी। – (✓)
  4. गुरुगोविन्द सिंह का जन्म स्थल तख्त श्री हरमंदिर जी कहलाता है। – (✓)

प्रश्न 4.
बताइये –

प्रश्न (क)
गोलघर कहाँ है ? इसका निर्माण क्यों करवाया गया ?
उत्तर-
गोलघर पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1776 ई में अनाज के सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष काल या अकाल के समय इस अनाज से ‘मदद पहुँचाई जाये। जिससे सभी को अनाज की समस्याओं का सामना करना नहीं पड़े।

प्रश्न (ख)
शेरशाह कौन थे? इनका मकबरा कहाँ है?
उत्तर-
शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खाँ था जो युवा काल में ही – अपने संरक्षक की रक्षा करते हुए शेर को तलवार से एक ही बार में दो टुकड़े कर दिये थे। तभी से उसे शेरशाह के नाम से पुकारा जाने लगा। रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है। यह मकबरा अष्टकोणीय है। जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

प्रश्न (ग)
अगर आप पटना संग्रहालय जायेंगे तो आपको कौन-कौन सी चीजें नजर आएंगी?
उत्तर-
पटना संग्रहालय का भवन राजस्थानी शैली में बना हुआ है। संग्रहालय के बगीचे में सामने ही तोप रखे हैं, चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी हैं। मुख्य भवन में जाते ही एक विशाल पेड़ देखने को मिलेगा। जो लगभग 50000 वर्ष पुराना है। उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं।

यह पत्थरनुमा जीवाश्म के उदाहरण हैं। यहाँ भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों को भी देखते हैं। पटना संग्रहालय में ही आगे बढ़कर जाने पर एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ है। यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले हुए उपहारों को भी देख सकते हैं जो उनकी स्मृति के रूप में रखा हुआ है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

प्रश्न (घ)
गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज किस नाम से प्रसिद्ध है? वहाँ सिक्ख क्यों आते हैं?
उत्तर-
गुरुगोविन्द सिंह का जन्म-स्थान आज तख्त श्री हरमंदिर साहब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। सफेद संगमरमर से बना हुआ है। यह सिक्खों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। गुरुगोविन्द सिंह के जन्मदिवस पर यहाँ मेला लगता -है। यहाँ देश-विदेश के सिक्ख भाग लेने आते हैं। इस पवित्र स्थल के अंदर गुरुग्रंथ साहिब रखा हुआ है और गुरुवाणी पढ़ी जाती है। यहाँ लंगर भी चलता

Bihar Board Class 6 Social Science बिहार दर्शन-2 Notes

पाठ का सारांश

बिहार दर्शन-2 में बच्चों ने मिलकर रविवार के दिन सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा, पटना के गोलघर, संग्रहालय तथा पटना सिटी स्थित तख्त मंदिर साहेब घूमने गये।

अगले दिन सभी बच्चे सासाराम राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 के किनारे रोहतास का जिला मुख्यालय है और यहाँ से दिल्ली-हावड़ा जोड़ने वाली ग्रैंडकोर्ड रेलवे लाइन भी गुजरती है। इस प्रकार, सभी बच्चे तैयार हो गये बस के द्वारा दर्शनीय स्थलों को देखने।

प्रधानाचार्य ने बाल सभा में बच्चों को बताया कि रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अफगान शासक शेरशाह का मकबरा स्थित है।

शेरशाह ने हुमायूँ को हराकर भारत की गद्दी पर कब्जा कर लिया था । यह मकबरा शेरशाह ने अपने जीवनकाल में ही बनवाना प्रारंभ करा दिया था। यह मकबरा अष्टकोणीय है जो लाल पत्थरों से बना हुआ है। मकबरे की छत गोल गुम्बद के रूप में है। यह मकबरा एक तालाब के बीचों-बीच हे और वहाँ तक जाने के लिए बीचों-बीच एक पुलिया मुख्य द्वार से मकबरा तक बनी हुई है।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

यह मकबरा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है और इसके कर्मचारी इसकी देख-रेख करते हैं। फिर सभी लोग पटना के गोलघर देखने के लिए गये। यह जगह पटना के गाँधी मैदान के पश्चिम में स्थित है। गोलघर की गोल दीवारों पर एक सूचना पट्ट लगी है जिसमें गोलघर के सम्बन्ध में कई जानकारियाँ दी गई हैं। उसमें लिखा है कि इसका निर्माण कैप्टन जान गॉलस्टीन ने 1776 ई. में अनाज को सुरक्षित भंडारण के उद्देश्य से करवाया था ताकि दुर्भिक्ष या अकाल के समय इस अनाज से मदद पहुँचाई जा सके ।

इसकी दीवारें 12 फीट मोटी और 96 फीट ऊँची है। इसके शीर्ष पर चढ़ने के लिए दोनों ओर से सीढियाँ बनी हुई हैं। सीढियाँ को चढ़कर ही गोलकर ऊपर जाया जाता है। वहाँ से पूरा पटना दिखाई देता है उत्तर दिशा में गंगा नदी बिल्कुल पास से बहती है । दूर पूरब में महात्मा गाँधी सेतु दिखाई पड़ता है।

गाँधी मैदान का विहंगम खुला क्षेत्र और एक किनारे पर स्थित श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल तथा चारों ओर ऊँची इमारतें बहुत ही आकर्षक लगती हैं। गोलघर के निकट में ही पटना संग्रहालय स्थित है। यहाँ स्कूली बच्चों को रियायती दुर पर प्रवेश टिकट मिलता है। टिकट लेने के बाद हमलोग अंदर गए। चारों और बड़ा-सा बगीचा है और बीच में संग्रहालय का भवन है। यह भवन राजस्थानी शैली में बना है। संग्रहालय का भवन के बगीचे में सामने ही तोच रखे हैं। ये तोपे अंग्रेजी शासन की हैं। चारों ओर कई बड़ी-बड़ी दुर्लभ मूर्तियाँ भी देखने को मिलती हैं।

भवन में मुख्य द्वार से जाते ही एक विशाल पेड़ है जो लगभग 5000 वर्ष पुराना है और उसकी लकड़ियाँ अब पत्थरनुमा हो गई हैं।

यह पत्थरनुमा वृक्ष जीवाश्म का उदाहरण है। संग्रहालय में भगवान बुद्ध और जैन तथा मौर्यकाल की महत्वपूर्ण मूर्तियों, सिक्कों और बर्तनों की कतार हैं। सभी वस्तुओं के पास नाम सहित उनकी आयु, उपयोगिता लिखी हुई है, जिसे पढ़कर उसके बारे में समझा जा सकता है। वहाँ एक राजेन्द्र कक्ष बना हुआ।

यहाँ राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद को मिले उपहारों एवं वस्तुओं को स्मृति के रूप में रखा गया है। हाँ, हमें संग्रहालय में रखे गए चीजों को बर्बाद नहीं करना चाहिए संग्रहालय में हर जगह सूचनाएँ लिखी हुई हैं। हर कमरे में दीवार पर कैमरे लगे हुए हैं। अगर कोई छुएगा तो कैमरे में उसकी तस्वीर आ जाएगी।

Bihar Board Class 6 Social Science Geography Solutions Chapter 10 बिहार दर्शन-2

यहाँ पत्थर की एक सुंदर-सी मूर्ति थी जिस पर ‘दक्षिणी’ लिखा हुआ था। वह मूर्ति दीदारगंज में मिली थी। वह मूर्ति बहुत ही चमक रही थी और उसके गले में एक हार भी था। इमलोगों ने घूमकर सारा संहालय देखा।

संग्रहालय देखने से इतिहास की समझ बनती है। इस प्रकार हमलोगों ने बिहार के दार्शनिक स्थलों को देखा और बहुत-सी ज्ञानवर्द्धक रोचक बातें जानने को मिली । हमने गोलघर, पटना संग्रहालय, तख्त हरमंदिर साहेब के दर्शन भी किये।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

Bihar Board Class 6 Science बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Text Book Questions and Answers

अभ्यास और प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(क) निम्न वस्तुओं में बिजली का चालक है –
(i) लकड़ी
(ii) कागज
(iii) प्लास्टिक
(iv) लोहा
उत्तर:
(iv) लोहा

(ख) बल्ब के आविष्कारक थे –
(i) जेम्सवाट
(ii) एडीसन
(iii) ग्राहम बेल
(iv) जहाँगीर भाभा
उत्तर:
(ii) एडीसन

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

(ग) बल्ब की कुंडली किस धातु की बनी होती है –
(i) लोहा
(ii) पीतल
(iii) टंगस्टन
(iv) स्टील
उत्तर:
(iii) टंगस्टन

(घ) हवा है –
(i) बिजली का चालक
(ii) बिजली का कुचालक
(iii) कभी चालक कभी कुचालक
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) बिजली का चालक

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

(क) जब विद्युत धारा सेल के एक सिरे व तार व बल्ब से होते हुए सेल के दूसरे सिरे तक प्रवाहित होती है तो इस चक्कर को ………..कहते हैं।
(ख) किसी वस्तु को विद्युत परिपथ में जोड़ने पर बल्ब जल उठता है। तो इस वस्तु को विद्युत का ……………. कहते हैं ।
(ग) ऐसी चीजें जिनको सर्किट में जोड़ने से बल्ब नहीं जलता हैं, इन्हें ………………. कहा जाता है।
उत्तर:
(क) परिपथ
(ख) चालक
(ग) कुचालक

प्रश्न 3.
राहुल ने नया सेल खरीदा। उसकी धुंडी पर एक प्लास्टिक की सील बनी थी। प्लास्टिक की सील हटाए बिना राहुल ने सेल को टॉर्च में – डाला। बताएँ, राहुल की टॉर्च क्यों नहीं जली?
उत्तर:
सभी वस्तुओं को आवेश या धारा के गमन के आधार पर दो भागों में बाँटा गया है। चालक तथा कुचालक। वैसी वस्तुएँ जिससे होकर धारा _आसानी से एक सिरे से दूसरे तक गमन करती हो उसे चालक तथा जिससे होकर धारा प्रवाहित नहीं होती हो उसे अचालक कहते हैं।
चालक – लोहा, ताँबा।
कुचालक – प्लास्टिक सीसा।

सेल की घंडी पर प्लास्टिक की सील लगी थी जिसके कारण धारा प्रवाहित नहीं हो पा रही थी। क्योंकि प्लास्टिक धारा का कुचालक होता है। यही कारण था कि राहुल की टॉर्च नहीं जली।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

प्रश्न 4.
बल्ब के अंदर की कुंडली टूटने के कारण जब फ्यूज हो जाता है, तो बताएँ बल्ब क्यों नहीं जलता है ?
उत्तर:
किसी यंत्र को संचालित करने के लिए विद्युत परिपथ पूर्ण होना चाहिए। कुंडल टूटने के कारण विद्युत परिपथ टूट जाता था जिसके कारण धारा प्रवाहित नहीं हो पाती है। यही कारण है कि बल्ब नहीं जल पाता है।

प्रश्न 5.
किशन के पास एक ही तार था। तार के एक सिरे को उसने अपने बल्ब की चूड़ी पर कसा और दूसरा सिरा सेल पर दबाया। फिर एक स्टील के डिब्बे पर सेल और बल्ब को दबाकर इस तरह रखा कि उसका बल्ब जल उठा। अपनी कॉपी में चित्र बना कर समझाएँ कि एक ही तार से परिपथ कैसे पूरा हो गया ?
Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग 1
उत्तर:
टॉर्च के निचले ढक्कन में एक मोटे तार का स्प्रिंग होता है। स्प्रिंग होने से बल्ब की धुंडी और दोनों सेल आपस में सटकर जुड़े रहते हैं। स्प्रिंग वाला तार टॉर्च के किनारे-किनारे ऊपर चला जाता है। ऊपर इस तार के साथ स्विच की पत्ती जुड़ी होती है। स्विच को ऊपर दबाने से पत्ती ऊपर जाकर बल्ब के एक सिरे को छूती है। सर्किट पूरा होता है और बल्ब जल उठता है।

प्रश्न 6.
अपने शब्दों में समझाएँ कि बल्ब में रोशनी कैसे होती है?
उत्तर:
बल्ब के फिलामेंट टंग्सटन का बना होता है जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। अधिक प्रतिरोध होने के कारण फिलामेंट में जब धारा प्रवाहित – होती है तो वह काफी गर्म हो जाता है। क्योंकि लगभग सभी विद्युत ऊर्जा ऊष्मा . में परिवर्तित हो जाती है। फिलामेंट जब काफी गर्म होकर लाल हो जाता है तो यह प्रकाश और ऊष्मा देने लगती है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

Bihar Board Class 6 Science बल्ब जलाओ जगमग-जगमग Notes

अध्ययन सामग्री:

बल्ब की जगमग-जगमग रोशनी ने हमारे मानव जीवन को एक नई जिन्दगी प्रदान की। इसके पहले लकड़ी, किरोसिन आदि जला कर हम प्रकाश – उत्पन्न करते थे। परन्तु बल्ब की जगमग-रोशनी ने आज हमारे जीवन में चार चाँद लगा दिया। विद्युत का आविष्कार ने हमारे मानव जीवन को आज यहाँ तक पहुँचा दिया। विकास को चरम सीमा पर पहुँचाने में विद्युत की अह्म भूमिका रही। बल्ब की सबसे पहली खबर सन् 1879 के दिसंबर माह में अमेरिका के एक अखबार में छपी। इस खबर से पूरी दुनिया में तहलका मच गया। इस आविष्कार का श्रेय थॉमस एडीसन को गया। यह प्रतिभा के धनी और कड़ी मेहनत में विश्वास रखने वाले अपने जीवनकाल में उन्होंने एक हजार से अधिक आविष्कार किए।

इस अध्याय के अध्ययन का मुख्य विषय था-बल्ब कैसे जलता है। इसके लिए क्या-क्या आवश्यक उपकरण चाहिए तथा क्या-क्या आवश्यक कदम उठाने के बाद यह जलता है।

Bihar Board Class 6 Science Solutions Chapter 14 बल्ब जलाओ जगमग-जगमग

बल्ब जलाने के लिए आवश्यक कदम –

1. तार को साफ करना—सबसे पहले तार के दोनों सिरों से प्लास्टिक हटा देते हैं। तार के दोनों सिरे साफ होना चाहिए। यदि सिरों पर पहले से ही प्लास्टिक हटा हुआ है और वे साफ नहीं हो तो उन्हें रेगमाल, पत्थर या किसी अन्य खुदरी चीज से घिसकर चमका लें।

2. बल्ब एवं होल्डर की जाँच-बल्ब एवं होल्डर की जाँच कर लेना चाहिए। उसके बाद परिपथ में उचित तरीके से जोड़ देते हैं।

3. सेल के सिरे पहचानिए सेल के दो सिरे होते हैं। एक तरफ पीतल को टोपी तो दूसरी तरफ धातु की पट्टी होती है। पीतल की टोपी को धन सिरा तथा दूसरी सिरा को ऋण सिरा कहते हैं। दोनों सेल सिरों को उचित तरीके से जोड़ते चले जाते हैं।

4. बढ़िया-सा सेल होल्डर–सेलों को होल्डर में उचित तरीके से लगा देते हैं।

5. अब जलेगा अपना बल्ब बल्ब होल्डर से जुड़े दोनों तारों को सेल से जोड़ देते हैं। एक तार को सेल की धुंडी पर लगा देते हैं। दूसरे तार को सेल के चपटे सिरे से जोड़ देते हैं।

6. अपना बल्ब बुझाएँगे कैसे-बल्ब को अनावश्यक रूप से जलने से बचाने के लिए तार को हटा देते हैं या उसमें एक स्विच लगा देते हैं।

इस प्रकार बल्ब जलाने की प्रक्रिया पूरी होती है। सेल से तार में, तार से बल्ब में और फिर बल्ब में से होकर तार के जरिए सेल के दूसरे सिरे तक बिजली के बहने का यह एक पूरा चक्कर लगाता है। बिजली के बहने का यह एक पूरा चक्कर को परिपथ (सर्किट) कहते हैं।

धारा का प्रवाह यदि परिपथ में होता रहता है तो उसे हम कहते हैं-सर्किट मूरा या चालू है। सर्किट में बिजली नहीं बहती तो हम कहते हैं। सर्किट अधूरा या कहीं से कटा हुआ है।

धारा के प्रवाह के आधार पर वस्तुओं को दो भागों में बाँटा गया है-चालक तथा अचालक या कुचालक। जिस पदार्थ से होकर धारा प्रवाहित हो जाती है उसे चालक कहते हैं। जैसे सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, अल्युमिनियम आदि। जिस पदार्थ से होकर धारा प्रवाहित नहीं होती है उसे अचालक कहते हैं। जेसे – लकड़ी, कागज, कपड़ा प्लास्टिक आदि।

धारा तथा विभिन्न यंत्रों का अध्ययन अब हमलोग आगे की कक्षा में करेंगे।