Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 मछली

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 10 मछली Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 10 मछली

Bihar Board Class 10 Hindi मछली Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 10 Bihar Board प्रश्न 1.
झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
उत्तर-
दौड़ते हुए बच्चे पतली गली में इसलिए घुस गये कि इस गली से घर नजदीक पड़ता था।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
उत्तर-
मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा थी कि एक मछली पिता जी से मांग कर कुँए में डालकर बहुत बड़ी करेंगे। जब मन होगा बाल्टी से निकालकर खेलेंगे। बाद में फिर कुँए में डाल देंगे।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf Download प्रश्न 3.
मछलियाँ लिए घर आने के बाद बच्चों ने क्या किया?
उत्तर-
घर आने के बाद बच्चों ने नहानघर में प्रवेश किया। भरी हुई बाल्टी को आधा खाली कर झोले को तीनों मछलियाँ उड़ेल दी।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 4.
मछली को छूते हुए संतू क्यों हिचक रहा था?
उत्तर-
संतू को मछली छूते हुए डर लग रहा था। मछली छूने से कहीं काट न ले।

Bihar Board Hindi Book Class 10 Pdf प्रश्न 5.
मछली के बारे में दीदी ने क्या जानकारी दी थी? बच्चों ने उसकी परख कैसे की?
उत्तर-
मछली के बारे में दीदी ने जानकारी दी थी कि मरी हुई मछली की आँख में अपनी परछाईं नहीं दिखती है। बच्चों ने उसकी परख एक मृत मछली की आँख में अपनी परछाईं देखकर की।

बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 10 Bihar Board प्रश्न 6.
संतू क्यों उदास हो गया ?
उत्तर-
संतू यह जानकर उदास हो गया था कि मछली कुछ देर बाद कट जायेगी। वह मछली को जीवित पालना चाहता था। मछली की बिछुड़ते हुए जानकर वह दुःखी हो गया।

Bihar Board Class 10 Hindi Chapter 1 प्रश्न 7.
घर में मछली कौन खाता था और वह कैसे बनायी जाती थी?
उत्तर-
घर में मछली केवल पिताजी खाते थे। मछली को उस घर का नौकर काटता था। उसे काटने के लिए अलग पाटा था। पहले मछली को पत्थर पर पटककर मार दिया जाता था, फिर राख से मलने के बाद पाटा पर रखकर चाकू से काटा जाता था। मछली बनाने का कार्य नहानघर .. में होता था।

Bihar Board Hindi Class 10 प्रश्न 8.
दीदी कहाँ थी और क्या कर रही थी?
उत्तर-
दीदी कमरे में थी और सो रही थी।

प्रश्न 9.
अरे-अरे कहता हुआ भग्गू किसके पीछे भागा और क्यों ?
उत्तर-
अरे अरे कहता हुआ भग्गू संतू के पीछे भागा क्योंकि संतू एक मछली को लेकर भाग रहा था। भागू को डर था कि संतू मछली को कुओं में डाल देगा जिसके चलते उसे डाँट पड़ेगी। संतू से मछली लेने के लिए वह उसके पीछे भागा।

प्रश्न 10.
मछली और दीदी में क्या समानता दिखाई पड़ी? स्पष्ट करें।
उत्तर-
आदमी के चंगुल में आकर मछली कटने को विवश थी। पानी के अभाव में अंगोछा में लिपटी मछली लहरा रही थी। दीदी कमरा में करवट लिए, पहनी हुई साड़ी को सर तक ओढे, सिसक-सिसक कर रो रही थी। हिचकी लेते ही दीदी का पूरा शरीर सिहर उठता था। दीदी का सिहरना एवं मछली का लहराना दोनों में समानता दिखलाई पड़ी।

प्रश्न 11.
पिताजी किससे नाराज थे और क्यों ?
उत्तर-
पिताजी नरेन से नाराज थे। क्योंकि बच्चों ने मछलियों के चलते स्वयं परेशान रहे। साथ ही भग्गू को भी परेशान किया। बच्चे मछली को पालना चाहते थे, कोमल बालमन मछली को कटते देख विह्वल हो उठा और बच्चा एक मछली को लेकर भाग गया। पीछे-पीछे भग्गू को भागना पड़ा। छीना-झपटी की स्थिति आई। पिताजी इन हरकतों के कारण नाराज हुए।

प्रश्न 12.
सप्रसंग व्याख्या करें
(क)बरसते पानी में खड़े होकर झोले का मुँह आकाश की तरफ फैलाकर मैंने खोल दिया ताकि आकाश।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘मछली’ नामक कहानी से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संबंध उस संदर्भ से है जब बच्चे पिताजी द्वारा खरीदी गयी तीन मछलियों को लेकर भीगते हुए घर जा रहे हैं। बच्चों को मछलियों के प्रति मोह था। वे उसे मरने देना नहीं चाहते थे। मछलियाँ बड़ी थीं। झोले में एक-दूसरे से दबी हुई थीं। झोला में तो पानी नहीं था। कहीं पानी के अभाव में ये मछलियाँ मर न जाएँ इसी डर से उन्होंने झोले का मुँह खोलकर आकाश की ओर फैला दिए ताकि आकाश का पानी झोले में पड़े और मछलियाँ जिन्दा रह सकें। इस प्रकार मछलियों के लिए पानी एवं जान की रक्षा करने के लिए बच्चों ने ऐसा किया। वे मछलियों को कुएं में डालकर पोसना चाहते थे। उन्हें मछलियों के प्राण बचाने की चिंता थी।

(ख) अगर बाल्टी भरी होती तो मछली उछलकर नीचे आ जाती।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘मछली’ शीर्षक कहानी से ली गयी हैं। इस वाक्य का संदर्भ उस समय से है जब बच्चे मछली लेकर घर आते हैं। नहानघर में पानी से भरी बाल्टी से आधा पानी को गिराकर उसमें तीन मछलियों को उड़ेल देते हैं। लेखक को लगा कि अगर भरी बाल्टी में मछलियों को रखा जाता तो वे उछलकर बाल्टी से निकल जाती और फर्श पर आ जाती।

बच्चों का बालसुलभ मन मछलियों को खाना नहीं चाहता था। एक बार एक छोटी मछली उनके हाथ से छूटकर नहानघर की नाली में घुस गयी थी जिसे दोनों भाइयों ने काफी ढूँढा, लेकिन वह मछली नहीं मिली। दीदी ने कहा था कि घर की नाली शहर की नाली से तीन मील दूर मोहरा नदी में मिली है जिससे छोटी मछली नदी में बहकर चली गयी होगी। इसी आशंका से बच्चों ने आधी पानी भरी बाल्टी में मछलियों को रखा था ताकि वे मछलियों उछलकर बाहर आकर कहीं नाली-नाली होते हुए नदी में न चली जाएँ। मछली के खोने का भय आज भी बच्चों के दिमाग में बना हुआ है। अतः, आज वे सतर्क थे और तीनों मछलियों को बाल्टी में रखकर सुरक्षा कर रहे थे।

(ग) और पास से देख। परछाई दिखती है?
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘मछली’ कहानी से ली गयी हैं। इसका संदर्भ दीदी द्वारा कही गयी बातों से जुड़ा हुआ है। दीदी अपने भाइयों से कहती थी कि जो मछली मर जाती है उसकी आँखों में झाँकने से आदमी की परछाईं नहीं दिखती हैं।

लेखक ने जब बाल्टी से मछली को निकालकर फर्श पर रखा और पूंछ पकड़कर दो-तीन बार हिलाया तो मछली में थोड़ी-सी भी हरकत नहीं हुई। इस पर लेखक ने संतू से कहा कि तू इसकी आँख में झाँककर देख तेरी परछाई इसमें दिखती है कि नहीं। संतू थोड़ी दूरी पर बैठा था। बड़े भाई की बात सुनकर वह मछली के पास आया और उत्सुकतावश मछली को देखने लगा। इस पर लेखक ने संतू से कहा है कि-और पास से देखा परछाई दिखती है क्या ? लेखक ने समझाते हुए दीदी की बातों को संतू से दुहरा दिया। संतू दूर से ही सिर झुकाए मछली की आँखों में झाँकता हुआ चुपचाप था। वह कुछ बोलता ही नहीं था कि परछाई दिखती है कि नहीं।

इस प्रकार उपर्युक्त पंक्तियों का संदर्भ और व्याख्या संतू, मछली और लेखक के बीच का है। मछली के जिन्दा होने के लिए लेखक ने संतू से उपर्युक्त वाक्य को कहा था ताकि दीदी ने जो बातें मछली के बारे में बताया था, वह सच था कि नहीं। वह इसकी परीक्षा ले रहा था। संतू चुपचाप मछली की आँखों में अपनी परछाईं देखने का प्रयत्न कर रहा था और निरूत्तर था।

(घ) नहानघर की नाली क्षणभर के लिए पूरी भर गई, फिर बिल्कुल खाली हो गयी।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक की कहानी ‘मछली’ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का संदर्भ नहानघर से है जहाँ लेखक मछलियों को देखने के लिए गया है। नहानघर में पहुंचने पर लेखक ने महसूस किया कि पूरा नहानघर मछलियों की गंध से भरा हुआ है। वहाँ भग्गू द्वारा गोल-गोल काटी गयी मछलियों के टुकड़े पड़े हुए थे। उसे लेखक ने हाथों से बाल्टी में धोया और पानी भरी बाल्टी को उड़ेल दिया। इससे नहानघर की नाली क्षणभर में पूरी भर गयी और तुरंत पानी के बह जाने पर खाली भी हो गयी। पूरे घर में मछलियों की गंध आ रही थी। जिसे लेखक ने महसूस किया। नहानघर में ही भग्गू मछलियों को धोकर, काटकर साफ-सुथरा कर रहा था ताकि उसे पकाया जा सके।

इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक कहना चाहता है कि नहानघर ही नहीं पूरा घर मछली की गंध से पट गया था। कारण मछली के कारण पूरे घर में हंगामा हो गया था। दीदी से लेकर . पिताजी और संतू सभी मछली वाली घटना में शरीक थे।

प्रश्न 13.
संतू के विरोध का क्या अभिप्राय है?
उत्तर-
संतू मानवीय गुणों को उजागर करता है। मानव में सेवा, परमार्थ, ममता जैसे गुण विद्यमान होते हैं। परन्तु आज मानव अपने आदर्श को भूलकर, इन गुणों को त्यागकर, स्वार्थ में अंधा होकर विवश और लाचार की मदद में नहीं बल्कि शोषण में लिप्त है। मूक मछलियों को निर्ममतापूर्वक काटते देख संतू उसकी रक्षा को आतुर हो उठता है और उसे बचाने हेतु झपट कर भग्गू के सामने से मछली को लेकर भाग जाता है। इस विरोध का मतलब है कि आज निःस्वार्थ भाव से बेबस, लाचार, शोषित, पीड़ित जनों की रक्षा, उत्थान एवं कल्याण के लिए अग्रसर होना परमावश्यक है। ममत्व में धैर्य टूट जाता है। सभी प्राणी में अपनी परछाईं देखनी चाहिए।

प्रश्न 14.
दीदी का चरित्र चित्रण करें।
उत्तर-
प्रस्तुत कहानी में मध्यम वर्गीय परिवार की यथार्थ झलक है। दीदी घर, के चहारदीवारी के बीच कठपुतली बनकर रहने वाली एक बाला है। लिंग-भेद परिवार में निहित है। पिता की ओर से स्वतंत्रता नहीं है जिसके चलते घर में ही रहकर समय व्यतीत करती है। वह ममता की मूर्ति है। अपने भाइयों के प्रति अटूट श्रद्धा रखती है। उन्हें प्रत्येक जीवों में अपनी परछाईं देखने की शिक्षा देती है। मछली को विवश होकर कट-जाना उसके लिए पीड़ादायक है। वह समाज की रूढ़िवादिता के बीच मूक रहकर लाचार, बेबस एवं निर्ममतापूर्वक प्रहार को सहन करने वाले की आत्मा की पुकार को अनुभव करके सिसकियाँ एवं आह भर कर रह जाने वाली कन्या है।

प्रश्न 15.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
उत्तर-
‘मछली’ शीर्षक कहानी में एक किशोर की स्मृतियाँ, दृष्टिकोण और समस्याएँ हैं। मछलियों के माध्यम से, मूक रहकर प्राणांत को स्वीकार लेना ही लाचार, शोषित, पीड़ित जनों की नियति है, बताया गया है। जीवन क्षणभंगुर है। कल्पनाएँ क्षणिक हैं एवं स्वप्न कभी भी बिखर सकते हैं। बाल सुलभ मनोभाव मछलियों के इर्द-गिर्द घूमते हैं। पूरी कहानी मछली पर ही आधारित है। मछली की दशा का जीवन्त चित्रण है। अंतत: दीदी की तुलना भी बालक मछली से करता है। इस कहानी का ‘मछली’ शीर्षक पूर्णरूपेण सार्थक कहा जा सकता है।

प्रश्न 16.
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर-
उत्तर के लिए सारांश देखें।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नांकित विशेष्य पदों में उपयुक्त विशेषण या क्रियाविशेषण लगाएँ
उत्तर-
गली – पतली गली
मछली – तीन मछलियाँ, कोई मछली।
उछली – जोर से उछली।
कमीज – गीली कमीज।
मूंछे – छल्लेदार मूंछे।
परछाई – अपनी परछाईं।
नहानघर – मछलियाँ नहानघर।
खंगाला – गोल-गोल खंगाला।

प्रश्न 2.
पाठ में प्रयुक्त विभिन्न क्रियारूपों को एकत्र कीजिए।
उत्तर-
घुस गए, पड़ता था, घूटते-घूटते बचा। उछलकर, आदि।

प्रश्न 3.
निम्नांकित वाक्यों के पद-विग्रह करें
(क) मुर्दा सी मछली के पूरे शरीर में अच्छी तरह राख मली।
उत्तर-
मुर्दा – गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन
मछली – जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्त्ताकारक।
अच्छी – गुणवाचक विशेषण स्त्रीलिंग, एकवचन।
मली – सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, एकवचन, भूतकाल।

(ख) पाटे के समय मछलियों के गोल-गोल चमकीले पंख पड़े थे।
उत्तर-
मछलियों – जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, बहुवचन संबंध कारक।
चमकीले – गुणवाचक विशेषण, बहुवचन, पुल्लिंग।

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दौड़ते हुए हम लोग एक पतली गली में घुस गए। इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी। बाजार का दिन था। लेकिन बूंदें पड़ने से भीड़ के बिखराव में तेजी आ गई थी। दौड़ इसलिए रहे थे कि डर लगता था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में तीन मछलियाँ थीं। एक तो उसी वक्त मर गई थी जब पिताजी खरीद रहे थे। दो जिन्दा थीं। झोले में उनकी तड़प के झटके मैं जब तब महसूस करता था। मन ही मन सोच रहा था कि एक मछली पिताजी से जरूर माँग लगेंगे। फिर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करेंगे। जब मन होगा बाल्टी से निकालकर खेलेंगे। बाद में फिर कुएँ में डाल देंगे।

प्रश्न
(क) प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है? और इसके लेखक कौन हैं ?
(ख) बच्चों ने गली का रास्ता क्यों पकड़ लिया?
(ग) बच्चों की कौन-सी उत्कंठा थी?
(घ) झोले में कितनी मछलियाँ थीं?
उत्तर-
(क) प्रस्तुत गद्यांश मछली शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक विनोद कुमार शुक्ल हैं।
(ख) बाजार का दिन होने और हल्की वर्षा होने के कारण दूसरे रास्तों में काफी भीड़ थी। गली से घर नजदीक पड़ता था। घर जल्दी पहुंचने के उद्देश्य से बच्चों ने गली का रास्ता पकड़ लिया।
(ग) बाजार से तीन मछलियाँ खरीदी गई थीं। एक मछली को वे पिताजी से मांग कर कुआँ – में डालना चाहते थे। कुआँ में डालकर वे मछली के साथ खेलना चाहते थे।
(घ) झोले में तीन मछलियाँ थीं।

2. नहानघर का दरवाजा अंदर से हम लोगों ने बंद कर लिया था। भरी हुई बाल्टी थी, उसे आधी खाली कर मैंने झोले की तीनों मछलियाँ उड़ेल दीं। अगर बाल्टी भरी होती तो मछली नाली में घुस गई थी। हाथों से मैंने और सन्तू ने टटोल-टटोलकर ढूँढा था। जब दिखी नहीं तो हम घर के पीछे जाकर खड़े हो गए थे जहाँ घर की नाली एक बड़ी नाली से मिलती थी। गंदे पानी में मछली दिखी नहीं। दीदी ने बताया था कि वह मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी फिर शहर से तीन मील दूर मोहरा नदी में चली जाएगी।

प्रश्न
(क) बच्चों ने मछलियों का क्या किया?
(ख) नहानघर की नाली में गिरी हुई मछली के बारे में दीदी ने क्या बताया था ?
(ग) मछली नाली में कैसे चली गई थी?
(घ) मोहरा नदी शहर से कितनी दूर पर बहती है ?
उत्तर-
(क)बच्चों ने मछलियों को आधे जल से भरी हुई बाल्टी में डाल दिया।
(ख) दीदी ने बताया था कि वह मछली इस नाली से शहर की सबसे बड़ी नाली में जाएगी और शहर से तीन मील दूर मोहरा नदी में चली जाएगी।
(ग) लेखक के हाथ से छूटकर मछली नाली में चली गई थी।
(घ) मोहरा नदी शहर से तीन मील की दूरी पर बहती है।

3. गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से जानें क्यों अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाएँ। मैं घर के धोए कपड़े पहन रहा था तो दीदी ने कहा कि धोबी के धुले कपड़े पहन लें। फिर दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल – दिए। संतू के बड़े-बड़े बाल थे इसलिए अभी तक गीले थे। दीदी ने संतू के बालों को टॉवेल से पोंछकर उसके बाल संवार दिए।

प्रश्न
(क) दीदी क्यों नाराज हुयी?
(ख) दीदी ने क्या किया ?.
(ग) उल्लिखित गद्यांश के आधार पर तर्क सहित बताएं कि दीदी का स्वभाव कैसा था?
उत्तर-
(क) भाइयों को गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।
(ख)अपनी नाराजगी जाहिर करने के बाद दीदी ने भाइयों को प्यार से समझाया। संतू को खुद अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए। फिर टॉवेल से उसके बाल सुखाकर उसके बाल झाड़े। नरेन को धोबी के साफ किए कपड़े पहनने को कहा।
(ग) दीदी ममतामयी थी। भाइयों से बहुत स्नेह करती थी यही कारण है कि गोले कपड़ों में भाइयों पर नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू के कपड़े बदलवाए उसके बाल सँवारे और नरेन को धोबी के धुले कपड़े पहनने के लिए निकाल कर दिए। .

4. तीनों मछलियों के कई टुकड़े हो गए थे। पाटे के पास मछलियों के गोल-गोल चमकीले पंख पड़े थें। दीदी जहाँ लेटी थी, उस समय कमरे का दरवाजा खुला था। शायद माँ अन्दर थीं। पिताजी दरवाजे के पास गुस्से से टहल रहे थे। दीदी की सिसकियाँ बढ़ गई थी। मुझे लगा कि पिताजी ने दीदी को मारा है।

प्रश्न
(क) मछलियों के टुकड़े होने का निहितार्थ क्या है ?
(ख) दीदी की सिसकियाँ क्यों बढ़ गई थीं?
(ग) पिताजी का दीदी को मारना क्या प्रदर्शित करता है ?
उत्तर-
(क) मछलियों के टुकड़े होने का निहितार्थ है कोमल भावनाओं का नष्ट होना।
(ख) दीदी को पिताजी ने मारा था, इसलिए उनकी सिसकियाँ बढ़ गई थीं।
(ग) पिताजी द्वारा दीदी. को मारना दोहरी मानसिकता का प्रतीक है जिसमें बेटा-बेटी में फर्क और निर्भर परनिर्भर में भेद स्पष्ट होता है।

5. घर में मछली काटने के लिए एक अलग से पाटा था। उस पाटे के ऊपर ही मछली रखकर काटी जाती थी। पाटे में चक्कू के आड़े-तिरछे निशान बन गए थे। यह पाटा परछी में ड्रम के पीछे रखा रहता था। जिस रोज मछली बनती थी उसी रोज यह पाटा निकाला जाता था। घर का नौकर मछली काटा करता था। पानी का गिरना बिल्कुल बंद हो गया था। आँगन में आकर मैंने देखा जिस जगह मछली काटी जाती थी वहाँ वही पाटा धुला हुआ रखा था। पास में थोड़ी चूल्हे की राख थी। मैंने सोचा भग्गू कुआँ के पास चक्कू में धार कर रहा होगा। नहानघर का दरवाजा पूरा खुला था। मुझे बाल्टी दिख रही थी जिसमें मछलियाँ थीं। माँ वहाँ नहीं थी। शायद ऊपर होगी। माँ को घर में मछली, गोश्त बनना अच्छा नहीं लगता था। पिताजी ने कई बार चाहा किं हम लोग भी मछली, गोश्त खाया करें, लेकिन माँ ने सख्ती से मना कर दिया था। और, किसी को अच्छा भी नहीं लगता था, केवल पिताजी खाते थे।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) घर में मछली काटने का साधन क्या था?
(ग) घर में मछली कौन काटता था?
(घ) माँ को क्या अच्छा नहीं लगता था?
(ङ) घर में मछली कौन खाते थे?
उत्तर-
(क) पाठ का सारांश-मछली।
लेखक का नाम-विनोद कुमार शुक्ला
(ख) घर में मछली काटने के लिए एक अलग से पाटा था।
(ग) घर का नौकर मछली काटता था।
(घ) मछली, गोश्त बनाना माँ को अच्छा नहीं लगता था।
(ङ) घर में केवल पिताजी मछली खाते थे।

6. भग्गू को जैसे मालूम था कि मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया। कुएँ में मछली पालने का उत्साह.बुझ-सा गया था। पिताजी शायद अभी तक आए नहीं थे। कमरे में जाकर देखा तो सच में दीदी करवट लिए लेटी थी। संतू को मैंने इशारे से बुलाया कि वह भी गीले कपड़े बदल ले। शायद कुछ आहट हुई होगी। दीदी ने पलटकर हमें देखा। गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से न जाने क्यों बहुत अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए। मैं घर के धोए कपड़े पहन रहा था तो दीदी ने कहा कि धोबी के धुले कपड़े पहन लूँ। फिर दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल दिए। संतू के बड़े-बड़े बाल थे, इसलिए अभी तक गीले थे। दीदी ने संतू के बातों को टॉवेल से पोंछकर, उनमें तेल लगाया। बाएँ हाथ से संतू की ठुड्डी पकड़कर दीदी ने उसके बाल सँवार दिए। जब दीदी संतू के बाल संवार रही थी तो संतू अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से दीदी को टकटकी बाँधे देख रहा था। सभी कहते थे कि दीदी बहुत सुन्दर है।

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखें।
(ख) भग्ग को क्या मालूम था और उसने आते ही क्या किया?
(ग) कमरे में कौन थी?
(घ) दीदी क्यों नाराज हुई?
(ङ) दीदी ने संतू के लिए क्या किया?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम मछली
लेखक का नाम-विनोद कुमार शुक्ला
(ख) भग्गू को जैसे मालूम था कि मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया।
(ग) कमरे में दीदी करवट लिए लेटी थी।
(घ) बच्चों को गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।
(ङ) दीदी ने संतू को अपने हाथों से अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए एवं उसके बाल संवारे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्व

सही विकल्प चुनें-

प्रश्न 1.
‘मछली’ किस कहानीकार की रचना है ?
(क) नलिन विलोचन शर्मा
(ख) प्रेमचंद
(ग) अज्ञेय
(घ) विनोद कुमार शुक्ल
उत्तर-
(घ) विनोद कुमार शुक्ल

प्रश्न 2.
‘मछली’ किस प्रकार की कहानी है ?
(क) सामाजिक
(ख) मनोवैज्ञानिक
(ग) ऐतिहासिक
(घ) वैज्ञानिक
उत्तर-
(क) सामाजिक

प्रश्न 3.
‘महाविद्यालय’ पुस्तक से कौन-सी रचना संकलित है ?
(क) विष के दाँत
(ख) मछली
(ग) नौबतखाने में इबादत
(घ) शिक्षा और संस्कृति
उत्तर-
(ख) मछली

प्रश्न 4.
‘मछली’ कहानी में किस वर्ग का जीवन वर्णित है ?
(क) उच्च वर्ग
(ख) मध्यम वर्ग
(ग) निम्न वर्ग
(घ) मजदूर वर्ग
उत्तर-
(ख) मध्यम वर्ग

प्रश्न 5.
संत-नरेन आपस में कौन हैं ?
(क) भाई-भाई
(ख) चाचा-भतीजा
(ग) भाई-बहन
(घ) जीजा-साला
उत्तर-
(क) भाई-भाई

प्रश्न 6.
विनोद कुमार शुक्ल कहानीकार उपन्यासकार के अलावा और क्या है ?
(क) कवि
(ख) नाटककार
(ग) आलोचक
(घ) राजनेता
उत्तर-
(घ) राजनेता

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
अब जोर से ……….. गिरने लगा था।
उत्तर-
पानी

प्रश्न 2.
संतू ……….. से काँप रहा था।
उत्तर-
ठंड

प्रश्न 3.
घर का नौकर ……… काटा करता था।
उत्तर-
मछली

प्रश्न 4.
हिचकी लेते ही दीदी का पूरा शरीर ……… उठता था।
उत्तर-
सिहर

प्रश्न 5.
नहानघर में जाकर उसे लगा कि ……….. गंध आ रही है।
उत्तर-
मछलियों की

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
झोले में मछली लेकर दौड़ते हुए लड़कों ने झोले का मुँह क्यों खोल दिया? ..
उत्तर-
लड़कों ने झोले का मुँह इसलिए खोल दिया ताकि वर्षा का जल मछलियों को जीवित रखने में झोले के अन्दर आ सके।

प्रश्न 2.
संतु मछली को क्यों नहीं छूना चाहता था?
उत्तर-
संतू मछली को इसलिए नहीं छूना चाहता था क्योंकि वह छूने से डरता था।

प्रश्न 3.
नरेन ने बाल्टी में क्यों हाथ डाला?
उत्तर-
नरेन ने बाल्टी में हाथ डालकर मुर्दा सी पड़ी मछली को बाहर निकालकर फर्श पर डाल दिया।

प्रश्न 4.
कमरे से दीदी की हल्की सिसकियों की आवाज क्यों आ रही थी?
उत्तर-
दीदी की सिसकियों की आवाज कमरे से इसलिए आ रही थी क्योंकि उसके पिताजी ने उसको पीटा था।

प्रश्न 5.
पिता जी ने दहाड़ क्यों मारा और क्या कहा?
उत्तर-
पिताजी ने सन्तू पर क्रोधित होकर दहाड़ मारा तथा भग्गू से उसके हाथ-पैर तोड़ देने के लिए कहा।

प्रश्न 6.
बच्चों ने मछलियों का क्या किया?
उत्तर-
बच्चों ने मछलियों को आधे जल से भरी हुई बाल्टी में डाल दिया।

प्रश्न 7.
मछली नाली में कैसे चली गई ?
उत्तर-
नरेन (लेखक) के हाथ से छूटकर मछली नाली में चली गई।

प्रश्न 8.
दीदी क्यों नाराज हुई?
उत्तर-
भाइयों को गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई।

प्रश्न 9.
मछलियों के टुकड़े होने का निहितार्थ क्या है ?
उत्तर-
मछलियों के टुकड़े होने का निहितार्थ है कोमल भावना का विनष्ट होना।

प्रश्न 10.
झोले में मछलियां लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
उत्तर-
झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में घुस गए, क्योंकि इस गली में घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुन भीड़ थी।

प्रश्न 11.
मछलियों को लेकर बच्चों की अभिलाषा क्या थी?
उत्तर-
मछलियों को लेकर बच्चों के मन में अभिलाषा थी कि एक मछली पिताजी से माँगकर उसे कुएँ में डालकर बहुत बड़ी करेंगे।

प्रश्न 12.
मछलियाँ लिए घर आने के बाद बच्चों ने क्या किया ?
उत्तर-
मछलियाँ घर लाने के बाद बच्चों ने नहानघर में भरी हुई बाल्टी को आधी करके उसमें . मछलियों को रख दिया।

प्रश्न 13.
मछली को छूते हुए संतु क्यों हिचक रहा था ?
उत्तर-
संतू मछलियों को छूते हुए हिचक रहा था, क्योंकि उसे डर था कि मछली काट लेगी।

प्रश्न 14.
दीदी कहाँ थी और क्या कर रही थी?
उत्तर-
दीदी घर के एक कमरे में थी। वह लेटी हुई थी और सिसक-सिसककर रो रही थी। . वह बार-बार हिचकी ले रही थी जिससे उसका शरीर सिहर उठता था।

मछली लेखक परिचय

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 ई० में राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ । । उन्होंने वृत्ति के रूप में प्राध्यापन को अपनाया । वे इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में एसोसिएट . प्रोफेसर थे । वे दो वर्षों (1994-1996 ई०) तक निराला सृजनपीठ में अतिथि साहित्यकार भी रहे । उनका पहला कविता संग्रह ‘लगभग जयहिंद’ पहचान सीरीज के अंतर्गत 1971 में प्रकाशित हुआ। उनके अन्य कविता संग्रह हैं – ‘वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर चला गया विचार की तरह’, ‘सबकुछ होना बचा रहेगा’ और ‘अतिरिक्त नहीं । उनके तीन उपन्यास – ‘नौकर की कमीज’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’ और ‘दीवार में एक खिडकी रहती थी’ तथा दो कहानी संग्रह – ‘पेड़ पर कमरा’ और ‘महाविद्यालय’ भी प्रकाशित हो चुके हैं। उनके उपन्यासों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इतालवी भाषा में उनकी कविताओं एवं एक कहानी संग्रह ‘पेड़ पर कमरा’ का अनुवाद हुआ है । ‘नौकर की कमीज’ उपन्यास पर मणि कौल द्वारा फिल्म का भी निर्माण हुआ है । विनोद कुमार शुक्ल को 1992 ई० में रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, 1997 ई० में दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान और 1990 ई० में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

बीसवीं शती के सातवें-आठवें दशक में विनोद कुमार शुक्ल एक कवि के रूप में सामने आए थे। कुछ ही समय बाद उसी दौर में उनकी दो-एक कहानियाँ भी सामने आई थीं । धारा और प्रवाह से बिल्कुल अलग, देखने में सरल किंतु बनावट में जटिल अपने न्यारेपन के कारण . उन्होंने सुधीजन का ध्यान आकृष्ट किया था । यह खूबी भाषा या तकनीक पर निर्भर नहीं थी। इसकी जड़ें संवेदना और अनुभूति में थीं और यह भीतर से पैदा हुई खासियत थी । तब से लेकर आज तक वह अद्वितीय मौलिकता अधिक स्फुट, विपुल और बहुमुखी होकर उनकी कविता, उपन्यास और कहानियों में उजागर होती आयी है।।

प्रस्तुत कहानी कहानियों के उनके संकलन ‘महाविद्यालय’ से ली गयी है । कहानी बचपन की स्मृति के भाषा-शिल्प में रची गयी है और इसमें एक किशोर की वयःसंधिकालीन स्मृतियाँ, दृष्टिकोण और समस्याएँ हैं । कहानी एक छोटे शहर के निम्न मध्यवर्गीय परिवार के भीतर के वातावरण, जीवन यथार्थ और संबंधों को आलोकित करती हुई लिंग-भेद की समस्या को भी स्पर्श करती है। घटनाएँ, जीवन प्रसंग आदि के विवरण एक बच्चे की आँखों देखे हुए और उसी के मितकथन से उपजी सादी भाषा में हैं । कहानी का समन्वित प्रभाव गहरा और संवेदनात्मक है। कहानी अपनी प्रतीकात्मकता के कारण मन पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ती है।

मछली Summary in Hindi

पाठ का सारांश

दौड़ते हुए हम लोग एक पतली गली में घुस गए। इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में बहुत भीड़ थी। बाजार का दिन था। लेकिन बूंदें पड़ने से भीड़ के बिखराव में तेजी आ . गई थी। दौड़ इसलिए रहे थे कि डर लगता था कि मछलियाँ बिना पानी के झोले में ही न मर जाएँ। झोले में तीन मछलियाँ थीं। एक तो उसी वक्त मर गई थी जब पिताजी खरीद रहे थे। वो जिन्दा थीं। झोले में उनकी तड़प के झटके मैं जब तब महसूस करता था। मन ही मन सोच रहा था कि एक मछली पिताजी से जरूर माँग लेंगे। फिर उसे कुँए में डालकर बहुत बड़ी करेंगे। जब मन होगा बाल्टी में निकालकर खेलेंगे। बाद में फिर कुँए में डाल देंगे।

अब जोर से पानी गिरने लगा था। बरसते पानी में खड़े होकर झोले का मुँह आकाश की तरफ फैलोकर मैंने खोल दिया ताकि आकाश का पानी झोले के अन्दर पड़ी मछलियों पर पड़े। पानी के छींटे पाकर, कहीं आसपास किसी तालाब या नदी का अंदाजकर जोर से मछली उछली। झोला मेरे हाथ से छूटते-छूटते बचा।

नहानघर के बाल्टी में मैंने झोले की तीनों मछलियाँ उड़ेल दीं। अगर बाल्टी भरी होती तो मछली उछलकर नीचे आ जाती। एक बार एक छोटी सी मछली मेरे हाथ से फिसलकर नहानघर की नाली में घुस गई थी। हाथों से मैंने और सन्तू ने हटोल टंटोलकर ढूँढा था। जब दिखी नहीं तो हम घर के पीछे जाकर खड़े हो गए थे जहाँ घर की नाली एक बड़ी नाली से मिलती थी। गंदे पानी में मछली दिखी नहीं।

संतू मछलियों की तरफ प्यार से देखता था। वह मछलियों को छूकर देखना चाहता था। लेकिन डरता भी था। बाल्टी के थोड़ा और पास खिसककर एक मछली को पकड़ते हुए मैंने कहा, “संतू! तू भी छूकर देख ना””नहीं, काटेगी” संतू ने इनकार करते हुए कहा। नीचे दबी हुई मछली
को आँखों में मैं अपनी छाया देखना चाहता था। दीदी कहती थी जो मछली मर जाती है उसकी आँखों में झाँकने से अपनी परछाईं नहीं दिखती।
“माँ कहाँ है ? उस तरफ मसाला पीस रही है।” मेरा दिल बैठ गया। “च: चः मछली के मसाला होगा” “आज ही बनेगी” दुःख से मैंने कहा।

“भइया! मछली अभी कट जायेगी।” भोलेपन से संतू ने पूछा। “हाँ” फिर संतू भी उदास हो गया। माँ को घर में मछली, गोश्त खाया करें लेकिन माँ ने सख्ती से मना कर दिया था। और किसी को अच्छा भी नहीं लगता था केवल पिताजी खाते थे।

भग्गू को जैसे मालूम था कि मछलियाँ नहानघर में हैं। आते ही वह अंगोछे में तीनों मछलियाँ निकाल लाया। कुँए में मछली पालने का उत्साह बुझ-सा गया था। कमरे में जाकर देखा तो सच में दीदी करवट लिए लेटी थी। संतू को मैंने इशारे से बुलाया कि वह भी गीले कपड़े बदल ले। शायद कुछ आहट हुई होगी। दीदी ने पलटकर हमें देखा। गीले कपड़ों में देखकर दीदी बहुत नाराज हुई। फिर प्यार से समझाया। संतू को दीदी ने खुद अपने हाथों से जाने क्यों बहुत अच्छे-अच्छे कपड़े पहनाए। मैं घर के धोए कपड़े पहिन रहा था तो दीदी ने कहा कि धोबी के धुले कपड़े पहिन लूँ। फिर दीदी ने पेटी से मेरे लिए कपड़े निकाल दिए। संतू के बड़े-बड़े बाल थे इसलिए अभी तक गीले थे। दीदी ने संतू के बालों को टावेल से पोंछकर, उनमें तेल लगाया। वायें हाथ से संतू की ठुड्डी पकड़कर दीदी ने उसके बाल सँवार दिए। जब दीदी संतू के बाल सँवार रही थी तो संतू अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से दीदी को टकटकी बाँधे देख रहा था। सभी कहते थे कि दीदी बहुत सुन्दर है।

भग्गू मछली काट रहा था संतू एक मछली अंगोछे से उठाकर बाहर की तरफ सरपट भागा। भग्गू भी मछली काटना छोड़कर “अरे! अरे! अरे!” कहता हुआ उसके पीछे-पीछे भागा। मैं वहीं खड़ा रहा, पाटे में राख से पिटी हुई सिर कटी हुई मछली पड़ी थी। बाड़े की तरफ आकर मैंने देखा कि कुंए के पास जमीन पर संतू जानबूझकर पट पड़ा था। दोनों हाथों से मछली को अपने पेट के पास छुपाए हुए था। भग्गू मछली छीनने की कोशिश कर रहा था। शायद उसे डर था कि संतू मछली कुँए में डाल देगा तो पिताजी से उसे डाँट पड़ेगी। मैंने सुना कि अंदर की तरफ पिताजी के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आ रही थी। संतू सहमा-सहमा चुपचाप खड़ा था। कीचड़ से उसके साफ अच्छे कपड़े बिल्कुल खराब हो गए थे। बाल जिसे दीदी ने प्यार से सँवारा था उसमें भी मिट्टी लगी थी।

शब्दार्थ

टटोला : अनुमान किया, थाह लिया
फर्श : पक्की जमीन
उत्सुकता : कुतूहल, जानने की इच्छा
छोर : किनारा
पाटा : फाँसुल, हँसुआ
आहट : ध्वनि, आवाज, संकेत
पेटी : बक्सा
टावेल : तौलिया
टकटकी : अपलक देखना
अंगोछा : गमछा
सरपट : तेजी
लहरना : तड़पना
सिसकियों : रुदन की अस्पष्ट ध्वनि, धीमे-धीमे रोना
बाड़ा : अहाता
निचोड़ना : निथारना, गारना

Bihar Board Class 8 Social Science Geography Solutions Chapter 1 संसाधन

Bihar Board Class 8 Social Science Solutions Geography Hamari Duniya Bhag 3 Chapter 1 संसाधन Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 8 Social Science Geography Solutions Chapter 1 संसाधन

Bihar Board Class 8 Social Science संसाधन Text Book Questions and Answers

अभ्यास-प्रश्न

I. बहुवैकल्पिक प्रश्न-

Bihar Board Class 8 Geography Solution प्रश्न 1.
इनमें से कौन एक प्राकृतिक संसाधन है ?
(क) पंचायत भवन
(ख) विद्यालय
(ग) भूमि
(घ) हवाई अड्डा
उत्तर-
(ग) भूमि

Bihar Board Class 8 Social Science Solution प्रश्न 2.
इनमें कौन प्राकृतिक संसाधन नहीं है ?
(क) सूर्य
(ख) मिट्टी
(ग) जल
(घ) हवाई जहाज़
उत्तर-
(घ) हवाई जहाज़

Bihar Board Class 8 Hamari Duniya प्रश्न 3.
केरल में पाया जाने वाला थोरियम किस प्रकार के संसाधन का उदाहरण है ?
(क) निजी
(ख) नवीकरणीय
(ग) संभाव्य
(घ) अनवीकरणीय
उत्तर-
(ग) संभाव्य

Bihar Board Class 8 Hamari Duniya Solution प्रश्न 4.
संसाधन निर्माण के लिए क्या आवश्यक है ?
(क) तकनीक
(ख) आवश्यकता
(ग) ज्ञान
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर-
(ग) ज्ञान

II. खाली स्थान को उपयुक्त शब्दों से पूरा करें।

  1. संसाधन के लिए मूल्य की अभिव्यक्ति ………… प्रकार से की जाती हैं।
  2. ………….. संसाधन क्षेत्र के विकास के लिए आधार का काम करते हैं।
  3. राजस्थान में पाया जाने वाला ताँबा ………….. संसाधन का उदाहरण है।
  4. …………… एवं शारीरिक क्षमता मानव को संसाधन बनाने के लिए आवश्यक है।

उत्तर-

  1. विविध
  2. मानव
  3. वास्तविक
  4. दिमागी।

III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें (अधिकतम 50 शब्दों में)

Bihar Board Class 8 History Solution प्रश्न 1.
संसाधन की परिभाषा दें।
उत्तर-
मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले सभी जीव-जंतु, वस्तुएँ एवं पदार्थ संसाधन कहलाते हैं।

Bihar Board Solution Class 8 Geography प्रश्न 2.
संसाधन का वर्गीकरण करें।
उत्तर
Bihar Board Class 8 History Book Solution
Class 8 Social Science Bihar Board प्रश्न 3.
प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण क्यों ज़रूरी है ?
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण जरूरी है। क्योंकि आवश्यकता एवं माँग के अनुसार इन संसाधनों को मानव अपने तकनीक एवं कौशल से उपयोग में लाता है।

Bihar Board Solution Class 8 Social Science प्रश्न 4.
नवीकरणीय संसाधन किसे कहा जाता है ? उदाहरण के साथ लिखें।
उत्तर-
नवीकरणीय संसाधन वैसे प्राकृतिक संसाधनों को कहा जाता है जिनकी पुनः पूर्ति प्राकृतिक रूप से होती रहती है । जैसे—सूर्य की किरणें एवं पवन ।

Bihar Board Class 8 Sst Solution प्रश्न 5.
प्राकृतिक संसाधनों के वितरण में असमानता के कारणों को लिखें।
उत्तर-
जल एवं वन जैसे संसाधन जिनके भंडार या पुनः पूर्ति में मानवीय हस्तक्षेप के कारण रूकावटें आती हैं। यदि इन संसाधनों के प्रति मानव का हस्तक्षेप कम हो जाए तो वे स्वयं ही पुनः पूर्ति में लग जाएँगे।

IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)

Class 8 Hamari Duniya Bihar Board प्रश्न 1.
संसाधन को परिभाषित कर उनका वर्गीकरण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले सभी जीव-जंत. वस्तुएँ एवं पदार्थ संसाधन कहलाते हैं।

Bihar Board 8th Class Social Science
प्रश्न 2.
प्राकृतिक संसाधन का वर्गीकरण उपयुक्त उदाहरण के साथ प्रस्तुत करें।
उत्तर-
विकास एवं उपयोग की दृष्टि से प्राकृतिक संसाधन को दो भागों में बाँटा गया है।

  1. वास्तविक संसाधन-पश्चिम एशिया का पेट्रोलियम, आस्ट्रेलिया का सोना, झारखंड का अभ्रक, मध्य प्रदेश का मैंगनीज एवं राजस्थान का ताँबा
  2. संभाव्य संसाधन केरल में मिलने वाला थोरियम, लद्दाख में पाया जाने वाला यूरेनियम ।

उत्पत्ति के आधार पर प्राकृतिक संसाधन को दो भागों में बाँटा गया

  1. जैव संसाधन-पेड़-पौधे, वन, जीव-जंतु ।
  2. अजैव संसाधन खनिज, चट्टान, मिट्टी, भूमि, खेत, तालाब, नदी, झील।

उपलब्धता के आधार पर प्राकृतिक संसाधन को दो भागों में बाँटा गया है

  1. नवीकरणीय संसाधन – सूर्य की किरणे एवं पवन ।
  2. अनवीकरणीय संसाधन – लोहा, कोयला, पेट्रोलियम, अभ्रक ।

वितरण के आधार पर प्राकृतिक संसाधन को चार भागों में बाँटा गया

  1. सर्वत्र उपलब्ध संसाधन मिट्टी, पवन।
  2.  स्थानिक संसाधन कोडरमा में पाया जाने वाला अभ्रक, जादूगोड़ा में मिलने वाला यूरेनियम, छोटानागपुर क्षेत्र में पाया जाने वाला कोयला ।

स्वामित्व के आधार पर प्राकृतिक संसाधन को तीन भागों में बाँटा – गया है

  1. निजी संसाधन-भूमि, तालाब ।
  2. राष्ट्रीय संसाधन-समुद्र तट से दूर 19.2 किलोमीटर क्षेत्र के अन्दर पाये जाने वाले संसाधन।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन खुला महासागर का क्षेत्र ।

प्रश्न 3.
“संसाधन बनाये जाते हैं।” उपर्युक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।
उत्तर-
“संसाधन बनाये जाते हैं।” जैसे
नदी या मरुस्थल में पड़े बालू का वहाँ कोई उपयोग नहीं होता । परन्तु जब वहाँ से उठाकर बालू को निर्माण कार्य हेतु गाँव या शहर में लाया जाता है तब इसका उपयोग और मूल्य दोनों बदल जाते हैं। अत: यह कह सकते हैं कि संसाधन होते नहीं, बनाये जाते हैं।

प्रश्न 4.
संसाधन संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधनों के बिना मानव जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। परन्तु इन संसाधनों के उपयोग की तकनीक एवं ठन संसाधनों की आवश्यकता का होना आवश्यक है। मनुष्य ने अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है। हमने इसका इस्तेमाल तो किया ही है इसे इस प्रकार प्रदूषित भी कर दिया है कि वे आज सीधे उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं।

यही नहीं, हमने कई प्राकृतिक संसाधनों का इतना अधिक खनन एवं उपयोग किया है कि इनके भंडार धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है। भविष्य में इनके भंडार खत्म होने की पूरी आशंका है। मानव के लिए इनका होना भविष्य में भी उतना ही जरूरी है जितना आज । मानव जीवन सतत् चलता रहे, इसके लिए यह जरूरी है कि हम इन अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित कर इसे भविष्य के लिए संरक्षित करें।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 2 विष के दाँत

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 2 विष के दाँत Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 2 विष के दाँत

Bihar Board Class 10 Hindi विष के दाँत Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

विष के दांत का प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 1.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कहानी में कहानीकार ने अमीरों की तथाकथित मर्यादा पर व्यंग्य किया है। इसमें गरीबों पर अमीरों के शोषण एवं अत्याचार पर प्रकाश डाला गया है। ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी महल और झोपड़ी की लड़ाई की कहानी है। इस लड़ाई में महल की जीत में भी हार दिखाई गई है। मदन द्वारा पिटे जाने पर खोखा के जो दो दाँत टूट जाते हैं वह अमीरों की प्रदर्शन-प्रियता और गरीबों पर उनके अत्याचार का प्रतीक है। मदन अमीरों की प्रदर्शन-प्रियता और गरीबों पर उनके अत्याचार के विरुद्ध एक चेतावनी है, सशक्त विद्रोह है। यही इस कहानी का लक्ष्य है। अतः निसंदेह कहा जा सकता है कि ‘विष के दाँत’ इस दृष्टि से बड़ा ही सार्थक शीर्षक है। अमीरों के विष के दाँत तोड़कर मदन ने जिस उत्साह, ओज और आग का परिचय दिया है वह समाज के जाने कितने गिरधर लालों के लिए गर्वोल्लास की बात है। इसमें लेखक द्वारा दिया गया संदेश मार्मिक बन पड़ा है।

विष के दांत कहानी का प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 2.
सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर-
सेन साहब के परिवार में उनकी पाँच लड़की थी। सीमा, रजनी, आलो, शेफाली, आरती सबसे छोटा लड़का था काशू बाबू, प्यार से खोखा कहते थे। ।
सेन साहब के परिवार में पाँचों लड़कियों के ऊपर काफी अनुशासन था। लड़का सबसे छोटा था और उसका बहुत बाद में था। इसी कारण से लड़के प्रति मोह होना स्वभाविक था। लड़का के ऊपर अनुशासन का बंधन बहुत ढीला था।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 3.
खोखा किन मामलों में अपवाद था ?
उत्तर-
सेन साहब एक अमीर आदमी थे। अभी हाल में उन्होंने एक नयी कार खरीदी थी। वे किसी को गाड़ी के पास फटकने नहीं देते थे। कहीं पर एक धब्बा दिख जाए तो क्लीनर और शोफर पर शामत आ जाती थी। उनके लड़कियों से मोटर की चमक-दमक का कोई खास खतरा नहीं था। लेकिन खोखा सबसे छोटा लड़का था। वह बुढ़ापे की आँखों का तारा था। इसीलिए मिसेज सेन ने उसे काफी छूट दे रखी थी। दरअसल बात यह थी कि खोखा का आविर्भाव तब हुआ था जब उसकी कोई उम्मीद दोनों को बाकी नहीं रह गई थी। खोखा जीवन के नियम का जैसे अपवाद था और इसलिए यह भी स्वाभाविक था कि वह घर के नियमों का भी अपवाद था। इसलिए मोटर को कोई खतरा था तो केवल खोखा से ही। घर में मोटर-संबंधी नियम हो या अन्यान्य मामले उसके लिए सिद्धान्त बदल जाते थे।

विष के दांत कहानी का सारांश बताएं Bihar Board Class 10 प्रश्न 4.
सेन दंपती खोखा में कैसी संभावनाएँ देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने उसकी कैसी शिक्षा तय की थी?
उत्तर-
सेन दंपती खोखा में अपने पिता की तरह इंजीनियर बनने की पूरी संभावना देखते थे। उन्होंने उसके शिक्षा के लिए कारखाने से बढ़ई मिस्त्री घर पर आकर एक-दो घंटे तक उसके साथ कुछ ठोंक-ठाक किया करे। इससे बच्चे की उँगलियाँ अभी से औजारों से वाकिफ हो जाएंगी।

Vish Ke Dant Ka Question Answer Bihar Board Class 10 प्रश्न 5.
सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
(क) लड़कियाँ क्या है, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है।
उत्तर-
‘व्याख्या- प्रस्तुत पंक्तियाँ नलिने विलोचन शर्मा द्वारा लिखित ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी से ली गयी हैं। यह संदर्भ सेन परिवार में पाली-पोसी जानेवाली लडकियों की चारित्रिक विशेषताओं . से जुड़ा हुआ है।

सेन परिवार मध्यमवर्गीय परिवार है जहाँ की जीवन-शैली कृत्रिमताओं से भरी हयी है।
सेन परिवार में लड़कियों को तहजीब और तमीज के साथ जीना सिखाया जाता है। उन्हें । शरारत करने की छूट नहीं। वे स्वच्छंद विचरण नहीं कर सकतीं जबकि बच्चा के लिए कोई पाबंदी नहीं है। सेन दंपत्ति ने लड़कियों को यह नहीं सिखाया है कि उन्हें क्या करना चाहिए उन्हें ऐसी तालीम दी गयी है कि उन्हें क्या-क्या नहीं करना है, इसकी सीख दी गयी है। इस प्रकार सेन परिवार में लड़कियों के प्रति दोहरी मानसिकता काम कर रही है। जहाँ लड़कियाँ अनुशासन, तहजीब और तमीज के बीच जी रही हैं वहाँ खोखा सर्वतंत्र स्वतंत्र है। लड़का-लड़की के साथ दुहरा व्यवहार विकास, परिवार और समाज के लिए घातक है। अतः लड़का-लड़की के बीच नस्लीय भेदभाव न पैदा कर उनमें समानता का विस्तार करना चाहिए।

(ख) खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने सिद्धान्तों को भी बदल लिया था।
उत्तर-
व्याख्या प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘विष के दाँत’ नामक कहानी से ली गयी हैं। इस कहानी के रचयिता आचार्य नलिन विलोचन शर्माजी हैं। यह पंक्ति सेन परिवार के लाडले
बेटे के जीवन-प्रसंग से संबंधित है।
कहानीकार ने इन पंक्तियों के माध्यम से यह बताने की चेष्टा किया है कि सेन परिवार एक मध्यमवर्गीय सफेदपोश परिवार है। यहाँ कृत्रिमता का ही बोलबाला है। नकली जीवन के बीच जीते ।। हुए सेन परिवार अपने बच्चों के प्रति भी दोहरा भाव रखता है।

सेन परिवार का बेटा शरारती स्वभाव का है। वह बुढ़ापे में पैदा हुआ है, इसी कारण सबका लाडला है। उसके लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा में कोई पाबंदी अनुशासन नहीं है। वह बेलौस जीने के लिए स्वतंत्र है। उसके लिए सारे नीति-नियम शिथिल कर दिए गए थे। वह इतना उच्छृखल था कि उसके द्वारा किये गए बुरे कर्मों को भी सेन दंपत्ति विपरीत भाव से देखते थे और उसकी तारीफ करते थकते नहीं थे।

सेन दंपत्ति बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसी कारण ट्रेनिंग भी वैसी ही दिलवा रहे थे। उसे किंडरगार्टन स्कूल की शिक्षा न देकर कारखाने में बढ़ई मिस्त्री के साथ लोहा पीटने, ठोंकने आदि से संबंधित काम सिखाया जाता था। औजारों से परिचित कराया जाता था। इस प्रकार सेन परिवार अपने शरारती बेटे के स्वभाव के अनुरूप ही शिक्षा की व्यवस्था कर दी थी और अपने सिद्धांतों को बदल लिया था।

(ग) ऐसे ही लडके आगे चलकर गंडे, चोर और डाक
उत्तर-
व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी से ली गयी हैं। इसके रचयिता हैं—नलिन विलोचन शर्मा। इस पंक्ति का प्रसंग गिरधारी के बेटे मदन के साथ जुड़ा हुआ है।

एक बार की बात है कि सेन की गाड़ी के पास मदन खड़ा होकर गाड़ी को छू रहा था। जब शोफर ने उसे ऐसा करने से मना किया तो वह शोफर को मारने दौड़ा लेकिन गिरधारी की पत्नी ने बेटे को संभाल लिया। ड्राइवर ने मदन को धक्के देकर नीचे गिरा दिया था जिससे मदन का घुटना फूट गया था.

शरारत की चर्चा ड्राइवर ने सेन साहब से की थी। इसी बात पर सेन साहब काफी क्रोधित हुए थे और गिरधारी को अपनी फैक्टरी से बुलवाकर डाँटते हुए कहा था कि देखो गिरधारी। आजकल मदन बहुत शोख हो गया है। मैं तो तुम्हारी भलाई ही चाहता हूँ। गाड़ी गंदा करने से मना करने पर वह ड्राइवर को मारने दौड़ पड़ा था और मेरे सामने भी वह डरने के बदले ड्राइवर की ओर मारने के लिए झपटता रहा। देखो, यह लक्षण अच्छा नहीं है, ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुण्डे, चोर और डाकू बनते हैं। गिरधारी लाल तो जी हाँ, जी हाँ कहने में ही लगा हुआ था। ऐसी सीख देते हुए सेन साहब गिरधरी लाल को बच्चे को सँभालने और शरारत छोड़ने की सीख देते हुए चले गए। यह प्रसंग उसी वक्त का है।

इन पंक्तियों में सेन के चरित्र के दोगलेपन की झलक साफ-साफ दिखती है एक तरफ अपने अनुशासनहीन बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना पालनेवाले सेन को उसकी बुराई नजर नहीं आती लेकिन दूसरी ओर गिरधारी लाल के बेटे में उइंडता और शरारत दिखाई पड़ती है। यह उस मध्यवर्गीय परिवार के जीवन चरित्र की सही तस्वीर है। अपने बेटे की प्रशंसा करते हैं, भले ही वह कुलनाशक है लेकिन निर्धन, निर्बल गिरधरी लाल के बेटे में कुलक्षण ही उन्हें दिखायी पड़ते हैं।

(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।
उत्तर-
व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘विष के दाँत’ नामक कहानी से ली गयी हैं जिसके रचियता हैं नलिन विलोचन शर्मा।
यह प्रसंग उस समय का है जब सेन दंपत्ति का बेटा दूसरे दिन शाम के वक्त बँगले के अहाते __ के बगलवाली गली में जा निकला। वहाँ धूल में मदन (गिरधारी लाल का बेटा) आवारागर्द लड़कों . के साथ लटू नचा रहा था। खोखा ने जब यह दृश्य देखा तो उसकी भी तबीयत लटू नचाने के लिए ललच गयी। खोखा तो बड़े घर का था यानी वह हंसों की जमात का था जबकि मदन और वे लड़के निम्न मध्यमवर्गीय दलित, शोषित थे। इन्हें कौओं से संबोधित किया गया। इसी सामाजिक भेदभाव के कारण कहा गया कि हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया। यानी कहने का भाव यह है कि खोखा जो अमीर सेन परिवार का वंशज है, गरीबों के खेल में शामिल होकर खेलने के लिए ललक गया किन्तु यह संभव न हो सका क्योंकि पहले दिन उसके पिता ने उसे और उसकी माँ के साथ पिता को भी प्रताड़ित किया था, उसने अपने अपमान को यादकर छूटते ही खोखा से कहा—अबे, भाग जा यहाँ से। बड़ा आया हैलटू खेलनेवाला ! यहाँ तेरा लटू नहीं है। जा, जा, अपने बाबा की मोटर में बैठ।

इन पंक्तियों के द्वारा कहानीकार सामाजिक असमानता, भेदभाव, गैरबराबरी को दर्शाना चाहता है।

विष के दांत प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 10 प्रश्न 6.
सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया?
उत्तर-
एक दिन का वाकया है कि ड्राइंग रूम में सेन साहब के कुछ दोस्त बैठे गपशप कर रहे थे। उनमें एक साहब साधारण हैसियत के अखबारनवीस थे और सेन के दूर के रिश्तेदार भी होते थे। साथ में उनका लड़का भी था, जो था तो खोखा से भी छोटा, पर बड़ा समझदार और होनहार मालूम पड़ता था। किसी ने उसकी कोई हरकत देखकर उसकी कुछ तारीफ कर दी और उन साहब से पूछा कि बच्चा स्कूल तो जाता ही होगा? इसके पहले कि पत्रकार महोदय : कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया- मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ, और वे ही बातें दुहराकर थकते नहीं थे। पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे। जब उनसे फिर पूछा गया कि अपने बच्चे के विषय में उनका क्या ख्याल है, तब उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि वह जेंटिलमैन जरूर बने और जो कुछ बने, उसका काम है, उसे पूरी आजादी रहेगी।” सेन साहब इस उत्तर के शिष्ट और प्रच्छन्न व्यंग्य पर ऐंठकर रह गए।

Vish Ke Dant Question Answer Bihar Board Class 10 प्रश्न 7.
मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहता है ?
उत्तर-
कहानीकार ड्राइवर के रूप में सामन्ती मानसिकता को दिखाया है। मदन एक गरीब का बच्चा है उसके सिर्फ मोटर को स्पर्श करने पर उसे धकेल दिया गया है। जिस कारण उसे चोट आ गया। सामन्ती मानसिकता और एक गरीब के व्यवहार की ओर कहानीकार बसा रहे हैं।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 8.
काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?
उत्तर-
काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण था काशू द्वारा मदन से लटू माँगना। मदन देने से इंकार करता है। काशू मारता है फिर मदन भी मारता है।
लेखक इस प्रसंग के द्वारा दिखाने चाहते हैं कि बच्चे में सामन्ती मानसिकता का भय नहीं होता बाद में चाहे जो हो जाय।

Bihar Board Class 10th Hindi Book Solution प्रश्न 9.
‘महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं।’ लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पुष्ट कीजिए।
उत्तर-
सेन साहब की नयी चमकती काली गाड़ी को छूने भर के अपराध के लिए मदन न केवल शोफर द्वारा घसीटा जाता है, अपितु बाप गिरधर द्वारा भी बेरहमी से पीटा जाता है। दूसरे दिन खोखा जब मदन की मंडली में लटू खेलने चला जाता है तो मदन का स्वाभिमान जाग उठता है। दोनों की लड़ाई वृहत् रूप ले लेती है। खोखा और. मदन की लड़ाई महल और झोपड़ी की लड़ाई का प्रतीक है। खोखा को मुँह की खानी पड़ती है। इस स्वाभिमान की झगड़ा में झोपड़ी वाले की जीत होती है।

प्रश्न 10.
रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने के बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है ?
उत्तर-
गिरधर लाल सेन साहब की फैक्ट्री में एक किरानी था और उनके ही बंगले के अहाते के एक कोने में आउट-हाउस में रहता था। सेन साहब द्वारा जब मदन की शिकायत की जाती । तब गिरधर मदन की पिटाई करता था। गिरधर सेन साहब की हर बात को मानने के लिए विवश था। लेकिन एक दिन जब मदन काशू के अहंकार का जवाब देते हुए उस पर प्रहार करके उसके दाँत तोड़ दिये तब उसके पिता उल्लास और गर्व के साथ उसे शाबासी देते हैं। जो काम वह स्वयं नहीं कर पाया था वह उसका पुत्र करके दिखा दिया था। इसलिए वह गौरवान्वित था। मदन शोषण, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध प्रज्वलित प्रतिशोध का प्रतीक है। उसके निर्भीकता से प्रभावित होकर गिरधर ने उसे छाती से लगा लिया।

प्रश्न 11.
सेन साहब, मदन, काश और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर-
सेन साहब- कहानी में सेन साहब प्रमुख पात्र हैं। नई-नई उन्होंने गाड़ी खरीदी है। इसीलिए गाड़ी छाया से सब दूर रहे। खासकर खोखा-खोखी।
सेन साहब में दिखावा बहुत अधिक है। अपने पुत्र के संबंध में बहुत बढ़ा-चढ़ाकार बातें करते हैं। अपने बेटे के सामने किसी दूसरे लड़के का प्रशंसा पसंद नहीं करते हैं। सेन साहब सामंती मानसिकता के आदमी है। .

मदन – सेन साहब का एक कर्मचारी गिरधर है जो उन्हीं के आहाते में रहता है। मदन उसी का लड़का है। लड़का साहसी और निर्भीक है। बाल सुलभ शरारत भी उसमें विद्यमान है। इसी कारण जब काशू. उससे झगड़ता है तो मदन भी उसी के भाषा में जवाब देता है।

काशू- काशू बाबू सेन साहब का एकमात्र सुपुत्र है। बहुत लाड़-प्यार के बहुत बिगड़ गया है। शरारत करने में माहिर हो गया है। कहानी का नायक काशू ही है।

गिरधर- गिरधर सेन साहब के फैक्ट्री में काम करने वाला एक कर्मचारी हैं। उन्हीं के अहाते में रहता है। गिरधर बेहद सीधा और सरल कर्मचारी। यदा-कदा इसे सेन साहब का गुस्सा झेलना पड़ता है। गिरधर मदन का पिता है।

प्रश्न 12.
आपकी दृष्टि में कहानी का नायक कौन है ? तर्कपूर्ण उत्तर दें।
उत्तर-
हमारी दृष्टि में ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी का नायक मदन है। नायक के संबंध में पुरानी कसौटी अब बदल चुकी है। पहले यह धारणा थी कि नायक वही हो सकता है. जो उच्च कुलोत्पन्न हो, सुसंस्कृत, सुशिक्षित, युवा तथा ललित-कला प्रेमी हो। परन्तु नायक के संबंध में ये शर्ते अब मान्य नहीं। कोई भी पात्र नायक पद का अधिकारी है यदि वह घटनाओं का संचालक है, सारे पात्रों में सर्वाधिक प्रभावशाली है और कथावस्तु में उसका ही महत्व सर्वोपरि है। इस दृष्टि से विचार करने पर स्पष्ट ज्ञात होता है कि इस कहानी का नायक मदन ही है। इसमें मदन का ही चरित्र है जो सबसे अधिक प्रभावशाली है। पूरे कथावस्तु में इसी के चरित्र का महत्त्व है। खोखे के विष के दाँत उखाड़ने की महत्त्वपूर्ण घटना का भी वही संचालक है। अत: निर्विवाद रूप से मदन ही कहानी का नायक है।

प्रश्न 13.
आरंभ से ही कहानीकार का स्वर व्यंग्यपूर्ण है। ऐसे कुछ प्रमाण उपस्थित करें।
उत्तर-
पाँचो लड़कियाँ तो तहजीब और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं।
जैसे कोयल घोंसले में से कब उड़ जाय। चमक ऐसी कि अपना मुँह देख लो।

प्रश्न 14.
‘विष के दाँत’ कहानी का सारांश लिखें।
उत्तर-
उत्तर के लिए सारांश देखें।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
कहानी से मुहावरे चुनकर उनके स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें।
उत्तर-
आखों का तारा-मोहन अपने माता-पिता के आखों का तारा है।
जीती-जागती मूरत- सेन साहब पुत्री तहजीब और तमीज में जीती जागती मूरत है।
किलकारी. मारना– मोहन अपने मित्र के बातों पर किलकारी मारता है।

प्रश्न 2.
कहानी से विदेशज शब्द चुनें और उनका स्रोत निर्देश करें।
उत्तर-
Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 2 विष के दाँत - 1

प्रश्न 3.
कहानी से पाँच मिश्र वाक्य चुनें?
उत्तर-
(i) उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी है।
(ii) सेनों का कहना था कि खोखा आखिर अपने बाप का बेटा ठहरा।
(iii) औरत के पास एक बच्चा खड़ा था, जिसे वह रोकने की कोशिश कर रही थी।
(iv) मैंने मना किया तो लगा कहने जा-जा।
(v) कुर्सियाँ लॉन में लगवा दो, जब तक हम यहाँ बैठते हैं।

प्रश्न 4.
वाक्य-भेद स्पष्ट कीजिए-..
(क) इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ।
(ख) पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे।
(ग) ठीक इसी वक्त मोटर के पीछे खट-खट की आवाज सुनकर सेन साहब लपके, शोफर भी दौड़ा। .
(घ) ड्राइवर, जरा दूसरे चक्कों को भी देख लो और पंप ले आकर हवा भर दो।
उत्तर-
(क) मिश्र वाक्य
(ख) साधारण वाक्य
(ग) साधारण वाक्य
(घ) संयुक्त वाक्य।

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. लड़कियाँ तो पाँचों बड़ी सुशील हैं, पाँच-पाँच ठहरी और सो भी लड़कियाँ, तहजीब और तमीज की तो जीती-जागती मूरत ही हैं। मिस्टर और मिसेज सेन ने उन्हें क्या करना चाहिए, यह सिखाया हो या नहीं, क्या-क्या नहीं करना चाहिए, इसकी उन्हें ऐसी तालीम दी है कि बस। लड़कियाँ क्या हैं, कठपुतलियाँ हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है। वे कभी किसी चीज को तोड़ती-फोड़ती नहीं। वे दौड़ती हैं, और खेलती भी हैं, लेकिन सिर्फ शाम के वक्त, और चूँकि उन्हें सिखाया गया है कि ये बातें उनकी सेहत के लिए जरूरी हैं। वे ऐसी मुस्कराहट अपने होठों पर ला सकती हैं कि सोसाइटी की तारिकाएँ भी उनसे कुछ सीखना चाहें, तो सीख लें, पर उन्हें खिलखिलाकर किलकारी मारते हुए किसी ने सुना नहीं। सेन परिवार के मुलाकाती रश्क के साथ अपने शरारती बच्चों से. खीझकर कहते हैं “एक तुम लोग हो, और मिसेज सेन की लड़कियाँ हैं। अब, फूल का गमला तोड़ने के लिए बना है ? तुम लोगों के मारे घर में कुछ भी तो नहीं रह सकता।”

प्रश्न
(क) प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ? और इसके लेखक कौन हैं ?
(ख) सेन साहब अपनी पुत्रियों को कैसा मानते थे?
(ग) स्वास्थ्य लाभ के लिए पुत्रियों को क्या सिखाया गया है ?
(घ) सेन साहब के मुलाकाती लोग अपने शरारती बच्चों से खीझकर क्या कहते थे?
(ङ) लेखक ने सेन साहब की पुत्रियों की तुलना कठपुतलियों से क्यों की है ?
उत्तर-
(क) प्रस्तुत गद्यांश ‘विष के दाँत’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक नलिन विलोचन शर्मा हैं।
(ख) सेन साहब को अपनी पुत्रियों पर पूरा भरोसा था। उनकी सोच थी कि उनकी बेटियाँ तहजीब और तमीज की जीती-जागती मूरत हैं। वे किसी भी चीज को तोड़ती-फोड़ती नहीं हैं।
(ग) स्वास्थ्य लाभ के लिए खेलना जरूरी है। खेलने से शरीर चुस्त-दुरूस्त रहता है किन्तु खेल की भी समय-सीमा निर्धारित थी। खेलना-कूदना और दौड़ना शाम में ही ठीक होता है। अतः, समय पालन का पूरा-पूरा निर्देश दिया गया था।
(घ) सेन साहब से मिलने के लिए प्रायः लोग आया-जाया करते थे। वे सेन साहब की पुत्रियों के रहन-सहन से काफी प्रभावित हो जाते थे। मंद मुस्कान, बोली में मिठास आदि उन पुत्रियों के गुण थे। किन्तु मिलनेवालों के बच्चे इन चीजों के विपरीत थे। कभी गमला तोड़ देना, आपस में उलझ जाना उनकी ये आदत बन गयी थीं। अत: उनकी लड़कियों पर रीझकर, अपने बेटे-बेटियों से कहते, एक तुम लोग हो और एक सेन साहब की लड़कियाँ जिनकी चाल-ढाल प्रशंसनीय है।
(ङ) कठपुतलियाँ निर्देशन के आधार पर चलती हैं। उठना, बैठना, चलना आदि सभी क्रियाएँ निर्देश पर ही होती हैं। ठीक उसी प्रकार सेन साहब की बेटियाँ भी निर्देश पर ही काम करती थीं। जोर-से नहीं हँसना, चीजों को नहीं तोड़ना, शाम में खेलना-कूदना आदि सभी काम वे कहने पर ही करती थीं। इसी कारण लेखक ने उन पुत्रियों की तुलना कठपुतलियों से की है।

2. खोखा नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा है यह नहीं कि मिसेज सेन अपना और बुढ़ाये का ताल्लुक किसी हालत में मानने को तैयार हों और सेन साहब तो सचमुच बूढ़े नहीं लगते, लेकिन मानने लगते कि बात छोड़िये। हकीकत तो यह है कि खोखा का आविर्भाव तब जाकर हुआ था, जब उसकी कोई उम्मीद दोनों को बाकी नहीं रह गयी थी। खोखा जीवन के नियम का अपवाद
था, और यह अस्वाभाविक नहीं था कि वह घर के नियमों का भी अपवाद हो।
प्रश्न
(क) पाठ और लेखक का नामोल्लेख करें।
(ख) लेखक ने नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा किसे कहा है और क्यों ?
(ग) खोखा घर के नियमों का अपवाद क्यों था?
उत्तर-
(क) पाठ-“विष के दाँत”, लेखक–नलिन विलोचन शर्मा।
(ख) लेखक ने सेन दम्पत्ति के एक मात्र पुत्र खोखा को नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा कहा है। वस्तुतः सेन दम्पत्ति इस ढलती उम्र में, जब संतानोत्पत्ति की कोई आशा नहीं थी, खोखा. का जन्म हुआ था। इसलिये उसे आँखों का तारा अर्थात् अत्यन्त प्यारा कहा है।
(ग) खोखा ढलती उम्र में सेन दम्पत्ति का एक मात्र पुत्र था। अत: बहुत दुलारा था। घर का अनुशासन लड़कियों पर तो लागू था किन्तु खोखा पर किसी प्रकार की शक्ति नहीं थी। उसपर … कोई पाबंदी न थी। इसलिये बहुत छूट थी।

3. एक दिन का वाकया है कि ड्राइंग रूम में सेन साहब के कुछ दोस्त बैठे गपशप कर . रहे थे। उनमें एक साहब साधारण हैसियत के अखबारनवीस थे और सेनों के दूर के रिश्तेदार भी होते थे। साथ में उनका लड़का भी था, जो था तो खोखा से भी छोटा, पर बड़ा समझदार और होनहार मालूम पड़ता था। किसी ने उसकी कोई हरकत देखकर उसकी कुछ तारीफ कर दी और उन साहब से पूछा कि बच्चा स्कूल तो जाता ही होगा? इसके पहले कि पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते, सेन साहब ने शुरू किया-मैं तो खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूँ, और वे ही बातें दुहराकर वे थकते नहीं थे। पत्रकार महोदय चुप मुस्कुराते रहे। जब उनसे फिर पूछा गया कि अपने बच्चे के विषय में उनका क्या ख्याल है, तब उन्होंने कहा “मैं चाहता हूँ कि वह जेंटिलमैन जरूर बने और जो कुछ बने, उसका काम है, उसे पूरी आजादी रहेगी।” सेन साहब इस उत्तर के शिष्ट और प्रच्छन्न व्यंग्य पर ऐंठकर रह गए।

प्रश्न
(क) पाठ तथा उसके लेखक का नाम लिखें।
(ख) ड्राइंग रूम में कौन बैठे थे ?
(ग) समझदार लड़का कौन था ?
(घ) सेन साहब खोखा को क्या बनाना चाहते थे ?
(ङ) पत्रकार महोदय के उत्तर को सुनने के पश्चात् सेन साहब पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-विष के दाँत
लेखक का नाम-नलिन विलोचन शर्मा।
(ख) ड्राइंग रूम में सेन साहब के कुछ दोस्त बैठे थे।
(ग) समझदार लड़का सेन साहब के रिश्तेदार पत्रकार महोदय का पुत्र था।
(घ) सेन साहब खोखा को इंजीनियर बनाना चाहते थे।
(ङ) पत्रकार महोदय के उत्तर पर सेन साहब ऐंठकर रह गए।

4. शाम के वक्त खेलता-कूदता खोखा बँगले के अहाते के बगल वाली गली में जा निकला। वहाँ धूल में मदन पड़ोसियों के आवारागर्द छोकरों के साथ लटू नचा रहा था। खोखा ने देखा तो उसकी तबीयत मचल गई। हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया, लेकिन आदत से लाचार उसने बड़े रोब के साथ मदन से कहा- ‘हमको लट्टू दो, हम भी खेलेगा’ दूसरे लड़कों की कोई खास उम्र नहीं थी, वे खोखा को अपनी जमात में ले लेने के फायदों को नजर अंदाज नहीं कर सकते थे। पर उनके अपमानित प्रताड़ित, लीडर मन को यह बात कब मंजूर हो सकती थी। उसने छूटते ही जवाब दिया-“अबे भाग जा यहाँ से ! बड़ा आया है लटू खेलने वाला। है भी लटू तेरे ! जा, अपने बाबा की मोटर पर बैठ।”

प्रश्न
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) खोखा शाम के खेलते हुए कहाँ चला गया ?
(ग) मदन क्या कर रहा था ?
(घ) लटू का खेल देखकर खोखा पर क्या प्रभाव पड़ा?
(ङ) मदन खोखा को खेल में भाग लेने क्यों नहीं दिया ?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम- विष के दाँत
लेखक का नाम नलिन विलोचन शर्मा।
(ख) खोखा शाम के वक्त खेलता-कूदता बँगले के अहाते की बगल वाली गली में चला गया।
(ग) मदन पड़ोसियों के आवारागर्द छोकरों के साथ लटू नचा रहा था।
(घ) लटू का खेल देखकर खोखा की तबीयत मचल गई। उसे खेलने की प्रबल इच्छा हुई।
(ङ) खोखा के व्यवहार ने मदन को आहत कर दिया था। उसके द्वारा प्रताड़ित होने के चलते वह खोखा को खेल में भाग लेने नहीं दिया।

5. मदन घर नहीं लौटा, लेकिन जाता ही कहाँ ? आठ-नौ बजे तक इधर-उधर मारा-मारा फिरता रहा। फिर भूख लगी, तो गली के दरवाजे से आहिस्ता-आहिस्ता घर में घुसा। उसके लिए मार खाना मामूली बात थी। डर था तो यही कि आज मार और दिनों से भी बुरी होगी, लेकिन उपाय ही क्या था! वह पहले रसोईघर में घुसा। माँ नहीं थी। बगल के सोनेवाले कमरे से बातचीत की आवाज आ रही थी। उसने इत्मीनान के साथ भर पेट खाना खाया, फिर दरवाजे के पास जाकर अन्दर की बातचीत सुनने की कोशिश करने लगा।

प्रश्न
(क) पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
(ख) मदन देर रात तक घर क्यों लौट गया ?
(ग) मदन किस बात के लिए डरा हुआ था ?
(घ) घर पहुँचकर मदन ने सर्वप्रथम क्या किया ?
(ङ) खाना खाने के बाद मदन ने क्या किया ?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-विष के दाँत।
लेखक का नाम-नलिन विलोचन शर्मा।
(ख) मदन देर रात तक घर लौट गया, क्योंकि इधर-उधर घूमते रहने के कारण उसे भूख लग चुकी थी।
(ग) मदन को डर था कि अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक मार खानी पड़ेगी।
(घ) घर पहुँचकर मदन ने सर्वप्रथम रसोईघर में घुसकर भर पेट खाना खाया।
(ङ) खाना खाने के उपरान्त मदन ने दरवाजे के पास जाकर अन्दर की बात सुनने की कोशिश करने लगा।

6.  चोर-गुंडा-डाकू होनेवाला. मदन भी कब माननेवाला था। वह झट काशू पर टूट पड़ा। दूसरे लड़के जरा हटकर इस द्वन्द्व युद्ध का मजा लेने लगे। लेकिन यह लड़ाई हड्डी और मांस की, बँगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी। अहाते में यही लड़ाई हुई रहती, तो काशू शेर हो जाता। वहाँ से तो एक मिनट बाद ही वह रोता हुआ जान लेकर भाग निकला। महल और झोपड़ीवालों की लड़ाई में अक्सर महलवाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में, जब दूसरे झोपड़ीवाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं। लेकिन बच्चों को इतनी अक्ल कहाँ ? उन्होंने न तो अपने दुर्दमनीय लीडर की मदद की, न अपने माता-पिता के मालिक के लाडले की ही। हाँ, लड़ाई खत्म हो जाने पर तुरन्त ही सहमते हुए तितर-बितर हो गए।

प्रश्न
(क) मदन काशू को मारने के लिए क्यों टूट पड़ा?
(ख) यह लड़ाई हड्डी और मांस की, बँगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी। इसका आशय स्पष्ट करें।
(ग) महल और झोपड़ीवालों की लड़ाई में महलवाले ही क्यों जीतते हैं ?
(घ) लड़ाई समाप्त होने पर क्या हुआ?
(ङ) मदन और काशू की लड़ाई में अन्य लड़के तमाशबीन क्यों बने रहे?
उत्तर-
(क) लट्टू खेलने के नाम पर मदन और काशू में आपसी विवाद उत्पन्न हो गया। काशू को अपने पिता और उनकी सम्पत्ति पर गर्व रहता था। इस कारण वह मदन को मार बैठा। मदन भी अल्हड़ और स्वाभिमानी प्रवृत्ति का था। अपनी पिटाई उसे नागवार लगी और वह काशू को मारने के लिए टूट पड़ा।
(ख) दो परस्पर असामान्य हैसियतों के बीच की लड़ाई अजीबोगरीब होती है। काशू अमीर बाप का बेटा था और मदन का बाप काशू के पिताजी का ही एक निम्न कोटि का कर्मचारी था। मदन और काशू में कभी भी प्रेम नहीं रहता था। दोनों में सर्प और नेवले की तरह संबंध था। गली का कुत्ता किसी तरह अपना पेट भरता है जबकि महल का कुत्ता स्वामी का स्नेही होता है उसे खाने के लिए विविध प्रकार की व्यवस्था रहती है।
(ग) झोपड़ीवाले महल के अत्याचार से भयभीत रहते हैं। उन्हें भय बना रहता है कि महल का विरोध करना अपने आपको मृत्यु के मुँह में झोकना है। महलों के दया-करम पर ही उनका जीवन निर्भर है। झोपड़ीवाले अपने साथी को मदद करने में हिचकते हैं। यही कारण है कि महलवाले हमेशा झोपड़ीवालों से जीत जाते हैं।
(घ) लड़ाई में जब काशू हार गया और रोता-बिलखता अपने घर में भाग गया तो अन्य लड़के भी वहाँ से तितर-बितर हो गये। उन्हें भय हो गया कि कहीं काशू के पिताजी आकर हमलोगों को मार बैठे।
(ङ) मदन और काशू की लड़ाई को देखनेवाले लड़कों के बाप काशू के पिताजी के यहाँ ही नौकरी करते थे। उन्हें लगा कि यहाँ मौन रह जाना ही समझदारी है। किसी को मदद करने का मतलब अपने ऊपर होनेवाले जुर्म को न्योता देना है। इसी कारण वे तमाशबीन बने रहे।

7. गिरधर निस्सहाय निष्ठुरता के साथ मदन की ओर बढ़ा। मदन ने अपने दाँत भींच लिए। गिरधर मदन के बिल्कुल पास आ गया कि अचानक ठिठक गया। उसके चेहरे से नाराजगी का बादल हट गया। उसने लपककर मंदन को हाथों से उठा लिया। मदन. हक्का-बक्का अपने पिता को देख रहा था। उसे याद नहीं, उसके पिता ने कब उसे इस तरह प्यार किया था, अगर कभी किया था, तो गिरधर उसी बेपरवाही, उल्लास और गर्व के साथ बोल उठा; जो किसी के लिए भी नौकरी से निकाले जाने पर ही मुमकिन हो सकता है, ‘शाबाश बेटे’। एक तेरा बाप है, और तूने तो, खोखा के दो-दो दाँत तोड़ डाले। हा हा हा हा !
(क) पाठ और लेखक का नामोल्लेख करें।
(ख) गिरधर निष्ठुरता के साथ आगे बढ़कर क्यों ठिठक गया? (ग) मदन हक्का-बक्का क्यों हो गया ?
(घ) गिरधर ने बेटे मदन को शाबासी क्यों दी? मदन एकाएक गिरधर के लिए प्यारा क्यों बन गया ?
उत्तर-
(क) पाठ-विष के दाँत। लेखक-नलिन विलोचन शर्मा।
(ख) गिरधर पहले तो गुस्से में मदन को मारने के लिए तत्पर हो गया किन्तु तत्काल ही उसे ख्याल आया कि अब तो वह सेन साहब का कर्मचारी है ही नहीं। फिर उनके लड़के के लिए अपने को क्यों मारे? यह सोचकर वह ठिठक गया।
(ग) मदन अक्सर अपने पिता से पिटता था। किन्तु जब पिता ने उसे अपने हाथों में प्यार से उठा लिया तो पिता के इस स्वभाव परिवर्तन पर वह हक्का-बक्का हो गया।
(घ) गिरधर सेन साहब का कर्मचारी था और अक्सर डाँट-फटकार सुनता था। इससे उसमें हीन-भावना घर कर गई थी। जब बेटे के कारण नौकरी से हटाया गया तो सेन साहब का भय समाप्त हो गया और उनके प्रति आक्रोश उभर आया। चूंकि उसके दमित आक्रोश को, उसके बेटे मदन ने सेन साहब के बेटे खोखा के दाँत को तोड़कर, व्यक्त कर दिया था, इसलिए मदन उसका प्यारा बन गया। जो काम गिरधर न कर सका था, उसके बेटे ने कर दिखाया।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनें-

प्रश्न 1.
विष के दाँत कहानी के रचयिता कौन हैं ?
(क) अमरकांत
(ख) विनोद कुमार शुक्ल
(ग) नलिन विलोचन शर्मा
(घ) यतीन्द्र मिश्रा
उत्तर-
(ग) नलिन विलोचन शर्मा

प्रश्न 2.
खोखा का दूसरा नाम क्या था?
(क) मदन
(ख) गिरधर
(ग) काशू
(घ) आलो
उत्तर-
(ग) काशू

प्रश्न 3.
‘मदन’ किसका पुत्र था?
(क) सेन साहब
(ख) गिरधर
(ग) शोफर
(घ) सिंह साहब
उत्तर-
(ख) गिरधर

प्रश्न 4.
विष के दाँत कैसी कहानी है?
(क) सामाजिक
(ख) ऐतिहासिक
(ग) धार्मिक
(घ) मनोवैज्ञानिक
उत्तर-
(घ) मनोवैज्ञानिक

प्रश्न 5.
‘विष के दाँत’ समाज के किस वर्ग की मानसिकता उजागर करती है ?
(क) उच्च वर्ग ।
(ख) निम्न वर्ग
(ग) मध्य वर्ग
(घ) निम्न-मध्य वर्ग
उत्तर-
(ग) मध्य वर्ग

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
खोखा नाउम्मीद ………. की आँखों का तारा है।
उत्तर-
बुढ़ापे

प्रश्न 2.
सेन साहब को देखकर औरत ……..” गई। .
उत्तर-सहम

प्रश्न 3.
मदन का ……. रुदन रुक गया था। .
उत्तर-
आत

प्रश्न 4.
दूसरे लड़के जरा हटकर इस ……… युद्ध का मजा लेने लगे।
उत्तर-
द्वन्द्व

प्रश्न 5.
मदन के लिए ……” खाना मामूली बात थी।
उत्तर-
मार

प्रश्न 6.
गिरधर ने लपककर मदन को “……” से उठा लिया।
उत्तर-
हाथों

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सेन साहब को कितनी लड़कियाँ थीं ? उनके क्या नाम थे?
उत्तर-
सेन साहब को सीमा, रजनी, आलो, शेफाली और आरती-ये पाँच लड़कियाँ थीं।

प्रश्न 2.
सेन साहब की लड़कियाँ कठपुतलियाँ किस प्रकार थीं ?
अथवा, लेखक ने सेन साहब की लड़कियों को कठपुतलियाँ क्यों कहा है?
उत्तर-
अपने माता-पिता (सेन-दम्पति) के आदेश का वे अक्षरशः पालन करती थीं तथा वही .. कार्य करती थीं जो उन्हें करने के लिए कहा जाता था।

प्रश्न 3.
खोखा सेन दम्पति की नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा क्यों था?
उत्तर-
खोखा सेन दम्पति के बुढ़ापे की संतान था। उसका जन्म ऐसे समय में हुआ था जब उसकी कोई उम्मीद उन दोनों को बाकी नहीं रह गई थी।

प्रश्न 4.
सेन साहब अपने “खोखा” को क्या बनाना चाहते थे ?
उत्तर-
सेन साहब अपने “खोखा” को इंजीनियर बनाना चाहते थे।

प्रश्न 5.
गिरधर कौन था?
उत्तर-
गिरधर सेन साहब की फैक्ट्री में किरानी था।

प्रश्न 6.
मदन ड्राइवर के बीच विवाद क्यों हुआ?
उत्तर-
ड्राइवर के मना करने पर भी मदन सेन साहब की कार को छू रहा था जो दोनों के बीच विवाद का कारण बना।

प्रश्न 7.
सेन साहब ने मदन की माँ को क्या हिदायत दी ?
उत्तर-
सेन साहब ने मदन की माँ को हिदायत दी कि मदन भविष्य में कार को छूना जैसी हरकत नहीं करे।

प्रश्न 8.
काश और मदन की लड़ाई कैसी थी?
उत्तर-
काशू और मदन की लड़ाई हड्डी और मांस की, बंगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई थी।

प्रश्न 9.
झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर कौन जीतता है ?
उत्तर-
झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं।

प्रश्न 10.
आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का प्रारंभ किसकी कविताओं से हुआ था ?
उत्तर-
आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का आरंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ।

विष के दाँत लिखक परिचय

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1916 ई० में पटना के बदरघाट में हुआ । वे जन्मना भोजपुरी भाषी थे। वे दर्शन और संस्कृत के प्रख्यात विद्वान महामहोपाध्याय पं० रामावतार शर्मा के ज्येष्ठ पुत्र थे । माता का नाम रत्नावती शर्मा था। उनके व्यक्तित्व-निर्माण में पिता के पांडित्य के साथ उनकी प्रगतिशील दृष्टि की भी बड़ी भूमिका थी। उनकी स्कूल की पढ़ाई पटना कॉलेजिएट स्कूल से हुई और पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने संस्कृत और हिंदी में एम० ए० किया। वे हरप्रसाद दास जैन कॉलेज, आरा, राँची विश्वविद्यालय और अंत में पटना विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे । सन् 1959 में वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष हुए और मृत्युपर्यंत (12 सितंबर 1961 ई०) इस पद पर बने रहे।

हिंदी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक और नई शैली के आलोचक नलिन जी की रचनाएँ इस प्रकार हैं – ‘दृष्टिकोण’, ‘साहित्य का इतिहास दर्शन’, ‘मानदंड’, ‘हिंदी उपन्यास – विशेषतः प्रेमचंद’, ‘साहित्य तत्त्व और आलोचना’ – आलोचनात्मक ग्रंथ; ‘विष के दाँत’ और सत्रह असंगृहीत पूर्व छोटी कहानियाँ — कहानी संग्रह; केसरी कुमार तथा नरेश के साथ काव्य संग्रह – ‘नकेन के प्रपद्य’ और ‘नकेन- दो’, ‘सदल मिश्र ग्रंथावली’, ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मारक ग्रंथ’, ‘संत परंपरा और साहित्य’ आदि संपादित ग्रंथ हैं।

आलोचकों के अनुसार, प्रयोगवाद का वास्तविक प्रारंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ और उनकी कहानियों में मनोवैज्ञानिकता के तत्त्व समग्रता से उभरकर आए। आलोचना में वे आधुनिक शैली के समर्थक थे । वे कथ्य, शिल्प, भाषा आदि सभी स्तरों पर नवीनता के आग्रही लेखक थे। उनमें प्रायः परंपरागत दृष्टि एवं शैली का निषेध तथा आधुनिक दृष्टि का समर्थन है । आलोचना की उनकी भाषा गठी हुई और संकेतात्मक है । उन्होंने अनेक पुराने शब्दों को नया जीवन दिया, जो आधुनिक साहित्य में पुनः प्रतिष्ठित हुए ।

यह कहानी ‘विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ’ नामक कहानी संग्रह से ली गई है। यह कहानी मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है। कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी । आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है । यह कहानी सामाजिक भेद-भाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार-दुलार के कुपरिणामों को उभारती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्त्वपूर्ण बानगी पेश करती है ।

विष के दाँत Summary in Hindi

पाठ का सारांश

विष के दाँत शीर्षक कहानी के लेखक श्री नलिन विलोचन शर्मा हैं। उन्होंने अपने लेख में । सामंती मिजाज के धनवान् परिवार और उसी पर आश्रित एक गरीब परिवार का चरित्र-चित्रण किया है। कहानी में सेन साहब और उनकी पत्नी को कड़े अनुशासन को पालन करने वाला दिखाया गया है। उनके परिवार में पाँच लड़की के बाद एक लड़का का जन्म होता है। लड़कियों के ऊपर अनुशासन की छड़ी बहुत कड़ी है जिससे लड़कियाँ मानो मिट्टी की मूर्ति बन चुकी है। उसी परिवार में लड़का सबसे छोटा है। सारा अनुशासन घर का नियम-व्यवस्था सब कुछ उसके लिए फे है। लाड़-प्यार में शरारती हो चुका है। अभी उम्र पाँच वर्ष का है लेकिन नौकर, बहन आदि पर हाथ चला देता है।

एक दिन संन साहब अपने दोस्तों के साथ ड्राइंग रूम में गपशप कर रहे थे। उनके एक पत्रकार मित्र भी थे। उसके साथ छोटा लड़का भी था जो काशू बाबू के उम्र का ही था। बात-चीत के क्रम में किसी ने उस लड़के के बारे में जानकारी चाही, बस सेन साहब अपने पुत्र खोखा के बारे में बोलने लगे। इसे इंजीनियर बनाना है। और बोलते ही चले गये। सेन साहब व्यवहार में परिवर्तन हो चुका था अपने पुत्र खोखा के लिए।

उन्हीं अहाते में गिरधर लाल रहता था। उसका छोटा लड़का मदन था जो खोखा के उम्र का था। एक दिन गाड़ी को गन्दा कर रहा था। रात में सेन साहब ने गिरधरलाल को बुलाकर काफी डाँटा। परिणामतः गिरधरलाल ने अपने बेटे मदन को खूब पीटा। रात में सोने वक्त सेनसाहब । मदन की रोने की आवाज सुनकर काफी खुश हुए।

अगले ही दिन काशू बाबू खेलने के लिए बगल के गली में चले गये। जहाँ मदन और अन्य लड़का लटू नचा रहा था। खोखा ने मदन से रौब में लटू माँगा। नहीं मिलने पर मदन पर चूंसा चला दिया। बदले में मदन ने भी घूसा चला दिया। और काशू बाबू के दो दाँत टूट गये। यानी विष के दाँत टूट गये।

शब्दार्थ

बरसाती : पोर्टिको
नाज : गर्व, गुमान
तहजीब : सभ्यता
शोफर : ड्राइवर
शामत : दुर्भाग्य
सख्त : कड़ा, कठोर
ताकीद : कोई बात जोर देकर कहना, चेतावनी
खोखा-खोखी : बच्चा-बच्ची (बाँग्ला)
फटकना : निकट आना
तमीज : विवेक, बुद्धि, शिष्टता
तालीम : शिक्षा
सोसाइटी : शिष्ट समाज, भद्रलोक
रश्क : इर्ष्या
ताल्लुक : संबंध
हकीकत : सच्चाई, वास्तविकता
आविर्भाव : उत्पत्ति, प्रकट होना
दुर्ललित : लाड़-प्यार में बिगड़ा हुआ
ट्रेंड : प्रशिक्षित
दूरदेशी : दूरदर्शिता, समझदारी
फरमाना : आग्रहपूर्वक कहना
फिजल : फालतू, व्यर्थ
वाकिफ : परिचित
वाकया : घटना
हेसियत : स्तर, प्रतिष्ठा, सामर्थ्य, औकात
अखबारनवीस : पत्रकार
प्रच्छन्न : छिपा हुआ, गुप्त, अप्रकट
अदब : शिष्टता, सभ्यता
हिकमत : कौशल, योग्यता
रासत : विदाई
बलौस : नि:स्वार्थ
बेयरा : खाना खिलाने वाला सेवक
चीत्कार : क्रंदन, आर्त होकर चीखना
शयनागार : शयनकक्ष, सोने का कमरा
खलल : विघ्न, बाधा, व्यवधान
कातर : आर्त
खेतयत : कुशलक्षेम
बेडब : बेतरीका, अनगढ़
उज्र : आपत्ति
मजाल : ताकत, हिम्मत, साहस
अक्ल : बुद्धि
दुर्दमनीय : मुश्किल से जिसका दमन किया जा सके
निष्ठुरता : क्रूर निर्ममता

Bihar Board Class 9 History Solutions Chapter 3 फ्रांस की क्रान्ति

Bihar Board Class 9 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 1 Chapter 3 फ्रांस की क्रान्ति Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 9 Social Science History Solutions Chapter 3 फ्रांस की क्रान्ति

Bihar Board Class 9 History फ्रांस की क्रान्ति Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न :

फ्रांस की क्रांति प्रश्न उत्तर Class 9 Bihar Board प्रश्न 1.
फ्रांस की राजक्रांति किस ई० में हुई ?
(क) 1776
(ख) 1789
(ग) 1776
(घ) 1832
उत्तर-
(ख) 1789

फ्रांस की क्रांति प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
बैस्टिल का पतन कब हुआ?
(क) 5 मई, 1789
(ख) 20 जून, 1789
(ग) 14 जुलाई, 1789
(घ) 27 अगस्त, 1789
उत्तर-
(ग) 14 जुलाई, 1789

Bihar Board Class 9 History Solution Chapter 3 प्रश्न 3.
प्रथम एस्टेट में कौन आते थे?
(क) सर्वसाधारण
(ख) किसान
(ग) पादरी
(घ) राजा
उत्तर-
(ग) पादरी

Bihar Board Class 9 History Book Solution प्रश्न 4.
द्वितीय एस्टेट में कौन आते थे?
(क) पादरी
(ख) राजा
(ग) कुलीन
(घ) मध्यमवर्ग
उत्तर-
(ग) कुलीन ।

Bihar Board 9th Class Social Science Book Pdf प्रश्न 5.
तृतीय एस्टेट में इनमें से कौन थे?
(क) दार्शनिक
(ख) कुलीन
(ग) पादरी
(घ) न्यायाधीश
उत्तर-
(क) दार्शनिक

फ्रांस की क्रांति प्रश्न उत्तर Pdf Bihar Board प्रश्न 6.
बोल्टेमर क्या था?
(क) वैज्ञानिक
(ख) गणितज्ञ
(ग) लेखक
(घ) शिल्पकार
उत्तर-
(ग) लेखक

Bihar Board Class 9 Social Science Solution प्रश्न 7.
रूसो किस सिद्धान्त का समर्थक था?
(क) समाजवाद
(ख) जनता की इच्छा
(ग) शक्ति पृथक्करण
(घ) निरंकुशता (General Will)
उत्तर-
(ख) जनता की इच्छा

Itihas Ki Duniya Class 9 Bihar Board प्रश्न 8.
मांटेस्क्यू ने कौन-सी पुस्तक लिखी?
(क) समाजिक संविदा
(ख) विधि का आत्मा
(ग) दास केपिटल
(घ) वृहत ज्ञानकोष
उत्तर-
(ख) विधि का आत्मा

फ्रांस की क्रांति के परिणामों का उल्लेख करें Bihar Board प्रश्न 9.
फ्रांस की राजक्रांति के समय वहाँ का राजा कौन था ?
(क) नेपोलियन
(ख) लुई चौदहवाँ
(ग) लुई सोलहवाँ
(घ) मिराब्यो
उत्तर-
(ग) लुई सोलहवाँ

फ्रांस की क्रांति के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 10.
फ्रांस में स्वतंत्रता दिवस कब मनाया जाता है ?
(क) 4 जुलाई
(ख) 14 जुलाई
(ग) 21 अगस्त
(घ) 31 जुलाई
उत्तर-
(ख) 14 जुलाई

I. रिक्त स्थान की पूर्ति करें-

1. लुई सोलहवाँ सन् …………… ई० में फ्रांस की गद्दी पर बैठा।
2. …………… लुई सोलहवाँ की पत्नी थी। 3. फ्रांस की संसदीय संस्था को …………… कहते थे।
4. ठेका पर टैक्स वसूलने वाले पूँजीपतियों को …………… कहा जाता था।
5. …………. के सिद्धन्त की स्थापना मांटेस्क्यू ने की।
6. ………….. की प्रसिद्ध पुस्तक ‘सामाजिक संविदा’ है।
7. 27 अगस्त, 1789 को फ्रांस की नेशनल एसेम्बली ने …………… की घोषणा थी।
8. जैकोबिन दल का प्रसिद्ध नेता …………… था।
9. दास प्रथा का अंतिम रूप से उन्मूलन …………… ई० में हुआ।
10. फ्रांसीसी महिलाओं को मतदान का अधिकार सन् ……….. ई० में मिला।
उत्तर-
1.1774,
2. मेरी अन्तोयनेत,
3. स्टेट जेनरल,
4. टैक्सफार्मर,
5. शक्ति पृथक्करण,
6. रूसो,
7. मानव और नागरिकों के अधिकार,
8. मैक्समिलियन राब्स पियर,
9. 1848,
10. 1946

लघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Solution Class 9 History प्रश्न 1.
फ्रांस की क्रांति के राजनैतिक कारण क्या थे?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति के राजनैतिक कारण निम्नलिखित थे।
(i) निरंकुश राजशाही। (ii) राज-दरबार की विलासिता । (iii) प्रशासनिक भ्रष्टाचार। (iv) संसद की बैठक 175 वर्षों तक नहीं बुलाई गयी। (v) अत्यधिक केन्द्रीयकरण की नीति। (vi) स्वायत्त शासन का अभाव। (vii) मेरी अन्तोयनेत का प्रभाव।
इन्हीं कारणों से फ्रांस की राज्य क्रान्ति हुई।

फ्रांसीसी क्रांति पाठ के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
फ्रांस की क्रांति के सामाजिक कारण क्या थे?
उत्तर-
फ्रांस में समाज तीन वर्गों में विभक्त था- (i) प्रथम एस्टेट में पादरी (ii) दूसरे एस्टेट में अभिजात वर्ग । (iii) तीसरे एस्टेट में सर्वसाधारण । प्रथम और द्वितीय वर्ग करों से मुक्त थे। फ्रांस की कुल भूमि का 40% इन्हीं के पास थी। 90 प्रतिशत जनता तीसरे एस्टेट में थी, जिनको कोई भी विशेषाधिकार प्राप्त नहीं था वे अपने स्वामी की सेवा घर एवं खेतों में काम करना । डाक्टर, वकील, जज, अध्यापक भी इसी वर्ग में थे। इन लोगों में भारी असंतोष था। यही वर्ग क्रांति का कारण बना।

France Ki Kranti Class 9 Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
क्रांति के आर्थिक कारणों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-

  • फ्रांस की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसे सुधारने के लिए वहाँ की जनता पर करों का बोझ लाद दिया गया था।
  • करों का विभाजन दोष पूर्ण था । प्रथम और द्वितीय वर्ग करों से मुक्त था, जबकि जनसाधारण को कर चुकाने पड़ते थे ।
  • किसानों पर भूमि पर, धार्मिक कर, सामन्ती कर आदि लगे थे। दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी कर देने पड़ते थे।
  • औद्योगिक क्रांति शुरू होने से मशीनों का उपयोग शुरू हुआ और बेरोजगारों की संख्या बढ़ने लगी।
  • व्यापारियों पर अनेक तरह के कर लगाए गए थे। जैसे—गिल्ड की पाबन्दी, सामन्ती कर, प्रान्तीय आयात कर इत्यादि । इस कारण यहाँ का व्यापार का विकास नहीं हो पाया। ये सभी कारण क्रांति को प्रोत्साहित किया।

Class 9 फ्रांस की क्रांति प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 4.
फ्रांस की क्रांति के बौद्धिक कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर-
फ्रांसीसी क्रान्ति के विषय में कहा जाता है कि यह एक मध्यम वर्गीय क्रान्ति थी । फ्रांस की स्थिति बड़ी गंभीर थी इस स्थिति को समझने या स्पष्ट करने में दार्शनिकों ने बड़ा योगदान दिया। फ्रांस के अनेक दार्शनिक, विचारक और लेखक हुए । इन लोगों ने तत्कालीन व्यवस्था पर करारा प्रहार किया । जनता इनके विचारों से गहरे रूप से प्रभावित हुए और क्रांति के लिए तैयार हो गई। इनमें प्रमुख मांटेस्क्यू, वाल्टेयर और रूसो थे।

  • मांटेस्क्यू ने अपनी पुस्तक ‘विधि की आत्मा’ में सरकार के तीनों अंगों-कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका–को एक ही हाथ । में केन्द्रित नहीं होनी चाहिए ऐसा होने से शासन निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी नहीं होगा। ऐसा बताकर उन्होंने शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त का पोषण किया।
  • रूसो पूर्ण परिवर्तन चाहते थे। उसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सामाजिक संविदा’ में जनमत को ही सर्व शक्तिशाली माना । अतः जनतंत्र का समर्थक था।
  • अन्य बुद्धिजीवी जिनमें ददरों प्रमुख थे । इन्होंने ‘वृहत ज्ञानकोष’ के लेखों से फ्रांस में क्रांन्तिकारी विचारों का प्रचार किया। फ्रांस के अर्थशास्त्रियों क्वेजनों एवं तुर्गों ने समाज में आर्थिक शोषण एवं नियंत्रण की आलोचना की और मुक्त व्यापार का समर्थन किया ।

Bihar Board Solution Class 9 Social Science Objective प्रश्न 5.
‘लेटर्स-डी-केचेट’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
लेटर्स-डी-केचेट’ से फ्रांस में बिना अभियोग के गिरफ्तारी वारंट होता था । फ्रांस में सभी तरह की स्वतंत्रताओं का अभाव था। भाषण, लेखन, विचार की अभिव्यक्ति तथा धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण अभाव था । वहाँ राजधर्म कैथोलिक था और प्रोटेस्टेंट धर्म के मानने वालों को कठोर सजा दी जाती थी। ऐसे धर्मावलवियों को राजा बिना अभियोग के रिरफ्तारी वारंट देता था। उसे ही लेटर्स-द-केचेट (Letters-decachet) कहते थे।

प्रश्न 6.
अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम का फ्रांस की क्रांति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम का फ्रांस की क्रांति पर बहुत प्रभाव पड़ा। अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में लफायते के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना ने इंग्लैण्ड के विरुद्ध युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने वहाँ देखा था कि अमेरिका के 13 उपनिवेशों ने कैसे औपनिवेशिक शासन को समाप्त कर लोकतंत्र की स्थापना की थी। स्वदेश वापस लौटकर उनलोगों ने देखा कि जिन सिद्धान्तों की रक्षा के लिए वे अमेरिका में युद्ध कर रहे थे उनका अपने देश में ही अभाव था। वे सैनिक फ्रांस में क्रांति का अग्रदूत बनकर लोकतंत्र का संदेश फैलाने लगे । जनसाधारण पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा अंत में वह फ्रांस की क्रान्ति का तात्कालिक कारण बन गया ।

प्रश्न 7.
‘मानव एवं नागरिकों के अधिकार से’ आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
14 जुलाई, 1789 के बाद लुई सोलहवाँ नाम मात्र के लिए राजा बना रहा और नेशनल एसेम्बली देश के लिए अधिनियम बनाने लगी। इसी सभी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी.27 अगस्त, 1789 को ‘मानव और नागरिकों के अधिकार’ (The Declaration of the rights of man and citizen)इसमें समानता, स्वतंत्रता, संपत्ति की सुरक्षा तथा अत्याचारों से मुक्ति के अधिकार को नैसर्गिक और अहरणीय’ माना गया । व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ प्रेस एवं भाषण की स्वतंत्रता भी मानी गयी । अब राज्य किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार नहीं कर सकता था। तथा मुआवजा दिए बिना उसके जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता था। इन अधिकारों की सुरक्षा करना राज्य का दायित्व माना गया । मध्यम वर्ग के लिए सबसे महत्वूपर्ण घोषणाएँ थीं। 90% सामान्य जनता को उन समस्याओं से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया गया जिनका सामना उन्हें निरंकुश राजशाही में करना पड़ता था।

प्रश्न 8.
फ्रांस की क्रांति का इंग्लैण्ड पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति का प्रभाव सिर्फ फ्रांस पर ही नहीं बल्कि यूरोप के अन्य देशों पर भी पड़ा । नेपोलियन फ्रांस में सुधार के कार्यों को करते हुए अपने विजय अभियान के दौरान जब इटली और जर्मनी आदि देशों में पहुँचा, तब उसे वहाँ की जनता भी ‘क्रांति का अग्रदूत’ कहकर स्वागत किया । इसने इन देशों के नागरिकों को राष्ट्रीयता का संदेश देने का कार्य किया। इंग्लैण्ड पर प्रभाव-नेपोलियन का विजय अभियान इंग्लैण्ड पर भी हुआ, क्रान्ति का इतना अधिक असर इंग्लैण्ड में दिखा कि वहाँ की जनता ने भी सामन्तवाद के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी । फलस्वरूप सन् 1832 ई० में इंग्लैण्ड में ‘संसदीय सुधार अधिनियम’ पारित हुआ; जिसके द्वारा वहाँ के जमींदारों की शक्ति समाप्त कर दी गयी और जनता के लिए अनेक सुधारों का मार्ग खुल गया । भविष्य में, इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रान्ति के विकास में इस क्रांति का बहुत योगदान रहा ।

प्रश्न 9.
फ्रांस की क्रांति ने इटली को प्रभावित किया, कैसे?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति ने इटली को बहुत प्रभावित किया । इटली इस समय कई भागों में बँटा हुआ था । फ्रांस की इस क्रान्ति के बाद इटली के विभिन्न भागों में नेपोलियन ने अपनी सेना एकत्रित कर लड़ाई की तैयारी की और ‘इटली राज्य’ स्थापित किया। एक साथ मिलकर युद्ध करने से उनमें राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ और इटली में भावी एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

प्रश्न 10.
फ्रांस की क्रांति से जर्मनी कैसे प्रभावित हुआ?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति से जर्मनी भी अछूता नहीं रहा। जर्मनी भी उस समय छोटे-छोटे 300 राज्यों में विभक्त था, जो नेपोलियन के ही प्रयास से 38 राज्यों में सिमट गया । इस क्रान्ति में ‘स्वतंत्रता’, ‘समानता’ एवं ‘बन्धुत्व’ की भावना को जर्मनी के लोगों ने अपनाया और आगे चलकर इससे जर्मनी के एकीकरण करने में बल प्राप्त हुआ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फ्रांस की क्रांति के क्या कारण थे?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति 1789 ई० में हुई। इसके निम्नलिखित कारण थे
(i) सामाजिक कारण-फ्रांस में समाज तीन वर्गों-उच्च मध्यम तथा निम्न । प्रथम दोनों श्रेणियों में बडे सामन्त, पादरी तथा कुलीन वर्ग के व्यक्ति थे । इन्हें किसी भी प्रकार का कोई कर नहीं देना पड़ता था और 40% जमीन के भी यही मालिक थे। तृतीय श्रेणी वालों के जिसमें सर्वसाधारण व्यक्ति डाक्टर, वकील, व्यापारी आदि थे जिन्हें सभी प्रकार का कर देना पड़ता था। फलतः यह वर्ग जिनकी संख्या 90% थी परिवर्तन चाहते थे।

(ii) राजनीतिक कारण-फांस का राजा अपने को ही राज्य मानता था। उसका कथन था ‘मैं ही राज्य हूँ।” यह कथन लुई चौदहवाँ का कथन था। शासन की एकरूपता नहीं थी 1 पादरी और कुलीन लोगों के लिए कानून अलग थे । जनसाधारण के लिए अलग । सेना असंतुष्ट थी । शासन भ्रष्टाचारी हो चुका था।

(iii) आर्थिक कारण-
(क) फ्रांस का राजा और रानी मेरी अन्तोयनेत अत्यन्त खर्चीले थे । राज्यकोष खाली हो गया था ।
(ख) धनी लोग कर्ज से मुक्त थे जन साधारण को हर तरह के कर्ज देने पड़ते थे। अतः विधि दोष पूर्ण थी।
(ग) फ्रांस में 15000 बड़े पदाधिकारी अपार धन वेतन में पाते थे।
(घ) इस प्रकार फ्रांस का खजाना खाली हो गया था।

(iv) बौद्धिक कारण-फ्रांस की स्थिति तो खराब थी ही, परन्तु इस स्थिति को स्पष्ट करने में योगदान दिया फ्रांस के दार्शनिकों ने ।
(क) रूसो अपनी पुस्तक “सामाजिक संविदा” में राजा के दैवी अधिकार पर प्रहार किया।
(ख) वाल्टेयर ने चर्च, समाज और राजतंत्र के दोषों का पर्दाफास किया।
(ग) मांटेस्क्यू ने अपनी पुस्तक ‘विधि का आत्मा’ में सरकार के अंदर विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के बीच सत्ता विभाजन की बात कही।

(v) तात्कालिक कारण-इस प्रकार उपर्युक्त कारणों के कारण फ्रांस की क्रान्ति हुई।

प्रश्न 2.
फ्रांस की क्रांति के परिणामों का उल्लेख करें।
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति के निम्नलिखित परिणाम हुए

  • पुरातन व्यवस्था का अन्त-इस क्रान्ति ने पुरातन व्यवस्था (Anceient Regime) को समाप्त कर दिया । आधुनिक युग का आरम्भ हुआ जिसमें स्वतंत्रता’, ‘समानता’ तथा ‘बन्धुत्व’ को प्रोत्साहन मिला। सामन्तवाद का अंत हो गया।
  • धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना-क्रान्ति के फलस्वरूप धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना हुई। बुद्धिवाद का उदय हुआ और जनता को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई।
  • जनतंत्र की स्थापना-फ्रांस की क्रान्ति ने राजा के दैवी अधिकार के सिद्धान्त को समाप्त कर दिया तथा जनतंत्र की स्थापना की।
  • व्यक्ति की महत्ता-1791 ई० में फ्रांस के नेशनल एसेम्बली ने पहली बार नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की घोषणा की तथा स्वतंत्रता एवं समानता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।
  • समाजवाद का आरम्भ-फ्रांसीसी क्रान्ति ने समाजवाद का बीजारोपण किया । जैकोबिनों ने बहुसंख्यक गरीबों को अनेक सुविधाएँ दी। अमीरी-गरीबी का भेद मिटाने का प्रयास हुआ। खाद्य-पदार्थों के मूल्य निर्धारित किए गए।
  • वाणिज्य व्यापार में वृद्धि-क्रान्ति के फलस्वरूप गिल्ड प्रथा, प्रान्तिक आयात कर तथा अन्य व्यापारिक प्रतिबंध व्यापारियों पर से हटा दिए गए, जिससे वाणिज्य एवं व्यापार का विकास हुआ । यही कारण था कि उन्नीसवीं शताब्दी में व्यापार के क्षेत्र में फ्रांस इंग्लैण्ड के बाद द्वितीय स्थान पर था।
  • दास प्रथा का उन्मूलन-सन 1794 ई० में कन्वेशन ने ‘दास मुक्ति कानून’ पारित किया । पुनः 1848 ई० में अंतिम रूप में फ्रांसीसी उपनिवेशों से दास प्रथा का अंत हो गया।
  • महिला आन्दोलन-क्रान्ति में महिलाएं भी शामिल हुई थी उन्होंने ‘The society of Revolutionary and Republican women’ नामक संस्था का गठन किया जिसमें ओलम्प दे गूज नामक नेत्री की अहम भूमिका थी। इनके नेतृत्व में महिलाओं को पुरुषों के समान राजनैतिक अधिकार की मांग को स्वीकार लिया गया। आन्दोलन चलता रहा और अन्त में 1946 ई० में महिलाओं को मताधि कार प्राप्त हो गया ।
  • सरकार पर शिक्षा का उत्तरदायित्व-फ्रांस में अभी तक चर्च में शिक्षा का प्रबन्ध था। अब इसकी जिम्मेवारी सरकार पर आ गयी। फलस्वरूप पेरिस विश्वविद्यालय तथा कई शिक्षण संस्थान एवं शोध संस्थान फ्रांस में खोले गए।
  • राष्ट्रीय कैलेंडर भी लागू कर दिया गया जिसका नया नाम ब्रुमेयर, थर्मिडर आदि रखा गया।

प्रश्न 3.
फ्रांस की क्रांति एक मध्यमवर्गीय क्रांति थी, कैसे?
उत्तर-
फ्रांस में सबसे अधिक असंतोष मध्यम वर्ग में था जिसका सबसे बड़ा कारण यह था कि सुयोग्य एवं सम्पन्न होते हुए भी उन्हें कुलीनों जैसा सामाजिक सम्मान प्राप्त नहीं था । सम्पन्नता और उन्नति के बावजूद भी वे सभी तरह के राजनैतिक अधिकारों से वंचित थे । राज्य में सभी बड़े पद कुलीनों के लिए सुरक्षित थे । उनका मानना था कि सामाजिक ओहदे का आधार योग्यता होनी चाहिए, न कि वंश ।

मध्यम वर्ग के साथ कुलीन वर्ग के लोग बहुत बुरा और असमानता का व्यवहार करते थे। यह बात उन्हें बहुत अपमानजनक लगती थी। इसी वजह से फ्रांस की क्रांति का सबसे महत्त्वपूर्ण नारा ‘समानता’ था जिसे मध्यम वर्ग ने आगाज किया। मध्यम वर्ग में शिक्षित वर्ग के लोगों ने तत्कालीन राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक दोषों को पर्दाफाश किया और जनमानस में आक्रोश पैदा किया । फ्रांसीसी बुद्धिजीवियों ने फ्रांस में बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात किया । इनमें मांटेस्क्यू, वोल्टेयर और रूसो थे । मांटेस्क्यू ने अपनी पुस्तक ‘विधि की आत्मा’ में सरकार के तीनों अंगों को पृथक-पृथक करने पर बल दिया रूसो । पूर्ण परिवर्तन चाहते थे। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘सामाजिक संविदा’ में राज्य को व्यक्ति द्वारा निर्मित संस्था और सामान्य इच्छा को संप्रभु माना है। अत: जनतंत्र का समर्थक था।

फ्रांस में क्वेजनों एवं तुर्गो जैसे अर्थशास्त्रियों ने समाज में अधिक शोषण एवं आर्थिक नियंत्रण की आलोचना करते हुए मुक्त व्यापार का
समर्थन किया।

इस प्रकार मध्यमवर्गीय लोगों में राजा एवं कुलीन वर्ग के लोगों के प्रति घृणा की भावना थी जो क्रान्ति का रूप ले लिया। इसीलिए फ्रांस की क्रान्ति को मध्यमवर्गीय क्रान्ति कहा जाता है।

प्रश्न 4.
फ्रांस की क्रांति में वहाँ के दार्शनिकों का क्या योगदान था?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति में वहाँ के दार्शनिकों का महत्त्वपूर्ण योगदान था। फ्रांस में अनेक दार्शनिक हुए जिन्होंने तत्कालीन व्यवस्था पर करारा प्रहार किया। उनमें मांटेस्क्यू, वाल्टेयर और रूसो प्रमुख थे।
(i) मांटेस्क्य-यह उदार विचारों वाला दार्शनिक था । इसने राज्य और चर्च दोनों की कटु आलोचना की वे जानते थे कि जीवन, संपत्ति एवं स्वतंत्रता मानव के जन्मसिद्ध अधिकार है। मॉटेस्क्यू की सबसे बड़ी देन शक्ति के पृथक्करण का सिद्धान्त है। अपनी पुस्तक ‘विधि की आत्मा’ । इसके अनुसार राज्य की शक्तियाँ कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका-एक ही हाथ में केन्द्रित नहीं होनी चाहिए । इस जनता भलीभाँति समझ रही थी। अतः इनके विचार क्रान्ति का कारण था।

(ii) वाल्टेयर-इसने भी चर्च की आलोचना की। अपने क्रान्ति विचारों के कारण वह जाना जाता था। उसका सिद्धन्त था कि राजतंत्र प्रजाहित में होना चाहिए।

(iii) रूसो-रूसो फ्रांस का सबसे बड़ा दार्शनिक था । वह लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था का समर्थक था। अपनी पुस्तक ‘सामाजिक संविदा’ (Social contract) में उसने ‘जनमत’ को ही सर्वशक्तिशाली माना । राज्य जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए बनी थी। अत: वह वर्तमान स्थिति से असंतुष्ट था । रूसो के अनुसार व्यक्ति द्वारा निर्मित संस्था और सामान्य इच्छा को संप्रभु माना । अतः वह जनतंत्र का समर्थक था । रूसा के क्रान्तिकारी विचारों ने फ्रांस में क्रान्ति के विस्फोट के लिए पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

(iv) दिदरो-दिदरो के ‘वृहत् ज्ञान कोष’ (eucyclopaedia) के लेखों के द्वारा इसने निरंकुश राजतंत्र, सामंतवाद एवं जनता के शोषण की घोर भर्त्सना की। इसका भी प्रभाव फ्रांसीसी जनता पर खूब पड़ा।

(v) क्वेजनों एवं तुर्गो-इन अर्थशास्त्रियों ने समाज में आर्थिक शोषण एवं आर्थिक नियंत्रण की आलोचना करते हुए मुक्त व्यापार का समर्थन किया।

इन सभी का फ्रांस की जनता पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 5.
फ्रांस की क्रांति की देनों का उल्लेख करें।
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति 1789 ई० में हुई थी। इस क्रान्ति से न केवल फ्रांस बल्कि संसार के समस्त देश इसके देनों से स्थाई रूप से प्रभावित हुए । वास्तव में इस क्रान्ति के कारण एक नये युग का उदय हुआ। इसके तीन प्रमुख सिद्धान्त समानता, स्वतंत्रता और मातृत्व की भावना पूरे विश्व के लिए अमर वरदान सिद्ध हुए । इन्हीं आधारों पर संसार के अनेक देशों में एक नये समाज की स्थापना का प्रयत्न किया गया । यह महान देन है ।

  •  स्वतंत्रता-स्वतंत्रता फ्रांसीसी क्रान्ति का एक मूल सिद्धान्त था । इस सिद्धान्त से यूरोप के लगभग सभी देश बड़े प्रभावित हुए । फ्रांस में मानव अधिकारों की घोषणा पत्र द्वारा सभी लोगों को उनके अधिकारी से परिचित कराया गया। देश में आर्द्धदोस (Serfdom) का अंत कर दिया गया। इस प्रकार निर्धन किसानों को सामंतों से छुटकारा मिल सका।
  • समानता-सभी के लिए समान कानून बना । वर्ग भेद मिट गया ।
  • लोकतंत्र-फ्रांस की क्रान्ति ने निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी शासन का अंत कर दिया और इसके स्थान पर लोकतंत्रात्मक शासन की स्थापना हुई।
  • दार्शनिक-फ्रांस की क्रान्ति के समय में ही फ्रांस के महान दार्शनिकों की पुस्तकें सामने आईं जैसे मांटेस्क्यू की पुस्तक ‘विधि का आत्मा’ । रूसो की पुस्तक ‘सामाजिक संविदा’ तथा दिदरो केलोस ‘वृहत् ज्ञान कोष’। ये सभी असाधारण पुस्तकें हैं जो क्रान्ति की महान देन है।

प्रश्न 6.
फ्रांस की क्रांति ने यूरोपीय देशों को किस तरह प्रभावित किया।
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति का विश्वव्यापि प्रभाव पड़ा संसार का कोई भी देश अछूता न रहा । खासकर यूरोप तो इसके व्यापक प्रभाव में आया ।

  • फ्रांस की क्रान्ति की देखा-देखी सामंती व्यवस्था को मिटाने के लिए एवं समानता के सिद्धान्त को लागू करने का प्रयास किया गया ।
  • नेपोलियन ने यूरोपीय राष्ट्रों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत कर दी। इसलिए इटली के भावी एकीकरण की नीव पड़ी।
  • नेपोलियन ने पोलैंड के लोगों के सामने भी एक संयुक्त तस्वीर रखी जो प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पूरी हुई।
  • जर्मनी में कुल 300 राज्य थे । नेपोलियन के प्रयास से 38 राज्य रह गए सबों को मिलाकर एक कर दिया ।
  • द्वितीय ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना में भी फ्रांसीसी क्रान्ति का योगदान था । इससे प्रेरणा लेकर ही इंग्लैण्ड में 1832 ई० का रिफार्म एक्ट (Reform Act) पारित हुआ । इससे संसदीय प्रणाली में सुधार हुआ ।

प्रश्न 7.
‘फ्रांस की क्रांति एक युगान्तकारी घटना थी’ इस कथन की पुष्टि
करें।
उत्तर-
सन् 1789 की फ्रांस की क्रांन्ति यूरोप के इतिहास में एक युगान्तकारी घटना थी, जिसने एक युग का अंत और दूसरे युग के आगमन का मार्ग प्रशस्त किया और दूसरे युग के आगमन का मार्ग प्रशस्त किया । सन 1789 के पूर्व फ्रांस में जो स्थिति व्याप्त थी उसे प्राचीन राजतंत्र के नाम से जाना जाता है इस समय सामन्ती व्यवस्था थी। समाज तीन वर्गों में विभाजित था

(i) कुलीन वर्ग (ii) पादरी वर्ग (iii) साधारण वर्ग । इसमें प्रथम और द्वितीय वर्ग को किसी प्रकार के टैक्स नहीं देने पड़ते थे। राजा स्वेच्छाचारी था । फ्रांस में प्रतिनिधि संस्थाओं का सर्वथा अभाव था। यद्यपि स्टेट्स जेनरल नामक प्रतिनिधि सभा थी तथापि 1614 के बाद इसकी बैठक ही नहीं हुई थी।

राज्य में कानूनी एकरूपता का अभाव था । राजा की इच्छा ही कानून थी राजा कहता था ‘मैं ही राज्य हूँ’ राजा की इच्छा को चुनौती नहीं दी जा सकती थी। राजा और कुलीन वर्ग ऐश-आराम की जिंदगी व्यतीत करते थे। चर्च भी राज्य में एक प्रभावशाली संस्था थी। 90 प्रतिशत जनता किसान थी जो विभिन्न प्रकार के कर से परेशान थी महँगाई की मार से ‘जीविका का संकट’ का उत्पन्न हो गया था।

उधर गिल्ड (व्यापारिक संगठन) प्रान्तीय क्रान्ति कानून अवाध रूप से व्यापार की प्रगति नहीं होने देते थे। इस तरह फ्रांस की पुरातन व्यवस्था को समाप्त कर स्वतंत्र विचार करने वाले समाज की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया । चूँकि फ्रांस ने इस युद्ध में ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिका की. मदद की थी, अत: अमेरिका के बाद स्वतंत्रता की लहर फ्रांस में आई जो यूरोप के इतिहास में एक युगान्तकारी घटना कहलाई।

प्रश्न 8.
फ्रांस की क्रांति के लिए लुई सोलहवाँ किस तरह उत्तरदायी था?
उत्तर-
लुई चौदहवाँ के बाद फ्रांस की गद्दी पर लुई सोलहवाँ गद्दी पर बैठा, जो अयोग्य और निरंकुश था । फ्रांस की क्रान्ति के लिए निम्नलिखित बातों के कारण उत्तरदायी था
(i) निरंकुश राजशाही-फ्रांस की क्रान्ति के समय में लुई सोलहवाँ गद्दी पर था । राजा के हाथों में सारी शक्ति केन्द्रित थी लुई सोलहवाँ का कहना था कि ‘मेरी इच्छा ही कानून है।’ इस व्यवस्था में राजा की आज्ञा नहीं मानना एक अपराध था। फ्रांस में राजा की निरंकुशता को नियंत्रित करने के लिए ‘पार्लमा’ नामक एक संस्था थी। यह एक प्रकार का न्यायालय था । इसमें केवल कुलीन वर्ग वाले ही न्यायाधीश थे। जो राजा का ही सर्मथन करती थी।

(ii) मेरी अन्तोयनेत का प्रभाव-लुई सोलहवाँकी पत्नी मेरी अन्तोयनेन थी जो फिजूलखर्ची के लिए प्रसिद्ध थी। यह उत्सवों में काफी रुपये लुटाती थी, और अपने खास आदमियों को ओहदे दिलाने के लिए राजकार्य में दखल देती रहती थी। रानी निर्ममतापूर्वक अपने भोग विलास पर खर्च करती थी।

(iii) प्रशासनिक भ्रष्टाचार-राजा के सलाहकार और अधिकारी भ्रष्ट थे । राजा के वर्साय स्थित राजा महल में पन्द्रह हजार अधिकारी एसे थे जो को भी काम नहीं करते थे, मगर अपार धन राशि वेतन के रूप में लेते थे । राजस्व का 1 प्रतिशत इन्हीं पर व्यय होता था । इससे प्रशासन पर बुरा प्रभाव पड़ा।

(iv) स्वायत्त शासन का अभाव-इसका सर्वथा अभाव था । फ्रांस में हर जगह वर्साय के राजमहल की ही प्रधानता थी। राजा के अलावे मेरी अन्तोयनेत के द्वारा शासन का दुरुपयोग किया जाता था, जिससे जन साधारण की धारणाएँ राजतंत्र के बिलकुल खिलाफ हो गयी।
इसे हर तरफ से देखने से पता चलता है कि लुई सोलहवाँ एक मात्र दोषी थी। अतः 1789 ई० तक आते-आते जन साधारण शासन में भाग लेने के लिए उतावला होने लगे।

प्रश्न 9.
फ्रांस की क्रांति में जैकोबिन दल का क्या भूमिका थी?
उत्तर-
सन् 1791 ई० में नेशनल एसेम्बली ने संविधान का प्रारूप तैयार किया। इसमें शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को अपनाया गया। यद्यपि लुई सोलहवाँ ने इस सिद्धान्त को मान लिया, परन्तु मिराव्या की मृत्यु के बाद देश में हिंसात्मक विद्रोह की शुरुआत हो गयी। इसमें समानता के सिद्धान्त की अवहेलना की गई बहुसंख्यकों को मतदान से वंचित रखा गया था सिर्फ धनी लोगों को ही यह अधिकार दिया गया । इस तरह बुर्जुआ वर्ग का प्रभाव बढ़ा इस बढ़ते असंतोष की अभिव्यक्ति नागरिक राजनीतिक क्लबों में जमा होकर करते थे। इन लोगों ने अपना एक दल बनाया जो ‘जैकोबिन दल’ कहलाया इन लोगों ने अपने मिलने का स्थान पेरिस के ‘कॉन्वेंट ऑफ सेंट जेक्ब’ को बनाया । यह आगे चलकर ‘जैकोबिन क्लब’ के नाम से जाना जाने लगा। इस क्लब के सदस्य थे-छोटे दुकानदार, कारीगर, मजदूर आदि । इसका नेता मैक्स मिलियन रॉब्सपियर था। इसने 1792 ई० में खाद्यानों की कमी एवं महंगाई को मुद्दा बनाकर जगह-जगह विद्रोह करवाए ।

जैकोबिन के कार्य-रॉब्सपियर वामपंथी विचारधारा का समर्थक था। इसने आंतक का राज्य स्थापित किया चौदह महीने में लगभग 17 हजार व्यक्तियों पर मुकदमे चलाये गए और उनहें फाँसी दे दी गई।

प्रत्यक्ष प्रजातंत्र का पोषक रॉब्सपियर प्रजातंत्र का पोषक था । 21 वर्ष से अधिक उम्र वालों को मतदान का अधिकार देकर, चाहे उनके पास सम्पत्ति हो या न हो, चुनाव कराया गया । 21 सितम्बर, 1792 ई० को नव निर्वाचित एसेम्बली को कन्वेंशन नाम दिया गया तथा राजा की सत्ता को समाप्त कर दिया गया । देशद्रोह के अपराध में लुई सोलहवाँ पर मुकदमा चलाया गया और 21 जनवरी, 1793 ई० को उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया गया।

रॉब्सपियर का अंत-रॉब्सपियर का आतंक राज्य 1793 ई० तक उत्कर्ष पर था । राष्ट्र का कलेन्डर 22 सितम्बर, 1792 को लागू किया गया । इन सभी को रॉब्सपीयर ने सर्वोच्च सता की प्रतिष्ठा के रूप में स्थापित किया लेकिन सभी अस्थाई सिद्ध हुए । उनकी हिंसात्मक कार्रवाइयों की वजह से विशेष न्यायालय ने जुलाई 27, 1794 को उसे मृत्यु दंड दिया गया । इस तरह ‘जैकोबिन का फ्रांस की क्रान्ति पर प्रभाव देखने को मिलता है।

प्रश्न 10.
नेशनल एसेम्बली और नेशनल कन्वेंशन ने फ्रांस के लिए कौन-कौन से सुधार पारित किए ?
उत्तर-
(क) नेशनल एसेम्बली द्वारा किये गए सुधार इस प्रकार हैं-14 जुलाई, सन् 1789 के बाद लुई सोलहवाँ नाम मात्र का राजा रह गया और नेशनल एसेम्बली देश के लिए अधिनियम बनाने लगी।

  • 21 अगस्त, 1789 को ‘मानव और नागरिकों के अधिकार’ (The Declaration of the rights of Man and citizen) की स्वीकार कर लिया । इस घोषणा से प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार प्रकट करने और अपनी इच्छानुसार धर्मपालन करने के अधिकार का मान्यता मिली।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता-व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ प्रेस पक्ष भाषण की स्वतंत्रता भी मानी गयी।
  • संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना-एक संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना हुई। अब राज्य में किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाये गिरफ्तार नहीं कर सकते थे, तथा मुआवजा दिए बिना उसके जमीन पर कब्जा नहीं कर सकते थे।
  • निजी सम्पत्ति का अधिकार-सभी नागरिकों को निजी सम्पत्ति रखने का अधिकार दिया गया ।
  • शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त को अपनाया गया। ये सभी घोषणाएँ अत्यधिक महत्वपूर्ण थी।
    (ख)नेशनल कन्वेंशन द्वारा किये गए सुधार-21 सितम्बर, 1792 को नव निर्वाचित एसेम्बली को कन्वेंशन नाम दिया गया। इस कन्वेंशन ने निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान की।
  • मतदान का अधिकार-21 वर्ष से अधिक उम्र वालों को मतदान का अधिकार मिला । चाहे उसके पास सम्पति हो या न हो।
  • गणतंत्र की स्थापना-कन्वेंशन का प्रमुख कार्य राजतंत्र का अंत कर फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना करना । यह कार्य प्रथम अधिवेशन के पहले ही पूरा कर दिया गया ।

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद

Bihar Board Class 10 History समाजवाद एवं साम्यवाद Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लग उनमें सही का चिह्न लगायें।

समाजवाद और साम्यवाद Class 10 Bihar Board प्रश्न 1.
रूस में कृषक दास प्रथा का अंत कब हुआ?
(क) 1861
(ख) 1862
(ग) 1863
(घ) 1864
उत्तर-
(क) 1861

समाजवाद और साम्यवाद Class 10 Notes Bihar Board प्रश्न 2.
रूस में जार का अर्थ क्या होता था ?
(क) पीने का बर्तन .
(ख) पानी रखने का मिट्टी का पात्र
(ग) रूस का सामन्त
(घ) रूस का सम्राट
उत्तर-
(घ) रूस का सम्राट

समाजवाद के उदय और विकास को रेखांकित करें Bihar Board प्रश्न 3.
कार्ल मार्क्स का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इंगलैंड
(ख) जर्मनी
(ग) इटली
(घ) रूस
उत्तर-
(ख) जर्मनी

इतिहास की दुनिया भाग 2 कक्षा 10 Bihar Board प्रश्न 4.
साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग कहाँ हुआ?
(क) रूस
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) क्यूबा
उत्तर-
(क) रूस

Bihar Board Class 10 Social Science Solution प्रश्न 5.
यूटोपियन समाजवादी कौन नहीं था? ।
(क) लुई ब्लां
(ख) सेंट साइमन
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) रॉबर्ट ओवन
उत्तर-
(ग) कार्ल मार्क्स

Bihar Board Class 10 History Book Solution प्रश्न 6.
“वार एंड पीस’ किसकी रचना है ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) टॉलस्टाय
(ग) दोस्तोवस्की
(घ) ऐंजल्स
उत्तर-
(ख) टॉलस्टाय

Bihar Board Class 10 History Notes Pdf प्रश्न 7.
बोल्शेविक क्रांति कब हुई ?
(क) फरवरी 1947
(ख) नवंबर 1917
(ग) अप्रैल 1917
(घ) अक्टूबर 1905
उत्तर-
(ख) नवंबर 1917

Social Science In Hindi Class 10 Bihar Board Pdf प्रश्न 8.
लाल सेना का गठन किसने किया था ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) स्टालिन
(ग) ट्रॉटसकी
(घ) करेंसकी
उत्तर-
(ग) ट्रॉटसकी

प्रश्न 9.
लेनिन की मृत्यु कब हुई थी?
(क) 1921
(ख) 1922
(ग) 1923
(घ) 1924
उत्तर-
(घ) 1924

प्रश्न 10.
ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि किन देशों के बीच हुआ था ?
(क) रूस और इटली
(ख) रूस और फ्रांस
(ग) रूस और इंगलैंड
(घ) रूस और जर्मनी
उत्तर-
(घ) रूस और जर्मनी

निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें :

प्रश्न 1.
रूसी क्रांति के समय शासक…………..था।
उत्तर-
जार निकालेस II

प्रश्न 2.
बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व……………ने किया था।
उत्तर-
लेनिन

प्रश्न 3.
नई आर्थिक नीति…………….ई. में लागू हुआ था।
उत्तर-
1921

प्रश्न 4.
राबर्ट ओवन………….”का निवासी था।
उत्तर-
ब्रिटेन

प्रश्न 5.
वैज्ञानिक समाजवाद का जनक……………..को माना जाता है।
उत्तर-
कार्ल मार्क्स

निम्नलिखित समूहों का मिलान करें :
Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद - 1
उत्तर-
1. (ख)
2. (घ)
3. (ङ)
4. (ग)
5. (क)।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
राष्ट्रवाद क्या है ?
उत्तर-
ऐसी व्यवस्था जिसमें उत्पादन के सभी साधनों पर किसी एक व्यक्ति या संस्था का अधिकार होता है।

प्रश्न 2.
खूनी रविवार क्या है?
उत्तर-
जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाईं जिसमें हजारों लोग मारे गये। इसलिए, 9 जनवरी, 1905 को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
अक्टूबर क्रांति क्या है ?
उत्तर-
1917 की रूस की महान क्रांति को अक्टूबर क्रांति भी कहते हैं।

प्रश्न 4.
सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं ?
उत्तर-
समाज का वैसा वर्ग जिसमें किसान, मजदूर एवं आम गरीब लोग शामिल होते हैं।

प्रश्न 5.
क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर-
क्रांति के पूर्व किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी वे करों के बेल्म से दबे थे।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
रूसी क्रांति के किन्हीं दो कारणों का वर्णन करें।
उत्तर-

  • जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासन-रूस में एक राजनीतिक संरचना स्थापित की थी। गलत सलाहकारों के कारण जार की स्वेच्छाचारिता बढ़ती गयी और जनता की स्थिति बाद से बदतर होती गयी।
  • कृषकों की दयनीय स्थिति कृषकों के पास पूँजी का अभाव था तथा करों के बोझ से वे दबे हुए थे। ऐसे में किसानों के पास क्रांति के सिवाय कोई चारा नहीं था।

प्रश्न 2.
रूसीकारण की नीति क्रांति हेतु कहाँ तक उत्तरदायी थी?
उत्तर-
सोवियत रूस विभिन्न राष्ट्रीयताओं का देश था। यहाँ मुख्यतः स्लाव जाति के लोग रहते थे। इनके अतिरिक्त फिन, पोल, जर्मन, यहूदी आदि अन्य जातियों के लोग भी थे। वे भिन्न-भिन्न भाषा बोलते तथा इनका रस्म-रिवाज भिन्न-भिन्न था। परन्तु रूस के अल्पसंख्यक जार-निकोलस द्वितीय द्वारा जारी की गयी रूसीकरण की नीति से परेशान थे। इसके अनुसार देश के सभी लोगों पर रूसी भाषा, शिक्षा और संस्कृति को लादने का प्रयास किया गया। इससे अल्पसंख्यकों में हलचल मच गयी और 1868 ई. में इस नीति के विरुद्ध पोलो ने विद्रोह किया तो निर्दयतापूर्वक उसका दमन किया गया। इससे रूसी राजतंत्र के प्रति उनका आक्रोश बढ़ता गया।

प्रश्न 3.
साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी। कैसे ?
उत्तर-
कार्ल मार्क्स ने एंगल्स के साथ मिलकर 1848 में एक साम्यवादी घोषणा पत्र प्रकाशित किया जिसे आधुनिक समाजवाद का जनक कहा जाता है। इसमें आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया। इसने पूँजीवाद का विरोध कर वर्गहीन समाज * की स्थापना में महत्वपूर्ण योग दिया।

प्रश्न 4.
नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धान्तों के साथ समझौता था, कैसे ?
उत्तर-
लेनिन एक कुशल सामाजिक चिंतक एवं व्यावहारिक राजनीतिज्ञ था। उसने यह स्पष्ट देखा कि तत्काल प्रभाव से पूरी तरह समाजवादी व्यवस्था लागू करना या एक साथ पूँजीवाद से टकराना संभव नहीं है अतः उसने एक नई आर्थिक नीति की घोषणा की जिसमें मार्क्सवादी मूल्यों
को भी तरजीह दिया ताकि पूँजीवाद और समाजवाद दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

प्रश्न 5.
प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया, कैसे?
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय रूसी क्रांति का तात्कालिक कारण बना क्योंकि युद्ध के मध्य जार द्वारा सेनापति का कमान अपने हाथों में लेने के कारण जरीना और उसके तथाकथित गुरु रासपुटिन (पादरी) जैसा निकृष्टतम व्यक्ति को षड्यंत्र करने का मौका मिल गया जिसके कारण राजतंत्र की प्रतिष्ठा और भी गिर गयी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
रूसी क्रांति के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर-
रूसी क्रांति के कारण निम्नलिखित हैं-

  • जार की निरंकुशता-जार निकोलस II जिसके शासनकाल में क्रांति हुई, वह दैवी अधिकारों में विश्वास करता था। उसे आम लोगों की कोई चिन्ता नहीं थी। उसके द्वारा नियुक्त अफसरशाही व्यवस्था अस्थिर, जड़ और अकुशल थी। अतः जनता की स्थिति बद से बदतर होती गयी।
  • कृषकों की दयनीय स्थिति कृषकों के पास पूँजी का अभाव था तथा वे करों के बोझ से दबे हुए थे। ऐसे में उनके पास क्रांति के सिवाय कोई चारा नहीं था।
  • मजदूरों की दयनीय स्थिति मजदूरों को अधिक काम के बदले कम मजदूरी मिलती थी। उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था, उन्हें कोई राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। वे अपने मांगों के समर्थन में हड़ताल भी नहीं कर सकते थे।
  • औद्योगिकीकरण की समस्या-रूस में राष्ट्रीय पूँजी का अभाव था। यहाँ औद्योगिकीकरण के लिए विदेशी पूँजी पर निर्भरता थी। विदेशी पूँजीपति आर्थिक शोषण को बढ़ावा दे रहे थे। अतः । चारों ओर असंतोष था।
  • रूसीकरण की नीति—जार निकोलस द्वितीय ने विभिन्नताओं का ख्याल न करते हुए देश के सभी लोगों पर रूसी भाषा, शिक्षा और संस्कृति को लादने का प्रयास किया, जिससे जनता में राजतंत्र के प्रति असंतोष बढ़ने लगा।
  • विदेशी घटनाओं का प्रभाव क्रीमिया के युद्ध में रूस की पराजय ने आर्थिक सुधारों का युग आरम्भ किया। तत्पश्चात 1904-05 के रूस-जापान युद्ध ने रूस में प्रथम क्रांति और प्रथम विश्वयुद्ध ने बॉल्शेविक क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।

मार्क्सवाद का प्रभाव तथा बुद्धिजीवियों का योगदान लियो टॉलस्टाय, दोस्तोवस्की, तुर्गनेव जैसे चिंतक वैचारिक क्रांति को प्रोत्साहन दे रहे थे, रूस के औद्योगिक मजदूरों पर कार्ल मार्क्स के समाजवादी विचारों का पूर्ण प्रभाव था। रूस का पहला साम्यवादी प्लेखानोव जारशाही का अंत कर साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना चाहता था। उसने 1898 में रशियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की। 1903 में साधन एवं अनुशासन के मुद्दे पर पार्टी में फूट पड़ गयी। बहुमत वाला दल बोल्शेविक सर्वहारा क्रांति का पक्षधर था जबकि मेनशेविक मध्यवर्गीय क्रांति के पक्षधर थे। 1901 में सोशलिस्ट रिवोल्यूशनरी पार्टी का गठन हुआ जो किसानों की मांगों को उठाता था। इस प्रकार मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित मजदूर एवं किसानों के संगठन रूस की क्रांति का एक महान कारण साबित हुए।

प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय–रूसी सेनाओं की हार को ध्यान में रखते हुए जार ने सेना का कमान अपने हाथों में ले लिया जिससे उनके खिलाफ षड्यंत्र का मौका मिला और राजतंत्र की प्रतिष्ठा और भी गिर गई।

प्रश्न 2.
नई आर्थिक नीति क्या है ?
उत्तर-
लेनिन एक कुशल सामाजिक चिंतक तथा व्यावहारिक राजनीतिज्ञ था। उसने स्पष्ट रूप से देखा कि तत्काल प्रभाव से समाजवादी व्यवस्था लागू करना या एक साथ सारी पूँजीवादी दुनिया से टकराना संभव नहीं है। इसीलिए 1921 ई. में उसने एक नई नीति की घोषणा की जिसे नई आर्थिक नीति कहते हैं। इसकी प्रमुख बातें निम्नांकित थीं-

  • किसानों से अनाज ले लेने के स्थान पर एक निश्चित कर लगाया गया। बचा हुआ अनाज किसान का था और वह इसका मनचाहा इस्तेमाल कर सकता था।
  • यद्यपि यह सिद्धांत कायम रखा गया कि जमीन राज्य की है फिर भी व्यवहार में जमीन किसान की हो गई।
  • 20 से कम कर्मचारियों वाले उद्योगों को व्यक्तिगत रूप से चलाने का अधिकार मिल गया।
  • उद्योगों का विकेन्द्रीकरण कर दिया गया। निर्णय और क्रियान्वयन के बारे में विभिन्न इकाइयों को काफी छूट दी गई।
  • विदेशी पूँजी भी सीमित तौर पर आमंत्रित की गई।
  • व्यक्तिगत संपत्ति और जीवन की बीमा भी राजकीय एजेंसी द्वारा शुरू किया गया।
  • विभिन्न स्तरों पर बैंक खोले गए।
  • ट्रेड यूनियन की अनिवार्य सदस्यता समाप्त कर दी गई।

प्रश्न 3.
रूसी क्रांति के प्रभाव की विवेचना करें।
उत्तर-

  • इस क्रांति के पश्चात् श्रमिक अथवा सर्वहारा वर्ग की सत्ता रूस में स्थापित हो गई तथा इसने अन्य क्षेत्रों में भी आंदोलन को प्रोत्साहन दिया।
  • रूसी क्रांति के बाद विश्व विचारधारा के स्तर पर दो खेमों में विभाजित हो गया। साम्यवादी विश्व एवं पूँजीवादी विश्व। इसके पश्चात् यूरोप भी दो भागों में विभाजित हो गया। पूर्वी एवं पश्चिमी यूरोपा धर्मसुधार आंदोलन के पश्चात् और साम्यवादी क्रांति से पहले यूरोप में
    वैचारिक आधार पर इस तरह का विभाजन नहीं देखा गया था।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् पूँजीवादी विश्व तथा सोवियत रूस के बीच शीतयुद्ध की शुरूआत हुई और आगामी चार दशकों तक दोनों खेमों के बीच शस्त्रों की होड़ चलती रही।
  • रूसी क्रांति के पश्चात् आर्थिक आयोजन के रूप में एक नवीन आर्थिक मॉडल आया। आगे पूँजीवादी देशों ने भी परिवर्तित रूप में इस मॉडल को अपना लिया। इस प्रकार स्वयं पूँजीवाद के चरित्र में भी परिवर्तन आ गया।
  • इस क्रांति की सफलता ने एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश मुक्ति को भी प्रोत्साहन दिया क्योंकि सोवियत रूस की साम्यवादी सरकार ने एशिया और अफ्रीका के देशों में होने वाले राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक समर्थन प्रदान किया।

प्रश्न 4.
कार्ल मार्क्स की जीवनी एवं सिद्धान्तों का वर्णन करें।
उत्तर-
कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 ई. को जर्मनी में राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कार्ल मार्क्स के पिता हेनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे, जिन्होंने बाद में चलकर ईसाई धर्म ग्रहण कर लिया था। मार्क्स ने बोन वि. वि. में विधि की शिक्षा ग्रहण की परन्तु 1836 में वे बर्लिन वि. वि. चले आए जहाँ उनके जीवन को एक नया मोड़ मिला। मार्क्स हीगल के विचारों से प्रभावित थे। 1843 में उन्होंने बचपन की मित्र जेनी से विवाह किया। उन्होंने राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास पर मांण्टेस्क्यू तथा रूसो के विचारों का गहन अध्ययन किया। कार्ल मार्क्स की मुलाकात पेरिस में 1844 ई. में फ्रेडरिक एंगेल्स से हुई जिनसे जीवन भर उनकी गहरी मित्रता बनी रही। एंगेल्स के विचारों एवं रचनाओं से प्रभावित होकर मार्क्स ने भी श्रमिक के कष्टों एवं उनकी कार्य की दशाओं पर गहन विचार करना आरंभ कर दिया। मार्क्स ने एंगेल्स के साथ मिलकर 1948 ई. में एक साम्यवादी घोषणापत्र प्रकाशित किया जिसे आधुनिक समाजवाद का जनक कहा जाता है। उपर्युक्त घोषणा पत्र में मार्क्स ने अपने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है। मार्क्स विश्व के उन गिने-चुने चिंतकों में एक हैं जिन्होंने इतिहास की धारा को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। मार्क्स ने 1867 ई. में ‘दास कैपिटल’ नामक पुस्तक की रचना की जिसे “समाजवादियों की बाइबिल” कहा जाता है।

मार्क्स ने कुछ सिद्धांत दिए जो निम्नलिखित हैं

  • द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत
  • वर्ग संघर्ष का सिद्धांत
  • इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या
  • मूल्य एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत
  • राज्यहीनं व वर्गहीन समाज की स्थापना।

प्रश्न 5.
यूटोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें।
उत्तर-
यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) समाजवादियों के विचार निम्न हैं

  • सेंट साइमनवे प्रथम यूटोपियन समाजवादी एवं फ्रांसीसी विचारक थे जिसने समाज को निर्धन वर्ग के भौतिक एवं नैतिक उत्थान के लिए कार्य करने और लोगों को एक दूसरे का शोषण करने के बदले मिलजुलकर काम करने की बात कही। उसने घोषित किया ‘प्रत्येक को उसकी क्षमता के अनुसार तथा प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार’। आगे यही समाजवाद का मूलभूत नारा बन गया।
  • चार्ल्स फौरिपर वह आधुनिक औद्योगिकवाद का विरोधी था तथा उनका मानना था कि श्रमिकों को छोटे नगर अथवा कस्बों में काम करना चाहिए।
  • लई ब्लांफ्रांसीसी यूरोपियन चितकों में एकमात्र व्यक्ति जिसने राजनीति में भी हिस्सा लिया। उनका मानना था कि आर्थिक सुधारों को प्रभावकारी बनाने के लिए पहले राजनीतिक सुधार आवश्यक है।
  • ब्रिटिश उद्योगपति राबर्ट ओवन वह सबसे महत्वपूर्ण यूटोपियन चिन्तक, जिसने बताया कि संतुष्ट श्रमिक ही वास्तविक श्रमिक हं।

Bihar Board Class 10 History समाजवाद एवं साम्यवाद Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
1854-56 के क्रीमिया युद्ध में किसकी हार हुई थी?
उत्तर-
रूस की।

प्रश्न 2.
रूसी क्रांति किसके नेतृत्व में हुई थी?
उत्तर-
1917 की रूसी क्रांति बोल्शेविक दल के नेता लेनिन के नेतृत्व में हुई थी।

प्रश्न 3.
जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या 1881 ई० में किसने की?
उत्तर-
1881 में जार एलेक्जेंडर की हत्या निहिलस्टों ने कर दी।

प्रश्न 4.
रूस के सम्राट को क्या कहा जाता था?
उत्तर-
रूस के सम्राट को जार कहा जाता था।

प्रश्न 5.
रूस में किस राजवंश का शासन था ?
उत्तर-
रूस में रोमोनोव वंश का शासन था।

प्रश्न 6.
रूस की संसद का क्या नाम था ?
उत्तर-
रूस की संसद का नाम ड्यूमा था।

प्रश्न 7.
रूस में कृषि-दासता की प्रथा किस वर्ष समाप्त हुई।
उत्तर-
रूस में कृषि दासता की प्रथा 1861 ई. में समाप्त हुई।

प्रश्न 8.
रासपुटिन कौन था ?
उत्तर-
रासपुटिन एक बदनाम और रहस्यमय पादरी था।

प्रश्न 9.
वार एंड पीस उपन्यास के लेखक कौन थे?
उत्तर-
वार एंड पीस उपन्यास के लेखक लियो टॉल्सटाय थे।

प्रश्न 10.
रूस में कृषि-दासता की प्रथा किसने समाप्त की?
उत्तर-
1861 तक रूस में किसानों के कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं था। अधिकांश किसान बँधुआ मजदूर थे। वे सामंतों के अधीन थे और जमीन से बंधे हुए थे। 1861 में क्रमिया युद्ध की पराजय के पश्चात जार एलेक्जेंडर द्वितीय ने इस बंधुआ प्रथा का अंत करके किसानों को मुक्ति दी। इसलिए उसे ‘मुक्तिदाता जार’ कहा जाता है। इस प्रकार कृषि-दासता (serfdom) का अंत हुआ।

प्रश्न 11.
साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग कहाँ हुआ था ?
उत्तर-
साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग रूस में हुआ था। रूसी क्रांति ने पुरान राजनीतिक व्यवस्था को नष्ट कर समाजवाद तथा साम्यवाद के आधार पर नए रूस का निर्माण किया। फलतः, इसका प्रभाव दुनिया के कोने-कोने में पड़ा और हर जगह साम्यवाद का नारा पुरानी व्यवस्था को गंभीर चुनौती देने लगा।

प्रश्न 12.
किसने सुधार के लिए आतंकवाद का सहारा लिया ?
उत्तर-
रूस में एक नागरिक वर्ग ऐसा था जो चाहता था कि रूस में सुधार आंदोलन चलाया जाए। इन्होंने निहिलिस्ट आंदोलन आरंभ किया तथा ये निहिलिस्ट के नाम से जाने जाते थे। ये निहिलिस्ट स्थापित व्यवस्था को आतंक का सहारा लेकर समाप्त करना चाहते थे। 1881 में जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या निहिलिस्टों ने कर दी।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
समाजवादी दर्शन क्या है ?
उत्तर-
समाजवाद उत्पादन में मुख्यतः निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व या धन के समान वितरण पर जोर देता है। समाजवादी शोषण उन्मुक्त समाज की स्थापना चाहते हैं। समाजवादी व्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसके अंतर्गत उत्पादन के सभी साधनों कारखानों तथा विपणन में सरकार का एकाधिकार हो। ऐसी व्यवस्था में उत्पादन निजी लाभ के लिए न होकर सारे समाज के लिए होता है।

प्रश्न 2.
रॉबर्ट ओवेन का संक्षिप्त परिचय दें?
उत्तर-
इंगलैंड में समाजवाद का प्रवर्तक रॉबर्ट ओवेन को माना जाता है। इंगलैंड में औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप श्रमिकों के शोषण को रोकने हेतु ओवेन ने एक आदेश समाज की स्थापना का प्रयास किया। उसके स्कॉटलैंड को न्यू लूनार्क नामक स्थान पर एक आदर्श कारखाना और मजदूरों के आवास की व्यवस्था की। इसमें श्रमिकों को अच्छा भोजन, आवास और उचित मजदूरी देने की व्यवस्था की गयी। श्रमिकों की शिक्षा, चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई। साथ ही काम के घंटे घटाए गए और बल मजदूरी समाप्त की गयी। ओवेन के इस प्रयास से मुनाफा में वृद्धि हुई इससे वह संतुष्ट हुआ।

प्रश्न 3.
1917 ई० की क्रांति के समय रूस में किस राजवंश का शासन था? इस शासन का स्वरूप क्या था ?
उत्तर-
1917 ई की क्रांति के पूर्व रूस में रोमोनोव वंश का शासन था। इस वंश के शासन का स्वरूप स्वेच्छाचारी राजतंत्र था। इस वंश के शासकों ने स्वेच्छाचारी राजतंत्र की स्थापना की। रूस का सम्राट जार अपने आपको का ईश्वर का प्रतिनिधि समझता था। वह सर्वशक्तिशाली था। राज्य की सारी शक्तियाँ उसी के हाथों में केन्द्रित थी। उसकी सत्ता पर किसी का नियंत्रण नहीं था। राज्य के अतिरिक्त वह रूसी चर्च का भी प्रधान था। राज्य के अतिरिक्त वह रूसी चर्च का भी प्रधान था। प्रजा जार और उसके अधिकारियों से भयभीत और त्रस्त रहती थी।

प्रश्न 4.
निहिलिज्म से आप क्या समझते हैं ? रूस पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
रूसी नागरिकों का एक वर्ग ऐसा था जो चाहता था कि रूस में सुधार आन्दोलन जार के द्वारा किए जाएँ। जार एलेक्जेंडर द्वितीय ने कई सुधार कार्यक्रम भी चलाए, परंतु इससे सुधारवादी संतुष्ट नहीं हुए। इनमें से कुछ ने निहिलिस्ट आंदोलन आरंभ किया। ये निहिलस्ट के नाम से जाने जाते थे। ये स्थापित व्यवस्था को आतंक का सहारा लेकर समाप्त करना चाहते थे। 1881 में जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या निहिलस्टों ने कर दी। इन निहिलिस्टो के विचारों से प्रभावित होकर क्रांतिकारी जारशाही के विरुद्ध एकजुट होने लगे।

प्रश्न 5.
बौद्धिक जागरण ने रूसी क्रांति को किस प्रकार प्रभावित किया ?
उत्तर-
19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में रूस में बौद्धिक जागरण हुआ जिसने लोगों को निरंकुश राजतंत्र के विरुद्ध बगावत करने की प्रेरणा दी। अनेक विख्यात लेखकों और बुद्धिजीवियों लियो टॉलस्टाय, ईरान तुर्गनेव, फ्योदोर दोस्तोवस्की, मैक्सिम गोर्की ने अपनी रचनाओं द्वारा सामाजिक अन्याय एवं भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था का विरोध कर एक नए प्रगतिशील समाज के निर्माण का आह्वान किया। रूसी लोग विशेषतः किसान और मजदूर, कार्ल मार्क्स के दर्शन से गहरे रूप से प्रभावित हुए। वे शोषण और अत्याचार विरुद्ध संघर्ष करने को तत्पर हो गए।

प्रश्न 6.
मेन्शिविकों और बोल्शेविको के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर-
19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से रूस में राजनीतिक दलों का उत्कर्ष हुआ। कार्ल मार्क्स के एक प्रशंसक और समर्थक लेखानीव ने 1883 में रूसी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की। इस दल ने मजदूरों को संघर्ष के लिए संगठित करना आरंभ किया। 1903 में संगठनात्मक मुद्दों को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी दो दलों में विभक्त हो गया। मेन्शेविक (अल्पमत वाले) तथा वोल्शेविक (बहुमत वाले) मेन्शेविक संवैधानिक रूप से देश में राजनीतिक परिवर्तन चाहते थे तथा मध्यवर्गीय क्रांति के समर्थक थे। परंतु बोल्शेविक इसे असंभव मानते थे तथा क्रांति के द्वारा परिवर्तन लाना चाहते थे जिसमें मजदूरों की विशेष भूमिका हो।

प्रश्न 7.
रूस में प्रति-क्रांति क्यों हुई ? बोल्शेविक सरकार ने इसका सामना कैसे किया ?
उत्तर-
बोल्शेविक क्रांति की नीतियों से वैसे लोग व्यग्र हो गए जिनकी संपत्ति और अधिकारों को नई सरकार ने छीन लिया था। अतः सामंत, पादरी, पूँजीपति नौकरशाह सरकार के विरोधी बन गए। वे सरकार का तख्ता पलटने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें विदेशी सहायता भी प्राप्त थी। लेनिन ने प्रति क्रांतिकारियों का कठोरतापूर्वक दमन करने का निश्चय किया। इसके लिए चेका नामक विशेष पुलिस दस्ता का गठन किया गया। इसने निर्मतापूर्वक हजारों षड्यंत्रकारियों को मौत के घाट उतार दिया। चेका के लाल आतंक ने षड्यंत्रकारियों की कमर तोड़ दी।

प्रश्न 8.
कौमिण्टर्न की स्थापना क्यों की गई? इसका क्या महत्व था ?
उत्तर-
मार्क्सवाद का प्रचार करने एवं विश्व के सभी मजदूरों को संगठित करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों के साम्यवादी दलों के प्रतिनिधि मास्को में एकत्रित हुए। सभी देशों की साम्यवादी पार्टियों का एक संघ बनाया गया जो कोमिण्टर्न कहलाया। इसका मुख्य कार्य विश्व में क्रांति का प्रचार करना एवं साम्यवादियों की सहायता करना था। कौमिण्टर्न का नेतृत्व रूस के साम्यवादी दल के पास रहा। लेनिन के इस कार्य से पूँजीवादी देशों में बेचैनी फैल गयी। रूस से मधुर संबंध बनाने को वे बाह्य हो गए। इंगलैंड ने 1921 में रूस से व्यापारिक संधि कर ली। 1924 तक इटली, जर्मनी, इंगलैंड ने रूस की बोल्शेविक सरकार को मान्यता प्रदान कर दी।

प्रश्न 9.
नई आर्थिक नीति (NEP) पर एक टिप्पणी लिखें?
उत्तर-
लेनिन ने 1921 में एक नई आर्थिक नीति (NEP) लागू की। इसके अनुसार सीमित रूप से किसानों और पूँजीपतियों को व्यक्तिगत संपत्ति रखने की अनुमति दी गई। यह नीति कारगर हुई।
खेती की पैदावार बढ़ी तथा उद्योग-धंधों में भी उत्पादन बढ़ा। इससे रूस समृद्धि के मार्ग पर ‘ आगे बढ़ा। नई आर्थिक नीति की कुछ मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं
(i) किसानों से अनाज की जबरन उगाही बन्द कर दी गई। अनाज के बदले उन्हें निश्चित कर देने को कहा गया। शेष अनाज का उपयोग किसान अपनी इच्छानुसार कर सकता था।
(ii) सैद्धांतिक रूप से जमीन पर राज्य का अधिकार मानते हुए भी व्यावहारिक रूप से किसानों को जमीन का स्वामित्व दिया गया।

प्रश्न 10.
कम्युनिस्ट इंटरनेशनल का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
कम्युनिस्ट इंटरनेशनल एक संस्था थी जिसकी स्थापना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 में हुई थी। इस संस्था का उद्देश्य साम्यवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करना था। इसके प्रभाव से अनेक देशों में साम्यवादी संगठनों की स्थापना हुई। साथ ही, अनेक प्रजातंत्रीय देशों में राजनीतिक समानता के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक समानता लाने का भी प्रयास किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध के आरंभ होने पर इस संस्था को भंग कर दिया गया।

प्रश्न 11.
‘सोवियत’ से क्या समझते हैं ?
उत्तर-
रूस में राजनीतिक संगठन के सबसे निचले स्तर पर स्थानीय समितियाँ थी जिन्हें ‘सोवियत’ कहा जाता था। आरंभ में यह मजदूरों के प्रतिनिधियों की परिषद थी जिसकी स्थापना हड़तालों के संचालन के लिए की गई थी, पर शीघ्र ही यह राजनतिक सत्ता का उपकरण बन गई। मजदूरों की भाँति किसानों की परिषदों या सोवियतों का निर्माण हुआ। भी सोवियतों के प्रतिनिधि एक राष्ट्रीय कांग्रेस का संगठन करते थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समाजवाद क उदय और विकास को रेखांकित करें।
उत्तर-
समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसने आधुनिक काल में समाज को एक नया रूप प्रदान किया। औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप समाज में पूँजीपति वर्गों द्वारा मजदूरों का लगातार शोषण अपने चरमोत्कर्ष पर था। उन्हें इस शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने तथा वर्ग विहीन समाज की स्थापना करने में समाजवादी विचारधारा ने अग्रणी भूमिका अदा की। समाजवाद उत्पादन में मुख्यतः निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व या धन के समान वितरण पर जोर देती है। यह एक शोषण उन्मुक्त समाज की स्थापना चाहता है। अतः समाजवादी व्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसके अन्तर्गत उत्पादन के सभी साधनों, कारखानों तथा विपणन में सरकार का एकाधिकार हो। ऐसी व्यवस्था में उत्पादन निजी लाभ के लिए न होकर सारे समाज के लिए होता है।

समाजवादी विचारधारा की उत्पत्ति 18वीं शताब्दी के प्रबोधन आन्दोलन के दार्शनिकों के लेखों में ढूँढे जा सकते हैं। आरंभिक समाजवादी आदर्शवादी थे, जिनमें सेंट साइमन, चार्ल्स फूरिए लुई ब्लां तथा रॉबर्ट ओवेन के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। समाजवादी आंदोलन और विचारधारा मुख्यतः दो भागों में विभक्त की जा सकती है – (i) आरंभिक समाजवादी अथवा कार्ल मार्क्स के पहले के समाजवादी (ii) कार्ल मार्क्स के बाद के समाजवादी। आरंभिक समाजवादी आदर्शवादी या “स्वप्नदर्शी” (Utopian) समाजवादी कहे गए। वे उच्च और अव्यावहारिक आदर्श से प्रभावित होकर “वर्ग संघर्ष” की नहीं बल्कि “वर्ग समन्वय” की बात करते थे। दूसरे प्रकार के समाजवादियों में फ्रेडरिक एंगेल्स, कार्ल मार्क्स और उनके बाद के चिंतक जो ‘साम्यवादी’ कहलाए ने वर्ग समन्वय के स्थान पर “वर्ग संघर्ष” की बात कही। इन लोगों ने समाजवाद की एक नई व्याख्या प्रस्तुत की जिसे “वैज्ञानिक समाजवाद” कहा जाता है।

19वीं शताब्दी में समाजवादी विचारधारा का तेजी से प्रसार हुआ। फ्रांस में लुई ब्लाँ ने सामाजिक कार्यशालाओं की स्थापना कर पूँजीवाद की बुराइयों को समाप्त करने की बात कही। जर्मनी भी समाजवादी विचारधारा से अपने को अलग नहीं रख सका। रूस में भी समाजवाद ने अपनी जड़ें जमा ली। कार्ल मार्क्स ने आरंभिक समाजवादियों से प्रेरणा लेकर ही नई समाजवादी व्याख्या प्रस्तुत की।

प्रश्न 2.
साम्यवाद के जनक कौन थे ? समाजवाद और साम्यवाद में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
साम्यवाद के जनक फेडरिक एंगेल्स तथा कार्ल मार्क्स थे। समाजवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसने आधुनिक काल में समान को एक नया रूप प्रदान किया। औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप समाज में पूँजीपति वर्गों द्वारा मजदूरों का लगातार शोषण अपने चरमोत्कर्ष पर था। उन्हें इस शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने तथा वर्ग विहीन समाज की स्थापना करने में समाजवादी विचारधारा ने अग्रणी भूमिका अदा की। समाजवाद उत्पादन में मुख्यतः निजी स्वामित्व की जगह सामूहिक स्वामित्व या धन के समान वितरण पर जोर देता है। यह एक शोषण उन्मुक्त समाज की स्थापना चाहता है। अतः समाजवादी व्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसके अंतर्गत उत्पादन के सभी साधनों कारखानों तथा विपणन में सरकार का एकाधिकार हो। ऐसी व्यवस्था में उत्पादन निजी लाभ के लिए न होकर सारे समाज के लिए होता है। आरंभिक समाजवादियों में सेंट साइमन, चार्ल्स फूरिए, लुई ब्लां तथा रॉबर्ट ओवेन के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। आरंभिक समाजवादी आदर्शवादी या स्वप्नदर्शी थे। वे उच्च और अव्यवहारिक आदर्श से प्रभावित होकर ‘वर्ग संघर्ष’ की नहीं बल्कि ‘वर्ग समन्वय’ की बात करते थे।

दूसरे प्रकार के समाजवादियों में फ्रेडरिक एंगेल्स, कार्ल मार्क्स और उनके बाद के चिंतक साम्यवादी कहलाए जो वर्ग समन्वय के स्थान पर “वर्ग संघर्ष” की बात की। इन लोगों ने समाजवाद की एक नई व्याख्या प्रस्तुत की जिसे “वैज्ञानिक समाजवाद” कहा जाता है। मार्क्स और एंगेल्स ने मिलकर 1848 में कम्यूनिस्ट मेनिफेस्टो अथवा साम्यवादी घोषणापत्र प्रकाशित किया। मार्क्स ने पूंजीवाद की घोर भर्त्सना की ओर श्रमिकों ने हक की बात उठाई। मजदूरों को अपने हक के लिए लड़ने को उसने उत्प्रेरित किया। मार्क्स ने अपनी विख्यात पुस्तक दास कैपिटल का प्रकाशन 1867 में किया जिले “समाजवादियों का बाइबिल” कहा जाता है। मार्क्सवादी दर्शन साम्यवाद के नाम से विख्यात हुआ। मार्क्स का मानना था कि मानव ‘इतिहास वर्ग संघर्ष’ का इतिहास है। इतिहास उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण के लिए दो वर्गों में चल रहे निरंतर संघर्ष की कहानी है।

प्रश्न 3.
1917 की रूसी क्रांति के प्रमुख कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर-
बीसवीं शताब्दी के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रूस की क्रांति थी। इस क्रांति ने रूस के सम्राट जार के एकतंत्रीय निरंकुश शासन का अंत कर मात्र लोकतंत्र की स्थापना का ही प्रयत्न नहीं किया अपितु सामाजिक आर्थिक और व्यवसायिक क्षेत्रों में कुलीनों पूँजीपतियों और जमींदारों की शक्ति का अंत किया तथा मजदूरों और किसानों की सत्ता को स्थापित किया। इस क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे

(i) जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासनः- 1917 से पूर्व रूस में रोमनोव राजवंश का शासन था। इस समय रूस के सम्राट की जार कहा जाता था। जार निकोलस-II जिसके शासनकाल में क्रांति हुई राजा के दैवी अधिकारों में विश्वास रखता था। उसे प्रजा के सुखः-दुख के प्रति कोई चिन्ता नहीं थी। जार ने जो अफसरशाही बनायी थी वह अस्थिर जड़ और अकुशल थी।

(ii) कृषकों की दयनीय स्थिति- रूस में जनसंख्या का बहुसंख्यक भाग कृषक ही थे, परन्तु उनकी स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। 1861 ई. में जार एलेक्जेंडर द्वितीय के द्वारा कृषि दासता समाप्त कर दी गई थी, परन्तु इससे किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। खेत छोटे थे जिनपर वे पुराने ढंग से खेती करते थे। पूँजी का अभाव तथा करों के बोझ के कारण किसानों के पास क्रान्ति के सिवाय कोई विकल्प नहीं था।

(iii) औद्योगिकरण की समस्या – रूसी औद्योगीकरण पश्चिमी पूँजीवादी औद्योगीकरण से भिन्न था। यहाँ कुछ ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उद्योगों का संकेद्रण था। यहाँ राष्ट्रीय पूँजी का अभाव था। अतः उद्योगों के विकास के लिए विदेशी पूँजी पर निर्भरता बढ़ गई थी। विदेशी पूँजीपति आर्थिक शोषण को बढ़ावा दे रहे थे। अतः चारो ओर असंतोष व्याप्त था।

(iv) रूसीकरण की नीति- सोवियत रूस विभिन्न राष्ट्रीयताओं का देश था। यहाँ मुख्य रूप से स्लाव जाति के लोग रहते थे। इनके अतिरिक्त किन पोल, जर्मन, यहूदी आदि अन्य जातियों के भी लोग थे। रूस का अल्पसंख्यक समूह जार निकोलस-II द्वारा जारी की गई समीकरण की नीति से परेशान था। इसके अनुसार जार ने देश के सभी लोगों पर रूसी भाषा, शिक्षा और संस्कृति लादने का प्रयास किया। 1863 में इस नीति के विरुद्ध पोोले ने विद्रोह किया जिसे निर्दयतापूर्वक दबा दिया गया लेकिन रूसी राजतंत्र के विरुद्ध उनका आक्रोश बढ़ता गया।

(v) विदेशी घटनाओं का प्रभाव- रूस की क्रांति में विदेशी घटनाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण थी। सर्वप्रथम क्रीमिया के युद्ध 1854-56 में रूस की पराजय ने उस देश में सुधारों का युग आरम्भ किया। तत्पश्चात 1904-05 के रूस-जापान युद्ध ने रूस में पहली क्रांति को जन्म दिया और अंततः प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय ने बोल्शेविक क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।

(vi) बौद्धिक कारण- 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में रूस में बौद्धिक जागरण हुआ.जिसने लोगों को निरंकुश राजतंत्र के विरूद्ध बगावत करने की प्रेरणा दी। अनेक विख्यात लेखकों एवं बुद्धिजीवियों लियो टॉल्सटाय, तुर्गनेव फ्योदोर दोस्तोवस्की, मैक्सिम गार्की ने अपनी रचनाओं द्वारा सामाजिक अन्याय एवं भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था का विरोध कर एक नए प्रगतिशील समान के निर्माण का आह्वान किया। रूसी लोग विशेषतः किसान और मजदूर कार्ल मार्क्स के दर्शन सभी गहरे रूप से प्रभावित हुए। साम्यवादी घोषणा-पत्र और दास कैपिटल द्वारा मार्क्स ने सामाजिक विचारधारा और वर्ग-संघर्ष के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। मार्क्स के विचारों से श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ और वे शोषण और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करने को तत्पर हो गए।

Bihar Board Class 10 History समाजवाद एवं साम्यवाद Notes

  • समाजवादी भावना का उदय मूलत: 18वों शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप हुआ था।
  • ऐतिहासिक दृष्टि से आधुनिक समाजवाद का विभाजन दो चरणों में किया जा सकता है- मार्क्स से पूर्व का समाजवाद एवं मार्क्स के बाद का समाजवाद।
  • मार्क्सवादी विचारकों ने इन्हें क्रमशः यूटोपियन एवं वैज्ञानिक समाजवाद का नाम दिया।
  • अधिकतर यूटोपियन विचारक फ्रांसीसी थे जो क्रांति के बदले शांतिपूर्ण परिवर्तन में विश्वास रखते थे। अर्थात् वे वर्ग संघर्ष के बदले वर्ग समन्वय के हिमायती थे।
  • प्रमुख यूटोपियन समाजवादी थे लुई-जलां, रॉबर्ट ओवन, चार्ल्स फौरियर इत्यादि।
  • कार्ल मार्क्स का जन्म 3 मई, 1818 ई. को जर्मनी के राइन प्रांत के टियर नगर में हुआ।
  • 1917 में रूस में बोल्शेविक क्रांति हुई, उस समय रूस का शासक जार निकोलस द्वितीय था।
  • 9 जनवरी, 1905 को खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है क्योंकि इस दिन जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ बरसाईं जिसमें हजारों लोग मारे गये।
  • लेनिन ने 1921 ई. NEP (नई आर्थिक नीति) की घोषणा की थी।
  • औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंगलैंड में हुई थी जिसके द्वारा समाज में पूँजीपति वर्ग एवं मजदूर वर्ग का उदय हुआ।
  • समाजवाद शब्द का पहला प्रयोग 1827 में हुआ।
  • सेंट साइमन (फ्रांस के) रॉबर्ट ओवेन (इंगलैंड के) आरंभिक समाजवादी थे जो आदर्शवादी थे। इसलिए उन्हें “स्वप्नदर्शी समाजवादी” (Utopian Socialists) कहा जाता है। * चार्टिस्ट आंदोलन ब्रिटेन में हुआ था।
  • कार्ल मार्क्स का जन्म जर्मनी के राइन प्रांत के टियर नगर में एक यहूदी परिवार में 5 मई, 1818 को हुआ था।
  • 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • मार्क्स और एंगेल्स ने मिलकर 1848 में कम्यूनिस्ट मेनिफेस्टो (CommunistManifesto) । अथवा साम्यवादी घोषणा पत्र प्रकाशित किया।
  • मार्क्स ने अपनी विख्यात पुस्तक दास कैपिटल का प्रकाशन 1867 में किया। इसे ‘समाजवादियों का बाइबिल’ कहा जाता है।
  • लंदन में 1864 में मार्क्स के प्रयासों से प्रथम इंटरनेशनल (अंतर्राष्ट्रीय संघ) की स्थापना हुई।
  • 1889 में पेरिस में द्वितीय इंटरनेशनल की बैठक हुई।
  • ‘चेका’ गुप्त पुलिस संगठन था।
  • ट्रॉटस्की के नेतृत्व में एक विशाल लाल सेना’ गठित की गई।
  • लेनिन ने 1921 ई. में एक नई आर्थिक नीति (NEP) लागू की। .
  • सोवियत संघ का विघटन दिसम्बर, 1991 ई० में हुआ।
  • लेनिन ने 1919 में मास्को में थर्ड इंटरनेशनल की स्थापना की।
  • शीतयुद्ध पूँजीवादी गुट का नेता संयुक्त राज्य अमेरिका तथा साम्यवादी गुट का नेता सोवियत संघ के बीच हुआ था।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 पुत्र वियोग

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 पुत्र वियोग

 

पुत्र वियोग वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ–

Bihar Board Class 12 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
‘मुकुल’ त्रिधारा आदि सुभद्रा कुमारी चौहान की कैसी कृतियाँ हैं?
(क) काव्य कृतियाँ
(ख) नाट्य कृतियाँ
(ग) कहानी–संग्रह
(घ) एकांकी–संग्रह
उत्तर-
(क)

Bihar Board Hindi Book Class 12 Pdf Download प्रश्न 2.
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म कब हुआ था?
(क) 16 अगस्त, 1904 ई.
(ख) 18 अगस्त, 1910 ई.
(ग) 15 अगस्त, 1902 ई.
(घ) 20 अगस्त, 1915 ई.
उत्तर-
(क)

Hindi Book Class 12 Bihar Board 100 Marks प्रश्न 3.
सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कविता कौन–सी है?
(क) प्यारे–नन्हें बेटे को
(ख) पुत्र–वियोग
(ग) हार–जीत
(घ) गाँव का घर
उत्तर-
(ख)

Class 12 Hindi Book Bihar Board प्रश्न 4.
माँ के लिए अपने मन को समझाना कब कठिन हो जाता है?
(क) घन नष्ट होने पर
(ख) पुत्र मृत्यु पर
(ग) पति मृत्यु पर
(घ) पिता मृत्यु पर
उत्तर-
(ख)

Bihar Board Solution Class 12th Hindi प्रश्न 5.
“बिखरे मोती समा के खेल’ सुभद्रा कुमारी चौहान की कौन–सी कृतियाँ हैं?
(क) कहानी–संग्रह
(ख) उपन्यास
(ग) संस्मरण
(घ) आलोचना
उत्तर-
(क)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 12 Pdf प्रश्न 1.
मेरा खोया हुआ………..।
अबतक मेरे पास न आया।
उत्तर-
खिलौना

Hindi Book Class 12 Bihar Board 100 Marks Pdf प्रश्न 2.
आज दिशाएँ भी हँसती हैं
है उल्लास……… पर छाया।
उत्तर-
विश्व

Bihar Board 12th Hindi Book Pdf प्रश्न 3.
शीत न लग जाए, इस भय से
नहीं ……… से जिसे उतारा।
उत्तर-
गोद

Hindi Class 12 Bihar Board प्रश्न 4.
छोड़ काम दौड़ कर आई,
………. कहकर जिस समय पुकारा।
उत्तर-
‘माँ’

Hindi Book Class 12 Bihar Board 100 Marks Syllabus प्रश्न 5.
……… दे दे जिसे सुलाया,
जिसके लिए लोरियाँ गाई।
उत्तर-
थपकी

पुत्र वियोग अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Bihar Board Class 12 Hindi Book Pdf प्रश्न 1.
कवयित्री स्वयं को असहाय क्यों कहती है?
उत्तर-
पुत्र वियोग के कारण।

दिगंत भाग 2 Pdf 12th Download प्रश्न 2.
सुभद्रा कुमारी चौहान का खिलौना क्या है?
उत्तर-
उसका पुत्र।

Bihar Board Class 12 Hindi Book प्रश्न 3.
माँ के लिए अपने मन को समझाना कब कठिन हो जाता है?
उत्तर-
पुत्र की मृत्यु पर।

Hindi Book Class 12 Bihar Board 100 Marks Pdf Download प्रश्न 4.
सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कविता कौन–सी है?
उत्तर-
पुत्र वियोग।

पुत्र वियोग पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

12th Hindi Book 100 Marks Bseb Pdf Download प्रश्न 1.
कवयित्री का खिलौना क्या है?
उत्तर-
कवयित्री का खिलौना उसका बेटा है। बच्चों को खिलौना प्रिय होता है। उसी प्रकार कवयित्री माँ के लिए उसका बेटा उसके जीवन का सर्वोत्तम उपहार है। इसलिए वह कवयित्र का खिलौना है।

Class 12th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 2.
कवयित्री स्वयं को असहाय और विवश क्यों कहती है?
उत्तर-
कवयित्री स्वयं को असहाय तथा विवश इसलिए कहती है कि उसने अपने बेटे की देख–भाल तथा उसके लालन–पालन पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर दिया। अपनी सुविधा असुविधा का कभी विचार नहीं किया। बेटा को ठंढ न लग जाए बीमार न पड़ जाए इसलिए सदैव उसे गोदी में रखा। इन सारी सावधानियों तथा मन्दिर में पूजा–अर्चना से वह अपने बेटे की असमय मृत्यु नहीं टाल सकी। नियमि के आगे किसी का वश नहीं चलता। अतः, वह स्वयं को असहाय तथा बेबस माँ कहती है।

प्रश्न 3.
पुत्र के लिए माँ क्या–क्या करती है?
उत्तर-
पुत्र के लिए माँ निजी सुख–दुख भूल जाती है। उसे अपनी सुख–सुविधा के विषय में सोचने की अवकाश नहीं रहता। वह बच्चे के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखती है। बेटा को ठंढ़ न लग जाए अथवा बीमार न पड़ जाए, इसके लिए उसे सदैव गोद में लेकर उसका.. मनोरंजन करती रहती है। उसे लोरी–गीत सुनाकर सुलाती है। उसके लिए मन्दिरों में जाकर पूजा–अर्चना करती है तथा मन्नतें माँगती है।

प्रश्न 4.
अर्थ स्पष्ट करें–
आज दिशाएँ भी हँसती हैं
है उल्लास विश्व पर छाया
मेरा खोया हुआ खिलौना
अब तक मेरे पास न आया।
उत्तर-
आज सभी दिशाएँ पुलकित हैं, सर्वत्र प्रसन्नता छाई हुई है। सारे विश्व में उल्लास का वातावरण है। किन्तु मेरा (कवयित्री) खोया हुआ खिलौना अब मुझे प्राप्त नहीं हुआ। अर्थात् कवयित्री के पुत्र का निधन हो गया है। इस प्रकार वह उससे (कवयित्री) छिन गया है। यह उसकी व्यक्तिगत क्षति है। विश्व के अन्य लोग हर्षित हैं। सभी दिशाएँ भी उल्लासित (प्रमुदित) दिख रही हैं। किन्तु कवयित्री ने अपना बेटा खो दिया है। उसकी मृत्यु हो चुकी है। वह उद्विग्न है शोक विह्वल है। अपनी असंयमित मनोदशा में वह बेटा के वापस आने की प्रतीक्षा करती है और नहीं लौटकर आने पर निराश हो जाती है।

प्रश्न 5.
माँ के लिए अपना मन समझाना कब कठिन है और क्यों?
उत्तर-
माँ के लिए अपने मन को समझाना तब कठिन हो जाता है, जब वह अपना बेटा खो देती है। बेटा माँ की अमूल्य धरोहर होता है। बेटा माँ की आँखों का तारा होता है। माँ का सर्वस्व यदि क्रूर नियति द्वारा उससे छीन लिया जाता है उसके बेटे की मृत्यु हो जाती है तो माँ के लिए अपने मन को समझाना कठिन होता है।

प्रश्न 6.
पुत्र को ‘छौना’ कहने से क्या भाव हुआ है, इसे उद्घाटित करें।
उत्तर-
‘छौना’ का अर्थ होता हे हिरण आदि पशुओं का बच्चा ‘पुत्र वियोग’ शीर्षक कविता में कवयित्री ने ‘छौना’ शब्द का प्रयोग अपने बेटा के लिए किया है। हिरण अथवा बाघ का बच्चा बड़ा भोला तथा सुन्दर दिखता है। इसके अतिरिक्त चंचल तथा तेज भी होती है। अतः, कवयित्री द्वारा अपने बेटा को छौना कहने के पीछे यह विशेष अर्थ भी हो सकता है।

प्रश्न 7.
मर्म उद्घाटित करें–
भाई–बहिन भूल सकते हैं
पिता भले ही तुम्हें भुलाये
किन्तु रात–दिन की साथिन माँ
कैसे अपना मन समझाएँ।
उत्तर-
भाई तथा बहिन, अपने भाई को भूल जा सकते हैं। पिता भी अपने बेटे को विस्मृत कर सकता है, पर उसकी ममतामयी माँ जो सदैव उसके पास रहती है, गोद में लेकर मन बहलाती है। उसको सुलाने के लिए लोरी गीत सुनाती है, वह माँ अपने बेटा को नहीं भूल सकती है। वह तो सदैव एक सच्चे साथी के समान, उसके पास सदैव रही है। उसको दिन रात गोदी में लेकर मन बहलाती रही है। अतः, वे बेटा को मौत के बाद अपने मन को कैसे समझाए।

प्रश्न 8.
कविता का भावार्थ संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-
‘पुत्र वियोग’ शीर्षक कविता में अपने बेटे की मौत के बाद उसकी शोकाकुल माँ के मन में उठनेवाले अनेक निराशाजनक तथा असंयमित विचार तथा उससे उपजी विषादपूर्ण मन:स्थिति का उद्घाटित किया गया। कवयित्री अपने बेटे के आकस्मिक तथा अप्रत्याशित निधन से मानसिक तौर पर अशान्त है। वह अपनी विगत स्मृतियों को याद कर उद्विग्न है। एक माँ के हृदय में उठनेवाले झंझावत की वह स्वयं भुक्तभोगी है। कविता में कवयित्री द्वारा नितांत मनोवैज्ञानिक तथा स्वाभाविक चित्रण किया गया है।

बेटा की मौत से कवयित्री विषाद के गहरे सदमे में डूबी है–उसका प्यारा बेटा अब उसे दूर चला गया है। उसने उसे दिन–रात गोद में लेकर ठंड तथा रोग से बचाया, लोरियाँ सुनाकर उसे सुलाया। उसके लिए मंदिरों में पूजा–अर्चना की, मन्नतें मांगी। किन्तु ये सारे प्रयास निरर्थक हो गए। अब वह दुखी माँ एक पल के लिए भी अपने बेटा का मुख देखना चाहती है उसे अपनी छाती से चिपकाकर स्नेह को वर्षा करना चाहती है, उससे बातचीत कर कुछ समझाना चाहती है। शोकाकुल कवयित्री (माँ) भावावेश में इतनी असंयमित हो जाती है कि वह अपने मृत बेटा को संबोधित करते हुए यहाँ तक कहती है–अब तुम सदा मेरे पास रहो, मुझे छोड़ कर मत जाओ।

वस्तुतः कवयित्री ने अपने बेटे की मौत से उपजे दु:खिया माँ के शोकपूर्ण उद्गारों का स्वाभाविक एवं मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है। ऐसी युक्तियुक्तपूर्ण एवं मार्मिक प्रस्तुति अन्यत्र दुर्लभ है। महादेवी वर्मा की एक मार्मिक कविता इस प्रकार है, जो माँ की ममता को प्रतिबंधित करती है, आँचल में है दूध और आँखों में पानी।

प्रश्न 9.
इस कविता को पढ़ने पर आपके मन पर क्या प्रभाव पड़ा, उसे लिखिए।
उत्तर-
‘पुत्र वियोग’ कविता में कवयित्री ने अपने बेटा की मृत्यु तथा उससे उपज विवाद की अभिव्यक्ति की है। कवयित्री की विरह–वेदना, अतीत के पृष्ठों को उलटते हुए विगत की स्मृतियों को दुहराना पाठक के मन में करुणा विषाद की रेखा खींच देती है। उसकी (पाठक) की भावनाएँ कवयित्री (माँ) के शोकाकुल क्षणों में अपनी संवेदना प्रकट करती दिखती है।

मेरे मन में भी कुछ इसी प्रकार के मनोभावों का आना स्वाभाविक है। किसका ‘हृदय संवेदना से नहीं भर उठेगा? कौन कवयित्री के शोकोद्गारों की गहराई में गए बिना रहेगा।

एक माँ का अपने बेटे को दिन रात देखभाल करना बीमारी, ठंड आदि से रक्षा के लिए उसे गोदी में खेलाते रहना। स्वयं रात में जागकर उसे लोरी सुनाकर सुलाना ! अपने दाम्पत्य जीवन को खुशी को संतान पर केन्द्रित करना। अंत में नियति के क्रूर चक्र की चपेट में बेटा की मौत। इन सारे घटनाक्रमों से मैं मानसिक रूप से अशांत हो गया। मुझे ऐसा अहसास हुआ जैसे यह त्रासदी मेरे साथ हुई। कविता में कवयित्री ने अपनी सम्पूर्ण संवेदना को उड़ेल दिया है, करुणा उमड़ पड़ी तथा असहाय दर्द की अनुभूति होती है।

पुत्र वियोग भाषा की बात

प्रश्न 1.
सुभद्रा कुमारी चौहान की काव्य–भाषा पर संक्षिपत टिप्पणी लिखें।
उत्तर-
सुभद्रा कुमारी चौहान की काव्य–भाषा यथार्थनिष्ठा राष्ट्रीय भावधारा है। वे अपने समकालीन छायावादी काव्यधरा के समान्तर रूप से काव्य रचना करनेवाली राष्ट्रीय भावधारा की प्रमुख और विशिष्ट कवयित्र थी। उनकी इस भावधारा के मूल में सामाजिक, राजनीतिक यथार्थ की प्रेरणाएँ और आग्रह थे।

प्रश्न 2.
कविता से सर्वनाम शब्दों को चुनें।
उत्तर-
मेरा खोया हुआ खिलौना, अबतक न मेरे पास आया।

प्रश्न 3.
‘मलिनता’ में ‘ता’ प्रत्यय है। ‘ता’ प्रत्यय के योग से पाँच अन्य शब्द बनाएँ।
उत्तर-
मानवता, आवश्यकता, दानवता, मनुष्यता, सरलता।

प्रश्न 4.
इनके विपरीतार्थक शब्द लिखें–
मलिनता, देव, असहाय, जटिल, नीरस, कठिन, विकल।
उत्तर-

  • शब्द विपरीतार्थक
  • मलिनता – स्वच्छता
  • देव – दानव
  • असहाय – समर्थ
  • जटिल – सरल
  • नीरस – सरस
  • कठिन – सरल
  • विकल – अविकल

प्रश्न 5.
वाक्य प्रयोग द्वारा इन मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करें
(क) आँखों में रात बिताना
(खं) शीश नवाना
उत्तर-
(क) आँखों में रात बिताना–(राज भर जागना)–माताएँ अपने बच्चों के लिए आँखों में रात बिता देती है।
(ख) शीश नवाना (आदर करना, प्रणाम करना)–मोहन ने अपने गुरु के सामने शीश नवाया।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखें गोद, छौना, बहन, विश्व, दूध।।
उत्तर-

  • शब्द समानार्थी शब्द
  • गोद – अंक
  • छौना – बालक, शावक
  • बहन – भगिनी
  • विश्व – जगत, संसार
  • दूध – पय, सुधा

प्रश्न 7.
‘उल्लास’ शब्द का सन्धि–विच्छेद्र करें।
उत्तर-
उल्लास = उत् + लास

पुत्र वियोग कवि परिचय सुभद्रा कुमारी चौहान (1904–1948)

कवि परिचय– 16 अगस्त, 1904 को सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म निहालपुर, इलाहाबाद (उ.प्र.) में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती धीराज कुँवरी और पिता का नाम ठाकुर रामनाथ सिंह था। सन् 1919 में इनका विवाह ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से खांडवा, मध्यप्रदेश में हुआ। लेखिका के पति अंग्रेजो सरकार द्वारा जब्त ‘कुली प्रथा और गुलामी का नशा’ नामक नाटकों के लेखक एक प्रसिद्ध पत्रकार, अच्छे स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के सक्रिय नेता थे।

लेखिका की आरम्भिक शिक्षा क्रास्थवेट गर्ल्स स्कूल, इलाहाबाद में हुई जहाँ इनके साथ प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा भी थीं। इसके पश्चात् वाराणसी में थियोसोफिकल स्कूल के नौवीं कक्षा के बाद अधूरी शिक्षा छोड़ कर असहयोग आन्दोलन में कूद पड़ी। छात्र जीवन से ही इन्हें काव्य रचना की भी अभिरूचि थी। आगे चलकर एक अच्छी कवयित्री एवं साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठा. भी पायौं।

लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान अपने जीवनकाल में समाज सेवा, स्वाधीनता संघर्ष में सक्रिय भागीदारी, राजनीति करते हुए अनेक बार कारावास भी गयीं। अन्त में मध्यप्रदेश के एक विधानसभा में एम. एल. ए. बनकर अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन और जागरण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वसंत पंचमी के दिन इस संसार से “नवश्रृजन के महापर्व” करके चल पड़ी।

इनके जीवन का महामंत्र था। स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व होम करना, इतना ही नहीं, मुक्तिबोध ने तो कहा है “सुभद्रा जी के साहित्य में अपने युग के मूल उद्वेग, उसके भिन्न–भिन्न रूप, अपनी आभरणहीन शैली में प्रकट हुए हैं।”

सुभद्रा कुमारी चौहान की निम्नलिखित रचनायें ‘मुकुल’ (कविता संग्रह), ‘त्रिधारा’ (कविता चयन) बिखरे मोती (कहानी संग्रह) सभा के खेल (कहानी संग्रह) प्रमुख हैं।

पुत्र वियोग कविता का सारांश

अपने पुत्र के असामयिक निधन के बाद माँ द्वारा व्यक्त की हुई उसके अन्दर की व्यथा का इस कविता में सफल निरूपण हुआ। कवयित्री माँ अपने पुत्र–वियोग में अत्यन्त भावुक हो उठती है। उसकी अन्तर्चेतना को पुत्र का अचानक बिछोह झकझोर देता है। प्रस्तुत कविता में पुत्र के अप्रत्याशित रूप से असनय निधन से माँ के हृदय में अपने संताप का हृदय–विदारक चित्रण है। एक माँ के विषादमय शोक का एक साथ धीरे–धीरे गहराता और क्रमशः ऊपर की ओर आरोहण करता भाव उत्कंठा अर्जित करता जाता है तथा कविता के अन्तिम छंद में पारिवारिक रिश्तों के बीच माँ–बेटे के संबंध को एक विलक्षण आत्म–प्रतीति में स्थायी परिवर्तित करता है। यह माँ की ममता की अभिव्यक्ति का चरमोत्कर्ष है।…

कवयित्री अपने पुत्र असामयिक निधन से अत्यन्त विकल है। उसे लगता है कि उसका प्रिय खिलौना खो गया है। उसने अपने बेटे के लिए सब प्रकार के कष्ट उठाए, पीड़ाएँ झेली। उसे कुछ हो न जाय, इसलिए हमेशा उसे गोद में लिए रहती थी। उसे सुलाने के लिए लोरियाँ गाकर तथा थपकी देकर सुलाया करती थी। मन्दिर में पूजा–अर्चना किया, मिन्नतें माँगी, फिर भी वह अपने बेटे को काल के गाल से नहीं बचा सकी। वह विवश है। नियति के आगे किसी का वश नहीं चलता।

कवयित्री की एकमात्र इच्छा यही है कि पलभर के लिए भी उसका बेटा उसके पास आ जाए अथवा कोई व्यक्ति उसे लाकर उससे मिला दे। कवयित्री उसे अपने सीने से चिपका लेती है तथा उसका सिर सहला–सहलाकर उसे समझाती है। कवयित्री की संवेदना उत्कर्ष पर पहुँच जाती है, शोक सागर में डूबती–उतराती बिछोह की पीड़ा असह्य है। वह बेटा से कहती है कि भविष्य में वह उसे छोड़कर कभी नहीं जाए। अपने मृत बेटे को उक्त बातें कहना उसकी असामान्य मनोदशा का परिचायक है। संभवतः उसने अपनी जीवित सन्तान को उक्त बातें कही हों।

सुभद्रा के प्रतिनिध काव्य संकलन ‘मुकुल’ से ली गई। प्रस्तुत कविता, ‘पुत्र–वियोग’ कवयित्री माँ के द्वारा लिखी गई है तथा निराला की ‘सरोज–स्मृति’ के बाद हिन्दी में एक दूसरा
“शोकगीत” है।

पुत्र के असमय निधन के बाद तड़पते रह गए माँ के हृदय के दारूण शोक की ऐसी सादगी भरी अभिव्यक्ति है जो निर्वैयक्तिक और सार्वभौम होकर अमिट रूप में काव्यत्व अर्जित कर लेती है। उसमें एक माँ के विवादमय शोक का एक साथ धीरे–धीरे गहराता और ऊपर–ऊपर आरोहण करता हुआ भाव उत्कटता अर्जन करता जाता है तथा कविता के अन्तिम छंद में पारिवारिक रिश्तों के बीच माँ–बेटे के संबंध को एक विलक्षण आत्म–प्रतीति में स्थायी परिणति पाता है।

कविता का भावार्थ 1.
आज दिशाएँ भी हँसती हैं
है उल्लास विश्व पर छाया,
मेरा खोया हुआ खिलौना
अब तक मेरे पास न आया।
शीत न लग जाए,
इस भय से नहीं गोद से
जिसे उतारा छोड़ काम दौड़ कर आई
‘मा’ कहकर जिस समय पुकारा (पृष्ठ 195)

प्रसंग–प्रस्तुत पद्यांश प्रसिद्ध कवयित्री ‘सुभद्रा कुमारी चौहान’ द्वारा रचित उनकी कविता ‘पुत्र वियोग’ से उद्धृत है जो उनके प्रतिनिधि काव्य संकलन ‘मुकुल’ में संकलित है। कवयित्री की यह रचना एक शोकगीति है।

यह शोकगीति पुत्र के असामयिक निधन के बाद कवयित्री माँ द्वारा लिखा गया है, जिसमें पुत्र–निधन के बाद पीछे तड़पते रह गए माँ के हृदय के दारुण शोक की मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति है। यह विषादमय शोक गहरा होता हुआ भाव उत्कटता प्राप्त करता जाता है।

व्याख्या–पुत्र की असामयिक मृत्यु से शोक विह्वल माँ अपने शोक संतप्त भावों को प्रकट करते हुए कहती है कि आज जब चारों ओर खुशी का वातावरण है और सारे संसार में खुशियाँ छाई हैं ऐसे में एक दुखी माँ के लिए ये सारी खुशियाँ बेकार हैं। मेरा पुत्र असमय मृत्यु को प्राप्त कर चुका है। मैं उसके इंतजार में दुखी बैठी हूँ। मेरा खोया पुत्र मेरे पास नहीं है।

फिर वह अपने मृत पुत्र को याद करती हुई कहती है कि मैंने अपने पुत्र को सर्दी, गर्मी, बरसात तथा हर दुख से बचाने का प्रयास किया था। मेरे प्रिय पुत्र को सर्दी न लगे, वह बीमार न पड़े, इसलिए मैंने उसे गोद से जमीन पर नहीं उतरने दिया। उसने जब भी माँ कहते हुए मुझे आवाज लगाई मैं अपना सारा काम–काज छोड़कर उसके पास दौड़कर आई, ताकि उसकी जरूरतें पूरी कर सकूँ।

विशेष–

  • पुत्र वियोग में दुखी माँ को उल्लासपूर्ण वातावरण भी उल्लसित नहीं कर पा रहा है।
  • माँ अपने पुत्र के हर दुःख में उसका ध्यान रखती है, यह भाव व्यक्त हुआ है।
  • माँ ने अपने पुत्र को खिलौना कहकर मार्मिकता बढ़ा दी है।
  • ‘हँसती हैं’ में अनुप्रास अलंकार है।
  • भाषा सहज तथा भावाभिव्यक्त करने में सक्षम है।
  • छंदबद्ध काव्यांश में करुण रस घनीभूत हुआ है।

2. थपकी दे दे जिसे सुलायी
जिसके लिए लोरियाँ गाईं,
जिसके मुख पर जरा मलिनता
देख आँख में रात बिताई।
जिसके लिए भूल अपनापन
पत्थर को भी देव बनाया
कहीं नारियल, दूध, बताशे
कहीं चढ़ाकर शीश नवाया।

प्रसंग–पूर्ववत्। माँ अपने पुत्र से असीम प्यार करती हैं। वह अपने पुत्र को जरा सी तकलीफ में देखकर परेशान हो जाती है। उसकी परेशानी दूर करने के लिए वह तरह–तरह के उपाय करती है। कवयित्री भी अपने पुत्र के साथ किए गए प्यार भरे व्यवहार को याद कर उठती है। उसे वे सारी बातें एक–एक कर याद आने लगती हैं।

व्याख्या–कवयित्री कहती हैं कि उसने अपने प्रिय पुत्र के हर दुख–सुख का ख्याल रखा। उसने उसे प्यार से थपकियाँ देकर सुलाने की कोशिश की। उसे सुलाने के लिए मीठी–मीठी लोरियाँ सुनाईं, जिससे वह सो जाए। अपने पुत्र के चेहरे की चमक फीकी देखकर या उसकी उदासी महसूस कर उसने रात–रात भर जागकर उसका ख्याल रखा।

भलाई और सुख के लिए वह अपना सब कुछ भूल गई। उसे अपना सुख–दुख याद न रहा। इस कारण उसने पत्थर को देवता मानकर उसकी विधिवत् पूजा–अर्चना की। उसने इन देवों की पूजा करते हुए कहीं नारियल, दूध और बताशे चढ़ाए तो कहीं देवालयों में अपने पुत्र की भलाई की कामना करते हुए देवों को प्रणाम किया।

विशेष–

  • माँ अपनी संतान की भलाई के लिए नाना प्रकार के कष्ट उठाती हैं, यह भाव व्यक्त हुआ है।
  • लोरियाँ गाकर बच्चों को सुलाने की प्राचीन परंपरा का वर्णन किया गया है। (iii) दे दे’ में पुनरुक्ति प्रकाश तथा “लिए लोरियाँ’ में अनुप्रास अलंकार है।
  • आँखों में रात बिताना’ ‘पत्थर को देव बनाना’ तथा ‘शीश नवाना’ आदि मुहावरों का उपयुक्त प्रयोग किया गया है।
  • भाषा सहज, सरल तथा भावों को व्यक्त करने में सक्षम है, जिससे काव्यांश मर्म को छू जाता है।
  • काव्यांश छंदबद्ध तुकांत शैली में है।

3. फिर भी कोई कुछ न कर सका
छिन ही गया खिलौना मेरा
मैं असहाय विवश बैठी ही
रही उठ गया छौना मेरा।
तड़प रहे हैं विकल प्राण ये
मुझको पल भर शान्ति नहीं है
वह खोया धन पर न सकूँगी
इसमें कुछ भी भ्रांति नहीं है।

प्रसंग–पूर्ववत्। कवयित्री ने अपने पुत्र की हर तरह से देखभाल की। उसकी सलामती के लिए पूजा–अर्चना करते हुए देवताओं के सम्मुख सिर झुकाकर दुआएँ भी माँगी, पर मृत्यु के आगे कोई कुछ नहीं कर सका है।

व्याख्या–कवयित्री कहती है कि उसके द्वारा की गई पूजा–अर्चना और माँगी गई दुआएँ भी उसके पुत्र को नहीं बचा सकी। कोई कुछ भी नहीं कर सका और उसका पुत्र असमय मृत्यु को प्राप्त हो गया। एक माँ का खिलौना उससे छिन गया और वह असहाय तथा विवश होकर बैठी रह गई। सकी आँखों से सामने ही उसका प्यारा पुत्र भगवान को प्यार हो गया।

पुत्र वियोग में तड़पती माँ कहती है कि इस असह्य कष्ट को उसका हृदयं तड़प–तड़पकर सह रहा है। उसे पुत्र की मृत्यु के बाद से पल भर के लिए शान्ति नहीं मिल सकी है। एक विवश माँ यह भी जानती है कि उसका जो अनमोल धन (पुत्र) खो गया है, उसे वह वापस नहीं पा सकती है। इस बात में जरा भी संदेह की गुजाइश नहीं है।

विशेष–

  • मृत्यु एक अटल सत्य है और इसे नकारा नहीं जा सकता है यह भाव व्यक्त किया गया है।
  • पुत्र वियोग में व्याकुल एक माँ के हृदय की पीड़ा का हृदय–स्पर्शी चित्रण है।
  • ‘कोई कुछ न कर सका’ में अनुप्रास अलंकार है।
  • पुत्र के लिए ‘खिलौना’, ‘छौना’, ‘धन’ आदि उपमों के प्रयोग से भाषा–सौन्दर्य में वृद्धि हुई है
  • छंदबद्ध काव्यांश में करुण रस की उद्भावना हुई है।
  • भाषा सरल, सहज, हृदयस्पर्शी, तत्सम शब्दों से युक्त तथा भावों को अभिव्यक्त करने में सफल है।.

4. फिर भी रोता ही रहता है
नहीं मानता है मन मेरा
बड़ा जटिल नीरस लगता है
सूना सूना जीवन मेरा।
यह लगता है एक बार यदि
पल भर को उसको पा जाती
जी से लगा प्यार से सर
सहला सहला उसको समझाती।

प्रसंग–पूर्ववत्।

एक माँ यह बात अच्छी तरह जानती है कि मृत्यु पर किसी का वश नहीं चलता है। मृत्यु को किसी से मोह नहीं होता और जो उसके मुँह में चला गया, वह कभी लौटकर नहीं आता है। किन्तु एक माँ अपने मृत बेटे को कभी भूल नहीं पाती है। वह पुत्र वियोग में सदा तड़पती रहती है।

व्याख्या–अपने पुत्र की असामयिक मृत्यु से दुखी कवयित्री कहती है कि यह जानकर भी कि जो मर गया उसे वापस नहीं पाया जा सकता है। फिर भी उसका पुत्र के लिए रोता ही रहता है। किसी तरह से समझाने पर भी वह नहीं मानता है। पुत्र की मृत्यु के उपरांत उसके जीवन में खुशियाँ नहीं बची हैं। उसका जीवन कठिन और सूना–सूना हो गया है।

कवयित्री सोचती है कि यदि वह अपने खोए (मरे हुए) पुत्र को एक बार फिर से पा जाती, तो उसे जी–भरकर प्यार करती और अपने हृदय से लगा लेती। वह अपने पुत्र का सिर बार–बार सहलाती है और उसे समझाती कि वह अपनी मां को छोड़कर दूर न जाए।

विशेष–

  • पुत्र वियोग में तड़पती माँ के शोकाकुल हृदय (मन) की पीड़ा का हृदयस्पर्शी वर्णन है।
  • माँ का जीवन उसके पुत्र के लिए बिना कितना सूना हो जाता है, यह भाव व्यक्त हुआ है।
  • माँ अपने पुत्र को पुनः पाना तथा प्यार करना चाहती है। इसे असंभव जानते हुए भी माँ की ममता इसे संभव बना लेना चाहती है।
  • ‘मानता है मेरा मन’ में अनुप्रास अलंकार तथा ‘सूना–सूना’ एवं ‘सहला–सहला’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  • काव्यांश छंदबद्ध एवं तुकांतयुक्त है, जिसमें करुण रस घनीभूत है।
  • भाषा सरल, सहज तथा भावाभिव्यक्ति में पूर्णतया समर्थ है।

5. मेरे भैया मेरे बेटे अब
माँ को यों छोड़ न जाना
बड़ा कठिन है बेटा खोकर
माँ को अपना मन समझाना।
भाई–बहिन भूल सकते हैं
पिता भले ही तुम्हें भुलावे
किन्तु रात–दिन की साथिन माँ
कैसे अपना मन समझावे ! (पृष्ठ 196)

प्रसंग–पूर्ववत्।

माँ अपने पुत्र की मृत्यु से बहुत दुखी है। उसका जीवन सूना–सूना हो गया है। वह अपने मृत पुत्र को पुनः पाना चाहती है। वह उसे समझाना चाहती है कि वह अपनी माँ को छोड़कर. कहीं भी न जाए।

व्याख्या–पुत्र वियोग में शोक–संतप्त माँ सोचती है कि यदि उसका पुत्र उसे पुनः मिल जाए तो वह उसे समझाएगी कि मेरे प्रिय पुत्र, मेरे भैया (बेटा) ! अब तुम अपनी माँ को छोड़कर इस तरह मत जाना, जैसे तुम अब चले गए थे। एक माँ से बेटे का यूँ बिछुड़कर दूर चले जाना ही उसके लिए सबसे बड़ा दुख है। अपने दुखी मन को सांत्वना देना और समझाना उसके (माँ के) लिए बड़ा ही कठिन होता है।

पुत्र वियोग में व्याकुल माँ कहती है कि हे बेटा ! तुम्हारे भाई–बहन तथा पिता भले ही तुम्हें. कुछ समय बाद भूल जाएँ, पर माँ तो अपने पुत्र की दिन–रात अर्थात् हर समय की साथिन होती है। वह उसे अपने गर्भ में पालती–पोसती है। उसे अपने साथ लिए हुए घूमती है। इसलिए वह उसे अपने मन को कैसे. और क्या समझाकर अपना दुख कम करे।

विशेष–

  • काव्याश में एक माँ की वेदना का हृदयस्पर्शी एवं मार्मिक वर्णन है।.
  • माँ और बेटे के बीच ममता का अटूट रिश्ता होता है। यह रिश्ता माँ को अपने पुत्र की याद दिलाता है, यह भाव व्यक्त हुआ है।
  • काव्यांश में करुण रस व्याप्त है।
  • भाषा सरल, सहज, बोधगम्य, मर्मस्पर्शी तथा भावों को व्यक्त करने में समर्थ है।।
  • काव्यांश छंदबद्ध तथा तुकांत युक्त है, जिसमें ‘रात–दिन की साथिन’ लोकोक्ति का अत्यन्त सुन्दर प्रयोग किया गया है।
  • अन्तिम पंक्तियों में मानवीय रिश्तों का मर्म छिपा हुआ है।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं

Bihar Board Class 10 Hindi नाखून क्यों बढ़ते हैं Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

नाखून क्यों बढ़ते हैं प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
नाखून क्यों बढ़ते हैं ? यह प्रश्न लेखक के आगे कैसे उपस्थित हुआ?
उत्तर-
नाखून क्यों बढ़ते हैं ? यह प्रश्न लेखक के आगे उनकी लड़की के माध्यम से उपस्थित हुआ।

Nakhun Kyu Badhte Hai Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है ?
उत्तर-
प्राचीन काल में मनुष्य जंगली था। वह वनमानुष की तरह था। उस समय वह अपने नाखून की सहायता से जीवन की रक्षा करता था। दाँत होने के बावजूद नख ही उसके असली हथियार थे। उन दिनों अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने के लिए नाखून ही आवश्यक अंग थे। कालान्तर में मानवीय हथियार ने आधुनिक रूप लिया और बंदूक, कारतूस, तोप, बम के रूप में मनुष्य की रक्षार्थ प्रयुक्त होने लगा। नखधर मनुष्य अत्याधुनिक हथियार पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है। पर उसके नाखून अब भी बढ़ रहे हैं। बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है कि तुम भीतर वाले अस्त्र से अब भी वंचित नहीं हो। तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही प्राचीनतम नख एवं दंत पर आश्रित रहने वाला जीव हो। पशु की समानता तुममें अब भी विद्यमान है।

Nakhun Kyon Badhate Hain Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप देखना कहाँ तक संगत है ?
उत्तर-
कुछ लाख वर्षों पहले मनुष्य जब जंगली था उसे नाखून की जरूरत थी। वनमानुष के समान मनुष्य के लिए नाखून अस्त्र था क्योंकि आत्मरक्षा एवं भोजन हेतु नख की महत्ता अधि क थी। उन दिनों प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ने के लिए नाखून आवश्यक अंग था। असल में वही उसके अस्त्र थे। आज के बदलते परिवेश में, परिवर्तित समय में, इस आधुनिकता के दौर में सभ्यता के विकास के साथ-साथ अस्त्र के रूप में इसकी आवश्यकता नहीं समझी जा रही है। अब मनुष्य पशु के समान जीवनयापन नहीं करके आगे बढ़ गया है, इसलिए समयानुसार अपने अस्त्र में भी परिवर्तन कर लिया है। प्राचीन समय के लिए अस्त्र कहा जाना उपयुक्त है, तर्कसंगत है। लेकिन आज यह मानवीय अस्त्र के रूप में प्रयुक्त नहीं है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं प्रश्न उत्तर कक्षा 10 Bihar Board प्रश्न 4.
मनुष्यं बार बार नाखूनों को क्यों काटता है ?
उत्तर-
मनुष्य निरंतर सभ्य होने के लिए प्रयासरत रहा है। प्रारंभिक काल में मानव एवं पशु एकसमान थे। नाखून अस्त्र थे। लेकिन जैसे-जैसे मानवीय विकास की धारा अग्रसर होती गई मनुष्य पशु से भिन्न होता गया। उसके अस्त्र-शस्त्र, आहार-विहार, सभ्यता-संस्कृति में निरंतर नवीनता आती गयी। वह पुरानी जीवन-शैली को परिवर्तित करता गया। जो नाखून अस्त्र थे उसे अब सौंदर्य का रूप देने लगा। इसमें नयापन लाने, इसे संवारने एवं पशु से भिन्न दिखने हेतु नाखूनों को मनुष्य काट देता है। अब वह प्राचीनतम पशुवत् मानव को भूल जाना चाहता है। नाखून को सुंदर देखना चाहता है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं Bihar Board प्रश्न 5.
सुकुमार विनोदों के लिए नाखून को उपयोग में लाना मनुष्य ने कैसे शुरू किया? लेखक ने इस संबंध में क्या बताया है ?
उत्तर-
लेखक ने कहा है कि पशुवत् मानव भी धीरे-धीरे विकसित हुआ, सभ्य बना तब पशुता की पहचान को कायम रखनेवाले नाखून को काटने की प्रवृत्ति पनपी। यही प्रवृत्ति कलात्मक रूप लेने लगी। वात्स्यायन के कामसूत्र से पता चलता है कि भारतवासियों में नाखूनों को जम कर संवारने की परिपाटी आज से दो हजार वर्ष पहले विकसित हुई।

उसे काटने की कला काफी मनोरंजक बताई गई है। त्रिकोण, वर्तुलाकार, चंद्राकार, दंतुल आदि विविध आकृतियों के नाखून उन दिनों विलासी नागरिकों के मनोविनोद का साधन बना। अपनी-अपनी रुचि के अनुसार किसी ने नाखून को कलात्मक ढंग से काटना पसंद किया तो कोई बढ़ाना। लेकिन लेखक ने बताया है कि यह भूलने की बात नहीं है कि ऐसी समस्त अधोगामिनी वृत्तियों को और नीचे खींचनेवाली वस्तुओं को भारतवर्ष ने मनुष्योचित बनाया है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं प्रश्न उत्तर Pdf Bihar Board प्रश्न 6.
नख बढ़ाना और उन्हें काटना कैसे मनुष्य की सहजात वृत्तियाँ हैं ? इनका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
मानव शरीर में बहुत-सी अनायास-जन्य सहज वृत्तियाँ अंतर्निहित हैं। दीर्घकालीन आवश्यकता बनकर मानव शरीर में विद्यमान रही सहज वृत्तियाँ ऐसे गुण हैं जो अनायास ही अनजाने में अपने आप काम करती हैं। नाखून का बढ़ना उनमें से एक है। वास्तव में सहजात वृत्तियाँ अनजान स्मृतियों को कहा जाता है। नख बढ़ाने की सहजात वृत्ति मनुष्य में निहित पशुत्व का प्रमाण है। उन्हें काटने की जो प्रवृति है वह मनुष्यता की निशानी है। मनुष्य के भीतर पशुत्व है लेकिन वह उसे बढ़ाना नहीं चाहता है। मानव पशुता को छोड़ चुका है क्योंकि पशु बनकर वह आगे नहीं बढ़ सकता। इसलिए पशुता की पहचान नाखून को मनुष्य काट देता है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं उत्तर Bihar Board प्रश्न 7.
लेखक क्यों पूछता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है, पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर ? स्पष्ट करें।
उत्तर-
लेखक के हृदय में अंतर्द्वन्द्व की भावना उभर रही है कि मनुष्य इस समय पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर बढ़ रहा है। वह इस प्रश्न को हल नहीं कर पाता है। अत: इसी जिज्ञासा ।

को शांत करने के लिए स्पष्ट रूप से इसे प्रश्न के रूप में लोगों के सामने रखता है। मनुष्य पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर बढ़ रहा है। इस विचारात्मक प्रश्न पर अध्ययन करने से पता चलता है कि मनुष्य पशुता की ओर बढ़ रहा है। मनुष्य में बंदूक, पिस्तौल, बम से लेकर नये-नये महाविनाश के अस्त्र-शस्त्रों को रखने की प्रवृत्ति जो बढ़ रही है वह स्पष्ट रूप से पशुता की निशानी है। पशु प्रवृत्ति वाले ही इस प्रकार के अस्त्रों के होड़ में आगे बढ़ते हैं।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 8.
देश की आजादी के लिए प्रयुक्त किन शब्दों की अर्थ मीमांसा लेखक करता है और लेखक के निष्कर्ष क्या हैं ?
उत्तर-
देश की आजादी के लिए प्रयुक्त ‘इण्डिपेण्डेन्स’ शब्दों की अर्थ मीमांसा लेखक करते हैं। इण्डिपेण्डेन्स का अर्थ है अनधीनता या किसी की अधीनता का अभाव, पर ‘स्वाधीनता’ शब्द का अर्थ है अपने ही अधीन रहना। अंग्रेजी में कहना हो, तो ‘सेल्फडिपेण्डेन्स’ कह सकते हैं।

लेखक का निष्कर्ष है ‘स्व’ निर्धारित आत्म-बंधन का फल है, जो उसे चरितार्थता की ओर ले जाती है। मनुष्य की चरितार्थता प्रेम में है, त्याग में है, अपने को सबके मंगल के नि:शेष भाव से दे देने में है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं प्रश्न उत्तर Class 8 Bihar Board प्रश्न 9.
लेखक ने किस प्रसंग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रसंग- मैं ऐसा तो नहीं मानता कि जो कुछ हमारा पुराना है, जो कुछ हमारा विशेष है, उससे हम चिपटे ही रहें। पुराने का ‘मोह’ सब समय वांछनीय ही नहीं होता। मेरे बच्चे को गोद में दबाये रखने वाली ‘बंदरिया’ मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती।

लेखक महोदय का अभिप्राय है कि सब पुराने अच्छे नहीं होते, सब नए खराब ही नहीं होते। भले लोग दोनों का जाँच कर लेते हैं, जो हितकर होता है उसे ग्रहण करते हैं।

Class 10th Hindi Godhuli Question Answer प्रश्न 10.
‘स्वाधीनता’ शब्द की सार्थकता लेखक क्या बताता है ?
उत्तर-
स्वाधीनता शब्द का अर्थ है अपने ही अधीन रहना। जिसमें ‘स्व’ का बंधन अवश्य है। यह क्या संयोग बात है या हमारी समूची परंपरा ही अनजाने में हमारी भाषा के द्वारा प्रकट होती रही है। समस्त वर्णों और समस्त जातियों का एक सामान्य आदर्श भी है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं प्रश्न उत्तर कक्षा 8 Bihar Board प्रश्न 11.
निबंध में लेखक ने किस बूढ़े का जिक्र किया है ? लेखक की दृष्टि में बूढ़े के कथनों की सार्थकता क्या है ?
उत्तर-
लेखक महोदय ने एक ऐसे बूढ़े का जिक्र किया है जो अपनी पूरी जिंदगी का अनुभव कुछ शब्दों में व्यक्त कर मनुष्य का सावधान करता है। जो इस प्रकार है। बाहर नहीं भीतर की ओर देखो। हिंसा को मन से दूर करो, मिथ्या को हटाओं, क्रोध और द्वेष को दूर करो, लोक के लिए कष्ट सहो, आराम की बात मत सोचो, प्रेम की बात सोचो, आत्म-तोषण की बात सोचो, काम करने की बात सोचो। लेखक की दृष्टि में कथन पूर्णतः सार्थक हैं।

Bihar Board Class 10th Hindi Solution प्रश्न 12.
मनुष्य की पूँछ की तरह उसके नाखून भी एक दिन झड़ जाएँगे। प्राणिशास्त्रियों के इस अनुमान से लेखक के मन में कैसी आशा जगती है ?
उत्तर-
ग्राणीशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि एक दिन मनुष्य की पूँछ की तरह उसके नाखून भी झड़ जायेंगे। इस तथ्य के आधार पर ही लेखक के मन में यह आशा जगती है कि भविष्य में मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जायेगा और मनुष्य का आवश्यक अंग उसी प्रकार झड़ जायेगा जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गयी है अर्थात् मनुष्य पशुता को पूर्णत: त्याग कर पूर्णरूपेण मानवता को प्राप्त कर लेगा।

नाखून क्यों बढ़ते हैं का सारांश Bihar Board प्रश्न 13.
‘सफलता’ और ‘चरितार्थता’ शब्दों में लेखक अर्थ की भिन्नता किस प्रकार प्रतिपादित करता है ?
उत्तर-
सफलता और चरितार्थता में अंतर है। मनुष्य मारणास्त्रों के संचयन से बाह्य उपकरणों के बाहुल्य से उस वस्तु को पा भी सकता है, जिसे उसने बड़े आडंबर के साथ सफलता नाम दे रखा है। परंतु मनुष्य की चरितार्थता प्रेम में है, मैत्री में है, अपने को सबके मंगल के लिए निःशेष भाव से दे देने में है। नाखूनों को काट देना उस ‘स्व’-निर्धारित आत्म-बंधन का फल है, जो उसे चरितार्थता की ओर ले जाती है।

गोधूलि भाग 1 Class 10 Pdf Bihar Board प्रश्न 14.
व्याख्या करें –
(क) काट दीजिए, वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्ज अपराधी की भाँति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर।
व्याख्या-
ग्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के नाखून क्यों बढ़ते हैं, शीर्षक से ली गयी हैं। इसका संदर्भ है-जब लेखक की बिटिया नाखून बढ़ने का सवाल पूछती है, तब लेखक इस पर चिंतन-मनन करने लगता है। इस छोटे से सवाल के बीच ही यह पंक्ति भी विद्यमान है जो लेखक के चिंतन से उभरकर आयी है।

लेखक का मानना है कि नाखून ठीक वैसे ही बढ़ते हैं जैसे कोई अपराधी निर्लज्ज भाव से दंड स्वीकार के समय मौन तो लगा जाते हैं लेकिन पुनः अपनी आदत या व्यसन को शुरू कर देते हैं और अपराध, चोरी करने लगते हैं।
यह नाखून भी ठीक उसी अपराधी की तरह है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है। काट दिए जाने पर पुनः बेहया की तरह बढ़ जाता है। इसे तनिक भी लाज-शर्म नहीं आती। अपराधी की भी ठीक वैसी ही प्रकृति-प्रवृत्ति है।

लेखक ने मनुष्य की पाश्विक प्रवृत्ति की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। वह बार-बार सुधरने, सुकर्म करने की कसमें खाता है। वादा करता है किन्तु थोड़ी देर के बाद पुनः वही कर्म दुहराने लगता है। कहने का मूल भाव यह है कि वह विध्वंसक प्रकृति की ओर सहज अग्रसर होता है जबकि वह निर्णयात्मक कार्यों में अपनी ऊर्जा और मेधा को लगाता।

(ख) मैं मनुष्य के नाखून की ओर देखता हूँ तो कभी-कभी निराश हो जाता हूँ।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के नाखून क्यों बढ़ते हैं’ नामक पाठ से ली गयी हैं। – इन पंक्तियों का संदर्भ मनुष्य की बर्बरता से जुड़ा हुआ है। अपने निबंध में लेखक यह बताना चाहता है कि मनुष्य के नाखून उसकी भयंकरता के प्रतीक हैं। लेखक के मन में कभी-कभी नाखून को देखकर निराशा उठती है। वह इस पर गंभीरता से चिंतन करने लगता है।

कहने का आशय यह है कि मनुष्य की बर्बरता कितनी भयंकर है कि वह अपने संहार में स्वयं लिप्त है जिसका उदाहरण—हिरोशिमा पर बम बरसाना है इससे कितनी धन-जन की हानि हुई, संस्कृति का विनाश हुआ, अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आज भी उसकी स्मृति से मन सिहर उठता है। तो यह है मनुष्य का पाशविक स्वरूप। यहीं स्वरूप उसके नाखून की याद दिला देते हैं। उसकी भयंकरता, बर्बरता, पाशविकता, अदूरदर्शिता, अमानवीयता जिसे लेकर लेखक निराश हो उठता है। वह चिंतित हो उठता है।

लेखक की दृष्टि में मनुष्य के नाखून भयंकर पाशवी वृत्ति के जीते-जागते उदाहरण हैं। मनुष्य की पशुता को जितनी बार काटने की कोशिश की जाय फिर भी वह मरना नहीं चाहती। किसी न किसी नवीन रूप को धारण कर अपने विध्वंसक रूप को प्रदर्शित कर ही देती है।

(ग) कमबख्त नाखून बढ़ते हैं तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा।
व्याख्या-
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ पाठ से ली गयी हैं।
इन पंक्तियों का संदर्भ जुड़ा है – लेख के अंत में द्विवेदीजी यह बताना चाहते हैं कि ये कमबख्त नाखून अगर बढ़ता है तो बढ़े, किन्तु मनुष्य उसे बढ़ने नहीं देगा।

लेखक के कहने का आशय यह है कि मनुष्य अब सभ्य और संवेदनशील हो गया है, बुद्धिजीवी हो गया है। वह नरसंहार का वीभत्स रूप देख चुका है। उसे यादकर ही वह कॉप जाता है। उसके विनाशक रूप का वह भुक्तभोगी है। हिरोशिमा का महाविनाश उसके सामने प्रत्यक्ष प्रमाण है। अतः, उससे निजात पाने के लिए वह सदैव सचेत होकर फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहा है। वह अपने विध्वंसक रूप को छोड़कर सृजनात्मकता की ओर अग्रसर होना चाहता है। वह मानव मूल्यों की रक्षा, मानवीयता की स्थापना में लगे रहना चाहता है। निरर्थक और संहारक तत्वों से बनकर शांति के साये में जीना चाहता है।

मनुष्य के इसी विवेकशील चिंतन और दूरदर्शिता की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए लेखक यह बताना चाहता है कि कमबख्त नाखून बढ़े तो बढ़े इससे चिंतित होने की जरूरत नहीं। अब मनुष्य सजग और सचेत है। वह उसे बढ़ने नहीं देगा उसे काटकर नष्ट कर देगा। कहने का भाव यह है कि वह क्रूरतम विध्वंसक रूप को त्याग देगा।

Bihar Board Solution Class 10 Hindi प्रश्न 15.
लेखक की दृष्टि में हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता क्या है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
लेखक की दृष्टि में हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है अपने आप पर अपने आपको द्वारा लगाया हुआ बंधन। भारतीय चित्त जो आज की अनधीनता के रूप में न सोचकर स्वाधीनता के रूप में सोचता है। यह भारतीय संस्कृति की विशेषता का ही फल है। यह विशेषता हमारे दीर्घकालीन संस्कारों से आयी है, इसलिए स्व के बंधन को आसानी से नहीं छोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 16.
मैं मनुष्य के नाखून की ओर देखता हूँ तो कभी-कभी निराश हो जाता हूँ। स्पष्ट . कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी साहित्य के ललित निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक से उद्धृत है। इस अंश में प्रख्यात निबंधकास हजारी प्रसाद द्विवेदी बार-बार काटे जाने पर . भी बढ़ जाने वाले नाखूनों के बहाने अत्यन्त सहज शैली में सभ्यता और संस्कृति की विकास गाथा उद्घाटित करते हैं। साथ ही नाखून बढ़ने की उसकी भयंकर पाश्विक वृत्ति के जीवंत प्रतीक का भी वर्णन करते हैं।

प्रस्तुत व्याख्येय अंश पूर्ण रूप से लाक्षणिक वृत्ति पर आधारित है। लाक्षणिक धारा में ही निबंध का यह अंश प्रवाहित हो रहा है। लेखक अपने वैचारिक बिन्दु को सार्वजनिक करते हैं। मनुष्य नाखून को अब नहीं चाहता। उसके भीतर प्राचीन बर्बरता का यह अंश है जिसे भी मनुष्य समाप्त कर देना चाहता है। लेकिन अगर नाखून काटना मानवीय प्रवृत्ति और नाखून बढ़ाना पाश्विक प्रवृति है तो मनुष्य पाश्विक प्रवृत्ति को अभी भी अंग लगाये हुए है। लेखक यही सोचकर |

कभी-कभी निराश हो जाते हैं कि इस विकासवादी युग में भी मनुष्य को बर्बरता नहीं घटी है। वह तो बढ़ती ही जा रही है। हिरोशिमा जैसा हत्याकांड पाश्विक प्रवृत्ति का महानतम उदाहरण है। साथ ही लेखक की उदासीनता इस पर है कि मनुष्य की पशुता को जितनी बार काट दो वह मरना नहीं जानती।

प्रश्न 17.
नाखून क्यों बढ़ते हैं का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर-
उत्तर के लिए सारांश देखें।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलें
उत्तर-
अल्पज्ञ – अल्पज्ञों
प्रतिद्वंद्वियों – प्रतिद्वंद्वी
हड्डि – हड्डियाँ
मुनि – मुनियों
अवशेष – अवशेष
वृतियों – वृत्ति
उत्तराधिकार- उत्तराधिकारियों
बंदरिया – बंदर

प्रश्न 2.
वाक्य-प्रयोग द्वारा निम्नलिखित शब्दों के लिंग-निर्णय करें
उत्तर-
बंदूक – बंदूक छूट गया।
घाट  – घाट साफ है।
सतह – सतह चिकना है।
अनुसधित्सा- अनुसंधिसा की इच्छा है।
भंडार – भंडार खाली है।
खोज – खोज पुराना है।
अंग – अंग कट गया।
वस्तु – वस्तु अच्छा है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया की काल रचना स्पष्ट करें।
(क) उन दिनों उसे जूझना पड़ता था। – भूतकाल
(ख) मनुष्य और आगे बढ़ा – भूतकाल
(ग) यह सबको मालूम है। – वर्तमान कार्ल
(घ) वह तो बढ़ती ही जा रही है। – वर्तमान काल
(ङ) मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा। – भविष्य काल

प्रश्न 4.
‘अस्त्र-शस्त्रों का बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा की निशानी है और उनकी बाढ़ . को रोकना मनुष्यत्व का तकाजा है। इस वाक्य में आए विभक्ति चिन्हों के प्रकार बताएँ।
उत्तर-
शस्त्रों का – षष्ठी विभक्ति
मनुष्य की – षष्ठी विभक्ति
इच्छा की – षष्ठी विभक्ति
उनकी – षष्ठी विभक्ति
बाढ़ को – द्वितीया विभक्ति
मनुष्यत्व का- षष्ठी विभक्ति।

प्रश्न 5.
स्वतंत्रता, स्वराज्य जैसे शब्दों की तरह ‘स्व’ लगाकर पाँच शब्द बनाइए।
उत्तर-
स्वधर्म, स्वदेश, स्वभाव, स्वप्रेरणा, स्वइच्छा।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखें
उत्तर-
पशुता – मनुष्यतां
घृणा – प्रेम
अभ्यास – अनभ्यास
मारणास्त्र – तारणस्त्र
ग्रहण – उग्रास
मूढ – ज्ञानी
अनुवर्तिता – परवर्तिता
सत्याचरण – असत्याचरण:

गिद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कुछ लाख ही वर्षों की बात है जब मनुष्य जंगली था, वनमानुष जैसा उसे नाखून की जरूरत थी. उसकी जीवन-रक्षा के लिये नाखून बहुत जरूरी थे। असल में वही उसके अस्त्र थे। दाँत भी थे, पर नाखून के बाद ही उसका स्थान था। उन दिनों उसे जूझना पड़ता था। प्रतिद्वन्द्वियों को पछाड़ना पड़ता था। नाखून उसके लिए आवश्यक अंग था। फिर धीरे-धीरे वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओं का सहारा लेने लगा। पत्थर के ढेले और पेड़ की डालें काम में लाने लगा (रामचंद्र जी की वानरी सेना के पास ऐसे ही अस्त्र थे।) उसने हड्डियों के भी हथियार बनाए। इन हड्डी के हथियारों में सबसे मजबूत और सबसे ऐतिहासिक का देवताओं के राजा का वज्र, जो दधीचि मुनि की हड्डियों से बना था। मनुष्य और आगे बढ़ा। उसने धातु के हथियार बनाए।

जिनके पास लोहे के अस्त्र और शस्त्र थे, वे विजयी हुए। देवताओं के राजा तक को मनुष्यों के राजा से इसलिए सहायता लेनी पड़ती थी कि मनुष्यों के पास लोहे के अस्त्र थे। असुरों के पास । अनेक विद्याएँ थीं, पर लोहे के अस्त्र नहीं थे, शायद घोड़े भी नहीं थे। आर्यों के पास ये दोनों चीजें थीं। आर्य विजयी हुए। फिर इतिहास अपनी गति से बढ़ता गया। नाग हारे, सुपर्ण हारे, यक्ष हारे, गंधर्व हारे, असुर हारे, राक्षस हारे। लोहे के अस्त्रों ने बाजी मार ली। इतिहास आगे बढ़ा। पलीतेवाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने, बमों ने, बमवर्षक वायुयानों में इतिहास को किस कीचड़भरे घाट तक घसीटा है, यह सबको मालूम है। नखधर मनुष्य अब एटम बम पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है। पर उसके नाखून अब भी बढ़ रहे हैं।

अब भी प्रकृति मनुष्य को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है, अब भी वह याद दिला देती है कि तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम वही लाख वर्ष के पहले के नख-दंतावलंबी जीव हो पशु के साथ एक ही सतह पर विचरण करने वाले और चरने वाले।

प्रश्न-
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) मनष्य को कब और क्यों नाखन की आवश्यकता थी
(ग) वज्र किसका हथियार था और वह कैसा था?
(घ) असुरों में अनेक विद्याएँ थीं फिर भी आर्यों से क्यों पराजित हुए ?
(ङ) अब भी प्रकृति मानव को क्या याद दिला देती है ?
(च) लेखक ने नख-दंतावलंबी जीव किसे कहा है ?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम- नाखून क्यों बढ़ते हैं।
लेखक का नाम- हजारी प्रसाद द्विवेदी।
(ख) जब मनुष्य वनमानुष जैसा जंगली था तब उसे नाखून की आवश्यकता थी क्योंकि मानव नाखून की सहायता से जंगली जीवों से रक्षा करता था; भोजन उपलब्धि में जीवों को मारने में सहायता लेता था।
(ग) वज्र इन्द्र का हथियार था और वह दधीचि की हड्डियों से बना था।
(घ) असुरों के पास अनेक विधाएँ थीं, पर लोहे के अस्त्र नहीं थे। शायद घोड़े भी नहीं थे। आर्यों के पास ये दोनों चीजें थीं इसी कारण आर्य विजयी हुए और असुर पराजित।।
(ङ) मानव को प्रकृति अब भी याद दिला देती है कि तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता। तुम्हारे अन्दर अब भी पशुता विद्यमान है।
(च) मनुष्य को।

2. मानव शरीर का अध्ययन करनेवाले प्राणिविज्ञानियों का निश्चित मत है कि मानव-चित्तं . – की भाँति मानव शरीर में बहुत-सी अभ्यास-जन्य सहज वृत्तियाँ रह गई हैं। दीर्घकाल तक उनकी आवश्यकता रही है। अतएव शरीर ने अपने भीतर एक ऐसा गुण पैदा कर लिया है कि वे वृत्तियाँ अनायास ही, और शरीर के अनजाने में भी, अपने-आप काम करती हैं। नाखून का बढ़ना उसमें से एक है, केश का बढ़ना दूसरा, दाँत का दुबारा उठना तीसरा है, पलकों का गिरना चौथा है। और असल में सहजात वृत्तियाँ अनजान स्मृतियों को ही कहते हैं।

हमारी भाषा में इसके उदाहरण मिलते हैं। अगर आदमी अपने शरीर की, मन की और वाक् की अनायास घटने वाली वृत्तियों के विषय में विचार करे, तो उसे अपनी वास्तविक प्रवृत्ति पहचानने में बहुत सहायता मिले। पर कौन सोचता है ? सोचना तो क्या उसे इतना भी पता नहीं चलता कि उसके भीतर नख बढ़ा लेने की जो सहजात वृत्ति है, वह उसके पशुत्व का प्रमाण है।

उनहें काटने की जो प्रवृत्ति हैं, वह उसकी मनुष्यता की निशानी है और यद्यपि पशुत्व के चिह्न उसके भीतर रह गए हैं, पर वह पशुत्व को छोड़ चुका है। पशु बनकर वह आगे नहीं बढ़ सकता। उसे कोई और रास्ता खोजना चाहिए। अस्त्र बढ़ाने की प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है।

प्रश्न-
(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
(ख) प्राणि विज्ञानियों का वृत्तियों के बारे में क्या मत है ?
(ग) लेखक का नख बढ़ाने की प्रवृत्ति से क्या अभिप्राय है?
(घ) मानव शरीर में विद्यमान सहजात वृत्तियाँ क्या-क्या हैं ?
(ङ) नख काटने की प्रवृत्ति किसकी निशानी है?
(च) कौन-सी प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है ?
(छ) मनुष्य को अपनी वास्तविक प्रवृत्ति पहचानने में क्या मददगार होगा?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम- नाखून क्यों बढ़ते हैं।
लेखक का नाम- हजारी प्रसाद द्विवेदी।
(ख) प्राणी विज्ञानियों का निश्चित मत है कि मानव-चित्त की भाँति शरीर में भी बहुत-सी अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ विद्यमान हैं। ,
(ग) लेखक नख बढ़ाने की प्रवृत्ति को मानव में अंतर्निहित पशुत्व का प्रमाण मानते हैं।
(घ) नाखून का बढ़ना, केश का बढ़ना, पलकों का गिरना, दाँत का दुबारा उठना इत्यादि मानव शरीर में विद्यमान सहजात वृत्तियाँ हैं।
(ङ) नख काटने की प्रवृत्ति मनुष्यता की निशानी है।
(च) अस्त्र बढ़ाने की प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है।
(छ) अगर मनुष्य अपने शरीर की; मन की और वाणी की अनायास घटनेवाली वृत्तियों के विषय में विचार करे, तो उसे अपनी वास्तविक प्रवृत्ति पहचानने में बहुत सहायता मिले।

3. सोचना तो. क्या उसे इतना भी पता नहीं चलता कि उसके भीतर नख बढ़ा लेने की जो सहजात वृत्ति है, वह उसके पशुत्व का प्रमाण है। उन्हें काटने की जो प्रवृत्ति है, वह उसकी मनुष्यता । की निशानी है और यद्यपि पशुत्व के चिह्न उसके भीतर रह गए हैं, पर वह पशुत्व को छोड़ चुका है। पशु बनकर वह आगे नहीं बढ़ सकता। उसे कोई और रास्ता खोजना चाहिए। अस्त्र बढ़ाने – की प्रवृत्ति मनुष्यता की क्रोिधिनी है।

प्रश्न-
(क) प्राणीविज्ञानी के अनुसार मानव की सहजात वृत्ति क्या है?
(ख) मनुष्यता की विरोधिनी क्या है?
(ग) नाखून बढ़ना और नाखून काटना किसकी निशानी है ?
(घ). ‘पशु बनकर वह आगे नहीं बढ़ सकता’-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क) प्राणीविज्ञानी के अनुसार मानव की सहजात वृत्ति नाखून बढ़ाना है।
(ख) अस्त्र-शस्त्र जमा करना मनुष्यता की विरोधिनी है।
(ग) प्राणीविज्ञानी के अनुसार नाखून बढ़ाना मानव की सहजात वृत्ति है। यदि मनुष्य नाखून काटता है तो काटने की प्रवृत्ति मनुष्यता की निशानी है।
(घ) आदिकाल में मनुष्य को हिंसक होने की जरूरत थी इसलिए उसके बार-बार नाखून उग आए परन्तु आज मनुष्य सभ्य हो चुका है। वह हिंसा की भावना को नष्ट कर देना चाहता है क्योंकि उसे पता है कि वह हिंसा या पशुता के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता। उसे कोई और रास्ता खोजना चाहिए। उसे यह भी ज्ञान है कि अस्त्र-शस्त्र जमा करना मानवता का विरोध करना है।

4. हमारी परंपरा महिमामकी, उत्तराधिकार विपुल और संस्कार उज्ज्वल हैं। हमारे अनजाने में भी ये बातें एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देती हैं। यह जरूर है कि परिस्थितियों बदल गई हैं। उपकरण नए हो गए हैं और उलझनों की मात्रा भी बहुत बढ़ गई है, पर मूल समस्याएं बहुत अधिक नहीं बदली हैं। भारतीय चित्त जो आज भी अधीनता’ के रूप में न सोचकर ‘स्वाधीनता’ के रूप में सोचता है, वह हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल है। वह ‘स्व’ के बंधन को आसानी से छोड़ नहीं सकता। अपने-आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बंधन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है।

प्रश्न
(क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।
(ख) हमारी परम्परा कैसी है?
(ग) भारतीय चित्त में ‘स्व’ का भाव किसका प्रतिफल है?
(घ) गद्यांश का भावार्थ लिखें।
उत्तर-
(क) पाठ- नाखून क्यों बढ़ते हैं।लेखक- हजारी प्रसाद द्विवेदी।।
(ख) हमारी भारतीय परम्परा महिमामयी, उत्तराधिकार विपुल और संस्कार उज्ज्वल हैं। यह . हमारे अनजाने में ही एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देती है।
(ग) भारतीय चित्त में ‘स्व’ का भाव हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल है।
(घ) हमारी महिमामयी परंपरा और उज्ज्वल संस्कार ही एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देते हैं। परिस्थितियों भले बदल गई हैं, पर समस्याएं बदली नहीं हैं। हमारे मानस में ‘स्व’ का जो भाव है, जो आत्म-बंधन की स्वीकृति है, वह दीर्घकालीन संस्कारों का फल है।

5. जातियाँ इस देश में अनेक आई हैं। लड़ती-झगड़ती भी रही हैं, फिर प्रेमपूर्वक बस भी गई हैं। सभ्यता की नाना सीढ़ियों पर खड़ी और नाना और मुख करके चलनेवाली इन जातियों के लिए सामान्य धर्म खोज निकालना कोई सहज बात नहीं थी।

भारतवर्ष के ऋषियों ने अनेक प्रकार से इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की थी। पर एक बात उन्होंने लक्ष्य की थी। समस्त वर्णों और समस्त जातियों का एक सामान्य आदर्श भी है। वह है अपने ही बंधनों से अपने को बाँधना। मनुष्य पशु से किस बात से भिन्न है। आहार-निद्रा आदि पशु-सुलभ स्वभाव उसके ठीक वैसे ही हैं, जैसे अन्य प्राणियों के। लेकिन वह फिर भी पशु से भिन्न हैं।

उसमें संयम है, दूसरे के सुख-दुख के प्रति संवेदना है, श्रद्धा है, तप है, त्याग है। वह मनुष्य के स्वयं के उद्भावित बंधन हैं। इसीलिए मनुष्य झगड़े-टंटे को अपना आदर्श नहीं मानता, गुस्से में आकर चढ़-दौड़ने-वाले अविवेकी को बुरा समझता है और वचन, मन और शरीर से किए गए असत्याचरण को गलत आचरण मानता है। यह किसी भी जाति या वर्ण या समुदाय का धर्म नहीं है। यह मनुष्यमात्र का धर्म है। महाभारत में इसीलिए निर्वैर भाव, सत्य और अक्रोध को सब वर्गों का सामान्य धर्म कहा है
प्रश्न-
(क) मनुष्य को संयमित करनेवाला कौन-सा बंधन है ?
(ख) मनुष्य किन गुणों के कारण पशुओं से भिन्न माना जाता है ?
(ग)लेखक ने ‘स्वाधीनता’ को भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा गुण क्यों माना है ?
(घ) गलत आचरण किसे माना गया है ?
उत्तर-
(क) मनुष्य को संयमित करनेवाला बंधन ‘स्व’ है। मनुष्य इस बंधन को स्वयं ही स्वीकार करता है। यही हमारी संस्कृति की विशेषता है।
(ख) लेखक के अनुसार आहार, निद्रा आदि पशुओं जैसी आदतें मनुष्य की भी है परन्तु
संयम, तप, त्याग, सुख-दुख के प्रति संवेदना आदि गुण उसे पशुओं से भिन्न बनाते हैं।
(ग) ‘स्वाधीनता’ का अर्थ है अपने ऊपर लगाया गया बंधन। अपने पर अपने द्वारा रोक लगाना भारतीय परंपरा है। मन में क्रोध आना पशुता की निशानी है परन्तु विवेक द्वारा संयमित करना मनुष्यता है।
(घ) वचन, मन और शरीर से किये गये असत्याचरण को गलत आचरण माना गया है।

6. मनुष्य को सुख कैसे मिलेगा? बड़े-बड़े नेता कहते हैं, वस्तुओं की कमी है, और मशीन बैठाओ, और उत्पादन बढ़ाओ, और धन की वृद्धि करो और बाह्य उपकरणों की ताकत बढ़ाओ। एक बूढा था। उसने कहा था–बाहर नहीं, भीतर की ओर देखो। हिंसा को मन से दूर करो, मिथ्या को हटाओ, क्रोध और द्वेष को दूर करो, लोक के लिए कष्ट सहो, आराम की बात मत सोचो, प्रेम की बात सोचो; आत्म-तोषण की बात सोचो, काम करने की बात सोचो।

उसने कहा-प्रेम ही बड़ी चीज है, क्योंकि वह हमारे भीतर है। उच्छृखलता पशु की प्रवृत्ति है, ‘स्व’ का बंधन मनुष्य का स्वभाव है। बूढ़े की बात अच्छी लगी या नहीं, पता नहीं। उसे गोली मार दी गई। आदमी के नाखून बढ़ने की प्रवृत्ति ही हावी हुई। मैं हैरान होकर सोचता हूँ बूढ़े ने कितनी गहराई में पैठकर मनुष्य की वास्तविक चरितार्थता का पता लगाया था।

प्रश्न-
(क) बड़े-बड़े नेताओं ने क्या कहा है ?
(ख) बूढ़ा कौन था? उसने क्या-क्या करने की सीख दी है ?
(ग) “एक बूढ़ा था”-लेखक ने किस बूढ़े की ओर संकेत किया है ?
(घ) लेखक हैरान होकर क्यों सोचता है ?
उत्तर-
(क) बड़े-बड़े नेताओं ने मशीन बैठाने, उत्पादन बढ़ाने, धन की वृद्धि करने और बाह्य उपकरणों की ताकत बढ़ाने को कहा है।
(ख) बूढ़ा सत्य और अहिंसा का पुजारी था। यहाँ उसने बाहर नहीं, भीतर की ओर देखने, हिंसा को मन से दूर करने, मिथ्या को हटाने, क्रोध और द्वेष को दूर करने, लोक के लिए कष्ट सहने, प्रेम.की बात सोचने, उच्छृखलता को छोड़कर ‘स्व’ को अपनाने की सीख दी है।
(ग) ‘एक बूढ़ा था’-वाक्यांश में लेखक ने महात्मा गाँधी की ओर संकेत किया है।
(घ) बूढ़े द्वारा अच्छी बातें समझाने पर भी उसे गोली मारी गई। पशुता. या हिंसा को जितनी बार भी समाप्त करने का प्रयास किया जाता है, वह बढ़ती जाती है। वास्तविक चरितार्थता का पाठ पढ़ानेवाला भी गोली का ही शिकार हुआ। लोगों की ऐसी पशुवृत्ति को देखकर लेखक हैरान हो जाता है।

7. सफलता और चरितार्थता में अंतर है। मनुष्य मरणास्त्रों के संचयन से, बाह्य उपकरणों के बाहुल्य से उस वस्तु को पा भी सकता है, जिसे उसने बड़े आडंबर के साथ सफलता नाम दे रखा है। परंतु मनुष्य की चरितार्थता प्रेम में है, मैत्री में है, त्याग में है, अपने को सबके मंगल के लिए नि:शेष भाव से दे देने में है। नाखूनों का बढ़ना मनुष्य की उस अंध सहजात वृत्ति का परिणाम है, जो उसके जीवन में सफलता ले आना वाहती है, उसको काट देना उस ‘स्व-निर्धारित आत्म-बंधन का फल है, जो उसे चरितार्थता की ओर ले जाती है।

प्रश्न-
(क) मनुष्य की चरितार्थता किसमें है?
(ख) मनुष्य ने सफलता का नाम किसे दे रखा है ?
(ग) नाखूनों का बढ़ना और नाखूनों का कटना किस चीज का परिचायक है ?
(घ) सफलता और चरितार्थता में क्या अन्तर है?
उत्तर-
(क) मनुष्य की चरितार्थता आपसी प्रेम, मित्रता और त्याग पर निर्भर करती है वास्तव में उसी का जीवन सफल है. जो दूसरे की भलाई के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दे।
(ख) मनुष्य मरणास्त्रों के संचयन से बाह्य उपकरणों के बाहुल्य से उस वस्तु में भी पा सकता है, जिसे उसने बड़े आडंबर के साथ अर्जित किया है। इसी रूप को मनुष्य ने सफलता का नाम दे रखा है।
(ग) नाखूनों का बढ़ना उस हिंसा का परिणाम है जिसके सहारे वह सफलता पाना चाहता है। दूसरी ओर नाखूनों को काटना आत्म-निर्धारित बंधन का फल है। मनुष्य को अपने बनाए गए बंधनों में ही बंधकर रहना चाहिए तभी मनुष्य-जीवन सफल है।
(घ) अपने बंधन में बंधकर जीवनयापन करना ही सफलता हैं जबकि चरितार्थता आपसी प्रेम, मित्रता और त्याग पर निर्भर करती है। परहित के लिए सर्वस्व अर्पित कर देना ही चरित्रार्थता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्व

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प्रश्न 1.
‘नाखून क्यों बढ़ते हैं किस प्रकार का निबंध है?
(क) ललित
(ख) भावात्मक
(ग) विवेचनात्मक
(घ) विवरणात्मक
उत्तर-
(क) ललित

प्रश्न 2.
हजारी प्रसाद द्विवेदी किस निबंध के रचयिता हैं ?
(क) नागरी लिपि
(ख) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(ग) परंपरा का मूल्यांकन
(घ) शिक्षा और संस्कृति
उत्तर-
(ख) नाखून क्यों बढ़ते हैं

प्रश्न 3.
अल्पज्ञ पिता कैसा जीव होता है ?
(क) दयनीय
(ख) बहादुर
(ग) अल्पभाषी
(घ) मृदुभाषी
उत्तर-
(क) दयनीय

प्रश्न 4.
दधीचि की हड्डी से क्या बना था?
(क) तलवार
(ख) त्रिशूल
(ग) इन्द्र का वज्र
(घ) कुछ भी नहीं
उत्तर-
(ग) इन्द्र का वज्र

प्रश्न 5.
‘कामसूत्र’ किसकी रचना है ?
(क) वात्स्यायन
(ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ग) भीमराव अंबेदकर
(घ) गुणाकर मूले
उत्तर-
(क) वात्स्यायन

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
हर……..”दिन नाखून बढ़ जाते हैं।
उत्तर-तीसरे

प्रश्न 2.
सहजात वृत्तियाँ……”स्मृतियों को कहते हैं।
उत्तर-
अनजान

प्रश्न 3.
अस्त्र बढ़ाने की प्रवृत्ति………..विरोधी है।
उत्तर-
मनुष्यता

प्रश्न 4.
“इण्डिपेण्डेन्स’ का अर्थ है…………..।
उत्तर-
अनधीनता

प्रश्न 5.
‘स्व’ का बंधन ……….. का स्वभाव है।
उत्तर-
मनुष्य

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जंगली मनुष्य को नाखून की जरूरत क्यों थी ?
उत्तर-
उसकी (जंगली मनुष्य) जीवन-रक्षा के लिए नाखून बहुत जरूरी था।

प्रश्न 2.
मनुष्य का नाखून बढ़ना किस वृत्ति का परिचायक है ?
उत्तर-
नाखून बढ़ना मनुष्य की पाशविक वृत्ति का परिचायक है।

प्रश्न 3.
हड्डी के हथियारों में सबसे मजबूत हथियार किसकी हड्डी से बना था?
उत्तर-
हड्डी के हथियारों में सबसे मजबूत हथियार दधीचि मुनि की हड्डियों से बना था।

प्रश्न 4.
हिरोशिमा का हत्याकांड किसका जीवंत प्रतीक है ?
उत्तर-
हिरोशिमा का हत्याकांड मनुष्य की भयंकर पाशविक वृत्ति का जीवंत प्रतीक है।

प्रश्न 5.
भारतीय संस्कृति की क्या विशेषता है. ?
उत्तर-
भारतीय संस्कृति की विशेषता है अपने-आप पर अपने-आप लगाया हुआ बंधना

प्रश्न 6.
भले और मूढ़ लोगों में क्या अन्तर है ? .
उत्तर-
भले लोग अच्छे-बुरे की जाँच कर हितकर को ग्रहण करते हैं और मूढ़ लोग दूसरों के इशारों पर भटकते रहते हैं।

प्रश्न 7.
महाभारत में सामान्य धर्म किसे कहा गया है?
उत्तर-
महाभारत में निर्वैर भाव, सत्य और क्रोधहीनता को सामान्य धर्म कहा गया है।

प्रश्न 8.
मनुष्य का स्वधर्म क्या है ?
उत्तर-
अपने आप पर संयम और दूसरे के मनोभावों का समादर करना मनुष्य का स्वधर्म है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं लेखक परिचय

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई० में आरत दुबे का छपरा, बलिया (उत्तर । प्रदेश) में हुआ । द्विवेदी जी का साहित्य कर्म भारतवर्ष के सांस्कृतिक इतिहास की रचनात्मक परिणति है । संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, बांग्ला आदि भाषाओं व उनके साहित्य के साथ इतिहास, संस्कृति, धर्म, दर्शन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की व्यापकता व गहनता में पैठकर उनका अगाध पांडित्य नवीन मानवतावादी सर्जना और आलोचना की क्षमता लेकर प्रकट हुआ है। वे ज्ञान को बोध और पांडित्य की सहृदयता में दाल कर एक ऐसा रचना संसार हमारे सामने उपस्थित करते हैं जो विचार की तेजस्विता, कथन के लालित्य और बंध की शास्त्रीयता का संगम है । इस प्रकार उनमें एकसाथ कबीर, तुलसी और रवींद्रनाथ एकाकार हो उठते हैं। उनकी सांस्कृतिक दृष्टि अपूर्व है। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति किसी एक जाति की देन नहीं, बल्कि समय-समय पर उपस्थित अनेक जातियों के श्रेष्ठ साधनांशों के लवण-नीर संयोग से विकसित हुई हैं।

द्विवेदीजी की प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘अशोक के फूल’, ‘कल्पलता’, ‘विचार और वितर्क’, ‘कुटज’,’विचार-प्रवाह’, ‘आलोक पर्व’, ‘प्राचीन भारत के कलात्मक विनोद’ (निबंध संग्रह); ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’, ‘चारुचंद्रलेख’, ‘पुनर्नवा’, ‘अनामदास का पोथा’ (उपन्यास); ‘सूर साहित्य’, ‘कबीर’, ‘मध्यकालीन बोध का स्वरूप’, ‘नाथ संप्रदाय’, ‘कालिदास की लालित्य योजना’, ‘हिंदी साहित्य का आदिकाल’, ‘हिंदी साहित्य की भूमिका’, ‘हिंदी साहित्य : उद्भव और विकास’ (आलोचना-साहित्येतिहास); ‘संदेशरासक’, ‘पृथ्वीराजरासो’, ‘नाथ-सिद्धों की बानियाँ'(ग्रंथ संपादन): ‘विश्व भारती’ (शांति निकेतन) पत्रिका का संपादन । द्विवेदीजी को आलोकपर्व’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा ‘पद्मभूषण’ सम्मान एवं लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा डी० लिट् की उपाधि मिली । वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय, शांति निकेतन विश्वविद्यालय, . चंडीगढ़ विश्वविद्यालय आदि में प्रोफेसर एवं प्रशासनिक पदों पर रहे । सन् 1979 में दिल्ली में उनका निधन हुआ।

हजारी प्रसाद द्विवेदी ग्रंथावली से लिए गए प्रस्तुत निबंध में प्रख्यात लेखक और निबंधकार का मानववादी दृष्टिकोण प्रकट होता है । इस ललित निबंध में लेखक ने बार-बार काटे जाने पर भी बढ़ जाने वाले नाखूनों के बहाने अत्यंत सहज शैली में सभ्यता और संस्कृति की विकाम-गाथा उद्घाटित कर दिखायी है। एक ओर नाखूनों का बढ़ना मनुष्य की आदिम पाशविक वृत्ति और संघर्ष चेतना का प्रमाण है तो दूसरी ओर उन्हें बार-बार काटते रहना और अलंकृत करते रहना मनुष्य के सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक चेतना को भी निरूपित करता है । लेखक ने नाखूनों के बहाने मनोरंजक शैली में मानव-सत्य का दिग्दर्शन कराने का सफल प्रयत्न किया है। यह निबंध नई पीढ़ी में सौंदर्यबोध, इतिहास चेतना और सांस्कृतिक आत्मगौरव का भाव जगाता है।

नाखून क्यों बढ़ते हैं Summary in Hindi

पाठ का सारांश

बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देने वाले प्रश्न कर बैठते हैं। मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ.दिया कि आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं, तो मैं सोच में पड़ गया, हर तीसरे दिन नाखून बढ़ जाते हैं, बच्चे कुछ दिन तक अगर उन्हें बढ़ने दें, तो माँ-बाप अकसर उन्हें डाँटा करते हैं। पर कोई नहीं जानता कि ये अभागे नाखन क्यों इस प्रकार बढ़ा करते हैं। काट दीजिए वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे पर निर्लज्ज अपराधी की भांति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर।

कुछ लाख ही वर्षों की बात है, जब मनुष्य जंगली था; वनमानुष जैसा। उसे नाखून की जरूरत थी। उसकी जीवन-रक्षा के लिए नाखून बहुत जरूरी थे। असल में वही उसके अस्त्र थे। दाँत भी थे पर नाखून के बाद ही उनका स्थान था। उन दिनों उसे जूझना पड़ता था, प्रतिद्वंदियों को पछाड़ना पड़ता था, नाखून उसके लिए आवश्यक अंग था। फिर धीरे-धीरे वह अपने अंग से बाहर की वस्तुओं का सहारा लेने लगा। पत्थर के ढेले और पेंड की डालें काम में लाने लगा। उसने हड्डियों के भी हथियार बनाये। मनुष्यं और आगे बढ़ा। उसने धातु के हथियार बनाए। पलीतेवाली बंदूकों ने, कारतूसों ने, तोपों ने, बमों ने, बमवर्षक वायुयानों ने इतिहास को किस कीचड़ भरे घाट पर घसीटा है, यह सबको मालूम है। नखधर मनुष्य अब एटम बम पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है। पर उसके नाखून अब भी बढ़ रहे थे।

कुछ हजार साल पहले मनुष्य ने नाखून को सुकुमार विनोदों के लिए उपयोग में लाना शुरू किया था। वात्स्यायन के कामसूत्र से पता चलता है कि आज से दो हजार वर्ष पहले का भारतवासी नाखूनों को जम के संवारता था। उनके काटने की कला काफी मनोरंजक बताई गई है। त्रिकोण, वर्तुलाकार, चंद्राकार दंतुल आदि विविध आकृतियों के नाखून उन दिनों विलासी नागरिकों के न. जाने किस काम आया करते थे। उनको सिक्थक (मोम) और अलंक्तक (आलता) से यत्नपूर्वक रगड़कर लाल और चिकना बनाया जाता था। गौड़ देश के लोग उन दिनों बड़े-बड़े नखों को , पसंद करते थे और दक्षिणात्य लोग छोटे नखों को। लेकिन समस्त अधोगामिनी वृत्तियों को और नीचे खींचनेवाली वस्तुओं को भारतवर्ष ने मनुष्योचित बनाया है, यह बात चाहूँ भी तो भूल नहीं सकता।

15 अगस्त को जब अंगरेजी भाषा के पत्र ‘इण्डिपेण्डेन्स की घोषणा कर रहे थे, देशी भाषा के पत्र ‘स्वाधीनता दिवस की चर्चा कर रहे थे। इण्डिपेण्डेन्स का अर्थ है स्वाधीनता ‘शब्द का – अर्थ है अपने ही अधीन’ रहना। उसने अपने आजादी के जितने भी नामकरण किए, स्वतंत्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता-उन सबमें ‘स्व’ का बंधन अवश्य रखा। अपने-आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बंधन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है।

मनुष्य झगड़े-डंटे को अपना आदर्श नहीं मानता, गुस्से में आकर चढ़-दौड़ने वाले अविवेकी को बुरा समझता है और वचन, मन और शरीर से किए गए असत्याचरण को गलत आचरण मानता है। यह किसी भी जाति या वर्ण या समुदाय का धर्म नहीं है। यह मनुष्यमात्र का धर्म है। महाभारत में इसीलिए निर्वैर भाव, सत्य और अक्रोध को सब वर्गों का सामान्य धर्म कहा है –
एतद्धि विततं श्रेष्ठं सर्वभूतेषु भारत!
निर्वैरता महाराज सत्यमक्रोध एव च।

अन्यत्र इसमें निरंतर दानशीलता को भी गिनाया गया है। गौतम ने ठीक ही कहा था कि मनुष्य – की मनुष्यता यही है कि वह सबके दुःख-सुख को सहानुभूति के साथ देखता है।

ऐसा कोई दिन आ सकता है, जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्राणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य का अनावश्यक अंग उसी प्रकार झड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है। उस दिन मनुष्य की पशुता भी लुप्त हो जाएगी। शायद उस दिन वह मारणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। .

नाखूनों का बढ़ना मनुष्य की उस अंध सहजात वृत्ति का परिणाम है, जो उसके जीवन में सफलता ले आना चाहती है, उसको काट देना उस ‘स्व’-निर्धारित आत्म-बंधन का पुल है, जो .. उसे चरितार्थता की ओर ले जाती है। कमबख्त नाखून बढ़ते हैं तो बढ़े, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा।

शब्दार्थ

अल्पज्ञ : कम जाननेवाला
दयनीय : दया करने योग्य
बेहया : बिना हया के, निर्लज्ज, वेशर्म
प्रतिद्वंद्वी : विरोधी
नखधर : नख को धारण करनेवाला, नाखून वाला
दंतावलंबी : दाँत का सहारा लेकर जीने वाला
विचरण : घूमना, भटकना
तत:किम : फिर क्या, इसके बाद क्या
असह्य : न सह सकने योग्य
पाशवी वृत्ति : पशु जैसा स्वभाव एवं आचरण
वर्तुलाकार : घुमावदार, गोलाकार
दंतुल : दाँत वाला, जिसके दाँत बाहर निकले हों
दाक्षिणात्य : दक्षिण का (दक्षिण भारतीय)
अभोगामिनी : नीचे की ओर जानेवाली
सहजात वत्ति : जन्म के साथ पैदा होने वाली वृत्ति या स्वभाव
वाक : वाणी, भाषा
निर्बोध : नासमझ, नादान
अनुवर्तिता.: पीछे-पीछे चलना
अरक्षित : जो रक्षित न हो, खुला
अनुसैधित्सा : अनुसंधान की प्रबल इच्छा
सरबस : सर्वस्व, सबकुछ
पर्वसंचित : पहले से इकट्ठा या जमा किया हुआ
समवेदना : दूसरे के दुख को महसूस करना
उद्भावित : प्रकट की गयी, उत्पन्न की गयी
असत्याचरण : असत्य आचरण, लोकविरुद्ध आचरण
निर्वैर : बिना वैर-विरोध के
उत्स : स्रोत, उद्गम, मूल
आत्मतोषण : अपने को संतुष्ट करना, अपने को समझाना ।
चरितार्थता : सार्थकता
नि:शेष : जिसका शेष भी न बचे. सम्पर्ण
तकाजा : माँग

Bihar Board Class 7 Social Science History Solutions Chapter 1 कहाँ, कब और कैसे?

Bihar Board Class 7 Social Science Solutions History Aatit Se Vartman Bhag 2 Chapter 1 कहाँ, कब और कैसे? Text Book Questions and Answers, Notes.

BSEB Bihar Board Class 7 Social Science History Solutions Chapter 1 कहाँ, कब और कैसे?

Bihar Board Class 7 Social Science कहाँ, कब और कैसे? Text Book Questions and Answers

पाठगत प्रश्नोत्तर

Bihar Board Class 7 Social Science Solution प्रश्न 1.
प्रौद्योगिकी किसे कहते हैं ?
उत्तर-
मानव जीवन को बेहतर और उन्नत बनाने के लिये विज्ञान के सिद्धांत पर आविष्कृत विभिन्न कल-पुर्जा और मशीनों का खेती और कल-कारखानों आदि में उपयोग ‘प्रौद्योगिकी’ कहलाता है।

Bihar Board Class 7 History Book Solution प्रश्न 2.
आज सिंचाई के लिये किन-किन साधनों का इस्तेमाल किया जाता है ?
उत्तर-
आज सिंचाई के लिये नहर, पइन, नलकूप, कुओं आदि का इस्तेमाल किया जाता है। नलकूपों या तालाबों से पानी खींचने के लिये डीजल इंजन या बिजली का उपयोग कर पंप चलाते हैं।

Bihar Board Class 7 Social Science Solution In Hindi प्रश्न 3.
मानचित्र-2 में दिखाए गए प्रमुख राज्यों की सूची बनाएँ।
उत्तर-
मानचित्र-2 में दिखाए गए प्रमुख राज्य हैं :

  1. गजनी
  2. कश्मीर
  3. सिंध
  4. मुल्तान
  5. कच्छ
  6. गुजरात
  7. अहमदनगर
  8. बीजापुर तथा
  9. बंगाल

Bihar Board Class 7 History Solution In Hindi प्रश्न 4.
मानचित्र-1 तथा 2, मानचित्रों में आप क्या अंतर पाते हैं ?
उत्तर-
दोनों मानचित्रों के अवलोकन के बाद हम यह अन्तर पाते हैं कि मानचित्र 1 में जहाँ शासक वंशों को प्रमुखता दी गई है तो मानचित्र 2 में राज्यों को प्रमुखता दी गई है। मानचित्र 1 में श्रीलंका को दिखाया गया है। उसके बदले मानचित्र 2 में अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों को दिखाया गया है।

Bihar Board Class 7 Geography Book Solution प्रश्न 5.
मध्यकाल में कौन-कौन से खाद्य-पदार्थ हम आज भी खाते हैं ? उस दौर में आम लोग क्या पहनते होंगे?
उत्तर-
शासक और उनके करीन्दे, धनी व्यापारी और ग्रामीण लोगों के खान-पान में सदा से अंतर रहा है। वह मध्यकाल में भी था और आज … है। मध्य काल के राज्य परिवार तथा सम्पन्न लोग जहाँ पोलाव, बिरयाना, कोरमा, फिरनी, अंगूर आदि खाते थे, सो आज भी खाते हैं।

गाँवों में खाने की वे ही वस्तुएँ होती थीं, जो लोग उपजाते थे । चावल ‘ का मौसम रहा तो चावल और गेहूँ का मौसम रहा तो रोटी खाना मध्यमाल में भी था और आज भी है । आम, अमरूद, केला, शकरकंद तब भी खाते थे और आज भी खाते हैं।

उस दौर में हिन्दू और मुसलमानों के पहनावें में अन्तर था । हिन्दू जहाँ धोती पहनते थे, वहीं मुसलमान लूँगी पहनते थे । गंजी, करता दोनों धर्म के लोग पहनते थे । आज वह भेद मिट चुका है। हिन्दु भी लँगी पहनने लगे हैं और ग्रामीण मुसलमान धोती पहनते हैं । बहुत दिनों तक साथ-साथ रहने के कारण दोनों के खान-पान और पहनावा में बहुत अंतर नहीं रह गया है।

Bihar Board Solution Class 7 Social Science प्रश्न 6.
क्या कारण रहा होगा कि भारत अतीत से ही संसार के लिये आकर्षण का केन्द्र रहा होगा?
उत्तर-
भारत आदि काल से चिंतकों और मनीषियों का देश रहा है । तप और योग यहाँ की खास बात थी और आज भी है। योगी संतों का सम्मान राजा-महाराजा तक करते थे । यहाँ के विद्वानों की धाक विश्व भर में थी । ऋषि दाण्डयायन से बात करके सिकन्दर आवाक रह गया था । सिकन्दर का गुरु अरस्तू ने उसे बताया था कि भारत विजय को जा रहे हो तो वहाँ के ऋषियों से आशीर्वाद लेना । लौटते समय मेरे लिये तुलसी का पौधा तथा गंगा जल अवश्य लाना ।

विश्व में गंगा ही एक ऐसी नदी है जिसके जल में कभी कीड़े नहीं पनपते चाहे वर्षों-वर्ष रखे रहो । भारत के प्रायः हर सभ्रांत घर में हरिद्वार-ऋषिकेश से लाया गंगा जल संजोकर रखा जाता है । मरते समय लोगों के मुंह में गंगाजल-तुलसी पत्ता देना लोग आवश्यक मानते हैं ।

यहाँ की भूमि उपजाऊ है । एक ही देश में सभी मौसमों का आनन्द लिया जा सकता है। वह भी एक ही समय में । खाने की कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो भारत में नहीं उपजती हो । कुछ फल और वन्य पशु ऐसे हैं जो केवल भारत में ही मिलते हैं।

Bihar Board Class 7 History Solution प्रश्न 7.
वैसी वस्तुओं की सूची बनाएँ, जिसे हवन में डाला जाता है ?
उत्तर-
मुख्य रूप से हवन में धूप, जव, तील, घी मिलाया जाता है । लेकिन यह आम है। खास तौर पर हवन में अनेक अन्य वनस्पतियाँ भी डाली जाती हैं।

Bihar Board 7th Class Social Science Solution प्रश्न 8.
हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के प्रति आस्था व्यक्त करने की अलग-अलग तरीके या पद्धति सम्प्रदाय कहलाती है। व्याख्या करें।
उत्तर-
हिन्दू धर्म कालान्तर में तीन सम्प्रदायों में बँट गया और तीनों के आराध्य देवी-देवता में भिन्नता आ गई । इनके तीन सम्प्रदाय थे : वैष्णव, शैव तथा शाक्त । वैष्णव विष्णु और लक्ष्मी को अपना आराध्य मानते हैं । राम और सीता तथा कृष्ण और राधा को ये क्रमशः विष्णु और लक्ष्मी के अवतार मानते हैं । इस सम्प्रदाय वाले रामलीला और कृष्णलीला कर अपना मनोरंजन करते हैं ।

शैव सम्प्रदाय वाले शिव को पूजते हैं । शाक्त सम्प्रदाय वाले शक्ति के रूप में दुर्गा और काली की पूजा करते हैं। बलिदान देकर बलि के पशु का मांस खाना और मदिरा पीना ये गलत नहीं मानते । ये मछली भी खाते हैं, जबकि वैष्णव और शैव मांस-मछली और मदिरा से दूर रहते हैं।

Bihar Board Class 7 Hamari Duniya Solution प्रश्न 9.
भक्त संत के वैसे दोहों पर चर्चा करें, जिसे आपने हिन्दी की पुस्तक में पढ़ा है।
उत्तर-
जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजियो ग्यान ।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहने दो म्यान ।।
माला तो कर में फिरै, जीभि फिरै मुख माँहिं ।
मनुआ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं ।।

Bihar Board Class 7 Civics Book Solution प्रश्न 10.
अभिलेखागार क्या है?
उत्तर-
अभिलेखों को जहाँ सुरक्षित रखा जाता है, उसे अभिलेखागार कहते हैं । खासतौर पर अभिलेखागार से तात्पर्य यह लगाया जाता है जहाँ सरकारी अभिलेख रखे जाते हैं । लेकिन कभी-कभी महत्त्वपूर्ण पाण्डुलिपि भी यहाँ रखी जाती है, जो सरकारी न होकर शैक्षिक और सामाजिक होती है। अभिलेखागार राष्ट्रीय भी होता है और राज्यों का भी । अकबर के बाद से अभिलेख रखने की परम्परा चली ।

History Class 7 Chapter 1 In Hindi प्रश्न 11.
‘न्यूमेसमेटिक्स’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-
सिक्कों के अध्ययन को ‘न्यूमै मेटिक्स’ कहते हैं।

अभ्यास के प्रश्नोत्तर

आइए फिर से याद करें :

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों को भरें :

  1. सोलहवीं सदी के आरम्भ में ………… ने हिन्दुस्तान शब्द का प्रयोग………किया ।
  2. ………. एक विशेष प्रकार का फारसी इतिहास है।
  3. …….लोगों द्वारा भारत में एक नये धर्म का आगमन हुआ।
  4. भारत में कागज का प्रयोग …………. शताब्दी के आस-पास हुआ ।

उत्तर-

  1. बाबर; वस्तुतः सम्पूर्ण उपमहाद्वीप के लिये
  2. तारीख-उल-हिन्द
  3. इन्हीं अरबों के साथ
  4. तेरहवीं ।

प्रश्न 2.
जोड़े बनाइए :

  1. राजतरंगिनी – दरिया साहब
  2. भक्ति संत – सासाराम
  3. तबकात-ए-नासिरी – बैकटपुर का शिव मंदिर
  4. शेरशाह का मकबरा – कश्मीर का इतिहास
  5. मानसिंह – मिनहाज-उस-सिराज

उत्तर-

  1. राजतरंगिनी – कश्मीर का इतिहास
  2. भक्ति संत – दरिया साहब
  3. तबकात-ए-नासिरी – मिनहाज-उस-सिराज
  4. शेरशाह का मकबरा – सासाराम
  5. मानसिंह – बैकटपुर का शिव मंदिर

प्रश्न 3.
मध्य काल के वैसे वस्त्रों की सूची बनाइए, जिसका व्यवहार हम आज भी करते हैं।
उत्तर-
मध्यकाल में सिले हुए वस्त्र बहुत कम लोग ही पहनते थे । कमर के नीचे धोती, कंधे से लेकर कमर के नीचे तक चादर तथा सर पर मुरेठा बाँधने का रिवाज रहा होगा । आज भी उत्तर प्रदेश के अधिकांश ब्राह्मण सिला हुआ वस्त्र पहनकर भोजन नहीं करते । इसी से अनुमान लगता है कि मध्य युग के लोग सिला हुआ वस्त्र नहीं पहनते होंगे । उनके वस्त्रों में से धोती, चादर

और मुरेठा का व्यवहार आज भी लोग करते हैं । सिला हुआ वस्त्र पहनने का रिवाज बहुत बाद में आरम्भ हुआ होगा

प्रश्न 4.
वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में हुए प्रमुख प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों को बताएँ ।
उत्तर-
प्राचीन भारत में वस्त्र उद्योग के लिए सूत तकली पर काते जाते थे, जिसमें काफी समय लगता था । कारण कि तकली को हाथ से नचाना पड़ता था । बाद में 13वीं सदी में परिवर्तन यह आया कि तकली का स्थान चरखे ने ले लिया । अब सूत तेजी से अधिक मात्रा में और कम समय में ही बन सकते थे। पहले सीधे कपास से सूत काता जाता था । बाद में इसमें बदलाव आया धुनिया लोग धनुकी पर रूई धुनने लगे । अब धुनी हुई रूई से सूत कातना आसान हो गया ।

प्रश्न 5. कागज का आविष्कार सर्वप्रथम कहाँ हुआ ?
उत्तर-
कागज का आविष्कार सर्वप्रथम चीन में हुआ ।

प्रश्न 6.
वनवासियों को जंगल क्यों छोड़ना पड़ा ?
उत्तर-
प्रौद्योगिकी में परिवर्तन के फलस्वरूप खेती योग्य भूमि की तलाश हो रही थी । बाहर से आये लोगों के लिये अधिक अन्न की भी आवश्यकता बढ़ी होगी । खेती बढ़ाने के लिए जंगल काटे जाने लगे । फलस्वरूप वनवासियों को जंगल छोड़ने पर विवश होना पड़ा । हालाँकि अनेक वनवासी खेती के काम में लग गए और ग्रामवासी बन गये ।

प्रश्न 7.
गंगा-यमुनी संस्कृति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
दो संस्कृतियों के मेल से जो संस्कृति विकसित हुई, उस संस्कृति को गंगा-यमुनी संस्कृति कहते हैं।

प्रश्न 8. आठवीं शताब्दी के आस-पास हुए परिवर्तनों को लिखिए।
उत्तर-
आठवीं शताब्दी के आस-पास पहला परिवर्तन तो देश के नाम बदलने के रूप में हुआ। अब ‘भारत’ को हिन्दुस्तान भी कहा जाने लगा। यह बदलाव 13वीं शताब्दी में तुर्क-सत्ता की स्थापना के बाद प्रचलित हुआ। उस समय हिन्दुस्तान की भौगोलिक सीमा उतनी ही थीं, जितनी पर तुकों का

अधिकार था । मुगल काल में अकबर से लेकर 17 वीं शताब्दी तक औरंगजेब ने हिन्दुस्तान की सीमा में काफी विस्तार किया । कृषि के साथ-साथ उद्योग-ध धों में भी बदलाव आए ।

प्रश्न 9.
क्या प्राचीन काल की तुलना में मध्य काल के अध्ययन के लिये ज्यादा स्रोत उपलब्ध हैं ?
उत्तर-
हाँ, प्राचीन काल की तुलना में मध्य काल के अध्ययन के लिए आज ज्यादा स्रोत उपलब्ध है। ये स्रोत अनेक लेखकों और इतिहासकारों द्वारा लिखे गये लेख और इतिहास हैं।

सर्वप्रथम इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज ने 13वीं शताब्दी में इतिहास लिखा, जिसमें उन्होंने बिहार के विषय में लिखा कि इसका नाम ‘बिहार’ क्यों पड़ा ? प्रसिद्ध विद्वान सैयद सुलेमान नदवी ने, एक अरबी गीत का उद्धरण दिया है, जो भारत के लिये प्रमुख है। भक्त कवियों और सूफी संतों ने भी भारत के सम्बंध में बहुत कुछ लिखा है । राजपूत राजाओं के दरबारी कवियों ने भी उस समय के सामाजिक जीवन के विषय में लिखा है । लिखित रचनाएँ या पाण्डुलिपियाँ, अभिलेख, सिक्के, भग्नावशेष, चित्र आदि विविध स्रोत हैं, लेकिन प्रधानता लिखित सामग्री को ही दी जाती है।

13 वीं शताब्दी में कागज का उपयोग शुरू हो जाने के बाद लिखने का काम व्यापक रूप से होने लगा । इस काल में लिखी गई पाण्डुलिपियाँ एवं प्रशासनिक प्रपत्र अभिलेखागारों और पुस्तकालयों में सुरक्षित है । इस काल की अनेक घटनाओं की जानकारी हमें इन्हीं अभिलेखों से प्राप्त होती है। अन्य अभिलेख पत्थरों, चट्टानों और ताम्र पत्रों पर लिखे गये थे

बहुत-से अभिलेख मन्दिरों और मस्जिदों और गाँवों में भी सुरक्षित हैं । कल्हण की राजतरंगिणी, अलबेरूनी की पुस्तक तहकीक-ए-हिन्द, मिन्हाज उससिराज कृत तबकात-ए-नासिरी, जियाउद्दीन बरनी की पुस्तक तवारीख-ए-फिरोजशाही । अबुल फजल ने अकबरनामा लिखा । इसके पहले बाबर ने बाबरनामा लिखा था । इनके अलावा अनेक यात्रियों ने अपने यात्रा वृत्तांत लिखा जो इतिहास से कम नहीं हैं । इससे स्पष्ट होता है कि प्राचीन काल की तुलना में मध्य काल के अध्ययन के लिये ज्यादा स्रोत उपलब्ध है।

प्रश्न 10.
जब एक ही व्यक्ति या घटना के सम्बंध में अलग-अलग मत आते हैं, तो ऐसी परिस्थितियों में इतिहासकार क्या करते होंगे ?
उत्तर-
प्रश्न में बताई गई परिस्थिति में इतिहासकार समान विशेषता वाले बड़े-बड़े हिस्सों, युगों या कालों में बाँट देते हैं । फिर अनुमान से स्थिति का अवलोकन कर स्वयं जो वे उचित समझते हैं, लिख देते हैं ।

Bihar Board Class 7 Social Science कहाँ, कब और कैसे? Notes

पाठ का सार संक्षेप

समय के साथ समाज में परिवर्तन होते ही रहते हैं। ये परिवर्तन कभी शब्दों के अर्थ में, कभी स्थानों के नाम में, कभी राज्यों की भौगोलिक सीमाओं में और कभी जीवन-शैली के सम्बन्ध में | वर्ग 7 में हम भारत के एक हजार वर्ष के अन्तर्गत होने वाले परिवर्तनों को जानेंगे अर्थात् 750 से 1750 ई० तक के।

कालक्रम में हमारे देश का नाम आर्यावर्त से भारत, भारत से हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान से इण्डिया होते रहा । आज भारत, हिन्दुस्तान और इण्डिया तीनों का प्रचलन है । हालाँकि भारत के संविधान में भारत और इण्डिया का ही उल्लेख है । तेरहवीं शताब्दी में तुर्क सत्ता की स्थापना के बाद भारत का नाम हिन्दुस्तान हो गया । हालाँकि सम्पूर्ण देश में तुर्को का शासन नहीं था । तुको ने लंगभग तीन सौ वर्षों तक ‘दिल्ली सल्तनत’ के नाम से शासन किया, तब शासकों को सुल्तान कहा जाता था ।

अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी था । इब्राहिम लोदी को हराकर बाबर ने यहाँ मुगल वंश की नींव रखी । अब मल्लान के स्थान पर शासकों को ‘बादशाह’ कहा जाने लगा । मुगल बादशाहों में सर्वाधिक नेक और प्रतापी बादशाह अकबर था । अकबर ने सम्पूर्ण भारत उपमहाद्वीप के लिये ‘हिन्दुस्तान’ या ‘हिन्दुस्थान’ नाम दिया ।

शाहजहाँ तक के युग को हिन्दुस्थान के लिए ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है । औरंगजेब ने दक्षिण भारत में कुछ मुगल साम्राज्य का विस्तार किया। औरंगजेब जब दक्षिण में उलझा था तो उत्तर भारत के उसके सूबेदारों ने धोखा देना आरंभ कर दिया। औरंगजेब का शासनकाल विस्तार और विखंडन दोनों के लिये जाना जाता है। यह 17वीं शताब्दी की बात है।

कृषि की प्रधानता से सिंचाई व्यवस्था भी विकसित अवस्था में थी । कुण्ड, ताल, तालाब में वर्षा जल को एकत्र किया जाता था और ‘दोन’ यंत्र से उनसे पानी निकालकर खेतों में पहुँचाया जाता था । कुँओं से भी सिंचाई होती थी । इसके लिए ढेंकी, मोठ, अरघट्ट या घटी यंत्र का व्यवहार होता है। बाद में ‘रहट’ का उपयोग होने लगा ।

समुद्री यात्रा की सुविधा ने व्यापार के क्षेत्र को बढ़ा दिया । अब भारत के लोग सुदूर पूर्व के देशों से व्यापार करते थे तो अरब के लोग भारत से व्यापार करते थे । भारत से व्यापार के सिलसिले में अरबी व्यापारियों का आना-जाना काफी बढ़ गया । इसके लिए अरबी व्यापारी केरल के तटीय क्षेत्रों में बाजाप्ता गाँव, बनाकर बस गये। उनको बसने से वहाँ के राजा ने भी काफी सहयोग दिया, कारण कि उनसे राजा को भारी मात्रा में व्यापारिक कर मिलता था। इतना ही नहीं, भारत में पहला मस्जिद केरल के हिन्दू राजा ने बनवा दिया । भारत में आए इन नये व्यापारियों से नयी प्रौद्योगिकी एवं नई विचारधारा लाने में भी योगदान मिला ।

अरब लोगों ने आठवीं शताब्दी में सिंध पर अपना शासन भी स्थापित कर लिया । इन्हीं के साथ भारत में ‘इस्लाम धर्म का भी आगमन हो गया । ‘इस्लाम’ धर्म को मानने वाले अपने को मुसलमान कहने लगे। ये एक ईश्वर में विश्वास करनेवाले लोग थे । इनका मूल धर्मग्रंथ ‘कुरान शरीफ’ है। अरब लोग अपने साथ अपना खान-पान और पहनावा भी लाये ।

कालक्रम में ये ही सब चीजें तुर्क-अफगान और मुगल भी ले आये । यूरोपीय व्यापारी भी कुछ नई सामग्री भारत में ले आए । पोलाव, बिरयानी, कोरमा, फिरनी, अगूर, मक्का, मिर्च चाय और कॉफी का प्रचलन इन बाहरी लोगों ने ही बढ़ाया। ज्ञान-विज्ञान और वैचारिकता का भी कुछ आदान-प्रदान हुआ ।

इस्लामिक जगत के लोगों के आने से यहाँ कुछ स्थायी राज्य स्थापित हुए, जिससे सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक जीवन में दरगामी प्रभाव पड़े । अब भारत में मिली-जुली परम्परा का विकास हुआ । इन परम्पराओं से भाषा, रहन-सहन, पोशाक, रीति-रिवाज आदि प्रभावित हुए । इसी को ‘गंगा-जमुनी’ संस्कृति कहा गया।

प्रसिद्ध अरबी विद्वान सैयद सुलेमान नदबी ने दिल खोलकर भारत की प्रशंसा की है।

राजपूतों का उदय भी इसी काल में हुआ । इन्हीं की महिमा का गान करने वाले कवि और चारण लोगों का एक अलग समुदाय था । राजाओं के दरबार में लिखने का काम करने वाले कायस्थ लोगों का उदय भी इसी काल में हुआ। जाट और सिक्खों का उदय भी हुआ : राजनीति में इनका स्थान महत्वपूर्ण हो गया । – यात्रियों ने भी बहुत लिखा है । सिक्कों के माध्यम से शासकों के तिथिक्रम का पता लगता है । इस काल के शासकों ने अनेक भव्य मंदिरों, मस्जिदों, मकबरा और किलों का निर्माण कराया जिनसे इनकी आर्थिक समृद्धि और वास्तुकला की जानकारी मिलती है।

दिल्ली से दौलताबाद और दौलताबाद से दिल्ली का वर्णन जियाबरनी ने ही किया है। यहाँ से वहाँ और वहाँ से यहाँ आने-जाने में ही बहुत लोग मर गये । इतिहास को समझने के लिए समय को सुविधानुसार बाँट दिया गया है।

Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 हार की जीत

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 1 Chapter 5 हार की जीत Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 6 Hindi Solutions Chapter 5 हार की जीत

Bihar Board Class 6 Hindi हार की जीत Text Book Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

पाठ से –

हार की जीत कहानी के प्रश्न उत्तर Class 6 Bihar Board प्रश्न 1.
बाबा भारती कौन थे ?
उत्तर:
बाबा भारती एक संत थे । जिनके पास सुलतान नामक एक घोड़ा था।

Har Ki Jeet Chapter Question Answer Bihar Board Class 6 प्रश्न 2.
बाबा भारती अपने घोड़े ‘सुलतान’ से किस प्रकार स्नेह करते थे?
उत्तर:
बाबा भारती अपने घोड़े सुलतान से उसी प्रकार स्नेह करते थे जैसे कोई माँ बेटे से स्नेह करती है, किसान को अपने खेत से स्नेह होता है । और जैसे गुरु शिष्य को स्नेह करता है।

Haar Ki Jeet Question Answer Bihar Board Class 6 प्रश्न 3.
बाबा भारती के घोड़े को देखने के लिए खड्ग सिंह क्यों अधीर हो उठा? घोड़ा देखने के बाद खड्ग सिंह के दिमाग में क्या उथल-पुथल होने लगी?
उत्तर:
बाबा भारती के घोड़े की कीर्ति सुनकर उसे देखने के लिए खड्ग सिंह अधीर हो उठा। घोड़ा देखने के बाद उसके दिमाग में उथल-पुथल होने लगी कि—यह घोड़ा मुझे कैसे प्राप्त होगा।

हार की जीत कहानी के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 6 प्रश्न 4.
खड्ग सिंह ने बाबा भारती के घोड़े को पाने के लिए किस प्रकार का रूप बदला?
उत्तर:
खड्ग सिंह ने बाबा भारती के घोड़े सुलतान को पाने के लिए अपाहिज का रूप बदला।

Haar Ki Jeet Question Answer Class 6 Bihar Board प्रश्न 5.
पाठ के किन वाक्यों से पता चलता है कि बाबा भारती को अपने घोड़े पर गर्व था?
उत्तर:
बड़ा विचित्र जानवर है, देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे। उसकी चाल तुम्हारा मन मोह लेगी इत्यादि । पाठ के वाक्यों से पता चलता है कि बाबा भारती को अपने घोड़े पर गर्व था।

Har Ki Jeet Question Answer Bihar Board Class 6 प्रश्न 6.
सही वाक्यों के सामने सही (✓) एवं गलत वाक्यों के सामने गलत (☓) का निशान लगाइए।
(क) बाबा भारती का घोड़ा कमजोर एवं दुर्बल था। (☓)
(ख) घोड़ा का नाम सुलतान था। (✓)
(ग) खड्गसिंह को बाबा भारती का घोड़ा पसंद था। (✓)
(घ) बाबा भारती ने सुलतान से बिछुड़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की। (✓)
(ङ) खड्गसिंह ने चुपक से घोड़ा को अस्तबल में बाँध दिया। (✓)

पाठ से आगे –

Har Ki Jeet Class 6 Bihar Board प्रश्न 1.
लोगों को यदि इस घटना का पता लग गया तो वे किसी अपाहिज पर विश्वास न करेंगे।” बाबा भारती के इस वक्तव्य का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
बाबा भारती के इस वक्तव्य का अभिप्राय है कि लोग किसी अपाहिज को मदद करने से दूर भागेंगे।

हार की जीत कहानी का सारांश Bihar Board Class 6 प्रश्न 2.
खड्गसिंह ने चुपके से रात में सुलतान को वापस अस्तबल में बाँध दिया। ऐसा उसने क्यों किया?
उत्तर:
खड्ग सिंह ऐसा इसलिए किया कि-बाबा भारती के वाक्य सुनकर उसका हृदय परिवर्तन हो गया वस्तुतः लोगों को मालूम हो जाने पर कोई भी व्यक्ति लाचार, गरीब और अपाहिज पर विश्वास नहीं करता । अतः उसने बाबा के घोड़े को लौटाने के लिए चुपके से घोड़े को अस्तबल में बाँध -दिया।

हार की जीत Question Answer Bihar Board Class 6 प्रश्न 3.
बाबा भारती के किस व्यवहार से खड्गसिंह के सोच में परिवर्तन हुआ?
उत्तर:
बाबा भारती ने घोड़ा के विषय में बात नहीं कर खड्ग सिंह से कहा-मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह घटना किसी से मत कहना । यदि लोगों को इस घटना के बारे में मालूम हो जायेगा तो गरीब, लाचार पर विश्वास करना छोड़ दंगे । यह कहकर सुलतान को बिना देख वापस चल दिए । बाबा के इस व्यवहार से खड्ग सिंह के सोच में परिवर्तन हुआ।

हार की जीत के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 6 प्रश्न 4.
आपकी प्रिय वस्तु कोई छिनने का प्रयास करे तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
हमारी प्रिय वस्तु यदि कोई छिनने का प्रयास करेगा तो मैं उसका विरोध करूँगा।

हार की जीत पाठ का सारांश Bihar Board Class 6 प्रश्न 5.
अगर आपको बाबा भारती से घोड़ा लेना होता तो आप क्या करते?
उत्तर:
अगर हमको बाबा भारती से घोड़ा लेना होता तो हम उनसे आग्रह करते और उसका उचित मूल्य देने की कोशिश करते।

Bihar Board Solution Class 6 Hindi प्रश्न 6.
कहानी का कोई दूसरा शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर:
इस कहानी का दूसरा शीर्षक “सुलतान” हो सकता है।

व्याकरण प्रश्न

हार की जीत का प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 6 प्रश्न 1.
(क) किसान अपने लहलहाते खेतों को देखकर बहुत प्रसन्न होता है।
(ख) खड्गसिंह एक कुख्यात डाकू था।
(ग) बाबा भारती के मुख पर प्रसन्नता थी।
(घ) उन्होंने दंढे जल से स्नान किया।
(ङ) सुलतान को देखने के लिए भीड़ लगी रहती थी।

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द क्रमशः जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक, द्रव्यवाचक एवं समूहवाचक संज्ञा है। इस प्रकार संज्ञा के पाँच भेद है।
निम्नलिखित वाक्यों में मोटे शब्दों को सामने के कोष्ठक में संज्ञा के भेद के रूप में लिखिए।

प्रश्नोत्तर –

  1. वह ईमानदारीपूर्वक काम करता है। (भाव वाचक संज्ञा)
  2. सुलतान बड़ा सुन्दर और बलवान था। (व्यक्तिवाचक संज्ञा)
  3. कार्तिक पूर्णिमा के दिन सोनपुर में मेला लगता है। (समूह वाचक संज्ञा)
  4. दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। (द्रव्य वाचक संज्ञा)
  5. बस घाटी से होकर गुजरती है। (जातिवाचक संज्ञा)

Bihar Board Class 6 Hindi Book Solution प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाइए –
(क) पश्चात
(ख) महात्मा
(ग) निश्चय
(घ) प्रशंसा
(ङ) अपाहिज
(च) स्वीकार।
उत्तर:
(क) पश्चात् = श्याम के पश्चात् राम भी यहाँ आया।
(ख) महात्मा = महात्मा लोग दयालु होते हैं।
(ग) निश्चय = निश्चय करके काम करना चाहिए।
(घ) प्रशंसा = अपनी प्रशंसा सुन सब प्रसन्न होते हैं।
(ङ) अपाहिज = अपाहिज लोग दया के पात्र होते हैं।
(च) स्वीकार = उसने मेरा निमंत्रण स्वीकार कर लिया ।

Kislay Hindi Book Bihar Class 6 Bihar Board प्रश्न 3.
इस पाठ में घोड़े की विशेषता से संबंधित जो शब्द हैं उन्हें चुनकर लिखिए।
उत्तर:
इस पाठ में घोड़े की विशेषता संबंधित शब्द है-बड़ा सुन्दर, बड़ा बलवान, बड़ा विचित्र जानवर है, उसकी चाल मन मोह लेगा। बाँका घोड़ा इत्यादि ।

प्रश्न 4.
निम्नांकित मुहावरों का अर्थ लिखिए
(क) लट्टू होना
(ख) फूले न समाना
(ग) हृदय पर साँप लोटना
(घ) मुँह मोड़ लेना।
उत्तर:
(क) लट्टू होना = लोभ हो जाना।
(ख) फूले न समाना = अत्यन्त खुश होना।
(ग) हृदय पर साँप लोटना = ईर्ष्या होना।
(घ) मुँह मोड़ लेना = नाता तोड़ लेना।

कुछ करने को –

प्रश्न 1.
आपके आस-पास कोई ऐसा व्यक्ति है जो अपने व्यवहार से आपको प्रभावित करता है । उसका पता कीजिए और उसकी दिनचर्या को लिखिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

हार की जीत Summary in Hindi

पाठ का सार संक्षेप

बाबा भारती अपने घोड़े सुलतान को बेहद प्यार करते थे। क्योंकि सुलतान बड़ा ही सुन्दर और बड़ा बलवान था। उस घोड़े का जोड़ सारे इलाके में कहीं नहीं था। वे अपने हाथ से घोड़े का. खरहरा करते, स्वयं उसको दाना खिलाते थे। शाम में उस पर बैठकर 8-10 मील का चक्कर लगाया करते थे।

खड्ग सिंह उस इलाके का कुख्यात डाकू था । लोग उसका नाम खुलकर काँप जाते थे। जब खड्ग सिंह ने सुलतान की बड़ाई सुनी तो वह सुलतान को देखने के लिए बाबा भारती के पास आया और प्रणाम कर सामने बैठ गया। बाबा ने खड्ग सिंह से हाल-चाल पूछा, पुनः आने का कारण पूछा। खड्ग सिंह ने कहा-सुलतान की चाहत यहाँ तक खींच लाई है। बाबा ने भी सुलतान की बड़ाई खड्ग सिंह से की। सुलतान को दिखाया। खड्ग सिंह ने उसकी चाल दिखाने का आग्रह किया तो बाबा ने घोड़े पर सवार होकर उसकी चाल भी दिखा दी। अब तो खड्ग सिंह ने सोच लिया यह घोड़ा मैं अवश्य प्राप्त करूँगा । बाबा से बोला—बाबाजी इस घोड़े को आपके पास नहीं रहनं दूंगा।

बाबा घबड़ा गये। सारी रात स्वयं जगकर घोड़े की रक्षा करने लगे। कुछ दिन बीत जाने पर बाबा कुछ लापरवाह हो गये । एक दिन जब शाम में बाबा भारती घोड़े पर घूम रहे थे तो किसी के कराहट की आवाज आई, “बाबा इस कंगाल की बाते सुनते जाना।” बाबा अपाहिज जैसा देखकर उसे पूछा क्या कष्ट है। उसने हाथ जोड़कर कहा, बाबा मैं दुखियारा हूँ मुझ पर दया करो । कृपा कर रामाबाला तक मुझे पहुँचा दो, भगवान आपका भला करेगा। दयावश बाबा ने अपाहिज को घोड़े पर बैठाकर लगाम पकड़ पैदल चलने लगे। एकाएक जोड़ का झटके के साथ लगाम हाथ से छूट गया । अपाहिज तनकर घोड़े पर बैठकर भागे जा रहा है। वह समझ गये खड्ग सिंह ही है।

बाबा भारती जोर से चिल्लाते हुए कहा-“खड्ग सिंह रूक जाओ, एक प्रार्थना करता हूँ अस्वीकार न करना, नहीं तो मेरा दिल टूट जायेगा।”

खड्ग सिंह ने कहा-“आज्ञा दीजिए। आपका दास हूँ केवल घोड़ा नहीं दूंगा।” बाबा ने कहा, घोड़े की बात मत करो। मेरी प्रार्थना केवल यही है कि इस घटना को किसी से मत कहना । यदि लोगों को इस घटना के बारे में पता चल जायेगा तो लोग अपाहिज पर विश्वास नहीं करेंगे। यह कहकर बाबा ने सुलतान की तरफ से मुँह मोड़ लिया।

खड्ग सिंह का मुँह आश्चर्य से खुला ही रह गया। रात्रि के अन्धकार में वह बाबा के मंदिर के पास आकर सन्नाटे में सुलतान को अस्तबल में बाँध दिया और चला गया। कल सुबह बाबा अपने आदत के अनुकूल अस्तबल जाने लगे। लेकिन याद आते ही लौटने लगे। उतनी ही देर में सुलतान की हिनहिनाहट सुनकर आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़कर सुलतान के गले लिपटकर रोने लगे। मानो बिछड़ा बेटा वापस आया हो  पुनः संतोष की श्वास – लेते हुए बोले…..अब कोई गरीब की सहायता करने से मुख नहीं मोड़ेगा।

Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 3 पुष्प की अभिलाषा

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पाठ से –

Pushp Ki Abhilasha Question Answer In Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों के भावार्थ स्पष्ट कीजिए –
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हरि, डाला जाऊँ।
चाह नहीं. देवों के सिर पर,
चढूँ, भाग्य पर इठलाऊँ।
उत्तर:
भावार्थ-हे प्रभु! हमारी अभिलाषा सम्राटों के मृत शरीर पर डाले जाने की नहीं और देवताओं के सिर पर चढ़कर अपने को भाग्यशाली मानें ऐसी भी हमारी अभिलाषा नहीं है।

Pushp Ki Abhilasha Question Answer Bihar Board प्रश्न 2.
प्रस्तुत पाठ में “मैं” शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर:
पुष्य के लिए।

पुष्प की अभिलाषा के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
हे वनमाली, मुझे तोड़कर उस रास्ते पर फेंक देना, जिस रास्ते से होकर अपनी मातृभूमि पर शीश चढ़ाने वाले वीर जाते हैं।” उपर्युक्त भाव पाठ की जिन पंक्तियों के द्वारा अभिव्यक्ति होती है उन पंक्तियों को लिखिए।’
उत्तर:
मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ पर देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढाने,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक ।।

Pushp Ki Abhilasha Questions And Answers Bihar Board प्रश्न 4.
“भाग्य पर इठलाऊँ” का कौन-सा अर्थ ठीक लगता है ?
(क) भाग्य पर नाराज होना।
(ख) भाग्य पर गर्व करना।
(ग) भाग्य पर विश्वास न करना।
उत्तर:
(ख) भाग्य पर गर्व करना।

पाठ से आगे –

पुष्प की अभिलाषा प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
बड़े-बड़े सम्मान पाने की बजाय पुष्प उस पथ पर फेंका जाना क्यों पसंद करता है, जिस पर मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले दीर जाते हैं ? अपना विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
बड़े-बड़े सम्मान पाना या बड़ों से सम्मानित होना मानव धर्म है लेकिन सबसे बड़ा धर्म है-देश धर्म अर्थात् मातृभूमि के प्रति धर्म का पालन करना । मातृभूमि की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है। अतः पुष्प को चाह है कि-यदि मैं अपनी मातृभूमि के रक्षक वीरों के पैर को कुछ राहत पहुँचा सकूँ तो हमारी सार्थकता सर्वोपरि होगी।

पुष्प की अभिलाषा कविता के प्रश्न उत्तर Bihar Board  प्रश्न 2.
पुष्प की भाँति आपकी भी कोई अभिलाषा होगी। उन्हें दस वाक्यों में लिखिए। .
उत्तर:
पुष्प की भाँति मेरी भी अभिलाषा है कि.-मैं भी देश-रक्षार्थ देश का सिपाही बनें । मेरे शरीर का एक-एक बूंद देश की रक्षा में लगे । हम अपने देश के गौरव को बढ़ावें । हम अपनी मातृभूमि के सम्मान को बढ़ावें । भारत माता को कलंकित करने वालों के सिर को कुचल डालें । देश-प्रेम को छोड़कर तुच्छ मानव के प्रति हमारे प्रेम न हो। जब-जब मैं जन्म लूँ, मातृभूमि की रक्षा करते हुए मरूँ। इससे ही जन्म सफल होता है। अतः भगवान से मेरी प्रार्थना
हे हरि, देश धर्म पर मैं बलि-बलि जाऊँ।
अर्थात् मातृभूमि के रक्षार्थ मैं बार-बार बलिदान हो जाऊँ।

व्याकरण –

पुष्प की अभिलाषा पाठ 1 के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
भाग्य शब्द के पहले सौ उपसर्ग लगाकर सौभाग्य शब्द बनता -है। इसी प्रकार नि, दुः अन् उपसर्ग लगाकर दो-दो शब्द बनाइए।
उत्तर:
नि = निहत्था, निशान ।
दुः = दुष्कर्म, दुश्मन ।
अन् = अनावश्यक, अनुत्तीर्ण ।

कुछ करने को –

Pushp Ki Abhilasha Question Answer In Hindi Pdf Bihar Board प्रश्न 1.
कल्पना के आधार पर इस कविता से सम्बन्धित एक चित्र बनाइए।
उत्तर:
चित्र बनावें।

पुष्प की अभिलाषा Questions Bihar Board प्रश्न 2.
मातृभूमि या देश-प्रेम से सम्बन्धित अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उनकी कविताओं को खोज कर पढ़िए और अपनी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
देशगान सुनायें।

पुष्प की अभिलाषा Summary in Hindi

कविता का अर्थ –

चाह नहीं मैं सुरवाला के ………………….. विंध प्यारी को ललचाऊँ।
अर्थ – हे प्रभु ! हमारी चाह देव कन्याओं के गहनों में गूंथा जाना नहीं है और प्रेमी के माला में गूँथाकर प्रेमिका को ललचाने की चाहत भी नहीं है।

चाह नहीं सम्राटों ………………….. भाग्य पर इठलाऊँ।
अर्थ – हे हरि ! सम्राटों के शव (मृत शरीर) पर डाले जाने की चाहत भी मुझे नहीं है तथा देवताओं के सिर पर चढ़कर अपने भाग्य पर गर्व करूँ, ऐसी अभिलाषा भी मेरी नहीं है।

मुझे तोड़ लेना ………………….. जाएँ वीर अनेक॥
अर्थ – हे वन माली ! मेरी अभिलाषा है कि-मझे तोड़कर उस पथ पर फेंक देना, जिस पथ पर मातृभूमि की रक्षार्थ अनेक वीर पुरुष जाते हैं।

Bihar Board Class 12 English Book Solutions Poem 3 Now the leaves are falling fast

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Bihar Board Class 12 English Now the leaves are falling fast Text Book Questions and Answers

A. Work in small groups and discuss these questions

Now The Leaves Are Falling Fast Question Answer Bihar Board Question 1.
There is a season in which trees shed their leaves. Which season is this? What are the other things that take place in this season?
Answer:
It is autumn. In autumn trees shed their leaves. Fruit ripen. Wheat and barley are sown.

Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board Question 2.
What feelings do the trees without leaves evoke in you?
Answer:
The trees look naked and ugly. The sights evoke a feeling of sympathy for them.

Now The Leaves Are Falling Fast Questions And Answers Bihar Board Question 3.
How do old people think about their own life and age when they see a child?
Answer:
They are reminded of their own childhood. They think of their past with nostalgia.

B. 1. Read the following sentences and write T for true and F for false statements 

(a) The leaves are falling very fast.
(b) The nurses are still there to take care of the flowers.
(c) All the prams are gone to the grave.
(d) Whispering neighbours’ disturb the ‘real delight’ of the ageing persons.
(e) Old persons feel lonely as they gradually become inactive.
(f) Death freezes the body and separates us from the crowd of die people.
(g) The promises of love are often deceptive.
(h) Starvation and suffering do not characterise human life.
(i) Travellers get one relief in the waterfall of the mountain.
(j) The prams go rolling on’ suggests the continuity of life.
Answer:
(a) T, (b) F, (c) T, (d) T, (e) T, (f) T, (g) T, (h) T, (i) T, (j) F.

B. 2. Complete the following sentences on the basis of what you have studied

(a) Nurses to the………………………….rolling one.
(b) The cold, impossible, ahead……………. lovely head
……………………………………………could bless
…………………………………………last distress.
Answer:
(a) Nurse’s flowers will not last;
Nurses to the graves are gone,
And the prams go rolling one.
(b) Cold impossible ahead.
Lists the mountain’s lovely head
Whose white waterfall could bless
Travellers in their last distress.

B. 3. Answer the following questions briefly

Question Answer Of Now The Leaves Are Falling Fast Bihar Board Question 1.
What does the poet mean when he says “Now the leaves are falling fast”?
Answer:
The poet means that the leaves of the branches of the tree are falling and the trees are becoming leafless. It is also meant by a person who slowly goes to its death and at last in a grave. Like a tree, every human life has to be destroyed. There is none who can be alive. Everyone is mortal.

Now The Leaves Are Falling Fast Poem Bihar Board Question 2.
What are the words in the second stanza suggest death and the effect of death on the human body?
Answer:
In the second stanza, the following are the words that suggest death and the effect of death on the human body Wishpering neighbours, Pluck and Freeze.

Now The Leaves Are Falling Fast Summary In Hindi Bihar Board Question 3.
How do we complete our last journey to the grave?
Answer:
When a man is dead hundreds of men carry the dead body in a wooden coffin to the grave. This is our last journey.

Now The Leaves Are Falling Fast Line By Line Explanation Bihar Board Question 4.
What do “Trolls” do in the “leafless wood”?
Answer:
Trolls run in search of their food in the leafless wood. They search for food to live.

Now The Leaves Are Falling Fast Ka Question Answer Bihar Board  Question 5.
Who are the ‘travellers’ and how will they be blessed?
Answer:
Old persons are the travellers and they are blessed with their last distress and that is death.

Now The Leaves Are Falling Fast Meaning In Hindi Bihar Board Question 6.
Which words in the first stanza suggest objects from Nature?
Answer:
‘Nurse’s flowers’ is the word in the first stanza that suggests objects from nature. It means ‘a nurse’.

Now The Leaves Are Falling Fast Summary Pdf Bihar Board Question 7.
Who are the ‘whispering neighbours’?
Answer.
Agents or messengers of death are the whispering neighbours who come when a human body is dead.

Now The Leaves Are Falling Fast Summary In English Bihar Board Question 8.
How does human life become miserable?
Answer:
Suffering from diseases and other problems, make human life become miserable and unhappy.

Now The Leaves Are Falling Fast Ka Hindi Bihar Board Question 9.
In what way will the travellers be blessed?
Answer:
Travellers will be blessed of those white waterfall which comes out from the mountain’s head. They will be blessed in their last distress.

C. 1. Long Answer Questions

Now The Leaves Are Falling Fast Written By Bihar Board Question 1.
Falling of leaves suggests the process of death and human waste on a large scale. Explain with reference to the poem.
Answer:
Falling of leaves suggests the process of death and human waste on a large scale. It means human life is just like a leaf which falls from a tree. Firstly, human life just starts as a baby and slowly it grows. After some time a human life suffers from a lot of diseases. Just like weather a human life also changes. When the weather changes the leaves fall down. In the same way, human life also decreases and decays.

Now The Leaves Are Falling Fast Ka Hindi Meaning Bihar Board Question 2.
The poet is critical of the negative tendencies of human society. What are these tendencies ? Give details.
Answer:
The poet W.H. Auden wants to say that human life is totally dependent on human society. Without a human society, it can’t grow properly and also can’t do anything well. The poet is critical of the negative tendencies of human society. There are different kinds of caste or creed. The poet says that all human life is the same and belongs to the same society but the people create different kinds of caste and divide themselves. The poet says that it is not good.

Question 3.
Who are the ‘Strolls’ in the real world?
Answer:
In this poem “The Leaves Are Falling Fast” is written by the poet W. H. Auden. According to his knowledge, those people are the ‘trolls’ in the real world who divide human life in different caste or creeds. The people who did crime anywhere and give troubles to others always think wrong things. They don’t think about others and their problems. They hurt those people who are gentle. Such types of people are the ‘trolls’ in the real world.

Question 4.
Though the poet refers to ‘death’ several times, yet the poem is not a pessimistic one. Justify your answer.
Answer:
The poet W. H. Auden refers to death several times in his poem, yet the poem is not a pessimistic one. In this poem, the poet tells that a tree becomes leafless in autumn. It looks like an old person who suffers from the illness. It seems that the poet has narrated the reality of life. Everything is bound to come to an end. But the circle of life and death will continue. Yet the poet is not a pessimistic one. In this poem, he tells that a tree becomes leafless in this season. It seems like an old person who suffers from an illness and can’t live for a long such as the tree also seemed that it would soon dry. As different types of seasons people also suffer from different kinds of disease.

Question 5.
Write in short the summary of the poem, “Now the Leaves are Falling Fast” [Board Model, 2009]
Or, write a short note of the poem, “Now the Leaves are Falling Fast” [B.M., 2009 A]
Answer:
“Now the Leaves are Falling Fast” is a simple but revealing poem by W.H. Auden. He is a 20th Century poet who tries to expose the frustration which is naturally present in human life. In this poem, the poet tries to show the crisis that has overtaken modem life. The poet describes the slow dismantling of our aspirations, our loneliness and our frustration against a very suitable background of autumn. Our rising aspirations are falling apart like leaves in autumn. Even the flowers growing under big trees are not able to survive. Death lays its icy hand on all. The poet coins highly suggestive expression to refer to death such as “whispering neighbours” and “pluck us from the real delight”. These two expressions suggest that human life is no better than death. In fact, it is life in death. The poet describes the situation of helplessness with the help of trolls who are mining for food without any success. The shocked silence of the nightingale completes the image of death. However, a sense of optimism is betrayed in the closing lines of the poem :

“Cold, impossible, ahead
Lists the mountains Lovely head
Whose white waterfall could bless
Travellers in their last distress.”

Thus the present poem is a fine lyric written by an accomplished poet like W.H. Auden. He has the most beautifully depicted mortality. Mortality and continuity are the two wheels on which life runs.

C. 3. Composition

Write a paragraph in about 100 words on each of the following:
(a) If winter comes, can spring be far behind?
Answer:
Life is blessed with good and bad. Winter is always associated with sad, dull and gloomy atmosphere whereas spring is the sign of freshness, happiness and enjoyment. Human beings should always be optimistic in their approach to life. They should understand the law of Nature. If there is pain, unhappiness or tears today, how far away is the happiness from us? There are two sides to everything. If today there is sorrow, tomorrow it will be happiness. We should believe that a tune will come when there will be equality justice and love everywhere. So we should never lose our hope and always be optimistic.

(b) Let us make this world a better place to live in.
Answer:
Life is beautiful and the world is a beautiful place to live in. But the fact is that we are trying to destroy this world for our selfish ends. God blessed us with a beautiful world. But human beings are destroying their beauty by bringing destruction to Nature. Man is giving so much pressure on this earth that an imbalance is created. They are not only unbalancing the earth but killing people, damaging their properties and making life fearful. Today, a time has come that there is no fellow feeling among the people. They are scared of believing other people. They are trying to protect and save themselves from their enemies in great fear. So it is our duty to make this world a better place to live in and enjoy its beauty.

D. Word Study
D. 2. Word-formation

Read carefully the following sentence taken from the poem:
And the prams go rolling on.
In the above sentence, the word ‘pram’ is the shortened form of perambulators. Write down the short forms of the following :
examination
programme
department
congratulation
modem
advertisement
Answer:
examination — exam,
programme — prog,
department — dept,
congratulation — congrats
modem — mod.
advertisement — ad.

D3. Word-meaning

Ex. 1. Write the antonyms of the following words and use them in your own sentences:

falling…………..
last……………….
freeze…………..
responsive………..
impossible………..
separate………
fast…………….
real…………
false…………
bless………..
Answer:
falling — raising — The children were raising fund for charity.
fast — slow — Ram is very slow in his reading.
last— first — Tom comes first in class.
freeze — melt — The ice got melt.
separate — together — We must work together.
responsive — unresponsive — He played unresponsive due to his bad health.
false — true — She is a true lady.
impossible — possible — Everything is possible in this world,
bless — curse — I never curse others.

E. Grammar

Ex. 1. Read the following sentences carefully:
’And the prams go rolling on’.
The line suggests continuity of action. It can also be rewritten as: ‘And the prams go on rolling’.
Write five similar sentences with ‘go on using the following verbs:
swim, walk, read, sleep, sketch
Answer:
(1) The students go on swimming.
(2) Healthy people go on walking.
(3) The students go on reading.
(4) The lazy go on sleeping.
(5) ‘The children go on sketching.

Ex. 2. Read the following sentence carefully:
‘And the active hands must freeze. ’In the above line ‘must’ suggests ‘compulsion’ or necessity. ‘Must is different from ‘should’ and ‘ought to’ which suggest ‘suggestion’ or ‘obligation’. Fill in blanks with ‘must’, ‘should’, ‘ought to’ to complete the following sentences
(1) We follow a suitable time-table of study.
(2) The young be considerate about the sentiments of their elders.
(3) Death does not mean the end of everything, life goes on.
(4) Why I always follow fashion.?
(5) We, the Indians show respect to the national flag.
Answer:
(1) should, (2) must, (3) must, (4) should, (5) ought to.

Comprehension Based Questions with Answers

1. Read the following extract of the poetic piece and answer the questions that follow:
Now the leaves are falling fast,
Nurse’s flowers will not last;
Nurses to the graves are gone,
Arid the prams go rolling on.

Questions.
(a) Name the poem and the poet.
(b) What do the falling leaves suggest?
(c) What does “nurses flowers will not last” mean?
(d) Whom the poet says, “nurses to the graves”?
(e) What does “the prans go rolling on”, mean?
Answer:
(a) The poem is “Now The Leaves Are Falling Fast.” and the name of the poet is “Wystan Hugh Auden”.
(b) The falling leaves suggest the process of death and human waste on a large stale, indicating the frustration and un fulfilment of human wishes.
(c) Flowers do not last long, because they are short-lived. It is the process of nature that nothing is everlasting.
(d) The poet explains the mortality of life. Death is inevitable. Since nurses have also to meet the same fate, as such they have gone to the graves.
(e) The prans rolling on proves that life goes on despite mortality. Love and compassion can provide heating touches to our tired nerves in the journey of life.

2. Read the following extract of the poetic piece and answer the questions that follow [Board Model, 2009]
Whispering neighbours left and right,
Pluck us from the real delight
And the active hands must freeze
Lonely on the separate knees.

Questions.
(a) Write the title of the poem and the poet’s name.
(b) Who are the “Whispering neighbours?”
(c) What does, “pluck us from the real delight knees”?
(d) Why the active hands must freeze?
(e) To whom the poet says “lonely on the separate knees”?
Answer:
(a) The title of the poem is, “Now The Leaves Are Falling Fast” and its poet is W. H. Auden.
(b) Agents or messenger of death is the whispering neighbours, who come at the time of death, to inform us of the inevitability of death.
(c) The whispering neighbours who are really the agents of death, spoil the joy of our life by pointing to the inevitability of death.
(d) Death freezes the active hands. It means that life.comes to an end with death. It is bound to come one day or another.
(e) Death separates us from the crowd of the people, to remain peacefully under the graves.

3. Read the following extract the poetic piece and answer the questions that follow [Board Model, 2009]
Dead in hundreds at the back
Follow wooden in our track,
Arms raised stiffly to reprove.
In false attitudes of love.

Questions:
(a) Name the poem and the poet.
(b) What does the poet say of the dead?
(c) Whose arms are raised stiffly?
(d) Why the poet feels “false attitude of love”?
(e) What is the feeling of the poet in these lines of the stanza?
Answer:
(a) The poem is, “Now The Leaves Are Falling Fast” and the name of the poet who wrote the poem is, W.H. Auden.
(b) The poet says that so many persons have died shortly because death cannot be avoided.
(c) Dead persons have raised their arms desperately to rebuke it. They are highly aggrieved with the end of life in such away.
(d) The poet feels false attitude of love because of the uncertainty of life and certainty of death. As such he calls it the false attitude of love.
(e) Poets reaction in this stanza relates to the inevitability of death, which cannot be avoided. It is the reality of human life.

4. Read the following extract of the poetic piece and answer the questions that follow [Board Model, 2009]
Starving through the leafless wood
Golden Series Passport
Trolls ran scolding for their food;
And the nightingale is dumb.
And the angel will not come.

Questions:
(a) Name the poem and the poet.
(b) Who are they starving?
(c) Who is scolding for the food?
(d) Why the nightingale is dumb?
(e) Who will not come there?
Answer:
(a) The poem is, “Now The Leaves Are Falling Fast” and the name of the poet is W.H. Auden.
(b) Wicked and ugly creatures are become starving (“trolls” are wicked and ugly creatures in Scandinavian mythology).
(c) Wicked and ugly creatures (trolls) are scolding for the food they require.
(d) The nightingale has become dumb to see the leafless trees. The trees are looking like death and the nightingale becomes silent to mourn this tragedy.
(e) The angel or innocent persons will not come there to witness the ugly and distressing conditions of the leafless trees.

5. Read the following extract of the poetic piece and answer the questions that follow [Board Model, 2009]
Cold, impossible, ahead
Lists the mountain’s lovely head
Whose white waterfall could bless
Travellers in their last distress.

Questions.
(a) Mention the title of the poem and poets’ name.
(b) What is cold and impossible?
(c) What does mountain’s lovely head mean?
(d) To whom white waterfall could bless?
(e) Who happens to be in last distress?
Answer:
(a) The title of the poem is “Now The Leaves Are Falling Fast” and the name of the poet is W.H. Auden.
(b) There are the lovely mountain peaks ahead, which are cold and it is not possible to climb over them.
(c) Mountain’s lovely head means – lovely peaks of the mountain which Jook beautiful.
(d) White waterfall could bless the travellers passing through that way.
(e) The travellers who are passing through lovely mountain peaks and white waterfall are in last distress.

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Poem 3 Now the leaves are falling fast English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.