Bihar Board Class 12 Psychology Solutions Chapter 2 आत्म एवं व्यक्तित्व

Bihar Board Class 12 Psychology Solutions Chapter 2 आत्म एवं व्यक्तित्व Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Psychology Solutions Chapter 2 आत्म एवं व्यक्तित्व

Bihar Board Class 12 Psychology आत्म एवं व्यक्तित्व Textbook Questions and Answers

आत्म को प्रभावित करने वाले कारक Bihar Board Class 12 प्रश्न 1.
आत्म क्या है? आत्म की भारतीय अवधारणा पाश्चात्य अवधारणा से किर प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
आत्म का तात्पर्य अपने संदर्भ में व्यक्ति के सचेतन अनुभवों, विचारों, चिंतन एवं भावनाओं की समग्रता से है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ में आत्म का विश्लेषण अनेक महत्त्वपूर्ण पक्षों को स्पष्ट करत है जो पाश्चात्य सांस्कृतिक संदर्भ में पाए जाने वाले पक्षों से भिन्न होते हैं। भारतीय और पाश्चात्य अवधारणाओं के मध्य एक महत्त्वपूर्ण अंतर इस तथ्य को लेकर है कि आत्म और दूसरे अन्य के बीच किस प्रकार सीमारेखा निर्धारित की गई है।

पाश्चात्य अवधारणा में यह सीमारेखा अपेक्षाकृत स्थिर और दृढ़ प्रतीत होती है। दूसरी तरफ, भारतीय अवधारणा में आत्म और अन्य के मध्य सीमा रेखा स्थिर न होकर परिवर्तनीय प्रकृति की बताई गई है। इस प्रकार एक समय में व्यक्ति का आत्म अन्य सब कुछ को अपने में अंतर्निहित करता हुआ समूचे ब्रह्मांड में विलीन होता हुआ प्रतीत होता है किन्तु दूसरे समय में आत्म अन्य सबसे पूर्णतया विनिवर्तित होकर व्यक्तिगत आत्म (उदाहरणार्थ, हमारी व्यक्तिगत आवश्यकताएँ एवं लक्ष्य) पर केन्द्रित होता हुआ प्रतीत होता है। पाश्चात्य अवधारणा आत्म और अन्य मनुष्य और प्रकृति तथा आत्मनिष्ठ और वस्तुनिष्ठ के मध्य स्पष्ट द्विभाजन करती हुई प्रतीत होती है। भारतीय अवधारणा इस प्रकार का कोई स्पष्ट द्विभाजन नहीं करती है।

पाश्चात्य संस्कृति में आत्म और समूह को स्पष्ट रूप से परिभाषित सीमा रेखाओं के साथ दो भिन्न इकाइयों के रूप में स्वीकार किया गया है। व्यक्ति समूह का सदस्य होते हुए भी अपनी वैयक्तिकता बनाए रखता है। भारतीय संस्कृति में आत्म को व्यक्ति के अपने समूह से पृथक् नहीं किया जाता है। बल्कि दोनों सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ बने रहते हैं। दूसरी तरफ, पाश्चात्य संस्कृति में दोनों के बीच एक दूरी बनी रहती है। यही कारण है कि अनेक पाश्चात्य संस्कृतियों का व्यक्तिवादी और अनेक एशियाई संस्कृतियों का सामूहिकतावादी संस्कृति के रूप में विशेषीकरण किया जाता है।

Class 12 Psychology Notes In Hindi Bihar Board प्रश्न 2.
परितोषण के विलंब से क्या तात्पर्य है? इसे क्यों वयस्कों के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण समझा जाता है? अथवा, आत्म-नियमन पर संक्षेप में एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आत्म:
नियमन का तात्पर्य हमारे अपने व्यवहार को संगठित और परिवीक्षण या मॉनीटर करने की योग्यता से है। जिन लोगों में बाह्य पर्यावरण की माँगों के अनुसार अपने व्यवहार को परिवर्तित करने की क्षमता होती है, वे आत्म-परिवीक्षण में उच्च होते हैं। जीवन की कई स्थितियों में स्थितिपरक दबावों के प्रति प्रतिरोध और स्वयं पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है। यह संभव होता है उस चीज के द्वारा जिसे हम सामान्यतया ‘संकल्प शक्ति’ के रूप में जानते हैं।

मनुष्य रूप में हम जिस तरह भी चाहें अपने व्यवहार को नियंत्रित कर सकते हैं। हम प्रायः अपनी कुछ आवश्यकताओं की संतुष्टि को विलंबित अथवा आस्थगित कर देते हैं। आवश्यकताओं के परितोषण की विलंबित अथवा आस्थगित करने के व्यवहार को सीखना ही आत्म-नियंत्रण कहा जाता है। दीर्घावधि लक्ष्यों की संप्राप्ति में आत्म-नियंत्रण एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय सांस्कृतिक परंपराएँ हमें कुछ ऐसे प्रभावी उपाय प्रदान करती हैं जिससे आत्म-नियंत्रण का विकास होता है। (उदाहरणार्थ, व्रत अथवा रोजा में उपवास करना और सांसारिक वस्तुओं के प्रति अनासक्ति का भाव रखना)।

आत्म-नियंत्रण के लिए अनेक मनोवैज्ञानिक तकनीकें सुझाई गई हैं। अपने व्यवहार का प्रेक्षण एक तकनीक है जिसके द्वारा आत्म के विभिन्न पक्षों को परिवर्तित, परिमार्जित अथवा सशक्त करने के लिए आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। आत्म-अनुदेश एक अन्य महत्त्वपूर्ण तकनीक है। हम। प्रायः अपने आपको कुछ करने तथा मनोवांछित तरीक से व्यवहार करने के लिए अनुदेश देते हैं। ऐसे अनुदेश आत्म-नियमन में प्रभावी होते हैं। आत्म-प्रबलन एक तीसरी तकनीक है। इसके अंतर्गत ऐसे व्यवहार पुरस्कृत होते हैं जिनके परिणाम सुखद होते हैं। उदाहरणार्थ, यदि हमने अपनी परीक्षा में अच्छा निष्पादन किया है तो हम अपने मित्रों के साथ फिल्म देखने जा सकते हैं। ये तकनीकें लोगों द्वारा उपयोग में लाई जाती हैं और आत्म-नियमन और आत्म-नियंत्रण के संदर्भ में अत्यन्त प्रभावी मानी गई हैं।

Psychology Class 12 Chapter 1 Notes In Hindi Bihar Board प्रश्न 3.
व्यक्तित्व को आप किस प्रकार परिभाषित करते हैं? व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागम कौन-से हैं?
उत्तर:
व्यक्तित्व का तात्पर्य सामान्यतया व्यक्ति के शारीरिक एवं बाह्य रूप से होता है। मनोवैज्ञानिक शब्दों में व्यक्तित्व से तात्पर्य उन विशिष्ट तरीकों से है जिनके द्वारा व्यक्तियों और स्थितियों के प्रति अनुक्रिया की जाती है। लोग सरलता से इस बात का वर्णन कर सकते हैं कि वे किस तरीके के विभिन्न स्थितियों के प्रति अनुक्रिया करते हैं। कुछ सूचक शब्दों (जैसे-शर्मीला, संवेदनशील, शांत, गंभीर, स्फूर्त आदि) का उपयोग प्रायः व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए किया जाता है। ये शब्द व्यक्तित्व के विभिन्न घटकों को इंगित करते हैं। इस अर्थ में व्यक्तित्व से तात्पर्य उन अनन्य एवं सापेक्ष रूप से स्थिर गुणों से है जो एक समयावधि में विभिन्न स्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार की विशिष्टता प्रदान करते हैं। व्यक्तित्व व्यक्तियों की उन विशेषताओं को भी कहते हैं जो अधिकांश परिस्थितियों में प्रकट होती हैं। व्यक्तित्व के अध्ययन के
प्रमुख उपागम निम्नलिखित हैं –

  1. प्रारूप उपागम
  2. विशेषक उपागम
  3. अंत:क्रियात्मक उपागम

व्यक्तित्व का आत्म सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया Bihar Board प्रश्न 4.
व्यक्तित्व का विशेषक उपासक क्या है? यह कैसे प्रारूप उपागम से भिन्न है?
उत्तर:
ये सिद्धांत मुख्यतः व्यक्तित्व के आधारभूत घटकों के वर्णन अथवा विशेषीकरण से संबंधित होते हैं। ये सिद्धांत व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले मूल तत्त्वों की खोज करते हैं। मनुष्य व्यापक रूप से मनोवैज्ञानिक गुणों में भिन्नताओं का प्रदर्शन करते हैं, फिर भी उनको व्यक्तित्व विशेषकों के लघु समूह में सम्मिलित किया जा सकता है। विशेषक उपागम हमारे दैनिक जीवन के सामान्य अनुभव के बहुत समान है।

उदाहरण के लिए जब हम यह जान लेते हैं कि कोई व्यक्ति सामाजिक है तो वह व्यक्ति न केवल सहयोग, मित्रता और सहायता करने वाला होगा बल्कि वह अन्य सामाजिक घटकों से युक्त व्यवहार प्रदर्शित करने में भी प्रवृत्त होगा। इस प्रकार, विशेषक उपागम लोगों की प्राथमिक विशेषताओं की पहचान करने का प्रयास करता है। एक विशेषक अपेक्षाकृत एक स्थिर और स्थायी गुण माना जाता है जिस पर एक व्यक्ति दूसरों से भिन्न होता है। इसमें संभव व्यवहारों की एक श्रृंखला अंतर्निहित होती है जिसको स्थिति की माँगों के द्वारा सक्रियता प्राप्त होती है।

विशेषक उपागम प्रारूप उपागम से भिन्न है। व्यक्तिगत के प्रारूप समानताओं पर आधारित प्रत्याशित व्यवहारों के एक समुच्चय का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्राचीन काल से ही लोगों को व्यक्तित्व के प्रारूपों में वर्गीकृत करने का प्रयास किया गया है। हिप्पोक्रेटस ने एक व्यक्तित्व का प्रारूप विज्ञान प्रस्तावित किया जो फ्लूइड अथवा ह्यूमस पर आधारित है। उन्होंने लोगों को चार प्रारूपों में वर्गीकृत किया है। जैसे-उत्साही, श्लैष्मिक, विवादी और कोपशील। प्रत्येक प्रारूप विशिष्ट व्यवहारपरक विशेषताओं वाला होता है।

Psychology 12th Bihar Board प्रश्न 5.
फ्रायड ने व्यक्तित्व की संरचना की व्याख्या कैसे की है?
उत्तर:
फ्रायड के सिद्धांत के अनुसार व्यक्तित्व के प्राथमिक संरचनात्मक तत्व तीन हैं – इदम या इड, अहं और पराहम्। ये तत्व अचेतन में ऊर्जा के रूप में होते हैं और इनके बारे में लोगों द्वारा किए गए व्यवहार के तरीकों से अनुमान लगाया जा सकता है। इड, अहं और पराहम् संप्रत्यय है न कि वास्तविक भौतिक संरचनाएँ।

इड:
यह व्यक्ति की मूल प्रवृत्तिक ऊर्जा का स्रोत होता है। इसका संबंध व्यक्ति की आदिम आवश्यकताओं, कामेच्छाओं और आक्रामक आवेगों की तात्कालिक तुष्टि से होता है। यह सुखेप्सा-सिद्धांत पर कार्य करता है जिसका यह अभिग्रह होता है कि लोग सुख की तलाश करते हैं और कष्ट का परिहार करते हैं। फ्रायड के अनुसार मनुष्य की अधिकांश मूलप्रवृतिक ऊर्जा कामुक होती है और शेष ऊर्जा आक्रामक होती है। इड को नैतिक मूल्यों, समाज और दूसरे लोगों की कोई परवाह नहीं होती है।

अहं:
इसका विकास इड से होता है और यह व्यक्ति की मूलप्रवृत्तिक आवश्यकताओं की संतुष्टि वास्तविकता के धरातल पर करता है। व्यक्तित्व की यह संरचना वास्तविकता सिद्धांत संचारित होती है और प्रायः इड को व्यवहार करने के उपयुक्त तरीकों की तरह निर्दिष्ट करता है। उदाहरण के लिए एक बालक का इड जो आइसक्रीम खाना चाहता है उससे कहता है कि आइसक्रीम झटक कर खा ले। उसका अहं उससे कहता है कि दुकानदार से पूछे बिना यदि आइसक्रीम लेकर वह खा लेता है तो वह दंड का भागी हो सकता है वास्तविकता सिद्धांत पर कार्य करते हुए बालक जानता है कि अनुमति लेने के बाद ही आइसक्रीम खाने की इच्छा को संतुष्ट करना सर्वाधिक उपयुक्त होगा। इस प्रकार इड की माँग अवास्तविक और सुखेप्सा-सिद्धांत से संचालित होती है, अहं धैर्यवान, तर्कसंगत तथा वास्तविकता सिद्धांत से संचालित होता है।

पराहम:
पराहम् को समझने का और इसकी विशेषता बताने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसको मानसिक प्रकार्यों की नैतिक शाखा के रूप में जाना जाए। पराहम् इड और अहं बताता है कि किसी विशिष्ट अवसर पर इच्छा विशेष की संतुष्टि नैतिक है अथवा नहीं। समाजीकरण की प्रक्रिया में पैतृक प्राधिकार के आंतरिकीकरण द्वारा पराहम् इड को नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई बालक आइसक्रीम देखकर उसे खाना चाहता है, तो वह इसके लिए अपनी माँ से पूछता है। उसका पराहम् संकेत देता है कि उसका यह व्यवहार नैतिक दृष्टि से सही है। इस तरह के व्यवहार के माध्यम से आइसक्रीम को प्राप्त करने पर बालक में कोई अपराध-बोध, भय अथवा दुश्चिता नहीं होगी।

आत्म को प्रभावित करने वाले कारक Bihar Board Class 12

चित्र: फ्रायड के सिद्धांत में व्यक्ति की संरचना

इस प्रकार व्यक्ति के प्रकार्यों के रूप में फ्रायड का विचार था कि मनुष्य का अचेतन तीन प्रतिस्पर्धी शक्तियों अथवा ऊर्जाओं से निर्मित हुआ है। कुछ लोगों में इड पराहम् से अधिक प्रबल होता है तो कुछ अन्य लोगों में पराहम् इड से अधिक प्रबल होता है। इड, अहं और पराहम् की सापेक्ष शक्ति प्रत्येक व्यक्ति को स्थिरता का निर्धारण करती है। फ्रायड के अनुसार इड की दो प्रकार की मूलप्रवृत्तिक शक्तियों से ऊर्जा प्राप्त होती है जिन्हें जीवन-प्रवृत्ति एवं मुमूर्षा या मृत्यु-प्रवृत्ति के नाम से जाना जाता है। उन्होंने मृत्यु-प्रवृत्ति (अथवा काम) को केन्द्र में रखते हुए अधिक महत्त्व दिया है। मूल प्रवृत्तिक जीवन-शक्ति जो इड को ऊर्जा प्रदान करती है कामशक्ति लिबिडो कहलाती है। लिबिडो सुखेप्सा-सिद्धांत के आधार पर कार्य करता है और तात्कालिक संतुष्टि चाहता है।

Psychology Class 12 Chapter 1 Question Answers In Hindi Bihar Board प्रश्न 6.
हार्नी की अवसाद की व्याख्या अल्फ्रेड एडलर की व्याख्या से किस प्रकार भिन्न है? अथवा, कैरेन हानी के आशावाद और एडलर के व्यष्टि मनोविज्ञान सिद्धांत की तुलना कीजिए।
उत्तर:
हार्नी की अवसाद की व्याख्या अल्फ्रेड एडलर की व्याख्या से भिन्न है। एडलर के सिद्धांत को व्यष्टि या वैयक्तिक मनोविज्ञान के रूप में जाना जाता है। उनका आधारभूत अभिग्रह यह है कि व्यक्ति का व्यवहार उद्देश्यपूर्ण एवं लक्ष्योन्मुख होता है। इसमें से प्रत्येक में चयन करने एवं सर्जन करने की क्षमता होती है। हमारे व्यक्तिगत लक्ष्य ही हमारी अभिप्रेरणा के स्रोत होते हैं। जो लक्ष्य हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं और हमारी अपर्याप्तता की भावना पर विजय प्राप्त करने में हमारी सहायता करते हैं, वे हमारे व्यक्तित्व के विकास में महत्त्वपूर्ण ‘मिका निभाते हैं। एंडलर के विचार से प्रत्येक व्यक्ति अपर्याप्तता और अपराध की भावनाओं सित होता है। इसे हम हीनता मनोग्रंथि के नाम से जानते हैं जो बाल्यावस्था में उत्पन्न होती इस मनोग्रंथि पर विजय प्राप्त करना इष्टतम व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है।

हार्नी ने मानव संवृद्धि और आत्मसिद्धि पर बल देते हुए मानव जीवन के एक आशावादी दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। हार्नी ने फ्रायड के इस विचार को कि महिलाएँ हीन होती हैं, चुनौती दी है। उनके अनुसार, प्रत्येक लिंग के व्यक्तियों में गुण होते हैं जिसकी प्रशंसा विपरीत लिंग के व्यक्तियों को करनी चाहिए तथा किसी भी लिंग के व्यक्तियों को श्रेष्ठ अथवा हीन नहीं समझा जाना चाहिए। प्रतिरोधस्वरूप उनका यह विचार था कि महिलाएँ जैविक कारकों की तुलना में सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों से अधिक प्रभावित होती हैं।

उन्होंने यह तर्क प्रस्तुत किया कि मनोवैज्ञानिक विकार बाल्यावस्था की अवधि में विक्षुब्ध अंतर्वैयक्तिक संबंधों के कारण उत्पन्न होते हैं। यदि माता-पिता का अपने बच्चे के प्रति व्यवहार उदासीन, हतोत्साहित करने वाला और अनियमित होता है तो बच्चा असुरक्षित महसूस करता है जिसके परिणामस्वरूप एक ऐसी भावना जिसे मूल दुश्चिता कहते हैं, उत्पन्न होती है। इस दुश्चिता के कारण माता-पिता के प्रति बच्चे में एक गहन अमर्ष और मूल आक्रामकता घटित होती है। अत्यधिक प्रभुत्व अथवा उदासीनता का प्रदर्शन कर एवं अत्यधिक अथवा अत्यंत कम अनुमोदन प्रदान कर माता-पिता बच्चों में एकाकीपन और असहायता की भावनाएँ उत्पन्न करते हैं जो उनके स्वास्थ्य विकास में बाधक होते हैं।

Psychology 12th Notes In Hindi Bihar Board प्रश्न 7.
व्यक्तित्व के मानवतावादी उपागम की प्रमुख प्रतिज्ञप्ति क्या है? आत्मसिद्धि से मैस्लो का क्या तात्पर्य था?
उत्तर:
मानवतावादी सिद्धांत मुख्यतः फ्रायड के सिद्धांत के प्रत्युत्तर में विकसित हुए। व्यक्तित्व के संदर्भ में मानवतावादी परिप्रेक्ष्य के विकास में कार्ल रोजर्स और अब्राहम मैस्लो ने विशेष रूप से योगदान किया है। रोजर्स द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विचार एक पूर्णतः प्रकार्यशील व्यक्ति का है। उनका विश्वास है कि व्यक्तित्व के विकास के लिए संतुष्टि अभिप्रेरक शक्ति है। लोग अपनी क्षमताओं, संभाव्यताओं और प्रतिभाओं को संभव सर्वोत्कृष्ट तरीके से अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं। व्यक्तियों में एक सहज प्रवृत्ति होती है जो उन्हें अपने वंशागत प्रकृति की सिद्धि या प्राप्ति के लिए निर्दिष्ट करती है।

मानव व्यवहार के बारे में रोजर्स ने दो आधारभूत अभिग्रह निर्मित किए हैं। एक यह कि व्यवहार लक्ष्योन्मुख और सार्थक होता है और दूसरा यह कि लोग (जो सहज रूप से अच्छे होते हैं) सदैव अनुकूली तथा आत्मसिद्धि वाले व्यवहार का चयन करेंगे। रोजर्स का सिद्धांत उनके निदानशाला में रोगियों को सुनते हुए प्राप्त अनुभवों से विकसित हुआ है। उन्होंने यह ध्यान दिया कि उनके सेवार्थियों के अनुभव में आत्म एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व था। इस प्रकार, उनका सिद्धांत आत्म के संप्रत्यय के चतुर्दिक संरचित है। उनके सिद्धांत का अभिग्रह है कि लोग सतत अपने वास्तविक आत्म की सिद्धि या प्राप्ति की प्रक्रिया में लगे रहते हैं।

रोजर्स ने सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति के पास आदर्श अहं या आत्म का एक संप्रत्यय होता है। एक आदर्श आत्म वह होता है जो कि एक व्यक्ति बनना अथवा होना चाहता है। जब वास्तविक आत्म और आदर्श के बीच समरूपता होती है तो व्यक्ति सामान्यतया प्रसन्न रहता है। किन्तु दोनों प्रकार के आत्म के बीच विसंगति के कारण प्रायः अप्रसन्नता और असंतोष की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। रोजर्स का एक आधारभूत सिद्धांत है कि लोगों में आत्मसिद्धि के माध्यम से आत्म-संप्रत्यय को अधिकतम सीमा तक विकसित करने की प्रवृत्ति होती है। इस प्रक्रिया में आत्म विकसित, विस्तारित और अधिक सामाजिक हो जाता है।

रोजर्स व्यक्तित्व-विकास को एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। इसमें अपने आपका मूल्यांकन करने का अधिगम और आत्मसिद्धि की प्रक्रिया में प्रवीणता सन्निहित होती है। आत्म-संप्रत्यय के विकास में सामाजिक प्रभावों की भूमिका को उन्होंने स्वीकार किया है। जब सामाजिक दशाएँ अनुकूल होती हैं, तब आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान उच्च होता है। इसके विपरीत, जब सामाजिक दशाएँ प्रतिकूल होती हैं, तब आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान निम्न होता है। उच्च आत्म-संप्रत्यय और आत्म-सम्मान रखने वाले लोग सामान्यतया नम्य एवं नए अनुभवों के प्रति मुक्त भाव से ग्रहणशील होते हैं ताकि वे अपने सतत् विकास और आत्मसिद्धि में लगे रह सकें।

मैस्लो ने आत्मसिद्धि की लब्धि या प्राप्ति के रूप में मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ लोगों की एक विस्तृत व्याख्या दी है। आत्मसिद्धि वह अवस्था होती है जिसमें लोग अपनी संपूर्ण संभाव्यताओं को विकसित कर चुके होते हैं। मैस्लो ने मनुष्यों का एक आशावादी और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया है जिसके अंतर्गत मानव में प्रेम, हर्ष और सर्जनात्मक कार्यों को करने की आत्मसिद्धि को प्राप्त करने में स्वतंत्र माने गए हैं। अभिप्रेरणाओं, जो हमारे जीवन को नियमित करती हैं, के विश्लेषण के द्वारा आत्मसिद्धि को संभव बनाया जा सकता है। हम जानते हैं कि जैविक सुरक्षा और आत्मीयता की आवश्यकताएँ (उत्तरजीविता आवश्यकताएँ) पशुओं और मनुष्यों दोनों में पाई जाती हैं। अतएव किसी व्यक्ति का मात्र इन आवश्यकताओं को संतुष्टि में संलग्न होना उसे पशुओं के स्तर पर ले आता है। मानव जीवन की वास्तविक यात्रा आत्म-सम्मान और आत्मसिद्धि जैसी आवश्यकताओं के अनुसरण से आरंभ होती है। मानवतावादी उपागम जीवन के सकारात्मक पक्षों के महत्त्व पर बल देता है।

आत्म-अवधारणा को प्रभावित करने वाले कारक Bihar Board प्रश्न 8.
व्यक्तित्व मूल्यांकन में प्रयुक्त की जाने वाली प्रमुख प्रेक्षण विधियों का विवेचन करें। इन विधियों के उपयोग में हमें किस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है? अथवा, व्यवहारपरक प्रेक्षण से आपका क्या तात्पर्य है? प्रेक्षण और साक्षात्कार विधियों में पाई जाने वाली सीमाओं को भी लिखिए।
उत्तर:
व्यवहारपरक प्रेक्षण एक अन्य विधि है जिसका व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए बहुत अधिक उपयोग किया जाता है। यद्यपि हम लोगों को ध्यानपूर्वक देखते हैं और उनके व्यक्तित्व के प्रति छवि निर्माण करते हैं तथापि व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए प्रेक्षण विधि का उपयोग एक अत्यंत परिष्कृत प्रक्रिया है जिसको अप्रशिक्षित लोगों के द्वारा उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। इसमें प्रेक्षक का विशिष्ट प्रशिक्षण और किसी व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए, एक नैतिक मनोवैज्ञानिक अपने सेवार्थी की उसके परिवार के सदस्यों और गृहवीक्षकों या अतिथियों के साथ होने वाली अंत:क्रियाओं का प्रेक्षण कर सकता है। सावधानी से अभिकल्पित प्रेक्षण के साथ एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक अपने सेवार्थी के व्यक्तित्व के बारे में पर्याप्त अंतर्दृष्टि विकसित कर सकता है।

बारंबार और व्यापक उपयोग के बावजूद भी प्रेक्षण और साक्षात्कार विधियों में निम्नलिखित सीमाएँ पाई जाती हैं –

  1. इन विधियों द्वारा उपयोगी प्रदत्त के संग्रह के लिए अपेक्षित व्यावसायिक प्रशिक्षण कठिन और समयसाध्य होता है।
  2. इन तकनीकों द्वारा वैध प्रदत्त प्राप्त करने के लिए मनोवैज्ञानिक में भी परिपक्वता आवश्यक होती है।
  3. प्रेक्षक की उपस्थिति मात्र परिणामों को दूषित कर सकती है। एक अपरिचित के रूप मैं प्रेक्षक प्रेक्षण किए जाने वाले व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है जिसके कारण प्रा प्रदत्त अनुपयोगी हो सकते हैं।

प्रश्न 9.
व्याख्या कीजिए कि प्रक्षेपी तकनीक किस प्रकार व्यक्तित्व का मूल्यांकन करती है? कौन-से व्यक्तित्व के प्रक्षेपी परीक्षण मनोवैज्ञानिकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग में लाए गए हैं?
उत्तर:
प्रक्षेपी तकनीकों का विकास अचेतन अभिप्रेरणाओं और भावनाओं का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। ये तकनीकें इस अभिग्रह पर आधारित है कि कम संरचित अथवा असंरचित उद्दीपक अथवा स्थिति व्यक्तियों को अपनी भावनाओं इच्छाओं और आवश्यकताओं को उस स्थिति पर प्रक्षेपण करने का अवसर प्रदान करना है। विभिन्न प्रकार की प्रक्षेपी तकनीकें विकसित की गई हैं जिनमें व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए विभिन्न प्रकार की उद्दीपक सामग्रियों और स्थितियों का उपयोग किया जाता है। इनमें कुछ तकनीकों में उद्दीपकों के साथ प्रयोज्य को अपने साहचर्यों को बताने की आवश्यकताआ होती है, कुछ में वाक्यों को पूरा करने की आवश्यकता होती है, कुछ में आरेखों द्वारा अभिव्यक्ति अपेक्षित होती है और कुछ में उद्दीपकों के एक वृहत् समुच्चय में से उद्दीपकों का वरण करने के लिए कहा जाता है।

Class 12 Psychology Notes In Hindi Bihar Board

चित्र: रोर्शा मसिलक्ष्म का एक उदाहरण रोर्शा मसिलक्ष्म परीक्षण को मनोवैज्ञानिकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग में लाया गया है। रोर्शा परीक्षण में 10 मसिलक्ष्म या स्याही-धब्बे होते हैं। उनमें पाँच काले और सफेद रंगों के हैं, दो कुछ लाल स्याही के साथ हैं और बाकी तीन पेस्टल रंगों के हैं। धब्बे एक विशिष्ट आकृति या आकार के साथ सममितीय रूप में दिए गए हैं। प्रत्येक धब्बा 7″ × 10″ के आकार के एक सफेद कार्ड बोर्ड के केन्द्र में मुद्रित (छापा हुआ) है। ये धब्बे मूलतः एक कागज के पन्ने पर स्याही गिराकर फिर उसे आधे पर से मोड़कर बनाए गए थे (इसलिए इन्हें मसिलक्ष्म परीक्षण कहा जाता है)।

इस कार्डों को व्यक्तिगत रूप से प्रयोज्यों को दो चरणों में दिखाया जाता है। पहले चरण को निष्पादन मुख्य अथवा उपयुक्त कहते हैं जिसमें प्रयोज्यों को कार्ड दिखाए जाते हैं और उनसे पूछा जाता है कि प्रत्येक कार्ड में वे क्या देख रहे हैं। दूसरे चरण को पूछताछ कहा जाता है जिसमें प्रयोज्य से यह पूछकर कि कहाँ, कैसे और किस आधार पर कोई विशिष्ट अनुक्रिया उनके द्वारा की गई है, इस आधार पर उनकी अनुक्रियाओं का एक विस्तृत विवरण तैयार किया जाता है प्रयोज्य की अनुक्रियाओं को एक सार्थक संदर्भ में रखने के लिए बिल्कुल ठीक या सटीक निर्णय आवश्यक है। इस परीक्षण के उपयोग और व्याख्या के लिए विस्तृत प्रशिक्षण आवश्यक होता है। प्रदत्तों की व्याख्या के लिए कम्प्यूटर तकनीकों को भी विकसित किया गया है।

प्रश्न 10.
अरिहनत एक गायक बनना चाहता है, इसके बावजूद कि वह चिकित्सकों के एक परिवार से संबंध रखता है। यद्यपि उसके परिवार के सदस्य दावा करते हैं कि वे उसको प्रेम करते हैं किन्तु वे उसकी जीवनवृत्ति को दृढ़ता से अस्वीकार कर देते हैं। कार्ल रोजर्स की शब्दावली का उपयोग करते हुए अरिहन्त के परिवार द्वारा प्रदर्शित अभिवृत्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरिहन्त के परिवार द्वारा प्रदर्शित अभिवृत्तियाँ अरिहन्त के लिए उचित नहीं है। अरिहन्त की इच्छा के खिलाफ उसके परिवार वाले उसे डॉक्टर बनाना चाहते हैं जो कि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से उसके लिए ठीक नहीं है। यहाँ कार्ल रोजर्स द्वारा प्रस्तावित मानवतावादी सिद्धांत को समझना आवश्यक है। रोजर्स द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विचार एक पूर्णतः प्रकार्यशील व्यक्ति का है। उनका विश्वास है कि व्यक्तित्व के विकास के लिए संतुष्टि अभिप्रेरक शक्ति है।

लोग अपनी क्षमताओं, संभाव्यताओं और प्रतिभावों को संभव सर्वोत्कृष्ट तरीके से अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं। व्यक्तियों में सहज प्रवृत्ति होती है जो उन्हें अपनी वंशगत प्रकृति की सिद्धि या प्राप्ति के लिए निर्दिष्ट करती है। मानव व्यवहार के बारे में रोजर्स ने दो आधारभूत अभिग्रह निर्मित किए हैं। एक यह है कि व्यवहार लक्ष्योन्मुख और सार्थक होता है और दूसरा यह है कि लोग सदैव अनुकूली तथा आत्मसिद्धि वाले व्यवहार का चयन करेंगे। रोजर्स ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक व्यक्ति के पास आदर्श अहं या आत्म का एक संप्रत्यय होता है। एक, आदर्श आत्म वह होता है कि जो कि एक व्यक्ति बनना अथवा होना चाहता है।

जब वास्तविक आत्म और आदर्श आत्म के बीच विसंगति होती है तो व्यक्ति सामान्यतया प्रसन्न रहता है। किन्तु दोनों प्रकार के आत्म के बीच विसंगति के कारण प्रायः अप्रसन्नता और असंतोष की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। रोजर्स का आधारभूत सिद्धांत है कि लोगों में आत्मसिद्धि के माध्यम से आत्म-संप्रत्यय को अधिकतम सीमा तक विकसित करने की प्रवृत्ति होती है। इस प्रक्रिया में आत्म विकसित, विस्तारित और अधिक सामाजिक हो जाता है। रोजर्स व्यक्तित्व विकास को एक सतत् प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। इसमें अपने आपका मूल्यांकन करने का अधिगम और आत्मसिद्धि की प्रक्रिया में प्रवीणता सन्निहित होती है। आत्म-संप्रत्यय के विकास में सामाजिक प्रभावों की भूमिका को उन्होंने स्वीकार किया है। जबकि सामाजिक दशाएँ अनुकूल होती हैं, तब आत्म-संप्रत्यय और उच्च आत्म-सम्मान रखने वाले लोग सामान्यतया नम्य एवं नए अनुभवों के प्रति मुक्त भाव से ग्रहणशील होते हैं। ताकि वे अपने सतत विकास और आत्मसिद्धि में लगे रह सकें।

Bihar Board Class 12 Psychology आत्म एवं व्यक्तित्व Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आत्म का आधार क्या है?
उत्तर:
दूसरे लोगों से हमारी अंत:क्रिया, हमारा अनुभव और इन्हें जो हम अर्थ प्रदान करते हैं, हमारे आत्म का आधार बनते हैं।

प्रश्न 2.
सामाजिक अनन्यता को परिभाषित करें।
उत्तर:
सामाजिक अनन्यता का तात्पर्य व्यक्ति के उन पक्षों से है जो उसे किसी सामाजिक अथवा सांस्कृतिक समूह से संबद्ध करते हैं अथवा जो ऐसे समूह से व्युत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 3.
आत्म से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आत्म का तात्पर्य अपने संदर्भ में व्यक्ति के सचेतन अनुभवों, विचारों, चिंतन एवं भावनाओं की समग्रता से है।

प्रश्न 4.
आत्म को किन दो रूपों में समझा जा सकता है?
उत्तर:
आत्म को आत्मगत एवं वस्तुगत दोनों रूपों में समझा जा सकता है।

प्रश्न 5.
आत्मगत रूप में आत्म का क्या अर्थ है?
उत्तर:
आत्मगत रूप में आत्म स्वयं को जानने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से संलग्न रहता है।

प्रश्न 6.
आत्म का वस्तुगत रूप क्या है?
उत्तर:
आत्मगत रूप में आत्म स्वयं को जानने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से संलग्न रहता है।

प्रश्न 7.
‘व्यक्तिगत आत्म’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत आत्म में एक ऐसा अभिविन्यास होता है जिसमें व्यक्ति अपने बारे में ही संबंध होने का अनुभव करता है।

प्रश्न 8.
सामाजिक आत्म में किन पक्षों पर बल दिया जाता है?
उत्तर:
सामाजिक आत्म में सहयोग, एकता, संबंधन, त्याग, समर्थन अथवा भागीदारी जैसे जीवन के पक्षों पर बल दिया जाता है।

प्रश्न 9.
सामाजिक आत्म को और किस रूप में जाना जाता है?
उत्तर:
सामाजिक आत्म को पारिवारिक अथवा संबंधात्मक आत्म के रूप में भी जाना जाता है।

प्रश्न 10.
आत्म-संप्रत्यय या आत्म-धारणा क्या है?
उत्तर:
व्यक्ति का अपनी क्षमताओं और गुणों के बारे में जो विचार होता है उसे ही आत्म संप्रत्यय या आत्म-धारणा कहते हैं।

प्रश्न 11.
आत्म के दो महत्त्वपूर्ण पक्ष कौन-से हैं? जिनका हमारे जीवन में व्यापक महत्व हैं?
उत्तर:
आत्म-सम्मान और आत्म-सक्षमता आत्म के दो महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं जिनका हमारे जीवन में व्यापक महत्त्व होता है।

प्रश्न 12.
आत्म-नियंत्रण की मनोवैज्ञानिक तकनीकें कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
आत्म-नियंत्रण की मनोवैज्ञानिक तकनीकें हैं-अपने व्यवहार का प्रेक्षण, आत्म अनुदेश एवं आत्म प्रबलता।

प्रश्न 13.
व्यक्तित्व से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
व्यक्तित्व व्यक्ति की मनोदैहिक विशेषताएँ हैं जो विभिन्न स्थितियों और समयों में सापेक्ष रूप से स्थिर होते हैं और उसे अनन्य बनाते हैं।

प्रश्न 14.
आत्म की धारणा को स्वरूप देने में किनकी प्रमुख भूमिका होती है?
उत्तर:
आत्म के बारे में बच्चे की धारणा को स्वरूप देने में माता-पिता, मित्रों, शिक्षकों एवं अन्य महत्त्वपूर्ण लोगों जिनसे उसकी अंत:क्रिया होती है, की अहं भूमिका होती है।

प्रश्न 15.
व्यक्तिगत अनन्यता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत अनन्यता से तात्पर्य व्यक्ति के उन गुणों से है जो उसे अन्य दूसरों से भिन्न करते हैं।

प्रश्न 16.
आत्म-नियंत्रण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आवश्यकताओं के परितोषण को विलंबित आस्थगित करने के व्यवहार को सीखना ही आत्म-नियंत्रण कहा जाता है।

प्रश्न 17.
आत्म-प्रबलन क्या है? एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
आत्म-प्रबलन आत्म-नियंत्रण का एक मनोवैज्ञानिक तकनीक है जिसके अंतर्गत ऐसे व्यवहार पुरस्कृत होते हैं जिनके परिणाम सुखद होते हैं। उदाहरणार्थ, यदि किसी ने अपनी परीक्षा में अच्छा निष्पादन किया है तो वह अपने मित्रों के साथ फिल्म देखने जा सकता है।

प्रश्न 18.
किस प्रकार के व्यक्तियों में आत्म-परिवीक्षण उच्च होता है?
उत्तर:
जिन लोगों में बाह्य पर्यावरण की माँगों के अनुसार अपने व्यवहार को परिवर्तित करने की क्षमता होती है, वे आत्म-परिवीक्षण में उच्च होते हैं।

प्रश्न 19.
आत्म-नियमन से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आत्म-नियमन का तात्पर्य हमारे अपने व्यवहार को संगठित और परिवीक्षण या मॉनीटर करने की योग्यता से है।

प्रश्न 20.
आत्म-सक्षमता को किस प्रकार विकसित किया जा सकता है?
उत्तर:
बच्चों के आरंभिक वर्षों में सकारात्मक प्रतिरूपों का मॉडलों को प्रस्तुत कर हमारा समाज, हमारे माता-पिता और हमारे अपने सकारात्मक अनुभव आत्म-सक्षमता की प्रबल भावना के विकास में सहायक हो सकते हैं।

प्रश्न 21.
व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागमों के नाम लिखिए।
उत्तर:
व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागम हैं-प्रारूपिक, मनोगतिक, व्यवहारवादी, सांस्कृतिक, मानवतावादी एवं विशेषक उपागम।

प्रश्न 22.
मनोगतिक उपागम को किसने विकसित किया?
उत्तर:
सिगमंड फ्रायड ने मनोगतिक उपागम को विकसित किया।

प्रश्न 23.
चेतना के तीन स्वर कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
चेतना के तीन स्वर हैं –

  1. चेतन
  2. पूर्वचेतन तथा
  3. अचेतन

प्रश्न 24.
मानवतावादी उपागम किस पर बल देता है?
उत्तर:
मानवतावादी उपागम व्यक्तियों के आत्मनिष्ठ अनुभवों और उनके वरणों पर बल देता है।

प्रश्न 25.
आत्म के विभिन्न रूपों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
आत्म के विभिन्न रूपों का निर्माण भौतिक एवं समाज, सांस्कृतिक पर्यावरणों से होने वाली हमारी अंतःक्रियाओं के परिणामस्वरूप होता है।

प्रश्न 26.
आत्म-सम्मान किसे कहते हैं?
उत्तर:
आत्म-सम्मान हमारे आत्म का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है। व्यक्ति के रूप में हम सदैव अपने मूल्य या मान और अपनी योग्यता के बारे में निर्णय या आकलन करते रहते हैं। व्यक्ति का अपने बारे में यह मूल्य निर्णय ही आत्म-सम्मान कहा जाता है।

प्रश्न 27.
छः से सात वर्ष तक के बच्चों में आत्म-सम्मान कितने क्षेत्रों में निर्मित हो जाता है?
उत्तर:
छः से सात वर्ष तक के बच्चों में आत्म-सम्मान चार क्षेत्रों में निर्मित हो जाता है-शैक्षिक क्षमता, सामाजिक क्षमता, शारीरिक/खेलकूद संबंधित क्षमता और शारीरिक रूप जो आयु के बढ़ने के साथ-साथ और अधिक परिष्कृत होता जाता है।

प्रश्न 28.
आत्म-सम्मान की समग्र भावना से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
अपनी स्थिर प्रवृत्तियों के रूप में अपने प्रति धारणा बनाने की क्षमता हमें भिन्न-भिन्न आत्म-मूल्यांकनों को जोड़कर अपने बारे में एक सामान्य मनोवैज्ञानिक प्रतिया निर्मित करने का अवसर प्रदान करती है। इसी को हम आत्म-सम्मान की समग्र भावना के रूप में जानते हैं।

प्रश्न 29.
तमस गुण क्या है?
उत्तर:
तमस गुण के अंतर्गत क्रोध, घमंड, अवसाद, आलस्य, असहायता की भावना आदि गुण आते हैं।

प्रश्न 30.
रजस गुण क्या है?
उत्तर:
रजस गुण के अंतर्गत तीव्र क्रिया, इंद्रिय तुष्टि की इच्छा, असंतोष, दूसरों के प्रति असूया (ईर्ष्या) और भौतिकवादी मानसिकता आदि गुण आते हैं।

प्रश्न 31.
सत्व गुण क्या है?
उत्तर:
सत्व गुण के अंतर्गत स्वच्छता, सत्यवादिता, कर्तव्यनिष्ठा, अनासक्ति या विलग्नता, अनुशासन आदि गुण आते हैं।

प्रश्न 32.
त्रिगुण क्या है?
उत्तर:
त्रिगुण तीन गुण हैं-सत्व, रजस और तमस, जिनके आधार पर भी एक व्यक्तित्व प्रारूप विज्ञान प्रतिपादित किया गया है।

प्रश्न 33.
मनोवैज्ञानिक शब्दों में व्यक्तित्व का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मनोवैज्ञानिक शब्दों में व्यक्तित्व से तात्पर्य उन विशिष्ट तरीकों से है जिनके द्वारा व्यक्तियों और स्थितियों के प्रति अनुक्रिया की जाती है।

प्रश्न 34.
स्वभाव को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
स्वभाव जैविक रूप में आधारित प्रतिक्रिया करने का एक विशिष्ट तरीका है।

प्रश्न 35.
स्ववृत्ति क्या है?
उत्तर:
किसी व्यक्ति विशेष में विशिष्ट तरीके से प्रतिक्रिया करने की व्यक्ति की प्रवृत्ति को स्ववृत्ति कहा जाता है।

प्रश्न 36.
प्रारूप उपागम क्या है?
उत्तर:
प्रारूप उपागम व्यक्ति के प्रक्षित व्यवहारपरक विशेषताओं के कुछ व्यापक स्वरूपों का परीक्षण कर मानव व्यक्तित्व को समझने का प्रयास करता है।

प्रश्न 37.
विशेषक उपागम क्या है?
उत्तर:
विशेषक उपागम विशिष्ट मनोवैज्ञानिक गुणों पर बल देता है जिसके आधार पर व्यक्ति संगत और स्थिर रूपों में भिन्न होते हैं।

प्रश्न 38.
अंत:क्रियात्मक उपागम किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंत:क्रियात्मक उपागम के अनुसार स्थितिपरक विशेषताएँ हमारे व्यवहारों को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोग स्वतंत्र अथवा आश्रित प्रकार का व्यवहार करेंगे। यह उनके आंतरिक व्यक्तित्व विशेषक पर निर्भर नहीं करता है बल्कि इस पर निर्भर करता है किसी विशिष्ट स्थिति में बाह्य पुरस्कार अथवा खतरा उपलब्ध है कि नहीं।

प्रश्न 39.
हिप्पोक्रेटस ने लोगों को कितने प्रारूपों में वर्गीकृत किया है?
उत्तर:
हिप्पोक्रेटस ने लोगों को चार प्रारूपों में वर्गीकृत किया है-उत्साही, श्लैष्मिक, विवादी और कोपशील।

प्रश्न 40.
चरक संहिता ने लोगों को किस आधार पर वर्गीकृत किया है?
उत्तर:
चरक संहिता ने लोगों को वात, पित्त एवं कफ इन तीन वर्गों में तीन ह्यूमरल तत्वों, जिन्हें त्रिदोष कहते हैं, के आधार पर वर्गीकृत किया है।

प्रश्न 41.
शेल्डन के द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व के प्रारूप को लिखिए।
उत्तर:
शेल्डन ने शारीरिक बनावट और स्वभाव को आधार बनाते हुए गोलाकृतिक, आयताकृतिक और लंबाकृतिक जैसे व्यक्तित्व के प्रारूप को प्रस्तावित किया है।

प्रश्न 42.
किस मनोवैज्ञानिक को विशेषक उपागम का अग्रणी माना जाता है?
उत्तर:
गार्डन ऑलपोर्ट को विशेषक उपागम का अग्रणी माना जाता है।

प्रश्न 43.
ऑलपोर्ट के अनुसार विशेषक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
ऑलपोर्ट ने विशेषकों को तीन वर्गों में वर्गीकरण किया-प्रमुख विशेषक, केन्द्रीय विशेषक और गौण विशेषक।

प्रश्न 44.
प्रमुख विशेषक वाले व्यक्ति किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
प्रमुख विशेषक अत्यंत सामान्यीकृत प्रवृत्तियाँ होती हैं। ये उस लक्ष्य को इंगित करती हैं जिससे चतुर्दिक व्यक्ति का पूरा जीवन व्यतीत होता है।

प्रश्न 45.
प्रमुख विशेषक के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
महात्मा गाँधी की अहिंसा और हिटलर का नाजीवाद प्रमुख विशेषक के उदाहरण हैं।

प्रश्न 46.
केन्द्रीय विशेषक के रूप में कौन होते हैं?
उत्तर:
प्रभाव में कम व्यापक किन्तु फिर भी सामान्यीकृत प्रवृत्तियाँ केन्द्रीय विशेषक के रूप में मानी जाती हैं। ये विशेषक प्रायः लोगों के प्रशंसापत्रों में अथवा नौकरी की संस्तुतियों में किसी व्यक्ति के लिए रखे जाते हैं।

प्रश्न 47.
कारक विश्लेषण नाम सांख्यिकीय तकनीक को किसने विकसित किया?
उत्तर:
रेमंड कैटेल ने।

प्रश्न 48.
मूल विशेषक कौन होते हैं?
उत्तर:
मूल विशेषक स्थिर होते हैं और व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले मूल तत्वों के रूप में जाने जाते हैं।

प्रश्न 49.
‘चेतन’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
चेतन के अंतर्गत के चिंतन, भावनाएँ और क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग जागरूक रहते हैं।

प्रश्न 50.
‘पूर्वचेतना’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पूर्वचेतना मानव मन चेतना का एक स्तर है जिसके अंतर्गत वे मानसिक क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग तभी जागरूक होते हैं जब वे उन पर सावधानीपूर्वक ध्यान केन्द्रित करते हैं।

प्रश्न 51.
गोलाकृतिक प्रारूप वाले व्यक्ति की विशेषता को लिखिए।
उत्तर:
गोलाकृतिक प्रारूप वाले व्यक्ति मोटे मृदुल और गोल होते हैं। स्वभाव से वे लोग शिथिल और सामाजिक या मिलनसार होते हैं।

प्रश्न 52.
आयताकृतिक प्रारूप वाले व्यक्तियों की विशेषता को लिखिए।
उत्तर:
आयताकृतिक प्रारूप वाले व्यक्ति मजबूत पेशी समूह एवं सुगठित शरीरवाले होते हैं जो देखने में आयताकार होते हैं, ऐसे व्यक्ति ऊर्जस्वी एवं साहसी होते हैं।

प्रश्न 53.
लंबाकृतिक प्रारूप वाले व्यक्तियों की विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
लंबाकृतिक प्रारूप वाले पतले, लंबे और सुकुमार होते हैं। ऐसे व्यक्ति कुशाग्रबुद्धि वाले, कलात्मक और अंतर्मुखी होते हैं।

प्रश्न 54.
अंर्तमुखी वाले व्यक्ति किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
अंतर्मुखी वे लोग होते हैं जो अकेले रहना पसंद करते हैं, दूसरों से बचते हैं, सांवेगिक द्वंद्वों से पलायन करते हैं और शर्मीले होते हैं।

प्रश्न 55.
बर्हिमुखी वाले व्यक्ति किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
बर्हिमुखी वाले व्यक्ति सामाजिक तथा बर्हिगामी होते हैं और ऐसे व्यवसायों का चयन करते हैं जिसमें लोगों से वे प्रत्यक्ष रूप से संपर्क बनाए रख सकें। लोगों के बीच में रहते हुए तथा सामाजिक कार्यों को करते हुए वे दबावों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।

प्रश्न 56.
दमन रक्षा युक्ति क्या है?
उत्तर:
दमन रक्षा युक्ति में दुश्चिंता उत्पन्न करने वाले व्यवहार और विचार पूरी तरह चेतना के स्तर से विलुप्त कर दिए जाते हैं।

प्रश्न 57.
किन्हीं चार रक्षा युक्तियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चार रक्षा युक्तियाँ निम्नलिखित हैं –

  1. दमन
  2. प्रक्षेपण
  3. अस्वीकरण
  4. प्रतिक्रिया निर्माण

प्रश्न 58.
‘पराहम्’ क्या है?
उत्तर:
‘पराहम्’ इड और अहं को बताता है कि किसी विशिष्ट अवसर पर इच्छा विशेष की संतुष्टि नैतिक है अथवा नहीं। समाजीकरण की प्रक्रिया में पैतृक प्राधिकार के आंतरिकीकरण द्वारा पराहम् इड को नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 59.
अचेतन से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
अचेतन मानव मन चेतना का एक स्तर है जिसके अंतर्गत ऐसी मानसिक क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग जागरूक नहीं होते हैं।

प्रश्न 60.
मनोविश्लेषण-चिकित्सा का आधारभूत लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
मनोविश्लेषण-चिकित्सा का आधारभूत लक्ष्य दमित अचेतन सामग्रियों को चेतना के स्तर पर ले आना है जिससे कि लोग और अधिक आत्म-जागरूक होकर समाकलित तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

प्रश्न 61.
‘इड’ क्या है?
उत्तर:
‘इड’ व्यक्ति की मूल प्रवृत्तिक ऊर्जा का स्रोत होता है। इसका संबंध व्यक्ति की आदिम आवश्यकताओं, कामेच्छाओं और आक्रामक आवेगों की तात्कालिक तुष्टि से होता है। इड को नैतिक मूल्यों, समाज और दूसरे लोगों की कोई परवाह नहीं होती है।

प्रश्न 62.
‘अहं’ क्या है?
उत्तर:
अहं का विकास इड से होता है और यह व्यक्ति की मूल प्रवृत्तिक आवश्यकताओं की संतुष्टि वास्तविकता के धरातल पर करता है। यह प्रायः इड को व्यवहार करने के उपयुक्त तरीकों की तरफ निर्दिष्ट करता है।

प्रश्न 63.
सांवेगिक बुद्धि क्या है?
उत्तर:
सांवेगिक बुद्धि में अपनी तथा दूसरे की भावनाओं और संवेगों को जानने तथा नियंत्रित करने, स्वयं को अभिप्रेरित करने तथा अपने आवेगों को नियंत्रित रखने तथा अंतर्वैयक्तिक संबंधों को प्रभावी ढंग से प्रबंध करने की योग्यताएँ सम्मिलित होती हैं।

प्रश्न 64.
‘संस्कृति’ शब्द से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
संस्कृति रीति-रिवाजों, विश्वासों, अभिवृत्तियों तथा कला और साहित्य में उपलब्धियों की एक सामूहिक व्यवस्था को कहते हैं।

प्रश्न 65.
प्रतिक्रिया निर्माण क्या है?
उत्तर:
प्रतिक्रिया निर्माण में व्यक्ति अपनी वास्तविक भावनाओं और इच्छाओं के ठीक विपरीत प्रकार का व्यवहार अपनाकर अपनी दुश्चिंता से रक्षा करने का प्रयास करता है।

प्रश्न 66.
अस्वीकरण क्या है?
उत्तर:
अस्वीकरण एक रक्षा युक्ति है जिसमें एक व्यक्ति पूरी तरह से वास्तविकता को स्वीकार करना नकार देता है।

प्रश्न 67.
प्रक्षेपण क्या है?
उत्तर:
प्रक्षेपण एक रक्षा युक्ति है जिसमें लोग अपने विशेषकों को दूसरों पर आरोपित करते हैं।

प्रश्न 68.
आत्म-सिद्धि क्या है?
उत्तर:
आत्म-सिद्धि वह अवस्था होती है जिसमें लोग अपनी सम्पूर्ण संभाव्यताओं को विकसित कर चुके होते हैं।

प्रश्न 69.
अनुक्रिया क्या है?
उत्तर:
प्रत्येक अनुक्रिया एक व्यवहार है जो किसी विशिष्ट आवश्यकता को संतुष्ट करने के लिए प्रकट की जाती है।

प्रश्न 70.
एडलर के सिद्धांत का आधारभूत अभिग्रह क्या है?
उत्तर:
एडलर के सिद्धांत ‘व्यष्टि मनोविज्ञान’ का आधारभूत अभिग्रह यह है कि व्यक्ति का व्यवहार उद्देश्यपूर्ण एवं लक्ष्योन्मुख होता है। इसमें से प्रत्येक में चयन करने एवं सर्जन करने की क्षमता होती है।

प्रश्न 71.
प्रतिक्रिया निर्माण का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रबल कामेच्छा से ग्रस्त कोई व्यक्ति यदि अपनी ऊर्जा को धार्मिक क्रियाकलापों में लगाते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो ऐसा व्यवहार प्रतिक्रिया निर्माण का उदाहरण होगा।

प्रश्न 72.
युक्तिकरण क्या है?
उत्तर:
युक्तिकरण एक रक्षा युक्ति है जिसमें एक व्यक्ति अपनी तर्कहीन भावनाओं और व्यवहारों को तर्कयुक्त और स्वीकार्य बनाने का प्रयास करता है।

प्रश्न 73.
युक्तिकरण का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा में निम्नस्तरीय निष्पादन के बाद कुछ नए कलम खरीदता है तो उसे युक्तिकरण का उपयोग करता है कि ‘वह आगे की परीक्षा में नए कलम के साथ उच्च स्तर का निष्पादन प्रदर्शित करेगा।’

प्रश्न 74.
मनोलैंगिक विकास को किसने प्रतिपादित किया?
उत्तर:
फ्रायड ने व्यक्तित्व विकास का एक पंच अवस्था सिद्धांत प्रस्तावित किया जिसे मनोलैंगिक विकास के नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 75.
विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान सिद्धांतों का आधारभूत अभिग्रह क्या है?
उत्तर:
विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान सिद्धांतों का आधारभूत अभिग्रह यह है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व में प्रतिस्पर्धा शक्तियाँ एवं संरचनाएँ कार्य करती हैं; न कि व्यक्ति और समाज की मांगों अथवा वास्तविकता के बीच कोई द्वंद्व होता है।

प्रश्न 76.
संरचित व्यक्तित्व परीक्षणों से क्या तात्पर्य है? व्यापक रूप से उपयोग किए गए दो संरचित व्यक्तित्व परीक्षण कौन-से हैं?
उत्तर:
संरचित व्यक्तित्व परीक्षणों से तात्पर्य आत्म-प्रतिवेदन मापों से है। ये माप उचित रूप से संरचित होते हैं और प्रायः ऐसे सिद्धांतों पर आधारित होते हैं जिनमें प्रयोज्यों को किसी प्रकार की निर्धारण मापनी पर शाब्दिक अनुक्रियाएँ देनी होती हैं। व्यापक रूप से उपयोग दिए गए दो संरचित व्यक्तित्व परीक्षण हैं:

  1. मिनेसोटा बहुपक्षीय व्यक्तित्व सूची (एम० एम० पी० आई०)।
  2. सोलह-व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली (16 पी० एफ०)।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्यक्तिगत आत्म और सामाजिक आत्म के बीच भेद स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘व्यक्तिगत’ आत्म एवं ‘सामाजिक’ आत्म के बीच भेद किया गया है। व्यक्तिगत आत्म में एक ऐसा अभिविन्यास होता है जिसमें व्यक्ति मुख्य रूप से अपने बारे में ही संबद्ध होने का अनुभव करता है। जैविक आवश्यकताएँ ‘जैविक आत्म’ को विकसित करती हैं किन्तु शीघ्र ही बच्चे को उसके पर्यावरण में मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आवश्यकताएँ उसके व्यक्तिगत आत्म के अन्य अवयवों को उत्पन्न करने लगती हैं किन्तु इस विस्तार में जीवन के उन पक्षों पर ही बल होता है, जो संबंधित व्यक्ति से जुड़ी हुई होती हैं। जैसे-व्यक्तिगत स्वतंत्रता, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, व्यक्तिगत उपलब्धि, व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ इत्यादि। सामाजिक समर्थन अथवा भागीदारी जैसे जीवन के पक्षों पर बल दिया जाता है। इस प्रकार का आत्म परिवार और सामाजिक संबंधों को महत्त्व देता है। इसलिए इस आत्म को पारिवारिक अथवा संबंधात्मक आत्म के रूप में भी जाना जाता है।

प्रश्न 2.
व्यक्तित्व किस प्रकार स्पष्ट किया जाता है?
उत्तर:
व्यक्तित्व को अग्रलिखित विशेषताओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. इसके अंतर्गत शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक दोनों ही घटक होते हैं।
  2. किसी व्यक्ति विशेष में व्यवहार के रूप में इसकी अभिव्यक्ति पर्याप्त रूप से अनन्य होती है।
  3. इसकी प्रमुख विशेषताएँ साधारणतया समय के साथ परिवर्तित नहीं होती हैं।
  4. यह इस अर्थ में गत्यात्मक होता है कि इसकी कुछ विशेषताएँ आंतरिक अथवा बाह्य स्थितिपरक माँगों के कारण परिवर्तित हो सकती हैं। इस प्रकार व्यक्तित्व स्थितियों के प्रति अनुकूलनशील होता है।

प्रश्न 3.
फ्रीडमैन एवं रोजेनमेन द्वारा व्यक्तित्व का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया है? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
फ्रीडमैन एवं रोजेनमैन ने टाइप ‘ए’ तथा टाइप ‘बी’ इन दो प्रकार के व्यक्तियों में लोगों का वर्गीकरण किया है।
1. टाइप ‘ए’ व्यक्तित्व वाले लोगों में उच्चस्तरीय अभिप्रेरणा, धैर्य की कमी, समय की कमी का अनुभव करना, उतावलापन और कार्य के बोझ से हमेशा लदे रहने का अनुभव करना पाया जाता है। ऐसे लोग निश्चित होकर मंदगति से कार्य करने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। टाइप ‘ए’ व्यक्तित्व वाले लोग अति रक्तदान और कॉरोनारी हृदय रोग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इस प्रकार के लोगों में कभी-कभी सी० एच० डी० के विकसित होने का खसरा, उच्च रक्तदाब, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और धूम्रपान से उत्पन्न होने वाले खतरों की अपेक्षा अधिक होता है।

2. टाइप ‘बी’ व्यक्तित्व को टाइप ‘ए’ व्यक्तित्व की विशेषताओं के अभाव के रूप में समझा जा सकता है।

प्रश्न 4.
केटेल के व्यक्तित्व कारक सिद्धांत को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
रेमंड केटेल का यह विश्वास था कि एक सामान्य संरचना होती है जिसे लेकर व्यक्ति एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। यह संरचना इंद्रियानुभविक रीति से निर्धारित की जा सकती है। उन्होंने भाषा में उपलब्ध वर्णनात्मक विशेषणों के विशाल समुच्चय में से प्राथमिक विशेषकों की पहचान करने का प्रयास किया है। सामान्य संरचनाओं का पता लगाने के लिए उन्होंने कारण विश्लेषण नामक सांख्यिकीय तकनीक का उपयोग किया है। इसके आधार पर उन्होंने 16 प्राथमिक अथवा मूल विशेषकों की जानकारी प्राप्त की है। मूल विशेषक स्थिर होते हैं और व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले मूल तत्वों के रूप में जाने जाते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक सतही या पृष्ठ विशेषक भी होते हैं जो मूल विशेषकों की अंतःक्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। केटेल ने मूल विशेषकों का वर्णन विपरीतार्थी या विलोमी प्रवृत्तियों के रूप में किया है। उन्होंने व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए एक परीक्षण विकसित किया जिसे सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली के नाम से जाना जाता है। इस परीक्षण का मनोवैज्ञानिकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया गया है।

प्रश्न 5.
आइजेक ने व्यक्तित्व को दो व्यापक आयामों के रूप में प्रस्तावित किया है। इन आयामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आइजेक ने व्यक्तित्व को दो व्यापक आयामों के रूप में प्रस्तावित किया है। इन आयामों का आधार जैविक एवं आनुवंशिक है। प्रत्येक आयाम में अनेक विशिष्ट विशेषकों को सम्मिलित किया गया है। ये आयाम निम्न प्रकार के हैं:
1. तंत्रिकातापिता बनाम सांवेगिक स्थिरता इससे तात्पर्य है कि लोगों में किस मात्रा तक अपनी भावनाओं पर नियंत्रण होता है। इस आयाम के एक छोर पर तंत्रिकाताप से ग्रस्त लोग होते हैं। ऐसे लोगों में दुश्चिता, चिड़चिड़ापन, अतिसंवेदनशीलता, बेचैनी और नियंत्रण का अभाव पाया जाता है। दूसरे छोर पर वे लोग होते हैं जो शांत, संयत स्वभाव वाले विश्वसनीय और स्वयं पर नियंत्रण रखने वाले होते हैं।

2. बर्हिमुखता बनाम अंतर्मुखता-इससे तात्पर्य है कि किस मात्रा के लोगों में सामाजिक उन्मुखता अथवा सामाजिक विमुखता पाई जाती है। इस आयाम के एक छोर पर वे लोग होते हैं जिसमें सक्रियता, यूथचारिता, आवेग और रोमांच के प्रति पसंदगी पाई जाती है। दूसरे छोर पर वे लोग होते हैं जो निष्क्रिय, शांत, सतर्क और आत्म-केन्द्रित होते हैं।

प्रश्न 6.
मानव मन चेतना के तीन स्तर कौन-कौन से हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव मन चेतना के तीन स्तर निम्नलिखित हैं –

  1. चेतन-यह चेतना का प्रथम स्तर है जिसके अंतर्गत चिंतन, भावनाएँ और क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग जागरूक रहते हैं।
  2. पूर्व चेतना-यह चेतना का दूसरा स्तर है जिसके अंतर्गत ऐसी मानसिक क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग तभी जागरूक होते हैं जब वे उन पर सावधानीपूर्वक ध्यान केन्द्रित करते हैं।
  3. अचेतन-यह चेतना का तीसरा स्तर है जिसके अंतर्गत ऐसी मानसिक क्रियाएँ आती हैं जिनके प्रति लोग जागरूक नहीं होते हैं।

फ्रायड के अनुसार अचेतन मूल प्रवृत्तिक और पाशविक अंतर्नादों का भंडार होता है। इसके अंतर्गत वे सभी इच्छाएँ और विचार भी होते हैं जो चेतन रूप में जागरूक स्थिति में छिपे हुए होते हैं क्योंकि वे मनोवैज्ञानिक द्वंद्वों को उत्पन्न करते हैं। इनमें अधिकांश कामेच्छओं से उत्पन्न होते हैं जिनको प्रकट रूप से अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता और इसीलिए उनका दमन कर दिया जाता है अचेतन आवेगों की अभिव्यक्ति के कुछ सामाजिक रूप से स्वीकार्य तरीकों को खोजने के लिए हैं अथवा उन आवेगों को अभिव्यक्त होने से बचाने के लिए निरंतर संघर्ष करते रहते हैं।

द्वंद्वों के संदर्भ में असफल निर्णय लेने के परिणामस्वरूप अपसामान्य व्यवहार उत्पन्न होते हैं। विस्मरण, अशुद्ध उच्चारण, माजक एवं स्वप्नों के विश्लेषण हमें अचेतन तक पहुँचने के लिए साधन प्रदान करते हैं। फ्रायड ने एक चिकित्सा प्रक्रिया विकसित की जिसे मनोविश्लेषण के रूप में जाना जाता है। मनोविश्लेषण-चिकित्सा का आधारभूत लक्ष्य दमित अचेतन सामग्रियों को चेतन के स्तर पर ले आना है जिससे कि लोग और अधिक आत्म-जागरूक होकर समाकलित तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

प्रश्न 7.
प्रक्षेपी तकनीकों की विशेषताएं क्या-क्या हैं?
उत्तर:
प्रक्षेपी तकनीकों की विशेषताएं निम्नलिखित हैं –

  1. उद्दीपक सापेक्ष रूप से अथवा पूर्णतः असंरचित और अनुपयुक्त ढंग से परिभाषित होते हैं।
  2. जिस व्यक्ति का मूल्यांकन किया जाता है उसे साधारणतया मूल्यांकन के उद्देश्य, अंक प्रदान करने की विधि और व्याख्या के बारे में नहीं बताया जाता है।
  3. व्यक्ति को यह सूचना दे दी जाती है कि कोई भी अनुक्रिया सही या गलत नहीं होती है।
  4. प्रत्येक अनुक्रिया व्यक्तित्व के एक महत्त्वपूर्ण पक्ष को प्रकट करने वाली समझी जाती है।
  5. अंक प्रदान करना और व्याख्या करना (अधिक समय लेने वाला) लंबा और कभी-कभी आत्मनिष्ठ होता है।

प्रश्न 8.
रोजेनज्विग का चित्रगत कुंठा अध्ययन पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
रोजेनज्विग का चित्रगत कुंठा अध्ययन (पी० एफ० अध्ययन) यह परीक्षण रोजेनज्विग द्वारा यह जानकारी प्राप्त करने के लिए विकसित किया गया कि कुंठा उत्पन्न करने वाली स्थिति में लोग कैसे आक्रामक व्यवहार अभिव्यक्त करते हैं। यह परीक्षण व्यंग्य चित्रों की सहायता से विभिन्न स्थितियों को प्रदर्शित करता है जिसमें एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कुठित करते हुए अथवा किसी कुंठात्मक दशा के प्रति दूसरे व्यक्ति का ध्यान आकर्षित करते हुए दिखाया जाता है।

प्रयोज्य से यह पूछा जाता ह कि दूसरा व्यक्ति (कुठित) क्या कहेगा अथवा क्या करेगा। अनुक्रियाओं का विश्लेषण आक्रामकता के प्रकार एवं दिशा के आधार पर किया जाता है। इस बात की जाँच करने का प्रयास किया जाता है कि क्या बल कुंठा उत्पन्न करने वाली वस्तु अथवा कुंठित व्यक्ति के संरक्षण अथवा समस्या के रचनात्मक समाधान पर दिया गया है। आक्रामकता की दिशा पर्यावरण के प्रति अथवा स्वयं के प्रति हो सकती है। यह भी संभव है कि स्थिति को टाल देने अथवा उसके महत्त्व को घटा देने के प्रयास में आक्रामकता की स्थिति समाप्त भी हो सकती है। पारीक ने भारतीय जनसंख्या पर उपयोग के लिए इस परीक्षण को रूपांतरित किया है।

प्रश्न 9.
व्यक्तंकन परीक्षण पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
व्यक्तंकन परीक्षण-यह एक सरल परीक्षण है जिसमें प्रयोज्य को एक कागज के पन्ने पर किसी व्यक्ति का चित्रांकन करने के लिए कहा जाता है। चित्रण को सुकन बनाने के लिए प्रयोज्य को एक पेन्सिल और रबड़ (मिटाने का) प्रदान किया जाता है। चित्रांकन के समापन के बाद प्रयोज्य से एक विपरीत लिंग के व्यक्ति का चित्रांकन करने के लिए कहा जाता है। अंततः प्रयोज्य से उस व्यक्ति के बारे में एक कहानी लिखने को कहा जाता है जैसे वह किसी उपन्यास या नाटक का एक पात्र हो। व्याख्याओं के कुछ उदाहरण अग्रलिखित प्रकार के होते हैं –

  1. मुखाकृति का लोप यह संकेत करता है कि व्यक्ति किसी उच्चस्तरीय द्वंद्व से अभिभूत अंतर्वैयक्तिक संबंध को टालने का प्रयास कर रहा है।
  2. गर्दन पर आलेखीय बल देना आवेगों के नियंत्रण के अभाव का संकेत करता है।
  3. अनानुपातिक रूप से बड़ा सिर आंगिक रूप से मस्तिष्क रोग और सिरदर्द के प्रति दुश्चिता को सूचित करता है।

प्रक्षेपी तकनीकों की सहायता से व्यक्तित्व का विश्लेषण अत्यंतचेचक प्रतीत होता है। यह हमें किसी व्यक्ति की अचेतन अभिप्रेरणाओं, गहन द्वंद्वों और संवेगात्मक मनोग्रंथियों को समझने में सहायता करता है। यद्यपि इन तकनीकों में अनुक्रियाओं की व्याख्या के लिए परिष्कृत कौशलों और विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त अंक प्रदान करने की विश्वसनीयता और व्याख्याओं की वैधता से संबंधित कुछ समस्याएं भी होती हैं किन्तु व्यावसायिक मनोवैज्ञानिकों ने इन तकनीकों को नितांत उपयोगी पाया है।

प्रश्न 10.
व्यक्तिगत अनन्यता और सामाजिक अनन्यता में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
व्यक्तिगत अनन्यता-इससे तात्पर्य व्यक्ति के गुणों से है जो उसे अन्य दूसरों से भिन्न करते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने नाम अथवा अपनी विशेषताओं अथवा अपनी विभवताओं अथवा क्षमताओं अथवा अपने विश्वासों का वर्णन करता/करती है। सामाजिक अनन्यता से तात्पर्य व्यक्ति – के उन पक्षों से है जो उसे किसी सामाजिक अथवा सांस्कृतिक समूह से संबद्ध करते हैं अथवा जो ऐसे समूह से व्युत्पन्न होते हैं। जब कोई यह कहता/कहती है कि वह एक हिन्दू है अथवा मुस्लिम है, ब्राह्मण है अथवा आदिवासी है, उत्तर भारतीय है अथवा दक्षिण भारतीय है, अथवा इसी तरह का कोई अन्य वक्तव्य तो वह अपनी सामाजिक अनन्यता के बारे में जानकारी देता/देती है। इस प्रकार के वर्णन उन तरीकों का विशेषीकरण करते हैं जिनके आधार पर लोग एक व्यक्ति के रूप में स्वयं का मानसिक स्तर पर प्रतिरूपण करते हैं।

प्रश्न 11.
आत्म-सक्षमता से आपका क्या तात्पर्य है? क्या आत्म-सक्षमता को विकसित किया जा सकता है?
उत्तर:
आत्म-सक्षमता हमारे आत्मा का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है। लोग एक-दूसरे से इस बात में भी भिन्न होते हैं कि उनका विश्वास इसमें है कि वे अपने जीवन के परिणामों को स्वयं नियंत्रित कर सकते हैं अथवा इसमें कि उनके जीवन के परिणाम भाग्य, नियति अथवा अन्य स्थितिपरक कारकों द्वारा नियंत्रित होता है। उदाहरण के लिए, परीक्षा में उत्तीर्ण होना। एक व्यक्ति यदि ऐसा विश्वास रखता है कि किसी स्थिति विशेष की मांगों के अनुसार उसमें योग्यता है या व्यवहार करने की क्षमता है तो उसमें उच्च आत्म-सक्षमता होती है।

आत्म-सक्षमता की अवधारणा बंदूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत पर आधारित है। बंदूरा के आरंभिक अध्ययन इस बात को प्रदर्शित करते हैं कि बच्चे और वयस्क दूसरों का प्रेक्षण एवं अनुकरण कर व्यवहारों को सीखते हैं। लोगों की अपनी प्रवीणता और उपलब्धिता की प्रत्याशाओं एवं स्वयं अपनी प्रभाविता के प्रति दृढ़ विश्वास से भी यह निर्धारित होता है कि वे किस तरह व्यवहारों में प्रवृत्त होंगे और व्यवहार विशेष को संपादित करने में कितना जोखिम उठाएँगें।

आत्म-सक्षमता की प्रबल भावना लोगों को अपने जीवन की परिस्थितियों का चयन करने, उनको प्रभावित करने एवं यहाँ तक कि उनका निर्माण करने को भी प्रेरित करती है। आत्म-सक्षमता की प्रबल भावना रखने वाले लोगों में भय का अनुभव भी कम होता है। आत्म-सक्षमता को विकसित किया जा सकता है। उच्च आत्म-सक्षमता रखने वाले लोग धूम्रपान न करने का निर्णय लेने के बाद तत्काल इस पर अमल कर लेते हैं। बच्चों के आरंभिक वर्षों में सकारात्मक प्रतिरूपों या मॉडलों को प्रस्तुत कर हमारा समाज हमारे माता-पिता और हमारे अपने सकारात्मक अनुभव आत्म-सक्षमता की प्रबल भावना के विकास में सहायक हो सकते हैं।

प्रश्न 12.
शेल्डन और युंग के द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व के प्ररूप का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनोविज्ञान में शेल्डन द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व के प्ररूप सर्वविदित हैं। शारीरिक बनावट और स्वभाव को आधार बनाते हुए शेल्डन ने गोलाकृतिक, आयताकृतिक और लंबाकृतिक जैसे व्यक्तित्व के प्ररूप को प्रस्तावित किया है। गोलाकृतिक प्ररूप वाले व्यक्ति मोटे, मृदुल और गोल होते हैं। स्वभाव से वे लोग शिथिल और सामाजिक या मिलनसार होते हैं। आयताकृतिक प्रारूप वाले लोग मजबूत पेशीसमूह एवं सुगठित शरीर वाले होते हैं जो देखने में आयताकार होते हैं, ऐसे व्यक्ति ऊर्जस्वी एवं साहसी होते हैं। लंबाकृतिक प्ररूप वाले पतले, लंबे और सुकुमार होते हैं। ऐसे व्यक्ति कुशाग्रबुद्धि वाले, कलात्मक और अंतर्मुखी होते हैं। यहाँ ध्यातव्य है कि व्यक्ति के ये शारीरिक प्ररूप सरल किन्तु व्यक्तियों के व्यवहारों की भविष्यवाणी करने में सीमित उपयोगिता वाले हैं। वस्तुत: व्यक्तित्व के ये प्ररूप रूढ़ धारणाओं की तरह हैं जो लोग उपयोग करते हैं।

युंग ने व्यक्तित्व का एक अन्य प्ररूपविज्ञान प्रस्तावित किया है जिसमें लोगों को उन्होंने अंतर्मुखी एवं बर्हिमुखी दो वर्गों में वर्गीकृत किया है। यह प्ररूप व्यापक रूप से स्वीकार किए गए हैं। इसके अनुसार अंतर्मुखी वह लोग होते हैं जो अकेला रहना पसंद करते हैं, दूसरों से बचते हैं, सांवेगिक द्वंद्वों से पलायन करते हैं और शर्मीले होते हैं। दूसरी ओर, बर्हिमुखी वह लोग होते हैं जो सामाजिक तथा बर्हिगामी होते हैं और ऐसे व्यवसायों का चयन करते हैं जिसमें लोगों से वे प्रत्यक्ष रूप से संपर्क बनाए रख सकें। लोगों के बीच में रहते हुए तथा सामाजिक कार्यों को करते हुए वे दबावों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।

प्रश्न 13.
एरिक एरिक्सन का सिद्धान्त अनन्यता की खोज को संक्षेप में समझाइए। मनोगतिक सिद्धांतों की आलोचनाओं को भी लिखिए।
उत्तर:
एरिक्सन का सिद्धांत व्यक्तित्व विकास में तर्कयुक्त, सचेतन अहं की प्रक्रियाओं पर बल देता है। उनके सिद्धांत में विकास को एक जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया और अहं अनन्यता का इस प्रक्रिया में केन्द्रीय स्थान माना गया है। किशोरावस्था के अनन्यता संकट के उनके संप्रत्यय ने व्यापक रूप से ध्यान आकृष्ट किया है। एरिक्सन का मत है कि युवकों को अपने लिए एक केन्द्रीय परिप्रेक्ष्य और एक दिशा निर्धारित करनी चाहिए जो उन्हें एकत्व और उद्देश्य का सार्थक अनुभव करा सके।

मनोगतिक सिद्धांतों की अनेक दृष्टिकोणों से आलोचना की गई है। प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित प्रकार की हैं –

  1. ये सिद्धांत अधिकांशतः व्यक्ति अध्ययनों पर आधारित है जिसमें परिशुद्ध, वैज्ञानिक आधार का अभाव है।
  2. इनमें कम संख्या में विशिष्ट व्यक्तियों का सामान्यीकरण के लिए प्रतिदर्श के रूप में उपयोग किया गया है।
  3. संप्रत्यय उचित ढंग से परिभाषित नहीं किए गए हैं और वैज्ञानिक परीक्षण के लिए उनको प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
  4. फ्रायड ने मात्र पुरुषों का मानव व्यक्तित्व के विकास के आदि प्रारूप के रूप में उपयोग किया है। उन्होंने महिलाओं के अनुभवों एवं परिप्रेक्ष्यों पर ध्यान नहीं दिया है।

प्रश्न 14.
स्वस्थ व्यक्ति कौन होते हैं? स्वस्थ लोगों की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
मानवतावादी सिद्धांतकारों का मत है कि स्वस्थ व्यक्ति मात्र समाज के प्रति समायोजन में ही निहित होता है। यह अपने को गहराई से जानने की जिज्ञासा, बिना छद्मवेश के अपनी भावनाओं के प्रति ईमानदार होने और जहाँ-तहाँ तक जैसा बने रहने की प्रवृत्ति को भी सन्निहित विशेषताएँ होती हैं –

  1. वे अपने, अपनी भावनाओं और अपनी सीमाओं के प्रति जागरूक होते हैं; अपने को स्वीकार करते हैं और अपने जीवन को जैसा बनाते हैं, उसके प्रति उत्तरदायी होते हैं। साथ ही कुछ बन जाने का साहस भी होता है।
  2. वे वर्तमान में रहते हैं; वे किसी बंधन में नहीं फँसते हैं।
  3. वे अतीत में नहीं जीते हैं और दुश्चिताजनक अपेक्षाओं और विकृत रक्षा के माध्यम से भविष्य को लेकर परेशान नहीं होते हैं।

प्रश्न 15.
मिनेसोटा बहुपक्षीय व्यक्तित्व -सूची पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मिनेसोटा बहुपक्षीय व्यक्तित्व सूची (एम० एम० पी० आई०) यह सूची एक परीक्षण के रूप में व्यक्तित्व मूल्यांकन में व्यापक रूप से उपयोग की गई है। हाथवे एवं कैकिन्लेने मनोरोग-निदान के लिए इस परीक्षण का एक सहायक उपकरण के रूप में विकास किया था किन्तु यह परीक्षण विभिन्न मनोविकारों की पहचान करने के लिए अत्यंत प्रभावी पाया गया है।

इसका परिशोधित एम० एम० पी० आई० 2 के रूप में उपलब्ध है। इसमें 567 कथन हैं। प्रयोज्य को अपने लिए प्रत्येक कथन के ‘सही’ अथवा ‘गलत’ होने के बारे में निर्णय लेना होता है। यह परीक्षण 10 उपमापनियों में विभाजित है जो स्वकायदुश्चिता रोग, अवसाद, हिस्टीरिया, मनोविकृत विसामान्य, पुरुषत्व-स्त्रीत्व, व्यामोह, मनोदौर्बल्य, मनोविदलता, उन्माद और सामाजिक अंतर्मुखता के निदान करने का प्रयत्न करता है। भारत में मल्लिक एवं जोशी ने जोधपुर बहुपक्षीय व्यक्तित्व सूची (जे० एम० पी० आई०) एम० एम० पी० आई० की तरह ही विकसित की है।

प्रश्न 16.
व्यवहारपरक निर्धारण क्या है? समझाइए निर्धारण विधि की प्रमुख सीमाएँ क्या होती हैं?
उत्तर:
शैक्षिक एवं औद्योगिक वातावरण में व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए प्रायः व्यवहारपरक निर्धारण का उपयोग किया जाता है। व्यवहारपरक निर्धारण सामान्यतया उन लोगों से लिए जाते हैं जो निर्धारण किए जाने वाले व्यक्ति को घनिष्ठ रूप से जानते हैं और उनके साथ लंबी समयावधि तक अंतःक्रिया कर चुके होते हैं अथवा जिनको प्रेक्षण करने का अवसर उन्हें प्राप्त हो चुका होता है। इस विधि में योग्यता निर्धारक व्यक्तियों को उनके व्यवहारपरक गुणों के आधार पर कुछ संवर्गों में रखने का प्रयास करते हैं। इन संवर्गों को विभिन्न संख्याएँ या वर्णनात्मक शब्द हो सकते हैं। यह पाया गया है कि संख्याओं अथवा सामान्य वर्णनात्मक विशेषणों का निर्धारण मापनियों में उपयोग प्रायः योग्यता निर्धारक लिए भ्रम उत्पन्न करता है। प्रभावी ढंग से निर्धारणों का उपयोग करने के लिए आवश्यक है कि विशेषकों को सावधानीपूर्वक लिखे गए व्यवहारपरक स्थिरकों के आधार पर स्पष्ट रूप से परिभाषित होना चाहिए।

निर्धारण विधि की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं –

1. योग्यता निर्धारक प्राय: कुछ अभिनतियों को प्रदर्शित करते हैं जो विभिन्न विशेषकों के बारे में उनके निर्णय को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, हममें अधिकांश लोग किसी एक अनुकूल अथवा प्रतिकूल विशेषक से अत्यधिक प्रभावित हो जाते हैं। इसी के आधार पर प्रायः योग्यता निर्धारक किसी व्यक्ति के बारे में अपना समग्र निर्णय दे देता है। इस प्रवृत्ति को परिवेश प्रभाव कहते हैं।

2. योग्यता निर्धारक में एक यह प्रवृत्ति भी पाई जाती है कि वह व्यक्तियों को या तो छोर की स्थितियों का परिहार कर मापनी के मध्य में रखता है (मध्य संवर्ग अभिनति) या फिर मापनी के मध्य संवर्गों का परिहार कर (आत्यंतिक अनुक्रिया अभिनति) छोर की स्थितियों में रखता है।

प्रश्न 17.
स्थितिपरक परीक्षण और नाम निर्देशन पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
स्थितिपरक परीक्षण-व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न प्रकार के स्थितिपरक परीक्षण निर्मित किए गए हैं। सबसे अधिक प्रयुक्त किया जाने वाला इस प्रकार का एक परीक्षण स्थितिपरक दबाव परीक्षण है। कोई व्यक्ति दबावमय स्थितियों में किस प्रकार व्यवहार करता है, इसके बारे में हमें सूचनाएँ प्रदान करता है। इस परीक्षण में एक व्यक्ति को एक दिए गए कृत्य पर निष्पादन कुछ ऐसे दूसरे लोगों के साथ करना होता है, जिनको उस व्यक्ति के साथ असहयोग करने और उसको निष्पादन में हस्तक्षेप करने का अनुदेश दिया गया होता है।

इस परीक्षण में एक प्रकार की भूमिका-निर्वाह सम्मिलित होता है। जो उस व्यक्ति को करने के लिए कहा जाता है, उसके बारे में एक शाब्दिक प्रतिवेदन भी प्राप्त किया जाता है। स्थिति वास्तविक भी हो सकती है, अन्यथा इसे एक वीडियो खेल के द्वारा उत्पन्न भी किया जा सकता है। नाम निर्देशन-इस विधि का उपयोग प्रायः समकक्षी मूल्यांकन प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग उन व्यक्तियों के साथ किया जा सकता है जिनमें दीर्घकालिक अंतःक्रिया होती रही हो और जो एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हों।

नाम निर्देशन विधि के उपयोग में प्रत्येक व्यक्ति से समूह के एक अथवा एक से अधिक व्यक्तियों का वरण या चयन करने के लिए कहा जाता है जिसके अथवा जिनके साथ वह कार्य करना, पढ़ना, खेलना अथवा किसी अन्य क्रिया में सहभागी होना पसंद करेगा/करेगी। व्यक्ति के चुने गए व्यक्तियों के वरण के व्यक्तित्व और व्यवहारपरक गुणों को समझने के लिए प्राप्त नाम निर्देशनों का विश्लेषण किया जा सकता है। यह तकनीक अत्यंत विश्वसनीय पाई गई है, यद्यपि यह व्यक्तिगत अभिनतियों से प्रभावित हो सकती है।

प्रश्न 18.
व्यक्तित्व मूल्यांकन विधि के रूप में आत्म-प्रतिवेदन का वर्णन करें।
उत्तर:
आत्म-प्रतिवेदन (Self-report) व्यक्तित्व के मापन का एक लोकप्रिय विधि है जिसमें व्यक्ति दिए गये प्रश्नों या कथनों को पढ़कर वस्तुनिष्ठ रूप से उसका उत्तर देता है। यहाँ व्यक्ति प्रश्नों या कथनों को पढ़कर यह समझने की कोशिश करता है कि वे स्वयं उनके लिए कितने सही या गलत हैं शायद यही कारण है कि इसे आत्म-प्रतिवेदन मापक (Self-report measure) कहा जाता है।

प्रश्न 19.
प्रसामाजिक व्यवहार की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
प्रसामाजिक व्यवहार से तात्पर्य दूसरों को मदद करने तथा उनके साथ सहभागिता एवं सहयोग दिखलाने से होता है। इस व्यवहार की कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

  1. प्रसामाजिक व्यवहार अपनी स्वेच्छा से न कि किसी के दबाव में आकर व्यक्त करता है।
  2. प्रसामाजिक व्यवहार का उद्देश्य दूसरों को लाभ पहुँचाकर उनका कल्याण करना होता है।
  3. ऐसा व्यवहार को करते समय व्यक्ति अपना लाभ या हानि के विचारों को महत्त्व नहीं देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
आत्म-सम्मान से आपका क्या तात्पर्य है? आत्म-सम्मान का हमारे दैनिक जीवन के व्यवहारों से किस प्रकार संबंधित है? वर्णन करें।
उत्तर:
आत्म-सम्मान हमारे आत्म का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है। व्यक्ति के रूप में हम सदैव अपने मूल्य या मान और अपनी योग्यता के बारे में निर्णय या आकलन करते रहते हैं। व्यक्ति का अपने बारे में यह मूल्य-निर्णय ही आत्म-सम्मान कहा जाता है। कुछ लोगों में आत्म-सम्मान उच्च स्तर का जबकि कुछ अन्य लोगों में आत्म-सम्मान निम्न स्तर का पाया जाता है। किसी व्यक्ति के आत्म-सम्मान का मूल्यांकन करने के लिए व्यक्ति के समक्ष विविध प्रकार के कथन प्रस्तुत किये जाते हैं और उसके संदर्भ में सही है, यह बताइए।

उदाहरण के लिए, किसी बालक/बालिका से ये पूछा जा सकता है कि “मैं गृहकार्य करने में अच्छा हूँ” अथवा “मुझे अक्सर विभिन्न खेलों में भाग लेने के लिए चुना जाता है” अथवा “मेरे सहपाठियों द्वारा मुझे बहुत पसंद किया जाता है” जैसे कथन उसके संदर्भ में किस सीमा तक सही हैं। यदि बालक/बालिका यह बताता/बताती है कि ये कथन उसके संदर्भ में सही है तो उसका आत्म-सम्मान उस दूसरे बालक/बालिका की तुलना में अधिक होगा जो यह बताता/बताती है कि यह कथन उसके बारे में सही नहीं हैं।

छः से सात वर्ष तक के बच्चों में आत्म-सम्मान चार क्षेत्रों में निर्मित हो जाता है-शैक्षिक क्षमता, सामाजिक क्षमता, शारीरिक/खेलकूद संबंधित क्षमता और शारीरिक रूप जो आयु के बढ़ने के साथ-साथ और अधिक परिष्कृत होता जाता है। अपनी स्थिर प्रवृत्तियों के रूप में अपने प्रति धारणा बनाने की क्षमता हमें भिन्न-भिन्न आत्म-मूल्यांकनों को छोड़कर अपने बारे में एक सामान्य मनोवैज्ञानिक प्रतिमा निर्मित करने का अवसर प्रदान करती है। इसी को हम आत्म-सम्मान की समग्र भावना के रूप में जानते हैं।

आत्म-सम्मान हमारे दैनिक जीवन के व्यवहारों से अपना घनिष्ठ संबंध प्रदर्शित करता है। उदाहरण के लिए जिन बच्चों में उच्च शैक्षिक आत्म-सम्मान होता है उनका निष्पादन विद्यालयों में निम्न आत्म-सम्मान रखने वाले बच्चों की तुलना में अधिक होता है और जिन बच्चों में उच्च सामाजिक आत्म-सम्मान होता है उनको निम्न सामाजिक आत्म-सम्मान रखने वाले बच्चों की तुलना में सहपाठियों द्वारा अधिक पसंद किया जाता है।

दूसरी तरफ, जिन बच्चों में सभी क्षेत्रों में निम्न आत्म-सम्मान होता है उनमें दुश्चिता, अवसाद और समाजविरोधी व्यवहार पाया जाता है। अध्ययनों द्वारा प्रदर्शित किया गया है कि जिन माता-पिता द्वारा स्नेह के साथ सकारात्मक ढंग से बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है ऐसे बालकों में उच्च आत्म-सम्मान विकसित होता है। क्योंकि ऐसा होने पर बच्चे अपने आपको सक्षम और योग्य व्यक्ति के रूप में स्वीकार करते हैं। जो माता-पिता बच्चों द्वारा सहायता न माँगने पर भी यदि उनके निर्णय स्वयं लेते हैं तो ऐसे बच्चों में निम्न आत्म-सम्मान पाया जाता है।

प्रश्न 2.
व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागमों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागम निम्न हैं –
1. प्रारूप उपागम:
व्यक्ति के प्रेक्षित व्यवहारपरक विशेषताओं के कुछ व्यापक स्वरूपों का परीक्षण कर मानव व्यक्तित्व को समझने का प्रयास करता है। प्रत्येक व्यवहारपरक स्वरूप व्यक्तित्व के किसी एक प्रकार को इंगित करता है जिसके अंतर्गत उस स्वरूप की व्यवहारपरक विशेषता की समानता के आधार पर व्यक्तियों को रखा जाता है।

2. विशेषक उपागम:
विशिष्ट मनोवैज्ञानिक गुणों पर बल देता है जिसके आधार पर व्यक्ति संगत और स्थिर रूपों में भिन्न होते हैं। उदाहरणार्थ, एक व्यक्ति कम शर्मीला हो सकता है जबकि दूसरा अधिक; एक व्यक्ति अधिक मैत्रीपूर्ण व्यवहार कर सकता है और दूसरा कम। यहाँ ‘शर्मीलापन’ और ‘मैत्रीपूर्ण व्यवहार’ विशेषकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसके आधार पर व्यक्तियों में संबंधित व्यवहारपरक गुणों या विशेषकों की उपस्थिति या अनुपस्थिति की मात्रा का मूल्यांकन किया जा सकता है।

3. अंतःक्रियात्मक उपागम:
इसके अनुसार स्थितिपरक विशेषताएँ हमारे व्यवहारों को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोग स्वतंत्र अथवा आश्रित प्रकार का व्यवहार करेंगे यह उनके आंतरिक व्यक्तित्व विशेषक पर निर्भर नहीं करता है बल्कि इस पर निर्भर करता है कि किसी विशिष्ट स्थिति में बाह्य पुरस्कार अथवा खतरा उपलब्ध है कि नहीं। भिन्न-भिन्न स्थितियों में विशेषकों को लेकर संगति अत्यंत निम्न पाई जाती है। बाजार में न्यायालय में अथवा पूजास्थलों पर लोगों के व्यवहारों का प्रेक्षण कर स्थितियों के अप्रतिरोध्य प्रभाव को देखा जा सकता है।

प्रश्न 3.
ऑलपोर्ट के विशेषक सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
गॉर्डन ऑलपोर्ट को विशेषक उपागम का अग्रणी माना जाता है। उन्होंने प्रस्तावित किया है कि व्यक्ति में अनेक विशेषक होते हैं जिनकी प्रकृति गत्यात्मक होती है। ये विशेषक व्यवहारों का निर्धारण इस रूप में करते हैं कि व्यक्ति विभिन्न स्थितियों में समान योजनाओं के साथ क्रियाशील होता है। विशेषक उद्दीपकों और अनुक्रियाओं को समाकलित करते हैं अन्यथा वे असमान दिखाई देते हैं। ऑलपोर्ट ने यह तर्क प्रस्तुत किया है कि लोग स्वयं का तथा दूसरों का वर्णन करने के लिए जिन शब्दों का उपयोग करते हैं वे शब्द मानव व्यक्तित्व को समझने का आधार प्रदान करते हैं।

उन्होंने अंग्रेजी भाषा के शब्दों का विश्लेषण विशेषकों का पता लगाने के लिए किया है जो किसी व्यक्ति का वर्णन है। इसके आधार पर ऑलपोर्ट ने विशेषकों का तीन वर्गों में वर्गीकरण किया-प्रमुख विशेषक, केन्द्रीय विशेषक तथा गौण विशेषक। प्रमुख विशेषक अत्यंत सामान्यीकृत प्रवृत्तियाँ होती हैं। ये उस लक्ष्य को इंगित करती हैं जिससे चतुर्दिक व्यक्ति का पूरा जीवन व्यतीत होता है। महात्मा गाँधी की अहिंसा और हिटलर का नाजीवाद प्रमुख विशेषक के उदाहरण हैं ये विशेषक व्यक्ति के नाम के साथ इस तरह घनिष्ठ रूप से जुड़े होते हैं कि उनकी पहचान ही व्यक्ति के नाम के साथ हो जाती है, जैसे-‘गाँधीवादी’ अथवा ‘हिटलरवादी’ विशेषक।

प्रभाव में कम व्यापक किन्तु फिर भी सामान्यीकृत प्रवृत्तियाँ ही केन्द्रीय विशेषक के रूप में जानी जाती हैं। ये विशेषक (उदाहरणार्थ, स्फूर्त, निष्कपट, मेहनती आदि) प्रायः लोगों के शंसापत्रों में अथवा नौकरी की संस्तुतियों में किसी व्यक्ति के लिए लिखे जाते हैं। व्यक्ति की सबसे कम सामान्यीकृत विशिष्टताओं के रूप में गौण विशेषक जाने जाते हैं। ऐसे विशेषकों के उदाहरण इन वाक्यों में, जैसे ‘मुझे आम पसंद है’ अथवा ‘मुझे संजातीय वस्त्र पहनना पसंद है’ देखे जा सकते हैं।

यद्यपि ऑलपोर्ट ने व्यवहार पर स्थितियों के प्रभाव को स्वीकार किया है फिर भी उनका मानना है कि स्थिति विशेष में व्यक्ति जिस प्रकार प्रतिक्रिया करता है वह उसके विशेषकों पर निर्भर करता है। लोग समान विशेषकों को देखते हुए भी उनको भिन्न तरीकों से व्यक्त कर सकते हैं। ऑलपोर्ट ने विशेषकों को मध्यवर्ती परिवयों की तरह अधिक माना है जो उद्दीपक स्थिति एवं व्यक्ति की अनुक्रिया के मध्य घटित होते हैं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि विशेषकों में किसी भी प्रकार की भिन्नता के कारण समान स्थिति में अथवा समान परिस्थिति के प्रति भिन्न प्रकार की अनुक्रिया उत्पन्न होती है।

प्रश्न 4.
व्यक्तित्व के पंच-कारक मॉडल का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पॉल कॉस्टा तथा रॉबर्ट मैक्रे ने सभी संभावित व्यक्तित्व विशेषकों की जाँच कर पाँच कारकों के एक समुच्चय के बारे में जानकारी दी है। इनको वृहत् पाँच कारकों के नाम से जाना जाता है। ये पाँच कारक निम्न हैं –

  1. अनुभवों के लिए खुलापन-जो लोग इस कारक पर उच्च अंक प्राप्त करते हैं वे कल्पनाशील, उत्सुक, नए विचारों के प्रति उदारता एवं सांस्कृतिक क्रिया-कलापों में अभिरुचि लेने वाले व्यक्ति होते हैं। इसके विपरीत, कम अंक प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में अनम्यता पाई जाती है।
  2. बर्हिमुखता यह विशेषता उन लोगों में पाई जाती है जिनमें सामाजिक सक्रियता, आग्रहिता, बर्हिगमन, बातूनापन और आमोद-प्रमोद के प्रति पसंदगी पाई जाती है। इसके विपरीत ऐसे लोग होते हैं जो शर्मीले और संकोची होते हैं।
  3. सहमतिशीलता-यह कारक लोगों की उन विशेषताओं को बताता है जिनमें सहायता करने, सहयोग करने, मैत्रीपूर्ण व्यवहार करने, देखभाल करने एवं पोषण करने जैसे व्यवहार सम्मिलित होते हैं। इसके विपरीत वे लोग होते हैं जो आक्रामक और आत्म-केन्द्रित होते हैं।
  4. तंत्रिकाताप-इस कारक पर उच्च अंक प्राप्त करने वाले लोग सांवेगिक रूप से अस्थिर, परेशान, भयभीत, दु:खी, चिड़चिड़े और तनावग्रस्त होते हैं। इसके विपरीत प्रकार के लोग सुसमायोजित होते हैं।
  5. अंतर्विवेकशीलता-इस कारक पर उच्च अंक प्राप्त करने वाले लोगों में उपलब्धि उन्मुखता, निर्भरता, उत्तरदायित्व, दूरदर्शिता, कर्मठता और आत्म-नियंत्रण पाया जाता है। इसके विपरीत, कम अंक प्राप्त करने वाले लोगों में आवेग पाया जाता है।

व्यक्तित्व के क्षेत्र में यह पंच-कारक मॉडल एक महत्त्वपूर्ण सैद्धांतिक विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं। विभिन्न संस्कृतियों में लोगों के व्यक्तित्व को समझने के लिए यह मॉडल अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है। विभिन्न संस्कृतियों भाषाओं में उपलब्ध व्यक्तित्व विशेषकों के विश्लेषण से यह मॉडल संगत है और विभिन्न विधियों से किए गए व्यक्तित्व के अध्ययन भी मॉडल का समर्थन करते हैं। अतएव, आज व्यक्तित्व के अध्ययन के लिए यह मॉडल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण आनुभविक उपागम माना जाता है।

प्रश्न 5.
फ्रायड द्वारा प्रस्तावित व्यक्तित्व-विकास की पंच अवस्था सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
फ्रायड ने व्यक्तित्व-विकास का एक पंच अवस्था सिद्धान्त प्रस्तावित किया जिसे मनोलैंगिक विकास के नाम से भी जाना जाता है। विकास की उन पाँच अवस्थाओं में से किसी भी अवस्था पर समस्याओं के आने से विकास बाधित हो जाता है और जिसका मनुष्य के जीवन पर दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है। फ्रायड द्वारा प्रस्तावित पंच अवस्था सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –

1. मौखिक अवस्था:
एक नवजात शिशु की मूल प्रवृत्तियाँ मुख पर केन्द्रित होती हैं। यह शिशु का प्राथमिक सुख प्राप्ति का केन्द्र होता है। यह मुख ही होता है जिसके माध्यम से शिशु भोजन ग्रहण करता है और अपनी भूख को शांत करता है। शिशु मौखिक संतुष्टि भोजन ग्रहण, अंगूठा चूसने, काटने और बलबलाने के माध्यम से प्राप्त करता है। जन्म के बाद आरम्भिक कुछ महीनों की अवधि में शिशुओं में अपने चतुर्दिक जगत के बारे में आधारभूत अनुभव और भावनाएँ विकसित हो जाती हैं। फ्रायड के अनुसार एक व्यस्क जिसके लिए यह संसार कटु अनुभवों से परिपूर्ण हैं, संभवतः मौखिक अवस्था का उसका विकास कठिनाई से हुआ करता है।

2. गुदीय अवस्था:
ऐसा पाया गया है कि दो-तीन वर्ष की आयु में बच्चा समाज की कुछ माँगों के प्रति अनुक्रिया सीखता है। इनमें से एक प्रमुख माँग माता-पिता की यह होती है कि बालक मूत्रत्याग एवं मलत्याग जैसे शारीरिक प्रकार्यों को सीखे। अधिकांश बच्चे एक आयु में इन क्रियाओं को करने में आनंद का अनुभव करते हैं। शरीर का गुदीय क्षेत्र कुछ सुखदायक भावनाओं का केन्द्र हो जाता है। इस अवस्था में इड और अहं के बीच द्वंद्व का आधार स्थापित हो जाता है। साथ ही शैशवास्था की सुख की इच्छा एवं वयस्क रूप में नियत्रित व्यवहार की माँग के बीच भी द्वंद्व का आधार स्थापित हो जाता है।

3. लैंगिक अवस्था यह अवस्था जननांगों पर बल देती है। चार-पांच वर्ष की आयु में बच्चे पुरुषों एवं महिलाओं के बीच का भेद अनुभव करने लगते हैं। बच्चे कामुकता के प्रति एवं अपने माता-पिता के बीच काम संबंधों के प्रति जागरूक हो जाते हैं। इसी अवस्था में बालक इडिपस मनोग्रंथि का अनुभव करता है जिसमें अपनी माता के प्रति प्रेम और पिता के प्रति आक्रामकता सन्निहित होती है तथा इसके परिणामस्वरूप पिता द्वारा दंडित या शिश्नलोप किए जाने का भय भी बालक में कार्य करता है। इस अवस्था में एक प्रमुख विकासात्मक उपलब्धि यह है कि बालक अपनी इस मनोग्रंथि का समाधान कर लेता है। वह ऐसा अपनी माता के प्रति पिता के संबंधों को स्वीकार करके उसी तरह का व्यवहार करता है।

बालिकाओं में यह इडिपस ग्रंथि थोड़े भिन्न रूप में घटित होती है। बालिकाओं में इसे इलेक्ट्रा मनोग्रंथि कहते हैं। इसे मनोग्रंथि में बालिका अपने पिता को प्रेम करती है और प्रतीकात्मक रूप से उससे विवाह करना चाहती है। जब उसको यह अनुभव होता है कि संभव नहीं है तो वह अपनी माता का अनुकरण कर उसके व्यवहारों को अपनाती है। ऐसा वह अपने पिता का स्नेह प्राप्त करने के लिए करती है। उपर्युक्त दोनों मनोग्रंथियों के समाधान में क्रांतिक घटक समान लिंग के माता-पिता के साथ तदात्मीकरण स्थापित करना है। दूसरे शब्दों में, बालक अपनी माता के प्रतिद्वंद्वी की बजाय भूमिका-प्रतिरूप मानने लगते हैं। बालिकाएँ अपने पिता के प्रति लैंगिक इच्छाओं का त्याग कर देती हैं और अपनी माता से तादात्म्य स्थापित करती है।

4. कामप्रसुप्ति अवस्था यह अवस्था सात वर्ष की आयु से आरंभ होकर यौवनारंभ तक बनी रहती है। इस अवधि में बालक का विकास शारीरिक दृष्टि से होता रहता है। किन्तु उसी कामेच्छाएँ सापेक्ष रूप से निष्क्रिय होती है। बालक की अधिकांश ऊर्जा सामाजिक अथवा उपलब्धि-संबंधी क्रियाओं में व्यय होती है।

5. जननांगीय अवस्था इस अवस्था में व्यक्ति मनोलैंगिक विकास में परिपक्वता प्राप्त करता है। पूर्व की अवस्थाओं में कामेच्छाएँ, भय और दमित भावनाएँ पुनः अभिव्यक्त होने लगती हैं। लोग इस अवस्था में विपरीत लिंग के सदस्यों से परिपक्व तरीके से सामाजिक और काम संबंधी आचरण करना सीख लेते हैं। यदि इस अवस्था की विकास यात्रा में व्यक्ति को अत्यधिक दबाव अथवा. अत्यासक्ति का अनुभव होता है तो इसका कारण विकास की किसी आरम्भिक अवस्था पर उसका स्थिरण हो सकता है।

प्रश्न 6.
अहं रक्षा युक्तियों के साथ अन्य रक्षा युक्तियों की भी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
फ्रायड के अनुसार मनुष्य के अधिकांश व्यवहार दुश्चिता के प्रति उपयुक्त समायोजन अथवा पलायन को प्रतिबिम्बित करते हैं। अतः, किसी दुश्चिताजनक स्थिति का अहं किस ढंग से सामना करता है, यही व्यापक रूप से निर्धारित करता है कि लोग किस प्रकार से व्यवहार करेंगे। फ्रायड का विश्वास था कि लोग दुश्चिता का परिहार रक्षा युक्तियाँ विकसित करके करते हैं।

ये रक्षा युक्तियाँ अहं को मूल प्रवृत्तिक आवश्यकताओं के प्रति जागरुकता से रक्षा करती हैं। इस प्रकार रक्षा युक्तियाँ वास्तविक को विकृत कर दुश्चिता को कम करने का एक तरीका है। यद्यपि दुश्चिता के प्रति जाने वाली कुछ रक्षा युक्तियाँ सामान्य एवं अनुकूल होती हैं तथापित ऐसे लोग जो इन युक्तियों का उपयोग इस सीमा तक करते हैं कि वास्तविकता वास्तव में विकृत हो जाती है तो वे विभिन्न प्रकार के कुसमायोजक व्यवहार विकसित कर लेते हैं।

विभिन्न प्रकार की रक्षा युक्तियाँ निम्नलिखित हैं –

1. दमन-यह रक्षा युक्ति सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। इसमें दुश्चिता उत्पन्न करने वाले व्यवहार और विचार पूरी तरह चेतना के स्तर से विलुप्त कर दिए जाते हैं। जब लोग किसी भावना अथवा इच्छा का दमन करते हैं तो वे उस भावना अथवा इच्छा के प्रति बिल्कुल ही जागरूक नहीं होते हैं। इस प्रकार जब कोई व्यक्ति कहता है कि “मैं नहीं जानता हूँ कि मैंने यह क्यों नहीं किया है”, तो उसका यह कथन किसी दमित भावना अथवा इच्छा को अभिव्यक्त करता है।

2. प्रक्षेपण-प्रक्षेपण में लोग अपने विशेषकों को दूसरों पर आरोपित करते हैं। एक व्यक्ति जिसमें प्रबल आक्रामक प्रवृत्तियाँ हैं वह दूसरे लोगों में अत्यधिक रूप से अपने प्रति होने वाले व्यवहारों को आक्रामक देखता है। अस्वीकरण में एक व्यक्ति पूरी तरह से वास्तविकता को स्वीकार करना नकार देता है। उदाहरण के लिए एच. आई. वी./एड्स से ग्रस्त रोगी पूरी तरह से अपने रोग को नकार सकता है।

3. प्रतिक्रिया निर्माण-इसमें व्यक्ति अपनी वास्तविक भावनाओं और इच्छाओं के ठीक विपरीत प्रकार का व्यवहार अपनाकर दुश्चिता से रक्षा करने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, प्रबल कामेच्छा से ग्रस्त कोई व्यक्ति यदि अपनी ऊर्जा का धार्मिक क्रिया-कलापों में लगाते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करता है तो ऐसा व्यवहार प्रतिक्रिया निर्माण का: दाहरण होगा।

4. युक्तिकरण-इसमें एक व्यक्ति अपनी तर्कहीन भावनाओं और व्यवहारों को तर्कयुक्त और स्वीकार्य बनाने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा में निम्नस्तरीय निष्पादन के बाद कुछ नए कलम खरीदता है तो इस युक्तिकरण का उपयोग करता है कि “वह आगे की परीक्षा में नए कलम के साथ उच्च स्तर का निष्पादन प्रदर्शित करेगा।”

जो लोग रक्षा युक्तियों का उपयोग करते हैं वे प्रायः इसके प्रति जागरूक नहीं होते हैं अथवा इससे अनभिज्ञ होते हैं। प्रत्येक रक्षा युक्ति दुश्चिता द्वारा उत्पन्न असुविधाजनक भावनाओं से अहं के बर्ताव करने का एक तरीका है। रक्षा युक्तियों की भूमिका के बारे में फ्रायड के विचारों के समक्ष अनेक प्रश्न उत्पन्न किए गए हैं। उदाहरण के लिए, फ्रायड का यह दावा कि प्रक्षेपण के उपयोग से दुश्चिता और दबाव कम होता है, अनेक अध्ययनों के परिणामों द्वारा समर्थित नहीं है।

प्रश्न 7.
बहुबुद्धि सिद्धांत का वर्णन करें।
उत्तर:
बहुबुद्धि सिद्धांत का प्रतिपादन होवार्ड गार्डनर (Howard Gardner, 1993, 1999) द्वारा किया गया। इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि कोई एकाकी क्षमता नहीं होती है बल्कि इसमें विभिन्न प्रकार की सामान्य क्षमताएँ सम्मिलित होती हैं। इन क्षमताओं को गार्डनर ने अलग-अलग बुद्धि प्रकार कहा है। ऐसे नौ प्रकार के बुद्धि की चर्चा उन्होंने अपने सिद्धांत में किया है और कहा है कि ये सभी प्रकार एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं। परंतु ये बुद्धि के सभी प्रकार आपस में अंतःक्रिया (Intractions) करते हैं और किसी समस्या के सामाधान में एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।

1. भाषाई बुद्धि (Linguistic intelligence):
इससे तात्पर्य भाषा के उत्तम उपयोग एवं उत्पादन की क्षमता से होता है। इस क्षमता के पर्याप्त होने पर व्यक्ति भाषा का उपयोग प्रवाही (fluently) एवं लचीली (flexible) ढंग से कर पाता है। जिन व्यक्तियों में यह बुद्धि अधिक होती है, वे शब्दों के विभिन्न अर्थ एवं उसका उपयोग के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और अपने मन में एक उत्तम भाषाई प्रतिमा (linguistic image) उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं।

2. तार्किक-गणितीय बुद्धि (Logical-Mathematical intelligence):
इससे तात्पर्य समस्या समाधान (problem solving) एवं वैज्ञानिक चिंतन करने की क्षमता से होता है। जिन व्यक्तियों में ऐसी बुद्धि की अधिकता होती है, वे किसी समस्या पर तार्किक रूप से तथा आलोचनात्मक ढंग से चिंतन करने में सक्षम होते हैं। ऐसे लोगों में अमूर्त चिन्तन करने की क्षमता अधिक होती है तथा गणितीय समस्याओं के समाधान में काफी उत्तम ढंग से विभिन्न तरह के गणितीय संकेतों एवं चिन्हों (signs) का उपयोग करते हैं।

3. संगीतिय बुद्धि (Musical intelligence):
इससे तात्पर्य संगीतिय लय (thythms) तथा पैटर्न्स (patterms) के बोध एवं उसके प्रति संवेदनशीलता से होती है। इस तरह की बुद्धि पर व्यक्ति उत्तम ढंग से संगीतिय पैटर्न को निर्मित कर पाता है। वैसे लोग जिनमें इस तरह की बुद्धि की अधिकता होती है, वे आवाजों के पैटर्न, कंपन, उतार-चढ़ाव आदि के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और नए-नए पैटर्न उत्पन्न करने में भी सक्षम होते हैं।

4. स्थानिक बुद्धि (Spatial intelligence):
इससे तात्पर्य विशेष दृष्टि प्रतिमा तथा पैटर्न को सार्थक ढंग से निर्माण करने की क्षमता से होता है। इसमें व्यक्ति को अपनी मानसिक प्रतिमाओं को उत्तम ढंग से उपयोग करने तथा परिस्थिति की माँग के अनुरूप उपयोग करने की पर्याप्त क्षमता होती है। जिन व्यक्तियों में इस तरह की बुद्धि अधिक होती है, वे आसानी से अपने मन में स्थानिक वातावरण उपस्थित कर सकने में सक्षम हो पाते हैं। सर्जन, पेंटर, हवाईजहाज चालक, आंतरिक . सजावट कर्ता (interior decorators) आदि में इस तरह की बुद्धि अधिक होती है।

5. शारीरिक गतिबोधक बुद्धि (Bodily kinesthetic intelligence):
इस तरह की बुद्धि में व्यक्ति अपने पूरे शरीर या किसी अंग विशेष में आवश्यकतानुसार सर्जनात्मक (Creative) एवं लचीले (flexible) ढंग से उपयोग कर पाता है। नर्तकी, अभिनेता, खिलाड़ी, सर्जन तथा व्यायामी (gymanst) आदि में इस तरह की बुद्धि अधिक होती है।

6. अंतर्वैयक्तिक बुद्धि (Interpersonal intelligence):
इस तरह की बुद्धि होने पर दूसरों के व्यवहार एवं अभिप्रेरक के सूक्ष्म पहलूओं को समझने की क्षमता व्यक्ति में अधिक होती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों के व्यवहारों, अभिप्रेरणाओं एवं भावों को उत्तम ढंग से समझकर उनके साथ एक घनिष्ठ संबंध बनाने में सक्षम हो पाते हैं। ऐसी बुद्धि मनोवैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं धार्मिक नेताओं में अधिक होती है।

7. अंतरावैयक्तिक बुद्धि (Intrapersonal intelligence):
इस तरह की बुद्धि में व्यक्ति अपने भावों, अभिप्रेरकों तथा इच्छाओं को समझता है। इसमें व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों एवं सीमाओं का उचित मूल्यांकन की क्षमता विकसित कर लेता है और इसका उपयोग वह अन्य लोगों के साथ उत्तम संबंध बनाने में सफलतापूर्वक उपयोग करता है। दार्शनिकों (philosophers) तथा धार्मिक साधु-संतों में इस तरह की बुद्धि अधिक होती है।

8. स्वाभाविक बुद्धि (Naturalistic intelligence):
इससे तात्पर्य स्वाभाविक या प्राकृतिक वातावरण की विशेषताओं या प्राकृतिक वातावरण की विशेषताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की क्षमता से होती है। इस तरह की बुद्धि की अधिकता होने पर व्यक्ति के विभिन्न प्राणियों, वनस्पतियों एवं अन्य संबद्ध चीजों के बीच सूक्ष्म विभेदन कर पाता है तथा उनकी विशेषताओं की प्रशंसा कर पाता है। इस तरह की बुद्धि किसानों, भिखारियों, पर्यटकों (tourist) तथा वनस्पतियों (botanists) में अधिक पायी जाती है।

9. अस्तित्ववादी बुद्धि (Naturalist intelligence):
इससे तात्पर्य मानव अस्तित्व, जिंदगी, मौत आदि से संबंधित वास्तविक तथ्यों की खोज की क्षमता से होता है। इस तरह की बुद्धि दार्शनिक चिंतकों (philosopher thinkers) में काफी होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि गार्डनर के बहुबुद्धि सिद्धान्त में कुल नौ तरह की बुद्धि की व्याख्या की गयी है, जिस पर मनोवैज्ञानिक का शोध अभी जारी है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
पी. एफ. अध्ययन को किसने विकसित किया?
(A) रोजेनज्विग
(B) हार्पर
(C) फ्राम
(D) ओइजर
उत्तर:
(A) रोजेनज्विग

प्रश्न 2.
एक प्रेक्षक की रिपोर्ट में जो प्रदत्त होते हैं, वे कैसे प्राप्त होते हैं?
(A) साक्षात्कार से
(B) प्रेक्षण और निर्धारण से
(C) नाम-निर्देशन से
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 3.
संरचित साक्षात्कारों में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?
(A) सामान्य प्रश्न
(B) अत्यंत विशिष्ट प्रकार के प्रश्न
(C) अनेक सामान्य प्रश्न
(D) उपर्युक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(B) अत्यंत विशिष्ट प्रकार के प्रश्न

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में किसका व्यक्तित्व के मूल्यांकन के लिए बहुत अधिक उपयोग किया जाता है?
(A) प्रेक्षण
(B) मूल्यांकन
(C) नाम निर्देशन
(D) स्थितिपरक परीक्षण
उत्तर:
(A) प्रेक्षण

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में किस विधि का उपयोग प्रायः समकक्षी मूल्यांकन प्राप्त करने के लिए किया जाता है?
(A) प्रेक्षण
(B) मित्रों
(C) नाम निर्देशन
(D) उपर्युक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(C) नाम निर्देशन

प्रश्न 6.
आत्म के बारे में बच्चे की धारणा को स्वरूप देने में किनकी भूमिका अहं होती है?
(A) माता-पिता
(B) मित्रों
(C) शिक्षकों
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन-सा कथन सत्य है?
(A) व्यक्तिगत अनन्यता से तात्पर्य व्यक्ति के उन गुणों से है जो उसे अन्य दूसरों से भिन्न करते हैं।
(B) जब कोई व्यक्ति अपने नाम का वर्णन करता है तो वह अपनी व्यक्तिगत अनन्यता को उद्घाटित करता है।
(C) जब कोई व्यक्ति अपनी विशेषताओं का वर्णन करता है तो वह अपनी व्यक्तिगत अनन्यता को उद्घाटित करता है।
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(A) किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व की समझ के लिए सोद्देश्य औपचारिक प्रयास को व्यक्तित्व मूल्यांकन कहा जाता है।
(B) मूल्यांकन का उपयोग कुछ विशेषताओं के आधार पर लोगों के मूल्यांकन या उनके मध्य विभेदन के लिए किया जाता है।
(C) फ्रायड ने सुझाव दिया कि किसी व्यक्ति के बारे में मूल्यांकन करने की सर्वोत्तम विधि है उसके बारे में पूछना।
(D) मूल्यांकन का लक्ष्य लोगों के व्यवहारों को न्यूनतम त्रुटि और अधिकतम परिशुद्धता के साथ समझना और उनकी भविष्यवाणी करना होता है।
उत्तर:
(C) फ्रायड ने सुझाव दिया कि किसी व्यक्ति के बारे में मूल्यांकन करने की सर्वोत्तम विधि है उसके बारे में पूछना।

प्रश्न 9.
जोधपुर बहुपक्षीय व्यक्तित्व सूची को किसने विकसित किया?
(A) मल्लिक एवं जोशी
(B) जोशी एवं सिंह
(C) एम० पी० शर्मा
(D) ए० के० गुप्ता
उत्तर:
(A) मल्लिक एवं जोशी

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में किसके द्वारा हम अपने व्यवहार संगठित और परिवीक्षण या मॉनीटर करते हैं?
(A) आत्म-नियमन
(B) आत्म-सक्षमता
(C) आत्म-विश्वास
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(A) आत्म-नियमन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में कौन आत्म-नियंत्रण के लिए मनोवैज्ञानिक तकनीक है?
(A) अपने व्यवहार का प्रेक्षण
(B) आत्म-अनुदेश
(C) आत्म प्रबलन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 12.
व्यक्तित्व को अन्तर्मुखी तथा बर्हिमुखी प्रकारों में किसने बांटा है?
(A) क्रेश्मर
(B) युंग
(C) शेल्डन
(D) एडलर
उत्तर:
(B) युंग

प्रश्न 13.
संवेगात्मक बुद्धि (E.Q.) पद का प्रतिपादन किसने किया है?
(A) गाल्टन
(B) वुड तथा वुड
(C) सैलोवे तथा मेयर
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(C) सैलोवे तथा मेयर

प्रश्न 14.
मानवतावादी उपागम के प्रतिपादक हैं –
(A) बी० एफ० स्कीनर
(B) वुड तथा वुड
(C) जार्ज केली
(D) एब्राह्म मैस्लो
उत्तर:
(D) एब्राह्म मैस्लो

प्रश्न 15.
निम्नलिखित में मनोवृत्ति के विकास पर किसका प्रभाव अधिक पड़ता है?
(A) परिवार का
(B) बुद्धि का
(C) आयु का
(D) जाति का
उत्तर:
(A) परिवार का

प्रश्न 16.
आत्म का तात्पर्य अपने संदर्भ में व्यक्ति के –
(A) सचेतन अनुभवों की समग्रता से है
(B) चिंतन की समग्रता से है
(C) भावनाओं की समग्रता है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 17.
आत्म को किस रूप से समझा जा सकता है?
(A) आत्मगत
(B) वस्तुगत
(C) आत्मगत और वस्तुगत
(D) इनमें कोई नही
उत्तर:
(C) आत्मगत और वस्तुगत

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में किसमें व्यक्ति मुख्य रूप से अपने बारे में ही संबद्ध का अनुभव करता है?
(A) व्यक्तिगत आत्म
(B) सामाजिक आत्म
(C) पारिवारिक आत्म
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(A) व्यक्तिगत आत्म

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में किसमें सहयोग, संबंधन, त्याग, एकता जैसे जीवन के पक्षों पर बल दिया जाता है?
(A) व्यक्तिगत आत्म
(B) सामाजिक आत्म
(C) संबंधात्मक आत्म
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) सामाजिक आत्म

प्रश्न 20.
जिस प्रकार से हम अपने आपका प्रत्यक्षण करते हैं और अपनी क्षमताओं और गुणों के बारे में जो विचार रखते हैं उसी को कहा जाता है –
(A) व्यक्तिगत संप्रत्यय
(B) आत्म-धारणा
(C) पारिवारिक संप्रत्यय
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(B) आत्म-धारणा

प्रश्न 21.
टी. ए. टी. को किसने विकसित किया?
(A) फ्रायड और गार्डनर
(B) मरे और स्पैरा
(C) मॉर्गन, फ्रायड और मरे
(D) मॉर्गन और मरे
उत्तर:
(D) मॉर्गन और मरे

प्रश्न 22.
रोझ मसिलक्ष्म परीक्षण में कितने मसिलक्ष्म होते हैं?
(A) 5
(B) 10
(C) 15
(D) 20
उत्तर:
(B) 10

प्रश्न 23.
16 पी० एफ० को किसने विकसित किया?
(A) फ्रायड
(B) केटेल
(C) सिगमंड
(D) गार्डनर
उत्तर:
(B) केटेल

प्रश्न 24.
एम. एम. पी. आई. में कितने कथन हैं?
(A) 314
(B) 418
(C) 567
(D) 816
उत्तर:
(C) 567

प्रश्न 25.
वैयक्तिक विभिन्नताओं के महत्त्व का सर्वप्रथम वैज्ञानिक अध्ययन किया?
(A) कैटेल
(B) गाल्टन
(C) हल
(D) जेम्स ड्रेवर
उत्तर:
(B) गाल्टन

प्रश्न 26.
व्यक्तित्व का ‘विशेषक सिद्धांत’ द्वारा दिया गया है –
(A) फ्रायड
(B) ऑलपोर्ट
(C) सुल्लीभान
(D) कैटल
उत्तर:
(B) ऑलपोर्ट

प्रश्न 27.
‘सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नवाली’ परीक्षण द्वारा विकसित किया गया?
(A) मरे
(B) आलपोर्ट
(C) युग
(D) कैटल
उत्तर:
(D) कैटल

प्रश्न 28.
सामाजिक प्रभाव का कौन एक प्रक्रिया निम्नांकित में नहीं है?
(A) अनुरूपता
(B) अनुपालन
(C) आज्ञापालन
(D) सामाजिक श्रमावनयन
उत्तर:
(D) सामाजिक श्रमावनयन

प्रश्न 29.
नीचे दिए गए सुमेलित एकांकों पर ध्यान दें और दिये गये कूट संकेतों के आधार पर सही उत्तर दें।

  1. रोर्शाक-स्याही धब्बा परीक्षण
  2. कैटल-तस्वीर-कुंठा परीक्षण
  3. पारीख-एम० एम० पी० आई०

कूट संकेत:
(A) केवल 3 सही है
(B) 1 और 3 सही है
(C) केवल 1 सही है
(D) 1 और 2 सही है
उत्तर:
(C) केवल 1 सही है

प्रश्न 30.
मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत में व्यक्तित्व का कार्यपालक किसे कहा गया है?
(A) पराहं
(B) अहं
(C) उपाहं
(D) इनमें सभी का
उत्तर:
(B) अहं

प्रश्न 31.
रोजर्स ने अपने व्यक्तित्व सिद्धांत में केन्द्रीय स्थान दिया है –
(A) स्व को
(B) अचेतन को
(C) अधिगम को
(D) आवश्यकता को
उत्तर:
(A) स्व को

प्रश्न 32.
किस मनोवैज्ञानिक ने व्यक्तित्व को ‘अन्तर्मुखी’ एवं ‘बर्हिमुखी’ दो वर्गों में वर्गीकृत किया है?
(A) शेल्डन
(B) वाट्सन
(C) युग
(D) रोजेनमैन
उत्तर:
(C) युग

प्रश्न 33.
इड आधारित है –
(A) वास्तविकता के सिद्धांत पर
(B) नैतिकता के सिद्धांत पर
(C) सुखेप्सा के सिद्धांत पर
(D) सामाजिक सिद्धांत पर
उत्तर:
(C) सुखेप्सा के सिद्धांत पर

प्रश्न 34.
कैटेल ने व्यक्तित्व के शीलगुण गुच्छों संख्या बताया है?
(A) 12
(B) 16
(C) 18
उत्तर:
(B) 16

प्रश्न 35.
बुद्धि लब्धि के संप्रत्यय का उल्लेख सर्वप्रथम किसने किया?
(A) बिने
(B) साइमन
(C) टर्मन
(D) कैटेल
उत्तर:
(C) टर्मन

प्रश्न 36.
मानव जीवन को आँधी और तूफान की अवस्था कहा जाता है –
(A) शैशवावस्था
(B) बाल्यावस्था
(C) किशोरावस्था
(D) प्रौढ़ावस्था
उत्तर:
(C) किशोरावस्था

प्रश्न 37.
टी० ए० टी० व्यक्तित्व मापन का एक परीक्षण है –
(A) प्रश्नावली
(B) आत्म-विवरण आविष्कारिका
(C) कागज पेंसिल जाँच
(D) प्रक्षेपी
उत्तर:
(C) कागज पेंसिल जाँच

प्रश्न 38.
व्यक्ति के अचेतन प्रक्रियाओं को बाहर लाने की विधि कहलाती है –
(A) जीवन-वृत्त विधि
(B) साक्षात्कार विधि
(C) प्रक्षेपण विधि
(D) प्रश्नावलियाँ
उत्तर:
(A) जीवन-वृत्त विधि

प्रश्न 39.
निम्नांकित में कौन ‘आनन्द के नियम’ से संचालित होता है?
(A) इदं
(B) अहम
(C) पराहम
(D) अचेतन
उत्तर:
(A) इदं

प्रश्न 40.
सामूहिक अचेतन की अंतर्वस्तुओं के लिए युंग द्वारा प्रयुक्त पद, अनुभव के संगठन के लिए वंशागत प्रतिरूपों को अभिव्यक्ति करने वाली प्रतिमाएँ या प्रतीक निम्नलिखित में क्या कहलाते हैं?
(A) अभिवृत्तियाँ
(B) स्वलीनता
(C) आद्यप्ररूप
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(C) आद्यप्ररूप

प्रश्न 41.
मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत में आत्म-सम्मान का स्थान नीचे से किस स्तर पर आता हैं?
(A) दूसरा
(B) तीसरा
(C) चौथा
(D) पाँचवाँ
उत्तर:
(C) चौथा

प्रश्न 42.
मानसिक आयु के संप्रत्यय को प्रस्तावित किया है –
(A) टरमन
(B) बिने
(C) स्टर्न
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 43.
अन्ना फ्रायड के योगदानों को निम्नांकित में किस श्रेणी में रखेंगे?
(A) मनोविश्लेषणात्मक
(B) नव मनोविश्लेषणात्मक
(C) संज्ञानात्मक
(D) मानवतावादी
उत्तर:
(B) नव मनोविश्लेषणात्मक

प्रश्न 44.
‘बड़े पंच’ में निम्नलिखित में किसे शामिल नहीं किया गया है?
(A) बर्हिमुखता
(B) मनस्ताप
(C) कर्तव्यनिष्ठता
(D) प्रभुत्व
उत्तर:
(D) प्रभुत्व

Bihar Board Class 12 English Unseen Passages for Comprehension

Students who are in search of Class 12 English Answers can use Bihar Board Class 12 English Book Solutions Poem Unseen Passages for Comprehension Pdf. First check in which chapter you are lagging and then Download Bihar Board Solutions for Class 12 English Chapter Wise. Students can build self confidence by solving the solutions with the help of Bihar State Board Class 12 Solutions. English is the scoring subject if you improve your grammar skills. Because most of the students will lose marks by writing grammar mistakes. So, we suggest you to Download Bihar State Board Class 12 English Solutions according to the chapters.

Bihar Board Class 12 English Unseen Passages for Comprehension

PASSAGE NO. 1

Today, India looks like it is on course to join the league of developed nations. It is beginning to establish a reputation not just as the technology nerve centre and back-office to the world but also as its production centre. India’s secularism and democracy serve as a role model for other developing countries. There is great pride in India that easily integrates with a global economy, yet maintains a unique cultural identity.

But what is breathtaking is India’s youth. For despite being an ancient civilization that traces itself to the very dawn of human habitation. India is among the youngest countries in the world. More than half the country is under 25 years of age and more than a third is under 15 years of age.

Brought up in the shadow of the rise of India’s service industry boom, this group feels it can be at least as good as if not better than anyone else in the world. This confidence has them demonstrating a great propensity to consume, throwing away ageing ideas of asceticism and thrift. Even those who do not have enough to consume today feel that they have the capability and opportunity to do so.

The economic activity created by this combination of a growing labour pool and rising consumer demand is enough to propel India to double¬digit economic growth for decades. One Just has to look at the impact that thee baby boomers in the US had over decades of economic activity, as measured by equity and housing prices. This opportunity also represents the greatest threat to India’s future. If the youth of India are not properly educated and if there are not enough jobs created. India will have forever lost its opportunity. There are danger signs in abundance. Fifty-three per cent of students in primary schools drop out, one-third of children in Class V cannot read, three-quarters of schools do not have a functioning toilet, female literacy is applied 45 per cent and 80 million children in the age group of 6-14 do not even attend school.

India’s IT and BPO industries are engines of job creation, but they still account for only 0.2 per cent of India’s employment. The country has no choice but to dramatically industrialize and inflate its domestic economy. According to a forecast by the Boston Consulting Group, more than half of India’s unemployed within the next decade could be its educated youth. We cannot allow that to happen. India is stuck in a quagmire of labour laws that hinder employment growth, particularly in the manufacturing sector. Inflexible labour laws inhibit entrepreneurship, so it is quite ironic that laws ostensibly designed to protect labour actually discourage employment.

Answer the following questions briefly :

  1. What makes the author think India is on the verge of joining the select band of developed nations? [3]
  2. Despite the fact that India is one of the oldest civilizations why does the author say it is young? [3]
  3. The author feels that if certain problems are not arrested, India would lose its opportunity. Why would India lose this opportunity? [3]
  4. What hinders employment growth? [3]

Answers:

  1. India’s self establishment as an important nerve centre of technology and its emergence as a great production centre makes the author think that India is on the verge of joining the select band of developed nations.
  2. The author says that despite being one of the oldest civilizations India is young because more than half the country is under 25 years of age and more than a third is under 15 years of age.
  3. India would lose its opportunity if the youth of India do not get proper education and if jobs are not created for them.
  4. Complex labour laws hinder employment in the manufacturing sector and discourage business industry and employment.

PASSAGE NO. 2

The therapeutic value and healing powers of plants were demonstrated to me when I was a boy of about ten. I had developed an acute persistent abdominal pain that did not respond readily to hospital medication. My mother had taken me to the city’s central hospital on several occasions, where different drugs were tried on me. In total desperation, she took me to Egya Mensa, a well-known herbalist in my home-town in the Western province of Ghana. This man was no stranger to the medical doctors at the hospital He had earned the reputation of offering excellent help when they were confronted with difficult cases where western medicine had failed to effect a cure.

After a brief interview, not very different from what goes on daily in the consulting offices of many general medical practitioners in the United States, he left us waiting in his consulting room while he went out to the field. He returned with several leaves and the bark of a tree and one of his attendants immediately prepared a decoration. I was given a glass of this preparation, it tasted extremely bitter, but within an hour or so I began to feel relieved. The rest of the decoration was put in two large bottles so that I could take doses periodically. Within about three days, the frequent abdominal pains stopped and I recall gaining a good appetite. I have appreciated the healing powers of medicinal plants ever since.

My experience may sound unusual to those who come from urban areas of the developed world, but for those in the less affluent nations, such experiences are a common occurrence. In fact, demographic studies by various national governments and intergovernmental organisations such as the World Health Organisation (WHO) indicate that for 75 to 90 per cent of the rural populations of the world, the herbalist is the only person who handles their medical problems. In African culture, traditional medical practitioners are always considered to be influential spiritual leaders as well, using magic and religion along with medicines. Illness is handled with the individual’s hidden spiritual powers and with the application of plants that have been found especially to contain healing powers.

(a) On the basis of your reading of the passage, answer the following
questions:
(i) Why did the author’s mother take him to Egya Mensa? What did Egya Mensa do? [3]
(ii) What do the WHO demographic studies indicate? [3]
(iii) What is the status of traditional medical practitioners in African culture?
(b) Find words in the above passage which convey similar meaning as the following : [l+i+l=3]
(i) often repeated (para 1)
(ii) pertaining to changes concerning people (para 3)
(iii) rich (para 3)
Answers:
(a) (i) The author’s mother took him to Egya Mensa because different modem drags had failed to cure his abdominal pain. Egya Mensa prepared decoration of several leaves and the bark of a tree. Only a glass of the decoration relieved him of the pain.
(ii) The WHO demographic studies indicate that 75 to 90 per cent of the rural population of the world depends totally on the herbalist for their medical problems.
(iii) In African culture, the status of traditional medical practitioner is very prestigious.
(b)
(i) persistent
(ii) demographic
(iii) affluent

PASSAGE NO. 3

Early automobiles were sometimes only ‘horseless carriages’ powered by gasoline or steam engines. Some of them were so noisy that cities often made laws forbidding their use because they frightened horses. Many countries helped to develop the automobile. The internal- combustion engine was invented in Austria, and France was an early leader in automobile manufacturing. But it was in the United States after 1900 that the automobile was improved most rapidly. As a large and growing country, the United States needed cars and trucks to provide transportation in places not served by trains. Two brilliant ideas made possible the mass production of automobiles. An American inventor named Eli Whitney thought of one of them, which is known as ‘standardization of parts’. In an effort to speed up production in his gun factory. Whitney decided that each part of a gun could be made by machines so that it would be exactly like all the others of its kind.

Another American, Henry Ford, developed the idea of the assembly line. Before Ford introduced the assembly line, each car was built by hand. Such a process was, of course, very slow. As a result, automobiles were so expensive that only rich people could afford them. Ford proposed a system in which each worker would have only a portion of the wheels. Another would place the wheels on the car. And still, another would insert the bolts that held the wheels to the car. Each worker needed to learn only one or two routine tasks.

But, the really important part of Ford’s idea was to bring the work to the worker. An automobile frame, which looks like a steel skeleton, was put on a moving platform. As the frame moved past the workers, each worker could attach a single part. When the car reached the end of the line, it was completely assembled. Oil, gasoline and water were added and the car was ready to be driven away. With the increased production made possible by the assembly line, automobiles became much cheaper and more and more people were able to afford them. Today, it can be said that wheels run America. The four rubber tyres of the automobile move America through work and play.

Even though the majority of Americans would find it hard to imagine what life could be without a car, some have begun to realize that the automobile is a mixed blessing. Traffic accidents are increasing steadily and large cities are plagued by traffic congestion. Worst of all, perhaps, is the air pollution caused by the internal-combustion engine. Every car engine bums hundreds of gallons of fuel each year and pumps hundreds of pounds of carbon monoxide and other gases into the air. These gases are one source of the smog that hangs over large cities. Some of these gases are poisonous and dangerous to health, especially for someone with a weak heart or a respiratory disease.

(a) On the basis of your reading, answer the following questions :
(i) How does the standardisation of parts help make mass production possible? [3]
(ii) How does the assembly line help make mass production possible? [3]
(iii) Why do some Americans call the automobile a mixed blessing? (Two points) [3]
(b) Complete the following with a word or phrase from the reading :
(i) Another idea, developed by Henry Ford was the [1]
(ii) With the increased production made possible by the assembly line, cars [1]
(c) Pick out the words from the passage which are similar in meaning to the following [1]
(i) a mixture of smoke and fo Upara 7)

Answers:
(a) (i) Standardisation of parts helps mass production possible by allowing each part being made by machines so that it is exactly like the others of its kind.
(ii) Assembly line allows a worker to make only a portion and thereby helps mass production possible.
(iii) The Americans call the automobile a mixed blessing because on the one hand it runs America but on the other hand it causes accidents and air pollution.
(b) (i) the moving platform which brought the work to the worker.
(ii) became much cheaper.
(c) (i) smog

PASSAGE NO. 4

Smoking is the major cause of mortality with bronchogenic carcinoma of the lungs and is one of the factors causing death due to malignancies of the larynx, oral cavity, oesophagus, bladder, kidney, pancreas, stomach and uterine cervix and coronary heart diseases. Nicotine is the major substance present in the smoke that causes physical dependence. The additives do produce damage to the body for example, ammonia can result in a 100-fold increase in the ability of nicotine to enter into the smoke. Levulinic acid, added to cigarettes to mask the harsh taste of the nicotine, can increase the binding of nicotine to brain receptors, which increases the ‘kick’ of nicotine.

Smoke from the burning end of a cigarette contains over 4000 chemicals and 40 carcinogens. It has long been known that tobacco smoke is carcinogenic or cancer-causing. The lungs of smokers collect an annual deposit of 1 to 1 Vi pounds of the gooey black material, Invisible gas phase of cigarette smoke contains nitrogen, oxygen and toxic gases like carbon monoxide, formaldehyde, acrolein, hydrogen cyanide and nitrogen oxides. These gases are poisonous and in many cases interfere with the body’s ability to transport oxygen.

Like many carcinogenic compounds, they can act as tumour promoters or tumour initiators by acting directly on the genetic make-up of cells of the body leading to the development of cancer. During smoking within the first 8-10 seconds, nicotine is absorbed through the lungs and quickly ‘moved’ into the bloodstream and circulated throughout the brain. Nicotine can also enter the bloodstream through the mucous membranes that line the mouth (if tobacco is chewed) or nose (if snuff is used) and even through the skin. Our brain is made of billions of nerve cells. They communicate with each other by chemical messengers called neurotransmitters.

Nicotine is one of the most powerful nerve poisons and binds stereo-selectively to nicotinic receptors located in the brain, autonomic ganglia, the medulla, neuro-muscular junctions. Located throughout the brain, they play a critical role in cognitive processes and memory? The nicotine molecule is shaped like a neurotransmitter called acetylcholine which is involved in many functions including muscle movement, breathing, heart-rate, learning and memory. Nicotine, because of

(i) Smoking is the major cause of mortality because it causes cancer in various parts of the body like the lungs, the mouth, the larynx, etc. It also causes the blockage of arteries resulting in heart diseases.
(ii) Nicotine in a cigarette makes the people addicted to it because it causes physical dependence.
(iii) Neurotransmitters are actually chemical messengers which help millions of nerve cells to communicate with one another.
(iv) Nicotine produces toxic effects by attaching itself to the acetylcholine sites of the brain.

PASSAGE NO. 5

I stopped to let the car cool off and to study the map. I had expected to be near my objective by now, but everything still seemed alien to me. I was only five when my father had taken; me abroad, and that was eighteen years ago. When my mother had died after a tragic accident, he did not quickly recover from the shock of loneliness. Everything around him was full of her presence, continually reopening the wound. So he decided to emigrate. In the new country, he became absorbed in making a new life for the two of us so that he gradually ceased to grieve. He did not marry again and I was brought up without a woman’s care, but I lacked for nothing for he was both father and mother to me. He always meant to go back one day, but not to stay. His roots and mine had become too firmly embedded in the new land. But he wanted to see the old folk again and to visit my mother’s grave. He became mortally ill a few months before we had planned to go and when he knew that he was dying, he made me promise to go on my own.

I hired a car the day after landing and bought a comprehensive book of maps, which I found most helpful on the cross country journey, but which I did not think I should need on the last stage. It was not that I actually remembered anything at all. But my father had described over and over again what we should see every milestone, after leaving the nearest town, so that I was positive I should recognize it is familiar territory. Well, I had been wrong, for I was now lost.

(a) On the basis of your reading of the passage, answer the following questions:
(i) Why did the author’s father emigrate? [3]
(ii) Why did the author not feel the absence of his mother after her death? [3]
(iii) Why did the author’s father want to go back to his old village? [3]
(iv) Why had the author come back to the land of his birth? [3]
Answers:
(a) (i) After the death of the author’s mother in an accident, the author’s father suffered from the shock of loneliness. Everything around him reminded him of her presence and memories. So he migrated.
(ii) The author did not feel the absence of his mother after her death because his father played the role of his mother also.
(iii) The author’s father wanted to go back to his old village because he wanted to see the old folk again and visit his wife’s grave.
(iv) The author came back to the land of his birth because he had promised his dying father to do so.

PASSAGE NO. 6

Years ago, when I was a young Assistant Professor at the Harvard Business School, I thought the role of business schools was to develop future managers who knew all about the various functions of business, to teach them how to define problems succinctly, analyse these problems and identify alternatives in a clear, logical fashion and finally, to teach them to make an intelligent decision. My thinking gradually became tempered by living and working outside the United States and by serving seven years as a college president. During my presidency of Babson College. I added several additional traits of skills that I felt a good manager must possess.

One must have the ability to express oneself in a clear articulate fashion. Good oral and written communication skills are absolutely essential if one is to be an effective manager. One must possess that intangible set of qualities called leadership skills. To be a good leader, one must understand and be sensitive to people and be able to inspire them towards the achievement of a common goal. Effective managers must be broadminded human beings who not only understand the world of business but also have a sense of the cultural, social, political, historical and (particularly today) the international aspects of life and society. This suggests that exposure to the liberal arts and humanities should be part of every manager’s education.

A good manager in today’s world must have the courage and a strong sense of integrity. He or she must know where to draw the line between the right and the wrong.

(a) On the basis of your reading of the passage, answer the following questions:
(i) What did the author think about the business schools in the
(v) How can the companies help their managers to be effective ? [12]
(b) Find words in the above passage which convey similar meaning as the following : [ 1 + 1 + 1 = 3]
(i) briefly and clearly (para 1)
(ii) modified (para 2)
(iii) that cannot be grasped (para 3)
Answers:
(a) (i) In the beginning, the other thought that the role of business schools was to produce future managers who knew about various functions of business, to teach them to define and analyse problems and identify alternatives.
(ii) An efficient manager must have good oral and written communication skills, leadership skills and sense of judgement.
(iii) The author was an Assistant Professor at the Harvard Business School.
(b) (i) Succinctly
(ii) added
(iii) intangible

PASSAGE NO. 7

Doing housework, taking care of children and carrying out assorted jobs for a husband are work just as much as is performing paid employment in an office or factory. Ignore this is to do a disservice to women in the labour force. The reality of housework that women’s work in the home is average 56 hours per week for the lull time homemaker and 26 hours per week for the employed wife/mother. Husbands and children barely increase their contribution to housework and child care when the wife/mother is in the labour force. As a result, the employed woman gives up most of her leisure carry out the responsibilities of family life.

We realize that it may sound strange to hear women’s activities in the home, called work. Since women, who do housework and take care of children receive no salary wages; homemaking is not considered ‘work’. Economists have finally helped us recognise the importance of women’s work in the family by estimating the monetary value of home-making. These estimates range from $4,705 (1968) through $8200 (1972) to over $13,000 per year in 1973 depending on whether the work of the home-maker is considered equivalent to an unskilled, skilled or a professional worker, respectively. For example, is child care comparable to babysitting at $ 0.75 per hour, to a nursery school aid at $ 3 per hour, or to the care of a child psychologist at $ 30 per hour?

Some people have proposed that the solution to the problems of the employed housewife would be simply to pay women for being housewives. Hence women with heavy family responsibilities would not have to enter the labour force in order to gain income for themselves and or their families. This is not a solution for many reasons wages provide income, but they do not remedy the isolating nature of the work itself nor the negative attitudes housewives themselves have towards housework (but not towards child care).

Wages for housework would reinforce occupational stereotyping by freezing women into their traditional roles. Unless women and men are paid equally in the labour form and there is no division of labour based on sex. women’s work in the home will have no value. Since it is not clear what constitutes housework, and we know that housework standards vary greatly, it would be difficult to know how to reward it. Pay for housework might place home-makers (mainly wives) in the difficult position of having their work assessed by their husbands, while in the case of single home-makers, it is not clear who would do the assessing.

Wages for housework, derived from spouse payments overlook the contribution women make to society by training children to be good citizens and assume that their work is only beneficial to their own families. Finally, payment for housework does not address itself to the basic reason why women with family responsibilities work; to increase family income over that which the employed husband father makes. Also, single women with family responsibilities work because they are the family breadwinners. On the basis of your reading of the passage, answer the following questions as briefly as possible :

(i) Why is an employed woman deprived of the joys of leisure? [3]
(ii) Why is home-making not considered at par with paid work? [3]
(iii) When will the women’s work in the home acquire recognition?
(iv) Why should the women working at home be not considered
equal to those working in offices or business centres? [3]
Answers:
(i) An employed woman is deprived of the joys of leisure because she has to work outside and in her home. Her husband and children contribute little to the housework and the employed woman manages it is her leisure.
(ii) Home-making is not considered at par with paid work because it is not clear what constitutes housework and how it should be assessed and rewarded.
(iii) The women’s work in the home will acquire recognition only when women are paid equally in the labour force and are not discriminated on the basis of gender.
(iv) The women working at home are not considered equal to those working in offices or business centres because the latter are paid and serve as bread earners.

PASSAGE NO. 8

In democratic countries, intelligence is still free to ask whatever question it chooses. This freedom, it is almost certain, will not survive another war. Educationist should, therefore, do all they can while there is yet time to build up in the minds of their charges, a habit of resistance to suggestion. If such resistance is not built up, the men and women of the next generation will be at the mercy of that skilful propagandist who contrives seize the instruments of information and persuasion., Resistance to suggestion can be built up in two ways. First, children can be taught to rely on their own internal resource and not to depend on incessant stimulation from without. This is doubly important. Reliance on external stimulation is bad for the character.

Moreover, such stimulation is the stuff with which propagandists bait their books, the jam in which dictators counsel their ideological pills. An individual who relies on external stimulation thereby exposes himself to the full force of whatever propaganda is being made in his neighbourhood. For a majority of people in the west, purposeless reading, purposeless listening to radios, purposeless looking at films have become an addiction, psychological equivalents alcoholism and morphinism. Things have come to such a pitch that there are many millions of men and women who suffer real distress if they are cut-off for a few days even a few hours from newspapers, radio and music or movie pictures. Like an addict to a drug, they have to indulge their vice not because their indulgence, gives them any real pleasure but because, unless they indulge they feel painful, subnormal and incomplete.

Even by intelligent people, it is now taken for granted that such psychological addictions are inevitable and even desirable, that there is nothing to be alarmed at in the fact that the majority of civilized men and women are now incapable of living on their own spiritual resources, but have become exactly dependent on incessant stimulation from without. How can children be taught to rely upon their own spiritual resources and resist the temptation to become reading addicts, hearing addicts, seeing addicts? First of all, they can be taught how to entertain themselves, by making things themselves, by playing musical instruments, by purposeful study, by scientific observation and by the practice of some art and so on. Based on your understanding of the passage answer the following questions:

(i) What does the author want educationists to do? [3]
(ii) Mention the two ways in which resistance to suggestion can be built up. [3]
(iii) What does the author mean by psychological addiction ? Give an example. [3]
(iv) How can children be saved from becoming reading, hearing or seeing addicts?
Answers:
(i) The author wants educationist to develop a habit of resistance to suggestion so that young men and women do not become prey to skilful propagandists.
(ii) The resistance to suggestion can be built in the following two ways :
(a) Children should be taught to depend on their own internal resources and not on sudden stimulation from outside.
(b) They should be trained to analyse critically the various methods and devices of the propagandists.
(iii) ‘By psychological addiction’ the author means becoming totally dependent on quick outside stimulation and not depending on one’s own spiritual resources. For example, a person deprived of newspaper, radio, movies, music for a few days will feel subnormal and incomplete. He will behave like a drug addict.
(iv) Children can be saved from becoming reading, hearing or seeing addicts by being taught how to entertain themselves, make things themselves or do scientific observations.

The main aim is to share the knowledge and help the students of Class 12 to secure the best score in their final exams. Use the concepts of Bihar Board Class 12 Poem Unseen Passages for Comprehension English Solutions in Real time to enhance your skills. If you have any doubts you can post your comments in the comment section, We will clarify your doubts as soon as possible without any delay.

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Political Science Solutions Chapter 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर

Bihar Board Class 12 Political Science एक दल के प्रभुत्व का दौर Textbook Questions and Answers

एक दल के प्रभुत्व का दौर प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर खाली जगह को भरो –
(क) 1952 के पहले आम चुनाव में लोकसभा के साथ-साथ ………… के लिए भी चुनाव कराए गए थे। (भारत के राष्ट्रपति पद/राज्य विधान सभा/राज्य सभा/प्रधानमंत्री)
(ख) ………….. लोकसभा के पहले आम चुनाव 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही (प्रजा सोशलिष्ट पार्टी/भारतीय जनसंघ/भारतीय कम्पयुनिष्ट पार्टी/भारतीय जनता पार्टी।
(ग) …………. स्वतंन्त्र पार्टी का एक निर्देशक सिद्धान्त था। कामगार तबके का हित / रियासतों का बचाव/राज्य के नियन्त्रण से मुक्त अर्थ व्यवस्था/संघ के भीतर राज्यों को स्वायत्तता)।
उत्तर:
(क) राज्य विधान सभा
(ख) कम्युनिष्ट पार्टी
(ग) राज्यों के नियन्त्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था

एक दल के प्रभुत्व का दौर Bihar Board प्रश्न 2.
यहाँ दो सूचियाँ दी गई है। पहले में नेताओं के नाम दर्ज हैं व दूसरे में दलों के। दोनों सूचियों में मेल बैठाएँ।Ek Dal Ke Prabhutv Ka Daur Bihar Board

उत्तर:
Bihar Board 12th Political Science Syllabus

Bihar Board 12th Political Science Syllabus प्रश्न 3.
एकल पार्टी के प्रभुत्व के बारे में यहाँ चार बयान लिखे गए हैं। प्रत्येक के आगे सही या गलत का चिह्न लगाएँ।
(क) विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनीतिक दल का अभाव एकल पार्टी-प्रभुत्व का कारण था।
(ख) जनमत की कमजोरी के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व कायम हुआ।
(ग) एकल पाटी-प्रभुत्व का सम्बन्ध के औपनिवेशिक अतीत से है।
(घ) एकल पाटी-प्रभुत्व से देश में लोकतान्त्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।
उत्तर:
(क) – सही
(ख) – गलत
(ग) – गलत
(घ) – गलत

Bihar Board Political Science प्रश्न 4.
अगर पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी की सरकार बनी होती तो किन मामलों में इस सरकार ने अलग नीति अपनाई होती? इन दोनों दलों द्वारा अपनाई गई नीतियों के बीच तीन अन्तरों का उल्लेख करें।
उत्तर:
अगर पहले आम चुनाव के बाद भारतीय जनसंघ अथवा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार बनी होती तो इन सरकारों ने किसान मजदूरों, केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्धों के बारे में, उद्योगों के बारे में व विदेश की नीति के बारे में अलग नीतियाँ बनाई होती।

भारतीय जनसंघ व भारतीय कम्युनिष्ट पार्टियों की नीतियों में निम्न तीन अन्तर प्रमुख हैं –

  1. भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी की सामाजिक आर्थिक नीतियाँ किसान व मजदूरों के हितों की पक्षधर हैं। जबकि भारतीय जनसंघ पार्टी की नीतियाँ व्यापारियों व उद्योगपतियों के हितों की पक्षधर मानी जाती है।
  2. भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी धर्म निरपेक्ष का समर्थन करती है। जबकि भारतीय जनसंघ पार्टी हिंदूवाद का समर्थन करती है।
  3. भारतीय जनसंघ पार्टी कश्मीर के अनुच्छेद 370 को हटाने का पक्षधर है जबकि भारतीय कम्युनिष्ट दल जम्मू कश्मीर को 370 के तहत विशेषदर्जा देने के पक्ष में है।

Political Science Class 12 Bihar Board प्रश्न 5.
कांग्रेस किन अर्थों में एक विचारधारात्मक गठबन्धन थी? कांग्रेस में मौजूद विभिन्न विचाराधारात्मक उपस्थितियों का उल्लेख करें।
उत्तर:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म 1885 को हुआ। उस समय यह केवल एक राजनीतिक दल ही नहीं था बल्कि यह आन्दोलन था उसमें प्रत्येक वर्ग जाति, क्षेत्र, भाषा व हित समूह के लोग शामिल थे जो वर्ग व समूह कांग्रेस से किन्हीं मुद्दों पर मतभेद रखते थे वे भी कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस के साथ कंधे से कन्धे मिलाकर चलते थे। इस प्रकार कांग्रेस एक पथदर्शक थी। प्रारम्भ में यद्यपि कांग्रेस का नेतृत्व उच्च वर्ग व वकील पेशे तक के लोगों तक सीमित था परन्तु जैसे जैसे कांग्रेस का जनाधिकार बढ़ा कांग्रेस का नेतृत्व भी विस्तृत हुआ अब इसमें खेती किसान की बुनियाद वाले तथा गाँव-गिराव की तरफ रूझान रखने वाले नेता भी उभरे।

आजादी के समय कांग्रेस एक सतरंगे सामाजिक गठबन्धन के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर छाया हुई थी। वैज्ञानिक स्तर पर भी साम्यवादी दल, समाजवादी दल, स्वतन्त्र दल, भी कांग्रेस के साथ कार्यरत थे। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वयं समाजवादी व साम्यवादी चिन्तन के नजदीक थे। गांधीजी को भी अराजकतावादी व साम्यवादी कहा गया। सुभाषचन्द्र भी एक साम्यवादी विचारधारा के थे उन्होंने फारवर्ड ब्लॉक पार्टी बनायी। इस अर्थ में कांग्रेस एक विचारात्मक गठबन्धन थी। कांग्रेस ने अपने अंदर क्रान्तिकारी, शान्तिवाद, मनुदारवादी, उग्रवादी, अर्थात् नर्मपंथी, दक्षिणपंथी, वामपंथी हर धारा के लोग समूह में थे। इस प्रकार कांग्रेस एक ऐसा समुद्र था जिसमें अनेक नदियों का संगम था। कांग्रेस में विलय व समायोजन की संस्कृति थी।

Bihar Board Class 12 Political Science Syllabus प्रश्न 6.
क्या एकल पार्टी प्रभुत्व की प्रणाली का भारतीय राजनीति के लोकतान्त्रिक चरित्र पर खराब असर हुआ?
उत्तर:
एक लम्बे समय तक भारतीय राजनीति में एक राजनीतिक दल अर्थात् कांग्रेस का प्रभुत्व रहा जिसका कारण प्रमुख रूप से यह था कि अन्य कोई दूसरा दल कांग्रेस के समान रूप में उभर कर नहीं आया। दूसरा कारण यह भी था कि कांग्रेस के पास राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत साथ थी व पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी व सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों का नेतृत्व रहा जिन्होंने देश, को मजबूत किया बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दी। 1952 से लेकर 1967 तक 1971 से लेकर 1977 तक 1980 से लेकर 1989 तक 1991 से 1996 तक कांग्रेस का प्रभाव रहा है अर्थात् प्रभुत्व रहा है।

भारतीय राजनीति में कांग्रेस के एकल दल के रूप में प्रभुत्व के भारतीय राजनीति पर निश्चित रूप से कुछ नकारात्मक प्रभाव अवश्य पड़े हैं जिनमें से प्रमुख रूप से निम्न हैं –

  1. राजनीतिक दलों में आन्तरिक प्रजातन्त्र का अभाव।
  2. केन्द्रवाद का विकास
  3. संविधान के प्रावधानों, (जैसे अनुच्छेद 356 का प्रयोग 356 का प्रयोग) का प्रयोग
  4. राज्यपाल के पद की गरिमा में, कभी
  5. विरोधी दलों का अभाव
  6. केन्द्र व प्रान्तों में टकराव की राजनीति
  7. मुख्यमंत्री के पद की गरिमा में गिरावट
  8. क्षेत्रीय दलों का उदय
  9. क्षेत्रवाद का उदय
  10. केन्द्र व प्रान्तों के सम्बन्धों की पुनः व्याख्या की माँग।

Ek Dal Ke Prabhutv Ka Daur Question Answer Bihar Board प्रश्न 7.
समाजवादी दलों और कम्युनिष्ट पार्टी के बीच के तीन अन्तर बताएँ। इसी तरह भारतीय जनसंघ व स्वतन्त्र पार्टी के बीच के तीन अंतरों का उल्लेख करें।
उत्तर:
समाजवादी दलों व कम्युनिष्ट पार्टी एक दूसरे के काफी करीब ही थे यूँ भी कह सकते हैं कि समाजवाद एक रास्ता है। व साम्यवाद एक मंजिल है परन्तु फिर भी इनमें कई बुनियादी अन्तर है जो कि निम्न हैं –

  1. समाजवाद एक सामाजिक आर्थिक विचारधारा है जबकि साम्यवाद सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक भी है।
  2. समाजवाद सामाजिक आर्थिक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्य को बनाए रखना चाहता है बल्कि राज्य को सामाजिक आर्थिक परिवर्तन की जिम्मेवारी सौपना चाहता है जबकि साम्यवाद राज्य को समाप्त करने के पक्ष में है।
  3. संवैधानिक व शान्तिपूर्ण तरीकों से सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन के पक्ष में है जबकि साम्यवादी हिंसक क्रान्ति से व्यवस्था परिवर्तन करना चाहते हैं।

भारतीय जनसंघ व स्वतंत्र पार्टी में अन्तर:
भारतीय जनसंघ वे स्वतंत्र पार्टी में कुछ समानताएँ होते हुए भी कुछ असमानताएँ हैं जिनमें से प्रमुख निम्न हैं –

  1. जनसंघ एक हिंदूवादी राजनीतिक दल है जो हिंदूत्व का प्रचार कर भारत को एक हिंदू राज्य बनाने की पक्षधर है जबकि स्वतंत्र पार्टी एक धर्म निरपेक्ष दल है।
  2. जनसंघ समाजवादी चिन्तन व राज्य की अधिक भूमिका समर्थन करती है जबकि स्वतंत्र दल मनुष्य की स्वतंत्रता की पक्षधर है व राज्य के कम से कम हस्तक्षेप के पक्ष में है।
  3. भारतीय जनसंघ गुटनिरपेक्षता की नीति का समर्थन करती है, जबकि स्वतंत्र पार्टी भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति का विरोध करता था।

प्रश्न 8.
भारत और मैक्सिको दोनों में एक खास समय तक एक पार्टी का प्रभुत्व रहा। बताएँ कि मैक्सिको में स्थापित एक पार्टी का प्रभुत्व कैसे भारत के एक पार्टी के प्रभुत्व से अलग था?
उत्तर:
इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी का मैक्सिकों में लगभग साठ वर्षों तक शासन रहा। मूलरूप से इस दल में राजनेता और सैनिक नेता, मजदूर और किसान संगठन तथा अनेक राजनीतिक दलों सहित कई प्रकार के हितों के संगठन में शामिल थे। इस पार्टी की प्रत्येक चुनाव में जीत निश्चित की जाती थी। अन्य दल केवल नाम मात्र के लिए ही चुनाव में शामिल होते थे ताकि शासक दल (पी.आर.आई.) को वैधता मिल जाए। चुनाव में नियम इस प्रकार से तय किए जाते थे कि पी.आर.आई दल की जीत निश्चित हो। प्रत्येक प्रकार के हेरा-फेरी शासक दल के आदेश व निर्देश से की जाती थी। इस प्रकार गलत तरीकों से मैक्सिको में पी.आर.आई. दल का शासन लम्बा अर्थात् 60 वर्षों से भी अधिक तक चला।

अगर हम मैक्सिको की तुलना भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व से तुलना करते हैं तो हम दोनों में कई प्रकार के अन्तर पाते हैं जिनमें निम्न प्रमुख हैं –

  1. भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व एक साथ नहीं रहा। जबकि मैक्सिको में पी.आर.आई. का शासन लगातार 60 वर्षों तक चला।
  2. भारत में प्रत्येक बार स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव होते रहे तथा सभी के लिए प्रयोग होने वाले नियमों के द्वारा होते थे परन्तु मैक्सिको में चुनावों में हेरा-फेरी होती रही व नियमों को शासक दल की जीत निश्चित करने के लिए फेरबदल की जाती थी।
  3. भारत में प्रजातंत्रीय संस्कृति व प्रजातंत्रीय प्रणाली के तहत कांग्रेस का प्रभुत्व रहा जबकि मैक्सिको में शासक दल की तानाशाही के कारण इसका प्रभुत्व रहा।

प्रश्न 9.
भारत का एक राजनीतिक नक्शा लीजिए। जिसमें राज्यों की सीमाएँ दिखाई गई हों और उसमें निम्नलिखित को चिह्नित करें।
(क) ऐसे दो राज्य जहाँ 1952-67 के दौरान कांग्रेस सत्ता में नहीं थी।
(ख) दो ऐसे राज्य जहाँ इस पूरी अवधि में कांग्रेस सत्ता में रही।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर Part - 2 img 3

प्रश्न 10.
निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कांग्रेस के संगठनकर्ता पटेल कांग्रेस को दूसरे राजनीतिक समूह से निसंग रखकर उसे एक सर्वांगसम तथा अनुशासित राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि कांग्रेस सबको समेटकर चलने वाला स्वभाव छोड़े और अनुशासित कॉडर से युक्त एक संगुफित पार्टी के रूप में उभरे। ‘यथार्थवादी’ होने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुशासन को ज्यादा तरजीह देते थे। अगर “आंदोलन को चलाते चले जाने” के बारे में गाँधी के ख्याल हद से ज्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एक विचारधारा पर चलने वाली अनुशासित तथा धुरंधर राजनीतिक पार्टी के रूप में बदलने की पटेल धारणा भी उसी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चूक गई जिसे कांग्रेस को आने वाले दशकों में निभाना था।

(क) लेखक क्यों सोच रहा है कि कांग्रेस को एक सर्वांगसम तथा अनुशासित पार्टी नहीं होना चाहिए?
(ख) शुरुआती सालों में कांग्रेस द्वारा निभाई गई समन्वयवादी भूमिका के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
1. लेखक सरदार पटेल के विचारों के सन्दर्भ में लिख रहे हैं कि भारत में लौह पुरुष सरदार पटेल कांग्रेस को किसी अन्य रूप में देखना चाहते थे। सरदार पटेल चाहते थे कि कांग्रेस एक व्यापक समूह न बने बल्कि साम्यवादी विचारधारा वाली साम्यवादी दल व जनसंघ जैसी एक निश्चित विचारधारा वाली केडर वाली व अनुशासित दल बनें। शायद ये कांग्रेस को एक राजनीतिक दल के बजाय एक आन्दोलन के रूप में देखना चाहते थे।

2. कंग्रेस की समन्वयवादी भूमिका के अनेक उदाहरण हैं जैसे कांग्रेस समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे किसान, मजदूर, व्यापारी वकील आदि को लेकर चली अर्थात् इन सभी वर्गों से कंग्रेस को समर्थन मिला। दूसरे कांग्रेस को अनुसूचित जाति, जनजाति, ब्राह्मण, राजपूत व पिछड़ा वर्ग सभी का समर्थन मिला। इसी प्रकार प्रत्येक विचारधारा जैसे वामपन्थी व दक्षिण पन्थी विचारधारा के लोग भी कांग्रेस में शामिल थे।

Bihar Board Class 12 Political Science एक दल के प्रभुत्व का दौर Additional Important Questions and Answers

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
दलीय प्रभुत्व से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दलीय प्रभुत्व का सम्बन्ध किसी राजनीतिक व्यवस्था की उस स्थिति से है जब किसी एक दल का प्रभाव पूरी सामाजिक व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था व राजनीतिक व्यवस्था पर होता है। चुनावी राजनीति में भी अन्य दल उसके सामने कमजोर होते हैं। एक दल के प्रभुत्व के कारण अन्य कोई दल इस स्थिति में नहीं आ पाता कि वह किसी एक विशेष दल के बराबर मतदाताओं को अपनी ओर प्रत्यक्ष रूप से अथवा अप्रत्यक्ष रूप से आकर्षित कर सकें एक दल का प्रभुत्व प्रजातन्त्रीय व्यवस्था में भी सम्भव है जैसे की भारत में कांग्रेस का प्रभुत्व इसी प्रकार तानाशाही में भी एक दल का प्रभुत्व सम्भव है जैसा कि साम्यवादी देशों में व मैक्सिको में।

प्रश्न 2.
भारत मे एक दलीय प्रभुत्व का युग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
भारत में बहुदलीय प्रणाली है अर्थात् भारत में अनेक राजनीतिक दल हैं रिपोर्ट बताती है कि भारत में लगभग 1800 राजनीतिक दल हैं। जिनमें से 6 राष्ट्रीय दल हैं व 45 क्षेत्रीय दल हैं। एक दल के प्रभुत्व के युग को प्रायः 1885 से लेकर 1967 के समय को माना जाता है – क्योंकि 1885 से लेकर 1947 तक राष्ट्रीय आन्दोलन में कांग्रेस का ही प्रभुत्व रहा व 1952 में हुए प्रथम आम चुनाव से लेकर 1962 तक के सभी चुनावों में कांग्रेस को लोकसभा में सर्वाधिक सीटें प्राप्त हुई व केन्द्र व प्रान्तों में कांग्रेस का ही शासन रहा। 1967 में जाकर इस स्थिति में परिवर्तन आया जब कांग्रेस को लोकसभा में केवल साधारण बहुमत प्राप्त हुआ व कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पायी।

प्रश्न 3.
कुछ उन राजनीतिक दलों के नाम बताइये जो कांग्रेस के विरोध में विकसित हुए।
उत्तर:
कांग्रेस के विरोध में जो राजनीतिक दल विकसित हुए उनमें से मुख्य थे भारतीय जनसंघ पार्टी, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी, मुस्लिम लीग, सोसालिस्ट पार्टी व स्वतंत्र पार्टी।

प्रश्न 4.
प्रजातंत्र से आप क्या समझते हैं? प्रजातंत्र की आवश्यक शर्ते समझाइए।
उत्तर:
प्रजातंत्र सरकार का वह रूप है जिसमें अन्तिम शक्ति जनता के पास होती है। यह वह सरकार है जिसमें जनता प्रत्यक्ष रूप से अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया व निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। प्रजातंत्र एक व्यापक शब्द है जिसमें सामाजिक, नैतिक आर्थिक पक्षों में व्यापक अर्थ है। वास्तव में प्रजातंत्र राजनीतिक प्रणाली के साथ-साथ एक दृष्टिकोण है। प्रजातन्त्र की सफलता के लिए कुछ आवश्यक शर्ते हैं। जैसे नागरिक शिक्षित होने चाहिए, जागरूक होने चाहिए, स्वतंत्र न्याय पालिका होनी चाहिए व स्वतंत्र प्रेस होनी चाहिए । सामाजिक व आर्थिक समानता भी प्रजातंत्र के लिए आवश्यक शर्त है।

प्रश्न 5.
भारतीय प्रजातंत्र की प्रमुख चुनौतियाँ समझाइए।
उत्तर:
भारत ने आजादी प्राप्त करने के बाद प्रजातन्त्रीय प्रणाली को अपनाया। अनेक लोगों का विचार था कि भारत में प्रजातंत्र निम्न परिस्थितियों के कारण सफल नहीं होगा –

  1. अनपढ़ता
  2. बेरोजगारी
  3. जातिवाद व साम्प्रदायिकवाद
  4. क्षेत्रीय असन्तुलन
  5. राज्य का व्यापक क्षत्र अर्थात् राज्य का बड़ा आकार
  6. क्षेत्रवाद
  7. उपनिवेशवादी व सामान्तवादी अतीत
  8. आर्थिक पिछड़ापन
  9. राजनीतिक ट्रेनिंग का अभाव

प्रश्न 6.
चुनाव आयोग का कार्य समझाइए।
उत्तर:
भारत में चुनावी प्रक्रिया को सम्पन्न करने के लिए भारतीय संविधान में एक सदस्ययी चुनाव आयोग के गठन की व्यवस्था की गई है जिसका प्रमुख कार्य विभिन्न स्तर पर स्वतन्त्र रूप से व शान्तिपूर्ण तरीके से चुनाव सम्पन्न कराना है। इस समय चुनाव आयोग तीन सदस्ययी है। जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त है व दो अन्य चुनाव आयुक्त है। सुमेरसैन प्रथम चुनाव आयुक्त था। चुनाव आयोग का गठन 1950 में किया गया था। प्रथम आम चुनाव भारत में 1952 में हुआ था।

प्रश्न 7.
भारतीय प्रजातंत्र की प्रमुख विशेषताएँ समझाइए।
उत्तर:
यद्यपि भारत को आजादी के बाद एक साम्यवादी व उपनिवेशवादी सामाजिक आर्थिक व्यवस्था विरासत में प्राप्त हुई फिर भी भारत में प्रजातंत्रीय प्रणाली को अपनाया जिसकी निम्न प्रमुख विशेषताएँ हैं –

  1. गणतंत्रात्मक सरकार
  2. संसदीय सरकार
  3. कार्यपालिका की संसद के प्रति जवाब देही
  4. संविधान की सर्वोच्चता
  5. न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  6. निश्चित समय पर स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव
  7. मन्त्रियों की व्यक्तिगत व सामूहिक जिम्मेवारी

प्रश्न 8.
व्यस्क मताधिकार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आजादी से पहले भारत में केवल सीमित मताधिकार था अर्थात् कुछ विशेष आधारों जैसे जाति शिक्षा स्तर व व्यक्तिगत सम्बन्धों के आधार पर ही मताधिकार प्राप्त होता है। परन्तु भारत के संविधान बनाने वाले भारतीय नागरिकों को व्यस्क मताधिकार दिया जिसका अर्थ है कि प्रत्येक व्यस्क नागरिक को मताधिकार प्राप्त होगा चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, सामाजिक स्तर, आर्थिक स्तर व भाषा व लिंग व रंग का हो। किसी भी आधार पर मताधिकार मामले में भेदभाव नहीं किया जाएगा। प्रारम्भ में 21 वर्ष के व्यक्ति को वयस्क माना जाता था परन्तु अब संविधान संशोधन के बाद यह उम्र 18 वर्ष कर दी गई। वयस्क मताधिकार नागरिकों के सर्वांगिक विकास के लिए व प्रजातंत्र के सिद्धान्तों के लिए अत्यन्त आवश्यक है।

प्रश्न 9.
आजादी के बाद के प्रारम्भिक वर्षों के चुनावों में कांग्रेस की अत्यधिक सफलता के कारण समझाइए।
उत्तर:
1952 में भारत में प्रथम आम चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस को भारी सफलता मिली। कांग्रेस की इस सफलता का सिलसिला 1957 व 1962 के चुनावों में भी चलता रहा इसके निम्न प्रमुख कारण थे।

  1. भारत की आजादी का गौरव भी कांग्रेस को प्राप्त था।
  2. राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत भी कांग्रेस के साथ थी।
  3. कांग्रेस में पंडित जवाहरलाल जैसे चमत्कारिक व्यक्तित्व के नेता थे।
  4. कांग्रेस के अलावा कोई अन्य प्रभावकारी राजनीतिक दल नहीं था। प्रश्न 10. 1967 के चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व की गिरावट के प्रमुख क्या कारण थे।

उत्तर:
1967 के आम चुनाव में प्रथम बार कांग्रेस के प्रभाव में कमी आयी क्योंकि लोकसभा के चुनाव में भी कांग्रेस की काफी सीटें घटी व कई राज्यों में भी कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी है। कांग्रेस के प्रभुत्व में कमी के प्रमुख कारण थे –

  1. चमत्कारिक नेतृत्व का अभाव
  2. राष्ट्रीय आन्दोलन के समय की राजनीतिक संस्कृति का अभाव
  3. क्षेत्रवाद का उदय
  4. अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों का उदय व उनकी चुनावी सफलता
  5. गठबन्धन की राजनीति उदय

प्रश्न 11.
साम्यवादी पार्टी का उदय भारत में किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
सोवियत संघ में प्रारम्भ हुए साम्यवाद का पूरे विश्व पर प्रभाव पड़ा। भारत में साम्यवादी पार्टी का गठन 1921 में ही हो गया था। परन्तु साम्यवादी विचारधारा को भारत में जड़े पकड़ने में काफी समय लगा। भारत को साम्यवादी आन्दोलन सोवियत संघ में आन्दोलन से प्राप्त प्रेरणा का परिणाम है। 1952 व 1957 के चुनावों तक भारत में साम्यवादी पार्टी को ज्यादा सफलता नहीं मिली परन्तु 1967 के हुए चुनावों में साम्यवादी दल को केन्द्र व कुछ राज्यों में सफलता मिली। 1957 में सर्वप्रथम केरल में ई.एम.एस. नम्बूदरीपाद के नेतृत्व में साम्यवादी दल की सरकार बनी। 1957 के बाद भारत के कई अन्य महत्वपूर्ण राज्यों में इसके प्रभाव में वृद्धि हुई जैसे पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा व बिहार आदि।

प्रश्न 12.
भारत में समाजवादी पार्टी के उदय को समझाइए।
उत्तर:
भारत में समाजवादी आन्दोलन विश्व में विकसित व प्रचलित विशेषकर यूरोप में विकसित प्रक्रिया का ही हिस्सा है। आजादी से पहले ही समाजवादी विचारधारा का प्रभाव राष्ट्रीय आन्दोलन के समय ही पड़ने लगा था। आजादी के समय कांग्रेस में भी अनेक नेता समाजवादी विचारधारा से सम्बन्धित थे। कांग्रेस में ही कांग्रेस सोशलिष्ट पाटी का 1934 में गठन किया गया। 1948 में सोशलिष्ट पार्टी का गठन किया गया यद्यपि आजादी में बाद की चुनावी राजनीति समाजवादी पाटी को ज्यादा सफलता नहीं मिली। आज वास्तविक समाजवादी चिन्तन पर कोई राजनीति दल नहीं है।

प्रश्न 13.
समाजवादी आन्दोलन के कुछ प्रमुख नेताओं व चिन्तकों के नाम बताइए।
उत्तर:
समाजवाद के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह एक ऐसा टोप है जिसका अधिक प्रयोग होने से आकार बिगड़ गया है। यह कथन सही है। भारत में ही नहीं विश्व के अनेक देशों में समाजवाद एक लोकप्रिय विचारधारा रही है जिससे अनेक चिन्तक जुड़े रहे परन्तु व्यवहार में इसे सफलता नहीं मिली। भारत के प्रमुख समाजवादी चिन्तकों के नाम निम्न हैं –

  1. आचार्य पटवर्धन
  2. आचार्य नरेन्द्र देव
  3. जय प्रकाश नारायण
  4. राजनारायण
  5. अशोक मेहता
  6. राम मनोहर लोहिया

प्रश्न 14.
उन प्रमुख राजनीतिक दलों के नाम बताइए जिनकी जड़े समाजवादी आन्दोलन के साथ जुड़ी हुई हैं।
उत्तर:
समाजवादी आन्दोलन से 1950 के दशक अनेक राजनीतिक दल प्रभावित हुए। यहाँ तक कि कांग्रेस ने भी 1955 के अपने अवधि अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर समाजवाद को अपनाया था। समाजवादी विचारधारा से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक दल निम्न है –

  1. राष्ट्रीय जनता दल
  2. समाजवादी पार्टी
  3. जनता दल (संयुक्त)
  4. जनता दल (सेक्यूलर)
  5. समाजवादी जनता पार्टी

प्रश्न 15.
भारतीय जनसंघ पाटी की उत्पत्ति समझाइए।
उत्तर:
भारतीय जनसंघ पार्टी का गठन सन् 1951 में किया गया था। इसके संस्थापक अध्यक्ष श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। इसकी जड़ें व वैचारिक प्रभाव आर.एस.एस. हिंदू महासभा का है। वैचारिक तौर पर भारतीय जनसंघ पार्टी कांग्रेस व साम्यवादी दलों से अलग है। भारतीय जनसंघ पाटी की प्रथमिकताएँ निम्न हैं –

  1. एक शब्द
  2. एक संस्कृति
  3. एक भाषा
  4. एक धर्म

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारत के संविधान के निर्माताओं ने संसदीय सरकार को क्यों अपनाया?
उत्तर:
15 अगस्त, 1947 को भारत ने आजादी प्राप्त करने के बाद अपना संविधान बनाया जिसके लिए 1946 में ही एक संविधान सभा का गठन किया गया था। लम्बे विचार विमर्श की प्रक्रिया में संविधान बनाने में लम्बा समय अर्थात् 2 वर्ष 11 माह व 18 दिन का समय लगा जो 26 नवम्बर 1949 को पूरा हुआ व 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। भारतीय संविधान में संसदीय प्रजातन्त्र को अपनाया गया। भारत में संसदात्मक प्रजातन्त्र को अपनाने से दुनिया के अनेक क्षेत्रों में इस बात पर संदेह व्यक्त किया गया कि भारत में जल्द ही फिर राजनीतिक अनिश्चितता आ जाएगी क्योंकि भारत की परिस्थिति प्रजातन्त्रीय सरकार के अनुकूल नहीं है।

भारत में 70% लोग ग्रामों में रहते हैं 30% गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं। यहाँ पर बड़े पैमाने पर लोग गरीब बेरोजगार व अशिक्षित हैं। परन्तु भारत के संविधान के बनाने वालों भारत के लोगों को जिम्मेवार व शक्तिशाली बनाने के लिए ही संसदात्मक सरकार को चुना ताकि वे अपने प्रतिनिधि चुन सके जो उनके प्रति जिम्मेवार हो तथा जो उनके बीच के ही सदस्य हो भारतीयों को विकसित करने व उनमें एक नया विश्वास पैदा करने के लिए संसदात्मक सरकार को अपनाया गया।

प्रश्न 2.
भारतीय प्रजातंत्र के सम्मुख कौन-कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ थी।
उत्तर:
भारतीय संविधान के निर्माताओं ने भारतीय समाज की कमजोरियों व शक्तियों को समझ कर अच्छी तरह से सोच विचार करने के बाद ही संसदीय प्रजातन्त्र को अपनाने का निर्णय लिया उन परिस्थितियों में निश्चित रूप से भारतीय प्रजातंत्र की सफलता में निम्न चुनौतियाँ थी –

  1. गरीबी
  2. राजनीतिक शिक्षा की कमी
  3. अनपढ़ता
  4. क्षेत्रीय असन्तुलन
  5. साम्प्रदायिकता
  6. साम्यवाद
  7. आर्थिक स्रोतों के विकास का अभाव

प्रश्न 3.
1967 के चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट के प्रमुख कारण समझाइए।
उत्तर:
जैसा कि हम जानते हैं कि कांग्रेस का राष्ट्रीय आन्दोलन के समय में भी आजादी के बाद भी प्रभुत्व रहा। राष्ट्रीय आन्दोलन तो कांग्रेस के नेतृत्व में ही लड़ा गया। ऐसा कहा जाता है कि राष्ट्रीय आन्दोलन का इतिहास कांग्रेस का इतिहास है। आजादी के बाद भी कांग्रेस का चुनावी राजनीति में प्रभुत्व रहा। इसके कुछ निश्चित कारण भी थे। 1952 में प्रथम चुनाव हुआ इसमें कांग्रेस को भारी सफलता मिली। इसी प्रकार से 1957 व 1962 के चुनावों में भी कांग्रेस का प्रभुत्व केन्द्र व प्रान्त दोनों में बना रहा।

परन्तु 1967 के चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व में केन्द्र के स्तर पर भी व प्रान्तों के स्तर पर भी गिरावट आयी जिसके निश्चित रूप से कुछ स्पष्ट कारण थे। एक प्रमुख कारण यह था कि हमारी चुनावी प्रक्रिया में जिस विधि का प्रयोग किया जाता है उसमें जिस पार्टी को वोट ज्यादा प्राप्त होते हैं उसकी सीटें भी ज्यादा आती हैं उन पार्टी के अनुपात में जो चुनाव में हिस्सा लेती हैं। 1952, 1957 व 1962 के चुनावों में यही हुआ लेकिन 1967 के चुनाव में विरोधी दलों की वोट नहीं बटी जिससे कांग्रेस की वोट तो वही रही परन्तु उसकी सीटों की संख्या घट गई। इस प्रकार से 1967 में कांग्रेस का प्रभुत्व कम लगा।

प्रश्न 4.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रभुत्व का स्वरूप समझाइए।
उत्तर:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रभुत्व में स्वरूप की दिन विशेषताएं हैं –

  1. कांग्रेस के प्रभुत्व का आधार भारत में प्रजातंत्रीय संस्कृति था।
  2. कांग्रेस का प्रभाव पूरे भारत में था तथा समाज के सभी वर्गों में था।
  3. कांग्रेस दल आम जनता का एक ऐसा दल था जिस पर विशिष्ट वर्गों का भी नियन्त्रण रहा।
  4. कांग्रेस एक ऐसा समूह है जिसमें विभिन्न हित समूह व विचार धाराओं का विलय व मिश्रण पाया जाता है।
  5. कांग्रेस विशेष प्रकार का सामाजिक राजनीतिक व वैचारिक गठबन्धन है।
  6. निर्णय लेने की प्रक्रिया आम सहमति व समायोजन पर आधारित थी।
  7. कांग्रेस में चमत्कारिक व्यक्तित्व के नेता थे।

प्रश्न 5.
भारत के प्रथम आम चुनावों में चुनाव आयोग को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा।
उत्तर:
जिस समय देश आजाद हुआ उस समय का वातावरण अत्यन्त तनावपूर्ण व अनिश्चितताओं से भरा हुआ था। कुछ वर्ष पहले ही साम्प्रदायिक उन्माद के कारण भारत का विभाजन हुआ था। भारत की जनता को व्यस्क मताधिकार तो दे दिया गया परन्तु इसके प्रयोग का ज्ञान बहुत कम लोगों को था। आर्थिक पिछड़ापन भी व्याप्त था। उस वातावरण में चुनाव आयोग को स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव कराने में अनेक परेशानियाँ आयी जिनमें निम्न प्रमुख थी –

  1. चुनाव क्षेत्र की सीमाओं को निर्धारित करने थे।
  2. योग्य मतदाताओं की मतसूचियाँ तैयार करना भी एक बड़ी चुनौती थी। क्योंकि उचित रिकार्ड का अभाव था।
  3. 1952 के चुनाव में लगभग 17 करोड़ मतदाता थे जिनसे प्रत्यक्ष रूप से मतदान कराना एक बड़ा कार्य था। शायद यह विश्व का इस प्रकार का पहला चुनाव था जिसमें इतने मतदाता थे।
  4. इस चुनाव में 17 करोड़ मतदाताओं के द्वारा 489 लोकसभा के सदस्यों व 3200 विधान सभा सदस्यों का चुनाव मापा जाना था।
  5. 17 करोड़ मतदाताओं में से केवल 17% शिक्षित थे।
  6. चुनावी प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी रखने वाले चुनावी कर्मचारी बहुत कम थे। अतः यह भी एक बड़ी समस्या थी।

प्रश्न 6.
भारतीय राजनीति में कांग्रेस के प्रभुत्व को समझाइए।
उत्तर:
कांग्रेस का भारतीय राजनीति में प्रभुत्व एक वास्तविकता है। राष्ट्रीय आन्दोलन के समय में कांग्रेस ने ही आन्दोलन का नेतृत्व किया व 1947 से लेकर आज तक भी भारतीय राजनीति कांग्रेस का प्रभुत्व कायम है यद्यपि इसके प्रभाव में विभिन्न कारणों से कमी आयी है। जैसे 1977 से लेकर 1980 तक 1989 से लेकर 1991 तक व 1996 से लेकर 2000 तक। इस समय भी कांग्रेस यू.पी.ए. का सबसे बड़ा दल थे। व इसके नेतृत्व में केन्द्र की सरकार 2013 तक चली थी जिसके प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह जी हैं। कांग्रेस के प्रभुत्व का प्रमुख कारण यह है कि इसको भारत के अतीत की विरासत के साथ देखा जाता है। तथा इसके प्रारम्भिक काल में उन नेताओं का नेतृत्व रहा जिनके हाथों में राष्ट्रीय आन्दोलन की बागडोर रही थी। कांग्रेस का प्रभुत्व आज भी कायम है।

प्रश्न 7.
भारत में साम्यवादी दल की सफलता समझाइए।
उत्तर:
भारत में साम्यवादी विचारधारा का प्रभाव सोवियत संघ में मार्क्सवादी आन्दोलन व वहाँ की कम्युनिष्ट पार्टी के प्रभाव में देखा जा सकता है। भारत में कम्युनिष्ट पार्टी का गठन 1920 में किया गया। यद्यपि साम्यवादी दल एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल था जो राष्ट्रीय आन्दोलन में भागीदार था परन्तु भारत की कम्युनिष्ट पार्टी की विचारधारा व कार्यशैली कांग्रेस से मिलती थी। भारत की आजादी के बाद भी साम्यवादी दल का प्रभाव भारतीय राजनीति पर बना रहा इसकी विचारधारा कार्यक्रम कांग्रेस से अलग थी।

इसकी प्राथमिकता किसानों मजदूरों व अल्पसंख्यकों के हितों के प्रति थी। केरल व पश्चिमी बंगाल में कम्युनिष्ट पार्टी का विशेष प्रभाव रहा। केरल व त्रिपुरा में इस दल की सरकारें सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। 1964 में कम्युनिष्ट पार्टी में विभाजन हुआ। CPI (M) पार्टी चीन की कम्युनिष्ट पार्टी के प्रभाव में आ गयी। प्रथम चुनावों में अर्थात् 1952 में साम्यवादी पार्टी को कांग्रेस के बाद दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। (आज भी भारत के अनेक राज्यों में कम्युनिष्ट पार्टी का प्रभाव है विशेषकर पंजाब, बिहार, हरियाणा व आन्ध्र प्रदेश।

प्रश्न 8.
भारत में समाजवादी आन्दोलन का विकास समझाइए।
उत्तर:
1950 के दौरान भारत में समाजवादी आन्दोलन का विकास हुआ। दुनिया भर में फैली समाजवादी आन्दोलन से भारत भी प्रभावित हुए बिना न रह सका क्योंकि भारत की सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियाँ समाजवादी व्यवस्था नियम के अनुकूल थी। भारतीय संविधान का उद्देश्य भी समाजवादी सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था का निर्माण करना था। जिसको राज्य की नीति के निर्देशक के अध्याय में व्यक्त किया गया है। कांग्रेस ने अपने अन्दर 1934 में कांग्रेस सोशलिष्ट पार्टी बनाए कांग्रेस ने भवन आबादी अधिवेशन में समाजवाद के सिद्धान्तों को अपनाया। 1948 में कांग्रेस के युवा नेताओं ने अलग समाजवादी पार्टी का गठन किया। भारत में समाजवादी आन्दोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में, जयप्रकाश नारायण राम मनोहर लोहिया, अशोक मेहता व आचार्य नरेन्द्र के नाम शामिल हैं।

प्रश्न 9.
भारत में समाजवादी आन्दोलन की सफलता व असफलताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारत में समाजवादी आन्दोलन को बड़े ही जोश व उम्मीद से प्रारम्भ किया गया क्योंकि भारत की सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का हल समाजवादी व्यवस्था में ही देखा गया राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव व बाबू जय प्रकाश नारायण (जे.पी.) ने भारत में समाजवाद की नींव डाली जिसको भारत के अनेक राज्यों में सोशलिष्ट पार्टी के रूप से राजनीतिक दलों के माध्यम से लोकप्रिय बनाया गया। भारतीय संविधान सभा भी इसके प्रभाव से मुक्त नहीं थी व भारतीय संविधान के चौथे भाग में दिए गए राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अध्याय में समाजवादी सिद्धान्तों को जगह दी अर्थात् सरकारों को यह निर्देश दिया गया कि अपनी सामाजिक व आर्थिक नीतियाँ व कार्यक्रम समाजवादी विचारधारा के आधार पर बनाए।

कांग्रेस जो आजादी से पहले भी व बाद में भी भारत का एक प्रमुख राजनीतिक दल रहा है, जो समाजवादी चिन्तन के प्रभाव में रहा है अनेक कांग्रेस नेता समाजवादी विचारधारा के समर्थक रहे। भारत में समाजवादी विचारधारा के प्रभाव में ही मिश्रित अर्थव्यवस्था कायम है परन्तु राजनीतिक प्रभाव में अर्थात् चुनावी राजनीति में समाजवादी विचारधारा के समर्थकों को ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं हुई व ये दल बार-बार बनते व टूटते रहे हैं। समाजवादी विचारधारा भारत की समाजिक आर्थिक समस्याओं को भी हल करने में असफल रही।

प्रश्न 10.
भारतीय चुनावी व्यवस्था में कांग्रेस के प्रभुत्व के प्रमुख कारण क्या रहे ?
उत्तर:
भारत में प्रथम चुनाव 1952 में हुआ 1952 के बाद 1957 व 1962 तक के बाद 1957 व 1962 तक के चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व बना रहा हालांकि 1967 के चुनाव में प्रथम बार कांग्रेस का प्रभाव कम हुआ क्योंकि केन्द्र में भी सरकार बनाने के लिए इसे केवल साधारण ही प्राप्त हुआ व कई राज्यों में इसकी सरकार नहीं बन पायी। इसके निम्न प्रमुख कारण थे। ये केवल पहले तीन आम चुनावों में कांग्रेस का अत्यधिक प्रभाव रहा।

  1. राष्ट्रीय आन्दोलन के वातावरण का प्रभाव
  2. चमत्कारिक नेतृत्व का प्रभाव
  3. कांग्रेस का जन आन्दोलन स्वरूप
  4. विरोधी दलों का अभाव

प्रश्न 11.
मैक्सिको व भारत में प्रचलित एक दलीय प्रभुत्व के अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
भारत में राजनीतिक दल के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन 1885 को बोम्बे में हुआ। राष्ट्रीय आन्दोलन का नेतृत्व कांग्रेस ने ही किया 1947 में देश आजाद हुआ व 1952 में भारत में प्रथम आम चुनाव हुआ। 1952 से लेकर आज तक कांग्रेस का प्रभुत्व किसी ना किसी रूप में कायम है 1952 से लेकर आज तक केवल एक दो बाद (1977 व 1996) को छोड़कर कांग्रेस एक सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। मैक्सिको भी एक ऐसा लेटिन अमेरिकन देश है जिसमें एक दल का प्रभुत्व रहा है।

इस दल का नाम है नेशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी जिसका जन्म 1929 में हुआ पिछले 60 वर्षों से मैक्सिको की राजनीति पर नेशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी का ही प्रभुत्व है। भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व व मैक्सिकों में नेशनल रिवोलूशनरी पाटी के प्रभुत्व में एक प्रमुख अन्तर यह है कि भारत में यह प्रभुत्व प्रजातन्त्रीय प्रक्रिया मूल्यों व प्रणाली के अन्तर्गत है जबकि मैक्सिको में यह प्रभुत्व तानाशाही संस्कृति, मूल्यों व प्रणाली के तहत है। वहाँ पर चुनाव प्रणाली पूर्ण रूप से सरकार द्वारा नियन्त्रित है। जबकि भारत में चुनाव प्रणाली पूर्ण रूप से स्वतन्त्र है। मैक्सिको के चुनाव में नेशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी सदैव जीतती है जबकि भारत में कांग्रेस को हार भी देखनी पड़ी है।

प्रश्न 12.
भारतीय चुनाव आयोग का गठन व कार्य समझाइए।
उत्तर:
भारतीय संविधान में स्वतन्त्र व शान्तिपूर्ण तरीके से विभिन्न स्तरों पर चुनाव सम्पन्न कराने के लिए एक स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव आयोग के गठन की व्यवस्था है। जिसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त व दो चुनाव आयुक्त होते हैं। निश्चित रूप से चुनाव आयोग का कठिन कार्य है। मुख्य रूप से वह निम्न कार्य करती है –

  1. चुनावों की तैयारी करना
  2. चुनावों की घोषणा करना
  3. मतसूचियाँ तैयार करना
  4. E.V.M. तैयार करना
  5. मत पत्र तैयार करना
  6. चुनाव से जुड़े कर्मचारियों व अधिकारियों को प्रशिक्षण देना
  7. परिणाम घोषित करना

प्रश्न 13.
भारत में कांग्रेस के अलावा अन्य दलों का विकास समझाइए।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान ही कांग्रेस के अलावा कुछ अन्य राजनीतिक दलों का विकास होना प्रारम्भ हो गया था यद्यपि उस समय सभी राजनीतिक दलों का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करना था। भले ही उनके तरीके अलग अलग थे परन्तु मंजिल सबकी एक थी। 1906 में मुस्लिम संगठन का गठन किया गया। 1920 में साम्यवादी दल का गठन किया गया। 1923 में स्वराज्य दल का गठन किया गया। इसके बाद अन्य राजनीतिक समूहों व दबाव समूहों के रूप में उभरे जो बाद में राजनीतिक दल बन गए इनमें मुख्य रूप से हिंदू महासभा जिसके उद्देश्य के अनुरूप 1951 में भारतीय जनसंघ का गठन हुआ।

इसी प्रकार समाजवादी विचारधारा के आधार पर समाजवादी पार्टियाँ बनी। किसानों व महिलाओं व मजदूरों तथा व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले दबाव समूहों का भी राजनीतिक दलों के विकास में योगदान रहा। आजादी के बाद कांग्रेस के अलावा साम्यवादी दल, समाजवादी दल, मुस्लिम लीग अर्थात् साम्प्रदायिक दल व कांग्रेस से अलग हुए लोगों के द्वारा विभिन्न आधारों पर बनाए गए राजनीतिक दलों का अस्तित्व रहा। 1980 के दशक के बाद भारत में अनेक क्षेत्रीय दलों का विकास हुआ। इस समय भारत में 900 राजनीतिक दल जिसमें केवल 6 राष्ट्रीय दल है।

प्रश्न 14.
स्वतंत्र पार्टी का उदय समझाइए।
उत्तर:
स्वतंत्र पार्टी का जन्म 1959 में हुआ इसका नेतृत्व सी. राजगोपालाचार्य, के.एम.मुन्शी, एस.जी.रंगा और मीनुमसानी ने किया। यह पाटी अपने विशेष कार्यक्रमों के आधार पर अन्य राजनीतिक दलों से अलग थी। स्वतंत्र पाटी व्यक्तिवादी विचारधारा का समर्थन करती थी जिसके आधार पर आर्थिक क्षेत्र में सरकार को कम से कम हस्तक्षेप करना चाहिए। यह राज्य द्वारा की गई केन्द्रीयकृत नियोजन राष्ट्रीयकरण व सार्वजनिक क्षेत्र के विकास का विरोध करती थी। इस दल ने निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता देने की वकालत की। यह दल सोवियत संघ के साथ कम व संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अधिक सम्बन्धों का पक्षधर था। स्वतंत्र पाटी का समर्थन आधार उच्चवर्ग, पूँजीपति, बड़े किसान आदि थे।

प्रश्न 15.
भारत में 1980 के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक दलों का स्वरूप समझाइए।
उत्तर:
बहुदलीय प्रणाली भारतीय राजनीतिक प्रणाली की प्रमुख विशेषता रही है। यह एक ऐसी बहुदलीय व्यवस्था रही है जिसमें एक ही राजनीतिक दल अर्थात् कांग्रेस का प्रभुत्व रहा है। यद्यपि अनेक विरोधी दलों का अस्तित्व रहा है लेकिन मजबूत व स्वस्थ विरोधी दलों का अभाव रहा अर्थात् विरोधी दल विभाजित रहे। 1980 तक के वर्षों में मुख्य राजनीतिक दलों का स्वरूप राष्ट्रीय रहा है जैसे साम्यवादी दल, जनसंघ व कुछ प्रमुख समाजवादी राजनीतिक दल प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल रहा है जो केवल किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं थे।

बल्कि बड़े क्षेत्रों में इनका प्रभाव व्याप्त था। परन्तु 1980 बाद विभिन्न कारणें से विभिन्न आधारों पर क्षेत्रीय दलों का विकास प्रारम्भ हो गया। इन दलों का विकास मुख्य रूप से क्षेत्र, भाषा व क्षेत्रीय असन्तुलन की राजनीति के आधार पर हुआ। इन क्षेत्रीय दलों को जल्द ही चुनावी राजनीति में भी सफलता मिलने लगी। परिणाम स्वरूप 1996 के बाद से केन्द्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रभुत्व के तौर पर मिली जुली राजनीति के आधार पर केन्द्र में भी इनका प्रभुत्व हो गया। सरकार एन.डी.ए. की रही हो या यू.पी.ए. की सरकार रही हो इनसे क्षेत्रीय दलों का ही बोलबाला रहा है।

प्रश्न 16.
भारतीय दलीय प्रणाली की प्रमुख समस्याएँ समझाइए।
उत्तर:
भारतीय दलीय प्रणाली की निम्न प्रमुख समस्याएँ है –

  1. आन्तरिक प्रजातन्त्र का अभाव
  2. अनुशासन हीनता
  3. गुटबाजी
  4. निश्चित विचारधारा का अभाव
  5. अवसर वादिता
  6. विघटित विरोधी दल
  7. केन्द्र की राजनीति पर क्षेत्रीय दलों का प्रभुत्व
  8. राजनीतिक अस्थिरता
  9. राजनीतिक अनिश्चितता
  10. चमत्कारिक व आदर्श नेताओं का अभाव
  11. जाति के आधार पर राजनीतिक दल
  12. साम्प्रदायिकता के आधार पर राजनीतिक दल

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भारतीय राजनीति में प्रभुत्व के कारण व प्रभाव समझाइए।
उत्तर:
1885 में कांग्रेस के गठन के बाद से ही कांग्रेस का राष्ट्रीय आन्दोलन पर भी व स्वतन्त्रता के बाद राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभुत्व रहा जो 1952 में सम्पन्न हुए प्रथम चुनाव से लेकर 2004 में हुए चुनावों तक देखा जा सकता है यह अलग बात है कि कांग्रेस को चुनावी राजनीति में असफलताओं का सामना करना पड़ा जिसका कारण क्षेत्रीय दलों का विकास होना है। परन्तु यह सत्य अवश्य है कि कांग्रेस का भारतीय राजनीति पर प्रभुत्व अवश्य कायम है जिसके प्रमुख कारण निम्न है –

  1. कांग्रेस को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
  2. कांग्रेस को राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत प्राप्त हुई।
  3. कांग्रेस का जन आधार रहा अर्थात् कांग्रेस का देश के प्रत्येक क्षेत्र व प्रत्येक वर्ग में प्रभाव कायम है।
  4. कांग्रेस के पास चमत्कारिक नेतृत्व रहा।
  5. नेहरू परिवार का कांग्रेस पर प्रभाव।
  6. प्रत्येक राष्ट्रवादी अवसरों जैसे 15 अगस्त व 26 जनवरी को कांग्रेस के इतिहास को ही राष्ट्रीय आन्दोलन की यादों के माध्यम से दोहराया जाता है।
  7. कांग्रेस के कुछ वर्ग जैसे अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, जन जाति व महिलाएँ सदैव लगातार समर्थक रहे हैं।

कांग्रेस के भारतीय राजनीतिक पर लगातार प्रभुत्व का निम्न प्रभाव रहा है –

  1. कांग्रेस एक सामाजिक गठबन्धन है क्योंकि कांग्रेस को विभिन्न वर्गों का समर्थन प्राप्त है। अत: इसने सम्पूर्ण वर्ग को सामाजिक व राजनीतिक रूप से प्रभावित किया है।
  2. कांग्रेस एक वैचारिक गठबन्धन है क्योंकि इसमें सामाजिक तौर पर समाजवादी, साम्यवादी, व दक्षिणपन्थी विचारधाराओं में लोग शामिल रहे हैं।
  3. कांग्रेस ने भारतीय संस्कृति जैसे सहनशीलता, धर्मनिर्पेक्षता व गुटनिर्पक्षता को बढ़ाया है।
  4. कांग्रेस ने भारतीय राजनीति में समायोजन व आम सहमति की राजनीति को बढ़ाया है।
  5. इसने राजनीतिक दलों में आन्तरिक प्रजातन्त्र को बढ़ाया।
  6. इसने भारत की विभिन्नता में एकता के स्वरूप को मजबूत किया है।

प्रश्न 2.
1967 के भारतीय राजनीति में कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट के कारणों को समझाइए।
उत्तर:
राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासतों का भारतीय राजनीति में विशेषतौर से राजनैतिक व्यवहार पर 1962 के चुनाव तक रहा व बाद में यह प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा जिसका प्रभाव 1967 के चुनाव में दिखने लगा जब 1967 के चुनाव में कांग्रेस को केवल इतनी ही सीटें मिली कि साधारण बहुमत से सरकार बन सके। अतः कांग्रेस के प्रभुत्व में गिरावट आ गई। कांग्रेस के प्रभुत्व की गिरावट के निम्न प्रमुख कारण माने जाते हैं।

  1. 1964 में पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद कांग्रेस में चमत्कारिक व्यक्तित्व का अभाव।
  2. 1964 में कई अन्य राजनीतिक दलों जैसे साम्यवादी दल भारतीय जन संघ, समाजवादी दल व मुस्लिम लीग के प्रभावों में बढ़ोत्तरी हुई।
  3. भारत में क्षेत्रवाद का विकास होने लगा जिसके आधार पर कई राज्यों में अनेक क्षेत्रीय दलों का विकास होने लगा।
  4. कांग्रेस के वोट बैंक का अन्य राजनीतिक दलों के पास खिसक जाने से भी कांग्रेस की सीटों की संख्या में कमी आ गई।
  5. केन्द्र में विरोधी दलों के खिलाफ कांग्रेस की सरकार के द्वारा संविधान के कुछ प्रावधानों के दुरूपयोग के कारण कांग्रेस के खिलाफ लोगों में नकारात्मक भावना बढ़ गई।
  6. राज्यों में मिली जुली सरकारों की राजनीति का आरम्भ होना।
  7. अनेक राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारों का बनना व उनका सफलता के साथ चलना।
  8. कांग्रेस विरोधी राजनीति का प्रचार।
  9. कांग्रेस में इसकी परम्परागत वोट बैंक द्वारा किए गए विश्वास में गिरावट।
  10. कांग्रेस में नेतृत्व का संकट।
  11. 1975 से 1977 तक आपात कालीन का खराब अनुभव।
  12. कांग्रेस की पुरानी संस्कृति में गिरावट।
  13. कांग्रेस में 1969 व 1978 में विभाजन।
  14. गैर-कानूनी वोट का एक होना। उपरोक्त कारणों से 1967 के बाद से कांग्रेस के प्रभुत्व में कमी आई है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

I. निम्नलिखित विकल्पों में से सही का चुनाव कीजिए।

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय आन्दोलन की विरासत किस राजनीतिक दल को मिली?
(अ) कांग्रेस पार्टी
(ब) साम्यवादी पार्टी
(स) समाजवादी पार्टी
(द) भारतीय जनसंघ
उत्तर:
(अ) कांग्रेस पार्टी

प्रश्न 2.
निम्न में उस देश का नाम बताइए जहाँ एक दल का प्रभुत्व नहीं है।
(अ) मैक्सिको
(ब) चीन
(स) क्यूबा
(द) संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर:
(द) संयुक्त राज्य अमेरिका

प्रश्न 3.
निम्न में से किस राज्य में सबसे पहले गैर कांग्रेसी सरकार बनी।
(अ) तमिलनाडु
(ब) केरल
(स) उत्तर प्रदेश
(द) पश्चिमी बंगाल
उत्तर:
(ब) केरल

प्रश्न 4.
किस वर्ष के केन्द्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी।
(अ) 1971
(ब) 1975
(स) 1977
(द) 1989
उत्तर:
(स) 1977

II. मिलान वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर

Bihar Board Class 12 Political Science Solutions chapter 2 एक दल के प्रभुत्व का दौर Part - 2 img 4
उत्तर:
(1) – द
(2) – स
(3) – य
(4) – अ
(5) – ब

Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र Textbook Questions and Answers, Additional Important Questions, Notes.

BSEB Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

Bihar Board Class 12 Geography मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र Textbook Questions and Answers

(क) नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 12 प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता:
(क) समाकलनात्मक अनुशासन
(ख) मानव और पर्यावरण के बीच अंतर-संबंधों का अध्ययन
(ग) द्वैधता पर आश्रित
(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं
उत्तर:
(घ) प्रौद्योगिकी के विकास के फलस्वरूप आधुनिक समय में प्रासंगिक नहीं

मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र के प्रश्न उत्तर Bihar Board Class 12 प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक भौगोलिक सूचना का स्रोत नहीं है:
(क) यात्रियों के विवरण
(ख) प्राचीन मानचित्र
(ग) चंद्रमा से चट्टानी पदार्थों के नमूने
(घ) प्राचीन महाकाव्य
उत्तर:
(घ) प्राचीन महाकाव्य

Manav Bhugol Prakriti Avn Vishay Kshetra Ka Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योय-क्रिया का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है –
(क) मानव बुद्धिमता
(ख) प्रौद्योगिकी
(ग) लोगों के अनुभव
(घ) मानवीय भाईचारा
उत्तर:
(ख) मानवीय भाईचारा

Bihar Board 12th Geography Book  प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपगमन नहीं है:
(क) क्षेत्रीय विभिन्नता
(ख) मात्रात्मक क्रांति
(ग) स्थानिक संगठन
(घ) अन्वेषण और वर्णन
उत्तर:
(ख) मात्रात्मक क्रांति

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए:

मानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए Bihar Board Class 12 प्रश्न 1.
मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है। या मानव भूगोल ‘हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना है।

Bihar Board 12th Geography Book Pdf Download प्रश्न 2.
मानव भूगोल के कुछ उपक्षेत्रों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. व्यवहारवादी भूगोल
  2. सामाजिक कल्याण का भूगोल
  3. अवकाश का भूगोल
  4. सांस्कृतिक भूगोल
  5. लिंग भूगोल
  6. ऐतिहासिक भूगोल एवं
  7. चिकित्सा भूगोल

मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र Notes Bihar Board प्रश्न 3.
मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है।
उत्तर:
मानव भूगोल का सामाजिक विज्ञान-सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, कल्याण अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, महिला अध्ययन, इतिहास, महामारी विज्ञान, नगरीय अध्ययन और नियोजन, राजनीति विज्ञान, सैन्य विज्ञान, जनांकिकी, नगर/ग्रामीण नियोजन, अर्थशास्त्र, संसाधन अर्थशास्त्र, कृषि विज्ञान, औद्योगिक अर्थशास्त्र व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वाणिज्य, पर्यटन और यात्रा प्रबंधन तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आदि सामाजिक विज्ञानों से गहरा संबंध है।

(ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:

मानवतावादी विचारों के क्या अभिलक्षण थे Bihar Board Class 12 प्रश्न 1.
मानव के प्राकृतीकरण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव इस सुंदर ब्रह्मांड का अंग बनकर अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली समझता है। प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रकृति के नियमों को अच्छे ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया। उदाहरण के लिए, घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी सहायता की। इसी प्रकार डी. एन. ए. और आनुवांशिकी के रहस्यों की समझ ने हमें अनेक बीमारियों पर विजय पाने के योग्य बनाया। अधिक तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है और प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है। मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है। ऐसे समाजों के लिए भौतिक पर्यावरण ‘माता-प्रकृति’ का रूप धारण करता है।

Manav Bhugol Prakriti Avn Vishay Kshetra Notes Bihar Board प्रश्न 2.
मानव भूगोल के विषय क्षेत्र पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मानव भूगोल, मानव जीवन के सभी तत्वों तथा अंतराल, जिसके अंतर्गत वे घटित होते हैं के मध्य संबंध की व्याख्या करने का प्रयत्न करती है। इस प्रकार मानव भूगोल की प्रकृति अत्यधिक अंतर-विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जाने वाले मानवीय तत्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए मानव भूगोल सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों जैसे सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, कल्याण अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र, मानव विज्ञान, इतिहास, महामारी विज्ञान, नगरीय अध्ययन और नियोजन, राजनीति विज्ञान, सैन्य विज्ञान, जनांकिकी, नगर/ग्रामीण नियोजन, अर्थशास्त्र, संसाधन अर्थशास्त्र, कृषि विज्ञान, औद्योगिकी अर्थशास्त्र, व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वाणिज्य, पर्यटन और यात्रा प्रबंधन तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आदि के साथ घनिष्ठ अंतरापृष्ठ विकसित करती है।

Bihar Board Class 12 Geography मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र  Additional Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

मानव भूगोल के 3 क्षेत्रों के नाम लिखिए Bihar Board Class 12 प्रश्न 1.
भूगोल की दो मुख्य शाखाओं के नाम बताइये।
उत्तर-:
भूगोल की दो मुख्य शाखाएँ हैं –

  1. क्रमबद्ध भूगोल और।
  2. प्रादेशिक भूगोल।

प्रश्न 2.
मानव भूगोल की परिभाषा बताइये।
उत्तर:
मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें हम मनुष्य तथा वातावरण के पारस्परिक संबंधों का क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन करते हैं।

प्रश्न 3.
एक अध्ययन विषय के रूप में मानव भूगोल का उद्भव कब हुआ?
उत्तर:
लगभग पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से लेकर अठारहवीं शताब्दी तक की अवधि को खोज का युग कहा जाता है। इस युग में मानचित्र निर्माण की विधियों का गुणात्मक विकास हुआ। इसी के साथ-साथ विश्व के विभिन्न भागों में खोज यात्राओं के द्वारा विस्तृत सूचनाएँ एकत्रित की गई।

प्रश्न 4.
एल्सवर्थ हंटिग्टन ने मानव भूगोल को किस प्रकार परिभाषित किया है?
उत्तर:
एल्सवर्थ हंटिग्टन के अनुसान, मानव और पर्यावरण के संबंध गतिशील हैं, न कि स्थिर। मानव और प्रकृति की भूमिकाएँ सक्रिय एवं निष्क्रिय दोनों ही होती हैं। मानव निरंतर ही क्रिया एवं प्रतिक्रिया में संलग्न रहता है। मानव के विकास की कहानी, स्थान एवं समय दोनों ही संदर्भो में मनुष्य के अपने भौगोलिक वातावरण के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया है।

प्रश्न 5.
बर्नार्ड वेरेनियस ने अपनी पुस्तक ज्यॉग्राफिया जनरेलिस (सामान्य भूगोल) को किन दो भागों में विभाजित किया है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बर्नार्ड, वेरेनियस ने अपनी पुस्तक ज्याँग्राफिया जनरेलिस को दो भागों में विभक्त किया है –

  1. सामान्य और
  2. विशिष्ट सामान्य भूगोल में संपूर्ण पृथ्वी को एक इकाई मानकर इसके लक्षणों का विवेचन किया गया है। इस पुस्तक के द्वितीय भाग विशिष्ट भूगोल में अलग-अलग प्रदेशों की बनावट का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 6.
वेरेनियस ने अपने प्रादेशिक भूगोल नामक ग्रंथ की विषय-वस्तु को कौन-कौन से तीन उपभागों में प्रस्तुत किया है?
उत्तर:

  1. खगोलीय लक्षण
  2. स्थलीय लक्षण और
  3. मानवीय लक्षण

प्रश्न 7.
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध (1859) में चार्ल्स डारविन की कौन-सी पुस्तक प्रकाशित हुई, जिससे प्रेरणा लेकर ‘मानव भूगोल’ का विकास हुआ?
उत्तर:
जीवों का विकास।

प्रश्न 8.
कल्याणपूरक विचारधारा का जन्म किन कारणों से हुआ तथा इस विचारधारा को किन-किन विद्वानों ने प्रचारित किया?
उत्तर:
विश्व के विभिन्न प्रदेशों, देशों के भीतर तथा पूँजीवाद के प्रभाव से विभिन्न सामाजिक समूहों के भीतर बढ़ती असमानता के कारण मानव भूगोल में कल्याणपूरक विचारधारा का जन्म हुआ। निर्धनता, विकास में प्रादेशिक असमानता, नगरीय झुग्गी-झोंपड़ियों और अभावों जैसे विषय भौगोलिक अध्ययन के केन्द्र बन गये। डी. एम. स्मिथ और डेविड हार्वे जैसे कुछ प्रसिद्ध विद्वानों ने इस विचारधारा का प्रचार किया।

प्रश्न 9.
अमेरिकी भूगोलवेत्ताओं फिंच एवं ट्रिवार्था ने मानव भूगोल की विषय-वस्तु को किन दो भागों में बाँटा है?
उत्तर:

  1. भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण और
  2. सांस्कृतिक या मानव-निर्मित पर्यावरण।

प्रश्न 10.
विगत चार दशकों में मानव भूगोल में नई विचारधाराओं का तेजी से विकास हुआ है। इसका क्या प्रमुख कारण रहा है?
उत्तर:
पिछले चार दशकों में मानव भूगोल में नई विचारधाराओं के तेजी से विकास होने का मुख्य कारण, ‘मानव भूगोल में मानवीय परिघटनाओं के प्रतिरूपों के वर्णन के स्थान पर इन प्रतिरूपों के पीछे कार्यरत प्रक्रियाओं को समझना है। इस प्रक्रिया में मानव भूगोल अब अधिक मानवीय हो गया है।

प्रश्न 11.
ट्रॉन्डहाईम के शहर में सर्दियों का क्या अर्थ है?
उत्तर:
प्रचंड पवनें और भारी हिम। महीनों तक आकाश अदीप्त रहता है।

प्रश्न 12.
1970 के दशक में मानवतावादी, आमूलवादी और व्यवहारवादी विचारधाराओं का जन्म हुआ। इन विचारधाराओं के कारण मानव भूगोल कितना प्रासंगिक बना?
उत्तर:
मात्रात्मक क्रांति से उत्पन्न असंतुष्टि और अमानवीय रूप से भूगोल के अध्ययन के चलते मानव भूगोल में 1970 के दशक में तीन नई विचारधाराओं का जन्म हुआ। इन विचारधाराओं के अभ्युदय से मानव भूगोल सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के प्रति अधिक प्रासंगिक बना।

प्रश्न 13.
पॉल विडाल द्वारा व्यक्त की गई मानव भूगोल के संदर्भ में परिभाषा बताइए।
उत्तर:
हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधों के अधिक संश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना है।
म ए गोल्डेन सीरिज पासपोर्ट टू (उच्च माध्यमिक) भूगोल, वर्ग-1295

प्रश्न 14.
जर्मन भूगोलवेत्ता राज्य/देश का वर्णन किस रूप में करते हैं?
उत्तर:
जीवित जीव के रूप में करते हैं।

प्रश्न 15.
सड़कों, रेलमार्गों और जलमार्गों के जाल का प्रायः किस रूप में वर्णन किया जाता है?
उत्तर:
परिसंचरण की धमनियों के रूप में वर्णन किया जाता है।

प्रश्न 16.
पर्यावरण की तीन विचारधाराओं के नाम लिखो।
उत्तर:
पर्यावरण निश्चयवाद, संभववाद और नव-निश्चयवाद।

प्रश्न 17.
किस भूगोलवेत्ता ने ‘मानव भूगोल के सिद्धांत’ नामक पुस्तक लिखी?
उत्तर:
एल्सर्वोथ हटिंगटन।

प्रश्न 18.
नव-निश्चयवाद के प्रमुख समर्थक कौन थे?
उत्तर:
ग्रिफिथ टेलर।

प्रश्न 19.
भूगोलवेत्ता ग्रिफिथ टेलर ने क्या नयी संकल्पना प्रस्तुत की थी?
उत्तर:
उन्होंने दो विचारों पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद को एक नया नाम ‘नव-निश्चयवाद अथवा रूको और जाओ’ दिया।

प्रश्न 20.
क्या आप उन तत्त्वों की सूची बना सकते हैं, जिनकी रचना मानव ने भौतिक पर्यावरण द्वारा प्रदत्त मंच पर अपने कार्य-कलापों के द्वारा की है?
उत्तर:
गृह, गाँव, नगर, सड़कों व रेलों का जाल, उद्योग, खेत, पत्तन, दैनिक उपयोग में अपने वाली वस्तुएँ तथा भौतिक संस्कृति के अन्य सभी तत्त्व भौतिक पर्यावरण द्वारा प्रदत् संसाधनों का उपयोग करते हुए मानव द्वारा निर्मित किए गए हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मानव भूगोल की विषय-वस्तु, सभी सामाजिक विज्ञानों का एकीकरण करती है। इस विषय पर संक्षिप्त में टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मानव भूगोल की विषय-वस्तु, सभी सामाजिक विज्ञानों का एकीकरण करती है, क्योंकि यह उन विज्ञानों का क्षेत्रीय एवं क्रमबद्धता का दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिनका उनमें अभाव होता है। इसके साथ ही मानव भूगोल अपनी विषय सामग्री के विश्लेषण के लिए अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंध स्थापित करता है। इस प्रक्रिया में मानव भूगोल अन्य सामाजिक विज्ञानों से सहायता प्राप्त करता है और उन्हें सहायता प्रदान भी करता है। उदाहरणतया, वह जनसंख्या के अध्ययन के लिए जनसांख्यिकी, आर्थिक भूगोल के लिए अर्थशास्त्र, कृषि भूगोल के लिए कृषि विज्ञान, नगरीय भूगोल के लिए नगरीय समाज विज्ञान, राजनीतिक भूगोल के लिए विज्ञान, सामाजिक भूगोल के लिए समाज शास्त्र तथा इतिहास पर निर्भर रहता है। बदले में मानव भूगोल इन विज्ञानों को क्षेत्रीय एवं क्रमबद्धता के दृष्टिकोण से अवगत कराता है।

प्रश्न 2.
प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जीन बूंश के मानव भूगोल की प्रकृति एवं क्षेत्र के विषय में क्या विचार थे? संक्षिप्त में उत्तर दीजिए।
उत्तर:
प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जीन बुंश के अनुसार ‘जिस प्रकार अर्थशास्त्र का संबंध कीमतों से, भू-गर्भशास्त्र का संबंध शैलों से, वनस्पति-विज्ञान का संबंध पौधों से, मानवाचार-विज्ञान का संबंध जातियों से तथा इतिहास का संबंध समय से है, उसी प्रकार भूगोल का केन्द्र बिंदु ‘स्थान’ है जिसमें ‘कहाँ’ और ‘क्यों’ जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया जाता है।

भूगोल की प्रमुख शाखा के रूप में मानव तथा पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन मानव भूगोल के अध्ययन का केन्द्र-बिंदु है, अर्थात् मानव भूगोल में पर्यावरण से संबंधित मानव समाज के अध्ययन पर विशेष बल दिया जाता है। वास्तव में, मानव भूगोल का कार्यक्षेत्र बहुत ही विस्तृत है। उसके अंतर्गत मानव प्रजातियों, विश्व के विभिन्न भागों में जनसंख्या का वितरण, घनत्व, विकास, वृद्धि, जनसांख्यिकीय के लक्षण, जन-स्थानान्तरण आदि के संबंध में ज्ञान प्राप्त किया जाता है। इसके साथ ही मानव समूहों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।

मानव भूगोल में ग्रामीण बस्तियों के प्रकार एवं प्रतिमान और नगरीय बस्तियों के स्थल, विकास और कार्य तथा नगरों के कार्यात्मक वर्गीकरण का भी अध्ययन किया जाता है। इसमें उद्योग-धंधे, परिवहन एवं संचार व्यवस्था तथा व्यापार आदि आर्थिक क्रियाओं का विकास तथा उसके क्षेत्रीय वितरण का भी अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 3.
मानव भूगोल के उपक्षेत्र सांस्कृतिक भूगोल के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल की इस शाखा में मानव के सांस्कृतिक पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। मानव का आवास, भोजन, सुरक्षा, रहन-सहन, भाषा, धर्म, रीति-रिवाज तथा पहनावा आदि इसके सांस्कृतिक पहलू हैं। मानव के ये सांस्कृतिक पहलू समय और स्थान के साथ बदलते रहते हैं।

कुछ भूगोलवेत्ता इसे सामाजिक भूगोल भी कहते हैं जे. एम. हॉउस्टन के अनुसार सामाजिक भूगोल को जनसंख्या के अध्ययनों सहित ग्राम्य एवं नगरीय बस्तियों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जाता है।’ सामाजिक भूगोल में मानव को एकांकी रूप में न लेते हुए मानव समूहों और पर्यावरण के संबंधों की व्याख्या की जाती है।

प्रश्न 4.
मानव भूगोल वास्तविक रूप में उदार शिक्षा का उद्देश्य पूरा करता है। इस विषय पर संक्षिप्त में प्रकाश डालिये।
उत्तर:
विश्व के विभिन्न भागों में मानवीय आवास को प्रभावित करने वाले तत्त्वों का मूल्यांकन करने में मानव भूगोल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समाजों, संस्कृतियों तथा मानव द्वारा निर्मित भू-पटलों में विरोधाभास का स्पष्टीकरण भी मानव भूगोल द्वारा ही किया जाता है। इससे आर्थिक, राजनैतिक तथा सामाजिक ढाँचे को समझने में सहायता मिलती है। मानव हमें आज के अशांत, तनावग्रस्त एवं प्रतिस्पर्धात्मक विश्व में सामाजिक वास्तविकता से अवगत कराता है और यथा संभव आधुनिक विश्व में मानवीय समस्याओं का हल ढूंढने में हमारी सहायता करता है। संक्षेप में, मानव भूगोल हमें उत्कृष्ट जानकारी उपलब्ध कराता है और अच्छे नागरिक बनने में हमारी सहायता करता है।

प्रश्न 5.
मानव भूगोल के उपक्षेत्र आर्थिक भूगोल के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल - प्रकृति एवं विषय क्षेत्र img 1

चित्र: मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र के पाँच मुख्य अंग।

  1. किसी प्रदेश की जनसंख्या तथा उसकी क्षमता।
  2. उस प्रदेश के प्राकृतिक वातावरण द्वारा प्रदान किए गये संसाधन।
  3. उस जनसंख्या द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करने से बना सांस्कृतिक प्रतिरूप।
  4. प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक वातावरणों के पारस्परिक कार्यों के द्वारा मानव वातावरण समायोजन का रूप, जिसे हम क्षेत्र संगठन का रूप भी कहते हैं।
  5. उपरोक्त वातावरण समायोजन कालिक अनुक्रमण।

प्रश्न 6.
मानव भूगोल के उपक्षेत्र आर्थिक भूगोल के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक भूगोल, मानव भूगोल की महत्त्वपूर्ण शाखा है। इसमें मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं के वितरण और प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ उनके संबंधों का अध्ययन किया जाता है। डॉ. एन. जी. पाउण्डस के अनुसार ‘आर्थिक भूगोल भू-पृष्ठ पर मानव की उत्पादन क्रियाओं के वितरण का अध्ययन करता है। मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं में उत्पादन, वितरण, उपभोग तथा विनिमय आदि क्रियाएँ सम्मिलित हैं।

प्रश्न 7.
द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् एक अध्ययन विषय के रूप में भूगोल में आये नवीन परिवर्तन पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शैक्षिक जगत समेत अनेक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ। भूगोल विषय भी इस विकास से अछूता नहीं रहा। सामान्य रूप से भूगोल और विशेष रूप से मानव भूगोल ने मानव समाज की समकालीन समस्याओं और मुद्दों के समाधान प्रस्तुत किये। इस अवधि में मानव कल्याण से संबंधित नई समस्याएँ जैसे गरीबी, सामाजिक व प्रादेशिक असमानता, समाज कल्याण तथा सशक्तिकरण आदि को समझने में पारंपरिक विधियाँ असमर्थ थीं। फलस्वरूप समय-समय पर नई विधियाँ अपनाई गई। उदाहरण के लिये, पचास के दशक के मध्य में प्रत्यक्षवाद के रूप में नई विचारधारा का जन्म हुआ।

इसमें मात्रात्मक विधियों के उपयोग में बल दिया गया। तदन्तर प्रत्यक्षवाद के विरोध स्वरूप मनोविज्ञान से ली गई संकल्पना पर आधारित व्यवहारगत विचारधारा का उदय हुआ, जिसमें मानव की ज्ञान शक्ति पर विशेष बल दिया गया। विश्व के विभिन्न प्रदेशों तथा देशों के भीतर तथा पूँजीवाद के प्रभाव से विभिन्न समूहों के भीतर बढ़ती असमानता के कारण मानव भूगोल में कल्याणपरक विचारधारा का जन्म हुआ। निर्धनता, विकास में प्रादेशिक असमानता, नगरीय झुग्गी-झोंपड़ियों और अभावों जैसे विषय भौगोलिक अध्ययन का केन्द्र बन गये। इनके अतिरिक्त मानवतावाद नामक विचारधारा का भी भूगोल में जन्म हुआ। यह विचारधारा मानव पर केंद्रित है। जिसमें मानव-जागृति, मानव-साधन, मानव चेतना और मानव की सृजनात्मक एवं क्रियाशील भूमिका पर बल दिया गया। अतः द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानव भूगोल में अनेक नई विचारधाराओं का तेजी से विकास हुआ।

प्रश्न 8.
भूगोल की भांति मानव भूगोल में भी एक-दूसरे से निकट रूप से संबंधित कौन-कौन से तीन कार्यों को सम्पन्न किया जाता है?
उत्तर:
1. पृथ्वी तल पर मानव:
निर्मित तत्त्वों का स्थानिक तथा स्थिति-संबंधी विश्लेषण करना। इसका संबंध संख्याओं, विशेषताओं, क्रिया कलाप और वितरण से होता है। इन विशेषताओं को प्रभावशाली ढंग से मानचित्र द्वारा प्रदर्शित करते हैं। कारक जिनसे निश्चित क्षेत्रीय प्रतिरूप बनते हैं उनका वर्णन किया जाता है। अधिक महत्त्वपूर्ण तथा उच्च दक्षता या साम्यवाले वैकल्पिक क्षेत्रीय प्रतिरूपों को प्रस्तावित किया जाता है। यहाँ क्षेत्रों के बीच स्थानिक विभिन्नता को बल दिया जाता है। तत्त्वों के बीच के संबंधों को दो प्रकार से देखा जा सकता है, जैसे-मनुष्य का प्रादेशिक क्षेत्र पर प्रभाव और पर्यावरण का मनुष्य पर प्रभाव।

2. पारिस्थितिक विश्लेषण:
यहाँ पर एक भौगोलिक प्रदेश के भीतर मानव और पर्यावरण संबंधों के अध्ययन को प्रमुखता दी जाती है।

3. प्रादेशिक संश्लेषण:
में स्थानिक एवं पारिस्थितिक उपागमों को एक साथ मिला दिया जाता है। प्रदेशों की पहचान कर ली जाती है। यहाँ अध्ययन का उद्देश्य आन्तरिक आकारि की सहलग्नता और बाह्य पारिस्थितिक सहसंबंधों की जानकारी प्राप्त करना होता है।

प्रश्न 9.
जनसंख्या भूगोल और ऐतिहासिक भूगोल का मानव भूगोल के साथ कैसे घनिष्ठ संबंध है? संक्षिप्त में विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या भूगोल में विश्व या इसके किसी भाग में कुल संख्या, जनसंख्या का वितरण, घनत्व जन्म एवं मृत्यु दर, जनसंख्या में वृद्धि दर, आयु, लिंग अनुपात, साक्षरता आदि का अध्ययन किया जाता है। ऐतिहासिक भूगोल किसी क्षेत्र में एक समय से दूसरे समय में होने वाले भौगोलिक परिवर्तनों के अध्ययन को ऐतिहासिक भूगोल कहते हैं। हार्टशॉर्न के अनुसार ‘ऐतिहासिक भूगोल भूतकाल का भूगोल है।

प्रश्न 10.
कृषि भूगोल और राजनैतिक भूगोल का मानव भूगोल के साथ क्या संबंध है।
उत्तर:
यह मानव भूगोल का ऐसा उपक्षेत्र है जिसमें कृषि संबंधी सभी तत्त्वों का अध्ययन किया जाता है। इसमें फसलों के उत्पादन एवं वितरण तथा पशु-पालन एवं पशु-उत्पाद सम्मिलित हैं। कृषि से मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता भोजन की आपूर्ति होती है, इसलिए मानव भूगोल का यह उपक्षेत्र सबसे महत्त्वपूर्ण है। राजनैतिक भूगोल राज्यों की सीमाओं, स्थानीय प्रशासन, प्रादेशिक नियोजन आदि से संबंधित है। यह मानवीय समूहों की राजनैतिक स्थितियों, समस्याओं व क्रियाओं में भूगोल के महत्त्व को मूल्यांकित करता है। वॉन बल्केनवर्ग के अनुसार ‘राजनैतिक भूगोल राज्यों का भूगोल है, और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की भौगोलिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 11.
प्रकृति का मानवीकरण क्या है?
उत्तर:
समय के साथ मानव अपने पर्यावरण और प्राकृतिक बलों को समझने लगते हैं। अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के साथ मानव बेहतर और अधिक सक्षम प्रौद्योगिकी का विकास करता है। वह अभाव की अवस्था से स्वतंत्रता की अवस्था की ओर अग्रसर होता है। पर्यावरण से प्राप्त संसाधनों के द्वारा वे संभावनाओं को जन्म देता है। मानवीय क्रियाओं की छाप सर्वत्र है, उच्च भूमियों पर स्वास्थ्य विश्राम-स्थल, विशाल नगरीय प्रसार, खेत, फलोद्यान, मैदानों व तरंगित पहाड़ियों में चरागाहों, तटों पर पतन और महासागरीय तल पर समुद्री मार्ग तथा अंतरिक्ष में उपग्रह इत्यादि। प्रकृति अवसर प्रदान करती है और मानव उनका उपयोग करता है तथा धीरे-धीरे प्रकृति का मानवीकरण हो जाता है।

प्रश्न 12.
मानव भूगोल का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
पृथ्वी पर मानवीय लक्षणों के अध्ययन को मानव भूगोल कहते हैं। गाँव, शहर, नहरें, सड़क, रेल, कृषि, उद्योग आदि सभी मनुष्य द्वारा बनाए गए हैं और मानवीय संस्कृति का नेतृत्व करते हैं। मानव जीवन पर प्रकृति का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 13.
नवनिश्चयवाद संकल्पना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नवनिश्चयवाद संकल्पना का तात्पर्य उन सीमाओं से है, जो पर्यावरण की हानि न करती हों, संभावनाओं को उत्पन्न किया जा सकता है तथा अंधाधुंध रफ्तार दुर्घटनाओं से मुक्त नहीं होती है। विकसित अर्थव्यवस्था के द्वारा चली गई मुक्त चाल के परिणमस्वरूप हरित-गृह प्रभाव, ओजोन परत अवक्षय, भूमंडलीय तापन, पीछे हटती हिमनदियाँ, निम्नीकृत भूमियाँ हैं। यह संकल्पना ढंग से एक संतुलन बनाने का प्रयास करती है जो संभावनाओं के बीच अपरिहार्य चयन द्वैतवाद को निष्फल करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक अलग अध्ययन क्षेत्र के रूप में विकसित होने के बाद से मानव भूगोल के विकास की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल, क्रमबद्ध भूगोल की ही एक शाखा है जिसमें मानव और प्रकृति के बीच सतत् परिवर्तनशील पारस्परिक क्रिया से उत्पन्न सांस्कृतिक लक्षणों की स्थिति एवं वितरण की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। मानव भूगोल की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने से पहले इसकी प्रकृति एवं अध्ययन क्षेत्र को समझना उपयोगी होगा। एक अध्ययन विषय के रूप में मानव भूगोल का उद्भव-लगभग पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध से लेकर अठारहवीं शताब्दी तक की अवधि की खोज की गई सूचनाओं की भूगोलविदों ने वैज्ञानिक तरीकों से जाँच की तथा उन्हें वर्गीकृत और व्यवस्थित किया। ऐसे वैज्ञानिक विश्लेषण का एक अच्छा उदाहरण बर्नार्ड वेरेनियस की पुस्तक सामान्य भूगोल (ज्यॉग्राफिया जनरेलिस) है। वेरेनियस ने अपने प्रादेशिक भूगोल नामक ग्रंथ में इसकी विषय-वस्तु को तीन उपभागों में प्रस्तुत किया-खगोलीय लक्षण, स्थलीय लक्षण और मानवीय लक्षण।

उन्नीसवीं शताब्दी में वैज्ञानिक विधियों के तीव्र विकास की अवस्था में भूगोल के विषय क्षेत्र को सीमित करने का प्रयास किया गया। इस अवधि में उच्चावच के लक्षणों के अध्ययन पर विशेष बल दिया गया। संभवतः अधिक तीव्रता से बदलते सांस्कृतिक लक्षणों की तुलना में पृथ्वी के अपेक्षाकृत स्थिर लक्षणों का वर्णन करना सरल था। उच्चावच के लक्षणों का अनेक प्रकार से मापन तथा परीक्षण किया गया। इसी कार्य के फलस्वरूप भूगोल की एक विशिष्ट शाखा का विकास हुआ जिसे भू-आकृति विज्ञान कहा गया। भौतिक लक्षणों के अध्ययन को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देने वाली इस विचारधारा के प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ विद्वानों ने मानव तथा प्राकृतिक पर्यावरण के बीच के संबंधों की जाँच शुरू कर दी। इसके परिणामस्वरूप ‘मानव भूगोल’ शाखा का उद्भव हुआ।

उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध (1859) में चार्ल्स डार्विन की पुस्तक ‘जीवों का विकास’ प्रकाशित हुई। इसी से प्रेरणा लेकर भौगोलिक अध्ययन की विशिष्ट शाखा के रूप में ‘मानव भूगोल’ का विकास हुआ। फ्रेडरिक रैटजेल की पुस्तक ‘एंथ्रोपोज्योग्राफी’ को भूगोल विषय में मानव को प्रतिष्ठित करने वाला प्रथम वास्तविक ग्रंथ कहा जाता है। रैटजेल को आधुनिक मानव भूगोल का जनक भी कहते हैं। उसके अनुसार, मानव भूगोल मानव समाजों तथा पृथ्वी-तल के बीच संबंधों का संश्लिष्ट अध्ययन है। फ्रांसीसी विद्वान वाइडल डी ला ब्लाश ने अपनी प्रतिष्ठित पुस्तक (मानव भूगोल के सिद्धांत) में बताया है कि ‘मानव भूगोल’ एवं मनुष्य के बीच पारस्परिक संबंधों का एक नया विचार देता है जिसमें पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा पृथ्वी पर निवास करने वाले जीवों के पारस्परिक संबंधों का संयुक्त ज्ञान समाविष्ट होता है।

एल्सवर्थ हंटिग्टन ने मानव भूगोल को ‘भौगोलिक पर्यावरण तथा मानव-प्रक्रियाओं के पारस्परिक संबंधों के अध्ययन’ को परिभाषित करते हुए कहा कि मानव और पर्यावरण से संबंध गतिशील है, न कि स्थिर। जीन बूंश प्रसिद्ध फ्रांसिसी भूगोलविद् ने कहा कि मानवीय घटनाएँ कभी स्थिर नहीं रहतीं। अतः हमें इन सभी का विकास के रूप में अध्ययन करना चाहिए।

विभिन्न विद्वानों द्वारा समय:
समय पर मानव भूगोल को परिभाषित किया गया है। प्रारम्भिक विद्वानों जैसे अरस्तु, बकल, हम्बोल्ट और रिटर ने इतिहास पर भूमि के प्रभाव को प्रमुखता दी। बाद में रैटजेल तथा सेम्पल के मानव क्रिया-कलापों पर पड़ने वाले प्रभावों की जाँच पर अधिक बल दिया। ब्लाश ने पारिस्थितिकी एवं स्थलीय एकता को मानव भूगोल के दो सिद्धांतों के रूप में देखा। हंटिग्टन ने समाज, संस्कृति और इतिहास पर जलवायु के प्रभाव को प्रमुखता प्रदान की। इस प्रकार, उपरोक्त विवेचनों से यह कहा जा सकता है कि इन सभी कार्यों ने ‘मानव समाज तथा पर्यावरण के बीच संबंधों के अध्ययन को ही प्रमुखता दी।

प्रश्न 2.
मानव भूगोल की विषय-वस्तु के विषय में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव भूगोल की विषय-वस्तु-मानव भूगोल एक अति विस्तृत विषय है। इसका उद्भव कुछ देशों में सामाजिक विज्ञानों से हुआ है जो मनुष्य के दिक् एवं स्थान के संबंधों का अध्ययन करते हैं। अमेरिकी भूगोलवेत्ताओं फिंच एवं ट्रिवार्था ने मानव भूगोल की विषय-वस्तु को दो बड़े भागों में बाँटा-भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण और सांस्कृतिक या मानव-निर्मित पर्यावरण।

भौतिक या प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत भौतिक लक्षण जैसे जलवायु, धरातलीय उच्चावच एवं अपवाह प्रणाली तथा प्राकृतिक संसाधन जैसे मिट्टी, खनिज, जल एवं वन आते हैं। सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्तर्गत पृथ्वी पर मानव निर्मित लक्षण जैसे-जनसंख्या और मानव बस्तियाँ एवं कृषि, विनिर्माण उद्योग, परिवहन आदि को सम्मिलित किया जाता है। एल्सवर्थ हंटिग्टन (1956) के अनुसार ‘मानव भूगोल भौतिक दशाओं तथा भौतिक पर्यावरण के साथ मानव की अनुक्रियाओं से संबंधित है।

ऊपर वर्णित आवश्यक तथ्यों के अतिरिक्त मानव भूगोल निम्नलिखित मानवीय-पर्यावरण के पक्षों के अध्ययन से भी संबंधित है उद्देश्य आंतरिक आकार की सहलग्नता और बाह्य पारिस्थितिक सह संबंधों की जानकारी प्राप्त करना होता है।

इस संबंध की गवेष्णा विभिन्न स्थानिक मापकों पर की जाती है, जो वृहत् स्तर जैसे, विश्व के मुख्य प्रदेश को लेकर मध्यम स्तर और सूक्ष्म स्तर जैसे-व्यक्ति या समूह और उनके निकटवर्ती भू-भाग तक हो सकती है। इसमें मानव को विश्लेषण का आधार बनाया जाता है: वे कहाँ हैं? वे वहीं पर क्यों हैं? क्या वे आपस में एक जैसे हैं? वे क्षेत्र में कैसे अंतक्रिया करते हैं और वे अपने प्राकृतिक परिवेश में किस प्रकार के सांस्कृतिक भू-दृश्य की रचना कर रहे हैं? ऐसे विभिन्न प्रश्नों के उत्तर एक भूगोलवेत्ता द्वारा अपनाये जाने वाले आधारभूत तरीकों से ही प्राप्त करना होता है: कौन कहाँ है, और कैसे एवं क्यों वह वहाँ है? यही नहीं, हम यह भी जानना चाहते हैं कि हमारे लिए, हमारी संतानों के लिए और भावी पीढ़ी के लिए इसका अर्थ क्या है?

मानव भूगोल के अध्ययन की विधियाँ:
मानव भूगोल की मुख्य विषय-वस्तु मानव और पर्यावरण के संबंध हैं। इनकी अनेक प्रकार से विवेचना की गई है। उत्तर डार्विन काल में इस संबंध के परीक्षण के लिए बहुत से नये तरीके अपनाए गए हैं। समय के साथ-साथ मानव भूगोल की विषय-वस्तु को पढ़ने के तरीके भी बदलते रहे हैं। ये परिवर्तन केवल मानव भूगोल में ही अकेले नहीं हुए हैं। बल्कि सम्पूर्ण भूगोल जगत में होने वाले परिवर्तनों के साथ ही घटित हुए हैं। इन प्रवृत्तियों की विवेचना नीचे की जा रही है।

प्रश्न 3.
अंतर बताइये:
(क) नियतिवाद और संभववाद
(ख) प्रत्यक्षवाद और मानवतावाद

उत्तर:
(क) नियतिवाद और संभववाद में अंतर
Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल - प्रकृति एवं विषय क्षेत्र img 2

(ख) प्रत्यक्षवाद और मानवतावाद में अंतर
Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल - प्रकृति एवं विषय क्षेत्र img 3

प्रश्न 4.
मानव भूगोल के अध्ययन की विधि के संदर्भ में नियतिवाद अथवा निश्चयवाद प्रवृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
निश्चयवाद विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक क्रिया कलाप को पर्यावरण से नियंत्रित माना जाता है। इस प्रकार किसी सामाजिक समूह, समाज या राष्ट्र का इतिहास, संस्कृति जीवन-शैली और विकास की अवस्था मुख्य रूप से पर्यावरण के भौतिक कारकों के द्वारा नियंत्रित होती है। धरातलीय स्वरूप, जलवायु, वनस्पति और जीव-जन्तु पर्यावरण के भौतिक कारक हैं। नियतिवादी सामान्यतः मानव को एक निष्क्रिय कारक समझते हैं, जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है।

ये कारक मानव के आचरण, निर्णय-क्षमता तथा जीवन पद्धति को भी निश्चित करते हैं। हिपोक्रेटस, अरस्तु, हेरोडोटस, स्ट्रेबो आदि रोमन और यूनानी विद्वानों ने सर्वप्रथम मानव पर प्राकृतिक दशाओं के प्रभाव की विवेचना की थी। इन्होंने विभिन्न जाति समूहों के शारीरिक लक्षणों और उनकी संस्कृति पर भौतिक कारकों के प्रभाव का विशेष रूप से अध्ययन किया था। भौगोलिक साहित्य में नियतिवाद का संकल्पना, अल-मसूदी, अल-इदरिसी और इब्न-खल्दून, कांट, हम्बोल्ट, रिटर और रैटजेल जैसे विद्वानों के साहित्य से 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशक तक आगे बढ़ती रही। इस विचारधारा का विस्तृत विकास, विशेषतः संयुक्त राज्य अमेरिका में, इ.सी. सेम्पुल तथा एल्सवर्थ हंटिग्टन के लेखों से हुआ, जो इसके बड़े समर्थक थे।

नियतिवादी-दर्शन की मूल रूप से दो आधारों पर आलोचना की गई –
1. यह स्पष्ट हो चुका है कि निश्चित दशाओं और परिस्थितियों में समान भौतिक पर्यावरण समान अनुक्रियायें उत्पन्न नहीं करता। भूमध्यसागरीय प्रदेश में स्थित यूनान और रोम में एक जैसी सभ्यताओं का विकास हुआ, वैसी सभ्यताएँ आस्ट्रेलिया, चिली, दक्षिणी अफ्रीका और कैलीफोर्निया के भूमध्य-सागरीय जलवायु वाले प्रदेशों में नहीं विकसित हुई।

2. यद्यपि पर्यावरण मानव को प्रभावित करता है, लेकिन मनुष्य भी पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार नियतिवाद का सिद्धांत कारण और प्रभाव संबंध के सिद्धांत इसकी विवेचना करने में बहुत सक्षम नहीं है।

इस प्रकार नियतिवाद से उत्पन्न यह विचार कि ‘मनुष्य प्रकृति का दास है’ अस्वीकृत कर दिया गया और दूसरे भूगोलवेत्ताओं ने इस बात पर बल देना आरंभ किया कि मनुष्य प्रकृति के तत्त्वों को चुनने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। जब प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाए, और जब मानव को अकर्मक या निष्क्रिय से सक्रिय शक्ति के रूप में देखा जाए तो यह धारणा संभववाद कहलाती है।

प्रश्न 5.
मानव भूगोल के विषय में विस्तृत अध्ययन करने के पश्चात् आप किस निर्णय पर पहुँचे?
उत्तर:
मानव भूगोल के विषय में विस्तृत अध्ययन करने के पश्चात् हम इस निर्णय पर पहुँचते हैं कि मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र की पाँच मुख्य शाखाएँ हैं –

  1. किसी प्रदेश की जनसंख्या तथा उसकी क्षमता।
  2. उस प्रदेश के प्राकृतिक प्रतिरूप।
  3. उस जनसंख्या द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग करने से बना सांस्कृतिक वातावरण।
  4. प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक वातावरणों के पारस्परिक कार्यों के द्वारा मानव-वातावरण-समायोजन का रूप।
  5. उपरोक्त मानव वातावरण-समायोजन का कालिक अनुक्रमण।

मानव भूगोल के निम्नलिखित उपक्षेत्र है:

(क) आर्थिक भूगोल।
(ख) सांस्कृतिक भूगोल।
(ग) जनसंख्या भूगोल।
(घ) ऐतिहासिक भूगोल।
(ड़) राजनैतिक भूगोल।
(च) कृषि भूगोल ।

Bihar Board Class 12 Geography Solutions Chapter 1 मानव भूगोल - प्रकृति एवं विषय क्षेत्र img 4

चित्र: मानव भूगोल का अन्य समाज शास्त्रों से संबंध

मानवतावाद (Humanism) भी मानव भूगोल की एक और विचारधारा है, जिसमें मानव-जागृति, मानव-साधन, मानव-चेतना और मानव की सृजनात्मकता के संदर्भ में मनुष्य की केन्द्रीय एवं क्रियाशील भूमिका पर बल दिया जाता है। दूसरे शब्दों में यह विचारधारा स्वयं मनुष्य पर केन्द्रित है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
मानव भूगोल में क्षेत्रीय विभेदन की शुरूआत का दशक कौन-सा था?
(A) 1950
(B) 1930
(C) 2000
(D) 1850
उत्तर:
(B) 1930

प्रश्न 2.
मानवतावाद किसकी एक और विचारधारा है
(A) समाज शास्त्र
(B) सामाजिक विज्ञान
(C) मानव भूगोल
(D) अर्थशास्त्र
उत्तर:
(C) मानव भूगोल

प्रश्न 3.
व्यवहारिक भूगोल, राजनीतिक भूगोल, आर्थिक भूगोल अथवा सामाजिक भूगोल कौन से भूगोल के उपक्षेत्र कहलाते हैं
(A) सामान्य भूगोल
(B) विशिष्ट भूगोल
(C) मानव भूगोल
(D) जीव विज्ञान
उत्तर:
(C) मानव भूगोल

प्रश्न 4.
मानवतावादी, आमूलवादी और व्यवहारवादी विचारधाराओं का उदय कब हुआ?
(A) 1970 के दशक में
(B) 1980 के दशक में
(C) 1990 के दशक में
(D) 1930 के दशक में
उत्तर:
(A) 1970 के दशक में

प्रश्न 5.
भूगोल में उत्तर-आधुनिकवाद विचार का दौर कब आया?
(A) 1990
(B) 1970
(C) 1960
(D) 1950
उत्तर:
(A) 1990

प्रश्न 6.
मानव भूगोल का उपक्षेत्र चिकित्सा भूगोल किस विषय से संबंधित है?
(A) मानव विज्ञान
(B) महामारी विज्ञान
(C) मनोविज्ञान
(D) कल्याण अर्थशास्त्र
उत्तर:
(B) महामारी विज्ञान

प्रश्न 7.
सैम्य भूगोल का उपक्षेत्र किस विज्ञान से संबंधित है?
(A) सैन्य विज्ञान
(B) राजनीतिक विज्ञान
(C) जनांकिकी विज्ञान
(D) सामाजिक विज्ञान
उत्तर:
(A) सैन्य विज्ञान

प्रश्न 8.
मानव भूगोल के क्षेत्र आर्थिक भूगोल का निम्न से एक उपक्षेत्र कौन-सा है?
(A) व्यवहारवादी भूगोल
(B) निर्वाचन भूगोल
(C) संसाधन भूगोल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) संसाधन भूगोल

प्रश्न 9.
मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है।’ ये मत किसने व्यक्त किया था?
(A) रैट जेल
(B) एलन सी. सेंपल
(C) पॉल विडाल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) एलन सी. सेंपल

प्रश्न 10.
उपनिवेश युग का उपागम क्या था?
(A) प्रादेशिक विश्लेषण
(B) अन्वेषण और विवरण
(C) स्थानिक संगठन
(D) भूगोल में उत्तर आधुनिकवाद
उत्तर:
(B) अन्वेषण और विवरण

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 9 Snake

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 9 Snake

Snake Questions And Answers Bihar Board 12th English  Question 1.
‘SNAKE’ is written by-
(A) W.H. Auden
(B) T.S. Eliot
(C) D.H. Lawrence
(D) John Donne
Answer:
(C) D.H. Lawrence

Snake Question Answer Bihar Board 12th English Question 2.
David H. Lawrence was born in-
(A) 1868
(B) 1858
(C) 1885
(D) 1895
Answer:
(C) 1885

Snake Poem Questions And Answers Bihar Board 12th English Question 3.
David H. Lawrence died in-
(A) 1920
(B) 1910
(C) 1940
(D) 1930
Answer:
(D) 1930

Snake By Dh Lawrence Bihar Board 12th English Question 4.
The speaker confesses that he-
(A) Hated the snake
(B) Liked the snake
(C) Feared the snake
(D) Killed the snake
Answer:
(B) Liked the snake

Snake Poem By Dh Lawrence Question And Answers Bihar Board 12th English Question 5.
The snake looked at the speaker-
(A) Roughly
(B) Vaguely
(C) Calmly
(D) Fiercely
Answer:
(B) Vaguely

Snake Dh Lawrence Questions Bihar Board 12th English Question 6.
In Sicily, black snakes are considered-
(A) Venomous
(B) Innocent
(C) Playful
(D) Gloomy
Answer:
(B) Innocent

Snake Poem Pdf Bihar Board 12th English Question 7.
The colour of the snake in the poem is-
(A) Yellow-black
(B) Golden
(C) Black
(D) Blue
Answer:
(C) Black

The Snake Looked At The Poet Bihar Board 12th English Question 8.
The speaker met the snake near the-
(A) Lake
(B) River
(C) Water-trough
(D) House
Answer:
(C) Water-trough

The Poem Snake Bihar Board 12th English Question 9.
The phrase ‘a king of exile’ in the poem ‘Snake’ stands for—
(A) the rat
(B) the elephant
(C) the snake
(D) the lion
Answer:
(C) the snake

Poem Snake Bihar Board 12th English Question 10.
After hitting the snake with a log the speaker of the Poem ‘Snake’ wants to —
(A) enjoy
(B) expiate
(C) celebrate
(D) None of these
Answer:
(B) expiate

Question 11.
The snake came to the poet’s water-through on a dav.
(A) hot
(B) cold
(C) rainy
(D) None of these
Answer:
(A) hot

Question 12.
In …………….. according to the poem ‘Snake’ black snakes are considered innocent.
(A) England
(B) Sicily
(C) France
(D) Italy
Answer:
(B) Sicily

Question 13.
The speaker in the poem ‘Snake’ hits the snake with—
(A) a nunter
(B) a log
(C) a rod
(D) None of these
Answer:
(B) a log

Question 14.
The speaker of the poem ‘Snake’ compares the snake with the sea – albatross of –
(A) The Ancient Mariner
(B) ‘Eve of St. Agnes’
(C) ‘The Scholar Gipsy
(D) ‘Lycidas’
Answer:
(A) The Ancient Mariner

Question 15.
Who w as composed the poem ‘Snake’?
(A) D.H. Lawrence
(B) T.S. Eliot
(C) W.B. Yeats
(D) W.H. Auden

Question 16.
D.H. Lawrence was—
(A) a fiction writer
(B) a poet
(C) a short story-writer
(D) All of these

Question 17.
In the poem ‘Snake’ Lawrence denounces the artificialities of ………….. life.
(A) ancient
(B) medieval
(C) modern
(D) None of these
Answer:
(C) modern

Question 18.
Who is the speaker in the poem, ‘Snake’?
(A) Donne
(B) Whitman
(C) Keats
(D) D.H. Lawrence
Answer:
(D) D.H. Lawrence

Question 19.
D.H. Lawrence has written the poem –
(A) My Grand Mother’s House
(B) Snake
(C) An Epitaph
(D) The Soldier
Answer:
(B) Snake

Question 20.
A snake appears on a trough of the ……………. to sip water.
(A) doctor
(B) teacher
(C) poet
(D) None of these
Answer:
(C) poet

Question 21.
A ……………. came to D.H. Lawrence’s water trough.
(A) snake
(B) cow
(C) goat
(D) cat
Answer:
(A) snake

Question 22.
The poet had gone to the water trough to drink
(A) tea
(B) coffee
(C) water
(D) milk
Answer:
(C) water

Question 23.
The poet compares the snake to a ………… bird, albatross.
(A) river
(B) sea
(C) pond
(D) well
Answer:
(B) sea

Question 24.
The snake seemed like a in ……………. exile.
(A) saint
(B) fakir
(C) queen
(D) king
Answer:
(D) king

Question 25.
A ……………. is mentioned in the poem ‘Snake’.
(A) mango tree
(B) peepal tree
(C) carbotree
(D) None of these
Answer:
(C) carbotree

Question 26.
The poet was wearing …………….
(A) pant
(B) pyjama
(C) underwear
(D) None of these
Answer:
(B) pyjama

Question 27.
The snake met the poet near his water
(A) bucket
(B) well
(C) trough
(D) pond
Answer:
(C) trough

Question 28.
The speaker had a desire to talk to
(A) cat
(B) rat
(C) scorpion
(D) snake
Answer:
(D) snake

Question 29.
The snake tooked at the poet
(A) happily
(B) confusingly
(C) sadly
(D) vaguely
Answer:
(D) vaguely

Question 30.
‘The voice of my education said to me He must be killed; these line are taken from—
(A) The Soldier
(B) Fire-Hymn
(C) Snake
(D) An Epitaph
Answer:
(C) Snake

Question 31.
‘He lifted his head from his drinking, as cattle do’ is written by—
(A) T.S. Eliot
(B) D.H. Lawrence
(C) Rupert Brooke
(D) John Keats
Answer:
(B) D.H. Lawrence

Question 32.
The colour of the snake is-
(A) Yellow
(B) Green
(C) Black
(D) Blue
Answer:
(C) Black

Question 33.
The speaker confesses that he-
(A) Hit the snake
(B) Liked the snake
(C) Feared the snake
(D) Disliked the snake
Answer:
(B) Liked the snake

Question 34.
‘SNAKE’is written by-
(A) W.H. Auden
(B) T.S. Eliot
(C) D.H. Lawrence
(D) John Donne
Answer:
(C) D.H. Lawrence

Question 35.
In Sicily, black snakes are considered-
(A) Venomous
(B) Innocent
(C) Playful
(D) food
Answer:
(A) Venomous

Question 36.
David H. Lawrence was born in-
(A) 1888
(B) 1858
(C) 1885
(D) 1855
Answer:
(C) 1885

Question 37.
David H. Lawrence died in-
(A) 1925
(B) 1915
(C) 1945
(D) 1930
Answer:
(D) 1930

Question 38.
The snake looked at the speaker-
(A) Sharply
(B) Vaguely
(C) Calmly
(D) Fiercely
Answer:
(B) Vaguely

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Chapter 8 How Free is the Press

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Chapter 8 How Free is the Press

How Free Is The Press Objective Question Bihar Board Question 1.
Who is the master of the state ?
(A) Government
(B) Press
(C) Court
(D) People
Answer:
(D) People

How Free Is The Press Question Answer Bihar Board Question 2.
The Press can make or break-
(A) Colony
(B) People
(C) Reputation
(D) Garbling
Answer:
(C) Reputation

How Free Is The Press Objective Questions Bihar Board Question 3.
A free and fair press is the true watchdog of-
(A) Colony
(B) Persons
(C) Court
(D) Democracy
Answer:
(D) Democracy

How Free Is The Press Bihar Board Question 4.
Every newspaper is shakled to its own set of-
(A) Landlords
(B) Overloads
(C) Overlords
(D) Nightmare
Answer:
(C) Overlords

How Free Is The Press In Hindi Bihar Board Question 5.
What policy widely circulated newspapers dare not support, however much in national interest, that might conflict, vested interests of its advertisers ?
(A) New policy
(B) State policy
(C) Public policy
(D) Personal policy
Answer:
(C) Public policy

How Free Is The Press Written By Bihar Board Question 6.
A big circulation spells bankruptoy if the paper has to depend on its sales for its-
(A) Advertisement
(B) Policy
(C) Ethics
(D) Revenue
Answer:
(D) Revenue

How Free Is The Press Hindi Bihar Board Question 7.
This is the special accomplishment of the Press interviewer-
(A) Marbling
(B) Garbling
(C) Titilating
(D) Allusion
Answer:
(B) Garbling

How Free Is The Press Is Written By Bihar Board Question 8.
What do free people take for granted ?
(A) Free home
(B) Free schools
(C) Free press
(D) Free pass
Answer:
(C) Free press

Question 9.
The essay ‘How Free Is The Press’ is written by-
(A) Martin Luther king. Jr.
(B) Pearl S. Buck
(C) Aurobindo Ghosh
(D) Dorothy L. Sayers
Answer:
(D) Dorothy L. Sayers

Question 10.
Dorothy was born in-
(A) 1883
(B) 1893
(C) 1873
(D) 1863
Answer:
(B) 1893

Question 11.
Dorothy died in-
(A) 1967
(B) 1958
(C) 1956
(D) 1957
Answer:
(D) 1957

Question 12.
When Dorothy Sayers became one of the first women to graduate from Oxford University ?
(A) 1950
(B) 1915
(C) 1918
(D) 1919
Answer:
(B) 1915

Question 13.
In the following essay ‘How Free Is The Press’, the author makes a strong case against-
(A) Chained press
(B) Slavery
(C) Misuse of the freedom of the press
(D) Rude editors
Answer:
(C) Misuse of the freedom of the press

Question 14.
Without a free press there can be no-
(A) Society
(B) Free people
(C) Humanity
(D) Peace
Answer:
(B) Free people

Question 15.
Restrictions are normally placed upon the press in time of-
(A) Flood
(B) Bloodshed
(C) War
(D) Famne
Answer:
(C) War

Question 16.
Full freedom is restored when it comes-
(A) War
(B) Famine
(C) Peace
(D) flood
Answer:
(C) Peace

Question 17.
The word used in the essay for the uncontrolled freedom of one man, or one gang, to impose its will on the world is-
(A) Brutality
(B) Tyranny
(C) Dictatorship
(D) Coerce
Answer:
(B) Tyranny

Question 18.
For the freedom of the press, we usually mean freedom from direction or-
(A) Scandal
(B) Pressure
(C) Censorship
(D) Distraction
Answer:
(C) Censorship

Question 19.
Under ordinary conditions, which press is singularly free, asjrnentionedin thieessay-
(A) Indian press
(B) American press
(C) British press
(D) European press
Answer:
(C) British press

Question 20.
Freedom of Press works to secure and sustain the Central doctrine of –
(A) State
(B) Democracy
(C) Public
(D) Personal interests
Answer:
(B) Democracy

Question 21.
The news in the newspapers is generally—
(A) to the point
(B) somewhat changed
(C) completely changed
(D) None of these
Answer:
(B) somewhat changed

Question 22.
Decent journalists and responsible editors are not pleased with present affairs—
(A) true
(B) not true
(C) cannot be said
(D) None of these
Answer:
(A) true

Question 23.
The press enjoys the—
(A) boldness of public
(B) the helpnessness of the public
(C) idleness of the public
(D) None of these
Answer:
(B) the helpnessness of the public

Question 24.
The editorial policy of a popular daily is controlled by—
(A) two chief Factors
(B) three chief factors
(C) four cheif factors
(D) None of these
Answer:
(A) two chief Factors

Question 25.
No widely circulated newspaper dares support a public policy due to vested interest of—
(A) the government
(B) editor
(C) reporter
(D) advertisers
Answer:
(D) advertisers

Question 26.
A big circulation spells bankruptcy if the paper has to depend on—
(A) the sales
(B) advertisers
(C) salers
(D) None of these
Answer:
(A) the sales

Question 27.
The policy of a newspaper is largely determined by—
(A) the government
(D) the public
(C) the proprietor
(D) None of these
Answer:
(C) the proprietor

Question 28.
The auther has given the forms of misrepresentation, they are—
(A) rive
(B) four
(C) seven
(D) six
Answer:
(D) six

Question 29.
Dorothy L.Sayers was born in –
(A) 1863
(B) 1873
(C) 1883
(D) 1893
Answer:
(D) 1893

Question 30.
She died in
(A) 1967
(B) 1957
(C) 1977
(D) 1987
Answer:
(B) 1957

Question 31.
She was educated at
(A) Cambridge
(B) Oxford
(C) both
(D) None of these
Answer:
(B) Oxford

Question 32.
In democracy, the freedom of press is.
(A) not necessary
(B) necessary
(C) dangerous
(D) None of these
Answer:
(B) necessary

Question 33.
Freedom of press is restricted during
(A) peace
(B) war
(C) epidemic
(D) None of these
Answer:
(B) war

Question 34.
The state is the
(A) master of the people
(B) servant of the people
(C) exploiter of the people
(D) None of these
Answer:
(B) servant of the people

Question 35.
The heaviest restriction upon the freedom of public opinion is
(A) official
(B) unofficial
(C) both
(D) None of these
Answer:
(B) unofficial

Question 36.
‘How free is the Press’ is written by –
(A) Mahatma Gandhi
(B) H.E. Bates
(C) Dorothy L. Sayers
(D) Dr. Zakir Hussain
Answer:
(C) Dorothy L. Sayers

Question 37.
Dorathy L. Sayers has written the lesson –
(A) I Have a Dream
(B) How free is the Press
(C) The Earth
(D) A child is Born
Answer:
(B) How free is the Press

Question 38.
Censorship is imposed during
(A) election
(B) peaceful time
(C) emergency
(D) None of these
Answer:
(C) emergency

Question 39.
………..are careful not to antagonize the press.
(A) Doctors
(B) Traders
(C) Teachers
(D) Politicians
Answer:
(D) Politicians

Question 40.
The ……….. is not the master but the servant of the people.
(A) State
(B) Government
(C) Village
(D) District
Answer:
(A) State

Question 41.
A free and fair press is the true watch …….. of democracy.
(A) cat
(B) bird
(C) dog
(D) None of these
Answer:
(C) dog

Question 42.
The first chief source of a newspaper’s revenue is ……….
(A) donation
(B) debt
(C) grant by the government
(D) advertisement
Answer:
(D) advertisement

Question 43.
The ………… Press is, under ordinary conditions, singularly free.
(A) European
(B) British
(C) Indian
(D) Chinese
Answer:
(B) British

Question 44.
The second chief source of a newspaper’s revenue is
(A) debt
(B) donation
(C) the wealth of owner
(D) grant by the government
Answer:
(C) the wealth of owner

Question 45.
The ……. can make or break reputation.
(A) teacher
(B) press
(C) man
(D) None of these
Answer:
(B) press

Question 46.
The editorial policy of a popular daily is controlled by …… chief factors.
(A) one
(B) two
(C) three
(D) four
Answer:
(B) two

Question 47.
The essay ‘How Free Is the Press’ is written by
(A) Martin Luther King, Jr.
(B) Pearl S. Buck
(C) Aurobindo Ghosh
(D) Dorothy L. Sayers
Answer:
(D) Dorothy L. Sayers

Question 48.
Dorothy died in
(A) 1967
(B) 1978
(C) 1956
(D) 1957
Answer:
(D) 1957

Question 49.
Without a free press there can be no
(A) peace
(B) free people
(C) humanity
(D) society
Answer:
(B) free people

Question 50.
When did Dorothy Sayers become one of the first women to graduate from Oxford University ?
(A) 1951
(B) 1915
(C) 1918
(D) 1919
Answer:
(B) 1915

Question 51.
Dorothy was born in
(A) 1883
(B) 1863
(C) 1873
(D) 1893
Answer:
(D) 1893

Question 52.
Full freedom is restored when it comes-
(A) war
(B) famine
(C) peace
(D) blood
Answer:
(C) peace

Question 53.
The press can make or break
(A) statue
(B) people
(C) reputation
(D) garbling
Answer:
(C) reputation

Question 54.
This is the special accomplishment of the press interviewer-
(A) Marbling
(B) Garbling
(C) Titillating
(D) Allusion
Answer:
(B) Garbling

Question 55.
A free and fair press is the true watchdog of
(A) state
(B) family
(C) court
(D) democracy
Answer:
(D) democracy

Question 56.
Who is the master of the state ?
(A) government
(B) pressed-
(C) courteous
(D) people
Answer:
(D) people

Question 57.
What do free people take for granted ?
(A) free home
(B) free schools
(C) free press
(D) free office
Answer:
(C) free press

Question 58.
The common has a ………… in parliament.
(A) seat
(B) place
(C) vote
(D) standard
Answer:
(C) vote

Question 59.
In the following essay ‘How Free Is The Press’, the author makes a strong case against
(A) press
(B) misuse freedom of the press
(C) slavery of press
(D) editors
Answer:
(B) misuse freedom of the press

Question 60.
Restrictions are normally placed upon the press in time of
(A) flood
(B) peace
(C) war
(D) famine
Answer:
(C) war

Question 61.
A big circulation spells bankruptcy if the paper has to depend on its sales for its
(A) advertisement
(B) honesty
(C) ethics
(D) revenue
Answer:
(D) revenue

Question 62.
Every newspaper is shackled to its own set of
(A) landlords
(B) overloads
(C) overlords
(D) editors
Answer:
(C) overlords

Question 63.
Under ordinary conditions, which press is singularly , free, as mentioned in the essay-
(A) European Press
(B) American Press
(C) British Press
(D) Indian Press
Answer:
(C) British Press

Question 64.
The word used in the essay for the uncontrolled freedom of one man, or one gang, to impose its will on the world is
(A) fertility
(B) coerce
(C) dictatorship
(D) tyranny
Answer:
(B) coerce

Question 65.
Freedom of Press works to secure and sustain the central doctrine of
(A) State
(B) Democracy
(C) Public
(D) personells
Answer:
(B) Democracy

Question 66.
What policy, widely circulated newspapers dare not support, however much in national interest, that might conflict, vested interests of its advertises ?
(A) man policy
(B) woman policy
(C) public policy
(D) personal policy
Answer:
(C) public policy

Question 67.
For the freedom of the press, we usually mean freedom from direction or
(A) scandal
(B) foment
(C) censorship
(D) discard
Answer:
(C) censorship

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 विक्रमशिला

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solutions Kislay Bhag 3 Chapter 12 विक्रमशिला Text Book Questions and Answers, Summary.

BSEB Bihar Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 विक्रमशिला

Bihar Board Class 8 Hindi विक्रमशिला Text Book Questions and Answers

प्रश्न – अभ्यास

पाठ से

Class 8th Hindi Bihar Board प्रश्न 1.
विक्रमशिला नामकरण के संदर्भ में जनश्रुति क्या है ?
उत्तर:
विक्रमशिला नामकरण के संदर्भ में जनश्रुति है कि विक्रम नामक यक्ष का दमन कर यहाँ बिहार (भ्रमण योग भूमि) बनाया गया। जिसके कारण इस भू-भाग का नाम विक्रमशीला रखा गया ।

Bihar Board Solution Class 8 Hindi प्रश्न 2.
विक्रमशीला कहाँ अवस्थित है ?
उत्तर:
विक्रमशीला बिहार राज्य के भागलपुर जिला में कहलगाँव के पास अंतिचक गाँव में अवस्थित है।

Bihar Board Class 8 Hindi Solutions प्रश्न 3.
यहाँ के पाठ्यक्रम में क्या-क्या शामिल था?
उत्तर:
यहाँ के पाठ्यक्रम में तंत्र शास्त्र, व्याकरण न्याय, सृष्टि-विज्ञान, शब्द-विद्या, शिल्प-विद्या, चिकित्सा-विद्या, सांख्य, वैशेषिक, अध्यात्म विद्या विज्ञान, जादू एवं चमत्कार विद्या शामिल थे।

पाठ से आगे

Bihar Board Class 8 Hindi प्रश्न 1.
परिभ्रमण के दौरान आप इस स्थल का चयन करना क्यों पसंद करेंगे?
उत्तर:
परिभ्रमण के दौरान इस स्थल का चयन हम इसलिए करेंगे क्योंकि यह स्थान ऐतिहासिक है। यहाँ कभी आर्यभट्ट जैसे विश्वविख्यात खगोलशास्त्री ने अध्ययन कर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाया था । अतः शिक्षार्थियों के लिए यह स्थल नमन करने योग्य है।

Bihar Board Class 8 Hindi Solution प्रश्न 2.
इस विश्वविद्यालय को आधुनिक बनाने के लिए आप क्या-क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
इस विश्वविद्यालय को आधुनिक बनाने के लिए हमारा सुझाव है कि इस विश्वविद्यालय को समृद्ध करें । ज्ञान-विज्ञान का अध्यापन आधुनिक ढंग से करवाया जाये । समृद्ध पुस्तकालय समृद्ध प्रयोगशाला का होना अनिवार्य

बिहार बोर्ड क्लास 8 हिंदी सलूशन प्रश्न 3.
तंत्र विद्या के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
तंत्र-विद्या को जानने वाले तांत्रिक कहलाते हैं। इस विद्या से आसानीपूर्वक कोई कार्य शीघ्र कर लिया जाता है।

Bihar Board 8th Class Hindi Book प्रश्न 4.
निम्नलिखित संस्थाओं को उनकी श्रेणी के अनुसार बढ़ते क्रम में सजाइए।
उत्तर:

  1. प्रारम्भिक विद्यालय,
  2. प्राथमिक विद्यालय,
  3. माध्यमिक विद्यालय,
  4. महाविद्यालय,
  5. विश्वविद्यालय।

व्याकरण

संधि : दो वर्गों के मेल से होनेवाले परिवर्तन को संधि कहते हैं। जैसे-पुस्तक + आलय = पुस्तकालय अ + आ = आ,

संधि के तीन भेद होते हैं-

  1. स्वर संधि,
  2. व्यंजन संधि,
  3. विसर्ग संधि ।

स्वर संधि : दो स्वर वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को ‘स्वर संधि’ कहते हैं।

जैसे-विद्या + अर्थी = विद्यार्थी, आ + अ = आ।

व्यंजन संधि : व्यंजन वर्ण के साथ स्वर अथवा व्यंजन वर्ण के मेल से होने वाले परिवर्तन को ‘व्यंजन संधि’ कहते हैं। जैसे दिक् + गज = दिग्गज।

विसर्ग संधि : विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो परिवर्तन होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे-मनः + रथ =, मनोरथ

Bihar Board Class 8 Hindi Book Solution प्रश्न 1.
ऊपर दी गई जानकारी के आधार पर संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए।

प्रश्नोत्तर :

  1. अतिशयोक्ति = अतिशय + उक्ति = स्वर संधि
  2. सर्वाधिक = सर्व + अधिक = स्वर संधि
  3. परीक्षा = परि + इच्छा = व्यञ्जन संधि
  4. उल्लेखनीय = उत् + लेख + अनीय = स्वर संधि
  5. पुस्तकालय = पुस्तक + आलय = स्वर संधि
  6. शोधार्थी = शोध + अर्थी = स्वर संधि
  7. विद्यार्थी = विद्या + अर्थी = स्वर संधि
  8. प्रत्येक = प्रति + एक = स्वर संधि
  9. नवागत = नव + आगत = स्वर संधि
  10. उच्चादर्श = उच्च + आदर्श = स्वर संधि
  11. नामांकित = नाम + अंकित = स्वर संधि
  12. अवलोकितेश्वर = अवलोकित + ईश्वर = स्वर संधि

Class 8 Hindi Bihar Board प्रश्न 2.
ऊपर बॉक्स में दी गई जानकारी के आधार पर निम्नलिखित शब्दों का समास बताइए
प्रश्नोत्तर:

  1. अभेद्य = नज समास ।
  2. अखण्ड = नत्र समास. ।
  3. पथरघट्टा = तत्पुरुष समास ।
  4. द्वारपंडित = तत्पुरुष समास ।
  5. कुलपति = तत्पुरुष समास ।
  6. शिक्षा केन्द्र = तत्पुरुष समास ।
  7. देश-विदेश = द्वन्द्व समास ।
  8. अलौकिक = नब समास ।

Class 8 Hindi Bihar Board Solution प्रश्न 3.
संधि और समास में अंतर बताइए।
उत्तर:
संधि और समास में निम्नलिखित अंतर है

  1. संधि में दो वर्णों का मेल होता है । जैसे देव + आलय = देवालय समास में दो पदों का मेल होता है। गंगाजल ।
  2. संधि में वर्ण मेल से वर्ण परिवर्तन होते हैं। समास में दो पदों (शब्दों) के बीच का कारक के चिह्न (विभक्ति) का लोप हो जाता है। जैसे-गंगा का जल = गंगाजल ।

गतिविधि

Class 8 Hindi Chapter 12 प्रश्न 1.
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भाँति प्राचीन काल में भारत में ‘नालंदा, तक्षशिला आदि विश्वविद्यालय शिक्षा के केन्द्र से उसके सम्बन्ध में शिक्षक से जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

Bihar Board Class 8th Hindi Solution प्रश्न 2.
सहपाठियों एवं अध्यापकों के साथ विक्रमशिला का परिभ्रमण कीजिए एवं वहाँ प्राप्त पुरातात्त्विक सामग्रियों की एक सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

विक्रमशिला Summary in Hindi

संक्षेप–विश्वविद्यालय महान खगोल शास्त्री “आर्यभट्ट” एवं तिब्बत ‘ में बौद्ध धर्म तथा लामा सम्प्रदाय के संस्थापक ‘अतिश दीपंकर’ की विद्यास्थली विक्रमशीला प्राचीन भारत को ज्ञान-विद्या के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठता प्रदान करने वाली विश्वविद्यालय में एक था।

बिहार राज्य के भागलपुर जिला में कहलगांव के पास अंतीचक गाँव में इसकी स्थापना आठवीं शदी के मध्य पालवंश के प्रतापी राजा धर्मपाल ने किया था जो बौद्धिक शक्ति प्रधान स्थली होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर

चमकने लगा। अपने आचार्यों के विक्रमपूर्ण आचरण के कारण तथा अखंडशील सम्पन्नता के कारण ही इस विश्वबिद्यालय का नाम विक्रमशीला पड़ा। यह भी किंवदंति है कि विक्रम नामक यक्ष को दमन कर इस स्थान को विहार (भ्रमण) के लायक बनाया गया।

इस प्रांगण में ‘छ: महाविद्यालय प्रत्येक महाविद्यालय के गेट पर “द्वार पण्डित” नियुक्त थे। जो तंत्र, योग, न्याय, काव्य और व्याकरण में पारंगत थे। वे महाविद्यालय में दाखिला पाने के पूर्व महाविद्यालय के द्वार पर ही मौखिक परीक्षा लेते थे। जो छात्र द्वार पण्डितों के प्रश्नों का उत्तर दे देते । वही विक्रमशीला विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में दाखिला पाते थे।

इस विश्वविद्यालय में समृद्ध पुस्तकालय जहाँ तत्र, तर्क, दर्शन और बौद्ध दर्शन से संबंधित ग्रंथों का विशाल संग्रह मौजूद था। अधिकृत आचार्य और शोधार्थी द्वारा पाण्डुलिपियों को तैयार किया जाता था। राजा गोपाल के समय अष्टशाहस्रिका प्राज्ञ पारमिता नामक प्रसिद्ध ग्रंथ यही तैयार किया गया था जो आज भी ब्रिटिश म्युजियम, लंदन में धरोहर रूप में रखा हुआ है।

यहाँ धन-शील, धैर्य, वीर्य, ध्यान, पाज्ञा, कौशल्य प्राणिधान बल एवं ज्ञान -10 परिमिताओं में पारंगत करवाकर छात्र को महामानव बना दिया जाता था। . दसवीं-ग्यारहवीं सदी तक यह पूर्वी एशिया महादेश का ज्ञान-दान का सबसे बड़ा केन्द्र बन चुका था।

छात्रों के लिए प्रथम वर्ग ‘भिक्षु वर्ग’ था । यहाँ का छात्र बन जाना ही गौरव की बात मानी जाती थी। देश-विदेश में राजा-महाराजाओं से यहाँ के ही छात्र सम्मान पुरस्कार का हकदार बन जाते थे।

यहाँ तंत्र, व्याकरण, न्याय, सृष्टि-विज्ञान, शब्द-विद्या, शिल्प-विद्या, ” चिकित्सा-विद्या, सांख्य, वैशेषिक, आत्मविद्या, विज्ञान, जादू एवं चमत्कार विद्या इस विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मलित थे। अध्यापन का मध्यम संस्कृत भाषा थी।

तेरहवीं सदी के आरम्भ में तुर्कों के आक्रमण के कारण इस विश्वविद्यालय का विनाश हो गया। तुर्कों ने इसे भ्रमवश किसी का किला मानकर इसे तहस-नहस कर दिया था। यह बात “तबाकत-ए-नासीरी” नामक ग्रंथ में सम्यक् रूप से वर्णित है।

वर्तमान सरकार की सकारात्मक सोच और पुरातात्विक विभाग के प्रयास से गुमनाम यह विश्वविद्यालय पुनः सुर्खियों में आ रहा है। खुदाई के बाद 50 फीट ऊँची एवं 73 फीट चौड़ी इमारत के रूप में चैत्य प्राप्त हुए हैं। भूमि स्पर्श की मुद्रा में साढ़े चार फीट की भगवान बुद्ध

की मूर्ति, पदमासन पर बैठे अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा, पद्मपाणि, मैत्रेय की प्रतिमा तथा क्षतिग्रस्त कुछ सीलें उपलब्ध हुए हैं। शैक्षणिक परिभ्रमण के दृष्टिकोण से यह स्थान दर्शनीय एवं ज्ञानवर्धक

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 7 Macavity : The Mystery Cat

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 100 Marks Objective Answers Poem 7 Macavity : The Mystery Cat

Macavity The Mystery Cat Objective Questions Bihar Board 12th  Question 1.
‘Macavity : The Mystery Cat’ is written by-
(A) D.H. Lawrence
(B) Walter De La Mare
(C) T.S. Eliot
(D) Kamala Das
Answer:
(C) T.S. Eliot

Macavity: The Mystery Cat Objective Questions Bihar Board 12th Question 2.
T.S. Eliot was born in-
(A) 1888
(B) 1885
(C) 1876
(D) 1891
Answer:
(A) 1888

Macavity The Mystery Cat Questions And Answers Bihar Board 12th Question 3.
T.S. Eliot died in-
(A) 1915
(B) 1965
(C) 1955
(D) 1935
Answer:
(B) 1965

Macavity The Mystery Cat Is Written By Bihar Board 12th Question 4.
Macavity is-
(A) Fat
(B) Short
(C) Tall and thin
(D) Dome shaped
Answer:
(C) Tall and thin

Macavity The Mystery Cat Question Answer Bihar Board 12th Question 5.
Macavity an defy or disobey or challenge-
(A) His master
(B) The food
(C) The law
(D) The dog
Answer:
(C) The law

Bihar Board 12th English Objective Question 12th Question 6.
Macavity is-
(A) A soldier
(B) A dog
(C) A cat
(D) A boy
Answer:
(C) A cat

12th English Objective Questions And Answers Pdf 2020 Question 7.
T.S. Eliot got Nobel Prize for literature in-
(A) 1938
(B) 1948
(C) 1936
(D) 1946
Answer:
(B) 1948

Cat English Questions With Answers Pdf Bihar Board 12th Question 8.
Macavity : The Mystery Cat is a-
(A) Drama
(B) Satire
(C) Light poem
(D) Literary poem
Answer:
(C) Light poem

Macavity The Mystery Cat Question Answer Class 12 Bihar Board Question 9.
Macavitv’s powers of leviation would make a stare.
(A) saint
(B) devil
(C) fakir
(D) None of these
Answer:
(C) fakir

Macavity The Mystery Cat By Ts Eliot Bihar Board 12th Question 10.
Macavity is outwardly—
(A) miserable
(B) healthy
(C) appealing
(D) respectable
Answer:
(D) respectable

Question 11.
Macavity’s foot-prints are not found in any ……….. of Scotland yard.
(A) file
(B) book
(C) copy
(D) None of these
Answer:
(A) file

Question 12.
According to Eliot, Macavity is the ……….. of Crime.
(A) Hitler
(B) Napoleon
(C) Alexander
(D) None of these
Answer:
(B) Napoleon

Question 13.
Who has composed the poem, ‘Macavity : The Mystery Cat’? ‘
(A) T.S. Eliot
(B) W.B. Yeats
(C) W.H. Auden
(D) None of these
Answer:
(A) T.S. Eliot

Question 14.
Eliot was awarded the Nobel Prize for literature in —
(A) 1947
(B) 1948
(C) 1949
(D) 1950
Answer:
(B) 1948

Question 15.
Eliot belonged to ……….. century.
(A) 18th
(B) 19th
(C) 20th
(D) None of these
Answer:
(C) 20th

Question 16.
Eliot was a—
(A) poet
(B) verse dramatist
(C) critic
(D) All of these
Answer:
(D) All of these

Question 17.
‘Macavity: the Mystery Cat’ is a ……….. poem.
(A) humprous
(B) didactic
(C) symbolic
(D) None of these
Answer:
(A) humprous

Question 18.
Macavity is the ……….. of Scotland Yard.
(A) despair
(B) bafflement
(C) frustration
(D) None of these
Answer:
(B) bafflement

Question 19.
T.S. Eliot has written the poem—
(A) Fire-Hymn
(B) Snake
(C) Macavity : The Mystery Cat
(D) The Soldier
Answer:
(C) Macavity : The Mystery Cat

Question 20.
……….. is a master of criminal.
(A) Macavitv
(B) Monkey
(C) Racavity
(D) None of these
Answer:
(B) Monkey

Question 21.
Macavity is called
(A) The Hidden Paw
(B) The Mysterious Paw
(C) the exposed paw
(D) The naughty paw
Answer:
(A) The Hidden Paw

Question 22.
Macavity is the settlement of—
(A) Bcotyard
(B) Mcotyard
(C) Scotyard
(D) None of these
Answer:
(C) Scotyard

Question 23.
…………. is tall and thin,
(A) Nacavity
(B) Macavity
(C) Lacavity
(D) Sacavity
Answer:
(B) Macavity

Question 24.
Macavity is a —
(A) dog
(B) Rat
(C) tiger
(D) Cat
Answer:
(D) Cat

Question 25.
Mungojerrie and Griddlebone are also— [2018A, I.A.]
(A) dogs
(B) Monkeys
(C) birds
(D) Cats
Answer:
(D) Cats

Question 26.
Macavity is an — [2018A, I.A.]
(A) outlaw
(B) Criminals
(C) looter
(D) diplomat
Answer:
(A) outlaw

Question 27.
Macavity is full of –
(A) happiness
(B) Sadness
(C) selfishness
(D) Decitfullness

Question 28.
Macavity disappears from the place of theft before the reach ………….. there.
(A) Owner
(B) Police
(C) Charles
(D) None of these
Answer:
(B) Police

Question 29.
‘He’s is broken every human law’ is taken from—
(A) The Soldier
(B) Fire-Hymn
(C) An Epitaph
(D) Macavity : The Mystery cat
Answer:
(D) Macavity : The Mystery cat

Question 30.
‘And when the foreign office find a Treaty’s gone astray’ is written by—
(A) Walt Whitman
(B) Rupert Brooke
(C) T.S. Eliot
(D) Kamala Das
Answer:
(C) T.S. Eliot

Question 31.
Macavity can defy or challenge-
(A) Anyone
(B) The food
(C) The law
(D) The dog
Answer:
(C) The law

Question 32.
‘Macavity: The Mystery Cat’ is written by-
(A) D. H. Lawrence
(B) Walter de la Mare
(C) T.S. Eliot
(D) Kamala das
Answer:
(C) T.S. Eliot

Question 33.
T.S. Eliot died in-
(A) 1955
(B) 1965
(C) 1955
(D) 1935
Answer:
(B) 1965

Question 34.
Macavity is-
(A) Fat and tall
(B) Short
(C) Tall and thin
(D) Dome Shaped
Answer:
(C) Tall and thin

Question 35.
T.S. Eliot was born in-
(A) 1888
(B) 1855
(C) 1877
(D) 1895
Answer:
(A) 1888

Question 36.
Macavity is-
(A) A spy
(B) A dog
(C) A Cat
(D) A boy
Answer:
(C) A Cat

Question 37.
T.S. Eliot Nobel Prize Literature is-
(A) 1938
(B) 1948
(C) 1932
(D) 1946
Answer:
(B) 1948

Question 38.
Macavitv : The Mystery Cat is a-
(A) Drama
(B) Satire
(C) Light poem
(D) Literarary poem
Answer:
(C) Light poem

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers David Copperfield

Bihar Board 12th English Objective Questions and Answers 

Bihar Board 12th English 50 Marks Objective Answers David Copperfield

David Copperfield Objective Question Answer Bihar Board Question 1.
‘David Copperfield’ has been written by
(A) Charles Dickens
(B) G.B. Shaw
(C) William Shakespeare
(D) None of these
Answer:
(A) Charles Dickens

David Copperfield Question Answer Bihar Board Question 2.
Why does David go to Yarmouth ?
(A) To go to school
(B) To visit Peggotty’s family
(C) To visit his aunt
(D) To find a wife
Answer:
(B) To visit Peggotty’s family

David Copperfield Novel Questions And Answers Bihar Board Question 3.
What happens while David is in yarmouth with Peggotty ?
(A) His aunt dies
(B) His mother marries Mr. Murdstone
(C) His mother has a baby
(D) He gets sick
Answer:
(B) His mother marries Mr. Murdstone

David Copperfield Quiz Bihar Board Question 4.
What kind of step father is Mr. Murdstone
(A) Kind
(B) Generous
(C) Strict
(D) Loving
Answer:
(C) Strict

David Copperfield Questions And Answers Bihar Board Question 5.
David endured all sufferings at Salem house because of his friendship with two boys
(A) Jack and Jill
(B) Tommy and Ronny
(C) Tommy and Steerforth
(D) Johny and Sunny
Answer:
(C) Tommy and Steerforth

David Copperfield Questions Bihar Board Question 6.
David’s school education ended with
(A) death of his mother
(B) death of his step-father
(C) death of his uncle
(D) death of his brother
Answer:
(A) death of his mother

David Copperfield Novel Questions And Answers Pdf Bihar Board Question 7.
David copperfield is the ………… novel by Charles Dickens
(A) sixth
(B) eight
(C) fourth
(D) none of these
Answer:
(B) eight

David Copperfield By Charles Dickens Questions And Answers Bihar Board Question 8.
David Copperfield was published in
(A) 1902
(B) 1850
(C) 1912
(D) 1875
Answer:
(B) 1850

David Copperfield Questions And Answers Pdf Bihar Board Question 9.
David Copperfield was bom in
(A) Blunderstone
(B) Derbyshire
(C) Glumorgan
(D) Warwickshire
Answer:
(A) Blunderstone

Question 10.
His (David) mother marries to Edward Murdstone when he was
(A) Seven years old
(B) Ten years old
(C) Twelve Years old
(D) None of these
Answer:
(A) Seven years old

Question 11.
was Murdstone’s
(A) wife
(B) sister
(C) aunt
(D) None of these
Answer:
(B) sister

Question 12.
David was married to
(A) Dora Spenlow
(B) Besty Trotwood
(C) Jane
(D) None of these
Answer:
(A) Dora Spenlow

Question 13.
David lived a happy conjugal (married) life with
(A) Jane
(B) Agnes
(C) B. Trotwood
(D) None of these
Answer:
(B) Agnes

Question 14.
Clara Copperfield was David’s
(A) mother
(B) sister
(C) aunt
(D) none of these
Answer:
(A) mother

Question 15.
Who was the faithful servant of the copperfield family ?
(A) Clara Peggotty
(B) Murstone
(C) Uriah heep
(D) None of these
Answer:
(A) Clara Peggotty

Question 16.
Mr. Barkis was the husband of
(A) Peggotty
(B) Dora
(C) Agnes
(D) none of these
Answer:
(A) Peggotty

Question 17.
Emily was a childhood friend of
(A) David
(B) Murdstone
(C) Daniel Peggotty
(D) None of these
Answer:
(A) David

Question 18.
John Dickens was the father of
(A) Chrales Dickens
(B) Murdstone
(C) David Copperfield
(D) None of these
Answer:
(A) Chrales Dickens

Question 19.
Wilkins Micawber was a friend of .
(A) David Copperfield
(B) Murdstone
(C) Uriah Heep
(D) None of these
Answer:
(A) David Copperfield

Question 20.
Emma Micawber was the wife of
(A) Wilkins Micawber
(B) David
(C) Uriah Heep
(D) None of these
Answer:
(A) Wilkins Micawber

Question 21.
Mr. Wickfield was the father of
(A) Agnes Wickfield
(B) Dora Spenlow
(C) C. Peggotty
(D) None of these
Answer:
(A) Agnes Wickfield

Question 22.
“Loving heart was better and stronger than wisdom” is a famous quote from chapter …….. of the David Copperfield.
(A) 9 th
(B) 12 th
(C) 13 th
(D) 18th
Answer:
(A) 9 th

Question 23.
Charles Dickens was born on
(A) Feb 7, 1812
(B) Feb 9, 1814
(C) Feb 7,1815
(D) Feb 7, 1912
Answer:
(A) Feb 7, 1812

Question 24.
“A man must take the fat with the lean” is a famous quote from
(A) David Copperfield
(B) Hamlet
(C) Pride and Prejudes
(D) None of these
Answer:
(A) David Copperfield

Question 25.
“Trifles make the sum of life” is quoted in the
(A) Chapter 53
(B) Chapter 61
(C) Chapter 60
(D) None of these
Answer:
(A) Chapter 53

Question 26.
“The labour is so pleasant” said Agnes, “that it is scarcely grateful in me to call it by that name” is quoted in
(A) Chapter 60
(B) Chapter 51
(C) Chapter 06
(D) None of these
Answer:
(A) Chapter 60

Question 27.
Agnes is David’s wife.
(A) first
(B) second
(C) third
(D) fourth
Answer:
(B) second

Question 28.
How long after his father’s death is David born
(A) Four months
(B) One day
(C) Two weeks
(D) six months
Answer:
(D) six months

Question 29.
What about David’s birth offends his great aunt, Miss Betsy Trotwood
(A) David cries when Miss Besty holds him
(B) The fact that he is not a girl
(C) The fact that he is ugly
(D) His mother asks Miss Betsy to leave
Answer:
(B) The fact that he is not a girl

Question 30.
Who begins to court David’s mother ?
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Micawber
(C) Mr. Copperfield
(D) Mr. Murdstone
Answer:
(D) Mr. Murdstone

Question 31.
What does Peggotty object to ?
(A) David going to school
(B) Mr. Murdstone courting David’s mother
(C) Working late
(D) Miss Betsy moving in
Answer:
(B) Mr. Murdstone courting David’s mother

Question 32.
David was sent to work for long hours in …….. of Murdstone and Grinby:
(A) Coffee house
(B) Ware house
(C) Tea-club
(D) Textile factory
Answer:
(B) Ware house

Question 33.
After leaving ware house job, David went to live with his great aunt betsy Trotwood’s who live in
(A) London
(B) Oxford
(C) Derbyshire
(D) Dover
Answer:
(D) Dover

Question 34.
David was very happy when Betsy Trotwood decided to send him to a good school in :
(A) Salisbury
(B) Canterbury
(C) Cambridge
(D) London
Answer:
(B) Canterbury

Question 35.
During his school days, David live with Betsy’s lawyer
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. Bluefield
(C) Mr. Jamesfield
(D) None of these
Answer:
(A) Mr. Wickfield

Question 36.
At Mr. Wickfield’s house David met ………….. who was Mr. Wickfield’s clerk
(A) Mr. Peggotty
(B) Uriah Heep
(C) Mr. Creakle
(D) James Steerforth
Answer:
(B) Uriah Heep

Question 37.
Mr. Creakle was :
(A) a ruthless headmaster
(B) a painter
(C) an actor
(D) none of these
Answer:
(A) a ruthless headmaster

Question 38.
C. Peggotty was married to
(A) Mr. Barkis
(B) W. Micawber
(C) David
(D) None of these
Answer:
(A) Mr. Barkis

Question 39.
Betsey Trotwood was David’s
(A) aunt
(B) daughter
(C) servant
(D) None
Answer:
(A) aunt

Question 40.
Uriah Heep was sent to jail for attempting to defrand the
(A) Bank of England
(B) Bank of America
(C) Bank of Japan
(D) None of these
Answer:
(A) Bank of England

Question 41.
Doctor Strong was David’s
(A) teacher
(B) friend
(C) uncle
(D) none of these
Answer:
(A) teacher

Question 42.
Mr. Barkis bequeaths to his wife an astronomical sum of
(A) £3000
(B) £ 2000
(C) £ 4000
(D) None of these
Answer:
(A) £3000

Question 43.
Who is the main antagonist of the first half of the novel ?
(A) Edward Murstone
(B) Micawber
(C) David
(D) None of these
Answer:
(A) Edward Murstone

Question 44.
Edward Murdstone was the step father of
(A) David
(B) Uriah Heep
(C) Dora
(D) None of these
Answer:
(A) David

Question 45.
Uriah Heep is the clerk of …………….
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. Micawber
(C) Besty Trotwood
(D) Clara Peggotty
Answer:
(A) Mr. Wickfield

Question 46.
Clara Peoggotty was a ……………. in the house of David Copperfieid.
(A) watchman
(B) servant
(C) aunt
(D) electrician
Answer:
(B) servant

Question 47.
How many novels Charles Dickens wrote
(A) 15
(B) 10
(C) 12
(D) None
Answer:
(A) 15

Question 48.
Which novel of Charles Dickens is based on his real life story
(A) David Copperfieid
(B) Pickwick Papers
(C) Oliver Twist
(D) Great Expectations
Answer:
(A) David Copperfieid

Question 49.
Jane Murdstone was the confidential friend of
(A) Dora Spenlow
(B) Agnes
(C) Daniel Peggotty
(D) None of these
Answer:
(A) Dora Spenlow

Question 50.
Daniel Peggotty was a
(A) Painter
(B) Fisherman
(C) Actor
(D) None of these
Answer:
(B) Fisherman

Question 51.
Who is the main antagonist of the novel’s second half
(A) Uriah Heep
(B) Wilkins Micawber
(C) Mr. Wickfield
(D) None of these
Answer:
(A) Uriah Heep

Question 52.
Uriah Heep nurtures a deep hatred for
(A) David Copperfieid
(B) Murdstone
(C) Dr. Strong
(D) None of these
Answer:
(A) David Copperfieid

Question 53.
Francis spenlow was the father of
(A) Dora spenlow
(B) Agnes Wickfield
(C) Daniel Peggotty
(D) None of these
Answer:
(A) Dora spenlow

Question 54.
Who was a poor teacher at Salem House ?
(A) Mr. Mell
(B) Dr. Strong
(C) Murdstone
(D) None of these
Answer:
(A) Mr. Mell

Question 55.
Mr. Sharp was the chief teacher of
(A) Salem House
(B) Trotwood’s house
(C) Micawber’s House
(D) None of these
Answer:
(A) Salem House

Question 56.
Who said, “It is only my child-wife” ?
(A) David
(B) Uriah Heep
(C) Micawber
(D) None of these
Answer:
(A) David

Question 57.
Why does David go to yarmouth?
(A) to go to school
(B) to visit his aunt
(C) to mid a wife
(D) to visit peggotty’s family
Answer:
(D) to visit peggotty’s family

Question 58.
What kind of step-father is Mr. Vlurdstone?
(A) Kind
(B) strict
(C) generous
(D) loving

Question 59.
David Copperfield was born in –
(A) Derbyshire
(B) Glumorgan
(C) Blunderstone
(D) None of these
Answer:
(C) Blunderstone

Question 60.
Jane was Murdstone’s –
(A) Wife
(B) Sister
(C) aunt
(D) None of these
Answer:
(B) Sister

Question 61.
Mr. Creakle was –
(A) a painter
(B) an actor
(C) a cruel headmaster
(D) None of these

Question 62.
Peggotty was married to —
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Barkis
(C) David
(D) None of these

Question 63.
David lived a happy conjugallife with—
(A) Jane
(B) B. Trotwood
(C) Agnes
(D) None of these

Question 64.
W ho was the faithful servant of the copperfield family?
(A) Murdstone
(B) Clara Peggotty
(C) Uriah Heep
(D) None of these
Answer:
(B) Clara Peggotty

Question 65.
Who is the main antagonist of the first half of the novel?
(A) David
(B) Micawber
(C) Edward Murdstone
(D) None of these
Answer:
(C) Edward Murdstone

Question 66.
Jane Murdstone was the confidential friend of—
(A) Dora spenlow
(B) Daniel Peggotty
(C) Agens
(D) None of these
Answer:
(A) Dora spenlow

Question 67.
Daniel Peggotty was a —
(A) painter
(B) fisherman
(C) actor
(D) None of these
Answer:
(B) fisherman

Question 68.
Emily was a childhood friend of—
(A) Murdstone
(B) Daniel Peggotty
(C) David
(D) None of these
Answer:
(C) David

Question 69.
Mr. Micawber was friend of—
(A) David-Copperfield
(B) Murdstone
(C) Uriah Heep
(D) None of these
Answer:
(A) David-Copperfield

Question 70.
Who is the main antagonist of the novel’s half?
(A) Mr. Wickfield
(B) Uriah Heep
(C) Mr. Micawber
(D) None of these
Answer:
(B) Uriah Heep

Question 71.
Who was a poor teacher at Salem House?
(A) Mr. Melt
(B) Dr. Strong
(C) Murdstone
(D) None of these
Answer:
(A) Mr. Melt

Question 72.
“A man must take the fat with the lean” is a famous quote from—
(A) Hamlet
(B) David Copperfield
(C) Pride and Prejudes
(D) None of these
Answer:
(B) David Copperfield

Question 73.
‘David Copperfield’ is a novel about ……….. psychology.
(A) adult
(B) female
(C) child
(D) old
Answer:
(C) child

Question 74.
Which novel of Charles Dicknes is based on his real life story—
(A) Oliver Twist
(B) Pickwick Papers
(C) Great Expectations
(D) David Copperfield
Answer:
(D) David Copperfield

Question 75.
Agnes is David’s ………… wife.
(A) first
(B) second
(C) third
(D) fourth
Answer:
(B) second

Question 76.
How many novels Charles Dicknes wrote? –
(A) 10
(B) 12
(C) 15
(D) None of these
Answer:
(C) 15

Question 77.
David Copperfield was published in —
(A)1840
(B) 1845
(C) 1850
(D) 1855
Answer:
(C) 1850

Question 78.
David copperfield was published in –
(A) 1840
(B) 1845
(C) 1850
(D) 1855
Answer:
(C) 1850

Question 79.
The family doctor of Copperfield’s family—
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Mell
(C) Mr. Wickfield
(D) Mr. Chillip
Answer:
(D) Mr. Chillip

Question 80.
Who was David’s early nurse?
(A) Agnes Wickfield
(B) Uriah Heep
(C) Micawber
(D) Clara Peggotty
Answer:
(D) Clara Peggotty

Question 81.
David revolted against-
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Murdstone
(C) Mr. Mell
(D) Mr.Barkis

Question 82.
Clara Peggottv’s nephew was —
(A) Tommy
(B) Creakle
(C) Ham
(D) None of these

Question 83.
Who was the emplovee of a wine-factory?
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Barkis
(C) Mr. Steerforth
(D) Mr. Micawber

Question 84.
Who begins to court David’s mother ?
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Creakle
(C) Mr. Murdstone
(D) None of these

Question 85.
Dr. Strong w as David’s
(A) teacher
(B) friend
(C) uncle
(D) None of these

Question 86.
John Dickens was the father of—
(A) Murdstone
(B) David Copperfield
(C) Charles Dicknes
(D) None of these
Answer:
(C) Charles Dicknes

Question 87.
Emma Micawber was the wife of— .
(A) Uriah Heep
(B) Wilkins Micawber
(C) David
(D) None of these
Answer:
(B) Wilkins Micawber

Question 88.
David Copperfield’s aunt is – [2018 A, I.A.]
(A) Betsey Trotwood
(B) Uriah Heep
(C) Clara Peggotty
(D) Agnes Wickfield
Answer:
(A) Betsey Trotwood

Question 89.
Mr. Wickfield suffers from — [2018 A, I.A.]
(A) Insomnia
(B) Cancer
(C) Chronic Willness
(D) Alcoholism
Answer:
(D) Alcoholism

Question 90.
What is the name of David’s house? 12018 A, LA. j
(A) Yarmouth
(B) Blundstone Roobery
(C) Salem House
(D) Limestone Aviary
Answer:
(B) Blundstone Roobery

Question 91.
David Copperfield is a novel written by-
(A) William Shakespeare
(B) Thomas Hardy
(C) Charles Dickens
(D) Henry james
Answer:
(C) Charles Dickens

Question 92.
Charles Dickens has written the noyel-
(A) David Copperfield
(B) Pamela
(C) The Old Man and The Sea
(D) The Portrait of a Lady
Answer:
(A) David Copperfield

Question 93.
Who is the hero of the novel’David Copperfield’?
(A) Uriah Heep
(B) David Copperfield
(C) Mr. Micawber
(D) None of them
Answer:
(B) David Copperfield

Question 94.
Who is the villain of the novel’David Copperfield’?
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Murdstone
(C) David Copperfield
(D) Uriah Heep
Answer:
(D) Uriah Heep

Question 95.
Mr. Murdstone is the step-father of-
(A) Uriah Heep
(B) Mr. Micawber
(C) David Copperfield
(D) None of them Ans. (C)

Question 96.
Mr. Murdstone is the of David.
(A) watchman
(B) servant
(C) aunt
(D) step-father
Answer:
(D) step-father

Question 97.
Uriah Heep is the clerk of-
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. Micawber
(C) Betsy Trotwood
(D) Clara Peggotty
Answer:
(A) Mr. Wickfield

Question 98.
David endured all suffering at Salem House because of his friendship with two boys
(A) Jack and Jill
(B) Tommy and Ronny
(C) Tommy and Steerforth
(D) Johny and Sunny
Answer:
(C) Tommy and Steerforth

Question 99.
David’s school education ended with the—
(A) death of his mother
(B) death of his step-father
(C) death of his uncle
(D) death of his brother
Answer:
(A) death of his mother

Question 100.
Mr. Micawber is a
(A) farmer
(B) social worker
(C) businessman
(D) principal
Answer:
(C) businessman

Question 101.
Miss Clara Peggotty is the servant of—
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Wickfield
(C) Mr. Dick
(D) David
Answer:
(D) David

Question 102.
Barkis is the husband of-
(A) Dora Spenlow
(B) Agnes
(C) Clara Peggotty
(D) None of them
Answer:
(C) Clara Peggotty

Question 103.
Agnes is the daughter of-
(A) Mr. Murdstone
(B) Mr. Wickfield
(C) Mr. Micawber
(D) Mr.dick

Question 104.
Agnes is the second wife of-
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Micawber
(C) David
(D) Barkis
Answer:
(C) David

Question 105.
Dora is the daughter of-
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. creakle
(C) Mr. Micawber
(D) Mr.spenlow
Answer:
(D) Mr.spenlow

Question 106.
Dora is the first wife of-
(A) Mr. Wickfield
(B) David
(C) Mr. Micawber
(D) None of them

Question 107.
Miss Lane Murdstone is the sister of-
(A) Mr. Murdstone
(B) Mr. Dick
(C) Mr. Micawber
(D) David

Question 108.
Mr. Dick is the secretary of-
(A) Mr. Creakle
(B) Uriah Heep
(C) Miss Trotwood
(D) Mrs. Copperfield
Answer:
(C) Miss Trotwood

Question 109.
Mrs Copperfield is the mother of-
(A) Mr. Barlas
(B) Mr. Creakle
(C) Mr. Dick
(D) David

Question 110.
Tommy is a sincere friend of-
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Spenlow
(C) David
(D) Uriah Heep

Question 111.
David was sent to work for long hours …………….. of Murdstone and Grinby.
(A) coffee house
(B) ware house
(C) tea-club
(D) textile factory
Answer:
(B) ware house

Question 112.
After leaving warehouse-job, David went to live with his great aunt Betsy Trotwood who lived in—
(A) London
(B) Oxford
(C) Derbyshire
(D) Dover
Answer:
(D) Dover

Question 113.
David was very happy when Besty decided to send him to a good school in-
(A) Salisbury
(B) Canterbury
(C) Cambridge
(D) London

Question 114.
David was tortured by
(A) Mr. Murdstone
(B) Mr.Creakle
(C) Both of them
(D) None of them
Answer:
(C) Both of them

Question 115.
Besty Trotwood is the aunt of –
(A) Peggotty
(B) Agnes
(C) Mr. Dick
(D) Davild
Answer:
(D) Davild

Question 116.
During his school days, David liked with Besty’slawyer-
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. Jamesfield
(C) Mr. Bloomfield
(D) None of them
Answer:
(A) Mr. Wickfield

Question 117.
At Mr. Wickfield’s house David met-who was Mr. Wickfield’s clerk.
(A) Mr. Peggoty
(B) Uriah Heep
(C) Mr. Creakle
(D) James Steerforth
Answer:
(B) Uriah Heep

Question 118.
David was born-after his father’s death.
(A) four months
(B) six months
(C) eight months
(D) ten months
Answer:
(B) six months

Question 119.
David was brought up by-
(A) Besty Trotwood
(B) Miss Lane Murdstone
(C) Miss Clara Paggotty
(D) None of them
Answer:
(C) Miss Clara Paggotty

Question 120.
David was born after the death of his-
(A) aunt
(B) father
(C) nurse
(D) None of them
Answer:
(B) father

Question 121.
David was the nephew of-
(A) Betsy Trotwood
(B) Paggotty
(C) Dora
(D) Agnes
Answer:
(A) Betsy Trotwood

Question 122.
David was the husband of-
(A) Dora
(B) Agnes
(C) Both of them
(D) None of them
Answer:
(C) Both of them

Question 123.
Mr. Murdstone was a very-
(A) kind man
(B) cruel man
(C) gentle man
(D) None of them
Answer:
(B) cruel man

Question 124.
All Salem House David was tortured by-
(A) Mr. creakle
(B) Mr. Murdstone
(C) Mr. Dick
(D) Streeforth
Answer:
(A) Mr. creakle

Question 125.
Who was arrested and put into the prison?
(A) David
(B) Mr. Murdstone
(C) Mr. Dick
(D) Mr. Micawber
Answer:
(D) Mr. Micawber

Question 126.
Who was a black hearted man and he betraved everyone?
(A) David
(B) Micawber
(C) Uriah Heep
(D) Barkis
Answer:
(C) Uriah Heep

Question 127.
After the death of Dora David married with—
(A) Agnes
(B) Paggott
(C) Miss Lane Murdstone
(D) None of them
Answer:
(A) Agnes

Question 128.
Who is the main culprit of the novel ‘David Copperfield’?
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Creakle
(C) Uriah Heep
(D) Barkis
Answer:
(C) Uriah Heep

Question 129.
David’s sufferings started when his mother married-
(A) Mr. Creakle
(B) Mr. Murdstone
(C) Mr. Dick
(D) Mr. Micawber
Answer:
(B) Mr. Murdstone

Question 130.
Step father of David Copperfield ……………….
(A) Clara Peggoty
(B) Mr. Murdstone
(C) David Copperfield
(D) Dora Spenlow
Answer:
(B) Mr. Murdstone

Question 131.
David Copperfield’s mother was ……………….
(A) Clara peggotty
(B) Betsey Trotwood
(C) Dora Spenlow
(D) Mrs. Clara Copperfield
Answer:
(D) Mrs. Clara Copperfield

Question 132.
Clara Peggotty was the ………………. Copperfield.
(A) friend
(B) hard working servant
(C) aunt
(D) sister
Answer:
(B) hard working servant

Question 133.
The family doctor of Copperfield’s family
(A) Mr. Mell
(B) Mr. Wickfield
(C) Mr. Chillip
(D) Mr. Creakle
Answer:
(C) Mr. Chillip

Question 134.
Who has written David Copperfield 1
(A) David Copperfield
(B) Charles Dickens
(C) Charles Charly
(D) Charles David
Answer:
(B) Charles Dickens

Question 135.
The owner of the school-Salem House
(A) Mr. Wickfield
(B) Mr. Quinion
(C) Mr. Mell
(D) Mr. Creakle
Answer:
(D) Mr. Creakle

Question 136.
Dora Spenlow was the….
(A) beloved
(B) aunt
(C) friend
(D) sister
Answer:
(A) beloved

Question 137.
Uriah Heep is the black hearted, mischievous clerk of …………………
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Chillp
(C) Mr. Wickfield
(D) Mr. Spenlow
Answer:
(C) Mr. Wickfield

Question 138.
David’s second wife was ……………
(A) Clara
(B) Emily
(C) Miss Creakle
(D) Agnes
Answer:
(D) Agnes

Question 139.
Miss Betsey Trotwood was David’s ……………..
(A) father’s aunt
(B) father’s sister
(C) mother’s sister
(D) best friend
Answer:
(A) father’s aunt

Question 140.
………….. is the most comic figure in the novel.
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Wickfield
(C) Mr. Spenlow
(D) Mr. Creakle
Answer:
(A) Mr. Micawber

Question 141.
…………….. is the manager of the firm of Murdstone and Grinby.
(A) Mr. Dick
(B) Mr. Quinion
(C) Uriah Heep
(D) J Steerforth
Answer:
(B) Mr. Quinion

Question 142.
David revolted against ……………..
(A) Mr. Meil
(B) Mr. Barkis
(C) Mr. Creakle
(D) Mr. Murdstone
Answer:
(D) Mr. Murdstone

Question 143.
…………. drives a cart.
(A) Yawler
(B) Mr. Barkis
(C) Ham
(D) Tommy Tradles
Answer:
(B) Mr. Barkis

Question 144.
…………… was the employee of a wine-factory.
(A) Mr. Micawber
(B) Mr. Creakle
(C) Mr. Barkis
(D) J. Steerforth
Answer:
(A) Mr. Micawber

Question 145.
Charming lady, the daughter of Mr. Spenlow …………….
(A) Clara
(B) Dora
(C) Emily
(D) Peggotty
Answer:
(B) Dora

Question 146.
Clara Peggoty’s nephew was ……………
(A) Tommy
(B) Ham
(C) Creakle
(D) Mell
Answer:
(B) Ham

Question 147.
David’s old classmate, whose father was a lawyer.
(A) Steerforth
(B) Tradles
(C) Yawler
(D) Ham
Answer:
(C) Yawler

Question 148.
Solely responsible in the turning fortunes in David’s life …………..
(A) Dora Spenlow
(B) Miss Betsey Trotwood
(C) Agnes
(D) Mrs. Murdstone
Answer:
(B) Miss Betsey Trotwood

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 1 पंच परमेश्वर

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions गद्य Chapter 1 पंच परमेश्वर

पंच परमेश्वर अति लघु उत्तरीय प्रश्न

पंच परमेश्वर कहानी के प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 1.
प्रेमचन्द ने कितनी कहानियाँ लिखी है?
उत्तर-
प्रेमचन्द ने लगभग 300 कहानियाँ लिखी हैं।

पंच परमेश्वर कहानी की विशेषता Bihar Board प्रश्न 2.
‘पंच परमेश्वर’ कहानी में किसका उद्घाटन हुआ है?
उत्तर-
‘पंच परमेश्वर’ कहानी में जीवन सत्य का मार्मिक उद्घाटन हुआ है।।

पंच परमेश्वर प्रश्न उत्तर Bihar Board प्रश्न 3.
पंच के पद पर प्रतिष्ठित व्यक्ति किसके प्रति उत्तरदायी होता है?
उत्तर-
पंच के पद पर प्रतिष्ठित व्यक्ति जाति, धर्म और सम्बन्धों से सर्वथा मुक्त न्याय के प्रति उत्तरदायी होता है।

Panch Parmeshwar Kahani Ka Uddeshya Bihar Board प्रश्न 4.
प्रेमचन्द की कहानी में उनकी चिन्ता के केन्द्रों में क्या रहा है?
उत्तर-
प्रेमचन्द की कहानी में उनकी चिन्ता के केन्द्रों में सदैव शोषित, पीडित, प्रताड़ित और उपेक्षित मनुष्य की मुक्ति रहा है।

पंच परमेश्वर कहानी का उद्देश्य लिखिए Bihar Board प्रश्न 5.
पंच की जबान से कौन बोलता है?
उत्तर-
पंच की जबान से ईश्वर अर्थात् खुदा बोलता है।

पंच परमेश्वर कहानी के प्रश्न उत्तर Class 6 Bihar Board प्रश्न 6.
जुम्मन की पत्नी का क्या नाम था?
उत्तर-
जुम्मन की पत्नी का नाम करीमन था।

पंच परमेश्वर कहानी का सारांश लिखिए Bihar Board प्रश्न 7.
जुम्मन के पिता का नाम क्या था?
उत्तर-
जुमराती शेख।

Panch Parmeshwar Kahani Ka Uddeshy Bihar Board प्रश्न 8.
अलगू चौधरी के गुरु का क्या नाम था?
उत्तर-
जुमराती शेख।।

Panch Parmeshwar Questions And Answers In Hindi Bihar Board प्रश्न 9.
प्रेमचन्द का पहला उपन्यास कौन है?
उत्तर-
सेवा सदन।

Panch Parmeshwar Summary In Hindi Bihar Board प्रश्न 10.
प्रेमचन्द का अन्तिम उपन्यास कौन-सा है?
उत्तर-
मंगल सूत्र।

Panch Parmeshwar Question And Answer Bihar Board प्रश्न 11.
प्रेमचंद का जन्म किस सन् में हुआ था?
उत्तर-
सन् 1880 में।

प्रश्न 12.
प्रेमचंद के समग्र कहानी-संग्रह का क्या नाम है?
उत्तर-
प्रेमचंद की कहानियाँ।

पंच परमेश्वर लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जुम्मन शेख और अलगू चौधरी के मित्रता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जुम्मन शेख और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेनदेन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे तब अपना घर अलगू को सौंप गए थे और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खान-पान का व्यवहार था न धर्म का नाता, केवल विचार मिलते थे। मित्रता का मूलमंत्र भी यही है।

इस मित्रता का जन्म उसी समय हुआ जब दोनों मित्र बालक थे और जुम्मन के पूज्य पिता, जुमराती उन्हें शिक्षा प्रदान करते थे।

प्रश्न 2.
जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की योग्यता, शिक्षा और मान-सम्मान की तुलना कीजिए।
उत्तर-
शिक्षा प्राप्त करने के लिए अलगू चौधरी ने अपने गुरु, शेख जुमराती की बहुत सेवा की थी, खूब रकाबियाँ मॉजी, खूब प्याले धोये। उनका हुक्का एक क्षण के लिए भी विश्राम न लेने पाता था क्योंकि प्रत्येक चिलम अलगू को आधे घंटे तक किताबों से अलग कर देती थी।

अलगू के पिता पुराने विचार वाले मनुष्य थे उन्हें शिक्षा की अपेक्षा गुरु की सेवा-सुश्रुषा पर अधिक विश्वास था। वह कहते थे कि शिक्षा पढ़ने से नहीं आती जो कुछ होता है गुरु के आशीर्वाद से ही होता है। जुम्मन शेख के पूज्य पिता ने दोनों की शिक्षा पर आशीर्वाद से अधिक सोटें का प्रयोग किया था। शैक्षणिक योग्यता के कारण ही आसपास के गाँवों में जुम्मन की पूजा होती थी। उनके लिखे हुए रेहननामे या बैनामें पर कचहरी की मुहर भी कलम न उठा सकता था। हल्के का डाकिया, कान्सटेबल और तहसील का चपरासी-सब उनकी कृपा की आकंक्षा रखते थे। यदि अलगू चौधरी का मान उनके धन के कारण था तो जुम्मन शेख अपनी अनमोल विद्या से ही सबके आदर पात्र बने थे।

प्रश्न 3.
जुम्मन शेख की खाला क्यों पंचायत करने पर मजबूर हो गई थी?
उत्तर-
जुम्मन शेख की बूढी खाला के पास कुछ थोड़ी-सी मिलकियत थी, उनको कोई निकट संबंधियों में से जीवित न था। इसलिए जुम्मन ने लंबे-चौड़े वादे करके वह मिलकियत अपने नाम लिखवा ली थी। जब तक दानपात्र की रजिस्ट्री न हुई थी, तब तक खालाजान का खूब आदर-सत्कार किया गया, पर रजिस्ट्री की मुहर ने इन खातिरदारियों पर भी मानो मुहर लगा दी। जुम्मन शेख की पत्नी करीमन रोटियों के साथ कड़वी बातों के कुछ तेज, तीखे सालन भी देने लगी। जुम्मन शेख भी निठुर हो गए।

खालाजान को प्रायः नित्य ही कड़वी बातें सुननी पड़ती थीं। बुढ़िया न जाने कब तक जीएगी। दो-तीन बीघे ऊसर क्या दे दिया, मानो मोल ले लिया है। इन बातों को सुन सुन कर खालाजान बिगड़ गयीं और पंचायत करने पर मजबूर हो गई।

प्रश्न 4.
प्रेमचंद ने उत्तरदायित्व की व्याख्या किस प्रकार की है? स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रेमचंद के विचार के अनुसार उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है। जब हम राह भूल कर भटकने लगते हैं तब यही ज्ञान हमारा विश्वसनीय पथ-प्रदर्शक बन जाता है। पत्र-संपादक अपनी शान्ति कुटी में बैठा हुआ कितनी धृष्टता और स्वतंत्रता के साथ अपनी प्रबल लेखनी से मंत्रिमण्डल पर आक्रमण करता है; परन्तु ऐसे अवसर आते हैं, जब वह स्वयं मंत्रिमण्डल में सम्मिलित होता है। मण्डल के भवन में पग धरते ही उसकी लेखनी कितनी मर्मज्ञ, कितनी विचारशील, कितना न्यायपरायण हो जाती है। इसका कारण उत्तरदायित्व का ज्ञान है।

नवयुवक युवावस्था में कितना उदण्ड रहता है। माता-पिता उसकी ओर से कितने चिन्तित रहते हैं। वे उसे कुल-कलंक समझते हैं परन्तु थोड़े ही समय में परिवार का बोझ सिर पर पड़ते ही वह अव्यवस्थित-चित्त उन्मत्त युवक कितना धैर्यशील कैसा शान्तचित हो जाता है, यह भी उत्तरदायित्व के ज्ञान का फल है।

जुम्मन शेख के मन में भी सरपंच का उच्च स्थान ग्रहण करते ही अपनी जिम्मेदारी का भाव पैदा हुआ। उसने सोचा, मैं इस समय न्याय और धर्म के सर्वोच्च आसन पर बैठा हूँ। मेरे मुँह से इस समय जो कुछ निकलेगा वह देववाणी के सदृश है और देववाणी में मेरे मनोविकारों का कदापि समावेश न होना चाहिए मुझे सत्य से जौ भर भी टलना उचित नहीं।

प्रश्न 5.
पंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है। कैसे?
उत्तर-
पंच परमेश्वर’ कहानी प्रेमचंद की एक प्रारम्भिक पर प्रसिद्ध कहानी है। पंच के पद पर बैठनेवाला व्यक्ति अन्यायपूर्ण निर्णय नहीं दे सकता। वह न्याय करता है।

जुम्मन शेख और अलगू चौधरी में गाढी मित्रता थी। जुम्मन शेख और उनकी खाला के बीच मतभेद होने पर अलगू चौधरी पंच मुकर्रर किए गए।

जुम्मन बोले-पंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है। पंच ईश्वर की वाणी को अभिव्यक्ति देकर दूध का दूध और पानी का पानी कर देता है।

बाद में खाला ने जुम्मन के मित्र अलगू को ही पंच चुना और अलगू ने खाला के पक्ष में निर्णय सुनाया।

सच है पंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है। पंच के दिल में खुदा बसता है। पंचों के मुँह से जो बात निकलती है, वह खुदा की तरफ से निकलती है।

प्रश्न 6.
कलियुग में दोस्त का व्यवहार कैसा होता है?
उत्तर-
कलियुग में दोस्त भी मौका पड़ने पर शत्रु सा व्यवहार करने लगता है। शत्रु तो शत्रु है ही।

लेकिन इस कहानी में पंच के रूप में जब अलगू बैठता है तो जुम्मन के खिलाफ फैसला देता है।

यहाँ कहानीकार कहता है कि कलियुग में दोस्त भी दगा देता है।

प्रश्न 7.
अच्छे कामों की सिद्धि में देर लगती है। पठित पाठ के आधार पर बनाएँ।
उत्तर-
पंच में परमेश्वर बसता है। जुम्मन के खिलाफ जब अलगू ने फैसला सुनाया तो जुम्मन को यह बात खटकने लगी। जुम्मन को जल्द ही बदला लेने का मौका मिल गया।

इसी पर प्रेमचंद कहते हैं-अच्छे कामों की सिद्धि में देर लगती है। बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं होती।

प्रश्न 8.
“अपने उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है। जब हम राह भूल कर भटकने लगते है। तब यही ज्ञान हमारा विश्वसनीय पथ-प्रदर्शक बन जाता है।”
उत्तर-
प्रस्तुत अवतरण प्रेमचंद की श्रेष्ठ कहानियों में से एक ‘पंच परमेश्वर’ से ली गई हैं खालाजान की पंचायत में अलगू चौधरी ने मित्र जुम्मन के खिलाफ फैसला सुनाकर जुम्मन से शत्रुता मोल ले ली थी। जुम्मन को विश्वासघाती मित्र से बदला चुकाने का अवसर मिलता है अलगू चौधरी और समझू साहू के बैल के मुकदमे में। समझू साहू जुम्मन को पंच बनाते हैं। जुम्मन के पंच बनते ही अलगू का कलेजा धक्-धक् करने लगता है।

मगर जुम्मन सरपंच बनते ही अलगू के साथ पुरानी शत्रुता को भूल जाते है, और एक उत्तरदायी सरपंच की तरह दूध का दूध और पानी का पानी करते हुए-सत्य का साथ देते हैं और फैसला समझू के विरुद्ध देते हैं-इसका कारण यही है कि व्यक्ति जब स्वतंत्र होता है, तब उसकी मन:स्थिति उदण्ड होती है, वह लापरवाह होता है। किन्तु जब उसके ऊपर जबाबदेही आती है तब वह लापरवाह नहीं रह पाता। उसके सारे संकुचित विचार एवं व्यवहार बदल जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि उत्तरदायित्व का ज्ञान संकुचित विचारों का सुधारक होता है।

जब व्यक्ति उत्तरदायित्व के पथ से भटकने लगता है तब उत्तरदायित्व का यही ज्ञान उसका विश्वसनीय साथी बन उसका पथ प्रदर्शन करता है, उसे भटकने नहीं देता। सत्य पथ से विचलित नहीं होने देता। यही उत्तरदायित्व का ज्ञान जुम्मन और अलगू को मित्रता या शत्रुता के संकुचित विचारों से मुक्त कर सत्य का साथ देने से असत्य को दण्डित करने को प्रेरित करता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पंच परमेश्वर कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर-
प्रेमचन्द की कहानियाँ भारतीय जीवन व्यवस्था का आइना है। उन्होंने अपनी कहानी ए परमेश्वर’ में शोषित, पीडित, प्रताड़ित, उपेक्षित लोगों की दशाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया है। उनकी कहानियाँ जाति-सम्प्रदाय और धार्मिक पाखंड से पूँजीवादी सामंती समाज की हृदयहीनता के विरुद्ध विद्रोह का शंखनाद करती है।

प्रस्तुत कहानी ‘पंच परमेश्वर’ में दो दृश्य उपस्थित कर जिसमें जुम्मन शेख, खालाजान, अलगू चौधरी, समझू साहू के माध्यम से न्याय के विजय को पुनर्स्थापित किया है और यह सिद्ध कर दिया है कि पंच में परमेश्वर का वास होता है। उसमें मित्रता कहीं भी बाधक नहीं होती है। जैसे जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की खानदानी मित्रता उस पर खालाजान के साथ होने वाली घटना में अलगू चौधरी ने जिस तरह पंचायत में फैसला दिया वह मित्रता की जगह न्याय का पक्ष लेकर पंच में परमेश्वर का वास है उसको सिद्ध करता है।

दूसरे दृश्य में अलगू चौधरी और समझू साहू की अनबन में पंचायत में जुम्मन शेख का पंच होना, जो अलगू चौधरी से खार खाए बैठा है उसने भी दुश्मनी को त्याग कर न्याय का पक्ष लेकर पंच में परमेश्वर का वास है उसकी पुष्टि करता है।

अन्ततः सार रूप में प्रेमचन्द ने समाज के उपेक्षित, प्रताड़ित, शोषित लोगों की मार्मिक दशा का चित्रण बड़े ही संवेदनशील रूप में व्यक्त कर उससे छुटकारा पाने के लिए जिस न्याय की स्थापना की है उससे ‘पंच की जुवान से खुद बोलता है’ को पंच परमेश्वर शीर्षक कहानी के माध्यम से सिद्ध कर दिया है।

प्रश्न 2.
‘प्रेमयंद’ के जीवन और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
जनमुक्ति-संघर्ष के महान योद्धा कथाकार प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई, 1880 ई. को वाराणसी से छ: मील दूरी लमही ग्राम में और मृत्यु 1936 ई. वाराणसी में हुई। उन्होंने निम्न मध्यवर्गीय जीवन के अभावों, संकटों और परेशानियों से निरन्तर जूझते हुए अपने मानवीय एवं सृजनात्मक व्यक्तित्व का निर्माण किया और अपने देश और दुनिया के मनुष्यों की मुक्ति के लिए अपना तन-मन-धन सब कुछ होम कर दिया।

अपने जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले इस सार्वकालिक अमर रचनाकार ने अपने उपन्यासों और कहानियों के जरिये एक सुखी-समृद्ध मानवीय विश्व समाज के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से ही अपने जीवन और साहित्य दोनों में अनवरत एक योद्धा की भूमिका का निर्वाह किया, जिसकी उपलब्धि के रूप में निर्मला, सेवा सदन, गबन रंगभूमि, कर्मभूमि और गोदान तथा अपूर्ण मंगल सूत्र जैसे श्रेष्ठ उपन्यास प्राप्त हैं।।

प्रेमचन्द ने एक कहानीकार के रूप में लगभग 300 कहानियाँ लिखीं, जिनमें जीवन के हर क्षेत्र, हर वर्ग के पात्रों की जीवन स्थितियों का अत्यन्त मार्मिक चित्रण है। कहानी का विषय तात्कालिक यथार्थ हो अथवा ऐतिहासिक विषय, उनकी चिन्ता के केन्द्र में सदैव शोषित-पीड़ित, प्रताड़ित-उपेक्षित मनुष्य की मुक्ति रही है। उनकी कहानियाँ जाति-सम्प्रदाय और धार्मिक पाखण्ड से लेकर पूँजीवादी सामंती समाज की हृदयहीनता के विरुद्ध विद्रोह का शंखनाद है।

प्रश्न 3.
“पंच परमेश्वर” शीर्षक कहानी की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
‘पंच परमेश्वर’ शीर्षक कहानी प्रेमचंद जी की एक महत्वपूर्ण रचना है। इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद जी ने ग्रामीण परिवेश की स्थितियों का सही चित्रण किया है। यह कहानी गाँवों में निवास करने वाले किसानों के जीवन से संबंधित है।

प्रेमचंद की ‘पंच परमेश्वर’ कहानी की अपनी निजी विशेषताएँ हैं। इस कहानी में आदर्श और यथार्थ का उचित समन्वय दृष्टिगत होता है। इन्होंने अपनी कहानी में बेजुबान ग्रामीणों का जितना स्वाभाविक चित्रण किया है, वैसा चित्रण दूसरे किसी भी कहानीकार की रचना में नहीं मिलता।

पंच परमेश्वर कहानी का प्लौट ग्रामीण परिवेश से जुड़ा हुआ है। दैनिक जीवन की दिनचर्या के साथ पारिवारिक एवं सामाजिक बनावट का भी चित्रण सम्यक् रूप से हुआ है। गाँवों में निवास करने वाले सीधे-सादे किसानों, मजदूरों का जीवन, आपसी संबंधों का सफल एवं यथार्थ चित्रण कर कहानीकार ने अपनी कला को उत्कृष्टता प्रदान किया है।

यह कहानी भारतीय गाँव की ठेठ कहानी है। इसमें जुम्मन शेख, खालाजान, अलगू चौधरी के बीच के आत्मीय एवं पारिवारिक संबंधों का चित्रण हुआ है। घरेलू समस्याओं को लेकर यह कहानी रची गयी है। इसमें तीनों के बीच पनप रहे प्रेम, द्वेष, स्वार्थ की सूक्ष्म व्याख्या प्रेमचंद ने की है। न्याय के आसान पर बैठकर कोई किसी का न मित्र होता है और न दुश्मन। इस कहानी में न्याय के प्रति मनुष्य का क्या कर्त्तव्य होना चाहिए, प्रेमचंद ने अपने विचारों को पात्रों के माध्यम से प्रकट किया है।

पात्रों की दृष्टि से भी प्रेमचंद की यह उत्कृष्ट रचना है। इस कहानी के प्रमुख पात्र हैं। जुमराती शेख, जुम्मन मियाँ, खालाजान, अलगू, करीमन, चौधरी, रामधन मिश्र और समझू साहू।

खालाजान अपनी सारी संपत्ति जुम्मन मियाँ को दे देती है। इसके साथ खाला के भरण-पोषण की शर्ते जुड़ी हुई हैं। दूसरी तरफ समझू साहू अलगू चौधरी से एक बैल उधार लिया था। अत्यधिक काम लेने के कारण बैल असमय ही मर जाता है। दूसरी तरफ खाला जान की सेवा प्रारंभिक दौर में तो होती है किन्तु जमीन रजिस्ट्री हो जाने के बाद व्यवहार में अंतर आ जाता है।

दोनों पक्षों की तरफ से बारी-बारी से न्याय के लिए पंचायतें होती हैं जिसमें सरपंच के आसन पर बैठकर अलगू चौधरी और जुम्मन शेख दोनों एक-दूसरे द्वारा आयोजित पंचायत में नीतिपूरक न्याय की घोषणा करते हैं। मित्रता न्याय करने में बाधक नहीं बनती। दोनों न्यायोपरांत तो कुछ दिनों के लिए एक-दूसरे का दुश्मन बन जाते हैं किन्तु विवेक जगने पर किए गए न्याय को उचित ठहराते हैं। सारा द्वेष, वैमनस्य को भुलकर अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में पुनः पूर्व की तरह मित्रता प्रगाढ़ हो जाती है और दोनों एक-दूसरे के प्रति पुनः विश्वसनीय बन जाते हैं।

इस प्रकार पंच परमेश्वर कहानी के द्वारा कहानीकार के कथानक, पात्र, परिवेश एवं उनके मानसिक स्थितियों का सम्यक् चित्र खींचा है। यह एक अद्वितीय कहानी है जो आदर्शोन्मुख विशेषताओं को प्रकट करती है।

प्रेमचंदजी की कहानी कला की सबसे बड़ी विशेषता है-आदर्श और यथार्थ का समुचित समन्वय। अपनी इस कहानी में प्रेमचंद जी ने इसका समुचित निर्वाह किया है। प्रेमचंद की दृष्टि में कहानी का उद्देश्य नैतिक पतन नहीं वरन् नैतिक उत्थान करना है। यथार्थवाद आदर्शवाद दोनों ‘ का समुचित समन्वय इस कहानी में हुआ है।

इस कहानी की समाप्ति आदर्शात्मक ढंग से की गयी है। इस कहानी में समस्या का समाधान निकालकर न्याय पक्ष की प्रबलता और अनिवार्यता को कहानीकार ने प्रदर्शित किया है। प्रेमचंद का व्यक्तिगत विश्वास है कि प्रत्येक कहानी में एक ऊँचा नैतिक संदेश होना चाहिए। ऐसा न करने से समाज तथा साहित्य का कोई लाभ नहीं होगा और हमारा समाज पथभ्रष्ट हो जाएगा। उपरोक्त बातों का चित्रण पंच परमेश्वर में सम्यक् रूप से हुआ है।

पंच परमेश्वर कहानी में आदर्शोन्मुख विचारों का प्रतिपादन किया गया है।

इस कहानी की दूसरी विशेषताएँ-मनोविज्ञान की अनुमति। प्रेमचंद जी ने अपनी इस कहानी में मनोवैज्ञानिक चरित्रों की सृष्टि करने की चेष्टा की है।

प्रेमचंद ने स्थान, पात्र एवं समाज की सही तस्वीर खींचने का प्रयास किया है। ग्रामीण जीवन, अत्याचार, उत्पीड़न, शोषण, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिस्पर्धा आदि पर सम्यक् प्रकाश डालते हुए सभी स्थितियों का सुंदर चित्रण किया है।

कथोपकथन में चरित्र-चित्रण कथा-वस्तु के साथ पात्रों की स्थिति और सुरुचि पर ध्यान भी दिया है। इनकी कहानियों में कथोपकथन में सुसम्बद्धता भी पायी जाती है।

भाषा की सरलता, चलते मुहावरों का प्रयोग, हास्य-व्यंग्य का सम्मिश्रित व्यवहार, उनकी भाषा शैली की खास विशेषताएँ हैं।

प्रेमचंद की पंच परमेश्वर कहानी में कल्पना की मात्रा कम, अनुभूतियों की मात्रा अधिक है। अनुभूतियाँ भी रचनाशील भावना में अनुजित होकर कहानी बन जाती है। प्रेमचंद की दृष्टि में सर्वाधिक उत्तम वही कहानी है जिसका आधार किसी मनोवैज्ञानिक सत्य पर आधारित हो।

प्रश्न 4.
प्रेमचंद ऐसा क्यों लिखा है कि पंच के पद पर बैठकर न कोई किसी का दोस्त है, न दुश्मन। न्याय के सिवा उसे कुछ नहीं सुझता। “पंच की जुबान से खुद बोलता है।” इस विचार को स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रेमचंद की प्रमुख कहानी ‘पंच परमेश्वर’ से उपरोक्त पंक्तियाँ ली गयी हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से प्रेमचंद ने न्याय एवं मित्रता के बीच के ज्ञान, विवेक का सम्यक् चित्रण किया है।

पंच परमेश्वर कहानी के प्रमुख पात्र जुम्मन शेख और अलगू चौधरी है। दोनों में गाढ़ी दोस्ती है। दोनों के परिवार में अंतरंगता अत्यधिक दिखायी पड़ती है।।

एक बार अलगू चौधरी गाँव के समझू साहु के हाथों अपना बैल उधार बेच देते हैं। समझू साहु एक क्रूर बनिया है। वह बैल से अत्यधिक काम लेता है किन्तु उसकी यथोचित सेवा नहीं करता है।

अचानक एक दिन बैल मर जाता है। समझू साहू और सहुआइन दोनों अलगू चौधरी को भद्दी-भद्दी गालियाँ देते और कहते कि निगोड़े ने ऐसा कुलच्छनी बैल दिया कि जन्म भर की कमाई भी लूट गयी और खुद बैल भी मर गया।

बैल के मरने के कुछ दिनों बाद अलगू चौधरी ने समझू साहु से अपने बैल की कीमत माँगी। समझू साहु और उनकी पत्नी दोनों झल्लाकर अलगू चौधरी पर बरस पड़े और दोनों पक्षों में हाथापाई की नौबत भी आ गयी। गाँव के लोग हल्ला सुनकर इकट्ठे हो गए। उन लोगों ने दोनों को समझाया कि पंचायत द्वारा फैसला करवा लो। अंत में दोनों पंचायत कराने का फैसला किया और गाँववालों की बात मान ली।

एक निश्चित समय में तीसरे दिन पंचायत बैठी। गाँव भर के लोग जमा हुए थे। दोनों पक्षों के लोग दल बनाकर पंचायत में जुटे थे। पंचायत बैठने पर रामधन मिश्र ने कहा कि दोनों। पक्षों को सुनो ! अब देरी क्या है? आप लोग अपना-अपना पंच चुनिए। अलगू चौधरी ने दीन भाव से कहा-समझू साहु ही पंच चुन लें। समझू साहु गर्व से खड़ा होकर अपनी ओर से जुम्मन शेख को पंच चुन लिया।

खालाजान और जुम्मन की पंचायत में अलगू चौधरी ही पंच बने थे और उन्होंने खाला के पक्ष में न्याय सुनाकर अलगू से दुश्मनी मोल ले ली थी। अलगू और जुम्मन दोनों बचपन के मित्र थे। दोनों में पारिवारिक अंतरंगता भी थी। पंचायत के बाद अलगू और जुम्मन में खटपट हो गयी। मित्रता दाश्मनी में बदल गयी। आज वही दिन अलगू चौधरी के लिए बुरे दिन के रूप में आ गया।

पंचायत में जुम्मन शेख के पंच चुनते ही अलगू चौधरी शंका में पड़ गए। उनका दिल धक्-धक् करने लगा। जुम्मन शेख के मन पंचायत में सरपंच के सर्वोच्च आसन पर बैठते ही जिम्मेवारी का भाव जग उठा। उसने सोचा, मैं इस वक्त न्याय और धर्म के सर्वोच्च आसन पर बैठा हूँ। मेरे मुँह से इस समय जो कुछ निकलेगा वह देववाणी सदृश है, और देववाणी में मेरे मनोविकारों का कदापि समावेश न होना चाहिए। मुझे सत्य से जौ भर भी टलना उचित नहीं।

दोनों पक्षों से सवाल-जवाब करते हुए जुम्मन शेख ने फैसला सुनाया–अलगू चौधरी और समझू साहु दोनों कान खोलकर सुन लो। पंचों का न्याय है। समझू साहु बैल का पूरा दाम अलगू चौधरी को दे दें क्योंकि जिस समय बैल खरीदा गया था उस समय वह बीमार नहीं था। अत्यधिक काम लेने एवं सेवा नहीं करने के कारण बैल असमय ही मर गया। अत: इसके लिए समझू साहु दोषी है। अतः बैल की कीमत वे अलगू चौधरी को दें।

सन्याय से अलगू चौधरी फूले न समाए। वे उठ खड़े हुए और जोर से बोले पंच-परमेश्वर की जय। प्रत्येक मनुष्य जुम्मन की नीति की सराहना करते हुए कहने लगे पंच में परमेश्वर निवास करते हैं। यह उन्हीं की महिमा है पंच के सामने खोटे को कौन-कौन खरा कह सकता है। इसे कहते हैं-न्याय।

थोड़ी देर बाद जुम्मन अलगू चौधरी के पास आए और गले से लिपटकर बोले- भैया ! जब तुमने मेरी पंचायत की थी तबसे मैं तुम्हारा प्राण-घातक शत्रु बन गया था। पर आज मुझे ज्ञात हुआ कि पंच के पद पर बैठकर न कोई किसी का दोस्त होता है न दुश्मन। न्याय के सिवा उसे और कुछ नहीं सूझता। आज मुझे विश्वास हो गया कि पंच की जुबान से खुदा बोलता है।

प्रश्न 5.
“इसी का नाम पंचायत है। दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। दोस्ती, दोस्ती की जगह है, किन्तु धर्म का पालन करना मुख्य है। ऐसी ही सत्यवादियों के बल पर पृथ्वी ठहरी है, नहीं तो वह कब की रसातल की चली जाती।” स्पष्ट करें।
उत्तर-
प्रेमचंद की ‘पंच परमेश्वर’ कहानी एक मनोवैज्ञानिक कहानी है। इसका परिवेश भारतीय गाँव से जुड़ा हुआ है। इसके पात्र भी ठेठ गाँव के लोग हैं।

इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद जी ने यह दिखाने का काम किया है कि पंच के पद पर बैठने वाला व्यक्ति अन्यायपूर्ण निर्णय नहीं दे सकता। आसन ग्रहण करते ही वह विवेकी बन जाता है और सगे संबंधों को नकारते हुए न्याय का पक्ष लेता है। न्याय के आसन पर बैठकर वह ईश्वर का प्रतिरूप बन जाता है। उसके भीतर विवेक जग जाता है और पारिवारिक सामाजिक संबंध न्याय के बीच दीवार बनकर खड़े नहीं होते।

जुम्मन शेख और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। जुम्मन शेख और उनकी खाला के बीच संपत्ति एवं सेवा को लेकर कुछ खटपट हो गई। खाला ने अलगू चौधरी को पंचायत में सरपंच मनोनीत कर दिया। न्याय के आसन पर बैठकर अलगू चौधरी का विवेक जग उठा और जुम्मन शेख्न और अलगू चौधरी की प्रगाढ़ मित्रता न्याय में बाधक नहीं बन सकी।।

जुम्मन ने पंचायत में कहा कि पंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है। पंच ईश्वर की वाणी को अभिव्यक्ति देकर दूध का दूध और पानी को पानी कर ,देता है।

पंचायत में अलगू चौंधरी ने खालाा का पक्ष लिया और न्याय खाला के पक्ष में लिया तथा खाला की सेवा माहवारी खर्च बाँध दिया। इस न्याय की पंचों के लिए एवं गाँव के लोगों की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा-इसी का नाम पंचायत है। दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। दोस्ती, दोस्ती की जगह है किन्तु धर्म का पालन करना मुख्य है। ऐसे ही सत्यवादियों के बल पर पृथ्वी ठहरी है, नहीं तो कब की रसातल को चली जाती है।

पंच परमेश्वर लेखक परिचय प्रेमचंद (1880-1936)

मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई, 1880 ई. में वाराणसी में लमही गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम अजायब राय था। गाँव की पाठशाला में उन्हें उर्दू-फारसी की प्रारंभिक शिक्षा मिली। 1904 ई. में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। आर्थिक विपन्नता के कारण वे आगे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। स्वाध्याय के बल पर उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

मुंशी प्रेमचन्द अध्यापक के पद पर भी कार्य किए। शिक्षा विभग में वे डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर भी आसीन हुए। राष्ट्रीय आंदोलन और गाँधीवादी विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दिया और साहित्य की सेवा में अपना अमूल्य जीवन समर्पण कर दिया। उन्होंने हंस प्रकाशन का भी संचालन किया। वे भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष भी बने।

प्रेमचन्द ने एक कहानीकार के रूप में यश अर्जित किया। उनकी कहानियाँ भारतीय जीवन व्यवस्था की आइना है। उन्होंने अपनी कहानी में शोषित, पीड़ित, प्रताड़ित, उपेक्षित लोगों की दशाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत किया है। उनकी कहानियाँ जाति-सम्प्रदाय और धार्मिक पाखण्ड से पूँजीवादी सामंती समाज की हृदयहीनता के विरुद्ध विद्रोह का शंखनाद है। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं :

कहानी संग्रह : सप्त सरोज, नवविधि, प्रेम पचीसी, प्रेम पूर्णिमा, प्रेम द्वादशी, प्रेम-तीर्थ, प्रेम-पीयूष, प्रेम चतुर्थी, पंच प्रसून, सप्त सुमन, कफन, मान-सरोवर, प्रेम प्रतिमा, प्रेरणा, प्रेम-प्रमोद, प्रेम-सरोवर, समर यात्रा, कुत्ते की कहानी, जंगल की कहानी, अग्नि समाधि और प्रेम-गंगा।

उपन्यास : प्रेम प्रतिज्ञा, सेवन सदन, प्रेमाश्रय, निर्मला, रंगभूमि, कायाकल्प, गवन, कर्म भूमि, गोदान, मंगलसूत्र। –

नाटक : संग्राम, कर्बला, प्रेम की वेदी, रूठी रात्रि।

जीवन चरित्र : कलम, तलवार और त्याग, महात्माशेख, शादी और रामचर्चा, इसके अतिरिक्त उन्होंने अंग्रेजी साहित्य का भी अनुवाद किया, मर्यादा, माधुरी, जागरण एवं हंस पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया।

Bihar Board 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 2 जीवन संदेश

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions

Bihar Board Class 12th Hindi Book 50 Marks Solutions पद्य Chapter 2 जीवन संदेश

 

अर्थ लेखन

(1) जग में सचर अचर जितने हैं सारे कर्म-निरत हैं।
धुन है एक न एक सभी को सबके निश्चित व्रत हैं।
जीवन भर आतप सह वसुधा पर छाया करता है।
तुच्छ पत्र की भी स्वकर्म में कैसी तत्परता है।

अर्थ-प्रस्तुत कवि का कहना है कि सचर अचर जितने भी प्राणी हैं सभी स्वकर्म में लीन हैं अर्थात् प्रकृति के विभिन्न रूप स्वकर्म में तत्लीन हैं। सभी का एक निश्चित संकल्प है, एक निश्चित धुन है। कवि उदाहरण स्वरूप पृथ्वी पर उगे तुच्छ वृक्षों के बारे में कहता है कि जीवन भर सूर्य की तीखी किरणों को सहन करते हुए भी वृक्ष पृथ्वी पर छाया फैलाता है। वह अपने कर्म से विमुख कभी नहीं होता है।

(2) सिंधु विहंग तरंग-पंख को फड़का कर प्रतिक्षण में।
है निमग्न नित भूमि खण्ड के सेवन में – रक्षण में।
कोमल मलय-पवन घर-घर में सुरभि बाँट आता है।
सत्य सींचने घन जीवन धारण कर नित जाता है।

अर्थ-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि का कहना है कि पृथ्वी पर अनेक नदियाँ हैं जो पक्षियों के पंख की तरह अपनी तरंगों को फड़का कर प्रतिपल इस भूखंड की सेवा एवं रक्षा में प्रतिदिन तत्पर रहती है।

ठीक उसी प्रकार शुद्ध, सुंदर सुगन्धित पवन भी अपनी मधुर मादकता और सुंदरता को घर-घर बाँटता है। बादल भी सच्चे रूप में वर्षा करने के लिए अपना रूप धारण कर लालायित रहता है।

इस दोहे का मूल भाव यह है कि प्रकृति जिस प्रकार अपने अनेक रूपों से धारा एवं मनुष्य की सेवा-रक्षा में रत है, वैसे ही मनुष्य को भी प्रकृतिगत गुणों से संपन्न होना चाहिए।

(3) रवि जग में शोभा सरसाता सोम सुधा बरसाता।।
सब है लगे कर्म में कोई निष्क्रिय दुष्ट न आता।
है उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के. भी लघु जीवन का।
उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का।

अर्थ-सूर्य भी शोभा और ऊष्मा की वर्षा करता है। वह अपने कर्म से कभी भी विमुख नहीं होता। सभी स्वकर्म में लीन हैं तभी तो निष्क्रियता का दुष्ट नहीं आ पाता है। तृण, घास-फूस भी अपने काम में संलग्न रहते हैं। वह भी कर्ममय बना रहता है।

(4) तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल-विकसित जन्म तुम्हारा।
क्या उद्देश्य रहित है जग में तुमने कभी विचारा?
बुरा न मानो, एक बार सोचो तुम अपने मन में।
क्या कर्त्तव्य समाप्त कर लिये तुमने निज जीवन में?

अर्थ-हम तो मनुष्य हैं, अमित बल-बुद्धि सम्पन्न। हममें जन्मना अमित बुद्धि-शक्ति, बल विकसित है। क्या हम उद्देश्य-हीन हैं? क्या हमने जीवन का आवंटित कर्त्तव्य समाप्त कर लिया है? अर्थात् मानव का जीवन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अतः हमें अपने कर्तव्य से विमुख कभी नहीं होना चाहिए।

(5) जिस पर गिरकर उदर दरी से तुमने जन्म लिया है।
जिसका खाकर अन्न, सुधा सम तुमने नीर पिया है।
जिस पर खड़े हुए, खेले, घर बना बसे, सुख पाये।
जिसका रूप विलोक तुम्हारे दृग, मन, प्राण जुड़ाये॥

अर्थ-पृथ्वी पर हमने जन्म लिया है। सुधा समान अन्न खाकर और पानी पीकर हम बड़े हुए हैं। पृथ्वी के अन्न-जल से हम जीवित होकर खड़े हुए हैं। हम धरती पर विभिन्न प्रकार-की क्रियायें करते हैं। इसी धरती पर बने घर में हम रहते हैं। यहीं हमने सुख पाया है। इस धरती को देख, इसके संघर्ष और सुख को देख हमारी आँखें, मन और प्राण तृप्त हुए हैं।

(6) वह स्नेह की पूर्ति दयामयि माता-तुल्य मही है।
उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?
हाथ पकड़कर प्रथम जिन्होंने चलना तुम्हें सिखाया।
भाषा सिखा हृदय का अद्भुत रूप स्वरूप दिखाया।

अर्थ-यह धरती माता सदृश है। यह सतत् हम पर स्नेह की वर्षा करती रहती है। यह दया की साक्षात् प्रतिमूर्ति है। उसके प्रति हमारा भी कुछ कर्त्तव्य-कर्म बनता है। यहाँ हमने चलना सीखा है। यहीं समाज में हमने भाषा सीखी है। हमारा सर्वांगीण विकास भी यहीं हुआ है।

(7) जिनकी कठिन कमाई का फल खाकर बड़े हुए हो।
दीर्घ देह ले बाधाओं में निर्भय खड़े हुए हो।
जिनके पैदा किये, बुने वस्त्रों से देह ढके हो।
आतप-वर्षा-शीत-काल में पीड़ित न हो सके हो॥

अर्थ-धरती की कमाई का फल खाकर ही हम बढ़े और बड़े हुए हैं। एक बड़ी काया लेकर निर्भय-निडर बने हैं। धरती पर उपजे रूई-वस्त्र से हमने अपना शरीर ढंका है। इससे जाड़ा-गर्मी-बरसात से हमारी रक्षा हुई है, हम सुखमय जीवन व्यतीत कर सके हैं।

(8) क्या उनका उपकार-भार तुम पर लवलेश नहीं है?
उनके प्रति कर्त्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है?
सतत ज्वलित दुख-दावानल में जग के दारुण रन में।
छोड़ उन्हें कायर बनकर तुम भाग बसे निर्जन में।

अर्थ-हमें इस धरती का उपकार मानना चाहिए। हमें इस धरती के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। हमें इस धरती का ऋण धरती की सेवा करके चुकाना चाहिए। इस धरती के लोगों की सेवा करनी चाहिए। इस धरती के लोग दुख की ज्वाला में जलते रहते हैं। हमें उनका दु:ख दूर करना चाहिए। हमें कायर और डरपोक बनकर जंगल की ओर पलायन नहीं करना चाहिए।

जीवन संदेश अति लघु उत्तरीय प्रश्न

जीवन संदेश कविता का सारांश Bihar Board 12th प्रश्न 1.
राम नरेश त्रिपाठी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर-
राम नरेश त्रिपाठी का जन्म 1946 ई. में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था।

Jeevan Sandesh Poem Summary In Hindi प्रश्न 2.
उत्तर भारतीय लोक साहित्य का सर्वप्रथम संकलन एवं सम्पादन किसने किया?
उत्तर-
राम नरेश त्रिपाठी ने।

जीवन संदेश Bihar Board 12th प्रश्न 3.
जीवन संदेश’ कविता राम नरेश त्रिपाठी की किस रचना से उद्घृत है?
उत्तर-
पथिक से।

प्रश्न 4.
‘पथिक’ काव्य की रचना किस साहित्यिक विधा में की गई है?
उत्तर-
खण्ड काव्य।

प्रश्न 5.
पृथ्वी पर सबों से अधिक बुद्धिमान, बलवान और विकसित प्राणी कौन है?
उत्तर-
मनुष्य।

प्रश्न 6.
त्रिपाठी जी ने कायर किसे कहा है?
उत्तर-
अपने समाज को संकट में छोड़कर अपनी ही दुनिया में मस्त रहने वाले को त्रिपाठी जी ने कायर कहा है।

प्रश्न 7.
‘जीवन संदेश’ कविता का संदेश क्या है?
उत्तर-
‘जीवन संदेश’ कविता का मुख्य संदेश कर्मशील रहने का है।

प्रश्न 8.
श्री राम नरेश त्रिपाठी किस भाषा के कवि थे।
उत्तर-
खड़ी बोली।

प्रश्न 9.
‘कविता कोमुदी’ किसकी रचना है?
उत्तर-
श्री राम नरेश त्रिपाठी की।

प्रश्न 10.
पथिक, मिलन ओर स्वप्न किसकी रचना है।
उत्तर-
राम नरेश त्रिपाठी की।।

प्रश्न 11.
श्री त्रिपाठी ने उत्तर भारत के लिए कैसा साहित्य सर्वप्रथम संकलन एवं संगठन किया?
उत्तर-
लोक साहित्य।

प्रश्न 12.
बुरा न मानो, एक बार सोचो तुम अपने मन में। क्या कर्त्तव्य समाप्त कर लिए तुमने निज जीवन में? इसके लेखक कौन हैं?
उत्तर-
रामनरेश त्रिपाठी।

प्रश्न 13.
“जीवन संदेश” कविता किसकी रचना है?
उत्तर-
रामनरेश त्रिपाठी की।

प्रश्न 14.
वह स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है। उसके प्रति कर्त्तव्य तुम्हारा
उत्तर-
मातृभूमि को।

जीवन संदेश लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“जीवन-संदेश” कविता का संदेश क्या है?
उत्तर-
श्री राम नरेश त्रिपाठी ने इस कविता के माध्यम से कर्मशील रहने का संदेश दिया है। कवि कहते हैं कि प्रकृति के सारे सचर और अचर जीव कर्मशील हैं। सभी एक निश्चित मार्ग पर जीवन में क्रियाशील होते हैं। वह कहते हैं कि जिस पृथ्वी और मानव समाज ने हमें एक सभ्य मनुष्य बनने में निरन्तर सहयोग किया है उस देश और समाज के प्रति भी हमारा कर्तव्य है कि उसके संकट को दूर करें।

प्रश्न 2.
जीवन का मूल रहस्य क्या है?
उत्तर-
कवि श्री राम नरेश त्रिपाठी कहते हैं कि प्रकृति के विभिन्न रूपों में क्रियाशीलता पायी जाती है। पशु, पक्षी और कोमल मलय पवन अपने कर्म में निरंतर लगे रहते हैं। इसी प्रकार सूर्य, चाँद और दूसरे सभी आकशीय पिंड अपने निश्चित कर्म और उद्देश्य की पूर्ति में कर्मशील हैं। उनसे लघु भूल-चूक नहीं होती है। लेकिन मनुष्य जो सबसे अधिक बुद्धिमान, बलवान और विकसित प्राणी है वह भूल क्यों करता है? उद्देश्य रहित और कर्तव्यहीन कैसे हो जाता है? यही जीवन का मूल रहस्य है जिसको समझना चाहिए और भूल-चूक से बचना चाहिए।

प्रश्न 3.
एक देशभक्त व्यक्ति का क्या कर्त्तव्य होता है?
उत्तर-
कवि श्री राम नरेश त्रिपाठी राष्ट्रीयता और मानवता के पुजारी थे। राष्ट्रीय आंदोलन में आप जेल जा चुके थे। इसलिए वह देश प्रेम की शिक्षा देते हैं। वह कहते हैं कि एक देशभक्त व्यक्ति का कर्तव्य है कि माता तुल्य, मातृभूमि के संकट को दूर करना चाहिए। दासता, आर्थिक संकट, बाहरी आक्रमण, प्राकृतिक आपदा जैसी अवस्थाओं से मुक्ति दिलाना हमारा परम कर्त्तव्य होना चाहिए।

यदि हम अपने समाज को संकट में छोड़ कर अपनी ही दुनिया में मस्त रहते हैं तो हमें निश्चित रूप से कर्त्तव्यविमुख और कायर कहा जायगा।

प्रश्न 4.
‘तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल विकसित’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कविवर रामनरेश त्रिपाठी के जीवन-संदेश की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं-
‘तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि-बल-विकसित जन्म तुम्हारा।
क्या उद्देश्य रहित है जग में तुमने कभी विचारा?।
बुरा न मानो, एक वार सोचो तुम अपने मन में।
क्या कर्त्तव्य समाप्त कर लिये तुमने निज जीवन में?’

कवि का कहना है कि मनुष्य मनुष्यता के लिए जाना जाता है। उसमें अमृतमय-अनन्त बुद्धि, ज्ञान, शक्ति विकसित होती रहती है।

यह विचार करना चाहिए कि हम उद्देश्यरहित नहीं हैं। हमें इस संसार में आकर कोई-न-कोई श्रेष्ठ कार्य करना है।

हमें बिना बुरा माने यह सोचना है कि अपने जिम्में आवंटित कर्त्तव्य-कर्म क्या हमने पूरे कर लिये हैं? नहीं तो हमें संसार के लिए उन्हें पूरा करना होगा।

कर्त्तव्य विमुख पलायनवादी कहलाते हैं। यह देश ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ की महत्ता को जाननेवाला है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राम नरेश त्रिपाठी के जीवन और व्यक्तित्व का एक सामान्य परिचय प्रस्तुत करें।
उत्तर-
श्री राम नरेश त्रिपाठी का जन्म संवत 1946 ई. में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था। खड़ी बोली के कवियों में आपका महत्त्वपूर्ण स्थान था। आप हिन्दी के बहुत पुराने कवि हैं। आपके काव्य में भाषा का सौन्दर्य और शैली की सरलता रहती है। आप राष्ट्रीयता और मानवता के पुजारी थे। राष्ट्रीय आन्दोलन में आप जेल जा चुके थे। राष्ट्रपिता गाँधीजी का आप पर अधिक प्रभाव पड़ा था। अत: आपके खण्डकाव्यों में अहिंसक क्रांति का संदेश सामने आता है। त्रिपाठी जी ने प्रबन्ध काव्य और मुक्तक-काव्य दोनों प्रकार के काव्य सफलतापूर्वक लिखे हैं।

उनकी कृति कविता-कौमुदी नाम से प्रकाशित हुई है। त्रिपाठी जी ने उत्तर भारतीय “लोक साहित्य” का सर्वप्रथम संकलन एवं संपादन किया और हिन्दी की बड़ी सेवा की है। बाल साहित्य के भी आप सिद्धहस्त लेखक थे। इस प्रकार त्रिपाठी जी बहुमुखी प्रतिभा के साहित्यकार माने। जाते थे। अंत तक आप हिन्दी साहित्य की सेवा में लगे रहे।

आपकी प्रमुख रचनाएँ पथिक, मिलन, स्वप्न और कविता कौमुदी हैं।

प्रश्न 2.
“जीवन-संदेश” शीर्षक कविता का भाव स्पष्ट कीजिए।
अथवा,
“जीवन संदेश” कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
“जीवन संदेश” शीर्षक कविता, श्री राम नरेश त्रिपाठी की रचना है जो ‘पथिक’ खण्ड-काव्य से उद्धृत है। कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों.की क्रियाशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, कर्मशील रहने का संदेश किया है। जिस पृथ्वी और मानव-समाज ने हमें एक साथ मनुष्य बनने में निरन्तर सहयोग किया है उस देश और समाज के प्रति भी तो हमारा कुछ कर्तव्य है। यदि उस समाज को संकट में छोड़ कर हम अपनी ही दुनिया में मस्त हैं तो हम निश्चित रूप से कर्तव्यविमुख और पलायनवादी कहलायेंगे।

जीवन के रहस्य को कवि ने समझाया है। वह कहते हैं कि इस जग में सचर एवं अचर दोनों कर्म के प्रति कर्मशील हैं। सभी एक निश्चित मार्ग में जीवन भर क्रियाशील होते हैं।

पशु, पक्षी, कोमल मलय पवन अपने कर्म में लगे रहते हैं। सूर्य चन्द्रमा और दूसरे सभी आकाशीय पिंड अपने निश्चित मार्ग और उद्देश्य की पूर्ति में कर्मशील होते हैं। उनसे लघु भूलचूक भी नहीं होती है।

इस पृथ्वी पर सबों से बुद्धिमान, बलवान और विकसित प्राणी मनुष्य है। क्या ईश्वर ने मनुष्य को उद्देश्य रहित, कर्तव्यहीन बनाया है? नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन का एक उत्तम लक्ष्य सर्वश्रेष्ठ बन कर ईश्वर के आदेश का पालन करना है। अपने माता, पिता परिवार, देश, धर्म के लिए अच्छे कर्म करना है।

एक देश भक्त का कर्तव्य है कि माता तुल्य मातृ-भुमि के संकट को दूर करना चाहिए, दासता, आर्थिक संकट, बाहरी आक्रमण जैसी अवस्थाओं से मुक्ति दिलाना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए।

यदि हम अपने समाज को संकट में छोड़कर अपनी ही दुनिया में मस्त रहते हैं तो हमें निश्चित रूप से कर्तव्यविमुख और कायर कहा जायगा। अतः प्रस्तुत कविता में कवि ने मनुष्य को, देश, समाज पृथ्वी इत्यादि सभी के प्रति समर्पण भाव को दिखाने का संकल्प व्यक्त किया है जिससे हम कर्तव्यविमुख नहीं कहलायें।

जीवन संदेश कवि-परिचय – राम नरेश त्रिपाठी

कविवर रामनरेश त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला में 1946 ई. में हुआ था। उनकी रचनाएँ खड़ी बोली में पाई जाती है। उनके काव्य में भाषा का सौंदर्य परिलक्षित होता है। वे राष्ट्रीयता और मानवता के पुजारी थे। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। गाँधी के अहिंसक क्रान्ति का संदेश उनके काव्य में पाया जाता है। उन्होंने प्रबन्ध काव्य और मुक्तक काव्य की रचना की। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत है। त्रिपाठी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी प्रमुख रचना कविता-कौमुदी के नाम से प्रकाशित है। उन्होंने उत्तर भारतीय ‘लोक साहित्य’ का सर्वप्रथम संकलन और संपादन किया। वस्तुतः त्रिपाठी जी ने हिन्दी साहित्य के विकास में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं

  • पथिक
  • मिलन
  • स्वप्न
  • कविता-कौमूदी।