Bihar Board 12th Home Science Objective Important Questions Part 3

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Bihar Board 12th Home Science Objective Important Questions Part 3

प्रश्न 1.
व्यक्ति की रोग तथा मृत्यु से लड़ने की क्षमता को कहते हैं
(a) प्रतिकारक
(b) इनोकुलेशन
(c) रोग निरोधी क्षमता
(d) उपचार
उत्तर:
(c) रोग निरोधी क्षमता

प्रश्न 2.
विटामिन ‘ए’ की कमी से बच्चों को कौन-सा रोग होता है ?
(a) रतौंधी
(b) पोलियो
(c) अतिसार
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(a) रतौंधी

प्रश्न 3.
विटामिन ‘ए’ घुलनशील है
(a) जल में
(b) वसा में
(c) उपर्युक्त दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वसा में

प्रश्न 4.
विटामिन ‘बी’ की कमी से बच्चों को कौन-सा रोग होता है ?
(a) स्कर्वी
(b) रतौंधी
(c) एनीमिया
(d) बेरी-बेरी
उत्तर:
(d) बेरी-बेरी

प्रश्न 5.
विटामिन ‘डी’ की कमी से कौन-सी बीमारी होती है ?
(a) स्कर्वी
(b) एनीमिया
(c) रिकेट्स
(d) बेरी-बेरी
उत्तर:
(c) रिकेट्स

प्रश्न 6.
सूर्य की रोशनी प्रदान करता है
(a) विटामिन ‘ए’
(b) विटामिन ‘बी’
(c) विटामिन ‘सी’
(d) विटामिन ‘डी’
उत्तर:
(d) विटामिन ‘डी’

प्रश्न 7.
विटामिन ‘सी’ की कमी से कौन-सी बीमारी होती है ?
(a) रतौंधी
(b) स्कर्वी
(c) एनीमिया
(d) बेरी-बेरी
उत्तर:
(b) स्कर्वी

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सा पोषणहीनता से संबंधित रोग है ?
(a) इंफ्लुएंजा
(b) ब्रोकाइटिस
(c) एनीमिया
(d) मलेरिया
उत्तर:
(c) एनीमिया

प्रश्न 9.
प्रोटीन की कमी से बच्चों में कौन-सा रोग होता है ?
(a) अंधापन
(b) क्वाशियोरकर
(c) रिकेट्स
(d) पोलियो
उत्तर:
(b) क्वाशियोरकर

प्रश्न 10.
भोजन में आयोडीन की कमी से कौन-सी बीमारी होती है ?
(a) स्कर्वी
(b) घेघा रोग (गलगण्ड)
(c) रतौंधी
(d) रिकेट्स
उत्तर:
(b) घेघा रोग (गलगण्ड)

प्रश्न 11.
नियासिन की कमी से कौन-सा रोग होता है ?
(a) एनीमिया
(b) बेरी-बेरी
(c) पेलाग्रा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पेलाग्रा

प्रश्न 12.
13-15 वर्ष के लड़के को प्रतिदिन कितनी कैलोरी की आवश्यकता होती है ?
(a) 2200
(b) 2450
(c) 1800
(d) 3000
उत्तर:
(b) 2450

प्रश्न 13.
छायी अवस्था में कितनी अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है ?
(a) 200
(b) 500
(c) 700
(d) 900
उत्तर:
(c) 700

प्रश्न 14.
गर्भवती स्त्री को कितनी कैलोरी की आवश्यकता होती है ?
(a) 1000 कैलोरी प्रतिदिन
(b) 2000 कैलोरी प्रतिदिन
(c) 2200-2800 कैलोरी प्रतिदिन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) 2200-2800 कैलोरी प्रतिदिन

प्रश्न 15.
एक दूध पिलाने वाली माता को पहले छः महीने प्रतिदिन के आहार में कितना अतिरिक्त प्रोटीन देना चाहिए ?
(a) 10 ग्राम
(b) 15 ग्राम
(c) 17 ग्राम
(d) 25 ग्राम
उत्तर:
(b) 15 ग्राम

प्रश्न 16.
भोजन में पोषक तत्त्वों की कमी से होता है
(a) कुपोषण
(b) क्वाशियोकर
(c) बेरी-बेरी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कुपोषण

प्रश्न 17.
संतुलित आहार न ग्रहण करने से क्या प्रभाव पड़ता है ?
(a) शारीरिक शक्ति की क्षीणता
(b) भार में कमी
(c) कमजोरी
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 18.
पेचिस से पीड़ित बच्चों को दिया जाना चाहिए
(a) दूध
(b) चीनीयुक्त गर्म पानी
(c) नमकयुक्त ठंडा पानी
(d) नमक तथा चीनीयुक्त पानी का घोल
उत्तर:
(d) नमक तथा चीनीयुक्त पानी का घोल

प्रश्न 19.
जीवन रक्षक घोल उपयोगी है
(a) पोलियो में
(b) डायरिया में
(c) उपर्युक्त दोनों में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) डायरिया में

प्रश्न 20.
निर्जलीकरण के कारण मरने वाले रोगी को क्या पिलाकर बचाया जा सकता है ?
(a) ओ० आर० एस० घोल
(b) उबला पानी
(c) चाय
(d) नींबू पानी
उत्तर:
(a) ओ० आर० एस० घोल

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में से कौन वायु द्वारा संवाहित रोग नहीं है ?
(a) खसरा
(b) इन्फ्लुएन्जा
(c) निमोनिया
(d) अतिसार
उत्तर:
(d) अतिसार

प्रश्न 22.
एड्स फैलता है
(a) हाथ मिलाने से
(b) साथ-साथ खेलने से
(c) संक्रमित सूइयों से
(d) जल तथा भोजन से
उत्तर:
(c) संक्रमित सूइयों से

प्रश्न 23.
उच्च तापमान तथा त्वचा पर लाल दाने किस रोग का लक्षण है ?
(a) तपेदिक
(b) टेटनस
(c) खसरा
(d) गलघोंटू
उत्तर:
(c) खसरा

प्रश्न 24.
किस बीमारी में 104-105° फारेनहाइट तक तीव्र ज्वर रहता है ?
(a) क्षय रोग
(b) टेटनस
(c) खसरा
(d) हैजा
उत्तर:
(b) टेटनस

प्रश्न 25.
क्षय रोग के लक्षण हैं
(a) लगातार सूखी खाँसी होना
(b) 90-100° तक ज्वर रहना
(c) छाती में दर्द रहना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में कौन-सा रोग क्लोजट्रिडियन टटनाई नामक बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न होता है ?
(a) निमोनिया
(b) खसरा
(c) टिटनस
(d) पोलियो
उत्तर:
(c) टिटनस

प्रश्न 27.
किस जीवाणु के संक्रमण से कुक्कर खाँसी रोग होता है ?
(a) वैसीलस परट्यूसिस
(b) न्यूसोकोकस
(c) स्टैप्टोकोकस
(d) स्टेलेफाइलोकोस
उत्तर:
(a) वैसीलस परट्यूसिस

प्रश्न 28.
कोटीने बैक्टीरियम डिपीथीरिए नामक जीवाणु से कौन रोग फैलता है ?
(a) खसरा
(b) गलाघोंटू
(c) हैजा
(d) पेचिस
उत्तर:
(b) गलाघोंटू

प्रश्न 29.
बिबरियो कोमा नामक जीवाणु से कौन रोग होता है ?
(a) निमोनिया
(b) हैजा
(c) प्लेग
(d) खुजली
उत्तर:
(b) हैजा

प्रश्न 30.
अतिसार किससे फैलता है ?
(a) विषाणु से
(b) जीवाणु से
(c) बिबरियो कोमा से
(d) न्यूयोकिकस से
उत्तर:
(b) जीवाणु से

प्रश्न 31.
पोलियो प्रायः किस उम्र के बच्चों को अधिक होता है ?
(a) 1-2 वर्ष के बच्चे को
(b) 3-4 वर्ष के बच्चे को
(c) नवजात शिशु को
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) 1-2 वर्ष के बच्चे को

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से कौन जल तथा खाद्य पदार्थों द्वारा संवाहित रोग है ?
(a) तपेदिक
(b) खसरा
(c) हैजा
(d) डिप्थीरिया
उत्तर:
(c) हैजा

प्रश्न 33.
जन्म के समय भारतीय बच्चे की औसत लम्बाई होती है
(a) 40 सेमी०
(b) 80 सेमी०
(c) 50 सेमी०
(d) 30 सेमी०
उत्तर:
(c) 50 सेमी०

प्रश्न 34.
जन्म के समय नवजात शिशु का औसत भार होता है
(a) 2 किग्रा०
(b) 3.5 किग्रा०
(c) 3 किग्रा०
(d) 4 किग्रा०
उत्तर:
(b) 3.5 किग्रा०

प्रश्न 35.
किस महीने में बच्चा बिना सहारे खड़ा हो सकता है ?
(a) 6 महीने में
(b) 7 महीने में
(c) 9-12 महीने में
(d) 12 महीने में
उत्तर:
(c) 9-12 महीने में

प्रश्न 36.
इरिक इरिक्सन ने सामाजिक विकास के कितने स्तर बताये हैं ?
(a) दो
(b) छः
(c) आठ
(d) चार
उत्तर:
(c) आठ

प्रश्न 37.
विवृद्धि का अर्थ है
(a) गुणात्मक विकास
(b) संख्यात्मक विकास
(c) सामाजिक विकास
(d) ज्ञानात्मक विकास
उत्तर:
(b) संख्यात्मक विकास

प्रश्न 38.
प्राथमिक रंग कितने हैं ?
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छः
उत्तर:
(a) तीन

प्रश्न 39.
निम्नलिखित में कौन प्राथमिक रंग है ?
(a) लाल, हरा, पीला
(b) लाल, बैंगनी, नीला
(c) लाल, पीला, नीला
(d) हरा, पीला, नीला
उत्तर:
(c) लाल, पीला, नीला

प्रश्न 40.
निम्न में से कौन प्राथमिक रंग नहीं है ?
(a) लाल
(b) पीला
(c) हरा
(d) नीला
उत्तर:
(c) हरा

प्रश्न 41.
बैंगनी रंग है
(a) प्राथमिक
(b) द्वितीयक
(c) तृतीयक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) द्वितीयक

प्रश्न 42.
चार वर्ष का बालक किस प्रकार के रंगों को पहचानने में समर्थ होता है ?
(a) प्राथमिक
(b) माध्यमिक
(c) तृतीयक
(d) स्थानिक
उत्तर:
(a) प्राथमिक

प्रश्न 43.
निम्न में से कौन शारीरिक विकास के अंतर्गत नहीं आता है ?
(a) लम्बाई
(b) वजन
(c) दाँत
(d) भाषा
उत्तर:
(d) भाषा

प्रश्न 44.
निम्न में से कौन सामुदायिक सुविधा है ?
(a) मकान
(b) बाजार
(c) मोटर
(d) जमीन
उत्तर:
(b) बाजार

प्रश्न 45.
भाषा विकास को प्रभावित करने वाला कारक है
(a) अभ्यास
(b) परिपक्वता
(c) स्वास्थ्य
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 46.
कितने डिग्री सेल्सियस पर उबालने पर पानी में उपस्थित सभी रोगाणु मर जाते हैं ?
(a) 100°C
(b) 110°C
(c) 120°C
(d) 125°C
उत्तर:
(a) 100°C

प्रश्न 47.
मिलावट रोकने में किसकी सहायता अपेक्षित है ?
(a) खाद्य निरीक्षक
(b) आम आदमी
(c) खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 48.
निम्नलिखित में से किस चेक की राशि का भुगतान नहीं किया जाता, बल्कि व्यक्ति के नाम के खाते में जमा होता है ?
(a) वाहक चेक
(b) आदेशक चेक
(c) रेखांकित चेक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) रेखांकित चेक

Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 3

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Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 3

प्रश्न 1.
किसने कहा है, “मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदंड है”?
(a) अरस्तू
(b) प्लेटो
(c) सोफिस्ट
(d) बैन
उत्तर:
(a) अरस्तू

प्रश्न 2.
काण्ट के ज्ञान-विचार को
(a) समीक्षावाद कहते हैं
(b) अनुभववाद कहते हैं
(c) बुद्धिवाद कहते हैं
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बुद्धिवाद कहते हैं

प्रश्न 3.
अरस्तू के अनुसार कारण
(a) आकारिक है
(b) अंतिम है
(c) उपादान है
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) उपादान है

प्रश्न 4.
प्रत्ययवाद के अनुसार परम सत्ता है
(a) प्रत्यय
(b) जड़
(c) तटस्थ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्रत्यय

प्रश्न 5.
निरपेक्ष प्रत्ययवाद के प्रवर्तक हैं
(a) बर्कले
(b) प्लेटो
(c) हेगल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्लेटो

प्रश्न 6.
भौतिकवाद के अनुसार परम सत्ता है
(a) प्रत्यय
(b) तटस्थ
(c) जड़
(d) ईश्वर
उत्तर:
(d) ईश्वर

प्रश्न 7.
प्रयोजनात्मक, विश्वमीमांसीय एवं सत्तामीमांसीय युक्ति के संबंध है
(a) ईश्वर के अस्तित्व से
(b) आत्मा के अस्तित्व से
(c) जड़ के अस्तित्व से
(d) इनमें से किसी के नहीं
उत्तर:
(b) आत्मा के अस्तित्व से

प्रश्न 8.
वस्तुएँ ज्ञाता से स्वतंत्र होती हैं। यह है
(a) बुद्धिवाद
(b) प्रत्ययवाद
(c) वस्तुवाद
(d) समीक्षावाद
उत्तर:
(c) वस्तुवाद

प्रश्न 9.
एसे इस्ट परसीपी का सिद्धान्त किसने दिया है?
(a) ह्यूम
(b) बर्कले
(c) मूर
(d) प्लेटो
उत्तर:
(c) मूर

प्रश्न 10.
शिक्षा दर्शन का आधार
(a) प्रकृतिवाद है
(b) अध्यात्मवाद है
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) एवं (b) दोनों

प्रश्न 11.
व्यापार नीतिशास्त्र अध्ययन है
(a) आदर्शों का
(b) मूल्यों का
(c) लाभ का
(d) नैतिकता का
उत्तर:
(b) मूल्यों का

प्रश्न 12.
किसके अनुसार, “गीता कर्म का विज्ञान है”?
(a) बाल गंगाधर तिलक
(b) विनोबा भावे
(c) श्री अरविन्द
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर:
(a) बाल गंगाधर तिलक

प्रश्न 13.
जैन के अंतिम तीर्थंकर कौन हैं?
(a) महावीर
(b) ऋषभदेव
(c) पार्श्वनाथ
(d) शाक्य मुनि
उत्तर:
(a) महावीर

प्रश्न 14.
बौद्ध दर्शन के अनुसार प्रथम आर्य सत्य है।
(a) सुख
(b) आनन्द
(c) दु:ख का कारण
(d) दु:ख
उत्तर:
(d) दु:ख

प्रश्न 15.
सांख्य दर्शन के प्रवर्तक हैं
(a) गौतम
(b) कपिल
(c) महावीर
(d) कणाद
उत्तर:
(c) महावीर

प्रश्न 16.
पर्यावरण का संबंध है
(a) पशु से
(b) मनुष्य से
(c) देवता से
(d) वनस्पति से
उत्तर:
(d) वनस्पति से

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन आस्तिक दर्शन है?
(a) बौद्ध दर्शन
(b) जैन दर्शन
(c) न्याय दर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) जैन दर्शन

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन अनुभववादी नहीं है?
(a) लॉक
(b) बर्कले
(c) काण्ट
(d) ह्यूम
उत्तर:
(c) काण्ट

प्रश्न 19.
अद्वैत दर्शन के प्रवर्तक हैं
(a) रामानुज
(b) बल्लभ
(c) शंकर
(d) कपिल
उत्तर:
(c) शंकर

प्रश्न 20.
फिलोसफी का अर्थ है
(a) नियमों का आविष्कार
(b) ज्ञान के प्रति प्रेम
(c) अमरत्व की आकांक्षा
(d) प्रत्यय की खोज
उत्तर:
(b) ज्ञान के प्रति प्रेम

प्रश्न 21.
कर्म सिद्धान्त कारणतावाद
(a) तार्किक है
(b) न्यायिक है
(c) नैतिक है
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) नैतिक है

प्रश्न 22.
मीमांसा दर्शन है
(a) कर्मप्रधान
(b) आत्मप्रधान
(c) धर्मप्रधान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) कर्मप्रधान

प्रश्न 23.
किसके अनुसार, ‘गीता माता है’?
(a) बाल गंगाधर तिलक
(b) विनोबा भावे
(c) श्री अरविन्द
(d) महात्मा गाँधी
Ans.
(d) महात्मा गाँधी

प्रश्न 24.
जैन दर्शन के प्रथम तीर्थंकर कौन हैं?
(a) महावीर
(b) ऋषभदेव
(c) पार्श्वनाथ
(d) महादेव
उत्तर:
(b) ऋषभदेव

प्रश्न 25.
जिसके पास समबुद्धि होती है, उसे कहते हैं
(a) मुनि
(b) स्थितप्रज्ञ
(c) योगी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 26.
दुःख के कारणों का निवारण है
(a) चतुर्थ आर्य सत्य
(b) तृतीय आर्य सत्य
(c) द्वितीय आर्य सत्य
(d) प्रथम आर्य सत्य
उत्तर:
(b) तृतीय आर्य सत्य

प्रश्न 27.
व्यापार नीतिशास्त्र अध्ययन है
(a) आदर्शों का
(b) मूल्यों का
(c) लाभ का
(d) नैतिकता का
उत्तर:
(b) मूल्यों का

प्रश्न 28.
किसने कहा है, ‘मनुष्य सभी वस्तुओं का मापदंड है’?
(a) अरस्तू
(b) प्लेटो
(c) सोफिस्ट
(d) बेन
उत्तर:
(a) अरस्तू

प्रश्न 29.
भारतीय दर्शन की मूल दृष्टि है।
(a) विश्लेषणात्मक
(b) बौद्धिक
(c) आध्यात्मिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) आध्यात्मिक

प्रश्न 30.
ऋत संबंधित है
(a) नैतिक नियम से
(b) धार्मिक नियम से
(c) भौतिक नियम से
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(a) नैतिक नियम से

प्रश्न 31.
कौन आस्तिक दर्शन है?
(a) जैन
(b) बौद्ध
(c) चार्वाक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) जैन

प्रश्न 32.
भारतीय दर्शन का आस्तिक व नास्तिक विभाजन का आधार है
(a) ईश्वर में विश्वास
(b) वेदों में विश्वास
(c) (a) और
(b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वेदों में विश्वास

प्रश्न 33.
चार्वाक दर्शन है
(a) भौतिकवादी
(b) आध्यात्मवादी
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) भौतिकवादी

प्रश्न 34.
भारतीय दर्शन में यथार्थ ज्ञान को कहा जाता है
(a) प्रमा
(b) अप्रमा
(c) संभाव्य
(d) अध्यास
उत्तर:
(a) प्रमा

प्रश्न 35.
‘दर्शन’ शब्द की उत्पत्ति हुई है।
(a) ‘लु’ धातु से
(b) ‘पश्’ धातु से
(c) ‘कृ’ धातु से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 36.
पुरुषार्थ हैं
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर:
(d) चार

प्रश्न 37.
‘कर्म’ शब्द की उत्पत्ति हुई है
(a) ‘लु’ धातु से
(b) ‘कुर्म’ धातु से
(c) ‘कृ’ धातु से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) ‘कृ’ धातु से

प्रश्न 38.
भारतीय दर्शन का सामान्य लक्षण हैं
(a) अविद्या
(b) मोक्ष (मुक्ति)
(c) पुनर्जन्म
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(b) मोक्ष (मुक्ति)

प्रश्न 39.
निम्न में से कौन-सा एक दृष्टिकोण वैशेषिक के अनुसार सही नहीं है?
(a) परमाणु नित्य हैं
(b) परमाणु से बने सामान नित्य हैं
(c) परमाणु उपमान के द्वारा नहीं जाने जाते हैं
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) परमाणु उपमान के द्वारा नहीं जाने जाते हैं

प्रश्न 40.
निष्काम कर्म का मूल सिद्धांत है
(a) शारीरिक सुख
(b) कर्त्तव्य के लिए कर्तव्य
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) कर्त्तव्य के लिए कर्तव्य

प्रश्न 41.
निम्न में से कौन-सी एक वेदान्त की शाखा नहीं है?
(a) द्वैत
(b) विशिष्टाद्वैत
(c) अद्वैत
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 42.
निम्न में से कौन एक बुद्धिवादी है?
(a) लॉक
(b) बर्कले
(c) देकार्त
(d) काण्ट
उत्तर:
(c) देकार्त

प्रश्न 43.
निम्न में से कौन एक बुद्धिवादी एवं अनुभववादी नहीं है?
(a) काण्ट
(b) स्पिनोजा
(c) ह्यूम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) स्पिनोजा

प्रश्न 44.
न्याय दर्शन के प्रवर्तक हैं
(a) कपिल मुनि
(b) गौतम मुनि
(c) बादरायण
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) गौतम मुनि

प्रश्न 45.
ईश्वर के अस्तित्व की सिद्धि के लिए देकार्त ने निम्न में से किस एक सिद्धांत का प्रयोग किया है ?
(a) एक पूर्ण सत्ता समग्र विश्व का कारण होनी चाहिए
(b) एक पूर्ण सत्ता एक पूर्ण सत्ता के प्रत्यय का कारण होनी चाहिए
(c) एक पूर्ण सत्ता आश्रित सत्ताओं का कारण होनी चाहिए
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 46.
निम्न में से कौन एक समानान्तरवाद का समर्थक है?
(a) लाइबनिस
(b) लॉक
(c) देकार्त
(d) स्पिनोजा
उत्तर:
(d) स्पिनोजा

प्रश्न 47.
प्रत्ययवाद संबंधित है
(a) जड़ से
(b) चेतना से
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) चेतना से

प्रश्न 48.
निम्नलिखित में कौन-सा एक परार्थानुमान का घटक नहीं है?
(a) परामर्श
(b) उदाहरण
(c) हेतु
(d) उपनय
उत्तर:
(a) परामर्श

प्रश्न 49.
बौद्ध दर्शन के अनुसार आर्य सत्य हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) चार

Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 4 in Hindi

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Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 4 in Hindi

प्रश्न 1.
उपयोगिता का क्रमवाचक सिद्धान्त किसने प्रस्तुत किया ?
(a) मार्शल
(b) पीगू
(c) हिक्स तथा एलेन
(d) रिकार्डो
उत्तर:
(c) हिक्स तथा एलेन

प्रश्न 2.
किस बाजार में उत्पाद विभेद पाया जाता है ?
(a) शुद्ध प्रतियोगिता
(b) पूर्ण प्रतियोगिता
(c) एकाधिकार
(d) एकाधिकारी प्रतियोगिता
उत्तर:
(d) एकाधिकारी प्रतियोगिता

प्रश्न 3.
सरकार द्वारा “उच्चतम निर्धारित कीमत” तय की जाती है
(a) आवश्यक वस्तुओं पर
(b) जो बाजार निर्धारित कीमत से कम होती है
(c) सामान्य लोगों की पहुँच के अन्दर लाना
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(c) सामान्य लोगों की पहुँच के अन्दर लाना

प्रश्न 4.
कीमत उस बिन्दु पर निर्धारित होती है जहाँ
(a) वस्तु की माँग अधिक हो
(b) वस्तु की पूर्ति अधिक हो
(c) वस्तु की माँग और वस्तु की पूर्ति बराबर हो
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) वस्तु की माँग और वस्तु की पूर्ति बराबर हो

प्रश्न 5.
बाजार मूल्य पाया जाता है
(a) अल्पकालीन बाजार में
(b) दीर्घकालीन बाजार में
(c) अति दीर्घ कालीन बाजार में
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अल्पकालीन बाजार में

प्रश्न 6.
ब्रिटिश अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड केन्स की प्रसिद्ध पुस्तक “द जनरल थ्योरी” किस वर्ष प्रकाशित हुई ?
(a) 1926
(b) 1936
(c) 1946
(d) 1956
उत्तर:
(b) 1936

प्रश्न 7.
महामंदी किस वर्ष आई थी?
(a) 1949
(b) 1939
(c) 1929
(d) 1919
उत्तर:
(c) 1929

प्रश्न 8.
समष्टि अर्थशास्त्र अर्थव्यवस्था को किन क्षेत्रकों के संयोग के रूप में देखता है ?
(a) परिवार
(b) फर्म
(c) सरकार और बाह्य क्षेत्रक
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 9.
मुद्रा विकास का सही अनुक्रम कौन-सा है ?
(a) वस्तु मुद्रा, पत्र मुद्रा, धातु मुद्रा
(b) वस्तु मुद्रा, धातु मुद्रा, पत्र मुद्रा
(c) साख मुद्रा, धातु मुद्रा, पत्र मुद्रा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वस्तु मुद्रा, धातु मुद्रा, पत्र मुद्रा

प्रश्न 10.
रिजर्व बैंक ने मुद्रा के चार माप दिए हैं जो कि M1, M2, M3 और M4 हैं M1 में शामिल हैं
(a) C = जनता के पास करेंसी
(b) DD = बैंकों द्वारा शुद्ध माँग जमा
(c) OD = रिजर्व बैंक के पास अन्य जमा
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(a) C = जनता के पास करेंसी

प्रश्न 11.
उत्पादन के साधन हैं
(a) पाँच
(b) छः
(c) सात
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) पाँच

प्रश्न 12.
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्या का समाधान होता है
(a) केन्द्रीय सरकार द्वारा
(b) मूलतंत्र द्वारा
(c) केन्द्रीय नियोजन द्वारा
(d) पूँजीपति द्वारा
उत्तर:
(a) केन्द्रीय सरकार द्वारा

प्रश्न 13.
किसने कहा-“मूल्य का निर्धारण माँग एवं पूर्ति दोनों के द्वारा होता है” ?
(a) जेवेन्स
(b) वालरस
(c) मार्शल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) मार्शल

प्रश्न 14.
परिवर्तनशील अनुपातों का नियम संबंधित है
(a) अल्पकाल एवं दीर्घकाल दोनों से
(b) दीर्घकाल से
(c) अल्पकाल से
(d) अतिदीर्घकाल से
उत्तर:
(c) अल्पकाल से

प्रश्न 15.
निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है ?
(a) औसत लागत = कुल स्थिर लागत – कुल परिवर्तनशील लागत
(b) औसत लागत = औसत स्थिर लागत + कुल परिवर्तनशील लागत
(c) औसत लागत = कुल स्थिर लागत + औसत परिवर्तनशील लागत
(d) औसत लागत = औसत स्थिर लागत + औसत परिवर्तनशील लागत
उत्तर:
(c) औसत लागत = कुल स्थिर लागत + औसत परिवर्तनशील लागत

प्रश्न 16.
कौन-सा कथन सत्य है ?
(a) सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति + सीमान्त बचत प्रवृत्ति = 0
(b) सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति + सीमान्त बचत प्रवृत्ति = <1
(c) सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति + सीमान्त बचत प्रवृत्ति = 1
(d) सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति + सीमान्त बचत प्रवृत्ति = >1
उत्तर:
(a) सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति + सीमान्त बचत प्रवृत्ति = 0

प्रश्न 17.
मुद्रा का कार्य है
(a) विनिमय का माध्यम
(b) मूल्य का मापक
(c) मूल्य का संचय
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 18.
अति अल्पकाल में पूर्ति होगी
(a) पूर्णतः लोचदार
(b) पूर्णतः बेलोचदार
(c) लोचदार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूर्णतः बेलोचदार

प्रश्न 19.
पूर्ण प्रतियोगिता में
(a) औसत आय = सीमान्त आय
(b) औसत आय > सीमान्त आय
(c) औसत आय < सीमान्त आय
(d) औसत आय + औसत लागत
उत्तर:
(a) औसत आय = सीमान्त आय

प्रश्न 20.
एकाधिकृत प्रतियोगिता की धारणा को दिया है
(a) हिक्स ने
(b) चैम्बरलीन ने
(c) श्रीमती रॉबिन्सन ने
(d) सैम्यूलसन ने
उत्तर:
(c) श्रीमती रॉबिन्सन ने

प्रश्न 21.
रोजगार सिद्धान्त का सम्बन्ध है
(a) स्थैतिक अर्थशास्त्र से
(b) व्यष्टि अर्थशास्त्र से
(c) समष्टि अर्थशास्त्र से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) समष्टि अर्थशास्त्र से

प्रश्न 22.
चक्रीय प्रवाह में शामिल है
(a) वास्तविक प्रवाह
(b) मौद्रिक प्रवाह
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 23.
विदेशी विनिमय दर का निर्धारण होता है
(a) सरकार द्वारा
(b) मोल-जोल द्वारा
(c) विश्व बैंक द्वारा
(d) माँग एवं पूर्ति द्वारा
उत्तर:
(a) सरकार द्वारा

प्रश्न 24.
निम्न में कौन-सा सत्य है ?
(a) कुल राष्ट्रीय उत्पाद = कुल घरेलू उत्पाद + घिसावट व्यय
(b) शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद = कुल राष्ट्रीय उत्पाद + घिसावट व्यय
(c) शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद = कुल राष्ट्रीय उत्पाद – घिसावट व्यय
(d) कुल राष्ट्रीय उत्पाद = शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद – घिसावट व्यय
उत्तर:
(c) शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद = कुल राष्ट्रीय उत्पाद – घिसावट व्यय

प्रश्न 25.
अनुकूल भुगतान संतुलन विनिमय दर में कमी लाता है
(a) गलत
(b) सही
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) सही

प्रश्न 26.
करेंसी जमा अनुपात है
(a) लोगों द्वारा करेंसी में धारित मुद्रा + बैंक जमा के रूप में धारित मुद्रा
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 4, 1
(c) लोगों द्वारा करेंसी में धारित मुद्रा × बैंक जमा के रूप में धारित मुद्रा
(d) लोगों द्वारा करेंसी में धारित मुद्रा – बैंक जमा के रूप में धारित मुद्रा
उत्तर:
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 4, 2

प्रश्न 27.
किस अर्थव्यवस्था में निजी सम्पत्ति के अस्तित्व एवं प्रधानता पायी जाती है ?
(a) समाजवाद
(b) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(c) पूँजीवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पूँजीवाद

प्रश्न 28.
उपभोक्ता के बचत के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किय ?
(a) मार्शल
(b) डुपोन्ट
(c) हिक्स
(d) सैम्यूअलसन
उत्तर:
(a) मार्शल

प्रश्न 29.
किस बाजार में वस्तु विभेद पाया जाता है ?
(a) शुद्ध प्रतियोगिता
(b) पूर्ण प्रतियोगिता
(c) एकाधिकार
(d) एकाधिकारी प्रतियोगिता
उत्तर:
(d) एकाधिकारी प्रतियोगिता

प्रश्न 30.
बाजार के किस अवस्था में मूल्य विभेद पाया जाता है ?
(a) पूर्ण प्रतियोगिता
(b) एकाधिकार
(c) एकाधिकार प्रतियोगिता
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) एकाधिकार

प्रश्न 31.
धन का वह भाग जिसे अधिक धनोपार्जन के लिए लगाया जाता है, है
(a) उत्पादन
(b) पूँजी
(c) निवेश
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूँजी

प्रश्न 32.
चक्रीय प्रवाह के निम्न में से कौन-सा प्रकार हैं ?
(a) वास्तविक प्रवाह
(b) मौद्रिक प्रवाह
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 33.
क्या सत्य है ?
(a) GNP = SDP + घिसावट
(b) GNP = NNP – घिसावट
(c) NNP = GNP – घिसावट
(d) NNP = GNP + घिसावट
उत्तर:
(c) NNP = GNP – घिसावट

प्रश्न 34.
यह किसने कहा कि ‘पूर्ति स्वयं माँग का सृजन करती है ?
(a) जे० बी० से
(b) जे० के० मेहता
(c) हंसन
(d) कुरीहारा
उत्तर:
(a) जे० बी० से

प्रश्न 35.
एकाधिकारी अवस्था में किसी वस्तु का उत्पादक होता है
(a) एक से अधिक
(b) दो से अधिक
(c) सिर्फ एक
(d) कोई नहीं
उत्तर:
(c) सिर्फ एक

प्रश्न 36.
निम्न में से किस अर्थव्यवस्था में कीमत एवं नियोजित तंत्र मिलकर केन्द्रीय समस्याओं का समाधान किया जाता है ?
(a) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(b) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(c) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) मिश्रित अर्थव्यवस्था

प्रश्न 37.
राष्ट्रीय आय की गणना निम्न में से किस विधि से की जाती है ?
(a) उत्पादन विधि
(b) आय विधि
(c) व्यय विधि
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 38.
निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र भारत की राष्ट्रीय आय में अधिकतम सहयोग देता है ?
(a) सेवाएँ
(b) कृषि
(c) व्यापार
(d) विनिर्माण
उत्तर:
(a) सेवाएँ

प्रश्न 39.
राष्ट्रीय आय लेखांकन विधि के जन्मदाता कौन हैं ?
(a) जे० एम० कीन्स
(b) इरविन फिशर
(c) जे० एस० मिल
(d) मार्शल
उत्तर:
(a) जे० एम० कीन्स

प्रश्न 40.
भारत का वित्तीय वर्ष कौन-सा है ?
(a) 1 जनवरी से 31 दिसंबर
(b) 1 अप्रैल से 31 मार्च
(c) 30 अक्टूबर से 1 सितंबर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1 अप्रैल से 31 मार्च

प्रश्न 41.
देश में कितने राज्य वित्त निगम है ?
(a) 18
(b) 28
(c) 20
(d) 22
उत्तर:
(a) 18

प्रश्न 42.
निम्न में से कौन गुणबोधक साख नियंत्रण की विधि नहीं है ?
(a) आग्रह
(b) नैतिक दबाव
(c) बैंक दर
(d) विज्ञापन
उत्तर:
(c) बैंक दर

प्रश्न 43.
किस बाजार में AR वक्र X अक्ष के समानान्तर होता है ?
(a) एकाधिकारी
(b) पूर्ण प्रतियोगिता
(c) एकाधिकारी प्रतियोगिता
(d) द्वि-अधिकारी
उत्तर:
(b) पूर्ण प्रतियोगिता

Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 2

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Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 2

प्रश्न 1.
ज्ञानशास्त्रीय सिद्धान्त के रूप में ‘समीक्षावाद’ देन है
(a) देकार्त का
(b) स्पीनोजा का
(c) बर्कले का
(d) काण्ट का
उत्तर:
(d) काण्ट का

प्रश्न 2.
‘ज्ञान की प्राप्ति निगमनात्मक विधि से होती है’ किस ज्ञान सिद्धान्त के अनुसार?
(a) बुद्धिवाद
(b) अनुभववाद
(c) समीक्षावाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 3.
किसके अनुसार ‘यथार्थ ज्ञान सार्वभौम, अनिवार्य और नवीन होना चाहिए’?
(a) काण्ट
(b) स्पीनोजा
(c) लॉक
(d) ह्यूम
उत्तर:
(d) ह्यूम

प्रश्न 4.
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर कौन हैं?
(a) ऋषभदेव
(b) महावीर
(c) पार्श्वनाथ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ऋषभदेव

प्रश्न 5.
योग दर्शन के प्रवर्तक हैं
(a) कपिल
(b) गौतम
(c) पतंजलि
(d) कणाद
उत्तर:
(c) पतंजलि

प्रश्न 6.
सांख्य दर्शन के प्रवर्तक है
(a) महावीर
(b) कणाद
(c) कपिल
(d) पतंजलि
उत्तर:
(c) कपिल

प्रश्न 7.
अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक हैं
(a) रामानुज
(b) शंकर
(c) मध्व
(d) निम्बार्क
उत्तर:
(b) शंकर

प्रश्न 8.
पतंजलि के अनुसार नियम की संख्या कितनी है?
(a) दो
(b) पाँच
(c) तीन
(d) छ:
उत्तर:
(b) पाँच

प्रश्न 9.
शंकर के अनुसार सत्-चित्-आनंद कौन हैं?
(a) ईश्वर
(b) माया
(c) ब्रह्म
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) ब्रह्म

प्रश्न 10.
आस्तिक और नास्तिक दर्शन का भेद भारतीय सम्प्रदाय में किस आधार पर किया गया है?
(a) ईश्वर में विश्वास
(b) वेद में विश्वास
(c) आत्मा में विश्वास
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वेद में विश्वास

प्रश्न 11.
जैन दर्शन में ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धान्त क्या है?
(a) स्याद्वाद
(b) अनेकान्तवाद
(c) अख्यातिवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) स्याद्वाद

प्रश्न 12.
‘पूर्व-स्थापित सामंजस्यवाद’ दिया गया है
(a) देकार्त द्वारा
(b) स्पीनोजा द्वारा
(c) लाइबनीज द्वारा
(d) ह्यूम द्वारा
उत्तर:
(c) लाइबनीज द्वारा

प्रश्न 13.
स्पीनोजा ने स्वीकारा है
(a) अंतःक्रियावाद
(b) समानान्तरवाद
(c) पूर्वस्थापित सामंजस्यवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समानान्तरवाद

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से कौन अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र की शाखा है?
(a) पर्यावरणीय नीतिशास्त्र
(b) जैव-चिकित्सीय नीतिशास्त्र
(c) व्यवसाय नीतिशास्त्र
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 15.
पर्यावरणीय नीतिशास्त्र है
(a) मनुष्य केन्द्रित
(b) जीवन केन्द्रित
(c) पशु केन्द्रित
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(b) जीवन केन्द्रित

प्रश्न 16.
निम्न में कौन पुरुषार्थ नहीं है?
(a) अर्थ
(b) काम
(c) धर्म
(d) ईश्वर
उत्तर:
(d) ईश्वर

प्रश्न 17.
सांख्य दर्शन में आत्मा के लिए जिस पद का प्रयोग हुआ है वह है
(a) जीव
(b) आत्मा
(c) पुरुष
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) जीव

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन आस्तिक दर्शन है?
(a) जैन दर्शन
(b) बौद्ध दर्शन
(c) सांख्य दर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) जैन दर्शन

प्रश्न 19.
भारतीय दर्शन में यथार्थ ज्ञान कहलाता है
(a) प्रमा
(b) अप्रमा
(c) ख्याति
(d) प्रमाण
उत्तर:
(a) प्रमा

प्रश्न 20.
जैन दर्शन के प्रणेता हैं
(a) गौतम
(b) कपिल
(c) महावीर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) महावीर

प्रश्न 21.
न्याय दर्शन के प्रणेता हैं
(a) कपिल
(b) गौतम
(c) पतंजलि
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) गौतम

प्रश्न 22.
अनुभववाद के समर्थक हैं
(a) देकार्त
(b) स्पीनोजा
(c) ह्यूम
(d) काण्ट
उत्तर:
(c) ह्यूम

प्रश्न 23.
अयथार्थ ज्ञान कहलाता है
(a) प्रमाण
(b) प्रमा
(c) अप्रमा
(d) ख्याति
उत्तर:
(c) अप्रमा

प्रश्न 24.
भारतीय दर्शन है
(a) व्यावहारिक
(b) अव्यावहारिक
(c) परिकल्पनात्मक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) व्यावहारिक

प्रश्न 25.
वैशेषिक दर्शन के प्रणेता हैं
(a) कणाद
(b) कपिल
(c) गौतम
(d) महावीर
उत्तर:
(a) कणाद

प्रश्न 26.
देकार्त ने स्वीकारा है
(a) समानान्तरवाद को
(b) अन्तक्रियावाद को
(c) पूर्वस्थापित सामंजस्यवाद को
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अन्तक्रियावाद को

प्रश्न 27.
निम्न में से कौन पुरुषार्थ है?
(a) ईश्वर
(b) आत्मा
(c) अर्थ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) अर्थ

प्रश्न 28.
‘जान की प्राप्ति जन्मजात प्रत्यय से होती है।’ ऐसा मानना है
(a) अनुभववाद का
(b) बुद्धिवाद का
(c) समीक्षावाद के
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 29.
‘प्रतीत्य समुदाय की चर्चा बौद्ध दर्शन के लिए आर्य सत्य में हुई है?
(a) प्रथम आर्य सत्य
(b) द्वितीय आर्य सत्य
(c) तृतीय आर्य सत्य
(d) चतुर्थ आर्य सत्य
उत्तर:
(d) चतुर्थ आर्य सत्य

प्रश्न 30.
अन्तक्रियावाद सिद्धान्त के प्रवर्तक हैं
(a) स्पीनोजा
(b) लाइबनीज
(c) देकार्त
(d) ह्यूम
उत्तर:
(d) ह्यूम

प्रश्न 31.
पुरुषार्ध हैं
(a) चार
(b) पाँच
(c) दो
(d) छः
उत्तर:
(a) चार

प्रश्न 32.
‘मैं सोचता हूँ इसलिए मैं हूँ’ कथन है
(a) देकार्त का
(b) लॉक का
(c) ह्यूम का
(d) प्लेटो का
उत्तर:
(a) देकार्त का

प्रश्न 33.
शिक्षा दर्शन एक शाखा है
(a) भौतिक विज्ञान का
(b) मनोविज्ञान का
(c) दर्शनशास्त्र का
(d) तर्कशास्त्र का .
उत्तर:
(c) दर्शनशास्त्र का

प्रश्न 34.
व्यापार व्यवसाय है
(a) अनैतिक
(b) क्रूर
(c) लाभोन्मुखी
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) लाभोन्मुखी

प्रश्न 35.
अनेकान्तवाद सिद्धान्त संबंधित है
(a) बौद्ध दर्शन से
(b) जैन दर्शन से
(c) चावार्क दर्शन से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) जैन दर्शन से

प्रश्न 36.
प्रागनुभविक ज्ञान संबंधित है
(a) अनुभव से
(b) बुद्धि से
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) (a) एवं (b) दोनों

प्रश्न 37.
वस्तुवाद है
(a) तत्वमीमांसीय सिद्धान्त
(b) ज्ञानमीमांसीय सिद्धान्त
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ज्ञानमीमांसीय सिद्धान्त

प्रश्न 38.
निम्न में से कौन चिंतक संदेहवाद से संबंधित हैं?
(a) लॉक
(b) स्पीनोजा
(c) ह्यूम
(d) प्लेटो
उत्तर:
(d) प्लेटो

प्रश्न 39.
निम्न में से कौन चिंतक कारणता के सिद्धान्त से संबंधित हैं?
(a) ह्यूम
(b) मिल
(c) अरस्तु
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) अरस्तु

प्रश्न 40.
मीमांसा दर्शन के प्रणेता हैं
(a) कपिल
(b) गौतम
(c) जैमिनि
(d) पतंजलि
उत्तर:
(c) जैमिनि

प्रश्न 41.
‘दर्शन’ शब्द की उत्पत्ति निम्न में से किस धातु की हुई है?
(a) कृ धातु से
(b) दृश् धातु से
(c) गम् धातु से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) दृश् धातु से

प्रश्न 42.
निम्न में से कौन आस्तिक दर्शन नहीं है?
(a) न्याय दर्शन
(b) योग दर्शन
(c) मीमांसा दर्शन
(d) बौद्ध दर्शन
उत्तर:
(a) न्याय दर्शन

प्रश्न 43.
ब्रह्मसूत्र के रचयिता हैं
(a) गौड़पाद
(b) बादरायण
(c) शंकर
(d) निम्बार्क
उत्तर:
(c) शंकर

प्रश्न 44.
निम्न में से कौन अनुभववादी नहीं हैं?
(a) लॉक
(b) बर्कले
(c) काण्ट
(d) ह्यूम
उत्तर:
(c) काण्ट

प्रश्न 45.
अद्वैत का अर्थ होता है
(a) एक नहीं
(b) दो नहीं
(c) तीन नहीं
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) दो नहीं

प्रश्न 46.
अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक हैं
(a) शंकर
(b) रामानुज
(c) मध्व
(d) निम्बार्क
उत्तर:
(a) शंकर

प्रश्न 47.
किस दार्शनिक ने कहा है, “ज्ञान संश्लेषणात्मक प्रागानुभविक निर्णय है”?
(a) काण्ट
(b) हेगल
(c) लाइबनीज
(d) स्पिनोजा
उत्तर:
(d) स्पिनोजा

प्रश्न 48.
सत्कार्यवाद के रूप में है
(a) आरंभवाद
(b) परिणामवाद
(c) विवर्त्तनाद
(d) (b) और (c) दोनों
उत्तर:
(d) (b) और (c) दोनों

प्रश्न 49.
निम्न में से अण्वीक्षा किसे कहते हैं?
(a) प्रत्यक्ष
(b) शब्द
(c) उपमान
(d) अनुमान
उत्तर:
(a) प्रत्यक्ष

Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 1

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Bihar Board 12th Philosophy Objective Important Questions Part 1

प्रश्न 1.
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति हुई है
(a) भौतिक सुख प्राप्ति की कामना से
(b) आध्यात्मिक असन्तोष से
(c) निराशावादी दृष्टिकोण से
(d) पलायनवादी प्रवृत्ति से
उत्तर:
(b) आध्यात्मिक असन्तोष से

प्रश्न 2.
पुरुषार्थ हैं
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) चार

प्रश्न 3.
ऋत नियम है
(a) नैतिक
(b) धार्मिक
(c) राजनीतिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) नैतिक

प्रश्न 4.
भारतीय दर्शन में यथार्थ ज्ञान कहलाता है
(a) अप्रमा
(b) प्रमा
(c) ख्याति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) प्रमा

प्रश्न 5.
‘दर्शन’ की उत्पत्ति किस धातु से हुई है?
(a) कृ धातु से
(b) दृश् धातु से
(c) लृ धातु से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) दृश् धातु से

प्रश्न 6.
‘गीता का उपदेश है
(a) सकाम कर्म
(b) निष्काम कर्म
(c) कर्म से संन्यास
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(b) निष्काम कर्म

प्रश्न 7.
भगवद्गीता में ‘योग’ शब्द का प्रयोग किन अर्थ में हुआ है?
(a) समाधिवाचक
(b) संबंधवाचक
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) दोनों में से कोई नहीं
उत्तर:
(d) दोनों में से कोई नहीं

प्रश्न 8.
बुद्ध के अनुसार दुःख का मूल कारण है
(a) तृष्णा
(b) जाति
(c) नामरूप
(d) अविद्या
उत्तर:
(a) तृष्णा

प्रश्न 9.
जैन दर्शन के प्रणेता हैं
(a) बुद्ध
(b) गौतम
(c) कपिल
(d) महावीर
उत्तर:
(d) महावीर

प्रश्न 10.
‘प्रतीत्य समुत्पाद’ की चर्चा बौद्ध दर्शन के किस आर्य सत्य में हुई है?
(a) प्रथम आर्य सत्य
(b) द्वितीय आर्य सत्य
(c) तृतीय आर्य सत्य
(d) चतुर्थ आर्य सत्य
उत्तर:
(d) चतुर्थ आर्य सत्य

प्रश्न 11.
स्वधर्म का वास्तविक संबंध है
(a) सामान्य धर्म से
(b) वर्णाश्रम धर्म से
(c) इन दोनों से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) वर्णाश्रम धर्म से

प्रश्न 12.
न्याय दर्शन के प्रणेता हैं
(a) गौतम बुद्ध
(b) महर्षि गौतम
(c) कणाद
(d) जैमिनि
उत्तर:
(b) महर्षि गौतम

प्रश्न 13.
ब्रह्म हैं
(a) अनेक
(b) अचेतन
(c) अनिर्वचनीय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 14.
योग दर्शन में चित्तवृत्ति निरोध को कहते हैं
(a) प्रणायाम
(b) समाधि
(c) योग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 15.
वैशेषिक दर्शन के प्रणेता हैं
(a) गौतम
(b) कणाद
(c) कपिल
(d) जैमिनि
उत्तर:
(b) कणाद

प्रश्न 16.
बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग के प्रथम दो (सम्यक दृष्टि एवं सम्यक संकल्प) को कहा जाता है
(a) समाधि
(b) शील
(c) प्रज्ञा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 17.
अद्वैत वेदान्त के अनुसार चैतन्य आत्मा का है
(a) गुण
(b) स्वरूप
(c) द्रव्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) स्वरूप

प्रश्न 18.
भारत के दार्शनिक सम्प्रदायों को बांटा गया है
(a) आस्तिक
(b) नास्तिक
(c) आस्तिक एवं नास्तिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) आस्तिक एवं नास्तिक

प्रश्न 19.
न्याय, वैशेषिक, सांख्य एवं योग निम्न में किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
(a) आस्तिक
(b) नास्तिक
(c) आस्तिक एवं नास्तिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) आस्तिक

प्रश्न 20.
सत्य, रज और तम गुण हैं
(a) आत्मा के
(b) पुरुष के
(c) प्रकृति के
(d) ब्रह्म के
उत्तर:
(b) पुरुष के

प्रश्न 21.
अद्वैत वेदान्त के अनुसार जगत है
(a) प्रातिभासिक सत्ता
(b) व्यावहारिक सत्ता
(c) पारमार्थिक सत्ता
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(b) व्यावहारिक सत्ता

प्रश्न 22.
चार्वाक, बौद्ध एवं जैन निम्न में से किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
(a) आस्तिक
(b) नास्तिक
(c) आस्तिक एवं नास्तिक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) नास्तिक

प्रश्न 23.
अनेकान्तवाद की आधारशिला है।
(a) न्यायवाद
(b) स्यादवाद
(c) मोक्ष
(d) अनेकत्ववाद
उत्तर:
(c) मोक्ष

प्रश्न 24.
बुद्धिवाद के समर्थक हैं।
(a) देकार्त
(b) लाइबनीज
(c) स्पिनोजा
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 25.
कारण का गुणात्मक लक्षण है
(a) यह पूर्ववर्ती घटना है
(b) यह अनौपाधिक घटना है
(c) यह तात्कालिक, नियत, अनौपाधिक, पूर्ववर्ती घटना है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) यह तात्कालिक, नियत, अनौपाधिक, पूर्ववर्ती घटना है

प्रश्न 26.
अनुभववाद के समर्थक हैं
(a) लॉक
(b) बर्कले
(c) ह्यूम
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 27.
अरस्तू के अनुसार कारण है
(a) आकारिक
(b) अंतिम
(c) उपादान
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 28.
किस तर्क ने जगत के अस्तित्व के आधार पर ईश्वर का अस्तित्व प्रमाणित किया है?
(a) जगत संबंधी तर्क
(b) प्रयोजनमूलक तर्क
(c) कारणता संबंधी तर्क
(d) सत्तावादी तर्क
उत्तर:
(d) सत्तावादी तर्क

प्रश्न 29.
अंतःक्रियावाद सिद्धांत है
(a) देकार्त का
(b) स्पिनोजा का
(c) लाइबनीज का
(d) लॉक का
उत्तर:
(d) लॉक का

प्रश्न 30.
जैन दर्शन के अनुसार जीवन का चरम लक्ष्य है
(a) अर्थ
(b) धर्म
(c) काम
(d) मोक्ष
उत्तर:
(d) मोक्ष

प्रश्न 31.
स्यादवाद को समझाने के लिए जैन दर्शन में कितने न्यायों का प्रतिपादन किया गया?
(a) चार
(b) तीन
(c) पाँच
(d) सात
उत्तर:
(d) सात

प्रश्न 32.
काण्ट के ज्ञान संबंधी विचार को कहते हैं?
(a) अनुभववाद
(b) समीक्षावाद
(c) बुद्धिवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) समीक्षावाद

प्रश्न 33.
समीक्षात्मक वस्तुवाद को कहते हैं
(a) ज्ञान मीमांसीय एकवाद
(b) ज्ञान मीमांसीय द्वैतवाद
(c) तत्व मीमांसीय द्वैतवाद
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ज्ञान मीमांसीय एकवाद

प्रश्न 34.
ज्ञान मीमांसीय वस्तुवाद के अनुसार
(a) ज्ञेय ज्ञाता से स्वतंत्र नहीं है
(b) ज्ञाता एवं ज्ञेय दोनों एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं
(c) (a) व (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) ज्ञाता एवं ज्ञेय दोनों एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं

प्रश्न 35.
सांख्य दर्शन में आत्मा के लिए जिस पद का प्रयोग हुआ है वह है
(a) पुरुष
(b) जीव
(c) आत्मा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) जीव

प्रश्न 36.
चतुर्थ आर्य सत्य को कहा जाता है
(a) मध्यम मार्ग
(b) अष्टांगिक मार्ग
(c) इन दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अष्टांगिक मार्ग

प्रश्न 37.
सत्कार्यवाद के रूप है
(a) विवर्तवाद एवं आरम्भवाद
(b) विवर्तवाद
(c) विवर्तवाद एवं परिणामवाद
(d) परिणामवाद
उत्तर:
(b) विवर्तवाद

प्रश्न 38.
मिल के अनुसार कारण है
(a) भावात्मक उपाधियों का योग
(b) निषेधात्मक उपाधियों का योग
(c) भावात्मक एवं निषेधात्मक उपाधियों का योग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) भावात्मक एवं निषेधात्मक उपाधियों का योग

प्रश्न 39.
काण्ट के अनुसार ज्ञान है
(a) प्रागनुभविक निर्णय
(b) अनुभव सापेक्ष निर्णय
(c) संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) संश्लेषणात्मक प्रागनुभविक निर्णय

प्रश्न 40.
“ज्ञान की प्राप्ति जन्मजात प्रत्यय से होती है।” ऐसा मानना है?
(a) बुद्धिवाद का
(b) अनुभववाद का
(c) समीक्षावाद का
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 41.
बुद्ध के किस आर्य सत्य में निर्वाण का मार्ग वर्णित है?
(a) प्रथम
(b) द्वितीय
(c) तृतीय
(d) चतुर्थ
उत्तर:
(b) द्वितीय

प्रश्न 42.
आस्तिक दर्शनों की संख्या है
(a) आठ
(b) छः
(c) तीन
(d) पाँच
उत्तर:
(b) छः

प्रश्न 43.
वैशेषिक के अनुसार निम्नांकित में कौन द्रव्य नहीं है?
(a) कर्म
(b) पृथ्वी
(c) काल
(d) आत्मा
उत्तर:
(b) पृथ्वी

प्रश्न 44.
निम्न में कौन नास्तिक दर्शन है?
(a) न्याय दर्शन
(b) सांख्य दर्शन
(c) योग दर्शन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(d) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 45.
‘फिलॉसफी’ का अर्थ है
(a) ज्ञान के प्रति प्रेम
(b) नियमों की खोज
(c) अमरत्व के लिए तीव्र उत्कंठा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ज्ञान के प्रति प्रेम

प्रश्न 46.
निम्न में से किसने बोला ‘सभी प्रत्यय अंतर्जात है’?
(a) लॉक
(b) बर्कले
(c) ह्यूम
(d) देकार्त्त
उत्तर:
(a) लॉक

प्रश्न 47.
निम्न में से किसने कहा है कि कारण भावात्मक और निषेधात्मक उपाधियों का योगफल है?
(a) मिल
(b) अरस्तू
(c) ह्यूम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अरस्तू

प्रश्न 48.
निम्न में से किसका मानना है कि कोई प्रत्यय जन्मजात नहीं होता है?
(a) देकार्त्त
(b) स्पीनोजा
(c) लॉक
(d) लाइबनीज
उत्तर:
(c) लॉक

प्रश्न 49.
निम्नलिखित में से किस युक्ति को कारणतामूलक युक्ति कहा जा सकता है?
(a) विश्वमलक
(b) तात्विक
(c) प्रयोजनमूलक
(d) नैतिक
उत्तर:
(c) प्रयोजनमूलक

Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 3 in Hindi

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Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 3 in Hindi

प्रश्न 1.
मौद्रिक नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं
(a) मूल्य स्थिरता
(b) आर्थिक विकास को बढ़ावा
(c) आर्थिक स्थिरता
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 2.
बजट कितने प्रकार के होते हैं ?
(a) संतुलित बजट
(b) बचत का बजट
(c) घाटे का बजट
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3.
केन्द्र से निकली सीधी पूर्ति रेखा की लोच (E)
(a) इकाई से कम (Es < 1) होती है
(b) इकाई से अधिक (Es > 1) होती है
(c) इकाई से बराबर (Es = 1) होती है
(d) अनंत के बराबर (Es = ∞) होती है
उत्तर:
(c) इकाई से बराबर (Es = 1) होती है

प्रश्न 4.
एकाधिकार फर्म के संतुलन की शर्त है
(a) औसत आय = औसत लागत
(b) सीमान्त आय = सीमान्त लागत
(c) सीमान्त लागत वक्र की ढाल > सीमान्त आय वक्र की ढाल
(d) (b) और (c) दोनों
उत्तर:
(a) औसत आय = औसत लागत

प्रश्न 5.
पूँजी खाते में निम्न में से कौन मद है ?
(a) सरकारी विदेशी ऋण
(b) निजी विदेशी ऋण
(c) विदेशी प्रत्यक्ष विनियोग
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) विदेशी प्रत्यक्ष विनियोग

प्रश्न 6.
विदेशी विनिमय की माँग के प्रमुख स्रोत है
(a) विदेशी वस्तुओं का आयात
(b) विदेश में निवेश
(c) पर्यटन
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 7.
सरकारी व्यय जिससे परिसम्पत्ति का सृजन नहीं होता, कहलाता है
(a) राजस्व व्यय
(b) पूँजीगत व्यय
(c) नियोजित व्यय
(d) बजट व्यय
उत्तर:
(d) बजट व्यय

प्रश्न 8.
केन्द्र सरकार के कर राजस्व के अंतर्गत निम्न में से कौन शामिल नहीं है ?
(a) आय कर
(b) सीमा शुल्क
(c) निगम कर
(d) उत्पादन शुल्क
उत्तर:
(b) सीमा शुल्क

प्रश्न 9.
निम्न में से कौन प्रत्यक्ष कर है ?
(a) आय कर
(b) निगम कर
(c) उत्पादन कर
(d) (a) और (b)
उत्तर:
(d) (a) और (b)

प्रश्न 10.
अप्रत्यक्ष कर के अंतर्गत किसे शामिल किया जाता है ?
(a) उत्पाद शुल्क
(b) बिक्री कर
(c) (a) और (b) दोनों
(d) सम्पत्ति कर
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 11.
निम्न में से कौन साख नियंत्रण की गुणात्मक विधि नहीं है ?
(a) मार्जिन आवश्यकता
(b) नैतिक दबाव
(c) उपभोक्ता साख पर नियंत्रण
(d) बैंकों के नकद कोष अनुपात में परिवर्तन
उत्तर:
(c) उपभोक्ता साख पर नियंत्रण

प्रश्न 12.
नरसिम्हन समिति की स्थापना हुई थी
(a) कर सुधार के लिए
(b) बैंकिंग सुधार के लिए
(c) कृषि सुधार के लिए
(d) आधारभूत संरचना सुधार के लिए
उत्तर:
(b) बैंकिंग सुधार के लिए

प्रश्न 13.
नरसिंहम समिति का गठन किस वर्ष हुआ था ?
(a) 1989 में
(b) 1991 में
(c) 1943 में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) 1991 में

प्रश्न 14.
भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था ?
(a) 1945 में
(b) 1959 में
(c) 1947 में
(d) 1949 में
उत्तर:
(d) 1949 में

प्रश्न 15.
निम्न में से कौन केन्द्रीय बैंक का कार्य नहीं है ?
(a) मुद्रा नोट का निर्गमन
(b) अंतिम आश्रयदाता
(c) आर्थिक आंकड़े एकत्र करना
(d) वित्तीय नीति का नियंत्रण
उत्तर:
(d) वित्तीय नीति का नियंत्रण

प्रश्न 16.
केन्द्रीय बैंक किसके द्वारा साख पर नियंत्रण रखता है ?
(a) बैंक दर
(b) खुले बाजार की क्रियाएँ
(c) नकद कोष अनुपात
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 17.
भारत का केन्द्रीय बैंक है
(a) स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया
(b) बैंक ऑफ इण्डिया
(c) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया
(d) सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया
उत्तर:
(c) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया

प्रश्न 18.
केन्द्रीय बैंक द्वारा कौन-सी मुद्रा जारी की जाती है ?
(a) चलन मुद्रा
(b) साख मुद्रा
(c) सिक्के
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) चलन मुद्रा

प्रश्न 19.
स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया का पहला नाम क्या था ?
(a) इम्पीरियल बैंक
(b) फेडरल बैंक
(c) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया
(d) ओरिएंटल बैंक
उत्तर:
(a) इम्पीरियल बैंक

प्रश्न 20.
भारत में कौन-सा बैंक साख सृजन करता है ?
(a) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया
(b) व्यावसायिक बैंक
(c) आई. डी. बी. आई.
(d) नाबार्ड
उत्तर:
(b) व्यावसायिक बैंक

प्रश्न 21.
निम्न में से किसमें निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र का सह-अस्तित्व होता है ?
(a) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
(b) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(c) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) मिश्रित अर्थव्यवस्था

प्रश्न 22.
अल्पकालीन औसत लागत वक्र सामान्यतः होता है
(a) S आकार का
(b) U आकार का
(c) L आकार का
(d) V आकार का
उत्तर:
(b) U आकार का

प्रश्न 23.
जब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है तब सीमांत उपयोगिता
(a) शून्य होती है
(b) ऋणात्मक होती है
(c) धनात्मक होती है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) शून्य होती है

प्रश्न 24.
भारत का केंद्रीय बैंक है
(a) रिजर्व बैंक
(b) स्टेट बैंक
(c) जनता बैंक
(d) शेयर बाजार
उत्तर:
(a) रिजर्व बैंक

प्रश्न 25.
निम्न में कौन स्थिर लागत नहीं है ?
(a) बीमे का प्रीमियम
(b) ब्याज
(c) कच्चे माल की लागत
(d) फैक्ट्री का किराया
उत्तर:
(c) कच्चे माल की लागत

प्रश्न 26.
किसके अनुसार अर्थशास्त्र मानव कल्याण का विज्ञान हैं ?
(a) मार्शल
(b) सेम्चुलसन
(c) जे० एस० मिल
(d) एडम स्मिथ
उत्तर:
(b) सेम्चुलसन

प्रश्न 27.
कीन्स का रोजगार सिद्धांत निम्न में से किस पर निर्भर है ?
(a) प्रभावपूर्ण माँग
(b) पूर्ति
(c) उत्पादन क्षमता
(d) कोई नहीं
उत्तर:
(a) प्रभावपूर्ण माँग

प्रश्न 28.
उस वक्र का नाम बताएँ जो आर्थिक समस्या दर्शाता है
(a) उत्पादन वक्र
(b) माँग वक्र
(c) उदासीनता वक्र
(d) उत्पादन संभावना वक्र
उत्तर:
(d) उत्पादन संभावना वक्र

प्रश्न 29.
परिवर्तनशील अनुपात का नियम उत्पादन की तीन अवस्थाओं की चर्चा करता है, जिसमें उत्पादन के प्रथम चरण में
(a) सीमांत और औसत लागत बढ़ते हैं
(b) सीमांत उत्पादन बढ़ता है, लेकिन औसत उत्पादन घटता है
(c) केवल औसत उत्पादन बढ़ता है
(d) केवल सीमान्त उत्पादन बढ़ता है
उत्तर:
(c) केवल औसत उत्पादन बढ़ता है

प्रश्न 30.
‘रोजगार, व्याज और मुद्रा का सामान्य सिद्धांत’ नामक पुस्तक के लेखक कौन है ?
(a) केन्स
(b) मार्शल
(c) हिक्स
(d) पीगू
उत्तर:
(a) केन्स

प्रश्न 31.
रिकार्डों के अनुसार पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण होता है
(a) आवश्यकता द्वारा
(b) माँग द्वारा
(c) उत्पादन लागत द्वारा
(d) उपयोगिता द्वारा
उत्तर:
(b) माँग द्वारा

प्रश्न 32.
उच्च मूल्य
(a) कम पूर्ति
(b) कम माँग
(c) अधिक माँग
(d) समान पूर्ति
उत्तर:
(b) कम माँग

प्रश्न 33.
वस्तु की पूर्ति के निर्धारक तत्व कौन हैं ?
(a) वस्तु की कीमत
(b) स्थानापन्न वस्तु की कीमत
(c) उत्पादन के साधनों की कीमत
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 34.
e = 0 का अर्थ है कि पूर्ति की लोच
(a) पूर्णतः लोचदार है
(b) पूर्णतः बेलोचदार है
(c) इकाई लोचदार है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) पूर्णतः बेलोचदार है

प्रश्न 35.
प्रत्येक बाजार दशा में एक फर्म के संतुलन के लिए कौन-सी शर्त पूरी होनी आवश्यक है ?
(a) औसत आय (AR) = सीमान्त लागत (MC)
(b) सीमान्त आय (MR) = सीमान्त लागत (MC)
(c) सीमान्त लागत (MC) वक्र सीमान्त आय (MR) वक्र को नीचे से काटे
(d) (b) और (c) दोनों
उत्तर:
(d) (b) और (c) दोनों

प्रश्न 36.
भुगतान शेष की संरचना में कौन-सा खाता शामिल होता है ?
(a) चालू खाता
(b) पूँजी खाता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) बचत खाता
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 37.
निम्न में से कौन मात्रात्मक साख नियंत्रण का तरीका नही है ?
(a) बैंक दर नीति
(b) साख की राशनिंग
(c) खुले बाजार की क्रियाएँ
(d) नकद कोष अनुपात में परिवर्तन
उत्तर:
(b) साख की राशनिंग

प्रश्न 38.
स्फीतिक अंतराल माप है
(a) अतिरेक माँग की
(b) अतिरेक पूर्ति की
(c) अल्प माँग की
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अतिरेक माँग की

प्रश्न 39.
किसने कहा है-‘मुद्रा वह धुरी है जिसके चारों ओर समस्त अर्थविज्ञान चक्कर करता है’ ?
(a) एडम स्मिथ
(b) पीगू
(c) मिल
(d) मार्शल
उत्तर:
(d) मार्शल

प्रश्न 40.
औसत आय है TR
(a) \(\frac{\mathrm{TR}}{\mathrm{Q}}\)
(b) \(\frac{\Delta \mathrm{Q}}{\mathrm{P}}\)
(c) \(\frac{\Delta \mathrm{TR}}{\Delta \mathrm{Q}}\)
(d) \(\frac{\mathrm{AR}}{\mathrm{Q}}\)
उत्तर:
(a) \(\frac{\mathrm{TR}}{\mathrm{Q}}\)

प्रश्न 41.
निम्न में से कौन धन की विशेषता है ?
(a) उपयोगिता
(b) सीमितता
(c) विनिमय-साध्यता
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(c) विनिमय-साध्यता

प्रश्न 42.
वस्तु की आवश्यकता पूर्ति की क्षमता को कहते हैं
(a) उत्पादकता
(b) उपयोगिता
(c) योग्यता
(d) संतुष्टि
उत्तर:
(b) उपयोगिता

प्रश्न 43.
सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम के प्रतिपादक हैं
(a) गोसेन
(b) एडम स्मिथ
(c) चैपमैन
(d) हिक्स
उत्तर:
(a) गोसेन

Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2 in Hindi

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Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2 in Hindi

प्रश्न 1.
इनमें से कौन सरकार की कर आय का स्रोत है ?
(a) उत्पाद कर
(b) सम्पत्ति कर
(c) मनोरंजन कर
(d) सभी
उत्तर:
(d) सभी

प्रश्न 2.
भारत के केंद्रीय बैंक का नाम है
(a) सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
(b) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
(c) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
(d) पंजाब नेशनल बैंक
उत्तर:
(a) सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

प्रश्न 3.
अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या कौन-सी है ?
(a) साधनों का आवंटन
(b) साधनों का कुशलतम उपयोग
(c) आर्थिक विकास
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 4.
निम्न में कौन स्थिर लागत नहीं है ?
(a) ऋण पर ब्याज
(b) कच्चे माल की लागत
(c) फैक्ट्री का किराया
(d) बीमा की किस्त
उत्तर:
(d) बीमा की किस्त

प्रश्न 5.
अवसर लागत को कहा जाता है
(a) बाह्य लागत
(b) आंतरिक लागत
(c) हस्तांतरण लागत
(d) मौद्रिक लागत
उत्तर:
(c) हस्तांतरण लागत

प्रश्न 6.
आय में वृद्धि से कोई माँग वक्र
(a) बायीं ओर खिसक जाता है
(b) दायीं ओर खिसक जाता है
(c) अपने स्थान पर स्थिर रहता है
(d) पहले बायीं फिर दायीं ओर खिसक जाता है
उत्तर:
(d) पहले बायीं फिर दायीं ओर खिसक जाता है

प्रश्न 7.
एक लम्बवत माँग वक्र का अर्थ है कि
(a) वस्तु आवश्यक आवश्यकता है
(b) वस्तु आवश्यकता है
(c) वस्तु आरामदायक वस्तु है
(d) वस्तु विलासिता वस्तु है
उत्तर:
(a) वस्तु आवश्यक आवश्यकता है

प्रश्न 8.
माँग वक्र नीचे झुकती है बायें से
(a) दाहिनी ओर
(b) बायीं ओर
(c) सीधे
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) दाहिनी ओर

प्रश्न 9.
उपभोक्ता संतुलन के लिए, वस्तु की
(a) कुल उपयोगिता = मूल्य
(b) सीमान्त उपयोगिता = मूल्य
(c) औसत उपयोगिता = मूल्य
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 10.
उपभोक्ता का संतुलन उस बिन्दु पर होता है, जहाँ
(a) सीमान्त उपयोगिता = मूल्य
(b) सीमान्त उपयोगिता < मूल्य
(c) सीमान्त उपयोगिता < मूल्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सीमान्त उपयोगिता = मूल्य

प्रश्न 11.
सम सीमान्त उपयोगिता नियम को कहते हैं
(a) ग्रोसेन का दूसरा नियम
(b) प्रतिस्थापन का नियम
(c) उपयोगिता ह्रास का नियम
(d) (a) और (b) दोनों
उत्तर:
(a) ग्रोसेन का दूसरा नियम

प्रश्न 12.
सम-सीमान्त उपयोगिता नियम के प्रतिपादक कौन हैं ?
(a) गोसेन
(b) पीगू
(c) एडम स्मिथ
(d) रिकार्डो
उत्तर:
(a) गोसेन

प्रश्न 13.
उत्पादन संभावना वक्र की अवधारणा जुड़ी है
(a) सैम्यूल्सन से
(b) मार्शल से
(c) हिक्स से
(d) रॉबिन्स से
उत्तर:
(a) सैम्यूल्सन से

प्रश्न 14.
उत्पादन संभावना वक्र
(a) अक्ष की ओर अवनतोदर होती है
(b) अक्ष की ओर उन्नतोदर होती है
(c) अक्ष के समानान्तर होती है
(d) अक्ष से लम्बवत् होती है
उत्तर:
(b) अक्ष की ओर उन्नतोदर होती है

प्रश्न 15.
यदि किसी वस्तु के मूल्य माँग की लोच ep = 0.5 हो, तो वस्तु की माँग
(a) लोचदार है
(b) पूर्णतः लोचदार है
(c) आपेक्षिक बेलोचदार है
(d) पूर्णतः बेलोचदार है
उत्तर:
(b) पूर्णतः लोचदार है

प्रश्न 16.
निम्न में से कौन माँग की लोच मापने की विधि नहीं है ?
(a) प्रतिशत विधि
(b) आय प्रणाली
(c) कुल व्यय प्रणाली
(d) बिन्दु विधि
उत्तर:
(d) बिन्दु विधि

प्रश्न 17.
निम्नलिखित सारणी से माँग की लोच ज्ञात करें :
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 1
(a) 2.00
(b) 2.50
(c) 3.00
(d) 3.50
उत्तर:
(b) 2.50

प्रश्न 18.
माँग की लोच मापने के लिए प्रतिशत या आनुपातिक रीति का प्रतिपादन किसने किया ?
(a) मार्शल
(b) फ्लक्स
(c) हिक्स
(d) रॉबिन्स
उत्तर:
(d) रॉबिन्स

प्रश्न 19.
माँग के नियम का आधार है
(a) उपयोगिता ह्रास नियम
(b) वर्धमान प्रतिफल नियम
(c) ह्रासमान प्रतिफल नियम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) उपयोगिता ह्रास नियम

प्रश्न 20.
मूल्य में परिवर्तन के फलस्वरूप माँग में जिस गति से परिवर्तन होगा उसे कहा जाता है
(a) माँग का नियम
(b) माँग की लोच
(c) लोच की माप
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(b) माँग की लोच

प्रश्न 21.
कॉफी के मूल्य में वृद्धि होने से चाय की माँग
(a) बढ़ती है
(b) घटती है
(c) स्थिर रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) बढ़ती है

प्रश्न 22.
निम्नलिखित में से कौन-सा घटक माँग की लोच को प्रभावित करता है ?
(a) वस्तुओं की प्रकृति
(b) आय स्तर
(c) कीमत स्तर
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(a) वस्तुओं की प्रकृति

प्रश्न 23.
मांग की लोच की माप निम्न में से किस विधि से की जाती है ?
(a) कुल व्यय विधि
(b) प्रतिशत या आनुपातिक रीति
(c) बिन्दु रीति
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 24.
किसी वस्तु की माँग प्रभावित होती है
(a) उपभोक्ता की इच्छा से
(b) उपभोक्ता की आय से
(c) उपभोक्ता की आवश्यकता से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) उपभोक्ता की आय से

प्रश्न 25.
निम्नांकित में से किस वस्तु की माँग बेलोच होती है ?
(a) रेडियो
(b) दवा
(c) टेलीविजन
(d) आभूषण
उत्तर:
(b) दवा

प्रश्न 26.
माँग की लोच को प्रभावित करने वाले घटक कौन-से हैं ?
(a) वस्तु की प्रकृति
(b) कीमत स्तर
(c) आय स्तर
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(a) वस्तु की प्रकृति

प्रश्न 27.
गिफिन वस्तुओं के लिए कीमत माँग की लोच होती है
(a) ऋणात्मक
(b) धनात्मक
(c) शून्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) ऋणात्मक

प्रश्न 28.
कीमत लोच मापने की रीतियाँ हैं
(a) कुल व्यय रीति
(b) बिन्दु रीति
(c) चाप रीति
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 29.
किसी वस्तु की माँग प्रभावित होती है
(a) वस्तु की कीमत से
(b) उपभोक्ता की आय से
(c) स्थानापन्न की कीमतों से
(d) इनमें सभी से
उत्तर:
(d) इनमें सभी से

प्रश्न 30.
माँग की लोच को मापने का सूत्र निम्न में कौन-सा है ?
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 2
उत्तर:
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 3

प्रश्न 31.
विलासिता की वस्तुओं की माँग होती है
(a) लोचदार
(b) बेलोचदार
(c) पूर्ण बेलोचदार
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) लोचदार

प्रश्न 32.
माँग के लिए निम्न में से कौन-सा तत्त्व आवश्यक है ?
(a) वस्तु की इच्छा
(b) वस्तु क्रय करने के लिए पर्याप्त साधन
(c) साधन व्यय करने की तत्परता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 33.
किस प्रकार की वस्तुओं के मूल्य में कमी होने से माँग में वृद्धि नहीं होती है ?
(a) अनिवार्य वस्तुएँ
(b) आरामदायक वस्तुएँ
(c) विलासिता वस्तुएँ
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अनिवार्य वस्तुएँ

प्रश्न 34.
अल्पकालीन उत्पादन फलन की व्याख्या निम्न में किस नियम के द्वारा की जाती है ?
(a) माँग के नियम के द्वारा
(b) परिवर्तनशील अनुपात के नियम के द्वारा
(c) पैमाने के प्रतिफल नियम के द्वारा
(d) माँग की लोच द्वारा
उत्तर:
(c) पैमाने के प्रतिफल नियम के द्वारा

प्रश्न 35.
निम्न में से सही अंकित कीजिए
(a) TVC = TC – TFC
(b) TC = TVC – TFC
(c) TFC = TVC + TC
(d) TC = TVC × TFC
उत्तर:
(b) TC = TVC – TFC

प्रश्न 36.
MR प्रदर्शित किया जाता है
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 4
उत्तर:
(c) \(\frac{\Delta \mathrm{AR}}{\mathrm{Q}}\)

प्रश्न 37.
निम्न में से कौन-सा कथन सही है ?
(a) वस्तु की कीमत एवं उसकी पूर्ति के बीच सीधा सम्बन्ध होता है
(b) पूर्ति वक्र बायें से दायें ऊपर की ओर उठता है
(c) पूर्ति को अनेक तत्व प्रभावित करते हैं
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(a) वस्तु की कीमत एवं उसकी पूर्ति के बीच सीधा सम्बन्ध होता है

प्रश्न 38.
यदि वस्तु की कीमत में 40% की वृद्धि हो परन्तु पूर्ति में केवल 15% की वृद्धि हो, ऐसी वस्तु की पूर्ति होगी
(a) अत्यधिक लोचदार
(b) लोचदार
(c) बेलोचदार
(d) पूर्णतः बेलोचदार
उत्तर:
(b) लोचदार

प्रश्न 39.
संतुलन की स्थिति में
(a) विक्रय की कुल मात्रा खरीदी जाने वाली मात्रा के बराबर
(b) बाजार पूर्ति बाजार माँग के बराबर
(c) न ही फर्म और न उपभोक्ता विचलित होना चाहते हैं
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 40.
प्रत्येक फर्म श्रम का उपयोग उस बिन्दु तक करती है
(a) जहाँ श्रम की सीमान्त उत्पादकता मजदूरी दर के बराबर होती है
(b) जहाँ श्रम की सीमान्त उत्पादकता मजदूरी दर से कम होती है
(c) जहाँ श्रम की सीमान्त उत्पादकता मजदूरी दर से अधिक होती है
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) जहाँ श्रम की सीमान्त उत्पादकता मजदूरी दर के बराबर होती है

प्रश्न 41.
निम्नांकित उदाहरण में कीमत लोच क्या है ?
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 5
(a) – 2.5
(b) 3.5
(c) -4.5
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) – 2.5

प्रश्न 42.
केन्स का अर्थशास्त्र
(a) न्यून माँग का अर्थशास्त्र है
(b) माँग-आधिक्य अर्थशास्त्र है
(c) पूर्ण रोजगार का अर्थशास्त्र है
(d) आंशिक माँग का अर्थशास्त्र है
उत्तर:
(c) पूर्ण रोजगार का अर्थशास्त्र है

प्रश्न 43.
कौन-सा कथन सत्य है ?
Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 2, 6
उत्तर:
(d) (b) और (c) दोनों

Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 1 in Hindi

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Bihar Board 12th Business Economics Objective Important Questions Part 1 in Hindi

प्रश्न 1.
अर्थशास्त्र की विषय वस्तु का अध्ययन किन शाखाओं के अन्तर्गत किया जाता रहा हैं ?
(a) व्यष्टि अर्थशास्त्र
(b) समष्टि अर्थशास्त्र
(c) उपरोक्त दोनों
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(c) उपरोक्त दोनों

प्रश्न 2.
साधनों के स्वामित्व के आधार पर अर्थव्यवस्थायें होती हैं ?
(a) केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था
(b) बाजार अर्थव्यवस्था
(c) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3.
अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्यायें कौन-सी है ?
(a) साधनों का आवंटन
(b) साधनों का कुशलतम उपयोग
(c) आर्थिक विकास
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 4.
समष्टि अर्थशास्त्र अध्ययन करता है
(a) पूर्ण रोजगार
(b) समग्र कीमत स्तर
(c) सकल राष्ट्रीय उत्पाद
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5.
बजट सेट के लिए आवश्यक है
(a) बंडलों का संग्रह
(b) विद्यमान बाजार कीमत
(c) उपभोक्ता की कुल आय
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी

प्रश्न 6.
ह्रासमान विस्थापन दर में
(a) वस्तु 1 की अधिक मात्रा
(b) वस्तु 2 की कम मात्रा
(c) वस्तु 1 एवं 2 दोनों की अधिक मात्रा
(d) (a) और (b) दोनों
उत्तर:
(b) वस्तु 2 की कम मात्रा

प्रश्न 7.
उपभोक्ता व्यवहार का अध्ययन किया जाता है
(a) सूक्ष्म अर्थशास्त्र में
(b) व्यापक अर्थशास्त्र में
(c) आय सिद्धान्त में
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) सूक्ष्म अर्थशास्त्र में

प्रश्न 8.
उदासीनता वक्र होता है
(a) मूल बिन्दु की ओर अवनतोदर
(b) मूल बिन्दु की ओर उन्नतोदर
(c) उपरोक्त दोनों सत्य
(d) उपरोक्त दोनों असत्य
उत्तर:
(b) मूल बिन्दु की ओर उन्नतोदर

प्रश्न 9.
माँग वक्र की ढाल होती है
(a) बायें से दायें नीचे की ओर
(b) बायें से दायें ऊपर की ओर
(c) x अक्ष के समानान्तर
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

प्रश्न 10.
माँग फलन को निम्नांकित में से कौन-सा समीकरण व्यक्त करता है ?
(a) Px
(b) Dx = Px
(c) Dx = f (Px)
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) Px

प्रश्न 11.
अर्थशास्त्र के जनक कौन थे?
(a) जे० बी० से
(b) माल्थस
(c) एडम स्मिथ
(d) जॉन रॉबिन्सन
उत्तर:
(c) एडम स्मिथ

प्रश्न 12.
माँग की लोच के कितने प्रकार होते हैं ?
(a) 3
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर:
(b) 5

प्रश्न 13.
बाजार मूल्य पाया जाता है
(a) दीर्घकालीन बाजार में
(b) अल्पकालीन बाजार में
(c) अति दीर्घकालीन बाजार में
(d) कोई नहीं
उत्तर:
(a) दीर्घकालीन बाजार में

प्रश्न 14.
अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्या कौन-सी है ?
(a) साधनों का आबंटन
(b) साधनों का कुशलतम उपयोग
(c) आर्थिक विकास
(d) सभी
उत्तर:
(a) साधनों का आबंटन

प्रश्न 15.
किस अर्थव्यवस्था में कीमत तंत्र के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं ?
(a) समाजवादी
(b) पूँजीवादी
(c) मिश्रित
(d) सभी
उत्तर:
(b) पूँजीवादी

प्रश्न 16.
उस वक्र को आर्थिक समस्या दर्शाता है, हैं
(a) उत्पादन वक्र
(b) माँग वक्र
(c) उदासीनता वक्र
(d) उत्पादन संभावना वक्र
उत्तर:
(c) उदासीनता वक्र

प्रश्न 17.
अवसर लागत का वैकल्पिक नाम है
(a) आर्थिक लागत
(b) संतुलन मूल्य
(c) सीमान्त लागत
(d) औसत लागत
उत्तर:
(a) आर्थिक लागत

प्रश्न 18.
फर्म के संतुलन की प्रथम शर्त है
(a) MC = MR
(b) MR = TR
(c) MR = AR
(d) AC = AR
उत्तर:
(a) MC = MR

प्रश्न 19.
व्यष्टि अर्थशास्त्र में सम्मिलित है
(a) व्यक्तिगत इकाई
(b) छोटे-छोटे इकाई
(c) व्यक्तिगत मूल्य निर्धारण
(d) सभी
उत्तर:
(d) सभी

प्रश्न 20.
किसने कहा कि अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है?
(a) मार्शल
(b) रॉबिन्स
(c) एडम स्मिथ
(d) जे०के० मेहता
उत्तर:
(c) एडम स्मिथ

प्रश्न 21.
व्यष्टि अर्थशास्त्र किसका प्रयोग करता है?
(a) सीमांत विश्लेषण
(b) पिण्ड प्रणाली
(c) मौद्रिक विश्लेषण
(d) आय विश्लेषण
उत्तर:
(a) सीमांत विश्लेषण

प्रश्न 22.
‘माइक्रो’ अर्थशास्त्र तथा ‘मेक्रो’ अर्थशास्त्र शब्दों का प्रयोग सर्वप्रथम किस अर्थशास्त्री द्वारा किया गया ?
(a) मौरिस डॉब
(b) रेमनर फ्रिस
(c) रेगनर नर्कस
(d) जे० एम० केन्ज
उत्तर:
(b) रेमनर फ्रिस

प्रश्न 23.
गिफिन पदार्थों का माँग-वक्र होगा
(a) क्षैतिज
(b) दायीं ओर नीचे गिरता हुआ
(c) बायीं ओर पीछे गिरता हुआ
(d) दायीं ओर ऊपर उठता हुआ
उत्तर:
(c) बायीं ओर पीछे गिरता हुआ

प्रश्न 24.
घटिया वस्तु के लिए आय माँग की लोच है
(a) धनात्मक
(b) शून्य
(c) ऋणात्मक
(d) अनन्त
उत्तर:
(c) ऋणात्मक

प्रश्न 25.
किसी फर्म का लाभ अधिकतम होने के लिए पहली आवश्यक शर्त क्या है ?
(a) AC = MR
(b) MC = MR
(c) MR = AR
(d) AC = AR
उत्तर:
(b) MC = MR

प्रश्न 26.
उत्पादन संभावना वक्र की अवधारणा जुड़ी है
(a) सैम्युल्सन से
(b) मार्शल से
(c) हिक्स से
(d) रॉबिन्स से
उत्तर:
(a) सैम्युल्सन से

प्रश्न 27.
किस प्रकार की अर्थव्यवस्था को मूल आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है ?
(a) पूँजीवादी
(b) समाजवादी
(c) मिश्रित
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 28.
निम्न में से कौन धन की विशेषता है ?
(a) उपयोगिता
(b) सीमितता
(c) विनिमय साध्यता
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी

प्रश्न 29.
अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्या है
(a) साधनों का आवंटन
(b) साधनों का कुशलतम प्रयोग
(c) आर्थिक विकास
(d) कोई नहीं
उत्तर:
(d) कोई नहीं

प्रश्न 30.
दुर्लभता की समस्या इसलिए है क्योंकि हमारे साधन हैं
(a) असीमित
(b) सीमित
(c) पर्याप्त
(d) बहुत ज्यादा
उत्तर:
(b) सीमित

प्रश्न 31.
मांग का नियम लागू नहीं होता है
(a) आरामदायक वस्तुओं पर
(b) विलासिता की वस्तुओं पर
(c) आवश्यक वस्तुओं पर
(d) निम्न कोटि की वस्तुओं पर
उत्तर:
(d) निम्न कोटि की वस्तुओं पर

प्रश्न 32.
उपयोगिता का गणनावाचक सिद्धांत किसने दिया ?
(a) मार्शल
(b) पीगू
(c) हिक्स
(d) रॉबिन्स
उत्तर:
(a) मार्शल

प्रश्न 33.
एकाधिकार बाजार में माँग रेखा ……… होती है।
(a) बेलोचदार
(b) लोचदार
(c) पूर्णतया लोचदार
(d) पूर्णतया बेलोचदार
उत्तर:
(b) लोचदार

प्रश्न 34.
सामान्य मूल्य का निर्धारण …….. अवधि में होता है।
(a) बाजार काल
(b) अल्प काल
(c) दीर्घकाल
(d) अतिदीर्घकाल
उत्तर:
(c) दीर्घकाल

प्रश्न 35.
भारत का वित्तीय वर्ष होता है
(a) जनवरी से दिसंबर
(b) अक्टूबर से सितंबर
(c) अप्रैल से मार्च
(d) जुलाई से जून
उत्तर:
(c) अप्रैल से मार्च

प्रश्न 36.
अवसर लागत को कहा जाता है
(a) बाह्य लागत
(b) आंतरिक लागत
(c) हस्तांतरण लागत
(d) मौद्रिक लागत
उत्तर:
(c) हस्तांतरण लागत

प्रश्न 37.
अल्पकाल औसत लागत वक्र सामान्यतः होता है
(a) S-आकार का
(b) U-आकार का
(c) L-आकार का
(d) V-आकार का
उत्तर:
(b) U-आकार का

प्रश्न 38.
माँग की लोच कितने प्रकार की होती है ?
(a) 3
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर:
(b) 5

प्रश्न 39.
भारत के 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था
(a) 1960
(b) 1969
(c) 1980
(d) 1985
उत्तर:
(b) 1969

प्रश्न 40.
स्टेट बैंक की स्थापना की गई
(a) 1951
(b) 1955
(c) 1957
(d) 1966
उत्तर:
(b) 1955

प्रश्न 41.
राजकोषीय नीति को हम ……… भी कहते हैं।
(a) मौद्रिक नीति
(b) बजट नीति
(c) आर्थिक नीति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) बजट नीति

प्रश्न 42.
‘अर्थशास्त्र का पिता’ किसे कहा जाता है ?
(a) मार्शल
(b) माल्थस
(c) एडम स्मिथ
(d) जॉन रॉबिन्सन
उत्तर:
(c) एडम स्मिथ

प्रश्न 43.
प्रत्यक्ष कर है
(a) आय कर
(b) उपहार कर
(c) दोनों
(d) कोई नहीं
उत्तर:
(c) दोनों

Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4

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Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4

प्रश्न 1.
श्रम के कुल उत्पादन की निम्नलिखित सूची द्वारा औसत उत्पादन (AP) एवं सीमान्त उत्पाद (MP) ज्ञात करें।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 1
उत्तर:
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 2

प्रश्न 2.
पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार की अवधारणा को स्पष्ट करें एवं इनके अंतर को स्पष्ट करें।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार का ऐसा रूप है जिसमें बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता पाये जाते हैं जो समरूप वस्तु एक समान कीमत पर बेचते है।

एकाधिकार बाजार का वह रूप है जिसमें वस्तु का केवल एक विक्रेता और अनेक क्रेता होते हैं।

पूर्ण प्रतियोगिता तथा एकाधिकार के बीच निम्नांकित अंतर हैं-

  • क्रेताओं तथा विक्रेताओं की संख्या- पूर्ण प्रतियोगिता में समरूप वस्तु के अनेक क्रेता तथा विक्रेता होते हैं। जबकि एकाधिकार में वस्तु का केवल एक ही विक्रेता होता है।
  • प्रवेश पर प्रतिबंध- पूर्ण प्रतियोगिता में नई फर्मों के उद्योग में प्रवेश पाने तथा पुरानी फर्म द्वारा उसे छोड़कर जाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। इसमें विपरीत, एकाधिकार में नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है।
  • माँग वक्र का आकार- पूर्ण प्रतियोगिता में माँग अथवा AR वक्र OX अक्ष के समानान्तर होता है, साथ ही औसत आगम और सीमांत आगम बराबर होते हैं

Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 3

एकाधिकार में, माँग अथवा AR वक्र बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुके होते है। एवं सीमांत आगम वक्र औसत आगम के नीचे होता है।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 4

प्रश्न 3.
किसी अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ कौन-सी हैं तथा ये क्यों उत्पन्न होती है ? उत्पादन संभावना वक्र की सहायता से ‘क्या उत्पादन करें’ की समस्या को समझाइए।
उत्तर:
एक अर्थव्यवस्था की तीन केन्द्रीय समस्याएँ निम्नांकित हैं-

  • क्या उत्पादित किया जाए? विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन से संबंधित चयन की समस्या।
  • कैसे उत्पादित किया जाए ? उत्पादन की तकनीकों से संबंधित चयन की समस्या।
  • किसके लिए उत्पादन किया जाए ? उत्पादन के वितरण से संबंधित चयन की समस्या।

ये समस्याएँ प्रत्येक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ हैं। ये समस्याएँ उत्पन्न होती हैं क्योंकि-

  • असीमित आवश्यकताओं की तुलना में संसाधन । दुर्लभ होते हैं और
  • इन संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोग हो सकते हैं। क्या उत्पादित किया जाए की समस्या का संबंध उत्पादन की जानेवाली वस्तुओं तथा सेवाओं के चयन से संबंधित होता है।

Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 5

ऊपर दिये गये चित्र में AB उत्पादन संभावना वक्र है, जिसमें उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन को Oe से of और og करने के लिए पहले से ज्यादा शुद्ध वस्तुओं का परित्याग करना पड़ता है, जैसे hk और nj।

क्योंकि सीमांत अक्सर लागत में बढ़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है इससे दो तथ्य स्पष्ट होते है-

  • उपभोक्ता वस्तुओं का अधिक उत्पादन तभी हो सकता है यदि शुद्ध सामग्री का उत्पादन घटाया जाए।
  • जैसे-जैसे अधिक से अधिक संसाधनों को युद्ध सामग्री के उत्पादन से हटाकर उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में लगाया जाता है, सीमांत अवसर लागत में बढ़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

प्रश्न 4.
उच्चतम मूल्य नीति की उपयुक्त चित्र द्वारा व्याख्या करें।
उत्तर:
कीमत की उच्चतम सीमा उस कीमत को दर्शाती है जिसे विक्रेता सरकारी हस्तक्षेप होने पर अधिकतम कीमत के रूप में प्राप्त करता है। यह कीमत निम्न चित्र में OP1 से प्रदर्शित की गई है।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 6

बाजार में अगर OP प्रचलित कीमत है और सभी वर्ग के लोग इस कीमत पर वस्तु का उपयोग नहीं कर पाते हैं तब सरकार OP1 कीमत निर्धारित करती है। फलत: ab आंतरिक माँग उत्पन्न होती है। सरकार सीमित पूर्ति के समाधान के रूप में राशनिंग का सहारा लेती है। प्रत्येक आटा समूह के लिए वस्तु की आपूर्ति का एक निश्चित कोटा निर्धारित कर देती है।

प्रश्न 5.
सरकारी क्षेत्र के समावेश के अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
सरकारी क्षेत्र में अर्थव्यवस्था में समावेश से अर्थव्यवस्था पर निम्नांकित प्रभाव पड़ते हैं-

  • सरकार गृहस्थों पर कर लगाती है। जिसकी उनकी प्रयोज्य आय कम होती है। फलस्वरूप कुल माँग घट जाती है।
  • सरकार घरेलू क्षेत्र को कई प्रकार से हस्तान्तरण भुगतान करती है जिसके फलस्वरूप उनका प्रयोज्य आय में वृद्धि होती है।
  • कानून तथा व्यवस्था व सुरक्षा आदि सेवाएँ प्रदान करके सरकार आय प्रजनन की प्रक्रिया में अंशदान करती है।
  • सरकार निगम कर लगाती है जिससे अर्थव्यस्था में वैयक्तिक आय घटती है।
  • वस्तुओं तथा सेवाओं पर कर घरेलू पदार्थ के बाजार मूल्य में वृद्धि लाता है।
  • उत्पादकों को सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता घरेलू पदार्थ के बाजार मूल्य को घटाती है।

प्रश्न 6.
एक वस्तु की माँग 5 रु० प्रति इकाई कीमत पर 30 इकाई है। मान लीजिए वस्तु की कीमत बढ़कर 6 रु० प्रति इकाई हो जाती है जिससे माँग घटकर 24 हो जाती है। माँग की कीमत लोच की गणना करें।
उत्तर:
मान लिया कि प्रारंभिक मूल्य P1 तथा अंतिम मूल्य P2 है। प्रारंभिक मूल्य (P1) पर माँगी गई वस्तु की मात्रा Q1 तथा अंतिम मूल्य (P2) पर माँगी गई वस्तु की मात्रा Q2 है।
P1 = Rs 5, P1 = Rs 6, Q1 = 30, Q2 = 24
माँग की कीमत लोच ep = \(\frac{\Delta Q}{\Delta P} \cdot \frac{P_{1}}{Q_{1}}\)
ΔQ = माँग मात्रा में परिवर्तन = Q2 – Q1
ΔP = कीमत में परिवर्तन = P2 – P1
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 7
अर्थात् माँग की कीमत लोच इकाई के बराबर है। (ऋणात्मक चिह्न यह बताता है कि माँग तथा मूल्य परिवर्तन एक दूसरे के विपरीत दिशा में होते हैं।)

प्रश्न 7.
राजस्व घाटा किसे कहते हैं ? इसे कम करने के दो उपाय बतायें।
उत्तर:
राजस्व घाटा सरकार के राजस्व व्यय की राजस्व प्राप्तियाँ पर अधिकता को दर्शाता है। राजस्व घटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ राजस्व घाटा यह बताता है कि सरकार अबचत कर रही है। अर्थात् सरकार की परिसंपत्तियों में कमी हो जाती है। इसे कम करने के दो उपाय निम्नांकित हैं-

  • करों की दरों में वृद्धि करके सरकार अपनी राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि करती है जिससे प्राप्तियों तथा व्यय का अंतर कम किया जा सकता है।
  • करों के आधार को विस्तृत करके भी सरकार अपनी राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि करती है तथा प्राप्तियों एवं व्यय के अंतर को कम करने का प्रयास करती है।
  • सार्वजनिक व्यय में कटौती करके।

प्रश्न 8.
संसाधनों के बँटवारे (आवंटन) से संबंधित केन्द्रीय समस्याओं का संक्षेप में विवरण दीजिए।
अथवा, अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
संसाधन के आबंटन से संबंधित तीन केन्द्रीय समस्यायें हैं-

  1. क्या उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में
  2. कैसे उत्पादन किया जाए और
  3. किसके लिये उत्पादन किया जाए।

1. क्या उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में (What to Produce and Which Quantity)- प्रत्येक अर्थव्यवस्था के पास साधन सीमित हैं और उनके वैकल्पिक प्रयोग होते हैं। समाज को लाखों वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। अत: अर्थव्यवस्था को यह निर्णय लेना होता है कि उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन किया जाए या पूँजीगत वस्तुओं का, विलासितापूर्ण वस्तुओं का उत्पादन किया जाय या अनिवार्य वस्तुओं का, युद्धकालीन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए या शांतिकालीन वस्तुओं का। इसके बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि कितनी मात्रा में इन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए।

2. कैसे उत्पादन किया जाए (How to Producc)- इन समस्या का संबंध उत्पादन की तकनीक के चयन से है। उत्पादन करने की तकनीक और पूँजी-प्रधान तकनीका उत्पादन की बेहतर तकनीक वही है जिसमें दुर्लभ संसाधनों का कम-से-कम उपयोग हो।

3. किसके लिए उत्पादन किया जाए (For whom to Produce)- अर्थव्यवस्था को यह निर्णय लेना होता है कि उत्पादित वस्तुओं का उपभोक्ताओं के बीच किस प्रकार वितरण किया जाए। अर्थव्यवस्था उन्हीं लोगों के लिए उत्पादन करती है जिनके पास पर्याप्त मात्रा में क्रय शक्ति होती है। क्रय शक्ति आय पर निर्भर करती है अर्थात् अर्थव्यवस्था को यह निर्णय लेना पड़ता है कि राष्ट्रीय आय का वितरण किस प्रकार किया जाए।

प्रश्न 9.
किसी वस्तु की माँग को निर्धारित करने वाले कारकों को समझाइयें।
उत्तर:
किसी वस्तु की माँग को निर्धारित करने वाले कारक (Factors determining thedemand for a commodity)- किसी वस्तु की माँग को निर्धारित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

(i) वस्तु की कीमत (Price of a commodity)- सामान्यत: किसी वस्तु की माँग की मात्रा उस वस्तु की कीमत पर आश्रित होती है। अन्य बातें पर्ववत रहने पर कीमत कम होने पर वस्त की मांग बढ़ती है और कीमत के बढ़ने पर माँग घटती है। किसी वस्तु की कीमत और उसकी माँग में विपरीत सम्बन्ध होता है।

(ii) संबंधित वस्तुओं की कीमतें (Prices of related goods)- संबंधित वस्तुएँ दो प्रकार की होती हैं-
पूरक वस्तुएँ तथा स्थानापन्न वस्तुएँ- पूरक वस्तुएँ वे वस्तुएँ होती हैं जो किसी आवश्यकता को संयुक्त रूप से पूरा करती हैं और स्थानापन्न वस्तुएँ वे वस्तुएँ होती हैं जो एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जा सकती हैं। पूरक वस्तुओं में यदि एक वस्तु की कीमत कम हो जाती है तो उसकी पूरक वस्तु की माँग बढ़ जाती है। इसके विपरीत यदि स्थानापन्न वस्तुओं में किसी एक की कीमत कम हो जाती है तो दूसरी वस्तु की मांग भी कम हो जाती है।

(iii) उपभोक्ता की आय (Income of Consumer)- उपभोक्ता की आय में वृद्धि होने पर सामान्यतया उसके द्वारा वस्तुओं की माँग में वृद्धि होती है।

आय में वृद्धि के साथ अनिवार्य वस्तुओं की माँग एक सीमा तक बढ़ती है तथा उसके बाद स्थिर हो जाती है। कुछ परिस्थितियों में आय में वृद्धि का वस्तु की माँग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसा खाने-पीने की सस्ती वस्तुओं में होता है। जैसे नमक आदि।

विलासितापूर्ण वस्तुओं की माँग आय में वृद्धि के साथ-साथ लगातार बढ़ती रहती है। घटिया (निम्नस्तरीय) वस्तुओं की माँग आय में वृद्धि साथ-साथ कम हो जाती है लेकिन सामान्य वस्तुओं की माँग आय में वृद्धि के साथ बढ़ती है और आय में कमी से कम हो जाती है।

(iv) उपभोक्ता की रुचि तथा फैशन (Interest of Consumer and Fashion)- परिवार या उपभोक्ता की रुचि भी किसी वस्तु को खरीदने के लिए प्रेरित कर सकता है। यदि पड़ोसियों के पास कार या स्कूटर है तो प्रदर्शनकारी प्रभाव के कारण एक परिवार की कार या स्कूटर की माँग बढ़ सकती है।

(v) विज्ञापन तथा प्रदर्शनकारी प्रभाव (Advertisement and Demonstration Effect) विज्ञापन भी उपभोक्ता को किसी विशेष वस्तु को खरीदने के लिए प्रेरित कर सकता है। यदि पड़ोसियों के पास कार या स्कूटर है तो प्रदर्शनकारी प्रभाव के कारण एक परिवार की कार या स्कूटर की मांग बढ़ सकती है।

(vi) जनसंख्या की मात्रा और बनावट (Quantity and Composition of population) अधिक जनसंख्या का अर्थ है परिवारों की अधिक संख्या और वस्तुओं की अधिक माँग। इसी प्रकार जनसंख्या की बनावट से भी विभिन्न वस्तुओं की माँग निर्धारित होती है।

(vii) आय का वितरण (Distribution of Income)- जिन अर्थव्यवस्था में आय का वितरण समान है वहाँ वस्तुओं की माँग अधिक होगी तथा इसके विपरीत जिन अर्थव्यवस्था में आय का वितरण असमान है, वहाँ वस्तुओं की माँग कम होगी।

(viii) जलवायु तथा रीति-रिवाज (Climate and Customs)- मौसम, त्योहार तथा विभिन्न परंपराएँ भी वस्तु की माँग को प्रभावित करती हैं। जैसे-गर्मी के मौसम में कूलर, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक आदि की माँग बढ़ जाती है।

प्रश्न 10.
माँग की लोच का महत्त्व लिखें।
उत्तर:
माँग की लोच का महत्त्व (Importance of elasticity of demand)- माँग की लोच का महत्व निम्नलिखित कारणों में है-

(i) एकाधिकारी के लिए उपयोगी (Useful for monopolist)- अपने उत्पादन के मूल्य निर्धारण में एकाधिकारी माँग की लोच का ध्यान रखता है। एकाधिकारी का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है। वह उस वस्तु का मूल्य उस वर्ग के लिए कम रखेगा जिसकी माँग अधिक लोचदार है और उस वर्ग के लिए अधिक रखेगा जिस वर्ग के लिए वस्तु की माँग बेलोचदार है।

(ii) वित्त मंत्री के लिए उपयोगी- माँग की लोच वित्त मंत्री के लिए भी उपयोगी है। वित्त मंत्री कर लगाते समय माँग की लोच को ध्यान में रखेगा। जिस वस्तु की माँग अधिक लोचदार होती है उस पर कम दर से कम कर लगाकर अधिक धनराशि प्राप्त करता है। इसके विपरीत वह उन वस्तुओं पर अधिक कर लगाएगा जिन वस्तुओं की माँग की लोच कम है।

(iii) साधन कीमत के निर्धारण में सहायक (Helpful in determining the price of factors)- उत्पादक प्रक्रिया में साधनों को मिलने वाले प्रतिफल की स्थिति इसके द्वारा स्पष्ट होती है वे साधन जिनकी माँग बेलोचदार होती है, लोचदार माँग वाले साधनों की तुलना में अधिक कीमत प्राप्त करते हैं।

(iv) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में उपयोगी (Useful in international trade)- माँग की लोच की जानकारी अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में बहुत ही सहायक है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में निर्यात की जाने वाली जिन वस्तुओं की माँग विदेशों में बेलोचदार है उनकी कीमत अधिक रखी जाएगी और जिन वस्तुओं की माँग विदेशों में बेलोचदार है उनकी कीमत अधिक रखी जाएगी।

(v) निर्धनता का विरोधाभास (Paradox of Poverty)- कई वस्तुओं की फसल बहुत अच्छी होने पर भी उनसे प्राप्त होने वाली आय बहुत कम होती है। इसका अर्थ यह है कि किसी वस्तु के उत्पादन में वृद्धि होने से आय बढ़ने के स्थान पर कम हो गई। इस अस्वाभाविक अवस्था को ही निर्धनता का विरोधाभास कहते हैं। इसका कारण यह है कि अधिकतर कृषि पदार्थों की माँग बेलोचदार होती है। इन वस्तुओं की पूर्ति के बढ़ने पर कीमत में काफी कमी आती है तो भी इनकी माँग में विशेष वृद्धि नहीं हो पाती। इसलिए इनकी बिक्री से प्राप्त कुल आय पहले की तुलना में कम हो जाती है।

(vi) राष्ट्रीयकरण की नीति के लिये महत्त्वपूर्ण (Important for the policy of nationalisation)- राष्ट्रीयकरण की नीति से अभिप्राय है कि सरकार का निजी क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व, नियन्त्रण तथा प्रबंध स्वयं अपने हाथों में लेना। जिन उद्योगों में उत्पादित वस्तुओं की माँग बेलोचदार होती है, उनकी कीमत में बहुत अधिक वृद्धि किये जाने पर भी उनकी माँग में विशेष कमी नहीं आती। यदि ऐसे उद्योग निजी क्षेत्र में रहते हैं तो उन उद्योगों के स्वामी अपनी उत्पादित वस्तुओं की अधिक कीमत लेकर जनता का शोषण कर सकते हैं। जनता को उनके शोषण से बचाने के लिए सरकार उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर सकती है।

(vii) कर लगाने में सहायक (Helpful in imposing taxes)- कर लगाते समय सरकार वस्तु की माँग लोच को ध्यान में रखती है।

प्रश्न 11.
परिवर्तनशील साधन के प्रतिफल तथा पैमाने के प्रतिफल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवर्तनशील साधन के प्रतिफल तथा पैमाने के प्रतिफल में निम्नलिखित अन्तर है-
परिवर्तनशील साधन के प्रतिफल:

  1. उत्पादन के चारों साधनों के एक निश्चित अनुपात में वृद्धि करने से कुल उत्पादन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, इसका अध्ययन पैमाने के प्रतिफल के अन्तर्गत किया जाता है।
  2. यह नियम दीर्घकाल में लागू होता है।
  3. इसमें उत्पत्ति के चारों साधन परिवर्तन-शील हैं।
  4. चारों साधनों में अनुपात स्थिर रहता है।
  5. उत्पादन का पैमाना बदल जाता है।
  6. पैमाने के वर्द्धमान प्रतिफल-चारों साधनों में एक निश्चित अनुपात में वृद्धि करने से कुल उत्पादन उस अनुपात से अधिक बढ़ता है।
  7. पैमाने के ह्रासमान प्रतिफल: चारों साधनों में एक निश्चित अनुपात में वृद्धि करने से कुल उत्पादन उस अनुपात से कम बढ़ता है।

पैमाने के प्रतिफल:

  1. अन्य साधनों को स्थिर रखकर किसी एक परिवर्तनशील साधन की इकाई में वृद्धि करने से कल उत्पादन का क्या प्रभाव पड़ता है, इसका अध्ययन परिवर्तनशील साधन के प्रतिफल के अन्तर्गत किया जाता है।
  2. यह नियम अल्पकाल में लागू होता है।
  3. समें एक साधन परिवर्तनशील है जबकि अन्य साधन स्थिर हैं।
  4. परिवर्तनशील तथा स्थिर साधनों में अनुपात बदला जाता है।
  5. उत्पादन के पैमाने में कोई परिवर्तन नहीं होती।
  6. उत्पत्ति वृद्धि नियमः अन्य साधनों को स्थिर रखकर श्रम की इकाइयों में वृद्धि करने पर कुल उत्पादन बढ़ती हुई दर से बढ़ता है तथा औसत और सीमान्त उत्पादन बढ़ते हैं।
  7. उत्पत्ति वृद्धि नियम अन्य साधनों को स्थिर रखकर श्रम की इकाइयों में वृद्धि करने पर कुल उत्पादन घटती हुई दर से बढ़ता है तथा औसत और सीमान्त उत्पादन घटता है।

प्रश्न 12.
पूर्ण प्रतियोगी श्रम बाजार में मजदूरी का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगी श्रम बाजार में मजदूरी का निर्धारण (Determination of Wage in Perfectly Competitive Labour Market)- श्रम बाजार में परिवार श्रम की पूर्ति करते हैं और श्रम की माँग फर्मों द्वारा की जाती है। श्रम से अभिप्राय श्रमिकों द्वारा किए गए काम के घंटों से है न कि श्रमिकों की संख्या से। श्रम बाजार में मजदूरी का निर्धारण उस बिन्दु पर होता है जहाँ पर माँग वक्र तथा पूर्ति वक्र आपस में काटते हैं।

मजदूरी निर्धारण में हम यह मान लेते हैं कि श्रम ही केवल परिवर्तनशील उत्पादन का साधन है तथा मजदूर बाजार में पूर्ण प्रतियोगिता है अर्थात् प्रत्येक फर्म के लिए मजदूरी दी गई है। प्रत्येक फर्म का उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना है। हम यह भी मानकर चलते हैं कि फर्म की उत्पादन तकनीक दी गई है और उत्पाद का ह्रासमान नियम लागू है।

जैसा कि प्रत्येक फर्म का उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना है, अत: फर्म उस बिन्दु तक श्रमिकों की नियुक्ति करती रहेगी जब तक अन्तिम श्रम पर होने वाला अतिरिक्त (Extra) व्यय उस श्रम से प्राप्त अतिरिक्त लाभ के समान नहीं होता। एक अतिरिक्त श्रम के लगाने की अतिरिक्त लागत मजदूरी पर (W) कहलाती है और एक अतिरिक्त मजदूर के लगाने से प्राप्त आय उस श्रम की सीमान्त उत्पादकता (MP,) कहलाती है। उत्पाद की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के बेचने से प्राप्त होने वाली आय सीमान्त आय (आगम) कहलाती है। फर्म उस बिन्दु तक श्रम को लगाती है, जहाँ
W = MRPL
यहाँ MRPL = MR × MPL

प्रश्न 13.
तीन विभिन्न विधियों की सूची बनाइए जिसमें अल्पाधिकारी फर्म व्यवहार कर सकता है।
उत्तर:
तीन विभिन्न विधियाँ (Three different ways)- नीचे तीन विभिन्न विधियाँ दी गई हैं जिनमें अल्पाधिकार फर्म व्यवहार कर सकती हैं
1. द्वि-अधिकारी फर्म आपस में सांठ-गांठ करके यह निर्णय ले सकती है कि वे एक दूसरे से स्पर्धा नहीं करेंगे और एक साथ दोनों फर्मों के लाभ को अधिकतम स्तर तक ले जाने का प्रयत्न करेंगे। इस स्थिति में दोनों फर्मे एकल एकाधिकारी की तरह व्यवहार करेंगी जिनके पास दो अलग-अलग वस्तु उत्पादन करने वाले कारखाने होंगे।

2. दो फर्मों में प्रत्येक यह निर्णय ले सकती है कि अपने लाभ को अधिकतम करने के लिये वह वस्तु की कितनी मात्रा का उत्पादन करेंगी। यहाँ यह मान लिया जाता है कि उनकी वस्तु की मात्रा की पूर्ति को कोई अन्य फर्म प्रभावित नहीं करेंगी।

3. कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है अल्पाधिकार बाजार संरचना में वस्तु की अनन्य पहुँचेगा, क्योंकि इस स्तर पर सीमांत संप्राप्ति और सीमांत लागत समान होंगे और निर्गत में वृद्धि के लाभ से किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होगी।

दूसरी ओर यदि फर्म प्रतिशत से अधिक मात्रा में निर्गत का उत्पादन करती है तो सीमांत लागत सीमांत संप्राप्ति से अधिक होती है। अभिप्राय यह है कि निर्गत की एक इकाई कम करने से कुल लागत में जो कमी होती है, वह इसी कमी के कारण कुल संप्राप्ति में हुई हानि से अधिक होती है। अतः फर्म के लिए यह उपयुक्त है कि वह निर्गत में कमी लाए। यह तर्क तब तक समीचीन होगा जब तक सीमांत लागत वक्र सीमांत संप्राप्ति वक्र के ऊपर अवस्थित और फर्म अपने निर्गत संप्राप्ति के मूल्य समान हो जाएँगे और फर्म अपने निर्गत में कमी को रोक देगी।

फर्म अनिवार्य रूप से प्रतिशत निर्गत स्तर पर पहुँचती है। अतः इस स्तर को निर्गत स्तर का संतुलन स्तर कहते हैं। निर्गत का यह संतुलन स्तर उस बिन्दु के संगत होता है जहाँ सीमांत संप्राप्ति सीमांत लागत के बराबर होती है। इस समानता को एकाधिकारी फर्म द्वारा उत्पादित निर्गत के लिये संतुलन की शर्त कहते हैं।

प्रश्न 14.
अल्पाधिकार किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
अल्पाधिकार (Oligopoly)- अल्पाधिकार अपूर्ण प्रतियोगिता का एक रूप है। अल्पाधिकार बाजार की ऐसी अवस्था को कहा जाता है जिसमें वस्तु के बहुत कम विक्रेता होते हैं और प्रत्येक विक्रेता पूर्ति एवं मूल्य पर समुचित प्रभाव रखता है। प्रो० मेयर्स के अनुसार “अल्पाधिकार बाजार की वह स्थिति है जिसमें विक्रेताओं की संख्या इतनी कम होती है कि प्रत्येक विक्रेता की पूर्ति का बाजार कीमत पर समुचित प्रभाव पड़ता है और प्रत्येक विक्रेता इस बात से परिचित होता है।”

अल्पाधिकार की विशेषताएँ (Characteristics of Oligopoly)- अल्पाधिकार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. विक्रेताओं की कम संख्या (A few sellers firms)- अल्पाधिकार में उत्पादकों एवं विक्रेताओं की संख्या सीमित होती है। प्रत्येक उत्पादक बाजार की कुल पूर्ति में एक महत्वपूर्ण भाग रखता है। इस कारण प्रत्येक उत्पादक उद्योग की मूल्य नीति को प्रभावित करने की स्थिति में होता है।

2. विक्रेताओं की परस्पर निर्भरता (Mutual dependence)- इसमें सभी विक्रेताओं में आपस में निर्भरता पाई जाती है। एक विक्रेता की उत्पाद एवं विक्रय नीति दूसरे विक्रेताओं की उत्पाद एवं मूल्य नीति से प्रभावित होती है।

3. वस्तु की प्रकृति (Nature of Product)- अल्पाधिकार में विभिन्न उत्पादकों के उत्पादों में समरूपता भी हो सकती है और विभेदीकरण भी। यदि उनका उत्पाद एकरूप है तो इसे विशुद्ध अल्पाधिकार कहा जाता है और यदि इनका उत्पाद अलग-अलग है तो इसे विभेदित अल्पाधिकार कहा जाता है। .

4. फर्मों के प्रवेश एवं बर्हिगमन में कठिनाई (Difficultentry andexittofirm)- अल्पाधिकार की स्थिति में फर्मे न तो आसानी से बाजार में प्रवेश कर पाती हैं और न पुरानी फर्मे आसानी से बाजार छोड़ पाती हैं।

5. अनम्य कीमत (Rigid Price)- कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि अल्पाधिकार बाजार संरचना में वस्तुओं की अनन्य कीमत होती है अर्थात् माँग में परिवर्तन के फलस्वरूप बाजार कीमत में निर्बाध संचालन नहीं होता है। इसका कारण यह है कि किसी भी फर्म द्वारा प्रारंभ की गई कीमत में परितर्वन के प्रति एकाधिकारी फर्म प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। यदि एक फर्म यह अनुभव करती है कि कीमत में वृद्धि से अधिक लाभ का सृजन होगा और इसलिये वह अपने निर्गत (उत्पाद) को बेचने के लिये कीमत में वृद्धि करेगी (अन्य फर्मे इसका अनुकरण नहीं कर सकती हैं)। अतः कीमत वृद्धि अतः कीमत वृद्धि से बिक्री की मात्रा में भारी गिरावट आएगी जिससे फर्म की संप्राप्ति और लाभ में गिरावट आएगी। अतः किसी फर्म के लिये कीमत में वृद्धि करना विवेक संगत नहीं होगा। इसी प्रकार कोई भी फर्म अपने उत्पाद की कीमत में कमी नहीं लाएगी।

6. आपसी अनुबंध (MutualAgreement)- कभी-कभी अल्पाधिकार के अंतर्गत कार्य करने वाली विभिन्न फर्मे आपस में एक अनुबंध कर लेती हैं। यह अनुबंध वस्तु के मूल्य तथा उत्पादन की मात्रा के सम्बन्ध में किया जाता है। इसका उद्देश्य सभी फर्मों के हितों की रक्षा करना तथा उनके लाभों में वृद्धि करना होता है। ऐसी दशा में निर्धारित किया गया मूल्य एकाधिकारी फर्म के समान ही होगा।

प्रश्न 15.
एक फर्म की कुल स्थिर लागत, कुल परिवर्तनशील लागत तथा कुल लागत क्या हैं ? ये आपस में किस प्रकार संबंधित हैं ?
उत्तर:
(i) कुल नश्चित लागत (Total Fixed Cost)- बेन्हम के अनुसार एक फर्म की स्थिर लागतें वे लागतें होती हैं, जो उत्पादन के आकार के साथ परिवर्तित नहीं होती। ये लागतें सदैव स्थिर रहती हैं। इनका संबंध उत्पादन की मात्रा के साथ नहीं होता अर्थात् उत्पादन की मात्रा के घटने E या बढ़ने का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। स्थिर लागतों कुल स्थिर लागत में भूमि अथवा फैक्टरी, इमारत का किराया, बीमा व्यय, लाइसेंस, फीस, सम्पत्ति कर आदि लागतें शामिल होती हैं। स्थिर लागतों को अप्रत्यक्ष कर भी कहा जाता है।

बगल के चित्र द्वारा स्थिर लागत को दर्शाया गया है।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 8

(ii) कुल परिवर्ती लागत (Total Variable Cost) कुल परिवर्ती (अथवा परिवर्तनशील) लागतें वे लागतें हैं जो उत्पाद के आकार के साथ घटती बढ़ती रहती है। ये लागतें । उत्पादन की मात्रा के साथ बढ़ती है और उत्पादन के घटने पर घटती है। कच्चा माल, बिजली, ईंधन, परिवहन आदि पर होने वाले व्यय परिवर्ती लागतें कहलाती हैं। बेन्हम के अनुसार, “एक फर्म की परिवर्ती लागतों में वे लागतें शामिल की जाती है जो उसके उत्पादन के आकार के साथ परिवर्तित होती हैं।” कुल परिवर्ती लागतों के सम्बन्ध में ध्यान देने योग्य बात यह है कि आरम्भ में ये लागतें घटती दर से बढ़ती है, परन्तु एक सीमा के बाद वे बढ़ती हुई दर से बढ़ती है। कुल परिवर्ती लागतों को ऊपर के चित्र द्वारा दर्शाया गया है।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 9

(iii) कुल लागत (Total Cost)- कुल लागत कुल स्थिर लागत तथा कुल परिवर्ती लागत का योग होती है। कुल लागत से अभिप्राय किसी वस्तु के उत्पादन पर होने वाले कुल व्यय से है। उत्पादन. की मात्रा में परिवर्तन होने पर उत्पादन की कुल लागत में भी परिवर्तन हो जाता है।

कुल परिवर्ती लागत, कुल स्थिर लागत तथा कुल लागत का पारस्परिक सम्बन्ध (Interrelationship between Total Variable Costs, Total Fixed Costs and Total Costs)- कुल परिवर्ती लागतों, कुल स्थिर लागतों तथा कुल लागतों के आपसी सम्बन्धों को नीचे चित्र द्वारा दर्शाया गया है-
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 10
चित्र से पता चलता है कि कुल लागत, कुल स्थिर लागत तथा कुल परिवर्ती लागत के योग हैं। उत्पादन के शून्य स्तर पर कुल लागत तथा स्थिर लागत बराबर होती है। परिवर्तनशील लागतों के बढ़ने से कुल लागतें बढ़ती हैं।

प्रश्न 16.
पूर्ण प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या- पूर्ण प्रतियोगी बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या बहुत अधिक होती है जिसके कारण कोई भी विक्रेता अथवा क्रेता बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर पाता। इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता में एक क्रेता अथवा एक विक्रेता बाजार में माँग अथवा पूर्ति की दशाओं को प्रभावित नहीं कर सकता।

(ii) वस्तु की समरूप इकाइयाँ- सभी विक्रेताओं द्वारा बाजार में वस्तु की बेची जाने वाली इकाइयाँ एक समान होती हैं।

(iii) फर्मों के प्रवेश व निष्कासन की स्वतंत्रता- पूर्ण प्रतियोगी बाजार में कोई भी नई फर्म उद्योग में प्रवेश कर सकती है तथा कोई भी पुरानी फर्म उद्योग से बाहर जा सकती है। इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता में फर्मों के उद्योग में आने-जाने पर कोई प्रबन्ध नहीं होता।

(iv) बाजार दशाओं का पूर्ण ज्ञान- पूर्ण प्रतियोगी बाजार में क्रेताओं एवं विक्रेताओं को बाजार दशाओं को पूर्ण ज्ञान होता है। इस प्रकार कोई भी क्रेता वस्तु की प्रचलित कीमत से अधिक कीमत देकर वस्तु नहीं खरीदेगा। यही कारण है कि बाजार में वस्तु की एक समान कीमत पायी जाती है।

(v) साधनों की पूर्ण गतिशीलता- पूर्ण प्रतियोगिता में उत्पत्ति के साधन बिना किसी व्यवधान के एक उद्योग से दूसरे उद्योग में अथवा एक फर्म से दूसरी फर्म में स्थानान्तरित किये जा सकते हैं।

(vi) कोई यातायात लागत नहीं- पूर्ण प्रतियोगी बाजार में यातायात लागत शून्य होती है जिसके कारण बाजार में एक कीमत प्रचलित रहती है।

प्रश्न 17.
कुल लागत, औसत लागत तथा सीमान्त लागत के क्या अर्थ है ? औसत लागत तथा सीमान्त लागत के आपसी सम्बन्ध की चित्र की सहायता से व्याख्या करें।
उत्तर:
कुल लागत : किसी वस्तु की एक निश्चित मात्रा का उत्पादन करने के लिए उत्पादक को जितने कुल व्यय करने पड़ते हैं उनके जोड़ को कुल लागत कहते हैं। अल्पकाल की कुल लागत में स्थिर लागत एवं परिवर्तन लागत दोनों सम्मिलित होती है, जबकि दीर्घकाल की कुल लागत में केवल परिवर्तनशील लागते ही शामिल होती हैं।

औसत लागत : उत्पादन की प्रति इकाई लागत को औसत लागत कहते हैं।
Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 11
सीमान्त लागत : किसी वस्तु की एक कम या एक अधिक इकाई उत्पादन करने में कुल लागत में जो अन्तर आता है, उसे सीमान्त लागत कहते हैं अर्थात् अतिरिक्त इकाई की अतिरिक्त लागत. को सीमान्त लागत कहते हैं।

सीमान्त लागत (MC) तथा औसत लागत (AC) में संबंध (Relationship between AC and MC):

  1. जब औसत लागत कम होती है, तब सीमान्त लागत औसत लागत से कम होती है।
  2. जब औसत लागत बढ़ती है तब सीमान्त लागत औसत लागत से अधिक होती है।
  3. सीमान्त लागत वक्र सीमान्त लागत वक्र को न्यूनतम बिन्दु पर काटता है।

Bihar Board 12th Economics Important Questions Long Answer Type Part 4, 12

प्रश्न 18.
मुद्रा के विभिन्न कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तर:
मुद्रा के कार्यों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

  1. अनिवार्य कर,
  2. सहायक कार्य

अनिवार्य कार्य- मुद्रा के अनिवार्य कार्य निम्नलिखित हैं-

  • विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange)- मुद्रा ने विनिमय के कार्य को सरल और सुविधापूर्ण बना दिया है। वर्तमान युग में सभी वस्तुएँ और सेवाएँ मुद्रा के माध्यम से ही खरीदी तथा बेची जाती हैं।
  • मूल्य मापक (Measure of Value)- मुद्रा का कार्य सभी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्यांकन करना है। वर्तमान युग में सभी वस्तुओं और सेवाओं को मुद्रा के द्वारा मापा जाता है।
  • स्थगित भुगतान का आधार (Payments)- वर्तमान युग में बहुत से भुगतान तत्काल न करके भविष्य के लिए स्थगित कर दिये जाते हैं। मुद्रा ऐसे सौदों के लिए आधार प्रस्तुत करती है। मुद्रा के मूल्य में अन्य वस्तुओं की अपेक्षा अधिक स्थायित्व पाया जाता है। मुद्रा में सामान्य स्वीकृति गुण पाया जाता है।
  • मूल्य का संचय (Store of value)- मनुष्य अपनी आय का कुछ भाग भविष्य के लिए अवश्य बचाता है। मुद्रा के प्रयोग द्वारा मूल्य संचय का कार्य सरल और सुविधापूर्ण हो गया है।
  • मूल्य का हस्तान्तरण (Transfer of value)- मुद्रा-क्रय शक्ति के हस्तांतरण का सर्वोत्तम साधन है। इसका कारण मुद्रा का सर्वग्राह्य और व्यापक होना है। मुद्रा के द्वारा चल व अचल सम्पत्ति का हस्तांतरण सरलता से हो सकता है।

सहायक कार्य- मुद्रा के सहायक कार्य निम्नलिखित हैं-

  • आय का वितरण (Distribution of Income)- आधुनिक युग में उत्पादन की प्रक्रिया बहुत जटिल हो गई है, जिसके लिए उत्पादन के विभिन्न साधनों का सहयोग प्राप्त किया जाता है। मुद्रा के द्वारा उत्पादन के विभिन्न साधनों को पुरस्कार दिया जाता है।
  • साख का आधार (Basis of Credit)- व्यापारिक बैंक साख का निर्माण नकद कोष के आधार पर करते हैं। मुद्रा साख का आधार है।
  • अधिकतम संतुष्टि का आधार (Basis of Maximum Satisfaction)- मुद्रा के द्वारा उपभोक्ता संतुष्टि प्राप्त करना चाहता है जो उसे सम सीमान्त उपयोगिता के नियम का पालन करके ही प्राप्त हो सकती है। इस नियम का पालन मुद्रा द्वारा ही संभव हुआ है।
  • पूँजी को सामान्य रूप प्रदान करना (General Form of the Capital)- मुद्रा सभी प्रकार की सम्पत्ति, धन, आय व पूँजी को सामान्य मूल्य प्रदान करती है, जिससे पूँजी का तरलता, गतिशीलता और उत्पादकता में वृद्धि हुई है।

Bihar Board 12th Business Economics Important Questions Short Answer Type Part 1 in Hindi

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Bihar Board 12th Business Economics Important Questions Short Answer Type Part 1 in Hindi

प्रश्न 1.
उपभोक्ता संतुलन का क्या अर्थ है ? इसकी मान्यताएँ लिखें।
उत्तर:
अर्थशास्त्र में उपभोक्ता संतुलन से अभिप्राय उस स्थिति से है जब एक उपभोक्ता दी हुई आय से एक या दो वस्तुओं को इस प्रकार खरीदता है कि उसे अधिकतम संतुष्टि होती है। और उसमें परिवर्तन लाने की प्रवृति जुड़ी होती है।

उपभोक्ता संतुलन की मान्यताएँ निम्नलिखित हैं-

  • मौद्रिक रूप में सीमांत उपयोगिता = मूल्य
  • मौद्रिक रूप मे कुल उपयोगिता तथा कुल व्यय में अन्तर का अधिकतम होना।

प्रश्न 2.
माँग तालिका की सहायता से माँग के नियम की व्याख्या करें।
उत्तर:
अर्थशास्त्र के अनुसार मूल्य और माँग में विपरीत सम्बंध है। इसीलिए माँग का नियम लागू होता है। यदि अन्य शर्ते सामान्य रहती है तो बाजार में जब किसी वस्तु का मूल्य बढ़ जाता है। उसकी माँग कम हो जाती है। दूसरी ओर जब किसी वस्तु का मूल्य कम हो जाता है तो उसकी माँग बढ़ जाती है। यही माँग का नियम है।

माँग के नियम को माँग तालिका द्वारा भी स्पष्ट किया जाता है। इस तालिका के द्वारा माँग के नियम को इस प्रकार दिखाया जा सकता है-
Bihar Board 12th Business Economics Important Questions Short Answer Type Part 1, 1
जिस तालिका में मूल्य और खरीदी गई वस्तु की मात्रा को सम्बंध को दिखाया जाता है उसे माँग की तालिका कहते हैं।

प्रश्न 3.
पूर्णतया लोचदार तथा पूर्णतया बेलोचदार माँग का अर्थ लिखें।
उत्तर:
पूर्णतया लोचदार माँग- जब किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन नहीं होने पर भी अथवा बहुत सूक्ष्म परिवर्तन होने पर माँग में बहुत अधिक परिवर्तन हो जाता है तब उस वस्तु की माँग पूर्णयता लोचदार कही जाती है। पूर्ण लोचदार माँग को अन्नत लोचदार माँग भी कहते हैं।

पूर्णयता बेलोचदार माँग- जब किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर भी उसकी माँग में कोई परिवर्तन नहीं होता है तो इसे पूर्णयता बेलोचदार माँग कहते हैं। इस स्थिति में माँग की लोच शून्य होती है।

प्रश्न 4.
सीमान्त उत्पादन तथा औसत उत्पादन के सम्बन्ध को बताएं।
उत्तर:
औसत उत्पादन तथा सीमांत में सम्बंध-

  • औसत उत्पादन जब तक बढ़ता है जब तक सीमांत उत्पादन से अधिक होता है।
  • औसत उत्पादन उस समय अधिकतम होता है जब सीमांत उत्पादन औसत उत्पादन के बराबर होता है।
  • औसत उत्पादन तब गिरता है जब सीमांत उत्पादन औसत उत्पादन से कम होता है।

प्रश्न 5.
अवसर लागत क्या है ?
उत्तर:
अवसर लागत से अभिप्राय उनसभी कष्ट त्याग और प्रयत्नों से है जो कि उत्पादन के साधनों की किसी वस्तु का उत्पादन करने के लिए उठाने पड़ते हैं।

प्रश्न 6.
कुल आगम, औसत आगम तथा सीमान्त आगम से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
कुल आगम- एक फर्म द्वारा अपनी वस्तु की एक निश्चित मात्रा की बिक्री से जो राशि प्राप्त होती है उसे कुल आगम कहते हैं। औसत आगम- औसत आगम की गणना करने के लिए कुल आगम को बेची गयी मात्रा से विभाजित किया जाता है।

सीमांत आगम- किसी फर्म द्वारा अपनी वस्तु की एक इकाई कम या अधिक बेचने से कुल आगम में जो परिवर्तन आता है उसे सीमांत आगम कहते हैं।

प्रश्न 7.
आर्थिक क्रिया क्या है ?
उत्तर:
आर्थिक क्रियाएँ वैसी क्रियाएँ हैं जिनसे आय के रूप में धन की प्राप्ति होती है। आर्थिक क्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • व्यवसाय
  • पेशा
  • रोजगार या नौकरी।

प्रश्न 8.
माँग को प्रभावित करने वाले किन्हीं पाँच कारकों का उल्लेख करें। अथवा, माँग के निर्धारकों की व्याख्या करें।
उत्तर:
वे तत्व जो किसी वस्तु की माँगी गई मात्रा को प्रभावित करते हैं माँग को निर्धारित करने वाले तत्त्व कहलाते हैं। ये मुख्य तत्त्व निम्नलिखित हैं-
(i) संबंधित वस्तुओं की कीमतें (Prices of related goods)- प्रतिस्थापन वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर दी गई वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है। जैसे-चाय की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी प्रतिस्थापन वस्तु कॉफी की माँग में वृद्धि हो जाती है। एक पूरक वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर दी गई वस्तु की माँग में कमी हो जाती है। पेट्रोल की कीमत में वृद्धि होने पर मोटर गाड़ी की माँग में कमी हो जाती है।

(ii) आय (Income)- उपभोक्ता की आय में वृद्धि होने पर वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है यह वस्तु पर निर्भर करता है कि वस्तु सामान्य वस्तु है अथवा घटिया वस्तु है।

(ii) रुचि, स्वभाव आदत (Taste, Preference and Habit)- यदि रुचि, स्वभाव और आदत में परिवर्तन अनुकूल हो तो वस्तु की माँग में वृद्धि होती है।

(iv) जनसंख्या- जनसंख्या बढ़ने पर माँग बढ़ती है और इसमें कमी होने पर माँग में कमी आती है।

(v) संभावित कीमत- वस्तु की संभावित कीमत बढ़ने या घटने पर उसकी वर्तमान माँग में वृद्धि या कमी आयेगी।

प्रश्न 9.
ह्रासमान सीमांत का नियम क्या है ?
उत्तर:
ह्रासमान सीमांत उत्पाद नियम यह दर्शाता है कि रोजगार के एक निश्चित स्तर के बाद एक साधन की सीमांत उत्पाद घटता है।
जब परिवर्तनशील साधन की इकाइयाँ अत्यधिक हो जाती हैं तो सीमांत उत्पाद शून्य एवं ऋणात्मक हो जाता है।

प्रश्न 10.
पूँजी पर्याप्तता अनुपात मापदण्ड क्या है ?
उत्तर:
वाणिज्यिक बैंकों के लिए पूँजी पर्याप्तता अनुपात मापदण्ड लागू किए गए हैं जिसके अंतर्गत भारत में कार्यरत सभी बैंकों को 8% की पूँजी पर्याप्तता मानक को प्राप्त करना अनिवार्य किया गया। देश के सभी सर्वाधिक बैंकों ने यह पूँजी पर्याप्तता प्राप्त कर लिया है।

प्रश्न 11.
हरित GNP किसे कहते हैं ?
उत्तर:
हरित GNP की अवधारणा का विकास आर्थिक विकास के मापक के रूप में किया जा रहा है। GNP को माननीय कुशलता को मापने के लायक इसी संदर्भ में हरित GNP आर्थिक संवृद्धि की कसौटी प्राकृतिक संसाधनों के विवेकशील विदोहन और विकास के हित लाभों के समान वितरण पर जोर देती है। अर्थात् GNP का संबंध प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, संरक्षण एवं समाज के विभिन्न वर्गों में उनके न्यायोचित बँटवारे से है।

प्रश्न 12.
मौसमी बेरोजगारी किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जब किसी व्यक्ति को रोजगार की प्राप्ति नहीं होती है तो इसे बेरोजगारी कहा जाता है। बेरोजगारी विभिन्न प्रकार की होती है जिसमें मौसमी बेरोजगारी भी एक है। जब वर्षभर में किसी विशेष मौसम में लोगों को रोजगार की प्राप्ति नहीं है और वे बेरोजगार बने रहते हैं तो इस स्थिति को मौसमी बेरोजगारी कहा जाता है, जैसे-गर्मी के दिनों में खेतों में कृषि-कार्य नहीं होता है। इसलिए इस मौसम में मजदूर बेरोजगार हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
जमाराशि क्या है ?
उत्तर:
बैंक में लोग अपने जमा पूँजी को विभिन्न खाता खोलकर उसे जमा के रूप में रखते हैं तो इसे जमाराशियाँ कहते हैं। जमाराशियों की रकम पर बैंक खाताधारी को एक निश्चित दर से ब्याज देती है।

प्रश्न 14.
समाशोधन गृह को परिभाषित करें।
उत्तर:
केन्द्रीय बैंक के समाशोधन गृह का अर्थ है वह विभिन्न बैंकों के एक-दूसरे के लेन-देन न्यूनतम नकदी के साथ निपटा देती है। क्योंकि प्रत्येक बैंक के कोष तथा खाते केंद्रीय बैंक के पास होते हैं। इसलिए केंद्रीय बैंक के लिए यह तर्कपूर्ण तथा सरल कदम है कि वह व्यापारिक बैंकों के लिए समाशोधन गृह का कार्य करे।

प्रश्न 15.
बजट क्या है ? परफॉर्मेंस बजट और जेंडर बजट की व्याख्या करें।
उत्तर:
वैसा विवरण-पत्र जिसमें आय और व्यय के अनुमानित आँकड़े दिए हुए रहते हैं तो ऐसे विवरण को बजट कहा जाता है। इसी विवरण-पत्र के आधार पर प्राप्त आय से खर्चों को पूरा किया जाता है।

प्रो० शिराज ने बजट की परिभाषा देते हुए कहा है कि ‘बजट आय और व्यय का वार्षिक विवरण है।’ इसी विवरण के आधार पर आय को प्राप्त किया जाता है और खर्च को पूरा किया जाता है।

बजट विभिन्न प्रकार के होते हैं-घरेलू बजट तथा सरकारी बजट।
परफारमेंस बजट एक ऐसा बजट है जिस बजट के द्वारा बजट में दिए गए आय और व्यय के विवरण के अनुसार बजट का परफार्मेंस होता है। यानि जितनी आय की प्राप्ति होती है उसी के अनुसार व्यय को पूरा किया जाता है। दूसरी ओर जेन्डर बजट एक ऐसा बजट है जिससे अनुमानित आँकड़ों में परिवर्तन नहीं होता है। बल्कि आय और व्यय में जितने आँकड़े दिए हुए रहते हैं उसी के अनुसार काम किया जाता है।

प्रश्न 16.
स्थिर एवं लोचशील विनिमय दर में अंतर बताइए।
उत्तर:
स्थिर एवं लोचशील विनिमय दर में निम्नलिखित अंतर हैं-
स्थिर विनिमय दर:

  1. विनिमय दर, सरकार द्वारा घोषित की जाती है।
  2. इस व्यवस्था के अंतर्गत विदेशी केन्द्रीय बैंक अपनी मुद्राओं की एक निर्धारित कीमत पर खरीदने व बेचने के लिए तत्पर रहते हैं।
  3. इसमें परिवर्तन नहीं आते हैं।

लोचशील विनिमय दर:

  1. लोचशील विनिमय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में माँग व पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है।
  2. इस व्यवस्था के अंतर्गत विनिमय दर स्वतंत्र रूप से विदेशी विनिमय बाजार में निर्धारित होता है।
  3. इसमें सदैव परिवर्तन आते रहते हैं।

प्रश्न 17.
कुल राष्ट्रीय उत्पाद तथा शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
किसी देश के अंतर्गत एक वर्ष में जितनी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है, उनके मौद्रिक मूल्य को कुल राष्ट्रीय उत्पाद कहा जाता है। इसे इस रूप में व्यक्त किया जाता है-

कुल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) = कुल घरेलू उत्पाद (GDP) + देशवासियों द्वारा विदेशों में अर्जित आय – विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय।

लेकिन कुल राष्ट्रीय उत्पाद में से घिसावट का व्यय घटा देने पर जो शेष बचता है उसे शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद कहा जाता है। इस प्रकार कुल राष्ट्रीय उत्पाद की धारणा एक विस्तृत धारणा है, जिसके अंतर्गत शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद आ जाता है।

प्रश्न 18.
सरकार के बजट से आप क्या समझते हैं ? अथवा, सरकारी बजट का अभिप्राय क्या है ?
उत्तर:
आगामी आर्थिक वर्ष के लिए सरकार के सभी प्रत्याशित राजस्व और व्यय का अनुमानित वार्षिक विवरण बजट कहलाता है। सरकार कई प्रकार की नीतियाँ बनाती है। इन नीतियों को लागू करने के लिए वित्त की आवश्यकता होती है। सरकार आय और व्यय के बारे में पहले से ही अनुमान लगाती है। अतः बजट आय और व्यय का अनुमान है। सरकारी नीतियों को क्रियान्वित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

प्रश्न 19.
कुल घरेलू उत्पाद तथा शुद्ध घरेलू उत्पाद में क्या अंतर है ? बताएँ।
उत्तर:
किसी देश की सीमा में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के सकल मूल्य को कुल घरेलू उत्पाद कहा जाता है। इसमें घिसावट भी शामिल होता है।

इसके विपरीत कुल घरेलू उत्पाद में से घिसावट निकालने पर जो शेष बचता है उसे शुद्ध घरेलू उत्पाद कहा जाता है। यह देश की सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का शुद्ध मूल्य होता है।

प्रश्न 20.
खाद्यान्न उपलब्धता गिरावट सिद्धांत से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
1998 के नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन ने एक नये सिद्धांत का प्रतिपादन किया है, जिसे खाद्यान्न उपलब्धता गिरावट सिद्धांत के नाम से जाना जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण खाद्यान्न के उत्पादन में कमी आती है। फलतः खाद्यान्न की पूर्ति माँग की तुलना में कम हो जाती है। पूर्ति के सापेक्ष खाद्यान्न की आंतरिक माँग खाद्यान्न की कीमतों को बढ़ाती है जिसके परिणामस्वरूप निर्धन व्यक्ति खाद्यान्न उपलब्धता से वंचित हो जाते हैं और क्षेत्र में भूखमरी की समस्या उत्पन्न होती है।

प्रश्न 21.
उपभोक्ता संतुलन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
अर्थशास्त्र में उपभोक्ता संतुलन से अभिप्राय उस स्थिति से है जब एक उपभोक्ता दी हुई आय से एक या दो वस्तुओं को इस प्रकार खरीदता है कि उसे अधिकतम संतुष्टि होती है और उसमें परिवर्तन लाने की कोई प्रवृत्ति जुड़ी होती है।

प्रश्न 22.
एक द्वि-क्षेत्र अर्थव्यवस्था से आय के चक्रीय प्रवाह को दर्शायें।
उत्तर:
परिवार मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फर्मों को साधन-सेवाएँ प्रदान करते हैं। इन सेवाओं का प्रयोग कर फर्मे वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करते हैं और उत्पादित वस्तुओं को परिवार को उनकी सेवाओं के बदले देती हैं। इस प्रकार परिवार और फर्मों के मध्य साधनसेवाओं और वस्तुओं का आदान-प्रदान या प्रवाह चक्रीय रूप से चलता रहता है। इसे वास्तविक प्रवाह कहा जाता है। वास्तविक प्रवाह का तात्पर्य परिवार और फर्मों के मध्य साधन-सेवाओं और वस्तुओं के प्रवाह से है। साधन-सेवाओं और वस्तुओं का भुगतान मुद्रा के रूप में होता है। साधन-सेवाओं के बदले फर्मे परिवारों को सेवा भुगतान देती है तथा वस्तु पूर्ति के बदले परिवार फर्मों को वस्तुओं का भुगतान देते हैं। इस प्रकार सेवा भुगतान के रूप में फर्मों से परिवार को तथा वस्तु भुगतान के रूप में परिवार से फर्मों को निरंतर आय का मुद्रा के रूप में प्रवाह होता है। इसे आय क प्रवाह या मुद्रा प्रवाह कहा जाता है। चित्र के माध्यम से भी इसे दर्शाया जा सकता है-
Bihar Board 12th Business Economics Important Questions Short Answer Type Part 1, 2

प्रश्न 23.
प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर में अंतर करें।
उत्तर:
प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर में निम्नलिखित अंतर है-
प्रत्यक्ष कर:

  1. इस कर को टाला नहीं जा सकता है।
  2. यह कर प्रगतिशील होता है। आय में वृद्धि के साथ इसमें वृद्धि होती है।
  3. आय कर, सम्पत्ति कर, निगम कर इसके उदाहरण हैं।

अप्रत्यक्ष कर:

  1. जिसे व्यक्ति को यह कर चुकाना पड़ता है वह इसे दूसरे व्यक्ति पर टाल सकता है।
  2. यह प्रगतिशील नहीं होता है।
  3. बिक्री कर, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क अप्रत्यक्ष कर के उदाहरण हैं।

प्रश्न 24.
निवेश गुणक क्या है ? उदाहरण के साथ वर्णन कंग अथवा, निवेश गुणक क्या है ? निवेश गुणक की गणना का सूत्र दें।
उत्तर:
केन्ज के अनुसार, “निवेश गुणक से ज्ञात होता है कि जब कुल निवेश में वृद्धि की जाएगी तो आय में जो वृद्धि होगी, वह निवेश में होने वाली वृद्धि से k गुणा अधिक होगी।”

डिल्लर्ड के अनुसार, “निवेश में की गई वृद्धि के परिणामस्वरूप आय में होने वाली वृद्धि के अनुपात को निवेश गुणक कहा जाता है।”

निवेश गुणक का सूत्र-
गुणक को निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है : K = \(\frac{\Delta \mathrm{Y}}{\Delta \mathrm{I}}\)
यहाँ K = गुणक, ΔI = निवेश में परिवर्तन, ΔY = आय में परिवर्तन

प्रश्न 25.
आय का चक्रीय प्रवाह समझाइए।
उत्तर:
आय के चक्रीय प्रवाह से अभिप्राय है अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं और सेवाओं या मुद्रा का प्रवाह। प्रत्येक प्रवाह से ज्ञात होता है कि एक क्षेत्र पूरे क्षेत्र पर कैसे निर्भर करता है।

प्रश्न 26.
साम्य कीमत से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जिस कीमत पर क्रेता वस्तु को खरीदने के लिए तैयार है तथा विक्रेता बेचने को तैयार है, वह वस्तु की संतुलन या साम्य कीमत होती है। संतुलन कीमत पर वस्तु की माँग और वस्तु की पूर्ति आपस में बराबर होते हैं।

प्रश्न 27.
मौद्रिक प्रवाह तथा वास्तविक प्रवाह में अंतर करें।
उत्तर:
मौद्रिक प्रवाह में मुद्रा फर्मों से परिवारों को साधन भुगतान के रूप में तथा परिवारों से फर्मों को उपयोग व्यय, के रूप में प्रवाहित होती है, जबकि वास्तविक प्रवाह में वस्तुओं का प्रवाह अर्थव्यवस्था के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाता है।

प्रश्न 28.
‘अर्थशास्त्र चयन का तर्कशास्त्र है।’ इसकी विवेचना करें।
अथवा, अर्थशास्त्र में सीमितता का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
दुर्लभता पर जोर देते हुए रॉबिन्स ने कहा कि मानवीय आवश्यकताएँ अनन्त हैं तथा उसकी पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। साथ ही, सीमित साधनों के वैकल्पिक प्रयोग भी संभव होते हैं। ऐसी स्थिति में मनुष्य के सामने चुनाव की समस्या उत्पन्न होती है कि सीमित साधनों के द्वारा किन-किन आवश्यकताओं की पूर्ति करे तथा किन्हें छोड़ दे। फलत: व्यक्ति आवश्यकता की तीव्रता पर ध्यान देते हुए पहले सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति करता है। उसके बाद कम महत्त्वपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति करता ताकि अधिकतम संतोष की प्राप्ति हो सके। इसी कारण रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को चयन का तर्कशास्त्र, कहा है।

प्रश्न 29.
मौद्रिक प्रवाह को परिभाषित करें। अथवा, मुद्रा प्रवाह की परिभाषा दें।
उत्तर:
मौद्रिक प्रवाह का अभिप्राय उस प्रवाह से है जिसमें फर्मों द्वारा उत्पादन के कारकों को उनकी सेवाओं के बदले में ब्याज, लाभ, मजदूरी तथा लगान के रूप में दी गई मुद्रा का प्रवाह फर्मों से परिवार क्षेत्र की ओर होता है। इसके विपरीत उपभोग व्यय के रूप में मुद्रा का प्रवाह परिवार क्षेत्र से फर्मों की ओर होता है।

प्रश्न 30.
बाजार के विस्तार से संबंधित तत्त्व कौन-कौन हैं ?
उत्तर:
बाजार का विस्तार वस्तु के गुण पर निर्भर करता है, जिसके अंतर्गत निम्न बातों का उल्लेख किया जाता है-

  • व्यापक माँग
  • व्यापक पूर्ति
  • टिकाऊपन
  • वहनीयता तथा
  • मूल्य में स्थिरता।

बाजार के विस्तार पर देश की आंतरिक स्थिति का भी प्रभाव पड़ता है, जिसके अंतर्गत निम्न बातों का उल्लेख किया जाता है-

  • शांति एवं सुरक्षा
  • यातायात एवं संवादवाहन के साधन
  • सरकारी नीति
  • मौद्रिक एवं बैंकिंग नीति
  • व्यापार का तरीका
  • उत्पादन का तरीका।

प्रश्न 31.
बाजार के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख करें।
उत्तर:
प्रतियोगिता के आधार पर बाजार के तीन प्रकार होते हैं-

  • पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार- वह बाजार जिसमें क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है, साथ ही इन दोनों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता भी पायी जाती है, पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार कहलाता है।
  • एकाधिकारी बाजार- वह बाजार जहाँ वस्तु की पूर्ति पर व्यक्ति या उद्योग विशेष का पूर्ण नियंत्रण होता है तथा उनके निकट स्थानापन्न वस्तुएँ भी बाजार में उपलब्ध नहीं होती है, एकाधिकारी बाजार कहलाता है।
  • अपूर्ण प्रतियोगिता का बाजार- यह पूर्ण प्रतियोगिता के बाजार तथा एकाधिकार के बाजार का सम्मिश्रण होता है।

प्रश्न 32.
सम सीमान्त उपयोगिता नियम की सचित्र व्याख्या करें।
उत्तर:
Bihar Board 12th Business Economics Important Questions Short Answer Type Part 1, 3
सम सीमान्त उपयोगिता नियम यह बतलाता है कि उपभोग के क्रम में उपभोक्ता को अधिकतम । संतोष की. प्राप्ति तभी संभव होती है जबकि वह अपनी सीमित आय को विभिन्न वस्तुओं पर इस प्रकार खर्च करे ताकि विभिन्न वस्तुओं से मिलने वाली सीमान्त उपयोगिता बराबर हो जाय। इस प्रकार जिस बिन्दु पर विभिन्न वस्तुओं से मिलने वाली सीमान्त उपयोगिता बराबर हो जाती है वही बिन्दु उपभोक्ता के संतुलन का बिन्दु या अधिकतम संतोष का बिन्दु कहा जाता है। मार्शल का कहना है “यदि किसी व्यक्ति के पास कोई ऐसी वस्तु हो जो विभिन्न प्रयोगों में लायी जा सके तो वह उस वस्तु को विभिन्न प्रयोगों में इस प्रकार बाँटेगा जिसमें उसकी सीमान्त उपयोगिता सभी प्रयोगों में समान रहे!” यह ऊपर के रेखाचित्र से ज्ञात हो जाता है-

इस रेखाचित्र में xx’ रेखा : वस्तु को एवं yy’ रेखा y वस्तु को बतलाती है। ये दोनों रेखाएँ एक दूसरे को M बिन्दु पर काटती है। यही बिन्दु उपभोक्ता के संतुलन का बिन्दु कहा जायेगा, क्योंकि यहीं पर दोनों वस्तुओं से प्राप्त सीमान्त उपयोगिता एक दूसरे के बराबर हो जाती है।

प्रश्न 33.
साख निर्माण से क्या अभिप्राय है ?
अथवा, साख सृजन की परिभाषा दें।
उत्तर:
अपने नकद कोषों के आधार पर व्यावसायिक बैंकों द्वारा माँग जमाओं का निर्माण करना ही साख निर्माण कहलाता है। प्रायः नकदै कोषों से कई गुणा अधिक जमाओं का निर्माण कर दिया जाता है। नकद कोषों तथा जमाओं के बीच अनुपात नकद-कोष अनुपात कहलाता है। बैंकों को अनुभव के आधार पर यह ज्ञात है कि कुल जमा का सिर्फ 10% ही नकदी के रूप में निकाला जाता है। जैसे यदि 100 रु. के नकद कोष के बदले में 1000 रु. की माँग जमाओं का निर्माण किया जाता है तो इसे 10 गुणा, अधिक साख निर्माण कहा जायेगा।

प्रश्न 34.
बचत एवं निवेश हमेशा बराबर होते हैं। व्याख्या करें।
उत्तर:
कीन्स के अनुसार आय रोजगार संतुलन निर्धारण उस बिन्दु पर होता है जहाँ बचत एवं निवेश आपस में बराबर होते हैं अर्थात् बचत – निवेश (S = I)

एक अर्थव्यवस्था में विनियोग दो प्रकार के होते हैं- नियोजित. विनियोग तथा गैर-नियोजित विनियोग। वस्तुत: नियोजित और गैर नियोजित विनियोग का जोड़ ही वास्तविक विनियोग या कुल विनियोग कहलाता है। संक्षेप में,
IR = Ip + Iu
जहाँ IR = वास्तविक विनियोग
Ip = नियोजित विनियोग तथा
Iu = गैर नियोजित विनियोग

उपर्युक्त समीकरण से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वास्तविक विनियोग केवल उसी स्थिति में ही नियोजित विनियोग के बराबर हो सकता है जबकि गैर नियोजित विनियोग शून्य हो। इसका तात्पर्य यह है कि यह आवश्यक सदैव नियोजित विनियोग के बराबर हो।

उपर्युक्त विवेचन के आधार पर हम कह सकते हैं कि
y = C + I
तो हमारा वास्तव में अभिप्राय यह होता है कि
y = C + IR
तथा y = C + S
दोनों समीकरणों को एक साथ प्रस्तुत करने पर
C + S = C + IR
या S = IR
अतः बचतें सदैव वास्तविक निवेश के समान होती है।

प्रश्न 35.
सीमान्त उपयोगिता तथा कुल उपयोगिता में अंतर कीजिए।
उत्तर:
किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपयोग से जो अतिरिक्त उपयोगिता मिलती है उसे सीमान्त उपयोगिता कहते हैं। जबकि उपभोग की सभी इकाइयों के उपभोग से उपभोक्ता को जो उपयोगिता प्राप्त होती है उसे कुल उपयोगिता कहते हैं।

Bihar Board 12th Psychology Important Questions Long Answer Type Part 6

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Bihar Board 12th Psychology Important Questions Long Answer Type Part 6

प्रश्न 1.
प्रतिरक्षक तंत्र को दबाव कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर:
दबाव के कारण प्रतिरक्षक तंत्र की कार्यप्रणाली दुर्बल हो जाती है जिसके कारण बीमारी उत्पन्न हो सकती है। प्रतिरक्षक तंत्र शरीर के भीतर तथा बाहर से होने वाले हमलों से शरीर की रक्षा करता है। मनस्तंत्रिका प्रतिरक्षा विज्ञान (Psycho neuro immunology) मन, मस्तिष्क और प्रतिरक्षक तंत्र के बीच संबंधों पर ध्यान केंद्रित करता है यह प्रतिरक्षक तंत्र पर दबाव के प्रभाव का अध्ययन करता है। प्रतिरक्षक तंत्र में श्वेत रक्त कोशिकाएँ या श्वेताणु (Antibodies) बाह्य तत्त्वों (एंटीजेन), जैसे वाइरस को पहचान कर नष्ट करता है।

इनके द्वारा रोगप्रतिकारकों (antibodies) का निर्माण भी होता है। तिरक्षक तंत्र में ही टी-कोशिकाएँ, बी-कोशिकाएँ हमला करने वाली को नष्ट करती हैं, तथा टी-सहायक कोशिकाएँ प्रतिरक्षात्मक क्रियाओं में वृद्धि करती हैं। इन्हीं टी-सहायक कोशिकाओं पर ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वाइरस (एच. आई. वी.) हमला करते हैं, जो कि एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंडोम (एड्स) के कारक हैं। बी-कोशिकाएँ रोगप्रतिकारकों का निर्माण करती हैं। प्राकृतिक रूप से नष्ट करने वाली कोशिकाएँ वाइरस तथा अर्बुद या ट्यूमर दोनों के विरुद्ध लड़ाई करती हैं।

दबाव के कारण प्राकृतिक रूप से नष्ट करने वाली कोशिकाओं की कोशिका-विषाक्तता प्रभावित हो सकती है, जो प्रमुख संक्रमणों तथा कैंसर से रक्षा में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होती है । अत्यधिक उच्च दबाव से ग्रस्त व्यक्तियों में, प्राकृतिक रूप से नष्ट करने वाली कोशिकाओं की कोशिका-विषाक्तता में भारी कमी पाई गई है। यह उन विद्यार्थियों, जो महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं में बैठने जा रहे हैं, शोकसंतृप्त व्यक्तियों तथा जो गंभीर रूप से अवसादग्रस्त हैं में भी पाई गई है । अध्ययन यह प्रदर्शित करते हैं कि प्रतिरक्षक तंत्र की क्रियाशीलता उन व्यक्तियों में बेहतर पाई जाती है जिन्हें सामाजिक अवलंब उपलब्ध रहती है। इसके अतिरिक्त प्रतिरक्षक तंत्र में परिवर्तन उन व्यक्तियों के स्वास्थ्य को अधिक प्रभावित करता है जिनका प्रतिरक्षक तंत्र पहले से ही दुर्बल हो चुका है। नकारात्मक संवेगों सहित, दबाव हार्मोन का स्राव होना जिनके द्वारा प्रतिरक्षक तंत्र दुर्बल होता है, जिसके परिणामस्वरूप मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं।
Bihar Board 12th Psychology Important Questions Long Answer Type Part 6 1

प्रश्न 2.
दबाव के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दबाव मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं। ये हैं-
(i) भौतिक एवं पर्यावरणी दबाव- भौतिक दबाव वे माँगें हैं, जिसके कारण हमारी शारीरिक दशा में परिवर्तन उत्पन्न हो जाता है। हम तनाव का अनुभव करते हैं जब हम शारीरिक रूप से अधिक परिश्रम करते हैं, पौष्टिक भोजन की कमी हो जाती है, कोई चोट लग जाती है, या निद्रा की कमी हो जाती है। पर्यावरणी दबाव हमारे परिवेश की वैसी दशाएँ होती हैं जो प्राय: अपरिहार्य होती हैं; जैसे-वायु प्रदूषण, भीड़, शोर, ग्रीष्मकाल की गर्मी, शीतकाल की सर्दी इत्यादि । एक अन्य प्रकार के पर्यावरणी दबाव प्राकृतिक विपदाएँ तथा विपाती घटनाएँ हैं; जैसे-आग, भूकंप, बाढ़ इत्यादि।

(ii) मनोवैज्ञानिक दबाव- यह वे दबाव हैं जिन्हें हम अपने मन से उत्पन्न करते हैं। ये दबाव अनुभव करने वाले व्यक्ति के लिए विशिष्ट होते हैं तथा दबाव के आंतरिक स्रोत होते हैं। हम समस्याओं के बारे में परेशान होते हैं, दुश्चिता करते हैं या अवसादग्रस्त हो जाते हैं। ये सभी केवल दबाव के लक्षण ही नहीं हैं बल्कि यह हमारे लिए दबाव को बढ़ाते भी हैं। मनोवैज्ञानिक दबाव के कुछ प्रमुख स्रोत कुंठा, द्वंद्व, आंतरिक एवं सामाजिक दबाव इत्यादि हैं।

जब कोई व्यक्ति या परिस्थिति हमारी आवश्यकताओं तथा अभिप्रेरकों को अवरुद्ध करती है, जो हमारे इष्ट लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा डालती है तो कुंठा (Frustration) उत्पन्न होती है। कुंठा के अनेक कारण हो सकते हैं; जैसे-सामाजिक भेदभाव, अंतर्वैयक्तिक क्षति, स्कूल में कम अंक प्राप्त करना इत्यादि। दो या दो से अधिक असंगत आवश्यकताओं तथा अभिप्रेरकों में द्वंद्व (conflict) हो सकता है, जैसे-क्या नृत्य का अध्ययन किया जाए या मनोविज्ञान का। हम अध्ययन को जारी भी रखना चाह सकते हैं या नौकरी भी करना चाह सकते हैं। हमारे मूल्यों में भी तब द्वंद्व हो सकता है जब हमारे ऊपर किसी ऐसे कार्य को करने के लिए दबाव डाला जाए जो हमारे अपने जीवन मूल्यांक के विपरीत हो।

(iii) सामाजिक दबाव-ये बाह्यजनित होते हैं तथा दूसरे लोगों के साथ हमारी अंत:क्रियाओं के कारण उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार की सामाजिक घटनाएँ; जैसे-परिवार में किसी की मृत्यु या बीमारी, तनावपूर्ण संबंध, पड़ोसियों से परेशानी, सामाजिक दबाव के कुछ उदाहरण हैं। एक सामाजिक दबाव व्यक्ति-व्यक्ति में बहुत भिन्न होते हैं। यह व्यक्ति जो अपने घर में शाम में शांतिपूर्ण बिताना चाहता है उसके लिए उत्सव या पार्टी में जाना दबावपूर्ण हो सकता है, जबकि किसी बहुत मिलनसार व्यक्ति के लिए शाम को घर बैठे रहना दबावपूर्ण हो सकता है।

प्रश्न 3.
दबाव प्रबंधन के विभिन्न तकनीकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दबाव प्रबंधन की विभिन्न तकनीक निम्नलिखित हैं
(i) विश्रांति की तकनीकें- यह वे सक्रिय कौशल हैं जिनके द्वारा दबाव के लक्षणों तथा बीमारियों, जैसे-उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोग के प्रभावों में कमी की जा सकती है। प्रायः विश्रांति शरीर के निचले भाग से प्रारंभ होती है तथा मुख पेशियों तक इस प्रकार लाई जाती है जिससे संपूर्ण शरीर विश्राम अवस्था में आ जाए। मन को शांत तथा शरीर को विश्राम अवस्था में लाने के लिए गहन श्वसन के साथ पेशी-शिथिलन का उपयोग किया गता है।

(ii) ध्यान प्रक्रियाएँ-योग विधि में ध्यान लगाने की प्रक्रिया में कुछ अधिगत प्रविधियाँ एक निश्चित अनुक्रम में उपयोग में लाई जाती हैं जिससे ध्यान को पुनः केंद्रित कर चेतना की परिवर्तित स्थिति उत्पन्न की जा सके। इसमें एकाग्रता को इतना पूर्णरूप से केंद्रित किया जाता है कि ध्यानस्थ व्यक्ति किसी बाह्य उद्दीपन के प्रति अनभिज्ञ हो जाता है तथा वह चेतना की एक भिन्न स्थिति में पहुंच जाता है।

(iii) जैवप्रतिप्राप्ति या बायोफीडबैक-यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दबाव के शरीरक्रियात्मक पक्षों का परिवीक्षण कर उन्हें कम करने के लिए फीडबैक दिया जाता है कि व्यक्ति में वर्तमानकालिक शरीरक्रियाएँ क्या हो रही हैं। प्रायः इसके साथ विश्रांति प्रशिक्षण का भी उपयोग किया जाता है। जैव प्रतिप्राप्ति प्रशिक्षण में तीन अवस्थाएँ होती हैं किसी विशिष्ट शरीरक्रियात्मक अनुक्रिया को शांत व्यवस्था में नियंत्रित करने के उपाय सीखना तथा उस नियंत्रण को सामान्य दैनिक जीवन में अंतरित करना।

(iv)सर्जनात्मक मानस-प्रत्यक्षीकरण-दबाव से निपटने के लिए यह एक प्रभावी तकनीक है। सर्जनात्मक मानस-प्रत्यक्षीकरण एक आत्मनिष्ठ अनुभव है जिसमें प्रतिमा तथा कल्पना का उपयोग किया जाता है। मानस-प्रत्यक्षीकरण के पूर्व व्यक्ति को वास्तविकता के अनुकूल एक लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए, यह आत्म-विश्वास के निर्माण में सहायक होता है। यदि व्यक्ति का मन शांत हो, शरीर विश्राम अवस्था में हो तथा आँखें बंद हों तो मानस-प्रत्यक्षीकरण सरल होता है। ऐसा करने से अवांछित विचारों के हस्तक्षेप में कमी आती है तथा व्यक्ति को वह सर्जनात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है जिससे कि काल्पनिक दृश्य को वास्तविकता में परिवर्तित किया जा सके।

(v) संज्ञानात्मक व्यवहारात्मक तकनीकें- इन तकनीकों का उद्देश्य व्यक्ति को दबाव के विरुद्ध संचारित करना होता है। मीचेनबॉम (Meichenbaum) ने दबाव संचारण प्रशिक्षण (Stress inoculation training) की एक प्रभावी विधि विकसित की है। इस उपागम का सार यह है कि व्यक्ति के नकारात्मक तथा अविवेकी विचारों के स्थान पर सकारात्मक तथा सविवेक विचार प्रतिस्थापित कर दिए जाएँ। इसके तीन प्रमुख चरण हैं मूल्यांकन, दबाव न्यूनीकरण तकनीकें तथा अनुप्रयोग एवं अनुवर्ती कार्रवाई। मूल्यांकन के अंतर्गत समस्या की प्रकृति पर परिचर्चा करना तथा व्यक्ति/सेवार्थी के दृष्टिकोण से देखना सम्मिलित होते हैं। दबाव न्यूनीकरण के अंतर्गत दबाव कम करने वाली तकनीकों जैसे-विश्रांति तथा आत्म-अनुदेशन को सीखना सम्मिलित होते हैं।

(vi) व्यायाम- दबाव के प्रति अनुक्रिया के बाद अनुभव किए गए शरीरक्रियात्मक भाव-प्रबोधन के लिए व्यायाम एक सक्रिय निर्गम-मार्ग प्रदान कर सकता है। नियमित व्यायाम के द्वारा हृदय की दक्षता में सुधार होता है, फेफड़ों के प्रकार्यों में वृद्धि होती है, रक्तचाप में कमी होती है, रक्त में वसा की मात्रा घटती है तथा शरीर के प्रतिरक्षक तंत्र में सुधार होता है। तैरना, टहलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, रस्सी कूदना इत्यादि दबाव को कम करने में सहायक होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को सप्ताह में कम-से-कम चार दिन एक साथ 30 मिनट तक इनमें से किसी व्यायाम का अभ्यास करना चाहिए। प्रत्येक सत्र में गरमाना, व्यायाम तथा ठंडा या सामान्य होने के चरण अवश्य होने चाहिए।

प्रश्न 4.
स्थिति स्थापना तथा स्वास्थ्य पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
स्थिति स्थापना एक गत्यात्मक विकासात्मक प्रक्रिया है, जो चुनौतीपूर्ण जीवन-दशाओं में – सकारात्मक समायोजन के अनुरक्षण को संदर्भित करता है। दबाव तथा विपत्ति के होते हुए भी उछलकर पुनः अपने स्थान पर पहले के समान वापस आने को स्थिति स्थापना कहते हैं। स्थिति स्थापना का संकल्पना-निर्धारण, आत्म-अर्ध तथा आत्म-विश्वास, स्वायत्तता तथा आत्मनिर्भरता की भावनाओं को अभिव्यक्त करता है, अपने लिए सकारात्मक भूमिका-प्रतिरूप ढूँढना, किसी अंतरंग मित्र को खोजना ऐसे संज्ञानात्मक कौशल विकसित करना, जैसे-समस्या समाधान, सर्जनात्मकता, संसाधन-सम्पन्नता तथा नम्यता और यह विश्वास कि मेरा जीवन अर्थपूर्ण’ तथा उसका एक उद्देश्य है। स्थिति स्थापक व्यक्ति अतिघात के प्रभावों, दबाव तथा विपत्ति पर विजयी हाने में सफल होते हैं, एवं मानसिक रूप से स्वस्थ तथा अर्थपूर्ण जीवन व्यतीत करना सीख लेते हैं।

स्थिति स्थापन को तीन संसाधनों के आधार पर हाल ही में परिभाषित किया गया है मेरे पास हैं (सामाजिक तथा अंतर्वैयक्तिक बल), अर्थात् “मेरे आस-पास मेरे विश्वास पात्र व्यक्ति है तथा चाहे कुछ भी हो जाए तो वे मुझसे प्यार करते हैं।” मैं हूँ (आंतरिक शक्ति), अर्थात् “स्वयं अपना तथा दूसरों का सम्मान करता/करती हूँ।” मैं समर्थ हूँ (अंतर्वैयक्तिक तथा समस्या समाधान कौशल), अर्थात् “जो भी समस्याएँ” मेरे सम्मुख आएँ, उनका समाध ढूंढने में मैं सक्षम हूँ।” किसी बालक को स्थिति स्थापक होने के लिए उसे उपरोक्त में से एक से अधिक शक्तियों की आवश्यकता होती है।

उदाहरण के लिए बालकों को काफी आत्म-सम्मान हो सकता है (मैं हूँ), किंतु हो सकता है कि उनके पास ऐसे व्यक्ति न हों जिससे वह सहायता प्राप्त कर सकें (मेरे पास हैं), तथा उनमें समस्याओं के समाधान की क्षमता न हो (मैं समर्थ हूँ)। ऐसे बालक स्थिति स्थापक नहीं कहे जाएंगे। बालकों पर किए गए अनुदैर्ध्य सध्ययन इस प्रकार के साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं कि निर्धनता तथा अन्य सामाजिक असुविधाओं से उत्पन्न विकट असुरक्षा के उपरांत भी अनेक व्यक्ति योग्य एवं ध्यान रखने वाले वयस्कों में विकसित हो जाते हैं।

प्रश्न 5.
विच्छेदन से आप क्या समझते हैं? इसके विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विचारों और संवेगों के बीच संयोजन विच्छेद का हो जाना ही विच्छेदन कहलाता है। विच्छेदन में अवास्तविकता की भावना, मनमुटाव या विरक्ति,व्यक्तित्व-लोप और कभी-कभी अस्मिता-लोप या परिवर्तन भी पाया जाता है। चेतना में अचानक और अस्थायी परिवर्तन जो कष्टकर अनुभवों को रोक देता है,विच्छेदी विकार (dissociative disorder) की मुख्य विशेषता होती है।

विच्छेदन के विभिन्न रूप इस प्रकार से हैं-
(i) विच्छेदी स्मृतिलोप (dissociative amnesia)-विच्छेदी स्मृतिलोप में अत्यधिक किन्तु चयनात्मक स्मृतिभ्रंश होता है जिसका कोई ज्ञात आंगिक कारण (जैसे-सिर में चोट लगना) नहीं होता है। कुछ लोग को अपने अतीत के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता है। दूसरे लोग कुछ विशिष्ट घटनाएँ, लोग, स्थान या वस्तुएँ याद नहीं कर पाते, जबकि दूसरी घटनाओं के लिए उनकी स्मृति बिल्कुल ठीक होती है। यह विकार अक्सर अत्यधिक दबाव से संबंधित होता है।

(ii) विच्छेदी आत्मविस्मति (dissociative fugue)-विच्छेदी आत्मविस्मृति का एक आवश्यक लक्षण है घर और कार्य स्थान से अप्रत्याशित यात्रा, एक नई पहचान की अवधारणा तथा पुरानी पहचान को याद न कर पाना। आत्मविस्मृति सामान्यता समाप्त हो जाती है। जब व्यक्ति अचानक जागता है और आत्मविस्मृति की अवधि में जो कुछ घटित हुआ उसकी कोई स्मृति नहीं रहती।

(iii) विच्छेदी पहचान विकार (dissociative identity disorder)-विच्छेदी पहचान विकार को अक्सर बहु व्यक्तित्व वाला कहा जाता है। यह सभी विच्छेदी विकारों में सबसे अधिक नाटकीय होती है। अक्सर यह बाल्यावस्था की कल्पना करता है जो आपस में एक-दूसरे के प्रति जानकारी रख सकते हैं या नहीं रख सकते हैं। a (iv) व्यक्तित्व लोप (depersonalisation)-व्यक्तित्व लोप में एक स्वप्न जैसी अवस्था होती है जिसमें व्यक्ति को स्व और वास्तविकता दोनों से अलग होने की अनुभूति होती है। व्यक्तित्व-लोप में आत्म-प्रत्यक्षण में परिवर्तन होता है और व्यक्ति का वास्तविकता बोध अस्थायी स्तर पर लुप्त हो जाता है या परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 6.
उन मनोवैज्ञानिक मॉडलों का वर्णन कीजिए जो मानसिक विकारों के मनोवैज्ञानिक कारणों को बताते हैं।
उत्तर:
मनोवैज्ञानिक मॉडल के अंतर्गत मनोगतिक, व्यवहारात्मक, संज्ञानात्मक तथा मानवतावादी अस्तित्वपरक मॉडल सम्मिलित हैं।
(i) आधुनिक मनोवैज्ञानिक मॉडल में मनोगतिक मॉडल (Psychodynamic mode) यह सबसे प्राचीन और सबसे प्रसिद्ध है। मनोगतिक सिद्धांतवादियों का विश्वास है कि व्यवहार चाहे सामान्य हो या असामान्य वह व्यक्ति के अंदर की मनोवैज्ञानिक शक्तियों के द्वारा निर्धारित होता है, जिनके प्रति वह गत्यात्मक कहलाती है, अर्थात् वे एक-दूसरे से अंत:क्रिया करती है तथा उनकी यह अंतःक्रिया व्यवहार, विचार और संवेगों को निर्धारित करती है।

इन शक्तियों के बीच द्वंद्व के परिणामस्वरूप फ्रॉयड (Freud) द्वारा प्रतिपादित किया गया था जिनका विश्वास था कि तीन केंद्रीय शक्तियाँ व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं-मूल प्रवृतिक आवश्यकताएँ, अंतर्नाद तथा आवेग (इदम् या इड) तार्किक चितन (अहम्) तथा नैतिक मानक (पराहम्)। फ्रॉयड के अनुसार अपसामान्य व्यवहार अचेतन स्तर पर होने वाले मानसिक द्वंद्वों की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है जिसका संबंध सामान्यतः प्रारंभिक बाल्यावस्था या शैशवावस्था से होता है।

(ii) एक और मॉडल जो मनोवैज्ञानिक कारणों की भूमिका पर जोर देता है वह व्यवहारात्मक मॉडल (behavioural model) है। यह मॉडल बताता है कि सामान्य और अपसामान्य दोनों व्यवहार अधिगत होते हैं और मनोवैज्ञानिक विकार व्यवहार करने के दुरनुकूलक तरीके सीखने के परिणामस्वरूप होते हैं। यह मॉडल उन व्यवहारों पर ध्यान देता है। जो अनुबंधन (conditioning) के कारण सीखे गए हैं तथा इसका उद्देश्य होता है कि जो कुछ सीखे गए हैं तथा इसका उद्देश्य होता है कि जो कुछ सीखा गया है। उसे अनधिगत या भुलाया जा सकता है। अधिगम प्राचीन अनुबंधन (कालिक साहचर्य जिसमें दो घटनाएँ बार-बार दूसरे के साथ-साथ घटित होती है), क्रियाप्रसूत अनुबंधन (जिसमें व्यवहार का अनुकरण करके सीखना) से हो सकता है। यह तीन प्रकार के अनुबंधन सभी प्रकार के व्यवहार, अनुकूली या दुरनुकूलक के लिए उत्तरदायी हैं।

(iii) सामाजिक-सांस्कृतिक मॉडल (Socio-cultural model) के अनुसार, सामाजिक और सांस्कृतिक शक्तियाँ जो व्यक्तियों को प्रभावित करती हैं, इनके संदर्भ में उपसामान्य व्यवहार को ज्यादा अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। चूँकि व्यवहार सामाजिक शक्तियों के द्वारा ही विकसित होता है अतः ऐसे कारक जैसे कि परिवार संरचना और संप्रेषण, सामाजिक तंत्र, सामाजिक दशाएँ तथा सामाजिक नामपत्र और भूमिकाएँ अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। ऐसा देखा गया है कि कुछ पारिवारिक व्यवस्थाओं में व्यक्तियों में उपसामान्य व्यवहार उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है। कुछ परिवारों में ऐसी जालबद्ध संरचना होती है जिसमें परिवार के सदस्य एक-दूसरे की गतिविधियों, विचारों और भावनाओं में कुछ ज्यादा ही अंतर्निहित होते हैं।

इस तरह के परिवारों के बच्चों को जीवन में स्वावलंबी होने में कठिनाई आ सकती है। इससे भी बड़े स्तर का सामाजिक तंत्र हो सकता है जिसमें व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक संबंध सम्मिलित होते हैं। कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि जो लोग अलग-थलग महसूस करते हैं और जिन्हें सामाजिक अवलंब प्राप्त नहीं होता है अर्थात् गहन और संतुष्टिदायक अंतर्वैयक्तिक संबंध जीवन में नहीं प्राप्त होता, वे उन लोगों की अपेक्षा अधिक और लंबे समय तक अवसादग्रस्त हो सकते हैं, जिनके अच्छे मित्रतापूर्ण संबंध होते हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांतकारों के अनुसार, जिन लोगों में कुछ समस्याएँ होती हैं उनमें असामान्य व्यवहारों की उत्पत्ति संज्ञाओं और भूमिकाओं से प्रभावित होता है।

जब लोग समाज के मानकों को तोड़ते हैं तो उन्हें, ‘विसामान्य’ और ‘मानसिक रोगी’ जैसे संज्ञाएँ दी जाती हैं। इस प्रकार की संज्ञाएँ इतनी ज्यादा उन लोगों से जुड़ जाती हैं कि लोग उन्हें ‘सनकी’ इत्यादि पुकारने लगते हैं और उन्हें उसी बीमारी की तरह से क्रिया करने के लिए उकसाते रहते हैं। धीरे-धीरे वह व्यक्ति बीमारी की भूमिका स्वीकार कर लेता है तथा अपसामान्य व्यवहार करने लगता है।

(iv) इन मॉडलों के अतिरिक्त, व्यवहार की एक बहुमान्य व्याख्या रोगोन्मुखता-दबाव मॉडल (diathesistress model) द्वारा दी गई है। इस मॉडल के अनुसार, जब कोई रोगोन्मुखता (किसी विकार के लिए जैविक पूर्ववृत्ति) किसी दबावपूर्ण स्थिति के कारण सामने आ जाती है तब मनोवैज्ञानिक विकार उत्पन्न होते हैं। इस मॉडल के तीन घटक यह हैं। पहला घटक रोगोन्मुखता या कुछ जैविक विपथन जो वंशगत हो सकते हैं।

दूसरा घटक यह है कि रोगोन्मुखता के कारण किसी मनोवैज्ञानिक विकार के प्रति दोषपूर्णता उत्पन्न हो सकती है, जिसका तात्पर्य यह हुआ कि व्यक्ति उस विकार के विकास के लिए ‘पूर्ववृत्त’ है या उसे विकार का ‘खतरा’ है। तीसरा घटक विकारी प्रतिबलकों की उपस्थिति है। इसका तात्पर्य उन कारकों से है जो मनोवैज्ञानिक विकारों का जन्म दे सकते हैं। यदि इस तरह के पूर्ववृत्त’ या ‘खतरे में रहने वाले व्यक्ति को इस तरह के दबावकारकों का सामना करना पड़ता है तो उनकी यह पूर्ववृत्ति वास्तव में विकार को जन्म दे सकती है। इस मॉडल का कई विकारों, जैसे दुश्चिता, अवसाद और मनोविदलता पर अनुप्रयोग किया गया है।

प्रश्न 7.
मनश्चिकित्सा की प्रकृति एवं विजय-क्षेत्र का वर्णन कीजिए। मनश्चिकित्सा में चिकित्सात्मक संबंध के महत्व को उजागर कीजिए।
उत्तर:
मनश्चिकित्सा उपचार चाहने वाले या सेवार्थी तथा उपचार करने वाले या चिकित्सा के बीच में एक ऐच्छिक संबंध है। इस संबंध का उद्देश्य उन मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करना होता है जिनका सामना सेवार्थी द्वारा किया जा रहा हो। यह संबंध सेवार्थी के विश्वास को बनाने में सहायक होता है जिससे वह अपनी समस्याओं के बारे में मुक्त होकर चर्चा कर सके । मनश्चिकित्सा का उद्देश्य दुरनुकूलक व्यवहारों को बदलना, वैयक्तिक कष्ट की भावना को कम करना तथा रोगी को अपने पर्यावरण से बेहतर ढंग से अनुकूलन करने में मदद करना है। अपर्याप्त वैवाहिक, व्यावसायिक तथा सामाजिक समायोजन की वह आवश्यकता होती है कि व्यक्ति के वैयक्तिक पर्यावरण में परिवर्तन किए जाएँ।

सभी मनश्चिकित्सात्मक उपागमों में निम्न अभिलक्षण पाए जाते हैं-

  • चिकित्सा के विभिन्न सिद्धांत में अंतर्निहित नियमों का व्यवस्थित या क्रमबद्ध अनुप्रयोग होता है,
  • केवल वे व्यक्ति, जिन्होंने कुशल पर्यवेक्षण में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया हो, मनश्चिकित्सा कर सकते हैं, हर कोई नहीं, एक अप्रशिक्षित व्यक्ति अनजाने में लाभ के बजाय हानि अधिक पहुँचा सकता है,
  • चिकित्सात्मक स्थितियों में एक चिकित्सक और एक सेवार्थी होता है जो अपनी संवेगात्मक समस्याओं के लिए सहायता चाहता है और प्राप्त करता है चिकित्सात्मक प्रक्रिया में यही व्यक्ति ध्यान का मुख्य केंद्र होता है तथा
  • इन दोनों व्यक्तियों, चिकित्सक एवं सेवार्थी के बीच की अंत:क्रिया के परिणामस्वरूप एक चिकित्सात्मक संबंध का निर्माण एवं उसका सुदृढीकरण होता है। यह एक गोपनीय, अंतर्वैयक्तिक एवं गत्यात्मक संबंध होता है। यह मानवीय संबंध किसी भी मनोवैज्ञानिक चिकित्सा का केंद्र होता है तथा यही परिवर्तन का माध्यम बनता है।

मनश्चिकित्सा में चिकित्सात्मक संबंध का महत्व-सेवार्थी एवं चिकित्सक के बीच एक विशेष संबंध को चिकित्सात्मक संबंध या चिकित्सात्मक मैत्री कहा जाता है। यह न तो एक क्षणिक परिचय होता है और न ही.एक स्थायी एवं टिकाऊ संबंधा

प्रश्न 8.
उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए कि संज्ञानात्मक विकृति किस प्रकार घटित होती है?
उत्तर:
संज्ञानात्मक चिकित्साओं में मनोवैज्ञानिक कष्ट का कारण अविवेकी विचारों और विश्वासों में स्थापित किया जाता है।
(i) अल्बर्ट एलिस (albert Elis) ने संवेग तर्क चिकित्सा (Rational emotive therapy, RET) को प्रतिपादित किया। इस चिकित्सा की केन्द्रीय धारणा है कि अविवेकी विश्वास पूर्ववर्ती घटनाओं और उनके परिणामों के बीच मध्यस्थता करते हैं। संवेग तर्क चिकित्सा में पहला चरण है पूर्ववर्ती-विश्वास-परिणाम (पू.वि.प.) विश्लेषण। पूर्ववर्ती घटनाओं जिनसे मनोवैज्ञानिक कष्ट उत्पन्न हुआ, को लिख लिया जाता है।

सेवार्थी के साक्षात्कार द्वारा उसके उन अविवेकी विश्वासों का पता लगाया जाता है जो उसकी वर्तमानकालिक वास्तविकता को विकृत कर रहे हैं। हो सकता है इन अविवेकी विश्वासों को पुष्ट करने वाले आनुभाविक प्रमाण पर्यावरण में नहीं भी हों। इन विश्वासों को अनिवार्य या चाहिए विचार कह सकते हैं, तात्पर्य यह है कि कोई भी बात एक विशिष्ट तरह से होनी ‘अनिवार्य’ या ‘चाहिए’ है। अविवेकी विश्वासों के उदाहरण है; जैसे-“किसी को हर एक का प्यार हर समय मिलना चाहिए”, “मनुष्य की तंगहाली बाह्य घटनाओं के कारण होती है जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता” इत्यादि।

अविवेकी विश्वासों के कारण पूर्ववर्ती घटना का विकृत प्रत्यक्षण नकारात्मक संवेगों और व्यवहारों के परिणाम का कारण बनता है। अविवेकी विश्वासों का मूल्यांकन प्रश्नावली और साक्षात्कार के द्वारा किया जाता है। संवेग तर्क चिकित्सा की प्रक्रिया के चिकित्सक अनिदेशात्मक प्रश्न करने के प्रक्रिया से अविवेकी विश्वासों का खंडन करता है। प्रश्न करने का स्वरूप सौम्य होता है निदेशात्मक या जाँच-पड़ताल वाला नहीं। ये प्रश्न सेवार्थी को अपने जीवन और समस्याओं से संबंधित पूर्वधारणाओं के बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। धीरे-धीरे सेवार्थी अपने जीवन-दर्शन में परिवर्तन लाकर अविवेकी विश्वासों को परिवर्तित करने में समर्थ हो जाता है। तर्कमूलक विश्वास तंत्र अविवेकी विश्वास तंत्र को प्रतिस्थापित करता है और मनोवैज्ञानिक कष्टों में कमी आती है।

(ii) दूसरी संज्ञानात्मक चिकित्सा आरन बेक (aaron beck) की है। दुश्चिता या अवसाद द्वारा अभिलक्षित मनोवैज्ञानिक कष्ट संबंधी उनके सिद्धांत के अनुसार परिवार और समाज द्वारा दिए गए बाल्यावस्था के अनुभव मल अन्विति योजना या मल स्कीमा (core scheme) या तंत्र के रूप में विकसित हो जाते हैं, जिनमें व्यक्ति के विश्वास और क्रिया के प्रतिरूप सम्मिलित होते हैं। इस प्रकार एक सेवार्थी जो बाल्यावस्था में अपते माता-पिता द्वारा उपेक्षित था एक ऐसा मूल स्कीमा विकसित कर लेता है कि “मैं वांछित हूँ।” जीवनकाल के दौरान कोई निर्णायक घटना उसके जीवन में घटित होती है। विद्यालय में उसके सामने अध्यापक के द्वारा उसकी हँसी उड़ायी जाती है। यह निर्णायक घटना उसके मूल स्कीमा “मैं वांछित हूँ।” को क्रियाशील कर देती है जो नकारात्मक स्वचालित विचारों को विकसित करती है।

नकारात्मक विचार सतत अविवेकी विचार होते हैं; जैसे-कोई मुझे प्यार नहीं करती, मैं कुरूप हूँ, मैं मूर्ख हूँ, मैं सफल नहीं हो सकता/सकती इत्यादि। इन नकारात्मक स्वचालित विचारों में संज्ञानात्मक विकृति के होते हैं किन्तु वे वास्तविकता को नकारात्मक तरीके से विकृत होते हैं। विचारों के इन प्रतिरूपों को अपक्रियात्मक संज्ञानात्मक संरचना (dysfunctional cognitive structure) कहते हैं। सामाजिक यथार्थ के बारे में ये संज्ञानात्मक त्रुटियाँ उत्पन्न करती हैं।

इन विचारों का बार-बार उत्पन्न होना दुश्चिता और अवसाद की भावनाओं को विकसित करता है। चिकित्सक जो प्रश्न करता है वे सौम्य होते हैं तथा सेवार्थी के विश्वासों और विचारों के प्रति बिना धमकी वाले किन्तु उनके खंडन करने वाले होते हैं। इन प्रश्नों के उदाहरण कुछ ऐसे हो सकते हैं, “क्यों हर कोई तुम्हें प्यार करे?”, “तुम्हारे लिए सफल होना क्या अर्थ रखता है?” इत्यादि। ये प्रश्न सेवार्थी को अपने नकारात्मक स्वचालित विचारों की विपरीत दिशा में सोचने को बाध्य करते हैं जिससे वह अपने अपक्रियात्मक स्कीमा के स्वरूप के बारे में अंतर्दृष्टि प्राप्त करता है तथा अपनी संज्ञानात्मक संरचना को परिवर्तित करने में समर्थ होता है। इस चिकित्सा का लक्ष्य संज्ञानात्मक पुनःसंरचना को प्राप्त करना है जो दुश्चिता तथा अवसाद को घटाती है।

प्रश्न 9.
अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
(i) परिवार एवं विद्यालय का परिवेश-विशेष रूप से जीवन के प्रारंभिक वर्षों में अभिवृत्ति निर्माण करने में माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्य महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाद में विद्यालय का परिवेश अभिवृत्ति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि बन जाता है। परिवार एवं विद्यालय में अभिवृत्तियों का अधिगम आमतौर पर साहचर्य, पुरस्कार और दंड तथा प्रतिरूपण के माध्यम से होता है।

(ii) संदर्भ समूह-संदर्भ समूह एक व्यक्ति को सोचने एवं व्यवहार करने के स्वीकृत नियमों या मानकों को बताते हैं। अतः ये समूह या संस्कृति के मानकों के माध्यम से अभिवृत्तियों के अधिगम को दर्शाते हैं। विभिन्न विषयों जैसे-राजनीतिक, धार्मिक तथा सामाजिक समूह, व्यवसाय, राष्ट्रीय एवं अन्य मुद्दों के प्रति अभिवृत्ति प्रायः संदर्भ समूह के माध्यम से ही विकसित होती है । यह प्रभाव विशेष रूप से किशोरावस्था के प्रारंभ में अधिक स्पष्ट होता है जब व्यक्ति के लिए या अनुभव करना महत्वपूर्ण होता है कि वह किसी समूह का सदस्य है। इसलिए अभिवृत्ति निर्माण में संदर्भ समूह की भूमिका एवं दंड के द्वारा अधिगम का भी एक उदाहरण हो सकता है।

(iii) व्यक्तिगत अनुभव-अनेक अभिवृत्तियों का निर्माण पारिवारिक परिवेश में या संदर्भ समूह के माध्यम से नहीं होता बल्कि इनका निर्माण प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुभव के द्वारा होता है, जो लोगों के साथ स्वयं के जीवन के प्रति हमारी अभिवृत्ति में प्रबल परिवर्तन उत्पन्न करता है। यहाँ वास्तविक जीवन से संबंधित एक उदाहरण प्रस्तुत है।

सेना का एक चालक (ड्राइवर) एक ऐसे व्यक्ति अनुभव से गुजरा जिसने उसके जीवन को ही परिवर्तित कर दिया। एक अभियान के दौरान, जिसमें उसके सभी साथी मारे जा चुके थे, वह मृत्यु के बहुत नजदीक से गुजरा। अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में विचार करते हुए उसने सेना में अपनी नौकरी छोड़ दी तथा महाराष्ट्र के एक गाँव में स्थित अपनी जन्मभूमि में वापस लौट आया और वहाँ एक सामुदायिक नेता के रूप में सक्रिय रूप से कार्य किया। एक विशुद्ध व्यक्तिगत अनुभव के द्वारा इस व्यक्ति ने सामुदायिक उत्थान या विकास के लिए एक प्रबल सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित कर ली। उसके प्रयास ने उसके गाँव के स्परूप को पूर्णरूपेण बदल दिया।

(iv) संचार माध्यम संबद्ध प्रभाव-वर्तमान समय में प्रौद्योगिकीय विकास ने दृश्य-श्रव्य माध्यम एवं इंटरनेट को एक शक्तिशाली सूचना का स्रोत बना दिया है जो अभिवृत्तियों का निर्माण एवं परिवर्तन करते हैं। इसके अतिरिक्त विद्यालय स्तरीय पाठ्य पुस्तकें भी अभिवृत्ति निर्माण को प्रभावित करती हैं। ये स्रोत सबसे पहले संज्ञानात्मक एवं भावात्मक घटक को प्रबल बनाते हैं और बाद में व्यवहारपरक पटक को भी प्रभावित कर सकते हैं।

संचार-माध्यम अभिवृत्ति पर अच्छा एवं खराब दोनों ही प्रकार के प्रभाव डाल सकते हैं। एक तरफ, संचार माध्यम एवं इंटरनेट, संचार के अन्य माध्यमों की तुलना में लोगों को भली प्रकार से सूचित करते हैं, दूसरी तरफ इन संचार माध्यमों से सूचना संकलन की प्रकृति पर कोई रोक या जाँच नहीं होती इसलिए निर्मित होने वाली अभिवृत्तियों या पहले से बनी अभिवृत्तियों में परिवर्तन की दिशा पर कोई नियंत्रण भी नहीं होता है। संचार माध्यमों का उपयोग उपभोक्तावादी अभिवृत्तियों के निर्माण के लिए किया जा सकता है और इनका उपयोग सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक अभिवृत्तियों को उत्पन्न करने के लिए भी किया जा सकता है।

प्रश्न 10.
पूर्वाग्रह के विभिन्न स्रोतों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पूर्वाग्रह के विभिन्न स्रोत निम्नलिखित हैं-
(i) अधिगम-अन्य अभिवृत्तियों की तरह पूर्वाग्रह भी साहचर्य, पुरस्कार एवं दंड, दूसरों के प्रेक्षण, समूह या संस्कृति के मानक तथा सूचनाओं की उपलब्धता, जो पूर्वाग्रह को बढ़ावा देते हैं, के द्वारा अधिगमित किए जा सकते हैं। परिवार, संदर्भ, समूह, व्यक्तिगत अनुभव तथा संचार माध्यम पूर्वाग्रह के अधिगम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जो लोग पूर्वाग्रहग्रस्त अभिवृत्तियों को सीखते हैं वे ‘पूर्वाग्रहग्रस्त व्यक्तित्व’ विकसित कर लेते हैं तथा समायोजन स्थापित करने की क्षमता में कमी, दुश्चिता तथा बाह्य समूह के प्रति आक्रामकता की भावना को प्रदर्शित करते हैं।

(ii) एक प्रबल सामाजिक अनन्यता तथा अंतःसमूह अभिनति-वे लोग जिनमें सामाजिक अनन्यता की प्रबल भावना होती है एवं अपने समूह के प्रति एक बहुत ही सकारात्मक अभिवृत्ति होती है वे अपनी अभिवृत्ति को और प्रबल बनाने के लिए बाह्य समूहों के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति रखते हैं। इनका प्रदर्शन पूर्वाग्रह के रूप में होता है।

(iii) बलि का बकरा बनाना यह एक ऐसी प्रक्रिया या गोचर है जिसके द्वारा बहुसंख्यक समूह अपनी अपनी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के लिए अल्पसंख्यक बाह्य समूह को दोषी ठहराता है। अल्पसंख्यक इस आरोप से बचाव करने के लिए या तो बहुत कमजोर होते हैं या संख्या में बहुत कम होते हैं। बलि का बकरा बनाने वाले प्रक्रिया कुंठा को प्रदर्शित करने का समूह आधारित एक तरीका है तथा प्रायः इसकी परिणति कमजोर समूह के प्रति नकारात्मक अभिवृत्ति या पूर्वाग्रह के रूप में होती है।

(iv) सत्य के संप्रत्यय का आधार तत्त्व-कभी-कभी लोग एक रूढ़धारणा को बनाए रखते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि जो सभी लोग दूसरे के बारे में कहते हैं उसमें कोई न कोई सत्य या सत्य का आधार तत्त्व(Kernel of truth) तो अवश्य होना चाहिए। यहाँ तक कि केवल कुछ उदाहरण ही ‘सत्य के आधार तत्त्व’ की अवधारणा को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त होते हैं।

(v) स्वतः साधक भविष्योक्ति-कुछ स्थितियों में वह समूह जो पूर्वाग्रह का लक्ष्य होता है स्वयं ही पूर्वाग्रह. को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। लक्ष्य समूह इस तरह से व्यवहार करता है कि वह पूर्वाग्रह को प्रमाणित करता है अर्थात् नकारात्मक प्रत्याशाओं की पुष्टि करता है। उदाहरणार्थ, यदि लक्ष्य समूह को ‘निर्भर’ और इसलिए प्रगति करने में अक्षम के रूप में वर्णित किया जाता है तो हो सकता है कि इस लक्ष्य समूह के सदस्य वास्तव में इस तरह से व्यवहार करें। इस विवरण को सही साबित करे। इस तरह वे पहले से विद्यमान पूर्वाग्रह को और प्रबल करते हैं।

प्रश्न 11.
समूह की विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
समूह की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ होती हैं-
(i) हम दो या दो से अधिक व्यक्तियों, जो स्वयं को समूह के संबद्ध समझते हैं, की एक सामाजिक इकाई है। समूह की यह विशेषता एक समूह को दूसरे समूह से पृथक् करने में सहायता करती है और समूह को अपनी एक अलग अनन्यता या पहचान प्रदान करती है।

(ii) यह ऐसे व्यक्तियों का एक समुच्चय है जिसमें सभी की एक जैसी अभिप्रेरणाएँ एवं लक्ष्य होते हैं। समूह निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने या समूह को किसी खतरे से दूर करने के लिए कार्य करते हैं।

(iii) यह ऐसे व्यक्तियों का एक समुच्चय होता है जो परस्पर-निर्भर होते हैं अर्थात् एक व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य दूसरों के लिए कुछ परिणाम उत्पन्न कर सकता है। क्रिकेट के खेल में एक खिलाड़ी कोई महत्त्वपूर्ण कैच छोड़ देता है तो इसका प्रभाव संपूर्ण टीम पर पड़ेगा।

(iv) वे लोग जो अपनी आवश्यकताओं की संतुष्टि अपने संयुक्त संबंध के आधार पर कर रहे हैं वे एक-दूसरे को प्रभावित भी करते हैं।

(v) यह ऐसे व्यक्तियों का एकत्रीकरण या समूहन है जो एक-दूसरे से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंतःक्रिया करते हैं।

(vi) यह ऐसे व्यक्तियों का एक समुच्चय होता है जिनके अंत:क्रियाएँ निर्धारित भूमिकाओं और प्रतिमानों के द्वारा संरचित होती हैं। इसका आशय यह हुआ कि जब समूह के सदस्य एकत्रित होते हैं या मिलते हैं तो समूह के सदस्य हर बार एक ही तरह के कार्यों का निष्पादन करते हैं और समूह के सदस्य के प्रतिमानों का पालन करते हैं। प्रतिमान हमें यह बताते हैं कि समूह में हम लोगों को किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए और समूह के सदस्यों से अपेक्षित व्यवहार करना चाहिए और समूह के सदस्यों से अपेक्षित व्यवहार को निर्धारित करते हैं।

प्रश्न 12.
औपचारिक एवं अनौपचारिक समूह तथा अंतः एवं बाह्य समूहों की तुलना , कीजिए एवं अंतर बताइए। .
उत्तर:
(i) औपचारिक एवं अनौपचारिक समूह- ऐसे समूह उस मात्रा में भिन्न होते हैं जिस मात्रा में समूह के प्रकार्य स्पष्ट और अनौपचारिक रूप से घोषित किए जाते हैं। एक औपचारिक समूह, जैसे-किसी कार्यालय संगठन द्वारा निष्पादित की जाने वाली भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से घोषित होती हैं। औपचारिक तथा अनौपचारिक समूह के आधार पर भिन्न होते हैं । औपचारिक समूह का निर्माण कुछ विशिष्ट नियमों या विधि पर आधारित होता है और सदस्यों की सुनिश्चित भूमिकाएँ होती हैं। इसमें मानकों का एक समुच्चय होता है जो व्यवस्था स्थापित करने में सहायक होता है। कोई विश्वद्यालय एक औपचारिक समूह का उदाहरण है। दूसरी तरफ अनौपचारिक समूहों का निर्माण नियमों या विधि पर आधारित नहीं होता है और सदस्यों में घनिष्ठ संबंध होता है।

(ii) अंतःसमूह एवं बाह्य समूह-जिस प्रकार व्यक्ति अपनी तुलना दूसरों से समानता या भिन्नता के आधार पर इस संदर्भ में करते हैं कि क्या उनके पास है और क्या दूसरों के पास है, वैसे ही व्यक्ति जिस समूह के संबंध रखते हैं उसकी तुलना उन समूहों से करते हैं जिनके वे सदस्य नहीं हैं। अंत:समूह’ के समूह को इंगित करता है और ‘बाह्य समूह’ दूसरे को इंगित करता है । अंत: समूह में सदस्यों के लिए ‘हम लोग’ (We) शब्द का उपयोग होता है जबकि बाह्य समूह के सदस्यों के लिए ‘वे’ (They) शब्द का उपयोग किया जाता है। हमलोग या वे शब्द के उपयोग से कोई व्यक्ति लोगों को समान या भिन्न के रूप में वर्गीकृत करता है।

या पाया गया है कि अंत:समूह में सामान्यतया व्यक्तियों में समानता मानी जाती है, उन्हें अनुकूल दृष्टि से देखा जाता है और उनमें वांछनीय विशेषक पाए जाते हैं। बाह्य समूह के सदस्यों को अलग तरीके से देखा जाता है और उनका प्रत्यक्षण अंत:समूह के सदस्यों की तुलना में प्राय: नकारात्मक होता है अंत:समूह तथा बाह्य समूह का प्रत्यक्षण हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित करत. है।

प्रश्न 13.
द्वंद्व समाधान युक्तियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
द्वंद्व समाधान युक्तियाँ की व्याख्या निम्नलिखित है-
(i) उच्चकोटि लक्ष्यों का निर्धारण-शैरिफ के अनुसार उच्चकोटि लक्ष्यों का निर्धारण करके अंतर-समूह द्वंद्व को कम किया जा सकता है। एक उच्चकोटि लक्ष्य दोनों ही पक्षों के लिए परस्पर हितकारी होता है, अत: दोनों ही समूह सहयोगी रूप से कार्य करते हैं।

(ii) प्रत्यक्षण में परिवर्तन करना-अनुनय, शैक्षिक तथा मीडिया अपील और समूहों का समाज में भी भिन्न रूप से निरूपण इत्यादि के माध्यम से प्रत्यक्षण एवं प्रतिक्रियाओं में परिवर्तन करने के द्वारा द्वंद्व में कमी लाई जा सकती है। प्रारंभ से ही दूसरों के प्रति सहानुभूति को प्रोत्साहित करना सिखाया जाना चाहिए।

(iii) अंतर-समूह संपर्क को बढ़ाना-समूहों के बीच संपर्क को बढ़ाने से भी द्वंद्व को कम किया जा सकता है। सामुदायिक परियोजनाओं और गतिविधियों के द्वारा द्वंद्व में उलझे समूहों को तटस्थ मुद्दों या विचारों में संलग्न कराकर द्वंद्व को कम किया जा सकता है। इसमें समूहों को एक साथ लाने की योजना होती है जिससे कि वे एक-दूसरे की विचाराधाराओं को अधिक अच्छी तरह से समझने योग्य हो जाएँ। परंतु, संपर्क के सफल होने के लिए उनको बनाए रखना आवश्यक है जिसका अर्थ है कि संपर्कों का समर्थन एक अन्य अवधि तक किया जाना चाहिए।

(iv) समूह की सीमाओं का पुनः निर्धारण-समूह की सीमाओं के पुनः निर्धारण को कुछ मनोवैज्ञानिकों द्वारा एक दूसरी प्रतिविधि के रूप में सुझाया गया है। यह ऐसी दशाओं को उत्पन्न करके किया जा सकता है जिसमें समूह की सीमाओं को पुनः परिभाषित किया जाता है और समूह को एक उभयनिष्ठ समूह से जुड़ा हुआ अनुभव करने लगता है।

(v) समझौता वार्ता-समझौता (Negotiation) एवं किसी तृतीय पक्ष के हस्तक्षेप के द्वारा भी द्वंद्व का समाधान किया जा सकता है। प्रतिस्पर्धा समूह द्वंद्व का समाधान परस्पर स्वीकार्य हल को ढूँढने का प्रयास करके भी कर सकते हैं। इसके लिए समझ एवं विश्वास की आवश्यकता होती है। समझौता वार्ता पारस्परिक संप्रेषण को कहते हैं जिससे ऐसी स्थितियाँ जिसमें द्वंद्व होता है उसमें समझौता या सहमति पर पहुँचा जाता है। कभी-कभी समझौता वार्ता के माध्यम से द्वंद्व को दूर करना कठिन होता है; ऐसे समय में किसी तृतीय पक्ष द्वारा मध्यस्थता (Mediation) एवं विवाचन (Arbitration) की आवश्यकता होती है। मध्यस्थता करने वाले दोनों पक्षों को प्रासंगिक मुद्दों पर अपनी बहस को केंद्रित करने एवं एक स्वैच्छिक समझौते तक पहुँचने में सहायता करते हैं। विवाचन में तृतीय पक्ष को दोनों पक्षों को सुनने के बाद एक निर्णय देने का प्राधिकार होता है।

(vi) संरचनात्मक समाधान-न्याय के सिद्धांतों के अनुसार सामाजिक संसाधनों का पुनर्वितरण करके भी द्वंद्व को कम किया जा सकता है। न्याय पर किए गए शोध में न्याय के अनेक सिद्धांतों की खोज की गई है। इनमें से कुछ हैं-समानता (सभी का समान रूप से विनिधान करना), आवश्यकता (आवश्यकताओं के आधार पर विनिधान करना), तथा समता (सदस्यों के योगदान के आधार पर विनिधान करना)।

(vii) दूसरे समूह के मानकों का आदर करना- भारत जैसे बहुविध समाज में विभिन्न सामाजिक एवं सजातीय समूहों के प्रबल मानकों का आदर करना एवं उनके प्रति संवेदनशील होना आवश्यक है। यह देखा गया है कि विभिन्न समूहों के बीच होने वाले अनेक सांप्रदायिक दंगे इस प्रकार की असंवेदनशीलता के कारण ही हुए हैं।

प्रश्न 14.
भीड़ के प्रमुख लक्षण क्या हैं? भीड़ के प्रमुख मनोवैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भीड़ का संदर्भ उस असुस्थता की भावना से है जिसका कारण यह है कि हमारे आस-पास बहुत अधिक व्यक्ति या वस्तुएँ होती हैं जिससे हमें भौतिक बंधन की अनुभूति होती है तथा कभी-कभी वैयक्तिक स्वतंत्रता में न्यूनता का अनुभव होता है। एक विशिष्ट क्षेत्र या दिक् में बड़ी संख्या में व्यक्तियों की उपस्थिति के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया ही भीड़ कहलाती है। जब यह संख्या एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है तब इसके कारण वह व्यक्तिक जो इस स्थिति में फंस गया है, दबाव का अनुभव करता है। इस अर्थ में भीड़ भी एक पर्यायवाची दबावकारक का उदाहरण है।

भीड़ के अनुभव के निम्नलिखित लक्षण होते हैं-

  1. असुरक्षा की भावना,
  2. वैयक्तिक स्वतंत्रता में न्यूनता या कमी,
  3. व्यक्ति का अपने आस-पास के परिवेश के संबंध में निषेधात्मक दृष्टिकोण तथा
  4. सामाजिक अंत:क्रिया पर नियंत्रण के अभाव की भावना।

भीड़ के प्रमुख मनोवैज्ञानिक परिणाम निम्नलिखित हैं-
(i) भीड़ तथा अधिक घनत्व के परिणामस्वरूप असामान्य व्यवहार तथा आक्रामकता उत्पन्न हो सकते हैं। अनेक वर्षों पूर्व चूहों पर किए गए शोध में यह परिलक्षित हुआ था। इन प्राणियों को एक बाड़े में रखा गया, प्रारंभ में यह कम संख्या में आक्रामक तथा विचित्र व्यवहार प्रकट होने लगे, जैसे-दूसरे चूहों की पूँछ काट लेना। यह आक्रामक व्यवहार इस सीमा तक बढ़ा कि अंततः ये प्राणी बड़ी संख्या में मर गए जिससे बाड़े में उनकी जनसंख्या फिर कम हो गई। मनुष्यों में भी जनसंख्या वृद्धि के साथ कभी-कभी हिंसात्मक अपराधों में वृद्धि पाई गई हैं।

(ii) भीड़ के फलस्वरूप उन कठिन कार्यों का, जिनमें संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ निहित होती हैं, निष्पादन निम्न स्तर का हो जाता है तथा स्मृति और संवेगात्मक दशा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये निषेधात्मक प्रभाव उन व्यक्तियों में अल्प मात्रा में परिलक्षित होते हैं जो भीड़ वाले परिवेश के आदी होते हैं।

(iii) वे बच्चे जो अत्यधिक भीड़ वाले घरों में बड़े होते हैं, वे निचले स्तर के शैक्षिक निष्पादन प्रदर्शित करते हैं। यदि वे किसी कार्य पर असफल होते हैं तो उन बच्चों की तुलना में जो कम भीड़ वाले घरों में बढ़ते हैं, उस कार्य पर निरंतर काम करते रहने की प्रवृति भी उनमें दुर्बल होती है। अपने माता-पिता के साथ वे अधिक द्वंद्व का अनुभव करते हैं तथा उन्हें अपने परिवार से भी कम सहायता प्राप्त होती हैं।

(iv) सामाजिक अंतःक्रिया की प्रकृति भी यह निर्धारित करती है कि व्यक्ति भीड़ के प्रति किस सीमा तक प्रतिक्रिया करेगा। उदाहरण के लिए यदि अंतःक्रिया किसी आनंददायक सामाजिक अवसर पर होती हैं; जैसे-किसी प्रीतिभोज अथवा सार्वजनिक समारोह में, तब संभव है कि उसी भौतिक स्थान में बड़ी संख्या में अनेक लोगों की उपस्थिति कोई भी दबाव उत्पन्न करे। बल्कि इसके फलस्वरूप सकारात्मक सांवेगिक प्रतिक्रियाएँ हो सकती हैं । इसके साथ ही, भीड़ भी सामाजिक अंत:क्रिया की प्रकृति को प्रभावित करती है।

(v) व्यक्ति भीड़ के प्रति जो निषेधात्मक प्रभाव प्रदर्शित करते हैं, उसकी मात्रा में व्यक्तिगत भिन्नताएँ होती हैं तथा उनकी प्रतिक्रियाओं की प्रकृति में भी भेद होता है।

प्रश्न 15.
निर्धनता उपशमन के उपयोग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
निर्धनता उपशमन के उपाय-निर्धनता एवं उसके निषेधात्मक परिणामों को उपशमित अथवा कम करने के लिए सरकार तथा अन्य समूहों द्वारा अनेक कार्य किए जा रहे हैं। यह कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) निर्धनता चक्र को तोड़ना तथा निर्धन व्यक्तियों के आत्मनिर्भर बनाने हेतु सहायता करना-प्रारंभ में निर्धन व्यक्तियों को वित्तीय सहायता, चिकित्सापरक एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराना आवश्यक हो सकता है। यह ध्यान रखने की आवश्यकता होती है कि निर्धन व्यक्ति इस वित्तीय एवं अन्य प्रकार की सहायताओं और स्रोतों पर अपनी जीविका के निर्भर न हो जाएँ।

(ii) ऐसे संदर्भो का निर्माण जो निर्धन व्यक्तियों को उनकी निर्धनता के लिए दोषी ठहराने की बजाय उन्हें उत्तरदायित्व सिखाए-इस उपाय के द्वारा उन्हें आशा, नियंत्रण एवं अनन्यता की भावनाओं को दोबारा अनुभव करने में सहायता मिलेगी।

(iii) सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए शैक्षिक एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना-इस उपाय के द्वारा निर्धन व्यक्तियों को अपनी योग्यताओं तथा कौशलों को पहचानने में सहायता मिलेगी जिससे वे समाज के अन्य वर्गों के समकक्ष अपने में समर्थ हो सकें । यह कुंठा को कम करके अपराध एवं हिंसा को भी कम करने में सहायक होगन तथा निर्धन व्यक्तियों को अवैध साधनों के बजाय, वैध साधनों से जीविकोपार्जन करने हेतु प्रोत्साहित करेगा।

(iv) उन्नत मानसिक स्वास्थ्य हेतु उपाय-निर्धनता न्यूनीकरण के अनेक उपाय उनके शारीरिक स्वास्थ्य को तो सुधारने में सहायता करते हैं किन्तु उनके मानसिक स्वास्थ्य की समस्या का समाधान प्रभावी ढंग से करना फिर भी आवश्यक होता है। यह आशा की जा सकती है कि इस समस्या के प्रति जागरूकता के द्वारा निर्धनता के इस पक्ष पर अधिक ध्यान देना संभव हो सकेगा।

(v) निर्धन व्यक्तियों को सशक्त करने के उपाय-उपर्युक्त उपायों के द्वारा निर्धन व्यक्तियों को अधिक सशक्त बनाना चाहिए जिससे वे स्वतंत्र रूप से गरिमा के साथ अपना जीवन-निर्वाह करने में समर्थ हो सकें तथा सरकार अथवा अन्य समूहों की सहायता पर निर्भर नहीं रहें।।

प्रश्न 16.
अचेतन की परिभाषा दें तथा इसकी विशेषताओं का वर्णन करें। अथवा, अचेतन क्या है ? अचेतन की विभिन्न विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
मन के सम्बन्ध में फ्रायड ने अपना वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया है। उन्होंने मन के दो पहलुओं की चर्चा की है-

  1. मन के गत्यात्मक पहलू,
  2. मन के आकारात्मक पहलू।

आकारात्मक पहलू के आधार पर उन्होंने मन को तीन भागों में बाँटा है-

  1. चेतन,
  2. अर्द्धचेतन
  3. अचेतन।

चेतन के सम्बन्ध में फ्रायड का कहना है कि यह मन का वह भाग, जिसकी जानकारी व्यक्ति का वर्तमान में रहती है। अर्द्धचेतन में ऐसे विचार रहते हैं, जिसकी जानकारी व्यक्ति को तत्काल नहीं रहती, लेकिन प्रयास करने पर उसकी जानकारी हो सकती है, लेकिन अचेतन मन का वह भाग है, जिसकी जानकारी व्यक्ति को न तो वर्तमान में रहती है और न ही प्रयास करने पर उसकी जानकारी हो सकती है।

अचेतन मन का सबसे बड़ा भाग है। इसकी तुलना फ्रायड ने बर्फ के उस बड़े टुकड़े से की है, जो पानी में है। जिस प्रकार पानी के रहने के कारण उसका बड़ा भाग दिखाई नहीं पड़ता है, उसी प्रकार मन के इस बड़े भाग की जानकारी व्यक्ति को नहीं रहती है। फ्रायड के अनुसार, यह मन का 7/8वाँ भाग है। इसमें हमारी अतृप्त इच्छाएँ संचित रहती हैं। फ्रायड से पूर्व भी कई विद्वानों ने अचेतन की चर्चा की है, लेकिन फ्रायड ने इसे कसौटियों पर कसकर इसे वैज्ञानिक रूप में पेश किया है। पहले के लोगों का विचार था कि अचेतन में निष्क्रिय एवं व्यर्थ की मानसिक क्रियाएँ रहती हैं, जिनका हमारे जीवन में कोई महत्त्व नहीं होता, लेकिन फ्रायड ने उसका खण्डन किया और बतलाया कि इसमें निष्क्रिय एवं बेकार की मानसिक क्रियाएँ नहीं रहतीं, बल्कि सक्रिय मानसिक क्रियाएँ रहती हैं। इसका हमारे मानसिक जीवन में बहुत अधिक महत्त्व होता है। यह व्यक्ति को हमेशा प्रभावित करते रहता है।

अचेतन की परिभाषा देते हुए ब्राउन ने कहा है-“अचेतन मन का ऐसा भाग है, जिसमें ऐसे विचार या मानसिक क्रियाएँ रहती हैं, जिसका प्रत्यावहन व्यक्ति अपने इच्छानुसार नहीं कर पाता। वे या तो स्वतः प्रकट होते हैं या उन्हें सम्मोहन या अन्य प्रयोगात्मक विधियों द्वारा जाना जा सकता है।” ब्राउन की परिभाषा से स्पष्ट हो रहा है कि अचेतन मन का वह भाग है जिसमें कुछ विचार सूचित होते हैं जो कभी चेतन में थे, लेकिन वर्तमान में किसी कारणवश अचेतन में चले गये हैं। उनकी परिभाषा से यह स्पष्ट हो रहा है कि अचेतन के विचारों को अपनी इच्छा से नहीं जाना जा सकता है। ये मौका पाकर अपने आप प्रकट होते हैं या उन्हें मनोवैज्ञानिक तरीके से जाना जा सकता है।

अचेतन की विशेषताएँ : अचेतन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. अचेतन मन का सबसे बड़ा भाग है-फ्रायड के अनुसार, अचेतन मन के तीनों पहलुओं में सबसे बड़ा भाग है। यह मन का 7/8वाँ भाग है। इससे स्पष्ट होता है कि अचेतन तुलना में कितना बड़ा है।

2. कामुक इच्छाओं का भंडार-फ्रायड ने कहा है कि अचेतन में काम-सम्बन्धी इच्छाएँ रहती है। इसका खास कारण यह है कि व्यक्ति का जीवन काम शक्तियों से प्रेरित होता है, अर्थात् व्यक्ति की हर इच्छाएँ काम से ही प्रेरित रहती है। इस मत को लेकर फ्रायड का बहुत विरोध हुआ, लेकिन फ्रायड ने काम शब्द का प्रयोग व्यापक रूप में किया है। उन्होंने कहा कि केवल संभोग ही काम नहीं है। अपने बच्चों के प्रति माता-पिता का स्नेह, मैत्री, मातृत्व, भाई-बहनों का प्रेम आदि काम-शक्ति से प्रेरित होता है। फ्रायड ने कहा कि काम-शक्ति बच्चों में भी रहती है। जब बच्चा किसी चीज को मुंह से चूसता है, तो वह लैंगिक इच्छाओं की संतुष्टि करता है, जिस प्रकार की संतुष्टि बड़े होने पर संभोग के द्वारा करता है। काम की संतुष्टि में समाज के द्वारा बाधाएँ उत्पन्न की जाती है जिससे व्यक्ति में काम-सम्बन्धी इच्छाओं की तृप्ति नहीं हो पाती है और उसका दमन अचेतन मन में हो जाता है, इसलिए अचेतन को कामुक इच्छाओं का भंडार माना जाता है।

3. अचेतन में इड की प्रवृत्तियाँ-व्यक्ति के अचेतन में इड की प्रवृत्तियाँ भरी रहती हैं। हम जानते हैं कि इड को वास्तविकता का ज्ञान नहीं रहता, अतः अपनी असामाजिक या अनैतिक इच्छाओं की पूर्ति करना चाहता है, किन्तु सामाजिक व्यवस्था के कारण इसकी पूर्ति संभव नहीं हो पाती, अतः ऐसे विचारों या इच्छाओं का दमन अचेतन मन में हो जाता है।

4. अचेतन अतार्किक एवं अनैतिक होता है-फ्रायड के अनुसार, अचेतन अतार्किक एवं अनैतिक होता है। अचेतन को समय एवं परिस्थिति का ज्ञान नहीं रहता है।