Bihar Board Class 6th Books Solutions

Bihar Board Class 6th Books Solutions

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BSEB Bihar Board Class 6th Text Books Solutions

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Bihar Board 12th Geography Objective Questions and Answers Key Pdf Download in Hindi & English

Bihar Board Class 12th Intermediate Geography Objective Questions and Answers Key 2019, 2020, 2021 Pdf free download in Hindi Medium and English Medium.

Bihar Board 12th Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Intermediate Geography Objective Questions and Answers Key 2020-2021 Pdf Download

Bihar Board 12th Geography Objective Questions and Answers in Hindi

Part 1: Principal of Human Geography (खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

Part 2: India – People and Economy (खण्ड 2: भारत – लोग और अर्थव्यवस्था)

Bihar Board 12th Geography Objective Questions and Answers in English

Part 1: Principal of Human Geography (खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

  • Chapter 1 Human Geography (Nature and Scope)
  • Chapter 2 The World Population (Distribution, Density and Growth)
  • Chapter 3 Population Composition
  • Chapter 4 Human Development
  • Chapter 5 Primary Activities
  • Chapter 6 Secondary Activities
  • Chapter 7 Tertiary and Quaternary Activities
  • Chapter 8 Transport and Communication
  • Chapter 9 International Trade
  • Chapter 10 Human Settlements

Part 2: India – People and Economy (खण्ड 2: भारत – लोग और अर्थव्यवस्था)

  • Chapter 11 Population: Distribution, Density, Growth and Composition
  • Chapter 12 Migration: Types, Causes and Consequences
  • Chapter 13 Human Development
  • Chapter 14 Human Settlements
  • Chapter 15 Land Resources and Agriculture
  • Chapter 16 Water Resources
  • Chapter 17 Mineral and Energy Resources
  • Chapter 18 Manufacturing Industries
  • Chapter 19 Planning and Sustainable Development in Indian Context
  • Chapter 20 Transport And Communication
  • Chapter 21 International Trade
  • Chapter 22 Geographical Perspective on Selected Issues and Problems

Bihar Board 12th Sociology Objective Questions and Answers Key Pdf Download in Hindi & English

Bihar Board Class 12th Intermediate Sociology Objective Questions and Answers Key 2019, 2020, 2021 Pdf free download in Hindi Medium and English Medium.

Bihar Board 12th Objective Questions and Answers

Bihar Board 12th Intermediate Sociology Objective Questions and Answers Key 2020-2021 Pdf Download

Bihar Board 12th Sociology Objective Questions and Answers in Hindi

Bihar Board Class 12 Sociology: Indian Society (खण्ड अ – भारतीय समाज)

Bihar Board Class 12 Sociology: Social Change and Development in India (खंड ब – भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास)

Bihar Board 12th Sociology Objective Questions and Answers in English

Bihar Board Class 12 Sociology: Indian Society (खण्ड अ – भारतीय समाज)

  • Chapter 1 Introducing Indian Society
  • Chapter 2 The Demographic Structure of the Indian Society
  • Chapter 3 Social Institutions: Continuity and Change
  • Chapter 4 The Market as a Social Institution
  • Chapter 5 Patterns of Social Inequality and Exclusion
  • Chapter 6 The Challenges of Cultural Diversity

Bihar Board Class 12 Sociology: Social Change and Development in India (खंड ब – भारत में सामाजिक परिवर्तन एवं विकास)

  • Chapter 7 Structural Change
  • Chapter 8 Cultural Change
  • Chapter 9 The Story of Indian Democracy
  • Chapter 10 Change and Development in Rural Society
  • Chapter 11 Change and Development in Industrial Society
  • Chapter 12 Globalisation and Social Change
  • Chapter 13 Mass Media and Communications
  • Chapter 14 Social Movements

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

BSEB Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ

Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

Bihar Board Class 9 Science हमारे आस-पास के पदार्थ InText Questions and Answers

प्रश्न श्रृंखला # 01 (पृष्ठ संख्या 4)

Bihar Board Class 9 Science Solution प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ हैं-कुर्सी, वायु, स्नेह, गंध, घृणा, बादाम, विचार, शीत, नींबू पानी, इत्र की सुगंध।
उत्तर:
कुर्सी, वायु, बादाम, नींबू पानी पदार्थ हैं।

Bihar Board Class 9 Science Solution In Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रेक्षण के कारण बताएँ गर्मा-गर्म खाने की गंध कई मीटर दूर से ही आपके पास पहुँच जाती है लेकिन ठंडे खाने की महक लेने के लिए आपको उसके पास जाना पड़ता है।
उत्तर:
गर्म खाने की गंध दूर तक पहुँच जाती है क्योंकि तापमान बढ़ने से कणों की गति तेज हो जाती है या उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। अतः गन्ध का वायु में विसरण तेज हो जाता है।

Bihar Board Solution Class 9 Science प्रश्न 3.
स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी काट पाता है। इससे पदार्थ का कौन-सा गुण प्रेक्षित होता है ?
उत्तर:
स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी काट पाता है क्योंकि पानी के कणों के बीच आकर्षण बल ठोसों की तुलना में कम होता है।

Bihar Board 9th Class Science Book Pdf In Hindi प्रश्न 4.
पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएँ होती हैं ?
उत्तर:
पदार्थ के कणों की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं –

  1. पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है।
  2. वे निरन्तर गतिशील होते हैं, अर्थात् उनमें गतिज ऊर्जा होती है।
  3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

प्रश्न श्रृंखला # 02 (पृष्ठ संख्या 6)

Bihar Board Class 9 Science Book Solutions प्रश्न 1.
किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं। (घनत्व = द्रव्यमान/आयतन) बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिखित को व्यवस्थित करें-वायु, चिमनी का धुआँ, शहद, जल, चॉक, रुई और लोहा।
उत्तर:
वायु, चिमनी का धुआँ, जल, शहद, रुई, चॉक, लोहा।

Bihar Board Class 9th Science Solution प्रश्न 2.
(a) पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों में होने वाले अन्तर को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 9 Chemistry Solutions

Bihar Board 9th Class Chemistry प्रश्न 2.
(b) निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए-दृढ़ता, संपीड्यता, तरलता, बर्तन में गैस का भरना, आकार, गतिज ऊर्जा एवं घनत्व।
उत्तर:

  1. दृढ़ता – ठोस दृढ़ होते हैं क्योंकि उनके कणों के बीच में रिक्त स्थान काफी कम व आकर्षण बल बहुत अधिक होता है। बाह्य बल लगाने पर भी ये
  2. अपने आकार को बनाये रखते हैं। अत्यधिक बल लगाने पर ये टूट सकते हैं, पर इनका आकार नहीं बदलता।
  3. संपीड्यता – बाह्य बल लगाने पर गैसों के आयतन में परिवर्तन होता है क्योंकि उसके कणों के बीच में अत्यधिक रिक्त स्थान व न्यून आकर्षण बल
  4. होता है। अतः उनकी संपीड्यता सबसे अधिक होती है।
  5. तरलता – द्रवों में बहाव होता है और इनका आकार बदलता है, इसीलिए ये दृढ़ नहीं लेकिन तरल होते हैं।
  6. बर्तन में गैस का भरना – संपीड्यता काफी अधिक होने के कारण गैस के अत्यधिक आयतन को एक कम आयतन वाले बर्तन में संपीडित किया जा
  7. सकता है व आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है।
  8. आकार – ठोसों का आकार निश्चित होता है। बाहरी दाब का उनके आकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, द्रवों का आकार बदलता रहता है। जिस
  9. बर्तन में इन्हें रखा जाये ये उसका आकार ले लेते हैं। गैसों का कोई आकार नहीं होता।
  10. गतिज ऊर्जा – पदार्थ में कणों की गति के कारण जो ऊर्जा होती है वह गतिज ऊर्जा कहलाती है। पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील रहते हैं, अर्थात्
  11. उनमें गतिज ऊर्जा होती है। तापमान बढ़ने से कणों की गति तेज हो जाती है। इसलिए तापमान बढ़ने से कणों की गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है।
  12. घनत्व – किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं।
  13. घनत्व = द्रव्यमान/आयतन।
  14. ठोसों का घनत्व सबसे अधिक, द्रवों का ठोसों से कम व गैसों का बहुत कम होता है।

Bihar Board Class 9th Physics प्रश्न 3.
कारण बताएँ –
(a) गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है जिसमें इसे रखते हैं।
उत्तर:
गैसीय अवस्था में कणों की गति अनियमित और अत्यधिक तीव्र होती है एवं कणों के बीच रिक्त स्थान भी अधिक होता है। अत: गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं।

(b) गैस बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती है।
उत्तर:
गैस के कणों की गति अत्यधिक तीव्र एवं अनियमित होती है। इस अनियमित गति के कारण ये कण आपस में एवं बर्तन की दीवारों से टकराते हैं। बर्तन की दीवार पर गैस कणों द्वारा प्रति इकाई क्षेत्र पर लगे बल के कारण गैस का दबाव बनता है।

(c) लकड़ी की मेज ठोस कहलाती है।
उत्तर:
लकड़ी की मेज का एक निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ तथा स्थिर आयतन या नगण्य संपीड्यता होती है। बाह्य बल लगाने पर भी यह अपने आकार को बनाये रखती है। इसमें दृढ़ता होती है अतः यह ठोस कहलाती है।

(d) हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं, लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा।
उत्तर:
हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं क्योंकि हवा गैसीय अवस्था में होती है। अतः उसके कणों के बीच अत्यधिक रिक्त स्थान एवं नगण्य आकर्षण बल होता है। जबकि ठोस लकड़ी दृढ़ होती है। उसके कणों के बीच बहुत कम रिक्त स्थान होता है एवं उनके बीच का आकर्षण बल बहुत अधिक होता है जिस कारण उसको तोड़ने में बहुत अधिक बल की आवश्यकता होती है।

Bihar Board 9th Class Science Book Pdf प्रश्न 4.
सामान्यतया ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है। लेकिन आपने बर्फ के टुकड़े को जल में तैरते हुए देखा होगा। पता लगाइए, ऐसा क्यों होता है ?
उत्तर:
सामान्यतया ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है लेकिन जल जब ठंडा होकर बर्फ बनाता है तो उसके कणों के मध्य रिक्त स्थान में वृद्धि होती है जिसके परिणामस्वरूप उसके आयतन में भी वृद्धि हो जाती है। अत: बर्फ का घनत्व जल के घनत्व से कम हो जाता है फलस्वरूप बर्फ का टुकड़ा जल पर तैरता है।

प्रश्न श्रृंखला # 03 (पृष्ठ संख्या 9)

Bihar Board Class 9 Science प्रश्न 1.
निम्नलिखित तापमान को सेल्सियस में बदलें –
(a) 300 K
(b) 573 K
हल : (a) 300 K
0°C = 273 K
300 K = 300 – 273
उत्तर:
= 27°C

(b) 573 K
573 K = 573 – 273
उत्तर:
= 300°C

Class 9 Science Notes Bihar Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित तापमान पर जल की भौतिक अवस्था क्या होगी?
(a) 250°C
(b) 100°C.
उत्तर:
(a) 250°C पर जल वाष्प अवस्था में होगा।
(b) 100°C पर जल द्रव से वाष्प अवस्था में बदलता है। 100°C जल का क्वथनांक होता है। इस ताप पर जल वाष्प व द्रव दोनों अवस्था में होगा।

Bihar Board Class 9 Biology Solutions प्रश्न 3.
किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों रहता है ?
उत्तर:
अवस्था परिवर्तन के दौरान पदार्थ का तापमान स्थिर रहता है क्योंकि पदार्थ अवस्था परिवर्तन के दौरान ऊष्मा को अवशोषित करता है व कणों के पारस्परिक आकर्षण बल को वशीभूत करके पदार्थ की अवस्था को बदलने में इस ऊष्मा का उपयोग होता है। इस ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। तापमान में बिना किसी तरह की वृद्धि दर्शाये इस ऊष्मीय ऊर्जा को पदार्थ अवशोषित कर लेता है।

Bihar Board Class 9 Science Book प्रश्न 4.
वायुमण्डलीय गैसों का द्रव में परिवर्तन करने के लिए कोई विधि सुझाइए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय गैसों को दाब बढ़ाकर या संपीडित करके व तापमान घटाकर द्रव में परिवर्तित किया जा सकता है।

प्रश्न श्रृंखला # 04 (पृष्ठ संख्या 11)

Bihar Board Class 9 Physics Solution प्रश्न 1.
गर्म एवं शुष्क दिन में कूलर अधिक ठंडा क्यों करता है ?
उत्तर:
गर्म एवं शुष्क दिन में तापमान की अधिकता व आर्द्रता 1 में कमी के कारण वाष्पीकरण की दर तेज होती है। वाष्पीकरण की दर अधिक होने के कारण कूलर अधिक ठंडा करता है।

Bihar Board Class 9 Physics Solutions प्रश्न 2.
गर्मियों में घड़े का जल ठंडा क्यों होता है ?
उत्तर:
गर्मियों में तापमान अधिक होता है अतः घड़े की बाहरी सतह से जल के वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। वाष्पीकरण के दौरान घड़े की सतह के कण घड़े के अन्दर के जल से या आसपास से ऊर्जा प्राप्त करके वाष्प में बदल जाते हैं। वाष्पीकरण की प्रसुप्त ऊष्मा के बराबर ऊष्मीय ऊर्जा घड़े के जल से अवशोषित हो जाती है, जिससे जल शीतल हो जाता है।

Bihar Board Class 9 Physics Book प्रश्न 3.
ऐसीटोन/पेट्रोल या इत्र डालने पर हमारी हथेली ठंडी क्यों हो जाती है ?
उत्तर:
जब ऐसीटोन/पेट्रोल या इत्र को हम हथेली पर गिराते हैं तो इसके कण हमारी हथेली या उसके आस-पास से ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं और वाष्पीकृत हो जाते हैं जिससे हथेली पर शीतलता महसूस होती है।

Bihar Board Solution Class 9 Biology प्रश्न 4.
कप की अपेक्षा प्लेट से हम गर्म दूध या चाय जल्दी क्यों पी लेते हैं ?
उत्तर:
वाष्पीकरण एक सतही प्रक्रिया है। सतही क्षेत्र बढ़ने पर वाष्पीकरण की दर भी बढ़ जाती है। अतः प्लेट में गर्म दूध या चाय डालने पर वह जल्दी ठण्डी हो जाती है, क्योंकि उसकी वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है, और हम उसे जल्दी पी लेते हैं।

Bihar Board Class 9 Chemistry Solutions प्रश्न 5.
गर्मियों में हमें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर:
गर्मियों में हमें सूती कपड़े पहनने चाहिए क्योंकि गर्मियों में हमें अधिक पसीना आता है। चूंकि सूती कपड़ों में जल का.अवशोषण अधिक होता है, अतः हमारा पसीना इसमें अवशोषित होकर वायुमण्डल में आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है और हमें शीतलता मिलती है।

क्रियाकलाप 1.1 (पृष्ठ संख्या 1)

प्रश्न 1.
आपके अनुसार नमक या शर्करा का क्या हुआ ?
उत्तर:
नमक या शर्करा जल (पानी) में घुल गई।

प्रश्न 2.
ये कहाँ गायब हुए ?
उत्तर:
नमक या शर्करा को जल में घोलने पर इनके कण जल के कणों के बीच के रिक्त स्थानों में समावेशित हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
क्या जल के स्तर में कोई बदलाव आया ?
उत्तर:
नहीं, जल के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया।

क्रियाकलाप 1.2 (पृष्ठ संख्या 2)

प्रश्न 1.
क्या जल अब भी रंगीन है ?
उत्तर:
प्रत्येक बार तनुकृत करने पर घोल का रंग हल्का होता जाता है, फिर भी पानी रंगीन नजर आता है।

क्रियाकलाप 1.3 (पृष्ठ संख्या 2)

प्रश्न 1.
अपनी कक्षा के किसी कोने में एक बुझी हुई अगरबत्ती रख दें। इसकी सुगन्ध लेने के लिए आपको इसके कितने समीप जाना पड़ता है ?
उत्तर:
बुझी हुई अगरबत्ती की सुगन्ध लेने के लिए हमें इसके एकदम समीप जाना पड़ता है।

प्रश्न 2.
अगर अगरबत्ती जला दें। क्या होता है ? क्या दूर से इसकी सुगन्ध आपको मिलती है ?
उत्तर:
अगरबत्ती जलाने पर इसका धुआँ फैलने लगता है या वायु में विसरित हो जाता है व दूर से इसकी सुगन्ध हमें मिलने लगती है।

क्रियाकलाप 1.4 (पृष्ठ संख्या 2)

प्रश्न 1.
स्याही की बूंद डालने के तुरन्त बाद आपने क्या देखा?
उत्तर:
स्याही की बूँद डालने के तुरन्त बाद जल का रंग नीला होने लगा।

प्रश्न 2.
शहद की बूंद डालने के तुरन्त बाद आपने क्या देखा?
उत्तर:
शहद की बूंद डालने के बाद जल का रंग धीरे-धीरे पीला होने लगा।

क्रियाकलाप 1.5 (पृष्ठ संख्या 3)

प्रश्न 1.
गिलास में ठोस क्रिस्टल के ठीक ऊपर क्या दिखाई देता है ?
उत्तर:
गिलास में ठोस क्रिस्टल के ठीक ऊपर क्रिस्टल के रंगीन कण जल में गति करते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 2.
समय बीतने पर क्या होता है ?
उत्तर:
समय बीतने पर कॉपर सल्फेट या पोटैशियम परमैंगनेट के कण समान रूप से पानी में वितरित हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
इससे ठोस और द्रव के कणों के बारे में क्या पता चलता है ?
उत्तर:
इससे पता चलता है कि ठोस के कण द्रव के कणों के रिक्त स्थानों में समावेशित हो जाते हैं व पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील होते हैं।

प्रश्न 4.
क्या तापमान के साथ मिश्रित होने की दर बदलती है ? क्यों और कैसे ?
उत्तर:
तापमान बढ़ने पर मिश्रित होने की दर तेज हो जाती है क्योंकि तापमान बढ़ने से पदार्थ के कणों की गति तेज हो जाती है। पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील होते हैं या उनमें गतिज ऊर्जा होती है। तापमान बढ़ने से कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है व उनका विसरण या मिश्रित होना तेज हो जाता है।

क्रियाकलाप 1.6 (पृष्ठ संख्या 3)

प्रश्न 1.
किस समूह को तोड़ना आसान था ? और क्यों ?
उत्तर:
तीसरे समूह को जोड़ना आसान था क्योंकि उसमें मानव श्रृंखला के मानवों ने एक-दूसरे को केवल उँगली के सिरे से छूकर श्रृंखला बनाई थी। अतः उनके बीच न्यून बल था।

प्रश्न 2.
यदि हम प्रत्येक विद्यार्थी को पदार्थ का एक कण मानें तो किस समूह में कणों ने एक-दूसरे को अधिक बल से पकड़ रखा था ?
उत्तर:
पहले समूह ने।

क्रियाकलाप 1.7 (पृष्ठ संख्या 3)

प्रश्न 1.
लोहे की कील, चॉक व रबर बैंड में से किसके कण अधिक बल से एक-दूसरे से जुड़े हैं ?
उत्तर:
लोहे की कील के।

क्रियाकलाप 1.8 (पृष्ठ संख्या 4)

प्रश्न 1.
जल का नल खोलकर जल की धार को अपनी उँगली से काटने का प्रयास करें। क्या जल की धार कटती
उत्तर:
नहीं, जल की धार नहीं कटती।

प्रश्न 2.
जल की धार न कटने का क्या कारण है ?
उत्तर:
जल के कणों के बीच आकर्षण बल कार्य करता है जिस कारण जल की धार के कण अलग नहीं होते व धार नहीं कटती।

क्रियाकलाप 1.9 (पृष्ठ संख्या 4)

प्रश्न 1.
क्या पेन, किताब, सुई और लकड़ी की छड़ का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ तथा स्थिर आयतन है ?
उत्तर:
हाँ, इन सभी का निश्चित आकार, स्पष्ट सीमाएँ । तथा स्थिर आयतन है।

प्रश्न 2.
इन पर हथौड़ा मारने, खींचने या गिराने से क्या होता है ?
उत्तर:
बाह्य बल लगाने पर ये सभी ठोस अपने आकार को बनाये रखते हैं। बल लगाने पर ये टूट सकते हैं लेकिन इनका आकार नहीं बदलता।

प्रश्न 3.
क्या इनका एक-दूसरे में विसरण सम्भव है ?
उत्तर:
नहीं, इनका एक-दूसरे में विसरण सम्भव नहीं है, क्योंकि इनके कणों के बीच रिक्त स्थान बहुत न्यून होता है।

प्रश्न 4.
बल लगाकर इनको सम्पीडित करने का प्रयास करें। क्या इनका संपीडन होता है ?
उत्तर:
इनका संपीडन नहीं होता। ये दृढ़ होते हैं।

क्रियाकलाप 1.10 (पृष्ठ संख्या 5)

प्रश्न 1.
जल, खाना पकाने का तेल, दूध, जूस, शीतल पेय को फर्श पर डाल देने पर क्या होगा ?
उत्तर:
इन द्रवों को फर्श पर डाल देने पर ये बहने लगते हैं।

प्रश्न 2.
किसी एक द्रव का 50 ml मापकर विभिन्न बर्तनों में क्रमशः एक-एक करके डालें। क्या प्रत्येक बार आयतन एकसमान रहता है ?
उत्तर:
हाँ, प्रत्येकं बार आयतन एकसमान रहता है।

प्रश्न 3.
क्या द्रव का आकार एकसमान रहता है ?
उत्तर:
नहीं, जिस बर्तन में इसे रखा जाए यह उसी का आकार ले लेता है।

प्रश्न 4.
द्रव को एक बर्तन से दूसरे बर्तन में उड़लने पर क्या यह आसानी से बहता है ? ..
उत्तर:
हाँ, यह तरल होने के कारण आसानी से बहता है।

क्रियाकलाप 1.11 (पृष्ठ संख्या 5)

प्रश्न 1.
आपने क्या देखा ? किस स्थिति में पिस्टन आसानी से अन्दर चला गया ?
उत्तर:
हमने देखा कि हवा भरी सिरिंज का पिस्टन बहुत आसानी से अन्दर चला गया व जल व चॉक भरी सिरिंज के पिस्टन को दबाना मुश्किल था।

प्रश्न 2.
अपने प्रेक्षण से आपने क्या अनुमान लगाया ?
उत्तर:
अपने प्रेक्षण से हमने यह अनुमान लगाया कि ठोसों एवं द्रवों की तुलना में गैसों की संपीड्यता काफी अधिक होती है।

क्रियाकलाप 1.12 (पृष्ठ संख्या 8)

प्रश्न 1.
उपर्युक्त क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं ?
उत्तर:
उपर्युक्त क्रियाकलाप में अमोनियम क्लोराइड या कपूर द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस और वापस ठोस में बदल जाता है। अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि कपूर ऊर्ध्वपातित होता है।

क्रियाकलाप 1.14 (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1.
वाष्पीकरण के निम्नलिखित तथ्यों के बारे में आप क्या अनुमान लगा सकते हैं ? तापमान का प्रभाव, सतह का क्षेत्र और वायु की चाल।
उत्तर:
तापमान का प्रभाव – तापमान में वृद्धि से जल के अधिक कणों में पर्याप्त गतिज ऊर्जा मिलती है, जिससे वे वाष्पीकृत हो जाते हैं।
सतह का क्षेत्र – सतही क्षेत्र बढ़ने पर वाष्पीकरण की दर भी बढ़ जाती है।
वायु की चाल – वायु के तेज होने से जलवाष्प के कण वायु के साथ उड़ जाते हैं जिससे आसपास के जलवाष्प की मात्रा घट जाती है। अतः वाष्पीकरण की दर तेज हो जाती है।

Bihar Board Class 9 Science हमारे आस-पास के पदार्थ Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस इकाई में परिवर्तित करें
(a) 300 K
(b) 573 K
हल : (a) 300 K
0°C = 273 K
300 K = 300 – 273
उत्तर:
= 27°C

(b) 573 K
273 K = 0°C
573 K = 573 – 273
उत्तर:
= 300°C

प्रश्न 2.
निम्नलिखित तापमानों को केल्विन इकाई में परिवर्तित करें
(a) 25°C
(b) 373°C.
हल : (a) 25°C
0°C = 273 K
अतः 25°C = 25 + 273
उत्तर:
= 298K

(b)373°C
0°C = 273 K
अतः 373°C = 373 + 273
उत्तर:
= 646 K

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अवलोकनों हेतु कारण लिखें –
(a) नैफ्थलीन को रखा रहने देने पर यह समय के साथ कुछ भी ठोस पदार्थ छोड़े बिना अदृश्य हो जाती है।
(b) हमें इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है।
उत्तर:
(a) नैफ्थलीन को रखा रहने देने पर यह ऊर्ध्वपातित हो जाती है, अर्थात् यह द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए बिना ठोस अवस्था से सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है।
(b) इत्र के कण वायु में मिल जाते हैं और विसरित होकर हम तक पहुँचते हैं। इत्र के कणों की तेज गति और अत्यधिक रिक्त स्थानों के कारण उनका वायु में विसरण बहुत तीव्रता से होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पदार्थों को उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण के अनुसार व्यवस्थित करें
(a) जल
(b) चीनी
(c) ऑक्सीजन।
उत्तर:
पदार्थों का उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण का क्रम –
ऑक्सीजन < जल < चीनी

प्रश्न 5.
निम्नलिखित तापमानों पर जल की भौतिक अवस्था क्या है –
(a) 25°C
(b) 0°C
(c) 100°C
उत्तर:
(a) 25°C पर द्रव अवस्था।
(b) 0°C पर द्रव व ठोस दोनों अवस्थाएँ सम्भव हैं।
(c) 100°C पर द्रव व गैस दोनों अवस्थाएँ सम्भव हैं।

प्रश्न 6.
पुष्टि हेतु कारण दें –
(a) जल कमरे के ताप पर द्रव है।
(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है।
उत्तर:
(a) जल कमरे के ताप पर द्रव है क्योंकि इसका एक निश्चित आयतन है व इसमें बहाव है।
(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है क्योंकि इसका एक निश्चित आकार व आयतन है। इसमें जल की भाँति बहाव नहीं है।

प्रश्न 7.
273K पर बर्फ को ठंडा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठंडा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है?
उत्तर:
273 K या 0°C पर ठंडा करने पर बर्फ, जल की तुलना में ज्यादा शीतलता प्रदान करती है, क्योंकि वह जल में परिवर्तित होने के लिए संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा जितनी ऊष्मा अवशोषित करती है। जबकि 273 K पर जल की अवस्था में परिवर्तन नहीं होता। अतः यह बर्फ की तुलना में कम ऊर्जा अवशोषित करता है।

प्रश्न 8.
उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है ?
उत्तर:
भाप से उबलते हुए जल की तुलना में जलने की तीव्रता अधिक महसूस होती है क्योंकि भाप के कणों में उसी तापमान पर पानी के कणों की अपेक्षा अधिक ऊर्जा होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भाप के कणों ने वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा के रूप में अतिरिक्त ऊष्मा अवशोषित कर ली है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित चित्र के लिए A,B,C,D, E तथा F की अवस्था परिवर्तन को नामांकित करें –
Bihar Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 हमारे आस-पास के पदार्थ
उत्तर:
A – संगलन
B – वाष्पीकरण
C – संघनन
D – जमना
E – ऊर्ध्वपातन
F – ऊर्ध्वपातन।

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Chapter 1 Indian Civilization and Culture

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Chapter 1 Indian Civilization and Culture

Indian Civilization And Culture Class 12 Objective Questions Bihar Board Question 1.
India’s glory is that it-
(A) Remains movable
(B) Remains immovable
(C) Always flourish
(D) Never give up hope
Answer:
(B) Remains immovable

Indian Civilization And Culture Objective Bihar Board Question 2.
The charge against India is that-
(A) Her civilization is very old
(B) Her people are so uncivilized, ignorant and stolid
(C) It ignored to writings of the Greeks
(D) Its ancestors dissuaded people from luxuries and pleasures
Answer:
(B) Her people are so uncivilized, ignorant and stolid

Indian Civilization And Culture Objective Question Answer Bihar Board Question 3.
Gandhi dominated Indian politics during
(A) 1869-1948
(B) 1919-1948
(C) 1915-1948
(D) 1916-1948
Answer:
(C) 1915-1948

Indian Civilization And Culture Ka Objective Bihar Board Question 4.
The Western civilization has the tendency to privilege-
(A) Paternity
(B) Morality
(C) Materiality
(D) Dominancy
Answer:
(C) Materiality

Indian Civilization And Culture Objective Question Bihar Board Question 5.
Indian civilization elevates the-
(A) Foundation
(B) Independence
(C) Spiritual
(D) Moral being
Answer:
(D) Moral being

Indian Civilization And Culture Ka Objective Question Bihar Board Question 6.
Machinery makes us slaves and we lose our-
(A) Moral fibre
(B) Own strength
(C) Ideology
(D) Character
Answer:
(A) Moral fibre

12th English Objective Questions And Answers Pdf 2021 Bihar Board Question 7.
Modern civilization is mainly the worship of-
(A) Idols
(B) Material
(C) Arts
(D) Politics
Answer:
(D) Politics

Indian Civilization And Culture Objective Pdf Download Bihar Board Question 8.
Indian Civilization And Culture’ is written by-
(A) Zakir Husain
(B) Kamala Das
(C) Mahatma Gandhi
(D) Rabindranath Tagore
Answer:
(C) Mahatma Gandhi

Indian Glory Is That It Is Bihar Board Question 9.
Modern Civilization is based on-
(A) Imperialism
(B) Materialism
(C) Dissatisfaction
(D) Non-violence
Answer:
(D) Non-violence

Indian Civilization And Culture Bihar Board Question 10.
‘My Experiments with Truth’ is-
(A) Story
(B) Autobiography
(C) Novel
(D) Biography
Answer:
(D) Biography

Bihar Board 12th English Objective Question Question 11.
He was more a spiritual leader than a politician-
(A) Jawahar Lai Nehru
(B) Lai Bahadur Shastri’
(C) Mohan Das Karamchand Gandhi
(D) Lokmanya Ti lak
Answer:
(C) Mohan Das Karamchand Gandhi

Class 12 English Objective Question Bihar Board Question 12.
Which cfvfiization is not beaten in the world ?
(A) Greek
(B) Indian
(C) Pharaohs
(D) Chinese
Answer:
(B) Indian

12th English Objective Question Answer Bihar Board Question 13.
Who imagined, that (Hey will avoid the mistakes of Greece and Rome ?
(A) Indian
(B) Chinese
(C) Japanese
(D) Europeans
Answer:
(D) Europeans

12th English Objective Questions And Answers Pdf Bihar Board Question 14.
Mahatma Gandhi has written the lesson—
(A) I Have a Dream
(B) The Artist
(C) Indian Civilization and Culture
(D) The Earth

English Class 12 Objective Questions Bihar Board Question 15.
Pharaohs were rulers were ancient—
(A) Russia
(B) Egypt
(C) India
(D) Greece

Bihar Board 12th English Objective Question 2021 Question 16.
…………….. were rulers of Egypt.
(A) Americans
(B) Africans
(C) Iranians
(D) Pharaohs
Answer:
(D) Pharaohs

Question 17.
Civilization is the state of development of a
(A) people
(B) animal
(C) bird
(D) non-living things
Answer:
(A) people

Question 18.
Gibbon is associated with -[2018A, I.A.]
(A) Italy
(B) Sweden
(C) Russia
(D) America
Answer:
(A) Italy

Question 19.
Europeon civilization will mean ………… for India. [18A, I.A.|
(A) want
(B) living
(C) real
(D) ruin
Answer:
(D) ruin

Question 20.
‘Simple living and high thinking’ is the base of –
(A) American Civilization
(B) Indian Civilization
(C) European Civilization
(D) None of these
Answer:
(B) Indian Civilization

Question 21.
Indian glory is that it is—
(A) immovable
(B) movable
(C) uncivilised
(D) ignorant
Answer:
(A) immovable

Question 22.
…………. was a spiritual leader than a politician
(A) Nehruji
(B) Sardar Patel
(C) Mahatma Gandhi
(D) Indira Gandhi
Answer:
(C) Mahatma Gandhi

Question 23.
‘My Experiments with Truth’ was written by—
(A) Nehruji
(B) Mahatma Gandhi
(C) Maulana Abdul Kalam Azad
(D) Sardar Patel
Answer:
(B) MahatmaGandhi

Question 24.
The mind is a restlessthe more it gets the more it wants.
(A) bird
(B) dog
(C) cow
(D) monkey
Answer:
(A) bird

Question 25.
The people of Europe learn their lesson from the writing of the man of ………….
(A) Germany
(B) Britain
(C) Greece or Rome
(D) Spain.
Answer:
(C) Greece or Rome

Question 26.
“Plain living and high thinking’ is the motto of –
(A) Western philosopher
(B) Eastern philosopher
(C) North philosopher
(D) None of these
Answer:
(A) Western philosopher

Question 27.
Sacrifice is the sole aim of our –
(A) Philosopher
(B) farmers
(C) righis
(D) scientists
Answer:
(C) righis

Question 28.
…………… is dead against blind imitation civilization.
(A) Nehruji
(B) Gandhiji
(C) Patel
(D) Ambedkar
Answer:
(B) Gandhiji

Question 29.
…………… were satisfied with small villages.
(A) Our ancestors
(B) Germans
(C) Romans
(D) Italians
Answer:
(A) Our ancestors

Question 30.
Has civilization taught us to be more ……….. another?
(A) enemy
(B) angry
(C) upset
(D) friendly
Answer:
(B) angry

Question 31.
Our ancestors enjoyed ………….. Rule.
(A) Nice
(B) Society
(C) Home
(D) Nation

Question 32.
Wealth and luxuries do not make a …………… happy
(A) bird
(B) man
(C) cow
(D) dog
Answer:
(C) cow

Question 33.
Gandhiji went to Champaran in …………….
(A) 1915
(B) 1916
(C) 1917
(D) 1918
Answer:
(C) 1917

Question 34.
The people of Europe are inspired by …………… and Roman writers.
(A) British
(B) Greek
(C) German
(D) Indian
Answer:
(B) Greek

Question 35.
The invention of ……….. proved a milestone in our development.
(A) fire
(B) agriculture
(C) carpentry
(D) None of these
Answer:
(A) fire

Question 36.
He wrote different articles for –
(A) ‘The Hindu’
(B) ‘The Timesof India’
(C) ‘The Blitze’
(D)’YoungIndia’
Answer:
(D)’YoungIndia’

Question 37.
Civilization points out to man –
(A) how to make money
(B) how to win the enemy
(C) the path of duty
(D) the way of living
Answer:
(C) the path of duty

Question 38.
To observe morality is to attain mastery over –
(A) economic growth
(B) political ability
(C) minds and passions
(D) art
Answer:
(C) minds and passions

Question 39.
The mind is a restless bird which always remains—
(A) hungry
(B) unsatisfied
(C) thirsty
(D) sick
Answer:
(B) unsatisfied

Question 40.
Happiness is largely a –
(A) mental condition
(B) Physical Condition
(C) disease
(D) imagination
Answer:
(A) mental condition

Question 41.
Mahatma Gandhi was more a—
(A) politician
(B) economist
(C) social reformer
(D) spiritual leader
Answer:
(D) spiritual leader

Question 42.
He used as the chief weapons—
(A) swords
(B) nuclear weapons
(C) guns
(D) truth and non-violence
Answer:
(D) truth and non-violence

Question 43.
Our ancestors dissuaded us from –
(A) politics
(B) luxuries and pleasure
(C) morality
(D) spirituality
Answer:
(B) luxuries and pleasure

Question 44.
Poeple in ancient days were satisfied with –
(A) towns
(B) cities
(C) mega cities
(D) villages
Answer:
(D) villages

Question 45.
Our forefathers saw that kings and their swords were inferior to –
(A) the swords of ethics
(B) the swords of politics
(C) the swords of economics
(D) the swords of treachery
Answer:
(A) the swords of ethics

Question 46.
In ancient days the common people followed –
(A) business
(B) agriculture
(C) industry
(D) politics
Answer:
(B) agriculture

Question 47.
Modern civilization is the worship of—
(A) material
(B) ethics
(C) brotherhood
(D) equality
Answer:
(A) material

Question 48.
‘Indian Civilization and Culture’ has been written by –
(A) Pt. Nehru
(B) M. Gandhi
(C) Hussain
(D) None of these
Answer:
(B) M. Gandhi

Question 49.
In ancient days the common people enjoyed –
(A) courts rule
(B) slavery
(C) true home rule
(D) foreign rule
Answer:
(C) true home rule

Question 50.
The tendency of Indian civilization is to elevate –
(A) immorality
(B) partiality
(C) moral being
(D) dishonesty
Answer:
(C) moral being

Question 51.
Indian civilization is –
(A) godless
(B) based on belief in God
(C) based on partiality
(D) based on matter
Answer:
(B) based on belief in God

Question 52.
‘Indian Civilization And Culture’ is written by …………….
(A) Mahatma Gandhi
(B) Manohar Malgaonkar
(C) Shiga Naoya
(D) Dr. Jakir Hussain
Answer:
(B) Manohar Malgaonkar

Question 53.
Gandhi was born in …………….
(A) 1865
(B) 1872
(C) 1869
(D) 1870
Answer:
(C) 1869

Question 54.
Gandhiji has said that mind is a ……………. bird.
(A) resting
(B) flying
(C) restless
(D) chirping
Answer:
(C) restless

Question 55.
Modern Civilization is based on …………….
(A) realistic
(B) materialism
(C) artistic
(D) ever-making
Answer:
(B) materialism

Question 56.
Truth and non-violence were the chief …………….
(A) books
(B) essays
(C) culture
(D) weapons
Answer:
(D) weapons

Question 57.
The western civilization has the tendency to privilege …………….
(A) inventions
(B) capital
(C) materiality
(D) mankind
Answer:
(C) materiality

Question 58.
……………. makes us slaves and we lose our moral fibre.
(A) culture
(B) science
(C) machinery
(D) civilization
Answer:
(C) machinery

Question 59.
We have been …………. west since long.
(A) copy
(B) copying
(C) copied
(D) copier
Answer:
(B) copying

Question 60.
Gandhi died in
(A) 1947
(B) 1948
(C) 1946
(D) 1945
Answer:
(B) 1948

Question 61.
Gandhiji was more a …………. leader than a politican.
(A) passionate
(B) spiritual
(C) popular
(D) numerous
Answer:
(B) spiritual

Question 62.
Gandhiji dominated Indian politics during …………….
(A) 1915 till 1947
(B) 1915 till 1948
(C) 1912 till 1948
(D) 1913 till 1947
Answer:
(B) 1915 till 1948

Question 63.
Indian Civilization has …………. it alive till now.
(A) keep
(B) keeping
(C) kept
(D) done
Answer:
(C) kept

Question 64.
We have ……………. many things from the west.
(A) borrow
(B) borrowing
(C) borrowed
(D) borrow on
Answer:
(C) borrowed

Question 65.
My Experiments with Truth’ was Gandhiji’s …………….
(A) biography
(B) autobiography
(C) essay
(D) confession
Answer:
(B) autobiography

Question 66.
India’s glory is that elemains …………….
(A) immovable
(B) movable
(C) passions
(D) sovareigns
Answer:
(B) movable

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता

Bihar Board Class 12 History ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता Textbook Questions and Answers

उत्तर दीजिए (लगभग 100-150 शब्दों में)

ईंटें मनके तथा अस्थियाँ हड़प्पा सभ्यता Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता के शहरों में लोगों को उपलब्ध भोजन सामग्री की सूची बनाइए। इन वस्तुओं को उपलब्ध कराने वाले समूहों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के शहरों में लोगों को उपलब्ध भोजन सामग्री की सूची:-

  1. अनेक प्रकार के अनाज: गेहूँ, जौ, चावल, दाल, सफेद चना, तिल और बाजरे का भोजन सामग्री के रूप में उपयोग करते थे।
  2. पेड़-पौधों से प्राप्त उत्पाद: फल, पत्ती आदि।
  3. दूध: दूध एवं उसके अन्य उत्पाद।
  4. मांस: विशेष रूप से मछली खाते थे। इसके अलावा मांस भेड़, बकरी तथा सूअर आदि पशुओं का मांस भी खाया जाता था। भोजन सामग्री उपलब्ध करने वाले समूह:
      • किसान।
      • मछुआरे।
      • पशुपालक यथा गड़रिये।

Bihar Board 12th History Book Pdf प्रश्न 2.
पुरातत्त्वविद हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता किस प्रकार लगाते हैं। वे कौन-सी भिन्नाताओं पर ध्यान देते हैं?
उत्तर:
पुरातत्त्वविदों द्वारा हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के तरीके और भिन्नतायें:

सामाजिक भिन्नताओं के दर्शन शवाधानों और विलासिता की वस्तुओं में होते हैं। मिस्र के शवाधानों (पिरामिड) की भाँति हड़प्पा स्थलों से भी शवाधान मिले हैं। हड़प्पाई लोग अपने मृतकों को गों में दफनाते थे। शवाधानों में भिन्नता मिलती है। कुछ शवाधानों या कब्रों से मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले हैं। आभूषण स्त्री और पुरुष दोनों धनी लोगों की कब्रों से मिले हैं। मृत्यु के बाद भी मनुष्य की आत्मा द्वारा इन वस्तुओं का प्रयोग करने की धारणा इस साक्ष्य से पुष्ट होती है। कुछ शवाधानों से छल्ले, मनके और दर्पण भी मिले हैं।

सामाजिक भिन्नता का एक अन्य प्रमाण विलासिता की वस्तुओं का मिलना है। दैनिक उपयोग की वस्तुएँ यथा-चक्कियाँ, मृद्भाण्ड, सूइयाँ, झांवा आदि भी मिले हैं। ये वस्तुएँ लगभग सभी बस्तियों से मिली हैं। कुछ कीमती पात्र भी मिले हैं। यह ध्यान देने योग्य बात है कि महँगे पदार्थों से निर्मित दुर्लभ वस्तुएं सामान्य रूप से मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी बस्तियों में ये विरले ही मिलते हैं। स्वर्णाभूषण केवल हड़प्पा स्थलों से मिले हैं। इन आधारों पर विद्वानों का विचार है कि हड़प्पा सिन्धु घाटी सभ्यता की राजधानी थी।

12th History Book Bihar Board प्रश्न 3.
क्या आप इस तथ्य से सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली, नगर योजना की ओर संकेत करती है? अपने उत्तर के कारण बताइए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकाल प्रणाली और नगर योजना-हड़प्पा सभ्यता के शहरों की नगर योजना विशिष्ट थी। इन नगरों की मुख्य विशेषता इसका जल निकास प्रबंध था। इस नगर की नालियाँ, मिट्टी के गारे, चूने और जिप्सन की बनी हुई थी। इनको बड़ी ईंटो और पत्थरों से ढका जाता था। जिसको ऊपर उठाकर उन नालियों की सफाई की जा सकती थी। घरों से बाहर की छोटी नालियाँ सड़कों के दोनों ओर बनी हुई थीं। जो बड़ी और पक्की नालियों में आकर मिल जाती थीं।

वर्षा जल के निकास की बड़ी नालियों का घेरा एक से दो मीटर तक था। घरों से गंदे पानी के निकास के लिए सड़क के दोनों ओर गड्ढे बने हुए थे। इन सब तथ्यों से प्रतीत होता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग अपने नगरों की सफाई की ओर अधिक ध्यान देते थे। नालियों के विषय में मैके लिखे हैं “निश्चित रूप से यह अब तक खोजी गई सर्वथा संपूर्ण प्राचीन प्रणाली है।” ए, डी. पुल्सकर (A. D. Pulsakar) के अनुसार मोहनजोदड़ों नगर के खण्डहरों को देखने वाला व्यक्ति नगर के योजनाबद्ध निर्माण और सफाई प्रणाली को देखकर चकित हो जाता है। यह निकास प्रणाली निश्चित रूप से नगर योजना की ओर संकेत करती है।

Bihar Board Class 12 History Book प्रश्न 4.
हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त पदार्थों की सूची बनाइए। कोई भी एक प्रकार का मनका बनाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त पदार्थ –

  1. कार्नीलियन (सुन्दर लाल रंग का)
  2. जैस्पर
  3. स्फाटिक,
  4. क्वार्ट्ज
  5. सेलखड़ी जैसे पत्थर,
  6. तांबा
  7. कोसा,
  8. सोने जैसे धातुएँ
  9. शंख
  10. फयॉन्स
  11. पकी मिट्टी।

मनका बनाने की एक विधि की प्रक्रिया: मनके बनाने की तकनीकों में प्रयुक्त पदार्थ के अनुसार भिन्नताएँ थी। सेलखड़ी पत्थर से आसानी से मनके बनाये जा सकते थे, क्योंकि यह मुलायम पत्थर होता था। कुछ मनके सेलखड़ी चूर्ण के लेप को साँचे में ढालकर तैयार किए जाते थे। ठोस पत्थरों से बनने वाले केवल ज्यामितीय आकारों छोड़कर इससे अन्य कई आकारों के मनके बनाए जा सकते थे। सेलखड़ी के सूक्ष्म मनकों के निर्माण की विधि स्पष्ट नहीं है।

ईट मनके तथा अस्थियां हड़प्पा सभ्यता Bihar Board प्रश्न 5.
चित्र 1.1 को देखिए और उसका वर्णन कीजिए। शव किस प्रकार रखा गया है? उसके समीप कौन-सी वस्तुएँ रखी गई हैं? क्या शरीर पर कोई पुरावस्तुएँ हैं? क्या इनसे कंकाल के लिंग का पता चलता है?
उत्तर:
शव का वर्णन: शव को एक गर्त में दफनाया गया है और उसे उत्तर-दक्षिण दिशा में रखा गया है। शव का सिर उत्तर की ओर है जो धर्मशास्त्र के अनुसार उचित दिशा में है। शव की मांसपेशियाँ, कपड़े आदि सड़ गये हैं और केवल कंकाल ही दिखाई दे रहा है।
ईंटें मनके तथा अस्थियाँ हड़प्पा सभ्यता Question Answer Bihar Board

  1. शव के निकट विशेष रूप से सिर के निकट दैनिक उपयोग की वस्तुएँ घड़ा, फ्लास्क, थूकदान आदि रखे गये हैं।
  2. शरीर पर रखी गई पुरावस्तुएँ स्पष्ट नहीं हैं। सम्भवतः हाथ में कड़े डाल रखे हैं।
  3. सम्भवतः यह कंकाल पुरुष का है क्योंकि इसका ललाट चौड़ा है।

निम्नलिखित पर एक लघु निबंध लिखिए। (लगभग 500 शब्दों में)

Bihar Board Class 12 History Book Solution प्रश्न 6.
मोहनजोदड़ों की कुछ विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मोहनजोदड़ों की विशिष्टताएँ:
1. मोहनजोदड़ों विश्व का सर्वाधिक प्राचीन योजनाबद्ध नगर है। यह पाकिस्तान में सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंधु नदी के किनारे है। मोहनजोदड़ों का शाब्दिक अर्थ है-मृतकों का शहर। यहाँ खुदाइयों में मुर्दो के अस्थिपंजर मिले थे। आर्य सभ्यता से पूर्व यह नगर सिंधु घाटी के लोगों की सामाजिक गतिविधियों का मुख्य केन्द्र था। इसका क्षेत्रफल लगभग एक वर्ग किलोमीटर था। इस समय यह नगर. दो टीलों पर स्थित है।

2. मोहनजोदड़ों में वर्तमान नगरों के समान योजनानुसार बनाई गई चौड़ी सड़कें थीं । इसकी मुख्य सड़क 33 फुट चौड़ी है और दूसरी सड़कें 13.5 फुट चौड़ी है। सभी पूर्व से पश्चिम या उत्तर-दक्षिण की ओर आपस में जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं। मैके (Machay) के अनुसार इन सड़कों को इस प्रकार से बनाया गया था कि यहाँ पर चलने वाली हवायें एक पंप की भाँति प्रदूषित हवाओं को खींच सकें जिससे वातावरण स्वच्छ रहे। इन बातों से यह प्रतीत होता है कि इस नगर का योजनाबद्ध ढंग से विकास करने के लिए एक उच्चाधिकारी नियुक्ति किया जाता होगा। भवनों के निर्माण के नियमों को कठोरता से लागू किया जाता होगा और यह भी ध्यान में रखा जाता होगा कि कोई भी भवन सड़कों के ऊपर न बने।

3. इस नगर की एक मुख्य विशेषता जल निकास व्यवस्था (Drainage System) थी। इस नगर की नालियाँ मिट्टी के गारे, चूने और जिप्सम की बनी हुई थीं। इनको बड़ी ईंटों और पत्थरों से ढका गया है। इन्हें ऊपर उठाकर उन नालियों की सफाई की जा सकती थी। घरों से बाहर की छोटी नालियाँ सड़कों के दोनों ओर बनी हुई थीं जो बड़ी और पक्की नालियों में आकर मिल जाती थीं। घरों से गंदे पानी के निकास के लिए मार्गों के दोनों ओर गड्ढे बने हुए थे।

4. गृह-वास्तु: मोहनजोदड़ों का गृहवास्तु विशिष्ट था। कई भवनों के केन्द्र में आगन था जिसके चारों ओर कमरे बने थे। संभवतः आँगन खाना पकाने और कताई करने जैसे गतिविधियों का केन्द्र था। गर्म और शुष्क मौसम में इसका पर्याप्त उपयोग किया जाता था। भूमितल पर बने कमरों में कोई खिड़की नहीं होती थी।

इसके अलावा मुख्य द्वार (आँगन) दिखाई नहीं देता था। इससे पता चलता है कि लोग एकांतप्रिय थे। प्रत्येक घर में ईंटों के फर्श से बना स्नानघर था। जिसकी नालियाँ सड़क की नालियों से जुड़ी हुई थी। छत पर जाने के लिए कई घरों में सीढ़ियाँ भी थीं। कई घरों में कुएँ भी थे।

5. दुर्ग: मोहनजोदड़ों में बस्तियों की सुरक्षा के लिए दुर्ग था। बस्ती का पश्चिमी भाग छोटी ऊँचाई वाला भाग होता था तथा पूर्वी भाग कम ऊंचाई वाला होता था। दुर्ग ऊँचे स्थान पर होता था। इसके अन्दर बड़े-बड़े सरकारी भवन, खाद्यान्न भंडार और बड़े स्नानघर बने होते थे। इनके ईंटों से बने ढाँचे आज भी देखे गए हैं। लकड़ी से बने ऊपरी हिस्से बहुत पहले सड़ चुके होंगे।

Bihar Board Solution Class 12th History प्रश्न 7.
हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची बनाइये तथा चर्चा कीजिए कि ये किस प्रकार प्राप्त किए जाते होंगे?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल: शिल्प उत्पादन का अर्थ है-माला के मनके बनाना, सीपियाँ काटना, धातु की वस्तुएँ बनाना, मोहरे बनाना तथा बाट बनाना। सिंधु घाटी में माला के मनके बनाने में प्रयुक्त सामग्री निम्नलिखित थी।

  1. सुन्दर लाल रंग का कार्नीलियन
  2. जैस्पर
  3. क्वार्ट्ज
  4. ताँबा
  5. कांसा
  6. सोने जैसी धातुएँ
  7. सीपियाँ
  8. टेराकोटा या आग में पकी हुई चूना-मिट्टी
  9. विभिन्न प्रकार के पत्थर।

प्राप्ति के तरीके: शिल्प उत्पादन के लिए अनेक प्रकार के कच्चे माल का प्रयोग किया जाता था। मिट्टी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध थी परन्तु पत्थर, लकड़ी तथा धातु बाहर से मँगाना पड़ता था। कच्चा माल प्राप्त करने के लिए हड़प्पा सभ्यता के लोग कई प्रकार की नीतियाँ अपनाते थे।

1. उपमहाद्वीप तथा आगे से आने वाला माल: कच्चा माल प्राप्त करने में हड़प्पाइयों ने कई स्थानों पर बस्तियाँ बसायी, जैसे शंख प्राप्त करने के लिए नागेश्वर और बालाकोट में, नीले रंग की लाजवर्द मणि के लिए सूदूर अफगानिस्तान के शोर्तुघई में। ये लोग कच्चे माल के विभिन्न स्थानों का खोज-अभियान भी जारी रखते थे। ये अभियान दल स्थानीय समुदायों के सम्पर्क में रहते थे।

2. सुदूर क्षेत्रों के सम्पर्क: कच्चे माल के लिए हड़प्पाई लोग सुदूर क्षेत्रों सम्पर्क में भी रहते थे। उदाहरण के लिए ये लोग तांबा अरब से मंगाते थे।

Bihar Board History Class 12 History प्रश्न 8.
चर्चा कीजिए कि पुरातत्वविद् किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं?
उत्तर:
अतीत के पुनर्निर्माण में पुरातत्त्वविदों का योगदान:
अतीत के पुनर्निर्माण में पुरातत्त्वविदों का महत्त्वपूर्ण योगदान निम्नवत रहा है –

  1. हड़प्पा सभ्यता की लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है। ऐसे में उस नगर के भौतिक साक्ष्य यथा-मृद्भाण्ड, औजार, आभूषण और खुदाई के समय तक अक्षत सामान हड़प्पाई जीवन का पुनर्निर्माण आधिकारिक और विश्वसनीय ढंग से करने में सहायक बनते हैं।
  2. मूर्तियों जैसी खुदाई से प्राप्त आकृतियाँ अतीत के सामाजिक जीवन को समझने में सहायक बनती हैं।
  3. कीमती आभूषणों से आर्थिक प्रास्थिति/अर्थव्यवस्था की जानकारी मिलती है।
  4. विभिन्न प्रकार की मूर्तियों यथा-मातृदेवी की मूर्ति या मुहर पर बने ‘आद्य शिव’ से लोगों के धार्मिक जीवन की जानकारी होती है।
  5. बैलगाड़ीनुमा खिलौने यह बताते हैं कि हड़प्पाई लोग आने-जाने या सामान ढोने के लिए परिवहन साधनों का भी प्रयोग करते हैं।
  6. शवाधानों से प्राप्त विभिन्न सामग्रियों से सामाजिक भिन्नता की जानकारी मिलती है।

ईंटें मनके तथा अस्थियाँ हड़प्पा सभ्यता Notes Bihar Board प्रश्न 9.
हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्य:
हड़प्पा सभ्यता के विभिन्न स्थलों से कोई ऐसा स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला है जिसके आधार पर शासकों द्वारा किये गये कार्यों का विवरण दिया जा सके। पुरातात्विक साक्ष्यों का भी अभाव है। मोहनजोदड़ों में एक विशाल भवन को प्रासाद कहा गया है परन्तु वहाँ शासकों से सम्बद्ध कोई वस्तु नहीं मिली है। पुरातत्त्वविदों ने एक पत्थर की मूर्ति को मेसोपोटामिया के इतिहास के आधार पर पुरोहित-राजा की संज्ञा दी है।

हड़प्पाई शासक संभवत:
आनुष्ठानिक कार्य कराते थे और उनकी याद बनाये रखने के लिए उनके चित्र मुहरों पर उत्कीर्ण कराते थे। ऐसा प्रतीत होता है राजनीतिक सत्ता वालों को ही अनुष्ठान करवाने का अधिकार था।

कुछ विद्वानों का विचार है कि हड़प्पाई समाज में कोई शासक नहीं था तथा सभी की सामाजिक स्थिति समान थी। पुरातत्त्वविदों के एक वर्ग का कहना है कि यहाँ एक से अधिक शासक थे। उनके अनुसार हड़प्पा, मोहनजोदड़ों और चहुँदड़ों आदि के अलग-अलग शासक थे। पुरात्त्वविदों का एक अन्य वर्ग कहता है कि सम्पूर्ण हड़प्पा सभ्यता एक राज्य की थी। इसका प्रमाण पुरावस्तुओं में पर्याप्त समानता का रहना है। ईंटों के आकार में निश्चित अनुपात है तथा कच्चे माल के स्रोतों के समीप ही बस्तियों का विकसित होना स्पष्ट है।

प्रश्न 10.
मानचित्र 1.2 पर उन स्थलों पर पेंसिल से घेरा बनाइए जहाँ से कृषि के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। उन स्थलों के आगे क्रॉस का निशान बनाइए जहाँ शिल्प उत्पादन के साक्ष्य मिले हैं। उन स्थलों पर ‘क’ लिखिए जहाँ कच्चा माल मिलता था।
उत्तर:
संकेत: कृषि के साक्ष्य वाले स्थल Ο
शिल्प उत्पादन के साक्ष्य वाले स्थल ⊗
कच्चे माल वाले स्थल Bihar Board Class 12 History Solutions Chapter 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ हड़प्पा सभ्यता img 2

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परियोजना कार्य (कोई एक)

प्रश्न 11.
पता कीजिए कि क्या आपके शहर में कोई संग्रहालय है। उनमें से एक को देखने जाइए और किन्हीं दस वस्तुओं पर एक रिपोर्ट लिखिए, जिसमें बताइए कि वे कितनी पुरानी हैं वे कहाँ से मिली थीं, और आपके अनुसार उन्हें क्यों प्रदर्शित किया गया है?
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 12.
वर्तमान समय में निर्मित तथा प्रयुक्त पत्थर, धातु तथा मिट्टी की दस वस्तुओं के रेखाचित्र एकत्रित कीजिए। इनकी तुलना इस अध्याय में दिये गये हड़प्पा सभ्यता के चित्रों से कीजिए तथा आपके द्वारा उनमें पाई गई समानताओं एवं भिन्नताओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।

Bihar Board Class 12 History ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ : हड़प्पा सभ्यता Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
सिन्धु घाटी सभ्यता को हड़प्पा संस्कृति क्यों कहते हैं?
उत्तर:

  1. सिन्धु घाटी सभ्यता की सर्वप्रथम खोज हड़प्पा नामक स्थान पर हुई। इसलिए इसे हड़प्पा संस्कृति कहते हैं।
  2. इसकी सर्वप्रथम खोज दयाराम साहनी ने 1921 ई. में की।

प्रश्न 2.
आरम्भिक तथा परवर्ती हड़प्पा संस्कृतियों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:

  1. सिन्धु घाटी क्षेत्र में हड़प्पा सभ्यता से पहले और बाद में भी संस्कृतियाँ अस्तित्व में थीं जिन्हें क्रमशः आरम्भिक तथा परवर्ती हड़प्पा कहा जाता है।
  2. इन संस्कृतियों से हड़प्पा सभ्यता को अलग करने के लिए कभी-कभी इसे विकसित हड़प्पा संस्कृति भी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
हड़प्पा संस्कृति का विस्तार बताइये।
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति का विस्तार उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के तट तक और पश्चिम में बलुचिस्तान के मकरान समुद्रतट से लेकर उत्तर पूर्व में मेरठ तक था। यह सम्पूर्ण क्षेत्र त्रिभुजाकार है और इसका क्षेत्रफल लगभग 1,299,600 वर्ग कि.मी. है।

प्रश्न 4.
हड़प्पा स्थल की दुर्दशा के क्या कारण हैं?
उत्तर:

  1. हड़प्पा स्थल की कई प्राचीन संरचनायें ईंट चुराने वालों की अशिष्टता का शिकार हो चुकी हैं। अर्थात्-लुप्तप्राय हैं।
  2. 1875 में ही भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पहले जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम ने लिखा है कि ईंट चोरों ने इतनी ईंटें चुरा ली थी कि वे लाहौर और मुल्तान के बीच 100 मील लम्बी रेल की पटरी तैयार करने के लिए पर्याप्त होती।

प्रश्न 5.
अवतल चक्कियों का क्या उपयोग था?
उत्तर:

  1. विद्वानों का अनुमान है कि इनकी सहायता से अनाज पीसा जाता था।
  2. सालन या तरी बनाने के लिए जड़ी-बूटियों तथा मसालों को कूटने के लिए भी विशेष प्रकार की अवतल चक्कियों का प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 6.
हड़प्पा संस्कृति में वर्णित विभिन्न जानवरों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. पालतू मवेशियों में भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर आदि प्रमुख थे।
  2. जंगली प्रजातियों में हिरण, घड़ियाल, सूअर आदि थे। मछली और पक्षियों जैसे जलचर और नभचर प्राणियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 7.
उन छः स्थलों के नाम बताइये जहाँ हड़प्पा संस्कृति उन्नत और परिपूर्ण थी। सम्बन्धित प्रदेशों के नाम भी बताइये।
उत्तर:

  1. हड़प्पा (पंजाब)
  2. मोहनजोदड़ो (सिन्ध)
  3. चहुँदडा (सिन्ध)
  4. लोथल (गुजरात)
  5. कालीबंगन (राजस्थान)
  6. बनावली (हरियाणा)।

प्रश्न 8.
आप किन तथ्यों के आधार पर कह सकते हैं कि सिन्धुवासी सफाई और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते थे?
उत्तर:

  1. हड़प्पा संस्कृति के लोगों के मकान पक्के और सड़कों तथा गलियों के किनारे स्थित थे। ये ऊँचे तथा खिड़कियों वाले हवादार घर थे।
  2. घरों का गन्दा जल बाहर निकलने के लिए भूगत नालियाँ बनी हुई थीं । इन नालियों का पानी नगर से बाहर तक जाता था।
  3. अधिकांश मकानों में स्नानघर तथा कुएँ आदि प्राप्त हुए हैं।
  4. कूड़ा-करकट एकत्र करने के लिए जगह-जगह टैंक बने हुए थे।

प्रश्न 9.
हड़प्पा संस्कृति का ज्ञान हमें किन स्रोतों से होता है?
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति की जानकारी के अनेक स्रोत हैं:

  1. विभिन्न स्थलों की खुदाई से प्राप्त सड़कों, गलियों, भवनों, स्नानागारों आदि के द्वारा नगर योजना, वास्तुकला और लोगों के रहन-सहन के विषय में जानकारी मिलती है।
  2. तकलियाँ, मिट्टी के खिलौने, धातु की मूर्तियाँ, आभूषण, मृद्भाण्ड जैसी कला एवं शिल्प की जानकारी कराने वाली वस्तुएँ विभिन्न व्यवसायों एवं सामाजिक दशा की जानकारी भी कराती है।
  3. मिट्टी की मुहरों से धर्म, लिपि आदि का ज्ञान होता है।

प्रश्न 10.
मोहनजोदड़ो के सार्वजनिक स्नानागार के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:

  1. यह सिन्ध प्रांत के मोहनजोदड़ो नामक शहर में पाया गया है। यह एक विशाल स्नानागार है। इसका जलाशय दुर्ग के टीले में है।
  2. यह स्थापत्य कला का सुन्दर नमूना है। इसकी लम्बाई 11.88 मी., चौड़ाई 7.01 और गहराई 2.43 मी. है। इसके साथ सीढ़ियाँ, कपड़े बदलने के कमरे और कुँआ भी बना हुआ है। गंदे पानी के निकास की गहरी और चौड़ी नालियाँ भी हैं।
  3. यह धार्मिक अवसरों पर प्रयोग किया जाता होगा।

प्रश्न 11.
हड़प्पा संस्कृति की काल गणना कीजिए।
उत्तर:
यह संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक और भारत की सर्वाधिक प्राचीन विकसित नगर सभ्यता है। इसकी लिपि अभी तक न पढ़ी जाने के कारण इसकी निश्चित तिथि नहीं बतायी जा सकती है। मेसोपोटामिया और बेबीलोनिया की खुदाई से मिले बर्तन, मोहरों आदि की तुलना सैन्धव सभ्यता की इन सामग्रियाँ से की गयी है। इस आधार पर इसका काल 2600 सा०यु०पू० से 1900 सा०यु०पू० ठहरता है।

प्रश्न 12.
हड़प्पा काल की तौल और माप पद्धति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. नगरवासियों ने व्यापार और आदान-प्रदान की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए माप और तौल का प्रयोग किया।
  2. ये लोग ‘तौल’ में बाटों का प्रयोग करते थे। ये बाट 16 या उसके गुणकों यथा -4, 8, 16, 64, 80, 160, 320 और 640 आदि में मानकीकृत थे।
  3. मापने के लिए पैमाने का प्रयोग करते थे। माप के निशान वाले लकड़ी और कांसे के डंडे प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 13.
हड़प्पा के शवाधानों में कौन-कौन सी वस्तुएँ मिली हैं और क्यों?
उत्तर:

  1. हड़प्पा के शवाधानों में दैनिक प्रयोग की वस्तुएँ, बर्तन, मटके, आभूषण, ताँबे के दर्पण आदि मिले हैं।
  2. इसके पीछे संभवतः ऐसी मान्यता थी कि इन वस्तुओं का मृत्योपरांत प्रयोग किया जा सकता था। पुरुषों और महिलाओं दोनों के शवाधानों से आभूषण मिले हैं।

प्रश्न 14.
कानीलियन से मनके किस प्रकार तैयार किये जाते थे?
उत्तर:
पीले रंग के एक कच्चे माल को आग में पकाने से लाल रंग का कार्नीलियन बनता था। अब इसके मनके तैयार किए जाते थे। इसके लिए पत्थर के टुकड़ों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था और फिर बारीकी से शल्क निकालकर इन्हें अंतिम रूप दिया जाता था। घिसाई, पॉलिश और इनमें छेद करने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होती थी। चहुँदड़ों, लोथल और हाल ही में धोलाविरा से छेद करने के विशेष उपकरण मिले हैं।

प्रश्न 15.
क्या सैन्धव सभ्यता एक नगर सभ्यता थी? अथवा, इस सभ्यता के नागरिक जीवन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिन्धु की सभ्यता एक नगर सभ्यता थी। यह निम्नलिखित बातों से स्पष्ट है –

  1. इस संस्कृति में, नगरों में सड़कों का निर्माण किया गया था जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थी और चौराहों का निर्माण करती थी।
  2. मकानों का विन्यास एक महाजाल (dragnet) की तरह है। इन मकानों में आराम की सभी व्यवस्थायें थी। मकान पक्की ईंटों के थे।
  3. नगरों के गन्दे पानी को निकालने के लिए भूगत पक्की नालियों की व्यवस्था की गई थी।
  4. अनेक घरों में स्नान आदि के लिए कुएँ मिले हैं।
  5. विशेष अवसरों के लिए सार्वजनिक स्नानागार बनाए गए थे।

प्रश्न 16.
कनिंघम के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर:

  1. ये भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रथम डायरेक्टर जनरल थे। उन्होंने 19 वीं शताब्दी के मध्य में पुरातात्विक उत्खनन आरम्भ किये।
  2. कनिंघम की मुख्य रूचि आरम्भिक ऐतिहासिक (लगभग छठी शताब्दी सा०यु०पू०) से चौथी शताब्दी ई.) तथा उसने बाद के कालों से सम्बन्धित पुरातत्त्व में थी।

प्रश्न 17.
उत्पादन केन्द्रों की पहचान के लिए पुरातत्त्वविद् किन वस्तुओं को ढूंढ़ते हैं?
उत्तर:
उत्पादन केन्द्रों की पहचान के लिए पुरातत्वविद् निम्नलिखित वस्तुओं को ढूंढते हैं:

  1. प्रस्तर पिंड
  2. पूर्ण शंख
  3. तांबा-अयस्क जैसा कच्चा माल
  4. औजार
  5. अपूर्ण वस्तुएँ
  6. परित्यक्त माल
  7. कूड़ा-करकट।

प्रश्न 18.
ओमान (अरब) के हड़प्पा सभ्यता के संबंध के क्या प्रमाण हैं?
उत्तर:

  1. ओमान अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम छोर पर स्थित था। संभवतः हड़प्पा में ताँबा यहीं से आता था। रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात होता है कि ओमानी ताँबे तथा हड़प्पाई पुरावस्तुओं दोनों में निकल के अंश मिले हैं जो इस सभ्यता के उभयनिष्ठ या समकालिक उद्भव को दर्शाते हैं।
  2. काली मिट्टी की परत चढ़ा हुआ एक हड़प्पाई मर्तबान ओमान नामक पुरातत्व स्थल में भी प्राप्त हुआ है।

प्रश्न 19.
हड़प्पन लिपि की दो विशेषतायें बताइये।
उत्तर:

  1. यद्यपि हड़प्पन लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है तथापि यह निश्चित रूप से यह वर्णमालीय नहीं है क्योंकि वर्णमालीय के प्रत्येक चिह्न एक स्वर अथवा व्यंजन को दर्शाता है।
  2. यह लिपि दाई से बांई ओर लिखी जाती थी क्योंकि दाई ओर चौड़ा अंतराल है और बांई ओर यह संकुचित है।

प्रश्न 20.
हड़प्पा स्थलों से कौन-कौन से अनाज प्राप्त हुए हैं?
उत्तर:

  1. गेहूँ
  2. जौ
  3. दाल
  4. सफेद चना
  5. तिल
  6. बाजरा
  7. चावल।

प्रश्न 21.
हड़प्पाई पुरातत्त्व में क्या उन्नति हुई है?
उत्तर:

  1. 1990 के दशक में हड़प्पाई पुरातत्त्व में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की रूचि बढ़ती जा रही है। उदाहरणार्थ-हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों स्थानों पर भारतीय उपमहाद्वीप तथा विदेशी विशेषज्ञ संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।
  2. वे आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करते हैं। इन तकनीकों में मिट्टी, पत्थर, धातु की वस्तुएं, वनस्पति और जानवरों के अवशेष प्राप्त करने हेतु धरातल (स्थल) का अन्वेषण और साथ ही उपलब्ध साक्ष्य के प्रत्येक सूक्ष्म टुकड़े का विश्लेषण शामिल है।

प्रश्न 22.
संस्कृति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:

  1. संस्कृति शब्द का प्रयोग पुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं और प्रायः एक साथ, एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा काल खण्ड से सम्बद्ध पाये जाते हैं।
  2. हड़प्पा सभ्यता के संदर्भ में इन विशिष्ट पुरावस्तुओं के मुहरे, मनक, बाट, पत्थर के फलक और पकी हुई ईंटें शामिल हैं।

प्रश्न 23.
हड़प्पाई लिपि की लिखावट कहाँ मिलती है?
उत्तर:

  1. मुहरें
  2. ताँबे के औजार
  3. मर्तबानो के, अॅबठ
  4. ताँबे तथा मिट्ठी की लघु पटिट्कायें
  5. आभूषण
  6. आस्थि – छड़ें
  7. सूचनापट्ट।

प्रश्न 24.
हड़प्पा के शवाधानों की मुख्य विशेषतायें क्या हैं?
उत्तर:

  1. यहाँ के शवाधानों में प्रायः मृतकों को गड्ढों में दफनाया गया था।
  2. कभी-कभी शवाधान गर्त की बनावट एक-दूसरे भिन्न होती थी। कुछ स्थानों पर गर्त की सतहों पर ईंटों की चिनाई की गई थी।

प्रश्न 25.
फयॉन्स क्या है? ये कहाँ मिलते हैं?
उत्तर:

  1. घिसी हुई रेत अथवा बालू तथा रंग और चिपचिपे पदार्थ के मिश्रण को पकाकर बनाये गये पदार्थ को फयॉन्स कहते हैं। यह हड़प्पा की विलासी वस्तु मानी जाती थी।
  2. संगधि त द्रव्यों को रखने के पात्र जैसी फयान्स की वस्तुएँ मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे बड़े नगरों की खुदाई से प्राप्त हुई हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हड़प्पा सभ्यता की कृषि प्रौद्योगिकी का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की कृषि प्रौद्यौगिकी:

  1. प्राप्त प्रमाणों से ज्ञात होता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था क्योंकि यहाँ के कई स्थलों से अनाज के दाने प्राप्त हुए हैं।
  2. मुहरों पर वृषभ या बैल का अंकन रहना तथा बैलों की कई मृणमूर्तियों का मिलना खेत जोतने और बैलगाड़ी के लिए वृषभ का प्रयोग किए जाने का स्वतः साक्ष्य है।
  3. चोलिस्तान के कई स्थलों यथा-बनावली (हरियाणा) में मिट्टी निर्मित हल के अवशेष मिलना यह अधि कारिक जानकारी बनता है कि खेतों की जुताई हल से होती थी। कालीबंगन (राजस्थान) में जुते हुए खेत के साक्ष्य भी मिले हैं।
  4. फसलों की कटाई के लिए लकड़ी के हत्थों में जड़े/फँसाए गए पत्थर के फलक (धार) या धातु फलक से पता चलता है कि उन्हें कृषि उपकरणों का ज्ञान था।
  5. सिंचाई के लिए नहरों और कुँओं का प्रयोग किया जाता था। अफगानिस्तान के शोर्तुघई में नहरों के अवशेष मिले है।

प्रश्न 2.
शिल्प और तकनीक के क्षेत्र में हड़प्पाई लोगों की उपलब्धियाँ बताएँ। अथवा, हड़प्याई संस्कृति की कला का उल्लेख 100 शब्दों में करें।
उत्तर:
हड़प्पा लोगों की शिल्प और तकनीकी अत्यन्त विकसित थी। इस क्षेत्र में उनकी निम्नलिखित उपलब्धियाँ थीं –

  1. हड़प्पा के लोग कांस्य निर्माण और प्रयोग से अच्छी तरह परिचित थे। तांबे में टिन मिलाकर कांसा बनाते थे। हड़प्पाई स्थलों से प्राप्त कांस्य के औजार और हथियारों में टिन की मात्रा कम है। वस्तुतः टिन उन्हें मुश्किल से मिलता होगा। उनके धातु-शिल्प-मूर्ति विनिर्माण एवं औजार विनिर्माण के थे। वे कुल्हाड़ी, आरी, छुरा आदि बनाते थे।
  2. ये लोग बुनाई कला से भी परिचित थे। वे कपड़े बनाते थे। सूत कातने के लिए तकली का प्रयोग करते थे। बुनकरों का समूह सूती और ऊनी कपड़ा तैयार करता था।
  3. हड़प्पाई लोग अच्छे राजगीर भी थे। उनकी कला विशाल इमारतों में देखने को मिलती है।
  4. ये नाव बनाने का काम भी करते थे।
  5. इनका महत्त्वपूर्ण शिल्प मिट्टी की मुहरें और मूर्ति बनाने तक सीमित था।
  6. समाज में चंद लोग स्वर्णकार या आभूषण विनिर्माता थे। स्वर्णाभूषण, रजत-भूषण और रत्नाभूषण बनाए जाते थे।
  7. हड़प्पाई कारीगर मणियों के निर्माण में भी निपुण थे।
  8. वे कुम्हारी कला से भी परिचित थे । चाक की सहायता से बर्तन चिकने और चमकीले बनाये जाते थे।

प्रश्न 3.
हड़प्पा नगरों का विन्यास कैसा था? इसकी विलक्षणताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा नगरों का विन्यास तथा प्रमुख विलक्षणतायें:
हड़प्पा सभ्यता का नगर का विन्यास जाल की भांति था। नगर एक निश्चित योजना के अनुसार बसाये गये थे। इसकी प्रमुख विलक्षणतायें या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. नगरों में सड़कें बनायी गयी थी जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। सड़कें गलियों से सम्बद्ध थीं। सड़कों और गलियों के कारण नगर कई खण्डों में विभक्त था।
  2. मकान, सड़कों और गलियों के किनारे बनाये गये थे। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों नगर-दुर्ग (Garrison) थे। इन दुर्गों में शासक वर्ग रहता था। दुर्गों से बाहर पक्की ईंटों के मकान बने थे जिनमें सामान्य लोग रहते थे।
  3. मोहनजोदड़ो के प्रमुख सार्वजनिक स्थल दुर्ग में एक विशाल स्नानागार है। यह 11.88 मीटर लम्बा, 7.01 मी. चौड़ा तथा 2.43 मीटर गहरा है। अनुमान है कि इसका प्रयोग महत्त्वपूर्ण अवसरों पर किया जाता होगा।
  4. अनाज के गोदाम भी बनाये गये हैं। हड़प्पा नगर के ऐसे एक गोदाम में 6 अन्तः कक्ष हैं।
  5. इन नगरों की जल-निकास व्यवस्था अति-सुधड़ और योजनाबद्ध थी। घरों का पानी भूगत और स्थान-स्थान पर ढक्कन-बंद नालियों से होता हुआ बस्ती सीमा से बाहर एक बड़े नाले का रूप लेता था और ऐसे कई नाले समूचे नगर की सीमा से बाहर त्यक्त-स्थान में मल-व्ययन एवं विसर्जन करते थे।
  6. लगभग सभी घरों में स्नानागार, कुएँ व आँगन आदि थे। इस प्रकार हड़प्पा नगरों का विन्यास अत्यन्त उच्चकोटि का था।

प्रश्न 4.
हड़प्पाई लोगों के मुख्य काम-धंधे क्या थे? उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों के आधार पर वर्णन कीजिए। अथवा, “सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों की आजीविका के साधन” शीर्षक से 100 शब्दों की सीमा में एक अवतरण लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पाई सभ्यता के लोगों को आजीविका के विविध साधनों का विशेष ज्ञान था इसीलिए वे समृद्ध और सुखी थे। इनका मुख्य व्यवसाय खेती था। ये लोग गेहूँ, जौ आदि की खेती करते थे। दूसरा मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। पालतू पशुओं में बैल, बकरी, सुअर, भैंस और ऊँट आदि प्रमुख थे। जंगली जानवरों में बन्दर, रीछ, खरगोश, चीता और गैंडा आदि थे। उनका तीसरा मुख्य व्यवसाय कपड़े तैयार करने (विनिर्माण) का था । आभूषण बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और व्यापार करना भी उनके प्रमुख व्यवसायों में शामिल थे। उत्खनन में प्राप्त बाटों से हड़प्पाई लोगों की व्यापारप्रियता स्पष्ट झलकती है। उनका व्यापार भारत तक सीमित न होकर विदेशों में भी फैला था। जल और स्थल दोनों मार्गों से यह व्यापार सुमेरिया और बेबीलोन आदि दूर-दूर के देशों के साथ किया जाता था।

प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी के लोगों द्वारा बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों की मुख्य विशेषताएं कौन-कौन सी थी?
उत्तर:
सिन्धु घाटी के लोगों द्वारा बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों की निम्नलिखित विशेषताएँ थी –

  1. सिन्धु घाटी के लोगों द्वारा प्रयुक्त होने वाले बर्तन चाक पर बने हुए होते थे। यह बात अपने में स्पष्ट करती है कि यह संस्कृति पूर्णतया विकसित थी।
  2. रूप और आकार की दृष्टि से इन बर्तनों की विविधता आश्चर्यजनक है।
  3. पतली गर्दन वाले बड़े आकार के घड़े तथा लाल रंग के बर्तनों पर काले रंग की चित्रकारी आदि हड़प्पा के बर्तनों की दो मुख्य विशेषताएँ हैं।
  4. इन बर्तनों पर अनेक प्रकार के वृक्षों, त्रिभुजों, वृत्तों और बेलों आदि का प्रयोग करके अनेक प्रकार के नमूने बनाये गये हैं।

प्रश्न 6.
“पकी मिट्टी की मूर्तियाँ और सीलें हड़प्पाई लोगों की धार्मिक प्रथाओं पर प्रचुर प्रकाश डालती हैं।” विवेचन करें। अथवा, हड़प्पाई मुहरों का धार्मिक महत्त्व 100 शब्दों में लिखें।
उत्तर:
पकी मिट्टी की मूर्तिकाएँ और सीलों या मुहरों का हड़प्पाई लोगों की धार्मिक प्रथाओं को जानने में विशेष महत्त्व है। हड़प्पा में पकी मिट्टी की मूर्तिकायें भारी संख्या में मिली हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये मूर्तियाँ मातृदेवी की मूर्तिकायें हैं क्योंकि एक स्त्री मूर्तिका के पेट से निकलता हुआ पौधा दिखाया गया है। यह देवी की प्रतीक भी मानी जाती है।

सीलों पर धर्म से सम्बन्धित अनेक आकृतियाँ मिलती है। एक सील पर एक पुरुष देवता अंकित है जिसके तीन सींग हैं और इसके आस-पास अनेक पशु अंकित किये गए हैं। इसकी पहचान पशुपति या शिव से की गयी है। सीलों पर पशुओं के अंकन से ज्ञात होता है कि लोग पशुओं की भी पूजा करते थे।

प्रश्न 7.
अन्य सभ्यता की तुलना में सिन्धु घाटी की सभ्यता के विषय में अधिक जानकारी नहीं मिलती है। क्यों?
उत्तर:
स्वल्प जानकारी मिलने के कारण (हेतुक):

  1. इसकी निश्चित तिथि ज्ञात नहीं है। तुलना के आधार पर इसकी तिथि निश्चित की गई हैं। इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है।
  2. हड़प्पा संस्कृति की लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है जिससे इसकी तिथि नहीं हो पाती तथा विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत जानकारी नहीं मिलती।
  3. तिथि के अभाव में साहित्य, रीति-रिवाज, रहन-सहन, धार्मिक क्रिया-कलापों के विषय में निश्चित जानकारी प्राप्त नहीं होती।
  4. हड़प्पा संस्कृति के नागरिकों के विषय में कोई निश्चित ज्ञान नहीं है । ये मूल निवासी कहाँ के थे, पता नहीं चलता।
  5. हड़प्पा संस्कृति के प्राचीन साहित्यिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
  6. चित्रलिपि की गूढ़ता अभी तक पुरातत्त्वविदों और भाषाविदों की समझ से बाहर बनी हुई है।

प्रश्न 8.
सिन्धु घाटी के विभिन्न केन्द्रों से जो मुहरें (Seals) मिली हैं उनका क्या महत्त्व है? अथवा, “पकी मिट्टी की मूर्तिकाएँ और मुहरें हड़प्पाई लोगों की धार्मिक प्रथाओं पर प्रचुर प्रकाश डालती हैं।” विवेचना करें।
उत्तर:
सिन्धु घाटी के लोगों की पकी मिट्टी की मूर्तियाँ और मुहरें वहाँ की संस्कृति का विशिष्ट उदाहरण हैं। यह हड़प्पाई लोगों की धार्मिक आस्थाओं पर प्रकाश डालती है। शिव, मातृदेवी आदि की पूजा करने के ध्वंसावशेष बताते हैं कि पुरुष और प्रकृति की अदृष्ट शक्तियों का उन्हें संज्ञान, अभिज्ञान या बोध था। कला की दृष्टि से ये अपना जवाब नहीं रखती। इन मुहरों पर खुदे हुए साँड, गेंडा, हाथी, बारहसिंघा के चित्र देखते ही बनते हैं। ये चित्र अपनी वास्तविकता एवं सुन्दरता के लिए अद्वितीय हैं। एक अन्य प्रकार से भी यह मुहरें प्रसिद्ध हैं। कुछ मुहरों पर अभिलेख खुदे हैं जो ऐतिहासिक दृष्टि से बड़े महत्वपूर्ण हैं। अभी उन पर खुदी लिपि पढ़ी नहीं जा सकी है। जब साहित्यकार इसे पढ़ने में सफल हो जायेंगे तो इन मुहरों का महत्त्व और भी बढ़ जायेगा-इस बात से कौन इंकार कर सकता है।

प्रश्न 9.
हड़प्पा संस्कृति के प्रमुख स्थलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अभी तक हड़प्पा संस्कृति के लगभग 1000 स्थलों की जानकारी मिल पाई है। हड़प्पा संस्कृति के आधिकारिक तौर पर प्रमुख स्थल केवल एक दर्जन हैं। ये निम्नलिखित हैं

  1. हड़प्पा: यह स्थल पश्चिमी पंजाब में मॉटगोमरी जिले में स्थित है। इसके उत्तर क्षेत्र से एक विशाल और समृद्ध नगर का ध्वंसावशेष प्राप्त हुआ है।
  2. मोहनजोदड़ो: यह सिन्ध के लरकाना जिले में सिन्धु नदी के तट पर स्थित है। यहाँ से समृद्ध नगर के साथ-साथ एक विशाल सार्वजनिक स्नानागार भी प्राप्त हुआ है।
  3. चहुँदड़ो: यह मोहनजोदड़ो से दक्षिण-पूर्व दिशा में 130 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहाँ से भी एक नगर का ध्वंसावशेष मिला है।
  4. लोथल: यह स्थल काठियावाड़ में स्थित है। विद्वानों के अनुसार यह हड़प्पा संस्कृति का एक बन्दरगाह था। स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संस्कृति में सती-प्रथा भी प्रचलित थी।
  5. कालीबंगन: यह राजस्थान के गंगानगर जिले की घाघरा नदी के किनारे स्थित है। यहाँ से भी पूर्ण नगर का अवशेष मिला है।
  6. बनावली: यह हरियाणा के हिसार जिले में है । यहाँ से हड़प्पा-पूर्व और हड़प्पा-कालीन संस्कृतियों के अवशेष मिले हैं।
  7. सुतकार्गेडोर और सुरकोतड़ा: इन समुद्रतटीय नगरों में हड़प्पा की विकसित और समृद्ध संस्कृति के अवशेष मिले हैं।
  8. रंगपुर और रोजड़ी: ये काठियावाड़ प्रायद्वीप में है। यहाँ उत्तर हड़प्पा के अंश मिले हैं।

प्रश्न 10.
हड़प्पा निवासियों के व्यापार और वाणिज्य का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
हड़प्पा निवासियों का व्यापार और वाणिज्य:
इन लोगों का आंतरिक और विदेशी व्यापार उन्नत था। हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगरों में तैयार की जाने वाली वाणिज्यिक वस्तुओं के उत्पादन का कच्चा माल उपलब्ध नहीं था। अन्य देशों व विदेशों से आयात करके इस जरूरत। को पूरा किया जाता था। उदाहरण के लिए-तांबे का आयात मुख्यतः खेतड़ी से होता था। सीप, शंख, कौड़ी आदि काठियावाड़ के समुद्र तट से आयात की जाती थी। जल और स्थल दोनों मार्गों से व्यापार विकसित था। अवशेषों में मुहर पर एक समुद्री जहाज की आकृति चित्रित है जो इस बात का द्योतक है कि इस समय नौका व छोटे जहाजों का प्रयोग होता था। स्थल-मार्ग द्वारा आवागमन के लिए घोड़े व गधे के अलावा बैलगाड़ियों का भी प्रयोग होता था। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के अवशेषों में मिट्टी की अनेक गाड़ियाँ भी मिली हैं। हड़प्पा के अवशेषों में कांसे का बना हुआ एक इक्का भी मिला है जिससे पता चलता है कि इस युग में इक्कों का प्रयोग होता था।

प्रश्न 11.
हड़प्पा लोगों के धार्मिक रीति-रिवाजों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पाई लोगों के धार्मिक रीति-रिवाजों का अनुमान उनकी कुछ मूर्तियों, बर्तनों और ताम्रपत्रों के चित्रों से मिलता है। मातृदेवी की अनेक मूर्तियाँ मिली हैं। इनसे पता चलता है कि मातृदेवी ही उनकी पूज्य देवी थी। एक मूर्ति ऐसी मिली है जो बिल्कुल नग्न है। हाथ में कटार तथा गले में नर-मुंडों की माला है। इससे पता चलता है कि लोग देवी, देवताओं को प्रसन्न करने के लिए नरबलि भी देते थे। यह नहीं कहा जा सकता है कि मातृदेवी के लिए मन्दिर भी बनाये जाते थे अथवा नहीं मोहनजोदड़ो से इनके एक देवता की मूर्ति मिली है जो कि आजकल के शिव देवता से मिलती-जुलती है। सम्भवतः ये लोग वृक्षों तथा पशुओं (सांड आदि), सांपों और पत्थरों की भी पूजा करते थे। यह धर्म आजकल के हिन्दू धर्म का उदयी रूप था। बड़ी संख्या में प्राप्त ताबीज उनकी भूत-प्रेत में विश्वास रखने और अदृष्ट एवं अशरीरी शक्तियों से डरने की मनोवृत्ति के परिचायक हैं। ताबीज वस्तुतः अज्ञान भय की आशंका से मुक्त करने वाले मंत्र या बीज-मंत्र प्रतिष्ठित कण्ड-गंड के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 12.
हड़प्पा संस्कृति व आर्य सभ्यता की तुलना कीजिए। दोनों के प्रमुख भेदों .. को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति और आर्य सभ्यता में अंतर –

  1. आर्य एक ग्रामीण सभ्यता थी जबकि हड़प्पा संस्कृति एक शहरी सभ्यता थी।
  2. हड़प्पा संस्कृति के लोग शांतिप्रिय थे जबकि आर्य युद्ध को पसंद करते थे। वे विभिन्न प्रकार के हथियारों से भलीभाँति परिचित थे।
  3. घोड़ा, आर्यों के लिए युद्ध, यातायात और आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण था जबकि हड़प्पा संस्कृति के लोग इससे अपरिचित थे।
  4. आर्य लोग गाय को पवित्र मानते थे जबकि हड़प्पाई लोगों ने यह स्थान सांड को दिया था।
  5. हड़प्पाई लोग मूर्ति-पूजक थे जबकि आर्य मूर्ति-पूजा से अपरिचित थे।
  6. हड़प्पा संस्कृति का व्यापार आर्य संस्कृति के व्यापार से अधिक विकसित था।

प्रश्न 13.
हड़प्पा संस्कृति के सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति का सामाजिक जीवन –

  1. भोजन: इस सभ्यता के लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे। फलों का प्रयोग अतिरिक्त भोजन के रूप में किया जाता था। गेहूँ और जौ प्रमुख खाद्यान्न थे।
  2. वस्त्र: विभिन्न स्थलों की खुदाई से प्राप्त बुने हुए और तकली पर कटे हुए बहुत से वस्तु अवशेषों, सुइयों व ताँबे के बटनों से उनके कताई और बुनाई शिल्प में जानकार होने का पता चलता है। सूती और ऊनी कपड़ों का प्रयोग किया जाता था। ये लोग रंगीन वस्त्र पहनते थे। स्त्री और पुरुषों की पोशाक में विशेष अन्तर नहीं था।
  3. आभूषण: स्त्री-पुरुष दोनों ही आभूषणों का प्रयोग करते थे। धनी वर्ग चाँदी आदि बहुमूल्य धातुओं परन्तु निर्धन वर्ग हड्डी और ईंटों के बने आभूषण धारण करता था। हार, कुण्डल, बाजूबंद, कटिबंद, अंगूठी आदि प्रमुख आभूषण थे।
  4. सफाई एवं स्वास्थ्य: हड़प्पा संस्कृति के लोग शरीर और घर की सफाई पर अधिक ध्यान देते थे। कुँओं और स्नानागारों के अवशेषों से पता चलता है कि लोग स्नान करते थे एवं घरेलू वस्तुओं की सफाई करते थे। खुदाई में कूड़ा एकत्रित करने के टैंक भी मिले हैं।
  5. मनोरंजन: ये लोग आखेट, पक्षी पालन, मछली पकड़ना, शतरंज, नृत्य, चित्रकला आदि से मनोरंजन करते थे।
  6. श्रृंगार प्रसाधन: उत्खनन से प्राप्त हाथीदाँत की वस्तुएँ, पीतल की फ्रेम वाले शीशे, लिपस्टिक आदि से पता चलता है कि शृंगार और केश-सज्जा का भी शालीन ज्ञान रखते थे।

प्रश्न 14.
हड़प्पा सभ्यता कैसे समाप्त हुई? विवेचना करें।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के अवसान को लेकर विद्वानों में मतभेद है। अभी तक ज्ञात कुछ कारण इस प्रकार हैं –

  1. सिन्धु क्षेत्र में आगे चलकर जलवायु परिवर्तन की स्थिति उत्पन्न हुई और जल-स्तर घटने लगा, वर्षा भी कम होने लगी अतः कृषि और पशुपालन का मुख्य व्यवसाय कर पाना असंभव हो गया होगा।
  2. कुछ विद्वानों के अनुसार सम-सीमान्त उपयोगिता हास नियम के अनुसार अति-भोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण होने लगी और ऊसर क्षेत्र बढ़ने लगा। सिन्धु घाटी के पतन का यह भी एक प्रमुख कारण रहा होगा।
  3. कुछ लोगों के अनुसार यहाँ भूकम्प आने से बस्तियाँ समाप्त हो गयीं।
  4. कुछ दूसरे लोगों का कहना है कि यहाँ भीषण बाढ़ आ गयी और पानी जमा हो जाने के कारण भारी मात्रा में विस्थापन हुआ।
  5. एक विचार म ए गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट टू यह भी माना जाता है कि सिन्धु नदी की धारा बदल गयी और सभ्यता का क्षेत्र नदी से दूर हो गया।

प्रश्न 15.
हड़प्पा सभ्यता के पशुपालन व्यवसाय का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता का पशुपालन व्यवसाय –

  1. हड़प्पा स्थलों से प्राप्त अवशेषों से। ज्ञात होता है कि यहाँ के लोगों का एक मुख्य व्यवसाय पशुपालन का था।
  2. प्राप्त अवशेषों में भेड़, बकरी, भैंस तथा सुअर की हड्डियाँ मिली हैं। पुरा-प्राणिविज्ञानियों द्वारा किये गये अध्ययनों से संकेत मिलता है कि ये सभी जानवर पालतू थे।
  3. हड़प्पाई मुद्राओं पर वृषभ (बैल) का अंकन है। बैल का प्रयोग कृषि कार्यों में किया जाता था।
  4. जंगली प्रजातियों जैसे वराह (सूअर), हिरण तथा घड़ियाल की हड्डियों मिली हैं। यह निश्चित नहीं है कि हड़प्पाई लोग इन जानवरों का स्वयं शिकार करते थे या इनका मांस अन्य शिकारी समुदाय के लोगों से प्राप्त करते थे।
  5. मछली तथा पक्षियों की हड्डियाँ भी मिली हैं। इससे पता चलता है कि वे इनका मांस भी खाते थे।

प्रश्न 16.
भारतीय सभ्यता को हड़प्पा संस्कृति की क्या देन है? अथवा, सैन्धव सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति के उन तत्त्वों का वर्णन कीजिए जो आज भी भारतीय जीवन में परिलक्षित होते हैं।
उत्तर:
सैन्धव सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति की आधुनिक भारतीय जीवन को देन:
हड़प्पा संस्कृति में भारतीय जीवन के अनेक तत्त्व विद्यमान थे। भारतीय जीवन के हड़प्पा संस्कृति में दृष्ट कुछ तत्व निम्नलिखित हैं:

1. नगर विन्यास:
हड़प्पाई नगर एक निश्चित योजना के अनुसार बसाये गये थे । नगर में लम्बी चौड़ी सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटकर चौराहों का निर्माण करती थी । यह लक्षण आधुनिक जीवन में भी दिखाई पड़ते हैं।

2. मकान:
सैन्धव सभ्यता के लगभग प्रत्येक घर, सड़कों और गलियों के किनारे पर थे। भारतीय घरों में आज भी आँगन, स्नान-कक्ष तथा छत पर जाने के लिए सीढ़ियाँ ठीक वैसी ही दिखाई पड़ती हैं जैसी हड़प्पा संस्कृति के मकानों में रही होंगी। घरों में दरवाजों और खिड़कियों का प्रयोग आज भी होता है।

3. आभूषण एवं श्रृंगार प्रसाधन:
आधुनिक भारतीय स्त्रियों के समान हड़प्पा स्त्रियाँ आभूषण पहनती थीं और अधर-रंजक (Lipstick), उबटनों का लेपन और सुगंधित द्रव्य (Powder) आदि का प्रयोग करती थीं।

4. धार्मिक समानता:
आधुनिक भारतीय, सैन्धव निवासियों की तरह शिव, मातृदेवी, तथा पशु आदि की पूजा करते हैं।

प्रश्न 17.
सिन्धु घाटी की सभ्यता का अन्य सभ्यताओं से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए। अथवा, हड़प्पा संस्कृति और मेसोपोटामिया की सभ्यता का आपसी सम्बन्ध क्या है?
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति के स्थलों से प्राप्त अवशेषों से ज्ञात होता है कि यहां के निवासियों का सम्बन्ध चीन, मिस्र, क्रीट और मेसोपोटामिया आदि के साथ भी था। ये अवशेष एक विकसित सभ्यता के समस्त लक्षणों को रखते हैं। हड़प्पा संस्कृति व मेसोपोटामिया से प्राप्त बर्तन और मोहरें स्पष्ट साक्ष्य हैं कि सिन्धु-घाटी की सभ्यता के लोगों (भारतीयों) का मेसोपोटामिया के साथ व्यापार संबंध था। केश-सज्जा की समानता भी दिखाई पड़ती है। मिस्र की सभ्यता के आभूषण इस सभ्यता से मिलते-जुलते हैं।

इन समानताओं के साथ असमानताएँ भी दिखाई देती हैं। नगर-विन्यास और स्थापत्य-कला (Architecture) की दृष्टि से हड़प्पा संस्कृति अन्य स्थानों की सभ्यताओं से उच्चकोटि की थी। हड़प्पाई लोग अध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में भी अन्य सभ्यताओं से आगे थे। हड़प्पा सभ्यता के धारणा-तत्व हिन्दु-धर्म से मेल खाते हैं।

प्रश्न 18.
हड़प्पा संस्कृति गृह स्थापत्य की प्रमुख विशेषतायें कौन-कौन सी थीं।
उत्तर:
गृह-स्थापत्य की विशेषतायें:

  1. प्रायः सभी घरों में आँगन होता या जिसके चारों ओर कमरे बने होते थे। आँगन का उपयोग खाना बनाने और सूत कातने जैसे कुटीर-उद्योगों को चलाने में होता था।
  2. लोग सम्भवतः एकांत को महत्त्व देते थे। भूतल पर बनी दीवारों में खिड़कियाँ नहीं थीं। इसके अलावा मुख्य द्वार से आंतरिक भाग अथवा आँगन को सीधा नहीं देखा जा सकता था।
  3. प्रत्येक घर में ईंटों के फर्श से बना अपना एक स्नानकक्ष होता था जिसकी नालियाँ सड़क की नालियों से जुड़ी होती थी।
  4. कुछ घरों में छत पर जाने के लिए सीढ़ियों के अवशेष मिले थे।
  5. कई आवासों में कुएँ। ये ऐसे कक्ष में बनाए गए थे जिसका मुँह सड़क की ओर खुलता था। इनमें दरवाजा नहीं रहता था अतः राहगीर इनसे जल ले सकते थे।

प्रश्न 19.
हड़प्पाई लोगों की सिंचाई व्यवस्था का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
सिंचाई व्यवस्था:

  1. अधिकांश हड़प्पा स्थल अर्द्ध-शुष्क या परिच्छाया क्षेत्रों में स्थित हैं जहाँ संभवतः कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता पड़ती होगी।
  2. अफगानिस्तान के शोर्तुघई नामक हड़प्पा स्थल से नहरों के कुछ अवशेष मिले हैं, परन्तु पंजाब और सिंध से नहीं मिले हैं। हो सकता है कि प्राचीन नहरें बाढ़ से भर गई हों।
  3. सम्भवतः कुँओं से भी सिंचाई होती होगी।
  4. जलाशयों से भी खेतों की सिंचाई की जाती थी। धौलावीरा (गुजरात) की खुदाई में एक जलाशय मिला है।

प्रश्न 20.
हड़प्पा सभ्यता में मनके किस प्रकार बनाये जाते थे?
उत्तर:
मनकों का निर्माण:

  1. हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन में मनकों का विशेष महत्त्व था। ये विभिन्न पदार्थों से बनाये जाते थे। इनमें कार्नीलियन (सुन्दर लाल रंग का), जैस्पर, स्फटिक, क्वार्टज तथा सेलखड़ी जैसे पत्थर, ताँबा, काँसा, सोना, शंख, फयॉन्स, पकी मिट्टी आदि थे।
  2. कुछ मनके दो या उससे अधिक पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाये जाते थे और कुछ स्वर्णजटित पत्थर के होते थे।
  3. मनके चक्राकार, बेलनाकार, गोलाकार, ढोलाकार तथा कुछ मनके सममिति रहित पाए गए हैं।
  4. कुछ मनकों में चित्र उत्कीर्ण है जबकि कुछ में केवल रेखाचित्र हैं।
  5. मिट्टी के मनकों को भाड़ में पकाया जाता था। पत्थर के पिंडों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था और बारीकी से तराशकर अंतिम रूप दिया जाता था। यह कार्यविधि घिसाई, पालिश और इनमें छेद करने के साथ पूरी होती थी।

प्रश्न 21.
हड़प्पा सभ्यता के नगर नियोजन की विशेषतायें बताइए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता के नगर नियोजन की विशेषतायें –

  1. बस्ती दो भागों में विभाजित थी-एक भाग छोटा परन्तु ऊँचाई पर बनाया गया और दूसरा कहीं अधिक बड़ा लेकिन नीचे बनाया गया। पुरातत्त्वविदों ने इन्हें क्रमश: दूकी और निचला शहर का नाम दिया है। दोनों बस्तियों को अलग-अलग दीवारों से घेर कर दूरी रखी गई थी।
  2. बस्ती का नियोजन करने के बाद ही उसके निर्माण का कार्य आरंभ किया जाता था। यह सभ्य लोगों की नियोजित बस्तियाँ थी।
  3. मकान धूप में सुखाई गई अथवा भट्टी में पकाई गई ईंटों के मिले हैं। इन ईंटों की लम्बाई, ऊँचाई की चार गुनी और चौड़ाई ऊँचाई की दुगुनी होती थी। इस प्रकार की ईंटें सभी हड़प्पाई बस्तियों में प्रयोग में लाई गई थीं।
  4. सड़कों तथा गलियों को लगभग एक ‘ग्रिड’ पद्धति (जालीनुमा) से बनाया गया था। ये एक-दूसरे को समकोण पर काटती थी।
  5. उनके पार्श्व भागों में आवासों का निर्माण किया गया था।

प्रश्न 22.
अवतल चक्कियों के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर:
अवतल चक्कियाँ –

  1. इनमें चाक के नीचे वाला गोल पत्थर अंदर की ओर धंसा हुआ है।
  2. इनका प्रयोग अनाज पीसने के लिए किया जाता था।
  3. ये चक्कियाँ प्रायः कठोर, उबड़-खाबड़, चकमक अथवा बलुआ पत्थर से निर्मित थीं।
  4. अवतल होने से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इन्हें घर्षण के समय स्थिर रखने के लिए जमीन अथवा मिट्टी में जमाकर रखा जाता होगा।
  5. ये चक्कियाँ प्रायः दो प्रकार की हैं-एक वे हैं जिनमें एक बड़े शिला-खण्ड पर दूसरे छोटे टुकड़े को आगे-पीछे चलाया जाता होगा। नीचे के बड़े शिलाखण्ड का घिसने से अवतल होना इस तथ्य का प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य है। दूसरी वे हैं जिनका प्रयोग केवल सालन या तरी बनाने के लिए जड़ी बूटियाँ तथा मसाले कूटने के लिए किया जाता था। इन्हें ‘सालन पत्थर’ भी कहा गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
हड़प्पा संस्कृति की विभिन्न विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा संस्कृति की मुख्य विशेषतायें –
1. काल:
इस सभ्यता में प्रचलित भाषा आज तक नहीं पढ़ी जा सकी अतः इस सभ्यता का सही काल-क्रम निश्चित करने के लिए हमें दूसरे देशों में पाए जाने वाली सभ्यताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। बेबीलोन और मेसोपोटामिया में ठीक सिन्धु-घाटी की सभ्यता के भग्नावशेषों से प्राप्त कुछ बर्तन और मोहरें मिली हैं। इन देशों की प्राचीन सभ्यता का काल ईसा से लगभग 3000 वर्ष पहले का माना जाता है। इसलिए यह सभ्यता आज से 500 वर्ष पहले की मानी गई है।

सिन्धु घाटी की खोजों से पता चलता है कि उस समय लोग प्रायः नगरों में रहते थे। डॉ. वी. डी. पुलस्कर के अनुसार मोहनजोदड़ो की खुदाई में सात संस्त प्राप्त हुए हैं। इनके आधार पर इस सभ्यता को 3250 से 2750 और 220 सा०यु०पू० के मध्य की सभ्यता माना जाता है। इन स्तरों में तीन स्तर उत्तरकालीन तीन मध्यकालीन और एक प्राचीन है। सम्भवतः यहाँ और भी प्राचीन स्तर रहे हों परन्तु वे पाताल या जल के गर्त में विलीन हो गये हैं। ज्ञात स्तरों में प्रत्येक के लिए 500 वर्ष की अवधि निश्चित की गयी है। इस आधार पर सिन्धु-घाटी की सभ्यता का जीवन काल निकालने का प्रयास किया गया है। कार्बन-विधि से भी इसकी तिथि निकालने का प्रयास किया गया है। समस्त आधारों पर कहा जा सकता है कि इस सभ्यता का प्रारम्भ 2800 सा०यु०पू० से 2200 सा०यु०पू० तक हुआ होगा। यह भी माना जाता है कि इस सभ्यता का प्रारम्भ बहुत पहले रहा होगा। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो का विकसित जन-जीवन निश्चित रूप से शताब्दियों के क्रमिक प्रयास का फल रहा होगा। इस प्रकार इस सभ्यता को आज से 5009 वर्ष पूर्व का माना जा सकता है।

2. नगर निर्माण योजना:
स्थलों के उत्खनन दर्शाता है कि उस समय के लोग नगरों में रहते थे। डॉ. पुलस्कर के अनुसार मोहनजोदड़ो में जाने वाले व्यक्ति उनके नगर निर्माण को देखकर चकित रह जाते होंगे। इन खण्डहरों में आकर ऐसा प्रतीत होता है कि हम लंकाशायर के किसी आधुनिक नगर में खड़े हैं। नगर का निर्माण सुनियोजित है। डॉ. मैले ने इस सम्बन्ध में लिखा है –

“It is interesting to note that these ancient cities of the Indus and earliest yet disocovered had a scheme of town planning existed.”

नगर में बड़ी-बड़ी सड़कें थी जो एक-दूसरे से मिलकर आधुनिक सड़कों जैसे चौराहे (crossing, roundabout) बनाती थी। मैके के विचार में यह सड़कें और गलियाँ इस प्रकार बनी हुई थीं कि आने वाली वायु एक कोने से दूसरे कोने तक शहर को स्वयं साफ कर दे। यह कहना कठिन है कि शहर की सफाई एक व्यक्ति के हाथ में थी अथवा एकाधिक के, परन्तु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि इस सभ्यता जितनी नागरिक सुख-सुविधाएँ अन्य किसी भी प्राचीन सभ्यता में नहीं दिखाई दी है। गलियों में रोशनी का विशेष प्रबंध था। शहर की गन्दगी को शहर से बाहर खाइयों में फेंका जाता था। आजकल की तरह ये लोग जल निष्कासन की सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति का ज्ञान रखते थे। उन्होंने यह नालियाँ खड़िया-मिट्टी, चूने और एक प्रकार के सीमेंट से बनाई थी। वे अपनी नालियों को ऊपर से खुली नहीं छोड़ते थे। वर्षा का पानी शहर से बाहर जाने के लिए एक बड़ा नाला बनाया गया था। सिन्धु घाटी के निवासियों की जल-निष्कासन व्यवस्था से यह पता चलता है कि वे सफाई का विशेष ध्यान रखते थे।

3. भवन-निर्माण कला:
सिन्धु घाटी की खुदाई करने से यह पता चलता है कि उस काल में एक कमरे के मकान से लेकर बड़े-बड़े भवन तक बनाये जाते थे। यह भवन प्रायः तीन प्रकार के होते थे –

  • आवास-गृह
  • पूजा गृह या बैठक-कक्ष (Drawing Room)
  • सार्वजनिक स्नानागार।

प्रायः पक्की ईंटों और मिट्टी के बने विभिन्न आकार-प्रकार के मकान मिले हैं। मकान कई तलों के होते थे। ऊपर जाने के लिए प्रायः सीढ़ियों का प्रयोग किया जाता था। मकानों में हवा और धूप जाने के लिए रोशनदान तथा दरवाजों का प्रयोग किया जाता था। प्रत्येक घर में रसोई घर व स्नानागृह होता था। दूसरे प्रकार के भवन को पूजा गृह या बैठक कक्ष जाना जाता था जो राज-काज चलाने के प्रयोग में आते थे। तीसरे प्रकार के भवन सार्वजनिक स्नानागार थे। इनमें सम्भवतः सबसे बड़ा स्नानागार मोहनजोदड़ो में था। प्राचीन काल में ऐसे जलाशयों के चारों ओर बरामदे तथा कमरों का विशेष प्रबन्ध था। तालाब में उतरने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई थी। गंदा पानी बाहर निकालने के लिए नालियाँ बनी थी । हजारों वर्ष से आजतक यह तालाब अपने जीवन्त रूप में है। इस विषय में डॉ. मुखर्जी का कहना है –

“The construction of such a swimming bath reflects great crediton engi neering of those days.”

4. शिल्प एवं तकनीकी:
भवन-निर्माण कला के अतिरिक्त सिन्धु घाटी के लोगों ने मूर्तिकला, नक्काशी की कला, मिट्टी के बर्तन बनाने की कला तथा चित्रकला में विशेष उन्नति कर रखी थी। मूर्तिकला की यहाँ जो मनुष्यों तथा पशुओं की मूर्तियाँ मिली हैं उनसे स्पष्ट होता है कि सिन्धु-घाटी के लोग मूर्तिकला में बड़े चतुर थे। बहुत-सी मोहरों पर जोकि खुदाई से प्राप्त हुई हैं, बड़े सुन्दर ढंग से और विभिन्न प्रकार के चित्र खुदे हैं। सांड, बैल, बारहसिंगा तथा हाथी जैसे पशुओं के चित्र उकेरे गए हैं । मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा के लोगों ने तरह-तरह के मिट्टी ” के बर्तन बनाए हैं जिन्हें आज की भाँति रोगन तथा पालिश करके रखा जाता था। यह पालिश किये हुए बर्तन संसार में मृदा-शिल्प का एक बेजोड़ नमूना है।

5. लेखन कला:
मिस्र और सुमेरिया की भाँति सिन्धु घाटी के लोग भी लेखन कला की जानकारी नहीं रखते थे। उनकी मुद्राओं में जहाँ मनुष्य और विभिन्न पशुओं के चित्र थे, वहीं कुछ लेख भी अंकित हैं। 400 से अधिक संकेतों वाली चित्रलिपि प्राप्त हुई है। इस लिपि को कई वर्षों तक पढ़ने का प्रयत्न किया गया लेकिन अभी तक कोई सफल नहीं हो सका। मिस्त्र और सुमेरिया की चित्र-लिपि पढ़ी जा चुकी है अत: उम्मीद की जाती है कि सिन्धु-घाटी की लिपि का रहस्य भी एक-न-एक दिन खुल जाएगा।

6. कृषि तथा उद्योग:
सिन्धु-घाटी के निवासियों का भोजन बहुत ही सादा था। वे गेहूँ, जौ और दूध से बनी हुई चीजों का अधिक प्रयोग करते थे। सब्जियाँ भी उनके भोजन का प्रमुख अंग थीं। उनका सबसे मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी था। अधिकतर जौ या गेहूँ की खेती की जाती थी। उनका दूसरा मुख्य व्यवसाय पशुओं को पालना था। पालतू पशुओं में बैल, बकरी, सूअर, भैंस तथा ऊँट और जंगली जानवरों में बंदर, रीछ, खरगोश, हिरण और गेंडा मुख्य पशु थे। उनका तीसरा मुख्य व्यवसाय कपड़े तैयार करने का था। आभूषण बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना और व्यापार करना आदि भी उनके मुख्य व्यवसायों में से थे। खुदाई में जो अनेक बाट प्राप्त हुए हैं उनसे सिन्धु-घाटी के लोगों की व्यापारप्रियता स्पष्ट झलकती है। उन लोगों का व्यापार भारत तक सीमित न रहकर विदेशों तक फैला हुआ था। जल और स्थल दोनों मार्गों से सुमेरिया और बेबीलोन आदि दूर-दूर के देशों के साथ भी व्यापार किया जाता था।

7. धर्म:
प्राप्त उपकरणों से ज्ञात होता है कि सिन्धु नदी की घाटी के निवासी मूर्तिपूजक थे। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में एक स्त्री के बहुत-से चित्र प्राप्त हुए हैं। उसकी कमर में एक करधनी बंधी है और सिर के ऊपर भी वह कुछ पहने हुए है। अनुमान है कि ये सब पृथ्वी माता के चित्र होंगे। उसकी पूजा संसार के एक विस्तृत क्षेत्र में होती है। यह भी कहा जाता है कि यह काली देवी का आरंभिक या आदि स्वरूप है। इसके अतिरिक्त एक देव की मूर्ति भी मिली है। इसके तीन मुख हैं और वह योगासन में बैठी है जिसके सिर पर विस्तृत प्रसाधन थे।

प्रश्न 2.
हड़प्या सभ्यता और आर्य सभ्यता में तुलना कीजिए। अथवा, हड़प्पा सभ्यता और आर्य सभ्यता में क्या अंतर है?
उत्तर:
हड़प्पा की सभ्यता एवं आर्य सभ्यता (Harappan Civilization and Aryan Civilization):
हड़प्पा के लोग उतने ही भारतीय हैं जितने कि आर्य सभ्यता के लोग। अब यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि इस सभ्यता का आर्य सभ्यता से क्या सम्बन्ध है? कुछ इतिहासकारों ने यह सिद्ध करने की चेष्टा की है कि हड़प्पा की सभ्यता भी आर्य सभ्यता की ही एक शाखा है परन्तु ऐसा करने में उन्हें कोई विशेष सफलता नहीं मिली है। वास्तव में हड़प्पा की सभ्यता और आर्य सभ्यता में कुछ ऐसी असमानताएँ हैं जो आसानी से भुलाई नहीं जा सकती जैसे:

  1. दोनों सभ्यताओं में पहला अन्तर यह है कि आर्य प्रायः ग्रामीण थे जबकि सिन्धु घाटी के लोग शहरी थे।
  2. दूसरा बड़ा अन्तर यह है कि हड़प्पा के निवासी शान्ति-प्रिय थे। वे तलवार, कवच और शिरस्त्राण से अपरिचित थे जबकि आर्य शूरकर्मा थे और प्रायः युद्ध में उलझे रहते थे। वे आक्रमण करने और आक्रमण से बचने की रणनीतियों से भली प्रकार परिचित थे।
  3.  तीसरा अन्तर यह है कि घोड़ा, जो आर्यों के आर्थिक जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग था, हड़प्पा के लोगों के लिए इतना महत्त्व नहीं रखता था और सम्भवतः वे इससे लगभग अपरिचित थे।
  4. चौथा अन्तर यह है कि आर्य लोग गाय को पवित्र मानते थे जबकि हड़प्पा के लोगों ने यह स्थान सांड (Bull) को दे रखा था।
  5. पाँचवा मुख्य अन्तर यह है कि हड़प्पा के लोग मूर्तिपूजक थे और शिव तथा अधिष्ठात्री देवी (Mother Goddess) उनके आराध्य थे। आर्य मूर्तिपूजा से अपरिचित थे। वे प्रकृति के भिन्न-भिन्न रूपों की उपासना करते थे।
  6. छठा बड़ा अन्तर यह है कि हड़प्पा के लोग घरेलू खेलों जैसे नाच व गाने को, तथा आर्य बाहर के खेलों जैसे शिकार और रथ दौड़ाना इत्यादि को अधिक महत्त्व देते थे। इन तर्कों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आर्य सभ्यता हड़प्पा की सभ्यता से भिन्न थी जिसमें द्रविड़ सभ्यता के लक्षण थे।

यद्यपि आर्य सभ्यता और हड़प्पा की सभ्यता दो भिन्न सभ्यताएँ थी फिर भी बहुत-से इतिहासकारों के अनुसार हड़प्पा के लोगों से आर्य लोग परीचित थे –

  1. ऋग्वेद में आर्यों के जिन विपक्षियों का उल्लेख है, वे वास्तव में हड़प्पा के लोगों की ओर संकेत करते हैं।
  2. आर्य ग्रन्थों में भगवान इन्द्र को नगरों का नाश करने वाला कहा गया है। आर्यों के नगर नहीं थे, इसलिए सम्भव है कि ये नगर हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने बसाए होंगे।
  3. ऋग्वेद में चपटी नाक और काले रंग वाले लोगों का उल्लेख है। वे अवश्य ही हड़प्पा में रहने वाले लोग होंगे।
  4. भेड़, बकरी, गाय, बैल और कुता आदि पशु जो आर्य तथा हड़प्पा के लोग दोनों पालते थे। इससे स्पष्ट होता है कि आर्य लोग तथा हड़प्पा के लोग साथ-साथ रहे या आर्य कुछ समय बाद में आए होंगे किन्तु उन दोनों के बीच परिचय अवश्य था।
  5. सोना, चाँदी जैसी धातुओं की जानकारी आर्य तथा हड़प्पा के लोगों को समान रूप से थी। अँगूठी और गले का हार दोनों लोग एक जैसे बनाते थे।
  6. स्त्रियों की वेशभूषा का ढंग लोगों का एक जैसा जान पड़ता है। इन बातों से सिद्ध होता है कि दोनों सभ्यताओं में कुछ मेल अवश्य था।

प्रश्न 3.
हड़प्पाई समाज पर प्रकाश डालिए। अथवा, हड़प्पा संस्कृति के सामाजिक जीवन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सामाजिक जीवन-प्राप्त अवशेषों से हड़प्पा संस्कृति के सामाजिक जीवन के विषय में निम्नलिखित जानकारी मिलती है –

1. सामाजिक गठन:
सैन्धव सभ्यता का समाज निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित था (क) विद्वान: इस वर्ग में पुरोहित, वैद्य, ज्योतिषी आते थे। (ख) योद्धा: इस वर्ग में सैनिक तथा राजकीय अधिकारी आते थे। (ग) व्यवसायी: इस वर्ग में व्यापारी और अन्य धंधों में लगे लोग आते थे। (घ)श्रमजीवी: इस वर्ग में घरेलू नौकर एवं मजदूर लोग आते थे।

2. भोजन:
हड़प्पा संस्कृति के लोगों का भोजन सादा और पौष्टिक था। उनके भोजन में गेहूँ, चावल, खजूर, फल, सब्जियाँ, दूध, दुग्ध पदार्थ, मिठाई, मांस और मछली आदि की प्रधानता थी। खुदाई में सिल-बट्टे भी मिले हैं। सम्भवतः ये लोग चटनी तथा स्वादिष्ट भोजन खाने के शौकीन थे।

3. वस्त्र:
सैन्धव सभ्यता के लोग ऋतुओं के अनुसार सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के कपड़ों का प्रयोग करते थे। कहा जाता है कि कपास की उत्पत्ति सबसे पहले भारत में ही हुई। प्राप्त मूर्तियों तथा खिलौनों से यह अनुमान लगाया जाता है कि ये साधारण ढंग से कपड़े पहनते थे। पुरुष प्रायः शाल की तरह का वस्त्र शरीर पर लपेटते थे। ऐसा लगता है कि शरीर के ऊपरी और निचले भाग को ढकने के लिए दो प्रकार के वस्त्र पहनते होंगे। सम्भवतः स्त्रियाँ तथा पुरुषों के वस्त्रों में कोई विशेष अन्तर नहीं होता था। इस सभ्यता से प्राप्त अनेक नग्न मूर्तियों के आधार पर कहा जा सकता है कि वहाँ के लोग नग्न भी रहते होंगे। हड़प्पा की खुदाई से प्रमाणित होता है कि औरतें सिर पर एक विशेष प्रकार का वस्त्र पहनती थीं जो पीछे की ओर पंख की तरह उठा रहता था।

4. आभूषण, केश- शृंगार तथा सौंदर्य प्रसाधन:
सिन्धु घाटी सभ्यता के स्त्री-पुरुष दोनों ही आभूषणों के बड़े शौकीन थे। हार, भुजबंद, कर-कंगन और अंगूठी स्त्री-पुरुष दोनों पहनते थे। गरीब लोगों के आभूषण तांबे, अस्थि और सीप आदि के बने होते थे। त्रियों में लम्बे-लम्बे बाल रखने, माँग भरने तथा जूड़ा बाँधने की प्रथा थी। पुरुष छोटी दाढ़ी और मूंछे रखते थे। स्त्रियाँ होठों पर लाली (Lipstick) तथा चेहरे पर पाउडर (Powder) लगाती थीं । वे काजल, सुरमा और सिन्दूर का भी प्रयोग करती थीं।

5. आमोद-प्रमोद:
सिन्धु घाटी के लोग नाच-गाने के बड़े शौकीन थे। घर में खेले जाने वाले खेलों (Indoor Game) का अधिक प्रचलन था। ये लोग शिकार और जुआ खेलने के बड़े शौकीन थे। पासा खेलना और पशु पक्षी आदि उनके मनोरंजन के अन्य प्रमुख साधन थे। बच्चों के मन-बहलाव के लिए खिलौने, झुनझुने, सीटियाँ, बैलगाड़ी के छोटे नमूने आदि होते थे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किस पत्थर की मुहरें बनाई जाती थीं?
(अ) सेलखड़ी पत्थर
(ब) लाल पत्थर
(स) बलुआ पत्थर
(द) काला पत्थर
उत्तर:
(अ) सेलखड़ी पत्थर

प्रश्न 2.
हड़प्पा सभ्यता के अवशेष कहाँ से नहीं मिले हैं?
(अ) अफगानिस्तान
(ब) जम्मू
(स) बलूचिस्तान
(द) केरल
उत्तर:
(द) केरल

प्रश्न 3.
भारतीय पुरातत्त्व का जनक किसको माना जाता है?
(अ) जान मार्शल
(ब) दयाराम साहनी
(स) जनरल अलैक्जेंडर कनिंघम
(द) ह्वीलर
उत्तर:
(स) ह्वीलर

प्रश्न 4.
मोहनजोदड़ो में कितने कुएँ मिले हैं?
(अ) 400
(ब) 500
(स) 600
(द) 700
उत्तर:
(द) 700

प्रश्न 5.
दुर्ग में स्थित मालगोदाम किसका बना था?
(अ) ईंटों का
(ब) ईंट और लकड़ी दोनों का
(स) पत्थर
(द) लकड़ी का
उत्तर:
(ब) ईंट और लकड़ी दोनों का

प्रश्न 6.
शवाधानों में निम्नलिखित कौन-सी वस्तु नहीं है?
(अ) मनके
(ब) आभूषण
(स) ताँबे के दर्पण
(द) ताँबे के घड़े
उत्तर:
(द) ताँबे के घड़े

प्रश्न 7.
शंख से क्या नहीं बनता था?
(अ) मनके
(ब) चूड़ियाँ
(स) करछियाँ
(द) पच्चीकारी की वस्तुएं
उत्तर:
(अ) मनके

प्रश्न 8.
गठोश्वर-जोधपुरा संस्कृति कहाँ पनपी थी?
(अ) पंजाब
(ब) राजस्थान
(स) गुजरात
(द) महाराष्ट्र
उत्तर:
(ब) राजस्थान

प्रश्न 9.
हड़प्पा लिपि के कितने चिह्न मिले हैं?
(अ) 100 से 150 तक
(ब) 150 से 200 तक
(स) 200 से 250 तक
(द) 375 से 400 तक
उत्तर:
(द) 375 से 400 तक

प्रश्न 10.
हड़प्पा सभ्यता का अंत कब हुआ?
(अ) 1600 सा०यु०पू० में
(ब) 1700 सा०यु०पू० में
(स) 1800 सान्यु०पू० में
(द) 2000 सा०यु०पू० में
उत्तर:
(स) 1800 सान्यु०पू० में

Bihar Board Class 11th Physics Solutions भौतिक विज्ञान

Bihar Board Class 11th Physics Solutions भौतिक विज्ञान

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Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 मानव बनो

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 2 Chapter 1 मानव बनो Text Book Questions and Answers and Summary.

BSEB Bihar Board Class 7 Hindi Solutions Chapter 1 मानव बनो

Bihar Board Class 7 Hindi मानव बनो Text Book Questions and Answers

पाठ से –

मानव बनो कविता का प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
‘मानव बनो शीर्षक कविता के कवि कौन हैं ?
उत्तर:
शिव मंगल सिंह “सुमन”।

मानव बनो कविता का अर्थ Bihar Board Class 7 प्रश्न 2.
मानव बनने के लिए हमें कौन-कौन सा कार्य करना चाहिए?
उत्तर:
मानव बनने के लिए हमें किसी का आसरा नहीं करना चाहिए, आँसू नहीं बहाना चाहिए, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए । हुँकार करना चाहिए। अपने आँसूओं को जन-कल्याण में लगाना चाहिए।

Manav Bano Kavita Ka Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
कवि के अनुसार सबसे बड़ी भूल क्या है ?
उत्तर:
मानव का सबसे बड़ी भूल है किसी पर आसरा करना । अर्थात् आशा लगाना।

Bihar Board Class 7 Hindi Book Solution प्रश्न 4.
अर्थ स्पष्ट कीजिए –
(क) अब अश्रु दिखलाओ नहीं, अब हाथ फैलाओ नहीं।
उत्तर:
किसी के सामने मत रोओ कि हमें इस चीज की कमी है तथा किसी चीज के लिए भी हाथ मत फैलाओ।

(ख) अब हाथ मत अपने मलो, जलना, अगर ऐसो जलो।
अपने हृदय की भस्म से, कर दो धरा को उर्वरा।
उत्तर:
मनुष्य को अपनी भूल पर पछताना नहीं चाहिए। किसी से जलना भी नहीं चाहिए। यदि जलना हो तो अगर (धूप) की तरह जलो। हे मानव अपने हृदय भस्म से पृथ्वी को उर्वरा बना दो। अर्थात् अपने जलन को भी सार्थक कर दो।

पाठ से आगे –

Manav Bano Kavita Ka Bhavarth Bihar Board प्रश्न 1.
मानव बनने की बात जो कवि द्वारा बतायी गयी है, इसके अतिरिक्त आप मानव में और कौन-कौन-सा गुण देखना चाहेंगे?
उत्तर:
कवि मानव बनने के लिए अनेक बातें बतायी हैं। इसके अतिरिक्त हम मानव में निम्नलिखित गुणों को देखना चाहते हैं –
मानव कर्मशील बने । मानव समय का महत्त्व दे।
मानव में परोपकार का गुण हो। मानव सत्य-अहिंसा का प्रिय हो तथा अनुशासन युक्त हो।

Bihar Board Class 7 Hindi प्रश्न 2.
अगर कोई समस्या आपके सामने आती है, तो इस समस्या का समाधान आप कैसे करते हैं ? उदाहरण’ सहित समझाइए।
उत्तर:
मानव के सम्मुख समस्याएँ अनेक आती हैं लेकिन उन समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए और हाथ पर हाथ रखकर चुपचाप बैठना भी नहीं चाहिए। भाग्य भरोसे तो कायर पुरुष रहते हैं। अतः आयी समस्या का समाधान करने के लिए कर्त्तव्यपरायण होना चाहिए।

उदाहरण में – हमें वर्ग में प्रथम स्थान पाना है लेकिन हमारे सम्मुख एक समस्या है कि परीक्षा के समय ही हमारे घर में बहन की शादी है। घर में बहुत आदमी जुटेंगे। कोलाहल होगा, बाजे बजेंगे । मंगल-गीत होगा। पढाई में दिक्कतें होंगी। लेकिन हमारे विचार से यह समस्या कोई बड़ी नहीं, अगर. मनुष्य मनोयोग से अध्ययन करे तो गीत-बाजे की ध्वनि नहीं सुनाई पड़ती हैं।

मनुष्य को दृढ़ संकल्प होना चाहिए तथा अपने कर्त्तव्य में लगा रहना चाहिए। जहाँ तक हो अध्ययन कक्ष शांत जगह चुनकर पढ़ना चाहिए ।

Hindi Class 7 Bihar Board Solution प्रश्न 3.
मानव होने का अर्थ है अपने जीवन पर खुद का अधिकार इस विचार की तर्कपूर्ण समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
जब तक मानव के जीवन पर दूसरों का अधिकार होता है तब तक मनुष्य पशु तुल्य रहता है। क्योंकि दूसरों के अधिकार में रहकर मनुष्य कोई भी कार्य स्वेच्छापूर्वक नहीं कर सकता है। ऐसा मानव अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए भी दूसरों पर आश्रित होता है। जैसे एक पशु भोजन के लिए भी मालिक पर आश्रित होता है। जब तक मनुष्य के जीवन पर स्वयं का अधिकार नहीं होगा उसमें मानवीय गुण नहीं आयेंगे । अर्थात् मानव अपनी समस्या का निदान स्वयं कर ले तो वह ही सच्चा मानव कहलायेगा ।

व्याकरण-

मानव बनो कविता Bihar Board Class 7 प्रश्न 1.
“हाथ फैलाना” एक मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है –
कुछ माँगना । इस प्रकार शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़े अनेक मुहावरे हैं। किन्हीं पाँच मुहावरों को लिखकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:

(क) हाथ मलना समय गँवाने से हाथ मलना पड़ता है।
(ख) पाँव फैलाना….नेता लोग जनता के बीच आसानी से अपन! पाँव फैला लेते हैं।
(ग) आँख मारना-लड़कियाँ भी लड़के पर आँख मारती हैं।
(घ) कान देना-बच्चे शिक्षक की बातों पर कान नहीं देते हैं।
(ङ) हाथ बढ़ाना-आजकल बच्चे भी माता-पिता के कामो में हाथ बँटाते हैं।

मानव बनो मानव जरा Bihar Board Class 7 प्रश्न 2.
इन शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए(क) फैलाना, (ख) प्यार, (ग) मानव, (घ) भूल।
उत्तर:

(क) फैलाना – समेटना
(ख) प्यार – नफरत
(ग) मानव-दानव
(घ) भूल-याद ।

मानव बनो Summary in Hindi

कविता का अर्थ:

है भूल करना भी ………………… मानव जरा।
अर्थ – प्यार करना भी भूल है। किसी को मनाना भी भूल है। लेकिन __ सबसे बड़ी भूल है किसी का आसरा करना । हे मानव ! जरा मानव तो बनो।

अब अश्रु दिखलाओ ……………………. मानव जरा।
अर्थ – हे मानव ! किसी के सामने मत रोना, किसी के सामने हाथ भी मत फैलाना । अब एक हुँकार कर दो जिससे पृथ्वी काँप जाय । हे मानव जरा मानव तो बनो।

उफ, हाय कर देना ……………………. मानव जरा।
अर्थ – उफ या हाय करना अर्थात् हार मान लेना मनुष्य को शोभा नहीं देता है। अपनी भूल पर आँसू बहाना भी मनुष्य का कर्म नहीं है। अगर ये आँसू बहे भी तो इन आँसूओं से विश्व का कण-कण सींच दो, जिससे वह हरा हो जाय।

अब हाथ मत अपने ………………….. मानव जरा।
अर्थ-अपनी भूल पर पछताना या बेवसी दिखाना मानव का कर्तव्य नहीं। जलना हो तो ऐसा जलो कि तुम्हारे हृदय की भस्म से धरती उपजाऊ हो जाये । हे मानव ! जरा मानव तो बनो ।

Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथा

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solutions Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड Chapter 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Hindi Solutions गद्य Chapter 1 श्रम विभाजन और जाति प्रथा

Bihar Board Class 10 Hindi श्रम विभाजन और जाति प्रथा Text Book Questions and Answers

बोध और अभ्यास

पाठ के साथ

श्रम विभाजन और जाति प्रथा क्लास 10th Bihar Board  प्रश्न 1.
लेखक किस विडंबना की बात करते हैं ? विडंबना का स्वरूप क्या है ?
उत्तर-
लेखक महोदय आधुनिक युग में भी “जातिवाद” के पोषकों की कमी नहीं है जिसे विडंबना कहते हैं।
विडंबना का स्वरूप यह है कि आधुनिक सभ्य समाज “कार्य-कुशलता” के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है। चूंकि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिए . इसमें कोई बुराई नहीं है।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा प्रश्न उत्तर Class 10 Bihar Board प्रश्न 2.
जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते हैं ?
उत्तर-
जातिवाद के पोषक ‘जातिवाद’ के पक्ष में अपना तर्क देते हुए उसकी उपयोगिता को सिद्ध करना चाहते हैं- .

  • जातिवादियों का कहना है कि आधुनिक सभ्य समाज कार्य कुशलता’ के लिए श्रम-विभाजन को आवश्यक मानता है क्योंकि श्रम-विभाजन जाति प्रथा का ही दूसरा रूप है। इसीलिए श्रम-विभाजन में कोई बुराई नहीं है।
  • जातिवादी समर्थकों का कहना है कि माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार ही यानी गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।
  •  हिन्दू धर्म पेशा-परिवर्तन की अनुमति नहीं देता। भले ही वह पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त ही क्यों न हो। भले ही उससे भूखों मरने की नौबत आ जाए लेकिन उसे अपनाना ही होगा।
  • जातिवादियों का कहना है कि परंपरागत पेशे में व्यक्ति दक्ष हो जाता है और वह अपना कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करता है।
  • जातिवादियों ने ‘जातिवाद’ के समर्थन में व्यक्ति की स्वतंत्रता को अपहृत कर सामाजिक बंधन के दायरे में ही जीने-मरने के लिए विवश कर दिया है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक व्यवस्था बनी रहती है और अराजकता नहीं फैलती।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा Class 10 Bihar Board प्रश्न 3.
जातिवाद के पक्ष में दिए गए तर्कों पर लेखक की प्रमुख आपत्तियाँ क्या हैं ?
उत्तर-
‘जातिवाद’ के पक्ष में दिए गए तको पर लेखक ने कई आपत्तियाँ उठायी हैं जो चिंतनीय

  • लेखक के दृष्टिकोण में जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है।
  • जाति प्रथा का श्रम विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं करता।
  • मनुष्य की व्यक्तिगत भावना या व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान या महत्त्व नहीं रहता।
  • आर्थिक पहलू से भी अत्यधिक हानिकारक जाति प्रथा है।
  • जाति प्रथा मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणा, रुचि व आत्मशक्ति को दबा देती है। साथ ही अस्वाभाविक नियमों में जकड़ कर निष्क्रिय भी बना देती है।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा का प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 4.
जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?
उत्तर-
भारतीय समाज में जाति श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप नहीं कही जा सकती है। श्रम के नाम पर श्रमिकों का विभाजन है। श्रमिकों के बच्चे को अनिच्छा से अपने बपौती काम करना पड़ता है। जो आधुनिक समाज के लिए स्वभाविक रूप नहीं है।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 5.
जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है।
उत्तर-
जातिप्रथा मनुष्य को जीवनभर के लिए एक ही पेशे में बांध देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त होने के कारण वह भूखों मर जाए। आधुनिक युग में उद्योग-धंधों की प्रक्रिया तथा तकनीक में निरंतर विकास और अकस्मात् परिवर्तन होने के कारण मनुष्य को पेशा बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। किन्तु, भारतीय हिन्दू धर्म की जाति प्रथा व्यक्ति को पारंगत होने के बावजूद ऐसा पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती है जो उसका पैतृक पेशा न हो। इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।

Bihar Board Class 10 Hindi Book Solution प्रश्न 6.
लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या किसे मानते हैं और क्यों?
उत्तर-
लेखक आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या जाति प्रथा को मानते हैं। जाति प्रथा के कारण पेशा चुनने में स्वतंत्रता नहीं होती। मनुष्य की व्यक्तिगत भावना तथा व्यक्तिगत रूची का इसमें कोई स्थान नहीं होता। मजबुरी बस जहाँ काम करने वालों का न दिल लगता हो न दिमाग कोई कुशलता कैसे प्राप्त की जा सकती है। अतः यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो जाता है कि आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक प्रथा है।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा Pdf Bihar Board प्रश्न 7.
लेखक ने पाठ में किन प्रमुख पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है ?
उत्तर-
जाति प्रथा के कारण श्रमिकों का अस्वभाविक विभाजन हो गया है। आपस में ऊँच-नीच की भावना भी विद्यमान है। .
जाति प्रथा के कारण अनिच्छा से पुस्तैनी पेशा अपनाना पड़ता है। जिसके कारण मनुष्य की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं होता। आर्थिक विकास में भी जातिप्रथा बाधक है।

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Question Answer Bihar Board प्रश्न 8.
सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है:
उत्तर-
डॉ. भीमराव अंबेदकर ने सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए निम्नांकित विशेषताओं का उल्लेख किया है –

  • सच्चे लोकतंत्र के लिए समाज में स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व भावना की वृद्धि हो।
  • समाज में इतनी गतिशीलता बनी रहे कि कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचालित हो सके।
  • समाज में बहुविध हितों में सबका भाग होना चाहिए और सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।
  • सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध रहने चाहिए।
  • दूध-पानी के मिश्रण की तरह भाईचारा होना चाहिए।

इन्हीं गुणों या विशेषताओं से युक्त तंत्र का दूसरा नाम लोकतंत्र है।
“लोकतंत्र शासन की एक पद्धति नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। इसमें यह आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान भाव हो।”

भाषा की बात

श्रम विभाजन और जाति प्रथा का सारांश Bihar Board प्रश्न 1.
पाठ से संयुक्त, सरल एवं मिश्र वाक्य चुनें।
उत्तर-
सरल वाक्य-पेशा परिवर्तन की अनुमति नहीं है। तकनीकी में निरंतर विकास होता है। विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता है।
संयुक्त वाक्य – मैं जातियों के विरूद्ध हूँ फिर मेरी दृष्टि में आदर्श समाज क्या है?
लोकतंत्र सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।
जातिप्रथा कम काम करने और टालू काम करने के लिए प्रेरित करता है।

मिश्र वाक्य-विडंबना की बात है कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है।
जाति प्रथा की विशेषता यह है कि यह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है। कुशल व्यक्ति का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता को सदा विकसित करें।

Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Class 10 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखें-
उत्तर-
सभ्य – असभ्य
विभाजन – संधि
निश्चय – अनिश्चय
ऊंचा – नीच
स्वतंत्रता – परतंत्रता
दोष – निर्दोष
सजग – निर्जग
रक्षा – अरक्षा
पूर्णनिर्धारण – पर निर्धारण

प्रश्न 3.
पाठ से विशेषण चुनें तथा उनका स्वतंत्र वाक्य प्रयोग करें।
उत्तर-
सभ्य = यह सभ्य समाज है।
मैतृक = मोहन के पास पैतृक संपत्ति है।
पहली = गीता पहली कक्षा में पढ़ती है।
यह = यह निर्विवाद रूप से सिद्ध है।
प्रति = साथियों के प्रति श्रद्ध हो।
हानिकारक = जाति हानिकारक प्रथा है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के पर्यायवाची शब्द लिखें –
उत्तर-
दूषित = गंदा, अपवित्र .
श्रमिक = मजदूर, श्रमजीवी
पेशा = रोजगार, नौकरी
अकस्मात = एकाएक, अचानक
अनुमति = आदेश, निर्देश
अवसर – मौका, संयोग
परिवर्तन = बदलाव, रूपान्तर
सम्मान = प्रतिष्ठा, मान

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

1. यह विडंबना की ही बात है कि युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं है, इसके पोषक कई आधारों पर इसका समर्थन करते हैं। समर्थन का एक आधार वह कहा जाता है कि आधुनिक सभ्य समाज कार्य-कुशलता के लिये श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है और चूंकि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिये इसमें कोई बुराई नहीं है, इस तर्क के संबंध में पहली बात तो यही आपत्तिजनक है कि जाति प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का भी रूप लिये हुये है, श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है, परन्तु किसी भी सभ्य समाज में श्रम विभाजन की व्यवस्था श्रमिकों के विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करती। भारत की जाति प्रथा की एक और विशेषता यह है कि यह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन ही नहीं करती बल्कि विभाजित वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा ऊँच-नीच भी करार देती है जो कि विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता।

प्रश्न
(क) प्रस्तुत अवतरण किस पाठ से लिया गया है और इसके लेखक कौन हैं ?
(ख) इस युग में किसके पोषकों की कमी नहीं है और क्यों?
(ग) भारत की जाति प्रथा की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
(घ) सभ्य समाज की क्या आवश्यकता है?
(ङ) श्रम-विभाजन में आपत्तिजनक कौन-सी बात है ?
उत्तर-
(क)प्रस्तुत अवतरण श्रम विभाजन और जाति प्रथा शीर्षक लेख से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. भीमराव अम्बेदकर जी हैं।
(ख) इस युग में जातिवाद के पोषकों की कमी नहीं है। जातिवाद श्रम विभाजन का एक अभिन्न अंग है। श्रम विभाजन के आधार पर ही जातिवाद की आधारशिला रखी गयी है।
(ग)भारत की जाति प्रथा की सबसे प्रमुख विशेषता है कि वह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन ही नहीं करती बल्कि विभाजित वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा ऊँच-नीच भी करा देती . है। ऐसी व्यवस्था विश्व के किसी भी समाज में नहीं है।
(घ)समर्थन के आधार पर सभ्य समाज कार्य-कुशलता के लिये श्रम विभाजन में आवश्यक अंग मानता है। जाति प्रथा श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है। यदि श्रम विभाजन न हो तो सभ्य समाज की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है।
(ङ) श्रम-विभाजन सभ्य समाज के लिये अत्यंत आवश्यक अंग है। जाति प्रथा श्रमिक विभाजन का ही रूप है। किसी भी सभ्य समाज में श्रम विभाजन की व्यवस्था श्रमिकों के विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करती है। सभ्य समाज की ऐसी व्यवस्था ही श्रम-विभाजन की आपत्तिजनक बातें हैं।

2. जाति प्रथा को यदि श्रम-विभाजन मान लिया जाए तो यह स्वाभाविक विभाजन नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। कुशल व्यक्ति या सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें, जिससे वह अपने पेशा या कार्य का चुनाव स्वयं कर सके। इस सिद्धांत के विपरीत जाति प्रथा
का दूषित सिद्धात यह है कि इससे मनुष्य के प्रशिक्षण अथवा उसकी निजी क्षमता का विचार किए बिना, दूसरे ही दृष्टिकोण, जैसे माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार, पहले से ही, अर्थात
गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।

प्रश्न
(क) गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
(ख) लेखक के अनुसार जाति प्रथा को स्वाभाविक श्रम-विभाजन क्यों नहीं माना जा सकता?
(ग) लेखक के अनुसार सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए क्या आवश्यक है?
(घ) जाति प्रथा का दूषित सिद्धांत क्या है ?
(ङ) किस प्रथा को श्रम विभाजन मान लेना स्वाभाविक विभाजन नहीं है।
उत्तर-
(क) पाठ का नाम-श्रम विभाजन और जाति प्रथा
लेखक का नाम-डॉ. भीमराव अंबेदकर।
(ख)क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है।
(ग)सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्तियों की क्षमता का विकास इस सीमा तक किया जाए जिससे वे अपने पेशा या कार्य का चुनाव स्वयं कर सकें।
(घ)सामाजिक स्तर के अनुसार गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर .देना जाति प्रथा का दूषित सिद्धांत है।
(ङ)जाति प्रथा को श्रम विभाजन मान लेना स्वाभाविक विभाजन नहीं है।

3. श्रम विभाजन की दृष्टि से भी जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है।
जाति प्रथा का श्रम विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रहता। मनुष्य की व्यक्तिगत भावना तथा व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान अथवा महत्व नहीं रहता। इस आधार पर हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न इतनी बड़ी समस्या नहीं जितनी यह कि बहुत-से लोग निर्धारित कार्य को अरुचि के साथ केवल विवशतावश करते हैं। ऐसी स्थिति स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालू काम करने और कम करने के लिए प्रेरित करती है। ऐसी स्थिति में जहाँ काम करने वालों का न दिल लगता हो न दिमाग, कोई कुशलता कैसे प्राप्त की जा सकती है। अतः यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हो जाता है कि आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकर प्रथा है। क्योंकि यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणारुचि व आत्मशक्ति को दबाकर उन्हें अस्वाभाविक नियमों में जकड़कर निष्क्रिय बना देती है।

प्रश्न
(क) गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
(ख) श्रम-विभाजन की दृष्टि से भी जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त क्यों है ?
(ग) आज उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या क्या है ?
(घ) जाति प्रथा में कुशलता प्राप्त करना कठिन क्यों है ?
(ङ) जाति प्रथा आर्थिक पहलू से भी हानिकर है, क्यों?
उत्तर-
(क) पाठ का नाम– श्रम विभाजन और जाति प्रथा
लेखक का नाम– डॉ. भीमराव अंबेदकर।
(ख) श्रम विभाजन की दृष्टि से भी जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है, क्योंकि इसमें मनुष्य की व्यक्तिगत रुचि का कोई स्थान नहीं रहता है। यह मानवीय स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रहता।
(ग) जातिगत निर्धारित कार्य को लोग अरुचि के साथ विवशतावश करते हैं। ऐसा करना … गरीबी और उत्पीड़न से भी बड़ी समस्या है।
(घ) जाति प्रथा में परंपरागत कार्य से लोग आजीवन जुड़े रहते हैं। यह प्रथा दुर्भावना से ग्रस्त रहकर दिल-दिमाग का उपयोग किये बिना कार्य करने के लिए प्रेरित करती है जिसके चलते कुशलता प्राप्त करना कठिन है।
(ङ) जाति प्रथा आर्थिक पहलू से भी हानिकर है, क्योंकि यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रेरणा रुचि व आत्मशक्ति को दबाकर उन्हें अस्वाभाविक नियमों में जकड़कर निष्क्रिय बना देती है।

4. किसी भी आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिये जिससे कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचरित हो सके। ऐसे समाज के बहुविध हितों में सबका भाग होना चाहिये तथा सबको उनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिये। सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध रहने चाहिये। तात्पर्य यह है कि दूध पानी के मिश्रण की तरह भाईचारे का यही वास्तविक रूप है और इसी का दूसरा नाम लोकतंत्र है क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है, इसमें यह आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो।

प्रश्न
(क) लोकतंत्र कैसे समाज की परिकल्पना करना चाहता है ?
(ख) लोकतंत्र का स्वरूप कैसा होना चाहिये।
(ग) भाईचारे का संबंध दूध और पानी के मिश्रण-सा क्यों बताया गया है?
(घ) किनकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिये।
उत्तर-
(क) लेखक एक आदर्श समाज की स्थापना चाहता है, ऐसा समाज जो जाति प्रथा . से ऊपर उठकर स्वतंत्रता, समता, भ्रातृत्व पर आधारित हो। आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिये जिससे कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचारित हो सके।
(ख) लोकतंत्र केवल शासन पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक दिनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। इसमें ऐसी व्यवस्था होनी चाहिये कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव हो।
(ग) दूध और पानी दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों में विच्छेदन नहीं किया जा सकता है। शुद्ध दूध में भी पानी का कुछ-न-कुछ अंश रहता ही है। सभ्य समाज ने जाति प्रथा के नाम पर श्रम का भी विभाजन कर दिया है। विविध जातियों का मिश्रण ही लोकतंत्र है। लोकतंत्र की ऐसी व्यवस्था ही भाईचारा है। विविध धर्म, सम्प्रदाय के होकर भी हम भारतीय हैं। हमारा संबंध. अक्षुण्ण है। यही कारण है कि भारत में भाईचारे का संबंध दूध और पानी की तरह है।
(घ) सभ्य समाज ने जाति प्रथा के नाम पर समाज को विभक्त कर दिया है। ऐसे समाज में सबको भाग लेना चाहिये तथा एक-दूसरे की रक्षा के लिये सजग रहना चाहिये।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. सही विकल्प चुनें –

प्रश्न 1.
श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा के लेखक कौन हैं ? ।
(क) महात्मा गाँधी
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) राम मनोहर लोहिया
(घ) भीमराव अम्बेदकर
उत्तर-
(घ) भीमराव अम्बेदकर

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका किसकी है ?
(क) भीमराव अंबेदकर
(ख) ज्योतिबा फूले
(ग) राजगोपालाचारी
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर-
(क) भीमराव अंबेदकर

प्रश्न 3.
सभ्य समाज की आवश्यकता क्या है ?
(क) जाति-प्रथा
(ख) श्रम-विभाजन
(ग) अणु-बम
(घ) दूध-पानी
उत्तर-
(ख) श्रम-विभाजन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित रचनाओं में से कौन सी रचना डॉ. अम्बेदकर की है
(क) द कास्ट्स इन इंडिया
(ख) द अनटचेबल्स, यू आर दे
(ग) हू आर शूद्राज
(घ) इनमें से सभी
उत्तर-
(घ) इनमें से सभी

प्रश्न 5.
भीमराव अंबेदकर के चिंतन तथा रचनात्मकता के इनमें से कौन प्रेरक व्यक्ति माने जाते हैं?
(क) महात्मा बुद्ध
(ख) कबीर दास
(ग) ज्योतिबा फूले
(घ) सभी
उत्तर-
(घ) सभी

रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1.
इस युग में भी जातिवाद के……….. की कमी नहीं है।
उत्तर-
पोषकों

प्रश्न 2.
जाति-प्रथा मनुष्य की….. पर आधारित नहीं है।
उत्तर-
रुचि

प्रश्न 3.
भारत में जाति-प्रथा…….का कारण है।
उत्तर-
बेरोजगारी

प्रश्न 4.
भाई-चारे का दूसरा नाम…… है।
उत्तर-
लोकतंत्र

अतिलघु उत्तरीय

प्रश्न 1.
श्रम-विभाजन कैसे समाज की आवश्यकता है?
उत्तर-
श्रम-विभाजन आज के सभ्य समाज की आवश्यकता है।

प्रश्न 2.
जाति-प्रथा स्वाभाविक विभाजन नहीं है। क्यों?
उत्तर-
रुचि पर आधारित नहीं होने के कारण जाति-प्रथा स्वाभाविक विभाजन नहीं है।

प्रश्न 3.
बाबा साहब भीमराव अंबेदकर की दृष्टि में आदर्श समाज कैसा होगा? ..
उत्तर-
बाबा साहब भीमराव अंबेदकर की दृष्टि में आदर्श समाज स्वतंत्रता समता और . बंधुत्व पर आधारित होगा।

प्रश्न 4.
भीमराव अम्बेदकर का जन्म किस प्रकार के परिवार में हुआ था?
उत्तर-
भीमराव अम्बेदकर का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था।

प्रश्न 5.
“बुद्धिज्म एण्ड कम्युनिज्म” नामक पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर-
“बुद्धिज्म एण्ड कम्युनिज्म’ नामक पुस्तक भीमराव अम्बेदकर ने लिखी थी।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा लेखक परिचय

बाबा साहेब भीमराव अंबेदकरका जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में मह, मध्यप्रदेश में एक दलित परिवार में हुआ था । मानव मुक्ति के पुरोधा बाबा साहेब अपने समय के सबसे सुपठित जनों में से एक थे । प्राथमिक शिक्षा के बाद बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क (अमेरिका), फिर वहाँ से लंदन (इंग्लैंड) गए । उन्होंने संस्कृत का धार्मिक, पौराणिक और पूरा वैदिक वाङ्मय अनुवाद के जरिये पढ़ा और ऐतिहासिक-सामाजिक क्षेत्र में अनेक मौलिक स्थापनाएँ प्रस्तुत की। सब मिलाकर वे इतिहास मीमांसक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् तथा धर्म-दर्शन के व्याख्याता बनकर उभरे । स्वदेश में कुछ समय उन्होंने वकालत भी की। समाज और राजनीति में बेहद सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अछूतों, स्त्रियों और मजदूरों को मानवीय अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए अथक संघर्ष किया। उनके चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यत: तीन प्रेरक व्यक्ति रहे – बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले ! भारत के संविधान निर्माण में उनकी महती भूमिका और एकनिष्ठ समर्पण के कारण ही हम आज उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता कह कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । दिसंबर, 1956 ई० में दिल्ली में बाबा साहेब का निधन हो गया ।

बाबा साहेब ने अनेक पुस्तकें लिखीं । उनकी प्रमुख रचनाएँ एवं भाषण हैं – ‘द कास्ट्स’ इन इंडिया : देयर मैकेनिज्म’, जेनेसिस एंड डेवलपमेंट’, ‘द अनटचेबल्स, हू आर दे’, ‘हू आर शूद्राज’, बुद्धिज्म एंड कम्युनिज्म’, बुद्धा एण्ड हिज धम्मा’, ‘थाट्स ऑन लिंग्युस्टिक स्टेट्स’, ‘द राइज एंड फॉल ऑफ द हिन्दू वीमेन’, ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्टआदि । हिंदी में उनका संपूर्ण वाङ्मय भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से ‘बाबा साहब अंबेदकर संपूर्ण वाङ्मय’ नाम से
21 खंडों में प्रकाशित हो चुका है।

यहाँ प्रस्तुत पाठ बाबा साहेब के विख्यात भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ के ललई सिंह यादव द्वारा किए गए हिंदी रूपांतर ‘जाति-भेद का उच्छेद’ से किंचित संपादन के साथ लिया गया है । यह भाषण ‘जाति-पाति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के वार्षिक सम्मेलन (सन् 1936) के अध्यक्षीय भाषण के रूप में तैयार किया गया था, परंतु इसकी क्रांतिकारी दृष्टि से आयोजकों की पूर्णत: सहमति न बन सकने के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया और यह पढ़ा न जा सका । बाद में बाबा साहेब ने इसे स्वतंत्र पुस्तिका का रूप दिया । प्रस्तुत आलेख में वे भारतीय समाज . में श्रम विभाजन के नाम पर मध्ययुगीन अवशिष्ट संस्कारों के रूप में बरकरार जाति प्रथा पर मानवीयता, नैसर्गिक न्याय एवं सामाजिक सद्भाव की दृष्टि से विचार करते हैं । जाति प्रथा के विषमतापूर्वक सामाजिक आधारों, रूढ़ पूर्वग्रहों और लोकतंत्र के लिए उसकी अस्वास्थ्यकर प्रकृति पर भी यहाँ एक संभ्रांत विधिवेत्ता का दृष्टिकोण उभर सका है । भारतीय लोकतंत्र के भावी नागरिकों के लिए. यह आलेख अत्यंत शिक्षाप्रद है।

श्रम विभाजन और जाति प्रथा Summary in Hindi

पाठ का सारांश :

प्रस्तुत पाठ में लेखक महोदय ने जाति प्रथा के कारण समाज उत्पन्न रूढ़िवादिता एवं लोकतंत्र पर खतरा को चित्रित किया है।

आज के वैज्ञानिक युग में भी “जातिवाद” के पोषकों की कमी नहीं है। उनका तर्क है कि आधुनिक समाज ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है। चूंकि जाति-प्रथा भी श्रम-विभाजन का दूसरा रूप है। परन्तु जाति-प्रथा के कारण श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन, विभाजित वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा ऊँच-नीच भी करार देती है, . जो विश्व के किसी भी समाज में नहीं पाया जाता।

अस्वाभाविक श्रमविभाजन के कारण मनुष्य स्वतंत्र रूप से अपनी पेशा का चुनाव नहीं कर सकता। माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार पेशा निर्धारित कर दिया जाता है। मनुष्य को जीवन भर के लिए एक पेशे में बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुक्त और अपर्याप्त होने के कारण वह. भूखों मर जाए। पैतृक पेशा में वह पारंगत नहीं हो इसके बाद भी चुनाव करना पड़ता है। जाति-प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख व प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि श्रम विभाजन की दृष्टि से भी जाति प्रथा गंभीर दोषों से युक्त है। आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न इतनी बड़ी समस्या नहीं जितनी यह कि बहुत से लोग ‘निर्धारित कार्य को ‘अरूचि’ के साथ विवशतावश करते हैं। ऐसी परिस्थिति में स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालू काम करने और कम काम करने के लिए प्रेरित करती है। आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक प्रथा है।

लेखक की दृष्टि में आदर्श समाज स्वतंत्रता, समता, भ्रातृत्व पर आधारित होगा। भ्रातृत्व अर्थात् भाईचारे में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। आदर्श समाज में गतिशीलता होनी चाहिए कि वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक संचारित हो सके। दूध-पानी के मिश्रण की तरह भाईचारे का यही वास्तविक रूप है। और इसी का दूसरा नाम लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। इसमें यह आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो।

शब्दार्थ :

विडंबना : उपहास
पोषक : समर्थक, पालक, पालनेवाला
पूर्वनिर्धारंण : पहले ही तय कर देना
अकस्मात . , : अचानक
प्रक्रिया : किसी काम के होने का ढंग या रीति
प्रतिकूल : विपरीत, उल्टा
स्वेच्छा : . अपनी इच्छा
उत्पीड़न : बहुत गहरी पीड़ा पहुँचाना, यंत्रणा देना
संचारित : प्रवाहित ..
बहुविध : अनेक प्रकार से
प्रत्यक्ष : सामने, समक्ष
भ्रातृत्व : भाईचारा, बंधुत्व.
वांछित : आकांक्षित, चाहा हुआ

Bihar Board Class 10 History Solutions Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 Social Science Solutions History इतिहास : इतिहास की दुनिया भाग 2 Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 10 Social Science History Solutions Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद

Bihar Board Class 10 History यूरोप में राष्ट्रवाद Text Book Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह्न लगायें।

Bihar Board Class 10 History Chapter 1 प्रश्न 1.
इटली एवं जर्मनी वर्तमान में किस महादेश के अंतर्गत आते हैं ?
(क) उत्तरी अमेरिका
(ख) दक्षिणी अमेरिका
(ग) यूरोप
(घ) पश्चिमी एशिया
उत्तर-
(ग) यूरोप

Class 10th History Chapter 1 Notes Bihar Board प्रश्न 2.
फ्रांस में किस शासक वंश की पुनर्स्थापना वियना कांग्रेस द्वारा की गई थी?
(क) हैब्सवर्ग
(ख) आर्लिया वंश
(ग) बूर्वो वंश
(घ) जार शाही
उत्तर-
(ग) बूर्वो वंश

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय प्रश्न उत्तर Class 10 प्रश्न 3.
मेजनी का संबंध किस संगठन से था ?
(क) लाल सेना
(ख) कर्बोनरी
(ग) फिलिक हेटारिया
(घ) डायट
उत्तर-
(ख) कर्बोनरी

Bihar Board Class 10 History Notes In Hindi प्रश्न 4.
इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध निम्न में कौन था ?
(क) इंगलैंड
(ख) रूस
(ग) आस्ट्रिया
(घ) प्रशा
उत्तर-
(ग) आस्ट्रिया

Bihar Board Class 10 History Solution प्रश्न 5.
‘काउंट काबूर’ को विक्टर इमैनुएल ने किस पद पर नियुक्त किया ?
(क) सेनापति
(ख) फ्रांस में राजदूत
(ग) प्रधानमंत्री
(घ) गृहमंत्री
उत्तर-
(ग) प्रधानमंत्री

Bihar Board Class 10 History Notes Pdf प्रश्न 6.
गैरीबाल्डी पेशे से क्या था ?
(क) सिपाही
(ख) किसान
(ग) जमींदार
(घ). नाविक
उत्तर-
(घ). नाविक

Bihar Board Solution Class 10 Social Science प्रश्न 7.
जर्मन राईन राज्य का निर्माण किसने किया था ?
(क) लुई 18वाँ
(ख) नेपोलियन बोनापार्ट
(ग) नेपोलियन III
(घ) बिस्मार्क
उत्तर-
(ख) नेपोलियन बोनापार्ट

Bihar Board Class 10 History Notes प्रश्न 8.
“जालवेरिन” एक संस्था थी?
(क) क्रांतिकारियों की
(ख) व्यापारियों की
(ग) विद्वानों की
(घ) पादरी सामंतों का
उत्तर-
(ख) व्यापारियों की

Bihar Board Class 10 History Book Solution प्रश्न 9.
“रक्त एवं लौह” की नीति का अवलम्बन किसने किया था?
(क) मेजनी
(ख) हिटलर
(ग) बिस्मार्क
(घ) विलियम I
उत्तर-
(ग) बिस्मार्क

Bihar Board Class 10 Social Science Solution प्रश्न 10.
फ्रैंकफर्ट की संधि कब हुई?
(क) 1864
(ख) 1866
(ग) 1870
(घ) 1871
उत्तर-
(घ) 1871

Bihar Board Solution Class 10 प्रश्न 11.
यूरोपवासियों के लिए किस देश का साहित्य एवं ज्ञान-विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा?
(क) जर्मनी
(ख) यूनान
(ग) तुर्की
(घ) इंग्लैंड
उत्तर-
(ख) यूनान

Bihar Board Class 10th History Solution प्रश्न 12.
1829 ई. की एड्रियानोपुल की संधि किस देश के साथ हुई ?
(क) तुर्की
(ख) यूनान
(ग) हंगरी
(घ) पोलैंड
उत्तर-
(क) तुर्की

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
1848 के फ्रांसीसो क्रांति के कारण क्या थे?
उत्तर-

  • मध्यम वर्ग का शासन पर असीम प्रभाव
  • समाजवाद का प्रसार
  • गीजों नामक कट्टर एवं प्रतिक्रियावादी प्रधानमंत्री का विरोध
  • लुई फिलिप की नीतियों का विरोध।

प्रश्न 2.
इटली, जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका क्या थी?
उत्तर-
आस्ट्रिया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किया जाने लगा जिसमें सार्डिनिया के शासक चार्ल्स एलबर्ट की पराजय हो गयी। ऑस्ट्रिया के हस्ताक्षेप से इटली में जनवादी आन्दोलन को कुचल दिया गया और मेजनी की हार हुई। धीरे-धीरे इटली में जनजागरुकता और राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने लगी। जर्मन राज्यों में बढ़ते हुए विद्रोह को आस्ट्रिया और प्रशा ने मिलकर दबाया।

प्रश्न 3.
यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ?
उत्तर-
नेपोलियन बोनापार्ट प्रथम ने जब इटली पर अधिकार किया तो उसने छोटे-छोटे राज्यों का अंत कर दिया। उसने रिगाओ, फेर्रारा, बोलोना तथा मोडेना को मिलाकर एक छोटे से गणराज्य की स्थापना कर दी थी। इसे “ट्रांसपार्निका गणतंत्र” कहा गया था। इससे वहाँ के लोगों में राष्ट्रीयता की भावना का प्रादुर्भाव हुआ।

प्रश्न 4.
गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें!
उत्तर-
गैरीबाल्डी पेशे से एक नाविक और मेजनी के विचारों का समर्थक था परंतु बाद में काबूर के प्रभाव में आकर संवैधानिक राजतंत्र का पक्षधर बन गया। गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों की सशस्त्र सेना बनायी जिसे ‘लाल कुर्ती’ के नाम से जाना जाता है। इसकी सहायता से 1860 ई. में नेपल्स के राजा को पराजित किया। इसके बाद सिसली पर विजय पायी। इन रियासतों की अधिकांश जनता बूर्वो राजवंश के निरंकुश शासन से तंग आकर गैरीबाल्डी का समर्थक बन गयी। गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ की सत्ता सम्भाली। बाद में उसने काबूर के परामर्श पर पोप पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उसने अपने सारे जीते हुए इलाकों को विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया। उसने विक्टर को संयुक्त इटली का राजा घोषित कर दिया और सार्डिनिया का नाम बदलकर इटली राज्य कर दिया।

प्रश्न 5.
विलियम के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था, कैसे?
उत्तर-
जनवरी 1830 में विलियम प्रथम प्रशा का शासक बना। वह साहसी, व्यवहारकुशल और योग्य सैनिक था। सिंहासन पर बैठते ही उसने सैन्यशक्ति बढ़ानी शुरू कर दी और उसने जर्मन राष्ट्रों को एकता के सूत्र में बाँधने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर महान कूटनीतिज्ञ बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया। अतः विलियम प्रथम के बिना जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

प्रश्न 1.
इटली के एकीकरण में मेजनी काबुर और गैरीबाल्डी के योगदानों को बतायें।
उत्तर-
मेजनी काबूर का योगदान मेजनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था। मेटरनिख युग के पतन के बाद भिन्न परिस्थिति में इटली में मेजिनी का प्रादुर्भाव हुआ। उसका योगदान निम्न है-

उसने “यंग इटली” नामक संस्था का गठन किया और युवा शक्ति में विश्वास करता था तथा कहा करता था कि “यदि समाज में क्रांति लानी है तो विद्रोह का नेतृत्व युवकों के हाथों में दे दो।” “यंग इटली” का एक मात्र उद्देश्य इटली को आस्ट्रिया के प्रभाव से मुक्त कर उसका एकीकरण करना था। उसने ‘जनता जनार्दन तथा इटली’ का नारा बुलंद किया। इससे युवाओं में एकता का सूत्रपात हुआ और दो वर्षों के भीतर “यंग इटली” के सदस्यों की संख्या साठ हजार तक पहुँच गयी। उग्रराष्ट्रवादी विचारों के कारण मेजिनी को निर्वासित होकर इंगलैंड जाना पड़ा। वहाँ से अपनी रचनाओं द्वारा इटली के स्वाधीनता संग्राम को प्रेरित करता रहा। इटली के एकीकरण में उसे पैगम्बर कहा गया है।

गैरीबाल्डो का योगदान-
काबूर का योगदान

गैरीबाल्डी को इटली का तलवार कहा जाता है, उसने “लाल कुर्ती” नामक नवयुवकों का एक संगठन कायम किया। इसकी सहायता से उसने 1860 ई. में नेपल्स के राजा को पराजित किया। बाद में सिसली और पोप को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद गैरीबाल्डी ने अपने सारे जीते हुए इलाकों को विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया और विक्टर को इटली का राजा घोषित कर दिया। पिडमौंट, सार्डिनिया का नाम बदलकर इटली राज्य कर दिया गया।

प्रश्न 2.
जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-
1848 ई. को क्रांति के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जर्मनी का एकीकरण क्रांतिकारियों के प्रत्यनों से नहीं होना था। उसका एकीकरण एक सैन्य शक्तिप्रधान साम्राज्य के रूप में शासकों द्वारा होना था और इस कार्य को पूरा किया बिस्मार्क ने।

जनवरी, 1830 में विलियम प्रथम प्रथा का शासक बना और उसने बिस्मार्क को चांसलर नियुक्त किया। बिस्मार्क प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण करना चाहता था, पर आस्ट्रिया उसका विरोध कर रहा था। बिस्मार्क जर्मन एकीकरण के लिए सैन्य शक्ति के महत्व को समझता था। अतः इसके लिए उसने ‘रक्त और लौह नीति’ का अवलम्बन किया। उसने अपने देश में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी! बिस्मार्क ने अपनी नीतियों से प्रशा का सुदृढीकरण किया और इस कारण प्रशा, आस्ट्रिया से किसी मायने में कम नहीं रह गया। तब बिस्मार्क ने डेनमार्क, आस्ट्रिया और फ्रांस के साथ युद्ध कर जर्मनी का एकीकरण करने में सफलता प्राप्त की।

प्रश्न 3.
राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभावों की चर्चा करें।
उत्तर-
राष्ट्रवाद आधुनिक विश्व की राजनैतिक जागृति का प्रतिफल है। यह एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एकता की वाहक बनती है। राष्ट्रवाद के उदय के कारण निम्न हैं

(i) यूरोप में पुनर्जागरण- पुनर्जागरण के कारण कला, साहित्य, विज्ञान इत्यादि पर गहरा प्रभाव पड़ा और लोगों के दृष्टि कोण में परिवर्तन हुए जिसने राष्ट्रवाद का बीजारोपण किया।

(ii) फ्रांस की राज्य क्रांति- इसने राजनीतिक को अभिजात्यवर्गीय परिवेश से बाहर कर उसे अखबारों, सड़कों और सर्वसाधारण की वस्तु बना दिया।

(iii) नेपोलियन का आक्रमण- नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसको वास्तविक एवं राजनैतिक रूपरेखा प्रदान की। जिससे इटली और जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। दूसरी तरफ नेपोलियन की नीतियों के कारण फ्रांसीसी प्रभुता और आधिपत्य के विरुद्ध यूरोप में देशभक्तिपूर्ण विक्षोभ भी जगा।

नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की विजयी शक्तियाँ आस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1814-15 में एकत्र हुई। जिनका उद्देश्य यूरोप में पुनः उसी व्यवस्था को स्थापित करना था, जिसे नेपोलियन के युद्धों.और विजयों ने अस्त-व्यस्त कर दिया था।

प्रश्न 4.
जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण दें।
उत्तर-
चार्ल्स दशम् एक निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था, जिसने फ्रांस में उभर रही राष्ट्रीयता तथा जनतंत्र भावनाओं को दबाने का कार्य किया। उसने अपने शासनकाल में संवैधानिक लोकतंत्र की राह में कई गतिरोध उत्पन्न किये। उसके द्वारा प्रतिक्रियावादी पोलिग्नेक को प्रधानमंत्री बनाया गया। पोलिग्नेक ने लूई 18वें द्वारा स्थापित समान नागरिक संहिता के स्थान पर शक्तिशाली अभिजात्यवर्ग की स्थापना तथा उसे विशेषाधिकारों से विभूषित करने का प्रयास किया।

उसके इस कदम को उदारवादियों ने चुनौती तथा क्रांति के विरुद्ध षड्यंत्र समझा। प्रतिनिधि सदन एवं दूसरे उदारवादियों ने पोलिग्नेक के विरुद्ध गहरा असंतोष प्रकट किया। चार्ल्स दशमा ने इस विरोध की प्रतिक्रियास्वरूप-25 जुलाई 1830 ई. को चार अध्यादेशों के विरोध में पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई और फ्रांस में 28 जुलाई से गृहयुद्ध प्रारम्भ हो गया। इसे ही जुलाई 1830 की क्रांति कहते हैं। इसके साथ ही चार्ल्स दशम फ्रांस की राजगद्दी को त्याग कर इंगलैंड चला गया और इस प्रकार फ्रांस में बूर्वो वंश के शासन का अंत हो गया और आर्लेयेस वंश के लुई फिलिप को सत्ता राप्त हुई।

प्रश्न 5.
यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर-
यूनान तुर्की साम्राज्य के अधीन था। फलतः तुर्की शासन से स्वयं को अलग करने के लए आन्दोलन चलाये जाने लगे। यूनान सारे यूरोपवासियों के लिए प्रेरणा एवं सम्मान का पर्याय था, जिसकी स्वतंत्रता के लिए समस्त यूरोप के नागरिक अपनी सरकार की तटस्थता के बावजूद भी उद्यत थे। इंगलैंड का महान कवि लार्ड बायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया। इससे यूनान की स्वतंत्रता के लिए सम्पूर्ण यूरोप में सहानुभूति की लहर दौड़ने लगी। इधर रूस भी अपनी साम्राज्यवादी महत्वकांक्षा तथा धार्मिक एकता के कारण यूनान की स्वतंत्रता का पक्षधर था।

यूनान में स्थिति तब विस्फोटक बन गयी जब तुर्की शासकों द्वारा यूनानी स्वतंत्रता संग्राम में संलग्न लोगों को बुरी तरह कुचलना शुरू किया गया। 1821 ई. में अलेक्जेंडर चिप-सिलांटी के नेतृत्व में यूनान में विद्रोह शुरू हो गया। परन्तु वह मेटरनिख के दबाव में खुलकर सामने नहीं आ पा रहा था। परन्तु जब जार निकोलस आया तो उसने खुलकर यूनानियों का समर्थन किया। अप्रैल 1826 में ग्रेट ब्रिटेन और रूस में एक समझौता हुआ कि वे तुर्की-यूनान विवाद में मध्यस्थता करेंगे।

फ्रांस का राजा चार्ल्स दशम भी यूनानी स्वतंत्रता में दिलचस्पी लेने लगा। 1827 में लंदन में एक सम्मेलन हुआ जिसमें इंगलैंड, फ्रांस तथा रूस ने मिलकर तुर्की के खिलाफ तथा यूनान के समर्थन में संयुक्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया। इस प्रकार तीनों देशों की सेना नावारिनो की खाड़ी में तुर्की के खिलाफ एकत्र हुई। युद्ध में तुर्की की सेना पराजित हुई और अंततः 1829 में एड्रियानोपल की संधि हुई। जिसके तहत तुर्की की नाममात्र की प्रभुता में यूनान को स्वायत्तता देने की बात हुई। परन्तु यूनानी राष्ट्रवादियों ने संधि की बातों को मानने से इंकार कर दिया। उधर इंगलैंड तथा फ्रांस भी यूनान पर रूस के प्रभाव की अपेक्षा इसे स्वतंत्र देश बनाना बेहतर मानते थे। फलतः 1832 में यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया। बवेरिया के शासक ओटो’ को स्वतंत्र यूनान का राजा घोषित किया गया।

Bihar Board Class 10 History यूरोप में राष्ट्रवाद Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘रक्त और तलवार’ की नीति किसने अपनाई ?
उत्तर-
बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण के लिए ‘रक्त और तलवार’ की नीति अपनाई।

प्रश्न 2.
अन्सर्ट रेनन ने राष्ट्रवाद को किस रूप में परिभाषित किया ?
उत्तर-
अन्सर्ट रेनन ने राष्ट्रवाद की नई व्याख्या की जिसके अनुसार राष्ट्र एक बड़ी और व्यापक एकता है।

प्रश्न 3.
वियना कांग्रेस (सम्मेलन) में फ्रांस में किस राजवंश की पुनर्स्थापना की गई?
उत्तर-
वियना कांग्रेस 1815 द्वारा फ्रांस में बूबों राजवंश की पुनर्स्थापना की गई।

प्रश्न 4.
जर्मन राइन महासंघ की स्थापना किसने की?
उत्तर-
जर्मन राइन महासंघ की स्थापना नेपोलियन ने की।

प्रश्न 5.
चार्टिस्ट आंदोलन किस देश में हुआ?
उत्तर-
चार्टिस्ट आंदोलन इंगलैंड में हुआ था।

प्रश्न 6.
1830 की जुलाई क्रांति का फ्रांस पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
1830 ई. की जुलाई क्रांति के परिणामस्वरूप फ्रांस में निरंकुश राजशाही का स्थान सांविधानिक गणतंत्र ने ले लिया।

प्रश्न 7.
फ्रैंकफर्ट संसद की बैठक क्यों बुलाई गई ? इसका क्या परिणाम हुआ ?
उत्तर-
फ्रैंकफर्ट ससंद की बैठक का मुख्य उद्देश्य जर्मन राष्ट्र के निर्माण की योजना बनाना था। इसके अनुसार जर्मन राष्ट्र का प्रधान एक राजा को बनाना था जिसे संसद के नियंत्रण में काम करना था तथा जर्मनी का एकीकरण उसी के नेतृत्व में होना था। लेकिन जब प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ ने यह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया तो एसेंबली भंग हो गई, जर्मनी
का एकीकरण पूरा नहीं हो सका।

प्रश्न 8.
अन्सर्ट रेनन ने राष्ट्रवाद को किस रूप में परिभाषित किया ?
उत्तर-
फ्रांसीसी दार्शनिक अन्सर्ट रेनन ने राष्ट्रवाद की एक नई और व्यापक परिभाषा दी। उनके अनुसार राष्ट्र समान भाषा, नस्ल, धर्म या क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है। राष्ट्रवाद के लिए अतीत में समान गौरव का होना, वर्तमान में एक समान इच्छा, संकल्प का होना, साथ मिलकर महान काम करना और आगे, ऐसे काम और करने की इच्छा एक जनसमूह होने की यह सब जरूरी शर्ते हैं। अतः, राष्ट्र एक बड़ी और व्यापक एकता है …….. उसका अस्तित्व रोज होनेवाला जनमत-संग्रह है ……….।

प्रश्न 9.
फ्रांसीसी क्रांति के बाद राष्ट्र का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर-
फ्रांसीसी क्रांति के बाद पुरातन युग का अंत हुआ और नए आधुनिक युग का आरंभ हुआ। फ्रांसीसी क्रांति के बाद राष्ट्र का निर्माण राष्ट्रवादी विचारों के आधार पर हुआ। निरंकुश राजतंत्र का अंत हुआ और प्रजातंत्र की स्थापना की गई। मानव एवं नागरिक अधिकारों की घोषण कर सामाजिक एवं आर्थिक समानता स्थापित की गई। स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के सिद्धांत पर राष्ट्र का निर्माण किया गया।

प्रश्न 10.
उदारवादी राष्ट्रवाद को किस रूप में देखते थे?
उत्तर-
उदारवादी राष्ट्रवाद को ‘आजाद’ के अर्थ में देखते थे। उदारवादी राष्ट्रवाद के लिए व्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष सभी की बराबरी, निरंकुश राजतंत्र के स्थान पर संविधान
और प्रतिनिधि सरकार की स्थापना, निजी संपत्ति की सुरक्षा, प्रेस की आजादी, आर्थिक क्षेत्र में मुक्त व्यापार आदि राष्ट्रीय से संबंधित विचार के समर्थक थे।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान का भाव बढ़ाने के लिए क्या किया ?
उत्तर-
फ्रांसीसी क्रांति आरंभ होने के साथ ही क्रांतिकारियों ने राष्ट्रीय और सामूहिक पहचा की भावना जगाने वाले कार्य किए। पितृभूमि और नागरिक जैसे शब्दों द्वारा फ्रांसीसियों में एक सामूहिक भावना और पहचान बढ़ाने का प्रयास किया गया। क्षेत्रीय भाषा के स्थान पर फ्रेंच भाषा को प्रोत्साहित किया गया।

प्रश्न 2.
यूनानी स्वतंत्रता संग्राम के कारणों और परिणामों का उल्लेख करें?
उत्तर-
यूनान एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र था। इसका अतीत गौरवमय था। पुनर्जागरण काल में यूनानी सभ्यता-संस्कृति अनेक राष्ट्रों के लिए प्रेरणादायक बन गई। लेकिन 15वीं शताब्दी में यूनान ऑटोमन साम्राज्य के अंतर्गत आ गया। इस साम्राज्य के अन्तर्गत विभिन्न भाषा, धर्म और नस्ल के निवासी थे। तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य के प्रति उनमें लगाव की भावना नहीं थी क्योंकि उन्हें तुर्की ने अपने साम्राज्य में आत्मसात करने का प्रयास नहीं किया।

यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन के निम्नलिखित कारण थे18वीं सदी के अंतिम चरण तक यूनान में राष्ट्रवादी भावना बलवती होने लगी। नेपोलियन के युद्धों और वियना काँग्रेस ने इस विचारधारा को आगे बढ़ाया। राष्ट्रवादी भावना के विकास में धर्म की भूमिका भी महत्वपूर्ण थी। 18वीं शताब्दी के अंत में यूनान में बौद्धिक आन्दोलन भी हुआ। करेंइस नामक दार्शनिक ने यूनानियों में राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रचार किया। कान्सेटेण्टाइन रीगास नामक एक नेता ने गुप्त समाचारपत्रों का प्रकाशन कर यूनानियों में तुर्की से स्वतंत्र होने की भावना प्रज्जवलित की।

यूनानी स्वतंत्रता संग्राम के निम्न परिणाम हुए यूनानियों ने लंबे और कठिन संघर्ष के बाद ऑटोमन साम्राज्य के अत्याचारी शासन से मुक्ति पाई। यूनान के स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र का उदय हुआ। यद्यपि गणतंत्र की स्थापना नहीं हो सकी परन्तु एक स्वतंत्र राष्ट्र के उद्देश्य मेटरनिक की प्रतिक्रियावादी नीति को गहरी ठेस लगाई। यूनानियों के विजय से 1830 के क्रांतिकारियों को प्रेरणा मिली। बोस्कन क्षेत्र के अन्य इसाई राज्यों में भी राष्ट्रवादी आंदोलन आरंभ करने की चाह बढ़ी।

प्रश्न 3.
जर्मनी के एकीकरण के लिए बिस्मार्क ने कौन-सी नीति अपनाई। इसका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर-
जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के प्रयासों का फल था। उसने अपनी कूटनीति और सैनिक शक्ति के सहारे जर्मनी का एकीकरण किया। वह प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण करना चाहता था। अतः, उसने प्रशा को सैनिक रूप से सशक्त करने का प्रयास किया। जर्मनी ‘ को एक सूत्र में बाँधने के लिए बिस्मार्क ने रक्त और तलवार की नीति अपनाई। उसका विचार था कि जर्मनी के एकीकरण में सफलता राजकुमारों द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है न कि लोगों द्वारा। बिस्मार्क के जर्मन एकीकरण का उद्देश्य तीन युद्धों द्वारा पूर्ण हुआ जो 1864 से 1870 के सात वर्ष के अल्प समय में लड़े गए। जर्मनी के एकीकरण में प्रशा के राजा विलियम प्रथम का बहुत हाथ रहा। बिस्मार्क के नीतियों के परिणामस्वरूप यूरोप के नक्शे पर एकीकृत जर्मन राष्ट्र का उदय हुआ।

प्रश्न 4.
फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान का भाव बढ़ाने के लिए क्या किया ?
उत्तर-
यूरोप में राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ फ्रांस में हुई। फ्रांसीसी क्रांति के प्रारंभ के साथ ही फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने राष्ट्रीय और सामूहिक पहचान की भावना जगानेवाले अनेक कार्य किए

  • पितृभूमि और नागरिक जैसे विचारों के द्वारा संयुक्त समुदाय के रूप में फ्रांसीसियों में एक सामूहिक भावना और पहचान बढ़ाने का प्रयास किया गया।
  • एक नया संविधान बनाकर सभी नागरिकों को समान अधिकार देकर समानता की
    स्थापना पर बल दिया गया।
  • एक नया फ्रांसीसी झंडा-तिरंगा चुना गया जिसने पहले के राजध्वज की जगह ले ली।
  • राष्ट्र के नाम पर एकजुटता के लिए राष्ट्रभक्ति गीत एवं राष्ट्रगान अपनाया गया।
  • पुरानी संस्था स्टेट्स जेनरल का चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा किया गया और उसका नाम बदलकर नेशनल एसेंबली कर दिया गया।
  • पेरिस की फ्रेंच भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया गया।
  • आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिए गए। नाप-तौल के लिए एक तरह की व्यवस्था की गई।

प्रश्न 5.
नेपोलियन की राष्ट्रवाद के विकास में क्या भूमिका थी?
उत्तर-
नेपोलियन बोनापार्ट (1789-1821) ने अपने शासनकाल में राष्ट्रवास के प्रसार के लिए अनेक सुधार संबंधी कार्य किए

  • नेपोलियन ने विशेषाधिकार तथा आर्थिक असामानता को दूर कर समानता की स्थापना की।
  • करों में समानता स्थापित की गई।
  • नेपोलियन ने 1804 में नेपोलियन संहिता लागू कर कानून के समक्ष सबको बराबरी का अधिकार दिया।
  • देशभक्तों, विद्वानों और कलाकारों को सम्मानित करना प्रारंभ किया।
  • नेपोलियन ने एक समान शुल्क, समान माप तौल प्रणाली और एक मुद्रा के द्वारा राष्ट्र को संगठित करने का प्रयास किया।
  • नागरिकों की संपत्ति संबंधी अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की।
  • यातायात और संचार व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास किया।
  • सामंती व्यवस्था समाप्त कर किसानों को भू-दासत्व से मुक्ति दिलाया।
  • नेपोलियन राष्ट्र निर्माण में शिक्षा को महत्वपूर्ण मानता था। अतः, शिक्षा प्रणाली की पुनर्व्यवस्था की। सेकेंडरी स्कूल तथा विश्वविद्यालयों से शिक्षित होने के कारण विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति जैसे राष्ट्रवादी भावना का विकास हुआ।
  • उसने कई धार्मिक सुधार किए। चर्च की संपत्ति को जब्त किया और उस पर राज्य का नियंत्रण स्थापित किया। उसने अनेक सुधारों द्वारा फ्रांस में राष्ट्रवादी भावना का विकास किया जिससे प्रेरणा लेकर यूरोप के अन्य देशों में राष्ट्रवादी भावना जागृत हुई।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यूरोपीय राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति का क्या योगदान था?
उत्तर-
यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति की अहम भूमिका रही। कला, साहित्य और संगीत ने राष्ट्रवादी भावनाओं को गढ़ने और व्यक्त करने में सहयोग दिया। इसके कई उदाहरण हमें फ्रांस, इटली, यूनान और जर्मनी में देखने को मिलते हैं। राष्ट्रप्रेम की भावना का प्रसा कलाकारों, विचारकों, साहित्यकारों, कवियों, संगीतकारों आदि ने संस्कृति को आधार बनाउ किया। इसके निम्नलिखित उदाहरण यूरोप में देखने को मिलते हैं।

(i) फ्रेडरिक सारयू का कल्पनादर्श–फ्रांसीसी कलाकार फ्रेंडिक सारयू ने एक कल्पनादश की रचना अपने चित्रों के द्वारा की जिसमें आदर्श समाज की कल्पना की गई। इन चित्रों में विभिन्न राष्ट्रों की पहचान कपड़ों और प्रतीक चिह्नों द्वारा एक राष्ट्र राज्य के रूप में की गई। इस प्रकार 19वीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रीयता के विकास में सारयू की कल्पनादर्श ने प्रेरणा का काम किया। कलाकारों ने मानवीय रूप में राष्ट्र को प्रस्तुत किया। राष्ट्र की कल्पना नारी रूप में की। फ्रांस में मारीआन को एवं जर्मनी में जर्मेनिया को राष्ट्रवाद के प्रतीक रूप में नारी का चित्रांकन हुआ।

(ii) रूमानीवाद-रूमानीवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जो एक विशिष्ट प्रकार के राष्ट्रवाद का प्रचार किया। आमतौर पर रूमानी कलाकारों और कवियों ने तर्क-वितर्क और विज्ञान के महिमामंडन की आलोचना की और उसकी जगह भावनाओं, अंतर्दृष्टि और रहस्यवादी भावनाओं पर अधिक बल दिया। उनका प्रयास था कि सामूहिक विरासत और संस्कृति को राष्ट्र का आधार बनाया जाए।

(iii) लोक परंपराएँ-जर्मनी के चिंतक योहान गॉटफ्रीड का मानना था कि सच्ची जर्मन संस्कृति आम लोगों में निहित थी। राष्ट्र की अभिव्यक्ति लोकगीतों, लोकनृत्यों और जनकाव्य से प्रकट होती थी इसलिए राष्ट्र निर्माण के लिए इनका संकलन आवश्यक था। निरक्षर लोगों में राष्ट्रीय भावना संगीत, लोककथा के द्वारा जीवित रखी गई। कैरोल कुर्पिस्की ने राष्ट्रीय संघर्ष का अपने ऑपेरा और संगीत से गुणगान किया।

(iv) भाषा भाषा ने भी राष्ट्रीय भावनाओं के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। रूसी कब्जे के बाद पोलिश भाषा को स्कूलों में बलपूर्वक हटाकर रूसी भाषा को जबरन लादा गया। 1831 के पोलिश विद्रोह को यद्यपि रूस ने कुचल दिया। परंतु राष्ट्रवाद के विरोध के लिए भाषा को एक हथियार बनाया। धार्मिक शिक्षा और चर्च में पोलिश भाशा का व्यवहार किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि पादरियों और विशपों को दंडित कर साइबेरिया भेज दिया गया। पोलिश भाषा रूसी प्रभुत्व के विरुद्ध संघर्ष
के प्रतीक के रूप में देखी जाने लगी।

प्रश्न 2.
1848 में उदारवादी क्रांतिकारियों ने किन राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को बढ़ावा दिया?
उत्तर-
यूरोप में 1848 का वर्ष क्रांतियों का वर्ष था इस वर्ष फ्रांस, ऑस्ट्रिया, हंगरी, इटली, पोलैंड, जर्मनी आदि देशों में क्रांतियाँ हुई। इन क्रांतियों के होने में अनेक परिस्थितियों ने योगदान किया

  • निरंकुश शासकों का निकम्मा शासन
  • यूरोप की आर्थिक दशा शोचनीय
  • राजनीतिक जीवन अस्थायी
  • यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का विकास
  • सामाजिक विद्वेष
  • राजनीतिक दलों द्वारा प्रजा में उत्तेजनात्मक भावना जागृत करना

1848 की क्रांति का यूरोपीय देशों की सरकार द्वारा दमन कर दिया गया और इसे आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हुई। परंतु इसे पूर्णरूप से असफल भी नहीं कहा जा सकता। इस क्रांति से यूरोप की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। उदारवादी क्रांतिकारियों की 1848 की क्रांति का अर्थ था राजतंत्र का अंत और गणतंत्र की स्थापना। इसके बाद उदारवादी क्रांतिकारियों ने निम्नलिखित विचारों को बढ़ावा दिया।

उदारवादियों ने जनता के असंतोष का फायदा उठाया और एक राष्ट्र के निर्माण की मांगों को आगे बढ़ाया। यह राष्ट्र-राज्य संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता और संगठन बनाने की स्वतंत्रता जैसे संसदीय सिद्धांतों पर आधारित था। उदारवादी क्रांतिकारियों द्वारा सार्वजनिक मताधिकार पर आधारित जनप्रतिनिधि सीमाओं के निर्माण, भू-दास और बंधुआ मजदूरी की प्रथा समाप्त करने की मांग की गई। उदारवादी आंदोलन के अंदर महिलाओं को राजनीतिक अधिकार प्रदान करने की मांग बढ़ने लगी। उदारवादी मध्यमवर्ग के स्त्री-पुरुष ने संविधानवाद की माँग को राष्ट्रीय एकीकरण की माँग से जोड़ दिया। इसी समय समाजवादी (साम्यवादी) विचार का प्रचार उदारवादियों द्वारा की गई। 1848 में खाद्य सामग्री का अभाव तथा बेरोजगारी की बढ़ती हुई समस्या से आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। इस संकट के समाधान के लिए उदारवादी क्रांतिकारियों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया।

प्रश्न 3.
इटली के एकीकरण के विभिन्न चरणों को इंगित करें।
उत्तर-
इटली का एकीकरण चार चरणों में पूरा हुआ। आरंभिक चरण में इटली के एकीकरण के पैगंबर मेजिनी का महत्त्वपूर्ण योगदान था। विक्टर इमैनुएल के शासनकाल से इटली के एकीकरण का वास्तविक प्रयास आरम्भ हुआ। जिसमें कावूर और गैरीबाल्डी का महत्त्वपूर्ण योगदान था। इटली के एकीकरण के चार चरण निम्नलिखित हैं-

(i) ज्युसेपे मेसिनी के नेतृत्व में मेजिनी गणतंत्रात्मक दल का नेता था। उसने अपने निर्वासन काल में गणतंत्रवादी उद्देश्यों के प्रचार के लिए ‘यंग इटली’ नामक और ‘यंग यूरोप’ की स्थापना की थी। यद्यपि इटली के एकीकरण के लिए 1831 तथा 1848 में दो क्रांतिकारी प्रयास किए गए थे, परंतु वे दोनों असफल रहे।

(ii) काउंट काबूर के नेतृत्व में काबूर 1858 में पीडमौंट का मंत्री प्रमुख था। उसका मुख्य लक्ष्य ऑस्ट्रिया से इटली के उद्धार को प्रभावित करना था। वह न तो क्रांतिकारी था और न ही गणतंत्रवादी परंतु उसे इटली का वास्तविक निर्माता माना जाता है। उसने फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक गठबंधन कायम किया और इसके माध्यम से 1859 में ऑस्ट्रियाई सेवाओं को परास्त करने में सफलता प्राप्त की।

(iii) गैरीबाल्डी के नेतृत्व में- गैरीबाल्डी ‘लाल कुर्ती’ नामक क्रांतिकारी आंदोलन का नायक था। 1860 में उसने दक्षिणी इटली तथा दो सिसलियों की राजधानी में पदयात्रा की और स्थानीय कृषकों का समर्थन प्राप्त कर स्पेन के शासकों को हटाने में सफल हुआ।

(iv) विक्टर इमैनुएल द्वितीय 1861 में रोम और वेनेशिया को छोड़कर समस्त इटली की इतालवी संसद के प्रतिनिधि तूरिन में एकत्र हुए और उन्होंने इटली के राजा के रूप में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को विधिवत रूप से स्वीकार किया। 1870 में विक्टर इमैनुएल ने रोम पर आक्रमण कर उस पर अधिकार कर लिया। 1875 में रोम को इटली की राजधानी बनाया गया।

प्रश्न 4.
जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर-
जर्मन का एकीकरण निम्न प्रकार हुआ-
(i) 1848 की फ्रैंकफर्ट संसद- प्रशा ने नरेश फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ के नेतृत्व में फ्रैंकफर्ट संसद ने जर्मनी के एकीकरण के लिए भरसक प्रयास किए परंतु वे असफल रहे। यद्यपि जर्मन लोगों में 1848 के पहले ही राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो चुकी थी। राष्ट्रीयता की भावना मध्यवर्गीय जर्मन लोगों में बहुत अधिक है।

(ii) प्रशा के नेतृत्व में एकीकरण– राष्ट्र निर्माण की इस उदारवादी विचारधारा को राजशाही और फौजी ताकतों के विरुद्ध कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा जिन्हें प्रशा के बड़े भूस्वामियों (Junkers) ने भी समर्थन दिया था उसके बाद प्रशा ने राष्ट्रीय एकीकरण के आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया। प्रशा का प्रधानमंत्री ऑटो वॉन बिस्मार्क इस प्रक्रिया का जनक था जिसने प्रशा की सेना और नौकरशाही की मदद ली।

(iii) बिस्मार्क का योगदान बिस्मार्क प्रशा के उन महान सपूतों में से एक था जिसने सेना और नौकरशाही की मदद से जर्मनी के एकीकरण का उत्कृष्ट प्रयास किया। उसका मानना था कि जर्मनी के एकीकरण में सफलता राजकुमारों द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है न कि लोगों द्वारा। वह प्रशा के जर्मनी में विलय द्वारा नहीं बल्कि प्रशा का जर्मनी तक विस्तार के द्वारा इस उद्देश्य
को पूरा करना चाहता था।

(iv) तीन युद्ध – बिस्मार्क के जर्मन-एकीकरण का उद्देश्य सात वर्ष में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस से तीन युद्धों द्वारा पूर्ण हुआ जो 1864 से 1870 के बीच लड़े गए।

(v) जर्मनी के एकीकरण की अंतिम प्रक्रिया- उपर्युक्त युद्धों का परिणाम प्रशा की जीत के रूप में आया जिससे एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई। 18 जनवरी 1871 में, वर्साय में हुए एक समारोह में प्रशा के राजा काइजर विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट बनाया गया और नए जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गई।

प्रश्न 5.
“ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का इतिहास शेष यूरोप की तुलना में भिन्न था।” स्पष्ट करें। .
उत्तर-
ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण किसी क्रांति का परिणाम नहीं था बल्कि शांतिपूर्वक संसद के माध्यम से हुआ। अतः, ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का इतिहास यूरोप के शेष देशों से भिन्न था। इसके कई कारण थे

(i) 18वीं शताब्दी के पहले ब्रिटेन राष्ट्र नहीं था। ब्रितानी द्वीपसमूह में रहनेवाले निवासी अंग्रेज, वेल्स, स्कॉटिश या आयरिश की मुख्य पहचान नृजातीय थी। इन सभी की अपनी-अपनी अलग सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराएँ थी।

(ii) ब्रिटिश राष्ट्र की राजनैतिक शक्ति और आर्थिक समृद्धि में जैसे-जैसे वृद्धि हुई वैसे-वैसे वह द्वीपसमूहों के अन्य राष्ट्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करते हुए वहाँ आंग्ल संस्कृति का विकास किया।

(iii) एक लंबे संघर्ष के बाद 1688 में रक्तहीन या गौरवपूर्ण क्रांति के माध्यम से समस्त शक्ति आंग्ल संसद के हाथों में आ गई। संसद के द्वारा ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ जिसका केंद्र इंगलैंड था।

(iv) स्कॉटलैंड और आयरलैंड पर प्रभाव स्थापित कर इंगलैंड ने स्कॉटलैंड के साथ 1707 के ऐक्ट ऑफ यूनियन द्वारा ‘यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन हुआ।

(v) ब्रितानी पहचान के विकास के लिए स्कॉटलैंड की खास संस्कृति एवं राजनीतिक संस्थाओं.को दबाया गया। उन्हें अपनी गोलिक भाषा बोलने और अपनी राष्ट्रीय पोशाक पहनने से रोका गया। अनेकों स्कॉटिशों को अपना वतन छोड़ने को बाध्य किया गया।

Bihar Board Class 10 History यूरोप में राष्ट्रवाद Notes

  • राष्ट्रवाद आधुनिक विश्व की राजनैतिक जागृति का प्रतिफल है। यह एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एकता की वाहक बनती है।
  • यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना के विकास में फ्रांस की राज्यक्रांति तत्पश्चातनेपोलियन के आक्रमणों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • फ्रांस में वियना व्यवस्था के तहत क्रांति के पूर्व की व्यवस्था को स्थापित करने के लिएबर्वो राजवंश को पुनर्स्थापित किया गया तथा लुई 18वाँ फ्रांस का राजा बना।
  • 28 जून 1830 ई. से फ्रांस में गृहयुद्ध आरम्भ हो गया। इसे ही जुलाई 1830 की फ्रांस क्रांति कहते हैं। परिणमतः चार्ल्स-X फ्रांस की राजगद्दी त्याग कर इंगलैंड पलायन कर गया और इस प्रकारबुर्बो वंश के शासन का अन्त हो गया।
  • बूर्वो वंश के स्थान पर आर्लियस वंश को गद्दी सौंपी गयीलुई फिलिप उसका शासक बना।
  • 1871 ई. तक इटली का एकीकरण मेजनी, काबूर, गैरी-बाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं एवं विक्टर इमैनुएल जैसे शासक के योगदानों के कारण पूर्ण हुआ।
  • 1871 में ही जर्मनी एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में यूरोप के राजनैतिक मानचित्र में पाया जिसमेंजालवेरिन विस्मार्क की भूमिका मुख्य थी।
  • राष्ट्रवाद की भावना का बीजारोपण यूरोप में पुनर्जागरण के काल से प्रारंभ हो चुका या परंतु उन्नत रूप में 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति से प्रकट हुई।
  • नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसे वास्तविक एवं राजनैतिक रूपरेखा प्रदान की जिससेइटली और जर्मनी का एकीकरण हुआ।
  • नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की विजयी शक्तियाँऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1815 में एकत्र हुई।
  • वियना काँग्रेस (1815) का मुख्य उद्देश्य यूरोप में पुनः उसी व्यवस्था को स्थापित करना
    था जिसेनेपोलियन ने समाप्त कर दिया था।
  • सन् 1815 ई. केवियना सम्मेलन की मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने किया जो घोर प्रतिक्रियावादी था।
  • वियना सम्मेलन में शामिल हुए देशों में ब्रिटेन रूसप्रशा औरऑस्ट्रिया मुख्य थे।
  • गणतंत्र एवं प्रजातंत्र जो फ्रांसीसी क्रांति की देन थी, उसका विरोध करना और पुरातन व्यवस्था की पुनर्स्थापना करना मेटरनिख व्यवस्था का उद्देश्य था।
  • 1848 ई. की फ्रांसीसी क्रांति नेमेटरनिख युग का अंत कर दिया।
  • विलियम प्रथम प्रशा का शासक था जिसने. विस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया।
  • “रक्त और लौह की नीति” का अवलम्बन बिस्मार्क ने किया।
  • ऑस्ट्रिया एवं प्रशा के बीच 1866 ई. में सेंडोवा का युद्ध’ हुआ।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 1 बातचीत

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 1 बातचीत

 

बातचीत अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Batchit Ka Question Answer Bihar Board प्रश्न 1.
‘बातचीत’ शीर्षक निबन्ध के निबंधकार हैं :
उत्तर-
बालकृष्ण भट्ट।

बातचीत कहानी का प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 2.
बालकृष्ण भट्ट किस युग के रचनाकार हैं?
उत्तर-
भारतेन्दु युग।

Batchit Question Answer Bihar Board प्रश्न 3.
‘सौ अज्ञान एक सुजान’ उपन्यास के लेखक कौन हैं :
उत्तर-
बालकृष्ण भट्ट।

Bihar Board Class 12 Hindi Book Solution प्रश्न 4.
आर्ट ऑफ कनवरसेशन कहाँ के लोगों में सर्वाधिक प्रचलित है?
उत्तर-
यूरोप के।

बातचीत कहानी का सारांश Bihar Board प्रश्न 5.
बालकृष्ण भट्ट ने किस पत्रिका का संपादन किया था?
उत्तर-
प्रदीप।

Baatchit Summary In Hindi Bihar Board प्रश्न 6.
बातचीत के माध्यम से बालकृष्ण भट्ट क्या बतलाना चाहते हैं?
उत्तर-
बातचीत की शैली।

Batchit Class 12 Bihar Board प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से बालकृष्ण भट्ट का निवास स्थान कौन-सा है?
उत्तर-
इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश।

Bihar Board Hindi Book Class 12 Pdf Download Bihar Board  प्रश्न 8.
बालकृष्ण भट्ट द्वारा कौन-सा उपन्यास रचित है?
उत्तर-
अपने-अपने अजनबी।

बातचीत वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ

Class 12 Hindi Book Bihar Board Bihar Board प्रश्न 1.
बालकृष्ण भट्ट के पिता कौन थे?
(क) बेनी प्रसाद भट्ट
(ख) रामप्रसाद भट्ट
(ग) शिवप्रसाद भट्ट
(घ) गौरीशंकर भट्ट
उत्तर-
(क)

Batchit Ka Question Answer Subjective Bihar Board प्रश्न 2.
बालकृष्ण भट्ट का जन्म कब हुआ था?।
(क) 23 जून, 1844
(ख) 12 अप्रैल, 1805
(ग) 21 मई, 1812
(घ) 15 जनवरी, 1806
उत्तर-
(क)

Digant Hindi Book Class 12 Pdf Download Bihar Board प्रश्न 3.
बालकृष्ण भट्ट की मृत्यु कब हुई थी?
(क) 20 जुलाई, 1914
(ख) 10 जून, 1905
(ग) 15 मार्च, 1909.
(घ) 20 सितम्बर, 1917
उत्तर-
(क)

बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 12 Bihar Board प्रश्न 4.
बालकृष्ण भट्ट की माँ का क्या नाम था?
(क) सावित्री देवी
(ख) पार्वती देवी
(ग) राधिका देवी
(घ) श्यामा देवी
उत्तर-
(ख)

बिहार बोर्ड हिंदी बुक 12th Bihar Board प्रश्न 5.
बालकृष्ण भट्ट जी ने किस शब्द कोष का संपादन किया?
(क) अंग्रेजी शब्दकोश
(ख) उर्दू शब्दकोश
(ग) संस्कृत शब्दकोश
(घ) हिन्दी शब्दकोश
उत्तर-
(घ)

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

बातचीत निबंध का सारांश Bihar Board प्रश्न 1.
मनुष्यों में …………. न होती तो हम नहीं जानते कि इस गूंगी सृष्टि का क्या हाल होता।
उत्तर-
वाशक्ति

Bihar Board Class 12 Hindi Chapter 1 Bihar Board प्रश्न 2.
घरेलू बातचीत …………. का ढंग है।
उत्तर-
मन रमाने

बिहार बोर्ड हिंदी बुक Class 12 Pdf Bihar Board प्रश्न 3.
सच है, जबतक मनुष्य बोलता नहीं तबतक उसका ……… प्रकट नहीं होता।
उत्तर-
गुण-दोष

Class 12th Hindi Book Bihar Board प्रश्न 4.
बेन जॉन्सन के अनुसार बोलने से ही मनुष्य के रूप का ……… होता है।
उत्तर-
साक्षात्कार

प्रश्न 5.
…….. यहाँ तक बढ़ा है कि स्पीच और लेख दोनों इसे नहीं पाते।
उत्तर-
आर्ट ऑफ कनवरसेशन

बातचीत पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
अगर हममें वाशक्ति न होती तो क्या होता?
उत्तर-
अगर हममें वाशक्ति न होती तो यह समस्त सृष्टि गूंगी प्रतीत होती। सभी लोग चुपचाप बैठे रहते और हम जो बोलकर एक-दूसरे के सुख-दुख का अनुभव करते हैं वाशक्ति न होने के कारण एक-दूसरे से कह-सुन. भी नहीं पाते और न ही अनुभव कर पाते।

प्रश्न 2.
बातचीत के संबंध में वेन जॉनसन और एडीसन के क्या विचार हैं?
उत्तर-
बातचीत के संबंध में वेन जॉनसन का मत है कि बोलने से ही मनुष्य के सही रूप का साक्षात्कार होता है। यह बहुत ही उचित जान पड़ता है।।

एडीसन का मत है कि असल बातचीत सिर्फ दो व्यक्तियों में हो सकती है जिसका तात्पर्य हुआ जब दो आदमी होते हैं तभी अपना दिल एक-दूसरे के सामने खोलते हैं। जब तीन हुए तब वह दो बात कोसों दूर गई। कहा भी है कि छह कानों में पड़ी बात खुल जाती है। दूसरे यह कि किसी तीसरे आदमी के आ जाते ही या तो वे दोनों अपनी बातचीत से निरस्त हो बैठेंगे या उसे निपट मूर्ख अज्ञानी, समझा बना लेंगे। जैसे गरम दूध और ठंडे पानी के दो बर्तन पास-पास असर होगा ३ आर्ट ऑफ कनवरशन बातचीत करने की एकमा काव्यकला प्रवीण मिलता गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट सेटा के रखे जाएँ तो एक का असर दूसरे में पहुँच जाता है अर्थात् दूध ठंडा हो जाता है और पानी गरम। वैसे ही दो आदमी आपस पास बैठे हों तो एक का गुप्त असर दूसरे पर पहुँच जाता है। चाहे एक दूसरे को देखें भी नहीं। तब बोलने को कौन कहे एक के शरीर की विद्युत दूसरे में प्रवेश करने लगती है। जब पास बैठने का इतना असर होता है तब बातचीत में कितना अधिक असर होगा इसे कौन नहीं स्वीकार करेगा।

प्रश्न 3.
‘आर्ट ऑफ कनवरशेसन’ क्या है?
उत्तर-
‘आर्ट ऑफ कनवरसेशन’ बातचीत करने की एक कला (प्रविधि) है जो योरप के लोगों में ज्यादा प्रचलित है। इस बातचीत की प्रविधि की पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वमंडली में है। ऐसी चतुराई के साथ इसमें प्रसंग छोड़े जाते हैं कि जिन्हें सुन कान को अत्यन्त सुख मिलता है। साथ ही इसका अन्य नाम शुद्ध गोष्ठी है। शुद्ध गोष्ठी की बातचीत को यह तारीफ है कि बात करनेवालों की जानकारी अथवा पंडिताई का अभिमान या कपट कहीं एक बात में ही प्रकट नहीं होता वरन् कर्ण रसाभास पैदा करने वाले शब्दों को बरकते हुए चतुर सयाने अपने बातचीत को सरस रखते हैं। दयनीय स्थिति यह है कि हमारे यहाँ के पंडित आधुनिक शुष्क बातचीत में जिसे शास्त्रार्थ कहते हैं, वैसा रस नहीं घोल सकते।

इस प्रकार आर्ट ऑफ कनवरशेसन मनुष्य के द्वारा आपस में बातचीत करने की उत्तम कला है जिसके द्वारा मनुष्य बातचीत को हमेशा आनंदमय बनाये रखता है।

प्रश्न 4.
मनुष्य की बातचीत का उत्तम तरीका क्या हो सकता है? इसके द्वारा वह कैसे अपने लिए सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है?
उत्तर-
मनुष्य में बातचीत का सबसे उत्तम तरीका उसका आत्मवार्तालाप है। मनुष्य अपने अन्दर ऐसी शक्ति विकसित करे जिसके कारण वह अपने आप से बात कर लिया करे। आत्मवार्तालाप से तात्पर्य क्रोध पर नियंत्रण है जिसके कारण अन्य किसी व्यक्ति को कष्ट न पहुँचे। क्योंकि हमारी भीतरी मनोवृति प्रशिक्षण नए-नए रंग दिखाया करती है। वह हमेशा बदलती रहती है। लेखक बालकृष्ण भट्टजी इस मन को प्रपंचात्मक संसार का एक बड़ा आइना के रूप में देखते हैं जिसमें जैसा चाहो वैसी सूरत देख लेना कोई असंभव बात नहीं। अतः मनुष्य को चाहिए कि मन के चित्त को एकाग्र कर मनोवृत्ति स्थिर कर अपने आप से बातचीत करना सीखें। इससे आत्मचेतना का विकास होगा। उसी वाणी पर नियंत्रण हो जायेगा जिसके कारण दुनिया से किसी से न बैर रहेगा और बिना प्रयास के हम बड़े-बड़े अजेय शत्रु पर भी विजय पा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो हम सर्वथा एक नवीन संसार की रचना कर सकते हैं। इससे हमारी वाशक्ति का दमन भी नहीं होगा। अत: व्यक्ति को चाहिए कि अपनी जिह्वा को काबू में रखकर मधुरता से भरी वाणी बोले। जिससे न किसी से कटुता रहेगी न बैर। इससे दुनिया खूबसूरत हो जायेगी। मनुष्य के बातचीत करने का यही सबसे उत्तम तरीका है।

प्रश्न 5.
व्याख्या करें :
(क) हमारी भीतरी मनोवृत्ति प्रतिक्षण नए-नए रंग दिखाया करती है। वह प्रपंचात्मक संसार का एक बड़ा भारी आइना है, जिसमें जैसी चाहो वैसी सूरत देख लेना कोई दुर्घट बात नहीं है।
(ख) सच है, जब तक मनुष्य बोलता नहीं तब तक उसका गुण-दोष प्रकट नहीं होता।
उत्तर-
व्याख्या-
(क) प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारे पाठ्यपुस्तक दिगंत भाग-2 के महान् विद्वान लेखक बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित ‘बातचीत’ शीर्षक निबन्ध से उद्धृत है। इन पंक्तियों में लेखक ने लिखा है कि जब मनुष्य समाज में रहता है तो समाज से ही भाषा सीखता है। भाषा उसके विचार अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाती है। परन्तु उसके अन्दर की मनोवृत्ति स्थिर नहीं रहती है। कहा भी गया है कि चित्त बड़ा चंचल होता है। इसकी चंचलता के कारण एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को दोस्त और दुश्मन मान लेता है। वह कभी क्रोध कर बैठता है, कभी-कभी मीठी बातें करता है। इस द्वन्द्व स्थिति में मनुष्य की असली चरित्र का पता नहीं चलता। मनुष्य के मन की स्थिति गिरगिट के रंग बदलने जैसी होती है। इसी स्थिति के कारण लेखक इस मन के प्रपंचों को जड़ मानता है। वह कहता है कि यह आइना के समान है। इस संसर में छल-प्रपंच झूठ फरेब सब होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मन की चंचलता ही है। विद्वान लेखक इस दुर्गुण को दूर करने के लिए सलाह भी देता है कि इससे बचने के लिए अपनी जिह्वा (मन) पर नियंत्रण रखना होगा। अपने चित्त को एकाग्र करना होगा। माना कि हमारी जिह्वा स्वच्छन्द चला करती है परन्तु उस पर यदि हमारा नियंत्रण हो गया तो बड़े-बड़े क्रोधादिक अजेय शत्रु को बिना प्रयास अपने वश में कर लेंगे।

अतः हमारी मनोवृत्ति पर नियंत्रण करना होगा जिससे हमें न किसी से वैर-झगड़ा शत्रुता होगी और हम अपने नवीन संसार की रचना कर सकेंगे तथा साथ ही बातचीत के माध्यम से जीवन
का रस ले सकेंगे।

(ख) प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारे पाठ्यपुस्तक दिंगत भाग-2 के बालकृष्ण भट्ट रचित निबन्ध ‘बातचीत’ से ली गयी हैं लेखक इस निबन्ध के माध्यम से यह बताना चाहता है कि बातचीत ही एक विशेष तरीका होता है जिसके कारण मनुष्य आपस में प्रेम से बातें कर उसका आनन्द उठाते हैं। परन्तु मनुष्य जब वाचाल हो जाता है अथवा बातचीत के दौरान अपने आप पर काबू नहीं रख पाता है तो वह ‘दोष’ है, परन्तु जब वह बड़ी सजींदगी से सलीके से बातचीत करता है तो वह गुण है। मनुष्य के मूक रहने के कारण उसको चरित्र का कुछ पता नहीं चलता है परन्तु वह जैसे ही कुछ बोलता है तो उसकी वाणी के माध्यम से गुण-दोष प्रकट होने लगते हैं। जब दो आदमी साथ बातचीत करते हैं तो दोनों अपने दिल एक-दूसरे के सामने खोलते हैं। इस खुलेपन में किसी की शिकायत, किसी की अच्छाई किसी की बुराई होती है और इससे व्यक्ति का गुण-दोष प्रकट हो जाता है। वेन जॉनसन इस संदर्भ में कहते हैं कि बोलने से मनुष्य का साक्षात्कार होता है, उसकी पहचान सामने आती है। यहाँ आदमी की अपनी जिन्दगी मजेदार बनाने के लिए खाने-पीने चलने-फिरने आदि की जरूरत होती है। वहाँ बातचीत की अत्यन्त आवश्यकता है जहाँ कुछ मवाद (गंदगी) या धुआँ जमा रहता है। यह बातचीत के जरिए भाप बनकर बाहर निकल पड़ता है। कहने का आशय यह है कि मनुष्य के मन के अन्दर बहुत भी परतें जमी रहती हैं जिनमें कुछ अच्छी और कुछ बुरी होती हैं और यह बातचीत के दौरान हमारी जिह्वा (विचार) से प्रकट हो जाता है। अत: बोलने से ही मनुष्य के गुण-दोष की पहचान होती है।

प्रश्न 6.
इस निबन्ध की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर-
इस निबंध (बातचीत) के माध्यम से विद्वान निबंधकार ने बातचीत करने के लिए ईश्वर द्वारा दी गई वाक्शक्ति को अनमोल बताया है और कहा है कि मनुष्य इसी शक्ति के कारण पशुओं से अलग है, बढ़कर है। बातचीत के विभिन्न तरीके जैसे आर्ट ऑफ कनवरसेशन, हृदय गोष्ठी आदि के बारे में बताया गया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से उत्तम तरीके से बातचीत करता हुआ उनकस आनन्द ले सकता है। इस निबंध में दो विदेशी निबन्धकारों का एडीसन एवं वेन जॉनसन मत दिया गया है जिसमें एडीसन ने यह कहा है कि जब तक मनुष्य बोलना नहीं बोलता उसके गुण-दोष नहीं प्रकट होते। वेन जॉनसन का मत है कि बोलने से ही मनुष्य के सही रूप का साक्षात्कार होता है। निबंध में यह भी बताया गया है कि मनुष्य को अपने हृदयं (मन) पर काबू रखकर बोलना या बातचीत करनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो वह सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है। उसे कोई दु:ख विषाद नहीं झेलना पड़ेगा। बातचीत मनुष्य को अपनी जिन्दगी मजेदार बनाने का एक जरिया भी है। लोग यदि बातचीत के दौरान चुकीली बात कह दें तो लोग हँसने लगते हैं जिससे प्रच्छन्न सुख भाव का बोध होता है। बातचीत मन बहलाव का माध्यम तो है ही, उत्तम बातचीत मनुष्य के व्यक्तित्व के विकसित करने का एक माध्यम भी है जिसके कारण व्यक्ति लोकप्रिय एवं प्रसिद्ध हो जाता है।

बातचीत भाषा की बात

प्रश्न 1.
‘राम-रमौवल’ का क्या अर्थ है? इसका वाक्य में प्रयोग करें।
उत्तर-
राम-रमौवल-चार से अधिक व्यक्तियों की बातचीत राम-रमौवल कहलाती है। ‘राम-श्याम मोहन और सोहन रेलगाड़ी में राम-रमौवल कर रहे थे।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम छाँटें और बताएं कि वे सर्वनाम के किस भेद के अन्तर्गत आते हैं?
(क) कोई चुटीली बात आ गई हँस पड़े।
उत्तर-
कोई-अनिश्चयवाचक सर्वनाम

(ख) इसे कौन न स्वीकार करेगा।
उत्तर-
कौन-प्रश्नवाचक सर्वनाम

(ग) इसकी पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वमंडली में है।
उत्तर-
इसकी-निश्चयवाचक

(घ) वह प्रपंचात्मक संसार का एक बड़ा भारी आईना है।
उत्तर-
वह-निश्चवाचक

(ङ) हम दो आदमी प्रेमपूर्वक संलाप कर रहे हैं।
उत्तर-
हम-पुरुषवाचक सर्वनाम।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्द संज्ञा के किन भेदों के अन्तर्गत आते हैं धुआँ, आदमी, त्रिकोण, कान, शेक्सपीयर, देश मीटिंग, पत्र, संसार, मुर्गा, मन्दिर।
उत्तर-

  • धुआँ – भाववाचक
  • आदमी – जातिवाचक
  • त्रिकोण – जातिवाचक
  • कान – जातिवाचक
  • शेक्सपीयर – व्यक्तिवाचक
  • देश – जातिवाचक
  • मीटिंग – समूहवाचक।
  • पत्र – भाववाचक संसार
  • संसार – जातिवाचक
  • मुर्गा – जातिवाचक
  • मन्दिर – जातिवाचक

प्रश्न 4.
वाक्य प्रयोग द्वारा लिंग-निर्णय करें शक्ति, उद्देश्य, बात, लत, नग, अनुभव, प्रकाश, रंग, विवाह, दाँत।
उत्तर-
शक्ति (स्त्री.)-ईश्वर की शक्ति अपरम्पार है।
उद्देश्य (पु.)-आपका उद्देश्य महान होना चाहिए।
बात (स्त्री.)-हमें संजीदगी से बात करनी चाहिए।
लत (पु.)-उसे शराब की लत पड़ गयी।
नग (पु.)-राम की अंगूठी में नग चमकता है।
अनुभव (स्त्री.)-ईश्वर का अनुभव करो।
प्रकाश (पु.)-सूर्य का प्रकाश बड़ा तीक्ष्ण था।
रंग (पु.)-उसका रंग काला है।।
विवाह (पु.)-राम-सीता का विवाह हुआ।
दाँत (पु.)-उसका दाँत टूट गया।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण चुनें।
(क) हम दो आदमी प्रेमपूर्वक संलाप कर रहे हैं।
उत्तर-
हम दो-संख्यावाचक विशेषण

(ख) इसकी पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वानमंडली में है।
उत्तर-
इसकी-सार्वजनिक विशेषण

(ग) सुस्त और बोदा हुआ तो दबी बिल्ली का सा स्कूल भर को अपना गुरु ही मानेगा।
उत्तर-
सुस्त, बोदा, दबी-गुणवाचक विशेषण।

बातचीत लेखक परिचय बालकृष्ण भट्ट (1844-1914)

जीवन-परिचय :
हिन्दी के प्रारंभिक युग के प्रमुख पत्रकार, निबन्धकार तथा हिन्दी के आधुनिक आलोचना के प्रवर्तकों में अग्रगण्य बालकृष्ण भट्ट का जन्म 23 जून, सन 1844 ई. के दिन हुआ इनके पिता का नाम बेनी प्रसाद भट्ट था जो एक व्यापारी थे तथा माता का नाम पार्वती देवी था जो एक सुसंकृत महिला थी। इन्होंने ही बालकृष्ण भट्ट के मन में अध्ययन की रुचि जगाई। भट्ट जी का निवास स्थान इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश था। इन्होंने प्रारंभ में संस्कृत का अध्ययन किया तथा सन् 1867 में प्रयाग के मिशन स्कूल में एंट्रेंस की परीक्षा दी। ये सन् 1869 से 1875 तक प्रयाग के मिशन स्कूल में अध्यापन में कार्यरत रहे।

सन् 1885 में प्रयाग के सी.ए, वी. स्कूल में संस्कृत का अध्यापन किया। सन् 1888 में प्रयाग की कायस्थ पाठशाला इंटर कॉलेज में अध्यापक नियुक्त हुए, किन्तु अपने उग्र स्वभाव के कारण इन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी और फिर ये लेखन कार्य में लग गए। पिता के निधनोपरांत इन्हें विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन्होंने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रेरणा से सन् 1877 में ‘हिन्दी प्रदीप’ नामक मासिक पत्रिका निकालनी प्रारंभ की और इसे 33 वर्षों तक निकालते रहे। इन्होंने घोर आर्थिक संकटों से जूझते हुए हिम्मत से काम लिया और साहित्य के बालकृष्ण भट्ट का निधन 20 जुलाई, सन् 1914 के दिन हुआ, जो कि हिन्दी साहित्य के लिए एक अपूरणीय क्षति थी।

रचनाएँ :
बालकृष्ण भट्ट की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं

उपन्यास-
रहस्य कथा, नूतन ब्रह्मचारी, गुप्त वैरी, सौ अजान एक सुजान, रसातल यात्रा, उचित दक्षिणा, हमारी घड़ी, सद्भाव का अभाव। .

नाटक-
पद्मावती, किरातार्जुनीय, वेणी संहार, शिशुपाल वध, नल दमयंती या दमयंती स्वयंवर, शिक्षादान, चन्द्रसेन, सीता वनवास, पतित पंचम, मेघनाद वध, वृहन्नला, इंग्लैंडेश्वरी और भारत जननी, कट्टर सूम की एक नकल, भारतवर्ष और कलि, दो दूरदेशी, एक रोगी और एक वैद्य, बाल विवाह, रेल का विकट खेल आदि।

प्रहसन-
जैसा काम वैसा परिणाम, नई रोशनी का विषय, आचार विडंबन आदि। निबंध-लगभग 1000 निबन्ध जो कि हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर है। ‘भट्ट निबन्ध माला’ नाम से दो खंडों में प्रकाशित एक संग्रह।

इसके अतिरिक्त सन् 1881 में की गई वेदों की युक्तिपूर्ण समीक्षा तथा सन् 1886 में लाला श्रीनिवास दास के ‘संयोगिता स्वयंवर’ की आलोचना।

साहित्यिक विशेषताएँ :
बालकृष्ण भट्ट भारतेन्दु युग के प्रमुख सहित्यकारों में से एक है। इन्होंने आधुनिक हिन्दी साहित्य को अपने जनधर्मी व्यक्तित्व और लेखन से एक नवीन धरातल, दिशा तथा रंग-रूप प्रदान किया। ये अपने युग के सर्वाधिक मुखर, तेजस्वी तथा सक्रिय गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट सौहित्यकार रहे। इन्होंने बाल विवाह, स्त्री शिक्षा, महिला स्वातंत्र्य, कृषकों की पीड़ा, अंग्रेजी शिक्षा, देश प्रेम अंधविश्वास आदि सामाजिक विषयों पर खुलकर साहित्य सृजन किया।

बातचीत पाठ के सारांश

प्रस्तुत कहानी ‘बातचीत’ के लेखक महान् पत्रकार बालकृष्ण भट्ट हैं : बालकृष्ण भट्ट आधुनिक हिन्दी गद्य के आदि निर्माताओं और उन्नायक रचनाकारों में एक हैं। बालकृष्ण भट्ट जी बातचीत निबन्ध के माध्यम से मनुष्य की ईश्वर द्वारा दी गई अनमोल वस्तु वाकशक्ति का सही इस्तेमाल करने को बताते हैं। महान् लेखक बताते हैं कि यदि मनुष्य में वाक्शक्ति न होती तो हम नहीं जानते कि इस गूंगी सृष्टि का क्या हाल होता। सबलोग मानों लुंज-पुंज अवस्था में एक कोने में बैठा दिए गए होते। लेखक बातचीत के विभिन्न तरीके भी बताते हैं। यथा घरेलू बातचीत मन रमाने का ढंग है। वे बताते हैं कि जहाँ आदमी की अपनी जिन्दगी मजेदार बनाने के लिए खाने, पीने, चलने, फिरने आदि की जरूरत है, उसी प्रकार बातचीत की भी अत्यन्त आपयकता है। हमारे मन में जो कुछ मवाद (गंदगी) या धुआँ जमा रहता है वह बातचीत के जरिए भाप बनकर हमारे मन में बाहर निकल पड़ता है।

इससे हमारा चित्त हल्का और स्वच्छ हो परम आनंद में मग्न हो जाता है। हमारे जीवन में बातचीत का भी एक खास तरह का मजा होता है। यही नहीं, भट्टजी बतलाते हैं कि जब तक मनुष्य बोलता नहीं तबतक उसका गुण-दोष प्रकट नहीं होता। महान् विद्वान वेन जानसन का कहना है कि बोलने से ही मनुष्य के रूप का सही साक्षात्कार हो पाता है। वे कहते हैं कि चार से अधिक की बातचीत तो केवल राम-रमौवल कहलाएगी। योरप (यूरोप) के लोगों से बातचीत का हुनर है जिसे आर्ट ऑफ कनवरसेशन कहते हैं। इस प्रसंग में ऐसे चतुराई से प्रसंग छोड़े जाते हैं कि जिन्हें कान को सुन अत्यन्त सुख मिलता है। हिन्दी में इसका नाम सुहृद गोष्ठी है। बालकृष्ण भट्ट बातचीत का उत्तम तरीका यह मानते हैं कि हम वह शक्ति पैदा करें कि अपने आप बात कर लिया करें। इस प्रकार आर्ट ऑफ कनवरसेशन मनुष्य के द्वारा आपस में बातचीत की उत्तम कला है जिसके द्वारा बातचीत को हमेशा आनन्दमय बनाए रहते हैं।