Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 10 ऋणपत्रों का निर्गमन

Bihar Board 12th Accountancy Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 10 ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 1.
ऋणपत्र है :
(A) ऋण का प्रमाण-पत्र
(B) नकद का प्रमाण-पत्र
(C) साख का प्रमाण-पत्र
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) ऋण का प्रमाण-पत्र

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 10 ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 2.
ऋणपत्रधारी होते हैं :
(A) कंपनी के ग्राहक
(B) कंपनी के मालिक
(C) कंपनी के लेनदार
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) कंपनी के लेनदार

प्रश्न 3.
बैंक से लिये गये ऋण के लिए ऋणपत्रों को सहायक प्रतिभूति के · रूप में निर्गमन किये जाने पर किस खाते को डेबिट किया जायेगा :
(A) बैंक खाता
(B) बैंक ऋण खाता
(C) ऋणपत्र खाता
(D) ऋणपत्र उचंती खाता
उत्तर-
(D) ऋणपत्र उचंती खाता

प्रश्न 4.
यदि विक्रेताओं को 5,00,000 रु. की शुद्ध सम्पत्तियों के प्रतिफल के बदले 4,50,000 रु. के ऋणपत्र निर्गमित किये जाते हैं तो शेष 50,000 रु. किस खाते में क्रेडिट किये जायेंगे :
(A) लाभ-हानि खाता
(B) ख्याति खाता
(C) सामान्य संचय खाता
(D) पूँजी संचय खाता
उत्तर-
(D) पूँजी संचय खाता

प्रश्न 5.
ऋणपत्र जो कि मात्र सुपुर्द कर देने पर हस्तान्तरित हो जाते हैं, कहे जाते हैं :
(A) पंजीकृत ऋणपत्र
(B) प्रथम ऋणपत्र
(C) वाहक ऋणपत्र
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) वाहक ऋणपत्र

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प्रश्न 6.
एक कंपनी के आर्थिक चिट्टे में, ऋणपत्रों के शीर्षक के अन्तर्गत दिखाया जाता है:
(A) असुरक्षित ऋण
(B) दीर्घकालीन ऋण
(C) चालू दायित्व
(D) संचय एवं अधिशेष
उत्तर-
(B) दीर्घकालीन ऋण

प्रश्न 7.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर दिया जाने वाले बट्टा किस प्रकृति का होता है ?
(A) आयतन हानि
(B) पूँजीगति हानि
(C) स्थगित आयगत व्यय
(D) इनमें से कोई नहीं |
उत्तर-
(B) पूँजीगति हानि

प्रश्न 8.
कंपनी के समापन पर ऋणपत्रों के मूलधन की वापसी की जाती है :
(A) सबसे पहले
(B) सबसे बाद में
(C) समता पूँजी में पहले
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) समता पूँजी में पहले

प्रश्न 9.
ऋणपत्रों पर देय ब्याज है :
(A) कंपनी के लाभों का एक विनियोजन
(B) कंपनी के लाभों के विरुद्ध एक प्रभार
(C) सिकिंग फण्ड में हस्तान्तरण
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर-
(B) कंपनी के लाभों के विरुद्ध एक प्रभार

प्रश्न 10.
ऋणपत्रों को…………..पर विमोचित नहीं किया जा सकता।
(A) प्रीमियम
(B) बट्टा
(C) सम
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) बट्टा

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प्रश्न 11.
ऋणपत्र प्रतिनिधित्व करता है:
(A) संचालक को कंपनी में हिस्सा
(B) समता अंशथारियों द्वारा निवेश
(C) व्यवस्था का दीर्घकालिक ऋण
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) व्यवस्था का दीर्घकालिक ऋण

प्रश्न 12.
ऋणपत्रों पर ब्याज होता है :
(A) 12% वार्षिक
(B) निश्चित दर
(C) 20% वार्षिक
(D) 6% वार्षिक
उत्तर-
(B) निश्चित दर

प्रश्न 13.
साधारणतया ऋणपत्र होते हैं :
(A) सुरक्षित
(B) असुरक्षित
(C) अंशत सुरक्षित
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) सुरक्षित

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प्रश्न 14.
कंपनी के लिए अधिक मूल्य पर ऋणपत्रों का निर्गमन है :
(A) आयगत प्राप्ति
(B) लाभ
(C) पूँजीगत लाभ
(D) सम्पत्ति
उत्तर-
(C) पूँजीगत लाभ

प्रश्न 15.
कंपनी के लिए ऋणपत्रों के निर्गमन पर कटौती है :
(A) पूँजीगत हानि
(B) आयगत हानि
(C) सामान्य हानि
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) पूँजीगत हानि

प्रश्न 16.
‘ऋणपत्रों के निर्गमन पर अधिक लाभों’ को आर्थिक चिट्ठे में दिखाया जाता है :
(A) सम्पत्ति पक्ष में
(B) दायित्व पक्ष में
(C) इनमें से कोई नहीं
(D) (A) और (B) दोनों
उत्तर-
(B) दायित्व पक्ष में

प्रश्न 17.
ऋणपत्रों पर कटौती के शेष को आर्थिक चिट्ठे में दिखाया जाता है :
(A) सम्पत्ति पक्ष में
(B) दायित्व पक्ष में
(C) इनमें से कोई नहीं
(D) (A) और (B) दोनों
उत्तर-
(A) सम्पत्ति पक्ष में

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प्रश्न 18.
ऋणपत्रों पर ब्याज की दर होती है :
(A) 12% p.a.
(B) 20%p.a
(C) निश्चित दर
(D) 15%p.a.
उत्तर-
(C) निश्चित दर

प्रश्न 19.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर कटौती को अपलिखित किया जाना चाहिए :
(A) प्रतिभूति प्रीमियम खाता से
(B) पूँजीगत लाभ से
(C) लाभ-हानि विवरण से
(D) उपर्युक्त क्रम में ऋणपत्रों की अवधि में
उत्तर-
(D) उपर्युक्त क्रम में ऋणपत्रों की अवधि में

प्रश्न 20.
F Ltd. ने 4,00,000 रु. मूल्य की मशीन खरीदी। प्रतिफल का भुगतान प्रत्येक 100 रु. वाले 10% ऋणपत्र 20% की कटौती पर निर्गमन द्वारा किया गया । ऋणपत्र खाता को क्रेडिट किया जायेगा :
(A) 4,00,000 रु.
(B) 5,00,000 रु.
(C) 3,20,000 रु.
(D) 4,80,000 रु.
उत्तर-
(B) 5,00,000 रु.

प्रश्न 21.
ऋणपत्रधारी प्राप्त करता है :
(A) लाभांश
(B) लाभ
(C) ब्याज
(D) बोनस
उत्तर-
(C) ब्याज

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प्रश्न 22.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि को सामान्यतः……….में अपलिखित किया जाता है :
(A) 5 वर्ष
(B) 10 वर्ष
(C) 15 वर्ष
(D) शोधन की अवधि तक
उत्तर-
(D) शोधन की अवधि तक

प्रश्न 23.
जब ऋणपत्रों को सहायक प्रतिभूति के रूप में जारी किया जाता
है तो कौन-सी प्रविष्टि करनी पड़ती है :
(A) Debenture Suspense A/c Dr.
To Debentures
(B) कोई प्रविष्टि नहीं की जाती है
(C) (A) अथवा (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) (A) अथवा (B) दोनों

प्रश्न 24.
ऋणपत्रधारी को मिलता है :
(A) लाभांश
(B) ब्याज
(C) लाभांश और ब्याज दानों
(D) बोनस
उत्तर-
(B) ब्याज

प्रश्न 25.
ऋणपत्रधारियों को कंपनी का…………कहा जाता है।
(A) लेनदार
(B) देनदार
(C) स्वामी
(D) बैंकर
उत्तर-
(A) लेनदार

प्रश्न 26.
एक कंपनी ने 1,00,000 12% ऋणपत्रों को प्रत्येक 100 रु. के निर्गमित किया। ऋणपत्रों पर ब्याज की राशि होगी :
(A) 12,000 रु.
(B) 1,20,000 रु.
(C) 12,00,000 रु.
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) 12,00,000 रु.

प्रश्न 27.
ऋणपत्रों के शोधन पर प्रीमियम खाता है :
(A) एक वास्तविक खाता
(B) एक अवास्तविक खाता
(C) एक व्यक्तिगत खाता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) एक व्यक्तिगत खाता

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प्रश्न 28.
ऋणपत्र प्रीमियम……….के लिए प्रयोग किया जा सकता है :
(A) अंशों या ऋणपत्रों के निर्गमन पर बट्टे के अपलेखन
(B) अंशो या ऋणपत्रों के शोधन पर प्रीमियम के अपलेखन
(C) पूँजीगत हानि के अपलेखन
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर-
(D) उपरोक्त सभी

प्रश्न 29.
निम्न में से कौन असत्य है ?
(A) एक कंपनी शोध्य ऋणपत्र जारी कर सकती है
(B) एक कंपनी मताधिकार के साथ ऋणपत्र जारी कर सकती है
(C) एक कंपनी अपने अंशों का क्रय कर सकती है
(D) एक कंपनी अपने ही ऋणपत्रों को खरीद सकती है
उत्तर-
(B) एक कंपनी मताधिकार के साथ ऋणपत्र जारी कर सकती है

प्रश्न 30.
ऋणपत्र भाग होता है :
(A) अंश पूँजी का
(B) दीर्घकालीन उधार
(C) स्वामित्व पूँजी का
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) दीर्घकालीन उधार

प्रश्न 31.
ऋणपत्र का प्रतिफल है :
(A) लाभ
(B) लाभांश
(C) ब्याज
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) ब्याज

प्रश्न 32.
ऋणपत्र शोधन प्रीमियम खाता है :
(A) सम्पत्ति
(B) दायित्व
(C) व्यय
(D) आगम
उत्तर-
(B) दायित्व

प्रश्न 33.
ऋणपत्र है :
(A) ऋण का प्रमाण-पत्र
(B) नकद प्रमाण-पत्र
(C) साख का प्रमाण-पत्र
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) ऋण का प्रमाण-पत्र

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 10 ऋणपत्रों का निर्गमन

प्रश्न 34.
ऋणपत्रों के निर्गमन पर हानि को………..के रूप में लिखा जाता है :
(A) अमूर्त सम्पत्ति
(B) चालू सम्पत्ति
(C) चालू दायित्व
(D) विविध व्यय
उत्तर-
(D) विविध व्यय

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर भावार्थ।

प्रश्न 1.
अर्थ स्पष्ट करें
दुनिया देखी पर कुछ न मिला,
तुझको देखा सब कुछ पाया
संसार-ज्ञान की महिमा से, प्रिय की पहचान कहीं सुन्दर तेरी मुस्कान कहीं सुन्दर।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि श्री गोपाल सिंह ‘नेपाली’ कहते हैं कि मानव को ईश्वर ने ज्ञान, ध्यान, चेतना, साहस और सौन्दर्य प्रदान कर दी है। वह कठिनाइयों में कभी पीछे नहीं हटता है। आगे बढ़ने और बढ़ते रहने का मार्ग खोज लेता है। जब वह कठिनाइयों और अंधकार पर विजय प्राप्त करता है तो उसके मुँह पर मुस्कान झलकती है जो बहुत ही सुन्दर होती है।

प्रश्न 2.
अर्थ स्पष्ट करें
जब गरजे मेघ, पपीहा बोलें-डालें गुल जारो में।
लेकिन काँटों की झाड़ी में बुलबुल का गान कहीं सुन्दर
तेरी मुस्कान कहीं सुन्दर
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कवि श्रीमान गोपाल सिंह ‘नेपाली’ कहते हैं कि प्रकृति का सौन्दर्य, मेघों के गरजने में, पपीहा की बोली में तथा बुलबुल के गानों में मिलते हैं। लेकिन मानव द्वारा लिखी गई कविताओं, गीतों और भजनों में जो कल्पनाएँ, स्वर, शब्द, संगीतमय मधुर आवाज और स्वाद मिलता है वह बहुत ही सुन्दर और महत्त्वपूर्ण होता है।

सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गोपाल सिंह नेपाली का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर-
नेपाली जी का जन्म 11 अगस्त, 1911 ई. को बेतिया, पश्चिमी चम्पारण में हुआ था।

प्रश्न 2.
नेपाली जी ने मन्दिर, मस्जिद और चर्च में रहने वाले देवता से कहीं अधिक बड़ा किसे कहा है?
उत्तर-
मन के भगवान को।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

प्रश्न 3.
मानव को ईश्वर ने क्या-क्या दिया है?
उत्तर-
मानव को ईश्वर ने ज्ञान, ध्यान, चेतना, साहस और सौन्दर्य दिया है।

प्रश्न 4.
किसके अरमानों की कोई सीमा नहीं होती है?
उत्तर-
मानव के अरमानों की कोई सीमा नहीं होती है।

प्रश्न 5.
नेपाली जी की आरंभिक रचना पर किस वाद के प्रभाव था?
उत्तर-
छायावाद का।

प्रश्न 6.
“सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर” गीत किसकी रचना है?
उत्तर-
गोपाल सिंह नेपाली।

प्रश्न 7.
गोपाल सिंह नेपाली की कविता के एक संग्रह का नाम बताइये।
उत्तर-
हिमालय ने पुकारा।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

प्रश्न 8.
भागलपुर के रेलवे प्लेटफार्म नं.-2 पर किसका निधन 17 अप्रैल, 1963 ई. को हुआ था?
उत्तर-
रामधारी सिंह ‘दिनकर’।

सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गोपाल सिंह नेपाली की कविताओं में क्या विशेषताएँ मिलती हैं?
उत्तर-
श्री गोपाल सिंह नेपाली उत्तर-छायावाद के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि-गीतकार थे जिनकी कविताएँ प्राचीन कवियों के समान जन-मानस का अभिन्न अंग बन गई हैं। अवसरवादियों के विपरीत स्वाभिमान के मूर्तिमान स्वरूप नेपाली जी सामान्य जन के दुख-दर्दो के गायक थे। उन्होंने स्वाधीनता, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रहरी के रूप में अपने जीवन की बलि दे दी है।

प्रश्न 2.
श्री गोपाल सिंह ‘नेपाली’ ऐसा क्यों सोचते हैं कि मानव के अन्दर देवता निवास करता है?
उत्तर-
श्री गोपाल सिंह ‘नेपाली’ कहते हैं कि मानव बड़ा ही साहसी और विवेकशील प्राणी है। उसने स्थल, जल, वायु, ऊँचे पर्वत, गर्म मरुस्थल इत्यादि पर पूर्ण आधिपत्य और नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। वह केवल संसार के महासागरों में ही जलयान नहीं चलाता है बल्कि प्रत्येक यातायात के साधनों को सफलतापूर्वक काम में लाती है। वह हमेशा और अधिक विचित्र और उपयोगी साधनों की प्राप्ति का प्रयास करता है। अतः उसके विचारों और भावनाओं में दैविक शक्ति का निवास है।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ का जीवन परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
विद्वान कवि गोपाल सिंह नेपाली का जन्म 11 अगस्त, 1911 ई. को बेतिया, जिला पश्चिमी चम्पारण में हुआ। इनमें कविता रचना की प्रतिभा जन्मजात थी। इनकी प्रारम्भिक रचनाओं पर छायावाद का प्रभाव दृष्टिगत होता है। लेकिन धीरे-धीरे इनके काव्य का एक स्वतंत्र पथ निर्मित हो गया। इन्होंने अपनी सुन्दर रचनाओं द्वारा हिन्दी चित्रपट जगत में काव्य प्रतिभा को जीवित रखा। गोपाल सिंह नेपाली पत्रकार भी रहे उमंग, रागिनी, पंछी, नीलिया, पंचमी, नवीन और हिमालय ने पुकारा आदि कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं इनकी कुछ अप्रकाशित रचनाएँ. भी हैं। इनका निधन 17 अप्रैल, 1963 ईस्वी को भागलपुर के रेलवे प्लेटफार्म नं.-2 पर हुआ।

गोपाल सिंह नेपाली उत्तर छायावाद के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि-गीतकार थे, जिनकी कविताएँ प्राचीन कवियों के समान जन-मानस का अभिन्न अंग बन गई है। अवसरवादियों के विपरीत स्वाभिमान के मूर्तिमान स्वरूप नेपाली जी सामान्य जन. के दुख-दर्दो के गायक थे। उन्होंने स्वाधीनता, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रहरी के रूप में अपने जीवन की बलि दे दी। आलोचकों की अपेक्षा के बावजूद वह जनता की स्मृति में सदैव बने रहे।

प्रश्न 2.
श्री गोपाल सिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता “सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर” का सारांश लिखिए।
उत्तर-
श्री गोपाल सिंह नेपाली ने प्रस्तुत गीत में मानवीय सौंदर्य और भावना की श्रेष्ठता का बखान किया है। वह ईश्वर के सौन्दर्य का उत्सव है किन्तु वह हमारी भावनाओं के प्रति सदैव मौन रहता है। मन्दिर, मस्जिद और चर्च में रहने वाले देवता से कहीं अधिक बड़ा मनुष्य के अंदर का वह देवता है जो मधुर स्वर में स्वयं को व्यक्त करता है।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

श्री गोपाल सिंह नेपाली कहते हैं कि मानव को ईश्वर ने ज्ञान, ध्यान, चेतना, साहस और सौन्दर्य प्रदान कर दी है। वह कठिनाइयों में कभी पीछे नहीं हटता है। आगे बढ़ने और बढ़ते रहने . का मार्ग खोज लेता है। जब वह कठिनाइयों और अंधकार पर विजय प्राप्त करता है तो उसके मुख पर मुस्कान झलकती है जो बहुत ही सुन्दर होती है।

इस पृथ्वी पर सभ्यता और संस्कृति, कला और कौशल के जितने चिन्ह मिलते हैं उसमें हमें मनुष्य के ज्ञान की महिमा और उसके सुन्दर विचारों और कल्पनाओं की पहचान देखने को मिलती हैं।

प्रकृति का सौन्दर्य, मेघों के गरजने में, पपीहा की बोली में बुलबुल के गाने में भी मिलते हैं, लेकिन मानव द्वारा लिखी गई कविताओं, गीतों और भजनों में जो कल्पनाएँ, स्वर शब्द और स्वाद मिलता है वह बहुत ही सुन्दर और महत्त्वपूर्ण होता है।

वास्तव में मानव बड़ा ही साहसी और विवेकशील प्राणी है। यह संसार के महासागरों में लघु जलयान और बड़ी-बड़ी जहाजें बनाकर सागर की ऊँची लहरों से बचा कर, चंचल जलयान को सफलतापूर्वक पार उतार ले जाता है। फिर और अधिक विचित्र उपयोगी साधन का प्रयास करता है।

मानव के अरमानों की कोई सीमा निश्चित नहीं है। कवि गोपाल सिंह नेपाली कहते हैं कि ईश्वर सौन्दर्य का उत्सव है किन्तु वह हमारी भावनाओं के प्रति सदैव मौन रहता है। मन्दिर, मस्जिद और चर्च में रहने वाले देवता से कहीं अधिक बड़ा मनुष्य के अंदर वह देवता है जो मधुर स्वर में स्वयं को व्यक्त करता है।

सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर कवि-परिचय – गोपाल सिंह ‘नेपाली’ (1911-1963)

आधुनिक हिन्दी साहित्य के जगमगाते सितारों में नेपाली जी एक गीतकार कवि के रूप में विख्यात है। इनका जन 11 अगस्त, 1911 ई. को बेतिया जिला पश्चिम चम्पारण में हुआ। बचपन से ही उनमें साहित्य के प्रति विशेष लगाव था। उनकी प्रारंभिक रचनाओं में छायावाद का प्रभाव दिख पड़ता है। लेकि। धीरे-धीरे उनके काव्य का एक स्वतंत्र पथ निर्मित हो गया।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

नेपाली जी उत्तर छायावाद के लोकप्रिय कवि-गीतकार थे। वे स्वाभिमान की मूर्ति थे। स्वाधीनता, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रहरी के रूप में अपने जीवन को न्योछावर कर दिया।

नेपाली जी ने एक गीतकार के रूप में अपनी अलग पहचान फिल्मी गीतकार के रूप में बनायी थी। उनकी गीत ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखिया प्यासी. रे’। आज भी जनमानस को प्रभावित कर रहा है। नेपाली जी ने प्रथम काव्य संग्रह ‘उमग की निश्चय’ शीर्षक कविता में अपने जीवन दर्शन और लक्ष्य को अत्यन्त सहज और सुबोध भाषा में अभिव्यक्त किया है। नेपाली जी एक सफल पत्रकार भी रहे। ‘हिमालय ने पुकारा’ कविता आज भी लोगों को देश-प्रेम और स्वाधीनता. की सीख देता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं

  • उमंग
  • रागिनी रही
  • पंछी
  • नीलिया
  • पंचमी
  • नवीन
  • हिमालय ने पुकारा।

नेपाली जी की कुछ अप्रकाशित रचनाएँ भी हैं। उनकी मृत्यु 17 अप्रैल, 1963 में भागलपुर – रेलवे प्लेटफार्म नं.-2 पर हुआ। नेपाली जी अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण आज भी जीवित है।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 5 सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 5 ठिठुरता हुआ गणतंत्र

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 5 ठिठुरता हुआ गणतंत्र

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 5 ठिठुरता हुआ गणतंत्र

ठिठुरता हुआ गणतंत्र अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ किस तरह की रचना है?
उत्तर-
‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ व्यंग्यात्मक रचना है।

प्रश्न 2.
हरिशंकर परसाई का जन्म कब और कहाँ हआ था?
उत्तर-
हरिशंकर परसाई का जन्म 1924 ई. में इटारसी (मध्य प्रदेश) में हुआ था।

प्रश्न 3.
गणतंत्र दिवस समारोह में हर राज्य की ओर से क्या निकलता है?
उत्तर-
गणतंत्र दिवस समारोह में हर राज्य की ओर से झाँकी निकलती है।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 5 ठिठुरता हुआ गणतंत्र

प्रश्न 4.
लेखक ने गणतंत्र दिवस का जलसा दिल्ली में कितनी बार देखा है?
उत्तर-
चार बार।

प्रश्न 5.
हरिशंकर परसाई ने हिन्दी में एम. ए. कहाँ से पास किया था?
उत्तर-
नागपुर विश्वविद्यालय।

प्रश्न 6.
“रानी नागफनी की कहानी” किसकी रचना है?
उत्तर-
हरिशंकर परसाई।

ठिठुरता हुआ गणतंत्र लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हरिशंकर परसाई ने “ठिठुरता हुआ गणतंत्र” के संबंध में क्या तर्क प्रस्तुत किया, स्पष्ट करें?
उत्तर-
ठिठुरता हुआ गणतंत्र एक व्यंग्यात्मक निबंध है। वह लिखते हैं कि हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर मौसम खराब रहता है। शीत लहर आती है। बादल छा जाते हैं बूंदा-बाँदी होती और सूर्य छिपा रहता है। हर गणतंत्र दिवस पर मौसम ऐसा ही धूपहीन ठिठुरन वाला होता है।

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प्रश्न 2.
गणतंत्र दिवस को सूर्य की किरण में मनाने के लिए कांग्रेसी मंत्री की क्या भावना थी? स्पष्ट करें।
उत्तर-
हरिशंकर परसाई जी एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष पर बैठे कांग्रेसी मंत्री की भावना पर व्यंग्य करते हुए लिखा है कि जब यह प्रश्न मंत्री जी से पूछा गया कि हर गणतंत्र दिवस में सूर्य छिप क्यों जाता है? मंत्री जी ने बताया कि गणतंत्र दिवस को सूर्य की किरणों में मनाने की कोशिश हो रही है। इतने बड़े सूर्य को बाहर लाना या उसके सामने से बादलों को हटाना आसान नहीं है। हमें सत्ता में रहने के लिए कम-से-कम सौ वर्ष तो दीजिए।

प्रश्न 3.
कांग्रेस के विभाजन से गणतंत्र दिवस किस प्रकार प्रभावित हो जाता है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
जब हरिशंकर परसाई जी ने अपने मित्र कांग्रेसी मंत्री जी से यह पूछा कि आप यह दावा कि गणतंत्र दिवस पर सूर्य बादल से बाहर आएगा अब कमजोर क्यों दिखाई पड़ रहा है.?

तो मंत्री महोदय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम हर बार सूर्य को बादल से बाहर निकालने की कोशिश करते थे पर हर बार सिंडिकेट वाले अडंगा डाल देते थे अब हम वादा करते हैं कि सूर्य को अगले गणतंत्र दिवस पर बाहर अवश्य निकालकर दिखायेंगे।

प्रश्न 4.
गणतंत्र दिवस.के ठिठुरन के विषय में विभिन्न विचारधाराओं के राज नेताओं पर किस प्रकार का व्यंग्य किया गया है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
भारतीय जनता पार्टी के एक पुराने जनसंघी नेता का कहना था कि “सूर्य गैर कांग्रेसी विचार पर अमल कर रहा है। यदि सूर्य वास्तव में सेक्युलर होता तो इस सरकार की गणतंत्र परेड में निकल आता। इस सरकार से आशा मत करो केवल हमारे राज्य में ही सूर्य निकलेगा।”

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 5 ठिठुरता हुआ गणतंत्र

एक साम्यवादी ने कहा “यह सब सी.आई.ए. का षडयंत्र है। सातवें बड़े दल दिल्ली भेजे जाते हैं।

किसी महाशय ने अंग्रेजों पर दोष आरोपित किया कि यह उसकी ही चाल है कि स्वतंत्रता दिवस भारी बरसात में मनाना पड़ता है स्वतंत्रता दिवस भींगता है और गणतंत्र दिवस ठिठुरता है।

प्रश्न 5.
“ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ में रेखांकित भारतीय गणतंत्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
“ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ हिन्दी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना है। इसमें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया है। लोग कहते हैं कि देश विकास कर रहा है जबकि देखने को मिलता है काले कारनामे। स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली बरसाती मौसम की बरसात पर व्यंग्यकार कहता है-स्वतंत्रता दिवस भी तो बरसात में होता है। अंग्रेज आया।

बहुत चालाक हैं। वे हमें भर बरसात में स्वतंत्र करके चले गए। उस कपटी प्रेमी की तरह जो प्रेमिका का छाता भी साथ लेते गए।

स्वतंत्रता दिवस भींगता है और गणतंत्र दिवस ठिठुरता है।

गणतंत्र दिवस पर झाँकियाँ निकलती हैं। ये झाँकियाँ झूठ बोलती हैं। इनमें विकास कार्य, जन-जीवन, इतिहास इत्यादि दिखलाए जाते हैं। कवि कहते हैं कि गुजरात की झाँकी में गुजरात दंगे की चर्चा होनी चाहिए। आँध्रप्रदेश की झांकी में हरिजन जलाते हुए दिखाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश की झांकी में राहत कार्यों में घपले को दिखाना चाहिए और बिहार की झाँकी निकले तो चारा खाते हुए अफसर, मंत्री दिखलाया जाना चाहिए।

हर वर्ष घोषणा होती है; समाजवाद आ रहा है। लेकिन यह सत्य नहीं है। साठ वर्ष आजादी के हो गये हैं लेकिन समाजवाद अभी तक नहीं आया।

व्यंग्यकार एक सपना देखता है कि समाजवाद आ गया है और बस्ती के बाहर टीले पर खड़ा है। अब प्रश्न यह है कि कौन इसे पकड़कर लायेगा-समाजवाद या पूँजीवाद। कांग्रेस, कम्युनिस्ट या सोशलिस्ट कौन समाजवाद लाएँगे। समाजवाद इन्हीं के चक्कर में अटका हुआ है और परेशान है। जनता भी परेशान है और लहूलुहान होकर समाजवाद भी टीले पर खड़ा है।

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जो लोग इस देश की रक्षा के लिए वचनबद्ध हैं वही उसे नष्ट कर रहे हैं। हम कहते हैं-सदा सत्य बोलेंगे। बोलते हैं सदा झूठ। झूठ को बढ़ावा देते हैं। सहकारिता पूर्ण ढंग से सरकारी खजाने को खाली करते हैं।

समाजवादी ही समाजवाद को आने से रोकते हैं। दिल्ली से फरमान जारी होता है कि समाजवाद देश के दौरे पर निकल रहा है। लेकिन यह कागज पर ही सत्य होगा। अफसर कहेंगे कि समाजवाद आएगा तो दंगा हो जाएगा। समाजवाद की सुरक्षा नहीं की जा सकती है।

अंत में व्यंग्यकार कहता है कि जनता के द्वारा न आकर समाजवाद दफ्तरों के द्वारा आ गया तो एक ऐतिहासिक घटना होगी।

अतः भारत का गणतंत्र (26 जनवरी) ठिठुरता हुआ आता है।

ठिठुरता हुआ गणतंत्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“ठिठुरता हुआ गणतंत्र” का सारांश लिखें।
उत्तर-
हिन्दी के प्रतिबद्ध व्यंगकार के रूप में हरिशंकर परसाई अद्वितीय माने जाते हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों में व्याप्त विसंगतियों पर तीव्र प्रहार करने वाले निर्भीक किन्तु बेहतर मानवीय-समाज के स्वप्नद्रष्टा परसाई जी हैं।

“ठिठुरता हुआ गणतंत्र” शीर्षक व्यंग्य रचना के माध्यक से परसाई जी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के इस दावे पर व्यंग्य किया है कि देश के सभी राज्य हर क्षेत्र में तीव्र गति से विकास कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में हर राज्य की ओर से दिखाई जानेवाली झांकियाँ अपने आप में एक बड़ा परिहास होती है। पिछले वर्ष राज्य अपने जिन काले कारनामों के लिए प्रसिद्ध हुए थे, राज्यों को उन्हीं की झाँकी दिखलानी चाहिए, लेकिन वे तो अपने विकास और श्रेष्ठता प्राप्त प्रदर्शित करने वाली झाँकियाँ दिखलाते हैं।

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सारांशतः लेखक का कथन है कि भारत में केवल गणतंत्र ही ठिठुरन का शिकार नहीं है बल्कि समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, सहकारिता इत्यादि भी ठिठुर कर रह गई है। यहाँ छीना-झपटी और अफसरशाही का राज है। लेखक ने गणतंत्र दिवस पर वर्षा की बूंदाबूंदी हर साल होने के संबंध में विभिन्न पार्टी के नेता के बयान पर कितना तीखा व्यंग्य किया है वह काबिले तारीफ है।

प्रश्न 2.
हरिशंकर परसाई के जीवन और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
हरिशंकर रसाई हिन्दी साहित्य के एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं। इनकी रचनाओं में जीवन के सभी क्षेत्रों में व्याप्त विसंगतियों पर तीव्र प्रहार मिलता है।

उनका जन्म 1924 ई. में इटारसी, (मध्यप्रदेश) के निकट जमानी गाँव में हुआ था। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी में एम.ए. किया था, लेकिन किसी प्रकार की नौकरी नहीं की थी। उन्होंने स्वतंत्र लेखन का ही जीवनचर्या के रूप में चुना। जबलपुर से वसुधा नाम की साहित्यिक मासिक पत्रिका निकाली, घाटे के बावजूद कई वर्षों तक उसे चलाया, अंत में परिस्थितियों ने बंद करने पर लाचार कर दिया। वह अनेक पत्र-पत्रिकाओं में वर्षों तक नियमित स्तंभ लिखते रहे।

नई दुनिया में “सुनो भाई साधो, नई कहानियाँ में “पाँचवाँ कालम” और “उलझी उलझी” कल्पना में “और अंत में” तथा देशबंधु में पूछो परसाई से आदि रचनाएँ प्रकाशित हुई जिनकी लोकप्रियता के बारे में दो मत नहीं है।

हरिशंकर परसाई जी ने बड़ी संख्या में कहानियाँ, उपन्यास एवं निबन्ध भी लिखे हैं। वे केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार और मध्यप्रदेश का शिखर सम्मान आदि अनेक पुरस्कारों से भी सम्मानित हुए थे।

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उनकी प्रकाशित पुस्तकें निम्नलिखित हैं-

  • हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे (कहानी संग्रह),
  • रानी नागफनी की कहानी (उपन्यास),
  • तट की खोज (उपन्यास),
  • तब की बात और थी (निबन्ध संग्रह),
  • भूत के पाँव पीछे,
  • बेईमानी की परत,
  • सदाचार की ताबीज,
  • शिकायत मुझे भी है,
  • वैष्णव की फिसलन,
  • विकलांग श्रद्धा का दौर इत्यादि।

प्रश्न 3.
हरिशंकर परसाई के “ठिठुरता हुआ गणतंत्र” शीर्षक निबंध की समीक्षा प्रस्तुत करें?
अथवा,
पठित निबंध, “ठिठुरता हुआ गणतंत्र” में हरिशंकर परसाई के विचारों के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
“ठिठुरता हुआ गणतंत्र” में हरिशंकर परसाई जी की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक व्यंग्य है। वह इस दावे पर व्यंग्य करते हैं कि देश के सभी राज्य हर क्षेत्र में तीव्र गति से विकास कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली में हर राज्य की ओर से दिखाई जानेवाली झाँकियाँ अपने आप में एक बड़ा परिहास होती हैं। पिछले वर्ष राज्य अपने जिन काले कारनामे के लिए प्रसिद्ध हुए थे। राज्यों को उन्हीं की झाँकी दिखलानी चाहिए, लेकिन वे तो अपने विकास और श्रेष्ठता प्रदर्शित करनेवाली झाँकियाँ दिखलाते हैं।

हरिशंकर परसाई जी लिखते हैं कि हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र समारोह के अवसर. पर मौसम खराब रहता है। शीत लहर आती है। बादल छा जाते हैं। बूंदा-बाँदी वर्षा होती है और सूर्य छिपा रहता है। हर गणतंत्र दिवस पर मौसम ऐसा ही धूपहीन ठिठुरने वाला होता है। इस रहस्य की खोज करने पर हरिशंकर परसाई जी को उनके एक मित्र कांग्रेसी मंत्री ने बताया कि गणतंत्र दिवस को सूर्य की किरणों को मनाने की कोशिश हो रही है। इतने बड़े सूर्य को बाहर लाना या उसके सामने से बादलों को हटाना आसान नहीं है। हमें सत्ता में रहने के लिए कम-से-कम सौ वर्ष तो दीजिए।

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इस पर हरिशंकर परसाई जी कहते हैं कि हाँ ! सौ. वर्ष दिए, मगर हर साल उसका कोई छोटा कोना निकलता तो दिखना चाहिए। सूर्य कोई बच्चा तो नहीं जो अंतरिक्ष की कोख में अटका है जिसे एक दिन आपरेशन करके निकाला जा सकता है।

हरिशंकर परसाई जी कहते हैं कि कांग्रेस का दो भागों में विभाजन हो गया। सूर्य को गणतंत्र दिवस पर बाहर निकालने का दावा कुछ कमजोर होने लगा। जब फिर एक कांग्रेसी से पूछा गया तो उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम हर बार सूर्य को बादलों से बाहर निकालने की कोशिश करते थे, पर हर बार सिंडिकेट वाले अड्गा डाल देते थे। अब हम वादा करते हैं कि अगले गणतंत्र दिवस पर सूर्य को निकाल कर दिखाएँगे।”

कांग्रेसी नेता की यह बातें सुनकर एक सिंटिकेटी मित्र बोल पड़े .”ये लेडी प्रधानमंत्री कम्युनिस्टों के चक्कर में आ गई है वही उसे उकसा रहे हैं कि सूर्य को निकाले। उन्हें उम्मीद है कि बादलों के पीछे से उनका प्यारा “लाल सूरज निकलेगा” ! वास्तव में सूर्य निकालने की क्या जरूरत है? क्या बादलों को हटाने से काम नहीं चल सकता है?

इस बात को सुनते ही एक जनसंघी भाई जो अब भारतीय जनता पार्टी में हैं कहने लगे कि “सूर्य गैर कांग्रेसवाद पर अमल कर रहा है। यदि सूर्य सेक्युलर होता है तो इस सरकार की परेड में निकल आता। इस सरकार से आशा मत करो केवल हमारे राज्य में ही सूर्य निकलेगा”। इस प्रकार अनेक दृष्टिकोण से बातें आती रहीं एक साम्यवादी ने कहा, “यह सब सी. आई. ए. का षडयंत्र है। सातवें बेड़े से बादल दिल्ली भेजे जाते हैं।

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यह भी कैसी आश्चर्य की बात है कि स्वतंत्रता दिवस पर भारी बरसात होती है। स्वतंत्रता दिवस भींगता है और गणतंत्र दिवस ठिठुरता है। ठिठुरते गणतंत्र दिवस के अवसर पर ओवर कोट से हाथ बाहर निकालना बहुत कठिन होता है लेकिन रेडियो से प्रसारित समाचार में यह कहा जाता है कि करतल (तालियों) की ध्वनि अर्थहीन होती है। परन्तु भारत तो “सत्यमेव जयते” का प्रचारक है। यहाँ झूठ बोलना पाप है। इसी प्रकार राज्यों की झाँकियाँ भी विकास की झूठी प्रचार करती दिखाई देती है।

भारत में केवल गणतंत्र दिवस ही ठिठुरन का शिकार नहीं है बल्कि समाजवाद, धर्म निरपेक्ष, सहकारिता इत्यादि भी ठिठुर कर रह गई है। यहाँ छीना-झपटी और अफसरशाही का राज है।

ठिठुरता हुआ गणतंत्र लेखक परिचय – हरिशंकर परसाई (1924-1995)

हरिशंकर परसाई का जन्म 1924 ई. में इटारसी (मध्य प्रदेश) के निकट जमानी गाँव में हुआ। नागपुर विश्वविद्यालय से एम. ए. हिन्दी की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्वतंत्र लेखन पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। उन्होंने ‘वसुधा’ नामक साहित्यिक पत्रिका का भी सम्पादन किया।

वे हिन्दी साहित्य के एक चर्चित व्यंग्यकार हैं। उनकी रचनाएँ कई. पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रसिद्ध कहानी ‘सुनो भाई साधो’ नई दुनिया में, पाँचवाँ कलम, नई कहानियों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं-

  • कहानी संग्रह : हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे।
  • उपन्यास : रानी नागफनी, तट की खोज।
  • निबंध संग्रह : तब की बात और थी।।

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Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 4 हिमालय का संदेश

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 4 हिमालय का संदेश

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 4 हिमालय का संदेश

हिमालय का संदेश अर्थ लेखन

प्रश्न 1.
अर्थ स्पष्ट करें
वृथा मत लो भारत का नाम
मानचित्र पर जो मिलता है, नहीं देश भारत है।
भू पर नहीं, मनों में हो, बस कहीं शेष भारत है।
भारत एक स्वप्न, भू को ऊपर ले जाने वाला
भारत एक विचार, स्वर्ग को भू पर लाने वाला।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों में, राष्ट्रकवि कवि रामधारी सिंह दिनकर कहते हैं कि भारत का नाम व्यर्थ बदनाम न करो संसार के मानचित्र पर जो भारत मिलता है वह केवल एक भौगोलिक रूप है। भारत को केवल भूमि पर नहीं बल्कि मनों में स्थापित करना चाहिए। वह कहते हैं कि भारत का एक स्वप्न है जो भूवासियों को उन्नति के मार्ग पर ले जाने वाला है। उसी प्रकार भारत स्वर्ग को भूमि पर लाने वाला एक विचार का नाम है। इसकी भावनाओं और दर्शनों में मनुष्यों को जगाने की शक्ति है।

प्रश्न 2.
राष्ट्रकवि “दिनकर” ने हिमालय का संदेश किन शब्दों में दिया है?
उत्तर-
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने ‘हिमालय का संदेश’ शीर्षक कविता के माध्यम से एक राष्ट्र के रूप में भारत की चेतना और संवेदना से युक्त व्यक्तित्व से हमारा साक्षात्कार कराया है। भारत मात्र भौगोलिक सत्ता नहीं है। उसका वास्तविक स्वरूप प्रेम, ऐक्य और त्याग की साधना में प्रकट होता है। भारतीयों के त्याग, माधुर्यपूर्ण निष्काम व्यवहार से मानवता फैल रही है। इन्हीं आदर्शों के कारण संसार में भारत का मान और सम्मान बढ़ा है।

प्रश्न 3.
अर्थ स्पष्ट करें
भारत जहाँ, वहाँ जीवन-साधना नहीं है भ्रम में,
धाराओं को समाधान है मिला हुआ संगम में।
जहाँ त्याग माधूर्यपूर्ण हो, जहाँ भोग निष्काम
समरस हो कामना, वहीं भारत को करो प्रणाम।
उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियों में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने भारत के आदर्शों को प्रस्तुत करते हुए यह याद दिलाया है कि भारत में विषमता, विभिन्नता के बीच एकता, अखण्डता, प्रेम और अहिंसा विकसित हो रही है। भारत में जीवन साधना के आदर्श मिलते हैं। यहाँ भ्रम और भूल नहीं है। बल्कि त्याग, माधुर्यपूर्ण और निष्काम सेवाएँ मिलती हैं। अच्छे विचार और व्यवहार भारतीयों की जीवन शैली रही है। नैतिकता का पाठ भारत से विश्व के अनेकों देशों में पहुँचा है। हमें भारत के मान-सम्मान को हमेशा बढ़ाना चाहिए।

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हिमालय का संदेश अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“दिनकर” के अलावा और किस एक हिन्दी कवि के साथ राष्ट्रकवि की उपाधि जुड़ती है?
उत्तर-
मैथिली शरण गुप्त।

प्रश्न 2.
‘दिनकर’ जी को किस काव्य-पुस्तक का ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था?
उत्तर-
उर्वशी।

प्रश्न 3.
‘दिनकर’ का संबंध हिन्दी की किस धारा से है?
उत्तर-
छायावादोत्तर स्वच्छंद धारा।

प्रश्न 4.
‘दिनकर’ ने अपनी किस रचना में कामाध्यात्मक की व्याख्या की है?
उत्तर-
उर्वशी।

प्रश्न 5.
दिनकर जी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर-
1908 ई. में

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प्रश्न 6.
‘दिनकर’ की मृत्यु कब हुई?
उत्तर-
1974 ई. में

प्रश्न 7.
“संस्कृति के चार अध्याय” किसकी रचना है?
उत्तर-
रामधारी सिंह दिनकर की।

प्रश्न 8.
“दिनकर” ने भारत-चीन युद्ध के काल में भारतीय जनमानस को झकझोरने के लिए कौन-सी कविता लिखी थी?
उत्तर-
परशुराम की प्रतीक्षा।

प्रश्न 9.
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर-
रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था।

प्रश्न 10.
दिनकर जी का भारत किस रूप में प्रकट होता है?
उत्तर-
दिनकर जी का भारत मात्र भौगोलिक सत्ता नहीं है, उसका वास्तविक स्वरूप प्रेम, ऐक्य और त्याग की साधना में प्रकट होता है।

प्रश्न 11.
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के नाम के आगे कौन-सा शब्द लगता है?
उत्तर-
राष्ट्रकवि।

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प्रश्न 12.
‘वृथा मत लो भारत का नाम’ दिनकर की किस कविता की पहली पंक्ति है?
उत्तर-
हिमालय संदेश।

प्रश्न 13.
विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला कौन-सा देश है?
उत्तर-
भारतवर्ष।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जीवन परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
भारतीय संस्कृति की विराट चेतना, मानव मूल्यों और उपलब्धियों के ओजस्वी गायक दिनकर का जन्म 1908 ई. में बेगूसराय के सिमरिया नामक गाँव में हुआ। दिनकर जी के पिता श्री रवि सिंह कुलीन तो थे पर एक सामान्य मध्यमवर्गीय कृषक परिवार के ही मुखिया थे। आरंभिक शिक्षा गाँव की ही पाठशाला में लेने के उपरांत दिनकर जी ने मोकामा हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की तथा पटना विश्वविद्यालय से इतिहास प्रतिष्ठा के साथ स्नातक की उपाधि पाई।

शिक्षा पूरी करने के उपरांत दिनकर जी सर्वप्रथम वरबीघा विद्यालय में अध्यापक हुए। सन् 1950 ई. में लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर में हिन्दी विभागाध्यक्ष होने के पूर्व वे सहकारिता तथा जनसंपर्क विभाग में क्रमशः रजिस्ट्रार तथा निदेशक भी रह चुके थे। उसके बाद भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बनाये गये थे। सन् 1952 ईस्वी में वे राज्य सभा के सदस्य मनोनीत हुए, जहाँ सन् 1964 ईस्वी तक रहे। सन् 1965-1971 ई. तक उन्होंने भारत सरकार के – हिन्दी सलाहकार के रूप में कार्य किया उसके बाद सन् 1974 ईस्वी में मृत्यु से पूर्व उन्होंने स्वतंत्र लेखन, चिन्तन तथा भ्रमण में अपने को सक्रिय रखा।

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बेगूसराय जिले के सिमरिया नामक गाँव में, राष्ट्रीयता के उद्गार कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 1908 ई. में हुआ था।

दिनकर जी का व्यक्तित्त्व बहुआयामी था। एक सामान्य परिवार के मुखिया और अनिश्चित आय वाला व्यक्ति होने के कारण अनेक बार बहुत बड़ी-आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। सन् 1934 ई. से उन्हें कवि के रूप में प्रसिद्धि मिलने लगी थी और अंग्रेजी सरकार . की वक्र दृष्टि भी उन पर पड़ने लगी थी। चार वर्षों में लगभग बाइस-तेईस बार उन्हें तबादले का शिकार होना पड़ा था, पर इस दौरान स्थान-परिवर्तन के लिए मिलने वाले अवकाशों का उपयोग वे प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल के सान्निध्य में किया करते थे।

डॉ. जायसवाल उन्हें पत्रवत् स्नेह देते थे। र सन् 1933 ईस्वी में लिखित “हिमालय” शीर्षक कविता से दिनकर जी को विशेष प्रसिद्धि मिली। स्वयं दिनकर जी ने स्वीकार किया है कि इस कविता के बाद ही वे कवि-रूप में स्थापित हुए, यानी उन्हें गंभीरता से लिया जाने लगा। उसके बाद से रश्मिरथी, कुरूक्षेत्र और उर्वशी जैसे प्रबंधों तथा रसवंती, नील कुसुम, सामधेनी, दिल्ली आदि स्फुट कविताओं के संग्रहों द्वारा उन्होंने हिन्दी काव्य को अकूत समृद्धि दी। “परशुराम की प्रतीक्षा” कविताओं द्वारा उन्होंने भारत चीन-युद्ध के काल में भारतीय जनमानसं को झकझोर कर रख दिया था।

पद्य के क्षेत्र में दिनकर जी ने अपनी लेखनी की प्रौढ़ता का खूब परिचय दिया है। “संस्कृति .. के चार अध्याय” कूल रूप से इतिहास ग्रंथ है, पर किसी कवि द्वारा लिखी गयी शायद आज तक वह अपने ढंग की अकेली पुस्तक है। “मिट्टी की ओर” काव्य की भूमिका और पंत, प्रसाद, मैथिली शरण जैसी पुस्तकों से स्पष्ट हो जाता है कि दिनकर जी एक प्रौढ़ पद्य लेखक भी थे और समालोचना के क्षेत्र में भी उन्होंने सार्थक भागीदारी निभायी थी।

दिनकर जी ने अपने जीवन में अनेक उतार-चढ़ावों के दिन गुजारे थे। पर अपने तेवर, सृजनशीलता तथा अध्ययन के स्तर पर कोई समझौता नहीं किया था। उस महान राष्ट्रकवि को राष्ट्र ने विभिन्न अलंकारों से सम्मानित भी किया था। सन् 1960 ईस्वी में उन्हें पद्मभूषण की उपाधि भी प्रदान की गयी थी और सन् 1962 ईस्वी में भागलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डी. लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। क्रमशः सन् 1953 ईस्वी और 1973 ईस्वी में दिनकर जी को उनकी दो कृतियाँ, “संस्कृति के चार अध्याय” और “उर्वशी” पर साहित्य अकादमी और ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुए थे। मैथिलीशरण गुप्त के बाद हिन्दी के एकमात्र कवि हैं। जिन्हें। राष्ट्र कवि के रूप में ख्याति मिली। उनकी मृत्यु 1974 ईस्वी में हुई।

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दिनकर की प्रमुख कृतियाँ में रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, सामधेनी, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी और उर्वशी के नाम विशेष रूप से स्मरणीय हैं।

प्रश्न 2.
“हिमालय का संदेश” शीर्षक कविता का सारांश लिखिए।
उत्तर-
राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह “दिनकर” एक मुक्त काव्यालोक के निर्माता थे। उन्होंने। कविताओं के माध्यम से सामाजिक और सामयिक प्रश्नों और चिन्ताओं को प्रस्तुत किया है।

दिनकर जी ने “हिमालय का संदेश” शीर्षक कविता के माध्यम से एक राष्ट्र के रूप में भारत की चेतना और संवेदना से युक्त व्यक्तित्त्व से हमारा साक्षात्कार कराया है। भारत मात्र एक भौगोलिक सत्ता नहीं है, उसका वास्तविक स्वरूप प्रेम, ऐक्य और त्याग की साधना में प्रकट होता है।

यह कविता 1933 ईस्वी में लिखी गई। स्वयं दिनकर जी ने स्वीकार किया है कि इस कविता। के बाद ही वे कवि रूप में स्थापित हुए।

वह कहते हैं कि संसार के मानचित्र पर जो भारत मिलता है वह केवल एक भौगोलिक रूप है। भारत को केवल भूमि पर नहीं बल्कि मनों में स्थापित करना चाहिए। भारत की महानताओं और विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहते हैं कि भारत एक स्वप्न है जो भूवासियों को ऊपर ले जानेवाला है। इसी प्रकार भारत स्वर्ग की भूमि पर लानेवाला एक विचार का नाम है। इसकी भावनाओं और दर्शनों में मनुष्यों को जागने की शक्ति है। भारत का आदर्श चरित्र एक जलज जगाती है।

भारत में विषमता, विभिन्नता के बीच एकता, अखण्डता, प्रेम और अहिंसा विकसित हो रही है। भारतीयों के त्याग, माधुर्यपूर्ण और निष्काम व्यवहार से मानवता फैल रही है। इन्हीं आदर्शों के कारण संसार में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। कवि रामधारी सिंह दिनकर ने भारत की चेतना और संवेदना को हिमालय का संदेश बनाकर प्रस्तुत करते हुए भारतवासियों से कहते हैं कि भारत के मान, मर्यादा और सम्मान को बढ़ाते रहना चाहिए। भारत का नाम व्यर्थ बदनाम होने से बचाना चाहिए।

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हिमालय का संदेश। कवि-परिचय- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974)

भारतीय संस्कृति की विराट चेतना, मानव मूल्यों और उपलब्धियों के ओजस्वी गायक दिनकर का जन्म 1908 ई. में बेगूसराय के सिमरिया नामक गाँव में हुआ। उन्होंने छायावादी काव्यधारा से फैली धुंध को काटकर एक मुक्त काव्यालोक का निर्माण किया।

छायावाद के संगीत निकुंज से कविता को जीवन के खुरदरे धरातल पर प्रतिष्ठा करने वाले दिनकर एक बहुत बड़े काव्य के रचयिता हैं। पद्य और पद्य दोनों में ही ‘दिनकर’ जी की लेखनी बड़ी समृद्ध रही है। एक ओर जहाँ उनका अध्ययन गहरा और व्यापक है वहीं चिंतन भी मौलिक है और अभिव्यक्ति तो सशक्त है ही विद्या की दृष्टि से उन्होंने कविता के साथ-साथ इतिहास, समालोचना, यात्रावृत्तांत संस्मरण, डायरी, रम्यं रचना और रेडियो नाटक भी लिखे हैं।

दिनकर भारतीय संस्कृति के व्याख्याता रहे हैं। भारतीय संस्कृति के चार अध्याय में उन्होंने आर्य संस्कृति की विशद व्याख्या की है। दिनकर जी को अपने राष्ट्रस्वरूप की गहरी पहचान है वे उन राष्ट्रीय स्थानों और चरित्रों को अपने काव्य में बार-बार प्रतीक्षात्मक प्रयोग करते हैं जो हमारी सांस्कृतिक चेतना और आदर्शों के आधार स्तंभ हैं। दिनकर जी के प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

स्फुटकाव्य-

  • रेणुका,
  • हुंकर,
  • रसवन्ती,
  • द्वन्द गीत,
  • बापू,
  • परशुराम की प्रतीक्षा,
  • नीम के पत्ते,
  • नील कुसुम,
  • आत्मा की आँखें आदि।
  • रश्मिरथी महाकाव्य,
  • उर्वशी।

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सम्पादित काव्य संकलन-

  • चक्रवात,
  • संचेतना,
  • रश्मि लोक,
  • दिनकर की सूक्तियाँ,
  • दिनकर के गीत,

सांस्कृतिक इतिहास–

  • संस्कृति के चार अध्याय,
  • हमारी सांस्कृतिक एकता,
  • भारत की सांस्कृतिक कहानी।

साहित्यालोचना-

  • मिट्टी की ओर,
  • अद्धनारीश्वर,
  • रेती के फूल,
  • चेतना की शिखा,
  • आधुनिक बोध,
  • बट पीपल आदि।

यात्रावृत्तांत-

  • देश-विदेश,
  • मेरी यात्राएँ।

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संस्मरण-

  • लोकदेव नेहरूं,
  • संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ।
    • डायरी-दिनकर की डायरी।
    • रम्य रचना-उजली आग।
    • रेडियो नाटक-हे। राम

बाल साहित्य-

  • मिर्च का मजा,
  • सूरज का ब्याज,
  • धूप-छाँह,
  • चित्तौड़ का साका।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 3 मंगर

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 3 मंगर

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मंगर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मंगर कौन था?
उत्तर-
मंगर लेखक बेनीपुरी जी का स्वाभिमानी हलवाहा था।

प्रश्न 2.
मंगर का स्वभाव कैसा था?
उत्तर-
मंगर का स्वभाव रूखा और बेलौस था।

प्रश्न 3.
भकोलिया कौन थी?
उत्तर-
भकोलिया मंगर की पली थी।

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प्रश्न 4.
मंगर का कद्र सभी क्यों करते थे?
उत्तर-
मंगर मेहनती और ईमानदार था। उसकी मेहनत और ईमानदारी के कारण सभी उसका … कद्र करते थे।

प्रश्न 5.
लेखक अपने को टुअर क्यों कहा है?
उत्तर-
लेखक के माता-पिता बचपन में ही मर गए थे अतः लेखक अपने को टुअर कहा है।

प्रश्न 6.
मंगर किस वेश-भूषा में रहता था?
उत्तर-
मंगर हमेशा कमर से भगवा लपेटे रहता था।

प्रश्न 7.
मंगर बैल को क्या समझता था?
उत्तर-
मंगर बैल को महादेव समझता था।

प्रश्न 8.
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म कब हुआ?
उत्तर-
1902 ई. में

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प्रश्न 9.
रामवृक्ष बेनीपुरी ने अधिकांश साहित्य रचना कहाँ की थी?
उत्तर-
जेल की सलाखों के पीछे।।

प्रश्न 10.
बेनीपुरी ग्रंथावली कितने खण्डों में है?
उत्तर-
दस खण्ड।

प्रश्न 11.
तरुण भारत और किसान मित्र (साप्ताहिक) के संपादक कौन थे?
उत्तर-
रामवृक्ष बेनीपुरी।

प्रश्न 12.
बेनीपुरी की रचना कौन-सी है।
उत्तर-
गोदान।

प्रश्न 13.
“गेहूँ और गुलाब” और “चिता के फूल” किसकी रचना है?
उत्तर-
रामवृक्ष बेनीपुरी।।

मंगर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मंगर के रूप-रंग का रेखाचित्र लिखिए।
उत्तर-
मंगर एक काला कलूटा शरीर, एक सम्पूर्ण सुविकसित मानव पुतले के समान था। लगातार मेहनत करने से उसकी मांसपेशियों में उभार पैदा हो गया था लेकिन पहलवानों की तरह नहीं।

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कपड़ों से मंगर को वहशत थी वह हमेशा कमर से भगवा ही लपेटे रहता था उसको बराबर धोतियाँ मिलती थीं लेकिन धोतियाँ हमेशा उसके सिर का ही सिंगार बनी रही। वह मुरेठे की तरह लपेटे रहता था। कुर्ता केवल कहीं संदेश लेकर जाते समय पहनता था। साधारणतः वह हमेशा नंग-धड़ग रहता था।

प्रश्न 2.
मंगर का स्वाभिमान किन कारणों से था? स्पष्ट करें।
उत्तर-
मंगर किसी की बात कभी बर्दाश्त नहीं करता था। एक बार मुसीबत काटने अपने बेटी के घर चला गया। दामाद की बेरूखी देखकर मंगर के स्वाभिमान को ठेस लगी वह वहाँ से भाग आया। वह अपने नेक स्वभाव के कारण लेखक के पिता जी का चहेता था और वह हमेशा उनसे अदब से बातें करता था लेकिन दूसरे किसी को वह अपने से बड़ा नहीं मानता था और बराबरी से बातें करता था। लेकिन किसी की मजाल नहीं थी कि उसको बदजुबान कहे। वह अपनी मेहनत और ईमानदारी के कारण सबके सिर आँखों पर बैठा था और सभी उसकी कदर करते थे।

प्रश्न 3. लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी का मंगर के साथ कैसा संबंध था? लेखक की भावनाओं को लिखें।

उत्तर-लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी के अनुसार, मंगर का स्वभाव रूखा और बेलौस था। वह किसी के साथ लल्लो-चप्पो नहीं करता और न लाई-लपटाई में रहता था। दो टूक बातें करता था। मंगर लेखक रामवृक्ष पर स्नेह की नजर रखता था। क्योंकि लेखक की माँ और पिता चल बसे थे। वह अपने परिवार में टुअर होकर रह गया था। वह अपने कंधा पर बैठा कर घुमाया करता था। कभी लेखक बचपन में ननिहाल जाते थे तो वह साथ जाता था। लेखक को घोड़ी पर बैठा कर ले जाता था और स्वयं पैदल चलता था। वह हमेशा लेखक के पिता के प्रेम की याद करता था और उनकी मृत्यु को अपनी फूटी तकदीर मानता था। क्योंकि उसको वह नौकर नहीं समझते थे।

प्रश्न 4.
मंगर की अर्धांगिनी-भकोलिया का परिचय प्रस्तुत करें।।
अथवा,
भकोलिया कौन थी? उसके चरित्र का रेखाचित्र प्रस्तुत करें।
उत्तर-
भकोलिया मंगर की अर्धांगिनी और एक आदर्श जोड़ी थी। वह जमुनिया रंग की काली औरत थी। वह दो बच्चों की माँ बन कर स्त्रीत्व के गुण से वंचित हो गई थी। लेकिन वह अपने पति का बहुत आदर और सेवा करती थी। जब मंगर बूढ़ा हो गया और काम से बैठ मान गया था तो वह कुछ हाथ-पाँव चलाकर भोजन संग्रह कर लेती और दोनों प्राणियों का गुजर बसर चला रही थी।

वह मंगर की तरह, एक आदर्श चरित्र वाली स्त्री थी। वह किसी से मुँह नहीं लगाती थी और न किसी की हेठी बरदाश्त करती थी। यदि कभी किसी ने छेड़ने की भूल कर दी तो वह काली साँपिन के फन की तरह फुफकारती थी लेकिन दर्शन और विष का आरोप उसके माथे पर न था।

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प्रश्न 5.
‘मंगर के लिए ये बैल, बैल नहीं, साक्षात् महादेव थे’। कैसे?
उत्तर-
‘मंगर’ रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित एक मजदूर का शब्द-चित्र है-शब्दों से खींचा गया चित्र।

मंगर एक स्वाभिमानी कृषक मजदूर था। वह रूखा और बेलौस था। दो टूक बातें, चौ-टूक व्यवहार।

मालिक के घर उसे डेढ़ रोटी मिलती। आधी रोटी के दो टुकड़े कर दोनों बैलों को खिला देता। दोनों बैलों को शंकर मानता, महादेव मुँह ताके और वह खाए-यह कैसे होगा? मंगर मजदूर के लिए बैल, बैल नहीं, साक्षात् महादेव थे। पशुओं के प्रति दया भाव मंगर मजदूर की विशेषता थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामवृक्ष बेनीपुरी लिखित ‘मंगर’ पाठ का सारांश लिखें।
उत्तर-
कथा के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी गद्य साहित्य की विधा में सजीव ओजपूर्ण शैली के लेखक रहे हैं।

बेनीपुरी जी ने ‘मंगर’ शब्द-चित्र के माध्यम से परिश्रमी किन्तु अन्दर से सुन्दर, कृषक मजदूर मंगर की दारुण जीवन कथा को अत्यन्त मार्मिक अभिव्यक्ति प्रदान की है। मंगर बाहर से भले ही काला-कलूटा हो लेकिन उसकी आत्मा की उज्वलता उसके चेहरे की कालिमा को अपूर्व आभा से आलोकित कर देती है। यह आभा उसी के चेहरे पर आ सकती है जो अपनी डेढ़ रोटियों में भी आधी रोटी के टुकड़े कर मालिक के ही दोनों बैलों को दे दे।

बेनीपुरी जी ने मंगर और उसकी पत्नी भकोलिया का चित्र इस तरह उपस्थित किया है कि अगर समाज में सभी उन दोनों से सबक लें तो मनुष्य स्वाभिमानी बन सकता है और वह शान से जीवन गुजार सकता है। जैसे-मंगर परिश्रमी है, किसी की गलत बात को बर्दाश्त नहीं करता है बैल को महादेव कहता है। भकोलिया भी उसका आदर करती है।

बेनीपुरी को मंगर से मुलाकात का अन्तिम पड़ाव बड़ा ही दर्दनाक है, एक आँख चली गई, लकवा मार गया। जीवन में कभी रोया नहीं शान से जिया आज मंगर रो रहा है लेखक को विस्मय हो रहा है जिसका सजीव चित्रण पाठक को भी रोमांचित कर देता है।

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प्रश्न 2.
रामवृक्ष बेनीपुरी के जीवन और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 1902 ई. में हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण 1920 में मैट्रिक से आगे पढ़ाई न कर पाए।।

एक हाथ में कलम और दूसरे हाथ में खादी का तिरंगा लेकर चलने वाले बेनीपुरी के साहित्य का अधिकांश भाग जेल की सलाखों के पीछे रचा गया। गद्य साहित्य की विविध विधाओं में अपनी सजीव ओजपूर्ण शैली के कारण इनकी गणना प्रथम श्रेणी के गद्यकारों में की जाती है।

संपादक के रूप में भी आपने तरुण भारत (साप्ताहिक), किसान मित्र (साप्ताहिक), बालक (मासिक), युवक (मासिक), लोकसंग्रह, कर्मवीर, योगी, जनता, हिमालय, नई धारा, चुन्नु-मुन्नू इत्यादि का संपादन किया। संपादकीय लेखों में आप मुक्त एवं निर्भीक विचार देते रहे।

आपकी प्रकाशित एवं अप्रकाशित रचनाओं की संख्या साठ से अधिक है। बेनीपुरी ग्रंथावली को दस खण्डों में प्रकाशित करने का प्रयास जारी है और चार खण्ड प्रकाशित हो चुके है।। माटी की मूरतें, पतितों के देश में, लालतारा, चिता के फूल, कैदी की पत्नी, गेहूँ और गुलाब, अम्बपाली, सीता की माँ, संघमित्रा, अमर ज्योति, तथागत, सिंहल विजय, शकुन्तला, रामराज्य, नेत्रदान, गाँव के देवता, नया समाज, विजेता इत्यादि आपकी उल्लेखनीय पुस्तकें हैं।

प्रश्न 3.
रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा प्रस्तुत “मंगर” हलवाहे का शब्द चित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा,
मंगर कौन था? उसके चरित्र की विशेषताओं से अपनी जानकारी का परिचय दीजिए।
उत्तर-
रामवृक्ष बेनीपुरी ने एक परिश्रमी किन्तु स्वाभिमानी, बाहर से कुरूप किन्तु अन्दर से सुन्दर कृषक-मजदूर “मंगर” की दारुण जीवन कथा को अत्यन्त मार्मिक अभिव्यक्ति प्रदान की है। मंगर बाहर से भले ही काला-कलूटा हो लेकिन उसकी आत्मा की उज्वलता उसके चेहरे की कालिमा को अपूर्व आभा से आलोकित कर देती है। यह आभा उसी के चेहरे पर आ सकती है जो अपनी डेढ़ रोटियों में से भी आधी रोटी के टुकड़े पर मालिक के ही दोनों बैलों को दे देता है।

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मंगर एक स्वाभिमानी व्यक्ति था। वह किसी की सख्त बात कभी बर्दाश्त नहीं करता था और वह अपने से बड़ा किसी को मन से नहीं मानता था। मंगर को सभी लोग आदर करते थे। किसी को मजाल नहीं था कि मंगर को बदजुबान कहे। हलवाहों को मिलने वाली नित दिन की गालियों से मंगर बचा हुआ था। इसका खास कारण, मंगर का हट्टा-कट्ठा शरीर और उसका सख्त कमाऊपनं चरित्र था। उसकी ईमानदारी ने चार चाँद लगा दिए थे। वह प्रतिदिन पन्द्रह कट्ठा खेत जोत लेता था। दूसरे हलवाहे उसके काम की तुलना में हमेशा पीछे रहते थे।

वह अपने काम के कारण परिवार में आदर का पात्र बन गया था। कभी-कभी रूठ भी जाता था लेकिन अपने मालिक से कभी झगड़ा नहीं करता था। वह केवल अपने सिर दर्द का बहाना करके काम से दो चार दिन बैठ जाता था।।

उसकी अर्धांगिनी भकोलिया जब उसे यह सूचना देती कि, “मालिक खड़े हैं। जाओ मान जाओ” तो वह जोर से मालिक को सुनाने के लिए ऐसा कहता था-कह दे मेरा सिर दर्द कर रहा है। लेकिन कुछ नोंक-झोंक के. बाद, मंगर फिर अपना काम आरंभ कर देता।

उसको काम के बदले प्रतिदिन डेढ़ रोटी मिलती थी। वह आधी रोटी के दो टुकड़े करके दोनों बैलों को खिला देता था फिर आधी रोटी लौटा देता था। वह बैलों को दिल से प्यार करता था। वह उन्हें महादेव कहा करता था। वह कहता था कि “महादेव मुँह ताके और मै खाऊँ” मंगर हमेशा कमर में भगवा ही लपेटे रहता था। उसे धोतियाँ मिलती थी, लेकिन धोतियाँ हमेशा उसके सिर का ही सिंगार बनती थी। इस प्रकार वह हमेशा नंग धडंग रहता था।

मंगर के विचार बड़े अच्छे थे, वह कहा करता था “आज खाय और कल को झक्खे, ताको गोरख संग न रखे।”

उसको कोई संतान न थी जो बुढ़ापे में लाठी का सहारा बनती। मंगर के बुढ़ापे की मरुभूमि को सींची नहीं जा सकती थी।
उसकी अद्धांगिनी भकोलिया कुछ काम करके दोनों प्राणियों का गुजर चला रही थी।

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एक दिन उसे अधकपारी की दर्द उठी, भकोलिया उसकी चिल्लाहट से पसीज गई। दाल चीनी पीस कर बकरी के दूध में लेप बनाया और उसके ललाट पर चढाया। यह लेप घातक सिद्ध हुआ। जलन पैदा हो गई। जलन जख्म में बदल गई। इस घटना से उसकी एक आँख चली गई। वह अंधा हो गया। कुछ दिनों बाद मंगर को आधे शरीर पर फालिज मार गया। वह पड़े-पड़े ऊब गया था। एक दिन वह उठने और चलने का प्रयास कर रहा था कि पछाड़ खाकर गिर पड़ा और फिर कभी न उठ सका।

मंगर लेखक परिचय – रामवृक्ष बेनीपुरी (1902-1968)

रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 1902 ई. में मुजफ्फरपुर जिला के बेनीपुर गाँव में हुआ था।। बेनीपुरी जी स्वतंत्रता के उपासक थे। मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े, फलतः उनकी उच्च शिक्षा बाधित हो गई। बेनीपुरी जी ने जेल की सलाखों के बीच ही अधिकांश साहित्यिक रचना की। वे एक सफल पत्रकार के रूप में भी कार्य किए। उन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया जिनमें तरुण भारत, बालक आदि प्रमुख हैं।

बेनीपुरी जी ने अपनी रचनाओं में सामाजिक विषमता को उजागर किया है। उनकी रचनाओं में स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति और प्रेम की भावना का मार्मिक चित्र परिलक्षित होता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं माटी की मूरतें, पतितों के देश में, लाल तारा, चिता के फूल, कैदी की पत्नी, गेहूँ और गुलाब, अम्बपाली, सीता की माँ, संघमित्रा, अमर ज्योति, तथागत, सिंहल विजय, शकुन्तला, रामराज्य, नेत्रदान, गाँव के देवता, नया समाज, विजेता आदि उल्लेखनीय हैं।

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Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर को ‘बंग देश की बुलबुल’ की उपाधि किसने दी थी?
उत्तर-
देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने।

प्रश्न 2.
रवीन्द्रनाथ बचपन में अपने पिता को किस प्रकार का गीत सुनाया करते थे?
उत्तर-
पारमार्थिक गीत।

प्रश्न 3.
रवीन्द्रनाथ ने किन मासिक पुस्तकों का संपादन किया?
उत्तर-
भारती, बालक, साधना और बंग-दर्शन नामक मासिक पुस्तकों का संपादन रवीन्द्रनाथ ने किया।

प्रश्न 4.
रवीन्द्र बाबू ने अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा कहाँ पाई थी?
उत्तर-
लंदन में।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

प्रश्न 5.
रवीन्द्र बाबू किसकी आराधना करके महान हुए?
उत्तर-
सरस्वती की।

प्रश्न 6.
रवीन्द्र बाबू का हृदय किस चीज से परिपूर्ण था?
उत्तर-
रवीन्द्र बाबू का हृदय स्वदेश प्रेम से परिपूर्ण था।

प्रश्न 7.
रवीन्द्र बाबू की वक्तृता कैसी थी?
उत्तर-
रवीन्द्र बाबू की वक्तृता हृदयहारिणी थी।

प्रश्न 8.
उपन्यास “बाणभट्ट की आत्म कथा” किसकी रचना है?
उत्तर-
हजारी प्रसाद द्विवेदी की।

प्रश्न 9.
हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के किस रचना में प्रसिद्ध थे?
उत्तर-
इतिहासकार।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

प्रश्न 10.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म कब हुआ था?
उत्तर-
सन् 1861 ई.।

प्रश्न 11.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पिता का क्या नाम था?
उत्तर-
देवेन्द्रनाथ ठाकुर।

कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर की लोकप्रियता का क्या कारण था, स्पष्ट करें।
उत्तर-
कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर बंगाल के प्रसिद्ध महापुरुषों में से थे। वे बंगला-साहित्य के दीप्यमान रल हैं। उनका काव्य और निबन्ध, उपन्यास और नाटक तथा. गीतों को बंगाल में घर-घर पढ़ा जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के बल पर शिक्षित बंगालियों के विचारों में परिवर्तन कर डाला। वे बंगला भाषा के अद्वितीय लेखक और कवि थे। वे बड़े देशभक्त, देशप्रेमी थे।। उनके द्वारा लिखित देशगान, त्योहारों और राष्ट्रीय उत्सवों पर पढ़े जाते हैं।

प्रश्न 2.
गीत प्रेमी के रूप में रवीन्द्र नाथ ठाकुर की योग्यताओं के संबंध में अपनी जानकारी प्रस्तुत करें।
उत्तर-
रवीन्द्रनाथ ठाकुर को लड़कपन से ही गीत गाने का शौक था। वह बहुधा अपने पिता के सामने गीत गा-गाकर सुनाते थे। उनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर उनके गाने से बहुत प्रसन्न होते थे। उन्होंने रवीन्द्रनाथ ठाकुर को बंग देश की बुलबुल की उपाधि दी थी। उनका सुर बहुत मीठा तो नहीं था पर वह संगीत विद्या के पूरे ज्ञाता थे। उन्होंने अनेक गीत बनाए हैं। उन गीतों को गाने में वे नये-नये सुरों का प्रयोग करते थे। वे स्वयं त्योहारों और ब्रह्म समाज के उत्सवों में सर्वसाधारण के सामने गीत गाते थे। देशभक्ति पर आधारित कविताएँ लिखकर वह साहित्य में अमर हो गये हैं।

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प्रश्न 3.
रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने साहित्य सेवियों के कर्तव्यं पर क्या विचार प्रकट किया है। स्पष्ट करें।
उत्तर-
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने जब यह देखा कि साहित्य सेवियों में पारम्परिक प्रीति का अभाव है जिसको उन्होंने अच्छा नहीं समझा। इस अभाव को दूर करने के लिए अपनी सहमति इस प्रकार प्रकट की है।

“इसमें संदेह नहीं कि साधारणतः मनुष्यों में पारस्परिक प्रीति का होना कल्याणकारी है। साहित्य सेवियों में प्रीति विस्तार से विशेष फल की प्राप्ति हो सकती है।” यदि लेखक लोग एक-दूसरे को प्यार करते हैं तो उनकी रचनाओं में भी विद्या, बुद्धि के अमृत फल मिलेगा और सरस्वती की सेवा होगी।

साहित्य सेवियों में साम्प्रदायिकता नहीं होनी चाहिए। ईर्ष्या और कलह की भावना भी हानिकारक होती है।

प्रश्न 4.
‘रवीन्द्रबाबू महान् पुरुष हैं।’ पुष्टि करें।
उत्तर-
‘कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर’ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित एक अत्यन्त प्रेरक निबंध है। इसमें रवीन्द्रबाबू की महानता को रेखांकित किया गया है।

रवि बाबू की महानता का आधार समर्पित भाव से साहित्य-साधना थी। यह सरस्वती साधना थी। वे मनुष्यता की सेवा के व्रत से लिखते थे। वे मानवतावादी थे।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

बिना किसी शैक्षिक डिग्री के होते वे महान स्वाध्यायी थे। वे अथक परिश्रम करते थे। अपनी व्यापक मानवदृष्टि के कारण ही वे विश्वकवि कहलाए।

कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हजारी प्रसाद द्विवेदी रचित ‘रवीन्द्रनाथ ठाकुर’ शीर्षक पाठ का सारांश लिखिए।
उत्तर-
आचार्य द्विवेदी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने हिन्दी की काव्य परम्परा को कबीर से जोड़कर एक प्रगतिशील मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया है वहीं उपन्यासकार के रूप में वाणभट्ट की आत्मकथा के द्वारा हिन्दी उपन्यास को नई दिशा दी है। दूसरी ओर ललित निबंधों के द्वारा हिन्दी निबंध को एक नई विधा का अवदान दिया है।

प्रस्तुत पाठ ‘कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर’ में उन्होंने रवीन्द्रनाथ ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व पर बड़ा ही सुन्दर प्रकाश डाला है। उन्होंने विश्व कवि के व्यक्तित्व के उन पक्षों पर दृष्टिपात किया है जो सामान्य लोगों की दृष्टि से ओझल हो जाते हैं।

लेखक ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर को आधार समर्पित भाव से सरस्वती का साधक बताया है।। उनकी साधना का एकमात्र उद्देश्य मनुष्यता की सेवा है। यही कारण था कि बिना किसी शैक्षणिक डिग्री के होते हुए भी वह अपने स्वाध्याय, अथक परिश्रम और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण के बल पर विश्व कवि के गौरव से विभूषित हुए।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर संगीत विद्या के पूर्ण ज्ञाता थे। वे गीतों को बनाने और गाने में नए-नए सुरों का प्रयोग करते थे जिसके कारण उन्हें ‘बंगदेश की बुलबुल’ की उनके पिता ने उपाधि दी थी। वे बहुत बड़े देशभक्त थे, गीतांजली उनकी विश्व प्रसिद्ध रचना है जिसके लिए उन्हें नोवेल पुरस्कार मिला था। उन्होंने ‘शांति निकेतन’ विश्वविद्यालय की स्थापना की।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

सारांश के रूप में आचार्य द्विवेदी ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर की मानव सेवा, प्रीति, कल्याणकारी, उपकार और सरस्वती की सेवा करने की भावना का प्रतीक मानकर उनका यशोगान किया है।

प्रश्न 2.
“हजारी प्रसाद द्विवेदी” के जीवन काल और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी के बड़े ऊँचे साहित्यकारों में से एक थे। उन्होंने निबन्धकार, उपन्यासकार, लेखक, आलोचक, चिन्तक तथा शोधकर्ता के रूप में काम किया है। साहित्य के सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और विशिष्ट कर्त्तव्य के कारण विशेष यश के भागी हुए हैं। उनका व्यक्तित्व गरिमामय चित्तवृत्ति उदार और दृष्टिकोणा व्यापक है।

उनकी प्रत्येक रचना पर उनके इस व्यक्तित्व की छाप देखी जा सकती है। हजारी प्रसाद द्विवेदी जी हिन्दी साहित्य के इतिहासकार, अच्छे उपन्यासकार और निबन्धकार के रूप में अपना योगदान हिन्दी साहित्य को दिया है। आपकी उपन्यास, बाणभट्ट की आत्मकथा, हिन्दी उपन्यास का गौरव ललित निबन्ध संग्रह हिन्दी की धरोहर है। उन्होंने अपने ललित निबन्धों में मनुष्य की सभ्यता-यात्रा पर दृष्टिपात करते हुए उसकी मानवीय संवेदना को जगाने का सृजनात्मक प्रयास किया है। अन्य ग्रंथों में हिन्दी साहित्य की भूमिका, हिन्दी साहित्य का उद्भव और विकास, नाथ सम्प्रदाय, विचार प्रवाह, विचार और वितर्क, कालिदास की लालित्य-योजना महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

प्रश्न 3.
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन और व्यक्तित्व का जो परिचय प्रस्तुत किया है। इस निबंध की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर शीर्षक निबन्ध में विश्वकवि के व्यक्तित्व के उन पक्षों पर दृष्टिपात किया है जो सामान्य लोगों की दृष्टि से ओझल हो जाते हैं।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर की महानता का आधार समर्पित भाव से सरस्वती की साधना है। उनकी साधना का एक मात्र उद्देश्य मनुष्यता की सेवा है। यही कारण है कि बिना किसी शैक्षणिक डिग्री के होते हुए भी वह अपने स्वाध्याय, अथक परिश्रम और व्यापक मानवीय दृष्टि के बल पर विश्व कवि के गौरव से विभूषित हुए।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

उनका जन्म सन् 1861 ई. में हुआ था। उनके पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर थे। इस परिवार में अनेक धार्मिक, दार्शनिक, साहित्य सेवी और शिल्पकार पुरुषों ने जन्म लिया है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर बचपन में ही माता के देहान्त के बाद महर्षि देवेन्द्र नाथ ठाकुर की निगरानी में आ गए। स्कूल की साधारण शिक्षा प्राप्त करने के बाद, घर पर ही रह कर शिक्षा प्राप्त करने लगे। बचपन से ही वे विचित्र बुद्धिमान होने का परिचय देना आरंभ कर दिए। 16 वर्ष की आयु में गद्य और गद्य दोनों में बहुत अच्छी योग्यता दिखाई। वह संगीत के प्रेमी थे।।

पिता को वह गीत गाकर सुनाते थे उनके. गाने से प्रसन्न होकर पिता. ने उनका “बंग देश की बुलबुल” की उपाधि दी थी।

संगीत विद्या के वह पूरे ज्ञाता थे। वह गीतों के बनाने और गाने में नए-नए सुरों का प्रयोग करते थे।

रवीन्दनाथ ठाकुर बड़े देशभक्त कवि थे। उन्होंने मातृभूमि, देशप्रेम, देशभक्त पर आधारित बहुत-सी कविताएँ लिखी हैं।

उनकी कविताओं में “गीतांजली” विश्व प्रसिद्ध है। वे साहित्य में प्रथम भारतीय नोबल पुरस्कार पाने वाले कवि थे।

ज्ञान-वृद्धि के लिए उन्होंने केवल सम्पूर्ण भारत में ही भ्रमण नहीं कियां, किन्तु यूरोप, अमेरिका, जापान भी घूम आए। “शांति निकेतन” रवीन्द्र नाथ ठाकुर की एक उत्तम यादगार है जो आज विश्व भारती, विश्वविद्यालय बन गया है।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने सैकड़ों पुस्तकें बंगला में लिखा है। वे अंग्रेजी भाषा में लिखने की अच्छी योग्यता रखने पर भी देशी भाषा में लिखना अच्छा समझते थे।

वे वास्तव में मानव सेवा, प्रीति, कल्याणकारी, उपकार और सरस्वती की सेवा करने की भावना से काम कर रहे थे।

कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर लेखक परिचय – हजारी प्रसाद द्विवेदी (1907-1979)

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय संस्कृति के विशिष्ट ज्ञाता और निबंधकार के रूप में विख्यात हैं। उनका जन्म 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा गाँव में हुआ था। आचार्य द्विवेदी की प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। 1930 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ज्योतिषाचार्य तथा इन्टर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे शांति निकेतन में अध्यापक होकर चले गये। वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर के पद को भी सुशोभित किया। लखनऊ विश्वविद्यालय से उन्हें डी. लिट की उपाधि मिली।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 4 कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

द्विवेदीजी ने हिन्दी साहित्य के विकास में अपना विशेष योगदान दिया। हिन्दी साहित्य की दूसरी परम्परा के प्रतिनिधि के रूप में आचार्य द्विवेदी जी ने हिन्दी की काव्य परम्परा को कबीर से जोड़कर एक प्रगतिशील मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया है। उपन्यासकार के रूप में उन्होंने वाणभट्ट की आत्मकथा के द्वारा हिन्दी उपन्यास को एक नई दिशा दी है। दूसरी ओर ललित निबंधों के द्वारा हिन्दी निबंध के एक नई विधा का अवदान दिया है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं सूर साहित्य, हिन्दी साहित्य की भूमिका, कबीर, वाण भट्ट की आत्मकथा (उपन्यास), अशोक के फूल (निबंध), मेघदूत, विचार प्रवाह, पृथ्वीराज रासो आदि।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

भारत माता ग्रामवासिनी अर्थ लेखन

प्रश्न 1. अर्थ स्पष्ट करें
भारत माता ग्राम वासिनी
खेतों में फैला है श्यामल
धूल-भरा मैला-सा आँचल
गंगा-यमुना में आँसू-जल
मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी
उत्तर-
कवि श्री सुमित्रानंद पंत कहते हैं कि भारतमाता ग्रामवासिनी है अर्थात् भारतमाता की आत्मा गाँव में निवास करती है। भारतीय किसान, खेतों में काम करते हैं। केवल किसान ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार खुले आकाश के नीचे प्रात:काल से संध्या तक, खेतों और मैदानों में खेती तथा पशु चरण कार्य में लगे होते हैं। फिर भी वे बहुत ही गरीब और पिछड़े हुए हैं। धूल-भरा मैला-सा आँचल उनकी गरीबी का चिह्न है। उनका उदास चेहरा, आँसू भरी आँखें दुःख की प्रतिमा है। कवि की कल्पना है कि भारतमाता अपने संतानों को दु:खी देख कर आँसू बहाती है। गंगा-यमुना में भारतमाता के आँसू जल प्रवाह के रूप में बह रहे हैं। .

प्रश्न 2.
अर्थ स्पष्ट करें
तीस कोटि सन्तान नग्न तन,
अर्थ क्षुधित, शोषित, निरस्त्रजन,
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन
नतमस्तक तरू तल निवासिनी।
उत्तर-
कवि श्री सुमित्रानंद पंत कहते हैं कि भारतमाता जो ग्रामवासिनी है अत्यंत दु:खी है। उसको इस बात के लिए अधिक दुःख है कि महानगरों में विकास कार्य हुआ है। यहाँ की चमक-दमक और आर्थिक खुशहाली की तुलना में गाँव की बदहाली चिंता का विषय बन गया है।

गाँव की. तीस करोड़ से अधिक जनता को नग्न तन, भूखा, अभावग्रस्त और शोषित देखकर भारतमाता दु:खी और उदास है। क्योंकि गाँव के निवासी असभ्य, अशिक्षित तथा निर्धन होने के कारण पिछड़े हुए हैं। अधिकतर लोग तो ऐसे भी हैं कि रहने का निवास स्थान नहीं रखते हैं। वृक्षों के नीचे निवास करते हैं।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

प्रश्न 3.
अर्थ स्पष्ट करें
स्वर्ण शस्य पर पद-तल लुंठित,
धरती-सा सहिष्णु मन कुंठित,
क्रन्दन कंपिता उधर मौन स्मित
राहु ग्रसित,
शरदेन्दु हासिनी।
उत्तर-
कवि श्री सुमित्रानंदन पंत कहते हैं कि कहने को तो भारतमाता की धरती बहुत ही उपजाऊ है, प्राकृतिक सम्पदा से समृद्ध है, लेकिन भारतवासी निर्धन हैं। उनका मन कुंठित है। कवि भारतमाता को दुःख की प्रतिमा के रूप में प्रस्तुत करने के बाद, भारतवासियों से आशा करता है कि अहिंसा, सत्य और तप संयम के मार्ग पर चल कर वे अवश्य सफल होंगे। जग जननी भारतमाता जीवन विकासिनी के रूप में हमारे लिए मार्गदर्शक बन कर आयगी।

प्रश्न 4.
अर्थ स्पष्ट करें
चिंतित मृकुटि क्षितिज तिमिरांकित
नामित नयन नभ वास्पाच्छादित
आनन-श्री छाया-शशि उपमित,
ज्ञान मूढ़, गीता प्रकाशिनी।
उत्तर-
पंत ने भारतमाता के मूर्त स्वरूप का मानवीकरण करते हुए उसकी मानसिक स्थितियों का विवेचन किया।

कवि कहता है कि भारतमाता की मृकुटि पर चिंता की रेखाएँ उभर गयी हैं। क्षितिज पर

मुखमंडल पर चन्द्रमा की सुंदर छाया दृष्टिगत होती है। जो मूढ़ है उनको गीता-ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करनेवाली हैं।

इस पंक्तियों का मूल भाव यह है कि भारतमाता का स्वरूप विराट है। अपनी संततियों की पीड़ा, क्लेश, अभावग्रस्तता एवं मूढ़ता से भारतमाता चिंतित हैं। वह हर जन-जन में गीता ज्ञान चाहती है।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

प्रश्न 5.
अर्थ स्पष्ट करें
सफल आज उसका तप संयम,
पिला अहिंसा स्तन्य सुधो पभ,
हरती जन-मन भय, भव-तम-भ्रम
जग-जननी, जीवन-विकासिनी।
उत्तर-
महाकवि पंत ने उपरोक्त काव्य पंक्तियों में भारतमाता के जीवंत स्वरूप का चित्रण करते हुए उनकी मनोभावनाओं को सटीक चित्रण किया है। कवि कहता है कि आज भारतमाता का संयमित तपस्या सफल सिद्ध हुई है। अपने स्तन से अहिंसा रूपी उत्तम सुधा का पान कराकर जन-जन के मन का भय का हरती हैं। साथ ही भाव रूपी अंधकार एवं भ्रम से भी मुक्ति दिलाती हैं। भारतमाता जगत की जननी हैं। वे जीवन को विकास के शिखर पर पहुँचाने वाली माँ है।

उपरोक्त पंक्तियों में कवि ने भारत माँ के स्थूल स्वरूप का जीवंत रूप में चित्रण किया है। उस जीवंत स्वरूप में मानवीय गुणों का उल्लेख किया है साथ ही अपनी संततियों की रक्षा, प्रगति, सेवा के लिए चिंतित करुणामयी माँ का चित्रण किया है।

इस कविता का मूल भाव यह है कि भारतमाता करुणामयी हैं, दयामयी हैं। उन्हें अपने सपूतों के सुख-दुख की चिंता है। उनके भीतर भौतिक चाहे आध्यात्मिक किसी भी प्रकार का ताप, यह भ्रम नहीं रहे, यही उनकी कामना है।

भारत माता ग्रामवासिनी अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतमाता की आत्मा कहाँ निवास करती है?
उत्तर-
भारतमाता की आत्मा गाँवों में निवास करती है।

प्रश्न 2.
भारतीय कृषक की गरीबी का चिह्न क्या है?
उत्तर-
भारतीय कृषक की गरीबी का चिह्न है धूल-भरा मैला-सा आँचल।

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प्रश्न 3.
भारत माता के आँसू के रूप में कौन निरन्तर बहती रहती है?
उत्तर-
गंगा और यमुना।

प्रश्न 4.
हमारा परम सौभाग्य क्या है?
उत्तर-
हमारा परम सौभाग्य भारतमाता की संतान होने का है।

प्रश्न 5.
भारतमाता की धरती कैसी है?
उत्तर-
भारतमाता की धरती अत्यधिक उर्वरा है।

प्रश्न 6.
‘बूढ़ा चाँद’ किसी रचना है?
उत्तर-
सुमित्रानन्दन पंत की।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

प्रश्न 7.
भारतमाता ग्रामवासिनी शीर्षक कविता में कवि ने भारत माता को किस रूप में चित्रित किया है?
उत्तर-
कवि ने भारतमाता को देश की आत्मा गाँवों में निवास करनेवाली माँ के रूप में चित्रित किया है।

प्रश्न 8.
“भारतमाता ग्रामवासिनी”, किसकी रचना है?
उत्तर-
‘सुमित्रानंदन पंत’ की।

प्रश्न 9.
“युगवाणी” किसकी रचना है?
उत्तर-
सुमित्रानंदन पंत की।

प्रश्न 10.
श्री सुमित्रानंदन पंत को “चिदम्बरा” के लिए कौन-सा पुरस्कार मिला था?
उत्तर-
ज्ञानपीठ।

भारत माता ग्रामवासिनी लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता “भारत माता ग्रामवासिनी” का सारांश लिखिए।
उत्तर-
प्रकृति के सुकुमार कवि श्री सुमित्रानंदन पंत ने “भारत माता ग्रामवासिनी” शीर्षक कविता में भारत माता को देश की आत्मा कहा है जिसको गाँव में निवास करने वाली माँ के रूप में चित्रित किया गया है। यह माँ अपनी करोड़ों संतानों को भूखा, नंगा, अभावग्रस्त और . शोषित देखकर अत्यन्त दुखी और उदास है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सुमित्रानंदन पंत के जीवन और व्यक्तित्त्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
प्रकृति के सुकुमार कवि के नाम से व्याख्यात सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन् 1900 ईस्वी में हुआ और जीवन के 70 वसन्त देखने के उपरान्त सन् 1970 ईस्वी में उनका परलोकवास हुआ। जन्म के कुछ ही साल बाद मातृहीन हो जाने के कारण उनका पालन-पोषण पिता और. दादी की देख-रेख में हुआ। अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक ग्राम में जन्म ही नहीं उनकी आरंभिक शिक्षा-दीक्षा भी हुई थी।

समित्रानन्दन पंत सन 1918 ई. में मँझले भाई के साथ बनारस आ गये और जयनारायण हाई स्कूल में पढ़ने लगे। सन् 1919 ई. में प्रयाग के म्योर कॉलेज में भर्ती हुए। मँझले भाई के कहने पर सन् 1921 ई. में कॉलेज छोड़ दिया पर सुकूमार चेतना से युक्त व्यक्तित्त्व होने के चलते सत्याग्रह में सक्रिय भाग नहीं ले सके। उसके बाद किसी शिक्षण संस्थान में संबंद्ध नहीं हुए पर स्वाध्याय और काव्य-सृजन को अबाध रूप में जारी रखा।

सुमित्रानन्दन पंतजी में काव्य-सृजन का आरंभ उनकी सात वर्षों की उम्र से ही हो गया था। तब वे चौथी कक्षा के छात्र थे। तब से 1918 ई. तक के काल को उन्होंने अपने काव्य का आरंभिक काल माना है। अल्मोड़ा की प्रकृति के साथ ही बड़े भाई के द्वारा ‘मेघदूत’ सस्वर पाठ और उनके धार्मिक वातावरण ने उनके बाल मन को गहराई तक प्रभावित किया। सन् 1918 ई. के पूर्व ही वे अल्मोड़ा अखबार बेंकटेश्वर समाचार और सरस्वती जैसी उच्चस्तरीय साहित्यिक पत्रिका के नियमित पाठक हो चुके थे।

वाराणसी के प्रवास-काल में पंतजी को रवीन्द्रनाथ टैगोर, सरोजनी नायडू और वडंसवर्थ जैसे रोमांटिक अंग्रेजी कवि के काव्य से परिचित होने का मौका मिला। काशी में उन्होंने प्रभृत रचनाएँ भी की जिनमें उपर्युक्त महाकवियों का गहरा प्रभाव पड़ता है। सन् 1922 ई. में “उच्छवास” का प्रकाशन हो चुका था। लेकिन उनकी काव्य प्रतिभा का पूर्ण विकास पल्लव में दिखाई पड़ता है। “पल्लव” का प्रकाशन सन् 1928 ई. में हुआ था। “उच्छावास” ग्रंथी, पल्लव, गुंजन और ज्योत्सना पंतजी के छापावादी काल की प्रमुख रचनाएं हैं।

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“युगान्त” का प्रकाशन सन् 1936 ई. में हुआ और उसमें ही सर्वप्रथम पंतजी ने छायावाद युग के अंत की घोषणा कर, प्रगतिवाद के पथ पर अपनी काव्य यात्रा के आरंभ की सूचना दे दी। ‘ग्राम्या’ और ‘युगवाणी’ उनकी प्रगतिवादी कविताओं के प्रतिनिधि संग्रह हैं। लेकिन तबकी प्रगतिवादी सिद्धांतवादिता की शुष्कता के साथ उनका सुकुमार कलाकार मन अधिक दिनों तक नहीं चल सका और सन् 1940 के बाद प्रगतिवाद की संकीर्णता से उन्होंने अपने को मुक्त कर लिया।

सन् 1931 ई. में पंतजी कलाकांकर में कुँवर ब्रजेश सिंह के आतिथ्य में रहे थे और अपनी “नौका बिहार” शीर्षक प्रसिद्ध कविता की रचना वहीं की थी।

सन् 1943 ई. में पंतजी भारत भ्रमण किया था और उसी दौरान मद्रास में महर्षि अरविन्द के उर्ध्व चेतनावाद के संपर्क में आये थे। अरविन्द का उनके तत्कालीन काव्य पर गहरा प्रभाव दिखाई पड़ाता है। लेकिन कुछ काल के उपरांत उसकी सीमा से बाहर आ उन्होंने सवात्मवाद

को अपना लिया था। पंतजी सन् 1950 ई. में ‘आल इण्डिया रेडियो’ परामर्श दाता के पद पर नियुक्त हुए इस पद पर वे 1957 ई. तक रहे थे। “कला और बूढ़ा चाँद” पर साहित्य अकादमी और चिदम्बरा पर ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी पंतजी सम्मानित किये गये थे।

सुमित्रानन्दन पंतजी जीवनभर कबीर रहे। दोहरे लम्बे घुघराले सजे बाल पर सौंदर्य से दीपित मुख मण्डल से युक्त उनका व्यक्तित्त्व काफी आकर्षक था। काव्य पात के समय उनके गले का माधुर्य श्रोताओं को मुग्ध कर लेता था।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 3 भारत माता ग्रामवासिनी

उनके प्रमुख काव्य ग्रंथ निम्नलिखित है-

  • उच्छवास 1920 ई.
  • ग्रंथि 1920 ई.
  • वीणा 1927 ई.
  • पल्लव 1928 ई.
  • गुंजन 1932 ई.
  • युगान्त 1936ई.
  • युगवाणी 1939 ई.
  • ग्राम्या 1940 ई.
  • स्वर्ण किरण 1947 ई.
  • स्वर्णधूल 1947 ई.
  • उत्तरा 1949 ई.
  • चिदम्बरा 1959 ई.
  • कला और बूढ़ा चाँद 1959 ई.
  • लोकायतन 1964 ई.

भारतमाता ग्रामवासिनी कवि-परिचय – सुमित्रानंदन पंत (1900-1970)

सुमित्रानंदन पंत हिन्दी के कालजयी कवि हैं। उनका जन्म 20 मई, 1900 ई. को उत्तरांचल राज्य के कौसानी में हुआ था। बचपन में माँ के प्यार से वे वंचित हो गये। पिता और दादी की छाया में उनकी काव्य प्रतिभा के पंख अल्मोडा की नैसर्गिक सुषमा के बीच खुले। 1918 में अपने मँझले भाई के साथ बनारस आने पर उनका सम्पर्क सरोजनी नायडू और कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर के साथ हुआ। सरोजनी नायडू के सम्पर्क में आने पर वे अंग्रेजी की रोमांटिक काव्यधारा से परिचित हुए।

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पंतजी के काव्य में जग जीवन के सामाजिक, भौतिक और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नयन का स्वर भी मिलता है। युगान्त से प्रारम्भ ‘प्रगतिशीलता ग्राम्य’ या तक चली और उसके बाद अरविन्द से प्रभावित होकर स्वर्ण धूलि और उत्तरा की रचना की। उनकी इन रचनाओं में अरविन्द दर्शन के नव मानवतावाद के दर्शन होते हैं। काव्य के अतिरिक्त उन्होंने नाट्य, कहानी और निबंध की भी रचना की लेकिन उनकी प्रसिद्धि मूलतः कवि के रूप में ही है। शब्द शिल्पी के रूप में विख्यात उनकी काव्य गाथा कवि की कल्पना और मन की तरंग के अनुरूप ही माधुर्य एवं प्रसाद गुण से मुक्त और व्यंजक है।

पंतजी ने हिन्दी साहित्य को एक नया आयाम दिया, हिन्दी की सेवा के प्रति उनकी देन से प्रभावित होकर उन्हें ‘कला और बूढ़ा चाँद’ पर साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला। चिदम्बरा पर उन्हें ‘ज्ञान-पीठ’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  • उच्छवास,
  • ग्रंथि,
  • वीणा,
  • पल्लव,
  • गुंजन,
  • युगान्त,
  • युगवाणी,
  • ग्राम्या,
  • स्वर्ण किरण,
  • स्वर्णधूलि;
  • उत्तरा,
  • रजत शिखर,
  • कला और बूढ़ा चाँद,
  • ज्योत्सना (नाटक),
  • लोकायतन। विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

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Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 2 गौरा

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Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 2 गौरा

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 2 गौरा

गौरा अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गौरा या गौरांगिनी कौन थी?
उत्तर-
गौरा या गौरागिनी एक गाय थी।

प्रश्न 2.
लालमणि कौन था?
उत्तर-
लालमणि गाय का बछड़ा था।

प्रश्न 3.
किसने गौरा को गुड़ में सूई खिला दिया था?
उत्तर-
एक ग्वाला ने गौरा को गुड़ में सूई खिला दिया था।

प्रश्न 4.
गौरा किस साहित्यिक विधा में है?
उत्तर-
गौरा महादेवी वर्मा का रेखाचित्र है।।

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प्रश्न 5.
लेखिका को गौरा किससे मिली थी?
उत्तर-
लेखिका को छोटी बहन से गौरा मिली थी।

प्रश्न 6.
लेखिका ने गौरा की मृत्यु के पीछे मनुष्य की किस प्रवृत्ति को उजागर किया है?
उत्तर-
लेखिका ने गौरा की मृत्यु के पीछे मनुष्य की अंध स्वार्थलिप्सा को उजागर किया है।

प्रश्न 7.
ग्वाला ने गौरा को गुड़ में सूई मिलाकर क्यों खिला दिया?
उत्तर-
गौरा जब से दूध देने लगी थी तबसे लेखिका ने ग्वाला से दूध लेना छोड़ दिया था। लेखिका पुनः ग्वाला से दूध लेने लगे इसीलिए उसने गौरा को गुड़ में सुई मिलाकर खिला दिया।

प्रश्न 8.
गौरा कैसी थी?
उत्तर-
गौरा प्रियदर्शिनी थी।

प्रश्न 9.
महात्मा गाँधी गाय को क्या कहते थे?
उत्तर-
‘गाय करुणा की कविता है’ ऐसा महात्मा गाँधी कहा करते थे।

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प्रश्न 10.
महादोवी वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर-
फर्रुखाबाद में।

प्रश्न 11.
महादेवी वर्मा की पहचान किस प्रकार के कवियों में होती है?
उत्तर-
छायावादी।

प्रश्न 12.
महादेवी वर्मा, नारी होने और बुद्ध के दुःखवाद से प्रभावित होने के कारण कौन-सा स्वर काव्य में प्रस्तुत किया है?
उत्तर-
वेदना।

प्रश्न 13.
महादेवी वर्मा की काव्य रचना नीहार कब प्रकाशित हुई थी।
उत्तर-
1930 ई.।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित काव्य-सग्रहों में कौन महादेवी वर्मा की रचना नहीं है?
उत्तर-
नीलिमा।

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प्रश्न 15.
“संध्यागीत” और दीपशिखा किसकी रचना है?
उत्तर-
महादेवी वर्मा।

गौरा लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महादेवी वर्मा ने अपनी बहिन श्यामा की प्रशंसा क्यों की है? स्पष्ट करें।
‘अथवा,
पशुपालन के विषय में महादेवी वर्मा और उनकी बहिन श्यामा के विचार में क्या भिन्नता थी। स्पष्ट करें।
उत्तर-
महादेवी वर्मा को पशुपालन का अधिक शौक था। उन्होंने पक्षी, कुत्ते, बिल्लियाँ, कुक्कुट और मछलियाँ पाल रखी थी। इन पालतू जीवों के प्रति स्नेह और दुलार की भावना उनके मन में रहती थी।

जबकि महादेवी वर्मा की छोटी बहिन श्यामा केवल उपयोगी पशुओं को पालना पसंद करती थी। वह खाद्य समस्या के समाधान के लिए पशु-पक्षी पालन उचित समझती थी। इसी कारण महादेवी वर्मा ने अपनी बहिन श्यामा की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि “वास्तव में मेरी छोटी बहिन श्यामा अपनी लौकिक बुद्धि में मुझसे से बहुत बड़ी है और बचपन से ही उनकी कर्मनिष्ठा तथा व्यवहार कुशलता की बहुत प्रशंसा होती रही है।”

प्रश्न 2.
महादेवी वर्मा ने ‘गौरा’ का रेखाचित्र किन शब्दों में प्रस्तुत किया है लिखें?
उत्तर-
गौरा, एक बछिया थी, जिसके पैर पुष्ट लचीले, भरे पुढे, चिकनी भरी हुई पीठ, लम्बी सुडौल गर्दन, निकलते हुए छोटे-छोटे सींग, अपनी ओर देखने वालों का ध्यान आकर्षित कर लेती थी।

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स्वस्थ पशु के शरीर के रोमों में एक विशेष चमक होती है। गौरा के सफेद शरीर की उज्वलता देखने पर ऐसा लगता था कि मानो उसके रोमों पर अभ्रक का चूर्ण मल दिया गया हो। जिसके कारण विशेष चमक उत्पन्न हो गई थी। उसकी बड़ी चमकीली और काली आँखें दीये की लौ की तरह झिलमिलाती थी।

प्रश्न 3.
महादेवी वर्मा ने गौरा के माँ बनने तथा उसके बच्चे का रेखा-चित्र किस प्रकार प्रस्तुत किया है? वर्णन करें।
उत्तर-
महादेवी वर्मा के घर ‘गौरा’ एक वर्ष रहने के बाद एक सुन्दर बच्चे की माँ बनी। बच्चा अपने लाल रंग के कारण गेरू का पुतला जैसा जान पड़ता था। उसके माथे पर पान के आकार का श्वेत तिलक और चारों पैरों में खुरों के ऊपर सफेद धारी वलय ऐसे लगते थे मानो गेरू की बनी वत्समूर्ति को चाँदी के आभूषणों से अलंकृत कर दिया गया हो। बछड़े का नाम “लाल मणि” रखा गया। परन्तु उसे सब ‘लालू’ के नाम से पुकारने लगे। माता-पुत्र दोनों निकट रहने पर हिमराशि जलते अंगारे का स्मरण कराते थे।

प्रश्न 4.
‘गौरा’ की मृत्यु का कारण क्या था? यह रहस्य कैसे उद्घाटित हुआ?
उत्तर-
गौरा के दूध देने से पूर्व जो ग्वाला महादेवी वर्मा के घर दूध देता था उसने आग्रह . करके गौरा का दूध दुहने का कार्य भार संभाल लिया था लेकिन उसके मन में एक चोर छिपा हुआ था। वह शाम का आना सह नहीं पाया क्योंकि उसके कारण उसकी आर्थिक हानि हो रही थी। अवसर मिलते ही गुड़ में लपेटकर सुई उसने गौरा को खिलाकर उसकी असमय मृत्यु निश्चित कर दिया ताकि गाय के मर जाने पर वह पुनः दूध देने लगे। गाय के बीमार हो जाने पर चिकित्सकों ने यह रहस्य, निरीक्षण, परीक्षण, एक्स-रे इत्यादि के आधार पर किया था। ग्वाला भी संदेह के बाद भाग निकला था अतः गौरा की मृत्यु ग्वाला के दुष्कर्म के कारण हुई थी।

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प्रश्न 5.
गौरा का संक्षिप्त कहानी लिखें।
उत्तर-
‘गौरा’ एक गाय पर लिखा महादेवी वर्मा का अद्भुत रेखाचित्र है। महादेवीजी एक सफल गद्य-लेखिका भी थीं।

गौरा एक सुन्दर गाय थी। उसके रूप रंग पर रही उसका नाम गौरा रखा गया था। उसे एक बछड़ा भी हुआ। वह कुल बारह सेर दूध देती थी। उस दूध को महादेवी वर्मा के पशु-परिवार कुत्ते-बिल्ली, गिलहरी, खरगोश, हरिण पीते थे। सभी गौरा पर प्रसन्न रहते थे। सभी वात्सल्य प्रेम का प्रदर्शन करते थे।

एक बेईमान ग्वाले ने गौरा को सुई देकर मार डाला। इस प्रकार गौरा का कारुणिक अन्त हुआ।

धन्य है गोपालक देश भारत। यही संक्षिप्त गौरा की कहानी है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महादेवी वर्मा द्वारा रचित ‘गौरा’ शीर्षक पाठ का सारांश लिखिए।
उत्तर-
महादेवी वर्मा मुख्यतः कवियित्री है, परन्तु उनका गद्य भी कम शक्तिशाली नहीं है।

कवियों की कसौटी गद्य कहा गया है। उनकी लेखनी इस कथन का समर्थन एवं उदाहरण है। इसी संदर्भ में ‘गौरा’ एक मार्मिक रचना-रेखाचित्र है। इसमें गाय के सौंदर्य और गुण के साथ-साथ गोपालक देश भारत में गाय की दर्दनाक मृत्यु का बड़ा ही मार्मिक दश्य उपस्थित किया ‘गौरा’ एक गाय का नाम है जो महादेवी वर्मा की बहन के घर से मिली थी। गौरा के शारीरिक बनावट का वर्णन कवयित्री ने जिस ढंग से किया है लगता है गाय को मानो इटैलियन मार्बल से तराशा गया हो। अपनी लेखनी के माध्यम से महादेवी वर्मा ने गाय में मनुष्यत्व भर दिया है-

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जैसे वह पाँव की आहट से सबको पहचानती थी। लेखिका के घर पर जितने भी पशु-पक्षी थे, सबसे घुल-मिल गई थी। कुछ दिन के बादा गौरा माँ बनती है और काफी दूध देती है। वह दूध इतना कि लेखिका के यहाँ जो ग्वाला दूध देने आता था उसका व्यापार बंद हो गया।

अन्त में एक त्रासद घटना घटती है जब वह ग्वाला गौरा को मरने की सुई खिला देता है जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है।

सारांशत: लेखिका ने गोपालक देश में जिस निर्दयता से गाय के साथ व्यवहार किया जाता है उस दृश्य का मार्मिक चित्र खींचकर यही कहना चाहा है कि धन्य है यह गोपालक देश।

प्रश्न 2.
महादेवी वर्मा के जीवन और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें?
उत्तर-
महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ। प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. करने के बाद प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य हो गई।

छायावादी कवियों में महादोवी वर्मा की अनोखी पहचान है। उनकी काव्य रचना में दुःखवाद की भावना मिलती है क्योंकि वह बुद्ध के दुःखवाद से प्रभावित थीं। उनकी पारिवारिक परिस्थिति में नारी जीवन दुःख से प्रभावित थी अतः उनके काव्य में दुःखानुभूति मिलती है।

वह स्वयं स्वीकार करती है कि : “मुझे दु:ख के दोनों ही रूप प्रिय हैं। एक वह जो मनुष्य के संवेदनशील हृदय की सारे संसार से एक अविच्छिन बंधनों में बाँध देता है और दूसरा वह जो काल और सीमा के बंधन में पड़े हुए असीम चेतन का क्रन्दन है।”।

महादेवी वर्मा बंगला और हिन्दी की रोमान्टिक और रहस्यवादी काव्यान्दोलनों से प्रभावित होकर अपने आध्यात्मिक प्रियतम को पुरुष के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी स्त्रियोचित भावनाओं को व्यजित किया है। भारतीय परम्परा और संत काव्य के रहस्यवादी भावना के अनुसार अपनी रहस्यानुभूतियों को कलात्मक अभिव्यक्ति भी प्रदान की है।

विरह भावना की प्रधानता के कारण महादोवी वर्मा को आधुनिक मीरा के रूप में सम्बोधित किया जाता है।

गीत-कला की दृष्टि से उनके गीत हिन्दी की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। लाक्षणिकता, प्रतीकात्मकता, ध्वन्यात्मकता और चित्रभाषा-कौशल के कारण उनके गीत सहज ही चिरस्मरणीय हैं।

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महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं। नीहार (1930), रश्मि (1932), नीरजा (1935), साध्यगीत (1936) और दीपशिखा (1942) में प्रकाशित हुई।

गद्यकार के रूप में भी महादेवी की महत्ता निर्विवाद है। स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र और श्रृंखला की कड़ियाँ, रेखाचित्र और संस्मरण के क्षेत्र में उनकी महत्त्वपूर्ण कृतियाँ हैं।

प्रश्न 3.
गौरा कौन थी? महादेवी वर्मा ने उसका रेखाचित्र किस प्रकार प्रस्तुत किया है। व्याख्या करें।
अथवा,
गौरा के संबंध में महादेवी वर्मा के विचारों की समीक्षा करें।
उत्तर-
गौरा महादेवी वर्मा की गाय है जिसे उनकी छोटी बहन ने उपहार के रूप में दिया था। यह मार्मिक रेखाचित्र उसी गाय से संबंधित है। उनकी दृष्टि में यह एक विलक्षण प्राणी है। “गौरा” अपने सुन्दर शरीर, आकर्षक चचाल और साहचर्य जनित लगाव तथा दुग्ध-आपूर्ति जैसी उपयोगिता के कारण वह प्रेम और मानवीय स्नेह पाने की हकदार थी। महादेवी वर्मा ने “गौरा” की निर्मम मृत्यु के पीछे मनुष्य की अंध स्वार्थलिप्सा को उजागर किया है। व्यक्ति स्वार्थ में इतना अंधा हो गया है कि दूध देने वाला निश्चल और प्रेम करने योग्य प्राणी ‘गौरा’ को सूई खिला देता है ताकि वह मर जाए, और महादेवी वर्मा पुनः उससे दूध लेने लगे। गौरा की यातनापूर्ण मृत्यु जैसें मानवीय संवेदनशील की ही मृत्यु है।

महादेवी वर्मा के रेखाचित्र में कम-से-कम शब्दों में कलात्मक दृश्य मिलता है। गौरा इसका एक सुन्दर प्रमाण है।

महादेवी को पशु-पक्षी, बकरी, कुक्कुट, मछली इत्यादि पालने का शौक, खाद्य समस्या के समाधान के लिए न था बल्कि जीवों के प्रति स्नेह और दुलार की भावना थी। जब उनकी छोटी बहन श्यामा ने उपयोगिता के आधार पर पशुपालन की ओर ध्यान आकर्षित कराया तो इन्होंने अपनी बहन को उसकी कर्मनिष्ठा और व्यवहार कुशलता की बहुत प्रशंसा की और उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

गौरा, एक सफेद, चमकदार अभ्रक जैसी रोमो वाली बाछी थी। उसका स्वागत एक अच्छे और सम्मानित अतिथि के रूप में टीका लगाकर और आरती उतार कर किया गया था। उसका नामकरण भी हुआ, “गौरांगिनी” या गौरा से वह प्रसिद्ध हो गई।

गौरा केवल देखने में सुन्दर न थी बल्कि उसका विचार, आचरण बहुत अच्छे थे। अन्य पालतू पशु-पक्षी, कुत्ते-बिल्लियाँ उसके मित्र बनकर उसके पेट के नीचे खेलने लगे थे।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 2 गौरा

वह घर के सभी लोगों को उनके पैर की आहट से पहचानती थी। उनसे कुछ पाने की प्रतीक्षा करती थी। एक वर्ष के बाद जब वह माता बनी और लाल रंग के बच्चे को जन्म दिया तो उसका महत्व और बढ़ गया था। वह प्रतिदिन बारह सेर दूध देती थी, उसका बच्चा लाल मणि (लालू) के अतिरिक्त उसका दूध घर के कुत्ते, बिल्लियाँ और बाल गोपाल पीते थे।

जब से गौरा, आवश्यकता से अधिक-दूध देने लगी थी तब से ग्वाले से दूध लेना बन्द कर दिया गया था। केवल वह दूध दुहने के लिए दोनों समय आता था। वह गौरा का दुश्मन हो गया था। उसके दिल में यह भावना पैदा हो गई थी कि गौरा के कारण ही उसके दूध का धंधा बन्द हो गया है। इसलिए किसी दिन मौका पाकर उसने सुई गुड़ के साथ गौरा को खिला दिया था जो उसके हृदय में जाकर चुभ गई थी।

यह रहस्य चिकित्सकों के निरीक्षण परीक्षण, एक्सरे आदि द्वारा उद्घाटित हुआ था। कानूनी कार्यवाही के लिए आवश्यक प्रमाण तो नहीं थे। लेकिन ग्वाले के भाग जाने से यह विश्वास हो गया था कि एक गोपालक देश का ग्वाला गौरा का हत्यारा था। गौरा मृत्यु के साथ संघर्ष करते हुए एक दिन मर गई। उसकी मृत्यु को दुःख सहना महादेवी वर्मा के लिए बहुत कठिन सिद्ध हुआ।

गौरा लेखक परिचय – महादेवी वर्मा (1907-1987)

महादेवी वर्मा का जन्म 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के पुर्रुखाबाद में हुआ प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम. ए. परीक्षा पास कर वे प्राध्यापक बनीं। वे प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्राचार्या के पद को भी सुशोभित की।

छायावादी कवियों में महादेवी वर्मा की एक अलग पहचान है। उनकी काव्य रचना में दुखवाद कीप अनुभूति होती है। महादेवी वर्मा नारी की पीड़ा से विचलित थी अतः अपने काव्य में नारी की पीड़ा को मूक वाणी दी है। वह बंगला और हिन्दी के रहस्यवादी काव्य से प्रभावित होकर अपनी रहस्यानुभूति को कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है। उनकी काव्य कृत्तियों में विरह भावना की प्रधानता है। गीत कला की दृष्टि से उनके गीत हिन्दी की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लाक्षाणिकता, प्रतीकात्मकता, ध्वन्यात्मकता और चित्र भाषा-कौशल के कारण उनके गीत सहज ही चिरस्मरणीय हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  • नीहार,
  • रश्मि
  • नीरजा
  • सांध्यगीत
  • दीपशिखा।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 2 गौरा

गद्यकार के रूप में उनकी महत्ता निर्विवाद है। गद्य में उनकी प्रमुख कृतियाँ- स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र और शृंखला की कड़ियाँ प्रमुख हैं।

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 1.
The poem, “The soldier” is composed by
(A) Rupert Brooke
(B) Wordsworth
(C) Edward thomas
(D) None of these
Answer:
(A) Rupert Brooke

Question 2.
‘The Soldier’ poem appeared in the year
(A) 1915
(B) 1920
(C) 1925
(D) None of these
Answer:
(A) 1915

Question 3.
‘Richer dust’ refers to
(A) the soldier’s body
(B) environment
(C) England
(D) none of these
Answer:
(A) the soldier’s body

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 4.
How many times the poet uses ‘England’ english in the poem
(A) six
(B) two
(C) three
(D) none of these
Answer:
(A) six

Question 5.
The valuable dust of the poet’s body is the dust of
(A) England
(B) America
(C) Germany
(D) None of these
Answer:
(A) England

Question 6.
Virtues of a true soldier has been depicted by
(A) Rupert Brooke
(B) Edward Thomas
(C) Wordsworth
(D) None of these
Answer:
(A) Rupert Brooke

Question 7.
‘A pulse in the eternal mind’ is an excerpt of
(A) The Soldier
(B) If
(C) The Daffodils
(D) None of these
Answer:
(A) The Soldier

Question 8.
‘Idealistic patriotism’ is the essence of
(A) The Soldier
(B) If
(C) Adiestrop
(D) None of these
Answer:
(A) The Soldier

Question 9.
‘The soldier is an example of
(A) Klonnet
(B) elegy
(C) eulogv
(D) none of these
Answer:
(A) Klonnet

Question 10.
Rupert Brooke was born in
(A) England
(B) Russia
(C) India
(D) None of these
Answer:
(A) England

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 11.
‘The soldier’ is an example of —
(A) sonnet
(B) prose
(C) elegy
(D) None of these
Answer:
(A) sonnet

Question 12.
‘Richer dust’ refers to —
(A) environment
(B) the soldier’s body
(C) England
(D) None of these
Answer:
(B) the soldier’s body

Question 13.
How many times the poet uses ‘England’ in the poem?
(A) two
(B) three
(C) six
(D) seven
Answer:
(C) six

Question 14.
The valuable dust of the poet’s bodv in the dust of—
(A) England
(B) America
(C) Germany
(D) None of these
Answer:
(A) England

Question 15.
Virtues of a true soldier has been depicted by—
(A) Edward Thomas
(B) Wordsworth
(C) Rupert Brooke
(D) None of these
Answer:
(D) None of these

Question 16.
‘A pulse in the eternal mind’ has been taken from the poem—
(A) If
(B) The Daffodils
(C) The Soldier
(D) Everyone Sang
Answer:
(C) The Soldier

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 17.
Rupert Brooke is famous as a —
(A) love poet
(B) war poet
(C) nature poet
(D) dedactic poet
Answer:
(B) war poet

Question 18.
The rich earth where the soldier dies, he concealed of —
(A) grass
(B) flowers
(C) dust
(D) None of these
Answer:
(C) dust

Question 19.
Who wrote the poem ‘The Soldier’?
(A) Edward Thomas
(B) Rupert Brooke
(C) W. B. Yeats
(D) W. B. Wordsworth
Answer:
(B) Rupert Brooke

Question 20.
Rupert Brooke has written the poem-
(A) The Daffodils
(B) Adlestrop
(C) The Soldier
(D) Everyone Sang
Answer:
(C) The Soldier

Question 21.
The poem ‘The Soldier’ is a-
(A) love poem
(B) patriotic poem
(C) romantic poem
(D) None of them
Answer:
(B) patriotic poem

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 22.
The poet, Rupert Brooke was born in-
(A) England
(B) America
(C) India
(D) France
Answer:
(A) England

Question 23.
Rupert Brooke took active part in-
(A) the first world war
(B) the second world war
(C) The war of Panipat
(D) None of them
Answer:
(A) the first world war

Question 24.
The poem ‘The Soldier’ shoyvs the poet’s deep love of-
(A) his family
(B) his mother land
(C) his own
(D) None of diem
Answer:
(B) his mother land

Question 25.
In his sonnet ‘The Soldier’ the poet describes the feelings of an-
(A) Indian soldier
(B) American soldier
(C) English soldier
(D) Irish soldier
Answer:
(C) English soldier

Question 26.
Rupert Brooke wants to die in a-
(A) battle field
(B) play ground
(C) hospital
(D) None of them
Answer:
(A) battle field

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 27.
‘If I should die, think only this of me’ is a line taken from the poem-
(A) everyone Sang
(B) Jhe Lake Isle of Innisfree
(C) If
(D) The Soldier
Answer:
(D) The Soldier

Question 28.
‘The Soldier’ is a………..
(A) novel
(B) story
(C) poem
(D) essay
Answer:
(C) poem

Question 29.
‘The Soldier’ is written by ………..
(A) Shakespeare
(B) Rupert Brooke
(C) Rudyard Kipling
(D) Edward Thomas
Answer:
(B) Rupert Brooke

Question 30.
‘The Soldier’ was written in time of ………….
(A) peace
(B) memory
(C) delight
(D) war
Answer:
(D) war

Question 31.
In that rich earth a richer dust ……………
(A) bore
(B) shaped
(C) concealed
(D) eternal
Answer:
(C) concealed

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 32.
………….. feelings is presented in the poem, ‘The Soldier’.
(A) hatred
(B) love
(C) patriotic
(D) humanity
Answer:
(C) patriotic

Question 33.
The rich earth where the soldier dies, be concealed of ……………
(A) flowers
(B) grass
(C) monument
(D) dust
Answer:
(D) dust

Question 34.
Rupert Brooke being poet was also a …………
(A) novelist
(B) soldier
(C) lieutenant
(D) businessman
Answer:
(B) soldier

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 35.
Rupert Brooke is famous as a ………….
(A) love poet
(B) war poet
(C) nature poet
(D) didactic poet
Answer:
(B) war poet

Question 36.
‘The Soldier’ was written and published during ………….
(A) World War-I
(B) World War-II
(C) Vietnam War
(D) Spanish-American War
Answer:
(A) World War-I

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers Poem 7 The Soldier

Question 37.
The poet says that if he dies in a foreign land, that part of land will be for ever of
(A) War-gift
(B) the poet
(C) England
(D) humanity
Answer:
(C) England

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

Bihar Board 12th Business Studies Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 1.
समन्वय स्थापित किया जाता है
(A) समूहों के मध्य
(B) विभागों के मध्य
(C) प्रबन्ध एवं कर्मचारियों के मध्य
(D) उपर्युक्त सभी के मध्य
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी के मध्य

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 2.
समन्वय है
(A) ऐच्छिक
(B) आवश्यक
(C) अनावश्यक
(D) समय की बर्बादी
उत्तर:
(B) आवश्यक

प्रश्न 3.
समन्वय स्थापित किया जाता है
(A) उच्चतम स्तर के प्रबन्ध द्वारा
(B) मध्यम स्तर के प्रबन्ध द्वारा
(C) निम्न स्तर के प्रबन्ध द्वारा
(D) इनमें से किसी के द्वारा नहीं
उत्तर:
(A) उच्चतम स्तर के प्रबन्ध द्वारा

प्रश्न 4.
कुण्ट्ज एवं ओ’डोनेल के अनुसार प्रबन्ध के प्रमुख कार्य हैं
(A) 5
(B) 4
(C) 3
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) 5

प्रश्न 5.
जार्ज आर टेरी के अनुसार प्रबन्ध के कार्य हैं
(A) 2
(B) 4
(C) 6
(D) ये सभी
उत्तर:
(B) 4

प्रश्न 6.
एक कार्य के निष्पादन के लिए प्रबन्ध को “सर्वोत्तम रास्ता ढूँढ़ना चाहिए।” वैज्ञानिक प्रबन्ध का कौन-सा सिद्धान्त इस पंक्ति की व्याख्या करता है
(A) समय अध्ययन
(B) गति अध्ययन
(C) थकान अध्ययन
(D) विधि अध्ययन
उत्तर:
(D) विधि अध्ययन

प्रश्न 7.
प्रबन्ध के सिद्धान्त नहीं हैं
(A) सार्वभौमिक
(B) लचीले
(C) सम्पूर्ण
(D) व्यवहारिक
उत्तर:
(C) सम्पूर्ण

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 8.
प्रबन्ध के सिद्धान्त हैं
(A) गतिशील
(B) लोचशील
(C) सार्वभौमिक
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
प्रशासनिक प्रबन्ध के प्रस्तुतकर्ता थे
(A) फेयोल
(B) टेलर
(C) टेरी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) फेयोल

प्रश्न 10.
हेनरी फेयोल के सिद्धान्त हैं
(A) 5
(B) 10
(C) 14
(D) 15
उत्तर:
(C) 14

प्रश्न 11.
सामाजिक वातावरण का निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण
(A) अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति
(B) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
(C) देश का संविधान
(D) परिवार की संरचना
उत्तर:
(D) परिवार की संरचना

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सा व्यवसायिक वातावरण का लक्षण नहीं है?
(A) अनिश्चितता
(B) कर्मचारी
(C) सम्बन्धता
(D) झंझट
उत्तर:
(B) कर्मचारी

प्रश्न 13.
भारत में उदारीकरण की नीति रही हैं
(A) सफल
(B) असफल
(C) पूर्णतः असफल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सफल

प्रश्न 14.
बजट का अर्थ है
(A) निष्पादन का नियोजित लक्ष्य
(B) भविष्य के कार्यकलाप का प्रयोग
(C) संसाधनों की व्यवस्थित कार्रवाई और सही वितरण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 15.
निम्न में से कौन-सी नियोजन की सीमा नहीं है?
(A) कठोरता
(B) समय की बर्बादी
(C) नियंत्रण का आधार
(D) अत्यधिक लागत
उत्तर:
(C) नियंत्रण का आधार

प्रश्न 16.
एक अच्छी योजना होती हे
(A) खचीली
(B) समय लेने वाली
(C) लोचपूर्ण
(D) संकीर्ण
उत्तर:
(C) लोचपूर्ण

प्रश्न 17.
नियोजन है
(A) लक्ष्य-अभिमुखी
(B) उद्देश्य अभिमुखी
(C) मानसिक प्रक्रिया
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 18.
नियोजन सभी प्रबन्धकीय क्रियाओं का ………. है।
(A) प्रारम्भ
(B) अन्त
(C) प्रारम्भ तथा अन्त दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रारम्भ तथा अन्त दोनों

प्रश्न 19.
कार्य के आधार पर सामूहिक क्रिया अंग है
(A) विकेन्द्रीकृत संगठन का
(B) प्रभागीय संगठन का
(C) कार्यात्मक संगठन का
(D) केन्द्रीयकृत संगठन का
उत्तर:
(C) कार्यात्मक संगठन का

प्रश्न 20.
उत्पादन रेखा पर आधारित सामूहिक क्रिया अंग है
(A) अन्तरित संगठन का
(B) प्रभागीय संगठन का
(C) कार्यात्मक संगठन का
(D) स्वायत्तशासित संगठन का
उत्तर:
(B) प्रभागीय संगठन का

प्रश्न 21.
अफवाहों को बढ़ावा देने वाले संगठन स्वरूप को समझा जाता है
(A) केन्द्रीयकृत संगठन
(B) विकेन्द्रीयकृत संगठन
(C) अनौपचारिक संगठन
(D) औपचारिक संगठन
उत्तर:
(C) अनौपचारिक संगठन

प्रश्न 22.
प्रशिक्षण की विधियाँ हैं
(A) कार्य बदली प्रशिक्षण
(B) कार्य पर प्रशिक्षण
(C) प्रशिक्षुता प्रशिक्षण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 23.
विकास का उद्देश्य है
(A) योग्यता में वृद्धि
(B) श्रेष्ठ निष्पादन
(C) पदोन्नति के अवसर
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 24.
कर्मचारियों का चयन होता है
(A) निम्न श्रेणी के आँधकारियों के द्वारा
(B) मध्यम श्रेणी के अधिकारियों के द्वारा
(C) उच्चतम श्रेणी के अधिकारियों के द्वारा
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 25.
संगठन के जीवन में भर्ती होती है
(A) एक बार
(B) दो बार
(C) कभी-कभी
(D) निरन्तर
उत्तर:
(D) निरन्तर

प्रश्न 26.
कर्मचारियों के विकास में सम्मिलित है
(A) पदोन्नति
(B) स्थानान्तरण
(C) प्रशिक्षण
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी

प्रश्न 27.
प्रभावी सन्देशवाहन में ………… भाषा का उपयोग नहीं होना चाहिएं
(A) स्पष्ट
(B) प्रभावशाली
(C) अस्पष्ट
(D) शालीन
उत्तर:
(C) अस्पष्ट

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 28.
सन्देशवाहन के प्रकार हैं
(A) लिखित
(B) मौखिक
(C) औपचारिक
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

प्रश्न 29.
समतल सन्देशवाहन में सुझाव का प्रवाह होता है
(A) ऊपर की ओर
(B) नीचे की ओर
(C) समतल स्तर पर
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(C) समतल स्तर पर

प्रश्न 30.
प्रभावी सन्देशवाहन में बाधा है
(A) भाषा
(B) दूरी
(C) व्यक्तिगत भिन्नताएँ
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

प्रश्न 31.
यदि आप सन्देशवाहन का प्रमाण रखना चाहते है, तो आपको ……………… सन्देशवाहन का उपयोग करना चाहिए।
(A) अनौपचारिक
(B) औपचारिक
(C) मौखिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) औपचारिक

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 32.
प्रभावी सन्देशवाहन के लिए आवश्यक है
(A) स्पष्टता
(B) शिष्टता
(C) निरन्तरता
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

प्रश्न 33.
नियन्त्रण क्रिया है
(A) महंगी
(B) सस्ती
(C) अनार्थिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) महंगी

प्रश्न 34.
नियन्त्रण आवश्यक है
(A) लघु-उपक्रम के लिए
(B) मध्यम श्रेणी के उपक्रम के लिए
(C) बड़े आकार वाले उपक्रम के लिए
(D) उपरोक्त सभी के लिए।
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी के लिए।

प्रश्न 35.
नियन्त्रण का कर्मचारी ………. करते हैं।
(A) विरोध
(B) समर्थन
(C) पसन्द
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) विरोध

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 36.
नियन्त्रण संबंधित है
(A) परिणाम
(B) कार्य
(C) प्रवास
(D) किसी से नहीं
उत्तर:
(A) परिणाम

प्रश्न 37.
एक व्यवसाय की चालू सम्पत्तियों की वित्त व्यवस्था होनी चाहिए
(A) केवल चालू दायित्वों से
(B) केवल दीर्घकालीन दायित्वों से
(C) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दोनों से अंशतः
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(C) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दोनों से अंशतः

प्रश्न 38.
स्थाई सम्पत्तियों की वित्त व्यवस्था होनी चाहिए
(A) दीर्घकालीन दायित्वों से
(B) अल्पकालीन दायित्वों से
(C) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दायित्वों के मिश्रण से
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन दायित्वों के मिश्रण से

प्रश्न 39.
सन् 2004 में भारत में स्कंध विपणियों की संख्या थी
(A) 20
(B) 21
(C) 23
(D) 34
उत्तर:
(D) 34

प्रश्न 40.
भारत में सबसे पहले स्कंध विपणि की स्थापना हुई थी
(A) 1857
(B) 1877
(C) 1887
(D) 1987
उत्तर:
(C) 1887

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 41.
विश्व में सबसे पहले स्कंध विपणि की स्थापना हुई थी
(A) दिल्ली
(B) लन्दन
(C) अमेरिका
(D) जापान
उत्तर:
(B) लन्दन

प्रश्न 42.
स्कंध विपणियों के लिए सेबी की सेवाएं है
(A) ऐच्छिक
(B) आवश्यक
(C) अनावश्यक
(D) अनिवार्य
उत्तर:
(D) अनिवार्य

प्रश्न 43.
सेबी का मुख्य कार्यालय है
(A) दिल्ली
(B) मुम्बई
(C) कोलकाता
(D) चेन्नई
उत्तर:
(B) मुम्बई

प्रश्न 44.
भारत में स्कन्ध विपणियों का भविष्य है
(A) उज्जवल
(B) अंधेरे में
(C) सामान्य
(D) कोई भविष्य नहीं
उत्तर:
(A) उज्जवल

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 45.
रेपो है
(A) पुनर्खरीद समझौता (विलेख)
(B) रिलायन्स पेट्रोलियम
(C) रीड एण्ड प्रोसेस (पढ़ो और प्रक्रम करो)
(D) उपर्युक्त कुछ भी नहीं
उत्तर:
(A) पुनर्खरीद समझौता (विलेख)

प्रश्न 46.
प्रचार का सबसे महंगा साधन है
(A) विज्ञापन
(B) व्यक्तिगत विक्रय
(C) विक्रय संवर्द्धन
(D) जन-सम्पर्क
उत्तर:
(B) व्यक्तिगत विक्रय

प्रश्न 47.
भारत में गैर-सरकारी कार्यरत संगठन है
(A) वॉइस
(B) कॉमन कॉज
(C) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) दोनों

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

प्रश्न 48.
उपभोक्ता विवादों के निपटारे की अवस्था तंत्र है
(A) एक स्तरीय
(B) त्रिस्तरीय
(C) द्वि-स्तरीय
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(B) त्रिस्तरीय

प्रश्न 49.
कार्य पर स्वयं-विकास आवश्यकताएँ ……….. के द्वारा पूर्ण की जाती हैं।
(A) कार्य में मेहनत
(B) किस्म उत्पाद आश्वस्त करना
(C) प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रशिक्षण कार्यक्रम में भागीदारी

प्रश्न 50.
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के प्रति भारत के सरकारी तन्त्र का दृष्टिकोण है
(A) विनाशात्मक
(B) नकारात्मक
(C) रचनात्मक
(D) असहयोगात्मक
उत्तर:
(D) असहयोगात्मक

Bihar Board 12th Business Studies VVI Objective Questions Model Set 6 in Hindi

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 6 साझेदारी का पुनर्गठन-साझेदारी का अवकाश ग्रहण

Bihar Board 12th Accountancy Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 6 साझेदारी का पुनर्गठन-साझेदारी का अवकाश ग्रहण

प्रश्न 1.
साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर संचित लाभों को किसके पूँजी खाते में जमा किया जाना चाहिए?
(A) सभी साझेदारों के पुराने अनुपात में
(B) शेष बचे हुए साझेदारों के नये अनुपात में
(C) सिर्फ अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के उसके अनुपात में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) सभी साझेदारों के पुराने अनुपात में

Bihar Board 12th Accountancy Objective Answers Chapter 6 साझेदारी का पुनर्गठन-साझेदारी का अवकाश ग्रहण

प्रश्न 2.
साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर, ख्याति की पूरी राशि किसके पूँजी खाते में क्रेडिट की जा सकती है :
(A) अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के
(B) शेष साझेदारों के
(C) सभी साझेदारों के
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) सभी साझेदारों के

प्रश्न 3.
बाहर जाने वाले ( अवकाश ग्रहण करने वाले) साझेदार को शेष साझेदार के पक्ष में फर्म के भावी लाभां के त्याग के लिए क्षतिपूर्ति की जाती है। शेष साझेदार ऐसी क्षतिपूर्ति का अंश करते हैं :
(A) लाभ प्राप्ति अनुपात में
(B) पूँजी अनुपात में
(C) त्याग अनुपात में
(D) लाभ-विभाजन अनुपात में
उत्तर-
(A) लाभ प्राप्ति अनुपात में

प्रश्न 4.
लाभ-प्राप्ति अनुपात की गणना की जाती है:
(A) एक नये साझेदार के प्रवेश के समय
(B) किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर
(C) साझेदारी फर्म के विघटित होने पर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर

प्रश्न 5.
एक साझेदार के अवकाश ग्रहण करने के समय अलिखित सम्पत्तियों का व्यवहार किस प्रकार किया जाता है ?
(A) पुनर्मूल्यांकन खाता में क्रेडिट
(B) सिर्फ अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के पूँजी खाता को क्रेडिट
(C) पुनर्मूल्यांकन खाता को डेबिट
(D) साझेदारों के पूँजी खाते को जमा
उत्तर-
(A) पुनर्मूल्यांकन खाता में क्रेडिट

प्रश्न 6.
एक साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर, सम्पत्ति एवं दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन के लाभ पूँजी खाते में जमा किये जाने चाहिए :
(A) सभी साझेदारों के, पुराने लाभ-विभाजन के अनुपात में
(B) बचे हुए साझेदारों के, पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में
(C) बचे हुए साझेदारों के, नये लाभ-विभाजन अनुपात में ।
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) सभी साझेदारों के, पुराने लाभ-विभाजन के अनुपात में

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प्रश्न 7.
किसी साझेदार की सेवानिवृत्ति पर, सेवानिवृत्त साझेदार के पूँजी खाते को जमा किया जायेगा :
(A) उसके भाग को ख्याति के साथ
(B) फर्म की ख्याति के साथ
(C) शेष साझेदारों के भाग की ख्याति के साथ
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) उसके भाग को ख्याति के साथ

प्रश्न 8.
फर्म के द्वारा संयुक्त बीमा पॉलिसी ली जा सकती है………जीवन पर :
(A) सभी साझेदारों के संयुक्त
(B) सभी साझेदारों के पृथक्-पृथक्
(C) फर्म के कर्मचारियों के
(D) (A) एवं (B) दोनों
उत्तर-
(D) (A) एवं (B) दोनों

प्रश्न 9.
अ, ब और स एक फर्म में समान साझेदार हैं । ब अवकाश ग्रहण करता है । शेष साझेदारों ने नई फर्म के लाभों को 5:4 के अनुपात में बाँटने का निश्चय किया। प्राप्ति अनुपात होगा :
(A) 2 : 1
(B) 1 : 2
(C) 4 :5
(D) 5 : 4
उत्तर-
(A) 2 : 1

प्रश्न 10.
अ, ब और स \(\frac{1}{2}: \frac{1}{3}: \frac{1}{6}\) के अनुपात में लाभ बाँटते हैं । स अवकाश ग्रहण करता है। प्राप्ति अनुपात होगा :
(A) 2 :1
(B) 2 : 3
(C) 3 : 2
(D) 1 : 2
उत्तर-
(C) 3 : 2

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प्रश्न 11.
सामान्य संचय की राशि को सभी साझेदारों के पूँजी खाते में हस्तान्तरित किया जाता है :
(A) नये लाभ-हानि अनुपात में
(B) पूँजी के अनुपात में
(C) पुराने लाभ-हानि अनुपात
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) पुराने लाभ-हानि अनुपात

प्रश्न 12.
अभिषेक, रजत और विवेक लाभों का विभाजन 5 : 3 : 2 के अनुपात में करते हैं। यदि विवेक सेवानिवृत्त होता है तो अभिषेक तथा रजत का नया लाभ विभाजन अनुपात होगा :
(A) 3 : 2
(B) 5 : 3
(C) 5 : 2
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) 5 : 3

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प्रश्न 13.
संयुक्त जीवन बीमा-पत्र खाता और संयुक्त बीमा-पत्र संचय खाता का शेष हमेशा होता है :
(A) समान
(B) असमान
(C) कोई आवश्यक नहीं
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) कोई आवश्यक नहीं

प्रश्न 14.
आनन्द, बहादुर और चंदर लाभों का विभाजन समान रूप से करते हुए साझेदार हैं। चंदर के अवकाश ग्रहण करने पर आनंद और बहादुर ने उसके भाग का अधिग्रहण 3:2 के अनुपात में किया। आनन्द और बहादुर का नया लाभ विभाजन अनुपात होगा :
(A) 8 : 7
(B) 4 : 5
(C) 3 : 2
(D) 2 : 3
उत्तर-
(A) 8 :7

प्रश्न 15.
अवकाश ग्रहण करने के समय पुनर्मूल्यांकन के लाभ-हानि को वहन किया जाता है :
(A) बचे हुए साझेदारों द्वारा
(B) सभी साझेदारों द्वारा
(C) नये साझेदार द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) सभी साझेदारों द्वारा

प्रश्न 16.
एक्स, वाई, जेड एक फर्म में बराबर के साझेदार हैं । जेड फर्म से अवकाश ग्रहण करता है । एक्स और वाई के बीच लाभ-विभाजन का अनुपात 1: 2 है। लाभ-प्राप्ति अनुपात होगा :
(A) 3 : 2
(B) 2 : 1
(C) 4:1
(D) केवल Y 1/3 प्राप्त करता है
उत्तर-
(D) केवल Y 1/3 प्राप्त करता है

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प्रश्न 17.
X, Y,Z3:4के अनुपात में लाभों को विभाजित करते हुए साझेदार हैं। Y अवकाश ग्रहण करता है और X एवं Z अपना लाभ समान अनुपात में बाँटते हैं। X एवं Z का नया अनुपात होगा :
(A) 1 : 2
(B) 2 : 1
(C) 3 : 1
(D) 1 : 1
उत्तर-
(D) 1 : 1

प्रश्न 18.
A, B और C साझेदार हैं और उनकी पूँजी क्रमशः 1,00,000 रु., 75,000 रु. एवं 50,000 रु. है। C के अवकाश ग्रहण पर उसके अंश को A एवं B ने 6:4के अनुपात में खरीद लिया। लाभ-प्राप्ति अनुपात होगा :
(A) 3 : 2
(B) 2 : 2
(C) 2 : 3
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) 3:2

प्रश्न 19.
एक साझेदार के अवकाश ग्रहण करने के समय, सभी साझेदारों के लिए किये गये फर्म की संयुक्त बीमा जीवन पॉलिसी के विरुद्ध फर्म को बीमा कंपनी से प्राप्त होता है :
(A) पॉलिसी राशि + बोनस
(B) समर्पण मूल्य
(C) पॉलिसी राशि
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) समर्पण मूल्य

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प्रश्न 20.
लाभ-प्राप्ति अनुपात है :
(A) नया अनुपात – त्याग अनुपात
(B) पुराना अनुपात – त्याग अनुपात
(C) नया-अनुपात – पुराना अनुपात
(D) पुराना अनुपात – नया अनुपात
उत्तर-
(C) नया-अनुपात – पुराना अनुपात

प्रश्न 21.
साझेदारी अधिनियम प्रावधान करता है कि अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार द्वारा छोड़े गए पूँजी शेष पर ब्याज मिलना चाहिए :
(A) 5%
(B) 6%
(C) बैंक दर
(D) 8%
उत्तर-
(B) 6%

प्रश्न 22.
हरी, रॉय तथा प्रसाद साझेदार हैं तथा उनका लाभ विभाजन अनुपात 3:5:1 है । रॉय अब अवकाश चाहता है। उसका हिस्सा प्रसाद ने ले लिया। हरि तथा प्रसाद का नया अनुपात होगा :
(A) 1 : 2
(B) 2 : 1
(C) 3 : 5
(D) बराबर
उत्तर-
(A) 1 : 2

प्रश्न 23.
A, B तथा C,5:3:2 के अनुपात में लाभ बाँटते हुए साझेदार हैं। A अवकाश ग्रहण करता है। प्राप्ति अनुपात ज्ञात कीजिए :
(A) 3 :2
(B) 5 : 3
(C) 5 : 2
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) 3 :2

प्रश्न 24.
बीमा पॉलिसी के समर्पित मूल्य से अर्थ उस मूल्य से है :
(A) जो किसी साझेदार की मृत्यु पर प्राप्त हो
(B) जो पॉलिसी के देय होने पर प्राप्त हो
(C) जो पॉलिसी के देय तिथि से पर्व प्राप्त हो सकता है
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर-
(C) जो पॉलिसी के देय तिथि से पर्व प्राप्त हो सकता है

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प्रश्न 25.
P, Q तथा R साझेदार हैं और उनका लाभ विभाजन अनुपात 5:3:2 है । R अवकाश ग्रहण करता है और अपने हिस्से का 3/5 P के पक्ष में तथा 2/5 Q के पक्ष में समर्पित करता है। नया लाभ-विभाजन अनुपात ज्ञात कीजिए।
(A) 7 : 3
(B) 1 : 2
(C) 31 : 19
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) 31 : 19

प्रश्न 26.
गोविन्द, हरी और प्रताप साझेदार हैं । गोविन्द की सेवानिवृत्ति पर चिट्ठे में ख्याति को 24,000 रु. पहले से ही दर्शाया गया है। ख्याति को अपलिखित किया जायेगा :
(A) सभी साझेदारों के पूँजी खातों को उनके पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में डेबिट करके
(B) शेष साझेदारों के पूँजी खातों को उनके नये लाभ-विभाजन अनुपात में डेबिट करके
(C) सेवानिवृत्त साझेदार के पूँजी खाते को उसके भाग की ख्याति में डेबिट करके
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) सभी साझेदारों के पूँजी खातों को उनके पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में डेबिट करके

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प्रश्न 27.
अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार को ख्याति दी जाती है :
(A) पुराने लाभ विभाजन अनुपात में
(B) पूँजी के अनुपात में
(C) बराबर अनुपात में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) पुराने लाभ विभाजन अनुपात में

प्रश्न 28.
साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर उसके हिस्से की ख्याति को शेष साझेदारों के मध्य अपलिखित कर दिया जाता है :
(A) नए लाभ-विभाजन अनुपात में
(B) नए पूँजी के अनुपात में
(C) लाभ-प्राप्ति के अनुपात में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) लाभ-प्राप्ति के अनुपात में

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प्रश्न 29.
किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार के पूँजी खाते को जमा किया जाएगा :
(A) उसके उसकी ख्याति के हिस्से
(B) फर्म की ख्याति
(C) शेष साझेदारों के ख्याति के हिस्से से
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(A) उसके उसकी ख्याति के हिस्से

प्रश्न 30.
साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर, सामान्य संचय की राशि को सभी साझेदारों के पूँजी खाते में हस्तान्तरित किया जाता है :
(A) नये लाभ-हानि अनुपात में
(B) पूँजी के अनुपात में
(C) पुराने लाभ-हानि अनुपात में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(C) पुराने लाभ-हानि अनुपात में

प्रश्न 31.
X, Y एवं Z. लाभों को 5:3:2 के अनुपाम में विभाजित करते थे। ख्याति पुस्तक में प्रदर्शित नहीं है, परंतु इसका मूल्य 1,00,000 रु. लगाया गया। X फर्म से अवकाश ग्रहण करता है और Y एवं Z भविष्य के लाभों को बराबर-बराबर बाँटने का निश्चय करते हैं। X के ख्याति में हिस्से को Y एवं Z के पूँजी खाते में……….अनुपात में डेबिट किया जाएगा।
(A) \(\frac{1}{2}: \frac{1}{2}\)
(B) 2 :3
(C) 3 : 2
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(B) 2 : 3

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प्रश्न 32.
x, y और 2 साझेदार हैं और लाभों का 5 : 3 : 2 के अनुपात में विभाजित करते हैं । y अवकाश ग्रहण करता है और x,y से 1/10 तथा z y से 1/5 ग्रहण करता है तो नया लाभ विभाजन अनुपात होगा:
(A) 7 : 13
(B) 13 : 7
(C) 3 : 2
(D) 1 : 1
उत्तर-
(C) 3 : 2

प्रश्न 33.
राजेन्दर, सतीश तथा तेजपाल का पुराना लाभ-विभाजन 2 : 2 : 1 है । सतीश की सेवानिवृत्ति के बाद उनका लाभ-विभाजन अनुपात 3:2 है। अधिलाभ अनुपात है :
(A) 3 : 2
(B) 2 : 1
(C) 1 : 1
(D) 2 : 3
उत्तर-
(C) 1:1